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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, April 25, 2026

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, 

    कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे, नए सत्र के लिए पंजीकरण शुरू



    लखनऊप्रदेश में अब कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेंद्र देव द्वारा जारी आदेश के मुताबिक नए शैक्षिक सत्र से इसके लिए पंजीकरण शुरू किया जा रहा है। अभी तक यह व्यवस्था सिर्फ इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए ही लागू थी।


    प्रयागराज स्थित पत्राचार शिक्षा संस्थान की स्थापना वर्ष 1980 में शासनादेश के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे अभ्यर्थियों को पढ़ाई का अवसर देना था, जो माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में व्यक्तिगत (प्राइवेट) परीक्षार्थी के रूप में शामिल होते हैं। इसमें यह भी तय किया गया था कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को संस्थान में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और उन्हें संस्थान द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना होगा। 

    समय के साथ ऐसे छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई, जिसके चलते अब इस व्यवस्था का विस्तार किया गया है। इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो नियमित स्कूल में पढ़ाई नहीं कर पाते लेकिन बोर्ड परीक्षा देना चाहते हैं।

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें


    यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अपने परिणाम से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए 17 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    नियमतः परिणाम घोषित होने के 25 दिन तक स्क्रूटनी के आवेदन लिए जाते हैं। लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर निर्धारित है। स्क्रूटनी से संबंधित आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है।

    इच्छुक अभ्यर्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। उसके बाद स्क्रूटनी के ऑनलाइन फॉर्म के प्रिंटआउट के साथ चालान पत्र संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से बोर्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 17 मई तक भेजेंगे।



    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


    कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

    एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



    संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

    कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


    नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

    शिक्षा के अधिकार के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का आदेश, हाईकोर्ट ने कहा- निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए नहीं हो सकती सिर्फ ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता

    शिक्षा के अधिकार के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का आदेश, हाईकोर्ट ने कहा- निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए नहीं हो सकती सिर्फ ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि वंचित वर्ग के अभिभावक तकनीक के अभाव में ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ हैं तो उनका मैन्युअल (ऑफलाइन) आवेदन स्वीकार करना बेसिक शिक्षा अधिकारी का कर्तव्य है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने प्रयागराज के बालक ख्वाजा अशर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ता के पिता ने ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थता जताते हुए मैन्युअल आवेदन दिया था, जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए स्वीकार करने से इन्कार कर दिया कि अब केवल ऑनलाइन प्रक्रिया ही मान्य है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

    कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल ऑनलाइन पोर्टल का सहारा लेना संविधान के अनुच्छेद 21-ए और शिक्षा के अधिकार कानून की मूल भावना के विपरीत है। यह गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित कर सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान हजारों बच्चों ने स्कूल आवंटित होने के बावजूद प्रवेश नहीं लिया।

    साथ ही कई स्कूलों में 25 प्रतिशत कोटे के मुकाबले केवल एक या दो बच्चों को ही प्रवेश दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उन अभिभावकों के लिए एक एसओपी तैयार करे जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, ताकि उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के माध्यम से सुविधा मिल सके। अदालत ने प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। 

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा


    लखनऊ । माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। इस बार दोनों ही कक्षाओं में प्रतापगढ़ जिले का दबदबा रहा। 10वीं में जहां कन्नौज की सृष्टि ने 94.43 फीसदी के साथ टॉप किया, वहीं 12 वीं में प्रतापगढ़ के रजनीश यादव 89.36 फीसदी अंकों के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहे।

    गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही कक्षाओं के टॉप-चार में प्रतापगढ़ के 3-3 विद्यार्थी शामिल हैं। परिणाम के अनुसार 10वीं में 14,199 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से और 816 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में पास हुए हैं जबकि पांच विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

    वहीं 12वीं में 5,661 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से तथा 6,087 द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हैं जबकि 555 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। कन्नौज जिले के राधा देवी आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गुरसहायगंज की छात्रा सृष्टि ने 94.43 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ की खुशबू सरोज 94.29 फीसदी के साथ रहीं जो वहां के जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, भुजाही बाजार की छात्रा हैं। इसमें तीसरे स्थान पर 93.29 फीसदी के साथ संयुक्त रूप से प्रतापगढ़ के ही दो विद्यार्थी रहे, जिन्हें समान रूप से कुल 653 अंक हासिल हुए। दोनों विद्यार्थियों में से एक मुलायम सिंह यादव जो श्री राम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यदुनाथपुर सैफाबाद से और दूसरी प्रियंका सरोज जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय भुजाही बाजार प्रतापगढ़ की हैं।


    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे

    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीएलएड (ओडीएल) करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें यूपी-टीईटी 2026 में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को फिलहाल (प्रोविजनल) रूप से परीक्षा में बैठने दिया जाए। स्पष्ट किया कि इनके चयन का मामला याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेगा। 


    कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा भी मांगा है। अगली सुनवाई 22 मई को होगी। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम शुक्ला समेत 36 याचियों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे अभ्यर्थी, जो 10 अगस्त 2017 या उससे पहले से कार्यरत हैं।

    Friday, April 24, 2026

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी जिला टॉपर बनकर उभरा है। हाईस्कूल में टॉपर समेत जिले की तीन और इंटर में दो बेटियों ने टॉप-3 में जगह बनाई है। हाईस्कूल और इंटर की टॉपर समेत टॉप-3 में तीन बेटियों के साथ सीतापुर दूसरे स्थान पर रहा।

    बृहस्पतिवार को जारी परीक्षा परिणामों के मुताबिक हाईस्कूल में सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83 फीसदी अंकों के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। इंटरमीडिएट में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।

    हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर बाराबंकी की अदिति और तीसरे स्थान पर सीतापुर की अर्पिता, झांसी के ऋषभ साहू व बाराबंकी की परी वर्मा शामिल हैं। इंटरमीडिएट में बरेली की नंदिनी गुप्ता व बाराबंकी की श्रेया वर्मा संयुक्त रूप से दूसरे और बरेली की सुरभि यादव व बाराबंकी की पूजा पाल संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। सीतापुर की टॉपर शिखा वर्मा और कशिश वर्मा ने बाबूराम सावित्री देवी शेखपुर, विलौली बाजार से पढ़ाई की है। अंशिका वर्मा बाराबंकी के मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज, जैदपुर की छात्रा है।





