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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, August 12, 2026

    परख सर्वे की निजी स्कूलों में भी कराई जाएगी तैयारी, SCERT परिणाम सुधार के लिए कर रहा प्रयास जिलों में भी होंगी कार्यशालाएं

    परख सर्वे की निजी स्कूलों में भी कराई जाएगी तैयारी, SCERT परिणाम सुधार के लिए कर रहा प्रयास जिलों में भी होंगी कार्यशालाएं


    लखनऊ। प्रदेश में परख राष्ट्रीय सर्वे में प्रदर्शन सुधारने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। अगले साल होने वाले सर्वे में राजकीय विद्यालयों के साथ ही निजी स्कूलों का भी मूल्यांकन होगा और उसके अनुसार सुधार के किए जाएंगे।

    परख डैशबोर्ड पर 2024 में हुए सर्वे का परिणाम अपलोड कर दिया गया है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से परिणाम में सुधार और आगे की तैयारियों को लेकर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी शुरू कर दिया गया है। अब निजी स्कूलों के शिक्षकों को भी प्रशिक्षण में शामिल कर आगे सुधार के लिए उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी जाएगी।


     केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से विभिन्न कक्षाओं में छात्रों की दक्षता को आंकने के लिए हर तीन साल पर यह सर्वे कराया जाता है। प्रदेश में परीक्षा के लिए छात्रों की संख्या व परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाता है। फिर परीक्षा परिणाम के औसत के आधार पर प्रदेश का परिणाम तैयार होता है। पिछले साल कक्षा तीन में भाषा में प्रदेश ने 68 व गणित में 64 अंक प्राप्त किए थे।

    यह राष्ट्रीय औसत क्रमशः 64 व 60 से अधिक था। ऐसे में विभिन्न मानकों में अन्य कक्षाओं में भी परिणाम को सुधारा जाएगा। छात्रों को ओएमआर शीट पर परीक्षा देने के लिए तैयारी कराई जाएगी। मॉक टेस्ट से तैयारी परखी जाएगी। यही वजह है कि अगले साल होने वाले सर्वे के लिए एससीईआरटी ने अभी से तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत मंडल के बाद जिला स्तर पर कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा।

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों से सम्बन्धित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों से सम्बन्धित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में

    नियमित के समान संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को लाभ दे राज्य सरकार : हाईकोर्ट, आदेश के पालन के लिए चार महीने का दिया समय

    नियमित के समान संविदा पर कार्यरत विशेष शिक्षकों को लाभ दे राज्य सरकार : हाईकोर्ट,  आदेश के पालन के लिए चार महीने का दिया समय


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक अहम फैसले में राज्य सरकार को निर्देश दिया कि सरकारी स्कूलों में वर्षों के अनुबंध पर कार्यरत विशेष शिक्षकों/संसाधन शिक्षकों को वेतन समानता और परिणामी सेवा लाभप्रदान करें।


    अदालत ने फैसले में कहा कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित करने के लिए नियुक्त इन शिक्षकों को उन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता है जो संबंधित नियमित शिक्षकों को उपलब्ध हैं। कोर्ट ने अधिकारियों को इन निर्देशों का पालन करने के लिए चार महीने का समय दिया है।

    न्यायमूर्ति इरशाद अली की एकल पीठ ने यह फैसला याचिकाकर्ताओं, विपिन मिश्रा और 23 अन्य लोगों द्वारा दायर एक याचिका को स्वीकार करके दिया। याचियों ने नियमित शिक्षकों के समान लाभ देने का आग्रह किया था। याचियों को जिला स्तरीय चयन समितियों और सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से भ्रमणशील शिक्षकों और संसाधन शिक्षकों के रूप में नियुक्त किया गया था। उनकी नियुक्ति संविदा पर हुई थी और उनका प्रारंभिक पारिश्रमिक 6000 रुपये प्रति माह तय किया गया था।

    याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने नियमित विशेष शिक्षकों के समान कर्तव्यों का निर्वहन किया। वे सरकारी स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षा प्रदान करने और उनका आकलन, पुनर्वास, परामर्श और निरंतर निगरानी करने का काम करते थे। उनके पास भारतीय पुनर्वास परिषद द्वारा निर्धारित योग्यताएं हैं और उन्होंने वर्षों तक काम किया है। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि समानता से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत भेदभाव के बराबर है।

    पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्य शिक्षकों की सेवा शर्तों की अनदेखी करते हुए योजना के लाभों का फायदा उठाकर चुनिंदा रूप से इसे लागू नहीं कर सकता है। याचिका को स्वीकार करते हुए, न्यायालय ने राज्य सरकार समेत प्रतिवादियों को याचिकाकर्ताओं को वेतनमान में समानता और आईईडीसी योजना के खंड 12.3 के तहत सभी परिणामी सेवा लाभ देने का निर्देश दिया। इसमें वार्षिक वेतन वृद्धि, स्वीकार्य अवकाश लाभ, जहां भी लागू हो मातृत्व लाभ और सेवा की निरंतरता शामिल है।

    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी, उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी,  उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    12 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को जल्द लागू करने की कवायद तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है।

    योजना के तहत ऐसी छात्राओं को भी लाभ दिया जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से ग्रस्त दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए उनकी दृष्टि व मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी है। साथ ही कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों और मुख्य चिकित्साधिकारी ने उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित की हो। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    50 हजार छात्राओं को देंगे स्कूटी: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए सरकार ने 400 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इससे 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर होगी।



    कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में राहत, टॉप पांच प्रतिशत मेधावियों का होगा चयन पाठ्यक्रम में विद्यार्थी कम हुए तो भी एक मेधावी छात्रा को मिलेगी स्कूटी

    400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है, 50 हजार छात्राओं को पहले चरण में ही मिल सकती है स्कूटी

    कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप फाइव प्रतिशत निकालने में आ रही है समस्या

    11 अगस्त 2026
    लखनऊ। यूपी में विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बहुत कम विद्यार्थी हैं, उसमें भी न्यूनतम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी मिलेगी। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत निकालने पर एक से कम संख्या आ रही है। ऐसे में कम से कम एक छात्रा को स्कूटी मिलेगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से मेधावी छात्राओं के संबंध में जानकारी मांगी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर स्नातक पास करने वाली मेधावी छात्राओं के परीक्षा परिणाम सहित जानकारी, शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष पास करने वाली वह छात्राएं, जिनके 80 प्रतिशत से अधिक अंक हैं या आठ से अधिक सीजीपीए (क्यूमेलेटिव ग्रेड प्वाइंट  ऐवरेज) है। 

    वहीं 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष 85 प्रतिशत अंक या फिर 8.5 सीजीपीए व इससे अधिक पाने वाली मेधावी छात्राओं और इससे भी अधिक अंक प्रतिशत पाने वाली मेधावी छात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। पोर्टल पर रिजल्ट को अपलोड कर उसकी टेस्टिंग का काम भी शुरू हो गया है और सभी संस्थानों से डाटा लेकर उसका सत्यापन भी किया जाएगा। 

    बैचलर आफ वोकेशनल व फाइन आर्ट्स सहित कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें टॉप पांच मेधावी छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है। ऐसे में अब कम से कम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी मिलेगी। ऐसे कोर्स जिसमें 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है तो भी उसमें किसी न किसी एक सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा को स्कूटी देने की तैयारी है।


