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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, July 12, 2020

    प्रतापगढ़ : पोर्टल से जुड़ेंगे शिक्षामित्र व अनुदेशक, PFMS पोर्टल से मानदेय भेजने की हो रही तैयारी, अब तक RTGS से खाते में भेजा जाता था पैसा

    प्रतापगढ़ : पोर्टल से जुड़ेंगे शिक्षामित्र व अनुदेशक, PFMS पोर्टल से मानदेय भेजने की हो रही तैयारी, अब तक RTGS से खाते में भेजा जाता था पैसा।


    प्रतापगढ़ : फर्जीवाड़ा रोकने के लिए अब शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को मानदेय राज्य मुख्यालय से दिया जाएगा। इससे न सिर्फ उन्हें समय से मानदेय मिलेगा बल्कि अन्य जिलों में एक ही प्रमाण पत्रों पर तैनात संविदा शिक्षकों की पकड़ भी हो पाएगी। पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर सबको लाने की तैयारी शुरू हो गई है। सितंबर से मानदेय इसी प्रणाली से दिए जाने की योजना है। जिले के प्राथमिक विद्यालयों में कुल 2851 शिक्षामित्र व 437 अनुदेशकों की तैनाती है। अभी तक इन्हें मानदेय आरटीजीएस के माध्यम से ऑनलाइन खाते में भेजा जाता था। राज्य परियोजना निदेशक विजय किरण आनंद ने 25 जून को सूबे के सभी बीएसए को पत्र भेज कर प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के मानदेय की बैंक इनवॉइस मांगी थी, जिससे इन्हें पोर्टल पर पंजीकृत किया जा सके। पोर्टल पर पंजीकृत करने के बाद शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों को मानदेय राज्य स्तर से दिया जाएगा। इससे उन्हें समय से मानदेय मिलेगा बल्कि अन्य जिलों में एक ही प्रमाणपत्रों पर तैनात संविदा शिक्षकों की पकड़ भी हो पाएगी। पब्लिक फाइनेंसियल मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) पोर्टल पर इन सबको लाने की तैयारी शुरू हो गई है। सितंबर से मानदेय इसी प्रणाली से देने की योजना है। उच्च प्राथमिक अनुदेशक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष तेजस्वी शुक्ला ने शासन के निर्देश पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अब अनुदेशकों को समय से मानदेय मिल सकेगा। दो जगह होने पर होगी पकड़ : पहले चरण में जिलों से ही इसके जरिए मानदेय भेजा जाएगा। दूसरे चरण में सितंबर तक इसे राज्य स्तर तक लागू किया जा सकता है। पब्लिक मैनेजमेंट फाइनेंशियल सिस्टम (पीएफएमएस) के जरिए मानदेय भेजने पर पता चल सकेगा कि एक ही प्रमाणपत्र पर कितने शिक्षामित्र या अनुदेशक तैनात हैं। यानी केजीबीवी के अनामिका प्रकरण जैसे मामले पकड़ में आ सकेंगे, क्योंकि राज्य स्तरीय डाटा इस पर रहेगा। वहीं अब मानदेय भी बजट आते ही दिया जा सकेगा। किसी भी वित्तीय शिकायत पर तुरंत जांच हो सकेगी।





    ये होंगे फायदे ::  बेसिक शिक्षा विभाग में चरणबद्ध तरीके से सभी खातों को पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम ( पीएफएमएस) पर लाया जा रहा है, ताकि फंड ट्रांसफर के साथ पारदर्शिता बनी रहे। यहां तक कि स्कूल प्रबंधन समितियों के खाते भी इस पर पंजीकृत किए गए हैं।

    ""पैसे से जुड़े सारे मामले पोर्टल से जुड़ेंगे, राज्य परियोजना के अकाउंट, कस्तूरबा विद्यालयों के अकाउंट, विद्यालयों के अकाउंट, शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों के अकाउंट सभी पोर्टल से जोड़े जाएंगे। अब बैंक किसी के पैसे को अपने यहां नहीं रोक सकेगा। शासन से सीधे पीएफएमएस पोर्टल के जरिए पैसा खाते में भेजा जाएगा। अशोक कुमार सिंह, बीएसए


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    यूपी बोर्ड : अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को करना पड़ेगा इंतजार, डिजिटल से चलेगा काम

    यूपी बोर्ड : अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को करना पड़ेगा इंतजार, डिजिटल से चलेगा काम


    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा 2020 का अंक सह प्रमाणपत्र मिलने में परीक्षार्थियों को इंतजार करना पड़ सकता है। बोर्ड ने 15 जुलाई से जिलों में वितरण कराने का ऐलान किया था लेकिन, अंकपत्र अभी क्षेत्रीय कार्यालयों में ही नहीं पहुंच सके हैं। अगले सप्ताह से क्षेत्रीय कार्यालय पहुंचने के आसार हैं। यूपी बोर्ड के निर्देश पर प्रधानाचार्य अंकपत्र की ऑनलाइन डिजिटल कॉपी पहली जुलाई से वितरित कर रहे हैं। 


    यह पहल इसलिए करनी पड़ी, क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते मार्कशीट छपने में देरी हुई है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि छात्र-छात्राओं को डिजिटल अंकपत्र वितरित किया जा रहा है, उसमें कोई दिक्कत नहीं आ रही साथ ही अगली कक्षाओं में प्रवेश के लिए वह मान्य होगा। जल्द ही अंक सह प्रमाणपत्र जिलों में पहुंचाए जाएं। इंटर का अंकपत्र 30 जुलाई तक भेजे जाने का ऐलान पहले ही किया जा चुका है।

    यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

    यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

     
    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक कालेजों में पाठ्यक्रम घटाया जाना है। बोर्ड प्रशासन पाठ्यक्रम सिर्फ इसी वर्ष के लिए कम करेगा, अगले वर्षो में तय पाठ की पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई यह एलान कर चुका है, जबकि बोर्ड के प्रस्ताव पर शासन से अनुमोदन का इंतजार किया जा रहा है। विभाग कोरोना संक्रमण का प्रभाव पठन-पाठन पर कब तक पड़ेगा इसका अनुमान लगा रहा है इसीलिए आदेश देने में विलंब हो रहा है।


