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Wednesday, November 25, 2020

यूपी : राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण

UP : विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज को इकाई मानकर लागू होगा आरक्षण, अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी


राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा।


लखनऊ । उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा। वहीं राजकीय डिग्री कॉलेजों में इसे सभी संस्थाओं को मिलाकर एक इकाई मानकर आरक्षण लागू होगा। अभी तक विभाग स्तर पर शिक्षक के खाली पदों पर आरक्षण लागू होने पर पांच से कम पद होने पर एससी कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए सीट नहीं आरक्षित हो पा रही थी और उन्हें नुकसान हो रहा था। अब ऐसा नहीं होगा।


केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण व्यवस्था में किए गए बदलाव की तर्ज पर प्रदेश में भी इसे लागू किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के लोगों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उप्र शैक्षिक संस्थान (शैक्षिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी गई। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह लागू हो जाएगा।


वहीं विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में इसके विधेयक को पेशकर इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। फिलहाल अब विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज में विभिन्न विभागों में शिक्षकों के जितने पद होंगे उन्हें मिलाकर संस्था स्तर पर कुल पदों पर एक साथ आरक्षण लागू किया जाएगा। फिलहाल यह बदलाव अल्पसंख्यक संस्थाओं, उत्कृष्ट संस्थाओं, अनुसंधान संस्थाओं और राष्ट्रीय व सामरिक महत्व की संस्थाओं में लागू नहीं होगा।


उधर राज्य विश्वविद्यालय सहारनपुर को राजकीय महाविद्यालय पुंवारका की 5.91 एकड़ जमीन, भवन एवं परिसम्पत्तियां देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इस कॉलेज के शिक्षकों को दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न कोर्सेज में पढ़ रहे विद्यार्थी पूर्व की तरह की अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्हें चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ की ही डिग्री दी जाएगी। नए शैक्षिक सत्र 2021-22 से इस कॉलेज में नए दाखिले नहीं लिए जाएंगे।

Monday, November 23, 2020

विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आज से लगेंगी कक्षाएं

विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आज से लगेंगी कक्षाएं


लखनऊ : यूपी के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में सोमवार से कक्षाएं लगेंगी। अभी कक्षाओं में 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही बुलाए जाएंगे। ऑनलाइन कक्षाओं का भी विकल्प विद्यार्थियों को दिया जाएगा। अभी तक कैंपस में सिर्फ पीएचडी व परास्नातक (पीजी) साइंस के विद्यार्थियों को ही आने की छूट थी। अब स्नातक (यूजी) के विद्यार्थियों के साथ-साथ पीजी के अन्य संकाय के विद्यार्थियों की भी कक्षाएं शुरू होंगी। उप्र विश्वविद्यालय-महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुपुक्टा) ने कोरोना की दूसरी वेब के बीच विश्वविद्यालय व कॉलेज कैंपस खोले जाने का विरोध किया है।



फुपुक्टा के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान का कहना है कि शादी समारोह में 200 की बजाए 100 लोगों की सीमा तय की जा रही है। विवि कैंपस में भीड़भाड़ बढ़ाकर कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए दावत दी जा रही है। अगर संक्रमण बढ़ा और कोई हादसा हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। जब ज्यादा सावधानी बरतने का समय है तो लापरवाही बरती जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से बीती 17 नवंबर को ही विश्वविद्यालय व कॉलेज कैंपस में कक्षाएं शुरू करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई थी। कैंपस में बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा और कोई भी विद्यार्थी अगर कैंपस में थूकते हुए पकड़ा गया तो अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

Sunday, November 22, 2020

एक से अधिक संस्थानों में काम नहीं कर सकते शिक्षक : AICTE

एक से अधिक संस्थानों में काम नहीं कर सकते शिक्षक : AICTE


नई दिल्ली। उच्च शिक्षण संस्थान अपने किसी शिक्षक से एक से अधिक संस्थानों में सेवा नहीं ले सकता। यदि कोई संस्थान ऐसा करता पाया जाता है तो फिर उसकी मान्यता रद्द करने से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) ने राज्यों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को नियमों का उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। सभी राज्य सरकारों, तकनीकी विश्वविद्यालय, राज्यपाल को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। 

राज्यों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों को लिखा पत्र, उल्लंघन पर मान्यता रद्द व अनुशासनात्मक कार्रवाई


एआईसीटीई का मानना है कि तकनीकी उच्च शिक्षण संस्थान पैसा बचाने के मकसद से शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता कर रहे है। कई संस्थान एक शिक्षक से अपने दो से अधिक कैंपस में सेवाएं ले रहे हैं । जबकि एक शिक्षक सिर्फ एक कैंपस में सेवाएं दे सकता है। छात्रों और शिक्षकों से ऐसी जानकारी मिलने पर लिखित शिकायत भेजने का आग्रह किया है। आईसीटीई भी तकनीकी संस्थानों में औचक निरीक्षण करेगा।

Friday, November 20, 2020

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी


उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को परखने के लिए आने वाले दिनों में अब क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) और टाइम्स जैसी रैकिंग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। देश में इसी तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों के विश्वस्तरीय रैकिंग की एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था बनेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके आकलन का फामरूला भारतीय शिक्षा पद्धति के मापदंडों के अनुरूप होगा। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक रैकिंग के लिए क्यूएस और टाइम्स जैसी दो ही एजेंसियां हैं। दोनों ही बिटिश मूल की हैं।


क्यूएस और टाइम्स जैसी रैकिंग करने वाली एजेंसियों पर ‘धारणा’ के आधार पर भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का आकलन करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कोई और नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रलय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से लगाए गए थे। यही वजह थी कि 2020 की टाइम्स रैकिंग में आइआइटी बांबे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे देश के सात प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने विरोध स्वरूप इस रैकिंग में शामिल होने से इन्कार कर दिया।



जेएनयू में चार वर्ष का होगा स्नातक पाठ्यक्रम!

