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Wednesday, September 23, 2020

महराजगंज : अन्तर्जनपदीय स्थानांतरण/पारस्परिक स्थानांतरण हेतु आवेदित शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रत्यावेदन निस्तारण सम्बन्धी निर्देश जारी, प्रत्यावेदन के लिए मिला अंतिम अवसर

महराजगंज : अन्तर्जनपदीय स्थानांतरण/पारस्परिक स्थानांतरण हेतु आवेदित शिक्षक/शिक्षिकाओं के प्रत्यावेदन निस्तारण सम्बन्धी निर्देश जारी, प्रत्यावेदन के लिए मिला अंतिम अवसर, आदेश देखें।

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

बेसिक शिक्षा : एसटीएफ ने 70 फर्जी शिक्षकों के खिलाफ शुरू की जांच

 
एसटीएफ ने फर्जी शिक्षकों को चिह्नित करने की मुहिम तेज कर दी है। एसटीएफ को ऐसे 70 शिक्षकों के नाम पता चले हैं जिन पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी करने का आरोप है। 


एसटीएफ ने सोमवार को इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें एसटीएफ के चंगुल में आया एक फर्जी शिक्षक व उसका भाई अन्य फर्जी शिक्षकों की जानकारी हासिल कर उनसे वसूली कर रहा था। ये लोग मानव संपदा पोर्टल से फर्जी शिक्षकों की जानकारी जुटाते थे। एसटीएफ को इनके पास से 70 फर्जी शिक्षकों की सूची मिली है।


एसटीएफ इस सूची से उजागर हुए नामों की जानकारी जुटा रही है। जो नाम सामने आए हैं उनकी पड़ताल में बेसिक शिक्षा विभाग का सहयोग लिया जा रहा है। इनमें ज्यादातर नाम पूर्वांचल के जिलों में तैनात शिक्षकों के हैं। एसटीएफ ने अब सामने आए नामों को लेकर बेसिक शिक्षा विभाग से संबंधित लोगों के दस्तावेजों के सत्यापन को कहा है। आरोप सही पाए जाने के बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 


तीन साल में 850 फर्जी शिक्षकों पर कार्रवाई
इससे पहले भी एसटीएफ फर्जी शिक्षकों के बारे में जानकारी जुटा कर बेसिक शिक्षा विभाग को देती रही है। एसटीएफ के आईजी अमिताभ यश ने बताया कि फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला बीते तीन साल से जारी है। इन तीन वर्षों में करीब 850 फर्जी शिक्षकों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है।

डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व डीएलएड 2019 द्वितीय सेमेस्टर के डायट एवं निजी संस्थानों के प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप संचालित किये जाने के सम्बन्ध में

लखनऊ : डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व डीएलएड 2019 द्वितीय सेमेस्टर के डायट एवं निजी संस्थानों के प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप संचालित किये जाने के सम्बन्ध में

डीएलएड प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप

 
प्रयागराज : कोरोना संक्रमण के दौर में डीएलएड के प्रशिक्षुओं की इंटर्नशिप भी ऑनलाइन कराने के आदेश हुए हैं। प्रदेश के डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व 2019 के द्वितीय सेमेस्टर के वे प्रशिक्षु जो डायट व निजी कालेजों में प्रशिक्षण ले रहे हैं प्रतिभाग करेंगे। यह इंटर्नशिप प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के सहयोग से कराई जाएगी। सभी संस्थानों को प्रशिक्षुओं की सूचनाएं तैयार कराने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। 


उप शिक्षा निदेशक डा. पवन कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि इंटर्नशिप की अवधि पांच सप्ताह रहेगी और सभी प्रशिक्षुओं को प्रतिभाग करना अनिवार्य है। इसे प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के सहयोग से डायट की ओर से संचालित किया जाएगा। हर प्रशिक्षु का नाम, दूरभाष नंबर व संख्या की सूचना विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उपलब्ध कराई जाएगी। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का आवंटन बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से होगा। इसके लिए वे खंड शिक्षा अधिकारियों से प्रस्ताव लें। 


इंटर्नशिप ऑनलाइन कक्षा शिक्षण से जुड़े कक्षा एक, दो, छह, सात व आठ के छात्र-छात्राओं से संबंधित होगा। प्रशिक्षुओं के लिए यह प्रशिक्षण करके सीखना के नाम से संचालित होगा। इसमें उन्हें भौतिक रूप से संस्थान या फिर विद्यालय में उपस्थित नहीं होना है। उप शिक्षा निदेशक ने सभी विवरण व अगली कार्यवाही के लिए रिपोर्ट 25 सितंबर तक मांगी है।

फतेहपुर : अब अभिभावक स्कूल जाकर लेंगे होमवर्क, मिशन प्रेरणा ई-पाठशाला का द्वितीय चरण 21 सितम्बर से शुरू

फतेहपुर : अब अभिभावक स्कूल जाकर लेंगे होमवर्क, मिशन प्रेरणा ई- पाठशाला का द्वितीय चरण 21 सितम्बर से शुरू।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को कोरोना संकटकाल में शिक्षा देने के लिए एक और नई कवायद शुरू हो गई है। अब विद्यालयों में ई-पाठशाला के तहत अभिभावकों के साथ गोष्ठी की जाएगी।कोविड-19 की गाइड लाइनों का पालन करते हुए गोष्ठी की जा रही है। 10 से अधिक अभिभावकों को एक बार में नहीं बुलाया जाएगा। 


जिसमें परिषदीय विद्यालयों में अब बच्चों की जगह अभिभावक स्कूल जाएंगे। अभिभावक स्कूल में शिक्षकों होमवर्क भी लेंगे और अपने बच्चों को होमवर्क कराने में मदद करेंगे। संसाधनों के अभाव में जो बच्चे शिक्षा से दूर हैं, ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। कोरोना संकट के कारण स्कूली छात्र- छात्राओं की नियमित पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है।


इसके लिए विद्यालयों में पठन पाठन की जो ऑनलाइन व्यवस्था की गई है वह परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए काफी मुश्किल साबित हो रही है। कारण है कि तमाम अभिभावकों के पासएंड्रायड फोन नहीं हैं। जिसके पास फोन हैं भी वह सही से ऑनलाइन वर्क को समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ रहा है। 


परिषदीय स्कूलों में मिशन प्रेरणा की पाठशाला का दूसरा चरण 21 सितंबर से शुरू किया गया है। जिसमें उन अभिभावकों को स्कूल बुलाने की तैयारी की जा रही है जो व्हाट्सएप ग्रुप से नहीं जुड़े हैं। संसाधन के अभाव में मोबाइल आदि की व्यवस्था न कर पाने वाले बच्चों के अभिभावकों में किसी पढ़े लिखे सदस्य माता, पिता, भाई, बहन, चाचा, चाची को सप्ताह में एक दिन स्कूल बुलाकर पूरे सप्ताह का होमवर्क दिया जाएगा। जिससे कि यह होमवर्क बच्चों को कराया जा सके।

इस दौरान डीसी अशोक त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय में एक दिन शिक्षक एक एक घंटे बांटकर अभिभावकों को स्कूल आने की अपील कर रहे हैं। कोविड-19 की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए गोष्ठी की जा रही है। 10 से अधिक अभिभावकों को एक बार में नहीं बुलाया जाएगा।

CBSE Compartment Exam 2020 : सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को जारी किए निर्देश, जल्द जारी करें 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं के परिणाम