    शैक्षिक सत्र अप्रैल से ही शुरू है। प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक कालेजों के लिए हर वर्ष का शैक्षिक पंचांग जारी होता है, इसमें किस माह में कितनी पढ़ाई होती है इसका जिक्र रहता है। जुलाई आधा बीत रहा है और अब तक कालेजों को संचालित करने के हालात नहीं है। हालांकि बोर्ड प्रशासन हाईस्कूल व इंटर के अभ्यर्थियों से परीक्षा फार्म भरा रहा है और कक्षा नौ व 11 में पंजीकरण करा शुरू करा चुका है। इससे भी पढ़ाई नहीं हो रही है, यह जरूर है कि ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्रओं को पढ़ाने का दावा किया जा रहा है ऐसे छात्रों की संख्या बहुत कम है। यूपी बोर्ड ने पहले 2020 का परिणाम जारी किया और फिर पाठ्यक्रम घटाने का प्रस्ताव तैयार किया। इसमें शासन को अलग-अलग सुझाव दिया गया है। 



    आसार हैं कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम करने का एलान करेगा और यह कटौती सिर्फ इसी वर्ष के लिए होगी। शासन प्रस्ताव का अनुमोदन करके पाठ्यक्रम घटाने का एलान कभी भी कर सकता है। यह भी संकेत है कि कंपार्टमेंट परीक्षा और पाठ्यक्रम की घोषणा एक साथ कर दी जाए। ज्ञात हो कि हाईस्कूल व इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि उन्हें शासन के आदेश का इंतजार है।

    फतेहपुर : कहानी ऑडियो के लिए जिले की राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका का हुआ चयन

    फतेहपुर : कहानी ऑडियो के लिए जिले की राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षिका का हुआ चयन।


    फतेहपुर :: बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षित छात्र-छात्राओं के लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद लखनऊ द्वारा पाठ्य पुस्तक को रुचिपूर्ण ढंग से बनाने का कार्य दीक्षा ऐप द्वारा किया जा रहा है। जिसके तहत कक्षा छह से आठ तक की पाठ्य पुस्तकों के पाठों का ऑडियो क्लिप बनाने के लिए शिक्षक शिक्षिकाओं से प्रस्ताव मांगे गए थे। राज्य स्तर पर उसे कुल 27 शिक्षकों को चयन किया गया। जिसमें जिले की राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक आसिया फारुकी के नाम का भी चयन किया गया है। नगर क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय अस्ती की प्रधानाध्यापक आसिया फारुकी ने बताया कि राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद लखनऊ द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों पर पुस्तक के पाठों को क्यूआर कोड से स्कैन करने पर पाठ का ऑडियो और वीडियो बच्चों को आकर्षित करते हैं। जिससे उनकी समझ भी विकसित होती हैं। इस कार्य में प्रदेश के 27 शिक्षकों में हमारा भी चयन हुआ है। हालांकि राज्य स्तर पर कहानी प्रतियोगिता भी जीत चुके हैं। बताया कि इससे पहले भी कक्षा 6, 7, 8 कक्षा की कहानियों को उनकी आवाज़ में डाला जा चुका है। ये कार्य कई वर्षों से हो रहा है। पुनः उनको कक्षा 1 से 5 तक की कहानियों को आवाज़ देने के लिए जिम्मेदारी दी गई है, यह पूरे जिले के लिए गर्व की बात है।





    दी जिम्मेदारी : पूरे प्रदेश में 27 शिक्षकों को इस कार्यक्रम के लिए किया गया है चयन, परिषदीय स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों के आधार पर बनने हैं ऑडियो


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    फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर फीडिंग में लापरवाही पड़ेगी भारी, शिक्षकों के साथ बीईओ पर भी होगी कार्यवाई, 15 जुलाई तक काम न होने पर रुकेगा वेतन

    फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर फीडिंग में लापरवाही पड़ेगी भारी, शिक्षकों के साथ बीईओ पर भी होगी कार्यवाई, 15 जुलाई तक काम न होने पर रुकेगा वेतन।


    फतेहपुर : मानव संपदा पोर्टल पर डाटा अपलोड में लापरवाही पर अब शिक्षकों के साथ खंड शिक्षा अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। शिक्षा निदेशक बेसिक के निर्देश के बाद बीएसए ने सभी शिक्षकों को 15 जुलाई तक पोर्टल पर अपना डाटा अपलोड और सुधार करने के लिए अंतिम अवसर दिया है। स्पष्टकिया गया है कि 15 जुलाई तक आदिमानव संपदा पोर्टल पर डाटा अपलोड नहीं होता है तो शिक्षकों के साथ-साथ खंड शिक्षा अधिकारियों के भी वेतन बाधित करने की कार्रवाई होगी। शिक्षा विभाग में फर्जी शिक्षकों को बेनकाब करने और अवकाश आदि कार्यों के ऑनलाइन संचालन किए जाने की नीति को लागू करने के लिए विभाग ने मानव संपदा पोर्टल पर सर्विस बुक को ऑनलाइन किए जाने की योजना बनाई है। इससे एक प्रमाण पत्र पर कई जनपद में नौकरी करने वाले शिक्षकों का पर्दाफाश हो सकेगा। इस योजना के तहत सभी शिक्षकों को अपना डाटा पोर्टल पर अपलोड किया जाना था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेशों के बावजूद जिले के तमाम शिक्षकों ने पोर्टल पर डाटा अपलोड करने में रुचि नहीं दिखाई। अभी भी जिले में तमाम शिक्षकों का डाटा अधूरा है। कई दर्जन शिक्षकों ने तो अभी मानव संपदा पोर्टल पर लॉगइन ही नहीं किया है।




    बीएसए सख्त : शिक्षकों के साथ बीइओ पर भी होगी कार्रवाई, तय समय 15 जुलाई तक काम न होने पर रुकेगा वेतन।

    शिक्षक खुद कर सकते हैं डाटा अपलोड : बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गूगल लिंक पर 15 जुलाई तक डाटा अपलोड करने एवं त्रुटियों के सुधार के लिए वक्त दिया गया है। इस काम को शिक्षक खुद ही कर सकते हैं। गूगल लिंक के माध्यम से कार्य किया जा सकता है। बताया कि जिले में करीब 98 प्रतिशत डाटा फीड हो चुका है। शेष को डाटा अपलोड करने के साथ साथ त्रुटियों का संशोधन भी करने के लिए सख्ती के साथ कहा गया है। अन्यथा की स्थिति में शिक्षकों के साथ साथ सम्बंधित बीईओ के भी वेतन रोकने की कार्यवाही की जाएगी।



