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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, July 1, 2026

    3 साल से अनुपस्थित शिक्षिका के अवकाश स्वीकृत करने का आरोप में आगरा के BEO निलंबित, देखें आदेश

    3 साल से अनुपस्थित शिक्षिका के अवकाश स्वीकृत करने का आरोप में आगरा के BEO  निलंबित, देखें आदेश 


    ➡️ अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किए आदेश
    ➡️ शिक्षिका को अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप 
    ➡️ गलत तरीके से लाभ देने का था आरोप
    ➡️ सहायक अध्यापिका रिनी सिंह को दिया लाभ
    ➡️ तथ्य छिपाने,भ्रामक जानकारी देने का भी आरोप
    ➡️ उच्चाधिकारियों को गुमराह करने पर गिरी गाज
    ➡️ अनुशासनहीनता के आरोप में बीईओ निलंबित


    आगरा के बेसिक शिक्षा विभाग के फतेहाबाद ब्लॉक के बीईओ शेष बहादुर सरोज को निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई उनके विरुद्ध प्राप्त शिकायतों, अनियमितताओं के आरोपों के आधार पर की गई है। बीईओ पर लगे आरोपों की जांच के आदेश दिए गए है।

    बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित कार्यालय से जारी आदेश के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी शेष बहादुर सरोज के खिलाफ भ्रष्टाचार समेत कई गंभीर आरोप लगे थे। आरोप है कि उन्होंने उच्च प्राथमिक विद्यालय रावर फतेहाबाद की सहायक अध्यापक रिनी सिंह को 1 नवंबर 2022 से निरंतर तीन साल तक अनुपस्थित रहने पर उन्हें अनुचित लाभ दिया गया।

    सहायक अध्यापक रिनी सिंह के अनुपस्थित रहने पर भी ग्रीष्म अवकाश, बाल्य देखभाल अवकाश, शीत अवकाश, असाधारण अवकाश, मेडिकल लीव स्वीकृत कर दी गई। खंड शिक्षाधिकारी की ओर से अधिकारियों को भ्रमित किया गया। उनकी ओर से साक्ष्य भी उपलब्ध नहीं कराए गए। कार्यशैली में अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही के भी आरोप लगाए गए हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि के लिए विस्तृत जांच आवश्यक मानी गई है। निलंबन के मंडल मुख्यालय अटैच किए गए हैं। 

    निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय आगरा मंडल अटैच किया गया है और उन्हें मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) के नियंत्रण में रखा जाएगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता (सब्सिस्टेंस अलाउंस) दिया जाएगा, जो वित्तीय हस्त पुस्तिका के प्रावधानों के अनुरूप होगा।

    हालांकि, यदि किसी अन्य स्रोत से आय प्राप्त होने की पुष्टि होती है, तो भत्ते में आवश्यक समायोजन किया जाएगा। इसके अलावा, यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या देयकों का मामला लंबित पाया जाता है, तो संबंधित राशि की वसूली नियमानुसार की जाएगी। विभाग ने यह भी कहा है कि आरोपों की पुष्टि के लिए पृथक से विभागीय जांच अधिकारी नियुक्त कर विस्तृत जांच कराई जाएगी।


    दिव्यांग छात्राओं को मुफ्त मिलेगी ई ट्राईसाइकिल, यूपी सरकार ने दी हरी झंडी

    दिव्यांग छात्राओं को मुफ्त मिलेगी ई ट्राईसाइकिल, यूपी सरकार ने दी हरी झंडी 



    लखनऊ। प्रदेश सरकार ने स्कूल जाने वाली या प्रशिक्षण प्राप्त कर रही दिव्यांग छात्राओं को ई ट्राईसाइकिल दिए जाने के लिए अनुदान नियमावली, 2026 को हरी झंडी दे दी है। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने इसका आधिकारिक शासनादेश भी जारी कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से पूरे प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू होगी।


    अक्सर गंभीर दिव्यांगता के चलते कई होनहार छात्राएं कॉलेज, लाइब्रेरी या ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट तक नहीं पहुंच पाती हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार प्रति ई ट्राईसाइकिल अधिकतम 65 हजार रुपये तक की अनुदान राशि देगी। इससे छात्राओं को आधुनिक और सुविधाजनक ई ट्राईसाइकिल मिल सकेगी, जिससे वे बिना किसी बाधा के अपनी पढ़ाई और तकनीकी प्रशिक्षण पूरा कर सकेंगी।

    लाभ केवल उन्हीं दिव्यांग छात्राओं को मिलेगा, जो किसी मान्यता प्राप्त स्कूल, कॉलेज या शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान में नियमित रूप से अध्ययनरत हैं। यह सुविधा विशेष रूप से मस्क्यूलर डिस्ट्रोफी, स्ट्रोक, सेरेब्रल पाल्सी और हीमोफीलिया जैसी गंभीर शारीरिक अक्षमताओं से प्रभावित छात्राओं के लिए है, जिन्हें चलने-फिरने में अत्यधिक कष्ट होता है। ई ट्राईसाइकिल के सुरक्षित संचालन के लिए छात्रा की दृष्टि, मानसिक स्थिति और कमर के ऊपर का हिस्सा पूरी तरह स्वस्थ होना अनिवार्य है। दिव्यांगता का प्रतिशत संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी द्वारा प्रमाणित होना आवश्यक होगा।

    सीएम योगी आज सहारनपुर से करेंगे स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ, विभाग ने व्यापक प्रचार प्रसार के दिए निर्देश, आज से माध्यमिक विद्यालय भी खुल जाएंगे

    सीएम योगी आज सहारनपुर से करेंगे स्कूल चलो अभियान का शुभारंभ, विभाग ने व्यापक प्रचार प्रसार के दिए निर्देश, आज से माध्यमिक विद्यालय भी खुल जाएंगे


    लखनऊ। प्रदेश में भीषण गर्मी और तपती धूप के बाद अब मौसम का मिजाज बदलते ही स्कूलों की रौनक फिर से लौटने वाली है। गर्मी की छुट्टियों के बाद प्रदेश के माध्यमिक विद्यालय भी एक जुलाई से खुल जाएंगे। जबकि प्रदेश के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान की शुरुआत सीएम योगी आदित्यनाथ खुद सहारनपुर में बुधवार को करेंगे। उनके साथ बेसिक राज्य शिक्षा मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह भी उपस्थित रहेंगे।


    सीएम इस्माइलपुर के सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय में बच्चों को किताबें, बैग व स्टेशनरी देंगे और सर्वश्रेष्ठ प्रधानाध्यापकों का सम्मान भी करेंगे। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों शैक्षणिक सत्र 2026-27 में स्कूल चलो अभियान को व्यापक अभियान बनाया जाएगा। ताकि शत-प्रतिशत बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा सके। यह अभियान एक से 15 जुलाई तक चलेगा। इसके साथ ही प्रदेश के सभी जिलों के प्राइवेट स्कूल भी एक जुलाई से ही खुल रहे हैं।

    प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण के लिए 1.63 करोड़ जारी किए गए हैं। नए शैक्षिक सत्र में शत-प्रतिशत नामांकन करने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी विकास खंडों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी द्वारा जारी निर्देश में कहा गया है कि अभियान का उद्देश्य विद्यालय से छूटे हर बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ना, ड्रॉपआउट बच्चों का पुनः नामांकन कराना तथा नामांकन को व्यापक जनभागीदारी का स्वरूप देना है।

    उन्होंने सभी बीएसए को निर्देश दिया है कि अभियान में ग्राम पंचायतों, नगर निकायों, विद्यालय प्रबंधन समितियों, स्वयं सहायता समूहों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं तथा जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। अभियान के दौरान घर-घर संपर्क, ग्राम व वार्ड स्तर पर सर्वे, विद्यालय से बाहर बच्चों की पहचान की जाएगी। 




    सीएम योगी की पाती : 15 जुलाई तक हर बच्चे का नामांकन कराने की जनमानस से की अपील


    Tuesday, June 30, 2026

    शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस संस्था को प्रोत्साहित करते हुए होगी माफ या राज्य सरकार द्वारा होगी प्रतिपूर्ति, देखें आदेश

    गरीब दो बहनों में से एक की फीस होगी माफ, आदेश जल्द

    लखनऊ । विद्यालयों, महाविद्यालयों अथवा संस्थाओं में पढ़ रहीं एक ही गरीब परिवार की दो बहनों में से एक की ट्यूशन फीस सरकार की तरफ से माफ किए जाने या उसकी भरपाई किए जाने के आदेश जल्द ही जारी किए जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से इस संबंध में की गई घोषणा को शासन स्तर से अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है।

    महिला कल्याण एवं बाल विकास पुष्टाहार विभाग ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर प्रदेश में यूपी बोर्ड से लेकर सीबीएसई और आईसीएसई स्कूलों की कक्षा 9 से 12 तक की बच्चियों का सारा विवरण तलब किया है। दूसरी तरफ पहली जुलाई को इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई है।



    शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस संस्था को प्रोत्साहित करते हुए होगी माफ या राज्य सरकार द्वारा होगी प्रतिपूर्ति, देखें आदेश 


    शासन द्वारा निर्धारित आय सीमा के नीचे जीवन यापन कर रहे किसी परिवार के एक से अधिक बच्चियों में से दूसरी का ट्यूशन फीस या तो संस्था को प्रोत्साहित करते हुए माफ कराई जाएगी या राज्य सरकार द्वारा प्रतिपूर्ति की जाएगी।

