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Wednesday, July 28, 2021

उरई : शिक्षक से रिश्वत लेते वित्त एवं लेखा (बेसिक) के बाबू को एंटी करप्शन ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार

उरई : शिक्षक से रिश्वत लेते वित्त एवं लेखा (बेसिक) के बाबू को एंटी करप्शन ने किया रंगे हाथों गिरफ्तार


उरई : बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिपिक को एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। उसने एक शिक्षक के बकाया वेतन भुगतान के बदले रिश्वत मांगी थी। पीड़ित की शिकायत पर जाल बिछाकर आरोपित को धर लिया गया। कोतवाली में आरोपित से पूछताछ की जा रही है।


कुठौंद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भदेख में सहायक अध्यापक ओम जी राना का फरवरी व मार्च का वेतन रुका है। उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय को प्रार्थनापत्र देकर बकाया वेतन भुगतान मांगा था, लेकिन कार्यालय से उनकी फाइल आगे नही बढ़ रही थी। उन्होंने वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय के लिपिक विनय कुमार से फाइल कंपलीट कर वेतन दिलवाने की मांग की तो उसने 15 हजार रुपये रिश्वत मांगी। रुपये न देने पर परेशान किया जा रहा था। इस पर उन्होंने भ्रष्टाचार निवारण संगठन की झांसी इकाई में शिकायत की। इसके बाद टीम ने शिक्षक को लिपिक विनय के पास भेजा। विनय ने जैसे ही केमिकल लगाकर भेजे गए 10 हजार रुपये लिए तो टीम ने कार्यालय में ही उसे रंगे हाथ पकड़ लिया। इसके बाद बीएसए कार्यालय में सनसनी फैल गई। आरोपित को कोतवाली लाया गया।

दस्तावेजों की पड़ताल के लिए टीम दोबारा बीएसए कार्यालय पहुंची और वित्त एवं लेखाधिकारी से भी पूछताछ की। एंटी करप्शन सेल झांसी यूनिट के इंस्पेक्टर प्रेमचंद्र ने बताया कि पीड़ित शिक्षक की शिकायत पर आरोपित विनय कुमार को पकड़ा गया है। मुकदमा दर्ज कराकर आरोपित को कोतवाली पुलिस के सिपुर्द किया गया है।


उरई : वेतन समायोजन के लिए दस हजार रुपये की रिश्वत लेने वाले बाबू विनय कुमार के खिलाफ एंटी करप्शन की टीम ने करीब चार घंटे कवायद की। सब कुछ तय होने के बाद उसे पकड़ा गया। रकम हाथ में थी लिहाजा अपने सफाई में कहने के लिए उसके बाद कुछ नहीं था। अपराधी की तरह गाड़ी में डालने के बाद उसे कोतवाली लाया गया।

एंटी करप्शन की टीम में प्रभारी निरीक्षक प्रेम चंद्र समेत कुल नौ सदस्य थे, लेकिन सरकारी कर्मचारी को रिश्वत लेते पकड़े जाने के लिए सरकारी गवाह भी जरूरी थे। लिहाजा नियमानुसार एंटी करप्शन की टीम ने डीएम कार्यालय में ऑपरेशन भ्रष्टाचार के संबंध में जानकारी दी। जिसके बाद कर्मचारी कलेक्ट्रेट के टीम में शामिल किए गए। इस तरह कुल 11 सदस्यीय टीम दबिश लेने के लिए बीएस कार्यालय पहुंची। इससे पहले ओम जी राना बाबू के पास पहुंचे। उन्होंने दस हजार रुपये बाबू के दिए।

 नोटों में विशेष केमिकल लगा हुआ था। जिससे बाबू को रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा सके। अपने लालच के चलते विनय कुमार वर्मा खुद फंस गया। उसे पकड़ने वाली टीम में एंटी करप्शन यूनिट के प्रभारी निरीक्षक प्रेम कुमार , निरीक्षक सुरेंद्र सिंह, अमरीश कुमार यादव, उप निरीक्षक मोहम्मद इसरार, मुख्य आरक्षी क्रांति कुमार पांडेय, राजबहादुर सिंह, सूर्येंद्र प्रताप सिंह, इरशाद खान, निरंजन सिंह आदि शामिल थे। गिरफ्तार बाबू को बुधवार को कोर्ट में पेश किया जा सकता है। वहीं शिकायतकर्ता के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं।

पैरवी करने वाले भी जुटे : रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार बाबू की उरई में भी अच्छी जान पहचान है, लिहाजा उसकी पैरवी के लिए कोतवाली में तमाम लोग आए, लेकिन बचाव कोई रास्ता नहीं होने से उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा।


उरई : कुठौंद में भदेख गांव के प्रथामिक विद्यालय में तैनात ओमजी राना महोबा से स्थानांतरित होकर आए थे, लेकिन दो माह का वेतन उनका लटका हुआ था। रिश्वत नहीं दे पाने की वजह से वेतन नहीं बनाया जा रहा था। उसने एंटी करप्शन यूनिट में सीधे शिकायत नहीं की बल्कि संगठन में बताया। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश कोषाध्यक्ष विजय कुमार पटेल ने बताया कि संगठन द्वारा पूरे प्रदेश में जन जागरण अभियान चलाया जा रहा है। ओमजी राना ने पहले संगठन के लीगल सेल में शिकायत की। संगठन के प्रयास से 183वां भ्रष्ट कर्मचारी गिरफ्तार कराया गया है। जनपद जालौन समेत बुंदेलखंड के 15 रिश्वतखोर कर्मचारी व अधिकारी अभी रडार पर हैं।

सप्ताह में तीन दिन आता था कार्यालय
 उरई : दस हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किए बाबू के खिलाफ शिकायतों की फेहरिस्त बेहद लंबी है। हालांकि एंटी करप्शन सेल में सिर्फ एक शिक्षक ने ही शिकायत की। जिसके बाद पूरे मामले की जांच शुरू की गई। रिश्वत के रुपयों के अलावा वेतन समायोजन से संबंधित पत्रवलीं एंटी करप्शन की टीम ने साक्ष्य के तौर पर सील कीं हैं।

बीएसएस कार्यालय के वित्त एवं लेखाधिकारी शाखा में तैनात बाबू विनय कुमार वर्मा एक साल पहले ही उरई में संबद्ध हुआ था। जिसे वेतन संबंधी कार्य सौपें गए थे। झांसी के मंडलीय कार्यालय में भी वह संबद्ध है। इसलिये सप्ताह में तीन दिन ही वह उरई आता था। आरोप है कि दूसरे जनपद से ट्रांसफर होकर आये दर्जनों शिक्षकों से उसने वेतन समायोजन करने में घूस ली। 

शिक्षक ओमजी राणा ने उत्पीड़न की पराकाष्ठा होने के बाद एंटी करप्शन यूनिट में शिकायत करने का मन बनाया गया। अब विनय कुमार सलाखों के पीछे कई और पीड़ित अब शिकायत के लिए आगे आ सकते हैं। एंटी करप्शन टीम के निरीक्षक अमरीश कुमार यादव के अनुसार विनय कुमार द्वारा पैसे लेकर वेतन के समायोजन करने से संबंधित पत्रवलियां कब्जे में लेकर सील कर दी गईं हैं। जिनके आधार पर जांच आगे बढ़ेगी।

भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी विद्यालय

भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी विद्यालय


शिक्षा मंत्रालय ने संसद में बताया कि वह सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए तेजी से काम कर रहा है। भारतनेट कार्यक्रम के तहत यह मुहिम शुरू की गई है जिसमें वर्ष 2023 तक सभी गांवों को फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


भारतनेट कार्यक्रम के जरिये इंटरनेट से जुड़ेंगे सभी सरकारी स्कूल, अब तक 1.19 लाख स्कूल जुड़ेआनलाइन शिक्षा और स्मार्ट क्लासरूम बनाने की मुहिम, देश में करीब 10 लाख सरकारी स्कूल


नई दिल्ली । आनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने सहित सरकारी स्कूलों को स्मार्ट क्लास रूम में तब्दील करने की मुहिम के बीच केंद्र सरकार ने देश भर के सभी सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से लैस करने का फैसला किया है। अब तक 1.19 लाख सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ दिया गया है। बाकी सभी स्कूलों को भी उस गांव तक फाइबर नेटवर्क पहुंचते ही जोड़ दिया जाएगा।


स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने की यह मुहिम इसलिए भी तेज हुई है, क्योंकि इसके जरिये विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों को दूसरे स्कूलों से आनलाइन जोड़ा जा सकेगा। स्कूली छात्रों को इससे फायदा होगा। इसके साथ ही स्मार्ट क्लास रूम के जरिये छात्र देश-दुनिया के बेहतरीन शिक्षकों के वीडियो देख सकेंगे और ऐसे पाठों को पढ़ सकेंगे, जिन्हें समझने के लिए उन्हें ट्यूशन या कोचिंग की मदद लेनी पड़ती है जो ग्रामीण और दूर दराज के क्षेत्रों में आसानी से नहीं मिल पाती है।


मौजूदा समय में देश में कुल 15 लाख स्कूल हैं। इनमें से करीब 10 लाख सरकारी स्कूल हैं जो अभी तक इंटरनेट की सुविधा से वंचित थे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों की तरह हाईटेक सुविधाओं से लैस करने पर जोर दिया गया है। शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में संसद को दी गई एक जानकारी में बताया कि वह सरकारी स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ने के लिए तेजी से काम कर रहा है। भारतनेट कार्यक्रम के तहत यह मुहिम शुरू की गई है जिसमें वर्ष 2023 तक सभी गांवों को फाइबर कनेक्टिविटी से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


उप्र के 4042, झारखंड के 10891 तथा बिहार के 1492 स्कूलों में पहुंचा इंटरनेट

फिलहाल मंत्रालय ने, जो गांव फाइबर कनेक्टिविटी से जुड़ गए हैं, वहां के सरकारी स्कूलों को इंटरनेट सुविधा से लैस करने का काम शुरू किया है। साथ ही आगे भी जैसे-जैसे गांवों में यह लाइन पहुंचेगी, वहां के सरकारी दफ्तरों से लेकर स्कूलों को भी इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक इस मुहिम के तहत 1.19 लाख स्कूलों को इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है। इनमें उत्तर प्रदेश के 4042 स्कूल, झारखंड के 10891, गुजरात के 23434, बिहार के 1492, बंगाल के 8055, दिल्ली के 2440 तथा मध्य प्रदेश के 3792 स्कूल शामिल हैं।

Tuesday, July 27, 2021

यूपी : उप मुख्यमंत्री ने कहा, अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी होगा बोर्ड परीक्षा परिणाम

यूपी : उप मुख्यमंत्री ने कहा, अगस्त के पहले सप्ताह तक जारी होगा बोर्ड परीक्षा परिणाम

प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा विभाग की हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 29.94 हजार से अधिक और इंटरमीडिएट में 26.10 हजार से अधिक परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा के उत्तीर्ण किया जाना है।


माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड-2021 का परिणाम अब अगस्त के पहले सप्ताह में जारी किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नए पैटर्न पर परिणाम जारी करने से पहले मुख्यमंत्री से चर्चा के लिए समय मांगा है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के चलते माध्यमिक शिक्षा विभाग की हाई स्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए 29.94 हजार से अधिक और इंटरमीडिएट में 26.10 हजार से अधिक परीक्षार्थियों को बिना परीक्षा के उत्तीर्ण किया जाना है।

बोर्ड ने 10वीं बोर्ड के परीक्षार्थियों को कक्षा 9वीं के 50 प्रतिशत और कक्षा 10वीं की प्री-बोर्ड के 50 प्रतिशत अंक देकर उत्तीर्ण करने की गाइडलाइन तैयार की है। इसी प्रकार इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों को कक्षा 10वीं के 50 प्रतिशत, कक्षा 11वीं के 40 और कक्षा-12वीं प्री-बोर्ड के 10 प्रतिशत अंक देकर उत्तीर्ण करने की गाइडलाइन के आधार पर परिणाम लगभग तैयार कर लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर इस वर्ष मेरिट जारी नहीं की जाएगी।

उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि पहली बार बिना परीक्षा के बोर्ड परिणाम जारी किया जाना है। सरकार की गाइडलाइन के अनुसार तैयार परिणाम पर मुख्यमंत्री से विचार विमर्श के लिए समय मांगा गया है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री से विचार विमर्श होने के तीन दिन बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगस्त के पहले सप्ताह तक परिणाम जारी किया जाएगा। उन्होंने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम एक साथ जारी किया जाएगा।

खाकी वर्दी छोड़कर चाक- डस्टर पकड़ रहे हैं युवा

69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में 154 शिक्षकों की हुई है नियुक्ति जिनमें 40 अभ्यर्थी थे सिपाही

खाकी वर्दी छोड़कर चाक- डस्टर पकड़ रहे हैं युवा 



लखीमपुर खीरी
वर्दी का रौब छोड़कर युवा अब शिक्षक बनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं सुकून की नौकरी करने के लिए पुलिस की नौकरी छोड़कर शिक्षक की नौकरी ज्वाइन की है। बेसिक शिक्षा विभाग में हाल ही में हुई 69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में जिले में जो नियुक्तियां हुई हैं उनमें सबसे ज्यादा संख्या उन लोगों की है। जो पहले से पुलिस विभाग में आरक्षी के पद पर कार्यरत रहे हैं । नियुक्ति पत्र लेने के बाद अब ज्वाइनिंग के लिए पुरानी नौकरी छोड़ रहे हैं । ज्वाइन करने के लिए विभाग को प्रार्थनापत्र देकर समय मांगा है।


बेसिक शिक्षा विभाग में दो दिन पहले 154 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए गए हैं। 69 हजार शिक्षक भर्ती के तीसरे चरण में जिले को 177 शिक्षक मिले थे। इसमें से 17 अनुपस्थित रहे । चार के आवेदन निरस्त हुए। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। दो के आवेदन में दिए गए अंकों पर शक होने के कारण उनको रोका गया है जबकि 154 को विभाग ने नियुक्तिपत्र दिए हैं। शिक्षक पद पर चयनित होने के बाद नियुक्तिपत्र प्राप्त करने वालों में से 40 ज्यादा ऐसे युवा हैं जो पहले से पुलिस में आरक्षी के पद कार्यरत थे। अब शिक्षक भर्ती में चयन होने पर वह वर्दी का रौब छोड़कर शिक्षक बनने जा रहे हैं ।


अगर शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य न कराया जाए तो यह सम्मान का पेशा है। यही वजह है कि हम लोगों की फील्ड में इंजीनियर, पुलिस कर्मी, एमबीए वाले युवा भी आ रहे हैं। पर जब शिक्षक से पढ़ाने के सिवा अन्य काम कराते हैं तो तकलीफ होती है । राहुल वाजपेयी, मीडिया प्रभारी प्राथमिक शिक्षक संघ

B.Ed. Entrance Exam : जारी हुए बीएड प्रवेश परीक्षा हेतु नए प्रवेश पत्र, 06 अगस्त को है परीक्षा

B.Ed. Entrance Exam : जारी हुए बीएड प्रवेश परीक्षा हेतु नए प्रवेश पत्र, 06 अगस्त को है परीक्षा




लखनऊ विश्वविद्यालय ने छह अगस्त को होने वाली संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड (प्रवेश पत्र) सोमवार को वेबसाइट https://www.lkouniv.ac.in/ पर अपलोड कर दिए। अभ्यर्थी अपनी पंजीकरण संख्या के माध्यम से नवीन प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकते हैं। जिन अभ्यर्थियों ने पूर्व में प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लिया है, वे उसी प्रवेश पत्र के साथ भी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। 


राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेयी ने बताया कि पहले बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 30 जुलाई को होनी थी। उसी के अनुसार प्रवेश पत्र भी जारी किए गए थे। अब शासन के आदेश पर तिथि बदलकर छह अगस्त कर दी गई है। इसलिए संशोधित तिथि के प्रवेश वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं।

 प्रवेश पत्र डाउनलोड करने में कोई दिक्कत आ रही हो तो अभ्यर्थी को ई-मेल helplineupbed2021@gmail.com पर अपना नाम, पिता और माता का नाम, अभ्यर्थी की जन्मतिथि, पंजीकृत मोबाइल नंबर, पंजीकृत ईमेल व हाईस्कूल परीक्षा पास करने का वर्ष भेजना होगा। उन्होंने बताया कि परीक्षा दो पालियों में आयोजित की जाएगी। पहली पाली सुबह 9 से 12 बजे और दूसरी पाली में दो से शाम पांच बजे तक होगी। इस बार बीएड प्रवेश परीक्षा में 5,91,305 परीक्षार्थी शामिल होने के लिए पंजीकृत हैं।


27 अगस्त को जारी होंगे नतीजे : तय कार्यक्रम के अनुसार संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा के नतीजे जारी करने की तिथि 27 अगस्त होगी। दाखिले के लिए आनलाइन काउंसिलिंग एक सितंबर से शुरू होगी। इसके अलावा नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत छह सितंबर से होगी।

माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल अनोखा, ऑनलाइन तबादला पर रिलीव करने पर रोक

माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल अनोखा, ऑनलाइन तबादला पर रिलीव करने पर रोक


■  राजकीय माध्यमिक कालेजों के शिक्षक आकांक्षी जिलों में फंसे
■  2019 में भी नहीं हो सका था, आफलाइन हो रहे स्थानांतरण


लखनऊ : माध्यमिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के तबादलों का खेल निराला है। प्रक्रिया आनलाइन है लेकिन, स्थानांतरण आफलाइन भी हो रहे हैं। कई राजकीय शिक्षकों ने आनलाइन आवेदन करके तबादले की शर्तें पूरी की, संबंधित जिलों के लिए उनका आदेश भी हो गया लेकिन, रिलीव नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनकी तैनाती आकांक्षी जिले में है। इन्हीं जिलों से जिन शिक्षकों का आफलाइन आदेश हुआ है उन्हें कार्यमुक्त किया जा रहा है।


राजकीय माध्यमिक कालेजों के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों का आनलाइन आवेदन लेकर तबादले किए गए हैं। शासन ने पारदर्शिता के लिए तकनीक का सहारा लिया लेकिन, आवेदन के समय से ही खामियां सामने आई। कई जिला विद्यालय निरीक्षकों ने शिकायत की कि उनके जिले के स्कूलों में शिक्षक के रिक्त पद वेबसाइट पर प्रदर्शित नहीं है। चुनिंदा जिलों के कालेजों में रिक्त पद विभाग कई साल से रोक रहा है, बाद में इन्हीं कालेजों के लिए आफलाइन आदेश जारी करके तैनाती दी जा रही है। फतेहपुर, बलरामपुर, श्रवस्ती, बहराइच, सोनभद्र, चंदौली, सिद्धार्थनगर व चित्रकूट से करीब 100 से अधिक शिक्षकों का अन्य जिलों के लिए स्थानांतरण आदेश हुआ, लेकिन रिलीव नहीं किया गया।

कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने की मांग, बेसिक शिक्षा मंत्री को निजी स्कूलों ने दिया प्रस्ताव

कक्षा एक से आठ तक के बच्चों के लिए स्कूल खोलने की मांग, बेसिक शिक्षा मंत्री को निजी स्कूलों ने दिया प्रस्ताव


लखनऊ। निजी स्कूलों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने सोमवार को बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विबेदी को 16 अगस्त से कक्षा एक से आठ तक के छात्रों की ऑफलाइन पढ़ाई शुरू करने का प्रस्ताव दिया।


इससे पहले संगठन डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को दो बार कक्षा 09 से 12 तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने का भी प्रस्ताव दे चुका है। उन्होंने सीएम योगी आदित्यनाथ से मिलने का भी समय मांगा। 

संगठन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने अपने सुझाव में स्कूल खोलने को कहा है। इसको शुरुआत प्राइमरी के बच्चों से करने को कहा है। उन्होंने बताया कि डब्लूएचओ और आईसीएमआर भी यही सुझाब दे चुका है, इसलिए कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के लिए स्कूल खोलने का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने बताया स्कूल खोलने के लिए एसओपी बही होंगी जो पहले के प्रस्ताव में दी गई थीं। चार घंटे कौ एक शिफ्ट की पढ़ाई होगी। न लंच होगा न असेंबली। उन्होंने बताया कि पिछले साल से सबक लेते हुए स्कूलों को जल्द खोल देना चाहिए।

29 जुलाई को शिक्षा नीति पर पीएम मोदी करेंगे राष्ट्र को संबोधित

29 जुलाई को शिक्षा नीति पर पीएम मोदी करेंगे राष्ट्र को संबोधित


नई दिल्ली: देश को आत्मनिर्भर बनाने की सोच के साथ पेश की गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को 29 जुलाई को एक वर्ष पूरा हो रहा है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह नीति के अमल को लेकर अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी देंगे। साथ ही शिक्षा नीति के आगे के रोडमैप को भी दिशा देंगे। शिक्षा नीति को कैबिनेट ने 29 जुलाई, 2020 को मंजूरी दी थी।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर पीएम के संबोधन की जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने सोमवार को पत्रकारों के साथ अनौपचारिक चर्चा में दी। उन्होंने बताया कि नीति से जुड़े प्रत्येक ¨बदु के अमल की जो समय सीमा तय की गई थी, फिलहाल उसी के अनुरूप काम चल रहा है। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति इस सरकार के लिए काफी अहम है, क्योंकि यह एक लंबी प्रक्रिया और आम लोगों से जुड़ाव के बाद सामने आई है। इसे तैयार करने में लाखों लोगों ने अपने सुझाव दिए थे। नीति को लेकर इससे पहले भी पीएम मोदी अलग-अलग मंचों से इसकी सोच को सामने ला चुके हैं। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक में कई बड़े बदलाव की सिफारिशें की गई हैं। इनमें स्कूलों की नई संरचना बनाई गई है, जिसमें अब प्री-प्राइमरी को भी शामिल गया है। वहीं उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नया कमीशन बनाने की सिफारिश की गई है।

छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का नवंबर में आकलन करेगा NCERT

छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का नवंबर में आकलन करेगा NCERT


प्रधान ने कहा एनसीईआरटी कक्षा-तीन पांच आठ और 10 के छात्रों की सीखने की उपलब्धि का आकलन करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करता है। कक्षा-तीन पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण 13 नवंबर 2017 को हुआ था।


नई दिल्ली :  सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों के सीखने की प्रक्रिया का आकलन करने के लिए एनसीईआरटी इस साल नवंबर में राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण करेगा। कक्षा तीन, पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण इससे पहले 2017 में और कक्षा 10 के लिए 2018 में किया गया था। यह जानकारी लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेद्र प्रधान ने दी।

आनलाइन क्लास में बढ़ोतरी को देखते हुए परखी जाएगी शिक्षा की गुणवत्ता

उनसे पूछा गया था कि हाल के दिनों में आनलाइन क्लास में बढ़ोतरी को देखते हुए क्या स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता का आकलन करने के लिए कोई अध्ययन या सर्वेक्षण किया गया है? इसके जवाब में प्रधान ने कहा, एनसीईआरटी कक्षा-तीन, पांच, आठ और 10 के छात्रों की सीखने की उपलब्धि का आकलन करने के लिए समय-समय पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण करता है। कक्षा-तीन, पांच और आठ के लिए यह सर्वेक्षण 13 नवंबर, 2017 को हुआ था। सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 701 जिलों में हुए इस सर्वेक्षण में 1.10 लाख स्कूलों के 22 लाख छात्रों ने भाग लिया था।


