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Wednesday, September 9, 2026

एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति


लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे वेतन न पाने वाले 811 तदर्थ शिक्षकों को भी जल्द वेतन दिया जाएगा। इसकी कानूनी अड़चनें दूर होंगी और सरकार इसके लिए नीति बनाएगी। कुल 1111 तदर्थ शिक्षकों में से अभी 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। अब शेष शिक्षकों को भी मिलेगा।


विधान परिषद में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में मंगलवार को समिति की बैठक हुई। इसमें विधान परिषद सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह व उमेश द्विवेदी ने यह मामला उठाया। शिक्षिका ईशा सिंह के प्रकरण पर कोर्ट के आदेश के बाद करीब 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।

एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एडहॉक व्यवस्था खत्म करने को लेकर दिए गए आदेश के बाद इन तदर्थ शिक्षकों को बाहर किया गया। पर्व में दिए गए आदेश में वर्ष 2021 तक नियमित शिक्षकों की व्यवस्था करनी थी। फिलहाल 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है और बाकी 811 शिक्षकों से काम लिए जाने के बावजूद वेतन नहीं दिया जा रहा। ऐसे में सरकार इन्हें लेकर नीति बनाए। बैठक में निर्देश दिए गए कि जल्द नीति बनाई जाए और बचे शिक्षकों को वेतन देने की तैयारी की जाए।

वहीं साल 2024 में नियुक्त विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने, शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों की पुरानी सेवा जोड़कर उन्हें भी पुरानी पेंशन का लाभ देने, 2000 के बाद नियमित शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने पर भी चर्चा की गई। व्यावसायिक शिक्षकों व निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए जल्द सेवा नियमावली बनाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव भी शामिल हए। 

Thursday, August 13, 2026

शिक्षकों को कम वेतन देने में फंसे निजी स्कूल, शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने उठाए सवाल, फीस से हुई आमदनी का 75 फीसदी वेतन में नहीं कर रहे भुगतान

शिक्षकों को कम वेतन देने में फंसे निजी स्कूल, शिक्षा के व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने उठाए सवाल, फीस से हुई आमदनी का 75 फीसदी वेतन में नहीं कर रहे भुगतान

प्रयागराज, लखनऊ, आगरा, अलीगढ़, गोरखपुर की मांगी रिपोर्ट


प्रयागराज। शिक्षकों को कम वेतन देने में दर्जनों निजी स्कूल फंस गए हैं। विधान परिषद की शिक्षा का व्यवसायीकरण संबंधी जांच समिति ने इस पर सवाल उठाया है। प्रयागराज की रिपोर्ट में गड़बड़ी मिलने पर प्रयागराज समेत लखनऊ, आगरा, अलीगढ़ और गोरखपुर के निजी स्कूलों की भी जांच कराने के आदेश दिए गए हैं। नियम है कि प्राइवेट स्कूलों को फीस से हुई आय की 75 प्रतिशत धनराशि शिक्षकों के वेतन मद में व्यय करनी चाहिए, लेकिन 2024 में प्रस्तुत शहर की रिपोर्ट में कई स्कूल इस मानक पर खरे नहीं उतरे हैं।


जिले के 35 स्कूलों से आमदनी और शिक्षकों के वेतन मद में भुगतान के संबंध में रिपोर्ट मांगी गई है। समिति का मानना है कि इस तरह की गड़बड़ी कई अन्य जनपदों में भी होने की संभावना है। समिति ने वर्ष 2021 से 2024 तक तीन वित्तीय वर्षों की रिपोर्ट भी मांगी है। इसमें कई स्कूल ऐसे हैं जिन्होंने अपनी आमदनी का आधा भी खर्च नहीं किया है।

समिति ने प्रमुख सचिव से यह अपेक्षा की है कि अपनी आख्या एक महीने के अंदर प्रस्तुत करें। जांच के आदेश मिलने पर बीएसए ने शहर के 35 निजी स्कूलों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

Sunday, June 21, 2026

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

शिक्षक आत्महत्या में बीएसए की गिरफ्तारी के बाद लिपिक ने भी किया सरेंडर, 25 हजार का इनाम संजीव सिंह पर घोषित था, चार माह से चल रही थी तलाश

इसी मामले में निलंबित बीएसए शालिनी 16 जून को दिल्ली से हुई थी गिरफ्तार

21 जून 2026

गोरखपुर : शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या प्रकरण में वांछित चल रहे देवरिया बीएसए कार्यालय के निलंबित लिपिक संजीव सिंह ने शनिवार को न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) अभिषेक चतुर्वेदी की अदालत में हाजिर होने के बाद उसे 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। उसकी गिरफ्तारी पर एसएसपी ने 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। साथ ही उसके खिलाफ कुर्की की कार्रवाई की तैयारी चल रही थी। 


शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या मामले में नामजद आरोपित संजीव सिंह देवरिया जिले के रामनाथ कालोनी का रहने वाला है। 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में दर्ज मुकदमे के बाद से वह फरार चल रहा था। मामला 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़ा है। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर प्रताड़ित करने, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने तथा मानसिक दबाव बनाने का आरोप लगाया था। शिकायत में कहा था कि लगातार प्रताड़ना से आहत होकर कृष्ण मोहन सिंह ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली पुलिस जांच में यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह समेत तीन शिक्षकों से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप यह भी था कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।


 पुलिस को उनकी जेब से चार पन्नों का सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें शालिनी श्रीवास्तव और संजीव सिंह को मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया गया था। इस मामले में मुख्य आरोपित देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को गुलरिहा पुलिस ने 16 जून को नई दिल्ली से गिरफ्तार किया था। इसी मामले में आरोपित बनाए गए देवरिया, गौरीबाजार के अर्जुनडीहा निवासी पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि फरार चल रहे लिपिक संजीव सिंह के सरेंडर के बाद अब मामले के सभी आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है।



शिक्षक कृष्ण मोहन की आत्महत्या मामले में अभियुक्त हैं निलंबित बीएसए शालिनी

गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की taiyaari

नामजद आरोपी लिपिक संजीव सिंह के घर चस्पा हो चुका है नोटिस, अब कुर्की की तैयारी

जांच के दौरान भ्रष्टाचार का मामला आने पर पूर्व प्रधानाध्यक को भेजा जा चुका है जेल

19 जून 2026

गोरखपुर । गुलरिहा इलाके में बर्खास्त शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में नामजद आरोपी व 25 हजार की इनामी देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी शालिनी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बुधवार को गोरखपुर पहुंची। पूछताछ के बाद बीएसए को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, मामले में नामजद फरार आरोपी निलंबित लिपिक संजीव सिंह के घर की कुर्की की तैयारी शुरू कर दी गई है।

शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभकुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।

जांच के दौरान एक रिटायर प्रधानाध्यक अनिरुद्ध का नाम आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद से शालिनी व लिपिक संजीव फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें जेल भेजा गया।

गुलरिहा थाने में दर्ज केस मैं आरोपी निलंबित बीएसए को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। लिपिक की तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस जारी हो चुका है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। - निमिष पाटील, एसपी सिटी



शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

16 जून 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

27 अप्रैल 2026

गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


अपडेट 19 मार्च 2026
निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

16 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

यह है मामला
कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

09 मार्च 2026
गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

Saturday, June 13, 2026

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों के भुगतान के सम्बन्ध में


प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों के भुगतान के सम्बन्ध में

Friday, May 8, 2026

डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी और भुगतान की खंगाली जाएगी कुंडली, जानिए क्यों?

डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी और भुगतान की खंगाली जाएगी कुंडली, जानिए क्यों?

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को दिए निर्देश

पीलीभीत में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से काम कराने का मामला सामने आने के बाद लिया निर्णय

लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय भगवान भरोसे हैं। इसकी बानगी हाल ही में पीलीभीत में देखने को मिली। जहां डीआईओएस कार्यालय में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से वेतन निकासी और भुगतान का काम लिया जा रहा था। अब पैसे में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में हड़कंप मचा हुआ है। निदेशालय ने इस मामले को देखते हुए पूरे प्रदेश में डीआईओएस कार्यालयों की कुंडली खंगालने का निर्णय लिया है।

पीलीभीत में डीआईओएस कार्यालय के आहरण व वितरण अधिकारी कंप्यूटर के कार्य के साथ ही वेतन संबंधी बिलों का टोकन जारी करने का संवेदनशील काम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी से करा रहे थे। जिला प्रशासन की जांच में पता चला कि कर्मचारी ने दूसरे के खातों में पैसे भेज दिए। मामला सही मिला तो कार्रवाई भी की गई है।

