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Friday, November 27, 2020

हाथरस : योगा एवं ICT आधारित कक्षा शिक्षण प्रतियोगिता के सम्बन्ध में

हाथरस : योगा एवं ICT आधारित कक्षा शिक्षण प्रतियोगिता के सम्बन्ध में



हाथरस : दिनाँक 28 नवम्बर को डायट प्राचार्य द्वारा प्रस्तावित ऑनलाइन समीक्षा बैठक में प्रतिभाग करने हेतु आदेश एवं एजेण्डा जारी, देखें

हाथरस : दिनाँक 28 नवम्बर को डायट प्राचार्य द्वारा प्रस्तावित ऑनलाइन समीक्षा बैठक में प्रतिभाग करने हेतु आदेश एवं एजेण्डा जारी, देखें


 

हाथरस : बीएलओ / सुपरवाइजर बने शिक्षक/शिक्षिकाओं के सीसीएल / मेडिकल अवकाश आवेदन के सम्बन्ध में

हाथरस : बीएलओ / सुपरवाइजर बने शिक्षक/शिक्षिकाओं के सीसीएल / मेडिकल अवकाश आवेदन के सम्बन्ध में



माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वर्ष 2021 की हाईस्कूल /इण्टरमीडिएट परीक्षाओं हेतु परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा कराये जाने हेतु नीति निर्धारण के सम्बन्ध में

माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित वर्ष 2021 की हाईस्कूल /इण्टरमीडिएट परीक्षाओं हेतु परीक्षा केन्द्रों का निर्धारण ऑनलाइन प्रक्रिया द्वारा कराये जाने हेतु नीति निर्धारण के सम्बन्ध में।

यूपी बोर्ड : कोरोना के चलते परीक्षा केंद्रों की संख्या करीब दोगुनी होने के आसार, परीक्षा में दिव्यांग छात्र-छात्राओं को स्वकेंद्र

यूपी बोर्ड परीक्षा अप्रैल से पहले संभव नहीं, नए कालेजों में संसाधन बड़ी चुनौती
 
प्रयागराज: यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए केंद्र फरवरी के पहले पखवारे में तय होंगे। उसी समय इंटर की प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी है। नीति जारी होने में देरी से केंद्र बनने में समय लगेगा। इससे अब अप्रैल के पहले परीक्षा शुरू हो पाने के आसार नहीं है। दिसंबर में कार्यक्रम पर मंथन जरूर शुरू हो रहा है।

परीक्षा में उन सभी बालिका विद्यालयों को अनिवार्य रूप से केंद्र बनाया जाएगा, जो केंद्र बनने की शर्ते पूरा करते हैं। इसमें पहले राजकीय फिर एडेड व अंत में वित्तविहीन विद्यालय का भेद नहीं होगा। यह क्रम सिर्फ बालक विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाने में देखा जाएगा। केंद्र बनने वाले बालिका विद्यालयों में बालक परीक्षार्थी आवंटित न किए जाएं, बल्कि पांच किमी की परिधि में आने वाले उन विद्यालयों की बालिकाओं को यहां परीक्षा देने का मौका दिया जाए, जो केंद्र नहीं बन सके हैं। 40 फीसद दिव्यांग छात्र-छात्रओं को यदि उनका विद्यालय केंद्र बना है तो स्वकेंद्र की सुविधा मिलेगी।

कोरोना संक्रमण ने केवल स्कूलों की पढ़ाई ही प्रभावित नहीं की है, बल्कि यूपी बोर्ड की अहम परीक्षा तक में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। बोर्ड ने पिछले साल ही 50 लाख से अधिक परीक्षार्थियों का इम्तिहान महज 7,786 केंद्रों पर कराकर रिकार्ड बनाया था। यह रिकार्ड इस वर्ष ही टूटने जा रहा है, क्योंकि परीक्षार्थियों के हित में शारीरिक दूरी का अनुपालन करने में केंद्रों की संख्या करीब दोगुनी होने के आसार हैं। केंद्र निर्धारण नीति जारी हो चुकी है और अब 28 हजार माध्यमिक कालेजों में से मानक वाले केंद्रों की तलाश शुरू होगी।

केंद्रों पर तय मानक के अनुरूप संसाधन हो और उनका पर्यवेक्षण आसानी से सके इसके लिए केंद्रों की संख्या कम करने की रणनीति बनी। हालांकि, हर बार की परीक्षा नीति में इसका उल्लेख रहता है कि पहले राजकीय फिर एडेड और अंत में वित्तविहीन कालेजों को अवसर दिया जाए। इसका सही से अनुपालन न होने से 2017 तक केंद्रों की संख्या अधिक रही। उसके बाद से लेकर पिछले वर्ष तक लगातार केंद्र कम होते गए। इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से 36 वर्ग फिट की दूरी रखनी है इसलिए केंद्रों की संख्या दोगुनी होने के आसार हैं, क्योंकि परीक्षार्थियों की संख्या पिछले वर्ष से कुछ कम है।

बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि हाईस्कूल परीक्षा 2021 के लिए 29 लाख 85 हजार 973 संस्थागत, 17 हजार 498 व्यक्तिगत सहित कुल 30 लाख तीन हजार 471 व इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 के लिए 24 लाख 97 हजार 541 संस्थागत व 73 हजार 69 व्यक्तिगत सहित 25 लाख 70 हजार 600 ने परीक्षा फार्म भरा है। हाईस्कूल व इंटर में 55 लाख 74 हजार 71 परीक्षार्थी हैं।


नए कालेजों में संसाधन बड़ी चुनौती

बोर्ड की परीक्षा में जिन नए कालेजों को केंद्र बनाया जाएगा। वहां वायस रिकार्डर युक्त सीसीटीवी कैमरा, रिकार्डिग के लिए डीवीआर होना जरूरी है। वेबकास्टिंग से मानीटरिंग किए जाने के लिए राउटर डिवाइस व हाईस्पीड इंटरनेट कनेक्शन के साथ ही डीवीआर में रिकार्डिग क्षमता 30 दिनों की होना बड़ी चुनौती होगी।


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा-2021 की नीति के तहत 40 फीसद स्थायी दिव्यांग छात्र-छात्रओं को स्वकेंद्र मिलेगा। इसके लिए सीएमओ से प्रमाणित दिव्यांग प्रमाणपत्र देना होगा। स्वकेंद्र नहीं होने की दशा में करीबी स्कूल आवंटित होगा। यदि बालिका व दिव्यांग को पांच किलोमीटर की परिधि में केंद्र देना संभव न हो तो विकल्प सहित प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा निदेशक के माध्यम से शासन को भेजा जाएगा।


ग्रामीण क्षेत्रों में हाईस्कूल व इंटर की संस्थागत व व्यक्तिगत बालिकाओं को यदि उनके विद्यालय (अग्रसारण केंद्र) को ही परीक्षा केंद्र बनाया गया है तो उन्हें संबंधित विद्यालय स्वकेंद्र की सुविधा के तहत आवंटित हो। जहां स्वकेंद्र की सुविधा न दी जा सके वहां अधिकतम पांच किलोमीटर में ही परीक्षा देने का अवसर दिया जाए। जिन विद्यालयों को स्वकेंद्र बनाया जाएगा, वहां अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापक के साथ ही 50 प्रतिशत स्टाफ बाह्य कालेजों का भी रखा जाए।