CBSE Compartment Exam 2020 : सुप्रीम कोर्ट ने CBSE को जारी किए निर्देश, जल्द जारी करें 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाओं के परिणाम

सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन को कंपार्टमेंट परीक्षा परिणाम को जल्द घोषित करने के लिए कहा है।


CBSE Compartment Exam 2020 : सुप्रीम कोर्ट ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) को कक्षा 10, 12 वीं के कंपार्टमेंट परीक्षा परिणाम को जल्द घोषित करने के लिए कहा है। कोर्ट ने यह फैसला कंपार्टमेंटल परीक्षा और परिणाम की घोषणा में होने वाली देरी की वजह से नए सत्र में प्रवेश के लिए समय सीमा बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुनाया है।सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई से कहा, ''बोर्ड जल्द से जल्द कंपार्टमेंट परीक्षाओं के नतीजे घोषित करने की कोशिश करें। इसके अलावा कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से कहा है कि कंपार्टमेंट परीक्षा में सफल होने वाले छात्रों को कॉलेजों में प्रवेश दिलाने में बोर्ड के साथ मिलकर काम करने को कहा है।


कोर्ट ने कहा कि CBSE और UGC दोनों को ही मिलकर फिलहाल शैक्षणिक वर्ष में कॉलेजों में प्रवेश पाने वाले छात्रों को कॉलेजों में प्रवेश सुनिश्चित करने के लिए साथ मिलकर काम करना चाहिए। कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने वाले 2 लाख स्टूडेंट्स के करियर में कोई बाधा नहीं आनी चाहिए। सभी छात्र-छात्राओं को कॉलेज में दाखिला मिलना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी को 24 सितंबर तक शैक्षणिक कैलेंडर जारी नहीं करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि कंपार्टमेंटल परीक्षा में लगभग 2 लाख छात्र उपस्थित हुए हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। यह एक एक्सपेशनल ईयर है, और हमें मिलकर एक समाधान निकालना होगा। इस संबंध में कोर्ट में दो याचिकाएं दायर हुई थीं। इनमें पहली में अनिका सामवेदी और शिवम कुमार की है। 


पहली याचिका में कहा गया था कि कोविड-19 संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कंपार्टमेंट की परीक्षाएं स्थगित कर दी जानी चाहिए। वहीं दूसरी याचिका में कहा गया था कि कंपार्टमेंट परीक्षा का रिजल्ट में देरी होने की वजह से किसी भी छात्र का भविष्य प्रभावित न हो। वहीं बता दें कि कोर्ट ने फिलहाल मामला 24 सितंबर तक टाल दिया है। अब इस मामले आज से 2 दिन यानी कि 24 सितंबर को परीक्षा होगी।

Tuesday, September 22, 2020

UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया

विश्वविद्यालयों में एक नवम्बर से होगी शैक्षणिक सत्र की शुरुआत, सभी छुट्टियों में होगी कटौती।

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के चलते बंद पड़े विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2020-21 के शैक्षणिक सत्र की शुरुआत एक नवंबर से होगी। स्नातक व स्नातकोत्तर के पहले वर्ष में 31 अक्टूबर तक दाखिले होंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपने दिशा-निर्देश में कहा है कि पाठ्यक्रमों को पूरा करने के लिए इस साल की सर्दियों और अगले साल की गर्मी की छुट्टियों और अन्य अवकाश में कटौती की जाएगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट किया, पढ़ाई पूरी करने के लिए सप्ताह में छह दिन कक्षाएं चलाने को भी कहा गया है। नया सत्र ऑनलाइन, फेस-टू-फेस क्लासरूम और मिश्रित मोड से चलाया जाएगा। यह कैलेंडर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के तकनीकी कॉलेजों पर भी लागू होगा।


UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश, 1 नवंबर से शुरू करें फर्स्ट ईयर की कक्षाएं और 30 नवंबर तक पूरी करें प्रवेश प्रक्रिया।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 की शुरुआत करने के लिए निर्देश दिए हैं। यूजीसी ने विश्वविद्यालयों से कहा है कि 1 नवंबर से नए सत्र की कक्षाएं शुरू कर दी जाएं। इसके अलावा यूनिवर्सिटी 30 नवंबर तक प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर लें। बता दें कि यूजीसी द्वारा 29 अप्रैल को जारी वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया था। इसके तहत फर्स्ट ईयर के छात्रों की कक्षाएं 1 सितंबर से शुरू होनी थी और अंतिम वर्ष की परीक्षाएं 1 जुलाई से 15 जुलाई तक आयोजित की जानी चाहिए। लेकिन फिर कोविड-19 महामारी के मामले कम नहीं होने की वजह से कैलेंडर को संशोधित करना पड़ा। इसके बाद फिर उच्च शिक्षा नियामक ने सितंबर के अंत तक अंतिम वर्ष की परीक्षा या टर्मिनल सेमेस्टर परीक्षा आयोजित करने का आदेश दिया।


लेकिन अब संशोधित दिशा निर्देशों के अनुसार, शैक्षणिक सत्र 2020-21 प्रथम वर्ष के छात्रों के लिए 1 नवंबर से शुरू हो सकता है। हालांकि अगर फर्स्ट ईयर के लिए आयोजित होने वाले एंट्रेंस एग्जाम में देरी होती है तो यह भी संभव है कि फिर नए सत्र की कक्षाएं शुरू करने में देरी हो जाए। मीडिया रिपोट के मुताबिक फिर यह परीक्षाएं 18 नवंबर को शुरू हो सकती हैं। हालांकि अभी इस बारे में कुछ भी कहना संभव नहीं हैं।

स्टूडेंट्स ध्यान दें कि आयोग ने संशोधित कैलेंडर में आगे यह भी कहा है कि 30 नवंबर तक छात्रों के प्रवेश को रद्द करने पर पूरी फीस वापसी की जाएगी। इसके अलावा आयोग ने प्रवेश प्रक्रिया के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। इसके मुताबिक यूजी और पीजी छात्रों के लिए मेरिट या प्रवेश आधारित प्रवेश अक्टूबर अंत तक पूरा हो जाना चाहिए और शेष खाली सीटों को 30 नवंबर तक भरा जाना चाहिए। बता दें कि इस बार कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से नए सत्र की शुरुआत में देरी हो रही है।

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं

University Session 2020-21: विश्वविद्यालयों में यूजी, पीजी के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी, 1 नवंबर से कक्षाएं, 8 मार्च से परीक्षाएं8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


नई दिल्ली :  University Session 2020-21: शिक्षा मंत्री ने देश भर के विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों, स्वायत्तशासी महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों और अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों में शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए एकेडेमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। शिक्षा मंत्री द्वारा अब से कुछ ही देर पहले दी गयी जानकारी के अनुसार, “विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने कोविड-19 महामारी को देखते हुए वर्ष 2020-21 के लिए अंडर-ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट (कोर्सेस) के छात्रों के लिए एकेडेमिक कैलेंडर के लिए यूजीसी गाइडलाइंस के लिए बनी समिति की रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए इसे मान्यता दे दी है।“ शिक्षा मंत्री द्वारा साझा किये गये यूजीसी यूजी/पीजी कैलेंडर के अनुसार सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2020 तक पूरी कर लेनी है और पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए पहले कक्षाओं का आरंभ 1 दिसंबर 2020 से किया जाना है। वहीं, 1 मार्च से 7 मार्च तक एक सप्ताह का प्रिपेरेशन ब्रेक दिया जाएगा और 8 मार्च से 26 मार्च 2021 तक परीक्षाओं का आयोजन किया जाना है।


