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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, June 17, 2026

    प्रयागराज : NPS के अंतर्गत नियुक्ति तिथि से नियमित कटौती प्रारंभ होने तक के लंबित अंशदान के संबंध में निर्देश

    प्रयागराज : NPS के अंतर्गत नियुक्ति तिथि से नियमित कटौती प्रारंभ होने तक के लंबित अंशदान के संबंध में निर्देश



    शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार

    शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


    शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

    16 जून 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

    गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    27 अप्रैल 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


    कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

    कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026
    निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज


    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    Tuesday, June 16, 2026

    फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

    फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

    दो साल में दो निजी विवि पर हुई कार्रवाई, 

    15 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने व आर्थिक शोषण आदि से बचाने के लिए यहां की सुविधाओं की जांच की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत अब तक दो विवि में कमियां मिलने पर कार्रवाई की गई है। वर्तमान सत्र में मंडलायुक्त व डीएम की अध्यक्षता वाली 11 कमेटियों को जिलों में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश उच्च शिक्षा परिषद ने दिया है।

    प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। पिछले साल जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद में निर्धारित सीट से ज्यादा प्रवेश लेने और फर्जी डिग्री मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। इस विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त की गई है। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। मोनाड यूनिवर्सिटी, हापुड़ में फर्जी डिग्री-मार्क्सशीट मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भी इसकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। बाराबंकी में एक निजी विश्वविद्यालय में हुए बवाल के बाद प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों की भवन, भूमि, सुविधा, गुणवत्ता, डिग्री आदि से जुड़ी जांच कराने का निर्णय लिया गया।

    उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले महीने प्रदेश में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में 11 समितियों का गठन किया है। इनको संबंधित मंडल के निजी विश्वविद्यालयों की जांच करने का दायित्व दिया गया है। इसमें संबंधित जिले के डीएम द्वारा नामित उप जिलाधिकारी, राज्य विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी व कुलसचिव, संबंधित मंडल के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आदि शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने इन कमेटियों को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। 


    यह प्रमुख चीजें जांचनी होंगी : जमीन, बिल्डिंग, साइट प्लान रिकॉर्ड के साथ, स्पांसर बॉडी, संस्थापक व पैटर्न, चांसलर, प्रो. चांसलर, वाइस चांसलर, प्रो. वीसी, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, स्टेच्यूटरी बॉडी, इसकी बैठकें, ऑडिट फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बैंक एकाउंट स्टेटमेंट, एफडी, खरीद, एसेट स्टॉक वेरीफिकेशन, लाइब्रेरी में हुई खरीद, लाइब्रेरी बजट, यूनिवर्सिटी कैलेंडर परीक्षा व पढ़ाई, एसएसएस-एनसीसी गतिविधि, वार्षिक रिपोर्ट, यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, बीसीआई आदि संस्थाओं के एप्रूवल, एडमिशन पॉलिसी, एक्रीडिटेशन, रैंकिंग, स्टूडेंट ग्रिवांस आदि से जुड़ी चीजें जांचनी हैं।




    निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच

    निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रमों और नकल रोकने के उपायों की होगी पडताल

    खेल मैदान, खेल सुविधाएं, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन होगा


    7 जून 2026
     लखनऊप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समितियां विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। जांच उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कामन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और समाप्ति, परीक्षा कार्यक्रम और अवकाश की तिथियों का मिलान किया जाएगा। यह भी जांचा जाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर छात्रों और कर्मचारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं।

    परिषद की ओर से गठित समितियां निजी विश्वविद्यालयों की वार्षिक और गतिविधि रिपोर्ट की भी समीक्षा करेंगी। वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों की स्थापना, छात्र नामांकन और उनके कार्यक्रमों की भी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मैदान, खेल सुविधाएं, आडिटोरियम, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

    छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनकी गतिविधियों में भागीदारी कितनी है। परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा होगी। सीसीटीवी निगरानी, शोध में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन साफ्टवेयर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश तिथियों और परीक्षा कार्यक्रमों को भी राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परखा जाएगा। समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाणपत्रों के प्रारूप, सुरक्षा फीचर और नामकरण की भी जांच करेंगी। राज्य सरकार को भेजे जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन, छात्र संख्या, वित्तीय विवरण और अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सभी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजी गई है या नहीं।




    प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

    समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?

