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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, September 9, 2026

    ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

    ककहरा के साथ फलदार पेड़ों की पाठशाला, स्कूलों में बनेंगे खाद्य वन, 16 हजार प्राथमिक स्कूल पहले चरण में किए गए चिह्नित

    पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों को मिलेगा प्राकृतिक पोषण

    लखनऊ : प्रदेश के प्राथमिक स्कूल अब सिर्फ पढ़ाई के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि बच्चों के पोषण और प्रकृति से जुड़ाव के नए ठिकाने भी बनेंगे। योगी सरकार प्राथमिक विद्यालयों में खाद्य वन (फ्रूट फारेस्ट) विकसित करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए स्कूल परिसर में उपलब्ध जमीन का उपयोग फलदार पौधे लगाने के लिए किया जाएगा। उद्देश्य बच्चों को स्कूल में ही ताजे फल और प्राकृतिक पोषण से जोड़ना है।


    खाद्य वन की अवधारणा के तहत स्कूल परिसर की खाली या उपलब्ध जमीन पर ऐसे फलदार पौधे लगाए जाएंगे, जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों और जिनसे बच्चों को समय-समय पर फल मिल सकें। इससे विद्यालय परिसर में हरियाली बढ़ाने के साथ बच्चों के पोषण में भी प्रत्यक्ष योगदान की उम्मीद है।

    खास बात यह है कि बच्चे इन पौधों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि उन्हें उगते, फलते और विकसित होते हुए अपनी आंखों से देखेंगे। पहले चरण में 16 हजार विद्यालय इसके लिए चिह्नित किए गए हैं। खाद्य वन को स्कूलों में 'पोषण की जीवंत पाठशाला' के रूप में विकसित किया जाएगा। शिक्षक बच्चों को पौधों की देखभाल, फलदार वृक्षों के महत्व, पोषण और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ेंगे।

     इससे विज्ञान और पर्यावरण जैसे विषयों की पढ़ाई को भी व्यावहारिक आधार मिलेगा। बच्चों में पौधों के प्रति जिम्मेदारी और प्रकृति के संरक्षण की आदत विकसित करने में भी यह पहल मददगार हो सकती है। स्कूल में पैदा होने वाले फल को बच्चों को खाने के लिए दिए जाएंगे। इससे स्थानीय स्तर पर पोषण का एक अतिरिक्त स्त्रोत तैयार होगा। खाद्य वन की देखभाल में बच्चों की भागीदारी भी होगी।

    कक्षा और उम्र के अनुसार बच्चों को पौधों में पानी देने, उनकी वृद्धि दर्ज करने और उनके संरक्षण जैसी गतिविधियों से जोड़ने की योजना है। इससे 'एक पेड़ लगाने' के साथ ही 'एक पेड़ पालने' की संस्कृति विकसित करने का अवसर मिलेगा।

    सरकार की यह पहल जमीन के बेहतर इस्तेमाल के साथ स्कूलों में हरियाली, बच्चों के पोषण और पर्यावरण शिक्षा को एक साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बन सकती है। यदि इन खाद्य वनों का नियमित रखरखाव सुनिश्चित हुआ और स्थानीय फलदार प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई तो आने वाले वर्षों में ये विद्यालय परिसर बच्चों के लिए पोषण, प्रकृति और सीखने के एकीकृत केंद्र के रूप में विकसित हो सकते हैं।

    नई पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पारिवारिक पेंशन लिए जाने के बाद नोडल खाते में प्राप्त धनराशि के निस्तारण के सम्बन्ध में

    नई पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पारिवारिक पेंशन लिए जाने के बाद नोडल खाते में प्राप्त धनराशि के निस्तारण के सम्बन्ध में


    समग्र शिक्षा में सेवा प्रदाता के कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक

    समग्र शिक्षा में सेवा प्रदाता के कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत की हुई वृद्धि, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक


    लखनऊ। प्रदेश में समग्र शिक्षा के तहत जिला परियोजना कार्यालयों में सेवा प्रदाता के माध्यम से कार्यरत कार्मिकों के मानदेय में 25 प्रतिशत वृद्धि को हरी झंडी मिल गई है। इनके मानदेय में साल 2020 से वृद्धि नहीं हुई थी। फैसले से करीब 500 कंप्यूटर ऑपरेटर, लेखाकार, अकाउंटेंट आदि के मानदेय में तीन से पांच हजार रुपये तक की वृद्धि होगी। यह अनुमोदन मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में समग्र शिक्षा कार्यकारी समिति की बैठक में हुआ। 


    बैठक में प्रदेश के राजकीय विद्यालयों में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी प्रयोग, छात्रों के सर्वांगीण विकास तथा समग्र शिक्षा के अंतर्गत स्वीकृत कार्ययोजना व बजट के प्रभावी क्रियान्वयन की समीक्षा की गई। 

    मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि अभिभावकों को प्रेरित करें कि वे बच्चों को निर्धारित यूनिफॉर्म में ही विद्यालय भेजें। उन्होंने विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब का नियमित अनुश्रवण करते हुए उनका प्रभावी प्रयोग करने के निर्देश दिए। 

    उन्होंने विद्यालयों में पढ़ाई के साथ खेलकूद व अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों पर ध्यान देने का निर्देश दिया। बैठक में साल 2026-27 के लिए समग्र शिक्षा में पीएबी द्वारा 11,902.85 करोड़ का बजट अनुमोदित किया गया है।


    विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

    विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे


    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


    युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


    विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


    डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति

    एडेड माध्यमिक विद्यालयों के 811 तदर्थ शिक्षकों को मिलेगा वेतन, सरकार बनाएगी नीति विधान परिषद में सर्वदलीय बैठक में बनी सहमति


    लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में वर्षों से पढ़ा रहे वेतन न पाने वाले 811 तदर्थ शिक्षकों को भी जल्द वेतन दिया जाएगा। इसकी कानूनी अड़चनें दूर होंगी और सरकार इसके लिए नीति बनाएगी। कुल 1111 तदर्थ शिक्षकों में से अभी 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है। अब शेष शिक्षकों को भी मिलेगा।


    विधान परिषद में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर नेता सदन व उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की अध्यक्षता में मंगलवार को समिति की बैठक हुई। इसमें विधान परिषद सदस्य देवेन्द्र प्रताप सिंह व उमेश द्विवेदी ने यह मामला उठाया। शिक्षिका ईशा सिंह के प्रकरण पर कोर्ट के आदेश के बाद करीब 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है।

    एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि नवंबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एडहॉक व्यवस्था खत्म करने को लेकर दिए गए आदेश के बाद इन तदर्थ शिक्षकों को बाहर किया गया। पर्व में दिए गए आदेश में वर्ष 2021 तक नियमित शिक्षकों की व्यवस्था करनी थी। फिलहाल 300 शिक्षकों को वेतन दिया जा रहा है और बाकी 811 शिक्षकों से काम लिए जाने के बावजूद वेतन नहीं दिया जा रहा। ऐसे में सरकार इन्हें लेकर नीति बनाए। बैठक में निर्देश दिए गए कि जल्द नीति बनाई जाए और बचे शिक्षकों को वेतन देने की तैयारी की जाए।

