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Tuesday, February 23, 2021

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी

मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी


मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये आवंटित होने से शिक्षकों के बकाया वेतन का कुछ भुगतान होने की उम्मीद जगी है। इस योजना में प्रदेश के करीब 25 हजार शिक्षकों का बीते चार साल का वेतन बकाया है। 


मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय प्रोग्राम में सम्मिलित मदरसा आधुनिकीकरण योजना में प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक कार्यरत हैं। मदरसों में काम करने वाले आधुनिकीकरण शिक्षकों मे स्नातक शिक्षक को 8000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र को 8000 में से मात्र 3600 रुपये और 15000 में से मात्र 4800 रुपये देने रहते हैं। 


केंद्र सरकार ने चार साल से अपना अंशदान नहीं दिया है। इसकी वजह से राज्य सरकार का अंशदान भी नहीं मिल पाया। शिक्षकों का मानदेय करीब 977 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है।

Saturday, February 13, 2021

अध्यापक के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक क्यों लटकाये रखा? : हाईकोर्ट ने पूछा सवाल

अध्यापक के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक क्यों लटकाये रखा? : हाईकोर्ट ने पूछा सवाल


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक तथा वित्त एवं लेखाधिकारी, बलिया को तीन मार्च को स्पष्टीकरण के साथ पेश होने का निर्देश दिया है। साथ ही व्यक्तिगत हलफनामे में स्पष्ट करने को कहा है कि याची के बकाया वेतन का भुगतान पांच साल तक दबाये क्यों रखा? 


कोर्ट ने दोनों अधिकारियों को 26 फरवरी तक याची के बकाया वेतन के सत्यापन का कार्य पूरा करने का भी निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूíत सलिल कुमार राय ने परमात्मानंद सिंह की याचिका पर दिया है। 


याचिका पर अधिवक्ता काशीनाथ सिंह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि 2015 से 2021 तक क्या किया गया, इसकी जानकारी नहीं दी। जिला विद्यालय निरीक्षक की लापरवाही प्रकट होती है। कोर्ट ने निरीक्षक व लेखाधिकारी दोनों को व्यक्तिगत हलफनामे के साथ हाजिर होने का निर्देश दिया है।

Monday, February 1, 2021

यूपी : शिक्षकों की सैलरी के बदलेंगे नियम, परफॉर्मेंस से जोड़ी जाएगी वेतन वृद्धि व प्रोन्नति

यूपी : शिक्षकों की सैलरी के बदलेंगे नियम, परफॉर्मेंस से जोड़ी जाएगी वेतन वृद्धि व प्रोन्नति



अब शिक्षकों की वेतनवृद्धि व प्रोन्नति या अन्य लाभों को उनके प्रदर्शन से जोड़ा जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत इसे यूपी की कार्ययोजना में शामिल किया गया है। शिक्षकों को आईआईएम, आईआईटी, बनारस हिन्दू विवि जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रशिक्षण दिलवाया जाएगा। वहीं ओडीओपी को व्यावसायिक शिक्षा में शामिल किया जाएगा। कक्षा नौ से 12 तक व्यावसायिक ट्रेड की पढ़ाई अनिवार्य की जाएगी।


2022-23 से न्यूनतम 100 स्कूल प्रधानाध्यापकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये मास्टर रिसोर्स पर्सन के रूप में काम करेंगे। इसके अलावा हर वर्ष शिक्षकों को 50 घण्टे का प्रशिक्षण देने की योजना है। शिक्षकों को स्वतंत्र रूप से काम करने के लिए राज्य स्तर से समयसारिणी या अन्य चीजें भेजने पर रोक लगाने को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है ताकि हर स्कूल के प्रमुख अपनी जिम्मेदारी निभाना सीख सकें। इसके अलावा राज्य स्तर पर नवाचार इकाई भी बनाई जाएगी जहां नवाचारों को संकलित किया जाएगा। मंडलीय शिक्षा अधिकारी को इसकी जिम्मेदारी सौँपी जाएगी। नवाचार करने वाले शिक्षक मास्टर रिसोर्स पर्सन के रूप में काम करेंगे। 


