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    Wednesday, April 29, 2026

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    27 अप्रैल 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


    कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

    कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026
    निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    प्रशस्त एप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, SCERT की ओर से एप के प्रयोग पर कार्यशाला का आयोजन

    प्रशस्त एप से स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान होगी आसान, SCERT की ओर से एप के प्रयोग पर कार्यशाला का आयोजन

    लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने स्कूलों में दिव्यांग बच्चों की पहचान के लिए प्रशस्त एप विकसित किया है। इसके जरिये 21 तरह की दिव्यांगता की जांच आसानी से की जा सकेगी। यह कवायद इन बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने का काम करेगी। यह जानकारी शिक्षा मंत्रालय की उप सचिव इरा सिंघल ने दी। वह मंगलवार को एससीईआरटी की ओर से माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में प्रशस्त एप के प्रयोग को लेकर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं।


    सिंघल ने कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की समय पर प्रारंभिक जांच, मूल्यांकन और पहचान होना जरूरी है। इसलिए सभी राज्यों, केंद्रशासित प्रदेशों को सभी बच्चों की चरणबद्ध व व्यवस्थित जांच के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। उन्होंने कहा कि एनआईसी व डीओएसईएल द्वारा विकसित किया जा रहा नया प्रशस्त एप 2.0, यू-डायस के साथ एकीकरण में विद्यालय प्रमुखों, शिक्षकों, विशेष शिक्षाविदों व छात्रों को जोड़ने और विद्यालय स्तर की जांच करने की सुविधा देगा। एप को मई में लॉन्च होने की उम्मीद है। इसलिए अभी उपयोगकर्ता स्वीकृति परीक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे एप को प्रयोग में लाने से पूर्व उसकी कमियों को दूर किया जा सके।

    उन्होंने बताया कि शिक्षकों को एप का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के व्यापक लक्ष्यों का हिस्सा है। कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय के प्रभात मिश्रा, संयुक्त निदेशक डॉ. भारती कौशिक, प्रो. आनंद मेहता, एससीईआरटी के निदेशक गणेश कुमार आदि उपस्थित रहे। 

    RTE में स्कूल बिना किसी देरी के प्रवेश देने के लिए बाध्य– सुप्रीम कोर्ट, जारी सरकारी सूची पर सवाल नहीं उठा सकते स्कूल

    RTE में स्कूल बिना किसी देरी के प्रवेश देने के लिए बाध्य– सुप्रीम कोर्ट, जारी सरकारी सूची पर सवाल नहीं उठा सकते स्कूल

    सुप्रीम कोर्ट सख्त : कमजोर वर्ग के बच्चों का दाखिला राष्ट्रीय मिशन, निजी स्कूल की दलीलें खारिज


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शिक्षा के अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को दाखिला देना राष्ट्रीय मिशन है। निजी स्कूलों को सख्त निर्देश देते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा, सांविधानिक एवं वैधानिक रूप से राज्य सरकार की ओर से आवंटित छात्रों को पड़ोस के स्कूल बिना किसी देरी के प्रवेश देने के लिए बाध्य हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया, किसी विद्यार्थी की पात्रता पर संदेह या विवाद लंबित होने का आधार बनाकर प्रवेश से इन्कार नहीं किया जा सकता।



    जस्टिस पीएस नरसिम्हा एवं जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने फैसले में कहा, आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 12 के तहत निजी, गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों को अपनी कक्षा की 25 फीसदी सीटें कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित करनी होती हैं। यह प्रावधान न केवल शिक्षा के प्रसार के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि समाज में समानता स्थापित करने की दिशा में भी बड़ा कदम है।

    कोर्ट ने स्पष्ट किया, संविधान के अनुच्छेद 21ए के तहत शिक्षा का मौलिक अधिकार तभी प्रभावी होगा जब आरटीई कानून का पूरी निष्ठा से पालन किया जाए। कोर्ट ने कहा, इन बच्चों का दाखिला सरकार, स्थानीय निकायों एवं अदालतों की साझा जिम्मेदारी है। पीठ ने कहा, यदि किसी स्कूल को चयन प्रक्रिया या छात्र की पात्रता पर आपत्ति है, तो वह संबंधित सरकारी प्राधिकरण के समक्ष आपत्ति दर्ज करा सकता है। इस प्रक्रिया के चलते दाखिले को रोका नहीं जा सकता।


