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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, March 9, 2026

    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात, जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात,  जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया।


    सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। 

    आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है।

    वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। 

    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
    यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

    बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

    सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


    भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

    हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

    निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


    यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

    गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

    मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

    सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

    मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

    परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



    हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

    प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

    18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



    1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

    ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

    10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

    सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

    बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

    उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

    कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



    यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

    मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


    प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

    बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

    पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।

    अलविदा (रमजान के अंतिम शुक्रवार) पर अवकाश घोषित करने की मांग

    अलविदा (रमजान के अंतिम शुक्रवार) पर अवकाश घोषित करने की मांग

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से अलविदा का 20 मार्च को अवकाश घोषित करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि रमजान का अंतिम शुक्रवार अलविदा 20 मार्च 2026 को पड़ रहा है। पूर्व के वर्षों में रमजान माह के अंतिम शुक्रवार को अलविदा का अवकाश घोषित किया जाता रहा है। किंतु बेसिक के कैलेंडर में यह अवकाश अब नहीं है। 


    20 मार्च को रमजान का अंतिम शुक्रवार पर अवकाश की मांग 

    उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व मान्यता) शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर 20 मार्च 2026 को “अलविदा जुमे” के अवसर पर अवकाश घोषित करने की मांग की है। 

    शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष मज़हर मुहम्मद खां और प्रदेश महामंत्री अरुणेन्द्र कुमार वर्मा के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि इस वर्ष रमजान माह का अंतिम शुक्रवार यानी 20 मार्च 2026 को “अलविदा जुमे” का दिन पड़ रहा है। परंपरागत रूप से इस दिन अवकाश घोषित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका में इस दिन को शामिल नहीं किया गया है। इसी आधार पर संघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस दिन के महत्व को देखते हुए इसे अवकाश घोषित किया जाए।



    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती

    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से एक सप्ताह तक प्रदेश व देश के शिक्षक पाती लिखने का अभियान चलाएंगे। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाएंगे।

    महासंघ ने कहा कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। बता दें कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के लिए एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने महासंघ का गठन किया है।


    जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 20 संगठन

    तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा।

    नौ मार्च से ‘शिक्षक की पाती’ अभियान से होगी शुरुआत


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।

    आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।

    तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।

    महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।






    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 23 शिक्षक संगठनों की 3 मई को लखनऊ कूच की तैयारी

    लखनऊ । शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क से सदन तक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। इसके लिए लखनऊ में संयुक्त मोर्चा के सभी शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ बनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संगठन सम्मिलित है।

    ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय के आह्वान पर हुई सभी शिक्षक संगठनों की बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, जूनियर शिक्षक संघ, विशिष्ट BTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश BTC शिक्षक संघ, TSCT सहित 23 शिक्षक संगठन सम्मिलित है और सभी संगठनों ने सर्वसहमति से TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का ऐलान किया है।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने एकजुट संघर्ष को शिक्षकों की सेवा शर्तों व सम्मान की लड़ाई बताया साथ ही उन्होंने कहा कि कोई नियम आदेश आने के बाद लागू होता है न कि पूर्व से। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक एकतरफा बताया वही अटेवा प्रमुख विजय कुमार बंधु ने टीईटी अनिवार्यता को सरकार की तानाशाही बताकर गरीबों की शिक्षा पर कुठाराघात करार देते हुए निजीकरण को बढ़ावा करार दिया।

    प्राथमिक शिक्षक संघ मीडिया प्रभारी हरि शंकर राठौर ने जानकारी दी कि टीईटी आंदोलन कों चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया जिसमें 3 मई को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ के ईको गॉर्डन में ऐतिहासिक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद शाम को शिक्षक विधानसभा की ओर कूच करेंगे। इससे पहले दिनांक 9 मार्च से 15 मार्च तक शिक्षकों की पाती अभियान चलेगा व 13 अप्रैल कों सभी जिला मुख्यालयों पर सायं 4 बजे से विरोध प्रदर्शन कर मशाल जुलुस निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम प्रधानमंत्री भारत सरकार कों ज्ञापन भेजा जायेगा।



    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में तीन मई को लखनऊ में रैली करेंगे शिक्षक, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ तेज करेगा आंदोलन


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए शिक्षकों का आंदोलन तेज हो रहा है। इसके तहत गठित अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने तीन मई को राजधानी लखनऊ में रैली व विधानसभा तक मार्च करने की घोषणा की है।


    महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा । कि इसके तहत पहले चरण में नौ से 15 मार्च के बीच शिक्षक की पाती लिखने का कार्यक्रम होगा। इसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष को ई मेल, पोस्टकार्ड से टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में पत्र लिखेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालेंगे।

    तब भी मांगे नहीं मानी गई तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में एकत्र होकर रैली करेंगे। साथ ही विधानसभा तक मार्च भी करेंगे। महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि फिर भी इसका समाधान नहीं हुआ तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का शिक्षक घेराव करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक बैठक फिर से राजधानी में सभी संगठनों की होगी।


    धर्मेंद्र प्रधान के बयान से नाराजगी

    शिक्षक-कर्मचारी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कहा कि पहले आप मेरी सरकार बनाओ, फिर हम टीईटी की अनिवार्यता पर विचार करेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय एवं विजय कुमार बंधु ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान सौदेबाजी है।


    महासंघ के समर्थन में आए कई संघ

    अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के समर्थन में कई और शिक्षक संगठन आए हैं। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि टीईटी की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने पत्र लिखकर समर्थन दिया है।

    स्कूल चलो अभियान' में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों पर भी रहेगी नजर

    स्कूल चलो अभियान' में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों पर भी रहेगी नजर


