DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, August 22, 2119

अब तक की सभी खबरें एक साथ एक जगह : प्राइमरी का मास्टर ● इन के साथ सभी जनपद स्तरीय अपडेट्स पढ़ें


व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ टुडे
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी
  • प्राइमरी का मास्टर कॉम
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर खबरें faizabad, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com fatehpur, uttar pradesh
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर
  • प्राइमरी का मास्टर करंट न्यूज़ इन हिंदी
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़
  • प्राइमरी का मास्टर लेटेस्ट न्यूज़ २०१८
  • प्राइमरी का मास्टर ● कॉम www.primarykamaster.com उत्तर प्रदेश
  • प्राइमरी का मास्टर ट्रांसफर 2019
  • प्राइमरी का मास्टर अवकाश तालिका 2019
  • प्राइमरी का मास्टर शिक्षा मित्र लेटेस्ट न्यूज़ इन हिंदी लैंग्वेज
  • primary ka master 69000 
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master latest news 2018 
  • primary ka master 69000 
  • news.primarykamaster.com 2019 
  • news.primarykamaster.com 2020   
  • primary ka master district news 
  • primary ka master transfer 
  • primary ka master app 
  • primary ka master holiday list 2019 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master 17140 
  • primary ka master transfer news 2019 
  • primary ka master app 
  • primary ka master transfer news 2018-19 
  • primary ka master todays latest news regarding 69000 
  • primary ka master allahabad 
  • primary ka master mutual transfer 
  • up primary teacher transfer latest news 
  • primary teacher ka transfer



स्क्रॉल करते जाएं और पढ़ते जाएं सभी खबरें एक ही जगह। जिस खबर को आप पूरा पढ़ना चाहें उसे क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

    Thursday, January 20, 2022

    UPTET परीक्षा बाद शिक्षक भर्ती आंदोलन तेज करने की तैयारी, सरकार पर जिद पर अड़ने का आरोप

    UPTET परीक्षा बाद शिक्षक भर्ती आंदोलन तेज करने की तैयारी,  सरकार पर जिद पर अड़ने का आरोप


    बेरोजगारों ने 23 जनवरी को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आयोजन के बाद शिक्षक भर्ती शुरू करने के लिए आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है।


     युवा मंच अध्यक्ष अनिल सिंह का कहना है कि जब आठ हजार से भी कम अभ्यर्थियों वाली पीसीएस मुख्य परीक्षा को कोविड-19 की वजह से स्थगित किया जा सकता है तो 21.65 लाख अभ्यर्थियों वाली टीईटी कराने की जिद समझ से परे है।


     लाखों युवाओं की जिंदगी को खतरे में डालकर यदि सरकार टीईटी कराने की जिद पर अड़ी है तो युवा भी परीक्षा के तत्काल बाद 97 हजार शिक्षक भर्ती का आंदोलन तेज करेगा।

    Wednesday, January 19, 2022

    जल्द बनेगा एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू करने की तैयारी

    जल्द बनेगा एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम,  नए सत्र से लागू करने की तैयारी


    नेशनल टीचर आफ काउंसिल एजुकेशन ने लखनऊ विश्वविद्यालय के डीन एजुकेशन की अध्यक्षता में बनाई है कमेटी


    लखनऊ : परास्नातक कक्षाओं में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सब कुछ ठीक रहा तो नेशनल टीचर आफ काउंसिल एजुकेशन (एनसीटीई) नए सत्र से एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम शुरू कर सकती है। खास बात ये है कि एनसीटीई ने नई शिक्षा नीति के अनुसार इसका पाठ्यक्रम बनाने की जिम्मेदारी लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन एजुकेशन प्रो. तृप्ता त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित कमेटी को दी है। कमेटी ने पाठ्यक्रम का स्ट्रक्चर तैयार कर लिया है। फरवरी के अंत तक पाठ्यक्रम बनाकर मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा।


    वर्ष 2014 से पहले बीएड पाठ्यक्रम एक वर्ष का होता था। उसके बाद से दो वर्षीय पाठ्यक्रम लागू हो गया। अब नई शिक्षा नीति- 2020 के अनुसार फिर से एक वर्षीय पाठ्यक्रम शुरू होगा। एनसीटीई की ओर से एक वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम बनाने के लिए छह सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। इसमें लखनऊ विश्वविद्यालय की डीन एजुकेशन प्रो. तृप्ता त्रिवेदी को चेयरपर्सन बनाया गया है। सदस्य के रूप में तमिलनाडु टीचर एजुकेशन यूनिवर्सिटी के प्रो. एस. मनी, जम्मू यूनिवर्सिटी की प्रो. रेनू खुराना, वनस्थली विद्यापीठ के प्रो. अजय खुराना, एमएसयू बड़ौदा की प्रो. छाया गोयल और एसवीपीजी गोरखपुर विवि के प्रो. बृजेश पांडेय शामिल हैं।


    दो सेमेस्टर होंगे : एक वर्षीय पाठ्यक्रम दो सेमेस्टर पर आधारित होगा। प्रो. तृप्ता त्रिवेदी ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुसार इसका स्ट्रक्चर तैयार हो गया है। स्कूली शिक्षा में बदलाव के आधार पर पाठ्यक्रम तैयार करने पर काम चल रहा है। इसके लिए सदस्यों के साथ आनलाइन मीटिंग में काफी चीजें स्पष्ट हो चुकी हैं। यह पाठ्यक्रम च्वाइस बेस क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) के तहत होगा। हमारी कोशिश है कि फरवरी के अंत तक पाठ्यक्रम तैयार कर भेज दिया जाए, जिससे एनसीटीई नए सत्र से इसे लागू कर सके।


    CBSE Science Challenge: सीबीएसई आयोजित करेगा साइंस चैलेंज, आठवीं से दसवीं के छात्र ले सकेंगे भाग

    CBSE Science Challenge: सीबीएसई आयोजित करेगा साइंस चैलेंज, आठवीं से दसवीं के छात्र ले सकेंगे भाग


    CBSE Science Challenge: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने परीक्षाओं से पहले ही छात्र-छात्राओं की तैयारी जांचने और उन्हें विज्ञान विषय के प्रति जागरूक करने के लिए साइंस चैलेंज कंपटीशन आयोजित करने का निर्णय किया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कक्षा आठवीं से दसवीं के छात्रों के लिए एक विज्ञान चुनौती की घोषणा की है। 


    बोर्ड इस चुनौती को "शिक्षार्थियों के बीच जिज्ञासा, सवाल-जवाब और उच्च स्तरीय सोच पैदा करने की पहल के रूप में" बच्चों की उम्र के ऐसे पड़ाव पर आयोजित कर रहा है, जहां उनके लिए दुनिया को समझने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी बेहद महत्वपूर्ण फैक्टर हैं।


    दीक्षा प्लेटफॉर्म पर हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध होगा

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बताया कि 'सीबीएसई साइंस चैलेंज' 17 जनवरी से 28 फरवरी, 2022 तक दीक्षा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा। यह चुनौती हिंदी और अंग्रेजी दोनों में उपलब्ध होगी और इसे बिना किसी भागीदारी शुल्क के सभी बोर्ड के छात्रों द्वारा लिया जा सकता है। सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों को अपने छात्रों को cbse.gov.in पर पंजीकृत करना आवश्यक है। एक बार पंजीकृत होने के बाद उन्हें पंजीकरण आईडी प्राप्त होगी जिसका उपयोग छात्रों को मंच पर चुनौती का उपयोग करने में सक्षम होने के लिए करना होगा। 


    DIKSHA एप के नवीनतम संस्करण पर भी मौजूद

    सीबीएसई से संबद्ध नहीं स्कूलों के छात्र सीधे प्लेटफॉर्म पर चुनौती का उपयोग कर सकते हैं। चुनौती/ पाठ्यक्रम को पूरा करने वाले सभी छात्रों को भागीदारी प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाएगा। चुनौती के लिए आवेदन करने वाले छात्रों को DIKSHA एप्लिकेशन के नवीनतम संस्करण को डाउनलोड करने या प्रमाण-पत्र प्राप्त करने के लिए DIKSHA वेबसाइट तक पहुंचने की सलाह दी जाती है। 

     
    रमन यंग साइंस इनोवेटर अवार्ड्स के लिए होंगे क्वालीफाई 

    स्कूल यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी लेते हैं कि छात्रों के पास वेबसाइट या एप पर उनके नाम की सही वर्तनी है। स्कूल प्रत्येक कक्षा से पांच बच्चों को नामांकित कर सकते हैं, जिन्होंने सीधे विज्ञान चुनौती में भागीदारी प्रमाण-पत्र प्राप्त किया है, वे दूसरे चरण में या रमन यंग साइंस इनोवेटर अवार्ड्स के राष्ट्रीय क्वालीफायर के लिए पात्र बन जाएंगे।

    विधानसभा निर्वाचन हेतु प्रशिक्षण ऑनलाइन संपादित कराए जाने एवं पति-पत्नी दोनों सेवा में होने पर किसी एक की ही निर्वाचन ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में RSM का ज्ञापन

    विधानसभा निर्वाचन हेतु प्रशिक्षण ऑनलाइन संपादित कराए जाने एवं पति-पत्नी दोनों सेवा में होने पर किसी एक की ही निर्वाचन ड्यूटी लगाए जाने के संबंध में RSM का ज्ञापन


    बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल

    बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों की वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल


    कोरोना काल में बेसिक शिक्षा विभाग के कक्षा एक से आठवीं तक के सरकारी स्कूलों में छमाही की परीक्षा प्रभावित होने के बाद अब वार्षिक परीक्षाओं पर भी संकट के बादल मंडरा गए हैं। फिलहाल विद्यालय 23 जनवरी तक बंद हैं। अप्रैल से नया सत्र शुरू होना है। पिछले दो वर्षों से सरकारी स्कूलों के बच्चे प्रमोट किए जा रहे हैं। वार्षिक कैलेंडर के मुताबिक नवंबर के अंतिम माह तक छमाही परीक्षाएं कराई जाती है।


     जो बच्चा तीन साल पहले पांचवीं कक्षा में था वो बिना ठीक से पढ़े और परीक्षा दिए नौवीं कक्षा में प्रवेश के लिए तैयार खड़ा होगा।  अभी शासन की ओर से बच्चों को विद्यालय न बुलाए जाने के आदेश हैं। परीक्षाएं कराने संबंधी निर्देश आएंगे तो उसका पालन किया जाएगा। 

    Tuesday, January 18, 2022

    UPTET की आंच में झुलसी जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती

    UPTET की आंच में झुलसी जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती


    प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल के लिए शिक्षक भर्ती प्रक्रिया उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने शुरू तो कराई, लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण ढंग से वह अटक गई। पीएनपी ने इसकी परीक्षा कराने के बाद 15 नवंबर-2021 को परिणाम घोषित किया। 


