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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, February 20, 2026

    अशासकीय अशासकीय सहायता प्राप्त प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षको/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखा शीर्षक-8338 के अन्तर्गत आवंटित धनराशि के उपरान्त जनपदो में कम पड़ रही धनराशि के मॉग पत्र/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

    अशासकीय अशासकीय सहायता प्राप्त प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षको/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखा शीर्षक-8338 के अन्तर्गत आवंटित धनराशि के उपरान्त जनपदो में कम पड़ रही धनराशि के मॉग पत्र/प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में


    अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब

    अस्थाई शिक्षकों और कर्मियों की भर्ती में आरक्षण पर UGC की सख्ती, 45 दिन या अधिक समय के लिए अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों के पालन का ब्यौरा तलब


    लखनऊ । विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में अस्थाई पदों पर शिक्षकों व कर्मचारियों की हुई भर्ती में आरक्षण का हिसाब किताब लिया जाएगा। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए इन अस्थाई पदों पर होने वाली भर्तियों में आरक्षण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों से इसका ब्योरा तलब किया गया है। अब वर्ष 2023 से 2025 तक हुई भर्तियों की जांच होगी। 

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वह शिक्षकों और कर्मचारियों के अस्थाई पदों पर की जा रही भर्तियों में आरक्षण के नियमों का सख्ती से पालन करें। ओबीसी व एससी-एसटी श्रेणी के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ दिया जाए। 45 दिन व उससे अधिक समय के लिए जितने भी अस्थाई पदों पर भर्ती हो रही है, उसमें आरक्षण के मानकों का कड़ाई से पालन कराया जाए।

    Thursday, February 19, 2026

    एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब

    एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब


    लखनऊ। यूपी के विधानसभा में सत्र के दौरान सपा विधायक ओम प्रकाश ने बुधवार को शिक्षामित्रों के मानदेय और उनकी गृह जिले की ग्राम पंचायत में तैनाती का मामला उठाया। उनकी बात सुनने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षामित्रों को उनके गृह जिलों की ग्राम पंचायतों में तैनाती के लिए मुक्त कर दिया जाएगा। आदेश पहले ही हो चुके हैं। एसआईआर की वजह से उन्हें फिलहाल मुक्त नहीं किया जा रहा है।


    ओम प्रकाश ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षामित्रों की भर्ती हुई थी। हालांकि अब शिक्षामित्र लाचार हैं। एक ही विद्यालय में उनके साथ पढ़ाने वाले अध्यापकों को 80 हजार से एक लाख रुपये तनख्वाह दी जा रही है, जबकि शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 

    शिक्षा मित्रों में से 37 हजार टीईटी पास हैं। बावजूद इसके शिक्षामित्रों को न तो 68,500 और न ही 69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल किया गया। तमाम शिक्षामित्र अपने निवास से दूर तैनात हैं। इससे भी उन्हें दिक्कत हो रही है। मेरे गांव में 13 शिक्षामित्र हैं। जब वह अपनी दिक्कत कहते हैं तो हम केवल मूकदर्शक बने सुनते रहते हैं। पूरे देश में शिक्षामित्र बने थे। यूपी में इनकी संख्या 1,37,500 है। सभी राज्यों में उनकी तनख्वाह बढ़ गई, जबकि यूपी में नहीं हुआ। इनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।


    कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका

    बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका है। ग्राम पंचायतों में भी तैनाती का आदेश जारी हो चुका है। हालांकि, एसआईआर की प्रक्रिया में इनकी ड्यूटी लगी है। इसके बाद ही इनकी रिलीविंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रुपये था जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। आगे भी जो बेहतर होगा वह किया जाएगा। मंत्री के जवाब पर सपा सदस्यों ने कहा कि हमने तो शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उन्हें 40 हजार रुपये वेतन दिया था। सपा सरकार तो उनकी बेहतरी चाहती थी।

    यूपी बोर्ड वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु लगाए गए शिक्षाधिकारियों की संशोधित सूची जारी

    यूपी बोर्ड वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु लगाए  गए शिक्षाधिकारियों की संशोधित सूची जारी 

    कार्यालय ज्ञाप
    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उ०प्र० प्रयागराज की वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा दिनांक 18 फरवरी 2026 से प्रारम्भ होकर दिनाक 12 मार्च, 2026 को समाप्त होगी। अतः माध्यमिक शिक्षा परिषद् द्वारा सचालित की जाने वाली हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों में अनुचित साधन प्रयोग (नकल) की प्रवृत्ति/सम्भावनाओं पर अंकुश लगाने परीक्षाओं की शुचिता, पवित्रता, गुणवता, विश्वसनीयता तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के दृष्टिगत परीक्षा कार्यों के निरीक्षण एवं पर्यवेक्षण हेतु कार्यालय ज्ञाप संख्या 129/15-7-2026 दिनांक 29-01-2026 निर्गत किया गया है।

    2- इस सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक, माध्यमिक के पत्र संख्या मा०शि० प०/केंद्र निर्धारण/डी० ई0/4282 दिनांक 10.02.2026 द्वारा उपलब्ध कराये गए संशोधन के प्रसताव पर सम्यक विचारोपरांत अपरिहार्य परिस्थितियों के दृष्टिगत उक्त कार्यालय ज्ञाप दिनांक 29-01-2026 के क्रम में निदेशालय स्तर से नामित अधिकारियों के सम्बन्ध में एत‌द्वारा निम्न तालिकाओं के अनुसार संशोधन किया जाता है।



    नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

    नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

    आदेश के पांच साल बाद भी प्रदेश भी में शुरू नहीं हुई शिक्षक भर्ती

    शीर्ष अदालत के पहले के आदेश पर आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दी थी सहमति 

