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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, October 18, 2026

    फर्जी नियुक्तियों पर हाईकोर्ट फिर सख्त, सभी बेसिक शिक्षक जमा करें अपने दस्तावेज, नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की होगी जांच, एक सप्ताह में करना होगा जमा

    परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों की पहचान के लिए 2018 से कई बार शुरू हुई जांच, एफआइआर में देरी से कार्रवाई प्रभावित

     लखनऊ: परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों की पहचान के लिए अब प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच होगी। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कक्षा एक से आठ तक के शिक्षकों को एक सप्ताह के भीतर नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा करने का आदेश दिया है। हालांकि, इससे पहले भी कई बार जांच शुरू हुई, लेकिन विभागीय स्तर पर देरी और कार्रवाई में ढिलाई के कारण कई मामले लंबे समय तक लटके रहे। कुछ आरोपित शिक्षक अदालत से स्थगन आदेश (स्टे) लेकर कार्रवाई रुकवाने में भी सफल रहे।

    फर्जी नियुक्तियों की जांच के लिए वर्ष 2018 में वर्ष 2011 से हुई भर्तियों के दस्तावेजों की पड़ताल शुरू की गई थी। हर जिले में अपर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटियां बनाई गईं, जिनमें पुलिस और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल थे। एसटीएफ से मिले इनपुट के आधार पर 10 हजार से अधिक शिक्षकों के दस्तावेज संदेह के घेरे में आए, लेकिन सत्यापन की प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2020 में कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में अनामिका शुक्ला के दस्तावेजों के कथित दुरुपयोग से कई जिलों में नौकरी पाने का मामला सामने आया। इसके बाद जांच तेज हुई।

     जून 2022 में एसटीएफ ने 35 से अधिक जिलों में कार्यरत 228 से अधिक संदिग्ध शिक्षकों की सूची विभाग को सौंपी थी। हरदोई और कुशीनगर समेत कुछ जिलों में वेतन वसूली के नोटिस भी जारी किए गए। जांच में देरी की एक बड़ी वजह दूसरे राज्यों और विश्वविद्यालयों से शैक्षणिक प्रमाणपत्रों का सत्यापन समय पर नहीं हो पाना रही। बिहार, मध्य प्रदेश और आगरा के विश्वविद्यालयों से डिग्रियों की पुष्टि में वर्षों लगने की शिकायतें सामने आईं।




    🔴 फर्जी नियुक्तियों पर हाईकोर्ट फिर सख्त, सभी बेसिक शिक्षक जमा करें अपने दस्तावेज

    🔴 नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की होगी जांच, एक सप्ताह में करना होगा जमा

    🔴 कहा- समस्या केवल हाल की नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बत्कि पिछले दो दशकों से

    🔴 एसटीएफ जांच में बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियों की बात आ चुकी है सामने

    प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में बेसिक शिक्षा विभाग में कक्षा एक से आठ तक के सभी शिक्षकों को अपने नियुक्ति पत्र और शैक्षणिक दस्तावेज जमा करने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने कुसुमलता की याचिका की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। अनुपालन रिपोर्ट और आगे विचार के लिए चार नवंबर 2026 को सुनवाई होगी। कोर्ट ने कहा है कि समस्या केवल हाल की नियुक्तियों तक सीमित नहीं, बल्कि पिछले दो दशकों से है। नियुक्ति प्राधिकारी को धोखा देकर नौकरी पाने वाले से बच्चों का भरोसा निभाने की अपेक्षा नहीं की जा सकती।


    स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) से मिले तथ्य पर कोर्ट को बताया गया कि याची ने गोरखपुर के कोदीपुर स्थित कंपोजिट प्राथमिक विद्यालय बैरीपार में तैनात सहायक अध्यापिका कुसुमलता श्रीवास्तव के शैक्षणिक दस्तावेज का इस्तेमाल कर नौकरी हासिल की। याची 12 और 13 अक्टूबर को एसटीएफ के सामने पेश नहीं हुई और सत्यापन के लिए दस्तावेज भी नहीं दिए। पिछली सुनवाई में उनके अधिवक्ता ने बताया था कि आपरेशन के कारण बेड रेस्ट पर हैं। एसटीएफ जांच में बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्तियों की बात सामने आई है। कई मामलों में एक ही शैक्षणिक दस्तावेज पर 10 अथवा उससे अधिक लोग नौकरी कर रहे हैं। कोर्ट ने समन्वय पीठ के 22 जनवरी 2026 के गरिमा सिंह बनाम राज्य मामले में दिए आदेश का भी उल्लेख किया। उसमें प्रमुख सचिव को फर्जी नियुक्तियां निरस्त करने, वेतन वसूलने और मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोर विभागीय तथा दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। छह माह की समय-सीमा तय की गई थी।

    आदेश के अनुसार सभी शिक्षक एक सप्ताह के भीतर अपने दस्तावेज बीएसए को देंगे। साथ में नोटरी से प्रमाणित शपथ-पत्र देकर बताएंगे कि उनका कोई निकट संबंधी बीएसए या उससे ऊपर के पद पर शिक्षा विभाग में कार्यरत अथवा सेवानिवृत्त है अथवा नहीं। निकट संबंधियों में पति-पत्नी, पिता, पुत्र, पुत्री, दामाद, बहू, सास, ससुर, साला, जीजा और चचेरे भाई-बहन आदि शामिल हैं। ऐसा कोई संबंधी न होने पर भी इसका वचनपत्र देना होगा।

    बीएसए प्रधानाध्यापकों और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आदेश जारी करेंगे। दस्तावेज मिलने के बाद शिक्षकों के नाम, नियुक्ति तिथि, शैक्षणिक योग्यता, उस समय की न्यूनतम अपेक्षित योग्यता और गजट के अनुसार मेरिट की एक्सेल शीट बनाकर दस्तावेज सहित एसटीएफ की संबंधित रेंज को भेजी जाएगी। बीएसए की कार्रवाई पर शिक्षा निदेशक और सत्यापन की निगरानी अपर पुलिस महानिदेशक (एसटीएफ) करेंगे। लापरवाही करने वाले अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जा सकता है। संबंधित अधिकारी प्रशासनिक कठिनाई या संसाधनों की कमी अगली सुनवाई से पहले कोर्ट के संज्ञान में ला सकते हैं।

    छात्र संख्या घटने के कारण विद्यालय बंद हुए हैं। मुफ्त किताबें, मिड-डे मील और यूनिफार्म जैसी सुविधाओं के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ, इसका एक प्रमुख कारण शिक्षकों की गुणवत्ता हो सकती है। - इलाहाबाद हाई कोर्ट


    कोर्ट ऑर्डर 👇 

    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    WRIT - A No. - 11906 of 2026
    Kusumlata
    .....Petitioner(s)
    Versus
    State Of U.P. And 2 Others
    .....Respondent(s)


    Counsel for Petitioner(s)
    Raja Sahani, Richesh Mishra

    Counsel for Respondent(s)
    Arun Kumar Tripathi, C.S.C.

    Court No. - 6

    HON'BLE VINOD DIWAKAR, J.
    1. In compliance with the order dated 08.10.2026, instructions have been furnished by the office of the Additional Superintendent of Police, Special Task Force, Lucknow, from which it is revealed that the petitioner has obtained employment fraudulently, by using the educational documents of one Kusumlata Srivastava, who is serving as an Assistant Teacher in Composite Primary School, Baraipar, Kodipur, District Gorakhpur.

    2. It is further revealed that the petitioner did not appear before the Special Task Force either on 12.10.2026 or on 13.10.2026, and has avoided submitting her educational qualifications for verification.

    3. On the last date of hearing, that is, yesterday, learned counsel for the petitioner submitted that the petitioner could not submit her documents as she had recently undergone surgery and was on bed rest. When the matter was taken up today, none appeared for the petitioner.

    4. In the course of the arguments, it was brought to the notice of the Court, and it has also surfaced in the investigation conducted by the Special Task Force, that a large number of teachers in the State have obtained employment on the basis of forged documents, or by using the documents of another person. The gravity of the matter may be judged from the fact that, in several instances, ten or more persons have obtained employment against a single set of educational documents.

    5. Having regard to the seriousness of the matter, a coordinate Bench of this Court, by order dated 22.01.2026 in Writ-A No. 19634 of 2025, Garima Singh v. State of U.P. and two others, directed as follows: "The Principal Secretary shall ensure that appropriate action, strictly in accordance with law, is taken against all such teachers who have obtained appointment by playing fraud upon the authorities, including cancellation of appointments and recovery of salary, wherever permissible. Simultaneously, stringent disciplinary and penal action shall also be initiated against those officials who are found to have colluded with, abetted, or deliberately ignored such fraudulent appointments. The entire exercise shall be completed expeditiously, preferably within a period of six months from the date of receipt of a certified copy of this order."

    6. A copy of that order was directed to be communicated to the Principal Secretary, Department of Basic Education, Government of Uttar Pradesh, Lucknow for reporting compliance.

