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Tuesday, August 22, 2119

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    Tuesday, October 13, 2026

    एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

    एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

    अब फिर से प्रबंधकों के हाथ में चयन का जिम्मा सौपेंगे

    प्रयागराज । प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति एक बार फिर से प्रबंधक ही करेंगे। शिक्षा निदेशालय की ओर से पूर्व की तरह प्रबंधकों के माध्यम से ही शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंजूरी को प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले कई सालों सेइन संस्थाओं में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षकों की कमी से स्कूलों में चार साल पहले स्थायी शिक्षकों की मानदेय पर नियुक्ति की गई थी।


    सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली 2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। उसके बाद 2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना भेजी थी। इसी प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। हालांकि इन दोनों ही संस्थाओंका नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। नवगठित आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में स्थायी शिक्षकों की चयन की समस्या दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने नए सिरे से शासन को प्रस्ताव भेजा है।


    शिक्षकों के आधे से अधिक पद हैं खाली
    संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं। 17 मार्च 2023 को शासन में हुई बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों के सृजित 2085 पदों में से 1064 कार्यरत थे और 1021 खाली थे। प्रधानाचार्यों के सृजित 570 पदों में से 263 कार्यरत और 307 रिक्त थे। महाविद्यालयों में प्राचार्य के 403 पदों में से 154 कार्यरत और 249 रिक्त थे और शिक्षकों के 1889 पदों में से 960 कार्यरत और 929 खाली थे। उसके बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं।


    उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2027 समय सारिणी जारी

    यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं 15 कार्यदिवसों में होंगी, विधानसभा चुनाव को देखते हुए बोर्ड ने तकरीबन चार महीने पहले ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया

    हाईस्कूल-इंटर परीक्षाएं पांच फरवरी से शुरू होंगी, विधानसभा चुनाव की तारीख टकराने पर संशोधित होगा कार्यक्रम

    प्रयागराज । यूपी बोर्ड की इस सत्र की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं फरवरी 2027 में ही संपन्न होंगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह के अनुसार 10वीं-12वीं की परीक्षाएं एक साथ पांच फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। 2027 में भी 2026 की तरह 15 कार्यदिवसों में परीक्षाएं कराई जाएंगी।

    विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बोर्ड ने तकरीबन चार महीने पहले ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह समय सारिणी संभावित है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विधानसभा चुनाव मार्च में संभावित मानते हुए टाइम टेबल जारी किया है। यदि विधानसभा चुनाव की तारीखें टकराती है तो बोर्ड परीक्षा की तिथियां संशोधित होंगी।

    छात्र-छात्राओं की सुविधा को देखते हुए यूपी बोर्ड के अधिकारियों ने कठिन विषयों की परीक्षा में पर्याप्त अंतराल रखा है। हाईस्कूल में दस फरवरी को अंग्रेजी, 13 फरवरी को गणित और 17 फरवरी को विज्ञान का पेपर है। तीनों ही परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं वाओं को को रिवीजन रिवीजन के लिए दो से तीन दिन का अंतराल मिलेगा।

    वहीं इंटर में आठ फरवरी को अंग्रेजी, 12 के जीव विज्ञान व गणित, 15 फरवरी को रसायन विज्ञान और 17 फरवरी को भौतिक विज्ञान की परीक्षा है। इस साल हाईस्कूल में 27,75,741 और इंटर में 24,28,972 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।

    हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं एक साथ पांच से 24 फरवरी तक कराई जाएंगी। वहीं 2027 में होली का त्योहार मार्च में मनाया जाएगा 121 मार्च को होलिका दहन और 22 को होली है। 


    यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं 5 से 24 फरवरी तक, परीक्षा कार्यक्रम जारी, 52 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी होंगे शामिल

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की वर्ष 2027 की परीक्षाएं पांच फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाएं 24 फरवरी तक चलेंगी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सोमवार देर शाम परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया। परीक्षा में करीब 52 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होंगे। इनमें तकरीबन 27.50 लाख छात्र व 24.50 लाख छात्राएं हैं।

    परीक्षाएं दो पालियों में होंगी। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और द्वितीय पाली की परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएंगी। प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। पहले दिन हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की हिंदी व प्रारंभिक हिंदी विषय की परीक्षा होगी। 

    इस बार एक ही रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का कवर पेज

    बोर्ड की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं में भी बदलाव किया गया है। इस बार मुख्य कवर पृष्ठ दो के बजाय एक ही होगा। इसी कवर पृष्ठ पर अभ्यर्थी रोल नंबर व अन्य जानकारी भरेंगे और परीक्षक भी प्राप्त अंकों का विवरण दर्ज करेंगे। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं के रंग में भी बदलाव में लाल रंग की उत्तरपुस्तिकाएं किया गया है। वर्ष 2026 की परीक्षा उपलब्ध कराई गई थीं।



    उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2027 समय सारिणी जारी

    छात्राओं को नवंबर से दो चरणों में मिलेगी स्कूटी, 25-25 हजार करके दो बार में होगा वितरण

    छात्राओं को नवंबर से दो चरणों में मिलेगी स्कूटी, 25-25 हजार करके दो बार में होगा वितरण 

    13 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश सरकार के घोषणापत्र में किए गए वादे के क्रम में प्रदेश में अगले महीने यानी नवंबर में स्नातक की छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। पहले इसका वितरण दिसंबर में करने की तैयारी थी किंतु हाल ही में सीएम द्वारा नवंबर में वितरण की घोषणा के बाद विभाग तैयारी में लग गया है। विभाग की यह कवायद है कि 25-25 हजार करके दो बार में स्कूटी का वितरण कराया जाए।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी बांटने के लिए औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। 40 हजार तक स्कूटी खरीदने का विभाग ने टेंडर भी कर दिया है। फिलहाल एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी की उपलब्धता कराने में कंपनी को कठिनाई न हो इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा जाएगा। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है।

    बाकी मेधावी छात्राओं को अगले चरण में स्कूटी दी जाएगी। विभाग की ओर से नवंबर से स्कूटी वितरण की शुरुआत कर दी जाएगी। कंपनी जैसे-जैसे डिलिवरी देगी उसके वितरण का काम भी तेजी से किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि स्कूटी वितरण से विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का नामांकन बढ़ाया जाए। साथ ही उन्हें उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित भी किया जाएगा। योजना के तहत मेधावी छात्राओं का विश्वविद्यालय व कॉलेजों से लेकर सत्यापन कराया गया है। विभाग ने इसके लिए 320 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया है। 



    मेधावी बालिकाओं को जल्द मिलेगी स्कूटी, 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी

     22 सितंबर 2026
    लखनऊ : रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटर देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी कर दी है। कंपनियां 26 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगी। निविदा 27 सितंबर को खोली जाएगी।

    योजना में वर्ष 2025-26 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली उच्च शिक्षण संस्थानों की शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को मेरिट के आधार पर स्कूटर देने का प्रविधान है। दिव्यांग छात्राओं, बलिदानी सैनिकों के परिवार की बेटियों और निराश्रित बालिकाओं को निर्धारित मेरिट में 10 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। छात्राओं को स्कूटर के साथ पंजीकरण, बीमा और हेलमेट भी दिया जाएगा। शुरुआती ईंधन देने की व्यवस्था की गई है। 

    लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर-नवंबर में 50 हजार छात्राओं को स्कूटर देने की घोषणा की थी। इसके बाद विभाग ने पहले चरण में 40 हजार स्कूटर की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए वादों में शामिल है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करना है।

