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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, January 16, 2026

    परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

    परिषदीय शिक्षकों ने प्रथम नियुक्ति से मांगी वरिष्ठता

    स्थानांतरण मिलने पर नए विद्यालय में हो जाते हैं कनिष्ठ।

    इस कारण पदोन्नति मिलने के लाभ से हो जाते हैं वंचित।


    प्रयागराजबेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में दूर-दराज के क्षेत्रों में कार्यरत शिक्षक समय-समय पर जिले के बाहर यानी अंतरजनपदीय स्थानांतरण पाकर घर के नजदीक पहुंचने का मौका तो मिलता है, लेकिन वह वरिष्ठता के लाभ से वंचित हो जाते हैं। स्थानांतरण के क्रम में जिस विद्यालय में वरिष्ठता मिलती है, वहां सबसे कनिष्ठ हो जाते हैं। क्योंकि पदोन्नति मिलने की प्रक्रिया में सबसे नीचे हो जाते हैं। वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति उन्हें मिलेगी जो विद्यालय में सबसे पहले से होंगे।


    शिक्षकों ने मांग उठाई है कि वरिष्ठता का निर्धारण उनकी पहली नियुक्ति तिथि से किया जाए। बड़ी संख्या में ऐसे महिला और पुरुष शिक्षक हैं, जो अध्यापन सेवा में पहले नियुक्त हुए, लेकिन स्थानांतरण लेकर घर के नजदीक आने के कारण कनिष्ठ हो गए। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था से उन शिक्षकों को नुकसान है, जो स्थानांतरण मिलने के बाद दूसरे जिले के विद्यालय में नियुक्त होते हैं।

    नियुक्ति मिलने के समय ही तय हो कि जब नियुक्ति प्रदेश स्तर पर होती है और स्थानांतरण भी प्रदेश स्तर पर मिलता है तो वरिष्ठता भी मौलिक नियुक्ति तिथि से निर्धारित होनी चाहिए, न कि स्थानांतरित होकर दूसरे विद्यालय में जाने की तिथि से।

    बताया गया कि वर्ष 47,000 शिक्षकों का स्थानांतरण उनके पसंद के जनपद में भेजा गया। इसमें एक बार करीब 27,000 तथा एक और बार करीब 20,000 शिक्षकों के स्थानांतरण हुए। यह शिक्षक नए विद्यालय में सबसे कनिष्ठ हो गए। इसके कारण पदोन्नति की प्रक्रिया में सबसे नीचे रहने के कारण लाभ से वंचित हो जाएंगे। इस व्यवस्था को बदलकर पहली नियुक्ति तिथि से वरिष्ठता निर्धारित किए जाने की मांग सरकार से की गई है।

    हवाई जहाज से वैज्ञानिक संस्थानों के भ्रमण पर जाएंगे मेधावी छात्र, राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 बच्चें शिक्षकों के साथ बंगलूर, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद व गांधीनगर का करेंगे भ्रमण

    हवाई जहाज से वैज्ञानिक संस्थानों के भ्रमण पर जाएंगे मेधावी छात्र, राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 बच्चें शिक्षकों के साथ बंगलूर, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद व गांधीनगर का करेंगे भ्रमण 


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के सपनों को ऊंची उड़ान मिलेगी। वे देश के प्रमुख राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों का भ्रमण करेंगे। यहां पर वे अंतरिक्ष विज्ञान, रॉकेट, रोबोटिक्स आदि से जुड़ी चीजों की बारीक जानकारी लेंगे। बच्चे जो चीजें किताबों में पढ़ रहे हैं, उसे पास से देखेंगे और समझेंगे भी। इस बार राष्ट्रीय अविष्कार अभियान के तहत पहली बार वे यात्रा पर हवाई जहाज से जाएंगे।


    बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के चयनित 150 बच्चे व शिक्षक बेंगलुरु, श्रीहरिकोटा, अहमदाबाद, गांधीनगर का चार दिन का भ्रमण करेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार की प्रोजेक्ट एडवाइजरी बोर्ड ने आवश्यक बजट पर मुहर लगाई है। विभाग की ओर से योजना के तहत हर जिले से दो छात्र-छात्रा व उनके साथ शिक्षकों को फरवरीं में इस एक्सपोजर विजिट कराने के निर्देश दिए हैं। इन छात्रों का चयन जिला स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी में पहला व दूसरा स्थान पाने वाले मॉडलों के आधार पर किया जाएगा।

    इस यात्रा का उद्देश्य छात्र-छात्राओं में न सिर्फ वैज्ञानिक जिज्ञासा व अनुभवात्मक शिक्षण को प्रोत्साहित करना है। साथ ही इसके माध्यम से उनमें विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग व गणित का व्यावहारिक अनुभव देना भी है। इसके साथ ही बच्चों को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार करना भी है। ताकि वे इस क्षेत्र में भी अपना कॅरियर बनाने के लिए प्रेरित हों।

    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया है कि यह भ्रमण मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के समन्वय में होगी। इसमें विज्ञान विषय के शिक्षक, मेंटर व खंड शिक्षा अधिकारी भी शामिल होंगे। इनका चयन मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक करेंगे। 


    मंडलवार होगा बच्चों का चयन

    एडी बेसिक बरेली के तहत 24, एडी बेसिक वाराणसी के तहत 22, एडी बेसिक गोरखपुर के तहत 20, एडी बेसिक मुरादाबाद के तहत 28, एडी बेसिक कानपुर के तहत 24, एडी बेसिक झांसी के तहत 14, एडी बेसिक अयोध्या के तहत 18 कुल 150 छात्र-छात्रा यात्रा में शामिल होंगे। इसमें अलीगढ़, आगरा, बरेली, प्रयागराज, विंध्याचल व वाराणसी के छात्र बंगलूरू, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्ती, मुरादाबाद, सहारनपुर व मेरठ के बच्चे श्रीहरिकोटा जाएंगे। जबकि लखनऊ, कानपुर, झांसी, चित्रकूट, अयोध्या वं देवीपाटन के बच्चे अहमदाबाद, गांधीनगर जाएंगे।

    मेरिट आधारित चयन हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों की 10 वर्षों की गोपनीय प्रविष्टियाँ मानव सम्पदा पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किये जाने के सम्बन्ध में

    मेरिट आधारित चयन हेतु अधिकारियों/कर्मचारियों की 10 वर्षों की गोपनीय प्रविष्टियाँ मानव सम्पदा पोर्टल पर ऑनलाइन अपलोड किये जाने के सम्बन्ध में


    जाड़े की छुट्टियों के बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, सत्र परीक्षा व निपुण आकलन में जुटेंगे

    गुरुजी पढाएंगे तो ही तो निपुण बनेंगे बच्चे, 27 जनवरी से होगा निपुण एसेसमेंट और शिक्षक एसआईआर व बीएलओ की ड्यूटी कर रहे


    लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों अधिसंख्य शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशक नवम्बर से एसआईआर और पंचायत बीएलओ के काम में लगे हैं। एक शिक्षक के भरोसे किसी तरह 10 से 16 दिसम्बर की बीच अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं हुईं। तब से अब तक सिर्फ नौ दिन स्कूल खुले हैं। शीतलहर व सर्दी के चलते 29 दिसम्बर से स्कूलों में लगातार अवकाश है। अब स्कूल 16 जनवरी को खुलेंगे।

    शिक्षकों के अनुसार इस दौरान कक्षाएं नहीं चलने से बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ है। न ही बच्चों को निपुण एसेसमेंट के लिये भाषा व गणित की तैयारी कराई गई है। 24 जनवरी से द्वितीय सत्र परीक्षा और 27 जनवरी से निपुण एसेसमेंट कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। इसको लेकर शिक्षकों में भारी आक्रोश है।

