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Friday, March 5, 2021

कुलपति कर सकेंगे विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती, नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द : डिप्टी सीएम

कुलपति कर सकेंगे विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की भर्ती, नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द : डिप्टी सीएम


प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) विश्वविद्यालय के तीसरे दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि सूबे के विश्वविद्यालयों में अब कुलपति कर्मचारियों की भर्ती कर सकेंगे। अब तक उनके पास केवल शिक्षकों की भर्ती का ही अधिकार था। शासन ने कुलपति के अधिकार क्षेत्र को बढ़ाए जाने का निर्णय लिया है। अब तक सूबे के विश्वविद्यलयों में कर्मचारियों की भर्ती उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के जरिए होती थी। उन्होंने कहा कि जल्द ही इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया जाएगा। 


डिप्टी सीएम ने कहा कि जल्द ही प्रदेश में नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन किया जाएगा। फिर इसमें बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा आयोग का विलय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक नए आयोग का गठन नहीं हो जाता है, तब तक भर्ती संस्थाएं अपना काम करती रहेंगी।

डॉ. शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत 70 विश्वविद्यालयों का 70 फीसदी पाठ्यक्रम कामन होगा। जबकि 30 फीसदी पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय को तैयार करना होगा। सूबे के सभी विवि और उससे संबद्ध कॉलेजों में इनोवेशन हब, डिजिटल लाइब्रेरी, वर्चुअल लैब और एकेडमिक डाटा बैंक स्थापित करने को कहा। इसके लिए वर्ष 2025 तक का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दिव्यांगजन विभाग की मदद से दिव्यांगों के लिए भी अनूठे लैब की स्थापना की बात कही।

उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। सभी को अपनी उपलब्धियों पर गर्व होगा। जिंदगी में जो भी उपलब्धि प्राप्त कर रहे हैं, उसके साथ नैतिकता, ईमानदारी, करुणा और दया जैसे गुणों को भी अपनाना होगा। इसी के बदौलत आप सब सर्वगुण संपन्न जनशक्ति बनकर प्रदेश और देश के लिए महत्वपूर्ण योगदान कर सकेंगे।

यूपी : राज्यपाल आनंदीबेन ने कॉलेज और विश्वविद्यालयों से एक-एक आंगनवाड़ी गोद लेने का किया आह्वान

यूपी : राज्यपाल आनंदीबेन ने  कॉलेज और विश्वविद्यालयों से एक-एक आंगनवाड़ी गोद लेने का किया आह्वान


उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने गरुवार को प्रयागराज में कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक 50 प्रतिशत युवाओं को उच्च शिक्षा का लक्ष्य तभी हासिल हो सकेगा जब प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करने पर ध्यान दिया जाए। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के 15वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने प्रदेश की आंगनवाड़ियों में सभी मूलभूत जरूरतों को उपलब्ध कराने के लिए सरकारी और निजी शैक्षणिक संस्थानों से इन आंगनवाड़ियों को गोद लेने का आह्वान किया।

    
उन्होंने कहा, “पूरे प्रदेश में 30-31 सरकारी विश्वविद्यालय और 40-50 निजी विश्वविद्यालय हैं। इनके साथ 50,000 से अधिक कॉलेज हैं। यदि एक-एक कॉलेज प्रदेश की सभी आंगनवाड़ियों को गोद लें तो इन आंगनवाड़ियों को वे सभी चीजें मिल जाएंगी, जो हम चाहते हैं।”
  
  
पटेल ने कहा, “दहेज जैसी कुरीतियों का हल शिक्षा है। एक बार मैंने जेल देखने का मन बनाया और 15-18 साल की लड़कियों को अपने साथ महिला जेल दिखाने गई। वहां उन लड़कियों ने महिला कैदियों से बातचीत की जिससे पता चला कि लगभग 325 महिलाओं को दहेज के लिए बहू की हत्या करने के लिए सजा हुई है।”


उन्होंने कहा कि लड़कियों को जेल दिखाने का मकसद उन बुराइयों से रूबरू कराना था जिनकी वजह से महिलाएं जेल में सड़ती हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के जरिए इन सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए सामूहिक चिंतन की जरूरत है और विश्वविद्यालय ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन कर छात्र-छात्राओं को जागरूक करें।


इस मौके पर भारतीय शिक्षण मंडल, नागपुर के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मुकुल कानिटकर ने कहा, “मुक्त शिक्षा, शिक्षार्थी केंद्रित है जिसमें विद्यार्थी अपनी गति एवं जरूरत के मुताबिक विषय वस्तु को सीखता है।”
 
   
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन में भी इस विश्वविद्यालय को प्रयास करना होगा। उन्होंने कहा कि शोध के क्षेत्र में भी अग्रणी भूमिका निभाते हुए इस विश्वविद्यालय ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध पीठ की स्थापना करके एक सार्थक पहल की है।
 
   
दीक्षांत समारोह में 19 विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल दिया गया और अन्य छात्रों को विभिन्न उपाधियां प्रदान की गईं। राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के नवनिर्मित अटल प्रेक्षागृह का भी उद्घाटन किया।

Thursday, March 4, 2021

UGC NET 2021: यूजीसी नेट परीक्षा के लिए आवेदन की लास्ट डेट आगे बढ़ी, 9 मार्च तक करें आवेदन