    लखनऊ के स्कूल ने किया था इन्कारयह मामला लखनऊ पब्लिक स्कूल, एल्डिको से जुड़ा था, जिसने राज्य सरकार की ओर से चयनित एक छात्रा को प्रवेश देने से इन्कार कर दिया था। स्कूल ने उसकी पात्रता पर संदेह जताया, जबकि उसका नाम सरकारी सूची में शामिल था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल को छात्रा को दाखिला देने का निर्देश दिया था। इसके बाद, स्कूल ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने स्कूल की अपील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को सही ठहराया है।


    सरकारी सूची पर सवाल नहीं उठा सकते : शीर्ष अदालत ने कहा, स्कूलों को सरकारी सूची पर सवाल उठाने का अधिकार नहीं है। एक बार सूची जारी हो जाने के बाद उन्हें प्रवेश देना ही होगा। कोर्ट ने चेतावनी दी, यदि इस प्रक्रिया में बाधा डाली गई तो शिक्षा का अधिकार केवल कागजी बनकर रह जाएगा।


    Monday, April 27, 2026

    सूबे की राजधानी में 100 परिषदीय विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात, हाईकोर्ट ने कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती पर दिया है जोर

    सूबे की राजधानी में 100 परिषदीय विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात, हाईकोर्ट ने कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती पर दिया है जोर


    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में कम से कम दो नियमित शिक्षकों की तैनाती का सुझाव दिया है। इसके बावजूद राजधानी में करीब 100 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जहां केवल एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। इससे करीब पांच हजार बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।


    राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या और नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं दिख रहे हैं। 

    नारायणपुर, यूपीएस नारायणपुर, गोदौली और रौतापुर समेत करीब 100 विद्यालयों में लंबे समय से केवल एक शिक्षक ही तैनात है। इनमें से भी कई शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दी जाती है, जिससे पढ़ाई और अधिक प्रभावित होती है।

    गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगे ड्यूटी
    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुधांशु मोहन का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, ऊपर से उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने विभाग से हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।

    1616 विद्यालयों के लिए 4800 शिक्षक
    शिक्षकों के अनुसार राजधानी में करीब 1616 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें दो लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। इनके मुकाबले महज 4800 शिक्षक कार्यरत हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावक भी अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में भेजने से कतराने लगे हैं।

    शिक्षकों की तैनाती पर शासन स्तर से लिया जाता है फैसला
    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि शिक्षकों का स्थानांतरण, पुनर्नियोजन और नए पदों पर नियुक्ति का फैसला शासन स्तर पर लिया जाता है वहां से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा।

    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद  शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष-2026 के 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण की त्रुटि सुधारने के लिए अंतिम अवसर दिया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

    सचिव ने बताया कि परीक्षार्थियों के प्रमाण पत्र सह अंकपत्र में नाम, माता-पिता के नाम की वर्तनी, जन्मतिथि, फोटो आदि में किसी प्रकार की त्रुटि को सुधारने का यह आखिरी मौका दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भविष्य में होने वाली असुविधा से बचाना है।

    उन्होंने कहा कि संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य परिषद की वेबसाइट पर लॉगिन कर निर्धारित प्रारूप एवं मैन्युअल डाउनलोड करें। इसके बाद संशोधन से संबंधित विवरण स्पष्ट रूप से भरकर स्वयं सत्यापित करें और जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमोदन प्राप्त कर पोर्टल पर अपलोड करें।

    यह प्रक्रिया 27 अप्रैल से 6 मई तक चलेगी। निर्धारित अवधि के भीतर विद्यालयों को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ ऑनलाइन आवेदन अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    उन्होंने कहा यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधन के लिए आवेदन नहीं किया जाता और प्रमाण पत्र जारी होने के उपरांत त्रुटि सुधार की मांग की जाती है, तो ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। 



    Sunday, April 26, 2026

    पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश

    पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश  


    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पारित पदावनति (रिवर्जन) के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षक को सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के पद पर मानते हुए वेतन एवं समस्त बकाया भुगतान किया जाए।