न्यूनतम व अधिकतम का फॉर्मूला

नकल रोकने को राजकीय विद्यालयों में 10 किलोमीटर की परिधि में आने वाले न्यूनतम गुणांक के वित्तविहीन स्कूलें के परीक्षार्थियों का आवंटन होगा। इसी तरह से एडेड विद्यालयों में भी आवंटन होगा। वहीं, वित्तविहीन विद्यालयों में उच्च गुणांक वाले वित्तविहीन और न्यूनतम गुणांक वाले परीक्षार्थियों का आवंटन होगा।


यूपी में माध्यमिक से जुड़े 6 से 8वीं तक के स्कूल खोलने से प्रधानाचार्यों ने किया साफ इनकार

यूपी में माध्यमिक से जुड़े 6 से 8वीं तक के स्कूल खोलने से प्रधानाचार्यों ने किया साफ इनकार


यूपी बोर्ड के कक्षा 6 से 8वीं तक के स्कूलों को 15 दिसंबर से खोलने से प्रधानाचार्यों ने इनकार कर दिया है। प्रधानाचार्यों ने जिला विद्यालय निरीक्षक को रिपोर्ट भेजकर कहा है कि 9 से 12 वीं तक स्कूल खुल रहे हैं। उसमें भी उपस्थित होने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या काफी कम है। वहीं, अभी तक परिषदीय विद्यालय भी नहीं खुल सके हैं। प्रधानाचार्यों ने कहा है कि कोरोना के मामले दोबारा बढ़ने लगे हैं। ऐसे में 15 दिसंबर से जूनियर हाईस्कूल न खोले जाएं।


स्कूल खोलने के संबंध में बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने 24 नवंबर को सभी डीआईओएस को पत्र जारी कर फीडबैक मांगा था। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए अधिकांश कॉलेजों के प्रधानाचार्यों ने स्कूल न खोलने की डीआईओएस को रिपोर्ट सौंपी। डीआईओएस ने यह रिपोर्ट बोर्ड सचिव को सौंप दी। बोर्ड सचिव ने इस रिपोर्ट को शासन के पास भेज दिया है। ऐसे में अभी स्कूल खुलना संभव नहीं है। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को लिखे पत्र में अपेक्षा की थी कि कक्षा छह से आठ तक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से बात कर विद्यालय खोलने या न खोलने को लेकर उनकी राय जानी जाए। उसी क्रम में जिला विद्यालय निरीक्षक की तरफ से सभी स्कूलों से फोन पर संपर्क किया गया।


डीआईओएस ने बताया कि अनलॉक-5 की गाइडलाइन में कक्षा नौ से 12वीं तक के स्कूल खोलने के निर्देश दिए गए। सभी विद्यालय खोल भी दिए गए हैं। उनमें भौतिक रूप से अध्यापन कार्य किया जा रहा है। अब कक्षा छह से आठ तक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से संपर्क कर उनकी राय ली गई लेकिन 70 प्रतिशत प्रधानाध्यापकों की राय है कि 15 दिसंबर से स्कूल न खोले जाएं। इसकी जानकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव को भेज दी गई है।


माध्यमिक के कक्षा 6 से 8 तक के स्कूलों के 70 फीसदी प्रधानाध्यापक नहीं चाहते स्कूल खुले

 प्रयागराज : कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए कक्षा छह से आठ तक के स्कूलों के 70 फीसद प्रधानाध्यापक विद्यालय खोलने को राजी नहीं हैं। उनका कहना है कि अभी परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। दोबारा कोरोना की लहर आती दिख रही है। ऐसे में विद्यार्थियों को स्कूल बुलाकर अध्यापन कार्य करना सुरक्षित नहीं है। सभी प्रधानाध्यापकों का कहना है कि सुरक्षा के मद्देनजर जरूरी है कि ऑनलाइन कक्षाएं ही चलती रहें। 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखा था। उसमें अपेक्षा की थी कि कक्षा छह से आठ तक के विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों से बात कर विद्यालय खोलने या न खोलने को लेकर उनकी राय जानी जाए। आगे शासन के निर्देशों के अनुसार कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल सभी शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों को ऑनलाइन कक्षाओं को और बेहतर तरीके से संचालित करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसके लिए सभी अभिभावकों से भी सहयोग मांगा जा रहा है।

पॉलीटेक्निक में दाखिले के कॉउंसलिंग को बढ़ाकर किया 10 चरण तक।

पॉलीटेक्निक में दाखिले के कॉउंसलिंग को बढ़ाकर किया 10 चरण तक।

लखनऊ : एआईसीटीई द्वारा दाखिला की तिथि बढ़ाने के बाद मिला एक और अवसर


पॉलीटेक्निक में दाखिले के लिए छात्रों को कॉउंसिलिंग में एक और अवसर दिया जाएगा। अब तक नौ चरण तक कॉउंसिलिंग कराने की घोषणा हुई थी, लेकिन एआईसीटीई द्वारा 5 दिसंबर तक दाखिला देने की अनुमति मिलने के बाद अब कॉउंसिलिंग 10 चरण तक होगी। अभी नौवें चरण की कॉउंसिलिंग जारी है। इस संबंध में सभी जानकारियां संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की वेबसाइट www.jeecup.nic.in पर उपलब्ध करा दी गई हैं।


परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि पहले एआईसीटीई द्वारा दाखिले की अंतिम तिथि 30 नवंबर निर्धारित थी। इससे पहले कॉउंसिलिंग खत्म करनी थी। इसलिए नौ चरणों तक कॉउंसिलिंग की घोषणा की गई थी। अब एआईसीटीई ने दाखिले की अंतिम तिथि बढ़ाकर पांच दिसंबर कर दी है। इसलिए कॉउंसिलिंग भी बढ़ाकर 10 चरण तक कर दी गई है। 10वें चरण के लिए पंजीकरण प्रक्रिया 27 से 30 नवंबर तक चलेगी। जिन छात्रों को नौ चरण तक की कॉउंसिलिंग में दाखिला नहीं मिला है वे दो और तीन दिसंबर को पंजीकरण कराएंगे। इन्हीं तिथियों पर कॉलेज चयन किया जाएगा और चार को सीट आवंटन का परिणाम जारी होगा। 

छात्रों को पांच दिसंबर तक प्रमाणपत्र सत्यापन और फीस जमा कर दाखिले की प्रक्रिया पूरी कर लेनी होगी। नौवें चरण के लिए सीट लॉक का आज अंतिम दिन
सचिव ने बताया कि नौवें चरण की कॉउंसिलिंग के लिए सीट लॉक करने की अंतिम तिथि 27 नवंबर है। सीट आवंटन का परिणाम 28 नवंबर को सुबह नौ बजे घोषित होगा। छात्रों को 28 से 30 नवंबर तक संस्थाओं में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। आठवें चरण की कॉउंसिलिंग के बाद कुल 238849 सीटों के सापेक्ष 106685 सीटों पर प्रवेश हुआ है।

Thursday, November 26, 2020

फतेहपुर : यूपीटीटीआई में होगी स्वेटरों की जांच, शासन के निर्देश पर जनपद भर से लिये गए स्वेटरों के सैम्पल

फतेहपुर : यूपीटीटीआई में होगी स्वेटरों की जांच, शासन के निर्देश पर जनपद भर से लिये गए स्वेटरों के सैम्पल।