ओडीओपी पढ़ाया जाएगा ट्रेड के रूप में
ओडओपी के तहत चयनित उत्पाद से संबंधित कौशल स्कूल में पढ़ाया जाएगा। कक्षा 9-10 में दो और कक्षा 11-12 में एक व्यावसायिक ट्रेड पढ़ाना अनिवार्य होगा। 2022-2023 से व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम सभी स्कूलों में चलाया जाएगा। कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में इसे शामिल किया जाएगा। 2024-25 तक 50 फीसदी छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। पहले चरण में सरकारी स्कूलों में इसे लागू किया जाएगा। 


कॅरिअर काउंसिलिंग से होगी पहचान
हर सत्र में दो से तीन बार कॅरिअर काउंसिलिंग का आयोजन किया जाएगा। इसमें क्षेत्रीय रोजगार संस्थाओं व पीपीपी के आधार पर संस्थाओं को अनुबंधित किया जाएगा। इसमें प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर चिह्नित कर उनकी रुचि व कौशल क्षमता के आधार पर संबंधित ट्रेड का प्रशिक्षण देने और उचित संस्था के चयन में मार्गदर्शन देगी। प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें अलग से दिग्दर्शन दिया जाएगा। 2022-23 से इसे सभी स्कूलों में लागू किया जाएगा। 

Tuesday, January 19, 2021

वाराणसी : कायाकल्प के 14 पैरामीटर्स की पूर्ति में छह विकास खंड फेल, सभी BEO का वेतन रुका

वाराणसी : कायाकल्प के 14 पैरामीटर्स की पूर्ति में छह विकास खंड फेल, सभी BEO का वेतन रुका

 
■ जनपद के 332 विद्यालय ही अब तक सभी कसौटी पर उतरे खरे
■ कुल 14 में 11 से भी कम ¨बदुओं पर 18 विद्यालयों में हुए कार्य


वाराणसी : बेसिक शिक्षा विभाग आपरेशन कायाकल्प के तहत परिषदीय विद्यालयों का परिवेश बदलने की कोशिश की में जुटा हुआ है। इसके तहत विद्यालयों में 14 पैरामीटर में बनाए गए हैं। ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों को 14वें वित्त आयोग या राज्य वित्त आयोग या ग्राम निधि से सभी ¨बदुओं पर कार्य कराने का निर्देश है। वहीं जनपद में 1143 विद्यालयों में अब तक महज 332 विद्यालयों में ही 14 बिंदुओं पर कार्य हुआ है। छह ब्लाकों में 11 बिंदुओं से भी कम कार्य हुए हैं। जिन ब्लाकों में 11 बिंदुओं से कम कार्य हुए हैं, विभाग ने उन्हें ‘शून्य’ की श्रेणी में रख दिया है।


बेसिक शिक्षा विभाग ने मार्च तक जनपद के सभी विद्यालयों में 14 ¨बदुओं पर कार्य कराने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए सभी विद्यालयों को निर्देश भी दिए जा चुके हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राकेश सिंह ने बताया कि जनपद में 515 विद्यालयों में 13 बिंदुओं पर कार्य हो चुके हैं। वहीं 278 विद्यालयों में 12 बिंदुओं पर तथा 18 विद्यालयों में 11 पैरामीटर के नीचे कार्य हुए हैं।

इसे देखते हुए सभी ब्लाक के खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन फिलहाल अगले आदेश तक के लिए रोक दिया गया है। सभी खंड शिक्षाधिकारियों को नए सत्र से पहले सभी विद्यालयों में 14 पैरामीटर पर कार्य कराने का निर्देश दिया गया है। 14 पैरामीटर पर कार्य होने के बाद ही खंड शिक्षा अधिकारियों का वेतन जारी किया जाएगा।