    मामला वर्ष 2009 का है, जब एक शिक्षक को पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में निलंबित कर बाद में जूनियर बेसिक स्कूल से प्राइमरी स्कूल में पदावनत कर दिया गया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि— शिक्षक को विधिवत चार्जशीट नहीं दी गई, न ही किसी प्रकार की मौखिक सुनवाई या गवाहों की जिरह कराई गई, शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं शिकायत को फर्जी बताया गया, और बिना समुचित जांच के ही विभाग ने कठोर कार्रवाई कर दी।

    न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि बिना उचित सुनवाई और साक्ष्य के की गई विभागीय कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, इसलिए यह कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।

    इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि U.P. Government Servant Conduct Rules, 1956 बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर लागू नहीं होते, इसलिए केवल पत्रकारिता में संलिप्तता के आधार पर कार्रवाई करना भी अनुचित है।

    हालांकि, शिक्षक 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पुनः पदस्थापित करना संभव नहीं है। लेकिन अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें 28 मार्च 2009 से सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के रूप में मानते हुए वेतन, एरियर एवं अन्य समस्त लाभ दिए जाएं।

    यह फैसला शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां बिना समुचित जांच के विभागीय कार्रवाई की जाती है।


    द्विविवाह के आरोप में बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, सेवा बहाली का आदेश, बेसिक शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 लागू नहीं

    द्विविवाह के आरोप में बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, सेवा बहाली का आदेश, बेसिक शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 लागू नहीं


    इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में द्विविवाह (Bigamy) के आरोप में बर्खास्त किए गए शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 लागू नहीं होती, बल्कि वे केवल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 से शासित होते हैं।

    मामला तुफैल अहमद बनाम राज्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है, जिसमें याची को 25 जुलाई 2019 को द्विविवाह के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने पहली पत्नी को तलाक देने के बाद दूसरी शादी की, जिस पर दूसरी पत्नी के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जिला प्रशासन की संस्तुति पर विभागीय कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी का आदेश पारित किया गया।

    याची की ओर से तर्क दिया गया कि सेवा नियमावली, 1981 में द्विविवाह पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है और न ही 1956 की आचरण नियमावली शिक्षकों पर लागू होती है। साथ ही, दूसरी शादी का तथ्य भी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुआ था, क्योंकि संबंधित वाद अनुपस्थिति के कारण खारिज हो चुका था।

    न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पाया कि बर्खास्तगी का आदेश नियमों के गलत अनुप्रयोग पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि 1956 की नियमावली को शिक्षकों पर लागू मानना विधिसम्मत नहीं है। इसके अतिरिक्त, द्विविवाह का आरोप भी विधिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ।

    इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने 25 जुलाई 2019 के बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए याची की सेवा बहाल करने और विधि अनुसार वेतन देने का निर्देश दिया। यह निर्णय बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।



    हाईकोर्ट ऑर्डर 👇 

    RTE के तहत प्रवेश के लिए मैनुअल आवेदन भी स्वीकार किए जाएं : हाईकोर्ट

    RTE के तहत प्रवेश के लिए मैनुअल आवेदन भी स्वीकार किए जाएं : हाईकोर्ट

    प्रयागराज । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट) का उद्देश्य सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है, खासकर कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को। केवल आनलाइन आवेदन की बाध्यता से इस उद्देश्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सरकार के आदेश में स्पष्ट है कि अभिभावक आनलाइन आवेदन नहीं कर पाते तो बीएसए को मैनुअल आवेदन स्वीकार कर उसे आगे बढ़ाना होगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने ख्वाजा शमशाद अहमद की याचिका स्वीकार करते हुए की है। कोर्ट ने बीएसए प्रयागराज को आदेश दिया है कि याची के आवेदन को एक सप्ताह के भीतर क्रियान्वित करें। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस व्यवस्था को सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अपनाए और सभी जिलों के बीएसए को यह आदेश लागू करने के लिए निर्देशित किया जाए।

