DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, August 22, 2119

अब तक की सभी खबरें एक साथ एक जगह : प्राइमरी का मास्टर ● इन के साथ सभी जनपद स्तरीय अपडेट्स पढ़ें


 📢 प्राइमरी का मास्टर PKM
      अधिकृत WhatsApp चैनल


व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ टुडे
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी 
  • प्राइमरी का मास्टर कॉम
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर खबरें faizabad, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com fatehpur, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर 2019
  • प्राइमरी का मास्टर अवकाश तालिका 2019
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़ इन हिंदी लैंग्वेज
  • primary ka master 69000 
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master latest news 2018 
  • primary ka master 69000 
  • news.primarykamaster.com 2019 
  • news.primarykamaster.com 2020   
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master transfer news 2019 
  • primary ka master app 
  • primary ka master transfer news 2018-19 
  • primary ka master todays latest news regarding 69000 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master mutual transfer 
  • up primary teacher transfer latest news 
  • primary teacher ka transfer



स्क्रॉल करते जाएं और पढ़ते जाएं सभी खबरें एक ही जगह। जिस खबर को आप पूरा पढ़ना चाहें उसे क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

    Wednesday, April 1, 2026

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    CTET फरवरी 2026 का परिणाम घोषित, कुल 25.68% अभ्यर्थी सफल

    नई दिल्ली, 30 मार्च 2026।
    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET) फरवरी 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के लाखों अभ्यर्थियों ने भाग लिया।

    जारी आंकड़ों के अनुसार, पेपर-1 में कुल 12,11,611 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 10,65,410 परीक्षार्थी उपस्थित हुए। इनमें से 3,58,937 अभ्यर्थी सफल रहे, जो कुल 33.69 प्रतिशत है। वहीं, पेपर-2 में 21,56,459 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जिनमें से 18,67,428 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए और 3,46,738 अभ्यर्थी सफल हुए, जिसकी सफलता दर 18.56 प्रतिशत रही।

    दोनों पेपरों को मिलाकर कुल 26,49,129 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 23,24,625 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें कुल 5,97,061 अभ्यर्थी सफल घोषित किए गए, जिससे कुल सफलता प्रतिशत 25.68 रहा।

    सीबीएसई ने बताया कि अभ्यर्थी अपना परिणाम आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर देख सकते हैं। साथ ही, मार्कशीट और पात्रता प्रमाण पत्र भी शीघ्र ही डिजिलॉकर पर उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिन्हें अभ्यर्थी अपने पंजीकृत मोबाइल नंबर के माध्यम से डाउनलोड कर सकेंगे। 




    CBSE ने जारी किया CTET का रिजल्ट, जानिए!  कितने नंबर वाला होगा पास? इस लिंक से करें चेक


    🔴 इस लिंक से देखें अपना परिणाम 

    CBSE ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) पेपर-1 और पेपर-2 का रिज्लट जारी कर दिया है। उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना स्कोर चेक कर सकते हैं।


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (CTET) 2026 का रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यह परीक्षा 7 और 8 फरवरी 2026 को आयोजित की गई थी। इस परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अपने लॉगिन डिटेल्स डालकर आसानी से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं। लाखों छात्रों को इस परीक्षा के रिजल्ट का इंतजार था। 


    इस परीक्षा में देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 25 लाख उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया था। अब यह सभी उम्मीदवार सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकते हैं। आप सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट जारी कर सकते हैं क्योंकि सीबीएसई ने सीटीईटी पेपर-1 और पेपर-2 दोनों का रिजल्ट एक साथ जारी कर दिया है। 

     

    कैसे चेक करें रिजल्ट?

    सबसे पहले CTET की आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर जाएं।

    लेटेस्ट न्यूज सेक्शन में 'CTET February Result 2026' का विकल्प दिखेगा।

    इस लिंक पर क्लिक करने से आप रिजल्ट लॉगिन पेज पर पहुंच जाएंगे।

    अपना रोल नंबर और पासवर्ड डालें।

    सबमिट करते ही आपका CTET रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा।

    इसके बाद आप अपना स्कोर कार्ड डाउनलोड कर लें। 


    कितने नंबर वाला होगा पास?
    CTET पास करने के लिए जनरल कैटेगरी के उम्मीदवारों को कम से कम 60 प्रतिशत नंबर लाने होते हैं। इसका मतलब है कि कुल 150 नंबरों में से कैंडिडेट्स को कम से कम 90 नंबर हासिल करने होते हैं। रिजर्व कैटेगरी के कैंडिडेट्स को CTET एग्जाम क्लियर करने के लिए 55 प्रतिशत स्कोर करना होता है। अगर आपका स्कोर इतना है तो आप इस परीक्षा में सफल हो गए हैं। इसके बाद आपका यह रिजल्ट लाइफ टाइम वैलिड रहेगा यानी इस रिजल्ट के आधार पर आप आगे परीक्षाएं दे सकते हैं। 


    पेपर-1 और पेपर-2 क्या है?
    सीबीएसई सेंट्रल टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट के पेपर-1 और पेपर-2 आयोजित किया था। पेपर 1 पास करने वाले अभ्यर्थी कक्षा 1 से लेकर 5वीं तक और पेपर 2 एग्जाम क्वालीफाई करने पर उम्मीदवार कक्षा 6 से लेकर 8 तक पढ़ाने के लिए पात्र हो जाते हैं।

    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश

    यूपी बोर्ड का नया सत्र आज से, ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य, परिषद ने दिए निर्देश- कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2026-27 की शुरुआत बुधवार से हो जाएगी। इसके साथ ही प्रवेश, पंजीकरण और ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू होगी।

    इस बार विशेष व्यवस्था के तहत सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की उपस्थिति परिषद के पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज की जाएगी। परिषद ने सभी विद्यालयों को निर्देशित किया है कि कक्षा नौवीं से 12वीं तक का संचालन एक अप्रैल से अनिवार्य रूप से किया जाए।

    बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज करने में किसी भी प्रकार की शिथिलता न बरती जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों के वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य होगी, इसलिए इस नियम का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

    सचिव ने बताया कि सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं व 11वीं के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10वीं व 12वीं के छात्रों के परीक्षा आवेदन से संबंधित समय सारिणी अलग से जारी की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि नए सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्रों का पंजीकरण और पूरा विवरण उसी दिन परिषद के पोर्टल पर दर्ज किया जाए।

    ताकि ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली में उनका नाम प्रदर्शित हो सके और उपस्थिति अंकित की जा सके। साथ ही अभिभावकों और छात्रों से कहा गया है कि वे किसी के बहकावे में आकर अनधिकृत या महंगी किताबें न खरीदें। परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकों की सूची और निर्धारित दरें वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।



    माध्यमिक शिक्षा : शैक्षिक सत्र 2026-27 में प्रवेश, पंजीकरण एवं ऑनलाइन उपस्थिति के संबंध में निर्देश


    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश

    भारत में भी बच्चों की सोशल मीडिया पहुंच पर सख्ती की तैयारी,  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की उम्र आधारित नियमों की सिफारिश


    नई दिल्ली। बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त नियम बनाने की दिशा में कदम तेज हो गए हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सुझाव दिया है कि बच्चों को उनकी उम्र के अनुसार ही सोशल मीडिया तक पहुंच दी जाए और इसके लिए एक स्पष्ट नियामक ढांचा तैयार किया जाए।


