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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, May 29, 2026

    डीएलएड से घटा प्रतियोगियों का मोह किसी डायट में नहीं भरी सभी सीटें, प्रदेश के 67 डायट में से 14 में आधी से ज्यादा रिक्त सीटें

    डीएलएड से घटा प्रतियोगियों का मोह किसी डायट में नहीं भरी सभी सीटें, प्रदेश के 67 डायट में से 14 में आधी से ज्यादा रिक्त सीटें

    निजी डीएलएड संस्थानों को मिलाकर डेढ़ लाख सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी

    प्रयागराजः प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान लगातार कम हो रहा है। यही कारण है कि पिछले कई वर्ष से डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर पा रही हैं। सत्र विलंबित होने के कारण वर्ष 2025 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 2026 में पूरी हुई और प्रवेश की स्थिति यह है कि प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में से कोई ऐसा नहीं है, जिसकी सभी सीटें भरी हों। 14 डायट ऐसे हैं, जिनमें आधी से ज्यादा सीटों पर अभ्यर्थी नहीं मिले। इस तरह डायट और निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों को मिलाकर 2,39,500 सीटों में से करीब 90 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।


    प्रदेश में 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) संचालित हैं। इसमें वाराणसी में संचालित कालेज आफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) भी सम्मिलित है। इसके अलावा 3,046 निजी डीएलएड संस्थान एवं 258 अल्पसंख्यक कालेज चल रहे हैं। इस तरह इन सभी संस्थानों को मिलाकर कुल 2,39,500 सीटों में से करीब 1.49 लाख खाली रह गई हैं। 


    स्थिति यह है कि डायट के रूप में संचालित सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की सभी सीटों के लिए भी अभ्यर्थी नहीं मिले। डायट में प्रवेश के मामले में सबसे अच्छी स्थिति बांदा और श्रावस्ती की है। इनमें स्वीकृत कुल 50-50 सीटों में से 49-49 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। दोनों में केवल एक-एक सीटें रिक्त हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर फर्रुखाबाद और महराजगंज है, जहां 50-50 सीटों में से केवल दो-दो खाली हैं। तीसरे नंबर पर इटावा, कुशीनगर, बलिया हैं। इटावा में 50 में 47 तथा बलिया एवं कुशीनगर में 100-100 सीटों के सापेक्ष 97-97 पर प्रवेश हुए हैं। इनमें तीन-तीन सीटें खाली हैं।

     इसके विपरीत मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, अमरोहा, बिजनौर, कन्नौज, औरैया, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, ललितपुर, वाराणसी में आधी से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। इनमें अधिकांश में 200 सीटें सृजित हैं। इस तरह प्रदेश के डायट संस्थानों में कुल 10,600 सीटें हैं, जिनमें 7,198 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। 3,402 सीटें रिक्त रह गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2018 के बाद से बेसिक शिक्षक भर्ती नहीं आने से डीएलएड पाठ्यक्रम के प्रति आकर्षण कम हुआ है।

    प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

    प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

    समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?


    लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।


    सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी।  यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।

    नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।

    कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा। 


    24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया 
    विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।


    नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
    आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।


    प्रदेश के जिन 80 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं वहां बनेंगे नए आवासीय बालिका स्कूल

    प्रदेश के जिन 80 ब्लॉकों में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय नहीं वहां बनेंगे नए आवासीय बालिका स्कूल

    प्रदेश में बनाए जाएंगे 80 आवासीय बालिका विद्यालय, 586 करोड़ रुपये निर्माण पर खर्च किए जाएंगे

    200 छात्राओं के रहने की व्यवस्था होगी, 3 एकड़ में बनेगा एक आवासीय बालिका विद्यालय

    समग्र शिक्षा की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया


    लखनऊ। यूपी में 80 आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण किया जाएगा। यहां कक्षा 6 से कक्षा 12 तक की पढ़ाई छात्राओं को कराई जाएगी। ऐसे ब्लॉक जहां पर कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) नहीं हैं, वहां पर इनका निर्माण किया जाएगा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है।


    कानपुर नगर व औरैया में एक भी केजीबीवी नहीं हैं। ऐसे में यहां पर सभी ब्लॉक में आवासीय बालिका विद्यालय का निर्माण होगा। वहीं कानपुर देहात में नौ, फिरोजाबाद में सात, बागपत में चार व इटावा में करीब तीन आवासीय बालिका विद्यालयों का निर्माण किया जाएगा। बाकी अन्य ऐसे ब्लॉक जहां केजीबीवी नहीं है, वहां पर आवासीय बालिका विद्यालय बनाया जाएगा।

    परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन

    परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन


    लखनऊ। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए परिषदीय विद्यालयों का मूल्यांकन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) करेगी। विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर एससीईआरटी की टीम मूल्यांकन करेगी।

    परिषदीय विद्यालयों की निपुण आकलन में स्थित काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह की स्थिति ठीक रही। इसको और बेहतर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एससीईआरटी से मूल्यांकन कराने की कार्य योजना तैयारी की है।

    निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई के सुधार के लिए प्रयास किया जाएगा। एससीईआरटी की टीम छोटे-छोटे क्षेत्रों में बंटे विद्यालयों का मूल्यांकन कर कमियों की जानकारी करेगी। सुधार के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी देगी।

    मूल्यांकन के समय कक्षावार रिपोर्ट को वरीयता दी जाएगी ताकि इसी के आधार पर रेमेडियल कक्षाओं को संचालित कर पठन-पाठन में सुधार किया जा सके। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि परख और निपुण मूल्यांकन में विद्यालयों की स्थिति बेहतर थी। अब एससीईआरटी के मूल्यांकन में विद्यालयों की गुणवत्ता को परखा जाएगा। 




    गुणवत्ता सुधार के लिए परिषदीय स्कूलों का होगा क्षेत्रवार मूल्यांकन

    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता और बेहतर बनाकर प्रदेश को राष्ट्रीय रैंकिंग में भी और बेहतर स्थान दिलाया जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इसके लिए विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट (क्षेत्र) में बांटकर वहां का मूल्यांकन कराएगा।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की निपुण मूल्यांकन में तो स्थिति काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह में स्थिति ठीक रही है। किंतु कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी नई रणनीति पर काम करेंगे। 



    कक्षावार मूल्यांकन को मिलेगी तरजीह

    विभाग का प्रयास है कि निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई में सुधार किया जाए। इसके लिए एससीईआरटी की ओर से विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटकर वहां की पढ़ाई की गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। इसमें ओवरऑल के साथ-साथ कक्षावार मूल्यांकन को वरीयता दी जाएगी। ताकि इसी के अनुरूप रेमेडियल क्लास या अतिरिक्त सुधार किया जा सके।


    विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटने से काफी बारीक स्तर की जानकारी मिल सकेगी। अभी जिला स्तर पर ही सुधार की कवायद चलती है। जबकि जिलों में भी स्कूलों के बीच में पढ़ाई के स्तर में काफी अंतर होता है। नई कवायद से न सिर्फ सुधार की प्रक्रिया आसान होगी। बल्कि परख जैसे राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन की तैयारी भी बेहतर हो सकेगी। - डॉ. पवन सचान, संयुक्त निदेशक, एससीईआरटी

    TET प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना दे दी गई नियुक्ति, PNP ने ऑनलाइन अपलोड कराए हैं UPTET के परीक्षाफल

    TET प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना दे दी गई नियुक्ति, PNP ने ऑनलाइन अपलोड कराए हैं UPTET के परीक्षाफल

    जब अनुक्रमांक आवंटित नहीं जिलों में सत्यापन पर प्रश्न

    प्रयागराजः उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के कई प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन में फर्जी मिलने से जिलों में किए गए अभिलेख सत्यापन पर प्रश्न उठे हैं। 


    पीएनपी ने टीईटी का परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध कराने के साथ व्यवस्था दी है कि प्रमाणपत्रों का आनलाइन सत्यापन किया जा सकता है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षक भर्तियों में कई जिलों में कुछ अभ्यर्थियों के टीईटी के प्रमाणपत्र पीएनपी के सत्यापन में तब फर्जी कूटरचित मिले, जब उन्हें नौकरी और वेतन पाते हुए महीनों/वर्ष बीत गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है नियुक्ति देने से पहले कराई गई काउंसलिंग में संबंधित के प्रमाणपत्रों का सत्यापन जिलों में नहीं किया गया।


    यह प्रश्न देवरिया, आगरा, आजमगढ़, बलरामपुर, मुजफ्फरनगर, कौशांबी के बाद सीतापुर के सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का पीएनपी कार्यालय में सत्यापन किए जाने के बाद उठा है। सीतापुर के मामले में पांच अभ्यर्थियों के टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित है, वह पीएनपी ने आवंटित ही नहीं किए थे। इसी तरह दो अन्य ने जिस अनुक्रमांक का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी पाई, वह पीएनपी ने उन्हें नहीं, बल्कि दो अन्य अभ्यर्थियों को आवंटित किए थे। ऐसे में यदि काउंसलिंग में सही ढंग से सत्यापन कराया गया होता तो उसी समय फर्जीवाड़ा सामने आ जाता। 