    प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में पहली से पांचवी के बच्चों की हिन्दी और गणित की दक्षता जांचने के लिए निपुण एसेसमेंट इसी माह होना है। डीएलएड प्रशिक्षु 27 जनवरी से स्कूलों में जाकर बच्चों निपुण लक्ष्य ऐप के माध्यम से ऑनलाइन आकलन करेंगे। लखनऊ के 1249 प्राइमरी स्कूलों में निपुण निपुण एसेसमेंट होना है।


    बिना पाठ्यक्रम पूरा हुए 24 जनवरी से सत्र परीक्षा
    प्राइमरी स्कूलों में 24 से 31 जनवरी के बीच द्वितीय सत्र परीक्षा होनी है। परीक्षा कार्यक्रम बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने आठ जनवरी को जारी किया था। शिक्षकों का कहना है कि अर्द्ध परीक्षा खत्म होने के बाद सिर्फ नौ दिन स्कूल खुले हैं लेकिन शिक्षकों के एसआईआर में लगे होने से पाठ्यक्रम पूरा नहीं हुआ।

    "नवम्बर से अधिकांश शिक्षक एसआईआर और पंचायत बीएलओ के काम में लगे हैं। दिसम्बर में अर्धवार्षिक परीक्षा खत्म हुई। फिर अवकाश, स्कूल खुलने के बाद सत्र परीक्षा, निपुण आकलन इत्यादि, बिना बच्चों की नियमित पढ़ाई के कैसे होगा? इस विषय पर विभाग को जरूर सोचना चाहिए।
    - विनय सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


     


    जाड़े की छुट्टियों के बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, सत्र परीक्षा व निपुण आकलन में जुटेंगे

    जाड़े की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने पर 24 से सत्रीय परीक्षाएं होंगी शुरू

    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय - विद्यालय जाड़े की छुट्टियों के बाद 16 जनवरी शुक्रवार से खुल रहे हैं। हालांकि प्रयागराज में 20 तक स्कूल - बंद रहेंगे। स्कूल खुलने के साथ ही - एक साथ विद्यालयों में दो महत्वपूर्ण - गतिविधियां सत्रीय परीक्षाएं व विद्यालयों का निपुण आकलन शुरू होना है। हालांकि अभी भी काफी - शिक्षक एसआईआर में फंसे हुए हैं। ऐसे में स्कूलों के लिए एक साथ दोनों काम कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक जाड़े की छुट्टियां थीं। जबकि 15 जनवरी को मकर संक्रांति का सार्वजनिक अवकाश घोषित था। इस क्रम में शुक्रवार से विद्यालय खुल रहे हैं। स्कूल खुलने के साथ ही 24 जनवरी से विद्यालयों में सत्रीय परीक्षाएं शुरू होंगी। परीक्षाएं 31 जनवरी तक आयोजित की जाएंगी। इसके लिए बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से विस्तृत निर्देश जारी किया जा चुके हैं।

    हालांकि इसमें यह राहत दी गई है कि परीक्षा दिसंबर तक पढ़ाए गए कोर्स के आधार पर ही आयोजित की जाएगी। इसके लिए विद्यालय स्तर पर पेपर बनाकर परीक्षा कराई जाएगी। जबकि शिक्षकों के एसआईआर के काम में फंसे होने से दिसंबर में भी काफी जगह पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित रही है। इसी बीच शिक्षकों के जिलों में समायोजन की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

    शुक्रवार से स्कूल खुलने पर इसका भी असर देखने को मिलेगा। दूसरी तरफ 27 जनवरी से विद्यालयों का निपुण आकलन भी शुरू कर दिया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने फरवरी तक सभी विद्यालयों का डीएलएड प्रशिक्षुओं के माध्यम से निपुण आंकलन कराने का विस्तृत निर्देश जारी कर रखा है। विभाग ने इसके लिए आवश्यक बजट भी जारी कर दिया है। इस तरह जाड़े की छुट्टियों के बाद खुल रहे स्कूलों में काफी हलचल रहेगी।


    शीतकालीन अवकाश के बाद आज से खुलेंगे परिषदीय स्कूल, खुलते ही निपुण आकलन और सत्र परीक्षा का दौर होगा शुरू 

    लखनऊः शीतकालीन अवकाश के बाद शुक्रवार से प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालय खुलेंगे। ठंड को देखते हुए फिलहाल स्कूलों का संचालन सुबह नौ बजे से अपराह्न तीन बजे तक किया जाएगा। स्कूल खुलते ही शिक्षण कार्य के साथ-साथ आगामी परीक्षाओं की तैयारियों पर विशेष जोर दिया जाएगा। हालांकि कुछ जिलों में ठंड के चलते जिला प्रशासन ने अभी अवकाश घोषित किया है।

    परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में शैक्षिक सत्र 2025-26 की द्वितीय सत्रीय परीक्षा 24 जनवरी से 31 जनवरी के बीच आयोजित की जाएगी। ऐसे में विद्यालयों को निर्देश दिए गए हैं कि बच्चों को परीक्षा के अनुरूप पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति कराई जाए और उनकी तैयारी को अंतिम रूप दिया जाए। सत्रीय परीक्षा के परिणामों के आधार पर जिन छात्र-छात्राओं का अपेक्षित परिणाम नहीं होगा, उनके लिए विशेष शिक्षण व्यवस्था की जाएगी। कक्षा स्तर पर ऐसे बच्चों की पहचान कर विषयवस्तु को सरल तरीके से दोहराया जाएगा, अतिरिक्त अभ्यास कराया जाएगा और उनकी सीखने की कमी को दूर करने पर फोकस किया जाएगा।

     बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, परीक्षा केवल मूल्यांकन का माध्यम नहीं होगी, बल्कि इसके जरिये बच्चों की शैक्षिक स्थिति का आकलन कर गुणवत्ता सुधार की रणनीति पर काम किया जाएगा। शिक्षकों को निर्देशित किया गया है कि वे कक्षा में व्यक्तिगत ध्यान देते हुए कमजोर विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

    विद्यालय खुलने के साथ ही उपस्थिति बढ़ाने, नियमित पठन-पाठन सुनिश्चित करने और बच्चों को सुरक्षित व अनुकूल वातावरण देने पर भी जोर दिया गया है। ठंड के मद्देनजर स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक सावधानियां बरतने के निर्देश भी विद्यालयों को दिए गए हैं।

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक माध्यमिक संस्थाओं में रिक्त पदों की उपलब्ध करायी गयी त्रुटिपूर्ण सूचना के सापेक्ष त्रुटिरहित सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।

    रोस्टर के आधार पर आरक्षण निर्धारित कर मांगी शिक्षक पदों की रिक्तियां, 16 एवं 17 जनवरी कों शिक्षा निदेशालय में बुलाए गए प्रदेश भर के डीआइओएस

    प्रयागराज : एडेड माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती के लिए शिक्षा निदेशालय को जो रिक्तियां जनपदों से मिली हैं, उसमें से कुछ जिलों से मिली रिक्तियों में आरक्षण की गणना राउंडअप के हिसाब की गई है, जबकि 2019 के शासनादेश में रोस्टर व्यवस्था लागू की जा चुकी है। इसके बावजूद कई जनपदों की रिक्तियों में आरक्षण का निर्धारण पुरानी व्यवस्था राउंडअप से किए जाने पर पदों की संख्या घट बढ़ गई है। ऐसे में रोस्टर के आधार आरक्षण का निर्धारण कर रिक्तियों का परीक्षण कर नए शासनादेश के क्रम में ईडब्ल्यूएस का भी आरक्षण निर्धारित कर रिक्तियां उपलब्ध कराने के निर्देश प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआइओएस) को दिए गए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से डीआइओएस को भेज पत्र में उप शिक्षा निदेशक (माध्यमिक 2) डा. ब्रजेश मिश्रा ने कहा है कि जिला किसी पूर्व में निदेशालय को भेजे गए रिक्त पदों का परीक्षण 13 अगस्त 2019 के शासनादेश के अनुसार रोस्टर प्रणाली के अनुसार किया जाए। इसमें मिली त्रुटियों को ठीक करके नवीन सूचना 16 एवं 17 जनवरी को विद्यालय निरीक्षक स्वयं या क्लास 2 अधिकारी और सहायक को निदेशालय भेजकर उपलब्ध कराया जाना सुनिश्चित करें, ताकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का पोर्टल लाइव होने पर पदों का विवरण फीड किया जा सके। इसके पहले शिक्षा निदेशालय को प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी), प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी), सहायक अध्यापक (संबद्ध प्राइमरी) को मिलाकर 23,213 पदों का अधियाचन मिल चुका है।



    एडेड कॉलेजों का मामला, शिक्षकों और प्रधानाचार्य के 23213 रिक्त पदों की मिली जानकारी

    एडेड कालेजों में शिक्षकों के रिक्त पद भेजने में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं,  त्रुटिरहित सूचना पुनः भेजने के निर्देश

    प्रयागराज । प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षिक स्नातक (सहायक अध्यापक या टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) के रिक्त पदों की सूचना भेजने में आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं किया गया।

    सभी 75 जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों की ओर से भेजे गए 23213 पदों में गड़बड़ी मिलने पर शिक्षा निदेशालय ने 16-17 जनवरी तक त्रुटिरहित सूचना भेजने के निर्देश दिए हैं। उपशिक्षा निदेशक (माध्यमिक-2) डॉ. ब्रजेश मिश्र ने सभी डीआईओएस को निर्देशित किया है कि 13 अगस्त 2019 के शासनादेश में लागू रोस्टर प्रणाली के अनुसार, आरक्षण की गणना करते हुए निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराएं। 2019 के शासनादेश में आर्थिक रूप से पिछड़े (ईडब्ल्यूएस) वर्ग का आरक्षण लागू होने के बाद रोस्टर प्रणाली में संशोधन किया गया था।




    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक माध्यमिक संस्थाओं में रिक्त पदों की उपलब्ध करायी गयी त्रुटिपूर्ण सूचना के सापेक्ष त्रुटिरहित सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।


    सर्वोदय विद्यालयों में लागू होगी सर्वश्रेष्ठ बोर्डिंग स्कूलों की कार्यप्रणाली, समाज कल्याण विभाग व बोर्डिंग स्कूल्स एसोसिएशन आफ इंडिया के बीच होगा समझौता

    सर्वोदय विद्यालयों में लागू होगी सर्वश्रेष्ठ बोर्डिंग स्कूलों की कार्यप्रणाली, समाज कल्याण विभाग व बोर्डिंग स्कूल्स एसोसिएशन आफ इंडिया के बीच होगा समझौता 

    सर्वोदय स्कूलों के प्राचार्यों और शिक्षकों की एक टीम करेगी इन स्कूलों का शैक्षिक भ्रमण

     लखनऊः जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में अब देश के प्रतिष्ठित और सर्वश्रेष्ठ बोर्डिंग स्कूलों की कार्यप्रणालियों को किया जाएगा। इसके लागू लिए बोर्डिंग स्कूल्स एसोसिएशन आफ इंडिया (बीएसएआइ) के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर समाज कल्याण विभाग और हस्ताक्षर भी होगा। इससे सर्वोदय विद्यालयों की शिक्षा के साथ उनकी आवासीय व्यवस्था भी और अधिक बेहतर होगी। समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने गुरुवार को देहरादून स्थित द दून स्कूल में बीएसएआइ से जुड़े बोर्डिंग स्कूलों के प्राचार्यों के साथ हुई बैठक में यह जानकारी साझा की।


    असीम अरुण ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य सर्वश्रेष्ठ बोर्डिंग स्कूलों के सफल अनुभवों को सर्वोदय विद्यालयों तक पहुंचाना है। वहां की प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था, छात्र कल्याण, अनुशासन, पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों और छात्रों के समग्र विकास से जुड़े माडल को सर्वोदय स्कूलों में भी अपनाया जाएगा।

    बोर्डिंग सुविधाओं को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से प्राचार्यों और शिक्षकों की एक टीम बीएसएआइ से जुड़े प्रतिष्ठित बोर्डिंग स्कूलों का शैक्षिक भ्रमण करेगी। वहां की शिक्षण पद्धति, छात्र देखभाल प्रणाली, छात्रावास प्रबंध और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को देखेगी, जिसके आधार पर सर्वोदय विद्यालयों के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा वर्ग के साथ अन्य वर्गों के छात्र-छात्राओं को निःशुल्क आवासीय सुविधा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए प्रदेश भर में 125 सर्वोदय विद्यालय का संचालन हो रहा है। नई एसओपी को सभी सर्वोदय विद्यालयों में लागू किया जाएगा।

    Thursday, January 15, 2026

    बेसिक शिक्षा विभाग और परिषदीय शिक्षकों की मौलिक समस्याओं का समाधान किये जाने के सम्बन्ध में RSM ने महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन

    समायोजन-3 की गड़बड़ियों का जिला स्तर पर ही होगा समाधान
     
    लखनऊ। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्राथमिक संवर्ग) ने परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के तीसरे चरण के समायोजन में जिला स्तर पर हुई गड़बड़ियों के संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी से मुलाकात की। उन्हें आश्वासन मिला कि जिला स्तर पर गठित समिति के माध्यम से आपत्तियों का समाधान किया जाएगा।

    महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवशंकर सिंह के नेतृत्व में पदाधिकारियों ने बताया कि माध्यमिक शिक्षकों को शत-प्रतिशत प्रोन्नत वेतनमान मिलता है, जबकि परिषदीय शिक्षकों में मात्र 20 प्रतिशत को यह लाभ मिला है। महानिदेशक ने परिषदीय शिक्षकों को भी शत प्रतिशत प्रोन्नत वेतनमान दिलाने का प्रयास करने का आश्वासन दिया।

    प्रदेश महामंत्री प्रदीप तिवारी ने कंपोजिट ग्रांट से सिम रिचार्ज के नाम पर की जा रही अनियमितताओं पर प्रकाश डाला, जिसमें 2500 से 4000 रुपये तक की कटौती की गई है, यहां तक कि उन विद्यालयों से भी कटौती हुई है जहां सिम उपलब्ध नहीं कराए गए। इस पर महानिदेशक ने समीक्षा के बाद जांच का भरोसा दिलाया।

    प्रतिनिधिमंडल ने विद्यालयों की संचालन अवधि को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) और आरटीई मानकों के अनुसार करने, हॉफ डे लीव, प्रतिवर्ष 31 ईएल, वरिष्ठता के आधार पर अंतर जिला तबादले, जिले के अंदर तबादले के लिए स्थाई नीति, कक्षावार व विषयवार शिक्षक नियुक्ति, गैर-शैक्षणिक कार्यों से शिक्षकों को मुक्त करने और प्रतिकर अवकाश जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाया। 


    बेसिक शिक्षा विभाग और परिषदीय शिक्षकों की मौलिक समस्याओं का समाधान किये जाने के सम्बन्ध में RSM ने महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन
     


    नयी पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के नामिनी द्वारा पारिवारिक पेंशन का विकल्प लिये जाने पर प्रान खाते के जमा धनराशि की सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।

    नयी पेंशन योजना से आच्छादित दिवंगत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के नामिनी द्वारा पारिवारिक पेंशन का विकल्प लिये जाने पर प्रान खाते के जमा धनराशि की सूचना उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।



    अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से प्रदेश में स्थापित होंगी 284 अटल टिंकरिंग लैब, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में बनेंगी, विज्ञान में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा

    अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से प्रदेश में स्थापित होंगी 284  अटल टिंकरिंग लैब, राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में बनेंगी, विज्ञान में नवाचार को मिलेगा बढ़ावा


    लखनऊ : युवाओं की कल्पनाओं को नई उड़ान देने के लिए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से अटल टिंकरिंग लैब की स्थापना होगी। नवाचार और उनकी वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने के लिए स्थापित होने वाली लैब प्रदेश के 284 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित होगी।


    अटल इनोवेशन मिशन के तहत खुलने वाली लैब से हाई स्कूल के छात्रों में रचनात्मकता विकसित होगी। विद्यार्थियों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में व्यावहारिक और प्रयोगात्मक शिक्षा के प्रति लगाव बढ़ेगा।  राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को हाईटेक लैब उपलब्ध कराने की श्रृंखला में प्रदेश के 284 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को अटल टिंकरिंग लैब स्थापित करने की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

     प्रत्येक चयनित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के तीन शिक्षकों को अटल टिंकरिंग लैब को संचालित करने के लिए अटल टिंकरिंग लैब सेवा प्रदाता द्वारा विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। 


    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर

    शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक


    लखनऊ । हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

    कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

    कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। 



    Wednesday, January 14, 2026

    माता-पिता के देहावसान पर 'अंतिम संस्कार अवकाश' स्वीकृत करने के संबन्ध में माध्यमिक शिक्षक संघ का ज्ञापन

    माता-पिता के देहावसान पर 'अंतिम संस्कार अवकाश' स्वीकृत करने के संबन्ध में माध्यमिक शिक्षक संघ का gyapan 


    छठी से आठवीं तक पढ़ाने वाले टेट या सीटेट क्वालीफाई हैं या नहीं, एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की संख्या और उनकी योग्यता की जानकारी मांगी

    बिना टीईटी जीआइसी के कक्षा छह से आठ तक में पढ़ा रहे, एलटी भर्ती पर संकट

    प्रयागराज : राजकीय इंटर कालेज (जीआइसी) के लिए एक तरफ सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती की प्रक्रिया चल रही है, वहीं इनमें संचालित कक्षा छह से आठ तक में पढ़ाने के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीणं को अनिवार्य नहीं किए जाने का विरोध किया जा रहा है।

    भर्ती विज्ञापन के विरोध में जय हिंद यादव की ओर से दाखिल याचिका पर हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक से 21 जनवरी को यह जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है कि जीआइसी में कक्षा छह से आठ तक में पढ़ा रहे शिक्षकों की है। संख्या कितनी है और उनकी योग्यता क्या है। वह टीईटी या केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) उत्तीर्ण हैं या नहीं। इसमें प्रभावी पैरवी के लिए शिक्षा निदेशक डा. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी) से कक्षा छह से 12 तक में पढ़ा रहे शिक्षकों की जानकारी बुधवार 14 जनवरी तक मांगी है।

    याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे व अधिवक्ता संजय कुमार यादव पैरवी कर रहे हैं। संजय यादव ने बताया कि एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 की विषयवार परीक्षा चल रही है, लेकिन यह भर्ती कोर्ट के आदेश के अधीन है। एलटी ग्रेड भर्ती में अनिवार्य योग्यता में टीईटी को शामिल नहीं किया गया है। सरकार सीटी कैडर को नौ जनवरी 1992 को डाइंग घोषित करने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक से ही कक्षा छह से 10 तक में शिक्षण कार्य करा रही शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा छह से आठ तक में शिक्षण कार्य करने के लिए टीईटी अनिवार्य योग्यता है।

    इस संबंध में हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जो शिक्षक नियुक्त हैं और कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक है, लेकिन टीईटी उत्तीर्ण नहीं है। उन्हें दो वर्ष के अंदर टीईटी योग्यता अर्जित करना अनिवार्य है। याचिका पर 12 जनवरी को हुई सुनवाई में कोर्ट ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक से शिक्षकों के संबंध में जानकारी मांगी है। इस क्रम में शिक्षा निदेशक ने जानकारी उपलब्ध कराने के लिए 12 जनवरी को पत्र के साथ प्रारूप भी जारी किया है। यह सूचना adrajkiya@gmail.com पर मांगी गई है।



    छठी से आठवीं तक पढ़ाने वाले टेट या सीटेट क्वालीफाई हैं या नहीं, एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने शिक्षकों की संख्या और उनकी योग्यता की जानकारी मांगी

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को कक्षा छह से 10 तक के विद्यालय की संख्या और उन विद्यालयों में कक्षा छह से कक्षा आठ तक शिक्षण कार्य कर रहे शिक्षकों की संख्या तथा उनकी योग्यता की जानकारी मांगी है। यह भी पूछा है कि वे टेट या सीटेट क्वालीफाई हैं या नहीं।

    एडवोकेट संजय कुमार यादव ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कोर्ट ने यह जानकारी एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती 2025 के विज्ञापन को चुनौती देने वाली याचिका पर मांगी है। कोर्ट ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 21 जनवरी की तारीख लगाई है। याचियों के अधिवक्ता संजय कुमार यादव ने बताया की एलटी ग्रेड शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य योग्यता में टीईटी को शामिल नहीं किया गया है जो अनिवार्य योग्यता है।

    उनका कहना है कि सीटी कैडर को डाइंग कैडर घोषित करने के बाद सरकार कक्षा छह से दस तक का शिक्षण कार्य एलटी ग्रेड शिक्षक से ही करा रही है। जबकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत कक्षा छह से आठ तक के शिक्षण कार्य के लिए टेट एक अनिवार्य योग्यता है। 

    हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि जो शिक्षक पहले से नियुक्त हैं और जिनका कार्यकाल पांच वर्ष से अधिक है, वे दो वर्ष के भीतर टेट योग्यता प्राप्त कर अन्यथा सर्विस छोड़ कर दें। एडवोकेट संजय यादव का कहना है कि जो नए शिक्षक नियुक्त किए जा रहे हैं, बिना टीईटी योग्यता के ही नियुक्त किया जा रहे हैं।



    Tuesday, January 13, 2026

    मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक, प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

    मनमाने समायोजन पर हाईकोर्ट पहुंचे परिषदीय शिक्षक,  प्रयागराज और लखनऊ में दायर हुई याचिकाएं, किसी भी जिले में नियम का पालन नहीं

    प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में मनमाने समायोजन के खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। विभिन्न जिलों के शिक्षकों की ओर से प्रयागराज और लखनऊ बेंच में दाखिल याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है। कुछ जिलों में शिक्षामित्रों को भी शिक्षक मानते हुए समायोजन कर दिया गया, जिससे शिक्षकों में आक्रोश है।

    पिछले साल जून में पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे। उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी। दिसंबर अंत में तीसरे चरण के समायोजन में भी शिक्षकों से विकल्प नहीं लिया गया और मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में दाखिल याचिका में पिछली सुनवाई के बाद सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा गया है। इस मामले की सुनवाई मंगलवार को फिर होनी है।

    सचिव ने मंडलीय अफसरों से मांगी रिपोर्ट: बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने मंडलीय सहायक बेसिक शिक्षा निदेशकों से समायोजन की रिपोर्ट तलब की है।

    एक गलती सुधारने में और बड़ी भूल कर बैठे अफसर
    प्रयागराज। पहले चरण के समायोजन में की गई गलती सुधारने में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने और बड़ी गलती कर दी है। जून 2025 में समायोजन के दौरान बड़ी संख्या में स्कूल एकल हो गए थे। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिकाएं हुईं तो अफसरों ने समायोजन रद्द करते हुए शिक्षकों को वापस मूल विद्यालयों में भेजना शुरू कर दिया। इसके खिलाफ भी कुछ याचिकाएं कर दीं। मामला बिगड़ता देखकर अफसरों ने तीसरे चरण के समायोजन के आदेश जारी कर दिए। आरोप है है कि तीसरे चरण में नियम दरकिनार करते हुए अलग-अलग जिलों में बीएस ने मनमाने आदेश जारी कर दिए।



    नियम न कानून और परिषदीय शिक्षकों का कर दिया मनमाना तबादला, समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक का कोई तय मानक, हाईकोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

    यू-डायस पोर्टल पर 31 दिसम्बर को ही स्थानान्तरित पर अभी तक सूची जारी नहीं हुई

    ● शिक्षकों से विकल्प लिए बगैर कर दिया मनमाना स्थानान्तरण 
    ● जिलों में बीएसए की मनमानी के खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में शिक्षक

    03 जनवरी 2026
    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के समायोजन में अफसरों पर मनमानी के आरोप लगे हैं। शिक्षकों का कहना है कि अफसरों ने मनमानी की सीमा पार कर दी है। यू-डायस पर उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर हुए समायोजन से पहले न तो शिक्षकों से विकल्प लिया गया न ही वरिष्ठ या कनिष्ठ शिक्षक को ही देखा गया। जहां जिस बेसिक शिक्षा अधिकारी को जो समझ में आया, तबादला आदेश जारी कर दिया। आक्रोशित शिक्षक हाईकोर्ट खुलने पर समायोजन आदेश को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं।

    जिन जिलों में कनिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमेठी, मथुरा, रायबरेली, बदायूं, हरदोई, देवरिया, हाथरस, उन्नाव, बुलंदशहर, लखीमपुर खीरी, बागपत और पीलीभीत आदि शामिल हैं। वहीं, जिन जिलों में वरिष्ठ शिक्षकों का समायोजन हुआ है उनमें अमरोहा, हापुड़, वाराणसी, चित्रकूट, बरेली, रामपुर, आगरा, गोरखपुर, फर्रुखाबाद, कुशीनगर, संत कबीर नगर, फिरोजाबाद, फतेहपुर और सीतापुर आदि शामिल हैं।

    शिक्षक नेता निर्भय सिंह का कहना है कि कई जिलों जैसे बाराबंकी, लखनऊ आदि में यू-डायस पोर्टल पर शिक्षकों को 31 दिसम्बर को ही स्कूल से स्थानान्तरित कर दिया गया है। अभी तक सूची जारी नहीं हुई कि किसे किस स्कूल भेजा गया है। इसे लेकर शिक्षक परेशान हैं।

    प्रयागराज में समायोजन में मनमानी का आरोप
    आरोप है कि संदीप कुमार तिवारी का समायोजन मेजा के कंपोजिट विद्यालय नेवढ़िया से उच्च प्राथमिक विद्यालय महुलीकलां में हुआ जो कि 40 किलोमीटर दूर है जबकि दो किमी दूर बगल का स्कूल एकल था। संदीप कुमार जुलाई-अगस्त 2025 में समायोजन के दौरान प्रधानाध्यापक बिसाहिजन खुर्द से नेवढ़िया गए थे। आरोप है कि स्वेच्छा से समायोजन लेने के छह महीने के अंदर दोबारा जबरदस्ती समायोजन कर दिया गया। उनसे वरिष्ठ दो शिक्षक हैं जिनका समायोजन नहीं हुआ। उच्च प्राथमिक विद्यालय शृंग्वेरपुर से हिंदी की अकेली शिक्षक सुनीता चौरसिया का समायोजन मादूपुर कर दिया गया। जबकि उनके स्कूल में एक विषय में दो शिक्षिकाएं हैं, उनमें से किसी का समायोजन नहीं हुआ। कई स्कूल ऐसे हैं जिसमें वरिष्ठ और कनिष्ठ को छोड़कर अन्य शिक्षकों का समायोजन हो गया है।

    प्राइमरी हेड को जूनियर में किया समायोजित
    जौनपुर और कासगंज समेत कुछ जिलों में प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उच्च प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक पद पर समायोजित कर दिया गया है। जबकि इसे लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है। सैकड़ों शिक्षकों ने प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में समायोजन या पदोन्नति में टीईटी लागू करने के लिए हाईकोर्ट में याचिकाएं कर रखी है।




    समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

    30 दिसम्बर 2025
    लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

    संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

    उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



    कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

    लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

    कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


    कहां कैसे हो रहे तबादले?

    शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

    शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


    बड़े अफसरों ने साधा मौन
    इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


    क्या है असल वजह?
    इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।

    Monday, January 12, 2026

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी उच्च शिक्षा निदेशक का चयन, मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए नया पत्र जारी किया

    मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति करेगी उच्च शिक्षा निदेशक का चयन, मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए नया पत्र जारी किया

    विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने दिए निर्देश, पहले जारी आदेश पर उठे थे सवाल

    प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का चयन अब मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित चयन समिति करेगी। इस संबंध में शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने निर्देश दिया है। अब चयन प्रक्रिया उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा (समूह 'क') सेवा (द्वितीय संशोधन) - नियमावली-2008 के प्रावधानों के न अनुसार होगा।

    विशेष सचिव की ओर से उच्च शिक्षा कार्यालय को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि उच्च शिक्षा निदेशक का चयन राजकीय महाविद्यालयों में कार्यरत स्नातकोत्तर (पीजी) प्राचार्यों में से किया जाएगा। यह चयन लोक सेवा आयोग के पदों के लिए लागू विभागीय चयन समिति नियमावली के तहत गठित समिति  द्वारा किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव करेंगे।

    उल्लेखनीय है कि 31 दिसंबर को डॉ. बीएल शर्मा को कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था। मामला हाईकोर्ट के संज्ञान में आने के बाद शासन ने संशोधित प्रक्रिया स्पष्ट करते हुए एक जनवरी को नया पत्र जारी किया।

    यह है मामला
    31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज सेवानिवृत्त हो गए। दरअसल उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। लेकिन शासन ने 31 दिसंबर को ही वरिष्ठता सूची दरकिनार कर सहायक निदेशक डॉ. बीएल शर्मा को प्रभारी निदेशक पद पर तैनात कर दिया। डॉ. बीएल शर्मा सात वर्ष से मुख्यालय में तैनात हैं। जबकि, विभागीय अधिकारियों का कहना हैं कि डॉ. बीएल शर्मा पीजी प्राचार्य तो दूर स्नातक यूजी कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पद पर कार्यरत हैं।


    निदेशक की पात्रता को चुनौती देने वाली पीआईएल कोर्ट ने रिट ए में बदली

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा निदेशक (बीएल शर्मा) की पात्रता और उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को रिट ए में बदल दी है। कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की पात्रता के खिलाफ जनहित याचिका स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने दिया है।

    प्रयागराज के बृजेंद्र कुमार मिश्रा की ओर से दायर जनहित याचिका में यूपी के उच्च शिक्षा निदेशक की पात्रता पर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट ने कहा कि सेवा संबंधी मामलों या किसी अधिकारी की पात्रता के विरुद्ध जनहित याचिका दायर करना कानूनी रूप से उचित नहीं है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यदि याचिकाकर्ता को पात्रता संबंधी कोई आपत्ति है तो वह नियमित याचिका के माध्यम से न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कोर्ट से अनुरोध किया कि इस जनहित याचिका को रिट-ए में परिवर्तित करने की अनुमति दी जाए।

    कोर्ट ने मामले के गुणों पर कोई टिप्पणी किए बिना इस अनुरोध को स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने कार्यालय को इस मामले को रिट ए के रूप में पंजीकृत करने का निर्देश दिया। जनहित याचिका की श्रेणी से हटाकर उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। 



    प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती, तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने का आरोप, सरकार और मंत्री को बनाया पार्टी

    हाईकोर्ट ने जनहित के बजाय नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी


    प्रयागराज। 31 दिसंबर को प्रभारी उच्च शिक्षा निदेशक बनाए गए डॉ. बीएल शर्मा की तैनाती को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। बाघम्बरी गद्दी के रहने वाले बृजेन्द्र कुमार मिश्र ने मनमानी तैनाती के खिलाफ जनहित याचिका की थी। हालांकि नौ जनवरी को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस अरुण कुमार ने इसे जनहित याचिका के स्थान पर नियमित याचिका के रूप में दाखिल करने की सलाह दी है।