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    सीबीएसई के नतीजे 15 जुलाई तक, मेरिट लिस्ट पर संशय

    सीबीएसई के नतीजे 15 जुलाई तक, मेरिट लिस्ट पर संशय 



    नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा के परिणाम 15 जुलाई तक जारी कर देगा। काउंसिल ऑफ द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआइएससीई) की तरह सीबीएसई भी मेरिट लिस्ट जारी न करने का फैसला ले सकता है। 


    सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने बताया कि कोरोना के चलते एवरेज मार्केटिंग के जरिये बोर्ड परीक्षा के परिणाम जारी किए जाएंगे। संभव है कि बोर्ड असाधारण परिस्थितियों को देखते हुए इस वर्ष मेरिट लिस्ट न जारी करे और नही टॉपर्स का एलान करे। हालांकि जनसंपर्क अधिकारी रमा शर्मा ने कहा कि बोर्ड ने अभी टॉपर्स की लिस्ट जारी करने को लेकर कोई फैसला नहीं लिया है।

    ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ अमीरों के लिए, गरीब परिवारों के पास स्मार्टफोन नहीं: बोले पूर्व सीएम अखिलेश

    ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ अमीरों के लिए, गरीब परिवारों के पास स्मार्टफोन नहीं: बोले पूर्व सीएम अखिलेश


    समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार की गलत नीतियों के चलते शिक्षा क्षेत्र में अव्यवस्था फैल रही है। स्कूल-कॉलेज कोरोना संकट के कारण बंद हैं। ऑनलाइन पढ़ाई पटरी पर नहीं आ पाई है। 


    गरीब परिवारों के बच्चों के पास स्मार्ट फोन नहीं है। तमाम स्थानों, खासकर देहात में नेटवर्क की समस्या बनी रहती है। ऑनलाइन पढ़ाई सिर्फ संपन्न परिवारों के लिए हो रही है।


    अखिलेश ने शनिवार को एक बयान में कहा कि भाजपा सरकार ने स्कूल-कॉलेज तो बंद करा दिए, लेकिन उनमें कार्यरत शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों की जिंदगी कैसे चलेगी, इसकी चिंता नहीं की। प्रबंधन पर विद्यालय बंदी के समय की फीस भी न लेने का दबाव बना। 


    ऐसी स्थिति में जो अभिभावक सक्षम थे, वे भी फीस नहीं जमा कर रहे हैं। नतीजतन 10 लाख से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों के शिक्षक वेतन के अभाव में भुखमरी के कगार पर पहुंच गए हैं। स्थिति यह है कि कुछ निजी विद्यालयों ने मार्च-अप्रैल का वेतन दे दिया, लेकिन आगे का वेतन देने से हाथ खड़े कर लिए हैं। 


    वहीं, कई विद्यालयों के शिक्षकों को मार्च का वेतन भी नहीं मिला है। जो अपने शिक्षण कार्य से आजीविका चला रहे थे, उनके सामने गंभीर संकट पैदा हो गया है। बेकारी व भूख से बहुत से 
    शिक्षक अवसाद ग्रस्त हो गए हैं। 


    'सरकार सहयोग करती तो न आता संकट'
    सपा अध्यक्ष ने कहा कि शिक्षा जगत के प्रति भाजपा सरकार में तनिक भी सम्मान का भाव होता तो वह प्राइवेट मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों के लिए न्यूनतम वेतन का सहयोग कर देती। 

    इससे सुविधा के अनुसार शिक्षक ऑनलाइन कक्षाएं ले सकते थे और अभिभावकों पर भी फीस का भार कुछ कम हो जाता। इसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन सभी के हित पूरे हो जाते।

    कोरोना के कारण नेशनल ओपन स्कूल NIOS की परीक्षाएं रद्द

    कोरोना के कारण नेशनल ओपन स्कूल NIOS की परीक्षाएं रद्द  


    नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने शुक्रवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूल (एनआईओएस) की परीक्षाएं रद्द करने की घोषणा की। 


    एनआईओएस ने शुक्रवार को जारी एक नोटिस में कहा, मार्च 2020 में होने वाली माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक परीक्षाओं को 17 जुलाई से कराने का फैसला किया गया था, जिसे अंततः रद्द कर दिया गया। इसके परिणाम की घोषणा मूल्यांकन योजना के आधार पर होगी। परीक्षार्थी चाहें तो अपने परिणाम को सुधारने के लिए आगे मांग पर होने वाली परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।

    69000 भर्ती : नकल माफिया एसटीएफ को भी दे रहे मात, सुराग नहीं


    69000 भर्ती : नकल माफिया एसटीएफ को भी दे रहे मात, सुराग नहीं

    -चंद्रमा यादव समेत चार आरोपी महीने भर बाद भी पकड़ से दूर
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    -पिछले महीने स्थानांतरित कर एसटीएफ को सौंपी गई थी विवेचना


    प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह में शामिल नकल माफिया एसटीएफ को भी मात दे रहे हैं। मामले में फरार चल रहे चंद्रमा यादव समेत चार आरोपी महीने भर बाद भी नही ंपकड़े जा सके हैं। शासन से सोरांव पुलिस से स्थानांतरित कर विवेचना पिछले महीने एसटीएफ को सौंपी थी। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह का भंडाफोड़ चार जून को हुआ था। सोरांव पुलिस ने मामले मेें महज छह दिन के भीतर 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। इसमें सरगना केएल पटेल भी शामिल था।


    प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए नौ जून को शासन ने विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित कर दी। जिसके बाद टीईटी पेपर लीक मामले के आरोपी चंद्रमा यादव को भी मामले में वांछित किया गया। मायापति दुबे, आलोक उर्फ धर्मेंद्र व दुर्गेश समेत तीन आरोपी पहले से फरार थे। एसटीएफ की टीम ने शहर में विभिन्न स्थानों केअलावा कौशांबी, प्रतापगढ़, भदोही में दबिश दी लेकिन आरोपियों का अब तक कोई सुराग नहीं हासिल कर पाई है। मामले में एसटीएफ अफसरों का यही कहना है कि फरार आरोपियों के हरसंभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। उन्हें गिरफ्तार करने के प्रयास लगातार जारी हैं। विवेचना प्रचलित है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


