DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label वरिष्ठता. Show all posts
Showing posts with label वरिष्ठता. Show all posts

Monday, May 25, 2026

स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

 लखनऊ : परिषदीय शिक्षकों ने एक बार फिर जनपदीय और अंतरजनपदीय तबादलों की मांग तेज कर दी है। वर्षों से दूरस्थ जिलों और ब्लाकों में तैनात शिक्षक अब सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि लगातार दूर-दराज क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद उन्हें घर के नजदीक तैनाती का मौका नहीं मिल रहा है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग अधिकारियों के तबादले की तैयारी तो कर रहा है, लेकिन परिषदीय शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर चुप्पी साधे हुए है। अब जनगणना कार्य का हवाला देकर तबादलों को टालने की बात कही जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।



तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं होने से परिषदीय शिक्षकों में नाराजगी, कई सालों से दूरस्थ जिलों व ब्लॉकों में कर रहे कार्य

नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों में जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में तबादला प्रक्रिया न शुरू होने से नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है दूरस्थ जिलों में कई वर्ष से सेवाएं दे रहे हैं लेकिन आकांक्षी जिलों में तैनात शिक्षकों के ट्रांसफर न होने से वह अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक जिले के अंदर दूरस्थ ब्लॉकों में तैनात हैं और अपने घर के पास तबादले की मांग कर रहे हैं।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो शिक्षक वर्षों से कार्यरत हैं उनको नगर क्षेत्र के विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित करना चाहिए। 2011 के बाद नगर क्षेत्रों में कोई समायोजन नहीं हुआ है। इससे नगर क्षेत्र में शिक्षकों की काफी कमी है। 

बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के विद्यालयों में 10 हजार पदों पर भर्ती की सूचना से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक निराश हैं। उन्होंने नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय इन पदों पर ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग की। अन्य शिक्षकों को भी वरिष्ठता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों को ब्लॉकों में नियुक्ति दी जाए।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे एक ओर वर्षों से इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक व्यवस्था में भी सुधार आएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस ग्रीष्मावकाश में ही जनपदीय और अंतरजनपदी ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। शिक्षकों ने म्यूचुअल ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जब दो शिक्षक आपसी सहमति से स्थान परिवर्तन चाहते हैं और इसके लिए नियमों में प्रविधान भी मौजूद है, तब भी विभाग स्तर पर फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जा रही हैं। इसे लेकर अधिकारियों पर हठधर्मिता का आरोप लगाया जा रहा है।

Thursday, May 14, 2026

कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


कहीं जूनियर शिक्षक का तबादला तो कही सीनियर का, बेसिक शिक्षकों का अंतःजनपदीय समायोजन में जिलों में बीएसए कर रहे अलग-अलग आदेश


शिक्षकों के समायोजन को लेकर जूनियर-सीनियर का विवाद शुरू, जिलों में समायोजन सूची पर भी विवाद

हाईकोर्ट ने स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे, अगली सुनवाई 22 मई को होनी है

हाल ही में अमेठी और भदोही में जूनियर शिक्षकों का समायोजन

कौशाम्बी, बुलंदशहर, लखीमपुर में सीनियर को दूसरे स्कूल भेजा

प्रयागराज। हाईकोर्ट के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में हो रहे शिक्षकों के समायोजन में एक और विवाद पैदा हो रहा है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा के आदेश पर कुछ जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जूनियर शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेज दिया है जबकि कुछ अन्य जिलों के बीएसए ने सीनियर शिक्षकों को समायोजित कर दिया है। अब इसको लेकर शिक्षकों ने विवाद करना शुरू कर दिया है। सीनियर कह रहे हैं कि जूनियर शिक्षक का समायोजन होना चाहिए जबकि जूनियर शिक्षक पहले से कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूल में भेजने पर अड़े हैं।


चूंकि अपर मुख्य सचिव के चार मई के आदेश में यह साफ नहीं है कि जूनियर या सीनियर में किसका समायोजन होगा इसलिए इसे लेकर कानूनी विवाद होना तय है। इसमें सीनियर और जूनियर दोनों में से जिसका मनमाफिक स्कूल में समायोजन नहीं होगा, वही न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा। सौरभकुमार सिंह व छह अन्य की ओर से दायर विशेष अपील में हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल को परिषदीय स्कूलों में न्यूनतम दो शिक्षकों की तैनाती के आदेश दिए थे। इस मामले की अगली सुनवाई 22 मई को होनी है।

अपर मुख्य सचिव ने सभी बीएसए से समायोजन करते हुए 20 मई तक रिपोर्ट मांगी है। अब तक जिन जिलों में समायोजन हो चुका है उनमें अमेठी, बाराबंकी और भदोही में जूनियर शिक्षकों जबकि मेरठ, बुलंदशहर, प्रतापगढ़ और कौशांबी में सीनियर को दूसरों स्कूलों में भेजा जा रहा है। बरेली में वरिष्ठ शिक्षकों को सरप्लस माना गया है। लखीमपुर खीरी में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस माना गया है लेकिन यदि सरप्लस अध्यापक महिला है तो अधिक ठहराव वाले पुरुष शिक्षक को समायोजित करने जा रहे हैं। हरदोई में दो कदम आगे बढ़ते हुए वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों सरप्लस शिक्षकों का डेटा मंगा लिया है। लखनऊ में अभी तक बीएसए ने सरप्लस में कनिष्ठ जाएगा या वरिष्ठ इसकी स्थिति तय नहीं की है।


जिले में शिक्षकों की समायोजन सूची पर भी विवाद

प्रयागराज। परिषदीय शिक्षकों के समायोजन के लिए बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार ने मंगलवार को सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी कर दी। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में वरिष्ठ शिक्षक को सरप्लस दिखाया गया है। हालांकि सूची में आरटीई नियमों की खुलकर अनदेखी की गई है। उच्च प्राथमिक स्तर पर 100 छात्रसंख्या तक विषयवार तीन शिक्षक होना अनिवार्य है। तमाम विद्यालयों में एक विषय के एक से अधिक शिक्षक होने के बावजूद उन्हें सरप्लस नहीं दिखाया गया है। सिर्फ उन्हीं शिक्षकों को सरप्लस किया गया है जहां छात्रसंख्या 100 से कम है और अध्यापक तीन से अधिक हैं। एनआईसी की वेबसाइट पर प्रदर्शित डाटा के संबंध में शिक्षकों को कोई आपत्ति हो तो जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन समिति के सदस्य सचिव बीएसए को 19 मई तक साक्ष्य सहित प्रस्तुत कर सकते हैं। बीएसए ने साफ किया है कि 19 मई के बाद किसी आपत्ति पर विचार नहीं किया जाएगा।


