DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label उच्च शिक्षा. Show all posts
Showing posts with label उच्च शिक्षा. Show all posts

Friday, July 3, 2020

उच्च शिक्षा : छात्रों की प्रोन्नति फॉर्मूले पर मंथन, अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे


लखनऊ| प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने के मामले में गुरुवार को कोई शासनादेश जारी नहीं हो का।वार्षिक और सेमेस्टर प्रणाली वाले पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले छात्रों को परीक्षाएं कराए बगैर अगली कक्षाओं और अगले सेमेस्टर में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला बनाने पर मंथन जारी है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी कोई सर्वमान्य तरीका तलाशने में जुटे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को उनके सरकारी आवास पर हुई बैठक में ही परीक्षाएं निरस्त करने का फैसला ले लिया गया था। परीक्षाओं के संबंध में गठित चार कुलपतियों की कमेटी ने परीक्षाएं निरस्त कर छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने की सिफारिश की थी। बैठक में यह भी तय किया गया था कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय की गाइड लाइन देखने के बाद छात्रों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत करने का फॉर्मूला तय किया जाएगा। कुलपतियों की कमेटी ने वार्षिक व सेमेस्टर प्रणाली के तहत होने वाली परीक्षाओं के संबंध में अपनी स्पष्ट राय दी है।

ये हो सकता है फॉर्मूला

सूत्रों के अनुसार आंतरिक मूल्यांकन और पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के आधार पर पदोन्नति करने का फैसला लिया जा सकता है। हालांकि एक पेच यह भी है कि कुछ राज्य विवि में कई प्रश्नपत्रों की परीक्षाएं हो चुकी हैं। ऐसे में एक प्रस्ताव यह भी है कि जिन प्रश्नपत्रों की परीक्षा हो चुकी है, उनका मूल्यांकन करा लिया जाए। फिर कोरोना को देखते हुए मूल्यांकन भी आसान नहीं है। खुद शिक्षक ही विरोध कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों में आंतरिक मूल्यांकन की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में केवल पिछली कक्षा या सेमेस्टर में प्राप्त अंकों के आधार पर ही अंक देकर अगली कक्षा या सेमेस्टर में प्रोन्नत करना होगा। अंतिम वर्ष के छात्रों को पिछले दो वर्षों की परीक्षा में प्राप्त अंकों के औसत के आधार पर अंक दिए जा सकते हैं।

Thursday, July 2, 2020

विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी


विदेश जाने वाले छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी

विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को अब देश में ही पढ़ाने की तैयारी, जानें क्‍या हो रहा है बदलाव

केंद्र सरकार ने चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है।...


नई दिल्ली। कोरोना संकट की चुनौतियों के बीच कुछ नई उम्मीदें भी जगी है। इनमें ही उच्च शिक्षा के लिए हर साल विदेशों को होने वाला पलायन भी है। जिसे पिछले कई सालों से चाहकर भी सरकार नहीं रोक पा रही है, लेकिन कोरोना काल ने इसकी राह आसान की है। सरकार भी इस मौके का फायदा उठाने के लिए पूरी ताकत से जुटी हुई है। इसके तहत चालू शैक्षणिक सत्र में ही विदेश जाने वाले करीब एक लाख छात्रों को देश में रोकने की योजना बनाई है। साथ ही इसे लेकर नए-नए कोर्स शुरू करने से लेकर आकर्षक पैकेज तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। 


चालू शैक्षणिक सत्र में करीब एक लाख छात्रों को रोकने का लक्ष्य
मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश से हर साल करीब सात लाख छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेशों में जाते है। जहां पढ़ाई पर हर साल वह करीब एक लाख करोड़ खर्च करते है। वहीं पढ़ाई के बाद इनमें से ज्यादा छात्र वहीं जॉब भी हासिल कर लेते है। ऐसे में उनकी प्रतिभा का पूरा फायदा दूसरे देश को मिलता है। इसके चलते देश को प्रतिभा और पैसे दोनों ही मोर्चे पर नुकसान उठाना पड़ता है। कोरोना संकटकाल में मंत्रालय के भीतर इन छात्रों को रोकने की कवायद तब जोर पकड़ी, जब विदेशों में पढ़ाई की योजना बनाए बैठे छात्रों और उनके अभिभावकों ने मंत्रालय से संपर्क कर देश में ही बेहतर पाठ्यक्रम और मौके उपलब्ध कराने की मांग की। 


नए पैकेज को घोषित कर सकती है सरकार 
सूत्रों की मानें तो मंत्रालय ने इसके बाद तुंरत ही सकारात्मक रूख दिखाते हुए जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षा के आवेदन की समयसीमा को बढाया था। जिसके बाद डेढ़ लाख से ज्यादा छात्रों के नए आवेदन आए हैं। माना जा रहा है कि यह सारे ऐसे ही छात्र है, जो विदेशों के बजाय अब देश में पढ़ना चाहते है। सूत्रों के मुताबिक आने वाले दिनों में सरकार विदेशों में पढ़ाई के लिए कराए गए रजिस्ट्रेशन को रद्द कराने वाले छात्रों को लेकर कुछ और नए पैकेज भी घोषित कर सकती है।

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक, समिति की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय

उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को प्रोन्नति में मिलेंगे औसत अंक समिति ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट, आज मुख्यमंत्री से मंथन के बाद होगा निर्णय


कोरोना संक्रमण के चलते राज्य विश्वविद्यालयों में नहीं होंगी परीक्षाएं


लखनऊ। प्रदेश विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के विद्यार्थियों को उनके पिछली कक्षाओं में प्राप्त अंकों के औसत अंक के आधार पर प्रोन्नत किया जाएगा। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के आयोजन के लिए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में बनी समिति ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपी है। समिति की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सहमति लेकर निर्णय किया जाएगा। 


कोरोना संक्रमण के चलते इस वर्ष राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं होगी। ऐसे में सभी विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए गठित समिति ने स्नातक तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम और द्वितीय वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक, द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को प्रथम वर्ष में प्राप्त अंकों के औसत अंक देकर प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। इसी प्रकार प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को इस वर्ष केवल प्रोन्नत करने का सुझाव हैं, उनके प्रथम वर्ष के अंकों का निर्धारण अगले वर्ष द्वितीय वर्ष की परीक्षा में मिले अंकों के औसत से किया जाए। 