     लखनऊ । प्रदेश में कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके लिए इस बार 'स्कूल चलो अभियान' को और अधिक व्यापक रूप से चलाने की तैयारी की जा रही है। अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से शुरू होने वाले अभियान में सिर्फ नए बच्चों के नामांकन पर ही नहीं, बल्कि एक कक्षा उत्तीर्ण कर अगली कक्षा में प्रवेश लेने की बजाय पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्राप आउट) बच्चों पर भी नजर रखी जाए। 


    अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से संकल्प लेने को कहा कि कोई भी बालक या बालिका शिक्षा से बाहर न रहे। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अनुसार प्रदेश में प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से पांच) पर नामांकन दर 90.9 प्रतिशत है, जबकि ड्रापआउट दर करीब 1.9 प्रतिशत है।

    प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

    प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

    वित्तविहीन महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों में भी रखे जाएंगे

    34 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य नीति के तहत


    प्रयागराज। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर एक काउंसलर रखे जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य नीति के तहत सरकार ने बजट में 34 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। पहले चरण में 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद वित्तविहीन महाविद्यालयों में काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी। काउंसलर को निश्चित मानदेय दिया जाएगा।


    सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2025) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रत्येक छात्र के लिए प्रमाणित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा बाह्य विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी कवायद शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य नीति का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, संवर्धन और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी है ताकि शैक्षिक संस्थानों में हर छात्र समावेशी, सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में तनावमुक्त, आत्मनिर्भर एवं सकारात्मक रूप से विकसित हो सके।

    काउंसलर की नियुक्ति से त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा एवं आकस्मिक सहायता तो मिलेगी ही उत्पीड़न, भेदभाव, रैगिंग, यौन हिंसा और असंवेदनशील व्यवहार के खिलाफ गोपनीय शिकायत और सहयोग की व्यवस्था भी होगी। अभिभावकों के लिए जागरूकता, साक्षरता व जीवन कौशल शिक्षा का समावेश भी करेंगे जिससे वे बच्चों पर अनुचित दबाव न डालें तथा मानसिक संकट को समझ सकें। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, करियर काउसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास, सामर्थ्य व सकारात्मक मानसिकता का निर्माण होगा।



    खास-खास

    त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा, अस्पताल व आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन के लिए लिखित प्रोटोकॉल, टेली एवं मानस जैसे नंबर हर कक्षा, हॉस्टल, अन्य स्थलों एवं वेबसाइट पर प्रमुखता से लिखना होगा।

    सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक स्टाफ के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर साल में कम-से-कम दो बार प्रशिक्षण-मनोवैज्ञानिक फर्स्ट एड, चेतावनी संकेत पहचान आदि की व्यवस्था।

    नियमित रूप से छात्रों व अभिभावकों दोनों के लिए पाठ्येतर गतिविधियां (खेल, कला, व्यक्तित्व विकास) व संरचित करियर काउंसलिग।

    हॉस्टलों व आवासीय संस्थानों में छेड़छाड़, ड्रग्स, उत्पीड़न, टेम्पर-प्रूफ पंखे, छत/बालकनी की पहुंच नियंत्रित करने जैसे उपाय होंगे।

    एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग व अन्य संवेदनशील छात्रों के लिए विशेष ध्यान, सहयोग व गैर भेदभावपूर्ण वातावरण, क्रियाशील आंतरिक शिकायत समिति/एंटी रैगिंग सेल।

    Sunday, March 8, 2026

    RTE : दूसरे चरण में आए 1.02 लाख आवेदन, 9 मार्च को लॉटरी, 11 मार्च तक प्रवेश

    RTE : दूसरे चरण में आए 1.02 लाख आवेदन, 9 मार्च को लॉटरी, 11 मार्च तक प्रवेश

    8 मार्च 2026
    लखनऊ। प्रदेश में आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है। पहले चरण में करीब 2.61 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 96 हजार बच्चों को सीटें आवंटित की गई थीं। वहीं, दूसरे चरण के लिए अब तक 1.02 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। शनिवार को इसकी अंतिम तिथि थी। इस चरण के लिए 9 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी। जिन बच्चों को सीटें मिलेंगी, उन्हें निजी स्कूल 11 मार्च तक प्रवेश देंगे। 

    जिलों की बात करें तो सबसे अधिक 5949 आवेदन लखनऊ में आए हैं। इसके बाद आगरा (4509), बुलंदशहर (4502), कानपुर नगर (3617) और बिजनौर (3228) का स्थान है। वहीं, सबसे कम आवेदन श्रावस्ती, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और बलरामपुर में मिले हैं। समग्र शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि आरटीई प्रवेश का तीसरा और अंतिम चरण 12 से 25 मार्च तक चलेगा। 27 मार्च को लॉटरी निकलेगी और 29 मार्च तक प्रवेश पूरा कराया जाएगा। 




    प्राइवेट स्कूलों में 'फ्री' एडमिशन का मौका, आरटीई के तहत आवेदन का दूसरा चरण है शुरू, जानें पूरा शेड्यूल

    22 फरवरी 2026
    लखनऊ । उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क शिक्षा पाने का सपना देख रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर फिर से सामने आया है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है।

    शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने दूसरे चरण का बिगुल फूंक दिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए द्वितीय चरण के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शनिवार, 21 फरवरी से आधिकारिक तौर पर प्रारंभ हो गई है। इस चरण का उद्देश्य उन बच्चों को कवर करना है जो पहले चरण में आवेदन करने से चूक गए थे या जिन्हें सीट आवंटित नहीं हो सकी थी।

    पहले चरण का प्रदर्शन: लखनऊ अव्वल शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में प्रदेश भर से कुल 2,61,501 बच्चों ने निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए रुचि दिखाई थी। व्यापक स्तर पर हुई स्क्रूटनी और बीते बुधवार को जिला स्तर पर निकाली गई पारदर्शी लॉटरी के माध्यम से 96,000 बच्चों को सीटें आवंटित की जा चुकी हैं।

