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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, February 12, 2026

    शिक्षा पर उत्तर प्रदेश का बड़ा दांव: बजट में बेसिक से प्राविधिक तक हजारों करोड़ की सौगात, देखें शिक्षा के हर स्तर पर कितना हुआ बजट आवंटन

    शिक्षा पर उत्तर प्रदेश का बड़ा दांव:  बजट में बेसिक से प्राविधिक तक हजारों करोड़ की सौगात, देखें शिक्षा के हर स्तर पर कितना हुआ बजट आवंटन


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026–27 के बजट में शिक्षा क्षेत्र को प्राथमिकता देते हुए बेसिक, माध्यमिक, उच्च और प्राविधिक शिक्षा के लिए व्यापक वित्तीय प्रावधान किए हैं। बजट में स्कूल शिक्षा से लेकर विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के विकास तक कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं, जिससे प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।



    बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये
    बेसिक शिक्षा के लिए 77,622 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म, स्कूल बैग, जूता-मोजा और स्टेशनरी उपलब्ध कराने हेतु 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

    प्रदेश के सभी 75 जनपदों में दो-दो मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। साथ ही प्रत्येक जनपद में एक विद्यालय को ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय’ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

    जहां कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं हैं, वहां आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना के लिए 580 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। शिक्षकों एवं कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना हेतु 358 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    सभी प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए 300 करोड़ रुपये तथा सहायता प्राप्त अशासकीय विद्यालयों के सुरक्षा ऑडिट में कमियां पाए जाने पर अनुरक्षण के लिए 300 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है।


    माध्यमिक शिक्षा के लिए 22,167 करोड़ रुपये
    माध्यमिक शिक्षा के लिए 22,167 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 15 प्रतिशत अधिक है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 520 करोड़ रुपये तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।
    राजकीय संस्कृत पाठशालाओं के छात्रों की छात्रवृत्ति हेतु 20 करोड़ रुपये, ड्रिम स्कूल क्लस्टर की स्थापना के लिए 150 करोड़ रुपये और अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा योजना हेतु 89 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। गोरखपुर में पूर्वांचल के पहले एवं प्रदेश के दूसरे सैनिक स्कूल की स्थापना और संचालन भी आरंभ किया गया है।


    उच्च शिक्षा को 6,591 करोड़ रुपये
    उच्च शिक्षा के लिए 6,591 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो वर्ष 2025–26 की तुलना में 7 प्रतिशत अधिक है। मेधावी छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना हेतु 400 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना के लिए 40 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

    मिर्जापुर, मुरादाबाद और बलरामपुर में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए 50-50 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। शाहजहांपुर और भदोही में नए विश्वविद्यालयों की स्थापना हेतु 21-21 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं।

    उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण नीति के लिए 14 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान भी किया गया है।


    प्राविधिक शिक्षा में 72 प्रतिशत वृद्धि
    प्राविधिक शिक्षा के क्षेत्र में 72 प्रतिशत की वृद्धि के साथ लगभग 2,365 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश के 195 डिप्लोमा स्तरीय संस्थानों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि 23 नए राजकीय पॉलिटेक्निक निर्माणाधीन या प्रक्रियाधीन हैं।

    राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों में नवीन तकनीक से सुसज्जित उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना के लिए 714 करोड़ रुपये तथा उन्नयन और अवस्थापना विकास हेतु 254 करोड़ रुपये प्रस्तावित हैं। 251 स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं और 143 नए स्मार्ट क्लासरूम की स्थापना प्रक्रिया में है।


    राज्य सरकार ने इस बजट के माध्यम से प्राथमिक से लेकर तकनीकी और उच्च शिक्षा तक एक समग्र शैक्षिक ढांचा विकसित करने की दिशा में ठोस कदम उठाने का संकेत दिया है। बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, डिजिटल संसाधनों के विस्तार, छात्र कल्याण योजनाओं और संस्थागत विकास पर विशेष जोर इस बजट की प्रमुख विशेषता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन घोषणाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया, तो उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन संभव है।

    वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों के लिए बनेगी सेवा नियमावली, उच्चस्तरीय समिति गठित, देखें आदेश

    वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों के लिए बनेगी सेवा नियमावली, उच्चस्तरीय समिति गठित, देखें आदेश 


    लखनऊः प्रदेश के 22 हजार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की अरसे लंबित सेवा नियमावली अब तय होने वाली है। शासन ने सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली का मसौदा तैयार करेगी। 


    समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपनी होगी। इसके साथ ही यह समिति वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता से संबंधित नियमावली में भी संशोधन के लिए प्रस्ताव देगी। इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया।

    सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति में माध्यमिक शिक्षा के विशेष सचिव, शिक्षा निदेशक, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (लखनऊ मंडल), शिक्षा निदेशक द्वारा नामित वित्तविहीन संस्था का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट मेसर्स डेलाइट का प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। 

    माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। यह समिति वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, कार्यकाल, दायित्व और अन्य आवश्यक पहलुओं को लेकर विस्तृत नियमावली पर विचार कर रिपोर्ट देगी। इसी के साथ माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा वित्तविहीन विद्यालयों को मान्यता दिए जाने से जुड़े मानकों और शर्तों का भी पुनरीक्षण करेगी।

    यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के स्ट्रांग रूम में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा/नकल विहीन परीक्षा की शुचिता, पवित्रता एवं विश्वसनीयता हेतु सतर्कता के सम्बन्ध में

    यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के स्ट्रांग रूम में प्रश्नपत्रों की सुरक्षा/नकल विहीन परीक्षा की शुचिता, पवित्रता एवं विश्वसनीयता हेतु सतर्कता के सम्बन्ध में


    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षाओं के दृष्टिगत निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के संबंध में शासनादेश जारी

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा आयोजित वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षाओं के दृष्टिगत निर्धारित परीक्षा केन्द्रों पर पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के संबंध में शासनादेश जारी 


    यूपी बोर्ड परीक्षा: कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र जारी, कल तक वितरण के निर्देश, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पक्षाओं के दौरान कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड से होगी पहचान

    यूपी बोर्ड परीक्षा: कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र जारी, कल तक वितरण के निर्देश, हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट पक्षाओं के दौरान कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड से होगी पहचान


    प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए कक्ष निरीक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने निर्देश दिए हैं कि ये 13 फरवरी तक कक्ष निरीक्षकों के लिए निर्गत कर दिए जाएं। संदिग्ध स्थिति मिलने पर क्यूआर कोड के माध्यम से परिचय पत्रों की मोबाइल एप से जांच की जा सकेगी।