समिति ने यह भी सुझाव दिया है कि जिन विषयों की अनुसार वास्तविक प्राप्तांक दिए परीक्षाएं लॉकडाउन से पहले हो गई थीं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं जाएं। समिति ने अन्य प्रदेशों में औसत अंक देकर विद्यार्थियों को का मूल्यांकन हो गया तो विद्यार्थियों पदोन्नति देने का उदाहरण भी प्रस्तुत को उस विषय में उनकी मेहनत के किया है।


48 लाख विद्यार्थियों पर होगा असर 
समिति ने पूर्व में शासन को दी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि विश्वविद्यालय की परीक्षाएं सोशल डिस्टेंसिंग के माध्यम से करा पाना संभव नहीं है। इससे शिक्षकों और विद्यार्थियों में कोरोना संक्रमण बढ़ने का खतरा रहेगा। समिति ने दूसरे प्रदेशों की तर्ज पर यूपी में भी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं नहीं कराने और विद्यार्थियों को बिना परीक्षा के प्रोन्नत करने का सुझाव दिया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में विद्यार्थियों को प्रोन्नत करने का फार्मूला भी दिया है। 


प्रदेश में 18 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, 169 राजकीय महाविद्यालय, 331 सहायता प्राप्त महाविद्यालय, 6531 वित्तविहीन महाविद्यालयों में करीब 48 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। इस मामले में उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने समिति के अध्यक्ष प्रो. तनेजा से सभी विश्वविद्यालयों की स्थिति के अनुसार प्रोन्नत करने का सुझाव मांगा था।


MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम

MHRD : इस महीने ऑनलाइन ही चलेगी पाठशाला शोधकर्ता व शिक्षक घर से ही करेंगे काम


नई दिल्ली। सरकार ने सभी शिक्षण संस्थान को 31 जुलाई तक बंद रखने का फैसला लिया है। इसे देखते हुए उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे ने अनलॉक-2 आदेश के तहत सभी राज्यों, यूजीसी, एआईसीटीई, एनटीए सहित सभी अधीनस्थ विभागों को पत्र लिखा है। इसके तहत इस अवधि में ऑनलाइन क्लास होगी। इसके अलावा शोधकर्ता, शिक्षक व कर्मी घर से काम करेंगे। 



घर से काम करने वाले एडहॉक शिक्षकों और अन्य कर्मियों को ड्यूटी पर माना जाएगा। अमित खरे ने लिखा है कि संस्थान बंद रहने के कारण स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय ऑनलाइन क्लास लेते रहेंगे। अन्य गाइडलाइन पूर्ववत रहेंगी। नियम का पालन करते हुए सभी छात्रों और शिक्षकों को आरोग्य सेतु एप डाउनलोड करना होगा

Tuesday, June 30, 2020

उच्च शिक्षा : विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र, 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में नहीं होंगी परीक्षाएं, प्रोन्नत होंगे छात्र

नहीं होंगी विवि की परीक्षाएं 48 लाख विद्यार्थी प्रमोट होंगे!

7026 डिग्री कॉलेज हैं सरकारी और प्राइवेट मिलाकर

लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में स्नातक व परास्नातक की परीक्षाएं नहीं होंगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने परीक्षाएं न कराने की संस्तुति की है। करीब 48 लाख से अधिक विद्याíथयों को अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाएगा।


उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में सोमवार को हुई महत्वपूर्ण बैठक में कमेटी के प्रस्ताव पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बन गई है। हालांकि औपचारिक घोषणा दो जुलाई को की जाएगी।




उच्च शिक्षा विभाग द्वारा गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच परीक्षाएं कराना जोखिम भरा हो सकता है। मालूम हो कि मार्च में हुए लॉकडाउन के चलते कई विश्वविद्यालयों में परीक्षाएं शुरू नहीं हो पाईं, कुछ में शुरू हुईं तो आधी परीक्षाएं हो पाईं। जुलाई में परीक्षाएं कराने के लिए परीक्षा कार्यक्रम घोषित किए गए तो विरोध शुरू हो गया। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी की रिपोर्ट को देखते हुए अब प्रोन्नति पिछली कक्षा में मिले अंक के आधार पर दी जाए या सभी विषयों में मिले अंक में से जिस विषय में ज्यादा अंक मिले हैं उसे आधार मानकर रिजल्ट तैयार किया जाए, इन सब पर मंथन किया जा रहा है।

’ उच्च शिक्षा विभाग की ओर से गठित कमेटी ने की संस्तुति

’ प्रोन्नति के फार्मूले पर मंथन, दो जुलाई को होगी औपचारिक घोषणा

राज्य विवि, एक मुक्त विवि, एक डीम्ड विवि और 27 निजी विवि हैं प्रदेश में

डॉ. दिनेश शर्मा ’ जागरण आर्काइव

सभी संभावनाओं को टटोला जा रहा है। कमेटी की रिपोर्ट पर भी मंथन किया जा रहा है। दो जुलाई को इस पर अंतिम निर्णय लेकर औपचारिक घोषणा की जाएगी।

डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री




 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Monday, June 29, 2020

उच्च शिक्षा : जांच कमेटी के विरोध में उतरे शिक्षक, आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधीः लुआक्टा


