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Friday, September 30, 2022

बीएड : 2.40 लाख सीटें आज से होंगी लॉक, चार चरणों में होगी काउंसलिंग, आज से पहला

बीएड : 2.40 लाख सीटें आज से होंगी लॉक, चार चरणों में होगी काउंसलिंग, आज से पहला

काउंसलिंग में अभ्यर्थियों को एक से ज्यादा कॉलेज चुनने का सुझाव ताकि सीट की न रहे परेशानी



बरेली। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के सफल अभ्यर्थियों की काउंसलिंग शुक्रवार से शुरू हो जाएगी। रुहेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक प्रदेश के 2450 कॉलेजों की 2.40 लाख सीट के लिए अभ्यर्थी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। सीट आवंटित न होने पर कॉलेजों को उनसे लिया गया अग्रिम शुल्क वापस करना होगा।


बीएड की काउंसिलिंग 31 अक्तूबर तक चलेगी। इस बीच दस अक्तूबर से सत्र प्रारंभ हो जाएगा। कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार ने बताया कि पूल काउंसलिंग सात नवंबर से शुरू होकर 15 नवंबर तक चलेगी। डायरेक्ट काउंसलिंग की तिथि 21 नवंबर से 25 नवंबर तक रखी गई है। 


शुक्रवार से कांउसलिंग शुरू करने के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और गाइडलाइन भी जारी कर दी गई है। इसके तहत पहली काउंसलिंग में सीट आवंटित न होने पर कॉलेजों को शुल्क वापस करना होगा।


अभ्यर्थियों को अभिलेखों की ऑनलाइन अपलोडिंग के समय बैंक खाता संख्या, नाम, पासबुक के पहले पेज की फोटो कॉपी या कैंसल चेक की कॉपी अपलोड करनी होगी। उन्हें मूल अंकतालिका अपलोड करने, लॉगिन और पासवर्ड भूलने की स्थिति में उसे कहीं सुरक्षित नोट करने या दोबारा जेनरेट करने का सुझाव दिया गया है।


चार चरणों में होगी काउंसलिंग, आज से पहला

कार्यक्रम के अनुसार पहले चरण में 75 हजार रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे। सात अक्तूबर तक पंजीकरण होगा, आठ अक्तूबर तक कॉलेज का चयन कर सकेंगे। नौ को सीट अलॉट होगी। दूसरे चरण में नौ से 13 अक्तूबर तक पंजीकरण, 14 अक्तूबर तक कॉलेज का चयन और 15 अक्तूबर को सीट मिलेगी। इसमें 75001 से दो लाख रैंक तक के अभ्यर्थी भाग लेंगे। तीसरे में 200001 से 3.5 लाख रैंक तक के अभ्यर्थी का पंजीकरण 15 से 19 अक्तूबर तक होंगे। 20 अक्तूबर तक कॉलेज का चयन और 21 अक्तूबर को सीट अलॉट होगी। चौथे में रैंक से लेकर सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल होंगे। 21 से 26 अक्तूबर तक पंजीकरण, 27 अक्तूबर तक कॉलेज का चयन और 28 अक्तूबर को सीट अलॉट होगी। एक से ज्यादा कॉलेजों का चयन करना बेहतर :


काउंसलिंग में अभ्यर्थियों को कॉलेज के चयन का विकल्प मौजूद रहेगा। इसलिए वे एक के बजाय कई कॉलेजों का चयन करें ताकि प्रवेश में आगे कोई दिक्कत न रहे। किसी एक कॉलेज की सीटें फुल होने के बाद दूसरा विकल्प मौजूद रहेगा।

Thursday, September 29, 2022

बच्चों को बेहतर ढंग से शिक्षा प्रदान की जाये इसका विशेष ध्यान रखा जाए, वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

बच्चों को बेहतर ढंग से शिक्षा प्रदान की जाये इसका विशेष ध्यान रखा जाए, वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए बोले बेसिक शिक्षा मंत्री 


उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  संदीप सिंह ने कहा कि बेसिक शिक्षा एवं समग्र शिक्षा के अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के क्रियान्वयन बेहतर ढंग से करते हुए विभागीय कार्यों को निर्धारित समय में किया जाना चाहिए, इसमें किसी प्रकार की ढिलाई नहीं की जाये। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को बेहतर ढंग से शिक्षा प्रदान की जाये इसका विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकृत छात्र-छात्राओं के सापेक्ष आधार प्रमाणीकरण के कार्य को गम्भीरता से लेते हुए समय से कराया जाये।


यह निर्देश संदीप सिंह ने कल लखनऊ स्थित योजना भवन में उ0प्र0 के खण्ड शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से दिये हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय कार्यों को मेहनत से किया जाये, विद्यालयों में पेयजल की व्यवस्था बेहतर होनी चाहिए, इसके साथ ही शौचालय बेहतर ढंग से क्रियाशील होना चाहिए। इसका भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।


उन्होंने आधार कार्ड विहीन छात्र-छात्राओं के आधार कार्ड बनाये जाने, ‘‘जल जीवन मिशन’’ के अन्तर्गत यू0पी0पी0सी0एल0 द्वारा कराये जा रहे पाइप्ड पेयजल आपूर्ति के अन्तर्गत किये गये कार्यों का सत्यापन, प्रेरणा पोर्टल पर ऑपरेशन कायाकल्प हेतु व्यय धनराशि की फीडिंग की प्रगति, विकास खण्ड स्तर पर शिक्षक प्रशिक्षण (04 दिवसीय) पूर्ण करना, विद्यालयों में ‘‘हमारे शिक्षक’’ बोर्ड लगाये जाने की प्रगति, निपुण विद्यालय, शिक्षक-विद्यार्थी सम्बन्धी अभियान, विद्यालयों में नामांकित सभी विद्यार्थियों एवं सभी शिक्षकों की उपस्थिति, शिक्षकों द्वारा आधारशिला क्रियान्वयन संदर्शिका का उपयोग करने की प्रगति, सभी विद्यालयों में पुस्तकालय/रीडिंग कॉर्नर की स्थापना एवं कालांश निर्धारित करना, मानव सम्पदा पोर्टल पर शिक्षकों द्वारा सेवा पुस्तिका ऑनलाइन जाँचकर सत्यता संबंधी प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने हेतु विकासखंड स्तर पर त्रुटियों का निराकरण की प्रगति, शिक्षकों के अवकाश स्वीकृति की प्रगति सहित अन्य विभागीय कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।


प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा  दीपक कुमार ने कहा कि मा0 मंत्री के द्वारा आज वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से जो निर्देश दिए गए हैं उसका अनुपालन अवश्यक सुनिश्चित किया जाय। इस अवसर पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा  विजय किरण आनन्द सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।




14 बिन्दुओं में जानिए बैठक का निचोड़,  वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए खण्ड शिक्षाधिकारियों को बेसिक शिक्षा मंत्री ने दिए ये निर्देश


उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने निर्देश दिए हैं कि स्कूलों में गुणवत्ता परक शिक्षा दी जाए। ब्लॉक स्तर पर संचालित विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन बेहतर ढंग से किया जाए। प्रेरणा पोर्टल पर पंजीकृत छात्र-छात्राओं के सापेक्ष आधार प्रमाणीकरण के काम को गंभीरता से लेते हुए इसे पूरा किया जाए। 


संदीप सिंह बुधवार को खण्ड शिक्षा अधिकारियों के साथ वीडियो कान्फ्रेंस कर रहे थे। उन्होंने कहा कि स्कूलों में पेयजल की व्यवस्था बेहतर हो, शौचालय बेहतर ढंग से क्रियाशील हों और जल जीवन मिशन के तहत यूपीपीसीएल द्वारा कराए जा रहे पाइप्ड पेयजल आपूर्ति के तहत किए जा रहे कामों का सत्यापन किया जाए। विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार ने कहा कि सभी योजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए। इस मौके पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनन्द सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


मीटिंग में दिए निर्देश
 
1. आधार विहीन छात्रों के आधार त्वरित गति से बनाना, आधार पेंडिंग @ स्कूल को अतिशीघ्र वेरिफिकेशन करके पेंडेन्सी समाप्त करे।

2. शारदा पोर्टल पर प्रगति बहुत खराब है, नोडल शिक्षक वार समीक्षा करके चिंहित करे कि अभी तक कौन नोडल है जिसने शारदा एप पर कोई एंट्री नही की।

3. नॉट सीडेड पर DBT पोर्टल मे अपेक्षित प्रगति नही हुए। स्कूल वार खराब प्रदर्शन वाले चिंहित कर उत्तरदायित्व निर्धारित करें।

4. मानव संपदा का डाटा त्रुटि रहित करने किस स्तर पर पेंडेन्सी है और क्यों है, चिंहित कर कार्यवाही प्रस्तावित करे। 

5. Udise पोर्टल  को अपग्रेड कर दिया है, अब छात्रों के नाम भी आधार नंबर सहित अंकित किये जायेंगे। अभी से तैयारी सुनिश्चित करें।

6. अध्यापको की समस्या सही से सुनकर उनका समाधान यथा समय करे लिपिक या अनुचर किसी भी शिक्षक को परेशान न करे। यदि कोई प्रतिकूल पाया गया तो विभागीय कार्यवाही निश्चित है।

7. प्रतिमाह टीचर अटेंडेंस समय से लॉक कराये। समय से लॉक न करने वाले पर उत्तरदायित्व तय करे। 

8. मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज छात्र संख्या का भौतिक सत्यापन रैंडम आधार पर करके रिपोर्ट दे। 

9. जो शिक्षक दूसरे जनपद से आये है, उनका लीव रिकॉर्ड जांचोपरांत अपडेट करें।

10. कंपोजिट ग्रांट की वाल पेंटिंग न करने वाले स्कूल को संदिग्ध मानते सघन जांच करे और अनुपालन न करने पर दंडित कराये। 

11. कायाकल्प पर हेडमास्टर अपने स्कूल में पत्रावली रखे और प्रधान को प्रगति से अवगत करा कर 19 पैरामीटर्स पर कार्यवाही करे। 

12. निपुण लक्ष्य के प्रति जागरूक होकर प्रत्येक शिक्षक स्वयं हाथ से चार्ट  बनाकर , अपनी क्लास मे चस्पा करे, यदि निरीक्षण में ऐसा नहीं मिला तो उत्तरदायित्व तय करे। 

13. प्रतिदिन प्रसारित शिक्षक संदर्शिका के अनुसार पढाई सुनिश्चित की जाय, निरीक्षण के समय गहनता से परखा जाय। 

14. अंत में  मंत्री जी द्वारा संबोधित किया गया कि BEO अपनी भूमिका को अच्छी तरह से समझे और समन्वय बनाकर कार्य करे।


Wednesday, September 28, 2022

कार्यालय बुलाते हैं निदेशालय के बाबू इसके चलते बढ़ रहा भ्रष्टाचार, महीनों लटकी रहती है फाइल, सिटीजन चार्टर लागू करने की मांग

कार्यालय बुलाते हैं निदेशालय के बाबू इसके चलते बढ़ रहा भ्रष्टाचार

महीनों लटकी रहती है फाइल, सिटीजन चार्टर लागू करने की मांग



प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के बाबू किसी भी तरह के आदेश या शिक्षकों से जुड़े स्वीकृत प्रपत्र देने के लिए कार्यालय बुलाते हैं। उसे संबंधित शिक्षक के पास आनलाइन या आफलाइन नहीं भेजा जाता है। निदेशालय के बाबू कार्यालय में बुलाते हैं तो इससे भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ जाती है। 


यह आरोप राजकीय शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने लगाया है। उन्होंने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय को पत्र लिखा है। साथ ही उसकी प्रति माध्यमिक शिक्षा मंत्री, सचिव और शिक्षा निदेशक को भी भेजा है।


राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील कुमार भड़ाना और प्रांतीय महामंत्री डा. रवि भूषण ने 27 सितंबर को अपर शिक्षा निदेशक राजकीय को लिखे पत्र में बाबुओं पर कई आरोप लगाए हैं। 


उन्होंने लिखा कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान, अनेक प्रकार के अवकाश की स्वीकृति, अनापत्ति प्रमाण पत्र, चिकित्सा प्रतिपूर्ति आदि के प्रकरणों का निस्तारण आपके द्वारा किया जाता है। लेकिन उसे संबंधित को समय से नहीं दिया जाता है। अक्सर ऐसा होता है कि हस्ताक्षर के बाद भी पत्र जारी नहीं किया जाता है।



