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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, July 4, 2022

    मोबाइल एप के मकड़जाल में उलझ कर रह गए बेसिक शिक्षक, वाट्सएप व टेलीग्राम में दर्जनों ग्रुप

    मोबाइल एप के मकड़जाल में उलझ कर रह गए बेसिक शिक्षक, वाट्सएप व टेलीग्राम में दर्जनों ग्रुप


    ■ जानकारियों का लेन-देन ऑनलाइन

    ■ प्रयोगशाला बनकर रह गया शिक्षा विभाग


    जानकारियों के लेन-देन का सिलसिला ऑनलाइन चलने लगा है, जिसके कारण शिक्षक मोबाइल एप के मकड़जाल में उलझकर रह गए हैं. शिक्षकों के स्मार्ट फोन में करीब दर्जनभर एप डाउनलोड हैं, इसके बाद भी कई पोर्टल में भी जाकर जानकारियां जुटानी और भेजनी पड़ रही है, जिससे पढ़ाने के अलावा अन्य कार्यों में शिक्षकों का समय खप रहा है।



    शिक्षा गुणवत्ता बढ़ाने के नाम पर हर साल नया प्रयोग से शिक्षा विभाग अब प्रयोगशाला बनकर रह गया है. शिक्षकों को पहले से ही पढ़ाने के अलावा शासन के कई योजनाओं में सहयोगी रखा गया है और अब जानकारियों के आनलाइन होने के बाद कई तरह के एप से उलझना पड़ रहा है।


    एक आम शिक्षक के मोबाइल पर करीब दर्जनभर एप शिक्षा विभाग से जुड़े डाउनलोड हैं. इसके बाद भी कई जानकारियों के लिए शिक्षकों को विभागीय पोर्टल पर जाना पड़ता है, तो कई जानकारियां प्रेषित करने भी पोर्टल  का सहारा है, जिससे शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने के लिए समय निकालने की जुगत भिड़ा रहे हैं, ताकि वे अपने मूल कार्य के प्रति कुछ तो न्याय कर सकें. वहीं किसी शिक्षक के पास अन्य प्रभार है, तो उसके लिए अलग मोबाइल एप है. प्राचार्य, प्रधानपाठक, संकुलों में प्रभार के साथ शिक्षक वोटर आईडी बनाने में ही कई तरह के मोबाइल एप का सहारा ले रहे हैं।


    इस तरह देखा जाए तो शिक्षकों के स्मार्ट फोन में दर्जनों तरह के एप भरे पड़े हैं. शिक्षकों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी से लेकर वेतनपत्रक तक के लिए मोबाइल एप या पोर्टल का ही सहारा लेना पड़ता है और समय-समय पर जानकारियों को अपडेट करना पड़ता है. इन एप में प्रमुख रूप से संपर्क फाउंडेशन, सरल कार्यक्रम का जीपी एप, अंगना म शिक्षा कार्यक्रम, सौ दिन सौ कहानी, नवाजतन, एमडीएम एपशामिल है, जिसमें से ज्यादातर प्रतिदिन के उपयोग में हैं।


    अब मध्यान्ह भोजन की जानकारी एप पर

    प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में बच्चों को मध्यान्ह भोजन प्रदान किया जाता है. इससे संबंधित जानकारी अब तक शिक्षक रजिस्टर में रखते थे और मासिक जानकारी भेजते रहे हैं, लेकिन अब विभाग द्वारा एमडीएम की जानकारी भी प्रतिदिन एप के माध्यम से भेजना अनिवार्य किया गया है. इस तरह के विभिन्न एप में उलझे शिक्षकों के पास पढ़ाने के लिए ही समय नहीं बच रहा है 


    वाट्सएप व टेलीग्राम में दर्जनों ग्रुप

    विभाग द्वारा एप का निर्माण किया जा रहा है. साथ ही शिक्षकों को कई तरह की जानकारी संकुल स्तर से वाट्सएप व टेलीग्राम पर बने विभिन्न ग्रुप के माध्यम से प्रदान किया जा रहा है. इसके चलते शिक्षक वाट्सएप व टेलीग्राम पर दर्जनों ग्रुप से जोड़े गए हैं और सभी में कई तरह की जानकारियां भेजी जा रही है, जिससे शिक्षकों को सभी ग्रुप को भी प्रतिदिन देखना पड़ता है, जिसमें भी समय की बरबादी हो रही है।

    डीएलएड के प्रति अभ्यर्थियों का घटा रुझान, चार वर्षों से नहीं भर रहीं सीटें

    डीएलएड के प्रति अभ्यर्थियों का घटा रुझान, चार वर्षों से नहीं भर रहीं सीटें


    प्रयागराज :  डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) के प्रति विद्यार्थियों का रुझान लगातार कम हो रहा है। बीते चार वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि डायट की सीटें तो भर जा रही हैं लेकिन, निजी कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह जा रही है। यहां दाखिले के लिए अभ्यर्थी दिलचस्पी ही नहीं दिखा रहे हैं। अभ्यर्थियों की बेरुखी की वजह से निजी कॉलेजों के प्रबंध तंत्र भी सकते में हैं।


    प्रदेश में कुल 67 डायट और लगभग 3100 निजी संस्थानों में डीएलएड (पूर्व में बीटीसी) के दाखिले होते हैं। इसमें कुल मिलाकर लगभग 2 लाख 41 हजार सीटें हैं। डायट में कुल 10.600 सीटें हैं। जबकि प्रदेश के निजी संस्थानों में लगभग 2 लाख 32 हजार सीटें हैं। आलम यह है कि कभी नौकरी की गारंटी माने जाने वाले इस कोर्स की पढ़ाई से छात्र कतरा रहे हैं। सत्र 2021-22 में स्थिति यह रही कि प्रदेश के 106 निजी कॉलेजों को एक भी छात्र नहीं मिला। सैकड़ों कॉलेजों को तो बमुश्किल एक दर्जन छात्र भी नहीं मिले। परिणामस्वरूप लगभग 1.32 लाख सीटें खाली रह गईं। ऐसे में इन कॉलेजों के प्रबंध तंत्र के सामने शिक्षकों और कर्मचारियों को वेतन देने के लाले पड़ गए।


    बीते सत्र में सीटों के सापेक्ष कम आवेदन आने की वजह से आवेदन की तिथि तीन बार बढ़ाई गई लेकिन आवेदन नहीं बढ़े। इससे पहले का सत्र कोरोना की वजह से शून्य घोषित हो गया था। इसी तरह सत्र 2017-18 में डीएलएड की कुल सीटो 2.11 लाख के सापेक्ष 1.92 लाख ने दाखिला लिया था। फिर लगातार कोर्स का क्रेज घटता गया जबकि इससे पहले डीएलएड में दाखिले के लिए मारामारी मची रहती थी। डीएलएड का दायरा सीमितः डीएलएड कर चुके पंकज मिश्र का कहना है कि डीएलएड के लिए दायरा सीमित कर दिया गया है। डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त अभ्यर्थी केवल प्राथमिक स्कूलों में आवेदन कर सकते हैं। वहीं 2018 में एनसीटीई ने बीएड को भी प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए मान्य कर दिया। बीएड के बाद प्राइमरी से लेकर इंटर कॉलेज के अतिरिक्त बीईओ समेत अन्य कई नौकरियों के लिए भी आवेदन किया जा सकता है। डीएलएड प्रशिक्षण प्राप्त प्रतियोगी छात्र आलोक बिलौरा कहते हैं, चार वर्ष पहले प्राइमरी में शिक्षक भर्ती आई थी, तब से नहीं आई। ऐसे में डीएलएड की अपेक्षा बीएड करना ज्यादा मुनासिब है।



    डीएलएड में दोषपूर्ण परीक्षा पद्धति प्रवेश परीक्षा में रुझान कम होने की प्रमुख वजह है। प्रत्येक सेमेस्टर में आठ विषय हैं लेकिन इनकी परीक्षा मात्र तीन दिनों में होती है। प्रवेश परीक्षा फल घोषित करने में अनावश्चक विलंब होता है। प्रवेश प्रक्रिया भी नियमित रूप से शुरू नहीं होती है। डीएलएड के लिए केवल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक बनने का अवसर है, जबकि बीएड डिग्री हासिल करने वालों के पास प्राथमिक से लेकर इंटर और अन्य नौकरियों के लिए आवेदन का अवसर होता है।

    एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती परिणाम 10 जुलाई के बाद

    एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती परिणाम 10 जुलाई के बाद


    प्रयागराज
     एडेड जूनियर : हाईस्कूल शिक्षक भर्ती - 2021 के संशोधित परिणाम की अभ्यर्थी प्रतीक्षा कर रहे हैं। 15 नवंबर 2021 को घोषित इस भर्ती परीक्षा परिणाम पर कुछ अभ्यर्थियों ने कम दिए जाने का आरोप लगाते हुए शासन से शिकायत की थी। आरोप की पुष्टि होने के बाद शासन के निर्देश पर उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय में परीक्षण कार्य अंतिम चरण में है । ऐसे में संशोधित परिणाम 10 जुलाई के बाद कभी भी जारी किया जा सकता है।


    प्रधानाध्यापक के 390 एवं सहायक अध्यापक के 1504 पदों के लिए लिखित परीक्षा कराने के बाद पीएनपी ने परिणाम घोषित किया था । स शासन के निर्देश पर आंतरिक समिति गठित कर परीक्षण शुरू कराया। कार्य तेजी से चल रहा है। सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के मुताबिक परीक्षण पूरा होने के बाद शासन की अनुमति से संशोधित परिणाम जारी कर सफल अभ्यर्थियों की सूची बेसिक शिक्षा निदेशालय को भेजी जाएगी।

    आदेश की नाफरमानी से नाखुश हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के खिलाफ वारंट किया जारी, जानिए पूरा मामला

    आदेश की नाफरमानी से नाखुश हाईकोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के खिलाफ वारंट किया जारी


    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आदेश का पालन न करने और तलब किए जाने पर उपस्थित न होने के लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर उन्हें तलब किया है। आदेश की नाफरमानी से नाखुश कोर्ट ने सीजेएम प्रयागराज को निर्देश दिया है कि सचिव पर वारंट तामील कराएं। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक ज्ञानेंद्र कुमार की याचिका पर अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा को सुनकर दिया है।


    अधिवक्ता नवीन कुमार शर्मा का कहना था कि याची की याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने मेडिकल आधार पर स्थानांतरण को लेकर आदेश दिया था। इस आदेश का पालन न होने पर नौ मार्च 2022 को कोर्ट ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रताप सिंह बघेल को एक जुलाई को हाजिर होने का निर्देश दिया था। लेकिन सचिव न तो स्वयं आए और न ही उन्होंने आदेश के अनुपालन का हलफनामा प्रस्तुत किया। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए सचिव के खिलाफ जमानती वारंट जारी करते हुए उन्हें तलब कर लिया है।

    Sunday, July 3, 2022

    JEECUP Result 2022 : डिप्लोमा से मोह भंग! यूपी में पॉलीटेक्निक की 94 हजार सीटें रह जाएंगी खाली

    JEECUP Result 2022 : डिप्लोमा से मोह भंग! यूपी में पॉलीटेक्निक की 94 हजार सीटें रह जाएंगी खाली

    पॉलीटेक्निक डिप्लोमा से युवाओं का मोहभंग होता दिख रहा है। इसलिए इस बार पॉलीटेक्निक संस्थानों में करीब 94 हजार सीटें खाली रहना तय है। दरअसल, पॉलीटेक्निक में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा हो चुकी है। इस बार 2,18,286 आवेदन हुए पर 70,613 आवेदकों ने परीक्षा ही छोड़ दी। कुल 2,41,810 सीटों के लिए 1,47,673 अभ्यर्थी ही परीक्षा देने पहुंचे। ऐसे में सभी परीक्षार्थियों को पास मान लिया जाए तो भी 94 हजार सीटें खाली रहेंगी। परीक्षा परिणाम गड़बड़ाया तो खाली सीटों का आंकड़ा बढ़कर एक लाख या उससे अधिक भी पहुंच सकता है।


    छात्रों को नहीं रास आई पढ़ाई
    राजकीय पॉलीटेक्निक गाजियाबाद और राजकीय महिला पॉलीटेक्निक लखनऊ में पीजी डिप्लोमा इन वेब डिजाइनिंग, मार्केटिंग एंड सेल्स मैनेजमेंट जैसे ट्रेडों में पिछले पांच सालों में एक तिहाई सीटें खाली रहीं। कानपुर में पीजी डिप्लोमा इन मार्केटिंग सेल्स में 66,वेब डिजाइनिंग में 58 और अकाउंटेंसी की 37 सीटें खाली रहीं।

    ग्रुप-ए की ट्रेडों में भी नहीं दिखा रुझान
    सावित्रीबाई फुले राजकीय महिला पॉलीटेक्निक कुमारहेरा, सहारनपुर में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और चौधरी मुख्तार सिंह राजकीय महिला पॉलीटेक्निक धौराला मेरठ की आईटी ट्रेड की सीटें तक नहीं भरती हैं। महिला पॉलीटेक्निक बलिया और वीरांगना झलकारी बाई राजकीय महिला पॉलीटेक्निक झांसी में कंप्यूटर एप्लीकेशन ट्रेड में पिछले 5 सालों में 75 में से कभी भी 6 सीटें नहीं भरीं। पीजी डिप्लोमा इन अकाउंटेंसी में राजकीय पॉलीटेक्निक ललितपुर में पिछले 5 सालों में सबसे ज्यादा 9 दाखिले हुए हैं। 2019 और 20 में वहां एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया।

    जिन कोर्स से नौकरी नहीं उसे भी पढ़ा रहे
    पॉलीटेक्निक संस्थानों के मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, सिविल और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी जैसी ट्रेडों के हुनरमंद भी बेरोजगार घूम रहे हैं। इसके बावजूद कई ऐसे कोर्स चल रहे हैं, जिनकी मांग ही नहीं है। यही कारण है कि रिटेल मैनेजमेंट, मार्केटिंग सेल्स, हार्डवेयर नेटवर्किंग, टिशू कल्चर, डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट, फैशन डिजाइन और प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी जैसे ट्रेड की सीटें हर बार खाली रहती हैं।

    15-20 हजार में मिल रहे बीटेक पास
    पॉलीटेक्नक युवाओं को आसानी से रोजगार न मिलने का कारण बीटेक पास बेरोजगारों की बढ़ती संख्या भी है। बीटेक पास भी 15 से 20 हजार के वेतन में नौकरी करने को तैयार हो जाते हैं और कंपनियां उनको प्राथमिकता भी देती हैं।

    कोट:

    ड्रोन, डाटा लर्निंग, डिजिटल मार्केटिंग, एंड्रॉयड टेक्नोलॉजी जैसे नए कोर्स का प्रशिक्षण दिया जाना है। इनसे युवाओं को आसानी से रोजगार के मौके मिलेंगे। पॉलीटेक्निक चलो अभियान चलाकर छात्रों की संख्या बढ़ाई जाएगी। - मनोज कुमार, निदेशक प्राविधिक शिक्षा

    आवेदक भी घटते गए

    वर्ष------- आवेदन

    2016------- 5,31,132
    2017 -------4,52,334

    2018 -------4,50,021
    2019 -------4,36,715

    2020 -------3,90,894
    2021 -------3,02,066

    2022 -------2,67,139

    PRERNA DBT : कैसा है यह मोबाइल APP, साल भर में सुधार के लिए सामने आए 25 वर्जन! 🤦🏻 मोबाइल बना विभाग की ‘प्रापर्टी’

    PRERNA DBT : कैसा है यह मोबाइल APP,  साल भर में सुधार के लिए सामने आए 25 वर्जन! 🤦🏻  मोबाइल बना विभाग की ‘प्रापर्टी’



    बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों का पंजीकरण, सत्यापन एवं धनराशि हस्तांतरण के लिए बीते साल डीबीटी ऐप लांच किया था। लांचिंग के बाद से ही यह ऐप सुर्खियों में हैं। इन दिनों डीबीटी ऐप पर शिक्षक काम कर रहे हैं लेकिन लगातार नए वर्जन आने से शिक्षक परेशान हैं। तकनीकी समस्याओं का त्वरित समाधान नहीं है।



    डीबीटी ऐप के जरिए न केवल बच्चों का रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है बल्कि छात्र व अभिभावकों के आधार सत्यापन भी किए जा रहे हैं। विभाग लगातार शिक्षकों पर इस बात का दबाव डाल रहा है कि निर्धारित अवधि में डीबीटी एप पर काम कर लिया जाए। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षक बताते हैं कि डीबीटी एप पर नित नए अपडेट आ रहे हैं, इससे काम में बाधा पहुंचती है। बात बात पर वेतन रोकने की धमकियां भी दी जा रही हैं। अब तक ऐप के 25 अपडेट आ चुके हैं।


    मोबाइल बना विभाग की ‘प्रापर्टी’