नई दिल्ली : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्नातक पाठयक्रम की समयावधि चार वर्ष करने पर बढ़ रहा है। गुरुवार को विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए कमेटी गठित करने व स्नातकोत्तर की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराने पर मंथन हुआ।

Thursday, November 19, 2020

डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता 15 अप्रैल तक, नए सत्र की समय-सारिणी जारी

डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता 15 अप्रैल तक, नए सत्र की समय-सारिणी जारी
 

सूबे के डिग्री कॉलेजों को नए शैक्षिक सत्र 2021-22 में ऑनलाइन संबद्धता दी जाएगी। यह पहला मौका है जब नए डिग्री कॉलेज खोलने, स्नातक व परास्नातक के नए कोर्स शुरू करने और कोर्सेज की सीट बढ़ाने के लिए ऑनलाइन संबद्धता दी जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग ने बुधवार को नए सत्र में संबद्धता के लिए समय-सारिणी घोषित कर दी है।


उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग के अनुसार एनआइसी द्वारा तैयार सॉफ्टवेयर की मदद से ऑनलाइन संबद्धता की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नए कोर्स शुरू करने की एनओसी हासिल करने के लिए डिग्री कॉलेज 31 दिसंबर तक विश्वविद्यालय के समक्ष आवेदन कर सकेंगे। ऐसे कॉलेज जो सारी अर्हताएं पूरी करते हैं, वे एनओसी व संबद्धता के लिए एक साथ आवेदन कर सकेंगे। जमा भूमि के अभिलेखों की राजस्व विभाग द्वारा 31 जनवरी तक जांच होगी। 

अभिलेख सही होने पर ऑनलाइन एनओसी जारी होगी। फिर संस्थान 25 फरवरी तक संबद्धता के लिए निरीक्षण मंडल गठित करने के लिए आवेदन करेंगे। विश्वविद्यालय पांच मार्च तक निरीक्षण मंडल का गठन करेंगे। निरीक्षण मंडल 30 मार्च तक अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय को देंगे। विवि रिपोर्ट के आधार पर 15 अप्रैल तक विवि डिग्री कॉलेजों को ऑनलाइन संबद्धता दे सकेंगे।

Wednesday, November 18, 2020

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF - National Research Foundation) के गठन की तैयारी पूरी, उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध में हाथ बंटाना होगा जरूरी

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF - National Research Foundation) के गठन की तैयारी पूरी,  उच्च शिक्षण संस्थानों को शोध में हाथ बंटाना होगा जरूरी


नई दिल्ली : शोध को बढ़ावा देने के साथ उसकी गुणवत्ता को भी बेहतर रखने के लिए प्रस्तावित नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (एनआरएफ) के गठन की तैयारी लगभग पूरी हो गई है। नीति आयोग सहित शोध से जुड़े सभी मंत्रलयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और विशेषज्ञों के साथ लंबी चर्चा के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय ने इससे जुड़े मसौदे को अंतिम रूप दे दिया है। ऐसे में इसे अब कभी भी कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जा सकता है। सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए अब शोध कार्यो में हाथ बंटाना जरूरी होगा। इनमें सरकारी और निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालय भी शामिल होंगे।


मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक यह स्वतंत्र संस्था होगी। जिसके पास आयोग जैसा अधिकार होगा। साथ ही इसका संचालन एक बोर्ड आफ गवर्नर्स करेगा। जिसका कार्यकाल तय होगा। यह फाउंडेशन उद्योगों के साथ तालमेल भी रखेगा। उनकी जरूरतों को उच्च शिक्षण संस्थानों तक पहुंचाएगा, ताकि शोध कार्यो को तेज कर सके। फाउंडेशन सभी शोध व उच्च शिक्षण संस्थानों में चल रहे शोधों पर भी नजर रखेगा। बेहतर और उपयोगी शोधों को और बढ़ाने को उन्हें वित्तीय मदद देगा। इसके तहत फाउंडेशन का एक अलग फंड होगा। एनआरएफ के गठन के स्वरूप पर काम कर रहे शिक्षा मंत्रलय के अधिकारियों के मुताबिक फाउंडेशन के स्वरूप को तैयार करने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के सुझावों को भी ध्यान में रखा गया है। वैसे तो इस फाउंडेशन के गठन की घोषणा मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के पहले बजट में जुलाई 2019 में कर दी थी, लेकिन राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लेकर चल रहे कार्यो को देखते हुए इसे ठंडे बस्ते में रखा गया था।

Tuesday, November 17, 2020

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के राज्य/निजी विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः आरम्भ किये जाने के सम्बन्ध में

कोविड-19 के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के राज्य/निजी विश्वविद्यालय, महाविद्यालयों में भौतिक रूप से पठन-पाठन पुनः आरम्भ किये जाने के सम्बन्ध में


यूपी में 23 नवंबर से खुलेंगे विश्वविद्यालय और कॉलेज, योगी सरकार ने जारी कीं गाइडलाइंस


विश्वविद्यालयों व कालेजों में 23 से लगेंगी कक्षाएं, रोस्टर के अनुसार बुलाए जाएंगे केवल 50 फीसद विद्यार्थी

लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में स्नातक (यूजी) और स्नातकोत्तर (पीजी) की कक्षाएं 23 नवंबर से लगेंगी। अभी तक सिर्फ पीएचडी और पीजी विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को ही पढ़ाई के लिए कैंपस बुलाया जा रहा था, लेकिन अब सभी पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों की कक्षाएं कैंपस में लगेंगी। 50 प्रतिशत विद्यार्थी ही दो गज की शारीरिक दूरी के नियमों का पालन कर बैठाए जाएंगे। रोस्टर इस तरह तैयार किया जाएगा कि विद्यार्थी एक दिन के अंतर पर बुलाए जाएंगे।

विश्वविद्यालयों व कालेजों को खोलने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग की ओर से मंगलवार को विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी गई। इसमें कहा गया कि संस्थान में यदि हॉल या कमरे बड़े हैं, तब भी अधिकतम 200 विद्यार्थी फेस मास्क और दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का सख्ती से पालन करते हुए ही बैठाए जाएंगे। क्लास का आकार यदि छोटा है तो उसे और सेक्शन में बांटा जा सकेगा। विद्यार्थियों को ऑनलाइन कक्षाओं का भी विकल्प दिया जाएगा। 

कोर्स का एक हिस्सा विद्यार्थी आनलाइन ही पढ़ेंगे। बाहरी लोगों का कैंपस में प्रवेश प्रतिबंधित होगा। कैंपस में थूकने पर भी प्रतिबंध रहेगा। विद्यार्थियों की थर्मल स्क्रीनिंग के बाद ही उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। इंफ्रारेड थर्मामीटर के साथ पल्स ऑक्सीमीटर की भी व्यवस्था संस्थानों में की जाएगी। प्रयोगशालाओं में भी विद्यार्थियों के छोटे-छोटे बैच बनाए जाएंगे। उच्च शिक्षण संस्थानों में जिम को खोला जाएगा ताकि विद्यार्थी कसरत कर सकें, लेकिन स्वीमिंग पूल पूरी तरह बंद रहेंगे। विद्यार्थी वेब पेज मनोदर्पण और राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर 8445440632 पर भी काउंसिलिंग करा सकेंगे।

■ रोस्टर के अनुसार बुलाए जाएंगे केवल 50 फीसद विद्यार्थी

■ आनलाइन क्लास भी चलेंगी, थूकने व बाहरी लोगों पर रहेगा प्रतिबंध

हॉस्टल के कमरे में एक विद्यार्थी रहेगा, 14 दिन क्वारंटाइन
विश्वविद्यालय व कॉलेजों के हॉस्टल में विद्यार्थियों को चरणबद्ध ढंग से बुलाया जाएगा। विभिन्न स्थानों से आ रहे विद्यार्थियों को 14 दिन तक क्वारंटाइन किया जाएगा। एक कमरे में एक विद्यार्थी ही रहेगा। वहीं मेस में भीड़ न हो इसके लिए उसका समय बढ़ाया जाएगा। डाइनिंग हॉल में छोटे-छोटे बैच में छात्र भेजे जाएंगे। विद्यार्थी नकद लेन-देन नहीं कर सकेंगे।


उत्तर प्रदेश में करीब 8 महीनों से बंद विश्वविद्यालय और कॉलेजों को 23 नवंबर से फिर से खोला जाएगा। शुरुआत में इन्हें 50 छात्रों की प्रतिशत उपस्थिति के साथ ही खोला जाएगा। राज्य सरकार ने मंगलवार को विश्वविद्यालय और कॉलेज खोले जाने को लेकर दिशानिर्देश भी अधिसूचित कर दिए। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के चलते मार्च माह से राज्य में विश्वविद्यालय और कॉलेज बंद हैं। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका गर्ग ने सभी जिला मजिस्ट्रेट और विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार को भेजे अपने आदेश में कहा है कि कक्षाएं चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू की जाएं। कक्षाएं इस तरह से लगें कि कैंपस में छात्रों की भीड़ न इकट्ठी हो। 


■   गाइडलाइंस की मुख्य बातें - 

- 50 प्रतिशत छात्रों की उपस्थिति के साथ कक्षाएं शुरू की जा सकती है। सभी छात्रों को मास्क पहनना होगा। कैंपस और कक्षाओं में सोशल डिस्टेंसिंग संबंधी गाइडलाइंस का पालन करना होगा। हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करना होगा। 

- गाइडलाइंस के मुताबिक, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को विद्यार्थियों व स्टाफ के लिए थर्मल स्कैनिंग एवं हैंड वाश का बंदोबस्त करना होगा। 

- वाइस चांसलर और प्रिंसपलों से कहा गया है कि संस्थानों को चलाने के लिए एसओपी (स्टैंडर्ज ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन किया जाए। 

- कोविड-19 से लड़ने के लिए शैक्षणिक संस्थान किसी नजदीकी अस्पताल और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले एनजीओ से टाईअप भी कर सकते हैं। 

- सभी विद्यार्थियों को आयोग्य सेतु एप डाउनलोड करनी होगी। 

- गाइडलाइंस में अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वह सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे जब भी घर से बाहर निकलें तो हेल्थ प्रोटोकॉल का पालन करें। अगर उनका बच्चा स्वस्थ नहीं है तो उसे घर से बाहर न जाने दें। 

- केवल वही शैक्षणिक संस्थान खुलेंगे जो कन्टेनमेंट जोन के बाहर होंगे। 

- कन्टेनमेंट जोन में रहने वाले छात्र, शिक्षक और कर्मचारी संस्थान में प्रवेश नहीं करेंगे। 