     इसी बीच सोमवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का दायित्व अमित कुमार घोष को दिया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी एमपी अग्रवाल के पास थी। ऐसे में विभाग के नेतृत्व में बदलाव के बीच इस महत्वाकांक्षी योजना की खरीद प्रक्रिया का आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।



    40 हजार छात्राओं को स्कूटी के लिए निविदा जारी

    उच्च शिक्षा निदेशालय 21 सितंबर को करेगा ऑनलाइन प्री बिड बैठक, राज्य विवि स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं से ले रहे दस्तावेज

    16 सितंबर 2026
    लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की स्नातक छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर उच्च शिक्षा विभाग ने काम तेज कर दिया है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने टेंडर जारी किया है। इनकी अनुमानित लागत 320 करोड़ रुपये है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। इसके लिए 21 सितंबर कोbऑनलाइन प्री-बिड बैठक होगी।

    योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण उत्तर प्रदेश की मूल निवासी छात्राओं को लाभ मिलेगा। इसके लिए छात्राओं ने राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय अथवा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त या स्ववित्तपोषित महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की हो। परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक होना अनिवार्य है।

    विवि अपने और संबद्ध महाविद्यालयों का डाटा जुटाकर स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं में मेरिट के आधार पर टॉप पांच प्रतिशत की सूची तैयार कर रहे हैं। चयनित छात्राओं से आधार, निवास व आय प्रमाणपत्र लेकर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय जिला प्रशासन के सहयोग से दस्तावेजों का सत्यापन कराएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों से करीब दो हजार छात्राओं का डाटा अपलोड किया जा चुका है।


    आवश्यकता के अनुसार बढ़ सकती है संख्या 

    पूर्व में विभाग ने 400 करोड़ रुपये के बजट से करीब 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा की थी। फिलहाल 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए टेंडर हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल ने बताया कि टेंडर में आवश्यकता के अनुसार संख्या घटाने-बढ़ाने का प्रावधान है। विश्वविद्यालयों से प्राप्त डाटा और सत्यापन के बाद पात्र छात्राओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।



    छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड की जारी

    13 सितंबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटी की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी।

    प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी।

    स्कूटी के साथ कई एसेसरीज भी अनिवार्य

    हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एसेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर आदि भी अनिवार्य है। स्कूटी बीएस सिक्स, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा।



    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी,  उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    12 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को जल्द लागू करने की कवायद तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है।

    योजना के तहत ऐसी छात्राओं को भी लाभ दिया जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से ग्रस्त दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए उनकी दृष्टि व मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी है। साथ ही कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों और मुख्य चिकित्साधिकारी ने उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित की हो। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    50 हजार छात्राओं को देंगे स्कूटी: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए सरकार ने 400 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इससे 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर होगी।



    कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में राहत, टॉप पांच प्रतिशत मेधावियों का होगा चयन पाठ्यक्रम में विद्यार्थी कम हुए तो भी एक मेधावी छात्रा को मिलेगी स्कूटी

    400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है, 50 हजार छात्राओं को पहले चरण में ही मिल सकती है स्कूटी

    कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप फाइव प्रतिशत निकालने में आ रही है समस्या

    11 अगस्त 2026
    लखनऊ। यूपी में विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बहुत कम विद्यार्थी हैं, उसमें भी न्यूनतम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी मिलेगी। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत निकालने पर एक से कम संख्या आ रही है। ऐसे में कम से कम एक छात्रा को स्कूटी मिलेगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से मेधावी छात्राओं के संबंध में जानकारी मांगी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर स्नातक पास करने वाली मेधावी छात्राओं के परीक्षा परिणाम सहित जानकारी, शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष पास करने वाली वह छात्राएं, जिनके 80 प्रतिशत से अधिक अंक हैं या आठ से अधिक सीजीपीए (क्यूमेलेटिव ग्रेड प्वाइंट  ऐवरेज) है। 

    वहीं 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष 85 प्रतिशत अंक या फिर 8.5 सीजीपीए व इससे अधिक पाने वाली मेधावी छात्राओं और इससे भी अधिक अंक प्रतिशत पाने वाली मेधावी छात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। पोर्टल पर रिजल्ट को अपलोड कर उसकी टेस्टिंग का काम भी शुरू हो गया है और सभी संस्थानों से डाटा लेकर उसका सत्यापन भी किया जाएगा। 

    बैचलर आफ वोकेशनल व फाइन आर्ट्स सहित कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें टॉप पांच मेधावी छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है। ऐसे में अब कम से कम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी मिलेगी। ऐसे कोर्स जिसमें 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है तो भी उसमें किसी न किसी एक सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा को स्कूटी देने की तैयारी है।


    विश्वविद्यालय-कॉलेजों से मंगवाए जा रहे आंकड़े

    फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय व कॉलेजों से आंकड़े मंगवाने के साथ-साथ कम छात्र संख्या वाले कोर्स व मानक के अनुसार अंक प्रतिशत न होने पर उस कोर्स की मेधावी छात्रा को राहत देने पर मंथन कर रहा है। जिससे उन्हें भी मुफ्त स्कूटी मिल सके। फिलहाल मेधावी छात्राओं को जल्द इसका तोहफा देने की तैयारी है।

    स्कूटी के लिए जरूरत पर बजट बढ़ाया जाएगा

    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। न्यूनतम 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में पहले चरण में ही 50 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगे और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा।




    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    Monday, October 12, 2026

    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर अहम सुनवाई, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में होने वाली स्पेशल टीईटी परीक्षा-2026 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी परीक्षा में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।
    याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी विज्ञापन संख्या-03/2026 दिनांक 03 सितंबर 2026 के क्लॉज 7.1 के पैराग्राफ संख्या-2 को चुनौती दी गई है।

    इस क्लॉज के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्राथमिक शिक्षक उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में आवेदन नहीं कर सकते। इसी प्रतिबंध को याचिका में अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई। कोर्ट नंबर-6 में हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के वकीलों ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यह मामला 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे दोबारा पेश किया जाए। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

    इस याचिका पर अब 28 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सुनवाई होने वाली है। कोर्ट के रुख को देखते हुए इस दिन कोई अहम आदेश या फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।



    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। 

    चयन आयोग की ओर से पांच सितंबर को जारी विज्ञापन में यह शर्त है कि प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षक प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। जबकि उच्च प्राथमिक स्तर/जूनियर हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक उच्च प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।

     याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य ने इसी शर्त को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई पांच अक्तूबर को न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई और अगली सुनवाई की तारीख 28 अक्तूबर निर्धारित हुई है। अदालत ने साफ किया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।


    मृतक आश्रितों की नौकरी में देरी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सख्ती, अफसरों का पंजीकरण तत्काल कराने का निर्देश

    मृतक आश्रितों की नौकरी में देरी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सख्ती, अफसरों का पंजीकरण तत्काल कराने का निर्देश


    लखनऊ : सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों को मानव संपदा पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण पूरा नहीं होने पर संबंधित कार्यालय में मृतक आश्रित नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।

    विभागीय समीक्षा में कई कार्यालयों में पंजीकरण लंबित मिलने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने यह निर्देश जारी किए हैं। शासन ने छह अप्रैल को आदेश दिया था कि 31 मई के बाद मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की नियुक्ति से जुड़े सभी आवेदनों का निस्तारण मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से आनलाइन किया जाएगा। 

