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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, September 23, 2021

    फतेहपुर : अवशेष वेतन भुगतान आदेश जारी, देखें सूची

    फतेहपुर : अवशेष वेतन भुगतान आदेश जारी, देखें सूची।

    हाथरस : DBT के सम्बन्ध में बीएसए के निर्देश जारी, आधार प्रमाणीकरण में छात्रों की सही पहचान न होने पर प्र0अ0 होंगे जिम्मेदार

    हाथरस : DBT के सम्बन्ध में बीएसए के निर्देश जारी, आधार प्रमाणीकरण में छात्रों की सही पहचान न होने पर प्र0अ0 होंगे जिम्मेदार


     

    अब 'बूढ़े' छात्र नहीं ले पाएंगे वजीफा, हाईस्कूल और कक्षा-8 पास करने के छह साल के अंदर लेना होगा प्रवेश, प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो नहीं भर पाएंगे छात्रवृत्ति के आवेदन, होगा ऑनलाइन मिलान

    अब 'बूढ़े' छात्र नहीं ले पाएंगे वजीफा, हाईस्कूल और कक्षा-8 न्यूनतम योग्यता वाले आईटीआई समेत सभी पाठ्यक्रमों के लिए प्रावधान, इन कक्षाएं को पास करने के छह साल के अंदर लेना होगा प्रवेश

    संशोधित नियमावली: प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो नहीं भर पाएंगे छात्रवृत्ति के आवेदन, होगा ऑनलाइन मिलान


    लखनऊ : प्रदेश सरकार ने चुनावी वर्ष में जहां एक ओर अधिक से अधिक गरीब छात्र-छात्रओं को छात्रवृत्ति देने के लिए नियम शिथिल किए हैं, वहीं छात्रवृत्ति का फर्जीवाड़ा रोकने के लिए भी कई ठोस कदम उठाए हैं। अब आय व जाति प्रमाण पत्र फर्जी हुआ तो छात्र आनलाइन आवेदन पत्र ही नहीं भर पाएंगे। समाज कल्याण विभाग एनआइसी के माध्यम से ऐसा साफ्टवेयर विकसित कर रहा है, जिसमें प्रमाणपत्रों का लाइव मिलान हो सकेगा। यदि प्रमाण पत्र फर्जी है तो उसका नंबर फीड करने पर आनलाइन आवेदन पत्र जमा ही नहीं होगा।

    समाज कल्याण विभाग ने अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति छात्र-छात्रओं की छात्रवृत्ति के लिए संशोधित नियमावली जारी कर दी। प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए स्नातक में 55 फीसद अंकों की बाध्यता खत्म कर दी गई है। यानी अब स्नातक में 50 फीसद अंक पाने वाले वे छात्र भी छात्रवृत्ति के आवेदन कर सकेंगे, जिन्होंने प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया है। अधिक से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति देने के लिए सरकार ने 31 जुलाई तक मान्यता पाने वाले संस्थानों के छात्रों को योजना में शामिल कर लिया है। अभी तक मान्यता व संबद्धता की 15 जुलाई अंतिम तिथि थी।

    आइटीआइ में दाखिला लेने वाले ऐसे छात्रों की शुल्क प्रतिपूर्ति नहीं की जाएगी, जिन्होंने कक्षा आठ या हाईस्कूल की परीक्षा छह साल पहले पास की है। सरकार ने प्रमुख सचिव समाज कल्याण की अध्यक्षता में गठित उस समिति को भी खत्म कर दिया है, जो अपने स्तर से कुछ विशेष मामलों में छात्रवृत्ति अनुमोदित कर देती थी। अब सरकार नियमावली के अनुसार ही सभी छात्रों को छात्रवृत्ति प्रदान करेगी। कोरोना काल में कक्षाएं आनलाइन चल रही हैं, ऐसे में संस्थानों की यह जिम्मेदारी होगी कि छात्रों की उपस्थिति आनलाइन पोर्टल पर दर्ज करें। बगैर परीक्षा के प्रोन्नति पाने वाले छात्रों को भी सरकार छात्रवृत्ति प्रदान करेगी।


    ● फर्जीवाड़ा रोकने के लिए प्रमाणपत्रों के आनलाइन मिलान की व्यवस्था

    ● अधिक से अधिक छात्रवृत्ति देने के लिए कई नियम हुए शिथिल


    आवेदन निरस्त होने पर डीएम के यहां कर सकेंगे अपील

    छात्रवृत्ति के आवेदन पत्र यदि किन्हीं कारणों से निरस्त होता है तो छात्र इसकी अपील जिलाधिकारी के यहां कर सकते हैं। जिलाधिकारी को इसके लिए 15 दिन का समय दिया गया है। इसमें जिलाधिकारी का निर्णय अंतिम होगा। प्रदेश सरकार ने सभी सरकारी व प्राइवेट विश्वविद्यालय व शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) व नेशनल बोर्ड आफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रे¨डग प्राप्त करने के लिए 2024 तक का समय प्रदान कर दिया है। इसके बाद यानी वर्ष 2025 में इसकी ग्रे¨डग न लेने वाले संस्थानों के छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिल पाएगी।

    ट्रांजेक्शन फेल होने पर भी मिल सकेगी छात्रवृत्ति

    दशमोत्तर छात्रवृत्ति में ट्रांजेक्शन फेल होने पर भी अब छात्र-छात्रओं को छात्रवृत्ति मिल सकेगी। केंद्र सरकार ने प्रदेश सरकार को दशमोत्तर छात्रवृत्ति वितरित करने के लिए एक अलग खाता स्टेट बैंक आफ इंडिया में खोलने के निर्देश दिए हैं। अभी तक कोषागार से छात्रवृत्ति वितरित होती थी, यदि किसी वजह से ट्रांजेक्शन फेल हो जाता है तो छात्रों को पैसा नहीं मिल पाता है। एसबीआइ में खाता खोलने से ट्रांजेक्शन फेल होने पर छात्रों के बैंक खाते में को दोबारा पैसा भेजा जा सकेगा। दशमोत्तर छात्रवृत्ति में पहले 40 फीसद पैसा प्रदेश सरकार खाते में भेजेगी। इसके बाद 60 फीसद धनराशि केंद्र सरकार आधार से लिंक खाते में भेजेगी।

    दिव्यांग छात्रों को मिलेगा 10 फीसद अतिरिक्त शैक्षणिक भत्ता

    छात्रवृत्ति के अलावा मिलने वाला शैक्षणिक भत्ता भी 10 फीसद अतिरिक्त प्रदान करेगी। यानी किसी पाठ्यक्रम का यदि शैक्षणिक भत्ता एक हजार रुपये है तो दिव्यांग छात्रों को 1100 रुपये दिए जाएंगे। वहीं, भारतीय पुनर्वास परिषद नई दिल्ली द्वारा मान्यता प्राप्त निजी क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों को अब डा. शकुंतला मिश्र राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय लखनऊ से सत्यापन कराना होगा। साथ ही दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष से भी पाठ्यक्रम को संस्तुत कराना होगा। इसके बगैर छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी।


    लखनऊ : अब 'बूढ़े छात्र न तो वजीफा और न ही शुल्क भरपाई का लाभ ले पाएंगे। हाईस्कूल और कक्षा-8 न्यूनतम योग्यता वाले आईटीआई समेत सभी पाठ्यक्रमों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। इसके तहत ये दोनों कक्षाएं पास करने वाले छात्रों को छह साल के भीतर आगे के इन पाठ्यक्रमों में निजी संस्थानों में दाखिला लेने पर ही छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई की सुविधा मिलेगी।


    26 सितंबर 2020 के अंक में इस समस्या को प्रमुखता से उठाया था। 40 साल से ज्यादा उम्र के लोगों के निजी आईटीआई में दाखिला लेकर वजीफे के साथ शुल्क प्रतिपूर्ति लेने के अनेक मामले प्रकाश में आए थे इस समस्या से निपटने के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति छात्रों के लिए जारी संशोधित नियमावली में विशेष प्रबंध किया गया है। आईटीआई या ऐसे पाठ्यक्रम, जिनमें प्रवेश की न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल या कक्षा-8 निर्धारित है, उनमें छात्रों को हाईस्कूल या कक्षा 8 पास करने के छह वर्ष के अंदर निजी क्षेत्र के संस्थानों से इस प्रकार के पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर ही शैक्षिक भत्ता और शुल्क प्रतिपूर्ति मिलेगी।

    दिव्यांग विद्यार्थियों मिलेगा 10 प्रतिशत ज्यादा शैक्षणिक भत्ता

    संशोधित नियमावली में अनुरक्षण भत्ते का नाम बदलकर शैक्षणिक भत्ता कर दिया गया है। दिव्यांग विद्यार्थियों को अन्य छात्रों से 10 प्रतिशत अतिरिक्त शैक्षणिक भत्ता देने का फैसला किया गया है।

    नौ प्रतिशत ब्याज के साथ लौटानी होगी राशि

    छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में गड़बड़ करने पर नियमावली में दोषियों के खिलाफ एफआईआर कराने का प्रावधान किया गया है। यह एफआईआर विद्यार्थी, प्रधानाचार्य और प्रबंधन के खिलाफ होगी। वहीं नी प्रतिशत ब्याज के साथ गलत ढंग से ली गई धनराशि लौटानी होगी। इतना ही नहीं, 75 फीसदी से कम उपस्थिति होने पर छात्र या संस्था को ली गई राशि वापस करनी होगी। इसी तरह से बिना कोर्स पूरा किए अगले वर्ष अध्ययन छोड़ने पर भी धनराशि वापस करनी होगी।

    50 फीसदी से कम विद्यार्थियों के नवीनीकरण पर देना होगा जवाब

    50 प्रतिशत से कम विद्यार्थियों के नवीनीकरण न कराने पर संस्थान को इसके वैध कारण बताने होंगे। इसमें बाढ़, सूखा, अनदेखी घटनाएं और कानून-व्यवस्था आदि शामिल हैं।

    एसएमएस भेजने की व्यवस्था भी

    विद्यार्थियों को आवेदन करने से लेकर खातों में राशि भेजने तक की जानकारी उनकेमोबाइल नंबर पर एमएमएस के जरिए दी जाएगी। इसके अलावा कक्षा 11 व 12 में शैक्षिणक सत्र 1 अप्रैल से 31 मार्च तक और उससे ऊपर की कक्षाओं में 1 जुलाई से 30 जून तक माना जाएगा।

    संशोधित समयसारिणी जारी

    शासन ने दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना से संबंधित पाठ्यक्रमों का मास्टर डाटाबेस तैयार करने, सत्यापन और लॉक करने के लिए संशोधित समयसारिणी भी जारी कर दी है।

    एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए तैयारी हुई तेज, 12 नवंबर को आएगा परिणाम

    एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए तैयारी हुई तेज,  12 नवंबर को आएगा परिणाम


    प्रयागराज:  एडेड जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों की कमी जल्द पूरी की जाएगी। शासन के निर्देश पर परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने भर्ती परीक्षा कराने के लिए तैयारियां तेज कर दी हैं। मंडल के जिला मुख्यालयों पर परीक्षा केंद्र बनाए जाने हैं। इसके लिए केंद्रों का निर्धारण किए जाने की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। प्रदेश में 1894 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा 17 अक्टूबर को करा के 12 नवंबर को फाइनल परिणाम घोषित किया जाना है।


    उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय उपाध्याय ने बताया कि जूनियर हाईस्कूल की भर्ती में प्रधानाध्यापक के 390 एवं सहायक अध्यापक के लिए 1504 पद हैं। इसके लिए करीब 3.34 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। परीक्षा दो पालियों में कराई जानी है। पहली पाली में सुबह 10 बजे से 12:30 बजे की परीक्षा में दोनों पदों के अभ्यर्थी शामिल होंगे, जबकि दूसरी पाली की विद्यालय प्रबंधन की परीक्षा में सिर्फ प्रधानाध्यापक पद के अभ्यर्थी शामिल होंगे। 


    परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने बताया कि परीक्षा कराने के तीन दिन बाद वेबसाइट पर उत्तरमाला जारी कर दी जाएगी। अभ्यर्थियों की ओर से आने वाली आपत्तियों का निस्तारण विषय विशेषज्ञों से कराने के बाद तय तिथि पर परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। 18 अप्रैल को होने वाली यह परीक्षा पंचायत चुनाव के कारण स्थगित कर दी गई थी।

    पॉलीटेक्निक संस्थानों में विभिन्न पदों की लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम जारी, ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि तक आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा पाठ्यक्रम

    पॉलीटेक्निक संस्थानों में विभिन्न पदों की लिखित परीक्षा का पाठ्यक्रम जारी, ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि तक आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध रहेगा पाठ्यक्रम

    प्रयागराज : प्रदेश के पॉलीटेक्निक संस्थानों में अब सीधी भर्ती नहीं होगी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से भर्ती के लिए जारी नए विज्ञापन में यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देनी होगी और परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में शामिल किया जाएगा।


    इसके लिए आयोग ने उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा (अध्यापन) सेवा परीक्षा, 2021 के लिए आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए विभिन्न पदों के लिए पाठ्यक्रम आयोग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है। अभ्यर्थी आयोग की वेबसाइट पर जाकर डाउनलोड सेलेबस के आप्शन पर क्लिक कर सामान्य अध्ययन सामान्य हिंदी तथा संबंधित शाखा / विषय का पाठ्यक्रम डाउनलोड कर सकते हैं। पाठ्यक्रम वेबसाइट पर 15 अक्तूबर तक उपलब्ध रहेगा। यह परीक्षा 12 दिसंबर को प्रस्तावित है।

    आयोग ने वर्ष 2017-18 में पॉलिटेक्निक संस्थानों में प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य के 1261 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसमें प्रधानाचार्य के 13 और प्रवक्ता 25 प्रकार के 1248 पद शामिल थे। ऑल इंडिया कौंसिल टेक्निकल एजूकेशन (एआईसीटीई) की ओर से नियमावली में संशोधन किए जाने कारण आयोग ने गत सात सितंबर को पुराना विज्ञापन निरस्त कर दिया था। पुराने विज्ञापन के तहत प्रधानाचार्य एवं प्रवक्ता के पदों पर सीधे इंटरव्यू के माध्यम से भर्ती होनी थी। 15 सितंबर को जारी विज्ञापन में यह स्पष्ट कर दिया गया कि इस बार अभ्यर्थियों को लिखित परीक्षा देनी होगी।

    यूपी : 13 जिलों में 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं 35% बच्चे

    यूपी : 13 जिलों में 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं 35% बच्चे


    प्रयागराज 
    प्रदेश के 13 जिलों में 35 फीसदी से अधिक बच्चे 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं। सूबे के 75 जिलों में से सबसे चिंताजनक स्थिति सिद्धार्थनगर की है जहां लगभग आधे या 53.5 प्रतिशत बच्चे कक्षा 8 पास करने के बाद 9वीं में नाम नहीं लिखवाते हैं।


    प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजी गई रिपोर्ट के अनुसार 2019-20 शैक्षणिक सत्र में 87 फीसदी बच्चों ने उच्च प्राथमिक स्तर की शिक्षा पूरी करने के बाद कक्षा 9 में प्रवेश लिया था। इनमें से 92.4 प्रतिशत लड़के और 81.5 फीसदी लड़कियां थीं। यानि हर पांच में से एक लड़की 8वीं के बाद पढ़ाई छोड़ देती है। हालांकि 2018-19 सत्र में 85.45 प्रतिशत बच्चों ने ही 8वीं पास करने के बाद कक्षा 9 में प्रवेश लिया था।

     
    इन 13 जिलों की स्थिति चिंताजनक

    सिद्धार्थनगर में ड्रॉपआउट रेट सबसे अधिक है। इसके अलावा सीतापुर में 56.2, हरदोई 56.9, श्रावस्ती 57.1, संभल 61.2, बदायूं 61.5, शाहजहांपुर 61.8, चित्रकूट 62.4, फर्रुखाबाद 63.2, पीलीभीत 63.6, बांदा 64.5, बहराइच 64.8 और बस्ती में 64.9 प्रतिशत बच्चे ही 8वीं पास करने के बाद 9 में दाखिला लेते हैं। बाकी बच्चे पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं।

    ● इन जिलों में 65 से भी कम बच्चे 9 में प्रवेश लेते हैं

    ● सिद्धार्थनगर, सीतापुर और हरदोई की रिपोर्ट सबसे खराब

    ● यूपी के 13 जिलों में दाखिले की स्थिति है चिंताजनक

    ● 8वीं के 87 प्रतिशत बच्चे ही 9 में लेते हैं प्रवेश


    विकास की दृष्टि से ये जिले पिछड़े हैं। यहां लोगों को लगता है कि पढ़ाई के बाद जब नौकरी नहीं मिलनी तो समय और रुपये क्यों खर्च करें। इस समस्या के समाधान को इन जिलों में अभियान चलाकर लोगों की आशंकाएं दूर करनी होंगी। - प्रो. एमपी दुबे, पूर्व कुलपति राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय

    विशिष्ट शिक्षकों का अनुपात रखना व्यावहारिक नहीं, नियुक्ति वाली याचिका पर शीर्ष अदालत में आदेश सुरक्षित

    विशिष्ट शिक्षकों का अनुपात रखना व्यावहारिक नहीं, नियुक्ति वाली याचिका पर शीर्ष अदालत में आदेश सुरक्षित


    ■ सुनवाई

    ● केंद्र ने कहा कि उन स्कूलों में ऐसे छात्रों की कोई निश्चित संख्या नहीं होती हैं

    ● विशिष्ट शिक्षकों की नियुक्ति वाली याचिका पर शीर्ष अदालत में आदेश सुरक्षित


    नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने बुधवार को उच्चतम न्यायालय से कहा कि सामान्य स्कूलों में विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए विशिष्ट शिक्षकों के शिक्षक-छात्र अनुपात को निर्धारित करना ‘व्यावहारिक नहीं’ है। केंद्र ने कहा कि उन स्कूलों में ऐसे छात्रों की कोई निश्चित संख्या नहीं होती हैं।

    न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ को केंद्र सरकार ने बताया कि नीति अधिक से अधिक सामान्य शिक्षकों को प्रशिक्षित करने की कोशिश करने की है ताकि वे विशेष प्रकृत्ति वाले बच्चों की जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हों। केंद्र ने कहा कि यह काम ‘सक्रिय पैमाने’ पर किया जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) माधवी दीवान ने कहा कि सामान्य स्कूल और विशेष स्कूल हैं जो विशेष जरूरतों वाले बच्चों की विशिष्ट जरूरतों को पूरा करते हैं।

    Wednesday, September 22, 2021

    आरटीई के तहत दाखिले से निजी स्कूलों का साफ इनकार : पहले शुल्क प्रतिपूर्ति फिर प्रवेश

    आरटीई के तहत दाखिले से निजी स्कूलों का साफ इनकार : पहले शुल्क प्रतिपूर्ति फिर प्रवेश

     
    ■ स्कूलों का पक्ष: शुल्क प्रतिपूर्ति करे शिक्षा विभाग

    ■ प्रशासन का पक्ष: प्रवेश न लेने पर जाएगी मान्यता


    अनएडेड स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने कहा कि कानून का पालन जितना स्कूल प्रबंधन को करना चाहिए उतना ही शिक्षा विभाग को भी करना चाहिए। आरटीई अधिनियम के तहत विभाग स्कूलों को शुल्क प्रतिपूर्ति करें। अधिनियम के तहत फीस की दर तय करें। फिर निजी स्कूल बच्चों का प्रवेश लेंगे।



    बेसिक शिक्षा अधिकारी विजय प्रताप सिंह ने कहा कि स्कूलों को आरटीई में चयनित बच्चों का प्रवेश लेना होगा। प्रवेश नहीं लेने वाले स्कूलों नोटिस भेजा जा रहा है। इसके बाद भी प्रवेश नहीं लेते हैं तो ऐसे स्कूलों की मान्यता प्रत्यहरण की कार्रवाई होगी।


    लखनऊ : प्राइवेट स्कूलों की मनमानी का खामियाजा शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत चयनित बच्चों और अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। शहर के 67 निजी स्कूलों ने 1583 गरीब बच्चों को प्रवेश देने से मना कर दिया है। कुछ स्कूलों ने बच्चों के अभिभावकों को स्कूल से भगा दिया तो कुछ ने सीधे हाथ जोड़ लिए कि हम आरटीई में प्रवेश नहीं ले सकते। प्राइवेट स्कूलों के मना करने के बाद अभिभावक बेसिक शिक्षा विभाग के चक्कर लगा रहे हैं।


    मंगलवार को 50 से अधिक अभिभावक शिक्षा भवन में प्रवेश दिलाने की गुहार लगा रहे थे। सभी को आश्वासन दिया गया कि चयनित अभ्यर्थियों को प्रवेश दिलाया जाएगा।


    दरअसल आरटीई के तहत गरीब वर्ग के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क शिक्षा मिलती है। इसके लिए सरकार की ओर से प्रति स्कूल प्रबंधन को हर माह 450 रुपए शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में दिया जाता है। पिछले दो वर्षों से शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान स्कूलों को नहीं किया गया है और न ही वर्ष 2013 से फीस की दर बढ़ाई है। इसके विरोध में ही निजी स्कूल संचालकों ने आरटीई के तहत प्रवेश लेने से मना कर दिया। प्रवेश नहीं लेने पर 1583 अभिभावकों ने बीएसए से शिकायत की है।

    बेसिक शिक्षा विभाग ने 12770 बच्चों का चयन आरटीई में किया है। सभी को विद्यालय आवंटित कर दिया है। परियोजना अधिकारी रेनू कश्यप ने कहा कि अभी तक 5027 बच्चों का प्रवेश ही पोर्टल पर अपडेट हुआ है।

    हाथरस : पाठ्य पुस्तक वितरण में लापरवाही पर समस्त बीईओ का वेतन रोका, बीएसए से किया स्पष्टीकरण तलब

    हाथरस : पाठ्य पुस्तक वितरण में लापरवाही पर समस्त बीईओ का वेतन रोका, बीएसए से किया स्पष्टीकरण तलब


     हाथरस। डीएम के निर्देश पर अधिकारियों ने जिले 132 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का निरीक्षण किया। इसमें 53 अध्यापक, अध्यापिकाएं व शिक्षामित्र गैरहाजिर मिले। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि शैक्षिक सत्र 2021-22 के लिए पाठ्य पुस्तकों - का वितरण नहीं किया गया है न ही अद्यतन विद्यालयों को पाठ्य पुस्तकों की आपूर्ति की गई है। जबकि आपूर्ति के लिए फॉर्म उपलब्ध करा दी गई है। इस पर बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। .