महीनों लटकी रहती है फाइल, सिटीजन चार्टर लागू करने की मांग

प्रयागराज । शिक्षा विभाग में बेसिक से लेकर उच्च तक भ्रष्टाचार का आलम व्याप्त है। बताया जाता है कि हर टेबल पर महीनों तक फाइल लटकाए रखी जाती है। बिना चढ़ावा के फाइल आगे नहीं बढ़ती है। फिर फाइल के दूसरी टेबल पर पहुंचने के बाद यही खेल शुरू होता है। 


प्रधानाचार्य परिषद के अध्यक्ष ब्रजेश शर्मा ने मांग है कि अगर सिटीजन चार्टर लागू कर दिया जाए तो इस पर कुछ हद तक लगाम जरूर लग जाएगी। वहीं, राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुनील कुमार भड़ाना और महामंत्री डॉ. रविभूषण ने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय को पत्र लिखकर मांग कि है कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/ शिक्षिकाओं के निस्तारित प्रकरणों की सूचना ऑनलाइन मेल के माध्यम से प्रेषित किया जाए।

स्कूलों में मातृभाषा में शिक्षा देने को बढ़ाने में जुटा शिक्षा मंत्रालय, निजी विद्यालयों को भी देनी होगी मातृभाषा में शिक्षा

निजी विद्यालयों को भी देनी होगी मातृभाषा में शिक्षा

• स्कूलों में मातृभाषा में शिक्षा देने को बढ़ाने में जुटा शिक्षा मंत्रालय

• राज्यों के साथ जल्द ही इस पर होगी विस्तृत चर्चा बनी रणनीति


नई दिल्ली: छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में अधिक तेजी से सीखते हैं और चीजों को समझने की क्षमता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय अब इस मुहिम को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जल्द ही वह इसे लेकर राज्यों के साथ भी चर्चा करने की तैयारी में है। 


फिलहाल यह मुहिम सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि इसके दायरे में निजी स्कूलों को भी लाने की योजना बनाई गई है। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में ऐसे शिक्षकों को तरजीह देने की तैयारी है, जो मातृभाषा में भी पढ़ाने में सक्षम हैं।


स्कूलों में बच्चों को कम से कम पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की सिफारिश वैसे तो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में भी की गई है। जिस पर राज्यों को अपने स्तर पर काम करना था, लेकिन अब तक के जो रुझान देखने को मिल रहे हैं, उनमें ज्यादातर राज्यों में अभी तक इसे लेकर कोई हलचल नहीं शुरू हुई है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय अब राज्यों को इसके लिए तैयार करने की रणनीति में जुटा है। पहले तो इसके दायरे में सिर्फ सरकारी स्कूलों को ही रखा गया था, लेकिन अब निजी स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया है। 


माना जा रहा है कि यदि इसे सरकारी और निजी स्कूलों में एक साथ नहीं अपनाया गया तो छात्रों के बीच एक बड़ी खाई बन जाएगी। फिलहाल सरकार इस अंतर को पाटने में जुटी है। इसके तहत निजी और सरकारी स्कूलों के बीच समन्वय कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 


गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में 15 लाख से ज्यादा स्कूल हैं। इनमें से करीब 86 प्रतिशत स्कूल सरकारी हैं, जबकि करीब 22 प्रतिशत स्कूल ही निजी स्कूल हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्कूल सरकारी अनुदान प्राप्त भी हैं। हालांकि इनकी संख्या सिर्फ पांच प्रतिशत ही है।

UP : मदरसों में अब एक घंटा ज्यादा पढ़ाई, सुबह नौ बजे से तीन बजे तक होगी पढ़ाई

UP : मदरसों में अब एक घंटा ज्यादा पढ़ाई, सुबह नौ बजे से तीन बजे तक होगी पढ़ाई


यूपी की योगी आद‍ित्‍यनाथ सरकार बच्‍चों की श‍िक्षा पर काफी फोकस कर रही है। इसी के साथ सरकार ने मदरसों में भी पढ़ाई का समय बदल द‍िया है। आज से पांच की जगह छह घंटे पढ़ाई होगी।


लखनऊ | प्रदेश के सभी मदरसों में शनिवार यानी आज एक अक्टूबर से पढ़ाई का समय बदल गया है। आज एक घंटा अधिक पढ़ाई होगी। समय बदलने के बाद आज पहले द‍िन सुबह मदरसा में आए छात्रों की राष्‍ट्रगान से शुरुआत की गई।


सुबह नौ बजे से तीन बजे तक होगी पढ़ाई
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने मदरसों का समय सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक कर दिया है। पहले मदरसों में सुबह नौ से दो बजे तक पढ़ाई होती थी। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि सभी मान्यता प्राप्त मदरसों में अब छह घंटे पढ़ाई कराई जाएगी। इससे बच्चों के व्यक्तित्व का बेहतर विकास हो सकेगा। 


छात्रों को दी जाएगी आधुन‍िक श‍िक्षा
सुबह की दुआएं (प्रार्थना) व अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान कराने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि मदरसों का समय एक घंटा बढ़ने से छात्र-छात्राओं को दीनियात की पढ़ाई के साथ ही आधुनिक शिक्षा के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा। मदरसा बोर्ड के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि अब बच्‍चों को हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान भी पढ़ाया जाएगा। ज‍िससे छात्रों का सामाज‍िक व‍िकास हो सके।


महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की सुनाई जाएंगीं कहान‍ियां
इसके साथ ही मदरसों में देश के इतिहास व खासकर महापुरुषों व स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि यहां के बच्चों में देश प्रेम व भक्ति का भाव जागृत हो सके और वे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा ले सकें।


प्रदेश सरकार मदरसों में आनलाइन पढ़ाई के लिए शिक्षक तैयार कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के दीक्षा पोर्टल की मदद ली जा रही। मदरसा शिक्षकों को पोर्टल के जरिए आनलाइन प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।


बोर्ड अब मदरसों में आनलाइन पढ़ाई के लिए मूलभूत सुविधाएं जुटाने में लगा हुआ है। लाकडाउन के समय जब स्कूल-कालेज बंद हुए तो केंद्र सरकार ने आनलाइन पढ़ाई के लिए दीक्षा पोर्टल व मोबाइल एप शुरू किया था। आनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था न होने से सर्वाधिक नुकसान मदरसों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का हुआ था।



बदलाव: प्रदेश के मदरसों में छह घंटे की पढ़ाई अनिवार्य

मदरसों में अब संचालक नहीं कर पाएंगे मनमर्जी

सुबह नौ बजे प्रार्थना या राष्ट्रगान किया जाएगा



लखनऊ  । उत्तर प्रदेश के मदरसों में भी अब अन्य शिक्षण संस्थानों की ही तरह छह घंटे पढ़ाई होगी। अभी तक राज्य के अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में शिक्षण कार्य की अवधि मदरसा प्रबंधक / संचालक की मर्जी से तय होती थी।


उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड ने अब इन मदरसों का टाइम टेबल बदलकर सभी मदरसों में छह घंटे की पढ़ाई अनिवार्य कर दी है। मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह ने इस बारे में आदेश जारी कर दिया है। पहली अक्तूबर से इन मदरसों में सुबह नौ बजे प्रार्थना यानि दुआ और फिर राष्ट्र गान होगा। इसके बाद सुबह नौ बजकर बीस मिनट से कक्षाएं चलेंगी। बारह से साढ़े बारह बजे के बीच इन्टरवल होगा। उसके बाद पुनः दोपहर तीन बजे तक कक्षाएं चलेंगी।



यह जानकारी यूपी मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार जावेद ने दी है। प्रदेश सरकार मदरसों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए कदम उठा रही है। इसी के तहत हाल ही में मदरसों से उनके संचालन से जुड़े तथ्यों का ब्योरा मांगा गया है ताकि उनकी वस्तुस्थिति के बारे में तस्वीर साफ रहे ।

निपुण लक्ष्य एप जांचेगा बच्चे अब तक कितना हुए दक्ष?

निपुण लक्ष्य एप जांचेगा बच्चे अब तक कितना हुए दक्ष? 



परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में बाल वाटिका और कक्षा एक से तीन तक के दो से ढाई लाख पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अलग तरीके से भाषा एवं संख्या ज्ञान ही नहीं कराया जा रहा, बल्कि बच्चों को साथ-साथ परीक्षा भी देते रहना होगा। 


बेसिक शिक्षा विभाग इसके लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। निपुण लक्ष्य एप के माध्यम से जांचा जाएगा कि बच्चे अब तक कितने दक्ष हुए हैं। और किस क्षेत्र में शिक्षक एवं अभिभावकों को अभी मेहनत करने की जरूरत है।



बेसिक शिक्षा विभाग में दीक्षा ऐप, रीड एलांग एप पहले से संचालित हैं। कोरोना महामारी के विकट दौर में परिषदीय विद्यालयों में दो वर्ष तक पढ़ाई प्रभावित हुई थी। बच्चों के स्कूल न जाने का असर उनके मानसिक विकास पर भी पड़ा है। केंद्र सरकार ने विद्यालय खुलते ही निपुण भारत मिशन शुरू किया जिसके लक्ष्य को वर्ष 2026-27 तक प्राप्त करना है। वहीं प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025-26 तक ही प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है।


इसमें कक्षा एक से तीन तक में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा में पहले की तरह जोड़ा जाना है। बेसिक शिक्षा विभाग की तरफ से इसके लिए विस्तृत तैयारियां कर पठन-पाठन के लिए संदर्शिका, निपुण लक्ष्य तैयार करके शिक्षकों को अलग से प्रशिक्षित किया जा रहा है। सभी बच्चे पढ़ाई करें और रोज स्कूल आएं इस पर विशेष जोर दिया जा रहा है।


पढ़ाई के पुराने ढर्रे को पीछे छोड़कर रोचक एवं खेल-खेल के अंदाज में हिंदी भाषा एवं गणितीय दक्षताओं में उन्हें निपुण बनाया जा रहा है। निपुण लक्ष्य में अंकित दक्षताओं के आंकलन के लिए विभाग ने निपुण लक्ष्य एप तैयार किया है। कक्षाओं में इसका आफलाइन उपयोग किया जा सकता है। इस एप को रीडिंग एलांग एप के माध्यम से जोड़ा गया है। एप में विषय विशेषज्ञों की ओर से बच्चों के उपयोग में आने वाले प्रश्न तैयार कर अपलोड किए गए हैं।


वैसे तो इस एप का उपयोग कर डायट मेंटर, स्टेट रिसोर्स ग्रुप (एसआरजी) एवं अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) स्कूलों में जाकर परीक्षण करेंगे। इसमें तय समय में 75 प्रतिशत अंकों एवं भाषा का ज्ञान होने पर ही बच्चे निपुण माने जाएंगे। इसके अलावा शिक्षक एवं अभिभावक भी इसके माध्यम से जान सकेंगे कि उनके बच्चों का सीखने का स्तर क्या है। इसमें आसानी यह होगी कि अभिभावक बच्चों को निपुण बनने के लिए प्रेरित करते रहेंगे। निपुण भारत मिशन के अंतर्गत बच्चों में भाषा एवं गणितीय दक्षता एवं लीडरशिप विकास पर विशेष बल दिया जा रहा है।


बीआरसी पर चल रहे चार दिवसीय प्रशिक्षण

प्राथमिक शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए दीक्षा ऐप के माध्यम से आनलाइन एवं जिले के प्रत्येक ब्लॉक संसाधन केंद्र पर आफलाइन चार दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आनलाइन प्रशिक्षण में प्रत्येक सप्ताह दो अकादमिक तथा एक लीडरशिप कोर्स प्रदेश स्तर से अध्यापकों के व्हाट्सएप ग्रुप पर भेजा जा रहा है।


निपुण लक्ष्य ऐप से यह लाभ होगा कि बच्चों के आंकलन के बाद शिक्षक उन बच्चों पर विशेष फोकस कर सकेंगे जो वांछित दक्षता हासिल नहीं कर पा रहे हैं। ये एप सभी बच्चों की पढ़ाई में सहायक बनेगा। परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को अलग तरीके से भाषा एवं संख्या ज्ञान ही नहीं कराया जा रहा, बल्कि बच्चों को साथ-साथ परीक्षा भी देते रहना होगा। बेसिक शिक्षा विभाग इसके लिए तकनीक का सहारा ले रहा है। निपुण लक्ष्य एप के माध्यम से जांचा जाएगा कि बच्चे अब तक कितने दक्ष हुए हैं। 

