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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, June 22, 2024

    रिश्वत लेते पकड़े गए लिपिक के बयानों के बाद सहअभियुक्त बनाए गए बीएसए मथुरा से अब पूछताछ करेगी एंटी करप्शन टीम

    रिश्वत लेते पकड़े गए लिपिक के बयानों के बाद सहअभियुक्त बनाए गए बीएसए मथुरा से अब पूछताछ करेगी एंटी करप्शन टीम


    मथुरा। 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार बीएसए कार्यालय के लिपिक ब्रजराज सिंह के बयानों के आधार पर बीएसए को सह अभियुक्त बनाने के बाद अब एंटी करप्शन टीम उनसे पूछताछ की तैयारी कर रही है। जल्द बीएसए को पूछताछ के लिए पुलिस बुलाएगी। इधर, मामले की रिपोर्ट डीएम ने शासन को भेज दी है। रिफाइनरी थाने में दर्ज मुकदमे की विवेचना आगरा एंटी करप्शन को ट्रांसफर कर दी है।

    बीती 19 जून को आगरा एंटी करप्शन की टीम ने 25 हजार रुपये की रिश्वत लेते बीएसए कार्यालय के लिपिक ब्रजराज सिंह को स्टेट बैंक चौराहा से गिरफ्तार किया था। लिपिक के बयानों के बाद बीएसए सुनील दत्त की मुश्किलें बढ़ गई हैं। ब्रजराज सिंह ने बयान दिया है कि उसने बीएसए के कहने पर रिश्वत मांगी थी। इसके पीछे तर्क दिया है कि वृंदावन के जूनियर हाईस्कूल में तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रामेश्वर सिंह की अनिवार्य सेवानिवृत्ति का नोटिस बीएसए ने जारी किया था। नोटिस का निस्तारण उन्हीं का अधिकार क्षेत्र है।

    रिश्वत में से कुछ हिस्सा बीएसए द्वारा स्वेच्छा से उसे दिया जाना तय था। लिपिक के बयानों के समर्थन में एंटी करप्शन की टीम साक्ष्य भी जुटा रही है। साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस इस मामले में बीएसए को घेर सकती है। इधर, बीएसए के भी बयान लिए जाएंगे। इसके बाद ही चार्जशीट तैयार होगी। अगर, बीएसए पर आरोप सही पाए जाते हैं तो शासन से अभियोजन स्वीकृति लेते हुए कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की जाएगी। रिफाइनरी थाना इंस्पेक्टर सोनू सिंह ने बताया कि मुकदमे की विवेचना आगरा एंटी करप्शन को ट्रांसफर हो गई है।



    19 जून 2024
    मथुरा में 25 हजार की रिश्वत लेते हुए BSA कार्यालय का बाबू हुआ गिरफ्तार

    मथुरा: जिले में बुधवार को बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तैनात लिपिक ब्रजराज सिंह को एंटी करप्शन टीम ने 25 हजार रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया. 


    एंटी करप्शन टीम इंस्पेक्टर सुबोध कुमार ने बताया 10 जून को धर्मवीर के पिता ने लिपिक ब्रजराज ने विभागीय काम करने के लिए पचास हजार रुपये की रिश्वत मांगने का शिकायत दर्ज कराई थी. मामले की जांच की गई, तो रिश्वत की सही जानकारी होने पर बुधवार को बीएसए कार्यालय में तैनात बाबू को रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया.

    राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण कसेगा स्कूलों पर शिकंजा, नियमावली बनाए जाने का काम हुआ शुरू

    राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण कसेगा स्कूलों पर शिकंजा,  नियमावली बनाए जाने का काम हुआ शुरू

    निजी व सरकारी स्कूलों की बनाई जाएगी जोड़ी

    लखनऊ : स्कूलों पर शिकंजा कसने के लिए राज्य विद्यालय मानक प्राधिकरण गठित करने की तैयारी तेज कर दी गई है। अब इसकी नियमावली तैयार की जा रही है और जल्द इसे मंजूरी दिलाई जाएगी। प्राधिकरण के गठित होने के बाद निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगेगी। वह मनमानी फीस नहीं वसूल सकेंगे और विभिन्न मानकों को सख्त किया जाएगा। यह स्वायत्त संस्था होगी और इसके अध्यक्ष व सदस्यों के चयन के लिए योग्यता तय की जाएगी।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग को  इसकी नियमावली तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। प्राइमरी और  माध्यमिक स्कूल अभी बेसिक शिक्षा परिषद व माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से तैयार किए गए नियमों के अनुसार चलाए जा रहे हैं। ऐसे में नियमों को मौजूदा समय की जरूरत के अनुसार अपडेट किया जाएगा और उन्हें सख्ती से लागू कराया जाएगा। 


    प्राधिकरण सभी स्कूलों का मूल्यांकन भी करेगा, जिसके आधार पर ग्रेडिंग की जाएगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) से स्कूल स्तर पर गुणवत्ता मूल्यांकन एवं प्रत्यायन के लिए मदद ली जाएगी। राज्य सरकार निजी स्कूलों पर ज्यादा से ज्यादा शिकंजा कसने पर जोर दे रही है। प्राधिकरण के माध्यम से यह कार्य किया जाएगा। गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ-साथ अभिभावकों की शिकायतों का भी त्वरित निस्तारण किया जा सकेगा। 


    अभी डीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी इसकी सुनवाई करती है, लेकिन यह इतना प्रभावी नहीं है। सरकारी व निजी स्कूलों का पेयर (जोड़ी) बनाई जाएगी और यह विद्यालय एक-दूसरे के संसाधनों का प्रयोग कर सकेंगे। निजी स्कूलों में बड़े खेल के मैदान नहीं हैं तो वह पास के सरकारी स्कूल के खेल मैदान का प्रयोग कर सकेंगे।

    पुरानी पेंशन के लिए एक्स पर अभियान, केंद्र की ओर से जारी पेंशन मेमोरेंडम को यूपी में भी लागू करने की उठाई मांग

    पुरानी पेंशन के लिए एक्स पर अभियान, केंद्र की ओर से जारी पेंशन मेमोरेंडम को यूपी में भी लागू करने की उठाई मांग

    विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से चलाया गया अभियान


    लखनऊ। पुरानी पेंशन बहाली व केंद्र सरकार द्वारा तीन मार्च 2023 को जारी पेंशन मेमोरेंडम को प्रदेश में भी लागू करने के लिए विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने एक्स पर अभियान चलाया। शिक्षकों ने एक्स पर मुख्यमंत्री से प्रदेश में भी पुरानी पेंशन बहाल कर ने व केंद्र के समान पेंशन मेमोरेंडम जारी करने की मांग की।


    संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि आप सब बढ़ चढ़कर इस मुहिम में अपनी भागीदारी दें, ताकि सरकार तक अपनी बात पहुंचाई जा सके। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के परिणाम ने यह बता दिया है कि यदि शिक्षकों/कर्मचारियों की बातों को और उनकी समस्याओं को अनदेखा किया गया तो आने वाले समय में इस सरकार के लिए भी सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा।


    वरिष्ठ उपाध्यक्ष शालिनी मिश्रा ने कहा कि हम सबको यह विश्वास है कि सरकार हमारी समस्याओं का जल्द समाधान करेगी। आज के अभियान से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने में प्रदेश के हजारों शिक्षक- कर्मचारियों ने प्रदेश अध्यक्ष के एक्स पोस्ट को रिपोस्ट कर ट्रेंड कराया। प्रांतीय मीडिया प्रभारी विनीत सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार भी अन्य राज्यों की तरह मेमोरेंडम जारी कर प्रभावित शिक्षकों-कर्मचारियो को पुरानी पेंशन देने का काम करे।


    Friday, June 21, 2024

    बच्चों को पढ़ाया जाएगा संस्कृति का ककहरा, कक्षा छह से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में संस्कृति एक विषय के रूप में होगी शामिल

    बच्चों को पढ़ाया जाएगा संस्कृति का ककहरा,  कक्षा छह से 12वीं तक के पाठ्यक्रम में संस्कृति एक विषय के रूप में होगी शामिल


    लखनऊ। प्रदेश की योगी सरकार अब स्कूली बच्चों को संस्कृति का ककहरा भी सिखाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल और संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह के निर्देशन में तैयार की गयी उत्तर प्रदेश की नयी सांस्कृतिक नीति में कक्षा छह से कक्षा 12वीं तक के पाठ्यक्रम में संस्कृति को भी एक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। इसके बाद स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर संस्कृति व कला के पाठ्यक्रम भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संचालित किये जाएंगे।


    प्रदेश के संस्कृति विभाग ने इस नयी सांस्कृतिक नीति का फाईनल ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। जल्द ही इसे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद एक कमेटी गठित होगी जो पाठ्यक्रम में संस्कृति को बतौर एक विषय शामिल करने की संस्तुति करेगी।


     बनेगी जनपदीय सांस्कृतिक इकाईः हर जिले में जिला स्तर पर जनपदीय सांस्कृतिक इकाई बनेगी जिसके तहत प्रत्येक जिले में संस्कृति विभाग का एक प्रेक्षागृह, जनपदीय संग्रहालय और सर्वकला महाविद्यालय स्थापित होंगे। यह महाविद्यालय भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय से सम्बद्ध रहेंगे। गुरु-शिष्य परम्परा के तहत कार्यशालाएं आयोजित होंगी, अभिरुचि पाठ्यक्रम चलाए जाएंगे।

    तदर्थ शिक्षकों ने दिया धरना, सेवा बहाली की गुहार, सीएम को संबोधित ज्ञापन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को दिया

    तदर्थ शिक्षकों ने दिया धरना, सेवा बहाली की गुहार, सीएम को संबोधित ज्ञापन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को दिया


    लखनऊ। माध्यमिक के तदर्थ शिक्षकों ने बृहस्पतिवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के सामने धरना देकर सेवा बहाली की गुहार लगाई। माध्यमिक तदर्थ शिक्षक संघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी संख्या में एकत्र शिक्षकों ने साफ कहा कि जल्द उनकी सेवा बहाली पर सकारात्मक निर्णय नहीं होता है, वे वह नियमित प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान उन्होंने सेवा बहाली के बाबत मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव को दिया।


    धरना दे रहे तदर्थ शिक्षकों ने कहा कि लगभग 3,000 तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं नौ नवंबर 2023 को समाप्त कर दी गई। इसके बाद से सभी तदर्थ शिक्षकों ने शासन से लेकर सरकार तक सेवा बहाली की गुहार लगाई। किंतु उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। तदर्थ शिक्षक अधिक उम्र के पड़ाव पर सेवा समाप्त होने से घर-परिवार की जिम्मेदारी को लेकर चिंतित हैं। उनके सामने अपने परिवार के भरण पोषण के साथ-साथ बच्चों की पढ़ाई- लिखाई और बुजुर्गों की दवाई आदि का भी संकट खड़ा हो रहा है।