यूजीसी यूजी/पीजी एकेडेमिक कैलेंडर 2020-21

दाखिला प्रक्रिया पूरी करने की तिथि – 31 अक्टूबर 2020

पहले सेमेस्टर के फ्रेश बैच के लिए कक्षाओं के आरंभ होने की तिथि - 1 दिसंबर 2020

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 मार्च 2021 से 7 मार्च 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि - 8 मार्च 2021 से 26 मार्च 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 27 मार्च से 4 अप्रैल 2021

ईवन सेमेस्टर की कक्षाओं का आरंभ – 5 अप्रैल 2021

परीक्षाओं की तैयारी के लिए ब्रेक – 1 अगस्त 2021 से 8 अगस्त 2021

परीक्षाओं के आयोजन की अवधि – 9 अगस्त 2021 से 21 अगस्त 2021

सेमेस्टर ब्रेक – 22 अगस्त 2021 से 29 अगस्त 2021

इस बैच के लिए अगले एकेडेमिक सेशन आरंभ होने की तिथि – 30 अगस्त 2021

एडमिशन कैंसिल कराने या माइग्रेशन में पूरी फीस होगी वापस

शिक्षा मंत्री ने नये शैक्षणिक सत्र के लिए एकेडेमिक कैंलेडर जारी करने के साथ ही साथ कहा, “लॉकडाउन और सम्बन्धित समस्याओं के कारण पैरेंट्स को हुई आर्थिक दिक्कतों को देखते हुए इस सेशन के लिए 30 नवंबर 2020 तक लिए गए दाखिले को रद्द कराने या माइग्रेशन की स्थिति में छात्रों को पूरी फीस वापस की जाएगी।“

फतेहपुर : अंतर जनपदीय स्थानांतरण में 1038 शिक्षक जाएंगे जनपद से बाहर

फतेहपुर : अंतर जनपदीय स्थानांतरण में 1038 शिक्षक जाएंगे जनपद से बाहर।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंतर जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया को हरी झंडी मिलने से आवेदक शिक्षक-शिक्षिकाओं के चेहरे खिल गए हैं। इस आदेश से जिले के 1038 शिक्षक शिक्षिकाओं को लाभ मिलेगा। यह अलग बात है कि जिले को शिक्षक संख्या का नुकसान होगा। 

प्राथमिक शिक्षक भर्ती में कानपुर महानगर सहित आसपास के जिलों के युवक युवतियां बेरोजगारी दूर करने के लिए नौकरी तो ज्वाइन कर लेते हैं। इसके स्थानांतरण की जुगत भिड़ाते रहते हैं। स्थानांतरण नीति आते ही वह तबादले पर अपने जिलों को चले जाते हैं। बीते सालों में गौर करें तो जिले से 456 शिक्षक तबादले पर गए थे और आने वालों की संख्या 39 रही है। 


जानकार कहते हैं कि 1038 शिक्षकों की भरपाई आने वालों से नहीं होगी। इसलिए तबादला नीति से जिले को नुकसान होना तय है।

CBSE : 10वीं व 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाएं आज से।

CBSE : 10वीं व 12वीं की कंपार्टमेंट परीक्षाएं आज से।

नई दिल्ली : सीबीएसई की 10वीं और 12वीं की कंपार्टमेंट की परीक्षाएं आज से शुरू होने जा रही हैं। दसवीं की परीक्षाएं 28 और बारहवीं की परीक्षाएं 30 सितंबर को समाप्त होंगी। कोरोना के बढ़ते संक्रमण और सामाजिक दूरी का पालन कराने के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या 500 से बढ़ाकर 1268 की गई है।


परीक्षा सुबह 10.30 बजे से दोपहर 1.30 बजे तक होगी। 10.15 तक छात्रों को प्रश्न पत्र दे दिया जाएगा। इस साल देश भर में दसवी में कुल 1, 50, 198 छात्रो और 12वीं में 87, 651 छात्रों की कंपार्टमेंट आई है। कोरोना के समय में छात्रों को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसलिए परीक्षा केंद्र छात्रों के घर के नजदीक ही बनाए गए हैं। स्कूलों को कहा गया है वह इस बात का ध्यान रखें कि छात्र और शिक्षक परीक्षा केंद्र तक बिना किसी दिक्कत के पहुंच सकें। यह भी ध्यान रखें कि केंद्र के बाहर भीड़ जमा न हो।

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच?

आधा सत्र बीता विद्यालय खुलने पर अब भी संशय, 
आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच? 

 
प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों का सत्र अप्रैल से शुरू होता है। विद्यार्थी स्कूल जाने लगते हैं लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते मार्च से ही सभी विद्यालय बंद हैं। पाठन-पाठन जैसे-तैसे ऑनलाइन संचालित करने की कोशिश हो रही है। आधा सत्र बीत जाने के बाद भी विद्यालय खुलने को लेकर असमंजस की स्थिति है।


बोले डीआइओएस, शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है

हालांकि केंद्र सरकार की तरफ से कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खोलने का निर्देश हो चुका है। इस मामले में राज्य अपने यहां की परिस्थितियों के अनुसार निर्णय लेने को स्वतंत्र हैं। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि अभी शासन से कोई निर्देश नहीं मिला है। समीक्षा के बाद जो आदेश आएगा उसके अनुसार आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उसमें भी बिना अभिभावक की अनुमति के कोई भी विद्यार्थी स्कूल नहीं आ सकेंगे।


स्‍कूल प्रबंधन का कहना है कि निर्देश मिलने पर खुलेंगे स्‍कूल

इस संबंध में स्कूलों का कहना है कि उनकी पूरी तैयारी है। जैसे निर्देश मिलेंगे, उसके अनुसार स्कूल खोले जाएंगे। संक्रमण से बचाव के लिए भी ठोस कदम उठाए जाएंगे। महर्षि पतंजलि विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य सुष्मिता कानूनगो ने बताया कि 22 से 30 सितंबर तक कम्पार्टमेंट परीक्षा कराई जाएगी। इस बीच विद्यालय नहीं खुलेगा। उसके बाद यदि निर्देश मिलेगा तो बोर्ड की परीक्षा वाले बच्चों को बुलाया जाएगा। खासकर प्रायोगिक कक्षाओं के लिए। बाकी विद्यार्थी ऑनलाइन पढ़ाई करते रहेंगे।


इन स्‍कूलों की प्रधानाचार्यों का यह कहना है

श्री महाप्रभु पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्य रविंद्र बिरदी ने भी कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं चलती रहेंगी। जरूरत के अनुसार विद्यार्थियों को विद्यालय बुलाया जाएगा। केपी गर्ल्‍स इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य अमिता सक्सेना ने बताया कि निर्देश आने पर स्कूल खुलेंगे। कर्नलगंज इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में शिक्षक नियमित आ रहे हैं। शासन का जैसा निर्देश मिलेगा उसके अनुसार कक्षाएं चलाई जाएंगी।


