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Wednesday, November 30, 2022

यूपी बोर्ड : ब्लॉक मुख्यालय में सुरक्षित रखे जाएंगे प्रश्नपत्र

यूपी बोर्ड : ब्लॉक मुख्यालय में सुरक्षित रखे जाएंगे प्रश्नपत्र


प्रतापगढ़। बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी है। इस बार जिला मुख्यालय से प्रश्न पत्र वितरित न कर ब्लॉक मुख्यालयों से वितरण करने की तैयारी है। इसके तहत ब्लॉक स्तर पर प्रश्न पत्र को सुरक्षित रखने के लिए सभी ब्लॉक से दो-दो स्कूलों के नाम मांगे हैं।


 बोर्ड परीक्षा को सुचितापूर्ण कराने के लिहाज से पहली बार बोर्ड प्रश्न पत्र रखने के लिए ब्लॉक स्तर पर राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों को चिह्नित किया है। जिनकी परिधि में सबसे अधिक परीक्षा केंद्र होंगे। इससे न सिर्फ प्रश्न पत्र की समुचित सुरक्षा होगी, बल्कि केंद्रवार सुरक्षित वितरण में भी मदद मिलेगी। 


बोर्ड परीक्षा के दौरान इस बार केंद्रों को एक साथ सभी प्रश्न पत्र नहीं दिए जाएंगे। जिस दिन जिस विषय की परीक्षा होगी। उस विषय का प्रश्नपत्र उस दिन केंद्रों को वितरित किया जाएगा। इसको लेकर बोर्ड ने पहले ही स्पष्ट निर्देश दे दिया है। 


पहले प्रश्नपत्रों को बैंक के लॉकर में रखने की तैयारी थी। इसके लिए प्रयास किया गया था, इसे स्थगित कर अब ब्लाक मुख्यालय की व्यवस्था की गई है।  ब्लॉक मुख्यालय से प्रश्नपत्र वितरण के लिए प्रत्येक ब्लॉकों के दो-दो स्कूलों को शामिल किया गया है।

Tuesday, November 29, 2022

सुप्रीम कोर्ट : छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाने व अलग शौचालय की मांग पर केंद्र व राज्यों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट : छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड दिए जाने व अलग शौचालय की मांग पर केंद्र व राज्यों को नोटिस



नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और आवासीय स्कूलों में छठी से 12वीं कक्षा तक की छात्राओं को मुफ्त सैनिटरी पैड और अलग शौचालय की मांग वाली याचिका पर केंद्र व राज्यों को नोटिस जारी किया।


 इस मामले में अगली सुनवाई जनवरी के दूसरे हफ्ते में होगी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दे के महत्व को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में सहायता करने का अनुरोध किया। 


■ याचिका में कहा गया कि मासिक धर्म सुरक्षित पानी, स्वच्छता और हाइजीन की आवश्यकता को विशेष रूप से युवतियों के लिए महत्वपूर्ण बनाता है। ऐसी स्थितियों में सुरक्षित पानी, स्वच्छता और हाइजीन तक पहुंच जीवन और मृत्यु का मामला हो सकता है।


■ याचिकाकर्ता जया ठाकुर के अनुसार, गरीब पृष्ठभूमि से आने वाली 11 से 16 साल की उम्र की छात्राओं की अक्सर हाइजीनिक तरीकों तक पहुंच नहीं हैं। सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है, लेकिन वे पूरे देश में सभी लड़कियों को कवर करने में सक्षम नहीं हैं।

यूपी बोर्ड 2023 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारियां तेज, केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक एवं मूल्यांकन के लिए परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति के लिए ऑनलाइन मांगी गई सूचना

यूपी बोर्ड : डिबार विद्यालय के शिक्षकों का भी डाटा होगा ऑनलाइन


यूपी बोर्ड परीक्षा सत्र 2022-23 की तैयारियां तेज हो गई है। बोर्ड ने केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक और अन्य ड्यूटी से संबंधित शिक्षक व कर्मचारियों का डॉटा ऑनलाइन करने के साथ डिबार विद्यालयों के शिक्षकों का डाटा भी ऑनलाइन करने का फरमान जारी किया है।

बोर्ड परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों की ऑनलाइन ड्यूटी लगाई जानी है। ऐसे में अध्यापकों की नियुक्ति जिस कक्षा (हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट) के लिए की गई है, चाहिए। उस कक्षा विषय के लिए निर्धारित विषय कोड के अनुरूप वेबसाइट पर अपडेट किया जाएगा। जो अध्यापक विद्यालय छोड़ चुके हैं या दिवंगत हो गए हैं। उनके नाम भी पोर्टल से डिलीट करने का निर्देश दिया गया है।

खास बात यह है कि विभिन्न कारणों से डिबार कर दिए गए विद्यालय के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों का भी डाटा ऑनलाइन किया जाएगा। उन्हें पोर्टल के डाटा में डिबार श्रेणी में दर्शाया जाएगा। बोर्ड द्वारा जारी निर्देश में साफ किया गया है कि किसी भी अध्यापक का विवरण किसी भी दशा में दो विद्यालयों में अपलोड नहीं होना चाहिए।

प्रधानाचार्य अपने विद्यालय में कार्यरत अध्यापकों का डाटा फाइनल करने से पहले सुनिश्चित करेंगे कि उनके विद्यालय में कार्यरत अध्यापक किसी अन्य विद्यालय में भी पंजीकृत तो नहीं है। लापरवाही मिलने पर संबंधित प्रधानाचार्य के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 



यूपी बोर्ड 2023 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारियां तेज,  केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक एवं मूल्यांकन के लिए परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति के लिए ऑनलाइन मांगी गई सूचना

 केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षकों का डाटा समय से अपडेट कराएंयूपी बोर्ड परीक्षा -2023 के संबंध में बोर्ड सचिव ने जारी किए निर्देश

डिबार शिक्षकों, प्रधानाचार्यों का विवरण छिपाया तो होगी कार्रवाई


प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने 2023 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की तैयारियां तेज कर दी है। बोर्ड परीक्षा के लिए केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक एवं मूल्यांकन के लिए परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति के लिए बोर्ड से जुड़े 28 हजार से अधिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सूचनाएं मांगी गई हैं। शिक्षकों के स्नातक-परास्नातक विषयों के विवरण के साथ पहली बार उनके शैक्षिक प्रमाणपत्रों को अपलोड करने को कहा गया है।


डिबार शिक्षक और प्रधानाचार्यों का ब्योरा देना होगा। परिषद की वेबसाइट पर डाटा अपलोड करने और अन्य प्रतिकूल स्थिति के लिए संबंधित प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे।



बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि प्रधानाचार्यों के माध्यम से शिक्षकों की सूचनाएं दस दिसंबर तक बोर्ड के पोर्टल पर अपलोड करवा दें। उसके बाद पोर्टल पर ही परीक्षण करते हुए डीआईओएस 20 दिसंबर तक बोर्ड को फॉरवर्ड करेंगे।



 विभिन्न कारणों से जिन शिक्षकों को डिबार किया गया है उन्हें पोर्टल पर डाटा में डिबार की श्रेणी में अनिवार्य रूप से दर्शाया जाए। स्कूलों में नवनियुक्त शिक्षकों का डाटा भी अनिवार्य रूप से अपडेट कर दिया जाए। शिक्षकों के विवरण बोर्ड के पोर्टल पर अपडेट करने की जिम्मेदारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों की है।


प्रयागराजः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने अब बोर्ड परीक्षा में केंद्र व्यवस्थापक, कक्ष निरीक्षक एवं परीक्षक की ड्यूटी लगाने से पहले सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के डाटा आनलाइन अपडेट कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने प्रधानाचार्यों को 10 दिसंबर और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को 20 दिसंबर तक का समय दिया है। डाटा अपडेट / अपलोड के लिए परिषद की वेबसाइट को क्रियाशील कर दिया गया है। इसी डाटा के आधार पर बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा - 2023 में ड्यूटी लगाई जाएगी। इसके पहले परीक्षा केंद्रों के जिओ लोकेशन, परीक्षार्थियों का शैक्षिक डाटा परिषद के पोर्टल पर अपडेट कराया जा चुका है।


जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में बताया गया है कि अध्यापकों की नियुक्ति जिस कक्षा (हाईस्कूल अथवा इंटरमीडिएट) के लिए की गई है उनके अध्यापन का विषय कोड अपलोड किया जाना है। विद्यालय छोड़ चुके या दिवंगत शिक्षकों के नाम पोर्टल से डिलीट किए जाने हैं। नवनियुक्त अध्यापकों का डाटा अवश्य अपलोड होना है।


कार्यरत किसी भी अध्यापक का विवरण छूटना नहीं चाहिए। डिबार शिक्षकों को पोर्टल पर डाटा डिबार श्रेणी में दर्शाया जाना चाहिए। किसी भी शिक्षक का विवरण दो विद्यालयों में अपलोड नहीं होना चाहिए। सभी अध्यापकों के अन्य विवरणों के साथ उनके स्नातक एवं परास्नातक स्तर के विषयों के स्पष्ट विवरण एवं शैक्षिक प्रमाणपत्रों को अपलोड कराया जाना आवश्यक है। कार्यरत अर्ह शिक्षकों का विवरण अपलोड कराने का दायित्व प्रधानाचार्य का है। प्रतिकूल स्थिति आने पर वही उत्तरदायी होंगे। विद्यालयों से डाटा अपलोड होने के बाद सीधे डीआइओएस के पोर्टल पर स्थानांतरित हो जाएगा। इसका परीक्षण कर डीआइओएस वांछित संशोधन के बाद पोर्टल पर सेव कर परिषद को फारवर्ड कराएंगे। इसी डाटा के आधार पर परीक्षा के दौरान और मूल्यांकन के समय ड्यूटी लगाई जाएगी।

शिक्षकों को राज्यपाल और सीएम ने दिया पुरस्कार, वेतनवृद्धि को दौड़ा रहे बाबू

शिक्षकों को राज्यपाल और सीएम ने दिया पुरस्कार, वेतनवृद्धि को दौड़ा रहे बाबू



राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों पुरस्कृत माध्यमिक शिक्षक पुरस्कार के रूप में मिली वेतनवृद्धि के लिए ठोकरें खा रहे हैं। कोई तीन साल से शिक्षा निदेशालय के चक्कर काट रहा है तो किसी ने वेतनवृद्धि के लिए उम्मीद ही छोड़ दी है।


 शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए अभिनव विद्यालय दांदूपुर के प्रधानाचार्य डॉ. आरडी शुक्ला और मेरी वानामेकर गर्ल्स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्या शुभा वाशिंगटन को 2018 का राज्य अध्यापक पुरस्कार पांच सितंबर 2019 को लखनऊ में दिया गया था।


भव्य समारोह में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने प्रदेशभर से चयनित शिक्षकों के साथ ही प्रयागराज के दोनों शिक्षकों को पुरस्कृत किया था। इन विशिष्ट शिक्षकों को पुरस्कार स्वरूप दो-दो साल का सेवा विस्तार और अन्य सुविधाओं के साथ मूल वेतन की तीन प्रतिशत वेतनवृद्धि मंजूर की गई थी। 


डॉ. आरडी शुक्ला पिछले तीन साल से अधिक समय से शिक्षा निदेशालय का चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक वेतनवृद्धि नहीं मिल सकी है। वहीं शुभा वाशिंगटन ने शुरुआत में जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय कार्यालय में प्रार्थना पत्र दिया। कई बार चक्कर काटने के बावजूद बाबुओं के आनाकानी करने और फाइल आगे नहीं बढ़ने पर उन्होंने वेतनवृद्धि की उम्मीद छोड़कर पैरवी करना ही बंद कर दिया।


बेसिक की पुरस्कृत शिक्षिका को मिल गई वेतनवृद्धि 
बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक इस मामले में खुशनसीब हैं। पांच सितंबर 2020 को वर्ष 2019 के लिए राज्य अध्यापक पुरस्कार पाने वाली परिषदीय स्कूल की शिक्षिका नीलिमा श्रीवास्तव को जनवरी 2022 में वेतनवृद्धि मिल गई। उनके वेतनवृद्धि की मंजूरी बीएसए के स्तर से होती है इसलिए कोई खास परेशानी नहीं हुई।