Tuesday, September 27, 2022

UGC : डिग्री कालेज में छात्रों को पढ़ाएंगे लाइब्रेरियन, पुस्तकालयाध्यक्ष का पदनाम भी बदलकर प्रवक्ता लाइब्रेरी किया जाएगा

UGC : डिग्री कालेज में छात्रों को पढ़ाएंगे लाइब्रेरियन, पुस्तकालयाध्यक्ष का पदनाम भी बदलकर प्रवक्ता लाइब्रेरी किया जाएगा



राजकीय डिग्री कॉलेजों में लाइब्रेरियन अब छात्र-छात्राओं की कक्षाएं भी लेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से निर्धारित न्यूनतम शैक्षिक अर्हता को सेवा नियमावली में शामिल करने के लिए शासन स्तर पर काम चल रहा है। पुस्तकालयाध्यक्ष का पदनाम भी बदलकर प्रवक्ता लाइब्रेरी किया जाएगा।



इस बीच संयुक्त शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) डॉ. केसी वर्मा ने सभी राजकीय स्नातक और स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्यों को 23 सितंबर को पत्र लिखकर पूर्व से कार्यरत एक सप्ताह में ऐसे प्रवक्ता लाइब्रेरी की सूचना मांगी हैं जो यूजीसी से निर्धारित न्यूनतम अर्हता धारित करते हैं।


प्रदेश के 170 राजकीय डिग्री कॉलेजों में पुस्तकालयाध्यक्ष के तकरीबन 110 पद खाली हैं। वर्तमान में लगभग 36 कॉलेजों में ही लाइब्रेरियन कार्यरत हैं। दो दर्जन के आसपास कॉलेजों में पद सृजन ही नहीं हो सका है। लेकिन वर्ष 2005 और 2008 के बाद से आयोग ने भर्ती नहीं निकाली है।


एडेड कॉलेजों में भी 200 से अधिक पद खालीप्रदेश के 321 सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पुस्तकालयाध्यक्ष के 200 से अधिक पद खाली हैं। पहले प्रबंधक अपने स्तर से लाइब्रेरियन की भर्ती कर लिया करते थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर लाइब्रेरियन को पहली जनवरी 1986 से यूजीसी की ओर से निर्धारित वेतनमान दिया जा रहा है। 


चूंकि यूजीसी का वेतनमान पाने वाले पदों पर प्रबंधन नियुक्ति नहीं कर सकता है इसलिए सरकार ने 13 मई 2009 को इन कॉलेजों में लाइब्रेरियन की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। उसके बाद नवंबर 2012 में कैबिनेट बैठक में उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को नियुक्ति की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन उसके बाद से नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

बीएड प्रवेश : चार राउंड में काउंसलिंग, 30 सितंबर से शुरू होगा पहला चरण

बीएड काउंसिलिंग : पहले चरण में 75 हजार रैंक तक के अभ्यर्थी होंगे शामिल

बीएड प्रवेश : चार राउंड में काउंसलिंग, 30 सितंबर से शुरू होगा पहला चरण


चार राउंड में काउंसलिंग कराने का फैसला किया है। 30 सितंबर से शुरू होने वाले पहले चरण में एक से 75 हजार रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे। अभ्यर्थी सात अक्टूबर तक पंजीकरण करवा सकेंगे। आठ अक्टूबर तक कॉलेज का चयन होगा। नौ अक्टूबर को सीट अलॉट होगी। यदि सीट आवंटित नहीं हो पाती है तो पहली काउंसलिंग में भुगतान की गई अग्रिम फीस या पूल काउंसलिंग में पूर्ण कॉलेज शुल्क वापस होगा। दूसरे चरण की काउंसलिंग के लिए 9 अक्टूबर से 13 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन होगा। अभ्यर्थी 14 अक्टूबर तक कॉलेज का चयन कर सकेंगे। 15 अक्टूबर को सीट अलॉट होगी। तीसरे चरण के लिए 15 से 19 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन होगा। चौथे चरण के लिए 21 से 26 अक्टूबर तक रजिस्ट्रेशन होगा। अभ्यार्थी 27 तक कॉलेज चयन कर सकेंगे।




बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बीएड काउंसिलिंग का कार्यक्रम जारी कर दिया है। काउंसिलिंग चार चरणों में 30 सितंबर से 28 अक्तूबर तक होगी। पहले चरण में एक से 75 हजार रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे।


विश्वविद्यालय की ओर से जारी किए गए कार्यक्रम में पहले चरण में शामिल होने वाले अभ्यर्थी काउंसिलिंग के लिए सात अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। कॉलेजों का चयन आठ अक्तूबर तक कर सकेंगे। नौ अक्तूबर को सीट अलॉट हो जाएगी। दूसरे चरण की काउंसिलिंग में नौ से 13 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन होंगे। 14 अक्तूबर तक कॉलेज का चयन और 15 अक्तूबर को सीटों का अलॉटमेंट किया जाएगा। दूसरे चरण में 75001 से दो लाख रैंक तक के अभ्यर्थी भाग लेंगे।


तीसरे चरण की काउंसिलिंग में 200001 से साढ़े तीन लाख रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे। इस काउंसिलिंग के तहत रजिस्ट्रेशन 15 अक्तूबर से 19 अक्तूबर तक होंगे। 20 अक्तूबर तक कॉलेज का चयन और 21 अक्तूबर को सीट अलॉटमेंट किया जाएगा। चौथे चरण की काउंसिलिंग में 350001 रैंक से लेकर सभी उत्तीर्ण अभ्यर्थी शामिल होंगे। रजिस्ट्रेशन 21 से 26 अक्तूबर तक चलेंगे। 27 अक्तूबर तक कॉलेजों का चयन होगा। सीट अलॉटमेंट 28 अक्तूबर को किया जाएगा। 


बीएड की काउंसिलिंग चार चरणों में होगी। इसका कार्यक्रम तय हो गया है। ऑनलाइन काउंसिलिंग की प्रक्रिया 30 सितंबर से शुरू होगी जो 28 अक्तूबर तक चलेगी। डॉ. राजीव कुमार, रजिस्ट्रार, रुहेलखंड विश्वविद्यालय

BEd 2022 काउंसिलिंग तारीख घोषित, रजिस्ट्रेशन के लिए छात्रों को ऑनलाइन जमा करने होगी यह धनराशि

BEd 2022 काउंसिलिंग तारीख घोषित, रजिस्ट्रेशन के लिए छात्रों को ऑनलाइन जमा करने होगी यह धनराशि



एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय (MJP Rohilkhad University) ने बीएड प्रवेश (BEd Entrance 2022) के लिए काउंसिलिंग का शेड्यूल 30 सितंबर से जारी किया है। काउंसिलिंग में शामिल होने वाले साढ़े छह लाख अभ्यर्थियों को 650 रुपये काउंसिलिंग शुल्क व पांच हजार रुपये अग्रिम कालेज शुल्क के रूप में आनलाइन देने होंगे।


नौ अक्टूबर से सीट बुक कर सकेंगे छात्र

30 सितंबर से 10 अक्टूबर तक होने वाली पहली काउंसिलिंग के लिए नौ अक्टूबर से छात्र सीट बुक कर सकेंगे। काउंसिलिंग में अगर अभ्यर्थी को सीट आवंटन नहीं होता है तो अग्रिम फीस पांच हजार रुपये खाते में वापस भेजी जाएगी। वहीं अगर सीट आवंटन के बाद अभ्यर्थी उस कालेज में प्रवेश नहीं लेता है तो अग्रिम फीस पांच रुपये वापस नहीं की जाएगी।


दीपावली के बाद हो सकती है तीसरे चरण की काउंसिलिंग

रुविवि प्रशासन के मुताबिक 30 सितंबर से नौ अक्टूबर तक पहली काउंसिलिंग, 10 से 19 अक्टूबर तक दूसरे चरण की काउंसिलिंग कराने की तैयारी है। वहीं दीपावली के बाद तीसरी काउंसिलिंग कराने की तैयारी है। हालांकि विस्तृत कार्यक्रम दो दिन में रुवि जारी करेगा।


नॉन रिफंडेबल रहेगी काउंसिलिंग फीस

राज्य समन्वयक बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा डा. पीबी सिंह ने बताया कि काउंसिलिंग शुल्क 650 रुपये नाॅॅन रिफंडेबल है। बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए 6,67,463 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। प्रदेश के 75 जिलों में 1542 केंद्र बना परीक्षा कराई गई थी। प्रश्न पत्र में हिंदी भाषा का चुनाव कर परीक्षा देने वालों की संख्या 5,45,046 व अंग्रेजी भाषा से परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 70,556 थी।



तीन दिन में दाखिल करने होंगे मूल दस्तावेज

द्वितीय प्रश्न पत्र में कला वर्ग के कुल अभ्यर्थियों की संख्या 3,39,358, वाणिज्य वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या 41,579, विज्ञान वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या 2,23,711 व कृषि वर्ग के अभ्यर्थियों की संख्या 11,131 थी। उन्होंने काउंसिलिंग के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि काउंसिलिंग के दौरान छात्र को महाविद्यालय आवंटन किए जाने की तारीख से तीन दिनों के अंदर सभी मूल दस्तावेजों के साथ आवंटित कालेज को रिपोर्ट करनी होगी। आवंटित महाविद्यालय के प्राचार्य अभ्यर्थी के मूल दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन करेंगे।


चार चक्र में होगी काउंसिलिंग

मुख्य काउंसिलिंग चक्र-एक में फेज एक, दो, तीन व चार होंगे। इसके बाद पूल काउंसिलिंग चक्र दो में होगी। चक्र तीन में सीधा प्रवेश होंगे। वहीं चक्र चार में अल्पसंख्यक सीटों पर सीधा प्रवेश होंगे। पहले राउंड की काउंसिलिंग पूरी होने के बाद महाविद्यालयों में रिक्त सीटों को पूल काउंसिलिंग से भरा जाएगा। निचली रैंक के अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वह महाविद्यालय आवंटन में अस्वीकृति से बचने के लिए अधिक विकल्प दे।



रिपोर्टिंग के लिए ये कागज होंगे आवश्यक

अभ्यर्थियों को रुवि वेबसाइट से अंतिम आवंटन सह पुष्टिकरण पत्र का प्रिंट आउट, बीएड जेईई-2022 के आवेदन पत्र, प्रवेश पत्र और स्कोर कार्ड की प्रति, जन्मतिथि प्रमाण के लिए कक्षा 10वीं का प्रमाणपत्र, अर्हता परीक्षा तक सभी अंक पत्र और प्रमाण पत्र, वेटेज प्रमाण पत्र, सरकार द्वारा जारी मूल फोटो पहचान पत्र, दो पासपोर्ट के लेटेस्ट फोटो, सभी शुल्क प्राप्तियों की प्रतियां होना आवश्यक है।



जनधन खाते का छात्र न दें विवरण

रुवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि अगर किन्हीं छात्रों को सीट आवंटित नहीं हो पाती है तो पहली काउंसिलिंग में अभ्यर्थी द्वारा भुगतान की गई अग्रिम फीस या पूल काउंसिलिंग में पूर्ण कालेज शुल्क की वापसी की जाएगी। इसके लिए छात्रों से बैंक खाते का विवरण मांगा गया है। यह खाता जनधन नहीं होना चाहिए। विवि ने स्पष्ट किया है कि क्रेडिट सीमा के कारण ऐसे खाते में शुल्क वापसी संभव नहीं हो पाती।

घूस लेते DIOS ऑफिस के बाबू गिरफ्तार, प्रमोशन की फाइल बढ़ाने को मांगी थी शिक्षिका से रिश्वत

घूस लेते DIOS ऑफिस के बाबू गिरफ्तार,  प्रमोशन की फाइल बढ़ाने को मांगी थी शिक्षिका से रिश्वत


प्रयागराज :  जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) द्वितीय कार्यालय का वरिष्ठ सहायक रामकृष्ण मिश्रा 10 हजार रुपये घूस लेते गिरफ्तार हुआ है। विजिलेंस की टीम ने सोमवार को डीआइओएस कार्यालय में वरिष्ठ सहायक को रंगेहाथ गिरफ्तार किया। उसके कब्जे से रिश्वत के 10 हजार रुपये भी बरामद हुए हैं। अभियुक्त के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा कायम किया गया है।