    आयोग के अनुसार, 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के स्वतंत्र उपयोग की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं, 13 से 15 वर्ष के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य हो और 15 से 18 वर्ष के किशोरों को सीमित और निगरानी के साथ उपयोग की छूट दी जाए। आयोग का मानना है कि इससे बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य की बेहतर रक्षा की जा सकेगी।

    रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय अधिक जोखिम वाले फीचर्स पर नियंत्रण किया जाना चाहिए। साथ ही, बच्चों की गोपनीयता और डेटा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए ताकि उनके अधिकार सुरक्षित रह सकें।

    आयोग ने उम्र सत्यापन प्रणाली को अनिवार्य बनाने की भी सिफारिश की है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चे तय नियमों के अनुसार ही सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, एक केंद्रीय नियामक संस्था के गठन का सुझाव दिया गया है, जो इन नियमों के पालन की निगरानी करेगी।

    रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वहां बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्त प्रावधान लागू किए गए हैं, जहां नियमों का उल्लंघन करने पर कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के बढ़ते डिजिटल एक्सपोजर को देखते हुए इस तरह के नियम समय की मांग हैं। यदि इन सिफारिशों को लागू किया जाता है, तो यह बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई

    संविदा प्रवक्ताओं को प्रमोशन में राहत लेकिन आर्थिक लाभ नहीं, व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई


     लखनऊ: राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत ऐसे प्रवक्ता जो पहले संविदा पर कार्यरत थे और बाद में नियमित हुए, उनकी पुरानी संविदा सेवा को करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत प्रमोशन में जोड़ा जाएगा। हालांकि यह लाभसिर्फ कागजी (नोशनल) होगा और इससे कोई आर्थिक लाभनहीं मिलेगा। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए चार सदस्यीय समिति बनाई गई है, जिसकी अध्यक्षता उच्च शिक्षा निदेशक करेंगे। समिति 15 दिन में रिपोर्ट देगी।


    यह व्यवस्था उन प्रवक्ताओं पर लागू होगी, जो वर्ष 2005-06, 2006-07 और 2008-09 में संविदा पर नियुक्त हुए थे और बाद में 26 दिसंबर 2016 के शासनादेश के तहत नियमित किए गए। उनकी सेवाएं पहले ही बिना अंतराल के निरंतर मानी जा चुकी हैं। यह निर्णय यूजीसी 2010 और 2018 के नियमों के आधार पर लिया गया है। 

    इन नियमों में शर्तों के साथ संविदा या अस्थायी सेवा को प्रमोशन में जोड़ने का प्राविधान है। यह भी स्पष्ट है कि सेवा सरकारी, निजी या स्थानीय संस्थान में की गई हो, उसमें भेदभाव नहीं होगा। हालांकि, इस निर्णय के तहत संविदा सेवा को केवल रिकार्ड में जोड़ा जाएगा। इससे न तो वरिष्ठता तय होगी, न पेंशन में लाभ मिलेगा और न ही कोई एरियर या अतिरिक्त वेतन दिया जाएगा। प्रमोशन के बाद वेतन केवल वास्तविक प्रमोशन की तारीख से ही लागू होगा। 

    यह निर्णय डा. रजत गंगवार समेत कई सहायक आचार्यों द्वारा पांच जुलाई 2025 को किए गए अनुरोध के बाद लिया गया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पूर्व अध्यक्ष डा. दीनानाथ सिंह और पूर्व संयुक्त महामंत्री डा. जगदीश सिंह दीक्षित ने कहा कि यह मांग लंबे समय से की जा रही थी। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया है कि अनुदानित महाविद्यालयों के शिक्षकों को भी यही लाभ दिया जाए।

    अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

    अटल आवासीय विद्यालयों में भी लागू होगा प्रोजेक्ट प्रवीण, आईटी, हेल्थकेयर, एआई और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आधुनिक कोर्स से छात्र होंगे सशक्त

    सरकार की पहल से 18 विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को मिलेगा कौशल प्रशिक्षण


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से अब प्रदेश के 18 अटल आवासीय विद्यालयों में प्रोजेक्ट प्रवीण लागू किया जाएगा। इसके तहत कक्षा 6 से 12 तक संचालित इन विद्यालयों के 3447 विद्यार्थियों को आधुनिक कौशल प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। विद्यार्थियों को आईटी, आईटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आदि का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसमें सॉफ्ट स्किल्स और इंडस्ट्रियल विजिट भी शामिल हैं।


    एआई फॉर ऑल मॉड्यूल को भी जोड़ा गया है, जिससे विद्यार्थी तकनीकी रूप से सशक्त बन सकें। अब तक यह कार्यक्रम केवल सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में संचालित था।

    व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल के निर्देशन में मिशन निदेशक पुलकित खरे द्वारा कराए गए सर्वे के आधार पर विद्यालयों को चयनित किया गया है। आगरा, अलीगढ़, अयोध्या, आजमगढ़, बस्ती, बांदा, गोंडा, झांसी, कानपुर नगर, लखनऊ, बुलंदशहर, मिर्जापुर, प्रयागराज, गोरखपुर, मुजफ्फरनगर, वाराणसी, बरेली और मुरादाबाद स्थित 18 अटल आवासीय विद्यालयों के कुल 3447 छात्र-छात्राओं को प्रशिक्षण के लिए पात्र पाया गया है। अटल आवासीय विद्यालय में श्रमिकों, प्रवासी कामगारों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभावान बच्चों को निशुल्क आवासीय शिक्षा प्रदान की जाती है।

    यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

    यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों के मूल्यांकन की अवधि बढ़ी, परिणाम में हो सकती है देरी

    31 मार्च 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन निर्धारित समय सीमा में पूरा नहीं हो सकेगा। लगभग 50 लाख से अधिक छात्रों की कॉपियों की जांच एक अप्रैल तक पूरी होना संभव नहीं है। बोर्ड ने मूल्यांकन अवधि को तीन से चार दिन बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे परीक्षा परिणाम घोषित होने में भी देरी की संभावना जताई जा रही है। 

    प्रदेश के 254 मूल्यांकन केंद्रों में से अब तक 117 केंद्रों पर मूल्यांकन का कार्य पूरा हो चुका है। करीब 80 प्रतिशत कॉपियों का मूल्यांकन संपन्न हो गया है, जबकि शेष कॉपियों की जांच चार अप्रैल तक पूरी होने की उम्मीद है। मंगलवार को 192 केंद्रों पर 47,804 परीक्षकों ने मूल्यांकन कार्य किया। इस दौरान हाईस्कूल की 5,80,800 और इंटरमीडिएट की 5,98,996 समेत कुल 11,79,796 उत्तर पुस्तिकाओं की जांच की गई।

    हाल के दिनों में मूल्यांकन कार्य में तेजी आई है। 30 मार्च को 17,56,851, 29 मार्च को 25,41,361 और 28 मार्च को 33,91,506 कॉपियों का मूल्यांकन किया गया। बुलंदशहर समेत कई जिलों में कॉपियों की जांच पूरी हो चुकी है। ईद और रामनवमी के अवकाश के कारण मूल्यांकन कार्य तीन दिन प्रभावित रहा। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित समय में कार्य पूरा नहीं हो सकेगा, इसलिए इसे तीन से चार दिन आगे बढ़ाया गया है। 