लखनऊ।  प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों के भौतिक सत्यापन और उनके शैक्षणिक अभिलेखों की जांच के लिए कमेटी गठित करने के आदेश का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षक इस आदेश को अपमानजनक मान रहे हैं। शिक्षक संगठन कानूनी लड़ाई लड़ने के विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं। बहस का विषय बना है मुद्दा ः शासन ने सभी जिलों में जिलाधिकारी की तरफ से नामित अपर जिलाधिकारी (डीएम) को कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। इसी तरह स्थलीय जांच के लिए जिलों में गठित होने वाली दो अलग-अलग उप समितियां में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को अध्यक्ष बनाया गया है। शासन के उच्च शिक्षा विभाग का यह आदेश जारी होते ही शिक्षकों में नाराजगी व्याप्त हो गई। विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर बने शिक्षकों के व्हाट्सएप ग्रुप में यह विषय बहस का मुद्दा बना हुआ है। उनका कहना है कि इस आदेश से तो कुलपतियों की भी जांच एसडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी करेगी, क्योंकि कुलपति भी किसी न किसी विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं। इसी तरह विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति, कोषाध्यक्ष व विभागाध्यक्ष तक की जांच भी एसडीएम करेंगे। दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि जांच का यह आदेश पूरी तरह अनुचित है। लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. विनीत वर्मा ने भी कहा कि इस मुद्दे पर शिक्षकों में काफी नाराजगी है। शिक्षकों की भावनाओं के अनुरूप निर्णय लिया जाएगा।

आदेश अपमानजनक और संविधान विरोधी लुआक्टा :- लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने कहा कि यह आदेश अपमानजनक होने के साथ-साथ संविधान विरोधी भी है। संविधान के अनुच्छेद 311 (डॉक्ट्रिन आफ प्लेजर) में में प्रावधान है कि किसी भी व्यक्ति की जांच उससे नीचे की रैंक वाला अफसर नहीं कर सकता है। जांच कमेटी के अध्यक्ष व सदस्यों का वेतनमान प्रोफेसरों से कम है। शासन ने अपना आदेश संशोधित नहीं किया तो संगठन कानूनी लड़ाई लड़ेगा। शिक्षकों को जांच से कोई इनकार नहीं है लेकिन जांच प्रक्रिया संविधान सम्मत होनी चाहिए।

Sunday, June 28, 2020

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जुलाई में अब नहीं होगी विश्वविद्यालयों में कोई भी परीक्षा


कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते जुलाई में अब नहीं होगी विश्वविद्यालयों में कोई भी परीक्षा


मानव संसाधन विकास मंत्रालय का साफ मानना है कि छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी।...


नई दिल्ली। कोरोना के देश भर में बढ़ते संक्रमण और जुलाई में इसके चरम पर पहुंचने को लेकर लगाए जा रहे अनुमानों को देखते हुए फिलहाल जुलाई में अब कोई भी परीक्षा नहीं होगी। सीबीएसई की बाकी बची परीक्षाओं को रद करने के ऐलान के बाद मंत्रालय ने जुलाई में प्रस्तावित अन्य परीक्षाओं को लेकर भी ऐसे ही संकेत दिए है। साथ ही इसे लेकर नए सिरे से समीक्षा शुरू कर दी है।


परीक्षाओं को टालने या रद करने को लेकर सोमवार को बुलाई गई उच्चस्तरीय बैठक
इस बीच सोमवार को जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है, जिसमें इन्हें टालने या रद करने को लेकर निर्णय किया जाएगा।


विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के रद होने की संभावना
फिलहाल जुलाई में प्रस्तावित जिन परीक्षाओं को रद या स्थगित किया जा सकता है, उनमें विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के साथ नीट, जेईई मेंस आदि परीक्षाएं शामिल है। इनमें विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के फिलहाल रद करने की पूरी संभावना है। इन छात्रों को पिछले सेमेस्टर की परीक्षाओं और आंतरिक आंकलन के आधार पर अंक देकर प्रमोट किया जा सकता है।


यूजीसी को पहले ही समीक्षा के दिए जा चुके हैं निर्देश
मंत्रालय ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पिछले दिनों ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से विश्वविद्यालयों को लेकर घोषित अपने परीक्षा प्लान और शैक्षणिक कैलेंडर की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दे दिए थे। जिसे लेकर यूजीसी ने भी एक कमेटी गठित की है। जो इसे लेकर सुझाव देगी। फिलहाल यूजीसी के मौजूदा प्लान के तहत विश्वविद्यालयों के अंतिम वर्ष की परीक्षाएं एक से पंद्रह जुलाई के बीच प्रस्तावित है।


विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं अब नहीं होगी, नया शैक्षणिक सत्र अक्टूबर तक खिसकेगा
वहीं नया शैक्षणिक सत्र भी सितंबर से शुरू होना है, लेकिन सूत्रों की मानें तो विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं अब नहीं होगी। साथ ही शैक्षणिक सत्र भी अब अक्टूबर तक खिसकेगा। जिसका ऐलान भी सोमवार को हो सकता है। विश्वविद्यालयों के पहले और दूसरे वर्ष के छात्रों को पहले ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर प्रमोट करने का विकल्प दिया जा चुका है।


एचआरडी मंत्रालय ने कहा- छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी
इस सब के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय का साफ मानना है कि छात्रों की सुरक्षा को दांव पर लगाकर परीक्षाएं नहीं कराई जाएंगी। स्थिति सामान्य होने के बाद जरूरी परीक्षाओं को कराने का निर्णय लिया जाएगा। वैसे भी सीबीएसई की बाकी बची परीक्षाओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट के रूख को देखते हुए मंत्रालय भी उत्साहित है। जिसे मंत्रालय ने सुरक्षा कारणों से रद कर दिया था। वैसे भी जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को न कराने को लेकर छात्रों और अभिभावकों का भी भारी दबाव है।

Saturday, June 27, 2020

यूपी : विश्वविद्यालय राज्य सरकार पर बोझ न बनें, आय के स्रोत तलाशें : राज्यपाल

विश्वविद्यालय राज्य सरकार पर बोझ न बनें, आय के स्रोत तलाशें : राज्यपाल


उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों ने अपील की है कि वे राज्य सरकार पर बोझ न बनें और आत्मनिर्भर बनने के लिए आय के स्रोत तलाशें। उन्होंने विश्वविद्यालयों को अपने शिक्षकों और कर्मचारियों की प्रोन्नति समय से करने के निर्देश भी दिए, जिससे उनका मनोबल बना रहे। 