    27 मई 2026
    लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।


    सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी।  यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।

    नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।

    कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा। 


    24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया 
    विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।


    नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
    आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।


    Monday, June 15, 2026

    मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में अगले सत्र से प्री-प्राइमरी से 12वीं तक यूपी बोर्ड से होगी पढ़ाई, हर जिले में होंगे दो कंपोजिट विद्यालय, 150 में से 86 का निर्माण शुरू

    मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में अगले सत्र से प्री-प्राइमरी से 12वीं तक यूपी बोर्ड से होगी पढ़ाई, हर जिले में होंगे दो कंपोजिट विद्यालय, 150 में से 86 का निर्माण शुरू

    प्री-प्राइमरी से 12वीं तक शिक्षा के लिए होंगी आधुनिक सुविधाएं


    लखनऊः प्रदेश में स्थापित किए जा रहे मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालयों में प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई यूपी बोर्ड पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। इन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जाएगी। सभी वर्गों और पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को यहां प्रवेश का अवसर मिलेगा। अगले सत्र से इन विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू करने की तैयारी है।


    प्रदेश में कुल 150 मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालय बनाए जाने हैं। इनमें से 126 विद्यालयों के निर्माण के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है जबकि 86 विद्यालयों में निर्माण कार्य शुरू हो गया है। कई विद्यालयों का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। पांच से 10 एकड़ भूमि पर बनने वाले इन विद्यालयों के निर्माण पर करीब 4,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रत्येक जिले में दो विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। एक विद्यालय के निर्माण पर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

    प्रत्येक विद्यालय में लगभग 1,500 विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था होगी। इन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों से स्थानांतरण के माध्यम से की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर नए पद भी सृजित किए जाएंगे। यहां विज्ञान, गणित, वाणिज्य और कला वर्ग की पढ़ाई के साथ ड्रीम लैब, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, एआइ और रोबोटिक्स लैब, भाषा प्रयोगशाला तथा कौशल विकास केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इन विद्यालयों में ओपेन जिम, रनिंग ट्रैक, वालीबाल, बैडमिंटन और हाकी कोर्ट, इंडोर प्ले एरिया, योग केंद्र, मिनी स्टेडियम और खेल के मैदान भी विकसित हो रहे हैं।

    निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

    निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala


    दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।


    नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।


    महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।

    एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।

    पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।

    याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।

    डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित न होने व परिणाम रोकने के मामले में PNP से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित न होने व परिणाम रोकने के मामले में PNP से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

    डीएलएड-2021 बैच की प्रयागराज निवासी व चार अन्य की याचिका पर कोर्ट ने मांगी जानकारी


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित नहीं करने और परिणाम रोकने के मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) अपना पक्ष रखें। अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी।


    यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमशेरी की एकल पीठ ने प्रयागराज की राधिका और चार अन्य की याचिका पर दिया है। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची बैच के हैं। इन्होंने चार अप्रैल 2025 को द्वितीय सेमेस्टर की बैंक परीक्षा में भाग लिया था।

    परीक्षा के बाद पीएनपी ने अधिकांश का परिणाम जारी कर दिया पर कुछ अभ्यर्थियों की अंकतालिका में गणित के अंक अंकित नहीं किए। इससे उनका द्वितीय सेमेस्टर का परिणाम रिजेक्ट दिख रहा।

    अभ्यर्थी डीएलएड चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं पर द्वितीय में बैक पेपर के परिणाम में इस त्रुटि से अंतिम परिणाम भी प्रभावित हो गया है।

    Sunday, June 14, 2026

    सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में अब तक 3.5 लाख का डाटा एकत्र

    सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में अब तक 3.5 लाख का डाटा एकत्र

    इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा


    लखनऊ। प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सालाना पांच लाख तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। 


    स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) द्वारा विकसित डेटा कलेक्शन पोर्टल से कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण जुटाया जा रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों का डाटा संकलित किया गया है। उन्होंने बताया कि डेटा सही होने से कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी। अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा।

    साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले विभाग पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और उसे त्रुटिरहित बनाने में जुटा है। 

    नई शिक्षक भर्ती से पहले शिक्षकों को मिले गृह जिले में तैनाती, PSPSA की मांग

    नई शिक्षक भर्ती से पहले शिक्षकों को मिले गृह जिले में तैनाती, PSPSA की मांग 


    लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती से पहले वर्तमान में काम कर रहे परिषदीय शिक्षकों को गृह जिले में तैनाती की मांग की है। इसके लिए एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।

    एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा है कि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक-शिक्षिकाएं 20 साल से अधिक से अपने गृह जिले से काफी दूर सेवा दे रहे हैं। उसमें उन्हें काफी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ हा है।

    सरकार परिषदीय विद्यालयों में खाली पदों के सापेक्ष नए शिक्षकों की भर्ती करने का विचार कर रही है। ऐसे में इससे पहले वर्तमान कार्यरत शिक्षकों के तबादले नहीं किए गए तो जिलों में पद भरने से ये अनुभवी शिक्षक अपने गृह जिला जाने के अवसर से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगे। ऐसे में शिक्षकों को एक से दूसरे जिले में तबादले का अवसर दिया जाए। 


