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Thursday, May 13, 2021

शुल्क भरपाई के लिए नैक व एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता होगी खत्म, निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को मिलेगी बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने तैयार किया प्रस्ताव, शीघ्र शासन को भेजा जाएगा।

शुल्क भरपाई के लिए नैक व एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता होगी खत्म, निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को मिलेगी बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने तैयार किया प्रस्ताव, शीघ्र शासन को भेजा जाएगा।


लखनऊ : कोरोना संकट के दौर में निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में शुल्क भरपाई के लिए नैक और एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता से वर्ष 2024-25 तक छूट रहेगी। इसके लिए समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा।


छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में वर्ष 2020-21 से निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लिए क्रमशः नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड आफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रेडिंग अनिवार्य कर दी गई थी। स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि प्रदेश में 28 निजी विश्वविद्यालय हैं, इनमें से सिर्फ पांच के पास ही नैक की ग्रेडिंग है। वहीं, करीब दो हजार तकनीकी संस्थानों में बमुश्किल 25 ही एनबीए ग्रेडिंग प्राप्त हैं।

नतीजतन पिछले वित्त वर्ष में ग्रेडिंग हासिल न कर पाने वाले निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया था। इन विद्यार्थियों ने पॉलिटेक्निक, बीटेक, एमबीए, एमसीए और एमटेक आदि पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था निजी शिक्षण संस्थानों का तर्क है कि कोरोना वायरस के हमले के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में वे अपने संस्थानों का नैक और एनबीए की टीम से मुआयना कराने में असमर्थ हैं। केंद्र सरकार ने भी नैक और एनबीए की ग्रेडिंग वर्ष 2025 26 से ही अनिवार्य की है। यही वजह है कि समाज कल्याण निदेशालय ने भी वर्ष 2024-25 तक यूपी में निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को इस ग्रेडिंग से छूट देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। समाज कल्याण निदेशालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया यह प्रस्ताव शासन की सहमति से ही तैयार किया गया है, इसलिए मंजूरी मिलना पर है तय है।

Tuesday, May 11, 2021

उच्च शिक्षा : बिना परीक्षा पास किये प्रमोट किये जाने को लेकर UGC का खंडन जारी, जानें पूरी सच्चाई

उच्च शिक्षा : बिना परीक्षा पास किये प्रमोट किये जाने को लेकर UGC का खंडन जारी, जानें पूरी सच्चाई



यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया गया है और गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई है।


कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में भ्रामक सूचनाओं और फर्जी खबरों की रोकथाम और पड़ताल कोई आसान काम नहीं है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण जहां एक और हर रोज किसी न किसी परीक्षा के रद्द या स्थगित होने की घोषणाएं हो रही हैं। वहीं, इनके सबके बीच, कई शरारती तत्व और बेपरवाह मीडिया संस्थान बिना प्रमाणिकता के खबरों का प्रकाशन और प्रसारण कर देते हैं।


इससे कई विद्यार्थी और उम्मीदवार गुमराह हो जाते हैं। ऐसी ही एक खबर वायरल हो रही है कि यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर बिना परीक्षा के छात्रों को उत्तीर्ण करने और अगली कक्षा में प्रमोट करने संबंधी निर्देश जारी किए हैं। जिसका खंडन यूजीसी ने किया है। 


वायरल खबर में दावा किया जा रहा है कि यूजीसी ने विद्यार्थियों के अगली कक्षा में प्रमोशन की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके अनुसार अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य कक्षाओं के स्टूडेंट्स के प्रमोशन का निर्णय विश्वविद्यालय ही कर सकेंगे।


दावे के अनुसार, यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय अपने यहां की स्थानीय परिस्थितियों को देखकर परीक्षाएं कराने या विद्यार्थियों को सीधे प्रमोट करने का फैसला ले सकेंगे। अब तक जो स्थिति है, उसमें ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी को बगैर परीक्षा के ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है।


लेकिन बता दें कि यूजीसी ने ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया है और न ही कोई गाइडलाइन जारी की है।  
यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मंगलवार, 11 मई, 2021 को एक स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर स्पष्ट किया कि आयोग की ओर से ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया गया है और गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई है।


हालांकि, यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी ओर से 06 मई, 2021 को एक परामर्श जारी किया गया था। कोरोना संक्रमण की वर्तमान दर को मद्देनजर रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मई माह में होने वाली अपनी सभी ऑफलाइन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था।

साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखकर मई माह में कोई भी ऑफलाइन परीक्षा आयोजिन न करने को कहा था। पत्र में यह भी लिखा गया है कि जून में समीक्षा बैठक के बाद ही इन परीक्षाओं के संबंध में कोई फैसला किया जाए।

इसके साथ ही यूजीसी ने लिखा था, हालांकि, कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए केंद्र / राज्य सरकार, शिक्षा मंत्रालय, या यूजीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन के संबंध में उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।  

Friday, May 7, 2021

कोरोना इफेक्ट: मई माह में होने वाली सभी ऑफलाइन परीक्षाएं स्थगित, यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र

कोरोना इफेक्ट: मई माह में होने वाली सभी ऑफलाइन परीक्षाएं स्थगित, यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को लिखा पत्र


यूजीसी ने मई माह में होने वाली सभी ऑफलाइन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। अब जून में समीक्षा बैठक के बाद ही इन परीक्षाओं के संबंध में कोई फैसला लिया जाएगा।


कोरोना संक्रमण की वर्तमान दर को मद्देनजर रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मई माह में होने वाली सभी ऑफलाइन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया है। यूजीसी ने इस संबंध में सभी विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखकर मई माह में कोई भी ऑफलाइन परीक्षा आयोजिन न करने के निर्देश दिए हैं। पत्र में यह भी लिखा गया है कि जून में समीक्षा बैठक के बाद ही इन परीक्षाओं के संबंध में कोई फैसला लिया जाएगा।


यूजीसी ने लिखा, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि देश के कई हिस्से कोविड-19 की दूसरी लहर का सामना कर रहे हैं। ऐसे समय में सभी के स्वास्थ्य का ध्यान रखना और सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे महत्वपूर्ण है। देश भर के संस्थान पहले से ही इस दिशा में हर संभव उपाय कर रहे हैं।