मामूली काम के लिए घूस लेते पकड़े जा चुके हैं बाबू

शिक्षा निदेशालय और जिला विद्यालय निरीक्षक द्वितीय कार्यालय के बाबू पिछले सवा साल के दौरान शिक्षकों के मामूली काम करने के लिए घूस लेते पकड़े जा चुके हैं। डीआईओएस टू कार्यालय के वरिष्ठ सहायक रामकृष्ण श्रीवास्तव को विजिलेंस की टीम ने शिक्षिका की पदोन्नति की फाइल आगे बढ़ाने के लिए 26 सितंबर को दस हजार रुपये घूस लेते रंगे हाथ पकड़ा था। वहीं पिछले साल सितंबर में ही शिक्षा निदेशालय के प्रधान सहायक अनिल कुमार को एक शिक्षक से बकाया भुगतान के लिए 30 हजार रुपये घूस लेते हुए विजिलेंस की टीम ने गिरफ्तार किया था।

अब एडेड स्कूलों में भी हो सकेंगे शादी समारोह, स्कूलों की आय बढ़ाने के लिए हो रहा विचार

अब एडेड स्कूलों में भी हो सकेंगे शादी समारोह, स्कूलों की आय बढ़ाने के लिए हो रहा विचार 


लखनऊ। यूपी बोर्ड से मान्यता प्राप्त एडेड माध्यमिक स्कूलों में अब सार्वजनिक कार्यक्रम, शादियां व अन्य कार्यक्रम हो सकेंगे। एडेड स्कूलों की आय बढ़ाने के लिए इस पर विचार किया जा रहा है।


 हालांकि यह स्पष्ट है कि केवल ऐसे कार्यक्रमों को ही अनुमति मिलेगी, जिससे शिक्षण कार्यों में कोई बाधा न आए। शासन स्तर पर विशेष सचिव स्तर के अधिकारी को इसकी कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। 


कार्ययोजना बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि ऐसे कार्यक्रमों को ही शामिल किया जाएगा, जिससे स्कूलों में चल रही पढ़ाई पर कोई असर न आए। स्कूल के मैदान या अन्य हॉल के इस्तेमाल ऐसे समय में हो जब स्कूल का समय न हो। इससे आने वाले फंड का इस्तेमाल स्कूलों की देखरेख में किया जाएगा।

अनुकंपा पर नियुक्त बाबू, टाइप में फेल हुए तो होंगे डिमोट

अनुकंपा पर नियुक्त बाबू,  टाइप में फेल हुए तो होंगे डिमोट 



लखनऊ। राज्य सरकार मृतक आश्रित कोटे पर समूह ‘ग’ के पद पर नौकरी पाने वालों को टाइपिंग परीक्षा पास न करने पर अब सेवा से बाहर नहीं करेगी बल्कि समूह ‘घ’ के पद पर डिमोट करेगी। कार्मिक विभाग इसके लिए मृतक आश्रित सेवा नियमावली-1974 में 13वां संशोधन करने जा रही है।


 दो साल का मिलता है मौका
मृतक आश्रित सेवा नियमावली के मुताबिक स्नातक तक डिग्री धारकों को अनुकंपा के आधार पर समूह ‘ग’ के पद पर सीधे भर्ती की जाती है। ऐसे कर्मियों को टाइपिंग परीक्षा पास करना अनिवार्य होता है। इसके लिए उन्हें दो साल का मौका दिया जाता है। पहले साल में परीक्षा पास न करने पर ऐसे कर्मियों की एक वेतन वृद्धि रोक दी जाती है। दूसरे साल भी टाइपिंग परीक्षा पास न करने पर नियमावली में ऐसे कर्मियों को नौकरी से बाहर करने का प्रावधान है।


पदावन्नत किए जाएंगे 
नियमावली के आधार पर टाइपिंग परीक्षा में पास न कर पाने वालों को बाहर करने की व्यवस्था है। इस तरह की कार्रवाई होने पर कर्मचारी हाईकोर्ट चले जाते हैं। इसको लेकर विभागों को जवाब देना पड़ता है। कुछ मामलों में तो निकाले गए कर्मियों को दोबारा रखना पड़ा है। इसीलिए कार्मिक विभाग समस्या का स्थाई समाधान करना चाहता है। कार्मिक विभाग ने मृतक आश्रित सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए इसमें टाइपिंग पास न कर पाने वालों को निकालने के स्थान पर डिमोट करने का प्रावधान किया जा रहा है।

दिनांक 05.12.2022 को पोर्टल पर लम्बित RTI ऑनलाइन प्रकरणों के सम्बंध में वीडियों कॉफ्रैन्सिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक।

दिनांक 05.12.2022 को पोर्टल पर लम्बित RTI ऑनलाइन प्रकरणों के सम्बंध में वीडियों कॉफ्रैन्सिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक।


CTET : त्रुटि सुधार हेतु 3 दिसंबर 2022 तक एक्टिव रहेगी करेक्शन विंडो, देखें नोटिफिकेशन

CTET :  त्रुटि सुधार हेतु 3 दिसंबर 2022 तक एक्टिव रहेगी करेक्शन विंडो, देखें नोटिफिकेशन 


Monday, November 28, 2022

विद्यार्थियों की करियर काउंसिलिंग के लिए बनेगा काल सेंटर, वाट्सएप चैटबाट के जरिये भी सवालों के दिए जाएंगे जवाब

विद्यार्थियों की करियर काउंसिलिंग के लिए बनेगा काल सेंटर

वाट्सएप चैटबाट के जरिये भी सवालों के दिए जाएंगे जवाब

जल्द कौशल विकास मिशन के साथ किया जाएगा MOU


माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अब करियर काउंसिलिंग की सुविधा दी जाएगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग जल्द कौशल विकास मिशन के साथ मिलकर काल सेंटर स्थापित करेगा। इस काल सेंटर के साथ- साथ वाट्सएप चैटबाट की मदद से भी उनके सवालों का जवाब दिया जाएगा। 


विभाग जल्द इसके लिए कौशल विकास मिशन के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन करेगा। विद्यार्थियों को करियर संवारने के लिए बेहतर विकल्प बताए जाएंगे और उन्हें रोजगार दिलाने पर भी जोर दिया जाएगा। 


महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने बताया कि वाट्सएप चैटबाट व काल सेंटर की मदद से विद्यार्थियों की करियर काउंसिलिंग की जाएगी। कक्षा नौ से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार किस क्षेत्र में अपना करियर बनाना ठीक रहेगा, यह उन्हें बताया जाएगा। 


वाट्सएप चैटबाट एक कंप्यूटर प्रोग्राम है जो कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी की मदद से काम करता है। यानी यह बातचीत करने वाले एक रोबोट जैसा होता है। विद्यार्थी अपने करियर से संबंधित सवाल लिखकर या बोलकर इससे पूछ सकेंगे। सरकारी व एडेड माध्यमिक स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को अच्छा करियर बनाने में मदद के लिए पंख पोर्टल भी बनाया गया है।

सैनिक स्कूल में प्रवेश की अंतिम तिथि 30 नवम्बर तक

सैनिक स्कूल में प्रवेश की अंतिम तिथि 30 नवम्बर तक


अखिल भारतीय सैनिक स्कूल में कक्षा छह और नौ में प्रवेश के लिए आवेदन फार्म भरने की अंतिम तिथि 30 नवंबर है।


 नेशनल टेस्टग एजेंसी (एनटीए) ने सभी सैनिक स्कूलों को अंतिम तिथि की सूचना दे दी है। सैनिक स्कूल घोड़ाखाल से मिली जानकारी के अनुसार एनटीए ही समस्त सैनिक स्कूलों की प्रवेश परीक्षा संपन्न कराती है। 


स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन की आखिरी तिथि 30 नवंबर तय की गई है। अभ्यर्थी को www.ais-see.nta.nic.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। संवाद

एडेड कॉलेजों में मृतक आश्रित पौत्र-पौत्री की भी नियुक्ति हो सकेगी, माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू

एडेड कॉलेजों में मृतक आश्रित पौत्र-पौत्री की भी नियुक्ति हो सकेगी, माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू



प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अब मृतक आश्रित पौत्र-पौत्री की भी नियुक्ति होगी। शासन ने माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। अब तक मृतक आश्रित के कुटुम्ब का सदस्य मृतक की विधवा/विधुर, पुत्र, अविवाहित या विधवा पुत्री को माना जाता था।


बदली व्यवस्था में कुटुम्ब का सदस्य पत्नी या पति, पुत्र या दत्तक पुत्र, पुत्रियां (जिसमें विधवा दत्तक पुत्रियां सम्मिलित हैं) और विधवा पुत्रवधु, आश्रित अविवाहित भाई, अविवाहित बहन, विधवा मां (यदि मृत सरकारी सेवक अविवाहित था) और यदि इनमें से कोई भी संबंधी नहीं है तो ऐसी स्थिति में आश्रित पौत्र या अविवाहित पौत्री को भी नियुक्ति मिलेगी। 


प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने 24 नवंबर को शिक्षा निदेशक को अधिनियम में बदलाव संबंधी आदेश भेजा है। इसके अलावा नियुक्ति के लिए जिला स्तरीय समिति में भी बदलाव किया गया है। पहले डीआईओएस की अध्यक्षता में गठित होने वाली समिति में बेसिक शिक्षा अधिकारी भी सदस्य होते थे। अब बीएसए के स्थान पर राजकीय इंटर कॉलेज या राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के वरिष्ठतम प्रधानाचार्य को सदस्य बनाया गया है।

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को UDISE कोड आवंटित कराने के सम्बंध में।

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को UDISE कोड आवंटित कराने के सम्बंध में।


शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों से जुड़े कार्यों में कोई प्रगति न होने से नाराज DGSE ने बेसिक शिक्षा परिषद सचिव और वित्त नियंत्रक को थमाई कारण बताओ नोटिस

शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों से जुड़े कार्यों में कोई प्रगति न होने से नाराज DGSE ने बेसिक शिक्षा परिषद सचिव और वित्त नियंत्रक को थमाई कारण बताओ नोटिस


परिषदीय शिक्षकों का ट्रांसफर फंसा, सचिव को नोटिस

परिषदीय शिक्षकों के ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में तबादले की प्रक्रिया आगे न बढ़ने समेत अन्य कार्यों में प्रगति न होने से नाराज महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल को कारण बताओ नोटिस दिया है।



वित्त नियंत्रक रविन्द्र कुमार से भी जवाब तलब किया है। 17 नवंबर को जारी नोटिस में विभिन्न कार्यों के लिए पिछले तीन महीने में लगातार निर्देश देने के बावजूद कोई प्रगति नहीं होने पर महानिदेशक ने नाराजगी जताई है।


ग्रामीण इलाके से शहरी क्षेत्र में अध्यापकों के तबादले, मृतक आश्रित नियुक्ति के लिए मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रावधान और शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही को ऑनलाइन, समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाने का प्रस्ताव नहीं भेजा गया। शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कार्रवाई ढीली है। शिक्षकों को जीवन बीमा पॉलिसी सुविधा उपलब्ध कराने के लिए विसंगतियां दूर कर कार्यवाही से अवगत नहीं कराया गया है।


नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के अंतर्गत कटौती व उसके सापेक्ष नियोजक का अंशदान संबंधित शिक्षक के एनपीएस खातों में प्रेषित किए जाने की प्रगति से भी अवगत नहीं कराया गया है। बच्चों के आधार प्रमाणीकरण के लिए शहरी क्षेत्र में जहां आधार किट उपलब्ध नहीं है और जहां आधार किट्स क्रियाशील नहीं है, वहां यूआईडीए की ओर से उपलब्ध कराई गई धनराशि से आधार किट्स उपलब्ध कराने के लिए निर्देशित करने के बावजूद अब तक काम पूरा नहीं किया गया है।


शिक्षकों के जो प्रत्यावेदन जिलों से अपील के माध्यम से अथवा सामान्य शिकायतों के माध्यम से सचिव को भेजे जाते हैं, उनके निस्तारण में सचिव कार्यालय में पारदर्शी व्यवस्था बनाने के लिए निर्देशित गया था। उसमें भी अब व्यवस्था में कोई भी सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।

