DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, August 22, 2119

अब तक की सभी खबरें एक साथ एक जगह : प्राइमरी का मास्टर ● इन के साथ सभी जनपद स्तरीय अपडेट्स पढ़ें


 📢 प्राइमरी का मास्टर PKM
      अधिकृत WhatsApp चैनल


व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ टुडे
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी 
  • प्राइमरी का मास्टर कॉम
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर खबरें faizabad, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com fatehpur, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर 2019
  • प्राइमरी का मास्टर अवकाश तालिका 2019
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़ इन हिंदी लैंग्वेज
  • primary ka master 69000 
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master latest news 2018 
  • primary ka master 69000 
  • news.primarykamaster.com 2019 
  • news.primarykamaster.com 2020   
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master transfer news 2019 
  • primary ka master app 
  • primary ka master transfer news 2018-19 
  • primary ka master todays latest news regarding 69000 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master mutual transfer 
  • up primary teacher transfer latest news 
  • primary teacher ka transfer



स्क्रॉल करते जाएं और पढ़ते जाएं सभी खबरें एक ही जगह। जिस खबर को आप पूरा पढ़ना चाहें उसे क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

    Sunday, April 19, 2026

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    जून में हफ्ते-दस दिन का ही समय मिलने की संभावना

    19 अप्रैल 2026
    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए इन गर्मी की छुट्टियों में भी तबादले के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मई में जनगणना के लिए घर-घर प्रगणन का काम शुरू होने वाला है। ऐसे में स्थानांतरण की प्रक्रिया इस बार भी शुरू होने की उम्मीद नहीं है।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में हुए थे। जबकि सर्दी की छुट्टियों (दिसंबर) में एसआईआर के कारण उनके तबादले की प्रक्रिया नहीं की गई। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार गर्मी की छुट्टियों में उन्हें इसका मौका मिलेगा। किंतु इसके आसार नहीं दिख रहे हैं।

    शिक्षकों ने बताया कि जनगणना के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है। वहीं 22 मई से 20 जून तक घर-घर जनगणना के लिए उनकी ड्यूटी लगनी है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह ने कहा कि अगर तिथि नहीं बढ़ी तो जून में दस दिन का समय विभाग को मिलेगा। लेकिन इसके लिए उन्हें सभी आवश्यक प्रक्रिया पहले से पूरी करनी होगी। वहीं अगर जनगणना की तिथि केंद्र ने बढ़ा दी तो फिर इसकी भी संभावना समाप्त हो जाएगी।

    हालांकि, तबादला नीति इसी महीने आ रही है, विभाग चाहे तो मई में जनगणना शुरू होने से पहले भी इसकी प्रक्रिया पूरी कर सकता है। हमारी मांग है कि विभाग इस तरफ ध्यान दे। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनगणना की वजह से इस बार तबादला प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं दिख रहा है। अगर दस दिन का मौका मिलता है तो जिले के अंदर परस्पर तबादले किए जा सकते हैं। किंतु इसके लिए उच्च अधिकारियों की सहमति जरूरी होगी।




    ग्रीष्मावकाश में स्थानांतरण की राह देख रहे बेसिक शिक्षकों को लग सकता है झटका, जानिए क्यों? 

    13 अप्रैल 2026
    प्रयागराज : ग्रीष्म अवकाश में अंतरजनपदीय तथा अंत जनपदीय स्थानांतरण की उम्मीद संजोए बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों शिक्षकों को झटका लग सकता है। देश व प्रदेश में चल रहे जनगणना कार्यक्रम के सुचारु संचानल के लिए इसमें लगे अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार की ओर से पत्र लिखा गया है। इस पत्र से बेसिक शिक्षक अपने स्थानांतरण को लेकर सशंकित हो गए हैं।


     जनगणना कार्य में शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है। प्रगणक बनाए गए शिक्षकों के विवरण की आनलाइन फीडिंग की जा रही है। ड्यूटी लगाए जाने का मैसेज कई शिक्षकों के मोबाइल नंबर पर आया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि वह कार्य को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूर्ण कर सकें। 

    अधिकारियों व प्रगणकों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की योजना तैयार कर ली गई है। इस बीच स्थानांतरण किए जाने से जनगणना कार्य प्रभावित होने को देखते हुए अधिकारियों के स्थानांतरण न किए जाने की तैयारी है।

    69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी से नाराज अभ्यर्थियों संग परिजन भी करेंगे 22 अप्रैल को आंदोलन

    69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी से नाराज अभ्यर्थियों संग परिजन भी करेंगे 22 अप्रैल को आंदोलन


    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 22 अप्रैल को फिर से राजधानी में दम दिखाएंगे। इस बार अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिजन और अलग-अलग कई संगठन एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। अभ्यार्थियों ने बताया कि दो फरवरी से राजधानी के ईको गार्डेन में उनका अनवरत धरना चल रहा है। किंतु सरकार इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार कोई पहल नहीं कर रही, जिससे मामला टल रहा है। इस प्रकारण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।


    अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि पिछली सुनवाई 19 मार्च को होनी थी लेकिन नहीं हुई। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में अनलिस्टेड है। इससे सभी अभ्यर्थियों में बहुत आक्रोश है। हमने 22 अप्रैल को महाआंदोलन करने का फैसला लिया है। सुशील कश्यप ने बताया कि सभी जिले में समन्वयक बनाकर ब्लाक स्तर पर संपर्क किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी आ सकें।

    आंदोलन में शामिल सुमित कुमार, विक्रम, अमित मौर्या आदि ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट डबल बेंच का फैसला, सब हमारे पक्ष में है। फिर भी हमारे साथ न्याय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम पिछड़े समाज से आते हैं। सरकार जल्द इस मामले में ठोस पहल नहीं करती है तो आंदोलन व्यापक होगा।