इस घटना के बाद शासन के निर्देश पर अब माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी डीआईओएस कार्यालयों में वेतन निकासी-भुगतान से जुड़े मामले व अन्य बिलों के भुगतान की कुंडली खंगालने का निर्णय लिया है। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक को इसके लिए विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि सभी एडी अपने जिले व मंडल के कार्यालयों में वेतन निकासी-भुगतान संबंधी कार्यों की गहनता से जांच करें। डीआईओएस कार्यालयों में यदि कोई अनियमितता मिलती है तो दोषी कर्मचारी व अधिकारी का नाम सहित उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव निदेशालय को उपलब्ध कराएं। वहीं, दूसरी तरफ शासन स्तर से भी इस मामले की मॉनीटरिंग की जा रही है। शासन ने भी निदेशालय को इसके लिए कड़े निर्देश दिए हैं। 



Sunday, April 26, 2026

पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश

पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश  


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पारित पदावनति (रिवर्जन) के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षक को सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के पद पर मानते हुए वेतन एवं समस्त बकाया भुगतान किया जाए।

मामला वर्ष 2009 का है, जब एक शिक्षक को पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में निलंबित कर बाद में जूनियर बेसिक स्कूल से प्राइमरी स्कूल में पदावनत कर दिया गया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि— शिक्षक को विधिवत चार्जशीट नहीं दी गई, न ही किसी प्रकार की मौखिक सुनवाई या गवाहों की जिरह कराई गई, शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं शिकायत को फर्जी बताया गया, और बिना समुचित जांच के ही विभाग ने कठोर कार्रवाई कर दी।

न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि बिना उचित सुनवाई और साक्ष्य के की गई विभागीय कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, इसलिए यह कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।

इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि U.P. Government Servant Conduct Rules, 1956 बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर लागू नहीं होते, इसलिए केवल पत्रकारिता में संलिप्तता के आधार पर कार्रवाई करना भी अनुचित है।

हालांकि, शिक्षक 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पुनः पदस्थापित करना संभव नहीं है। लेकिन अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें 28 मार्च 2009 से सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के रूप में मानते हुए वेतन, एरियर एवं अन्य समस्त लाभ दिए जाएं।

यह फैसला शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां बिना समुचित जांच के विभागीय कार्रवाई की जाती है।


Thursday, April 23, 2026

एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा

एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा


लखनऊ। एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने मंडल के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जिले के एडेड स्कूल प्रबन्धनों से तत्काल प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं।


इसी प्रकार दो अन्य मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने इस प्रकरण में एक दो दिनों के भीतरजिलाविद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके जिले से प्रस्ताव मंगाने केलिएपत्रावलियों पर सहमति दे दी है। 

दरअसल, हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश देते हुए कहा था कि यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक के हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं और वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है तो ऐसे शिक्षक को हस्ताक्षर प्रमाणन के तीन माह बाद से लेकर नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति होने तक अथवा उसके सेवानिवृत्त होने तक, प्रधानाचार्य पद का पूर्ण वेतनमान दिया जाएगा। 

कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को आधार बनाते हुए माना कि जब कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारियां निभा रहा है, तो उसे उस पदके अनुरूप वेतन मिलना ही चाहिए।

Wednesday, April 22, 2026

मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। केवल मान्यता निलंबन के आधार पर वहां के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन रोका जाना अवैधानिक है।


यह टिप्पणी न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने आजमगढ़ स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशर्फियां मिसबाहुल उलूम मुबारकपुर में तैनात रहे बदरे आलम और अन्य 19 शिक्षकों व कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका पर की है। याचियों ने नौ जनवरी को जारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मदरसे की मान्यता निलंबन की स्थिति में शिक्षकों का वेतन रोके जाने का आदेश दिया गया था।

वेतन की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे याचियों के वकील ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमावली-2016 के विनियम 13 (6) के अनुसार, जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। 

Tuesday, April 7, 2026

नियमित की तनख्वाह के हकदार कार्यवाहक प्रधानाचार्यः हाईकोर्ट, अनुदानित संस्थानों के कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को कोर्ट ने दी बड़ी राहत

नियमित की तनख्वाह के हकदार कार्यवाहक प्रधानाचार्यः हाईकोर्ट, अनुदानित संस्थानों के कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को कोर्ट ने दी बड़ी राहत


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि अनुदानित संस्थानों में कार्यरत कार्यवाहक प्रधानाचार्य बिना किसी अतिरिक्त राहत, नियमित प्रधानाचार्य को मिलने वाले वेतन के हकदार हैं। कोर्ट ने कहा कि नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति तक उन्हें कार्य करने का अधिकार है लेकिन नियमित नियुक्ति के आते ही पद छोड़ना होगा।


यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति स्वरूपमा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने पांच विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया है। तीन महीने में पद के वेतन का भुगतान का आदेश देते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि अपीलार्थी तब तक पद पर बने रहेंगे, जब तक नियमित नियुक्ति नहीं होती। कोर्ट ने धनेश्वर सिंह चौहान बनाम डीआईओएस, नर्मदेश्वर मिश्र बनाम डीआईओएस, सालोमन मोरार झा बनाम डीआईओएस देवरिया के निर्णयों का देते हुए कि कार्यवाहक प्रधानाचायों को नियमित प्रधानाचार्य के समान वेतन मिलना चाहिए विशेषकर तब, जब पद 30 दिन से अधिक समय तक खाली हो। 

अपीलार्थियों ने एकल पीठ के निर्णयको चुनौती दी थी। खंडपीठ ने संदर्भ के लिए वीरेश चंद्र मिश्र व दो अन्य का मामला लिया। वीरेश चंद्र मिश्र सेवा चयन बोर्ड द्वारा रसायन विज्ञान के व्याख्यातानियुक्त किएगएथे। उन्हेंउसी वर्ष स्वतंत्र भारत अंतर महाविद्यालय सुरजावली वाया खुर्जा बुलंदशहर आवंटित किया गया। यहां तत्कालीन प्रधानाचार्य अनिल कुमार ने त्यागपत्र देने के साथ ही याची को कार्यभार सौंप दिया, जो संस्थान में सबसे वरिष्ठ व्याख्याता थे। उन्होंने प्रधानाचार्य के रूप में कार्य किया लेकिन उन्हें प्रधानाचार्य पद के अनुसार वेतन नहीं दिया गया। 

Sunday, March 22, 2026

नई सरकारी नौकरी में पेंशन व वेतन निर्धारण में जुड़ेगी पुरानी सैन्य सेवा : हाईकोर्ट

नई सरकारी नौकरी में पेंशन व वेतन निर्धारण में जुड़ेगी पुरानी सैन्य सेवा : हाईकोर्ट

पूर्व सैनिक शिक्षक को आठ माह में सभी बकाये का भुगतान करने का आदेश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई पूर्व सैनिक सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सरकारी नौकरी में पुनर्नियुक्त होता है तो उसकी पिछली सैन्य सेवा को वेतन निर्धारण और पेंशन लाभ के लिए जोड़ा जाना अनिवार्य है।


यह आदेश न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने मैनपुरी के हवलदार सिंह की याचिका स्वीकार करते हुए शिक्षा विभाग को आठ सप्ताह के भीतर सभी बकाया भुगतान करने का आदेश दिया है।

याची हवलदार सिंह ने चार जुलाई 1981 से 31 जुलाई 1996 तक भारतीय नौसेना में सेवाएं दी थीं। वहां से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया। 2011 में मैनपुरी के एक प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त हुए। 31 मार्च 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने 15 वर्ष की सैन्य सेवा को शिक्षा विभाग की सेवा के साथ जोड़ने की मांग की थी, जिस पर विभाग निर्णय नहीं ले पा रहा था। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

सुनवाई के दौरान स्थायी अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि याची इस लाभ का हकदार है पर दलील दी कि एक अन्य समान मामले में प्रस्ताव शासन के पास लंबित है।

हालांकि, कोर्ट ने सरकार के इस रुख पर नाराजगी जताई। कहा कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं कानूनी प्रावधानों से ऊपर नहीं हैं। एक बार जब विभाग याची की पात्रता को स्वीकार कर ले तो उसे प्रशासनिक अनुमोदन के अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।

Friday, February 27, 2026

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के चतुर्थ त्रैमास के वेतनादि के भुगतान हेतु अतिरिक्त धनावंटन के सम्बन्ध में

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के चतुर्थ त्रैमास के वेतनादि के भुगतान हेतु अतिरिक्त धनावंटन के सम्बन्ध में


Tuesday, February 3, 2026

फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश

फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश



फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि ऐसे सभी असिस्टेंट टीचरों के मामलों की पूरे राज्य में व्यापक जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने इस संबंध में राज्य सरकार को मैंडमस जारी किया है।


हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि यह जांच संभव हो तो छह महीने के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल अवैध नियुक्तियों को रद्द करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे शिक्षकों से अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी भी की जाए। इसके साथ ही फर्जी नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार द्वारा कई सर्कुलर और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समय पर और प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। यह निष्क्रियता न सिर्फ धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करती है। कोर्ट ने कहा कि इससे छात्रों के हितों को गंभीर नुकसान होता है, जो न्यायालय के लिए सर्वोपरि है।