देश में कोरोना संक्रमण के मौजूदा हालातों को मद्देनजर रखते हुए, कैंपस में शारीरिक दूरी बनाए रखने और छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों राहत प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है कि उच्च शिक्षा संस्थान, मई 2021 में आयोजित होने वाली सभी ऑफलाइन परीक्षाओं को स्थगित कर दें। 


हालांकि, कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए केंद्रीय/राज्य सरकार, शिक्षा मंत्रालय, या यूजीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशाें और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा संस्थान, ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन के संबंध में उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

इस संबंध में अगले महीने, उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा स्थिति की देखते हुए उचित निर्णय लिया जा सकता है।

Wednesday, May 5, 2021

यूपी : सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय बन्द, ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित

यूपी : सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय बन्द, ऑनलाइन पढ़ाई भी स्थगित


प्रयागराज: प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय पूरी तरह से बंद रहेंगे। कालेजों में छात्र-छात्रओं, शिक्षक व अधिकारियों की उपस्थिति नहीं होगी। यहां तक कि ऑनलाइन पढ़ाई भी 15 मई तक स्थगित रहेगी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शासन ने यह कदम उठाया है।



शासन ने 15 अप्रैल को जारी शासनादेश में निर्देश दिया था कि विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों की प्रायोगिक व अन्य परीक्षाएं 15 मई तक स्थगित रखी जाएं। साथ ही कालेज परिसर में शिक्षक व कर्मचारियों की सीमित संख्या में उपस्थिति हो। 


अब प्रदेश में उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालय व महाविद्यालयों को 15 मई तक पूरी तरह से बंद करने का आदेश दिया गया है। निर्देश है कि कालेज परिसर में किसी छात्र-छात्र, शिक्षक, कर्मचारी या फिर अधिकारी की उपस्थिति नहीं होगी। इस अवधि में ऑनलाइन कक्षाएं भी स्थगित रहेंगी। ज्ञात हो कि शासन ने इसके पहले बेसिक व माध्यमिक स्तर के सभी स्कूलों को बंद कर चुका है।

Monday, May 3, 2021

परीक्षाओं पर मांगी गई कार्ययोजना, उच्च शिक्षा निदेशालय ने जारी किया पत्र

परीक्षाओं पर मांगी गई कार्ययोजना, उच्च शिक्षा निदेशालय ने जारी किया पत्र


प्रयागराज कोविड के मद्देनजर राज्य विश्वविद्यालयों में भी परीक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं, लेकिन परीक्षाओं के आयोजन पर जल्द ही निर्णय लिया जाएगा। इसके लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों को पत्र जारी करते हुए परीक्षाओं को लेकन उनका अभिमत और कार्ययोजना मांगी है।


प्रो. राजेंद्र सिंह ( रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय में विषम सेमेस्टर की परीक्षाएं हो चुकी हैं, लेकिन कोविड संक्रमण तेजी से बढ़ने के कारण वार्षिक परीक्षाएं समय से शुरू नहीं कराई जा सकीं। ज्यादातर विश्वविद्यालयों की यही हालत है। विश्वविद्यालय प्रशासन के लिए यह तय करना मुश्किल हो गया है कि संक्रमण के इस दौर में परीक्षाएं कराएं या नहीं।


अगर परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं तो छात्र-छात्राओं पर संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा और परीक्षाओं में विलंब होता है तो अगला सत्र समय से शुरू कर पाना बड़ी चुनौती होगी।


फिलहाल राज्य विश्वविद्यालय प्रशासन को परीक्षाओं को लेकक अपना अभिमत उपलब्ध करना है । सहायक निदेशक उच्च शिक्षा संजय सिंह की ओर से प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र जारी कर कहा गया है कि शासन से प्राप्त निर्देशों के क्रम कोविड 19 के मद्देनजर विश्वविद्यालय वार्षिक परीक्षा / विभिन्न परीक्षाएं 2021 के संबंध में अपनी कार्ययोजना से अपने अभिमत सहित पूरी रिपोर्ट तत्काल शासन को उपलब्ध कराना सुनिश्चित करे।

यूपी : राजकीय महाविद्यालयों में टैबलेट के जरिये अब ई लर्निंग

यूपी : राजकीय महाविद्यालयों में टैबलेट के जरिये अब ई लर्निंग


उत्तर प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत छात्र- छात्राएं अब टैबलेट से पढ़ाई करेंगे। प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं को टैबलेट उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।


 मौजूदा सत्र में 100 छात्र- छात्राओं को टैबलेट उपलब्ध करा दिए गए है, जबकि अगले सत्र में इससे अधिक संख्या में छात्र- छात्राओं को टैबलेट दिए जाएंगे। छात्र-छात्राओं को टैबलेट मिलने से प्रदेश में डिजिटल शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की रुचि बढ़ेगी और इससे पढ़ाई भी आसान होगी।


 इसी के तहत प्रदेश के सात महत्वाकांक्षी जिलों में संचालित 18 राजकीय महाविद्यालयों में अध्ययनरत 100 छात्र-छात्राओं को ई.लर्निंग के माध्यम से ज्ञानार्जन करने के उद्देश्य से उच्च शिक्षा विभाग ने प्री-लोडेड टैबलेट्स उपलब्ध कराए हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार अगले शैक्षिक सत्र 2021-22 में प्रदेश के 120 राजकीय महाविद्यालयों के छात्र छात्राओं को प्री-लोडेड टैबलेट उपलब्ध कराने की योजना बना चुकी है।


 उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज के अनुसार इन प्री लोडेड टैबलेट में उपलब्ध कराए गए. ई-कंटेंट प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्वान एवं प्रबुद्ध शिक्षकों ने तैयार किए हैं।

Thursday, April 29, 2021

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी, UGC जारी करेगा गाइडलाइन

विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी, UGC जारी करेगा गाइडलाइन


विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी
Covid Seond Wave देश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है। जल्द ही इसके लिए यूजीसी गाइडलाइन जारी करेगा।