    सूत्र बताते हैं कि बीते दो सालों से विभाग शिक्षकों के फोन से लाखों बच्चों का डीबीटी एप पर न केवल फीडिंग, सत्यापन व पंजीकरण करा रहा है बल्कि गूगल मीट व आनलाइन ट्रेनिंग भी करा रहा है। तकनीकी रूप से अक्षम शिक्षकों को यह दौर भारी पड़ रहा है। उधर दूसरी ओर ग्रामीण शिकायत करते हैं कि शिक्षक हमेशा फोन पर लगे रहते हैं।


    अब तक नहीं सुधार पाए एप

    सूत्र बताते हैं कि विभाग का डीबीटी ऐप शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय है। इस एप में कभी लागिन तो कभी बच्चों की संख्या व अन्य सम्बन्धित बिन्दुओं पर कोई न कोई समस्या सामने आ रही है। शिक्षक इस एप से उकताने लगे हैं।

    संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया 15 जुलाई से होगी शुरू

    संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में दाखिले की प्रक्रिया 15 जुलाई से होगी शुरू


    वाराणसी : संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री, आचार्य, योग एवं एमए हिंदू अध्ययन पाठ्यक्रम में दाखिले की प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू होगी। नई शिक्षा नीति के अनुसार तैयार पाठ्यक्रमों में सेमेस्टर प्रणाली के अनुसार ही पठन-पाठन होगा।



    शनिवार को कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी की अध्यक्षता में प्रवेश समिति की बैठक में यह निर्णय लिया गया। कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि शास्त्री, आचार्य एवं शास्त्री योग ( बीए योग स्ववित्त पोषित) आचार्य योग ( एमए योग स्ववित्त पोषित), स्नात्कोत्तर डिप्लोमा इन योग स्ववित्त पोषित पाठ्यक्रम तथा एमए हिंदू अध्ययन (स्ववित्त पोषित) में प्रवेश प्रक्रिया 15 जुलाई से शुरू हो जाएगी। उक्त पाठ्यक्रम क्रमशः तीन वर्ष एवं दो वर्ष का होगा।

    नई शिक्षा नीति के अनुसार प्रत्येक कक्षा में सेमेस्टर प्रणाली लागू की जाएगी। बैठक में छात्र कल्याण संकायाध्यक्ष प्रो. हरिशंकर पांडेय, प्रो महेंद्र पांडेय, डॉ. विजय कुमार पांडेय, विजयमणि त्रिपाठी उपस्थित थे।

    मॉडल बनेंगे प्रदेश के पांच आश्रम पद्धति विद्यालय, ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए 1-1 करोड़ देगी सरकार

    मॉडल बनेंगे प्रदेश के पांच आश्रम पद्धति विद्यालय, ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए 1-1 करोड़ देगी सरकार

    ◆ अयोध्या, गोरखपुर, रामपुर, झांसी व प्रयागराज के स्कूलों का चयन

    ◆ ढांचागत सुविधाओं के विकास के लिए 1-1 करोड़ देगी सरकार



    प्रदेश में पांच आश्रम पद्धति विद्यालय मॉडल के रूप में विकसित किए जाएंगे। इसका खाका तैयार कर लिया गया है। इन स्कूलों में जरूरी ढांचागत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए सरकार 1-1 करोड़ रुपये देगी। समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण की पहल पर हो रही इस कवायद के तहत कुछ फंड 'कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिविलटी (सीएसएआर)' से भी जुटाया जाएगा।

    समाज कल्याण विभाग ने गोरखपुर, रामपुर, झांसी, अयोध्या और प्रयागराज के आश्रम पद्धति विद्यालयों का चयन पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया है। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को रहने खाने, ड्रेस व कॉपी-किताब की सुविधाएं दी जाती हैं। लेकिन व्यवस्थाएं उतनी चुस्त-दुरुस्त नहीं है, जितनी मौजूदा प्रतियोगी माहौल के हिसाब से होनी चाहिए। इन स्कूलों में सुविधाओं के विकास के लिए कॉरपोरेट समूहों से भी बात हो गई है।

    पांचों स्कूलों में इस तरह बढ़ेंगी सुविधाएं

    ■ मानक के अनुसार पर्याप्त शिक्षकों की तैनाती।

    ■ परिसर में इनंटरनेट के साथ स्मार्ट क्लास की व्यवस्था होगी, विद्यार्थी कंप्यूटर और प्रोजेक्टर से जुड़े स्मार्ट बोर्ड पर पढ़ाई कर सकेंगे।

    ■ विद्यार्थियों को बैठने के लिए सुविधाजनक कुर्सियां होंगी।

    ■ विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार बच्चों को विभिन्न प्रकार का पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जाए। देश के अलग-अलग हिस्सों के व्यंजनों से भी उन्हें परिचित कराया जाएगा।

    ■खेल शिक्षकों की तैनाती होगी। बच्चों को कबड्डी, खो-खो, क्रिकेट, बास्केटबाल, फुटबाल, सेपकटाकरा आदि खेलों का प्रशिक्षण देने के साथ खेल किट भी दी जाएगी।

    ■कक्षा में पढ़ाई के साथ ही साथ होमवर्क और खेल गतिविधियों के लिए समय निश्चित होगा।

    सीईयूटी पीजी के लिए अब 10 जुलाई तक करें आवेद

    सीईयूटी पीजी के लिए अब 10 जुलाई तक करें आवेदन

    नई दिल्ली : विश्वविद्यालयों में स्नातकोत्तर प्रोग्राम में दाखिले के लिए सीयूईटी पीजी-2022 में अब 10 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। छात्रों की मांग पर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने स्नातकोत्तर प्रोग्राम में दाखिले के लिए सीयूईटी पीजी- 2022 में ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की तारीख 10 जुलाई तक बढ़ा दी है।


    इसके अलावा छात्र 12 से 14 जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन पत्र की त्रुटियों में भी सुधार कर सकते हैं। हालांकि, यदि कोई छात्र आवेदन पत्र की त्रुटियों में सुधार करता है तो उसे फीस देनी होगी। पहले 4 जुलाई तक आवेदन पत्र भर सकते थे।

    नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से शनिवार शाम को पब्लिक नोटिस जारी किया गया है। इसमें सीयूईटी पीजी के लिए ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की विंडो की डेट आगे बढ़ाने का जानकारी दी गई है। इसमें लिखा है कि नए उम्मीदवार 10 जुलाई शाम पांच बजे तक ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। जबकि 11 जुलाई रात 11.50 मिनट तक वे ऑनलाइन फीस जमा करवा सकेंगे। फीस नेटबेकिंग, क्रेडिट, डेबिट, यूपीआई या पेटीएम से जमा की जा सकती है। 12 से 14 जुलाई रात 11.50 मिनट तक जिन छात्रों ने पहले से ऑनलाइन आवेदन पत्र भर रखा है, यदि वे उसकी त्रुटियों में सुधार कर सकते हैं।

    Saturday, July 2, 2022

    गणित व विज्ञान की पढ़ाई को आसान बनाएगी लैब, गोरखपुर में बनेगी प्रदेश की पहली सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग लैब Science & Math's Lab

    गणित व विज्ञान की पढ़ाई को आसान बनाएगी लैब, गोरखपुर में बनेगी प्रदेश की पहली सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग लैब 
    Science & Math's Lab 


    गणित और विज्ञान के बनाए जाएंगे 200 मॉडल

    50,000 रुपये की किट उपलब्ध कराई जाएगी



    गोरखपुर। बेसिक शिक्षा विभाग और आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से गोरखपुर में प्रदेश की पहली सेंटर फॉर क्रिएटिव लर्निंग (सीसीएल) लैब का निर्माण किया जाएगा। लैब में विज्ञान, गणित के 200 मॉडल बनाए जाएंगे। इसके जरिए परिषदीय स्कूल के शिक्षक व बच्चों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इससे गणित और विज्ञान की पढ़ाई आसान हो जाएगी।


    पहले चरण में जिला स्तरीय सीसीएल लैब का निर्माण होगा। दूसरे चरण में 20 विकास खंडों में लैब बनेगी। जिला स्तरीय लैब में आईआईटी गांधीनगर की तरफ से किट उपलब्ध कराई जाएगी। इसकी कीमत 50 हजार रुपये रहेगी। इस किट में गणित व विज्ञान की पढ़ाई आसान बनाने के सूत्र होंगे। कक्षा तीन hatH आठवीं के विद्यार्थियों के लिए दो ग्रुप में प्रत्येक शुक्रवार और शनिवार को दो-दो घंटे का यू-ट्यूब सेशन आयोजित होगा। इससे आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञ जुड़ेंगे और बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे। 