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती


    लखनऊ। प्रदेश में जर्जर व पुराने हो चुके राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में सुधार के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की गई। लेकिन विद्यालय विभाग की इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वे बजट तो ले ले रहे हैं मगर न तो इसका प्रयोग कर रहे हैं न ही विभाग को इसकी जानकारी दे रहे हैं।


    प्रदेश के राजकीय व एडेड कॉलेजों में निर्माण, मरम्मत व अवस्थापना सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत बजट दिया जाता है। खास यह कि इसमें राजकीय विद्यालयों को 95 फीसदी तक तो एडेड में 75 फीसदी तक कुल आगणन का पैसा दिया जा रहा है। इसके बाद भी कई बार प्रस्ताव भेजने में आनाकानी की जाती है, वहीं कई जिलों में बजट के सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रोजेक्ट अलंकार योजना में वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में एडेड कॉलेजों के प्रस्ताव पर शासन व निदेशालय की ओर से तीन किश्तें जारी की जा चुकी हैं। लेकिन इसमें कई विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक न तो पहली किश्त का प्रयोग किया न ही बजट सरेंडर करने की जानकारी निदेशालय को भेजी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक (अर्थ) महेंद्र कुमार सिंह ने सभी डीआईओएस को पत्र भेजकर कहा है कि जिलों में यह कहा जाता है कि संस्था को आवंटित धनराशि समर्पित कर दी गई है। जबकि निदेशालय को इसकी जानकारी ही नहीं मिली है। उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जिलों में विद्यालयों को आवंटित पहली किश्त की राशि का प्रयोग किया गया या नहीं? या इसको समर्पित कर दिया गया है? इसके बारे में जल्द सूचना उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर अब विभाग सख्ती करते हुए इससे शासन को भी अवगत कराएगा।


    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    18 अप्रैल 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) लखनऊ की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। आयोग ने यह वारंट पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से जारी करने को कहा है।

    लखनऊ और बहराइच के विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने वाली भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं मिला है। संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर बताया था कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में मोहनलालगंज, चिनहट व बहराइच के रिसिया ब्लॉक में आपूर्ति के बाद 1.33 करोड़ रुपये बकाया हैं।

    पत्राचार के बावजूद सुनवाई न होने से संस्था आर्थिक संकट में है। आयोग मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। 15 मार्च को आयोग ने दोनों जिलों के बीएसए को 16 अप्रैल को सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया था।

    आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा की पीठ के समक्ष 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष से अनूप यादव और भारती हरित ग्राम उदय संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक उपस्थित हुए। मामले में बहराइच के खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए बहराइच के

    18 अप्रैल तक अवकाश पर होने की जानकारी दी। वहीं, बीएसए लखनऊ सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, जबकि उन्हें सूचना दी गई थी। सुनवाई के दौरान बीईओ बहराइच ने बताया कि यदि संबंधित स्कूलों की सूची और उनसे वसूली योग्य राशि उपलब्ध करा दी जाए तो बीएसए स्तर पर वसूली में सहयोग किया जा सकता है। इस पर आयोग ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह बहराइच व लखनऊ के स्कूलों की सूची और वसूली योग्य राशि सात दिन के भीतर उपलब्ध कराएं।

    आयोग ने जिलाधिकारी बहराइच और पुलिस कमिश्नर लखनऊ को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर दोनों जिलों के बीएसए की उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी।



    1.33 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक और दो बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण, ड्रेस आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं होने पर मानवाधिकार आयोग की 16 अप्रैल को सुनवाई

    16 मार्च 2026
    लखनऊ। राजधानी और बहराइच के कुछ विद्यालयों में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने बेसिक शिक्षा निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ और बहराइच के बीएसए को तलब किया है। दोनों अधिकारियों को 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान आयोग में उपस्थित होना होगा।

    लखनऊ की भारतीय हरित खादी ग्रामोदाय संस्था को विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने का काम मिला था। संस्था ने वर्ष 2019-20 और 2020 21 में लखनऊ के मोहनलालगंज व चिनहट, बहराइच के रिसिया ब्लॉक में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति की थी।

    संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने पिछले साल मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी कि ड्रेस की आपूर्ति करने के बाद अब तक 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। इसको लेकर विजय शंकर ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से पत्राचार किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा अब तक भुगतान नहीं हुआ। अधिक रकम होने की वजह से उनकी संस्था व वह खुद आर्थिक तंगी की स्थिति में आ गए हैं। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लिया।

    12 मार्च को आयोग ने आदेश दिया है कि जो आपत्तियां विजय शंकर की तरफ से दर्ज कराई गई हैं वह बेसिक शिक्षा के निदेश को भेजी जाएं। उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ व बहराइच के बीएसए को 16 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे उपस्थित होना होगा। आदेश का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी निदेशक को दी है। सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय सुनाएगा। 

    Saturday, April 18, 2026

    जन्म प्रमाणपत्र तब तक मान्य जब तक रद्द न हो–हाईकोर्ट, कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश, संदेह के आधार पर याची को प्रवेश देने से मना किया गया था

    जन्म प्रमाणपत्र तब तक मान्य जब तक रद्द न हो–हाईकोर्ट, कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश, संदेह के आधार पर याची को प्रवेश देने से मना किया गया था


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत जारी जन्म प्रमाणपत्र तब तक वैध और मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमे जालसाजी साबित न हो जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी विमल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


    कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई दस्तावेज, जो किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी किया गया, या तो रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाजी का कोई तत्व साबित न हो जाए, तब तक उसका संबंधित अधिकारियों पर बाध्यकारी प्रभाव रहेगा।

    कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता कि वे अपनी मनमर्जी के आधार पर किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी प्रमाण पत्र पर संदेह करें। जन्म प्रमाण पत्र में याची की जन्मतिथि एक जुलाई 2013 दर्ज थी। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह में दाखिले के लिए अभ्यर्थी का जन्म एक मई 2013 और 30 जुलाई 2015 के बीच होना चाहिए। जन्म प्रमाण पत्र पर संदेह के आधार पर याची को दाखिला देने से मना कर दिया गया, इसलिए याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। चार दलील की गई कि जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए बिना याची को दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकता। 