    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) इस व्यवस्था के लिए पोर्टल पर डीडीसीए माड्यूल शुरू कर चुका है। प्रत्येक संबंधित कार्यालय को अपनी आफिस एडमिन आइडी से प्रथम स्तर (एल-1) और मंजूरी देने वाले द्वितीय स्तर (एल-2) के अधिकारियों को नामित करना होगा। जिन कार्यालयों में नियुक्ति का अधिकार है, वहां आदेश जारी करने वाले अधिकारी का पंजीकरण भी जरूरी होगा।



    माध्यमिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों के समायोजन में देरी करने पर 54 जिलों से निदेशालय ने जताई नाराजगी

    अभी तक 54 जिलों ने पहले स्तर व ऑर्डर अथॉरिटी का पंजीकरण ही नहीं किया है

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों के समायोजन में देरी करने पर 54 जिलों से निदेशालय ने नाराजगी जताई है। इसकी प्रक्रिया मानव संपदा पोर्टल से ऑनलाइन की जानी है, लेकिन अभी तक इन जिलों ने पहले स्तर व आर्डर अथॉरिटी का पंजीकरण ही नहीं किया है। ऐसे में संयुक्त शिक्षा निदेशकों व डीआईओएस को जल्द कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने इन जिलों से मानव संपदा पोर्टल से मृतक आश्रितों का सेवायोजन कराने में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। 31 मई के बाद से मृतक आश्रितों के समायोजन के लिए आवेदन और उसके निस्तारण की समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की जानी है। इसके लिए पोर्टल पर मृतक आश्रित सेवायोजन प्रणाली शुरू की गई है।

    नियुक्ति प्राधिकारी से प्राथमिक स्तर पर ऑनलाइन ही लॉगिन व पासवर्ड से मृतक आश्रित आवेदनों को अनुमोदित कर आगे बढ़ाया जाना है। ऑनलाइन प्रणाली से मृतक आश्रितों के आवेदन, मृतक कर्मियों के अंतिम रिपोर्टिंग कार्यालय में भेजे जाएंगे। ऐसे में यह कार्य हर संबंधित कार्यालय व निदेशायल के सभी ऑफिस एडमिन के माध्यम से अनिवार्य रूप से की जानी है।

    जिन ऑफिस एडमिन की ओर से यह कार्य नहीं किया जाएगा, उस कार्यालय के मृतक आश्रित आवेदन नहीं कर सकेंगे। लापरवाही करने वालों में लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर व बाराबंकी समेत 54 जिले हैं।


    पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का होगा गठन

    पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का होगा गठन

    योग, संगीत, साहित्य से लेकर एआई, कोडिंग और रोबोटिक्स तक की गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा


    लखनऊ। प्रदेश के सभी पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का गठन किया जाएगा।


    इन क्लबों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई के साथ योग, साहित्य, संगीत, नृत्य, नाटक, खेल और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही एआई, कोडिंग, रोबोट निर्माण, साइबर सुरक्षा, एथिकल हैकिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    हॉबी क्लबों का मुख्य उद्देश्य तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना तथा उनके तनाव को कम करना है। इन गतिविधियों से छात्रों में टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, एकाग्रता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा। इससे उनके शैक्षिक प्रदर्शन में भी सुधार होने की उम्मीद है। फोटोग्राफी, सॉफ्ट स्किल, वाद-विवाद और अन्य रुचि आधारित गतिविधियां भी क्लबों का हिस्सा होंगी।

    हर क्लब में होंगे मेंटर और समन्वयक

    प्रत्येक हॉबी क्लब में एक छात्र समन्वयक नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान के एक शिक्षक को फैकल्टी मेंटर की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो क्लब की निगरानी और गतिविधियों के आयोजन का काम देखेंगे। हर क्लब में कम से कम एक बाहरी मेंटर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसमें जिलाधिकारी (डीएम) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) स्तर के अधिकारी भी शामिल हो सकेंगे।

     क्लब जरूरत के अनुसार बाहरी विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनके व्याख्यान आयोजित करेंगे और अन्य संस्थानों या विशेषज्ञों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी कर सकेंगे। गतिविधियों के तहत वार्षिक समारोह आयोजित होंगे। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्लबों और छात्र समन्वयकों को सम्मानित किया जाएगा, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ रचनात्मक और तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

    दिसंबर तक सभी राजकीय माध्यमिक स्कूलों में बनेंगी अटल टिंकरिंग लैब

    दिसंबर तक सभी राजकीय माध्यमिक स्कूलों में बनेंगी अटल टिंकरिंग लैब

     लखनऊः सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी भी रोबोटिक्स, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) जैसी आधुनिक तकनीकों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि प्रयोग करके सीखेंगे। 515 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दिसंबर तक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का लक्ष्य है।


     इन प्रयोगशालाओं के जरिये विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें नए विचारों को माडल के रूप में तैयार करने और तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर मिलेगा। 2490 राजकीय विद्यालयों में से 900 विद्यालय लैब की स्थापना के लिए चिह्नित किए गए हैं। 

    पहले चरण में 385 विद्यालयों में प्रयोगशालाएं स्थापित हैं। अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थी थ्रीडी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट, सेंसर, इलेक्ट्रानिक्स उपकरण और कंप्यूटर की मदद से अलग-अलग प्रयोग कर सकेंगे।

    Sunday, October 11, 2026

    45 लाख से अधिक बच्चों को अब भी डेस्क-बेंच का इंतजार, एक हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद खरीद की रफ्तार सुस्त

    45 लाख से अधिक बच्चों को अब भी डेस्क-बेंच का इंतजार, एक हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद खरीद की रफ्तार सुस्त

    आपरेशन कायाकल्प के दावों के बीच 46 हजार स्कूलों में टाट-पट्टी पर पढ़ाई


    लखनऊ : सर्दी की दस्तक के साथ परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की मुश्किलें फिर बढ़ने वाली हैं। आपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की सूरत बदलने के दावों के बीच प्रदेश के 46 हजार से अधिक विद्यालयों में बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। करीब 45 लाख से अधिक बच्चों को डेस्क-बेंच नसीब नहीं हैं। हैरानी यह है कि इस सत्र में सभी बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। ऐसे में सवाल है कि जब बजट और योजना दोनों मौजूद हैं, तो बच्चों को बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?


    प्रदेश में 1,32,735 परिषदीय विद्यालय हैं। आपरेशन कायाकल्प के तहत इनमें बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है, लेकिन बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था अब भी अधूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 65 प्रतिशत विद्यालयों में ही फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में सबसे अधिक बच्चे इस कमी से जूझ रहे हैं। बहराइच, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और अयोध्या समेत कई जिलों के विद्यालयों में डेस्क-बेंच की कमी बनी हुई है। लखनऊ, गोरखपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है। डेस्क-बेंच के अभाव में बच्चों को जमीन पर बैठकर लिखना-पढ़ना पड़ता है। इससे उन्हें असुविधा होती है और लंबे समय तक झुककर बैठने से पीठ व गर्दन में परेशानी और थकान हो सकती है। सर्दियों में जमीन पर बैठना उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

    खरीद की व्यवस्था बदलने में उलझी प्रक्रिया

    फर्नीचर खरीदने के लिए समग्र शिक्षा परियोजना निदेशालय से करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित है। खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है और गुणवत्ता की निगरानी जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति को करनी है। कुछ जिलों में कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत भी फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों तक सुविधा नहीं पहुंच पाई है। पहले फर्नीचर खरीद की केंद्रीयकृत व्यवस्था थी, जिसे बाद में बदलकर जिलों के स्तर पर खरीद करने की व्यवस्था बनाई गई, लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।


    69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

    69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा विभाग के शहरी परिषदीय स्कूलों में 11508 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आने के बाद अब अभ्यर्थियों को 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इस फैसले के बाद ही करीब 45,000 ग्रामीण शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए रास्ता साफ होगा।


