DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label उच्च शिक्षा. Show all posts
Showing posts with label उच्च शिक्षा. Show all posts

Tuesday, September 22, 2020

UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया

विश्वविद्यालयों में एक नवम्बर से होगी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, सभी छुट्टियों में होगी कटौती।

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2020-21 के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक नवंबर से होगी। स्नातक व स्नातकोत्तर के पहले वर्ष में 31 अक्टूबर तक दाखिले होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपने दिशा-निर्देश में कहा है कि पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए इस साल की सर्दियों और अगले साल की गर्मी की छुट्टियों और अन्य अवकाश में कटौती की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट किया, पढ़ाई पूरी करने के लिए सप्ताह में छह दिन कक्षाएं चलाने को भी कहा गया है। नया सत्र ऑनलाइन, फेस-टू-फेस क्लासरूम और मिश्रित मोड से चलाया जाएगा। यह कैलेंडर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के तकनीकी कॉलेजों पर भी लागू होगा।


UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि 1 नवंबर से नए सत्र की कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी 30 नवंबर तक प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर लें। बता दें कि यूजीसी द्वारा 29 अप्रैल को जारी वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया था। इसके तहत फर्स्ट ईयर के छात्रों की कक्षाएं 1 सितंबर से शुरू होनी थी और अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित की जानी चाहिए। लेकिन फिर कोविड-19 महामारी के मामले कम नहीं होने की वजह से कैलेंडर को संशोधित करना पड़ा। इसके बाद फिर उच्च शिक्षा नियामक ने सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षा या टर्मिनल सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया।


लेकिन अब संशोधित दिशा निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2020-21 प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए 1 नवंबर से शुरू हो सकता है। हालांकि अगर फर्स्ट ईयर के लिए आयोजित होने वाले एंट्रेंस एग्जाम में देरी होती है तो यह भी संभव है कि फिर नए सत्र की कक्षाएं शुरू करने में देरी हो जाए। मीडिया रिपोट के मुताबिक फिर यह परीक्षाएं 18 नवंबर को शुरू हो सकती हैं। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं हैं।

स्टूडेंट्स ध्यान दें कि आयोग ने संशोधित कैलेंडर में आगे यह भी कहा है कि 30 नवंबर तक छात्रों के प्रवेश को रद्द करने पर पूरी फीस वापसी की जाएगी। इसके अलावा आयोग ने प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक यूजी और पीजी छात्रों के लिए मेरिट या प्रवेश आधारित प्रवेश अक्टूबर अंत तक पूरा हो जाना चाहिए और शेष खाली सीटों को 30 नवंबर तक भरा जाना चाहिए। बता दें कि इस बार कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से नए सत्र की शुरुआत में देरी हो रही है।

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


नई दिल्ली :  University Session 2020-21: शिक्षा मंत्री ने देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वायत्तशासी महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्री द्वारा अब से कुछ ही देर पहले दी गयी जानकारी के अनुसार, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए वर्ष 2020-21 के लिए अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट (कोर्सेस) के छात्रों के लिए एकेडेमिक कैलेंडर के लिए यूजीसी गाइडलाइंस के लिए बनी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इसे मान्यता दे दी है।“ शिक्षा मंत्री द्वारा साझा किये गये यूजीसी यूजी/पीजी कैलेंडर के अनुसार सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2020 तक पूरी कर लेनी है और पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए पहले कक्षाओं का आरंभ 1 दिसंबर 2020 से किया जाना है। वहीं, 1 मार्च से 7 मार्च तक एक सप्ताह का प्रिपेरेशन ब्रेक दिया जाएगा और 8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


यूजीसी यूजी/पीजी एकेडेमिक कैलेंडर 2020-21

दाखिला प्रक्रिया पूरी करने की तिथि – 31 अक्टूबर 2020

पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए कक्षाओं के आरंभ होने की तिथि - 1 दिसंबर 2020

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 मार्च 2021 से 7 मार्च 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि - 8 मार्च 2021 से 26 मार्च 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 27 मार्च से 4 अप्रैल 2021

ईवन सेमेस्टर की कक्षाओं का आरंभ – 5 अप्रैल 2021

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 अगस्त 2021 से 8 अगस्त 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि – 9 अगस्त 2021 से 21 अगस्त 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 22 अगस्त 2021 से 29 अगस्त 2021

इस बैच के लिए अगले एकेडेमिक सेशन आरंभ होने की तिथि – 30 अगस्त 2021

एडमिशन कैंसिल कराने या माइग्रेशन में पूरी फीस होगी वापस

शिक्षा मंत्री ने नये शैक्षणिक सत्र के लिए एकेडेमिक कैंलेडर जारी करने के साथ ही साथ कहा, “लॉकडाउन और सम्बन्धित समस्याओं के कारण पैरेंट्स को हुई आर्थिक दिक्कतों को देखते हुए इस सेशन के लिए 30 नवंबर 2020 तक लिए गए दाखिले को रद्द कराने या माइग्रेशन की स्थिति में छात्रों को पूरी फीस वापस की जाएगी।“

शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज

सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज।


राज्य मुख्यालय  : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के आदेश से नया विवाद छिड़ गया है। इस प्रक्रिया से एक तरफ शिक्षकों की जांच लटक गई है तो दूसरी तरफ सत्यापन के लिए जमा होने वाले शुल्क को लेकर फैसला नहीं हो पा रहा है। शिक्षक संगठनों ने यह शुल्क शिक्षकों से ही लिए जाने पर नाराजगी जताई है। शासन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन उन बोर्डों या विश्वविद्यालयों से करा लें, जहां से वे जारी किए गए हैं। 

इससे पहले जिलावार गठित जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ-साथ उनके सेवा संबंधी अभिलेखों एवं शैक्षिक अभिलेखों की जांच की थी। अब एक नया विवाद यह शुरू हो गया है कि सत्यापन के लिए शुल्क कौन अदा करेगा? कई विश्वविद्यालय अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए पहले ही शुल्क जमा करा लेते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है कि कुछ महाविद्यालय यह शुल्क शिक्षकों से ही वसूल रहे हैं। संगठन ने लखनऊ के ही एक महाविद्यालय का उदाहरण भी दिया है, जिसने सत्यापन कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही डाल दी है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार यह जांच 31 जुलाई तक पूरी होनी थी लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में यह जांच अब स्थगित कर दी जानी चाहिए।