Thursday, January 29, 2026

तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं – हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं – हाईकोर्ट,  देखें कोर्ट ऑर्डर 

तदर्थ प्रधानाचार्यों को मिल चुके वेतन की वसूली नहीं लेकिन आगे नहीं मिलेगा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं है क्योंकि नए अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है।

 कोर्ट ने कहा कि 1982 के अधिनियम की धारा 18 में उल्लिखित पूर्व-शर्तों का पालन किया जाना अनिवार्य है। उन शर्तों के पूरा होने के बाद ही ऐसा तदर्थ पदोन्नत व्यक्ति प्रधानाचार्य के पद के वेतन का हकदार होगा। यह भी कहाकि पहले नियुक्त तदर्थ प्रधानाचार्यों से वेतन की वापसी न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने इस मुद्दे को लेकर समिता सहित कई अन्य की याचिकाओं पर उठे कानूनी प्रश्न और संदर्भ का निस्तारण करते हुए दिया है।

सभी याचिकाएं निरस्त
कोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित डीआईओएस हर मामले के तथ्य जांचेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि यदि रिक्ति अधिसूचित नहीं की गई थी तो ऐसा तदर्थ प्रधानाचार्य उस पद के वेतन का हकदार नहीं होगा। ऐसे मामले में कॉलेज इस निर्णय की तिथि से चार सप्ताह के भीतर रिक्ति को अधिसूचित करेगा।

नए नियम लागूः कोर्ट

 कोर्ट ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन नियमावली 2023  लागू हो गई है और 1982 का अधिनियम निरस्त कर दिया गया है। 2023 के अधिनियम में तदर्थ प्रधानाचार्यों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। 1921 के अधिनियम और उसके नियमों के तहत तदर्थ प्रधानाचार्य को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है इसलिए इसके कानूनी परिणाम लागू होंगे।


देखें कोर्ट ऑर्डर के कार्यकारी हिस्से 👇


Tuesday, December 23, 2025

हाईकोर्ट ने कहा, बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रशिक्षु शिक्षकों के वेतन पर निर्णय लें या हाजिर हों

हाईकोर्ट ने कहा, बेसिक शिक्षा परिषद सचिव प्रशिक्षु शिक्षकों के वेतन पर निर्णय लें या हाजिर हों

कोर्ट ने सोनभद्र निवासी व अन्य की अवमानना याचिका पर आदेश दिया


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को प्रशिक्षु शिक्षकों के वेतन के भुगतान पर 26 फरवरी तक निर्णय लेने का आदेश दिया है। साथ ही चेतावनी दी है कि रिट कोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने की दशा में उन्हें अदालत ने व्यक्तिगत रूप से हाजिर होना पड़ेगा।


यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की अदालत ने सोनभद्र निवासी मोहम्मद अहमद व अन्य की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 24 अप्रैल 2002 के शासनादेश के अनुसार प्रशिक्षित ग्रेड शिक्षक के रूप में वेतन पाने के हकदार हैं। इस संबंध में उन्होंने तीन अप्रैल 2024 और 11 जुलाई 2024 को संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रत्यावेदन भी प्रस्तुत किए पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया।

जबकि, याचियों की ओर से दाखिल याचिका निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट की एकल पीठ ने प्रत्यावेदन तीन महीने में निस्तारित करने का आदेश दिया था। इससे पहले कोर्ट ने सोनभद्र के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से प्रत्यावेदन निस्तारित नहीं करने पर जवाब तलब किया था।

इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अनुपालन हलफनामा दाखिल कर बताया कि मामला बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव से संबंधित है। लिहाजा, कोर्ट ने याचिका में सचिव की शामिल करते हुए उन्हें कोर्ट के आदेश का अनुपालन करने की मोहलत दी है। 

Tuesday, November 25, 2025

छात्र संख्या के आधार पर वेतन, कोर्ट पहुंचे प्रभारी प्रधानाध्यापक, परिषदीय स्कूलों में प्रभारी को प्रधानाध्यापक का वेतनमान देने का मामला

छात्र संख्या के आधार पर वेतन, कोर्ट पहुंचे प्रभारी प्रधानाध्यापक, परिषदीय स्कूलों में प्रभारी को प्रधानाध्यापक का वेतनमान देने का मामला