    जिलों की स्थिति देखें तो राजधानी लखनऊ 18,107 आवेदनों के साथ पहले स्थान पर रहा। वाराणसी 17,476 आवेदनों के साथ दूसरे, आगरा 13,627 आवेदनों के साथ तीसरे और कानपुर नगर 13,546 आवेदनों के साथ चौथे स्थान पर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्रों में आरटीई के प्रति जागरूकता काफी अधिक है।

    महानिदेशक के सख्त निर्देश: प्रतिदिन होगी समीक्षा स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने इस अभियान को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि दूसरे चरण में अधिक से अधिक पात्र बच्चों को जोड़ने के लिए ब्लाक और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्राप्त होने वाले आवेदनों के सत्यापन (Verification) का कार्य लटकाया न जाए। सत्यापन का कार्य अब प्रतिदिन पूर्ण किया जाएगा और इसकी राज्य स्तर से रोजाना समीक्षा की जाएगी।


    कैसे करें आवेदन और क्या है पात्रता? 
    दूसरे चरण के तहत अभिभावक आरटीई के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज हैं। यह योजना उन परिवारों के लिए संजीवनी है जिनकी वार्षिक आय सीमा शासन द्वारा निर्धारित मानक के भीतर है। दूसरे चरण की लॉटरी प्रक्रिया मार्च में आयोजित होने की संभावना है।

    सरकार की इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे। प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले इन दाखिलों से सामाजिक समानता को भी बढ़ावा मिल रहा है।





    RTE के पहले चरण में आए 2.61 लाख आवेदन, लखनऊ 18107 के साथ टॉप पर, आज खुलेगी लाटरी, इसके बाद होंगे प्रवेश

    18 फरवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन हुए। दो से 16 फरवरी तक हुए आवेदन में 2.61 लाख से ज्यादा आवेदन हुए हैं। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।

    प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई की 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो से 16 फरवरी तक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन हुए हैं। पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने पर कुल 261501 आवेदन हुए हैं। साथ ही बीएसए के द्वारा इनका सत्यापन भी कर दिया गया है। अब 18 फरवरी को लॉटरी करके प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

    पहले चरण में लखनऊ 18107 आवेदन के साथ टॉप पर है। इसके अलावा वाराणसी में 17476, आगरा में 13627, कानपुर नगर में 13546, बुलंदशहर में 10831, मेरठ में 9145, मुरादाबाद में 9028, अलीगढ़ में 8567, प्रयागराज में 7173 व हाथरस में 7074 आवेदन हुए हैं। जबकि सबसे कम श्रावस्ती में 125, चित्रकूट में 211, हमीरपुर में 220, बस्ती में 369, कानपुर देहात में 485, महोबा में 486 व कन्नौज में 495 आवेदन ही हुए हैं। समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस साल रिकॉर्ड आवेदन हुए हैं।




    UP RTE : पहले चरण में ही रिकॉर्ड 2.25 लाख आवेदन

    पिछले साल से ज्यादा प्रवेश का लक्ष्य, लखनऊ व बनारस में 15 हजार से ज्यादा आवेदन

    14 फरवरी 2026
    लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन होते दिख रहे हैं। दो फरवरी से शुरू हुए आवेदन में अब तक दो लाख से ज्यादा आवेदन हो चुके हैं जबकि आवेदन का आखिरी दिन 16 फरवरी है। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।


    प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई के 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो फरवरी से सत्र 2026-27 के लिए आवेदन शुरू हुए हैं। शनिवार देर शाम तक 2.25 लाख से अधिक आवेदन हो चुके हैं। जबकि अभी दो चरण और बाकी हैं। इसे लेकर बेसिक शिक्षा विभाग भी उत्साहित है। इसके साथ ही प्रतिदिन आने वाले आवेदनों का बीएसए द्वारा सत्यापन भी उसी दिन किया जा रहा है।

    इसमें मिलने वाली कमियों को दुरुस्त भी कराया जा रहा है। ताकि निर्धारित समय के अनुसार 18 फरवरी को लाटरी जारी की जा सके। अब तक के आंकड़ों के अनुसार 15899 आवेदन के साथ लखनऊ टॉप पर है। जबकि इसके साथ ही 15494 आवेदन वाराणसी, 11980 आगरा, 11418 कानपुर नगर, 9393 बुलंदशहर, 7759 मुरादाबाद, 7560 अलीगढ़, 7542 मेरठ, 6275 हाथरस व 5883 आवेदन प्रयागराज में हुए हैं।

    समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि अभी आखिर के दो दिनों में आवेदन की संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस साल प्रवेश आवेदन शुरू होने से पहले जिलों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है ओर लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। इसका लाभआर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मिलेगा। हम इस बार रिकॉर्ड आवेदन के लिए भी पूरा प्रयास करेंगे।


    यहां हुए हैं कम आवेदन

    श्रावस्ती 110, चित्रकूट 159, हमीरपुर 175, बस्ती 297, कानपुर देहात 384, कन्नौज 404, महोबा 405, औरैया 462, संतकबीरनगर 476, बहराइच 505, बलरामपुर 582, देवरिया 619, प्रतापगढ़ 690, गोंडा 739