    पूर्व में उच्चतम न्यायालय ने अवसर, वेटेज और आयु में छूट देने के लिए कहा था


    प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सिविल अपील राम शरण मौर्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी में शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए नई शिक्षक भर्ती शुरू करने का अनुरोध किया है।


    शिक्षामित्रों का कहना है कि शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व आदेश में अगली शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को अवसर, वेटेज (भारांक) तथा आयु/पात्रता में उपयुक्त छूट देने की बात कही थी, जिस पर राज्य सरकार ने भी सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, आदेश के बाद पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नई शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है। 
    प्रार्थना में यह भी उल्लेख है कि राज्य सरकार ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। साथ ही 68500 शिक्षक भर्ती से संबंधित 27,713 रिक्त पदों को नई विज्ञप्ति जारी कर भरने के निर्देशों का भी अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। 

    इस पर याचिकाकर्ताओं ने शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कराने और पूर्व निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है। उधर इस मामले से जुड़े लोग इस मिसलेनियस एप्लीकेशन (एमए) को आगामी सुनवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 

    यह आवेदन भविष्य की भर्ती नीति और प्रक्रियात्मक दिशा को प्रभावित कर सकता है। 69000 शिक्षक भर्ती पहले से ही व्यापक न्यायिक विमर्श का विषय रही है और संबंधित पक्षकार लंबित निर्देशों के अनुपालन पर विशेष जोर दे रहे हैं। शिक्षामित्रों के प्रार्थना पत्र की सुनवाई भी 69000 आरक्षण विवाद के साथ की जाएगी।

    Wednesday, February 18, 2026

    बेसिक शिक्षकों के 46,944 पदों पर नहीं होंगी भर्तियां, यूपी सरकार का विधान सभा में दो टूक जवाब

    बेसिक शिक्षकों के 46,944 पदों पर नहीं होंगी भर्तियां, यूपी सरकार का विधान सभा में दो टूक जवाब 


    लखनऊ: बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधान सभा में बताया कि परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती के 46,944 पद रिक्त हैं। फिलहाल भर्ती के लिए सरकार की कोई योजना नहीं है।

    चित्रकूट से सपा विधायक अनिल प्रधान द्वारा पूछे गए प्रश्न के जवाब में मंत्री ने बताया कि एक अप्रैल 2022 से आठ जनवरी 2026 तक 5,856 अभ्यर्थियों का चयन व नियुक्तियां सरकार ने की हैं। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक सीधी भर्ती के 46,944 पद वर्तमान में रिक्त हैं। 

    विधायक ने यह भी पूछा कि क्या सरकार शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण अभ्यर्थियों के लिए नए पदों का सृजन कर भर्ती परीक्षा कराने पर विचार करेगी? इस पर सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं' दिया गया।

     मंत्री ने यह भी कहा कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक व शिक्षामित्र कार्यरत हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री ने फिर दोहराया कि एक भी परिषदीय विद्यालय बंद नहीं किया गया है।  शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को सरकार पांच-पांच लाख रुपये रुपये की सीमा तक कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करा रही है। मानदेय बढ़ाने पर विचार हो रहा है। उधर टीईटी मामले में सरकार द्वारा पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने की जानकारी भी दी गई। 

    वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में

    वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षाओं में अनुचित साधन प्रयोग करते हुए पकड़े गये परीक्षार्थियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं कराये जाने के सम्बन्ध में।

    समायोजन 3.0 पर यथास्थित बनाए रखने का हाईकोर्ट का आदेश, जिला स्तरीय समिति एक माह में करे निर्णय, देखें कोर्ट ऑर्डर


    समायोजन 3.0 पर यथास्थित बनाए रखने का हाईकोर्ट का आदेश, जिला स्तरीय समिति एक माह में करे निर्णय

    🔴 कोर्ट ने दिए यह निर्देश

    तबादले सत्यापित एवं अद्यतन आंकड़ों पर आधारित हों।

    जिलास्तर पर स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षकों की संख्या और छात्र नामांकन का समेकित डेटा अनिवार्य रूप से देखा जाए।

    प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण हो।

    समायोजन को दंडात्मक या उत्पीडन के औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।

    प्रशासनिक आवश्यकता और छात्र हित सर्वोपरि रहे।

    शिक्षकों के समायोजन में अपनाई जाए पारदर्शी प्रक्रियाः हाईकोर्ट

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन और स्थानांतरण में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिलास्तरीय कमेटी शिक्षकों से प्रत्यावेदन लेकर विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से समायोजन की प्रकिया पूरी करे। तब तक विद्यालयों में यथास्थिति कायम रखी जाए। प्रदेश के कई जिलों के सैकड़ों शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने दिया है। याचिकाओं में शिक्षकों के समायोजन एवं तबादला संबंधी 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। 

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, नवीन शर्मा और अन्य वकीलों का कहना था कि समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया मनमाने तरीके से अपनाई जा रही है। नियमावली में दिए निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण हर जिले में अपने-अपने तरीके से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मध्य सत्र में समायोजन का औचित्य नहीं जबकि वर्तमान सत्र मार्च में समाप्त होने वाला है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विस्तृत निर्णय में कहा कि स्थानांतरण सेवा की एक सामान्य शर्त है और अदालतें आमतौर पर तबादला आदेशों में दखल नहीं देतीं। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि नीतिगत मामलों में अदालतें अपील प्राधिकरण की तरह कार्य नहीं कर सकतीं और न ही यह जांच सकती हैं कि कोई अन्य नीति अधिक उचित या बेहतर हो सकती थी। 

    कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य नीति की बुद्धिमत्ता का पुनर्मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि यह देखना है कि निर्णय प्रक्रिया कानून के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि कि यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की सत्यता और सत्यापन को लेकर अस्पष्टता है, जिससे शैक्षिक ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

    याचियों को प्रत्यावेदन देने का निर्देश

    अदालत ने कहा कि याचिकाओं में संस्थानवार स्वीकृत पद, कार्यरत संख्या और अधिशेष/कमी का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में व्यक्तिगत तथ्यों की जांच प्रशासनिक स्तर पर ही संभव है। इसलिए प्रत्येक याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के समक्ष पृथक एवं विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत करे। कोर्ट ने समिति को एक माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक माह तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने तक यथा स्थिति कायम रखी जाए। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का तत्काल सत्यापन एवं अद्यतन करने तथा संशोधित आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।



    छात्र-शिक्षक अनुपात के साथ UDISE पोर्टल को करें अपडेट : हाई कोर्ट

    पुनर्व्यवस्थापन आदेश को चुनौती देने वाले शिक्षकों को ताकालिक राहत, यथास्थिति का निर्देश

    जिलाधिकारी की कमेटी महीने भर में याचियों के प्रत्यावेदन पर नियमानुसार निर्णय ले

    17 फरवरी 2026
    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि संबंधित प्राधिकारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन (यूडीआइएसई अथवा यू-डायस) पोर्टल पर सही व प्रमाणित डेटा सत्यापित कर इसके अनुरूप ही सहायक अध्यापकों-प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति करें ताकि निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात बनाए रखा जा सके। कोर्ट ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी को याचियों के प्रत्यावेदन पर एक माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है और तब तक इन अध्यापकों की वर्तमान स्थिति कायम रखने को कहा है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने यह आदेश देते हुए 157 उन शिक्षकों को तात्कालिक तौर पर राहत दी है जिन्होंने राज्य सरकार के 14 नवंबर 2025 के आदेश के क्रम में अपने पुनर्व्यवस्थापन को चुनौती दी थी।

    कोर्ट ने कहा, याचीगण ने आवश्यक तथ्यात्मक जानकारी नहीं दी है, जिससे कार्रवाई की वैधता की जांच करना मुश्किल हो रहा है। याचीगण को संस्थान-वार विवरण देना होगा, जिसमें स्वीकृत संख्या, कार्यरत संख्या और शिक्षकों की अधिकता या कमी की जानकारी हो। प्रशासनिक कार्रवाई में तथ्यात्मक त्रुटियों के कारण प्रणालीगत असंतुलन हो सकता है और इससे छात्रों का हित प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में निष्पक्षता और तर्कसंगतता सुनिश्चित करने के लिए सीमित जांच करनी होगी। कोर्ट ने कहा, पुनर्वितरण मामलों में हस्तक्षेप करने के लिए सावधानी बरतनी चाहिए, लेकिन कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है। यदि कार्रवाई मनमानी है, गैर मौजूद या असत्यापित डेटा पर आधारित है तथा इससे सार्वजनिक हित गंभीर रूप से प्रभावित हो सकता है तो संवैधानिक अदालतें शवितहीन नहीं हैं। अदालत ने पाया कि नवंबर 2025 के सरकारी आदेश के अनुसार पुनर्वितरण के लिए निर्धारित मानदंडों का पालन किया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं हो पा रहा है।

    याचीगण के अधिवक्ता ने कहा कि पूर्व में आदेश था कि जिलाधिकारी हर साल जुलाई से पहले शिक्षकों की स्वीकृत संख्या की समीक्षा कर आवश्यकता अनुसार पुनर्वितरण करते थे, लेकिन नवंबर का आदेश 23 मई 2025 के आदेश से अलग है। याचीगण का कहना था कि बच्चों के निश्शुल्क और अनिवार्य शिक्षा के अधिकार अधिनियम, 2009 के प्रविधानों की अनदेखी की जा रही है। अदालत ने पाया कि प्रत्येक संस्थान में कम से कम दो शिक्षकों की आवश्यकता है। छात्र संख्या के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों की आवश्यकता है। जूनियर बेसिक स्कूल में 150 तथा सीनियर बेसिक स्कूल में 100 से अधिक छात्रों के लिए एक प्रधानाध्यापक की आवश्यकता है। अरुण प्रताप सिंह व 37 अन्य, संगीता सिंह पटेल और 42 अन्य, अभिषेक कुमार त्रिपाठी व 11 अन्य, स्वदेश कुमार व 57 अन्य तथा अमन राज व पांच अन्य की याचिकाओं को एक साथ सुना गया था। 








    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी
     
    3 फरवरी 2026
    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन में याची शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 13 जनवरी को लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है।

    अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कुल 130 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सोमवार को पक्षकारों ने जवाबी शपथ पत्र व प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने अंतिम सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय कर तब तक के लिए अंतरिम रोक बढ़ा दी।



    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया आदेश

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही। पर लगी रोक को 19 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी तक कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है।

    याची शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित करते हुए अंतरिम आदेश दिया है कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 के संबंध में आगे की कार्यवाही नहीं करेंगे। 

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का लाभ इस याचिका से संबद्ध अन्य याचिकाओं के याची शिक्षकों को भी मिलेगा। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।

    याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण संबंधी शासनादेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने नियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जा सकता। मामले में राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। 



    मध्य सत्र में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 

    कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।


    अमेठी, बाराबंकी और श्रावस्ती में भी समायोजन 3.0 पर लगी रोक, पुरानी  याचिकाओं के साथ कनेक्ट करते हुए 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई, देखें कोर्ट ऑर्डर 





    शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक

    लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

    कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

    कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। 



    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश

    यूपी बोर्ड के 8033 परीक्षा केंद्रों पर नकल रोकने के विशेष इंतजाम

    आज से यूपी बोर्ड परीक्षाएं शुरू, 15 दिन में पूरी होंगी परीक्षाएं, परीक्षार्थियों को हर पेज पर लिखना होगा अनुक्रमांक

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक चलेंगी। इस बार परीक्षा अवधि लगभग 15 कार्य-दिवस में पूर्ण कराने की तैयारी है। प्रदेश भर में कुल 8033 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इस बार 53,37,778 परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। नकल रोकने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

    परीक्षार्थियों को मुख्य व अनुपूरक (सप्लीमेंट्री) उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर अपना अनुक्रमांक लिखना अनिवार्य का होगा डिजचा की जाएगी। मुख्य पृष्ठ पर केवल यूनिक (केंद्र) कोड की मुहर लगेगी, जबकि केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर व पदनाम की मुहर नहीं लगाई जाएगी। इस बार मुख्य विषयों के प्रश्नपत्रों के अतिरिक्त सेट की भी व्यवस्था की गई है।

    स्ट्रैटिक मजिस्ट्रेट व केंद्र व्यवस्थापक को छोड़कर कोई भी कर्मचारी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं रख सकेगा। स्ट्रांग रूम में मोबाइल पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। यदि किसी कक्ष निरीक्षक, केंद्र व्यवस्थापक या शिक्षक का पाल्य उसी केंद्र पर परीक्षा दे रहा है तो उसे परीक्षा कार्य से अलग कर वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। प्रत्येक केंद्र पर एक आंतरिक और एक बाह्य दो केंद्र व्यवस्थापक तैनात रहेंगे। इस वर्ष यूपी बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 परीक्षार्थी शामिल होंगे। प्रदेश के 75 जिलों में कुल 8033 विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाया


    परिषद ने जारी किया टोल-फ्री नंबर

    छात्रों एवं अभिभावकों की समस्याओं के समाधान के लिए परिषद ने टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 18001805310 और 18001805312 जारी किए हैं। परीक्षार्थी किसी भी प्रकार की जानकारी या समस्या के लिए इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं।



    आधा घंटा तक विलंब से पहुंचे परीक्षार्थी को अनुमति दे सकेंगे केंद्र व्यवस्थापक, सचिव ने केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए जारी किए निर्देश 

    प्रयागराजः यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए केंद्र व्यवस्थापकों एवं कक्ष निरीक्षकों के लिए यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा है कि किसी प्रश्नपत्र के लिए अधिकतम आधा घंटा तक देर से पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को केंद्र व्यवस्थापक परीक्षा में बैठने की अनुमति दे सकेंगे। इससे ज्यादा देर वालों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा उत्तर पुस्तिका पर मुद्रित क्रमांक को उपस्थिति पत्रक पर परीक्षार्थियों द्वारा अंकित किया जाना अनिवार्य है। इसे कक्ष निरीक्षक सुनिश्चित कराएंगे।

    परीक्षा 18 फरवरी से आरंभ होकर 12 मार्च तक चलेगी। प्रश्न पत्रों की परीक्षा अवधि 3.15 घंटे निर्धारित है, जिसमें से शुरू के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ्ने के लिए है। दिव्यांग तथा दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए निर्धारित अवधि के अतिरिक्त 20 मिनट प्रति घंटे के हिसाब से अतिरिक्त देय होगा। इसके अलावा प्रत्येक परीक्षा केंद्रों में कम से कम 50 प्रतिशत स्टाफ बाह्य विद्यालयों से नियुक्त किए जाएंगे।

     स्ववित्तपोषित विद्यालयों में यथासंभव राजकीय एवं अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों के 50 प्रतिशत स्टाफ नियुक्त किए जाएंगे। रिजर्व सेट से संबंधित अलमारी लाक करने और आकस्मिक स्थिति में उसे खोलने की कार्यवाही माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव से निर्देश प्राप्त करने के बाद ही जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कराई जाएगी, उस समय केंद्र व्यवस्थापक, बाह्य केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट एवं संबंधित थानाध्यक्ष अथवा नामित इंस्पेक्टर की उपस्थिति अनिवार्य रहेगी। इसके अलावा कक्ष निरीक्षकों का यह व्यक्तिगत उत्तरदायित्व होगा कि हर परीक्षार्थी से उत्तरपुस्तिका के प्रत्येक पृष्ठ पर उनका अनुक्रमांक एवं उत्तरपुस्तिका क्रमांक अनिवार्य रूप से लिखवाएं।

    प्रत्येक कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक अनिवार्य

    हर परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति अनिवार्य होगी। कक्ष निरीक्षकों के पास उनका परिचय पत्र, आधार कार्ड रहना केंद्र व्यवस्थापक सुनिश्चित कराएंगे। सचल दल में महिला निरीक्षणकर्ता का होना अनिवार्य है। बालिका परीक्षार्थी वाले केंद्र पर सचल/निरीक्षण दल के पुरुष सदस्य तलाशी नहीं ले सकेंगे। सभी कक्ष निरीक्षकों/कर्मचारियों के लिए फोटो युक्त परिचय पत्र अनिवार्य है। जीआइसी व एडेड विद्यालयों के शिक्षकों को न्यूनतम 20 पाली में कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रहेगा।


    यूपी बोर्ड: 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य, सरकारी शिक्षकों को हाईस्कूल, इंटर परीक्षा में करनी होगी ड्यूटी