Friday, February 27, 2026

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव

वरिष्ठता नहीं, लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से बनेंगे प्रधानाचार्य, हाईकोर्ट ने रद्द किए पुरानी प्रक्रिया के भर्ती प्रस्ताव


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों (एडेड विद्यालय) में प्रधानाचार्य बनने के लिए अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा व साक्षात्कार देना अनिवार्य बताया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि 2023 के नए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम के लागू होने के बाद पुराने नियमों के तहत मांगे गए सभी अधियाचन शून्य माने जाएंगे।


 कोर्ट ने शासन और चयन आयोग को भर्ती प्रक्रिया अगले छह महीने के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए। कई जिलों के याचियों की याचिका पर न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। याचियों ने दलील दी कि वर्ष 2019-20 और 2021-22 में प्रधानाचार्यों के 884 और हेडमास्टरों के 729 पदों के लिए प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। इसलिए इसे पुराने नियमों से ही पूरा किया जाना चाहिए।

इस पर कोर्ट ने कहा कि कानून में बदलाव का उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। महज अधियाचन भेज देने से किसी भी उम्मीदवार को नियुक्ति का मौलिक अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता। जब प्रक्रिया एक कदम भी आगे नहीं बढ़ी तो नई व्यवस्था को लागू करना पूरी तरह सांविधानिक है। 


Friday, January 16, 2026

परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

स्थानांतरण मिलने पर नए विद्यालय में हो जाते हैं कनिष्ठ।

इस कारण पदोन्नति मिलने के लाभ से हो जाते हैं वंचित।


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक समय-समय पर जिले के बाहर यानी अंतरजनपदीय स्थानांतरण पाकर घर के नजदीक पहुंचने का मौका तो मिलता है, लेकिन वह वरिष्ठता के लाभ से वंचित हो जाते हैं। स्थानांतरण के क्रम में जिस विद्यालय में वरिष्ठता मिलती है, वहां सबसे कनिष्ठ हो जाते हैं। क्योंकि पदोन्नति मिलने की प्रक्रिया में सबसे नीचे हो जाते हैं। वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति उन्हें मिलेगी जो विद्यालय में सबसे पहले से होंगे।


शिक्षकों ने मांग उठाई है कि वरिष्ठता का निर्धारण उनकी पहली नियुक्ति तिथि से किया जाए। बड़ी संख्या में ऐसे महिला और पुरुष शिक्षक हैं, जो अध्यापन सेवा में पहले नियुक्त हुए, लेकिन स्थानांतरण लेकर घर के नजदीक आने के कारण कनिष्ठ हो गए। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था से उन शिक्षकों को नुकसान है, जो स्थानांतरण मिलने के बाद दूसरे जिले के विद्यालय में नियुक्त होते हैं।

नियुक्ति मिलने के समय ही तय हो कि जब नियुक्ति प्रदेश स्तर पर होती है और स्थानांतरण भी प्रदेश स्तर पर मिलता है तो वरिष्ठता भी मौलिक नियुक्ति तिथि से निर्धारित होनी चाहिए, न कि स्थानांतरित होकर दूसरे विद्यालय में जाने की तिथि से।

बताया गया कि वर्ष 47,000 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके पसंद के जनपद में भेजा गया। इसमें एक बार करीब 27,000 तथा एक और बार करीब 20,000 शिक्षकों के स्थानांतरण हुए। यह शिक्षक नए विद्यालय में सबसे कनिष्ठ हो गए। इसके कारण पदोन्नति की प्रक्रिया में सबसे नीचे रहने के कारण लाभ से वंचित हो जाएंगे। इस व्यवस्था को बदलकर पहली नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता निर्धारित किए जाने की मांग सरकार से की गई है।

Thursday, August 21, 2025

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्रास माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत अध्यापकों की ज्येष्ठता निर्धारण के सम्बन्ध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्रास माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत अध्यापकों की ज्येष्ठता निर्धारण के सम्बन्ध में


Friday, February 7, 2025

शिक्षक की नियुक्ति वरिष्ठता में प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं – हाईकोर्ट

शिक्षक की नियुक्ति वरिष्ठता में प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं – हाईकोर्ट 


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बालेश्वर दास केस के फैसले के हवाले से कहा कि प्रोबेशन अवधि सफलता पूर्वक पूरी होने के बाद कर्मचारी मूल नियुक्ति तिथि से नियमित नियुक्त माना जाएगा। इस तरह याची से पहले रजनीश कुमार की नियुक्ति होने के कारण वह वरिष्ठ होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने डॉ योगेन्द्र पाल की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया है। साथ ही कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज नगला पूर्वी बदायूं के दो अध्यापकों के वरिष्ठता विवाद को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी है।


याची का कहना था कि वह 13 सितंबर 1998 को लेक्चरर पद पर प्रोन्नत किया गया। विपक्षी को 20 अप्रैल 1998 से प्रोबेशन पर नियुक्ति दी गई। प्रोबेशन अवधि 20 अप्रैल 1999 को पूरी हुई। विपक्षी कार्यवाहक प्रधानाचार्य रजनीश के अधिवक्ता अनुराग शुक्ल का तर्क था कि याची 13 सितंबर 1998 को नियुक्त हुआ और विपक्षी 20 अप्रैल 1998 की तिथि से लेक्चरर नियुक्त हुआ। इसमें प्रोबेशन अवधि बाधक नहीं होगी।

Friday, January 17, 2025

तबादला लेने वाले शिक्षक अपने संवर्ग में होंगे सबसे कनिष्ठ, डिग्री कॉलेजों की संशोधित तबादला नियमावली जारी, शासन ने पांच साल से घटाकर तीन साल की है अवधि

तबादला लेने वाले शिक्षक अपने संवर्ग में होंगे सबसे कनिष्ठ, डिग्री कॉलेजों की संशोधित तबादला नियमावली जारी, शासन ने पांच साल से घटाकर तीन साल की है अवधि


लखनऊ। सरकार ने पिछले दिनों सहायता प्राप्त (एडेड) महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए तबादला नियमावली में संशोधन किया था। अब शासन ने इसकी संशोधित नियमावली जारी कर दी है। इसमें कहा गया है कि तबादला पाने वाले शिक्षक संबंधित महाविद्यालय में अपने संवर्ग के कनिष्ठ शिक्षक होंगे। यदि दो शिक्षक एक ही तिथि को कार्यभार संभालते हैं तो उनमें से ज्येष्ठ जन्मतिथि वाला शिक्षक वरिष्ठ होगा।


शासन ने शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए तबादले के लिए न्यूनतम सेवा अवधि पांच साल से घटाकर तीन साल की है। शिक्षक इसका लाभ पूरी सेवा अवधि में सिर्फ एक बार ले सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव महेंद्र प्रसाद अग्रवाल के अनुसार शिक्षकों का तबादला ऐसे पदों के सापेक्ष किया जाएगा जिनका वेतन लेखा विभाग से जारी किया जाता हो।