फतेहपुर : हुसैनगंज क्षेत्र से विधायक और प्रदेश सरकार में खाद्य रसद एवं नागरिक आपूर्ति राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह की शिकायत के बाद परिषदीय विद्यालयों में वितरित किए गए स्वेटरों की पड़ताल शुरू हो गई है। जिले भर से स्वेटरों के सैंपल एकत्र कराए गए हैं और इन्हें जांच के लिए शासन के निर्देश पर जिला प्रशासन ने उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (यूपीटीटीआई) कानपुर भेजा है। स्वेटर की गुणवत्ता पर खुद राज्यमंत्री की ओर से सवाल उठाए जाने के बाद बेसिक शिक्षा विभाग और आपूर्ति संस्था में हड़कंप मचा है।


अमर उजाला ने 22 नवंबर को राज्यमंत्री की शिकायत को आधार बनाते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। डीएम ने इस मुद्दे पर खागा, फतेहपुर और बिंदकी तीनों उपजिलाधिकारियों से हर ब्लॉक से तीन-तीन स्वेटरों के सैंपल मंगवा लिए हैं। अब स्वेटरों की गुणवत्ता की जांच की जानी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेंद्र सिंह ने बताया कि मानक के मुताबिक स्वेटर एक्रेलिक के बने होने चाहिए। वहीं, इस मसले पर जिलाधिकारी संजीव सिंह ने बताया कि सभी ब्लॉकों से स्वेटरों के नमूने लेकर उत्तर प्रदेश टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट (यूपीटीटीआई) कानपुर में भेजे गए हैं। वहां की लैब रिपोर्ट आते ही शासन को भेजी जाएगी। डीएम ने बताया कि लैब की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। स्वेटरों की क्वालिटी यदि घटिया निकली तो आपूर्ति करने वाली संस्था और जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि राज्यमंत्री रणवेंद्र प्रताप उर्फ धुन्नी सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर परिषदीय स्कूलों में वितरित किए गए स्वेटरों की गुणवत्ता घटिया होने की शिकायत की थी। मुख्यमंत्री को खराब गुणवत्ता वाले स्वेटरों के नमूने भी दिए थे। प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन ने जिला प्रशासन को इस विषय की जांच कराने के निर्देश दिए थे।


आस्था ट्रेडर्स रायबरेली से खरीदे गए स्वेटर

फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग ने दो लाख 44 हजार 282 स्वेटरों की खरीद की थी। चार साइजों में आस्था ट्रेडर्स रायबरेली से 174 रुपये 90 पैसे प्रति स्वेटर की कीमत दर से खरीदे गए स्वेटरों का वितरण भी लगभग पूरा हो चुका है आपूर्ति करने वाले प्रतिष्ठान ने जेम पोर्टल के माध्य से टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कर ब्लॉकवार छात्र संख्या के आधार पर स्वेटरों की आपूर्ति की है। कक्षा एक और दो के लिए स्माल साइज, कक्षा तीन और चार के लिए मीडियम साइज, कक्षा पांच और छह के लिए एक्स टू साइज और डबल एक्स टू साइज के स्वेटर खरीदे गए थे।

फतेहपुर : SMC गठन हेतु विकासखण्डवार नोडल/ प्रभारी अधिकारी एवं तिथियां घोषित, क्लिक करके देखें विस्तृत निर्देश।

फतेहपुर : SMC गठन हेतु  विकासखण्डवार नोडल/ प्रभारी अधिकारी एवं तिथियां घोषित, क्लिक करके देखें विस्तृत निर्देश।

यूपी बोर्ड के एक केंद्र पर दो पालियों में अधिकतम आठ सौ विद्यार्थी दे सकेंगे परीक्षा, दिशा-निर्देश जारी


यूपी बोर्ड के एक केंद्र पर दो पालियों में अधिकतम आठ सौ विद्यार्थी दे सकेंगे परीक्षा, दिशा-निर्देश जारी


★   कोरोना के कारण एक विद्यार्थी को 36 वर्ग फीट जगह देनी होगी, 

★   न्यूनतम 150 विद्यार्थी होंगे आवंटित, नौ फरवरी को जारी होगी सूची


लखनऊ : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की वर्ष 2021 की परीक्षा में कोरोना प्रोटोकॉल का विशेष ख्याल रखा जाएगा। परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उनमें कोरोना से बचाव के उपाय विशेष रूप से शामिल हैं। एक परीक्षा केंद्र पर दो पालियों में अधिकतम 800 विद्यार्थी और न्यूनतम 150 विद्यार्थी परीक्षा दे सकेंगे। शारीरिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन हो, इसके लिए प्रत्येक विद्यार्थी को 36 वर्ग फीट जगह बैठने के लिए दी जाएगी। नौ फरवरी 2021 को परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। बीते साल के मुकाबले इस वर्ष परीक्षा केंद्रों का बढ़ना तय है।


अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला की ओर से बुधवार को परीक्षा केंद्र निर्धारण के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए। कोरोना संक्रमण को देखते हुए परीक्षा केंद्रों में दो गज की शारीरिक दूरी के नियम का पालन कराने के लिए स्कूल में बैठने की कितनी जगह है, इसे देखा जाएगा। परीक्षा केंद्रों में नकल न हो इसके लिए सीसी कैमरे और वॉयस रिकार्डर लगाए जाएंगे। यही नहीं परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में राजकीय स्कूलों व एडेड स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी और इसके बाद वित्तविहीन स्कूल केंद्र बनाए जाएंगे।

डीएलएड : पेपर लीक में निरस्त परीक्षा दुबारा हुई सम्पन्न


डीएलएड : पेपर लीक में निरस्त हुई परीक्षा दुबारा सम्पन्न


प्रयागराज। पेपर आउट होने के मामले में निरस्त की गई डीएलएड कौ परीक्षा बुधवार को दोबारा आयोजित की गई। इस परीक्षा के दौरान अतिरिकत सतर्कता बरती गई। परीक्षा केंद्रों पर निगरानी बढ़ा दी गई। परीक्षा पूरी होने के बाद अफसरों ने राहत की सांस ली डीएलएड गणित विषय को छह नवंबर को आयोजित परीक्षा में पेपर आउट हो गया था।


 पेपर आउट होने की खबर आने के बाद काफी हडक़ंप मचा और सात नवंबर को गणित की परीक्षा निरस्त कर दी गई। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रदेश भर से 28 लाख अभ्यर्थी पंजीकृत थे। 13 नवंबर को परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से विज्ञप्ति जारी कर पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गई, जिसमें कहा गया था कि पुनः परीक्षा 25 नवंबर को पूर्व निर्धारित केंद्रों में सुबह 10 से 11 बजे तक आयोजित की जाएगी।

अनुदेशकों के नवीनीकरण मामले में गोरखपुर के डीएम व BSA को अवमानना का नोटिस

अनुदेशकों के नवीनीकरण मामले में गोरखपुर के डीएम व BSA को अवमानना का नोटिस


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिलाधिकारी गोरखपुर के विजयेन्द्र पांडियन और BSA को अबमानना का नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने उनको अदालत के आदेश का पालन करने के लिए एक और अवसर देते हुए कहा कि यदि एक माह में आदेश का पालन कर हलफनामा नहीं देते हैं तो उनको तलब कर अवमानना का आरोप निर्मित किया जाएगा। 


कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया अवमानना का केस बनता है। यह आदेश न्यायमूर्ति वी के बिड़ला ने अनुदेशक प्रभु शंकर व छह अन्य की अवमानना याचिका पर दिया है। इससे पहले कोर्ट ने डीएम व बीएसए को याचीगण को अनुदेशक पद पर कार्य करने देने तथा मानदेय देने का निर्देश दिया था। याचियों का कहना है कि अंशकालिक अनुदेशक  पर आठ साल कार्य करने के बाद यह कहते हुए नवीनीकरण करने से इंकार कर दिया गया कि स्कूल में 100 से कम बच्चे होने के कारण जरूरत नहीं है। कोर्ट ने निर्धारित मानदेय से कम भुगतान करने को चपरासी के न्यूनतम बेतन से कम भुगतान को शोषण माना था और सरकार से जवाब मांगा है। याचिका लंबित हैं।

विद्यालय खुलने के बाद ठप हुई बच्चों की पढ़ाई, परिषदीय स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई पटरी से उतरी

विद्यालय खुलने के बाद ठप हुई बच्चों की पढ़ाई, परिषदीय स्कूलों में चल रही ऑनलाइन पढ़ाई पटरी से उतरी


शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों में डिजिटल संसाधनों की उपलब्धता में भारी अंतर पर हाईकोर्ट की चिंता ने एक बार फिर इस समस्या की ओर सबका ध्यान खींचा है। लॉकडाउन लगने के बाद से सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों ने तो पढ़ाई-लिखाई का ऑनलाइन तौरतरीका अपना लिया लेकिन सरकारी स्कूलों में डिजिटल शिक्षा का लाभ बमुश्किल एक तिहाई बच्चों को भी नहीं मिल सका। हालत यह है कक्षा एक से आठ तक परिषदीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों के जुलाई में खुलने के बाद जो थोड़ी बहुत पढ़ाई हो रही थी वह भी पटरी से उतर गई। सरकारी स्कूलों में 25 से 30 प्रतिशत बच्चों को ही वर्तमान में ऑनलाइन पढ़ाई का मिल पा रहा है।


मार्च से लेकर जून अंत तक शिक्षकों ने व्हाटसग्रुपों पर बच्चों को जोड़कर कक्षाएं चलाईं। बच्चों को होमवर्क देना, प्रतियोगिताएं करवना जैसी गतिविधयां चल रही थी।लेकिन जब शिक्षकों को स्कूल बुलाया जाने लगा तो वह व्हाट्सएप ग्रुपों पर निष्क्रिय हो गए। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी अध्यापकों को गांवों में भेजकर बच्चों को छोटे-छोटे समूह में पढ़वा सकते थे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 


कुछ शिक्षक व्हाट्सएप ग्रुप से पढ़ाई करा रहे हैं लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। ऐसी ही स्थिति माध्यमिक विद्यालयों में है। यूपी बोर्ड के 1079 स्कूलों में पंजीकृत कक्षा 9 से 12 तक के 418888 छात्र-छात्राओं में से 58 हजार से अधिक बच्चे ऐसे हैं जिनके पास न तो टेलीविजन है और न ही  स्कूल खुले एक महीने से अधिक हो चुके हैं लेकिन एक तिहाई बच्चे भी स्कूल नहीं आ रहे हैं।


दीक्षा एप, रीड अलांग एप आदि के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है |सभी स्कूलों में व्हाट्सग्रुप बने हुए हैं. स्मार्टफोन और इंटरनेट आदि की सुविधाएं न होने के कारण 30-35 प्रतिशत बच्चे ही इससे जुड़ सके हैं | -डॉ . विनोद मिश्र, जिला समन्वयक प्रशिक्षण समग्र शिक्षा अभियान

माध्यमिक शिक्षा से जुड़े प्रदेश भर के 6 से 8 तक के विद्यालय खोलने की तैयारी, DIOS से मांगी गई रिपोर्ट

माध्यमिक शिक्षा से जुड़े प्रदेश भर के 6 से 8 तक के विद्यालय खोलने की तैयारी, DIOS से मांगी गई रिपोर्ट


प्रयागराज : प्रदेशभर के कक्षा छह से लेकर आठ तक के विद्यालय भी खोलने की तैयारी है। यूपी बोर्ड सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। पत्र में कहा गया है कि इन विद्यालयों को खोलने की अपेक्षा की गई है। सभी कोरोना की स्थिति का आंकलन करते हुए रिपोर्ट भेजें।


बोर्ड सचिव ने 23 नवंबर को सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से उनके जिलों में कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट मांगी थी। असल में, लखनऊ जिले में एक कालेज में दो विद्यार्थी संक्रमित मिले थे, इस पर सभी जिलों से सूचना मांगी गई। कालेजों में कोरोना जांच का इंतजाम नहीं है, ऐसे में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक इस संबंध में स्पष्ट सूचना नहीं दे सके। उन्हें अब एक सप्ताह का अवसर दिया गया है।


यूपी बोर्ड की परीक्षा नीति जल्द : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा 2021 मार्च व अप्रैल में प्रस्तावित है। बोर्ड प्रशासन ने परीक्षा केंद्र बनाने के लिए शिक्षा निदेशक माध्यमिक को परीक्षा नीति का प्रस्ताव भेजा था। निदेशक की ओर से जल्द ही नीति जारी होने की उम्मीद है। उसके बाद केंद्र निर्धारण कार्य शुरू होगा और दिसंबर के अंत तक परीक्षा कार्यक्रम जारी हो सकता है, ताकि उसी के अनुरूप सभी छात्र-छात्रएं तैयारी तेजी से कर सकें।

Wednesday, November 25, 2020

फतेहपुर : तम्बाकू मुक्त शैक्षिक संस्थानों (TOFEI) पर बेबीनार के आयोजन के सम्बन्ध में

फतेहपुर : तम्बाकू मुक्त शैक्षिक संस्थानों (TOFEI) पर बेबीनार के आयोजन के सम्बन्ध में।

फतेहपुर : स्कूलों को दिया बिजली विभाग ने अंधेरा, परिषदीय स्कूलों में करेक्शन को दिए गए 5.32 करोड़ दबा गया बिजली विभाग।

फतेहपुर : स्कूलों को दिया बिजली विभाग ने अंधेरा, परिषदीय स्कूलों में करेक्शन को दिए गए 5.32 करोड़ दबा गया बिजली विभाग।

फतेहपुर :  बिजली विभाग के खेल न्यारे हैं। ताजा मामला बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा है। जिले के 1,550 परिषदीय विद्यालयों में बिजली कनेक्शन, वायरिंग और बिजली उपकरण की व्यवस्था की हुई पड़ताल में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि बिजली विभाग इस मद में दी गई 5.32 करोड़ रुपये की धनराशि ही दबा गया। 1550 स्कूलों के लिए दी गई इस धनराशि से बिजली विभाग ने मात्र 227 में कनेक्शन किए और शेष 1323 स्कूलों को अपने हाल पर छोड़ दिया। यह स्थिति तब है जब बेसिक शिक्षा विभाग ने पहली किस्त 2008-09 में 851 स्कूलों में कनेक्शन के लिए 2 करोड़ 31 लाख 93 हजार 157 दे दी थी। आखिरी किस्त 2012-13 में 138 स्कूलों के लिए 38 लाख 65 हजार 254 रुपये की दी गई थी।