     तदर्थ शिक्षकों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि लोकसभा चुनाव के पूर्व सरकार उनको कोई खुशखबरी देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। समिति प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने कहा कि सीएम योगी आदित्यनाथ से बड़ी उम्मीद है लेकिन उनको गलत तथ्य बताकर भ्रमित करने का काम किया गया है।


    समिति के प्रदेश महामंत्री सुशील शुक्ला ने कहा कि सभी तदर्थ शिक्षकों की सेवाएं बहाल करते हुए वेतन भुगतान किया जाए। जौनपुर में शासनादेश से प्रभावित सात तदर्थ शिक्षकों का वेतन भुगतान किया जाए। शिक्षकों का ज्ञापन लेते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा कि तदर्थ शिक्षकों का मामला शासन के संज्ञान में है। जल्द ही इस मामले में सकारात्मक निर्णय होगा। 


    शिक्षामित्रों को स्थायी कर समान कार्य के लिए समान वेतन देने की सीएम योगी से लगाई गुहार

    शिक्षामित्रों को स्थायी कर समान कार्य के लिए समान वेतन देने की सीएम योगी से लगाई गुहार 


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिक्षामित्रों को स्थायी करने और समान कार्य के लिए समान वेतन देने की गुहार लगाई है। इसके लिए संघ के प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव ने बृहस्पतिवार को जनता दर्शन कार्यक्रम में सीएम से मिलकर ज्ञापन दिया।


    सुशील ने कहा कि इस महंगाई के दौर में शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये वह भी 11 महीने दिया जाता है। इससे न तो वह अपने परिवार का भरण-पोषण कर पा रहे हैं न ही बच्चों की पढ़ाई। उनके मामले में 14 नवंबर 2023 को बेसिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया गया। किंतु उसके बाद चुनाव की घोषणा हो गई।

    उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की कमेटी के प्रस्ताव को जल्द लागू करें। साथ ही शिक्षामित्रों को पीएफ योजना में शामिल करने और मेडिकल सुविधा भी दी जाए।

    बीएड प्रवेश परीक्षा परिणाम 25 जून तक, रिजल्ट से पहले कॉपियों की री-चेकिंग का काम शुरू

    बीएड प्रवेश परीक्षा परिणाम 25 जून तक, रिजल्ट से पहले कॉपियों की री-चेकिंग का काम शुरू

    21 जून 2024
    झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम तैयार कर लिया गया है। अब उसकी री-चेकिंग का काम शुरू कर दिया गया है। विश्वविद्यालय की 25 जून तक परिणाम घोषित करने की तैयारी है। बीयू द्वारा नौ जून को राज्य स्तरीय संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया था। परीक्षा 51 जिलों में बनाए गए 470 परीक्षा केंद्रों पर हुई थी, जिसमें पंजीकृत 2.23 लाख अभ्यर्थियों में से 1.93 लाख शामिल हुए थे।

    प्रवेश परीक्षा के अगले दिन से ही बीयू में उत्तर पुस्तिकाओं की जांच का काम शुरू कर दिया गया था। उत्तरपुस्तिकाओं की त्रिस्तरीय जांच की गई थी। अब विश्वविद्यालय द्वारा रिजल्ट तैयार कर लिया गया है। इसके साथ ही अब रिजल्ट की री- चेकिंग का काम शुरू कर दिया गया है। खासतौर पर अभ्यर्थियों को दिए जाने वाले एनसीसी, एनएसएस आदि के भारांक की जांच की जा रही है। 

    इसके अलावा विश्वविद्यालय द्वारा अलग से गठित की गई एक टीम उत्तरपुस्तिकाओं की आकस्मिक रूप से मैन्युअल जांच में भी जुटी हुई है। बता दें कि रिजल्ट त्रुटि रहित घोषित हो, इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है।


    बीएड प्रवेश परीक्षा के परिणाम की री-चेकिंग का काम शुरू कर दिया गया है। 25 जून तक रिजल्ट घोषित करने की योजना है। इस दिशा में तेजी से तैयारियां जारी हैं। –विनय कुमार सिंह, कुलसचिव- बुंदेलखंड विश्वविद्यालय




    यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा का 25 जून से पहले आ सकता है रिजल्ट 

    18 जून 2024
    झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय 25 जून से पहले बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित कर सकता है। रिजल्ट तैयार करने का काम अंतिम दौर में पहुंच चुका है। त्रिस्तरीय जांच पूरी होने के बाद परिणाम घोषित कर दिया जाएगा।


    बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से नौ जून को राज्य स्तरीय संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया गया था। प्रदेश के 51 जिलों के 470 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की गई इस परीक्षा में 1.93 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के अगले दिन से ही उत्तरपुस्तिकाओं की जांच का काम शुरू कर दिया गया था। विश्वविद्यालय ने 30 जून से पहले परिणाम घोषित करने की घोषणा की थी। अब उत्तरपुस्तिकाओं की जांच का काम अंतिम दौर में पहुंच चुका है। ऐसे में बीयू की 25 जून से पहले परिणाम घोषित करने की तैयारी है। ब्यूरो

    Thursday, June 20, 2024

    यूपी में छात्रवृत्ति की दरों में होगी वृद्धि

    यूपी में छात्रवृत्ति की दरों में होगी वृद्धि


    लखनऊ। यूपी में चालू वित्त वर्ष में छात्रवृत्ति की दरों में वृद्धि होगी। केंद्र सरकार अगले माह अपनी नई दरें जारी करेगी। इन्हें प्रदेश में भी लागू करने पर विचार किया जा रहा है।


     प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को ढाई लाख रुपये तक और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक सालाना आय होने पर छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई करती है। वर्ष 2023-24 में कक्षा 9 व 10 के छात्रों का शैक्षणिक भत्ता 3,000 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये किया गया था। इसके अलावा दशमोत्तर कक्षाओं की छात्रवृत्ति की दरों में भी विभिन्न स्लैब में बढ़ोतरी की गई थी।


     समाज कल्याण विभाग के सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार एक बार फिर छात्रवृत्ति की दरें बढ़ाने जा रही है। राज्यों के साथ बैठक में इसकी जानकारी दे दी गई है। माना जा रहा है कि 10 जुलाई तक केंद्र की नई दरें आ जाएंगी। उन दरों को यूपी में भी स्वीकार किया जाएगा। 

    बोर्ड परीक्षाओं में राज्य स्तरीय मेरिट के मेधावियों को एक लाख और जिला स्तरीय मेरिट के टाप टेन मेधावियों को मिलेगा 21 हजार रुपए

    बोर्ड परीक्षाओं में राज्य स्तरीय मेरिट के मेधावियों को एक लाख और जिला स्तरीय मेरिट के टाप टेन मेधावियों को मिलेगा 21 हजार रुपए 

     
    प्रयागराज : 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में राज्य व जिले की टॉप टेन सूची में स्थान पाने वाले 1885 मेधावियों को एक-एक लाख रुपये, टैबलेट, प्रशस्ति पत्र और मेडल देकर सम्मानित किया जाएगा। इसमें संस्कृत शिक्षा परिषद, सीबीएसई और सीआईएससीई की परीक्षा में प्रदेश में टॉप टेन सूची में स्थान बनाने वाले होनहारों को भी सम्मानित किया जाएगा।

    सम्मान समारोह की तैयारियां शुरू हो गई है और माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि मेरिट लिस्ट में शामिल छात्र-छात्राओं के बैंक खाते का विवरण साक्ष्य के साथ संबंधित स्कूल से प्राप्त कर लें ताकि उनके खाते में पुरस्कार राशि भेजी जा सके। इसके अलावा राज्य व जिले की मेरिट सूची में शामिल मेधावियों के नाम, माता-पिता के नाम आदि में कोई त्रुटि हो तो उसका समाधान करते हुए तत्काल सूचित करें ताकि विद्यार्थी का डाटा संशोधित किया जा सके।

    सम्मान समारोह के आयोजन की तिथि बाद में सूचित की जाएगी। यूपी बोर्ड की टॉप फाइव मेरिट में 10वीं में 17 और 12वीं में 36 मेधावी शामिल हैं। छठवें से दसवें स्थान तक 10वीं में 142 व 12वीं में 372 मेधावियों के नाम हैं। वहीं जिले के टॉप टेन में क्रमश 700 व 501 छात्र-छात्राओं के नाम हैं। संस्कृत शिक्षा परिषद के 10वीं-12वीं के क्रमश 11-11, क्रमश सीआईएससीई के 30 व 17 जबकि सीबीएसई के क्रमश 26 व 22 विद्यार्थियों को सम्मान मिलेगा। इस प्रकार प्रदेशभर के कुल 1885 मेधावियों को पुरस्कृत किया जाएगा।


    बोर्ड परीक्षा के 170 मेधावियों को योगी करेंगे सम्मानित

    हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के मेधावियों को मुख्यमंत्री योगी सम्मानित करेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग मेधावी सम्मान समारोह की तारीख जल्द घोषित करेगा। उम्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के टाप पांच मेधावी, उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद, काउंसिल फार द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट्स एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) के टाप 10-10 मेधावियों को सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम में योगी कुल 170 मेधावियों को सम्मानित करेंगे।

    वहीं यूपी बोर्ड की राज्य स्तरीय मेरिट सूची के टाप छह से लेकर टाप 10 तक के मेधावियों और प्रत्येक जिले के टाप 10 मेधावियों को जिला स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा। हाईस्कूल व इंटर के इन - मेधावियों की संख्या 1,201 है। राज्य स्तरीय मेरिट के मेधावियों को एक लाख रुपये का चेक, एक टैबलेट, प्रशस्ति  पत्र और मेडल दिया जाएगा। वहीं यूपी बोर्ड की जिला स्तरीय मेरिट के टाप टेन मेधावियों को 21 हजार रुपये का चेक दिया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डा. महेन्द्र देव की ओर से सभी जिला  विद्यालय निरीक्षकों को इसकी तैयारी  शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रतिकूल आदेश से पहले नहीं रोक सकते वेतन, हाईकोर्ट ने निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई किए बिना वेतन रोकने का आदेश किया रद्द

    प्रतिकूल आदेश से पहले नहीं रोक सकते वेतन, हाईकोर्ट ने निलंबन या बर्खास्तगी की कार्रवाई किए बिना वेतन रोकने का आदेश किया रद्द 


    जौनपुर के केशवनाथ सीनियर बेसिक स्कूल, होरैया, राम नगर विधमौवा में सहायक अध्यापक चयन मामले में कोर्ट ने वेतन रोकने के आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि प्रतिकूल आदेश होने से पहले किसी कर्मचारी का वेतन नहीं रोका जा सकता है. 


    प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कर्मचारी के खिलाफ बिना किसी अनुशासनात्मक कार्यवाही के वेतन रोकने के आदेश को रद्द कर दिया है. कोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियमावली 1978 के अनुसार प्रतिकूल कार्रवाई या सेवा समाप्ति का आदेश जब तक जारी नहीं होता है, तब तक कर्मचारी सेवा में माना जाएगा. साथ ही वह वेतन पाने का हकदार होगा. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का वेतन तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक कि उन्हें सेवा से निलंबित या बर्खास्त नहीं कर दिया जाता. यह आदेश संजय कुमार सिंह और तीन अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने दिया है.