- शिक्षकों को ऑनलाइन शिक्षण के लिये छात्रों को प्रोत्साहित करना होगा। 

- कक्षाओं में छात्र बुक, लैपटॉप, नोट्स आपस में शेयर नहीं करेंगे। 
- दो छात्रों के बीच छह फीट की दूरी होना अनिवार्य है। 

- संस्थान के गेट पर छात्रों के प्रवेश करते समय और निकलते समय कोई भीड़ न लगे, इसके लिए पूरी सावधानी बरती जाए। 

- विश्वविद्यालयों को हेल्थ प्रोटोकॉल के साथ हॉस्टल खोलने की इजाजत होगी। कोरोना लक्षण वाले छात्रों को हॉस्टल में ठहरने की इजाजत नहीं होगी। डाइनिंग टेबल से परहेज करें और छोटे छोटे समूहों में खाना खाएं। कॉमन एरिया में जाते समय मास्क पहनें। स्विमिंग पूल बंद रहेंगे। हॉस्टल में रहने वाले विद्यार्थी कमरा शेयर नहीं कर सकेगे।

- तनाव से निपटने और मानसिक स्वास्थ्य दुरुस्त रखने के लिए छात्रों, शिक्षकों व कर्मचारियों को मनोदर्पण वेबपेज के बारे में बताया जाए।















Sunday, November 15, 2020

उच्च शिक्षा : शिक्षकों द्वारा तैयार 62000 ई-कंटेंट से समृद्ध हुआ पोर्टल, विद्यार्थियों को मिली सुविधा

उच्च शिक्षा : शिक्षकों द्वारा तैयार 62000 ई-कंटेंट से समृद्ध हुआ पोर्टल, विद्यार्थियों को मिली सुविधा


 कोविड-19 के प्रकोप के चलते इस बार उच्च शिक्षा संस्थानों में अब तक दाखिला पूर्ण नहीं हो सका है। इसके चलते स्नातक व स्नातकोत्तर की आनलाइन क्लास भी बाधित चल रही है। वहीं, राज्य विश्वविद्यालयों के अध्यापक भी इधर बीच ई-कंटेंट को लेकर उदासीन हो गए थे। दो माह पहले शासन के ई-पोर्टल पर तीस हजार ई-कंटेंट अपलोड किए गए थे। इस पर राज्यपाल/कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के कड़ी नाराजगी भी जताई थी। उन्होंने सभी राज्य विश्वविद्यालयों को ई-कंटेंट बढ़ाने का निर्देश दिया था। सख्त निर्देश के बाद पोर्टल पर ई-कंटेंट की संख्या अचानक बढ़ गई है। वर्तमान में पोर्टल पर 62000 ई-कंटेंट अपलोड हो चुके हैं।


इसमें महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के शिक्षकों द्वारा तैयार 6600 पाठ्य सामग्री भी शामिल है। पोर्टल पर ई-कंटेंट अपलोड करने के मामले में काशी विद्यापीठ सूबे में तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर आगरा व दूसरे नंबर पर लखनऊ है। इसके अलावा संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वाचल विश्वविद्यालय (जौनपुर), जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय (बलिया) सहित सूबे के अन्य राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों द्वारा ई-कंटेंट के रूप में पाठ्य सामग्री शामिल है। इस प्रकार ई-लाइब्रेरी में अब हंिदूी और अंग्रेजी में हजारों टेक्स्ट, आडियो-वीडियो फार्म में शिक्षण सामग्री उपलब्ध है।

ऐसे में अब घर बैठे स्नातक व स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों को पढ़ने के लिए ई-पोर्टल नामक विशाल ई-प्लेटफार्म की सुविधा मौजूद है। किसी भी विश्वविद्यालय व महाविद्यालय के छात्र अब सूबे के सर्वश्रेष्ठ शिक्षक के व्याख्यान, नोट्स का उपयोग आसानी से कर सकते हैं।

Friday, November 6, 2020

केंद्र सरकार ने राज्यों पर छोड़ा उच्च शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला।

केंद्र सरकार ने राज्यों पर छोड़ा उच्च शिक्षण संस्थान खोलने का फैसला।

नई दिल्ली : करीब सात माह से बंद पड़े उच्च शिक्षण संस्थानों को खोलने के लिए केंद्र सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। संस्थानों को खोलने या न खोलने का फैसला राज्य सरकारों पर छोड़ दिया गया है। उन्हें कोरोना संक्रमण के हालात को ध्यान में रखकर फैसला लेना होगा।


शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि जनता की मांग पर यह कदम उठाया गया है। संस्थान अधिकतम 50 फीसदी क्षमता के साथ ही खुल सकते हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालयों और अन्य केंद्रीय वित्त पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों को फिर से खोलने का निर्णय कुलपतियों और प्रमुखों पर छोड़ दिया गया है। राज्यों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कब से कक्षाएं चलें, इस पर राज्य सरकार फैसला करेंगी। चरणबद्ध तरीके से परिसर खोले जाएंगे।कोरोना मानदंडों का पालन करना होगा। कंटेनमेंट जोन से बाहर होने पर ही खोलने की अनुमति होगी।


पंजाब में 16 से खुलेंगे कॉलेज

पंजाब सरकार ने कंटेनमेंट जोन के बाहर वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को 16 नवंबर से खोलने का फैसला लिया है। मेडिकल छात्रों की अंतिम वर्ष की कक्षाएं नौ नवंबर से शुरू होंगी।

कन्टेनमेन्ट जॉन से बाहर खुलेंगे विश्विद्यालय और कॉलेज, यूजीसी के दिशा- निर्देश, कोई संक्रमित मिला तो फिर बन्द हो जाएंगे संस्थान।