    विज्ञान और गणित विषय के एआरपी को दिया जाएगा प्रशिक्षण

    जनपद के हर विकास खंड के गणित एवं विज्ञान विषय के एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) के लिए प्रत्येकं सोमवार को एक घंटे का ऑनलाइन सेशन होगा। इसका मकसद बच्चों के प्रस्तावित यू-ट्यूब सेशन से उत्पन्न होने वाली जिज्ञासाओं का सरल समाधान करना है। प्रोग्राम कोआर्डिनेटर के लिए भी 10-10 दिन की अवधि के प्रशिक्षण तीन चरणों में कुल 30 दिन तक पूरे वर्ष चलाए जाएंगे।




    यूपी में बीएससी नर्सिंग के लिए पहली बार प्रवेश परीक्षा, नर्सिंग कॉलेजों की भी होगी ग्रेडिंग

    यूपी में बीएससी नर्सिंग के लिए पहली बार प्रवेश परीक्षा, नर्सिंग कॉलेजों की भी होगी ग्रेडिंग



    1. नैक की तरह निजी बीएससी कालेजों की होगी ग्रेडिंग

    2. जॉन हापकिंस यूनिवर्सिटी से ली जाएगी गुणवत्ता बढ़ाने में मदद

    3. मानक पूरा करने वाले निजी बीएससी कालेजों की तय होगी ए, बी, सी श्रेणी

    4. इंटर बायलोजी के साथ बीएससी बायो के छात्र कर सकेंगे आवेदन

    5. प्रदेश में 2017 के पहले तक मात्र एक संस्थान 1972 में कानपुर में खुला था।

    6. वर्ष 2013 में तीन जिलों आगरा, झांसी और मेरठ को मंजूरी मिली थी।

    7. मेरठ के अलावा कोई कालेज संचालित नहीं हो पाया था।

    8000 सीटों पर दिया जाएगा दाखिला



    लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के सरकारी व निजी मेडिकल कालेजों में पैरा-मेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने के लिए बड़ा फैसला किया है। इसके तहत प्रदेश में पहली बार बीएससी नर्सिंग की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। प्रदेश के सरकारी और निजी बीएससी नर्सिंग कॉलेजों में करीब आठ हजार छात्रों को प्रवेश मिलेगा। इसके लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 जुलाई रखी गई है। छात्रों को केजीएमयू की वेबसाइट www.kgmu.org और अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल विश्वविद्यालय की वेबसाइट www.abvmuup.edu.in पर मिलने वाले लिंक पर आवेदन करना होगा। संभव है परीक्षा जुलाई के अंतिम सप्ताह में कराई जाए।


    आजादी के बाद से लेकर 2017 तक नर्सिंग व पैरा मेडिक्स को नजरअंदाज किया गया। इस कारण सरकारी मेडिकल कॉलेजों में योग्य नर्सिंग और पैरा मेडिक्स स्टाफ की कमी है। प्रदेश में 35 सरकारी मेडिकल कालेज और निजी क्षेत्र में 30 मेडिकल कालेज हैं। इनमें पैरा मेडिकल स्टाफ खासतौर पर नर्सों की कमी है। प्रदेश में भारी संख्या में नर्सिंग स्टाफ केरल व कर्नाटक से आता है।


    परीक्षा एक साथ होगी 

    निजी और सरकारी कॉलेजों की परीक्षा एक ही साथ होगी

     
    लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तय किया है कि नीट की तर्ज पर बीएससी नर्सिंग कालेजों की एक साथ पूरे प्रदेश में एक ही प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। पहले केजीएमयू अपने स्तर से अलग प्रवेश परीक्षा कराने जा रहा था, जिसे सीएम ने उच्चस्तरीय बैठक के बाद रोक दिया।


    मुख्यमंत्री को इन नर्सिंग कालेजों में प्रवेश के तरीके, पाठ्यक्रम, शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर आपत्ति थी। सीएम ने चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार को इसके लिए पूरी प्रक्रिया नए सिरे से तय करने के निर्देश दिए।


    हर सरकारी मेडिकल कालेज में खुलेगा नर्सिंग कालेज: चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि योगी सरकार की योजना है कि हर सरकारी मेडिकल कालेज में बीएससी नर्सिंग कालेज स्थापित किया जाए। फिलहाल बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई के लिए सात जिलों प्रयागराज, गोरखपुर, कन्नौज, आगरा, जिम्स ग्रेटर नोएडा, राम मनोहर लोहिया संस्थान लखनऊ और झांसी में नए नर्सिंग कालेज स्वीकृत किए गए हैं। इनमें प्रधानाचार्य और प्रोफेसर सहित 138 पदों का सृजन कर नियुक्ति भी कर दी गई है।

    अब इग्नू में पढ़िए वैदिक गणित व वास्तु शास्त्र, लांच किया सर्टिफिकेट इन वैदिक गणित व पीजी डिप्लोमा इन वास्तु शास्त्र कोर्स

    अब इग्नू में पढ़िए वैदिक गणित व वास्तु शास्त्र, 


    ◆ इग्नू ने लांच किया सर्टिफिकेट इन वैदिक गणित व पीजी डिप्लोमा इन वास्तु शास्त्र कोर्स

    ◆ वैदिक गणित 12वीं के बाद छह माह का व स्नातक के बाद दो साल का कोर्स वास्तु शास्त्र


    सनातन ज्ञान परंपरा के प्रचार- प्रसार, दैनंदिन व्यवहार में इसके अधिकाधिक प्रयोग और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के माध्यम से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) विद्यार्थियों को दक्ष बनाने की दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में इग्नू ने सर्टिफिकेट इन वैदिक गणित व पीजी डिप्लोमा इन वास्तु शास्त्र नामक दो नए पाठ्यक्रम लांच किए हैं। ऋषियों द्वारा रचित ग्रंथों वेदों में वर्णित गणित पर आधारित सर्टिफिकेट कोर्स छह माह का व वास्तु शास्त्र पर केंद्रित पीजी डिप्लोमा कोर्स की अवधि दो साल की होगी।


    दोनों पाठ्यक्रमों में प्रवेश की प्रक्रिया गुरुवार से शुरू भी हो चुकी है। प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। दो वर्षीय डिप्लोमा पाठ्यक्रम में निवास स्थान के साथ ही व्यावसायिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान, चिकित्सालय आदि के वास्तु के संगठन के बारे में भी जानकारी दी जाएगी ।


     डिप्लोमा पाठ्यक्रम में किसी भी विषय में स्नातक के बाद प्रवेश लिया जा सकेगा। छह माह के वैदिक गणित के सर्टिफिकेट कोर्स में 12वीं पास अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकेंगे। राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किए गए ये कोर्स वाराणसी में बीएचयू स्थित इग्नू के क्षेत्रीय केंद्र के साथ ही देश के सभी केंद्रों पर संचालित होंगे


    । सर्टिफिकेट इन वैदिक गणित कोर्स तैयार किया है इग्नू नई दिल्ली की एसोसिएट प्रोफेसर व कार्यक्रम संयोजक डा. पुष्पा ने। डा. पुष्पा बताती हैं कि इस पाठ्यक्रम में वैदिक गणितीय परंपरा, वैदिक अंक गणित, वैदिक बीज गणित, वैदिक रेखा गणित शामिल है।

    आपाधापी के बीच राजकीय महाविद्यालयों के 82 शिक्षकों का तबादला

    आपाधापी के बीच राजकीय महाविद्यालयों के 82 शिक्षकों का तबादला


    प्रयागराज । प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य, असिस्टेंट प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की ऑनलाइन स्थानांतरण नीति के तहत उच्च शिक्षा निदेशालय ने 82 शिक्षकों के तबादले कर दिए। निदेशालय ने तबादले के लिए शिक्षकों से बृहस्पतिवार को ऑनलाइन आवेदन मांगे और आधी रात को तबादले की लिस्ट भी जारी कर दी।


    ऑनलाइन आवेदन के लिए शिक्षकों को काफी कम समय मिला। यही वजह रही कि तबादले के लिए कुल 367 शिक्षकों ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराए और इनमें से केवल 172 शिक्षक ऑनलाइन फॉर्म भरकर आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सके। 195 शिक्षक रजिस्ट्रेशन कराने के बावजूद आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके।