UGC NET 2021: यूजीसी नेट परीक्षा के लिए आवेदन की लास्ट डेट आगे बढ़ी, 9 मार्च तक करें आवेदन


UGC NET 2021 नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency NTA) ने यूजीसी नेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। इसके मुताबिक उम्मीदवार अब 9 मार्च 2021 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।


UGC NET 2021: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Testing Agency, NTA) ने यूजीसी नेट परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की आखिरी तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। इसके मुताबिक उम्मीदवार अब 9 मार्च, 2021 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ऐसे में जो भी उम्मीदवार इस परीक्षा के लिए अभी तक आवेदन नहीं कर पाएं हैं, उन्हें एनटीए ने बड़ी राहत देते हुए कुछ और दिनों का मौक दिया है। 


इसके अनुसार अब अभ्यर्थी 9 आधिकारिक पोर्टल पर ugcnet.nta.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। वहीं इस संबंध में एनटीए ने एक आधिकारिक सूचना जारी की है। इसके अनुसार यूजीसी नेट परीक्षा की लास्ट डेट बढ़ाने के संबंध में उम्मीदवारों के अनुरोध को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। वहीं इससे पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 2 मार्च, 2021 तक थी।

■ UGC NET 2021: इन तिथियों का रखें ध्यान

● ऑनलाइन आवेदन की प्रारंभिक तिथि- 2 फरवरी, 2021
● ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि- 9 मार्च, 2021
● शुल्क जमा करने की लास्ट डेट- 10 मार्च, 2021
● करेक्शन विंडो ओपन- 12 फरवरी से 16 मार्च, 2021 तक


■ UGC NET 2021: इन तारीख में होगी परीक्षा

यूजीसी नेट परीक्षा 2 मई, 3, 4, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 14, और 17, 2021 को आयोजित किया जाना है। परीक्षा तीन घंटे की होगी। यह परीक्षा दो पेपर होंगे। इसके तहत पेपर 1 और पेपर 2 में क्रमशः 100 और 200 अंक होंगे। वहीं अब परीक्षा का आयोजन दो पालियों में किया जाता है। पहली पाली की परीक्षा सुबह 9:30 से दोपहर के 12:30 तक आयोजित की जाएगी। 


वहीं दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 2:30 से शाम 5 बजे तक आयोजित की जाएगी। वहीं इस परीक्षा से जुड़ी ज्यादा डिटेल्स चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं। गौरतलब है कि यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता और जूनियर रिसर्च फेलोशिप के लिए होता है।

Monday, March 1, 2021

NTA UGC NET 2021 : कल है यूजीसी नेट के लिए आवेदन की अंतिम तिथि

NTA UGC NET 2021 : कल है यूजीसी नेट के लिए आवेदन की अंतिम तिथि


NTA UGC NET 2021 : नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की ओर से आयोजित की जाने वाली परीक्षा यूजीसी नेट परीक्षा 2021 के लिए कल आवेदन की अंतिम तिथि (2 मार्च) है। अगर किसी इच्छुक उम्मीदवार ने अभी तक आवेदन नहीं किया है तो वह ugcnet.nta.nic.in पर जाकर एप्लाई कर सकता है। आवेदन फीस 3 मार्च तक जमा कराई जा सकती है। आवेदन फॉर्म में सुधार 5 मार्च से 9 मार्च तक किया जा सकेगा। यूजीसी नेट परीक्षा का आयोजन 2, 3, 4, 5, 6, 7, 10, 11, 12, 14 और 17 मई 2021 को होगा। आपको बता दें कि दिसंबर 2020 यूजीसी नेट संस्करण का आयोजन मई 2021 में होने जा रहा है। 


देश भर के विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जूनियर प्रोफेसर फेलोशिप और सहायक प्रोफेसर के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा का आयोजन वर्ष में दो बार, आमतौर पर जून और दिसंबर, में किया जाता है। वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते जून की परीक्षा के आयोजन मे देरी हुई थी और बाद में एनटीए ने परीक्षा का आयोजन 16 सितंबर से 18 सितंबर और 21 सितंबर से 25 सितंबर तक किया था। जून परीक्षा की देरी के चलते यूजीसी नेट दिसंबर 2020 परीक्षा के आयोजन में भी देरी हुई है।


आवेदन शुल्क: 
सामान्य वर्ग - 1000 रुपये
ईडब्ल्यूएस, ओबीसी और एनसीएल-  500 रुपये
एससी, एसटी, दिव्यांग और थर्ड जेंडर-  250 रुपये


कुल 300 अंकों के होंगे प्रश्न
नेट परीक्षा में प्रथम और द्वितीय प्रश्नपत्रों को मिलाकर कुल 300 अंक के प्रश्न पूछे जाएंगे। जिसमें प्रथम प्रश्न पत्र में प्रश्नों की संख्या 50 होगी और द्वितीय प्रश्नपत्र में प्रश्नों की संख्या 100 होगी। प्रथम प्रश्नपत्र 100 अंक और द्वितीय प्रश्नपत्र 200 अंक का होगा। परीक्षा में सभी बहुवैकल्पिक प्रश्न पूछे जाएंगे। अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए कुल 3 घंटे का समय मिलेगा।