    यूपी बोर्ड मूल्यांकन में 2% गलती तो 3 साल के लिए डिबार, परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी

    यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी केंद्रों के उपनियंत्रक को भेजे निर्देश

    अंकेक्षण के बावजूद गलती तो नकल अधिनियम में होगी कार्रवाई

    15 मार्च 2026
    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हो रहा है। कॉपियों के मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए, इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी 250 केंद्रों के उपनियंत्रकों (प्रधानाचार्यों) को सख्त निर्देश दिए हैं। मूल्यांकन के लिए भेजे निर्देश में लिखा है कि मूल्यांकन में दो प्रतिशत तक त्रुटि पाए जाने पर परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी तथा संबंधित परीक्षक को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। एक प्रतिशत तक त्रुटि मिलने पर मानदेय में 50 प्रतिशत की कटौती होगी तथा दशमलव पांच प्रतिशत तक त्रुटि होने पर 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

    अंकेक्षण (दोबारा जांच) के बाद भी यदि किसी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाएगी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अंकेक्षक की होगा। कॉपी जांचने या अंकेक्षण में लापरवाही पर बोर्ड के नियम /विनियम एवं उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अंकेक्षक की व्यवस्था का उद्देश्य है कि मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो तथा त्रुटि/लापरवाही के कारण छात्रों के साथ अन्याय न हो। अंक सावधानी पूर्वक चढ़ाए जाएं क्योंकि कटिंग होने पर कम्प्यूटर अंक स्वीकार नहीं करेगा और परीक्षार्थी का परीक्षाफल अपूर्ण रह जाएगा।

    विज्ञान-सोशल की कॉपियों का पैनल मूल्यांकन
    हाईस्कूल की सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं का पैनल मूल्यांकन होगा। सामाजिक विज्ञान के प्रथम खंड को इतिहास एवं राजनीति शास्त्र के साथ स्नातक प्रशिक्षित तथा द्वितीय खंड अर्थशास्त्र एवं भूगोल के साथ स्नातक प्रशिक्षित योग्यताधारी परीक्षक मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम खंड को भौतिक विज्ञान के साथ बीएससी प्रशिक्षित स्नातक तथा द्वितीय एवं तृतीय खंड को रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों के साथ बीएससी प्रशिक्षित परीक्षक मूल्यांकन करेंगे।




    किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
    यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

    बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

    सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


    भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

    हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

    निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


    यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

    गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

    मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

    सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

    मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

    परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



    हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

    प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

    18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



    1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

    ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

    10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

    सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

    बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

    उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

    कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



    यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

    मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


    प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

    बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

    पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।

    Tuesday, March 31, 2026

    सीएम "योगी की पाती" से छात्रों को संदेश – नए सत्र में शिक्षा, संस्कार और खेल पर जोर

    सीएम "योगी की पाती" से छात्रों को संदेश – नए सत्र में शिक्षा, संस्कार और खेल पर जोर

    स्कूली वाहनों का पोर्टल पर दर्ज कराएं ब्योरा, अब होगी ऑनलाइन निगरानी, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए

    स्कूली वाहनों का पोर्टल पर दर्ज कराएं ब्योरा, अब होगी ऑनलाइन निगरानी, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए

    अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा ने जारी किए निर्देश

    लखनऊ। बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्कूली वाहनों का फिटनेस दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से सभी डीआईओएस और बीएसए को जारी निर्देश में कहा गया है कि स्कूल के वाहन हादसों का शिकार न होने पाए। वाहनों की निगरानी के लिए एक पोर्टल बनाया गया है। इससे परिवहन मुख्यालय से वाहनों की खामी का पता चल जाएगा और प्रत्येक वाहन की स्थिति पर नजर रहेगी।


    सभी डीआईओएस व बीएसए को जारी निर्देश में कहा गया है कि 15 अप्रैल तक अभियान चलाकर पोर्टल पर सभी स्कूलों का डाटा फीड कराएं। वाहन संबंधी डाटा में वाहन का पंजीकरण नंबर, वाहन का प्रकार, वाहन की आयु, वाहन मॉडल, इंजन संख्या, चेसिस संख्या, वाहन स्वामी का नाम, पता, मोबाइल नंबर, परमिट संख्या व उसकी वैधता तिथि, फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा प्रमाण पत्र, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण पत्र, जीपीएस की स्थिति व सीसीटीवी कैमरों हैं या नहीं, सभी जानकारियां पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। इससे आसानी से जानकारी मिल जाएगी कि कौन सा वाहन कब अनफिट हो रहा है या फिर कोई अन्य कमी है तो संबंधित जिले के अधिकारियों व स्कूल प्रशासन से संपर्क कर उसको दुरुस्त किया जाएगा।

    वाहन के विवरण के साथ स्कूल वाहन चालकों का ब्योरा देना होगा। इसमें चालक का नाम, पता, मोबाइल नंबर, डीएल की डिटेल, चालक का अनुभव प्रमाणपत्र, पुलिस सत्यापन रिपोर्ट, मेडिकल रिपोर्ट आदि भी देना होगा। इससे चालक की भी निगरानी की जा सकेगी। 

    इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को मुफ्त में कराया जाएगा एआई का कोर्स, 7 अप्रैल तक होगा पंजीकरण, सभी डीआईओएस को निर्देश जारी

    इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को मुफ्त में कराया जाएगा एआई का कोर्स, 7 अप्रैल तक होगा पंजीकरण, सभी डीआईओएस को निर्देश जारी

    लखनऊ। प्रदेश में 11वीं और 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का कोर्स मुफ्त में करने का बेहतरीन मौका मिलने जा रहा है। यह कार्यक्रम 15 अप्रैल से शुरू हो रहा है जो 60 दिनों तक चलेगा। यह पाठ्यक्रम छात्रों के भविष्य और रोजगारपरक शिक्षा के लिहाज से बेहद उपयोगी माना जा रहा है।


    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डीआईओएस को इसमें अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। सभी विद्यालयों को 2 से 7 अप्रैल के बीच अधिकतम पंजीकरण कराने के निर्देश दिए गए हैं। 


    उन्होंने बताया यह पहल महाराणा प्रताप इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गोरखपुर की ओर से टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) और महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के सहयोग से की जा रही है। इस ऑनलाइन प्रोग्राम को पूरा करने वाले छात्रों को 2 क्रेडिट पॉइंट के साथ प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के प्रभावी संचालन के लिए संयुक्त निदेशक विवेक नौटियाल को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।

    Monday, March 30, 2026

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

    दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

    प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


     महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


     उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

    Sunday, March 29, 2026

    उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

    उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

    50 प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य 2035 तक पाने की कवायद


    प्रयागराज। कक्षा छह से 12 साल के बच्चों के लिए स्कूल चलो अभियान की तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी दाखिले को विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश के सभी 24 राज्य विश्वविद्यालयों, 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार विशेष प्रवेश अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।


    सीबीएसई, सीआईएससीई समेत सभी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद अप्रैल से यह अभियान शुरू होगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा के अनुसार इसकी शुरुआत आगरा से होगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन लगभग 27 प्रतिशत है। 2035 तक सकल नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 

    मंडल मुख्यालय वाले जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से दाखिला उत्सव आयोजित किया जाएगा, जहां सभी महाविद्यालय अपने स्टाल लगाकर बच्चों को अपने यहां पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों, छात्रवृत्ति एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी देंगे।