नई दिल्ली  ।  देश में कोरोना की दूसरी लहर को देखते हुए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की आगामी सभी प्रस्तावित परीक्षाओं और प्रवेश प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी हो रही है। जल्द ही इसके लिए यूजीसी गाइडलाइन जारी करेगा। इसके साथ पाठ्यक्रम में भी कटौती की जा सकती है। इसके अलावा देश के विश्वविद्यालयों के छात्रों और शिक्षकों के काफी संख्या में कोरोना से पीड़ित होने की खबरें आ रही हैं। इससे पहले कई राज्यों की परीक्षाएं रद कर दी गई हैं या निलंबित कर दी गई हैं। इसमें यूपी, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं। पीएम मोदी की अध्यक्षता में हुई बैठक में सीबीएसई की कक्षा 10 की परीक्षा रद कर दी गई और कक्षा 12 वीं की परीक्षा को रद कर दिया गया है।


उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम

उच्च शिक्षण संस्थानों ने अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करने का फैसला किया है। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को हासिल होगी, जो गुणवत्ता के एक तय मानक को पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुविधा को विस्तार मिलने से दाखिले से वंचित रहने के बाद भी छात्र अपनी पसंद के विषयों और पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस बीच एआइसीटीई ने बड़ी संख्या में अपने कोर्सों को ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ), कंप्यूटर एप्लीकेशन, डाटा साइंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेवल एंड टूरिज्म के साथ प्रबंधन और उससे जुड़े कोर्स शामिल हैं।



यूजीसी ने टीकाकरण से जुड़ी रणनीति पर शुरू किया काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने टीकाकरण से जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी अपने स्तर पर योजना तैयार करने को कहा गया है। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन के मुताबिक टीकाकरण के इससे पहले के चरणों में भी सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को तय उम्र के दायरे में आने वाले संस्थान के सभी लोगों का टीकाकरण कराने के लिए कहा गया था। साथ ही इसे लेकर आम लोगों को जागरूक करने को कहा था।
    

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 20 अप्रैल, 2021 को यूजीसी नेट परीक्षा,दिसंबर 2020 परीक्षा को स्थगित कर दिया था। IIT मद्रास और अन्ना विश्वविद्यालय ने अपनी सेमेस्टर परीक्षाओं और यहां तक कि ऑनलाइन परीक्षाओं को भी स्थगित कर दिया है। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आइसीएआइ) ने कोविड-19 की दूसरी लहर को देखते हुए मई में प्रस्तावित सीए फाइनल और सीए इंटरमीडिएट परीक्षा स्थगित कर दी है। आइसीएआइ की ओर से जारी महत्वपूर्ण सूचना में बताया गया है कि कोविड-19 की मौजूदा समस्या से छात्रों को बचाना बेहद जरूरी है। इसलिए 21 मई की सीए फाइनल और 22 मई की सीए इंटरमीडिएट की परीक्षा स्थगित की जा रही है।


बुधवार को स्वास्थ्य मंत्रालय के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटों में 3,60,960 नए मामले आए। पिछले एक सप्ताह से तीन लाख से ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। इस दौरान 3,293 लोगों की मौत से देश में कोरोना से अब तक हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर दो लाख से अधिक हो गया। ऐसा पहली बार है जब कोरोना से इतनी तादाद में मौतें हुईं और नए मामले सामने आए।

Sunday, April 25, 2021

उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय


उच्च शिक्षा के ज्यादातर कोर्स होंगे ऑनलाइन, यूजीसी ने योजना पर शुरू किया काम, मानक तय


कोरोना संकट को देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे।
कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थान अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेंगे। यूजीसी ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।


नई दिल्ली । कोरोना संकट को लंबा खिंचता देख उच्च शिक्षण संस्थानों ने भी नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। इसके तहत अब वह अपने ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को आनलाइन या फिर दूरस्थ शिक्षा के माध्यमों से संचालित करेगे। हालांकि यह सुविधा सिर्फ उन्हीं उच्च शिक्षण संस्थानों को हासिल होगी, जो गुणवत्ता के एक तय मानक को पूरा करेंगे। माना जा रहा है कि इस सुविधा को विस्तार मिलने से दाखिले से वंचित रहने के बाद भी छात्र अपनी पसंद के विषयों और पाठ्यक्रमों में पढ़ाई कर सकेंगे।

योजना पर तेजी से काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने फिलहाल इस योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है। इस बीच एआइसीटीई ने बड़ी संख्या में अपने कोर्सों को ऑनलाइन और दूरस्थ शिक्षा के जरिए पढ़ाने की भी मंजूरी दी है। इनमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ), कंप्यूटर एप्लीकेशन, डाटा साइंस, लॉजिस्टिक्स, ट्रेवल एंड टूरिज्म के साथ प्रबंधन और उससे जुड़े कोर्स शामिल हैं।


एआइसीटीई ने छूट दी

खास बात है कि अब तक तकनीकी कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से पढ़ाने की अनुमति कुछ ही संस्थानों को मिली थी लेकिन इस पहल के बाद एआइसीटीई ने गुणवत्ता के तय मानकों को हासिल करने वाले सभी संस्थानों को ऐसे कोर्सों को ऑनलाइन या दूरस्थ माध्यमों से संचालित करने की छूट दे दी है। इसके लिए अब उन्हें अनुमति भी लेनी होगी।


यूजीसी ने भी तेज की पहल

वहीं यूजीसी ने भी इसे लेकर अपनी पहल तेज की है। साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों से गुणवत्ता के मानकों के आधार पर ऑनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से कोर्सों को शुरू करने की अनुमति दी है। इस बीच संस्थानों के लिए गुणवत्ता के जो मानक तय किए गए है, वह राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) और एनबीए (नेशनल बोर्ड आफ एक्रेडेशन) की रैकिंग पर आधारित है।