शिक्षिका की शिकायत पर विजिलेंस टीम ने किया ट्रैप

बताया गया कि काेरांव के भगेसर गांव निवासी रामकृष्ण मिश्रा डीआइओएस कार्यालय में वरिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत है। आरोप है कि विद्यावती दरबारी बालिका इंटर कालेज में कार्यरत शिक्षिका गार्गी श्रीवास्तव की अंग्रेजी प्रवक्ता पद पर पदोन्नति होनी है।

पदोन्नति से संबंधित फाइल को संयुक्त शिक्षा निदेशक के पास पहुंचाने के लिए वरिष्ठ सहायक ने 10 हजार रुपये मांगे थे। रामकृष्ण की इस कारस्तानी से परेशान शिक्षिका ने विजिलेंस कार्यालय में शिकायत की। तब एसपी विजिलेंस के निर्देश पर अधिकारियों ने गोपनीय तरीके से जांच की।


वाराणसी की अदालत में कल किया जाएगा पेश

जांच में आरोप की पुष्टि हुई तो सोमवार को विजिलेंस टीम शिकायतकर्ता शिक्षिका के साथ डीआइओएस कार्यालय पहंंची और फिर वरिष्ठ सहायक को रंगेहाथ घूस लेते गिरफ्तार कर लिया।

इससे शिक्षाकर्मियों में खलबली मच गई। एसपी विजिलेंस शगुन गौतम का कहना है कि शिकायत के आधार पर रामकृष्ण मिश्रा को ट्रैप किया गया है। मंगलवार को उसे वाराणसी स्थित एंटी करप्सन कोर्ट लखनऊ में पेश किया जाएगा।


मदरसा छात्रों की किताबों का पैसा अब सीधे खाते में

मदरसा छात्रों की किताबों का पैसा अब सीधे खाते में


लखनऊ। मदरसा छात्रों को एनसीईआरटी की किताबों के लिए पैसा उनके अभिभावकों के बैंक खातों में डीबीटी से भेजा जाएगा। सोमवार को मदरसों के सर्वे संबंधी बैठक में यह निर्णय लिया गया।


 अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को यह सुविधा मिलेगी। सरकार का उद्देश्य मदरसों की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक एवं गुणवत्तायुक्त बनाना है। बैठक में पोषण अनुदान योजना के 14 करोड़ के बजट का इस्तेमाल किताबों पर खर्च करने पर सहमति बनी। 


प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें कक्षा एक से आठ तक लगभग एक लाख छात्र अध्ययनरत हैं। मंत्री ने कहा कि मदरसे के कुछ प्रतिभाशाली छात्रों ने नीट में सफलता पाई है। उन्हें सम्मानित किया जाएगा।

Monday, September 26, 2022

यूपी के हर जिले में खेलो इंडिया सेंटर, ब्लाक स्तर पर स्टेडियम बनाये जाने पर भी विचार

यूपी के हर जिले में खेलो इंडिया सेंटर, ब्लाक स्तर पर स्टेडियम बनाये जाने पर भी विचार


एक जिला एक खेल योजना तहत प्रदेश के सभी 75 जिलों में खेलो इण्डिया सेंटर की स्थापना की जाएगी। 42 जिलों में प्रशिक्षकों का चयन कर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बचे अन्य जिलों के प्रशिक्षकों के चयन की कार्यवाही चल रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में खेलों को बढ़ावा देने के लिए ब्लाक स्तर पर स्टेडियम बनाये जाने पर भी विचार किया जा रहा है।


यह बातें खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गिरीश चन्द्र यादव ने बुधवार को बीबीडी बैडमिंटन अकादमी में प्रदेश क्रीड़ा भारती प्रादेशिक बैठक में पदाधिकारियों के सम्बोधित करते हुए कहीं।


मंत्री ने कहा कि 2017 से अब तक प्रदेश में 41 स्टेडियम का निर्माण किया जा चुका है। क्रीड़ा भारती को राज्य की खेल गतिविधियों से जोड़ा जायेगा। मेजर ध्यानचन्द स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर के मिशन के तहत सभी विभागों में खेल सुविधाओं को बढ़ाया जायेगा। जिससे खेल का विकास हो और खिलाड़ियोंको जरूरी सुविधाएं मिलें।


नई खेल नीति जल्द लागू होगी 

अपर मुख्य सचिव खेल नवनीत सहगल ने कहा कि सरकार का आमजन से जुड़ने का खेल सबसे अच्छा माध्यम है। लोगों को खेल से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। खेलों को बेहतर बनाने के लिए सभी खेल सुविधाओं की इनवेंटरी बनाई जा रही है। इनको जीआई टैग कराकर विभागीय वेबसाइट पर अपलोड कराया जायेगा। 250 खेल प्रशिक्षकों की भर्ती की जा रही है। शीघ्र ही नई खेल नीति लागू की जायेगी। प्रदेश में 14 खेलों के लिए जगह चिन्हित कर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना होगी। बैठक में क्रीड़ा भारती के अध्यक्ष अवनीश कुमार सिंह, प्रदेश मंत्री डॉ. विकास अग्रवाल प्रांतीय अध्यक्ष थे।



यूपी के स्कूलों में जल्द योग अनिवार्य करने की तैयारी, बनाए जाएंगे जिला खेल केंद्र

खेल संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए की जा रही पहल, युवाओं को देंगे प्रोत्साहन

100 करोड़ का कारपस फंड खेल प्रोत्साहन के लिए


लखनऊ यूपी के स्कूलों में 1 जल्द योग को अनिवार्य किए जाने की तैयारी की जा रही है। खेल संस्कृति को बढ़ावा देने और बचपन से ही खेल के प्रति रूचि बढ़ाने के लिए यह पहल की जा रही है। खेल विभाग द्वारा तैयार किए गए इस मसदे पर जल्द मुहर लगेगी। पांच वर्ष से 14 वर्ष तक के प्रतिभाशाली बच्चों को चिन्हित कर उन्हें आगे राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेलों के लिए तैयार किया जाएगा। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर खेल  को बढ़ावा दिया जाएग। प्रत्येक जिले में एक जिला खेल केंद्र स्थापित किया जाएगा।


अपर मुख्य सचिव, खेल नवनीत सहगल के मुताबिक यूपी केंद्र सरकार की मदद से खेलों को बढ़ावा देने के लिए तेजी से काम कर रहा है। राजधानी स्थित गुरु गोबिंद सिंह स्पोर्ट्स कालेज की सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा।


 अच्छे युवाओं को विभिन्न खेलों के लिए तैयार करने के लिए जिलों में खोले जाने वाले जिला खेल केंद्र में जिला स्पोर्ट्स कोचिंग सेंटर भी शामिल होंगे जहाँ खेल प्रतिभाओं को तराशा जाएग ग्राम सभा की जमीन पर खेल विभाग खेल का मैदान विकसित करेगा और गंव में ही युवाओं को खेल के अच्छे संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।


खिलाड़ियों व स्पोर्ट्स फेडरेशन को ग्राम समाज की जमीन लीज पर दी जाएगी। जमीन उन्हें इस शर्त पर दी जाएगी कि वह अपनी एकेडमी में 50 प्रतिशत खिलाड़ी यूपी के रखेंगे। फिलहाल खेल विभाग खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के लिए मजबूती से काम कर रहा है। खेल विभाग द्वारा अभी हाल ही में विभिन्न विभागों के साथ बैठक कर खेल को बढ़ावा देने के लिए ठोस कार्ययोजना बनाने पर जोर दे रहा है।


100 करोड़ का कारपस फंड खेल प्रोत्साहन के लिए

 यूपी में खेल को प्रोत्साहन देने के लिए 100 करोड़ रुपये का कारपस फंड बनाया जाएगा। समाज के सभी लोगों को खेल से जोड़ने के लिए ठोस रणनीति तैयार की जाएगी। स्पोट्र्स स्टेडियम मे भी योग की प्रैक्टिस कराने की व्यवस्था की जाएगी।

एडेड जूनियर भर्ती के संशोधित परिणाम ने सैकड़ों युवाओं का कॅरियर डूबने से बचाया, जानिए कैसे?

एडेड जूनियर भर्ती के संशोधित परिणाम ने सैकड़ों युवाओं का कॅरियर डूबने से बचाया, जानिए कैसे?


प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती के लिए संशोधित परिणाम ने सैकड़ों युवाओं का कॅरियर डूबने से बचा लिया। 15 नवंबर को त्रुटिपूर्ण परिणाम घोषित होने के बाद से हक की लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों ने छह सितंबर को संशोधन के बाद राहत की सांस ली है। संशोधित परिणाम में पूर्व में सफल 3140 अभ्यर्थी फेल हो गए लेकिन 229 ऐसे भी थे जो फेल से पास हो गए। भर्ती शुरू करने के लिए परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से संशोधित परिणाम बेसिक शिक्षा निदेशक को भेजा जा चुका है।


शिक्षक भर्ती के रिजल्ट संशोधन में 23 नंबर तक बढ़ोतरी


केस वन एडेड जूनियर हाईस्कूल में शिक्षक भर्ती की अभ्यर्थी सोनाली यादव को 15 नवंबर 2021 को पहली बार घोषित परिणाम में 88 नंबर मिले थे। ओबीसी वर्ग में होने के बावजूद वह फेल थीं। लेकिन परिणाम में अनियमितता की शिकायत के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर जब संशोधन हुआ तो सोनाली के नंबर बढ़कर 111 हो गए। पहले जहां वह नौकरी की रेस से बाहर थी वहीं अब उन्हें शिक्षक बनने की उम्मीद है।


केस टू अंग्रेजी भाषा से परीक्षा देने वाली वंदना शर्मा को पूर्व में घोषित रिजल्ट में 118 नंबर मिले थे लेकिन संशोधित परिणाम में 127 अंक हो गए। संस्कृत भाषा से परीक्षा में शामिल अंतिमा शुक्ला के 103 से बढ़कर 122, हिंदी से अभिषेक त्रिपाठी के 111 से 122 तो विज्ञान वर्ग के अमन मिश्र के 97 से 109 नंबर हो गए हैं।

एडेड स्कूलों में शिक्षकों की समायोजन प्रकिया का विरोध शुरू, शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

एडेड स्कूलों में शिक्षकों की समायोजन प्रकिया का विरोध शुरू, शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल

कम छात्र संख्या पर पद खत्म करने के प्रस्ताव का विरोध


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों में शुरू की जा रही शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया का विरोध शुरू हो गया है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि विभाग राजकीय विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन तो कर नहीं पाया, अब एडेड विद्यालयों में जबरन प्रक्रिया छेड़ रहा है।


 माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री आरपी मिश्र ने कहा कि शहरी क्षेत्र के एडेड विद्यालयों की छोड़ दिया जाए तो ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में पर्याप्त छात्र संख्या है, लेकिन यहां शिक्षकों की कमी है। ऐसे में वहां नए पद सृजित किए जाएं। जहां छात्र संख्या कम है, वहां अमान्य विद्यालयों के छात्रों को समायोजित किया जाए।


वहीं, माध्यमिक शिक्षक संघ चेतनारायण गुट के संजय द्विवेदी का कहना है कि एडेड विद्यालयों में शिक्षकों का प्रस्तावित समायोजन अवैध है। सरकारी विद्यालयों में वरिष्ठता प्रदेश स्तर पर होती है, लेकिन एडेड विद्यालय स्वयं में एक इकाई है। इसलिए इन विद्यालों में शिक्षकों का समायोजन गैर कानूनी है।


कम छात्र संख्या पर पद खत्म करने के प्रस्ताव का विरोध

लखनऊ। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ ने सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन और कम छात्र संख्या पर पद खत्म करने के शासन के प्रस्ताव का विरोध किया है। हजरतगंज स्थित नेशनल इंटर कॉलेज में प्रदेश अध्यक्ष श्रवण कुमार कुशवाहा की अध्यक्षता में हुई बैठक में संघ ने कह प्रस्ताव पारित किए। संरक्षक डॉ. हरि प्रकाश यादव ने कहा कि माध्यमिक विद्यालयों के प्रांतीयकरण के बाद ही शिक्षकों का समायोजन किया जाए और अधिक छात्र संख्या वाले विद्यालयों में नए पदों के सृजन के साथ ही कोई पद समाप्त न किया जाए।