 उन्होंने कहा है कि प्रबंधतंत्र ऐसे शिक्षकों के तबादले को सहमति देने से पहले यह सुनिश्चित करेंगे कि शिक्षक के खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई लंबित नहीं है। एक महाविद्यालय से दूसरे में एकल व परस्पर तबादले के लिए आवेदन प्रबंधतंत्र की लिखित सहमति से उच्च शिक्षा निदेशक को करेंगे। उच्च शिक्षा निदेशक आवेदन मिलने के एक माह में अपनी संस्तुति शासन को भेजेंगे।

अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के लिए आरक्षण व्यवस्था बनाई रखी जाएगी। इसके लिए एक से दूसरे विद्यालय में एकल तबादला शिक्षक का उसी श्रेणी में खाली पद पर किया जाएगा। नई पेंशन योजना से आच्छादित कर्मचारियों के लिए संबंधित शिक्षक अपना प्रार्थना पत्र संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी डीडीओ को देंगे। नियमावली जारी होने के बाद जल्द ही इसके लिए आवेदन शुरू होने की उम्मीद है।

Monday, December 16, 2024

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त, जानिए! क्या है विवाद?

बेसिक शिक्षा : नौ साल से प्रमोशन नहीं हुए, पहले वाले भी होने लगे निरस्त,  जानिए! क्या है विवाद?


लखनऊ : प्रदेश के बेसिक स्कूलों में नौ साल से शिक्षकों के प्रमोशन नहीं हुए। इससे पहले जो प्रमोशन हुए थे, वे भी अब वरिष्ठता विवाद में उलझते जा रहे हैं। वरिष्ठता विवाद के बाद हाई कोर्ट के निर्देश पर तीन जिलों के प्रमोशन निरस्त भी कर दिए गए हैं। इससे प्रदेश के अन्य जिलों के प्रमोट हुए शिक्षक भी सहमे हुए हैं कि इस आदेश असर प्रदेश के सभी जिलों पर न पड़े।


60 फीसदी स्कूल प्रभारी हेड के सहारे 
बेसिक स्कूलों में आखिरी बार 2015 में प्रमोशन हुए थे। पहले जिला स्तर से प्रमोशन होते थे। ऐसे में कई जिले तो ऐसे हैं जहां 15 साल से प्रमोशन ही नहीं हुए हैं। इस वजह से प्रदेश के करीब 60% स्कूलों में स्थायी हेड मास्टर नहीं हैं। वे प्रभारी शिक्षकों के सहारे चल रहे हैं। अब तीन जिलों के प्रमोशन फिर से रद कर दिए गए हैं। ये जिले बुलंदशहर, सहारनपुर और सोनभद्र हैं। इससे अब प्रदेश में शिक्षकों को डर सता रहा है कि कहीं उनके जिले में भी प्रमोशन पर कोर्ट के आदेश का असर न पड़े।


जानिए! क्या है विवाद?

तीन जिलों में रद किए गए प्रमोशन में मुख्य विवाद वरिष्ठता तय करने को लेकर है। जूनियर स्कूलों के हेड के पद पर जो प्रमोशन किए गए थे, उसमें कार्यभार ग्रहण करने की तारीख के आधार पर वरिष्ठता तय की गई थी। इसको लेकर कुछ शिक्षक तभी कोर्ट चले गए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण नियुक्ति की तारीख से होना चाहिए, न कि कार्यभार ग्रहण करने की तारीख से। जूनियर हाईस्कूलों में कुछ शिक्षक ऐसे भी थे जिनकी भर्ती सीधे जूनियर में ही हुई थी।

उन्होंने भी एक मुकदमा दायर कर दिया। इस तरह इस मामले में तीन पक्ष हो गए। इस पर कोर्ट ने इसी साल सरकार को निर्देश दिए थे कि वरिष्ठता का निर्धारण तय नियमावली के आधार पर करते हुए मामले को निस्तारित किया जाए। बेसिक शिक्षा विभाग ने अब इसका निस्तारण करते हुए संबंधित बीएसए को आदेश जारी कर दिए। जिन तीन जिलों के शिक्षक कोर्ट गए थे, वहां के बीएसए ने प्रमोशन निरस्त कर दिए हैं।

Sunday, October 6, 2024

हाईकोर्ट का बीएसए को निर्देश: सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले बतौर शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा भी जोड़ने पर करें विचार

हाईकोर्ट का बीएसए को निर्देश: सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले बतौर शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा भी जोड़ने पर करें विचार 


प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सिद्धार्थनगर जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) को सहायक अध्यापक नियुक्ति से पहले की गई सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में शामिल करने की मांग पर विचार करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने 48 सहायक अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। याचिकाकर्ताओं ने सहायक अध्यापक बनने से पहले शिक्षामित्र के रूप में की गई सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में जोड़ने की मांग की थी।


याचिकाकर्ताओं में रामराज चौधरी और 47 अन्य जूनियर बेसिक स्कूलों के सहायक अध्यापक शामिल हैं, जिन्होंने यह याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि शिक्षामित्र के रूप में उनके द्वारा दी गई सेवा को नियुक्ति के समय वरिष्ठता सूची में शामिल नहीं किया गया, जिससे उन्हें वरिष्ठता के लाभ से वंचित किया गया है। याचिका में कहा गया कि सहायक अध्यापक बनने से पहले उनकी की गई सेवा का मूल्यांकन किया जाना चाहिए और इसे उनकी वरिष्ठता में जोड़ा जाना चाहिए।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को नियमानुसार इस मांग पर विचार करना चाहिए और इसे सुलझाने के लिए अगले दो माह के भीतर निर्णय लेना होगा। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में नियमों और प्रावधानों के अनुसार कार्यवाही की जानी चाहिए।

यह निर्णय 48 सहायक अध्यापकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अपनी सेवा अवधि को वरिष्ठता में जोड़ने की उम्मीद कर रहे हैं। अगर बेसिक शिक्षा अधिकारी सहायक अध्यापक बनने से पहले की सेवा को वरिष्ठता निर्धारण में शामिल करने के पक्ष में निर्णय लेते हैं, तो इसका असर इन शिक्षकों की पदोन्नति और वेतनमान और पुरानी पेंशन पर भी पड़ सकता है।

Friday, August 2, 2024

प्रबंधन की वरिष्ठता सूची में DIOS को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट

प्रबंधन की वरिष्ठता सूची में DIOS को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं : हाईकोर्ट

कॉलेज की प्रबंध समिति की वरिष्ठता सूची को डीआईओएस ने संशोधित करने का दिया था निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जिला विद्यालय निरीक्षक को किसी भी संस्थान की प्रबंध समिति की ओर से बनाई गई वरिष्ठता सूची में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है।


उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम या अन्य किसी विधिक प्रावधान के अनुसार उन्हें संशोधित वरिष्ठता सूची जारी करने और कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त करने का निर्देश देने का अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की पीठ ने कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज और एक अन्य की याचिका पर यह आदेश दिया।


बदायूं स्थित कुंवर रुकुम सिंह वैदिक इंटर कॉलेज के प्रबंधक ने प्रवक्ताओं की वरिष्ठता सूची बनाई थी। इसको जिला विद्यालय निरीक्षक बदायूं के 27 मार्च 2024 के आदेश रद्द कर दिया। साथ ही उन्हें संयुक्त  शिक्षा निदेशक बरेली मंडल के दो मार्च 2017 के आदेश के अनुसार वर्ष 2020-21 में प्रकाशित पूर्व वरिष्ठता सूची के अनुसार 15 अप्रैल 2024 के आदेश से नई वरिष्ठता सूची जारी करने का निर्देश दिया।


याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट ने में जिला विद्यालय निरीक्षक, बदायूं के आदेश की वैधता को चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए डीआईओएस के आदेश को रद्द कर दिया।


कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट शिक्षा नियमावली के अन्तर्गत बनाए गए विनियमों के उपबंधों में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसके तहत जिला विद्यालय निरीक्षक विद्यालय की प्रबंध समिति की वरिष्ठता सूची में हस्तक्षेप कर सकें या संशोधित करने का निर्देश दे सकें।



Wednesday, March 13, 2024

तीन महीने में डायट प्रवक्ताओं की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी करे सरकार : हाईकोर्ट

तीन महीने में डायट प्रवक्ताओं की अंतिम वरिष्ठता सूची जारी करे सरकार : हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डायट प्रवक्ताओं अनंतिम को राहत देते हुए उनकी अंतिम वरिष्ठता सूची तीन माह में जारी करने का आदेश दिया है। यह सूची पर 15 जून 2022 को मांगी गई थी आपत्ति आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने जितेंद्र कुमार व 14 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।


याचियों की ओर से कहा गया कि वह डायट में बतौर प्रवक्ता तैनात हैं। विभाग की ओर से प्रवक्ताओं की अनंतिम वरिष्ठता सूची जारी करते हुए आपत्तियां मांगी गईं थीं। आपत्ति 15 जून 2022 में मांगी गई थी। प्रवक्ताओं की ओर से आपत्तियां दे दी गई लेकिन विभाग की ओर से अंतिम वरिष्ठता सूची नहीं जारी की गई।


इस पर प्रवक्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। प्रवक्ताओं की ओर से कहा गया कि वरिष्ठता सूची जारी करने के लिए सरकार से गुहार लगाई थी लेकिन उस पर कोई सुनवाई नहीं की गई। सूची अभी तक जारी नहीं की गई। इस पर कोर्ट ने तीन महीने में वरिष्ठता सूची जारी करने का आदेश पारित किया है।

Thursday, January 4, 2024

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए महिला-पुरुष की अलग वरिष्ठता सूची तैयार करने पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक, कोर्ट आर्डर अपडेटेड

सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए महिला-पुरुष की अलग वरिष्ठता सूची तैयार करने पर दिल्ली हाईकोर्ट की रोक

🔴 कोर्ट आर्डर अपडेटेड  👇 


नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले के तहत सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की पदोन्नति के लिए महिला-पुरुष की अलग वरिष्ठता सूची तैयार करने पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि पदोन्नति के लिए वरिष्ठता क्रम ही आधार होगा, जिसकी नियुक्ति पहले होगी, वही पहले पदोन्नति पाएगा। इसके लिए महिला-पुरुष के लिए अलग से वरिष्ठता सूची तैयार कर पदोन्नति देना पूरी तरह गैरकानूनी है।


 न्यायमूर्ति वी कामेश्वर राव एवं न्यायमूर्ति ए के मेंदीरत्ता की पीठ ने दिल्ली सरकार की याचिका को खारिज करते हुए कहा है कि पदोन्नति के लिए महिला-पुरुष में भेदभाव का कोई आधार नहीं है। पीठ ने कहा कि नियुक्ति प्रक्रिया एवं पदोन्नति प्रक्रिया में कहीं भी ऐसा प्रावधान नहीं है कि महिला व पुरुष शिक्षकों के लिए अलग से वरिष्ठता क्रम तैयार किया जाए। दरअसल इस मामले में दिल्ली सरकार ने केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकर (कैट) के एक आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कैट ने एक शिक्षक की याचिका को मंजूर करते हुए सरकार के पुरुष व महिला के आधार पर अलग-अलग पदोन्नति सूची तैयार करने कानून विरुद्ध बताया था। 


उच्च न्यायालय ने भी अब कैट के आदेश पर मुहर लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार को एक ही वरिष्ठता सूची तैयार करनी होगी, जिसमें नियुक्ति की तारीख के हिसाब से महिला व पुरुष दोनों शामिल होंगे। इसी के आधार पर पदोन्नति दी जाएगी।



10 हजार को राहत

सुनवाई के दौरान उच्च न्यायालय के समक्ष एक गंभीर मुद्दा यह भी उठा कि वर्ष 2014 व वर्ष 2022 के बीच पदोन्नत हुए शिक्षकों की स्थिति क्या रखी जाए। इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि उन शिक्षकों की स्थिति में कोई बदलाव ना किया जाए। क्योंकि इससे व्यवस्था बिगड़ जाएगी। एक अधिकारी के मुताबिक इस बीच करीब दस हजार शिक्षकों ने पदोन्नति पाई है।


2014 का मामला

मामले में वर्ष 2014 में एक शिक्षक ने कैट के समक्ष इस मुद्दे को उठाते हुए याचिका दायर की थी। शारीरिक शिक्षा अध्यापक ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने पहले नियुक्ति पाई। लेकिन उनसे बाद में नियुक्त होने वालों को पहले पदोन्नत कर दिया गया। इस पर सरकार का पक्ष था कि महिला शिक्षकों को अलग वरिष्ठता सूची के आधार पर पदोन्नत किया गया है।


सरकार की दलील

दिल्ली सरकार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि राजधानी में दो पाली में स्कूल चलते हैं। पहली पाली में लड़कियों का स्कूल लगता है। जिसमें महिला शिक्षकों की तैनाती की जाती है। क्योंकि महिला सुरक्षा एक बेहद गंभीर मुद्दा है। वहीं दूसरी पाली में लड़कों के लिए स्कूल चलता है इसमें पुरुष शिक्षक होते हैं। ऐसे में जब पदोन्नति की जाती है तो पाली के हिसाब से वरिष्ठता सूची बनती है।