बेसिक शिक्षा विभाग ने 2008-09 से परिषदीय स्कूलों में बिजली कनेक्शन जोड़ने की मुहिम चलाई थी। इसके तहत पहले साल 851 स्कूल, दूसरे साल 2009 10 में 424 और फिर 37 स्कूल, 2011-12 में 100 स्कूल, 2012-13 में 138 स्कूलों में विजली कनेक्शन कराने के लिए एस्टीमेट धनराशि जमा की थी। इसके लिए प्रति स्कूल 26,988 रुपये के हिसाब से धनराशि जमा की गई थी। इसमें प्रति स्कूल 2200 रुपये कनेक्शन शुल्क, 1788 रुपये स्कूल में वायरिंग और 7500 रुपये पंखा और ट्यूबलाइट आदि सामान की खरीदारी के लिए बिजली विभाग को पैसा दिया गया था।


2008-09 से 2012-13 के मध्य इन चार सालों में किस्तों में जमा की इस भारी भरकम धनराशि से 1550 परिषदीय स्कूलों में से सिर्फ 227 में कनेक्शन हुए। बाकी स्कूलों अपने हाल पर छोड़ दिए गए।

बिजली कनेक्शन में हो रही देरी पर बिजली विभाग ने तब अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी लेकिन बेसिक शिक्षा अधिकारी जैसे-जैसे बदलते गए मामला ठंडे बस्ते में जाता रहा। 2012 में तत्कालीन बीएसए आरपी यादव के तबादले के बाद फिर किसी भी बीएसए ने इस धनराशि के उपयोग को लेकर पता करना मुनासिब नहीं समझा। ऐसे में अब यह धनराशि बिजली विभाग के खजाने में ही गुम हो गई।

पिछले दिनों जब बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों में बिजली कनेक्शन के लिए फिर से पड़ताल कराई तो सालों से दबा यह मामला खुलकर सामने आ गया। बीएसए अब बिजली विभाग से हिसाब मांगने की तैयारी कर रहे हैं। जल्द बीएसए की तरफ से अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजा जाएगा।

12 साल बाद भी बिजली विभाग परिषदीय स्कूलों में न तो कनेक्शन कर सका और न ही वायरिंग व बिजली उपकरण ही लगा सका। 5.32 करोड़ रुपये का भारी भरकम बजट ही बिजली विभाग दबा गया। यह बेहद गंभीर मामला है। पड़ताल में सारी जानकारी सामने आई है। बिजली विभाग के अधीक्षण अभियंता को पत्र भेजकर इस बारे में जानकारी ली जाएगी। - शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए।

जितनी एस्टीमेट धनराशि बेसिक शिक्षा विभाग ने जमा की होगी, उतने कनेक्शन जोड़े गए होंगे। अगर सभी कनेक्शन नहीं जोड़े गए हैं, तो बेसिक शिक्षा विभाग जमा धनराशि की रसीद प्रस्तुत करके शेष स्कूलों के कनेक्शन जुड़वा सकता है। मामला काफी पुराना है, बिना किसी साक्ष्य के कुछ सही बता पाना मुश्किल है।

आनंद कुमार शुक्ला, अधीक्षण अभियंता, बिजली विभाग।

हाथरस : ऑनलाइन समीक्षा बैठक दिनाँक 25 नवम्बर के सम्बन्ध में

हाथरस : ऑनलाइन समीक्षा बैठक दिनाँक 25 नवम्बर के सम्बन्ध में




यूपी : राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण

UP : विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज को इकाई मानकर लागू होगा आरक्षण, अध्यादेश को कैबिनेट की मंजूरी


राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा।


लखनऊ । उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और एडेड डिग्री कॉलेजों को अब इकाई मानकर शिक्षकों के पदों पर भर्ती में आरक्षण लागू किया जाएगा। वहीं राजकीय डिग्री कॉलेजों में इसे सभी संस्थाओं को मिलाकर एक इकाई मानकर आरक्षण लागू होगा। अभी तक विभाग स्तर पर शिक्षक के खाली पदों पर आरक्षण लागू होने पर पांच से कम पद होने पर एससी कैटेगरी के अभ्यर्थियों के लिए सीट नहीं आरक्षित हो पा रही थी और उन्हें नुकसान हो रहा था। अब ऐसा नहीं होगा।


केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षण व्यवस्था में किए गए बदलाव की तर्ज पर प्रदेश में भी इसे लागू किया जा रहा है। वहीं आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी के लोगों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में उप्र शैक्षिक संस्थान (शैक्षिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी गई। अब राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह लागू हो जाएगा।


वहीं विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में इसके विधेयक को पेशकर इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। फिलहाल अब विश्वविद्यालय व एडेड कॉलेज में विभिन्न विभागों में शिक्षकों के जितने पद होंगे उन्हें मिलाकर संस्था स्तर पर कुल पदों पर एक साथ आरक्षण लागू किया जाएगा। फिलहाल यह बदलाव अल्पसंख्यक संस्थाओं, उत्कृष्ट संस्थाओं, अनुसंधान संस्थाओं और राष्ट्रीय व सामरिक महत्व की संस्थाओं में लागू नहीं होगा।


उधर राज्य विश्वविद्यालय सहारनपुर को राजकीय महाविद्यालय पुंवारका की 5.91 एकड़ जमीन, भवन एवं परिसम्पत्तियां देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। अब इस कॉलेज के शिक्षकों को दूसरे कॉलेज में स्थानांतरित किया जाएगा। वर्तमान में विभिन्न कोर्सेज में पढ़ रहे विद्यार्थी पूर्व की तरह की अपनी पढ़ाई पूरी करेंगे और उन्हें चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ की ही डिग्री दी जाएगी। नए शैक्षिक सत्र 2021-22 से इस कॉलेज में नए दाखिले नहीं लिए जाएंगे।

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

राजधानी लखनऊ में बड़े बच्चों को थमाया जा रहा छोटे साइज का स्वेटर, वितरण में जमकर धांधली


लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो विभाग को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर स्वेटर बच्चों को थमाए जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा छह के बच्चों को कक्षा दो के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूर्ति की जा रही है।


शिक्षा विभाग के मुताबिक परिषदीय स्कूल करीब 1200 व पूर्व माध्यमिक स्कूल 640 हैं। कुल बच्चों की संख्या एक लाख 96 हजार है। विभाग का दावा है कि करीब 80 हजार स्वेटर किए जा वितरित किए जा चुके हैं। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमश: 26, 28 30 और 32 नंबर तक स्वेटर आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32, 34, 36 और 38 नंबर साइज आता है। गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। एक बच्चे के पिता ने बताया कि उनको 32 नंबर का स्वेटर दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं?