प्राथमिक में 150 और उप्रावि में 100 बच्चों दे रहे वेतनमान पर

प्रयागराज । छात्रसंख्या के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापकों के समान वेतनमान देने का विवाद हाईकोर्ट पहुंच गया है। पूर्व में कई मामलों में हाईकोर्ट ने प्रभारी को प्रधानाध्यापक के समान देने के आदेश दिए थे। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने इन आदेशों का अनुपालन नहीं किया तो कई शिक्षकों ने अवमानना याचिका कर दी। उसके बाद 14 अक्तूबर को एक आदेश जारी किया, जिसमें प्राथमिक विद्यालयों में 150 या अधिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से अधिक छात्रसंख्या होने पर ही प्रभारी को नियमित प्रधानाध्यापक के समान वेतन देने की बात कही गई थी।


शासनादेश में ऐसे प्रभारी प्रधानाध्यापकों को केवल पर्यवेक्षकीय कार्यों की जिम्मेदारी देने का प्रावधान किया गया है जिनके यहां प्राथमिक में 150 और उच्च प्राथमिक में 100 से कम छात्र हैं। शासनादेश में यह भी साफ किया गया है कि यदि वरिष्ठ शिक्षक जिम्मेदारी नहीं निभाते तो उनसे कनिष्ठ शिक्षक को तब तक के लिए प्रभारी प्रधानाध्यापक बनाया जाएगा, जब तक पदोन्नति से नियमित नियुक्ति न हो जाए। 

इस आदेश के आधार पर बेसिक शिक्षा अधिकारियों ने छात्रसंख्या के आधार पर प्रभारी प्रधानाध्यापकों के पद पर तैनाती के लिए वरिष्ठता सूची के अनुसार शिक्षकों से विकल्प भी लेना शुरू कर दिया है। इस बीच उन शिक्षकों ने 14 अक्तूबर के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी है जहां इस मानक के अनुसार छात्रसंख्या कम है। 

उनका कहना है कि यह शासनादेश समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत का उल्लंघन करता है और न्यायालय के निर्णय की भावना के विपरीत है। शिक्षक संगठनों ने भी इस शासनादेश पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि न्यायालय के आदेश के बाद सरकार को सभी प्रभारी प्रधानाध्यापकों को समान वेतन देना चाहिए, न कि केवल चुनिंदा विद्यालयों या याचियों तक इसे सीमित करना चाहिए।

इंचार्ज अध्यापक को हेड मास्टर का वेतनमान देने का निर्देश, उच्च पद पर काम करने वाला कर्मचारी पद के अनुरूप वेतन का हकदार : हाईकोर्ट

इंचार्ज अध्यापक को हेड मास्टर का वेतनमान देने का निर्देश, उच्च पद पर काम करने वाला कर्मचारी पद के अनुरूप वेतन का हकदार : हाईकोर्ट 


प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कार्यवाहक हेडमास्टर पद पर काम करने वाले टीजीटी प्रवक्ता को हेडमास्टर पद के वेतनमान का हकदार माना है। कोर्ट ने पूर्व मध्य रेलवे को निर्देश दिया है कि याची उमाकांत पांडेय को कार्यवाहक हेडमास्टर पद पर काम करने की अवधि के दौरान नियमित हेडमास्टर का वेतनमान छह प्रतिशत वार्षिक व्याज के साथ भुगतान किया जाए। यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की पीठ ने दिया है।


मुकदमे से जुड़े संक्षिप्त तथ्य ये हैं कि याची पूर्व मध्य रेलवे इंटर कालेज, दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) जिला चंदौली में नियमित प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) के रूप में कार्यरत था। यहां जूनियर विंग के प्रधानाध्यापक की सेवानिवृत्ति 30 नवंबर 2004 को हुई। इससे पहले तीन नवंबर 2004 के आदेश द्वारा याची को 'प्रभारी प्रधानाध्यापक' के रूप में कार्य करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने पहली दिसंबर 2004 से छह मार्च 2008 तक इस पद पर कार्य किया। फिर नियमित पदधारी ने प्रधानाध्यापक का पदभार ग्रहण किया। 


याची ने कार्य अवधि के लिए हेडमास्टर के समान वेतन भुगतान किए जाने की मांग को लेकर प्रत्यावेदन दिया। उसके प्रत्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिया गया। उल्टे विभाग ने उसे पद के दायित्व का ठीक से निर्वहन न करने के कारण चार्जशीट जारी कर दी। याची ने विभागीय कार्रवाई को अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष चुनौती दी। प्राधिकारी ने विभागीय कार्रवाई रद कर दी। इसके बाद याची ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) प्रयागराज में याचिका दाखिल की।