     जिन 172 शिक्षकों ने  आवेदन की प्रक्रिया पूरी की, उनमें से 113 शिक्षकों के आवेदनों को संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्यों ने अनुमोदित कर आगे बढ़ाया। 21 शिक्षकों के आवेदन उनके प्राचार्यों ने निरस्त कर दिए, जबकि 38 शिक्षकों के आवेदन प्राचार्यों के पास लंबित पड़े हैं। यानी ये शिक्षक तबादले की अर्हता पूरी नहीं कर रहे थे।

    Friday, July 1, 2022

    UP : माध्यमिक विद्यालयों में भी शुरू होगा स्कूल चलो अभियान, जल्द जारी होंगे विभागीय दिशा निर्देश

    UP : माध्यमिक विद्यालयों में भी शुरू होगा स्कूल चलो अभियान, जल्द जारी होंगे विभागीय दिशा निर्देश 


    लखनऊ : अब माध्यमिक विद्यालयों व उच्च शिक्षा संस्थानों की भी गर्मी की छुट्टियां खत्म हो गई हैं, शुक्रवार को सभी स्कूल-कालेज खुल जाएंगे। प्राथमिक स्कूलों की तर्ज पर स्कूल चलो अभियान माध्यमिक शिक्षा शुरू करने की तैयारी है। इससे छात्र-छात्राओं की ड्राप आउट दर कम करके शत-प्रतिशत नामांकन कराया जा सकेगा। माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी 10 मई को ही इसका एलान कर चुकी हैं, जल्द विभाग इसके दिशा-निर्देश जारी करेगा ।



    बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालय छुट्टियों के बाद 16 जून को ही खुल गए हैं। विभाग कक्षा 9 व 11 में छात्र- छात्राओं के पंजीकरण के साथ ही हाईस्कूल व इंटर परीक्षा के लिए फार्म भरने का कार्यक्रम भी जारी करेगा। 


    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एकेडमिक कैलेंडर में पहली बार विद्यार्थियों के सतत मूल्यांकन के लिए पांच मासिक परीक्षाएं भी कराएगा। पहली परीक्षा जुलाई माह में ही होनी है, इसमें बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाएंगे। वहीं, अगस्त में होने वाली परीक्षा में वर्णनात्मक सवाल पूछे जाएंगे।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग में अभी तक पाठ्य पुस्तकों का प्रबंध नहीं हो सका है। बेसिक शिक्षा विभाग परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराता है। 

    CUET UG 2022 : 10 लाख स्टूडेंट्स, 1000 परीक्षा केंद्र, एनटीए की CUET UG परीक्षा 15 जुलाई से

    CUET UG 2022 : 10 लाख स्टूडेंट्स, 1000 परीक्षा केंद्र, एनटीए की CUET UG परीक्षा 15 जुलाई से

    10 लाख उम्मीदवार और हर उम्मीदवार ने कम से कम पांच यूनिवर्सिटी के लिए अप्लाई किया है। तकरीबन कुल 60000 विषयों का कॉम्बिनेश। ऐसा है पहली बार लिए जाने वाले कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम का आंकड़ा। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी 86 यूनिवर्सिटी के अंडर ग्रेजुएट कोर्सेज में एडमिशन के लिए यह परीक्षा 15 जुलाई से 10 अगस्त तक आयोजित कराएगी। एनटीए के आधिकारियों की मानें तो नतीजे 20 अगस्त तक जारी हो जाएंगे।


    एनटीए के एक अधिकारी ने नाम न लेने की शर्त पर बताया कि एजेंसी सीबीटी परीक्षा 554 शहरों में भारत में और विदेशों के 13 शहरों में आयोजित करेगी। जिसके लिए करीब 800-1000 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। परीक्षा के लिए करीब 10 लाख उम्मीदवारों ने आवेदन किया है और एक उ्ममीदवार ने कम से कम 5 यूनिवर्सिटी के लिए आवेदन किया है। इस तरह कुल आवेदनों की संख्या 50 लाख से भी ज्यादा हो सकती है। 

    एनटीए के अधिकारी ने बताया कि नीट और जेईई में कोई विषय का कॉम्बिनेशन नहीं होता था, लेकिन यहां सीयूईटी में 60,000 कॉम्बिनेशन हैं, जो इस परीक्षा को एक बड़ी परीक्षा बनाता है। इसलिए यह परीक्षा 10 दिन में 15 शिफ्टों में की जाएगी।

    लखीमपुर खीरी : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

    लखीमपुर खीरी : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।

    डिग्री शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 किए जाने के फैसले पर रोक

    डिग्री शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 किए जाने के फैसले पर रोक


    प्रयागराज :  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेग्युलेशन के अनुसार तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था, जिसकी वैधता को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने याचिका करने वाले चंद्र मोहन ओझा व 21 अन्य शिक्षकों से अपील पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है और राज्य सरकार को उसके बाद चार सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।



     अपील में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2010 में रेग्युलेशन संशोधित किया और अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयुसीमा 65 वर्ष कर दी, जिसे राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2010 को आंशिक रूप से अपनाया है। लेकिन जब तक विश्वविद्यालय अपनी परिनियमावली संशोधित नहीं कर लेते, इसका लाभ उच्च शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों को नहीं मिल सकता। कहा गया कि एकल पीठ ने सरकार से जवाब मांगे बगैर निर्देश दिया है इसलिए उसे रद्द किया जाए।

    आज से खुलेंगे यूपी बोर्ड के स्कूल, शिक्षकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति लगेगी

    आज से खुलेंगे यूपी बोर्ड के स्कूल, शिक्षकों की बायोमीट्रिक उपस्थिति लगेगी

    लखनऊ : ग्रीष्मावकाश के बाद प्रदेश में यूपी बोर्ड से जुड़े राजकीय, सहायता प्राप्त व निजी माध्यमिक विद्यालय शुक्रवार से खुलेंगे। इसके साथ ही राजकीय इंटर कॉलेजों में शिक्षकों की बायोमीट्रिक अटेंडेंस भी लगनी शुरू होगी। हालांकि यह अभी अनिवार्य नहीं होगी। इसका ट्रायल चलेगा और जहां कोई तकनीकी दिक्कत आ रही होगी, पहले उसे दूर किया जाएगा। यही नहीं सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भी जल्द बायोमीट्रिक हाजिरी लगानी शुरू होगी। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक आराधना शुक्ला ने बताया कि विभाग की सौ दिन की कार्य योजना में बायोमीट्रिक अटेंडेंस शुरू करना शामिल था। इस क्रम में राजकीय विद्यालयों में मशीनें लगवाने के साथ ही उनका ट्रायल भी कराया गया है।

    चिंताजनक : माध्यमिक शिक्षा विभाग में हिंदी के शिक्षक पढ़ा रहे जीव विज्ञान, वर्ष 2018 के बाद से नहीं हो सकी भर्ती।

    चिंताजनक : माध्यमिक शिक्षा विभाग में हिंदी के शिक्षक पढ़ा रहे जीव विज्ञान, वर्ष 2018 के बाद से नहीं हो सकी भर्ती।

    प्रयागराज : राजकीय विद्यालयों में पढ़ाई-लिखाई की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रदेश के 2332 राजकीय हाईस्कूलों और इंटर कॉलेजों में शिक्षकों के स्वीकृत पदों की तुलना में एक तिहाई से अधिक पद खाली हैं। इसका नतीजा है कि स्कूल में तैनात एक विषय के शिक्षक दूसरे विषय भी पढ़ा रहे हैं। मसलन, प्रयागराज में गंगापार के एक स्कूल में हिन्दी के शिक्षक 12वीं में जीव विज्ञान पढ़ा रहे हैं तो कक्षा 9 और 10 में संस्कृत-हिन्दी के शिक्षक गृह विज्ञान की कक्षाएं ले रहे हैं।

    राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फूलपुर में जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान और गणित, जीजीआईसी हंडिया में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, गणित तथा नागरिक शास्त्रत्त्, जीजीआईसी धनुपुर में गणित, रसायन विज्ञान और भौतिक विज्ञान की शिक्षिका नहीं हैं। कमोवेश यही स्थिति अधिकांश स्कूलों की हैं। शिक्षकों के अभाव में प्रधानाचार्यों ने वैकल्पिक व्यवस्था बना रखी है। जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उन्हीं से बाकी विषय पढ़वाए जा रहे हैं।

    हालांकि कार्रवाई के डर से कोई भी प्रधानाचार्य इस विषय पर खुलकर बोलने को तैयार नहीं है पर एक बात तो तय है कि शिक्षक न होने पर या तो वह विषय स्कूल में पढ़ाया ही नहीं जा रहा या फिर दूसरे विषय का शिक्षक पढ़ा रहा है।

