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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, May 7, 2026

    अब कक्षा छह से ही कौशल विकास, यूपी समेत पांच राज्यों में लागू होगा पायलट प्रोजेक्ट

    अब कक्षा छह से ही कौशल विकास, यूपी समेत पांच राज्यों में लागू होगा पायलट प्रोजेक्ट

    दिल्ली में हुई बैठक में राज्यों से लिए सुझाव

    लखनऊ। अब कक्षा छह से ही स्कूलों में कौशल आधारित पढ़ाई कराई जाएगी। कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की ओर से उत्तर प्रदेश और बिहार समेत पांच राज्यों में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा। हाल ही में दिल्ली में हुई इन राज्यों के प्रतिनिधियों की बैठक में इसकी रूपरेखा तैयार की गई है।


    प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अभी कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों के लिए प्रोजेक्ट प्रवीण लागू किया गया है। इसमें अत्याधुनिक क्षेत्र की लैब स्थापित कर छात्रों को कौशल विकास से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब कौशल आधारित पढ़ाई कक्षा छह से ही शुरू की जाएगी। इसमें स्कूलों को उद्योगों व कौशल विकास संस्थानों से जोड़ा जाएगा। इनमें स्किल से जुड़ी लैब की स्थापना की जाएगी।

    कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय की दिल्ली में हुई बैठक में यूपी, आंध्र प्रदेश, बिहार, असम व उड़ीसा के अधिकारी शामिल हुए। यूपी से इस बैठक में शामिल व्यावसायिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस योजना का उद्देश्य स्कूल स्तर से ही छात्रों को कौशल विकास के लिए तैयार किया जाना है। इसमें आईटीआई आदि संस्थानों के साथ मिलकर छात्रों को व्यवहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसी के तहत स्कूलों को भी तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा, जिनमें सामान्य, तकनीकी मिश्रित मॉडल के स्कूल होंगे। साथ ही एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट (एबीसी) व नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) को भी प्रभावी बनाया जाएगा।


    कई विभागों का होगा एक पूल
    इस योजना में व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास विभाग, बेसिक, माध्यमिक व उच्च, उद्योग, श्रम विभाग व जिला प्रशासन भी शामिल होगा। यह सभी विभाग एक साथ मिलकर इस योजना पर काम करेंगे। युवाओं को इंडस्ट्री के लिए तैयार करेंगे। अगर उनके बीच में कोई गैप है तो उसे पूरा करेंगे। इन सभी का समन्वय कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय करेगा।


    रोजगार व उद्योगों के लिए होंगे तैयार
    इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं के लिए शिक्षा से रोजगार तक एक सहज और प्रभावी रास्ता तैयार करना है। छात्र पढ़ाई करते हुए भी किसी भी स्तर पर उसे छोड़ने का मन बनाए तो उसका कोई नुकसान न हो। वो अपना खुद का काम शुरू कर सकेंगे या उद्योगों में भी जा सकेंगे। वहीं अगर वे इंटर करते हैं तो इसके बाद भी रोजगार के लिए तैयार होंगे।


    यह भी खास

    इस केंद्रीयकृत योजना में लगभग 600 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    कौशल विकास के माध्यम से युवा इंडस्ट्री के लिए तैयार होंगे।

    कमियों को दूर कर युवाओं को इंटरप्रेन्योरशिप के लिए तैयार किया जाएगा।

    राज्यों में मुख्य सचिव के नेतृत्व में समन्वय किया जाएगा।

    कौशल विकास के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा दिया जाएगा।

    नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट

    नवीनीकरण न करना मनमाना व न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध, स्कूलों में छात्रों की संख्या में गिरावट के लिए सिर्फ अनुदेशक जिम्मेदार नहीं : हाईकोर्ट

    देखें हाईकोर्ट ऑर्डर 

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या में कमी के लिए केवल अंशकालिक अनुदेशकों को जिम्मेदार ठहराना अनुचित है। अगर किसी स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम हो जाती है तो इसके लिए सभी सभी शिक्षकों को जिम्मेदार माना जा सकता है, सिर्फ अनुदेशकों को नहीं। ऐसे में छात्रों की संख्या में कमी के आधार पर अंशकालिक अनुदेशकों की सेवा का नवीनीकरण न करना मनमाना और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने कानपुर देहात निवासी मनोज कुमार व 57 अन्य की याचिका पर दिया है। 

    यह मामला विभिन्न जिलों में कार्यरत उन अंशकालिक अनुदेशकों से जुड़ा है जिनकी नियुक्ति शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कला, स्वास्थ्य और शारीरिक शिक्षा जैसे विषयों के लिए की गई थी।

    वर्ष 2013 के शासनादेश के तहत नियुक्त इन अनुदेशकों की सेवाओं को विभाग ने इस आधार पर समाप्त कर दिया था कि संबंधित विद्यालयों में छात्र संख्या 100 के निर्धारित मानक से कम हो गई है। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची अधिवक्ता ने दलील दी कि 31 जनवरी 2013 के मूल शासनादेश में नवीनीकरण के लिए छात्र संख्या की कोई अनिवार्य शर्त नहीं जोड़ी गई और संतोषजनक सेवा के बावजूद अनुदेशकों हटाना गलत है। 


    हाईकोर्ट ऑर्डर 👇 


    प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों की सूचना नहीं दी, तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश

    प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों की सूचना नहीं दी, तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश 


    प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों ने प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के सभी रिक्त पदों की सूचना चयन के लिए नहीं भेजी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को चार मई को पत्र लिखकर तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। 

    निदेशक ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 27 फरवरी को सूचित किया था कि हाईकोर्ट ने 26 फरवरी को छह महीने में प्रधानाचार्यों की भर्ती पूरी करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में एडेड कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों का अधियाचन भेजने के निर्देश दिए गए थे।



    Wednesday, May 6, 2026

    छठवीं में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक तय करें स्कूल – सीबीएसई, ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    छठवीं में तीसरी भाषा का चयन 31 मई तक तय करें स्कूल – सीबीएसई, ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला


    06 मई 2026
    नई दिल्लीः सीबीएसई ने छठवीं में तीसरी भाषा (आर 3) लागू करने को लेकर सभी संबद्ध स्कूलों को प्रक्रिया तेज करने को कहा है। बोर्ड का कहना है कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए यह व्यवस्था अनिवार्य होगी और सभी स्कूलों को 31 मई तक ओसिस पोर्टल पर अपनी तीसरी भाषा का चयन करके अपलोड या संशोधित करना होगा। नई व्यवस्था एक जुलाई से शुरू करनी होगी।

    सीबीएसई के अनुसार, कई स्कूलों ने तीसरी भाषा का विकल्प पहले ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया है, कुछ स्कूल अब भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। वहीं, कुछ ने नीति के अनुरूप विकल्प नहीं चुने हैं। सीबीएसई ने कहा है, निर्धारित समय सीमा तक जानकारी अपडेट नहीं करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई हो सकती है।


    ये है तीन भाषा चुनने का फार्मूला

    आर 1 (पहली भाषा) : यह वह मुख्य भाषा होती है, जिसे स्कूल चुनता है। यह भाषा सीबीएसई की सूची में शामिल होती है, जैसे हिंदी या कोई क्षेत्रीय भाषा। आमतौर पर छात्रों की पढ़ाई की शुरुआत इसी भाषा से होती है।