    मामले में पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि टीईटी के परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध हैं। सत्यापन के संबंध में पूर्व में आदेश निर्गत है कि आनलाइन माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है। यदि किसी मामले में संदिग्ध स्थिति मिलती है तो उसे पीएनपी कार्यालय भेजकर सत्यापन कराया जा सकता है। वर्ष 2011 से टीईटी का आयोजन शुरू हुआ। पहली टीईटी यूपी बोर्ड ने कराई थी। 2012 में टीईटी का आयोजन नहीं हुआ। वर्ष 2013 से यह आयोजन पीएनपी करा रहा था। अब इसके आयोजन का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को दिया गया है।

    जून के पहले सप्ताह से यूपी डीएलएड के लिए आवेदन, 2.39 लाख सीटों पर होंगे दाखिले, विज्ञापन जल्द

    जून के पहले सप्ताह से यूपी डीएलएड के लिए आवेदन, 
    2.39 लाख सीटों पर होंगे दाखिले, विज्ञापन जल्द


    प्रयागराज । सूबे में डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) प्रशिक्षण 2026 (पूर्व बीटीसी) में दाखिले के लिए आवेदन जून के पहले सप्ताह से शुरू होने की संभावना है। 


    परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की ओर से प्रवेश संबंधी प्रस्ताव शासन को भेज दिया गया है। माना जा रहा है कि शासन से मंजूरी मिलते ही एक-दो दिन के भीतर विज्ञापन जारी कर ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। 


    लाखों अभ्यर्थी लंबे समय से डीएलएड प्रवेश विज्ञापन का इंतजार कर रहे हैं। इस बार करीब 2 लाख 39 हजार सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सरकारी और निजी कॉलेजों में दो वर्षीय प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के लिए आवेदन ऑनलाइन माध्यम से लिए जाएंगे।

    Thursday, May 28, 2026

    उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन पांच जुलाई तक मांगे गए

    उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों से राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन पांच जुलाई तक मांगे गए 




    लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हो गए हैं। इसके लिए शिक्षक पांच जुलाई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पुरस्कार के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों व पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। श्रेणी एक में उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक व श्रेणी-दो में पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं।

    ऑनलाइन आवेदन वेबसाइट www.awards.gov.in पर ऑनलाइन किए जा सकेंगे। आवेदन प्रक्रिया स्व-नामांकन आधारित है। जिसमें वर्तमान व पूर्व कुलपति, प्राचार्य, निदेशक व शिक्षक भी फॉर्म भर सकते हैं। शिक्षकों को अपने सेवाकाल की उपलब्धियों के साथ ही दो से तीन मिनट का वीडियो और उसका यूट्यूब लिंक भी भेजना होगा।

    उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के लिए 25 व पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों के लिए 10 पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। चयनित शिक्षकों को 50 हजार रुपये का नकद पुरस्कार, मेडल व प्रमाण पत्र दिया जाएगा। पुरस्कार पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर दिया जाएगा। 


    परिषदीय शिक्षकों के तबादलों पर लगा ब्रेक, घर वापसी का इंतजार और बढ़ा, जनगणना और समायोजन प्रक्रिया के चलते फिलहाल नहीं होग स्थानांतरण, बढ़ी निराशा

    परिषदीय शिक्षकों के तबादलों पर लगा ब्रेक, घर वापसी का इंतजार और बढ़ा, जनगणना और समायोजन प्रक्रिया के चलते फिलहाल नहीं होग स्थानांतरण, बढ़ी निराशा


    लखनऊः प्रदेश में परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों फिलहाल ब्रेक लग गया है। जनगणना कार्य और शिक्षक समायोजन प्रक्रिया के चलते बेसिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। इससे वर्षों से गृह जिले जाने का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षक और शिक्षिकाओं में निराशा बढ़ गई है।


    सरकारी आदेश के अनुसार जनगणना का पहला चरण 20 जून 2026 तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण अगले वर्ष फरवरी में होगा। जनगणना कार्य पूरा होने यानी अगले वर्ष 31 मार्च तक स्थानांतरण न करने के निर्देश हैं। इसी आधार पर विभाग ने फिलहाल तबादले रोक दिए हैं। बड़ी संख्या में हर रोज शिक्षक संगठन और जनप्रतिनिधि शिक्षकों के तबादले की मांग को लेकर मंत्री और विभागीय अधिकारियों के पास पहुंच रहे हैं। 

    हालांकि विभागीय अधिकारियों ने साफ किया है कि वर्तमान परिस्थितियों में एक से दूसरे जिले में शिक्षकों के तबादले संभव नहीं हैं। प्रदेश में बड़ी संख्या में शिक्षक 10 से 15 वर्षों से गैर जनपदों में तैनात हैं। शिक्षकों का कहना है कि परिवार से दूर रहने के कारण वे पारिवारिक जिम्मेदारियां ठीक से नहीं निभा पा रहे हैं। पिछली बार जारी स्थानांतरण नीति के तहत लगभग 500 शिक्षकों का ही तबादला हो सका था, जबकि बड़ी संख्या में शिक्षक इससे वंचित रह गए थे। शिक्षक संगठनों ने वरिष्ठता आधारित स्थायी स्थानांतरण नीति लागू करने और हर वर्ष नियमित तबादले करने की मांग उठाई है।

    इधर, शिक्षक समायोजन मामले में राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया है कि विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आपत्तियां मिली हैं, जिनका सत्यापन और निस्तारण किया जा रहा है। इसके बाद ही अधिशेष शिक्षकों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। न्यायालय का आदेश है कि अधिशेष शिक्षकों की पहचान पूरे प्रदेश में फर्स्ट इन फर्स्ट आउट सिद्धांत के आधार पर की जाए। यानी पहले नियुक्त शिक्षक को बाद में नियुक्त शिक्षक की तुलना में प्राथमिकता मिलेगी। कक्षा छह से आठ तक के विषय अध्यापकों के मामले में यह व्यवस्था विषयवार लागू होगी। कोर्ट ने सभी आपत्तियों का निस्तारण 20 जून तक करने और अगली सुनवाई तीन जुलाई 2026 को करने के आदेश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया है कि अगली सुनवाई तक किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण या पुनर्नियोजन नहीं किया जाएगा।

    स्वच्छ गरिमा विद्यालय से बेटियों के सम्मान को नई ताकत, 75 मॉडल स्कूलों से शुरु हुआ बदलाव, जुलाई तक सभी विद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान

    स्वच्छ गरिमा विद्यालय से बेटियों के सम्मान को नई ताकत, 75 मॉडल स्कूलों से शुरु हुआ बदलाव, जुलाई तक सभी विद्यालयों तक पहुंचेगा अभियान

    विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस आज

    लखनऊ। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस के मौके पर उत्तर प्रदेश की बेटियों की शिक्षा और सम्मान से जुड़ी एक बड़ी पहल को नई रफ्तार मिली है। राज्य सरकार अब प्रदेश के 7004 सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को 'स्वच्छ गरिमा विद्यालय' के रूप में विकसित करेगी। समग्र शिक्षा और यूनिसेफ के सहयोग से चल रही यह पहल स्कूलों को माहवारी स्वच्छता के अनुकूल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


    साल 2022 से 75 स्कूलों में शुरू, अब पूरे प्रदेश तक पहुंचा अभियान

    इस अभियान की शुरुआत वर्ष 2022 में हुई थी। पहले चरण में प्रदेश के सभी 75 जिलों में एक-एक राजकीय विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाया गया। यहां बालिकाओं के लिए स्वच्छ शौचालय, सेनेटरी पैड वेंडिंग मशीन, पैड निस्तारण सुविधा और जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए गए। इन स्कूलों में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद अब इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।

    अप्रैल 2026 में 150 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर के रूप में तैयार किया गया है। ये शिक्षक अगले तीन महीनों में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देंगे। जुलाई से नए शैक्षणिक सत्र में इसका व्यापक क्रियान्वयन शुरू होगा।

    समग्र शिक्षा के अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय ने बताया कि यह पहल बालिकाओं को शिक्षा से जोड़े रखने और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

    Wednesday, May 27, 2026

    एक जून को सीएम 223 बोर्ड मेधावियों को करेंगे सम्मानित, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये टैबलेट, प्रशस्ति पत्र देंगे

    एक जून को सीएम 223 बोर्ड मेधावियों को करेंगे सम्मानित, राज्य स्तरीय मेधावियों को एक-एक लाख रुपये टैबलेट, प्रशस्ति पत्र देंगे

    जिला स्तर पर होने वाले आयोजन में मेधावियों को 21-21 हजार रुपये व प्रशस्ति पत्र दिए जाएंगे


    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक जून को लोकभवन में हाईस्कूल व इंटर के विभिन्न बोर्ड के राज्य स्तरीय मेधावियों को सम्मानित करेंगे। राज्य स्तर पर प्रथम 10 मेधावियों को एक-एक लाख रुपये का चेक, एक-एक टैबलेट, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। जिला स्तरीय सम्मान समारोह में जिले के प्रथम 10 मेधावियों को 21–21 हजार रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र व मेडल दिए जाएंगे। 