    शिवकुटी में दर्ज केस में भी नहीं हुई कार्रवाई
    69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा पास कराने वाले गिरोह के सरगना केएल पटेल पिछले साल रेलवे भर्ती परीक्षा में धांधली की कोशिश करते पकड़े गए गिरोह के भी संपर्क में था। जिस पर शिवकुटी थाने में दर्ज मामले मेें उसे आरोपी बनाया गया था। सोरांव मामले में गिरफ्तारी के बाद शिवकुटी पुलिस ने भी अपने मुकदमे में उसका रिमांड बनवाया था। हालांकि अब तक इस मामले में भी उसके खिलाफ कार्रवाई आगे नहीं बढ़ सकी है। हालांकि पुलिस का कहना है कि उसके खिलाप साक्ष्य एकत्रित किए जा रहे हैं। साक्ष्यों के अनुसार कार्रवाई आगे बढ़ाई जाएगी।

    माध्यमिक : आम शिक्षकों का स्थानांतरण बंद, पहुंच वालों के लिए कोई रोक नहीं


    माध्यमिक : आम शिक्षकों का स्थानांतरण बंद, पहुंच वालों के लिए कोई रोक नहीं

    प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के स्थानांतरण पर निदेशक की रोक का कोई असर नहीं


    प्रयरागराज। प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के स्थानांतरण में निदेशक की रोक के बाद भी मनमाने तरीके से पहुंच वाले शिक्षकों के स्थानांतरण लगातार हो रहे हैं। प्रदेश के हजारों शिक्षक सरकार की ओर से स्थानांतरण पर लगी रोक के हटाए जाने का इंतजार कर रहे हैं। साल भर से 32 शिक्षक-शिक्षिकाओं की फाइल सारी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद भी शिक्षा निदेशालय में निदेशक. माध्यमिक के आदेश का इंतजार कर रही हैं।


    वहीं स्थानांतरण पर रोक के बाद भी प्रदेश सरकार में पहुंच रखने वाली दो शिक्षिकाओं और एक शिक्षक का स्थानांतरण आदेश चुपचाप जारी कर दिया गया। जो स्थानांतरण हुए उसमें पहला, मई में प्रयागराज से लखनऊ जबकि बाकी दो स्थानांतरण बीती नौ जुलाई को हुए। इसमें एक वाराणसी में एक स्कूल से दूसरे स्कूल और दूसरा बांदा के एक स्कूल से कानपुर नगर स्थानांतरण का है। ये स्थानांतरण गुपचुप तरीके से हो रहे हैं जबकि शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने ऑफलाइन स्थानांतरण की पत्रावली शिक्षा निदेशालय को अग्रसारित करने पर रोक लगा रखी है। 


    डीआईओएस ने निदेशक को नहीं दी सूचना
    शिक्षा निदेशक की ओर से ऑनलाइन स्थानांतरण के लिए प्रदेश के जिला विद्यालय निरीक्षकों से चार बार जानकारी मांगी गई। इसमें प्रदेश के मात्र पांच जिला विद्यालय निरीक्षकों ने ही जानकारी भेजी। शिक्षा निदेशक की ओर से चार बार दिए गए आदेश का पालन न किए जाने पर भी किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थानांतरण को लेकर 11 शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है जबकि अधिकारी पहुंच वालों का गुचचुप तरीके से स्थानांतरण कर दे रहे हैं।

    इसी सत्र से केवी और नवोदय में ओबीसी आरक्षण का मिलेगा लाभ

    इसी सत्र से केवी और नवोदय में ओबीसी आरक्षण का मिलेगा लाभ

    केंद्रीय विद्यालय में पहली और नवोदय में छठी कक्षा के छात्रों को मिलेगा फायदा


    नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालय संगठन और नवोदय विद्यालय समिति के स्कूलों में भी 2020 सत्र से दाखिले में ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलेगा। सरकार ने केंद्र सरकार के दोनों शिक्षण संस्थानों में दाखिले में ओबीसी नियमों को लागू करने की मंजूरी दे दी है। पहली कक्षा से आरक्षण का लाभ मिलेगा। 


    वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में जल्द ही पहली कक्षा में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन विंडो ओपन होने जा रही है। इसी के तहत पहली कक्षा में दाखिले के दौरान ओबीसी आरक्षण के तहत दाखिले में लाभ मिलेगा। 13 जुलाई को देश के सभी केंद्रीय विद्यालय स्कूलों की ऑनलाइन बैठक भी बुलाई गई है। इसमें नए दाखिला नियमों के साथ-साथ सभी को अपने सॉफ्टवेयर में भी बदलाव करना होगा।


     इसी के साथ नवोदय स्कूलों में भी इस आरक्षण के तहत इस साल से छठी कक्षा से छात्रों को पूरा लाभ मिलेगा। 2017 में पहली बार इन स्कूलों में आरक्षण की मांग उठी थी। इसी के तहत तीन महीने पहले ही इसका खाका तैयार किया गया था।

    कुछ राज्यों के बदले रुख पर यूजीसी ने कहा, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय परीक्षाओं से नहीं कर सकते इनकार


    कुछ राज्यों के बदले रुख पर यूजीसी ने कहा, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालय परीक्षाओं से नहीं कर सकते इनकार


    नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को रद्द करने को लेकर छात्रों की ओर से चलाए जा रहे अभियान और कुछ राज्यों के रुख के बाद यूजीसी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कुछ राज्यों के परीक्षा न कराए जाने की एकतरफा घोषणा के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने भी कहा 'सभी विश्वविद्यालय गाइडलाइन के दायरे में आते हैं। चाहे व केंद्रीय हों अथवा राज्यों के विश्वविद्यालय। कोई भी इसे मानने से इनकार नहीं कर सकता है।'