स्वेटर जिस एजेंसी से बंटवाए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चों की नाप से बहुत छोटे स्वेटरों की सप्लाई की जा रही है, जोकि उचित नहीं है। -विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


यह देखा जाएगा कि बीएसए ने आखिर किस साइज के स्वेटर ऑर्डर किए थे। अगर बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिए जा रहे हैं तो यह गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। - पीएन सिंह, एडी बेसिक


अगर ऐसा हुआ है तो इसके लिए खंड शिक्षाधिकारी जिम्मेदार हैं। बच्चों को किस साइज के स्वेटर लगेंगे, इसका ब्योरा खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराया गया है। खंड शिक्षाधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। - दिनेश कुमार, बीएसए



लखनऊ । बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो बच्चों को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर तैयार किए गए स्वेटर बच्चों को थमाये जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा 6 के बच्चों को कक्षा 2 के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूरी की जा रही है। स्पष्ट है कि इस बार भी स्वेटर वितरण में जमकर धांधली हुई है।


प्राथमिक विद्यालय विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमशः 26, 28 30 और 32 नंबर तक के स्वेटर साइज में आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32 (कॉमन), 34, 36, और 38 नंबर का स्वेटर साइज में आता है। मगर बेहद गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर मोहनलालगंज के एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा कक्षा सात में पड़ता है और उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज 32 नंबर है। इसी तरह कक्षा पांच में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता ने बताया कि उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज भी 32 नंबर ही है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे से आए साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं? क्या बड़े बच्चों के साइज के स्वेटर तैयार नहीं किए गए? या इसमें भी कोई बड़ी धांधली है।


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह के मुताबिक, स्वेटर खरीद कर बाटने की जिम्मेदारी जब शिक्षकों को दी जाती है तो सारे नियम सामने आ जाते थे, अब वही स्वेटर जिस भी एजेंसी से बटवाये जा रहे है उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चो की नाप से बहुत छोटे स्वेटर की सप्लाई की जा रही है, जो उचित नही है।


पैक लिफाफे में थमाया जा रहा है स्वेटर
बच्चों अभिभावकों की मानें तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वितरित किए जा रहा है स्वेटर पैक लिफाफे में स्वेटर थमा दिया जा रहा है। जबकि बच्चों के नाम का स्वेटर है य नहीं इसके लिए उन्हें पहना कर भी देखा जा सकता है। मगर जिम्मेदार सिर्फ स्वेटर के नाम पर औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे हैं।


क्‍या कहते हैं एडी बेसिक ? 
एडी बेसिक पीएन सिंह के मुताबिक, यह दिखवाया जाएगा। आखिर किस साइज के स्वेटर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आर्डर किए थे। अगर, बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिया जा रहा है तो यह बेहद गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।

शिक्षकों के रिक्त पद निरस्त कराने वाले DIOS पर होगी कार्रवाई, शासन को कार्रवाई के लिए लिखेगा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड।

शिक्षकों के रिक्त पद निरस्त कराने वाले DIOS पर होगी कार्रवाई, शासन को कार्रवाई के लिए लिखेगा माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड।


प्रयागराज : माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड उन जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) पर और सख्त हो गया है जो शिक्षकों की नियुक्ति में खेल कर रहे हैं। चयन बोर्ड ने पहले वेबसाइट पर विज्ञप्ति जारी करके रिक्त पदों का विज्ञापन निरस्त न करने का एलान किया। अब पत्र भेजने वालों पर कार्रवाई करने के लिए शासन को पत्र लिखने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया गया है कि डीआइओएस की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाना जरूरी है।


चयन बोर्ड की मंगलवार को वचरुअल बैठक हुई। इसमें कहा गया कि शासन ने तदर्थ शिक्षकों को विशेष महत्व देते हुए भर्ती में उनको शामिल करने के लिए विशेष छूट का निर्देश दिया है। अब विधिक राय लेने के बाद ही टीजीटी-पीजीटी का विज्ञापन जारी होगा और उसमें विशेष महत्व दिया जाएगा। बैठक में सदस्य डा. हरेंद्र राय व डा. दिनेश मणि त्रिपाठी ने कहा कि एक दिसंबर को स्नातक व शिक्षक विधान परिषद सदस्य का निर्वाचन है। उस दिन चयन बोर्ड का साक्षात्कार स्थगित करके अवकाश घोषित किया जाए और साक्षात्कार की तारीख बाद में घोषित कर दी जाए। इन मुद्दों पर चयन बोर्ड की ओर से समाचार लिखे जाने तक वेबसाइट पर औपचारिक सूचना जारी नहीं हुई है और न ही अधिकारियों की इसकी पुष्टि की है।


23 पदों का विज्ञापन नहीं होगा निरस्त : इंटरनेट मीडिया पर चयन बोर्ड के उप सचिव की ओर से एक पत्र वायरल हो गया है। यह पत्र शिक्षा निदेशक माध्यमिक को संबोधित है। कहा गया है कि निदेशक ने 11 नवंबर, 2020 को पत्र भेजकर 23 पदों का अधियाचन निरस्त करने की अपेक्षा की है, जबकि इन पदों को नए विज्ञापन में शामिल किया गया है। संशोधित विज्ञापन फिर जारी होना है इसलिए इन पदों का अधियाचन निरस्त नहीं हो सकता है, क्योंकि इससे विवाद बढ़ेंगे। ज्ञात हो कि नवंबर के पहले सप्ताह में इन पदों पर 2013 टीजीटी भर्ती के रिक्त पदों के सापेक्ष शिक्षा निदेशालय काउंसिलिंग कराकर 17 अभ्यर्थियों को कालेज आवंटित कर रहा है। अब इस मामले का निपटारा कोर्ट में होगा।

Tuesday, November 24, 2020

माध्यमिक कालेजों में छात्रों की उपस्थिति की एक माह की रिपोर्ट तलब


माध्यमिक कालेजों में छात्रों की उपस्थिति की एक माह की रिपोर्ट तलब


प्रयागराज : कोरोना की वजह से लंबे समय से बंद माध्यमिक कालेजों को पिछले माह खोला है, छात्र-छात्रओं की स्कूल आने की अनिवार्यता नहीं है, बल्कि अभिभावकों चाहें तो उन्हें भेजें। 


यूपी बोर्ड सचिव ने जिलों से एक माह की रिपोर्ट मांगी है कि उपस्थिति कैसी है। असल में बोर्ड प्रशासन परीक्षा कराने की तैयारी कर रहा है, इसमें यह रिपोर्ट खासी अहम रहेगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) आमतौर संबद्ध कालेजों का पाठ्यक्रम और परीक्षा ही कराता रहा है।

डीएलएड, बीटीसी प्रशिक्षुओं ने की नई शिक्षक भर्ती की मांग

डीएलएड, बीटीसी प्रशिक्षुओं ने की नई शिक्षक भर्ती की मांग



डीएलएड बीटीसी, प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके प्रशिक्षुओं के लिए नई शिक्षक भर्ती शुरू करने की मांग को लेकर स्कूल शिक्षा महानिदेशक एवं बेसिक शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंप।


डीएलएड 2017 बैच लगातार -ई शिक्षक भर्ती की मांग को लेकर सरकार से व प्रशासन से गुहार लगा रहा है। नई शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों ने जिले स्तर पर विधायक, सांसद को ज्ञापन देकर भर्ती की मांग की है। मांग करने वालों में विकास सिंह, शिवम श्रीवास्तव, अमित कुमार ,गणेश यदुवंशी, देव शुक्ला आदि शामिल रहे।

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम

अब परिषदीय स्कूलों के शिक्षक करेंगे अनुलोम-विलोम



★ क्लिक करके देखें संबंधित आदेश

📌  परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों हेतु "योगाभ्यास प्रतियोगिता" वर्ष 2020-21 के आयोजन के सम्बन्ध में 


प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को योग के प्रति जागरूक करने के लिए योगाभ्यास प्रतियोगिता कराई जाएगी। विभाग की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में शिक्षकों को अनुलोम-बिलोम, कपालभाती, भस्विका, उदगीथ, उज्जाई आसन करने होंगे।