    ग्रामीण शिक्षक भर्ती के लिए विभाग ने रिक्त पदों का अधियाचन भी मंगा लिया है। करीब 45000 रिक्त पद इसमें शामिल हैं। दरअसल, चार दिसंबर 2018 को 69,000 शिक्षक भर्ती के पदों का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें करीब 19,000 पदों पर आरक्षण का मामला फंस गया था।

    विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट इन पदों को लेकर क्या निर्णय लेती है इसके बाद ही अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जाएगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि ग्रामीण शिक्षक भर्ती का विवरण तो मिल चुका है। कोर्ट के फैसले के बाद पदों में कुछ बदलाव होने की स्थिति को देखते हुए अभी चयन आयोग को अधियाचन नहीं भेजा गया है।

    Saturday, October 10, 2026

    वित्तविहीन शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा प्रदान किये जाने और गति दिए जाने की समीक्षा हेतु हेतु 14 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बैठक

    वित्तविहीन शिक्षकों को कैशलेश चिकित्सा सुविधा प्रदान किये जाने और गति दिए जाने की समीक्षा हेतु हेतु 14 अक्टूबर को उच्चस्तरीय बैठक

    Friday, October 9, 2026

    68358 विद्यालयों में हुआ मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (MHM) क्लब का गठन, बेसिक के 66045 स्कूलों में पैड बैंक भी लगाए गए

    68358 विद्यालयों में हुआ मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (MHM) क्लब का गठन, बेसिक के 66045 स्कूलों में पैड बैंक भी लगाए गए


    लखनऊ। प्रदेश के विद्यालयों में बेटियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और गरिमा को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया जा रहा है। इस क्रम में मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन (एमएचएम) से जुड़ी व्यवस्था को जागरूकता से बेहतर किया जा रहा है। इसके तहत अब तक प्रदेश में अब तक 68358 विद्यालयों में एमएचएम क्लब का गठन किया गया है।

    इसके साथ ही 66045 विद्यालयों में पैड बैंक स्थापित किया गया। 63633 विद्यालयों में जागरूकता सत्र और 63928 में शिक्षकों के साथ एमएचएम के बिंदुओं पर चर्चा की गई है। इस प्रक्रिया को और गति देने के लिए 13-14 अगस्त को राज्य परियोजना कार्यालय में 209 मास्टर ट्रेनर की कार्यशालाएं आयोजित की गई थी।

    इसके बाद 9 से 25 सितंबर के बीच प्रदेश के 450 मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण पूरा हुआ। इससे विद्यालय स्तर पर मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन से जुड़ी जानकारी और गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि इससे विद्यालयों में मासिक धर्म को लेकर झिझक और संकोच दूर करने में सहयोग मिलेगा। इसका असर विद्यालय स्तर पर दिखाई भी दे रहा है।

    उन्होंने कहा कि एमएचएम व्यवस्था को सिर्फ सैनिटरी नैपकिन की उपलब्धता तक सीमित नहीं रखा गया है। विद्यालयों में छात्राओं को जरूरी सुविधा उपलब्ध कराने के साथ जागरूकता गतिविधियों को भी नियमित रूप दिया जा रहा है। शनिवार को मीना मंच के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन और महत्वपूर्ण आपातकालीन सहायता नंबरों से संबंधित सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं।


    पाठ्यक्रम में भी किया गया शामिल : मासिक धर्म स्वच्छता को विद्यालयी शिक्षा की नियमित गतिविधियों से जोड़ने के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद की ओर से भी पहल की गई है। पाठ्यक्रम में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन संबंधी जागरूकता की विषयवस्तु शामिल की गई है। इससे छात्राओं के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच मासिक धर्म से जुड़े विषयों पर सहज संवाद का वातावरण तैयार करने में मदद मिलेगी।

    Thursday, October 8, 2026

    प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं

    प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं 

    परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक के नियम का हो रहा विरोध

    आठ अक्तूबर से प्रस्तावित है प्रधानाचार्य भर्ती के आवेदन

    8 अक्टूबर 2026
    प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य 1172 एवं प्रधानाध्यापक 1475 पदों पर भर्ती के आवेदन शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 13 साल बाद आठ अक्तूबर से इस भर्ती के आवेदन प्रस्तावित हैं। इस बीच नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर दी हैं।

     इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गेश कुमार और नौ अन्य की ओर से 28 सितंबर को याचिका दायर की गई है। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे।

    वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करना अनुचित है। लिहाजा नियमानुसार पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकोंको अनुभवके आधार पर बीएड प्रशिक्षण से छूट प्रदान करने तथा बीएड के समकक्ष (एलटी आदि) प्रशिक्षणों को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।

    दो सितंबर को जारी संशोधन में प्रधानाचार्य भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) और केन्द्र /राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता या सहायक अध्यापक या हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्युनतम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए मान्य किया गया है। 

    प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) अथवा बीपीएड की उपाधि अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास केन्द्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।




    वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

    केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक

    तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान

    10 सितंबर 2026
    प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।


    इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है। 


    शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।


     देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।


    प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।

    Sunday, October 4, 2026

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का इंतजार खत्म होगा, चार हजार एलटी ग्रेड शिक्षक प्रवक्ता बनेंगे, पदोन्नति जल्द

    शीघ्र होगी एलटी ग्रेट के शिक्षकों की पदोन्नति

    प्रयागराज : पदोन्नति का इंतजार कर रहे राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के एलटी ग्रेट के शिक्षकों के लिए अच्छी खबर है। पुरुष संवर्ग के करीब 2100 और महिला संवर्ग के 1800 शिक्षकों की सूची तैयार हो रही है। शिक्षा निदेशालय की ओर से उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग को विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक के लिए पत्र भेजा जाएगा।

    इससे पहले महिला संवर्ग के दो विषयों की 59 शिक्षकों की दिसंबर 2022 में प्रोन्नति हो चुकी है जबकि पुरुष संवर्ग के शिक्षक इंतजार कर रहे हैं। 2019-20 से 2023-24 सत्र के बीच रिक्त पदों पर पदोन्नति के प्रस्ताव पर आयोग की ओर से आपत्ति के कारण प्रक्रिया को रोक दिया गया था। आयोग ने रिक्तियों के कारण और तिथि के विवरण के साथ ज्येष्ठता सूची निर्विवादित होने का प्रमाणपत्र देने के लिए कहा था। 

    अध्यापकों के क्रमांक क्रमवार न होने, सूची में दिव्यांगों के लिए आरक्षण चिह्नित न होने पर भी आपत्ति थी। अब अपर शिक्षा निदेशक अजय द्विवेदी का कहना है कि प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जाएगी।


    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का इंतजार खत्म होगा, चार हजार एलटी ग्रेड शिक्षक प्रवक्ता बनेंगे, पदोन्नति जल्द

    प्रयागराज। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत एलटी ग्रेड के तकरीबन चार हजार शिक्षक-शिक्षिकाओं को जल्द प्रवक्ता पद पर पदोन्नति मिलेगी। शासन के निर्देश पर एलटी ग्रेड पुरुष संवर्ग में 2100 से अधिक, जबकि महिला संवर्ग में 1800 से अधिक पदोन्नति की सूची तैयार की जा रही है। वैसे तो शासन ने 30 सितंबर तक ही पदोन्नति की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए थे, लेकिन वरिष्ठता सूची बनाने में समय लग गया है। अब शिक्षा निदेशालय की ओर से जल्द उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक के लिए पत्र भेजा जाएगा। डीपीसी में ही पदोन्नति पर मुहर लगेगी।