    याची के अधिवक्ता की सहमति पर पीआईएल को नियमित याचिका के रूप में दर्ज करने के निर्देश देने के साथ हाईकोर्ट ने उपयुक्त बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनाती में वरिष्ठता को दरकिनार करने के मामले में प्रदेश सरकार के साथ ही उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, डॉ. बीएल शर्मा के साथ ही उच्च शिक्षा के विशेष सचिव और संयुक्त सचिव को भी पार्टी बनाया गया है।


    प्रवक्ता को दे दिया पीजी प्राचार्य का पद

    प्रयागराज। उच्च शिक्षा निदेशक का पद राजकीय पीजी कॉलेज के प्राचार्य के समकक्ष होता है। जबकि डॉ. बीएल शर्मा पीजी तो दूर स्नातक (यूजी) कॉलेज के भी प्राचार्य नहीं हैं। वह वर्तमान में प्रवक्ता के वेतनमान पर कार्यरत हैं। 31 दिसंबर को उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज की सेवानिवृत्ति के दिन वरिष्ठता सूची के अनुसार क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी मेरठ के पद पर कार्यरत डॉ. मोनिका सिंह की तैनाती तय मानी जा रही थी। डॉ. बीएल शर्मा को निदेशक का प्रभार देने का फरमान आ गया। 

    डॉ. बीएल शर्मा उच्च शिक्षा निदेशालय में सहायक निदेशक पर 25 मई 2018 से कार्यरत हैं। उनसे वरिष्ठ डॉ. शशि कपूर संयुक्त निदेशक के पद पर तैनात हैं लेकिन उनको भी प्रभार नहीं मिला। सूत्रों के अनुसार शिक्षा निदेशालय से निदेशक पद पर तैनाती के लिए जिन पांच नामों की संस्तुति भेजी गई थी उनमें डॉ. बीएल शर्मा का नाम नहीं था क्योंकि वरिष्ठता सूची में दर्जनों शिक्षक ऊपर हैं। चर्चा है कि मंत्री का करीबी होने के कारण ही वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए डॉ. बीएल शर्मा को इतनी अहम जिम्मेदारी दी गई है।

    फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

    फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

     राज्यमंत्री असीम अरुण ने दिए निर्देश

    लखनऊ। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत कुछ कोर्स कोऑर्डिनेटरों द्वारा फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त किए जाने के प्रकरण पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए विभाग में आउटसोर्सिंग से जुड़े मामलों में स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।


    शासनादेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के जरिये की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह निर्धारित नियमों, मानकों और प्रक्रिया के अनुरूप हों। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त सभी कर्मियों के शैक्षिक और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी कराया जाएगा। उन्होंने वर्तमान में विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के दस्तावेजों की भी अगले तीन महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि विभाग में किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी नियुक्तियां पारदर्शी और नियमों के अनुसार होंगी। ब्यूरो

    Sunday, January 11, 2026

    अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

    अनधिकृत पुस्तकों पर यूपी बोर्ड हुआ सख्त, विद्यालयों में जांचेगा बस्ते, जुर्माना और सजा के प्रावधान सहित विद्यालय की मान्यता तक वापस लेने की कार्यवाही की तैयारी

    कक्षा नौ से 12 तक की पुस्तकें छापने के लिए अधिकृत हैं तीन मुद्रक

    फरवरी में बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र की पुस्तकें

    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षिक सत्र के लिए कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्यपुस्तकें फरवरी में बाजार में उपलब्ध कराने की योजना सुनिश्चित की है। पुस्तकें समय से पहले उपलब्ध कराने के साथ बोर्ड यह भी सुनिश्चित कराएगा कि विद्यार्थियों के बस्ते में अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें न पहुंचें। अप्रैल से विद्यालय खुलने पर हर जिले में कुछ विद्यालयों में छात्र छात्राओं के बस्ते की रेंडम जांच जिला विद्यालय निरीक्षकों की टीम से इस उद्देश्य से कराई जाएगी कि विद्यालयों में अनधिकृत पुस्तकें तो नहीं थोपी गई हैं। अनधिकृत पाठ्यपुस्तक मिलने पर संलिप्त लोगों पर जुर्माना और सजा का प्रविधान है तथा संबंधित विद्यालय की मान्यता तक वापस ली जा सकती है।

    बीते वर्षों में शैक्षिक सत्र शुरू होने के दो से तीन महीने बाद बोर्ड की अधिकृत पुस्तकें बाजार में उपलब्ध हो पाती थीं। इस देरी का फायदा उठाकर अनधिकृत विक्रेता एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित डुप्लीकेट और महंगी पुस्तकें बाजार में बेचते थे, जिन्हें कई विद्यालयों में छात्रों को खरीदने के लिए मजबूर भी किया जाता था। समय पर किताबें उपलब्ध न होने के कारण बोर्ड भी इस पर प्रभावी रोक नहीं लगा पाता था, लेकिन इस बार अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर नियंत्रण के लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने ठोस तैयारी की है। 

    इसी कारण हर जिले में पुस्तक विक्रेताओं की दुकान का नाम, पता व मोबाइल फोन नंबर अभी से जारी कर दिया गया है, जहां अधिकृत मुद्रक पाठ्यपुस्तकों को फरवरी के प्रथम सप्ताह में उपलब्ध कराएंगे। ऐसे में यह तर्क पहले ही खत्म कर दिया गया है कि अधिकृत पुस्तकें नहीं मिल रही हैं। फरवरी में ही पुस्तकें उपलब्ध हो जाने पर विद्यार्थियों/अभिभावकों को सत्र शुरू होने के पहले ही पाठ्यपुस्तकें खरीदने का अवसर मिल जाएगा। 

    इस तरह शैक्षिक सत्र 2026-2027 में जब विद्यालय खुलेंगे तो छात्र-छात्राएं बस्तों में अधिकृत पुस्तकों के साथ आएंगे। ऐसे में बस्तों की रेंडम जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि उनके पास केवल अधिकृत पाठ्यपुस्तकें हैं। बोर्ड सचिव का मानना है कि इससे जहां अनधिकृत पुस्तकों की बिक्री पर रोक लगेगी, वहीं पाठ्यक्रम की गुणवत्ता और एकरूपता भी बनी रहेगी। अभिभावकों को आर्थिक शोषण से भी मुक्ति मिलेगी।



    यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें, डुप्लीकेसी पर जेल, माध्यमिक शिक्षा परिषद के पास रहेगा पाठ्यपुस्तकों का कॉपीराइट 

    अधिकृत पुस्तकों के अलावा पढ़ाया तो पांच लाख जुर्माना या मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए अनधिकृत पुस्तकों पर लगाई रोक

    मुद्रकों और विक्रेताओं की जिलेवार जारी की गई सूची


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर पर अनधिकृत और महंगी पाठ्य पुस्तकों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। परिषद ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी विद्यालय द्वारा छात्रों को अनधिकृत या अधिक मूल्य वाली पुस्तकों को खरीदने अथवा पढ़ने के लिए बाध्य किया गया तो उस संस्था पर पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही मान्यता निलंबन या पूरी तरह समाप्त करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कक्षा नौ से 12 तक कुल 34 विषयों के अंतर्गत 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकों को सस्ते दर पर प्रचलन में लाया गया था। इन पुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए परिषद ने तीन मुद्रक-वितरकों को अधिकृत किया है। 

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि हाईस्कूल स्तर पर अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान एवं इंटरमीडिएट स्तर पर अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान, गृह विज्ञान सहित कुल 36 विषयों  की 70 एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए अनिवार्य की गई है।