    शिक्षकों के 37 प्रतिशत पद हैं खाली: प्रदेश के 2332 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के 37 प्रतिशत पद खाली हैं। इन स्कूलों में प्रवक्ता के 4700 व सहायक अध्यापक के 19300 यानी कुल 24000 पद स्वीकृत हैं। इनमें से 2717 प्रवक्ता और 12294 सहायक अध्यापक कार्यरत हैं। प्रवक्ता के 1986 व सहायक अध्यापक के 7006 कुल 9882 पद खाली हैं। स्वीकृत 24000 पदों के सापेक्ष 37.46 प्रतिशत पद खाली हैं। यही नहीं, प्रधानाचार्य के स्वीकृत 430 में से 342 पद रिक्त हैं।


    वर्ष 2018 के बाद से नहीं हो सकी भर्ती

    2018 के बाद से राजकीय स्कूलों में सहायक अध्यापकों की भर्ती नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने 2018 में 15 विषय में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) के 10768 पदों पर भर्ती निकाली थी। कंप्यूटर विषय में 1667 पदों के मुकाबले केवल 36 शिक्षकों का चयन हुआ था। विज्ञान में 1045 पदों में से केवल 84 पर चयन हुआ था और बाकी पद रिक्त रह गए थे।

    राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के पदस्थापन में समानता नहीं है। जिला मुख्यालय वाले स्कूलों में बिना आवश्यकता के शिक्षक भरे हुए हैं तो ग्रामीण क्षेत्र में सालों से पद रिक्त हैं।

    डॉ. रवि भूषण, प्रदेश महामंत्री राजकीय शिक्षक संघ

    Thursday, June 30, 2022

    ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीडिंग और आधार वेरिफिकेशन में जूझ रहे बेसिक शिक्षक

    ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीडिंग और आधार वेरिफिकेशन में जूझ रहे बेसिक शिक्षक 


    परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन और आधार वैरिफिकेशन शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है। 30 जून तक कार्य पूरा करने के दबाव के बीच नेटवर्क और सर्वर डाउन होने की समस्या से शिक्षक परेशान हैं।


    आधार कार्ड बनाने के लिए विभाग की ओर से विद्यालयों में समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते बगैर आधार कार्ड के प्रवेश पाए बच्चों का डीबीटी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है।


     विभाग ने निर्देश दिए हैं कि प्रेरणा पोर्टल और यू-डीआईएस पर हर छात्र का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों का आधार वेरिफिकेशन किया जाए और अगर किसी भी बच्चे के पास आधार नहीं है तो उसे तुरंत बनवाकर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। 


    प्रयासों के बाद भी पोर्टल पर नामांकन अपलोड करने का काम गति नहीं पकड़ पा रहा था। अंतिम तिथि घोषित होने, बार-बार बीआरसी से संख्या पूछे जाने और कार्य पूर्ण करने की सख्ती के बीच रजिस्ट्रेशन और आधार वेरिफिकेशन में जूझते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य कार्यों की आनलाइन फीडिंग का भी शिक्षकों पर दबाव है।

    बेसिक शिक्षा का हाल : तिमाही परीक्षा आई पर किताबें नहीं मिल पाईं

    कैसे होगी पढ़ाई? तीन माह बाद भी नहीं आ पाईं पुस्तकें 🤔

    बेसिक शिक्षा का हाल : तिमाही परीक्षा आई पर किताबें नहीं मिल पाईं



    परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र शुरू होने के तीन महीने बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिल पाईं हैं। नई शिक्षा नीति के तहत प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में पहली बार तिमाही परीक्षाएं होंगी। जो कि जुलाई के अंत में हो सकती है। शिक्षा विभाग परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।


    ऐसे में बिना किताब बच्चे परीक्षाओं की तैयारी कैसे करेंगे। इससे पहले राज्य सरकार ने मिशन प्रेरणा के तहत साल में दो बार स्टूडेंट असेसमेंट टेस्ट लेने का निर्णय किया था, लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इस बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बेसिक शिक्षा विभाग साल में चार बार परीक्षाएं लेगा। हर तीन महीने में अलग लक्ष्य तय किए जाएंगे।


    परिषदीय विद्यालय में बीते अप्रैल माह से ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू है, लेकिन अभी तक छात्रों को पढ़ने के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें नहीं आ पाई हैं। अधिकांश छात्र पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिनके पास किताब ही नहीं है। 


    विभाग का कहना है कि पाठ्य पुस्तकें शासन स्तर से आती हैं। उसके लिए टेंडर जारी हो चुका है। सितंबर माह से शासन से जिलों में किताबें आनी शुरू हो जाएंगी। सत्यापन के बाद उसका वितरण छात्रों में करा दिया जाएगा। सवाल उठ रहा है कि नए सत्र के आरम्भ में ही छात्रों को विभाग नई पाठ्य पुस्तकें क्यों नहीं उपलब्ध करा पा रहा है।


    बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के शैक्षणिक परिवेश को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बेहतर बनाने की सरकारी कोशिश जारी है। मिशन कायाकल्प से अवस्थापना सुविधा बेहतर बनाने के लिए भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। 


    कम्पोजिट ग्रांट से विद्यालय व्यवस्था प्रबंधन के लिए छात्र संख्या के आधार पर एसएमसी के खाते में पहले की तुलना में अधिक धनराशि शासन से आ रही है। पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी किताब भी छात्रों को समय से नहीं मिल पा रही हैं। 


    प्रदेश में सरकार किसी भी दल का हो, लेकिन पाठ्य पुस्तकों के वितरण में देरी की समस्या पिछले डेढ़ दशक से है। जुलाई अगस्त से पहले पाठ्य पुस्तकें नहीं आ पाती हैं। जिले से लेकर ब्लाक व स्कूलों में किताबों के पहुंचने में अक्सर सितंबर-अक्तूबर माह गुजर जाता है। देर से किताब पहुंचने के बाद शिक्षक उसका वितरण छात्रों में करते हैं।


    विभाग का कहना है कि नई पाठ्य पुस्तक के अभाव में पढ़ाई प्रभावित नहीं है। क्योंकि पिछले सत्र समाप्ति के समय शिक्षक छात्रों से पुरानी किताबें एकत्र करा लिए थे।

    विकल्प न भरना ग्रेच्युटी न देने का आधार नहीं, हाईकोर्ट ने फिर लगाई गई आदेश की मुहर, देखें हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आर्डर

    विकल्प न भरना ग्रेच्युटी न देने का आधार नहीं, हाईकोर्ट ने फिर लगाई गई आदेश की मुहर, देखें हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आर्डर 



    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापक की 60 साल से पहले मृत्यु होने पर इस आधार पर भी ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं रोका जा सकता है कि उसने 60 साल में सेवानिवृत्त होने का विकल्प नहीं दिया था। कोर्ट ने मामले में सभी याचियों को 6 सप्ताह के भीतर आठ फीसदी की दर से ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने शिखा शर्मा, मंजू कुमारी सहित 28 याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करते हुए दिया।


    " याची की ओर से तर्क दिया गया कि उनके पति की मृत्यु सेवानिवृत्ति होने से पहले ही हो गई है। उन्होंने सेवा के दौरान विकल्प का चुनाव नहीं किया था। इस आधार पर डीआईओएस ने ग्रेच्युटी के भुगतान करने से मना कर दिया। याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


    समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

    समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

    प्रयागराज : समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नौंवी और दसवीं के नव प्रवेशी विद्यार्थियों का डाटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया दो जुलाई से शुरू होगी। वहीं पुराने विद्यार्थियों के डाटा फीडिंग की प्रक्रिया 20 जुलाई से शुरू होगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी त्रिनेत्र कुमार सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय एवं कालेज प्रबंधकों को कार्यक्रम से अवगत कराया गया है। उन्हें पत्र भी लिखा गया है।

    Board Results : सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा के नतीजे 15 जुलाई तक हो सकते हैं घोषित

    Board Results : सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा के नतीजे 15 जुलाई तक हो सकते हैं घोषित

    सीबीएसई और सीआईएससीई दसवीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे 15 जुलाई तक घोषित कर सकते हैं। सूत्रों ने बुधवार को बताया कि इस संबंध में मूल्यांकन प्रक्रिया चल रही है।


    कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021-2022 के लिए शैक्षणिक सत्र को विभाजित करना और दसवीं व 12वीं कक्षा के लिए पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाना सीबीएसई द्वारा घोषित बोर्ड परीक्षाओं के लिए विशेष मूल्यांकन योजना का हिस्सा था। सीआईएससीई ने भी इसका पालन किया था। सीबीएसई की दसवीं कक्षा की परीक्षा 24 मई को संपन्न हुई, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 15 जून को समाप्त हुई थी। सीआईएससीई की दसवीं कक्षा की परीक्षा 20 मई को और 12वीं कक्षा की परीक्षा 13 जून को संपन्न हुईं थी। अधिकांश राज्य बोर्डों ने परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। सीबीएसई और सीआईएससीई ने परीक्षाएं महामारी के मद्देनजर देर से कराई थी।