JRF अभ्यर्थियों के लिए उम्र सीमा बढ़ाई गई

यूजीसी ने मई में होने वाली यूजीसी नेट जूनियर रिसर्च फेलोशिप (जेआरएफ) के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 31 वर्ष कर दी है। चूंकि पिछले साल दिसंबर में यह परीक्षा नहीं हो सकी थी। इसलिए उम्र सीमा बढ़ाई गई है, ताकि जिन अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त हो गई, वे इसमें शामिल हो सकें। इस बदलाव से बिहार के काफी अभ्यर्थियों को लाभ होगा। मई सत्र की परीक्षा के लिए अधिकतम आयु सीमा 30 वर्ष से बढ़ाकर 31 वर्ष की गई है। यूजीसी ने नोटिस जारी कर बताया कि पांच वर्ष तक की छूट ओबीसी-एनसीएल, एससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी, थर्ड जेंडर के अभ्यर्थियों और महिला आवेदकों को दी गई है। इधर, एलएलएम डिग्री के अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में तीन वर्ष की छूट होगी। असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए कोई अधिकतम आयु सीमा नहीं है।

Sunday, February 28, 2021

नई शिक्षा नीति से बदलेगा भाषाओं का पाठ्यक्रम, कई स्तरों पर दिखाई देगा उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रस्तावित बदलाव

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति से बदल जाएगा भाषाओं का भी पाठ्यक्रम

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रमों में प्रस्तावित बदलाव कई स्तरों पर दिखाई देगा। नए पाठ्यक्रम में गैर प्रायोगिक विषयों में भी व्यावहारिक ज्ञान पर जोर दिया जाएगा। भाषाओं के पाठ्यक्रम में भी इसका असर दिखेगा। नया पाठ्यक्रम पहली जुलाई 2021 से शुरू होने वाले नए सत्र से लागू हो सकता है।


स्नातक स्तर पर लागू होने वाले न्यूनतम समान पाठ्यक्रम के संबंध में शासन से जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर ये पाठ्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं। शासन ने भाषाओं के पाठ्यक्रम में अनुवाद व स्क्रिप्ट राइटिंग समेत रोजगार से जुड़ी वाली लेखन की अन्य विधाओं को शामिल करने का सुझाव दिया है। इस तरह हिन्दी, संस्कृत और अंग्रेजी समेत अन्य भाषाओं के पाठ्यक्रम को अब ज्यादा उपयोगी बनाया जाएगा। तैयार कराए जा रहे पाठ्यक्रम पर फीडबैक लेकर उसमें बदलाव भी किया जाना है। यह जिम्मेदारी उच्च शिक्षा परिषद को दी गई है। परिषद ने ही पाठ्यक्रमों को अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर फीडबैक भी मांगे हैं।


नई नीति के तहत 12वीं के बाद उच्च शिक्षा के पहले वर्ष में प्रवेश लेने के इच्छुक छात्र को प्रथम वर्ष के लिए दो मुख्य विषयों के साथ एक संकाय का चुनाव करना होगा। दो प्रमुख विषयों के अलावा उन्हें प्रत्येक सेमेस्टर में किसी भी अन्य संकाय के एक और मुख्य विषय का चुनाव करना होगा। इसके साथ ही एक गौण विषय किसी अन्य संकाय से, एक व्यावसायिक पाठ्यक्रम (अपनी अभिरुचि के अनुसार) तथा एक अनिवार्य सह-शैक्षणिक पाठ्यक्रम का चयन करना होगा। शासन ने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन और पाठ्यक्रमों की पुनर्संरचना से संबंधित जानकारी भी शिक्षकों को भी देने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों को रेफ्रेशर कोर्स आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। मार्च के महीने में होने वाले रेफ्रेशर कोर्स में विश्वविद्यालयों के अलावा महाविद्यालयों के शिक्षक भी शामिल किए जाएंगे।

Tuesday, February 23, 2021

दिल्ली विवि में दाखिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट से करने की तैयारी

दिल्ली विवि में दाखिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट से करने की तैयारी


नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में अब अंडर ग्रेजुएट स्तर के सभी विषयों में दाखिले प्रवेश परीक्षा से करने की तैयारी की जा रही है। प्रवेश परीक्षा के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट (सीयूसेट) होगा। टेस्ट के अंक और बारहवीं के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार होगी।


अभी तक यूजी के दस कोर्सेज के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को वर्ष 2020 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने आयोजित किया था। नई शिक्षा नीति में देशभर में सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम में 2021 से एक ही संयुक्त प्रवेश परीक्षा से दाखिले करने के लिए कहा गया है। यह टेस्ट भी एनटीए ही आयोजित करेगी।


डीयू अधिकारियों के अनुसार दाखिले नई शिक्षा नीति के अनुसार ही होंगे। प्रशासन ने प्रवेश परीक्षा के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करनी शुरू की है। सीयूसेट के लिए डीयू का प्रस्ताव है कि इसमें बारहवीं के अंकों की वेटेज 50 फीसदी और बाकी 50 फीसदी वेटेज टेस्ट की होगी। विभिन्न बोर्ड से छात्र आने के कारण बारहवीं के अंकों को पर्सेटाइल के हिसाब से तय किया जा सकता है।

प्रशासन का मानना है कि अलग बोर्ड होने से छात्रों के अंकों में समरूपता नहीं होती है। इस टेस्ट के होने से छात्र को अलग अलग विश्वविद्यालय में दाखिला के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। दाखिले का आधार विश्वविद्यालय अपने अनुसार तय कर सकेंगे।

