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Sunday, August 23, 2026

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

देशभर के सभी स्कूलों में बनेंगे चुनावी साक्षरता क्लब, चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग की मुहिम

दिसंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 ऐसे क्लबों को सक्रिय करने का लक्ष्य


नई दिल्ली ।  इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) सहित देश की चुनावी प्रक्रिया को लेकर फैलाए जाने वाले दुष्प्रचार से निपटने के लिए चुनाव आयोग ने अब नई पीढ़ी को इन चुनावी प्रक्रियाओं से जोड़ने और समझाने की एक मुहिम शुरू की है। इसके तहत देशभर के प्रत्येक स्कूल, कालेज व विश्वविद्यालय में अब एक चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) स्थापित होगा। जहां छात्रों को ईवीएम के कामकाज सहित मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया, मतगणना की प्रक्रिया आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। जल्द ही आयोग इसके लिए एक पाठ्यक्रम भी जारी करेगा। इसकी तैयारी जोरों पर है।


इस मुहिम के तहत  देश के 14.71 लाख स्कूलों, करीब 70 हजार उच्च शिक्षण संस्थानों और 1420 निजी व सरकारी विश्वविद्यालयों तक चुनावी साक्षरता क्लब खोलने की योजना बनाई है। इस साल के अंत यानी दिसंबर तक देश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम 10 सक्रिय क्लब शुरू करने की योजना है। देश में मौजूदा समय में 4,123 विधानसभा क्षेत्र हैं। ऐसे में 41 हजार से अधिक क्लब इस साल के अंत तक सक्रिय हो जाएंगे। प्रत्येक क्लब में सदस्यों की संख्या करीब 25 होगी। ऐसे में इस मुहिम के जरिए इस साल 10 लाख से अधिक छात्रों को जोड़ने की योजना है। आयोग इस मुहिम को राज्यों के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ाने में जुटा है।

इस पूरी मुहिम की कमान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने खुद ही संभाली है। उन्होंने इसे लेकर राज्यों का दौरा भी शुरू कर दिया है। दिसंबर तक उनकी सभी 36 राज्यों तक पहुंचने की तैयारी है। इस कड़ी में सोमवार को वह उत्तर प्रदेश के दौरे पर रहेंगे। उसके बाद वह तमिलनाडु, गोवा व गुजरात जाएंगे। इन दौरों के दौरान वह राज्य के सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों, कालेजों व स्कूलों के प्राचार्यों के साथ करीब छह-सात सौ छात्रों की एक कांफ्रेंस में हिस्सा लेते हैं।

स्कूल के क्लब में नौवीं से 12वीं कक्षा तक के बच्चे शामिल होंगे। प्रत्येक कक्षा के प्रत्येक सेक्शन से दो-दो बच्चे (एक छात्र व एक छात्रा) चयनित होंगे। इसका चयन क्लास टीचर करेंगे। क्लब के अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का चयन चयनित छात्रों के बीच चुनाव के जरिए होगा। कालेज व विश्वविद्यालय स्तर पर क्लब में भी प्रत्येक स्ट्रीम में एक सेक्शन से दो-दो छात्र चयनित होंगे। इन सभी का चयन एक शैक्षणिक सत्र के लिए होगा। यह क्लब चुनावी साक्षरता के अपने तय पाठ्यक्रम के मुताबिक हफ्ते में एक दिन करीब एक घंटे के लिए एक्टिविटी आयोजित करेगा।


Wednesday, July 29, 2026

शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त,  कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

आयोग को कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार, पर आरटीई कानून का भी करना होगा पालन


नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का सांविधानिक अधिकार है, लेकिन यह भी उसकी जिम्मेदारी है कि इससे शिक्षकों पर अनावश्यक कार्यभार न पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्य तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह टिप्पणी शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लगाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।


 न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति  की अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार है। हालांकि, बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 27 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि किसी भी शिक्षक को स्कूल समय के दौरान चुनाव संबंधी कार्य नहीं दिया जा रहा है।


महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी रखें ध्यान

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिक्षक पूरे दिन छह से आठ घंटे पढ़ाने के बाद चुनाव संबंधी अतिरिक्त कार्य करेंगे तो उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ेगा। अदालत ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और विशेष रूप से महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखने की सलाह दी।

Tuesday, December 2, 2025

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक, बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

बीएलओ की मौतों पर भड़के यूपी के शिक्षक,  बोले- हमारा काम केवल पढ़ाना

01 दिसम्बर 2025
 लखनऊः विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) अभियान में तैनात कई बीएलओ (बूथ लेवल आफिसर) की मौत के बाद पूरे प्रदेश में शिक्षक संगठनों में आक्रोश है। संगठनों का कहना है कि शिक्षकों का मूल कार्य बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन प्रशासन उन्हें जबरन निर्वाचन संबंधी कठिन और दबाव भरे कामों में लगा रहा है, जिससे उनकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। कई शिक्षकों को पहली बार यह जिम्मेदारी मिली है। तकनीकी दिक्कतों, जनसहयोग की कमी और लक्ष्य पूरा न होने पर दिए जा रहे दंडात्मक निर्देशों के कारण वे भारी तनाव में हैं।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने कहा कि मौजूदा हालात शिक्षक समाज में भय और असुरक्षा पैदा कर रहे हैं। यह शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है। संगठन ने मांग की है कि मृत शिक्षकों के परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा, परिजन को सरकारी नौकरी, माता पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा और बच्चों की निश्शुल्क शिक्षा दी जाए। 10 दिसंबर से परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं और उसके बाद निपुण आकलन होना है। ऐसे में विद्यालयों में स्टाफ की कमी से परीक्षाएं प्रभावित होंगी। इसलिए सभी शिक्षकों को बीएलओ ड्यूटी से तुरंत मुक्त किया जाए।



शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग, शिक्षक संगठनों ने बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताते हुए मुख्यमंत्री से लगाई गुहार

कहा- स्कूलों में प्रभावित हो रही पढ़ाई, बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

दिवंगत बीएलओ के परिजनों को नौकरी और 50 लाख मुआवजा देने की मांग

27 नवंबर 2025
लखनऊ। शिक्षक संगठनों ने विभिन्न स्थानों पर बीएलओ के आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताई है। संगठनों का कहना है कि काम के दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हो रहे हैं। इससे शिक्षकों में भी भय व्याप्त है। संगठनों ने सीएम से शिक्षकों को बीएलओ की ड्यूटी से हटाने की मांग की है। साथ ही काम का तनावमुक्त माहौल बनाने की मांग उठाई है।


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी व महामंत्री उमाशंकर सिंह ने सीएम को पत्र भेजकर यह मांग उठाई है। इसमें उन्होंने कहा है कि शिक्षकों की बीएलओ ड्यूटी लगने से परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन भी प्रभावित हो रहा है।

शिक्षा के अधिकार अधिनियम में भी शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य लिए जाने पर स्पष्ट रोक है। परिषदीय स्कूलों में 10 दिसंबर से अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं प्रस्तावित हैं ऐसे में इस समय बच्चों की तैयारी पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने बीएलओ पर अधिकारियों द्वारा दबाव बनाने का आरोप लगाया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने मांग की दिवंगत बीएलओ के परिजनों को सरकारी नौकरी और 50 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग दिया जाए।

साथ ही एसआईआर के काम का समय बढ़े और बीएलओ के सहयोग के लिए दो अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। अनिल ने कहा, जिन अधिकारियों दबाव के चलते बीएलओ विपरीत कदम उठाने को मजबूर हुए हैं उसकी जांच कराके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए

Thursday, August 14, 2025

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण के सम्बन्ध में शैक्षणिक संस्थानों के प्रवेश रजिस्टर की उपलब्धता सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा बूथ लेवल अधिकारियों तक कराने हेतु आदेश

विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की निर्वाचक नामावलियों के पुनरीक्षण के सम्बन्ध में शैक्षणिक संस्थानों के प्रवेश रजिस्टर की उपलब्धता सम्बन्धित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों तथा बूथ लेवल अधिकारियों तक कराने हेतु आदेश 


Tuesday, June 10, 2025

BLO : बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षामित्र, अनुदेशक या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं

बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षामित्र, अनुदेशक या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं 


लखनऊ । बीएलओ की तैनाती के लिए ईआरओ यानी इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर की मर्जी नहीं चलेगी। निर्वाचन आयोग के सचिव पवन दीवान की ओर से यूपी समेत सभी राज्यों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। अब बीएलओ का कार्य कराने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ती, शिक्षा मित्र या अन्य किसी समूह घ के नीचे के कर्मचारी की तैनाती सीधे नहीं की जा सकेगी। 


यह निर्देश मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को सभी जिलों के डीईओ, ईआरओ तक पहुंचाने के बाद 20 जून तक जानकारी चुनाव आयोग को देनी होगी। इस संबंध में 23 मई को नई दिल्ली में हुई बैठक में निर्णय लिया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के इस सम्मेलन में निर्वाचन आयोग की ओर से निर्देश दिए गए हैं। 


इसमें मतदाता सूची 2023 मैनुअल के निर्देशों में संशोधन किया गया है। इसके अनुसार ईआर ओ मतदाता सूची के प्रत्येक हिस्से के लिए एक बीएलओ तैनात करेगा। बीएलओ राज्य सरकार के ग्रुप सी या उससे ऊपर के नियमित सेवारत कर्मचारियों में से होगा। 


नियमित राज्य या स्थानीय कर्मचारी न होने की स्थिति में ईआरओ आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों अनुबंध शिक्षकों या केन्द्र सरकार के कर्मचारियों में से बीएलओ की नियुक्ति कर सकता है। बावजूद इसके इस मामले में सीईओ को ईआरओ की ओर से हस्ताक्षर किया हुआ एक अनुपलब्धता प्रमाणपत्र देना होगा। ईआरओ के प्रमाणपत्र को जिलाधिकारी यानी डीईओ सत्यापित करते हुए आगे भेजेंगे।


सिर्फ लखनऊ में ही 3387 बीएलओ

सिर्फ लखनऊ में ही 3387 बीएलओ की तैनाती है। बावजूद इसके 1200 से 1500 तक बीएलओ चुनाव में कम पड़ जाते हैं। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान एडेड स्कूलों के टीचरों की ड्यूटी लगाई गई थी। अब समूह घ से नीचे के कर्मचारियों की तैनाती से पहले चुनाव आयोग से अनुमति लेनी होगी।

Sunday, May 25, 2025

एमएलसी निर्वाचन में मतदाता नहीं बन सकेंगे वित्तविहीन व अंशकालिक शिक्षक

एमएलसी निर्वाचन में मतदाता नहीं बन सकेंगे वित्तविहीन व अंशकालिक शिक्षक


लखनऊ। प्रदेश के विधान परिषद क्षेत्र के निर्वाचन में वित्तविहीन एवं अंशकालिक शिक्षक अब मतदाता नहीं बन सकेंगे। राज्य निर्वाचन अधिकारी ने संबंधित आयुक्त और निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को निर्वाचन आयोग के नियमों के मुताबिक आवश्यक कार्यवाही करने का निर्देश दिया है।


 बता दें कि उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के वाराणसी खंड के शिक्षक नेता सुधांशु शेखर त्रिपाठी ने राज्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर बीते कई वर्ष से बगैर योग्यता के वित्तविहीन शिक्षकों को अवैध तरीके से मतदाता बनाने की शिकायत की थी। उन्होंने इस बाबत भारत निर्वाचन आयोग के नियमों का हवाला भी दिया था, जिसका संज्ञान लेकर आदेश जारी किया गया है। 