★  11 पैरामीटर से कम यानी ‘शून्य’ वाले ब्लाक इस प्रकार है।

’बड़ागांव, चिरईगांव, चोलापुर, हरहुआ, पिंडरा, सेवापुरी

■ ये हैं 14 पैरामीटर

● ’हैंडपंपों की मरम्मत

● ’बालक के लिए शौचालय

● ’बालिकाओं के लिए शौचालय

● ’बालक व बालिकाओं के लिए अलग-अलग मूत्रलय व पानी की व्यवस्था

● ’शौचालय में टाइल्स

● ’हैंडवाश यूनिट का निर्माण

● ’रसोईघर का जीर्णोद्धार

● ’विद्यालयों में टाइल्स

● ’विद्युतीकरण का कार्य

● ’विद्युत संयोजन का कार्य

● ’ब्लैक बोर्ड

● ’विद्यालय की रंगाई-पुताई

● ’सबमर्सबिल पंप

● ’दिव्यांग शौचालय

Monday, January 18, 2021

उन्नाव : अभिलेखों का सत्यापन न होने से भटक रहे शिक्षक, 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में 891 शिक्षकों की हुई है तैनाती

उन्नाव : अभिलेखों का सत्यापन न होने से भटक रहे शिक्षक, 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में 891 शिक्षकों की हुई है तैनाती

उन्नाव : अभिलेखों का सत्यापन न होने से नवनियुक्त शिक्षक तीन महीने से वेतन के लिए भटक रहे हैं। विभागीय अधिकारी अभिलेखों के सत्यापन के लिए पत्र प्रयागराज बोर्ड व यूनिवर्सिटी भेजने की बात कह रहे हैं। पर अभी तक किसी का भी सत्यापन नहीं हुआ है।


69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले में 16 अक्तूबर 2020 को 891 नव नियुक्त शिक्षकों की तैनाती हुई थी। इसमें 167 वह शिक्षक शामिल हैं जो पहले शिक्षामित्र थे। सपा शासनकाल में वह समायोजित शिक्षक बने। उनके अभिलेखों का सत्यापन होने के बाद ही उन्हें वेतन मिला। सरकार बदलते ही समायोजन निरस्त हुआ। बाद में तैयारी कर वह फिर से शिक्षक बन गए। विभाग अब भर्ती होने वाले सभी शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन करा रहा है। शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों का कहना है कि उनके अभिलेखों का एक बार तो सत्यापन हो चुका है। बावजूद इसके उनका वेतन जारी नहीं हुआ तीन महीने का समय बीतने वाला है अभी तक किसी भी है। शिक्षक का सत्यापन नहीं हुआ जब तक सत्यापन नहीं हो जाता उन्हें वेतन भी नहीं मिल सकता।



अभिलेखों का ऑफलाइन सत्यापन के साथ ऑनलाइन भी कराने का प्रयास किया जा रहा है। जिन शिक्षकों का  ऑनलाइन सत्यापन हो जाएगा उनका वेतन जारी कर दिया जाएगा। जिन शिक्षकों का ऑफलाइन सत्यापन भेजा गया है उनका सत्यापन आने के बाद ही वेतन जारी होगा।

प्रदीप कुमार पांडेय, बीएसए

Friday, January 8, 2021

आदेश का पालन करे या अवमानना कार्यवाही को रहें तैयार, शिक्षक के बकाया वेतन का मामला

आदेश का पालन करे या अवमानना कार्यवाही को रहें तैयार, शिक्षक के बकाया वेतन का मामला


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला को अध्यापक के बकाया वेतन का भुगतान करने के आदेश का 20 जनवरी 2021 तक पालन करने या अवमानना कार्यवाही के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीत कुमार ने अध्यापक कमलेश प्रसाद तिवारी की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता लोकेश द्विवेदी को सुनकर दिया है। अवमानना याचिका में कहा गया है कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके याची के बकाया वेतन के भुगतान के आदेश की खंडपीठ से पुष्टि के बावजूद पालन नहीं किया जा रहा है। कहा गया है कि न ही वेतन का आकलन किया गया और न बकाया वेतन के भुगतान की मंशा है।


सरकार की तरफ से कहा गया कि खंडपीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है इसलिए सुनवाई टाली जाए। कोर्ट ने इस दलील को यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि एसएलपी दाखिल होने मात्र से आदेश पर रोक नहीं लग जाती।