Monday, February 22, 2021

यूपी के हर मंडल को एक राज्य विश्वविद्यालय की सौगात, उच्च शिक्षा की सूरत बदलने की कोशिश

यूपी के हर मंडल को एक राज्य विश्वविद्यालय की सौगात, उच्च शिक्षा की सूरत बदलने की कोशिश


उच्च शिक्षा के स्तर को नई बुलंदी देने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूपी के हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इससे ग्रामीण परिवेश के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए एक जिले से दूसरे जिलों व राज्यों में पढ़ाई करने के लिए दौड़ नहीं लगाना पड़ेगी। वहीं, 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों की सूरत भी बदलने का काम योगी सरकार करने जा रही है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को प्रदेश सरकार के पांचवे बजट भाषण के दौरान हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय खोले जाने की बात कही। 


यूपी में अभी 16 राज्य विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें भी कई मंडलों में अभी राज्य विश्वविद्यालय नहीं है। ऐसे में ग्रामीण परिवेश के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। इससे छात्रों पर हॉस्टल व मेस फीस को बोझ बढ़ जाता है। अपने ही मंडल में विश्वविद्यालय खुल जाने के बाद छात्रों को पढ़ाई करने के लिए दूर दराज नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावा प्रदेश के 170 शासकीय डिग्री कॉलेजा की सूरत भी योगी सरकार ने बदलने की तैयारी कर ली है। 

UGC Dual Degree Rules: यूजीसी ने दोहरी डिग्री के नियम लेकर तैयार मसौदे को दिया अंतिम रूप

 UGC Dual Degree Rules: यूजीसी ने दोहरी डिग्री के नियम लेकर तैयार मसौदे को दिया अंतिम रूप


UGC New Rules on Dual Degree: भारतीय एवं विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही संयुक्त या दोहरी डिग्री की पेशकश कर सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इन शिक्षा कार्यक्रमों के नियमों से संबंधित मसौदे को अंतिम रूप दिया है। हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय मसौदे को लेकर मिलने वाली प्रतिक्रिया के बाद लिया जाएगा जिसे सार्वजनिक किया गया है।


इस मसौदे के मुताबिक, भारत के उच्च शिक्षण संस्थान क्रेडिट पहचान और हस्तांतरण के साथ-साथ दोहरी डिग्री प्रदान करने को लेकर समकक्ष विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ समझौता कर सकेंगे।


इसके मुताबिक, यह नियम ऑनलाइन, ओपन और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के शिक्षा कार्यक्रमों में लागू नहीं होंगे। नियमों के अनुसार, दोहरी डिग्री कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों संस्थानों की डिग्री संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद भारतीय एवं विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान अलग-अलग या संयुक्त डिग्री दे पाएंगे।

अब राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भी होगी आउटसोर्सिंग से नियुक्ति

अब राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भी होगी आउटसोर्सिंग से नियुक्ति

स्कूल-कॉलेजों में आउटसोर्सिंग से चपरासी रखने से आगे बढ़कर सरकार अब राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड के समकक्ष प्रवक्ता की नियुक्ति आउटसोर्सिंग से करेगी। शासन ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के निर्मित 49 राजकीय महाविद्यालयों में परास्नातक स्तर पर कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के विषयों के लिए प्रवक्ता के 98 पदों तथा 12 राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर वाणिज्य संकाय के विषयों के लिए प्रवक्ता के 24 पदों को पहली बार आउटसोर्सिंग से भरे जाने की मंजूरी दी है।


विशेष सचिव उच्च शिक्षा योगेश दत्त त्रिपाठी ने 12 फरवरी को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज को इस संबंध में आदेश भेजे हैं। ये पद तभी भरे जाएंगे जब राजकीय महाविद्यालय संचालित होने की स्थिति में होंगे। आउटसोर्सिंग से भरे जाने वाले पदों के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इन पदों को अस्थायी रूप से 28 फरवरी 2022 तक के लिए सृजित किया गया है।

क्या कहते हैं नेता?
शिक्षक विधायक और नेता शिक्षक दल विधान परिषद सुरेश कुमार त्रिपाठी ने कहा, 'आउटसोर्सिंग पर प्रवक्ता को रखना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। शिक्षा के लिए ये व्यवस्था ठीक नहीं है। शिक्षा को एक प्रकाश से निजी हाथों में सौंपने का उपक्रम शुरू हो गया है।'


चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में प्रमोशन के लिए परीक्षा 14 मार्च को
राजकीय महाविद्यालय, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पुस्तकालयाध्यक्ष, राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के लिए परीक्षा 14 मार्च को होगी। परीक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय पीजी कॉलेज नैनी में होगी।


Thursday, February 18, 2021

उच्च शिक्षा : एडेड कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति शीघ्र, कॅरियर एडवांसमेंट योजना के तहत होनी है प्रोन्नतियां

उच्च शिक्षा : एडेड कॉलेजों में शिक्षकों की प्रोन्नति शीघ्र, कॅरियर एडवांसमेंट योजना के तहत होनी है प्रोन्नतियां

❇️ उच्च शिक्षा निदेशक ने मूल्यांकन समिति के लिए नाम तय किया


प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की कॅरियर एडवांसमेंट योजना के तहत होने वाली प्रोन्नतियों को शासन ने हरी झंडी दे दी है। शासन के निर्देश पर उच्च शिक्षा निदेशक ने मूल्यांकन समिति के लिए जिलावार अपने नामिनी का नाम तय कर दिया है। मूल्यांकन समिति की संस्तुति पर ही शिक्षकों की प्रोन्नतियां होती हैं।


सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफसरों को स्टेज- 1 से स्टेज- 4 तक एवं सातवें वेतनमान वेतनमान के मैट्रिक लेवल तक प्रोन्नतियां होनी हैं। इसके तहत उन्हें वेतनमान में वृद्धि का लाभ मिलता है। इन्हीं चरणों की प्रोन्नति प्रक्रिया के बाद उन्हें एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर भी प्रोन्नति दी जाती है। यह प्रक्रिया समय से न हो पाने पर उनकी प्रोन्नति लटक जाती है। स्क्रीनिंग कम मूल्यांकन समिति विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी ) की गाइड लाइन के तहत एकेडमिक परफार्मेस इंडीकेटर्स (एपीआई) के आधार पर शिक्षक के कार्यों का मूल्यांकन करती है। यूजीसी ने प्रोन्नति के लिए एपीआई के अंक तय कर रखे हैं, जो अलग-अलग कार्यों के आधार पर मिलते हैं। इसमें शोध कार्यों, सेमिनारों में सहभागिता और प्रशासनिक दायित्वों पर भी अंक मिलते हैं।

उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज ने वर्ष 2019 में जारी की गई सूची में संशोधित करते हुए मूल्यांकन समिति के लिए अपने नामिनी का नाम घोषित किया है । यह सूची विवि के कार्यक्षेत्र में आने वाले जिलों के आधार पर बनाई गई है।

Wednesday, February 17, 2021

अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी

अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी



प्रयागराज। प्रदेश में अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती अटकी हुई है। शासन ने भर्ती पर रोक लगा रखी है। हालांकि कुछ कॉलेजों ने शासन से विशेष अनुमति लेकर अपने यहां भर्तियां की हैं, लेकिन ज्यादातर कॉलेजों में भर्तियां नहीं हुईं हैं। अब नए शिक्षा सेवा आयोग के गठन के बाद अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में भर्ती की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।


दरअसल, अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक अशासकीय विद्यालयों में भर्ती की प्रक्रिया प्रबंधन के जिम्मे होती थी। भर्ती में मनमानी और गड़बड़ी के अक्सर आरोप लगते रहते थे। ऐसे में शासन को भर्ती पर रोक लगानी पड़ी। तैयारी थी कि भर्ती संस्थाओं के माध्यम से ऐसे महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में भर्ती कराई जाएगी। फिलहाल, उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती के 2003 पदों पर प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए नोटिफिकेशन भी जारी किया जा चुका है, लेकिन इसमें अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालय शामिल नहीं हैं। वहीं, माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भी अशासकीय विद्यालयों में टीजीटी-पीजीटी भर्ती शुरू करने वाला हैं, लेकिन इसमें भी अल्पसंख्यक अशासकीय विद्यालय शामिल नहीं हैं।


प्रदेश में अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों की संख्या 21 है। इनमें से कुछ महाविद्यालयों की ओर से शासन में प्रार्थनापत्र देकर भर्ती की अनुमति मांगी गई थी। इन महाविद्यालयों में भर्ती भी हुई, लेकिन ज्यादातर अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों में अब भी असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर रोक लगी हुई है। सूत्रों का कहना है कि प्रदेश में नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन होने वाला है। आयोग के गठन के बाद अल्पसंख्यक अशासकीय महाविद्यालयों और अल्पसंख्यक माध्यमिक विद्यालयों में भर्ती शुरू होने के पूरे आसार हैं।

Saturday, February 13, 2021

यूपी : 15 फरवरी से पूर्ण रूप से संचालित होंगे सभी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शिक्षण संस्थान, शासन ने जारी किया आदेश

यूपी : 15 फरवरी से पूर्ण रूप से संचालित होंगे सभी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और शिक्षण संस्थान, शासन ने जारी किया आदेश


उच्च शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के अंतर्गत समस्त विश्वविद्यालय, महाविद्यालय, शिक्षण संस्थान 15 फरवरी से पूर्ण रूप से संचालित किए जाएंगे।

लखनऊ : करीब 11 माह बाद प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय, महाविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों में 15 फरवरी से पूरी क्षमता के साथ पूर्ण रूप से कक्षाओं का संचालन शुरू किया जाएगा।


उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अब्दुल समद ने शुक्रवार को यह आदेश जारी किया। किसी भी विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी में कोरोना के लक्षण दिखाई देने पर उन्हें प्राथमिक उपचार देते हुए घर भेज दिया जाएगा। 

उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों को एक-दूसरे से छह फीट की दूरी पर बैठाया जाएगा। सभी को मास्क पहनने के साथ सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा। एक-दूसरे के साथ भोजन या बर्तन साझा नहीं करने की सलाह दी जाएगी। बायोमीट्रिक उपस्थिति की जगह संपर्क रहित उपस्थिति की व्यवस्था की जाएगी।


छात्रावासों में भी कोविड प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। छात्रों को आवश्यक वस्तुएं परिसर में ही उपलब्ध कराई जाएंगी। गौरतलब है कि लॉकडाउन के बाद नवंबर से विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कक्षाएं 50% उपस्थिति के साथ संचालित हो रही थीं।