कोरोना संकट के बीच पहल

उच्च शिक्षण संस्थानों के ज्यादा से ज्यादा कोर्सों को ऑनलाइन करने की यह पहल उस समय शुरू हुई है, जब कोरोना के चलते संस्थानों में दाखिले से लेकर पढ़ाई, परीक्षा आदि का पूरा तंत्र लड़खड़ाया हुआ है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। ऐसे में कोई भी छात्र अपनी मनचाही पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके तहत उसे ऑनलाइन या दूरस्थ शिक्षा जैसे विकल्प भी मुहैया कराए जा रहे हैं। कोरोना संकट को देखते हुए वैसे भी सरकार का पूरा जोर ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर है। 

Saturday, April 24, 2021

कोरोना टीकाकरण की नई मुहिम के अगुवा बनेंगे विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने बनाई रणनीति


कोरोना टीकाकरण की नई मुहिम के अगुवा बनेंगे विश्वविद्यालय और कालेज, यूजीसी ने बनाई रणनीति


इनमें से भी बड़ी संख्या ऐसे आयु वर्ग की है, जो विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यनरत है, यूजीसी ने इससे जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी योजना तैयार करने को कहा गया है। इसका स्वरूप क्या होगा यह टीकाकरण के नए चरण को लेकर सरकार की योजना सामने आने के बाद अगले हफ्ते तक साफ हो सकेगा।


नई दिल्ली ।  देश भर में एक मई से कोरोना टीकाकरण का एक नया चरण शुरू होने जा रहा है। इसमें 45 साल की उम्र से नीचे और 18 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों को भी टीका लगाया जाएगा। उम्मीद है कि टीकाकरण के इस नई मुहिम से कोरोना संक्रमण की रफ्तार थामने में मदद मिलेगी। सरकार के फैसले से टीकाकरण के दायरे में देश की एक बड़ी आबादी आ गई है। इनमें से भी बड़ी संख्या ऐसे आयु वर्ग की है, जो मौजूदा समय में विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में अध्यनरत है। जिन्हें इस चरण में प्राथमिकता पर टीका लगाने की तैयारी है। 

यूजीसी ने इससे जुड़ी रणनीति पर शुरू किया काम

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इससे जुड़ी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से भी अपने स्तर पर योजना तैयार करने को कहा गया है। इसका स्वरूप क्या होगा, यह टीकाकरण के नए चरण को लेकर सरकार की योजना सामने आने के बाद अगले हफ्ते तक साफ हो सकेगा। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन में पढ़ रहे हैं। यूजीसी के सचिव रजनीश जैन के मुताबिक टीकाकरण के इससे पहले के चरणों में भी सभी विश्वविद्यालयों और कालेजों को तय उम्र के दायरे में आने वाले संस्थान के सभी लोगों का टीकाकरण कराने के लिए कहा गया था। साथ ही इसे लेकर आम लोगों को जागरूक करने को कहा था। 


उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, केरल, असम सहित कई राज्यों ने 18 से 45 साल की आयु वर्ग को मुफ्त में टीका उपलब्ध कराने का एलान किया है। माना जा रहा है कि यदि टीकाकरण की इस मुहिम में मई और जून तक उच्च शिक्षण संस्थानों से जुड़े ज्यादातर छात्रों का टीकाकरण हो जाता है, तो जुलाई से संस्थानों को सुचारु रूप से शुरू किया जा सकता है।


गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय और करीब पचास हजार कालेज हैं। इनमें करीब पचास केंद्रीय विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त करीब डेढ़ सौ दूसरे उच्च शिक्षण संस्थान हैं।

Thursday, April 15, 2021

आदेश जारी : यूपी में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थान की परीक्षाएं स्थगित, शिक्षण कार्य होगा ऑनलाइन

UP University Exam 2021 : यूपी के सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं 15 मई तक टलीं, आदेश जारी

आदेश जारी : यूपी में विश्वविद्यालय, महाविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थान की परीक्षाएं स्थगित, शिक्षण कार्य होगा ऑनलाइन


उत्तर प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएं 15 मई तक स्थगित कर दीं गई हैं। बरेली के एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह के ऑनलाइन संबोधन के दौरान गुरुवार को डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने यह भी कहा कि यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को भी 20 मई तक के लिए स्थगित किया जा रहा है। प्रदेश में अब कक्षा एक से लेकर 12 तक के सभी स्कूल व कॉलेज 15 मई तक बंद रहेंगे। 


मेरठ में मेडिकल और सेमेस्टर की परीक्षा भी स्थगित
कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने अब सेमेस्टर और मेडिकल की परीक्षा भी स्थगित कर दी है। अगले आदेश तक अब कोई भी परीक्षा नहीं होगी। इससे पहले वार्षिक मुख्य परीक्षाएं स्थगित की जा चुकी हैं। विश्वविद्यालय ने गुरुवार को यह निर्णय लिया। ये परीक्षाएं 16 अप्रैल से होने वाली थीं। इनमें एमबीबीएस, बीबीए, बीडीएस जैसे कोर्स के छात्र हैं। अब दोबारा से स्थिति की समीक्षा करने के बाद परीक्षा का नया कार्यक्रम जारी किया जाएगा।


उत्तर प्रदेश में बुधवार को कोरोना के 20,510 नए मामले सामने आए जिसमें अकेले लखनऊ में 5,433 संक्रमण के केस आए। राज्य में अभी भी 1,11,835 एक्टिव केस हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कोरोना पॉजिटिव हो गए हैं। इससे पहले मुख्यमंत्री ऑफिस के कुछ अधिकारी भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए।


आपको बता दें कि यूपी बोर्ड की परीक्षाएं दूसरी बार टालीं गई हैं। प्रदेश में इससे पहले पंचायत चुनाव के कारण यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को टाला गया था। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं का आयोजन पहले 24 अप्रैल से होना था। इसके बाद पंचायत चुनाव के कारण एग्जाम टाइम टेबल आगे बढ़ाया गया था और परीक्षाएं 8 मई से निर्धारित की गई थीं। अब कोरोना वायरस संक्रमण के कारण इसे फिर से टालना पड़ा है।

Friday, April 2, 2021

कोविड के बढ़ते संक्रमण के दृष्टिगत विश्वविद्यालय / महाविद्यालय / उच्च शिक्षण संस्थान संचालित किए जाने संबंधी दिशा निर्देश जारी