कोर्ट ने आदेश की अवहेलना करने पर विपक्षियों को तलब किया था। तीन अधिकारी पेश हुए और सचिव ने पेशी से छूट मांगी। लेकिन आदेश का पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने अधिकारियों की हाजिरी माफ करते हुए आदेश का अनुपालन कर हलफनामा दाखिल करने का समय दिया है। साथ ही कहा कि आदेश का पालन नहीं किया तो कोर्ट सचिव के खिलाफ अवमानना का आरोप निर्मित करेगी।

अगला लेख: धर्मांतरण विरोधी कानून के विरुद्ध याचिकाओं पर सुनवाई 15 को
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Thursday, January 7, 2021

फतेहपुर : अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण के फलस्वरूप कार्यभार ग्रहण करने वाले अध्यापकों का अवशेष वेतन भुगतान आदेश जारी, देखें सूची

फतेहपुर : अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण के फलस्वरूप कार्यभार ग्रहण करने वाले  अध्यापकों का अवशेष वेतन भुगतान आदेश जारी, देखें सूची।


Monday, January 4, 2021

'नवनियुक्त शिक्षकों को 31 तक वेतन भुगतान करें, दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने की मांग

'नवनियुक्त शिक्षकों को 31 तक वेतन भुगतान करें, दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने की मांग

शिक्षकों व शिक्षामित्रों की समस्याओं को लेकर संघ के प्रदेश अध्यक्ष सीएम से मिलेगा संघ

लखनऊ :  बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों और शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान के लिए उप्र. दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ का प्रतिनिधि मंडल जल्दी ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात करेगा। दारुलशफा स्थित संघ के दफ्तर में रविवार को हुई बैठक में शिक्षकों और शिक्षा मित्रों की वाजिब समस्याओं का समाधान नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की गई। 

अनिल कुमार यादव ने कहा कि 69 हजार शिक्षक भर्ती में नवनियुक्त शिक्षकों को वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने इन शिक्षकों को 31 जनवरी तक वेतन भुगतान करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने शिक्षकों की अगली भर्ती में शिक्षामित्रों को अंतिम अवसर देने के आदेश दिए हैं। लेकिन रोजाना स्कूल जाने से शिक्षामित्र फरवरी में प्रस्तावित यूपी टेट की परीक्षा की तैयारी नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को टेट की तैयारी के लिए 30 दिन का सवैतनिक अवकाश देने की मांग की। साथ ही शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ाकर 30 हजार रुपये करने, सर्दी में स्कूलों को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक संचालित करने, जिलों में एक स्कूल से दूसरे स्कूल में तबादलों की प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग की। बैठक में संघ के उपाध्यक्ष रश्मिकांत द्विवेदी, महामत्री धर्मेंद्र कुमार, कोषाध्यक्ष संदीप दत्त, सचिव उबैद सिद्दीकी, प्रदेश मंत्री विद्या निवास, अजीत कुमार, सुनील शुक्ला और विनय सहित तमाम पदाधिकारी शामिल हुए।

Friday, December 18, 2020

मैनपुरी : 69000 भर्ती अंतर्गत नवनियुक्त शिक्षकों का सत्यापन उपरांत वेतन आदेश जारी।

मैनपुरी : 69000 भर्ती अंतर्गत नवनियुक्त शिक्षकों का सत्यापन उपरांत वेतन आदेश जारी। 



Wednesday, December 9, 2020

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा परिषदीय शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से भुगतान किए जाने के सम्बन्ध

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा परिषदीय शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के वेतन मानव सम्पदा पोर्टल के माध्यम से भुगतान किए जाने के सम्बन्ध।


फतेहपुर : नववर्ष से मानव संपदा पोर्टल से मिलेगा वेतन

फतेहपुर : नए साल से परिषदीय शिक्षकों को मानव संपदा पोर्टल के जरिए वेतन दिया जाएगा। विभाग ने इसके लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं। विभाग के सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मानव संपदा पोर्टल पर सभी शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों विवरण अपलोड कर दिया जाए जिससे वेतन भुगतान में किसी तरह की समस्या न आए।