धर्मेद्र प्रधान ने लोकसभा को बताया कि केंद्र सरकार उच्च शिक्षा आयोग का गठन करेगी। शिक्षा मंत्रालय इसके लिए विधेयक तैयार करने की प्रक्रिया में है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद जैसे स्वायत्त निकायों के स्थान पर उच्च शिक्षा आयोग की परिकल्पना की गई है।

आइआइटी मद्रास का नाम बदलने का प्रस्ताव नहीं

धर्मेंद्र प्रधान ने आइआइटी मद्रास का नाम बदलने के किसी प्रस्ताव से इन्कार किया है। लोकसभा में एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने इस सिलसिले में बयान दिया। उन्होंने कहा, आइआइटी मद्रास के नाम में संशोधन के किसी प्रस्ताव पर सरकार द्वारा विचार नहीं किया जा रहा है।

HECI : शिक्षा मंत्रालय तैयार कर रहा है भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए विधेयक – शिक्षा मंत्री

HECI : शिक्षा मंत्रालय तैयार कर रहा है भारतीय उच्च शिक्षा आयोग की स्थापना के लिए विधेयक – शिक्षा मंत्री


HECI केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) की स्थापना के लिए विधेयक को तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज 26 जुलाई 2021 को लोक सभा में दी गयी।

एनईपी 2020 में उच्च शिक्षा के लिए एचईसीआई को एकमात्र अब्रेला बॉडी बनाने का प्रावधान।


नई दिल्ली : HECI: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) की स्थापना के लिए विधेयक को तैयार किया जा रहा है। यह जानकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज, 26 जुलाई 2021 को लोक सभा में दी गयी। शिक्षा मंत्री ने संसद के निचले सदन को सूचित करते हुए कहा, “शिक्षा मंत्रालय द्वारा केंद्रीय कैबिनेट की अनुमति के बाद राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 की घोषणा पिछले वर्ष 29 जुलाई 2020 को की थी। एनईपी में भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है जो कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में चार अलग-अलग महत्वपूर्ण कार्यों - विनियमन, मान्यता, वित्त पोषण, और अकादमिक मानक सेटिंग के लिए शीर्ष निकाय के तौर पर कार्य करेगा।”


आनंद प्रधान ने लोक सभी में लिखित उत्तर देते हुए बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा के अंतर्गत परिकल्पित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग के चारों कार्यों के अनुरूप ही शिक्षा मंत्रालय द्वारा इसकी स्थापना के लिए विधेयक का निर्माण किया जा रहा है।


बता दें कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों के अनुसार वर्तमान में उच्च शिक्षा क्षेत्र में कार्य कर रहे स्वायत्त शिक्षा निकायों, जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के स्थान पर अब भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (एचईसीआई) ही कार्य करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में चिकित्सा और कानूनी शिक्षा को छोड़कर, उच्च शिक्षा के लिए एचईसीआई को एकमात्र अब्रेला बॉडी के तौर पर स्थापित करने की सिफारिश की गयी है।

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी

31 जुलाई तक आना है 12वीं का रिजल्ट, यूपी बोर्ड ने साधी चुप्पी 

◆ 10वीं और 12वीं के 56 लाख बच्चों को रिजल्ट का है इंतजार
◆ सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई तक परिणाम घोषित करने को कहा
◆ इंटर के बच्चों का रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं


प्रयागराज : सीआईएससीई की 10वीं व 12वीं का परिणाम घोषित होने के साथ ही यूपी बोर्ड के 56 लाख से अधिक विद्यार्थियों की उत्सुकता बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी बोर्ड को 31जुलाई तक 12वीं का परिणाम जारी करने का आदेश दिया है।

कोर्ट से निर्धारित तिथि में मात्र पांच दिन बचे हैं, लेकिन यूपी बोर्ड अब तक परिणाम जारी करने की तिथि तक नहीं बता सका है। स्थिति यह है कि अब तक इंटर के छात्र छात्राओं के रोल नंबर वेबसाइट पर अपलोड नहीं किए जा सके हैं। जबकि हाईस्कूल के रोल नंबर 10 जुलाई को ही अपलोड हो गए थे। बोर्ड का कहना है कि 10वीं और 12वीं के रोल नंबर पहले ही स्कूलों को भेज दिए थे लेकिन इस साल बच्चों की सहूलियत के लिए वेबसाइट पर भी अपलोड कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार परिणाम को लेकर शासन स्तर पर फैसला नहीं हो पा रहा है। बोर्ड ने उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के निर्देश पर जुलाई के पहले सप्ताह में ही परिणाम तैयार कर लिया था। लेकिन शासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण परिणाम जारी करने की तिथि तय नहीं हो पा रही है। चर्चा है कि इस देरी के पीछे एक कारण कागजी औपचारिकता पूरी न होना भी है।

29,94,312
परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं।

26,10,316
छात्र-छात्राएं इंटरमीडिएट

कब क्या हुआ

◆ 29 मई : हाईस्कूल की परीक्षा परीक्षार्थी हाईस्कूल में हैं निरस्त करने का निर्णय
◆ 3 जून : इंटरमीडिएट की परीक्षा रद्द करने पर लगी मुहर
◆ 20 जून : शासन ने जारी किया परिणाम तैयार करने का फॉर्मूला

परिणाम में क्या फंसा है पेच

कोरोना महामारी के कारण यूपी बोर्ड के 100 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है कि बिना परीक्षा परिणाम घोषित होगा। बोर्ड के अधिनियम में बिना परीक्षा परिणाम जारी करने का कोई प्रावधान नहीं है। हर साल 10वीं-12वीं की परीक्षा के लिए केंद्र निर्धारण से लेकर हर छोटे-बड़े काम के लिए बकायदा शासनादेश जारी होते हैं। इस साल शासन ने बिना परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्णय तो ले लिया लेकिन उसके लिए कोई आदेश जारी नहीं किया। ऐसे में बोर्ड अफसरों को डर भी सता रहा है कि कहीं परिणाम जारी होने के बाद कोई विवाद हाईकोर्ट पहुंचता है और कोर्ट ये पूछता है कि किस आधार या शासनादेश पर परिणाम तैयार किया गया तो क्या जवाब देंगे।

CISCE : परीक्षा परिणाम में मिलीं गड़बड़ियां, बोर्ड कराएगा सत्यापन, स्कूलों को भेजा पत्र

सीआईएससीई : परीक्षा परिणाम में मिलीं गड़बड़ियां, बोर्ड कराएगा सत्यापन, स्कूलों को भेजा पत्र 

सीआईएससीई के कक्षा 10 व 12 के परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियां मिली हैं। अधिकांश स्कूलों ने इंग्लिश लिटरेचर और जियोग्राफी में विद्यार्थियों को बहुत कम अंक देने की शिकायत की है।


सीआईएससीई के कक्षा 10 व 12 के परीक्षा परिणाम में गड़बड़ियां मिली हैं। अधिकांश स्कूलों ने इंग्लिश लिटरेचर और जियोग्राफी में विद्यार्थियों को बहुत कम अंक देने की शिकायत की है। बोर्ड ने इस पर संज्ञान लेते हुए कहा कि अंकों का सत्यापन कराएगा। इस संबंध में बोर्ड के उप सचिव हेनरी सोलर ने सभी स्कूलों को पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाी की जाएगी। 

स्कूलों के मुताबिक विद्यार्थियों को इंग्लिश लिटरेचर व जियोग्राफी में काफी कम अंक मिले हैं। इन्हीं विद्यार्थियों को अन्य विषयों में 90 फीसदी से ज्यादा अंक मिले हैं। जबकि इन दोनों विषयों में हमेशा से अच्छे अंक मिलते रहे हैं। स्कूलों का कहना है कि उन्होंने जितने अंक भेजे थे और जितने औसत अंक की अपेक्षा थी, उससे काफी कम अंक बोर्ड ने दिए हैं।   

कम अंक को मिले ज्यादा अंक और ज्यादा को मिले कम
बोर्ड ने नई मूल्यांकन प्रक्रिया के तहत जो परीक्षा परिणाम जारी किया है, वह कई स्तरों पर चौंकाने वाला है। स्कूलों के अनुसार जिन विद्यार्थियों को 80 से 85 प्रतिशत अंक मिलने थे, उन्हें 90 से 95 प्रतिशत अंक मिले और जिन्हें 90 से ज्यादा मिलने थे, वे 80 प्रतिशत में ही सिमट कर रह गए।

सेंट जोसेफ इंटर कॉलेज के एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि वे पहले से कह रहे थे कि विद्यार्थियों को केवल बोर्ड परीक्षा के आधार पर ही अंक दिया जाए। यहां विद्यार्थियों की क्षमता के अनुसार नहीं सॉफ्टवेयर के अनुसार अंक मिले हैं। मेधावी छात्रों में इससे निराशा है। विद्यार्थियों को सिर्फ उत्तीर्ण होने का सर्टिफिकेट देना चाहिए था।

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव, शासन के निर्देश पर बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजा गया पत्र

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव, शासन के निर्देश पर बोर्ड की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को भेजा गया पत्र
 

प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों को पठन-पाठन के लिए भौतिक रूप से खोले जाने के बारे में एक बार फिर से अभिभावकों की राय मांगी गई है। शासन के 23 जुलाई के पत्र के बाद यूपी बोर्ड के अपर सचिव अशोक कुमार गुप्ता की ओर से प्रदेश के सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों को पत्र भेजा गया है।


पत्र में उत्तर प्रदेश के सभी शिक्षा बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों को पठन-पाठन के लिए भौतिक रूप से खोले जाने के संबंध में अभिभावकों की मौजूदा राय जानने को कहा गया है। बोर्ड के अपर सचिव की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के संबंध में छात्र-छात्राओं के अभिभावकों से उनकी सहमति के संबंध में सूचना बोर्ड की ओर से भेेजे गए प्रारूप पर बोर्ड की ई-मेल आईडी  upmsp@rediffmail.com पर 27 जुलाई दोपहर दो बजे तक  हर हाल में साफ्ट एवं हार्ड कॉपी के रूप में उपलब्ध करा दें।

यूपी बोर्ड ने माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने के बारे में मांगे सुझाव


Monday, July 26, 2021

रिपोर्ट में दावा : कोरोना काल में 55 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों के वेतन में हुई कटौती


रिपोर्ट में दावा : 55 फीसदी निजी स्कूल शिक्षकों के वेतन में हुई कटौती, 54 फीसदी के पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं

55 फीसदी से अधिक विद्यालयों ने इस शैक्षणिक वर्ष में नए प्रवेशों की संख्या में बड़ी कमी की बात कही है।


कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए लगाए बए पाबंदियों की वजह से देश भर के अधिकांश निजी स्कूलों के रेवन्यू में 20-50 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। जिसकी वजह से कुछ विद्यालयों ने शिक्षकों में कटौती करना शुरू कर दिया है। यह दावा भारत में गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा पर काम करने वाले एनजीओ सेंट्रल स्क्वायर फाउंडेशन (सीएसएफ) की रिपोर्ट में किया गया है।  आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। बता दें कि यह रिपोर्ट 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 1,100 से अधिक अभिभावकों, स्कूल प्रशासक और शिक्षक के बातचीत के आधार पर किए गए अध्ययन पर आधारित है।


55 फीसदी स्कूलों में नए प्रवेशों की संख्या में आई कमी

रिपोर्ट के मुताबिक 55 फीसदी से अधिक विद्यालयों ने इस शैक्षणिक वर्ष में नए प्रवेशों की संख्या में बड़ी कमी की बात कही है। वहीं 77 फीसदी स्कूलों ने कहा कि वे कोविड-19 के दौरान स्कूल के लिए ऋण लेने में रुचि नहीं रखते हैं, और केवल तीन फीसदी ने ही सफलतापूर्वक ऋण लिया है, जबकि पांच फीसदी अभी भी अपने लोन के प्रोसेस होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।