    आर 2 (दूसरी भाषा) : दूसरी भाषा आर 1 से अलग होती है। यह भी एक मानक भाषा होती है, जिसे स्कूल पढ़ाता है जैसे अंग्रेजी या कोई दूसरी भारतीय भाषा।

    आर 3 (तीसरी भाषा) : तीसरी भाषा आर 1 और आर 2 दोनों से अलग होती है। इसमें छात्र अपनी क्षेत्रीय भाषा या मातृभाषा का चुनाव कर सकते हैं। इन तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होनी चाहिए।




    छठी कक्षा से तीसरी भाषा को सीबीएसई ने किया अनिवार्य, नए नियम के तहत तीन भाषाओं में दो भारतीय भाषा होना जरूरी

    कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यामक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने भाषा शिक्षा को लेकर बड़ा बदलाव करते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा (आर3) को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। यह कदम नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन 2023 के तहत बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है। साथ ही इसी सत्र से कक्षा नौवीं के लिए गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली का कार्यान्वयन शुरू किया जा रहा है।

    सीबीएसई के अनुसार अब छात्रों को हिंदी और अंग्रेजी के अलावा कम से कम एक और भाषा पढ़नी होगी। नए नियम के तहत तीन भाषाओं में से दो भारतीय भाषाएं होना अनिवार्य होगा। इस नीति के लागू होने के बाद कक्षा छठी से शुरू होने वाला तीसरी भाषा का अध्ययन कक्षा दसवीं तक जारी रहेगा। वर्तमान में हिंदी और अंग्रेजी समेत कुल 44 भाषाएं पढ़ाई जा रही हैं। जिनमें संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी भाषाएं, अन्य क्षेत्रीय भारतीय भाषाएं और कुछ विदेशी भाषाएं भी शामिल हैं।

    छात्रों का होगा समग्र विकास : भाषा पाठ्यक्रम को इस तरह तैयार किया गया है कि छात्रों की सुनने, बोलने, पढ़ने और लिखने की क्षमता का समग्र विकास हो सके। इसमें आर 1, आर2 और आर3 के रूप में तीन-भाषा ढांचा तय किया है। एनसीएफएसई-2023 की सिफारिशों के अनुसार इन तीन भाषाओं में से दो भाषाएं भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड द्वारा बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठी से तीसरी भाषा अनिवार्य कर दी जाएगी।

     सभी कक्षा में भाषा होगी अनिवार्य
    बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि तीसरी भाषा की पढ़ाई शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छठीं में अनिवार्य रूप से शुरू होगी। इसके बाद हर वर्ष इसे एक-एक कक्षा में बढ़ाया जाएगा ताकि छात्रों पर अचानक अतिरिक्त बोझ न पड़े और वह क्रमिक रूप से नई भाषा सीख सकें। जारी कार्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में केवल कक्षा छठीं के छात्रों के लिए आर3 अनिवार्य होगा। जबकि सत्र 2027-28 में यह कक्षा छठी और सातवी, सत्र 2028-29 में कक्षा छठी से आठवी, सत्र 2029-30 में कक्षा छठी से नौवीं और सत्र 2030-31 तक कक्षा छठी से दसवीं तक के सभी छात्रों के लिए तीसरी भाषा अनिवार्य हो जाएगी।

    सांस्कृतिक विविधता की समझ होगी मजबूत : इस नीति के तहत छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी। जिनमें से कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना जरूरी है। सीबीएसई का मानना है कि इस पहल से छात्रों की भाषाई क्षमता के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक विविधता की समझ भी मजबूत होगी। इस चरणवद्ध शुरुआत से पाठ्यक्रम का सुचारू रूप से परिवर्तन सुनिश्चित और माध्यमिक स्तर के मूल्यांकन सुधारों के साथ सामंजस्य स्थापित होगा।

    अधिकांश किताब 10 से 15 अप्रैल तक होंगी उपलब्ध : वहीं सीबीएसई द्वारा कक्षा नौवीं और दसवीं पाठ्यक्रम जारी करने को लेकर आयोजित वेबिनार में एनसीईआरटी के निदेशक प्रोफेसर दिनेश सकलानी ने अनुसार नौवीं की किताबें तैयार हैं। प्रिंटिंग में हैं। इसमें अधिकांश किताबें 10 से 15 अप्रैल के बीच आ जाएंगी। एक से दो किताबें आने में देरी हो सकती है।



    सीबीएसई : नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए गणित, विज्ञान के दो स्तर अगले सत्र से होंगे लागू, 

    मानक और उन्नत प्रणाली पर आधारित 10वीं की पहली परीक्षा 2028 में होगी

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं और दसवीं कक्षा के लिए अपना नया शैक्षिक कार्यक्रम लागू कर दिया। इसके तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली होगी। गणित और विज्ञान के लिए दो स्तरीय प्रणाली (मानक और उन्नत) पर आधारित कक्षा 10 की पहली बोर्ड परीक्षा 2028 में होगी।

    सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शुक्रवार को बताया कि 2026 से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत अनिवार्य तीन भाषा फार्मूला कक्षा 6 के लिए लागू किया जाएगा, जबकि कक्षा 9 के लिए गणित और विज्ञान में अनिवार्य मानक एवं वैकल्पिक उन्नत पाठ्यक्रमों की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू की जाएगी। कक्षा 9 के लिए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से गणित और विज्ञान की दो-स्तरीय प्रणाली शुरू होने से दोनों विषयों में एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

    अधिकारी ने कहा, नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे (एनसीएफ) की सिफारिशों के अनुसार, इन तीन भाषाओं में से दो भारत की मूल भाषाएं होनी चाहिए । भाषाओं को तीन चरणों-आर 1, आर 2 और आर3-में एक सुव्यवस्थित तीन-भाषा ढांचे के तहत व्यवस्थित किया गया है। बहुभाषी शिक्षा के चरणबद्ध कार्यान्वयन के बोर्ड के प्रयासों को जारी रखते हुए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से तीसरी भाषा को अनिवार्य किए जाने से यह सुनिश्चित होगा कि प्रत्येक छात्र कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करे। हालांकि, एक समान भाषा योजना को अपनाना वांछनीय है, लेकिन अगर कोई छात्र विदेश के किसी स्कूल से पढ़कर आया है और उसने वहां 8वीं या 9वीं तक जो तीसरी भाषा पढ़ी थी, वह स्कूलों में उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे खास मामलों में निर्धारित मानदंडों के अनुसार छूट दी जा सकती है। 


    मानक परीक्षा अनिवार्य, उन्नत वैकल्पिक

    गणित और विज्ञान की दो स्तरीय प्रणाली पर अधिकारी ने कहा, सभी छात्र मानक पाठ्यक्रम का अध्ययन करेंगे और तीन घंटे की 80 अंकों की एक समान परीक्षा में शामिल होंगे। उच्च दक्षता का विकल्प चुनने वाले छात्र दोनों विषयों में किसी एक या दोनों में एक अतिरिक्त उन्नत स्तर का चयन कर सकते हैं। इस स्तर में एक घंटे का 25 अंकों का एक अन्य प्रश्नपत्र हल करना होगा, जिसे उच्च-स्तरीय बौद्धिक कौशल और गहन वैचारिक समझ आंकने के लिए तैयार किया गया है। अधिकारी ने कहा, छात्रों के लिए मानक परीक्षा देना अनिवार्य होगा, जबकि उन्नत परीक्षा वैकल्पिक रहेगी। अहम बात यह है कि उन्नत परीक्षा में हासिल अंकों को कुल अंकों में नहीं जोड़ा जाएगा; इसके बजाय 50 फीसदी या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की मार्कशीट में उन्नत स्तर की योग्यता अलग से दिखाई जाएगी।

    तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें, निजी फोन से जनगणना को राजी नहीं शिक्षक, विरोध करते हुए जनगणना रजिस्ट्रार को लिख रहे पत्र

    तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें, निजी फोन से जनगणना को राजी नहीं शिक्षक, विरोध  करते हुए जनगणना रजिस्ट्रार को लिख रहे पत्र


    लखनऊ। जनगणना में निजी मोबाइल प्रयोग करने के निर्देशों का शिक्षकों एवं शिक्षक संगठनों की ओर से भारी विरोध शुरू हो गया है। जनगणना की ट्रेनिंग में शिक्षकों व अन्य कर्मियों को जनगणना के दायित्वों को पूरा करने के लिए आधुनिक फीचर वाले मोबाइल के इस्तेमाल के निर्देश दिए गए हैं।


    बड़ी संख्या में शिक्षकों के साथ-साथ शिक्षक संगठनों ने राज्य जनगणना अधिकारी से लेकर भारत के जनगणना रजिस्ट्रार को इसके लिए कड़ा विरोध पत्र भेजा है। पत्रों में किसी ने लिखा है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक हैं, जो आज भी की-पैड वाला साधारण मोबाइल प्रयोग करते हैं। किसी ने लिखा कि कई शिक्षक ऐसे हैं, जिनके पास स्मार्टफोन तो है लेकिन अपनी जरूरत के हिसाब से 4जीबी से कम रैम वाला मोबाइल का उपयोग करते हैं। सफाई में यह भी लिखा गया है कि ऐसा करना कोई पिछड़ापन नहीं यह उनकी निजी जीवन शैली है। फिर कैसे किसी को विशेष मोबाइल खरीदने के लिए बाध्य किया जा सकता है।


    तकनीकी शर्तें बढ़ा रहीं मुश्किलें
    शिक्षक आशीष सिंह की मानें तो स्थिति और मुश्किल तब हो जाती है, जब एचएलओ ऐप की तकनीकी शर्तें सामने आती हैं। जैसे एंडरॉयड 12 या उससे ऊपर और कम से कम 4 जीबी रैम आईफोन यूजर्स के लिए भी कम से कम आईओएस 15.0 होना चाहिए। ऐसे में जिनके पास ऐसा फोन नहीं है, उन्हें मजबूरी में नया फोन खरीदना पड़ेगा, वरना वे कार्य नहीं कर पाएंगे। प्रशिक्षण के समय बहुत अध्यापक इसी परेशानी में दिखे। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कर्मचारियों पर अतिरिक्त आर्थिक और तकनीकी बोझ डालती है।


    एचएलओ का हो रहा कड़ा विरोध 
    एचएलओ ऐप के जरिए " बीवाईओडी यानि 'ब्रिंग योर ओन डिवाइस' मॉडल लागू किया गया है अर्थात अपना फोन लाओ और उसी से सरकारी काम करो लेकिन इसके लिए न तो कोई स्मार्टफोन दिया जा रहा है और न ही कोई तकनीकी सहायता। 
    वरिष्ठ शिक्षक नेता ओम प्रकाश त्रिपाठी कहते हैं कि डिजिटल जनगणना का जो दावा किया जा रहा है, वह पूरी तरह कर्मचारियों के निजी संसाधनों पर टिका हुआ है।

    अब गुरुजी AI से बच्चों को पढ़ाएंगे, वर्ष 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष बनाने का लक्ष्य

    अब गुरुजी AI से बच्चों को पढ़ाएंगे, वर्ष 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष बनाने का लक्ष्य


    नई दिल्ली। दूर-दराज एवं ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षक भी अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से पढ़ाएंगे। आखिरी छोर के छात्र तक एआई की पहुंच सुनिश्चित कराने का खाका तैयार हो गया है। वर्ष 2027 तक 10 लाख स्कूली शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष आईआईटी मद्रास का बोधन एआई बनाने का लक्ष्य है। इसमें सहयोग करेगा।


    1 जून से शिक्षकों के लिए एआई साक्षरता पायलट परियोजना शुरू होगी। इसमें भाषाई बंधन से इतर बाल वाटिका से 12वीं कक्षा तक के शिक्षक सभी विषयों में 22 भारतीय भाषाओं में एआई से पढ़ाने का प्रशिक्षण लेंगे। खास बात है कि एआई की मदद से शिक्षक कक्षा में पिछड़ने वाले छात्रों की पहचान कर अलग से पढ़ाई का प्लान तैयार कर उनको आगे बढ़ने में मदद करेंगे।

    शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2027 तक 10 लाख शिक्षकों को एआई से पढ़ाने में दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। एआई से शिक्षक पढ़ाने की गुणवत्ता में सुधार भी कर सकते हैं। राज्य सरकारों के सहयोग से सरकारी स्कूलों को मुख्य रूप से फोकस किया जा रहा। आईआईटी मद्रास का बोधन एआई इस परियोजना का नेतृत्व करेगा।

    एनसीईआरटी, एनसीटीई और स्कूलों में काम करने वाली संस्थाएं भी सहयोग करेंगी। अब शिक्षकों को डर है कि एआई उनकी जगह ले लेगा और उनकी नौकरी चली जाएगी। हालांकि, एआई के माध्यम से शिक्षक पढ़ाने के स्किल में बदलाव कर गुणवत्ता में सुधार लाकर रिजल्ट में बदलाव ला सकते हैं। 


    छात्र को उसकी मातृभाषा में एआई से पढ़ने का मिलेगा मौका :शिक्षकों को 22 भारतीय भाषाओं में एआई की मदद से पढ़ाने का प्रशिक्षण मिलेगा। इसका मकसद छात्र को उसकी अपनी मातृभाषा में एआई से पढ़ने का मौका उपलब्ध कराना है।


    एआई से पिछड़ने वाले छात्रों की पहचान से लेकर सुधार पर काम
    बोधन एआई पार्टनरशिप को लीड करने वाली निधि शर्मा ने बताया कि कक्षा में हर छात्र पर ध्यान देना शिक्षक के लिए संभव नहीं होता, क्योंकि मैनुअल में एक ही प्लान से पढ़ाई होती है। मगर, एआई से शिक्षक कक्षा के हर छात्र पर नजर रख सकते हैं। छात्र का टेस्ट पेपर स्कैन करते ही एआई कमियां बता देगा। मध्यम स्तर और होनहार छात्रों के लिए अलग-अलग प्लान बनाकर शिक्षक पढ़ा सकते हैं।


    यूपी, बिहार, ओडिशा, हरियाणा, आंध्र प्रदेश समेत कई राज्य जुड़ेंगे
    यूपी, बिहार, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, ओडिशा समेत अन्य राज्यों में इस परियोजना को शुरू करने की बात चल रही। आंध्र प्रदेश सरकार ने करार भी कर लिया है। इसमें संबंधित राज्यों के शिक्षा विभाग की जरूरतों के आधार पर शिक्षकों को एआई में दक्ष किया जाएगा।


    आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान

    आदेश को भ्रामक बताने पर संभल DIOS पर हाईकोर्ट ने किया एक लाख हर्जाना, शिक्षकों की नियुक्ति व तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार का मामला, निजी वेतन से करना होगा भुगतान