    सीडीओ आरबी भास्कर ने कहा | कि यह स्थिति काफी खेदजनक है। अभी तक दो-तीन विद्यालयों में पाठ्य पुस्तकों का वितरण किया गया है। इसका पूर्ण उत्तरदायित्व बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों का है।

    इस शिथिलता के लिए समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों का सितंबर का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोका जाता है। बेसिक शिक्षा अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया है। बिना पाठ्य पुस्तकों के अध्ययन कार्य कैसे किया जा रहा है। अनुपस्थित अध्यापक, अध्यापिकाओं का 21 सितंबर का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोके जाने के निर्देश जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिए गए हैं।

    सहारनपुर : उर्दू शिक्षक संघ की मांग पर अन्य निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के साथ उर्दू की पुस्तकों का भी तत्काल वितरण किये जाने का आदेश जारी

    सहारनपुर : उर्दू शिक्षक संघ की मांग पर अन्य निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों के साथ उर्दू की पुस्तकों का भी तत्काल वितरण किये जाने का आदेश जारी


     

    प्रदेश के लिए होगी एक पीएचडी प्रवेश परीक्षा

    प्रदेश के लिए होगी एक पीएचडी प्रवेश परीक्षा

     
    घोषणा जल्द

    ● ए ग्रेड विवि के ही पीएचडी एंट्रेंस की बाध्यता से फंसा पेंच
    ● केंद्रीय विवि सभी राज्य विवि के लिए करा सकती है एंट्रेंस


    प्रदेशभर के राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तरीय कॉलेजों में भी रिसर्च सेंटर बनाने के फैसले के बावजूद पीएचडी एंट्रेंस के लिए छात्रों को इंतजार करना होगा। प्रदेश में प्रत्येक विवि द्वारा अपने स्तर पर एंट्रेंस कराने की उम्मीद नहीं है। ए ग्रेड विवि द्वारा ही एंट्रेंस कराने की बाध्यता से उत्तर प्रदेश में सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए कॉमन पीएचडी एंट्रेंस ही होगा।

    सेंट्रल यूनिवर्सिटी राज्य विवि में पीएचडी में प्रवेश के लिए यह टेस्ट कराएगी। जल्द ही प्रदेश स्तर पर राज्य विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए टेस्ट की घोषणा होने की उम्मीद है।

    नए नियमों से राज्य विवि में बढ़ेंगी सीटें:शासन ने केवल स्नातक स्तर रेगुलर और पीजी में सेल्फ फाइनेंस कोर्स वाले कॉलेजों में शिक्षकों को पीएचडी कराने की छूट दे दी है। इससे कॉलेजों में ना केवल रिसर्च गाइड की संख्या बढ़ेगी बल्कि सीटों में भी बढ़ोतरी होगी। सीसीएसयू ने व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है। अधिकांश राज्य विवि में पुराने नियम से सीटों की संख्या सीमित थी। इसमें पीजी रेगुलर वाले कॉलेज में ही रिसर्च सेंटर की बाध्यता थी। ऐसे में अनेक विवि लंबे समय से पीएचडी एंट्रेंस नहीं करा पाए।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने को कहा

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने को कहा

    यूजीसी की बड़ी पहल : स्नातक के आखिरी सेमेस्टर में रोजगार की ट्रेनिंग अनिवार्य


    इस संबंध में यूजीसी की तरफ से एक नोटिस भी जारी किया गया है. इस नोटिस में कहा गया है, "जैसा कि आप जानते हैं केंद्र सरकार की बजट 2020-21 घोषणा को ध्यान में रखते हुए नए स्नातकों को रोजगार संबंधी जरूरी ज्ञान के साथ तैयार किया जा सके. इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना और कार्य के प्रति नजरिया पैदा हो. इसी को देखते हुए विश्वविद्यालयों को अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए."



    नई दिल्ली. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने एक बड़ी पहल करते हुए विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों से अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को अपने पाठ्यक्रमों में बढावा देने की गुजारिश की है. आयोग ने उच्च शिक्षण संस्थानों से कहा है कि सामान्य सामान्य डिग्री कार्यक्रमों के साथ अप्रेंटिस/इंटर्नशिप भी जोड़ें यानी अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाए.


    इस संबंध में यूजीसी की तरफ से एक नोटिस भी जारी किया गया है. इस नोटिस में कहा गया है, "जैसा कि आप जानते हैं केंद्र सरकार की बजट 2020-21 घोषणा को ध्यान में रखते हुए नए स्नातकों को रोजगार संबंधी जरूरी ज्ञान के साथ तैयार किया जा सके. इससे छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना और कार्य के प्रति नजरिया पैदा हो. इसी को देखते हुए विश्वविद्यालयों को अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री कार्यक्रमों को बढ़ावा देना चाहिए." 


    आपको बता दें कि अप्रेंटिस/इंटर्नशिप युक्त डिग्री और डिप्लोमा कोर्सों के बारे में केंद्रीय बजट 2021-22 में ऐलान किया गया था, जिससे कि छात्रों को और अधिक रोजगार परक बनाया जा सके. पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक ने अगस्त में  अप्रेंटिस/इंटर्नशिप डिग्री, डिप्लोमा से जुड़ी यूजीसी की गाइडलाइन्स भी जारी की थी. 

    इलाहाबाद हाईकोर्ट : निवास के आधार पर नौकरी देने से इंकार करना असंवैधानिक

    इलाहाबाद हाईकोर्ट  : निवास के आधार पर नौकरी देने से इंकार करना असंवैधानिक



    प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि जब कोर्ट ने पहले ही निवास के आधार पर नौकरी देने से इन्कार किए जाने को असंवैधानिक करार दिया है तो कट आफ डेट के बाद निवास प्रमाणपत्र जमा करने के आधार पर नियुक्ति से मना नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी बुलंदशहर को दो माह के भीतर भर्ती में चयनित याची को नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने नीतू की याचिका पर दिया है।


    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब कोर्ट ने पहले ही निवास के आधार पर नौकरी देने से इंकार करने को असंवैधानिक करार दिया है तो कट आफ डेट के बाद निवास प्रमाणपत्र जमा करने के आधार पर नियुक्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी बुलंदशहर को दो माह में भर्ती में चयनित याची को नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है और कहा है कि याची कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से वेतन पाने की हकदार है।


    कोर्ट ने इस मांग को मानने से इंकार कर दिया कि चयन के बाद नियुक्त न करने से वेतन दिया जाए। कोर्ट ने कहा काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत पर याची वास्तविक कार्यभार ग्रहण करने से वेतन पाने की हकदार हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने नीतू की याचिका पर दिया है।


    याची का सहायक अध्यापक भर्ती 2019मे चयन हुआ।नियम था कि अभ्यर्थी प्रदेश का मूल निवासी हो या पांच साल से लगातार प्रदेश में निवास कर रहा हो और चयन के बाद सत्यापन के समय निवास प्रमाणपत्र दिखाये।

    याची हरियाणा की मूल निवासी हैं।उसकी शादी गाजियाबाद में 2012मे हुई है।याची चयनित हुई और उसे अमेठी जिला आवंटित किया गया।याची ने निवास प्रमाणपत्र कट आफ डेट 28मई 20के बाद का दिया। जिससे नियुक्ति करने से इंकार कर दिया गया।जिसे चुनौती दी गई थी।

    याची का कहना था कि जब कोर्ट ने सुमित व विपिन कुमार मौर्य केस में अपने फैसले में निवास के आधार पर किसी नागरिक को नौकरी देने से इंकार करने को असंवैधानिक करार दिया  है तो उसे निवास के आधार पर नियुक्ति देने से इंकार करना भी असंवैधानिक है। कोर्ट ने तर्क से  सहमत हो याचिका मंजूर कर ली और नियुक्ति करने का निर्देश दिया है।


    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD

    Reserved on 7.9.2021
    Delivered on 21.9.2021
    Court No. - 6
    Case :- WRIT - A No. - 4871 of 2021
    Petitioner :- Neetu
    Respondent :- State Of U.P. And 3 Others
    Counsel for Petitioner :- Man Bahadur Singh
    Counsel for Respondent :- C.S.C.,Archana Singh,Yatindra

    Hon'ble Pankaj Bhatia,J.

    1. Heard learned counsel for the petitioner as well as Sri Yatindra, learned counsel for the respondent Nos. 3 and 4, learned Standing Counsel and perused the record.

    2. The present writ petition has been filed with the following prayers:
    "(I). Issue a writ, order or direction in the nature of Certiorary quashing the impugned government order dated 04.12.2020 to the extent insoar as point no. 3 (1) is concerned (Annexure No. 13 to the writ petition).
    (II) Issue a writ, order or direction in the nature of Certiorary quashing the impugned government order dated 05.03.2021 to the extent insofar as para 2(2) is concerned (Annexure No. 14 to the writ petition).
    (III) Issue a writ, order or direction in the nature of mandamus directing/commanding the respondents specially the District Basic Education Officer, District Bulandshahar to issue appointment order to the petitioner on the the post of Assistant Teacher in Primary School in District Bulandshahar and to pay her salary month to month in pursuance of the select list 30.11.2020 and counselling dated 02.12.2020."

    3. The facts, in brief, giving rise to the present writ petition are that the State Government issued Government Order dated 1.12.2018 for conducting recruitment of Assistant Teacher and an advertisement was issued to the effect known as Assistant Teacher Recruitment Examination-2019.

    4. The selection/recruitment and other conditions governing the Assistant Teachers in Basic Schools run by the Board of Basic Education are Governed by the Basic Education Act, 1972 and U.P Basic Education (Teachers) Service Rules, 1981 and U.P. Basic Education (Teachers)(Posting) Rules, 2008.

    5. It is argued that the Act of 1972 and the Rules of 2008 do not provide for requirement of domicile/residence for selection to the posts of Assistant Teacher

    6. Paragraph 4 (4) of the Guidelines dated 1.12.2018 issued by the State Government for recruitment provided that eligibility for recruitment would be that the candidate should be Indian national and either domicile of UP or residing in UP for the last five years. The criteria is reproduced hereinbelow:
    4(4) निवास- ऐसे अभ्यर्थी आवेदन हेतु पात्र होंगे जो भारत के नागरिक हो, तथा या तो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हों अथवा आवेदन की तिथि के पूर्व उत्तर प्रदेश में निरन्तर 05 वर्ष से स्थायी रूप से निवास कर रहे हो। अभ्यर्थी द्वारा निर्धारित प्रारूप पर सक्षम स्तर से निर्गत निवास पत्र चयन/सत्यापन के समय चयन समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य होगा।

    7. No separate guidelines was provided for female candidates. The petitioner having the requisite qualification applied for recruitment under the General category and was declared qualified. After the declaration of the result, the State Government issued Government Orders dated 13.5.2020 and 16.5.2020 indicating the manner of filling of the vacancies, as advertised, and no separate criteria for production of domicile certificate was provided therein (Annexure No. 5 & 6).