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी निर्देश के अनुसार राज्य स्तर पर यूपी बोर्ड, संस्कृत शिक्षा परिषद, सीआईएसई व सीबीएसई के हाईस्कूल व इंटर के कुल 223 मेधावियों को सीएम लोकभवन में सम्मानित करेंगे। जिला स्तर पर कुल 1459 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य स्तरीय आयोजन में मेधावियों के साथ उनके एक-एक अभिभावक भी शामिल हो सकेंगे।

     उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि राज्य स्तरीय कार्यक्रम का लाइव प्रसारण जिला मुख्यालय पर करने के लिए व्यवस्था की जाए। डीआईओएस एक जून को होने वाले आयोजन में मंत्री या जनप्रतिनिधि की उपस्थिति में आयोजन सुनिश्चित कराएं। निदेशक ने कहा है कि मेधावियों को दी जाने वाली धनराशि कोषागार से उनके खातों में हस्तांतरित कराई जाएगी। 

    CBSE : 12वीं में चार लाख से अधिक आए पुनर्मूल्यांकन आवेदन, 11 लाख से अधिक स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गईं, पोर्टल दोबारा खोलने पर हो सकता है विचार

    CBSE : 12वीं में चार लाख से अधिक आए पुनर्मूल्यांकन आवेदन, 11 लाख से अधिक स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गईं, पोर्टल दोबारा खोलने पर हो सकता है विचार


    27 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 12वीं की परीक्षा में ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के चलते पुनर्मूल्यांकन के लिए रिकॉर्ड चार लाख से ज्यादा आवेदन मिल चुके हैं। सीबीएसई के इतिहास में पहली बार किसी परीक्षा में इतनी बड़ी संख्या में पुनर्मूल्यांकन के आवेदन आए हैं।

    मंगलवार को शाम साढ़े चार बजे - तक 4,04,319 विद्यार्थी आवेदन कर चुके थे, जबकि गिनती अभी जारी है। वहीं, हजारों विद्यार्थियों को आंसर-शीट मिल ही नहीं पाई, इस कारण वे फिर से मूल्यांकन के लिए आवेदन नहीं कर पाए हैं। खास बात यह है कि 11,31,961 स्कैन उत्तर पुस्तिकाएं मांगी गई हैं। इसमें से अभी तक 8,98,214 उत्तर पुस्तिकाएं दी जा चुकी हैं। 

    अधिकारी भी मानते हैं कि 12वीं के नतीजे आने के 14 दिन बीतने के बाद अभी तक विद्यार्थी परेशान हैं। विद्यार्थियों की दिक्कतों को देखते हुए सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन के लिए विंडो फिर खोलने पर विचार कर सकता है। यदि विंडो खुलती है, तो चार लाख का आंकड़ा और बढ़ने की उम्मीद है। उत्तर पुस्तिका की प्रति नहीं मिलने से आवेदन से वंचित रह गए विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक स्कैन कॉपी नहीं मिलेगी, तब तक कैसे पता चलेगा कि उन्हें कम नंबर क्यों मिले हैं? 




    सीबीएसई 12वीं के विद्यार्थियों को लौटाएगा पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में ली गई अतिरिक्त राशि, अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    कम नहीं हो रहीं समस्याएं : पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी गड़बड़ियां

    24 मई 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कहा कि 12वीं के नतीजे के बाद पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी गड़बड़ियों से जिन विद्यार्थियों से अधिक शुल्क वसूला गया, उन्हें अतिरिक्त राशि लौटाई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने पुनर्मूल्यांकन के दौरान बच्चों व अभिभावकों की तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायतों पर सीबीएसई से विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी है।

    सीबीएसई ने रविवार को बताया कि 21-22 मई को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी के लिए आवेदन करते समय तकनीकी समस्याओं के चलते कुछ मामलों में अधिक राशि वसूली गई, जबकि कुछ में कम शुल्क लिया गया। जिन मामलों में अधिक भुगतान लिया गया, उनमें अतिरिक्त राशि उसी भुगतान माध्यम में वापस की जाएगी, जिससे शुल्क जमा किया गया था। जिन मामलों में कम शुल्क लिया गया है, उनमें जरूरी होने पर विद्यार्थियों को शेष राशि जमा करने के बारे में अलग से सूचित किया जाएगा।

     बोर्ड ने यह भी बताया कि ऐसे सभी मामलों में उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए दोबारा आवेदन की जरूरत नहीं होगी। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे में गड़बड़ी और प्रक्रिया के दौरान सामने आई अन्य तकनीकी खामियों पर संज्ञान लिया था। 


    अब आज रात तक कर सकेंगे आवेदन

    सीबीएसई ने 12वीं की उत्तर पुस्तिका की स्कैन प्रति हासिल करने के लिए आवेदन की तिथि एक दिन और बढ़ा दी है। अब 25 मई को रात 11:59 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

    डिजिटल मूल्यांकन का आकलन जारी डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था को लेकर व्यापक विरोध व विद्यार्थियों की बढ़ती चिंता के बीच शिक्षा मंत्रालय 12वीं के नतीजों पर सतर्कता से नजर बनाए हुए है। सीबीएसई को इसमें प्रशासनिक निगरानी भी मुहैया करा रहा है। इस वर्ष 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के बाद सामने आईं विसंगतियों और पोर्टल में तकनीकी गड़बड़ियों के बाद मंत्रालय ने हस्तक्षेप किया है।

    दाखिले में दिक्कत न आए प्रशासनिक निगरानी का मकसद सुनिश्चित करना है कि तकनीकी बाधाओं के कारण कॉलेज में दाखिले के दौरान विद्यार्थियों को असुविधा न हो।




    CBSE उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कापी लेने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि हुई 24 मई

    23 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेने की अंतिम तारीख एक दिन के लिए और बढ़ा दी है। पहले अंतिम तिथि 23 मई थी, लेकिन अब विद्यार्थी 24 मई तक इसके लिए आवेदन कर सकेंगे। वेबसाइट पर आ रही तकनीकी दिक्कतों के कारण यह निर्णय लिया गया है।

    बोर्ड ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से वेबसाइट पर अत्यधिक ट्रैफिक और कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण कई विद्यार्थियों को आवेदन करने में परेशानी हो रही थी। इस कारण वे समय पर आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है। वहीं, विद्यार्थियों का दावा है कि वेबसाइट हैक हो गई थी, जिस कारण फीस के मूल्य में बदलाव देखने को मिल रहा था।

    सीबीएसई के अनुसार, वेबसाइट पर बढ़े लोड के साथ कुछ तकनीकी हस्तक्षेप के प्रयासों के कारण भी सिस्टम पर असर पड़ा है, जिससे आवेदन प्रक्रिया बाधित हुई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि अब सभी प्रभावित विद्यार्थी अतिरिक्त एक दिन के भीतर आवेदन कर सकते हैं। स्कैन कापी प्राप्त करने के बाद छात्रों को आगे की प्रक्रिया यानी वेरिफिकेशन आफ इश्यूज आब्जर्व्ह और रि-इवैल्यूएशन के लिए भी दो दिन का अतिरिक्त समय दिया जाएगा, ताकि वे अपनी उत्तरपुस्तिका को ठीक से देखकर निर्णय ले सकें। बोर्ड ने कहा कि अन्य सभी नियम और शर्तें पहले की तरह ही लागू रहेंगी।




    ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम में कम नंबरों के बाद अब सीबीएसई के री-इवैल्यूएशन पोर्टल की परेशानी, विद्यार्थियों ने पोर्टल पर लागिन नहीं कर पाने का लगाया आरोप

    कभी वेबसाइट पर ब्लैंक पेज दिखने तो कभी कैप्चा कोड नहीं आने की भी शिकायत

    20 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई की ओर से 12 वीं में कापियों की जांच के लिए आन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम से परिणाम में उम्मीद से कम अंक मिलने की शिकायतें मिली हैं। इसके बाद अब री-इवैल्यूएशन और स्कैन कापी हासिल करने के
     लिए खोले गए पोर्टल पर तकनीकी दिक्कतों से विद्यार्थियों की चिंता और बढ़ गई है। कई विद्यार्थियों का आरोप है कि वे न तो पोर्टल पर लागिन कर पा रहे हैं और न ही आवेदन प्रक्रिया पूरी हो रही है।


    मंगलवार को सीबीएसई ने पोस्ट रिजल्ट (परिणाम के बाद) सुविधा शुरू की है। इसमें विद्यार्थी अपनी जांची हुई उत्तर पुस्तिका की स्कैन कापी लेकर री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर सकते हैं, लेकिन पोर्टल खुलते ही इंटरनेट मीडिया पर शिकायतों की संख्या बढ़‌ने लगी है।