    इसके अलावा परिषद द्वारा विकसित कक्षा नौ से 12 तक हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की 12 पाठ्य पुस्तकों को भी सस्ते दर पर छात्रों के अध्ययन हेतु लागू किया गया है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्त पोषित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट विद्यालयों में केवल माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्य पुस्तकों को ही पढ़ाया जाएगा। इसके अतिरिक्त किसी अन्य पाठ्य पुस्तक को प्रचलन में लाने की अनुमति नहीं होगी।

    सचिव भगवती सिंह ने कहा कि निर्देशों का उल्लंघन इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गंभीर अपराध माना जाएगा। दोषी पाए जाने पर संस्था पर पांच लाख रुपये का जुर्माना, निर्धारित अवधि के लिए मान्यता निलंबन अथवा पूरी तरह से समाप्त की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पाठ्य पुस्तकों की डुप्लीकेसी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए तीन वितरकों को अधिकृत किया गया है। इनमें आगरा, झांसी और लखनऊ के वितरक शामिल हैं।





    यूपी बोर्ड ने अधिकृत की एनसीईआरटी व अपनी पाठ्यपुस्तकें

    प्रयागराजः उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की पाठ्यपुस्तकें फरवरी के प्रथम सप्ताह तक बाजार में उपलब्ध कराने की तैयारी कर ली है। पिछले कुछ वर्षों में यह पहली बार होगा कि अप्रैल से शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र के लिए पाठ्यपुस्तकें फरवरी में ही उपलब्ध हो जाने पर अनधिकृत और महंगी पुस्तकों का विक्रय कर छात्र छात्राओं/अभिभावकों की जेब काटने का खेल बंद हो जाएगा। इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश के सभी राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में केवल परिषद द्वारा अधिकृत एनसीईआरटी एवं परिषद की पाठ्यपुस्तकें ही पढ़ाई जाएंगी। डुप्लीकेसी पाए जाने पर जेल और जुर्माना होगा।

    बोर्ड सचिव के अनुसार, सभी पाठ्यपुस्तकों का कापीराइट परिषद के पास रहेगा। पुस्तकों की पाइरेसी डुप्लीकेसी पाए जाने पर संबंधित मुद्रक, विक्रेता अथवा व्यक्ति के खिलाफ कापीराइट अधिनियम-1957 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसमें छह माह से तीन वर्ष तक की सजा और 50 हजार से दो लाख रुपये तक जुर्माना हो सकता है। हाईस्कूल के कक्षा नौ व 10 की अंग्रेजी, विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान तथा इंटरमीडिएट के कक्षा 11 व 12 की अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान विषय सहित कुल 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित होने के साथ सस्ते मूल्य पर उपलब्ध होंगी। 

    इसके अतिरिक्त परिषद द्वारा विकसित की गई हिंदी, संस्कृत और उर्दू विषयों की कक्षा नौ से 12 तक की 12 पाठ्यपुस्तकें भी लागू होंगी। सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा को कक्षा नौ व 12, मेसर्स पीतांबरा बुक्स प्रा.लि. बिजौली, झांसी को कक्षा 10 तथा व मेसर्स सिंघल एजेंसीज लखनऊ को कक्षा 11 की पाठ्यपुस्तकों के लिए अधिकृत किया गया है। इन तीन वे मुद्रकों के अलावा किसी अन्य की वे पुस्तकें मान्य नहीं होंगी। सूची भी जारी की गई है कि किस जिले में किस पुस्तक विक्रेता के यहां अधिकृत न पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी। डीआओएस व इसी अनुरूप व्यवस्था सुनिश्चित व कराएंगे। 

    सचिव ने चेतावनी दी है कि यदि कोई विद्यालय अधिक मूल्य व की किताबें, अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें, गाइड बुक या अन्य सामग्री खरीदने के लिए छात्र-छात्राओं को बाध्य करेगा तो नियमों के उल्लंघन पर पांच लाख रुपये तक जुर्माना, मान्यता का निलंबन अथवा मान्यता वापसी तक की कार्रवाई संभव है। 

    Saturday, January 10, 2026

    सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी निर्णय सहित शिक्षा से जुड़े कई मामलों पर अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ की पहल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर समुचित कार्यवाही की मांग

    सुप्रीम कोर्ट के TET संबंधी निर्णय सहित  शिक्षा से जुड़े कई मामलों पर अखिल भारतीय शैक्षिक महासंघ की पहल, शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर समुचित कार्यवाही की मांग


    अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ (ABRSM) के एक प्रतिनिधिमंडल ने आज भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से भेंट कर शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिनांक 01.09.2025 के निर्णय (सिविल अपील संख्या 1385/2015) के संदर्भ में एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया। 

    प्रतिनिधिमंडल ने नियुक्ति तिथि की परवाह किए बिना सभी सेवारत शिक्षकों पर TET अनिवार्य किए जाने पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू किया गया, तो इससे देशभर के लगभग 12 लाख शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा, वरिष्ठता, पदोन्नति तथा आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।

    प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री का ध्यान इस तथ्य की ओर आकृष्ट किया कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की दिनांक 23.08.2010 की अधिसूचना में स्पष्ट रूप से यह उल्लेख है कि कक्षा I से VIII तक के शिक्षकों हेतु न्यूनतम योग्यताएँ अधिसूचना की तिथि से प्रभावी होंगी तथा इससे पूर्व नियुक्त शिक्षकों को TET से छूट रहेगी। महासंघ ने यह भी निवेदन किया कि उस समय प्रचलित वैध शैक्षणिक एवं व्यावसायिक योग्यताओं के अंतर्गत नियुक्त होकर वर्षों से सेवा दे रहे अनुभवी शिक्षकों पर इस निर्णय को पूर्वव्यापी रूप से लागू करना न्यायसंगत नहीं होगा।

    शैक्षिक महासंघ ने शिक्षा मंत्री से यह अनुरोध किया कि वे इस विषय में हस्तक्षेप कर निर्णय को केवल भावी रूप से लागू किए जाने, अधिसूचना से पूर्व नियुक्त शिक्षकों की वरिष्ठता, गरिमा एवं वैध अपेक्षाओं की रक्षा किए जाने तथा शिक्षकों को संभावित सेवा-समाप्ति एवं पदोन्नति से वंचित किए जाने से बचाने हेतु आवश्यक विधिक एवं प्रशासनिक कदम उठाए जाने की दिशा में पहल करें।

    इस अवसर पर महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक का स्वागत करते हुए उसके उद्देश्यों की सराहना की तथा विधेयक को अधिक प्रभावी, समावेशी एवं व्यवहारिक बनाने हेतु कुछ महत्वपूर्ण सुधारात्मक सुझाव भी मंत्रीजी को प्रस्तुत किए। इसके साथ ही उच्च शिक्षा तथा विद्यालय शिक्षा से संबंधित विभिन्न दीर्घकाल से लंबित समस्याओं के समाधान हेतु एक विस्तृत मांग-पत्र भी माननीय मंत्री को सौंपा गया।

    शिक्षा मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा के संबंध में संगठन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों एवं तथ्यों को गंभीरता से समझते हुए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के अध्यक्ष एवं संबंधित अधिकारियों को इस विषय में समुचित एवं आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ-साथ शिक्षकों एवं शैक्षणिक संस्थानों से जुड़े विषयों पर संतुलित एवं सकारात्मक दृष्टिकोण से विचार किए जाने का आश्वासन दिया।

    इस प्रतिनिधिमंडल में ABRSM के अध्यक्ष प्रो. नारायण लाल गुप्ता, महासचिव प्रो. गीता भट्ट, संगठन मंत्री महेंद्र कपूर, सह संगठन मंत्री जी. लक्ष्मण, वरिष्ठ उपाध्यक्ष महेंद्र कुमार, विद्यालय शिक्षा प्रभारी शिवानंद सिंदनकेरा, एनआईटी शिक्षक फोरम के संयोजक प्रो. महेंद्र श्रीमाली, ABRSM तेलंगाना इकाई (TPUS) के अध्यक्ष हनुमंत राव तथा महासंघ की तमिलनाडु इकाई देसीय अस्ररियार संगम के महासचिव कंदसामी सम्मिलित थे। 