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की 18 फरवरी से शुरू हो रही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के दौरान राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के सभी शिक्षकों को कम से कम 20 पाली का कक्ष निरीक्षण अनिवार्य रूप से करना होगा। परीक्षा केंद्र बने वित्तविहीन विद्यालयों में राजकीय और एडेड कॉलेज के 50 प्रतिशत स्टाफ की नियुक्ति के निर्देश दिए गए हैं।

    यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि बोर्ड परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने तथा परीक्षा के सफल संचालन के लिए जिनकी केंद्र व्यवस्थापक तथा कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगाई गई है उनके स्तर से लापरवाही या जानबूझकर अनुपस्थित होने पर अनुशासनात्मक एवं विधिक कार्रवाई की जाए। प्रत्येक परीक्षा कक्ष में दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे।

    स्ट्रांग रूम में रखनी होगी लोहे की चार आलमारी : परीक्षा केंद्र पर स्ट्रांग रूम में पालीवार प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव, अवशेष प्रश्नपत्रों तथा बंडल स्लिप को रखने के लिए कुल चार लोहे की डबल लॉकयुक्त आलमारी की व्यवस्था की जाएगी। दोनों पालियों के मुख्य प्रश्नपत्र सेट के सुरक्षित रखरखाव के लिए दो आलमारी रहेगी। तीसरी आलमारी में बचे हुए प्रश्नपत्र रखे जाएंगे जबकि चौथी आलमारी में रिजर्व सेट के प्रश्नपत्रों के पैकेट रखने होंगे।



    परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व पोर्टल पर जारी किए जाएंगे निरीक्षकों के परिचय पत्र, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी किए निर्देश

    सचिव भगवती सिंह की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा गया पत्र

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु, पारदर्शी और नकलविहीन संचालन के लिए कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    सचिव ने निर्देश दिया है कि । कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाते ए समय उनके संपूर्ण विवरण की न भलीभांति जांच की जाए। किसी विद्यालय से संबंधित परीक्षा केंद्र रे पर कितने कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता होगी, इसका पूरा 5 विवरण डीआईओएस स्तर से ही निर्गत किया जाएगा। कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर परीक्षा प्रारंभ होने से एक सप्ताह पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा डाउनलोड किए जाएंगे।

    परिचय पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कक्ष निरीक्षक को आवंटित परीक्षा केंद्र का विवरण अंकित कर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को हस्तगत कराया जाएगा। कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापकों को परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से तीन दिवस पूर्व 15 फरवरी को अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर केंद्र व्यवस्थापक को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

    डीआईओएस द्वारा जनपद में बनाए गए सभी परीक्षा केंद्रों के लिए केंद्रवार कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार कर अपने कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिनमें से एक कक्ष निरीक्षक का बाह्य विद्यालय से होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पांच कक्षों पर एक मोचक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापक माध्यमिक शिक्षा परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार न किए गए हों। परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिन परीक्षा केंद्रों पर बालिका परीक्षार्थी परीक्षा दे रही हों, वहां महिला कक्ष निरीक्षकों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाएगी।

    परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में 40 परीक्षार्थियों पर दो तथा 41 से 60 परीक्षार्थियों पर तीन कक्ष निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वकेंद्र पर छात्राओं के परीक्षा कक्षों में उसी विद्यालय के अध्यापकों की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।




    परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला निरीक्षक की लगेगी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा की 30 दिन तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी के 120 केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए परिषद के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला कक्ष की ड्यूटी लगाना जरूरी है। तलाशी की भी उन्हीं को अनुमति होगी।

    परिषद की ओर से जारी आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं। परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्ष निरीक्षकों को भी मोबाइल फोन, कैलकुलेटर व अन्य इलेक्ट्रिॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष व अन्य जगहों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरे में आवाज की भी रिकॉर्डिंग होनी जरूरी है। साथ ही इसका डाटा परीक्षा खत्म होने के 30 दिनों तक रखना अनिवार्य है।

    परिषद के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अनुक्रमांक अनिवार्य रूप से लिखेंगे। कक्ष बोर्ड पर किसी स्तर से कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी।

    परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उस पर लगने वाली फोटो का सही तरीके से मिलान जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होगी। ऐसा पाए जाने पर विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।




    यूपी बोर्ड की परीक्षा में जूते मोजे उतरवाने पर प्रतिबंध, रोज कैमरों और वायस रिकॉर्डर की होगी जांच, एक माह तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    लखनऊ । राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों के जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा लेने पर रोक लगा दी है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ही परीक्षार्थियों की पूरी जांच होगी। केंद्रों पर लगे कैमरों और वायस रिकॉर्ड की जांच होगी। खराब होने पर सूचना तुरंत डीआईओएस के साथ कंट्रोल रूम को देनी होगी और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है। इसमें कहा है कि किसी भी छात्रा की तलाशी पुरुष शिक्षक नहीं करेंगे। केंद्र पर जिस विषय का पेपर है, उसके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। परीक्षार्थियों से अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे। 

    बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के हर पेज पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना होगा। केंद्र पर फोटोग्राफी और प्रेस, मीडिया को ब्रीफिंग नहीं होगी। सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर के बिना किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं होगी। कैमरे, वायस रिकार्डर के डीवीआर की रिकार्डिंग 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट रोज सेक्टर, स्टैटिक मजिस्ट्रेट डीएम, डीआईओएस को देंगे। केंद्रों पर प्रवेश पत्र के साथ कक्ष निरीक्षकों, ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के परिचय पत्र की भी जांच होगी। निरीक्षकों के मोबाइल और गैजेट बाहर जमा कराए जाएंगे।