    नियमानुसार पांच साल की सेवा पूरी कर चुके शिक्षक-शिक्षिकाओं की हर साल रिक्त पदों के सापेक्ष पदोन्नति होनी चाहिए, लेकिन राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों को सालों इंतजार करना पड़ता है। इससे पहले महिला शाखा के दो विषयों की 59 शिक्षिकाओं का दिसंबर 2022 में प्रवक्ता पद पर प्रमोशन हुआ था, जबकि पुरुष वर्ग की पदोन्नति कई सालों से नहीं हुई है। पदोन्नति के लिए माध्यमिक शिक्षाविभाग की ओर से यूपीपीएससी को डीपीसी की बैठक कराने के लिए दो साल पहले ही अनुरोध किया गया था। हालांकि 2019-20 से 2023-24 सत्र के बीच रिक्त पदों पर पदोन्नति के प्रस्ताव पर आयोग की ओर से आपत्ति होने के बाद से प्रक्रिया टल गई थी।

    आयोग ने रिक्तियों के घटित होने का कारण व तिथि के विवरण के साथ ही ज्येष्ठता सूची निर्विवादित होने संबंधित प्रमाणपत्र देने को कहा था। सूची में शिक्षिकाओं का क्रमांक क्रमवार नहीं होने समेत चयन वर्षवार अधियाचित पदों के सापेक्ष दिव्यांगों के लिए आरक्षण चिह्नित नहीं होने पर भी आपत्ति हुई थी। वहीं एलटी ग्रेड पुरुष वर्ग के शिक्षकों की पदोन्नति वरिष्ठता विवाद के कारण रुकी हुई थी। अपर शिक्षा निदेशक अजय द्विवेदी का कहना है कि कार्यवाही जल्द पूरी की जाएगी।

    4.60 लाख विद्यार्थियों के खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति, सीएम योगी ने दी सीख - मिली राशि शिक्षा पर खर्च करें बच्चे, बुक बैंक बनाएं

    4.60 लाख विद्यार्थियों के खातों में पहुंची छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति, सीएम योगी ने दी सीख - मिली राशि शिक्षा पर खर्च करें बच्चे, बुक बैंक बनाएं

    अगले महीने 50 हजार मेधावी बच्चियों को मिलेगी स्कूटी


    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को चालू वित्त वर्ष के लिए पूर्वदशम (9-10) और दशमोत्तर कक्षाओं के 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के खातों में 148 करोड़ रुपये से अधिक की छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति हस्तांतरित की। सीएम ने छात्रों को आश्वस्त किया कि छात्रों के लिए पैसे की कोई कमी नहीं है। हर पात्र बच्चे को छात्रवृत्ति मिलेगी, छूटे हुए बच्चे भी जल्द आवेदन करें।

    लोकभवन में आयोजित कार्यक्रम में सीएम ने विद्यार्थियों से कहा कि छात्रवृत्ति की राशि को खान-पान के बजाय शिक्षा पर ही खर्च कीजिए। इससे पुस्तकें, खरीदिए। पाठ्यक्रम के साथ ही महापुरुषों की आत्मकथा, ज्ञानवर्धक व धार्मिक पुस्तकों को पढ़िए, अपना बुक बैंक बढ़ाइए। कहा, सरकार दो करोड़ युवाओं को टैबलेट दे रही है, 60 लाख को मिल चुका है। शेष को जल्द मिलेगा।



    4.60 लाख पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रों के खाते में आज आएगी ₹2250 से लेकर 14 हजार तक की छात्रवृत्ति, मुख्यमंत्री योगी करेंगे पहले चरण के वितरण का शुभारंभ

    यूपी में छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम आज,  मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ, छात्रों के बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी राशि



    लखनऊ। प्रदेश के 460559 मेधावी व जरूरतमंद विद्यार्थियों के खातों में शनिवार को 148.04 करोड़ की छात्रवृत्ति पहुंचेगी। खाते में श्रेणीवार 2250 रुपये से लेकर 14 हजार रुपये तक छात्रवृत्ति की राशि का भुगतान होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को लोक भवन में समारोह में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति वितरण प्रक्रिया का शुभारंभ करेंगे।


    समाज कल्याण विभाग के तहत अनुसूचित जाति श्रेणी के पूर्वदशम (कक्षा 9-10) के 50,311 छात्रों को 7.04 करोड़, दशमोत्तर (कक्षा 11-12) के 38,177 छात्रों को 4.53 करोड़ और दशमोत्तर (अन्य उच्च शिक्षा) के 71,471 छात्रों को 52.97 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। सामान्य वर्ग के पूर्वदशम के 21,532 छात्रों को 6.45 करोड़ और दशमोत्तर के 16,552 छात्रों को 4.98 करोड़ रुपये रुपये का लाभ मिलेगा। इसी तरह से पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के अंतर्गत पूर्वदशम के 1,27,088 छात्रों को 28.59 करोड़ एवं दशमोत्तर के 96,527 छात्रों को 31.42 करोड़ की राशि हस्तांतरित की जाएगी।



    युवाओं को डिजीलॉकर में मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी लगाम, रोजगार मेलों में सत्यापन होगा आसान

    युवाओं को डिजीलॉकर में मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी लगाम, रोजगार मेलों में सत्यापन होगा आसान

    लखनऊ। प्रदेश में रोजगार मेले में कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के प्रमाणपत्रों का अब मौके पर ही ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर व नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी से जोड़ दिया गया है। अब भर्ती के समय प्रमाणपत्रों को मौके पर ही जांचा जा सकेगा। इससे गड़बड़ प्रमाणपत्र लाने वाले युवाओं को मौके पर ही पकड़ा जा सकेगा।


    उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से डिजिटल प्रमाणपत्र व्यवस्था के लिए संस्थागत पंजीकरण, प्रमाणपत्र का प्रारूप तैयार करने और पुराने अभिलेखों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। नई कवायद से प्रशिक्षण पाने वाले युवा डिजीलॉकर से अपने प्रमाणपत्र डाउनलोड भी कर सकेंगे। साथ ही उन्हें कहीं भी जॉब के लिए उन्हें इसे लेकर भी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

    विभाग की ओर से रोजगार व प्रशिक्षण में पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाया गया है। कहीं किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए सभी प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को भी सतर्क किया गया है। इसका अनुपालन सभी को कड़ाई से करने के लिए भी निर्देश दिया गया है।

    28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार, 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं

    28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार,  2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं


    लखनऊ। प्रदेश में 28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय वापसी का इंतजार है। सिर्फ पांच जिलों में मात्र 2000 शिक्षामित्रों को ही इसका लाभ मिल सका है। आरोप है कि जनवरी 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अधिकारी मनमानी दिखा रहे हैं।


    दरअसल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया था। वर्ष 2017 में इनका समायोजन रद्द कर इन्हें दोबारा शिक्षामित्र बनाया गया। जून 2018 में शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी की गई, मगर तमाम शिक्षामित्र छूट गए। उसके बाद शिक्षामित्रों ने लगभग सात साल तक संघर्ष किया और जनवरी 2025 में शासनादेश जारी कर इन्हें अपने मूल विद्यालय भेजने के आदेश दिए गए।