    विद्यार्थियों का कहना है कि कभी वेबसाइट ब्लैंक पेज दिखा रही है, कभी कैप्चा कोड नहीं आ रहा। कई मामलों में भुगतान कटने के बाद भी आवेदन पूरा नहीं हो रहा है। एक छात्र ने बताया कि कई बार कोशिश के बाद भी वह पंजीकरण नहीं कर पाया, क्योंकि बार-बार वेब साइट हैंग हो रही है। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर भी छात्रों ने स्क्रीनशाट साझा करते हुए बोर्ड की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं। एक छात्र ने कहा कि कि रुपये कट गए पर वेरिफिकेशन फेल हो गया। सिस्टम अपग्रेड नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था ही फेल है। हालांकि, इस मामले में सीबीएसई ने किसी बड़ी तकनीकी विफलता से इन्कार किया है।

    बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि उन्हें सुबह कुछ छात्रों के फोन आए थे, जो लागिन नहीं कर पा रहे थे। वैसे इस संबंध में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है। उनके अनुसार कई बार पुराना सेव पेज खुल जाता है, जिसे कंप्यूटर रीस्टार्ट करने से ठीक किया जा सकता है। उन्होंने छात्रों को कुछ देर बाद दोबारा से लागिन करने की सलाह दी है। बोर्ड ने कहा कि री-इवैल्यूएशन पोर्टल सही तरीके से काम कर रहा है। वैसे इस बार स्कैन कापी और री-इवैल्यूएशन की फीस भी कम की गई है। स्कैन कापी शुल्क 700 से 100 रुपये, री-इवैल्यूएशन फीस 500 से 100 रुपये और प्रति प्रश्न जांच शुल्क 100 से 25 रुपये किया गया है।

    यूपी के स्कूलों में पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए चलेगा विशेष अभियान, 'रीडिंग आवर, समाचार-पत्र पठन व डीईएआर अभियान को मिलेगा बढ़ावा

    यूपी के स्कूलों में पढ़ने की आदत बढ़ाने के लिए चलेगा विशेष अभियान, 'रीडिंग आवर, समाचार-पत्र पठन व डीईएआर अभियान को मिलेगा बढ़ावा

    बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने स्कूलों में समाचार पत्र पढ़ने पर दिया जोर

     लखनऊप्रदेश के बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों में बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करने के लिए सरकार ने शैक्षिक सत्र 2026-27 से विशेष अभियान तेज करने का फैसला किया है। सरकार का उद्देश्य बच्चों की भाषा क्षमता, तार्किक सोच, संवाद कौशल और रचनात्मक अभिव्यक्ति को मजबूत करना है। इसके लिए सभी स्कूलों में 'रीडिंग आवर', 'समाचार-पत्र पठन' और 'ड्राप एवरीथिंग एंड रीड (डीईएआर) अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।


    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा को केवल किताबों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि विद्यार्थियों के समग्र विकास पर काम कर रही है। नियमित पढ़ाई से बच्चों की भाषा और सोचने समझने की क्षमता बेहतर होगी। स्कूल खुलने के बाद स्कूलों में लेखन प्रतियोगिता, पुस्तक समीक्षा और समाचार आधारित लेखन गतिविधियां भी कराई जाएंगी, ताकि छात्र-छात्राओं की अभिव्यक्ति क्षमता मजबूत हो सके। अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी डायट प्राचार्यों, एडी बेसिक, बीएसए और बीईओ को निर्देश दिए हैं कि अभियान को गंभीरता से लागू कराया जाए। स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान समाचार वाचन भी कराया जाएगा और बच्चों को नियमित पुस्तक पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। 


    सरकार ने प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-20' और उच्च प्राथमिक स्तर पर 'सुपर-30' रीडिंग चैलेंज को भी आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। तय संख्या में पुस्तकें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया जाएगा। सबसे अधिक पुस्तकें पढ़ने वाले छात्र-छात्रा को 'चैंपियन रीडर आफ द इयर' का पुरस्कार दिया जाएगा। विद्यार्थियों को कहानी लेखन, समीक्षा लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा ताकि उनकी सोच, विश्लेषण क्षमता और आत्मविश्वास का विकास हो सके।

    बच्चों को मोबाइल से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का स्नेहिल संदेश, गर्मी की छुट्टियों पर 'सीएम योगी' की बच्चों को पाती

    बच्चों को मोबाइल से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का स्नेहिल संदेश, गर्मी की छुट्टियों पर 'सीएम योगी' की बच्चों को पाती


    उत्तर प्रदेश में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बच्चों के नाम एक बेहद भावुक खुला खत लिखा है. 'योगी अंकल' ने बच्चों से इन छुट्टियों में मोबाइल और रील्स की स्क्रीन से दूर रहने, नानी-दादी के घर जाकर संस्कार सीखने और इस वैकेशन को पूरी तरह 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने की बड़ी अपील की है.


    लखनऊ ।  उत्तर प्रदेश में स्कूलों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होते ही सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक बिल्कुल अलग और संवेदनशील अंदाज में नजर आए हैं. बच्चों के 'योगी अंकल' ने आज, 25 मई 2026 को राज्य के स्कूली बच्चों और उनके अभिभावकों के नाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बेहद भावुक और प्रेरक खुला खत साझा किया है. इस खत को 'योगी की पाती' नाम दिया गया है, जिसमें उन्होंने बच्चों को मोबाइल स्क्रीन से दूर रहने, संस्कारों से जुड़ने और अपनी छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का कड़ा और स्नेहिल संदेश दिया है. 


    'मेरे प्यारे बच्चों... किताबों से दोस्ती करो, नई भाषा सीखो' मुख्यमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुए लिखा कि स्कूल की व्यस्त दिनचर्या और परीक्षाओं के परिणाम के बाद मिलने वाला यह अवकाश केवल खाली बैठने के लिए नहीं, बल्कि कुछ नया तलाशने का समय है. सीएम योगी ने लिखा:

    "मेरे प्यारे बच्चों, गर्मी की छुट्टियां आप सभी के लिए आनंद, उत्साह और नए शोध का समय लेकर आती हैं. व्यस्त रूटीन से मुक्ति मिलते ही मन कुछ नया सीखने के लिए उत्सुक हो जाता है. यह समय अपनी रुचियों को पहचानने, अच्छी किताबों से दोस्ती करने, फोटोग्राफी, पेंटिंग, कुकिंग, संगीत और बागवानी जैसे शौक विकसित करने का है."

    उन्होंने किशोरों और युवाओं से विशेष अपील की कि वे इस खाली समय का उपयोग कोई नई भाषा सीखने या कोई नया हुनर (Skill Acquisition) हासिल करने की प्रक्रिया में करें. 


    पेरेंट्स से अपील: 'बच्चों को ले जाएं नानी-दादी के घर' खत के दूसरे हिस्से में सीएम योगी ने अभिभावकों (Parents) को सीधे संबोधित करते हुए आज के डिजिटल दौर की एक बड़ी कमी पर चोट की. उन्होंने लिखा कि आज के बच्चे दादा-दादी और नाना-नानी की कहानियों से दूर होते जा रहे हैं.

    संस्कारों से जुड़ाव: सीएम ने पेरेंट्स से कहा कि इन छुट्टियों में बच्चों को उनके ननिहाल और ददिहाल जरूर लेकर जाएं, ताकि वे अपने परिवार के साथ समय बिता सकें और हमारे पारिवारिक मूल्यों, संस्कृति और परंपराओं को करीब से समझ सकें.

    प्रकृति से दोस्ती: उन्होंने माता-पिता से अपील की कि बच्चों को मिट्टी, पानी और वृक्षों का महत्व समझाएं. बच्चों के हाथों से पौधे लगवाएं और उन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी बच्चों को ही सौंपें.

    छुट्टियों को 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाएं पर्यावरण संरक्षण पर विशेष जोर देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश से एक बड़ा संकल्प लेने का आह्वान किया है. उन्होंने लिखा:

    'मेरी आप सभी से अपील है कि इन छुट्टियों को पूरी तरह से 'प्लास्टिक-मुक्त' बनाने का संकल्प लें. आप कहीं भी घूमने जाएं या पिकनिक पर जाएं, हमेशा कपड़े या जूट के थैलों का ही उपयोग करें. प्लास्टिक का कचरा कहीं भी न फेंकें. आज के ये छोटे-छोटे प्रयास ही भविष्य में बड़े बदलावों का आधार बनते हैं.' 

    सीएम ने बच्चों को उत्तर प्रदेश की प्राकृतिक संपदा से रूबरू कराने के लिए उन्हें दुधवा नेशनल पार्क, चूका बीच और कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी जैसे प्राकृतिक स्थलों पर ले जाने का भी सुझाव दिया.