Tuesday, February 9, 2021

खुलेंगे देशभर के विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने दी हरी झंडी

खुलेंगे देशभर के विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने दी हरी झंडी



कोरोना वायरस के घटते प्रभाव को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने देशभर में बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कालेजों को जरूरी सुरक्षा इंतजामों के साथ फिर खोलने के लिए कहा है। हालांकि इन्हें कब से खोलना है, इसका फैसला उन्हें राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की सहमति के आधार पर करने को कहा है। यूजीसी ने फिलहाल इस संबंध में विश्वविद्यालयों और कालेजों को पूरी स्वतंत्रता दी है। साथ ही संस्थानों को खोलने के लिए पूर्व में जारी गाइडलाइन पर अमल सुनिश्चित करने को भी कहा है।


यूजीसी ने यह कदम बंद पड़े विश्वविद्यालयों और दूसरे उच्च शिक्षण संस्थानों को खोलने की छात्रों की मांगों को देखते हुए लिया है। हालांकि इसे लेकर यूजीसी पूरी तरह से सतर्क भी है क्योंकि अभी भी महाराष्ट्र और केरल जैसे राज्यों में कोरोना संक्रमण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। वहां हर दिन हजारों की संख्या में मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे में यूजीसी बिल्कुल भी जल्दबाजी में नहीं है और न ही संस्थानों पर इन्हें खोलने के लिए कोई दवाब ही बनाया है। संस्थानों को छात्रों को बुलाने से जुड़े निर्णय लेने का अधिकार दिया है। वहीं, यूजीसी की संस्थानों को खोलने से जुड़ी गाइडलाइन में इस बात पर जोर दिया गया है कि आफलाइन कक्षाएं जब शुरू हों तो छात्रों को एक सीट छोड़कर बैठाया जाएगा। साथ ही मास्क पहनने और हाथ साफ करने को अनिवार्य बनाया जाए।

Monday, February 8, 2021

नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द

नए शिक्षा सेवा आयोग का गठन जल्द


लखनऊ। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया है कि केंद्र के उच्च शिक्षा आयोग की तर्ज पर प्रदेश में नए शिक्षा सेवा आयोग का जल्द गठन किया जाएगा। जिसमें शिक्षकों से जुड़ी कई चीजें होंगी। इसमें शिक्षकों का समावेश होगा। ऑनलाइन पठन-पाठन की प्रक्रिया का समावेश हो। उनको और प्रोत्साहन देने का प्रयास करेंगे। उन्होंने यह जानकारी ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में आयोजित समारोह में शिक्षकों के बीच दी।

बतौर विशिष्ट अतिथि उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ई- कंटेंट और ऑनलाइन लर्निंग का स्कोप बढ़ा है। नई शिक्षा नीति में भी यूपी ने काफी कात किया है । टास्क फोर्स बनाकर हर महीने की 04 तारीख को बैठक करते हैं। स्टीयरिंग कमेटी का भी गठन किया गया है।

भाषा विवि भी काफी तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए-नए विषयों
पर शोध हो रहा है। सिर्फ भवन सुंदर बनाने से काम नहीं चलता। शिक्षक-छात्र भी अच्छे होने चाहिए। पठन-पाठन बेहतर हो। उन्होंने आश्वासन दिया कि प्रदेश सरकार विश्वविद्यालय की हर सकारात्मक पहल में उसके साथ है। विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश में भाषा के केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है और यदि विश्वविद्यालय इस ओर पहल करते हुए नए पाठ्यक्रम शुरू करता है तो नए पदों के लिए भी संस्तुति प्रदान करेंगी ।

राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू

राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ताओं की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू


प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता के खाली पड़े पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी प्राचार्यों से नौ फरवरी तक रिक्त पदों का ब्योरा तलब कर लिया है। पहली बार राजकीय महाविद्यालयों में रिक्त पदों पर ऑनलानन काउंसलिंग के माध्यम से चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति की जाएगी। 


राजकीय महाविद्यालयों में प्रवक्ता के पदों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग सीधी भर्ती करता है। आयोग ने पिछले दिनों कई विषयों में प्रवक्ता के पदों का अंतिम चयन परिणाम जारी किया है। अब इन्हें कॉलेज आवंटित किए जाने हैं और इसके बाद नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। आप यह खबर सेवायोजन डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं। यहपहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन माध्यम से होती थी, लेकिन ऑफलाइन काउंसलिंग में मनमानी, पक्षपात और गड़बड़ी के तमाम आरोप लगने के कारण शासन ने इस बार ऑनलाइन काउंसलिंग की व्यवस्था को लागू कर दिया है, ताकि कॉलेज आवंटन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय एनआईसी के माध्यम से नया सॉफ्टवेयर तैयार करवा रहा है। ऑनलाइन काउंसलिंग एनआईसी लखनऊ के माध्यम से होगी।

Thursday, February 4, 2021

UGC की सीधी निगरानी में रहेंगे यूपी के विश्वविद्यालय और कॉलेज

UGC की सीधी निगरानी में रहेंगे यूपी के विश्वविद्यालय और कॉलेज

उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालय और उनसे एफिलिएटेड कॉलेज भी अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सीधी निगरानी में रहेंगे। शासन ने यूजीसी की तरफ से बनवाए गए यूनिवर्सिटी एक्टिविटी मॉनीटरिंग पोर्टल (यूएएमपी) पर सभी मांगी गई सूचनाएं देने का निर्देश दिया है। 