     22.06.2026



    इस बार बदला रहेगा बीएड में अभ्यास शिक्षण का माहौल, प्रैक्टिस टीचिंग का काम अब डीआईओएस के अधीन होगा

    इस बार बदला रहेगा बीएड में अभ्यास शिक्षण का माहौल, प्रैक्टिस टीचिंग का काम अब डीआईओएस के अधीन होगा

    30 जून 2026
    लखनऊ। यूपी सरकार ने बीएड शिक्षण को लेकर एक नया आदेश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अब प्रैक्टिस टीचिंग का काम जिला विद्यालय निरीक्षक देखेंगे। ऐसे में पाठयोजना का अवलोकन, मापन व मूल्यांकन कौन करेगा यह प्रश्न अनुत्तरित है।

    बताया जाता है कि अभी तक शिक्षण अभ्यास का दायित्व कॉलेज का बीएड विभाग निभाता था। अब यदि शिक्षा विभाग को यह काम सौंपा जाता है तो वह अपनी मशीनरी से इस काम को कराएंगे। ऐसे में शिक्षक पाठयोजना इत्यादि का मूल्यांकन नहीं करेंगे। दूसरी तरफ स्ववित्त पोषित महाविद्यालय के संचालक इस नियम की जानकारी विद्यार्थियों को देकर उन्हें नए नियम के तहत ढाल लेंगे। जबकि अनुदानित महाविद्यालय में शिक्षक किसी भी प्रकार से इस मामले को अपने अनुकूल नहीं मान रहे हैं।




    अब राजकीय और एडेड स्कूलों से ही इंटर्नशिप कर सकेंगे बीएड विद्यार्थी, एनसीटीई के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग की पहल
     
    बीएड पाठ्यक्रम के तहत इंटर्नशिप कार्यक्रम होगा लागू 

    एनसीटीई की व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर

    08 जून 2026
    प्रयागराज। बीएड पाठ्यक्रम करने वाले छात्र-छात्राओं को राजकीय या सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से प्रशिक्षुता (इंटर्नशिप) करनी होगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने पहल की है। दो साल के बीएड पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 20 हफ्ते की इंटर्नशिप जरूरी होगी।

    पहले साल चार सप्ताह और दूसरे में 16 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य होगी। इसका रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा। अब तक तमाम संस्थान फर्जी इंटर्नशिप प्रमाणपत्र लगा देते थे। इससे गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा था।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पांच जून को पत्र लिखा है कि एनसीटीई रेगुलेशन 2014 में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रदेश के सभी बीएड कॉलेजों (सरकारी अथवा निजी) में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कराया जाए।



    बीएड में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य


    9 मई 2026
    लखनऊ। बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप जरूरी होगी। प्रशिक्षुओं को पहले वर्ष चार, दूसरे वर्ष 16 हफ्ते की इंटर्नशिप करनी होगी। 


    इन्हें राजकीय माध्यमिक स्कूलों पढ़ाने भेजा जाएगा। कहीं राजकीय स्कूल नहीं है तो निजी में भेजा जाएगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियम सख्ती से लागू होंगे। 

    उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिलों को निर्देश भेज दिए हैं। कॉलेज इंटर्नशिप के लिए छात्र सूची डीआईओएस को भेजेंगे।

    वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

    वित्तीय साक्षर बनाने और बैंक फ्रॉड से बचाने के लिए 21 हजार स्कूलों में लगेगी क्लास

    लखनऊ। बच्चों को साइबर फ्राड, धोखाधड़ी के साथ बैंकिंग सुविधाओं की जानकारी देने के लिए बैंकों ने स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम की शुरुआत की है। इस पहल के तहत बैंकों की सभी शाखाओं को एक-एक स्कूल गोद लेना है। फिर विद्यार्थियों को वित्तीय साक्षर बनाया जाएगा। अभी तक 160 स्कूलों को बैंकों ने गोद लिया है। प्रदेश में कुल बैंक शाखाओं की संख्या करीब 21000 है।


    साइबर और बैंक फ्रॉड के बढ़ते मामलों पर लगाम लगाने के लिए बैंकों ने अब स्कूलों का रुख किया है। भारतीय बैंक संघ ने 'स्कूल बैंक चैम्प्स प्रोग्राम' शुरू किया है, जिसके तहत देशभर की हर बैंक शाखा एक-एक स्कूल को अंगीकृत करेगी। उत्तर प्रदेश में भी इस पहल को तेजी से लागू किया जा रहा है, ताकि बचपन से ही बच्चों को वित्तीय साक्षर और डिजिटल बैंकिंग के प्रति जागरूक बनाया जा सके। 

    सातवीं से नौवीं तक तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी परीक्षा, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी CBSE ने बताया कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू होगी

    सातवीं से नौवीं तक तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी परीक्षा, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी CBSE ने बताया कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू होगी


    नई दिल्लीः राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों में चल रही तमाम उलझनों पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को विराम लगा दिया। बोर्ड ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर साफ किया है कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू की जाएगी। कक्षा नौवीं और 10वीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उन्हें तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।

    बोर्ड के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना बहुभाषी बनाना है। इसी कारण मौजूदा बैचों को राहत दी गई है, नई व्यवस्था को पूरी तरह वर्तमान कक्षा छह से लागू किया जाएगा।

    इन छात्रों को मिलेगी छूटः दिव्यांग छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो छात्र चुने गए भाषा संयोजन को जारी रख सकेगा।


    सीबीएसई: किस कक्षा के लिए क्या है नियम

    कक्षा 10: इस बैच के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न उसकी बोर्ड परीक्षा होगी।

    कक्षा नौः इस बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले वर्ष कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा से होगा।

    कक्षा सात व आठः इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा। 

    कक्षा छहः यही पहला बैच होगा, जिस पर तीन-भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा (आर-3) की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

    उदाहरण से समझें: यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं, जैसे हिंदी और संस्कृत, या हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है। यदि छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा, जैसे हिंदी और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा ही लेनी होगी, ताकि तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहें।

    वहीं, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच या अंग्रेजी और जर्मन चुनी हुई हैं, उन्हें भी राहत दी गई है। वर्तमान में सातवीं, आठवीं और नौवीं के ऐसे छात्र अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रख सकेंगे, लेकिन उनके साथ एक भारतीय भाषा भी जोड़नी होगी।




    सीबीएसई : 10वीं तक नहीं बदलनी होगी विदेशी भाषा, तीन भाषाओं वाली नीति में विद्यार्थियों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में तीन भाषाओं वाली नीति (त्रि-भाषा फॉर्मूला) को लेकर भ्रम को दूर किया है, जिससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ने वाले जिन विद्यार्थियों ने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, उन्हें मौजूदा भाषाएं बदलने की जरूरत नहीं है। ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक अपनी चुनी भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।


    सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई भाषा नीति के तहत कम के कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता को आगामी सत्र से केवल कक्षा 6 से लागू किया जाएगा। इसे कक्षा 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं थोपा जाएगा। सीबीएसई ने मई में जारी सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड के इस नियम के खिलाफ विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। 


    पहले अनिवार्य की थीं तीन भाषाएं
    बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर में कहा था कि जब तक तीसरी भाषा की नई पुस्तकें नहीं आ जाती हैं, तब तक कक्षा 9 के विद्यार्थी चुनी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे। अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से त्रि-भाषा नीति लागू करने और कक्षा 9 के लिए गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।

    Monday, June 29, 2026

    यूपी के मिड डे मील रसोइयों ने की मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग

    यूपी के मिड डे मील रसोइयों ने की मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग

    दो हजार रुपये मानदेय... वो भी सिर्फ 10 महीने


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयो के रसोइयों ने मानदेय बढ़ाने एवं सेवा शर्तें तय करने की मांग की है क्योंकि उन्हें केवल 10 महीने मात्र 2000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलता है। सेवा शर्तें तय न होने के कारण अवकाश व कैशलेस इलाज आदि में दिक्कत होती है।


    प्रदेश के 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में दो-दो यानी लगभग 2.50 लाख रसोइये तैनात हैं। परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन (एमडीएम) तैयार करने वाली रसोइयों की अब तक कोई सेवा शर्तें तय नहीं की गई हैं। इसकी वजह से अपने मानदेय भुगतान से लेकर अवकाश, सेवानिवृत्ति व अन्य सुविधाओं को लेकर इन्हें हमेशा परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

     हालत यह है कि शासनादेश के बावजूद कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी इन्हें सही से लाभ नहीं मिल पा रहा जबकि आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश, मातृत्व अवकाश या बाल्य देखभाल अवकाश जैसी कोई भी सुविधाएं इन्हें नहीं मिलती है। 

    नए सिरे से अब तय होगा छात्रों को पढ़ाने का तरीका, पहली बार विद्यार्थियों के लिए पाठ्यचर्या की रूपरेखा बनाएगा यूपी बोर्ड

    नए सिरे से अब तय होगा छात्रों को पढ़ाने का तरीका, पहली बार विद्यार्थियों के लिए पाठ्यचर्या की रूपरेखा बनाएगा यूपी बोर्ड