    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे 23 अप्रैल को

    ऐसे चेक करें रिजल्ट

    1 स्टेप
    सबसे पहले वेबसाइट UPMSP.EDU.IN पर जाना होगा।

    2 स्टेप
    होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना होगा, उस पर क्लिक करना है।

    3 स्टेप
    अब आपको रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा।

    4 स्टेप
    रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, चेक करने के साथ ही मार्कशीट को डाउनलोड कर सकेंगे।


    23 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद बृहस्पतिवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित करेगा। यह पिछले वर्ष से तीन दिन पहले है। परिणाम शाम चार बजे निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव और परिषद के सचिव भगवती सिंह जारी करेंगे।

    परीक्षा में कुल 5337778 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 2523112 छात्राएं, 28,14,612 छात्र और 54 ट्रांसजेंडर शामिल थे। परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर आयोजित हुईं। हाईस्कूल में करीब 26 लाख और इंटरमीडिएट में लगभग 24.5 लाख छात्रों ने भाग लिया, जबकि जेलों में बंद 360 परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा दी।

    मूल्यांकन कार्य 254 केंद्रों पर 2.75 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 15 कार्य दिवसों में पूरा हुआ। इस बार त्रुटिहीन परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक बनाया गया था। सचिव भगवती सिंह ने बताया कि छात्र अपना रिजल्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकेंगे। 





    यूपी बोर्ड का परिणाम तैयार, घोषणा जल्द, 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना

    22 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का परिणाम लगभग बनकर तैयार है। परिणाम की समीक्षा अंतिम दौर में है। 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड की ओर से जल्द ही परिणाम किस दिन घोषित होगा इसकी अधिकृत सूचना जल्द जारी होगी। परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को भी परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।



    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले, प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले

    प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ-साथ शिक्षक शिक्षा में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एनसीईआरटी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अपने डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा, जिनमें बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड कोर्स शामिल होंगे।

    पहली बार स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षक बनने की पढ़ाई का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इससे पहले इस पाठ्यक्रम की समीक्षा रिपोर्ट तैयार होगी और उसमें मौजूद कमियों को दूर किया जाएगा। इसके लिए एनसीईआरटी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के साथ मिलकर काम करेगा। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला एनसीटीई की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। इसके तहत एनसीईआरटी परिसर और छह अन्य कॉलेजों में सीटें उपलब्ध होंगी।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्ताव पर एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू-बी विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया है। अब तक एनसीईआरटी बालवाटिका से कक्षा 12 तक के पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करता रहा है, लेकिन उसी आधार पर शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में एकरूपता नहीं थी।

    नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार पर रहेगा फोकस नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, पढ़ाने के तरीकों में बदलाव, खेल-आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और तकनीक आधारित शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों पर शोध किया जाएगा।




    एनसीईआरटी अब खुद देगा अपनी डिग्रियां

    डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगा। साथ ही देश भर में उसके जो छह क्षेत्रीय संस्थान है, वह भी अपनी डिग्री दे सकेंगे। अभी तक एनसीईआरटी के क्षेत्रीय संस्थानों को डिग्री देने के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेनी पड़ती थी। इन संस्थानों में अभी शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि इस दर्ज के बाद अब जल्द ही वह कुछ और नए कोर्स भी शुरू कर सकता है।


    NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

    शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी, एनसीईआरटी के छह संस्थान भी होंगे शामिल

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) किताबें बनाने के साथ-साथ अब डिग्री, डिप्लोमा व पीएचडी की पढ़ाई भी कराएगी। केंद्र सरकार ने एनसीईआरटी को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा दे दिया है। इसी हफ्ते इसकी अधिसूचना जारी होगी।

    एनसीईआरटी के साथ उसके छह संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान के अजमेर, ओडिशा के भुवनेश्वर, कर्नाटक के मैसूर, मेघालय के शिलांग और मध्य प्रदेश के भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान है।

    एनसीईआरटी अब तक सीबीएसई बोर्ड समेत राज्यों के लिए स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करती थी। नई व्यवस्था के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेगी। परिषद को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा मिला है, जिसमें संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता।

    एनसीईआरटी ने 2025 में सरकार को दी थी रिपोर्ट

    यूजीसी ने 2023 में कुछ शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसमें एनसीईआरटी को तीन साल में सभी शर्तों को पूरा करना था। एनसीईआरटी ने सरकार को 2025 में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर यूजीसी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    शोध पर होगा काम 
    विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी शोध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेगी। नए कोर्स, ऑफ कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।





    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन


    10 जनवरी 2026
    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी

    यूपी में सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक तो निजी विद्यालयों में 50 प्रतिशत ही बन सकीं अपार आईडी 

    23 अप्रैल 2026
    लखनऊ। यूपी में अब कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर नहीं रहेगा। उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो रही है। योगी सरकार के ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, अपार प्लस (अपार+) मिशन के तहत हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा रही है, जिससे उसकी पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। मतलब साफ है, न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की जा रही है।

    2.68 करोड़ से अधिकबच्चों को जोड़ाः आगामी 30 जून तक चलने वाले इस मिशन में 4.24 करोड़ छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चों को शामिल कर 63 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक बच्चों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इससे शिक्षा को जमीनी स्तर तक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में तेज प्रगति दिखाई दे रही है। इसमें सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

    विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रोफाइल डिजिटली सुरक्षित रहेगी

    अपार प्लस व्यवस्था के तहत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वतः स्थानांतरित हो जाता है। इससे ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डाटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।




    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी 

    13 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

    पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।


    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट

    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट 

    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। इसमें विभिन्न विषयों की परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेंगी। इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने - का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे।