    विश्वविद्यालय-कॉलेजों से मंगवाए जा रहे आंकड़े

    फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय व कॉलेजों से आंकड़े मंगवाने के साथ-साथ कम छात्र संख्या वाले कोर्स व मानक के अनुसार अंक प्रतिशत न होने पर उस कोर्स की मेधावी छात्रा को राहत देने पर मंथन कर रहा है। जिससे उन्हें भी मुफ्त स्कूटी मिल सके। फिलहाल मेधावी छात्राओं को जल्द इसका तोहफा देने की तैयारी है।

    स्कूटी के लिए जरूरत पर बजट बढ़ाया जाएगा

    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। न्यूनतम 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में पहले चरण में ही 50 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगे और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा।




    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    यूपी बेसिक शिक्षा में शिक्षकों के 60,958 पद रिक्त, नगर क्षेत्र के 11508 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव प्रेषित

    यूपी बेसिक शिक्षा में शिक्षकों के 60,958 पद रिक्त,  नगर क्षेत्र के 11508 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव प्रेषित 

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र 2026 के प्रथम मंगलवार को विधायक श्री तेज प्रताप सिंह (करहल) द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-51 के जवाब में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में छात्र-शिक्षक अनुपात और शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं।

    प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में निर्धारित मानक के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35:1 है।

    विधानसभा में पूछे गए सवाल में शिक्षकों के स्वीकृत पदों और वर्तमान रिक्तियों की जानकारी भी मांगी गई थी। विभाग के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती के कुल 3,27,804 स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में 60,958 पद रिक्त हैं।

    रिक्त पदों पर भर्ती के सवाल पर सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन के लिए शासन की अधिसूचना संख्या-415/79-शि0-1-2023-1-क-14-2023, दिनांक 21 अगस्त 2023 जारी की जा चुकी है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में नगर क्षेत्र के सहायक अध्यापकों के 11,508 पदों पर सीधी भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय द्वारा 17 मई 2026 को अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को भेजा गया है।

    इससे स्पष्ट है कि सरकार के सामने बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में रिक्त शिक्षक पदों का मुद्दा मौजूद है और भर्ती प्रक्रिया के लिए कम से कम 11,508 पदों का अधियाचन आयोग को भेजे जाने की जानकारी विधानसभा में दी गई है।

    हालांकि प्रश्नोत्तरी में यह भी उल्लेखनीय है कि रिक्त पदों पर भर्ती किए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के बाद “यदि नहीं, तो क्यों?” का प्रश्न ही नहीं उठता, और विभागीय उत्तर में भी आगामी भर्ती की समयसीमा अथवा सभी 60,958 रिक्त पदों को भरने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है।

    विधानसभा में प्रस्तुत यह जवाब ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में स्वीकृत पदों और कार्यरत शिक्षकों के बीच रिक्तियों का आंकड़ा हजारों में है। ऐसे में 30:1 और 35:1 के निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात को जमीन पर बनाए रखने के लिए रिक्त पदों को भरना कितना जरूरी है, यह सवाल भी इस प्रश्नोत्तरी के आंकड़ों के साथ एक बार फिर सामने आता है।




    प्राथमिक शिक्षकों के 11508 रिक्त पदों का अधियाचन पोर्टल पर अपलोड, करीब 30 वर्ष बाद नगरीय विद्यालयों के लिए अधियाचन प्रेषित

    प्रयागराज। प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार हैं। नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के लिए 11,508 पदों का अधियाचन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के ई-पोर्टल पर अपलोड किया गया है। नगरीय विद्यालयों में इतनी संख्या में रिक्त पदों पर अधियाचन करीब 30 वर्ष बाद अपलोड किए गए हैं।

    ग्रामीण अंचल के विद्यालयों के लिए 48 हजार पदों का अधियाचन अपलोड करने की तैयारी की सूचना है। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधियाचन का परीक्षण कर करीब 59 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

    प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के 2.25 लाख से अधिक विद्यालय हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जून में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी ने नगरीय क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष रूप से अधियाचन भेजा था। विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में पदों की पुष्टि की गई थी।

    नगर क्षेत्र में 15 हजार तक हैं रिक्तियां
    नगरीय विद्यालयों में 12 से 15 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। बेसिक शिक्षा परिषद ने 11,508 पदों के लिए अधियाचन ई-पोर्टल पर अपलोड किया है। 2010 के बाद ग्रामीण अंचल में शिक्षकों की कमी को देखते हुए नगरीय क्षेत्रों के अध्यापकों के तबादले किए गए थे। इस वजह से नगरीय विद्यालयों में पद रिक्त हो गए थे। अब उन्हें भरने की कवायद तेज हो गई है।




    उत्तर प्रदेश में 60,958 सहायक अध्यापक पद रिक्त, नगर क्षेत्र के 11,508 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-153 के उत्तर में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों और भर्ती की स्थिति स्पष्ट की है।

    सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से 9 मार्च 2026 तक कुल 5,35,389 प्रशिक्षुओं को डीएलएड (D.El.Ed.) का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जबकि 1,26,371 प्रशिक्षुओं को शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई है।

    विभाग ने बताया कि वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र में सहायक अध्यापकों के 48,883 तथा नगर क्षेत्र में 12,075 सीधी भर्ती के पद रिक्त हैं।

    रिक्त पदों पर भर्ती के संबंध में सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम-2023 लागू होने के बाद परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पदों पर चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी।

    इसी क्रम में नगर क्षेत्र के 11,508 सहायक अध्यापक पदों पर सीधी भर्ती के लिए 17 मई 2026 को शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय द्वारा अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को भेजा जा चुका है। सरकार ने संकेत दिया है कि आगे की भर्ती प्रक्रिया आयोग के माध्यम से नियमानुसार संपन्न कराई जाएगी।


    Tuesday, August 11, 2026

    यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे

    यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे


    लखनऊ। प्रदेश को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। नए सत्र 2026-27 से यहां प्रवेश व पढ़ाई भी शुरू होगी। शासन ने यहां प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, कनिष्ठ लिपिक आदि के 1810 पदों का सृजन भी कर दिया है। इन स्वीकृत पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा।


    प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत 68 राजकीय इंटर कॉलेज (बालक-बालिका) तथा 58 राजकीय हाईस्कूल कुल 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों का निर्माण व हस्तांतरण किया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 68, प्रधानाध्यापक के 58, प्रवक्ता के 680, सहायक अध्यापक (एलटी) के 819 तथा कनिष्ठ सहायक के 185 नियमित पदों का सृजन किया है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भरे जाएंगे। जबकि शेष 50 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इन विद्यालयों में छठवीं व नवीं क्लास में 80-80 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

    इन राजकीय इंटर कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, कंप्यूटर, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, भौतिक विज्ञान, रसायन व जीव विज्ञान की पढ़ाई होगी। नए व हस्तांतरित विद्यालयों में से प्रतापगढ़ में एक, बलरामपुर में सात, बाराबंकी में तीन, सुल्तानपुर में चार, अयोध्या में दो, सीतापुर, रायबरेली व लखनऊ में एक-एक समेत आदि जिलों के विद्यालय शामिल हैं। 