यह प्रतियोगिता पंचायत स्तर से शुरू होकर ब्लाक एवं जिला स्तर के साथ प्रदेश स्तर पर कराई जाएगी। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा की ओर से खंड शिक्षाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया कि जिले के सभी पंचायतों के विद्यालयों में यह प्रतियोगिता 28 नवंबर को होगी। विकास खंड स्तर पर दो दिसंबर को बहादुरपुर, सैदाबाद, हंडिया, धनुपुर, प्रतापपुर, तीन दिसंबर को कप बहरिया, मऊआइमा, होलागढ़, सोरांव, चार दिसंबर को कौड़िहार-1, डरहार-2, चाका, जसरा, शंकरगढ़, नगर क्षेत्र एवं पांच दिसंबर को करछना, मेजा, उरुवा, मांडा, कोरांव, कौधियारा के बीआरसी पर प्रतियोगिता होगी।

31277 सहायक अध्यापक भर्ती में विद्यालय आवंटन में अनियमितता का आरोप

31277 सहायक अध्यापक भर्ती में विद्यालय आवंटन में अनियमितता का आरोप


प्रयागराज। परषिदीय विद्यालयों में हाल में नियुक्त 31277 सहायक अध्यापक भर्ती में विद्यालय आबंटन में अनियमितता का आरोप लगा है। पारदर्शिता के नाम पर ऑनलाइन विद्यालय आबंटन के सरकार के ले को नकार कर पक्षपातपूर्ण तरीके से विद्यालय आवंटन का आरोप शिक्षकों ने लगाया है। जिले के कौड़िहार-2 के प्राथमिक विद्यालय जलालपुर घोषी का है। यहां पद रिक्त नहीं होने के बाद भी एक शिक्षिका का पदस्थापन कर दिया गया।


आरोप लगा है कि इस विद्यालय में 2018-19 में 102 छात्र नामांकित थे , जहाँ एक प्रधानाध्यापक और 4 शिक्षिकाएं नियुक्त थे। इस दौरान स्थानीय स्तर पर समायोजन के समय छात्र / शिक्षक अनुपात ज्यादा बताकर वहां से एक शिक्षिका का समायोजन दूसरे विद्यालय में कर दिया गया। इस समय जब मात्र 92 बच्चे ही नामांकित हैं, उसी विद्यालय में एक नई शिक्षिका नियुक्त कर दी गई।

10वीं और 12वीं के यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों हेतु नवीन दिशा-निर्देश जारी, कैसे करें तैयारी?

10वीं और 12वीं के यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों हेतु नवीन दिशा-निर्देश जारी, कैसे करें तैयारी?


यूपी बोर्ड की 2021 हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में मंडल के कुल 419883 छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। इन बच्चों की बोर्ड परीक्षा तैयारी में कोई बाधा न हो और वह तैयारी पर पूरा फोकस कर सकें, इसके इसके लिए यूपी बोर्ड के सचिव मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक दिव्यकांत शुक्ल ने स्टडी, रिवीजन, हेल्थ एंड हेल्प नामक कार्ययोजना तैयार की है। सचिव का कहना कि कोविड -19 के कारण छात्र-छात्राओं की पढ़ाई में कोई कमी न हो, इसके लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने व्हाट्सएप, वर्चुअल क्लासेज, ई-ज्ञान गंगा, दीक्षा पोर्टल, स्वयंप्रभा चैनल जैसी कई योजनाएं चालू की गयी हैं। आवश्यकता पड़ने पर बच्चों की काउंसिलिंग के लिए भी आवश्यक उपाय किए जाएंगे। 




स्टडी प्लान 
  • सभी विद्यार्थी सर्वप्रथम एक समयसारिणी तैयार करें जिसमें पढ़ाई के साथ-साथ विराम का भी समय निश्चित करें और उसका पालन करने का प्रयास करें। 
  • जिस भी संसाधन से पढ़ाई करें, उनके नोट्स अवश्य बनाएं
  • जिस विषय में कोई बाधा हो, उस संबंध में अपने शिक्षकों, अभिभावक, मित्रों के साथ वार्ता करें
  • पाठ्यक्रम को छोटे टुकड़ों में बांटकर उन्हें एक-एक करके पढ़ें 

रिवीजन प्लान 
  • बोर्ड परीक्षा के लिए बचे हुए समय के दृष्टिगत समस्त विषयों का कम से कम दो बार रिवाइज करें
  • पिछले साल के प्रश्नपत्रों अथवा बाजार में उपलब्ध सैम्पल पेपर को हल करें
  • नियमित तौर पर अपना स्वमूल्यांकन करें
  • दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए स्वतः अलग रणनीति विकसित करें तथा उसपर विशेष ध्यान केन्द्रित करें
  • हेल्थ एंड हेल्प प्लानः
  • परीक्षाओं के डर को मन से निकाल कर सकारात्मक सोच के साथ तैयारी करें
  • कम से कम 8-9 घंटे की नींद अवश्य लें जिससे शरीर को आराम करने का समय मिले
  • कोरोना से बचाव के लिए भारत सरकार द्वारा जारी गाइडलाइन्स का अनुपालन सुनिश्चित करें
  • नियमित तौर पर पढ़ाई के बीच-बीच में कुछ खाते रहें जिससे शरीर में उर्जा बनी रहे
  • जंक फूड से बचने का प्रयास करें
  • अपने सहपाठियों से पढ़ाई में सहयोग लें तथा उनका भी यथासंभव सहायोग करें
  • शिक्षकों, अभिभावकों, मित्रों से नियमित रूप से जुड़े रहें तथा अपने मन की किसी भी परेशानी को उनके साथ साझा करें

यूपी : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम दिसबंर में होगा घोषित

यूपी : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा कार्यक्रम दिसबंर में होगा घोषित

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम दिसंबर में घोषित किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग प्रदेश में कोरोना संक्रमण की स्थिति का आंकलन करने के आधार पर कार्यक्रम तय करेगा। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाई स्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा - 2021 के लिए 45 लाख से अधिक विद्यार्थियों ने आवेदन किया है। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलों में नियमित पठन-पाठन सामान्य दिनों की तरह नहीं हो रहा है।


इधर, दीपावली के बाद प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ता जा रहा है। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के कुछ जिलों में संक्रमण बढ़ रहा है। लाखों विद्यार्थियों के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ परीक्षा कराने के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या अधिक रखनी होगी और परीक्षा के दिन भी बढ़ाने होंगे। विभाग के अधिकारी ने बताया कि विभाग दिसंबर में संक्रमण की स्थिति का आंकलन करने के बाद उसके आधार  परीक्षा का कार्यक्रम तय करेगा।


उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि दिसंबर में बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम दिसंबर में घोषित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा सरकार के समय में जुलाई-अगस्त में ही परीक्षा का कार्यक्रम घोषित कर दिया जाता है। इसके चलते विद्यार्थियों और अभिभावकों को भी परीक्षा कार्यक्रम का इंतजार है।

Monday, November 23, 2020

सहारनपुर : SBTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन को शिक्षक समस्याओं हेतु पत्राचार करने हेतु मान्य किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, देखें

सहारनपुर : SBTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन को शिक्षक समस्याओं हेतु पत्राचार करने हेतु मान्य किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी, देखें