    बोर्ड द्वारा इस वर्ष से लागू किए गए इस सिस्टम में दूसरी परीक्षा देना पूरी तरह से वैकल्पिक रखा गया है। यानी जो छात्र मुख्य परीक्षा में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे दूसरी बोर्ड परीक्षा देकर अपने अंकों को बेहतर कर सकते हैं। अधिकांश परीक्षाएं सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक होंगी, जबकि कुछ विषयों की परीक्षाएं दोपहर साढ़े बारह बजे तक ही समाप्त हो जाएंगी। बोर्ड ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे अपने एडमिट कार्ड के साथ समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    लोक सेवा आयोग ने आयोजित की डीपीसी, प्रक्रिया तेज

    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यामक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को जल्द ही 500 नियमित प्रधानाचार्य मिलेंगे। लोक सेवा आयोग ने इसके लिए हाल ही में डीपीसी (विभागीय प्रोन्नति समिति) आयोजित की है।


    शासन ने खंड शिक्षा अधिकारियों व पुरुष-महिला शिक्षकों का नया कोटा हाल ही में तय किया है। पदोन्नति के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसमें खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए 34 फीसदी कोटा निर्धारित है, जो पहले 17 फीसदी था। महिला-पुरुष शिक्षकों के लिए 33-33 फीसदी कोटा तय किया गया है, जो पहले क्रमशः 22 व 61 फीसदी था।

    डीपीसी में बीईओ व विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों के पदोन्नति के पद भरे जाएंगे। निर्धारित मानक पूरे करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी प्रधानाचार्य बनेंगे। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक भी पदोन्नति पाकर प्रधानाचार्य बनेंगे। इसका असर विद्यालयों के कामकाज पर पड़ेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीपीसी के बाद लोक सेवा आयोग योग्य अभ्यर्थियों की सूची शासन को भेजेगा। शासन औपचारिकताएं पूरी कर इन प्रधानाचार्यों को विद्यालयों में तैनाती देगा। प्रदेश के 2400 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में से 600 से ज्यादा में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।


    बीईओ के खाली पद भरेंगे

    प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के बाद प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के काफी पद खाली होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें भरने की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी है। विभाग खाली पदों की जानकारी जुटा रहा है। ताकि इसके अनुसार नई भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जा सके। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है।

    Thursday, April 23, 2026

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    अपर मुख्य सचिव और निदेशक से मिले शिक्षामित्र पदाधिकारी


    लखनऊ। उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा व बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्थानांतरण (मूल विद्यालय वापसी) जैसी सुविधाओं को लागू करने की मांग की।


    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ देने संबंधी औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है। इसे जल्द पूरा किया जाए ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षामित्रों को समय पर उपचार मिल सके। वहीं तबादले के लिए जिला स्तर पर प्रक्रिया नहीं हो रही है। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जाए। अधिकारियों ने इस पर जल्द सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

     प्रतिनिधिमंडल में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (तिवारी गुट) के अध्यक्ष एसपी तिवारी, शिक्षामित्र संघ प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, विनोद वर्मा, अजीत कुमार यादव, सुशील तिवारी आदि उपस्थित थे। 

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा


    लखनऊ। एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने मंडल के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जिले के एडेड स्कूल प्रबन्धनों से तत्काल प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं।


    इसी प्रकार दो अन्य मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने इस प्रकरण में एक दो दिनों के भीतरजिलाविद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके जिले से प्रस्ताव मंगाने केलिएपत्रावलियों पर सहमति दे दी है। 

    दरअसल, हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश देते हुए कहा था कि यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक के हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं और वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है तो ऐसे शिक्षक को हस्ताक्षर प्रमाणन के तीन माह बाद से लेकर नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति होने तक अथवा उसके सेवानिवृत्त होने तक, प्रधानाचार्य पद का पूर्ण वेतनमान दिया जाएगा। 

    कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को आधार बनाते हुए माना कि जब कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारियां निभा रहा है, तो उसे उस पदके अनुरूप वेतन मिलना ही चाहिए।

    विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया

    विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया 

    23 अप्रैल 2026
    लखनऊ । 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में याची बनकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे आरक्षित श्रेणी के भारी संख्या में अभ्यर्थी बुधवार को विधान भवन के सामने प्रदर्शन कर धरने पर बैठ गए। आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने योगी जी हमें न्याय दो, सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के पक्ष में याची लाभका प्रस्ताव पेश करो के नारे लगाने लगे। पुलिस ने आकर अभ्यर्थियों को रोक लिया। दोनों के बीच गहमागहमी होने लगी। पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी। सभी को जबरन पुलिस बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। अभ्यर्थी पहले भी न्याय के लिये डिप्टी सीएम समेत शिक्षामंत्री आदि के यहां कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।


    धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप एवं धनंजय गुप्ता का कहना है कि आरक्षण घोटाले का यह मामला लखनऊ हाई कोर्ट में वर्ष 2020 से चल रहा है। इस भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह सिर्फ 3.86% वहीं एससी वर्ग को ज्यादा आरक्षण दिया गया है।

     बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन किया गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ 13 अगस्त 2024 को इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को रद्द कर चुकी है। प्रदेश सरकार को शिक्षक भर्ती की सूची तीन महीने के अंदर मूल चयन सूची के रूप में लिस्ट बनाने का आदेश दे चुकी है लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।

    जारी रहेगा प्रदर्शन...
    पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश प्रदेश महासचिव सुमित यादव का कहना है कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित यांची अभ्यर्थियों के पक्ष में उन्हें न्याय देने के लिए याची लाभ का प्रपोजल पेश नहीं कर देती तब तक आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन करते रहेंगे। प्रदर्शन में सुशील कश्यप, धनंजय गुप्ता, सुमित यादव आदि शामिल रहे।




    69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी से नाराज अभ्यर्थियों संग परिजन भी करेंगे 22 अप्रैल को आंदोलन

    18 अप्रैल 2026
    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 22 अप्रैल को फिर से राजधानी में दम दिखाएंगे। इस बार अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिजन और अलग-अलग कई संगठन एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। अभ्यार्थियों ने बताया कि दो फरवरी से राजधानी के ईको गार्डेन में उनका अनवरत धरना चल रहा है। किंतु सरकार इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार कोई पहल नहीं कर रही, जिससे मामला टल रहा है। इस प्रकारण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।


    अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि पिछली सुनवाई 19 मार्च को होनी थी लेकिन नहीं हुई। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में अनलिस्टेड है। इससे सभी अभ्यर्थियों में बहुत आक्रोश है। हमने 22 अप्रैल को महाआंदोलन करने का फैसला लिया है। सुशील कश्यप ने बताया कि सभी जिले में समन्वयक बनाकर ब्लाक स्तर पर संपर्क किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी आ सकें।

    आंदोलन में शामिल सुमित कुमार, विक्रम, अमित मौर्या आदि ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट डबल बेंच का फैसला, सब हमारे पक्ष में है। फिर भी हमारे साथ न्याय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम पिछड़े समाज से आते हैं। सरकार जल्द इस मामले में ठोस पहल नहीं करती है तो आंदोलन व्यापक होगा।

    Wednesday, April 22, 2026

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में हर दिन दर्ज होगी आनलाइन उपस्थिति, निर्देश जारी

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में हर दिन दर्ज होगी आनलाइन उपस्थिति, निर्देश जारी

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के लिए जारी किया आदेश

    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने राज्य के सभी माध्यमिक विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड से जुड़े 29,208 राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए अब छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति आनलाइन दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने 20 अप्रैल को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को इस संबंध में निर्देश जारी किए।

    पत्र के अनुसार सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन शैक्षिक सत्र 2026-27 में इस व्यवस्था का क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं पाया गया। निर्देशों के अनुसार अब विद्यालयों को प्रतिदिन पहले पीरियड में ही छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति आनलाइन दर्ज करनी होगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को अपनी लागइन आइडी का उपयोग करना होगा। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके लिए अलग से उपस्थिति पोर्टल लिंक और यूजर मैनुअल उपलब्ध कराया गया है।

    डिजिटल प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए बोर्ड ने मोबाइल एप के जरिये भी उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा दी है। बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को विशेष जिम्मेदारी देते हुए निर्देशित किया है कि वे अपने जिले के शत-प्रतिशत विद्यालयों से आनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। साथ ही नियमित निगरानी कर यह देखा जाए कि कोई भी विद्यालय इस व्यवस्था से बाहर न रहे।


    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

    05 साल पूर्व बच्चे के जन्म के दो साल बाद दूसरा अवकाश नहीं मिला


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं हो सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 



    याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिए याची की दूसरे मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरानयाची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है। इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राज्य की ओर सेवित्तीय हैंडबुक के नियम 153 (1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष जरूरी हैं।




    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा, सरकार की वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं

    लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहली मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक (वित्तीय नियम संग्रह) के प्रविधान मातृत्व लाभकानून के ऊपर नहीं हो सकते हैं।

    यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिये याची की दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 एक लाभकारी कानून है और इसके प्रविधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।

    अदालत ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है और यह किसी भी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रविधानों से ऊपर है। ऐसे में यदि दोनों में कोई विरोधाभास हो तो अधिनियम के प्रविधान ही प्रभावी होंगे। कोर्ट ने पाया कि याची की पहली संतान 2021 में हुई थी और इसके बाद उन्होंने 2022 में दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया। अदालत ने इस आदेश को रद करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को छह अप्रैल 2026 से दो अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।

    मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

    मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। केवल मान्यता निलंबन के आधार पर वहां के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन रोका जाना अवैधानिक है।


    यह टिप्पणी न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने आजमगढ़ स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशर्फियां मिसबाहुल उलूम मुबारकपुर में तैनात रहे बदरे आलम और अन्य 19 शिक्षकों व कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका पर की है। याचियों ने नौ जनवरी को जारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मदरसे की मान्यता निलंबन की स्थिति में शिक्षकों का वेतन रोके जाने का आदेश दिया गया था।

    वेतन की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे याचियों के वकील ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमावली-2016 के विनियम 13 (6) के अनुसार, जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। 

    धोखाधड़ी के प्रमाण के बिना दशकों पुरानी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

    धोखाधड़ी के प्रमाण के बिना दशकों पुरानी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

    गौतमबुद्ध नगर के मुकेश कुमार शर्मा ने याचिका दायर कर बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने लंबे समय तक सेवा दी है और उसकी नियुक्ति में धोखाधड़ी या जालसाजी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है तो दशकों बाद उसकी सेवा समाप्त करना पूरी तरह से अवैध है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के कंपोजिट विद्यालय जेवर में कार्यरत हेडमास्टर मुकेश कुमार शर्मा की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया।


    यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 11 दिसंबर 2025 के आदेश से याची की सेवाएं इस आधार पर समाप्त कर दी थीं कि उन्होंने शैक्षणिक सत्र 1993-94 में एक साथ दो नियमित पाठ्यक्रम शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। याची ने बीएसए के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    विभाग के वकील ने दलील दी कि एक ही वर्ष में दो परीक्षाएं उत्तीर्ण करना और इस तथ्य को छिपाना नियुक्ति को अवैध बनाता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी की ओर से रद्द या अवैध घोषित नहीं किए जाते, तब तक वे पूरी तरह प्रभावी माने जाएंगे।

    इस मामले में याची के हाईस्कूल (1991), शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र (1993-94) और इंटरमीडिएट (1995) के प्रमाणपत्र आज भी वैध हैं। कोर्ट ने कहा कि तीन दशक की निष्कलंक सेवा के बाद इस तरह की कार्रवाई अवैध और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।


    बर्खास्तगी प्रक्रिया में पाईं गंभीर खामियां

    कोर्ट ने बर्खास्तगी प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाईं। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कोई नियमित विभागीय जांच नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि बिना आरोप पत्र तैयार किए और बिना साक्ष्य प्रस्तुत किए, महज नोटिस के आधार पर सेवा समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इन सभी आधारों पर अदालत ने बीएसए के बर्खास्तगी आदेश को मनमाना और दोषपूर्ण करार देते हुए रद्द कर दिया और याची की रिट याचिका को स्वीकार कर लिया।

    प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के बिना निलंबन मंजूर नहीं, निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं – हाईकोर्ट