    इसके 13 दिन बाद उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) प्रस्तावित थी, जिसे कराने की तैयारी में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के सफल अभ्यर्थियों की सूची कहीं पीछे रह गई और यूपीटीईटी पर्चा लीक होने के कारण नहीं हो सकी। यूपीटीईटी का प्रश्नपत्र परीक्षा के दिन इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो गया था। पुष्टि होने के बाद परीक्षा रद कर दी गई। इसे विपक्षियों ने मुद्दा बनाया, जिससे सरकार पर भी प्रश्न उठे। परीक्षा रद होने की जांच एसटीएफ ने शुरू की। पीएनपी के तत्कालीन सचिव भी जांच के घेरे में आए। 


    पूछताछ किए जाने और उन पर कार्रवाई किए जाने की प्रक्रिया के बीच जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती के परिणाम की कोई पूछ परख नहीं हुई। शासन ने अनिल भूषण चतुर्वेदी को नया सचिव बनाकर भेजा। उसके बाद यूपीटीईटी 23 जनवरी को नए सिरे से कराए जाने की तिथि घोषित हो गई। ऐसे में नए सचिव परीक्षा कराने के लिए केंद्रों का नए सिरे से निर्धारण, प्रश्नपत्र तैयार कराने, उसके प्रकाशन के लिए एजेंसी चयन आदि कार्यों में व्यस्त हो गए, क्योंकि यह परीक्षा अब चुनौतीपूर्ण हो गई है। 


    यूपीटीईटी की आंच में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती अटक गई। सरकार चुनावी मोड में आ गई, जिससे शिक्षक भर्ती परिणाम घोषित करने के बावजूद प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी। अब भी कोई बोलने को तैयार नहीं है और परेशान अभ्यर्थी मांग कर रहे हैं कि भर्ती प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।

    बेसिक शिक्षा DBT : और 20 लाख बच्चों को भुगतान करने का निर्देश, 40 लाख का बैंक खाता व आधार से जुड़े होने का परीक्षण जारी

    बेसिक शिक्षा DBT : और 20 लाख बच्चों को भुगतान करने का निर्देश, 40 लाख का बैंक खाता व आधार से जुड़े होने का परीक्षण जारी



     लखनऊ : इन दिनों कड़ाके की ठंड पड़ रही है। सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद व सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को ठंड से बचाने के लिए स्वेटर दिलाने के इंतजाम भी किए हैं लेकिन, अफसरों की कार्यशैली से सभी बच्चों को उसका लाभ अब तक नहीं मिल सका है। करीब 20 लाख बच्चों के अभिभावकों को जल्द धन मिलने जा रहा है, जबकि 40 लाख छात्र-छात्रओं को धन भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।


    सरकार ने पहली बार प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त दी जाने वाली सामग्री खरीदने का जिम्मा अभिभावकों को सौंपा, हर छात्र को 1100 रुपये उनके बैंक खाते में भेजने का निर्देश दिया। नवंबर में एक करोड़ 20 लाख छात्र-छात्रओं के अभिभावकों के खाते में धन भेजा जा चुका है।


    इसके बाद 60 लाख छात्र-छात्रओं के अभिभावकों को धन भेजना था, करीब 20 लाख को भुगतान करने का निर्देश हो गया है, 40 लाख अभिभावकों का बैंक खाता व उसका आधार से जुड़े होने का परीक्षण चल रहा है।


    23 जनवरी को होने वाली UPTET परीक्षा को लेकर यूपी सरकार सतर्क, जारी हुए ये महत्वपूर्ण निर्देश, हर केंद्र पर बनेगी कोविड हेल्प डेस्क, तैयारी हेतु समीक्षा बैठक आज

    23 जनवरी को होने वाली UPTET परीक्षा को लेकर यूपी सरकार सतर्क, जारी हुए ये महत्वपूर्ण निर्देश

    UPTET: यूपीटीईटी के लिए हर केंद्र पर बनेगी कोविड हेल्प डेस्क, तैयारी हेतु समीक्षा बैठक आज


    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के लिए दागी व संदिग्ध छवि वाले संस्थानों को केंद्र कतई न बनाएं। इनकी पहले ही जांच कर ली जाए। परीक्षा केंद्र निर्धारण में संस्थान के पिछले रिकॉर्ड को जरूर देखें।


    टीईटी परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद योगी सरकार यह परीक्षा आगामी 23 जनवरी को कराने जा रही है। इस बार सरकार काफी सतर्क है। इसलिए मुख्यमंत्री ने सोमवार को टीम-9 के अधिकारियों के साथ बैठक में इस पर खास तौर पर निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि टीईटी के सुव्यवस्थित आयोजन के संबंध में पुख्ता तैयारियां कर ली जाएं। कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन हो। हर केंद्र पर मास्क, सैनिटाइजर, इंफ्रारेड थरमामीटर की उपलब्धता होनी चाहिए।


    सीएम ने कहा कि परीक्षा की शुचिता के दृष्टिगत अपर मुख्य सचिव गृह और एडीजी कानून-व्यवस्था, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा के साथ जिलाधिकारियों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों व परीक्षा आयोजन से जुड़े अन्य अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संवाद कर व्यवस्थाओं की पड़ताल करें।


    कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए 23 जनवरी को होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) के प्रत्येक केंद्र पर कोविड हेल्प डेस्क बनाई जाएगी। अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने टीईटी के आयोजन के संबंध में सोमवार को सभी कमिश्नर, पुलिस आयुक्त, डीएम और एसएसपी को निर्देश जारी किए।


    केंद्रों पर पर्याप्त संख्या में थर्मल स्कैनर और ऑक्सीमीटर की व्यवस्था रखी जाएगी और प्रत्येक परीक्षा कक्ष में हैंड सेनेटाइजर रखे जाएंगे। कुछ अतिरिक्त सर्जिकल मास्क भी रखें जाएंगे, ताकि अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया जा सके। अभ्यर्थियों को उचित दूरी पर बैठाया जाएगा। केंद्र पर एक मेडिकल टीम भी तैनात रहेगी जिससे किसी प्रकार की चिकित्सकीय आवश्यकता को पूरा किया जा सके। केंद्र व्यवस्थापक, दो कक्ष निरीक्षकों और पर्यवेक्षक के सामने परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र खुलवाएंगे और परीक्षा होने के बाद ओएमआर उत्तरपत्रक बंद करवाएंगे। गौरतलब है कि 23 को 2532 केंद्रों पर पहली पाली और 1733 केंद्रों पर दूसरी पाली की परीक्षा होगी।

    समीक्षा बैठक आज

    23 जनवरी को होने वाली यूपीटीईटी 2021 की तैयारियों को लेकर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार मंगलवार दोपहर 12 बजे से ऑनलाइन समीक्षा बैठक करेंगे। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

    कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले

    कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले


    कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने से छात्रों की सीखने और पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इस कारण छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र अक्षर भी भूलने लगे हैं। ऐसे छात्रों की शिक्षा को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी है। तस्वीरों, कहानियों और दूसरी गतिविधियों के जरिए छात्रों को अक्षर पढ़ने, लिखने और बोलने को लेकर सक्षम बनाया जाएगा।


    एससीईआरटी का परिपत्र जारी: राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) दिल्ली की ओर से हाल ही में परिपत्र जारी किया गया है। जिसे लेकर दिल्ली के सरकारी स्कूल से लेकर निगम स्कूलों में 14 हफ्तों के लिए नर्सरी से आठवीं के छात्रों के लिए विशेष अभियान चलेगा। 


    इस अभियान को सभी स्कूलों में लागू करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही दिल्ली के अलग-अलग जिलों को लेकर नौ नोडल अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई है।


    छात्रों को कार्य पुस्तिका मिलेगी: छात्रों को सप्ताह में छह कार्य पुस्तिका उपलब्ध कराई जाएंगी। अंग्रेजी, हिंदी और अंक गणित की दो-दो लघु कथाएं, गीत, कविताएं और संख्यात्मक गतिविधियां दी जाएंगी। इसके अलावा चित्र देखकर समझने और कहानी बनाने से जुड़ी गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा होंगी।


    कई माध्यमों का प्रयोग: एससीईआरटी के अनुसार इन कार्य पुस्तिका के माध्यम से छात्रों को बोलने, सुनने, पढ़ने, लिखने और संख्यात्मक गतिविधियों को करने के लिए उन्मुख बनाना जाएगा, ताकि स्कूल बंद होने के वर्तमान चरण के दौरान उनकी मूलभूत सीखने की क्षमता में सीखने की हानि कम से कम हो।

    रिपोर्ट में क्या

    वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड के चलते सभी कक्षा के छात्रों में सीखने की क्षमता कम हुई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले वर्ष अक्तूबर में रिपोर्ट के हवाले से भी यह जानकारी दी थी। वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-2021 में 17 फीसदी से अधिक छात्र अक्षर नहीं पढ़ सके। यह केवल प्राथमिक कक्षा के छात्रों की बात नहीं है, बल्कि बड़ी कक्षा में भी ऐसा देखने को मिला है। 14-18 वर्ष की उम्र वाले 80 छात्रों का सीखने का स्तर कम हुआ है।


    सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ा

    लैसेंट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार स्कूलों के बंद होने का छात्रों पर सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में भी एक तिहाई अभिभावकों ने बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होने के बारे में सूचना दी है।

    यूपी बोर्ड : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से बोर्ड परीक्षा की निगरानी, विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित है परीक्षा

    यूपी बोर्ड : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से बोर्ड परीक्षा की निगरानी, विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित है परीक्षा


    ● 2022 की 10वीं-12वीं परीक्षा के लिए प्रस्तावित 8266 केंद्र
    ● नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी


    प्रयागराज : विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 में नकल पर रोक लगाने के लिए दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। बोर्ड की ओर से 8266 केंद्रों पर परीक्षा प्रस्तावित है। वैसे तो केंद्रों की अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होगी लेकिन बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है।

    परीक्षा केंद्रों में उपलब्ध आवश्यक संसाधनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। 95 हजार से अधिक कमरों और परिसर में दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। आवश्यकता पड़ने पर कैमरों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा परीक्षा कक्षा में चल रही गतिविधि की निगरानी के लिए कैमरों में वायस रिकॉर्डर भी लगवाए गए हैं ताकि बोल-बोल कर नकल न होने पाए।

    सीसीटीवी कैमरों की मदद से परीक्षा कक्ष की गतिविधियों की वेबकास्टिंग भी कराएंगे ताकि जिला स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक और लखनऊ शिक्षा निदेशालय में बने कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भी नजर रख सकें। परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पन्ने पर अपनी राइटिंग में कॉपी का क्रमांक और अपना अनुक्रमांक लिखना होगा। 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए 10वीं में 27,83,742 और 12वीं में 23,91,841 कुल 51,74,583 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।


    UPMSP UP Board 10th, 12th Exam 2022 : दो लाख सीसीटीवी कैमरों से होगी बोर्ड परीक्षा की निगरानी

    UPMSP UP Board 10th, 12th Exam 2022 : विधानसभा चुनाव के बाद मार्च अंत में प्रस्तावित यूपी बोर्ड की हाईस्कूल-इंटरमीडिएट परीक्षा 2022 में नकल पर रोक लगाने के लिए दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। बोर्ड की ओर से 8266 केंद्रों पर परीक्षा प्रस्तावित है। वैसे तो केंद्रों की अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होगी लेकिन बोर्ड ने नकल विहीन परीक्षा कराने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी है।