कोविड के बढ़ते संक्रमण के दृष्टिगत विश्वविद्यालय / महाविद्यालय / उच्च शिक्षण संस्थान संचालित किए जाने संबंधी दिशा निर्देश जारी।

विश्वविद्यालय सहित सभी शिक्षण संस्थाओं में सिर्फ ऑनलाइन कक्षाएं


कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए शासन ने  गाइड लाइन जारी की। इसके तहत विश्वविद्यालय सहित सभी महाविद्यालय, स्कूलों, कोचिंग संस्थाओं और प्रशिक्षण संस्थाओं में शनिवार से केवल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा। शासन-प्रशासन के अगले आदेश तक सभी शिक्षण संस्थाओं में ऑनलाइन व्यवस्था लागू रहेगी।


शासन ने गुरुवार को यह आदेश दिया था कि जिले में कोरोना संक्रमण को देखते हुए विश्वविद्यालय सहित महाविद्यालयों में भी कक्षाओं के संचालन के बारे में जिलाधिकारी निर्णय ले सकते हैं। 

 तय हुआ कि सभी शिक्षण संस्थाओं में अगले आदेश तक केवल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन कराया जाएगा। इसमें विश्वविद्यालय से लेकर प्राथमिक विद्यालय, कोचिंग व प्रशिक्षण संस्थान सभी शामिल हैं। 


जहां पर परीक्षाओं का संचालन हो रहा है, प्रायोगिक परीक्षाएं हो रही हैं, वहां पर छात्र-छात्राओं और स्टाफ के बीच छह फीट की दूरी, मास्क, सेनिटाइजेशन आदि का प्रबंधन किया जाए। किसी भी दशा में कोरोना महामारी को लेकर जारी की गई गाइड लाइन का उल्लंघन न हो। 

Friday, March 26, 2021

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 120 राजकीय महाविद्यालयों में दिए जाएंगे टैबलेट

डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 120 राजकीय महाविद्यालयों में दिए जाएंगे टैबलेट

सात महत्वाकांक्षी जिलों के 18 राजकीय  महाविद्यालयों में उपलब्ध कराए प्री-लोडेड टैब

लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के सात महत्वाकांक्षी जिलों के 18 राजकीय महाविद्यालयों में 160 प्री-लोडेड टैबलेट उपलब्ध कराए गए हैं। विभाग के सात महत्वाकांक्षी निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज  ने बताया कि आगामी शैक्षिक सत्र 2021- 22 में 120 राजकीय महाविद्यालयों में प्री-लोडेड टैबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। 


उन्होंने बताया कि टैबलेट में विभिन्न विषयों के शिक्षकों की ओर से तैयार पाठ्यसामग्री अपलोड की गई है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।  प्री-लोडेड टैब के जरिये विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई के साथ विभिन्न एप, ऑनलाइन बुक्स, ई लाइब्रेरी, वीडियो, फोटोग्राफ, वाइस रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रख सकते हैं।

Wednesday, March 24, 2021

विश्विद्यालयों व कालेजों में 31 मार्च तक ऑनलाइन कक्षाएं ही चलेंगी

विश्विद्यालयों व कालेजों में 31 मार्च तक ऑनलाइन कक्षाएं ही चलेंगी


लखनऊ: प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में 25 मार्च से 31 मार्च तक आनलाइन कक्षाएं ही चलेंगी। उच्च शिक्षण संस्थानों में फिजिकल क्लासेज पूरी तरह बंद रहेंगी। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग की ओर से मंगलवार को आदेश जारी कर दिए गए। 


होली की छुट्टी संस्थानों में अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार ही होंगी। रजिस्टर पर हाजिरी ली जाएगी। विश्वविद्यालय व कालेजों में प्रत्येक पाली की परीक्षा से पहले संस्थान को पूरी तरह सैनिटाइज कराया जाएगा। विद्यार्थी अनिवार्य रूप से मास्क पहनकर आएंगे और दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती से पालन कराया जाएगा। परिसर में परीक्षा देने आ रहे विद्यार्थियों की गेट पर स्क्रीनिंग की जाएगी।

Tuesday, March 23, 2021

नई शिक्षा नीति आई पर शिक्षक के पद नहीं जा रहे भरे

नई शिक्षा नीति आई पर शिक्षक के पद नहीं जा रहे भरे


राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों को नालंदा और तक्षशिला जैसी प्रतिष्ठा दिलाने की बातें तो हो रही है, लेकिन जब उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाने के लिए शिक्षक ही नहीं होंगे, तो यह मुकाम कैसे हासिल हो पाएगा। स्थिति कुछ ऐसी ही है। देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं है। यह कमी भी कोई सौ-दो सौ शिक्षकों की नहीं है, बल्कि अकेले केंद्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों में ही 14 हजार से ज्यादा पद रिक्त हैं। इनमें सबसे खराब स्थिति केंद्रीय विश्वविद्यालयों की है, जहां फिलहाल शिक्षकों के छह हजार से ज्यादा पद खाली हैं। आइआइटी, एनआइटी और आइआइएम का भी कुछ ऐसा ही हाल है।


उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर यह सवाल उस समय उठ रहे है, जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति को सरकार तेजी से लागू करने में जुटी है। खासबात यह है कि नीति में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर चिंता जताई गई है, साथ ही कहा गया है कि जब तक शिक्षकों के खाली पदों को भरा नहीं जाएगा, तब तक नीति का फायदा मिल पाना मुश्किल है। यही वजह है कि सरकार से उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के खाली पदों को लेकर सवाल किए जाने लगे हैं। हाल ही में संसद में भी इसे लेकर सवाल पूछे गए हैं। इस बीच सरकार ने जो जानकारी दी है, उसके मुताबिक केंद्रीय स्तर के उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों की कुल संख्या 42 हजार है, इनमें से 14,268 पद खाली हैं। इन संस्थानों में केंद्रीय विश्वविद्यालय,आइआइटी, टिपलआइटी, एनआइटी, आइआइएम जैसे संस्थान शामिल हैं।