    वहीं साल 2024 में नियुक्त विशिष्ट बीटीसी शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने, शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों की पुरानी सेवा जोड़कर उन्हें भी पुरानी पेंशन का लाभ देने, 2000 के बाद नियमित शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने पर भी चर्चा की गई। व्यावसायिक शिक्षकों व निजी स्कूलों के शिक्षकों के लिए जल्द सेवा नियमावली बनाने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव भी शामिल हए। 

    भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट, बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की

    भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट,  बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की
     

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बाद में बैंक पेपर देकर बीटीसी उत्तीर्ण करने वाले चार शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। बाद में हासिल की गई योग्यता से पिछली तारीख से पात्रता पैदा नहीं हो सकती।


    बलिया के के चार सहायक अध्यापकों की न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने याचिका खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया के 30 अप्रैल 2025 और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के 29 मई 2026 के आदेश को बरकरार रखा।

    याचियों ने 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। उनका कहना था कि आवेदन करते समय उन्होंने अपने अंकों की सही जानकारी दी थी और उनके आवेदन स्वीकार किए गए तथा प्रवेश पत्र भी जारी हुए। परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बलिया में नियुक्ति मिली और उन्होंने लंबे समय तक सेवा भी की। उन्होंने बाद में बैक पेपर देकर बीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण की और 7 अगस्त 2019 को प्रमाणपत्र जारी हुआ। 

    कोर्ट ने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि 22bदिसंबर 2018 थी, जबकि याचियों ने बीटीसी की आवश्यक योग्यता बैंक पेपर का परिणाम आने के बाद हासिल की। इसलिए उस तारीख को वे भर्ती के लिए पात्र नहीं थे। आवेदन स्वीकार होना, प्रवेश पत्र जारी होना, परीक्षा में सफल होना या बाद में नियुक्ति निल कर सकता। कोर्ट यह कहा किलंये जाना पात्रता को मूल कमी को दूर नहीं समय तक नौकरी करने और वेतन पाने के कारण सहानुभूति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निर्धारित योग्यता की अनिवार्यता से समझौता नहीं किया जा सकता। 

    दूसरे अभ्यर्थियों को समान आधार पर नौकरी मिलने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसी अन्य को मिली गलत राहत के आधार पर समान गलत लाभ का दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही निर्धारित योग्यता के अभाव मैं कानूनी रूप से दोषपूर्ण हो, तो सेवा समाप्त करने के लिए अलग से विभानीय अनुशासनात्पक जांच जरूरी नहीं है। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी।

    Tuesday, September 8, 2026

    कर्नाटक में शिक्षक अब अपने नाम के आगे लगा सकेंगे 'Tr'

    कर्नाटक में शिक्षक अब अपने नाम के आगे लगा सकेंगे 'Tr'

    समाज के सच्चे शिल्पकारों को मिला डाक्टर व इंजीनियर जैसा व्यावसायिक गौरव और सम्मान, इस संबंध में आदेश भी जारी

    बेंगलुरु : शिक्षक समाज की रीढ़ होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के बच्चों का भविष्य गढ़कर राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देते हैं। इसी भावना को सम्मान देते हुए कर्नाटक सरकार ने शिक्षक दिवस के अवसर पर एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायक निर्णय लिया है। राज्य के मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार ने कैबिनेट की सहमति के बाद घोषणा की है कि अब कर्नाटक के लगभग साढ़े चार लाख शिक्षक अपने नाम के आगे 'टीआर' (टीचर) उपसर्ग का गर्व के साथ उपयोग कर सकेंगे।

     यह निर्णय शिक्षकों को डाक्टर, इंजीनियर और प्रोफेसर जैसे प्रतिष्ठित पेशेवरों के समकक्ष खड़ा करता है। इस संबंध में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग द्वारा आधिकारिक सरकारी आदेश भी जारी कर दिया गया है।

     मुख्यमंत्री ने विजयनगर जिले के कुडलीगी में 'प्रजा सेवा अभियान' के दौरान स्पष्ट किया कि माता-पिता हमें जन्म देते हैं, लेकिन शिक्षक जीवन का सही मार्ग दिखाकर हमें इंसान बनाते हैं। 'टीआर' केवल दो अक्षर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी समाज और बच्चों के भविष्य को समर्पित करने का एक जीवंत प्रतीक है।

    Sunday, September 6, 2026

    अब दूरदराज के उच्च शिक्षण संस्थान डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन करवा सकेंगे पढ़ाई, UGC ने जनवरी के लिए यूजी, पीजी पाठयक्रमों में पढ़ाई के लिए आवेदन विंडो ओपन का फैसला लिया

    अब दूरदराज के उच्च शिक्षण संस्थान डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन करवा सकेंगे पढ़ाई, UGC ने जनवरी के लिए यूजी, पीजी पाठयक्रमों में पढ़ाई के लिए आवेदन विंडो ओपन का फैसला लिया


    नई दिल्ली। दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के छात्रों को जनवरी सत्र से घर के आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और डिस्टेंस लर्निंग मोड (ओडीएल) से पढ़ाई का मौका मिल सकता है। दरअसल, शैक्षणिक सत्र 2027 के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियमों को पूरा करने वाले सभी शिक्षण संस्थानों के लिए खोलने का फैसला लिया है।

    यूजीसी ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखा है। इसके मुताबिक, ऐसे विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों से ऑनलाइन डिग्री प्रोग्राम और डिस्टेंस लर्निंग मोड (ओडीएल) से नियमों को पूरा करने वाले सभी शिक्षण संस्थान 15 सितंबर तक आवेदन पत्र भेज सकते हैं। योग्यता पात्रता नियम पूरा करने वाले उच्च शिक्षण संस्थान ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (ओडीएल) मोड और ऑनलाइन मोड से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेंगे।

    इसके तहत जनवरी-फरवरी 2027 दाखिला सत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर पाठयक्रमों में दाखिला दे सकेंगे। इससे दूरदराज के छात्रों को घर के पास ऐसे उच्च शिक्षण संस्थानों से डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई का लाभ होगा।

    इससे पहले, चयनित संस्थानों को यूजीसी (ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम और ऑनलाइन प्रोग्राम) विनियम, 2020 और इसके संशोधनों के विनियम 3(ए) और विनियम 3 (बी) के आधार पर अनुमति मिलेगी। हालांकि उन्हीं संस्थानों को अनुमति मिलेगी, जोकि रैगुलर डिग्री प्रोग्राम में पहले से संबंधित विषय की पढ़ाई करवा रहे होंगे। 