    Monday, August 10, 2026

    छात्रवृत्ति के लिए कल से आवेदन कर सकेंगे ओबीसी छात्र, कार्यक्रम जारी, 2 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्रों को मिलेगा लाभ

    छात्रवृत्ति के लिए कल से आवेदन कर सकेंगे ओबीसी छात्र, कार्यक्रम जारी, 2 लाख रुपये तक वार्षिक आय वाले परिवारों के छात्रों को मिलेगा लाभ

    10 अगस्त 2026
    लखनऊ। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की पूर्वदशम, दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत वर्ष 2026- 27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 11 अगस्त से शुरू होगी। छात्र 11 से 25 अगस्त तक छात्रवृत्ति के लिए आवेदन कर सकेंगे। जबकि वर्ष 2026-27 सत्र के नए (फ्रेश कैटेगरी में शामिल) छात्र 11 अगस्त से 21 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं।

    इस योजना के जरिये पिछले 9 वर्षों में करीब 22 करोड़ से अधिक छात्रों को आर्थिक सहायता मिल चुकी है। वर्ष 2025-26 में पिछड़ा वर्ग के 36 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत आर्थिक सहायता प्रदान की गई। पूर्वदशम यानी कक्षा 9 और 10 की छात्रवृत्ति योजना के तहत 8.88 लाख छात्रों के बैंक खातों में कुल 219.64 करोड़ रुपये की धनराशि भेजी गई थी। इस अवधि में दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के तहत इंटरमीडिएट से लेकर उच्च शिक्षा तक के 27.86 लाख छात्रों को कुल 2882.02 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता दी गई थी।

    योजना के तहत ऐसे विद्यार्थियों को लाभ दिया जाता है, जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 2 लाख रुपये या उससे कम है। पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए आवेदन प्रक्रिया 11 अगस्त से शुरू हो रही है। उन्होंने पात्र छात्रों से निर्धारित समय सीमा के भीतर ऑनलाइन आवेदन करने की अपील की है। 




    11 अगस्त से शुरू होंगे छात्रवृत्ति आवेदन, यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया

    24 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। 

    शासनादेश के अनुसार प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को 22 जुलाई से 5 अगस्त तक अपना मास्टर डाटा छात्रवृत्ति पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक और संबंधित अधिकारी विद्यालयों की मान्यता, सीटों तथा अन्य विवरणों का सत्यापन करेंगे। अल्पसंख्यक वर्ग के निजी विद्यालयों की पोर्टल पर मार्किंग भी इसी अवधि में पूरी की जाएगी। 


    वीनीकरण श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन और हार्डकॉपी जमा करने की प्रक्रिया 11 अगस्त से 25 अगस्त तक चलेगी। विद्यालय स्तर पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, आवेदन का सत्यापन और अग्रसारण 30 अगस्त तक पूरा किया जाएगा। शासन ने लक्ष्य रखा है कि पात्र विद्यार्थियों के खातों में अक्टूबर 2026 तक लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि सीधे हस्तांतरित कर दी जाए। 

    स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं और कर दी कार्यालयों में मनमानी तैनाती, शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए थे

    स्कूलों में प्रधानाचार्य नहीं और कर दी कार्यालयों में मनमानी तैनाती, शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए the

    10 अगस्त 2026
    प्रयागराज । राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की कमी के बावजूद हाल ही में पदोन्नत प्रधानाचार्यों की तैनाती मनमाने तरीके से स्कूल के बजाय बेसिक शिक्षा विभाग के कार्यालयों में कर दी गई है। यह स्थिति तब है जबकि शासनादेश में प्राथमिकता के आधार पर स्कूलों में तैनाती के आदेश दिए गए थे।

     बीएसए, प्रधानाचार्य जीआईसी और समकक्ष पदों पर मई में पदोन्नति के बाद 30 जुलाई को जारी पदस्थापन आदेश में तमाम शिक्षकों को एससीईआरटी लखनऊ, राज्य शिक्षा संस्थान, कॉलेज ऑफ टीचर एजुकेशन, उच्च अध्ययन शिक्षण संस्थान, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान, राज्य हिंदी संस्थान, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के अलावा यूपी बोर्ड में उपसचिव, सह जिला विद्यालय निरीक्षक, मंडलीय मनोवैज्ञानिक, विज्ञान प्रगति अधिकारी, मध्याह्न भोजन प्राधिकरण लखनऊ भेज दिया गया।

    वहीं, राजकीय इंटर कॉलेज बार ललितपुर जहां 850 छात्र-छात्राएं हैं वहां न तो प्रधानाचार्य हैं और न कोई प्रवक्ता है। दो सहायक अध्यापक विद्यालय चला रहे हैं। यही हाल राजकीय इंटर कॉलेज कलिंजर बांदा का है। जहां 860 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। यहां भी न तो प्रधानाचार्य हैं और न ही किसी विषय के प्रवक्ता, तीन सहायक अध्यापक तीन साल से यह विद्यालय चला रहे हैं। 

    राजकीय शिक्षक संघ के प्रदेश संरक्षक रामेश्वर पांडेय और छाया शुक्ला ने अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर मनमानी तैनाती पर आपत्ति की है। मांग की है कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित राजकीय विद्यालयों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता एवं शिक्षकों की नियुक्ति वरीयता के आधार पर करें और जिन क्लास टू अफसरों का पदस्थापन विभिन्न संस्थानों में किया गया है उसे निरस्त किया जाए। उन्हें प्रदेश के खाली राजकीय विद्यालयों में नियुक्त किया जाए। यदि एक सप्ताह के अंदर उक्त कार्यवाही नहीं हुई तो बाध्य होकर राजकीय शिक्षक संघ उच्च न्यायालय में वाद दाखिल करेगा।



    विद्यालयों में प्रधानाचार्य के पद खाली, विभागों में भेजे अधिकारी, शिक्षक संघ ने आरोप लगाते हुए समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की

    7लय अगस्त 2026
    लखनऊ। राजकीय शिक्षक संघ ने माध्यमिक शिक्षा विभाग में नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। संघ ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर इसमें नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया है। साथ ही 30 जुलाई को जारी समूह ख अधिकारियों की पदस्थापना सूची को तत्काल रद्द करने की मांग की है।


    महामंत्री संघ के प्रांतीय सत्यशंकर मिश्रा व प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय ने कहा है कि पुरुष शिक्षकों को बालक विद्यालयों में और महिला शिक्षकों को बालिका विद्यालयों में तैनात किया जाना चाहिए। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन नियमों का उल्लंघन किया है। पुरुष को बालिका विद्यालयों में और महिला अधिकारियों को बालक विद्यालयों में तैनात किया गया है। यह पूरी तरह गलत है।

    उन्होंने कहा कि प्रदेश के काफी राजकीय बालक और बालिका विद्यालय प्रधानाचार्य विहीन हैं। इसके बावजूद समूह ख की पदोन्नति पाए कई अधिकारियों को विद्यालयों की जगह कार्यालयों में भेजा गया है। इनमें ऐसे कार्यालय भी शामिल हैं, जहां कोई खास काम तक नहीं है। संघ का आरोप है कि इससे राजकीय इंटर कॉलेजों में पठन-पाठन में सुधार नहीं हो पा रहा है।