    छात्रसंख्या घटने से चिंतित

    यूपी के महाविद्यालयों में 2025-26 सत्र में छात्रसंख्या घट गई है। प्रदेश के 216 राजकीय, 330 अशासकीय सहायता प्राप्त और 8072 वित्तविहीन महाविद्यालयों में 4895468 विद्यार्थियों ने परंपरागत पाठ्यक्रमों (बीए, बीएससी, बीकॉम आदि) में दाखिला लिया है। जबकि पिछले साल दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 53,28,969 थी। 

    अभियान चलाकर उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा

    अभियान चलाकर उच्च प्राथमिक स्कूलों के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा

    माध्यमिक स्कूल फीडर विद्यालय बनेंगे, छात्र संख्या बढ़ाने के लिए की जा रही पहल ब्लॉक में वरिष्ठतम प्रधानाचार्य बनेंगे नोडल

    लखनऊ। राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ाने के लिए पहली बार अनूठी पहल की जा रही है। पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले उच्च प्राथमिक स्कूलों के कक्षा आठ के छात्रों का दाखिला राजकीय व एडेड माध्यमिक स्कूलों में कराया जाएगा। इनको उच्च प्राथमिक स्कूलों के फीडर विद्यालय बनाए जाएंगे। प्रत्येक ब्लॉक में वरिष्ठतम प्रधानाचार्य को प्रभारी व नोडल अधिकारी बनाया जाएगा।

    स्कूल चलो अभियान का प्रथम चरण एक से 15 अप्रैल तक चलेगा। सभी सरकारी व एडेड माध्यमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां कक्षा नौ व 11 में प्रवेश कराने के लिए तैयारियां शुरू करें। अपने विद्यालय के पांच किलोमीटर के दायरे में आने वाले सरकारी उच्च प्राथमिक स्कूलों से संपर्क करेंगे। सभी उच्च प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाचार्यों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वह अपने यहां पर एक रजिस्टर तैयार करेंगे, जिसमें कक्षा आठ के छात्रों का पूरा ब्योरा होगा और नौ में प्रवेश लेने की दशा में विद्यालय के नाम आदि का उल्लेख किया जाएगा।

    नोडल अधिकारी इसका ब्योरा जुटाएंगे और कोशिश की जाएगी कि ज्यादा से ज्यादा प्रवेश सरकारी व एडेड माध्यमिक स्कूलों में हो। कोई अभिभावक अगर किसी अन्य स्कूल में प्रवेश कराना चाहता है, तो उन्हें इसकी छूट होगी। ऐसे ही कक्षा 10 के छात्रों का कक्षा 11 में प्रवेश के लिए अभियान चलाएंगे। महानिदेशक, स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि 30 अप्रैल तक स्कूल दाखिले का ब्योरा देंगे।

    शिक्षकों की टीम घर-घर जाएगी

    नोडल की जिम्मेदारी होगी कि कक्षा आठ के पास छात्रों की सूची प्राप्त करेंगे। प्रधानाध्यापक व शिक्षकों की टीम घर-घर संपर्क करके कक्षा नौ व कक्षा 11 में छात्रों का प्रवेश अपने स्कूलों में कराने का आग्रह करेगी।




    अब माध्यमिक विद्यालयों में भी चलेगा स्कूल चलो अभियान, कक्षा 8 के बाद ड्रॉप आउट हो रहे 21 फीसदी छात्रों पर नजर

    एक अप्रैल से बेसिक-माध्यमिक में शुरू किया जाएगा अभियान

    लखनऊ। प्रदेश में एक अप्रैल से शुरू हो रहे नए सत्र 2026-27 को लेकर तैयारी तेज हो गई है। वहीं नए सत्र से बेसिक के साथ ही माध्यमिक विद्यालयों में भी छात्रों की संख्या बढ़ाने व ड्रॉप आउट को रोकने के लिए स्कूल चलो अभियान चलाया जाएगा। इसमें ड्रॉप आउट हो रहे 21 फीसदी छात्रों पर खास नजर होगी।


    प्रदेश के बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विद्यालयों में एक अप्रैल से नए सत्र की शुरुआत होती है। इसे देखते हुए विभाग की ओर से नए सत्र को लेकर व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। हर साल की तरह एक अप्रैल से ही इसे प्रभावी रूप से हर जिले में चलाया जाएगा। वहीं हाल ही में शासन स्तर पर हुई बैठक में निर्देश दिया गया है कि इस साल से माध्यमिक के विद्यालयों में भी इसे लागू किया जाएगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार कक्षा 8 पास करने के बाद कक्षा नौ में 79 फीसदी ही छात्र नामांकन करा रहे हैं। वर्तमान में कक्षा आठ में 37 लाख बच्चे हैं। इसके अनुसार लगभग 8.17 लाख छात्र ड्रॉप आउट होते हैं।

    इसमें 4.13 फीसदी छात्र व 4.03 फीसदी छात्राएं हैं। वहीं प्रदेश में कक्षा नौ से 12 में वर्तमान में 1.07 करोड़ छात्रों का नामांकन है। ऐसे में विभाग का लक्ष्य है कि स्कूल चलो अभियान के तहत कक्षा आठ में पढ़ने वाले ज्यादा से ज्यादा छात्रों का कक्षा नौ में नामांकन कराया जाए। इसके लिए उन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जहां नामांकन दर कम है।

    अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रत्येक बच्चे की पहचान करें और उन्हें विद्यालय लाने के लिए प्रेरित करें। स्कूल चलो अभियान की सफलता के लिए सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया जाएगा।

    Saturday, March 28, 2026

    दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

    दिल्ली शिक्षा निदेशालय ने कक्षा में रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर लगाई रोक, शिक्षकों पर भी नियम लागू

    🔴 कक्षा के दौरान रील्स, शॉर्ट वीडियो बनाने पर रोक।

    🔴 पढ़ाई का माहौल बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश।

    🔴 शैक्षणिक सामग्री अनुमति से, आपत्तिजनक सामग्री प्रतिबंधित।

    दिल्ली  शिक्षा निदेशालय ने दिल्ली के स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शॉर्ट वीडियो बनाने पर सख्त रोक लगा दी है। यह कदम पढ़ाई के माहौल को प्रभावित करने वाली शिकायतों के बाद उठाया गया है। निर्देश में छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को कक्षा के घंटों में ऐसे वीडियो बनाने से मना किया गया है।


    नई दिल्ली। स्कूलों में पढ़ाई के दौरान रील्स और शार्ट वीडियो बनाने के बढ़ते चलन पर अब सख्ती शुरू हो गई है। शिक्षा निदेशालय ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि कक्षा के घंटों में विद्यार्थी, शिक्षक या कर्मचारी किसी भी तरह के रील्स या शार्ट वीडियो न बनाएं।


    निदेशालय ने कहा कि स्कूल परिसर में मनोरंजन के लिए वीडियो बनाए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सभी स्कूल प्रधानाचार्यों को निर्देश दिया गया है कि वे इस तरह की गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाएं।

    केवल शिक्षा पर फोकस दिलाना उद्देश्य
    निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि कोई भी गतिविधि जो पढ़ाई-लिखाई में बाधा डाले या विद्यार्थियों का ध्यान भटकाए, उसे पूरी तरह प्रतिबंधित किया जाए। साथ ही स्कूलों की गरिमा और अनुशासन बनाए रखना जरूरी है और फोकस केवल शिक्षा पर होना चाहिए।