    Saturday, September 5, 2026

    तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने के मुद्दे को लेकर धारा 33(छ) के तहत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवा व पेंशन का मांगा गया ब्योरा

    तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने के मुद्दे को लेकर धारा 33(छ) के तहत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवा व पेंशन का मांगा गया ब्योरा


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में धारा 33(छ) के तहत विनियमित किए गए शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को जोड़कर पेंशन दिए जाने के संबंध में शासन स्तर पर प्रकरण की समीक्षा की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश द्वारा मंडलीय अधिकारियों से विस्तृत सूचनाएं मांगी गई हैं।

    शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार, विधान सभा के प्रथम सत्र 2026 में 13 फरवरी 2026 को विधान परिषद सदस्य श्री ध्रुव कुमार त्रिपाठी द्वारा नियम-105 के अंतर्गत 22 मार्च 2016 को जारी विनियमितीकरण आदेश के आधार पर धारा 33(छ) के अंतर्गत विनियमित शिक्षकों की तदर्थ सेवाओं को पेंशन के लिए जोड़ने का मुद्दा उठाया गया था।

    पत्र में बताया गया है कि अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा/बेसिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश शासन द्वारा आगामी बैठक में इस प्रकरण की समीक्षा प्रस्तावित है। इसके लिए सभी मंडलों से निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    मंडलों से धारा 33(छ) के अंतर्गत विनियमितीकरण के लिए प्राप्त कुल प्रकरण, मान्य किए गए प्रकरण, अमान्य किए गए प्रकरण तथा अवशेष प्रकरणों की संख्या मांगी गई है। संबंधित सूचना निर्धारित प्रारूप में ई-मेल आईडी admadhyamik@gmail.com पर हार्ड एवं सॉफ्ट कॉपी में उपलब्ध कराने को कहा गया है। पत्र में प्रकरण को शीर्ष वरीयता एवं व्यक्तिगत ध्यान दिए जाने की अपेक्षा की गई है। 



    Friday, September 4, 2026

    नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

    नदियों के नाम पर होंगे एनसीईआरटी की भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम

     छठी और नौवीं की भारतीय भाषाओं की सभी पाठ्यपुस्तकों के नाम स्थानीय नदियों के नाम पर रखे

    हिंदी की पाठ्यपुस्तक का नाम अलकनंदा और रेवा, तो पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा


    नई दिल्ली: देश की नई पीढ़ी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के त्रिभाषा फार्मूले के जरिये भारतीय भाषाओं से जोड़ने की पहल में छात्र सिर्फ भाषा नहीं सीखेंगे, बल्कि देश की नदियों के नाम से भी रूबरू होंगे। एनसीईआरटी सभी भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम देश की नदियों के नाम पर रख रही है। अब तक छठी और नौंवी कक्षा के लिए संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं की नई पाठ्यपुस्तकों के नाम क्षेत्र या राज्यों की भाषाओं के आधार पर वहां की स्थानीय नदियों के नाम पर रखा गया है।


    पंजाबी भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम सतलुज और रावी रखा गया है, जबकि तमिल भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भवानी और वैगई (तमिलनाडु की प्रमुख नदियां) के नाम पर रखा गया है। हिंदी की पाठ्यपुस्तकों का नाम अलकनंदा व रेवा रखा गया है। बांग्ला भाषा की पाठ्यपुस्तक का नाम भागीरथी और कालिंदी है। वहीं, मैथिली भाषा की पुस्तक का नाम कमला और कौशिकी (स्थानीय नदियां) रखा गया है। 


    इसी तरह अन्य भाषाओं की पुस्तकों के नाम भी देश की प्रमुख भाषाओं के नाम पर रखे गए हैं। एनसीईआरटी के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, अलग-अलग भाषाओं की इन पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने का काम त्रिभाषा फार्मूले के तहत किया जा रहा है। छठी से दसवीं तक छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, इनमें दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। इन पाठ्यपुस्तकों का नाम नदियों के नाम पर रखने का फैसला इसलिए लिया गया है, क्योंकि नई पीढ़ी भाषाओं की तरह देश की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी नदियों के नाम भी जान सकेगी।

    किन प्रमुख नदियों के नाम पर है किताबेंः अलकनंदा, सतलुज, भवानी, कृष्णा, नेपाली तीस्ता, गोदावरी, साबरमती, भागीरथी, लोकतक, मांडवी, कमला, झेलम, बैतरणी, देविका, गोमती, सिंधु, रेवा, नर्मदा, पंचगंगा, कालिंदी, रावी, महानदी, तुंगभद्रा, पंबा, कपिला, कौशिकी, तवा, चिनाब, लुनी, वैगई आदि।

    शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी, आंदोलन करने की तैयारी

    शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी,  आंदोलन करने की तैयारी


    प्रयागराज। शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परीक्षा में शिक्षामित्रों को नहीं शामिल किया गया है। इससे शिक्षामित्रों में नाराजगी है। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की ओर से मांग की गई है कि इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है।


    शिक्षामित्र भी लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने सेवा के दौरान बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया है। इसके बावजूद उन्हें विभागीय टीईटी का अवसर न दिया जाना गलत है। करीब 1.43 लाख में करीब 70 हजार शिक्षामित्र हैं जो टीईटी पास नहीं हैं।

    प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा, "सरकार जब सेवारत अध्यापकों को विभागीय टीईटी के माध्यम से अपनी पात्रता पूरी करने का अवसर दे सकती है तो 26 वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के लिए ऐसा अवसर क्यों नहीं? यदि शिक्षामित्रों शिक्षामित्रा को नजरअंदाज किया गया तो प्रयागराज से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा।"

    संघ के जिला महामंत्री सुनील तिवारी ने कहा, "एक तरफ सेवारत अध्यापकों के लिए विशेष टीईटी की व्यवस्था की जा रही है और दूसरी तरफ शिक्षामित्रों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है।

    बेसिक शिक्षा के राज्य शिक्षक पुरस्कार पर कई जिलों से उठे सवाल, जिला स्तर पर सबसे कम अंक वालों को प्रदेश स्तर पर चुने जाने का आरोप

    बेसिक शिक्षा के राज्य शिक्षक पुरस्कार पर कई जिलों से उठे सवाल, जिला स्तर पर सबसे कम अंक वालों को प्रदेश स्तर पर चुने जाने का आरोप 


    लखनऊ । पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है। इस अवसर पर आयोजित समारोह में राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा। इससे पहले ही राज्य पुरस्कार सवालों के घेरे में आ गए हैं। कई जिलों में शिक्षकों ने शिकायत की हैं चयन में कमियां बताई हैं। सबसे ज्यादा सवाल जिला स्तर पर दिए गए अंकों और प्रदेश स्तर पर किए गए चयन में बड़े अंतर को लेकर हैं। वहीं, हेडमास्टर के अग्रसारित किए बिना पुरस्कार देने और कई बार सस्पेंड शिक्षिका का नाम पुरस्कार लिस्ट में होने जैसी शिकायतें भी हैं।