    09 से 12 वीं तक के विद्यार्थियों के सीखने की रूपरेखा बनाएंगे

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के 29 हजार से अधिक स्कूलों में कक्षा नौ से 12 तक में अध्ययनरत एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को सिखाने-पढ़ाने का तौर-तरीका नए सिरे से तैयार होगा। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 को उत्तर प्रदेश में लागू करने के लिए राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या (एससीएफ) विकसित करने की जिम्मेदारी यूपी बोर्ड को दी गई है। माध्यमिक शिक्षा में एनसीएफ को लागू करने के लिए समग्र शिक्षा अभियान लखनऊ के प्रस्ताव पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 2026-27 सत्र की वार्षिक कार्ययोजना के तहत बजट को मंजूरी दे दी है।


    यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या का उद्देश्य यह तय करना है कि विद्यालयों में क्या पढ़ाया जाए, कैसे पढ़ाया जाए और विद्यार्थियों का मूल्यांकन किस प्रकार किया जाए। बोर्ड के अपर सचिव पाठ्यपुस्तक डॉ. स्कंद शुक्ल ने बताया कि राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या विकसित करने के लिए जुलाई से ऑफलाइन और ऑनलाइन कार्यशाला शुरू होगी। इसमें प्रतिभाग करने के लिए प्रदेशभर से विशेषज्ञों को बुलाया जाएगा। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को भी शामिल किया जाएगा।


    🔴 पाठ्यचर्या का उद्देश्य

    शिक्षा को अधिक रचनात्मक, व्यावहारिक और छात्र केंद्रित बनाना।

    विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, समस्या समाधान और रचनात्मकता का विकास करना।

    शिक्षा को स्थानीय भाषा, संस्कृति और जीवन से जोड़ना।

    केवल रटने की बजाय समझ-आधारित सीखने को बढ़ावा देना।

    समावेशी और समान अवसर वाली शिक्षा सुनिश्चित करना।


    🔴 प्रमुख घटक

    शिक्षण अधिगम प्रक्रिया

    मूल्यांकन प्रणाली

    शिक्षक की भूमिका

    विद्यालयी वातावरण और संसाधन

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को लेकर शिक्षकों की बेरुखी से बढ़ी शिक्षा विभाग की परेशानी, 13 जुलाई तक आनलाइन आवेदन का मौका

    ट्यूशन पढ़ाने वालों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार नहीं मिलेगा


    प्रयागराज। राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार 2026 के लिए 13 जुलाई तक शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक शिक्षकों से आवेदन कराएं।

    खास बात यह है कि ट्यूशन जैसी गतिविधियों में संलिप्त शिक्षक या प्रधानाचार्य आवेदन नहीं कर सकते हैं। संविदा पर कार्यरत शिक्षक या शिक्षामित्र भी आवेदन के लिए अर्ह नहीं है। केवल न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा वाले नियमित शिक्षक, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य पात्र है। राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार पोर्टल http://nationalawardstoteachers.education.gov.in पर पंजीकरण की अंतिम तिथि 10 जुलाई और सबमिट करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। आवेदक को आवेदन पत्र के साथ एक ऑनलाइन पोर्टफोलियो अपलोड करना है, जिसमें आवश्यक अभिलेख, टूल्स, एक्टिविटी रिपोर्ट, फील्ड विजिट, फोटो, ऑडियो या वीडियो आदि सम्मिलित होंगे।



    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को लेकर शिक्षकों की बेरुखी से बढ़ी शिक्षा विभाग की परेशानी, 13 जुलाई तक आनलाइन आवेदन का मौका, जिले में कराना होगा 25 आवेदन

    शिक्षकों को प्रेरित कर अधिक से अधिक आवेदन कराने में जुटा विभाग

    लखनऊ । राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए आनलाइन स्व-नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आवेदन की रफ्तार धीमी होने से विभागीय अधिकरियों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में शिक्षा निदेशालय ने पात्र शिक्षकों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक आनलाइन आवेदन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। 


    इस वर्ष शिक्षा मंत्रालय ने यूपी को दो हजार नामांकन का लक्ष्य दिया है। इस हिसाब से जिले में कमसे कम 25 शिक्षकों को आवेदन करने  होंगे। विभाग की तरफ से इसके लिए संबंधित अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के दो से तीन उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पोर्टल पर आवेदन कराने और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार 25 जून तक प्रदेश भर में केवल 24 शिक्षकों ने पंजीकरण कराया था, जबकि अंतिम रूप से एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ था। 

    बड़ी संख्या में जिले ऐसे हैं, जहां अब तक एक भी नामांकन नहीं हुआ है।  इसी के मद्देनजर यहां आवेदन संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र शिक्षक 10 जुलाई तक आनलाइन स्व-नामांकन कर सकते हैं, जबकि 13 जुलाई तक आवेदन अंतिम रूप से सबमिट करना होगा।


    Sunday, June 28, 2026

    समायोजन को लेकर हाईकोर्ट लगातार समान नीति लागू करने के आदेश दे रहा और अधिकारी वरिष्ठता सूची तैयार करने में अलग-अलग नियम लागू कर रहे

    समायोजन को लेकर हाईकोर्ट लगातार समान नीति लागू करने के आदेश दे रहा और अधिकारी वरिष्ठता सूची तैयार करने में अलग-अलग नियम लागू कर रहे 


    लखनऊ । बेसिक के सरप्लस शिक्षकों के अंतःजनपदीय (जिले के अंदर) तबादले समायोजन का मामला पहले से हाईकोर्ट में है। कोर्ट लगातार समान नीति लागू करने के आदेश दे रहा है। इसके बावजूद जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारी वरिष्ठता सूची तैयार करने में अलग-अलग नियम लागू कर रहे हैं। 


    अब छात्र शिक्षक-अनुपात को लेकर गडबड़ी सामने आई है। कहीं, 30 अप्रैल की छात्र संख्या के आधार पर अनुपात तय किया जा रहा है तो कहीं 20 मई की छात्र संख्या के आधार पर। बेसिक शिक्षा विभाग के तबादलों में शुरुआत से ही हर जिले में अलग-अलग नियम लागू होने के मामले सामने आ रहे हैं। कहीं, जूनियर का तबादला तो कहीं सीनियर का तबादला किया जा रहा था। इस पर काफी विवाद हुआ और शिक्षक कोर्ट चले गए। 

    कोर्ट के आदेश पर अब शासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सीनियर शिक्षक ही सरप्लस होंगे। कोर्ट ने सभी जिलों की वरिष्ठता सूची भी तलब की है।


    कोर्ट के निर्देश पर तैयार की जा रही सूची

    कोर्ट के निर्देश पर सभी जिलों में वरिष्ठता सूची तैयार की जा रही हैं, इसमें भी गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। ललितपुर में वरिष्ठता सूची तैयार करने के लिए 20 मई की छात्र संख्या को छात्र-शिक्षक अनुपात का आधार बनाया गया है। वहीं, औरैया में 30 अप्रैल की छात्र संख्या के आधार पर अनुपात तय किया गया है। शिक्षकों का कहना है कि अप्रैल से जुलाई तक कई चरणों में सकूल चलो अभियान चलता है। इस दौरान नए दाखिले होते हैं। ऐसे में छात्रसंख्या लगातार बढ़ती है। इससे छात्र शिक्षक अनुपात बदलना निश्चित है। पूरे प्रदेश में एक ही तारीख तय करके छात्र शिक्षक अनुपात निकाला जाना चाहिए।


    हेडमास्टर के समायोजन पर भी अलग नियम

    इसके अलावा कुछ जिलों में हेड मास्टर को सरप्लस मानने या न मानने पर भी अलग-अलग जिलो में अलग आदेश किए जा रहे है। झांसी में 150 से कम छात्र संख्या पर हेड को सरप्लस मानकर तबादला किया जा रहा है। वहीं, बाराबंकी सहित कई जिलों में इसका उलट है। वहां हेड को सरप्लस नहीं माना जा रहा है। इस बारे में प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि एक छात्र की संख्या घटने या बढने से शिक्षक के तबादले पर अंतर आ जाता है। पूरे प्रदेश में समान मानक तय करने चाहिए। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि मामला न्यायालय में विचारधीन है। इस बारे में वह कुछ नहीं कह सकते।

    शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश

    शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी कर शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन निशुल्क करने को कहा है। अब कोई भी कॉलेज या विश्वविद्यालय सरकारी नौकरियों के लिए छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन से मना नहीं कर सकेगा।


    यूजीसी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता की जांच एक अनिवार्य शर्त है। पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद छात्रों को सत्यापन के लिए लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

    इसी को देखते हुए अब सभी केंद्रीय, राज्य, मानित (डीम्ड) और निजी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी भर्ती एजेंसी द्वारा मांगे जाने पर शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि बिना किसी शुल्क के करें। आयोग का मानना है कि उम्मीदवारों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना सरकारी हितों के लिए आवश्यक है, इसलिए संस्थान इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान करें।

    प्रोजेक्ट प्रवीण में 36 हजार अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण 15 जुलाई से

    प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत माध्यमिक स्कूलों के 36103 विद्यार्थियों को मिलेगा प्रशिक्षण

    15 से शुरू होंगी कक्षाएं, गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी होंगे

    आईटी, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रॉनिक्स और कृषि आदि क्षेत्रों में प्रशिक्षण