    सचिव ने कहा है कि सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य पोर्टल से परिचय पत्र डाउनलोड कर दो प्रतियों में प्रिंट करेंगे। परिचय पत्र पर अंकित शिक्षक के विवरण एवं फोटो को विद्यालयी अभिलेखों से मिलान कर प्रधानाचार्य स्वयं तथा संबंधित शिक्षक हस्ताक्षर सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद परीक्षा केंद्र का नाम अंकित कर परिचय डीआइओएस को प्रतिहस्ताक्षर के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। डीआइओएस प्रतिहस्ताक्षरित एक प्रति प्रधानाचार्य को लौटाएंगे तथा दूसरी प्रति कार्यालय अभिलेख में रखी जाएगी। जिन शिक्षकों के क्यूआर कोड युक्त परिचय पत्र पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं, उनके लिए सादे परिचय पत्र जारी करने की व्यवस्था की गई है। साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग से लगाए गए कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से निर्गत किए जाएंगे।

    केंद्र के बाहर अभिभावकों से लिए रखें पेयजल व्यवस्था

    परीक्षा केंद्र व उसके आसपास साप. सफाई, विशेष रूप से शौचालय साफ-सुफरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा केंद्र में शुद्ध पेयजल व्यवस्था तथा केंद्र के बाहर यदि परीक्षार्थ के अभिभावक उपस्थित हों तो उनके लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

    पर्याप्त कक्ष निरीक्षकों की उपलब्धता के निर्देश

    18 फरवरी से 12 मार्च तक चलने वाली यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए पर्याप्त कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही मुख्य चिकित्साधिकारी से समन्वय बनाकर केंद्र पर प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था परीक्षार्थियों एवं कार्मिकों के लिए सुनिश्चित की जाए।

    Wednesday, February 11, 2026

    उ०प्र० माध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 33 के अन्तर्गत विनियमितीकरण के सम्बन्ध में।

    उ०प्र० माध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 33 के अन्तर्गत विनियमितीकरण के सम्बन्ध में


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत शिक्षक विनियमितीकरण को लेकर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) डॉ. महेंद्र देव ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि शिक्षकों के विनियमितीकरण के मामलों में केवल वेतन भुगतान या अस्थायी आधार को ही नहीं, बल्कि उनकी सेवा अवधि को भी निर्णायक आधार माना जाएगा। निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि नियुक्ति के समय लागू नियमों और न्यायालय के आदेशों के अनुरूप ही निर्णय लिया जाए तथा किसी भी शिक्षक के साथ अन्याय न हो।


    एडेड स्कूलों में TGT के 24,515 और PGT के 6,216 पद रिक्त, पठन पाठन में हो रही परेशानी

    एडेड स्कूलों में टीजीटी के 24,515 और पीजीटी के 6,216 पद रिक्त,  पठन पाठन में हो रही परेशानी

    प्रयागराज। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी सामने आई है। टीजीटी के 24,515 और पीजीटी के 6,216 पद रिक्त हैं। यह जानकारी सरधना विधानसभा से विधायक अतुल प्रधान द्वारा पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने दी है। शिक्षा जगत की नजर भर्ती प्रक्रिया पर है। लंबे समय से शिक्षकों की भर्ती नहीं होने के कारण विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।


    विधायक ने माध्यमिक शिक्षा मंत्री से पूछा था कि एडेड इंटर कॉलेजों में कितने पद खाली हैं और क्या सरकार इन्हें भरने के लिए विज्ञापन जारी करेगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव के बताया कि पीजीटी के 50 प्रतिशत पद सीधी भर्ती से तथा 50 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते हैं। जिन संस्थाओं में अनुदानित संबद्ध प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं, वहां टीजीटी के 75 प्रतिशत पद सीधी भर्ती और 25 प्रतिशत पद पदोन्नति से भरे जाते हैं। अन्य संस्थाओं में टीजीटी के पद पूरी तरह सीधी भर्ती से भरे जाते हैं।

    निदेशालय के मुताबिक टीजीटी-पीजीटी भर्ती का विज्ञापन वर्ष 2022 में जारी किया गया था। भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया शिक्षा सेवा चयन आयोग में चल रही है। सचिव सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि रिक्त पदों के अधियाचन भेजने के लिए जिलों से त्रुटिरहित सूचनाएं मांगी गई हैं। आयोग द्वारा पोर्टल विकसित किए जाने के बाद यूजर आईडी और पासवर्ड उपलब्ध कराकर सूचनाओं का परीक्षण करते हुए अधियाचन भेजा जाएगा।

    नाबालिग की आयु निर्धारण में शैक्षणिक दस्तावेज ही प्राथमिक –हाईकोर्ट

    नाबालिग की आयु निर्धारण में शैक्षणिक दस्तावेज ही प्राथमिक –हाईकोर्ट

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि नाबालिग की आयु निर्धारण में शैक्षणिक दस्तावेज़ सबसे अहम हैं। यदि दस्तावेजों संदिग्धता है या स्पष्टता का अभाव है तब अस्थि परीक्षण के द्वारा आयु निर्धारण किया जा सकता है। मगर इस प्रकार किए गए निर्धारण में दो वर्ष ऊपर और नीचे की आयु गणना की संभावना होती है जिसका लाभ नाबालिग के पक्ष में जाएगा। कोर्ट ने नाबालिगता से जुड़े मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड, प्रयागराज द्वारा पारित आदेश को रद्द करते हुए मामले पर कानून के अनुसार पुनः विचार करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति जय प्रकाश तिवारी ने नाबालिग की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।


    मामला एक नाबालिग बनाम राज्य सरकार एवं अन्य से संबंधित है, जिसमें याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता नाज़िया नफीस ने पैरवी की, जबकि राज्य की ओर से अपर सरकारी अधिवक्ता राजीव कुमार एवं विपक्षी पक्ष की ओर से कृष्ण कुमार मिश्रा उपस्थित रहे।

    मामला प्रयागराज के फाफामऊ थाने का है। प्राथमिकी 16 फरवरी 2023 को दर्ज की गई थी, जिसमें दो नामजद और एक अज्ञात आरोपी था। याचिकाकर्ता कानामएफआईआर में नहीं था, बल्कि जांच के दौरान सह-आरोपी के कथन के आधार पर उसका नाम सामने आया। इसके बाद याचिकाकर्ता की ओर से स्वयं को नाबालिग घोषित किए जानेके लिए आवेदन प्रस्तुत किया गया, जिसमें स्कूल प्रमाणपत्र के आधार पर जन्मतिथि एक जनवरी 2006 बताई गई। 