    गौरतलब है कि सीबीएसई ने कोरोना के चलते इस अकादमिक वर्ष को दो टर्म में बांटा था। टर्म-1 की परीक्षा नवंबर-दिसंबर 2021 में आयोजित हुई थी। टर्म-1 में स्टूडेंट्स से ऑब्जेक्टिव टाइप वाले प्रश्न पूछे गए थे। टर्म-1 परीक्षा के तीन माह बाद रिजल्ट जारी किया गया था।

    डिग्री कॉलेज शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु के फैसले पर रोक

    डिग्री कॉलेज शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु के फैसले पर रोक

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेग्युलेशन के अनुसार तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था, जिसकी वैधता को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने याचिका करने वाले चंद्र मोहन ओझा व 21 अन्य शिक्षकों से अपील पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है और राज्य सरकार को उसके बाद चार सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।


    अपील में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2010 में रेग्युलेशन संशोधित किया और अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयुसीमा 65 वर्ष कर दी, जिसे राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2010 को आंशिक रूप से अपनाया है। लेकिन जब तक विश्वविद्यालय अपनी परिनियमावली संशोधित नहीं कर लेते, इसका लाभ उच्च शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों को नहीं मिल सकता। कहा गया कि एकल पीठ ने सरकार से जवाब मांगे बगैर निर्देश दिया है इसलिए उसे रद्द किया जाए।

    यूपी बोर्ड : इंटर के अंकपत्र भेजे गए क्षेत्रीय कार्यालय, जानें कॉलेजों में कब से होगा वितरण

    यूपी बोर्ड : इंटर के अंकपत्र भेजे गए क्षेत्रीय कार्यालय, जानें कॉलेजों में कब से होगा वितरण

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) 24 मार्च से 13 अप्रैल के बीच संपन्न हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल से 4 मई के बीच प्रयोगात्मक परीक्षा संपन्न हुई। 27 अप्रैल से सात मई के बीच मूल्यांकन कार्य संपन्न हुआ।


    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इंटरमीडिएट के अंकपत्र भेजे जा रहे हैं। मंगलवार तक क्षेत्रीय कार्यालयों से अंकपत्र कॉलेजों तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद विद्यार्थियों को अंकपत्र वितरण शुरू हो जाएगा। परिषद ने अभी इंटर के ही अंकपत्र भेजे हैं। दरअसल इन कक्षाओं के सभी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे संस्थानों में दाखिले के लिए अंकपत्र होना जरूरी है। ऐसे में परिषद ने पहले इंटर के अंकपत्र भेजे हैं। हालांकि यूपी बोर्ड अफसरों का कहना है कि जल्द ही हाईस्कूल के भी अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों को भेज दिए जाएंगे।

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) 24 मार्च से 13 अप्रैल के बीच संपन्न हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल से 4 मई के बीच प्रयोगात्मक परीक्षा संपन्न हुई। 27 अप्रैल से सात मई के बीच मूल्यांकन कार्य संपन्न हुआ। लगभग सवा महीने बाद 18 जून को परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम जारी किया। इसमें इंटरमीडिएट में कुल 24 लाख से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत रहे। 85.33 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।

    परिणाम जारी करने के बाद ही बोर्ड विद्यार्थियों के अंकपत्र भेजने की तैयारी में जुट गया था। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक इंटरमीडिएट के अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे जा रहे हैं। मंगलवार तक सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में अंकपत्र पहुंच जाएंगे। इसके बाद कॉलेज से प्रधानाचार्य विद्यार्थियों को वितरित करेंगे। इसके बाद जल्द ही हाईस्कूल के अंकपत्र भी क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे जाएंगे।

    यूपी बोर्ड : इंटर के विद्यार्थियों को अगले हफ्ते मिलेंगे अंकपत्र

    यूपी बोर्ड की इंटर परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं को पहले अंकपत्र सह प्रमाणपत्र मिलेंगे। 18 जून को घोषित बोर्ड परीक्षा के परिणाम के अंकपत्र प्रयागराज समेत पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों को दो दिन पहले ही मिले हैं। क्षेत्रीय कार्यालयों में टेबुलेशन रिकॉर्ड से मिलान, जिला और विद्यालयवार व्यवस्थित करने आदि में चार-छह दिन लगेगा।

    अधिकारियों के अनुसार अगले सप्ताह अंकपत्र जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेज दिए जाएंगे, जहां से विद्यार्थियों को बांटने के लिए स्कूलों को दिए जाएंगे। जल्द हाईस्कूल के अंकपत्र भी भेजे जाएंगे। यूपी बोर्ड के प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव विनय कुमार गिल ने बताया कि 12वीं के अंकपत्र मिल गए हैं। जरूरी औपचारिकता के बाद जिलों को भेज दिए जाएंगे।

    सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एक जुलाई से शुरू होंगे कक्षा नौ व 11 में छात्रों के पंजीकरण

    सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एक जुलाई से शुरू होंगे कक्षा नौ व 11 में छात्रों के पंजीकरण

    लखनऊ : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों के कक्षा नौ व 11 के छात्रों का पंजीकरण एक जुलाई से शुरू हो जाएगा। परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने बोर्ड की वेबसाइट पर सभी स्कूलों को अपने संस्थागत छात्रों की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान संस्थागत छात्रों के प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली तो संबंधित स्कूल के खिलाफ मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी।


    बोर्ड ने सभी स्कूलों को इसकी सूचना भेज दी है। जो छात्र सभी विषयों में उत्तीर्ण हों उनका स्कूलों को पंजीकरण कराना होगा। जो छात्र दूसरे स्कूल से आ रहे हैं तो उन्हें वैध प्रमाणपत्र दर्शाने होंगे। स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे सुनिश्चित कर लें कि छात्र गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय का तो नहीं है। यदि गौर मान्यता प्राप्त विद्यालय के छात्रों का पंजीकरण किया तो स्कूल की मान्यता भी जा सकती है। वहीं, सभी स्कूलों को कक्षा नौ से 12 तक में अध्ययनरत छात्रों की सूची भी बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। बोर्ड ने साफ किया है कि एक बार छात्र की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद विषय में बदलाव को लेकर आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। स्थानांतरण वाले मामले में विचार-विर्मश किया जाएगा।

    विलंब शुल्क 2000 रुपये
    बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 के छात्रों की पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। प्रति छात्र पंजीकरण शुल्क 300 रुपये निर्धारित है। इसके बाद विलंब शुल्क के साथ 15 अक्तूबर तक पंजीकरण होंगे। इस दौरान प्रति छात्र पंजीकरण शुल्क 2300 रुपये निर्धारित किया गया है।

    बोर्ड रिजल्ट आया नहीं 11 में हो गए दाखिले
    सीबीएसई बोर्ड कक्षा 10 का परीक्षा परिणाम आना अभी बाकी है। इससे पहले ही अधिकतर स्कूलों ने अपने यहां पर कक्षा 11 के दाखिले पूर्ण कर लिए हैं। स्कूलों ने प्री बोर्ड परीक्षा और प्रथम टर्म परीक्षा के आधार पर दाखिले लिए हैं। इनमें कई ऐसे छात्र भी हैं जो पढ़ाई बायो व मैथ्स विषय से करना चाहते हैं, लेकिन स्कूलों ने उनको मानविकी वर्ग में रखा है। सीबीएसई के सिटी समन्वयक डॉ. जावेद आलम खान ने बताया कि स्कूल टर्म प्रथम और प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर दाखिला लेकर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कितने अंक तक विज्ञान वर्ग देना है, इसकी अर्हता स्कूल तय कर सकते हैं।

    Wednesday, June 29, 2022

    बेसिक परिषदीय अध्यापकों की पदोन्नति विषयक उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा सचिव परिषद के समक्ष तर्कपूर्ण मांगपत्र प्रेषित

    बेसिक परिषदीय अध्यापकों की पदोन्नति विषयक उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा सचिव परिषद के समक्ष तर्कपूर्ण मांगपत्र प्रेषित



    प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद सृजन के संबंध में उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को दिया ज्ञापन

    प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद सृजन के संबंध में उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को दिया ज्ञापन