    7. It is a matter of common knowledge that a large number of primary schools have been closed down, principally on account of a shortfall in the number of students. That shortfall is not attributable to a want of resources, but to the deteriorating quality of the education imparted and to the inadequate performance of the teachers. Nor is it attributable to appointments made in recent years alone; it is traceable to the practice, prevailing over the last two decades, of appointments secured by fraudulent means.

    8. Where the Government is infusing substantial resources - free textbooks, the mid-day meal, uniforms and other provisions - and the condition of the primary schools has still not improved, one of the principal reasons may well be the quality of the teachers, and the fact that teachers in government service are not discharging their duties with the seriousness and sincerity expected of them.

    9. A teacher should always bear in mind that subject knowledge at the level taught is not the only quality of a good teacher. Equally necessary are pedagogic ability, which is distinct from knowledge; regularity of attendance and attention in class; patience and a temperament suited to young children; fairness, so that no child is neglected on account of caste, poverty, capacity, or financial and social background; and a sense of the trust reposed - that for a first-generation learner, the teacher is the only route out.

    10. A difficult decision requires to be taken in this regard. The future of the next generation depends upon the quality of the education imparted to it. An effective and disciplined teacher is the need of the hour, failing which we may not be able to justify the role assigned to us.

    11. A teacher who has secured appointment by fraudulent means cannot be expected to possess the aforesaid qualities. One who begins by deceiving the authority that appointed him can scarcely be relied upon to uphold the trust of the children placed under his charge.

    12. In view of the foregoing, the following directions are issued:

    (i) All teachers of Classes I to VIII shall furnish legible copies of their appointment letters and educational documents, including those relating to High School, Intermediate, Graduation, B.Ed./B.T.C. (D.El.Ed., B.El.Ed., etc.), TET/CTET, and any other qualification required for appointment as a teacher at the relevant point of time. The documents shall be submitted to the Basic Shiksha Adhikari concerned within one week of receipt of the notification issued from the office of the Basic Shiksha Adhikari.

    (ii) All teachers shall also file notarised affidavits furnishing particulars of their immediate relatives, whether serving or retired, who have held office in the Education Department of Uttar Pradesh at the level of Basic Shiksha Adhikari and above. For this purpose, "immediate relatives" means husband, wife, father, son, daughter, son-in-law, daughter-in-law, mother-in-lThe brother-in-law, sister-in-law, father-in-law, and first-degree cousins. The list is illustrative and not exhaustive. Where a teacher has no such relative in the Department, the affidavit shall be filed furnishing an undertaking to that effect.

    13. All Basic Shiksha Adhikaris are directed to issue orders forthwith to the Headmasters and In-charge Headmasters of the schools within their territorial jurisdiction, requiring them in turn to direct the teachers of their respective schools to submit the documents aforesaid.

    14. Immediately upon receipt of the documents, the office of the Basic Shiksha Adhikari shall compile, in an Excel sheet, the names of the teachers, the dates of their appointment, their academic qualifications, the minimum qualification required for appointment at the relevant time, the merit scored by each individual as per the Gazette notification, and such other relevant particulars, and shall forward the same, together with the documents, to the Range Office of the Special Task Force concerned.

    15. There are 18 Range Offices and 7 Commissionerates of the Special Task Force in Uttar Pradesh. The head of the Range may evolve a mechanism for verification of the documents, if necessary with the assistance of the Superintendent of Police, the Senior Superintendent of Police or the Commissioner of Police, as the case may be. Where any request is received from the office of the Special Task Force, the officer concerned shall extend prompt cooperation and provide the resources required to carry out the terms of this order.

    16. The Education Department shall extend cooperation in furnishing to the Special Task Force such information as may be necessary to carry out the terms of this order, and as may otherwise be required.

    17. The entire exercise shall be completed expeditiously. The Director of Education shall supervise the exercise undertaken by the Basic Shiksha Adhikaris, and may nominate an officer for day-to-day supervision. Likewise, the Additional Director General of Police, Special Task Force, shall supervise the verification and investigation, and may nominate an officer for day-to-day supervision.

    18. Any laxity or dereliction of duty on the part of any of the officers named hereinabove shall be viewed seriously, and the officer concerned may be held personally accountable.

    19. Put up this case as fresh on 04.11.2026 for reporting compliance and for further consideration. If any of the officers named hereinabove faces administrative difficulty or a want of resources, he may move an appropriate application, or bring the matter to the notice of the Court even before the next date of hearing.

    (Vinod Diwakar,J.)
    October 16, 2026
    Anil K. Sharma

    Saturday, October 17, 2026

    दो बार होगी एडेड माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के चयन व प्रोन्नत वेतनमान की प्रक्रिया

    दो बार होगी एडेड माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के चयन व प्रोन्नत वेतनमान की प्रक्रिया


    लखनऊ। यूपी में एडेड माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के चयन व प्रोन्नत वेतनमान देने की प्रक्रिया वर्ष में न्यूनतम दो बार होगी। जनवरी व जुलाई में पात्र शिक्षकों को इसका लाभ दिया जाएगा। 


    जल्द चयन व प्रोन्नत वेतनमान को लेकर शासनादेश जारी किया जाएगा। जिससे करीब छह हजार शिक्षकों को बड़ी राहत मिल जाएगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से चयन व प्रोन्नत वेतनमान के प्रकरणों को लेकर एक उच्चस्तरीय बैठक की गई। जिसमें जिलों में शिक्षकों के चयन व प्रोन्नत वेतनमान के मामले निस्तारित किए जाने के सख्त निर्देश दिए गए।

    Friday, October 16, 2026

    नवोदय: कक्षा 9 और 11 में लेटरल एंट्री के जरिए आवेदन की अंतिम तिथि फिर बढ़ी, अब अभ्यर्थी 22 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे

    नवोदय: कक्षा 9 और 11 में लेटरल एंट्री के जरिए आवेदन की अंतिम तिथि फिर बढ़ी, अब अभ्यर्थी 22 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे




    कक्षा 9 और 11 में लेटरल एंट्री के जरिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी, अब अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे

    02 अक्टूबर 2026
    नई दिल्ली/नोएडा। नवोदय विद्यालय समिति ने शैक्षिक सत्र 2027-28 में कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए आयोजित होने वाले लेटरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट (LEST)-2027 के ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है।

    समिति की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को जारी विज्ञप्ति के अनुसार, LEST-2027 के लिए ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल 1 सितंबर 2026 को शुरू किया गया था। अब अभ्यर्थी 15 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकेंगे।

    नवोदय विद्यालय समिति के अनुसार, कक्षा 9 और कक्षा 11 में प्रवेश के इच्छुक पात्र विद्यार्थी निर्धारित पोर्टल के माध्यम से निःशुल्क ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के लिए समिति ने कक्षा के अनुसार अलग-अलग लिंक उपलब्ध कराए हैं।

    कक्षा 9 के लिए आवेदन पोर्टल:

    कक्षा 11 के लिए आवेदन पोर्टल:

    समिति ने अभ्यर्थियों से निर्धारित अंतिम तिथि से पहले ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की अपील की है।




    नवोदय विद्यालयों में कक्षा 9 व 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू, आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित

    2 सितम्बर 2026
    नोएडा। नवोदय विद्यालय समिति ने सत्र 2027-28 में कक्षा 9 एवं 11 की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए लेटेरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट (LEST)-2027 हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।


    समिति की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, इच्छुक अभ्यर्थी कक्षा 9 एवं कक्षा 11 के लिए निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल पर निःशुल्क आवेदन कर सकते हैं। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। परीक्षा संबंधी विस्तृत विवरण (प्रॉस्पेक्टस) भी पंजीकरण पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।

    कक्षा 9 और 11 में प्रवेश के लिए अलग-अलग ऑनलाइन पोर्टल निर्धारित किए गए हैं। प्रवेश रिक्त सीटों के सापेक्ष लेटरल एंट्री सिलेक्शन टेस्ट के माध्यम से होगा। समिति ने अभ्यर्थियों को अंतिम तिथि से पहले आवेदन प्रक्रिया पूरी करने की सलाह दी है।

    तृतीय सेमेस्टर में 8644 अनुत्तीर्ण, डीएलएड द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणाम घोषित

     तृतीय सेमेस्टर में 8644 अनुत्तीर्ण, डीएलएड द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणाम घोषित


    प्रयागराज । सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड द्विवार्षिक पाठ्यक्रम के परीक्षा परिणाम घोषित कर दिए हैं। इनमें सत्र 2018, 2019, 2021, 2022, 2023 के साथ सितंबर 2026 के नतीजे शामिल हैं। डीएलएड 2023 बैच के तृतीय सेमेस्टर में 8644 प्रशिक्षु अनुत्तीर्ण घोषित हुए हैं जबकि 36181 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। 1541 अभ्यर्थियों के परीक्षा परिणाम अधूरे हैं। 370 अभ्यर्थियों ने परीक्षा छोड़ दी थी। उत्तीर्ण घोषित होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या 25996 है।