    हालांकि, जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने स्कूल प्रमाणपत्र को संदेहास्पद मानते हुए अस्थि-परीक्षण कराने का आदेश दिया। चिकित्सा परीक्षण में याचिकाकर्ता की आयु 18 से 20 वर्ष के बीच बताई गई और मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने उसकी आयु 19 वर्ष आंकी। इसके आधार पर जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 28 जून 2023 को याचिकाकर्ता को घटना की तिथि पर बालिग मानते हुए नाबालिग घोषित करने का आवेदन खारिज कर दिया। इस आदेश को सत्र न्यायालय ने भी बरकरार रखा।

    हाईकोर्ट ने कहा कि जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम, 2015 की धारा 94(2) के अनुसार आयु निर्धारण में सर्वप्रथम स्कूल प्रमाणपत्र या मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। केवल इन दस्तावेजों के अभाव में ही चिकित्सा परीक्षण कराया जा सकता है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्थि-परीक्षण आयु निर्धारण का सटीक माध्यम नहीं है, बल्कि इसमें दो वर्ष तक की त्रुटि संभव है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा गया कि सीमा रेखा मामलों में संदेह का लाभ अभियुक्त को दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का आदेश करते हुए पुनःबोर्ड को भेज दिया है।

    राजकीय व एडेड माध्यमिक के 15 और वित्तविहीन विद्यालय के 5 शिक्षकों को मिलेगा राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार, देखें जारी सूची

    राजकीय व एडेड माध्यमिक के 15 और वित्तविहीन विद्यालय के 5 शिक्षकों को मिलेगा राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार, देखें जारी सूची 


    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने हर साल शिक्षक दिवस पर दिए जाने वाले शिक्षक पुरस्कारों की घोषणा कर दी है। 2025 के लिए प्रदेश के राजकीय व एडेड माध्यमिक विद्यालय के 15 शिक्षकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चुना गया है। शासन ने मंगलवार को इसके लिए चयनित शिक्षकों की सूची जारी कर दी।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र की ओर से जारी सूची के मुताबिक पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षकों में गाजियाबाद की रेनू तोमर, वाराणसी के डॉ. रमेश प्रताप सिंह, रायबरेली के गिरिजेश कुमार मल्ल, मुरादाबाद के डॉ. अनुज कुमार अग्रवाल, गोरखपुर के महेश्वर प्रसाद त्रिपाठी, संत कबीर नगर के अरुण कुमार ओझा व डॉ. अभिषेक कुमार सिंह शामिल हैं।

    इनके अलावा रामपुर के डॉ. गौरव वाष्र्णेय, हापुड़ के अमित शर्मा, भदोही के डॉ. हरिश्चंद्र यादव, फिरोजाबाद के अश्वनी कुमार जैन, बरेली के राजपाल व डॉ संजय कुमार सिंह, आगरा के गुणधर लाल जैन न तथा वाराणसी के प्रकाश नारायण सिंह शामिल हैं। उन्होंने कहा, चयनित शिक्षकों को शिक्षकों को नियमानुसार सेवा विस्तार व सुविधाएं दी जाएंगी।



    Tuesday, February 10, 2026

    बोर्ड परीक्षाओं से पहले सीएम योगी ने बच्चों को लिखा पत्र, मोबाइल से दूर रहकर अनुशासन व आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने का संदेश

    बोर्ड परीक्षाओं से पहले सीएम योगी ने बच्चों को लिखा पत्र, मोबाइल से दूर रहकर अनुशासन व आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देने का संदेश


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बोर्ड परीक्षाओं से पूर्व प्रदेश के विद्यार्थियों के नाम एक प्रेरणादायी पत्र जारी कर उन्हें सफलता, अनुशासन और आत्मविश्वास का संदेश दिया है। ‘योगी की पाती’ के माध्यम से मुख्यमंत्री ने बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य को सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परीक्षा को जीवन का एक चरण मात्र मानने की सलाह दी है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में छात्रों को चाइनीज मांझे जैसे खतरनाक पदार्थों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी और इसके उपयोग को कानूनन अपराध बताते हुए समाज और प्रशासन को सतर्क रहने का आह्वान किया। उन्होंने बच्चों से अपील की कि वे स्वयं भी इसका प्रयोग न करें और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करें।

    पत्र में मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग पर भी चिंता जताई गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल बच्चों का बहुमूल्य समय नष्ट करता है, आंखों पर बुरा प्रभाव डालता है और पढ़ाई में बाधा बनता है। उन्होंने विद्यार्थियों को मोबाइल से दूरी बनाकर खेलकूद, रचनात्मक गतिविधियों और परिवार के साथ समय बिताने की सलाह दी।

    परीक्षा को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने छात्रों से घबराहट न करने, प्रश्नपत्र को ध्यान से पढ़ने और बिना दबाव के उत्तर लिखने का आग्रह किया। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि अधिकार केवल कर्म पर है, फल की चिंता किए बिना पूरे मनोयोग से प्रयास करना ही सफलता की कुंजी है।

    मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मेहनत, सीखने की ललक और अनुशासन ही सबसे बड़ी पूंजी है। अंत में उन्होंने प्रदेश के सभी छात्रों को आगामी बोर्ड परीक्षाओं के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।






    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश

    आधा घंटा तक विलंब से पहुंचे परीक्षार्थी को अनुमति दे सकेंगे केंद्र व्यवस्थापक, सचिव ने केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए जारी किए निर्देश 

    प्रयागराजः यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि किसी प्रश्नपत्र के लिए अधिकतम आधा घंटा तक देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को केंद्र व्यवस्थापक परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकेंगे। इससे ज्यादा देर वालों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा उत्तर पुस्तिका पर मुद्रित क्रमांक को उपस्थिति पत्रक पर परीक्षार्थियों द्वारा अंकित किया जाना अनिवार्य है। इसे कक्ष निरीक्षक सुनिश्चित कराएंगे।

    परीक्षा 18 फरवरी से आरंभ होकर 12 मार्च तक चलेगी। प्रश्न पत्रों की परीक्षा अवधि 3.15 घंटे निर्धारित है, जिसमें से शुरू के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ्ने के लिए है। दिव्यांग तथा दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए निर्धारित अवधि के अतिरिक्त 20 मिनट प्रति घंटे के हिसाब से अतिरिक्त देय होगा। इसके अलावा प्रत्येक परीक्षा केंद्रों में कम से कम 50 प्रतिशत स्टाफ बाह्य विद्यालयों से नियुक्त किए जाएंगे।