    CBSE : मान्यताविहीन स्कूलों के छात्रों का लिया प्रवेश तो कार्रवाई तय

    CBSE : मान्यताविहीन स्कूलों के छात्रों का लिया प्रवेश तो कार्रवाई तय



     सीबीएसई बोर्ड के स्कूल उन स्कूलों के बच्चों का 9वीं और 12वीं में प्रवेश नहीं ले सकेंगे, जिसको मान्यता नहीं मिली है। यदि कोई स्कूल ऐसा करता पाया जाता है और जांच में यह सिद्ध हो जाता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। शर्त के मुताबिक स्कूलों को एक जुलाई से स्कूल में पंजीकरण और शिक्षकों का डाटा बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। आखिरी तिथि 30 सितंबर निर्धारित है।


    प्रवेश को लेकर सख्ती की वजह यह है कि बहुत से ऐसे स्कूल हैं, जिनके विद्यार्थी पढ़ाई तो बिना मान्यता वाले स्कूलों में ही करते हैं लेकिन उनका औपचारिक पंजीकरण बोर्ड के स्कूलों में रहता है। प्रवेश के लिए बोर्ड ने यह शर्तें रखी हैं।


     • केवल अपने स्कूल के नियमित विद्यार्थियों का ही प्रवेश लेना होगा।

     • अगर दूसरे स्कूल के बच्चे का प्रवेश लें तो उसकी भी मान्यता होनी चाहिए।

     •11वीं में उसी विद्यार्थी का प्रवेश लिया जाए, जिसका हाईस्कूल रिजल्ट बोर्ड ने जारी किया हो एक कक्षा में 40 से ज्यादा बच्चे नहीं बैठाने होंगे।

     •हर स्कूल में 30 बच्चे पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है बोर्ड से अनुमति लेने के बाद ही सेक्शन की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

     •दिव्यांग बच्चों को सहूलियत देने की अनिवार्यता होगी स्कूलों को जिस विषय की मान्यता मिली है, उसी में प्रवेश लेना होगा।

     •बिना मान्यता वाले विषय में प्रवेश लेने पर स्कूल मान्यता रद कर दी जाएगी।


     सीबीएसई ने 9वीं और 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए नियम और शर्तें जारी की हैं। इनसे सभी स्कूलों को बोर्ड की ओर से अवगत भी करा दिया गया है।

    यूपी के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे विद्यार्थी, स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां जाएंगी सुनाई

    यूपी के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे विद्यार्थी, स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां जाएंगी सुनाई

    आजादी का अमृत महोत्सव के तहत पूरे एक साल तक यह कार्यक्रम चलाया जाएगा



    लखनऊ । स्कूलों में स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां सुनाई जाएंगी। ऐसी 100 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानियों को जुटाया जाएगा और फिर इसे दिलचस्प तरीके से बच्चों को सुनाया जाएगा। ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यूपी के अलग-अलग हिस्सों के होंगे।


    केंद्रीय कौशल विकास मंत्री धमेंद्र प्रधान ने यूपी के बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द ऐसे सेनानियों के नाम और उनके जीवन वृत्त को इकट्ठा करें ताकि इनसे विद्यार्थियों को परिचित कराया जा सके।


    आमतौर पर स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र छिड़ते ही लोगों को रानी लक्ष्मी बाई, मंगल पाण्डे, झलकारी बाई, बेगम हजरतमहल, अशफाकउल्ला खान जैसे नाम ही याद आते हैं लेकिन कई ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं, जिन्होंने काकोरी काण्ड, चौरा चौरी काण्ड समेत अन्य आजादी की लड़ाइयों में हिस्सा लिया और शहीद हुए लेकिन उनका नाम केवल उनके क्षेत्र तक ही सीमित है। 

    हर जिले से ऐसे सेनानियों के नाम, फोटो और अन्य सूचनाओं को इकट्ठा किया जाएगा और फिर इस पर दिलचस्प तरीके से कहानियां लिखी जाएंगी। हर सेनानी का लोगो तैयार किया जाएगा।

    बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु प्री ‘बुकिंग’ को ऑनलाइन इश्तिहार!

    बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु  प्री ‘बुकिंग’ को ऑनलाइन इश्तिहार!



    यूपी सरकार ने अब तक बेसिक शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय या जनपद के भीतर तबादले के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है लेकिन जिले में अभी से ही परस्पर स्थानान्तरण के लिए साथियों की तलाश जारी है।


    सोशल मीडिया पर इश्तिहार देकर अपने साथियों की खोज कर प्री बुकिंग की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि तबादले के लिए शिक्षक एक दूसरे को कई तरह के लालच भी दे रहे हैं।


    कई साल से जिले के भीतर स्थानान्तरण न होने एवं बीते साल शिक्षकों का अपेक्षित संख्या में तबादले न होने से बेसिक शिक्षकों को उम्मीद है कि इस वर्ष उनके तबादले जिले के बाहर न सही लेकिन जिले के भीतर तो हो ही सकते हैं।


    कयास लगाया जा रहा है कि तबादला प्रक्रिया में एकल स्थानान्तरण के साथ परस्पर स्थानान्तरण भी किए जाएंगे। म्युचुअल ट्रांसफर को शिक्षक अधिक सुरक्षित मान रहे हैं।


    सूत्र बताते हैं कि इस स्थानान्तरण में दूसरे साथी की तलाश के लिए सोशल मीडिया पर शिक्षकों का ब्यौरा व मोबाइल नंबर दिए जा रहे हैं ताकि इच्छुक शिक्षक एक दूसरे से सम्पर्क कर सकें। बताते हैं कि परस्पर स्थानान्तरण के लिए अनेक शिक्षकों ने एक दूसरे से समझौता कर हामी भर ली है। आदेश जारी होते ही आवेदन कर दिए जाएंगे।


    पेश किए जा रहे हैं कई आफर

    मजे की बात है कि साथी की तलाश में सोशल मीडिया में कई तरह के आफर दिए जा रहे हैं। इनमें पैसों से लेकर गाड़ी व नाश्ते की व्यवस्था तक शामिल है। कुछ में आकर्षक गिफ्ट की भी पेशकश की गई है।


    सरकार की तरफ लगी हैं निगाहें

    शिक्षकों की निगाहें फिलवक्त सरकार व विभाग की तरफ हैं। उन्हें उम्मीद है कि विभाग जल्द ही तबादले के लिए आदेश जारी कर सकता है। समायोजन के साथ शिक्षकों के तबादले की संभावना के मद्देनजर यह कवायद की जा रही है। बीते दिनों शिक्षकों से सम्बन्धित आंकड़े भी विभाग द्वारा मांगे जाने से इस संभावना को बल मिला है।

    उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका,सत्र 2021-22 में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी

    उच्च शिक्षा में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी, राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्र घटने से चिंता

     
    ● 2020-21 में 50,21,277 तो 2021-22 में 45.40 लाख थे छात्र

    ● उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका


    प्रयागराज : उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं के नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका लगा है। शैक्षणिक सत्र 2021-22 में उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या में तकरीबन पांच लाख की गिरावट देखने को मिली है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तैयार प्रदेश के 51 राज्य विश्वविद्यालयों और 7875 महाविद्यालयों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

    2020-21 सत्र में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 5021277 (1860220 छात्र व 3161057 छात्राएं) विद्यार्थी पंजीकृत थे। जबकि 2021-22 में यह संख्या सिमटकर 4540605 (2177467 छात्र व 2363138 छात्राएं) हो गई। 2019-2020 में उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 41,83,992 (1969206 छात्र व 2214786 छात्राएं) थी।

    बालिका शिक्षा पर पड़ा सर्वाधिक असर : प्रयागराज। कोरोना काल में उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का सर्वाधिक असर बालिका शिक्षा पर पड़ा है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 में जहां 22,14,786 और 2020-21 में 31,61,057 छात्राओं ने उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया था, वहीं 2021-22 में बालिकाओं के नामांकन की संख्या कम होकर 23,63,138 रह गई। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के प्रयासों को कोरोना काल में झटका लगा है। इस सत्र में नामांकन संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

    चार सालों में संस्थानों के नामांकन पर एक नजर

    वर्ष छात्र छात्राएं योग

    2021-22 2177467 2363138 4540605

    2020-21 1860220 3161057 5021277

    2019-20 1969206 2214786 41,83,992

    2018-19 2074205 2308322 43,82,527

    कोरोना काल में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के नामांकन में कमी दर्ज की गई है। 2022-23 सत्र में इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

    डॉ. अमित भारद्वाज, उच्च शिक्षा निदेशक