    छात्र-छात्राओं के नामांकन में भी वृद्धि नहीं हो रही है। राजकीय शिक्षक संघ ने पदस्थापना सूची की समीक्षा की मांग की है। संघ ने नियम विपरीत किए गए सभी तैनाती को तत्काल निरस्त करने को कहा है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे न्यायालय की शरण लेंगे। इसकी पूरी जवाबदेही शासन और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की होगी।

    Friday, August 7, 2026

    शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

    शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

    7 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर शिक्षामित्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मिला। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को सुनकर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।


    एमएलसी कुंवर महाराज सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से 62 साल करने, शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने, टीईटी पास शिक्षामित्र जो एनसीटीई की सभी अर्हताओं को पूरा करते हैं, उन्हें नियमित करने का अनुरोध किया। 

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि इसके साथ ही महिला शिक्षामित्रों के तबादले व मूल विद्यालय वापसी व्यवस्था को पूरा कराने, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ नौकरी देने का अनुरोध भी किया गया। इसके साथ ही शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि, कैशलेस चिकित्सा कार्ड और जीवन सुरक्षा कवर जैसी व्यवस्था लागू करने के लिए आभार भी जताया। मुलाकात में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार भी उपस्थित थे। 



    शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट सहित सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने और विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल करने की रखी मांग

    बेसिक शिक्षा मंत्री से मिला शिक्षामित्र संघ का प्रतिनिधिमंडल

    5 अगस्त 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह से मुलाकात की। इसमें शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए नियमितीकरण की मांग की गई।


    संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि टीईटी पास व एनसीटीई के सभी मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए उन्हें विद्यालयों में शिक्षकों को मिलने वाली सभी सुविधाओं के साथ समायोजित किया जाए। 

    सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल से बढ़ाकर 62 साल की जाए और पूरे 12 महीने का मानदेय दिया जाए। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए होने वाली विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल होने का अवसर दिया जाए। 

    बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों की मांगों को पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, रामसेवक पाल, मंडल उपाध्यक्ष अयोध्या दिनेश वर्मा शामिल थे।

    माध्यमिक विद्यालय में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' का होगा विस्तार, प्रदेश के 4026 राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शुरू होगी तैयारी

    माध्यमिक विद्यालय में 'प्रोजेक्ट प्रवीण' का होगा विस्तार, प्रदेश के 4026 राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में शुरू होगी तैयारी

    विद्यालयों में सुविधाओं का सर्वे कर प्रशिक्षण शुरू करेगा कौशल विकास मिशन

    लखनऊमाध्यमिक शिक्षा के स्तर पर भी विद्यार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने और रोजगारोन्मुख बनाने के प्रयासों के विस्तार के लिए प्रदेश सरकार प्रोजेक्ट प्रवीण का दायरा बढ़ाने जा रही है। प्रदेश के उन राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में भी अब कौशल प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी, जहां अभी तक किसी भी व्यावसायिक शिक्षा योजना का लाभ नहीं पहुंचा है। इन विद्यालयों में कक्षाएं, बिजली, उपकरण समेत आधारभूत सुविधाओं का सर्वे कर कौशल विकास मिशन के सहयोग से प्रशिक्षण शुरू कराया जाएगा। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को निर्देश जारी कर दिए हैं।




    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 3208 अशासकीय सहायता प्राप्त और 818 राजकीय माध्यमिकविद्यालय ऐसे हैं, जो किसी भी व्यावसायिक शिक्षा योजना से आच्छादित नहीं हैं। इन विद्यालयों में आवश्यक संसाधनों और सुविधाओं का सर्वे होगा और उसकी रिपोर्ट के आधार पर चरणबद्ध तरीके से कौशल प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक शिक्षा भी मिल सके।

    योजना के क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले के डीआइओएस और जिला समन्वयक को ऐसे विद्यालयों की सूची यू-डायस कोड और छात्र संख्या के साथ तैयार कर कौशल विकास मिशन के निदेशक को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बाद चयनित विद्यालयों में माध्यमिक शिक्षा विभाग और कौशल विकास मिशन द्वारा जारी संयुक्त दिशा-निर्देशों के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।

    अपर मुख्य सचिव ने निर्देशों में कहा है कि जिन विद्यालयों में अब तक कोई व्यावसायिक शिक्षा योजना लागू नहीं है, वहां समयबद्ध तरीके से सर्वे और प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पूरी की जाए।

    Thursday, August 6, 2026

    पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं

    पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं


    प्रयागराजः पीएम श्री योजना के तहत देशभर के 14500 से अधिक सरकारी स्कूलों को माडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रति स्कूल दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। प्रयागराज में इस योजना के तहत 43 स्कूल चयनित हैं, लेकिन सुविधाओं के बावजूद इन स्कूलों में छात्र संख्या में कमी देखी जा रही है।


    सत्र 2025-26 में कुल 11773 पंजीयन हुए थे, जबकि सत्र 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर 10417 रह गया है। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षा, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, पर्यावरण अनुकूल उपायों के तहत सोलर पैनल, एलईडी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका भी विकसित की जा रही हैं। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद छात्र संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है। पीएम श्री पीएस पट्टीनाथ राय में पिछले सत्र में 202 छात्रों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस बार केवल 127 नामांकन हुए। पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उपरदहा में 425 विद्यार्थियों के सापेक्ष सिर्फ 233 पंजीयन हुए हैं। धनुपुर विकासखंड के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल यासीनपुर में 398 के सापेक्ष 317 और जारौन में 271 के सापेक्ष 220 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।

    चाका के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उबारी में 400 के सापेक्ष 378 और बहरिया के पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय महपुरा में 154 के सापेक्ष 128 नए नामांकन हुए हैं। बहादुरपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रितैया में पिछले सत्र में 365 छात्रों का पंजीकरण था, जो इस बार 336 पर सीमित रह गया। पीएमश्री पीएस रामपुर में भी पंजीयन का आंकड़ा पिछले सत्र को पार नहीं कर पाया है। सिर्फ 133 नए नामांकन हुए हैं। यही हाल पीएमश्री कंपोजिट स्कूल सराय लहुरी का है, यहां 207 पंजीयन हुआ। जो पिछले सत्र की तुलना में 50 कम है। 

    पीएमश्री कंपोजिट स्कूल भगवतपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल जनका, पीएमश्री प्राथमिक विद्यालय बालिका सिरसा, पीएमश्री पीएस छतवा जैसे अन्य स्कूलों में भी छात्र संख्या पिछले सत्र के आंकड़े को नहीं पार कर सकी है। बीएसए अनिल कुमार का कहना है कि सितंबर तक विद्यार्थियों का पंजीयन जारी रहेगा। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं। कुछ स्कूलों ने पिछले सत्र के आंकड़े को पार कर लिया है, जिनमें पीएम श्री पीएस सोरांव प्रथम, पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रमईपुर, और पीएम श्री कंपोजिट स्कूल निकदलपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल तातारगंज जैसे विद्यालय शामिल हैं।

    अब एक छत के नीचे प्राविधिक शिक्षा के होंगे सभी कार्यालय, लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक परिसर में बनेगा एकीकृत कार्यालय