कोर्ट आर्डर 👇



Monday, December 18, 2023

मियाद खत्म, नहीं जारी हो सकी फाइनल लिस्ट, फिर उलझी बेसिक शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया, नहीं सुलझ रहा पद संख्या का विवाद

मियाद खत्म, नहीं जारी हो सकी फाइनल लिस्ट, फिर उलझी बेसिक शिक्षकों की प्रमोशन प्रक्रिया, नहीं सुलझ रहा पद संख्या का विवाद


18 दिसंबर 2023
लखनऊ : बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया लगातार उलझती जा रही है। प्रमोशन के पात्र शिक्षकों की फाइनल लिस्ट जारी करने की मियाद बीत जाने के बावजूद अभी तक जिलों में पदों की संख्या को लेकर विवाद बना हुआ है। यही वजह है कि अभी तक लिस्ट पोर्टल पर आपलोड नहीं हो सकी है।


 बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रकिया फरवरी से चल रही है। इसी के साथ अंतरजनपदीय तबादलों और म्युचुअल तबादलों की प्रक्रिया भी चल रही थी। इनमें से सिर्फ अंतरजनपदीय तबादले ही पूरे हो सके हैं। इसके बाद प्रमोशन की प्रक्रिया नए सिरे से शुरू की गई। बेसिक शिक्षा परिषद ने इसके लिए 16 दिसंबर तक पात्र शिक्षकों की फाइनल लिस्ट अपलोड करने के आदेश दिए थे। अभी तक एक दर्जन से भी कम जिले ही फाइनल लिस्ट जारी कर पाए हैं।


ऐसे उलझी प्रक्रिया : फाइनल लिस्ट जारी करने से पहले हुई विडियो कॉन्फ्रेंसिंग में 2011 तक सृजित पदों के सापेक्ष खाली पदों पर प्रमोशन के लिए कहा गया था। कुछ बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को इस बाबत लिखित निर्देश भी दिए। इसको लेकर भ्रम की स्थिति हो गई। 

अब कई जिलों ने अपने यहां प्रमोशन के लिए खाली पदों की संख्या शून्य और माइनस में दिखा दी है। बाराबंकी और बुलंदशहर में खाली पदों की संख्या शून्य दिखाई गई है। एटा में यह संख्या माइनस में है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल कहते हैं कि अगर कहीं कोई भ्रम है तो बात करके उसे दूर किया जाएगा।



बेसिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची फिर विवादों के घेरे में, जिलों मे अलग-अलग मानक तय किए गए, कल अपलोड होनी है फाइनल लिस्ट

15 दिसंबर 2023
लखनऊ : बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रकिया अंतिम चरण में हैं लेकिन विवाद थमने का नाम नहीं ले रहे। सबसे बडा विवाद वरिष्ठता सूची को लेकर ही है। जिलों में बीएसए ने अपने स्तर से वरिष्ठता के मानक तय कर दिए हैं। जॉइनिंग तिथि एक होने पर कुछ जिलों ने जन्म तिथि को आधार बनाया है तो कुछ ने चयन गुणांक के आधार पर सूची जारी की है। इसी आधार पर काउंसलिंग की जा रही है और 16 दिसंबर तक फाइनल लिस्ट अपलोड करनी है।

बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया वर्षों से अटकी है। इस साल फरवरी में प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन बाद कई बार इसे रोका गया। अब 16 दिसंबर तक प्रमोट हुए शिक्षकों की फाइनल लिस्ट अपलोड करनी है। ऐसे में वरिष्ठता सूची पर विवाद शुरू हो गया है। इस बारे में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि पूरे प्रदेश में एक ही मानक होना चाहिए, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।



कई ज़िलों में बेसिक शिक्षकों की अंतिम ज्येष्ठता सूची पर आपत्ति

प्रयागराज : पदोन्नति पाने की प्रतीक्षा कर रहे बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को विलंब का झटका लग सकता है। पदोन्नति देने के लिए प्रकाशित की गई अंतिम सूची पर कई जिलों से आपत्ति आई है। 


शिक्षकों का कहना है कि अंतिम ज्येष्ठता सूची में 30 सितंबर 2023 तक पांच वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले सभी शिक्षकों को अंतिम सूची में शामिल किया जाना था, लेकिन कई जिलों में परिषद सचिव के आदेश का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है।


पदोन्नति देने के लिए तैयार की गई अंतिम वरिष्ठता सूची कुछ जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने जन्मतिथि से बनाई है तो कुछ ने नियुक्ति तिथि से। इसके कारण विरोधाभास है। 

Sunday, November 12, 2023

पदोन्नति में वरिष्ठता का आधार बन रहा बाधा, जिलों में अलग-अलग आधार पर बन रही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची

पदोन्नति में वरिष्ठता का आधार बन रहा बाधा,  जिलों में अलग-अलग आधार पर बन रही शिक्षकों की वरिष्ठता सूची



लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया यूं ही नहीं अटकी है। वरिष्ठ अधिकारी बार-बार समय पर पदोन्नति के आदेश तो जारी कर देते हैं, लेकिन वरिष्ठता का आधार क्या होगा, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यही वजह है कि अब तक सिर्फ 45 जिलों में ही वरिष्ठता सूची बन पाई है। बस्ती समेत कुछ जिलों में इसके विरोध में प्रदर्शन भी हो रहा है।


शिक्षकों की फरवरी से चल रही प्रक्रिया को लेकर रोज नई-नई दिक्कतें सामने आ रही हैं। लेकिन वरिष्ठ अधिकारी दिक्कतों की अनदेखी कर रहे हैं। कुछ जिले शिक्षकों की वरिष्ठता का आधार जन्मतिथि तो कुछ गुणांक मान रहे हैं। यही वजह है कि जब इस पर शिक्षक आपत्ति करते हैं तो वरिष्ठता सूची पूरी नहीं हो पा रही है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि वरिष्ठता सूची में टीईटी वालों को ले रहे हैं या नहीं, इसे लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। बिना टीईटी के 2008 के भी शिक्षक पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभाग जब तक मेरिट बनाने का आधार स्पष्ट नहीं करेगा, तब तक दिक्कत रहेगी।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह ने कहा कि वरिष्ठता का आधार गुणांक होना चाहिए। दो शिक्षकों के गुणांक एक होने पर उनके चयन-गुणांक को आधार बनाना चाहिए। इसके बाद भी कौशांबी, प्रतापगढ़, बिजनौर, संत रविदास नगर कन्नौज और भदोही जिलों में जन्मतिथि को आधार मानकर वरिष्ठता सूची अपलोड की गई है। जब तक ये त्रुटि सही नहीं होगी तब तक पदोन्नति कैसे होगी?