    डीएलएड 2023 प्रथम सेमेस्टर में पंजीकृत 11830 प्रशिक्षुओं में से 296 अनुपस्थित रहे और 154 का परिणाम अपूर्ण है। 2517 फेल हो गए जबकि 9151 ने परीक्षा पास कर ली है। डीएलएड 2022 तृतीय सेमेस्टर में पंजीकृत 4200 प्रशिक्षुओं में से 312 अनुपस्थित, 32 का परिणाम अपूर्ण, 983 अनुत्तीर्ण और 3183 उत्तीर्ण हैं। डीएलएड 2021 तृतीय सेमेस्टर में 1302 प्रशिक्षुओं में से 38 अनुपस्थित रहे 113 का परिणाम अपूर्ण है।

    प्रदेश के राजकीय कॉलेजों के शिक्षक बन सकेंगे प्रवक्ता, 3444 पदों पर पदोन्नति की तैयारी, लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा विवरण

    प्रदेश के राजकीय कॉलेजों के शिक्षक बन सकेंगे प्रवक्ता, 3444 पदों पर पदोन्नति की तैयारी, लोक सेवा आयोग को भेजा जाएगा विवरण


    प्रयागराज। प्रदेश भर के राजकीय माध्यमिक कॉलेजों के शिक्षकों की पदोन्नति की तैयारी तेजी से चली रही है। प्रदेश भर के 3444 शिक्षक अब प्रवक्ता बनने जा रहे हैं। जल्द ही इन्हें पदोन्नति मिल जाएगी। अपर शिक्षा निदेशक राजकीय अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, पदोन्नति होने वाले एलटी ग्रेड शिक्षकों की सूची तैयार हो चुकी है।


     विवरण अब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) को भेजा जाएगा। प्रवक्ता (पुरुष) के 19 विषयों के लिए पदोन्नति की जाएगी। इसके लिए 2577 प्रवक्ता के पद रिक्त मिले हैं लेकिन इसमें 1620 पदों पर पदोन्नति होगी। इसी तरह महिला में 1821 पद हैं जिसमें सभी पदों पर पदोन्नति की जाएगी।


    वैसे तो शासन की ओर से इस पदोन्नति के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया था लेकिन जनपद स्तर से वरिष्ठता सूची बनाने में हुई देरी के चलते इसमें देरी हो गई। अपर शिक्षा निदेशक राजकीय अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि पुरुष वर्ग में शैक्षणिक सत्र वर्ष 2010-11 से अभी तक आठ विषयों के लिए पदोन्नति होनी है।

    इसी तरह 11 विषयों के लिए वर्ष 2019-20 से अभी तक के रिक्त पदों का विवरण मंगाया गया है। प्रदेश में कुल 974 राजकीय माध्यमिक कॉलेज कुल हैं जिसमें 444 जीजीआईसी और 530 जीआईसी संचालित हो रहे हैं।

    Thursday, October 15, 2026

    यूपी बोर्ड में हर वर्ष कम हो रहे एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी

    यूपी बोर्ड में हर वर्ष कम हो रहे एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी 


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में बीते पांच वर्षों से प्रत्येक वर्ष औसतन एक लाख से ज्यादा परीक्षार्थी कम हो रहे हैं। वर्ष-2023 की परीक्षा में जहां 58,84,634 परीक्षार्थी पंजीकृत थे वहीं 2027 की परीक्षा में 52.04 लाख परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।

    2027 में पांच फरवरी से होने वाली होने वाली हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में हाईस्कूल में 27,75,741 इंटरमीडिएट में 24,28,972 पंजीकृत हुए हैं। पिछले पांच वर्षों के आंकड़ों पर गौर करें तो इस बार परीक्षार्थियों की संख्या 6.79 लाख से ज्यादा घट गई।


    वर्ष 2024 में एक साथ तकरीबन 3.59 लाख छात्र कम हो गए। वर्ष-2025 में 54,37,174 और वर्ष 2026 में एक लाख से ज्यादा कमी के साथ परीक्षार्थियों की संख्या 53,37,432 हो गई थी। छात्रों की लगातार घट रही संख्या को लेकर यूपी बोर्ड भी चिंतित है। यही कारण है कि कॉलेजों में नामांकन बढ़ाने, सस्ती किताबें उपलब्ध कराने व शत प्रतिशत ऑनलाइन उपस्थिति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


    बिहार व मध्य प्रदेश के छात्र भी होते थे शामिल
    दरअसल, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में पहले लगातार नकल कराए जाने व पेपर आउट कराए जाने की घटनाएं सामान्य हो गई थी। ऐसे में उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड जैसे राज्यों के भी तमाम छात्र यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए पंजीकृत होते थे और परीक्षा में शामिल होकर पास हो जाते थे। अब सरकार की सख्ती के चलते परीक्षाओं में सेंधमारी आसान नहीं है। सीसीटीवी से परीक्षा कक्ष व केंद्रों की निगरानी की जा रही है। छात्रों की लगातार हो रही कमी का एक प्रमुख कारण इसे भी माना जा रहा है।


    यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों की संख्या में कमी आई है। परीक्षाओं में सख्ती होने से भी ऐसी स्थिति होने की संभावना हो सकती है। कुछ दूसरे बोर्ड में चले जाते हैं, जिससे छात्र कम हुए हैं। - भगवती सिंह, सचिव, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद

    Wednesday, October 14, 2026

    विधान परिषद चुनाव के मतदाताओं के लिए 23 अक्टूबर को मिलेगा विशेष अवकाश

    विधान परिषद चुनाव के मतदाताओं के लिए 23 अक्टूबर को मिलेगा विशेष अवकाश 

    लखनऊ। विधान परिषद की स्नातक व शिक्षक सीटों के लिए मतदान के दिन 23 अक्तूबर को मतदाताओं को विशेष आकस्मिक अवकाश मिलेगा। इस संबंध में चुनाव आयोग के निर्देश पर सामान्य प्रशासन विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधान परिषद के खंड स्नातक की 5 और खंड शिक्षक के 6 निर्वाचन क्षेत्रों के द्विवार्षिक निर्वाचन-2026 के लिए 23 अक्तूबर को मतदान होगा। 

    लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, इलाहाबाद-झांसी के खंड स्नातक और लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद, गोरखपुर-फैजाबाद के खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान संपन्न होगा। उन्होंने बताया कि इन निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान करने के लिए उत्तर प्रदेश के ऐसे सभी कर्मचारी, जो विश्वविद्यालय स्नातक हैं और संबंधित खंड स्नातक व खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रामाणिक मतदाता हैं, उन्हें अपने मताधिकार का प्रयोग करने के लिए मतदान दिवस 23 अक्तूबर पर विशेष आकस्मिक अवकाश दिया जाएगा। 

    क्या होता है विशेष आकस्मिक अवकाश : विशेष आकस्मिक अवकाश सरकारी या गैर-सरकारी संस्थानों में कर्मचारियों को किसी विशेष परिस्थिति, कर्तव्य या सार्वजनिक हित से जुड़े कार्यों के लिए दिया जाने वाला अतिरिक्त अवकाश होता है। यह सामान्य आकस्मिक अवकाश से अलग होता है और इसे कर्मचारी की मुख्य छुट्टी जैसे अर्जित अवकाश या सामान्य सीएल से नहीं काटा जाता है।


    MLC चुनाव मतदान दिवस 23 अक्टूबर को विशेष अवकाश स्वीकृत किये जाने के संबंध में









    शिक्षक भर्ती के आवेदन की अंतिम तिथि करीब, अंक पत्र के लिए दौड़ लगा रहे छात्र, प्रदेश भर से छात्र प्रशिक्षण और टीईटी के अंकपत्र के लिए पहुंच रहे PNP कार्यालय

    शिक्षक भर्ती के आवेदन की अंतिम तिथि करीब, अंक पत्र के लिए दौड़ लगा रहे छात्र, प्रदेश भर से छात्र प्रशिक्षण और टीईटी के अंकपत्र के लिए पहुंच रहे PNP कार्यालय


    प्रयागराज। इन दिनों पीएनपी (परीक्षा नियामक प्राधिकारी) कार्यालय पर डीएलएड व टीईटी पास कर चुके छात्र बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

    इनमें वे अभ्यर्थी शामिल हैं जिन्होंने वर्षों बाद भी डीएलएड व टीईटी का अंक पत्र प्राप्त नहीं किया है। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनके अंक पत्र में नाम या अन्य विवरण त्रुटिपूर्ण हैं।

    बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निकाली गई शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर है। मार्कशीट नहीं होने की वजह से छात्र भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में पीएनपी आने वाले अभ्यर्थी अफसरों व कर्मचारियों से जल्द मार्कशीट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।