Sunday, November 27, 2022

महिला सुरक्षा पर UGC सख्त, देश भर के सभी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों को एक बार फिर किया सचेत

महिला सुरक्षा पर UGC सख्त, देश भर के सभी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों को एक बार फिर किया सचेत


• उच्च शिक्षण संस्थानों से विशेष अभियान चलाने के निर्देश

• यौन उत्पीड़न व लैंगिक विभेद के मामले नौ तक निपटाने के निर्देश

यूजीसी के कैंपस को ऐसी घटनाओं से मुक्त रखने की सलाह



नई दिल्ली: महिला सुरक्षा पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सख्त रुख अपनाते हुए देश भर के सभी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों को एक बार फिर सचेत किया और कहा कि वह कैंपस में इसे सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाएं।


यूजीसी ने इस दौरान लैंगिक भेदभाव से जुड़ी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थानों में दस दिसंबर तक विशेष पखवाड़ा मानने की भी सलाह दी है। इसमें महिलाओं के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए बने कानून के प्रविधानों से सभी को अवगत कराने को कहा है।


यूजीसी ने यह पहल तब की है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ है। ऐसे समय में उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग और महिला के साथ लैंगिंक भेदभाव के मामले सामने आते है। यूजीसी ने इसके अलावा संस्थानों से अपने यहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े लंबित मामलों को भी नौ दिसंबर तक निपटाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही इसकी जानकारी भी मांगी गई थी। यूजीसी ने इसके साथ ही छात्रों और संस्थान के कर्मचारियों के बीच इसे लेकर कार्यशाला भी आयोजित करने को कहा है।

पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में अब सिर्फ 9वीं व 10वीं के बच्चों को ही लाभ

पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना में अब सिर्फ 9वीं व 10वीं के बच्चों को ही लाभ

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछड़े और अल्पसंख्यक समुदायों के लिए अपनी प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना को 9वीं और 10वीं कक्षा के छात्रों तक सीमित कर दिया है। पहले कक्षा 1 से 8 तक के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चों को यह छात्रवृत्ति मिलती थी। 


सरकार ने इस संबंध में जारी नोटिस में कहा कि सरकार के लिए शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 प्रत्येक बच्चे को मुफ्त और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना अनिवार्य बनाता है। नोटिस में शिक्षण संस्थान के नोडल अधिकारी (आईएनओ)/ जिला नोडल अधिकारी (डीएनओ) / राज्य नोडल अधिकारी (एसएनओ) को अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की प्री- मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत केवल कक्षा नौवीं और दसवीं के लिए आवेदनों को सत्यापित करने के लिए कहा गया है।


अब बेसिक के अल्पसंख्यक छात्रों को भी नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति

06 लाख गरीब अल्पसंख्यक छात्रों के लिए केंद्र सरकार से प्रतिवर्ष मिल रहे थे 275 करोड़ रुपये

05 तक के छात्रों को एक हजार व छह से आठ के छात्रों को मिल रहे थे चार-पांच हजार प्रतिवर्ष


लखनऊ : मदरसों में ही नहीं अब बेसिक के स्कूलों में भी पढ़ रहे अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को कक्षा आठ तक की छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। निश्शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत कक्षा आठ तक के बच्चों की शिक्षा मुफ्त होने पर एससी, एसटी व ओबीसी के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति पहले ही बंद हो गई थी लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने अल्पसंख्यक छात्रों के लिए अब तक इसे बनाए रखा। 2016 में प्रदेश सरकार ने भी कक्षा आठ तक की अपनी छात्रवृत्ति बंद कर दी लेकिन केंद्र सरकार से मिल रही थी। पिछले वर्ष ही करीब छह लाख छात्र-छात्राओं को 275 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी गई। 


अब इस और ध्यान जाने पर केंद्र सरकार ने कक्षा एक से आठ तक के सभी अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं की भी छात्रवृत्ति बंद कर दी है। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में कहा कि छात्रवृत्ति का मुख्य उद्देश्य अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के दृष्टिगत छात्रों को पुस्तकें व कापी व अन्य शिक्षण सामग्री आदि के क्रय में सहायता प्रदान करना था । 


चूंकि अब कक्षा आठ तक के छात्र- छात्राओं से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाता है, इसलिए छात्रवृत्ति की प्रासंगिकता नहीं रह गई है। ऐसे में अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने पूर्व दशम कक्षाओं में केवल कक्षा- नौ एवं 10 के छात्रों को ही छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है। हालांकि, जब अन्य वर्गों के कक्षा आठ तक के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति पहले ही बंद हो गई थी तब अल्पसंख्यक छात्रों को अब तक छात्रवृत्ति मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। 


गौरतलब है कि कक्षा पांच तक के अल्पसंख्यक छात्रों को एक हजार जबकि कक्षा छह से आठ तक के छात्रों को चार से पांच हजार रुपये वार्षिक छात्रवृत्ति मिल रही थी। बैठक में मंत्री ने वक्फ संपत्तियों की निगरानी और सुरक्षा तथा विभाग में सीधी भर्ती के रिक्त पदों को शीघ्र भरने के भी निर्देश दिए। बैठक में अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग, विशेष सचिव अनिल कुमार, निदेशक जे. रीभा, मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह, संयुक्त निदेशक आरके सिंह व एसएन पाण्डेय थे।



अब आठवीं तक के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं, केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग ने जारी किया आदेश


अल्पसंख्यक विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया है कि शिक्षा के अधिकार के तहत कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई मुफ्त है। विद्यार्थियों को अन्य जरूरी वस्तुएं भी दी जाती हैं। इसलिए सिर्फ नौवीं एवं दसवीं के विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति दी जाएगी और उन्हीं के आवेदन अग्रसारित किए जाएं


प्रयागराज : प्रदेश के मदरसों में अध्ययनरत कक्षा एक से आठ तक के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति रोक दी गई है। यह निर्देश भारत सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से जारी किया गया है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्णमुरारी के मुताबिक मंत्रालय के निर्देश में कहा गया है कि बेसिक स्कूलों की तरह ही इन मदरसों के छात्र-छात्राओं को भी दोपहर का भोजन, यूनिफार्म, किताब कापी भी निश्शुल्क दी जाती है। फीस भी नहीं ली जाती है। इसलिए अब छात्रवृत्ति नहीं दी जाएगी।


मदरसों में कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को हर साल एक हजार रुपये और कक्षा छह से आठ तक के छात्र - छात्राओं को 6500 रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से वजीफा मिलता था। 


कक्षा नौ से लेकर उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा लेने वाले इन विद्यार्थियों को पहले की तरह ही छात्रवृत्ति मिलती रहेगी। 




प्रयागराज । आठवीं तक के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को अब केंद्रीय छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी। केंद्रीय अल्पसंख्यक विभाग ने इस बाबत आदेश जारी कर दिया है। अंतिम समय में हुए इस आदेश से मदरसा संचालकों में निराशा है।

केंद्र सरकार की ओर से प्री मैट्रिक योजना के अंतर्गत पहली से दसवीं तक के अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती है। कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को एक वर्ष में एक हजार रुपये दिए जाते हैं। छठवीं से आठवीं तक के लिए छात्रवृत्ति की राशि अलग-अलग है।

इसके लिए 15 नवंबर तक आवेदन मांगे गए थे। संस्थानों की ओर से सत्यापन के बाद आवेदन फारवर्ड भी कर दिए गए हैं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय की ओर से अब इसकी हार्ड कॉपी की मांग की गई थी, लेकिन शनिवार को अचानक प्रक्रिया रोक दी गई।

संस्थान प्रतिनिधियों को बताया गया कि पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति नहीं दी जाएगी। सिर्फ नौवीं एवं दसवीं के विद्यार्थियों के आवेदनों की ही हार्ड कॉपी जमा की जाए।

अल्पसंख्यक विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया है कि शिक्षा के अधिकार के तहत कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई मुफ्त है। विद्यार्थियों को अन्य जरूरी वस्तुएं भी दी जाती हैं। इसलिए सिर्फ नौवीं एवं दसवीं के विद्यार्थियों को ही छात्रवृत्ति दी जाएगी और उन्हीं के आवेदन अग्रसारित किए जाएं। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कृष्ण मुरारी का कहना है कि आदेश आया है। इसी के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वहीं मऊआइमा स्थित मदरसा के प्रधानाचार्य शफीकुर्रहमान ने इस आदेश पर निराशा जताई है। उनका कहना है कि अभी जिला विद्यालय निरीक्षक की ओर से 24 नवंबर को ही पत्र लिखकर पहली से दसवीं तक के सभी विद्यार्थियों के आवेदनों की हार्ड कॉपी मांगी गई थी, लेकिन शनिवार को अचानक यह आदेश आ गया। यह निराश करने वाला है।

छात्रवृत्ति नहीं दी जानी थी तो पहले से इसकी सूचना होनी चाहिए थी। उन्होंने बताया कि जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय में छात्रवृत्ति बहाली की मांग का ज्ञापन सोमवार को सौंपा जाएगा।

उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षकों की शीघ्र होगी स्थाई नियुक्ति

उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में कम्प्यूटर शिक्षकों की शीघ्र होगी स्थाई नियुक्ति


यूपी सरकार ने सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कंप्यूटर शिक्षकों के पद सृजित करने के लिए राज्य माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा है

कंप्यूटर शिक्षा लगभग 10 साल पहले पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी योजना के तहत शुरू की गई थी लेकिन उनके पास नियमित कंप्यूटर शिक्षक नहीं थे। 

अब प्रदेश में पहली बार 4500 से अधिक सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी.

इस घटनाक्रम से अवगत राज्य माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार ने इन संस्थानों में कंप्यूटर शिक्षकों के पद सृजित करने के लिए राज्य माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा है।

अपर निदेशक (माध्यमिक शिक्षा) महेंद्र देव ने 21 अप्रैल को यूपी बोर्ड के सचिव को पत्र लिखकर इस संबंध में जानकारी मांगी है. अधिकारी ने कहा कि इससे पहले कभी भी इन स्कूलों में नियमित कंप्यूटर शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई।

पत्र के जवाब में अधिकारियों ने स्कूलों की सूची राज्य सरकार को भेज दी है। सूची में उन स्कूलों के नाम शामिल हैं जहां प्रत्येक जिले में कंप्यूटर विषय/शिक्षा को मान्यता दी गई है (हाई स्कूल और इंटरमीडिएट के लिए अलग-अलग) और जहां विषय पढ़ाया जा रहा है। सरकार से पद सृजन की मंजूरी के बाद, नियुक्ति उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड (UPSESSB) के माध्यम से की जाएगी, एक अधिकारी ने साझा किया।

कंप्यूटर शिक्षा लगभग 10 साल पहले पूरे उत्तर प्रदेश में सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी योजना के तहत शुरू की गई थी। प्रत्येक स्कूल को 10 कंप्यूटर देने के साथ-साथ निजी एजेंसियों से आउटसोर्स किए गए कंप्यूटर शिक्षकों को शुरू में 15,000 रुपये के मानदेय पर रखा गया था, लेकिन 5-विषम वर्षों के बाद पूरी पहल ठप हो गई। अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर लैब पिछले चार-पांच साल से बंद हैं। कुछ विद्यालयों में निजी शिक्षक हैं जिनका मानदेय छात्रों से एकत्रित धन से दिया जाता है।

माध्यमिक विद्यालयों में भी कमी
अधिकारी मानते हैं कि राज्य के 2200 से अधिक सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में भी कंप्यूटर शिक्षकों की कमी है। पहली बार एलटी ग्रेड (सहायक शिक्षक) भर्ती-2018 में कंप्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पद विज्ञापित किए गए थे। कुल 1673 पदों में से, 898 पुरुषों के लिए और 775 स्कूल की लड़कियों की शाखा के लिए थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस भर्ती का परिणाम 23 अक्टूबर, 2019 को जारी किया। लेकिन पुरुषों में सिर्फ 30 शिक्षक और महिलाओं में केवल छह शिक्षक सफल हुए, और बाकी पद खाली रहे।