    याची ख्वाजा शमशाद अहमद ने बेटे ख्वाजा अशर के नर्सरी में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से आनलाइन आवेदन नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने बीएसए प्रयागराज के कार्यालय में मैनुअल आवेदन किया, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। इस पर यह याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) (सी) के तहत प्रवेश दिलाने के लिए केवल आनलाइन आवेदन अनिवार्य नहीं किया जा सकता। 

    अभिभावक किसी कारणवश आनलाइन आवेदन नहीं कर पाते तो उनका आफलाइन आवेदन भी स्वीकार किया जाना चाहिए और संबंधित अधिकारी का दायित्व है कि वह उसे प्रक्रिया में शामिल करे। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि अब पूरी प्रक्रिया आनलाइन है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।



    शिक्षा के अधिकार के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का आदेश, 
    हाईकोर्ट ने कहा- निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए नहीं हो सकती सिर्फ ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि वंचित वर्ग के अभिभावक तकनीक के अभाव में ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ हैं तो उनका मैन्युअल (ऑफलाइन) आवेदन स्वीकार करना बेसिक शिक्षा अधिकारी का कर्तव्य है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने प्रयागराज के बालक ख्वाजा अशर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ता के पिता ने ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थता जताते हुए मैन्युअल आवेदन दिया था, जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए स्वीकार करने से इन्कार कर दिया कि अब केवल ऑनलाइन प्रक्रिया ही मान्य है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

    कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल ऑनलाइन पोर्टल का सहारा लेना संविधान के अनुच्छेद 21-ए और शिक्षा के अधिकार कानून की मूल भावना के विपरीत है। यह गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित कर सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान हजारों बच्चों ने स्कूल आवंटित होने के बावजूद प्रवेश नहीं लिया।

    साथ ही कई स्कूलों में 25 प्रतिशत कोटे के मुकाबले केवल एक या दो बच्चों को ही प्रवेश दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उन अभिभावकों के लिए एक एसओपी तैयार करे जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, ताकि उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के माध्यम से सुविधा मिल सके। अदालत ने प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। 

    Saturday, April 25, 2026

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, 

    कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे, नए सत्र के लिए पंजीकरण शुरू



    लखनऊप्रदेश में अब कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेंद्र देव द्वारा जारी आदेश के मुताबिक नए शैक्षिक सत्र से इसके लिए पंजीकरण शुरू किया जा रहा है। अभी तक यह व्यवस्था सिर्फ इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए ही लागू थी।


    प्रयागराज स्थित पत्राचार शिक्षा संस्थान की स्थापना वर्ष 1980 में शासनादेश के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे अभ्यर्थियों को पढ़ाई का अवसर देना था, जो माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में व्यक्तिगत (प्राइवेट) परीक्षार्थी के रूप में शामिल होते हैं। इसमें यह भी तय किया गया था कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को संस्थान में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और उन्हें संस्थान द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना होगा। 

    समय के साथ ऐसे छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई, जिसके चलते अब इस व्यवस्था का विस्तार किया गया है। इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो नियमित स्कूल में पढ़ाई नहीं कर पाते लेकिन बोर्ड परीक्षा देना चाहते हैं।

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें


    यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अपने परिणाम से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए 17 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    नियमतः परिणाम घोषित होने के 25 दिन तक स्क्रूटनी के आवेदन लिए जाते हैं। लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर निर्धारित है। स्क्रूटनी से संबंधित आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है।

    इच्छुक अभ्यर्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। उसके बाद स्क्रूटनी के ऑनलाइन फॉर्म के प्रिंटआउट के साथ चालान पत्र संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से बोर्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 17 मई तक भेजेंगे।



    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


    कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

    एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



    संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

    कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


    नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा


    लखनऊ । माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। इस बार दोनों ही कक्षाओं में प्रतापगढ़ जिले का दबदबा रहा। 10वीं में जहां कन्नौज की सृष्टि ने 94.43 फीसदी के साथ टॉप किया, वहीं 12 वीं में प्रतापगढ़ के रजनीश यादव 89.36 फीसदी अंकों के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहे।

    गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही कक्षाओं के टॉप-चार में प्रतापगढ़ के 3-3 विद्यार्थी शामिल हैं। परिणाम के अनुसार 10वीं में 14,199 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से और 816 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में पास हुए हैं जबकि पांच विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