    हालांकि, विभाग ने यह भी कहा है कि शैक्षणिक, सांस्कृतिक या जागरूकता से जुड़े कंटेंट को अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए पहले संबंधित प्राधिकरण की मंजूरी लेनी होगी और शिक्षक की निगरानी में ही ऐसी गतिविधि होनी चाहिए।

    नियम उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी
    साथ ही यह भी साफ किया गया है कि स्कूल परिसर में किसी भी तरह का आपत्तिजनक, गैर-शैक्षणिक या प्रमोशनल कंटेंट रिकार्ड नहीं किया जाएगा। सभी स्कूलों को यह निर्देश तुरंत लागू करने और विद्यार्थियों व कर्मचारियों तक जानकारी पहुंचाने को कहा गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि निर्देशों का उल्लंघन गंभीरता से लिया जाएगा।

    NPS के विरोध में एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे शिक्षक-कर्मचारी

    NPS के विरोध में एक अप्रैल को काला दिवस मनाएंगे शिक्षक-कर्मचारी

    लखनऊ। शिक्षकों और कर्मचारियों ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के विरोध में 1 अप्रैल को काला दिवस मनाने का निर्णय लिया है। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में पारा स्थित डॉ. रामाशीष स्मृति भवन में आयोजित बैठक में इसकी रणनीति बनाई गई। 


    उन्होंने एनपीएस को कर्मचारियों के साथ धोखा बताते हुए कहा कि यह पेंशन नहीं, बल्कि शेयर बाजार पर आधारित असुरक्षित व्यवस्था है। वैश्विक परिस्थितियों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव से कर्मचारियों का भारी नुकसान हुआ है, जिसकी भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। 

    उन्होंने बताया कि एनपीएस के तहत सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बहुत कम पेंशन मिल रही है, जिससे महंगाई में जीवनयापन कठिन है। इसलिए शिक्षक-कर्मचारी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे और पुरानी पेंशन बहाली की मांग करेंगे।

     बैठक में प्रदेश महामंत्री नीरज पति त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष विक्रमादित्य मौर्य, विजय कुमार, नरेंद्र कुमार, सुनील कुमार वर्मा, रजत प्रकाश, राकेश कुमार, अशोक कुमार सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। ब्यूरो

    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड

    नए सत्र में सुबह अखबार से होगी पढ़ाई की शुरुआत, विद्यार्थियों में स्क्रीन समय घटाने और भाषा सुधारने पर रहेगा जोर,  माध्यमिक शिक्षा परिषद के शैक्षणिक कैलेंडर में अखबार पढ़ना अनिवार्य

    लखनऊअप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में माध्यमिक विद्यालयों की प्रार्थना सभा में छात्र-छात्राएं अखबारों की सुर्खियां पढ़ेंगे, कठिन शब्दों का अर्थ समझेंगे और भाषा पर पकड़ मजबूत करेंगे। इसके साथ ही विद्यालयों में मोबाइल लाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की पढ़ने की आदत विकसित करने और बढ़ते स्क्रीन टाइम पर लगाम लगाने के लिए समाचार पढ़ने को अब शैक्षणिक कैलेंडर का हिस्सा बना दिया गया है। इससे पहले दिसंबर में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए समाचार पढ़ना अनिवार्य करने का आदेश जारी किया था।

    विद्यार्थी प्रार्थना सभा में प्रमुख समाचार पढ़ेंगे। शिक्षकों की जिम्मेदारी होगी कि वे समाचारों में आए कठिन शब्दों का सही उच्चारण कराएं और उनका अर्थ व वाक्य प्रयोग भी समझाएं। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और मंडलीय शिक्षा अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि विद्यालयों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। परिषद का मानना है कि किशोरावस्था में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक, मानसिक और नैतिक विकास पर प्रतिकूल असर डालता है। उनकी आंखों की रोशनी कमजोर होती है, पढ़ाई में ध्यान की कमी और आनलाइन गेम्स की लत जैसी समस्याओं को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।



    नए सत्र में यूपी बोर्ड स्कूलों में क्विज, ओडीओपी और रचनात्मक प्रोजेक्ट होंगे अनिवार्य, सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल हो ऐसा होगा प्रयास

     लखनऊ: प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई को ज्यादा रोचक, व्यावहारिक और छात्र-केंद्रित बनाने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। नए शैक्षणिक सत्र से माध्यमिक स्कूलों में सामान्य ज्ञान और स्थानीय उत्पादों की जानकारी पर जोर देने के साथ रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि छात्र सिर्फ किताबों तक सीमित न रहकर व्यावहारिक ज्ञान भी हासिल कर सकें। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सत्र 2026-27 के शैक्षिक पंचांग में इन गतिविधियों को शामिल करते हुए सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं।

    एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना को भी स्कूल स्तर पर बढ़ावा दिया जाएगा। विद्यालयों और छात्रों को दैनिक जीवन में स्थानीय उत्पादों के उपयोग के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    जिला स्तर पर आयोजित होने वाले शिल्प मेले और ओडीओपी से जुड़ी प्रदर्शनियों का भ्रमण भी छात्रों को कराया जाएगा ताकि वे अपने क्षेत्र की पारंपरिक कला, शिल्प और उद्योगों को करीब से समझ सकें। वहीं कक्षा नौ और 11 के छात्रों के लिए नए सत्र शुरू होने से पहले रचनात्मक प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य कर दिया गया है। 

    यह प्रोजेक्ट छात्रों की रुचि के अनुसार होगा और इसमें भाषा, गणित, विज्ञान, कला, संगीत और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों को शामिल करते हुए बहुविषयक दृष्टिकोण अपनाया जाएगा। छात्रों को प्रोजेक्ट के तहत विभिन्न रचनात्मक कार्य करने का अवसर मिलेगा, जैसे पढ़ी गई पुस्तकों की तुलनात्मक समीक्षा लिखना, स्वयं कहानी, कविता या नाटक लिखना, भ्रमण किए गए स्थानों का सचित्र वर्णन करना, अपने बनाए चित्रों का संग्रह तैयार करना, कोई कार्यशील माडल बनाना या कोई कलाकृति तैयार करना।



    यूपी बोर्ड के स्कूलों में जंक फूड के नुकसान बताएंगे, टिफिन में पौष्टिक खाना लाने को करेंगे प्रेरित, जागरूकता कार्यक्रम भी कराए जाएंगे

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से जारी नए एकेडमिक कैलेंडर में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, जागरूकता और व्यावहारिक ज्ञान को प्राथमिकता दी गई है। इस बार बोर्ड ने विशेष रूप से बच्चों में बढ़ती जंक फूड की आदत को नियंत्रित करने और उन्हें पौष्टिक आहार के प्रति प्रेरित करने पर जोर दिया है।

    निर्देशों के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों की ओर से जंक फूड के दुष्प्रभावों के बारे में विद्यार्थियों को बताया जाएगा। इसके लिए जानकारी पूर्ण वीडियो दिखाए जाएंगे और विज्ञान क्लब जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को यह समझाया जाएगा कि पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में कौन-कौन से हानिकारक रसायन मौजूद होते हैं। 