    भर्ती आई तो याद आई मार्कशीट

    यहां आने वाले छात्रों में कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने आठ से दस वर्ष पहले डीएलएड/बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया। उनके मार्कशीट में कुछ त्रुटियां थी जिन्हें समय रहते संशोधित नहीं कराया गया। अब शिक्षक भर्ती आने पर छात्रों को मार्कशीट में संशोधन की याद आई यही कारण है कि लगातार बड़ी संख्या में छात्र पीएनपी पहुंच रहे हैं। इसी तरह छात्रों ने टीईटी की परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली। लेकिन, भर्ती नहीं आने की वजह से उन्होंने कार्यालयों से अंक पत्र प्राप्त नहीं किया। आवेदन में टीईटी अंक पत्र क्रमांक की अनिवार्यता के कारण अंक पत्र लेने कार्यालय पहुंच रहे हैं।


    सत्र में देरी से छात्रवृत्ति के लिए नहीं कर सके आवेदन

    डीएलएड बैच-2025 के प्रशिक्षुओं ने मंगलवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। बताया कि शैक्षणिक सत्र का संचालन देर से शुरू होने से छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सके। पोर्टल 14 जनवरी को बंद हो गया था जबकि प्रवेश प्रक्रिया इसके बाद भी जारी रही। ऐसे में पात्र होने के बाद भी आवेदन से वंचित रह गए। प्रशिक्षुओं ने पोर्टल फिर से खोले जाने की मांग की। इस दौरान अमित, राहुल यादव, रत्नेश समेत अन्य रहे।


    सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एक से दो दिन के अंदर हर हाल में अंक पत्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया जाए। एक साथ कई छात्र अंक पत्र लेने व सुधार कराने के लिए पहुंच रहे हैं इससे कुछ असुविधाएं हो रही हैं। - राजेंद्र प्रताप सिंह, सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी

    Tuesday, October 13, 2026

    NCERT शिक्षकों-पेशेवरों के लिए शुरु करेगा मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स (DCGC), छात्रों की शैक्षणिक से भावनात्मक समस्याओं को समझने में मिलेगी मदद

    NCERT शिक्षकों-पेशेवरों के लिए शुरु करेगा मार्गदर्शन एवं परामर्श डिप्लोमा कोर्स, छात्रों की शैक्षणिक से भावनात्मक समस्याओं को समझने में मिलेगी मदद


    🔴 अधिक जानकारी के लिए लिंक क्लिक करके देखें अधिकृत जानकारी 

    नई दिल्ली।  राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और शिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने स्कूली शिक्षकों और काउंसलिंग के बत्र से जुड़े पेशेवरों के लिए बार्गदर्शन एवं परामर्स डिप्लोमा कोर्स यानी डिप्लोमा कोर्स इन गाइडेंस एंड काउंसलिंग (DCGC) शुरू करने का एलान कया है।

    इसका मकसद, शिक्षकों व शिक्षा मत्र से जुड़े अन्य पेशेवरों को छात्रों की शैक्षणिक, सामाजिक बावनात्मक व नैतिक समस्याओं को समझने और उनका समाधान करने के लिए प्रशिक्षित करना है।

    एनसीईआरटी ने सोमवार को यह कोर्स शुरू करने की घोषणा की। फिलहाल, अगले साल से यह कोर्स एनसीईआरटी के छह केंद्रों-दिल्ली, अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसूरु व शिलांग केंद्र में चलाया जाएगा। प्रति केंद्र 50 सीट रहेंगी। एनसीईआरटी के विश्वविद्यालय बनने के बाद यह केंद्र कॉलेज बन जाएंगे। अगले चरण में सीटों में भी बढ़ोतरी होगी।


    एक वर्षीय कोर्स तीन भागों में बंटा

    अगले साल से शुरू होने वाले इस डिप्लोमा कोर्स को तीन भागों में बांटा गया है। जनवरी-जून 2027 तक छह महीने का डिस्टेंस, जुलाई-सितंबर तक तीन महीने को फेस टू फेस और अक्तूबर से दिसंबर तक तीन महीने अपने गृह शहर में इंटर्नशिप का मौका मिलेगा। अधिकारी के मुताबिक, आज स्कूलों में छात्रों की समस्याएं केवल पढ़ाई या परीक्षा के दबाव तक सीमित नहीं हैं। कई बार छात्र करियर को लेकर असमंजस, साथियों से तुलना, आत्मविश्वास की कमी और भावनात्मक चुनौतियों का भी सामना करते हैं। कुछ मामलों में छात्रों को ध्यानपूर्वक सुनने, उसकी परेशानी समझने और उचित मार्गदर्शन देने की जरूरत होती है। यह कोर्स शिक्षकों को इन चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने में सहायता करेगा।


    पाठ्यक्रम में तीन बिंदुओं पर फोकस

    शैक्षणिक समस्याएं: पढ़ाई में कठिनाई, सीखने से जुड़ी चुनौतियां और शैक्षणिक प्रगति के लिए मार्गदर्शन पर रहेगा।

    सामाजिक व भावनात्मक समस्याएं: छात्रों की भावनाओं, व्यवहार और सामाजिक संबंधों से जुड़ी चुनौतियों को समझना।

    नैतिक समस्याएं: छात्रों में सही निर्णय लेने, जिम्मेदारी समझने और सकारात्मक व्यवहार विकसित करने में सहायता करना।

    प्रदेश में शिक्षकों के वेतन से ईपीएफ कटौती नहीं कर रहे निजी स्कूल, अपना अंशदान बचाने के लिए खेल कर रहे स्कूल संचालक

    प्रदेश में शिक्षकों के वेतन से ईपीएफ कटौती नहीं कर रहे निजी स्कूल, अपना अंशदान बचाने के लिए खेल कर रहे स्कूल संचालक

    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय ने यूपी बोर्ड के 2847 व 505 महाविद्यालयों को भेजा पत्र

    लखनऊ: निजी स्कूल संचालक बच्चों का भविष्य बनाने वाले शिक्षकों का वर्तमान सुधार रहे न भविष्य। मानदेय कम होने के बाद भी शिक्षकों को भविष्य निधि के माध्यम से आर्थिक सुरक्षा दी जाती है, लेकिन स्कूल संचालक शिक्षकों के पीएफ की कटौती ही नहीं कर रहे ताकि संचालकों को नियोक्ता का अंशदान न देना पड़े। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय कार्यालय ने यूपी बोर्ड के 2847 व 505 महाविद्यालयों को पत्र भेजकर पीएफ पंजीकरण कराने का अनुरोध किया है। स्कूल संचालक श्रम सुविधा पोर्टल पर पंजीकरण कर सकते हैं।


    कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) लखनऊ क्षेत्र में सीतापुर, लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई, रायबरेली व लखीमपुर खीरी जिले आते हैं लेकिन यही हाल पूरे प्रदेश में है। छह जिलों में माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड ) से मान्यता प्राप्त हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर के 2847 विद्यालय और 600 से अधिक महाविद्यालय चल रहे हैं. इनमें से अधिकांश प्रधानाचार्य से अनुचर तक के पीएफ अंशदान की कटौती नहीं करते। कुछ तो सिर्फ कागज पर कर रहे हैं।

    क्या है नियम
    स्कूल या संस्थान जहां भी 20 या उससे अधिक कर्मचारी किसी भी रूप में कार्यरत है उनके वेतन से पेंशन कटौती अनिवार्य है। कर्मचारी संख्या 20 से कम होने पर स्वेच्छा से कटौती कर सकते हैं। केंद्र ने पिछले महीने ही वेतन सीमा 15 से 25 हजार प्रतिमाह कर दी है।

    नियोक्ता अंशदान बचाने का खेल : वेतन या मानदेय की धनराशि पर 12 प्रतिशत कर्मचारी और इतनी ही धनराशि नियोक्ता को जमा करनी पड़ती है। अधिकांश नियोक्ता अपना अंशदान बचाने के लिए कटौती ही नहीं कर रहे हैं। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त द्वितीय आशीष कुमार ने बताया, सभी स्कूल प्रबंधकों व प्रधानाचार्यों से शिक्षक व अन्य स्टाफ की पीएफ कटौती का अनुरोध किया है।

    लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने सभी महाविद्यालयों  को पत्र भेजा है। ईपीएफओ के क्षेत्रीय भविष्य निधि आयुक्त प्रथम अश्विनी कुमार गुप्ता ने बताया, 2009 से अब तक संचालित ऐसे संस्थान जिन्होंने 20 कर्मचारी होने पर भी पीएफ जमा नहीं किया वह 31 अक्टूबर तक नियोक्ता का अंशदान जमा कर ईपीएफओ कोड पा सकते हैं। 31 के बाद निरीक्षण करके अंशदान जमा न करने वालों पर जुर्माना लगेगा। 


    पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय

    पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को स्कूल से जोड़ेंगे 'NIOS मित्र'
    योजना में सौ से अधिक बच्चों को प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश मिलेगा 120 रुपए मानदेय

    10वीं और 12वीं कक्षा के साथ स्कूली शिक्षा की आयु वर्ग के सभी बच्चों की होगी मैपिंग