    Saturday, March 7, 2026

    आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

    आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

    25% हैं राज्य की आबादी में 15 साल से कम उम्र के बच्चे

    12 लाख छात्रों के लिए की जाएगी 'एआई ट्यूटर' की व्यवस्था


    अमरावती/बेंगलुरु । आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में राज्य सरकारों ने नाबालिगों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। आंध्र प्रदेश में 13 साल, जबकि कर्नाटक में 16 साल से कम उम्म्र के बच्चे सोशल मीडिया नहीं चला सकेंगे। आंध्र प्रदेश ने 90 दिन (तीन माह) के भीतर नियम लागू करने की बात कही है, वहीं कर्नाटक ने अभी प्रतिबंध लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की है। प्रतिबंध लागू होने पर ये दोनों राज्य ऐसा करने वाले देश के पहले राज्य बन जाएंगे।


    शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने विधानसभा में बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों पर मोबाइल का इस्तेमाल करने से होने वाले बुरे असर को रोकने के मकसद से प्रतिबंध लागू किया जाएगा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्ववविद्यालयों में ड्रग्स का इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की भी बात कही। सिद्धरमैया ने कहा कि छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण की चिंता के साथ सरकार जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा स्कूल-कॉलेजों में काउंसिलिंग सेंटर भी स्थापित करेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रतिबंध कबसे लागू होगा।

    दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा। कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकें। उन्होंने बताया कि 90 दिन के भीतर प्रदेश में यह प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

    उम्र 16 वर्ष तक करने पर चल रहा विचारः आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार इस पहलू पर विचार कर रही है कि आयुसीमा 13 ही रखी जाए या इसे बढ़ाकर 16 वर्ष किया जाए। बताया कि तीन माह में अंतिम निर्णय होते ही प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

    जल्द तैयार होगी विशेष योजना
    कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि स्कूलों, कॉलेजों और घरों में बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक को लेकर नियमावली बनाई जाएगी। कहा कि इसे लेकर एक विशेष योजना बनाई जा रही है। अंतिम रूप दिए जाते ही इसकी जानकारी दी जाएगी।

    संसद में भी जताई जा चुकी चिंताः जनवरी जनवरी में संसद में पेश किए गए केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वे में भी बच्चों में बढ़ रही डिजिटल लत को लेकर चिंता जताई गई थी।



    एआई एआई डिजिटल डिजिटल ट्यूटर ट्यू

    बेंगलुरु। शिक्षा में एआई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी धारवाड़ की मदद से 'सेल्फ लर्निंग डिजिटल ट्यूटर' सुविधा दी जाएगी। कक्षा आठ से 12वीं तक के करीब 12.28 लाख छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर सरकार पांच करोड़ रुपये खर्च करेगी।


    एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। देश में 75 करोड़ मोबाइल फोन हैं, जबकि एक अरब के करीब इंटरनेट उपयोगकर्ता है। मेटा के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है।


    समान रूप से लागू होनियम : मेटा

    नई दिल्ली। कर्नाटक द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद, मेटा ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों से किशोर कम सुरक्षित, और अनियमित साइटों की ओर जा सकते हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकारों को सावधानी बरतनी चाहिए। मेटा ने कहा कि वह प्रतिबंधों का पालन करेगी। मेटा ने कहा कि किशोर हर हफ्ते 40 ऐप इस्तेमाल करते है, इसलिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को निशाना बनाने से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी।


    दुनियाभर में कई देश कस रहे नकेल
    कहा-कहां लगाम

    ऑस्ट्रेलिया: पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया।

    फ्रांसः इस साल जनवरी में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का कानून पारित हो गया।

    स्पेनः स्पेन सरकार ने भी हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे ही प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है। इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।

    ब्रिटेन: वर्तमान में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध पर जनता की राय चल रही है।

    नार्वे: यहां पर 15 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव पेश किया गया है, जल्द ही कानून बनने की उम्मीद है।

    अमेरिका: वर्जीनिया और फ्लोरिडा राज्यों ने एक घंटे की समयसीमा तय की है। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है।

    डेनमार्क: डेनमार्क में 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि माता-पिता की अनुमति से 13 साल तक के बच्चे कुछ ऐप चला सकेंगे

    चीन: यहां माइनर मोड प्रोग्राम लागू है, जो उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम और ऐप के इस्तेमाल को सीमित करता है।


    इंटरनेट और डेटा केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए कर्नाटक सरकार को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के साथ इस राज्य-स्तरीय बैन को जोड़ना होगा। इससे पहले, राज्य सरकार विधानसभा में एक नया विधेयक पेश करेगी या मौजूदा आईटी नियमों में

    Friday, March 6, 2026

    विश्वविद्यालय-कॉलेजों के छात्रों का आयुष्मान हेल्थ अकाउंट बनेगा, अपलोड होगी मेडिकल हिस्ट्री

    विश्वविद्यालय-कॉलेजों के छात्रों का आयुष्मान हेल्थ अकाउंट बनेगा, अपलोड होगी मेडिकल हिस्ट्री


    विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन (एबीडीएम) के तहत सभी विद्यार्थियों का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) बनाया जाएगा। हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएमएस) से सभी विद्यार्थियों का हेल्थ अकाउंट जुड़ेगा। फिर विद्यार्थी संस्थान की क्लीनिक से लेकर किसी भी बड़े अस्पताल में दिखाने जाएंगे तो पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक पर डॉक्टर देख सकेंगे।


    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) की ओर से चलाए जा रहे एबीडीएम के तहत विद्यार्थियों का हेल्थ अकाउंट बनाकर उनके उपचार व पैथोलॉजी जांच से जुड़ा ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिससे अगर वह किसी भी डॉक्टर को दिखाने जाएं तो हेल्थ अकाउंट की मदद से उनके पिछले उपचार का ब्योरा आसानी से मिल सके और उसे आगे अपडेट किया जा सके। जिससे छात्रों को उपचार व पैथोलॉजी जांच से संबंधित रिकॉर्ड के दस्तावेज रखने की जरूरत न पड़े।