    याचिगण जौनपुर के केशवनाथ सीनियर बेसिक स्कूल, होरैया, राम नगर विधमौवा में सहायक अध्यापक चयनित हुए थे. चयन समिति ने उनके चयन की संस्तुति की थी. 21अगस्त 2003 बीएसए ने सहायक अध्यापक के पद पर चयन को अनुमोदन प्रदान किया. याचिकाकर्ताओं ने पदभार ग्रहण कर लिया और उन्हें नियमित आधार पर वेतन दिया जाने लगा. इस बीच 2008 में एक शिकायत पर की गई जांच में याचियों और व अधिकारियों की मिलीभगत से नियुक्ति पाने का आरोप लगाते हुए सभी का वेतन रोक दिया गया. उनको पदों पर काम करने से भी रोक दिया गया. जांच रिपोर्ट के आधार पर याचियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और बाद में आरोप पत्र जारी किए गए. वेतन की कटौती के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई.

    कोर्ट में याची अधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्तियों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जौनपुर ने अनुमोदित किया था. नियुक्ति में कोई अनियमितता साबित नहीं की जा सकी है. दूसरी ओर परिषद और राज्य सरकार के वकीलों का कहना था कि याचिकाकर्ताओं को उनके पदों पर नियुक्त करते समय उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल (जूनियर हाई स्कूल) (शिक्षकों की भर्ती और सेवा की शर्तें) नियम 1978 के विशिष्ट प्रावधानों का पालन नहीं किया गया था. ऐसे में याचियों की नियुक्ति अवैध थी। इसलिए उनका वेतन रोकना उचित है.

    सुनवाई के बाद कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं पर राज्य प्राधिकारियों के साथ मिलीभगत करने का सिर्फ आरोप लगाया गया है. इसे साबित करने के लिए कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया था. कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति को अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि चयन साक्षात्कार जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नामित व्यक्ति की उपस्थिति में किए गए थे. यह कहा गया कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की संतुष्टि के बाद ही याचिकाकर्ताओं को 21अगस्त 2003 को स्वीकृति दी गई थी.

    कोर्ट ने कहा कि याचियों के खिलाफ आज तक कोई सबूत पेश नहीं किया है. जिससे पता चले कि 24 मार्च 2008 की रिपोर्ट के अनुसार याचियों के खिलाफ किसी तरह की प्रतिकूल कार्रवाई की गई थी या नहीं. जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने याचियों की नियुक्ति देने के आदेश को भी वापस नहीं लिया. कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में अनुशासनात्मक जांच किए बिना सेवा समाप्ति नहीं की जा सकती. कोर्ट ने राज्य सरकार और परिषद् को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ताओं को वेतन का बकाया तथा सभी परिणामी लाभ प्रदान करें, जिनके वे हकदार हैं.



    प्रतिकूल आदेश से पहले नहीं रोक सकते वेतन : हाईकोर्ट

    प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि कर्मचारी के खिलाफ बिना किसी अनुशासनात्मक कार्यवाही के उसका वेतन रोकने का आदेश अनुचित है। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूल नियमावली 1978 के अनुसार प्रतिकूल कार्रवाई या सेवा समाप्ति का आदेश जब तक जारी नहीं होता है, तब तक कर्मचारी सेवा में माना जाएगा। साथ ही वह वेतन पाने का हकदार होगा। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ताओं का वेतन तब तक नहीं रोका जा सकता जब तक कि उन्हें सेवा से निलंबित या बर्खास्त नहीं कर दिया जाता। संजय कुमार सिंह और तीन अन्य की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल ने दिया है।

    याचीगण जौनपुर के केशवनाथ सीनियर बेसिक स्कूल, होरैया, राम नगर विधमौवा में सहायक अध्यापक चयनित हुए थे। चयन समिति ने उनके चयन की संस्तुति की। 21अगस्त 2003 को बीएसए ने सहायक अध्यापक के पद पर चयन को अनुमोदन प्रदान किया। याचिकाकर्ताओं ने पदभार ग्रहण कर लिया और उन्हें नियमित आधार पर वेतन दिया जाने लगा।

    इस बीच 2008 में एक शिकायत पर की गई जांच में याचियों और अधिकारीयों की मिलीभगत से नियुक्ति पाने का आरोप लगाते हुए सभी का वेतन रोक दिया गया। उनको पदों पर काम करने से भी रोक दिया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर याचियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और बाद में आरोप पत्र जारी किए गए। वेतन की कटौती के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई।

    याची अधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्तियों को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जौनपुर ने अनुमोदित किया था। नियुक्ति में कोई अनियमितता साबित नहीं की जा सकी है।

    Wednesday, June 19, 2024

    माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा, रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकेंगे

    माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा, रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकेंगे



    समग्र शिक्षा के तहत माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए 18 प्रकार के ट्रेड की सूची तैयार की गई है। माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा में रुचि के अनुसार दो ट्रेड चुन सकते हैं।


    नई शिक्षा नीति के तहत व्यावसायिक शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है। जिससे विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ रोजगारपरक शिक्षा ले सकें। इसी को लेकर माध्यमिक शिक्षा परिषद नए शैक्षिक सत्र में राजकीय सहित सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थी व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण करेंगे। 


    माध्यमिक शिक्षा परिषद से 18 प्रकार के ट्रेडों की सूची जिले में आई है। इस सूची को प्रधानाचार्यों के पास भेज दिया गया है। उन्हें सूची से दो ट्रेड चयनित करने के लिए कहा गया है। ट्रेडों की जानकारी जिला परियोजना अधिकारी को भेजी जाएगी।


    सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकसः विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा।


     व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेक्निक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान आदि की जानकारी भी दी जाएगी। 

    सम्पत्ति का ब्योरा देने पर ही होगी शिक्षकों की पदोन्नति, मानव संपदा पोर्टल पर 30 जून तक दर्ज करना होगा ब्योरा

    मानव संपदा पोर्टल पर 30 जून तक दर्ज करना होगा ब्योरा

    सम्पत्ति का ब्योरा देने पर ही होगी शिक्षकों की पदोन्नति


    लखनऊ । माध्यमिक शिक्षकों को अब पदोन्नति तभी मिलेगी जब वे अपनी चल-अचल सम्पत्तियों का ब्यौरा मानव सम्पदा पोर्टल पर दर्ज करेंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस बारे में एक आदेश जारी कर कहा है कि 30 जून तक सभी शिक्षकों को अपनी चल अचल संपत्ति का ब्यौरा मानव संपदा पोर्टल पर दर्ज करा दें तभी उन्हें प्रोन्नति आदि का लाभ मिल सकेगा।


    विभाग ने संपत्ति घोषित नहीं करने वाले शिक्षकों के नाम चेतावनी भी जारी की है। साथ ही कहा है कि तय तिथि के भीतर पोर्टल पर चल-अचल सम्पत्तियों का विवरण प्रस्तुत नहीं किया जाना प्रतिकूल तथ्य के रूप में लिया जायेगा और शासन से लेकर विभागाध्यक्ष या कार्यालयाध्यक्ष स्तर पर आयोजित होनी वाली विभिन्न चयन समितियों की बैठकों में इस तथय को संज्ञान में लेकर ऐसे शिक्षकों की सत्यनिष्ठा को प्रमाणित न मानते हुए उनकी पदोन्नति के प्रकरण पर कतई विचार नहीं किया जायेगा।


    दरअसल पिछले वर्ष 31 दिसंबर तक सभी शिक्षकों को पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्यौरा दर्ज किए जाने के शासन व विभागीय निदेशालय की ओर से निर्देश दिए गए थे। लेकिन ज्यादातर शिक्षकों ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया नतीजा 14 जून तक प्रदेश भर के 17, 78,405 शिक्षक कर्मियों में से मात्र 18,600 शिक्षकों ने पोर्टल पर अपनी संपत्तियों का ब्यौरा दर्ज किया है। 


    सम्पत्तियों का ब्यौरा दर्ज करने को लेकर हो रही लापरवाही को देखते हुए सरकार ने ऐसे शिक्षक कर्मियों के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली 1999 के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सर्कुलर जारी कर शिक्षकों से कहा है कि उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 के नियम 24 के अनुसार मानव सम्पदा पोर्टल पर 30 जून तक सम्पत्तियों का विवरण अनिवार्य रूप से दर्ज करा दें अन्यथा ऐसे शिक्षकों की प्रोन्नति पर विचार नहीं होगा। ऐसे शिक्षक कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनिक कार्यवाही भी की जायेगी।


    पहले भी सरकार जारी कर चुकी है नोटिस

    शिक्षकों के साथ-साथ कई अन्य संवर्गों के अधिकारियों कर्मचारियों को सम्पत्तियों का ब्यौरा देने के लिए भी सरकार पिछले वर्ष भी नोटिस जारी कर चुकी है। पहली नोटिस मई में जारी की गई जबकि दूसरी 11 दिसम्बर व तीसरी नोटिस इस साल 22 फरवरी को जारी की गई। फिर भी काफी कम शिक्षकों ने ब्योरा दिया।


    पूर्व में आईएएस-पीसीएस को ही देना होता था ब्योरा

    पूर्व में अखिल भारतीय सेवा के अलावा प्रादेशिक सेवा (पीसीएस/पीपीएस आदि) के अधिकारियों को अपनी सम्पत्तियों का ब्यौरा देना अनिवार्य किया गया था लेकिन दो वर्ष पूर्व सरकार ने सभी संवर्ग के कर्मचारियों के लिए भी इसे अनिवार्य कर दिया। इसके लिए उत्तर प्रदेश सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 में संशोधन कर उसमें नियम 24 जोड़ दिया गया।

    तबादले के लिए आज से कार्यमुक्त होंगे बेसिक शिक्षक, शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण का मामला

    तबादले के लिए आज से कार्यमुक्त होंगे बेसिक शिक्षक, शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण का मामला

    15 से 18 जून तक पोर्टल पर लिए गए आवेदन, करीब तीन हजार शिक्षकों ने बनाए जोड़े




    प्रयागराज । प्रदेश के दो हजार से अधिक परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण के लिए कार्यमुक्त और कार्यभार ग्रहण करने की प्रक्रिया बुधवार से शुरू होगी। हाईकोर्ट के आदेश पर पूर्व में तबादले का लाभ ले चुके शिक्षकों से दोबारा आवेदन लेते हुए बीएसए के स्तर से 13 और 14 जून को सत्यापन कराया गया। उसके बाद 15 से 18 जून तक इन शिक्षक ने दूसरे जिले के शिक्षकों बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी की ओर से बुधवार को कार्यमुक्त और कार्यभार ग्रहण करने के लिए आदेश 19 से 21 तक अपने जिले से कार्यमुक्त होने और दूसरे जिले में कार्यभार ग्रहण करने का अवसर देने की तैयारी है। 