    विपक्षी ने सीएम ओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जन्म तिथि में एक साल से छह महीने तक का अंतर हो सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हड्डियों के विकास की जांच को पूरी तरह सटीक नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह केवल प्लस-माइनस दो साल तक ही सटीक होती है। निर्णय दिया कि सीएमओ की रिपोर्ट में दर्ज अंतर के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए बिना एडमिशन देने से मना करना शिक्षा का अधिकार का उल्लंघन है।

    Friday, April 17, 2026

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय


    प्रयागराजइलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक ग्रेच्युटी (उपदान) पाने के हकदार हैं और इसके लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं लगाया जा सकता। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने मेहरजहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। 


    याची ने एक सहायता प्राप्त संस्थान में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति प्राप्त की थी, लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी का लाभनहीं दिया गया था।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश स्कूल और कालेज शिक्षक ग्रेच्युटी फंड नियमावली 1964 के तहत ग्रेच्युटी केवल सेवा के दौरान मृत्यु होने पर ही देय थी, जो सेवानिवृत्त शिक्षकों के अधिकारों का पूर्ण संरक्षण नहीं करती। 

    कोर्ट ने माना कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान ही होते हैं। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि शिक्षक ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने का विकल्प नहीं चुना था, इसलिए वे ग्रेच्युटी की पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक सरकारी आदेश किसी वैधानिक प्रविधान या नियम का स्थान नहीं ले सकता।

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान करना नियोक्ता की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसे केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने 'पेमेंट आफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के प्रविधानों का हवाला देते हुए कहा कि याची इस कानून के तहत लाभ पाने की पात्र हैं। संबंधित अधिकारियों को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह याची की ग्रेच्युटी की गणना कर आठ सप्ताह के भीतर उसका भुगतान सुनिश्चित कराएं।


    हाईकोर्ट ऑर्डर 👇

    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    Neutral Citation No. - 2026:AHC:77821-DB
    AFR
    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    WRIT - A No. - 12810 of 2024
    Smt Mehar Jahan
    .....Petitioner(s)
    Versus
    State Of U.P. And 4 Others
    .....Respondent(s)

    Counsel for Petitioner(s)
    Shoar Mohammad Khan
    Counsel for Respondent(s)
    C.S.C.
    Court No. - 29
    HON'BLE ARINDAM SINHA, J.
    HON'BLE SATYA VEER SINGH, J.
    (Per Arindam Sinha, J.)

    1. Petitioner served as a teacher in an aided educational institution. Her service conditions included application of U.P. School and College Teachers Gratuity Fund Rules, 1964. She served out her tenure and retired at age 60. She is getting pension. After a long time, she has moved Court with her contention that she did not get gratuity. Mr. Shaor Mohammad Khan, learned advocate appears on behalf of petitioner and Mr. Kartikeya Saran, learned advocate, Additional Advocate General, for State.

    2. On our query Mr. Khan submits, his client had made representation dated 7th May, 2024. Till before then she was unaware that her pension not including gratuity gave rise to a cause. Under the rules of 1964 she did not get any gratuity because said rules provide for payment of gratuity only in event of the teacher dying in harness. In the circumstances, she cannot be barred from seeking to enforce her legal right to have payment of gratuity under provisions in Payment of Gratuity Act, 1972. He relies on view taken by a Division Bench of this Court in Special Appeal Defective no.768 of 2021 (Jwala Devi vs. State of U.P. and 5 others). Relied upon paragraph is reproduced below. "It is settled law that payment of gratuity is the right of the employee, provided gratuity is actually payable in accordance with law. Non-payment of gratuity, in the event it is legally payable, is the statutory responsibility of the employer. Therefore, the writ petition of the widow of the deceased employee asking for payment of gratuity cannot be dismissed merely on the ground of laches, unless it is found that the gratuity is not legally payable." He seeks interference. 3. Mr. Saran submits, applicability of the Act of 1972 to petitioner depends on definition of 'employee' given in the Act. Section 2(e) is reproduced below.
    "2(e). "employee" means any person (other than an apprentice) who is employed for wages, whether the terms of such employment are express or implied, in any kind of work, manual or otherwise, in or in connection with the work of a factory, mine, oilfield, plantation, port, railway company, shop or other establishment to which this Act applies, but does not include any such person who holds a post under the Central Government or a State Government and is governed by any other Act or by any rules providing for payment of gratuity."
    (emphasis supplied)

    He relies on judgments of the Supreme Court, firstly for proposition that a government aided educational institution is akin to the State Government, as employer. Secondly, there is exclusion by the definition clause in respect of application of the Act to persons, who are employees of, inter alia, the State Government and is governed by rules providing for payment of gratuity. Relied upon judgments are as under.
    i) Vikram Bhalchandra Ghongade vs. The Headmistress Girls High School and Junior College, reported in (2025) 10 SCC 248. Paragraph 8 is reproduced below. "8. It must be observed that a teacher in an aided school for all practical purposes is akin to a post under the State Government. Pertinent is the fact that the posts in aided schools are either sanctioned by the Government or approved in accordance with the Rules and pay and allowances are also paid by the Government. The aided school teachers are also entitled to some of the conditions of service as are applicable to government teachers, with entitlement of pension, provident fund and gratuity as applicable, in accordance with the Rules brought out under Article 309 of the Constitution of India. Though strictly speaking the teachers may not be holding a post under the State Government, it is akin to a post under the State Government, at least for the monetary benefits of pay and allowances, while in service, as also pension and other benefits on retirement."