    ये है प्रक्रिया : पुरस्कारों के चयन के लिए सबसे पहले जिला स्तरीय समिति शिक्षकों से जरूरी दस्तावेज लेकर तय प्रक्रिया के तहत अंक देती है। पुरस्कार के लिए जरूरी इन दस्तावेज के 80 अंक होते हैं। उसके बाद निदेशालय स्तर पर साक्षात्कार होता है और दस्तावेज की जांच होती है। निदेशालय स्तर से 20 अंक तय होते हैं। इस आधार पर 100 अंकों में जिसके अंक ज्यादा होंगे, उसे पुरस्कार के लिए चुना जाएगा।


    जिसके कम अंक, उसे पुरस्कारसबसे ज्यादा सवाल अंक देने की प्रक्रिया पर ही हैं। ललितपुर में शिक्षक नीरज द्विवेदी को जिला स्तर पर 80 में से 65 अंक मिले। अनिल कुमार को 50 और प्रीति गुप्ता को 36 अंक मिले। प्रदेश स्तर पर साक्षात्कार और समीक्षा के बाद चयन जिले में सबसे कम अंक वाली प्रीति गुप्ता का हुआ। इसी तरह महोबा में जिला स्तर पर ब्रज किशोर को 69 अंक मिले। वहीं, ओम प्रकाश तिवारी को 49 और विनोद कुमार पाठक को 39 अंक मिले। पुरस्कार की सूची आई तो उसमें 39 अंक पाने वाले विनोद कुमार पाठक का नाम आया। इस पर सवाल ये उठ रहे हैं कि जिसके जिला स्तर पर 69 और 65 अंक पाने वालों को साक्षात्कार में शून्य अंक भी दिया जाए और 39 और 36 अंक पाने वालों को पूरे 20-20 नंबर भी दे दिए जाएं तो भी कम रहेंगे।

    ऐसे में उनका चयन कैसे हो गया ?

    कई बार सस्पेंड शिक्षिका को पुरस्कार : बदायूं में प्राथमिक विद्यालय रिसौली की शिक्षका किरण देवी को पुरस्कार के लिए चुना गया है। उसी गांव की मेघा ने उनके बारे में अधिकारियों को शिकायत की है। कहा है कि किरण देवी तीन बार गंभीर आरोपों सस्पेंड हो चुकी हैं। ऐसे में उनको यह पुरस्कार कैसे दिया जा सकता है? बीएसए बदायूं का कहना है कि निलंबन कोई सजा नहीं होती है।


    हेडमास्टर ने ही की शिकायत

    लखनऊ में भी जिला स्तर पर 48 अंक पाने वाली विनीता का चयन पुरस्कार के लिए हुआ है। उससे ज्यादा अंक पाने वालो को नहीं चुना गया। इसके अलावा गोसाईगंज के प्राथमिक विद्यालय अमेठी की हेड टीचर संतोष राय ने इसकी शिकायत भी जनसुनवाई पोर्टल पर की है और एक विडियो बनाकर भी प्रसारित किया है। उनका कहना है कि उनसे हस्ताक्षर ही नहीं करवाए गए। उन्हें आशंका है कि उनकी शिक्षिका विनीता ने उनके फर्जी हस्ताक्षर किए। इस बारे में विनीता का कहना है कि हेड टीचर ने हस्ताक्षर करने से मना कर दिया था। ऐसे में खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को अधिकार होता है और उन्होंने आवेदन अग्रसारित कर दिया।

    जिलों में तय मानकों के अनुसार अंक नहीं दिए गए थे। कई के पूरे दस्तावेज नहीं थे। ऐसे में निदेशालय स्तर पर समीक्षा की गई। उस आधार पर चयन किया गया है। यदि हेडमास्टर किसी व्यक्तिगत कारण से किसी का आवेदन अग्रसारित नहीं करता तो उससे बड़े सक्षम अधिकारी को यह अधिकार होता है। जिनका चयन नहीं हुए वे बेवजह जिले के अंकों के आधार पर सवाल उठा रहे हैं। - अनिल भूषण चतुर्वेदी, निदेशक-बेसिक शिक्षा

    सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका

    सरकारी स्कूलों में वीडियोग्राफी व बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने की याचिका खारिज, CJP के School Theek Karo अभियान को झटका 


    नई दिल्ली। राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर व सिविल सोसाइटी के सदस्यों के प्रवेश व वीडियोग्राफी पर लगी रोक जारी रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इन प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया है।

    जस्टिस पीएस नरसिम्हा व जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने बृहस्पतिवार को प्रिया मिश्रा की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह इस पर पर विचार विचार के के लिए इच्छुक नहीं है। 

    राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य की अनुमति को जरूरी किया था। वहीं, यूपी में अयोध्या के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, यूट्यूबर और सोशल मीडिया से जुड़े लोगों के बिना अनुमति प्रवेश व वीडियोग्राफी पर रोक लगाई थी। याचिका में इन दोनों आदेशों को चुनौती दी गई थी।


    माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

    माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक की अर्हता में संशोधन, प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50% के साथ बीएड किया गया शामिल

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रधानाचार्य (इंटर स्तर) व प्रधानाध्यापक (हाईस्कूल स्तर) की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसमें जहां पीजी स्तर पर राहत देते हुए 50 फीसदी अंक तय किए गए हैं। वहीं बीएड को शामिल किया गया है। जबकि अनुभव का नियम पूर्व की भांति रहेगा।


    विशेष सचिव संदीप परमार की ओर से जारी आदेश के अनुसार उप्र माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 के अध्याय 2 के विनियम-1 के परिशिष्ट क में संस्था प्रधान की अर्हता में संशोधन किया गया है। इसके तहत प्रधानाचार्य के लिए पीजी में 50 फीसदी अंक होने चाहिए। एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड होना चाहिए। साथ ही पूर्व की भांति राज्य सरकार की उच्चतर कक्षाओं (नौ से 12 में) प्रवक्ता व सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षण अनुभव, हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 साल से कम आयु आयु नहीं होना चाहिए।

    इसी क्रम में प्रधानाध्यापक के लिए पीजी 50 फीसदी अंकों के साथ, एनसीटीई द्वारा मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में बीएड व बीपीएड होना होगा। साथ ही केंद्र-राज्य सरकार की मान्यता प्राप्त संस्थाओं में कक्षा नौ से 12 में प्रवक्ता, सहायक अध्यापक के पद पर कम से कम चार साल का शिक्षक अनुभव, जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद पर कम से कम चार साल का अनुभव, 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए। बता दें, अब तक दोनों पद के लिए लगभग एक जैसी अर्हता थी। 


    शॉर्ट्स, रील्स व वीडियो से जेन जी और अल्फा की पढ़ाई की राह होगी आसान, SIET कक्षा एक से 12 तक के लिए तैयार करेगा वीडियो, रोचक तरीके से कठिन विषयों, टॉपिक की देंगे जानकारी