    अंतरजनपदीय सामान्य और पारस्परिक तबादले के लिए दो जून 2023 को शासनादेश जारी हुआ था। सामान्य तबादला तो मात्र 23 दिन में किया गया था लेकिन पारस्परिक ट्रांसफर को लेकर विवाद हो गया। कुछ ऐसे शिक्षकों ने आवेदन कर दिया था जो पूर्व में अंतरजनपदीय स्थानान्तरण का लाभ ले चुके थे। 


    इन अभ्यर्थियों के आवेदन विभाग ने रोक दिए तो मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। हाईकोर्ट ने इन शिक्षकों को भी स्थानान्तरण का लाभ देने का आदेश दिया था। इसी विवाद के कारण पूर्व में पेयर बना चुके 2234 शिक्षकों का तबादला भी फंसा हुआ था। नए सिरे से आवेदन लेने पर यह संख्या ढाई हजार के आसपास पहुंच गई है।



    बेसिक के शिक्षकों का अंतर जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण आज

    प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद (म्यूचुअल) के शिक्षकों का अंतर जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण आदेश बुधवार को जारी कर दिया जाएगा। मंगलवार शाम तक करीब तीन हजार शिक्षकों ने जोड़े बनाने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। इसी के साथ ही पूर्व में जोड़े बना चुके शिक्षकों का भी स्थानांतरण होगा।

    शिक्षकों के पारस्परिक स्थानांतरण के लिए जोड़े बनाने की प्रक्रिया 15 जून से शुरू हुई थी। इसके लिए 18 जून की शाम तक पोर्टल पर आवेदन लिए गए। आवेदन भले ही ऑनलाइन हुए, लेकिन जोड़े बनाने के लिए शिक्षकों को ऑफलाइन मशक्कत करनी पड़ी थी। उन्हें खुद से अपना विकल्प ढूंढना पड़ा और उसकी सहमति ली। इस तरह तीन हजार शिक्षकों ने जोड़े बना लिए हैं। इससे पूर्व में 2234 शिक्षक जोड़े बना चुके थे। 

    इन शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच 13 और 14 जून को हो चुकी है। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी ने बताया कि जिनके जोड़े बन गए हैं, उन्हें 19 जून को कार्यमुक्त कर दिया जाएगा। तत्काल उन्हें दूसरे विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करना होगा।

    हाईस्कूल में अब दस विषयों की परीक्षा, सात से बनेगी मेरिट, यूपी बोर्ड ने 29 जून तक मांगे सुझाव, नए सत्र से लागू होंगे बदलाव

    हाईस्कूल में अब दस विषयों की परीक्षा, सात से बनेगी मेरिट, यूपी बोर्ड ने 29 जून तक मांगे सुझाव, नए सत्र से लागू होंगे बदलाव

    🔴 upmspncf2023@gmail.com पर अपने सुझाव भेज सकते हैं।

    🔴 प्रस्ताव में हिंदी अनिवार्य, दो अन्य भाषाएं भी छात्रों को पढ़नी होंगी

     
    प्रयागराज : राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल अर्थात कक्षा नौ और दस में बड़े बदलाव की तैयारी की है। 2025-26 से कक्षा नौ में कुल दस विषयों की परीक्षा कराई जाएगी जबकि मेरिट सात विषयों के आधार पर बनेगी। अभी मात्र छह विषयों की परीक्षा ली जा रही है। प्रत्येक विद्यार्थी को कम से कम तीन भाषाएं पढ़ना होगा। कक्षा नौ और दस के विद्यार्थियों के लिए अगले सत्र से बदलाव लागू करने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद यूपी बोर्ड ने सुझाव मांगे हैं। upmspncf2023@gmail.com पर सभी सुझाव 29 जून तक दिए जा सकते हैं।


    बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि नए प्रस्ताव में सभी विद्यार्थियों को हिंदी पढ़ना अनिवार्य है। इसके अतिरिक्त संस्कृत, गुजराती, उर्दू, पंजाबी, बांग्ला, मराठी, असमी, उड़िया, कन्नड़, कश्मीरी, सिंधी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, नेपाली, पालि, अरबी, फारसी और अंग्रेजी में से कोई दो भाषाओं को भी पढ़ना होगा। गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान सभी के लिए अनिवार्य रहेंगे। 


    गृह विज्ञान, मानव विज्ञान, वाणिज्य, एनसीसी, कंप्यूटर, कृषि या पर्यावरण विज्ञान में से कोई एक विषय चुनना होगा। कला शिक्षा क्षेत्र के तहत चित्रकला, रंजन कला, संगीत गायन या संगीत वादन में से किसी एक विषय का चयन कर पढ़ाई करनी होगी। विद्यार्थियों को शारीरिक एवं स्वास्थ्य शिक्षा के तहत नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा तथा समाजोपयोगी उत्पादक एवं समाजसेवा कार्य सभी के लिए अनिवार्य रहेगा।


    यूपी बोर्ड में होने वाले बदलाव व्यवसायिक शिक्षा पर भी प्रभावी हो रहे हैं। कुल 31 विषयों में से एक विषय अब विद्यार्थी चुन सकेंगे। इनके लिए बोर्ड ने तीन श्रेणियां तय की हैं। ए श्रेणी में सात, बी श्रेणी में 15 और सी श्रेणी में नौ विषय शामिल हैं। इसी क्रम में शारीरिक, कला एवं व्यवसायिक शिक्षा में 30 नंबर की लिखित परीक्षा कराई जाएगी। 70 अंक का आंतरिक मूल्यांकन होगा। शेष विषयों में 80 अंक की लिखित परीक्षा और 20 अंक का आंतरिक मूल्यांकन होगा। 


    बोर्ड की तरफ से जारी सूचना में कहा गया है कि पाकशास्त्र, बेकिंग एवं कन्फेक्शनरी, मधुमक्खी पालन, पौधशाला, खाद्य संरक्षण, फल संरक्षण, फसल सुरक्षा संबंधी विषय ए वर्ग अर्थात जीवन रूपों के साथ कार्य करने संबंधी हैं। मशीन और सामग्रियों के साथ कार्य करने संबंधी विषयों में आटोमोबाइल, आइटी/ आइटीईएस, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन, सोलर सिस्टम, मोबाइल रिपेयरिंग, टेक्सटाइल डिजाइन, छाया चित्रण अर्थात फोटोग्राफी, परिधान रचना एवं सज्जा, आशुलिपिक तथा टंकण, मुद्रण, रेडियो एवं टेलीविजन, बुनाई तकनीक, सिलाई शामिल है। वर्ग सी मानव सेवा में कार्य करने संबंधी विषयों की सूची में नौ विषय शामिल हैं। इनमें हेल्थ केयर, रिटेल ट्रेडिंग अर्थात खुदरा व्यापार, सुरक्षा, आपदा प्रबंधन, पुस्तकालय विज्ञान, धुलाई रंगाई, बैंकिंग, एकाउंटेंसी एवं अंकेक्षण, पर्यटन एवं आतिथ्य शामिल है।


    विषयवार होगा ग्रेडिंग सिस्टम 

    बोर्ड ने विषयवार ग्रेडिंग सिस्टम तय किया है। कक्षा नौ में 91-100 अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को ए-1 ग्रेड, 81-90 अंक पर ए-2 ग्रेड, 71-80 अंक पर बी-1 ग्रेड, 61 से 70 अंक पर बी-2 ग्रेड, 51 से 60 अंक पर सी-1 ग्रेड, 41 से 50 अंक पर सी-2 ग्रेड 33से 40 अंक पर डी ग्रेड ओर 0-32 अंक पर ई ग्रेड दिया जाएगा। ई ग्रेड पर विद्यार्थी अनुत्तीर्ण होंगे।


    ट्रेड विषयों के संचालन के लिए अनुदान देय नहीं

    बोर्डने नए निर्देशों में कहा है कि यदि कोई विद्यालय व्यावसायिक शिक्षा क्षेत्र के चयनित ट्रेड के विषय पढ़ाता है तो जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमति प्राप्त करनी होगी। जिला विद्यालय निरीक्षक परिषद को अनिवार्य रूप से सूचित करेंगे। विद्यालयों को अलग से मान्यता की आवश्यकता नहीं होगी। संस्था को ट्रेड विषयों के संचालन के लिए कोई भी शासकीय अनुदान नहीं दिया जाएगा। 

    समस्त मान्यता प्राप्त संस्थाओं में भाषाओं के अतिरिक्त समस्त विषयों के शिक्षण का माध्यम हिंदी अथवा अंग्रेजी रहेगा। प्रतिबंध यह है कि जिन विद्यालयों को हिंदी माध्यम से शिक्षण दिए जाने हेतु पूर्व में मान्यता/अनुमति मिली है उन्हें अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षण दिए जाने की अनुमति दी जा सकती है।


    बदलेगा प्रश्नों का प्रारूप

    यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि अब प्रश्न पत्र का प्रारूप भी बदल जाएगा। नए प्रारूप में 20 अंकों के बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे। 30 अंकों के दक्षता आधारित प्रश्न और 30 अंक के वर्णात्मक प्रश्न होंगे।


    आंतरिक मूल्यांकन के होंगे 20 अंक

    अब तक हाईस्कूल का हाइस्कूल का अंकपत्र 600 अंकों का होता था। वह अब 1000 अंकों का होगा। इसमें प्रत्येक विषय 100 अंक का होगा। उसमें से की परीक्षा होगी और 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन से मिलेगा।

    पदोन्नति में 32 साल बाद संसोधन कर बीईओ कोटा बढ़ाने के निर्णय का विरोध शुरू

    पदोन्नति में 32 साल बाद संसोधन कर बीईओ कोटा बढ़ाने के निर्णय का विरोध शुरू

    ■ कोटा 17 से 34% नहीं करने की मांग

    ■ राजकीय शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा नियमावली 1992 में पुरुष शाखा, महिला शाखा एवं निरीक्षण शाखा (खंड शिक्षाधिकारियों) के पदोन्नति कोटे में 32 साल बाद संशोधन के निर्णय का विरोध शुरू हो गया है। आपके अपने अखबार 'हिन्दुस्तान' में बुधवार के अंक में इस आशय का समाचार प्रकाशित होने के बाद शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर शिक्षा विभाग के अफसरों से आपत्ति दर्ज की है।


    राजकीय शिक्षक संघ बीपी सिंह के प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को लखनऊ में अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार और माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव से मुलाकात कर मांग पत्र सौंपा। गुट के महामंत्री डॉ. रवि भूषण का कहना है कि राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के लिए न्यूनतम तीन साल का शिक्षण अनुभव अनिवार्य है जबकि खंड शिक्षाधिकारी यह शर्त पूरी नहीं करते। 


    उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी और प्रवक्ता जीआईसी पद परस्पर स्थानान्तरणीय बनाते हुए दोनों की आमेलित वरिष्ठता सूची जारी करने की भी मांग की है। राजकीय शिक्षक संघ पांडेय गुट के प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पांडेय ने अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर पदोन्नति कोटे में संशोधन का विरोध किया है।