55 फीसदी शिक्षकों के वेतन में की गई कटौती
निजी स्कूलों के तकरीबन 55 फीसदी शिक्षकों के वेतन में लॉकडाउन के दौरान कटौती की गई है। वहीं कम फीस वाले विद्यालयों द्वारा करीब 65 फीसदी शिक्षकों की सैलरी रोक दी गई थी। 37 फीसदी शिक्षकों का वेतन ज्यादा फीस वाले विद्यालयों ने रोक दिया है। उच्च शुल्क वाले स्कूलों द्वारा रोक दिया गया। तकरीबन 54 फीसदी शिक्षकों के पास आय का कोई वैकल्पिक स्रोत नहीं है, 30 प्रतिशत ने अपने वेतन को निजी ट्यूशन और कोचिंग के साथ पूरक किया।


50 फीसदी ने ही किया फीस का भुगतान
रिपोर्ट में कहा गया है कि 70 फीसदी अभिभावकों ने स्कूल फीस समान होने की बात कही है। हालांकि केवल 50 फीसदी अभिभावकों ने ही फीस का भगुतान किया है। 20 फीसदी माता-पिता ने प्रौद्योगिकी और बुनियादी ढांचे पर खर्च में वृद्धि की सूचना दी और 15 फीसदी ने शिक्षा खर्च में वृद्धि की सूचना दी है। 78 फीसदी अभिभावकों ने बताया कि वे अपने बच्चे की शिक्षा का खर्च उसी स्कूल में जारी रखने में सक्षम होंगे।

कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास ने भर्ती में जोड़ी नई शर्त, निजी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग

कोरोना काल में ऑनलाइन क्लास ने भर्ती में जोड़ी नई शर्त,  निजी स्कूलों में ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग


■  बदलाव

● किसी भी विषय के हो शिक्षक कम्प्यूटर का ज्ञान जरूरी

● ऑनलाइन क्लास लेने में सहज शिक्षकों की मांग

कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन में सवा साल से पढ़ाई-लिखाई ऑनलाइन चल रही है। इस बदलाव ने शिक्षकों की अनिवार्य न्यूनतम योग्यता में भी परिवर्तन कर दिया है। अब स्कूल वाले टेक्नोलॉजी फ्रेंडली शिक्षकों को लेना पसंद कर रहे हैं ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लग रही कक्षा में परेशानी न हो।


सरकारी स्कूलों में होने वाली शिक्षकों की भर्ती के कायदे कानून बदलने में तो समय लगेगा लेकिन निजी स्कूलों ने बदलाव लागू कर दिया है शिक्षकों की भर्ती के लिए विज्ञापन में बकायदा ऑनलाइन क्लास लेने में सहज अभ्यर्थियों से आवेदन मांगे जा रहे हैं।


पिछले महीने रेड ईगल आर्मी प्री प्राइमरी स्कूल ओल्ड कैंट तेलियरगंज ने शिक्षिकाओं की भर्ती के लिए जो विज्ञापन निकाला उसमें कम्प्यूटर का आधारभूत ज्ञान (ट्रिपलसी) टेक्नोलॉजी फ्रेंडली व ऑनलाइन क्लास लेने में सहज होना अनिवार्य शर्त के रूप में रखा था। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। स्कूल संचालकों का यह मानना है कि ऑनलाइन शिक्षा भविष्य में और सुदृढ़ होगी।


निश्चित रूप से लॉकडाउन के कारण शिक्षकों को तकनीकी रूप से सक्षम होना अनिवार्य है। सबसे बड़ी चुनौती सामने कोई बच्चा न होने के बावजूद पढ़ाना है। हम शिक्षकों को नियुक्त करने के बाद तीन दिन की ट्रेनिंग देते हैं। शिक्षण के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय और भाषा पर पकड़ और क्लास में अनुशासन बनाए रखना है।
-फादर थॉमस कुमार, प्रिंसिपल सेंट जोसेफ

चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाये जाने की संभावना, चार साल से नहीं हुई है वृद्धि

चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाये जाने की संभावना, चार साल से नहीं हुई है वृद्धि


यूपी सरकार विधानसभा चुनाव से पहले शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ा सकती है। बेसिक शिक्षा विभाग ने सरकार को 1.46 लाख शिक्षा मित्रों को दिए जा रहे मानदेय, सरकार पर वित्तीय भारत समेत पूरा ब्यौरा दे दिया है। करीब चार साल से शिक्षा मित्रों का मानदेय नहीं बढ़ाया गया है। वर्तमान में उन्हें 10 हजार रुपये मानदेय मिलता है। सूत्रों के मुताबिक मानदेय में दो से चार हजार रुपये तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2017 के लोक कल्याण संकल्प पत्र में शिक्षा मित्रों की समस्या को तीन माह में न्यायिक तरीकों से सुलझाने का आश्वासन दिया था। जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 1.36 लाख शिक्षा मित्रों का सहायक अध्यापक के पद पर समायोजन रद्द कर उन्हें पुन: शिक्षा मित्र बनाना पड़ा। 


हालांकि शिक्षा मित्रों के आंदोलन के बाद सरकार ने उनका मानदेय 3,500 से बढ़ाकर 10,000 रुपये महीने किया था। सरकार ने उनकी मांगों व समस्याओं के समाधान के लिए उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी। कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है।


जानकारों के मुताबिक चुनाव को देखते हुए शिक्षा मित्रों की नाराजगी दूर करने के लिए सरकार व संगठन की बैठक में उनका मानदेय बढ़ाने पर फैसला हुआ है। इसके लिए सरकार ने कई जानकारियां मांगी थीं, जिसे बेसिक शिक्षा विभाग ने सौंप दिया है। संगठन की अगस्त में होने वाली उच्चस्तरीय बैठक में इस पर फैसला हो सकता है।

‘शासन से शिक्षा मित्रों की संख्या व उन्हें दिए जा रहे मानदेय का ब्योरा मांगा गया था। पूरा ब्योरा भेज दिया गया है।’
 - विजय किरन आनंद, महानिदेशक स्कूल शिक्षा

सिर्फ 10.1 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का पढ़ाई के लिए करते हैं उपयोग

सिर्फ 10.1 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का पढ़ाई के लिए करते हैं उपयोग

एनसीपीसीआर के अध्ययन का दावा, 59.2 फीसद बच्चे स्मार्टफोन का चैटिंग के लिए करते हैं इस्तेमाल


राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की तरफ से कराए गए एक अध्ययन में चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं। अध्ययन में कहा गया है कि 59.2 फीसद बच्चे अपने स्मार्टफोन पर मैसेजिंग एप का उपयोग करते हैं, जबकि सिर्फ 10.1 प्रतिशत ही स्मार्टफोन या इंटरनेट सुविधा वाले उपकरणों का इस्तेमाल आनलाइन पढ़ाई या सीखने के लिए करते हैं।


मोबाइल फोन व इंटरनेट सेवा वाली दूसरी डिवाइस के इस्तेमाल का बच्चों पर पड़ने वाले प्रभाव के संबंध में किए गए अध्ययन में पता चला कि सभी आयुवर्ग (8-18 साल) के 30.2 फीसद बच्चों व किशोरों के पास अपना स्मार्टफोन है। 13 साल से ज्यादा उम्र के किशोरों में स्मार्टफोन के इस्तेमाल की प्रवृत्ति काफी तेज हुई है। अध्ययन के अनुसार, ‘इससे पता चलता है कि 12-13 साल से ज्यादा उम्र के किशोरों के अभिभावक उन्हें लैपटाप या डेस्कटाप दिलाने के बजाय स्मार्टफोन उपलब्ध कराना ज्यादा बेहतर समझते हैं।’

देशभर में हुए इस अध्ययन में पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण व पूवरेत्तर क्षेत्र की 15 लोकेशन को चुना गया। हर क्षेत्र में करीब एक हजार लोगों की प्रतिक्रियाएं ली गईं, जिनमें स्कूली छात्र, अभिभावक व शिक्षक शामिल रहे। अध्ययन में पता चला कि 72.70 फीसद शिक्षकों को स्मार्टफोन के इस्तेमाल का अनुभव नहीं था। 54.1 फीसद ने कहा कि कक्षा में स्मार्टफोन के इस्तेमाल से परेशानी पैदा होती है।

तबादला : विजय किरण आनंद बने गोरखपुर के डीएम, अनामिका को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का मिला प्रभार

तबादला : विजय किरण आनंद बने गोरखपुर के डीएम, अनामिका को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का मिला प्रभार


शासन ने गोरखपुर के डीएम के. विजयेंद्र पांडियन के स्थान पर महानिदेशक  स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को गोरखपुर के डीएम के पद पर तैनाती दी है। 

विजय किरण आनंद को बेसिक शिक्षा में प्राइमरी शिक्षकों की भर्ती, स्कूलों में बदलाव के लिए ‘कायाकल्य योजना’ व शिक्षा विभाग के कार्मिकों को बाबूराज से सहूलियत देने के लिए मानव संपदा पोर्टल के सफल क्रियान्वयन करने से प्रसिद्धि मिली है। उन्हें मुख्यमंत्री के गृह जिले की कमान सौंपी गई है।

सचिव बेसिक शिक्षा अनामिका सिंह को महानिदेशक स्कूल शिक्षा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। 


शिक्षामित्रों ने मनाया काला दिवस, 25 जुलाई को रद्द हुआ था समायोजन, सरकार से वादा पूरा करने की रखी मांग

शिक्षामित्रों ने मनाया काला दिवस, 25 जुलाई को रद्द हुआ था समायोजन, सरकार से वादा पूरा करने की रखी मांग


लखनऊ। सहायक शिक्षक पद पर समायोजन निरस्त होने के चार वर्ष पूरे होने पर शिक्षामित्रों ने रविवार को काला दिवस मनाया।  शिक्षामित्र संघों के आह्वान पर शिक्षामित्रों ने अपने घरों में हाथों पर काली है पट्टी बांधकर विरोध जताया। संघ के प्रदेश मंत्री कौशल ने बताया कि संगठन ने पूरे प्रदेश में काला दिवस मनाया है।


उन्होंने सरकार से शिक्षामित्रों की समस्या दूर करने के वादे को पूरा करने की मांग की है। उधर, दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने अबसाद के कारण जान गंवाने वाले शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की। संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने बताया कि शिक्षामित्रों ने घरों पर मोमबत्ती जलाकर दिवंगत शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित कर सरकार से मांगों को पूरा करने की मांग की।

महिला शिक्षकों ने मांगी तीन दिन की पीरियड लीव Demand for Period Leave

महिला शिक्षकों ने मांगी तीन दिन की पीरियड लीव


लखनऊ। उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने प्रदेश सरकार से महिला शिक्षकों को हर महीने तीन दिन पीरियड अवकाश देने की मांग की है। संघ की अध्यक्ष सुलोचना मौर्य ने बताया कि प्रदेश भर को समस्त सेवारत महिला शिक्षकों एवं अन्य महिला कर्मियों को पीरियड की समस्या पर माह में 3 दिन का पीरियड लीव मिलनी चाहिए।


 उन्होंने बताया कि संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए इसके समर्थन में ट्विटर पर अभियान चलाया। उन्होंने बताया कि ट्विटर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस मांग का समर्थन किया। सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक 3 घंटे में पौने दो लाख से अधिक लोगो ने ट्वीट कर अपनी मांग को
माननीय मुख्यमंत्री तक पहुंचाया। 

Cbse result 2021 : सीबीएसई 12वीं रिजल्ट पोर्टल पर अपलोड करने की डेडलाइन खत्म, इस सप्ताह नतीजे जारी होने की उम्मीद

Cbse result 2021 : सीबीएसई 12वीं रिजल्ट पोर्टल पर अपलोड करने की डेडलाइन खत्म, इस सप्ताह नतीजे जारी होने की उम्मीद


Cbse result 2021 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12चीं रिजल्ट को सीबीएसई स्कूलों द्वारा पोर्टल पर अपलोड करने की डेडलाइन खत्म हो चुकी है। अब इस नतीजे जारी किए जाने की उम्मीद है। रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जल्द ही सीबीएसई रिजल्ट जारी करने की डेट का ऐलान करेंगे। रिजल्ट की घोषणा होने के बाद सीबीएसई के छात्र अपना रिजल्ट cbse.nic.in पर चेक कर सेंगे।