    Tuesday, May 26, 2026

    जानिए! क्या है श्रमिक विद्या योजना? जिसका 75 जिलों में किया जायेगा विस्तार

    जानिए! क्या है श्रमिक विद्या योजना? जिसका 75 जिलों में किया जायेगा विस्तार 

    लखनऊ । बाल श्रमिक विद्या योजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक प्रमुख बाल कल्याण और शिक्षा प्रोत्साहन योजना है, जिसे राज्य में बाल श्रम को खत्म करने और गरीब कामकाजी बच्चों को शिक्षित करने के लिए शुरू किया गया था। अब इसका विस्तार उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कर दिया गया है

    इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

    उद्देश्य: आर्थिक तंगी के कारण बाल मजदूरी करने वाले 8 से 18 वर्ष के बच्चों को चिन्हित कर उन्हें शिक्षा से जोड़ना और मुख्यधारा में वापस लाना।

    वित्तीय सहायता: बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करने हेतु सरकार मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करती है:

    बालकों (लड़कों) को: ₹1,000 प्रति माह
    बालिकाओं (लड़कियों) को: ₹1,200 प्रति माह

    अतिरिक्त प्रोत्साहन: यदि ये बच्चे कक्षा 8, 9 और 10 पास करते हैं, तो उन्हें शिक्षा पूरी करने के लिए ₹6,000 की विशेष प्रोत्साहन राशि अलग से दी जाती है।कौशल विकास: निजी क्षेत्रों के सहयोग से इन बच्चों के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण का भी प्रावधान किया गया है ताकि भविष्य में उन्हें बेहतर रोजगार मिल सके।



    अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू होगी श्रमिक विद्या योजना, सीएम योगी ने दिए निर्देश, अब तक 20 जिलों में लागू थी

    योजना के तहत 8 से 18 साल आयु वर्ग के कामकाजी बच्चों को भेजा जाएगा विद्यालय


    24 मई 2026
    लखनऊ। प्रदेश में श्रमिक परिवार के बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए श्रम विभाग संचालित बाल श्रमिक विद्या योजना को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने का फैसला किया है। योजना के तहत 8 से 18 वर्ष की आयु तक के कामकाजी बच्चों को विद्यालय से जोड़ा जाएगा। वहीं, सेवा मित्र योजना को और प्रभावी बनाते हुए बड़े और औद्योगिक शहरों में श्रमिक सुविधा केंद्रों का विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं।


    यह निर्देश मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को श्रम एवं सेवायोजन विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने रोजगार मिशन को वैश्विक अवसरों से जोड़ने पर जोर देते हुए कहा कि कोई भी श्रमिक परिवार का बच्चा आर्थिक मजबूरी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। उन्होंने निर्देश दिए कि बाल श्रम प्रभावित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाकर बच्चों को विद्यालयों से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के सहयोग से इन बच्चों के कौशल विकास की कार्ययोजना तैयार करें।

    वर्ष 2020 में शुरु बाल श्रमिक विद्या योजना के तहत 8 से 18 वर्ष के कामकाजी बच्चों को विद्यालयों में प्रवेश के साथ आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्तमान में योजना 20 जिलों में संचालित है। मुख्यमंत्री ने इसे नए प्रावधानों के साथ प्रदेश के सभी 75 जिलों में लागू करने के निर्देश दिए।

    मुख्यमंत्री ने 'सेवामित्र व्यवस्था' को रोजगार और जनसुविधा का अभिनव मॉडल बताते हुए कहा कि तकनीक आधारित ऐसी व्यवस्थाएं युवाओं और कुशल कामगारों के लिए नए अवसर तैयार करती हैं।

    बैठक में बताया गया कि वर्ष 2021 से संचालित इस व्यवस्था के तहत नागरिक मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल अथवा कॉल सेंटर के माध्यम से घरेलू सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में पोर्टल पर 1097 सेवा प्रदाता, 5049 सेवामित्र और 54,747 कुशल कामगार पंजीकृत हैं। 

    मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों के अनुकूल वातावरण और श्रमिक हितों के बीच संतुलन बनाना सरकार की नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

    आंगनबाड़ी में पोषाहार का बदला स्वाद और सिस्टम, ओटीपी बताए बिना अब नहीं मिलेगा पोषक आहार, लाभार्थियों की 7 श्रेणी तय कर पोषक आहार को दिए गए हैं अलग-अलग नाम

    आंगनबाड़ी पोषक आहार में अमृत, पोषण, संजीवनी और पुष्टिकर, लाभार्थियों की श्रेणी बनाकर दिए गए नाम

    आंगनबाड़ी में पोषाहार का बदला स्वाद और सिस्टम, ओटीपी बताए बिना अब नहीं मिलेगा पोषक आहार

    लाभार्थियों की 7 श्रेणी तय कर पोषक आहार को दिए गए हैं अलग-अलग नाम


    लखनऊ। आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत बच्चे, गर्भवती और धात्री के पोषक आहार वितरण की व्यवस्था में ओटीपी का ताला लग गया है। यानी अब आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को ओटीपी बताने पर ही एजेंसी से पोषक आहार मिलेगा। पोषक आहार में हलआ, दलिया, मूंग दाल की खिचड़ी शामिल की गई है। पोषक आहार के लाभार्थियों की श्रेणी बनाकर उसे नाम भी दिया गया है।  बच्चों, गर्भवती व धात्री महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्र से प्रतिमाह पोषक आहार मिलता है। अब पोषक आहार में मिलने वाले खाद्य पदार्थ के साथ ही वितरण व्यवस्था में बदलाव किया जा रहा है। 



    नई व्यवस्था के तहत आने वाले पोषक आहार को बच्चों की उम्र के अनुसार ही नाम दिया गया है। छह माह से एक वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे को आटा-बेसन का मीठा हलवा दिया जाएगा। इसे शिशु अमृत नाम दिया गया है। एक से तीन वर्ष के आयु वर्ग के बच्चे को दिए जाने वाले हलवा को शिशु आहार कहा गया है।

    तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चे को आटा-बेसन की बर्फी, दलिया और मूंग दाल की नमकीन खिचड़ी दी जाएगी। इसे बाल पुष्टिकर नाम दिया गया है।

    गर्भवती और धात्री को आटा-बेसन और सोया बर्फी, दलिया-मूंग दाल की नमकीन खिचड़ी संपूर्ण मातृ आहार के नाम से दी जाएगी। एक से तीन वर्ष के अति कुपोषित बच्चों को मीठा हलवा मिलेगा। इसे बाल संजीवनी नाम दिया गया।


    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के मोबाइल पर आएगा ओटीपी

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को अपने मोबाइल फोन में ईएलएमडी एप डाउनलोड करना होगा। केंद्र का विवरण और अन्य जरूरी जानकारी दर्ज करनी होगी। एप के जरिये ही ओटीपी आएगा। ओटीपी बताने पर ही संबंधित एजेंसी केंद्र पर पंजीकृत लाभार्थियों की संख्या के सापेक्ष पोषक आहार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सुपुर्द करेगी। जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रेयश कुमार ने बताया कि ओटीपी न बताने पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को पोषक आहार सुपुर्द नहीं किया जाएगा। निदेशालय स्तर से उतने ही लाभार्थियों का पोषक आहार आएगा, जिनका आधार पंजीकरण और चेहरा प्रमाणीकरण हो चुका है।

    Monday, May 25, 2026

    स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

    स्थानांतरण पर सरकार व विभाग की चुप्पी से बेसिक शिक्षकों में नाराजगी, शिक्षक संगठनों का आरोप जनगणना का हवाला देकर टाले जा रहे तबादले

     लखनऊपरिषदीय शिक्षकों ने एक बार फिर जनपदीय और अंतरजनपदीय तबादलों की मांग तेज कर दी है। वर्षों से दूरस्थ जिलों और ब्लाकों में तैनात शिक्षक अब सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि लगातार दूर-दराज क्षेत्रों में सेवा देने के बावजूद उन्हें घर के नजदीक तैनाती का मौका नहीं मिल रहा है, जिससे पारिवारिक और सामाजिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो रही हैं।

    शिक्षक संगठनों का आरोप है कि विभाग अधिकारियों के तबादले की तैयारी तो कर रहा है, लेकिन परिषदीय शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर चुप्पी साधे हुए है। अब जनगणना कार्य का हवाला देकर तबादलों को टालने की बात कही जा रही है, जिससे शिक्षकों में भारी नाराजगी है।



    तबादला प्रक्रिया शुरू नहीं होने से परिषदीय शिक्षकों में नाराजगी, कई सालों से दूरस्थ जिलों व ब्लॉकों में कर रहे कार्य

    नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों में जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में तबादला प्रक्रिया न शुरू होने से नाराजगी है। शिक्षकों का कहना है दूरस्थ जिलों में कई वर्ष से सेवाएं दे रहे हैं लेकिन आकांक्षी जिलों में तैनात शिक्षकों के ट्रांसफर न होने से वह अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। शिक्षक जिले के अंदर दूरस्थ ब्लॉकों में तैनात हैं और अपने घर के पास तबादले की मांग कर रहे हैं।


    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जो शिक्षक वर्षों से कार्यरत हैं उनको नगर क्षेत्र के विद्यालयों में प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित करना चाहिए। 2011 के बाद नगर क्षेत्रों में कोई समायोजन नहीं हुआ है। इससे नगर क्षेत्र में शिक्षकों की काफी कमी है। 

    बेसिक शिक्षा परिषद के नगर क्षेत्र के विद्यालयों में 10 हजार पदों पर भर्ती की सूचना से ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक निराश हैं। उन्होंने नगर क्षेत्र के विद्यालयों में सीधी भर्ती के बजाय इन पदों पर ग्रामीण क्षेत्र के दिव्यांग, गंभीर रूप से बीमार शिक्षक व महिला शिक्षकों को प्राथमिकता पर समायोजित करने की मांग की। अन्य शिक्षकों को भी वरिष्ठता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए। सीधी भर्ती से नियुक्त शिक्षकों को ब्लॉकों में नियुक्ति दी जाए।