यूजीसी ने हाल ही में देश के सभी केंद्रीय, राज्य व डीम्ड विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा अनुदानित उच्च शिक्षण संस्थानों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर शैक्षिक सत्र 2020-21 से संबंधित सभी इस पोर्टल पर उपलब्ध कराने को कहा है। यह पहल इसलिए भी की गई है कि क्योंकि यूजीसी शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति में एससी-एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस व दिव्यांगजनों के लिए तय किए गए आरक्षण नियमों का पालन सुनिश्चित कराना चाहता है। 

यूजीसी ने पोर्टल पर श्रेणीवार आरक्षण के अनुसार विश्वविद्यालय या महाविद्यालय में नियुक्त शिक्षकों व कर्मचारियों के बारे में सूचनाएं देने, वर्ष 2020-21 में आरक्षण नियमों के अनुसार पाठ्यक्रमों में लिए गए प्रवेश और हास्टलों में आवंटित कक्षों के बारे में सूचनाएं देनी हैं। यूजीसी ने कहा है कि यदि आरक्षित पदों पर नियुक्तियों में बैकलॉग है तो उस पर जल्द से जल्द नियुक्तियां की जाएं।

Wednesday, February 3, 2021

मई में होगी उच्च शिक्षण संस्थाओं में वार्षिक व सम सेमेस्टर परीक्षा

मई में होगी उच्च शिक्षण संस्थाओं में वार्षिक व सम सेमेस्टर परीक्षा

लखनऊ : प्रदेश में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों की वार्षिक एवं सम सेमेस्टर परीक्षाएं मई में होंगी। वार्षिक परीक्षाओं का परिणाम 30 जून तक जारी किया जाएगा। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग ने विभाग के निदेशक और निजी विवि के कुलपतियों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि शैक्षिक सत्र 2021 22 का संचालन 10 जुलाई से शुरू किया जाएगा।


परीक्षा की समय सारिणी

विषम सेमेस्टर प्रयोगात्मक परीक्षा फरवरी में होगी।

विषम सेमेस्टर की लिखित परीक्षा फरवरी-मार्च में।

सम सेमेस्टर कक्षाओं में शिक्षण कार्य की शुरुआत मार्च से होगी।

वार्षिक एवं सम सेमेस्टर परीक्षाओं की प्रयोगात्मक परीक्षा अप्रैल में।

वार्षिक एवं सम सेमेस्टर परीक्षाओं की लिखित परीक्षा मई में।



विश्वविद्यालयों में 10 जुलाई से शुरू होगा नया सत्र, उच्च शिक्षा विभाग ने जारी किया शैक्षिक कैलेंडर


लखनऊ : विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में नए शैक्षिक सत्र 2021-22 की शुरुआत 10 जुलाई से होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने मंगलवार को शैक्षिक कैलेंडर जारी कर दिया। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग की ओर से जारी इस शैक्षिक कैंलेंडर के साथ वर्तमान सत्र की प्रस्तावित परीक्षा का कार्यक्रम भी जारी कर दिया गया है।

वर्तमान शैक्षिक सत्र में मई 2021 में स्नातक की वार्षिक परीक्षाएं और इसके साथ जहां सेमेस्टर प्रणाली लागू है, उन संस्थानों में सम सेमेस्टर की परीक्षाएं शुरू होंगी। 30 जून, 2021 तक परिणाम हर हाल में घोषित किया जाएगा।

यही नहीं इससे पहले वर्तमान शैक्षिक सत्र में स्नातक व परास्नातक की विषम सेमेस्टर की प्रयोगात्मक परीक्षाएं इस महीने फरवरी में होंगी, जबकि लिखित परीक्षा फरवरी-मार्च 2021 में शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

Monday, February 1, 2021

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा

उच्च शिक्षण संस्थानों को वर्ष 2022 तक गुणवत्ता के मानकों पर उतरना होगा खरा।


नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की छिड़ी मुहिम में अब सभी का जोर शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती देने पर है। फिलहाल इसके लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्धारित मानकों के साथ अब समय की भी एक रेखा खींच दी है।


वर्ष 2022 तक सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को अब नैक के मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके तहत उन्हें नैक के कुल स्कोर में से आधे से ज्यादा स्कोर हासिल करना होगा। यूजीसी ने यह पहल ऐसे समय की है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की मुहिम तेजी से चल रही है। 


वैसे भी नीति के अमल के अगुवा उच्च शिक्षण संस्थान ही बने हुए है। ऐसे में यूजीसी का पूरा फोकस नीति के अमल के साथ गुणवत्ता के मोर्चे पर भी संस्थानों की मजबूती देने को लेकर है। यही वजह है कि यूजीसी ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से शैक्षणिक गुणवत्ता को समय रहते दुरुस्त करने को कहा है। साथ ही नैक रैकिंग के मानकों के आधार पर अपने परखने को कहा है।

Sunday, January 24, 2021

उच्च शिक्षा में यूजीसी की पहल, नए शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा प्रशिक्षण