आइए जानते हैं कि अभिभावकों की क्‍या है सोच

शहर में लगातार कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है। इसे लेकर अभिभावक चिंतित हैं। वे अपने बच्चों को अभी स्कूल नहीं भेजना चाहते हैं। उनका कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई जैसे चल रही है, वही पर्याप्त है। मेंहदौरी कालोनी की कविता कहती हैं कि मेरा बेटा कक्षा 11वीं में पढ़ता है। ऑनलाइन पढ़ाई चल रही है। अभी संक्रमण को देखते हुए हम बच्चे को स्कूल नहीं भेज सकते। घर में ही रहना सुरक्षित है। इसी प्रकार नैनी की रहने वाली सुषमा पांडेय बेटे की पढ़ाई ऑनलाइन चल रही है। हालांकि वह उतनी प्रभावी नहीं है लेकिन कोरोना वायरस का खतरा भी नहीं मोल ले सकते। अभी घर में ही रहना ठीक है। जल्दबाजी कर के मुसीबत नहीं मोल लेंगे।

इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में होगा संशोधन, यूपी बोर्ड से मांगा प्रस्ताव

इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में होगा संशोधन, यूपी बोर्ड से मांगा प्रस्ताव

 
इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में होगा संशोधन, यूपी बोर्ड से मांगा प्रस्ताव।

शिक्षा निदेशक माध्यमिक की ओर से शासन के निर्देश पर यूपी बोर्ड सचिव, बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिव से इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन का प्रस्ताव मांगा है।

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेंद्र देव की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देश पर 24 अगस्त 2020 को पत्र भेजकर इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन के लिए प्रस्ताव मांगा गया था परंतु अभी तक इस संबंध में कोई जानकारी नहीं भेजी गई है। अपर निदेशक माध्यमिक ने 15 दिन के भीतर इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन का प्रस्ताव शिक्षा निदेशक कार्यालय प्रयागराज भेजने को कहा है, जिससे इसे शासन को भेजा जा सके।

मानव संपदा पोर्टल का दुरुपयोग करने की कोशिश में पकड़े गए दो फर्जी शिक्षक, गिरफ्तार

दो फर्जी प्राथमिक शिक्षकों समेत तीन विभूति खंड से गिरफ्तार

--मानव संपदा पोर्टल का दुरुपयोग करने की कोशिश में धरे गए --बाराबंकी व लखनऊ में काम रहे हैं दोनों फर्जी शिक्षक

राज्य मुख्यालय :  स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने मानव संपदा पोर्टल का दुरुपयोग कर धांधली करने करने वाले दो फर्जी प्राथमिक शिक्षकों समेत तीन को लखनऊ से गिरफ्तार किया है। एक फर्जी शिक्षक बाराबंकी में तो दूसरा गोरखपुर में कार्यरत है। तीनों के विरुद्ध लखनऊ के विभूति खंड थाने में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अलग-अलग फर्जी नाम से कर रहे थे नौकरी पकड़ा गया अभियुक्त यदुनंदन यादव पुत्र इन्द्रमणि यादव गोरखपुर के सहजनवां थाना क्षेत्र स्थित हरदी गांव का रहने वाला है।


वह वर्तमान में बाराबंकी जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित सिंघला रेजीडेंसी के मकान नंबर 26 में रहता है और प्रमोद कुमार सिंह के फर्जी नाम से बाराबंकी जिले के बनीकोडर ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय ककराहा में सहायक अध्यापक के रूप में काम कर रहा है, जबकि गिरफ्तार दूसरा अभियुक्त सत्यपाल यादव उसका भाई है। तीसरा अभियुक्त प्रमोद कुमार यादव पुत्र इंद्रदेव यादव देवरिया जिले के सलेमपुर थाना क्षेत्र स्थित बरसीपार का रहने वाला है। वह आशीष कुमार सिंह के फर्जी नाम से गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र स्थित प्राथमिक विद्यालय खोरी पट्टी में सहायक अध्यापक के रूप में नौकरी कर रहा है। तीनों के कब्जे से 6 अदद मोबाइल फोन, दो लैपटॉप, एक प्रिंटर, एक अल्टो कार (यूपी 32 एचबी 5831), दो कूटरचित सीआरपीएफ का पहचान पत्र, प्रमोद कुमार सिंह के नाम को दो कूटरचित आधार कार्ड, एक कूटरचित प्रमोद कुमार सिंह के नाम का डीएल व एक पैनकार्ड, दो एटीएम कार्ड तथा 8.60 लाख रुपये नकद बरामद हुए हैं। तीनों को सोमवार को गोमती नगर में वेब सिनेमा के निकट पराग बूथ से गिरफ्तार किया गया। 


अर्चना पांडेय के नाम से पत्नी बनी शिक्षक फर्जी मार्कशीट के आधार पर विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक के पद पर नौकरी करने वालों के विरुद्ध एएसपी सत्यसेन यादव के नेतृत्व में एसटीएफ मुख्यालय के अलावा फील्ड इकाई गोरखपुर की टीमें लगातार काम कर रही हैं। इसी दौरान पता चला कि प्रमोद कुमार सिंह उर्फ यदुनंदन यादव मानव सम्पदा पोर्टल का दुरुपयोग कर अपने गैंग के सदस्यों के साथ धांधली करके लोगों से पैसा इकट्ठा कर रहा है। यह भी पता चला कि वह अपने गैंग के सदस्य के साथ एक फर्जी शिक्षक से मिलने लखनऊ आएगा। इस सूचना पर इंस्पेक्टर सत्य प्रकाश सिंह फील्ड इकाई गोरखपुर के नेतृत्व में एक टीम ने तीनों को दबोच लिया। यदुनंदन ने पूछताछ में बताया कि वह प्रमोद कुमार सिंह के नाम से फर्जी शिक्षक है। वह अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र बनवा कर वर्ष 2000 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था। इस मामले में वर्ष 2007 में उसके विरुद्ध गोरखपुर के सहजनवां थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था और वह उसमें जेल भी गया था। उसकी पत्नी श्रीलता वर्तमान समय में अर्चना पांडेय के नाम से उच्च प्राथमिक विद्यालय गदिया बाराबंकी में अध्यापक के पद पर नौकरी कर रही है। 


पोर्टल का अधिकारी बनकर करता था फोन यदुनंदन ने एसटीएफ को बताया कि वह मानव संपदा पोर्टल से पब्लिक विंडो में दी गई सूची के आधार का इस्तेमाल करके यह जानकारी प्राप्त कर लेता था कि कौन फर्जी अध्यापक है। इसके बाद वह उनसे वसूली करता था। इसके बाद वह फर्जी अध्यापकों के हाईस्कूल, इंटरमीडिएट, स्नातक व बीएड आदि शैक्षिक दस्तावेजों का अध्ययन कर लेता था। इससे पता चल जाता था कि कौन कूटरचित शैक्षिक दस्तावेज के आधार पर चयनित होकर नौकरी कर रहा है। जिन शिक्षकों का मोबाइल नंबर नहीं मिलता था, उनसे सम्पर्क करने के लिए उनके जिले के पोर्टल से ग्राम प्रधान के नंबर पर सम्पर्क कर शिक्षक का मोबाइल नंबर प्राप्त कर लेता था। फिर उनके मोबाइल नंबर पर सम्पर्क कर बताता था कि वह मानव संपदा पोर्टल का अधिकारी बोल रहा है। इसी तरह उसने सोमवार को आशीष कुमार सिंह को पैसा लेकर लखनऊ बुलाया था, जिसका वास्तविक नाम प्रमोद कुमार यादव है। अपनी गाड़ी से बरामद कागजात के बारे में पूछताछ पर बताया कि उसने बताया कि ये सभी फर्जी अध्यापक हैं। ये सारे कागजात उसने मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से निकाले हैं। इनमें से कुछ फर्जी अध्यापकों से वह पैसा वसूल चुका है और कुछ से पैसा वसूलना बाकी है। सत्यपाल यादव ने पूछताछ पर बताया कि वह यदुनंदन यादव का भाई है। जब कोई फर्जी शिक्षक मिलने आता है तो वह यदुनंदन का ड्राइवर या स्टाफ बन कर उससे मिलता है। इसी तरह प्रमोद कुमार यादव ने भी फर्जी शिक्षक होने की जानकारी दी।

शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज

सत्यापन के लिए शुल्क लिए जाने से शिक्षक नाराज।


राज्य मुख्यालय  : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन कराने के आदेश से नया विवाद छिड़ गया है। इस प्रक्रिया से एक तरफ शिक्षकों की जांच लटक गई है तो दूसरी तरफ सत्यापन के लिए जमा होने वाले शुल्क को लेकर फैसला नहीं हो पा रहा है। शिक्षक संगठनों ने यह शुल्क शिक्षकों से ही लिए जाने पर नाराजगी जताई है। शासन ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से कहा है कि वे अपने यहां कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक अभिलेखों का सत्यापन उन बोर्डों या विश्वविद्यालयों से करा लें, जहां से वे जारी किए गए हैं। 

इससे पहले जिलावार गठित जांच कमेटी ने शिक्षकों का भौतिक सत्यापन करने के साथ-साथ उनके सेवा संबंधी अभिलेखों एवं शैक्षिक अभिलेखों की जांच की थी। अब एक नया विवाद यह शुरू हो गया है कि सत्यापन के लिए शुल्क कौन अदा करेगा? कई विश्वविद्यालय अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों का सत्यापन करने के लिए पहले ही शुल्क जमा करा लेते हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) ने उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को पत्र लिखकर नाराजगी जताई है कि कुछ महाविद्यालय यह शुल्क शिक्षकों से ही वसूल रहे हैं। संगठन ने लखनऊ के ही एक महाविद्यालय का उदाहरण भी दिया है, जिसने सत्यापन कराने की जिम्मेदारी शिक्षकों पर ही डाल दी है। संगठन का कहना है कि मुख्यमंत्री के आदेश के अनुसार यह जांच 31 जुलाई तक पूरी होनी थी लेकिन यह अभी तक पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में यह जांच अब स्थगित कर दी जानी चाहिए।

Monday, September 21, 2020

देश के तीन राज्यों में आज से स्कूल खुलेंगे, दिल्ली, यूपी, समेत कई राज्य अभी स्कूल खोलने को राजी नहीं

देश के तीन राज्यों में आज से स्कूल खुलेंगे,  दिल्ली, यूपी, समेत कई राज्य अभी स्कूल खोलने को राजी नहीं


केंद्र की इजाजत के बाद 21 सितंबर से 9वीं से 2 वीं तक के स्कूल खोलने को लेकर मध्य प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा ने सहमति दे दी है। पांच माह से भी अधिक समय के बाद सोमवार से इन प्रदेशों में आंशिक रूप से स्कूल खुलेंगे। 


हालांकि, कोरोना के प्रसार को देखते हुए कई राज्य स्कूल खोलने के लिए फिलहाल राजी नहीं है। दिल्ली, यूपी, उत्तराखंड, गुजरात, केरल और पश्चिम बंगाल अभी स्कूल खोलने पर राजी नहीं हैं।

यह ध्यान रखना होगा

● सफाई और सामाजिक दूरी का पालन करना होगा।
● छात्र कॉपी, पेंसिल आदि शेयर नहीं कर पाएंगे।
● कक्षा में छह फीट की दूरी पर मार्किंग करनी होगी। 
● 50 फीसदी शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक स्टाफ स्कूल आ सकेगा।
● बाहर खुले में भी पढ़ाई हो सकेगी।
● कक्षा, लेबोरेटरी और वॉशरूम सैनिटाइज करवाना होगा ।
● ऑक्सीजन लेवल जांचने के लिए ऑक्सीमीटर अनिवार्य है।
● शिक्षक और कर्मचारियों को फेस मास्क और सैनिटाइजर स्कूल से मिलेगा।

इनको नहीं मिलेगा प्रवेश

● क्वारंटाइन जोन से छात्र, शिक्षक या कर्मचारी स्कूल नहीं आ सकेंगे।
● बीमार छात्र, शिक्षक या कर्मचारी को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा 



दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के पांचवें चरण की समय सारिणी

दूरदर्शन उत्तर प्रदेश (DD UP) चैनल पर यूपी बोर्ड की कक्षा- 10 व 12 हेतु शैक्षणिक प्रसारण के पांचवें चरण की समय सारिणी




उत्तर प्रदेश : 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे स्कूल

उत्तर प्रदेश : 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे स्कूल

बंद रहेंगे माध्यमिक तक के स्कूल, आइटीआइ में कक्षाएं आज से

उत्तर प्रदेश में स्कूल 30 सितम्बर तक नहीं खुलेंगे। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने रविवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि स्कूलों में 50 फीसदी अध्यापक बुलाए जा सकेंगे। 


केन्द्रीय गाइडलाइन के मुताबिक कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल-कॉलेज 21 सितम्बर से खोले जाने थे। मगर राज्य सरकार ने फैसला किया है कि यूपी के हालात अभी ऐसे नहीं है कि स्कूल-कॉलेज खोले जाएं। प्रदेश में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूल खोलना सम्भव नहीं है। इसलिए यह फैसला लेना पड़ा है।


बंद रहेंगे माध्यमिक तक के स्कूल, आइटीआइ में कक्षाएं आज से

 
लखनऊ : यूपी के माध्यमिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों की कक्षाएं सोमवार से नहीं लगेंगी। वह पहले की तरह अभी ऑनलाइन पढ़ाई ही करेंगे। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में सोमवार से व्यावसायिक प्रशिक्षण शुरू होगा। कौशल विकास केंद्रों में भी प्रशिक्षण शुरू होगा।

आइटीआइ में दो वर्षीय कोर्स के द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों की सुबह नौ बजे से और एक वर्षीय कोर्स की कक्षाएं सुबह 10 बजे से शुरू होंगी। वहीं दूसरी ओर दो वर्षीय कोर्स के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों की कक्षाएं एक अक्टूबर से शुरू होंगी। स्कूलों को खोलने का निर्णय 30 सितंबर के बाद स्थिति की समीक्षा के अनुसार लिया जाएगा। स्कूलों को तब तक अभिभावकों से सहमति पत्र लेने के निर्देश दिए गए हैं कि आगे स्कूल खुलने की स्थिति में वह अपने बच्चों को भेजेंगे या नहीं।


विवि व डिग्री कॉलेजों में भी अभी ऑफलाइन पढ़ाई नहीं होगी। स्नातक व स्नातकोत्तर विद्यार्थियों के लिए कैंपस बंद रहेंगे। शोध छात्रों को अनुमति देने पर उच्च शिक्षा विभाग विचार कर रहा है।