    प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के बिना निलंबन मंजूर नहीं, निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं – हाईकोर्ट

    मऊ के रानीपुर के इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य के निलंबन का मामला


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान में कर्मचारी/प्राचार्य को निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रबंधन समिति का विधिवत प्रस्ताव आवश्यक है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने राजीव कुमार द्विवेदी की याचिका पर दिया है।


    मऊ के रानीपुर क्षेत्र में स्थित जनता इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य राजीव कुमार द्विवेदी को 15 जनवरी 2026 को प्रबंधक की ओर से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन को जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने सात मार्च 2026 को मंजूरी दे दी थी।

    याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रबंधक ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर निलंबन आदेश जारी किया। इसके लिए प्रबंधन समिति का कोई प्रस्ताव नहीं था। ऐसे में डीआईओएस की ओर से दी गई मंजूरी अवैध है। विपक्षी की ओर से दलील दी गई कि प्रबंधन समिति ने 15 जनवरी 2026 को प्रस्ताव पारित किया था। उक्त प्रस्ताव को निलंबन आदेश के साथ डीआईओएस को भेजा गया था।

    कोर्ट ने डीआईओएस की ओर से सात मार्च 2026 को दिया गया निलंबन आदेश रद्द कर दिया। साथ ही मामले को पुनः डीआईओएस के पास भेजते हुए निर्देश दिया कि यदि प्रबंधन समिति का कोई प्रस्ताव उपलब्ध हो तो एक महीने के भीतर नया आदेश पारित करें। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे 30 अप्रैल 2026 को डीआईओएस के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित हों।

    Tuesday, April 21, 2026

    हीट वेव के दृष्टिगत मदरसों में भी पठन-पाठन का समय परिवर्तन, 8 से 2 बजे के स्थान पर अब 7 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक होंगे संचालित

    हीट वेव के दृष्टिगत मदरसों में भी पठन-पाठन का समय परिवर्तन,  8 से 2 बजे के स्थान पर अब 7 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक होंगे संचालित 



    Sunday, April 19, 2026

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    जून में हफ्ते-दस दिन का ही समय मिलने की संभावना

    19 अप्रैल 2026
    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए इन गर्मी की छुट्टियों में भी तबादले के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मई में जनगणना के लिए घर-घर प्रगणन का काम शुरू होने वाला है। ऐसे में स्थानांतरण की प्रक्रिया इस बार भी शुरू होने की उम्मीद नहीं है।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में हुए थे। जबकि सर्दी की छुट्टियों (दिसंबर) में एसआईआर के कारण उनके तबादले की प्रक्रिया नहीं की गई। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार गर्मी की छुट्टियों में उन्हें इसका मौका मिलेगा। किंतु इसके आसार नहीं दिख रहे हैं।

    शिक्षकों ने बताया कि जनगणना के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है। वहीं 22 मई से 20 जून तक घर-घर जनगणना के लिए उनकी ड्यूटी लगनी है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह ने कहा कि अगर तिथि नहीं बढ़ी तो जून में दस दिन का समय विभाग को मिलेगा। लेकिन इसके लिए उन्हें सभी आवश्यक प्रक्रिया पहले से पूरी करनी होगी। वहीं अगर जनगणना की तिथि केंद्र ने बढ़ा दी तो फिर इसकी भी संभावना समाप्त हो जाएगी।

    हालांकि, तबादला नीति इसी महीने आ रही है, विभाग चाहे तो मई में जनगणना शुरू होने से पहले भी इसकी प्रक्रिया पूरी कर सकता है। हमारी मांग है कि विभाग इस तरफ ध्यान दे। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनगणना की वजह से इस बार तबादला प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं दिख रहा है। अगर दस दिन का मौका मिलता है तो जिले के अंदर परस्पर तबादले किए जा सकते हैं। किंतु इसके लिए उच्च अधिकारियों की सहमति जरूरी होगी।




    ग्रीष्मावकाश में स्थानांतरण की राह देख रहे बेसिक शिक्षकों को लग सकता है झटका, जानिए क्यों? 

    13 अप्रैल 2026
    प्रयागराज : ग्रीष्म अवकाश में अंतरजनपदीय तथा अंत जनपदीय स्थानांतरण की उम्मीद संजोए बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों शिक्षकों को झटका लग सकता है। देश व प्रदेश में चल रहे जनगणना कार्यक्रम के सुचारु संचानल के लिए इसमें लगे अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार की ओर से पत्र लिखा गया है। इस पत्र से बेसिक शिक्षक अपने स्थानांतरण को लेकर सशंकित हो गए हैं।


     जनगणना कार्य में शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है। प्रगणक बनाए गए शिक्षकों के विवरण की आनलाइन फीडिंग की जा रही है। ड्यूटी लगाए जाने का मैसेज कई शिक्षकों के मोबाइल नंबर पर आया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि वह कार्य को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूर्ण कर सकें। 

    अधिकारियों व प्रगणकों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की योजना तैयार कर ली गई है। इस बीच स्थानांतरण किए जाने से जनगणना कार्य प्रभावित होने को देखते हुए अधिकारियों के स्थानांतरण न किए जाने की तैयारी है।

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती


    लखनऊ। प्रदेश में जर्जर व पुराने हो चुके राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में सुधार के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की गई। लेकिन विद्यालय विभाग की इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वे बजट तो ले ले रहे हैं मगर न तो इसका प्रयोग कर रहे हैं न ही विभाग को इसकी जानकारी दे रहे हैं।