Wednesday, December 11, 2024

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश

शिक्षकों से नहीं ले सकते गैर शैक्षणिक कार्य, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लगाई रोक और नियमित वेतन भुगतान का दिया आदेश
 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका से चुनाव संबंधित कार्य लिए जाने के रामपुर के एसडीएम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने शिक्षिका का वेतन रोकने के आदेश पर भी रोक लगा दी है और उसे नियमित वेतन का भुगतान करने का निर्देश दिया है। सहारनपुर की संयमी शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति अजय भनोट ने दिया।


याची के अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची को एसडीम/ चुनाव पंजीकरण अधिकारी रामपुर मनिहारान ने चुनाव संबंधी विविध कार्यों में लगाया था जिसकी वजह से याची द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। वह छात्रों को पढ़ाने का काम नहीं कर पा रही थी। बाद में एसडीएम ने 29 अक्टूबर 2024 के आदेश से याची का वेतन रोक दिया गया।


अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ द्वारा सुनीता शर्मा एडवोकेट की जनहित याचिका पर पारित फैसले का हवाला दिया। इस निर्णय में खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। खंडपीठ ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा है कि बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है, यह उनके मौलिक अधिकार में शामिल है तथा अनिवार्य शिक्षा अधिनियम की धारा 27 में स्पष्ट रूप से वर्णित है कि शिक्षकों से गैर शैक्षणिक कार्य नहीं लिया जा सकता है। शिक्षकों से सिर्फ 10 वर्ष में होने वाली जनगणना, आपदा राहत और सामान्य निर्वाचन के समय ही सेवा ली जा सकती है। इसके अलावा उनसे कोई अन्य ड्यूटी लेना अवैधानिक है। खंडपीठ ने कहा है कि शिक्षकों का कार्य सिर्फ छात्रों को पढ़ाना है।

Sunday, October 27, 2024

उ0प्र0 विद्यालय निरीक्षक संघ उ0प्र0 का प्रान्तीय अधिवेशन/निर्वाचन(चुनाव) कराये जाने हेतु आगामी तिथि 23 व 24 नवम्बर निर्धारित किये जाने के संबंध में


कार्यालय आदेश उ0प्र0 विद्यालय निरीक्षक संघ उ0प्र0 का प्रान्तीय अधिवेशन/निर्वाचन(चुनाव) कराये जाने हेतु आगामी तिथि 23 व 24 नवम्बर निर्धारित किये जाने के संबंध men




विद्यालय निरीक्षक संघ के निर्वाचन की दृष्टिगत प्रतिभाग करने वाले सदस्य खंड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) को 26 अक्टूबर को मिलेगा विशेष अवकाश 


Sunday, October 13, 2024

CBSE लोकतांत्रिक भागीदारी और चुनावी साक्षरता का पढ़ाएगा पाठ, 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए 15 अक्टूबर को आयोजित होगा चुनावी साक्षरता वेबिनार

CBSE लोकतांत्रिक भागीदारी और चुनावी साक्षरता का पढ़ाएगा पाठ, 9वीं से 12वीं तक के छात्रों के लिए 15 अक्टूबर को आयोजित होगा चुनावी साक्षरता वेबिनार

वेबिनार का उद्देश्य छात्रों को चुनावी प्रक्रिया और उनकी नागरिक जिम्मेदारियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्रदान करना


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) छात्रों को लोकतांत्रिक भागीदारी और चुनावी साक्षरता का पाठ पढ़ाने जा रहा है। इसके लिए नौवीं से बारहवीं के छात्रों में नागरिक सहभागिता, लोकतांत्रिक भागीदारी और चुनावी साक्षरता को बढ़ाने के लिए आगामी 15 अक्तूबर से साक्षरता वेबिनार आयोजित किया जाएगा। वेबिनार का उद्देश्य छात्रों को चुनावी प्रक्रिया में जिम्मेदारियां, लोकतांत्रिक सिद्धांतों की गहरी समझ को बढ़ावा देना है।

बोर्ड का मानना है कि इस वेबिनार से छात्रों में लोकतांत्रिक सिद्धांतों और सक्रिय नागरिकता की गहरी समझ को बढ़ावा मिलेगा। बोर्ड ने स्कूलों को कहा है कि वे इस वेबिनार में छात्रों की भागीदारी को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रयास करें।

एक घंटे के इस सत्र में उन्हें चुनावी साक्षरता के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी। इससे छात्र भी चुनावी साक्षरता को लेकर जागरूक हो सकेंगे। बोर्ड की ओर से इसके लिए एक लिंक भी स्कूलों को भेजा गया है, जिसके माध्यम से छात्र इस वेबिनार का हिस्सा बन सकते हैं।




कक्षा 6 से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्र पढ़ेंगे लोकतंत्र, मतदान आदि की चुनावी प्रक्रिया


नई दिल्ली। कक्षा छठीं से लेकर उच्च शिक्षा तक छात्र चुनावी प्रक्रिया भी पढ़ेंगे। छात्रों को लोकतंत्र, मतदान आदि की प्रक्रिया समझाने के लिए एनसीईआरटी बाकायदा पाठ्यक्रम भी तैयार करेगा।

चुनावी प्रक्रिया की परीक्षा देने के बाद उनके सर्टिफिकेट और डिग्री में उसके क्रेडिट भी जुड़ेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के सचिव प्रोफेसर मनीष जोशी ने मंगलवार को इस संबंध में सभी राज्यों और उच्च शिक्षण संस्थानों को पत्र लिखा है।

पत्र में स्कूली शिक्षा से ही छात्रों को जागरूक करने के मकसद से चुनावी प्रक्रिया को पाठ्यक्रम में शामिल करने की बात कही गई है। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय और भारत निर्वाचन आयोग में समझौता हुआ है। पत्र में चुनावी भागीदारी लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है और इसके लिए युवाओं में रूचि पैटा करना जरूरी बताया गया है।