    (emphasis supplied)
    ii) N. Manoharan, etc. vs. The Administrative Officer and another, reported in (2026) 2 SCR 596. Paragraph 12 from the judgment is reproduced below.
    "12. It is relevant to notice that the amended definition deals with the first limb of Section 2(e), and the second exclusionary limb is the same in the pre-and post-amendment provisions. Construing Section 2(e), the second limb begins with the words "but does not include" any such person (i) who holds a post under the Central Government, (ii) a State Government, (iii) is governed by any other Act or (iv) by any Rules providing payment of gratuity. The exclusionary clause, if read by applying the golden rule without a further test, excludes employees of the Central and State Governments from the meaning of "employee" under the PG Act. Secondly, it also excludes a person who is governed by any other act. Thirdly, even if it is used as "or" but not as "and", it excludes any such person who is governed by any other Act or by any rules providing for payment of gratuity. The provision contains the words both "means" and "does not include". Under interpretation of statutes, this Court has repeatedly held that coupling the word "means" with "includes" denotes an exhaustive definition. Conversely, the word "means" and "does not include" should be read as exclusionary language that strictly excludes the scope of the provision from certain classes. Consequently, a person who is governed by any other Act, or governed by any Rules providing for payment of gratuity, does not come within the ambit of the definition of "employee" under the PG Act."
    (emphasis supplied)

    4. Mr. Saran submits further, there is Government order (GO) dated 10th August, 1978 in place. By it, teachers such as petitioner had the option to avail of payment of gratuity, on opting on or after 30th June, 1978 to retire at age 58. Petitioner exercised her option in the negative and continued to serve till she achieved age of superannuation at 60 years. Hence, she continued to be governed by the rules of 1964. As such, she not being included in meaning of 'employee' given in the Act of 1972, now cannot say that she is entitled to payment of gratuity under the Act. In any event the writ petition is grossly delayed. It be dismissed.

    5. Meaning of gratuity has not been given in the Act of 1972. Oxford English Dictionary, 12th Edition of South Asia Edition gives meaning of 'gratuity' as reproduced below.
    "gratuity - A sum of money paid to an employee at the end of a period of employment."
    Taking part of the meaning given in section 2(e) requiring, an excluded person to be governed by, inter alia, any rules providing for payment of gratuity, inevitable conclusion is that the rules of 1964 provide for payment of gratuity to only those teachers, who die in harness after having continuously served for three years. Otherwise, the rules do not provide for payment of gratuity. At this stage Mr. Khan points out, his client drawing pension also does not have component of gratuity inbuilt into the benefit. He relies on clause (17) under definitions article 366 in the Constitution. The clause is reproduced below.
    "366. Definitions.
    .........(17) "pension" means a pension, whether contributory or not, of any kind whatsoever payable to or in respect of any person, and includes retired pay so payable; a gratuity so payable and any sum or sums so payable by way of the return, with or without interest thereon or any other addition thereto, of subscriptions to a provident fund."
    (emphasis supplied)

    6. In other words petitioner, in our view, having served till she superannuated on achieving 60 years of age, cannot be said to be covered by the rules of 1964 as, we reiterate, they are only applicable for payment of gratuity to those teachers, who die while in service. In the circumstances, it is understandable that aforesaid GO dated 10th August, 1978 was issued. Mr. Saran hands up English translation of the GO. Paragraph 1 from the translation is reproduced below.
    "I am directed to say that orders have already been issued for the sanction of pension to the teachers of non-government higher secondary schools aided by the state fund at the rates admissible to their counterparts in government schools. A demand has also been made to the government that such teachers of the said category of schools who retire by opting for retirement at the age of 58 years, be given death and retirement gratuity benefits. The government, after due consideration, has accepted this demand. Therefore, the Honorable Governor orders that such teachers who retire on or after June 30, 1978, by opting for retirement at the age of 58 years, be granted the aforesaid gratuity at the rates admissible to their counterparts in government schools."
    (emphasis supplied)

    7. In N. Manoharan (supra) the Supreme Court also declared on interpretation of statutes. We see the definition clause [section 2(e)] to provide in the alternative, for exclusion of employees of the Central and State Governments. However, the requirement of them being covered by any other Act or rules attaches as the word joining the alternatives is 'and'. Our aforesaid view is thus reinforced by the definition clause since, even though petitioner is said to have worked for an aided institution, declared to be akin to the State Government in Vikram Bhalchandra Ghongade (supra), she was not covered by the rules for payment of gratuity at the end of her service. Furthermore, it cannot be said that the GO was an option for petitioner to avail gratuity by retiring at age 58 and not having so opted, was allowed to work for another two years in lieu of gratuity. In any event, a GO is neither a statutory provision nor can be said to be a rule.

    8. We conclude, petitioner stands covered by provisions in Payment of Gratuity Act, 1972. She was and is entitled to payment of gratuity, having worked for an aided institution declared to be akin to State Government, which provides for payment of gratuity in the pension paid to their employees. As such, her delay in approaching the writ Court for obtaining payment of the gratuity, being gratitude for services rendered, cannot be barred. We respectfully agree with view taken in Jwala Devi (supra).

    9. The writ petition is allowed to extent above. Respondent no.4 is directed to take expeditious steps for sanction and disbursement of gratuity calculated in respect of petitioner, in accordance with provisions in Payment of Gratuity Act, 1972 and the rules framed thereunder. This be done within eight weeks from communication of certified copy of this order, to be made by petitioner.