बेसिक शिक्षा विभाग के लेखा कार्यालय ने दिसंबर माह से ही शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों को मानव संपदा पोर्टल से वेतन दिए जाने की तैयारी की थी लेकिन सभी ब्लॉकों द्वारा मानक मुताबिक फीडिंग न कराए जाने के कारण दिसंबर में यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। विभाग ने दो दिन पहले सभी कर्मियों एवं शिक्षकों को नवंबर माह का वेतन पूर्व प्रक्रिया के तहत रिलीज कर दिया। अब विभाग नए साल से हर दशा में वेतन भुगतान मानव संपदा पोर्टल से कराना चाहता है।

लागू हो जाएगा पे रोल माइयूल

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत शिक्षकों एवं कर्मियों के शैक्षिक अभिलेखों को मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड कराने के साथ ही आनलाइन सेवा पंजिका को भी शिक्षकों द्वारा स्व सत्यापित किया जा चुका है। अब विभाग पोर्टल का पे रोल माड्यूल लागू करने जा रहा है। इस माड्यूल का लखनऊ के बक्शी का तालाब विकास खंड में सफल क्रियान्वयन भी किया जा चुका है। विभाग जिम्मेदारों को माड्यूल लागू करने के बारे में प्रशिक्षित भी कर चुका है।

Wednesday, December 2, 2020

परिषदीय शिक्षकों को मनचाहे बैंक में वेतन खाता खुलवाने व बैंक बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाने व सेविंग एकाउंट के स्थान पर सैलेरी एकाउंट में संचालन का अधिकार दिए जाने की PSPSA ने उठाई मांग।

परिषदीय शिक्षकों को मनचाहे बैंक में वेतन खाता खुलवाने व बैंक बदलने की प्रक्रिया को आसान बनाने व सेविंग एकाउंट के स्थान पर सैलेरी एकाउंट में संचालन का अधिकार दिए जाने की PSPSA ने उठाई मांग। 

Saturday, November 7, 2020

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ( समग्र शिक्षा) अंतर्गत स्वीकृत नवीन राजकीय हाईस्कूल में कार्यरत शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मियों के वेतन आदि भुगतान हेतु धनराशि अवमुक्त

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान ( समग्र शिक्षा) अंतर्गत स्वीकृत नवीन राजकीय हाईस्कूल में कार्यरत शिक्षकों / शिक्षणेत्तर कर्मियों के वेतन आदि भुगतान हेतु धनराशि अवमुक्त।

Saturday, September 26, 2020

हाथरस : सरप्लस समायोजित कार्यभार ग्रहण न करने वाले 34 शिक्षकों का वेतन बहाल किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी

हाथरस : सरप्लस समायोजित कार्यभार ग्रहण न करने वाले 34 शिक्षकों का वेतन बहाल किये जाने सम्बन्धी आदेश जारी



Monday, September 21, 2020

हाथरस : परिषदीय शिक्षकों के वेतन खातों व पैन नंबर में परिवर्तन न करने के सम्बन्ध में

हाथरस : परिषदीय शिक्षकों के वेतन खातों व पैन नंबर में परिवर्तन न करने के सम्बन्ध में



Wednesday, September 16, 2020

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची।















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Friday, September 11, 2020

मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय

मृतक आश्रित कोटे पर नियुक्त शिक्षक के वेतन के मामले में बीएसए बलिया पर अवमानना का आरोप तय


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुलाई 1994 से मृतक आश्रित कोटे में नियुक्त जूनियर हाईस्कूल के सहायक अध्यापक को वेतन भुगतान के आदेश को लेकर लंबित अवमानना याचिका की शीघ्र सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि आदेश की अवहेलना करने वाले जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बलिया संतोष कुमार राय के खिलाफ आरोप तय किया गया है। कोविड-19 के प्रकोप के कारण अभी सामान्य तौर पर न्यायालय नहीं चल रहा है। स्थिति सामान्य होने पर सुनवाई की मांग को लेकर दोबारा अर्जी दाखिल की जाए।