    नई दिल्ली: 10वीं और 12वीं कक्षाओं में फेल हो चुके छात्रों के साथ ही अब स्कूली शिक्षा से दूर या फिर वंचित प्रत्येक आयु वर्ग के बच्चों की तलाश के लिए देश भर में अभियान चलेगा। शिक्षा मंत्रालय की पहल पर राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआइओएस) राज्यों के साथ मिलकर इसकी तैयारी में जुटा है। इसके तहत जल्द ही देश के सभी ब्लाकों में 'एनआइओएस मित्र' की तैनाती की जाएगी, जो अपने ब्लाक में स्कूली शिक्षा की उम्र में स्कूलों से दूर सभी बच्चों की पहचान करेगा। इनमें से जो बच्चे शिक्षा के अधिकार कानून के तहत राज्यों के स्कूलों में पढ़ने के लिए पात्र होंगे, उन्हें राज्य पढ़ाएंगे, बाकी बच्चों को, जिनमें दसवीं और बारहवीं के फेल छात्र भी होंगे, उन्हें एनआइओएस के जरिए पढ़ाया जाएगा।


    एनआइओएस ने इस मुहिम को प्रोत्साहित करने के लिए एक इंसेंटिव प्लान भी तैयार किया है। इसमें ऐसे प्रत्येक बच्चे को प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। फिलहाल इसे लेकर जो प्लान बनाया गया है, उनमें 49 प्रवेश दिलाने वाले एनआइओएस मित्र को प्रत्येक प्रवेश पर 80 रुपए दिए जाएंगे। वहीं 50 से 99 प्रवेश दिलाने पर प्रति प्रवेश सौ रुपए और सौ से डेढ़ सौ प्रवेश दिलाने पर उन्हें प्रति प्रवेश 120 रुपए की प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। यह खर्च केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उठाएंगी। इस स्कीम में जो छात्र आर्थिक रूप से कमजोर हैं उनकी फीस व पढ़ाई का खर्च भी केंद्र व राज्य मिलकर उठाएंगें। मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक एनआइओएस मित्र की पहल अगले महीने से शुरू हो जाएगी।


    यूपी सहित पांच राज्यों में होगा ट्रायल: इससे पहले उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक और गुजरात के पांच ब्लाकों में एनआइओएस की ओर से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने की तैयारी है। इसे लेकर एक एप तैयार कराया गया है। इसके जरिये एनआइओएस मित्र अपने काम को अंजाम देंगे। इनमें फिलहाल उत्तर प्रदेश के अयोध्या व श्रावस्ती जिले को शामिल किया गया है। बाकी राज्यों में जिलों के चयन की प्रक्रिया चल रही है। इस अभियान के तहत 10वीं और 12वीं फेल हो चुके दो करोड़ बच्चों को स्कूलों से फिर से जोड़ने के साथ 2030 तक स्कूली शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को शत-प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। मौजूदा समय में 10वीं कक्षा तक आते-आते करीब 20 प्रतिशत बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं।

    एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

    एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

    अब फिर से प्रबंधकों के हाथ में चयन का जिम्मा सौपेंगे

    प्रयागराज । प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति एक बार फिर से प्रबंधक ही करेंगे। शिक्षा निदेशालय की ओर से पूर्व की तरह प्रबंधकों के माध्यम से ही शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंजूरी को प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले कई सालों सेइन संस्थाओं में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षकों की कमी से स्कूलों में चार साल पहले स्थायी शिक्षकों की मानदेय पर नियुक्ति की गई थी।


    सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली 2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। उसके बाद 2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना भेजी थी। इसी प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। हालांकि इन दोनों ही संस्थाओंका नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। नवगठित आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में स्थायी शिक्षकों की चयन की समस्या दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने नए सिरे से शासन को प्रस्ताव भेजा है।


    शिक्षकों के आधे से अधिक पद हैं खाली
    संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं। 17 मार्च 2023 को शासन में हुई बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों के सृजित 2085 पदों में से 1064 कार्यरत थे और 1021 खाली थे। प्रधानाचार्यों के सृजित 570 पदों में से 263 कार्यरत और 307 रिक्त थे। महाविद्यालयों में प्राचार्य के 403 पदों में से 154 कार्यरत और 249 रिक्त थे और शिक्षकों के 1889 पदों में से 960 कार्यरत और 929 खाली थे। उसके बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं।


    उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2027 समय सारिणी जारी

    यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं की परीक्षाएं 15 कार्यदिवसों में होंगी, विधानसभा चुनाव को देखते हुए बोर्ड ने तकरीबन चार महीने पहले ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी किया

    हाईस्कूल-इंटर परीक्षाएं पांच फरवरी से शुरू होंगी, विधानसभा चुनाव की तारीख टकराने पर संशोधित होगा कार्यक्रम

    प्रयागराज । यूपी बोर्ड की इस सत्र की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं फरवरी 2027 में ही संपन्न होंगी। बोर्ड सचिव भगवती सिंह के अनुसार 10वीं-12वीं की परीक्षाएं एक साथ पांच फरवरी से शुरू होकर 24 फरवरी 2027 तक चलेंगी। 2027 में भी 2026 की तरह 15 कार्यदिवसों में परीक्षाएं कराई जाएंगी।

    विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए बोर्ड ने तकरीबन चार महीने पहले ही बोर्ड परीक्षा का कार्यक्रम जारी कर दिया है। यह समय सारिणी संभावित है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विधानसभा चुनाव मार्च में संभावित मानते हुए टाइम टेबल जारी किया है। यदि विधानसभा चुनाव की तारीखें टकराती है तो बोर्ड परीक्षा की तिथियां संशोधित होंगी।

    छात्र-छात्राओं की सुविधा को देखते हुए यूपी बोर्ड के अधिकारियों ने कठिन विषयों की परीक्षा में पर्याप्त अंतराल रखा है। हाईस्कूल में दस फरवरी को अंग्रेजी, 13 फरवरी को गणित और 17 फरवरी को विज्ञान का पेपर है। तीनों ही परीक्षाओं में छात्र-छात्राओं वाओं को को रिवीजन रिवीजन के लिए दो से तीन दिन का अंतराल मिलेगा।

    वहीं इंटर में आठ फरवरी को अंग्रेजी, 12 के जीव विज्ञान व गणित, 15 फरवरी को रसायन विज्ञान और 17 फरवरी को भौतिक विज्ञान की परीक्षा है। इस साल हाईस्कूल में 27,75,741 और इंटर में 24,28,972 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।

    हाईस्कूल और इंटर की परीक्षाएं एक साथ पांच से 24 फरवरी तक कराई जाएंगी। वहीं 2027 में होली का त्योहार मार्च में मनाया जाएगा 121 मार्च को होलिका दहन और 22 को होली है। 


    यूपी बोर्ड की 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं 5 से 24 फरवरी तक, परीक्षा कार्यक्रम जारी, 52 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी होंगे शामिल

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की वर्ष 2027 की परीक्षाएं पांच फरवरी से शुरू होंगी। परीक्षाएं 24 फरवरी तक चलेंगी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने सोमवार देर शाम परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया। परीक्षा में करीब 52 लाख से ज्यादा परीक्षार्थी शामिल होंगे। इनमें तकरीबन 27.50 लाख छात्र व 24.50 लाख छात्राएं हैं।

    परीक्षाएं दो पालियों में होंगी। प्रथम पाली की परीक्षा सुबह 8:30 बजे से 11:45 बजे तक और द्वितीय पाली की परीक्षा दोपहर 2:00 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएंगी। प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। पहले दिन हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की हिंदी व प्रारंभिक हिंदी विषय की परीक्षा होगी। 

    इस बार एक ही रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का कवर पेज

    बोर्ड की ओर से उत्तर पुस्तिकाओं में भी बदलाव किया गया है। इस बार मुख्य कवर पृष्ठ दो के बजाय एक ही होगा। इसी कवर पृष्ठ पर अभ्यर्थी रोल नंबर व अन्य जानकारी भरेंगे और परीक्षक भी प्राप्त अंकों का विवरण दर्ज करेंगे। साथ ही उत्तर पुस्तिकाओं के रंग में भी बदलाव में लाल रंग की उत्तरपुस्तिकाएं किया गया है। वर्ष 2026 की परीक्षा उपलब्ध कराई गई थीं।



    उत्तर प्रदेश इंटरमीडिएट एवं हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा 2027 समय सारिणी जारी

    छात्राओं को नवंबर से दो चरणों में मिलेगी स्कूटी, 25-25 हजार करके दो बार में होगा वितरण

    छात्राओं को नवंबर से दो चरणों में मिलेगी स्कूटी, 25-25 हजार करके दो बार में होगा वितरण 