प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा के महानिदेशक (डीजी) विजय किरन आनंद ने शुक्रवार को जीआईसी, जीजीआईसी, डीआईओएस कार्यालय, यूपी बोर्ड मुख्यालय और शिक्षा निदेशालय का औचक निरीक्षण किया।



कहा कि माध्यमिक विद्यालयों में जो भी कमियां हैं उनको अलंकार योजना, राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा योजना, स्मार्ट सिटी सहित अन्य योजनाओं से शीघ्र बेहतर किया जाएगा। कम्प्यूटर के शिक्षकों की माध्यमिक विद्यालयों में शीघ्र स्थाई नियुक्ति होगी, इसकी शासन स्तर पर तैयारियां शुरू हो गयी है।


उन्होंने कहा कि शिक्षकों को उत्साहित करने के लिए और उनको बेहतर प्रशिक्षण देने के लिए विशेषकर गणित, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान और जीव विज्ञान के शिक्षकों का शीघ्र प्रशिक्षण शुरू होगा। कम्प्यूटर शिक्षकों की लंबे समय से स्थाई भर्ती नहीं हुई है, ऐसे में कम्प्यूटर शिक्षकों की स्थाई भर्ती शीघ्र शुरू होगी। इसके लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा और वहां से संस्तुति मिलते ही भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि की यूपी बोर्ड मुख्यालय और शिक्षा निदेशालय के अलग-अलग अनुभागों में जो भी परेशानियां है उसको भी शीघ्र दूर किया जाएगा, इसके लिए कार्य योजना तैयार हो रही है।


महानिदेशक ने कहा कि खेलकूद और आर्ट क्राफ्ट को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यूपी बोर्ड की परीक्षाओं को बेहतर और पारदर्शी कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जो भी परीक्षा केंद्र बनेंगे वह पारदर्शी और स्वच्छ छवि के होगे। कोई भी ब्लैक लिस्टेड या दागी छवि के विद्यालय परीक्षा केंद्र नहीं बनेगा। अगर कोई ऐसा परीक्षा केन्द्र बनता है या मामला प्रकाश में आता है तो सम्बंधित डीआईओएस और जेडी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के चारों शिक्षा निदेशक और बेसिक शिक्षा और बोर्ड के सचिव की शीघ्र स्थायी नियुक्ति होगी, इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जाएगा।


निरीक्षण के दौरान यूपी बोर्ड के सचिव दिव्य कांत शुक्ला, क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज की अपर सचिव विभा मिश्रा, सीएल चौरसिया, अनिल भूषण चतुर्वेदी, डीआईओएस पीएन सिंह, डीडीआर आर एन विश्वकर्मा, बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी, जीआईसी के प्रधानाचार्य बीके सिंह, जीजीआईसी की प्रधानाचार्या नीलम मिश्रा, डॉ रेखा राम सहित अन्य वरिष्ठ अफसर, शिक्षक मौजूद थे।

माध्यमिक विद्यालयों में छात्र अनुपात से होगी शिक्षकों की तैनाती, सभी जिलों से छात्रों व शिक्षकों का ब्योरा मांगा

माध्यमिक विद्यालयों में छात्र अनुपात से होगी शिक्षकों की तैनाती, सभी जिलों से छात्रों व शिक्षकों का ब्योरा मांगा

माध्यमिक शिक्षा : तय प्रारूप में छात्र नामांकन तथा शिक्षकों का विवरण उपलब्ध कराने के संबंध में निर्देश जारी, देखें आदेश
 

लखनऊ। डीजी स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से उनके जिले के राजकीय विद्यालयों में नामांकित छात्रों और कार्यरत शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। इसके आधार पर शिक्षकों की तर्कसंगत एवं समानुपातिक तैनाती किए जाने की योजना है। यह सूचना दो अलग-अलग प्रारूपों पर मांगी गई है। इसमें प्रारूप ‘ए’ पर छात्र नामांकन और प्रारूप ‘बी’ पर शिक्षकों का विवरण मांगा गया है।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती करने की तैयारी फिर शुरू हो गई है। इसके लिए सभी विद्यालयों के विषयवार छात्रों व शिक्षकों का ब्योरा मांगा गया है। ब्योरा आने के बाद विद्यालयवार समीक्षा होगी और फिर जरूरत के अनुसार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी। इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने शनिवार को सभी डीआईओएस को निर्देश जारी किए हैं।


उन्होंने कहा है कि विद्यालयों में शिक्षकों की तर्कसंगत व समानुपातिक तैनाती जरूरी है। इसलिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों का ब्योरा जुटाया जाए। उन्होंने छात्र नामांकन व कार्यरत शिक्षकों का विवरण निर्धारित प्रारूप में दस दिन में निदेशक माध्यमिक शिक्षा कार्यालय को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। 


माना जा रहा है कि ब्योरा जुटाने के बाद न केवल जरूरत के अनुसार शिक्षकों को इधर, उधर किया जाएगा, बल्कि विषयवार कम ज्यादा शिक्षकों व छात्रों के नामांकन की स्थिति की समीक्षा भी हो सकेगी। सूत्र इस कवायद को सरप्लस शिक्षकों के तबादलों से जोड़ रहे हैं। उनका कहना है कि चालू शैक्षिक सत्र में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन शासन ने इस पर रोक लगा दी थी। राजकीय शिक्षक संघ ने भी इस पर एतराज जताया था।



Saturday, November 26, 2022

नियुक्ति में देरी से सुप्रीम कोर्ट खफा, यूपी में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करने का मामला

नियुक्ति में देरी से सुप्रीम कोर्ट खफा, यूपी में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति नहीं करने का मामला



नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए एक अपर्याप्त हलफनामा दाखिल करने के लिए यूपी सरकार को फटकार लगाई, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले छात्रों को पढ़ाने के लिए राज्य में विशेष शिक्षकों की कमी रेखांकित की गई थी। सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि वे 12,000 नियमित शिक्षकों की नियुक्ति पर विचार कर रहे हैं। इसके लिए बजट आवंटित किया जा चुका है।


इस पर जस्टिस दिनेश माहेश्वरी और जस्टिस सुधांशु धूलिया की पीठ ने पूछा, इस शताब्दी में कब ? अब हमें सरकार के उठने तक इंतजार करना चाहिए? वकील ने कहा, आप हमें निर्देश दे सकते हैं। कोर्ट ने कहा, क्या पूरी सरकार हमें ही चलानी है । आप हमें निर्देश देने के लिए कह रहे हैं। वे (याचिकाकर्ता ) हमें निर्देश देने के लिए कह रहे हैं। इसके बाद आप कहेंगे कि न्यायालय अपनी सीमा का उल्लंघन कर रहा है। आप खड़े हैं, बैठे हैं या सो रहे हैं, हम यह जानना नहीं चाहते। आप इसे करें। अभी तक आप बस सो रहे हैं, और कुछ नहीं। इस तरह के मामले हैं, जहां आपको अति- संवेदनशीलता दिखानी चाहिए। यह अपेक्षित है। हम बुलाते हैं और उपदेश देते रहते हैं, यह क्या है ?

उच्च शिक्षा नीति लाएगी यूपी सरकार, हर जिले में खुलेंगे नए संस्थान

उच्च शिक्षा नीति लाएगी यूपी सरकार, हर जिले में खुलेंगे नए संस्थान

युवाओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए निजी क्षेत्र को देंगे बढ़ावा

निवेशकों को आकर्षित करने के लिए दी जाएंगी कई तरह की सुविधाएं


लखनऊ। प्रदेश में उच्च शिक्षा को आधुनिक व रोजगारपरक बनाने के लिए उसका विस्तार किया जाएगा। इसके लिए सरकार उच्च शिक्षा नीति लाएगी। इनमें निजी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तमाम सुविधाएं दी जाएंगी। जिससे पिछड़े व असेवित क्षेत्रों के साथ ही हर जिले में उच्च शिक्षण संस्थान खुलेंगे और विद्यार्थियों को रोजगार के विकल्प भी बढ़ेंगे।


उच्च शिक्षा विभाग इस बाबत एक कॉन्क्लेव आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। शुक्रवार को इस संबंध में विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपतियों व विशेषज्ञों संग शासन स्तर पर विचार किया गया। अधिकारियों के मुताबिक पहले औद्योगिक नीति में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने की व्यवस्था होती थी लेकिन अब इसे अलग से तैयार किया जा रहा है। सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की अर्थव्यवस्था दस खरब डॉलर की बनाने की है। ऐसे में युवाओं को बेहतर उच्च शिक्षा देने के लिए निजी क्षेत्र को बढ़ावा देने की तैयारी है।


कॉन्क्लेव में प्रदेश ही नहीं देश-विदेश के निवेशकों को आमंत्रित किया जाएगा। सरकार इसमें निवेशकों से युवाओं के कौशल विकास व उच्च शिक्षा देने के साथ ही उनको रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की अपेक्षाएं बताएगी। वहीं निवेशकों से पूछेगी कि उनको सरकार क्या उम्मीदें हैं। पीपीपी मॉडल पर शिक्षण संस्था खोलने के विकल्प पर भी चर्चा होगी।



विदेशी विश्वविद्यालयों को बुलाएंगे 

 प्रदेश में विदेशी विश्वविद्यालयों को भी विस्तार के लिए आमंत्रित किया जाएगा। कोशिश होगी कि बाहर के विश्वविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थान यहां के विवि व संस्थान से शैक्षिक आदान-प्रदान के लिए जुड़ें। इसके लिए एमओयू से लेकर सभी विकल्पों पर चर्चा होगी। छात्रों को पढ़ाई के लिए एक- दूसरे के यहां भेजने के साथ ही विभिन्न विधाओं में दक्ष करने का प्रयास होगा।



बेसिक व माध्यमिक शिक्षा को भी जोड़ेंगे

यदि कोई निवेशक प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक के लिए संस्थान खोलना चाहता है तो उसे इसके लिए सुविधाएं दी जाएंगी। तकनीकी शिक्षा को भी इसमें जोड़ा जाएगा। उच्च शिक्षा नीति में युवाओं को औद्योगिक जरूरतों के मुताबिक दक्ष करने पर जोर दिया जाएगा। जिससे प्रशिक्षित युवाओं को आसानी से रोजगार मिल सके। वहीं वे अपना उद्यम भी शुरू कर सकें। इसके लिए विषय विशेष का प्रशिक्षण देने वाली संस्थाओं को संस्थान खोलने के लिए अवसर दिए जाएंगे।


वर्तमान में 7300 निजी उच्च शिक्षण संस्थान

वर्तमान में प्रदेश में लगभग 7900 उच्च शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से 7300 निजी संस्थान हैं। इसी तरह कुल 50 विश्वविद्यालयों में से 30 निजी विवि हैं। ज्यादातर निजी संस्थाएं नोएडा व आसपास के क्षेत्रों में है।

विधान परिषद सदस्य श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी द्वारा गैर सहायता अशासकीय जूनियर हाईस्कूलों के संबन्ध में पूछे गए प्रश्न के जवाब के संबंध में

विधान परिषद सदस्य श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी द्वारा गैर सहायता अशासकीय जूनियर हाईस्कूलों के संबन्ध में पूछे गए प्रश्न के जवाब के संबंध में


एडेड स्कूलों में रखे जाएंगे 22 हजार कर्मी, आउटसोसिंग से नियुक्ति, 15 दिनों में डीआइओएस देंगे पदों का ब्योरा

एडेड स्कूलों में रखे जाएंगे 22 हजार कर्मी, आउटसोसिंग से नियुक्ति, 15 दिनों में डीआइओएस देंगे पदों का ब्योरा


लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में अगले महीने आउटसोर्सिंग पर 22 हजार कर्मचारी रखे जाएंगे। एनएचएम करेगा 17,291 पदों पर भर्ती सभी स्कूल 15 दिनों के अंदर जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) कार्यालय को अपने यहां तृतीय श्रेणी व चतुर्थ श्रेणी कर्मियों के खाली पदों का ब्योरा देंगे। डीआइओएस मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय व मंडल स्तर पर गठित कमेटी इन पदों के हिसाब से जिलों के लिए आउटसोर्सिंग कंपनी का चयन करेगी। यह प्रक्रिया महीने भर में पूरी की जाएगी।