वह शुक्रवार को राजभवन में लखनऊ विश्वविद्यालय की समस्याओं के समाधान एवं शताब्दी वर्ष समारोह मनाने के संबंध में आयोजित बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दो-तीन विश्वविद्यालयों का चयन कर उसे पूरा सहयोग दें जिससे वे नैक मूल्यांकन में 'ए' ग्रेड हासिल कर सकें, क्योंकि प्रदेश का कोई भी विश्वविद्यालय नैक मूल्यांकन में 'ए' ग्रेड प्राप्त नहीं कर सका है।


शताब्दी समारोह मनाए जाने के संबंध में राज्यपाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री जो प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री भी हैं, के दिशा-निर्देशन में शताब्दी समारोह का भव्य और ऐतिहासिक आयोजन किया जाए। राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी सप्ताह में एक दिन तय करें ताकि वे विश्वविद्यालयों के कुलपति से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनें एवं उनके निराकरण में सहयोग करें। इसके साथ ही वे स्वयं विश्वविद्यालयों का आकस्मिक निरीक्षण कर वहां की स्थिति का जायजा भी लें, जिससे छोटी-छोटी समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण हो सके।


बैठक में उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री नीलिमा कटियार, राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव महेश कुमार गुप्ता, अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव कुमार मित्तल, लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय एवं राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी केयूर सम्पत सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे। 


विश्वविद्यालय परिक्षाओं के लिए कमेटी गठित

विवि परीक्षाओं के लिए कमेटी गठित

लखनऊ : राज्य सरकार ने विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के संबंध में चार कुलपतियों की एक कमेटी का गठन किया है। कमेटी के अध्यक्ष चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति होंगे। अवध, आगरा और कानपुर के कुलपति इसके सदस्य होंगे। यह कमेटी सोमवार को अपनी रिपोर्ट देगी। इसी के आधार पर फैसला होगा कि परीक्षाएं कराईं जाएं या छात्रों को बिना परीक्षा प्रोन्नत कर दिया जाए।





 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

उच्च शिक्षा विभाग के हर शिक्षक की होगी जांच, सभी जिलों में गठित होगी समिति और उपसमिति

उच्च शिक्षा विभाग के हर शिक्षक की होगी जांच, सभी जिलों में गठित होगी समिति और उपसमिति।


लखनऊ : राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय और अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यरत हर शिक्षक की नियुक्ति की जांच होगी। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका, एस गर्ग ने शुक्रवार को जांच का शासनादेश जारी करते हुए सभी जिलाधिकारियों को एक जांच समिति और उप समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं उन्होंने सभी डीएम को जांच पूरी कराकर 31 जुलाई तक रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में एक जांच समिति बनेगी। इसमें अपर पुलिस अधीक्षक को सदस्य और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी को सदस्य सचिव नामित किया जाएगा। समिति के पर्यवेक्षण में स्थलीय जांच के लिए एसडीएम की अध्यक्षता में एक समिति बनेगी। समिति में डीएम द्वारा नामित जिले के राजकीय महाविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रवक्ता और संबंधित राज्य विवि के वित्त अधिकारी को सदस्य नामित किया जाएगा। अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों की जांच के लिए डीएम द्वारा नामित एसडीएम की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की जाएगी। समिति में जिले के राजकीय महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राचार्य, राजकीय महाविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रवक्ता को सदस्य नामित किया जाएगा।





विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं के लिए समिति गठित : प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण के दौरान राज्य विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं आयोजित कराने के लिए समिति गठित की है। चौधरी चरण सिंह विवि के कुलपति प्रो. एनके तनेजा की अध्यक्षता में गठित समिति में डॉ. भीमराव आंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अशोक सिंघल, पति शाहूजी महाराज विवि कानपुर की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता और डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित को सदस्य बनाया गया है। समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सरकार को प्रस्तुत करेगी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Friday, June 26, 2020

प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम स्थगित

प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम स्थगित


उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में प्रस्तावित स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम शासन ने स्थगित कर दिया। इसके लिए विश्वविद्यालयों को प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश जारी किया है। ऐसे में नए शैक्षणिक सत्र 2020-21 में वर्तमान में जारी पाठ्यक्रम ही शामिल रहेगा।


प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम लागू करने की कवायद तीन वर्षो से चल रही थी। 2017 में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में कुलपति सम्मेलन में फैसला लिया था। पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा गोरखपुर व लखनऊ विश्वविद्यालय को दिया। दोनों विवि ने 16 विषयों का पाठ्यक्रम तैयार किया। 


शासन ने इसे लागू कराने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अर¨वद दीक्षित, गोरखपुर विवि के कुलपति प्रो. वीके सिंह, रुहेलखंड विवि के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल, लखनऊ विवि के तत्कालीन प्रति कुलपति प्रो. यूएन द्विवेदी बतौर सदस्य शामिल थे। पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर विश्वविद्यालयों को भेज दी। 


शासन से निर्देश था कि सभी विश्वविद्यालय इसे विद्वत परिषद और कार्य परिषद के एजेंडे में शामिल कर मंजूरी देंगे। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विवि समेत प्रदेश के तमाम विश्वविद्यालयों में कवायद शुरू हो गई थी।


●  यूपी में स्नातक स्तर पर प्रस्तावित समान पाठ्यक्रम पर शासन ने लगा दी रोक

●   बुंदेलखंड विवि के कुलपति की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने की थी सिफारिश


प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में नए सत्र 2020-21 से समान पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी थी। फिलहाल इस प्रक्रिया पर शासन स्तर से रोक लगा दी गई है। - शेषनाथ पांडेय, कुलसचिव, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विवि।

Thursday, June 25, 2020

विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराएं या प्रमोशन दें, फैसला जल्द- उपमुख्यमंत्री

विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराएं या प्रमोशन दें, फैसला जल्द- उपमुख्यमंत्री।