     स्ववित्तपोषित विद्यालयों में यथासंभव राजकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 50 प्रतिशत स्टाफ नियुक्त किए जाएंगे। रिजर्व सेट से संबंधित अलमारी लाक करने और आकस्मिक स्थिति में उसे खोलने की कार्यवाही माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव से निर्देश प्राप्त करने के बाद ही जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कराई जाएगी, उस समय केंद्र व्यवस्थापक, बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट एवं संबंधित थानाध्यक्ष अथवा नामित इंस्पेक्टर की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। इसके अलावा कक्ष निरीक्षकों का यह व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होगा कि हर परीक्षार्थी से उत्तरपुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर उनका अनुक्रमांक एवं उत्तरपुस्तिका क्रमांक अनिवार्य रूप से लिखवाएं।

    प्रत्येक कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक अनिवार्य

    हर परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। कक्ष निरीक्षकों के पास उनका परिचय पत्र, आधार कार्ड रहना केंद्र व्यवस्थापक सुनिश्चित कराएंगे। सचल दल में महिला निरीक्षणकर्ता का होना अनिवार्य है। बालिका परीक्षार्थी वाले केंद्र पर सचल/निरीक्षण दल के पुरुष सदस्य तलाशी नहीं ले सकेंगे। सभी कक्ष निरीक्षकों/कर्मचारियों के लिए फोटो युक्त परिचय पत्र अनिवार्य है। जीआइसी व एडेड विद्यालयों के शिक्षकों को न्यूनतम 20 पाली में कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रहेगा।


    यूपी बोर्ड: 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य, सरकारी शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटर परीक्षा में करनी होगी ड्यूटी

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 18 फरवरी से शुरू हो रही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के सभी शिक्षकों को कम से कम 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रूप से करना होगा। परीक्षा केंद्र बने वित्तविहीन विद्यालयों में राजकीय और एडेड कॉलेज के 50 प्रतिशत स्टाफ की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

    यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने तथा परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिनकी केंद्र व्यवस्थापक तथा कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगाई गई है उनके स्तर से लापरवाही या जानबूझकर अनुपस्थित होने पर अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाए। प्रत्येक परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे।

    स्ट्रांग रूम में रखनी होगी लोहे की चार आलमारी : परीक्षा केंद्र पर स्ट्रांग रूम में पालीवार प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव, अवशेष प्रश्नपत्रों तथा बंडल स्लिप को रखने के लिए कुल चार लोहे की डबल लॉकयुक्त आलमारी की व्यवस्था की जाएगी। दोनों पालियों के मुख्य प्रश्नपत्र सेट के सुरक्षित रखरखाव के लिए दो आलमारी रहेगी। तीसरी आलमारी में बचे हुए प्रश्नपत्र रखे जाएंगे जबकि चौथी आलमारी में रिजर्व सेट के प्रश्नपत्रों के पैकेट रखने होंगे।



    परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व पोर्टल पर जारी किए जाएंगे निरीक्षकों के परिचय पत्र, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी किए निर्देश

    सचिव भगवती सिंह की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा गया पत्र

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु, पारदर्शी और नकलविहीन संचालन के लिए कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    सचिव ने निर्देश दिया है कि । कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाते ए समय उनके संपूर्ण विवरण की न भलीभांति जांच की जाए। किसी विद्यालय से संबंधित परीक्षा केंद्र रे पर कितने कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता होगी, इसका पूरा 5 विवरण डीआईओएस स्तर से ही निर्गत किया जाएगा। कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर परीक्षा प्रारंभ होने से एक सप्ताह पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा डाउनलोड किए जाएंगे।

    परिचय पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कक्ष निरीक्षक को आवंटित परीक्षा केंद्र का विवरण अंकित कर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को हस्तगत कराया जाएगा। कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापकों को परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से तीन दिवस पूर्व 15 फरवरी को अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर केंद्र व्यवस्थापक को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

    डीआईओएस द्वारा जनपद में बनाए गए सभी परीक्षा केंद्रों के लिए केंद्रवार कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार कर अपने कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिनमें से एक कक्ष निरीक्षक का बाह्य विद्यालय से होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पांच कक्षों पर एक मोचक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापक माध्यमिक शिक्षा परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार न किए गए हों। परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिन परीक्षा केंद्रों पर बालिका परीक्षार्थी परीक्षा दे रही हों, वहां महिला कक्ष निरीक्षकों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाएगी।

    परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में 40 परीक्षार्थियों पर दो तथा 41 से 60 परीक्षार्थियों पर तीन कक्ष निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वकेंद्र पर छात्राओं के परीक्षा कक्षों में उसी विद्यालय के अध्यापकों की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।




    परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला निरीक्षक की लगेगी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा की 30 दिन तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी के 120 केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए परिषद के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला कक्ष की ड्यूटी लगाना जरूरी है। तलाशी की भी उन्हीं को अनुमति होगी।

    परिषद की ओर से जारी आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं। परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्ष निरीक्षकों को भी मोबाइल फोन, कैलकुलेटर व अन्य इलेक्ट्रिॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष व अन्य जगहों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरे में आवाज की भी रिकॉर्डिंग होनी जरूरी है। साथ ही इसका डाटा परीक्षा खत्म होने के 30 दिनों तक रखना अनिवार्य है।

    परिषद के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अनुक्रमांक अनिवार्य रूप से लिखेंगे। कक्ष बोर्ड पर किसी स्तर से कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी।

    परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उस पर लगने वाली फोटो का सही तरीके से मिलान जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होगी। ऐसा पाए जाने पर विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।




    यूपी बोर्ड की परीक्षा में जूते मोजे उतरवाने पर प्रतिबंध, रोज कैमरों और वायस रिकॉर्डर की होगी जांच, एक माह तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    लखनऊ । राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों के जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा लेने पर रोक लगा दी है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ही परीक्षार्थियों की पूरी जांच होगी। केंद्रों पर लगे कैमरों और वायस रिकॉर्ड की जांच होगी। खराब होने पर सूचना तुरंत डीआईओएस के साथ कंट्रोल रूम को देनी होगी और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है। इसमें कहा है कि किसी भी छात्रा की तलाशी पुरुष शिक्षक नहीं करेंगे। केंद्र पर जिस विषय का पेपर है, उसके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। परीक्षार्थियों से अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे। 

    बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के हर पेज पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना होगा। केंद्र पर फोटोग्राफी और प्रेस, मीडिया को ब्रीफिंग नहीं होगी। सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर के बिना किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं होगी। कैमरे, वायस रिकार्डर के डीवीआर की रिकार्डिंग 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट रोज सेक्टर, स्टैटिक मजिस्ट्रेट डीएम, डीआईओएस को देंगे। केंद्रों पर प्रवेश पत्र के साथ कक्ष निरीक्षकों, ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के परिचय पत्र की भी जांच होगी। निरीक्षकों के मोबाइल और गैजेट बाहर जमा कराए जाएंगे।



    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश






    यूपी बोर्ड के अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ करेगी निगरानी, नकल में संलिप्त बाहरी व्यक्तियों पर अंकुश के लिए एलआइयू रहेगी सक्रिय

    थानाध्यक्षों को निर्देश, केंद्र व्यवस्थापक व निरीक्षक माने जाएंगे लोकसेवक


     प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा नकलविहीन और शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, डीएम, पुलिस आयुक्त/एसएससी व एसपी को शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि नकल में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए एलआइयू व अन्य स्त्रोतों से सूचना एकत्र कर परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर आवश्यकतानुसार एसटीएफ को तैनात किया जाए।

    परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों के बाहर पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी)/ जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व व्यवस्थापन कार्य करने वाले अध्यापकों व केंद्राध्यक्षों को लोक सेवक माना जाएगा। ऐसे में इन पर हमला आदि दुर्घटनाओं के मामले में संज्ञेय अपराध के अंतर्गत एफआइआर दर्ज की जाएगी।

     परीक्षा केंद्र से सामूहिक नकल अथवा परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिलने/संदेह होने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आजीवन कारावास तक तथा एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। जनपद को जोन सेक्टर में बांटकर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। यह दायित्व एसडीएम/नगर मजिस्ट्रेट/कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया जाएगा। 

    निरीक्षण व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि प्रत्येक सेक्टर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 10 से अधिक न हो। यथासंभव प्रधानाचार्य पद के समानांतर या उच्च पदधारक कार्मिक अधिकारी को ही स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नियुक्त किए जाएंगे। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर कराई जाएगी।



    बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव हेतु परीक्षा केन्द्रों पर स्ट्रांग रूम की स्थापना व उसमें रखी डबल लॉक आलमारी की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों के वितरण के सम्बन्ध में।


    एडेड विद्यालयों के 62 हजार माध्यमिक शिक्षकों की बहाल होगी सेवा सुरक्षा, शासन के विशेष सचिव ने आयोग के सचिव से मांगा संशोधन का प्रस्ताव

    प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का मामला

    एडेड विद्यालयों के 62 हजार माध्यमिक शिक्षकों की बहाल होगी सेवा सुरक्षा, शासन के विशेष सचिव ने आयोग के सचिव से मांगा संशोधन का प्रस्ताव


    प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तकरीबन 62 हजार प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल होगी। विशेष सचिव उच्च शिक्षा गिरिजेश कुमार त्यागी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को छह फरवरी को पत्र लिखकर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा-18 व 21 का समावेश चयन आयोग अधिनियम 2023 में करने के संबंध में प्रस्ताव मांगा है।


    एडेड कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का चयन पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से होता था, लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते हैं। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेने का प्रावधान था। चयन बोर्ड का विलय कर शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है। 21 अगस्त 2023 को विधानसभा से पारित इस आयोग के विधेयक में इस प्रावधान को शामिल नहीं किया गया। यह व्यवस्था नहीं होने से पिछले ढाई साल में प्रदेशभर में प्रबंधक के मनमाने तरीके से प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने की शिकायतें बढ़ गईं।

    माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी की अगुवाई में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और महामंत्री नरेन्द्र कुमार वर्मा ने 20 जनवरी को अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा से लखनऊ में मुलाकात कर इस प्रावधान को जोड़ने की मांग की थी। 28 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री/नेता सदन, विधान परिषद केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए थे कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में सेवा-सुरक्षा संबंधी इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 18-21 जोड़ने पर विचार किया जाए। इस पर विशेष सचिव नेचयन आयोग अधिनियम, 2023 में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा-18 व 21 का समावेश करने के लिए विस्तृत एवं सुविचारित आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।




    माध्यमिक शिक्षकों की सेवा और सुरक्षा की ओर कदम, अधिनियम में बदलाव की तैयारी

    सेवा-सुरक्षा से संबंधित धाराएं जोड़ने पर मंथन, विशेष सचिव उच्च शिक्षा ने चयन आयोग से मांगी रिपोर्ट

    लखनऊः प्रदेश के सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा से जुड़ी मांग पर अब सरकार ने गंभीर पहल शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में अहम संशोधन पर मंथन चल रहा है, जिससे शिक्षकों की नौकरी को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सके। सरकार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 18 और 21 को नए अधिनियम में शामिल करने और धारा 11 (6) को हटाने पर विचार कर रही है। इसी क्रम में विशेष सचिव, उच्च शिक्षा विभाग ने चयन आयोग से पूरे मामले पर विस्तृत, तथ्यात्मक और नियमानुसार रिपोर्ट मांगी है।

    शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग गठन करते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भंग कर दिया गया। इसमें माध्यमिक शिक्षकों के सेवा सुरक्षा और कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतनमान से संबंधित अधिनियम की धारा 18 व 21 को शामिल नहीं किया गया। इसकी वजह से माध्यमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर समस्या आ रही थी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने 20 जनवरी को इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को पत्र लिखकर इसकी मांग रखी थी। 

    इसके बाद 28 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग के साथ हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए कि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 18 से 21 को नए चयन आयोग अधिनियम में जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इसी निर्देश के अनुपालन में विशेष सचिव उच्च शिक्षा गिरिजेश कुमार त्यागी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा सेवा चयन आयोग के सचिव को पत्र लिखा है कि शिक्षक संघ की मांगों और उप मुख्यमंत्री के आदेशों के आलोक में पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे आवश्यक निर्णय लिया जा सके।

     प्रस्तावित बदलावों से न सिर्फ सेवा-सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि कार्यवाहक संस्था प्रधानों को पद के अनुरूप वेतन मिलने का रास्ता भी साफ होगा। नियमों में संशोधन होने से मनमाने निलंबन या सेवा समाप्ति पर प्रभावी कानूनी रोक लगेगी। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो इससे प्रदेश के हजारों माध्यमिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा।

    इस्तीफा कर्मचारी का हक, कूलिंग पीरियड सुरक्षा कवच, हाईकोर्ट ने शिक्षक की वेतन सहित बहाली का दिया आदेश