    राज्य अध्यापक पुरस्कार 2023 हेतु जारी शासनादेश में संशोधन किए जाने के सम्बंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने की मांग

    राज्य अध्यापक पुरस्कार 2023 हेतु जारी शासनादेश में संशोधन किए जाने के सम्बंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने की मांग 


    गत वर्ष जारी शासनादेश के अनुसार अंतर जनपदीय स्थानांतरण पारस्परिक अंतर जनपदीय स्थानांतरण तथा जनपद के अंदर स्थानांतरण किये जाने हेतु आदेश किये जाने के सम्बंध में जूनियर शिक्षक संघ ने रखी मांग

    गत वर्ष जारी शासनादेश के अनुसार अंतर जनपदीय स्थानांतरण पारस्परिक अंतर जनपदीय स्थानांतरण तथा जनपद के अंदर स्थानांतरण किये जाने हेतु आदेश किये जाने के सम्बंध में जूनियर शिक्षक संघ ने रखी मांग


    Tuesday, June 18, 2024

    CBSE : वेब एप्लीकेशन, आईटी, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के पाठ्यक्रम में बदलाव

    CBSE : वेब एप्लीकेशन, आईटी, आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के पाठ्यक्रम में बदलाव


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने कौशल विषयों वेब एप्लीकेशन, आईटी व आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के पाठ्यक्रम व सामग्री में बदलाव किया है। यह बदलाव चालू शैक्षणिक सत्र 2024-25 से ही लागू होंगे। बोर्ड ने बाजार की जरूरतों के हिसाब में इनमें कुछ पहलुओं को जोड़ा है। बोर्ड ने इस संबंध में जानकारी स्कूलों को भेज दी है। बदलाव के साथ पाठ्यक्रम को बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर भी अपलोड किया है। मालूम हो कि बोर्ड 33 स्किल और व्यावसायिक कोर्स संचालित करता है।


    सीबीएसई ने ग्यारहवीं के वेब एप्लीकेशन व आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस, दसवीं के इंर्फोमेशन टेक्नालॉजी और नौवीं के आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस कौशल विषय को संशोधित किया है। वहीं ग्यारहवीं के आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस विषय में शिक्षकों के लिये एक प्रोजेक्ट कुक बुक और छात्रों के लिए एक हैंडबुक को भी तैयार कर अपलोड किया है। इसमें अभ्यास के लिए बहु विकल्पीय प्रश्नों, रिक्त स्थान, लघु उत्तर वाले प्रश्न, केस स्टडी, एप्लीकेशन आधारित प्रश्नों और गतिविधियों को जोड़ा है। 


    इन विषयों के पाठ्यक्रम में जिस तरह का संशोधन किया गया है उससे छात्र भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार होंगे। बोर्ड ने स्कूलों को स्पष्ट किया है कि बारहवीं के वेब एप्लीकेशन कौशल विषय को भी संशोधित किया जा रहा है। इसे शैक्षणिक सत्र 2025-26 से लागू किया जाएगा।

    चार साल का ग्रेजुएशन के बाद एक साल का होगा PG कोर्स, बदलने वाली है पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई, जानिए UGC का क्रेडिट स्कोर प्लान

    चार साल का ग्रेजुएशन के बाद एक साल का होगा PG कोर्स, बदलने वाली है पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई, जानिए UGC का क्रेडिट स्कोर प्लान


    UGC PG Framework स्नातक के बाद यूजीसी ने अब परास्नातक (पीजी) कोर्सों के लिए भी नया फ्रेमवर्क जारी किया है। इसमें एक साल का पीजी डिप्लोमा पहले की तरह जारी रहेगा। हालांकि बीई-बीटेक और तीन वर्षीय स्नातक कोर्सों करने वालों के लिए दो साल का होगा पीजी कोर्स। क्रेडिट अंक भी अलग-अलग होंगे। जानिए पीजी की पढ़ाई में और क्या-क्या बदलेगा। यूजीसी ने इन फ्रेमवर्क को सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को अमल में लाने के निर्देश दिए है।


    नई दिल्ली। ग्रेजुएशन के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अब पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) को लेकर भी नया फ्रेमवर्क जारी किया है। जो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप है। जिसमें छात्रों को बीच में कभी भी पढ़ाई छोड़ने और शुरू करने का विकल्प मिलेगा।


    नए फ्रेमवर्क के तहत बीई-बीटेक को छोड़ बाकी चार वर्षीय स्नातक कोर्स करने वाले छात्रों के लिए परास्नातक कोर्स एक साल का होगा। इसके लिए छात्रों को 260 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे। वहीं एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पर छात्रों को 240 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे। यूजीसी ने परास्नातक कोर्सों को लेकर जारी किए गए इन फ्रेमवर्क को सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को अमल में लाने के भी निर्देश दिए है।


    बीई-बीटेक के लिए दो साल का पीजी कोर्स
    परास्नातक कोर्सों को लेकर तैयार किए गए नए फ्रेमवर्क में चार साल का बीई- बीटेक कोर्स करने वाले छात्रों के लिए परास्नातक कोर्स दो साल का होगा। इसके लिए छात्रों को 280 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे। वहीं तीन साल का स्नातक कोर्सों करने वाले छात्रों के लिए पहले की तरह परा स्नातक की पढ़ाई दो साल की ही होगी। इसके लिए उन्हें 260 क्रेडिट अंक जुटाने होंगे। यूजीसी ने इस फ्रेमवर्क के साथ ही देश भर के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों से इस फ्रेमवर्क को अपनाने का निर्देश दिया है।


    उच्च शिक्षा आयोग पर सरकार अब बढ़ेगी आगे-प्रधान
    अलग-अलग नियामकों के बीच बिखरे उच्च शिक्षा के ढांचे को एक दायरे में लाने के लिए प्रस्तावित भारतीय उच्च शिक्षा आयोग (HECI) के गठन पर केंद्र सरकार ने फिर रुचि दिखाई है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने मंत्रालय की फिर से जिम्मेदारी संभालने के बाद इसमें तेजी लाने का दावा किया है और कहा कि जल्द ही वह इसे कैबिनेट के सामने भी लेकर जाएंगे।


    प्रधान ने कहा कि आयोग का स्वरूप तैयार कर हो गया है। इसे लेकर सभी मंत्रालयों और विशेषज्ञों के साथ लंबी चर्चा भी की जा चुकी है। यह पूरी तरह से तैयार है। मंत्रालय जल्द इसे लेकर आगे बढ़ेगा। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में ही इसके गठन की सिफारिश की गई थी। इस दौरान मेडिकल और कानून की पढ़ाई को छोड़ कर पूरी उच्च शिक्षा को इस आयोग के दायरे में लाया जाएगा। गौरतलब है कि मौजूदा समय में उच्च शिक्षा करीब 11 नियामकों के दायरे में बंटी हुई है।

    दाखिले की उम्र सीमा में तीन महीने की छूट देगी सरकार! 01 जुलाई को 6 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को पहली कक्षा में एडमिशन देने की तैयारी

    परिषदीय स्कूलों में प्रवेश आयु सीमा बदलने की तैयारी
     

    परिषदीय स्कूलों में बच्चों की कम संख्या की समस्या से निजात पाने के लिए विभाग अपने ही एक आदेश को बदलने की तैयारी में है। यह आदेश प्रवेश के समय बच्चों की आयु सीमा को लेकर था। इसके तहत स्कूलों में उन्हीं बच्चों का प्रवेश लिया जाना था, जिनकी उम्र एक अप्रैल से सत्र शुरू होते समय 6 साल की हो चुकी है। हालांकि स्कूल चलो अभियान की वांछित प्रगति न हो पाने की स्थिति में इसकी समीक्षा की जा रही है।

    एक अप्रैल से शुरू हुए बेसिक शिक्षा विभाग के नए सत्र के साथ ही प्रवेश उत्सव की भी शुरुआत हो गई। हालांकि पूरे प्रदेश के किसी भी जिले में प्रवेश का टारगेट पूरा नहीं हो सका। प्रवेश कार्यों में लगे शिक्षकों ने बताया कि बेसिक शिक्षा निदेशक ने सत्र शुरू होने से पहले ही आदेश दिया था कि इस साल उन्हीं बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा, जिनकी उम्र एक अप्रैल तक 6 साल हो चुकी हो। इससे छोटे बच्चों को आंगनबाड़ी में भेजा जाए। आयुसीमा तय हो जाने के कारण मुश्किलें बढ़ गईं और प्रवेश कम हो गए। 

    बेसिक शिक्षा विभाग अब इस नियम को बदलने की तैयारी कर रहा है। 6 वर्ष के नियम में कुछ महीनों की ढील दी जा सकती है।




    दाखिले की उम्र सीमा में तीन महीने की छूट देगी सरकार!  01 जुलाई को 6 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों को पहली कक्षा में एडमिशन देने की तैयारी

    लखनऊ : पहली कक्षा में दाखिले के लिए उम्र सीमा में तीन महीने की छूट मिल सकती है। प्रदेश सरकार जल्द इस बारे में निर्णय लेगी। इसके बाद एक जुलाई को छह साल की उम्र पूरी करने वालों को भी दाखिला मिल सकता है। इससे पहले एक अप्रैल को छह साल की उम्र पूरी करने वालों को ही दाखिला देने का निर्णय लिया गया था।


    इसलिए तय हुई थी अप्रैल की समय सीमा

    पूरे देश में नियम है। कि पहली कक्षा में छह साल से कम उम्र में दाखिला न लिया जाए। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत यह नियम पहले से लागू है। अब नई शिक्षा नीति में इसे सख्ती से लागू करने की बात कही गई है। पिछले साल भी केंद्र ने सभी राज्यों को इस बाबत निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कुछ राज्यों ने कम उम्र के बच्चों को दाखिला दिया था। इसे देखते हुए यूपी में भी प्रदेश सरकार ने इसे सख्ती से लागू किया।


    यूं उठी उम्र सीमा में छूट की मांग

    पहले यूपी बोर्ड और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों का सत्र जुलाई से शुरू होता था। ऐसे में जुलाई में छह साल की उम्र लागू होती थी। चूंकि अब बेसिक शिक्षा परिषद और यूपी बोर्ड का सत्र भी एक अप्रैल से शुरू हो जाता है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने सख्त निर्देश दिए कि एक अप्रैल को जिनकी उम्र छह साल पूरी हो चुकी है, उनको ही दाखिला दिया जाए। 

    उधर, सरकार यह भी चाहती है कि स्कूलों में छात्र संख्या बढ़े। शिक्षकों पर अधिक दाखिले करने का दबाव है। इस वजह से उम्र सीमा में छूट देने की मांग उठ रही थी। इसे देखते हुए शासन स्तर पर यह सहमति बन चुकी है कि केंद्र से विशेष अपील करके जुलाई में छह साल पूरे करने वाले बच्चों को दाखिला दिया जाए। जल्द इसका शासनादेश जारी किया जा सकता है।


    समझिए! क्यों बदलना पड़ रहा निर्णय?