    वहीं 12वीं में 5,661 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से तथा 6,087 द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हैं जबकि 555 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। कन्नौज जिले के राधा देवी आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गुरसहायगंज की छात्रा सृष्टि ने 94.43 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ की खुशबू सरोज 94.29 फीसदी के साथ रहीं जो वहां के जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, भुजाही बाजार की छात्रा हैं। इसमें तीसरे स्थान पर 93.29 फीसदी के साथ संयुक्त रूप से प्रतापगढ़ के ही दो विद्यार्थी रहे, जिन्हें समान रूप से कुल 653 अंक हासिल हुए। दोनों विद्यार्थियों में से एक मुलायम सिंह यादव जो श्री राम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यदुनाथपुर सैफाबाद से और दूसरी प्रियंका सरोज जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय भुजाही बाजार प्रतापगढ़ की हैं।


    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे

    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीएलएड (ओडीएल) करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें यूपी-टीईटी 2026 में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को फिलहाल (प्रोविजनल) रूप से परीक्षा में बैठने दिया जाए। स्पष्ट किया कि इनके चयन का मामला याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेगा। 


    कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा भी मांगा है। अगली सुनवाई 22 मई को होगी। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम शुक्ला समेत 36 याचियों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे अभ्यर्थी, जो 10 अगस्त 2017 या उससे पहले से कार्यरत हैं।

    Friday, April 24, 2026

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी जिला टॉपर बनकर उभरा है। हाईस्कूल में टॉपर समेत जिले की तीन और इंटर में दो बेटियों ने टॉप-3 में जगह बनाई है। हाईस्कूल और इंटर की टॉपर समेत टॉप-3 में तीन बेटियों के साथ सीतापुर दूसरे स्थान पर रहा।

    बृहस्पतिवार को जारी परीक्षा परिणामों के मुताबिक हाईस्कूल में सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83 फीसदी अंकों के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। इंटरमीडिएट में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।

    हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर बाराबंकी की अदिति और तीसरे स्थान पर सीतापुर की अर्पिता, झांसी के ऋषभ साहू व बाराबंकी की परी वर्मा शामिल हैं। इंटरमीडिएट में बरेली की नंदिनी गुप्ता व बाराबंकी की श्रेया वर्मा संयुक्त रूप से दूसरे और बरेली की सुरभि यादव व बाराबंकी की पूजा पाल संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। सीतापुर की टॉपर शिखा वर्मा और कशिश वर्मा ने बाबूराम सावित्री देवी शेखपुर, विलौली बाजार से पढ़ाई की है। अंशिका वर्मा बाराबंकी के मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज, जैदपुर की छात्रा है।





    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे 23 अप्रैल को

    ऐसे चेक करें रिजल्ट

    1 स्टेप
    सबसे पहले वेबसाइट UPMSP.EDU.IN पर जाना होगा।

    2 स्टेप
    होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना होगा, उस पर क्लिक करना है।

    3 स्टेप
    अब आपको रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा।

    4 स्टेप
    रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, चेक करने के साथ ही मार्कशीट को डाउनलोड कर सकेंगे।


    23 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद बृहस्पतिवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित करेगा। यह पिछले वर्ष से तीन दिन पहले है। परिणाम शाम चार बजे निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव और परिषद के सचिव भगवती सिंह जारी करेंगे।

    परीक्षा में कुल 5337778 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 2523112 छात्राएं, 28,14,612 छात्र और 54 ट्रांसजेंडर शामिल थे। परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर आयोजित हुईं। हाईस्कूल में करीब 26 लाख और इंटरमीडिएट में लगभग 24.5 लाख छात्रों ने भाग लिया, जबकि जेलों में बंद 360 परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा दी।

    मूल्यांकन कार्य 254 केंद्रों पर 2.75 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 15 कार्य दिवसों में पूरा हुआ। इस बार त्रुटिहीन परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक बनाया गया था। सचिव भगवती सिंह ने बताया कि छात्र अपना रिजल्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकेंगे। 





    यूपी बोर्ड का परिणाम तैयार, घोषणा जल्द, 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना

    22 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का परिणाम लगभग बनकर तैयार है। परिणाम की समीक्षा अंतिम दौर में है। 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड की ओर से जल्द ही परिणाम किस दिन घोषित होगा इसकी अधिकृत सूचना जल्द जारी होगी। परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को भी परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।



    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले, प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले

    प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ-साथ शिक्षक शिक्षा में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एनसीईआरटी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अपने डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा, जिनमें बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड कोर्स शामिल होंगे।

    पहली बार स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षक बनने की पढ़ाई का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इससे पहले इस पाठ्यक्रम की समीक्षा रिपोर्ट तैयार होगी और उसमें मौजूद कमियों को दूर किया जाएगा। इसके लिए एनसीईआरटी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के साथ मिलकर काम करेगा। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला एनसीटीई की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। इसके तहत एनसीईआरटी परिसर और छह अन्य कॉलेजों में सीटें उपलब्ध होंगी।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्ताव पर एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू-बी विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया है। अब तक एनसीईआरटी बालवाटिका से कक्षा 12 तक के पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करता रहा है, लेकिन उसी आधार पर शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में एकरूपता नहीं थी।

    नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार पर रहेगा फोकस नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, पढ़ाने के तरीकों में बदलाव, खेल-आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और तकनीक आधारित शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों पर शोध किया जाएगा।




    एनसीईआरटी अब खुद देगा अपनी डिग्रियां

    डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगा। साथ ही देश भर में उसके जो छह क्षेत्रीय संस्थान है, वह भी अपनी डिग्री दे सकेंगे। अभी तक एनसीईआरटी के क्षेत्रीय संस्थानों को डिग्री देने के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेनी पड़ती थी। इन संस्थानों में अभी शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि इस दर्ज के बाद अब जल्द ही वह कुछ और नए कोर्स भी शुरू कर सकता है।


    NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

    शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी, एनसीईआरटी के छह संस्थान भी होंगे शामिल

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) किताबें बनाने के साथ-साथ अब डिग्री, डिप्लोमा व पीएचडी की पढ़ाई भी कराएगी। केंद्र सरकार ने एनसीईआरटी को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा दे दिया है। इसी हफ्ते इसकी अधिसूचना जारी होगी।

    एनसीईआरटी के साथ उसके छह संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान के अजमेर, ओडिशा के भुवनेश्वर, कर्नाटक के मैसूर, मेघालय के शिलांग और मध्य प्रदेश के भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान है।

    एनसीईआरटी अब तक सीबीएसई बोर्ड समेत राज्यों के लिए स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करती थी। नई व्यवस्था के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेगी। परिषद को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा मिला है, जिसमें संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता।

    एनसीईआरटी ने 2025 में सरकार को दी थी रिपोर्ट

    यूजीसी ने 2023 में कुछ शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसमें एनसीईआरटी को तीन साल में सभी शर्तों को पूरा करना था। एनसीईआरटी ने सरकार को 2025 में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर यूजीसी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    शोध पर होगा काम 
    विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी शोध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेगी। नए कोर्स, ऑफ कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।





    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन


    10 जनवरी 2026
    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी

    यूपी में सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक तो निजी विद्यालयों में 50 प्रतिशत ही बन सकीं अपार आईडी 

    23 अप्रैल 2026
    लखनऊ। यूपी में अब कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर नहीं रहेगा। उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो रही है। योगी सरकार के ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, अपार प्लस (अपार+) मिशन के तहत हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा रही है, जिससे उसकी पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। मतलब साफ है, न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की जा रही है।

    2.68 करोड़ से अधिकबच्चों को जोड़ाः आगामी 30 जून तक चलने वाले इस मिशन में 4.24 करोड़ छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चों को शामिल कर 63 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक बच्चों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इससे शिक्षा को जमीनी स्तर तक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में तेज प्रगति दिखाई दे रही है। इसमें सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

    विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रोफाइल डिजिटली सुरक्षित रहेगी

    अपार प्लस व्यवस्था के तहत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वतः स्थानांतरित हो जाता है। इससे ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डाटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।