    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ रोजगारपरक कौशल से जोड़ने की मुहिम तेज कर दी गई है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण के लिए लक्ष्य आवंटित कर दिए हैं।


    इस योजना के तहत आईटी आईटीईएस, हेल्थकेयर, अपैरल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जॉब और कृषि क्षेत्र में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी
    की होंगे। इससे बच्चों को प्रयोगात्मक व व्यावहारिक ज्ञान अच्छे से मिल सकेगा। इस साल प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत कुल 36,103 प्रशिक्षणार्थियों को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    कौशल विकास मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि केंद्र की स्थापना, पंजीकरण और बैच बनाकर 15 जुलाई तक कक्षाओं का संचालन शुरू करना होगा। बैच शुरू होने के सात दिन के अंदर सभी विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री का वितरण कर उसकी फोटो मिशन पोर्टल पर अपलोड करनी होगी। उन्होंने कहा कि यदि कोई प्रशिक्षण प्रदाता समय पर कार्य शुरू नहीं करता है या जिला स्तर से किसी प्रकार की शिकायत मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।


    ये जिले शामिल
    आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र सहित राज्य के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण देने की जिम्मेदारी दी गई है। पाठ्यक्रम की अधिकतम अवधि 300 घंटे होगी।

    सरकार का प्रयास है कि प्रदेश का कोई भी युवा हुनर से वंचित न रहे। प्रोजेक्ट प्रवीण के जरिये राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही तकनीकी और व्यावसायिक क्षेत्रों में मजबूत कर रहे हैं। -कपिल देव अग्रवाल, व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)




    प्रोजेक्ट प्रवीण में 36 हजार अभ्यर्थियों को कौशल प्रशिक्षण 15 जुलाई से

     लखनऊ: राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले 36,103 छात्र-छात्राओं को इस सत्र में रोजगारपरक कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। उप्र कौशल विकास मिशन ने 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण (एसटीटी) का लक्ष्य जारी किया है। सभी प्रशिक्षण संस्थानों को 15 जुलाई से हर हाल में कक्षाएं शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशिक्षण की अवधि अधिकतम 300 घंटे होगी और हर बैच में अधिकतम 35 प्रशिक्षणार्थी ही शामिल किए जाएंगे।

    प्रोजेक्ट प्रवीण के माध्यम से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को सामान्य शिक्षा के साथ तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। इस शैक्षणिक सत्र में आगरा, बरेली, आजमगढ़, ललितपुर, वाराणसी, रामपुर, शाहजहांपुर, जालौन और सोनभद्र समेत अन्य जिलों के राजकीय विद्यालयों में सूचीबद्ध 299 प्रशिक्षण प्रदाताओं को प्रशिक्षण की जिम्मेदारी सौंपी गई है। 

    इसके तहत आइटी-आइटीईएस, हेल्थकेयर, इलेक्ट्रानिक्स, अपैरल, ब्यूटी एंड वेलनेस, मैनेजमेंट, ग्रीन जाब्स और एग्रीकल्चर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। सीमित बैच होने से विद्यार्थियों को व्यावहारिक और प्रयोगात्मक प्रशिक्षण बेहतर ढंग से मिल सकेगा। मिशन के निदेशक पुलकित खरे ने सभी प्रशिक्षण प्रदाताओं को निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए हैं।

    Friday, June 26, 2026

    परिषदीय इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हो रही हिन्दी में पढ़ाई, पढ़ाई के लिए तैनात शिक्षकों के हुए तबादलों से बढ़ी कठिनाई

    परिषदीय इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हो रही हिन्दी में पढ़ाई, पढ़ाई के लिए तैनात शिक्षकों के हुए तबादलों से बढ़ी कठिनाई 


    लखनऊ। अंग्रेजी माध्यम के 16 हजार परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में हिंदी में पढ़ाई कराई जा रही है। अंग्रेजी माध्यम की पूरी किताबें मिलती नहीं और स्कूलों को अंग्रेजी में पढ़ने वाले छात्र भी कम मिलते हैं। पढ़ाने को तैनात किए गए शिक्षकों के भी दूसरी जगह तबादले हो गए। ऐसे में पढ़ाई कराना कठिन हो रहा है।


    सभी जिलों के प्रत्येक ब्लॉक में 17-17 अंग्रेजी माध्यम स्कूल हैं और इसके अलावा नगर क्षेत्र में भी यह विद्यालय चल रहे हैं। सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को कभी भी पूरी किताबें अंग्रेजी में छपी नहीं मिलती। दूसरी समस्या यह है कि कक्षा पांच तक जैसे-तैसे अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई छात्रों को कराई जाती है लेकिन अंग्रेजी के उच्च प्राथमिक स्कूल बहुत कम हैं।

     उदाहरण के तौर पर बीकेटी ब्लॉक में 17 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में से सिर्फ दो महिगवां व बसहा उच्च प्राथमिक स्कूल अंग्रेजी माध्यम के हैं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कर छात्र आगे कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में नहीं कर पाते। वर्ष 2017 से चरणबद्ध ढंग से 16 हजार विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तो तब्दील कर दिया गया लेकिन यह मकसद पूरा नहीं कर पा रहे।

    प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन, के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि न किताबें मिलती हैं, न शिक्षक हैं और न ही अंग्रेजी में पढ़ने वाले ज्यादा छात्र।


    पहले चयन फिर तबादला माध्यम

    पढ़ाई कराने के लिए शिक्षकों की परीक्षा ली गई। उनसे विकल्प लिया गया और उसके बाद उनकी तैनाती हुई। समायोजन की प्रक्रिया में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों को हिंदी माध्यम के स्कूलों में तैनात कर दिया गया।


    कंपोजिट बेहतर विकल्प

    अगर बेसिक शिक्षा परिषद यह प्रयोग कंपोजिट स्कूलों यानी जहां प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में हैं वहां करते तो कठिनाई न होती। छात्र कक्षा एक से कक्षा आठ तक आसानी से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कर लेता।

    यूपी में संस्कृत स्कूलों के विद्यार्थियों का 'पंख' पोर्टल पर होगा रजिस्ट्रेशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षिक पंचांग लागू, प्रत्येक शनिवार होगा 'आनंदमय दिवस

    यूपी में संस्कृत स्कूलों के विद्यार्थियों का 'पंख' पोर्टल पर होगा रजिस्ट्रेशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शैक्षिक पंचांग लागू, प्रत्येक शनिवार होगा 'आनंदमय दिवस


    प्रदेश के संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों का 'पंख' पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शैक्षिक पंचांग का अनिवार्य रूप से पालन होगा। यह निर्णय माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की समीक्षा बैठक में लिया गया, जिसमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षण और छात्रों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया गया।


    🔴 संस्कृत विद्यालयों के छात्रों का 'पंख' पोर्टल पर पंजीकरण होगा।

    🔴 राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शैक्षिक पंचांग का पालन अनिवार्य।

    🔴 प्रत्येक शनिवार 'आनंदमय दिवस' पर रचनात्मक गतिविधियां आयोजित होंगी।


    लखनऊ। प्रदेश के संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों का 'पंख' पोर्टल पर पंजीकरण कराया जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देते हुए संस्कृत परिषद के शैक्षिक पंचांग का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाएगा।


    यह निर्णय माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया। परिषद के सचिव ओपी त्रिपाठी की अध्यक्षता में हुई बैठक में प्रयागराज के निरीक्षक संस्कृत पाठशाला और सभी मंडलीय उपनिरीक्षकों ने भाग लिया। बैठक में स्कूल चलो अभियान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, मिशन पहचान, फन डे और विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण विकसित करने पर जोर दिया गया।

    निर्देश दिए गए कि प्रत्येक विद्यालय में प्रतिदिन एक विद्यार्थी सूचना पट्ट पर संस्कृत भाषा में सुविचार लिखेगा, जिसकी प्रार्थना सभा में व्याख्या भी की जाएगी। माह के सर्वश्रेष्ठ सुविचार लिखने वाले विद्यार्थी को सम्मानित किया जाएगा, जिससे विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और संस्कृत भाषा के प्रति रुचि बढ़े।

    सचिव ने विद्यालयों के नियमित निरीक्षण और शैक्षिक पंचांग के अनुरूप पठन-पाठन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही विद्यार्थियों को एनसीईआरटी की डिजिटल पुस्तकों, मोबाइल एप और क्यूआर कोड आधारित अध्ययन सामग्री के उपयोग के लिए प्रेरित करने को कहा गया।

    प्रत्येक शनिवार 'आनंदमय दिवस' के तहत वाद-विवाद, क्विज, निबंध लेखन और स्थानीय भ्रमण जैसी गतिविधियां आयोजित कर विद्यार्थियों के सृजनात्मक कौशल और वैज्ञानिक सोच को विकसित किया जाएगा।

    संस्कृत माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किए हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा आवेदन पत्रों में संशोधन के नए निर्देश

    संस्कृत माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किए हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा आवेदन पत्रों में संशोधन के नए निर्देश