    8. The petitioner claims that the petitioner was initially a resident of Haryana and passed her Secondary School Examination from Faridabad and her graduation from Rohtak, Haryana as well as B.Ed from Haryana. Subsequently, the petitioner got married to Sri Kuldeep Singh on 5.12.2012 and ever since her marriage, continued to stay at Ghaziabad, which is also indicated in her Marriage Certificate dated 19.8.2015.

    9. The petitioner after being declared to be selected in the written examination moved an application online on the website of the Basic Education Board and in the tentative select list, name of the petitioner surfaced. The petitioner in terms of her selection, appeared before the Selection Committee on 2.12.2020 at District Amethi (her allotted district) along with her testimonials, however, she was not issued the appointment certificate solely on the ground that the domicile certificate of the petitioner was issued after the cut off date 28.5.2020. At this stage, the petitioner argues that by way of abundant caution, the petitioner had applied for issuance of domicile certificate at her matrimonial address i.e Ghaziabad on 16.5.2020, the date on which the advertisement was issued by the State and it was assured by the service provider that domicile certificate would be granted within seven days, however, the domicile certificate was actually issued to the petitioner on 3.6.2020. It is stated that the Government issued a clarification on 4.12.2020 wherein it was stated that only domicile certificate and caste certificate issued prior to 28.5.2020 are acceptable. In view of the same, an order was passed on 5.3.2021 cancelling the appointment of all the persons, who had produced caste and domicile certificates issued subsequent to 28.5.2020.

    10. Counsel for the petitioner argues that for similar recruitment exercise carried out for earlier examination similar conditions with regards to requirement of mandatory domicile certificate was provided for. The said Guidelines were challenged before this Court in Writ Petition (A) No. 4714 of 2019 (Sumit and 14 others Vs. State of UP and 2 others) mainly on the ground that denying appointment solely on grounds of place of birth was contrary to the mandate of Article 16 (2) of the Constitution of India and also contrary to the requirements specified in the Recruitment Rules. The said contention was accepted and the said petition was allowed by this Court vide judgment dated 8.5.2019 whereby considering the mandate of Article 16 (2) of Constitution of India, Clause 2 of the Guidelines dated 19.8.2018 was declared ultra vires the 1981 Rules and was held to be unconstitutional and in violation of Article 16(2).

    11. He further argues that the State of UP while carrying out exercise for recruitment to the post of Junior Engineers and other technical staff provided for horizontal reservations only to persons domiciled in the State which was challenged before this Court. This Court delivered a detailed judgment dated 16.1.2019 in Writ A No. 11039 of 2018 (Vipin Kumar Maurya and 4 others vs. State of UP) and declared the said provision contained in Government Order dated 9.1.2007 as ultra vires Article 16(2) and 16(3) of The Constitution of India.

    12. The present writ petition, thus, contends that once the Guidelines of providing the domicile certificate are held to be unconstitutional, similar requirement of domicile in present recruitment examination is also unconstitutional and ultra vires 1981 Rules. He argues that Rules of Recruitment being the same i.e 1981 Rules, the facts of the case are identical to the facts, which led to passing of judgment in case of Sumit and others Vs. State (supra), as such, Point No. 3 (1) of the impugned Government Order dated 4.12.2020 (Annexure No. 13) and Paragraph 2(2) of the Government Order dated 5.3.2021 (Annexure No. 14) should be declared to be ultra vires the 1981 Rules and unconstitutional and in violation of Article 16(2).

    13. He, thus, claims that the petitioner is entitled for reliefs claimed and for issuance of appointment letter.

    14. In view of the contention raised by the petitioner and as the facts being similar to the one leading to passing of judgment in case of Sumit and others Vs. State, I do not see any reason to take a view contrary to the view taken by this Court in judgment of Sumit and others (supra).

    15. Interpreting similar questions, this Court has held in case of Vipin Kumar Maurya (supra) that denial of employment on basis of domicile is violative of Article 16(2) and 16(3) of the Constitution of India.

    16. Adopting the reasoning as contained in the judgment of this Court in case of Sumit Vs. State (supra) and in case of Vipin Kumar Maurya Vs. State (supra), the Point No. 3 (1) of the impugned Government Order dated 4.12.2020 (Annexure No. 13) and Paragraph 2(2) of the Government Order dated 05.03.2021 (Annexure No. 14) impugned herein are declared to be ultra vires the 1981 Rules and unconstitutional and in violation of Article 16(2).

    17. Once the condition specified in Point No. 3 (1) of the impugned Government Order dated 4.12.2020 (Annexure No. 13) and Paragraph 2(2) of the Government Order dated 5.3.2021 (Annexure No. 14) impugned herein are declared to be ultra vires the 1981 Rules and unconstitutional and in violation of Article 16(2), I have no hesitation in holding that denial of appointment letter to the petitioner solely on the ground that domicile certificate issued to the petitioner was subsequent to the cut off date, cannot be accepted .

    18. Accordingly, the writ petition is allowed. The Respondent No. 4, District Basic Education Officer, Bulandshahar is directed to issue appointment letter to the petitioner in terms of her selection.

    19. The prayer of the petitioner for payment of her salary from the date her name surfaced in the select list is rejected on the ground of ''no work no pay'.

    20. It is clarified that the appointment letter, as directed above, shall be issued to the petitioner within a period of two months from the date the petitioner approaches the Respondent No. 4 and the petitioner shall also be entitled to her salary and other benefits after her actual joining.
    21. Copy of the order downloaded from the official website of this Court shall be treated as certified copy of the order.

    Order Date :- 21.9.2021
    vinay

    एससी-एसटी छात्रों के लिए संशोधित नियमावली जारी, छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई योजना में नैक और एनबीए ग्रेडिंग की अनिवार्यता खत्म

    एससी-एसटी छात्रों के लिए संशोधित नियमावली जारी, छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई योजना में नैक और एनबीए ग्रेडिंग की अनिवार्यता खत्म



    लखनऊ। एससी-एसटी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति व शुल्क भरपाई योजना में निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों पर नैक या एनबीए से ग्रेडिंग हासिल करने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में योजना का लाभ लेने के लिए स्नातक में न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता भी घटाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। देर शाम शासन ने इसका शासनादेश जारी कर दिया।


    प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति व जनजाति के दो लाख रुपये व अन्य वर्गों के ढाई लाख रुपये सालाना आय वाले परिवारों के विद्यार्थियों के लिए इस योजना का लाभ देती है। अभी नेशनल असिस्मेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड ऑफ एक्रीडिटेशन (एनवीए) की निर्धारित ग्रेडिंग हासिल करने वाले निजी विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों के छात्रों को ही इस योजना का लाभ मिलता है। 


    कोरोना संकट के कारण केंद्र ने इस नियम में 2024-25 तक छूट दे दी है। इसी आधार पर प्रदेश सरकार ने भी राहत देने का निर्णय लिया। शासनादेश में कहा गया कि केंद्र व राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त सभी विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थाओं और एआईसीटीई से मान्यता प्राप्त संस्थानों में संचालित तकनीकी पाठ्यक्रमों में 2024 तक नैक और एनबीए से ग्रेडिंग प्राप्त करनी होगी। 2025-26 से ग्रेडिंग प्राप्त विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों व तकनीकी संस्थानों को यह सुविधा मिलेगी।


     31 अगस्त तक नई मान्यता वाले संस्थान को लाभ

    संशोधित नियमावली के तहत तहत 31 अगस्त तक नई मान्यता पाने वाले संस्थानों के छात्र भी इस योजना में शामिल होंगे। पूर्व में लागू व्यवस्था के अनुसार, यह कटऑफ डेट 15 जुलाई था। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, कोरोना संकट को देखते हुए यह व्यवस्था सिर्फ इस साल के लिए लागू की गई है।

    बेसिक शिक्षा मंत्री से मिलकर म्यूच्यूअल ट्रांसफर और पदोन्नति की मांग के साथ भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ गोपनीय जांच की रखी मांग

    बेसिक शिक्षा मंत्री से मिलकर म्यूच्यूअल ट्रांसफर और पदोन्नति की मांग के साथ भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ गोपनीय जांच की रखी मांग



    लखनऊ। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने प्रदेश सरकार से परिषदीय शिक्षकों के स्वैच्छिक तबादले व पदोन्नति की मांग की है। एसोसिएशन के प्रतिनिधि मंडल ने मंगलवार को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) सतीश चंद्र द्विवेदी से मुलाकात कर इस संबंध में ज्ञापन सौंपा। यूटा के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर ने बताया कि एसोसिएशन ने


    सरकार से परिषदीय शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की तरह कैशलेस चिकित्सा सुविधा, ऑफलाइन अवकाश की स्वीकृति और आकांक्षी जिलों के शिक्षकों का भी अंतर्जनपदीय तबादला करने की मांग की है। उन्होंने परस्पर तबादले की प्रक्रिया को । वर्षभर लागू करने की मांग की। उन्होंने बताया कि संगठन ने प्रदेश के कई जिलों में कार्यरत अधिकारियों के भ्रष्टाचार में शामिल होने के साक्ष्य भी सौंपे हैं। बेसिक शिक्षा मंत्री ने मामले की गोपनीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

    विद्यांजली 2.0 : जहां पढ़े, वहीं स्कूल बेहतर बनाने का अवसर, इस तरह दे सकते है सहायता

    विद्यांजली 2.0 : जहां पढ़े, वहीं स्कूल बेहतर बनाने का अवसर,  इस तरह दे सकते है सहायता



    सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने में अब सिर्फ सरकार ही नहीं बल्कि हर कोई अपने तरीके से योगदान दे सकेगा। ये योगदान बच्चों को पढ़ाने लिखाने से लेकर उनके खाने-पीने से जुड़ी सुविधाओं को जुटाने व स्कूल के इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि से जुड़े होंगे इसके तहत सरकार और स्कूलों का सबसे ज्यादा फोकस इन्हीं स्कूलों से पढ़े पूर्व छात्रों और ऐसे स्थानीय लोगों को इस मुहिम से जोड़ने को लेकर है, जो सेवानिवृत्ति हो चुके हैं और खुद को सामाजिक विकास से जुड़ी गतिविधियों में सक्रिय रखते हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय ने यह पहल उस समय की है, जब राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए जनभागीदारी पर जोर दिया गया है। मंत्रालय ने इसे लेकर विद्यांजलि 2.0 नाम की एक नई योजना शुरू की है। जिसके तहत कोई भी व्यक्ति स्कूलों को बेहतर बनाने की इस मुहिम से जुड़ सकता है। अपने हिसाब से मदद कर सकता है। जरूरी नहीं कि यह मदद आर्थिक ही हो। 


    यदि वह इन स्कूलों में कुछ समय के लिए पढ़ाना चाहता है या बच्चों को किसी खेल या विशेष हुनर से प्रशिक्षित करना चाहता है, तो वह भी कर सकता है। इसके लिए उन्हें स्कूल को पहले बताना होगा। वहीं स्कूलों की ओर से भी समय-समय पर अपनी जरूरतों का ब्योरा आनलाइन मुहैया कराया जाएगा। जिसके आधार पर कोई भी उन्हें संबंधित योगदान दे सकेगा। फिलहाल इस पूरी कवायद के पीछे शिक्षा मंत्रालय का जो मुख्य मकसद है, वह सरकारी स्कूलों के प्रति आम लोगों में भरोसा जगाना है।