Sunday, September 25, 2022

ITI में सीधे संपर्क कर खाली सीटों पर अब प्रवेश ले सकेंगे अभ्यर्थी, सरकारी व निजी संस्थान में दाखिले की अंतिम तिथि है 30 सितंबर

आईटीआई में सीधे संपर्क कर खाली सीटों पर अब प्रवेश ले सकेंगे अभ्यर्थी

सरकारी व निजी संस्थान में दाखिले की अंतिम तिथि है 30 सितंबर



लखनऊ। प्रदेश के सरकारी व निजी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में अभ्यर्थी अब सीधे संपर्क कर खाली सीटों पर दाखिला ले सकेंगे। सभी संस्थाओं में दाखिले के लिए अंतिम तिथि 30 सितंबर है। ऐसे में जिन्होंने पहले कहीं आवेदन नहीं किया है, वह निजी संस्थानों में दाखिले के लिए 29 सितंबर तक पंजीकरण करा सकते हैं।


वहीं राजकीय संस्थानों में बीते दिनों आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों को दाखिले का मौका मिलेगा। हालांकि राजकीय संस्थाओं में जिला स्तरीय चयन के लिए अभ्यर्थी स्थायी (गृह जनपद) व अस्थायी पते से संबंधित जिले की सीटों पर ही प्रवेश के ही पात्र होंगे।


विशेष सचिव, व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास व अधिशासी निदेशक, एससीवीटी अभिषेक सिंह के अनुसार अभ्यर्थियों ने चौथे चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन के समय जिस राजकीय संस्थानों व व्यवसायों के विकल्प भरे हैं, उन्हीं के सापेक्ष उपलब्ध खाली सीट पर दाखिले के लिए जिले के नोडल राजकीय संस्थान के प्रधानाचार्य से संपर्क करें।


राजकीय संस्थानों में पहले से पंजीकृत गैर चयनित अभ्यर्थियों को सीट दी जाएगी। इसके बाद खाली सीटों पर नए आवेदकों का मेरिट के अनुसार दाखिला मिलेगा। राजकीय संस्थानों में खाली सीटों पर प्रवेश जिले स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाएगा। समिति द्वारा अनुमोदित आवंटित सूची संस्थान के सूचना पट पर प्रदर्शित की जाएगी।


अधिशासी निदेशक ने राजकीय संस्थानों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि अभ्यर्थी द्वारा ऑनलाइन आवेदन में दी गई सूचना के अनुसार उसके प्रमाणपत्रों आदि की जांच के बाद उसका दाखिला करें।


अधिशासी निदेशक ने बताया कि सभी गैर चयनित अभ्यर्थियों (प्रवेश प्रक्रिया में पूर्व में पंजीकृत व नवीन ऑनलाइन आवेदनकर्ताओं) की ग्रुपवार मेरिट के क्रम में सूची संबंधित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान को उपलब्ध करा दी गई है। 

यूपी बोर्ड : 10 अक्तूबर तक भर सकते हैं 10 वीं, 12 वीं के परीक्षा फार्म

यूपी बोर्ड : 10 अक्तूबर तक भर सकते हैं 10 वीं, 12 वीं के परीक्षा फार्म

शासन को प्रस्ताव भेजा था। शासन को स्वीकृति के बाद तिथि बढ़ाई गई है।



प्रयागराज उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की यूपी बोर्ड परीक्षा 2023 के लिए दसवीं और बारहवीं के विद्यार्थी अब 10 अक्तूबर तक आवेदन कर सकते हैं। परिषद ने नौवीं और ग्यारहवीं में अग्रिम पंजीकरण की तिथि भी बढ़ा दी है। यूपी बोर्ड ने तिथि बढ़ाने के लिए 9 वीं और 11वीं में अग्रिम पंजीकरण की तिथि भी बढ़ाई गई। 


यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल के मुताबिक अब 10 वीं और 12वीं के विद्यार्थी सौ रुपये विलंब शुल्क के साथ परीक्षा शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में जमा कर सकते हैं। जमा परीक्षा शुल्क की सूचना तथा शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइट पर 10 अक्तूबर तक अपलोड किया जा सकता है।


संस्थानों के प्रधान 15 अक्तूबर तक पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली एवं कोपपत्र की एक प्रति परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे जाने के लिए जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करा सकते हैं।


 इसके अलावा नौवीं और ग्यारहवीं में अग्रिम पंजीकरण की तिथि भी 10 अक्तूबर तक बढ़ा दी गई है। 10 अक्तूबर तक विद्यार्थियों के शुल्क और शैक्षिक विवरण परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड किए जाने हैं, साथ ही 15 अक्तूबर तक प्रधानाचार्य विद्यार्थियों की फोटोयुक्त सूची, शुल्क का विवरण डीआईओएस कार्यालय में जमा करा सकते हैं।


इससे पहले हाईस्कूल में 31 लाख और बारहवीं में 27 लाख यानी कुल 58 लाख 78 हजार विद्यार्थी परीक्षा फार्म भर चुके हैं। वहीं नौवीं में 29 लाख और ग्यारहवीं में 22 लाख विद्यार्थी अग्रिम पंजीकरण करा चुके हैं।

बीएड : पहली काउंसलिंग की सीटें दस अक्टूबर को होंगी आवंटित, इसी दिन दूसरी ऑनलाइन काउंसलिंग हो जाएगी शुरू

बीएड : पहली काउंसलिंग की सीटें दस अक्टूबर को होंगी आवंटित

इसी दिन दूसरी ऑनलाइन काउंसलिंग हो जाएगी शुरू


बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने तीन काउंसलिंग के लिए संभावित कार्यक्रम बना लिया है। पहली काउंसलिंग की सीटों का अलाटमेंट दस अक्तूबर को हो जाएगा। उसी दिन दूसरी ऑनलाइन काउंसलिंग भी शुरू हो जाएगी। इस कार्यक्रम को विश्वविद्यालय सोमवार को अंतिम रूप दे देगा।


शासन की ओर से बीएड काउंसलिंग के लिए 30 सितंबर से 31 अक्तूबर तक का समय निर्धारित किया गया है। इसी के बीच रुहेलखंड विश्वविद्यालय तीन काउंसलिंग करवाएगा। पहली काउंसलिंग की प्रक्रिया 30 सितंबर से दस अक्तूबर तक चलेगी। नौ अक्तूबर को विद्यार्थी पसंदीदा कॉलेज में सीट बुक करेंगे। उसके अगले दिन अलाटमेंट हो जाएगा। दूसरे चरण की काउंसलिंग दस अक्तूबर से 19 अक्तूबर तक चलेगी और चौथी काउंसलिंग दिवाली के बाद होगी।


प्रोसेसिंग फीस लगेगी 650 रुपये बीएड में काउंसलिंग के लिए प्रोसेसिंग फीस विद्यार्थियों को 650 रुपये देनी होगी। विद्यार्थी यह फीस चेक के अलावा डेबिट व क्रेडिट कार्ड के जरिये भी दे सकेंगे।

Saturday, September 24, 2022

सालों से पदोन्नति न होने से उपजा आक्रोश, अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे सीतापुर के बेसिक शिक्षक

सालों से पदोन्नति न होने से उपजा आक्रोश, अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे सीतापुर के बेसिक शिक्षक


सहायक शिक्षकों के सहारे चल रहे प्रधानाध्यापक विहीन विद्यालय


सीतापुर। पदोन्नति न होने से शिक्षकों में आक्रोश है। गुरुवार को बड़ी संख्या में शिक्षक जिला मुख्यालय स्थित बीएसए कार्यालय पर जमा हुए और पदोन्नति की मांग करते हुए बीएसए को ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम का नेतृत्व परसेण्डी ब्लॉक के शिक्षक राजीव गौड़ ने किया। शिक्षकों का कहना है कि जनपद में विगत कई वर्षों से शिक्षकों की पदोन्नति नहीं हुई है।


सीतापुर। शिक्षक संगठन के बैनर से परहेज करते हुए गुरुवार जनपद के सैकड़ों शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर अपनी सामूहिक उपस्थिति दर्ज कराते हुए पदोन्नति की मांग पर बीएसए को ज्ञापन सौंपा। कार्यक्रम का नेतृत्व परसेण्डी ब्लॉक के शिक्षक राजीव गौड़ कर रहे थे।


ज्ञातव्य है कि जनपद में विगत कई वर्षो से शिक्षकों की पदोन्नतियाँ नही हुई है। नतीजतन हजारों विद्यालय प्रधानाध्यापक विहीन होकर सहायक शिक्षकों के भरासे चल रहे है। प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में शिक्षकों को कई साल से प्रधानाध्यापक पद का पूरा कार्य बिना किसी अतिरिक्त वेतन या लाभ के करना पड़ रहा है। कमी मिलने यह सहायक शिक्षक प्रधानाध्यापक पद के सापेक्ष दंड के भोगी बना दिये जाते हैं परन्तु लाभ के नाम पर सिर्फ उत्पीड़न का दंश झेलने का मजबूर है। 


इसी एक मांग को लेकर जनपद के सैकड़ों शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर सामूहिक रूप से उपस्थित होकर बीएसएस को सम्बोधित ज्ञापन सौंपा है। जिस पर लगभग 250 300 शिक्षकों ने अपने हस्ताक्षर किये हैं। इस अवसर पर मुख्य रूप से राजीव गौड़, सेरेन्द्र गुप्ता, खुश्तर रहमान खां, बिसम्बर सिंह, जितेंद्र सिंह, अभय तिवारी, सुनील बागपत, सुधीर यादव, कुलदीप, आदर्श गौर, आदर्श पांडे, सूर्य नारायण, अनिल मिश्र, संजीव रावत, पूजा आदि मौजूद रहे।

लाखों बच्चों का आधार लिंक नहीं, बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग स्टेशनरी की राशि फंसेगी, सभी बीएसए से मांगी रिपोर्ट

लाखों बच्चों का आधार लिंक नहीं
 
● बच्चों की यूनिफॉर्म, जूते-मोजे, बैग स्टेशनरी की राशि फंसेगी

● महानिदेशक स्कूली शिक्षा ने सभी बीएसए से मांगी रिपोर्ट


प्रयागराज : आधार नंबर लिंक नहीं होने के कारण प्रदेश के लाखों बच्चों की यूनिफॉर्म की राशि फंस सकती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को दो सेट यूनिफॉर्म, स्वेटर, जूता-मोजा, बैग और स्टेशनरी के लिए 1200 रुपये राशि सीधे अभिभावक के बैंक खाते में भेजी जाती है। 2022-23 सत्र में पहले चरण में राशि भेजी जा चुकी है और दूसरे चरण की तैयारी चल रही है।


22 सितंबर तक की डीबीटी/आधार ऑथेंटिकेशन रिपोर्ट के मुताबिक 75 में से 23 जिलों में एक चौथाई बच्चों का आधार नंबर लिंक नहीं हो सका है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों, खंड शिक्षाधिकारियों और जिला समन्वयकों को ऑथेंटिकेशन रिपोर्ट भेजते हुए सभी खातों को लिंक करवाने के निर्देश दिए हैं।


बलरामपुर-कन्नौज में सर्वाधिक काम पिछड़ा

डीबीटी/आधार ऑथेंटिकेशन में सबसे खराब रिपोर्ट बलरामपुर और कन्नौज की है। बलरामपुर में पंजीकृत 2,88,636 बच्चों में से 34.5 प्रतिशत जबकि कन्नौज में पंजीकृत 1,76,362 छात्र-छात्राओं में से 34.7 फीसदी का आधार लिंक नहीं हुआ है। बहराइच में 26.8 फीसदी, हरदोई में 26.2, जौनपुर 25.8, आजमगढ़ 28.4, गोरखपुर 25.8, गाजीपुर 27.1, सिद्धार्थनगर 27.1, उन्नाव 29.6, बलिया 27.3, कानपुर नगर 29.7, कानपुर देहात 28.5, श्रावस्ती 26.4, मथुरा 25.7, मऊ 25.6, मैनपुरी 27.4, एटा 25.5, मेरठ 25.8, जालौन 26.6, औरैया 25.6, गाजियाबाद 29, बागपत में 27.6 प्रतिशत बच्चों का आधार सत्यापित नहीं हुआ है।

एक्ट में प्रावधान नहीं, कैसे करेंगे शिक्षकों का समायोजन?

एक्ट में प्रावधान नहीं, कैसे करेंगे शिक्षकों का समायोजन?