विश्वविद्यालय परीक्षाएं कराएं या प्रमोशन दें, फैसला जल्द- उपमुख्यमंत्री।


लखनऊ : प्रदेश के उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि कोविड-19 संक्रमण का सकारात्मक पक्ष यह है कि ऑनलाइन शिक्षा का दायरा बढ़ा है। उन्होंने कहा कि सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों के चुनाव में गुरुजनों की विद्धता को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। विश्वविद्यालयों की परीक्षाओं पर सरकार का रुख साफ करते हुए उन्होंने कहा कि जल्द ही इस पर फैसला लिया जाएगा कि परीक्षाएं ली जाएं या बिना परीक्षा विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रोन्नत कर दिया जाए। डॉ. शर्मा बुधवार को 'हिन्दुस्तान शिक्षा शिखर सम्मान समारोह' में विजेता शैक्षिक संस्थानों को सम्मानित कर रहे थे। वेबिनार के जरिए हुआ ऑनलाइन सम्मान समारोह में 20 शैक्षिक संस्थानों को उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।







समारोह का उद्घाटन करते हुए उप मुख्यमंत्री ने गुरु के सम्मान पर कहा कि भले ही आज गुरुकुल पद्धति नहीं है लेकिन गुरु का सम्मान आज भी है। संस्थानों को चुनते समय फैकल्टी देखी जाती है। बिल्डिंग भले अच्छी हो लेकिन गुरु अच्छा नहीं तो कोई फायदा नहीं है। 'हिन्दुस्तान' के प्रधान संपादक शशि शेखर ने कार्यक्रम की जानकारी दी और स्वागत किया। एचटी मीडिया लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक राजीव मित्रा ने समारोह के अंत में धन्यवाद ज्ञापित किया।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Wednesday, June 24, 2020

राज्यपाल आनंदीबेन ने कहा- पांच साल पुराने विश्वविद्यालय व कॉलेजों के लिए नैक मूल्यांकन अनिवार्य हो



राज्यपाल आनंदीबेन ने कहा- पांच साल पुराने विश्वविद्यालय व कॉलेजों के लिए नैक मूल्यांकन अनिवार्य हो 


यूपी की राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर फिक्रमंद राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सुधार के लिए कई कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।...


लखनऊ  । उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर फिक्रमंद राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने सुधार के लिए कई कठोर कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने पांच वर्ष पुराने हो चुके विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) मूल्यांकन अनिवार्य रूप से करवाने के निर्देश दिए हैं, साथ ही मूल्यांकन करवाने में लापरवाही करने वाली संस्थाओं पर कार्रवाई की बात कही है। राज्यपाल मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग और नैक के संयुक्त तत्वावधान में नैक मूल्यांकन एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार विषयक वेबिनार में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद थी। 


राज्यपाल तथा कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा 20 राज्य विश्वविद्यालयों में से एक भी नैक से ए ग्रेड नहीं है। सिर्फ छह विश्वविद्यालयों ने ही नैक से मूल्यांकन करवाया है। 159 राजकीय डिग्री कॉलेजों में से सिर्फ 29 ने मूल्यांकन करवाया है और इसमें भी कोई ए ग्रेड नहीं है। जो कि अच्छी स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि कुलपतियों का कार्यकाल कम से कम पांच वर्ष होना चाहिए। तभी वह बेहतर ढंग से काम कर पाएंगे और बेहतर परिणाम मिलेंगे।


वेबिनार में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि कहा पांच वर्ष से अधिक समय से स्थापित सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के लिए नैक का मूल्यांकन अनिवार्य होना चाहिए। इस मूल्यांकन के दौरान मानक अनुपालन न करने की स्थिति में कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थाओं को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान अथवा किन्हीं अन्य संस्थाओं से वित्तीय सहायता प्राप्त करनी है, तो उन्हेंं अनिवार्य रूप से नैक संस्था से मूल्यांकन कराना ही होगा। उन्होंने कहा कि नैक मूल्यांकन के लिए शासन एवं उच्च शिक्षा विभाग की ओर से कठोर प्रयास किये जाने की आवश्यकता है।


राज्यपाल ने कहा वैश्विक महामारी कोविड-19 के समय उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सार्वभौमिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार का दायित्व और अधिक बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा में तेजी से आये बदलाव के कारण उच्च शिक्षा की गुणवत्तापरक वृद्धि के सत्त प्रयासों के लिए तकनीकी संसाधनों का प्रयोग भी आवश्यक होगा। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऑनलाइन शिक्षण पर विशेष ध्यान देना होगा। किसी भी प्रकार की शिक्षा की गुणवत्ता राष्ट्र के विकास में सहायक होती है, इसलिए उच्च शिक्षा में गुणवत्तायुक्त शिक्षा के प्रति सजग रहना होगा।


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि महाविद्यालयों की सम्बद्धता के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे। ऐसे में अधिकतम 300 महाविद्यालयों को ही विश्वविद्यालय से सम्बद्धता दी जानी चाहिए, जबकि यहां पर तो एक-एक विश्वविद्यालय से एक हजार से अधिक महाविद्यालय सम्बद्ध हैं, ऐसी स्थिति में कुलपति कैसे नियंत्रण कर सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में भरे हुए पदों के आधार पर ही नैक मूल्यांकन किया जाता है। संविदा पर नियुक्त शिक्षक नैक मूल्यांकन के मापदण्ड में नहीं आते हैं। हर जगह पर शत-प्रतिशत शिक्षकों के पदों को भरा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि खेद की बात है कि किसी भी विश्वविद्यालय में शत-प्रतिशत अध्यापक नहीं है। इस पर उच्च शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालय को गम्भीरता से विचार करना चाहिए।


राज्यपाल ने कहा कि कुलपति की नियुक्ति राजभवन से होती है और रजिस्ट्रार, कंट्रोलर और वित्त अधिकारी की नियुक्ति उच्च शिक्षा विभाग से होती है। अब तो ऐसी स्थिति में सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षा विभाग के मध्य सहज संबंध अति आवश्यक है। राज्यपाल ने कहा विश्वविद्यालय की समस्यायें जैसे नये कोर्स को मान्यता देने के साथ नियुक्ति एवं पदोन्नति की स्वीकृति देना शासन का कार्य है। उन्होंने कहा कि कुलपति और शासन के अधिकारियों के बीच परस्पर समन्वय का वातावरण बने, इसलिए आवश्यक है कि एक निश्चित दिवस पर दो या तीन विश्वविद्यालयों के अधिकारियों को बुलाकर उनकी समस्याओं को समझकर उचित समाधान किया जाए।


राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उच्च शैक्षिक संस्थानों के नियमन पर अपने विचार रखते हुए कहा प्रमुख शैक्षिक प्रशासक जैसे कि कुलपति, कुलसचिव, वित्त अधिकारी एवं परीक्षा नियंत्रक के चयन में पारदर्शीता एवं गुणवत्ता सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि चयन के लिए राज्य सरकार एवं विश्वविद्यालय भी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देशों का अनुपालन अवश्य करें। उन्होंने कहा कि कुलपति का कार्यकाल पांच वर्ष का होना चाहिए। उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के बारे में उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम तीन-चार वर्षों में निरन्तर अद्यतन करने का प्रावधान होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय के पास उद्योग से जुडऩे के लिए इण्डस्ट्री एकेडमिक सेल होना चाहिए, जो शिक्षकों एवं छात्रों को उद्योग प्रक्रियाओं में सम्मिलित करने का कार्य करें।


राज्यपाल ने कहा कि अधिकांश राज्य विश्वविद्यालयों में नियुक्ति की कोई संस्थागत व्यवस्था नहीं है। जिसके कारण प्रमोशन व नियुक्तियां कई वर्ष से अटकी रहती हैं। उन्होंने कहा कि सभी राज्य विश्वविद्यालय नियुक्ति व प्रोन्नति के लिए यूजीसी रेगुलेशन 2018 को स्वीकार करते हुए अपनी परिनियमावली में संशोधन कर एक रिक्रूटमेन्ट सेल का गठन करें। जिससे कार्य में पारदर्शिता के साथ उसको गति भी मिले। उन्होंने कहा विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षा विभाग के बीच सहज संबंध उनकी बेहतरी के लिए आवश्यक है। राज्यपाल ने कहा कि छात्रों एवं शिक्षकों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध कायम रखना आवश्यक है। इसके लिए विश्वविद्यालयों की विभिन्न समितियों में छात्र-छात्राओं को शामिल करना चाहिए और उनके माध्यम से कार्यक्रम आयोजित कराये जाने चाहिए। इससे छात्रों में व्यावहारिक अनुभव के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ेगा। राज्यपाल ने कहा प्रदेश के 20 राज्य विश्वविद्यालयों में से कोई भी विश्वविद्यालय 'ए' ग्रेड में नहीं है। सिर्फ छह विश्वविद्यालय ही नैक संस्था से मूल्यांकित हैं। 159 राजकीय महाविद्यालयों में से भी कोई 'ए' श्रेणी में नहीं हैं, मात्र 29 नैक मूल्यांकित हैं, यह हमारे लिए आदर्श स्थिति नहीं है।


 उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने वेबिनार में कहा कि उच्च शिक्षा में उकृष्टता लाने के लिए राष्ट्र का दृढ़ संकल्प है। कोविड-19 के दौरान भी उच्च शिक्षा को प्रभावित नहीं होने दिया गया। विभिन्न विषयों पर शिक्षकों ने ई-कंटेंट तैयार कर छात्रों को ऑनलाइन, व्हाट्सअप और यू-ट्यूब के माध्यम से उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फेमवर्क (एनआईआरएफ) में स्थान प्राप्त करने का प्रयास करें। 


इस वेबिनार में राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद के निदेशक डॉ एससी शर्मा, प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस0 गर्ग, विश्वविद्यालयों के कुलपतिगण तथा विषय विशेषज्ञ भी ऑनलाइन जुड़े हुए थे।  

बेसिक से उच्च शिक्षा तक के लिए शुरू होंगे शैक्षिक चैनल


बेसिक से उच्च शिक्षा तक के लिए शुरू होंगे शैक्षिक चैनल


लखनऊ : सूबे में प्राथमिक स्कूलों से लेकर उच्च शिक्षण संस्थाओं में पढ़ रहे विद्याíथयों को घर बैठे पढ़ाई कराने के लिए जल्द ही दो नए शैक्षिक चैनल शुरू किए जाएंगे। दरअसल कोरोना महामारी के चलते अभी स्कूलों को खोलने पर अनिश्चितता है। कब से स्कूलों में पढ़ाई शुरू होगी, यह तय नहीं है। ऐसे में विद्याíथयों को घर बैठे ही पढ़ाई के लिए कम्युनिटी रेडियो व एक कॉमन वेबसाइट बनाकर कम्युनिटी व्यूइंग की सुविधा दी जाएगी।


यह फैसला डिप्टी सीएम डॉ.दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में मंगलवार को शिक्षा समिति की बैठक में लिया गया। विधानभवन स्थित उप मुख्यमंत्री के कक्ष में आयोजित इस बैठक में फैसला लिया गया कि योग्य शिक्षकों को विश्वस्तरीय ई-कंटेट तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं एकेटीयू कुलपति प्रो.विनय कुमार पाठक की अध्यक्षता में गठित की गई कमेटी के सुझाव के अनुसार डेटा सíवसेज की दरों को कम करने के लिए एक विशेष वेबसाइट तैयार की जाएगी। इसमें 80 फीसद खर्च शासन व 20 प्रतिशत डेटा प्रोवाइडर कंपनी करेगी।


विवि सभी विश्वविवद्यालयों को उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा ने निर्देश दिए हैं कि वह नैक मूल्यांकन के लिए अपने संबद्ध कॉलेजों के मेंटर बनें। उनका मार्गदर्शन करें। वहीं नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ) रैकिंग में श्रेष्ठ स्थान लाएं।


डिप्टी सीएम की अध्यक्षता में हुई शिक्षा समिति की बैठक में फैसला, कम्युनिटी रेडियो व कम्युनिटी व्यूइंग से सामूहिक पढ़ाई को बढ़ावा मिलेगा

उच्च शिक्षा : अंतिम वर्ष के छात्रों को नहीं देनी होगी परीक्षा, इंटरनल असेसमेंट और पूर्व सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर रिजल्ट जारी करने की तैयारी