    यूजीसी सचिव रजनीश जैन ने कहा कि उन्हें भी कई राज्यों की ओर से परीक्षाएं न कराने के फैसले की जानकारी मिली है, जल्द ही वह इस संबंध में संबंधित राज्यों और विश्वविद्यालयों से चर्चा करेंगे। साथ ही उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराएंगे। उन्होंने कहा कि जहां तक बात कोरोना संक्रमण के खतरे की है तो मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी दोनों ही छात्रों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से सतर्क है। यही वजह है कि जुलाई में प्रस्तावित परीक्षाओं को कराने के फैसले को टाल कर अब सितंबर अंत तक का समय दिया गया है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर विश्वविद्यालय परीक्षाओं को लेकर तैयार है। उन्होंने तैयारी भी कर ली है। स्थानीय स्थितियों का आंकलन करने के बाद वह जल्द ही परीक्षाओं को लेकर फैसला ले सकेंगे।


    यूजीसी ने छह जुलाई को जारी अपनी संशोधित गाइड लाइन में अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को जरूरी बताया। साथ ही इन्हें कराने के लिए विश्वविद्यालयों को सितंबर अंत तक का समय दिया है। बता दें कि यूजीसी देश में विश्वविद्यालयों की सबसे बड़ी नियामक संस्था है।


    गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद जारी की गई थी संशोधित गाइडलाइन
    यूजीसी ने विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को लेकर जारी गई अपनी संशोधित गाइडलाइन गृह मंत्रालय की अनुमति के बाद जारी की थी। इसके तहत अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को अहम बताया गया था। साथ ही विश्वविद्यालयों को इसके लिए 30 सितंबर तक समय दिया था। इसके अलावा यह भी कहा था कि यदि किसी छात्र की परीक्षाएं इस दौरान छूट जाती है, तो उचित कारणों के आधार पर उन्हें चालू सत्र के बीच में ही फिर से परीक्षा का एक मौका दिया जाए।


     कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए यूजीसी विश्वविद्यालयों की पहले और दूसरे वर्ष की परीक्षाओं को पहले ही रद्द चुकी है। इसके तहत इन सभी छात्रों को अब आंतरिक आंकलन के आधार पर प्रमोट किया जाएगा। जबकि अंतिम वर्ष की परीक्षाओं को एक से पंद्रह जुलाई के बीच कराने को कहा था।

    131 शिक्षक बदले हुए पैन नंबर से ले रहे हैं वेतन, शासन से मिले निर्देश के बाद विभाग ने जांच की प्रकिया की शुरू


    131 शिक्षक बदले हुए पैन नंबर से ले रहे हैं वेतन, शासन से मिले निर्देश के बाद विभाग ने जांच की प्रकिया की शुरू


    कासगंज। शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़े से जूझ रहे शिक्षा विभाग की सिरदर्दी कम होने का नाम नहीं ले रही। एसआईटी की जांच में जनपद के 131 शिक्षक पैन नंबर बदल कर वेतन ले रहे हैं। शासन के निर्देश पर उन शिक्षकों का सत्यापन किया जा रहा है। बीएसए ने इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र लिखकर जांच कराने के निर्देश दिए हैं।


    आगरा विश्व विद्यालय से वर्ष 2004-05 में बीएड करने वाले शिक्षकों के फजीवाड़े की जांच के बीच ही कस्तूरबा विद्यालय में फर्जी शिक्षिका का मामला सामने आया। शासन ने अब ऐसे शिक्षकों को रडार पर ले लिया है जिन्होंने किसी कारण से अपने पैन नंबर बदलवाए। इनकी जांच एसआईटी को सौंपी गई है।
    एसआईटी ने इन ऐसे शिक्षकों की सूची जनपद में भेजी है इसमें 131 शिक्षक पैन नंबर बदलकर वेतन लेते पाए गए हैं। इन शिक्षकों के पुराने व नए नंबर में काफी अंतर है। 


    इस सूची के आने के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मच गई है। अब इन सभी शिक्षकों की जांच की जाएगी। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि शिक्षकों ने अपने जो पैन नंबर बदलवाए हैं वे अभिलेखों में गलत नंबर अंकित हो जाने की वजह से ऐसा किया गया है या फिर या फिर शिक्षकों ने अपने पैन नंबर बदलकर कोई अनुचित लाभ लिया है। इन सभी शिक्षकों से कारण सहित स्पष्टीकरण मांगा जाएगा, ताकि सही तथ्य सामने आ सकें।

    पैन कार्ड बदलवाने वाले शिक्षकों का विकासखंड वार ब्योरा
    कासगंज-20
    अमापुर-7
    गंजडुंडवारा-21
    पटियाली-25
    सिढ़पुरा-18
    सहावर-14
    सोरों-26


    पैन नंबर बदलवाने वाले सभी शिक्षकों का सत्यापन कराया जाएगा। इस संबंध में वित्त एवं लेखाधिकारी को पत्र लिखकर जांच कराने के निर्देश दे दिए गए हैं। -अंजली अग्रवाल, बेसिक शिक्षा अधिकारी

    मानव सम्पदा के नित नए अपडेट के बाद आने वाली नवीन समस्याओं को इंगित करते हेतु उ प्र प्रा शि संघ इकाई बेहटा शाखा सीतापुर का ज्ञापन, उठाये गंभीर सवाल, तकनीकी दिक्कतों से मुक्ति की मांग।

    मानव सम्पदा बनी परिषदीय शिक्षकों हेतु गम्भीर आपदा, साइट की तकनीकी दिक्कतों के चलते शिक्षकों की बढ़ी दुश्वारियां।


    मानव सम्पदा के नित नए अपडेट के बाद आने वाली नवीन समस्याओं को इंगित करते हेतु उ प्र प्रा शि संघ इकाई बेहटा शाखा सीतापुर का ज्ञापन, उठाये गंभीर सवाल, तकनीकी दिक्कतों से मुक्ति की मांग। 




    SMC और VEC में 31 मार्च 2019 तक कि अवशेष व अप्रयुक्त धनराशि को हस्तांतरित की जा रही प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए सीतापुर की ब्लॉक बेहटा PSS इकाई ने उठाये महत्वपूर्ण सवाल, प्रक्रिया को दी वित्तीय कदाचार की संज्ञा, सौंपा ज्ञापन