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे एक ओर वर्षों से इंतजार कर रहे शिक्षकों को राहत मिलेगी, वहीं दूसरी ओर शैक्षणिक व्यवस्था में भी सुधार आएगा। उन्होंने सरकार से मांग की है कि इस ग्रीष्मावकाश में ही जनपदीय और अंतरजनपदी ट्रांसफर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। शिक्षकों ने म्यूचुअल ट्रांसफर प्रक्रिया को लेकर भी विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। जब दो शिक्षक आपसी सहमति से स्थान परिवर्तन चाहते हैं और इसके लिए नियमों में प्रविधान भी मौजूद है, तब भी विभाग स्तर पर फाइलें आगे नहीं बढ़ाई जा रही हैं। इसे लेकर अधिकारियों पर हठधर्मिता का आरोप लगाया जा रहा है।

    Sunday, May 24, 2026

    राजकीय महाविद्यालयों के 230 प्रवक्ताओं का तबादला, उच्च शिक्षा विभाग ने कहीं पूरी की जरूरत, कहीं अभी बाकी

    राजकीय महाविद्यालयों के 230 प्रवक्ताओं का तबादला, उच्च शिक्षा विभाग ने कहीं पूरी की जरूरत, कहीं अभी बाकी

    कम प्रवेश वाले महाविद्यालयों पर भी चला है डंडा


    लखनऊ। उच्च शिक्षा विभाग ने शनिवार देर रात महाविद्यालयों के 230 प्रवक्ताओं राजकीय का तबादला किया है। इसमें उच्च शिक्षा विभाग ने जहां जरूरत वाले कुछ महाविद्यालयों में तैनाती की है तो कुछ अभी बाकी हैं। वहीं कम प्रवेश वाले राजकीय महाविद्यालयों पर भी शासन का डंडा चला है।


    प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की सख्ती के बाद छात्र संख्या बढ़ाने के लिए लगातार बैठकें व दौरे चल रहे हैं। इस बीच राजकीय महाविद्यालयों में जरूरत के अनुसार शिक्षकों की तैनाती न होने का भी मामला संज्ञान में आया था। इसे देखते हुए पिछले दिनों विभाग ने सभी शिक्षकों की संबद्धता निरस्त कर दी थी।

    जबकि तबादला नीति जारी होने के बाद शनिवार को 230 प्रवक्ताओं की तबादला सूची जारी की गई। इसके तहत कम छात्र संख्या वाले राजकीय महाविद्यालय निहस्था, रायबरेली से चार शिक्षकों का तबादला किया गया है। वहीं सोनभद्र के अलग-अलग राजकीय महाविद्यालयों में आधा दर्जन शिक्षकों की तैनाती की गई है। हालांकि लखीमपुर खीरी के अच्छी छात्र संख्या वाले कॉलेज को इसमें भी शिक्षक नहीं मिले हैं।

    उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी की ओर से तबादला सूची जारी करते हुए शिक्षकों को तत्काल नए तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया गया है। इसके लिए उन्हें किसी तरह का अवकाश नहीं दिया जाएगा।

    प्रदेश के 600 सरकारी माध्यमिक स्कूलों में हाईटेक ड्रीम लैब बनाने की तैयारी, विद्यार्थियों को मिलेगा एआई, रोबोटिक्स, थ्रीडी प्रिंटिंग का प्रशिक्षण

    प्रदेश के 600 सरकारी माध्यमिक स्कूलों में हाईटेक ड्रीम लैब बनाने की तैयारी, विद्यार्थियों को मिलेगा एआई, रोबोटिक्स, थ्रीडी प्रिंटिंग का प्रशिक्षण

    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने टाटा नेल्को के साथ किया अनुबंध

    लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा ने नेल्को लिमिटेड (टाटा इंटरप्राइज) व अन्य औद्योगिक समूहों के साथ समझौता किया है। इसके तहत प्रदेश के 600 राजकीय माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में आधुनिक ड्रीम लैब स्थापित की जाएंगी।


    एमओयू माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में शनिवार को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की मौजूदगी में हुआ। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी और नेल्को के प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए।


    अपर मुख्य सचिव ने बताया कि यह योजना प्रदेश के सभी जिलों में लागू होगी। इसमें 150 हब और 450 स्पोक विद्यालय शामिल किए गए हैं। पहले चरण में 18 हब और 54 स्पोक विद्यालयों में ड्रीम लैब बनाई जाएंगी। दूसरे चरण में 36 हब और 108 स्पोक विद्यालय तथा तीसरे चरण में 96 हब और 288 स्पोक विद्यालयों को जोड़ा जाएगा।

     इन ड्रीम लैब में कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, 3डी प्रिंटिंग, ड्रोन तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और इलेक्ट्रिक वाहन जैसी आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और स्किल इंडिया मिशन के अनुरूप तैयार की गई है। इसका उद्देश्य छात्रों में तकनीकी ज्ञान, नवाचार और रोजगार से जुड़े कौशल विकसित करना है।

    परियोजना के तहत पांच साल तक उद्योग समूह आधुनिक मशीनें, सॉफ्टवेयर और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराएंगे। साथ ही विशेषज्ञ विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्रशिक्षण भी देंगे। कार्यक्रम में अपर शिक्षा निदेशक व्यावसायिक शिक्षा सुरेन्द्र कुमार तिवारी तथा अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकांत पांडेय आदि उपस्थित थे।

    Saturday, May 23, 2026

    समग्र शिक्षा (मा०) की वार्षिक कार्य योजना और बजट 2026-27 अन्तर्गत OMR आधारित Unit Test आकलन कार्यक्रम हेतु अध्यापकों को नामित किए जाने के सम्बन्ध में

    समग्र शिक्षा (मा०) की वार्षिक कार्य योजना और बजट 2026-27 अन्तर्गत OMR आधारित Unit Test आकलन कार्यक्रम हेतु अध्यापकों को नामित किए जाने के सम्बन्ध में


    प्राथमिक व उच्च प्राथमिक UPTET के आवेदकों की एक ही दिन होगी परीक्षा, दोनों स्तर की परीक्षा के लिए पंजीकृत 3.96 लाख अभ्यर्थियों को मिलेगी बड़ी राहत

    प्राथमिक व उच्च प्राथमिक UPTET के आवेदकों की एक ही दिन होगी परीक्षा, दोनों स्तर की परीक्षा के लिए पंजीकृत 3.96 लाख अभ्यर्थियों को मिलेगी बड़ी राहत

    शिक्षा सवा चयन आयोग की बैठक में बनी योजना, केंद्रों के उपलब्धता की प्रतीक्षा

    23 मई 2026
    प्रयागराज : पहली बार उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) का आयोजन कर रहा शिक्षा सेवा चयन आयोग परीक्षार्थियों के आवागमन की सुविधा का भी ध्यान रख रहा है।

    इसके लिए उन अभ्यर्थियों का विवरण अलग से जुटाया गया है, जिन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किया है। ऐसे करीब 3.96 लाख अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन में अलग-अलग पाली में कराए जाने की योजना पर आयोग की बैठक में चर्चा हुई है।

    इस अनुरूप परीक्षा केंद्रों की उपलब्धता होने पर परीक्षा जनपद की सूचना जारी की जाएगी, ताकि परीक्षार्थी जाने-आने की व्यवस्था सुनिश्चित कर सकेंगे।

    दो, तीन और चार जुलाई को आयोजित की जाने वाली टीईटी के लिए कुल 16.16 लाख आवेदन हुए हैं। इसमें करीब 3.96 लाख अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किया है। अलग-अलग आंकड़े देखेंगे तो उच्च प्राथमिक के लिए 12.12 लाख और प्राथमिक टीईटी के लिए 7.84 लाख आवेदन हुए हैं। जिन अभ्यर्थियों ने दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किए हैं, उनकी परीक्षा यदि अलग-अलग दिनों में हुई तो उन्हें दो बार जाना-आना पड़ेगा और परीक्षा केंद्र एक ही जनपद में होने पर रुकने की भी व्यवस्था करनी पड़ेगी। ऐसे में इन अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन में कराने की योजना आयोग ने तैयार की है।

    परीक्षा केंद्रों की सूचना जिलाधिकारियों से मांगी गई है, ताकि केंद्रों का निर्धारण कर परीक्षा जनपद की सूचना अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले दी जा सके। इसके अलावा अन्य अभ्यर्थियों को केवल एक स्तर की टीईटी में सम्मिलित होने जाना है, इसलिए उन्हें आवागमन में अड्चन नहीं होगी।




    एक दिन हो सकती है प्राथमिक व उच्च के 3.96 लाख अभ्यर्थियों की टीईटी, दो, तीन और चार जुलाई को UPTET परीक्षा

    प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 7.84 लाख व उच्च के लिए 12.12 लाख आवेदन

    उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग दो, तीन और चार जुलाई को कराएगा परीक्षा