    प्रदेश के राजकीय व एडेड कॉलेजों में निर्माण, मरम्मत व अवस्थापना सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत बजट दिया जाता है। खास यह कि इसमें राजकीय विद्यालयों को 95 फीसदी तक तो एडेड में 75 फीसदी तक कुल आगणन का पैसा दिया जा रहा है। इसके बाद भी कई बार प्रस्ताव भेजने में आनाकानी की जाती है, वहीं कई जिलों में बजट के सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रोजेक्ट अलंकार योजना में वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में एडेड कॉलेजों के प्रस्ताव पर शासन व निदेशालय की ओर से तीन किश्तें जारी की जा चुकी हैं। लेकिन इसमें कई विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक न तो पहली किश्त का प्रयोग किया न ही बजट सरेंडर करने की जानकारी निदेशालय को भेजी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक (अर्थ) महेंद्र कुमार सिंह ने सभी डीआईओएस को पत्र भेजकर कहा है कि जिलों में यह कहा जाता है कि संस्था को आवंटित धनराशि समर्पित कर दी गई है। जबकि निदेशालय को इसकी जानकारी ही नहीं मिली है। उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जिलों में विद्यालयों को आवंटित पहली किश्त की राशि का प्रयोग किया गया या नहीं? या इसको समर्पित कर दिया गया है? इसके बारे में जल्द सूचना उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर अब विभाग सख्ती करते हुए इससे शासन को भी अवगत कराएगा।


    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    18 अप्रैल 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) लखनऊ की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। आयोग ने यह वारंट पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से जारी करने को कहा है।

    लखनऊ और बहराइच के विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने वाली भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं मिला है। संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर बताया था कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में मोहनलालगंज, चिनहट व बहराइच के रिसिया ब्लॉक में आपूर्ति के बाद 1.33 करोड़ रुपये बकाया हैं।

    पत्राचार के बावजूद सुनवाई न होने से संस्था आर्थिक संकट में है। आयोग मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। 15 मार्च को आयोग ने दोनों जिलों के बीएसए को 16 अप्रैल को सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया था।

    आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा की पीठ के समक्ष 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष से अनूप यादव और भारती हरित ग्राम उदय संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक उपस्थित हुए। मामले में बहराइच के खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए बहराइच के

    18 अप्रैल तक अवकाश पर होने की जानकारी दी। वहीं, बीएसए लखनऊ सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, जबकि उन्हें सूचना दी गई थी। सुनवाई के दौरान बीईओ बहराइच ने बताया कि यदि संबंधित स्कूलों की सूची और उनसे वसूली योग्य राशि उपलब्ध करा दी जाए तो बीएसए स्तर पर वसूली में सहयोग किया जा सकता है। इस पर आयोग ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह बहराइच व लखनऊ के स्कूलों की सूची और वसूली योग्य राशि सात दिन के भीतर उपलब्ध कराएं।

    आयोग ने जिलाधिकारी बहराइच और पुलिस कमिश्नर लखनऊ को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर दोनों जिलों के बीएसए की उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी।



    1.33 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक और दो बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण, ड्रेस आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं होने पर मानवाधिकार आयोग की 16 अप्रैल को सुनवाई

    16 मार्च 2026
    लखनऊ। राजधानी और बहराइच के कुछ विद्यालयों में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने बेसिक शिक्षा निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ और बहराइच के बीएसए को तलब किया है। दोनों अधिकारियों को 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान आयोग में उपस्थित होना होगा।

    लखनऊ की भारतीय हरित खादी ग्रामोदाय संस्था को विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने का काम मिला था। संस्था ने वर्ष 2019-20 और 2020 21 में लखनऊ के मोहनलालगंज व चिनहट, बहराइच के रिसिया ब्लॉक में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति की थी।

    संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने पिछले साल मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी कि ड्रेस की आपूर्ति करने के बाद अब तक 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। इसको लेकर विजय शंकर ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से पत्राचार किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा अब तक भुगतान नहीं हुआ। अधिक रकम होने की वजह से उनकी संस्था व वह खुद आर्थिक तंगी की स्थिति में आ गए हैं। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लिया।

    12 मार्च को आयोग ने आदेश दिया है कि जो आपत्तियां विजय शंकर की तरफ से दर्ज कराई गई हैं वह बेसिक शिक्षा के निदेश को भेजी जाएं। उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ व बहराइच के बीएसए को 16 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे उपस्थित होना होगा। आदेश का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी निदेशक को दी है। सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय सुनाएगा। 

    Saturday, April 18, 2026

    जन्म प्रमाणपत्र तब तक मान्य जब तक रद्द न हो–हाईकोर्ट, कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश, संदेह के आधार पर याची को प्रवेश देने से मना किया गया था

    जन्म प्रमाणपत्र तब तक मान्य जब तक रद्द न हो–हाईकोर्ट, कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया आदेश, संदेह के आधार पर याची को प्रवेश देने से मना किया गया था


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक निर्णय में कहा है कि जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 के तहत जारी जन्म प्रमाणपत्र तब तक वैध और मान्य है, जब तक उसे रद्द न कर दिया जाए या उसमे जालसाजी साबित न हो जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने कक्षा छह में दाखिले से जुड़ी विमल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


    कोर्ट ने कहा कि जब तक कोई दस्तावेज, जो किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी किया गया, या तो रद्द न कर दिया जाए या उसमें जालसाजी का कोई तत्व साबित न हो जाए, तब तक उसका संबंधित अधिकारियों पर बाध्यकारी प्रभाव रहेगा।

    कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में यह नहीं आता कि वे अपनी मनमर्जी के आधार पर किसी वैधानिक प्रावधान के तहत जारी प्रमाण पत्र पर संदेह करें। जन्म प्रमाण पत्र में याची की जन्मतिथि एक जुलाई 2013 दर्ज थी। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह में दाखिले के लिए अभ्यर्थी का जन्म एक मई 2013 और 30 जुलाई 2015 के बीच होना चाहिए। जन्म प्रमाण पत्र पर संदेह के आधार पर याची को दाखिला देने से मना कर दिया गया, इसलिए याची ने हाईकोर्ट का रुख किया। चार दलील की गई कि जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए बिना याची को दाखिला देने से मना नहीं किया जा सकता। 

    विपक्षी ने सीएम ओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जन्म तिथि में एक साल से छह महीने तक का अंतर हो सकता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि हड्डियों के विकास की जांच को पूरी तरह सटीक नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह केवल प्लस-माइनस दो साल तक ही सटीक होती है। निर्णय दिया कि सीएमओ की रिपोर्ट में दर्ज अंतर के आधार पर जन्म प्रमाण पत्र रद्द किए बिना एडमिशन देने से मना करना शिक्षा का अधिकार का उल्लंघन है।

    Friday, April 17, 2026

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय


    प्रयागराजइलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक ग्रेच्युटी (उपदान) पाने के हकदार हैं और इसके लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं लगाया जा सकता। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने मेहरजहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। 


    याची ने एक सहायता प्राप्त संस्थान में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति प्राप्त की थी, लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी का लाभनहीं दिया गया था।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश स्कूल और कालेज शिक्षक ग्रेच्युटी फंड नियमावली 1964 के तहत ग्रेच्युटी केवल सेवा के दौरान मृत्यु होने पर ही देय थी, जो सेवानिवृत्त शिक्षकों के अधिकारों का पूर्ण संरक्षण नहीं करती। 

    कोर्ट ने माना कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान ही होते हैं। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि शिक्षक ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने का विकल्प नहीं चुना था, इसलिए वे ग्रेच्युटी की पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक सरकारी आदेश किसी वैधानिक प्रविधान या नियम का स्थान नहीं ले सकता।

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान करना नियोक्ता की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसे केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने 'पेमेंट आफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के प्रविधानों का हवाला देते हुए कहा कि याची इस कानून के तहत लाभ पाने की पात्र हैं। संबंधित अधिकारियों को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह याची की ग्रेच्युटी की गणना कर आठ सप्ताह के भीतर उसका भुगतान सुनिश्चित कराएं।


    हाईकोर्ट ऑर्डर 👇

    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    Neutral Citation No. - 2026:AHC:77821-DB
    AFR
    HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
    WRIT - A No. - 12810 of 2024
    Smt Mehar Jahan
    .....Petitioner(s)
    Versus
    State Of U.P. And 4 Others
    .....Respondent(s)

    Counsel for Petitioner(s)
    Shoar Mohammad Khan
    Counsel for Respondent(s)
    C.S.C.
    Court No. - 29
    HON'BLE ARINDAM SINHA, J.
    HON'BLE SATYA VEER SINGH, J.
    (Per Arindam Sinha, J.)

    1. Petitioner served as a teacher in an aided educational institution. Her service conditions included application of U.P. School and College Teachers Gratuity Fund Rules, 1964. She served out her tenure and retired at age 60. She is getting pension. After a long time, she has moved Court with her contention that she did not get gratuity. Mr. Shaor Mohammad Khan, learned advocate appears on behalf of petitioner and Mr. Kartikeya Saran, learned advocate, Additional Advocate General, for State.

    2. On our query Mr. Khan submits, his client had made representation dated 7th May, 2024. Till before then she was unaware that her pension not including gratuity gave rise to a cause. Under the rules of 1964 she did not get any gratuity because said rules provide for payment of gratuity only in event of the teacher dying in harness. In the circumstances, she cannot be barred from seeking to enforce her legal right to have payment of gratuity under provisions in Payment of Gratuity Act, 1972. He relies on view taken by a Division Bench of this Court in Special Appeal Defective no.768 of 2021 (Jwala Devi vs. State of U.P. and 5 others). Relied upon paragraph is reproduced below. "It is settled law that payment of gratuity is the right of the employee, provided gratuity is actually payable in accordance with law. Non-payment of gratuity, in the event it is legally payable, is the statutory responsibility of the employer. Therefore, the writ petition of the widow of the deceased employee asking for payment of gratuity cannot be dismissed merely on the ground of laches, unless it is found that the gratuity is not legally payable." He seeks interference. 3. Mr. Saran submits, applicability of the Act of 1972 to petitioner depends on definition of 'employee' given in the Act. Section 2(e) is reproduced below.
    "2(e). "employee" means any person (other than an apprentice) who is employed for wages, whether the terms of such employment are express or implied, in any kind of work, manual or otherwise, in or in connection with the work of a factory, mine, oilfield, plantation, port, railway company, shop or other establishment to which this Act applies, but does not include any such person who holds a post under the Central Government or a State Government and is governed by any other Act or by any rules providing for payment of gratuity."
    (emphasis supplied)

    He relies on judgments of the Supreme Court, firstly for proposition that a government aided educational institution is akin to the State Government, as employer. Secondly, there is exclusion by the definition clause in respect of application of the Act to persons, who are employees of, inter alia, the State Government and is governed by rules providing for payment of gratuity. Relied upon judgments are as under.
    i) Vikram Bhalchandra Ghongade vs. The Headmistress Girls High School and Junior College, reported in (2025) 10 SCC 248. Paragraph 8 is reproduced below. "8. It must be observed that a teacher in an aided school for all practical purposes is akin to a post under the State Government. Pertinent is the fact that the posts in aided schools are either sanctioned by the Government or approved in accordance with the Rules and pay and allowances are also paid by the Government. The aided school teachers are also entitled to some of the conditions of service as are applicable to government teachers, with entitlement of pension, provident fund and gratuity as applicable, in accordance with the Rules brought out under Article 309 of the Constitution of India. Though strictly speaking the teachers may not be holding a post under the State Government, it is akin to a post under the State Government, at least for the monetary benefits of pay and allowances, while in service, as also pension and other benefits on retirement."

    (emphasis supplied)
    ii) N. Manoharan, etc. vs. The Administrative Officer and another, reported in (2026) 2 SCR 596. Paragraph 12 from the judgment is reproduced below.
    "12. It is relevant to notice that the amended definition deals with the first limb of Section 2(e), and the second exclusionary limb is the same in the pre-and post-amendment provisions. Construing Section 2(e), the second limb begins with the words "but does not include" any such person (i) who holds a post under the Central Government, (ii) a State Government, (iii) is governed by any other Act or (iv) by any Rules providing payment of gratuity. The exclusionary clause, if read by applying the golden rule without a further test, excludes employees of the Central and State Governments from the meaning of "employee" under the PG Act. Secondly, it also excludes a person who is governed by any other act. Thirdly, even if it is used as "or" but not as "and", it excludes any such person who is governed by any other Act or by any rules providing for payment of gratuity. The provision contains the words both "means" and "does not include". Under interpretation of statutes, this Court has repeatedly held that coupling the word "means" with "includes" denotes an exhaustive definition. Conversely, the word "means" and "does not include" should be read as exclusionary language that strictly excludes the scope of the provision from certain classes. Consequently, a person who is governed by any other Act, or governed by any Rules providing for payment of gratuity, does not come within the ambit of the definition of "employee" under the PG Act."
    (emphasis supplied)

    4. Mr. Saran submits further, there is Government order (GO) dated 10th August, 1978 in place. By it, teachers such as petitioner had the option to avail of payment of gratuity, on opting on or after 30th June, 1978 to retire at age 58. Petitioner exercised her option in the negative and continued to serve till she achieved age of superannuation at 60 years. Hence, she continued to be governed by the rules of 1964. As such, she not being included in meaning of 'employee' given in the Act of 1972, now cannot say that she is entitled to payment of gratuity under the Act. In any event the writ petition is grossly delayed. It be dismissed.