इंजीनियरिंग कॉलेज और पॉलीटेक्निक भी नहीं खुलेंगे

इंजीनियरिंग कॉलेजों व पॉलीटेक्निक संस्थानों में भी अभी कक्षाएं शुरू नहीं की जाएंगी। सिर्फ ऑनलाइन क्लासेज ही चलेंगी। पॉलीटेक्निक संस्थानों में 25 सितंबर से परीक्षाएं शुरू होंगी, जिसकी तैयारियां की जा रही हैं।

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

पिछड़ा वर्ग आयोग के निर्णय के खिलाफ 69000 शिक्षक भर्ती करने पर आंदोलन की चेतावनी

 
लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के ओबीसी अभ्यर्थियों ने 67 हजार 887 चयनित अभ्यर्थियों में से 31 हजार 361 को नियुक्ति देने के सरकार के निर्णय को राष्ट्रीय ओबीसी आयोग को अवमानना बताया है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग ने भर्ती पर स्थगन आदेश दे रखा है, उसके बाद सरकार नियुक्ति कैसे कर सकती है।


 अभ्यर्थियों ने आगामी दिनों में लखनऊ में आंदोलन की चेतावनी दी है। उधर, विभाग का दावा है कि आयोग को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है, नियुक्ति सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत ही दी जा रही है। आरक्षण एवं एमआरसी लीगल टीम के प्रवक्ता विजय यादव का कहना है कि ओबीसी आयोग के उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति ने 7 जुलाई को भर्ती पर रोक लगाई थी। 


आयोग ने स्पष्ट किया था कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय होने के बाद भी आयोग की ओर से मामले में निर्णय देने तक भर्ती पर रोक रहेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने आयोग के आदेश के तहत अभी तक सरकार इस 69000 सहायक शिक्षक भर्ती की वर्ग बार शैक्षिक गुणांक सहित मूल चयन सूची उपलब्ध नहीं कराई है।

यूपी बोर्ड : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू

UP Board : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू।

उत्तर प्रदेश में नए अकादमिक सत्र शुरू होने के पांच महीने बाद ही यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अपने 11वीं कक्षा के कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए शुरू कर दिया है।


यूपी बोर्ड के इस फैसले क मतलब है कि अगले शैक्षिक सत्र में राज्यभर में बोर्ड से जुड़े करीब 28000 स्कूलों में कॉर्मस स्ट्रीम 12वीं कक्षा में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा।


परिणाम स्वरूप, यूपी बोर्ड 12वीं कक्षा की परीक्षा 2022 में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित होगी। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) आधारित पाठक्रम आर्ट्स और साइंस के लिए लागू किया जा चुका है।


यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि विशेश सचिव (माध्यमिक शिक्षा) आर्यका अखौरी ने 18 सितंबर को एक आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और यूपी बोर्ड को भेजा गया है। इस आदेश में पाठ्यक्रम में बदलाव की स्वीकृति और विवरण के बारे में बताया गया है।


उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2020 को प्रस्ताव पर यूपी बोर्ड से स्वीकृति मिल गई थी।

पुराने पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय हिन्दी या सामान्य हिन्दी रखा गया था। साथ ही कई सब्जेक्ट विकल्प के तौर पर थे। लेकिन अब नए पाठ्यक्रम में छात्रों को सामान्य हिन्दी, बिजनेस स्टडीज और अकाउंटैंसी को एक अनिवार्य विषय के रूप में चुनना होगा। वहीं दो विकल्पीय विषय जैसे इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, मैथमैटिक्स और कम्प्यूटर होगा।

यूपी बोर्ड ने 1 अप्रैल 2018 को बोर्ड से जुड़े स्कूलो में 18 विषयों का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने की बात कही थी।

कॉमर्स स्ट्रीम में कक्षा 9 में 41612 और 11वीं में 71,834 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।

Sunday, September 20, 2020

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO और 2 शिक्षक सस्पेंड किए

आगरा : रिश्वत के आरोप में बेसिक शिक्षा मंत्री ने BEO समेत 2 शिक्षक सस्पेंड किए


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड किया.


आगरा. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने शनिवार को आगरा मंडल समीक्षा बैठक में बीईओ सहित तीन को सस्पेंड कर दिया. शनिवार को हुई इस मीटिंग में जनप्रतिनिधि और अन्य लोगों की शिकायत करने पर बीईओ और दो शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने इस मामले की जांच करने के आदेश दिए.


आगरा के सर्किट हाउस में हुई इस मीटिंग में बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने आगरा मंडल के सभी जनपदों में यूनिफॉर्म वितरण और दूसरी योजनाओं की समीक्षा की. इस मीटिंग में लोगों की शिकायत करने पर खंड शिक्षाधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव और दो शिक्षकों को संस्पेंड कर दिया. बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि खंड शिक्षा अधिकारी अकोला ओमप्रकाश यादव के खिलाफ जनप्रतिनिधियों ने शिकायत की थी. अकोला ओमप्रकाश यादव पर बरौली अहीर का भी अतिरिक्त आभार था.


सतीश द्विवेदी ने कहा कि बरौली अहीर में तैनात दो शिक्षक उमेश यादव और प्रदीप यादव के खिलाफ भी लोगों ने शिकायत की. इन पर शिक्षकों के साथ अभद्रता करने और काम के लिए पैसे मांगने के आरोप थे. तीनों को तत्काल प्रभाव के साथ सस्पेंड कर दिया गया है और मामले की जांच की भी जाएगी.


इस समीक्षा बैठक में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने ऑपरेशन कायाकल्प को आगे बढ़ाने, रिटायर्ड शिक्षकों को समय पर जीपीएफ और पेंशन का भुगतान करने, फर्जी शिक्षकों के खिलाफ जांच और यूनीफॉर्म-किताब वितरण को समय से पूरा करने के निर्देश दिए. इस मीटिंग में आगरा, मथुरा, फिरोजाबाद और मैनपुरी के बेसिक शिक्षा अधिकारी, लेखा अधिकारी, आगरा मंडल के एडी बेसिक और डाइट प्राचार्य भी मौजूद रहे.

डीएलएड प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन, सत्र 2018 के सभी प्रशिक्षुओं को प्रमोट करने की मांग

डीएलएड प्रशिक्षुओं का प्रदर्शन, सत्र 2018 के सभी प्रशिक्षुओं को प्रमोट करने की मांग।

प्रयागराज : डीएलएड प्रशिक्षुओं ने शनिवार को परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि सत्र 2018 के सभी प्रशिक्षुओं को प्रमोट किया जाए, जो प्रशिक्षु फेल हैं या फिर बैक पेपर आया है उन्हें भी अगली कक्षा में प्रोन्नत किया जाए। प्रशिक्षुओं ने कहा कि सरकार ने उनकी मांग को माना है, जबकि परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने ऐसा प्रस्ताव भेजा कि फेल व बैक पेपर वालों का पाठ्यक्रम जल्द पूरा नहीं हो सकेगा। 


सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि शासन ने स्पष्ट आदेश दिया है, उसी के अनुसार प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। जब सभी विषयों में उत्तीर्ण होना अनिवार्य है तो उसके बिना कैसे सभी को प्रमोट किया जा सकता है।

69000 शिक्षक भर्ती मामला : धांधली के सात आरोपियों पर होगी कुर्की की कार्रवाई, एसटीएफ जल्द कोर्ट में देगी अर्जी, लंबे समय से चल रहे हैं फरार