नई दिल्ली : कंटेनमेंट जोन से बाहर विश्वविद्यालय और कॉलेज अब खुल सकेंगे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने ऑनलाइन, ऑफलाइन और मिश्रित मोड से कैंपस खोलने के लिए निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, किसी के संक्रमित मिलने पर कैंपस फिर बंद करना होगा।

यूजीसी सचिव प्रो. रजनीश जैन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कैंपस प्लेसमेंट, प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और कक्षाओं में 50 फीसदी छात्रों को ही एक दिन में आने की अनुमति होगी । हर जगह छह फुट दूरी और मास्क अनिवार्य होगा। कैंटीन बंद रहेगी और सार्वजनिक कार्यक्रमों पर रोक रहेगी। जो छात्र ऑनलाइन पढ़ना चाहें, उन्हें अध्ययन सामग्री देनी होगी विदेशी छात्रों के लिए विशेष योजना बनानी होगी। 


दिवाली व क्रिसमस की छुट्टियों में कटौती

मौजूदा शैक्षणिक सत्र के अकादमिक कैलेंडर में दिवाली, क्रिसमस और नए साल की छुट्टियां भी कम होंगी। कॉलेज हफ्ते में पांच की बजाय छह दिन कक्षा लगा सकते हैं। संस्थान पढ़ाई को लेकर बदलाव कर सकेंगे।

बहुत जरूरी हो तो ही खुलेंगे हॉस्टल

हॉस्टल खुलने के लिए नियम अलग होंगे। कमरों में एक से अधिक छात्रों के रहने की अनुमति नहीं होगी। बहुत जरूरी होने पर ही हॉस्टल में छात्र को रुकने की अनुमति मिलेगी। कोरोना के लक्षण वाले छात्र कैंपस में नहीं रुक सकेंगे।

उच्च शिक्षा : एकल तबादले को कतार में तीन हजार शिक्षक, शिक्षक संघ ने उप मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन।

उच्च शिक्षा : एकल तबादले को कतार में तीन हजार शिक्षक, शिक्षक संघ ने उप मुख्यमंत्री को दिया ज्ञापन।

लखनऊ : प्रदेश के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत तीन हजार शिक्षक एकल स्थानान्तरण के लिए कतार में खड़े हैं। मौजूदा पेचीदा नियमों के कारण कारण उनकी यह इच्छा पूरी नहीं हो पा रही है। इस कारण अब माध्यमिक की तरह उच्च शिक्षा में भी नियमों में बदलाव की मांग तेज होने लगी है।


प्रबंधकीय व्यवस्था वाले इन सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में एकल स्थानान्तरण की सुविधा तो है लेकिन इसमें दोनों महाविद्यालयों के प्रबंध तंत्र के अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) का पेंच फंसा हुआ है। इस कारण आवेदक को पहले उस महाविद्यालय की एनओसी लेनी पड़ती है जहां वह पढ़ा रहे हैं, फिर उस महाविद्यालय से भी एनओसी लेनी पड़ती है जहां वे अपना तबादला चाहते हैं। यही व्यवस्था पहले माध्यमिक के सहायता प्राप्त इंटर कॉलेजों में थीलेकिन शासन ने इसमें बदलाव कर दिया।

शिक्षक महासंघने उपमुख्यमंत्री को ज्ञापन दिया है ::  उत्तर प्रदेश विवि महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुफुक्टा ) ने इस संबंध में उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को ज्ञापन देकर अनिवार्य एनओसी व्यवस्था समाप्त करते हुए आनलाइन एकल स्थानान्तरण करने की मांग की है।

Wednesday, November 4, 2020

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों से मांगा ब्योरा, खाली पदों को भरने की तैयारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में जुटा शिक्षा मंत्रालय, अब विश्वविद्यालयों में खाली नहीं रहेंगे अहम पद

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालयों से मांगा ब्योरा, खाली पदों को भरने की तैयारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में जुटे शिक्षा मंत्रालय ने बनाई योजना

केंद्रीय विश्वविद्यालयों में खाली पड़े अहम पदों को दिसंबर तक भरने की योजना



नई दिल्ली। ।विश्वविद्यालयों में कोई भी अहम पद अब लंबे समय तक खाली नहीं रहेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल में जुटा केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इसे लेकर एक विस्तृत योजना तैयार की है। इसके तहत कुलपति सहित खाली पड़े सभी अहम पदों को दिसंबर तक भरने की योजना बनाई गई है। आगे भी इन पदों के खाली होने से पहले ही इन पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


फिलहाल इसको लेकर सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से ब्योरा मांगा गया है। इसमें इलाहाबाद और हैदराबाद विश्वविद्यालय सहित करीब आधा दर्जन केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति के खाली पड़े पदों को इस महीने के अंत तक भरने का संकेत भी दिया है।


विश्वविद्यालयों में खाली पड़े प्रमुख पदों को भरने को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने यह गंभीरता उस समय दिखाई है, जब शिक्षा नीति के प्रभावी अमल के लिए संस्थानों में स्थायी नियुक्ति पर जोर दिया गया है। साथ ही हाल ही में दिल्ली विश्वविद्यालय में जो स्थितियां निर्मित हुई, उसके बाद शिक्षा मंत्रालय और भी ज्यादा सतर्क हुआ। वहां कुलपति के छुट्टी पर होने और दूसरे अहम पदों के खाली पड़े होने से राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर ढिलाई बरती जा रही थी। बैठकों में विश्वविद्यालय की ओर से कोई हिस्सा भी नहीं ले रहा था। इसके साथ ही यह भी देखा गया कि अहम पदों के खाली रहने से वहां प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताएं भी बढ़ गई थीं। हालांकि, मंत्रालय इन पदों को भरने के लिए विश्वविद्यालय से कई बार पत्राचार कर चुका था। बावजूद इसके इन पदों को नहीं भरा गया था।