    अब एक छत के नीचे प्राविधिक शिक्षा के होंगे सभी कार्यालय, लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक परिसर में बनेगा एकीकृत कार्यालय

    प्रवेश, परीक्षा, फीस व प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग आदि के होंगे कार्य 

    प्रमुख सचिव समेत प्रमुख अधिकारियों के कार्यालय भी होंगे

    लखनऊ। प्राविधिक शिक्षा विभाग के बिखरे हुए कार्यालयों को अब एक छत के नीचे लाने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग लखनऊ में एकीकृत कार्यालय का निर्माण कराएगा, जहां प्रमुख सचिव, महानिदेशक समेत सभी प्रमुख अधिकारियों के कार्यालय होंगे। यहां प्रवेश, परीक्षा, परिणाम, फीस, परियोजनाओं की मॉनीटरिंग और अन्य विभागीय कार्य एक ही स्थान से संचालित होंगे। इसके लिए अनुपूरक बजट में दो करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


    प्राविधिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत डिप्लोमा और डिग्री स्तर की तकनीकी शिक्षा से जुड़े विभिन्न कार्य संचालित होते हैं। वर्तमान में प्राविधिक शिक्षा परिषद का निदेशालय कानपुर में है, जबकि संयुक्त प्रवेश परीक्षा (पॉलीटेक्निक), प्राविधिक शिक्षा परिषद और फीस व नियमन समिति के कार्यालय लखनऊ के चारबाग क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर संचालित हो रहे हैं। महानिदेशक का कार्यालय इंदिरा भवन में है। वहीं, शोध, विकास एवं प्रशिक्षण संस्थान का कार्यालय भी कानपुर में स्थित है। कानपुर में ही स्थित निदेशालय की कुछ भूमि मेट्रो परियोजना में अधिग्रहित हो चुकी है।

    प्रदेश में तकनीकी डिग्री संस्थानों की बढ़ती संख्या के साथ विभागीय गतिविधियां भी बढ़ी हैं। प्रवेश, परीक्षा, परिणाम और अन्य महत्वपूर्ण कार्य अलग-अलग कार्यालयों से संचालित होने के कारण समन्वय में कठिनाई आती है। अधिकारियों, कर्मचारियों, छात्रों और शिक्षकों को भी विभिन्न कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इन समस्याओं को देखते हुए विभाग ने लखनऊ के राजकीय पॉलीटेक्निक परिसर में एकीकृत कार्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया है। यहां प्रमुख सचिव, महानिदेशक, निदेशक, जीकेपी सचिव, परिषद सचिव सहित सभी प्रमुख विभागीय अधिकारियों के कार्यालय होंगे।


    प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट की भी होगी स्थापना

    एकीकृत कार्यालय में विभाग की योजनाओं, एमओयू और विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी के लिए प्रोजेक्ट मॉनीटरिंग यूनिट भी स्थापित की जाएगी। कंपनियों के कार्यों की समीक्षा और परियोजनाओं की प्रगति पर नजर रखने के लिए अलग मॉनीटरिंग सेल बनाया जाएगा, जिससे योजनाओं, कार्यों व प्रोजेक्ट की निगरानी की जा सकेगी।

    एकीकृत कार्यालय बनने से छात्रों और शिक्षकों को छोटी-छोटी जानकारी या कार्य के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। विभागीय कामकाज में आसानी होगी। इससे समय, श्रम और पैसों की बचत होगी। आशीष पटेल, मंत्री, प्राविधिक शिक्षा विभाग


    Wednesday, August 5, 2026

    वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

    वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा के लिए नई नीति से सरकार का इंकार, 2001 के शासनादेश का दिया हवाला

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए तारांकित प्रश्न संख्या-20 के उत्तर में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के वित्तविहीन मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, स्थायी सेवा शर्तें, ईपीएफ, चिकित्सा सुविधा तथा अन्य सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने हेतु फिलहाल कोई नई नीति या सेवा नियमावली बनाने पर सरकार विचार नहीं कर रही है।

    सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तें 10 अगस्त 2001 के शासनादेश में पहले से निर्धारित हैं। इसके अनुसार अंशकालिक अध्यापकों का पारिश्रमिक विद्यालय प्रबंधन अपने संसाधनों से नियमित रूप से पूरे शिक्षण सत्र के दौरान देगा तथा उसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। साथ ही यह भी प्रावधान है कि उनका भुगतान न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत कुशल श्रमिकों के लिए समय-समय पर निर्धारित न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगा।

    उत्तर में यह भी कहा गया है कि विद्यालय प्रबंधन ऐसे अंशकालिक शिक्षकों के लिए नियमानुसार भविष्य निधि (EPF) तथा जीवन बीमा जैसी योजनाएं भी लागू करेगा, जिनमें नियोक्ता का अंशदान प्रबंधन अपने निजी संसाधनों से वहन करेगा।

    इस प्रकार सरकार ने स्पष्ट किया है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए अलग से नई सेवा नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है और वर्तमान व्यवस्था 2001 के शासनादेश के अनुसार ही संचालित रहेगी।


    आकांक्षी जिलों के शिक्षकों के सामान्य अंतरजनपदीय तबादले से सरकार का इंकार, केवल विशेष परिस्थितियों में मिलेगी राहत

    आकांक्षी जिलों के शिक्षकों के सामान्य अंतरजनपदीय तबादले से सरकार का इंकार, केवल विशेष परिस्थितियों में मिलेगी राहत

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए एक तारांकित प्रश्न के उत्तर में बेसिक शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि आकांक्षी जनपदों में पिछले दस वर्षों से कार्यरत शिक्षकों के गृह जनपद में वर्ष 2026 के दौरान सामान्य अंतरजनपदीय स्थानांतरण पर सरकार कोई विचार नहीं कर रही है।

    सरकार ने अपने उत्तर में कहा है कि बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का पद जनपद संवर्गीय होता है, इसलिए उनके स्थानांतरण की कोई वैधानिक बाध्यता नहीं है। साथ ही, भारत सरकार द्वारा संचालित जनगणना 2026-27 के कार्यों के कारण भी 31 मार्च 2027 तक स्थानांतरण पर प्रतिबंध संबंधी निर्देश प्रभावी हैं।

    हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि मानवीय दृष्टिकोण एवं विशेष परिस्थितियों में अंतरजनपदीय स्थानांतरण की व्यवस्था पहले से लागू है। 4 जून 2026 के शासनादेश के तहत कैंसर, डायलिसिस, दिव्यांगता, पति-पत्नी दोनों के परिषदीय शिक्षक होने अथवा अन्य विषम परिस्थितियों में मुख्यमंत्री के अनुमोदन से अंतरजनपदीय स्थानांतरण की नीति लागू की गई है। इस व्यवस्था का लाभ आकांक्षी जनपदों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भी प्राप्त कर सकते हैं।

    इस प्रकार सरकार ने सामान्य तबादलों से इंकार करते हुए केवल विशेष श्रेणी के मामलों में मानवीय आधार पर राहत उपलब्ध कराने की नीति को दोहराया है।

    मदरसों में कामिल-फाजिल डिग्री बंद, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी

    मदरसों में कामिल-फाजिल डिग्री बंद, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यूपी कैबिनेट ने दी मंजूरी 


    लखनऊ। प्रदेश के मदरसे अब कामिल और फाजिल की डिग्री नहीं दे सकेंगे। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए आदेश के अनुपालन में तैयार मदरसा शिक्षा परिषद अधिनियम-2004 के संशोधित प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट की मंजूरी दे दी गई।


    मदरसा शिक्षा परिषद की कामिल (स्नातक) और फाजिल (स्नात्कोत्तर) की डिग्री को यूजीसी से मान्यता नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने इन डिग्रियों को असांविधानिक घोषित किया था। मंगलवार को नए प्रस्ताव को मंजूरी के बाद कामिल फाजिल डिग्री बंद हो जाएगी। 

    Tuesday, August 4, 2026

    हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन विद्युत लाइन क्यों?

    हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन लाइन क्यों? 

    पॉवर कॉर्पोरेशन के एमडी को बनाया पक्षकार, स्कूल सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और एसओपी पर मांगी प्रगति रिपोर्ट, स्कूलों की सुरक्षा व आसपास ट्रैफिक जाम पर भी अदालत सख्त


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देकर अगली सुनवाई तक इस संबंध में उनका जवाब पेश करें।


    न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि कई मामलों में हाईटेंशन लाइनें स्कूल परिसरों पर गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ी। इस संबंध में हुए अध्ययन और अखबार में प्रकाशित खबरों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय बताते हुए विस्तृत परीक्षण की जरूरत बताई। 


    सुनवाई के दौरान डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ ने स्कूलों में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती पर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सात स्कूलों की व्यवस्था अच्छी, पांच की औसत और पांच की खराब पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा।

    अदालत को यह भी बताया गया कि स्कूलों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। अगली सुनवाई में कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्योरा दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

    नाबालिगों की सुरक्षा पर अदालत गंभीर
    सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। कोर्ट को बताया गया कि परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पुलिस सत्यापन में 2370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 के खिलाफ मिशन भरोसा के तहत प्रतिकूल रिपोर्ट दर्ज मिली है। अदालत ने कहा कि यह नाबालिग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर विषय है। बार के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, स्कूल वैन में महिला चालकों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस सुझाव पर सरकार आवश्यक विचार करेगी।

    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-33 छ के अधीन विनियमित तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों के पेंशन प्रकरणों के निस्तारण के सम्बन्ध में

    विनियिमत तदर्थ / अल्पकालिक शिक्षको के पेंशन प्रकरणो को शासन के निर्देशों के क्रम में निस्तारण के सम्बन्ध में निर्णय लेने का निर्देश 



    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयनबोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-33 छ के अधीन विनियमित तदर्थ/अल्पकालिक शिक्षकों के पेंशन प्रकरणों के निस्तारण के सम्बन्ध में




    संस्कृत विद्यालयों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को जनपद मंडल राज्य स्तर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभा कराए जाने के संबंध में

    संस्कृत विद्यालयों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को जनपद मंडल राज्य स्तर पर आयोजित खेलकूद प्रतियोगिता में प्रतिभा कराए जाने के संबंध में




    Monday, August 3, 2026

    PM E-Vidya: उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई के लिए 5 नए DTH टीवी चैनल

    PM E-Vidya: उत्तर प्रदेश में कक्षा 1 से 12 तक की पढ़ाई के लिए 5 नए DTH टीवी चैनल, 24 घंटे मिलेगी निःशुल्क शैक्षिक सामग्री


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक श्रेणी पदों पर चयन के सम्बन्ध में सूचना उपलब्ध कराये जाने विषयक

    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक श्रेणी पदों पर चयन के सम्बन्ध में सूचना उपलब्ध कराये जाने विषयक।


    Sunday, August 2, 2026

    यूपी में 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों की बनेगी सेवा नियमावली

    यूपी में 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों की बनेगी सेवा नियमावली

     ● बिना वाजिब कारण बताए शिक्षकों को नहीं हटा सकेंगे

    ● निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी

    01 अगस्त 2026
    लखनऊ ।  राज्य सरकार यूपी के 25 हजार निजी माध्यमिक स्कूलों के 3.50 लाख शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करने जा रही है। इसके लिए सेवानियमावली बनाई जाएगी।

    अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी बना दी गई है। इसकी देखरेख में सेवा नियमावली बनाई जाएगी। इसके बाद बिना वाजिब कारण के शिक्षकों को नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा। नियमावली बनने के बाद निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को बड़ी राहत मिलेगी।

    इससे प्रबंधतंत्र की मनमानी पर रोक लगेगी और निजी स्कूलों में योग्य शिक्षकों की तैनाती का रास्ता साफ होगा। अर्हता व योग्यता पूरी किए बिना निजी स्कूलों में शिक्षक नहीं पढ़ा सकेंगे। प्रबंधतंत्र को शिक्षकों को नियुक्ति पत्र देना होगा और आधार लिंक बैंक खाते में वेतन देना होगा। नियमावली में छुट्टियों से लेकर उनकी सेवा को सुरक्षित रखना का भी प्रावधान होगा। 

    निजी माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों की सेवा नियमावली बनाए जाने को लेकर सात सदस्यीय कमेटी बनाने का आदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग के उप सचिव चंद्र प्रकाश मिश्र की ओर से जारी किया गया है। कमेटी में सदस्य सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव बनाए गए हैं। 


    तय किया जाए न्यूनतम वेतन: शिक्षक संघ

    उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा कहते हैं कि आउटसोर्सिंग कर्मियों का न्यूनतम वेतन तय कर दिया गया है। इसलिए निजी विद्यालयों के संसाधनों व छात्रों की संख्या के अनुसार शिक्षकों का न्यूनतम वेतन तय किया जाए। शिक्षकों को अभी बहुत कम वेतन मिल रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में तो 5000-6000 रुपये ही दिए जाने की जानकारी मिल रही है। अच्छे कॉन्वेंट स्कूलों में 50 हजार व उससे अधिक वेतन मिलता है।




    वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा नियमावली तैयार किए जाने की प्रक्रिया ने पकड़ी गति,  30 जुलाई को हुई अहम बैठक, शासन ने अधिकारियों को किया तलब

    29 जुलाई 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली तैयार किए जाने की प्रक्रिया ने गति पकड़ ली है। इस संबंध में 30 जुलाई 2026 को अपराह्न 3:00 बजे उत्तर प्रदेश सचिवालय स्थित नवीन भवन के सभागार में अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है।

    उप सचिव, माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-7 द्वारा जारी पत्र के अनुसार, वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली तैयार करने हेतु पूर्व में गठित सात सदस्यीय समिति का पुनर्गठन किया जा चुका है। इसी क्रम में समिति की बैठक आयोजित की जा रही है।

    बैठक में विशेष सचिव माध्यमिक शिक्षा, शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ सहित संबंधित अधिकारियों को उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही शिक्षा निदेशक को वित्तविहीन संस्थाओं एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के मामलों से जुड़े दो नामित प्रतिनिधियों को आवश्यक अभिलेखों और सुझावों सहित बैठक में शामिल कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज को भी वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा नियमावली के संबंध में सभी प्रासंगिक अभिलेखों एवं सुझावों के साथ प्रस्तुतीकरण तैयार कर बैठक में प्रस्तुत करने को कहा गया है।