    5. Meaning of gratuity has not been given in the Act of 1972. Oxford English Dictionary, 12th Edition of South Asia Edition gives meaning of 'gratuity' as reproduced below.
    "gratuity - A sum of money paid to an employee at the end of a period of employment."
    Taking part of the meaning given in section 2(e) requiring, an excluded person to be governed by, inter alia, any rules providing for payment of gratuity, inevitable conclusion is that the rules of 1964 provide for payment of gratuity to only those teachers, who die in harness after having continuously served for three years. Otherwise, the rules do not provide for payment of gratuity. At this stage Mr. Khan points out, his client drawing pension also does not have component of gratuity inbuilt into the benefit. He relies on clause (17) under definitions article 366 in the Constitution. The clause is reproduced below.
    "366. Definitions.
    .........(17) "pension" means a pension, whether contributory or not, of any kind whatsoever payable to or in respect of any person, and includes retired pay so payable; a gratuity so payable and any sum or sums so payable by way of the return, with or without interest thereon or any other addition thereto, of subscriptions to a provident fund."
    (emphasis supplied)

    6. In other words petitioner, in our view, having served till she superannuated on achieving 60 years of age, cannot be said to be covered by the rules of 1964 as, we reiterate, they are only applicable for payment of gratuity to those teachers, who die while in service. In the circumstances, it is understandable that aforesaid GO dated 10th August, 1978 was issued. Mr. Saran hands up English translation of the GO. Paragraph 1 from the translation is reproduced below.
    "I am directed to say that orders have already been issued for the sanction of pension to the teachers of non-government higher secondary schools aided by the state fund at the rates admissible to their counterparts in government schools. A demand has also been made to the government that such teachers of the said category of schools who retire by opting for retirement at the age of 58 years, be given death and retirement gratuity benefits. The government, after due consideration, has accepted this demand. Therefore, the Honorable Governor orders that such teachers who retire on or after June 30, 1978, by opting for retirement at the age of 58 years, be granted the aforesaid gratuity at the rates admissible to their counterparts in government schools."
    (emphasis supplied)

    7. In N. Manoharan (supra) the Supreme Court also declared on interpretation of statutes. We see the definition clause [section 2(e)] to provide in the alternative, for exclusion of employees of the Central and State Governments. However, the requirement of them being covered by any other Act or rules attaches as the word joining the alternatives is 'and'. Our aforesaid view is thus reinforced by the definition clause since, even though petitioner is said to have worked for an aided institution, declared to be akin to the State Government in Vikram Bhalchandra Ghongade (supra), she was not covered by the rules for payment of gratuity at the end of her service. Furthermore, it cannot be said that the GO was an option for petitioner to avail gratuity by retiring at age 58 and not having so opted, was allowed to work for another two years in lieu of gratuity. In any event, a GO is neither a statutory provision nor can be said to be a rule.

    8. We conclude, petitioner stands covered by provisions in Payment of Gratuity Act, 1972. She was and is entitled to payment of gratuity, having worked for an aided institution declared to be akin to State Government, which provides for payment of gratuity in the pension paid to their employees. As such, her delay in approaching the writ Court for obtaining payment of the gratuity, being gratitude for services rendered, cannot be barred. We respectfully agree with view taken in Jwala Devi (supra).

    9. The writ petition is allowed to extent above. Respondent no.4 is directed to take expeditious steps for sanction and disbursement of gratuity calculated in respect of petitioner, in accordance with provisions in Payment of Gratuity Act, 1972 and the rules framed thereunder. This be done within eight weeks from communication of certified copy of this order, to be made by petitioner.

    (Arindam Sinha,J.)
    (Satya Veer Singh,J.)
    April 9, 2026

    Thursday, April 16, 2026

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट 


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा के परिणाम आज, 15 अप्रैल को नतीजे जारी हो चुके हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं।


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। यह परिणाम आज शाम 4 बजे जारी हुए हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 93.70 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। बीते वर्ष से कुल पास प्रतिशत 0.04 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।


    जरूरी आंकड़े
    10वीं में कुल पास छात्र- 23,16,008
    बीते वर्ष कुल पास छात्र- 22,21,636
    कुल पास प्रतिशत- 93.70%

    सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 2.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 55,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। लड़कियों ने इस बार भी रिजल्ट में बाजी मारी और कुल 94.99 प्रतिशत लड़कियां पास हुईं। वहीं 92.69 प्रतिशत लड़के पास हुए।


    इस साल भी नहीं जारी हुई टॉपर्स लिस्ट
    हालांकि, बोर्ड ने इस वर्ष भी मेरिट सूची नहीं जारी की है। बोर्ड 0.1 प्रतिशत छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र जारी करेगा, ये वो छात्र होंगे जिन्होंने विषयों में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

    मेरिट प्रमाण पत्र संबंधित छात्र के डिजिलाकर में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, परीक्षार्थियों को मार्कशीट भी उनके डिजिलाकर खातों में उपलब्ध कराई गई है।

    सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि बोर्ड जल्द ही छात्रों को उनके स्कूल के माध्यम से उत्तीर्ण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। वहीं, इस वर्ष कंपार्टमेंट लाने वाले विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी।



    रिजल्ट देखने एवं डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं।

    इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर रिजल्ट एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।

    लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना लॉगिन डिटेल डालें।
    लॉगिन डिटेल डालने के बाद सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।

    चाहें तो रिजल्ट का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।