राजनीति में युवाओं की भागीदारी के लिए जरूरी

यूजीसी सचिव ने कहा कि यह भारत की लोकतांत्रिक राजनीति में युवाओं की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी क्षेत्रों में मतदान का आंकड़ा बेहद कम है। शहरों मतदाताओं को लोकतंत्र के मेले में मतदान के प्रति जागरूक करने में युवा बेहद अहम भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए स्कूली शिक्षा के दौरान ही उन्हें चुनावी प्रक्रिया के बारे में पाठ्यक्रम के माध्यम से पढ़ाया जाएगा।


ईवीएम, वीवीपैट के बारे में पढ़ेंगे छात्र

चुनावी प्रक्रिया में छात्रों को ईवीएम, वीवीपैट, भारत निर्वाचन आयोग मोबाइल ऐप, बैलेट यूनिट मतदान कंपार्टमेंट, कंट्रोल यूनिट, पीठासीन अधिकारी, 2 मतदान अधिकारी, पोलिंग एजेंट, वोटिंग कंपार्टमेंट, नोटा आदि के बारे में भी पढ़ाया जाएगा। इसका मकसद उन्हें चुनावी प्रक्रिया की हर जानकारी से रूबरू करवाना है। शिक्षण संस्थानों में चुनावी प्रकिया को समझाने के लिए मॉक पोल यानी चुनाव का ट्रायल भी करवाया जाएगा।

Wednesday, September 11, 2024

चुनाव में लगे सभी कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त मानदेय की मांग

चुनाव में लगे सभी कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त मानदेय की मांग


लखनऊ। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने चुनाव में ड्यूटी करने वाले निर्वाचन विभाग के अधिकारियों को एक माह का अतिरिक्त वेतन/मानदेय देने का आदेश दिया है। 

विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी से चुनाव में लगे सभी कर्मचारियों को अतिरिक्त मानदेय देने की मांग की है। 


एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि बीएलओ, सुपरवाइजर लगातार चुनाव के कार्य में लगे होते हैं। लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र चुनाव का करीब 40 फीसदी कार्य करते हैं। इन्हें अतिरिक्त वेतन, मानदेय न देकर सिर्फ निर्वाचन कार्यालय के अधिकारियों को एक माह का वेतन देना न्यायोचित नहीं है। सभी कर्मियों के साथ एक जैसा व्यवहार ही किया जाए।

Saturday, June 15, 2024

लोक सभा निर्वाचन 2024 के अंतर्गत दिवंगत मतदान कार्मिकों को उचित मुआवजा न दिये जाने एवं मतदान कार्मिकों को मानदेय भुगतान न किए जाने / असमान रूप से किये जाने के संबंध में ज्ञापन

लोक सभा निर्वाचन 2024 के अंतर्गत दिवंगत मतदान कार्मिकों को उचित मुआवजा न दिये जाने एवं मतदान कार्मिकों को मानदेय भुगतान न किए जाने / असमान रूप से किये जाने के संबंध में ज्ञापन 



Tuesday, May 28, 2024

मांग : गर्मी छुट्टी में चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश दे सरकार

मांग : गर्मी छुट्टी में चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश दे सरकार

माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजा पत्र


लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर छुट्टी में लोकसभा चुनाव में ड्यूटी पर तैनात शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को काम के बदले उपार्जित अवकाश देने की मांग की है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष चेत नारायण सिंह व प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में 21 मई से 30 जून -तक ग्रीष्मावकाश है। इस दौरान सामान्य - लोकसभा चुनाव में प्रदेश के हजारों शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारी निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न करा रहे हैं। 


शासनादेश के अनुसार अवकाश अवधि में ड्यूटी करने वाले शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश देने की व्यवस्था पूर्व में विहित है। किंतु माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए लोकसभा चुनाव में छुट्टी में काम करने वाले शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को काम के बदले उपार्जित अवकाश दिए जाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दें।

Tuesday, May 14, 2024

चुनाव ड्यूटी में लगे अनुदेशकों को हादसा होने पर मिलेंगे सभी लाभ, चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति की साफ

चुनाव ड्यूटी में लगे अनुदेशकों को हादसा होने पर मिलेंगे सभी लाभ, चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति की साफ

मतदान के दिन वीडियोग्राफी की मिली है जिम्मेदारी


लखनऊ। चुनाव ड्यूटी में लगे परिषदीय विद्यालयों के अनुदेशकों को हादसा होने पर दूसरे सरकारी कार्मिकों की तरह ही सभी लाभ मिलेंगे। चुनाव आयोग ने इस संबंध में स्थिति स्पष्ट कर दी है। इन अनुदेशकों को तमाम स्थानों पर मतदान के दिन वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी की जिम्मेदारी मिली है। इस काम के लिए अनुदेशकों को कैमरे भी मुहैया कराए गए हैं। उन्हें ईवीएम सील होने तक वीडियोग्राफी व फोटोग्राफी का काम करना है।


 इनके ड्यूटी आदेश में लिखा है कि इस काम के लिए उन्हें कोई अतिरिक्त भत्ता, यात्रा भत्ता और मानदेय देय नहीं मिलेगा। जबकि चुनाव ड्यूटी में लगाए जा रहे शिक्षकों को प्रोत्साहन भत्ता दिया जा रहा है। इसलिए यह अनुदेशक भी उन सभी सुविधाओं की मांग कर रहे हैं, जो अन्य कार्मिकों को मिलती हैं।