    केंद्रीय विद्यालयों कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य

    केंद्रीय विद्यालयों कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य


    नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन अनिवार्य रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है। 


    शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा 29 मई को जारी परिपत्र में कहा गया है कि सभी विद्यालयों को तीसरी भाषा (आर-3) के चयन की प्रक्रिया छात्रों और अभिभावकों से पूरी कर लेनी चाहिए। नए प्रावधान के अनुसार, तीसरी भाषा के रूप में छात्र संस्कृत या अपने राज्य/क्षेत्र की किसी अनुसूचित भाषा का चयन कर सकते हैं। यह भाषा पहली भाषा (हिंदी) व दूसरी (अंग्रेजी) से अलग होगी।

    Saturday, June 13, 2026

    इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड के लिए आवेदन शुरू, अंतिम तिथि 31 जुलाई, शिव नादर फाउंडेशन ऑक्सफोर्ड विवि के साथ मिलकर देगा अवार्ड

    इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड के लिए आवेदन शुरू, अंतिम तिथि 31 जुलाई, शिव नादर फाउंडेशन ऑक्सफोर्ड विवि के साथ मिलकर देगा अवार्ड

    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आवेदन बढ़ाने के दिए निर्देश


    लखनऊ। शिव नादर फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का सेड बिजनेस स्कूल मिलकर इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड देगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। 


    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शिक्षकों से अधिक आवेदन के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र भेजा है। विभाग के संयुक्त निदेशक विवेक नौटियाल ने यह जानकारी दी। पुरस्कार आठ श्रेणियों में प्रदान किया जाएगा। इनमें व्यवसाय अध्ययन, उद्यमशीलता, कंप्यूटर विज्ञान, अंग्रेजी, पर्यावरणीय विज्ञान, भूगोल, गणित और भौतिक विज्ञान शामिल हैं। आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक नियमित शिक्षकों का नामांकन कर सकते हैं। वे अधिकतम दो श्रेष्ठ शिक्षकों को नामांकित कर सकेंगे।


    चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। चयनित शिक्षकों को सेड बिजनेस स्कूल में एक हफ्ते के व्यक्तिगत कार्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति मिलेगी। यह कार्यक्रम शिक्षा और वैश्विक शिक्षाशास्त्र के नेतृत्व पर केंद्रित होगा। विजेता 16 शिक्षकों को शिक्षण कौशल सुधारने के लिए पांच-छह सप्ताह का ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम भी मिलेगा। डीआईओएस को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षकों को व्हाट्सएप समूह और ईमेल से 31 जुलाई तक आवेदन करने के लिए प्रेरित करें। 

    वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया होगी आसान, यूपी बोर्ड ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा, ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा

    वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया होगी आसान, यूपी बोर्ड ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा, ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा

    12 जून 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्त विहीन विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन संशोधनों का उद्देश्य भूमि मानकों में लचीलापन लाना और मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाना है। इस प्रस्ताव को परिषद के सचिव भगवती सिंह ने शासन को भेज दिया है। 

    भूमि और स्वामित्व नियमों में बदलाव : प्रस्तावित विनियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 3000 वर्गमीटर भूमि का मानक बरकरार है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह 6000 वर्गमीटर है।  हालांकि, 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त संस्थाओं के लिए क्षेत्रफल पुराने मानक के अनुसार ही रहेगा। इंटरमीडिएट नवीन वर्ग या अतिरिक्त विषय की मान्यता के लिए अतिरिक्त कक्षा कक्ष और प्रयोगशाला आवश्यक होगी।

    विद्यालय समिति, ट्रस्ट या कंपनी के अतिरिक्त अब सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालय चला सकेंगे। विद्यालयों को 30 वर्ष की पंजीकृत लीज डीड पर भी मान्यता दी जा सकेगी।


    आवेदन प्रक्रिया और शुल्क में सरलीकरण

    मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा। इससे संस्थान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर किसी भी समय आवेदन कर सकेंगे। पहले आवेदन की समय सीमा 31 मई तक निर्धारित थी। विलंब शुल्क 20,000 रुपये का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। राजकीय कोषागार में जमा शुल्क का कोष पत्र चालू वित्तीय वर्ष का होना आवश्यक नहीं है। पूर्व के वित्तीय वर्ष का कोष पत्र भी मान्य होगा। यह कदम अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 13 अप्रैल 2026 को हुई बैठक के निर्देशों के बाद उठाया गया है। बैठक में भूमि मानकों में लचीलापन लाने पर जोर दिया गया था। साथ ही मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल को पूरे वर्ष खोले रखने का सुझाव दिया गया है। संस्थागत स्वामित्व के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराने पर भी विचार हुआ। प्रस्तावित संशोधनों से पुराने भूमि मानकों पर मान्यता प्राप्त विद्यालयों की अवरुद्ध उच्चीकरण प्रक्रिया बहाल हो सकेगी। इससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। परिषद विनियमों के अध्याय-सात के कई विनियमों में संशोधन किया जाना अपेक्षित है।




    अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण

    पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए विषय शुरु करने में भी राहत

    3 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके तहत अब सीबीएसई की भांति स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), स्थानीय निकाय आदि को मान्यता देने में शामिल किया जाएगा। इससे कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से शिक्षा में निवेश बढ़ेगा।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से तीन दिनों के अंदर इससे जुड़ा संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर से इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता मानकों में शिथिलीकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में दी गई संस्तुति की आख्या शासन को मिली थी।


    इसके तहत वर्तमान में विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए उनका संचालन सोसाइटी, ट्रस्ट या पंजीकृत कंपनी के माध्यम से होना अनिवार्य है। अब सीबीएसई की तर्ज पर सांविधिक निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को भी विद्यालय संचालन और मान्यता के दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।


    इसके अलावा समिति ने भूमि संबंधी मानकों में भी लचीलापन देने की सिफारिश की है। 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त कर चल रहे विद्यालयों को वर्तमान संशाधनों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे विद्यालयों को अतिरिक्त विषय या सेक्शन की मान्यता के लिए नए भूमि मानकों का पालन नहीं करना होगा। यदि विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला हैं तो अतिरिक्त भूमि की अनिवार्यता में छूट दी जाए।


    साल भर खुला रहेगा ऑनलाइन पोर्टल

    मान्यता आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाने की संस्तुति समिति ने की है। समिति ने मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पूरे साल खुला रखने की सिफारिश की है। इसमें आगामी परीक्षा वर्ष के लिए मान्यता पर विचार तभी होगा जब संबंधित विद्यालय का आवेदन सभी औपचारिकताओं के साथ 31 मई तक मिल जाए। 31 मई के बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले से अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा।

    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों के भुगतान के सम्बन्ध में


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों के भुगतान के सम्बन्ध में

    Friday, June 12, 2026

    जनगणना और सार्वजनिक परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अर्जित अवकाश देने की माध्यमिक शिक्षा विभाग की सिफारिश, शासन लेगा अंतिम निर्णय

    ड्यूटी में बीत रही छुट्टी तो मिलेगा अर्जित अवकाश,  एडेड माध्यमिक शिक्षकों के लिए विभागीय प्रस्ताव प्रेषित


    लखनऊ । गर्मियों की छुट्टियों में ड्यूटी के बदले एडेड माध्यमिक शिक्षकों को अलग से अर्जित अवकाश मिल सकता है। शिक्षकों की मांग पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शासन को इसका प्रस्ताव भेज दिया है। इसमें राजकीय शिक्षकों की तरह एडेड माध्यमिक शिक्षकों को भी अर्जित अवकाश देने की सिफारिश की गई है।

    बेसिक स्कूलों में 20 मई से 15 जून तो माध्यमिक स्कूलों में 21 मई से 30 जून तक गर्मी की छुट्टियां होती है। इस बार ज्यादातर शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना में लगाई गई है। इसके अलावा मई-जून में कई प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। इनमें भी ड्यूटी लगाई जा रही है। शिक्षकों के लिए बिना अनुमति जिला छोड़ने पर भी रोक है। ऐसे में ये शिक्षक अर्जित अवकाश की मांग कर रहे है। माध्यमिक शिक्षक संघ की इस मांग पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने शासन को प्रस्ताव भेजा है।

    उम्मीदे बढ़ी माध्यमिक शिक्षा निदेशालय से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अर्जित अवकाश के लिए बेसिक शिक्षकों की उम्मीदें भी बढ़ गई है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षकों को अर्जित अवकाश नहीं मिलता। ग्रीष्मावकाश भी नहीं मिल रहा तो अर्जित अवकाश दिया जाए।



    जनगणना में लगे शिक्षकों को दिया जाए अर्जित अवकाश पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक का पत्र हुआ वायरल

    लखनऊ। मई व जून में जनगणना और परीक्षा ड्यूटी में लगे एडेड माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को अर्जित अवकाश देने की मांग उठी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के पूर्व निदेशक महेंद्र देव का इस संबंध में भेजा गया पत्र वायरल हुआ है। शिक्षकों को गर्मी की छुट्टी में जनगणना और 21 मई से 30 जून तक परीक्षा ड्यूटी में लगाया गया है। उन्हें राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की भांति उपार्जित अवकाश दिया जाए। पूर्व निदेशक महेंद्र देव ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री लालमणि द्विवेदी के ज्ञापन का हवाला दिया। 


    जनगणना और सार्वजनिक परीक्षाओं में ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को अर्जित अवकाश देने की माध्यमिक शिक्षा विभाग की सिफारिश, शासन लेगा अंतिम निर्णय

    प्रयागराज/लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जनगणना, सार्वजनिक परीक्षाओं तथा उनसे संबंधित प्रशिक्षण कार्यों में लगाए गए सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को अर्जित अवकाश (Earned Leave) देने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस संबंध में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को पत्र भेजकर आवश्यक निर्णय लेने का अनुरोध किया है।

    पत्र में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2026 में मई और जून माह के दौरान जनगणना कार्य तथा विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं के आयोजन, प्रशिक्षण एवं अन्य शासकीय कार्यों के कारण अनेक जिलों में माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की ग्रीष्मावकाश अवधि प्रभावित हुई है। 21 मई से 30 जून तक निर्धारित ग्रीष्मावकाश के दौरान कई शिक्षकों की लगातार ड्यूटी लगाई गई, जिससे वे अवकाश का पूरा लाभ नहीं उठा सके।

    शिक्षा निदेशक ने अपने पत्र में कहा है कि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 तथा वित्तीय नियमों के अंतर्गत ऐसे मामलों में अर्जित अवकाश प्रदान करने का प्रावधान पहले से मौजूद है। पूर्व में भी बोर्ड परीक्षाओं, मूल्यांकन, प्रशिक्षण, जनगणना तथा अन्य शासकीय कार्यों में लगाए गए शिक्षकों को प्रभावित ग्रीष्मावकाश के बदले अर्जित अवकाश दिए जाने संबंधी आदेश जारी किए जाते रहे हैं।


    पत्र के प्रमुख बिंदु

    ● वर्ष 2026 में जनगणना और विभिन्न सार्वजनिक परीक्षाओं के कारण अनेक शिक्षकों का ग्रीष्मावकाश प्रभावित हुआ।

    ● सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों को लगातार प्रशिक्षण और परीक्षा संबंधी कार्यों में लगाया गया।

    ● प्रभावित शिक्षकों को अवकाश के बदले अर्जित अवकाश दिए जाने का प्रावधान नियमों में उपलब्ध है।

    ● पूर्व में भी बोर्ड परीक्षा, मूल्यांकन, प्रशिक्षण और जनगणना कार्यों के लिए प्रभावित अवकाश के बदले अर्जित अवकाश स्वीकृत किए जाते रहे हैं।

    ● माध्यमिक शिक्षक संघ द्वारा इस संबंध में शासन से मांग उठाई गई थी।

    ● शिक्षा निदेशक ने शासन को भेजे पत्र में अनुरोध किया है कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को भी राजकीय विद्यालयों के शिक्षकों की भांति अर्जित अवकाश प्रदान करने पर विचार किया जाए।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जनगणना जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्य तथा सार्वजनिक परीक्षाओं के सफल संचालन में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। ऐसे में उनके प्रभावित अवकाश की भरपाई अर्जित अवकाश के रूप में किया जाना न्यायोचित और नियमसम्मत होगा। अब इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।


    Thursday, June 11, 2026

    139 बीईओ और 369 लिपिकों के तबादले की सूची तैयार, शासन की मंजूरी मिलते ही जारी होगा आदेश

    139 बीईओ और 369 लिपिकों के तबादले की सूची तैयार, शासन की मंजूरी मिलते ही जारी होगा आदेश


    लखनऊ/ प्रयागराज । प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात 139 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और 369 लिपिकों के स्थानांतरण की सूची बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को भेज दी है।

    प्रदेश के विभिन्न जिलों में तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात 139 खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) और 369 लिपिकों के स्थानांतरण की सूची बेसिक शिक्षा निदेशालय ने शासन को भेज दी है। शासन की मंजूरी मिलते ही तबादला आदेश जारी किए जा सकते हैं।



    सूत्रों के अनुसार वर्तमान में प्रदेश में 862 से अधिक खंड शिक्षा अधिकारी तैनात हैं। 15 से अधिक अधिकारी भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबित हैं। कई अन्य के खिलाफ जांच चल रही है। शासन की स्थानांतरण नीति के तहत एक ही जिले में तीन वर्ष और मंडल में सात वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके बीस फीसदी खंड शिक्षा अधिकारियों और लिपिकों को स्थानांतरित किया जाना है।

    बेसिक शिक्षा निदेशालय ने स्थानांतरण की सूची मई माह में ही शासन को भेज दी गई थी। सूची भेजे जाने के बाद निदेशक और अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) के पदों पर नई तैनाती की जा चुकी है।

    ऐसे में तबादलों के लिए विभागीय स्तर पर चर्चाओं का दौर जारी है। इस संबंध में अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) मनोज कुमार द्विवेदी ने कहा कि उनकी तैनाती से पहले ही स्थानांतरण सूची शासन को भेजी जा चुकी होगी। अब अंतिम निर्णय शासन स्तर से मंजूरी मिलने के बाद ही होगा।

    Wednesday, June 10, 2026

    30 जून तक अपलोड करने होंगे शैक्षिक रिकार्ड, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश

    30 जून तक अपलोड करने होंगे शैक्षिक रिकार्ड, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों को दिए निर्देश

     समय सीमा के बाद बंद हो जाएगा अपलोड विंडो, छात्रों को एबीसी सुविधा का मिलेगा लाभ


     लखनऊराष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में लचीली और बहुविषयक पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को परीक्षा वर्ष 2025 के विद्यार्थियों के शैक्षिक रिकार्ड 30 जून तक अनिवार्य रूप से नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी और एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफार्म पर अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए यूजीसी ने मंगलवार को सार्वजनिक सूचना जारी की है।

    यूजीसी ने कहा है कि सभी क्रेडिट प्रदान करने वाले संस्थानों को छात्रों की मार्कशीट, ग्रेड शीट और संबंधित क्रेडिट डेटा को नेशनल एकेडमिक डिपाजिटरी और एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट (एबीसी) प्लेटफार्म पर निर्धारित समयसीमा के भीतर अपलोड करना होगा। यह कार्य अपार आइडी के साथ किया जाएगा, जिससे छात्रों को क्रेडिट संचय, क्रेडिट ट्रांसफर, क्रेडिट रिडेम्पशन और अन्य छात्र-केंद्रित सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके।

    यूजीसी ने स्पष्ट किया है कि यह निर्देश शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 29 मई को जारी पत्र व सात नवंबर 2024 के पूर्व निर्देशों के क्रम में जारी किए गए हैं। आयोग के अनुसार 30 जून की समयसीमा अंतिम होगी। इसके बाद परीक्षा वर्ष 2025 से संबंधित नए रिकार्ड अपलोड करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और अपलोड विंडो बंद कर दी जाएगी।

    हालांकि, पहले से अपलोड किए गए रिकार्ड में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर केवल विशेष परिस्थितियों में और नैड-एबीसी प्रणाली के निर्धारित नियमों के अनुसार संशोधन की अनुमति दी जा सकेगी।


    Tuesday, June 9, 2026

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी

    माध्यमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों की सूची 12 जून को आएगी, जून 18 तक शिक्षक डीआईओएस कार्यालय में तबादले के लिए करेंगे आवेदन

    सरप्लस वाले शिक्षकों को खुद आवेदन पर मिल सकेगा बेहतर विकल्प

    लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया 12 जून से शुरू होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सरप्लस के लिए स्वतः आवेदन करने वाले शिक्षकों को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी निर्देश के अनुसार 12 जून तक डीआईओएस एनआईसी की वेबसाइट पर सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी करेंगे। शिक्षक 18 जून तक डीआईओएस ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन करेंगे। डीआईओएस 25 जून तक आवेदन पत्रों का परीक्षण कर अनुमोदन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजेंगे। 30 जून तक शिक्षकों को कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि सरप्लस शिक्षकों से मिले विकल्पों पर तैनाती के लिए तय मानक के आधार पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। वहीं सरप्लस शिक्षक यदि अपनी नई तैनाती के लिए खुद आवेदन नहीं करते हैं तो खाली पद के सापेक्ष उन्हें किसी भी विद्यालय में समायोजित या स्थानांतरित कर दें। सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए सबसे आखिर में आने वाले शिक्षकों को सबसे पहले तबादला होगा। उन्हें सरप्लस माना जाएगा। 

    निदेशक ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जोन एक में जिले की नगरीय सीमा या जिला मुख्यालय से आठ किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन दो में जिले में तहसील मुख्यालय से दो किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन तीन में उपरोक्त से अतिरिक्त क्षेत्र के विद्यालय आएंगे। शासन ने जोन वाइज शिक्षकों के लिए मानक तय किए हैं।

    निदेशक ने सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए भी विस्तृत मानक की व्याख्यान की है। उन्होंने कहा है कि नई नियुक्ति-तैनाती में जोन तीन में सबसे पहले नियुक्ति-तैनाती की जाएगी। इसकी न्यूनतम अवधि तीन साल की होगी। पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को तबादले का विकल्प दिया जाएगा।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी 
     




    राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के जून अंत तक होंगे तबादले, शासन ने जारी किया शासनादेश, संवर्ग में 20 फीसदी से अधिक नहीं किए जाएंगे तबादले