फिलहाल मंत्रालय ने इन स्थितियों को देखते हुए केंद्रीय विश्वविद्यालयों से खाली पड़े सभी अहम पदों का ब्योरा मांगा है। साथ ही इन पदों को तय समय सीमा में भरने के लिए कहा है। मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, खाली पड़े पदों को दिसंबर तक भरने की योजना बनाई गई है।


आधा दर्जन विश्वविद्यालयों में कुलपति के खाली पड़े पद 25 नवंबर से पहले भरने के संकेत

इनमें करीब आधा दर्जन विश्वविद्यालयों में कुलपति के खाली पड़े पद भी हैं, जिन्हें मंत्रालय ने 25 नवंबर से पहले भरने का संकेत दिया है। साथ ही राज्यों से भी अपने विश्वविद्यालयों में कुलपति सहित दूसरे खाली पड़े अहम पदों को भरने के लिए कहा है।


इलाहाबाद विश्वविद्यालय समेत छह विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद खाली पड़े हैं

गौरतलब है कि मौजूदा समय में जिन प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कुलपति के पद खाली पड़े हैं, उनमें इलाहाबाद विश्वविद्यालय, हैदराबाद विश्वविद्यालय, मौलाना आजाद उर्दू विश्वविद्यालय, गुरु घासीदास विश्वविद्यालय, तमिलनाडु केंद्रीय विश्वविद्यलाय और झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय आदि शामिल हैं।

Thursday, October 29, 2020

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लिए न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। 


प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित है। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित समिति में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके. तनेजा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को सदस्य बनाया है। प्रत्येक संकाय के लिए पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी भी गठित की गई है। 

यूपी : बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने का सुझाव

यूपी :  बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा को एक मंच पर लाने का सुझाव

 
लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के क्रियान्वयन के लिए गठित टास्क फोर्स ने प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक, उच्च शिक्षा और प्राविधिक शिक्षा विभाग को एक मंच पर लाने का सुझाव दिया है। टास्क फोर्स ने स्नातक और स्नातकोत्तर में एक समान पाठ्यक्रम लागू करने और एकेडमिक क्रेडिट बैंक की स्थापना का सुझाव दिया है।


बुधवार को उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित टास्क फोर्स की बैठक में शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर आए सुझावों पर मंथन किया गया। बैठक में उच्च शिक्षा, प्राविधिक शिक्षा एवं व्यावसायिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षा को सहज, सरल, सर्वसुलभ एवं रोजगारपरक बनाने के लिए तैयार कार्ययोजना का प्रस्तुतीकरण किया गया।


 उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस. गर्ग ने स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम निर्धारण, प्रवेश प्रक्रिया तथा एकेडमिक क्रेडिट बैंक की स्थापना, कौशल विकास को उद्योगों से जोड़ने, संबद्धता की व्यवस्था समाप्त कर महाविद्यालयों को स्वायत्तता देने और नैक का मूल्यांकन पर सुझाव दिए। डॉ. निशी पांडेय ने बहुभाषोय विवि को स्थापना के लिए तैयार मसौदे का प्रस्तुताकरण दिया। बैठक में राज्य उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डॉ. गिरीशचंद्र त्रिपाठी, प्राविधिक एवं व्यवसायिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव एस. राधा चौहान, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला उपस्थित थे।

Wednesday, October 28, 2020

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

लखनऊ : नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम करने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति व यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक किया जाएगा। इसकी अध्यक्ष विभागीय अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग होंगी। वहीं हर संकाय के लिए भी सुपरवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है।


यह कमेटी प्रो. सुरेन्द्र दुबे द्वारा संस्तुत किए गए विषयों के पाठ्यक्रमों को नवम्बर 2020 तक पुर्नसंयोजित करेगी। अन्य विषयों के पाठ्यक्रम 15 जनवरी 2021 तक तैयार किए जाने हैं।


राज्य स्तरीय समिति में लखनऊ विवि की भौतिक विज्ञान की विभागाध्याक्ष प्रो. पूनम टण्डन, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के सांख्यिकी विभाग के प्रो हरेकृष्ण, मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बादलपुर के एसो. प्रोफेसर दिनेश चन्द्र शर्मा सदस्य होंगे। ये कमेटी पाठ्यक्रम समयबद्ध रूप से तैयार हो, इसके लिए प्रभावी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए भी कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटयां हर विषय का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन करेगी और उसकी मॉनिटरिंग करते हुए समयसीमा तक पाठ्यक्रम तैयार करवाएगी।

Saturday, October 24, 2020

उच्च शिक्षा : अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त

अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त।

राज्य मुख्यालय : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 में यह इस पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। ‌यह जानकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम एक वर्ष की अवधि का है, जबकि पीएचडी पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवधि का है। 

एमफिल के लिए एपीआई स्कोर 5 से 7 प्वाइंट का है, जबकि पीएचडी का एपीआई स्कोर 25-30 प्वाइंट का है। नई शिक्षा नीति के तहत की गई संस्तुति के संबंध में शासन ने एमफिल पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने के बारे में प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों से अभिमत मांगा था। लखनऊ विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी एवं महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की संस्तुतियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया।

Friday, October 23, 2020

उच्च शिक्षा : शिक्षा शास्त्र का रिजल्ट आने की उम्मीद जगी, विज्ञापन- 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती मामला।