    शासन का मानना है कि इस बैठक में प्राप्त सुझावों और अभिलेखों के आधार पर वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली के प्रारूप को अंतिम रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते हैं।


    Saturday, August 1, 2026

    डीएलएड-2023 के चतुर्थ सेमेस्टर में आधे हुए फेल, 2018 से 2024 बैच के दूसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम घोषित

    डीएलएड-2023 के चतुर्थ सेमेस्टर में आधे हुए फेल, 2018 से 2024 बैच के दूसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम घोषित

    🔴 137615 प्रशिक्षुओं में से 73883 ही हो सके पास

    🔴 डीएलएड 2024 द्वितीय सेमेस्टर में 64559 फेल

    ♠️ द्वितीय सेमेस्टर रिजल्ट लिंक:

    https://updeledinfo.in/


    ♠️ चतुर्थ सेमेस्टर रिजल्ट लिंक:

    https://btcexam.in/



    प्रयागराज। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने डीएलएड 2018 से 2024 बैच के दूसरे और चौथे सेमेस्टर की परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया। डीएलएड 2023 चतुर्थ सेमेस्टर के 137615 प्रशिक्षुओं में से 137042 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 62258 (45.43 प्रतिशत) पास हैं, 73883 फेल हो गए, जबकि 573 गैरहाजिर रहे।

    डीएलएड 2024 द्वितीय सेमेस्टर में पंजीकृत 139223 प्रशिक्षुओं में से 137554 परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 72861 (52.97 प्रतिशत) पास हैं, 64559 फेल हो गए और 1669 अनुपस्थित रहे। डीएलएड 2023 द्वितीय सेमेस्टर में 53729 प्रशिक्षुओं में से 52992 सम्मिलित हुए। इनमें से 32692 (61.69 फीसदी) पास हैं, 20246 फेल हो गए जबकि 737 गैरहाजिर रहे।

    डीएलएड 2022 चतुर्थ सेमेस्टर में पंजीकृत 14702 प्रशिक्षुओं में से 14160 उपस्थित थे। इनमें से 8959 (63.27 प्रतिशत) पास हैं, 5182 फेल हो गए और 542 अनुपस्थित थे। डीएलएड 2022 द्वितीय सेमेस्टर में 7267 प्रशिक्षुओं में से 6675 उपस्थित हुए। इनमें से 4424 (66.28 फीसदी) पास हैं, 2250 फेल हो गए और 592 गैरहाजिर रहे।


    माध्यमिक विद्यालयों में होगी व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई, एक विद्यालय में दो-दो प्रशिक्षक होंगे तैनात, सप्ताह में छह घंटे मिलेगा प्रशिक्षण, शिक्षा के साथ ही कौशल विकास पर दिया जा रहा है जोर

    माध्यमिक विद्यालयों में होगी व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई, एक विद्यालय में दो-दो प्रशिक्षक होंगे तैनात, सप्ताह में छह घंटे मिलेगा प्रशिक्षण, शिक्षा के साथ ही कौशल विकास पर दिया जा रहा है जोर


    लखनऊ । शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर अब छात्रों के लिए व्यवसायिक शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया जा रहा है। अब माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालयों में दो-दो प्रशिक्षकों की तैनाती की गई है। वह सप्ताह में छह घंटे छात्रों को प्रशिक्षण देंगे।


    राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ रोजगारपरक व्यावसायिक शिक्षा भी दी जाएगी। विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा नौवीं से 12वीं के छात्र मनपसंद ट्रेड चुन सकेंगे। छात्रों को कृषि, आईटी और रिटेल सहित ट्रेडों के कौशल सिखाए जाएंगे।

    व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में 25 छात्रों का दाखिला अनिवार्य किया गया है। सप्ताह में छह घंटे छात्रों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यालयों में दो-दो प्रशिक्षकों की तैनाती की कार्य योजना माध्यमिक शिक्षा परिषद ने तैयार की है। प्रशिक्षण में केवल किताबों की पढ़ाई नहीं होगी, बल्कि व्यावहारिक जानकारी और काम करने का तरीका भी सिखाया जाएगा।

    इससे विद्यार्थियों में नई तकनीकी और व्यावसायिक दक्षता विकसित होगी। इससे वे आगे की पढ़ाई के साथ स्वरोजगार और कौशल आधारित कॅरिअर के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे।  माध्यमिक विद्यालयों में जल्द ही व्यावसायिक प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। दाखिला लेने वाले विद्यालयों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    Thursday, July 30, 2026

    फर्जी IGRS शिकायतों पर होगी सख्ती, शिकायतकर्ता का सत्यापन और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही होगी कार्रवाई

    फर्जी IGRS शिकायतों पर होगी सख्ती, शिकायतकर्ता का सत्यापन और साक्ष्यों की पुष्टि के बाद ही होगी कार्रवाई


    प्रयागराज/लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज ने विद्यालयों के विरुद्ध की जाने वाली फर्जी IGRS शिकायतों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। जारी पत्र के अनुसार अब किसी भी विद्यालय के विरुद्ध प्राप्त IGRS शिकायत पर कार्रवाई करने से पहले शिकायतकर्ता का सत्यापन तथा प्रस्तुत साक्ष्यों की पुष्टि सुनिश्चित की जाएगी।

    यह निर्देश शासन के आदेश तथा विधान परिषद सदस्य श्री उमेश द्विवेदी द्वारा उठाए गए विषय के अनुपालन में जारी किया गया है। पत्र में कहा गया है कि केवल प्रमाणित एवं वास्तविक शिकायतों पर ही विभागीय नियमों और विनियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाए, ताकि निराधार अथवा फर्जी शिकायतों के आधार पर विद्यालयों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।

    अपर सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज ने अपने क्षेत्राधिकार के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS) को निर्देशित किया है कि वे प्रत्येक प्रकरण का विभागीय नियमों के आलोक में परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

    शिक्षा विभाग के इस कदम को शिकायत निस्तारण प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तथ्यपरक और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे वास्तविक शिकायतों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ फर्जी एवं दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर भी प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।


    Wednesday, July 29, 2026

    कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल करने को उठ रही मांग

    कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी शामिल करने को उठ रही मांग


    लखनऊ। मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना में सेवारत बेसिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को शामिल किए जाने के बाद अब सेवानिवृत्त शिक्षकों, शिक्षणेत्तर कर्मचारियों तथा मृतक आश्रित कोटे से नियुक्त कर्मचारियों को भी योजना का लाभ देने की मांग तेज हो गई है। विभिन्न शिक्षक एवं कर्मचारी संगठनों ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर सभी पात्र वर्गों को बिना भेदभाव योजना में शामिल करने की मांग की है।


    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने इसे सेवानिवृत्त शिक्षकों के साथ असमान व्यवहार बताते हुए कहा कि जिस प्रकार राज्यकर्मियों को सेवानिवृत्ति के बाद भी चिकित्सा सुविधा मिलती है, उसी प्रकार शिक्षकों को भी समान अधिकार मिलना चाहिए। वहीं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और मृतक आश्रित नियुक्त कर्मचारियों को भी योजना के दायरे में लाने की मांग उठाई गई है।