    एक अप्रैल को नया सत्र तो शुरू हो गया, लेकिन कुछ दिन पढ़ाई के बाद फिर छुट्टी हो गई। इसके बाद जून अंत से जुलाई की शुरुआत तक स्कूल चलो अभियान चलाया जाता है। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तभी ज्यादातर दाखिले होते हैं। ऐसे में एक अप्रैल को छह साल की उम्र पूरी करने के नियम से दिक्कत यह आ रही थी कि जुलाई में जो बच्चे दाखिला लेंगे उनकी उम्र छह साल से तीन महीने ज्यादा हो चुकी होगी। इससे जून-जुलाई में दाखिले नहीं होंगे। वैसे भी बेसिक स्कूलों में सत्र 2022-23 की तुलना में 2023-24 में बच्चों की संख्या 24 लाख कम हो गई थी। छह साल उम्र के नियम से छात्र संख्या में और कमी आती। इसी वजह से उम्र सीमा में ढील देने की तैयारी है।

    Monday, June 17, 2024

    इंचार्ज को हेड का वेतन देने को तैयार नहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर

    इंचार्ज को हेड का वेतन देने को तैयार नहीं बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर

    हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश को डबल बेंच में चुनौती देने की तैयारी


    प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों में इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक का वेतन देने को तैयार नहीं हैं। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संगठन मंत्री त्रिपुरारी दुबे की ओर से 2022 में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 15 मई को एक माह के अंदर प्रभारी प्रधानाध्यापकों को नियमित प्रधानाध्यापक पद का वेतन और पीछे का एरियर भुगतान करने का आदेश दिया था।


    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की नियमित प्रधानाध्यापक के वेतन भुगतान संबंधी मांग पर बांदा की बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रिंसी मौर्या ने भी 13 जून को बेसिक शिक्षा निदेशक को पत्र लिखकर मार्गदर्शन देने का अनुरोध किया है। हालांकि एक महीने की समय सीमा बीतने के बावजूद विभाग ने अपना रुख साफ नहीं किया है। 


    सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट के सिंगल बेंच के आदेश को डबल बेंच में चुनौती देने की तैयारी है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग विधिक राय ले रहा है। परिषदीय स्कूलों में बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापकों के पद रिक्त पड़े हैं लेकिन पिछले कई वर्षों से उन पर पदोन्नति नहीं की जा रही है। इससे प्रभारी प्रधानाध्यापक का दायित्व निभा रहे सहायक अध्यापकों में अफसरों के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। 


    नियमित प्रधानाध्यापक का वेतन भुगतान होने पर प्रत्येक शिक्षक को हर महीने औसतन तीन से चार हजार रुपये का लाभ होगा।

    Sunday, June 16, 2024

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता / सहायक अध्यापक (पुरुष/महिला) के वार्षिक स्थानान्तरण नीति के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2024-25 में ऑनलाइन स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रवक्ता / सहायक अध्यापक (पुरुष/महिला) के वार्षिक स्थानान्तरण नीति के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2024-25 में ऑनलाइन स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में


    मौखिक आदेश से रोक दी गई ढाई सौ शिक्षकों की नियुक्ति, 12460 शिक्षक भर्ती का मामला

    मौखिक आदेश से रोक दी गई ढाई सौ शिक्षकों की नियुक्ति, 12460 शिक्षक भर्ती का मामला



    प्रयागराज । परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 12460 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत नियुक्ति पत्र पाने वाले 5856 सहायक अध्यापकों की एक तरफ तैनाती की प्रक्रिया चल रही है तो वहीं चयन सूची में शामिल ढाई सौ से अधिक अभ्यर्थी भटक रहे हैं।

    शून्य जनपद विवाद का निपटारा होने के बाद रिक्त 6470 पदों पर नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट के आदेश पर जिलों में 30 दिसंबर 2023 और सात जनवरी 2024 को क्रमशः 1796 और 4060 कुल 5856 नियुक्ति पत्र वितरित किए गए थे। अभ्यर्थियों का आरोप है कि नियुक्ति के लिए आयोजित काउंसिलिंग के दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव के मौखिक आदेश पर मामूली कारणों से उन्हें बाहर कर दिया गया।


    12460 शिक्षक भर्ती में कई जिलों के अभ्यर्थी परेशान जाति व निवास प्रमाणपत्र की मूल प्रति के कारण अटके


    केस 1
    12460 शिक्षक भर्ती में पांच जनवरी को काउंसिलिंग के दौरान भदोही जिले में 31 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। इन अभ्यर्थियों ने इस वर्ष का जाति व निवास प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था, जबकि बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आवेदन के समय यानि वर्ष 2016 का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने की बात कहकर लौटा दिया। कुमारी सुनिता, नेहा कुशवाहा, नीलम, उजाला जायसवाल, अनीता देवी, दुर्गेश कुमार समेत 31 अभ्यर्थियों ने अगले दिन शपथपत्र के साथ पुराने प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। उसके बाद से ये अभ्यर्थी प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक के चक्कर काट रहे हैं। भदोही के ही कई अन्य अभ्यर्थियों को इन्हीं कारणों से नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया।


    केस 2
    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय नई दिल्ली से डीएड विशेष शिक्षा में प्रशिक्षित आशीष शुक्ला और पिंकी मिश्रा को अमेठी जिले में नियुक्ति पत्र नहीं दिया गया। इन दोनों ने इंटर के बाद 2013 में डीएड किया और उसके बाद 2016 में स्नातक किया है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन में इंटर के बाद ही डीएड विशेष शिक्षा करने का प्रावधान है और डीएड विशेष शिक्षा को मान्य करने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने दिए हैं।

    इन मामलों के निस्तारण के लिए संबंधित जिलों के मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन भी किया गया था, लेकिन छह महीना बीतने के बावजूद निस्तारण नहीं हुआ और अभ्यर्थी भटक रहे हैं।

    मदरसा शिक्षकों और छात्रों की लगेगी बायोमेट्रिक हाज़िरी

    मदरसा शिक्षकों और छात्रों की लगेगी बायोमेट्रिक हाज़िरी


    मदरसों में अब शिक्षक और छात्रों की भी बायोमेट्रिक हाजिरी लगेगी। इसे लेकर उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार डॉ. प्रियंका अवस्थी ने आदेश जारी किए हैं। इसके बाद मदरसों में हाजिरी लगाने की व्यवस्थाएं की जाने लगी हैं।


    उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या 16460 है। इन भदरसों में तहतानिया (कक्षा एक से पांच), फौकानिया (कक्षा पांच से आठ) तक के 13 लाख विद्यार्थी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। वहीं इनमें शामिल 560 अनुदानित मदरसों में एक लाख 92 हजार 313 विद्यार्थी शिक्षा हासिल कर रहे हैं। 

    अनुदानित मदरसों में मुंशी व मौलवी (समकक्ष हाईस्कूल), आलिम (समकक्ष इंटर, कामिल (समकक्ष स्नातक) और फाजिल (समकक्ष परास्नातक) शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।

    Saturday, June 15, 2024

    मांग : केंद्र की भांति पेंशन के लिए प्रदेश भी जारी करे मेमोरेंडम

    मांग : केंद्र की भांति पेंशन के लिए प्रदेश भी जारी करे मेमोरेंडम


    लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने पेंशन के लिए केंद्र की भांति प्रदेश में भी मेमोरेंडम जारी करने की मांग की है। इसके लिए एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री आवास पर जनता दर्शन कार्यक्रम में ज्ञापन दिया है। 

    प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने कहा कि केंद्र में पुरानी पेंशन का विकल्प देने के लिए तीन मार्च 2023 को आदेश हुआ है। वैसा ही आदेश यूपी में एक अप्रैल 2005 के पूर्व विज्ञप्ति पदों के लिए जारी करने की मांग की गई है। वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रदेश सचिव राकेश तिवारी आदि पदाधिकारी शामिल थे। 


    विशिष्ट बीटीसी 2004 बैच के लिए मेमोरेंडम जारी करने हेतु विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की पहल


    लोक सभा निर्वाचन 2024 के अंतर्गत दिवंगत मतदान कार्मिकों को उचित मुआवजा न दिये जाने एवं मतदान कार्मिकों को मानदेय भुगतान न किए जाने / असमान रूप से किये जाने के संबंध में ज्ञापन

    लोक सभा निर्वाचन 2024 के अंतर्गत दिवंगत मतदान कार्मिकों को उचित मुआवजा न दिये जाने एवं मतदान कार्मिकों को मानदेय भुगतान न किए जाने / असमान रूप से किये जाने के संबंध में ज्ञापन 



    वर्ष में दो बार होंगी बोर्ड परीक्षाएं, 2025-26 से 10वीं व 12वीं की दो बार बोर्ड परीक्षा कराने पर बनी सहमति

    वर्ष में दो बार होंगी बोर्ड परीक्षाएं, 2025-26 से 10वीं व 12वीं की दो बार बोर्ड परीक्षा कराने पर बनी सहमति

    JEE की तर्ज पर फरवरी व अप्रैल में बोर्ड परीक्षा कराने की योजना


    नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार प्रवेश देने की मंजूरी के साथ ही शिक्षा मंत्रालय ने अगले शैक्षणिक सत्र यानी 2025- 26 से दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को भी साल में दो बार कराने को लेकर अपनी सैद्धांतिक । सहमति दे दी है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शुक्रवार को बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार कराने की फिर से जानकारी दी और कहा कि अभी तक इसे जेईई की तर्ज पर कराने पर सहमति बनी है। इसमें पहली परीक्षा फरवरी में और दूसरी परीक्षा अप्रैल में होगी। छात्रों को दोनों ही परीक्षाओं में शामिल होने के विकल्प दिए जाएंगे। इनमें से उनका प्रदर्शन जिसमें बेहतर होगा उसे ही अंतिम स्कोर माना जाएगा।


    प्रधान ने बताया कि वर्ष में दो बार बोर्ड परीक्षाएं कराने के बेहतर तरीके को लेकर मंत्रालय की सीबीएसई सहित दूसरे शिक्षा बोर्डों के साथ ही चर्चा चल रही है। मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार इस पहल से बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों का तनाव कम होगा। किसी कारण से किसी छात्र का पहली बार में यदि पेपर खराब हो गया, तो उसके पास दूसरी बार परीक्षा देने का विकल्प रहेगा।

     वहीं उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार प्रवेश देने के फैसले के बाद अब बारहवीं के परीक्षा मे देरी के चलते ऐसे बच्चों के दाखिले को लेकर उठ रहे सवाल भी खत्म हो गए। उसे अब प्रवेश के लिए एक साल का इंतजार नहीं करना होगा। उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार प्रवेश देने की मंजूरी के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने यह भी साफ किया है कि सीयूईटी के आधार पर ही दोनों ही सत्रों में छात्रों को प्रवेश मिलेगा। दूसरे सत्र में प्रवेश के लिए उन्हें अलग-अलग से कोई परीक्षा नहीं देनी होगी। अभी जुलाई के सत्र के लिए सीयूईटी होती है।


    दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार कराने के लिए दो फार्मूले तैयार किए गए हैं। एक फार्मूला सेमेस्टर यानी छह-छह महीने में परीक्षा कराने का भी है। हालांकि अब तक जेईई की तर्ज पर ही इसे कराने को लेकर सहमति बनी है। – धर्मेंद्र प्रधान

    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधान एवं अध्यापकों के स्थानान्तरण के सम्बन्ध में।

    ऐडेड विद्यालयों में स्थानांतरण के लिए ऑफलाइन आवेदन 27 जून तक


    प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के स्थानांतरण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए आवेदन 27 जून तक शिक्षा निदेशालय में करना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के तीसरे दिन 30 जून को स्थानांतरण आदेश जारी कर दिया जाएगा। स्थानांतरण की प्रक्रिया ऑफलाइन होगी। पूर्व की तरह आनलाइन प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।

    पिछले वर्ष स्थानांतरण नीति दो जून को आई थी। उसके बाद आनलाइन और आनलाइन आवेदन लिए गए थे और 1193 शिक्षकों और प्रधानाचार्यों का स्थानांतरण हुआ था। इसमें अधिकतर आवेदन आनलाइन था। इस बार अफसरों ने आनलाइन में कई समस्याएं बताई। इसलिए केवल ऑफलाइन स्थानांतरण करने का आदेश हुआ है।

     एडेड विद्यालयों में स्थानांतरण की प्रक्रिया जटिल है। शिक्षक जहां पर स्थानांतरण चाहते हैं, वहां पर उनके विषय का पद रिक्त होना चाहिए। पद रिक्त होने की जानकारी लेने के बाद वहां के प्रबंधक से एनओसी लेनी होगी। कई बार प्रबंधक एनओसी नहीं देते हैं। अगर वह रिक्त पद पर भर्ती का अधियाचन आयोग को भेज चुके होंगे तो एनओसी नहीं दे सकते हैं। एनओसी लेने के बाद शिक्षक को डीआईओएस से फाइल स्वीकृत कराकर संयुक्त निदेशक (जेडी) से भी स्वीकृति लेनी होगी। ऐसे ही शिक्षक जहां तैनात हैं, वहां से खुद के स्थानांतरण के लिए प्रबंधक से एनओसी लेने के बाद डीआईओएस और फिर जेडी से फाइल स्वीकृत करवानी होगी। 



    एडेड माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के आफलाइन होंगे तवादले

    लखनऊ: अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों के स्थानांतरण आफलाइन प्रक्रिया अपनाकर किए जाएंगे। 30 जून तक स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को निर्देश दिए गए हैं कि वह पारदर्शिता के लिए कमेटी का गठन कर सकते हैं। वहीं राजकीय माध्यमिक स्कूलों में आनलाइन माध्यम से स्थानांतरण किए जाएंगे। 

    विशेष सचिव, माध्यमिक शिक्षा केके गुप्ता की ओर से आफलाइन स्थानांतरण प्रक्रिया से संबंधित आदेश गुरुवार को जारी कर दिया गया। आवेदन करने वाले शिक्षकों व प्रधानाध्यापकों को स्कूलों के प्रबंधक अनापत्ति प्रमाण पत्र देंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक खाली पदों का ब्योरा जुटाकर इसका सत्यापन करेंगे। फिर नियमानुसार स्थानांतरण किया जाएगा। 

    निराश्रित महिला, असाध्य रोगी, पति-पत्नी दोनों के सरकारी सेवा में हैं तो उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। नियमों का पालन करते हुए ही स्थानांतरण किया जाएगा। क्योंकि एडेड स्कूलों में शिक्षक व प्रधानाध्यापकों के लिए प्रबंधक से अनापत्ति लेना आवश्यक है, ऐसे में यहां स्थानांतरण आफलाइन माध्यम से ही होंगे।



    अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के संस्था प्रधान एवं अध्यापकों के स्थानान्तरण के सम्बन्ध में।


    परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को DBT के जरिए जल्द मिलेगी ड्रेस, जूता-मोजा के लिए धनराशि

    परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को DBT के जरिए जल्द मिलेगी ड्रेस, जूता-मोजा के लिए धनराशि 


    लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय विद्यालय गर्मी की छुट्टियों के बाद 25 जून से फिर खुलेंगे। नए सत्र में स्कूल खुलने से पहले ही बच्चों के ड्रेस, स्टेशनरी, जूता-मोजा खरीदने के लिए नकद राशि उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए डीबीटी संबंधी तैयारी तेजी से चल रही है। विभाग इसे अगले सप्ताह करने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इसके लिए समय मांगा गया है।


    परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले कक्षा एक से आठ तक के लगभग दो करोड़ बच्चों को हर नए सत्र में प्रदेश सरकार की ओर से 1200 रुपये डीबीटी किया जाता है। यह राशि सीधे बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में भेजी जाती है। पिछले साल भी मुख्यमंत्री ने खुद इस राशि ट्रांसफर की थी। इस राशि से बच्चों के लिए ड्रेस, स्टेशनरी, जूता-मोजा व स्वेटर खरीदे जाते हैं।


    वहीं विभाग की ओर से बच्चों को निशुल्क किताब का वितरण अलग से किया जाता है। इस तरह परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को पूरी तरह निशुल्क शिक्षा देने की व्यवस्था है। इस बार भी विभाग ने डीबीटी से जुड़ी आवश्यक तैयारी दो दिन में पूरी करने को कहा है। बच्चों के अभिभावकों के आधार नंबर उनके बैंक खाते से लिंक कराने पर सबसे ज्यादा जोर है, ताकि डीबीटी राशि जारी होते ही सीधे उनके खाते में पहुंच जाए। 

    परिषदीय स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने की तैयारी

    परिषदीय स्कूलों के ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने की तैयारी 

    यूपी में आठवीं तक के बच्चों को मिलने जा रही बड़ी राहत, स्कूलों की छुट्टी बढ़ाने की तैयारी



    लखनऊ : भीषण गर्मी को देखते हुए परिषदीय स्कूलों में अवकाश और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अभी 18 जून से परिषदीय स्कूल खुल रहे हैं। अब बेसिक शिक्षा विभाग ग्रीष्मकालीन अवकाश बढ़ाने पर विचार कर रहा है। 


    मौसम के संबंध में भी जानकारी जुटाई जा रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि पहले एक हफ्ते छुट्टियां आगे बढ़ाई जाएंगी। गर्मी के कारण विद्यालयों में विद्यार्थी बीमार न हों, इसे लेकर विभाग चिंतित है। कुछ जिलों में जिलाधिकारी अपने स्तर पर छुट्टियां आगे बढ़ा चुके हैं। ऐसे मे सभी जिलों में अवकाश बढ़ाने को लेकर एकरूपता रहे इस पर भी ध्यान दिया जा रहा है। 


    शिक्षक संगठनों की ओर से भी छुट्टियां बढ़ाए जाने की मांग की गई है। पिछले वर्ष परिषदीय स्कूल 30 जून तक बंद थे। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार भी छुट्टियां बढ़ाई जाएंगी।



    प्रचंड गर्मी को देखते हुए प्राइमरी स्कूलों का ग्रीष्मावकाश बढ़ाया जा सकता है। गर्मी और धूप के तेवरों को देखते हुए सरकार स्कूलों की गर्मी की छुट्टी बढ़ाने के लिए गम्भीरता से विचार कर रही है। 

    प्रचंड गर्मी और लू को देखते हुए प्राइमरी स्कूलों का ग्रीष्मावकाश एक सप्ताह और बढ़ाया जा सकता है। झुलसा देने वाली धूप के तेवरों को देखते हुए सरकार स्कूलों की गर्मी की छुट्टी बढ़ाने के लिए गम्भीरता से विचार कर रही है। पिछले साल अधिक गर्मी के कारण गर्मियों की छुट्टी को 15 दिन बढ़ाकर 30 जून तक कर दिया गया था।

     दूसरी तरफ शिक्षक संगठनों एवं अभिभावकों की ओर से भीषण गर्मी को देखते हुए ग्रीष्मावकाश की तिथि बढ़ाने की लगातार की जा रही मांगों के कारण भी विभाग दबाव में है। ऐसे में सरकार के निर्देश पर शिक्षा विभाग ने मौसम विभाग को पत्र भेजकर अगले 15 दिनों का गर्मी से जुड़े पूर्वानुमान एवं संभावित अधिकतम तापमान का चार्ट उपलब्ध कराने को कहा है ताकि स्कूलों के खोलने या बन्द रखने को लेकर कोई निर्णय किया जा सके। आगामी 15 जून को प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में ग्रीष्मावकाश समाप्त होने जा रहा हैं और 18 जून से स्कूल खुलने जा रहे हैं।


    Friday, June 14, 2024

    बोर्ड परीक्षाओं में छात्राओं को मिलेंगे सैनेटरी पैड व रेस्ट ब्रेक

    बोर्ड परीक्षाओं में छात्राओं को मिलेंगे सैनेटरी पैड व रेस्ट ब्रेक

    शिक्षा मंत्रालय ने सभी स्कूलों, सीबीएसई, केवीएस व एनवीएस को जारी किए दिशा-निर्देश

    Govt Announces Proactive Measures For Menstrual Hygiene Management During Board Exams


    नई दिल्ली। मासिक धर्म के कारण अब बेटियों की स्कूली शिक्षा बाधित नहीं होगी। लड़कियों को स्कूली शिक्षा से जोड़े रखने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने सभी स्कूलों को 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान मुफ्त सैनेटरी पैड मुहैया कराने का दिशानिर्देश जारी किया है। इसमें छात्राओं की सुविधा का ध्यान रखते हुए रेस्ट ब्रेक देने को भी कहा गया है।


    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) को एक परामर्श भेजा है। मंत्रालय का मानना है कि लड़कियों के समग्र कल्याण के लिहाज से मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन बेहद जरूरी है।


    यह फैसला लड़कियों के स्वास्थ्य, सम्मान और शैक्षणिक सफलता को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। दरअसल, मासिक धर्म के कारण ग्रामीण व दूरदराज इलाकों की छात्राएं स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ देती है क्योंकि उनके पास सैनेटरी पैड खरीदने के लिए पैसे नहीं होते हैं। दूसरे कई बार बेटियां शर्म के कारण अपनी दिक्कतों को घर और स्कूल में महिला शिक्षकों के समक्ष भी नहीं बता पाती हैं। इसी कारण स्कूल से दूर हो जाती है।

    अनुमोदन पर 30 दिनों तक बीएसए की खामोशी, स्वीकृति के समान – हाईकोर्ट

    अनुमोदन पर 30 दिनों तक बीएसए की खामोशी, स्वीकृति के समान – हाईकोर्ट 

    अनुभव प्रमाण पत्र के सत्यापन के बाद पद पर सवेतन बहाली का आदेश


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि नियुक्ति के अनुमोदन लिए भेजे गए दस्तावेजों पर 30 दिनों तक बीएसए की खामोशी को यूपी बेसिक स्कूल नियम 10 के तहत उनकी स्वीकृति मानी जाएगी। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की एकल पीठ ने याची कविता सिंह की ओर से दाखिल याचिका को स्वीकार करते हुए की।