    यह अपने निवास स्थान की जिन ग्राम पंचायतों में शिक्षामित्र पद पर रखे गए थे वहीं इन्हें वापस भेजा जाना है। सबसे अधिक कठिनाई वह महिला शिक्षामित्र उठा रही हैं जिन्हें शादी के बाद दूसरे जिले में जाना पड़ा। अब वह अपने मायके वाले जिले में लंबी दूरी नापकर पढ़ाने आती है या उन्हें मायके में ही रहना पड़ रहा है। अब तक सिर्फ बाराबंकी, लखनऊ, अंबेडकरनगर, चित्रकूट और बरेली में ही शिक्षामित्रों को लाभ मिल सका है और वह अपने मूल विद्यालय वापस आ चुके हैं। बाकी जिलों में शिक्षामित्र परेशान हैं।

    उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के व प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव के कहते हैं कि शासन की मंशा पर प्र अधिकारी पानी फेर रहे हैं। शासनादेश जारी होने के एक साल 10 महीने बाद भी शिक्षामित्र परेशान हैं।

    Saturday, October 3, 2026

    निजी विद्यालय के शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ रिट याचिका पोषणीय नहीं: हाईकोर्ट

    निजी विद्यालय के शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ रिट याचिका पोषणीय नहीं: हाईकोर्ट

    हाईकोर्ट ने कहा-निजी संस्था के खिलाफ सार्वजनिक प्रकृति के कर्तव्य का पालन कराने के लिए ही जारी की जा सकती है रिट


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी ट्रस्ट की ओर से संचालित गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान के कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए अनुच्छेद-226 के तहत रिट याचिका पोषणीय नहीं है। क्योंकि, यह मूलतः नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संविदात्मक प्रकृति का निजी विवाद होता है।


    इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने आजमगढ़ निवासी शिक्षिका नूतन राय की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी निजी संस्था के खिलाफ रिट जारी की जा सकती है। यदि उससे सार्वजनिक प्रकृति के कर्तव्य का पालन कराया जाना हो। लेकिन सेवा अनुबंध से उपजा विवाद पूरी तरह से निजी विवाद होने के कारण रिट अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

    मामले में याची ने निजी शिक्षण संस्थान से अपनी सेवा समाप्त किए जाने को चुनौती दी थी। प्रतिवादियों ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि संस्थान एक निजी ट्रस्ट है। संस्थान को सरकार से कोई सहायता या अनुदान नहीं मिलता।

    याची ने अंडी मुक्ता सद्‌गुरु श्री मुक्ताजी वंदास स्वामी सुवर्ण जयंती महोत्सव स्मारक ट्रस्ट मामले का हवाला दिया। कहा कि सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाली निजी संस्था के खिलाफ रिट याचिका दायर की जा सकती है। वहीं, संस्थान ने सेंट मैरी एजुकेशन सोसाइटी, आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी और दिलीप कुमार पांडे के मामलों का हवाला दिया। कहा कि जब सेवा शर्तें किसी वैधानिक प्रावधान से नियंत्रित न हों तो कर्मचारी को रिट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का सहारा नहीं मिल सकता।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा भले ही सार्वजनिक महत्व का विषय हो, लेकिन इससे निजी शिक्षण संस्थान में नियोक्ता-कर्मचारी संबंध का प्रत्येक पहलू सार्वजनिक कानून के दायरे में नहीं आ जाता। यदि सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाला कोई वैधानिक ढांचा नहीं है तो संबंध अनुबंध पर आधारित रहेगा।

    Friday, October 2, 2026

    हाईस्कूल-इंटर के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन का मौका

    हाईस्कूल-इंटर के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन का मौका


    प्रयागराज। शैक्षिक सत्र 2026 27 के कक्षा-9 के विद्यार्थियों तथा परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10 और 12 के संस्थागत एवं - व्यक्तिगत विद्यार्थियों के शैक्षिक विवरण ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। यूपी बोर्ड की ओर से अब विद्यार्थियों के विवरण की जांच और आवश्यक संशोधन के लिए समय निर्धारित किया गया है।

    कक्षा-10 और 12 के विद्यार्थियों के विवरण की चेकलिस्ट परिषद के पोर्टल से प्राप्त कर संस्था के प्रधान द्वारा जांच की जाएगी। जांच के बाद किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक होने पर विवरण को संशोधित और अपडेट किया जा सकेगा। इसके लिए एक से छह अक्तूबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।

    वहीं, कक्षा-9 और 11 के विद्यार्थियों के विवरण की चेकलिस्ट भी परिषद के पोर्टल से प्राप्त कर संस्था के प्रधान को जांच करनी होगी। इनके विवरण में संशोधन एक से छह अक्तूबर 2026 तक प्रतिबंधित रहेगा।

    हालांकि, विशेष रूप से पांच से आठ अक्तूबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक कक्षा-9 और 11 के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन किया जा सकेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी संस्थानों को निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।


    कक्षा 9 और 11 में लेटरल एंट्री के जरिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे

    कक्षा 9 और 11 में लेटरल एंट्री के जरिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे

    02 अक्टूबर 2026
    नई दिल्ली/नोएडा। नवोदय विद्यालय समिति ने शैक्षिक सत्र 2027-28 में कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाले लेटरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट (LEST)-2027 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है।

    समिति की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, LEST-2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल 1 सितंबर 2026 को शुरू किया गया था। अब अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे।

    नवोदय विद्यालय समिति के अनुसार, कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश के इच्छुक पात्र विद्यार्थी निर्धारित पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए समिति ने कक्षा के अनुसार अलग-अलग लिंक उपलब्ध कराए हैं।

    कक्षा 9 के लिए आवेदन पोर्टल:

    कक्षा 11 के लिए आवेदन पोर्टल:

    समिति ने अभ्यर्थियों से निर्धारित अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।




    नवोदय विद्यालयों में कक्षा 9 व 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित

    2 सितम्बर 2026
    नोएडा। नवोदय विद्यालय समिति ने सत्र 2027-28 में कक्षा 9 एवं 11 की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए लेटेरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट (LEST)-2027 हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।


    समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थी कक्षा 9 एवं कक्षा 11 के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर निःशुल्क आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा संबंधी विस्तृत विवरण (प्रॉस्पेक्टस) भी पंजीकरण पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।

    कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए अलग-अलग ऑनलाइन पोर्टल निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश रिक्त सीटों के सापेक्ष लेटरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट के माध्यम से होगा। समिति ने अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है।

    स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

    स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

    नियमित शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है स्पेशल टीईटी


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पेशल टीईटी कोई नई भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सेवारत (इन-सर्विस) नियमित शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

    मामले के तथ्यों के अनुसार उत्तर प्रदेश शासन ने गत दो सितंबर को एक शासनादेश जारी किया था, जिसके तहत उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को स्पेशल टीईटी आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आयोग ने गत तीन सितंबर को परीक्षा की अधिसूचना जारी की।

    याची शिक्षामित्रों ने इस शासनादेश और अधिसूचना को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि वे लगभग 26 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियमित सहायक अध्यापकों की तरह ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं। एनसीटीई की न्यूनतम अर्हता रखने के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 16 (अवसर की समानता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में उन्हें भी अपनी सेवा सुरक्षा व भविष्य के लिए इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए।

    आयोग व राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट व समीक्षा याचिका आदेश) के अनुपालन में केवल उन इन-सर्विस शिक्षकों को छूट/अवसर दिया गया है, जिनकी नियुक्ति टीईटी अनिवार्य होने से पूर्व हो चुकी थी और जिनकी सेवा निरंतरता टीईटी पास करने पर निर्भर है।

    शिक्षामित्र संविदा व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और वे नियमित इन-सर्विस शिक्षकों के समकक्ष नहीं हैं। जुलाई 2026 में आयोजित नियमित टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्र आवेदन करने के लिए पात्र थे लेकिन उन्होंने उसमें भाग नहीं लिया। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि स्पेशल टीईटी किसी नई नियुक्ति, पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं है। यह केवल उन सेवारत शिक्षकों के लिए एक संक्रांतिकालीन व्यवस्था है, जिनकी नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करना अनिवार्य किया है। 