इस साल सीबीएसई 12वीं परीक्षा के लिए करीब 14 लाख छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई को कहा था कि 12वीं के छात्रों के नतीजे 31 जुलाई तक जारी हो जाने चाहिए। आंतरिक मूल्यांकन से मिले मार्क्स से जो छात्र खुश नहीं होंगे उन्हें 15 अगस्त से 15 सितंबर के बीच परीक्षा में बैठने का मौका दिया जाएगा।

सीबीएसई 12वीं का रिजल्ट स्कूलों द्वारा पोर्टल पर अपलोड करने की डेट 22 जुलाई तय थी जिसे सीबीएसई ने 25 जुलाई तक बढा दिया था। बोर्ड के अनुसार शिक्षक लगातार काम से तनाव में थे। ऐसे में जल्दबाजी में रिजल्ट में गलतियां हो रही थीं, बोर्ड को रिजल्ट एक बार चेक करने की रिक्वेस्ट भेजी जा रही थीं। इसी को देखते हुए बोर्ड ने रिजल्ट अपलोड करने की डेडलाइन 25 जुलाई तक बढ़़ा दी थी।

इसी बीच दिल्ली विश्वविद्यालय ने एडमिशन 2021 कार्यक्रम का ऐलान करते हुए कहा है कि मेरिट के आधार पर 2 अगस्त से एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

Sunday, July 25, 2021

बीएड प्रवेश परीक्षा में पूर्व में जारी प्रवेश पत्र भी मान्य, 28 जुलाई को जारी होंगे संशोधित प्रवेशपत्र

बीएड प्रवेश परीक्षा में पूर्व में जारी प्रवेश पत्र भी मान्य, 28 जुलाई को जारी होंगे संशोधित प्रवेशपत्र


उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 30 जुलाई के बजाय अब 06 अगस्त को होगी। परीक्षा का आयोजन कर रहे लखनऊ विश्वविद्यालय ने कहा कि इसमें पहले जारी प्रवेश पत्र भी मान्य होंगे। हालांकि संशोधित प्रवेश परीक्षा तिथि के साथ प्रवेश पत्र अपलोड किए जा रहे हैं, जिन्हें अभ्यर्थी 28 जुलाई से 04 अगस्त तक डाउनलोड कर सकते हैं। 


प्रवेश परीक्षा की राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेयी ने बताया कि जिन अभ्यर्थियों ने प्रवेश पत्र डाउनलोड कर लिया है, उन्हें दोबारा डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है। परीक्षा से संबंधित अन्य सभी कार्यक्रम यथावत रहेंगे। परीक्षा केंद्रों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि वे 06 अगस्त को कोई परीक्षा न आयोजित करें। 

CISCE बोर्ड : बगैर परीक्षा के घोषित नतीजों में भी कई फेल

CISCE बोर्ड : बगैर परीक्षा के घोषित नतीजों में भी कई फेल


नई दिल्ली: काउंसिल फार द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) ने आइसीएसई (10वीं) और आइएससी (12वीं) कक्षा के परीक्षा परिणामों की घोषणा कर दी है। शनिवार को बोर्ड की वेबसाइट पर डाले गए नतीजों के मुताबिक 10वीं में 99.98 प्रतिशत और 12वीं 99.76 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए हैं। कोरोना के कारण इस साल भी मेरिट सूची जारी नहीं हुई।


कोरोना के कारण इस साल आइसीएसई और आइएससी परीक्षाएं आयोजित नहीं हुई थीं, इसलिए इवैल्यूएशन पालिसी के आधार पर परिणाम तैयार किया गया है। इसमें 2020 और 2021 में स्कूल में आयोजित टेस्ट और स्कूल द्वारा प्रयोगात्मक परीक्षा में दिए गए नंबरों के आधार पर मूल्यांकन किया गया। जिन्होंने इन मापदंडों का पालन नहीं किया, उन्हें पास नहीं किया गया है। सीबीएसई की तरह ही सीआइएससीई भी मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट डिजीलाकर के जरिये छात्रों को मुहैया कराएगा। इस बार परीक्षा नहीं होने के कारण विद्यार्थी उत्तर पुस्तिका का पुनरीक्षण नहीं करा सकते, लेकिन मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर उनकी आपत्तियों पर विचार होगा।


● 10वीं में 99.98 और 12वीं 99.76 प्रतिशत छात्र हुए पास

● कोरोना के कारण इस बार नहीं जारी हुई मेरिट सूची


■ 10वीं का परिणाम

◆ परीक्षार्थी>>2,19,499

◆ सफल>>2,19,454 (99.98 प्रतिशत)

◆ गत वर्ष>>99.34 प्रतिशत


■  12वीं का परिणाम

◆ परीक्षार्थी>>94,011

◆ सफल>>93,781 (99.76 प्रतिशत)

◆ गत वर्ष>>96.84 प्रतिशत

हाथरस : प्रेरणा पोर्टल पर विद्यालय की लोकेशन से हटकर उपस्थिति दिए जाने पर कस्तूरबा विद्यालयों की वार्डन को नोटिस जारी, देखें

हाथरस : प्रेरणा पोर्टल पर विद्यालय की लोकेशन से हटकर उपस्थिति दिए जाने पर कस्तूरबा विद्यालयों की वार्डन को नोटिस जारी, देखें


 

महराजगंज : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी

महराजगंज : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी।




शिक्षक पांच वर्ष से पहले भी मांग सकते अंतर जिला तबादला: हाईकोर्ट

शिक्षक पांच वर्ष से पहले भी मांग सकते अंतर जिला तबादला: हाईकोर्ट

विशेष परिस्थिति में पांच वर्ष से कम पर भी शिक्षकों को अंतर्जनपदीय तबादले का हक


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि विशेष परिस्थितियों में एक जिले में पांच वर्ष से कम समय से नियुक्त सहायक अध्यापक भी अंतर्जनपदीय तबादले के हकदार हैं। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद को याची के मामले में इस दृष्टिकोण से विचार करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने प्रयागराज में नियुक्त सहायक अध्यापक धर्मेंद्र सिंह राजपूत की याचिका पर अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा को सुनकर दिया है। याची की पत्नी फिरोजाबाद में सहायक अध्यापिका है। इस पर याची ने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण फिरोजाबाद के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था लेकिन उसे इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उसने प्रयागराज में पांच वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं की है। 

अधिवक्ता नवीन शर्मा ने हाईकोर्ट के पूर्व के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली के तहत विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष की सेवा अनिवार्यता में छूट दिए जाने का प्रावधान है। पति-पत्नी एक ही जिले में कार्य करें, यह विशेष परिस्थिति में आता है इसलिए याची का स्थानांतरण फिरोजाबाद किया जाना चाहिए।

 कोर्ट ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष की सेवा अनिवार्यतया में छूट देने का प्रावधान है। याची के मामले में आवेदन सिर्फ इस आधार पर निरस्त किया गया कि उसने प्रयागराज में पांच वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं की है। ऐसे में बेसिक शिक्षा परिषद याची के प्रत्यावेदन पर इस दृष्टिकोण से नए सिरे से विचार कर निर्णय ले।


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि विशेष परिस्थितियों में एक जिले में पांच वर्ष की अवधि पूरी करने से पहले भी सहायक अध्यापक अंतर जिला तबादले की मांग कर सकते हैं। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को याची के तबादले पर विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने प्रयागराज में सहायक धर्मेद्र सिंह राजपूत की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसकी पत्नी फीरोजाबाद में सहायक अध्यापिका है।


याची ने अंतर जिला स्थानांतरण फीरोजाबाद करने के लिए आनलाइन आवेदन किया था। उसका आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उसने अभी प्रयागराज में पांच वर्ष की सेवा पूर्ण नहीं की है, जबकि बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली में विशेष परिस्थितियों में पांच वर्ष की सेवा अनिवार्यता में छूट दिए जाने का प्रविधान है। पति-पत्नी एक साथ रहे, एक ही जिले में कार्य करें, यह विशेष परिस्थिति में आता है। लिहाजा याची का स्थानांतरण फिरोजाबाद किया जाना चाहिए। कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया है कि याची के प्रत्यावेदन पर नए सिरे से विचार कर निर्णय लिया जाए।

Saturday, July 24, 2021

CISCE बोर्ड के शनिवार को आएंगे 10वीं और 12वीं के परिणाम

CISCE बोर्ड के शनिवार को आएंगे 10वीं और 12वीं के परिणाम


काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) के 10वीं (आईसीएसई) और 12वीं (आईएससी) के नतीजे शनिवार दोपहर तीन बजे घोषित होंगे। इन्हें सीआईएससीई की वेबसाइट www.cisce.org, www.results.cisce.org पर उपलब्ध कराया जाएगा। नतीजों को एसएमएस से भी प्राप्त किया जा सकता है। इस बार कोरोना महामारी के कारण 10वीं व 12वीं की परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया था। परीक्षा न होने के कारण नतीजे विद्यार्थियों के आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर जारी किए जा रहे हैं। 



सीआईएससीई से संबद्ध स्कूल नतीजों को बोर्ड के कैरियर पोर्टल पर जाकर देख सकेंगे। इसके लिए उन्हें पोर्टल पर जाकर लॉग-इन करना होगा। एसएमएस से रिजल्ट प्राप्त करने के लिए 10वीं के विद्यार्थी को आईसीएसई लिखकर अपना सात अंकों का यूनीक आईडी नंबर टाइप कर 09248082883 पर भेजना होगा। इसी तरह 12वीं के विद्यार्थी रिजल्ट प्राप्त करने के लिए आईएससी और अपना सात अंकों का यूनीक आईडी टाइप कर 09248082883 पर भेज सकेंगे।


रीचेकिंग की सुविधा नहीं, अंकों पर दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
परीक्षा रद्द होने के कारण इस बार विद्यार्थियों को उत्तर पुस्तिकाओं की री चेकिंग की सुविधा नहीं मिलेगी। यदि किसी विद्यार्थी को अंकों की गणना को लेकर आपत्ति होगी तो उन्हें अपने स्कूल को इसका कारण बताते हुए लिखित आवेदन करना होगा। इसके लिए बोर्ड ने समाधान तंत्र विकसित किया है। विद्यार्थी के आवेदन पर स्कूल विचार करेंगे। विद्यार्थी के कारण से संतुष्ट होने के बाद ही वे उसे सीआईएससीई के पास भेजेंगे। इसके लिए बोर्ड ने स्कूलों को एक अगस्त तक का समय दिया है। स्कूलों को स्पष्ट कर दिया गया है कि आवेदन की समीक्षा स्कूल प्रमुख के भेजने पर ही की जाएगी। बोर्ड अपना निर्णय स्कूल प्रमुख को ही बताएगा। समीक्षा के बाद रिजल्ट में कुछ बदलाव होता है तो बोर्ड इसकी सूचना स्कूल को देगा। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि अंकों की गणना में हुई त्रुटियों का तंत्र के तहत ही सुधार किया जाएगा।

68500 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत नियुक्ति की मांग को लेकर निदेशालय पर अनशन शुरू

68500 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत नियुक्ति की मांग को लेकर निदेशालय पर अनशन शुरू



परिषदीय विद्यालयों के लिए 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में परीक्षा पास करने के बाद भी चयनित शिक्षकों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है। नियुक्ति की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर अनशन शुरू कर दिया है। 


इन अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए 18 सितंबर 2020 को हाईकोर्ट ने खाली सीटों पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के 10 महीने बीत जाने के बाद भी इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है।



कोर्ट की ओर से नरेंद्र कुमार चतुर्वेदी एवं अन्य की याचिकाओं के निस्तारण के दौरान खाली सीटों पर चार सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली के चलते नरेंद्र कुमार चतुर्वेदी एवं अन्य तथा संबंधित सभी याचिकाओं के अधीन उत्तीर्ण अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक परिषद कार्यालय की ओर से इन अभ्यर्थियों को कोई आश्वासन नहीं मिला है।