    यही नहीं एचआईएमएस के तहत ई-सुश्रुत क्लीनिक की मदद से उन्हें चिकित्सीय परामर्श आसानी से दिलाया जा सके। ई-सुश्रुत क्लीनिक की मदद से छोटे क्लीनिकों में ओपीडी सेवा के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट आसानी से दिलाया जा सके।


    हर संस्थान में नियुक्त होगा नोडल अधिकारी

    प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान एबीडीएम के एचआईएमएस को लागू करेगा। वह स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर ढंग से उपयोग के लिए एक नोडल अधिकारी तैनात करेगा। जिसकी देखरेख में यह कार्य किया जाएगा। एनएचए ने सी-डैक के साथ मिलकर एचआईएमएस तैयार किया है, जिसका नाम ई-सुश्रुत क्लीनिक है। यह एक प्लग एंड प्ले सॉल्यूशन है। https://ehmis-lite.in पर पंजीकरण कराकर इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

    इंस्पायर अवार्ड में यूपी के 7173 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित, छात्रों को मॉडल बनाने के लिए मिलेंगे 10-10 हजार रुपये

    इंस्पायर अवार्ड में यूपी के 7173 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित, छात्रों को मॉडल बनाने के लिए मिलेंगे 10-10 हजार रुपये

    लखनऊः भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 7173 विद्यार्थियों के इनोवेशन आइडिया का चयन किया गया है। चयनित विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक आइडिया पर माडल या प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और इंस्पायर अवार्ड मानक प्रभारी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि चयनित विद्यार्थियों के बैंक खाते सक्रिय रखें। यदि किसी छात्र के खाते में केवाईसी या अन्य औपचारिकताएं लंबित हैं तो उन्हें तुरंत पूरा कराया जाए, ताकि प्रोत्साहन राशि के हस्तांतरण में किसी प्रकार की बाधा न आए।

    इस योजना में प्रदेश के सभी 18 मंडलों में से लखनऊ मंडल सबसे आगे रहा है। लखनऊ जिले से सर्वाधिक 370 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित हुए हैं, जबकि मंडल स्तर पर लखनऊ मंडल से कुल 906 प्रोजेक्ट चयनित हुए हैं। जिला स्तर पर दूसरे स्थान पर प्रयागराज है, जहां 216 विद्यार्थियों के आइडिया का चयन हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक चयनित बाल वैज्ञानिक को अपने माडल तैयार करने के लिए 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।


    स्कूलों में वैज्ञानिक सोच को मिलेगा बढ़ावा

    इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का उद्देश्य स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों ने अपने नए वैज्ञानिक विचार या समस्या के समाधान से जुड़े आइडिया को प्रस्तुत किया था। इसमें से श्रेष्ठ आइडिया का चुनाव किया गया। चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देकर उनके आइडिया को माडल के रूप में विकसित करने का अवसर दिया जाएगा। इस बार चयनित विद्यालयों में बेसिक शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के बच्चों ने भी स्थान बनाया है। निजी विद्यालयों के बच्चों के आइडिया का भी चयन हुआ है।




    इंस्पायर अवॉर्ड में यूपी के 7173 मेधावी चयनित, 
    लखनऊ पहले, प्रयागराज दूसरे स्थान पर रहा 




    प्रयागराज। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से संचालित इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत चयनित प्रतिभाओं की सूची जारी कर दी गई है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश से कुल 7173 मेधावी छात्र-रत्राओं का चयन हुआ है जिन्होंने अपने मौलिक वैज्ञानिक विचारों और नवाचारी मॉडल के आधार पर यह उपलब्धि हासिल की। 


    जनपदवार सूची में लखनऊ 370 स्थान पर रहा, जबकि प्रयागराज 216 छात्रों के चयन के साथ और कानपुर तीसरे स्थान पर है। कानपुर के 14 छात्रओं चयन हुआ है। प्रतापगढ़ के 121, कौशाम्बी के 48 बच्चों का चयन हुआ है। वहीं आगरा के 119, अलीके, गोरखपुर के 112, मुरादाबाद के 145, मेरठ के 117, वाराणसी 191 तथा बरेली के 129 छात्रों का चयन हुआ है। 

    यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश में नवाचार और अनुसंधान के बढ़ते माहौल की भी पुष्टि करती है। विज्ञान क्लब के समन्वयक डॉ. लालजी यादव ने बताया कि योजना के अंतर्गत 12वीं तक के विद्यार्थियों का चयन उनके मौलिक और रचनात्मक वैज्ञानिक विचारों के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें अनुसंधान के क्षेत्र में आगे चढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

    डीएलएड की स्क्रूटनी को 14 मार्च तक करें आवेदन


    डीएलएड की स्क्रूटनी को 14 मार्च तक करें आवेदन

    प्रयागराज। डीएलएड के विभिन्न बैच के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा के 25 फरवरी को घोषित परिणाम से असंतुष्ट प्रशिक्षु स्क्रूटनी के लिए 14 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि आवेदन पत्र की प्रति के साथ स्क्रूटनी फीस की मूल रसीद संलग्न कर 18 मार्च तक उपलब्ध कराएं। 

    स्क्रूटनी के लिए प्रशिक्षुओं को प्रति विषय 150 रुपये फीस देनी होगी। डायट प्राचार्य एक से 15 मार्च तक आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करेंगे। गौरतलब है कि 25 फरवरी को घोषित परिणाम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षु फेल हो गए थे। सर्वाधिक 101279 (57 प्रतिशत) प्रशिक्षु डीएलएड 2024 के प्रथम सेमेस्टर में फेल थे।