यह आदेश न्यायमूर्ति वीके बिड़ला ने लक्ष्मण प्रसाद कुशवाहा की अवमानना याचिका पर प्रस्तुत शीघ्र सुनवाई की अर्जी को निरस्त करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता बीएन सिंह का कहना है कि याची दो जुलाई 1994 से जूनियर हाईस्कूल बलिया में बिना वेतन के पढ़ा रहा है। वह भुखमरी की कगार पर है। उसकी नियुक्ति मृतक आश्रित कोटे में की गई है। हाईकोर्ट ने 22 अप्रैल 2002 को उसकी याचिका मंजूर करते हुए बीएसए को नियमित वेतन भुगतान का निर्देश दिया था। साथ ही नौ फीसदी ब्याज के साथ बकाया वेतन का तीन माह में भुगतान करने का भी निर्देश दिया। इस आदेश का पालन नहीं किया गया।


अवमानना याचिका दाखिल होने पर कोर्ट ने आदेश पालन का समय दिया लेकिन फिर भी पालन नहीं किया गया। इस पर कोर्ट ने आदेश की जानबूझकर अवहेलना करने का अवमानना आरोप तय करते हुए जवाब मांगा है। 23 जुलाई 2019 को याचिका की सुनवाई नहीं हो सकी। बाद में लॉक डाउन के कारण सुनवाई नहीं होने पर याची ने कोर्ट से शीघ्र सुनवाई की गुहार लगाई। कोर्ट ने न्यायालय के सामान्य रूप से कार्य करने पर प्रार्थना पत्र देने की सलाह देते हुए अर्जी खारिज कर दी है।

Saturday, September 5, 2020

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित

उच्च शिक्षा : कॉलेज से विवि आते ही घट गया प्रोफेसरों का वेतन, वेतन संरक्षण लाभ से हैं वंचित।

लखनऊ : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं।

कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी। इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे।विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है। इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं।


शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी : शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियां भी विश्वविद्यालयों ने भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।

........




एक साल से लंबित हैं वेतन संरक्षण के मामले

लखनऊ -राज्य मुख्यालय : प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पद पर नियुक्त होने वाले कई शिक्षक एक साल से भी ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी वेतन संरक्षण के लाभ से वंचित हैं। मामला शासन स्तर पर लंबित होने के कारण वे फिलहाल पहले से कम वेतन पर काम कर रहे हैं। कई विश्वविद्यालयों ने लगभग एक साल पहले असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर नियुक्ति की थी।




इसमें कई शिक्षक महाविद्यालयों की नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालयों में नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर के पद कार्यरत कई शिक्षक विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर पद पर तो कई एसोसिएट प्रोफेसर के पद पर ही नियुक्त हुए थे। महाविद्यालयों में कार्यरत रहते हुए ये एसोसिएट प्रोफेसर वरिष्ठता के कारण कई वार्षिक वेतन वृद्धियों की बदौलत ज्यादा वेतन पा रहे थे। विश्वविद्यालयों में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के मूल पद पर कार्यभार ग्रहण करने से उनका वेतन कम हो गया। पहले से शासनादेश है कि ऐसे मामलों में वेतन संरक्षण का लाभ दिया जाता है।


 इसमें यह व्यवस्था भी है कि पांच या उससे ज्यादा वेतन वृद्धियां होने पर शासन की अनुमति लेनी होती है। इस तरह वेतन संरक्षण की अनुमति के लिए विश्वविद्यालयों की तरफ से शासन को प्रस्ताव भेजे गए हैं। सूत्रों के अनुसार शासन के उच्च शिक्षा विभाग में वेतन संरक्षण के कई प्रस्ताव लंबित पड़े हैं। कुछ मामलों में शासन स्तर से मांगी गई और जानकारियों भी विश्वविद्यालयों भेज दी हैं। बावजूद इसके ऐसे कई मामले अभी भी लंबित हैं। संबंधित विश्वविद्यालयों के शिक्षकों के संगठन इस पर लगातार नाराजगी भी जता रहे हैं।


