टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक निकालेंगे मशाल जुलूस
13 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी जैसी नई शर्तें थोपना अनुचित है।
मुख्य विधिक प्रभारी विवेकानन्द ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता हटाने के लिए न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संतोष तिवारी ने आंदोलन को निर्णायक बताया।
इसके अलावा कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान, शालिनी मिश्रा तथा ओपी त्रिपाठी समेत कई शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की।
टीईटी अनिवार्यता के विरोध हेतु 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालयों में मशाल जुलूस के लिए किया जा रहा शिक्षकों से व्यापक जनसंपर्क
10 अप्रैल 2026
लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी।
महासंघ के सभी घटक संगठनों द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर जनसंपर्क किया जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय व समन्वयक विजय कुमार बंधु ने बताया कि विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आंदोलन को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा व न्यायपूर्ण व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानकर समर्थन दिया है।
आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की कि जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर अधिकतम संख्या में सहभागिता सुनिश्चित करें।
टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद
6 अप्रैल 2026
लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है।
शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।
सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।
टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी
23 संगठनों का महासंघ एकजुट,
लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।
महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई।
दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।
टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक
प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।
महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।