उच्च शिक्षा : अंतिम वर्ष के छात्रोंको नहीं देनी होगी परीक्षा, इंटरनल असेसमेंट और पूर्व सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर रिजल्ट जारी करने की तैयारी।


नई दिल्ली। देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अंतिम वर्ष के लाखों छात्रों के लिए राहत की खबर है। कोविड-19 के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए जुलाई में आयोजित होने वाली वार्षिक परीक्षा के बजाय इंटरनल असेसमेंट और पूर्व सेमेस्टर के प्रदर्शन के आधार पर उनका रिजल्ट जारी करने की तैयारी हो रही है। सरकार ने इसके लिए हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आरसी कुहाड़ की अध्यक्षता में कमेटी बनाई है। यूजीसी इसी हफ्ते अंतिम वर्ष के छात्रों और 2020 सत्र में दाखिले के लिए संशोधित गाइडलाइन जारी करेगा। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, हरियाणा और ओडिशा सरकार ने कोरोना के बढ़ते आंकड़ों को देखते हुए अंतिम वर्ष की जुलाई में होने वाली परीक्षा न लेने का फैसला लिया है। इसी के चलते कई अन्य राज्यों ने भी सरकार से परीक्षा न करवाने की मांग रखी है। कमेटी बना दी गई है, ताकि विभिन्न विश्वविद्यालयों व हितधारकों से बात करके नई गाइडलाइन तैयार की जा सके।





बाद में रिजल्ट सुधारने का विकल्प

अंतिम वर्ष के छात्रों को अगर लगेगा कि इंटरनल असेसमेंट और पूर्व सेमेस्टर के आधार पर तैयार नतीजे में उनके अंक या ग्रेड कम हैं तो उन्हें रिजल्ट सुधारने का विकल्प मिलेगा। इसके लिए कोरोना के हालात ठीक होने के बाद छात्र विवि में लिखित परीक्षा के लिए आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद उनकी डिग्री व अंक तालिका में संशोधन किया जाएगा।


अभी अगस्त या सितंबर से नया सत्र नहीं

देश में कोरोना मामलों को देखते हुए अभी अगस्त या सितंबर में नया सत्र शुरू नहीं होगा। यूजीसी ने अप्रैल में जारी गाइडलाइन में अगस्त में पुराने और सितंबर से नए छात्रों का सत्र शुरू करने के निर्देश दिए थे लेकिन अब इसमें बदलाव होगा। अब अगस्त में कोरोना के हालात को देखते हुए नए सत्र को लेकर फैसला लिया जाएगा।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Sunday, June 21, 2020

उच्च शिक्षा : मानव संपदा पोर्टल पर पंजीकरण के बाद मिलेगा वेतन

उच्च शिक्षा : मानव संपदा पोर्टल पर पंजीकरण के बाद मिलेगा वेतन 


प्रयागराज। प्रदेश के सभी राज्य स्नातक//परास्नातक महाविद्यालयों, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों और राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी में तैनात तमाम कर्मचारियों को पंजीकरण मानव संपदा पोर्टल पर नहीं किया गया है। 



उच्च शिक्षा निदेशालय ने पत्र जारी का निर्देश दिए हैं कि मानव संपदा पोर्टल पर सभी कर्मचारियों का पंजीकरण होने के बाद ही जून माह के वेतन का भुगतान किया जाएगा। निदेशालय की ओर से पूर्व में कई बार निर्देश जारी किए जा चुके हैं कि क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय, राजकीय महाविद्यालय, राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी में तैनात कर्मचारियों का पंजीकरण मानव संपदा पोर्टल पर कराया जाए।

Saturday, June 20, 2020

उच्च शिक्षा संस्थानों में भी जांचे जाएंगे दस्तावेज, स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए बन रहा पोर्टल

उच्च शिक्षा संस्थानों में भी दस्तावेज जांचे जाएंगे


राज्य मुख्यालय : बेसिक शिक्षा में फर्जी शैक्षिक अभिलेखों पर शिक्षकों की नियुक्ति का मामला सामने आने के बाद उच्च शिक्षा विभाग भी सतर्क हो गया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर उच्च शिक्षा संस्थानों में नियुक्त शिक्षकों के भी शैक्षिक अभिलेखों की जांच कराने की तैयारी चल रही है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी होने की संभावना है।





उच्च शिक्षा विभाग के अधीन प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों के अलावा सभी राजकीय महाविद्यालय और सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालय आते हैं। इस कारण जांच में इन तीन श्रेणी के संस्थानों को शामिल करने पर विचार चल रहा है। सूत्रों के अनुसार शासन स्तर पर अभी जांच टीम के गठन पर विचार चल रहा है। संभव है कि विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के लिए विश्वविद्यालय स्तर पर और राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों के लिए क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के स्तर पर जांच टीम का गठन किया जाए।



स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए बन रहा पोर्टल

शासन ने राज्य विश्वविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों में पढ़ा रहे शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में पढ़ाने वाले सभी शिक्षकों के लिए अलग पोर्टल बनाने का आदेश दिया है। इस पोर्टल पर स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों व महाविद्यालयों के शिक्षकों के अलावा कर्मचारियों का भी ब्योरा होगा।



 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Friday, June 19, 2020

केंद्र सरकार ने विज्ञान सहित 4 फेलोशिप की राशि बढ़ाई, जनवरी 2019 से होगी लागू

केंद्र सरकार ने विज्ञान सहित 4 फेलोशिप की राशि बढ़ाई, जनवरी 2019 से होगी लागू


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने साइंस, ह्यूमैनिटीज और सोशल साइंस की चार पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप (पीडीएफ) में चार हजार से नौ हजार रुपये तक बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दे चार हजार से 9,000 तक बढ़ी पिछले साल जनवरी से लागू दी है। यूजीसी ने सभी 750 विश्वविद्यालयों और राज्य सरकारों को इसकी सूचना दे दी है। बढ़ी हुई फेलोशिप का लाभ 1 जनवरी, 2019 से मिलेगा। 