 इन अभ्यर्थियों ने इससे पूर्व में 14 अक्तूबर 2020 को बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन उप सचिव को ज्ञापन देकर नियुक्ति की मांग की थी। इसके बाद से यह अभ्यर्थी लगातार सरकार से नियुक्ति की गुहार लगा रहे हैं। धरना एवं अनशन करने वालों में शोभित सिंह, आरती सिंह, अंजना त्रिपाठी, समरजीत राव, दीपक मौर्य, अनिल वर्मा, गोपाल यादव, अभिलाष सैनी, शिव मोहन मौजूद रहे।

सभी मंडल मुख्यालयों में सैनिक स्कूल खुलेंगे : सीएम योगी

सभी मंडल मुख्यालयों में सैनिक स्कूल खुलेंगे : सीएम योगी


गुरु पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ऐलान कि प्रदेश के सभी 18 मण्डल मुख्यालयों पर जल्द सैनिक स्कूल खुलेंगे। उन्होंने कहा कि केंद्र ने आम बजट में 100 सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव रखा है। उसी के मद्देनजर मंडल मुख्यालयों पर सैनिक स्कूल खोलने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।


वह शुक्रवार को गोरखपुर के खाद कारखाना परिसर में सूबे के पांचवें सैनिक स्कूल का शिलान्यास करने के बाद जनसभा संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गोरखपुर में बनने जा रहा सैनिक स्कूल पूर्वी उत्तर प्रदेश के विद्यार्थियों को सैन्य प्रशिक्षण के साथ योग्यतम शिक्षा देने का भी प्रयास है। इसमें अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहला सैनिक स्कूल 1960 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ संपूर्णानंद ने स्थापित किया था। कारगिल विजय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले परमवीर चक्र विजेता शहीद कैप्टन मनोज पांडेय ने भी इसी सैनिक स्कूल से शिक्षण प्रशिक्षण पाया था। 2017 में भाजपा की सरकार यूपी में आई तो लखनऊ सैनिक स्कूल का नामकरण शहीद कैप्टन मनोज पांडेय की शहादत का सम्मान करते हुए उनके नाम पर किया गया। उनके साथ उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा एवं अन्य जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।

सभी 75 जिलों में होंगे मेडिकल कॉलेज
सीएम योगी ने कहा कि कभी पूर्वी उत्तर प्रदेश में एकमात्र मेडिकल कॉलेज बीआरडी मेडिकल कॉलेज ही था। सरकार ने देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर में भी मेडिकल कॉलेज की सौगात दी है। जो जिले रह गए हैं, वहां हम पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने जा रहे हैं। प्रदेश सरकार के पांच साल पूरा होते होते प्रदेश के सभी 75 जिलों में मेडिकल कॉलेज होंगे। सीएम ने कहा कि गोरखपुर एम्स के शुभारंभ अक्तूबर में पीएम मोदी के हाथों कराया जाएगा।

साढ़े चार साल में 4.50 लाख युवाओं को मिली नौकरी
योगी ने कहा कि उनके साढ़े चार सालों में 4.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। किसी से एक भी पैसा नहीं लिया गया। आज नौकरी निकलती है तो योग्यता के आधार पर मिलती है, न कि सिफारिश और रिश्वत। अकेले 1.20 लाख से अधिक युवाओं को बेसिक शिक्षा विभाग में ही नियुक्ति मिली है। उच्चशिक्षा एवं मेडिकल शिक्षा को जोड़े तो यह आंकड़ा 1.50 लाख रुपये के करीब बैठेगा। एक लाख से अधिक युवा पुलिस में भर्ती किए गए हैं।


पिछली सरकारों में भर्ती निकलने के साथ शुरू हो जाता था भ्रष्टाचार
सीएम ने कहा कि पिछली सरकारें वंशवाद एवं जातिवाद ने नाम पर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न भिन्न करती थीं। नौकरी निकलती थी तो भ्रष्टाचार उनके साथ साथ चलने लगता था। अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए उद्योग धंधों को बंद करते थे। चीनी मिलों को बेचते थे। विकास के नाम पर आने वाले पैसों का बंदरबाट करते थे। विकास दिखाई नहीं देता था। पैसा आता था और गायब हो जाता था।

बिजनौर : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

बिजनौर : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर भर्ती हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें


अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान एवं अध्यापकों के ऑन लाइन स्थानान्तरण के सम्बन्ध में सहायक निर्देश।

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान एवं अध्यापकों के ऑन लाइन स्थानान्तरण के सम्बन्ध में सहायक निर्देश।


Friday, July 23, 2021

6696 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र समारोहपूर्वक वितरित, सीएम योगी ने नवनियुक्तों को ट्रांसफर पोस्टिंग में न उलझने की सीख

6696 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र समारोहपूर्वक वितरित, सीएम योगी ने नवनियुक्तों को ट्रांसफर पोस्टिंग में न उलझने की सीख

मुख्यमंत्री योगी आद‍ित्‍यनाथ बोले, श‍िक्षा में सुधार से विपक्षी दल भयभीत...युवाओं को कर रहे गुमराह



मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि उनकी सरकार के कार्यकाल में जिस पारदर्शिता से सवा चार लाख भर्तियां हुईं और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के कायाकल्प के साथ उनमें शैक्षिक सुधार हुआ, उससे विपक्षी दल भयभीत हैं। 

भर्तियों में शुचिता से बुरा उन लोगों को भी लग रहा है जिनकी अवैध कमाई का जरिया बंद हो गया है। इसलिए विपक्षी दल युवाओं को गुमराह करने में लगे हैं।


योगी परिषदीय विद्यालयों में 69000 शिक्षकों की भर्ती के तीसरे चरण में बचे हुए 6696 पदों पर चयनित अभ्यर्थियों के नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को शुक्रवार को संबोधित कर रहे थे। 


लोकभवन में आयोजित इस कार्यक्रम में 250 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। इनमें से 10 अभ्यर्थियों को मुख्यमंत्री ने खुद नियुक्ति पत्र प्रदान किए। शेष चयनित अभ्यर्थियों को जिलों में प्रभारी मंत्री और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में नियुक्ति पत्र बांटे गए।


चोर की दाढ़ी में तिनका : भर्तियों में पारदर्शिता और आरक्षण के नियमों के पालन पर विपक्ष के हो-हल्ले को योगी ने 'चोर की दाढ़ी में तिनका' करार दिया। कहा कि जब भर्तियां निकलती थीं तो प्रदेश के कुछ गैंग झोला लेकर कमाई के लिए निकलते थे। कुछ खानदान ऐसे थे जिनकी आजीविका भर्तियों पर निर्भर थी। ऐसे लोगों को मालूम है कि यदि आज वे झोला लेकर निकलेंगे तो हमारी एजेंसियां सतर्क हैं। हमने उनके लिए जेल भी खाली करवाई हैं।


दयनीय विभाग, बेफिक्र पिछली सरकारें : मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों की स्थिति अत्यंत दयनीय थी। पूरा विभाग ट्रांसफर-पोङ्क्षस्टग और ऐसी तमाम गतिविधियों में लिप्त था जो शिक्षा के लिए कलंक थीं, लेकिन पिछली सरकारें बेफिक्र थीं। आपरेशन कायाकल्प के जरिये प्रदेश के 1.2 लाख स्कूलों को संवारा गया।


सवा चार लाख युवाओं को दीं नौकरियां : योगी ने कहा कि चार साल, चार महीने के कार्यकाल में हमारी सरकार ने सवा चार लाख युवाओं को नौकरियां दी हैं जिनमे से एक पर भी कोई संदेह नहीं कर सका। डेढ़ लाख भर्तियां शिक्षा से जुड़े विभागों में हुई हैं जिनमें से बेसिक शिक्षा विभाग में 1.23 लाख शिक्षक भर्ती किये गए हैं। एक और परीक्षा होने जा रही है जिसमें आवेदकों की संख्या 30 लाख है। इसमें ऐसी व्यवस्था होगी कि कहीं तिनका भी नहीं हिलेगा।


ट्रांसफर पोस्टि‍ंग में न उलझिए : नियुक्ति पत्र पाने वाले शिक्षकों को उन्होंने नसीहत दी कि ट्रांसफर-पोस्टिंग की सिफारिश में उलझ कर अपने होनहार भविष्य को आगे बढ़ाने में खुद बाधक न बनिए। उनसे कहा कि जो ईमानदारी सरकार ने आपकी भर्ती में दिखाई है, उतनी ही ईमानदारी और प्रतिबद्धता आप समाज के प्रति दिखाइए। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान किया कि वे ग्राम पंचायत के हर घर से जुड़े और गांव के सभी बच्चों का ब्योरा जुटाकर उन्हें शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ें।


कोरोना काल में बच्चों को पढ़ाने की वैकल्पिक व्यवस्था खोजें : कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों को पढ़ाने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था खोजने का आग्रह किया। कहा कि हमें शिक्षा की प्रक्रिया को बाधित नहीं होने देना है वरना आने वाली पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी।


बाधा खड़ी करने वालों के मंसूबे नाकाम : बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि कुछ लोग शिक्षक भर्ती में बाधा खड़ी करना चाहते थे, लेकिन सरकार ने उनके मंसूबे नाकाम करते हुए कोरोना काल की विषम परिस्थितियों में पारदर्शिता के साथ 69000 शिक्षकों की भर्ती पूरी की।


वनटांगिया गांवों में भी बन रहे स्कूल : प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार ने बताया कि 2020-21 में गोरखपुर के सात वनटांगिया गांवों में से पांच में प्राथमिक और दो में उच्च प्राथमिक स्कूलों का निर्माण पूरा हो चुका है। महाराजगंज के 26 वनटांगिया गांवों में से 19 में प्राथमिक और सात में उच्च प्राथमिक स्कूलों का निर्माण जारी है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल के लिए शिक्षा मंत्रालय बनाएगा पोर्टल, उच्च शिक्षण संस्थानों को हर अपडेट की देनी होगी जानकारी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर अमल के लिए शिक्षा मंत्रालय बनाएगा पोर्टल, उच्च शिक्षण संस्थानों को हर अपडेट की देनी होगी जानकारी


शिक्षा मंत्रालय ने अब नीति के अमल पर नजर रखने के लिए एक पोर्टल भी तैयार करने की योजना बनाई है। जिसमें शिक्षा नीति के अमल से जुड़ी सभी एजेंसियों की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी अपडेट करनी होगी।


नई दिल्ली । कोरोना संकट काल में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की सुस्त पड़ी रफ्तार को फिर से गति देने की कोशिशें तेज हो गई हैं। नए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की ओर से नीति के अमल में अब तक हुई प्रगति की रिपोर्ट मांगें जाने के बाद इसे लेकर हलचल और बढ़ी हुई है। हालांकि शिक्षा मंत्रालय ने अब नीति के अमल पर नजर रखने के लिए एक पोर्टल भी तैयार करने की योजना बनाई है। जिसमें शिक्षा नीति के अमल से जुड़ी सभी एजेंसियों की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी अपडेट करनी होगी।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को गति देने के लिए बनी नई रणनीति

इस बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर नीति के सुझावों को संपूर्णता के साथ लागू करने को कहा है, ताकि देश की 21वीं सदी की जरूरतें पूरी हो सकें। यूजीसी ने मुख्य रूप से जिन क्षेत्रों पर ध्यान देने की जरूरत बताई है, उनमें कला, भाषा, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, प्रोफेशनल, तकनीक और व्यवसायिक क्षेत्र शामिल है। इसके साथ ही स्किल के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की संभावनाओं पर भी फोकस करने को कहा है।