प्रयागराज : प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन का आदेश जारी होने के साथ ही इसके अनुपालन को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। शिक्षक नेता इसका विरोध भी कर रहे हैं। इस आदेश के अनुपालन में सबसे ब़ड़ा बाधक बन सकता है इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921। इस अधिनियम में समायोजन का प्रावधान ही नहीं है। इस वजह से इसे लेकर कानूनी अड़चन आना तय माना जा रहा है।


 माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने समायोजन का आदेश जारी किया है। सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के लिए प्रदेशस्तर पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक और मंडलस्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है।


आदेश में 1976 के शासनादेश को आधार बनाया गया है, जबकि इन शिक्षकों की सेवाएं इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 से नियंत्रित होती है। एक और बड़ी अड़चन यह है कि एडेड कॉलेजों में संस्था ही चयन की इकाई होती है और चयन तिथि से ही वरिष्ठता निर्धारित की जाती है। ऐसे में समायोजन से वरिष्ठता को लेकर विवाद होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि इससे समायोजित होने वाले शिक्षक के पूर्व के वर्षों का अनुभव शून्य हो जाएगा।


 समायोजित शिक्षक सबसे जूनियर हो जाएगा। सेवा वर्ष के शून्य होने से शिक्षक को आर्थिक क्षति होगी। जिससे मुकदमेबाजी बढ़ना तय माना जा रहा है। यदि समायोजित शिक्षक की वरिष्ठता बरकरार रखी जाती है तो भी दिक्कत आ सकती है क्योंकि तब उस स्कूल में पूर्व से कार्यरत शिक्षक अपनी वरिष्ठता बनाए रखने कोर्ट का सहारा ले सकते हैं। 


स्पष्ट है कि दोनों स्थिति में मुकदमा होना तय है। शिक्षक नेताओं का कहना है कि 27 सितंबर 2019 को टास्क फोर्स गठित करते हुए सभी एडेड कॉलेजों में छात्र संख्या के अनुसार अध्यापकों की जनशक्ति निर्धारित कराई गई थी। सरप्लस होने के कारण ही जुलाई 2019 में ऑनलाइन अधियाचन में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेजे गए शिक्षकों के लगभग 39 हजार पदों में से केवल 15 हजार पदों का ही विज्ञापन और चयन किया गया। शेष 24 हजार पदों को सीज कर दिया गया, तो फिर तीन साल में ही समायोजन की आवश्यकता कैसे पड़ गई।


1986 में वित्तीय सर्वेक्षण के नाम पर, 2013 में जनशक्ति के नाम पर, 2019 में टास्क फोर्स के नाम पर और अब 2022 में समायोजन के नाम पर सरकार एडेड माध्यमिक विद्यालयों के सृजित पदों को समाप्त कर रही है। लेकिन जिन विद्यालयों में छात्र संख्या बहुत बढ़ गई है, वहां पद सृजन नहीं है। सरकार एडेड विद्यालयों के अस्तित्व को समाप्त करना चाहती है। -लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट)


सरकार लगातार एडेड कॉलेजों को कमजोर करती जा रही है। किसी न किसी बहाने से शिक्षकों की संख्या कम कर रहे हैं और शिक्षा में निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है जो कि उचित नहीं है। प्रदेश की गरीब और जरूरतमंद आबादी के लिए सस्ती और सुलभ शिक्षा के दरवाजे बंद हो रहे हैं। -सुरेश त्रिपाठी, एमएलसी और शिक्षक विधायक दल के नेता

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति NMMS हेतु आवेदन तिथि 05 अक्टूबर तक बढ़ी

आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति NMMS हेतु आवेदन तिथि 05 अक्टूबर तक बढ़ी


राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए आवेदन की तिथि 11 दिन और बढ़ा दी गई है। परीक्षा के लिए अब आवेदन 5 अक्टूबर तक किया जा सकेगा। संशोधन के लिए 6 से 8 अक्तूबर तक का समय तय किया गया है। 


प्रयागराज : राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2023-24 के लिए फार्म भरने की तिथि बढ़ाई है। परीक्षा में सफल बच्चों को पढ़ाई के लिए चार साल में 48 हजार की छात्रवृत्ति दी जाएगी।


 इसके लिए आवेदन निश्शुल्क है। आठवीं में पढ़ने वही बच्चे फार्म भर सकते हैं, जिनके अभिभावक की वार्षिक आय 3.5 लाख रुपये से कम है। फार्म भरने वाले सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थियों का सातवीं में 55 प्रतिशत और ओबीसी व एससी के अभ्यर्थियों का 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। 


मनोविज्ञानशाला की निदेशक ऊषा चंद्रा ने बताया कि आनलाइन आवेदन वेबसाइट www.entdata.co.in पर 29 अगस्त 2022 से शुरू हो गया था। अंतिम तिथि 24 सितंबर निर्धारित थी, लेकिन अधिक से अधिक बच्चों की सहभागिता के लिए अंतिम तिथि अब 5 अक्टूबर तक बढ़ाई गई है।

शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ भेदभाव का आरोप

मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ भेदभाव का आरोप


निर्दलीय समूह के राजबहादुर सिंह चन्देल एवं डा. आकाश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार विजेताओं के साथ भेदभाव का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों में उत्कृष्ठ सेवा के लिए मुख्यमंत्री शिक्षक पुरस्कार मिलता है। वहीं सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार मिलता है। 



राज्य शिक्षक पुरस्कार विजेताओं को 62 वर्ष के बाद 65 वर्ष तक की उम्र यानी तीन वर्ष का सेवा विस्तार मिलता है, बसों में मुफ्त यात्रा व चिकित्सीय सुविध मिलती है। यह सारी सुविधाएं वित्त विहीन शिक्षकों को नहीं मिलती हैं। सरकार भेदभाव कर रही है। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार इस मामले की दिखवा लेगी। अधिष्ठाता जयपाल सिंह व्यस्त ने कार्यस्थगन अस्वीकार कर दिया।

आधा सत्र बीतने पर भी किताबें न बंटने पर सदन में उठा मामला, सरकार बोली - 10 से 15 दिनों में सभी को मिल जाएंगी किताबें

आधा सत्र बीतने पर भी किताबें न बंटने पर सदन में उठा मामला, सरकार बोली - 10 से 15 दिनों में सभी को मिल जाएंगी किताबें 


 शिक्षक दल ने उठाया कितायें न बंटने का मामला

सरकार का दावा : मात्र 8 फीसदी पुस्तकों का वितरण बकाया 


लखनऊ  :  विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षक दल ने मुफ्त किताबें न बंटने का मामला उठाया। शिक्षक दल के सुरेश कुमार त्रिपाठी एवं ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि आध सत्र बीत चुका है, लेकिन प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों तथा सहायता प्राप्त पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के छात्र छात्राओं को मुफ्त पुस्तकें अभी तक नहीं मिल पाई हैं। जब किताबें ही उपलब्ध नहीं होंगी तो गरीबों के बच्चे कैसे पढ़ेंगे। सरकार ने कहा कि 92 प्रतिशत किताबों का वितरण हो चुका है अब केवल आठ प्रतिशत बच्चे रह गए हैं। इन्हें भी 10 से 15 दिनों में किताबें मिल जाएंगी।


सुरेश त्रिपाठी ने कहा कि एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू हो चुका है और अब सितंबर का महीना भी बीतने वाला है, लेकिन बच्चों को किताबें आज तक नहीं मिलीं। बाजार में भी किताबें उपलब्ध नहीं हैं, यदि होती तो गरीब मां-बाप अपना पेट काटकर बच्चों के लिए खरीद लेते। बगैर किताबों के बच्चों को जो पढ़ाया जा रहा है उसमें क्या समझ में आया होगा। किन परिस्थितियों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची सरकार को इसकी जांच करानी चाहिए। यह करोड़ों गरीब परिवारों के बच्चों से जुड़ा मामला है। इसमें जो भी दोषी अधिकारी हैं उनके खिलाफ सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए।


बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि अब स्कूलों के पठन पाठन में पहले से बहुत बदलाव आ गया है। अब किताबों के अलावा स्मार्ट क्लास व दीक्षा एप के जरिए स्कूलों में पढ़ाई हो रही है। इसके अलावा जब बच्चे पास होकर नई कक्षा में प्रवेश करते हैं तो उनकी पुरानी किताबें भी स्कूल में रखवा ली जाती हैं। इन पुरानी किताबों से भी पढ़ाई हो रही है। उन्होंने बताया 6 कि किताबों के टैंडर होने में विलंब इसलिए हुआ क्योंकि उस समय विधानसभा चुनाव थे। सरकार किताबों का वितरण जल्द कराने के लिए प्रयास कर रही है। अब तक 92 प्रतिशत किताबें बंट चुकी हैं, शेष बच्चों को 10 से 15 दिनों में किताबें मिल जाएंगी। अधिष्ठाता जयपाल सिंह व्यस्त ने कार्यस्थगन अस्वीकार कर दिया।

403 विद्यालयों को यूपी बोर्ड से मिली मान्यता, तीन वर्ष बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी की गई सूची Manyata UP Board

403 विद्यालयों को यूपी बोर्ड से मिली मान्यतातीन वर्ष बाद माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी की गई सूची



प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से 403 नए विद्यालयों को मान्यता प्रदान की गई है। कई विद्यालयों को सीधे हाईस्कूल (6-10 तक) तो कई को इंटर तक की मान्यता प्रदान दी गई है। मान्यता प्राप्त करने वालों में सबसे अधिक प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय में कुल 135 नए विद्यालय शामिल हैं।


विशेष सचिव शासन ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक और सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद को भेजे पत्र में लिखा है कि इन विद्यालयों को मान्यता प्रदान किए जाने के बारे में निर्धारित मानक / शर्तों में यदि कोई कमी पायी जाती है तो संस्तुतिकर्ता अधिकारी उत्तरदायी होंगे।


साथ ही उपरोक्त विद्यालयों को मान्यता विशेष अपील संख्या संख्या 25/2006 मंजू अवस्थी व अन्य बनाम यूपी राज्य व अन्य उच्च न्यायालय के आदेश दिनांक 06 नवंबर 2012 के विरुद्ध उच्च न्यायालय में योजित क्लेरीफिकेशन अप्लीकेशन में पारित होने वाले अंतिम निर्णय के अधीन होंगे। वित्तविहीन विद्यालयों को मान्यता प्रदान किए जाने के बारे में अग्रेतर कार्रवाई सुनिश्चित करने का कष्ट करें। सूबे में कुल 403 विद्यालयों को मान्यता प्रदान की गई है। इसमें क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज में 135, मेरठ में 85, वाराणसी में 105, बरेली में 19, गोरखपुर में 19 नए विद्यालयों को वित्त विहीन मान्यता प्रदान की गई है।


यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि लगभग तीन वर्ष बाद नए विद्यालयों की मान्यता सूची जारी की गई है।

Friday, September 23, 2022

फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, दीक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था

फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक, दीक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था



माध्यमिक विद्यालयों के अंग्रेजी विषय के शिक्षक अब फर्राटेदार अंग्रेजी बोलेंगे। अंग्रेजी विषय के शिक्षकों को बाकायदा इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए दीक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण पूरा होने पर शिक्षकों को ऑनलाइन प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।


राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत अंग्रेजी भाषा के शिक्षकों के लिए इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स की व्यवस्था की गई है। प्रशिक्षण के लिए कोर्स आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान प्रयागराज की ओर से विकसित किया गया है। इसे दीक्षा पोर्टल पर अपलोड किया गया है। माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए शिक्षकों की दक्षता बढ़ाई जाएगी। पांच सितंबर से दीक्षा पोर्टल पर लाइव प्रशिक्षण की व्यवस्था की गई है।


अंग्रेजी भाषा के शिक्षकों के अतिरिक्त अन्य विषयों के इच्छुक शिक्षक भी ऑनलाइन प्रशिक्षण में प्रतिभाग कर सकते हैं। ऑनलाइन कोर्स में 132 मॉड्यूल हैं। प्रत्येक मॉड्यूल का समय लगभग 10 मिनट रखा गया है। ऑनलाइन प्रशिक्षण का यह कोर्स लगभग चार माह का होगा। मॉड्यूल्स में अंग्रेजी बोलने की अभ्यास संबंधी विषय वस्तु के साथ ही प्रारंभिक व्याकरण पर भी सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