    कोरोना से माता-पिता खोने वाले बच्चों को CBSE ने दी राहत

    कोरोना से माता-पिता खोने वाले बच्चों को CBSE ने दी राहत


    नई दिल्ली: कोरोना से कई बच्चों के सिर से उनके अभिभावकों का साया छिन गया है। ऐसे सभी अनाथ हो चुके छात्रों की आर्थिक परेशानी को देखते हुए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने तय किया है कि वह इनसे परीक्षा व पंजीकरण शुल्क नहीं लेगा। इस संबंध में सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने मंगलवार को सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को परिपत्र जारी कर कहा कि स्कूल बोर्ड परीक्षा देने वाले ऐसे सभी 10वीं और 12वीं के छात्रों की जांच करे जो कोरोना के दौरान अनाथ हो गए हैं। बोर्ड को लिस्ट आफ कैंडिडेट (एलओसी) उपलब्ध कराते समय उनकी जानकारी उपलब्ध कराई जाए। बोर्ड ने ये भी स्पष्ट किया कि ये छूट केवल सत्र 2021-22 के छात्रों के लिए ही रहेगी।



    सीबीएसई की नवंबर-दिसंबर में होने वाली परीक्षाओं का पंजीकरण शुरू हो गया है। स्कूलों को 30 सितंबर तक बिना विलंब शुल्क के और नौ अक्टूबर तक विलंब शुल्क के साथ सीबीएसई की वेबसाइट पर ई-परीक्षा लिंक के माध्यम से एलओसी जमा करनी है।

    CTET Exam 2021: सीबीएसई ने जारी किया मॉक टेस्ट और अभ्यास केन्द्रों की सूची, देखें

    CTET Exam 2021: सीबीएसई ने जारी किया मॉक टेस्ट और अभ्यास केन्द्रों की सूची, देखें


    CTET 2021 के लिए कुल 356 परीक्षा अभ्यास केंद्र तय किए हैं। बोर्ड ने आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर मॉक टेस्ट का लिंक और परीक्षा अभ्यास केंद्रों की सूची जारी की है. सीबीएसई ने CTET 2021 के लिए कुल 356 परीक्षा अभ्यास केंद्र तय किए हैं। 


    नई दिल्ली. CTET 2021: केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (CTET 2021) के लिए मॉक टेस्ट लिंक और अभ्यास केन्द्रों की सूची जारी कर दी है. गौरतलब है कि सीबीएसई द्वारा 16 दिसंबर, 2021 से 13 जनवरी, 2022 के बीच CTET Exam 2021 का आयोजन किया जाएगा. बोर्ड ने आधिकारिक वेबसाइट ctet.nic.in पर मॉक टेस्ट का लिंक और परीक्षा अभ्यास केंद्रों की सूची जारी की है. सीबीएसई ने CTET 2021 के लिए कुल 356 परीक्षा अभ्यास केंद्र तय किए हैं.


    इस साल CTET परीक्षा कंप्यूटर आधारित मोड में आयोजित की जाएगी. सीबीएसई ने कहा है कि “विशेष रूप से दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों के अभ्यर्थियों को अभ्यास करने और कंप्यूटर आधारित टेस्ट (CBT) देने में सक्षम बनाने के लिए सभी प्रयास किए जाते हैं. ताकि उम्मीदवार लॉग इन करना सीख सकें.” इसी प्रयास के तहत अन्ह्यास केंद्र बनाए गए हैं.


    CTET Exam 2021: मुफ्त में कर सकते हैं उपयोग
    बोर्ड ने कहा है कि, “जो उम्मीदवार ऑनलाइन प्रक्रिया से अच्छी तरह से वाकिफ नहीं हैं और विभिन्न बाधाओं के कारण ऑनलाइन परीक्षा में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, वे इन केंद्रों की सेवाओं का मुफ्त में उपयोग कर सकते हैं.” इसके अलावा बोर्ड ने वेबसाइट पर मॉक टेस्ट भी उपलब्ध करा दिए हैं, जिसका अभ्यास करके अभ्यर्थी परीक्षा की तयारी कर सकते हैं. अभ्यास केन्द्रों की सूची देखने की डायरेक्ट लिंक नीचे दी जा रही है.




    Tuesday, September 21, 2021

    जीआइसी में शिक्षिकाओं के तबादले में विषय दरकिनार, पढ़ाई पर पड़ेगा असर

    जीआइसी में शिक्षिकाओं के तबादले में विषय दरकिनार, पढ़ाई पर पड़ेगा असर 


    प्रदेश के कई जिला मुख्यालय के राजकीय इंटर कालेज (जीआइसी) में गैर विषय की महिला सहायक अध्यापक (एलटी) एवं महिला प्रवक्ताओं ( लेक्चरर) के तबादले कर दिए गए हैं। तबादले उन कालेजों से भी किए गए हैं, जहां स्थानांतरि शिक्षिका के विषय की दूसरी शिक्षिका नहीं हैं। ऐसे में जहां से स्थानांतरण हुआ वहां संबंधित विषय पढ़ाने के लिए शिक्षिका नहीं रह गई हैं और जहां तबादला हुआ, वहां उस विषय का पद रिक्त नहीं था। एलटी एवं प्रवक्ता दोनों वर्ग में महिलाओं के इस तबादले से कालेजों में पढ़ाई पर असर पड़ेगा।


    तबादला करने के दौरान जीआइसी में पढ़ाई व्यवस्था सुचारु रखने की ओर माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने ध्यान नहीं दिया। राजकीय शिक्षक संघ ( पाण्डेय गुट) के महामंत्री रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय अनुसार प्रयागराज मुख्यालय में राजकीय इंटर कालेज (बालक) में प्रवक्ता के 39 एवं सहायक अध्यापक के 68 पद स्वीकृत हैं, जो कि पुरुष संवर्ग के हैं। जुलाई में 19 महिला सहायक अध्यापक और तीन महिला प्रवक्ताओं के आनलाइन तबादले को गलत ठहराया है। 

    उन्होंने अपर शिक्षा निदेशक राजकीय माध्यमिक शिक्षा निदेशक, उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री को पत्र लिखकर इन तबादलों को निरस्त करने की मांग उठाई है। कहा कि तबादले निरस्त नहीं किए गए तो संगठन अदालत का दरवाजा खटखटाएगा। राजकीय शिक्षक संघ ( भड़ाना गुट) गुट के महामंत्री डा. रविभूषण ने बिना विषय और कालेज में विषय की एकल शिक्षिका होने के बावजूद तबादले का विरोध किया है। उन्होंने बालक विद्यालय में शिक्षिकाओं के तबादलों को भी सही नहीं माना।


    आयोग ने रविवार को कराई अलग-अलग संवर्ग की परीक्षा : अभी रविवार को ही उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने जीआइसी प्रवक्ता के 1473 पदों के लिए विभिन्न जिलों में विषय वार परीक्षा कराई। इसमें पुरुष के 991 और महिला के 482 पद हैं।


    पूर्व में भी आयोग अलग-अलग संवर्ग के लिए परीक्षा कराकर चयन करता रहा है तो नियुक्ति में निदेशालय को संवर्ग का ध्यान रखना चाहिए। अपर शिक्षा निदेशक (एडी) माध्यमिक ( राजकीय) अंजना गोयल ने बताया कि जीआइसी में सह शिक्षा व्यवस्था है, इसलिए तबादले किए गए हैं। बालक वर्ग के जीआइसी में शिक्षिकाओं के तबादले के मामले में भी सह शिक्षा को ही आधार बताया ।

    बीएड 2021-23 के पहले चरण की काउंसिलिंग में 31,800 अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण

    बीएड 2021-23 के पहले चरण की काउंसिलिंग में 31,800 अभ्यर्थियों ने कराया पंजीकरण

    बीएड काउंसिलिंग के पहले चरण में सिर्फ 31 हजार रजिस्ट्रेशन


    लखनऊ। कई राज्य विश्वविद्यालयों में बिना स्नातक अंतिम वर्ष का परीक्षा परिणाम जारी हुए सरकारी व प्राइवेट बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू काउंसिलिंग को पहले चरण में ही झटका लगता दिख रहा है। लखनऊ विवि द्वारा 17 सितंबर से शुरू की गई काउंसिलिंग में अब तक 31 हजार विद्यार्थियों ने ही रजिस्ट्रेशन कराया है। जबकि रजिस्ट्रेशन में 75 हजार रैंक तक के विद्यार्थियों को शामिल होना था।


    लखनऊ : लखनऊ विश्वविद्यालय (लवि) की ओर से चल रही बीएड 2021-23 के पहले चरण की काउंसिलिंग में अब तक 31,800 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया, जबकि 13,225 ने पसंदीदा कालेज चुनें। संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड की राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेयी ने बताया कि अभ्यर्थी 23 सितंबर तक पंजीकरण कर सकेंगे। वहीं च्वाइस फिलिंग 24 सितंबर तक की जा सकेगी। 25 सितंबर को सीटें आवंटित होंगी।

    बीएड काउंसिलिंग 17 सितंबर से जारी है। पहले चरण की काउंसिलिंग में 1 से 75,000 रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे। काउंसिलिंग चार चरणों में कराई जाएगी। पंजीकरण शुल्क 750 रुपये है। एक से 75,000 रैंक तक के अभ्यर्थी 23 सितंबर तक पंजीकरण कर सकते हैं। 26 से 29 सितंबर तक सीट कंफर्मेशन के साथ फीस जमा करनी होगी। अभ्यर्थी 26 सितंबर से 29 सितंबर 2021 के मध्य शेष शुल्क आनलाइन जमा कर अपना सीट आवंटन पत्र प्राप्त कर लें।

    दूसरा चरण में 75,001 से दो लाख रैंक तक और पहले चरण के छूटे हुए अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण 25 सितंबर से शुरू होंगे। 26 से 28 सितंबर तक पंजीकरण और च्वाइस फिलिंग होगी। 29 सितंबर को च्वाइस फिलिंग और 30 सितंबर को सीट आवंटन होगा। एक से चार अक्टूबर तक सीट पक्की करके की जमा करनी होगी।


    22 अक्टूबर से पूल काउंसिलिंग

    बीएड की चार चरणों की काउंसिलिंग के बाद खाली सीटों को भरने के लिए पूल काउंसिलिंग कराई जाएगी। इसके लिए पंजीकरण और च्वाइस फिलिंग 22 से 25 अक्टूबर तक होगी। 26 अक्टूबर को सिर्फ च्वाइस फिलिंग और 27 अक्टूबर को सीट आवंटन किया जाएगा। 28 से 30 अक्टूबर तक आवंटन लेटर डाउनलोड किए जा सकेंगे।



    बीएड में प्रवेश के लिए आज से कर सकेंगे च्वाइस फिलिंग


    लखनऊ विश्वविद्यालय की ओर से चल रही संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड 2021 23 के पहले चरण की काउंसिलिंग के के लिए अभ्यर्थी 23 सितंबर तक पंजीकरण कर सकेंगे। च्वाइस फिलिंग मंगलवार से 24 सितंबर तक की जा सकेगी। 25 को सीट आवंटन होगा। 26 से 29 तक सीट कंफर्मेशन के साथ फीस जमा करनी होगी।