    स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज को सौंपेगी भारत सरकार, सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी, बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत

    स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज को सौंपेगी भारत सरकार, सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी, बड़े बदलाव की तैयारी के संकेत 

    सम्मग्र शिक्षा अभियान के एक नए चरण की होगी शुरुआत

    नई दिल्ली: स्कूली शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए शुरू किए गए समग्र शिक्षा अभियान के जल्द ही एक नए चरण की शुरुआत होगी। इसमें 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्यों को पूरा करने सहित स्कूलों के संचालन की व्यवस्था को लेकर भी बड़े बदलाव की तैयारी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को इसे लेकर एक खाका पेश किया और राज्यों से सुझाव भी मांगे। नई व्यवस्था के तहत स्कूलों के संचालन का पूरा जिम्मा समाज के पास होगा, जबकि सरकार सिर्फ वेतन और व्यवस्था देगी।


    केंद्र ने यह पहल तब की है, जब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को पांच साल पूरा हो गया है। समग्र शिक्षा अभियान का मौजूदा चरण भी 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रहा है। इस अभियान के चलते पिछले कुछ वर्षों में स्कूली शिक्षा में इंफ्रास्ट्रक्चर और गुणवत्ता दोनों स्तर पर काफी सुधार हुआ है। बावजूद इसके लर्निंग आउटकम बढ़ाने, परीक्षा के बोझ को कम करने, बारहवीं तक शत-प्रतिशत सकल नामांकन अनुपात करने जैसे ऐसे कदम हैं, जिसे सामाजिक जुड़ाव को बढ़ाए बगैर हासिल नहीं किया जा सकता। 


    मंत्रालय ने इसी सोच के साथ अब स्कूलों के संचालन की पूरी व्यवस्था में बदलाव का फैसला लिया है। इसे लेकर एक मसौदा तैयार किया गया है, जिसमें स्कूलों के संचालन के लिए समाज के प्रबुद्ध वर्गों की समिति गठित की जा सकती है। 

    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन



    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    Friday, January 9, 2026

    अब अटल विद्यालयों में भी समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्यप्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन ने जारी किया शासनादेश

    अब अटल विद्यालयों में भी समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्यप्रमुख सचिव श्रम एवं सेवायोजन ने जारी किया शासनादेश

    कक्षा शुरू होने से पहले छात्र पढ़कर सुनाएंगे समाचार, जूनियर बनाएंगे स्क्रैपबुक

    लखनऊछात्रों को मोबाइल से दूर करने, उनमें पढ़ने के प्रति दिलचस्पी जगाने एवं तर्क शक्ति बढ़ाने के प्रयासों को लेकर शासन ने बड़ा कदम उठाते हुए स्कूलों एवं कालेजों में समाचार पत्र का नियमित पाठन अनिवार्य किया है। पिछले दिनों पहले बेसिक और माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में आदेश जारी किया था। इसी लीक पर चलते हुए अब श्रम एवं सेवायोजन विभाग के प्रमुख सचिव ने अटल आवासीय विद्यालयों के लिए समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य कर दिया है।


    मंडल में संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में नियमित रूप से हिंदी व अंग्रेजी समाचार पत्र दिए जाएंगे। छात्रों को प्रतिदिन समाचार पढ़ने, नए शब्द सीखने और महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विद्यार्थियों की भाषा क्षमता, सामान्य ज्ञान और सोचने-समझने की शक्ति बेहतर होगी। 

    उत्तर प्रदेश भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष व प्रमुख सचिव श्रमयोजन डा. एमके शन्मुगा सुंदरम ने आठ जनवरी को जारी आदेश में कहा है कि विद्यालयों के पुस्तकालय में हिंदी और अंग्रेजी भाषा के समाचार पत्र अनिवार्य रूप से आएंगे। समाचार पत्रों में सामान्य ज्ञान के अतिरिक्त विज्ञान, अर्थव्यवस्था, नवीन विकास एवं खेल समाचारों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। 

    कक्षा प्रारंभ होने से पहले का दस मिनट का समय समाचार पत्र के लिए रिजर्व किया जाएगा। विद्यालय के डिस्प्ले बोर्ड पर आज का विचार लिखना होगा। कक्षा 11 और 12 के छात्रों के लिए सप्ताह में एक बार संपादकीय लेख पर आधारित समाचार लेखन या ग्रुप डिस्कशन आयोजित करना होगा। विद्यार्थियों के संपादन में स्कूल की पत्रिका निकालने का निर्देश दिया गया है।

    जूनियर स्तर के छात्रों के लिए विज्ञान, पर्यावरण एवं खेल जैसे विषयों पर स्क्रैपबुक तैयार करने के लिए कहा गया है। छात्रों के मानसिक विकास के लिए समाचार पत्रों में प्रकाशित सुडोकू, शब्द पहेली व क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

    1044 माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित होगी ICT लैब

    1044 माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित होगी ICT लैब


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) लैब का दायरा बढ़ाया जाएगा। पहले चरण में 778 विद्यालयों में लैब स्थापित करने के बाद, दूसरे चरण में 1044 विद्यालयों में लैब की स्थापना की जाएगी। 


    इसका उद्देश्य छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से पठन-पाठन में बेहतर अवसर प्रदान करना है। आईसीटी लैब की स्थापना से छात्रों को कंप्यूटर शिक्षा का अवसर मिलेगा। साथ ही, विद्यालयों में कंप्यूटर उपलब्ध होने से वे तकनीकी कौशल सीख सकेंगे, कोडिंग, इंटरनेट का प्रयोग कर सकेंगे और डिजिटल सामग्री के माध्यम से अध्ययन कर सकेंगे। 


    चयनित विद्यालयों में प्रत्येक लैब में 7 कंप्यूटर डेस्कटॉप, इंटरैक्टिव पैनल, वेब कैमरा, मल्टीफंक्शनल प्रिंटर, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम और वाई-फाई राउटर जैसी सुविधाएं मिलेंगी। उपलब्ध कराई जाएंगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिए हैं कि आईसीटी लैब के लिए विद्यालय में अलग कमरे का प्रबंध किया जाए। 

    तकनीकी आधार पर निरस्त नहीं कर सकते स्थानांतरण आवेदन, शिक्षक का अंतरजनपदीय स्थानांतरण रद्द करने पर सचिव बेसिक शिक्षा तलब

    तकनीकी आधार पर निरस्त नहीं कर सकते स्थानांतरण आवेदन, शिक्षक का अंतर जनपदीय स्थानांतरण रद्द करने पर सचिव बेसिक शिक्षा तलब


    प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि अंतरजनपदीय स्थानांतरण का आवेदन तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता है, यदि आवेदक की ओर से आवेदन करने में कोई गलती नहीं की गई है। कोर्ट ने प्राइमरी स्कूल के हेडमास्टर के अंतरजनपदीय स्थानांतरण के आवेदन को तकनीकी खामी के आधार पर खारिज किए जाने पर यह टिप्पणी की है। अगली सुनवाई को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को इस मामले में तलब किया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने असद उल्ला खान की याचिका पर दिया है।


    याची फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला मुकुट में हेड मास्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। उनके इस दावे को 13 नवंबर 2025 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि याची फर्रुखाबाद के नवाबगंज ब्लॉक स्थित प्राथमिक विद्यालय नगला मुकुट में हेडमास्टर के पद पर तैनात हैं। उन्होंने अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था। उनके इस दावे को 13 नवंबर 2025 को इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि कुछ तकनीकी त्रुटि के कारण समय पर विचार नहीं किया जा सका और अब ऑफलाइन विचार करना कानूनन मान्य नहीं है।