    परीक्षा केंद्रों में उपलब्ध आवश्यक संसाधनों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। 95 हजार से अधिक कमरों और परिसर में दो लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे स्थापित हैं। आवश्यकता पड़ने पर कैमरों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इसके अलावा परीक्षा कक्षा में चल रही गतिविधि की निगरानी के लिए कैमरों में वायस रिकॉर्डर भी लगवाए गए हैं ताकि बोल-बोल कर नकल न होने पाए।

    सीसीटीवी कैमरों की मदद से परीक्षा कक्ष की गतिविधियों की वेबकास्टिंग भी कराएंगे ताकि जिला स्तर पर जिला विद्यालय निरीक्षक और लखनऊ शिक्षा निदेशालय में बने कंट्रोल रूम में बैठे अधिकारी भी नजर रख सकें। परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पन्ने पर अपनी राइटिंग में कॉपी का क्रमांक और अपना अनुक्रमांक लिखना होगा। 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए 10वीं में 27,83,742 और 12वीं में 23,91,841 कुल 51,74,583 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं।

    कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने छात्रों को किया सतर्क

    कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग  ने छात्रों को किया सतर्क


    नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है।


    उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है।


    यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती।



    यूजीसी : ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की फ्रेंचाइजी नहीं दी जा सकती

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने निर्देश दिया है कि उच्च शिक्षण संस्थान फ्रेंचाइजी व्यवस्था के तहत ऑनलाइन या ओपन डिस्टेंस लर्निंग कार्यक्रम संचालित न करें। ऐसा करने पर संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम का दावा करने वाली फ्रेंचाइजी दोनों पर कार्रवाई की जाएगी।

    यूजीसी के अनुसार मान्यता सूची में शामिल संस्थान ही अनुमति वाले पाठ्यक्रम चला सकते हैं। आयोग को पता चला है कि एडटेक कंपनियां ओपन डिस्टेंस लर्निंग और ऑनलाइन पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए विज्ञापन दे रही हैं। इनमें उच्च शिक्षण संस्थानों की फ्रेंचाइजी या समझौते का हवाला दिया गया है।

    छात्रों को आगाह किया

    यूजीसी ने छात्रों को भी आगाह किया है कि वे विज्ञापनों के झांसे में न आएं। किसी भी पाठ्यक्रम में दाखिले से पहले यूजीसी की वेबसाइट पर उसकी मान्यता व पात्रता की जांच जरूर करें।


    कंपनियां नहीं चला सकतीं आनलाइन शैक्षिक कोर्स, यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला


    नई समस्या

    ★ यूजीसी ने कहा- बगैर मान्यता और संवद्धता को जांचे आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में न लें दाखिला

    ★ शिक्षा से जुड़ी निजी आनलाइन कंपनियां विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर चला रही है कोर्स

    नई दिल्ली : कोरोना काल में जब स्कूल-कालेज बंद पड़े हैं और छात्रों के पास पढ़ाई का एक मात्र जरिया आनलाइन ही बचा है। ऐसे में आनलाइन शिक्षा के नाम पर फर्जीवाड़े भी बढ़े हैं। फिलहाल विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने छात्रों को इसे लेकर सतर्क किया और सलाह दी है कि बगैर मान्यता और संबद्धता को जांचे किसी भी आनलाइन प्रोग्राम या कोर्स में दाखिला न लें। खासकर आनलाइन पढ़ाई करा रही शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी निजी कंपनियों को लेकर बिल्कुल सतर्क रहें, क्योंकि इन्हें ऐसे कोर्स चलाने की अनुमति नहीं है।

    उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए निर्धारित किए गए आनलाइन कोर्स के नियमों का हवाला देते हुए यूजीसी ने साफ किया है कि इन कोर्स को चलाने की अनुमति फिलहाल उन्हीं विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को है जो यूजीसी के मानकों को पूरा करते है। इन कोर्स को किसी दूसरे संस्थानों या निजी कंपनियों को संचालित करने की अनुमति बिल्कुल भी नहीं है। ऐसे में शिक्षा से जुड़ी निजी क्षेत्र की जो भी आनलाइन कंपनियां छात्रों को इस तरह के कोर्स या प्रोग्राम में दाखिला देने का आफर दे रही हैं, वे बिल्कुल गलत है। ऐसी कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इनकी गतिविधियों पर नजर भी रखी जा रही है।

    यूजीसी के मुताबिक आनलाइन पढ़ाई कराने वाली निजी क्षेत्र से जुड़ी इन कंपनियां की ओर से आनलाइन और दूरस्थ माध्यमों से संचालित होने वाले प्रोग्राम या कोर्स में यह कहते हुए दाखिला देने का प्रस्ताव किया जा रहा है कि वह विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं। इन कोर्स को चलाने की संबद्धता किसी भी उच्च शिक्षण संस्थान की ओर से दी ही नहीं जा सकती।

    Monday, January 17, 2022

    स्कूली पाठ्यक्रम नए ढांचे में गढ़ा जाएगा, 10 + 2 के पैटर्न से निकालकर 5 + 3 + 3 + 4 के पैटर्न पर ले जाने की तैयारी।

    स्कूली पाठ्यक्रम नए ढांचे में गढ़ा जाएगा, 10 + 2 के पैटर्न से निकालकर 5 + 3 + 3 + 4 के पैटर्न पर ले जाने की तैयारी।



     नई दिल्ली : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिये स्कूली शिक्षा के ढांचे में बदलाव की जो सिफारिशें की गई थीं, उन सभी पर अमल तेजी से शुरू हो गया है। इनमें जो अहम बदलाव है, वह स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम को 10 प्लस टू के पैटर्न से निकालकर फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के पैटर्न पर ले जाने का है। शिक्षा मंत्रलय ने इस काम में ज्यादा देरी न करते हुए इसे इसी साल पूरा करने का लक्ष्य तय किया है। इसे लेकर गठित टीम को तेजी से इस दिशा में काम आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।


    शिक्षा मंत्रलय ने इसके साथ ही स्कूली पाठ्यक्रम को नए सिरे से गढ़ने पर भी जोर दिया है जिससे स्कूलों से रटने और रटाने का पूरा खेल खत्म हो जाए। साथ ही ऐसे पाठ्यक्रम का विकास हो, जिसमें सीखने की समग्र प्रक्रिया हो। मंत्रलय ने स्कूली शिक्षा के नए ढांचे में इन पहलुओं पर ध्यान देने की जरूरत बताई है। 


    मंत्रलय ने नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) के लिए जो विशेषज्ञ टीम बनाई है, उसके मुखिया भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख और देश के वरिष्ठ विज्ञानी के. कस्तूरीरंगन को बनाया है। बता दें कि यह वही कस्तूरीरंगन हैं जिनकी अगुआई में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी तैयार की गई है। मंत्रलय का मानना है कि यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि नीति के जरिये बदलाव के जो सपने देखें गए हैं वे पूरी तरह से ढांचे में आ सकें।


    शिक्षा मंत्रलय ने इसके साथ ही स्कूली ढांचा तैयार करने में जिन मूलभूत विषयों पर ध्यान देने पर जोर दिया है, उनमें 21वीं सदी की जरूरत को ध्यान में रखते हुए सोच आधारित विषयवस्तु को प्रमुखता देने, वैज्ञानिक सोच, समस्या समाधान, सहयोग और डिजिटल शिक्षा से जुड़े विषय शामिल हैं। साथ ही स्थानीय विषयवस्तु और भाषा को प्रमुखता से शामिल करने का सुझाव दिया गया है। मंत्रलय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, स्कूली शिक्षा के ढांचे को तैयार करने का ज्यादातर काम पूरा हो चुका है। अब गठित की गई उच्चस्तरीय कमेटी इसकी समीक्षा करेगी।


    अब फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर का पैटर्न होगा लागू
    ऐसा है शिक्षा का नया ढांचा


    मौजूदा समय में 10 प्लस टू वाले स्कूली शिक्षा ढांचे में तीन से छह वर्ष की उम्र के बच्चे शामिल हैं क्योंकि अभी छह वर्ष की उम्र में बच्चों को सीधे कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। लेकिन नए फाइव प्लस थ्री प्लस थ्री प्लस फोर के ढांचे में तीन साल की उम्र से ही बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। यानी अब जैसे ही बच्चा तीन साल का होगा, उसे आंगनवाड़ी या बालवाटिका में प्रवेश दिया जाएगा।

    पीसीएम मेंस और UPTET स्थगित करने की अपील, सोशल साइट्स के ज़रिए पर विरोध जारी

    पीसीएम मेंस और UPTET स्थगित करने की अपील, सोशल साइट्स के ज़रिए पर विरोध जारी


    उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस मेंस परीक्षा 2021 लखनऊ, प्रयागराज और गाजियाबाद में होने वाली है। 28 से 31 जनवरी तक प्रस्तावित परीक्षा कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच आयोजित करने का विरोध हो रहा है। परीक्षा में शामिल होने वाले अर्ह अभ्यर्थी परीक्षा को स्थगित करने की मांग कर रहे हैं। 


    अभ्यर्थियों ने आयोग के सचिव व अध्यक्ष को कई बार इस सम्बंध में पत्र भी लिखा है कि दर्जनों अभ्यर्थी ऐसे हैं जो कोविड संक्रमण से ग्रसित हैं। ऐसे में ये अभ्यर्थी कैसे परीक्षा दें पाएंगे। इसके साथ ही जो अन्य अभ्यर्थी है वे अगर परीक्षा में शामिल होते हैं उनके संक्रमित होने का खतरा है। अभी तक आयोग की ओर से इस सम्बंध में किसी भी अभ्यर्थी को कोई जवाब नहीं मिला है।


    परीक्षा टालने की मांग

    कोरोना के बीच टीईटी परीक्षा का सोशल साइट पर विरोध हो रहा है। परीक्षार्थीमांग कर रहे हैं कि हालात सामान्य होने तक परीक्षा को स्थगित किया जाए। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया पर पॉजिटिव रिपोर्ट भी साझा की है।




    अभ्यर्थी कोरोना से भयभीत, सोशल मीडिया पर UPTET व पीसीएस-2021 परीक्षा टालने की मांग तेज


    प्रयागराज : कोरोना संक्रमण का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। पीड़ितों में वो प्रतियोगी छात्र भी शामिल हैं, जिनकी आने वाले दिनों में परीक्षाएं हैं। सूबे में 23 जनवरी को यूपीटीईटी व 28 जनवरी से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की पीसीएस-2021 मेंस (मुख्य परीक्षा) होनी है। परीक्षा से पहले दोनों परीक्षाओं के सैकड़ों अभ्यर्थी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। इसी कारण कोरोना से भयभीत अभ्यर्थी दोनों परीक्षाओं को टालने की मांग कर रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ई-मेल के जरिये सामूहिक पत्र भेजे जा रहे हैं। इसके साथ ट्विटर पर अभियान छेड़ा है। 