इस संबंध में आयोग से संपर्क करने पर बताया गया है कि कुछ सरकारी कर्मचारियों की बूथ पर कैमरों के साथ ड्यूटी लगाई गई है। ये कैमरे जिला पंचायत से खरीदे गए हैं और ये कर्मचारी अनुदेशक व रोजगार सेवक आदि हैं। इनको पैक्ड लंच दिया जाएगा। किसी भी दुर्घटना की स्थिति में संबंधित कर्मचारियों को नियमानुसार एक्सग्रेसिया का लाभ और अन्य सरकारी कर्मचारी के रूप में मिलने वाले विभिन्न लाभ दिए जाएंगे।



चुनाव ड्यूटी के लिए मानदेय भी दिया जाए

परिषदीय अनुदेशक कल्याण एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह का कहना है कि कई जिलों में अनुदेशकों की चुनाव ड्यूटी बिना मानदेय के लगा दी गई है। इतना ही नहीं, पी-2 के बजाय पी-3 में ड्यूटी लगी है। उन्होंने मानदेय देने की मांग की है।

Saturday, April 13, 2024

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने चुनाव ड्यूटी के बहिष्कार की दी चेतावनी, कुछ जनपदों में शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी तृतीय बनाए जाने से उपजी नाराजगी

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने चुनाव ड्यूटी के बहिष्कार की दी चेतावनी, कुछ जनपदों में शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी तृतीय बनाए जाने से उपजी नाराजगी


लखनऊ। चुनाव आयोग ने शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी द्वितीय के पद पर तैनात करने का जिला निर्वाचन अधिकारियों को आदेश दिया है। किंतु कुछ जिलों में उनकी ड्यूटी मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में लगाई जा रही है। इस पर प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने नाराजगी जताई है। साथ ही संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इसमें संशोधन की मांग की है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के आदेश का जिले के अधिकारियों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। गोंडा, चित्रकूट आदि कुछ जिलों में शिक्षामित्र की ड्यूटी मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र एक शिक्षक के रूप में काम करते हैं। 20 साल से अधिक से चुनाव में मतदान अधिकारी प्रथम व द्वितीय की ड्यूटी करते रहे हैं।


उन्होंने कहा कि अगर मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में शिक्षामित्र की ड्यूटी लगाई गई, तो वह इसका बहिष्कार करेगा। उन्होंने मांग की जिला निर्वाचन अधिकारी अपने इस आदेश में संशोधन करें। ताकि चुनाव को ठीक ढंग से सकुशल संपन्न कराया जा सके।

Wednesday, April 10, 2024

असाध्य रोगों से पीड़ित और पति पत्नी दोनो के सेवा में होने की स्थिति में लोकसभा निर्वाचन ड्यूटी से छूट दिए जाने हेतु प्राथमिक शिक्षक संघ की मांग

असाध्य रोगों से पीड़ित और पति पत्नी दोनो के सेवा में होने की स्थिति में लोकसभा निर्वाचन ड्यूटी से छूट दिए जाने हेतु प्राथमिक शिक्षक संघ का ज्ञापन


बेसिक शिक्षा परिषद के नियत्रंणाधीन परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षिकाओं जो असाध्य रोग से पीड़ित हैं अथवा पति एंव पत्नी सरकारी सेवा में है लोक सभा निर्वाचन-2024 में छूट प्रदान किए जाने के संबंध में ज्ञापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन


Monday, April 8, 2024

मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चाचा चौधरी और साबू भी उतरे चुनाव मैदान में

मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चाचा चौधरी और साबू भी उतरे चुनाव मैदान में


लखनऊ। आपको कार्टून कैरेक्टर चाचा चौधरी और साबू तो याद ही होंगे। बचपन में इनकी कहानियों व करतब ने आपको खूब गुदगुदाया होगा। चाचा चौधरी के दिमाग की तो दाद दी जाती थी। ये तो हुई पुरानी बातें। अब वही चाचा चौधरी और साबू नए अवतार में आपके सामने होंगे। चाचा चौधरी और साबू लोगों को मतदान की अहमियत समझाएंगे।


ईवीएम, बूथ, वोटर हेल्पलाइन की जानकारी भी देंगे। देश-प्रदेश में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कवायदें चल रही हैं। चाचा चौधरी और साबू को मैदान में उतारना चुनाव आयोग का इनोवेटिव आइडिया है। इसके लिए आयोग ने चाचा चौधरी कॉमिक्स की सॉफ्ट कॉपी तैयार कराई है। बेसिक शिक्षा विभाग की मदद से ये कॉमिक्स कैरेक्टर घरों तक पहुंचेंगे। न केवल पहुंचेंगे, अभिभावकों से संकल्प पत्र भी भरवाएंगे।


■ चाचा चौधरी और साबू अपना पूरा असर दिखा सकें इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षक संकुल की विशेष बैठकें आयोजित कर रहा है। इसमें स्थानीय स्तर पर सभी शिक्षकों व अभिभावकों को शामिल किया जा रहा। वहीं ऐसे मतदाता जो होली के अवसर पर घर आने वाले हैं, उनके बच्चे के जरिये घर पर संकल्प पत्र भेजा जाएगा। संकल्प पत्र में अभिभावक को बताना होगा कि उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में चेक कर लिया है या नहीं।

■ यदि किसी कारण से उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो तुरंत पंजीकृत करवाने के लिए संकल्प लेना होगा। इतना ही नहीं वे लोकसभा चुनाव में वोट डालने जरूर जाएंगे और अपने रिश्तेदारों व पडोसियों को भी प्रेरित करेंगे, इसका भी अभिभावक संकल्प लेंगे।


बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी बीएसए को निर्देश दिया है कि बैठकों में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले कॉमिक्स चाचा चौधरी की सॉफ्ट कॉपी को वितरित कराएं। उन्होंने यह भी कहा है कि विभाग छात्रों की बुलावा टीमें भी गठित करेगा। बुलावा टीमें वोटिंग के दिन घर-घर जाकर मतदान के लिए प्रेरित करेंगी। बता दें कि अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी निधि श्रीवास्तव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर इस अभियान में सहयोग करने और अभिभावकों से संकल्प पत्र भरवाकर पांच अप्रैल तक उपलब्ध कराने को कहा है।

चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को गोद में नहीं ले सकेंगे नेता और प्रत्याशी, चुनाव कार्यों में बच्चों के उपयोग को किया प्रतिबंधित

बच्चों से चुनाव प्रचार कराया तो प्रत्याशी पर होगी कार्रवाई 

चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को गोद में नहीं ले सकेंगे नेता और प्रत्याशी, चुनाव कार्यों में बच्चों के उपयोग को किया प्रतिबंधित


लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का चुनाव प्रचार या चुनाव से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाया है। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों के नेता और प्रत्याशी छोटे बच्चों को गोद में भी नहीं ले सकेंगे।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को बताया कि आयोग ने बालश्रम कानून के तहत आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियानों व अन्य चुनावी गतिविधियों में बच्चों के उपयोग के प्रति शून्य सहनशीलता का संदेश दिया है। 

बताया कि राजनीतिक दलों, अभ्यर्थियों एवं चुनाव से जुड़े प्रशासनिक तंत्र को नाबालिग बच्चों का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिए हैं। चुनाव के दौरान बच्चों को रैलियां निकालने, नारे लगवाने, पोस्टर एवं पत्रक बांटने के कार्य में नहीं लगाया जाएगा। 

राजनीतिक दलों के नेता और प्रत्याशी की ओर से बच्चों को गोद में लेने, वाहन या रैलियों में बच्चे को ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। किसी राजनीतिक दल की भारत निर्वाचन आयोग ने उपलब्धियों को बढ़ावा देने या विरोधी दलों व अभ्यर्थियों की आलोचना करने सहित किसी भी प्रकार से प्रचार- अभियान की झलक बनाने के लिए बच्चों का उपयोग करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। 

कहा कि चुनाव कार्य में किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी या सरकारी मशीनरी की ओर से बच्चों का उपयोग पाया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी



राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल पड़ेगा भारी, चुनाव आयोग हुआ सख्त
 
चुनाव प्रचार अभियान में बच्चों का इस्तेमाल करने पर इलेक्शन कमीशन ने कड़ी नाराजगी जताई है। लोकसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे पोस्टर और पर्चों सहित प्रचार की किसी भी सामग्री में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी रूप में न करें। राजनीतिक दलों को इसे लेकर EC ने परामर्श जारी किया। इसमें आयोग ने दलों और उम्मीदवारों की ओर से किसी भी तरीके से बच्चों का इस्तेमाल किए जाने के प्रति अपनी कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति से अवगत कराया।


चुनाव आयोग ने कहा कि नेताओं और उम्मीदवारों को प्रचार गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी तरीके से नहीं करना चाहिए, चाहे वे बच्चे को गोद में उठा रहे हों या वाहन में या फिर रैलियों में बच्चे को ले जाना हो। इलेक्शन कमीशन की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'किसी भी तरीके से राजनीतिक प्रचार अभियान चलाने के लिए बच्चों के इस्तेमाल पर भी यह प्रतिबंध लागू है जिसमें कविता, गीत, बोले गए शब्द, राजनीतिक दल या उम्मीदवार के प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन शामिल है।' गौरतलब है कि हाल-फिलहाल में चुनावी कैंपेन के दौरान बच्चों का इस्तेमाल बढ़ता देखा गया है। अलग-अलग पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार के दौरान छोटे बच्चों के साथ वोट मांगते दिख जाते हैं। 


किन लोगों को मिलेगी छूट, चुनाव आयोग ने बताया
आयोग ने कहा, 'अगर कोई नेता जो किसी भी राजनीतिक दल की चुनाव प्रचार गतिविधि में शामिल नहीं है और वह कोई बच्चा अपने माता-पिता या अभिभावक के साथ उसके समीप केवल मौजूद रहता है। ऐसी परिस्थिति में यह दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।' मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने निर्वाचन आयोग के प्रमुख हितधारकों के रूप में राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर लगातार जोर दिया है। खासतौर से उन्होंने आगामी संसदीय चुनावों के मद्देनजर लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में उनसे सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया है। 



चुनाव प्रचार और रैलियों में बच्चों के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की नज़र टेढ़ी, जारी की सख्त गाइडलाइन


नई दिल्ली। आयोग ने कहा कि नेताओं और उम्मीदवारों को प्रचार गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी तरीके से नहीं करना चाहिए। चाहे वे बच्चे को गोद में उठा रहे हों या वाहन में या फिर रैलियों में बच्चे को ले जाना हो।

आयोग ने एक बयान में कहा कि किसी भी तरीके से राजनीतिक प्रचार अभियान चलाने के लिए बच्चों के इस्तेमाल पर भी यह प्रतिबंध लागू है, जिसमें कविता, गीत, बोले गए शब्द, राजनीतिक दल या उम्मीदवार के प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन शामिल है।

आयोग ने कहा कि लेकिन यदि कोई नेता जो प्रचार गतिविधि में शामिल नहीं है और कोई बच्चा अभिभावक के साथ उसके समीप केवल मौजूद होता है तो यह दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।


ECI ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह से बच्चों को शामिल करने के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही

लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) से पहले चुनाव आयोग (Election Commission) ने राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रचार से जुड़ा सख्त गाइडलाइन जारी किया है. आयोग ने चुनाव प्रचार में बच्चों और नाबालिग को शामिल करने पर रोक लगा दी है. आयोग का कहना है कि अगर कोई उम्मीदवार गाइडलाइन का उल्लंघन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


चुनाव आयोग की गाइडलाइंस में क्या है?
लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने सोमवार, 5 जनवरी को सख्त निर्देश जारी किए हैं. इसके तहत चुनाव प्रचार में बच्चों या नाबालिगों को शामिल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. आयोग ने पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह से बच्चों को शामिल करने के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही है.