    इस्तीफा कर्मचारी का हक, कूलिंग पीरियड सुरक्षा कवच, हाईकोर्ट ने शिक्षक की वेतन सहित बहाली का दिया आदेश


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आननफानन इस्तीफा देना कदाचार नहीं है। इसे कर्मचारी के विरुद्ध हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। स्वीकार होने के पहले कर्मचारी इस्तीफा वापस ले सकता है। यही कारण है कि सेवा नियमावली में कूलिंग पीरियड का प्रावधान है, ताकि कर्मचारी अपना मन बदल सके। यह महज औपचारिकता नहीं, कर्मचारी का सुरक्षा कवच है।


    इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने वाराणसी के जामिया अरबिया मतलौल उलूम प्रबंध समिति की स्पेशल अपील खारिज कर दी। साथ ही शिक्षक को 15 दिन में बकाये के ब्याज सहित भुगतान कर सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।

    मदरसा शिक्षक मोहम्मद उस्मान गनी ने पारिवारिक कारणों से इस्तीफा दिया था पर बाद में आरोप लगाया कि उनसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाकर जबरन इस्तीफा लिया गया था। इस दलील पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली थी।

    इस आदेश के खिलाफ प्रबंधन ने स्पेशल अपील दाखिल की। दलील दी कि शिक्षक का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया था। ऐसे में अब उनकी बहाली अनुचित होगी। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि यह प्रबंध समिति का अड़ियल रवैया है। एकल पीठ ने मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कहा था, लेकिन प्रबंधन ने बहाली के बजाय कर्मचारी को कानूनी लड़ाई में उलझाए रखने का रास्ता चुना। यह कूलिंग पीरियड के प्रावधान का अपमान है।


    जब तथ्य और हालत स्पष्ट हो तो मामले की बार-बार प्रबंधन के पास पुनर्विचार के लिए भेजना न्याय की प्रकिया में देरी और कर्मचारी के उत्पीड़न का कारण बनता है। -इलाहाबाद हाईकोर्ट


    क्या है कूलिंग पीरियड का नियम

    यूपी गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली 2016 के विनियम 15 (2) के मुताबिक इस्तीफे के बाद तीन महीने का समय और सुनवाई का अवसर इसलिए दिया जाता है, ताकि कर्मचारी ठंडे दिमाग से अपने इस्तीफे पर विचार कर सके। यदि इस दौरान कर्मचारी कहता है कि उसने दबाव में इस्तीफा दिया था तो उसका कानूनी मूल्य शून्य हो जाता है। प्रबंधन जबरन इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकता।

    Monday, February 9, 2026

    परीक्षा पे चर्चा-2026 कार्यक्रम (PPC-2026) के 9वें संस्करण के अन्तर्गत द्वितीय ऐपीसोड 09 फरवरी को प्रसारित किए जाने के सम्बन्ध में

    परीक्षा पे चर्चा-2026 कार्यक्रम (PPC-2026) के 9वें संस्करण के अन्तर्गत द्वितीय ऐपीसोड 09 फरवरी को प्रसारित किए जाने के सम्बन्ध में 

    कृपया संयुक्त सचिव, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अ०शा० पत्र संख्या:2-6/2025-PPC दिनांक 06 फरवरी, 2026 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जो "परीक्षा पे चर्चा-2026" कार्यक्रम (PPC-2026) के 9वें संस्करण के अन्तर्गत द्वितीय ऐपीसोड दिनांक 09 फरवरी, 2026 को प्रातः 10:00 बजे से विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से प्रसारित किये जाने के सम्बन्ध में है। 

    उक्त सम्बन्ध में अपेक्षा की गयी है कि दिनांक 09 फरवरी, 2026 को प्रातः 10:00 बजे से द्वितीय ऐपीसोड का प्रसारण विभिन्न सोशल मीडिया (यू-ट्यूब, फेसबुक, लाइव, इत्यादि), दूरदर्शन, पी०एम० ई-विद्या, टी०वी० (टेलीविजन), रेडियो चैनलों और नेट-फ्लिक्स, जियो हॉटस्टार, अमेजन प्राइम वीडियो आदि के माध्यम से सभी विद्यालयों, प्रशासनिक परिसरों, अधीनस्थ कार्यालयों एवं अन्य प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर किया जाना है। उक्त इवेन्ट्स लिंक निम्नवत् हैः-




    परीक्षा पे चर्चा आज, पीएम मोदी बच्चों से करेंगे संवाद, होगा सजीव प्रसारण

    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शुक्रवार को होने वाले परीक्षा पे चर्चा के विशेष एपिसोड में वह परीक्षाओं से जुड़े विषयों, तनावमुक्त रहने और सीखने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर बात करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे प्रसारित होगा। इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा के लिए 4.5 करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। 

    प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहाि इस वर्ष का परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम कई रोचक विषयों को शामिल करेगा, जिनमें खास तौर पर परीक्षा के दौरान तनाव से दूर रहने और आत्मविश्वास बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंच उन्हें देशभर के होनहार विद्यार्थियों से संवाद का अवसर देता है, जिसे वह हमेशा पसंद करते हैं।

    परीक्षा पे चर्चा का यह एपिसोड टेलीविजन के साथ-साथ सोनीलिव, प्राइम वीडियो और जी 5 जैसे ओटीटी मंचों पर भी उपलब्ध रहेगा। इस साल परीक्षा पे चर्चा के तहत प्रधानमंत्री ने गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और नई दिल्ली स्थित 7 लोक कल्याण मार्ग पर विद्यार्थियों से संवाद किया। इन बैठकों में उन्होंने परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानने की बात कही और संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक सुझाव दिए। 



    परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम अन्तर्गत मा० प्रधानमंत्री जी की विद्यार्थियों के साथ चर्चा का 06 फरवरी को प्रातः 10.00 बजे होगा सजीव प्रसारण 





    Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी 6 फरवरी को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से करेंगे परीक्षा पे चर्चा, सुबह 10 बजे होगा प्रसारण, जानिए! कहां देखें लाइव प्रसारण?