    लोक सेवा आयोग ने पीसीएस-2021 के तहत 678 पदों की भर्ती निकाली है। रिक्तियों के सापेक्ष 7688 अभ्यर्थी मुख्य परीक्षा के लिए सफल हुए हैं। मुख्य परीक्षा प्रयागराज, लखनऊ व गाजियाबाद में 28 से 31 जनवरी तक दो सत्रों में आयोजित होनी है। कुछ दिनों में अभ्यर्थियों का प्रवेश पत्र जारी होना है। 


    इसके पहले अभ्यर्थी कोरोना संक्रमित होने लगे हैं। डीएलएड (बीटीसी) अध्यक्ष विनोद पटेल का कहना है कि उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) में 20 लाख से अधिक अभ्यर्थी शामिल होंगे। उक्त परीक्षा में शामिल होने वाले काफी अभ्यर्थी कोरोना से संक्रमित हैं। यही कारण है कि इंटरनेट मीडिया में चलाए जा रहे अभियान में 80 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा टालने की मांग कर रहे हैं। सरकार को सबकी मंशा व सुविधा को देखते हुए उचित कदम उठाएं।

    लखनऊ विवि से बीएड प्रवेश की फीस न मिलने से प्रदेश के स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

    लखनऊ विवि से बीएड प्रवेश की फीस न मिलने से प्रदेश के  स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट


    बीएड की फीस न मिलने से प्रदेश के 2350 स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा गया है। हालत यह है कि इन महाविद्यालयों के लगभग 50 हजार शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल पा रहा है। इन महाविद्यालयों का प्रबंध तंत्र फीस न मिल पाने की वजह बता कर उन्हें आश्वासन देता रहता है।


    संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन इस बार भी लखनऊ विश्वविद्यालय ने कराई थी। प्रवेश परीक्षा परिणाम के आधार पर राज्य स्तरीय ऑनलाइन काउंसिलिंग के जरिए विगत अक्तूबर में प्रवेश प्रक्रिया सम्पन्न हुई थी। काउंसिलिंग में सीट आवंटित होने पर प्रवेशार्थी को एक वर्ष की 51250 रुपये फीस लखनऊ विश्वविद्यालय में ही जमा करनी पड़ती है।


     फीस जमा होने के बाद ही सीट लॉक होती है। इसके बाद प्रवेशार्थी को संबंधित महाविद्यालय में जाकर प्रवेश लेना होता है। महाविद्यालय में उसे कोई फीस नहीं देनी होती है। प्रवेश पाने वाले महाविद्यालय की फीस बाद में लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा उसे लौटाई जाएगी। प्रदेश के स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की आय का जरिया केवल फीस ही होती है। इन महाविद्यालयों को सरकार से कोई वित्तीय मदद नहीं मिलती है।


    प्रदेश के 2350 स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में बीएड पाठ्यक्रम संचालित है। इन महाविद्यालयों में लगभग 2.14 लाख बीएड के छात्रों को प्रवेश मिला है। इस तरह बीएड की फीस के रूप में लगभग 1100 करोड़ रुपये अभी लखनऊ विश्वविद्यालय के पास ही पड़े हैं। अभी महाविद्यालय अपने स्तर से लखनऊ विश्वविद्यालय से फीस जल्द वापस पाने के लिए दबाव बना रहे हैं। जल्द ही उनका संगठन भी मांगपत्र के साथ मैदान में आने वाला है।


     उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि वह लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर मांग करेंगे कि बीएड की फीस जल्द वापस लौटाई जाए क्योंकि महाविद्यालय अपने सामान्य खर्चे भी नहीं जुटा पा रहे हैं।

    कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन के लिए सोशल मीडिया को बनाया हथियार, चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग को लेकर अटेवा का ट्विटर अभियान

    कर्मचारियों और शिक्षकों ने पुरानी पेंशन के लिए सोशल मीडिया को बनाया हथियार, चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग को लेकर अटेवा का  ट्विटर अभियान



    शिक्षक कर्मचारी अपनी आवाज को सोशल मीडिया के माध्यम से राजनीतिक दलों तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए सोशल मीडिया एक बड़ा प्लेटफार्म ट्विटर अभियान चलाया गया। शिक्षक कर्मचारी पुरानी पेंशन बहाली के लिए अटेवा के बैनर तले विभिन्न सोशल प्लेटफार्म के जरिए अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।


    अटेवा पेंशन बचाओ मंच उप्र के प्रदेश मीडिया प्रभारी डा. राजेश कुमार ने बताया कि अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष व एमएनओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के आह्वान पर 16 जनवरी को दोपहर दो बजे लेकर शाम पांच बजे तक कर्मचारियों, शिक्षकों, अधिकारियों की पुरानी पेंशन बहाल करने के लिए सोशल मीडिया में ट्विटर पर वोट फॉर ओपीएस अभियान चलाया। इस अभियान में देश व उत्तर प्रदेश के शिक्षक कर्मचारियो ने भाग लिया। जिससे यह हैश टैग लगातार ट्रेंड में बना रहा। ट्विटर अभियान के माध्यम से प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री व राज्यों के मुख्यमंत्रियो से पुरानी पेंशन बहाल करने की मांग की गयी। चुनाव को ध्यान में रखते हुए विभिन्न दलों के प्रमुख नेतागणों से पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे को घोषणा पत्र में रखने व प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की भी अपील ट्विटर अभियान के माध्यम से की गई।



    चुनावी घोषणा पत्र में शामिल करने की मांग

    एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने बताया कि पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा हो गई है। उत्तर प्रदेश सहित देश के लाखों-लाख पेंशन विहीन शिक्षक कर्मचारियों ने ट्विटर अभियान के माध्यम से अपनी एकता का प्रदर्शन किया है। पुरानी पेंशन बहाली के मुद्दे पर सभी कर्मचारी एकजुट है। इनको नजरअंदाज करना सभी दलों को भारी पड़ेगा। इसलिए अटेवा और एनएमओपीएस यह मांग करता है कि शिक्षक, कर्मचारियों के इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में रखकर इसे प्रमुख मुद्दा बनाएं और सरकार बनने पर इसे लागू करें।

    Sunday, January 16, 2022

    यूपी में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सभी स्कूल और कॉलेज 23 जनवरी तक रहेगें बंद, ऑनलाइन होगी पढ़ाई, शासन का निर्णय

    यूपी में तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण के बीच सभी स्कूल और कॉलेज 23 जनवरी तक रहेगें बंद, शासन का निर्णय




    यूपी में सभी शैक्षिक संस्थान 23 जनवरी तक बंद


    लखनऊ: कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए सरकार ने स्कूलों की बंदी की अवधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। संक्रमण की स्थिति की समीक्षा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास पर आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में की। उसमें अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी स्कूल-कालेज, तकनीकी शिक्षण संस्थानों को 23 जनवरी तक बंद कर दिया जाए। 


    उन्होंने निगरानी समितियों से डोर टू डोर सर्वे कराने और शत-प्रतिशत टीकाकरण पर जोर दिया। इसके बाद मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सभी शैक्षिक संस्थान 23 जनवरी तक बंद रहेंगे। इस दौरान आनलाइन कक्षाएं यथावत चलती रहेंगी। उल्लेखनीय है कि इससे पहले शासन ने 16 जनवरी तक शैक्षिक संस्थान बंद किए जाने का आदेश नौ जनवरी को जारी किया था। उस आदेश के तहत सोमवार से स्कूल-कालेज खोले जाना प्रस्तावित था, लेकिन संक्रमण की स्थिति की समीक्षा के बाद बंदी की अवधि को बढ़ा दिया गया है।



    सीबीएसई : दूसरे टर्म की परीक्षा मार्च-अप्रैल में बोर्ड ने जारी किया सैंपल पेपर, इस बार दो घंटे की हो सकती है परीक्षा

    सीबीएसई : दूसरे टर्म की परीक्षा मार्च-अप्रैल में बोर्ड ने जारी किया सैंपल पेपर, इस बार दो घंटे की हो सकती है परीक्षा

    नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 10वीं और 12वीं की टर्म-2 परीक्षा के लिए सैंपल प्रश्नपत्र जारी कर दिए हैं। परीक्षा मार्च-अप्रैल में आयोजित की जाएगी। बच्चों की सुविधा के लिए मार्किंग स्कीम भी जारी की गई है। सैंपल पेपर को देखने के लिए छात्र सीबीएसई की वेबसाइट पर जा सकते हैं। नवंबर-दिसंबर में हुई टर्म परीक्षा के नतीजों की घोषणा जल्द की जाएगी।


    इस बार अलग होगा प्रारूप: बोर्ड के मुताबिक, पहले टर्म की परीक्षा की तुलना में इस बार बहुविकल्पीय के बजाय छोटे व बड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। परीक्षा के लिए दो घंटे का समय निर्धारित किया गया है।

    ■ यदि कोरोना महामारी की स्थिति नहीं सुधरती है तो दूसरे टर्म की परीक्षा भी बहुविकल्पीय आधार पर ही होगी। तब समय सीमा घटकर 90 मिनट हो सकती है।

    69000 शिक्षक भर्ती चौथी सूची चयन प्रक्रिया ठप : काउंसलिंग का इंतजार, 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी होने के बाद विभाग में कोई सुगबुगाहट नहीं

    69000 शिक्षक भर्ती चौथी सूची चयन प्रक्रिया ठप : काउंसलिंग का इंतजार, 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी होने के बाद विभाग में कोई सुगबुगाहट नहीं


    प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के लिए 68 सौ अभ्यर्थियों की सूची जारी होने के बाद प्रक्रिया ठप पड़ी है। अभ्यर्थी काउंसलिंग की तिथि घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं लेकिन विभाग में कोई सुगबुगाहट ही नहीं है।


    अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा विभाग में काउंसलिंग तिथि घोषित करने को लेकर चक्कर लगा रहे हैं लेकिन अफसर भी चुप्पी साधे हैं। कुछ अभ्यर्थी सरकारी नौकरी तो कुछ प्राइवेट नौकरी छोड़कर आए हैं। अब वह काउंसलिंग तिथि घोषित न होने से अधर में फंसे हुए हैं। 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग हेतु 68 सौ अभ्यर्थियों की चयन सूची बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा 5 जनवरी 2022 को जारी की गई।


     सूची जारी होने के बाद तमाम अभ्यर्थियों ने अपनी प्राइवेट और सरकारी नौकरी छोड़ दी। जबकि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से अभी तक काउंसलिंग शेड्यूल जारी नहीं किया गया है। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि अगर उन्हें पता होता कि सूची जारी करने के बाद विभाग काउंसलिंग तिथि और नियुक्ति पत्र देने में विलंब करेगा तो वह अभी नौकरी छोड़कर नहीं आते। इन अभ्यर्थियों के सामने आर्थिक परेशानी भी उठानी पड़ रही है।



    नियुक्ति पूरी करवाने को व्हाट्सएप पर एकजुटता, 69000 भर्ती के तहत आरक्षित और विशेष आरक्षित वर्ग के लिए जारी 6800 की चौथी सूची में शामिल अभ्यर्थी मांग रहे नियुक्ति