एडेड स्कूलों में महीने भर में मैनपावर उपलब्ध कराने के लिए निर्धारित किए गए टाइम टेबल के अनुसार अधिकारी खाली पदों का ब्योरा लेकर इन पदों पर कर्मियों की तैनाती तक की प्रक्रिया में अगर लापरवाही बरतेंगे तो कार्रवाई की जाएगी। हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में पांच कर्मियों को रखा जाएगा। वहीं इंटरमीडिएट कला वर्ग के विद्यालयों में सात कर्मचारी रखे जाएंगे। साहित्य के साथ-साथ अगर विज्ञान वर्ग की पढ़ाई स्कूल में हो रही है तो तीन अतिरिक्त कर्मी यानी 10 कर्मचारी रख सकेंगे।



एडेड माध्यमिक विद्यालयों में शुरू होगी आउटसोर्स कर्मियों की भर्ती

शासन ने प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी, दो हफ्ते में मांगे गए प्रस्ताव


लखनऊ। शासन ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग से भर्ती की प्रक्रिया शुरू करने को मंजूरी दे दी है। इन विद्यालयों को शासनादेश के अनुसार जरूरी कर्मचारियों की प्रस्ताव डीआईओएस  को संख्या निर्धारित कर दो हफ्ते में उपलब्ध कराने को कहा गया है।


 विद्यालयों से प्रस्ताव मिलने के बाद डीआईओएस एक हफ्ते में मंडलीय समिति को अपने जिले की सूचना देंगे। फिर मंडलीय समिति तीन हफ्ते में सेवा प्रदाता का चयन करेगी। इसके बाद सेवा प्रदाता चार हफ्ते में आउटसोर्स कर्मियों को उपलब्ध कराएगी। 


इस संबंध में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा एसपी सिंह ने आदेश जारी कर दिए हैं। भर्ती में इस बात पर खास ध्यान देने को गया है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि विद्यालय में एक सफाई कर्मी व एक चौकीदार अनिवार्य रूप से रहे ।

निदेशालय का चक्कर न काटें शिक्षक, ऑनलाइन दें छुट्टी, शिक्षण की गुणवत्ता आप लोग सुधारें, संसाधनों की कमियां हम दूर करेंगे, शिक्षकों से बोले DGSE

निदेशालय का चक्कर न काटें शिक्षक, ऑनलाइन दें छुट्टी, महानिदेशक ने शिक्षा निदेशालय का किया निरीक्षण, व्यवस्था देख दिए कई निर्देश
 
शिक्षण की गुणवत्ता आप लोग सुधारें, संसाधनों की कमियां हम दूर करेंगे, शिक्षकों से बोले DGSE 


प्रयागराज । महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने शुक्रवार को जीआईसी, जीजीआईसी और डीआईओएस कार्यालय का निरीक्षण किया। स्कूलों में उन्होंने शिक्षकों से कहा कि आप शिक्षण की गुणवत्ता सुधारें, कमियां हम दूर करेंगे। वहीं, शिक्षा निदेशालय और माध्यमिक शिक्षा परिषद के निरीक्षण के दौरान पारदर्शी व्यवस्था पर जोर दिया।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद सबसे पहले सुबह लगभग सवा नौ बजे राजकीय इंटर कॉलेज पहुंचे। यहां उन्होंने हर कक्षा में जाकर शिक्षण व्यवस्था का जायजा लिया। प्रधानाचार्य वीके सिंह से विद्यालय में होने वाली अतिरिक्त गतिविधियों के बारे जानकारी ली।


इसके बाद वह जीजीआईसी पहुंचे। यहां प्रधानाचार्या डॉ. नीलम मिश्र से स्कूल में शिक्षण व्यवस्था, शिक्षकों की संख्या, छात्राओं की संख्या आदि की जानकारी ली। इसके बाद बाद महानिदेशक डीआईओएस कार्यालय पहुंचे। यहां हर पटल पर जाकर कर्मचारियों से बातचीत की। इस दौरान सचिव यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल, डीडीआर आरएन विश्वकर्मा, डीआईओएस पीएन सिंह आदि उपस्थित रहे ।



प्रयागराज : महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने शुक्रवार को शिक्षा निदेशालय का निरीक्षण किया। माध्यमिक का प्रभार मिलने के बाद पहली बार आए महानिदेशक ने अधिकारियों और कर्मचारियों से दो टूक कहा है कि कोई भी शिक्षक छुट्टी, एरियर या किसी अन्य काम के लिए शिक्षा निदेशालय के चक्कर न काटें। छुट्टी, बकाया भुगतान से लेकर अन्य कार्यों को ऑनलाइन और समयबद्ध तरीके से किया जाए।


राजकीय शिक्षकों की ऑनलाइन छुट्टी दिसंबर से और बायोमीट्रिक हाजिरी के आधार पर वेतन भुगतान की व्यवस्था जनवरी से सुनिश्चित की जाए। दोपहर एक बजे शिक्षा निदेशालय पहुंचे महानिदेशक ने सबसे पहले विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण किया। फाइलों का रखरखाव ठीक नहीं मिला। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अधिकारी शिक्षा निदेशालय में नहीं बैठते इसके चलते परेशानी हो रही है। पब्लिक आकर आरोप लगाती है कि बाबू काम नहीं करते। छोटे-छोटे काम के लिए लखनऊ दौड़ना पड़ता है। इस पर महानिदेशक ने अधिकारियों के निदेशालय में बैठना सुनिश्चित कराने का आश्वासन दिया। 


इसके बाद वह यूपी बोर्ड मुख्यालय का निरीक्षण करने पहुंचे। सफाई व कार्यालय की व्यवस्था पर संतोष जताते हुए निर्देश दिया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा में कोई ढिलाई न होने पाए।


बच्चों को बनाएं काबिल, देंगे संसाधन

महानिदेशक विजय किरन आनंद ने शुक्रवार सुबह राजकीय इंटर कॉलेज और राजकीय बालिका इंटर कॉलेज का निरीक्षण किया। प्रधानाचार्य वीके सिंह और नीलम मिश्रा समेत शिक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ उनमें स्किल डेवलप करें। स्कूल में जो भी संसाधन की कमी है उसकी पूर्ति शासन करेगा। उन्होंने जीआईसी की कम्प्यूटर लैब को 100 नए कंप्यूटर देने और छात्रावास के जीर्णोद्धार की भी बात कही। इस दौरान बोर्ड सचिव दिब्यकांत शुक्ल, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक आरएन विश्वकर्मा आदि उपस्थित रहे।

Friday, November 25, 2022

यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को जारी हुए मॉडल पेपर, ऐसे कर सकते हैं डाऊनलोड

UP Board परीक्षा के लिए Sample Paper जारी,  वेबसाइट से ऐसे करें डाउनलोड

यूपी बोर्ड परीक्षा की तैयारी को जारी हुए मॉडल पेपर, ऐसे कर सकते हैं डाऊनलोड 


UP Board Exams 2023: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने कक्षा 10वीं-12वीं के लिए यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 के सैंपल पेपर जारी कर दिए हैं। जो छात्र यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 के लिए उपस्थित होने जा रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट – upmsp.edu.in से यूपी बोर्ड मॉडल पेपर देख और डाउनलोड कर सकते हैं। 


यूपीएमएसपी कक्षा 10वीं और 12वीं के सैंपल पेपर विषयवार जारी किए जाते हैं। सैंपल पेपर और नीचे दिए गए लिंक की जांच करने के लिए आसान प्रक्रिया बताई गई है।


UP Board Exams 2023 परीक्षा तिथियांयूपीएमएसपी ने अभी तक यूपी बोर्ड परीक्षा तिथि 2023 की घोषणा नहीं की है। हालांकि, छात्र यूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा तिथि पत्र 2023 जल्द ही जारी होने की उम्मीद कर सकते हैं। 


उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यूपी बोर्ड मार्च 2023 से मई 2023 के बीच 10वीं और 12वीं की वार्षिक परीक्षा आयोजित करेगा।UP Board Exams 2023 सैंपल पेपर्सयूपी बोर्ड कक्षा 10वीं और 12वीं के सैंपल पेपर विभिन्न विषयों जैसे अंग्रेजी, गणित, हिंदी और अन्य के लिए जारी किए जाते हैं। उम्मीदवार सैंपल पेपर डाउनलोड कर सकते हैं और यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 की बेहतर तैयारी के लिए उनका अभ्यास कर सकते हैं।


 यूपी बोर्ड सैंपल पेपर के माध्यम से उम्मीदवारों को प्रश्नों के प्रकार और पैटर्न का अंदाजा हो जाएगा। बेहतर तैयारी के लिए निर्धारित समय-सीमा के भीतर सैंपल पेपर हल करने का प्रयास करें। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर सभी विषयों के लिंक देख सकते हैं। आधिकारिक वेबसाइट से सैंपल पेपर डाउनलोड करने के लिए नीचे दिए गए चरणों की जांच करें।



UP Board Exams 2023 सैंपल पेपर्स कैसे डाउनलोड करें?

सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाएं।होम पेज पर मॉडल पेपर लिंक पर क्लिक करेंएक पेज खुलेगा, यूपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के सैंपल पेपर लिंक पर क्लिक करें।सैंपल पेपर का पीडीएफ चेक करें और डाउनलोड करें।अब आवश्यकतानुसार कक्षा वाइज सैंपल पेपर का प्रिंट आउट ले लें।

सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन अब पांच दिसंबर तक

सैनिक स्कूल में प्रवेश के लिए आवेदन अब पांच दिसंबर तक


लखनऊ। सरोजनीनगर स्थित कैप्टन मनोज कुमार पांडेय सैनिक स्कूल के सत्र 2023-24 में कक्षा छह, सात व नौ में प्रवेश के लिए बिना विलंब शुल्क के 25 नवंबर तो विलंब शुल्क के साथ पांच दिसंबर तक आवेदन कर सकते हैं।


आवेदन स्कूल की वेबसाइट www.upsainikschool.org किए जाएंगे। कक्षा छह व सात में केवल बालकों और कक्षा नौ में बालकों संग बालिकाओं को भी प्रवेश मिलेगा।


प्रधानाचार्य कर्नल राजेश राघव ने बताया कि आवेदन शुल्क 1000 रुपये है। अंतिम तिथि 25 नवंबर शाम पांच बजे तक है, वहीं 2000 रुपये विलंब शुल्क के साथ पांच दिसंबर शाम पांच बजे तक आवेदन कर सकते हैं। कक्षा छह के लिए जन्मतिथि दो जुलाई 2011 से एक जनवरी 2014 तक, कक्षा सात के लिए दो जुलाई 2010 से एक जनवरी 2013 तक, कक्षा नौ के लिए दो जुलाई 2008 से एक जनवरी 2011 तक होनी चाहिए। प्रवेश परीक्षा 15 जनवरी को होगी।

Thursday, November 24, 2022

हर माध्यमिक स्कूल में होगी कंप्यूटर लैब, दिया जाएगा टैबलेट

हर माध्यमिक स्कूल में होगी कंप्यूटर लैब, दिया जाएगा टैबलेट


लखनऊ: सरकारी व अशासकीय सहायता प्राप्त सभी माध्यमिक स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित की जाएगी। हर स्कूल की कंप्यूटर लैब में न्यूनतम 10-10 कंप्यूटर जरूर होंगे और विद्यार्थियों को इसकी ट्रेनिंग दी जाएगी। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को खासकर कंप्यूटर का ज्ञान दिया जाएगा। हर स्कूल को एक-एक टैबलेट भी दिया जाएगा। दीक्षा पोर्टल पर शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद की और से माध्यमिक स्कूलों में अगले शैक्षिक सत्र 2023-24 से विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए बेहतर संसाधन व सुविधाएं उपलब्ध कराए जाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने अभी से इसकी तैयारी शुरू करने का आदेश दिया है। स्कूलों में एक-एक टैबलेट देने का मकसद इसके जरिये विभागीय योजनाओं की स्कूल में स्थिति की जानकारी लेने के साथ समय-समय पर मानीटरिंग करना है। सरकारी माध्यमिक स्कूलों के विद्यार्थियों को भी स्मार्ट क्लास की सुविधा मिले इस पर फोकस किया जा रहा है।