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व में पारित आदेश को भ्रामक बता ने याचियों का दावा अस्वीकार करने पर संभल के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) पर एक लाख रुपये का हर्जाना लगाया है। उन्हें हर्जाने की रकम निजी वेतन से या एक हफ्ते में जिला विधिक सेवा त प्राधिकरण में जमा करने का आदेश दिया गया है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमशेरी की अदालत ने - राष्ट्रीय कन्या इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि याची को अधिकारी की हठधर्मिता और आदेश की गलत व्याख्या के कारण  दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी, जिसके लिए हर्जाना लगाया जाना जरूरी है। कोर्ट ने प्रबंध समिति के खिलाफ पारित डीआईओएस के आदेश को रद्द कर नए सिरे से फैसला लेने का निर्देश दिया है।


    मामले के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट ने आदेश पारित कर डीआईओएस को निर्देश दिया था कि वह डॉ. दीपक भाटिया व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य में पारित पूर्व फैसलों के आलोक में शिक्षकों की नियुक्ति और तदर्थ प्रधानाचार्य के कार्यभार पर नया निर्णय लें। इस दौरान चयनित शिक्षक को तदर्थ प्रधानाचार्य के रूप में कार्य करने की अनुमति भी दी थी, लेकिन डीआईओएस ने कोर्ट के आदेश का पालन करने के बजाय अपने आदेश में यह लिख दिया कि 19 जनवरी का आदेश न्यायालय को गुमराह करके प्राप्त किया गया है।

    इस पर अदालत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब राज्य सरकार ने उस आदेश को चुनौती नहीं दी थी तो डीआईओएस को ऐसी टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं था। कोर्ट ने कहा कि अधिकारी ने न केवल आदेश कीगलत व्याख्या की, बल्कि याचिकाकर्ता को दोबारा अदालत आने पर मजबूर किया जो कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है।

    हर्जाना लगाने के साथ कोर्ट ने डीआईओएस को अंतिम अवसर देते हुए नए सिरे से आदेश पारित करने के लिए मामले को इस निर्देश के साथ दोबारा उनके पास भेजा दिया कि डीआईओएस 19 जनवरी के आदेश का अक्षरशः पालन करें। यह भी सुनिश्चित करें कि स्व-वित्तपोषित योजना के तहत नियुक्तियां नियमों के अनुरूप हैं या नहीं।


    Tuesday, May 5, 2026

    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    यूपी बोर्ड: त्रुटिरहित विवरण सुनिश्चित करने के लिए पोर्टल पर अपलोड करने के लिए पीडीएफ साइज बढ़ा, कल तक है संशोधन का अंतिम मौका 

    वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में सम्मिलित छात्र-छात्राओं के प्रमाणपत्र एवं अंकपत्र में त्रुटिरहित विवरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छात्र/छात्रा के नाम, माता/पिता के नाम की वर्तनी, जन्मतिथि, फोटो आदि में संशोधन हेतु निर्धारित प्रारूप पर प्रविष्टियाँ अंकित करते हुए आवश्यक साक्ष्यों सहित दिनांक 06.05.2026 को सायं 06:00 बजे तक अपलोड करने के निर्देश निर्गत किए गए थे।

    तत्क्रम में अवगत कराना है कि संशोधन हेतु पूर्णतः भरे हुए प्रारूप एवं आवश्यक साक्ष्य / प्रपत्रों से संबंधित पीडीएफ अपलोड करने के लिए पोर्टल पर पीडीएफ फाइल की साइज बढ़ा दी गयी है।

    उक्त प्रपत्रों को अपलोड करने के उपरांत यदि संशोधन से संबंधित कोई प्रकरण अवशेष रह जाता है, तो संबंधित विद्यालय ऐसे अवशेष प्रकरणों को अगले दिवस भी (निर्धारित अन्तिम तिथि तक) अपलोड कर सकते हैं।





    छह तक शैक्षिक विवरण में करा लें संशोधन, फिर नहीं मिलेगा मौका, यूपी बोर्ड ने दी चेतावनी, इसके उपरांत त्रुटि सुधार की मांग किए जाने पर होगी कार्रवाई

    04 मई 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद विद्यार्थियों को शैक्षिक विवरण में त्रुटि सुधार के लिए तीन से चार बार मौका दे चुका है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में ऐसे विद्यार्थी हैं, जिनके शैक्षिक विवरण में कोई न कोई तकनीकी कमी है। स्कूलों के प्रधानाचार्य इस प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।

    ऐसे में यूपी बोर्ड ने छह मई तक अंतिम मौका देते हुए स्पष्ट किया है कि संशोधन करा लें, इसके बाद कोई भी मामला आया तो कार्रवाई की जाएगी। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम आ चुका है। जल्द ही अंकपत्रों का वितरण भी शुरू होने की संभावना है। ऐसे में शैक्षिक विवरण में सुधार के लिए परिषद ने पांचवीं और अंतिम बार अवसर प्रदान किया है।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि परीक्षार्थियों के प्रमाणपत्र सह अंकपत्र में नाम, माता-पिता के नाम की वर्तनी, जन्मतिथि, फोटो आदि में किसी प्रकार की त्रुटि रह जाने पर उसे सुधारने के लिए यह आखिरी मौका दिया जा रहा है।

    इसका उद्देश्य विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को भविष्य में होने वाली असुविधा से बचाना है। उन्होंने कहा कि संबंधित विद्यालयों के प्रधानाचार्य परिषद की वेबसाइट पर लॉगिन कर निर्धारित प्रारूप एवं मैन्युअल डाउनलोड करें।

    इसके बाद संशोधन से संबंधित विवरण स्पष्ट रूप से भरकर स्वयं सत्यापित करें और जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमोदन प्राप्त कर पुनः पोर्टल पर अपलोड करें। यह प्रक्रिया छह मई की शाम तक चलेगी। निर्धारित अवधि के भीतर विद्यालयों को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ आवेदन ऑनलाइन अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    सचिव ने कहा है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधन के लिए आवेदन नहीं किया जाता और बाद में प्रमाणपत्र जारी होने के उपरांत त्रुटि सुधार की मांग की जाती है तो ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।




    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद  शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    27 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष-2026 के 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण की त्रुटि सुधारने के लिए अंतिम अवसर दिया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

    सचिव ने बताया कि परीक्षार्थियों के प्रमाण पत्र सह अंकपत्र में नाम, माता-पिता के नाम की वर्तनी, जन्मतिथि, फोटो आदि में किसी प्रकार की त्रुटि को सुधारने का यह आखिरी मौका दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भविष्य में होने वाली असुविधा से बचाना है।

    उन्होंने कहा कि संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य परिषद की वेबसाइट पर लॉगिन कर निर्धारित प्रारूप एवं मैन्युअल डाउनलोड करें। इसके बाद संशोधन से संबंधित विवरण स्पष्ट रूप से भरकर स्वयं सत्यापित करें और जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमोदन प्राप्त कर पोर्टल पर अपलोड करें।

    यह प्रक्रिया 27 अप्रैल से 6 मई तक चलेगी। निर्धारित अवधि के भीतर विद्यालयों को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ ऑनलाइन आवेदन अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    उन्होंने कहा यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधन के लिए आवेदन नहीं किया जाता और प्रमाण पत्र जारी होने के उपरांत त्रुटि सुधार की मांग की जाती है, तो ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। 