    13 अक्टूबर 2026
    लखनऊ। प्रदेश सरकार के घोषणापत्र में किए गए वादे के क्रम में प्रदेश में अगले महीने यानी नवंबर में स्नातक की छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। पहले इसका वितरण दिसंबर में करने की तैयारी थी किंतु हाल ही में सीएम द्वारा नवंबर में वितरण की घोषणा के बाद विभाग तैयारी में लग गया है। विभाग की यह कवायद है कि 25-25 हजार करके दो बार में स्कूटी का वितरण कराया जाए।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी बांटने के लिए औपचारिकताएं तेजी से पूरी की जा रही हैं। 40 हजार तक स्कूटी खरीदने का विभाग ने टेंडर भी कर दिया है। फिलहाल एक साथ इतनी बड़ी संख्या में स्कूटी की उपलब्धता कराने में कंपनी को कठिनाई न हो इसके लिए इसे दो चरणों में बांटा जाएगा। पहले चरण में 20 हजार से 25 हजार तक मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है।

    बाकी मेधावी छात्राओं को अगले चरण में स्कूटी दी जाएगी। विभाग की ओर से नवंबर से स्कूटी वितरण की शुरुआत कर दी जाएगी। कंपनी जैसे-जैसे डिलिवरी देगी उसके वितरण का काम भी तेजी से किया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि स्कूटी वितरण से विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में छात्राओं का नामांकन बढ़ाया जाए। साथ ही उन्हें उच्च शिक्षा के प्रति आकर्षित भी किया जाएगा। योजना के तहत मेधावी छात्राओं का विश्वविद्यालय व कॉलेजों से लेकर सत्यापन कराया गया है। विभाग ने इसके लिए 320 करोड़ का बजट भी जारी कर दिया है। 



    मेधावी बालिकाओं को जल्द मिलेगी स्कूटी, 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी

     22 सितंबर 2026
    लखनऊ : रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को स्कूटर देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने 320 करोड़ रुपये की लागत से 40 हजार स्कूटर खरीदने के लिए जेम पोर्टल पर बिड जारी कर दी है। कंपनियां 26 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगी। निविदा 27 सितंबर को खोली जाएगी।

    योजना में वर्ष 2025-26 में स्नातक की पढ़ाई पूरी करने वाली उच्च शिक्षण संस्थानों की शीर्ष पांच प्रतिशत छात्राओं को मेरिट के आधार पर स्कूटर देने का प्रविधान है। दिव्यांग छात्राओं, बलिदानी सैनिकों के परिवार की बेटियों और निराश्रित बालिकाओं को निर्धारित मेरिट में 10 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। छात्राओं को स्कूटर के साथ पंजीकरण, बीमा और हेलमेट भी दिया जाएगा। शुरुआती ईंधन देने की व्यवस्था की गई है। 

    लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अक्टूबर-नवंबर में 50 हजार छात्राओं को स्कूटर देने की घोषणा की थी। इसके बाद विभाग ने पहले चरण में 40 हजार स्कूटर की खरीद की प्रक्रिया शुरू की है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटर योजना भाजपा के संकल्प पत्र में किए गए वादों में शामिल है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में छात्राओं को प्रोत्साहित करना है।

     इसी बीच सोमवार को हुए प्रशासनिक फेरबदल में उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का दायित्व अमित कुमार घोष को दिया गया है। इससे पहले यह जिम्मेदारी एमपी अग्रवाल के पास थी। ऐसे में विभाग के नेतृत्व में बदलाव के बीच इस महत्वाकांक्षी योजना की खरीद प्रक्रिया का आगे बढ़ना महत्वपूर्ण है।



    40 हजार छात्राओं को स्कूटी के लिए निविदा जारी

    उच्च शिक्षा निदेशालय 21 सितंबर को करेगा ऑनलाइन प्री बिड बैठक, राज्य विवि स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं से ले रहे दस्तावेज

    16 सितंबर 2026
    लखनऊ। विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश की स्नातक छात्राओं को स्कूटी देने की योजना पर उच्च शिक्षा विभाग ने काम तेज कर दिया है। रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने टेंडर जारी किया है। इनकी अनुमानित लागत 320 करोड़ रुपये है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। इसके लिए 21 सितंबर कोbऑनलाइन प्री-बिड बैठक होगी।

    योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण उत्तर प्रदेश की मूल निवासी छात्राओं को लाभ मिलेगा। इसके लिए छात्राओं ने राज्य विश्वविद्यालय, निजी विश्वविद्यालय अथवा राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्ध राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त या स्ववित्तपोषित महाविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की हो। परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक होना अनिवार्य है।

    विवि अपने और संबद्ध महाविद्यालयों का डाटा जुटाकर स्नातक उत्तीर्ण छात्राओं में मेरिट के आधार पर टॉप पांच प्रतिशत की सूची तैयार कर रहे हैं। चयनित छात्राओं से आधार, निवास व आय प्रमाणपत्र लेकर पोर्टल पर अपलोड किए जा रहे हैं। इसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय जिला प्रशासन के सहयोग से दस्तावेजों का सत्यापन कराएगा। लखनऊ विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों से करीब दो हजार छात्राओं का डाटा अपलोड किया जा चुका है।


    आवश्यकता के अनुसार बढ़ सकती है संख्या 

    पूर्व में विभाग ने 400 करोड़ रुपये के बजट से करीब 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देने की घोषणा की थी। फिलहाल 40 हजार स्कूटी खरीदने के लिए टेंडर हुआ है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल ने बताया कि टेंडर में आवश्यकता के अनुसार संख्या घटाने-बढ़ाने का प्रावधान है। विश्वविद्यालयों से प्राप्त डाटा और सत्यापन के बाद पात्र छात्राओं की वास्तविक संख्या स्पष्ट होगी।



    छात्राओं को जनवरी तक मिलेगी स्कूटी, 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड की जारी

    13 सितंबर 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत 40 हजार मेधावी छात्राओं को जनवरी तक स्कूटी देने की तैयारी है। 40 हजार स्कूटी उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने जेम पोर्टल पर बिड जारी की है। चयनित कंपनी को सिर्फ 100 दिनों में स्कूटी आपूर्ति करनी होगी। उच्च शिक्षा विभाग ने सितंबर अंत तक खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने की तैयारी की है। उसके बाद 100 दिन सप्लाई में लगेगा। इस लिहाज से जनवरी तक छात्राओं को स्कूटी मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि स्कूटी की डिलीवरी प्रदेश के सभी 75 जिला/मंडल मुख्यालयों पर की जाएगी।

    प्रत्येक स्थान पर कितनी स्कूटी भेजी जाएंगी, इसकी जानकारी खरीद आदेश के समय देंगे। इस बीच छात्राओं की चयन सूची भी तैयार हो जाएगी। हालांकि अधिकारियों ने स्कूटी की संख्या 25 प्रतिशत तक बढ़ाने या घटाने का प्रावधान रखा है ताकि यदि लाभार्थियों की संख्या बढ़ती है तो अतिरिक्त वाहनों की सप्लाई में किसी तरह की कोई परेशानी न होने पाए। यही नहीं यह संख्या आवश्यकता पड़ने पर 25 फीसदी से भी अधिक बढ़ या घट सकती है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. मोनिका सिंह के अनुसार स्कूटी खरीद के लिए विक्रेताओं से 21 सितंबर को 12 बजे से ऑनलाइन बैठक होगी।

    स्कूटी के साथ कई एसेसरीज भी अनिवार्य

    हर स्कूटी के साथ एक आईएस 4151:2015 मानक का हेलमेट और चार लीटर पेट्रोल भी दिया जाएगा। स्कूटी के साथ कई एसेसरीज जैसे गार्ड किट, ग्रिप कवर, किक रबर, सीट कवर आदि भी अनिवार्य है। स्कूटी बीएस सिक्स, ऑटोमैटिक और ट्यूबलेस टायर वाला होगा।



    मेधावी के साथ निराश्रित-दिव्यांग छात्राओं को भी मिलेगी स्कूटी,  उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विवि से मांगी जानकारी

    12 अगस्त 2026
    लखनऊ। प्रदेश में रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को जल्द लागू करने की कवायद तेज हो गई है। योजना के तहत वर्ष 2025-26 में अंतिम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली छात्राओं के साथ निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं को भी स्कूटी दी जाएगी। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों से पात्र छात्राओं का ब्योरा मांगा है।

    योजना के तहत ऐसी छात्राओं को भी लाभ दिया जाएगा, जिनके माता-पिता में से किसी एक की मृत्यु हो गई हो और परिवार में भरण-पोषण करने वाला कोई अन्य सदस्य न हो। वहीं, मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी, हीमोफिलिया आदि से ग्रस्त दिव्यांग छात्राओं को भी योजना में शामिल किया जाएगा। इसके लिए उनकी दृष्टि व मानसिक स्थिति ठीक होना जरूरी है। साथ ही कमर के ऊपर का हिस्सा स्वस्थ होने के कारण वे मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल चलाने में सक्षम हों और मुख्य चिकित्साधिकारी ने उनकी दिव्यांगता 80 फीसदी या उससे अधिक प्रमाणित की हो। ऐसी छात्राओं को दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग की नियमावली के अनुसार स्कूटी दी जाएगी।

    उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव सर्वेश कुमार सिंह ने सभी राज्य व निजी विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक और उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा है। इसमें वर्ष 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण निराश्रित और दिव्यांग छात्राओं की संख्या समेत अन्य जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    50 हजार छात्राओं को देंगे स्कूटी: रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए सरकार ने 400 करोड़ का बजट आवंटित किया है। इससे 50 हजार से अधिक छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी की खरीद जिला स्तर पर होगी।



    कम विद्यार्थियों वाले पाठ्यक्रमों में राहत, टॉप पांच प्रतिशत मेधावियों का होगा चयन पाठ्यक्रम में विद्यार्थी कम हुए तो भी एक मेधावी छात्रा को मिलेगी स्कूटी

    400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है, 50 हजार छात्राओं को पहले चरण में ही मिल सकती है स्कूटी

    कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप फाइव प्रतिशत निकालने में आ रही है समस्या

    11 अगस्त 2026
    लखनऊ। यूपी में विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में ऐसे पाठ्यक्रम जिसमें बहुत कम विद्यार्थी हैं, उसमें भी न्यूनतम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी दी जाएगी। विभिन्न पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी मिलेगी। कुछ पाठ्यक्रमों में टॉप पांच प्रतिशत निकालने पर एक से कम संख्या आ रही है। ऐसे में कम से कम एक छात्रा को स्कूटी मिलेगी।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से मेधावी छात्राओं के संबंध में जानकारी मांगी गई है। शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 प्रतिशत से अधिक अंक पाकर स्नातक पास करने वाली मेधावी छात्राओं के परीक्षा परिणाम सहित जानकारी, शैक्षिक सत्र 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष पास करने वाली वह छात्राएं, जिनके 80 प्रतिशत से अधिक अंक हैं या आठ से अधिक सीजीपीए (क्यूमेलेटिव ग्रेड प्वाइंट  ऐवरेज) है। 

    वहीं 2025-26 में स्नातक द्वितीय वर्ष 85 प्रतिशत अंक या फिर 8.5 सीजीपीए व इससे अधिक पाने वाली मेधावी छात्राओं और इससे भी अधिक अंक प्रतिशत पाने वाली मेधावी छात्राओं के बारे में जानकारी मांगी गई है। पोर्टल पर रिजल्ट को अपलोड कर उसकी टेस्टिंग का काम भी शुरू हो गया है और सभी संस्थानों से डाटा लेकर उसका सत्यापन भी किया जाएगा। 

    बैचलर आफ वोकेशनल व फाइन आर्ट्स सहित कई कोर्स ऐसे हैं, जिसमें टॉप पांच मेधावी छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है। ऐसे में अब कम से कम एक मेधावी छात्रा को स्कूटी मिलेगी। ऐसे कोर्स जिसमें 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली टॉप पांच प्रतिशत छात्राओं की संख्या एक से कम आ रही है तो भी उसमें किसी न किसी एक सर्वाधिक अंक पाने वाली छात्रा को स्कूटी देने की तैयारी है।


    विश्वविद्यालय-कॉलेजों से मंगवाए जा रहे आंकड़े

    फिलहाल उच्च शिक्षा विभाग विश्वविद्यालय व कॉलेजों से आंकड़े मंगवाने के साथ-साथ कम छात्र संख्या वाले कोर्स व मानक के अनुसार अंक प्रतिशत न होने पर उस कोर्स की मेधावी छात्रा को राहत देने पर मंथन कर रहा है। जिससे उन्हें भी मुफ्त स्कूटी मिल सके। फिलहाल मेधावी छात्राओं को जल्द इसका तोहफा देने की तैयारी है।

    स्कूटी के लिए जरूरत पर बजट बढ़ाया जाएगा

    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं को स्कूटी मिलेगी। न्यूनतम 80 प्रतिशत तक अंक पाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया गया है। करीब 400 करोड़ रुपये का बजट उच्च शिक्षा विभाग के पास है। ऐसे में पहले चरण में ही 50 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगे और मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए जरूरत के अनुसार बजट बढ़ाया जाएगा।




    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    Monday, October 12, 2026

    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर अहम सुनवाई, प्राथमिक शिक्षकों को जूनियर टीईटी में आवेदन का मौका देने की मांग

    इलाहाबाद: उत्तर प्रदेश में होने वाली स्पेशल टीईटी परीक्षा-2026 को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दाखिल की गई है। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी परीक्षा में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।
    याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य हैं, जबकि उत्तर प्रदेश सरकार व अन्य को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिका में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा जारी विज्ञापन संख्या-03/2026 दिनांक 03 सितंबर 2026 के क्लॉज 7.1 के पैराग्राफ संख्या-2 को चुनौती दी गई है।

    इस क्लॉज के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक केवल उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए आवेदन कर सकते हैं। प्राथमिक शिक्षक उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में आवेदन नहीं कर सकते। इसी प्रतिबंध को याचिका में अवैध बताते हुए रद्द करने की मांग की गई है।

    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई। कोर्ट नंबर-6 में हुई सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों के वकीलों ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि यह मामला 28 अक्टूबर 2026 को दोपहर 2 बजे दोबारा पेश किया जाए। अदालत ने यह भी साफ कर दिया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।

    इस याचिका पर अब 28 अक्टूबर को महत्वपूर्ण सुनवाई होने वाली है। कोर्ट के रुख को देखते हुए इस दिन कोई अहम आदेश या फैसला आने की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल पूरा मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में विचाराधीन है।



    स्पेशल टीईटी की शर्त के खिलाफ शिक्षक पहुंचे हाईकोर्ट

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की स्पेशल टीईटी-2026 को लेकर शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। 

    चयन आयोग की ओर से पांच सितंबर को जारी विज्ञापन में यह शर्त है कि प्राथमिक स्तर के विद्यालयों में कार्यरत सभी शिक्षक प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। जबकि उच्च प्राथमिक स्तर/जूनियर हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक उच्च प्राथमिक स्तर की विशेष टीईटी के लिए अर्ह होंगे। प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों ने उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की टीईटी में भी आवेदन करने का विकल्प दिए जाने की मांग की है।

     याचिकाकर्ता वंदना उपाध्याय एवं 28 अन्य ने इसी शर्त को चुनौती दी है। इस मामले की सुनवाई पांच अक्तूबर को न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत में हुई और अगली सुनवाई की तारीख 28 अक्तूबर निर्धारित हुई है। अदालत ने साफ किया है कि अगली तारीख पर निर्देश लेने के लिए कोई और समय नहीं दिया जाएगा।


    मृतक आश्रितों की नौकरी में देरी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सख्ती, अफसरों का पंजीकरण तत्काल कराने का निर्देश

    मृतक आश्रितों की नौकरी में देरी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग की सख्ती, अफसरों का पंजीकरण तत्काल कराने का निर्देश


    लखनऊ : सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उनके आश्रितों को नौकरी देने की प्रक्रिया में लापरवाही अब भारी पड़ सकती है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों को मानव संपदा पोर्टल पर तत्काल पंजीकरण कराने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण पूरा नहीं होने पर संबंधित कार्यालय में मृतक आश्रित नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे।

    विभागीय समीक्षा में कई कार्यालयों में पंजीकरण लंबित मिलने के बाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने यह निर्देश जारी किए हैं। शासन ने छह अप्रैल को आदेश दिया था कि 31 मई के बाद मृत सरकारी कर्मचारियों के आश्रितों की नियुक्ति से जुड़े सभी आवेदनों का निस्तारण मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से आनलाइन किया जाएगा। 

    राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) इस व्यवस्था के लिए पोर्टल पर डीडीसीए माड्यूल शुरू कर चुका है। प्रत्येक संबंधित कार्यालय को अपनी आफिस एडमिन आइडी से प्रथम स्तर (एल-1) और मंजूरी देने वाले द्वितीय स्तर (एल-2) के अधिकारियों को नामित करना होगा। जिन कार्यालयों में नियुक्ति का अधिकार है, वहां आदेश जारी करने वाले अधिकारी का पंजीकरण भी जरूरी होगा।



    माध्यमिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों के समायोजन में देरी करने पर 54 जिलों से निदेशालय ने जताई नाराजगी

    अभी तक 54 जिलों ने पहले स्तर व ऑर्डर अथॉरिटी का पंजीकरण ही नहीं किया है

    लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों के समायोजन में देरी करने पर 54 जिलों से निदेशालय ने नाराजगी जताई है। इसकी प्रक्रिया मानव संपदा पोर्टल से ऑनलाइन की जानी है, लेकिन अभी तक इन जिलों ने पहले स्तर व आर्डर अथॉरिटी का पंजीकरण ही नहीं किया है। ऐसे में संयुक्त शिक्षा निदेशकों व डीआईओएस को जल्द कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने इन जिलों से मानव संपदा पोर्टल से मृतक आश्रितों का सेवायोजन कराने में लापरवाही पर नाराजगी जताई है। 31 मई के बाद से मृतक आश्रितों के समायोजन के लिए आवेदन और उसके निस्तारण की समस्त प्रक्रिया ऑनलाइन माध्यम से की जानी है। इसके लिए पोर्टल पर मृतक आश्रित सेवायोजन प्रणाली शुरू की गई है।