Friday, September 18, 2020

और आखिर में शिक्षा निदेशालय में नहीं बदले जा सके कर्मियों के पटल

और आखिर में शिक्षा निदेशालय में नहीं बदले जा सके कर्मियों के पटल

 
प्रयागराज : पारदर्शी व निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर शासन का विशेष जोर है। लेकिन, उच्च शिक्षा निदेशालय में शासन के निर्देश लागू नहीं हो पा रहे हैं। यहां के अधिकारी व कर्मचारी अपनी सुविधा के मुताबिक सारा काम करते हैं। पटलों का परिवर्तन न करना उसका प्रमाण है। शासन ने 15 सितंबर 2019 तक सारे पटलों का नए सिरे से गठन करने का निर्देश दिया था। लेकिन, साल भर बाद भी पटल नहीं बदला गया। सारा काम पुराने ढर्रे पर चल रहा है।


● सितंबर 2019 तक हर पटल पर नए की तैनाती का था निर्देश

● डिप्टी सीएम को विधायक ने लिखा था पत्र


उच्च शिक्षा निदेशालय में पेंशन, बजट, पदोन्नति व नियुक्ति सहित 13 पटल हैं। कई पटलों कुछ वरिष्ठ प्रशासनिक व प्रशासनिक अधिकारी सालों से काम कर रहे हैं। अधिकारियों के करीबी लिपिक भी उनके साथ आठ-10 साल से एक ही जगह पर कार्यरत हैं। इसकी शिकायत निदेशालय में कार्यरत सहायकों ने शासन से किया था। शिकायत में विभिन्न पटलों में धन उगाही होने की शिकायत प्रमुखता से कही गई। इसके बाद शासन ने हर पटल पर काम करने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा मांग लिया। साथ ही सारे पटल को नए सिरे से गठित करने का निर्देश दिया। लेकिन, उसके अनुरूप कार्रवाई नहीं हुई। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा का कहना है कि पटल परिवर्तन की दिशा में कदम उठाया जा रहा है। एक व्यक्ति सारा काम न देखे उसके मद्देनजर बदलाव किए हैं।


उच्च शिक्षा निदेशालय के पटलों की अनियमितता को लेकर सदर बांदा के विधायक प्रकाश द्विवेदी ने उच्च शिक्षा मंत्रलय देख रहे डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर उचित कार्रवाई की मांग की थी। 18 अगस्त को पत्र लिखने के बावजूद उस दिशा में कोई कदम नहीं उठा।

Saturday, September 12, 2020

उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह

उच्च शिक्षा : ज्यादा ई-कंटेंट अपलोड पर शिक्षक होंगे पुरस्कृत, विद्यादान के रूप में मनाया जाएगा सितम्बर व अक्टूबर माह।

डिजिटल लाइब्रेरी : • पांच सितंबर से पोर्टल क्रियाशील, डिजिटल लाइब्रेरी दिया गया नाम।

ई-कंटेंट पोर्टल पर विवि व कॉलेजों के शिक्षक अपलोड कर रहे


लखनऊ : अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने बताया कि सितंबर व अक्तूबर माह को 'विद्यादान माह' के रूप में मनाए जाने का फैसला किया गया है। इस माह के दौरान उच्च शिक्षा की डिजिटल लाइब्रेरी में अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले शिक्षकों और उनकी शिक्षण संस्थाओं को पुरस्कृत किया जाएगा यह पुरस्कार 6 श्रेणियों में दिया जाएगा।



उन्होंने बताया कि उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के मार्गदर्शन में नई शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन का कार्य प्रगति पर है। विभाग ने एनआईसी के सहयोग से रिकार्ड समय (दो माह) में ई-कंटेंट पोर्टल विकसित किया है। इसमें पर सभी राज्य व निजीविश्वविद्यालयों तथा राजकीय, सहायता प्राप्त व निजी महाविद्यालयों के शिक्षकों ने स्वेच्छा से गुणवत्तापरक ई-कन्टेन्ट अपलोड कर रहे हैं। यह पार्ट 5 सितंबर से प्रयोगात्मक रूप से क्रियाशील हो गया है, जो यूपी उच्च शिक्षा डिजिटल लाइब्रेरी के नाम से जाना जाता है।

अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा ने बताया कि अधिक से अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने के लिए प्रोत्साहित करने को 6 श्रेणियों में शिक्षण संस्थाओं एवं शिक्षक को पुरस्कृत किए जाने का निर्णय लिया गया है। इस श्रेणी में राज्य और निजी विश्वविद्यालय की कैटेगरी के तहत सबसे अधिक ई कन्टेट अपलोड करने वाले तीन राज्य व निजी विवि, राज्य विवि की कैटेगरी में अपने से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के शिक्षकों को प्रेरित करते हुए उनसे अधिक से अधिक ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले तीन राज्य विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों की कैटेगरी में राजकीय महाविद्यालय, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय तथा स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में से सबसे अधिक संख्या में ई-कन्टेन्ट अपलोड करने वाले 7 महाविद्यालयों तथा नोडल विवि की कैटेगरी में ई-कन्टेन्ट विकसित करने के लिए विषयवार चयनित नोडल विवि में से तीन को पुरस्कृत किया जाएगा। विषयवार कैटेगरी में प्रत्येक विषय में सबसे अधिक-कंटेंट अपलोड करने वाले 2 शिक्षक तथा सभी विषयों की कैटेगरी में पूरे प्रदेश में 10 शिक्षकों को पुरस्कृत किया जाएगा।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Friday, September 11, 2020

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

ऑनलाइन पढ़ाई में नहीं होगा खिलवाड़, ई-कंटेंट पोर्टल पर 30 सितंबर तक अपलोड होगा कंटेंट

उच्च शिक्षा : डिजिटल लाइब्रेरी से घर बैठे मिलेगा हर विषय का ई-कंटेंट, 10 शिक्षक होंगे पुरस्कृत

 
लखनऊ : कोरोना महामारी के कारण बंद चल रहे शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को घर बैठे बेहतर ई-कंटेंट उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने डिजिटल लाइब्रेरी तैयार की है। ई-कंटेंट पोर्टल के माध्यम से विद्यार्थियों को घर बैठे हर विषय की पाठ्य सामग्री उपलब्ध होनी शुरू भी हो गई है।


उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर सितंबर और अक्टूबर महीने में विद्यादान माह मनाया जाएगा। इन दो महीनों में शिक्षकों को विशेष तौर पर अधिक से अधिक ई-कंटेंट उपलब्ध करवने के लिए प्रेरित किया जाएगा। ज्यादा ई-कंटेंट उपलब्ध कराने वाले 10 शिक्षकों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के मुताबिक बीती पांच सितंबर से ई-कंटेंट पोर्टल पर पाठ्य सामग्री उपलब्ध होने लगी है।


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों के स्नातक व परास्नातक के विद्यार्थी पोर्टल पर क्लिक कर आसानी से किसी भी विषय का ई-कंटेंट हासिल कर सकेंगे। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार किए जा चुके हैं और अब इसे तेजी से अपलोड किया जा रहा है।


लखनऊ : यूपी के राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई में अब खिलवाड़ नहीं हो पाएगा। कोरोना संक्रमण के चलते बीते मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद शुरू की गई ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आईं थीं। कई शिक्षकों ने ई-कंटेंट के मैटीरियल के तौर विषय की किताब स्कैन कर डाल दी थी, लेकिन अब ई-कंटेंट पोर्टल तैयार किया गया है और स्क्रीनिंग के बाद ही इस पर ई-कंटेंट अपलोड किया जा रहा है। बौद्धिक संपदा अधिकार व कॉपीराइट अधिनियम का पालन करने के लिए शिक्षकों से एक प्रपत्र भी भरवाया जा रहा है। विश्वविद्यालय व कॉलेज स्तर से लेकर उच्च शिक्षा विभाग तक इसकी निगरानी की जा रही है।


उच्च शिक्षा विभाग द्वारा तैयार किए गए ई-कंटेंट पोर्टल  पर स्नातक व परास्नातक कक्षाओं के विषयवार कंटेंट अपलोड करने का काम शुरू हो गया है। अब तक करीब 13 हजार ई-कंटेंट तैयार भी किए जा चुके हैं। स्क्रीनिंग के बाद इन्हें ऑनलाइन किया जा रहा है। 30 सितंबर तक सभी विषयों के ई-कंटेंट को अपलोड करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। उप मुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा के निर्देश पर साइंस, कॉमर्स व आर्ट्स के अलग-अलग विषयों के ई-कंटेंट तैयार करने के लिए राज्य विश्वविद्यालयों को नोडल विश्वविद्यालय के रूप में चयनित किया गया है। 


विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों के लिए आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ व लखनऊ विश्वविद्यालय को ई-कंटेंट तैयार करने का जिम्मा दिया गया है। इसी तरह कॉमर्स का ई-कंटेंट लखनऊ विश्वविद्यालय व आगरा के डॉ.भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय को और मैनेजमेंट के ई-कंटेंट का जिम्मा झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय व बरेली के रुहेलखंड विश्वविद्यालय को सौंपा गया है।

सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान

सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान।


सरकार ने जारी की स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं के लिए गाइडलाइन, रखना होगा इन बातों का ध्यान।

देश में लगातार कोरोना के मामलों में इजाफा हो रहा है। भारत में अब तक  4,370,128 से ज्यादा केस सामने आ चुके हैं। वहीं देश के सभी राज्यों ने ज्यादातर पाबंदियों को हटा दिया है।



इसी बीच स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्कूल और कॉलेजों की परीक्षाओं को लेकर नई गाइडलाइन जारी कर दी। जिसमें परीक्षा के समय सावधानी के कई नियमों के बारे में बताया गया है।

मंत्रालय ने साफ किया है कि सभी को छींकते या खांसते समय मुंह ढंंकना होगा। साथ ही किसी भी जगह थूकने की इजाजत नहीं है। जो छात्र कोरोना से पीड़ित हैं उन भी विचार चल रहा है।



जो छात्र कंटेनमेंट जोन में हैं, उन पर परीक्षा एजेंसियां को विचार करने को कहा गया है जिसमें विश्वविद्यालय भी शामिल हैं। सभी स्टाफ के साथ परीक्षार्थियों को अपने स्वास्थ्य की जानकारी देनी पड़ सकती है।

साथ ही स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा कि परीक्षार्थियों को इस बारे में जानकारी दे दी जाएगी, एडमिट कार्ड के साथ उन्हें पानी और सैनिटाइजर जैसी कौन सी वस्तुएं ले जाने की अनुमति होगी।

मंत्रालय ने कहा कि परीक्षार्थियों के साथ बड़ी संख्या में अभिवावक  भी आते हैं, वे लगातार वहीं रहते  हैं, उस दौरान सुरक्षा मानकों का ध्यान रखना बहुत जरूरी होगा। उन्हें शारीरिक दूरी के साथ मास्क लगाना होगा।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी के मुताबिक भारत में कोरोना वायरस के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। इस के मद्देनजर भीड़ से बचने के लिए परीक्षाएं टुकड़ों में कराई जा सकती हैं।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, September 5, 2020

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित।

लखनऊ : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं।

कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी। इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे।विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है। इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं।


शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी : शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियां भी विश्वविद्यालयों ने भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।

........




एक साल से लंबित हैं वेतन संरक्षण के मामले

लखनऊ -राज्य मुख्यालय : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे फिलहाल पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी।




इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे। विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है।


 इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए विश्वविद्यालयों की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियों भी विश्वविद्यालयों भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं।


लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर अड़ा UGC लेकिन पढ़ाई पर राज्यों को देगा पूरी छूट

 

नई दिल्ली: कोरोना संकटकाल में परीक्षाओं को लेकर छिड़ी लड़ाई खूब चर्चा में रही, जिसमें छात्रों के भविष्य को देखते हुए यूजीसी अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर अड़ गया था, लेकिन अब वह पढ़ाई को लेकर राज्यों के साथ ऐसा कोई टकराव नहीं रखना चाहता है। यही वजह है कि विश्वविद्यालयों पर पढ़ाई को लेकर कुछ भी नहीं थोपा जाएगा, बल्कि सभी को अपने स्तर पर इससे जुड़ा फैसला लेने की पूरी छूट दी जाएगी। वह छात्रों को जिस तरह से पढ़ाना चाहते है, उसका पूरा फैसला ले सकेंगे। यानी किन-किन छात्रों को क्लास में बुलाना है, किसे आनलाइन पढ़ाना चाहते है जैसे सारे निर्णय अब वह अपने स्तर पर करेंगे। हालांकि 30 फीसद कोर्स ऑनलाइन कराने का निर्देश दिया जा चुका है।