    Monday, May 4, 2026

    वित्तीय मदद तो लें रहीं राज्य सरकारें पर शिक्षकों के रिक्त पद भरने में कर रहीं आनाकानी, उत्तर प्रदेश में 2.17 लाख और बिहार में 1.92 लाख शिक्षकों के पद रिक्त

    वित्तीय मदद तो लें रहीं राज्य सरकारें पर शिक्षकों के रिक्त पद भरने में कर रहीं आनाकानी, उत्तर प्रदेश में 2.17 लाख और बिहार में 1.92 लाख शिक्षकों के पद रिक्त

    शिक्षकों के बिना शिक्षा (जागरण संपादकीय)

    यह निराशाजनक है कि राज्यों में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति को फिर से चिंता जतानी पड़ी। इस समिति ने पिछले वर्ष भी स्कूली शिक्षकों के खाली पड़े पदों पर चिंता जताते हुए उन्हें इस वर्ष मार्च तक भरने की आवश्यकता पर बल दिया था, लेकिन उस पर ध्यान नहीं दिया गया और इसीलिए अब इस समिति ने शिक्षकों के खाली पद भरने में देरी करने वाले राज्यों की वित्तीय मदद रोकने का सुझाव दिया है। 

    समिति के अनुसार जब तक राज्य शिक्षकों के खाली पद नहीं भरते, तब तक उन्हें समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय मदद न दी जाए। यदि ऐसा किया जाता है तो यह भी संभव है कि राज्य वित्तीय सहायता के अभाव में रिक्त शिक्षकों के पद भरने में और अधिक सुस्ती दिखाएं। यह ध्यान रहे कि संसदीय समिति की तरह से शिक्षा मंत्रालय भी राज्यों से शिक्षकों के रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरने का आग्रह कर चुका है, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात वाला है। यह सामान्य बात नहीं कि राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शिक्षकों के करीब दस लाख पद खाली पड़े हैं। इनमें लगभग साढ़े सात लाख पद प्राथमिक शिक्षकों के है। इसका अर्थ है कि शिक्षा की बुनियाद ही कमजोर की जा रही है।

    यह एक विडंबना ही है कि शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने में पिछले कई वर्षों से ढिलाई बरती जा रही है। यह ढिलाई यही बताती है कि राज्य सरकारें स्कूली शिक्षा की दशा-दिशा सुधारने के प्रति गंभीर नहीं। उनकी इस अगंभीरता का परिचय उन सर्वेक्षणों से मिलता है, जो प्राथमिक शिक्षा की दयनीय दशा को रेखांकित करते रहते हैं। ये सर्वेक्षण यह बताते रहे हैं कि किस तरह चौथी पांचवीं के छात्रों को सामान्य जोड़-घटाव करने में कठिनाई होती है या फिर वे दो-तीन वाक्य भी सही तरह नहीं लिख पाते। 

    यह ठीक नहीं कि राज्य सरकारें समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूली शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय मदद तो लें, पर शिक्षकों के रिक्त पद भरने में आनाकानी करें। यह विचित्र है कि जो काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए, वही एजेंडे से बाहर दिखता है। इसका प्रमाण यह है कि कुछ राज्यों में कई वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली बने हुए हैं। जैसे उत्तर प्रदेश में 2.17 लाख पद खाली हैं। बिहार में 1.92 लाख शिक्षकों के पद रिक्त हैं तो झारखंड में 72 हजार और मध्य प्रदेश एवं पश्चिम बंगाल में 55-55 हजार। अपेक्षाकृत संपन्न और छोटे राज्य हरियाणा में भी 15 हजार शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। शिक्षकों के खाली पद भरने में कोताही एक तरह से देश की भावी पीढ़ी के भविष्य के साथ जानबूझकर किया जा रहा खिलवाड़ ही है।



    शिक्षक भर्ती न होने पर राज्यों की रुकेगी वित्तीय मदद, संसदीय समिति की सिफारिश 

    नई दिल्लीः स्कूलों में शिक्षकों के पदों को लंबे समय तक नहीं भरना अब राज्यों को मंहगा पड़ सकता है।- संसदीय समिति की सिफारिश पर गंभीर शिक्षा मंत्रालय अब ऐसे सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को समग्र शिक्षा के तहत दी जाने वाली वित्तीय मदद में कटौती कर सकता है है या फिर रोक सकता है। फिलहाल देश में शिक्षकों के करीब 10 लाख पद खाली हैं। इनमें करीब साढ़े सात लाख पद अकेले प्राथमिक स्तर के शिक्षकों के हैं।


    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई वाली शिक्षा मंत्रालय की संसदीय समिति ने अपनी 349वीं और 363वीं रिपोर्ट में शिक्षकों के इन खाली पदों को समयबद्ध तरीके से भरने की बार-बार सिफारिश की है। साथ ही शिक्षा मंत्रालय भी कई बार राज्यों से इन खाली पदों को भरने के लिए कह चुका है। बावजूद इसके राज्यों का रवैया जस का तस बना हुआ है। वह केंद्र से हर साल समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय मदद ले रहे हैं, लेकिन शिक्षकों के पद खाली बने हुए हैं।

    समिति का मानना है कि स्कूलों में शिक्षकों के पदों का खाली होना और भरना वैसे तो एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन अधिकांश राज्यों में पिछले कई वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली बने हुए हैं। समिति ने राज्यों के इस रवैये को गंभीर बताया और मंत्रालय से सिफारिश की है कि जब तक राज्य शिक्षकों के खाली पदों को नहीं भरते हैं, तब तक उन्हें समग्र शिक्षा का पैसा नहीं दिया जाए। 

    वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र सरकार ने शिक्षा मंत्रालय को समग्र शिक्षा के तहत 41,249 करोड़ रुपये आवंटित किया था। यह राज्यों को स्कूली शिक्षा की गुणक्ता सुधारने के लिए दिया जाता है। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, संसदीय समिति की सिफारिश पर समग्र शिक्षा के तहत दी जाने वाली वित्तीय मदद की समीक्षा की जा रही है। इस दौरान तय मानकों के अनुरूप काम न करने वाले और शिक्षकों के खाली पदों को न भरने वाली राज्यों की वित्तीय मदद रोकने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।

    टीईटी 2026: दूरस्थ डीएलएड अभ्यर्थियों ने आवेदन समय सीमा बढ़ाने की मांग की

    टीईटी 2026: दूरस्थ डीएलएड अभ्यर्थियों ने आवेदन समय सीमा बढ़ाने की मांग की, अदालत के आदेश के बाद अभ्यर्थियों को मिला एक दिन का समय

    04 मई 2026
    प्रयागराज। दूरस्थ डीएलएड अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2026 की आवेदन तिथि बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें आवेदन का समय भी कम मिला साथ ही सर्वर की दिक्कत के कारण भी कठिनाई सामने आई।

    अभ्यर्थियों का कहना है कि दूरस्थ डीएलएड अभ्यर्थियों को टीईटी 2026 में शामिल करने के उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आयोग की ओर से समय पर व्यापक प्रचार-प्रसार नहीं किया गया। आयोग ने 2 मई की शाम को अखबारों में प्रकाशन के लिए विज्ञप्ति जारी की, जिसमें तीन मई तक आवेदन की अंतिम तिथि होने की बात कहीं गई।