■ सभी बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने सभी बीएसए को पत्र भेजकर निर्धारित तिथि आठ नवंबर तक पदोन्नति की प्रक्रिया न पूरी करने पर स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने कहा है कि सभी बीएसए एक सप्ताह में अपना स्पष्टीकरण दें कि क्यों न उनका उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाए। वहीं 21 नवंबर तक पदोन्नति प्रक्रिया पूरी न करने वाले बीएसए व पटल सहायक का उत्तरदायित्व तय किया जाएगा।


■ 20752 शिक्षकों को जोड़ा टूटने का डर

बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही पदोन्नति प्रक्रिया से एक और कुछ शिक्षकों में खुशी है वहीं दूसरी तरफ जिले के अंदर परस्पर तबादले की प्रक्रिया में शामिल 20752 शिक्षकों को अपना जोड़ा (पेयर) टूटने का डर सता रहा है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि यदि पदोन्नति प्रक्रिया, परस्पर तबादले से पहले पूरी कर दी जाती है तो काफी शिक्षकों के जोड़े टूट जायेंगे। ऐसे में महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद से मांग है कि पहले परस्पर तबादले पूरे किए जाएं फिर पदोन्नति की जाए।

Tuesday, August 8, 2023

आठ साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों ने घेरा तो एक माह में कार्यवाही पूरी करने का मिला आश्वासन, बेसिक शिक्षा मंत्री नहीं मिले तो निदेशालय का किया घेराव

आठ साल से पदोन्नति का इंतजार कर रहे शिक्षकों ने घेरा तो एक माह में कार्यवाही पूरी करने का मिला आश्वासन, बेसिक शिक्षा मंत्री नहीं मिले तो निदेशालय का किया घेराव


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक आठ माह से पदोन्नति (प्रमोशन) प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं। इस साल जनवरी में प्रक्रिया शुरू भी हुई तो अब तक पूरी नहीं हो सकी। इससे नाराज शिक्षकों ने सोमवार को लखनऊ में डेरा डाल दिया। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से मुलाकात नहीं हुई तो उन्होंने निदेशालय का घेराव किया। अधिकारियों ने एक माह में कार्यवाही पूरी करने का आश्वासन दिया।


शिक्षकों ने कहा कि आठ साल से उनके यहां पदोन्नति नहीं हुई। वहीं 23 जनवरी को बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रक्रिया तो शुरू की लेकिन आठ महीने में भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई। इससे शिक्षकों में काफी नाराजगी है। ऐसे में विभिन्न जिलों से शिक्षक सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से मिलने उनके आवास पहुंचे। हालांकि वह नहीं मिले।


इसके बाद शिक्षक बेसिक शिक्षा निदेशालय पहुंचे। यहां उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने शिक्षकों से वार्ता की और कहा कि प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों की मेरिट बनाने में समय लग रहा है, एक महीने में प्रक्रिया को पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद भी शिक्षक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल से मिलने के लिए डटे रहे।


शिक्षकों का नेतृत्व कर रहे निर्भय सिंह ने कहा कि यदि जल्द पदोन्नति की प्रक्रिया नहीं पूरी की जाती तो शिक्षक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। घेराव में सदानंद मिश्रा, अमिताभ मिश्र, शिवकुमार पाठक, रोहित शुक्ला, विद्या सिंह, अमिताभ मिश्र, अनूप श्रीवास्तव, अंजनी झा, आत्माराम, आशुतोष, जेपी नगीना राय, अनुराग आदि शामिल थे। 




लगातार लटकते जा रहे बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन, शिक्षकों का धैर्य दे रहा जवाब, छह महीने से ज्यादा बीते, तैयार नहीं हो सकी वरिष्ठता सूची


छह महीने से ज्यादा वक्त बीत गया लेकिन तब से बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया जहां की तहां अटकी है। अभी तक सभी जिलों की वरिष्ठता सूची तक पोर्टल पर अपलोड नहीं हो सकी है। अब शिक्षकों का धैर्य जवाब देने लगा है। इसको लेकर सोमवार को प्रदेशभर से शिक्षक छुट्टी लेकर लखनऊ पहुंच रहे हैं। वे शिक्षा मंत्री और विभाग के अफसरों से मिलकर स्थिति साफ करने की मांग करेंगे। 


बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की प्रक्रिया फरवरी शुरू हुई थी। उसके बाद से आवेदन और फिर में वरिष्ठता सूची जारी करने की तारीख लगातार बढ़ती रही। करीब एक दर्जन बार तारीख बढ़ने के बाद प्रक्रिया थम गई। इस बीच तबादलों के आदेश हो गए। इसमें से अंतरजनपदीय तबादले हो चुके हैं और अब तैनाती प्रक्रिया शुरू हो गई है लेकिन प्रमोशन को लेकर विभाग के अफसर अब चुप्पी साधे हैं।


 पिछले महीने एक आदेश आया था कि सभी बीएसए 24 जुलाई तक वरिष्ठता सूची को जांच लें। हकीकत यह है कि पोर्टल पर अभी तक 29 जिलों की ही अंतिम सूची अपलोड हो पाई है। तब से कोई नया आदेश नहीं आया।


बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन कई साल से नहीं हुए। अब फिर से प्रमोशन प्रक्रिया लटकने से शिक्षकों में रोष है। कई जिलों में शिक्षकों ने रविवार को अपने क्षेत्र के सांसदों और नेताओं से भी मुलाकात कर यह समस्या रखी। प्रदेशभर से शिक्षक अब छुट्टी लेकर सोमवार को लखनऊ में जुटेंगे। 


वरिष्ठता सूची को लेकर काफी आपत्तियां आई थीं। उनका निस्तारण किया जा रहा है। जल्द ही सभी जिलों की अंतिम सूची जारी कर तबादले किए जाएंगे। - विजय किरण आनंद, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा


प्रमोशन में फंस रहे ये पेच

प्रमोशन प्रक्रिया में अब भी कई पेच फंस रहे हैं। सबसे बड़ी दिक्कत वरिष्ठता सूची को लेकर है। इसमें बड़ा पेच टीईटी की अनिवार्यता को लेकर है। इसी वजह से 2018 में प्रमोशन प्रक्रिया रुक गई थी। जिन शिक्षकों का प्रमोशन होना है वे प्राइमरी के सहायक से जूनियर के सहायक अध्यापक बनेंगे। इनमें शिक्षक बनने के लिए जूनियर टीईटी अनिवार्यता को आधार बनाकर कुछ शिक्षक 2018 में कोर्ट चले गए थे। प्रदेश में कुछ शिक्षक जूनियर टीईटी पास हैं और कुछ नहीं। अभी जो 29 जिलों की वरिष्ठता सूची अपलोड हुई है, उसमें दोनों तरह के शिक्षक हैं। अधिकारी असमंजस में हैं कि बिना टीईटी वालों को शामिल करें या नहीं। इस वजह से वरिष्ठता सूची तैयार नहीं हो पा रही। प्रमोशन प्रक्रिया शुरू करने से पहले इसके लिए पूरी तैयारी नहीं की गई। शुरुआती आदेश में यह भी साफ नहीं किया गया कि कितने पद हैं और कितने पर प्रमोशन होगा। यही वजह है कि अब अधिकारी खुद असमंजस में हैं कि क्या करें ?