    लखनऊ, 24 जून 2026।
    उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा आवेदन पत्रों में संशोधन, त्रुटि सुधार, जन्मतिथि संशोधन, नाम, उपनाम, अभिभावक तथा प्रमाण-पत्रों की द्वितीय प्रति प्राप्त करने से संबंधित मामलों के निस्तारण के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद के सचिव द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि परीक्षा आवेदन पत्र परिषद कार्यालय भेजे जाने से पूर्व विद्यालय स्तर पर ही विद्यार्थियों के समस्त विवरणों का सावधानीपूर्वक मिलान कराया जाए, ताकि आवेदन पत्रों में किसी भी प्रकार की त्रुटि शेष न रहे। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय में विषय अध्यापकों की टीम गठित कर छात्र-छात्राओं के विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में उल्लेख किया गया है कि आवेदन पत्रों के परिषद कार्यालय पहुंचने के बाद भी बड़ी संख्या में नाम, जन्मतिथि, अभिभावक के नाम तथा अन्य विवरणों में संशोधन के प्रकरण प्राप्त होते हैं, जिससे विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसी स्थिति को देखते हुए विद्यालय स्तर पर त्रुटिरहित आवेदन प्रक्रिया पर विशेष बल दिया गया है।

    परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि परीक्षा आवेदन पत्र परिषद कार्यालय भेजे जाने के बाद संशोधन संबंधी प्रकरण केवल निर्धारित प्रपत्रों पर आवश्यक अभिलेख संलग्न कर ही भेजे जाएंगे। अपूर्ण अथवा निर्धारित प्रक्रिया के विपरीत भेजे गए प्रकरणों पर कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी, जिसकी पूर्ण जिम्मेदारी संबंधित संस्था प्रधान की होगी।

    पत्र के अनुसार विभिन्न सत्रों के लिए संशोधन शुल्क भी निर्धारित किया गया है। वर्ष 2002 से 2005 तक के अभिलेखों के संशोधन हेतु ₹2500, 2006 से 2010 तक ₹2000, 2011 से 2015 तक ₹1500 तथा 2016 से 2020 तक के अभिलेखों के लिए ₹1200 शुल्क निर्धारित किया गया है। वहीं प्रमाण-पत्रों की द्वितीय प्रति जारी करने के लिए ₹500 शुल्क देय होगा।

    परिषद ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि जनपद के समस्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को इन दिशा-निर्देशों से अवगत कराते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही संशोधन संबंधी प्रकरण परिषद को उपलब्ध कराए जाएँ।


    संस्कृत छात्रों को हाईस्कूल के बाद सीधे मिलेगा साढ़े सात वर्षीय बीएएमएस में दाखिला, प्रदेश में खुलेंगे पांच गुरुकुलम, प्रवेश परीक्षा के जरिये होगा दाखिला

    संस्कृत छात्रों को हाईस्कूल के बाद सीधे मिलेगा साढ़े सात वर्षीय बीएएमएस में दाखिला, प्रदेश में खुलेंगे पांच गुरुकुलम, प्रवेश परीक्षा के जरिये होगा दाखिला

    7.5 साल में मिलेगी डिग्री आयुष विभाग ने शुरू की तैयारी

    लखनऊ। प्रदेश में संस्कृत छात्रों के लिए खुशखबरी है। अब उन्हें हाईस्कूल के बाद सीधे बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी में दाखिला (बीएएमएस) मिलेगा। इसके लिए प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू होंगे। ये गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में खुलेंगे।


    संस्कृत छात्रों को विभिन्न तरह के व्यावसायिक कोर्स से जोड़ा जा रहा है। इसी रणनीति के तहत राष्ट्रीय भारतीय चिकित्सा पद्धति आयोग और केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने मिलकर पारंपरिक वैदिक मूल्यों और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान को जोड़ने के लिए नया फ्रेमवर्क तैयार किया है। हर राज्य में आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू होंगे। इनमें बीएएमएस की पढ़ाई होंगी।

    हाईस्कूल तक संस्कृत की पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रवेश परीक्षा के जरिए दाखिला दिया जाएगा। इंटीग्रेटेड बीएएमएस कोर्स 7.5 साल का होगा। उत्तर प्रदेश में पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् शुरू करने की तैयारी है। इसे गाजियाबाद, बस्ती, गोंडा, आगरा और मिर्जापुर में खोला जाएगा। आयुष विभाग ने सभी तैयारी पूरी कर ली है।

    कैसे होगा दाखिला : आयुर्वेद के मूल ग्रंथ (जैसे चरक संहिता, सुश्रुत संहिता) संस्कृत में हैं। केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय नोडल एजेंसी के रूप में काम कर रहा है। सभी आयुर्वेद गुरुकुल इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। दाखिले के लिए विश्वविद्यालय द्वारा प्रवेश परीक्षा कराई जाएगी। इसे पीएपी एनईईटी नाम दिया गया है। गुरुकुलम् के पास खुद का अस्पताल होगा। जहां छात्रों को व्यावहारिक और क्लिनिकल ट्रेनिंग दी जाएगी

    7.5 साल का होगा कोर्सः यह पूरी तरह से एक आवासीय ग्रेजुएशन कोर्स है। 10वीं कक्षा के बाद ही छात्रों को आयुर्वेद डॉक्टर बनने का एक सीधा रास्ता देगा है। यह कोर्स 7.5 साल का होगा। पहले दो वर्ष तक प्री-आयुर्वेद शिक्षा और फिर 4.5 वर्ष तक बीएएमएस की पढ़ाई होगी। एक वर्ष इंटर्नशिप होगा।


    क्या है आयुर्वेद गुरुकुलम 
    आयुर्वेद गुरुकुलम चिकित्सा और शिक्षा के क्षेत्र में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी पहल है। इसकी शुरुआत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय अपने खुद के परिसरों में इसी वर्ष से करने की तैयारी में है। देश का सबसे पहला मुख्य आयुर्वेद गुरुकुलम कैंपस नासिक और दूसरा नई दिल्ली स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू करने की तैयारी है। केरल में आयुर्वेद गुरुकुलम नाम से निजी पारंपरिक संस्थान और चिकित्सा केंद्र चल रहा है। यहां दुनिया भर के छात्रों को पंचकर्म, आयुर्वेद कॉस्मेटोलॉजी और पारंपरिक केरल चिकित्सा पद्धतियों में शॉर्ट-टर्म और डिप्लोमा कोर्सेज कराता है।


    संस्कृत भाषा की पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए यह बड़ा अवसर है। संस्कृत छात्र आयुर्वेद की मूल ग्रंथों की पढ़ाई करके डॉक्टर बनेंगे। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता सहित अन्य वेदों- पुराण का पाठ करेंगे। खास बात यह है कि उत्तर प्रदेश पहला राज्य है, जिसे एक साथ पांच आयुर्वेद गुरुकुलम् का तोहफा मिला है।- डॉ. दयाशंकर मिश्र दयालु आयुष मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

    Thursday, June 25, 2026

    RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

    RTI में देरी और भ्रामक सूचना देने पर औरैया में BSA रहे तीन शिक्षाधिकारियों पर 25 हजार का जुर्माना

    औरैया के दो पूर्व व वर्तमान बीएसए पर लगाया जुर्माना, वेतन से जुर्माना राशि काटने का आदेश


    लखनऊ। राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के प्रावधानों की अनदेखी और भ्रामक सूचना देने के मामले में तीन बीएसए पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने यह कार्रवाई औरैया के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से जुड़े एक प्रकरण में की है।


    आयोग में कुलदीप कुमार चतुर्वेदी की शिकायत पर सुनवाई हुई। शिकायतकर्ता ने 24 जून 2022 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, औरैया कार्यालय में सूचना के लिए आवेदन दिया था। आयोग के अनुसार निर्धारित समय सीमा में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई। करीब एक वर्ष की देरी के बाद 26 जुलाई 2023 को सूचना दी गई। सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि सूचना देने में हुई देरी का अधिकारियों ने कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया। आयोग ने कारण बताओ नोटिस जारी कर कई अवसर दिए, लेकिन अधिकारियों की ओर से उचित जवाब नहीं मिला।


    सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत

    आयोग ने यह भी माना कि सूचना देने से इनकार करने के लिए आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) का अनुचित आधार लिया गया। राज्य सूचना आयुक्त स्वतंत्र प्रकाश गुप्त ने अपने आदेश में कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। सूचना देने में बेवजह देरी और भ्रामक जानकारी देना अधिनियम की भावना के विपरीत है। आयोग ने तत्कालीन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस राजपूत, तत्कालीन बीएसए अनिल कुमार और वर्तमान बीएसए संजीव कुमार पर संयुक्त रूप से 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह राशि तीनों अधिकारियों के वेतन से समान रूप से वसूलने के निर्देश दिए गए हैं।

    माध्यमिक शिक्षकों को बड़ी राहत, हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ, शासन ने संशोधन को दी मंजूरी

    माध्यमिक शिक्षकों को बड़ी राहत,  हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ,  शासन ने संशोधन को दी मंजूरी


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए हाईस्कूल सहायक अध्यापक से इंटरमीडिएट प्रवक्ता पद पर पदोन्नति से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान कर दिया है। शासन ने माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन को स्वीकृति प्रदान कर दी है।

    9 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त शिक्षकों को मिलेगा लाभ
    शासनादेश संख्या 1163/15-7-2026-1(29)/2019, दिनांक 18 जून 2026 के अनुसार स्पष्ट किया गया है कि 09 सितंबर 2025 से पूर्व नियुक्त सहायक अध्यापक प्रवक्ता पद पर पदोन्नति के लिए पूर्व व्यवस्था के अनुसार ही पूर्णतः पात्र (Eligible) माने जाएंगे। इस निर्णय से उन हजारों शिक्षकों को राहत मिलेगी जो नियमों में बदलाव के बाद पदोन्नति को लेकर असमंजस की स्थिति में थे।