    Pariksha Pe Charcha 2026 Date: परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण 6 फरवरी सुबह 10 बजे आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करेंगे। इस बार कार्यक्रम नए अंदाज में देशभर के छात्रों से जुड़ते हुए आयोजित किया जा रहा है और इसे टीवी व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लाइव देखा जा सकेगा।
     

    Pariksha Pe Charcha 2026: विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक बार फिर आयोजित होने जा रहा है।


    इस साल इसका 9वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसकी तारीख आधिकारिक तौर पर घोषित कर दी गई है। प्रधानमंत्री 6 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद करेंगे।
    इस बार कार्यक्रम का बदला हुआ स्वरूप पिछले वर्षों में यह कार्यक्रम मुख्य रूप से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होता था, लेकिन अब इसके आयोजन के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। 

    नई पहल के तहत प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग क्षेत्रों के छात्रों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर और गुवाहाटी के विद्यार्थियों से बातचीत की।  वहीं कुछ चयनित छात्रों को दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर उनसे मिलने और अपने सवाल साझा करने का अवसर भी मिला।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए इस कार्यक्रम को लेकर अपनी उत्सुकता व्यक्त की और कहा कि परीक्षा के मौसम में ‘परीक्षा पे चर्चा’ की वापसी छात्रों के लिए नई ऊर्जा लेकर आती है। उन्होंने छात्रों से तनावमुक्त होकर परीक्षाओं का सामना करने की अपील भी की।


    रजिस्ट्रेशन में बना नया रिकॉर्ड
    इस वर्ष कार्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। अब तक 4.5 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने इसमें भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो पिछले साल बने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी अधिक बताया जा रहा है। 

    आंकड़ों के मुताबिक, 4.19 करोड़ से ज्यादा छात्र, करीब 24.84 लाख शिक्षक और लगभग 6.15 लाख अभिभावक इस पहल से जुड़ चुके हैं। यह बड़ी भागीदारी दर्शाती है कि परीक्षा के दबाव को कम करने की दिशा में यह कार्यक्रम कितना लोकप्रिय हो चुका है।


    कहां देखें लाइव प्रसारण?
    6 फरवरी को होने वाले इस खास कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट दूरदर्शन के DD National, DD News और DD India चैनलों के साथ-साथ ऑल इंडिया रेडियो पर किया जाएगा। 

    इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव और MyGov.in पोर्टल पर भी छात्र इसे ऑनलाइन देख सकते हैं। कई निजी टीवी चैनल भी इसका प्रसारण करेंगे, ताकि देशभर के विद्यार्थी प्रधानमंत्री के सुझावों से जुड़ सकें।


    'एग्जाम वॉरियर्स' अभियान का हिस्सा
    परीक्षा पे चर्चा केंद्र सरकार की एग्जाम वॉरियर्स पहल से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाली चिंता और दबाव से बाहर निकालना है। फरवरी के मध्य से सीबीएसई सहित विभिन्न बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और अप्रैल में जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। ऐसे समय में यह संवाद छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

    इस कार्यक्रम में छठी कक्षा से ऊपर के छात्र, शिक्षक और अभिभावक हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र और भविष्य के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर भी मिलता है। यह चर्चा केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी युवाओं को प्रेरित करती है।

    यूपी बोर्ड हाईस्कूल विज्ञान व गृहविज्ञान में आंतरिक मूल्यांकन समाप्त, होगी प्रयोगात्मक परीक्षा, अगले सत्र से लागू होगी नई व्यवस्था

    यूपी बोर्ड हाईस्कूल विज्ञान व गृहविज्ञान में आंतरिक मूल्यांकन समाप्त, होगी प्रयोगात्मक परीक्षा, दोनों विषयों में अब तक अन्य विषयों की तरह होता था आंतरिक मूल्यांकन

    अगले सत्र से नई व्यवस्था सुनिश्चित करने के बोर्ड सचिव ने दिए निर्देश


    प्रयागराजः माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान एवं गृहविज्ञान विषय की प्रायोगिक परीक्षा को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब हाईस्कूल विज्ञान और गृह विज्ञान विषय में आंतरिक मूल्यांकन के स्थान पर प्रयोगात्मक परीक्षाएं आयोजित की जाएंगी। यूपी बोर्ड के प्रस्ताव पर राज्यपाल ने स्वीकृति प्रदान करते हुए परिषद विनियमों में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन दोनों विषयों में अगले सत्र की परीक्षा से प्रयोगात्मक परीक्षा आयोजित कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने जारी किए हैं।


    माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा इस संबंध में पूर्व में शासन को पत्र प्रेषित कर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा अधिनियम की धारा-16 (2) के अंतर्गत शासकीय स्वीकृति का अनुरोध किया गया था। शासन की स्वीकृति के बाद परिषद विनियमों के अध्याय-13 में संशोधन किया गया है। 


    संशोधित विनियम के अनुसार हाईस्कूल स्तर पर विज्ञान एवं गृहविज्ञान विषय को छोड़कर अन्य सभी विषयों में प्रयोगात्मक कार्यों का आंतरिक मूल्यांकन पूर्ववत पांच प्वाइंट स्केल ग्रेडिंग के आधार पर ही किया जाएगा। संशोधित व्यवस्था के तहत विज्ञान एवं गृह विज्ञान विषय में 30 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा परिषद द्वारा आयोजित कराई जाएगी। इस परीक्षा के प्राप्तांक और ग्रेड को प्रमाणपत्र/सह अंकपत्र में प्रदर्शित किया जाएगा। 


    पहले इन विषयों में प्रयोगात्मक कार्यों का आंतरिक मूल्यांकन पांच प्वाइंट स्केल ग्रेडिंग के आधार पर किया जाता था और 20 ग्रेड अंकपत्र में अंकित किए जाते थे, लेकिन अब यह व्यवस्था समाप्त कर दी गई है। इस बदलाव के संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता ने यूपी बोर्ड सचिव को पत्र भेजा है।

    Sunday, February 8, 2026

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों में एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र 2026-27 से लगभग 60 हजार अनुदेशक रखे जाएंगे। बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को कम से कम दो कोर्स पढ़ाना होगा। इसके लिए प्रत्येक स्कूल को अपने संसाधनों से दो-दो अनुदेशक रखने होंगे। बोर्ड के विशेषज्ञ स्कूलों में रखे जाने वाले अनुदेशकों की अर्हता तय करेंगे। अनुदेशकों की अर्हता के संबंध में जल्द ही स्कूलों को निर्देश भेजे जाएंगे।


    पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग से तैयार इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी जरूरतों, उद्योग जगत की अपेक्षाओं व विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखते हुए व्यवहारिक, कौशल-आधारित एवं रोजगारोन्मुखी विषयवस्तु को शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह कदम विद्यालयी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।


    108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे

    व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों हेतु एक साथ 108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इन कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, मीडिया और ऑटो सर्विस टेक्निशियन जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है।