CBSE Date Sheet 2021: जल्द जारी होगी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए डेटशीट, 1 जनवरी से 8 फरवरी के बीच होंगे प्रैक्टिकल एग्जाम।

CBSE Date Sheet 2021: जल्द जारी होगी 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के लिए डेटशीट, 1 जनवरी से 8 फरवरी के बीच होंगे प्रैक्टिकल एग्जाम।

सीबीएस वे प्रैक्टिकल एग्जाम 2021 का आयोजन 1 जनवरी से 8 फरवरी के बीच किये जाने की घोषणा की है।


नई दिल्ली : CBSE Date Sheet 2021 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 10वीं और 12वीं कक्षाओं के लिए सीबीएसई डेटशीट 2021 जल्द ही जारी करेगा। सोशल मीडिया पर फैल रही कक्षा 10 और कक्षा 12 की सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं को मई में टाले जाने की अफवाहों पर विराम लगाते हुए सीबीएसई ने परीक्षा के निश्चित रूप से आयोजित किये जाने की जानकारी दी है। बोर्ड सचिव अनुराग त्रिपाठी ने एसोचैम द्वारा नई शिक्षा नीति पर आयोजित एक वेबीनार के दौरान कहा, “बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन निश्चित रूप से किया जाएगा और इसके लिए शेड्यूल जल्द ही जारी किया जाएगा।“ सचिव ने जानकारी दी कि परीक्षाओं के आयोजन और मूल्यांकन की पद्धति को लेकर योजना बनाई जा रही है।


12वीं के प्रैक्टिकल परीक्षाओं की संभावित तिथियां घोषित

वहीं दूसरी तरफ, विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीएसई बोर्ड द्वारा 12वीं कक्षाओं के लिए प्रैक्टिकल परीक्षाओं की तिथियों की घोषणा कर दी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बोर्ड ने देश भर के स्कूलों में विभिन्न स्ट्रीम्स में 12वीं कक्षाओं के छात्र-छात्राओं के लिए सीबीएस बोर्ड प्रैक्टिकल एग्जाम 2021 का आयोजन 1 जनवरी से 8 फरवरी के बीच किये जाने की घोषणा की है। हालांकि, बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सीबीएसई बोर्ड 12वीं प्रैक्टिकल एग्जाम 2021 की तिथियां संभावित हैं और स्ट्रीम एवं विषय के अनुसार प्रायोगिक परीक्षाएं की निश्चित तिथियों की घोषणा सीबीएसई डेटशीट 2021 के साथ ही की जा सकती है।

बता दें सीबीएसई द्वारा शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं एवं प्रायोगिक परीक्षाओं की तिथियों और कक्षा 10 परीक्षाओं के लिए सीबीएसई बोर्ड टाइम-टेबल 2021 की घोषणा ऑफिशियल वेबसाइट, cbse.nic.in पर जारी की जाएगी। इसलिए सीबीएसई बोर्ड 10वीं डेटशीट 2021 या सीबीएसई बोर्ड 12वीं डेटशीट 2021 के लिए स्टूडेंट्स को बोर्ड ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाये रखनी चाहिए।

शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली तो शिक्षण संस्थान होंगे जिम्मेदार, 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा


शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं मिली तो शिक्षण संस्थान होंगे जिम्मेदार, 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा


यूपी में समाज कल्याण विभाग ने कसा शिकंजा, 630 संस्थानों को 25 तक देना है ऑनलाइन डाटा।


लखनऊ । समाज कल्याण विभाग की ओर से मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ यदि विद्यार्थियों को नहीं मिलता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संस्थान के संचालक की होगी। समाज कल्याण विभाग ने राजधानी की सभी 630 शिक्षण संस्थानों को फीस, मान्यता और प्रवेश की क्षमता सहित पूरा विवरण ऑनलाइन विभाग को देने का अंतिम अवसर दिया है। 25 नवंबर तक सभी को पूरा विवरण ऑनलाइन करना है। ऐेसा न करने वाले शिक्षण संस्थान के विद्यार्थी शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह जाएंगे जिसके लिए संस्थान ही जिम्मेदार होगा।



आर्थिक रूप से कमजोर मेधावियों को मिलने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति पर भी कोरोना का ग्रहण न लगे और सभी को इसका लाभ मिल सके, इसके लिए समाज कल्याण विभाग ने संस्थानों का पूरा विवरण ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। इस बार शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए सामान्य वर्ग के 52,500 लाख रुपये और अनुसूचित जाति व जनजाति के शुल्क प्रतिपूर्ति व छात्रवृत्ति के लिए 98,012 लाख रुपये का बजट स्वीकृत है। पूर्व दशम कक्षा नौ और 10 और दशमोत्तर कक्षा 12 के ऊपर विद्यार्थियों को पैसा दिया जाएगा। विद्यार्थी वेबसाइट scholarship.up.nic.in पर जाकर जानकारी ले सकते हैं। पॉलीटेक्निक और आइटीआइ की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होेने की कगार पर है। अब आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। इस बार मैनेजमेंट कोटे के विद्यार्थियों को शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। जीरो फीस की व्यवस्था भी खत्म हो गई है। सामान्य वर्ग के इंटर में 60 फीसद और स्नातक में 55 फीसद वाले को ही शुल्क प्रतिपूर्ति मिलेगी।


जिला समाज कल्याण अधिकारी डा.अमरनाथ यती ने बताया कि शुल्क प्रतिपूर्ति को पारदर्शी बनाने के विभागीय निर्णय के सापेक्ष ऐसा किया गया है। शिक्षण संस्थान विवरण देने में लापरवाही कर रहे हें। 25 नवंबर तक अंतिम मौका दिया जा रहा है। इसके बाद उन्हें लाभ से वंचित किया जाएगा। 15 दिसंबर तक ऑनलाइन दिए गए विवरण की जांच की जाएगी। गड़बड़ी मिली तो कानूनी कार्रवाई भी होगी।

पॉलीटेक्निक काउंसिलिंग का परिणाम घोषित, आवंटित संस्थान में ही होगी दस्तावेजों की जांच

पॉलीटेक्निक काउंसिलिंग का परिणाम घोषित, आवंटित संस्थान में ही होगी दस्तावेजों की जांच।

संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद 'द्वारा चल रही काउंसिलिंग का परिणाम रविवार को घोषित कर दिया गया। काउंसिलिंग के अभ्यर्थी संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद की वेबसाइट jeecup.nic. in पर पूरी जानकारी ले सकते हैं। परिषद के सचिव एसके वैश्य ने बताया कि आवंटित संस्थान में 25 नवंबर को दोपहर दो बजे तक फीस जमा करनी है। आवंटित संस्थान में ही दस्तावेजों की जांच 24 तक करानी होगी। 


अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद ने 30 नवंबर तक प्रवेश प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। चार हजार अभ्यर्थियों ने आठवें चरण में हिस्सा लिया। प्रवेश परीक्षा के लिए 3,90894 ने पंजीयन कराया था और उनमें से 2,40144 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए। 1,50750 परीक्षा से वंचित अभ्यर्थियों को भी प्रवेश का अवसर दिया गया। नवें चरण तक प्रवेश प्रक्रिया चलेगी। परिषद की वेबसाइट के अलावा टोलफ्री नंबर-18001806589 और 0522-2630678 और 0522- 2630667 पर संपर्क किया जा सकता है।