तय समय पर शुरू नहीं हो पाए कई टास्‍क

यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थाओं से शिक्षा के क्षेत्र में अपनाई जाने वाली हर नई पहल को अपने संस्थान की वेबसाइट पर भी साझा करने को कहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर यह हलचल इसलिए भी बढ़ी हुई है, क्योंकि कोरोना के चलते शिक्षा नीति के अमल के लिए तय किए गए कई टास्क पर तय समय-सीमा से काम नहीं शुरू हो पाया है।

वैसे भी शिक्षा नीति के अमल को लेकर जो टास्क बनाया है, उनमें ज्यादा टास्कों पर वर्ष 2024 तक काम होना है। इनमें भी अगले दो सालों में करीब 70 फीसद टास्क पर काम होना है। ऐसे में इसके अमल में देरी हुई तो नीति के अमल में आगे भी देरी दिखेगी। सरकार नीति के अमल से अलम को लेकर इसलिए भी सतर्क है, क्योंकि इससे पहले जो नीति आई थी, वह समय पर लागू होने के चलते अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पायी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इससे बचने की जरूरत पर बल दिया गया है।

शैक्षिक सत्र 2021-22: सीबीएसई परीक्षा की नई स्कीम के लिए तैयार हो रहे स्कूल

शैक्षिक सत्र 2021-22: सीबीएसई परीक्षा की नई स्कीम के लिए तैयार हो रहे स्कूल


■  शैक्षिक सत्र 2021-22 के फर्स्ट टर्म-1 एग्जाम के लिए बन रहे मल्टीपल च्वाइस क्वेशचंस बैंक, बच्चों को मिलेगी परीक्षा देने की सीख
■  नंवबर में होने वाले इस एग्जाम के लिए स्कूल सितंबर में इस पैटर्न पर लेंगे परीक्षा
■  सीबीएसई की ओर से दसवीं-बारहवीं की परीक्षा साल में दो बार कराने की घोषणा के बाद स्कूल तैयारी में जुटे



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से दसवीं-बारहवीं की परीक्षा के लिए जारी की गई स्पेशल स्कीम के तहत नवंबर में फर्स्ट टर्म-1 एग्जाम होने हैं। स्कूल इस एग्जाम में बच्चों के बेहतर प्रदर्शन के लिए मल्टीपल च्वाइस क्वैंशचंस बैंक तैयार कर रहे हैं। इस तरह के बैंक तैयार करने के पीछे स्कूलों का उद्देश्य बच्चों को बोर्ड के पैटर्न से परिचित कराना है।

इस स्कीम के तहत बच्चों की परीक्षा ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा होनी है। हालांकि यह कोरोना महामारी की तीसरी लहर पर निर्भर करेगा। स्कूल इससे पहले अपने स्तर पर प्री-बोर्ड की तर्ज पर परीक्षा कराएंगे जिसमें मल्टीपल च्वाइस क्वैंशचन फॉर्मेट में ही उनकी परीक्षा ली जाएगी।

मौसम विहार स्थित डीएवी स्कूल की प्रिंसिपल वंदना कपूर ने बताया कि इस स्कीम के तहत फर्स्ट टर्म-1 एग्जाम नवंबर-दिसंबर 2021 के बीच लिया जाना है। इसके लिए अभी से तैयारी की जा रही है क्योंकि यह स्कीम बच्चों के साथ-साथ स्कूलों के लिए भी नई है।

परीक्षा में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाने हैं। लिहाजा हम मल्टीपल च्वाइस क्वैंशचन बैंक बना रहे हैं। जिससे कि उससे बच्चों को उनसे परिचित कराया जा सके। प्री बोर्ड तर्ज पर हम सिंतबर में एक परीक्षा लेंगे जिसमें मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न ही रखे जाएंगे। बच्चों को तैयारी के लिए सैंपल क्वैंशचन बैंक भी देंगे। जिससे कि वह बोर्ड की ओर से नवंबर में आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए तैयार हो सकें।

दिलशाद गार्डन स्थित अर्वाचीन इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल स्वप्ना नायर ने बताया कि बोर्ड की स्कीम को देखते हुए हमने 100 फीसदी पाठ्यक्रम को दो हिस्सों में बांट दिया है। 50-50 फीसदी हिस्से को भी टुकड़ों में बांट दिया है। यह तैयारी हमने जुलाई से शुरू की है। 50 फीसदी हिस्से में से बहुविकल्पीय प्रश्न आधारित सैंपल पेपर बना रहे हैं। इसके आधार पर नवंबर की परीक्षा शुरू होने से पहले परीक्षा ली जाएगी। जिससे कि बच्चे परीक्षा के पैटर्न से परिचित हो जाएं।

उल्लेखनीय है कि कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर सीबीएसई ने जुलाई के पहले सप्ताह में दसवीं-बारहवीं 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए स्पेशल स्कीम की घोषणा की थी। इस स्कीम के तहत 50-50 फीसदी पाठ्यक्रम के साथ दो बार परीक्षा होनी है।

पहला टर्म-1 एग्जाम नवंबर-दिसंबर 2021 में होना है। इसमें मल्टीपल च्वाइस केस आधारित एमसीक्यू और रीजनिंग बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। हर पेपर का टेस्ट 90 मिनट का होगा। प्रश्न प्रत्र सीबीएसई ही स्कूलों को भेजेगा। परीक्षा भी वहीं होगी जहां छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। छात्रों को ओएमआर शीट पर उत्तर देने हैं। जिन्हें स्कूल स्कैन करके सीबीएसई के पोर्टल पर अपलोड करेंगे।

UP Board 10th, 12th Result 2021 LIVE Updates : यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं का रिजल्ट, नंबर चेक करने के लिए ऐसे मिलेगा रोल नंबर

UP Board 10th, 12th Result 2021 LIVE Updates : यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं का रिजल्ट, नंबर चेक करने के लिए ऐसे मिलेगा रोल नंबर


रिजल्ट इंटरनल मार्किंग फॉर्मूले के आधार पर तैयार किया गया है। बोर्ड ने 10वीं के स्‍टूडेंट्स के लिए रोल नंबर सर्च करने का लिंक आधिकारिक वेबसाइट पर एक्टिव कर दिया है।


छात्र यूपी बोर्ड रिजल्ट से जुड़े लेटेस्ट अपडेट के लिए आधिकारिक वेबसाइट upresults.nic.in या upmsp.edu.in पर चेक कर सकते हैं।


 यूपी बोर्ड 10वीं 12वीं के रिजल्ट का इंतजार लाखों स्टूडेंट्स कर रहे हैं। यूपी बोर्ड का रिजल्ट कब जारी किया जाएगा इसकी तारीख की घोषणा जल्द ही की जा सकती है। कोरोना के कारण इस साल यूपी बोर्ड के एग्जाम नहीं हुए थे। रिजल्ट जारी होने के बाद स्टूडेंट्स अपना यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं 12वीं का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट  upresults.nic.in  या  upmsp.edu.in पर देख सकते हैं। शिक्षामंत्री दिनेश शर्मा जल्‍द रिजल्‍ट डेट की घोषणा कर सकते हैं। इस साल परीक्षाएं आयोजित नहीं की गई हैं इसलिए रिजल्‍ट के साथ मेरिट लिस्‍ट जारी नहीं की जाएगी और कोई टॉपर भी नहीं होंगे।


रिजल्‍ट इंटरनल मार्किंग फॉर्मूले के आधार पर तैयार किया गया है। बोर्ड ने 10वीं के स्‍टूडेंट्स के लिए रोल नंबर सर्च करने का लिंक आधिकारिक वेबसाइट पर एक्टिव कर दिया है। जो छात्र 10वीं क्‍लास में रजिस्‍टर्ड हैं, वे अपने रजिस्‍ट्रेशन नंबर की मदद से अपना रोल नंबर डाउनलोड कर लें। यूपी बोर्ड कक्षा 12 का रिजल्ट 50:40:10 के फार्मूले पर तैयार किया जाएगा। इसके अनुसार 50 प्रतिशत अंक कक्षा 10 से होंगे, कक्षा 11 की वार्षिक परीक्षा या अर्धवार्षिक परीक्षा से 40 प्रतिशत अंक होंगे। बाकी 10 फ़ीसदी अंक 12वीं की प्री बोर्ड परीक्षा से होंगे।

चयनित शिक्षकों ने नियुक्ति की मांग को लेकर निदेशालय पर अनशन शुरू किया, हाईकोर्ट के आदेश के 10 महीने बाद भी नहीं मिली नियुक्ति, चयनित अभ्यर्थी लगा रहे सरकार से गुहार

चयनित शिक्षकों ने नियुक्ति की मांग को लेकर निदेशालय पर अनशन शुरू किया

हाईकोर्ट के आदेश के 10 महीने बाद भी नहीं मिली नियुक्ति, चयनित अभ्यर्थी लगा रहे सरकार से गुहार


परिषदीय विद्यालयों के लिए 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में परीक्षा पास करने के बाद भी चयनित शिक्षकों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है। नियुक्ति की मांग को लेकर चयनित शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर अनशन शुरू कर दिया है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि नियुक्ति होने तक उनका अनशन जारी रहेगा। परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए 18 सितंबर 2020 को हाईकोर्ट ने खाली सीटों पर नियुक्ति देने का निर्देश दिया था। कोर्ट के आदेश के 10 महीने बीत जाने के बाद भी इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है।


कोर्ट की ओर से नरेंद्र कुमार चतुर्वेदी एवं अन्य की याचिकाओं के निस्तारण के दौरान खाली सीटों पर चार सप्ताह में नियुक्ति देने का आदेश दिया था। बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली के चलते नरेंद्र कुमार चतुर्वेदी एवं अन्य तथा संबंधित सभी याचिकाओं के अधीन उत्तीर्ण अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं। अभी तक परिषद कार्यालय की ओर से इन अभ्यर्थियों को कोई आश्वासन नहीं मिला है।


 इन अभ्यर्थियों ने इससे पूर्व में 14 अक्तूबर 2020 को बेसिक शिक्षा परिषद के तत्कालीन उप सचिव को ज्ञापन देकर नियुक्ति की मांग की थी। इसके बाद से यह अभ्यर्थी लगातार सरकार से नियुक्ति की गुहार लगा रहे हैं। धरना एवं अनशन करने वालों में शोभित सिंह, आरती सिंह, अंजना त्रिपाठी, समरजीत राव, दीपक मौर्य, अनिल वर्मा, गोपाल यादव, अभिलाष सैनी, शिव मोहन मौजूद रहे।

Thursday, July 22, 2021

विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने पर डीआईओएस शाहजहांपुर तलब

अनुकंपा नियुक्ति से इन्कार पर डीआइओएस तलब, मांगा स्पष्टीकरण, विवाहित पुत्री ने की नौकरी देने की मांग

विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने पर डीआईओएस शाहजहांपुर तलब


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इन्कार करने व आदेशों की अनदेखी पर जिला विद्यालय निरीक्षक शाहजहांपुर को तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जाय? यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने शाहजहांपुर की माधुरी मिश्र की याचिका पर दिया है।


याची का कहना था कि उसके पिता बिनोवा भावे इंटर कालेज कांठ, शाहजहांपुर में सहायक अध्यापक थे। सेवाकाल में 25 मई 2019 को उनकी मृत्यु हो गई। याची उनकी विवाहित पुत्री है, उसने अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने के लिए आवेदन किया था। उसे जिला विद्यालय निरीक्षक ने निरस्त कर दिया। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। 


कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रकरण जिला विद्यालय निरीक्षक को वापस कर दिया। जिला विद्यालय निरीक्षक ने 16 जून 2020 को पुन: याची का प्रत्यावेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है जिसके आधार पर विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।



इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार करने व इस संबंध में अदालत द्वारा दिए गए तमाम आदेशों की अनदेखी करने पर जिला विद्यालय निरीक्षक शाहजहांपुर को तलब कर लिया है। कोर्ट ने उनको उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है कि क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए।