    शॉर्ट्स, रील्स व वीडियो से जेन जी और अल्फा की पढ़ाई की राह होगी आसान, SIET कक्षा एक से 12 तक के लिए तैयार करेगा वीडियो, रोचक तरीके से कठिन विषयों, टॉपिक की देंगे जानकारी


    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के छात्रों को पढ़ाई में कठिन विषयों व टॉपिक को सिखाने के लिए अब नए तरीके अपनाए जाएंगे। इसके तहत अब जेन जी व जेन अल्फा (कक्षा एक से 12 तक के छात्रों) के लिए छोटे-छोटे विषयों व टॉपिक की जानकारी वाले शॉर्ट्स, रील्स व वीडियो तैयार कराए जा रहे हैं। इसमें न सिर्फ रोचक तरीके से जानकारी देंगे बल्कि छात्रों के डाउट को भी दूर किया जाएगा।


    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से छात्रों के लिए शैक्षिक वीडियो तैयार करने और विभिन्न माध्यमों पर उसे उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इतना ही नहीं बोर्ड परीक्षा के दौरान व निपुण भारत मिशन को गति देने के लिए उनके द्वारा ऑनलाइन यू-ट्यूब सत्र का भी आयोजन किया गया था। यह शिक्षकों व छात्रों के लिए काफी उपयोगी रहा और काफी देखा व सुना गया।

    अब राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) इसे और आगे बढ़ा रहा है। इसके लिए एसआईईटी की ओर से शिक्षकों के वीडियो तैयार कर उनको यू-ट्यूब पर अपलोड किया जा रहा है। हाल ही में बैगलेस डे (बिना बैग के स्कूल का एक दिन) पर जानकारी देने वाला रोचक वीडियो तैयार किया गया है। इसी क्रम में अब आजकल के युवाओं की जरूरत को देखते हुए संस्थान की ओर से पढ़ाई से जुड़े शॉर्ट्स, रील व अन्य वीडियो भी तैयार किए जाएंगे।


    अपना यू-ट्यूब चैनल भी शुरू करेंगे

    एसआईईटी के निदेशक डॉ. मुकेश चंद्र ने बताया शॉर्ट्स, रील व अन्य वीडियो को छात्रों तक पहुंचाने के लिए संस्थान अपना खुद का यू-ट्यूब चैनल व फेसबुक पेज भी शुरू करना अभी शिक्षकों से कठिन विषयों पर शॉर्ट्स व रील तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन्हें रोचक बनाने के लिए एनीमेशन आदि का भी प्रयोग किया जाएगा। साथ ही छात्रों के लिए इंटरैक्टिव भी बनाया जाएगा। इसमें आने वाले फीडबैक से इसे और बेहतर बनाया जाएगा।

    Wednesday, September 2, 2026

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर बड़ा फैसला, कक्षा 6 से 8 की पढ़ाई वाले स्कूलों में आदेश निरस्त

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर बड़ा फैसला, कक्षा 6 से 8 की पढ़ाई वाले स्कूलों में आदेश निरस्त


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण/समायोजन को लेकर शिक्षा निदेशालय ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। शासनादेश के तहत वर्ष 2026-27 के लिए चिन्हित सरप्लस शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं के स्थानांतरण/समायोजन की प्रक्रिया में संशोधन किया गया है।

    जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि सरप्लस की गणना के लिए निर्धारित मानकों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाओं को भी ध्यान में रखा जाना है। ऐसे राजकीय माध्यमिक विद्यालय, जहां कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं संचालित नहीं होती हैं, उन्हें यथास्थिति बनाए रखा जाएगा।

    वहीं, जिन विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाएं संचालित हैं, वहां सरप्लस शिक्षकों की गणना RTE के निर्धारित मानकों के अनुसार की जाएगी और इस क्रम में आदेश रद्द किया जाएगा।  शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने सभी संबंधित अधिकारियों को शासनादेश के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।


    हाईकोर्ट ने हरदोई के बीएसए का निलंबन आदेश रद्द किया

    हाईकोर्ट ने हरदोई के बीएसए का निलंबन आदेश रद्द किया

    02 सितंबर 2026
    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डा अजीत सिंह के निलबन आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने साथ ही अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा को छूट भी दी कि बीएसए का चार सप्ताह में कहीं और जगह तबादला कर सकते हैं। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने मंगलवार को यह फैसला डा अजीत सिंह की याचिका पर दिया। 

    याची ने 2 जुलाई 2026 के निलंबन आदेश समेत इसके परिणामी आदेशों को चुनौती दी थी। इनके तहत याची को निलंबित करके उन्हें बेसिक शिक्षा निदेशक, यूपी, लखनऊ के दफ्तर से अटैच कर दिया गया था। याची का कहना था कि निलंबन संबंधी पूरी कार्यवाही का ताना बाना, हरदोई के जिलाधिकारी द्वारा दुर्भावना से बुना गया। जो कानून की मंशा के खिलाफ था। 

    कोर्ट ने फैसले में कहा कि मामले के तथ्यों और चर्चा के मद्देनजर अदालत का मत है कि याची के खिलाफ शुरू की गई सभी कार्यवाहियां बदले की भावना से की गईं थीं। ऐसे में समिति की 20 जून 2026 की रिपोर्ट समेत परिणामी कार्यवाही रद्द किए जाने योग्य है। तदनुसार, इसे निरस्त किया जाता है। 


    हरदोई के बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजीत सिंह निलंबित, भर्ती में हेरफेर के गंभीर आरोप, जांच जारी

    02 जुलाई 2026
    हरदोई। शिकायतों और अनियमितताओं के जाल में फंसे जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. अजित सिंह को आखिरकार शासन ने निलंबित कर दिया। बीएसए पर लगे आरोपों की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई हुई। डॉ. अजित को बेसिक शिक्षा निदेशालय से संबद्ध कर दिया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक (षष्ठ मंडल) करेंगे।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कुछ गंभीर शिकायतें जिलाधिकारी अनुनय झा को मिली थीं। इस पर उन्होंने जांच के लिए नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। एसडीएम सदर, संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रमेंद्र सिंह इसमें सदस्य थे। जांच टीम ने 61 अभ्यर्थियों की नियुक्ति पत्रावली गायब होने, ईसीसीई एजुकेटर भर्ती परीक्षा में शासनादेश का पालन न करने, सेवानिवृत्त शिक्षकों की पेंशन और अन्य देयताओं से संबंधित पत्रावलियों को लंबित रखने की पुष्टि करते हुए रिपोर्ट डीएम को 20 जून को सौंपी थी।

    इसी रिपोर्ट पर डीएम अनुनय झा ने बीएसए डॉ. अजित सिंह को निलंबित करते हुए विभागीय जांच कराए जाने की संस्तुति की थी। इसी क्रम में बृहस्पतिवार को बीएसए को निलंबित कर दिया गया। बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि निलंबन अवधि में बीएसए निदेशायल से संबद्ध रहेंगे। मामले की विस्तृत जांच संयुक्त शिक्षा निदेशक करेंगे।
     



    हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

    पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

    23 जून 2026
    हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

    जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

    समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

    जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

    रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

    प्रशासन ने आरोपों को नकारा
    बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



    हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

    20 जून 2026
    हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

    हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


    एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जानिए पूरा मामला 
    गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

    उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

    आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


    बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

    एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

    एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

    यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


    डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

    नवोदय विद्यालयों में कक्षा 9 व 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित

    नवोदय विद्यालयों में कक्षा 9 व 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित


    नोएडा। नवोदय विद्यालय समिति ने सत्र 2027-28 में कक्षा 9 एवं 11 की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए लेटेरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट (LEST)-2027 हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।


    समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थी कक्षा 9 एवं कक्षा 11 के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर निःशुल्क आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा संबंधी विस्तृत विवरण (प्रॉस्पेक्टस) भी पंजीकरण पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।

    कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए अलग-अलग ऑनलाइन पोर्टल निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश रिक्त सीटों के सापेक्ष लेटरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट के माध्यम से होगा। समिति ने अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है।

    राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी

    राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति फाइल नहीं लटकेगी, फाइल पर निदेशक को अधिकतम 30 दिन में लेना होगा निर्णय, समर्थ पोर्टल पर यह प्रक्रिया 90 दिन में होगी पूरी


    लखनऊ। राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल अब बेवजह लटकाई नहीं जा सकेगी। उच्च शिक्षा निदेशक को शिक्षक के प्रोन्नति की फाइल पर अधिकतम 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 


    अभी तक निदेशालय में लंबे समय तक फाइलें लटकाने के चलते शिक्षकों को दौड़ भाग करनी पड़ती थी। अब उन्हें बड़ी राहत मिल गई है। अभी तक राजकीय व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की समर्थ पोर्टल पर करियर एडवांसमेंट स्कीम (सीएएस) के तहत शिक्षक पदोन्नति के लिए आवेदन करता है तो पहले कॉलेज की इंटरनल क्वॉलिटी एश्योरेंस सेल (आईक्यूएसी) के पास आवेदन जाता है। वह उसकी जांच कर आगे प्राचार्य को ऑनलाइन ही पोर्टल पर रिपोर्ट बढ़ा देती है। 

    फिर प्राचार्य कमेटी का गठन कर प्रोन्नति की प्रक्रिया को पूरा करता है। यह प्रक्रिया 60 दिनों में पूरी होती है। फिर यहां से निदेशालय को शिक्षक की प्रोन्नति के लिए प्रस्ताव भेज दिया जाता है। अब निदेशक के पास शिक्षकों की पदोन्नति की फाइल जाने पर उन्हें 30 दिनों में निर्णय लेना होगा। 

    निदेशक को अब अधिकतम 30 दिनों में इस पर निर्णय लेना होगा। समर्थ पोर्टल पर शिक्षक प्रोन्नति की पूरी प्रक्रिया 90 दिनों में पूरी हो जाएगी। फिलहाल, इस निर्णय से 212 राजकीय डिग्री कॉलेजों व 331 एडेड डिग्री कॉलेजों के करीब 16 हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिल गई है।

    Tuesday, September 1, 2026

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तारीख बढ़ी

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तारीख बढ़ी


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने सोमवार को सत्र 2026-27 के लिए नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण की तिथि बढ़ा दी है। बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि विद्यालय के प्रधानाचार्य अग्रिम पंजीकरण शुल्क जमा कर 10 सितंबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक बोर्ड की वेबसाइट पर विवरण अपलोड कर सकेंगे। नौवीं के 40 लिए 50 रुपये और 11वीं के लिए 40 रुपये पंजीकरण शुल्क है। अपलोड किए गए विवरण में 11 से 13 सितंबर तक संशोधन कराया जा सकता है। 




    यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों की APAAR ID बनाने पर जोर, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी की विज्ञप्ति

    यूपी बोर्ड के विद्यार्थियों की APAAR ID बनाने पर जोर, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी की विज्ञप्ति

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने कक्षा 9 एवं 11 के विद्यार्थियों के अग्रिम पंजीकरण तथा कक्षा 10 एवं 12 के परीक्षा आवेदन की प्रक्रिया के बीच विद्यार्थियों की APAAR ID (वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी) बनाने को लेकर विद्यालयों को निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद ने कहा है कि APAAR ID विद्यार्थियों की 12 अंकों की स्थायी डिजिटल पहचान है, जिसमें उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा के क्रेडिट और रिपोर्ट कार्ड एक स्थान पर सुरक्षित रहेंगे। इसके माध्यम से विद्यार्थियों के मार्कशीट, ट्रांसफर सर्टिफिकेट आदि प्रमाणपत्र डिजिलॉकर पर डिजिटल रूप से सुरक्षित रखने तथा छात्रवृत्ति, कल्याणकारी योजनाओं और शैक्षणिक सुविधाओं का लाभ सुगमता से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

    विज्ञप्ति के अनुसार पंजीकरण एवं परीक्षा आवेदन पत्र भरते समय APAAR ID का विवरण देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन विद्यार्थियों के व्यापक हित और उनके डिजिटल शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए परिषद ने सभी विद्यालय प्रधानाचार्यों, शिक्षकों और अभिभावकों से विशेष अनुरोध किया है कि अभिभावक की सहमति से विद्यार्थियों की APAAR ID बनवाकर आगामी पंजीकरण एवं परीक्षा फॉर्म में उसका विवरण दर्ज कराएं।

    परिषद ने स्पष्ट किया है कि APAAR ID बनवाने की प्रक्रिया सरल और सुरक्षित है तथा यह अभिभावक की सहमति से पूरी की जाती है। प्रधानाचार्यों से आग्रह किया गया है कि अंतिम पंजीकरण तिथि से पूर्व अधिकतम विद्यार्थियों की APAAR ID बनवाते हुए उन्हें डिजिटल रूप से सशक्त एवं उनके शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित बनाने में सहयोग करें।

    यह विज्ञप्ति माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश की सचिव भगवती सिंह द्वारा 27 अगस्त 2026 को जारी की गई है।


    वित्तविहीन शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा, आदेश जारी

    वित्तविहीन शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा, आदेश जारी

    अपर शिक्षा निदेशक ने सभी डीआईओएस को लिखा पत्र

    प्रयागराज। प्रदेश के 22 हजार से अधिक वित्तविहीन स्कूलों में पढ़ाने वाले 356465 शिक्षक-शिक्षिकाओं को भी कैशलेस चिकित्सा का लाभ मिलेगा। अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) कामता राम पाल ने 21 जुलाई के शासनादेश के अनुपालन के क्रम में सोमवार को सभी डीआईओएस को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं।