    SMC और VEC में 31 मार्च 2019 तक कि अवशेष व अप्रयुक्त धनराशि को हस्तांतरित की जा रही प्रक्रिया को दोषपूर्ण बताते हुए सीतापुर की ब्लॉक बेहटा PSS इकाई ने उठाये महत्वपूर्ण सवाल, प्रक्रिया को दी वित्तीय कदाचार की संज्ञा, सौंपा ज्ञापन। 



    ★  सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत जनपद में विद्यालय प्रबन्ध समिति(एसoएमoसीo) तथा ग्राम शिक्षा समिति (वीoईoसीo) के बैंक खातों में 31 मार्च 2019 तक अप्रयुक्त/अवशेष धनराशि को जनपद स्तर पर बैंक खाते में संरक्षित किये जाने हेतु अपनाई जा रही प्रक्रिया के विरोध में उ प्र प्रा शि संघ की ब्लॉक इकाई का ज्ञापन


    ■ सुलगते प्रश्न

    🧨क्या SMC या VEC एकाउंट में  आये किसी मद के अप्रयुक्त धन को दूसरे खाते में हस्तान्तरित करने का परिषदीय विद्यालय के प्रधानध्यापक को है..?

    🧨महानिदेशक स्तर के सभी जारी पत्रों में यह ज़िम्मेदारी किसको दी गई..?

    🧨जिला स्तरीय/ब्लॉक स्तरीय आदेशो में किस आधार पर धन हस्तांतरण/चेक जमा करने का दबाव...?

    🧨महानिदेशक स्तर से जारी प्रारूप 1 और प्रारूप 2 पर विद्यालय स्तर से सूचना लेकर वित्तीय सदाचार की प्रक्रिया अपनाने में गुरेज क्यो..?

    🧨यदि प्रधानाध्यापक अमुक अप्रयुक्त धन की चेक देता है तो यह वित्तीय कदाचार की श्रेणी में तो नही..?

    🧨VEC खाते में समाजकल्याण विभाग से आई छात्र छात्रवृत्ति का धन भी क्या सर्व शिक्षा अभियान को वापस हो सकता है..?
    🧨क्या किसी मद में आये धन/अवशेष धन के प्रयोग/हेड बदलाव का आदेश निर्गत करने का अधिकार शासन स्तर के अतिरिक्त अन्य किसी को है..?

    🧨क्या यह अप्रयुक्त धन सरकारी कोष के अतिरिक्त किसी अन्य नवीन सामान्य बचत खाते में जमा करना नियमसंगत है..? 

    Saturday, July 11, 2020

    महराजगंज : परिषदीय विद्यालयों में अनियमित/नियम विरुद्ध/फर्जी रूप से हुई नियुक्ति जांच/सत्यापन हेतु बीएसए ने मृतक आश्रित सहित सभी शिक्षक/शिक्षिकाओं की पत्रावली प्रेषित करने के सम्बन्ध में दिया निर्देश

    महराजगंज : परिषदीय विद्यालयों में अनियमित/नियम विरुद्ध/फर्जी रूप से हुई नियुक्ति जांच/सत्यापन हेतु बीएसए ने मृतक आश्रित सहित सभी शिक्षक/शिक्षिकाओं की पत्रावली प्रेषित करने के सम्बन्ध में दिया निर्देश।


    मृतक आश्रित के अन्तर्गत नियुक्त शिक्षक/शिक्षिकाओं की जांच के सम्बन्ध में-


    Friday, July 10, 2020

    लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब

    लॉकडाउन में प्राइवेट स्कूल फीस माफ करने वाली याचिका पर SC ने दिया यह जवाब
       
    याचिका में लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग कोर्ट से की गई थी.


    नई दिल्ली: सुप्रीमकोर्ट (Supreme Court) ने लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों की तीन महीने की फीस (School Fees) माफ करने और रेगुलेटरी तंत्र बनाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि राज्य की स्थिति अलग होती है. याचिकाकर्ता से हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने के लिए कोर्ट ने कहा है. 


    बताते चलें कि 8 राज्यों के अभिभावकों ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए लॉकडाउन के दौरान निजी स्कूलों की तीन महीने की (एक अप्रैल से जून तक की) फीस माफ करने और नियमित स्कूल शुरू होने तक फीस रेगुलेट किये जाने की मांग की थी. शुक्रवार को कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है.  


    अभिभावकों ने अपनी याचिका में फीस न देने के कारण बच्चों को स्कूल से न निकाला जाए जैसी मांग भी कोर्ट से की थी. गौरतलब है कि कोरोना महामारी के चलते हुए राष्ट्रव्यापी लाॉकडाउन जारी है. ऐसे में रोजगार बंद होने से बहुत से अभिभावक फीस देने में असमर्थ हो गए हैं. हालांकि केंद्र सरकार ने अनलॉक 2 की घोषणा करते हुए जारी बंदिशों में कुछ छूट दी है. लेकिन अभी-भी कुछ राज्य ऐसे हैं जहां कोरोना ने तांडव मचा रखा है. जिसके मद्देनजर राज्य सरकार को वापस लॉकडाउन की घोषणा की है.

    प्रयागराज : 61 फर्जी शिक्षकों से नहीं हुई वेतन रिकवरी, तीन साल पहले किए गए थे बर्खास्त, फर्जी अभिलेखों के आधार पर बने थे शिक्षक

    प्रयागराज : 61 फर्जी शिक्षकों से नहीं हुई वेतन रिकवरी, तीन साल पहले किए गए थे बर्खास्त, फर्जी अभिलेखों के आधार पर बने थे शिक्षक।