    स्कूल भौगोलिक आधार पर करेंगे विषयों का चयन

    प्रत्येक स्कूल को अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम से कम दो विषयों का चयन करना होगा। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को स्थानीय उद्योगों से जोड़ना है, जैसे भदोही में कालीन उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण। संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 10 दिनों की अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान भी रखा गया है।


    यूपी बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन, छात्रों के नाम, विषय आदि की त्रुटियों में संशोधन के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र

    यूपी बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन, छात्रों के नाम, विषय आदि की त्रुटियों में संशोधन के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र 

    7 फरवरी 2026
    प्रयागराज। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से शुरू हो रही है। परीक्षा में शामिल होने वाले ऐसे छात्रों जिनके नाम, विषय, माता-पिता के नाम आदि में गड़बड़ी है, उसे यूपी बोर्ड संशोधन करने में जुटा है। ऐसे में परीक्षा के बाद होने वाली परेशानी से छात्रों को वेवजह बोर्ड का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। संशोधन के बाद छात्रों को संशोधित प्रवेश पत्र भी दिए जाएंगे। छात्रों के विवरण में त्रुटि से संशोधन के नाम पर होने वाली परेशानी बचाने के लिए यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने एक मौका देते हुए प्रदेश के सभी डीआईओएस को निर्देशित किया था कि आवश्यक प्रपत्रों के साथ 25 जनवरी तक प्रधानाचार्यों से संशोधन के लिए आवेदन पत्र प्राप्त कर लें।

    साथ ही सभी प्रकरणों के परीक्षण के बाद अवशेष त्रुटियों, रिस्टोर व डिलीट का विद्यालयवार विवरण साक्ष्यों, अभिलेखों और अपनी संस्तुति के साथ 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध करा दें।

    पांच क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, मेरठ, वाराणसी, बरेली और गोरखपुर तमाम संशोधन के प्रकरण आए हैं। लेकिन बोर्ड के द्वारा संशोधन कार्य अभी नहीं किया जा सका है। उधर बोर्ड सचिव भगवती सिंह का कहना है कि विवरण में संशोधन के बाद परीक्षार्थियों को संशोधित प्रवेश पत्र भी जारी किए जाएंगे।



    2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का दिया आखिरी मौका

    20 जनवरी 2026
    लखनऊ। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का आखिरी मौका दिया है। इस अवसर के अन्तर्गत छात्र-छात्राएं नाम, जन्मतिथि, माता पिता के नाम में संशोधन करा सकेंगे। जेंडर व जाति में यदि कोई गलती की आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र जारी किया है। इसमें 25 जनवरी तक सभी स्कूलों प्रधानाचार्यों को डीआईओएस कार्यालय में छात्र का शुद्ध आवेदन पत्र जमा कराना होगा।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद से पत्र जारी होने के डीआईओएस ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को पत्र भेजते हुए तय तिथि में कार्यालय को आवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर स्कूल और छात्र अपने गलत शैक्षिक प्रपत्र के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।



    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के शैक्षिक विवरण की त्रुटि में संशोधन का अंतिम अवसर, संशोधन के लिए साक्ष्य के साथ क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक आवेदन भेजने के निर्देश

    प्रयागराज । हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विवरण बार-बार पोर्टल खोलने के बाद भी संशोधित नहीं किए जाने पर बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने नाराजगी जताई है। साथ ही परीक्षार्थियों के हित में उनके विवरण में संशोधन का अंतिम अवसर दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे संशोधन संबंधी सभी आवश्यक प्रपत्र के साथ प्रधानाचार्य से 25 जनवरी तक आवेदनपत्र लेकर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक भेजना सुनिश्चित करें, ताकि संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    बोर्ड सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में कहा है कि कई जनपदों से प्रधानाचार्य एवं परीक्षार्थियों ने जानकारी दी है कि उनके कई विवरण में त्रुटियां संशोधित नहीं हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ प्रधानाचार्यों ने अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतते हुए अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हो रही है। 


    अब अंतिम अवसर देते हुए सचिव ने भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि शैक्षिक विवरण में किस-किस स्तर की त्रुटियां ठीक की जाएंगी। इनमें विद्यार्थी का विवरण रिस्टोर किया जाएगा, विद्यार्थी का विवरण डिलीट किया जाएगा, उनके नाम अथवा माता-पिता के नाम में वर्तनी त्रुटि ठीक की जा सकेगी। साथ ही विषय वर्ग में संशोधन, विद्यार्थी की जन्मतिथि, जेंडर एवं जाति में संशोधन किया जा सकेगा, लेकिन संशोधन के संबंध में साक्ष्य अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने होंगे। संशोधन के लिए आवश्यक प्रपत्र संलग्न कर उसका भलीभांति परीक्षण करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी संस्तुति के साथ आवेदन पत्र क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर 25 जनवरी के बाद प्राप्त आवेदन पत्र मान्य नहीं किए जाएंगे।


    सख्ती : परीक्षा में पर्चा लीक व अफवाह रोकेगी क्यूआरटी

    सख्ती : परीक्षा में पर्चा लीक व अफवाह रोकेगी क्यूआरटी

    लखनऊ : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में पर्चा लीक कराने व सोशल मीडिया पर इसे लेकर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली गई है। राज्य व जिला स्तर पर क्विक रिस्पांस टीमें (क्यूआरटी) बनाई गई हैं। पर्चा व कापियों की सुरक्षा को रात में भी स्ट्रांग रूम का औचक निरीक्षण होगा। परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ भी नजर रखेगी।


    18 फरवरी से शुरू हो रहीं यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 8033 केंद्रों पर होगी। इसमें 52.30 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। ऐसे में नकल के साथ-साथ पर्चा लीक कराने वाले नकल माफिया व सोशल मीडिया पर पर्चा लीक की भ्रामक सूचना डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कहीं कोई अफवाह व पर्चा लीक होने की खबर सामने आती है, तो क्यूआरटी समय रहते नियंत्रण करेगी। अफवाह फैलाने वालों को चिह्नित किया जाएगा कोई नेटवर्क है तो ध्वस्त

    पर्यवेक्षकों की तैनाती

    यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए मंडल व जिलों में एक-एक पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। अयोध्या में निदेशक साक्षरता अनिल भूषण चतुर्वेदी, लखनऊ में संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल, देवीपाटन में सीटीई प्राचार्य अजय कुमार सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

    Saturday, February 7, 2026

    नयी पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, जिन्हे पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है, के प्रकरण निस्तारित किए जाने के सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी

    नयी पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, जिन्हे पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है, के प्रकरण निस्तारित किए जाने के सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी