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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, February 25, 2021

    जालौन : अफसरों की 'बाजीगरी' में उलझा बचपन, बोरों में बन्द मिली पुस्तकें, शासन को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया शत प्रतिशत आवंटन

    जालौन : अफसरों की बाजीगरी में उलझा 'बचपन', बोरों में बन्द मिली पुस्तकें, शासन को भेजी गई रिपोर्ट में बताया गया शत प्रतिशत आवंटन।

    कैद में पुस्तकें, अफसरों की 'बाजीगरी ' में उलझा 'बचपन'

    शासन को भेजी रिपोर्ट में बताया शत प्रतिशत बंट गई किताबें, कदौरा व महेबा के कई स्कूलों में पहुंची नहीं, बोरों में मिली बंद

    यह चार मामले बताने के लिए काफी हैं कि कालपी में प्राथमिक शिक्षा का क्या हाल है। पिछले दिनों अफसरों ने शासन को भेजी रिपोर्ट में बाजीगरी दिखा दी। सरकारी आंकड़ों में शत प्रतिशत बच्चों को निश्शुल्क मिलने वाली किताबें बंट चुकी है। इसका राजफाश तब हुआ, जब शिक्षक संगठनों ने अधिकारियों की करतूत को सार्वजनिक तौर पर उजागर किया। मंगलबारको कदौरान व महेबा बनाक में चारी से रखी किताबों पुस्तकों को जलाने व फिकवाने की नाकाम कोशिश की गई। मामला तूल पकड़ने पर अफसर एक दूसरे की बगले झांक रहे हैं।

    रात भर पदाधिकारियों ने की रखवाली : मंगलवार को भी राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पदाधिकारियों ने अधिकारियों को सूचना दी लेकिन किसी ने भी ताला खुलवाना उचित नहीं समझा। संघ के शिक्षकों ने आरोप लगाया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजी रिपोर्ट में शत प्रतिशत बच्चों को किताबें वितरित करना बताया है जबकि धरातल पर हकीकत अलग है। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान के साद कई शिक्षक सोमवार की पूरी रात पूर्व माध्यमिक विद्यालय उसरगांव परिसर के बाहर एकल कक्षा में बंद किताबों की रखवाली करते रहे। मौके से अधिकारियों को फोन भी अवगत भी कराया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। नरेंद्र मोदी विचार मंच के राष्ट्रीय महामंत्री अशोक वाजपेई मौके पर पहुंचे और दोपहर तक ताला खुलवाने के लिए प्रयासरत रहे। बीईओ अजीत यादव वडीसी प्रशिक्षण विश्वनाथ दुबे पहुंचे। और बीईओ कदौरा को फोन से ताला खुलवाने के लिए बुलाया गया लेकिन वह मौके पर नहीं आए। विद्यालय के बढ़ता देख विद्यालय से निकल गए।

    मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। अगर गलत रिपोर्ट प्रेषित की गई है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

    संकुल शिक्षक विवेक कुमार बवाल प्रेमंद, बीएसए



    केस- 1

    उच्च प्राथमिक विद्यालय खल्ला बलाक महेबा में कक्षा छह की गणित की एक भी किताब नहीं पहुची, जवकि 38 छात्र नामांकित हैं। यहां गृह विज्ञान, कृधि विज्ञान पर्यावरण खेल व स्वास्थ विषय की भी किता अभी तक नहीं पहुंची है। वहीं शिक्षक ने एका अक्टूबर को बीइभी को पत्र लिखकर किताबों की माग की थी।

    केस- 2 

    प्राथमिक विद्यालय सिकरी रहमानपुर नाक महेवा में कक्षा तीन व पाच में गिनतारा की एक भी किताब नहीं पहुंची । इसी तरह कक्षा चार व पाच में रेनवो किताव किसी भी छात्र को नहीं मिली। विद्यालय में कुल छात्र नामांकित है। शिक्षक के मुताबिक किताड़ं की माग उन्होंने काफी पहले कर रखी है।

    केस- 3

    प्राथमिक विद्यालय बम्हौरी ब्लाक कदौरा में कक्षा एक, दो और तीन के छात्रों को एक किताब मुहैया नहीं कराई गई है। वहीं कक्षा चार कलरव व गिनतारा की किताब और कक्षा पाच में भी गिनतारा की किताइनहीं पहुंचाई गई है 178 अब पंजीकृत हैं। अभिभावक शिक्षक से इस बारे में कई बार पूछ चुके हैं।

    केस- 4

    पूर्व माध्यमिक विद्यालय इकौना ब्लॉक कदौरा में कक्षा एक के छात्रों को एक भी किताब नहीं दी गई है। कक्षा दो में के सापेक्ष 15 को ही कलरव की किताबें मुहैया कराई गई है। कक्षा चार में कलरव, रेनबो व संस्कृत की एक भी किताब नहीं दी गई। कक्षा में 47 छात्र है। वही विद्यालय में कुल 211 छात्र पंजीकृत है।

    ब्लॉक : महोबा

    प्राथमिक विद्यालय : 89 उच्च प्राथमिक विद्यालय : 38
    कपोजिट विद्यालय : 21

    कुल छात्र (2020-21) :11162


    उसगाव पूर्व माध्यमिक विद्यालय में बोरियों में बंद रखी छात्रों को दी जाने वाली किताबें

    ब्लाक : कदौरा

    प्राथमिक विद्यालय : 106
    उच्च प्राथमिक विद्यालय : 35 कंपोजिट क्यालय :28
    कुल छात्र (2020-21) p003


    ताला न खुलने पर गाड़ी के आगे बैठे शिक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के निर्देश पर बीइओ और डीसी ट्रेनिंग उसरगांव के एकत कक्ष में जांच करने पहुंचे थे

    कालपी : उसरगांव में दो दिनों से निश्शुल्क बंटने वाली किताबें एकल कक्ष में बोरियों में सखी गई हैं, लेकिन वे दिनों से ताला नहीं खोला गया। मंगलवार को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की ओर से जांच के लिए बीइओ अजीत यादव व डीसी ट्रेनिंग विश्वनाथ दुबे बंद ताला खुलवाए बिना ही जाने लगे। जैसे ही दोनों अधिकारी गाड़ी में बैठकर चले तो महासंघ के जिलाध्यक्ष प्रदीप चौहान, इल्यास मंसूरी, बृजेश श्रीवास्तव आदि शिक्षक उनकी गाड़ी के सामने बैठ गए और कहा कि एकल कक्ष का ताला खुलवा कर किताब देख लें कि यह किताब कौन सी हैं या फिर हम लोगों के ऊपर से गाड़ी चढ़ाकर निकाल लें। हम लोग जान दे देंगें लेकिन आपको बिना ताला खोले नहीं जाने दो। जिसके बाद अधिकारी गाड़ी से उतर गए। इसी बीच ज्ञान भारती चौकी प्रभारी अमित प्रताप सिंह मौके पर पहुंचे तो उन्होंने पूरी बात सुनी और दोनों जांच अधिकारियों को मौके से निकलवाया। इस पर शिक्षक नाराज हो गए और जिलाधिकारी के समक्ष जाने की बात कहीं। फिलहाल देर शाम तक ताला नहीं खुल सका।

    आजमगढ़ : जांच के लिए नहीं पहुंचे शिक्षक, दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वालों की हो रही जांच

    आजमगढ़ : जांच के लिए नहीं पहुंचे शिक्षक, दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने वालों की हो रही जांच


    आजमगढ़। बेसिक शिक्षा विभाग से शिक्षकों की हुई भर्ती में दिव्यांग होने का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नौकरी हासिल करने
     वालों की जांच हो रही है। मेडिकल बोर्ड ने अनुपस्थित दिव्यांग शिक्षकों को सूची जारी कर दी है। इसमें जिले के 15 दिव्यांग शिक्षक हैं।


    शीर्ष कोर्ट ने उत्तर प्रदेश राज्य बनाम रविंद्र कुमार शर्मा व अन्य की विशेष अपील की सुनवाई करते हुए तीन फरवरी, 2016 को आदेश दिया कि अभ्यर्थियों की जांच मेडिकल बोर्ड गठित कर कराई जाए। शासन ने इसके अनुपालन में 13 मई, 2016 को मेडिकल बोर्ड गठित करने का आदेश दिया। यह काम करीब पांच साल बाद पूरा हुआ। जनपद के 15 शिक्षक वर्ष 2016 से 2019 तक कभी भी मेडिकल बोर्ड के कार्यालय में उपस्थित नहीं हुए। मेडिकल बोर्ड ने उक्त शिक्षकों की सूची जारी कर दी है। साथ ही जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से जनपद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक व प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात दिव्यांग अभ्यर्थी का अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। बता दें कि विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, विशेष चयन 2008 तथा सामान्य चयन 2008 में चयनित शिक्षकों की जांच हो रही है।

    मेडिकल बोर्ड के समक्ष आज तक यह शिक्षक नहीं हुए उपस्थित
    आजमगढ़। परिषदीय विद्यालयों में तैनात दिव्यांग शिक्षक जो वर्ष 2016 से 2019 के बीच आज तक उपस्थित न होने वाले शिक्षकों की सूची मेडिकल बोर्ड ने जारी कर दी है। कुल 204 शिक्षकों की सूची में 15 नाम आजमगढ़ जनपद में तैनात हुए शिक्षकों की है। इसमें 14 शिक्षक विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण वर्ष 2007 के और एक वर्ष 2008 का है।


    विशिष्ट बीटीसी प्रशिक्षण 2007, विशेष चयन 2008 तथा सामान्य चयन 2008 में चयनित दिव्यांग शिक्षकों की जांच चल रही है। मेडिकल बोर्ड द्वारा गठित टीम के समक्ष जिले के कई शिक्षक अनुपस्थित चल रहे हैं उक्त शिक्षकों का वेतन रोका जाएगा। अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, आजमगढ़।

    बदायूं : ट्रांसफर को लेकर बीएसए और बाबू आमने सामने, आफिस में दिन भर चला ड्रामा

    बदायूं : ट्रांसफर को लेकर बीएसए और बाबू आमने सामने, आफिस में दिन भर चला ड्रामा


    बदायूं। बीएसए ने बाबू का तबादला क्या किया कि रियाटरमेंट के आखिरी दिनों में गंभीर आरोपों के बीच घिर गये हैं। बीएसए और बाबू के आमने-सामने आने से विभाग की भी खूब फजीहत हो रही है। डीएम ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दिये हैं। बीएसए का मामला इतना तूल पकड़ गया है, डीएम ने स्वंय ही संज्ञान ले लिया है।

    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपाल सिंह राजपूत का 28 फरवरी के लिये रिटायरमेंट हैं। बीएसए ने 22 फरवरी के लिये मुख्यालय पर तैनात कनिष्ठ लिपिक का उझानी नगर क्षेत्र के लिये तबादला कर दिया और इनके स्थान पर आनन फानन में मृतक आश्रित में एक नियुक्ति कर दूसरे बाबू को तैनात कर दिया। बीएसए ने जल्दबाजी में जो निर्णय लिया है, उसके बीच घिर गये हैं। 


    पहले बाबू और बीएसए आमने सामने आये फिर बाद में जब बाबू की पत्नी कार्यालय पहुंची तो बीएसए पर छेड़छाड़ समेत अन्य गंभीर आरोप लग गये। बाबू का कहना है कि बीएसए ने पूर्व में भी मेरे खिलाफ द्वेषभावना के तहत कार्रवाई की थी। इसके बाद कोर्ट की शरण ली थी, कोर्ट के आदेश पर फिर से मुख्यालय पर ज्वाइनिंग मिल गयी थी। बीते दिनों सहायक अध्यापकों शिक्षकों की भर्ती प्रकिया एवं स्वेटर वितरण कार्य संपन्न कराया।

    अब एक साथ बीएसए ने आरोप लगाते हुये कार्रवाई कर दी। बीएसए का आरोप है कि बाबू अनैतिक एवं नियम विरूद्ध कार्य करने के आदि हैं। ऐसे में जनहित एवं विभाग के हित में बाबू का मुख्यालय से तबादला किया गया।


    बीएसए कार्यालय में हंगामा

    बाबू की पत्नी बीएसए से मिलने पहुंची, इसके कुछ देर बाद कार्यालय में हंगामा हुआ। पुलिस मौके पर पहुंच गयी। पुलिस ने मामला रफादफा करा दिया। इसके बाद बाबू की पत्नी ने डीएम के यहां पहुंचकर पूरे मामले से अवगत कराया।

    नियम विरुद्ध किया ट्रांसफर

    मुख्य सचिव के 12 मई 2020 के आदेश के क्रम में सरकारी अधिकारी एवं कर्मचारी के ट्रांसफर पर रोक है। किन्हीं कारणों में अगर ट्रांसफर किया जाता है तो सक्षम अधिकारी का अनुमोदन जरूरी है। जबकि बीएसए ने अनुमोदन नहीं लिया। इसलिये नियम विरूद्ध तबादला किया गा है।

    तबादला को लेकर बाबू का बीएसए से विवाद हुआ है, दोनों ओर से शिकायत आई है। मामले की जांच कराई जायेगी इसके बाद ही कार्रवाई की जायेगी, थाना प्रभारी को तहरीर देने की जानकारी मुझे नहीं है। - कुमार प्रशांत, डीएम

    दिल्ली: नर्सरी से 8वीं तक के बच्चों की नहीं होगी परीक्षा, इस आधार पर किए जाएंगे प्रमोट

    दिल्ली: नर्सरी से 8वीं तक के बच्चों की नहीं होगी परीक्षा, इस आधार पर किए जाएंगे प्रमोट


    दिल्ली के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले नर्सरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चे नो डिटेंशन पॉलिसी के तहत अगली कक्षाओं में प्रमोट होंगे। वार्षिक परीक्षा की बजाय उनका मूल्यांकन असाइनमेंट व वर्कशीट के आधार पर किया जाएगा। कोरोना महामारी के कारण बीते एक साल से स्कूल बंद हैं। वर्ष 2020 में भी इसी आधार पर बच्चों को प्रमोट किया गया था। शिक्षा निदेशालय ने इसके लिए गाइडलाइंस भी जारी कर दी हैं।

    कोरोना महामारी के कारण मार्च 2020 से स्कूल बंद हैं। अप्रैल से स्कूलों में नया सत्र शुरू होता है, ऐसे में एक बार फिर छात्रों को असाइनमेंट के आधार पर प्रमोट किया जा रहा है। बच्चों का मूल्यांकन 100 अंकों के आधार पर ही होगा। इसके लिए अंकों की वेटेज भी तय की गई है।


    तीसरी से पांचवीं तक के बच्चों की वर्कशीट का मूल्यांकन 30 अंकों, शीतकालीन अवकाश के दौरान दिए गए असाइनमेंट का मूल्यांकन 30 अंकों के आधार पर होगा। एक मार्च से 15 मार्च के बीच शिक्षक बच्चों को असाइनमेंट व प्रोजेक्ट देंगे। इनका मूल्यांकन 40 अंकों के आधार पर होगा। छठी से आठवीं तक के बच्चों का मूल्यांकन भी 100 अंकों के आधार पर होगा। इसमें वर्कशीट के 20 अंक, शीतकालीन अवकाश के दौरान दिए गए असाइनमेंट के लिए 30 अंक, व एक मार्च से 15 मार्च के बीच दिए जाने वाले असाइनमेंट और प्रोजेक्ट का मूल्यांकन 50 अंकों के आधार पर होगा।


    कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए अपनाई गई वैकल्पिक लर्निंग एप्रोच का प्रभाव जानने के लिए ही यह मूल्यांकन किया जा रहा है। इस मूल्यांकन के आधार पर निदेशालय को अगले सत्र के लिए सीखने की रणनीति बनाने में भी मदद मिलेगी। सरकारी स्कूल के बच्चों के अंक लिंक पर अपलोड करने के लिए 15 से 25 मार्च तक का समय दिया गया है। सह-शैक्षिक गतिविधियों के लिए स्कूल बच्चों को ग्रेड देंगे। मूल्यांकन के बाद रिजल्ट 31 मार्च को घोषित किए जाएंगे। रिजल्ट जारी करने के लिए बच्चों को स्कूल नहीं बुलाया जाएगा।


    केजी से दूसरी तक के बच्चे भी होंगे प्रमोट
    सरकारी स्कूलों में केजी से दूसरी कक्षा तक केबच्चों को भी अगली कक्षाओं में प्रमोट किया जाएगा। शिक्षा निदेशालय ने इन कक्षाओं के बच्चों के मूल्यांकन के लिए भी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन कक्षाओं का मूल्यांकन शीतकालीन अवकाश में दिए गए असाइनमेंट, कोविड-19 केदौरान दी गई वर्कशीट (ऑफलाइन-ऑनलाइन) के आधार पर किया जाएगा। कोविड-19 के कारण स्कूल बंद होने से टीचिंग लर्निंग एक्टिविटी भी बंद है। इन कक्षाओं के बच्चों को वर्कशीट दी जा रही हैं। अब मार्च में बच्चों को वर्कशीट का अंतिम सेट दिया जाएगा। उसके बाद केजी से दूसरी तक के छात्रों को ग्रेड-मार्क्स दिए जाएंगे।

    श्रावस्ती : फर्जी शिक्षक होने के शक पर सेवा समाप्ति से पूर्व पक्ष रखने का मौका, अंतिम नोटिस जारी

    श्रावस्ती : फर्जी शिक्षक होने के शक पर सेवा समाप्ति से पूर्व पक्ष रखने का मौका, अंतिम नोटिस जारी


    जल्द होंगे जिले के अंदर परिषदीय शिक्षकों के तबादले, मृतक आश्रितों को शैक्षिक योग्यता अनुसार नौकरी देने का आदेश जल्द बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

    जल्द होंगे जिले के अंदर परिषदीय शिक्षकों के तबादले, मृतक आश्रितों को शैक्षिक योग्यता अनुसार नौकरी देने का आदेश जल्द बोले बेसिक शिक्षा मंत्री



    लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि जिले के अंदर परिषदीय शिक्षकों के तबादले जल्द किए जाएंगे। परिषदीय शिक्षकों की लंबित मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। बुधवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से सिंचाई भवन में एक दिवसीय प्रांतीय संगोष्ठी आयोजित की गई।

    संगोष्ठी को संबोधित करते हुए द्विवेदी ने कहा, शिक्षकों की पदोन्नति के लिए बजट सत्र समाप्त होने के बाद बैठक की जाएगी। पदोन्नति में आने वाली अड़चनों को दूर करने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने कहा कि मृतक आश्रितों को लिपिक के पद पर नियुक्ति देने के लिए जल्द आदेश जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भविष्य में शिक्षकों को ड्रेस, एमडीएम सहित अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त रखने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम को संघ के प्रांतीय अध्यक्ष सुशील पांडेय ने भी संबोधित किया।

    पालीटेक्निक प्रवेश के लिए 26 फरवरी से होंगे आवेदन

    पालीटेक्निक प्रवेश के लिए 26 फरवरी से होंगे आवेदन

    एडेड और निजी पालीटेक्निक संस्थानों में वर्ष 2021-22 में डिप्लोमा एवं पोस्ट ग्रेजुएट पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 26 फरवरी से शुरू होगी। बुधवार को इसकी तिथि तय कर दी गई। इस बार सभी प्रवेश परीक्षाएं आनलाइन होनी हैं, इसलिए 75 की जगह करीब 60 जिलों में ही केंद्र बनाने की योजना है। सिर्फ उन्हीं कालेजों को सेंटर बनाया जाएगा, जहां आनलाइन परीक्षा के सारे इंतजाम होंगे।


    हर साल संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रदेश के 1,372 पालीटेक्निक संस्थानों में प्रवेश प्रक्रिया आयोजित की जाती है। पिछले साल कोविड की वजह से प्रवेश प्रक्रिया काफी देर से शुरू हुई थी। इस बार समय से आवेदन शुरू कराने की तैयारी है। प्रवेश के लिए आनलाइन आवेदन के विस्तृत निर्देश jeecup.nic. in और jeecup.org पर जल्द जारी होंगे। प्रवेश परीक्षाएं 15 से 20 जून तक आनलाइन होंगी। इसका समय सुबह नौ से 12 बजे और दोपहर में 2.30 से 5.30 बजे तक होगा।

    Wednesday, February 24, 2021

    सुलतानपुर : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, चयन हेतु देखें अर्हता एवं शर्ते

    सुलतानपुर : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, चयन हेतु देखें अर्हता एवं शर्ते

    केंद्र से बजट मिलने पर होगा प्रेरकों के अवशेष मानदेय का भुगतान

    केंद्र से बजट मिलने पर होगा प्रेरकों के अवशेष मानदेय का भुगतान



    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने विधानसभा में कहा कि प्रेरकों के बकाया मानदेय का  भुगतान केंद्र सरकार की ओर से किया जाता है। 


    प्रदेश सरकार ने केंद्र को प्रेरकों के मानदेय भुगतान का बजट जारी करने का प्रस्ताव भेजा है। केंद्र से बजट मिलते ही प्रेरकों के बकाया मानदेय का भुगतान कर दिया जाएगा।

    परिवर्तन लागत और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं

    परिवर्तन लागत और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं


    सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान ने मिड डे मील योजना में परिवर्तन लागत में वृद्धि और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का सवाल रखा।  


    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री ने कहा कि मिड डे मील योजना के तहत परिवर्तन लागत में वृद्धि करने, रसोइयों का मानदेय बढ़ाने, बच्चों को खाने के लिए बर्तन व कक्ष उपलब्ध कराने और रसोई को अध्ययन कक्ष से दूर स्थापित करने की सरकार की कोई योजना नहीं है।

    जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें, शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई

    जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें,  शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को शिक्षा विभाग से मिले जूतों के साइज को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायतें आ रही हैं। किसी छात्र का जूता बड़ा तो किसी का छोटा होने पैर में फिट नहीं हो रहा है। अब जूते बदलवाने के लिए शिक्षक गोदाम के चक्कर लगा रहे हैं।

    साल बीतने के बाद परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को जनवरी में जूते-मोजे भेजे गए तो ये गलत नाप के निकल गए। एक मार्च से स्कूल आने के लिए बच्चों को इन्हें बांटा जा रहा है.तो कोई जूता छोटा होने तो कोई बड़ा होने की शिकायत कर रहा है।

    उच्च प्राथमिक के कक्षा 6 से 8 के छात्र विद्यालय आने लगे हैं तो वे विद्यालय में ही जूते नापकर देख ले रहे हैं, लेकिन प्राथमिक कक्षा 1 से 5 तक के छात्र अभी विद्यालय नहीं आ रहे हैं तो उनके सामने साइज की समस्या आ रही है। लड़कों को फीते वाले तो लड़कियों को स्ट्रिप वाले जूते मुहैया कराए जा रहे हैं । दोनों ही वर्गों को साइज को लेकर शिकायतें है।

    इन साइज के मिले जूते

    उच्च प्राथमिक के कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों को 5 से 7 नंबर तक के तो छात्राओं को 4 से 7 नंबर तक के जूते दिए गए। वहीं प्राथमिक के बच्चों को इससे कम नंबर के जूते दिए गए। जिले में करीब 196000 परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए जूते मुहैया कराए गए। एक ही क्लास में कुछ बच्चों को छोटे तो कुछ को बड़े साइज के जूते मिले।

    शिक्षकों को अपने खर्च पर करनी पड़ रही ढुलाई

    हर ब्लॉक के बीआरसी या उसके पास स्थित विद्यालय में अस्थायी गोदाम बनाकर जूते रखे गए हैं। विद्यालयों तक जूते न पहुंचने से शिक्षक अपने खर्च पर गोदाम से जूते विद्यालय तक ला रहे हैं। इसमें साइज गड़बड़ होने पर इन्हें गोदाम तक चक्कर लगाना पड़ रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि कुछ बच्चों के जूते ज्यादा बड़े व छोटे होने से शिक्षकों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

    फर्म की है जिम्मेदारी

    अस्थायी गोडाउन बने हुए हैं। शिक्षक वहां से जूते बदलवा सकते हैं। अगर वहां पर भी सही साइज नहीं मिलेगा तो फर्म की जिम्मेदारी है सही साइज के जूते मुहैया कराए। जिले में 95 प्रतिशत जूते और 100 फीसदी मोजे व बैग बंट चुके हैं। -दिनेश कुमार, बेसिक शिक्षा अधिकारी

    शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने की उठाई मांग

    शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने की उठाई मांग

    लखनऊ। शिक्षक दल के ध्रुव कुमार त्रिपाठी और सुरेश कुमार त्रिपाठी ने विधान परिषद में असाध्य रोगों के इलाज के लिए शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा देने का मुद्दा उठाया। कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए ध्रुव कुमार ने कहा कि शिक्षक कल्याण कोष और अनिवार्य बीमा की जो व्यवस्था थी उसे खत्म कर दिया गया है। सरकार ने शिक्षकों को निशुल्क चिकित्सा सुविधा की कोई घोषणा बजट में भी नहीं की है। 


    इसके जवाब में नेता सदन डॉ. दिनेश शर्मा कहा कि कोविड काल के दौरान सभी का निशुल्क इलाज किया गया है। शिक्षकों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की सुविधा पहले से दी जाती रही है। शिक्षकों को चिकित्सीय सहायता की जो सुविधाएं पूर्व में दी जाती थीं, उसे सपा सरकार ने 18 जून 2015 को खत्म कर दिया था। निर्दलीय समूह के राज बहादुर सिंह चंदेल ने वित्त विहीन शिक्षकों को पारिश्रमिक देने का मामला उठाया। इस पर नेता सदन ने कहा कि न तो मुख्यमंत्री ने और न ही उन्होंने ऐसा कोई वादा किया था

    मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी

    मदरसा शिक्षकों का भी हुआ करेगा तबादला, मदरसा नियमावली में संशोधन करने की तैयारी


    लखनऊ : प्रदेश सरकार अब मदरसा शिक्षकों का भी तबादला करेगी। इसके लिए सरकार मदरसा नियमावली में संशोधन करने जा रही है। नियमावली में ऐसे प्रविधान किए जा रहे हैं, जिससे प्रबंधकों की मनमानी पर भी अंकुश लग सके। सरकार मदरसा शिक्षकों की भर्तियां भी चयन आयोग से कराने पर विचार कर रही है।


    प्रदेश में 558 अनुदानित मदरसे हैं। इनमें करीब नौ हजार शिक्षक हैं। मदरसों के लिए उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन एवं सेवा नियमावली लागू है। प्रदेश सरकार इस नियमावली में नई शिक्षा नीति के अनुसार संशोधन करने जा रही है।

    इस मोबाइल एप से भी जान सकेंगे बच्चे के सीखने-समझने का स्तर, जान‍िए कैसे?

    लांच हुआ 'प्रेरणा लक्ष्य' एप, ऐसे करेगा काम, करें एक क्लिक में डाउनलोड

    इस मोबाइल एप से भी जान सकेंगे बच्चे के सीखने-समझने का स्तर, जान‍िए कैसे?


    लखनऊ बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी ने किया प्रेरणा लक्ष्य एप का शुभारंभ। एप के माध्यम से शिक्षक और अभिभावक यह जान सकेंगे कि बच्चों के सीखने का स्तर क्या है? विद्यार्थियों के प्रेरणा लक्ष्य प्राप्त करने पर उन्हें प्रेरक बालक/बालिका के रूप में घोषित किया जाएगा।


    लखनऊ  । परिषदीय स्कूलों के बच्चों के सीखने-समझने के स्तर को अब मोबाइल एप के जरिये भी जाना जा सकेगा। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी ने 'प्रेरणा लक्ष्य एप' का मंगलवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद के सभागार में शुभारंभ किया।

    ✍️ प्ले स्टोर से यह एप डाउनलोड करने का लिंक : https://play.google.com/store/apps/details?id=org.samagra.missionPrerna

    इस मौके पर उन्होंने कहा कि प्रेरणा लक्ष्य एप के माध्यम से शिक्षक और अभिभावक यह जान सकेंगे कि बच्चों के सीखने का स्तर क्या है? यह भी पता चल सकेगा कि कक्षावार कौन सी दक्षताएं हासिल करने के उन्हें बच्चे पर अधिक ध्यान देना होगा। प्रेरणा लक्ष्य एप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध और निश्शुल्क है। एप का प्रयोग ऑफलाइन भी किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि प्रेरणा लक्ष्य एप का गूगल के  'रीड अलांग' एप से समन्वय किया गया है। इसके माध्यम से बच्चे की रीडिंग क्षमता और बौद्धिक ज्ञान का आकलन किया जा सकेगा। इस एप में एससीईआरटी द्वारा विषय विशेषज्ञों के माध्यम से बच्चों के उपयोग के लिए विस्तृत प्रश्नों को तैयार किया गया है।


    मंत्री ने कहा कि इस एप के द्वारा विद्यार्थियों के प्रेरणा लक्ष्य प्राप्त करने पर उन्हें प्रेरक बालक/बालिका के रूप में घोषित किया जाएगा। इसके माध्यम से प्रेरक विद्यालय/प्रेरक ब्लॉक के थर्ड पार्टी मूल्यांकन के लिए पहले से ही सकारात्मक वातावरण का सृजन हो सकेगा। गौरतलब है कि बेसिक शिक्षा विभाग के मिशन प्रेरणा के तहत प्राथमिक कक्षाओं के बच्चों के लिए ह‍िंदी और गणित विषयों में लर्निंग गोल (प्रेरणा लक्ष्य) निर्धारित किये गए हैं।

    ✍️ प्ले स्टोर से यह एप डाउनलोड करने का लिंक : https://play.google.com/store/apps/details?id=org.samagra.missionPrerna

    लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) दफ्तर में 'प्रेरणा लक्ष्य' एप लांच किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग लगातार प्रगति की ओर अग्रसर है। प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सभी आवश्यक व्यवस्थाएं कराई जा रहीं हैं।



    उन्होंने कहा कि 'प्रेरणा लक्ष्य' एप एक परिवर्तनात्मक असेसमेंट टूल है। इसमें शिक्षक और अभिभावक द्वारा बच्चों के सीखने का स्तर कक्षावार बच्चों की दक्षता से जुड़ी जानकारियां दी जाएगी। एप में एससीईआरटी की ओर से विषय विशेषज्ञों के जरिए बच्चों के लिए उपयोगी विस्तृत प्रश्नों का निर्माण किया गया है। एप के विशेषज्ञ रोहित त्रिपाठी ने कहा कि प्रेरणा लक्ष्य एप पूर्णतः निःशुल्क है। इस एप का प्रयोग ऑफ लाइन भी किया जा सकता है। इस अवसर पर निदेशक बेसिक शिक्षा सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

    ✍️ प्ले स्टोर से यह एप डाउनलोड करने का लिंक : https://play.google.com/store/apps/details?id=org.samagra.missionPrerna

    Tuesday, February 23, 2021

    दिल्ली : ऑफलाइन परीक्षा के लिए बच्चों को बाध्य नहीं कर सकते स्कूल : शिक्षा निदेशालय


    दिल्ली : ऑफलाइन परीक्षा के लिए बच्चों को बाध्य नहीं कर सकते स्कूल : शिक्षा निदेशालय


    बच्चों के पास ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही विकल्प हैं।
    मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के पास भी बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें की हैं।मौजूदा समय में बच्चों का स्कूल आना कतई उचित नहीं है। हाल ही में दिल्ली में दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के मामलों की भी पुष्टि हुई है।


    नई दिल्ली  । राजधानी में कोरोना के मामले घटने के बाद दिल्ली सरकार द्वारा शैक्षिक गतिविधियों में थोड़ी ढील देने के बाद निजी स्कूलों ने ऑफलाइन परीक्षा के लिए विद्यालय आने के लिए बच्चों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। इससे अभिभावक और बच्चे दोनों परेशान हैं। वहीं, गृह मंत्रालय की ओर से जारी दिशा निर्देशों में कहा गया है कि कोई भी स्कूल बिना अभिभावकों की सहमति के बच्चों को ऑफलाइन परीक्षा के लिए जबरन नहीं बुला सकता।


    फिलहाल बच्चों के पास ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही विकल्प हैं। लेकिन, इसके बावजूद भी स्कूल अभिभावकों की सहमति के बिना 9वीं और 11वीं कक्षा के बच्चों को स्कूल भेजने के लिए बाध्य कर रहे हैं। इसको लेकर अभिभावकों की ओर से दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) से भी शिकायतें की गई हैं। इस पर आयोग ने संबंधित स्कूल से जवाब भी मांगा है।


    वहीं, इस मामले पर शिक्षा निदेशालय का कहना है कि स्कूल अभिभावकों पर बच्चों को स्कूल भेजने के लिए किसी प्रकार का दबाव नहीं बना सकते हैं। ये कतई सहीं नहीं है। जब तक सरकार पूरी तरह से अनलॉक नहीं घोषित कर देती तब तक तो बच्चे का स्कूल आना पूरी तरह वैकल्पिक है। कोई भी स्कूल बच्चे को स्कूल बुलाने के लिए अभिभावकों को बाध्य नहीं कर सकता है।


    स्कूल बुलाने पर अगर कोई बच्चा बीमार हो गया तो फिर इसकी पूरी जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन को लेनी होगी। जिन अभिभावकों को स्कूल की तरफ से बच्चे को भेजने के लिए बाध्य किया जा रहा है वो शिक्षा निदेशालय को लिखित में शिकायत कर सकते हैं । निदेशालय इन स्कूलों पर कार्रवाई करेगा। वहीं, इस मामले पर दिल्ली अभिभावक संघ की अध्यक्ष अपराजिता गौतम का कहना है कि बच्चों को आफलाइन परीक्षा के लिए जबरन स्कूल बुलाने से बड़ी संख्या में बच्चे और अभिभावक चिंतित हैं। इसके लिए मेरे पास भी कई सारे बच्चों की शिकायतें आई हैं।


    वहीं, मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के पास भी बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर शिकायतें की हैं।मौजूदा समय में बच्चों का स्कूल आना कतई उचित नहीं है। हाल ही में दिल्ली में दक्षिण अफ्रीकी स्ट्रेन के मामलों की भी पुष्टि हुई है। ऐसे में बच्चों को स्कूल बुलाना खतरे से खाली नहीं है। इसलिए दिल्ली सरकार अतिशीघ्र निजी स्कूलों को आदेश जारी कर 9वीं और 11वीं के बच्चों की परीक्षाएं ऑनलाइन कराने का आदेश जारी करे, जिससे बच्चों और अभिभावकों को राहत मिल सके।

    बीटेक डिग्री वाले नहीं बन सकते गणित के शिक्षक, हाईकोर्ट ने शिक्षक बनने की योग्यता में छूट देने से किया इंकार, जाने पूरा मामला

    बीटेक डिग्री वाले नहीं बन सकते गणित के शिक्षक, हाईकोर्ट ने शिक्षक बनने की योग्यता में छूट देने से किया इंकार, जाने पूरा मामला



    बीटेक (इंजीनियरिंग) की डिग्री वाले व्यक्ति गणित के शिक्षक (टीजीटी) नहीं बन सकते। उच्च न्यायालय ने केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) द्वारा बीटेक की डिग्री धारक महिला को गणित विषय के शिक्षक नियुक्त करने से इनकार किए जाने को सही ठहराते हुए यह फैसला दिया है। न्यायालय ने कहा कि गणित विषय के टीजीटी बनने के लिए स्नातक में सभी वर्षों में गणित विषय का अध्ययन जरूरी है।



    जस्टिस मनमोहन और आशा मेनन की पीठ ने कहा कि बीटेक में एक या दो सेमेस्टर में गणित पढ़ाई जाती है। ऐसे में बीटेक की डिग्री को गणित में स्नातक नहीं माना जा सकता है। उच्च न्यायालय ने इसके साथ ही सुभाश्री दास की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया। उन्होंने लिखित परीक्षा में उतीर्ण होने के बाद भी केवीएस द्वारा गणित के टीजीटी के लिए पर्याप्त योग्यता नहीं होने के आधार पर साक्षात्कार में शामिल होने से वंचित किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने शिक्षक बनने की योग्यता में किसी तरह की छूट देने से इनकार कर दिया। साथ ही कहा कि इससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होगी।


    याचिकाकर्ता सुभाश्री दास की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि राष्ट्रीय शैक्षणिक शिक्षा परिषद ने 2015 में बीटेक की डिग्री के आधार पर बीएड करने की अनुमति दी है। ऐसे में केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा उन्हें गणित का टीजीटी बनने से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है। याचिका में कहा गया था कि केवीएस को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। याचिका में यह भी कहा गया था कि केवीएस ने इस पद के लिए केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा और बीएड अनिवार्य योग्यता बताया था। ऐसे में बीटेक की डिग्री के आधार पर बीएड करने वाले को गणित का टीजीटी बनने से नहीं रोका जा सकता।


    एनसीटीई का निर्देश बाध्यकारी नहीं
    उच्च न्यायालय ने कहा है कि याचिकाकर्ता ऐसा कोई नियम बताने में पूरी तरह से नाकाम रहा है जिसमें यह कहा गया हो कि राष्ट्रीय शैक्षणिक शिक्षा परिषद द्वारा बीएड पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए तय मानदंड सभी सरकारों, संस्थानों और संगठनों के लिए बाध्यकारी हो। पीठ ने याचिकाकर्ता की उन दलीलों को सिरे से ठुकरा दिया, जिसमें कहा गया था कि कई राज्य सरकारों ने बीटेक की डिग्री के आधार पर बीएड करने वालों को शिक्षक नियुक्ति के लिए योग्य माना है।

    दखल नहीं देगा अदालत
    उच्च न्यायालय ने कहा कि यह मामला केवीएस में शिक्षा के गुणवत्ता से जुड़ा है, जहां शिक्षा के उच्च मानदंड को पूरा करना है। न्यायालय ने कहा कि जहां योग्यता का उच्च मानक स्थापित करना है, ऐसे मामलों में न्यायालय हस्तक्षेप नहीं करेगा।

    2018 में निकली थी भर्ती
    केवीएस ने 2018 में शिक्षकों की भर्ती निकाली थी। इसमें याचिकाकर्ता सुभाश्री ने भी आवेदन किया था। उन्होंने लिखित परीक्षा में सामान्य श्रेणी में 83वां स्थान प्राप्त किया था। लेकिन, केवीएस ने पर्याप्त योग्यता नहीं होने के आधार पर उन्हें साक्षात्कार से वंचित कर दिया। इसके खिलाफ उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण में याचिका दाखिल की। न्यायाधिकरण ने भी मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल की थी।

    क्या यूपी में शिक्षामित्रों का बढ़ेगा मानदेय? इस सवाल पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब

    क्या यूपी में शिक्षामित्रों का बढ़ेगा मानदेय? इस सवाल पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने दिया ये जवाब


    विधानसभा में मंगलवार को प्रश्नकाल के दौरान बेसिक शिक्षा मंत्री ने बसपा के श्याम सुंदर शर्मा के सवाल पर कहा कि शित्रामित्रों का मानदेय बढ़ाने पर सरकार फिलहाल कोई विचार नहीं कर रही। 


    हुआ यूं कि प्रश्नकाल के दौरान बसपा के श्याम सुंदर शर्मा ने सवाल के जरिये जानना चाहा कि क्या सरकार शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने पर विचार कर रही है। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शिक्षा मित्रों का मानदेय 3500 रुपये तक किया गया था। इसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहानुभूति पूर्वक विचार करते हुए बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया। फिलहाल, शिक्षा मित्रों का मानदेय बढ़ाने पर कोई विचार नहीं हो रहा है।


    इस पर श्याम सुंदर शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसी कोई सीमा तय नहीं की है कि मानदेय न बढ़ाया जाए। सरकार चाहे तो दस हजार रुपये से बढ़ा भी सकती है। शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाना चाहिए। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि सदस्य बेवजह मामले को तूल दे रहे हैं। ऐसा किसी खास वजह से किया जा रहा है। इस दौरान उन्होंने  टिप्पणी करते हुए कुछ ऐसा कहा जिस पर बसपा सदस्यों ने आपत्ति कर दी।


    इस पर संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि मंत्री के लिखित जवाब में स्पष्ट है कि मानदेय बढ़ाने का कोई औचित्य नहीं है। इस पर भी बसपा सदस्यों ने आपत्ति जारी रखी तो बेसिक शिक्षा मंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने अपने स्थान पर खड़े होकर कहा कि उनका ऐसा कोई आशय नहीं था। अगर उनकी बात से किसी को ठेंस लगी है तो वह क्षमा प्रार्थी है और अपने  शब्द वापस लेते हैं। इसके बाद ही मामला शांत हुआ।

    स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला

    स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला


    प्रयागराज : कक्षा एक से आठ तक के स्कूल खोलने के निर्देश शासन की ओर से जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला चलती रहेगी। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देश दिया है कि कक्षा एवं विषयवार शैक्षिक सामग्री सप्ताह के प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा कर बच्चों को अभ्यास करने व प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रेरित किया जाए। दूरदर्शन के जरिए भी प्रसारण जारी रहेगा। विद्यार्थियों को जुड़े रहने के लिए भी कहा जाए।




    बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि शासन की मंशा है कि बच्चों की पढ़ाई में कोई अवरोध न आए। हम सब भी इसके लिए प्रयासरत हैं। राज्य स्तर से प्रेषित शैक्षिक सामग्री के अतिरिक्त शिक्षक भी मासिक पंचांग के अनुसार शैक्षणिक सामग्री बच्चों को उपलब्ध कराएंगे। उसके अध्ययन के बाद बच्चों को उस अध्ययन सामग्री में पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर देना होगा। इसके लिए शिक्षक अपने स्तर से भी सवाल पूछ सकेंगे।

    क्यूआर कोड स्कैन कर दीक्षा एप की पाठ्य सामग्री देख सकेंगे

    दीक्षा एप डाउनलोड कर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एप पर उपलब्ध करीब 4000 आडियो विजुअल शिक्षण सामग्री को पाठ्य पुस्तक में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर पढ़ सकेंगे।

    सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा की जाएगी कक्षा एक से आठ तक की शैक्षिक सामग्री

    बच्चों को दी गई निश्शुल्क पुस्तक

    पठन पाठन व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए निश्शुल्क पुस्तक व अभ्यास पुस्तिका बच्चों को बांटी जा चुकी है। उसके आधार पर ही दूरदर्शन से वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। अभिभावकों से कहा है कि बच्चों को अनिवार्य रूप से शैक्षणिक कार्यक्रम दिखाएं। शैक्षणिक सामग्री और वीडियो वाट्सएप ग्रुप पर पहले की तरह भेजते रहेंगे। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद भी जारी रखना है। बच्चों की प्रगति के बारे में भी समय समय पर रिपोर्ट देने की प्रक्रिया भी चलती रहेगी।

    मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी

    मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये, शिक्षकों के बकाया वेतन भुगतान होने की उम्मीद जगी


    मदरसा आधुनिकीकरण योजना के लिए बजट में 479 करोड़ रुपये आवंटित होने से शिक्षकों के बकाया वेतन का कुछ भुगतान होने की उम्मीद जगी है। इस योजना में प्रदेश के करीब 25 हजार शिक्षकों का बीते चार साल का वेतन बकाया है। 


    मदरसों में आधुनिक विषयों की शिक्षा देने के लिए भारत सरकार की अत्यंत महत्वाकांक्षी और प्रधानमंत्री के 15 सूत्रीय प्रोग्राम में सम्मिलित मदरसा आधुनिकीकरण योजना में प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक कार्यरत हैं। मदरसों में काम करने वाले आधुनिकीकरण शिक्षकों मे स्नातक शिक्षक को 8000 और परास्नातक शिक्षक को 15000 रुपये मानदेय मिलता है। इसमें केंद्र को 8000 में से मात्र 3600 रुपये और 15000 में से मात्र 4800 रुपये देने रहते हैं। 


    केंद्र सरकार ने चार साल से अपना अंशदान नहीं दिया है। इसकी वजह से राज्य सरकार का अंशदान भी नहीं मिल पाया। शिक्षकों का मानदेय करीब 977 करोड़ रुपये बकाया हो चुका है।

    संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा, निदेशालय का होगा गठन

    संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा, निदेशालय का होगा गठन 


    संस्कृत विद्यालयों का गुरुकुल पद्धति के अनुसार संचालन कर निर्धन विद्यार्थियों को सरकार निशुल्क छात्रावास और भोजन की सुविधा देगी। राजकीय संस्कृत विद्यालयों और माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए 5 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।


    देववाणी संस्कृत को नया जीवन तकनीक बनाएगी उज्ज्वल भविष्य। उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं।


    प्रदेश में संस्कृत के विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय की हालत किसी से छिपी नहीं है। देववाणी संस्कृत जो पढ़ना भी चाहते हैं, वे कालेजों की हालत देखकर आगे नहीं बढ़ते। योगी सरकार ने इसके लिए बड़ी पहल की है।



     उप्र संस्कृत शिक्षा निदेशालय के गठन और उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के कार्यालय भवन के लिए पांच करोड़ रुपये आवंटित हुए हैं। साथ ही संस्कृत विद्यालयों में पढऩे वाले निर्धन छात्रों को गुरुकुल पद्धति के अनुसार मुफ्त छात्रावास व भोजन की व्यवस्था की जाएगी। यानी अब संस्कृत पढऩे वालों की संख्या बढ़ेगी और उनका भविष्य भी बेहतर होगा।

    दिल्ली विवि में दाखिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट से करने की तैयारी

    दिल्ली विवि में दाखिले सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट से करने की तैयारी


    नई दिल्ली। दिल्ली विश्वविद्यालय में अब अंडर ग्रेजुएट स्तर के सभी विषयों में दाखिले प्रवेश परीक्षा से करने की तैयारी की जा रही है। प्रवेश परीक्षा के लिए सेंट्रल यूनिवर्सिटी कॉमन एंट्रेस टेस्ट (सीयूसेट) होगा। टेस्ट के अंक और बारहवीं के अंकों के आधार पर मेरिट तैयार होगी।


    अभी तक यूजी के दस कोर्सेज के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाती है। इस प्रवेश परीक्षा को वर्ष 2020 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने आयोजित किया था। नई शिक्षा नीति में देशभर में सभी विश्वविद्यालयों में स्नातक पाठ्यक्रम में 2021 से एक ही संयुक्त प्रवेश परीक्षा से दाखिले करने के लिए कहा गया है। यह टेस्ट भी एनटीए ही आयोजित करेगी।


    डीयू अधिकारियों के अनुसार दाखिले नई शिक्षा नीति के अनुसार ही होंगे। प्रशासन ने प्रवेश परीक्षा के लिए विस्तृत रूपरेखा तैयार करनी शुरू की है। सीयूसेट के लिए डीयू का प्रस्ताव है कि इसमें बारहवीं के अंकों की वेटेज 50 फीसदी और बाकी 50 फीसदी वेटेज टेस्ट की होगी। विभिन्न बोर्ड से छात्र आने के कारण बारहवीं के अंकों को पर्सेटाइल के हिसाब से तय किया जा सकता है।

    प्रशासन का मानना है कि अलग बोर्ड होने से छात्रों के अंकों में समरूपता नहीं होती है। इस टेस्ट के होने से छात्र को अलग अलग विश्वविद्यालय में दाखिला के लिए अलग-अलग प्रवेश परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी। दाखिले का आधार विश्वविद्यालय अपने अनुसार तय कर सकेंगे।

    69000 शिक्षक भर्ती त्रुटियों के कारण छूट गए अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर घेरा निदेशालय

    69000 शिक्षक भर्ती त्रुटियों के कारण छूट गए अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर घेरा निदेशालय


    लखनऊ। बेसिक के 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित रहने वाले सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सोमवार को निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव किया। अभ्यर्थियों ने बताया कि वे पिछले दो महीने से नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर भटक रहे हैं।


    पहले तो आश्वासन भी दिया गया लेकिन अब तो कोई इस मुद्दे पर बात करने तक को तैयार नहीं है। आवेदन में हुईं त्रुटियों में सुधार करने का अवसर दिए जाने और नियुक्ति पत्र जारी करने की मांग को लेकर सुबह सैकड़ों अभ्यर्थी निदेशालय परिसर पहुंच गए हाथों में पोस्टर-बैनर लिए अभ्यर्थी परिसर में धरने पर बैठ गए। देर शाम तक वे प्रदर्शन करते रहे लेकिन इस दौरान कोई भी अधिकारी उनसे वार्ता करने नहीं पहुंचा। इस दौरान भारी पुलिस बल भी मौजूद रहा।

    Monday, February 22, 2021

    200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत

    200 करोड़ रुपये के बजट से यूपी सरकार प्रदेश के 4500 एडेड माध्यमिक स्कूलों की सुधारेगी सेहत


    राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा।


    लखनऊ  ।  राजकीय स्कूलों की तर्ज पर अब राजधानी सहित प्रदेश भर के माध्यमिक विद्यालयों के भी दिन बहुरेंगे। योगी सरकार ने नए सत्र के बजट में 200 करोड़ रुपये का प्राविधान किया है। हर जिले के एडेड माध्यमिक विद्यालयों को लाभ मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा अधिनियम 1921 में बना था। तभी से एडेड माध्यमिक विद्यालयों का संचालन हो रहा है, लेकिन वर्ष 1971 में इन स्कूलों को सरकार ने अनुदान सूची पर लेना शुरू किया था। वर्तमान समय में प्रदेश भर में करीब 4500 सहायता प्राप्त अशासकी माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं।

    प्रयोगशालाएं हो गईं कबाड़

    लखनऊ में 94 एडेड माध्यमिक विद्यालय हैं। इनमें बहुत से ऐसे स्कूल हैं, जिनके भवन की मरम्मत से लेकर अन्य सुविधाओं का अभाव है। सरकार की ओर से इन स्कूलों में सिर्फ शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन की ग्रांट दी जाती है। कक्षा एक से आठ तक फीस भी नहीं ली जाती, जिसकी वजह से स्कूलों की स्थिति खराब होती चली गई। लखनऊ इंटरमीडिएट कालेज हो या हरि चंद इंटर कालेज। यहां प्रयोगशालाएं खत्म हो चुकी हैं। ऐसे में योगी सरकार ने पहली बार 200 करोड़ रुपये के बजट का प्राविधान किया है।
     

    डा. आरपी मिश्रा ने कहा कि शिक्षक संघ लगातार मांग उठा रहा था कि राजकीय स्कूलों की तर्ज पर सरकार एडेड माध्यमिक विद्यालयों को भी अवस्थापना सुविधाओं के लिए फंड दे। जिससे इन स्कूलों की स्थिति भी ठीक कराई जा सके। अब बजट में प्राविधान किया गया है।

    लखनऊ मंडल के संयुक्त निदेशक सुरेंद्र तिवारी ने बताया कि एडेड माध्यमिक विद्यालयों में बजट देने का निर्णय अच्छा है। इससे इन स्कूलों में जरूरी मरम्मत, छात्र सुविधाएं आदि की जा सकेंगी।

    हर मंडल में निजी सहभागिता से खुलेगा एक-एक सैनिक स्कूल

    यूपी में बढ़ेगी सैनिक स्कूलों की संख्या, गोरखपुर में बनेगा नया सैनिक स्कूल

    हर मंडल में निजी सहभागिता से खुलेगा एक-एक सैनिक स्कूल


    प्रदेश के प्रत्येक मंडल में निजी सहभागिता से एक सैनिक स्कूल की स्थापना की जाएगी। इसके लिए राज्य सरकार जमीन उपलब्ध कराएगी। मैनपुरी, अमेठी और झांसी के बकाया कामों को पूरा कराने और गोरखपुर में एक नए सैनिक स्कूल का निर्माण के लिए 90 करोड़ का बजट प्रावधान किया है।

     राजधानी लखनऊ स्थित कैप्टन मनोज पांडेय सैनिक स्कूल में ऑडिटोरियम की क्षमता बढ़ाने के लिए 15 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है।

    युवाओं को अनुशासन के साथ उन्हें सस्ती व गुणवत्तापरक शिक्षा दिलाने के लिए प्रदेश की योगी सरकार प्रतिबद्धता से काम कर रही है। अभी हाल में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हर मंडल में एक सैनिक स्कूल खोले जाने का प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा है। इसी कड़ी में गोरखपुर में एक सैनिक स्कूल के निर्माण की मंजूरी मुख्यमंत्री ने दी है। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बजट अभिभाषण के दौरान 90 करोड़ रुपये का बजट गोरखपुर सैनिक स्कूल के लिए पास किया है। इसके अलावा कैप्टन मनोज कुमार पाण्डेय सैनिक स्कूल सरोजनीनगर में एक हजार लोगों की क्षमता वाले आडिटोरियम का निर्माण कराया जाएगा। इसके 15 करोड़ रुपए का प्राविधान किया गया है।



    सेना में जाने के सपने बुनने वाली बेटियों के पंखों को प्रदेश की योगी सरकार नई उड़ान देने जा रही है। प्रदेश सरकार कारगिल शहीद कैप्टन मनोज पाण्डेय सैनिक स्कूल की क्षमता को दोगुना करने की तैयारी कर रहा है। यूपी के बजट में कैप्टन मनोज पाण्डेय सैनिक स्कूल सरोजनीनगर को विकसित किए जाने व उसकी क्षमता को दोगुना करने का प्रस्ताव पास किया गया है। खासकर बेटियों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार बालिका कैडेट के लिए 150 की क्षमता वाले छात्रावास का निर्माण कराएगा। साथ ही एक हजार की क्षमता वाले आडिटोरियम का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए 15 करोड़ रुपए बजट का प्राविधान किया गया है। वहीं, सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था भी की गई है।  


    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के चलते अन्य राज्यों की अपेक्षा यूपी में सैनिक स्कूल की संख्या अधिक है। यूपी में रक्षा मंत्रालय द्वारा तीन सैनिक स्कूलों का संचालन अमेठी, झांसी, मैनपुरी में किया जा रहा है जबकि बागपत में सैनिक स्कूल का निर्माण प्रस्तावित है। इसके अलावा गोरखपुर में एक सैनिक स्कूल बनाए जाने के लिए 90 करोड़ रुपए का प्राविधान प्रदेश सरकार ने अपने अंतिम बजट में किया है।


     प्रदेश के सैनिक स्कूलों में छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा बहुत कम फीस में मुहैया कराई जा रही है। लखनऊ में यूपी सैनिक स्कूल का संचालन किया जाता है, जो राज्य सरकार के अधीन है । यह देश का पहला सैनिक स्कूल है। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने देश भर में सैनिक स्कूलों का निर्माण कराया। जानकारों की मानें तो सैनिक स्कूल में दाखिले के बाद छात्र कम फीस में उच्च गुणवत्ता की शिक्षा हासिल करते हैं। ऐसे में योगी सरकार के प्रस्ताव से उन अभिभावकों को बड़ी राहत मिलेगी जो अधिक फीस होने के चलते अपने बच्चों को अच्छे स्कूलों में नहीं पढ़ा पाते हैं। सैनिक स्कूलों की संख्या बढ़ने से ऐसे अभिभावकों के बच्चे बेहतर शिक्षा हासिल कर सकेंगे।

    यूपी के हर मंडल को एक राज्य विश्वविद्यालय की सौगात, उच्च शिक्षा की सूरत बदलने की कोशिश

    यूपी के हर मंडल को एक राज्य विश्वविद्यालय की सौगात, उच्च शिक्षा की सूरत बदलने की कोशिश


    उच्च शिक्षा के स्तर को नई बुलंदी देने के लिए प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर यूपी के हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इससे ग्रामीण परिवेश के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए एक जिले से दूसरे जिलों व राज्यों में पढ़ाई करने के लिए दौड़ नहीं लगाना पड़ेगी। वहीं, 200 करोड़ रुपये की लागत से प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों की सूरत भी बदलने का काम योगी सरकार करने जा रही है। प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को प्रदेश सरकार के पांचवे बजट भाषण के दौरान हर मंडल में एक राज्य विश्वविद्यालय खोले जाने की बात कही। 


    यूपी में अभी 16 राज्य विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनमें भी कई मंडलों में अभी राज्य विश्वविद्यालय नहीं है। ऐसे में ग्रामीण परिवेश के छात्रों को उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए दूसरे जिलों में जाना पड़ता है। इससे छात्रों पर हॉस्टल व मेस फीस को बोझ बढ़ जाता है। अपने ही मंडल में विश्वविद्यालय खुल जाने के बाद छात्रों को पढ़ाई करने के लिए दूर दराज नहीं जाना पड़ेगा। इसके अलावा प्रदेश के 170 शासकीय डिग्री कॉलेजा की सूरत भी योगी सरकार ने बदलने की तैयारी कर ली है। 

    NPS के क्रियान्वयन को लेकर आने वाली शिथिलताओं / समस्याओं को लेकर PSPSA ने लिखा DGSE को पत्र, बजट व नियमित अंशदान से जुड़ी समस्याओं की तरफ ध्यान किया आकृष्ट

    NPS के क्रियान्वयन को लेकर आने वाली शिथिलताओं / समस्याओं को लेकर PSPSA ने लिखा DGSE को पत्र, बजट व नियमित अंशदान से जुड़ी समस्याओं की तरफ ध्यान किया आकृष्ट।

    हेडमास्टर नेतृत्व विकास कार्यक्रम माह फरवरी अंतर्गत आज दिनांक 22 फरवरी 2021 को 11 बजे से होगा यूट्यूब सेशन लाइव, क्लिक करके जुड़े अधिकृत लिंक के जरिये

    हेडमास्टर नेतृत्व विकास कार्यक्रम माह फरवरी अंतर्गत आज दिनांक 22 फरवरी 2021 को 11 बजे से होगा यूट्यूब सेशन लाइव, क्लिक करके जुड़े अधिकृत लिंक के जरिये



    सभी प्रधानाध्यापक/सभी इंचार्ज ध्यान दे-
    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में सभी प्रधानाध्यापकों / इंचार्ज का यू ट्यूब लाइव सेशन  "प्रेरक HT ऑफ द ब्लॉक" का आयोजन आज दिनांक 22 फरवरी को पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 12.30 तक होगा। जिसमे सभी प्रधानाध्यापकों / इंचार्ज की सहभागिता अनिवार्य होगी।




    ★ दिनांक   -  22 फरवरी 2021
    ★ समय     -  पूर्वान्ह 11 बजे से अपरान्ह 12.30
    ★ यू टयूब मीटिंग में जुड़ने के लिए लिंक


    जनपद के भीतर जल्द होगा शिक्षकों का स्थानांतरण, नगर क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र का भी अंतर होगा समाप्त

    जनपद के भीतर जल्द होगा शिक्षकों का स्थानांतरण, नगर क्षेत्र व ग्रामीण क्षेत्र का भी अंतर होगा समाप्त।


    ■ - कुशीनगर आए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी जानकारी

    ■ - प्रदेश के 1194 जर्जर विद्यालयों के भवन ध्वस्त कराकर नया निर्माण होगा

    ■ - 400 करोड़ की लागत से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बनेंगे स्मार्ट क्लास


    कसया (कुशीनगर)। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में शिक्षकों के अंतर जनपदीय तबादले के बाद ग्रीष्मावकाश में जनपद के भीतर समायोजन किया जाएगा। प्रदेश के 1194 विद्यालयों के जर्जर भवन को ध्वस्त कराकर उनकी जगह नए भवन बनाए जाएंगे। इसके अलावा 400 करोड़ रुपये खर्चकर उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना होगी।


    ये बातें शनिवार को प्रदेश के बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कही। वे कुशीनगर स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। अपने व्यक्तिगत कार्य से आए मंत्री ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अंतर जनपदीय स्थानांतरण के चलते स्कूलों में शिक्षक-अनुपात बिगड़ गया है। ग्रीष्मावकाश में अब जनपद के भीतर शिक्षक-अनुपात ठीक करने के लिए शिक्षकों का तबादला होगा। 


    इसके लिए शिक्षकों से आवदेन लिए जाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। अगले शैक्षणिक सत्र से कोई विद्यालय शिक्षक विहीन नहीं होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा कि अब नगर और देहात के अंतर को खत्म किया जाएगा। उन्होंने कुशीनगर में हुए विकास कार्यों पर खुशी जताते हुए कहा कि महापरिनिर्वाण स्थली कुशीनगर अब पहले से अधिक सुंदर दिख रही है।

    प्राइमरी स्कूल खुलने पर टीका लगाकर बच्चों का होगा स्कूलों में स्वागत, सजाए जाएंगे परिषदीय स्कूल

    प्राइमरी स्कूल खुलने पर टीका लगाकर बच्चों का होगा स्कूलों में स्वागत, सजाए जाएंगे परिषदीय स्कूल


    कोरोना काल में करीब एक साल बाद खुल रहे कक्षा एक से पांचवीं तक के स्कूलों को बच्चों के स्वागत के लिए सजाया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूलों में गुब्बारों, झालरों और अन्य सजावटी सामान से सजाने और बच्चों के लिए शौचालय व पीने के पानी के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।


    प्रदेश सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि प्रदेश में कक्षा एक से पांचवीं तक के विद्यालय एक मार्च से संचालित होंगे। कोरोना काल में एक साल बाद स्कूल आने वाले बच्चों को अच्छा माहौल देने के लिए स्कूलों को सजाया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने स्कूलों में सजावट की तैयारियां शुरू की है।  बच्चों के स्वागत के लिए स्कूल की कक्षाओं व गेट को रंगीन गुब्बारों, फूलों व रंग बिरंगी झालरों से सजाया जाएगा।  टीका लगाकर बच्चों का स्कूल में स्वागत किया जाएगा।


    स्कूलों में बच्चों के पीने के पानी के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था की जाएगी। जानकारों की मानें तो शिक्षकों को कंपोजिट ग्रांट से रनिंग वाटर की व्यवस्था करना होगी। इसके अलावा लड़कियों के लिए शौचालय की अलग व्यवस्था की जाएगी। प्रदेश सरकार के प्रवक्ता  ने बताया कि ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों का कायाकल्प किया जा रहा है। स्कूल भवनों व कक्षाओं की दीवारों को आकर्षक पेटिंग, स्लोगन  से सजाया गया है। स्कूलों को स्मार्ट क्लास व लाइब्रेरी से लैस किया गया है। अकेले लखनऊ के 1642 स्कूलों से करीब 100 स्कूल में स्मार्ट क्लास बनाए गए हैं।

    UGC Dual Degree Rules: यूजीसी ने दोहरी डिग्री के नियम लेकर तैयार मसौदे को दिया अंतिम रूप

     UGC Dual Degree Rules: यूजीसी ने दोहरी डिग्री के नियम लेकर तैयार मसौदे को दिया अंतिम रूप


    UGC New Rules on Dual Degree: भारतीय एवं विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही संयुक्त या दोहरी डिग्री की पेशकश कर सकेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इन शिक्षा कार्यक्रमों के नियमों से संबंधित मसौदे को अंतिम रूप दिया है। हालांकि, इस बारे में अंतिम निर्णय मसौदे को लेकर मिलने वाली प्रतिक्रिया के बाद लिया जाएगा जिसे सार्वजनिक किया गया है।


    इस मसौदे के मुताबिक, भारत के उच्च शिक्षण संस्थान क्रेडिट पहचान और हस्तांतरण के साथ-साथ दोहरी डिग्री प्रदान करने को लेकर समकक्ष विदेशी शिक्षण संस्थानों के साथ समझौता कर सकेंगे।


    इसके मुताबिक, यह नियम ऑनलाइन, ओपन और दूरस्थ शिक्षा प्रणाली के शिक्षा कार्यक्रमों में लागू नहीं होंगे। नियमों के अनुसार, दोहरी डिग्री कार्यक्रम के अंतर्गत दोनों संस्थानों की डिग्री संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद भारतीय एवं विदेशी उच्च शिक्षण संस्थान अलग-अलग या संयुक्त डिग्री दे पाएंगे।

    बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पहली से 8वीं तक के बच्चों को इस साल भी बिना परीक्षा किया जाएगा पास

    बिहार सरकार का बड़ा फैसला, पहली से 8वीं तक के बच्चों को इस साल भी बिना परीक्षा किया जाएगा पास


    बिहार के सरकारी प्रारंभिक स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 1.66 करोड़ बच्चे इस साल भी बिना वार्षिक परीक्षा अगली कक्षा में प्रमोट किए जाएंगे। राज्य शिक्षा विभाग ने कोरोना संकट की वजह से लम्बे समय तक स्कूल बंदी और बच्चों के कॅरियर को देखते हुए यह फैसला लिया है। 


    मुख्य सचिव संजय कुमार ने कहा, 'पढ़ाई में हुए नुकसान की भरपाई के लिए अपने तीन माह की कैच-अप क्लास आयोजित करने का फैसला किया है। इन कक्षाओं में स्टूडेंट्स को बेसिक व जरूरी टॉपिक्स पढाए जाएंगे ताकि अगली कक्षा के कोर्स की पढ़ाई के दौरान उन्हें कोई दिक्कत न आए। इन कक्षाओं से उन स्डूडेंट्स को खासा लाभ होगा जो टीवी, इंटरनेट, स्मार्टफोन के अभाव के चलते ऑनलाइन क्लास में हिस्सा नहीं ले सके थे। मार्च मध्य में इन कक्षाओं के शुरू होने की उम्मीद है।'


    इस बीच शिक्षा विभाग ने 9वीं कक्षा में पंजीकृत 13.17 लाख बच्चों की परीक्षा 26 फरवरी से 3 मार्च के बीच कराने की तैयारी शुरू कर दी है। 


    बिहार बोर्ड ने अधिकारियों ने कहा, 'हमने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से कहा है कि वह 24 फरवरी तक सभी ओएमआर शीट प्राप्त कर लें। 4 मार्च से विद्यार्थियों की प्रैक्टिकल परीक्षाएं होंगी।'

    राज्य में कक्षा 6 से 8 तक की कक्षाओं के लिए विद्यालय साढ़े 10 माह बाद 8 फरवरी से खुले हैं। राज्यभर के प्राथमिक स्कूल (कक्षा 1 से पांच) अब भी बंद हैं।


    गौरतलब हो कि कोरोना संकट की वजह से शैक्षिक सत्र 2019-20 में भी वार्षिक परीक्षा नहीं ली जा सकी थी और दसवीं, 12वीं को छोड़कर अन्य सभी कक्षाओं के बच्चों को अगली कक्षा में प्रोन्नत करने का निर्देश दिया था। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार ने 13 मार्च 2020 को ही राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद करने का आदेश दे दिया था। बच्चे अगली कक्षा में प्रोन्नत तो हो गए लेकिन उनकी पढ़ाई आरंभ नहीं हो सकी। कई महीने बाद किताबें पाठ्य पुस्तक निगम की साइट पर अपलोड की जा सकीं। अलबत्ता दूरदर्शन पर कक्षाएं चलाकर शिक्षा विभाग और बिहार शिक्षा परियोजना परिषद ने बच्चों को शिक्षण से जोड़े रखने की कोशिश जरूर की। 


    पिछले साल 1.94 करोड़ छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में प्रोन्नत हुए थे  
    शैक्षिक सत्र 2019-20 में कोरोना संकट के चलते जारी स्कूलबंदी के कारण दसवीं छोड़ पहली से 11वीं तक के सरकारी स्कूलों में नामांकित सभी बच्चों को बिना वार्षिक परीक्षा लिए ही अगली कक्षाओं में प्रोन्नति दे दी गयी थी। इस बाबत 8 अप्रैल 2020 को विभाग ने आदेश जारी किया था। इस निर्णय से 1.94 करोड़ छात्र-छात्राएं अगली कक्षा में प्रोन्नत हो गए थे। इनमें पहली से आठवीं तक के 1.66 करोड़, 9वीं के 16 लाख और 11वीं के करीब 12 लाख विद्यार्थी शामिल थे।

    अब राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भी होगी आउटसोर्सिंग से नियुक्ति

    अब राजकीय कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भी होगी आउटसोर्सिंग से नियुक्ति

    स्कूल-कॉलेजों में आउटसोर्सिंग से चपरासी रखने से आगे बढ़कर सरकार अब राजकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर ग्रेड के समकक्ष प्रवक्ता की नियुक्ति आउटसोर्सिंग से करेगी। शासन ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के निर्मित 49 राजकीय महाविद्यालयों में परास्नातक स्तर पर कला, विज्ञान एवं वाणिज्य संकाय के विषयों के लिए प्रवक्ता के 98 पदों तथा 12 राजकीय महाविद्यालयों में स्नातक स्तर पर वाणिज्य संकाय के विषयों के लिए प्रवक्ता के 24 पदों को पहली बार आउटसोर्सिंग से भरे जाने की मंजूरी दी है।


    विशेष सचिव उच्च शिक्षा योगेश दत्त त्रिपाठी ने 12 फरवरी को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज को इस संबंध में आदेश भेजे हैं। ये पद तभी भरे जाएंगे जब राजकीय महाविद्यालय संचालित होने की स्थिति में होंगे। आउटसोर्सिंग से भरे जाने वाले पदों के लिए सेवा प्रदाता एजेंसी का चयन पारदर्शी तरीके से किया जाएगा। इन पदों को अस्थायी रूप से 28 फरवरी 2022 तक के लिए सृजित किया गया है।

    क्या कहते हैं नेता?
    शिक्षक विधायक और नेता शिक्षक दल विधान परिषद सुरेश कुमार त्रिपाठी ने कहा, 'आउटसोर्सिंग पर प्रवक्ता को रखना दुर्भाग्यपूर्ण निर्णय है। शिक्षा के लिए ये व्यवस्था ठीक नहीं है। शिक्षा को एक प्रकाश से निजी हाथों में सौंपने का उपक्रम शुरू हो गया है।'


    चतुर्थ से तृतीय श्रेणी में प्रमोशन के लिए परीक्षा 14 मार्च को
    राजकीय महाविद्यालय, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालय, पुस्तकालयाध्यक्ष, राजकीय पब्लिक लाइब्रेरी में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तृतीय श्रेणी में पदोन्नति के लिए परीक्षा 14 मार्च को होगी। परीक्षा हेमवती नंदन बहुगुणा राजकीय पीजी कॉलेज नैनी में होगी।


    Sunday, February 21, 2021

    अभिभावकों के खाते में जाएगी बेसिक स्कूल के बच्चों को मिलने वाली राशि, बोले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री

    अभिभावकों के खाते में जाएगी बेसिक स्कूल के बच्चों को मिलने वाली राशि, बोले बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री


    सिद्धार्थनगर । प्रदेश के बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि योगी सरकार परिषदीय स्कूलों की सूरत और तस्वीर बदलने के लिए प्रयासरत है। आगामी 31 मार्च 2022 तक सूबे के सभी विद्यालयों को फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, दिव्यांग बच्चों के लिए रैंप का निर्माण एवं प्लेग्राउंड की सुविधाओं से लैस करने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा बच्चों पर खर्च होने वाली धनराशि अब अभिभावकों के खाते में भेजी जाएगी।


    बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. सतीश द्विवेदी शनिवार को मुख्यालय पर पुनर्निर्माण के लिए चयनित विद्यालयों के शिलान्यास अवसर को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि कायाकल्प के तहत स्कूलों को आदर्श बनाने की कोशिश हो रही है। अब तक टाइल्स, फर्श की मरम्मत, बाला बेटिंग, बाउंड्रीवाल आदि के माध्यम से विद्यालयों में बेहतर शिक्षा का माहौल बनाने में सफलता मिली है। 


    31 मार्च 2022 तक एक भी स्कूल नहीं बचेगा, जहां फर्नीचर, स्मार्ट क्लास, रैंप, प्लेग्राउंड की सुविधा न हो। इसके लिए सीएम की अध्यक्षता में कार्ययोजना तैयार की जा रही है। भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि बच्चों को मिल रहे ड्रेस, जूता-मोजा, स्वेटर की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहते हैं। 


    इन बिंदुओं पर प्रभावी नियंत्रण करने के लिए योगी सरकार ने बच्चों पर खर्च होने वाली समस्त धनराशि का भुगतान अब अभिभावकों के बैंक खाते में भेजने का भी निर्णय लिया है। इस दिशा में अभिभावकों के बैंक खाते का अपडेशन कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है।

    हाथरस : सामुदायिक सहयोग से परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट टीवी / कंप्यूटर प्रोजेक्टर उपलब्ध कराए जाने के सम्बन्ध में प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी

    हाथरस : सामुदायिक सहयोग से परिषदीय विद्यालयों में स्मार्ट टीवी / कंप्यूटर प्रोजेक्टर उपलब्ध कराए जाने के सम्बन्ध में प्रस्ताव आमंत्रित करने हेतु प्रेस विज्ञप्ति जारी



    श्रमिकों के बच्चों के लिए सीबीएसई पैटर्न पर 18 अटल आवासीय विद्यालय बनवाएगी योगी सरकार

    श्रमिकों के बच्चों के लिए सीबीएसई पैटर्न पर 18 अटल आवासीय विद्यालय बनवाएगी योगी सरकार 


    श्रम एवं सेवायोजन मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा है कि राष्ट्र निर्माण करने वाले श्रमिकों के उज्जवल भविष्य की पूरी व्यवस्था सरकार कर रही है। इनके बच्चों का पूरा खर्च भी श्रम विभाग वहन कर रहा है। सरकार के प्रयासों से मजदूरों के जीवन में बदलाव आएगा। श्रमिकों के बच्चों की पढ़ाई-लिखाई अच्छी हो और उनका भविष्य उज्जवल हों, इसके लिए प्रदेश सरकार हर मण्डल में एक-एक अटल आवासीय विद्यालय बना रहा है, जहां पर बच्चों को पढ़ाई-लिखाई, रहने व खाने की व्यवस्था मुफ्त होगी। श्रमिक चाहें जहां भी काम करें, उन्हें अब अपने बच्चों की चिन्ता नही होगी।


    श्रम मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के बच्चों एवं अनाथ बच्चों को बेहतर तथा निःशुल्क शिक्षा, आवास एवं भोजन उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक मण्डल में अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना कर रही है। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों को नवोदय विद्यालय की तर्ज पर विकसित किया जाएगा तथा यहां पर इन बच्चों को सीबीएसई पैटर्न की शिक्षा दी जाएगी। 


    इन विद्यालयों में उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों के 1000 बच्चों के लिए प्रत्येक विद्यालय में रहने, खाने एवं पढ़ाई तथा खेलकूद की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने बताया कि इन विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक की निःशुक्ल आवासीय शिक्षा प्रदान की जाएगी। इन विद्यालयों का निर्माण 12 से 15 एकड भूमि पर कराया जायेगा, तथा इस विद्यालयों का संचालन श्रम विभाग द्वारा किया जाएगा।

    फतेहपुर : शिक्षक संगठन तमाम; पर लटके हैं बेसिक शिक्षकों के कई काम

    फतेहपुर : शिक्षक संगठन तमाम; पर लटके हैं बेसिक शिक्षकों के कई काम


    नहीं हो रहे अब भी यह काम

    ▪️एक दशक बाद भी प्राथमिक सहायक शिक्षकों का प्रमोशन नहीं

    ▪️सैकड़ों शिक्षकों का वेतन बकाया अब भी बांकी शैक्षिक अभिलेखों के सत्यापन में नहीं दिखी तेजी। 

    ▪️प्रत्येक माह शिक्षकों को नहीं दी जाती वेतन पर्ची

    ▪️पेंशन, जीपीएफ एवं एनपीएस सम्बन्धी समस्याएं भी बरकरार 

    ▪️संख्या बल अधिक होने के बावजूद माशिसं से कमतर है बेसिक संघ 

    ▪️परिषदीय शिक्षकों को विधान परिषद में प्रतिनिधित्व की मांग

    फतेहपुर : जिले में यूं तो शिक्षकों के कई संगठन हैं लेकिन शिक्षकों की समस्याएं विभिन्न मसलों पर जस की तस बनी हुई हैं। वेतन, एरियर, प्रमोशन जैसे कई मामलों पर संगठन शिक्षकों की मांग को पूरी नहीं करा सकें। सूत्र बताते हैं कि ये संगठन शिक्षकों की समस्याओं को लड़ने की बजाए अपने वर्चस्व की जंग लड़ते हैं।


    जिले में इस समय प्राथमिक शिक्षक संघ के अलावा जूनियर संघ, अटेवा संघ, और राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जैसे शिक्षक संगठन हैं जो बेसिक शिक्षा विभाग के अधीन सेवारत शिक्षकों की समस्याओं के लिए संघर्ष करने का जिम्मा संभाले हुए हैं। अटेवा ने पुरानी पेंशन के लिए जंग छेड़ी है तो वहीं दूसरे संगठन भी स्थानीय स्तर पर वेतन और एरियर के लिए संघर्ष का दावा कर रहे हैं। पिछली शिक्षक भर्तियों के अधीन सेवारत शिक्षकों का वेतन बकाया न मिलना, ससमय सत्यापन न होना और दशक बीतने के बावजूद प्राथमिक सहायक शिक्षकों का प्रमोशन न होना संगठनों को कटघरे में खड़ा कर रहा है।

    ज्ञापनों का नहीं मिल सका अब तक फायदा : बीते समय में शिक्षक संगठनों ने अधिकारियों को कई ज्ञापन सौंपे है लेकिन धरातल पर इसका लाभ होता नहीं दिख रहा है।

    बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति

    बीएड - डीएलएड 2021: बीएड के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने व फीस भरपाई की मंजूरी, डीएलएड सत्र शून्य होने के कारण नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति
    BEd- BTC Scholorship and Fees Refund 2021



    प्रदेश के बी.एड.पाठ्यक्रम में अध्ययनरत गरीब व जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। प्रदेश सरकार ने बी.एड.और बी.टी.सी. की सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई के मामले में इन पाठ्यक्रमों को संचालित करने वाली शिक्षण संस्थाओं की जांच करने के आदेश दिये थे।


    इसके लिए पिछले साल अक्तूबर में अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में एक राज्य स्तरीय जांच कमेटी भी गठित की गयी थी मगर बीती 16 फरवरी को शासन से एक आदेश जारी करके इस राज्य स्तरीय कमेटी को निरस्त कर दिया गया और उसके स्थान पर जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की गयी जिसमें जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी और सम्बंधित उप जिलाधिकारी को सदस्य बनाया गया।


    इस जांच कमेटी को अपनी आठ बिन्दुओं पर जांच रिपोर्ट आगामी 10 मार्च को शासन को सौंपने के निर्देश दिये गये थे। मगर अब इस समय सीमा को घटाकर 26 फरवरी तक कर दिया गया है। 26 फरवरी तक समाज कल्याण निदेशालय और शासन को यह जांच रिपोर्ट जिलों से मिल जाएगी, उसके बाद जांच रिपोर्ट में जो शिक्षण संस्थाएं बी.एड., बी.टी.सी. व अन्य पाठ्यक्रमों छात्रवृत्ति तथा फीस भरपाई के फर्जीवाड़े में लिप्त पायी जाएंगी उन्हें छोड़कर बाकी अन्य सभी शिक्षण संस्थाओं के बी.एड.के पाठ्यक्रमों के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।


    चूंकि कोरोना संकट की वजह से मौजूदा शैक्षिक सत्र में बीटीसी का सत्र शून्य कर दिया गया है इसलिए बीटीसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति व फीस भरपाई नहीं दी जाएगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के छात्रवृत्ति अनुभाग से जुड़े अधिकारियों से मिली है। बी.एड.पाठ्यक्रम के छात्र-छात्राओं को प्रथम वर्ष 51 हजार 250 रूपये, और 30 हजार द्वितीय वर्ष में बतौर फीस भरपाई दी जाती है इसके अलावा हर साल दो वर्ष के इस पाठ्यक्रम में हर साल लगभग 9 हजार रूपये की छात्रवृत्ति मिलती है।


    2019-20 के शैक्षिक सत्र में समाज कल्याण विभाग से बी.एड.पाठ्यक्रम के 1लाख 12 हजार और सामान्य वर्ग 15 हजार 875 छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई का लाभ दिया गया था जिस पर अनुसूचित जाति के बच्चों पर 442 करोड़ और सामान्य वर्ग के बच्चों पर 45.86 करोड़ रूपये का व्यय आया था। पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग ने भी पिछले शैक्षिक सत्र में करीब 80 हजार अल्पसंख्यक छात्र-छात्राओं को बी.एड.पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ दिया था।

    पदोन्नति न मिलने की हताशा में कार्यवाहक / प्रभारी प्रधानाध्यापक का पद छोड़ने लगे बेसिक शिक्षक

    पदोन्नति न मिलने की हताशा में कार्यवाहक / प्रभारी प्रधानाध्यापक का पद छोड़ने लगे बेसिक शिक्षक



    प्रयागराज : 12 साल से प्रमोशन न मिलने से हताश शिक्षकों ने कार्यवाहक प्रधानाध्यापक पद से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय लक्षन का पूरा मेजा की कार्यवाहक प्रधानाध्यापिका परमजीत कौर ने खंड शिक्षाधिकारी को पद से इस्तीफा भेजते हुए सहायक अध्यापिका के पद पर कार्य करने की इच्छा जताई है। उनका कहना है कि प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से वह इंचार्ज हेडमास्टर के पद से इस्तीफा दे रहीं हैं।


    प्रयागराज में 9 फरवरी 2009 के बाद नियुक्त शिक्षकों का प्रमोशन नहीं हुआ है। जिसके चलते सैकड़ों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के सहारे चल रहा है। अफसर वरिष्ठता के आधार पर शिक्षकों को कार्यवाहक की जिम्मेदारी सौंप दे रहे हैं, भले ही उनकी इच्छा हो या नहीं। सरकार की सभी योजनाओं का क्रियान्वयन करने के साथ ही स्कूल में सफाई से लेकर बच्चों के प्रवेश, शिक्षकों की उपस्थिति आदि खुद देखना पड़ता है।


    बच्चों के खाते में मिड-डे-मील की कन्वर्जन कास्ट पहुंचाने से लेकर यूनिफॉर्म सिलाने और जूता, मोजा, बैग, किताबें बांटने का काम प्रधानाध्यापक का है। कार्यवाहक को प्रधानाध्यापक का वेतन न मिलने से बड़ी संख्या में शिक्षक इस जिम्मेदारी को उठाना नहीं चाहते।


    इनका कहना है

    शिक्षक को दंड तो कार्यवाहक प्रधानाध्यापक का मिलता है लेकिन वेतन या अन्य कोई लाभ उस पद का नहीं दिया जाता। जबकि माध्यमिक विद्यालयों में कार्यवाहक प्रधानाचार्य को इंक्रीमेंट तक मिलता है। जो शिक्षक कार्यवाहक पद छोड़ने का निर्णय ले रहे हैं, वह स्वागत योग्य है। - देवेन्द्र श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष प्राथमिक शिक्षक संघ

    हाथरस : कस्तूरबा विद्यालयों में शिक्षक व गैर शैक्षणिक पदों पर नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति निर्गत

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