    प्रयागराज : फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक बनने का खेल सालों से चला आ रहा है। अभी 69 हजार शिक्षक भर्ती का प्रकरण शांत भी नहीं हुआ कि एक और मामला सामने आ गया है। यह 61 ऐसे फर्जी शिक्षकों का मामला है, जो तीन साल पहले बस्ती हो चुके हैं। लेकिन विभाग अब तक इन लोगों से नौकरी के दौरान वेतन के रूप में लिए गए करोड़ों रुपये की वसूली नहीं कर पाया है। तीन साल पहले धनूपुर ब्लाक में सात, बहरिया में सात, करछना में दो, कौड़िहार में आठ, कोरांव में चार, मऊआईमा में एक, मांडा में चार, मेजा में सात, हंडिया में दो, प्रतापपुर में तीन, सादाबाद में आठ, उरुवा में चार, फूलपुर व जसरा में दो-दो शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्र पर नौकरी करते पाए थे। तब इन 61 फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया था लेकिन तब तक यह लोग तीन से दस साल की नौकरी कर चुके थे। जब बर्खास्त हुए तो इन सभी से वेतन की रिकवरी होनी थी। लेकिन विभाग की लापरवाही से रिकवरी नहीं हुई और मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। अब शिक्षकों के फर्जीवाड़े के प्रकरण प्रदेश भर में चल रहा है तो पिछले दिनों लखनऊ में हुई बैठक में बर्खास्त शिक्षकों का भी मामला सामने आया। बर्खास्त शिक्षकों पर कार्रवाई न होने की जानकारी मिलने पर अफसरों ने नाराजगी जताई। उसके बाद बीएसएफ सक्रिय हुए और बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा कराने के साथ ही रिकवरी कराने का आदेश दिया। अब उनके खिलाफ मुकदमा कराए जा रहे हैं।




    "सभी बर्खास्त शिक्षकों पर मुकदमा दर्ज कराने के लिए एक जुलाई को पत्र जारी कर संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया था। उसके बाद वित्त अधिकारी को भी इस संबंध में लिखकर जानकारी मांगी गई। अब सभी बर्खास्त शिक्षकों को नोटिस भेजा गया है। उन्हें एक सप्ताह का समय भी दिया है। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। -- संजय कुशवाहा, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी


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    सीबीएसई की तर्ज पर करीब 30 फीसदी घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, 27,342 कॉलेजों के पठन-पाठन पर पड़ेगा असर, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार

    महीने के हिसाब से कोर्स कम करेगा यूपी बोर्ड।

    प्रयागराज :: सीबीएसई के बाद यूपी बोर्ड भी 2020-21 सत्र के लिए कोर्स कम करने जा रहा है। कोरोना के कारण मार्च से ही स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बाधित है। इसे देखते हुए यूपी बोर्ड के विषय विशेषज्ञों से कोर्स कम करने का प्रस्ताव तैयार कराया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जुलाई महीने में यदि नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं तो कक्षा 9 से 12 तक के पूरे पाठ्यक्रम का 10 प्रतिशत गुस्सा कम किया जाएगा। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे। इसी प्रकार अगस्त में पढ़ाई बाधित होने पर 20 फीसदी और सितंबर तक कक्षाएं चालू नहीं होने पर 30 प्रतिशत कोर्स कम किया जाएगा। बोर्ड ने इसी फॉर्मूले के आधार पर विषय विशेषज्ञों की कमेटी से हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक, विज्ञान, भूगोल, जीव विज्ञान, कला, गृह विज्ञान समेत पूरे कोर्स में कटौती करवाते हुए शासन को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है। संस्कृत शिक्षा बोर्ड भी कम करने जा रहा कोर्स प्रदेश के 1151 संस्कृत विद्यालयों में संचालित प्रथमा (कक्षा 6 से 8 तक), पूर्व मध्यमा (कक्षा 9 व 10) और उत्तर मध्यमा (कक्षा 11 व 12) के कोर्स कटौती भी होने जा रही है। 13 से 15 जुलाई तक संस्कृत शिक्षा बोर्ड लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे।


    भेजा प्रस्ताव : कोरोना के कारण जुलाई महीने की पढ़ाई बाधित होने पर 10 प्रतिशत करेंगे कटौती

    अगस्त के लिए 20 प्रतिशत, सितंबर तक नुकसान पर 30 प्रतिशत कमी का प्रस्ताव बोर्ड की ओर से शासन को भेजा गया है प्रस्ताव, विषय विशेषज्ञों से ली रिपोर्ट।

    इस तरह होगी कटौती प्रयागराज उदाहरण के तौर पर जुलाई का नुकसान होने पर कक्षा 10 संस्कृत से तीन पाठ (10 प्रतिशत),अगस्तकी पढ़ाई प्रभावित होने की दशा में छह पाठ (20 प्रतिशत) और सितंबर तक पढ़ाई-लिखाई पटरी पर आने की स्थिति में नौ पाठ (30 प्रतिशत) कम किया जाएगा। 2020-21 सत्र की शुरुआत तो एक अप्रैल से ही हो चुकी है लेकिन यूपी बोर्ड जुलाई से सितंबर तक को आधार बनाकर कटौती करने के पक्ष में है।


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    सीबीएसई की तर्ज पर घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार।

    प्रयागराज : सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में पाठ्यक्रम घटने जा रहा है। इसका असर प्रदेशभर के 27,373 कालेजों की पढ़ाई पर पड़ेगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा नौ से 12वीं तक का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत कम किया है। यूपी बोर्ड जून माह में ही पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा चुका है, संकेत है कि शासन करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम घटने का एलान कभी भी कर सकता है। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने 30 जून को 'यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में घटेगा पाठ्यक्रम !' खबर प्रकाशित की थी। कोरोना संक्रमण के कारण अब तक स्कूल-कालेज नहीं खुलने से पढ़ाई बाधित है। जबकि शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से ही शुरू हो चुका है।





    हालांकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम को अपनाया गया है। लेकिन, फिर भी उस गति से पढ़ाई नहीं हो सकी है। इसीलिए पाठ्यक्रम को कम करने की कवायद है। यूपी बोर्ड में कई विषयों में सीबीएसई का ही पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। बोर्ड ने शासन के निर्देश पर जून में ही शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की देखरेख में पाठ्यक्रम घटाने के लिए बैठक की थी। पाठ्यचर्या समिति (पाठ्यक्रम बनाने वाले) के सदस्यों व विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अहम विषयों में पाठ्यक्रम कम करने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा कक्षा नौ व ग्यारह का सिलेबस घटाने का प्रस्ताव है, जिसका करीब 20 व 30 फीसद कम करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब कभी भी शासन यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम सीबीएसई की तर्ज पर 30 प्रतिशत कम कर सकता है। उधर, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पाठ्यक्रम घटाने पर शासन ही अंतिम निर्णय करेगा, जो आदेश होगा उसका अनुपालन कराया जाएगा।


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    Polytechnic Entrance Exam 2020: पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा अब 12 और 15 सितंबर को


    Polytechnic Entrance Exam 2020: पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा अब 12 और 15 सितंबर को