आयोग ने कहा है कि "राजनीतिक दलों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाता है कि वो बच्चों को किसी भी प्रकार के चुनाव अभियान में शामिल न करें, जिसमें रैलियां, नारे लगाना, पोस्टर या पैम्फलेट का वितरण, या कोई अन्य चुनाव-संबंधी गतिविधि शामिल है."

इसके साथ ही आयोग ने कहा कि राज नेताओं और उम्मीदवारों को किसी भी तरह से प्रचार गतिविधियों में बच्चों को शामिल नहीं करना चाहिए, जिसमें बच्चे को गोद में लेना, वाहन में बच्चे को ले जाना या रैलियों में शामिल करना शामिल है।


चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों द्वारा कविता, गीत, बोले गए शब्दों, प्रतीक चिन्हों, राजनीतिक दल की विचारधारा, उनकी उपलब्धियों को बढ़ावा देने सहित किसी भी तरीके से राजनीतिक अभियान से जुड़ी गतिविधियों में बच्चों को शामिल करने पर रोक रहेगी.
सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है. इसके साथ ही आयोग ने सभी चुनाव अधिकारियों और मशीनरी को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वो चुनाव-संबंधी कार्य या गतिविधियों के दौरान किसी भी क्षमता में बच्चों को शामिल करने से बचें।


आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला
आयोग ने गाइडलाइन जारी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है. चेतन रामलाल भुटाडा बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य केस में 4 अगस्त, 2014 को अपने फैसले में कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था कि राजनीतिक दल बच्चों को चुनाव प्रचार में शामिल न करें और अपने उम्मीदवारों को भी इसकी अनुमति न दें।

Saturday, March 23, 2024

मांग : लोकसभा चुनाव में बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी सभी विभागों के समान अनुपात में लगाई जाए

मांग : लोकसभा चुनाव में बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी सभी विभागों के समान अनुपात में लगाई जाए


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन (पीएसपीएसए) ने लोकसभा चुनाव में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी सभी विभागों के समान अनुपात में लगाने की मांग की है। संगठन की ओर से केंद्रीय निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर मतदान सामग्री जमा करने के समय होने वाली अव्यवस्था पर भी रोक लगाने के लिए व्यवस्था करने को कहा है।


एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि पिछले कई चुनाव में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी अधिक संख्या में लगाई गई है। एक महीने से परिषदीय शिक्षक बोर्ड परीक्षा करा रहे थे। अब उनकी ड्यूटी चुनाव में लगाई जाएगी, जिससे विद्यालयों में पठन-पाठन और प्रभावित होगा। इसलिए चुनाव में शिक्षकों की ड्यूटी सभी विभागों के समान अनुपात में लगाई जाए। 

Monday, March 11, 2024

उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने लोकसभा चुनाव में परिस्थितिजन्य दक्षता अनुसार ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र

उत्तर प्रदेश महिला शिक्षक संघ ने लोकसभा चुनाव में परिस्थितिजन्य दक्षता अनुसार ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में राज्य निर्वाचन आयोग को लिखा पत्र

Monday, February 12, 2024

चुनाव कार्य के लिए सिर्फ शिक्षक ही क्यों? चुनावों के लिए हमेशा स्कूल और कॉलेज के संसाधन ही क्यों प्रयोग हों? इस बार केके पाठक ने चुनावों में शैक्षिक संसाधनों के उपयोग को लेकर उठाया सवाल

चुनाव कार्य के लिए सिर्फ शिक्षक ही क्यों? चुनावों के लिए हमेशा स्कूल और कॉलेज के संसाधन ही क्यों प्रयोग हों?  इस बार केके पाठक ने चुनावों में शैक्षिक संसाधनों के उपयोग को लेकर उठाया
 सवाल

पहले अन्य विभाग के सभी कर्मियों को चुनाव ड्यूटी में लगाएं उसके बाद शेष बचे हुए कार्य और पदों के लिए शिक्षकों को ड्यूटी में शामिल करें


Bihar Education Department: बिहार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की ओर से सभी जिलाधिकारियों को एक सख्त पत्र जारी किया गया है। इस आदेश पत्र में केके पाठक ने प्रदेश के सभी जिलाधिकारी को संबोधित करते हुए कई बातें लिखी हैं। केके पाठक के पत्र का विषय है। लोकसभा चुनाव हेतु शिक्षा विभाग के संसाधनों के उपयोग के संबंध में। आइए जानते हैं केके पाठक ने लोकसभा चुनाव और किसी भी चुनाव में शिक्षा विभाग के संसाधनों के प्रयोग को लेकर क्या आदेश जारी किया है।

    
पटना: बिहार में शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक की ओर से लगातार कई मुद्दों को लेकर जिलाधिकारियों को आदेश पत्र जारी किया जाता है। अपर मुख्य सचिव का पदभार संभालने के बाद केके पाठक ने सैकड़ों पत्र जारी किए होंगे। उनके आदेश पर एक्शन भी होता है। ताजा मामला उनके एक ऐसे आदेश पत्र से जुड़ा हुआ है, जिसमें उन्होंने चुनाव के दौरान शिक्षा संसाधनों के प्रयोग को लेकर आदेश जारी किया है। 


केके पाठक ने कहा है कि चुनाव के दौरान शिक्षा विभाग के विद्यालय और भवन को परंपरागत तौर पर लिया जाता रहा है। इसके अतिरिक्त शिक्षकों की भी ड्यूटी चुनाव में लगती रही है। उन्होंने अपने पत्र में आगे कहा है कि शिक्षा विभाग भली भांति इस बात से अवगत है कि बिना शिक्षा विभाग के संसाधनों के चुनाव का काम नहीं हो सकता। अतः इस हेतु शिक्षा विभाग जिला प्रशासन को पूर्ण सहयोग करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने आगे कहा है कि पिछले सभी चुनाव में परंपरागत तरीके से जिला प्रशासन सबसे पहले शिक्षा विभाग के सारे भवन और सारे कर्मचारी शिक्षक सहित ले लेता है। उसके बाद कमी होने पर अन्य विभागों की ओर देखा जाता है। इस परंपरा पर पूरी तरह रोक लगनी चाहिए।