    शिक्षामित्रों की नियुक्ति का स्वरूप और विधिक दर्जा नियमित सहायक अध्यापकों से पूरी तरह भिन्न है। असमान वर्गों को एक समान नहीं माना जा सकता इसलिए सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा कराना अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है। राज्य सरकार ने शासनादेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के दायरे को हाईकोर्ट अपनी मर्जी से नहीं बढ़ा सकता।

    ... तो खटखटा सकते हैं न्यायालय का दरवाजा

    कोर्ट ने इसी मुद्दे पर प्रतीक मिश्र व दो अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी व सरकारी वकील को सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए याचियों को यह छूट दी है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार स्पेशल टीईटी प्राप्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध कोई अनुचित वरीयता या आरक्षण देती है, तो वे उसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



    विभागीय  TET  में बैठने की मांग को लेकर दायर शिक्षामित्रों की याचिका खारिज, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर

    01 अक्टूबर 2026





    शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर देने की मांग के लिए दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित

    25 सितंबर 2026
    प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में आवेदन का अवसर दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर गुरुवार को निर्णय सुरक्षित कर लिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिया।

    वसीम अहमद एवं 220 अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से अधिवक्ता जेन अब्बास ने शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों का करीब 26 वर्षों से बतौर शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ निर्वाचन कार्य, चुनाव ड्यूटी, एसआईआर, जनगणना, मतगणना, बालगणना, विद्यालय संचालन प्रभार, सरकार द्वाराजैन अब्बास आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में कक्ष निरिक्षक ड्यूटी, गुणवत्ता संवर्धन के लिए विभाग द्वारा कराए जाने वाले समस्त प्रशिक्षण अध्यापक के समान अनुभव है।

    इसके बाद भी विशेष टीईटी में आवेदन के अवसर को लेकर शिक्षामित्रों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है जबकि अन्य श्रेणियों में कार्यरत शिक्षकों एवं विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है। यह भी तर्क रखा गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए टीईटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर दिया जाना आवश्यक है।



    विशेष टीईटी में योग्यता में छूट को दी चुनौती, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

    16 सितंबर 2026
    प्रयागराज। हाईकोर्ट में बीटीसी (डीएलएड), बीएड एवं दूरस्थ बीटीसी पास प्रतीक मिश्रा एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने विशेष टीईटी के लिए निर्धारित योग्यता में छूट को चुनौती दी है। याचिका में दो सितंबर के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी योग्यता संबंधी शर्त को शिथिल कर दिया है। 

    सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाया था कि सेवारत शिक्षकों को दो साल के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य है। पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्ष की छूट को तीन वर्ष कर दिया है। इस तरह से सेवारत शिक्षकों को एक सितंबर 2028 के पूर्व टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। याचियों का आरोप है कि राज्य सरकार के आदेश से सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आरटीई एक्ट 2009 की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।



    विशेष टीईटी में मौके पाने की जद्दोजहद में हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षामित्र, आज सुनवाई 

    हाईकोर्ट में कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों ने दायर की याचिका

    सरकार ने टीईटी में केवल सेवारत एवं विशेष शिक्षकों से मांगे आवेदन

    16 सितंबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से सेवारत एवं विशेष शिक्षकों के लिए कराई जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अवसर देने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की है। कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें भी स्पेशल टीईटी में बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि वे नियमित शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।

    याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजर अंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद अब इसे 16 सितंबर को प्रतीक मिश्रा व तीन अन्य की याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।


    स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर

    प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल TET' (विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। शिक्षामित्रों की इस पहल से परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के आगामी फैसलों पर टिक गई हैं।


    शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिकाओं और उनकी स्थिति का विवरण निम्न प्रकार है:


    Writ A 14346/2026 (प्रतीक मिश्रा व अन्य): इस याचिका पर 10 सितंबर 2026 को प्रारंभिक सुनवाई संपन्न हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर 2026 तय की है।

    Writ A 14495/2026 (कुमारी गुलाबी व अन्य): शिक्षामित्रों द्वारा राहत की मांग को लेकर दाखिल की गई इस दूसरी याचिका पर आज 14 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की पीठ में सुनवाई होनी तय हुई है।

    इन दोनों ही याचिकाओं के माध्यम से शिक्षामित्रों ने माननीय न्यायालय से प्रार्थना (Prayer) की है कि उन्हें भी स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। 14 और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत शिक्षामित्रों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं।


    Thursday, October 1, 2026

    मंदिरों के विध्वंस से लेकर सिख गुरुओं के संघर्ष तक और रामराज्य भी पढ़ेंगे छात्र, NCERT सामाजिक विज्ञान की नई किताब में काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी जानेंगे

    मंदिरों के विध्वंस से लेकर सिख गुरुओं के संघर्ष तक और रामराज्य भी पढ़ेंगे छात्र, NCERT सामाजिक विज्ञान की नई किताब में काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी जानेंगे

    नई दिल्ली। एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसायटी इंडिया एंड बियॉन्ड' पार्ट-2 में मध्यकालीन भारत के इतिहास को 'प्रतिरोध और दृढ़ता' के नजरिये से रखा गया है। किताब में मंदिरों के विध्वंस और पुनर्निर्माण, विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के प्रतिरोध, सिख गुरुओं के साथ मुगल सत्ता के टकराव और शासन की भारतीय परंपराओं का उल्लेख है। 

    वहीं, 'रामराज्य', 'सत्यमेव जयते' और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य जैसे विषयों को आधुनिक शासन से जोड़ा गया है। पवित्र स्थलों' से जुड़े हिस्से में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए किताब बताती है कि मंदिर को अलग-अलग दौर में क्षति पहुंची और उसका पुनर्निर्माण भी हुआ। किताब के अनुसार, अकबर के शासनकाल में टोडर मल और राजा मान सिंह से जुड़े संरक्षण के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, जबकि बाद में औरंगजेब के शासनकाल में इसे फिर नष्ट किया गया। वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 1780 में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। इसी हिस्से में मंदिरों पर हमलों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखा गया है।

    मथुरा-वृंदावन में मंदिरों के पुनर्निर्माण का जिक्र : किताब में मंदिरों के संरक्षण और पुनर्निर्माण के उदाहरण भी दिए गए हैं। इसके तहत अहिल्याबाई होल्कर के काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ वृंदावन के गोविंद देवजी मंदिर के संरक्षण का उल्लेख है। बुंदेला शासक वीर सिंह द्वारा मथुरा में केशव देव मंदिर के निर्माण को संरक्षण देने की बात भी कही गई है। किताब के अनुसार 16वीं शताब्दी के बाद मंदिरों की वास्तुकला और उनके स्थान में भी बदलाव दिखाई देता है। कई मंदिर अपेक्षाकृत कम दिखाई देने वाली जगहों और संकरी गलियों में बनाए गए। 



    बच्चे पढ़ेंगे सुशासन के राजदंड सेंगोल के बारे में, नौवीं की नई किताब में नया भारत, संसद से लेकर चोल राजवंश तक... लिज्जत पापड़ की कहानी भी

    नई दिल्ली। जिस सेंगोल को लेकर नए संसद भवन के उद्घाटन के वक्त सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए थे, वही सेंगोल अब नौवीं कक्षा के बच्चों को सुशासन का पाठ पढ़ाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी : इंडिया एंड बियॉन्ड’ में सेंगोल को शासन और सुशासन के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जगह दी है। यह किताब मंगलवार से बाजार में उपलब्ध हो गई है।