    डीएलएड परीक्षा की स्क्रूटनी के लिए आज से आवेदन, जानिए! कैसे और कहां करें आवेदन

    प्रयागराज । डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा वर्ष अक्टूबर व नवंबर 2025 की स्क्रूटनी के लिए आनलाइन आवेदन शनिवार से किए जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने अंतिम तिथि 14 मार्च निर्धारित की है। आफलाइन आवेदन नहीं स्वीकार किए जाएंगे। प्रशिक्षण-2018, 2021 एवं 2023 बैच के अभ्यर्थी http://www.btcexam.in पर आवेदन करेंगे, जबकि 2019, 2022 एवं 2024 के अभ्यर्थियों को https://www.updeledexam.in के माध्यम से आवेदन करना होगा।





    डीएलएड-2024 के प्रथम सेमेस्टर में आधे से अधिक परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण

    परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने परीक्षाओं का घोषित किया परिणाम

    1.84 लाख परीक्षार्थियों में से 43 फीसदी उत्तीर्ण, 3525 अनुपस्थित, 1334 का रिजल्ट अपूर्ण

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड प्रशिक्षण के विभिन्न बैच का अक्तूबर एवं नवंबर-2025 में आयोजित प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया।

    जारी परिणाम के अनुसार, वर्ष-2024 के प्रथम सेमेस्टर के कुल 1,84,576 परीक्षार्थियों में से 78,125 ही सफल हुए हैं। इनमें से 3525 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। जबकि, 1334 परीक्षार्थियों का परिणाम अपूर्ण व 309 परीक्षार्थियों के परिणाम किसी कारण से रोके गए हैं।

    इसी प्रकार, वर्ष 2017 के थर्ड सेमेस्टर का परिणाम शत प्रतिशत रहा। इसमें एक परीक्षार्थी ही पंजीकृत था, जो कि सफल रहा। वहीं, वर्ष-2018, 2019, 2021, 2022 व 2023 के भी परिणाम घोषित किए गए हैं। परीक्षार्थी अपना परिणाम विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन देख सकते हैं।

    जिन अभ्यर्थियों का परिणाम अपूर्ण है या रोका गया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यक अभिलेखों एवं औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा।


    Wednesday, March 4, 2026

    एडेड विद्यालयों के प्रबंधक शिक्षकों पर सीधे नहीं कर सकेंगे कार्रवाई, शिक्षकों के हित में शासन ने लिया अहम फैसला

    इंटरमीडिएट एक्ट बनेगा एडेड स्कूलों के शिक्षकों का सुरक्षा कवच

    एडेड विद्यालयों के प्रबंधक शिक्षकों पर सीधे नहीं कर सकेंगे कार्रवाई, शिक्षकों के हित में शासन ने लिया अहम फैसला


    लखनऊ । एडेड विद्यालयों में प्रबन्धन अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इंटरमीडिएट एक्ट की उप धारा-3 क ही उनका सुरक्षा कवच बनकर उनकी सेवा को महफूज रखेगा। शासन ने उक्त धारा का स्मरण दिलाते हुए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियमों में सेवा सुरक्षा का अलग से प्रावधान करने की मांग को औचित्यहीन करार दिया है। इस संबंध में शासन ने सोमवार को सभी जिलों के डीआईओएस को आदेश भेज दिया है। शासन ने कहा है कि एक्ट की उप धारा-3 (क) ही शिक्षकों का सेवा कवच है, जिसे दरकिनार करना प्रबंधतंत्र और डीआईओएस के लिए बहुत मुश्किल होगा

    डीआईओएस द्वारा मामले को लटकाना उत्पीड़नः इस धारा के तहत कोई भी प्रबंधतंत्र बिना जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन या अनुमति के प्रबंधतंत्र किसी भी शिक्षक के विरुद्ध कोई दंडित कार्यवाही नहीं कर सकता। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है। न उसकी सेवा समाप्त कर सकता है और न ही नोटिस तक दे सकता है।




    प्रबंधन की मनमानी और एडेड शिक्षकों के उत्पीड़न पर लगेगी रोक, शासन ने सभी डीआईओएस को भेजा निर्देश, कहा- धारा 16 का करें पालन


    लखनऊ। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने नए शिक्षा सेवा चयन आयोग में शामिल धारा-3 का उल्लेख करते हुए सभी डीआईओएस को इसके तहत आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।


    प्रदेश में समय-समय पर जिलों से शिक्षकों की सेवा समाप्ति आदि की शिकायतें माध्यमिक शिक्षा निदेशक व शासन को मिलती रही हैं। माध्यमिक शिक्षक संघों के अनुसार अलग-अलग प्रबंधनों ने तीन सौ से अधिक शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने का दावा किया है। 

    पिछले दिनों विधान मंडल में भी सदस्यों ने इससे जुड़ा मामला उठाया था। साथ ही सदस्यों ने इस पर रोक लगाने की भी मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने कहा है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए इंटरमीडिएट एक्स 1921 की धारा 16 (छ) की उपधारा 3 (क) के तहत कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश हैं।

     इसके तहत कोई भी प्रबंध तंत्र बिना डीआईओएस के पूर्व अनुमति के किसी भी शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता है। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है, न उनकी सेवा समाप्त कर सकता है। 

    अब प्रबंधन पर भी सख्ती होगी। अगर शासन को शिकायत मिली तो डीआईओएस की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इस नियम का सख्ती से पालन कराने की मांग की है। 

    Tuesday, March 3, 2026

    यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा का मौका, पांच में से एक विषय में अंक सुधार परीक्षा की सुविधा देगा बोर्ड

    यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा का मौका, पांच में से एक विषय में अंक सुधार परीक्षा की सुविधा देगा बोर्ड