डीईओ को आदेश
केके पाठक ने अपने आदेश में आगे लिखा है कि मेरा अनुरोध ये है कि शिक्षा विभाग के संसाधनों को लेने से पहले आप निम्नलिखित सावधानियों को बरतने की कृपा करें। उन्होंने कहा है कि शिक्षा विभाग के शैक्षणिक और प्रशिक्षण संबंधी कार्य में बाधा कम पहुंचे। 

केके पाठक ने जिलाधिकारियों को साफ-साफ निर्देशित करते हुए कहा है कि शिक्षा विभाग के विद्यालय पहले से ही बूथ के रूप में सूचित किए जा चुके हैं और वोटर लिस्ट भी छप चुकी है। अतः उस संबंध में अब कुछ नहीं किया जा सकता है। किन्तु Strong Room, Counting Center इत्यादि के लिए आप परंपरागत रूप से जिला एवं अनुमंडल मुख्यालय स्तर पर शिक्षा विभाग के भवनों, यानी कि डिग्री कॉलेज, उच्च विद्यालय, डायट इत्यादि को लेते रहे हैं। मेरा आपसे अनुरोध होगा कि परंपरागत तौर पर शिक्षा विभाग के भवनों को लिए जाने से पहले आप ये भी विचार कर सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में अन्य विभाग के भी काफी प्रशासकीय/शैक्षणिक भवन बने है।


जिलाधिकारी को आदेश पत्र
केके पाठक ने जिलाधिकारियों को लिखे गए पत्र में कहा है कि ध्यान रहे कि प्रचुर मात्रा में विभिन्न विभागों के भवन, मेडिकल/इंजीनियरिंग कॉलेज, आई.टी. आई, निजी क्षेत्र में मेडिकल कॉलेज इत्यादि भारी संख्या में खुल गए है। अतः आप इन भवनों को भी ईवीएम अथवा मतगणना केन्द्र के लिए लेने पर विचार कर सकते है। मैं ऊपर उल्लेख कर चुका हूं कि हमारे कई विद्यालय/उच्च विद्यालय/डिग्री कॉलेज में मतदान बूथ के तौर पर अधिसूचित हैं और जिसे अब बदला नहीं जा सकता है। यदि कुछ बदला जा सकता है तो वो ये है कि आप मतगणना केन्द्र/ईवीएम इत्यादि के लिए शिक्षा विभाग के अलावे किसी अन्य विभाग के भवनों का इस्तेमाल करें। 


कम से कम इस हद तक आपसे ये आशा की जाती है कि आप अन्य विभागों के भवनों को भी Explore करने का प्रयास करेंगे। केके पाठक ने आगे चुनाव कार्य में शिक्षकों की ड्यूटी को लेकर कड़ा आदेश जारी किया है। उन्होंने जिला प्रशासन और चुनाव से जुड़े अधिकारियों से कहा है कि अन्य विभाग के कर्मचारियों को भी चुनावी ड्यूटी में लगाया जाए।


केके पाठक का सख्त आदेश
परम्परागत तौर पर हमारे सभी शिक्षक पोलिंग पार्टी इत्यादि के अंग बनाए जाते हैं। इसके अलावा हाल ही में यह देखा गया है कि शिक्षा विभाग के अन्य प्रखंड स्तरीय कर्मी (जो कि संविदा के माध्यम से रखे गए हैं) को भी चुनावी ड्यूटी में लगाया जा रहा है। उन्हें Sector Magistrate अथवा इसी प्रकार के अन्य कार्यों पर लगा दिया जाता है। इस व्यवस्था को बदलने की आवश्यकता है। 


आपसे अनुरोध है कि पहले अन्य विभाग के सभी कर्मियों को चुनाव ड्यूटी में लगाएं उसके बाद शेष बचे हुए कार्य और पदों के लिए शिक्षकों को ड्यूटी में शामिल करें। उपरोक्त आलोक में मेरा आपसे अनुरोध है कि पहले आप अन्य विभागों के भवन की उपलब्धता को टटोलें। साथ ही अन्य विभाग के सारे कर्मचारियों की उपलब्धता को टटोले और आवश्यकता अनुसार उन्हें ड्यूटी में लगाने के बाद, जो Shortfall हो तो उसे शिक्षा विभाग से पूरा करें।


 इससे ये संदेश जाएगा कि परंपरागत तरीके से पिछले चुनावों के आधार पर हमारे संसाधनों को नहीं लिया गया है, बल्कि अन्य विभाग के भी संसाधनों को बराबरी के अनुपात में लिया गया है। केके पाठक ने साफ कहा है कि ये अनुभव रहा है कि शिक्षा विभाग के संसाधनों को दो माह की आवश्यकता के लिए कहकर लिया जाता है, किन्तु 06 से 07 साल तक ईवीएम मशीनें, पुलिस बल तथा चुनाव कार्य का अन्य सामान महाविद्यालयों/ विद्यालयों / डायट संस्थानों में पड़ा रहता है, जिसे अधोहस्ताक्षरी द्वारा अभियान के तौर पर बड़ी मुश्किल से खाली कराया जाता है। अतः फिर से यह परंपरा स्थापित नहीं होने दें। केके पाठक ने ये आदेश प्रदेश के सभी उप विकास आयुक्त, सभी क्षेत्रीय उप निदेशक, शिक्षा विभाग, बिहार/सभी जिला शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षा विभाग को दिया है।