    किताब में लिखा गया है कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंगोल को नए संसद भवन में स्थापित किया। इसे धर्मसम्मत शासन चिह्न के रूप में इस्तेमाल करने की परंपरा चोल राजवंश के दौर में शुरू हुई थी। किताब में बताया गया है कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात को आजादी के मौके पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने शैव परंपरा के संतों से सेंगोल ग्रहण किया था। छात्रों से कहा गया है कि वे ऐतिहासिक तस्वीरों के जरिये सेंगोल की यात्रा के बारे में और जानकारी जुटाएं।


    किताब में शासन और लोकनीति वाले अध्याय में भारत के शासकीय प्रतीकों की जड़ों को समझाया गया है। इसी हिस्से में राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडक उपनिषद से और सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को महाभारत से जोड़ा गया है। किताब का तर्क है कि ये प्रतीक केवल सजावटी नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों के वाहक हैं जो संस्थाओं को सुशासन की जिम्मेदारी के साथ सौंपे गए हैं।


    सुशासन की सात शाखाएं

    अध्याय में सुशासन को एक पेड़ के रूप में दिखाया गया है, जिसकी सात शाखाएं भागीदारी, कानून का राज, जवाबदेही, पारदर्शिता, प्रभावशीलता, संवेदनशीलता और समावेशिता हैं। पेड़ के नीचे खड़े नागरिकों के साथ संदेश दिया गया है कि सुशासन सरकार और नागरिकों की साझेदारी है।


    प्रस्तावना में ही दिशा साफ

    किताब की दिशा उसकी प्रस्तावना से ही स्पष्ट है। एनसीईआरटी निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी के हस्ताक्षर से सितंबर 2026 में लिखी प्रस्तावना में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है जो भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता, मूल्यों और नैतिक परंपराओं में गहराई से रची-बसी हो। किताब में भारतीय ज्ञान, परंपरा और साझा विरासत के तत्वों को समकालीन सरोकारों से जोड़ा गया है।


    सत्ता की जगह शासन

    भूमिका में एनसीईआरटी ने खुद माना है कि पहले इसमें सत्ता विषय पर अध्याय प्रस्तावित था, जिसकी जगह अब ‘शासन और लोकनीति’ अध्याय रखा गया है। ‘भारत और विश्व : भाग एक’ वाला अध्याय अब दसवीं कक्षा में खिसका दिया गया है। इसके पीछे पढ़ाई को अधिक सुसंगत रखने और बच्चों पर कठिन विचारों का बोझ न डालने को कारण बताया गया है।


    आयकर की दरें भी पढ़ेंगे बच्चे

    निजी वित्त प्रबंधन वाले अध्याय में बच्चे अब आयकर की दरें भी पढ़ेंगे। इसमें नई कर व्यवस्था की पूरी तालिका दी गई है।


    लिज्जत पापड़ की कथा से स्टार्टअप तक

    उद्यमिता के अध्याय में दो देसी कहानियां दी गई हैं। इनमें लिज्जत पापड़ की कहानी 1959 से शुरू होती है, जब मुंबई की एक चॉल की सात गृहिणियों ने 80 रुपये और उधार के सामान से काम शुरू किया। किताब के अनुसार इस सहकारी संस्था में 2023 तक 45,000 से ज्यादा महिला सदस्य, 83 शाखाएं और 1,600 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार था।




    पहले भ्रष्टाचार का पाठ, अब किया गया है सिर्फ न्यायपालिका का बखान, NCERT की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान किताब में बदली तस्वीर, विवाद वाले तथ्य अब पूरी तरह हटाए गए


    नई दिल्ली। जिस अध्याय को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका पर विवादित टिप्पणी के चलते देशभर से वापस मंगवा लिया था, वह अब बदले हुए रूप में स्कूलों तक पहुंच चुका है। नई किताब में अदालतों की कमजोरियों और चुनौतियों के बजाय न्यायपालिका के ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों को प्रमुखता दी गई है।

    राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के संशोधित संस्करण में ‘द ज्यूडिशियरी इन अवर सोसाइटी’ अध्याय को पूरी तरह बदल दिया गया है। पिछले संस्करण में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों के भारी बोझ, पहाड़ और जजों की कमी जैसे मुद्दों को शामिल किया गया था, लेकिन नए पाठ से ये विवादित हिस्से पूरी तरह हटा दिए गए हैं।


    26 फरवरी को किताब देशभर से वापस मंगाई गई थी। फरवरी 2026 में आठवीं कक्षा की इसी किताब के न्यायपालिका वाले अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक हिस्सा सामने आया था। इसमें अदालतों के सामने मौजूद चुनौतियों में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के भारी बोझ का उल्लेख किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इसका स्वतः संज्ञान लिया था। 26 फरवरी को अदालत ने किताब को तत्काल देशभर से वापस लेने का आदेश दिया। इसके बाद एनसीईआरटी को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी और पूरी किताब वापस लेनी पड़ी। केंद्र ने समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसके बाद अध्याय को बदल दिया गया।


    सिर्फ ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों पर जोर

    नए अध्याय में न्यायपालिका के ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों को बताया गया है। वहीं भ्रष्टाचार, मुकदमों का बोझ, पहाड़ और जजों की कमी जैसे मुद्दे, जिन पर पिछला विवाद खड़ा हुआ था, नए पाठ से पूरी तरह बाहर हैं।


    नए पाठ में क्या है

    नया अध्याय मार्टिन लूथर किंग जूनियर के इस कथन से शुरू होता है कि कहीं भी अन्याय हर जगह के न्याय के लिए खतरा है। इसके बाद संविधान की प्रस्तावना में न्याय के वादे, अदालतों के पिरामिड, सर्वोच्च न्यायालय की 33 जमा एक की संख्या, जजों की योग्यता और सेवानिवृत्ति की उम्र को समझाया गया है। अनुच्छेद 142 की पूर्ण न्याय वाली शक्ति का भी ब्योरा दिया गया है। अध्याय में बार-बार यह बताया गया है कि न्यायपालिका विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र है।


    सरकार का श्रेय, इतिहास की चूक

    किताब में आजादी के बाद औपनिवेशिक दौर के सैकड़ों कानूनों को भेदभावपूर्ण बताया गया है और कहा गया है कि सरकार ने ऐसे 500 से ज्यादा कानून रद्द किए। उदाहरण के रूप में 1871 का आपराधिक जनजाति कानून दिया गया है।


    मुकदमों का बोझ, पर बिना आंकड़े

    देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं, लेकिन नए अध्याय में इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। समस्या केवल संकेत के रूप में सामने आती है। डिजिटल पहलों वाले हिस्से में ई-फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई, सीधा प्रसारण और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड का उल्लेख किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य द्वार पर लगी वर्चुअल जस्टिस क्लॉक को पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल बताया गया है।

    अभ्यास प्रश्नों में बच्चों से कहा गया है कि वे स्वयं को विधायिका या कार्यपालिका का हिस्सा मानकर मुकदमों की बड़ी संख्या से निपटने के नए उपाय सुझाएं।


    नियुक्ति में कॉलेजियम का जिक्र नहीं

    जजों की नियुक्ति वाले हिस्से में किताब केवल संविधान के प्रावधानों को दोहराती है। उसके मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय के जज राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं। उच्च न्यायालय के जज राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद नियुक्त किए जाते हैं। इस हिस्से में कॉलेजियम प्रणाली का कोई जिक्र नहीं किया गया है।