    नियुक्ति प्राधिकारी से प्राथमिक स्तर पर ऑनलाइन ही लॉगिन व पासवर्ड से मृतक आश्रित आवेदनों को अनुमोदित कर आगे बढ़ाया जाना है। ऑनलाइन प्रणाली से मृतक आश्रितों के आवेदन, मृतक कर्मियों के अंतिम रिपोर्टिंग कार्यालय में भेजे जाएंगे। ऐसे में यह कार्य हर संबंधित कार्यालय व निदेशायल के सभी ऑफिस एडमिन के माध्यम से अनिवार्य रूप से की जानी है।

    जिन ऑफिस एडमिन की ओर से यह कार्य नहीं किया जाएगा, उस कार्यालय के मृतक आश्रित आवेदन नहीं कर सकेंगे। लापरवाही करने वालों में लखनऊ, उन्नाव, कानपुर नगर, कानपुर देहात, रायबरेली, अंबेडकर नगर, सुल्तानपुर व बाराबंकी समेत 54 जिले हैं।


    पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का होगा गठन

    पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का होगा गठन

    योग, संगीत, साहित्य से लेकर एआई, कोडिंग और रोबोटिक्स तक की गतिविधियों को मिलेगा बढ़ावा


    लखनऊ। प्रदेश के सभी पॉलीटेक्निक संस्थानों में छात्रों को तनावमुक्त रखने और उनकी छिपी प्रतिभा को निखारने के लिए 15-15 हॉबी क्लबों का गठन किया जाएगा।


    इन क्लबों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई के साथ योग, साहित्य, संगीत, नृत्य, नाटक, खेल और सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही एआई, कोडिंग, रोबोट निर्माण, साइबर सुरक्षा, एथिकल हैकिंग और ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

    हॉबी क्लबों का मुख्य उद्देश्य तकनीकी पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे छात्रों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना तथा उनके तनाव को कम करना है। इन गतिविधियों से छात्रों में टीम वर्क, नेतृत्व क्षमता, संचार कौशल, एकाग्रता और रचनात्मक सोच को बढ़ावा मिलेगा। इससे उनके शैक्षिक प्रदर्शन में भी सुधार होने की उम्मीद है। फोटोग्राफी, सॉफ्ट स्किल, वाद-विवाद और अन्य रुचि आधारित गतिविधियां भी क्लबों का हिस्सा होंगी।

    हर क्लब में होंगे मेंटर और समन्वयक

    प्रत्येक हॉबी क्लब में एक छात्र समन्वयक नियुक्त किया जाएगा। इसके अलावा संस्थान के एक शिक्षक को फैकल्टी मेंटर की जिम्मेदारी दी जाएगी, जो क्लब की निगरानी और गतिविधियों के आयोजन का काम देखेंगे। हर क्लब में कम से कम एक बाहरी मेंटर की नियुक्ति अनिवार्य होगी। इसमें जिलाधिकारी (डीएम) और मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) स्तर के अधिकारी भी शामिल हो सकेंगे।

     क्लब जरूरत के अनुसार बाहरी विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनके व्याख्यान आयोजित करेंगे और अन्य संस्थानों या विशेषज्ञों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) भी कर सकेंगे। गतिविधियों के तहत वार्षिक समारोह आयोजित होंगे। इसमें उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले क्लबों और छात्र समन्वयकों को सम्मानित किया जाएगा, ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ रचनात्मक और तकनीकी गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

    दिसंबर तक सभी राजकीय माध्यमिक स्कूलों में बनेंगी अटल टिंकरिंग लैब

    दिसंबर तक सभी राजकीय माध्यमिक स्कूलों में बनेंगी अटल टिंकरिंग लैब

     लखनऊः सभी राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी भी रोबोटिक्स, कोडिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) जैसी आधुनिक तकनीकों को केवल किताबों में नहीं पढ़ेंगे, बल्कि प्रयोग करके सीखेंगे। 515 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में दिसंबर तक अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने का लक्ष्य है।


     इन प्रयोगशालाओं के जरिये विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच विकसित करने के साथ उन्हें नए विचारों को माडल के रूप में तैयार करने और तकनीकी समस्याओं का समाधान खोजने का अवसर मिलेगा। 2490 राजकीय विद्यालयों में से 900 विद्यालय लैब की स्थापना के लिए चिह्नित किए गए हैं। 

    पहले चरण में 385 विद्यालयों में प्रयोगशालाएं स्थापित हैं। अटल टिंकरिंग लैब में विद्यार्थी थ्रीडी प्रिंटर, रोबोटिक्स किट, सेंसर, इलेक्ट्रानिक्स उपकरण और कंप्यूटर की मदद से अलग-अलग प्रयोग कर सकेंगे।

    Sunday, October 11, 2026

    45 लाख से अधिक बच्चों को अब भी डेस्क-बेंच का इंतजार, एक हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद खरीद की रफ्तार सुस्त

    45 लाख से अधिक बच्चों को अब भी डेस्क-बेंच का इंतजार, एक हजार करोड़ रुपये का बजट होने के बावजूद खरीद की रफ्तार सुस्त

    आपरेशन कायाकल्प के दावों के बीच 46 हजार स्कूलों में टाट-पट्टी पर पढ़ाई


    लखनऊ : सर्दी की दस्तक के साथ परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों की मुश्किलें फिर बढ़ने वाली हैं। आपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों की सूरत बदलने के दावों के बीच प्रदेश के 46 हजार से अधिक विद्यालयों में बच्चे आज भी टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। करीब 45 लाख से अधिक बच्चों को डेस्क-बेंच नसीब नहीं हैं। हैरानी यह है कि इस सत्र में सभी बच्चों को फर्नीचर उपलब्ध कराने का दावा किया जा रहा है, लेकिन इसके लिए करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित होने के बावजूद खरीद प्रक्रिया अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है। ऐसे में सवाल है कि जब बजट और योजना दोनों मौजूद हैं, तो बच्चों को बुनियादी सुविधा के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है?


    प्रदेश में 1,32,735 परिषदीय विद्यालय हैं। आपरेशन कायाकल्प के तहत इनमें बुनियादी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है, लेकिन बैठने के लिए फर्नीचर की व्यवस्था अब भी अधूरी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, करीब 65 प्रतिशत विद्यालयों में ही फर्नीचर की व्यवस्था हो सकी है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, जबकि प्राथमिक विद्यालयों में सबसे अधिक बच्चे इस कमी से जूझ रहे हैं। बहराइच, बाराबंकी, लखीमपुर खीरी और अयोध्या समेत कई जिलों के विद्यालयों में डेस्क-बेंच की कमी बनी हुई है। लखनऊ, गोरखपुर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में स्थिति तुलनात्मक रूप से बेहतर है। डेस्क-बेंच के अभाव में बच्चों को जमीन पर बैठकर लिखना-पढ़ना पड़ता है। इससे उन्हें असुविधा होती है और लंबे समय तक झुककर बैठने से पीठ व गर्दन में परेशानी और थकान हो सकती है। सर्दियों में जमीन पर बैठना उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता है।

    खरीद की व्यवस्था बदलने में उलझी प्रक्रिया

    फर्नीचर खरीदने के लिए समग्र शिक्षा परियोजना निदेशालय से करीब एक हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित है। खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से की जानी है और गुणवत्ता की निगरानी जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय समिति को करनी है। कुछ जिलों में कारपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत भी फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में विद्यालयों तक सुविधा नहीं पहुंच पाई है। पहले फर्नीचर खरीद की केंद्रीयकृत व्यवस्था थी, जिसे बाद में बदलकर जिलों के स्तर पर खरीद करने की व्यवस्था बनाई गई, लेकिन खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।


    69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

    69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा विभाग के शहरी परिषदीय स्कूलों में 11508 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आने के बाद अब अभ्यर्थियों को 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इस फैसले के बाद ही करीब 45,000 ग्रामीण शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए रास्ता साफ होगा।


    ग्रामीण शिक्षक भर्ती के लिए विभाग ने रिक्त पदों का अधियाचन भी मंगा लिया है। करीब 45000 रिक्त पद इसमें शामिल हैं। दरअसल, चार दिसंबर 2018 को 69,000 शिक्षक भर्ती के पदों का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें करीब 19,000 पदों पर आरक्षण का मामला फंस गया था।

    विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट इन पदों को लेकर क्या निर्णय लेती है इसके बाद ही अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जाएगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि ग्रामीण शिक्षक भर्ती का विवरण तो मिल चुका है। कोर्ट के फैसले के बाद पदों में कुछ बदलाव होने की स्थिति को देखते हुए अभी चयन आयोग को अधियाचन नहीं भेजा गया है।