Thursday, May 18, 2023

मियाद खत्म : बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन के लिए 11 बार हिदायत देने के बावजूद वरिष्ठता सूची दस जिलों ने अपलोड नहीं की

मियाद खत्म : बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन के लिए 11 बार हिदायत देने के बावजूद वरिष्ठता सूची दस जिलों ने अपलोड नहीं की


प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के प्रमोशन के लिए 11 बार हिदायत देने के बावजूद 75 में से 65 जिले ही वरिष्ठता सूची अपलोड कर सके हैं। 


बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने 12 मई को सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एनआईसी की ओर से तैयार पोर्टल पर 16 मई तक वरिष्ठता सूची अपलोड करने के निर्देश दिए थे। लेकिन समयसीमा बीतने के बावजूद 10 जिलों की सूची फाइनल नहीं हो सकी है। 


जिन जिलों ने वरिष्ठता सूची अपलोड की है उसमें भी तमाम कमियां हैं। भदोही ने जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता सूची तैयार कर दी है जबकि नियमावली के मुताबिक ज्येष्ठता सूची अध्यापक की मौलिक नियुक्ति तिथि और चयन गुणांक से तय होती है। पहले बाराबंकी ने भी जन्मतिथि के आधार पर सूची तैयार की थी, लेकिन बाद में ठीक कर लिया गया।

Tuesday, May 16, 2023

बेसिक शिक्षकों की ज्येष्ठता सूची चार माह बाद भी नहीं आ सकी

बेसिक शिक्षकों की ज्येष्ठता सूची चार माह बाद भी नहीं आ सकी


लखनऊ । प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की ज्येष्ठता सूची इस वर्ष 20 फरवरी तक पोर्टल पर अपलोड की जानी थी लेकिन आज 15 मई हो गए, सूची का कहीं अता- पता नहीं है।

गौरतलब है कि ज्येष्ठता सूची अपलोड करने की अन्तिम तिथि अब तक 10 बार बढ़ाई जा चुकी है। विभागीय अधिकारियों के बीच हो रहे पत्राचारों से जानकारी मिली है कि अब तक मात्र 32 जिलों में ज्येष्ठता सूची को अन्तिम रूप दिया जा सका है। शेष 43 जिले अब भी इस कार्य के प्रति कतई गम्भीर प्रतीत नहीं हो रहे। यह स्थिति तब है जबकि विभाग की ओर से 44 जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की जा चुकी है।

प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों के कई सालों से प्रोन्नति नहीं हुई है। इस साल फरवरी में प्रोन्नति की प्रक्रिया शुरू हुई लेकिन उससे पहले की (ज्येष्ठता सूची तैयार करने की ) प्रक्रिया को पूरी करने में ही भारी लापरवाही बरती जा रही है।



दस बार दी हिदायत, फिर भी वरिष्ठता सूची में तमाम कमियां


परिषदीय शिक्षकों के प्रमोशन के लिए दस बार हिदायत देने के बावजूद जिलों से अपलोड की जा रही वरिष्ठता सूची में तमाम कमियां हैं। कहीं नियम विरुद्ध तरीके से शिक्षकों की जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता तय कर दी गई है तो कहीं टीईटी का ब्योरा ही दर्ज नहीं है। कुछ जिलों ने एक मई 2018 को नियुक्त शिक्षकों की सेवा पांच साल मानते हुए वरिष्ठता सूची में शामिल कर लिया है। वरिष्ठता सूची नियमानुसार न होने के कारण प्रमोशन में विवाद तय माना जा रहा है।


शुक्रवार दोपहर तक 75 जिलों में से 32 की वरिष्ठता सूची अपलोड हो सकी थी। बाराबंकी ने जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता सूची तैयार कर दी है, जबकि नियमावली के मुताबिक ज्येष्ठता सूची अध्यापक की मौलिक नियुक्ति तिथि और चयन गुणांक से तय होती है। हाथरस और रामपुर में एक मई 2018 को 12460 शिक्षक भर्ती के तहत नियुक्त शिक्षकों की सेवा के पांच वर्ष पूरे मान लिए गए हैं, जबकि मैनपुरी में एक मई 2018 को नियुक्त शिक्षकों के पांच वर्ष पूरे नहीं माने गए हैं। प्रयागराज की वरिष्ठता सूची का क्रम गड़बड़ है। क्रम संख्या 5323 के बाद 5933 व 6794 है। कौशाम्बी में किस शिक्षक ने टीईटी की है और किसने नहीं, इसका जिक्र नहीं है।



अब 16 तक अपलोड होगी सूची

बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने आठ मई को सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 11 मई तक वरिष्ठता सूची अपलोड करने के निर्देश दिए थे। लेकिन तय समय तक 32 जिले ही पोर्टल पर सूची दे सके। इसे देखते हुए सचिव ने 11वीं बार मौका देते हुए सूची अपलोड करने की अंतिम तिथि 16 मई तक बढ़ा दी है। सभी बीएसए को इस आशय का प्रमाणपत्र देना होगा कि ज्येष्ठता सूची में कोई त्रुटि नहीं है

Friday, May 12, 2023

शिक्षकों से अपेक्षाएं बड़ी, सुविधाएं दूर की कौड़ी, पदोन्नति और अंतर जनपदीय तबादले का अब भी इंतजार,, चार माह बाद भी नहीं बन पाई वरिष्ठता सूची

शिक्षकों से अपेक्षाएं बड़ी, सुविधाएं दूर की कौड़ी, पदोन्नति और अंतर जनपदीय तबादले का अब भी इंतजार,, चार माह बाद भी नहीं बन पाई वरिष्ठता सूची 


लखनऊ। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से विभाग की अपेक्षाएं तो बड़ी हैं, लेकिन उनको दी जाने वाली सुविधाओं पर ध्यान नहीं है। शिक्षक लंबे समय से अंतर जनपदीय तबादले और पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। हाल ही में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की गई है, जो पूरा होने का नाम नहीं ले रही है।


शिक्षक बताते हैं कि दस साल पहले विभाग ने पदोन्नति की थी। इसके बाद से पदोन्नति नहीं हुई है। इससे बड़ी संख्या में शिक्षक बिना प्रमोशन पाए ही सेवानिवृत्त हो गए। पिछले वर्ष कार्यवाही शुरू तो हुई, लेकिन पूरी होने का नाम नहीं ले रही है। दिसंबर अंत से शुरू शिक्षकों की वरिष्ठता की कवायद भी अब तक पूरी नहीं हो पाई है।