    इस कारण हजारों अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाए हैं। अभ्यर्थियों ने आवेदन की समय सीमा कम से कम तीन दिन बढ़ाने की मांग की है। देवरिया से पवन पाठक, जौनपुर से अश्वनी, वाराणसी से मनीष, गोरखपुर से सीमा आदि का कहना है कि रविवार की सुबह उन्हें जानकारी हुई, लेकिन सर्वर ही नहीं चल रहा है।

    उधर, आयोग के उप सचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश से आच्छादित अभ्यर्थियों के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट 30 अप्रैल को ही खोल दी गई थी। 



    UPTET 2026 : दूरस्थ डीएलएड योग्यता वाले शिक्षक भी कर सकेंगे आवेदन, इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के बाद सूचना जारी

    2 मई 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी)-2026 में प्रदेश के लगभग 50 हजार से अधिक ऐसे शिक्षक जिन्होंने दूरस्थ शिक्षा (ओडीएल) के माध्यम से डीएलएड किया है, ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने यह फैसला इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ के 24 अप्रैल को पारित आदेश के बाद लिया है।

    न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम कुमार शुक्ला व 36 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया है। इसमें राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से 18 माह का डीएलएड (ओडीएल मोड) करने वाले शिक्षकों को अंतरिम राहत देते हुए टीईटी-2026 में शामिल होने की अनुमति प्रदान की गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतिम निर्णय आने तक अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

    मामले की अगली सुनवाई 22 मई 2026 को निर्धारित की गई है। कोर्ट ने राज्य सरकार, परीक्षा आयोग और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। आयोग के उपसचिव संजय कुमार सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश से आच्छादित अभ्यर्थी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत तीन मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।




    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे

    24 अप्रैल 2026
    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीएलएड (ओडीएल) करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें यूपी-टीईटी 2026 में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को फिलहाल (प्रोविजनल) रूप से परीक्षा में बैठने दिया जाए। स्पष्ट किया कि इनके चयन का मामला याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेगा। 


    कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा भी मांगा है। अगली सुनवाई 22 मई को होगी। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम शुक्ला समेत 36 याचियों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे अभ्यर्थी, जो 10 अगस्त 2017 या उससे पहले से कार्यरत हैं।

    Saturday, May 2, 2026

    संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों का मांगा विवरण, कैशलेस चिकित्सा की तैयारी

    संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों का मांगा विवरण, कैशलेस चिकित्सा की तैयारी


    प्रयागराज । प्रदेश सरकार सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, कार्मिकों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। इसी क्रम में एडेड संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों व कार्मिकों का भी विवरण जुटाया जा रहा है।

     इस संबंध में उप शिक्षा निदेशक (संस्कृत) रामाज्ञा कुमार ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को 30 अप्रैल को पत्र लिखा है। एडेड माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के शिक्षक व शिक्षणेतर कर्मचारियों का विवरण उपलब्ध कराने के लिए एक प्रारूप भी जारी किया गया है।

    पत्र का विषय अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षक/शिक्षणेतर कर्मचारियों को निश्शुल्क कैशलेस सुविधा दिए जाने के संबंध में है। पत्र में बताया गया है कि इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग में जनपद स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा पोर्टल पर प्रमाणन के लिए नोडल अधिकारी नामित किए जाने का निर्णय लिया गया है। उप निदेशक संस्कृत ने बताया है कि विवरण उपलब्ध होने के बाद निदेशक को अवगत कराया जाएगा।


    जनगणना में शिक्षक-कर्मचारी लगे, बंद होने लगे परिषदीय विद्यालय, फर्रुखाबाद, बरेली, उन्नाव के बीएसए ने डीएम को लिखे पत्र

    जनगणना में शिक्षक-कर्मचारी लगे, बंद होने लगे परिषदीय विद्यालय, फर्रुखाबाद, बरेली, उन्नाव के बीएसए ने डीएम को लिखे पत्र

    कुछ शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों को इससे मुक्त करने की मांग

    लखनऊ। देश-प्रदेश में जनगणना से जुड़ी प्रक्रिया तेजी पकड़ रही है। इसके तहत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं और मकान सूचीकरण व गणना का कार्य भी शुरू हो चुका है। इस कार्य के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को प्रगणक और पर्यवेक्षक बनाया जा रहा है, जिसका सीधा असर विद्यालयों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। कई स्थानों पर विद्यालय बंद तक हो गए हैं।


    अप्रैल के अंत में अधिकांश जिलों में जनगणना प्रशिक्षण आयोजित किया गया, जिसमें शिक्षकों को सुबह से शाम तक व्यस्त रहना पड़ा। इसका असर विद्यालयों की पढ़ाई और स्कूल चलो अभियान पर भी पड़ा है। फर्रुखाबाद के बीएसए ने डीएम को पत्र लिखकर बताया कि सभी शिक्षकों व कर्मचारियों को मकान गणना में लगा देने के कारण विद्यालय बंद हो गए हैं। उन्होंने प्रधानाध्यापकों को इस कार्य से मुक्त करने की मांग की है।

    इसी प्रकार बरेली और उन्नाव सहित अन्य जिलों के बीएसए ने भी जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा है कि सभी शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाए जाने से विद्यालयों का संचालन प्रभावित हो रहा है। इससे स्कूल चलो अभियान, नए पंजीकरण और मध्याह्न भोजन (एमडीएम) जैसी योजनाएं भी बाधित हो रही हैं। उन्होंने प्रधान शिक्षक और इंचार्ज शिक्षकों को इस ड्यूटी से मुक्त करने की मांग की है, ताकि विद्यालयों में पढ़ाई सुचारू रूप से चल सके।

    इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि पहले शिक्षकों को लंबे समय तक एसआईआर में लगाया गया, उसके बाद बोर्ड परीक्षाओं में भी उनकी ड्यूटी लगाई गई। इससे परिषदीय विद्यालयों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हुई। अब जब नया सत्र शुरू हो रहा है और सर्व शिक्षा अभियान व स्कूल चलो अभियान चल रहे हैं, तब भी शिक्षकों को जनगणना में लगा दिया गया है।

    उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को इस कार्य में लगाया जाए। कई कम मानदेय वाले कर्मचारी स्वयं इस ड्यूटी में शामिल होना चाहते हैं। इससे विद्यालयों की पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी और जनगणना कार्य भी सुचारू रूप से पूरा हो सकेगा।


    वरिष्ठता का मुद्दा भी उठा

    शिक्षकों और बीएसए ने यह भी बताया कि एक ही विद्यालय में 4200 ग्रेड पे वाले शिक्षक को सुपरवाइजर और 4600 व 4800 ग्रेड पे वाले शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है, जो वरिष्ठता के विपरीत है। उन्होंने मांग की है कि ड्यूटी निर्धारण में वरिष्ठता का ध्यान रखा जाए और इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश जारी किए जाएं।

    यूपी बोर्ड यूपी बोर्ड : 20 मई तक विद्यार्थियों को अंकपत्र देने की तैयारी

    यूपी बोर्ड : 20 मई तक विद्यार्थियों को अंकपत्र देने की तैयारी

    02 मई 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल और इंटर परीक्षा का परिणाम घोषित करने के बाद अंकपत्र वितरण की तैयारी तेज कर दी है। बोर्ड की योजना है कि 20 मई तक करीब 43,50,498 उत्तीर्ण परीक्षार्थियों को अंकपत्र उपलब्ध करा दिए जाएं। इस बीच स्क्रूटनी (पुनर्मूल्यांकन) के लिए आवेदन तेजी से आने लगे हैं। वहीं, कंपार्टमेंट और प्रस्तावित इम्प्रूवमेंट परीक्षा महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है। वर्ष 2026 में 53,37,778 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। हाईस्कूल में शामिल 26,01,381 छात्रों से 23,52,181 उत्तीर्ण हुए हैं। 