शिक्षा मंत्रलय की ओर से संसद को दी गई जानकारी में बताया गया है कि मौजूदा समय में सभी 42 केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 18 हजार हैं, इनमें से 6,074 पद खाली हैं। आइआइटी में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पद 10 हजार हैं, इनमें से 3,876 पद खाली हैं। टिपलआइटी में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 919 हैं, जबकि इनमें से 461 पद खाली हैं।

Monday, March 22, 2021

इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिये मैथ्स, फिजिक्स और केमेस्ट्री बने रहेंगे जरूरी सब्जेक्ट, AICTE ने किया साफ


इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिये मैथ्स, फिजिक्स और केमेस्ट्री बने रहेंगे जरूरी सब्जेक्ट, AICTE ने किया साफ


अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे ने स्पष्ट किया कि इंजीनियरिंग में दाखिले के लिये गणित, भौतिकी और रसायन शास्त्र महत्वपूर्ण बने रहेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि कम्प्यूटर साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी जैसे सहयोगी विषय लेने वाले छात्रों को इंजीनियरिंग में नामांकन की अनुमति देने के मकसद से दिशानिर्देशों में विकल्प दिया गया है। अनिल सहस्त्रबुद्धे ने बताया, '' हमने ऐसा कभी नहीं कहा कि इंजीनियरिंग में दाखिले के लिये गणित, भौतिकी, रसायन नहीं चाहिए। यह जरूरी विषय हैं। उन्होंने कहा कि भौतिकी, गणित के बिना कोई भी इंजीनियरिंग की शिक्षा पूरी कर ही नहीं सकता।


एआईसीटीई के अध्यक्ष ने कहा कि इंजीनियरिंग में दाखिले के लिये गणित, भौतिकी और रसायन शास्त्र महत्वपूर्ण बने रहेंगे।सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप, छात्रों में बहु-विषयक दृष्टिकोण को विकसित करने की जरूरत महसूस की गई जिसकी वजह से इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में प्रवेश से संबंधित विषयों के बारे में स्थिति स्पष्ट करना जरूरी था।
उन्होंने कहा कि विस्तृत विचार-विमर्श के बाद परिषद ने अनुमोदन प्रक्रिया में कुछ बदलाव किए जो वास्तव में इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के पाठ्यक्रमों में प्रवेश के इच्छुक छात्रों को उनकी पसंद के अनुरूप विकल्प प्रदान करते हैं।


गौरतलब है कि हाल ही में एआईसीटीई ने स्नातक स्तर पर इंजीनियरिंग संकाय में दाखिले के लिये प्रवेश स्तर के दिशानिर्देशों में बदलाव करते हुए 11वीं एवं 12वीं कक्षा में गणित एवं भौतिकी नहीं पढ़ने वाले छात्रों को नामांकन के लिये पात्र बताया था । हालांकि, इससे पहले इंजीनियरिंग में दाखिले के लिये छात्रों को हाई स्कूल के स्तर पर भौतिकी, गणित की पढ़ाई करना जरूरी था। अनिल सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि ये बदलाव किसी राज्य या इंजीनीयरिंग कालेजों के लिये अनिवार्य नहीं हैं और न ही जेईई या सीईटी जैसी परीक्षाओं के संदर्भ में कोई बाध्यता हैं।
उन्होंने कहा, '' पहले की तरह ही गणित, भौतिकी, रयायन शास्त्र विषय में जेईई, सीईटी जैसी प्रवेश परीक्षा जारी रहेगी ।


एआईसीटीई के अध्यक्ष ने कहा '' बहरहाल, नयी राष्ट्रीय शिक्षा नीति के बाद जब 10+2 की प्रणाली खत्म्र होगी, 5+3+3+4 का प्रारूप होगा और कला, विज्ञान तथा कामर्स संकाय वर्तमान स्वरूप में नहीं रहेंगे, तब छात्रों के बीच बहु-विषयक दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए एक व्यवस्था के संदर्भ में यह बात कही गई है।


उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर साइंस, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी जैसे सहयोगी विषय लेने वाले छात्रों को इंजीनियरिंग में नामांकन की अनुमति देने के मकसद से दिशानिर्देशों में विकल्प दिया गया है। दिशानिर्देशों को लेकर भ्रम के बारे में पूछे जाने पर सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि अगर किसी छात्र का स्कूल के स्तर पर कोई कोर्स छूट गया है तब इसे पूरा करने के लिये कालेज पूरक कोर्स या ब्रिज कोर्स पेश कर सकते हैं।

Friday, March 19, 2021

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एक ही कामन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये छात्रों को मिलेगा दाखिला


केंद्रीय विश्वविद्यालयों में एक ही कामन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये छात्रों को मिलेगा दाखिला, यूजीसी से मांगी रिपोर्ट


केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में दाखिले
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए कामन एंट्रेंस टेस्ट कराने पर अड़ा हुआ है। आने वाले नए शैक्षणिक सत्र से केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए छात्रों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।



नई दिल्ली । विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए कामन एंट्रेंस टेस्ट कराने पर अड़ा हुआ है। लिहाजा, कोई बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो आने वाले नए शैक्षणिक सत्र से केंद्रीय विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में दाखिले के लिए छात्रों को अलग-अलग विश्वविद्यालयों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। एक ही कामन एंट्रेंस टेस्ट के जरिये इन विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिल सकेगा। इससे जहां छात्रों के समय की बचत होगी, वहीं अलग-अलग विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए आवेदन करने, प्रवेश परीक्षाओं में शामिल होने के झंझट और उससे पड़ने वाले एक बड़े आर्थिक बोझ से भी उन्हें मुक्ति मिलेगी।


आगामी शैक्षणिक सत्र से सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में शुरू करने की तैयारी

वैसे तो इस कामन एंट्रेंस टेस्ट में देश के सभी विश्वविद्यालयों को शामिल करने की योजना है, लेकिन इसे अभी सिर्फ सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक ही सीमित करने की तैयारी है। हालांकि इसके लिए अभी भी कई केंद्रीय विश्वविद्यालय पूरी तरह तैयार नहीं हैं, लेकिन यूजीसी छात्रों के हितों को देखते हुए कामन एंट्रेंस टेस्ट कराने पर अड़ा हुआ है। हाल में केंद्रीय विश्वविद्यालयों से इस मुद्दे पर हुई चर्चा में भी यूजीसी ने इसे साफ कर दिया है। साथ ही कामन एंट्रेंस टेस्ट के लिए सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से संचालित कोर्सों और सीटों का ब्योरा मांगा है।