    बोर्ड ने स्कूलों को निर्देशित किया है कि वे पौष्टिक आहार की एक सूची तैयार करें और छात्रों को उसी के अनुरूप टिफिन लाने के लिए प्रेरित करें। इससे बच्चों में संतुलित आहार की आदत विकसित होगी और उनका शारीरिक व मानसिक विकास बेहतर होगा। इसके अलावा, किशोरावस्था शिक्षा से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।



    माध्यमिक स्कूलों में सप्ताह में एक दिन अब अंग्रेजी में होगी प्रार्थना, 
    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया कैलेंडर

    बच्चों से रोज पढ़वाई जाएंगी अखबार की प्रमुख खबरें, कठिन शब्दों का उच्चारण, अर्थ भी बताया जाएगा

    एक अप्रैल से कक्षा नौ के विद्यार्थियों का शुरू होगा पंजीकरण

    🔴 मुख्य बिंदु

    एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र प्रारंभ।

    कक्षा नौ से 12 तक प्रथम यूनिट टेस्ट जुलाई में (बहुविकल्पीय प्रश्नों पर आधारित)।

    अर्द्धवार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षाएं सितंबर के चौथे सप्ताह में।

    अर्द्धवार्षिक लिखित परीक्षा अक्तूबर में।

    कक्षा 10 व 12 का पाठ्यक्रम 10 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    कक्षा नौ व 11 का पाठ्यक्रम 25 जनवरी 2027 तक पूर्ण करना होगा।

    प्री-बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षा 11 जनवरी 2027 से।

    कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षा 1 फरवरी 2027 से।

    बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 27 जनवरी से 10 फरवरी 2027 तक।

    बोर्ड परीक्षा फरवरी 2027 में आयोजित होगी।

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों में सप्ताह में एक दिन अंग्रेजी में प्रार्थना सभा होगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से सोमवार को जारी शैक्षिक सत्र 2026-27 के कैलेंडर में यह व्यवस्था दी गई है। यदि विद्यालय में कोई अन्य भाषा भी पढ़ाई जाती हो तो सप्ताह में एक दिन यथासम्भव प्रार्थना सभा उस भाषा में भी संचालित की जाएगी। खास बात यह है कि एक अप्रैल को सत्र शुरू होने के साथ ही यूपी बोर्ड का पोर्टल क्रियाशील रहेगा जिस पर कक्षा नौ के विद्यार्थियों का पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) किया जा सकता है।

    स्कूलों को विद्यार्थियों के प्रवेश के साथ-साथ पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू करते हुए उनके विवरण जैसे नाम, पिता का नाम, माता का नाम, जन्मतिथि आदि का मिलान विद्यालयी रिकॉर्ड से किया जाएगा। हाईस्कूल और इंटर के लिए परीक्षा आवेदन करने से पहले विद्यार्थियों के विवरण का विद्यालयी अभिलेखों से मिलान करते हुए अभिभावकों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने के बाद ही आवेदन प्रक्रिया पूरी की जाएगी। वार्षिक परीक्षा के लिए सभी विद्यार्थियों की 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की जाएगी। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों से पढ़वाए जाने वाले समाचार में प्रयुक्त कुछ कठिन शब्दों का उच्चारण एवं अर्थ सहित वाक्य प्रयोग भी बताया जाएगा। विद्यालय परिसर में छात्र छात्राओं को मोबाइल लाना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा तथा मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग से बच्चों के शारीरिक, मानसिक एवं नैतिक विकास पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों जैसे आंखों की रोशनी, पढ़ाई में एकाग्रता में कमी, ऑनलाइन गेम्स की लत आदि के प्रति जागरूक किया जाएगा।

    छात्र-छात्राओं की सभी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं एवं ग्रीष्मावकाश गृहकार्य को स्कूल में सुरक्षित रखा जाएगा और यूपी बोर्ड के निर्देश पर वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अन्य कर्मचारियों को इंटरनेट के सुरक्षित उपयोग एवं साइबर अपराधों के प्रति सजग करने के लिए स्कूलों में 'साइबर क्लब' का गठन होगा। अर्द्धवार्षिक परीक्षा मासिक शैक्षिक पंचांग के अनुसार सितंबर तक पढ़ाए गए लगभग 60 प्रतिशत पाठ्यक्रम से ली जाएगी।


    वार्षिक परीक्षा के बाद करना होगा प्रोजेक्ट कार्य

    प्रयागराज। कक्षा नौ एवं 11 के विद्यार्थियों को वार्षिक परीक्षा के बाद नया सत्र शुरू होने से पहले उनकी रुचि के अनुरूप भाषा, गणित, विज्ञान, कला, संगीत, सामाजिक विज्ञान आदि विषयों को समाहित करते हुए एक रचनात्मक प्रोजेक्ट कार्य अनिवार्य रूप से दिया जाएगा। प्रोजेक्ट कार्य का चयन पूरी तरह से विद्यार्थियों की रुचि के अनुरूप किया जाएगा और सत्र शुरू होने पर विद्यार्थी अपने प्रोजेक्ट कार्य को कक्षाध्यापक / विषय अध्यापक के समक्ष प्रस्तुत करेंगे। वरिष्ठ अधिकारियों के विद्यालय निरीक्षण के समय इन प्रोजेक्ट कार्यों को उनके समक्ष अवलोकन के लिए प्रस्तुत करना होगा।


    फरवरी में होगी हाईस्कूल-इंटर की बोर्ड परीक्षा

    प्रयागराज। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं फरवरी 2027 में कराई जाएगी। इनकी प्रायोगिक परीक्षाएं 27 जनवरी से दस फरवरी 2027 तक होगी। कक्षा नौ व 11 की वार्षिक परीक्षाएं एक से दस फरवरी तक और विद्यार्थियों के अंक वेबसाइट पर मार्च के तीसरे सप्ताह तक अपलोड करने होंगे। कक्षा 12 की प्री बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षाएं 11 जनवरी से और लिखित परीक्षा 18 जनवरी से शुरू होगी। 10वीं-12वीं का पाठ्यक्रम पूरी करने की अंतिम तिथि दस जनवरी और नौ व 11 का कोर्स पूरा करने की आखिरी तारीख 25 जनवरी है।


    यूपी बोर्ड ने 2026-27 शैक्षिक सत्र के लिए जारी किया शैक्षिक कैलेंडर, करें डाउनलोड




    Friday, March 27, 2026

    कटऑफ से अधिक अंक तो याची नियुक्ति की हकदार, 29334 विज्ञान गणित भर्ती में हाईकोर्ट का आदेश

    कटऑफ से अधिक अंक तो याची नियुक्ति की हकदार,  29334 विज्ञान गणित भर्ती में हाईकोर्ट का आदेश

    कोर्ट ने कहा, कार्यकारी निर्देश न्यायिक निर्देशों को रद्द नहीं कर सकते

    प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2013 की 29334 सहायक अध्यापक भर्ती में कटऑफ से अधिक अंक पाने वाली अभ्यर्थी (याची) की सहायक अध्यापक विज्ञान पद पर नियुक्ति के लिए विचार करने का निर्देश दिया है।


    कोर्ट ने कहा कि कार्यकारी निर्देश न्यायिक निर्देशों को रद्द नहीं कर सकते, न ही वे अर्जित अधिकारों को समाप्त कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट नीरज कुमार पांडेय के मामले में तय कर चुका है कि सीनियर बेसिक स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त पदों पर कटऑफ से अधिक अंक पाने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। ऐसे अभ्यर्थियों से कानून के अनुसार नियुक्ति की पेशकश की जानी चाहिए। 