लखनऊ विश्वविद्यालय संबद्ध महाविद्यालय शिक्षक संघ (लुआक्टा) के अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय का कहना है कि महाविद्यालयों से विश्वविद्यालयों में गए शिक्षकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। इन मामलों को जल्द ही उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा के सामने उठाया जाएगा।


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Wednesday, August 26, 2020

खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समकक्ष वेतन और भत्ते देने की मांग

खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समकक्ष वेतन और भत्ते देने की मांग

 

लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय विद्यालय निरीक्षक संघ ने खंड शिक्षा अधिकारियों को केंद्र सरकार के विद्यालय प्रथम निरीक्षक-शिक्षा अधिकारी के समान वेतन और भत्ते देने की मांग की है। संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश द्विबेदी से मुलाकात कर लंबित मांगों पर बात की। 


साथ ही 32 सालों से प्रोन्नति नहीं मिलने से अधिकारियों का मनोबल कमजोर होने का भी मुद॒दा उठाया। मंत्री ने उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रतिनिधि मंडल में राज्य अत कर्म परिषद के अध्यक्ष एसपी तिवारी, संघ के महामंत्री वीरेंद्र , उपाध्यक्ष संजय शुक्ल, संयुक्त मंत्री आरपी यादव व अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।

Sunday, August 9, 2020

पीलीभीत : स्वर्गवासी गुरुजी का दो साल तक वेतन निकाले जाने के मामले की एडी बेसिक ने तलब की रिपोर्ट, पत्नी एटीएम से निकालती रहीं वेतन

पीलीभीत : स्वर्गवासी गुरुजी का दो साल तक वेतन निकाले जाने के मामले की एडी बेसिक ने तलब की रिपोर्ट, पत्नी एटीएम से निकालती रहीं वेतन।




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पीलीभीत : बेसिक शिक्षा विभाग का कारनामा : स्वर्गवासी होने के बाद भी गुरुजी का दो साल तक निकलता रहा वेतन, इंक्रीमेंट भी लगाया,  मामले को दबाने में जुटे अधिकारी।


●  स्वर्गवासी होने के बाद भी गुरुजी का दो साल तक निकलता रहा वेतन, इंक्रीमेंट भी लग गया

● बिलसंडा के खंड शिक्षाधिकारी ने बीएसए को लिखा पत्र, अब मामले को दबाने में जुटे अधिकारी


पीलीभीत। बीएसए दफ्तर अक्सर अपने अजीबोगरीब कारनामों के लिए चर्चा में रहता है। पहले भी यहां फर्जीवाड़ा सामने आते रहे हैं। अब बीएसए दफ्तर में नया कारनामा सामने आया है। प्राथमिक स्कूल के शिक्षक की दो साल पहले मौत हो गई। मगर, उसका वेतन नवंबर 2018 तक निकलता रहा। इतना ही नहीं, बीएसए ने स्वर्गवासी गुरुजी का इंक्रीमेंट भी लगा दिया।


खंड शिक्षाधिकारी ने बीएसए को पत्र लिखकर मामले की जानकारी दी तो अब अधिकारी पूरे मामले को दबाने में लग गए। इससे बीएसए दफ्तर की आंख मूंदकर शिक्षकों की हाजिरी प्रमाणित करने की कार्यशैली भी उजागर हुई है। बिलसंडा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय हर्रायपुर में सहायक अध्यापक के रूप में कार्यरत अरविंद कुमार का 22 मई 2016 को निधन हो गया। मगर, मौत के बाद भी मई 2016 से नवंबर 2018 तक उनका वेतन पहले की तरह ही न केवल खाते में पहुंचता रहा, बल्कि कुछ समय बाद स्वर्ग सिधार गए गुरुजी का बीएसए ने इंक्रीमेंट भी लगा दिया। कुछ समय पहले जब बिलसंडा के खंड शिक्षा अधिकारी को किसी दूसरे शिक्षक ने उस शिक्षक की मौत के बारे में जानकारी दी, तो वह चौंक गए। बिलसंडा के खंड शिक्षा अधिकारी ने 24 जुलाई को इस प्रकरण में बीएसए और वित्त लेखाधिकारी को एक पत्र लिखा। इसमें हर्रायपुर प्राथमिक विद्यालय के शिक्षक की मौत की जानकारी देते हुए दो साल का वेतन रिकवरी करने की बात कही गई। यह जानकारी होते ही बीएसए दफ्तर में हड़कंप मच गया। सूत्रों के अनुसार, बीएसए ने आनन-फानन में बिलसंडा खंड शिक्षा अधिकारी को अपने दफ्तर बुलाकर मामला और ज्यादा न खोलने पर बात कही.