    इस बीच बेसिक शिक्षा से सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र दत्त त्रिवेदी ने भी मांग का समर्थन करते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों सेवानिवृत्त शिक्षक वर्षों तक शिक्षा व्यवस्था को अपनी सेवाएं देने के बाद बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें मुख्यमंत्री कैशलेस चिकित्सा योजना से बाहर रखना न्यायसंगत नहीं है। सरकार को सेवा निवृत्त बेसिक शिक्षकों को भी समान रूप से योजना में शामिल कर उन्हें सम्मानजनक स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कदम केवल एक सुविधा नहीं, बल्कि शिक्षकों के आजीवन योगदान के प्रति राज्य का सम्मान भी होगा।

    शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

    शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी पर हाईकोर्ट सख्त,  कहा- बच्चों की पढ़ाई से नहीं हो समझौता, RTE कानून का भी करना होगा पालन

    आयोग को कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार, पर आरटीई कानून का भी करना होगा पालन


    नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का सांविधानिक अधिकार है, लेकिन यह भी उसकी जिम्मेदारी है कि इससे शिक्षकों पर अनावश्यक कार्यभार न पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्य तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह टिप्पणी शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लगाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।


     न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति  की अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार है। हालांकि, बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 27 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि किसी भी शिक्षक को स्कूल समय के दौरान चुनाव संबंधी कार्य नहीं दिया जा रहा है।


    महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी रखें ध्यान

    हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिक्षक पूरे दिन छह से आठ घंटे पढ़ाने के बाद चुनाव संबंधी अतिरिक्त कार्य करेंगे तो उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ेगा। अदालत ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और विशेष रूप से महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखने की सलाह दी।

    Monday, July 27, 2026

    उच्च शिक्षा के शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेश चिकित्सा के साथ डेढ़ करोड़ रुपये का दुर्घटना बीमा कवर, सीएम योगी की उपस्थिति में विभाग PNB के साथ करेगा MOU

    उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को कैशलेस इलाज के साथ डेढ़ करोड़ का बीमा

    05 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज,  शिक्षक परिवार को 1.28 लाख शिक्षकों को मिलेगा सीधा लाभ


    आगरा । प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ा रहे शिक्षकों को अब कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस योजना में राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा मिलेगा। योजना के शुभारंभ के दौरान ही पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के साथ उच्च शिक्षा विभाग का मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) हुआ।


    योजना का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना का दायरा बढ़ाते हुए इसमें 50 हजार से अधिक शिक्षणेतर कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है, जिससे प्रदेश के लगभग 10 लाख लोगों को स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का सीधा लाभ मिलेगा।

    एमओयू के बारे में बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अनहोनी या दुर्घटना की स्थिति में शिक्षकों के परिवार को ₹1.5 करोड़ से ₹3 करोड़ तक की आर्थिक सहायता राशि, अस्पताल में ₹60,000 तक का नकद लाभ और ₹12 लाख तक का टर्म लाइफ बीमा कवर प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब नेशनल बैंक से निजी विश्वविद्यालयों और स्ववित्त पोषित संस्थानों के शिक्षकों को भी इस बीमा कवर से पूरी तरह जोड़ने का आग्रह किया। इस योजना का संचालन साचीज संस्था द्वारा किया जाएगा। इसमें आयुष्मान भारत योजना की ही दरें लागू होंगी। इसके तहत पैनल में शामिल सरकारी और निजी अस्पतालों में 1900 से अधिक बीमारियों के इलाज का पैकेज मिलेगा।



    उच्च शिक्षा के शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेश चिकित्सा के साथ डेढ़ करोड़ रुपये का दुर्घटना बीमा कवर, सीएम योगी की उपस्थिति में विभाग PNB के साथ करेगा MOU 

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 जुलाई को आगरा में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को दोहरा तोहफा देंगे। एक तरफ वे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का कार्ड वितरित कर योजना का शुभारंभ करेंगे, वहीं शिक्षकों व कर्मचारियों को डेढ़ करोड़ तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग पीएनबी के साथ एमओयू करेगा।


    एमओयू के तहत शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को 1.50 करोड़ तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 3 करोड़ तक का हवाई दुर्घटना बीमा, 60 हजार तक का अस्पताल नकद लाभ तथा 12 लाख तक का टर्म लाइफ बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सीएम कैशलेस चिकित्सा सुविधा में प्रदेश के विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों व उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी लाभ मिलेगा। 

    योजना के लागू होने के बाद पात्र शिक्षकों और उनके परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। कार्ड बनने के बाद पहले दिन से ही निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा।

    अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जाएगा। इसके साथ ही सभी जिलों में भी कार्यक्रम कर कार्ड वितरण किया जाएगा।

    1900 से अधिक उपचार पैकेज मिलेगा योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों में 1900 से अधिक उपचार पैकेजों का लाभ मिलेगा। इनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, जटिल सर्जरी सहित कई गंभीर बीमारियों का उपचार शामिल है। योजना का संचालन साचीज के माध्यम से किया जाएगा और आयुष्मान भारत की निर्धारित उपचार दरें लागू होंगी। इसके लिए पोर्टल सक्रिय कर शिक्षकों का पंजीकरण किया जा रहा है।

    Sunday, July 26, 2026

    10वीं-12वीं परीक्षा के निजी परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वालों को 100 रुपये देना होगा विलंब शुल्क

    10वीं-12वीं परीक्षा के निजी परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वालों को 100 रुपये देना होगा विलंब शुल्क


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्तिगत (निजी) परीक्षार्थियों के आवेदन की समय सारिणी जारी कर दी है।


    परिषद सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट पर निर्धारित तिथियों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। अधिसूचना के अनुसार अग्रसारण केंद्रों के प्रधानाचार्य पांच अगस्त तक आवेदन पत्रों का अग्रसारण व परीक्षा शुल्क प्राप्त कर सकेंगे।

    इसके बाद 10 अगस्त तक कोषागार में परीक्षा शुल्क जमा किया जाएगा। कोषागार में जमा शुल्क की सूचना और परीक्षार्थियों का ऑनलाइन विवरण 16 अगस्त (रात्रि 12 बजे तक) अपलोड करना होगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वाले व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ 16 अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करने की सुविधा मिलेगी।

    ऐसे अभ्यर्थियों का ऑनलाइन आवेदन और शैक्षिक विवरण 20 अगस्त (रात्रि 12 बजे तक) अपलोड हो सकेंगे। 21 से 31 अगस्त तक प्रधानाचार्य ऑनलाइन अपलोड किए गए अभ्यर्थियों के नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, विषय, फोटो सहित सभी विवरणों का मिलान करेंगे। यदि किसी प्रकार की त्रुटि मिलती है तो उसका संशोधन एक से 10 सितंबर तक किया जा सकेगा। अंतिम फोटोयुक्त नामावली और संबंधित अभिलेख 30 सितंबर तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करने होंगे।

    परिषद ने परीक्षा के लिए परीक्षा शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। हाईस्कूल व्यक्तिगत परीक्षा का शुल्क 706 रुपये, इंटरमीडिएट का 806 रुपये और विषय सुधार व अतिरिक्त विषय के लिए 206 रुपये निर्धारित किया गया है।