69000 शिक्षक भर्ती मामलाः धांधली के सात आरोपियों पर होगी कुर्की की कार्रवाई।

एसटीएफ जल्द कोर्ट में देगी अर्जी, लंबे समय से चल रहे हैं फरार


प्रयागराज : 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली मामले के सात आरोपियों के खिलाफ एसटीएफ जल्द ही कुर्की की कार्रवाई शुरू करेगी। यह लंबे समय से फरार चल रहे हैं। इनके खिलाफ गैरजमानती वारंट भी जारी है लेकिन फिर भी यह पकड़ से दूर हैं। एसटीएफ अफसरों का कहना है कि कोर्ट खुलते ही इस संबंध में अर्जी दी जाएगी।


शिक्षक भर्ती परीक्षा मामले सरगना केएल पटेल समेत 15 आरेापी अब तक जेल भेजे जा चुके हैं। एक नामजद आरोपी मायापति दुबे को अग्रिम जमानत मिल गई है। बता दें कि विवेचना स्थानांतरित होने के बाद एसटीएफ ने नकल माफिया चंद्रमा यादव व दुर्गेेश सिंह को भी वांछित किया था। यही नहीं विवेचना के दौरान पांच अन्य लोगों के बारे में पता चला जो किसी न किसी रूप में गिरोह के लिए काम करते हैं। इनमें अरविंद पटेल, शिवदीप पटेल, संदीप पटेल, सत्यम पटेल व शैलेश पटेल शामिल हैं। सत्यम जहां सरगना केएल पटेल का भतीजा है वहीं शैलेश उसका साला है।

यह दोनों सरगना के दाहिने हाथ के तौर पर काम करते हैं जबकि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला संदीप सॉल्वर है। इसके अलावा अरविंद व शिवदीप कैंडिडेट खोजने का काम करते हैं। एसटीएफ अफसरों का कहना है कि जल्द ही कोर्ट में इनके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई शुरू करने के लिए अर्जी दी जाए।

कस्तूरबा विद्यालय की शिक्षिका की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, वेतन सहित बहाल करने का आदेश, फर्जी नियुक्ति के मामले में जवाब तलब

कस्तूरबा विद्यालय की शिक्षिका  की बर्खास्तगी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक।

वेतन सहित बहाल करने का आदेश, फर्जी नियुक्ति के मामले में जवाब तलब।


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्ति पाने की आरोपी कस्तूरबा विद्यालय की नियमित शिक्षिका की बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगाते हुए उनको वेतन के साथ अपने पद पर बहाल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने फर्जी नियुक्ति के मामले में प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय आराजी लाइंस वाराणसी में नियुक्त अध्यापिका सरिता आर्या की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता ने दिया है। याची के अधिवक्ता सुदर्शन सिंह का कहना था कि याची को 17 जुलाई 2020 को सेवा से बर्खास्त करते हुए उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया है। शिक्षिका पर फर्जी अंकपत्रों के आधार पर नियुक्ति पाने का आरोप है। याची हिंदी विषय की पूर्णकालिक अध्यापिका है।


अधिवक्ता का कहना कि कोर्ट ने इसी प्रकार के एक अन्य मामले में बर्खास्तगी पर रोक लगाते हुए वेतन सहित बहाल करने का आदेश दिया है। याची के प्रकरण में भी ऐसा ही आदेश की मांग की गई। कोर्ट ने रामचरित्र यादव व अन्य के मामले में 31 अगस्त को दिए आदेश को याची के संबंध में भी देते हुए दोनों याचिकाओं को एक साथ सुनवाई के लिए प्रस्तुत करने का आदेश दिया है। इस दौरान दोनों पक्षों को अपने-अपने हलफनामे और जवाबी हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है।

फतेहपुर : स्कूलों में होगी डिजिटल अवस्थापना

फतेहपुर : स्कूलों में डिजिटल अवस्थापना होगी।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में अब कंप्यूटर, प्रोजेक्ट में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता का सहारा लिया जाएगा। इसके अलावा विद्यालयों को गोद लेने के लिए कहा गया है। अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर डीएम संजीव सिंह ने पत्र जारी कर विभिन्न वर्गों से सहयोग की अपील की है। 

 अपर मुख्य सचिवद्वारा दिशा निर्देशों के तहत डीएम ने पत्र जारी कर बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के संचालितप्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विकास के लिए उसे गोद लिए जाने तथा बेसिक शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए इच्छुक संगठन एवं संस्थाओं के लिए सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं। कहा कि अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अवस्थापना, कम्प्यूटर प्रोजेक्टर व स्मार्ट टीवी आदि न होने के कारण छात्र छात्राएं डिजिटल लर्निंग के तहत शिक्षा से वंचित हैं। विद्यालयों के शैक्षणिक परिवेश में गुणात्मक वृद्धि के लिए ग्राम पंचायत की निधियों से सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से व्यवस्था किया जाना है।

प्रयागराज : बच्चों की जगह अभिभावक जाएंगे स्कूल, लेंगे होमवर्क।

प्रयागराज : बच्चों की जगह अभिभावक जाएंगे स्कूल, लेंगे होमवर्क।


प्रयागराज : जिले के परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिशन प्रेरणा ई-पाठशाला का दूसरा चरण 21 सितंबर से शुरू होगा। इस दौरान ऐसे बच्चे जिनके अभिभावक स्कूलों के व्हाट्स एप ग्रुप से नहीं जुड़े हैं, उन बच्चों के परिवार में पढ़े-लिखे किसी सदस्य जैसे माता, पिता, भाई, बहन, चाचा, चाची को सप्ताह में एक दिन स्कूल आमंत्रित कर पूरे सप्ताह की कार्य योजना और पाठ्यक्रम के संबंध में जानकारी दी जाएगी। 

प्रत्येक सोमवार को शिक्षक एक एक घंटे बांटकर अभिभावकों को स्कूल आने का अनुरोध करेंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को शुक्रवार को निर्देशित किया है कि सोशल डिस्टेंसिंग और कोविड-19 का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए प्रत्येक घंटे में 10 अभिभावकों को बुलाया जाएगा। अभिभावकों के स्कूल आने पर बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों में रुचि, विषय समझने में आरही कठिनाइयों के बारे में भी चर्चा की जाएगी।

Saturday, September 19, 2020

21 सितंबर के बाद राज्यों की सहमति से खोले जा सकते हैं स्कूल, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने जारी किया प्लान

21 सितंबर के बाद राज्यों की सहमति से खोले जा सकते हैं स्कूल, केंद्रीय विद्यालय संगठन ने जारी किया प्लान।


कोरोना संक्रमण के बीच अब स्कूलों को भी खोलने की तैयारी शुरु हो गई है। 21 सितंबर के बाद राज्यों की सहमति से स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जा सकती है। 

नई दिल्ली : कोरोना संक्रमण के बीच जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षाओं को कराने के बाद अब स्कूलों को भी खोलने की तैयारी शुरु हो गई है। 21 सितंबर के बाद राज्यों की सहमति से स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि बच्चों को स्कूल भेजने से पहले अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़े स्कूलों ने इसे लेकर प्लान जारी कर दिया है। इसके लिए अभिभावकों से सहमति मांगी गई है।