JNU, जामिया समेत 48 विश्वविद्यालयों में मिलेगी विदेशी विवि की डिग्री, UGC ने दोहरी डिग्री की दी सहमति

JNU, जामिया समेत 48 विश्वविद्यालयों में मिलेगी विदेशी विवि की डिग्री, UGC ने दोहरी डिग्री की दी सहमति


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर संयुक्त और दोहरी डिग्री शुरू करने की सहमति दी है। इसके तहत बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, हरियाणा केंद्रीय विश्वविद्यालय, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल यूनिवर्सिटी उत्तराखंड, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी दिल्ली, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी समेत 48 यूनिवर्सिटी में अब विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्री भी मिलेगी।


वहीं, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंसेज शैक्षणिक सत्र 2022-23 से आस्ट्रेलिया की मोनॅश यूनिवर्सिटी के साथ फील्ड ऑफ इंटरनेशनल डेवलपमेंट प्रैक्टिस और यूके की क्वीनमेरी यूनिवर्सिटी के साथ सोशल एंटरप्रिंयोरशिप और इंटरनेशनल बिजनेस में दोहरी डिग्री प्रोग्राम शुरू कर रहा है।



यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि अभी 48 विश्वविद्यालयों ने विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर दोहरी और संयुक्त डिग्री की पढ़ाई करवाने पर सहमति दे दी है। इसके अलावा अभी अन्य विश्वविद्यालय इस योजना पर काम कर रहे हैं। यूजीसी विनियम 2022 के तहत भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालय एक लिखित समझौते के तहत दोहरी और संयुक्त डिग्री देंगे। समझौते में दाखिला, फीस, पाठ्यक्रम, कोर्स, वीजा, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट से लेकर अन्य शर्तें शामिल हैं। अब भारतीय छात्रों को विदेशी विश्वविद्यालयों की डिग्री की पढ़ाई का मौका मिलेगा। वहीं, विदेशी छात्र भी भारत में आएंगे। इससे भारतीय संस्थानों को आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।



30 फीसदी कोर्स की पढ़ाई पर विदेशी डिग्री

पहले विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करने के लिए छात्र को पूूूरी पढ़ाई विदेश में जाकर करनी पड़ती थी। इसमें लाखों रुपये की फीस और रहने-खाने का खर्चा अलग से होता था। ऐसे में अधिकतर छात्र चाहकर भी विदेशी विश्वविद्यालयों से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई नहीं कर पाते थे। यूजीसी के नए नियम में महज 30 फीसदी कोर्स करके विदेशी विश्वविद्यालय की डिग्री पाने का मौका उपलब्ध है।


इस तरह से होगी पढ़ाई

ट्विन प्रोग्राम: इसमें छात्र को कुछ कोर्स में एक, दो या तीन सेमेस्टर की पढ़ाई विदेशी विश्वविद्यालय में जाकर करनी होगी। यह एक तरह का स्टूडेंट एक्सचेंज प्रोग्राम होगा। इसमें 30 फीसदी कोर्स या क्रेडिट विदेशी विश्वविद्यालय से प्राप्त करने होंगे।

ज्वाइंट डिग्री: इसमें एक भारतीय और दूसरा विदेशी विश्वविद्यालय मिलकर डिग्री प्रोग्राम चलाएंगे। इसमें डिग्री भारतीय विश्वविद्यालय की होगी। उसमें दोनों विश्वविद्यालयों का नाम और लोगो होगा। इसमें कम से कम 30-30 फीसदी क्रेडिट दोनों विश्वविद्यालयों से प्राप्त करने अनिवार्य होंगे।

दोहरी डिग्री: एक भारतीय और दूसरा विदेशी विश्वविद्यालय डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवाएंगे। दोनों विश्वविद्यालय अलग-अलग डिग्री जारी करेंगे। इसमें भी दोनों प्रोग्राम में 30 या उससे अधिक क्रेडिट स्कोर हासिल करने होंगे।


लखीमपुर खीरी : मीडियाकर्मी/पत्रकार बताकर स्कूल आने वाले व्यक्ति/समूह से प्रधानाध्यापक/इं०प्र०अ० मांगें जिला सूचना अधिकारी द्वारा निर्गत पहचान पत्र, बीएसए द्वारा जारी निर्देश-पत्र देखें

लखीमपुर खीरी : मीडियाकर्मी/पत्रकार बताकर स्कूल आने वाले व्यक्ति/समूह से प्रधानाध्यापक/इं०प्र०अ० मांगें जिला सूचना अधिकारी द्वारा निर्गत पहचान पत्र, बीएसए द्वारा जारी निर्देश-पत्र देखें



विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं, अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ

विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं,  अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ 


अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची है। शैक्षिक सत्र शुरू हुए छह महीने होने को हैं लेकिन अभी तक कक्षा एक से आठ तक की किताबें नहीं छपी हैं। अब छपाई शुरू हुई है। किताबें न होने से बच्चों की पढ़ाई पिछड़ रही है। स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षा अगले माह होनी है। ऐसे में बिना किताबों के ही बच्चे परीक्षा देंगे। लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव समेत पूरे प्रदेश में अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ है।


किसी स्कूल को नहीं मिलीं किताबें


लखनऊ में अंग्रेजी माध्यम के 165 प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं। इनमें करीब 20 हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों को अभी तक एक भी किताब नहीं मिली है। शिक्षक लगातार बीएसए कार्यालय से किताबों की मांग कर रहे हैं। अधिकारी उपलब्ध नहीं कर पा रहे हैं। किताबें न मिलने से बच्चों के साथ अभिभावक भी परेशान हैं। वहीं शिक्षा विभाग जिले के बीएसए को भेजकर किताबों का सत्यापन करा रहा है। कुछ किताबों के नमूने भेजे हैं।


समस्या

● प्रदेश के किसी भी इंग्लिश मीडियम स्कूल में नहीं पहुंचीं किताबें

● लखनऊ के प्राइमरी, जूनियर 165 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई

● सभी स्कूलों में पुरानी किताबों से शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे


अंग्रेजी माध्यम की जो किताबें मिली हैं, उन्हें वितरित करने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को भेजा है। सभी को निर्देशित किया गया है कि किताबों का जल्द वितरण कराएं। अरुण कुमार, बीएसए, लखनऊ

NCERT : कक्षा एक से 12वीं तक कला की शिक्षा हो अनिवार्य, अनिवार्य रूप से कला शिक्षक की नियुक्त का सुझाव

NCERT  : कक्षा एक से 12वीं तक कला की शिक्षा हो अनिवार्य, अनिवार्य रूप से कला शिक्षक की नियुक्त का सुझाव

• नए स्कूली पाठ्यक्रम की तैयारी के बीच एनसीईआरटी ने की सिफारिश 
• कला शिक्षकों के लिए शुरू होगा स्पेशल इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स


नई दिल्ली : स्कूलों का नया स्कूली पाठ्यक्रम आधुनिकता और भारतीय कला-संस्कृति का मिश्रण होगा, जहां बच्चों को कोडिंग व आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस संग कला (आर्ट एजुकेशन) की भी शिक्षा दी जाएगी। फिलहाल राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ( एनसीईआरटी) ने सभी स्कूलों में पहली से 12वीं कक्षा तक कला को अनिवार्य रूप से पढ़ाने की सिफारिश की है। इसके लिए सभी स्कूलों में अनिवार्य रूप से कला शिक्षक भी नियुक्त का सुझाव दिया है।


एनसीईआरटी के कला एवं सौंदर्यबोध विभाग ने यह सिफारिश ऐसे समय की है, जब नए स्कूली पाठ्यक्रम को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इस सिफारिश में न सिर्फ कला को एक विषय के रूप में सभी स्कूलों में पढ़ाने की सिफारिश की गई है, बल्कि इसके मूल्यांकन को जरूरी बताते हुए परीक्षा परिणाम में इनके अंकों को जोड़ने की पैरवी भी की है। 



कला शिक्षा को लेकर अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर कोई गाइडलाइन नहीं थी। इसके चलते कोई भी राज्य इसे लेकर गंभीर नहीं था। इसके साथ ही कला शिक्षकों के लिए अब तक कोई न्यूनतम योग्यता निर्धारित नहीं थी, हालांकि इसे लेकर उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान व उत्तराखंड सहित देश के दर्जनभर से ज्यादा राज्यों में कला क्षेत्र से जुड़े छात्र आंदोलन भी कर चुके हैं। कला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एनसीईआरटी कला शिक्षा में चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स शुरू करने की तैयारी में जुटी है। 


माना जा रहा है कि अगले साल से शुरू होने वाले चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्सों के साथ इसे भी शुरू कर दिया जाएगा। जिसमें 12वीं तक कला की पढ़ाई करने वाले छात्र सीधे दाखिला ले सकेंगे। वैसे तो अभी तक चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड के तहत बीए-बीएड, बीएससी- बीएड व बीकाम - बीएड जैसे कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव था। अब बीए-बीएड इन आर्ट एजुकेशन भी शुरू होगा। इसके साथ ही स्कूलों में कला की पढ़ाई के लिए नया पाठ्यक्रम भी तैयार होगा। यह सारी पहल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद शुरू की गई है।

एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन का आदेश जारी

माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया तय

एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन का आदेश जारी

माध्यमिक स्कूलों में सबसे बाद में आया शिक्षक माना जाएगा सरप्लस


लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा एडेड स्कूल में सबसे बाद में भर्ती या फिर दूसरे स्कूल से ट्रांसफर होकर आए शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा। इन स्कूलों में पहले के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है, ऐसे में छात्र- शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षक समायोजित किए जाएंगे। इन्हें दूसरे विद्यालयों में ट्रांसफर किया जाएगा और इनका पद समाप्त किया जाएगा। अगर स्थानांतरण संभव नहीं है तो विद्यालय की भावी रिक्तियों में इन्हें समायोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश व मंडल स्तर पर दो कमेटियां गठित की गई हैं।


प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। मगर ऐसे शिक्षक जो स्वयं कैंसर, लीवर व किडनी जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त शिक्षकों को एम्स, पीजीआइ, मेडिकल कालेज व चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर इन्हें सरप्लस की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। 


ऐसे शिक्षक जो खुद दिव्यांग हैं या फिर उनके स्वजन दिव्यांग हैं या फिर गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा आटिस्टिक है या 40 प्रतिशत दिव्यांग है, ऐसे शिक्षक जिनके पति या पत्नी सेना में हैं, ऐसी विधवा महिला या विधुर पुरुष जिन्होंने दूसरी शादी नहीं की है और वह एकल अभिभावक उन्हें भी सरप्लस शिक्षकों की श्रेणी से छूट दी जाएगी। 


सरप्लस शिक्षकों को चिह्नित करने के लिए प्रदेश स्तर पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय और मंडल स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।


लखनऊ। एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया प्रक्रिया तय कर दी गई है। इसमें सबसे सरप्लस शिक्षक वह होगा जिसने सबसे बाद में स्कूल में कार्यभार ग्रहण किया हो हालांकि कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को इससे छूट दी गई है।


माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। जिन स्कूलों में शिक्षक कम है वहां इन्हें स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने एडेड स्कूलों के सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के निर्देश दिए थे। प्रदेश में लगभग 4500 सहायताप्राप्त स्कूल हैं।


काफी वर्ष पहले सरकार ने यहां जनशक्ति निर्धारण करवाया था। इन स्कूलों में छात्रसंख्या कम हो गई लेकिन पद पहले की संख्या के आधार पर ही रहे। अब जिन स्कूलों में शिक्षक कम हैं वे विषयवार सूची तैयार करेंगे ताकि उन्हें बच्चों की संख्या के मुताबिक शिक्षक मिल सके। 


सरप्लस शिक्षक के निर्धारण के लिए सबसे बाद में आने वाले यानी लास्ट कम फर्स्ट आउट के सिद्धांत का पालन किया जाएगा। लेकिन इसमें स्वयं या पति पत्नी को कैंसर, एड्स, किडनी, लीवर जैसी असाध्य बीमारियों से ग्रसित होने या फिर विधवा या विधुर शिक्षक जिन पर बच्चों के पालने की जिम्मेदारी हो, सेना-वायु सेना समेत अन्य बलों में कार्यरत लोगों के जीवनसाथी और विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा ऑटिस्टिक से पीड़ित हो, तो उस पर यह सिद्धांत लागू नहीं होगा। इन सभी के लिए निर्धारित प्रमाणपत्र लगाने पर ही छूट दी जाएगी।