शाहजहांपुर की माधुरी मिश्रा की याचिका पर न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने यह आदेश दिया। याची का पक्ष रख रहे अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना था कि याची के पिता बिनोवा भावे इंटर कॉलेज काठ शाहजहांपुर में सहायक अध्यापक थे। सेवाकाल में 25 मई 19 को उनकी मृत्यु हो गई। याची उनकी विवाहित पुत्री है। उसने अनुकंपा आधार पर नियुक्ति देने के लिए आवेदन किया था। जिसे जिला विद्यालय निरीक्षक ने निरस्त कर दिया। इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रकरण वापस डीआईओएस शाहजहांपुर को भेज दिया। 

डीआईओएस ने 16 जून 2020 को पुन: याची का प्रत्यावेदन यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि ऐसा कोई शासनादेश नहीं है जिसके आधार पर विवाहित पुत्री को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए। अधिवक्ता का कहना था कि जिला विद्यालय निरीक्षक ने हाईकोर्ट द्वारा पारित उन तमाम आदेशों की अनदेखी की है, जिनमें विवाहित पुत्री को भी परिवार की परिभाषा में शामिल किया गया है। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का आदेश देखने से स्पष्ट है कि उन्हें अदालत के आदेशों की जानकारी थी। इसके बावजूद उन्होंने जानबूझकर उन आदेशों की अनदेखी की। कोर्ट ने डीआईओएस को अगली तारीख पर उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने के लिए कहा है।

ऑनलाइन तबादले में नो ड्यूज पर अटके एडेड माध्यमिक के शिक्षक

ऑनलाइन तबादले में नो ड्यूज पर अटके एडेड माध्यमिक के शिक्षक


प्रयागराज : एडेड माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों के आनलाइन तबादले की प्रक्रिया में प्रबंधकों के अनापत्ति प्रमाणपत्र (नो ड्यूज) ने पेंच फंसा दिया है। शासन ने प्रदेश के एडेड कालेजों में पहली बार आनलाइन तबादले की प्रक्रिया शुरू की है। इसके लिए 16 जुलाई तक प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता व सहायक अध्यापकों से आनलाइन आवेदन मांगे गए। इसमें जिन कालेजों से शिक्षक गण स्थानांतरण चाहते हैं, वहां से नो ड्यूज लेना जरूरी किया गया है, लेकिन कई जिलों से शिकायत आई है कि प्रबंधक नो ड्यूज नहीं दे रहे हैं।


तबादले की प्रक्रिया में व्यवस्था दी है कि आनलाइन आवेदन करने के बाद उसे संबंधित विद्यालय के प्रबंधक फारवर्ड करेंगे। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक और मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक के अनुमोदन के साथ प्रक्रिया आगे बढ़कर शासन तक जाएगी। शिक्षकों का आरोप है कि कई कालेज विभाग की वेबसाइट पर शो नहीं हो रहे हैं। कई कालेजों में रिक्तियां नहीं हैं। यही वजहें हैं कि आनलाइन तबादले के लिए रजिस्ट्रेशन तो करीब सात हजार शिक्षकों ने किया, लेकिन फाइनली आवेदन उसके एक तिहाई भी नहीं आए। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों का कहना है कि उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से भेजे गए शिक्षकों को तो प्रबंधक ज्वाइन नहीं करा रहे हैं। ऐसे में उनकी ज्वाइनिंग को लेकर संदेह है। इतना ही नहीं, रिक्त पद के सापेक्ष आवेदन ज्यादा होने से सभी को मनपसंद जगह तबादला नहीं हो सकेगा। इधर, अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा का कहना है कि प्रयास किया जा रहा है कि जुलाई माह में ही शिक्षकों की तबादला सूची जारी कर दी जाए। इसके लिए प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्हा के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब

बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्हा के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से दो हफ्ते में मांगा जवाब



★ हाई कोर्ट

● राज्य सरकार को निर्देश, दो सप्ताह में दाखिल करें जवाब

● अलग अधिवक्ता नियुक्त करने पर महानिदेशक बेसिक शिक्षा तलब


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्हा के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। न्यायालय ने अलग अधिवक्ता नियुक्त करने पर महानिदेशक बेसिक शिक्षा को तलब करते हुए व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है।


कोर्ट ने पूछा है कि कार्यालय का पक्ष रखने के लिए मुख्य स्थाई अधिवक्ता ने नोटिस प्राप्त किया है तब किन परिस्थितियों में उन्होंने अलग अधिवक्ता पैनल नियुक्त किया? यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने संजय सिन्हा की याचिका पर दिया है।


याची के अधिवक्ता का तर्क था कि उनको अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश पर पांच मार्च 2021 को निलंबित कर दिया गया। याची के खिलाफ दो अज्ञात लोगों ने शिकायत दर्ज की थी, लेकिन उसके साथ कोई शपथ पत्र दाखिल नहीं किया गया है, जबकि 19 अगस्त 2012 के शासनादेश के अनुसार किसी भी शिकायत के साथ शपथ पत्र दाखिल किया जाना आवश्यक है। याची सितंबर 2018 तक सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के पद पर कार्यरत रहा है। फिर उसने कभी भी इस पद पर काम नहीं किया है। सचिव पद से हटने के तीन साल बाद निलंबन की कार्रवाई की गई है। याची 31 अगस्त 2021 को सेवानिवृत्त होने जा रहा है। सरकार की तरफ से पेश अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कहा कि लगाए गए आरोप गंभीर हैं।

Navodaya Exam: 11 अगस्त को होगी नवोदय की परीक्षा, जल्द एडमिट कार्ड होगा जारी

Navodaya Exam: 11 अगस्त को होगी नवोदय की परीक्षा, जल्द एडमिट कार्ड होगा जारी


नई दिल्ली : जेईई मेंस और नीट के बाद शिक्षा मंत्रलय ने नवोदय विद्यालय की छठवीं कक्षा में दाखिले के लिए शैक्षणिक सत्र 2021-22 की प्रस्तावित प्रवेश परीक्षा की तारीख का भी एलान कर दिया है।


यह परीक्षा 11 अगस्त को देश भर के 11 हजार से ज्यादा केंद्रों पर आयोजित होगी। मौजूदा समय में देश के लगभग सभी जिलों में एक नवोदय विद्यालय है। खास बात यह है कि इन विद्यालयों में दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिए लिया जाता है। यह विद्यालय आवासीय होते हैं। कोरोना संकट के चलते अब तक इस परीक्षा का आयोजन टलता रहा है। 


Navodaya Exam: 11 अगस्त को होगी नवोदय की परीक्षा, जल्द एडमिट कार्ड होगा जारी

जवाहर नवोदय विद्यालय समिति ने चयन परीक्षा के लिए नवोदय परीक्षा की तारीख जारी कर दी है. शिक्षा मंत्रालय ने सूचित किया है कि जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा या जेएनवीएसटी कक्षा VI प्रवेश 2021 के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 11 अगस्त को आयोजित किया जाएगा. चयन परीक्षा पहले 16 मई, 2021 को मिजोरम, नागालैंड और मेघालय को छोड़कर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में निर्धारित की गई थी. बाद के लिए, परीक्षा 19 जून, 2021 को निर्धारित की गई थी. इन दोनों तिथियों को रद्द कर दिया गया और दूसरी लहर के बीच नोटिस जारी किया गया.

नोटिस में सूचित किया गया था कि छात्रों को परीक्षा से कम से कम 15 दिन पहले परीक्षा के बारे में सूचित किया जाएगा. शिक्षा मंत्रालय ने तारीख की जानकारी दे दी है और आधिकारिक नोटिस जल्द ही आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर जारी किया जाएगा. जिन लोगों ने पंजीकरण कराया था, उन्हें सलाह दी जाती है कि वे एडमिट कार्ड जारी करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नजर बनाए रखें. एनवीएस पहले ही मई में परीक्षा और परीक्षा पैटर्न के बारे में एक पुस्तिका जारी कर चुका है.

नवोदय विद्यालय समिति के तहत विभिन्न स्कूलों में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए हर साल नवोदय प्रवेश परीक्षा या जेएनवी चयन परीक्षा आयोजित की जाती है. 2021 की परीक्षा 2 घंटे की अवधि की होगी. परीक्षा को प्रवेश परीक्षा के रूप में भी जाना जाता है. हर साल देश भर से लाखों छात्र परीक्षा के लिए उपस्थित होते हैं. जेवीएन माध्यमिक शिक्षा के लिए केंद्रीय वित्त पोषित स्कूल हैं. ये आवासीय विद्यालय हैं और मेधावी छात्रों को मुफ्त शिक्षा प्रदान किया जाता है. परीक्षा आमतौर पर साल में दो बार आयोजित की जाती है एक बार जनवरी में और फिर मार्च में प्रवेश प्रक्रिया के लिए. इस साल, हालांकि, विभिन्न कारणों से परीक्षा स्थगित कर दी गई थी.

सीबीएसई का नया आदेश : 25 जुलाई तक नहीं आएगा 12वीं का रिजल्ट! देखें यह आदेश

सीबीएसई का नया आदेश : 25 जुलाई तक नहीं आएगा 12वीं का रिजल्ट! देखें यह आदेश


सीबीएसई ने बुधवार, 21 जुलाई को सभी स्कूलों के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। इस बीच, देश भर में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के कक्षा 12वीं के लाखों छात्र और उनके अभिभावकों की नजरें सीबीएसई के रिजल्ट की घोषणा पर टिकी हैं।


सीबीएसई ने बुधवार, 21 जुलाई को सभी स्कूलों के लिए एक अहम आदेश जारी किया है। इस बीच, देश भर में सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों के कक्षा 12वीं के लाखों छात्र और उनके अभिभावकों की नजरें सीबीएसई के रिजल्ट की घोषणा पर टिकी हैं। लेकिन सीबीएसई की ओर से रिजल्ट जारी करने अथवा रिजल्ट की संभावित तिथियों की घोषणा न किए जाने से उनकी बैचेनी बढ़ती जा रही है। समय पर परिणाम घोषित न होने के कारण उनके सामने अगली कक्षाओं में दाखिले को लेकर भी चिंताएं पनपने लगी हैं। 


दरअसल, सीबीएसई की ओर से बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन कार्य के अपलोड अंकों के मॉडरेशन के लिए डेडलाइन आगे बढ़ा दी है। यह पहले 22 जुलाई तक निर्धारित थी। अब इसे 25 जुलाई, 2021 तक के लिए बढ़ा दिया गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के नए आदेश के अनुसार, दसवीं और बारहवीं कक्षा के परिणाम को अंतिम रूप देने की अंतिम तिथि 22 जुलाई से बढ़ाकर 25 जुलाई शाम 5 बजे तक कर दी है। 


Central Board of Secondary Education (CBSE) extends the last date of finalising the class XII result, from 22nd July to 25th July (5:00 PM). 
— ANI (@ANI) July 21, 2021


सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉ संयम भारद्वाज ने कहा कि यह वक्त बेहद तनाव वाला है। ऐसे में जल्दबाजी से गलतियों की संभावना अधिक हो जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए अंकों के मॉडरेशन के लिए डेडलाइन आगे बढ़ाई जा रही है। सभी स्कूलों को निर्देशित किया जाता है कि वे इस समय-सीमा में अंकों के मॉडरेशन का कार्य निष्पादित कर लें। अन्यथा उन्हें छोड़कर शेष स्कूलों का परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। स्कूल प्रबंधन को अंतिम समय की आपा-धापी से बचते हुए इस कार्य को प्राथमिकता से पूरा कर लेना चाहिए। 


बता दें कि कोरोना महामारी के प्रकोप के कारण इस वर्ष सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं रद्द कर दी गईं थीं। छात्रों के रिजल्ट तैयार करने के लिए मूल्यांकन फॉर्मूला तैयार किए गए थे। उसके आधार पर भी परिणाम तैयार किए गए हैं। सीबीएसई की ओर से 10वीं का रिजल्ट 20 जुलाई तक घोषित किया जाना था, लेकिन इसमें लगातार देरी हो रही है। जबकि, कक्षा-12वीं का परिणाम 31 जुलाई को घोषित किया जाना प्रस्तावित है।