 वरिष्ठता तय न होने से दो बार जिले के अंदर तबादले की प्रक्रिया शुरू करने की तिथि टाली गई है। प्राथमिक से उच्च प्राथमिक स्कूलों में पदोन्नति न होने का खामियाजा शिक्षक ही नहीं छात्र भी भुगत रहे हैं। कई विद्यालयों में गणित व विज्ञान के शिक्षक ही नहीं हैं। शिक्षकों से एप के जरिए काफी काम व डाटा अपलोड कराए जाते हैं। लेकिन टैबलेट खरीद की प्रक्रिया 2019 से अभी चल ही रही है। शिक्षक सबसे ज्यादा परिवार गणना से परेशान हैं। इन सबका असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है।



पहले की सुविधाओं पर चली कैंची

एक तरफ तो शिक्षकों को पदोन्नति, जिले के अंदर तबादले जैसी सुविधाएं नहीं दी जा रही हैं। वहीं पहले से दी जा रही सुविधाओं पर भी कैंची चला दी गई है। प्रदेश में हर संवर्ग में अधिकारियों को पढ़ाई के लिए छुट्टी का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों के लिए यह सुविधा हाल ही में समाप्त कर दी गई। इसी तरह उनका प्रतिपूर्ति अवकाश भी समाप्त किया गया। शिक्षक काफी दिनों से चिकित्सा सुविधा देने की भी मांग कर रहे हैं। इस पर भी अब तक ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।


वरिष्ठता संबंधी स्पष्ट प्रोफार्मा व निर्देश जारी किया गया था। उनकी नियुक्ति की मौलिक तिथि व इसमें एकरूपता होने पर गुणांक को आधार बनाना है। जल्द ही इसे फाइनल कर दिया जाएगा। इसके बाद जिले के अंदर तबादला प्रक्रिया शुरू होगी।-प्रताप सिंह बघेल, - सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद


वर्षों से वरिष्ठता व जिले के अंदर तबादले के लिए शिक्षक इंतजार कर रहे हैं। विभाग जान-बूझकर इसे लंबित कर रहा है। मेडिकल व सीयूजी मोबाइल की सुविधा देने के लिए काफी दिनों से मांग चल रही है, पर ध्यान हीं दिया जा रहा है। -अनिल यादव, प्रदेश अध्यक्ष, यूपी बीटीसी शिक्षक संघ

Tuesday, May 2, 2023

शिक्षकों की भर्ती का आधार अलग-अलग, वरिष्ठता उलझी, 40 से अधिक जिलों में अब भी चल रही है प्रक्रिया

शिक्षकों की भर्ती का आधार अलग-अलग, वरिष्ठता उलझी

40 से अधिक जिलों में अब भी चल रही है प्रक्रिया

तीन मई तक आपत्तियों का किया जाएगा निस्तारण


लखनऊ। प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने की प्रक्रिया गुणांक के फेर में उलझती दिख रही है। क्योंकि शिक्षकों की नियुक्ति अलग-अलग साल में अलग-अलग आधार पर हुई है। हाल यह है कि तीन दर्जन से अधिक जिलों में अभी भी वरिष्ठता की आपत्तियों का निस्तारण नहीं हो पाया है। इससे शिक्षकों में नाराजगी है।


गत वर्षों में शिक्षकों की भर्ती अलग- अलग आधार पर हुई थी। कुछ शिक्षकों की भर्ती टीईटी मेरिट पर, कुछ की शैक्षिक प्रमाणपत्रों के प्रतिशत पर तो कुछ की हाईस्कूल व इंटर की मेरिट पर की गई है। वरिष्ठता तय करने के लिए कोई एक सामान्य फॉर्मूला तय न होने से गुणांक निकालने में दिक्कत हो रही है। इससे पदोन्नति की कार्यवाही भी उलझती जा रही है। यही वजह है कि अब तक छह बार इसकी तिथि बढ़ाई जा चुकी है। 


शिक्षकों के अलग-अलग जिलों में तैनाती और वर्तमान में उनके तैनाती स्थल अलग-अलग होने से भी वरिष्ठता तय करने में समस्या आ रही है। शिक्षक इन कमियों को लेकर बार-बार पोर्टल पर आपत्ति दर्ज करा रहे हैं, लेकिन विभाग इनका निस्तारण नहीं कर पा रहा है। यही वजह है कि शिक्षकों की वरिष्ठता तय करने की प्रक्रिया दो माह से ज्यादा समय से चल रही है। इसके बाद भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।


हाल में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 40 से अधिक जिलों में वरिष्ठता सूची पर शिक्षकों की आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया जा सका है। हालांकि शिकायतों के निस्तारण की तिथि तीन मई तक बढ़ाई गई है। शिक्षकों का कहना है कि इसके बाद भी विभाग सही से वरिष्ठता का निर्धारण नहीं तय कर पाएगा। क्योंकि इसमें गुणांक का मामला उलझा हुआ है।

Tuesday, April 11, 2023

कई जिलों में अब तक नहीं अपलोड हुई बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति हेतु वरिष्ठता सूची

कई जिलों में अब तक नहीं अपलोड हुई बेसिक शिक्षकों की  पदोन्नति हेतु वरिष्ठता सूची



लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची को लेकर दिक्कतें खत्म होती नहीं दिख रही हैं। विभाग की ओर से चार अप्रैल सूची अपलोड करने की आखिरी तिथि देने के बाद भी लखनऊ समेत एक दर्जन से अधिक जिलों में सूची नहीं अपलोड की जा सकी है। इसे लेकर शिक्षकों में काफी नाराजगी है।


परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की वर्षों बाद वरिष्ठता तय करने व प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। किंतु इसको लेकर एक के बाद एक पेच बढ़ते जा रहे हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत दूसरे जिले से आए शिक्षकों की वरिष्ठता के निर्धारण को लेकर आ रही है। 


बेसिक शिक्षा अधिकारी इससे संबंधित डेटा उपलब्ध न होने के कारण उनकी वरिष्ठता का निर्धारण नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि कई जिलों में अभी  भी यह सूची नहीं अपलोड की जा सकी है। यह स्थिति तब है जबकि इसके लिए चार बार डेडलाइन तय की जा चुकी है।


जिन जिलों में सूची अपलोड भी की गई है। वहां शिक्षक इससे संतुष्ट नहीं हैं और वे काफी संख्या में इस पर अपनी आपत्ति दर्ज करा रहे हैं। दूसरी तरफ शिक्षकों का कहना है कि नया सत्र शुरू हो गया है। निकाय चुनाव को लेकर आचार संहिता लग चुकी है। उनका कहना है कि पहले से ही विभाग इसे लेकर गंभीर नहीं था ।