    14 मई 2026
    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी)-2026 के उन अभ्यर्थियों की परीक्षा एक दिन में आयोजित कर बड़ी राहत दे सकता है, जिन्होंने प्राथमिक व उच्च प्राथमिक दोनों स्तर की टीईटी के लिए आवेदन किया है। ऐसे अभ्यर्थियों की संख्या करीब 3.96 लाख है। एक ही दिन में दो अलग-अलग पालियों में परीक्षा कराए जाने से इन अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र के जनपद में दो बार नहीं जाना-आना पड़ेगा। इसके अलावा केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए करीब 7.84 लाख व उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए 12.12 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं। टीईटी आयोजन दो, तीन व चार जुालई को प्रस्तावित है।




    शिक्षा सेवा चयन आयोग ने एक ही आवेदन में अलग अलग शुल्क लेकर प्राथमिक और उच्च प्राथमिक की टीईटी के लिए आनलाइन आवेदन लिया है। अंतिम तिथि तीन मई तक कुल 16.16 आवेदन किए गए। आयोग ने परीक्षा व्यवस्था के लिए प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के आवेदनों की अलग-अलग गणना कराई। इसमें करीब 3.96 अभ्यर्थी ऐसे हैं, जिन्होंने प्राथमिक और उच्च प्राथमिक दोनों के लिए आवेदन किया है। 

    चूंकि दोनों स्तर की टीईटी का आयोजन अलग-अलग किया जाएगा, इसलिए दोनों में आवेदन करने वाले परीक्षार्थियों को दो बार परीक्षा देने जाना पड़ेगा। इसे ध्यान में रखकर आयोग अध्यक्ष डा. प्रशांत कुमार ऐसी व्यवस्था बनाने के प्रयास में हैं, जिसमें दोनों स्तर के अभ्यर्थियों की परीक्षा एक ही दिन दो अलग-अलग पालियों में संपन्न कराई जा सके।

    अध्यक्ष ने बताया कि इस अनुरूप व्यवस्था बन जाने पर इन अभ्यर्थियों का समय और खर्च दोनों बचेंगे। इसके अलावा प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के अलग-अलग अभ्यर्थी अपने लिए निर्धारित पाली में सम्मिलित होकर परीक्षा दे सकेंगे। परीक्षा केंद्रों की संख्या, सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र तथा अभ्यर्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आयोग विस्तृत योजना तैयार कर रहा है।

    यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी

    यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी 

    23 मई 2026
    लखनऊ। यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसमें 971 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक और बाकी राजकीय माध्यमिक स्कूल होंगे। यहां कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जाएगी। 17 विभिन्न ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

    यूपी बोर्ड कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी इन 17 विभिन्न ट्रेड में से कोई भी मनपसंद ट्रेड वैकल्पिक विषय के रूप में चुनेंगे और व्यावसायिक प्रशिक्षकों की मदद से इन्हें ट्रेनिंग व पढ़ाई की सुविधा दी जाएगी। जुलाई से इन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार व स्वरोजगार की शिक्षा भी मिल सकेगी।

    ये पढ़ाया जाएगा
    विद्यार्थियों को माइक्रोफाइनेंस एग्जीक्यूटिव, असिस्टेंट ब्यूटी वेलनेस कंसल्टेंट, ब्यूटी थेरेपिस्ट, कंज्यूमर एनर्जी मीटर टेक्नीशियन टेक्नीशियन, जैम, जैली व केचअप प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, फोर व्हीलर सर्विस, सिलाई मशीन ऑपरेटर, डेयरी वर्कर, सोलैनेसी क्रॉप कल्टीवेटर, डोमेस्टिक डाटा इंट्री ऑपरेटर, फिजिकल एजुकेशन असिस्टेंट।



    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    जून के प्रथम सप्ताह से तैयारी

     14 मई 2026
    लखनऊराजधानी समेत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को हुनर का ज्ञान भी दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में कौशल विकास की विशेष पाठशाला शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जून के प्रथम सप्ताह से इसकी शुरुआत होने की संभावना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही निश्शुल्क तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।


    कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का अनुरोध किया गया है। योजना के अनुसार छात्र-छात्राओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वह पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। तीन महीने से लेकर एक साल तक के कोर्स की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीयों की इच्छा के एन यूरोप प्रवेश दिया जाएगा। हर ट्रेड में 30 विद्यार्थियों का ही प्रवेश होगा।

    इन ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण :
    इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, कंप्यूटर आपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, डाटा एंट्री आपरेटर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई एवं कढ़ाई,


    मोबाइल रिपेयरिंग, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग, हेल्थकेयर असिस्टेंट, होटल मैनेजमेंट एवं फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, सीसीटीवी एवं सिक्योरिटी सिस्टम इंस्टालेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैली एवं अकाउंटिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण, डेयरी एवं पशुपालन, ड्रोन टेक्नोलाजी एवं संचालन, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-रिक्शा एवं ईवी रिपेयरिंग, फर्नीचर एवं बढ़ई का कार्य, पेंटिंग एवं पालिशिंग, फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट।


    विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की शुरुआत होने से विद्यार्थी कम उम्र में ही रोजगारपरक शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इस मिशन का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा के अलावा अल्प संख्यक कल्याण विभाग, महिला कल्याण व नगर विकास समेत 13 विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। –पुलकित खरे, मिशन निदेशक


    आइसीटी लैब संचालन प्रशिक्षण 16 को
    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित आइसीटी लैब उपकरणों के सुचारु संचालन को लेकर 16 मई निशागंज के राजकीय इंटर कालेज एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मंडल के छह जनपदों के 129 प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण आईसीटी लैब सेवा द्वारा दो सत्रों में आयोजित होगा। सुबह 11 बजे से से दोपहर एक बजे व द्वितीय सत्र तीन से शाम पांच बजे तक चलेगा।

    Friday, May 22, 2026

    भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का प्रदेशव्यापी विरोध और सुदूर ब्लॉक में तैनाती ने बढ़ाया आक्रोश

    भीषण गर्मी में जनगणना ड्यूटी पर शिक्षकों का प्रदेशव्यापी विरोध और सुदूर ब्लॉक में तैनाती ने बढ़ाया आक्रोश


    लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और लू के बीच शिक्षकों से जनगणना कार्य कराए जाने को लेकर विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। प्रदेशभर के शिक्षक संघों से जुड़े शिक्षकों ने शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए जनगणना से जुड़े फील्ड कार्य को मौसम सामान्य होने तक स्थगित करने की अपील की है। वहीं शिक्षकों की दूरस्थ क्षेत्रों और दूसरे ब्लॉकों में ड्यूटी लगाए जाने से नाराजगी और बढ़ गई है।


    शिक्षक संघों का कहना है कि जब प्रशासन स्वयं लोगों से दोपहर में घरों से बाहर न निकलने की अपील कर रहा है, तब शिक्षकों और शिक्षिकाओं को चिलचिलाती धूप में घर-घर सर्वे और मकान गणना के लिए भेजना पूरी तरह अमानवीय है। उनका आरोप है कि कई जिलों में शिक्षकों को उनके कार्यस्थल से दूर दूसरे ब्लॉकों में जबरन ड्यूटी दी जा रही है, जिससे उन्हें घंटों यात्रा करनी पड़ रही है और स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ गए हैं।


    प्रयागराज समेत कई जिलों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं कि शिक्षकों को  दूरस्थ क्षेत्रों तक जनगणना कार्य के लिए भेजा जा रहा है। शिक्षक संघों ने इसे अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि इससे न केवल शिक्षकों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि अन्य कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं।


    संघों ने यह भी आरोप लगाया कि शासन के दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए 55 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों, दिव्यांग कर्मचारियों और गर्भवती शिक्षिकाओं तक की ड्यूटी लगा दी गई है। ऐसे में जनगणना कार्य अब प्रशासनिक व्यवस्था से ज्यादा “दबाव आधारित अभियान” बनता जा रहा है।


    प्रदेशभर के शिक्षक संघों ने मांग की है कि वर्तमान मौसम को देखते हुए जनगणना 2027 के प्रथम चरण की फील्ड गतिविधियों को तत्काल रोका जाए या कम से कम मौसम सामान्य होने तक स्थगित किया जाए। साथ ही ड्यूटी स्थानीय स्तर पर ही लगाई जाए ताकि शिक्षकों को अनावश्यक रूप से दूसरे ब्लॉकों और लंबी दूरी के क्षेत्रों में न भेजा जाए।


    शिक्षक संघों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने जल्द मानवीय दृष्टिकोण नहीं अपनाया तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि शिक्षक शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ हैं, उन्हें हर प्रशासनिक अभियान में “सर्वसुलभ फील्ड कर्मचारी” की तरह इस्तेमाल करना अब बंद होना चाहिए।

    एक विषय में अनुत्तीर्ण तो यूपी बोर्ड में अब दे सकेंगे कंपार्टमेंट परीक्षा, इंप्रूवमेंट नहीं

    एक विषय में अनुत्तीर्ण तो यूपी बोर्ड में अब दे सकेंगे कंपार्टमेंट परीक्षा, इंप्रूवमेंट नहीं