प्रशिक्षण के बाद ही पीएम श्री में पढ़ाएंगे शिक्षक, सभी शिक्षकों को दिया जाएगा तीन महीने का प्रशिक्षण

प्रशिक्षण के बाद ही पीएम श्री में पढ़ाएंगे शिक्षक


• शिक्षा मंत्रालय की योजना, स्कूलों के चयनित होते ही इनमें पढ़ाने वाले

• सभी शिक्षकों को दिया जाएगा तीन महीने का प्रशिक्षण

• एनसीटीई और राज्यों के साथ मिलकर चलेगी मुहिम



नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप स्कूली शिक्षा को मजबूती देने के लिए देश भर में प्रस्तावित पीएम श्री ( पीएम स्कूल फार राइजिंग इंडिया) स्कूलों को खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। यह ऐसे सरकारी स्कूल होंगे, जो न सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर मजबूती से खड़े दिखेंगे बल्कि शैक्षणिक स्तर पर भी इनकी ऊंचाई देखने को मिलेगी।


शिक्षा मंत्रालय ने इसके लिए कई अहम योजनाएं बनाई है। इनमें से ही एक अहम योजना इनमें पढ़ाने वाले शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देना है। जो स्कूलों के चयन के साथ ही देश भर में शुरू हो जाएगी। यह प्रशिक्षण करीब तीन महीने का होगा।


शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक प्रस्तावित पीएम श्री स्कूलों में जिस - तरह से एनईपी की सभी सिफारिशों को लागू किया जाएगा, उसके लिए शिक्षकों का प्रशिक्षित होना जरूरी है। खासकर स्कूली शिक्षा में जिस तरह से बच्चों को खेल और खिलौने के जरिए पढ़ाने की तैयारी है, वह सरकारी स्कूलों के लिए बिल्कुल नया है।

इसके साथ ही बच्चों को स्थानीय भाषा में पढ़ाने, कौशल विकास, टिंकरिंग लैब और इनोवेशन लैब जैसी पहलों को अमल में लाने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित करना जरूरी है। स्कीम से जुड़े मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों की मानें तो इसके लिए एनसीटीई और राज्यों के साथ मिलकर विशेष प्रशिक्षण कोर्स तैयार किया जा रहा है। हालांकि प्रशिक्षण का काम स्कूलों के चयन के बाद ही शुरू होगा। 


गौरतलब है कि देश भर पीएम- श्री स्कीम के तहत करीब 14500 सरकारी स्कूलों को अपग्रेड किया जाएगा। जिसके तहत प्रत्येक ब्लाक में दो पीएम- श्री स्कूल बनेंगे। इनमें एक प्राइमरी और एक मिडिल स्कूल होगा। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने लिए दो करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इस स्कीम की अहम शर्त यह है कि इनमें उन्हीं राज्यों के स्कूलों को शामिल किया जाएगा, जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू लगने का भरोसा देंगे। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय सभी राज्यों के साथ एक एमओयू भी कर रहा है।


निजी स्कूलों में महंगी होगी पढ़ाई, नए शैक्षणिक सत्र से फीस में 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का तैयार किया प्रस्ताव

निजी स्कूलों में महंगी होगी पढ़ाई, नए शैक्षणिक सत्र से फीस में 12 प्रतिशत तक बढ़ोतरी का तैयार किया प्रस्ताव

निजी स्कूल संगठन का दावा- अधिनियम के अनुसार ही बनाया गया है प्रस्ताव


लखनऊ। निजी स्कूल में बच्चों को पढ़ाने वाले अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ने वाला है। राजधानी के प्राइवेट स्कूलों ने नए शैक्षणिक सत्र 2022-23 से नर्सरी से लेकर 12वीं की कक्षाओं की फीस में 12 प्रतिशत तक की वृद्धि करने की तैयारी पूरी कर ली है।


निजी विद्यालयों के संगठन अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अनुसार उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क विनियम ) अधिनियम 2018 में दिए गए फॉर्मूले के अनुसार ही फीस बढ़ाने का प्रस्ताव बनाया गया है। इसमें कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) का औसत और पांच प्रतिशत फीस वृद्धि को जोड़कर फीस में कुल बढ़ोतरी की दर निकाली जाती है। इस बार यह 11.61 प्रतिशत तक आ रही है।


वर्ष 2020 में कोरोना के चलते शासन ने फीस वृद्धि पर रोक लगाई थी, जो 2021 में भी जारी रही। साल 2022 में फीस बढ़ाने को लेकर निजी स्कूलों के संगठनों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसके बाद उन्होंने वर्तमान सत्र की फीस में वृद्धि की थी। इसे देखते हुए अप्रैल में शासन ने भी फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी। इसके बाद फीस में नौ प्रतिशत का इजाफा किया गया। अब फिर से इसे 12 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।


अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि महंगाई काफी बढ़ गई है। इससे सीपीआई में भी वृद्धि हुई है। इसके आंकड़े सरकार ही जारी करती है। पिछले 12 महीने का औसत सीपीआई 6.61 प्रतिशत तक है। इसमें पांच प्रतिशत फीस वृद्धि मिलाकर कुल बढ़ोतरी 11.61 प्रतिशत तक बनती है और इसी दर का प्रस्ताव तैयार किया है। नियम अनुसार ही फीस बढ़ाई जाएगी। 



जिले के बाद प्रदेश के स्कूलों के साथ होगी बैठक

अनिल अग्रवाल ने बताया कि फीस वृद्धि का प्रस्ताव नवंबर के अंतिम सप्ताह या दिसंबर के पहले हफ्ते में जिले के संगठन से जुड़े स्कूलों के प्रतिनिधियों की बैठक में रखा जाएगा। इसके बाद प्रदेश के जितने भी स्कूल संगठन हैं, उनसे भी बात की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अधिनियम में दिए गए फॉर्मूले के अनुसार से ज्यादा कोई फीस बढ़ाएगा तो संगठन उसका विरोध करेगा। जिले की कमेटी उस पर कार्रवाई भी कर सकती है।



एक साल में अतिरिक्त तीन प्रतिशत तक की वृद्धि

निजी स्कूलों की फीस में एक ही वर्ष में अतिरिक्त तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो जाएगी। वर्तमान शैक्षणिक सत्र के लिए निजी स्कूलों के संगठन ने नौ प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव पास किया था। इस बार सीपीआई ज्यादा होने पर 11.61 प्रतिशत तक की वृद्धि का प्रस्ताव है।


स्कूली वाहनों के शुल्क में पहले ही किया जा चुका है इजाफा

वर्तमान शैक्षणिक सत्र के बीच में ही स्कूली वाहनों का शुल्क बढ़ाया जा चुका है। सीएनजी के रेट बेतहाशा बढ़ने से स्कूली वाहन संचालकों ने हर तीन किमी पर प्रति छात्र 700 से लेकर एक हजार रुपये रुपये तक की वृद्धि की है। अब नए सत्र में फीस की बढ़ोतरी अभिभावकों की कमर तोड़ सकती है।


अपनी-अपनी बात


दो सालों से नहीं बढ़ाई गई है फीस

वर्ष 2020 और 2021 में फीस नहीं बढ़ाई गई थी। आज महंगाई दर ज्यादा है। स्टाफ का वेतन भी बढ़ाना है। व्यवस्था चलाने व लोन की किस्त भी बढ़ चुकी है। अधिनियम में दिए गए फॉर्मूले के अनुसार की फीस वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
-अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, अनएडेड
प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन



ज्यादा फीस बढ़ाई तो कमेटी लेगी निर्णय

स्कूल अधिनियम 2018 में दिए फॉर्मूले से ज्यादा फीस बढ़ाते हैं तो प्रकरण जिला कमेटी में रखा जाएगा। इसके अध्यक्ष डीएम होते हैं। कमेटी स्कूल के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मामले पर निर्णय लेगी।
- राकेश कुमार, डीआईओएस


मनमानी पर अंकुश लगाए सरकार

अभिभावक चौतरफा महंगाई के बोझ तले दबा है। स्कूल वाहन, बैग और यूनिफॉर्म के रेट पहले से ही बढ़ चुके हैं। ऊपर से निजी स्कूल हर साल मनमानी फीस बढ़ा देते हैं। सरकार को चाहिए कि इस पर अंकुश के लिए निगरानी सेल बनाए। स्कूल चुपचाप 15 से 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा देते हैं। यह हर साल नहीं होना चाहिए।
- राकेश कुमार सिंह, अध्यक्ष, लखनऊ अभिभावक विचार परिषद



माध्यमिक शिक्षा : DGSE की अपेक्षानुरूप क्रियान्वयन हेतु तत्काल प्रभाव से कार्यावंटन लागू, देखें आदेश

माध्यमिक शिक्षा : DGSE की अपेक्षानुरूप क्रियान्वयन हेतु तत्काल प्रभाव से कार्यावंटन लागू, देखें आदेश

DGSE ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में अधिकारियों के बीच किया काम का बंटवारा 


लखनऊ। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में उनके दफ्तर से जुड़े कार्यों को तीन अधिकारियों को आवंटित किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक से समन्वय और शिक्षकों के स्थानांतरण से जुड़े कार्य उप निदेशक विवेक नौटियाल को दिया गया है। वहीं संस्कृत शिक्षा परिषद से समन्वय और आईजीआरएस पोर्टल से जुड़े कार्य सहायक निदेशक भगवत प्रसाद पटेल को सौंपा गया है।


माध्यमिक शिक्षा परिषद के कामकाज की समीक्षा और बोर्ड परीक्षा में सुधार की जिम्मेदारी लखनऊ डायट के उप प्राचार्य मुकेश कुमार सिंह को सौंपी गई है।


महानिदेशक ने उप निदेशक विवेक नौटियाल को शिक्षकों एवं कर्मचारी संगठनों से संबंधित प्रकरण, शासन से संबंधित प्रकरणों पर समन्वय और निस्तारण, माध्यमिक शिक्षा के निदेशक एवं अपर निदेशक से समन्वय, शिक्षकों के स्थानांतरण और महानिदेशक की ओर से सौंपे गए अन्य कार्य की जिम्मेदारी दी है।


सहायक निदेशक भगवत प्रसाद पटेल को महानिदेशक स्कूल शिक्षा से संबंधित आईजीआरएस पोर्टल के मामले, संस्कृत शिक्षा परिषद से जुड़े कार्य, सामान्य शैक्षिक संवर्ग सेवा समूह क एवं ख के अधिकारियों के स्थानांतरण, विभागीय अधिकारियों की पदोन्नति, मृतक आश्रितों को नियुक्ति का कार्य दिया है।


लखनऊ डायट के उप प्राचार्य मुकेश कुमार सिंह को सहायता प्राप्त विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण, माध्यमिक शिक्षा परिषद के कामकाज की समीक्षा, बोर्ड परीक्षा प्रणाली में सुधार, मानव संपदा पोर्टल, सभी प्रकार की मान्यताओं, प्रोजेक्ट अलंकार, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, पाठ्यक्रम में बदलाव और कौशल विकास से जुड़े कार्य दिए गए हैं।

कक्षा नौ से 12 तक छात्रों का भी मूल्यांकन एप से होगा, तिमाही, छमाही परीक्षा में OMR शीट का होगा इस्तेमाल

कक्षा नौ से 12 तक छात्रों का भी मूल्यांकन एप से होगा, तिमाही, छमाही परीक्षा में OMR शीट का होगा इस्तेमाल

माध्यमिक शिक्षा में भी लर्निंग आउटकम निर्धारण पर शुरू हुआ काम, विद्या समीक्षा केन्द्र से रखी जाएगी नजर


कक्षा 9 से 12 तक गणित, विज्ञान, अंग्रेजी समेत अन्य कई विषयों के लर्निंग आउटकम एससीईआरटी तैयार कर रहा है।