    (Arindam Sinha,J.)
    (Satya Veer Singh,J.)
    April 9, 2026

    Thursday, April 16, 2026

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट 


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा के परिणाम आज, 15 अप्रैल को नतीजे जारी हो चुके हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं।


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। यह परिणाम आज शाम 4 बजे जारी हुए हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 93.70 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। बीते वर्ष से कुल पास प्रतिशत 0.04 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।


    जरूरी आंकड़े
    10वीं में कुल पास छात्र- 23,16,008
    बीते वर्ष कुल पास छात्र- 22,21,636
    कुल पास प्रतिशत- 93.70%

    सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 2.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 55,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। लड़कियों ने इस बार भी रिजल्ट में बाजी मारी और कुल 94.99 प्रतिशत लड़कियां पास हुईं। वहीं 92.69 प्रतिशत लड़के पास हुए।


    इस साल भी नहीं जारी हुई टॉपर्स लिस्ट
    हालांकि, बोर्ड ने इस वर्ष भी मेरिट सूची नहीं जारी की है। बोर्ड 0.1 प्रतिशत छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र जारी करेगा, ये वो छात्र होंगे जिन्होंने विषयों में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

    मेरिट प्रमाण पत्र संबंधित छात्र के डिजिलाकर में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, परीक्षार्थियों को मार्कशीट भी उनके डिजिलाकर खातों में उपलब्ध कराई गई है।

    सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि बोर्ड जल्द ही छात्रों को उनके स्कूल के माध्यम से उत्तीर्ण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। वहीं, इस वर्ष कंपार्टमेंट लाने वाले विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी।



    रिजल्ट देखने एवं डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं।

    इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर रिजल्ट एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।

    लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना लॉगिन डिटेल डालें।
    लॉगिन डिटेल डालने के बाद सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।

    चाहें तो रिजल्ट का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।

    Wednesday, April 15, 2026

    सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नतियों की जांच आगे बढ़ी, तत्कालीन प्रमुख सचिव, सचिव व विशेष सचिव से लिखित पक्ष लेगा नियुक्ति विभाग


    सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नतियों की जांच आगे बढ़ी, तत्कालीन प्रमुख सचिव, सचिव व विशेष सचिव से लिखित पक्ष लेगा नियुक्ति विभाग

    14 अप्रैल 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किए जाने की जांच रफ्तार पकड़ रही है। नियुक्ति विभाग उच्चस्तर से सहमति प्राप्त होने के बाद अब इस मामले में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का लिखित में पक्ष लेगा। इसके अलावा सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया गया है।

    समाज कल्याण विभाग प्रदेश में 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे

    सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी भेजा गया पत्र

    और प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। यहां बता दें कि 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य के पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नतियां दे दी गईं।

    सूत्रों के मुताबिक, ये पदोन्नतियां दिए जाने के बाद समाज कल्याण विभाग में तैनाती पाने वाले एक समीक्षा अधिकारी ने यह मामला पकड़ा और पूरे प्रकरण पर फाइल

    चला दी। इसके बाद शासन स्तर से सभी पदोन्नतियां रद्द कर दी गईं। साथ ही समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक व योजना प्रभारी जे राम के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शासन ने समीक्षा अधिकारी धर्मेंद्र, अनुभाग अधिकारी अरविंद प्रकाश, उप सचिव रजनीकांत पांडेय और विशेष सचिव शशिकांत कनौजिया की जिम्मेदारी तय करने के लिए सचिवालय प्रशासन विभाग को पत्र भेज दिया है।

    शासन के सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का पक्ष मिलने के बाद जांच की आगे की दिशा तय हो सकेगी। इसके लिए इन अधिकारियों को शासन से पत्र जारी किया जा रहा है।



    सर्वोदय विद्यालय के 100 प्रवक्ताओं को नियमविरुद्ध पदोन्नति, प्रमुख सचिव तक पहुंची जांच की आंच

    दो साल पहले समाज कल्याण विभाग में 100 प्रवक्ताओं को दी गई थी गलत पदोन्नति

    06 अप्रैल 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति मामले में जांच की आंच तत्कालीन प्रमुख सचिव और विशेष सचिव तक पहुंच गई है। प्राथमिक जांच में निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ साथ शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए गए हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह इन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आगे की जांच शुरू हो सकती है।

    समाज कल्याण विभाग 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। वर्ष 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी नियमविरुद्ध पदोन्नति का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है।



    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर मिलेगी प्रोन्नति


    20 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन किया गया है। प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर गलत ढंग से की गई प्रोन्नति को निरस्त किए जाने के बाद यह निर्णय गया है। अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। प्रवक्ता के 22 साल की सेवा पूरी होने पर उसे प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति दी जाएगी।

    इन विद्यालयों में उप्र समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली का उल्लंघन कर 4800 रुपये पे ग्रेड पर कार्यरत प्रवक्ताओं को सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड पर पदोन्नति दी गई थी। अब संशोधन कर उप प्रधानाचार्य 2 का पद सृजित किया गया है। मामले में उप निदेशक जे.राम पर विभागीयम कार्रवाई की जाएगी।

    नए आदेशों के तहत यूपी में 93 सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के एक-एक पद का सृजन किया गया है। पुनरीक्षित पे मैट्रिक्स लेवल 10 पर 56100-177500 रुपये वेतनमान निर्धारित किया गया है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से पद सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है।




    प्रधानाचार्य बनाए गए 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति रद्द, समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों का मामला

    19 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों में 100 प्रवक्ताओं की गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर हुई प्रोन्नति को रद कर दिया गया है।


    नियम विपरीत प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति किए जाने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग यूपी में 101 जयप्रकाशनारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित कर रहा है। 

    यहां कार्यरत करीब 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पर दो वर्ष पूर्व प्रोन्नति दी गई। प्रवक्ताओं को 4800 रुपये पे ग्रेड से सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड के प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति दी गई। इसका प्रस्ताव 11 जनवरी 2024 को भेजा गया और उस समय इस पद पर प्रोन्नति के लिए पोषक संवर्ग भी उपलब्ध नहीं था। नियम के अनुसार, इन्हें पहले उप प्रधानाचार्य बनाना चाहिए था, फिर प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किया जाना चाहिए था।

    स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं

    स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं


    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। 


    हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।

    आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। 

    Tuesday, April 14, 2026

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी 


    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

    पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी

    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी 

    आदर्श प्रशासन योजना में सदस्य नहीं होंगे अधिकारी व शिक्षाविद, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश, एडेड कॉलेजों की समिति में बनाए जाते हैं सदस्य