यूजीसी के सचिव प्रो रजनीश जैन के मुताबिक, यूजीसी के पास चार पोस्ट डॉक्टरल फेलोशिप बढ़ाने का प्रस्ताव आया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय से मंजूरी मिलने के बाद सभी संस्थानों को सूचित कर दिया गया है। शोधकर्ताओं को पिछले 16 महीनों का एरियर भी मिलेगा। इसके अलावा एचआरए भी संशोधित दर पर मिलेगा। इससे पहले सरकार ने 2019 में पिछली डेट से जेआरएफ, एसआरएफ और रिसर्च एसोसिएट में 20 फीसदी तक बढ़ोतरी की थी।

यूपी में 30 जून के बाद शुरू होंगी यूनिवर्सिटी और कॉलेज की सेमेस्टर परीक्षाएं, यहां पढ़ें पूरी डिटेल

जुलाई में होंगी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं, बढ़ाये जाएंगे परीक्षा केंद्र

यूपी में 30 जून के बाद शुरू होंगी यूनिवर्सिटी और कॉलेज की सेमेस्टर परीक्षाएं, यहां पढ़ें पूरी डिटेल


 उत्तर प्रदेश राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 30 जून 2020 के बाद सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षाएं शुरू करने की तैयारी की जा रही है। ...

के 


UP University, College Exam 2020: उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों के छात्रों के लिए महत्वपूर्ण खबर है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों व कॉलेजों की परीक्षा को लेकर बड़ा निर्णय लिया गया है। राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 30 जून 2020 के बाद सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षाएं शुरू करने की तैयारी की जा रही है। इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने एक बयान जारी किया है।

मुख्य सचिव ने अपने बयान के जरिए बताया है कि राज्य के विश्वविद्यालयों परीक्षाएं 30 जून 2020 के बाद आयोजित की जाएंगी। साथ ही निर्देश दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों की परीक्षाएं और बीएड 2020 की परीक्षा सफलता पूर्वक आयोजित करने के लिए सभी संस्थान महत्वपूर्ण व आवश्यक इंतजामों की तैयारियों पर ध्यान दें। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को अलकोहल बेस्ड सैनिटाइजर की पर्याप्त व्यवस्था करने का निर्देश दिया है, ताकि कार्यक्रम स्थल में प्रवेश से पहले उनके हाथों को कीटाणुरहित किया जा सके।


बता दें कि इसी बीच उत्तर प्रदेश बीएड 2020 परीक्षा की तिथियों की घोषणा जल्द ही की जाएगी। पूर्व में बीएड 2020 परीक्षा 6 अप्रैल 2020 को आयोजित होने वाली थी। लेकिन कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया गया। इस कारण यह परीक्षा स्थगित करनी पड़ी थी। बता दें कि इस परीक्षा के माध्यम से लगभग 2 लाख उम्मीदवारों को प्रवेश दिया जाना है।


इससे पूर्व उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों से परीक्षा कार्यक्रम मांगा जा चुका है। बता दें कि कई विश्वविद्यालयों में कुछ ही परीक्षाएं शेष रह गई हैं। ऐसे में वहां जिन विषयों की परीक्षाएं हो चुकी हैं, उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य शुरू करने को कहा गया है। फिलहाल छह जुलाई से विश्वविद्यालयों में नया सत्र शुरू होगा।


 लखनऊ : मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में सेमेस्टर व वार्षिक परीक्षाएं अगले महीने से करवाने के निर्देश दिए हैं। गुरुवार को सभी राज्य विवि के कुलपतियों, उच्च शिक्षा निदेशक, मंडलायुक्तों व जिलाधिकारियों को भेजे निर्देश में उन्होंने 30 जून के बाद परीक्षाएं करने को कहा है। 


परीक्षा केंद्रों पर पर्याप्त सैनिटाइजेशन करें। शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और छात्रों के प्रवेश के समय इन्फ्रारेड थर्मामीटर से तापमान लेने के साथ ही मास्क, फेसकवर का पालन सुनिश्चित करवाया जाएगा। छात्रों की अधिक संख्या में उपस्थिति होने पर भी एक ही स्थान पर भीड़भाड़ न होने पाए, इसकी व्यवस्था बनाएं। 

Thursday, June 18, 2020

तीन महीने देर से शुरू हो सकता है आईआईटी का शैक्षणिक सत्र

तीन महीने देर से शुरू हो सकता है आईआईटी का शैक्षणिक सत्र


ननई दिल्ली। कोरोना महामारी के कारण सभी आईआईटी में शैक्षणिक सत्र शुरू होने में दो से तीन महीने का विलंब हो सकता है। वहीं देर से शुरू होने पर सत्र तीन से छह माह तक आगे बढ़ सकता है। अगस्त से शुरू होने वाले सत्र को ऑनलाइन ही चलाया जाएगा। यदि सितंबर या अक्तूबर तक देश में कोरोना के हालात ठीक होते हैं तो उसके बाद छात्रों को दिसंबर तक ही बुलाया जा सकता है। जेईई एडवांस व इन्हीं मुद्दों और लेकर जल्द ही स्टैंडिंग कमेटी आईआईटी काउंसिल की बैठक होने वाली है। आईआईटी अधिकारी के मुताबिक कोरोना के कारण फिलहाल कैंपस खोलने की योजना नहीं है।




देशभर में कोरोना संक्रमण का आंकड़ा जिस रफ्तार से बढ़ रहा है, ऐसे में छात्रों को कैंपस बुलाकर स्वास्थ्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। इसीलिए फाइनल सेमेस्टर परीक्षा लेकर अन्य परीक्षाओं के रिजल्ट असेसमेंट व असाइनमेंट के आधार पर तैयार किए जा रहे हैं। डिग्री भी ऑनलाइन उपलब्ध करवाई जाएगी। अधिकारी ने बताया कि सिर्फ चुनिंदा पीएचडी छात्रों को कैंपस आने की अनुमति मिलेगी। जिन स्कूल के पास इंटरनेट की व्यवस्था नहीं होगी, उन्हें थोड़े समय के लिए कैंपस आने दिया जाएगा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जब जेईई मेन 2020 की स्कोर लिस्ट जारी करें, उसके दो हफ्ते के अंदर जेईई एडवांस परीक्षा आयोजित होगी।