यूजीसी वैसे भी राज्यों और राज्य के विवि के साथ अब कोई नया विवाद नहीं खड़ा करना चाहता है। पढ़ाई को लेकर जो नई गाइडलाइन तैयार की जा रही है, उनमें राज्यों को इससे जुड़ा पूरा फैसला लेने के लिए अधिकृत किया जाएगा।

Friday, September 4, 2020

परीक्षाओं के साथ विवि प्रवेश का काम भी रखें जारी, 30 सितंबर तक करानी है परीक्षाएं- यूजीसी

परीक्षाओं के साथ विवि प्रवेश का काम भी रखें जारी, 30 सितंबर तक करानी है परीक्षाएं- यूजीसी

 

नई दिल्ली: अनलॉक-4 आने के बाद शैक्षणिक संस्थानों के जल्द खुलने की उम्मीद के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी विश्वविद्यालयों से इसकी तैयारी शुरू करने को कहा है। इसके तहत सितंबर में परीक्षाओं के साथ प्रवेश का काम भी पूरा करने को कहा है। यदि प्रवेश प्रक्रिया में ज्यादा वक्त लगने की संभावना है तो छात्रों को तदर्थ (प्रोविजनल) प्रवेश भी दिया जा सकता है जिसकी शेष प्रक्रिया बाद में पूरी हो सकेगी।


यूजीसी का मानना है कि प्रवेश प्रक्रिया यदि समय पर पूरी हो जाती है तो संस्थानों के खुलने के बाद तुरंत पढ़ाई शुरू हो सकेगी। यदि इसमें किसी तरह की देरी भी होती है तो छात्रों की ऑनलाइन सहित दूसरे माध्यमों से पढ़ाई शुरू कराई जा सकेगी। अभी प्रवेश प्रक्रिया अटके होने की वजह से इन छात्रों की पढ़ाई शुरू नहीं हो पा रही है। यूजीसी ने यह निर्देश उस समय दिया है जब सभी विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अपनी अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करानी हैं।


 यूजीसी को बड़ी राहत इसलिए भी है क्योंकि वह पहले ही सभी विश्वविद्यालयों को 30 फीसद कोर्स की पढ़ाई ऑनलाइन कराने के निर्देश दे चुका है। ऐसे में संस्थानों के खुलने के बाद छात्रों को 70 फीसद कोर्स ही पढ़ाना होगा। यूजीसी ने यह निर्देश केंद्रीय विश्वविद्यालयों के साथ साथ राज्य विश्वविद्यालयों को भी दिया है। साथ ही इससे जुड़ी सभी तैयारियों का ब्योरा भी मांगा है।

Monday, August 31, 2020

उच्च शिक्षा : शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 दावेदार, नौ शिक्षकों को मिलेंगे ‘सरस्वती’, ‘शिक्षक श्री’ सम्मान

उच्च शिक्षा : शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 दावेदार।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने शुरू की आवेदनों की मार्किंग

नौ शिक्षकों को मिलेंगे ‘सरस्वती’, ‘शिक्षक श्री’ सम्मान


प्रयागराज। उच्च शिक्षा में राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 शिक्षकों ने दावेदारी की है। उच्च शिक्षा निदेशालय में आए आवेदनों की मार्किंग शुरू कर दी गई है। मार्किंग के बाद ये नाम शासन को भेजे जाएंगे और इसके बाद इन्हीं में से नौ शिक्षकों के नाम राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किए जाएंगे।
पुरस्कार वितरण समारोह शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर चार सितंबर को आयोजित किया जाएगा। समारोह लखनऊ में होंगे और चयनित शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित किए जाएंगे।


राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश भर के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों से आवेदन थे। प्रदेश के कुल 130 शिक्षकों ने पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। इन सभी के आवेदन उच्च शिक्षा निदेशालय को मिल गए हैं और अब इनकी मार्किंग की जा रही है।



शिक्षकों की योग्यता, कक्षाओं में उनकी उपस्थित, सेमिनार/कांफ्रेंस में भागीदारी, पूर्व में मिले पुरस्कार एवं अन्य बिंदुओं के आधार पर आवेदनों की मार्किंग की जाएगी। इसके बाद मार्किंग के अनुसार क्रमवार शिक्षकों के नाम रखा जाएंगे और 130 शिक्षकों की सूची शासन को प्रेषित कर दी जाएगी।


उच्च शिक्षा निदेशाक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि शासन स्तर पर गठित कमेटी उच्च शिक्षा निदेशालय से भेजी गई सूची की समीक्षा करेंगी। इसके बाद मार्किंग के हिसाब से सूची में शामिल नौ सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के नाम छांटकर अलग कर लिए जाएंगे। इनमें से तीन शिक्षकों को ‘सरस्वती सम्मान’ दिया जाएगा, जिसके तहत तीन-तीन लाख रुपये का नगद पुरस्कार मिलेगा।


वहीं, छह शिक्षकों को ‘शिक्षक श्री’ सम्मान के तहत डेढ़-डेढ़ लाख रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री लखनऊ में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर चार सितंबर को शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।

Sunday, August 30, 2020

विश्वविद्यालय व डिग्रीकॉलेजों में इस बार बढ़ेंगी ज्यादा सीटें, विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ने का भेजेंगे प्रस्ताव, मिलेगी मंजूरी - उप मुख्यमंत्री

विश्वविद्यालय व डिग्रीकॉलेजों में इस बार बढ़ेंगी ज्यादा सीटें, विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ने का भेजेंगे प्रस्ताव, मिलेगी मंजूरी - उप मुख्यमंत्री।


कोरोना के कारण दूसरे राज्य में पढ़ने नहीं जा हे सूबे के विद्यार्थी

कोरोना महामारी के कारण इस बार दूसरे राज्यों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए बहुत कम विद्यार्थी जा रहे हैं। वहीं इस वर्ष इंटरमीडिएट का रिजल्ट भी काफी अच्छा गया है। ऐसे में यूपी के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में बीते सालों के मुकाबले दो से तीन गुने तक फार्म आए हैं। एक-एक सीट पर दाखिले के लिए जबरदस्त मुकाबला है, मगर उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को राहत देने का फैसला किया है। हर साल करीब 33 फीसद तक सीटें बढ़ती है मगर इस बार  बीते वर्षों के मुकाबले स्नातक व परास्नातक कोर्सेज में कहीं ज्यादा सीटें बढ़ाई जाएंगी।




उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजेंगे उन्हें महामारी को देखते हुए मंजूर कर दिया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को आसानी से दाखिला मिल सके। यूपी में 16 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, को डीम्ड विश्वविद्यालय व एक मुक्त विश्वविद्यालय है। वहीं 170 राजकीय डिग्री कॉलेज, 331 एडेड डिग्री कॉलेज व 6682 सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेज हैं। यहां स्नातक की करीब नौ लाख सीटें और परास्नातक की दो लाख सीटें हैं।

इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड में ही करीब 18.54 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, इसके अलावा अन्य बोर्ड के  विद्यार्थी भी शामिल हैं। फिलहाल  बीए, बीएससी व बीकॉम की हर साल करीब 33 फीसद तक सीटें बढ़ाई जाती रहेंगी लेकिन इस बार जरूरत के अनुसार 50%या इससे भी अधिक सीटें बढ़ाई जाएंगी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

यूपी में खुलेंगे नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालय, 30 से 40 लाख रुपये मिलेगा अनुदान

यूपी में खुलेंगे नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालय, 30 से 40 लाख रुपये मिलेगा अनुदान।

प्रदेश में नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने निजी प्रबंधतंत्रों से आवेदन मांगे हैं। इन महाविद्यालयों की स्थापना असेवित विकास खंडों में की जानी है। प्रबंधतंत्रों को वित्तीय वर्ष 2020-21 के तहत महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 30 से 40 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना से रोजगार का सृजन होगा और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होगी।





आवेदन के लिए मानक तय किए गए हैं कि स्ववित्त पोषित महाविद्यालय वहां स्थापित किए जाने हैं, जहां पूर्व से सहशिक्षा के लिए कोई संकाय या महिला महाविद्यालय संचालित न हो। असेवित विकास खंड सीमा से संयुक्त दूसरे असेवित विकास खंड की स्थिति में स्थापित किए जाने वाले महाविद्यालय की पारस्परिक सीधी दूरी (एरियल डिस्टेंस) पांच किलोमीटर से कम न हो एवं छात्र-छात्राओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो। साथ ही प्रस्तावित महाविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि भू-अभिलेखों में ‘महाविद्यालय द्वारा सोसाइटी’ के नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में अनिवार्य रूप से दर्ज हो एवं संयुक्त हो और महाविद्यालय के लिए संपर्क मार्ग अनिवार्य रूप से स्थित हो।


सहशिक्षा महाविद्यालय की स्थापना के लिए 10 हजार वर्ग मीटर और कन्या महाविद्यालय के लिए पंाच हजार वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य है। संस्था के आय का स्नोत कम से कम पांच लाख रुपये वार्षिक या उससे अधिक हो। इसके योजना के स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय के लिए अधिकतम 40 लाख और कला/वाणिज्य संकाय के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। अनुदान तीन किस्तों में दिया जाएगा।


आवेदन पत्र ट्रेजरी चालान के माध्यम से 21 सितंबर तक प्राप्त एवं जमा किए जा सकते हैं। 21 सितंबर को शाम पांच बजे के बाद आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जिन प्रबंधतंत्रों द्वारा पूर्व में आवेदन किए गए थे, लेकिन महाविद्यालय की स्थापना के लिए अनुदान स्वीकृत नहीं हुआ था, उन्हें नए सिरे से आवेदन करने होंगे।


प्रदेश में नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना के लिए प्रबंधतंत्रों से आवेदन मांगे गए हैं। इसके लिए अनुदान दिया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों की भर्ती होने से रोजगार का सृजन होगा। डॉ. वंदना शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, August 29, 2020

विवि व कॉलेजों में ई-प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश

विवि व कॉलेजों में ई-प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश।

राज्य मुख्यालय : उच्च शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2020 के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को ई-प्रकोष्ठ स्तापित करने का निर्देश दिया है। यह प्रकोष्ठ छात्रों को अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। विश्वविद्यालयों को स्टार्ट अप संस्कृति की मजबूती के लिए नोडल संस्था की सलाह से नवाचार व उद्यमिता पाठ्यक्रम शुरू करने को कहा गया है।



इस पाठ्यक्रम को संबद्ध महाविद्यालयों को भी स्वीकार करना होगा। महाविद्यालय स्तर पर नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर फैकल्टी विकास कार्यक्रमों का आयोजन करने को भी कहा गया है। शासनादेश में कहा गया है कि जो छात्र उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आना चाहते हैं, उन्हें स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति दी जाएगी। पाठ्यक्रम की पूर्ति के लिए आवश्यक अधिकतम अवधि में एक वर्ष के अंतराल वर्ष की गणना नहीं की जाएगी। पाठ्यक्रम की निरंतरता बनाए रखने के लिए अंतराल वर्ष की सुविधा को पाठ्यक्रम में पुन: शामिल होते समय दिया जा सकता है।


किसी स्टार्ट अप अवधारणा पर काम करने वाले छात्र उद्यमी को डिग्री की पूर्णता के लिए अपनी स्टार्ट अप परियोजना को अपने अंतिम वर्ष की परियोजना के रूप में बदलने की अनुमति दी जाएगी। शासन के इस आदेश पर स्टार्ट-अप नीति के क्रियान्वयन के संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से रिपोर्ट मांगी है।






Friday, August 28, 2020

UGC की गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- विश्वविद्यालयों में फाइनल ईयर की परीक्षा के बिना नहीं किया जा सकता पास

UGC की गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर, कहा- विश्वविद्यालयों में फाइनल ईयर की परीक्षा के बिना नहीं किया जा सकता पास।


देश भर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में स्नातक कोर्सेज की फाइनल ईयर परीक्षाओं को लेकर यूजीसी के दिशा-निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट ने भी मुहर लगा दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यूजीसी की अनुमति के बिना राज्य एग्जाम रद्द नहीं कर सकते। फाइनल ईयर की परीक्षाएं आयोजित किए बिना छात्रों को पास नहीं किया जा सकता। राज्यों को 30 सितंबर तक एग्जाम कराने होंगे। न्यायालय ने कहा कि जो राज्य 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी। शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में यूजीसी के 6 जुलाई के सर्कुलर को सही ठहराते हुए कहा कि  आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य महामारी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा स्थगित कर सकते हैं लेकिन उन्हें यूजीसी के साथ सलाह मशविरा करके नई तिथियां तय करनी होंगी।