इस बीच, केंद्रीय विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी तैयारी भी शुरू हो गई है। कामन एंट्रेंस टेस्ट कराने का जिम्मा नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को सौंपा गया है जो इस काम में तेजी से जुटी है। फिलहाल एनटीए के पास के ही जेईई मेंस, नीट सहित सभी बड़ी परीक्षाओं को कराने की जिम्मेदारी है। मौजूदा समय में देश में एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय हैं जिनमें 40 से ज्यादा केंद्रीय विश्वविद्यालय हैं।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति में की गई है सिफारिश

विश्वविद्यालयों की स्नातक कक्षाओं में प्रवेश के लिए कामन एंट्रेंस टेस्ट कराने की यह सिफारिश राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी गई है। इनमें सभी केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों को इसमें शामिल करने की सिफारिश की गई है। यूजीसी से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो नीति की सिफारिशों के अमल का काम तेजी से चल रहा है, ऐसे में इस पहल को भी शुरू करने की तैयारी है। आने वाले सत्र में स्नातक कक्षाओं में दाखिला कामन एंट्रेंस टेस्ट से ही होगा।

उच्च शिक्षा निदेशालय : फाइलें लंबित रखने वाले कर्मी व अधिकारी निशाने पर, कार्यप्रणाली में सुधार हेतु व्यापक बदलाव



प्रयागराज : त्वरित व निष्पक्ष कार्यप्रणाली के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय में कुछ महीनों में व्यापक बदलाव किए गए हैं। निदेशालय में विभागवार कार्यो की समीक्षा होगी। हर विभाग में फाइलों की स्थिति यानी निस्तारित करने की रफ्तार के जरिये अधिकारियों व कर्मचारियों के कार्यो की समीक्षा होगी। कारण बताओ नोटिस देकर विभागीय कार्रवाई होगी।


 शासन ने जांच कराकर वर्षो से एक पटल पर जमे अधिकारियों व कर्मियों को स्थानांतरित कर नई जिम्मेदारी सौंपी गई। शिक्षकों व कर्मचारियों के निदेशालय में सीधे पटल पर आकर काम कराने पर रोक लगा दी। उन्हें ई-मेल के जरिये शिकायत करने की सुविधा दी है। शिकायतकर्ता के कार्य को निस्तारित करके उन्हें ई-मेल के जरिये सूचित करने की व्यवस्था भी बनी है। 


उच्च शिक्षा निदेशक डा.अमित भारद्वाज ने कहा कि शासन की मंशा कार्यो के भ्रष्टाचार मुक्त-त्वरित निस्तारण करने की है। इसी के मुताबिक निदेशालय में यह व्यवस्था लागू की गई है।

Thursday, March 18, 2021

UGC : एमफिल और पीएचडी थिसिस (शोध प्रबंध) जमा करने के लिए आखिरी तारीख फिर से बढ़ी

UGC MPhiI and PhD : यूजीसी ने एमफिल और पीएचडी स्टूडेंट्स के लिए जारी किया एक अहम नोटिस

UGC : एमफिल और पीएचडी  थिसिस (शोध प्रबंध) जमा करने के लिए आखिरी तारीख फिर से बढ़ी


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एमफिल और पीएचडी के स्टूडेंट्स के लिए एक अहम नोटिस जारी किया है। नोटिस में लिखा गया है कि एमफिल और पीएचडी  थिसिस (शोध प्रबंध) जमा करने के लिए आखिरी तारीख को फिर से बढ़ा दिया है। एमफिल और पीएचडी के स्टूडेंट्स अब 31 दिसंबर, 2021 अपने शोध और थिसिस जमा कर सकते हैं। इस संबंध में यूजीसी की आधिकारिक वेबसाइट, ugc.ac.in पर जाकर नोटिसको पढ़ा जा सकता है।


नोटिस में कहा गया है कि रिसर्च स्कॉलर्स के हितों को ध्यान में रखते हुए, एमफिल / पीएचडी स्टूडेंट्स को, जिन्हें 30 जून, 2021 तक तक अपनी थीसिस जमा करनी थी, उनके लिए छह महीने (31 दिसंबर, 2021 तक) के लिए तारीख को बढ़ा दिया गया है। वहीं, दो कॉन्फेरेंस में एविडेंस ऑफ पब्लिकेशन और प्रेजेंटेशन प्रस्तुत करने के लिए छह महीने का एक्सटेंशन दिया जा सकता है। हालांकि, फेलोशिप कार्यकाल केवल 5 वर्ष तक ही रहेगा।

Wednesday, March 10, 2021

उच्‍च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, खत्‍म हो सकती है UGC जैसी संस्‍था

उच्‍च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, खत्‍म हो सकती है यूजीसी जैसी संस्‍था

सारी उच्च शिक्षा अब राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा आयोग (HECI) के दायरे में।


अभी उच्च शिक्षा में करीब 14 अलग-अलग नियामक काम कर रहे हैं। उच्च शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने की मुहिम में फिलहाल इस क्षेत्र में मौजूद दर्जनभर से ज्यादा नियामक एक बड़ी बाधा माने जा रहे हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इससे बाहर निकलने की सिफारिश की गई है।


नई दिल्ली। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में उच्च शिक्षण संस्थान फिलहाल जिस तरह से अगुआ बने हुए हैं, उनमें उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए प्रस्तावित नियामक जल्द ही अस्तित्व में आ सकता है। वैसे भी नीति के अमल में जुटा शिक्षा मंत्रालय इस काम में अब देरी के मूड में नहीं है। यही वजह है कि मंत्रालय में इसे लेकर इन दिनों तेजी से काम चल रहा है। हालांकि इसे लेकर जो बड़े बदलाव होंगे, उनमें यूजीसी जैसी संस्था समाप्त हो जाएगी। वहीं मेडिकल और विधिक शिक्षा को छोड़कर सारी उच्च शिक्षा अब राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) के दायरे में होगी। 