    याची शर्तों को पूरा करती है क्योंकि उसने समय रहते ही इस न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और उसके अंक अंतिम चयनित अभ्यर्थी से अधिक हैं इसलिए याची को विचार सूची से बाहर रखने की कार्रवाई सर्वोच्च न्यायालय के बाध्यकारी निर्देशों का सीधा उल्लंघन है, जो संविधान के अनुच्छेद 141 के तहत प्रवर्तनीय हैं। 

    यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दीप्ति चौहान की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि योग्यता और पात्रता के बावजूद याची को नियुक्ति से वंचित करना एक प्रकार का भेदभावपूर्ण व्यवहार है। याची ने कटऑफ से अधिक अंक प्राप्त किए थे तो वह नियुक्ति की हकदार है।

    प्रोजेक्ट प्रवीण में AI की पढ़ाई से दो लाख छात्रों को मिलेगा लाभ, कक्षा नौ से 12 तक AI 4 All कोर्स अनिवार्य, 1200 स्कूलों में लागू होगी व्यवस्था

    प्रोजेक्ट प्रवीण में AI की पढ़ाई से दो लाख छात्रों को मिलेगा लाभ, कक्षा नौ से 12 तक AI 4 All कोर्स अनिवार्य, 1200 स्कूलों में लागू होगी व्यवस्था

    28 मार्च को मिशन मुख्यालय की ओर से आयोजित होगी आनलाइन कार्यशाला

    लखनऊ : अब माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की पढ़ाई कराई जाएगी। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत कक्षा नौ से 12 तक चलने वाले सभी वोकेशनल कोर्स में 'एआइ फार आल' को अनिवार्य कर दिया है। इससे प्रदेश के 1200 से ज्यादा स्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभमिलेगा। सभी प्रशिक्षकों को भी इसे पूरा करना होगा। इसके लिए 28 मार्च को मिशन मुख्यालय की ओर से एक दिन की आनलाइन कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें एआइ विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को तकनीकी जानकारी देंगे।

    यह नई व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी। इसके तहत छात्रों और प्रशिक्षकों के लिए चार घंटे का विशेष एआइ कोर्स अनिवार्य किया गया है। इसे स्कूली शिक्षा में तकनीक जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मान जा रहा है। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत पहले से नौंवी से 12वीं तक के छात्रों को 210 घंटे का मुफ्त कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें आइटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रानिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अब इसमें एआइ को जोड़कर छात्रों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा।

     इस कोर्स के जरिये छात्रों में समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मक सोच, डेटा समझने की योग्यता और डिजिटल स्किल विकसित की जाएंगी, जिससे वे भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो सकें। जरूरत और बाजार की मांग को देखते हुए अलग-अलग जाब रोल के लिए एआइ के विशेष माड्यूल भी बनाए गए हैं। इनमें आइटी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलरिंग, हेल्थकेयर और डिजिटल मित्र जैसे क्षेत्र शामिल हैं।



    सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी तक रहेगी नजर, एडेड कालेजों तक भी पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण

    प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में चल रही 'प्रवीण' कौशल योजना को लेकर सरकार ने अब सख्त निगरानी का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि कौशल प्रशिक्षण अब सिर्फ कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के रोजगार तक का सफर तय करेगी।


     कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को रोज 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण देने वाली इस योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। 2022-23 में 150 स्कूलों से शुरू होकर 2025-26 में यह संख्या 500 से अधिक राजकीय विद्यालयों तक पहुंच चुकी है, जबकि सहायताप्राप्त स्कूलों में भी सर्वे जारी है।

    नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी के स्तर से स्कूलों में जाकर प्रशिक्षण की हकीकत परखी जाएगी। लैब में लगे उपकरण, ट्रेनिंग पार्टनर द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षक, उनकी उपस्थिति और पढ़ाने की गुणवत्ता, सबका भौतिक सत्यापन होगा। स्कूल प्रशासन और कौशल विकास मिशन के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए नियमित बैठकें भी कराई जाएंगी। सबसे अहम फोकस प्रशिक्षण के बाद का परिणाम होगा। कितने छात्रों को प्रमाणपत्र मिले, कितने रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े हैं, अब यह भी प्रशासनिक निगरानी का हिस्सा बनेगा। इसके माध्यम से स्कूलों की पढ़ाई को सीधे रोजगार से जोड़ना और युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हुनर के साथ आत्मनिर्भर बनाना है।


    एडेड कालेजों तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण

    अगले शैक्षणिक सत्र से प्रोजेक्ट प्रवीण का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एडेड माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी तक यह योजना केवल राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में लागू थी। धीरे-धीरे इसे अन्य कालेजों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। एडेड कालेजों के बाद यूपी बोर्ड के निजी विद्यालयों के छात्रों को भी इससे जोड़ा जाएगा। कौशल विकास मिशन ने अगले शैक्षणिक सत्र में पांच लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया है।

    Thursday, March 26, 2026

    विभागीय लापरवाही से चयन वेतनमान की लड़ाई भूख हड़ताल तक आई, छह माह बाद भी नहीं लगा चयन वेतनमान

    विभागीय लापरवाही से चयन वेतनमान की लड़ाई भूख हड़ताल तक आई, छह माह बाद भी नहीं लगा चयन वेतनमान

    एक अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करेंगे शिक्षक


    लखनऊ।   बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की लापरवाही से शिक्षकों का चयनित वेतनमान छह माह बीत जाने के बाद भी नहीं लगा है। जिससे शिक्षकों में आक्रोश है और सामूहिक भूख हड़ताल करने की तैयारी कर रहे हैं। शिक्षकों की 10 वर्ष की सेवा के उपरांत चयन वेतनमान का लाभ दिया जाना है। जबकि निर्धारित तिथि के 6 माह बीत जाने के बाद भी चयन वेतनमान के लिए शिक्षक भटकने को विवश हैं। हालांकि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अधिकांश शिक्षकों का चयन स्वीकृत किया जा चुका है, लेकिन वित्त एवं लेखाधिकारी स्तर से रुचि नहीं ली जा रही है। कई शिक्षक संगठनों ने ज्ञापन देकर आंदोलन की चेतावनी दी है।


    लखनऊ के शिक्षक हरिशंकर राठौर ने बताया कि मेरा चयन वेतनमान अक्टूबर 2025 में लगना था जिसके लिए ब्लॉक से लेकर जिले तक कई बार आग्रह किया गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सहयोग करते हुए 19 जनवरी को मेरा चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी किया। आशा थी कि जनवरी में चयन वेतनमान लग जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके बाद तीन बार वित्त एवं लेखा अधिकारी से निवेदन किया लेकिन सिर्फ आश्वासन ही प्राप्त हुआ। राठौर ने कहा कि यदि मार्च माह में मेरा कई जिलों में चयन वेतनमान पर अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है।  चयन वेतनमान नहीं लगा तो चयन वेतनमान लंबित होने से दुखी होकर 1 अप्रैल से कार्यालय जिलाधिकारी पर भूख हड़ताल के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष वीरेन्द्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि जिले में सैकड़ों शिक्षकों का चयन वेतनमान सितंबर माह से आज तक लंबित है। विभिन्न विकासखंडों से एक दर्जन से अधिक प्रकरणों में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आदेश निर्गत होने के बाद भी भुगतान नहीं हो पाया है। शिक्षकों का कहना है कि वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय द्वारा तकनीकी आपत्तियों के आधार पर प्रकरणों को रोका जा रहा है।