    NCTE मानकों के कारण उत्पन्न हुई थी समस्या
    प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि 09 सितंबर 2025 को जारी शासनादेश के तहत शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अर्हताओं को NCTE (National Council for Teacher Education) के मानकों के अनुरूप संशोधित किया गया था। इसके बाद पहले से नियुक्त शिक्षकों की पदोन्नति संबंधी पात्रता को लेकर कई व्यावहारिक प्रश्न सामने आए थे।

    चूंकि पूर्व में नियुक्त सहायक अध्यापकों की नियुक्ति उस समय प्रचलित अर्हताओं के आधार पर हुई थी, इसलिए उनकी पदोन्नति व्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए वर्तमान संशोधन किया गया है।



    प्रमुख बिंदु

    हाईस्कूल सहायक अध्यापक से प्रवक्ता पदोन्नति का मार्ग साफ।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद के प्रस्ताव को शासन की मंजूरी।

    09 सितंबर 2025 से पहले नियुक्त शिक्षक पूर्व नियमों के अनुसार पात्र होंगे।

    NCTE मानकों के कारण उत्पन्न पदोन्नति संबंधी विवाद का समाधान।

    हजारों शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ मिलने की संभावना।

    Wednesday, June 24, 2026

    हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

    हरदोई बीएसए के निलंबन की संस्तुति के साथ उच्च स्तरीय जांच की सिफारिश, डीएम द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत

    पदेन दायित्वों में गंभीर लापरवाही बरतने और कार्यशैली पर सवाल

    23 जून 2026
    हरदोई: जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डाक्टर अजित सिंह के खिलाफ रिश्वत मांगने और लेनदेन से जुड़े आरोपों की एफआईआर की पुलिस जांच जारी रहने के बीच जिलाधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की रिपोर्ट में गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। इसी आधार पर डीएम ने बीएसए के निलंबन और शासन स्तर पर उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने की संस्तुति की है।

    जांच समिति, जिसमें नगर मजिस्ट्रेट संजय कुमार, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्रवक्ता डाक्टर रामेंद्र सिंह शामिल थे, ने अपनी रिपोर्ट में कई गंभीर बिंदु उठाए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बीएसए पर न केवल नियुक्ति पत्र वितरण में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं, बल्कि पेंशन पत्रावलियों से जुड़े मामलों में भी 20 हजार रुपये मांगने जैसे आरोपों का उल्लेख किया गया है। 

    रिपोर्ट में कहा गया है कि डाक्टर अजित सिंह द्वारा अपने पदेन दायित्वों का निर्वहन ठीक से नहीं किया गया। उनकी कार्यशैली और आचरण को पद एवं गरिमा के प्रतिकूल पाया गया है। समिति ने यह भी टिप्पणी की कि न्यायालय, शासन और निदेशालय के निर्देशों के मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वह इस संवेदनशील पद पर रहने योग्य नहीं हैं। 

    समिति ने अपने निष्कर्ष में यह भी कहा है कि जांच के दौरान सामने आए सीमित मामलों के आधार पर यह आशंका मजबूत होती है कि मृतक आश्रितों की नियुक्ति, सेवा संबंधी निलंबन-बहाली, वित्तीय स्वीकृतियों और अन्य प्रशासनिक निर्णयों में भी व्यापक स्तर पर अनियमितताएं हो सकती हैं। ऐसे सभी प्रकरणों की विस्तृत समीक्षा आवश्यक है। 

    जांच रिपोर्ट में उच्च स्तर पर यह भी संस्तुति की गई है कि बीएसए डाक्टर अजित सिंह के पूरे कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की स्वतंत्र और व्यापक जांच कराई जाए, ताकि सभी लंबित और विवादित मामलों की वास्तविक स्थिति सामने आ सके। डीएम की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में इन सभी तथ्यों को गंभीर प्रशासनिक चूक और संभावित अनियमितताओं के रूप में दर्ज किया गया है, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई अब शासन स्तर पर तय की जाएगी।

    रची गई साजिश, आरोप फर्जीः बीएसए डाक्टर अजित सिंह पर लगे आरोपों के बारे में उनका पक्ष लेने का प्रयास किया, जिसमें सोमवार की शाम बीएसए का प्राइवेट नंबर बंद आता रहा। सीयूजी नंबर पर फोन किया तो वह उठा नहीं। पूर्व में बीएसए डाक्टर अजित सिंह से हुई वार्ता में उन्होंने रिश्वत मांगने और लेने के आरोपों को पूरी तरह से फर्जी बताया था। बीएसए डाक्टर अजित सिंह के अनुसार उन्हें प्रशासन की तरफ से पूरी साजिश कर फंसाया जा रहा है, जिसके लिए फर्जी रिपोर्ट बनाई गई है। इसमें कई लोग शामिल हैं, जोकि उन्हें किसी भी तरह से हटवाना चाहते हैं।

    प्रशासन ने आरोपों को नकारा
    बीएसए डाक्टर अजित सिंह द्वारा प्रशासन पर साजिश रचे जाने के आरोप में प्रशासन का कहना है कि बीएसए ने खुद अनियमितता की। फाइलों को गायब कराया। पेंशन पत्रावलियों में हस्ताक्षर नहीं किए। बिना किसी कारण के पत्रावलियों को लंबित रखा। बीएसए के लिपिकों ने ही बयान दिए हैं। अब बीएसए फंस रहे तो साजिश बता रहे हैं।



    हरदोई BSA पर 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप पर FIR दर्ज, जानिए पूरा मामला  

    20 जून 2026
    हरदोई ।  बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) डॉ. अजीत सिंह पर शुक्रवार रात 5 लाख रिश्वत मांगने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई। आरोप है कि अजीत सिंह ने एजुकेटर भर्ती से जुड़ी एक संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की धमकी देकर 5 लाख रुपए की मांग की थी। संस्था अध्यक्ष ने 2 लाख रुपए ले भी लिए थे। 

    हालांकि बीएसए ने आरोपों को झूठा बताया। उन्होंने कहा- डीएम अनुनय झा ने जाल बिछाकर मुझे फंसाया है। वह मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे, लेकिन साबित नहीं कर पाए। 


    एक दिन पहले 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल दस्तावेज गायब मिले थे। डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जानिए पूरा मामला 
    गोंडा के तरबगंज स्थित उज्ज्वला सेवा संस्थान के अध्यक्ष ओम प्रकाश तिवारी की शिकायत पर बीएसए डॉ. अजित सिंह के खिलाफ हरदोई में थाना कोतवाली नगर में मुकदमा दर्ज हुआ है। ओम प्रकाश तिवारी ने बताया- यूपी के कई जिलों में ईसीसीई (ECCE) एजुकेटर के 210 पदों पर भर्ती प्रक्रिया के लिए हमारी संस्था को अधिकृत किया गया था।

    उनका दावा है कि उसने सेवायोजन पोर्टल से मिले 4,590 आवेदनों में से जिला चयन समिति द्वारा किए गए रैंडमाइजेशन के माध्यम से 630 अभ्यर्थियों का चयन संबंधी डेटा प्राप्त कर लिया था। इसके बाद आगे की प्रक्रिया के लिए संबंधित अधिकारियों से मार्गदर्शन मांगा गया। अनुबंध के लगभग 6 महीने बाद जब उन्होंने कार्य को आगे बढ़ाने के लिए संपर्क किया तो बीएसए ने उन्हें कार्यालय बुलाया और 5 लाख रुपए रिश्वत मांगी।

    आरोप है कि रुपए न देने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने और जमानत राशि जब्त कराने की धमकी दी। संस्था अध्यक्ष का यह भी आरोप है कि दबाव में आकर उन्होंने 2 लाख रुपए दे दिए, लेकिन इसके बाद भी बाकी रुपए मांगे जाते रहे। लगातार प्रताड़ित किया जाता रहा।


    बीएसए डॉ. अजीत सिंह ने बताया- यह जिलाधिकारी का ट्रैप है, जिसमें मुझे फंसाया गया है। वह लगातार मुझ पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते थे। मैंने उनसे कहा था कि यदि कोई भ्रष्टाचार हुआ है तो उसे साबित करें। इसके बाद मुझे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। मुझे अपशब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि मैं जिले में न रहूं और यहां से चला जाऊं।

    एडीएम प्रफुल्ल त्रिपाठी ने भी मुझे प्रताड़ित किया। मेरे कार्यालय के दो बाबुओं को अपने यहां अटैच कर लिया गया और अपने यहां के दो बाबुओं को मेरे कार्यालय में भेज दिया गया, ताकि मेरी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके।

    एजुकेटर भर्ती परीक्षा से संबंधित जो भी कार्रवाई हुई, वह जिलाधिकारी के निर्देशों पर की गई। पूरी प्रक्रिया जिला प्रशासन की निगरानी में संपन्न हुई। इसके बावजूद अब मुझे फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। बैठकों में मेरे साथ अभद्र व्यवहार किया गया और अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। मैं इसे बर्दाश्त नहीं कर सकता। जिलाधिकारी ने फर्म संचालक को बुलाकर मेरे खिलाफ षड्यंत्र के तहत मुकदमा दर्ज कराया है।