    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम

    24 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी जिला टॉपर बनकर उभरा है। हाईस्कूल में टॉपर समेत जिले की तीन और इंटर में दो बेटियों ने टॉप-3 में जगह बनाई है। हाईस्कूल और इंटर की टॉपर समेत टॉप-3 में तीन बेटियों के साथ सीतापुर दूसरे स्थान पर रहा।

    बृहस्पतिवार को जारी परीक्षा परिणामों के मुताबिक हाईस्कूल में सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83 फीसदी अंकों के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। इंटरमीडिएट में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।

    हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर बाराबंकी की अदिति और तीसरे स्थान पर सीतापुर की अर्पिता, झांसी के ऋषभ साहू व बाराबंकी की परी वर्मा शामिल हैं। इंटरमीडिएट में बरेली की नंदिनी गुप्ता व बाराबंकी की श्रेया वर्मा संयुक्त रूप से दूसरे और बरेली की सुरभि यादव व बाराबंकी की पूजा पाल संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। सीतापुर की टॉपर शिखा वर्मा और कशिश वर्मा ने बाबूराम सावित्री देवी शेखपुर, विलौली बाजार से पढ़ाई की है। अंशिका वर्मा बाराबंकी के मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज, जैदपुर की छात्रा है।





    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे 23 अप्रैल को

    ऐसे चेक करें रिजल्ट

    1 स्टेप
    सबसे पहले वेबसाइट UPMSP.EDU.IN पर जाना होगा।

    2 स्टेप
    होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना होगा, उस पर क्लिक करना है।

    3 स्टेप
    अब आपको रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा।

    4 स्टेप
    रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, चेक करने के साथ ही मार्कशीट को डाउनलोड कर सकेंगे।


    23 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद बृहस्पतिवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित करेगा। यह पिछले वर्ष से तीन दिन पहले है। परिणाम शाम चार बजे निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव और परिषद के सचिव भगवती सिंह जारी करेंगे।

    परीक्षा में कुल 5337778 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 2523112 छात्राएं, 28,14,612 छात्र और 54 ट्रांसजेंडर शामिल थे। परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर आयोजित हुईं। हाईस्कूल में करीब 26 लाख और इंटरमीडिएट में लगभग 24.5 लाख छात्रों ने भाग लिया, जबकि जेलों में बंद 360 परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा दी।

    मूल्यांकन कार्य 254 केंद्रों पर 2.75 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 15 कार्य दिवसों में पूरा हुआ। इस बार त्रुटिहीन परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक बनाया गया था। सचिव भगवती सिंह ने बताया कि छात्र अपना रिजल्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकेंगे। 





    यूपी बोर्ड का परिणाम तैयार, घोषणा जल्द, 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना

    22 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का परिणाम लगभग बनकर तैयार है। परिणाम की समीक्षा अंतिम दौर में है। 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड की ओर से जल्द ही परिणाम किस दिन घोषित होगा इसकी अधिकृत सूचना जल्द जारी होगी। परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को भी परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।



    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    Friday, May 1, 2026

    आईसीएसई व आईएससी के रिजल्ट जारी, छात्राएं अव्वल, 10वीं में 99.18% व 12वीं में 99.13% परीक्षार्थी पास

    आईसीएसई व आईएससी के रिजल्ट जारी, छात्राएं अव्वल, 10वीं में 99.18% व 12वीं में 99.13% परीक्षार्थी पास


    नई दिल्ली। भारतीय स्कूल प्रमाण पत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) ने बृहस्पतिवार को 10वीं व 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। 10वीं कक्षा में 99.18 प्रतिशत जबकि 12वीं में 99.13 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। एक बार फिर परीक्षा परिणामों में छात्राओं ने बाजी मारी।


     कुल 2,58,721 परीक्षार्थियों ने 10वीं (आईसीएसई) जबकि 1,03,316 ने 12वीं (आईएससी) की परीक्षा में हिस्सा
     लिया। आईसीएसई में रिकॉर्ड 99.46 प्रतिशत छात्राएं, जबकि 98.93 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। वहीं, आईएससी में 99.48% छात्राएं, जबकि 98.81% छात्र उत्तीर्ण हुए। आईसीएसई में 2,56,590 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि 2,131 असफल रहे। आईएससी में 1,02,414 उत्तीर्ण व 902 असफल रहे। परिणाम सीआईएससीई की वेबसाइट पर हैं। 


    बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव व सेक्रेटरी डा. जोसफ इमैनुएल ने बताया कि इस बार दसवीं की परीक्षा में एक लाख 37 हजार 503 छात्रों और एक लाख 21 हजार 218 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इनमें एक लाख 36 हजार 32 छात्र व एक लाख 20 हजार 558 छात्राएं उत्तीर्ण हुईं। वहीं, 12वीं में 54 हजार 118 छात्र व 49 हजार 198 छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित हुईं। इसमें 53 हजार 472 छात्र व 48 हजार 942 छात्राओं ने परीक्षा पास की। वहीं, जो छात्र अपने अकों से संतुष्ट नहीं हैं, वह रीचेक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही सीआइएससीई की ओर से इम्प्रूवमेंट एग्जाम की सुविधा भी दी जाएगी। वैसे परिषद ने 2024 से कंपार्टमेंट परीक्षा समाप्त कर दी है। अब छात्र अधिकतम दो विषयों में सुधार के लिए परीक्षा दे सकते हैं।

    अब यूपी बोर्ड के छात्र भी दे सकेंगे इम्प्रूवमेंट परीक्षा, बोर्ड ने शासन को भेजा प्रस्ताव, जल्द मिल सकती है मंजूरी

    अब यूपी बोर्ड के छात्र भी दे सकेंगे इम्प्रूवमेंट परीक्षा, बोर्ड ने शासन को भेजा प्रस्ताव, जल्द मिल सकती है मंजूरी


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में कम नंबर पाए विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। वह इम्प्रूवमेंट परीक्षा देकर अपने नंबर बढ़ा सकेंगे। बोर्ड ने शासन को इम्प्रूवमेंट परीक्षा कराने का प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।


    इसके अलावा छात्रों को स्क्रूटनी (पुनर्मूल्यांकन) और कंपार्टमेंट परीक्षा के जरिये भी अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिलेगा। इन प्रक्रियाओं की शुरुआत एक मई से होने जा रही है, जबकि कंपार्टमेंट परीक्षा जुलाई में प्रस्तावित है। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। हाईस्कूल में 26,01,381 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 23,52,181 पास हुए और 2,49,200 फेल हो गए। वहीं इंटरमीडिएट में 24,86,072 परीक्षार्थियों में से 19,98,317 उत्तीर्ण हुए, जबकि 4,87,755 असफल रहे। हालांकि, बोर्ड ने स्क्रूटनी का विकल्प दिया है, लेकिन प्रति विषय 500 रुपये शुल्क होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के सामने चुनौती बनी हुई है।