मौत के बाद भी शिक्षक का वेतन लगातार निकलने का प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है, खंड शिक्षा अधिकारी से मामले की जानकारी कर जांच कराई जाएगी। अगर, इसमें किसी की लापरवाही सामने आई तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई होगी। - देवेंद्र स्वरूप, बीएसए

तो क्या स्वर्गवासी होने के बाद भी विद्यालय आते रहे गुरुजी!
सबसे बड़ी बात यह है कि जिन शिक्षक की चार साल पहले मौत हो गई, वो क्या वह स्वर्गवासी होने के बाद भी दो साल तक लगातार स्कूल आकर बच्चों को पढ़ाते रहे। अगर वह स्कूल नहीं आए तो उनकी उपस्थिति कैसे दर्शा दी गई। इन पर जांच कराने के बजाय बीएसए दफ्तर पूरे मामले पर परदा डालने में जुट गया है।

भूल मानकर मामला निपटाने में लगे अफसर
भले ही बेसिक शिक्षा विभाग से दिवंगत शिक्षक के खाते में वेतन गया हो। मगर, बीएसए और लेखा विभाग के जिम्मेदार अब उसे भूल मानकर निपटाने की तैयारी में लग गए हैं। नियमानुसार बीएसए दफ्तर के लेखा विभाग को जो वेतन बिल मिलता है, उसी के अनुसार वेतन जारी करते हैं। अब वर्तमान लेखाधिकारी का मानना है कि यह मामला उनके समय का नहीं है न ही उन्हें शिक्षक की मौत के बारे में कोई जानकारी थी। नीचे से वेतन बिल पास होकर आया और वेतन जारी हो गया।

उपस्थिति प्रमाणित होने पर ही मिलता है वेतन
वेतन के लिए एक स्कूल के सभी शिक्षकों से प्रारूप नौ पर महीने भर के हस्ताक्षर कराए जाते हैं उसी पर मेडिकल लीव, आकस्मिक अवकाश आदि भी दर्ज होता है। प्रधानाध्यापक इसे ब्लॉक संसाधन केंद्र भेज देते हैं। जहां पर खंड शिक्षा अधिकारी के द्वारा उनकी उपस्थिति को प्रमाणित कर आगे भेजा जाता है। फिर उसे बीएसए प्रमाणित करते हैं तब जाकर वेतन निकलता है। मगर, इस मामले में खंड शिक्षाधिकारी और बीएसए दोनों ही शिक्षक की मौत होने के बाद भी उपस्थिति प्रमाणित करते रहे।




साभार : अमर उजाला

Thursday, July 30, 2020

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन, सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन

आगरा : वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर किया विरोध प्रदर्शन,  सार्वजनिक गिरफ्तारी देने के बाद मिला वेतन।

आगरा : : शिक्षकों के वेतन और अकारण निलंबन के विरोध में बुधवार को शिक्षकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पर तालाबंदी कर सामाजिक गिरफ्तारी भी दी। हालांकि गिरफ्तारी के बाद शिक्षकों का वेतन और शिक्षामित्रों का मानदेय जारी कर दिया गया।



राष्ट्रवादी शिक्षक महासंघ के बैनर तले प्रदेश संयोजक मुकेश डागुर व वीरेन्द्र छौंकर के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर में ने एसडीएम महेंद्र कुमार व क्षेत्राधिकारी नम्रता श्रीवास्तव का सामाजिक गिरफ्तारी दी। शिक्षकों ने सीएम महेंद्र कुमार को बेसिक शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।


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