नई शिक्षा नीति के अमल में तेजी से जुटी सरकार अब और देरी के मूड में नहीं 

अभी उच्च शिक्षा में करीब 14 अलग-अलग नियामक काम कर रहे हैं। उच्च शिक्षा को विश्वस्तरीय बनाने की मुहिम में फिलहाल इस क्षेत्र में मौजूद दर्जनभर से ज्यादा नियामक एक बड़ी बाधा माने जा रहे हैं। यही वजह है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी इससे बाहर निकलने की सिफारिश की गई है। इस दौरान पूरी उच्च शिक्षा को एक ही नियामक के दायरे में रखने के लिए भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (एचईसीआइ)के गठन का प्रस्ताव है। हालांकि नीति को मंजूरी मिलने से पहले ही सरकार ने भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग के गठन की तैयारी कर ली थी। इसे लेकर विधेयक का मसौदा भी तैयार हो गया था, लेकिन यह संसद में पेश नहीं हो पाया था। अब सरकार इस मसौदे को नए रूप में लाने की तैयारी में जुटी है। 


मेडिकल और विधिक शिक्षा को छोड़कर पूरी उच्च शिक्षा होगी एक कमीशन के दायरे में

माना जा रहा है कि महीने भर के अंदर ही यह नियामक सामने आ सकता है। वैसे भी नीति में उच्च शिक्षा के लिए इस शीर्ष नियामक को वर्ष 2020 में ही गठित करने का लक्ष्य रखा गया था, जो कोरोना संकट के चलते आगे बढ़ गया है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक उच्च शिक्षा को लेकर इस नए नियामक का स्वरूप नीति के अनुरूप ही होगा। इसकी शीर्ष संस्था भारतीय उच्चतर शिक्षा आयोग (एचईसीआइ) होगा। इसके प्रमुख के तौर पर शिक्षा मंत्री के नाम का प्रस्ताव किया गया है। इसके साथ ही इसके चार स्वतंत्र निकाय होंगे, जो विनियमन, प्रत्यायन, फंडिंग और शैक्षणिक मानकों के निर्धारण आदि का कार्य करेंगे। इनमें पहला निकाय राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा विनियामक परिषद होगा। यह पूरी उच्च शिक्षा का एक साझा और सिंगल प्वाइंट रेगुलेटर होगा। हालांकि इसके दायरे में मेडिकल और विधिक शिक्षा नहीं होगी। 


यह उच्च शिक्षण संस्थानों में नियमों के दोहराव और अव्यवस्था को खत्म करेगा। दूसरा तंत्र राष्ट्रीय प्रत्यायन परिषद (नैक) होगा, जो शिक्षा की गुणवत्ता और स्वायत्तता को लेकर काम करेगा। तीसरा तंत्र उच्चतर शिक्षा अनुदान परिषद होगा, जो उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए फंडिंग का काम करेगा। चौथा तंत्र सामान्य शिक्षा परिषद (जीईसी) होगा, जो स्नातक कोर्सों के फ्रेमवर्क और कौशल विकास के लिए काम करेगा। फिलहाल नीति में 2025 तक शिक्षण संस्थानों से जुड़े 50 फीसद छात्रों को किसी न किसी एक कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।


गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में अभी फिलहाल जो अलग-अलग नियामक काम कर रहे हैं, उनमें विश्वविद्यालयों और कालेजों के सामान्य कोर्सों के लिए यूजीसी, इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों और कोर्सों के लिए एआइसीटीई, शिक्षकों की शिक्षा के लिए एनसीटीई, आर्किटेक्ट से जुड़े कोर्सों के लिए आर्किटेक्चर काउंसिल, फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया, राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद, कृषि से जुड़ी पढ़ाई के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, पशुओं से जुड़ी पढ़ाई के लिए वेटरनरी काउंसिल आफ इंडिया आदि शामिल हैं। ऐसे में अभी एक ही संस्थान में इन कोर्सों को शुरू करने के लिए अलग-अलग नियामकों से मंजूरी लेनी होती है।

UGC NET: JRF व SRF की राशि 50 हजार प्रतिमाह करने की सिफारिश

 UGC NET: JRF व SRF की राशि 50 हजार प्रतिमाह करने की सिफारिश


शिक्षा, महिला, बाल, युवा संबंधी स्थाई समिति ने केंद्र सरकार से जूनियर रिसर्च फैलोशिप (जेआरएफ) और सीनियर रिसर्च फैलोशिप (एसआरएफ) की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रतिमाह करने की सिफारिश की है। समिति की रिपोर्ट मंगलवार को संसद में पेश की गई।


अभी जेआरएफ एवं एसआरएफ के लिए 31-35 हजार रुपये की राशि प्रतिमाह प्रदान की जाती है। भाजपा सांसद डा. विनय पी. सहस्रबुद्धे की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी रिपोर्ट में उच्च शिक्षा में शोध अनुसंधान बढ़ाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (एनआरएफ) को राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर फैलोशिप आरंभ करनी चाहिए।


समिति ने उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के लिए बीए, बीएससी तथा बीकाम में दो सेमिस्टर इंटर्नशिप के जोड़ने की सिफारिश की है। इन छात्रों को कंपनियों में स्टार्टअप में इंटर्नशिप कराने से उनके लिए रोजगार के अवसर बेहतर होंगे। 


समिति ने कहा कि सरकार कृषि, स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैनो टेक्नोलॉजी ब्लॉक-चेन, क्वान्टम कम्प्यूटिंग, मिक्सड रियलिटी और डेटा विश्लेषण आदि जैसी नई प्रोद्योगिकियों में निवेश बढ़ाने के लिए एक योजना तैयार करे। इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने की क्षमता है जिसका दोहन किए जाने की आवश्यकता है। विभाग को इन सभी उभरती प्रौद्योगिकियों में उत्पन्न होने वाली नौकरियों के लिए मानव संसाधन को प्रशिक्षित करने की योजना तैयार करने हेतु एक अध्ययन समूह का गठन करना चाहिए।