    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश






    यूपी बोर्ड के अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ करेगी निगरानी, नकल में संलिप्त बाहरी व्यक्तियों पर अंकुश के लिए एलआइयू रहेगी सक्रिय

    थानाध्यक्षों को निर्देश, केंद्र व्यवस्थापक व निरीक्षक माने जाएंगे लोकसेवक


     प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा नकलविहीन और शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, डीएम, पुलिस आयुक्त/एसएससी व एसपी को शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि नकल में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए एलआइयू व अन्य स्त्रोतों से सूचना एकत्र कर परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर आवश्यकतानुसार एसटीएफ को तैनात किया जाए।

    परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों के बाहर पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी)/ जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व व्यवस्थापन कार्य करने वाले अध्यापकों व केंद्राध्यक्षों को लोक सेवक माना जाएगा। ऐसे में इन पर हमला आदि दुर्घटनाओं के मामले में संज्ञेय अपराध के अंतर्गत एफआइआर दर्ज की जाएगी।

     परीक्षा केंद्र से सामूहिक नकल अथवा परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिलने/संदेह होने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आजीवन कारावास तक तथा एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। जनपद को जोन सेक्टर में बांटकर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। यह दायित्व एसडीएम/नगर मजिस्ट्रेट/कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया जाएगा। 

    निरीक्षण व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि प्रत्येक सेक्टर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 10 से अधिक न हो। यथासंभव प्रधानाचार्य पद के समानांतर या उच्च पदधारक कार्मिक अधिकारी को ही स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नियुक्त किए जाएंगे। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर कराई जाएगी।



    बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव हेतु परीक्षा केन्द्रों पर स्ट्रांग रूम की स्थापना व उसमें रखी डबल लॉक आलमारी की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों के वितरण के सम्बन्ध में।


    RTE के पहले चरण में आए 2.61 लाख आवेदन, लखनऊ 18107 के साथ टॉप पर, आज खुलेगी लाटरी, इसके बाद होंगे प्रवेश

    RTE के पहले चरण में आए 2.61 लाख आवेदन, लखनऊ 18107 के साथ टॉप पर, आज खुलेगी लाटरी, इसके बाद होंगे प्रवेश

    18 फरवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन हुए। दो से 16 फरवरी तक हुए आवेदन में 2.61 लाख से ज्यादा आवेदन हुए हैं। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।

    प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई की 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो से 16 फरवरी तक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन हुए हैं। पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने पर कुल 261501 आवेदन हुए हैं। साथ ही बीएसए के द्वारा इनका सत्यापन भी कर दिया गया है। अब 18 फरवरी को लॉटरी करके प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

    पहले चरण में लखनऊ 18107 आवेदन के साथ टॉप पर है। इसके अलावा वाराणसी में 17476, आगरा में 13627, कानपुर नगर में 13546, बुलंदशहर में 10831, मेरठ में 9145, मुरादाबाद में 9028, अलीगढ़ में 8567, प्रयागराज में 7173 व हाथरस में 7074 आवेदन हुए हैं। जबकि सबसे कम श्रावस्ती में 125, चित्रकूट में 211, हमीरपुर में 220, बस्ती में 369, कानपुर देहात में 485, महोबा में 486 व कन्नौज में 495 आवेदन ही हुए हैं। समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस साल रिकॉर्ड आवेदन हुए हैं।




    UP RTE : पहले चरण में ही रिकॉर्ड 2.25 लाख आवेदन

    पिछले साल से ज्यादा प्रवेश का लक्ष्य, लखनऊ व बनारस में 15 हजार से ज्यादा आवेदन

    14 फरवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन होते दिख रहे हैं। दो फरवरी से शुरू हुए आवेदन में अब तक दो लाख से ज्यादा आवेदन हो चुके हैं जबकि आवेदन का आखिरी दिन 16 फरवरी है। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।


    प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई के 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो फरवरी से सत्र 2026-27 के लिए आवेदन शुरू हुए हैं। शनिवार देर शाम तक 2.25 लाख से अधिक आवेदन हो चुके हैं। जबकि अभी दो चरण और बाकी हैं। इसे लेकर बेसिक शिक्षा विभाग भी उत्साहित है। इसके साथ ही प्रतिदिन आने वाले आवेदनों का बीएसए द्वारा सत्यापन भी उसी दिन किया जा रहा है।

    इसमें मिलने वाली कमियों को दुरुस्त भी कराया जा रहा है। ताकि निर्धारित समय के अनुसार 18 फरवरी को लाटरी जारी की जा सके। अब तक के आंकड़ों के अनुसार 15899 आवेदन के साथ लखनऊ टॉप पर है। जबकि इसके साथ ही 15494 आवेदन वाराणसी, 11980 आगरा, 11418 कानपुर नगर, 9393 बुलंदशहर, 7759 मुरादाबाद, 7560 अलीगढ़, 7542 मेरठ, 6275 हाथरस व 5883 आवेदन प्रयागराज में हुए हैं।

    समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि अभी आखिर के दो दिनों में आवेदन की संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस साल प्रवेश आवेदन शुरू होने से पहले जिलों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है ओर लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। इसका लाभआर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मिलेगा। हम इस बार रिकॉर्ड आवेदन के लिए भी पूरा प्रयास करेंगे।


    यहां हुए हैं कम आवेदन

    श्रावस्ती 110, चित्रकूट 159, हमीरपुर 175, बस्ती 297, कानपुर देहात 384, कन्नौज 404, महोबा 405, औरैया 462, संतकबीरनगर 476, बहराइच 505, बलरामपुर 582, देवरिया 619, प्रतापगढ़ 690, गोंडा 739

    विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर केंद्र से जवाब तलब, अदालत ने कहा, इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी

    विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्यता पर केंद्र से जवाब तलब, अदालत ने कहा, इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी


    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा है कि क्या कक्षा 9 से 12 तक पढ़ाने वाले विशेष शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करना अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर नियमों और दिशानिर्देशों में स्पष्टता जरूरी है।


    जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी, न्याय मित्र ऋषि मल्होत्रा और अन्य वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलें सुनने के बाद केंद्र से जवाब मांगा। अदालत ने तीन सवालों पर स्पष्टीकरण चाहा है, क्या माध्यमिक स्तर के विशेष शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य है, 10 जून 2022 के शिक्षा मंत्रालय के पत्र में बताई गई भर्ती प्रक्रिया सभी स्तरों पर लागू होती है या नहीं, और क्या 2010 के बाद किसी राज्य या केंद्र ने माध्यमिक स्तर के लिए टीईटी आयोजित की है।


    केंद्र ने कहा-टीईटी सभी शिक्षकों के लिए जरूरी

    सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि टीईटी सभी शिक्षकों के लिए जरूरी है और विशेष शिक्षकों के लिए भारतीय पुनर्वास परिषद का प्रमाणपत्र भी अनिवार्य है। इस पर जस्टिस दत्ता ने 2021 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि टीईटी की शर्त स्पष्ट रूप से कक्षा 1 से 5 और 6 से 8 तक के लिए है, 9 से 12 के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि ऐसी अनिवार्यता केवल प्रशासनिक पत्र से नहीं, बल्कि विधि या नियमों के तहत तय होनी चाहिए। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को 21 जुलाई 2022 के आदेश के अनुपालन में संविदा शिक्षकों के वेतन और सेवा शर्तों पर एक महीने में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश भी दिया।

    Tuesday, February 17, 2026

    वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विषयों एवं जेण्डर कोड की त्रुटियों के निवारण के संबंध में

    विषय और जेंडर कोड संबंधी त्रुटियों को सुधारने के निर्देश, यूपी बोर्ड ने सभी डीआईओएस को जारी किए निर्देश

    साक्ष्यों के आधार पर संशोधन कर परीक्षार्थियों को परीक्षा में किया जाए शामिल

    प्रयागराज । माध्यमिक शिक्षा परिषद की 18 फरवरी से शुरू हो रही हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले - परीक्षार्थियों के विषय और जेंडर कोड संबंधी त्रुटियों में सुधार के लिए परिषद ने एक और अवसर दिया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश जारी किए हैं। कहा कि छात्र हित को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जेंडर कोड में संशोधन एवं प्रश्नपत्रों की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए परीक्षार्थियों के विषय भी संशोधित कर उन्हें परीक्षा में सम्मिलित किया जाए।

    परिषद ने स्पष्ट किया है कि सभी संशोधनों को हर हाल में पूर्ण कर क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिवों से 20 मार्च तक प्राप्त कर लिया जाए। ऐसा न होने पर त्रुटिपूर्ण डाटा फीडिंग के लिए संबंधित विद्यालयों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।

    हालांकि, इससे पहले भी परिषद की वेबसाइट पर प्रधानाचार्यों द्वारा अपलोड किए गए शैक्षिक विवरणों में त्रुटियों को दूर करने के लिए ऑनलाइन संशोधन के अवसर दिए जा चुके हैं। इसके बाद भी जो त्रुटियां शेष रह गई हैं, उनमें संशोधन के लिए प्रधानाचार्य के माध्यम से ऑफलाइन आवेदन लेकर क्षेत्रीय कार्यालय की संस्तुति पर संशोधन की सुविधा प्रदान की गई है।




    वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विषयों एवं जेण्डर कोड की त्रुटियों के निवारण के संबंध में।

    वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षणेत्तर कार्मिकों के परिचय पत्र निर्गत किये जाने के सम्बंध में

    यूपी बोर्ड परीक्षा में पहली बार परीक्षा केंद्र के शिक्षणेत्तर कर्मियों को भी जारी होगा QR कोड युक्त परिचय पत्र

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा में पहली बार परीक्षा केंद्र के शिक्षणेत्तर कर्मियों को परिचय पत्र जारी करने का आदेश दिया गया है। अभी तक केवल कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र जारी किए जाते थे। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि नकल विहीन परीक्षा कराने के उद्देश्य से ऐसा कदम उठाया गया है। परिषद ने कक्ष निरीक्षकों को क्यूआर कोड युक्त मुद्रित परिचय पत्र पोर्टल पर अपलोड कर निर्गत किए जाने के संबंध में निर्देश सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पहले ही प्रेषित कर चुकी है। 


    वर्ष 2026 की यूपी बोर्ड परीक्षा में परीक्षा केन्द्रों पर विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करने वाले शिक्षणेत्तर कार्मिकों के परिचय पत्र निर्गत किये जाने के सम्बंध में

    आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार

    आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार


    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। हाल ही में इनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हुई है। 


    एक अप्रैल से पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा निशुल्क उपलब्ध होगी। सीएम ने कहा रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया। युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।


    शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकारः उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। शिक्षक चाहे बेसिक के हों, माध्यमिक या उच्च शिक्षा केइसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, रसोइयों को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। एक अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा।

    पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वालों का 28 फरवरी को बंद हो जाएगा एनपीएस खाता, यूपी सरकार का विधान परिषद में जवाब

    पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वालों का 28 फरवरी को बंद हो जाएगा एनपीएस खाता, यूपी सरकार का विधान परिषद में जवाब 