    इसके लिए शिक्षकों को स्वयं तथा अपने आश्रितों का मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए विकसित पोर्टल https://cmtcts.upsdv.gov.in पर  आधार कार्ड के अनुसार पंजीकरण करना होगा। शिक्षक का आवेदन प्रथम स्तर पर सत्यापन एवं अनुमोदन के लिए संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक / प्रधानाचार्य को अग्रसारित होगा। 

    प्रधानाध्यापक /प्रधानाचार्य शिक्षक की नियुक्ति नियमानुसार होने तथा निरन्तर कार्यरत होने की स्थिति में परीक्षण के बाद आवेदन संबंधित डीआईओएस को सत्यापन एवं अनुमोदन के लिए अग्रसारित करेंगे।


    Sunday, August 30, 2026

    नवसृजित जनपदों के शिक्षकों/कर्मचारियों के GPF की धनराशि के हस्तान्तरण में विलम्ब के संबंध में

    नवसृजित जनपदों के शिक्षकों/कर्मचारियों के GPF की धनराशि के हस्तान्तरण में विलम्ब के संबंध में।


    अशासकीय संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत के अंशदायी पेंशन योजनान्तर्गत शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एनपीएस प्रणाली के समन्वय (Coordination) के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण/कार्यशाला के संबंध में।

    अशासकीय संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत के अंशदायी पेंशन योजनान्तर्गत शिक्षकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के एनपीएस  प्रणाली के समन्वय (Coordination) के संबंध में आयोजित प्रशिक्षण/कार्यशाला के संबंध में।



    26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद, संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

    26 राजकीय बेसिक विद्यालय बंद,  संचालित 42 स्कूलों में 39 शिक्षक, राजकीय बेसिक विद्यालयों में शिक्षक नियुक्त नहीं होने से व्यवस्था बेपटरी

    प्रदेश के कुल 68 विद्यालयों में 44 शिक्षक विहीन, शिक्षक युक्त विद्यालयों की संख्या 24

    प्रयागराज : पठन-पाठन बेहतर बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में राजकीय बेसिक विद्यालय स्थापित तो किए गए, लेकिन आज स्कूल से लेकर शिक्षक व विद्यार्थियों तक को ढूंढ़ना पड़ेगा। स्थिति यह है कि कुल स्थापित 68 विद्यालयों में 26 बंद हो गए हैं। जो 42 संचालित हैं, उनमें विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 39 शिक्षक हैं। 1990 के बाद शिक्षकों की नियुक्ति इस संवर्ग के विद्यालयों में नहीं होने से स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ती गई, जिसका परिणाम यह है कि इनके अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लग गया है कि ये संचालित ही क्यों हैं? सोमवार को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक/बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेन शर्मा की विभागीय समीक्षा बैठक में राजकीय बेसिक विद्यालयों की बदहाली का विषय भी उठ सकता है।


    बालिका वर्ग, 23 सह शिक्षा प्रदेश में स्थापित कुल 68 विद्यालयों में तीन बालक वर्ग, 41 विद्यालय तथा एक विद्यालय कंपोजिट था। पिछले वर्ष इन विद्यालयों की स्थिति का आकलन शिक्षा निदेशालय ने कराया तो चिंताजनक तस्वीर सामने आई। इनमें कोई बालक विद्यालय संचालित नहीं मिला। यानी तीनों बंद हैं। इसके अलावा बालिका वर्ग के 21 तथा सह शिक्षा के 21 विद्यालय संचालित मिले। इस तरह कुल 44 विद्यालयों में शिक्षक नहीं हैं, जबकि 24 विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती है। संचालित विद्यालयों में 243 छात्राएं व 1017 बालक पंजीकृत हैं।

    जिन विद्यालयों में विद्यार्थी पंजीकृत हैं, वहां शिक्षकों को संबद्ध करके काम चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि मऊ जिले में स्थित राजकीय बालिका सीनियर बेसिक विद्यालय में 32 छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन कोई शिक्षक नहीं हैं। राजकीय कन्या सीनियर बेसिक विद्यालय नगर क्षेत्र बांदा में भी ऐसा ही है। यहां 13 बालक व आठ बालिका तो पंजीकृत हैं, लेकिन शिक्षक नियुक्त नहीं हैं। आगरा के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल बाह में तीन बालक और तीन बालिका को पढ़ाने के लिए एक शिक्षक नियुक्त हैं। ऐसे ही मेरठ के राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल रोहटा में पंजीकृत पांच बालिकाओं के लिए एक शिक्षक की तैनाती है।

    चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

    चुनावी साल में आंगनबाड़ी और सहायिकाओं का 50 फीसदी मानदेय बढ़ाने की तैयारी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं का 4 से बढ़ाकर 6 हजार करने का है प्रस्ताव

    लखनऊ। चुनावी साल में आधी आबादी को साधने के लिए सरकार एक और बड़ा फैसला लेने जा रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में दोगुना वृद्धि करने की तैयारी है। बाल विकास सेवा एवं आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय 8 से बढ़ाकर 12 हजार तो सहायिकाओं के मानदेय को 4 हजार से बढ़ाकर 6 हजार करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे अगली कैबिनेट में मंजूरी दी जा सकती है। इस फैसले से प्रदेश की 1.89 लाख आंगनबाड़ी और 1.67 लाख सहायिकाओं को लाभ मिलेगा।


    दरअसल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते अप्रैल महीने में ही आंगनबाड़ी और सहायिकाओं के मानदेय में सम्मानजन वृद्धि करने की घोषणा की थी। इसी कड़ी में विभाग ने मानदेय बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग के स्तर पर सहमति मिल चुकी है। मानदेय बढ़ान से प्रदेश सरकार के खजाने पर 3000 करोड़ से अधिक का वित्तीय भार आएगा। खास बात यह है कि योगी सरकार ने मानदेय में यह बढ़ोत्तरी अपने दम करने की हिम्मत दिखाई है। इस बढ़ोत्तरी में केंद्र सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलेगी।

    बता दें कि मौजूदा मानदेय में केंद्र सरकार से भी धनराशि मिलती है, लेकिन इस बार की बढ़ोत्तरी से बढ़ने वाले वित्तीय भार को योगी सरकार अकेले वहन करेगी। मौजूदा समय में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 8000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलता है, जिसमें 4500 रुपए केंद्र सरकार देती है और शेष 3500 रुपए राज्य सरकार देती है। अब प्रदेश सरकार अपनी 3500 की हिस्सेदारी को बढ़ाकर 5500 कर देगी। इसे मिलाकर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को कुल 12000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसी प्रकार सहायिकाओं के मानदेय में भी राज्य सरकार अपनी हिस्सेदारी में 2000 रुपए और बढ़ाने जा रही है। इस प्रकार इन्हे अब 6000 रुपए प्रतिमाह मानदेय मिलेगा।