    लखनऊ। प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के संचालन के लिए प्रबंध समिति व आदर्श प्रशासन योजना समिति का गठन किया जाता है। किंतु आदर्श प्रशासन योजना में सदस्यों के मनोनयन में गड़बड़ी व मनमानी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग सख्त हुआ है। विभाग ने इसमें से विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य बनाने की व्यवस्था खत्म करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आदर्श प्रशासन योजना को निरस्त कर दिया गया है। कुछ संस्थाओं में आदर्श प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।

    इसलिए जिन संस्थाओं में प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था, वे साधारण सभा से प्रस्ताव प्राप्त कर इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त कराएं। इसका आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जानकारी के अनुसार कुछ विद्यालयों में समिति के सदस्यों की ओर से आगे चलकर विद्यालयों के एसेट आदि पर अधिकार कर लिया गया है। इसकी शिकायत विभाग में हुई है।

    वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रबंध समिति के चुनाव के लिए संस्था द्वारा पर्यवेक्षक की मांग करने पर डीआईओएस को सात दिन में पर्यवेक्षक नामित करना होगा। यदि डीआईओएस समय से चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं करते हैं तो प्रबंधतंत्र को निर्धारित समय में चुनाव कराने का अधिकार होगा। इस चुनाव को डीआईओएस द्वारा अमान्य नहीं किया जाएगा।

    प्रबंध समिति का चुना होने के बाद हस्ताक्षर प्रमाणित करने के लिए डीआईओएस को 14 दिन के अंदर भेजा जाएगा। निर्विवाद रूप से कार्यरत प्रबंध समिति के चुनाव में पूर्व प्रबंधक चुने जाते हैं तो फिर से हस्ताक्षर प्रमाणित करने की जरूरत नहीं है। वहीं पदाधिकारी व समिति के सदस्यों का का कार्यकाल पांच साल का होगा। अगर आदर्श प्रशासन योजना निरस्त भी होती है तो प्रबंध समिति का कार्यकाल वही होगा जो संस्था की प्रशासन योजना में पहले से तय है।


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में।

    यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता

    यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता 


    प्रयागराज : पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार के कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की गई है, जिन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई तो की, लेकिन 10वीं या 12वीं तक पहुंचने से पहले ही विद्यालय जाना बंद कर दिया। देश भर में यह संख्या दो करोड़ 72 लाख है, जिनमें से उत्तर प्रदेश के 47.69 लाख हैं। उत्तर प्रदेश के 'आउट आफ स्कूल' बच्चों को इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


    यह सर्वे करीब तीन वर्ष की अवधि में किया गया है। इन बच्चों की पहचान उन्हें विद्यालय से मिलने वाले यूनिक नंबर (अपार आइडी) के आधार पर की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस योजना तैयार की है। एनआइओएस की मदद से इन बच्चों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जिला या ब्लाक स्तर पर पीएमश्री विद्यालय में इनके नामांकन प्रदेश सरकार कराएगी। इसके बाद एनआइओएस के माध्यम से पाठ्यसामग्री संबंधित विद्यार्थियों के घर भेजी जाएगी।

    लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट, 19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल

    लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट,  19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल 


    प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों की सेवा सिर्फ तकनीकी आधार समाप्त करना अनुचित है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए कोर्ट ने निरस्त कर संबंधित शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है।


    मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाई स्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। वर्ष 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई और 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया। 

    वर्ष 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया। शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।  

    खंडपीठ ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। वर्ष 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।

    शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद नहीं किया जा सकता। यदि धोखाधड़ी नहीं है तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30 अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद करते हुए शिक्षकों की सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।

    81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी

    81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी

    प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज शामिल


    प्रयागराज। प्रदेश में 81 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद के सृजन की स्वीकृति मिल गई है। इनमें 32 निर्माणाधीन तथा प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज भी शामिल हैं।

    माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-1 के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त ने बताया कि इन पदों पर भर्ती उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा (पंचम संशोधन) नियमावली-2025 के तहत की जाएगी। इससे प्रदेश में नए विद्यालयों के संचालन को गति मिलेगी।

    प्रधानमंत्री जन विकास योजना के अंतर्गत निर्मित 49 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद सृजित किए गए हैं। इनमें अंबेडकरनगर के टांडा, बदायूं के सैदपुर, बहराइच के गुरघुट्टा, अचौलिया और बसहियापाते, बरेली के उरला जागीर व पैंगा रिछा सहित सिद्धार्थनगर, कई जनपदों के विद्यालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त संभल, पीलीभीत, अमरोहा, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, संतकबीरनगर, मेरठ और हापुड़ में एक-एक, जबकि बिजनौर, लखीमपुर, सीतापुर और रामपुर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं। शामली, मुरादाबाद और सीतापुर में तीन-तीन, मुजफ्फरनगर में चार तथा सहारनपुर और बरेली में छह-छह कॉलेज इस सूची में शामिल हैं।

    32 निर्माणाधीन कॉलेज भी शामिल: इसके साथ ही 32 निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में भी प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें मैनपुरी, अयोध्या, एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, संभल, कन्नौज, शामली, अमेठी, मेरठ और सोनभद्र में एक-एक, जबकि सीतापुर और बिजनौर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं।


    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

    अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के संयोजन में दर्ज कराया विरोध

    14 अप्रैल 2026
    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए मशाल जलाई। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।


    राजधानी लखनऊ में बीएन सिंह की प्रतिमा के पास से शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। नो टीईटी बिफोर आरटीई की तख्तियां लिए शिक्षकों ने 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए टीईटी अनिवार्यता के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 25 साल की लंबी सेवा करने के बाद अब वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके रोजगार पर लटकी तलवार को हटाया जाए। जिलों में भी शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में मशाल जलाई।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय व विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों पर अव्यवहारिक नियम थोप रही है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। टीईटी की अनिवार्यता, पेंशन समाप्त करना, निजीकरण और सेवा शर्तों में लगातार हो रहे बदलाव जैसे मुद्दे आज पूरे शिक्षक व कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।

    विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सरकार टेट अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करे। पुरानी पेंशन बहाल कर शिक्षकों व कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करे। जुलूस में अनिल यादव, दिलीप चौहान, हरिशंकर राठौर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह आदि शामिल थे।



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक निकालेंगे मशाल जुलूस

    13 अप्रैल 2026
    लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी जैसी नई शर्तें थोपना अनुचित है।

     मुख्य विधिक प्रभारी विवेकानन्द ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता हटाने के लिए न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संतोष तिवारी ने आंदोलन को निर्णायक बताया।

     इसके अलावा कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान, शालिनी मिश्रा तथा ओपी त्रिपाठी समेत कई शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की। 



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध हेतु 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालयों में मशाल जुलूस के लिए किया जा रहा शिक्षकों से व्यापक जनसंपर्क

    10 अप्रैल 2026
    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी। 

    महासंघ के सभी घटक संगठनों द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर जनसंपर्क किया जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय व समन्वयक विजय कुमार बंधु ने बताया कि विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आंदोलन को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा व न्यायपूर्ण व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानकर समर्थन दिया है। 

    आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की कि जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर अधिकतम संख्या में सहभागिता सुनिश्चित करें। 



    टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद

    6 अप्रैल 2026
    लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है। 

    शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।



    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

    दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

    प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


     महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


     उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

    यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा

    यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा

    छात्रों के साथ विद्यालय के कामकाज में होगा उपयोगी

    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। इसके तहत छात्रों को नए सत्र 2026-27 में निःशुल्क वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग कंपोजिट ग्रांट से प्रदेश के 2441 विद्यालयों में वाई-फाई लगवाएगा। जो छात्रों के साथ-साथ विद्यालय के कामकाज में भी उपयोगी होगी।


    हाल के वर्षों में प्रदेश के राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन से जुड़े संसाधन बेहतर करने के लिए कवायद की जा रही है। इसी क्रम में विद्यालयों में वाई-फाई लगवाया जाएगा। यह छात्रों के साथ-साथ विद्यालयों में बनी स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, प्रधानाचार्य को मिले टैबलेट आदि के संचालन में भी उपयोगी होगा।

    इससे ऑनलाइन पठन-पाठन को विद्यालयों में बढ़ावा दिया जा सकेगा। विद्यालयों में वाई-फाई की सुविधा का विस्तार होने से छात्रों को न केवल अपनी पढ़ाई के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे विभिन्न शैक्षिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे छात्र ऑनलाइन ट्यूटोरियल, ई-बुक्स और अन्य डिजिटल शैक्षिक सामग्री का लाभ उठा सकेंगे।

    गणित-विज्ञान जैसे विषयों को विजुअल समझाया जा सकेगा। शिक्षक प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड के जरिए लाइव कंटेंट दिखा सकते हैं। वाई-फाई की सुविधा पढ़ाई को रोचक भी बनाने में मददगार होगी। छात्रों को किसी भी चीज में शोध करने में आसानी होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। क्योंकि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अभी भी संसाधनों की कमी है।


    स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब का बेहतर उपयोग

    माध्यमिक विद्यालयों में पहले से बनी स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब भी इस सुविधा के मिलने से पूरी क्षमता से काम करेंगे। वाई-फाई की सुविधा इन अत्याधुनिक शिक्षण उपकरणों के प्रभावी प्रयोग को सुनिश्चित करेगी। शिक्षक इन संसाधनों से इंटरैक्टिव पढ़ाई करा सकेंगे, जिससे छात्रों की समझ और जुड़ाव बढ़ेगा। वहीं प्रधानाचार्यों को दिए गए टैबलेट का संचालन भी वाई-फाई से अधिक सुचारू रूप से हो सकेगा, जिससे विद्यालय प्रबंधन में दक्षता आएगी।

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

    आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक कर रहे हैं इसका विरोध

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

    उन शिक्षकों को मिली है छूट जिनकी बची है पांच साल की नौकरी


    प्रयागराज। कक्षा एक से आठ तक  के सभी सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दस अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन की रिट याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में इस कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को ही चुनौती दी गई है, इसलिए इसमें कोई दम नहीं है।


    इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) उत्तर प्रदेश की रिट याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने साफ कहा था कि याचिका की सारी प्रार्थनाएं एक सितंबर 2025 के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले से पहले ही तय हो चुकी हैं। एक सितंबर को शीर्ष अदालत ने आरटीई एक्ट के तहत गैर-माइनॉरिटी स्कूलों में टीईटी अनिवार्य माना था।

    सेवारत पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।


    दोनों फैसलों का मतलब

    सुप्रीम कोर्ट ने अब दो बार (17 नवंबर 2025 और दस अप्रैल 2026) यूपी के शिक्षक संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों मामलों में कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ है कि आरटीई कानून और टीईटी की अनिवार्यता पर कोई ढील नहीं मिलेगी। प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों पर अब टीईटी पास करने का दबाव बढ़ गया है। जिन शिक्षकों की पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास न करने पर नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

    जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट

    जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट 

    मऊ निवासी याची ने आदेश को को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, शिक्षक का निलंबन रद्द

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में दर्ज जन्मतिथि की भिन्नता को धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलतबयानी नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मऊ के सहायक अध्यापक विजय यादव की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि अभ्यर्थी ने गलत जन्मतिथि का सहारा लेकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तब तक ऐसी विसंगति को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है।