    28 मार्च 2005 से पहले विज्ञापित पदों पर चयनित कार्मिकों को दी गई सुविधा

    विधान परिषद में प्रश्न प्रहर में प्रदेश सरकार का जवाब


    लखनऊ। प्रदेश में पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने वाले कार्मिकों का 28 फरवरी को एनपीएस खाता बंद हो जाएगा। यह विकल्प चुनने का अधिकार उन कार्मिकों को दिया गया है, जिनकी नियुक्ति का विज्ञापन 28 मार्च 2005 के पूर्व हो चुका था। यह जानकारी विधान परिषद में प्रश्न प्रहर में सपा एमएलसी डॉ. मान सिंह यादव के प्रश्न के जवाब में संसदीय कार्य राज्यमंत्री जसवंत सैनी ने दी।


    उन्होंने यह भी बताया कि ऐसे कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना के दायरे में लाने संबंधी आदेश जारी करने की अंतिम तिथि 31 मार्च 2025 और एनपीएस खाता बंद करने की तिथि 30 जून 2025 निर्धारित की गई थी। कार्मिकों की ओर से या तो विलंब से विकल्प प्रस्तुत किए गए या नियुक्ति प्राधिकारियों ने समय से आदेश जारी नहीं किए। इसलिए अब एनपीएस खाता बंद करने की तिथि 28 फरवरी निर्धारित की गई है। उसके बाद ही एनपीएस में जमा राशि को जीपीएफ खाते में जमा कराया जा सकेगा।


     एनपीएस वाले शिक्षकों का राज्यांश समय से जमा कराएं

    लखनऊ। विधान परिषद में एनपीएस के दायरे में आने वाले शिक्षकों का मुद्दा उठाते हुए सदस्य ध्रुव कुमार पाठक ने कहा कि ये व्यवस्था अधिकारियों की मनमानी का शिकार हो गई है। एनपीएस में शिक्षक का राज्यांश 10 और 14 फीसदी का अंशदान जमा करने की व्यवस्था है। इन दोनों कटौतियों का अंशदान एनएसडीएल में जमा करने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि राज्यांश देरी से जमा किया जाता है। ध्रुव त्रिपाठी ने ये भी कहा कि पुरानी पेंशन के दायरे में आने वाले हजारों शिक्षकों की एनपीएस धनराशि जीपीएस खातों में ट्रांसफर नहीं की गई है। एनपीएस सेवा के अंतर्गत रिटायर होने वाले शिक्षकों को 800 से लेकर 1500 रुपये महीना पेंशन मिल रही है। इस पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा कि राज्यांश की धनराशि में कोई देरी नहीं की जा रही है। समय से धनराशि का आवंटन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्यांश की धनराशि प्रत्येक तिमाही जमा की जाती है। इस पर ध्रुव त्रिपाठी ने कहा कि 10 फीसदी और 14 फीसदी राज्यांश दोनों एक साथ शिक्षक के खाते में जाए ताकि ब्याज का नुकसान न हो। सभापति ने उनके सुझाव का परीक्षण कराने के निर्देश दिए। 

    यूपी बोर्ड परीक्षा में नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई, देखें जारी नए दिशा निर्देश

    यूपी बोर्ड परीक्षा में नियमों के उल्लंघन पर होगी कार्रवाई, देखें जारी नए दिशा निर्देश 


    प्रयागराज। बोर्ड परीक्षा में शुचिता, सुरक्षा, गोपनीयता और अनुशासन बनाए रखने के लिए प्रशासन की ओर से केंद्र व्यवस्थापकों, कक्ष निरीक्षकों और संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करने वाले पर कार्रवाई होगी। 

    जारी दिशा-निर्देश के अनुसार...

    प्रश्नपत्र निर्धारित समय से पहले किसी भी परिस्थिति में नहीं खोले जाएंगे और लिफाफा खोलते समय विषय, तिथि व पाली का मिलान अनिवार्य होगा।

    जेंडर त्रुटि होने पर अभिलेखीय साक्ष्य के आधार पर जिला विद्यालय निरीक्षक की अनुमति से संशोधन किया जाए।

    केंद्र व्यवस्थापक व स्टैटिक मजिस्ट्रेट को छोड़ कर कोई भी कर्मचारी /परीक्षार्थी मोबाइल या इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस नहीं रखेगा, स्ट्रांग रूम में भी मोबाइल पूर्णतः प्रतिबंधित है।

    किसी भी स्थिति में बालिका परीक्षार्थियों की तलाशी पुरुष कक्ष निरीक्षक /अधिकारी द्वारा नहीं ली जाएगी।

    बिना परिचय-पत्र कोई भी कार्मिक परीक्षा परिसर में नहीं रहेगा तथा सभी नियुक्त कार्मिक अपनी ड्यूटी स्थल पर ही उपस्थित रहेंगे।

    उत्तर पुस्तिका के मुख्य पृष्ठ पर केवल यूनिक (केंद्र) कोड की मुहर लगेगी, केंद्र व्यवस्थापक के हस्ताक्षर व पदनाम की मुहर नहीं लगाई जाएगी।

    परीक्षा शुरू होने से पूर्व घोषणा की जाए कि उत्तर पुस्तिका में रुपये रखना दंडनीय है, ऐसा मिलने पर छात्र तथा संबंधित कक्ष निरीक्षक दोनों पर कार्रवाई होगी।

    किसी भी परीक्षार्थी का प्रवेश-पत्र विद्यालय द्वारा नियम विरुद्ध नहीं रोका जाएगा।

    प्रत्येक केंद्र पर पर्याप्त फर्नीचर, प्रकाश, पेयजल तथा क्रियाशील शौचालय की व्यवस्था अनिवार्य होगी।