    यदि मैंने किसी प्रकार का भ्रष्टाचार किया है तो एजुकेटर पदों पर भर्ती होने वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ कर ली जाए। यह पता कर लिया जाए कि क्या मैंने किसी से कोई धनराशि मांगी है या किसी प्रकार की अवैध मांग की है। यह मेरे खिलाफ रची गई एक सुनियोजित साजिश है। मैं इसका कानूनी तरीके से सामना करूंगा। इस साजिश में एडीएम की भी भूमिका है। मैं पूरी तरह निर्दोष हूं।


    डीएम के निर्देश पर टीम ने आकर की जांच बेसिक शिक्षा विभाग में 29 हजार शिक्षक भर्ती से संबंधित 61 शिक्षकों की मूल पत्रावलियां गायब मिली थीं। विवाद बढ़ने के बाद डीएम अनुनय झा के निर्देश पर शुक्रवार शाम 5 बजे सिटी मजिस्ट्रेट संजय सिंह, एसडीएम सदर संजय अग्रहरि और डायट प्राचार्य रामेंद्र सिंह की 3 सदस्यीय समिति बीएसए कार्यालय पहुंची। टीम ने घंटों तक भर्ती, नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की गहन जांच की।

    जांच के दौरान कुछ जरूरी पत्रावलियां रिकॉर्ड से गायब मिलीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भर्ती संबंधी अभिलेख रखने वाली कई अलमारियों और दो कमरों को सील कर दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराई जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

    जांच में नहीं मिले 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख जांच में यह भी सामने आया कि 29 हजार शिक्षक भर्ती से जुड़े 61 शिक्षकों के मूल अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। इस मामले में तत्कालीन पटल प्रभारी अनुपम मिश्रा के खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। एजुकेटर भर्ती प्रक्रिया का दायित्व भी उनके पास था।

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी

    राजकीय माध्यमिक स्कूलों में सिर्फ 250 शिक्षकों का तबादला, जिलों में सरप्लस चिह्नित शिक्षकों का तबादला, सामान्य स्थानांतरण में राहत दिए जाने की मांग

    22 जून 2026
    लखनऊ। राजकीय माध्यमिक स्कूलों में सिर्फ 250 शिक्षकों का स्थानांतरण होगा। जिलों में छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार सरप्लस चिह्नित किए गए शिक्षकों का स्थानांतरण किए जाने की तैयारी तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इन सरप्लस शिक्षकों के स्थानांतरण पर पूरा जोर दे रहा है। फिर सामान्य तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से यूपी में छात्र- शिक्षक अनुपात के अनुसार 250 शिक्षकों की सूची तैयार कर ली गई है। अब सूची के अनुसार स्थानांतरण किया जाएगा। बड़े शहरों में ही यह सरप्लस शिक्षक चिह्नित हुए हैं, जो कई वर्षों से एक ही जिले में जमे हुए हैं। राजकीय शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय कहते हैं कि वर्ष 1976 के मानकों के अनुसार यह शिक्षक सरप्लस घोषित किए गए हैं।



    सर्टिफिकेट ने फंसा दिया राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला, आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ी 

    ◾ गुरुवार को खत्म हो रही आवेदन तिथि को बढ़ाया 
    ◾ डीआईओएस व प्राचार्य नहीं बढ़ा रहे आवेदन फॉर्म

    19 जून 2026
    लखनऊ । यूपी में राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला सर्टिफिकेट के फेर में फंस गया है। प्राचार्यों से सर्टिफकेट मांगा जा रहा है कि शिक्षक के तबादले से पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। ऐसे में प्राचार्य व जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) तबादला फॉर्म आगे नहीं बढ़ा रहे। जिसके कारण अब आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ा दी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से सभी जिलों के डीआईओएस को पत्र लिखकर नाराजगी जताई गई है कि आखिर स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के फॉर्म आगे क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। अब निदेशक की ओर से नई ईमेल directorsecondaryeducation2026@gmail.com निर्धारित की गई है। राजकीय शिक्षक संघ के संरक्षक रामेश्वर पांडेय का कहना है कि शिक्षकों को स्थानांतरण के लिए परेशान किया जा रहा है।




    माध्यमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों की सूची 12 जून को आएगी, जून 18 तक शिक्षक डीआईओएस कार्यालय में तबादले के लिए करेंगे आवेदन

    सरप्लस वाले शिक्षकों को खुद आवेदन पर मिल सकेगा बेहतर विकल्प

    लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया 12 जून से शुरू होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सरप्लस के लिए स्वतः आवेदन करने वाले शिक्षकों को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी निर्देश के अनुसार 12 जून तक डीआईओएस एनआईसी की वेबसाइट पर सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी करेंगे। शिक्षक 18 जून तक डीआईओएस ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन करेंगे। डीआईओएस 25 जून तक आवेदन पत्रों का परीक्षण कर अनुमोदन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजेंगे। 30 जून तक शिक्षकों को कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि सरप्लस शिक्षकों से मिले विकल्पों पर तैनाती के लिए तय मानक के आधार पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। वहीं सरप्लस शिक्षक यदि अपनी नई तैनाती के लिए खुद आवेदन नहीं करते हैं तो खाली पद के सापेक्ष उन्हें किसी भी विद्यालय में समायोजित या स्थानांतरित कर दें। सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए सबसे आखिर में आने वाले शिक्षकों को सबसे पहले तबादला होगा। उन्हें सरप्लस माना जाएगा। 

    निदेशक ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जोन एक में जिले की नगरीय सीमा या जिला मुख्यालय से आठ किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन दो में जिले में तहसील मुख्यालय से दो किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन तीन में उपरोक्त से अतिरिक्त क्षेत्र के विद्यालय आएंगे। शासन ने जोन वाइज शिक्षकों के लिए मानक तय किए हैं।

    निदेशक ने सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए भी विस्तृत मानक की व्याख्यान की है। उन्होंने कहा है कि नई नियुक्ति-तैनाती में जोन तीन में सबसे पहले नियुक्ति-तैनाती की जाएगी। इसकी न्यूनतम अवधि तीन साल की होगी। पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को तबादले का विकल्प दिया जाएगा।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी 
     




    राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के जून अंत तक होंगे तबादले, शासन ने जारी किया शासनादेश, संवर्ग में 20 फीसदी से अधिक नहीं किए जाएंगे तबादले


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जून में पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। बाद में सामान्य तबादले होंगे। संवर्ग की संख्या के 20 फीसदी तक तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह ने निर्देश जारी किया। कहा, राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसमें कार्यरत विद्यालय में बाद में कार्यभार संभालने वाले को पहले सरप्लस माना जाएगा। वहीं, सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को इसमें यथासंभव शामिल नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दूसरे चरण में चार श्रेणी के शिक्षकों को निर्धारित मानक पर तबादला दिया जाएगा। इसमें सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, यदि पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में अलग-अलग जिले में तैनात हैं। तीसरे चरण में शेष शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

    सचिव ने कहा है कि संवर्ग की संख्या के 20 प्रतिशत सीमा तक तबादले होंगे। इसे बढ़ाने का अधिकार विभागीय मंत्री के पास होगा। आवेदन से लेकर तबादला प्रक्रिया जून में ही पूरी की जाएगी। ताकि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती के स्थान से अलग संबद्ध नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक तैनात नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


    सरप्लस शिक्षकों के लिए मानक

    ◾खुद के दिव्यांग होने पर 10 से 20 नंबर

    ◾पत्नी-पति, बच्चे के दिव्यांग होने पर 10 नंबर

    ◾राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक होने पर 10 नंबर

    ◾विधवा-तलाकशुदा महिला शिक्षिका को 10 नंबर

    ◾आश्रित बच्चों की देखभाल वाले पुरुष शिक्षकों को 10 नंबर

    ◾महिला शिक्षिका होने पर 10 नंबर

    ◾जोन 3 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾जोन 2 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾शिक्षक की आयु के अनुसार हर साल के लिए एक नंबर



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी 


    Tuesday, June 23, 2026

    मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी

    मदरसों में घटते जा रहे विद्यार्थी, बढ़ गए शिक्षक, मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से घटकर 63 हजार पर सिमटी 

    अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल, शिक्षक हैं 10 हजार


    लखनऊ : मदरसों में छात्रों के नामांकन की गहन जांच से फर्जी नामांकन कम हो रहे या मुस्लिम अभिभावक बच्चों को मदरसों में पढ़ाने में दिलचस्पी नहीं ले रहे ? साल दर साल मदरसों में छात्रों की संख्या घटने से यह सवाल उठ रहा है। 10 वर्ष पहले प्रदेश के मदरसों में छात्रों की संख्या चार लाख से अधिक थी, जो घटकर अब 63 हजार रह गई है।


    दूसरी तरफ, पिछले वर्ष शिक्षकों की भर्ती पर रोक लगने से पहले तक उनकी संख्या लगातार बढ़ती रही। वर्तमान में मदरसों में तकरीबन 10 हजार शिक्षक हैं।

    प्रदेश में सरकार की अनुदान सूची में 558 मदरसे शामिल हैं। इनमें फर्जी छात्र नामांकन, अनुदान राशि में हेरफेर की शिकायतों पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जांच के निर्देश दिए। जांच में मानकों व नियमों के उल्लंघन पर 15 मदरसों की मान्यता निलंबित कर उनके अनुदान को रोका गया लेकिन 543 मदरसों को अनुदान मिल रहा है। सभी में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया गया लेकिन छात्रों की संख्या में गिरावट जारी है। 