उच्च शिक्षा : शिक्षा शास्त्र का रिजल्ट आने की उम्मीद जगी, विज्ञापन- 47 के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती मामला।

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के खाली पदों के लिए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 47 के तहत भर्ती निकाली थी। जिसके लिए 35 विषयों के सापेक्ष 34 का रिजल्ट घोषित किया जा चुका है। जबकि शिक्षा शास्त्र विषय का रिजल्ट अभी नहीं घोषित हुआ है। जल्द उक्त विषय का रिजल्ट जारी होने की उम्मीद है। ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के खाली पदों के लिए उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या 47 के तहत भर्ती निकाली थी। इसके तहत 35 विषयों में 1150 असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों की भर्ती निकाली गई। सारे विषयों में इंटरव्यू की प्रक्रिया आठ फरवरी को पूरी हो गई थी । इसमें 33 विषयों का रिजल्ट पहले ही जारी कर दिया गया था लेकिन, समाजशास्त्र व शिक्षाशास्त्र का मामला कोर्ट में लंबित होने के कारण रिजल्ट जारी नहीं किया गया। समाजशास्त्र का इंटरव्यू 13 नवंबर 2019 को शुरू होकर आठ फरवरी 2020 तक चला। इसके बीच अधिक अंक होने के बावजूद इंटरव्यू में न बुलाने के आरोप में चार अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी। शिक्षा शास्त्र विषय में एमए और एमएड की डिग्री समतुल्य होने के विवाद के चलते रिजल्ट रूका रहा है। सुप्रीम कोर्ट के अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला आने के बाद रिजल्ट का रास्ता साफ हो गया। इस विषय में असिस्टेंट प्रोफेसर के 100 पद हैं। वहीं, आयोग उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से 2016 पदों का अधियाचन को उच्चतर शिक्षा आयोग को भेजा गया है। महिला क्षैतिज आरक्षण तय न होने के कारण विज्ञापन रूका हुआ है। सूत्रों की माने तो शासन जल्द ही इस मामले में स्थिति स्पष्ट कर सकता है। 


एनआईसी में 15 शिक्षकों को मिलेगा नियुक्ति पत्र : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के लिए सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) के लिए चयनित 15 नवनियुक्त शिक्षकों को जिलाधिकारी कैंपस स्थित एनआईसी में नियुक्ति पत्र दिया जाएगा। प्रदेश की राजधानी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एवं उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा चयनित 3317 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देंगे।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों के अध्यक्षों को निर्देश दिया था कि जिन विभागों के रिक्त पदों के अधियाचन लोक सेवा आयोग को नहीं भेजे गए हैं वे विभाग तत्काल आयोग को रिक्त पदों की जानकारी भेजें इसी सम्बंध में लोक सेवा आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उन विभागों के नाम की जानकारी दी जिनसे रिक्त पदों पर अभी तक अधियाचन प्राप्त नहीं हुआ है। जिसमें ग्राम्य विकास विभाग, राजस्व विभाग, गृह विभाग, नगर विकास, वाणिज्य कर, वित्त सेवाए, शिक्षा, निबंधन, पंचायती राज, उपभोक्ता संरक्षण एवं बाट माप तथा वन्य एवं जीव जीव अनुभाग आदि शामिल हैं। इन विभागों से कोई भी अधियाचन चयन वर्ष 2019-20 के लिए प्राप्त नहीं हुये हैं।

Thursday, October 22, 2020

यूपी : नवंबर में होगा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को खोलने का फैसला

यूपी :  नवंबर में होगा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों को खोलने का फैसला


यूपी के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को खोलने का फैसला नवंबर में लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि स्कूलों में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढा़ई भी जारी रहेगी. साथ ही उन्होंने कोरोना मरीजों से ज्यादा फीस लेने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात भी कही.


यूपी के उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि यूपी सरकार द्वारा विश्ववद्यालयों और महाविद्यालयों को खोलने का फैसला नवंबर में ले लिया जाएगा. डॉ, शर्मा बुधवार को टूंडला विधानसभा के उपचुनाव में प्रचार के लिए आए थे. जहां उन्होंने सर्किट हाउस में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ कोविड-19 की समीक्षा बैठक की. बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूपी में विश्वविद्यालय और महाविद्यालय खोले जाने पर विचार चल रहा है. इसको लेकर संबंधित विभाग कितने तैयार हैं. उनके द्वारा क्या सावधानियां बरती जानी हैं, इस बारे में उन्हें बता दिया गया है. साथ ही उन्होंने कहा कि स्कूलों में ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढा़ई भी जारी रहेगी. 


डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल तो खोल दिए गए हैं लेकिन अभी 15 फीसदी बच्चों की ही उपस्थिति हो रही है, हालांकि अच्छी बात ये है कि लोग खुद ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं.


Wednesday, October 21, 2020

नए निजी विश्वविद्यालय खोलने के 13 प्रस्ताव निरस्त, मानक पूरे न होने पर 3 और प्रस्ताव भी जल्द होंगे निरस्त

नए निजी विश्वविद्यालय खोलने के 13 प्रस्ताव निरस्त, मानक पूरे न होने पर 3 और प्रस्ताव भी जल्द होंगे निरस्त।

लखनऊ :  प्रदेश में नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के लिए मिले 31 में से 13 प्रस्ताव भूमि के मानक पूरे नहीं होने के कारण निरस्त कर दिए गए हैं। तीन और प्रस्ताव भी जल्द निरस्त किए जाएंगे। वहीं, पांच विश्वविद्यालयों को मानक पूरा करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया गया है। 


मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारी ने यह जानकारी दी। मुख्य सचिव राजेन्द्र कुमार तिवारी ने विवि स्थापित करने के लिए प्राप्त सभी प्रस्तावों का निस्तारण पूरी निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ करने के निर्देश दिए।


इनके प्रस्ताव निरस्त...