मार्च से ही बंद पड़े स्कूलों को खोलने को लेकर अनलॉक-4 में भी कुछ सहूलियतें दी गई हैं। इसके तहत 21 सितंबर से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्कूलों में 50 फीसद टीचिंग स्टाफ को स्कूल आने की अनुमति दे सकते हैं। इस दौरान कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्र भी अभिभावक की सहमति के बाद शिक्षकों से मार्गदर्शन लेने स्कूल जा सकेंगे। वैसे तो स्कूलों, कोचिंग सहित दूसरे सभी शैक्षणिक संस्थानों को 30 सितंबर तक बंद रखा गया है। इस बीच दिल्ली सरकार ने अपने स्कूलों को पांच अक्टूबर तक बंद रखने का घोषणा की है।


केंद्रीय विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को स्कूलों के खोलने का पूरा प्लान भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार विद्यालय 21 सितंबर से फिर से खुल रहा है। ऐसे में स्वेच्छा से अपने बच्चों को स्कूल भेजें। बच्चों को विद्यालय से लाने और ले जाने की पूरी जिम्मेदारी अभिभावकों की खुद होगी। इस दौरान बच्चों के स्कूल आने का जो प्लान भेजा गया है, उनमें 11वीं और 12वीं के बच्चों को सिर्फ सोमवार और मंगलवार आना है। जबकि दसवीं के बच्चों को बुधवार और गुरूवार और नौवीं के बच्चों को शुक्रवार और शनिवार को आना है।

जारी प्‍लान में कहा गया है कि बच्चों को लंच और पानी की बोतल के साथ मास्क और सैनिटाइजर भी अनिवार्य रूप से लाना होगा। हालांकि कोरोना के तेजी से बढ़ते संक्रमण को देखते हुए स्कूलों की ओर से भेजा गया यह प्रस्ताव ज्यादातर अभिभावकों को भा नहीं रहा है। फिलहाल केंद्रीय विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि किसी भी बच्चे पर स्कूल आने का कोई दबाव नहीं होगा। हालांकि जो आना चाहते हैं। उन्हें फोन करके और किस संबंध में आ रहे हैं। इसकी जानकारी पहले देनी होगी।

देशभर में केंद्रीय विद्यालय खोलने की तैयारियां पूरी, यह है केवीएस का प्रस्ताव

नई दिल्ली : कोरोना संक्रमण के बीच जेईई मेंस और नीट जैसी परीक्षाओं को कराने के बाद अब स्कूलों को भी खोलने की तैयारी शुरू हो गई है। 21 सितंबर के बाद राज्यों की सहमति से स्कूलों को खोलने की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि बच्चों को स्कूल भेजने से पहले अभिभावकों की सहमति जरूरी होगी। फिलहाल केंद्रीय शिक्षा मंत्रलय के अधीन काम करने वाले केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) से जुड़े स्कूलों ने इसे लेकर प्लान जारी कर दिया है। इसके लिए अभिभावकों से सहमति मांगी है।

मार्च से ही बंद पड़े स्कूलों को खोलने को लेकर अनलॉक-4 में भी कुछ सहूलियतें दी गई है। इसके तहत 21 सितंबर से राज्य और केंद्र शासित प्रदेश स्कूलों में 50 फीसद टीचिंग स्टाफ को स्कूल आने की अनुमति दे सकते हैं। इस दौरान कक्षा नौ से बारहवीं तक के छात्र भी अभिभावक की सहमति के बाद शिक्षकों से मार्गदर्शन लेने स्कूल जा सकेंगे। वैसे तो स्कूलों, कोचिंग सहित दूसरे सभी शैक्षणिक संस्थानों को 30 सितंबर तक बंद रखा गया है। हालांकि दिल्ली सरकार ने इस बीच अपने स्कूलों को पांच अक्टूबर तक बंद रखने का घोषणा की है।

इस बीच केंद्रीय विद्यालयों की ओर से अभिभावकों को स्कूलों के खोलने का पूरा प्लान भेजा है। फिलहाल केंद्रीय विद्यालयों से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि किसी भी बच्चे पर स्कूल आने का कोई दबाव नहीं होगा। हालांकि कोरोना के तेजी से बढते संक्रमण को देखते प्रस्ताव ज्यादातर अभिभावकों को भा नहीं रहा है।

21 से गैर शैक्षणिक कार्यो के लिए खोले जा सकते हैं स्कूल
30 सितंबर तक है शैक्षणिक कार्यो पर रोक
50 फीसद स्टाफ को बुलाने की इजाजत दी गई है

केवीएस का प्रस्ताव

’>>अभिभावक स्वेच्छा से बच्चों को स्कूल भेजें।

’>>अभिभावक ही बच्चों को विद्यालय लाएंगे और ले जाएंगे।

’>>मास्क-सैनिटाइजर अनिवार्य होगा

’>>11वीं व 12 वीं के छात्रों को सोमवार और मंगलवार आना होगा।

’>>10वीं के छात्र बुधवार व गुरुवार को आएंगे।

’>>9वीं के बच्चे शुक्रवार शनिवार को आएंगे।

’>>राज्यों की सहमति के बाद ही केंद्र सरकार देगी इजाजत

’>>अभिभावकों से मांगी सहमति, खुद की जवाबदेही पर भेजने होंगे बच्चे

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के इंटरमीडिएट वाणिज्य में भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू हो गया है। नए शैक्षिक सत्र की कक्षा 11 में नए पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरू होगी। बता दें कि कुछ माह पहले ही अंग्रेजी विषय में भी एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाया गया था और कक्षा नौ से पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई अगले सत्र से होगी। शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है।


यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर हो रही है। कई विषयों में पहले ही यह पाठ्यक्रम लागू है तो अन्य विषयों में बोर्ड प्रशासन बदलाव करा रहा है। इस वर्ष हाईस्कूल में अंग्रेजी, व इंटर में अंग्रेजी व वाणिज्य विषय का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी की तर्ज पर किया गया है। इसका प्रस्ताव काफी समय पहले भेजा गया था, कक्षा 9 व 11 के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बदलाव हो चुका है।

अब शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है। असल में, वाणिज्य वर्ग में रेगुलेशन में संशोधन होना था इसलिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कार्य पूरा हो रहा है और पढ़ाई चल रही है इसलिए वाणिज्य वर्ग का नया पाठ्यक्रम नए सत्र से लागू होगा।


पहले का वाणिज्य पाठ्यक्रम

एक अनिवार्य विषय : हिंदी या सामान्य हिंदी
बहीखाता व लेखाशास्त्र
व्यापारिक संगठन व पत्र व्यवहार

निम्न में से कोई दो विषय
अर्थशास्त्र तथा वाणिज्य भूगोल
अधिकोषण तत्व
औद्योगिक संगठन
गणित तथा प्रारंभिक सांख्यिकी
कंप्यूटर
बीमा सिद्धांत एवं व्यवहार
मानविकी वर्ग के विषयों में से कोई एक विषय
क्रम एक अर्थशास्त्र व वाणिज्य भूगोल लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से अर्थशास्त्र विषय नहीं ले सकेंगे।
क्रम पांच कंप्यूटर विषय लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से कंप्यूटर विषय नहीं ले सकेगा।


अब ये पाठ्यक्रम
अनिवार्य विषय
1. सामान्य हिंदी
2. व्यवसाय अध्ययन
3. लेखाशास्त्र

ऐच्छिक विषय निम्न में से कोई दो लेने होंगे
1. अर्थशास्त्र
2. अंग्रेजी
3. गणित
4. कंप्यूटर