गौरतलब है कि यूजीसी ने छह जुलाई को देशभर के विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि अगर परीक्षाएं नहीं हुईं तो छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यूजीसी की इस गाइडलाइंस को देश भर के कई छात्रों और संगठनों ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। याचिकाओं में कहा गया था कि कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाएं करवाना छात्रों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर छात्रों के पिछले प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करने चाहिए।




सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर तक फाइनल ईयर की परीक्षाएं कराने के यूजीसी के निर्देशों को चुनौती देनी वाली याचिकाओं पर 18 अगस्त को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।





इससे पहले यूजीसी ने शीर्ष अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालयों एवं कॉलेजों को कोविड-19 महामारी के बीच फाइनल ईयर की परीक्षाएं 30 सितंबर तक आयोजित कराने के संबंध में छह जुलाई को जारी निर्देश कोई फरमान नहीं है, लेकिन परीक्षाओं को आयोजित किए बिना राज्य डिग्री प्रदान करने का निर्णय नहीं ले सकते। यूजीसी ने न्यायालय को बताया था कि यह निर्देश ''छात्रों के लाभ'' के लिए है क्योंकि विश्वविद्यालयों को स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों (पोस्ट ग्रेजुएट कोर्सेज) के लिए प्रवेश शुरू करना है और राज्य प्राधिकार यूजीसी के दिशा-निर्देशों को नजरअंदाज नहीं सकते हैं।



- उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जो राज्य 30 सितम्बर तक अंतिम वर्ष की परीक्षा कराने के इच्छुक नहीं हैं, उन्हें यूजीसी को इसकी जानकारी देनी होगी।

- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्टूडेंट्स को प्रमोट करने के लिए राज्यों को एग्जाम अऩिवार्य रूप से कराने होंगे। कोर्ट ने कहा कि आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राज्य महामारी को ध्यान में रखते हुए परीक्षा स्थगित कर सकते हैं और यूजीसी के साथ सलाह मशविरा करके नई तिथियां तय कर सकते हैं।

- सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा के खिलाफ याचिका खारिज की। कहा- यूजीसी की गाइडलाइंस के मुताबिक ही एग्जाम होंगे।

- यूजीसी ने छह जुलाई को देशभर के विश्वविद्यालयों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं आयोजित करने का निर्देश दिया था। उसने कहा था कि अगर परीक्षाएं नहीं हुईं तो छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। यूजीसी की इस गाइडलाइंस को देश भर के कई छात्रों और संगठनों ने याचिका दायर कर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती थी। याचिकाओं में कहा गया था कोविड-19 महामारी के बीच परीक्षाएं करवाना छात्रों की सुरक्षा के लिए ठीक नहीं है। यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर छात्रों के पिछले प्रदर्शन और आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर परिणाम घोषित करने चाहिए। शीर्ष न्यायालय में इस विषय को लेकर याचिका दायर करने वालों में युवा सेना भी शामिल है जो शिवसेना की युवा शाखा है। उसने महामारी के दौरान परीक्षाएं कराये जाने के यूजीसी के निर्देश पर सवाल उठाया है।

- दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने अंतिम वर्ष की परीक्षा सहित विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है। हालांकि यूजीसी इस बात पर कायम है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित किए बिना स्नातक करने वाले छात्रों को डिग्री नहीं दी जा सकती।
 
- दिल्ली, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित कुछ राज्यों ने अंतिम वर्ष की परीक्षा सहित विश्वविद्यालय की परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।

- यूजीसी इस बात पर कायम है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को आयोजित किए बिना स्नातक करने वाले छात्रों को डिग्री नहीं दी जा सकती।

- यूजीसी और केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुए सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया तुषार मेहता ने आठ अगस्त को बताया कि राज्य सरकारें परीक्षाओं को रद्द नहीं कर सकती है। यह शक्ति यूजीसी के पास है।

......................





UGC, University Final Year Exam Guideline : यूजीसी फाइनल ईयर की परीक्षाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज नहीं सुनाएगा फैसला, जानें अपडेट।


UGC, University Final Year Exam Guideline : फाइनल ईयर की परीक्षाओं पर फैसले का इंतजार कर रहे हैं देश भर के लाखों परीक्षार्थियों के लिए जरूरी खबर है। लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक संभावना जताई जा रही है कि सुप्रीम कोर्ट आज इस संबंध में फैसला नहीं सुनाएगा। दरअसल मामला आज लिस्ट में नहीं है। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि अब कोर्ट इस संबंध में किसी और दिन फैसला सुना सकता है। देश भर में अंतिम वर्ष की परीक्षाएं होंगी या नहीं, इसे लेकर दायर याचिका पर 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई थी। पीठ ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था और सभी पक्षों से तीन दिनों के भीतर लिखित रूप से अपनी अंतिम दलील दाखिल करने को कहा था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के मामले में सुनवाई न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति एम.आर. शाह की खण्डपीठ कर रही थी।




सुप्रीम कोर्ट की खण्डपीठ द्वारा सभी पक्षों को दिए गए समय सीमा समाप्त होने के बाद संभावना है कि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं के मामले में निर्णय आज, 26 अगस्त को सुनाया जा सकता है। इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने भी 24 अगस्त को ट्वीट करके जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई पूरी कर चुकी खण्डपीठ द्वारा 26 अगस्त 2020 को निर्णय सुनाया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया था कि वे माननीय उच्चतम न्यायालय को जल्द फैसला सुनाने के लिए अनुरोध भेजने की कोशिश कर रहे हैं।

बता दें कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 6 जुलाई, 2020 को देश भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों के अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को अनिवार्य रूप से 30 सितंबर, 2020 तक पूरा करने से सम्बन्धित सर्कुलर जारी किया गया था। उस समय से ही कोविड-19 महामारी के दौरान परीक्षाएं कराने का विरोध किया जा रहा है। इसे लेकर देश भर के अलग-अलग संस्थानों के 31 छात्रों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसमें छात्रों द्वारा अंतिम वर्ष या सेमेस्टर की परीक्षाओं को रद्द करने की मांग की गई थी। याचिका में छात्रों के रिजल्ट, उनके आंतरिक मूल्यांकन या पिछले प्रदर्शन के आधार पर तैयार किए जाने की मांग की गई थी।