    याची की 2014 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की गई थी। सेवा के कई साल बाद एक शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने जांच शुरू की, जिसमें यह पाया गया कि उनकी आठवीं क्लास के रिकॉर्ड और हाईस्कूल गजट में जन्मतिथि दो जुलाई 1984 दर्ज थी। वहीं, नियुक्ति के लिए प्रस्तुत 'पूर्व मध्यमा' प्रमाणपत्र में यह तिथि सात जुलाई 1987 अंकित थी। इसी विसंगति को तथ्यों को छिपाना और धोखाधड़ी मानते हुए विभाग ने 27 जून 2019 को याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया था। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने कभी भी हाईस्कूल के उस प्रमाणपत्र का उपयोग नहीं किया, जिसमें 1984 की जन्मतिथि दर्ज थी। स्पष्ट किया कि याची की पूरी शैक्षणिक यात्रा और नियुक्ति पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की डिग्री पर आधारित थी, जो पूर्णतः वैध है।


    दस्तावेज फर्जी मिलते हैं तो कार्रवाई को स्वतंत्र

    कोर्ट ने पाया कि विभाग ने याची के किसी भी प्रमाणपत्र को फर्जी या जाली नहीं पाया गया है। यदि हाईस्कूल वाली जन्मतिथि (1984) को भी सही मान लिया जाए तो भी वह निर्धारित आयु व पात्रता के दायरे में ही है। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि याची ने किसी गलत मंशा से इस जानकारी को छिपाया था। कोर्ट ने याची को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही विभाग को छूट भी दी है कि यदि भविष्य में याची के प्रस्तुत मूल दस्तावेज कभी फर्जी या जाली पाए जाते हैं तो अधिकारी कानून के अनुसार पुनः कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

    Monday, April 13, 2026

    रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार


    लखनऊ। प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में छात्राओं को और बेहतर सुविधा देने की कवायद नए सत्र से पहले पूरी हो रही है। एक ओर जहां खाली पदों को तेजी से भरा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत ढांचे और छात्राओं की दैनिक सुविधाओं के विस्तार में भी प्रगति आई है।


    केजीबीवी में एकेडमिक हॉस्टल, अतिरिक्त डॉरमेट्री, कंप्यूटर लैब और टॉयलेट ब्लॉक जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। प्रयागराज में 43, बलिया में 42, उन्नाव में 39 और एटा में 35 रिक्तियों को चिह्नित कर इनको भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जबकि श्रावस्ती, रायबरेली, आजमगढ़, ललितपुर आदि में कोई भी पद खाली नहीं है। 


    दूसरी तरफ छात्राओं के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के लिए रोटी मेकिंग मशीन, सोलर गीजर, जेनसेट व वाशिंग मशीन जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही फोक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट, ओपन जिम और एक केजीबीवी-एक खेल जैसी पहल भी छात्राओं के समग्र विकास में सहयोगी बन रही हैं।

    Sunday, April 12, 2026

    उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन के संबंध में

    उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन के संबंध में

    बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग

    बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग

    लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने गर्मी की छुट्टियों में जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने पर उन्हें प्रतिकर अवकाश देने की मांग उठाई है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है।


     प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी एवं प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि गर्मी की छुट्टियां शिक्षकों को उनके आवश्यक एवं व्यक्तिगत कार्यों के लिए प्रदान की जाती हैं, इसलिए यदि इस अवधि में उनकी ड्यूटी शासकीय कार्यों में लगाई जाती है तो उनका अवकाश प्रभावित होता है। ऐसे में जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना अथवा अन्य सरकारी कार्यों में लगाई जाए, उन्हें बाद में प्रतिकर अवकाश दिया जाना चाहिए। 

    उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों का मनोबल बना रहेगा और वे पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ शासकीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। संगठन ने यह भी मांग की है कि गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय एवं जिले के भीतर तबादलों की प्रक्रिया भी आयोजित की जाए। 

    International Maths Olympiad 2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।

    International Maths Olympiad 2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।


    Saturday, April 11, 2026

    प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश

    प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश


    प्रयागराज, 10 अप्रैल 2026।
    उत्तर प्रदेश के शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी राजकीय एवं सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जारी निर्देश के अनुसार, आगामी 28 एवं 29 अप्रैल 2026 को इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने की संभावना को देखते हुए महाविद्यालयों को पहले से सक्रिय होने को कहा गया है। इसके तहत सभी महाविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र के 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित इंटर कॉलेजों से संपर्क स्थापित करेंगे और प्रवेश प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए “प्रवेश उत्सव” कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

    पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि छात्र-छात्राओं को आकर्षित करने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं, जिनकी फोटोग्राफी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रमाण भी संकलित किए जाएं। इन गतिविधियों की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

    शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि महाविद्यालयों में छात्र संख्या में वृद्धि करना अनिवार्य है। यदि किसी महाविद्यालय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो संबंधित प्राचार्य, शिक्षक एवं कार्मिकों के कार्य मूल्यांकन में इस तथ्य को शामिल किया जाएगा और शासन को अवगत कराया जाएगा।

    इस आदेश की प्रतिलिपि सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिया गया है कि वे अभियान की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।

    शिक्षा विभाग के इस कदम को उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।



    Friday, April 10, 2026

    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश

    पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश 

    2005 तक चयनित ऐसे शिक्षामित्रों का मामला जो बाद में अध्यापक बन गए

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अनूप कुमार सिंह व अन्य की याचिका सुनवाई करते हुए दिया है।


    सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 28 जून 2024 एवं 30 जुलाई 2025 के शासनादेशों के तहत पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र दिया गया है और याचियों का दावा संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    सरकारी वकील ने याचियों की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को याचियों के दावे पर नियमानुसार विचार कर उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करते हुए दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि वर्ष 2005 तक चयनित ऐसे शिक्षा मित्र जो बाद की सीधी भर्तियों में अध्यापक बन गए हैं, उन्होंने पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र भरा है जिस पर शासन को निर्णय लेना है।