    बीएड काउंसिलिंग 17 सितंबर से जारी है। पहले चरण की काउंसिलिंग में एक से 75,000 रैंक तक के अभ्यर्थी शामिल होंगे। संयुक्त प्रवेश परीक्षा बीएड की राज्य समन्वयक प्रो. अमिता वाजपेयी ने बताया कि काउंसिलिंग चार चरणों में कराई जाएगी। पंजीकरण शुल्क 750 रुपये है। दूसरे चरण में 75,001 से दो लाख रैंक तक और पहले चरण के छूटे हुए अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण 25 सितंबर से शुरू होंगे।

    रहें तैयार : पहले यूपीटीईटी और फिर नई शिक्षक भर्ती परीक्षा का इसी माह होगा एलान


    रहें तैयार :  पहले यूपीटीईटी और फिर नई शिक्षक भर्ती परीक्षा का इसी माह होगा एलान


    उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे प्रतियोगियों के लिए अच्छी खबर है। परिषदीय विद्यालयों में नई शिक्षक भर्ती की मांग लंबे समय से कर रहे अभ्यर्थियों की मुराद जल्द पूरी हो सकती है। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की नई शिक्षक भर्ती का ऐलान इसी माहीने होने की संभावना हैं। भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 (यूपीटीईटी) करने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि भर्ती की तैयारियों के तहत यूपीटीईटी नवंबर में कराई जा सकती है। शासन ने परीक्षा संस्था से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा है। इसके बाद दिसंबर में शिक्षक भर्ती परीक्षा कराई जा सकती है। 

    उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी स्कूलों की नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद अध्यक्ष मुकुल सिंघल की अगुवाई में बनी तीन सदस्यीय कमेटी 15 दिन से रिक्त पदों व विद्यालयों के पद निर्धारण प्रक्रिया को खंगाल रही है। नई भर्ती पदों के हिसाब से सबसे बड़ी हो सकती है, स्कूलों में शिक्षकों के करीब 70 हजार से अधिक पद खाली हैं। कमेटी की रिपोर्ट सौंपने के बाद ऐलान किए जाने की तैयारी है।

    बता दें कि उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग ने 69000 शिक्षक भर्ती के दौरान शीर्ष कोर्ट में हलफनामा दिया था कि विभाग में 51,112 शिक्षकों के पद रिक्त हैं। पिछले वर्षों में हुई शिक्षक भर्ती के खाली पदों को नई शिक्षक भर्ती में जोड़ा जा सकता है। 68500 भर्ती अब तक पूरी नहीं हो सकी है इसलिए रिक्त पदों को लेकर माथापच्ची की जा रही है। वहीं, 69000 शिक्षक भर्ती के सारे पद तीन चरण की काउंसिलिंग के बाद भी भरे नहीं जा सके हैं। हाल के वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले और कोरोना काल में कालकवलित हुए शिक्षकों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। संकेत हैं कि कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द सीएम योगी आदित्यनाथ को सौंपेगी, क्योंकि विलंब होने पर भर्ती विधानसभा चुनाव से पहले पूरी हो पाना मुश्किल होगा।

    2018 व 2019 में कराया गया पद निर्धारण : उत्तर प्रदेश में निश्शुल्क एवं बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 लागू है। उसी की सिफारिशों के अनुरूप 2018 में शिक्षकों का पद निर्धारण करते हुए स्कूलों में बड़ी संख्या में प्रधानाध्यापक पद का अनुमोदन नहीं हुआ लेकिन, सरकार ने इन पदों को खत्म नहीं किया है। स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात दुरुस्त करने के लिए 2019 में भी पद निर्धारण प्रक्रिया चली।


    उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे प्रतियोगियों के लिए अच्छी खबर है। परिषदीय विद्यालयों में नई शिक्षक भर्ती की मांग लंबे समय से कर रहे अभ्यर्थियों की मुराद जल्द पूरी हो सकती है। बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों की नई शिक्षक भर्ती का ऐलान इसी माहीने होने की संभावना हैं । भर्ती प्रक्रिया शुरू होते ही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 यूपीटीईटी करने की तैयारी है।


    बताया जा रहा है कि भर्ती की तैयारियों के तहत यूपीटीईटी नवंबर में कराई जा सकती है। शासन ने परीक्षा संस्था से इस संबंध में प्रस्ताव मांगा है। इसके बाद दिसंबर में शिक्षक भर्ती परीक्षा कराई जा सकती है। उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के प्राइमरी स्कूलों की नई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू हो सकती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राजस्व परिषद अध्यक्ष मुकुल सिंघल की अगुवाई में बनी तीन सदस्यीय कमेटी 15 दिन से रिक्त पदों व विद्यालयों के पद निर्धारण प्रक्रिया को खंगाल रही है। नई भर्ती पदों के हिसाब से सबसे बड़ी हो सकती है, स्कूलों में शिक्षकों के करीब 70 हजार से अधिक पद खाली हैं। कमेटी की रिपोर्ट सौंपने के बाद ऐलान किए जाने की तैयारी है। बता दें कि यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग ने 69000 शिक्षक भर्ती के दौरान शीर्ष कोर्ट में हलफनामा दिया था कि विभाग में 51112 शिक्षकों के पद रिक्त हैं । पिछले वर्षों में हुई शिक्षक भर्ती के खाली पदों को नई शिक्षक भर्ती में जोड़ा जा सकता है। 68500 भर्ती अब तक पूरी नहीं हो सकी है इसलिए रिक्त पदों को लेकर माथापच्ची की जा रही है। वहीं 69000 शिक्षक भर्ती के सारे पद तीन चरण की काउंसिलिंग के बाद भी भरे नहीं जा सके हैं। हाल के वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले व कोरोना काल में कालकवलित हुए शिक्षकों का ब्योरा जुटाया जा रहा है। संकेत हैं कि कमेटी अपनी रिपोर्ट जल्द सीएम योगी को सौंपेगी, क्योंकि विलंब होने पर भर्ती विस चुनाव से पहले पूरी हो पाना मुश्किल होगा।

    छात्र पढ़ाई करें, स्कूल खोलने का फैसला राज्य करेंगे : सुप्रीम कोर्ट

    छात्र पढ़ाई करें, स्कूल खोलने का फैसला राज्य करेंगे : सुप्रीम कोर्ट
     
    चिंता: बच्चों व तमाम शिक्षकों को अभी नहीं लग पाया टीका


    नई दिल्ली : दिल्ली में स्कूलों को फिर से पहले की तरह खोलने के लिए दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया और कहा कि छात्र पढ़ाई पर ध्यान दें। स्कूल कब खोले जाएं, यह राज्य देखेंगे। यह याचिका 12वीं के छात्र ने दायर की थी और कहा था कि स्कूलों को पर्याप्त सुरक्षा उपायों के साथ खोला जाए।


    जस्टिस डीवाई चंद्रचूड और बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि अदालत इस तरह का आदेश नहीं दे सकती और इसके लिए आप दिल्ली सरकार के पास जाएं। पीठ ने कहा कि एक बच्चे को संवैधानिक राहत लेने के लिए खुद को इस तरह से पेश नहीं करना चाहिए। हम यह नहीं कह रहे हैं कि यह प्रचार पाने का हथकंडा है, लेकिन इसी कारण बच्चों को इसमें शामिल नहीं करना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि केरल और महाराष्ट्र की स्थिति का अंदाजा लगाइये, हम किसी राज्य के खतरों को नजरअंदाज कर यह निर्देश नहीं दे सकते कि बच्चों को वापस स्कूल भेजिए।

    अदालत ने कहा, देश में टीकाकरण हो रहा है और सौभाग्य से, अब हमारे पास ऐसी रिपोर्ट हैं जो बताती हैं कि संक्रमण उस प्रकृति का नहीं होगा पर बच्चों को अभी टीके नहीं लग पाए हैं और कई शिक्षक भी बचे होंगे जो टीका नहीं ले पाए होंगे। ऐसे में हम यह नहीं कह सकते कि सभी बच्चों को स्कूल भेजें।

    यूपी : एक हजार एडेड विद्यालयों के संदिग्ध शिक्षकों को दस्तावेजों की जांच के बाद ही मिलेगा वेतन, बेसिक शिक्षा निदेशक ने तलब की रिपोर्ट

    यूपी : एक हजार एडेड विद्यालयों के संदिग्ध शिक्षकों को दस्तावेजों की जांच के बाद ही मिलेगा वेतन, बेसिक शिक्षा निदेशक ने तलब की रिपोर्ट


    बेसिक शिक्षा परिषद के एक हजार सहायता प्राप्त उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संदिग्ध शिक्षकों को दस्तावेजों की जांच के बाद ही वेतन मिलेगा।


    बेसिक शिक्षा परिषद के एक हजार सहायता प्राप्त उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संदिग्ध शिक्षकों को दस्तावेजों की जांच के बाद ही वेतन मिलेगा। शिक्षक संगठनों की ओर से वेतन भुगतान का दबाव बनाए जाने पर बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशकों से रिपोर्ट तलब की है। इसमें पूछा गया है कि संबंधित शिक्षकों का वेतन किन-किन कारणों से रोका गया है। शासन की ओर से गठित समिति सहायक निदेशकों की रिपोर्ट के बाद वेतन भुगतान का निर्णय करेगी। शिक्षकों की नियुक्ति सही मिलने पर ही वेतन भुगतान किया जाएगा।


    बेसिक शिक्षा विभाग ने वर्ष 2006 में एक हजार विद्यालयों को आर्थिक सहायता (ग्रांट) देना शुरू किया था। विद्यालय सहायता प्राप्त घोषित होने के बाद इन स्कूलों के शिक्षकों के वेतन, भत्तों का भुगतान भी सरकार के स्तर से शुरू किया गया। पर, बाद में शिक्षकों की जांच में सामने आया कि करीब चार सौ से अधिक शिक्षक फर्जी हैं। शिक्षकों की नियुक्ति निर्धारित प्रक्रिया और मापदंड के अनुसार नहीं की गई है। ऐसे में सरकार ने पात्रता पूरी नहीं करने वाले करीब चार सौ शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी।

    बीएसए को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का हक नहीं, बीएलओ की ड्यूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

    बीएसए को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का हक नहीं, बीएलओ की ड्यूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

     
    ■  मामला : देखें कोर्ट आर्डर 👇

    ● बीएलओ की डॺूटी न करने पर बीएसए ने रोका था वेतन

    ● कोर्ट ने कहा, शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते 


    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। साथ ही बीएलओ ड्यूटी नहीं करने वाले सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का बीएसए फिरोजाबाद का आदेश रद्द कर दिया है। कोर्ट ने सहायक अध्यापक को वेतन सहित सेवा में बहाल करने का आदेश भी दिया है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने सहायक अध्यापक कैलाश बाबू की याचिका पर अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी को सुनकर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार बीएसए ने याची की बूथ लेवल अधिकारी के कार्य के लिए ड्यूटी लगाई थी। ड्यूटी न करने पर सात अगस्त 2021 को बीएसए फिरोजाबाद में याची का वेतन रोकने का आदेश जारी कर दिया। 


    अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का तर्क था कि बेसिक शिक्षा अधिकारी को सहायक अध्यापक का वेतन रोकने का अधिकार नहीं है। साथ ही जहां तक बीएलओ ड्यूटी का सवाल है, हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सुनीता शर्मा व अन्य के केस में स्पष्ट किया है कि शिक्षकों से शिक्षणेत्तर कार्य नहीं लिए जा सकते हैं। कोर्ट ने इस तर्क के मद्देनजर बीएसए का सात अगस्त 2021 का आदेश रद्द कर दिया और याची को वेतन सहित बहाल करने का निर्देश दिया है।



    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    Court No. - 6
    Case :- WRIT - A No. - 12203 of 2021

    Petitioner :- Kailash Babu And Another
    Respondent :- State Of U.P. And 4 Others
    Counsel for Petitioner :- Agnihotri Kumar Tripathi
    Counsel for Respondent :- C.S.C.,Archana Singh,Bhupendra Kumar Yadav

    Hon'ble Pankaj Bhatia,J.
    Heard learned counsel for the parties.
    The present writ petition has been filed challenging the order dated 07.08.2021, passed by Basic Shiksha Adhikari, Firozabad (respondent no. 5) whereby the salary of the petitioner has been stopped on account of non-performing the duties of booth level officer.

    The counsel for the petitioners argues that the said order is bad on more than one count, firstly, the respondent has no authority under law to stop the salary even if the allegations are accepted to be correct and, secondly, this Court, in the case of Sunita Sharma vs. State of U.P. and others, 2015 (3) ESC 1289 (All.) (DB) had taken a decision that the petitioners being forced to carry out the duties of BLO is without any authority of law. The decision of this Court in the case of Sunita Sharma (supra) is very clear that the teachers similar to the petitioners cannot be forced to carry out the duties of BLO.

    In view of the said judgement coupled with the fact that the respondent has no authority to withhold the salary as has been done by means of the impugned order dated 07.08.2021 (Annexure 1 to the writ petition) the same is set aside insofar as it relates to the petitioners with directions that the petitioners shall be permitted to continue to work and shall be paid salary to which they are entitled under law.
    The petition is disposed off in terms of the said direction.

    Copy of the order downloaded from the website of Allahabad High Court shall be accepted/treated as certified copy of the order.

    Order Date :- 17.9.2021
    Puspendra

    बेसिक शिक्षा परिषद को हाईकोर्ट ने विचार करने के लिए कहा, पति-पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति पर हो विचार

    शिक्षक दंपती को एक ही जिले में रखने का दिया निर्देश, याची ने अंतरजनपदीय तबादले के लिए किया था आवेदन

    बेसिक शिक्षा परिषद को हाईकोर्ट ने विचार करने के लिए कहा, पति-पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति पर हो विचार



    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद से पति-पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति देने के मामले में अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के परिप्रेक्ष्य में विचार करने का निर्देश दिया है।

    यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने सहायक अध्यापक राधाकांत त्रिपाठी की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट को बताया कि याची की नियुक्ति सीतापुर जिले में है और उसकी पत्नी प्रयागराज में सहायक अध्यापिका है।

     याची ने अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए आवेदन किया था लेकिन उसका आवेदन मात्र इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उसने सहायक अध्यापक के रूप में पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की है। एडवोकेट अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी का कहना था कि 2008 की नियमावली के नियम 8 (2)(डी) के अनुसार अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए एक जिले में पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य है लेकिन इस नियम में कुछ अपवाद भी हैं। 

    पति-पत्नी को एक ही जिले में नियुक्त देना इसी अपवाद के तहत आता है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने प्रकरण को विचारणीय मानते हुए बेसिक शिक्षा परिषद को निर्देश दिया कि इस संबंध में हाईकोर्ट के आदेश व नियमों के तहत याची के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण पर विचार करें।


    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति-पत्नी को एक ही जिले में रखने के मामले में अंतरजनपदीय स्थानांतरण पर बेसिक शिक्षा परिषद को विचार करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने राधाकांत त्रिपाठी की याचिका पर दिया है।


    याची सीतापुर जिले में सहायक अध्यापक है, जबकि उसकी पत्नी प्रयागराज में सहायक अध्यापिका है। याची ने अंतरजनपदीय तबादला हेतु आवेदन किया था। आवेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया गया कि उसने सहायक अध्यापक के रूप में पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा पूरी नहीं की है।


     याची का कहना था कि 2008 की नियमावली के नियम 8 (2) (डी) के अनुसार अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए एक जिले में पांच वर्ष की सेवा अनिवार्य है। इस नियम में कुछ अपवाद भी हैं। पति पत्नी को एक ही जिले में नियुक्ति देना इसी अपवाद के तहत आता है।

    Monday, September 20, 2021

    DBT प्रक्रिया हेतु तकनीकी पहलुओं को समझाने हेतु दिनांक 21 सितंबर 2021 को दोपहर 12 बजे से यूट्यूब सेशन होगा आयोजित, जुड़ने के लिए देखें डायरेक्ट लिंक

    DBT प्रक्रिया हेतु तकनीकी पहलुओं को समझाने हेतु दिनांक 21 सितंबर 2021 को दोपहर  12 बजे से यूट्यूब सेशन होगा आयोजित, जुड़ने के लिए देखें डायरेक्ट लिंक 



    डीबीटी की प्रक्रिया सम्पादित कराये जाने हेतु डीबीटी - प्रेरणा मोबाइल एप्प एवं प्रेरणा-पोर्टल के संचालन से सम्बन्धी तकनीकी पहलुओं को समझाने के उद्देश्य से दिनांक 21.09.2021 को दोपहर 12.00 बजे से यू-टयूब के माध्यम से एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया जा रहा है, जिसका लिंक निम्न है।

    👉  यूट्यूब सेशन लिंक


    उक्त प्रशिक्षण में अपने जनपद के समस्त अध्यापकों/खण्ड शिक्षा अधिकारियों/जिला समन्वयकों एवं अन्य तकनीकी स्टाफ सहित स्वयं की प्रतिभागिता सुनिश्चित करने का कष्ट करें।

    आज्ञा से,
    महानिदेशक, स्कूल शिक्षा,
    उत्तर प्रदेश।

    बिजनौर : अपने पाल्यों को विद्यालय लाने पर रोक लगाने संबंधी खंड शिक्षा अधिकारी के बेतुके आदेश को बीएसए ने किया निरस्त

    बिजनौर : अपने पाल्यों को विद्यालय लाने पर रोक लगाने संबंधी खंड शिक्षा अधिकारी के बेतुके आदेश को बीएसए ने किया निरस्त

    ■   बीईओ पर कार्यवाही के नाम पर साधी चुप्पी

    योगी सरकार का दावा : प्राइमरी व इंटर कालेजों में शिक्षकों की बम्पर भर्ती के जरिये कमी की दूर

    योगी सरकार का दावा : प्राइमरी व इंटर कालेजों में शिक्षकों की बम्पर भर्ती के जरिये कमी की दूर

    उच्च शिक्षा को सात विश्वविद्यालय और 50 डिग्री कालेज देंगे रफ्तार

    सीएम योगी ने जारी किया रिपोर्ट कार्ड कहा - 4.5 लाख युवाओं को दी सरकारी नौकरी

    मेरिट के आधार पर तबादलों से प्रशासनिक व्यवस्था हुई चुस्त-दुरुस्त


    लखनऊ : प्रदेश में छात्रों को उच्च गुणवत्ता की शिक्षा देने के लिए बेसिक व माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में बड़े पैमाने पर शिक्षकों की नियुक्ति की गई। 250 नए इंटर कालेजों के साथ 1.38 प्राइमरी स्कूलों का कायाकल्प किया गया। उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए छात्रों को दूर न जाना पड़े इसके लिए प्रदेश में सात नए विश्वविद्यालय व 50 महाविद्यालय बनाए जा रहे हैं। 35 नए राजकीय आइटीआइ की स्थापना कर युवाओं के कौशल विकास का सपना पूरा किया जा रहा है।



    सरकार के साढ़े चार साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। सात नए विश्वविद्यालयों व 50 डिग्री कालेजों के साथ लखनऊ में स्टेट फारेंसिक इंस्टीट्यूट का निर्माण किया जा रहा है। यहां फारेंसिक जांच के साथ छात्र फारेंसिक साइंस विषय में पढ़ाई कर सकेंगे। सीएम ने कहा कि फारेंसिक जांच में महीनों लगते थे लेकिन, कमिश्नरी स्तर पर फारेंसिक व साइबर लैब स्थापित की गई है। इससे अपराधों से जुड़ी फारेंसिक जांचों में तेजी आएगी।


    प्राइमरी स्कूलों में बच्चों को बेहतर पढ़ाई का माहौल देने के लिए आपरेशन कायाकल्प शुरू हुआ। इसमें बच्चों के लिए शौचालय, बैठने के लिए बेंच, आकर्षक शिक्षण कक्षों का निर्माण हुआ। सुविधाएं बढ़ने के साथ स्कूलों में बच्चों की संख्या भी बढ़ी है। सरकार ने 250 नए इंटर कालेज शुरू किए। शिक्षकों के 5987 नए पदों पर भर्ती कर कालेजों में शिक्षा की गुणवत्ता में इजाफा किया। श्रमिकों के बच्चों को निश्शुल्क शिक्षा के लिए 18 मंडलों में अटल आवासीय विद्यालय की स्थापना कर गरीब बच्चों के सपनों को पूरा किया। यूपी बोर्ड के मेधावी विद्यार्थियों के गांवों तक एपीजे अब्दुल कलाम गौरव पथ का निर्माण किया। बालिकाओं को बेहतर शिक्षा देने के लिए 107 विकासखंडों में बालिका छात्रवास का निर्माण भी कराया जा रहा है। छात्रों के कौशल विकास का कार्य भी सरकार कर रही है। खासकर एससी-एसटी वर्ग के छात्रों के लिए सभी आइटीआइ में निश्शुल्क ट्रेनिंग की व्यवस्था की गई है और पांच नए ट्रेड भी शुरू किए गए हैं।


    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सरकारी नियुक्तियों और सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की तैनाती पूरी पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित की है। प्रदेश में 4.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरियां दी गई है। मेरिट के आधार पर ट्रांसफर किए जाने से प्रशासनिक व्यवस्था में स्थिरता का माहौल बना जिससे कर्मियों का मनोबल बढ़ा।






    यूपी बोर्ड के 2204 सरकारी स्कूलों को मिलेंगे टैबलेट, होगी मॉनिटरिंग, प्राथमिक स्कूलों में सभी स्कूलों में जल्द होगा टैबलेट, तकनीकी दिक्कतों से खरीद लटकी

    यूपी बोर्ड के 2204 सरकारी स्कूलों को मिलेंगे टैबलेट, होगी मॉनिटरिंग


    प्राथमिक स्कूलों में सभी स्कूलों में जल्द होगा टैबलेट, तकनीकी दिक्कतों से खरीद लटकी


    पहले प्राइमरी शिक्षा में भी सभी स्कूलों में टैबलेट देने का फैसला हो चुका है। 1,59,043 सरकारी स्कूलों, 880 खण्ड शिक्षा अधिकारियों और 4400 अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) को ये टैबलेट दिए जाएंगे। इसके मार्फत न सिर्फ स्कूलों की मॉनिटरिंग आसान होगी बल्कि शिक्षकों की हाजिरी भी बायोमीट्रिक तरीके से ली जा सकेगी।

    इस टैबलेट में जो भी डाटा होगा वह राज्यस्तर पर देखा जा सके, इसके लिए क्लाउड आधारित स्टोरेज होगा। हालांकि दो वर्ष पहले ही योजना को मंजूरी मिली थी लेकिन तकनीकी दिक्कतों के कारण टैबलेट खरीद अभी तक नहीं हो पाई है।


    प्रदेश के 2204 सरकारी हाईस्कूल / इंटर कॉलेजों को टैबलेट दिया जाएगा। यह टैबलेट प्रधानाध्यापक को दिया जाएगा। इससे पढ़ाई की गुणवत्ता पर नजर रख जाएगी और मॉनिटरिंग आसान होगी। हर स्कूल को प्रति टैबलेट 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आने वाले समय में यह लाभकारी साबित होगा।


    इन टैबलेट से स्कूल के मुखिया यानी प्रधानाध्यापक / प्रधानाचार्य तकनीकी रूप से समृद्ध होंगे। शुरुआती दौर में लर्निंग आउटकम समेत यूपी बोर्ड के रिजल्ट का विश्लेषण भी इसी पर किया जाएगा। प्रदेश के 2204 सरकारी स्कूलों से योजना शुरू की जा रही है। प्रदेश में 2285 सरकारी स्कूल हैं। टैबलेट स्कूल में होने से कई तरह के काम स्कूल स्तर पर ही किए जा सकेंगे। इससे निरीक्षण की रिपोर्ट, अवस्थापना सुविधाएं व अन्य कई तरह की जानकारियों का आदान-प्रदान मिनटों में हो जाएगा।

    रिजल्ट का विश्लेषण :वहीं यूपी बोर्ड परीक्षा के अपने स्कूल के रिजल्ट का विश्लेषण भी किया जा सकेगा और अन्य स्कूलों से तुलना भी की जा सकेगी। केन्द्र सरकार ने परफार्मेंस र्ग्रेडिंग इण्डेक्स की शुरुआत की है और इसके तहत हर सरकारी स्कूल में कई तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं। टैबलेट भी इनमें से एक है।

    Sunday, September 19, 2021

    एक लाख छात्रों को छात्रवृत्ति दो अक्टूबर को

    एक लाख छात्रों को छात्रवृत्ति दो अक्टूबर को

    लखनऊ : सरकार चुनावी वर्ष में अधिक से अधिक जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने की तैयारी में जुट गई है। इसी के तहत पहले चरण में दो अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन एक लाख से अधिक छात्रों को छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद छात्रवृत्ति वितरित कर छात्रों के चेहरे पर मुस्कान लाएंगे।


    सरकार ने समाज कल्याण अल्पसंख्यक कल्याण व पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग को अधिक से अधिक छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति देने के निर्देश दिए हैं। इसी क्रम में समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति की संशोधित समय सारणी भी जारी कर दी है। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति के लिए आनलाइन आवेदन कर सकें। संशोधित समय सारणी के अनुसार छात्रवृत्ति के मास्टर डाटा बेस में शामिल होने के लिए शिक्षण संस्थान अब 27 सितंबर तक अपनी सूचनाएं अपलोड कर सकेंगे। अभी तक इसकी अंतिम तिथि 18 अगस्त थी। इस वर्ष परिणाम विलंब से आने के कारण बहुत सारे शिक्षण संस्थान छात्रवृत्ति के लिए मास्टर | डाटा में अपनी सूचनाएं अपलोड नहीं कर पाए थे।

    UPTET : 28 नवंबर को हो सकती है पात्रता परीक्षा, परीक्षा नियामक ने शासन को भेजा प्रस्ताव

    UPTET : 28 नवंबर को हो सकती है पात्रता परीक्षा, परीक्षा नियामक ने शासन को भेजा प्रस्ताव

    UPTET परीक्षा की तारीख को लेकर नया अपडेट, जानिए पूरी डिटेल


     उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2021 (यूपीटीईटी) की तारीख का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए अच्छी खबर है। शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य शिक्षक पात्रता परीक्षा 28 नवंबर को हो सकती है। यह प्रस्ताव उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव ने भेजा है। पहले 19 दिसंबर को परीक्षा कराने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसे बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने यह कहकर लौटा दिया था कि इसे और पहले कराया जाए। ऐसे में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर यह नई तिथि प्रस्तावित की गई है। इस पर मुहर लग जाने पर परीक्षा कराने की तैयारी परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय शुरू कर देगा।

    उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए टीईटी करना अनिवार्य है। ऐसे में परिषद के विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए प्रतियोगी इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। वर्ष 2020 में कोरोना संक्रमण की रफ्तार ज्यादा होने के कारण यह परीक्षा नहीं कराई गई थी, ऐसे में प्रतियोगी जल्दी परीक्षा कराने की मांग कर रहे थे।

    उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा कराने वाली संस्था परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से पहले 19 दिसंबर की तिथि परीक्षा के लिए प्रस्तावित की गई थी, लेकिन इसे विभागीय मंत्री ने मंजूरी न देकर कहा था कि जब 2020 में परीक्षा नहीं हुई तो इस बार इतना विलंब क्यों किया जा रहा है। हालांकि इसके पहले भी परीक्षा कराने के प्रयास किए गए थे। शासन ने 15 मार्च को परीक्षा कराने की समय सारणी जारी कर दी थी।

    18 मई से एक जून तक आनलाइन आवेदन लिए जाने थे। परीक्षा 25 जुलाई को होनी थी। उसी दौरान कोरोना की दूसरी लहर आने के कारण आवेदन प्रकिया रोक दी गई। अब विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव संजय कुमार उपाध्याय ने नई तारीख प्रस्तावित की है। दिसंबर के बाद कभी भी विधानसभा चुनाव कराए जा सकते हैं, इसलिए इतना समय लिया गया है कि परीक्षा की प्रक्रिया पूरी की जा सके।


    उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा 28 नवंबर को हो सकती है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से इसके लिए प्रस्ताव भेजा गया है। अभ्यर्थी काफी शिद्दत से इस परीक्षा का इंतजार कर रहे हैं। शासन की ओर से इस तिथि पर मुहर लगने के बाद परीक्षा नियामक जल्द ही इसके लिए अभ्यर्थियों से आवेदन मांगेगा।


    प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती में शामिल होने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया गया है। 2019 में यह आखिरी बार परीक्षा हुई थी। 2020 में कोरोना वायरस संक्रमण के चलते यह परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी। इसके चले प्रतियोगी लंबे समय से 2021 टीईटी का इंतजार कर रहे हैं। अब जबकि संक्रमण कम हो गया है तो परीक्षा नियामक प्राधिकारी इसके लिए सक्रिय हो गया है। शासन को 28 नवंबर को परीक्षा कराने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। 

    संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों की होगी एनपीएस कटौती

    संस्कृत स्कूलों के शिक्षकों की होगी एनपीएस कटौती


    प्रयागराज : जिले के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों से संबद्ध प्राइमरी और एडेड संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों को 16 साल बाद न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) का लाभ मिलने की आस जगी है।


    प्रयागराज की वित्त एवं लेखाधिकारी पायल सिंह ने इसके लिए 5 सितंबर को प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों को पत्र लिखकर एनपीएस के आवेदन मांगे हैं। ताकि प्रान आवंटन करते हुए उनके अभिदाता एवं नियोक्ता अंशदान की कटौती तथा निवेश सुनिश्चित कराया जा सके।

    जिले में 25 संस्कृत विद्यालयों के शिक्षकों को भुगतान हो रहा है। इनमें कार्यरत कुल 75 शिक्षकों में से 56 एनपीएस वाले हैं। संबद्ध प्राइमरी के 44 स्कूल हैं। 23 बालक में 152 व 21 बालिका विद्यालय में 172 कुल 312 शिक्षक हैं। इनमें एनपीएस वालों की संख्या स्पष्ट नहीं है लेकिन 80 फीसदी एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त हैं।

    प्रदेश के शिक्षा मंत्री, अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक) तथा शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को बताना चाहिए कि योजना लागू होने के 16 वर्ष बाद भी अब तक एनपीएस में कटौती क्यों नहीं शुरू की गई। प्रावधानों को सरकार क्यों नहीं लागू कर पा रही है।

    -लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट)

    हरियाणा में 8वीं की बोर्ड परीक्षा लेने के फैसले से मचा बवाल, सीबीएसई व आईसीएसई ने जताई आपत्ति

    हरियाणा में 8वीं की बोर्ड परीक्षा लेने के फैसले से मचा बवाल, सीबीएसई व आईसीएसई ने जताई आपत्ति


    8वी कक्षा के बच्चों की वार्षिक बोर्ड परीक्षा अब हरियाणा बोर्ड द्वारा ली जाएगी.

    सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड का कहना है कि सरकार के इस फैसले से काफी दिक्कतें खड़ी होने वाली हैं. इस से बच्चों की पढ़ाई और करियर में अस्थिरता आएगी जिससे पढाई की क्वालिटी में कमी आना तय है.


    हरियाणा. हरियाणा सरकार ने हरियाणा निशुल्क अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियम 2011 में बदलाव कर कक्षा आठवीं के लिए बोर्ड आरंभ करने का फैसला किया है. जिसके तहत अब हरियाणा में सभी शिक्षा बोर्डो के 8वी कक्षा के बच्चों की वार्षिक बोर्ड परीक्षा अब हरियाणा बोर्ड द्वारा ली जाएगी. इस संदर्भ में शिक्षा विभाग द्वारा सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से जिलों में सभी अन्य बोर्डों के स्कूलों की सूची मांगी गई है. वहीं सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड द्वारा इस फैसले पर विरोध जताया जा रहा है. सीबीएसई स्कूल यूनियन इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने को कहा है.


    सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड का कहना है कि सरकार के इस फैसले से काफी दिक्कतें खड़ी होने वाली हैं. इस से बच्चों की पढ़ाई और करियर में अस्थिरता आएगी जिससे पढाई की क्वालिटी में कमी आना तय है. ऐसे में हम इस फैसले का विरोध करते है. इसके साथ ही सीबीएसई स्कूल यूनियन भी इस फैसले पर कड़ा एतराज जता रहे है. यूनियन का कहना है कि जिस बोर्ड में बच्चा पढ़ रहा है उसी को वार्षिक परीक्षा लेने का हक है. ऐसे में शिक्षा विभाग का यह फैसला गैर कानूनी है. यूनियन का कहना है कि हम इसके बारे में सरकार से बातचीत करेंगे अगर जरूरत पड़ी तो कोर्ट का रुख किया जाएगा.


    बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाना है मुख्य लक्ष्य
    इस बारे में हरियाणा स्कूल बोर्ड एजुकेशन के चेयरमैन ने जानकारी देते हुए बताया कि पहले हरियाणा शिक्षा बोर्ड कक्षा 5,8,10 ओर 12 के लिए बोर्ड की परीक्षा लेता था. लेकिन उसके बाद शिक्षा का अधिकार नियम लागू होने से सिर्फ 10वी ओर 12वी की परीक्षा होने लगी. लेकिन अब हरियाणा शिक्षा नीति में संशोधन के बाद हरियाणा में सभी बोर्डों के 8वी कक्षा के बच्चों की वार्षिक परीक्षा हरियाणा विद्यालय बोर्ड द्वारा ली जाएगी बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाना इसका मुख्य लक्ष्य है.