उच्च शिक्षा में यूजीसी की पहल, नए शिक्षकों के लिए अनिवार्य होगा प्रशिक्षण।


विश्वविद्यालयों और कालेजों में नियुक्त होने वाले नए शिक्षकों के लिए अब शुरुआती प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। उच्च शिक्षण संस्थानों की शैक्षणिक गुणवत्ता बेहतर करने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यह अहम फैसला लिया है। नए शिक्षकों को संस्थान परिचय के साथ विषय वस्तु, छात्रों के साथ व्यवहार, पढ़ाने का तरीका और शोध से जुड़ाव आदि से रूबरू कराया जाएगा। इसके साथ संस्थान के मौजूदा शिक्षकों के लिए पहले से चल रहे रिफ्रेशर कोर्स भी जारी रखे जाएंगे।


यूजीसी ने शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े इस प्रोग्राम का मसौदा तैयार कर लिया है। इसे इंडक्शन एंड मेंटरशिप फार टीचर्स आफ हायर एजुकेशन नाम दिया गया है। विश्वविद्यालयों से इस पर छह फरवरी तक राय मांगी गई है। इसके बाद इससे जुड़ी गाइडलाइन को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। यूजीसी के मुताबिक यह प्रोग्राम इसी साल से देश भर के सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों में लागू कर दिया जाएगा। 


नए शिक्षकों के शुरुआती प्रशिक्षण की अवधि भी तय कर दी गई है। नियुक्ति के साल भर के भीतर ही उन्हें इस प्रशिक्षण प्रोग्राम में शामिल होगा। पूरा प्रोग्राम 160 से 175 घंटे की अवधि का होगा। फिलहाल इस प्रोग्राम में प्रशिक्षक के रूप में संस्थान के वरिष्ठ व दक्ष शिक्षकों के साथ सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षक भी शामिल किए जाएंगे। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक दक्षता को बेहतर बनाने के लिए भी एक प्रशिक्षण प्रोग्राम चलाने की योजना बनाई है।

Saturday, January 23, 2021

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की दिशा में UGC का एक और कदम, एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की होगी शुरुआत

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की दिशा में UGC का  एक और कदम, एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट की होगी शुरुआत



राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल की दिशा में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत उच्च शिक्षण संस्थानों में अब कामर्शियल बैंकों की तरह एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) नाम की एक नई स्कीम शुरू होगी। इसमें छात्रों की बीच में छोड़ी गई पढ़ाई अब बेकार नहीं जाएगी।



बल्कि जितने समय पढ़ाई की है, उसका पूरा क्रेडिट इस प्रस्तावित बैंक में जमा रहेगा। उसके आधार पर वह कभी भी फिर से पढ़ाई शुरू कर सकेगा या फिर अपने जमा क्रेडिट को भुना भी सकेगा। इस दौरान उसने यदि एक साल की पढ़ाई पूरी कर ली है तो उसे कोर्स का सर्टिफिकेट मिल जाएगा। वहीं दो साल की पढ़ाई पूरी कर ली है तो डिप्लोमा मिल जाएगा।

एबीसी नाम से प्रस्तावित इस स्कीम के तहत विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र किसी कोर्स को बीच में छोड़कर किसी नए कोर्स की पढ़ाई भी कर सकेंगे। इस बीच उस कोर्स का क्रेडिट बाद में मुख्य कोर्स के साथ जुड़ जाएगा। यानी किसी कोर्स के बीच में भी कोई नया कोर्स करने की आजादी मिलेगी। इसके साथ ही छात्र अपने जमा क्रेडिट के आधार पर किसी दूसरे विश्वविद्यालय में भी प्रवेश ले सकेंगे। इस दौरान यह जरूर देखा जाएगा कि छात्र नेशनल असेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) की रैंकिंग में यदि उच्च संस्थान से निम्न रैंकिंग वाले संस्थान में जाता है तो उसका क्रेडिट ट्रांसफर हो जाएगा, लेकिन अगर वह निम्न रैंकिंग से उच्च रैंकिंग वाले संस्थान में प्रवेश लेना चाहेगा तो क्रेडिट ट्रांसफर नहीं होगा। 


फिलहाल यूजीसी ने इसके रेगुलेशन का मसौदा तैयार किया है जिसे लेकर देशभर के सभी विश्वविद्यालयों से राय मांगी है। उन्हें पांच फरवरी तक इस पर अपनी राय देनी है। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने बताया कि इस स्कीम को नए शैक्षणिक सत्र से शुरू करने की योजना है। एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) को मंजूरी मिलने के बाद सभी विश्वविद्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा। ऐसे में विश्वविद्यालयों के किसी भी कोर्स में प्रवेश लेते ही छात्र का इस बैंक में अपने आप एक अकाउंट खुल जाएगा। इसके लिए उन्हें यूनिक आइडी भी मिलेगी जहां उनकी जीवनभर की पढ़ाई का ब्योरा मौजूद रहेगा। नौकरियों में दस्तावेजों के वेरीफिकेशन में भी इसकी मदद ली जा सकेगी। इसके साथ ही सभी कोर्सों के क्रेडिट का मानक भी तय होगा जिसे यूजीसी जल्द जारी करेगा। यूजीसी के प्रस्तावित ड्राफ्ट के मुताबिक, यह एकेडमिक बैंक भी कामर्शियल बैंकों की तरह काम करेगा जहां छात्रों की पढ़ाई का पूरा क्रेडिट जमा होगा। इसका वे कभी भी और कहीं भी इस्तेमाल कर सकेंगे।