    25,76,082 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए

    सीबीएसई और सीआईएससीई में दो-दो विषयों में है व्यवस्था

    यूपी बोर्ड ने पहले से दे रखी है एक विषय में कंपार्टमेंट की सुविधा


    प्रयागराज । यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में पंजीकृत 25,76,082 छात्र-छात्राओं को पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यूपी बोर्ड ने इसी साल से इंटर के पांच विषयों में से एक विषय में इंप्रूवमेंट परीक्षा शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस पर औपचारिक सहमति भी मिल चुकी है और अप्रैल अंत में परिणाम घोषित होने के बाद इसके आवेदन लिए जाएंगे। यह व्यवस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) में पहले से लागू है। इन दोनों बोर्ड के परीक्षार्थी दो-दो विषयों में इंप्रूवमेंट दे सकते हैं।


    कई बार ऐसा होता है कि तबीयत खराब होने, पारिवारिक सामाजिकया अन्य कारणों से परीक्षार्थी किसी विषय में पास तो हो जाते हैं लेकिन उसे बहुत कम नंबर मिलते हैं। इसका असर उसकी आगे की पढ़ाई और कॅरियर पर भी पड़ता है। ऐसे में बड़ी संख्या में ऐसे परीक्षार्थी होते हैं जो अंकसुधार (इंप्रूवमेंट) परीक्षा देना चाहते हैं लेकिन यूपी बोर्ड में ऐसी व्यवस्था ही नहीं थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए बोर्ड की ओर से इस साल इंटर के परीक्षार्थियों के लिए भी इंप्रूवमेंट की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है।

    सचिव भगवती सिंह का कहना है कि शासन से मंजूरी मिलने पर इंटर में इंप्रूवमेंट की व्यवस्था लागू की जाएगी। यूपी बोर्ड ने 2020 से इंटर में कम्पार्टमेंट की व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत इंटर का कोई छात्र यदि एक विषय में फेल है तो कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो सकता है। उससे पहले एक विषय में फेल इंटर के परीक्षार्थियों को दोबारा से सभी पांच विषयों की परीक्षा देनी होती थी। हाईस्कूल में इंप्रूवमेंट/कंपार्टमेंट की सुविधा पहले से लागू है।

    Monday, March 2, 2026

    होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में

    होली अवकाश में मु्ख्यालय नहीं छोड़ेंगे यूपी बोर्ड परीक्षा ड्यूटी में लगे अधिकारी-कर्मचारी, DIOS को सख्त निर्देश

    मुख्यालय छोड़ने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिए कार्रवाई के निर्देश

    जिला विद्यालय निरीक्षकों से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड 2026 की संचालित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर होली अवकाश अवधि में भी सख्ती बरती जाएगी। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी करते हुए प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। कहा है कि एक मार्च से 4 मार्च तक होली अवकाश के दौरान परीक्षा कार्य से जुड़े कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

    जेडी की अनुमति के बिना नहीं जाएंगे मुख्यालय के बाहर
    उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर के अधिकारी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) की अनुमति के बिना मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे, जबकि संयुक्त एवं अपर शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी शिक्षा निदेशक की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

    स्ट्रांग रूम की सतत निगरानी के निर्देश 
    परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की अभेद सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्ट्रांग रूम की सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक होने पर तत्काल मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं परिषद मुख्यालय को सूचना देना अनिवार्य होगा। लापरवाही पाए जाने पर केंद्र व्यवस्थापक व संबंधित प्रभारी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

    24 घंटे अधिकारी व कर्मचारी फोन सक्रिय रखेंगे 
    इसके अतिरिक्त सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मोबाइल फोन 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। संपर्क न होने की स्थिति को घोर लापरवाही माना जाएगा। अवकाश अवधि में स्ट्रांग रूम का आकस्मिक निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें सीसीटीवी व्यवस्था, सुरक्षा एवं तैनात कर्मियों की उपस्थिति की गहन जांच की जाएगी।

    गृह जनपद जाने के लिए शिक्षकों ने मांगी अनुमति
    यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं होली अवधि में स्थगित रहेंगी, लेकिन परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों में रखे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा विभाग और यूपी बोर्ड की प्राथमिकता है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारु संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षकों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

    शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है
    कहा है कि अवकाश अवधि में वह (डीआइओएस) तथा परीक्षा कार्य से जुड़े अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी बिना मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। इसके विरोध में राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश की ओर से होली अवकाश के दौरान परीक्षा ड्यूटी में लगे शिक्षकों को उनके गृह जनपद जाने की अनुमति देने की मांग की गई है। इसके लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है।

    पत्र में क्या मांग की गई?
    पत्र में राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं महामंत्री अरुण यादव ने बताया है कि 18 फरवरी से संचालित यूपी बोर्ड की वर्ष 2026 की परीक्षा के बीच एक मार्च से चार मार्च तक होली अवकाश निर्धारित है। आरोप है कि इस अवधि में परीक्षा कार्य में लगे शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को गृह जनपद जाने में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। 

    त्योहार पर स्वजन करते हैं उनकी प्रतीक्षा...
    कहा गया है कि परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित प्रश्नपत्रों की जिम्मेदारी केंद्र व्यवस्थापक, वाह्य केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा तैनात पुलिस कर्मियों की होती है, न कि सामान्य ड्यूटी में लगे शिक्षकों की। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश में घर जाने से रोका जाना उचित नहीं है। अनेक शिक्षक अपने गृह जनपद से दूर अन्य जिलों में कार्यरत हैं। त्योहार के अवसर पर परिवार के लोग उनकी प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे में उनके घर न पहुंचने से उनके घर में होली का पर्व फीका हो जाएगा।


    होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में


    Sunday, March 1, 2026

    छुट्टी, वेतनमान सब ऑनलाइन, फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग के काम पेंडिंग, ऑनलाइन सिस्टम तो लागू कर दिया, लेकिन महीनों तक लटकाए रहते हैं जिला और ब्लॉक स्तर के अफसर