    राजधानी में पूर्व में एक शिक्षक द्वारा आत्मदाह करने की घटना हो चुकी है। ये स्थितियां अधिकारियों की घोर लापरवाही को दर्शाता है जो की अति निंदनीय है। - सुशील कुमार पांडे, अध्यक्ष उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ

    एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई

    एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई


     लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने सीबीएसई स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कक्षा 9वीं के छात्र नई शिक्षा नीति के तहत बदले सिलेबस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई हैं। पिछले वर्ष कक्षा आठ के छात्रों को सितंबर तक किताबों के लिए इंतजार करना पड़ा था और अब वही स्थिति दोहराने की आशंका गहराने लगी है। इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असमंजस का माहौल बन गया है।


    प्रदेश में 11 हजार से अधिक सीबीएसई स्कूल और 122 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहां एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होती है। ऐसे में इस देरी का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस बीच एनसीईआरटी ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत किताबें और सिलेबस चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। कक्षा एक से आठवीं तक की किताबें तैयार कर ली गई हैं और प्रिंट व डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जबकि कक्षा नौवीं की किताबें तैयार की जा रही हैं और इन्हें सत्र 2026-27 में लागू किया जाएगा। इसके लिए ड्राफ्ट सिलेबस जारी कर सुझाव भी मांगे गए हैं। 


    एनसीईआरटी ने शिक्षकों को सलाह दी है कि नए सिलेबस से पहले छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत की जाए, ताकि उन्हें बदलाव को समझने में आसानी हो। वहीं कक्षा 10 और 11 में फिलहाल पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई जारी रहेगी और नई किताबें 2027-28 से लागू होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ साल शिक्षा व्यवस्था के लिए संक्रमण काल साबित होंगे, जहां पुरानी और नई व्यवस्था साथ-साथ चलेगी। इस दौरान किताबों की देरी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने और भ्रम की स्थिति बनने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में स्कूलों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों की पढ़ाई को बिना रुकावट आगे बढ़ाएं।

    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट?

    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित


    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    रामनवमी पर आज व कल यूपी बोर्ड उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन रहेगा स्थगित

    रामनवमी पर आज व कल यूपी बोर्ड उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन रहेगा स्थगित

    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाई स्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रदेश के 254 केंद्रों पर चल रहा है। यह कार्य एक अप्रैल तक पूर्ण किया जाना प्रस्तावित है। यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने रामनवमी पर्व (सार्वजनिक अवकाश) पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित करने के निर्देश 20 मार्च को दिए थे। अब शासन की ओर से 27 मार्च को भी रामनवमी का सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने पर बोर्ड सचिव ने इस दिन भी मूल्यांकन स्थगित करने का निर्णय लिया है। 

    इस तरह अब दो दिन मूल्यांकन कार्य स्थगित रहने के बाद 28 मार्च से पुनः शुरू होगा। बुधवार को 80,462 परीक्षकों ने हाईस्कूल की 18.96 लाख तथा इंटरमीडिएट की 14.95 लाख उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया। 




    यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

    यूपी बोर्ड ने शिक्षकों को राहत देते हुए ईद और रामनवमी के दिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थगित कर दिया है। बोर्ड के सचिव ने शिक्षकों की मांग पर यह फैसला लिया है। जिन मूल्यांकन केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, वहां परीक्षा के बाद दोपहर एक बजे से मूल्यांकन शुरू होगा।


    यूपी बोर्ड सचिव ने कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों को राहत दी

    शिक्षकों की मांग पर यूपी बोर्ड सचिव ने जारी किया आदेश

    प्रतियोगी परीक्षा वाले केंद्र पर उस दिन एक बजे से मूल्यांकन


    प्रयागराज। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बीच कुछ प्रतियोगी परीक्षाएं होने के साथ-साथ ईद और रामनवमी पर्व भी है। कुछ मूल्यांकन केंद्रों पर मूल्यांकन के दिन प्रतियोगी परीक्षा प्रस्तावित होने से भी संकट है। इसके अलावा मूल्यांकन कार्य कर रहे कुछ परीक्षक प्रतियोगी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगने से परेशान हैं।

    21 व 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित
    इन सभी मामलों में शिक्षकों व शिक्षक संगठनों की मांग पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह ने ईद पर 21 मार्च को तथा रामनवमी पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित किए जाने का आदेश जारी कर दिया है।

    बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान किया
    उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य एक अप्रैल तक चलना है। इस बीच पर्वों के दिन मूल्यांकन स्थगित करने की शिक्षक संगठनों की मांग का समाधान करते हुए बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान कर दिया है। कहा है कि जिन मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एपीओ परीक्षा प्रस्तावित है, उन केंद्रों पर उस दिन मूल्यांकन कार्य परीक्षा संपन्न होने के बाद दोपहर एक बजे से शुरू कराया जाएगा।

    मूल्यांकन अवधि में ही वह दोनों कार्य पूर्ण हो सकेंगे
    बोर्ड सचिव ने कहा कि ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में लगी है, वह वहां से ड्यूटी पूर्ण करने के बाद मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होकर काॅपियां जांचेंगे। इस तरह मूल्यांकन अवधि के समय में ही वह दोनों कार्य पूर्ण कर सकेंगे। उन्होंने सभी परीक्षकों, अंकेक्षकों, उप प्रधान परीक्षकों से शुचितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।


    Wednesday, March 25, 2026

    सुप्रीम कोर्ट के पुराने कानूनी निर्णयों को साक्ष्य बनाकर लड़ेंगे कानूनी लड़ाई, टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने की गतिविधियां तेज

    सुप्रीम कोर्ट के पुराने कानूनी निर्णयों को साक्ष्य बनाकर लड़ेंगे कानूनी लड़ाई, टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने की गतिविधियां तेज

    प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में नियुक्त सभी शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के आदेश के विरोध में शिक्षक संगठनों ने गतिविधियां तेज कर दी हैं। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के घटक संगठनों की एक बैठक में महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से अवगत कराया। 


    बताया कि सात नवंबर-2024 को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने स्पष्ट किया था कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता। साथ ही चयन प्रक्रिया के बीच योग्यता में परिवर्तन को संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना गया था। इस तरह इस निर्णय को टीईटी की अनिवार्यता मामले में साक्ष्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत कर कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय किया गया।

    बैठक में शिक्षक संगठनों ने कानूनी रणनीति पर चर्चा की। बताया गया कि टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में योजित (दाखिल) की गई हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नया आदेश 25-30 वर्ष पहले नियुक्त शिक्षकों की योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाता है, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध बताया है। 

    प्रदेश संयोजक के अनुसार यदि मामले की सुनवाई ओपन कोर्ट में होती है तो शिक्षकों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं का एक प्रभावी पैनल खड़ा किया जाएगा। पहले से कार्यरत शिक्षकों के हितों में ठोस और तथ्यात्मक तर्क प्रस्तुत किए जाएंगे। उन्होंने पूर्व के फैसलों के आधार पर शिक्षकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई है। कहा कि पौने दो लाख से ज्यादा शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय की प्रतीक्षा है।