    प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत आरक्षित और विशेष आरक्षित वर्ग के लिए पांच जनवरी को जारी 6800 की चौथी सूची में शामिल अभ्यर्थी अपनी भर्ती पूरी कराने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हो गए हैं। इन अभ्यर्थियों ने सभी 18 मंडल में अपने व्हाट्सएप ग्रुप बनाए हैं ताकि भर्ती पूरी होने तक समन्वय बना रहे। किसी प्रकार की समस्या पर निराकरण कर सकें।


    आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने इस भर्ती में आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगाए तो अफसरों ने नकार दिया। इसके बाद इन अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग में अपील कर दी। वहां सुनवाई के बाद आरक्षण की अनदेखी की पुष्टि होने के बाद आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी अपने हक के लिए लखनऊ में धरने पर डट गए। सरकार ने आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की मांगें मानते हुए चौथी सूची तो जारी कर दी। लेकिन जिला आवंटन, काउंसिलिंग या नियुक्ति पत्र वितरण से पहले ही चुनाव की अधिसूचना जारी हो गई और प्रक्रिया रुक गई। अभ्यर्थी इस सूची से भी संतुष्ट नहीं है। वे 19 हजार से अधिक पदों पर भर्ती की मांग कर रहे हैं।



    69000 शिक्षक भर्ती के चौथी सूची के चयनितों ने  सोशल मीडिया पर खोला मोर्चा


    प्रयागराज 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत चयनित सहायक अध्यापकों की जारी चौथी सूची में शामिल अभ्यर्थियों ने नियुक्ति के लिए सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है। साथ ही संघर्ष को संगठित रखने के उद्देश्य से अभ्यर्थियों ने सभी 18 मंडलों में व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाए हैं।


     69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण की अनदेखी के आरोप लगने के बाद काफी विवाद हुआ था विधानसभा चुनाव करीब आते ही पांच जनवरी को विशेष आरक्षित वर्ग के लिए 6800 की चौथी सूची जारी कर दी गई थी, लेकिन आचार संहिता लागू हो जाने के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया अटक गई।

    ‘परीक्षा पे चर्चा’: पंजीकरण कराने के लिए ट्वीट के जरिए पीएम मोदी का अनुरोध, बताया चुनौतियों व आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर


    ‘परीक्षा पे चर्चा’: पंजीकरण कराने के लिए ट्वीट के जरिए पीएम मोदी का अनुरोध, बताया चुनौतियों व आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर 


    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से इस वर्ष के ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम के लिए पंजीकरण कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के ऊर्जावान युवाओं के साथ संवाद स्थापित करने के साथ-साथ विश्व में शिक्षा के उभरते प्रचलन से रूबरू होने का बेहतर मौका है। 


    प्रधानमंत्री ने शनिवार को ट्वीट कर कहा, ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम नजदीक आ रहा है। हम तनाव मुक्त परीक्षा पर चर्चा करेंगे। अपने बहादुर परीक्षार्थियों, उनके परिजन और शिक्षकों का फिर से सहयोग करेंगे। प्रधानमंत्री ने इस कार्यक्रम को सीखने का एक शानदार अनुभव बताया। साथ ही कहा कि यह युवाओं से जुड़ने और उनकी चुनौतियों व आकांक्षाओं को बेहतर तरीके से समझने का अवसर है। स्कूल एवं कॉलेज के छात्रों के साथ प्रधानमंत्री के संवाद कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ का पहला संस्करण 16 फरवरी 2018 को आयोजित हुआ था



    प्रतियोगिता के लिए तय किए गए विषय

    ‘परीक्षा पे चर्चा‘ कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आयोजित होने वाली प्रतियोगिता में छात्रों के वास्ते कुछ विषय तय किए गए हैं। इनमें कोविड-19 के दौरान परीक्षा तनाव प्रबंधन रणनीति, अपने गांव एवं शहर का इतिहास, आत्मनिर्भर भारत के लिए आत्मनिर्भर स्कूल, स्वच्छ भारत-हरित भारत और पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय शामिल हैं।

    Saturday, January 15, 2022

    जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती परिणाम के बाद चयन प्रक्रिया ठप्प, अभ्यर्थी हैरान परेशान

    जूनियर हाईस्कूल एडेड शिक्षक भर्ती परिणाम के बाद चयन प्रक्रिया ठप्प,  अभ्यर्थी हैरान परेशान



    प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती-2021 परीक्षा का परिणाम आने के बाद की प्रक्रिया पहेली बन गई है। परिणाम आए दो महीने बीत गए, लेकिन चयन प्रक्रिया बातों-दावों के आगे नहीं बढ़ सकी। पिछले दिनों अभ्यर्थी भर्ती विज्ञप्ति की जानकारी करने शिक्षा निदेशालय पहुंचे तो पता चला कि सफल अभ्यर्थियों का परिणाम वहां नहीं पहुंचा है। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने जो डिस्पैच नंबर दिया, उसमें परिणाम की सूची नहीं होने के दावा अभ्यर्थियों ने किया है। ऐसे में अभ्यर्थी समझ नहीं पा रहे कि आखिर परिणाम कहां अटका है। पीएनपी ने यह भर्ती परीक्षा 17 अक्टूबर को कराई थी। 


    परिणाम 15 नवंबर को आया। प्रधानाध्यापक के 390 और सहायक अध्यापक के 1504 पदों के लिए 46 हजार से ज्यादा अभ्यर्थी सफल हुए। ये अभ्यर्थी रिक्त पदों के सापेक्ष भर्ती विज्ञप्ति के माध्यम से मेरिट तैयार कर चयन किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। परीक्षा में सफल अभ्यर्थी ज्ञानवेंद्र सिंह ‘बंटी’ का कहना है कि परीक्षा परिणाम को लेकर तस्वीर साफ नहीं की जा रही है। बेसिक शिक्षा मंत्री ने दावा किया था कि 30 दिसंबर से चयन प्रक्रिया शुरू होगी, लेकिन कुछ हुआ नहीं। 


    इस पूरे मामले को लेकर अभ्यर्थी परेशान हैं। कभी शिक्षा निदेशालय तो कभी पीएनपी के चक्कर काट रहे हैं। पिछले दिनों पीएनपी कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था। यह परीक्षा कराने के बाद परिणाम पीएनपी के पूर्व सचिव संजय उपाध्याय के समय में घोषित किया गया था। इस परिणाम के 13 दिन बाद यानी 28 नवंबर-2021 को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा आयोजित होनी थी, ऐसे में फोकस इस परीक्षा पर हो गया और जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती का मामला पीछे चला गया। दुर्भाग्य यह रहा कि शिक्षक पात्रता परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने पर तत्कालीन सचिव को निलंबित कर गिरफ्तार कर लिया गया। ऐसे में जूनियर शिक्षक भर्ती के परिणाम को लेकर नए सचिव ने अभ्यर्थियों को कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया।

    रिपोर्ट कार्ड : नहीं हुआ जिले के भीतर तबादला, पदोन्नति भी नहीं हुई, बेसिक शिक्षा मंत्री ने तबादले का कई बार दिया था आश्वासन

    रिपोर्ट कार्ड : नहीं हुआ जिले के भीतर तबादला, पदोन्नति भी नहीं हुई, बेसिक शिक्षा मंत्री ने तबादले का कई बार दिया था आश्वासन


    ● अंतर जनपदीय तबादले तो हुए पर जिले के भीतर नहीं हुआ



    प्रयागराज : बीते पांच साल में बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों का न तो जिले के भीतर तबादला हुआ और न ही पदोन्नति की आस पूरी हो सकी। बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी ने जिले के अंदर एक से दूसरे विकास खंड में तबादले के लिए कई बार आश्वासन दिया लेकिन वास्तविकता में कुछ नहीं हुआ।



    पिछले साल 23 अप्रैल को मंत्री ने ट्वीट कर शिक्षकों के जिले के भीतर जल्द तबादले की बात कही थी। फिर उसके बाद सात अगस्त को शिक्षा विभाग के अधिकारियों की बैठक में अगस्त में ही स्थानान्तरण करने के निर्देश दिए लेकिन न तो शासनादेश जारी हुआ और न ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकी।


    शिक्षकों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनका पद जिला कैडर का होने के बावजूद 2016 के बाद से जिले के भीतर ट्रांसफर नहीं हुआ जबकि इन पांच सालों के दौरान गैर जिले के शिक्षकों को दो बार अंतर जनपदीय तबादले का लाभ मिला। पहले जिले के अंदर हर साल स्थानांतरण होता था लेकिन 2016 के बाद से स्थानांतरण नहीं हुए।


    कुछ गिनती के शिक्षकों को पारस्परिक ट्रांसफर का लाभ मिला। इस दौरान शिक्षकों को पदोन्नति भी नहीं मिली। जिले में मार्च 2009 से नियुक्त हजारों शिक्षक पदोन्नति के इंतजार में है। बेसिक शिक्षा परिषद के नियमों के मुताबिक नियुक्ति के तीन साल बाद पदोन्नति होनी चाहिए।


    लेकिन प्रयागराज में आखिरी बार 2016 में फरवरी 2009 तक नियुक्त शिक्षकों को ही पदोन्नति मिल सकी है। पदोन्नति न होने के कारण प्रत्येक शिक्षक को हर महीने औसतन चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। वहीं दूसरी ओर एक परिसर में स्थित प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों का संविलियन करने से प्रधानाध्यापक के सैकड़ों पद कम हो गए। पद्दोन्नति के अवसर भी कम हो गए।


    इनका कहना है

    जिले में मार्च 2009 से नियुक्त शिक्षकों को पदोन्नति नहीं मिल सकी है। हम लोगों का हर महीने औसतन चार से पांच हजार रुपये का नुकसान हो रहा है। नियमत: तीन साल के बाद पदोन्नति होनी चाहिए। लेकिन हजारों शिक्षक ऐसे हैं जिनका प्रमोशन नियुक्ति के पांच से 12 साल के बाद भी नहीं हुआ। - दीपक मिश्र, परिषदीय शिक्षक


    पांच साल में सबसे अधिक शिक्षकों के हित प्रभावित हुए। जिले के अंदर स्थानांतरण पांच वर्षों से नहीं हुए जबकि पारस्परिक स्थानांतरण नई सरकार बनने के बाद दो बार हुए। शिक्षक का पद जिले कैडर का होता है। बाहरी जिलों से आए शिक्षकों से ज्यादा प्राथमिकता जनपद में पूर्व से नियुक्त शिक्षकों की होनी चाहिए किन्तु नियमावली के विरूद्ध अन्य जिलों से आए शिक्षक को प्राथमिकता दी गई।- अनिल राजभर, परिषदीय शिक्षक

    यूपी के माध्यमिक स्कूलों में होंगी लिखित और प्रायोगिक परीक्षाएं, सरकार ने सशर्त दी अनुमति

    यूपी के माध्यमिक स्कूलों में होंगी लिखित और प्रायोगिक परीक्षाएं, सरकार ने सशर्त दी अनुमति

    प्रदेशभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की वजह से विद्यालय बंद हैं। इस दौरान स्कूलों में लिखित व प्रायोगिक परीक्षाएं पहले से निर्धारित रही हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने लिखित व प्रायोगिक परीक्षाएं कराने की अब सशर्त अनुमति दी है।

    यूपी के माध्यमिक स्कूलों में होंगी लिखित और प्रायोगिक परीक्षाएं, सरकार ने सशर्त दी अनुमतिशासन ने लिखित व प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने की छूट दी है।


    लखनऊ :  प्रदेशभर में कोरोना संक्रमितों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होने की वजह से विद्यालय बंद हैं। इस दौरान स्कूलों में लिखित व प्रायोगिक परीक्षाएं पहले से निर्धारित रही हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने लिखित व प्रायोगिक परीक्षाएं कराने की अब सशर्त अनुमति दी है। अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे आदेश में लिखा है कि पांच व नौ जनवरी को शासन ने कोरोना संक्रमण की वजह से सभी विद्यालयों को 16 जनवरी तक बंद रखने का निर्देश दिया था, वहीं 11 जनवरी को जारी आदेश में शासन ने लिखित व प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने की छूट दी गई है। ऐसे में जिन माध्यमिक विद्यालयों में पहले से निर्धारित लिखित व प्रायोगिक परीक्षाएं कराया जाना अनिवार्य हैं उन्हें प्रतिबंधों के साथ अनुमति दी गई है। 

    अपर मुख्य सचिव का निर्देश है कि विद्यालय परिसर का नियमित सैनिटाइजेशन हो, शिक्षक-कर्मचारी सहित छात्र-छात्राएं अनिवार्य रूप से मास्क पहनें, शारीरिक दूरी का सख्ती से अनुपालन हो, किसी छात्र या शिक्षक को बुखार आने पर प्राथमिक उपचार दिलाकर तत्काल उसे घर भेजे जाने का इंतजाम हो। समय-समय पर शासन की ओर से जारी कोविड गाइडलाइन का पालन और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी की ओर से दिए गए निर्देशों का सख्ती से अनुपालन किया जाए। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ये निर्देश इसलिए जारी किए हैं, क्योंकि माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के स्कूलों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की प्रीबोर्ड परीक्षा इसी माह प्रस्तावित है, साथ ही इंटरमीडिएट की प्रायोगिक परीक्षाएं भी होनी हैं। इसीलिए विभाग को इस संबंध में निर्देश दिया है। इस समय जिस तेजी से संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, उसे देखते हुए स्कूलों में पठन-पाठन होना संभव नहीं है, लेकिन परीक्षाएं जरूर हो सकती हैं।

    UPTET : रोक के बावजूद स्मार्टफोन की इंट्री, बेदाग यूपीटीईटी कराना चुनौती

    UPTET : रोक के बावजूद स्मार्टफोन की इंट्री, बेदाग यूपीटीईटी कराना चुनौती

    UPTET 2021 : 28 नवंबर को पेपर लीक के कारण निरस्त होने के बाद दोबारा 23 जनवरी को होने जा रही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) को बेदाग कराना परीक्षा नियामक प्रधिकारी कार्यालय के लिए किसी चुनौती से कम नहीं। सबसे बड़ी समस्या है कि तमाम केंद्रों पर स्मार्टफोन पर रोक नहीं लग पा रही। शासन ने पिछली कई परीक्षा से यह आदेश कर रखा है कि कक्ष निरीक्षक (शिक्षक), केंद्र व्यवस्थापक (प्रधानाचार्य), स्टाफ और निरीक्षण पर आने वाले अफसरों और मजिस्ट्रेट के पास केंद्र के अंदर स्मार्टफोन नहीं होना चाहिए। केवल की-पैड वाला सामान्य फोन बातचीत के लिए रह सकता है। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय के बाबू और कई स्कूलों के प्रधानाचार्य व स्टाफ परीक्षा के दौरान भी स्मार्टफोन का चोरी से इस्तेमाल करते हैं। 



    मुख्य बिंदु
    -परीक्षा से एक घंटे पहले खुलेंगे परीक्षा कक्ष और हॉल
    -पेपर शुरू होने से आधे घंटे पहले तक अभ्यर्थियों को अपना स्थान ग्रहण कर लेना है
    -केंद्र अधीक्षक की अनुमति के बगैर अभ्यर्थी अपनी सीट या परीक्षा कक्ष नहीं छोड़ेंगे
    -अभ्यर्थी अपने साथ कार्ड बोर्ड या क्लिप बोर्ड ला सकते हैं जिस पर कुछ लिखा नहीं होना चाहिए ताकि मेज की सतह समतल न होने पर उपयोग कर सकें।

    28 नवंबर को पेपर लीक के बाद भी प्रयागराज समेत कई जिलों में परीक्षा शुरू हो गई थी। परीक्षा के दौरान कई केंद्र व्यवस्थापकों ने व्हाट्सएप ग्रुपों पर अभ्यर्थियों की उपस्थिति अपडेट की थी। यानी परीक्षा के दौरान प्रधानाचार्य अनधिकृत रूप से स्मार्टफोन चला रहे थे। ऐसे में कोई प्रश्नपत्र की फोटो खींचकर वायरल कर दे तो हंगामा तय है। सूत्रों के अनुसार परीक्षा से पहले शासन स्तर पर होने जा रही वीडियो कान्फ्रेंसिंग में इस बिन्दु पर प्रमुखता से चर्चा होने जा रही है। लापरवाही पर उड़नदस्ते में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

    Friday, January 14, 2022

    सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के नई पेंशन योजना (NPS) से आच्छादित और दिवंगत हो चुके शिक्षकों और कर्मचारियों के मृतक आश्रितों की पारिवारिक पेंशन का रास्ता साफ

     सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के नई पेंशन योजना (NPS) से आच्छादित और दिवंगत हो चुके शिक्षकों और कर्मचारियों के मृतक आश्रितों की पारिवारिक पेंशन का रास्ता साफ


    ● वित्त नियंत्रक के पद नाम से बैंक खाता खोला जाएगा
    ● प्रदेशभर के 4500 सहायता प्राप्त विद्यालयों के लिए व्यवस्था
    ● उसके बाद आश्रित की पारिवारिक पेंशन स्वीकृत होगी
    ● 2016 से रुपये वापसी के लिए खाता न होने से फंसा था मामला


    प्रयागराज : प्रदेश के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों के नई पेंशन योजना (एनपीएस) से आच्छादित और दिवंगत हो चुके शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के आश्रितों के लिए पुरानी पारिवारिक पेंशन का रास्ता साफ हो गया है।


    19 मई 2016 को सरकार ने यह व्यवस्था दी थी कि एनपीएस से आच्छादित किसी शिक्षक या कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उसके आश्रित को पारिवारिक पेंशन तभी स्वीकृत की जाएगी, जब उसके एनपीएस खातों में जमा संपूर्ण धनराशि (अर्थात अभिदाता अंशदान और नियोक्ता अंशदान दोनों) सरकार को वापस लौटाया जाएगा। इस धनवापसी के लिए सरकारी कर्मचारियों के मामले में तो खाते का प्रबंध किया गया था। लेकिन सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के मामले में अब तक इसका कोई खाता ही नहीं था।



     इसके कारण प्रदेश के सैकड़ों शिक्षकों-कर्मचारियों के आश्रितों की पारिवारिक पेंशन ही नहीं बन पा रही थी। उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार ने 11 जनवरी 2022 को जारी आदेश में ‘वित्त नियंत्रक, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश’ के पद नाम से बैंक खाता खोलने की व्यवस्था दे दी है। बैंक खाते का संचालन डुअल सिग्नेटरी से किया जाएगा, जिसमें वित्त नियंत्रक माध्यमिक के साथ शिक्षा निदेशालय के एक और अधिकारी को संयुक्त खातेदार बनाया जाएगा। यह खाता खुलने से मृत शिक्षकों व कर्मचारियों के एनपीएस खातों में जमा संपूर्ण धनराशि ट्रस्टी बैंक के माध्यम से खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी। जिसे वित्त नियंत्रक प्रत्येक माह कोषागार में जमा कराएंगे।


    खाता खोलने के लिए काफी समय से संगठन की ओर से प्रयास किया जा रहा था। उम्मीद है कि पीड़ित परिवारों को जल्द पुरानी पेंशन का लाभ मिलेगा। साथ ही प्रदेश सरकार को केंद्र सरकार की तरह एनपीएस में अभिदाता यानि कर्मचारी की ओर से किए गए अपने अंशदान तथा उसके लाभांश को भी उसके आश्रित को एकमुश्त देने का प्रावधान करना चाहिए। -लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट

    69000 सहायक अध्यापक भर्ती: फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाए कन्नौज के 9 शिक्षक बर्खास्त

    69000 सहायक अध्यापक भर्ती: फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी पाए कन्नौज के 9 शिक्षक बर्खास्त

    कन्नौज : फर्जी दस्तावेज तैयार कर नौकरी पाने वाले कन्नौज के नौ शिक्षक गुरुवार को बर्खास्त कर दिए गए। इनमें सात फिरोजाबाद जनपद के रहने वाले हैं। इसके अलावा अभी 13 और शिक्षक रडार पर हैं। इन सभी को नोटिस भेजे गए हैं, लेकिन किसी का जवाब नहीं आया है। बाकी पर भी बर्खास्तगी की तलवार लटकी है।

    प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती के तहत तीन चरणों में कन्नौज में 1,450 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी। शैक्षिक अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराया गया तो 22 सहायक शिक्षकों के अभिलेख फर्जी मिले। इसके बाद बीएसए संगीता सिंह ने सभी को तीन-तीन नोटिस भेजकर जवाब मांगा, लेकिन कोई भी जवाब देने के लिए हाजिर नहीं हुआ। जवाब न मिलने पर बर्खास्तगी का अंतिम नोटिस भेजा गया, इस पर जवाब न आने पर नौ शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया। सभी को वेतन रिकवरी के नोटिस के साथ बर्खास्तगी का पत्र भेजा गया है। साथ ही सभी के खिलाफ सम्बंधित थानों एफआईआर के भी निर्देश दिए गए हैं।

    इनकी हुई बर्खास्तगी
    फिरोजाबाद के शंभूनगर की प्रियंका यादव, शिकोहाबाद के बृजेश कुमार, नीरज यादव, दिग्विजय सिंह, राहुल यादव, नीलम यादव, दिव्या निवासी हैं। इटावा के सत्यम त्रिपाठी और कानपुर देहात के विनोद कुमार को बर्खास्त किया गया है।

    Thursday, January 13, 2022

    प्रत्येक शिक्षक को 50 लाख का बीमा कवर देने, निर्वाचन प्रशिक्षण ऑनलाइन कराने, ड्यूटी उपरांत आइसोलेशन हेतु 07 दिन का अवकाश देने आदि के लिए उ0प्र0जू0हा0 शिक्षक संघ का मांगपत्र

    प्रत्येक शिक्षक को 50 लाख का बीमा कवर देने, निर्वाचन प्रशिक्षण ऑनलाइन कराने, ड्यूटी उपरांत आइसोलेशन हेतु 07 दिन का अवकाश देने आदि के लिए उ0प्र0जू0हा0 शिक्षक संघ का मांगपत्र।