    छुट्टी, वेतनमान सब ऑनलाइन, फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग के काम पेंडिंग,  ऑनलाइन सिस्टम तो लागू कर दिया, लेकिन महीनों तक लटकाए रहते हैं जिला और ब्लॉक स्तर के अफसर


    केस-1
    बाराबंकी के हरख ब्लॉक में शिक्षकों की छुट्टियों के 84 आवेदन पेडिग है। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन बीईओ कार्यालय से अप्रूव नहीं हुए है। पूरे जिले में सभी 15 ब्लॉक और नगर क्षेत्र मिलाकर 804 आवेदन पेंडिंग है।

    केस-2
    करीब छह महीने पहले शिक्षकों को फडामेंटल लिट्रेसी ऐड न्युमिरेसी का प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रशिक्षण के लिए उनको 750 रुपये भत्ता दिया जाना था। यह भत्ता भी ऑनलाइन उनके खाते मे आना था, लेकिन अब तक नही आया।

    ये दो उदाहरण शिक्षा विभाग में ऑनलाइन कामों की रफ्तार का आइना है। इसके अलावा भी कई काम ऐसे हैं जो ऑनलाइन होते हैं और पेंडेंसी खत्म होने के साथ ही काम की रफ्तार बढ़ने के दावे किए जाते हैं। हकीकत ये है कि सामान्य भत्तों से लेकर एनओसी और छुट्टियों का अप्रूवल तक लंबे समय तक फंसा रहता है। व्यवस्था ऑनलाइन होने के बावजूद शिक्षकों को विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में रिश्वत की मांग तक के आरोप लगते हैं।


    छुट्टियां लटकाने पर चेतावनीः छुट्टियों के अप्रूवल की ही बात करें तो सीसीएल, अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकास सहित सभी तरह की छुट्टियां ऑनलाइन ही अप्रूव की जाती हैं। बाराबंकी का मामला तो इसलिए सामने आ गया कि वहां के बीएसए ने खुद सभी बीएसए को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा है कि काफी अधिक मात्रा में छुट्टियों के आवेदन लंबित हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि है कि तत्काल इनको अग्रसारित करें, अन्यथा की स्थिति में समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी। शिक्षकों का आरोप है कि हर जिले में यही हाल है।

    चयन वेतनमान लंबितः चयन वेतनमान भी ऑनलाइन लगना होता है, लेकिन नवंबर से अब तक ज्यादातर जिलों में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षक चयन वेतनमान के इंतजार में हैं। इसको लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, यूनाइटेड टीचर्स असोसिएशन सहित कई शिक्षक संगठनों ने अधिकारियों से शिकायत की। डीजी से लेकर कई जिलों के बीएसए तक ने इस पर पत्र लिखकर चयन वेतनमान की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश भी दिए, लेकिन उसके बावजूद ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसको लटकाए हुए हैं। शिक्षकों की शिकायत है कि इसके लिए भी शिक्षकों से तीन हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है।


    'जिम्मेदारी तय हो'

    शिक्षको का आरोप है कि विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था तो कर दी, लेकिन अफसरों और कर्मचारियों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया, ऑफलाइन जितने ही लंबे समय तक काम लटके रहते है। प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद शिक्षको को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते है कि अफसरों का रवैया नहीं बदलेगा, तब तक ऑनलाइन व्यवस्था का कोई फायदा नहीं। उच्च अधिकारियों को पेडिंग कामों की लगातार समीक्षा करनी चाहिए और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।


    ये काम ऑनलाइन

    जीपीएफ से अडवास भुगतान, सभी प्रकार की एनओसी, चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान, नया वेतन भुगतान, नोटिस का स्पष्टीकरण, मानव संपदा पोर्टल पर सशेधन, वेतन वैरिएशन पर संशोधन, अन्य सशोधन ऑनलाइन किए जाने की व्यवस्था विभाग ने की है।


    जो भी ऑनलाइन काम होने है, वे बिना विलंब के तुरंत होने चाहिए। इस बारे में लगातार निर्देश दिए जा रहे है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। चयन वेतनमान शिक्षकों को समय पर मिले, इसकी लगातार समीक्षा करके निर्देश भी दिए जा रहे हैं। - मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा


    (साभार : नवभारत टाइम्स)

    अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे

    अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे


    नई दिल्ली । अप्रैल से शुरू हो रहे अगले शैक्षणिक सत्र में तीसरी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकता है। स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में तीसरी कक्षा से कंपटीशनल थिंकिंग और एआई का पाठ्यक्रम शुरू कराने का प्रयास है।


    जैसे छात्रों को भाषाई ज्ञान और अंक ज्ञान शुरू से दिया जाता है, उसमें एआई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जोड़ना है। तीसरी से आठवीं कक्षा तक एआई की शुरुआती पढ़ाई के बाद नौवीं से बारहवीं तक इसे इलेक्टिव कोर्स के तौर पर छात्र पढ़ सकते हैं।

    शिक्षा मंत्रालय ने तीसरी से आठवीं कक्षा तक तुरंत यह पाठ्यक्रम शुरू करने की मंशा जताने के साथ उच्चस्तर पर एआई पाठ्यक्रम को अद्यतन करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज हो रहा है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसमें 15 दिनों तक लगातार प्रदेश भर में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह कार्यक्रम पांच से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में होगा।


    प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने सभी जिलाध्यक्ष व महामंत्री के साथ शनिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से राहत देने की मांग उठाएंगे। बैठक में वीपी बघेल, संजय सिंह, भानुप्रताप सिंह, आशुतोष वर्मा, ओमजी पोरवाल, केके शर्मा, जया शर्मा, अखिलेश सिंह गुंजन, देवकुमार मिश्रा आदि उपस्थित थे।