इसके प्रस्तावों पर विचार करने के लिए शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। वहीं मंडल् स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्याक्षता मे मंडल स्तर कमेटी का गठन किया गया है।



एडेड माध्यमिक स्कूलों में सबसे बाद में आया शिक्षक होगा सरप्लस


लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा एडेड स्कूल में सबसे बाद में भर्ती या फिर दूसरे स्कूल से ट्रांसफर होकर आए शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा। इन स्कूलों में पहले के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है, ऐसे में छात्र - शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षक समायोजित किए जाएंगे। इन्हें दूसरे विद्यालयों में ट्रांसफर किया जाएगा और इनका पद समाप्त किया जाएगा। अगर स्थानांतरण संभव नहीं है तो विद्यालय की भावी रिक्तियों में इन्हें समायोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश व मंडल स्तर पर दो कमेटियां गठित की गई हैं।


प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। मगर ऐसे शिक्षक जो स्वयं कैंसर, लीवर व किडनी जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर इन्हें सरप्लस की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। ऐसे शिक्षक जो खुद दिव्यांग हैं या फिर उनके स्वजन दिव्यांग हैं या फिर गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा आटिस्टिक है या 40 प्रतिशत दिव्यांग है, ऐसे शिक्षक जिनके पति या पत्नी सेना में हैं, उन्हें भी सरप्लस शिक्षकों की श्रेणी से छूट दी जाएगी।


Thursday, September 22, 2022

जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती परीक्षा : आरोप झूठे थे, ओएमआर शीट सच निकली

जूनियर एडेड शिक्षक भर्ती परीक्षा : आरोप झूठे थे, ओएमआर शीट सच निकली



एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के संशोधित परिणाम में अंक घटा दिए जाने और अवैध (इनवैलिड) घोषित कर दिए जाने के अभ्यर्थियों के आरोप कंप्यूटर स्क्रीन पर टिक नहीं सके। उत्तर प्रदेश परीक्षा प्राधिकारी (पीएनपी) नियामक प्राधिकारी सचिव ने प्रत्यावेदन देने वाले अभ्यर्थियों को कंप्यूटर पर स्कैन उनकी मूल ओएमआर शीट बारी बारी से दिखाई तो उनके आरोप गलत निकले। ओएमआर शीट पर गलती देखकर अभ्यर्थी लौट गए। -


प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापक के 1504 पदों की वर्ष 2021 की इस भर्ती परीक्षा का परिणाम 15 नवंबर, 2021 को घोषित किया गया था। इसमें 132 अभ्यर्थियों को कम अंक दिए जाने की गड़बड़ी की पुष्टि होने पर शासन ने परिणाम का पूनर्मूल्यांकन कराया गया। छह सितंबर, 2022 को संशोधित परिणाम जारी किया गया तो बड़ी संख्या में उलटफेर हो गया। जिनके अंक कम हो गए या सिरीज अथवा विषय गलत भरने के कारण अवैध हो गए, उन्होंने पीएनपी में प्रत्यावेदन दिया। 


प्रत्यावेदन देने वाले अभ्यर्थियों को पीएनपी सचिव ने एक सप्ताह बाद बारी-बारी से कार्यालय बुलाया। ओएमआर शीट की कार्बन कापी स्कैन कराई। सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि करीब 250 अभ्यर्थियों ने प्रत्यावेदन दिए हैं। इसमें 100 से ज्यादा को उनकी मूल ओएमआर शीट अब तक कंप्यूटर पर दिखाई गई, जिसमें किसी के भी अंक या अवैध की स्थिति में परिवर्तन नहीं हुआ।


ऐसे हुए प्रश्न और जवाब


केस 1

महिला अभ्यर्थी :- ये देखिए मेरी ओएमआर शीट की कार्बन कापी । पहले हमें 134 अंक मिले थे। अब 117 कैसे हो गए?

सचिव :- देखिए अपनी मूल ओएमआर शीट । कई प्रश्नों के उत्तर में एक गोले को पूरा काला किया है और दूसरे को अधूरा। इस कारण इसके अंक नहीं मिले ।

फिर प्रश्न :- पहले तो इसे सही मानकर अंक दिए गए थे?

सचिव : ऐसी ही गड़बड़ी के कारण संशोधित परिणाम जारी हुआ है, अन्यथा संशोधित क्यों जारी होता।

(महिला तनतनाते हुए निकल गई ।)



केस 2

महिला अभ्यर्थी :- मेरे 102 अंक थे, अब 100 कैसे हो गए?

सचिव :- ये देखिए, गोले को काला करने में गड़बड़ी की है।

पुरुष अभ्यर्थी :- 109 अंक मिले थे, अब तीन अंक कैसे घट गए । ये देखिए ओएमआर शीट की कार्बन कापी ।

सचिव :- दिखाते हुए - एक गोले को पूरा काला किया है, दूसरे को आधा किया है। इससे इसका मूल्यांकन नहीं हुआ।

पुरुष अभ्यर्थी : पहले 124 अंक मिले थे, अब शून्य कैसे हो सकता है?

सचिव : आपने प्रश्नपुस्तिका दूसरे सीरीज की हल की है और ओएमआर शीट पर दूसरी सीरीज के संकेतांक को काला किया है। यह अवैध है।

शिक्षामित्रों के मुद्दे पर सपा का सदन से वॉकआउट, अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान करने की उठाई मांग

शिक्षामित्रों के मुद्दे पर सपा का सदन से वॉकआउट, अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान करने की उठाई मांग 


लखनऊ। सपा सदस्यों ने शिक्षामित्रों के मुद्दे पर बुधवार को विधान परिषद से वॉकआउट किया। उनका कहना था कि सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों की समस्याओं का समाधान करे। समान कार्य के लिए समान वेतन दे। वहीं शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि भाजपा शासन में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। शिक्षामित्रों को हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने मानदेय भी 3,500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया।


 कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिये सपा सदस्य मुकुल यादव ने कहा कि शिक्षामित्रों का मानदेय कुशल श्रमिक के मानदेय से काफी कम है। शिक्षामित्रों के मामले में पूर्व डिप्टी सीएम के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई गई थी, उसकी रिपोर्ट की जानकारी दी जानी चाहिए। शिक्षामित्रों के पक्ष में अध्यादेश लाकर उन्हें बहाल किया जाना चाहिए। टीईटी पास करने की बाध्यता से छूट दी जानी चाहिए ।


 नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा, शिक्षा मंत्री पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के पौत्र हैं। पिछड़े वर्ग से होने के कारण सपा सदस्य उन्हें बोलने नहीं देना चाहते हैं। सपा के लाल बिहारी यादव ने कहा कि इसमें पिछड़ों की बात कहां से आ गई। इसके बाद हंगामा बढ़ गया और सपा सदस्य वॉक आउट कर गए। 



लखनऊ विधान परिषद बुधवार को समाजवादी पार्टी ने शिक्षामित्रों का मुख उठाया। सपा ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने की मांग करते हुए कहा कि भाजपा सरकार शिक्षमित्रों के साथ सैतेला व्यवहार कर रही है। न्यायिक प्रक्रिया में शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर हुए समायोजन की उचित नहीं मान था, किंतु उनके सेवाकाल को देखते हुए सरकार मानदेय बढ़ा सकती है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षामित्रों के हित में सरकार निर्णय करेगी। सरकार से कोई ठोस आश्वासन न मिलने पर सपा सदन से बहिर्गमन कर दिया।


सपा के लाल बिहारी यादव, आशुतोष सिन्हा व द्य मान सिंह यादव ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के रूप में शिक्षामित्रों का मुद्दा उठाया। आशुतोष सिन्हा ने कहा कि शिक्षामित्रों की नियुक्ति उस समय हुई थी जब शिक्षकों की कमी के कारण बेसिक शिक्षा के स्कूलों में ताले लग गए थे। शिक्षामित्रों को इस महंगाई में भी मात्र 10 हजार रुपये प्रतिमाह मिल रहा है। सरकार अध्यादेश लाकर शिक्षामित्रों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की छूट दे सकती है। 


मान सिंह यादव ने कहा कि अब तक चार हजार से अधिक शिक्षामित्र अपनी जान गवां चुके हैं। एक शिक्ष मित्र ने तो अपने खून से सरकार को पत्र लिखा था, फिर भी इस समस्या का हल नहीं निकला। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने कहा कि मिशन कायाकल्प से परिषदीय विद्यालयों की सूरत बदल गई है। उन्होंने विभाग की कई और उपलब्धियां गिनाई तो सपा सदस्य खड़े हो गए और कहा कि सरकार शिक्षामित्रों के मुद्दे को भटका रही है। हम सरकार की उपलब्धियां सुनने नहीं आए हैं। सपा सदस्यों ने सदन का बहिर्गमन कर दिया। 


सपा सदस्यों के बाहर जाने के बाद मंत्री संदीप सिंह ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश पर ही सहायक अध्यापक से वापस शिक्षामित्र बनाए गए हैं। कुल 1.37 लाख शिक्षामित्रों में सहायक अध्यापक की अर्हता रखने वाले 15240 का समायोजन किया गया था। शेष शिक्षामित्रों को 3500 रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रति माह मानदेय कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार इनके हित में निर्णय करेगे।

Wednesday, September 21, 2022

समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों का हाल, भर्ती पर रोक, एक शिक्षक पर 158 बच्चों का जिम्मा

समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों का हाल, भर्ती पर रोक, एक शिक्षक पर 158 बच्चों का जिम्मा

प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और समाज कल्याण विभाग से संचालित व अनुदानित प्रदेशभर के 489 स्कूलों में शिक्षक भर्ती पर रोक का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में प्रत्येक 30 बच्चे पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन यहां एक शिक्षक पर 158 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा है। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों को हेडमास्टर, टीचर, बाबू से लेकर चपरासी तक की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।


अनु सचिव शासन अशोक कुमार यादव ने 11 मई को निदेशक समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर इन स्कूलों में चयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति भंग कर दी थी। साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात को तार्किक बनाने के लिए समायोजन का अनुरोध किया था। जिन स्कूलों में 30 से कम छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं उन स्कूलों के छात्रों को बेसिक शिक्षा विभाग के निकटस्थ स्कूलों में प्रवेश दिलाकर यहां कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने को कहा था।

परिषदीय स्कूलों तक पक्की सड़क और नालियों को बनवाने की मांग

परिषदीय स्कूलों तक पक्की सड़क और नालियों को बनवाने की मांग



लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने ग्रामीण क्षेत्रों के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों तक पक्की सड़कों का निर्माण व जलनिकासी की भी समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।


 एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह व महामंत्री आशुतोष मिश्र ने मुख्यमंत्री व महानिदेशक स्कूल शिक्षा को इस संबंध में पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में सड़क निर्माण व नालियों का निर्माण प्राथमिकता से कराने की मांग की है। 


जानिए कौन बना माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी?

जानिए कौन बना माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी?


लखनऊ। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. महेंद्र देव को लंबी लड़ाई के बाद शासन ने अपर निदेशक पद पर प्रोन्नत कर दिया है। उनकी वरिष्ठता को लेकर विवाद था। अब पदोन्नति से वह माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी हो जाएंगे। इससे भविष्य में निदेशक पद को लेकर होने वाली दावेदारी की तस्वीर भी बदल सकती है। 


डॉ. महेंद्र उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह क के संयुक्त शिक्षा निदेशक व समकक्ष स्तर के अधिकारी थे। अब उन्हें अपर शिक्षा निदेशक / समकक्ष स्तर के पद पर पदोन्नति दी गई है। इसके साथ ही वह माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी हो गए हैं। वह वर्तमान में अपर शिक्षा निदेशक (मा.) के पद पर प्रयागराज में तैनात हैं।

परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 63 हजार पद खाली, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 63 हजार पद खाली, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री 



लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने विधानसभा में विधायक प्रसन्न कुमार और मनोज कुमार पारस के एक सवाल के जवाब में बताया कि परिषदीय स्कूलों में करीब 63 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें ग्रामीण स्कूलों में 51,112 और शहरी स्कूलों में 12, 149 पद खाली हैं।



 परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 5,80,084 पद सृजित हैं। प्रदेश में अनुदेशक व शिक्षामित्र समेत कुल 6,28,915 शिक्षक कार्यरत हैं।