    मदरसा शिक्षा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही स्वीकारती हैं कि छात्रों की संख्या घट रही है। कहती हैं कि कामिल, फाजिल (स्नातक) डिग्री की मान्यता नहीं होना भी इसका एक कारण है। वह कहती हैं कि संभवतः जो अभिभावक बच्चों को स्नातक, परास्नातक तक पढ़ाना चाहते हैं, वह मदरसों में दाखिले से बच रहे हैं क्योंकि मुंशी व मौलवी की पढ़ाई के बाद आगे की शिक्षा के लिए इस बोर्ड की व्यवस्था नहीं है। कामिल, फाजिल की डिग्री को सुप्रीम कोर्ट असंवैधानिक करार दे चुका है।

    मदरसा सुधार आंदोलन के तलहा अंसारी का कहना है कि अभिभावक यह समझ रहे हैं कि प्रतिस्पर्धा के दौर में बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के रोजगार नहीं मिल सकता है, इसलिए बच्चों को मदरसों के बजाय मुख्यधारा के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। अंसारी का यह भी मानना है कि पहले मदरसों में छात्रों की फर्जी संख्या दर्ज करके अनुदान हड़पा जाता था। उन्होंने 2016 की मदरसा नियमावली के बाद अनुदान और छात्रों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए सीबीआइ जांच की मांग की है। मानवाधिकार आयोग में भी शिकायत की गई है। पिछले वर्ष तक शिक्षकों की भर्ती में मनमानी का जिक्र करते हुए बताते हैं कि लखनऊ के एक मदरसे में छात्र तो 429 ही हैं लेकिन शिक्षक 611 देवरिया के मदरसे में 240 छात्र हैं लेकिन शिक्षक 14 हैं जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 30 छात्रों पर एक शिक्षक का अनुपात है।

    राज्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित, कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले किए जाएंगे इस्तेमाल

    राज्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में प्लास्टिक पूरी तरह प्रतिबंधित,  कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले किए जाएंगे इस्तेमाल

    जनभवन ने इसके लिए विवि को जारी किए कड़े निर्देश

    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व संबद्ध महाविद्यालयों में सिंगल यूज प्लास्टिक, प्लास्टिक की बोतलें, कप-प्लेट, चम्मच, पॉलीथीन बैग को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए गए हैं। इनकी जगह पर मिट्टी के कुल्हड़, कागज के बर्तन, जूट के थैले आदि प्रयोग किए जाएंगे। जनभवन ने इसके लिए सभी राज्य विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को कड़े निर्देश जारी किए हैं।


    राज्यपाल के विशेष कार्याधिकारी डॉ. पंकज एल जॉनी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय व संबद्ध महाविद्यालयों की परिसर स्थित कैंटीन, हॉस्टल और कार्यक्रमों में प्लास्टिक के जगह पर उक्त का प्रयोग किया जाए। नए सत्र की शुरुआत में सभी शिक्षकों, कर्मचारियों व छात्रों को प्लास्टिक मुक्त परिसर की शपथ दिलाई जाए। परिसर में इसकी जागरूकता के लिए बोर्ड व होर्डिंग लगाए जाएं।

    उन्होंने कहा है कि परिसर में गीला व सूखा कचरा के लिए अलग-अलग कूड़ेदान की व्यवस्था की जाए। प्लास्टिक कचरे की रिसाइक्लिंग की उचित व्यवस्था की जाए। इतना ही नहीं इन निर्देशों के कड़ाई से अनुपालन के लिए विश्वविद्यालय व संस्थान स्तर पर प्लास्टिक मुक्त निगरानी समिति का गठन किया जाए। जो समय-समय पर परिसर और संबद्ध कॉलेजों का औचक निरीक्षण भी करेगी।

    विशेष कार्याधिकारी ने कहा है कि परिसर को स्वच्छ बनाए रखने के लिए हर सप्ताह में एक दिन शनिवार या शुक्रवार को निर्धारित किया जाए, इसके अंतर्गत विश्वविद्यालयों, संस्थानों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों द्वारा अपने सभी भवनों, विभागों, छात्रावासों व परिसर में विशेष सफाई अभियान भी चलाया जाए।

    खास यह कि राज्यपाल व जनभवन के अधिकारियों द्वारा विश्वविद्यालयों में दीक्षांत समारोह के समय इन सभी व्यवस्थाओं और साप्ताहिक सफाई का निरीक्षण भी किया जाएगा।

    तबादले में वरिष्ठता की अनदेखी पर शिक्षकों का प्रदर्शन, निदेशालय पहुंचे 36 जिलों के शिक्षकों ने वरिष्ठता के आधार पर तबादले की मांग उठाई

    तबादले में वरिष्ठता की अनदेखी पर शिक्षकों का प्रदर्शन, 
    निदेशालय पहुंचे 36 जिलों के शिक्षकों ने वरिष्ठता के आधार पर तबादले की मांग उठाई

    12 से 15 वर्ष से एक ही जिले में तैनात शिक्षक बोले- 25 हजार वरिष्ठ शिक्षक तबादले से वंचित


    लखनऊ। तबादले के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे परिषदीय शिक्षकों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। वरिष्ठता को स्थानांतरण का आधार बनाने की मांग को लेकर 36 जिलों से आए शिक्षक निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय शिविर कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि हर बार तबादला नीति में बदलाव होने से लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षक लगातार पीछे छूट रहे हैं।


    धरने पर बैठे शिक्षकों ने बताया कि वे 12 से 15 वर्ष से विभिन्न जिलों में सेवाएं दे रहे हैं और हर वर्ष स्थानांतरण की उम्मीद करते हैं लेकिन हर बार नीति में बदलाव उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। इस बार भी तबादला नीति में दिए गए पांच विकल्पों के चलते वरिष्ठ शिक्षकों के लिए स्थानांतरण का लाभ मिलना मुश्किल हो गया है।

    प्रदर्शन के दौरान जब निदेशालय के अधिकारी शिक्षकों से बातचीत करने नहीं पहुंचे तो कुछ शिक्षकों ने निदेशालय में प्रवेश करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद शिक्षकों ने शिक्षा महानिदेशक के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।

    शिक्षक विजय पांडेय, राजीव गौड़, महेश पाल, आनंद सिंह, अमृत पांडेय और विजय कुमार ने कहा कि पिछले छह वर्षों से स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता को आधार नहीं बनाया जा रहा है। नतीजतन लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों में निराशा बढ़ रही है। उनका कहना है कि गृह जनपद से वर्षों दूर रहने के कारण न केवल वे स्वयं बल्कि उनके परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों की देखभाल व परवरिश में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

    शिक्षकों ने मांग की कि स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता को प्राथमिक आधार बनाया जाए ताकि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को राहत मिल सके। शिक्षक विजय पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि जनपदों में करीब 25 हजार वरिष्ठ शिक्षक अब तक तबादले के लाभ से वंचित हैं।

    Monday, June 22, 2026

    तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

    तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

    आसपास की दुकानों पर गुटखा तंबाकू की बिक्री बंद कराने के लिए उठाने होंगे कदम

    प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चलाया जाना है। सभी परिसर तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य है। 


    इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक स्कूल परिसर में तंबाकू, गुटखा खाने, बीड़ी, सिगरेट के प्रयोग पर रोक रहेगी। इन सब चीजों के पाउच भी यदि परिसर में मिल गए तो शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रधानाचार्यों से जवाब तलब होगा। परिसर में यदि कहीं पर पूर्व में पान गुटखा की पीक के निशान हों तो उन्हें तत्काल प्रभाव से हटवाने का दायित्व भी प्रधानाध्यापकों या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों पर है। 

    ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने पर अधिकारियों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करके वास्तविक स्थिति देखेगी। स्कूलों में हर छह महीने में कम से कम एक तंबाकू नियंत्रण गतिविधि कराई जाएगी। इन गतिविधियों की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त करते हुए उनके नाम, मोबाइल नंबर और तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगवाया जाएगा।  सभी शिक्षण संस्थाओं में मुख्य द्वार के पास बोर्ड या वाल पेंटिंग कराई जाए, जिसमें तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का उल्लेख हो।

     इसकी रोकथाम के लिए नामित नोडल का नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित होना आवश्यक है। परिसर के भीतर तंबाकू उपयोग का कोई सबूत नहीं होना चाहिए। परिसर में तंबाकू के नुकसान बताने वाले पोस्टर लगवाने के साथ संस्थान की आचार संहिता का उल्लेख किया जाए। शिक्षण संस्थान की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' का चिह्नीकरण आवश्यक है। इस 100 गज के दायरे में यदि तंबाकू आदि की बिक्री वाली दुकानें हों तो उन्हें हटवाना होगा या फिर दुकानों पर ऐसे पदार्थ की बिक्री बंद करानी होगी। 

    संस्थान के नोडल अपने स्तर पर नियमों के उल्लंघन पर सांकेतिक जुर्माना या सुधारात्मक संदेश देने वाली कोई कार्रवाई कर सकते हैं। इस संबंध में डीआइओएस संतोष कुमार राय का कहना है कि यह सब विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मन मस्तिष्क को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष में शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान से जुडे राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।