सर्वदेव विवि आजमगढ़, कृष्ण लाल मेमोरियल यूनिवर्सिटी ग्रेटर नोएडा, पंडित दीनदयाल उपाध्याय फरह विवि मथुरा, अलीगढ़ विवि अलीगढ़ (एएसीएन), एसआरडी यूनिवर्सिटी फिरोजाबाद, पीके यूनिवर्सिटी मथुरा, दून यूनिवर्सिटी सहारनपुर, पीएसआईटी कानपुर, एसआरएम यूनिवर्सिटी गाजियाबाद, आरकेजी यूनिवर्सिटी पिलखुवा हापुड़, डॉ. विजय इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, वाराणसी, श्री मूर्ति ठाकुर मदन मोहन केदार महन्त नारायण यूनिवर्सिटी मिर्जापुर एवं महाराणा प्रताप यूनिवर्सिटी कानपुर।

>>5 प्रस्तावों को मानक पूरा करने को मिला समय

Monday, October 19, 2020

निशाने पर उच्च शिक्षा निदेशालय के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी

निशाने पर उच्च शिक्षा निदेशालय के भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी

 
प्रयागराज : उच्च शिक्षा निदेशालय के कार्यो में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाने के लिए अधिकतर काम ऑनलाइन करने की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षकों व कर्मचारियों के निदेशालय आने पर रोक लगाकर ई-मेल के जरिए शिकायत-प्रार्थना पत्र भेजने का निर्देश है। अब उन अधिकारियों व कर्मचारियों की सूची तैयार हो रही है, जिनके ऊपर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। उनका ब्योरा शासन को भेजा जाएगा।


उच्च शिक्षा निदेशालय पर अनियमितता के आरोप लगते रहे हैं। पटलों में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर शासन ने कार्रवाई का निर्देश दिया है। भ्रष्ट कार्यप्रणाली पर अंकुश लगाने के लिए सिटीजन चार्टर कमेटी गठित की गई है। कमेटी को पेंशन, जीपीएफ सहित समस्त मामलों की फाइलें एक सप्ताह के अंदर निस्तारित करने का निर्देश दिया है। फाइल लंबित होने पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी को उसका कारण लिखित रूप से बताना होगा। साथ ही उन अधिकारियों व कर्मचारियों का ब्योरा एकत्र किया जा रहा है जो सालों से एक पटल पर जमे हैं और उनके खिलाफ शासन को शिकायत भेजी गई है। उनके कार्यो की गुप्त समीक्षा चल रही है। इसमें वो कहां कितने समय से काम कर रहे हैं? प्रतिदिन कितनी फाइलें निस्तारित करते हैं? कौन सी फाइल कितने दिनों तक रोकी गई? पटल का पर्वितन क्यों नहीं हुआ? आदि का ब्योरा एकत्र करके रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि शासन की मंशा के अनुरूप हर काम पारदर्शी बनाने की दिशा में काम चल रहा है। आने वाले दिनों में कई बदलाव होंगे, दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।

Sunday, October 18, 2020

उच्च शिक्षा : प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को एक नवंबर से कैंपस बुलाने की तैयारी, चलती रहेंगी ऑनलाइन कक्षाएं

उच्च शिक्षा : प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को एक नवंबर से कैंपस बुलाने की तैयारी,  ऑनलाइन कक्षाएं चलती रहेंगी।

 
लखनऊ : राज्य विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में एक नवंबर से स्नातक (यूजी) प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं कैंपस में शुरू करने की तैयारी है। विवि अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देश के अनुसार कक्षाएं शुरू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग तैयारियों में लगा है।


बीती 15 अक्टूबर से शोध छात्रों व स्नातकोत्तर (पीजी) के साइंस व टेक्नोलॉजी के विद्यार्थियों के लिए कैंपस खोल दिया गया है। सोमवार से कक्षा नौ से इंटर तक की कक्षाएं भी स्कूलों में लगेंगी। कोरोना के मरीज भी घट रहे हैं, ऐसे में धीरे-धीरे कैंपस खोले जाएंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा कहते हैं कि यूजीसी की गाइडलाइन को लागू कराया जाएगा। कोरोना प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन कर कक्षाएं शुरू करने को लेकर जल्द बैठक होगी।



प्रत्येक कक्षा में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को ही एक दिन में बुलाया जाएगा। बाकी पढ़ाई ऑनलाइन कक्षाओं से होगी। यूजी व पीजी के सेकेंड ईयर व थर्ड ईयर के विद्यार्थियों की ऑनलाइन कक्षाएं बीती चार अगस्त से चल रही हैं। अब फस्र्ट ईयर के स्टूडेंट के साथ सीनियर विद्यार्थियों की भी कक्षाएं कैंपस में शुरू होंगी।



इंजीनियरिंग छात्र ऑनलाइन क्लास ही पढ़ेंगे : इंजीनियरिंग कॉलेजों में बीटेक, बीफार्मा आदि के विद्यार्थियों की पढ़ाई कैंपस में शुरू करने या कैंपस खोलने को लेकर प्राविधिक शिक्षा विभाग ने फिलहाल कोई निर्णय नहीं लिया है। ऐसे में ऑनलाइन क्लास ही चलेगी।