    अब तक हाईस्कूल में एक विषय में अनुत्तीर्ण विद्यार्थी देते थे अंक सुधार (इंप्रूवमेंट) परीक्षा

    हर विषय में उत्तीर्ण परीक्षार्थी ही किसी एक विषय में दे सकेंगे इंप्रूवमेंट परीक्षा, इंटर में भी व्यवस्था लागू


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट/इप्रूवमेंट परीक्षा-2026 के लिए व्यवस्था में बदलाव कर रही है। हाईस्कूल में किसी एक विषय में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी (अंक सुधार) इंप्रूवमेंट परीक्षा में सम्मिलित होते थे, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। एक विषय में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी उस विषय में अब कंपार्टमेंट परीक्षा देंगे। इंप्रूवमेंट परीक्षा में वह परीक्षार्थी सम्मिलित हो सकेंगे, जो सभी विषयों में उत्तीर्ण होंगे और किसी एक विषय में अंक सुधार चाहते होंगे। इसके अलावा अंक सुधार परीक्षा का प्रविधान इंटरमीडिएट में भी इस बार से किया जा रहा है। यूपी बोर्ड के इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
     

    अभी तक इंटरमीडिएट में अंक सुधार परीक्षा की व्यवस्था नहीं थी। यह व्यवस्था केवल हाईस्कूल के लिए थी, लेकिन इसकी पात्रता में अब बदलाव किया गया है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट दोनों में वह परीक्षार्थी अंक सुधार परीक्षा में सम्मिलित होने के पात्र होंगे, जो सभी विषयो में उत्तीर्ण होंगे। किसी विषय में कम अंक होने पर उसमें सुधार के लिए परीक्षा दे सकेंगे। यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि यदि अंक सुधार परीक्षा में सम्मिलित होते हैं, तो उनके अंतिम अंक मुख्य परीक्षा और इंप्रूवमेंट परीक्षा में जिसमें अधिक होंगे, वह माने जाएंगे। यानी कि यदि इंप्रूवमेंट परीक्षा में मुख्य परीक्षा की तुलना में कम अंक मिलते हैं, तो अंकपत्र में इंप्रूवमेंट का नहीं, बल्कि मुख्य परीक्षा वाला अंक प्रदर्शित किया जाएगा। 


    इसके अलावा कंपार्टमेंट परीक्षा में किसी विषय में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी आवेदन कर सम्मिलित हो सकेंगे। यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए कार्यक्रम जारी कर आवेदन लिए जाएंगे।

    विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में भी खुलेंगे कौशल विकास केंद्र, यूपी कौशल विकास मिशन करेगा पहल, महिला कॉलेजों में प्राथमिकता पर खोले जाएंगे केंद्र

    विश्वविद्यालयों-कॉलेजों में भी खुलेंगे कौशल विकास केंद्र, यूपी कौशल विकास मिशन करेगा पहल, महिला कॉलेजों में प्राथमिकता पर खोले जाएंगे केंद्र


    लखनऊ। प्रदेश में युवाओं के कौशल विकास का दायरा और बढ़ेगा। इसके तहत आईटीआई व माध्यमिक विद्यालयों के बाद अब राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में भी कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे। उप्र कौशल विकास मिशन खुद इसके लिए पहल करेगा। जरूरत के अनुसार वह ट्रेनिंग पार्टनर व बजट भी मुहैया कराएगा।


    ज्यादा से ज्यादा युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उनको रोजगार से जोड़ने के लिए उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से इस साल यह नई पहल शुरू की जा रही है। इससे राज्य विश्वविद्यालयों-महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण दिया जाएगा। खासकर महिला कॉलेजों में कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे ताकि छात्राओं उनको स्वरोजगार व रोजगार के लिए पूरी तरह से तैयार किया जा सके।

    और हाल ही में कौशल विकास मिशन मुख्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस पर सहमति बनी है। इसमें कहा गया कि युवाओं के बेहतर भविष्य के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों, महाविद्यालयों विश्वविद्यालयों में कौशल विकास कार्यक्रमों के संचालन के लिए प्रस्ताव तैयार किया जाए। इसके बाद यूनिवर्सिटी-कॉलेजों के साथ बैठक कर इसे लागू करने की चर्चा की जाए ताकि स्नातक स्तर के युवाओं को भी अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जा सके। 

    वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पहले चरण में राजकीय यूनिवर्सिटी व डिग्री कॉलेजों में कौशल विकास केंद्र खोले जाएंगे। मिशन पहले यूनिवर्सिटी-कॉलेजों को केंद्र शुरू करने और संचालन का प्रस्ताव देगा। अगर यूनिवर्सिटी या कॉलेज असमर्थता जताते हैं तो मिशन ट्रेनिंग पार्टनर से छात्रों को कौशल प्रशिक्षण दिलाएगा।


    इस साल 10 लाख युवाओं को देंगे प्रशिक्षण

    राज्य सरकार ने इस बार यूपी कौशल विकास मिशन का बजट बढ़ाकर 1000 करोड़ से ज्यादा कर दिया है। ऐसे में अब तक जहां हर साल दो लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा रहा था। यह आंकड़ा पांच गुना बढ़कर 10 लाख हो गया है। कौशल विकास मिशन ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए प्रशिक्षण का दायरा आईटीआई व माध्यमिक से बढ़ाकर उच्च शिक्षण संस्थानों तक करने की तैयारी की है।

    69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े


    69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े

    69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू किया मंथन

    सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू, आरक्षण के नियमों के अनुसार बनेगी सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग कर रहे

    22 मई 2026
    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने नई चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर विभाग आरक्षण नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने पर मंथ कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर छह सप्ताह में नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर, पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से प्रभावित सभी याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे। मोर्चा का कहना है कि 2020 से हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 


    69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू

    लखनऊ। यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सिरे से चयन सूची तैयार करने पर मंथन कर रहा है। अब आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने की तैयारी है। वहीं चयन से वंचित अभ्यर्थी याची लाभ देने की मांग कर रहे हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिए हैं। जिसके लिए सरकार को छह हफ्ते का समय दिया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिल गया। विभागीय अधिकारियों ने इसके अनुसार बैठक कर मंथन शुरू किया।

     वहीं पिछड़ा - दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सभी आरक्षण प्रभावित याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि इस पर पहला हक उन प्रभावित अभ्यर्थियों का है जो 2020 से हाईकोर्ट में याची बनकर तथा 2023 से डबल बेंच में याची बनकर जीते और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं। पीड़ितों की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की सामान्य बेंच 21 जुलाई को सुनवाई करेगी।



    न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

    उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा- मगर यह भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा

    कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को रिकार्ड में लेते हुए छह सप्ताह का दिया समय

    भर्ती का मामला वर्ष 2018 से है लंबित, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने दी है चुनौती

    20 मई 2026
    ई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्हा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।


    राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह  सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

    इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

    रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। 
    पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

    इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।




    69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें, 
    आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन

    18 मई 2026
    लखनऊपरिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम करते हुए धरना दिया। उनका कहना था कि वे छह साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जार्ज मसीह की बेंच में होनी है। सरकार इसमें अपना पक्ष पर रख देती है तो मामले का जल्द समाधान हो सकता है।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रही, जिससे मामला लटकता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा। 


    अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमण्डल ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, मिला आश्वासन

    69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का तपती सड़क पर लेटकर प्रदर्शन


    लखनऊ ।  प्राइमरी स्कूल की 69 हजार शिक्षक भर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याची बने आरक्षित अभ्यर्थी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे भीषण गर्मी में तपती सड़क पर लेट-लेट कर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे। अभ्यर्थियों ने 20 मिनट तक लेटकर प्रदर्शन किया और खूब नारेबाजी की। हाथ, पैर व पेट सड़क की गर्मी से तप गया। बेहाल अभ्यर्थी पसीने से तर-बतर हो गए। बेहाल अभ्यर्थियों को पुलिस ने पानी पिलाया।

    सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की। अभ्यर्थियों ने उन्हें ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई पर बात की। अभ्यर्थियों कहा कि प्रदेश सरकार याची लाभ का प्रस्ताव पेश कर ने इस मामले का निस्तारण करे। मंत्री अभ्यर्थियों के प्रस्ताव पर सहमति और आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने इन्हें बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में 31 बार यह मामला सूचीबद्ध हो चुका है, लेकिन किसी भी तारीख में सरकार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब फिर मंगलवार को सुनवाई होनी है।

    प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित, विक्रम ने बताया कि अभ्यर्थी न्याय के लिए बीते छह साल से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं। चार दिसंबर 2018 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए। छह जनवरी 2019 परीक्षा हुई। एक जून 2020 को परिणाम जारी हुआ। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी 19000 आरक्षण सीट पर अनियमितता का आरोप लगाकर हाईकोर्ट चले गए


    इतनी बार अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

    मुख्यमंत्री आवास का घेराव-छह बार
    डिप्टी सीएम के आवास का घेराव व प्रदर्शन- 10 बार
    बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव 10 से अधिक बार
    पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव-8 बार