नेता व अभिभावक भी कर रहे विरोध

अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर यूजीसी की गाइडलाइंस के आने के बाद से निरंतर इसका विरोध हो रहा है। स्टूडेंट्स, सोशल मीडिया व अन्य माध्यम से अंतिम वर्ष की परीक्षाओं पर यूजीसी की गाइडलाइंस का लगातार विरोध करते आ रहे हैं। अभिभावक समेत कई नेता भी यूजीसी के निर्णय का विरोध कर रहे हैं। बता दें कि पंजाब के मुख्यमंत्री, दिल्ली के मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर अंतिम वर्ष की परीक्षा रद्द करने की मांग की थी। इसके अलावा, कांग्रेस सांसद राहुल गांधी भी परीक्षा कराए जाने के यूजीसी के फैसले के विरोध में हैं। वहीं, शिवसेना की युवा शाखा ने भी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सितंबर तक परीक्षा कराए जाने के निर्णय को चुनौती दी थी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होगा ‘स्टार्टअप’

उच्च शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होगा ‘स्टार्टअप’।

स्टार्टअप के लिए स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति।

-उच्च शिक्षा निदेशालय ने विश्वविद्यालयों, कॉलेजों से मांगी ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020’ के बिंदुओं पर अनुपालन आख्या।


प्रयागराज :  प्रदेश में उद्यमिता की संभावनाओं को देखते हुए राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के पाठ्यक्रम में ‘स्टार्टअप’ को भी शामिल किया जाएगा। ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति 2020’ के तहत इसका क्रियान्वयन किया जाएगा। इस बारे में उच्च शिक्षा के संयुक्त निदेशक डा. हिरेंद्र प्रताप सिंह की ओर से सभी राज्य विवि के कुलसचिवों एवं महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र जारी कर निर्देश दिए गए हैं कि इस संबंध में विवि और महाविद्यालय शासन एवं निदेशालय को यह अवगत कराएं कि इस पर क्या कर रहे हैं।




इस नीति के तहत विवि द्वारा प्रदेश में स्टार्टअप संस्कृति की सुदृढ़ता के लिए नोडल संस्था के परामर्श से नवचार और उद्यमिता पाठ्यक्रम आरंभ किए जाएंगे। इन्हें संघटक महाविद्यालयों में भी लागू किया जाएगा। महाविद्यालय स्तर पर नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय/महाविद्यालय फैकल्टी विकास कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे। जो छात्र उद्यमिता के क्षेत्र में अग्रसर होना चाहते हैं, उन्हें स्नातक/स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति दी जाएगी। पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए आवश्यक अधिकतम अविधि में एक वर्ष के अंतराल की गणना नहीं की जाएगी। पाठ्यक्रम की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए ‘अंतराल वर्ष’ सुविधा को पाठ्यक्रम में पुन: शामिल होते समय दिया जा सकता है।


किसी स्टार्ट अप अवधारणा पर काम करने वाले छात्र उद्यमी को डिग्री की पूर्णता के लिए अपनी स्टार्टअप परियोजना को अपने अंतिम वर्ष की परियोजना के रूप में बदलने की अनुमति दी जाएगी। विद्यालय स्तर के छात्रों को अपना उद्यम प्रारंभ करने एवं प्रोत्साहित करने के लिए विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों एवं विद्यालयों में ई-प्रकोष्ठ की स्थापना की जाएगी। विभाग द्वारा संपूर्ण प्रदेश में इंक्यूबेटर्स की स्थापना किए जाने की आवश्यकता होगी, जो कुल नीतिगत लक्ष्य का कम से कम 50 फीसदी होगा।


स्टार्टअप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा हैकाथॉन, बूट कैंपस, स्टार्टअप इवेंटस का आयोजन किया जाएगा। उच्च शिक्षा निदेशालय ने राज्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को पत्र जारी करनी ‘उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020’ के बिंदुओं की अनुपालन आख्या मांगी है।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Wednesday, August 26, 2020

उच्च शिक्षा : सत्यापन के फरमान के खिलाफ शिक्षकों ने उठाई आवाज, शिक्षक संगठनों ने की उप मुख्यमंत्री से जांच स्थगित करने की मांग

उच्च शिक्षा : सत्यापन के फरमान के खिलाफ शिक्षकों ने उठाई आवाज।

महाविद्यालयों के पास नहीं है सत्यापन शुल्क का बजट




राज्य मुख्यालय : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के फरमान के खिलाफ आवाज मुखर होने लगी है। शिक्षक संगठनों ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा से यह जांच स्थगित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि पूर्व में जारी शासनादेश के विपरीत जाकर अब सत्यापन की कार्रवाई शुरू कराई जा रही है। यह कार्रवाई शिक्षकों के उत्पीड़न का जरिया बन रही है।





शिक्षक संगठनों का यह आक्रोश क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के उस पत्र के बाद मुखर हुआ है, जिसमें विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों से अपने सभी शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का उसे निर्गत करने वाले बोर्ड या विश्वविद्यालय से सत्यापन कराने को कहा गया है। इससे पहले शासन के आदेश पर जिले स्तर पर गठित कमेटी ने शिक्षकों की जांच की थी। इसमें शैक्षिक अभिलेखों के साथ-साथ सेवा अभिलेखों की भी जांच की गई थी।




लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री को ज्ञापन देकर कहा है कि शासनादेश में कहीं भी शैक्षणिक अभिलेखों की जांच संबंधित संस्थान द्वारा कराने का कोई उल्लेख नहीं किया गया है। इस तरह क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों द्वारा शासनादेश का उल्लंघन किया जा रहा है। लुआक्टा ने यह तथ्य भी संज्ञान में लाया है कि अभिलेखों की जांच के लिए शुल्क की अदायगी करनी पड़ती है। महाविद्यालयों के पास किसी तरह का कोई कोष नहीं है जिससे अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क जमा कर सके। कतिपय महाविद्यालयों द्वारा शिक्षकों से शैक्षणिक अभिलेखों की जांच के नाम पर धनउगाही की जा रही है।


लुआक्टा ने ज्ञापन में कहा है कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा मुख्यमंत्री के आदेशों की अवहेलना की गई है और जांच के लिए निर्धारित 31 जुलाई 2020 की तिथि तक जांच कार्य पूर्ण नहीं की गई। इस कारण अब जांच कार्य स्थगित कर दिया जाना चाहिए और शासनादेश के विपरीत क्षेत्रीय कार्यालयों से जारी पत्र को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाना चाहिए।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Tuesday, August 25, 2020

कोविड के चलते स्नातक के अंकों के आधार पर इस साल मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेश

कोविड के चलते स्नातक के अंकों के आधार पर इस साल मैनेजमेंट कॉलेजों में प्रवेश

 

एमबीए या पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन मैनेजमेंट (पीजीडीएम) में एडमिशन की इच्छा रखने वाले छात्रों के लिए अच्छी खबर है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) ने कहा है कि एमबीए और पीजीडीएम कराने वाले संस्थान स्नातक में मिले नंबर के आधार पर छात्रों का अपने यहां एडमिशन कर सकते हैं। परिषद ने कहा है कि कोविड-19 महामारी के चलते कई प्रवेश परीक्षाएं आयोजित नहीं कराई जा सकती हैं। तकनीकी शिक्षा नियामक ने इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नामांकन प्रक्रिया में यह छूट सिर्फ 2020-21 के अकादमिक सत्र के लिए दी जा रही है।


परिषद के सचिव राजीव कुमार ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी फैलने के डर से कई राज्यों में प्रवेश परीक्षाओं का आयोजन नहीं कराया जा सका है। अभी यह भी स्पष्ट नहीं है कि इन परीक्षाओं को स्थगित किया गया है या भविष्य में इनका आयोजन कराया जाएगा या रद कर दिया जाएगा।


इस साल नामांकन का यह होगा तरीका : संस्थान स्नातक या समकक्ष परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर पारदर्शी तरीके से मेरिट लिस्ट तैयार कर एडमिशन ले सकते हैं। जो छात्र इन कोर्सो के लिए किसी प्रवेश परीक्षा में शामिल हुए होंगे और स्कोर किया होगा, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।

राजर्षि टण्डन मुक्त विवि में 12 साल बाद पीएचडी को हरी झंडी

राजर्षि टण्डन मुक्त विवि में 12 साल बाद पीएचडी को हरी झंडी

 

उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय से 12 साल बाद फिर पीएचडी की जा सकेगी। राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने कुलपति से चर्चा के बाद हरी झंडी दे दी है। कार्यपरिषद से भी मंजूरी मिल गई है। सितंबर से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने के आसार हैं।


वर्ष 2008 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के पीएचडी संबंधी अध्यादेश की वजह से विश्वविद्यालय में प्रवेश बंद था। कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने इसे शुरू कराने की पहल की। प्रस्ताव को कुलाधिपति तथा प्रदेश सरकार की अनुमति मिलने के बाद कार्यपरिषद की बैठक में रखा गया, जिसे सर्वसम्मति से मंजूरी मिल गई। नए शैक्षिक सत्र में शिक्षाशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास, कंप्यूटर विज्ञान, एग्रीकल्चर, हेल्थ साइंस, कॉमर्स, मैनेजमेंट, हिंदी, संस्कृत और पत्रकारिता में पीएचडी की जा सकेगी।


संस्थान के शिक्षक ही होंगे निदेशक: पूर्व में शोध निदेशक, बाहरी होते थे। अतएव शोध भी बाहर कराए जाते थे। यहां शोधाíथयों को थीसिस जमा करनी होती थी। सिर्फ डिग्री अवार्ड होती थी। नए रेगुलेशन के तहत प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा और मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षक ही निदेशक होंगे।


आरडीसी में तय होंगे शोध निदेशक: मुविवि उन्हीं विषयों में पीएचडी कराएगा, जिसमें शिक्षक होंगे। सबसे पहले शोध निदेशक का नाम स्कूल बोर्ड प्रस्तावित करेगा। फिर रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) मुहर लगाएगी। आरडीसी में बाहरी विशेषज्ञ भी शामिल होगा। इसके बाद एकेडमिक काउंसिल और कार्य परिषद की मंजूरी मिलने पर संख्या के अनुसार विषयवार रिक्तियां निकाली जाएंगी। प्रोफेसर को आठ, रीडर को छह और लेक्चरर को चार लोगों को पीएचडी कराने की अनुमति रहेगी।


प्री-पीएचडी अनिवार्य

पीएचडी से पहले आवेदक को इसके लिए परीक्षा में सफल होना पड़ेगा। इसके बाद मेरिट और निर्धारित आरक्षण के आधार पर रजिस्ट्रेशन होगा। शोध के दौरान छह माह की प्री पीएचडी भी अनिवार्य होगी।

पीएचडी के लिए नए सत्र में आवेदन मांगे जाएंगे। आरडीसी की बैठक में शोध निदेशक तय होने के बाद आवेदन की प्रक्रिया शुरू होगी।

Sunday, August 23, 2020

प्रयागराज में होगी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, विधानसभा में पास हुआ विधेयक

प्रयागराज में होगी राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, विधानसभा में पास हुआ विधेयक

 
उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन ‘उत्तर प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय प्रयागराज विधेयक--2020’ को मंजूरी मिल गई। इससे प्रदेश में दूसरे राज्य विधि विश्वविद्यालय की स्थापना का रास्ता साफ हो गया है। बता दें कि विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए प्रदेश सरकार चालू वित्तीय वर्ष 2020-21 में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है।


सरकार की ओर से प्रयागराज के झलवा क्षेत्र में 25 एकड़ जमीन पर विधि विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। लखनऊ के राममनोहर लोहिया विधि विवि जो 40 एकड़ में बना है, उसके बाद यह विवि सबसे बड़े परिसर में होगा। इस विवि की स्थापना नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी बंगलुरु के तर्ज पर की जाएगी।


विधि विवि खोलने से छात्रों के लिए अवसर बढ़ेंगे विधि विवि खोले जाने से प्रयागराज एवं उसके आसपास के छात्रों के लिए कानून की पढ़ाई के रास्ते खुलेंगे। इसमें डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे। इसके साथ न्यायिक व अन्य विधि सेवाएं, विधि निर्माण, विधि सुधार के क्षेत्र में छात्रों को शोध की सुविधा होगी। व्यावसायिक शिक्षा और न्यायिक पदाधिकारियों व अन्य व्यक्तियों को विधि क्षेत्र में प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी होगी।


कानून के जानकार होंगे पदाधिकारी 
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश इस विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष होंगे, जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विश्वविद्यालय के कुलाधिपति होंगे। कुलाधिपति ही विश्वविद्यालय में कुलपति की नियुक्ति करेंगे। 


विश्वविद्यालय में महापरिषद, कार्य परिषद, शैक्षिक परिषद और वित्तीय समिति का गठन होगा। महापरिषद को विश्वविद्यालय के बारे में फैसला लेने का सर्वोच्च अधिकार होगा।