    ऐसे में कंपार्टमेंट और प्रस्तावित इम्प्रूवमेंट परीक्षा उनके लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं। इन कदमों से छात्रों को न केवल मानसिक राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने शैक्षणिक भविष्य को दोबारा संवारने का मौका भी मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कंपार्टमेंट परीक्षा की प्रक्रिया भी एक-दो दिन में शुरू कर दी जाएगी। साथ ही, इम्प्रूवमेंट परीक्षा के प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही छात्रों को एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।

    सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

    सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

    पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों की संख्या पर पड़ रहा सीधा असर


    प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से नियमित प्राचार्यों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है। 216 सरकारी कॉलेजों में मात्र 16 में ही पूर्णकालिक प्राचार्य तैनात हैं जबकि बाकी संस्थान कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इसका असर न सिर्फ पठन-पाठन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है बल्कि छात्रों की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।


    प्रयागराज मंडल के 13 महाविद्यालयों समेत प्रदेश भर के अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य का अभाव है। प्राचार्य पद पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। यूजी कॉलेजों में 2017 और पीजी कॉलेजों में 2019 के बाद से प्रमोशन नहीं हो सका है। दूसरी ओर कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। पहले जहां प्रदेश में 171 राजकीय महाविद्यालय थे, वहीं वर्ष 2025 के दौरान करीब 71 नए कॉलेज खोले गए, जिनमें से 46 राजकीय कालेज को पठन-पाठन की जिम्मेदारी दी गई। नए संस्थानों के लिए भी नियमित प्राचार्य की व्यवस्था नहीं हो पाई।

    नियमों के तहत वरिष्ठ प्रोफेसर को प्राचार्य का चार्ज दिया जाना चाहिए लेकिन कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर अन्य को भी प्रभार सौंपा जा रहा है। यहां तक कि निदेशक स्तर पर भी कार्यवाहक व्यवस्था लागू है जिससे प्रशासनिक अस्थिरता साफ नजर आती है। शिक्षकों का मानना है कि कार्यवाहक प्राचार्य प्रभावी निर्णय लेने से बचते हैं। उन्हें यह आशंका रहती है कि स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के बाद उन्हें फिर से अपने ही सहकर्मियों के बीच सामान्य भूमिका में लौटना पड़ेगा। यही वजह है कि अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर अपेक्षित सख्ती नहीं हो पाती। वर्ष 2022 के बाद से राजकीय महाविद्यालयों में कोई नई भर्ती भी नहीं हुई है, जबकि हर माह दो से तीन प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं। 

    Thursday, April 30, 2026

    शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा पोर्टल जल्द, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए पोर्टल लगभग तैयार

    शिक्षकों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा पोर्टल जल्द, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए पोर्टल लगभग तैयार

    उच्च शिक्षा में राज्य विवि के कुलसचिव अनुमोदित करेंगे शिक्षकों की जानकारी


    लखनऊ। लाखों शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के लिए साचीज के सहयोग से पोर्टल बनकर लगभग तैयार हो गया है। जल्द ही इसे लाइव किया जाएगा।


    प्रदेश में बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा दिए जाने का निर्णय कैबिनेट ने जनवरी में लिया था। इसके बाद इसकी आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। इस क्रम में विभाग की ओर से साचीज को शिक्षकों का डाटा उपलब्ध कराते हुए पोर्टल तैयार किया जा रहा है। इसमें शिक्षकों की जानकारी तो मानव संपदा पोर्टल से अपडेट हो जाएगी। किंतु उनको अपने आश्रितों की जानकारी खुद भरनी होगी। जल्द ही इस पोर्टल को लाइव कर दिया जाएगा। विभाग का प्रयास है कि शिक्षकों को जल्द से जल्द इसका लाभ दिलाया जा सके।

    वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों के 1.35 लाख शिक्षकों व उनके आश्रितों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। उच्च शिक्षा निदेशालय की संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. शशि कपूर ने सभी रजिस्ट्रार व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बताया है कि साचीज के द्वारा अपनी वेबसाइट पर उच्च शिक्षा का टैब दिया जाएगा। इसमें संबंधित लाभार्थी द्वारा अपना विवरण फीड किया जाएगा।

    विवरण फीड करने के बाद संबंधित विश्वविद्यालय के कुलसचिव को विवरण दिखाई देगा, जिसे वह अनुमोदन करेंगे। उसके बाद संबंधित विवरण अगली कार्यवाही के लिए स्टेट नोडल अधिकारी के पास जाएगा। उन्होंने सभी संबंधितों को इससे जुड़ी कार्यवाही अपने स्तर से पूरी करने का निर्देश दिया है।


    सभी शिक्षकों का डाटा मिल रहा है। इसके साथ ही पोर्टल का ट्रायल भी चल रहा है। हमारा प्रयास है कि इसको मई में शुरू कर दें। ताकि शिक्षकों व उनके आश्रितों को समय से इसका लाभ मिल सके। - अर्चना वर्मा, मुख्य कार्यपालक अधिकारी, साचीज

    सीबीएसई का पढ़ाई के साथ परवरिश पर जोर, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी, करें डाउनलोड

    सीबीएसई का पढ़ाई के साथ परवरिश पर जोर, शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी, करें डाउनलोड




    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने बुधवार को शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए 'पैरेंटिंग कैलेंडर' जारी किया। इसका मकसद स्कूलों में पढ़ाई और घर पर माता-पिता की परवरिश के बीच व्यवस्थित जुड़ाव को मजबूत करना और छात्रों की सर्वांगीण भलाई को बढ़ावा देना है। बुधवार को यूट्यूब पर सीबीएसई के आधिकारिक चैनल पर लाइव कार्यक्रम के दौरान यह कैलेंडर जारी किया गया। इसमें बोर्ड से संबद्ध स्कूलों के प्रधानाचार्य, शिक्षक, काउंसलर, अभिभावक शामिल हुए।


    बोर्ड ने एक बयान में बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शैक्षिक सत्र 2025-26 से यह पहल शुरू की गई थी। अभिभावकों-शिक्षकों से मिले फीडबैक के आधार पर इसे अब और विस्तार दिया गया है। नए संस्करण में जुड़ाव की बेहतर रणनीतियां, शिक्षकों के नेतृत्व वाली गतिविधियां और छात्रों के भावनात्मक, सामाजिक और शैक्षणिक विकास में मदद के लिए विशेष मनोवैज्ञानिक-सामाजिक पहलें शामिल की गई हैं।

    छात्रों को समान अवसर देना उद्देश्य बोर्ड ने बताया कि कैलेंडर में कुछ नए घटक जोड़े गए हैं। इनमें समावेश पर विशेष अनुभाग शामिल है, जिसका उद्देश्य अलग-अलग तरह के छात्रों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देना है।

    'पैरेंटिग वर्कशॉप' अनुभाग को विकासोन्मुखी दृष्टिकोण के साथ और मजबूत किया गया है। इससे स्कूलों को छात्रों की उम्र और संदर्भ के अनुसार उपयुक्त जुड़ाव कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी। कैलेंडर घर में माता-पिता और बच्चों के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने, घर और स्कूल के बीच साझेदारी मजबूत करने और माता-पिता के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि वे अपने बच्चे के विकास की यात्रा में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकें।

    Wednesday, April 29, 2026

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    27 अप्रैल 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


    कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

    कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026
    निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।