    विधानसभा चुनाव में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को दिए जाएं कोरोनाकर्मी का दर्जा, 50 लाख बीमा कवर के साथ अन्य मांगों के लिए उठे हाथ


    यूपी विधानसभा चुनाव 2022 में बड़े पैमाने पर शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएंगी। इन सभी को कोरोनाकर्मी का दर्जा देने के लिए आवाज़ उठाई जा रही है।

    शिक्षक संघों का कहना है कि पंचायत चुनाव में ड्यूटी करने वाले प्रदेश भर के 1622 शिक्षकों व कर्मियों की कोरोना संक्रमण के चलते जान गई थी। उन्हें कोरोना कर्मी का दर्जा न मिलने के कारण किसी तरह का लाभ भी नहीं दिया गया। फिर वही हालात पैदा हो रहे हैं।


    उप्र जूनियर हाईस्‍कूल शिक्षक संघ ने उठाई मांग

    उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की ओर से मुख्य निर्वाचन अधिकारी उत्तर प्रदेश लखनऊ को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि विधानसभा चुनाव में लगने वाले प्रत्येक कर्मी को कोरोनाकर्मी माना जाएं। चाहे वह प्रशिक्षण में शामिल हो या फिर मतदान या अन्न गतिविधि हो। पत्र में बताया गया है कि स्कूल के शिक्षकों के साथ शिक्षामित्रों की भी ड्यूटी लगाई जा रही हैं। उनकी सुरक्षा के लिए किसी तरह के ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। जिन लोगों की चुनाव में ड्यूटी लग रही है उन्हें 50 लाख का बीमा कवर दिया जाए। जो प्रशिक्षण गतिविधियां हो वह आनलाइन कराई जाए।








    Wednesday, January 12, 2022

    स्कूली शिक्षा के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम होगा तैयार

    स्कूली शिक्षा के लिए नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम होगा तैयार



    नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय इस साल के अंत तक स्कूली शिक्षा, के लिए नया व व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम तैयार करेगा। इसमें भारत से जुड़ी जानकारी, बच्चों में वैज्ञानिक सोच और 21वीं सदी के कौशल विकास आदि पर जोर दिया। जाएगा। इसमें खास तौर पर सामाजिक समस्याओं का उल्लेख होगा। केंद्र सरकार की स्कूली शिक्षा व साक्षरता सचिव अनीता करवाल ने मंगलवार को स्टार्टअप भारत | नवाचार सप्ताह पर आयोजित कार्यक्रम में यह जानकारी दी।


    करवाल ने कहा कि हम नया राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा विकसित करने की प्रक्रिया में है। इस विषय पर जाने माने वैज्ञानिक डॉ. के कस्तूरीरंगन के नेतृत्व में एक समिति विचार विमर्श कर रही है। 


    उम्मीद है कि इस साल के अंत तक हम स्कूली शिक्षा के लिए नया और व्यापक राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा तैयार कर लेंगे। उन्होंने कहा कि इसके तहत बचपन से ही बच्चों में वैज्ञानिक सोच के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। बच्चों में गणना संबंधी सोच विकसित करने पर फोकस रहेगा। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि केवल गणितीय ज्ञान पर जोर होगा। 

    69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने दाखिल की याचिका, 6800 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग

    69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों ने दाखिल की याचिका, 6800 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग


    प्रयागराज : परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग की गलत तरीके से 6800 पदों पर भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर दी।



    6800 पदों के लिए जारी चौथी सूची से असंतुष्ट ओबीसी और एससी अभ्यर्थियों का कहना है कि 69000 भर्ती में आरक्षित वर्ग की 19000 से अधिक सीटों पर घोटाला हुआ है लेकिन सरकार मात्र 6800 पदों पर घोटाला स्वीकार रही है। 


    याचिका दाखिल करने वाले मुनेश मौर्य का कहना है कि पूर्व बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद तथा वर्तमान में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल ने कहा था कि इस भर्ती में एक भी सीट पर घोटाला नहीं हुआ जबकि सरकार ने घोटाला स्वीकार कर सूची जारी कर दी।

    बेरोजगारों को वापस नहीं मिल सके 290 करोड़ रुपये, 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती का मामला

    बेरोजगारों को वापस नहीं मिल सके 290 करोड़ रुपये, 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती का मामला



    ● फीस के रूप में सरकार को मिले थे 290 करोड़ रुपये

    ● डायटों की लापरवाही के कारण नहीं हो सका रुपयों का भुगतान



    देखते-देखते पांच साल बीत गए लेकिन बेरोजगारों को खुद के 289 करोड़ रुपये में से चवन्नी वापस नहीं मिल सकी। बेसिक शिक्षा परिषद ने 23 जनवरी 2019 तक अभ्यर्थियों को फीस वापस करने की बात कही थी लेकिन जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) की लापरवाही से भुगतान नहीं हो सका। 


    परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 72825 प्रशिक्षु शिक्षक भर्ती के लिए 13 नवंबर 2011 को पहली बार आयोजित यूपीटीईटी में कथित तौर पर घोटाले की बात सामने आने पर दिसंबर 2012 में एकेडमिक मेरिट पर भर्ती शुरू हुई थी। आवेदन फीस के रूप में सरकार को 2,89,98,54,400 रुपये मिले थे। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर टीईटी मेरिट पर 72825 भर्ती पूरी हुई और एकेडमिक मेरिट पर भर्ती की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी।


    नौ साल से अधिक का समय बीतने के बावजूद अब तक अभ्यर्थियों के रुपये उनके खाते में वापस नहीं भेजे जा सके। बेसिक शिक्षा परिषद की पूर्व सचिव रूबी सिंह ने फीस वापसी के लिए अभ्यर्थियों से 3 से 30 नवंबर 2018 तक संबंधित डायट में आवेदन पत्र रजिस्टर्ड/स्पीड पोस्ट या वाहक के माध्यम से साक्ष्यों के साथ उपलब्ध कराने को कहा था। परिषद की ओर से सात जनवरी 2019 तक डायट प्राचार्यों के खाते में आरटीजीएस के जरिए मांगी गई धनराशि उपलब्ध करानी थी। उसके बाद अभ्यर्थियों के खाते में रुपये भेजने थे। लेकिन अधिकांश डायट से मांगपत्र नहीं मिलने के कारण बजट जारी नहीं हो रहा।


    30 से 40 हजार रुपये तक खर्च किए थे

    दिसंबर 2012 में एकेडमिक रिकार्ड के आधार पर 72,825 प्रशिक्षु शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू होने पर एक-एक अभ्यर्थी ने औसतन 30 से 40 हजार रुपये खर्च किए थे। सामान्य व ओबीसी वर्ग के लिए एक जिले से आवेदन फीस 500 रुपये थी। अधिकतर अभ्यर्थियों ने सभी 75 जिलों से फार्म भरा था। इस लिहाज से 37,500 रुपये सिर्फ फीस पड़ी। इसके बाद चालान और डाक आदि पर हजारों रुपये खर्च हुए।

    जब एकेडमिक रिकॉर्ड से भर्ती नहीं हुई तो सरकार के खाते में जमा बेरोजगार अभ्यर्थियों के रुपये उन्हें वापस मिलने चाहिए थे। लेकिन अफसरों की लापरवाही से आज तक भुगतान नहीं हो सका जो दुर्भाग्यपूर्ण है। -कपिलदेव शर्मा, अभ्यर्थी

    बड़ी खबर : सीबीएसई टर्म-1 रिजल्ट का इंतजार खत्म, इस दिन घोषित होंगे 10वीं, 12वीं के परिणाम

    बड़ी खबर : सीबीएसई टर्म-1 रिजल्ट का इंतजार खत्म, इस दिन घोषित होंगे 10वीं, 12वीं के परिणाम

    टर्म- 1 रिजल्ट के संबंध में एक आधिकारिक बयान में पहले कहा गया था कि परिणाम प्राप्त अंकों के रूप में घोषित किए जाएंगे। ये परिणाम पास कम्पार्टमेंट या रिपीट श्रेणी के मार्कर नहीं होंगे। इसके साथ ही अंतिम परिणाम टर्म 2 परीक्षा के बाद घोषित किया जाएगा।




    बड़ी खबर: सीबीएसई टर्म-1 रिजल्ट का इंतजार खत्म, इस दिन घोषित होंगे 10वीं, 12वीं के परिणामसीबीएसई टर्म-1 की परीक्षा परिणाम का इंतजार जल्द होगा खत्म।

    नई दिल्ली : सीबीएसई टर्म-1 रिजल्ट की राह देख रहे रहे छात्र-छात्राओं का इंतजार अब खत्म होने वाला है। नतीजे जल्द ही घोषित किए जाएंगे। वहीं इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स में सीबीएसई के एक अधिकारी ने कहा कि 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाओं की मूल्यांकन प्रक्रिया जारी है। इसके साथ ही बोर्ड अगले सप्ताह मूल्यांकन प्रक्रिया की समीक्षा करेगा। हालांकि,अधिकारी ने परिणाम की घोषणा की तारीख के बारे में सूचित नहीं किया है। उन्होंने आगे कहा कि, कोविड -19 महामारी के बढ़ते मामालों की वजह से पैदा हुई स्थितियों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर प्रभाव डाला। हम जल्द ही परिणाम की घोषणा करने की पूरी कोशिश कर रहे हैं। अभी परिणाम की तारीख की पुष्टि नहीं कर सकते हैं, क्योंकि यह महामारी की स्थितियों के बीच मूल्यांकन प्रक्रिया की प्रगति पर निर्भर करता है।

    वहीं इस संबंध में सीबीएसई बोर्ड की ओर से भी कोई जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education) टर्म- 1 रिजल्ट के संबंध में एक आधिकारिक बयान में पहले कहा गया था कि परिणाम प्राप्त अंकों के रूप में घोषित किए जाएंगे। ये परिणाम पास, कम्पार्टमेंट या रिपीट श्रेणी के मार्कर नहीं होंगे। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि कक्षा 10,12 की बोर्ड परीक्षाओं का अंतिम परिणाम टर्म 2 परीक्षा के बाद घोषित किया जाएगा।

    लेकिन अभी तक बोर्ड ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि टर्म-1 का रिजल्ट कब जारी किया जाएगा। वहीं तमाम मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीबीएसई बोर्ड 10वीं-12वीं कक्षा के लिए टर्म-1 रिजल्ट के नतीजे किसी भी वक्त घोषित कर सकती है। अब ऐसी स्थिति में छात्र-छात्राओं को सलाह दी जाती है कि, वे आधिकारिक वेबसाइट्स cbse.gov.in और cbseresults.nic.in पर विजिट करें, जिससे उन्हें रिजल्ट से जुड़ी सही अपडेट मिल सके।

    CBSE class 10 class 12 term 1 results 2022: 10वीं, 12वीं रिजल्ट चेक करने के लिए ऐसे स्टेप्स को करें फाॅलो