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जून में पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। बाद में सामान्य तबादले होंगे। संवर्ग की संख्या के 20 फीसदी तक तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह ने निर्देश जारी किया। कहा, राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसमें कार्यरत विद्यालय में बाद में कार्यभार संभालने वाले को पहले सरप्लस माना जाएगा। वहीं, सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को इसमें यथासंभव शामिल नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दूसरे चरण में चार श्रेणी के शिक्षकों को निर्धारित मानक पर तबादला दिया जाएगा। इसमें सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, यदि पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में अलग-अलग जिले में तैनात हैं। तीसरे चरण में शेष शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

    सचिव ने कहा है कि संवर्ग की संख्या के 20 प्रतिशत सीमा तक तबादले होंगे। इसे बढ़ाने का अधिकार विभागीय मंत्री के पास होगा। आवेदन से लेकर तबादला प्रक्रिया जून में ही पूरी की जाएगी। ताकि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती के स्थान से अलग संबद्ध नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक तैनात नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


    सरप्लस शिक्षकों के लिए मानक

    ◾खुद के दिव्यांग होने पर 10 से 20 नंबर

    ◾पत्नी-पति, बच्चे के दिव्यांग होने पर 10 नंबर

    ◾राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक होने पर 10 नंबर

    ◾विधवा-तलाकशुदा महिला शिक्षिका को 10 नंबर

    ◾आश्रित बच्चों की देखभाल वाले पुरुष शिक्षकों को 10 नंबर

    ◾महिला शिक्षिका होने पर 10 नंबर

    ◾जोन 3 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾जोन 2 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾शिक्षक की आयु के अनुसार हर साल के लिए एक नंबर



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी 


    Monday, June 8, 2026

    अब राजकीय और एडेड स्कूलों से ही इंटर्नशिप कर सकेंगे बीएड विद्यार्थी, एनसीटीई के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग की पहल

    अब राजकीय और एडेड स्कूलों से ही इंटर्नशिप कर सकेंगे बीएड विद्यार्थी, एनसीटीई के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर शिक्षा विभाग की पहल
     
    बीएड पाठ्यक्रम के तहत इंटर्नशिप कार्यक्रम होगा लागू 

    एनसीटीई की व्यवस्था के प्रभावी क्रियान्वयन पर गंभीर

    08 जून 2026
    प्रयागराज। बीएड पाठ्यक्रम करने वाले छात्र-छात्राओं को राजकीय या सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से प्रशिक्षुता (इंटर्नशिप) करनी होगी। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के नियमों को सख्ती से लागू करने को लेकर उच्च शिक्षा विभाग ने पहल की है। दो साल के बीएड पाठ्यक्रम में पढ़ने वाले छात्रों के लिए 20 हफ्ते की इंटर्नशिप जरूरी होगी।

    पहले साल चार सप्ताह और दूसरे में 16 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य होगी। इसका रिकॉर्ड भी प्रस्तुत करना होगा। अब तक तमाम संस्थान फर्जी इंटर्नशिप प्रमाणपत्र लगा देते थे। इससे गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण नहीं हो पा रहा था।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पांच जून को पत्र लिखा है कि एनसीटीई रेगुलेशन 2014 में दी गई व्यवस्था के अनुसार प्रदेश के सभी बीएड कॉलेजों (सरकारी अथवा निजी) में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कराया जाए।



    बीएड में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप अनिवार्य


    9 मई 2026
    लखनऊ। बीएड के दो वर्षीय पाठ्यक्रम में 20 सप्ताह की इंटर्नशिप जरूरी होगी। प्रशिक्षुओं को पहले वर्ष चार, दूसरे वर्ष 16 हफ्ते की इंटर्नशिप करनी होगी। 


    इन्हें राजकीय माध्यमिक स्कूलों पढ़ाने भेजा जाएगा। कहीं राजकीय स्कूल नहीं है तो निजी में भेजा जाएगा। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के नियम सख्ती से लागू होंगे। 

    उच्च शिक्षा संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने जिलों को निर्देश भेज दिए हैं। कॉलेज इंटर्नशिप के लिए छात्र सूची डीआईओएस को भेजेंगे।

    कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट

    कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट 

    हाईकोर्ट ने किताबें तय करने का का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का अधिकार बरकरार रखा

    केवल बोर्ड की प्रकाशित किताबों को अपनाने का दिया गया था निर्देश

    कुछ स्कूलों के खिलाफ अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने की थीं शिकायतें


    जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कक्षा छह से आठ तक के निजी स्कूल अब मनमर्जी या पसंद से किताबें नहीं चुन सकेंगे। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के लिए किताबें तय करने का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) अधिकार बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का का फैसला स्कूली बच्चों और अभिभावकों पर सीधा असर डालेगा।


    कुछ निजी स्कूलों में जेकेबोस की किताबों के बदले या अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने की शिकायतें आई थीं। इसके बाद जेकेबोस ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों को कक्षा छह से आठ तक के लिए केवल बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों को अपनाने और पढ़ाने का निर्देश दिया गया था।

    जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स यूनाइटेड फ्रंट इसे लेकर हाईकोर्ट में लेटर्स अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्कूली शिक्षा बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा छह से आठ के लिए बोर्ड की ओर से प्रकाशित पुस्तिकाओं को आवश्यक किए जाने संबंधी निर्देश दिए गए थे।

    हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील दायर की। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज कर दिया है और सिंगल जज के उस फैसले को ठहराया। डिवीजन बेंच ने कहा कि बोर्ड की ओर से पाठ्यक्रम और किताबों संबंधी बाध्यता का मकसद शैक्षिक मानकों को बनाए रखना और प्रदेश में शैक्षिक सामग्री में एकरूपता सुनिश्चित करना है।

    कोर्ट का दखल तभी सही है जब उसकी नीति मनमानी, गलत या कानून के खिलाफ हो। माना जा रहा है कि कोर्ट के इस फैसले से एक सिस्टम बनेगा और छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों पर बिना मंजूरी वाली किताबों का बोझ कम होगा। जेएनएफ


    इस आधार पर दी गई चुनौती

    अपील करने वाले ने इन निर्देशों को चुनौती दी थी। इसमें आधार बनाया गया कि बोर्ड पाठ्यक्रम और किताबें तय कर सकता है लेकिन वह निजी स्कूलों को सिर्फ बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। तर्क दिया गया कि इससे विद्यार्थी बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता की किताबें अपनाने के विकल्प से वंचित हो जाएंगे।

    निजी स्कूलों की दलील को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार जब कोई शैक्षिक संस्थान अपनी मर्जी से बोर्ड से संबद्धता लेता है तो उसकी शर्तों से जुड़ जाता है। इनमें जेकेबोस की ओर से तय पाठ्यक्रम और किताबें अपनाना भी शामिल है।




    पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

    पीएम मोदी की अध्यक्षता में शिक्षा क्षेत्र से जुड़े सुधारों पर होगा मंथन, 11 जून को होगी नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक

    राज्यों की आर्थिक प्रगति की रफ्तार कैसे बढ़े, इस पर भी विमर्श

    नई दिल्ली: देश में पेपर लीक की घटनाओं के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। यह बैठक 11 जून को नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की होगी और इसमें शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इस बैठक में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए आवश्यक मानव संसाधन विकास, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, सेकेंडरी स्तर की शिक्षा व्यवस्था, और बच्चों की एक्स्ट्रा कैरीकुलर गतिविधियों यानी खेल, सांस्कृतिक गतिविधियों और लीडरशिप कार्यक्रम आदि को लेकर किस तरह की नीति बनाई जाए, इस पर चर्चा होगी। साथ ही इस पर भी विमर्श होगा कि किस तरह से राज्यों में नियमों व व्यवस्थाओं को ज्यादा से ज्यादा उदारवादी बनाकर आर्थिक प्रगति की रफ्तार तेज की जाए।


    बैठक में सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों के भाग लेने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में पेपर लीक से संबंधित मुद्दे सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे, लेकिन कुछ मुख्यमंत्रियों द्वारा इस विषय को उठाए जाने की संभावना है। 

    सभी राज्यों को पहले ही यह संदेश दिया गया है कि शिक्षा क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होगी, ताकि मुख्यमंत्री अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकें। मुख्य रूप से, विकसित भारत के लक्ष्यों के अनुसार मौजूदा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव और केंद्र तथा राज्यों के बीच सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 

    कांग्रेस शासित राज्यों के नए मुख्यमंत्रियों जैसे कि केरल और कर्नाटक द्वारा पेपर लीक के मुद्दे को लेकर सरकार को असहज करने का प्रयास किया जा सकता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद हो रही इस बैठक में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय पहली बार भाग ले सकते हैं।

    सूत्रों का कहना है कि इस बैठक को मई, 2026 में पीएम मोदी की उनके मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ हुई अलग-अलग बैठकों के संदर्भ में भी देखना चाहिए। उक्त बैठकों में मोदी ने पश्चिम एशिया संकट से उत्पन्न चुनौतियों को दूर करने के लिए रिफार्म एक्सप्रेस व विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्यों के स्तर पर कारोबार करने की राह की अड़चनों को दूर करने को प्राथमिकता के तौर पर लेने की बात कही थी।

     मुख्य सचिवों की बैठक में कई ऐसे फैसले किए गए थे जिनको लेकर अब मुख्यमंत्रियों के साथ विमर्श किया जाएगा। इसमें वामपंथी हिंसा से मुक्त कराये गए जिलों व क्षेत्रों के लिए विशेष कार्यक्रम व योजनाओं को लागू करना भी शामिल है।