    लंबे सम समय से मानदेय बढ़ाने की मांग

    सरकार के इस संभावित फैसले को महज मानदेय वृद्धि के तौर पर नहीं, बल्कि चुनावी साल में महिला मतदाताओं को साधने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। प्रदेश में आंगनबाड़ी व्यवस्था से बड़ी संख्या में महिलाएं सीधे जुड़ी हैं। कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का नेटवर्क गांव-गांव और शहरों के मोहल्लों तक फैला हुआ है। ऐसे में मानदेय बढ़ाने का फैसला एक बड़े महिला वर्ग को आर्थिक राहत देने के साथ-साथ राजनीतिक संदेश देने वाला कदम साबित हो सकता है। लंबे समय से मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहे इस वर्ग के लिए यह वृद्धि आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


    महिला मतदाताओं पर बढ़ा फोकस

    राजनीतिक नजरिये से देखें तो विधानसभा चुनाव से पहले महिला मतदाताओं पर सभी दलों का फोकस बढ़ना स्वाभाविक है। ऐसे में सरकार की ओर से आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रस्तावित बढ़ोतरी को महिला सशक्तीकरण और कल्याणकारी राजनीति के साथ जोड़कर पेश किया जा सकता है। इससे सरकार को अपने महिला-केंद्रित कामकाज को रेखांकित करने का मौका मिलेगा।

    Saturday, August 29, 2026

    यूपी में शिक्षकों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों को मिलेगा बड़ा सम्मान, ₹3 लाख तक पुरस्कार जीतने का मौका, सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने का निर्देश

    यूपी में शिक्षकों, स्कूलों और ग्राम पंचायतों को मिलेगा बड़ा सम्मान, ₹3 लाख तक पुरस्कार जीतने का मौका, सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने का निर्देश 


    लखनऊ, 28 अगस्त 2026। उत्तर प्रदेश में सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और ब्लॉक संसाधन केंद्रों (BRC) को प्रोत्साहित करने के लिए ‘सीखो सिखाओ अवॉर्ड्स 2026’ की शुरुआत की गई है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव की ओर से 27 अगस्त 2026 को प्रदेश के सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी किया गया है।

    पांच श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
    ‘सीखो सिखाओ अवॉर्ड्स 2026’ के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पांच प्रमुख श्रेणियों में सम्मानित किया जाएगा—

    🔴 शिक्षक पुरस्कार – परिषदीय विद्यालयों के कक्षा 1 से 8 तक के शिक्षक।
    🔴 विद्यालय पुरस्कार – परिषदीय विद्यालय कक्षा 1 से 8।
    🔴 ग्राम पंचायत पुरस्कार – शैक्षिक क्षेत्र में अनुकरणीय योगदान देने वाली ग्राम पंचायतें।
    🔴 BRC पुरस्कार – शैक्षिक सहयोग के लिए योगदान देने वाले ब्लॉक संसाधन केंद्र।
    🔴 बालिका शिक्षा पुरस्कार – परिषदीय/माध्यमिक/KGBV विद्यालयों के कक्षा 6 से 12 तक के शिक्षक।


    विजेताओं को मिलेगा ₹3 लाख तक का पुरस्कार
    योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों में विजेताओं और उप-विजेताओं को आर्थिक पुरस्कार दिया जाएगा। शिक्षक पुरस्कार में प्रत्येक विजेता को ₹1 लाख और उप-विजेता को ₹50 हजार मिलेंगे। वहीं विद्यालय, ग्राम पंचायत और BRC पुरस्कार की प्रत्येक श्रेणी में विजेता को ₹3 लाख तथा उप-विजेता को ₹1 लाख की पुरस्कार राशि दी जाएगी। बालिका शिक्षा पुरस्कार के राज्य स्तरीय विजेता को ₹3 लाख का पुरस्कार मिलेगा।

    16 विजेता और 16 उप-विजेता
    विद्यालय, शिक्षक, ग्राम पंचायत और BRC की प्रत्येक श्रेणी में प्रदेश को पश्चिमी यूपी, केंद्रीय यूपी, पूर्वांचल और बुंदेलखंड के चार क्षेत्रों में बांटकर चयन किया जाएगा। प्रत्येक क्षेत्र से एक विजेता और एक उप-विजेता चुना जाएगा। इस प्रकार इन चार श्रेणियों में कुल 16 विजेता और 16 उप-विजेता होंगे। इसके अतिरिक्त बालिका शिक्षा श्रेणी में प्रदेश स्तर पर एक विजेता का चयन किया जाएगा।

    20 सितंबर तक आवेदन का मौका
    जारी सूचना के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 21 अगस्त 2026 से शुरू हो चुकी है और आवेदन की अंतिम तिथि 20 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है।

    आवेदन एवं विस्तृत जानकारी के लिए सीखो सिखाओ फाउंडेशन की वेबसाइट का उल्लेख किया गया है। विभाग ने अधिकारियों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के शिक्षकों, विद्यालयों, ग्राम पंचायतों और BRC को इस पहल की जानकारी दें, ताकि अधिक से अधिक पात्र लोग इसमें भाग ले सकें।


    सीखो सिखाओ एवॉर्डस 2026 हेतु प्रोत्साहित किये जाने के संबंध में।



    अमान्य विद्यालयों और निजी कोचिंग पर सख्ती के लिए यूपी में चलेगा विशेष अभियान

    अमान्य विद्यालयों और निजी कोचिंग पर सख्ती के लिए यूपी में चलेगा विशेष अभियान

    मान्यता/अमान्य विद्यालयों पर कार्रवाई के लिए यूपी बोर्ड ने फिर जारी किए सख्त निर्देश

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश ने जनपदों में अनधिकृत/अमान्य विद्यालयों के संचालन तथा नियम विरुद्ध निजी कोचिंग की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान चलाकर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। परिषद ने 24 अगस्त 2026 को जारी स्मरण पत्र में जिला विद्यालय निरीक्षकों और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पूर्व में जारी निर्देशों के अनुपालन की स्थिति से अवगत कराने को कहा है।

    पत्र में शासनादेश दिनांक 09 जून 2025 के अनुपालन में गठित समिति के निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि अधीनस्थ क्षेत्रों में सघन निरीक्षण अभियान चलाकर अमान्य विद्यालयों को चिह्नित किया जाए तथा उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। कार्रवाई की सूचना निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने के निर्देश पहले भी दिए गए थे, लेकिन पत्र के अनुसार सूचना अद्यतन उपलब्ध नहीं कराई गई है।

    परिषद को अमान्य विद्यालयों के संचालन की सूचनाएं लगातार प्राप्त हो रही हैं। ऐसे में संबंधित अधिकारियों से पूर्व में भेजे गए 05 अप्रैल 2026 के पत्र में निर्धारित प्रारूप पर कार्रवाई की अद्यतन सूचना यथाशीघ्र उपलब्ध कराने को कहा गया है।