स्थानांतरित शिक्षकों को मानव संपदा पोर्टल से वेतन भुगतान करने का आदेश जारी

स्थानांतरित शिक्षकों को मानव संपदा पोर्टल से वेतन भुगतान करने का आदेश जारी 


प्रयागराज। अशासकीय सहायता माध्यमिक संस्थाओं में कार्यरत तकरीबन दो हजार प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के तबादले के बाद मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से वेतन भुगतान करने के आदेश दिए गए हैं।

शिक्षा निदेशालय से 360 ऑनलाइन और लगभग 1600 ऑफलाइन स्थानांतरित शिक्षकों ने  नवीन कॉलेज में कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कई शिक्षकों ने शिकायत की है कि कार्यभार ग्रहण करने के बाद भी जिलों के अधिकारी पोर्टल के माध्यम से नियमानुसार वेतन नहीं दे रहे हैं। 

अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने सभी जिला विद्यालयनिरीक्षकों को सोमवार को पत्र लिखा है कि एक अध्यापक का वेतन भुगतान दो जिलों से किया जाना संभव नहीं है। ऐसे में यह आदेशित किया जाता है कि स्थानांतरित अध्यापकों के पूर्व में कार्यरत संस्था की लास्ट पे सर्टिफिकेट (एलपीसी) के आधार पर पूरे महीने का वेतन भुगतान संबंधित से कराना सुनिश्चित करें।


Sunday, October 19, 2025

आदेश के बाद भी तदर्थ शिक्षकों को नहीं मिला नौ महीने का वेतन

आदेश के बाद भी तदर्थ शिक्षकों को नहीं मिला नौ महीने का वेतन

माध्यमिक विद्यालयों से हटाए गए तदर्थ शिक्षकों की खराब हुई दिवाली

माध्यमिक शिक्षक संघ ने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई नाराजगी


लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में 20 साल से अधिक काम करने वाले लगभग 2300 तदर्थ शिक्षकों को उच्च अधिकारियों के आदेश के बाद भी नौ महीने का वेतन नहीं दिया गया। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए इन शिक्षकों व परिजनों की दिवाली खराब करने का भी आरोप लगाया है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह पटेल व संगठन प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी ने कहा कि ये वे शिक्षक हैं जिन्हें 2000 के पूर्व में तय व्यवस्था के तहत नियुक्त किया गया था। वे लगातार सेवा में रहकर देश की भावी पीढ़ी के निर्माण में गत 20 साल से ज्यादा से अपना योगदान दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट से उन्हें नियमित करने और नियमित वेतन भुगतान के स्पष्ट आदेशों के बाद भी अधिकारी मनमानी कर रहे हैं।

डॉ. पटेल ने इस संवेदनशील मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का व्यक्तिगत ध्यान आकृष्ट करते हुए उनसे तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने अपनी स्वेच्छाचारिता से शिक्षकों का वेतन रोककर उनका आर्थिक व मानसिक उत्पीड़न कर रहे हैं।

उन्होंने विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा से भी इस मामले में व्यक्तिगत रुचि लेते हुए शिक्षकों का वेतन जल्द जारी कराने की मांग की।

Saturday, October 18, 2025

शिक्षक ने ले ली थी दवा की ओवरडोज, बच्चों का आधार न बनने से शिक्षक का बीईओ ने रोका था वेतन


शिक्षक ने ले ली थी दवा की ओवरडोज, बच्चों का आधार न बनने से शिक्षक का बीईओ ने रोका था वेतन

बीईओ कार्यालय की ओर से बच्चों का आधार कार्ड न बनने के चलते छह शिक्षकों का वेतन रोका गया था। बाद में अन्य शिक्षकों का वेतन बहाल हो गया, परंतु शौकिंद्र का वेतन दो माह से रुका रहा।

शौकिंद्र ने इस संबंध में बीएसए को पत्र भेजकर अपनी स्थिति बताई थी, जिस पर बीएसए ने वेतन भुगतान का निर्देश भी दिया, मगर इसके बाद बीईओ ने रोक जारी रखी कि जब तक सभी रजिस्टर आनलाइन नहीं होंगे, आख्या नहीं लगाई जाएगी। शिक्षक व बीईओ के बीच व्हाट्सएप चैटिंग भी हुई, बाद में इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो गई। 

शिक्षक ने दीपावली के पहले घर जाने की इच्छा जताई और कहा कि सभी का वेतन जारी कर दिया गया है, केवल उनका रोका गया है। यह भी लिखा कि वे मानसिक रूप से परेशान हैं, और यदि वेतन नहीं मिला तो उनके पास आत्महत्या के सिवाय कोई विकल्प नहीं बचेगा। बुधवार की रात करीब आठ बजे शौकिंद्र ने कमरे में रखी दवाओं की ओवरडोज ले ली। 