    बीएसए इलाहाबाद को न्यायालय ने प्रतिवादियों को एक महीने के भीतर अनुभव प्रमाण पत्र सत्यापित करने का निर्देश दिया। यह माना गया कि यदि दस्तावेज वास्तविक पाया जाता है, तो याचिकाकर्ता को प्रिंसिपल के पद पर बने रहने की अनुमति दी जानी चाहिए। इस शर्त पर, न्यायालय ने आगे निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को उसके वेतन का बकाया भुगतान किया जाएगा और उसे उसका मासिक वेतन भी मिलता रहेगा। मामला प्रयागराज का है। 


    याची को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 17 अक्टूबर 2015 को डॉ. अंबेडकर जूनियर हाई स्कूल, कौशाम्बी में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किया था। उन्होंने उक्त पद पर 19 वर्षों तक काम किया।

    2016 में, राम कली बालिका पूर्व माध्यमिक विद्यालय, इलाहाबाद ने कई पदों के लिए रिक्तियों का विज्ञापन जारी हुआ। जिसमे तहत याची ने प्रधानाध्यापक के पद के लिए आवेदन किया था। याची का चयन भी हो गया। उसने कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। वेतन न मिलने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की तो नियुक्ति प्राधिकारी ने याची के दस्तावेजों में अनुभव प्रमाणपत्र और बीएसए से अनुमोदन की गैर मौजूदगी का हवाला देते हुए याची को नियुक्ति के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    याची के वकील ने दलील दी कि याची ने 19 साल के अनुभव प्रमाण पत्र के साथ सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए थे, जिसमें दिखाया गया था कि वह संस्था में सहायक शिक्षिका के रूप में काम करती थी।

    यह प्रस्तुत किया गया कि याची के अनुभव प्रमाण पत्र में वर्तमान प्रबंधक, आकाश सिंह द्वारा छेड़छाड़ की गई थी, जिसके आधार पर विवादित आदेश पारित किया गया, जबकि नियुक्ति और दस्तावेजों के अनुमोदन के लिए बीएसए को भेजे गए पत्र पर बीएसए में अब तक कोई जवाब नही दिया। जबकि नियमानुसार अनुमोदन पर बीएसए को तीस दिन के भीतर जवान देना चाहिए। 

    माध्यमिक विद्यालयों के लिए विज्ञान कैलेंडर जारी

    माध्यमिक विद्यालयों के लिए विज्ञान कैलेंडर जारी


    विद्यालयों में विद्यार्थियों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए समग्र शिक्षा माध्यमिक की ओर से विज्ञान प्रदर्शनी के लिए कैलेंडर जारी कर दिया गया है। 15 अक्टूबर 2024 तक विद्यालय स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी लगाई जाएगी। जनपद स्तरीय प्रदर्शनी 31 अक्टूबर तक, मंडल स्तरीय प्रदर्शनी 10 नवंबर और राज्य स्तरीय प्रदर्शनी 11 नवंबर से 30 नवंबर तक आयोजित होगी। इन तिथियों के बीच में विज्ञान की प्रदर्शनी लगेगी।


    राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा ने विज्ञान प्रदर्शनी के लिए जरूरी दिशा निर्देश जारी किया है। विज्ञान प्रदर्शनी में जूनियर वर्ग में कक्षा नौ और 10, सीनियर वर्ग में कक्षा 11 से 12 तक दो संवर्ग होंगे। विद्यार्थियों को विज्ञान, गणित और प्रौद्योगिकी में अपनी स्वभाविक जिज्ञासा, रचनात्मकता, नवाचार और प्रयोग के लिए एक मंच मिलता है। साथ ही इससे उनमें वैज्ञानिक चेतना का विकास होता है। विज्ञान प्रदर्शनी के लिए छह मुख्य विषय तय किए गए हैं।

    इसमें पर्यावरण, जैव विविधता, मानव कल्याण में जीवन विज्ञान, वैकल्पिक ऊर्जा, सूचना संचार व परिवहन प्रौद्योगिकी, गणित- भौतिक विज्ञान और खेल हैं। प्रदर्शनी में माडल स्थिर या क्रियाशील दो तरह के हो सकते हैं। छात्र-छात्राएं अपनी सोच के अनुसार प्रदर्शन कर सकते हैं। विद्यालय स्तर से चयनित माडल जनपद स्तर की प्रदर्शनी में पहुंचेगी। जनपद से मंडल और मंडल से राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में उन्हें अवसर मिलेगा। उत्कृष्ट माडल पर पुरस्कार भी दिया जाएगा।

    संयुक्त शिक्षा निदेशक डा. प्रदीप कुमार ने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को जुलाई से शुरू होने वाले नियमित सत्र से विद्यालयों में इसकी तैयारी कराने के लिए निर्देश भी दिया है।

    Thursday, June 13, 2024

    गर्मी के कारण स्कूलों को 30 जून तक बंद रखने की शिक्षक संगठनो की मांग

    गर्मी के कारण स्कूलों को 30 जून तक बंद रखने की शिक्षक संगठनो की मांग

    शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव को भेजा पत्र


    लखनऊ। प्रदेश में परिषदीय विद्यालय गर्मी की छुट्टियों के बाद 18 जून को खुल रहे हैं। वहीं पूरे - प्रदेश में भीषण गर्मी पड़ रही है। इसे देखते हुए बच्चों के स्वास्थ्य का हवाला देते हुए शिक्षक संगठनों ने गर्मी की छुट्टियां 30 जून तक बढ़ाने की मांग की है। 


    प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय  कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री व प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को भेजे पत्र में कहा है कि पूरा प्रदेश भीषण गर्मी व लू से तप रहा है। ऐसे में विद्यालयों को 18 जून से खोलना हितकर नहीं होगा। वहीं शिक्षकों की परस्पर तबादले की प्रक्रिया भी चल रही है।

    इसे देखते हुए परिषदीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 30 जून तक की जाएं। वहीं उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा को भेजे पत्र में कहा है कि वर्तमान में प्रदेश भर में भीषण गर्मी पड़ रही है। ऐसे में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों का ग्रीष्मकालीन अवकाश 30 जून तक बढ़ाया जाए। 



    भीषण गर्मी के दृष्टिगत ग्रीष्मावकाश को 30 जून तक बढ़ाए जाने की PSPSA की मांग 





    प्रदेश में पड़ रही भीषण गर्मी के दृष्टिगत परिषदीय विद्यालयों में ग्रीष्मावकाश 30 जून तक बढ़ाए जाने की मुख्यमंत्री से मांग






    भीषण गर्मी के दृष्टिगत  बेसिक शिक्षा मंत्री से की ग्रीष्मावकाश को 30 जून तक बढ़ाये जाने की मांग


    प्रोजेक्ट अलंकार के अन्तर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत, पुनर्निर्माण, निर्माण एवं अवस्थापना सुविधाओं हेतु सहयोगी अनुदान योजना के सम्बन्ध में

    प्रोजेक्ट अलंकार के अन्तर्गत अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों के जीर्णोद्धार, मरम्मत, पुनर्निर्माण, निर्माण एवं अवस्थापना सुविधाओं हेतु सहयोगी अनुदान योजना के सम्बन्ध में



    हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के आलोक एवं अनुपालन में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत समस्त शिक्षक/ शिक्षिकाओं को प्रधानाध्यापक पद के समस्त लाभ एवं नियमित वेतन आदि दिये जाने हेतु मांग

    हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के आलोक एवं अनुपालन में प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में प्रभारी प्रधानाध्यापक के रूप में कार्यरत समस्त शिक्षक/ शिक्षिकाओं को प्रधानाध्यापक पद के समस्त लाभ एवं नियमित वेतन आदि दिये जाने हेतु मांग


    यूपी बोर्ड : अब एक क्लिक पर 99 साल के प्रमाणपत्र, निशुल्क होगी सुविधा

    यूपी बोर्ड : अब एक क्लिक पर 99 साल के प्रमाणपत्र, निशुल्क होगी सुविधा


    एक क्लिक में दिखेगा यूपी बोर्ड के 80 वर्षों का रिकॉर्ड, 
    1923 से 2003 तक के अभिलेख होंगे ऑनलाइन

    निशुल्क होगी सुविधा 

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के 20 कमरों में धूल फांक रहे 80 वर्ष पुराने अभिलेखों के डिजिटलीकरण का काम शुरू हो गया है। कुछ माह में इन अभिलेखों का डिजिटलीकरण कर दिया जाएगा।


    उसके बाद से इसे निशुल्क ऑनलाइन देखा सकेगा। इसके साथ अंकपत्रों व प्रमाणपत्रों की दूसरी प्रति बनवाई जा सकेगी। साथ ही कागजों के रखरखाव का झंझट खत्म हो जाएगा।


    परीक्षा कराने वाली देश की सबसे पुरानी संस्था यूपी बोर्ड की स्थापना 1921 में हुई थी। यूपी बोर्ड ने पहली परीक्षा 1923 में कराई थी। तब से अब तक 101 वर्षों के अंक पत्र, प्रमाण पत्र व अन्य अभिलेख मुख्यालय में मौजूद हैं।


    21वीं सदी में कंप्यूटर का प्रचलन बढ़ा तो 2003 के बाद के दस्तावेज ऑनलाइन किए गए। 2003 से पहले के दस्तावेज फाइलों में बंडल बनाकर रखे गए हैं। 80 वर्षों की फाइलों को संभालकर रखना बोर्ड के लिए चुनौती है। इन फाइलों को मुख्यालय के 20 कमरों में रखा गया है। इनको बचाने के लिए समय- समय पर दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है। इसके बावजूद कई वर्ष के अभिलेख सीलन से या चूहों के कुतरने से खराब हो गए हैं। 


    नहीं लगाना पड़ेगा बोर्ड का चक्कर

    2003 से पहले यूपी बोर्ड से हाईस्कूल या इंटर कर चुके लोगों को अगर इसकी दूसरी प्रति चाहिए तो उन्हें लिपिकों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब अभिलेखों के डिजिटल होने पर यह प्रमाण पत्र आसानी से बनवाए जा सकेंगे। प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और बोर्ड के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।


    केंद्र सरकार की योजना से हो रहा डिजिटलीकरण

    यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया कि केंद्र सरकार की योजना स्पेशल असिस्टेंट टू स्टेटस फॉर कैपिटल इनवेस्टमेंट (इनिशिएटिव फॉर डिजिटाइजेशन) के तहत यूपी बोर्ड के अभिलेखों का डिजिटाइजेशन व उनके लेमिनेशन का कार्य शुरू कराया गया है। इससे अभिलेख हमेशा के लिए सुरक्षित होंगे। साथ ही साथ अंकपत्र और प्रमाणपत्र बनाने की कार्रवाई व अभिलेखों के सत्यापन आदि की प्रक्रिया तेज हो जाएगी।