    10वीं, 12वीं रिजल्ट चेक करने के लिए उम्मीदवारों को सीबीएसई की आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर लॉग इन करना होगा। इसके बाद फिर उम्मीदवारों को होमपेज पर 'सीबीएसई टर्म 1 कक्षा 10 परिणाम 2022' या 'सीबीएसई टर्म 1 कक्षा 12 परिणाम 2022' के लिंक पर क्लिक करना होगा। इसके बाद, फिर उम्मीदवारों को आवश्यक क्रेडेंशियल दर्ज करना होगा। अब परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होंगे। उम्मीदवारों को परिणाम डाउनलोड करना होगा और भविष्य के संदर्भ के लिए उसका एक प्रिंटआउट लेना होगा। उम्मीदवारों को परिणाम डाउनलोड करना होगा और भविष्य के संदर्भ के लिए उसका एक प्रिंटआउट लेना होगा

    डिजिलॉकर ऐप पर भी चेक कर पाएंगे नतीजे

    स्टूडेंट्स डिजिलॉकर ऐप पर अपने कक्षा 10, 12 के परिणाम देख सकते हैं। इस ऐप को Google Play Store से डाउनलोड किया जा सकता है या वेबसाइट digilocker.gov.in पर चेक किया जा सकता है।

    UMANG ऐप पर भी देख पाएंगे रिजल्ट 

    सीबीएसई टर्म-1 के छात्र उमंग मोबाइल एप्लिकेशन पर अपना परिणाम देख सकते हैं और डाउनलोड कर सकते हैं। उमंग एप को भी गूगल प्ले एप के जरिए डाउनलोड किया जा सकता है।

    UPTET प्रवेशपत्र पर अंकित होगा फ्री यात्रा विवरण, पूर्व में घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 12 जनवरी को प्रवेश पत्र जारी होने हो सकती है देरी, ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड

     UPTET  प्रवेशपत्र पर अंकित होगा फ्री यात्रा विवरण, पूर्व में घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 12 जनवरी को प्रवेश पत्र जारी होने हो सकती है देरी, ऐसे कर सकेंगे डाउनलोड


    टीईटी प्रवेश पत्र आज नहीं

    प्रयागराज :  23 जनवरी को प्रस्तावित यूपी-टीईटी का प्रवेश पत्र बुधवार को जारी नहीं हो सकेगा। परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार अभ्यर्थियों को नि:शुल्क परिवहन की सुविधा दिए जाने संबंधी शासनादेश मिलने के बाद प्रवेश पत्र जारी होंगे। इसमें एक-दो दिन का समय लग सकता है।


    प्रयागराज : प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद हुई 28 नवंबर की यूपीटीईटी को नए सिरे से कराने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। परीक्षा रद होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि यह परीक्षा नई तिथि में कराए जाने पर परीक्षार्थियों को बस यात्र की फ्री सुविधा दी जाएगी। 


    अब फ्री यात्र की सुविधा दिए जाने को प्रवेशपत्र पर अंकित किए जाने की तैयारी है। इस काम में एक दो दिन का समय लग सकता है। इसी कारण 23 जनवरी को होने वाली इस परीक्षा के लिए पूर्व में घोषित कार्यक्रम के मुताबिक 12 जनवरी को प्रवेश पत्र जारी होने में देरी हो रही है।

     


    प्रयागराज। 23 जनवरी को प्रस्तावित उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) का प्रवेश पत्र बुधवार दोपहर बाद जारी होगा। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने जिलेवार केंद्रों की सूची को अंतिम रूप दे दिया है। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी के लिए क्रमश: 1291629 और 873553 अभ्यर्थी पंजीकृत हैं। जिलों से प्राप्त संशोधित प्रस्ताव के आधार पर प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 2532 और उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा के लिए 1733 केंद्र बनाए गए हैं। 


    UPTET परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी

    बता दें कि इन दावों के उलट विभागीय अधिकारी यूपी टीईटी का आयोजन पूर्ण पारदर्शी तरीके के करने के लिए लगातार कड़े बंदोबस्त कर रहे हैं। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। जहां प्राथमिक स्तर की परीक्षा 2,532 केंद्रों पर होगी, वहीं, उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा 1733 केंद्रों पर आयोजित की जाएगी। दोनों स्तर की परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की संख्या घटाई गई है। प्राथमिक स्तर की परीक्षा 22 में तो उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा में भी 14 केंद्र कम किए गए हैं।


    एडमिट कार्ड जारी किए जाने के बाद उम्मीदवार निम्नलिखित चरणों से प्रवेश-पत्र डाउनलोड कर सकेंगे :-


    चरण 1: उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट updeled.gov.in पर जाएं।

    चरण 2: एडमिट कार्ड डाउनलोड लिंक पर क्लिक करें।

    चरण 3: अपने रजिस्ट्रेशन लॉगिन विवरण दर्ज करें।

    चरण 4: यूपी टीईटी प्रवेश पत्र डाउनलोड करें।



     प्रयागराज:  प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद हुई 28 नवंबर की यूपीटीईटी को नए सिरे से कराने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। परीक्षा रद होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि यह परीक्षा नई तिथि में कराए जाने पर परीक्षार्थियों को बस यात्रा की फ्री सुविधा दी जाएगी। अब फ्री यात्रा की सुविधा दिए जाने को प्रवेशपत्र पर अंकित किए जाने की तैयारी है। इस काम में एक दो दिन का समय लग सकता है। 


     उस समय परीक्षार्थियों के लिए मुख्यमंत्री द्वारा की गई फ्री यात्रा सुविधा दिए जाने की घोषणा को वैधानिक रूप दिया जाना है। इसके लिए अभी शासनादेश जारी नहीं हुआ है। शासनादेश जारी होते ही परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र पर फ्री यात्रा का विवरण अंकित कर जल्द ही प्रवेश पत्र जारी कर दिया जाएगा। 23 जनवरी को परीक्षा दो पालियों में कराई जाएगी।

    Tuesday, January 11, 2022

    गोरखपुर : स्थानीय अवकाशों सहित वर्ष 2022 अवकाश तालिका जारी, देखें

    गोरखपुर : स्थानीय अवकाशों सहित वर्ष 2022 अवकाश तालिका जारी, देखें

    विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी

    विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी


    उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने के इच्छुक पात्रों को पहले पंजीकरण करना होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि उनकी रुचि ऐसे किस विषय में है जो छात्रों के लिए उपयोगी होगा। पंजीकरण कराने वालों को संस्थान जरूरत के अनुरूप आमंत्रित करेंगे।


    नई दिल्ली। स्कूलों की जरूरतों की पूर्ति व उनसे लोगों का जुड़ाव बढ़ाने के लिए शुरू की गई विद्यांजलि योजना को अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी लागू करने की तैयारी है। शिक्षा मंत्रालय की इस योजना के तहत सेवानिवृत्त या सेवारत प्रोफेसर, अधिकारी, पेशेवर व पीएचडी या स्नातकोत्तर डिग्रीधारी आसपास के उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ा सकेंगे। कौशल विशेषज्ञों को भी अपना हुनर बांटने का मौका मिलेगा।


    उच्च शिक्षण संस्थानों में स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने के इच्छुक पात्रों को पहले पंजीकरण करना होगा। उन्हें यह भी बताना होगा कि उनकी रुचि ऐसे किस विषय में है जो छात्रों के लिए उपयोगी होगा। पंजीकरण कराने वालों को संस्थान जरूरत के अनुरूप आमंत्रित करेंगे।



    इस योजना के पीछे हैं मंत्रालय के ये दो उद्देश्य


    विद्यांजलि योजना की वेबसाइट पर संस्थानों के बुनियादी ढांचे और पठन-पाठन की जरूरतों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अनुरूप कोई भी व्यक्ति या संस्था उच्च शिक्षण संस्थानों की मदद कर सकेगा। योजना के पीछे मंत्रालय के दो उद्देश्य हैं। पहला, संस्थानों की जरूरत की पूर्ति हो जाएगी और दूसरा, लोगों का संस्थानों के प्रति जुड़ाव बढ़ेगा।

    गौरतलब है कि फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों की कमी है। विशेषज्ञ या कौशल से जुड़े शिक्षकों का तो घोर अभाव है। सरकार का मानना है कि यह योजना शिक्षण संस्थानों में शिक्षकों और विशेषज्ञों की कमी को दूर करेगी, जिससे छात्रा लाभान्वित होंगे। फिलहाल, देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में चार करोड़ से ज्यादा छात्र अध्ययन कर रहे हैं।



    योजना से जुड़ चुके हैं एक लाख से ज्यादा स्कूल

    विद्यांजलि योजना से अबतक एक लाख से ज्यादा स्कूल जुड़ चुके हैं। ज्यादातर स्कूल दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूद हैं और वहां बुनियादी ढांचे का भी अभाव है। स्कूलों में पढ़ाने के लिए 13 हजार से ज्यादा लोग पंजीकरण करा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की सेवाएं ली जा रही हैं। 15 हजार से ज्यादा स्कूलों ने डिजिटल या आनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधानों की मांग की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, इन स्कूलों के 11 हजार से ज्यादा छात्रों को डिजिटल पठन-पाठन के संसाधन मुहैया करा दिए गए हैं। इनमें मोबाइल व प्रोजेक्टर आदि शामिल हैं।

    प्रबंध समितियां अब नहीं कर सकेंगी मदरसा शिक्षकों का उत्पीड़न, शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी

    प्रबंध समितियां अब नहीं कर सकेंगी मदरसा शिक्षकों का उत्पीड़न, शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी


    ★ सेवा नियमावली में कार्रवाई के खिलाफ अपील की व्यवस्था न होने का फायदा उठाता था प्रबंधन
    ★ शासन ने अब प्रशासन योजना को मदरसा बोर्ड से अनुमोदित कराना किया अनिवार्य, आदेश जारी

    लखनऊ : मदरसा सेवा नियमावली की खामियों की आड़ में मदरसा प्रबंधन अब शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने प्रशासन योजना संबंधी प्रावधानों को कड़ाई से लागू करने का आदेश दिया है। अब मदरसा प्रबंधन को कर्मचारियों के निलंबन और बर्खास्तगी से पहले मदरसा बोर्ड से प्रशासन योजना को अनुमोदित कराना अनिवार्य होगा।


    प्रदेश में मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें 558 मदरसे सरकार से सहायता प्राप्त हैं। से 9 से अनुदानित मदरसों में 9 हजार से ज्यादा शिक्षक हैं। लेकिन इन मदरसों के लिए बनी नियमावली 2016 ही शिक्षकों व कर्मियों के उत्पीड़न का कारण बन गई थी। इसमें दंड के खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था न होने से प्रबंध समितियां मनमाने ढंग से निलंबन, वेतन वृद्धि रोकना अनिवार्य सेवानिवृत्ति जैसी कार्रवाई कर शोषण करती थीं। इस मुद्दे को अमर उजाला ने बीती 29 सितंबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इसके बाद शासन ने सेवा नियमावली में उल्लिखित प्रशासन योजना संबंधी प्रावधानों को कड़ाई से लागू कराने का शासनादेश जारी किया है। विशेष सचिव जेपी से के प्रभावी सिंह की ओर से जारी इस आदेश होने से शिक्षकों व कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई, निलंबन व बर्खास्तगी व जैसी प्रबंधन की मनमर्जी रुकेगी।