लोगों ने उन्हें चिकित्सक के पास उपचार के बाद घर भेज दिया गया। गुरुवार की सुबह फिर स्थिति गंभीर देख उन्हें सीएचसी इटवा और मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। बड़ी संख्या में शिक्षक अस्पताल पहुंचे। 

प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष राधेरमण ने कहा कि यह अत्यंत गंभीर मामला है। शिक्षक दो माह से वेतन के लिए दर-दर भटक रहा है। इससे वह मानसिक रूप से टूट गया। इस पर बीईओ पर मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिला महामंत्री पंकज त्रिपाठी व ब्लाक अध्यक्ष मो. इमरान ने कहा कि यह प्रशासनिक असंवेदनशीलता का उदाहरण है। डीएम ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है। इसमें एडीएम, मेडिकल कॉलेज के मुख्य चिकित्साधीक्षक व बीएसए को शामिल किया गया है। 



बीईओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाकर शिक्षक ने खाया जहर, बाधित वेतन बहाल करने की लगाई थी गुहार, सोशल मीडिया पर दी थी खुदकुशी की चेतावनी

सिद्धार्थनगर के खुनियांव ब्लॉक में तैनात हैं शोकेंद्र यादव


सिद्धार्थनगर। इटवा थाना क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भदोखर भदोखरी में तैनात शिक्षक शोकेंद्र यादव ने बुधवार की देर शाम जहर खा लिया। मूलतः बागपत जिले के थाना सराय रसूलपुर संकुल पुठी पोआमी नगर, थाना सराय निवासी शोकेंद्र का आरोप है कि बीईओ इटवा के उत्पीड़न और बदसलूकी से तंग आकर उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया।


उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। बीईओ ने आरोपों को गलत बताया है। वहीं, डीएम ने मामले की जांच के लिए एडीएम की अगुवाई में तीन सदस्यीय टीम गठित कर दी है। इटवा ब्लॉक क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय भदोखर भदोखरी में तैनात शोकेंद्र महादेव घूरहू निवासी जमील के मकान में किराये पर रह रहे हैं। शोकेंद्र का आरोप है कि बीईओ इटवा राजेश कुमार ने उनका वेतन बाधित कर दिया था। आरोप है कि कई बार अनुरोध के बाद भी बीईओ वेतन बहाल नहीं कर रहे थे। 

दीपावली नजदीक आने पर भी वेतन न मिल पाने से वह बहुत परेशान थे। उन्होंने बीईओ को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर दीपावली से पहले वेतन बहाल करने की सिफारिश की थी। बीईओ से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिलने पर वह निराश हो गए थे।

बुधवार को बीईओ को व्हॉट्सएप पर भेजे मैसेज में उन्होंने वेतन न मिलने पर खुदकुशी की बात भी लिखी थी। इसके बाद आत्मघाती कदम उठा लिया। जानकारी होने पर लोग एक प्राइवेट अस्पताल में ले गए जहां रात में इलाज चला। बृहस्पतिवार की सुबह साथी शिक्षक सीएचसी इटवा ले आए। 




Saturday, October 4, 2025

2300 तदर्थ शिक्षकों को दीपावली से पहले बकाया वेतन, विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव

2300 तदर्थ शिक्षकों को दीपावली से पहले बकाया वेतन, विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव 


लखनऊ। प्रदेश के 2300 तदर्थ शिक्षकों को दीपावली से पहले बकाया वेतन देने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने नौ माह से बकाया देने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।


वेतन न मिलने से इन शिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदार बताया जा रहा है। कोर्ट व शासन के आदेशों के बावजूद अधिकारियों की हीलाहवाली से इन शिक्षकों को महीनों से वेतन नहीं मिल सका है। इन शिक्षकों को समय से वेतन देने की मांग को लेकर सदन से लेकर सड़क तक शिक्षक संगठनों व राजनेताओं ने आंदोलन किया। 

पिछले दिनों शिक्षक नेताओं ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर तदर्थ शिक्षकों के बकाये वेतन का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद मुख्यमंत्री सचिवालय से बकाये वेतन के यथाशीघ्र भुगतान के निर्देश दिए गए हैं।

 बताया जा रहा है कि इस निर्देश के बाद विभाग में एक बार फिर से इस दिशा में कवायद शुरू कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शासन को इसके लिए प्रस्ताव भी भेज दिया है।