    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी 

    13 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

    पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।


    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट

    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट 

    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। इसमें विभिन्न विषयों की परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेंगी। इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने - का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे।

    बोर्ड द्वारा इस वर्ष से लागू किए गए इस सिस्टम में दूसरी परीक्षा देना पूरी तरह से वैकल्पिक रखा गया है। यानी जो छात्र मुख्य परीक्षा में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे दूसरी बोर्ड परीक्षा देकर अपने अंकों को बेहतर कर सकते हैं। अधिकांश परीक्षाएं सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक होंगी, जबकि कुछ विषयों की परीक्षाएं दोपहर साढ़े बारह बजे तक ही समाप्त हो जाएंगी। बोर्ड ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे अपने एडमिट कार्ड के साथ समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    लोक सेवा आयोग ने आयोजित की डीपीसी, प्रक्रिया तेज

    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यामक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को जल्द ही 500 नियमित प्रधानाचार्य मिलेंगे। लोक सेवा आयोग ने इसके लिए हाल ही में डीपीसी (विभागीय प्रोन्नति समिति) आयोजित की है।


    शासन ने खंड शिक्षा अधिकारियों व पुरुष-महिला शिक्षकों का नया कोटा हाल ही में तय किया है। पदोन्नति के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसमें खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए 34 फीसदी कोटा निर्धारित है, जो पहले 17 फीसदी था। महिला-पुरुष शिक्षकों के लिए 33-33 फीसदी कोटा तय किया गया है, जो पहले क्रमशः 22 व 61 फीसदी था।

    डीपीसी में बीईओ व विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों के पदोन्नति के पद भरे जाएंगे। निर्धारित मानक पूरे करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी प्रधानाचार्य बनेंगे। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक भी पदोन्नति पाकर प्रधानाचार्य बनेंगे। इसका असर विद्यालयों के कामकाज पर पड़ेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीपीसी के बाद लोक सेवा आयोग योग्य अभ्यर्थियों की सूची शासन को भेजेगा। शासन औपचारिकताएं पूरी कर इन प्रधानाचार्यों को विद्यालयों में तैनाती देगा। प्रदेश के 2400 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में से 600 से ज्यादा में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।


    बीईओ के खाली पद भरेंगे

    प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के बाद प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के काफी पद खाली होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें भरने की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी है। विभाग खाली पदों की जानकारी जुटा रहा है। ताकि इसके अनुसार नई भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जा सके। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है।

    Thursday, April 23, 2026

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    अपर मुख्य सचिव और निदेशक से मिले शिक्षामित्र पदाधिकारी


    लखनऊ। उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा व बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्थानांतरण (मूल विद्यालय वापसी) जैसी सुविधाओं को लागू करने की मांग की।


    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ देने संबंधी औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है। इसे जल्द पूरा किया जाए ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षामित्रों को समय पर उपचार मिल सके। वहीं तबादले के लिए जिला स्तर पर प्रक्रिया नहीं हो रही है। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जाए। अधिकारियों ने इस पर जल्द सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

     प्रतिनिधिमंडल में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (तिवारी गुट) के अध्यक्ष एसपी तिवारी, शिक्षामित्र संघ प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, विनोद वर्मा, अजीत कुमार यादव, सुशील तिवारी आदि उपस्थित थे। 

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा


    लखनऊ। एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने मंडल के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जिले के एडेड स्कूल प्रबन्धनों से तत्काल प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं।


    इसी प्रकार दो अन्य मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने इस प्रकरण में एक दो दिनों के भीतरजिलाविद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके जिले से प्रस्ताव मंगाने केलिएपत्रावलियों पर सहमति दे दी है। 

    दरअसल, हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश देते हुए कहा था कि यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक के हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं और वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है तो ऐसे शिक्षक को हस्ताक्षर प्रमाणन के तीन माह बाद से लेकर नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति होने तक अथवा उसके सेवानिवृत्त होने तक, प्रधानाचार्य पद का पूर्ण वेतनमान दिया जाएगा। 

    कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को आधार बनाते हुए माना कि जब कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारियां निभा रहा है, तो उसे उस पदके अनुरूप वेतन मिलना ही चाहिए।