माध्यमिक शिक्षा के अधिकारियों को विद्या समीक्षा केन्द्र की कार्यप्रणाली देखने के निर्देश दिए हैं। यह समीक्षा केन्द्र समग्र शिक्षा के तहत स्थापित किया गया है, यहां से बेसिक शिक्षा विभाग की सभी योजनाओं और स्कूलों की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। अब यहां से कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षा पर भी नजर रखी जाएगी।


 शुरुआत में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) द्वारा प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे, बाद में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान की मदद ली जा सकती है। मूल्यांकन की कार्ययोजना बनाने की जिम्मेदारी अपर शिक्षा निदेशक प्रयागराज को सौंपी गई रिपोर्ट कार्ड का डिजायन भी नया बनाया जाएगा। अभी तक यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12 तक में दो तिमाही, एक छमाही और परीक्षाएं तो ली जाती हैं। लेकिन इसका परीक्षाफल स्कूलों में ही होता है। तिमाही परीक्षाओं में वर्णनात्मक और बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए अलग-अलग पेपर लिए जाते हैं।


लखनऊ : माध्यमिक शिक्षा यानी कक्षा नौ से बारह तक के छात्रों के मूल्यांकन का तरीका बदलने की तैयारी है। यहां भी कक्षा 9 से 12 तक के लिए लर्निंग आउटकम तय किए जाएंगे और उस आधार पर ओएमआर शीट पर परीक्षा ली जाएगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं। इसकी कार्ययोजना दिसम्बर के अंत तक शासन को सौंपी जाएगी। अगले सत्र से इसे लागू कर दिया जाएगा।


लर्निंग आउटकम निर्धारण पर शुरू हुआ काम कक्षा 9 से 12 तक गणित, विज्ञान, अंग्रेजी समेत अन्य कई विषयों के लर्निंग आउटकम एससीईआरटी तैयार कर रहा है। बहुविकल्पीय प्रश्नों के लिए ओएमआर शीट दी जाएगी। वहीं वर्णनात्मक परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तरपुस्तिका दी जाएगी। 


विद्यार्थियों के उत्तर के आधार पर शिक्षक ओएमआर शीट पर उसका आकलन करेंगे और सरल एप के माध्यम से अपलोड किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा के पोर्टल ‘पहुंच’ पर इसका डैशबोर्ड पर रहेगा जिस पर पूरा रिजल्ट दिखेगा। इस पर विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाएं स्कैन करके भी अपलोड की जाएगी।


विद्यार्थियों के नियमित रूप से मूल्यांकन करने के लिए तिमाही या छमाही आधार पर मूल्यांकन टेस्ट लिए जाएंगे। ‘पहुंच’ पोर्टल पर स्कूलों की ग्रेडिंग भी की जाएगी, जिसमें 50 फीसदी नंबर अकादमिक पर दिए जाएंगे, जो इन मूल्यांकनों पर आधारित होगी। दिसम्बर में इसकी योजना पर मुहर लगने के बाद जनवरी से शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।



बेसिक शिक्षा में ली जा रही तकनीक की मदद

बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में इस सत्र से तिमाही परीक्षाएं ओएमआर शीट पर ली जाने की व्यवस्था की गई है। इसके लिए सरल एप को विकसित किया गया है, जिस पर उत्तरपुस्तिका को स्कैन करते ही रिजल्ट सामने आ जाता है। हर कक्षा के लिए निपुण तालिका या लर्निंग आउटकम तय किए गए हैं। रिजल्ट के आधार पर ही आगे पढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाती है।

KVS : संविदा पर रखे जाएंगे विशेष शिक्षक

KVS : संविदा पर रखे जाएंगे विशेष शिक्षक


 दिव्यांग बच्चों के सुचारू रूप से पठन-पाठन के लिए केंद्रीय विद्यालयों में विशेष शिक्षक रखे जाएंगे। केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) के निर्देश पर विशेष शिक्षकों के नियमित पद सृजित होने तक प्रत्येक विद्यालय में संविदा पर इनकी तैनाती होगी।


 30 नवंबर तक चयन की प्रक्रिया पूरी कर विद्यालयों द्वारा मुख्यालय को सूचना हर हाल में भेजनी होगी। विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के मानक भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआइ) के अनुसार होंगे। विशेष बीएड धारक ही पात्र होंगे।


केंद्रीय विद्यालयों में संविदा पर भर्ती होंगे विशेष शिक्षक


प्रयागराज : विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने के मकसद से केंद्रीय विद्यालय संगठन ने महत्वपूर्ण पहल की है। केंद्रीय विद्यालयों में संविदा पर विशेष शिक्षक रखने के आदेश हुए हैं। संगठन के संयुक्त आयुक्त (एकेडमिक) एनआर मुरली ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के उपायुक्तों को पत्र लिखकर विशेष शिक्षकों के नियमित पद सृजित होने तक प्रत्येक विद्यालय में अनिवार्य रूप से संविदा पर विशेष शिक्षक रखने के आदेश दिए हैं।


विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के मानक भारतीय पुर्नवास परिषद के अनुसार होंगे। संविदा शिक्षकों की तैनाती की सूचना 30 नवंबर तक मांगी गई है। इससे पहले तीन जून 2016 और चार जुलाई 2018 को विशेष शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश दिए गए थे लेकिन वर्तमान में देशभर में संचालित 1225 केंद्रीय विद्यालयों में से अधिकांश में विशेष आवश्यक वाले बच्चों के शिक्षण के लिए स्पेशल एजुकेटर्स (विशेष शिक्षक) नहीं हैं।


एक याचिका की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 नवंबर को 987 विशेष शिक्षकों को रखने के आदेश दिए थे। वर्तमान में केंद्रीय विद्यालयों में 5625 विशेष बच्चे विभिन्न कक्षाओं में अध्ययनरत हैं, जबकि संगठन के स्कूलों में वर्तमान में कुल 40 विशेष शिक्षक संविदा पर हैं। प्रयागराज के केवी न्यू कैंट में 57 दिव्यांग श्रेणी के हैं जबकि केवि ओल्ड कैंट में 13 बच्चे दिव्यांग हैं।


5वीं तक दस दिव्यांगों पर एक शिक्षक का प्रावधान

प्रयागराज। सरकारी प्राथमिक स्कूलों में कक्षा एक से पांच तक दस दिव्यांग बच्चों और छठी से आठवीं कक्षा तक 15 दिव्यांग बच्चों का नामांकन होने पर एक विशेष शिक्षक (स्पेशल एजुकेटर) रखने का प्रावधान है। निशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए केंद्र सरकार ने 21 सितंबर को अधिसूचना जारी की है जो कि सभी राज्यों पर समान रूप से प्रभावी है।

Wednesday, November 23, 2022

TCS एकलव्य और सर्वोदय विद्यालयों के शिक्षकों को देगा प्रशिक्षण

TCS एकलव्य और सर्वोदय विद्यालयों के शिक्षकों को देगा प्रशिक्षण


लखनऊ। समाज कल्याण विभाग और टीसीएस सीएसआर ग्रुप के बीच भागीदारी भवन में समाज कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण की अध्यक्षता में विभाग द्वारा संचालित 105 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों एवं एकलव्य विद्यालय के शैक्षणिक विकास के लिए 18 माह के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।


टीसीएस द्वारा अपने प्रशिक्षण प्रोग्राम द्वारा विद्यालय के शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा जो विद्यालयों में साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग एवं मैथमेटिक्स (स्टेम एजुकेशन) को बढ़ावा देने के लिए छात्र- छात्राओं को प्रेरित करेंगे। टीसीएस द्वारा अपने कार्यक्रम को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाया गया है, जिससे सर्वोदय विद्यालय के विद्यार्थी अंतरराष्ट्रीय मानकों पर अपना मूल्यांकन कर सके और इस प्रकार से प्रशिक्षित हो जिससे भविष्य में जेईई और नीट इत्यादि प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हो सकें। एमओयू के दौरान विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

 
टीसीएस के साथ मिलकर इनोवेटिव तरीके से सर्वोदय विद्यालय के छात्र छात्राओं को लॉजिकल एवं कम्यूटेशनल थिंकिंग को बढ़ावा देकर भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
- असीम अरुण, राज्य मंत्री समाज कल्याण

गणित व विज्ञान की बेहतर पढ़ाई में मार्गदर्शक होंगे सौ-सौ सुपर मास्टर, स्टेट रिसोर्स पर्सन बेहतर ढंग से पढ़ाई कराने के लिए नई टिप्स व तकनीकी का प्रयोग करना सिखाएंगे

गणित व विज्ञान की बेहतर पढ़ाई में मार्गदर्शक होंगे सौ-सौ सुपर मास्टर, स्टेट रिसोर्स पर्सन बेहतर ढंग से पढ़ाई कराने के लिए नई टिप्स व तकनीकी का प्रयोग करना सिखाएंगे


लखनऊ : यूपी बोर्ड के सरकारी व सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में गणित व विज्ञान की पढ़ाई रोचक ढंग से विद्यार्थियों को कराने के लिए सौ-सौ सुपर मास्टर तैनात किए जाएंगे। 


यह स्टेट रिसोर्स पर्सन जिलों में शिक्षकों को बेहतर ढंग से पढ़ाई कराने के लिए नई-नई टिप्स व तकनीकी का प्रयोग करना सिखाएंगे। अगले शैक्षिक सत्र से माध्यमिक स्कूलों में प्रत्येक विषय की पाठ्य योजना (लेसन प्लान) तैयार करने को शिक्षक संदर्शिका भी बनेगी।


गणित व विज्ञान पढ़ाएंगे

🔴 स्टेट रिसोर्स पर्सन जिलों में शिक्षकों को करेंगे गाइड

🔴 माध्यमिक स्कूलों के लिए तैयार होगी शिक्षक संदर्शिका


महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद की ओर से गणित, विज्ञान के साथ-साथ अंग्रेजी की पढ़ाई पर भी विशेष जोर देने के निर्देश दिये गए। 


आमतौर पर इन विषयों में छात्र ज्यादा कमजोर होते हैं, ऐसे में अब इन्हें और बेहतर ढंग से पढ़ाने की कार्ययोजना तैयार की जा रही है। अगले महीने इसे लेकर एक राज्य स्तरीय कार्यशाला का भी आयोजन किया जाएगा। यहां इन विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों को बताएंगे कि किस तरह इन विषयों की बेहतर ढंग से पढ़ाई कराई जाए। क्योंकि यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का कोर्स आज भी सबसे अच्छा है। सिर्फ इसे बेहतर ढंग से विद्यार्थियों को पढ़ाने की जरूरत है।


 शिक्षकों को पाठ्य योजना तैयार करने के लिए शिक्षक संदर्शिका दी जाएगी। यह शिक्षक संदर्शिका सभी स्कूलों के शिक्षकों को मार्च वर्ष 2023 तक देने का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी माध्यमिक स्कूलों में बेहतर शिक्षा देने के लिए सभी जरूरी उपाय किए जा रहे हैं।



200 प्रधानाचार्य IIM में पढ़ेंगे स्कूल लीडरशिप का पाठ

सरकारी माध्यमिक स्कूलों के 200 प्रधानाचार्यों को इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट (आइआइएम) लखनऊ में स्कूल लीडरशिप का पाठ भी पढ़ाया जाएगा।

पदोन्नत प्रधानाचार्यों, शिक्षकों का ऑनलाइन होगा पदस्थापन, 26 नवंबर तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने हैं प्रपत्र

पदोन्नत प्रधानाचार्यों, शिक्षकों का ऑनलाइन होगा पदस्थापन

26 नवंबर तक मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड करने हैं प्रपत्र


प्रयागराज । राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में गत दिनों पदोन्नति पाए प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पुरुष / महिला) का ऑनलाइन पदस्थापन होगा। इन सभी को मानव संपदा पोर्टल पर प्रपत्रों को 26 नवंबर तक अपलोड करना है।


राजकीय माध्यमिक विद्यालय के लगभग छह सौ अधिक शिक्षकों की प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और प्रवक्ता पद पर पदोन्न्ति हुई है। अब इनका पदस्थापन होना है। शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेंद्र देव ने इस संबंध में सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखा है।


मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से पदोन्नति प्राप्त प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता एवं सभी समकक्ष (पुरुष / महिला) के ऑनलाइन पदस्थापन कराने के लिए गुणांक निर्धारित किए गए हैं। इसमें कैंसर, एचआईवी, किडनी, लीवर, दिव्यांग, पति- पत्नी के सरकारी सेवा में होने पर, 58 वर्ष से अधिक आयु पूरी कर चुके लोगों को वरीयता दी जाएगी। इसका अधिकारी से निर्गत प्रमाण पत्र लगाना होगा।

CTET : निर्धारित सीटें फुल होने से परेशानी देखते हुए यूपी में 26 हजार सीटें बढ़ीं, शाम तक सब हुईं फुल, फिर से पड़ोसी राज्यों का भरना पड़ रहा विकल्प

CTET : निर्धारित सीटें फुल होने से परेशानी देखते हुए यूपी में 26 हजार सीटें बढ़ीं, शाम तक सब हुईं फुल, फिर से पड़ोसी राज्यों का भरना पड़ रहा विकल्प 


🆕 Update 
प्रयागराज : केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) के लिए निर्धारित सीट फुल होने के कारण अभ्यर्थियों को हो रही परेशानी को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश के 21 जिलों में 26458 सीटें बढ़ाईं। हालांकि ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि गुरुवार से एक दिन पहले बढ़ाई गई। पहले यूपी के सभी 21 जिलों में कुल 5,02,748 अभ्यर्थियों की संख्या निर्धारित की गई थी। बुधवार को इसे बढ़ाकर 5,29,206 कर दिया गया। बढाई गईं सभी सीटें भी शाम सात बजे तक फुल हो गईं।


अब फिर से अभ्यर्थियों को पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान का विकल्प भरना पड़ रहा है। केंद्रीय और नवोदय विद्यालय आदि के साथ ही उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती में भी सीटीईटी मान्य है। सीबीएसई ने दिसंबर सत्र की सीटीईटी के लिए पहली बार जिलों में सीटों की संख्या निर्धारित कर दी है जिसके कारण परेशानी हो रही है।


लखनऊ में करीब छह हजार सीटों का इजाफा

यूपी में सर्वाधिक 110580 सीटें लखनऊ में थीं जिसे बढ़ाकर 116400 कर दिया गया है। प्रयागराज 43733 से 46035, वाराणसी में 65550 से 69000, कानपुर 46322 से 48760, गोरखपुर 44137 से 46460, मेरठ 38456 से 40480, गाज़ियाबाद 41690 से 43884, बरेली 15317 से 16123, नोएडा 11996 से 12627 जबकि आगरा में 24363 बढ़ाकर 24645 सीटें की गई हैं। अयोध्या, बलिया, बस्ती, बिजनौर, गाज़ीपुर, झांसी, लखीमपुर में भी सीटें बढ़ी हैं।



CTET : यूपी का कोटा पूरा, परीक्षा देने अब एमपी और दिल्ली जाएंगे अभ्यर्थी


● प्रयाग समेत यूपी के 21 जिलों में प्रस्तावित केंद्रों पर आवेदन की संख्या हुई पूरी

● उत्तर प्रदेश में नहीं मिल रहा केंद्र, मजबूरन दूसरे राज्यों के लिए कर रहे आवेदन


केंद्रीय और नवोदय विद्यालय समेत अन्य स्कूलों और उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती में मान्य केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) इस बार हजारों अभ्यर्थियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। 


इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने जिलों के लिए परीक्षार्थियों की संख्या निर्धारित कर दी है। यानि निश्चित संख्या के बाद उस जिले में परीक्षा की सुविधा नहीं मिलेगी और दूसरे जिले या फिर राज्य का रुख करना पड़ेगा।



यूपी के लिए 21 जिलों में निर्धारित सीटों की संख्या सात दिन पहले ही पूरी हो चुकी है और अब अभ्यर्थियों के पास दूसरे राज्य में परीक्षा देने या फिर परीक्षा छोड़ने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। केंद्रों का निर्धारण ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति पर था इसलिए देरी से फॉर्म भरने वालों को सबसे अधिक कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।


आठ दिन बाद ही फुल हो गई थीं बिहार की सीटें हालत यह है कि दिसंबर-जनवरी में ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तावित परीक्षा के लिए पंजीकरण तो 24 नवंबर तक होने हैं, लेकिन यूपी ही नहीं मध्य प्रदेश के नजदीकी जिलों जैसे रीवा, जबलपुर और सतना की सीटें भी यहां के अभ्यर्थियों से फुल हो गई हैं। बिहार की निर्धारित संख्या 31 अक्तूबर को आवेदन शुरू होने के आठ दिन बाद सात नवंबर को ही पूरी हो गई थी।


जौनपुर के विकास और प्रमोद कन्नौजिया तीन दिन पहले सीटीईटी का फॉर्म भरने लगे तो पता चला की उत्तर प्रदेश के लिए निर्धारित संख्या पूरी हो चुकी है। अब परीक्षा देनी है तो दिल्ली या दूसरे किसी राज्य में जाना होगा। मजबूरन दोनों अभ्यर्थियों ने दिल्ली केंद्र चुना है। इसी प्रकार प्रयागराज की रागिनी शुक्ला ने कोटा (राजस्थान) से परीक्षा देने का विकल्प दिया है।


नैनी की श्वेता सिंह चार दिन पहले सीटीईटी का ऑनलाइन आवेदन भरने लगी तो यूपी में कोई सेंटर नहीं मिला। दूसरे राज्य जाने की बजाय उन्होंने इस बार परीक्षा नहीं देने का निर्णय लिया है। सलोरी की प्रिया पांडेय ने भी यूपी में केंद्र फुल होने पर इस बार सीटीईटी नहीं देने का निर्णय लिया। इसी तरह हजारों अभ्यर्थी सीटीईटी नहीं दे रहे हैं।



प्रदेश में लखनऊ में परीक्षा देंगे सर्वाधिक अभ्यर्थी

यूपी के 21 जिलों में सर्वाधिक 110580 अभ्यर्थी लखनऊ में परीक्षा में शामिल होंगे। वाराणसी में 65550, प्रयागराज 43733, गोरखपुर 44137, गाज़ियाबाद 41690, कानपुर 46322 और मेरठ में 38456 अभ्यर्थियों का पंजीकरण हो चुका है।

अफसरों की बेरुखी के कारण शिक्षा निदेशालय हुए अनाथ, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के बड़े अधिकारी लखनऊ में बैठ कर निबटा रहे काम

अफसरों की बेरुखी के कारण शिक्षा निदेशालय हुए अनाथ, माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के बड़े अधिकारी लखनऊ में बैठ कर निबटा रहे काम



अफसरों की बेरुखी के कारण शिक्षा निदेशालय अनाथ हो गया है। माध्यमिक और बेसिक शिक्षा के बड़े अधिकारी लखनऊ में बैठ रहे हैं जिसके कारण सामान्य विभागीय गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।


प्रदेश के 1.50 लाख से अधिक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को नियंत्रित करने के साथ उनमें कार्यरत लाखों शिक्षकों की सेवाएं देखने वाले बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल जुलाई 2020 में इस पद पर नियुक्ति के बाद से ही कार्यालय में नहीं बैठ रहे।


वह अपना सारा सरकारी कामकाज लखनऊ से ही कर रहे हैं। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव को नौ नवंबर को माध्यमिक शिक्षा निदेशक का कार्यभार मिलने के बाद से वे भी यहां नहीं बैठ रहे।


 अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक ही शिक्षा निदेशालय के प्रशासनिक मुखिया होते हैं और उनके यहां नहीं बैठने से स्टाफ की भी निगरानी नहीं हो पा रही। इनके अलावा अपर शिक्षा निदेशक राजकीय केके गुप्ता भी लखनऊ से ही रिमोट से कार्यालय संचालित कर रहे हैं। 


शिक्षा निदेशालय मिनिस्टीरियल कर्मचारी संघ के मंत्री प्रदीप कुमार सिंह ने मंगलवार को महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद को ई-मेल भेजकर वर्तमान परिस्थितियों पर आपत्ति जताई है।


 प्रदीप सिंह ने मुख्यमंत्री से लेकर अन्य आला अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर अफसरों के निदेशालय में बैठकर शासकीय दायित्व निर्वहन करवाना सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है।



Tuesday, November 22, 2022

आगरा विवि BEd फर्जीवाड़ा : 18 से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी हैं दोषी, कुलपति को सौंपी गई रिपोर्ट

आगरा विवि बीएड फर्जीवाड़ा :  18 से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी हैं दोषी, कुलपति को सौंपी गई रिपोर्ट


डा. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के बीएड 2012-13 सत्र के फर्जीवाड़े में चार वरिष्ठ प्रोफेसर और तीन कर्मचारी नहीं बल्कि 18 से ज्यादा शिक्षक और कर्मचारी शामिल हैं।इन सूची सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने कुलपति को सौंपी है। कुलपति ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश को रिपोर्ट बनाने को कहा है, जिससे दोषियों पर कार्रवाई हो।



18 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी बीएड की परीक्षा

बीएड के 2012-13 सत्र में 250 से अधिक कालेजों के लगभग 18 हजार छात्रों ने परीक्षा दी थी। मूल्यांकन में प्राप्तांक बढ़ा दिए गए, फायल और चार्ट भी गायब कर दिए गए। 2014 में तत्कालीन कुलपति प्रो. मो. मुज्जमिल ने इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सेवानिवृत्त न्यायाधीश को सौंपी।आठ साल तक चली एक सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट शनिवार को परीक्षा समिति की बैठक में ही सभी सदस्यों के सामने खोली गई। रिपोर्ट में मूल्यांकन की जिम्मेदारी संभाल रहे चार वरिष्ठ प्रोफेसरों और तीन कर्मचारियों को अंक बढ़ाने का दोषी बताया है।



तीन कुलसचिवों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है

इसके साथ ही कुल 18 शिक्षकों और कर्मचारियों के नामों की सूची भी सौंपी गई है. कुलपति प्रो. आशु रानी का कहना है कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश को ही कुछ और बिंदुओं पर जांच के बाद अंतिम रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है। उसके बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 

बाढ़ के समय नदियों में विलीन विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए महानिदेशक ने तलब की रिपोर्ट

बाढ़ के समय नदियों में विलीन विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए महानिदेशक ने तलब की रिपोर्ट


बलिया : गंगा व सरयू नदियों के कटान में विलीन हुए एक दर्जन परिषदीय विद्यालयों के संबंध में महानिदेशक प्राथमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश विजय किरण आनंद ने मातहतों से रिपोर्ट तलब किया है। पूछा है यह विद्यालय दोबारा क्यों नहीं बना?


बैरिया के प्राथमिक विद्यालय गंगापुर, गंगोली, उदई छपरा श्रीनगर व उच्च प्राथमिक विद्यालय सूघर छपरा, बेलहरी विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय चौबे छपरा, उच्च प्राथमिक विद्यालय गंगापुर, गंगा के कटान में विलीन हो गए थे। वहीं मुरली छपरा विकासखंड के इब्राहिमाबाद नवबरार ग्राम पंचायत के प्राथमिक विद्यालय नवकाटोला, रेवती विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय रामपुर पूर्वी, शिवपुर, रामपुर पश्चिमी तथा माझा सरजू नदी के कटान में विलीन हो चुके हैं। कुल 11 परिषदीय विद्यालय विभिन्न चार विद्यालयों में संलग्न कर संचालित कराए जा रहे हैं।


बच्चों के पठन-पाठन में काफी असुविधा हो रही है। स्थानीय  लोगों ने महानिदेशक प्राथमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश को प्रार्थना पत्र देकर आग्रह किया था कि इन गांवों के विद्यालयों को जहां इस गांव के लोग बसे हैं वहां पर बनवा दिया जाए।


महानिदेशक ने प्राथमिक शिक्षा उत्तर प्रदेश के निदेशक सुभा सिंह को निर्देश जारी किया कि तत्काल बेसिक शिक्षा अधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त करें और सुनिश्चित करें कि अगले ग्रीष्मावकाश से पहले कटान से विस्थापित उक्त गांव के लोग जहां-जहां समूह में बसे हैं वहां इन विद्यालयों को बनवाया जाए।