    Polytechnic Entrance Exam 2020 कोरोना के मद्देनजर बढ़ाई गई तिथि पहले 19 और 25 जुलाई को होनी थी परीक्षा ।


    लखनऊ || कोरोना संक्रमण के मद्देनजर शासन ने पॉलीटेक्निक प्रवेश परीक्षा की तिथि बढ़ा दी है। अब यह परीक्षा 12 और 15 सितंबर को होगी। पहले इसकी तिथि 19 और 25 जुलाई निर्धारित की गई थी। गुरुवार को यह जानकारी संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद के सचिव एसके वैश्य ने दी। दो पालियों में होगी परीक्षा दोनों तिथियों में दो पालियों में परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। परीक्षा सूबे के 75 जिलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीके से होगी। पूरे प्रदेश से करीब चार लाख विद्यार्थियों ने इसके लिए आवेदन किया है।


    लॉकडाउन से बढ़ी प्रवेश परीक्षा की तिथि

    गौरतलब हैै क‍ि पहले प्रवेश परीक्षा की तिथि पांच और छह जुलाई थी, लेक‍िन लॉकडाउन और बढ़ते कोरोना संक्रमण के कारण परिषद को यह तिथि बढ़ानी पड़ी थी। 20 मई को जारी हुए आदेश में परिषद ने प्रवेश परीक्षा की नई तिथि 19 और 25 जुलाई निर्धारित की थी, लेक‍िन एक बाद फ‍िर परीक्षा की त‍िथ‍ियोंं में बदलाव क‍िया गया है। 


    परीक्षा शेड्यूल 
    ग्रुप-ए (तीन वर्षीय डिप्लोमा ऑनलाइन परीक्षा), 12 सितंबर, सुबह नौ से दोपहर 12:00 बजे तक। -
    ग्रुप-ई-वन, ई-टू (डिप्लोमा इन फार्मेसी ऑफलाइन परीक्षा), 12 सितंबर, दोपहर 02:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक।
    ग्रुप-बी, सी, डी, एफ, जी, एच और आई (ऑनलाइन परीक्षा), 15 सितंबर, सुबह नौ बजे से दोपहर 12:00 बजे तक।
    ग्रुप-के वन से के-आठ (ऑनलाइन परीक्षा), 15 सितंबर, दोपहर 02:30 बजे से शाम 05:30 बजे तक।  

    CISCE : ICSE, ISC Results 2020: 10वीं में 99.33% और 12वीं में 96.84% छात्र हुए पास, ऐसे देखें परिणाम


    CISCE :  ICSE, ISC Results 2020: 10वीं में 99.33% और 12वीं में 96.84% छात्र हुए पास, ऐसे देखें परिणाम 


    ICSE, ISC Result 2020: काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (ICSE) कक्षा 10वीं और इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) कक्षा 12वीं के परीक्षाओं के रिजल्ट जारी कर दिए हैं.
      

    ICSE, ISC Result 2020: काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (CISCE) ने आखिरकार 10वीं और 12वीं के रिजल्ट जारी कर दिए हैं. रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट्स cisce.org, results.cisce.org पर उपलब्ध है. बोर्ड परीक्षा के अंक और पास सर्टिफिकेट डिजीलॉकर पर 48 घंटे बाद मिल जाएंगे. वहीं CISCE इस बार मेरिट लिस्ट जारी नहीं करेगा.

    इस साल इंडियन सर्टिफिकेट ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (ICSE) कक्षा 10वीं में 99.33% और इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट (ISC) कक्षा 12वीं में 96.84% छात्र सफल हुए हैं. पिछले साल 10वीं कक्षा में 98.54% और 12वीं कक्षा में 96.52% छात्रों ने सफलता हासिल की थी. इस बार रिजल्ट पिछले साल से बेहतर है.


    बता दें, इस साल 10वीं में 2,07,902 छात्रों ने परीक्षा दी थी जिसमें से 2,06,525 पास हुए हैं, वहीं 12वीं में 88,409 छात्रों ने परीक्षा दी थी जिसमें से 85,611 पास हुए हैं.


    ये थे पिछले साल के टॉप, ISC 12वीं के टॉपर का नाम

    कोलकाता के देवांग कुमार अग्रवाल और बेंगलुरु की विभा स्वामीनाथन ने ISC 12वीं की परीक्षा में 100 परसेंट मार्क्स के साथ टॉप किया है.


    ICSE 10वीं में टॉपर का नाम
    मुंबई की जूही रूपेश कजारिया और मुक्तसर के मनहर बंसल ने कक्षा 10वीं की ISCE एग्जाम में 99.60 परसेंट के साथ टॉप किया है.


    नंबर से खुश नहीं तो दोबारा चेक करा सकते हैं आंसरशीट
    जो छात्र अपने रिजल्ट से खुश नहीं हैं वह री- चेकिंग के लिए आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए हर एक पेपर के लिए 1000 रुपये फीस देनी होगी. आवेदन करने के लिए ऑनलाइन विंडो 10 से 16 जुलाई, 2020 तक खुली रहेगी.


    कैसे मिलेगी मार्कशीट
    CISCE काउंसिल छात्रों के लिए डिजिटल मार्कशीट और पास सर्टिफिकेट उपलब्ध करेगा. काउंसिल डिजीलॉकर (DigiLocker) द्वारा सभी छात्रों के लिए उनके नंबर और पास सर्टिफिकेट उपलब्ध करेगा.




    पिछले साल कैसे रहे थे 10वीं-12वीं के रिजल्ट

    पिछली बार 10वीं की परीक्षा में 98.54% स्टूडेंट्स को कामयाबी मिली थी, और लड़कियों ने लड़कों से बाजी मार ली थी. वहीं 12वीं में 96.52% छात्र पास हुए थे. आपको बता दें, पिछले साल 7 मई को रिजल्ट की घोषणा हो गई थी, लेकिन इस बार कोरोना वायरस के कारण रिजल्ट में देरी गई, इसी के साथ CISCE ने बची हुई परीक्षा का रद्द कर दिया गया था.

    वहीं जिन परीक्षाओं का आयोजन नहीं हुआ है, उनके लिए अंक आंतरिक मूल्यांकन मोड द्वारा दिए जाएंगे. यदि कोई छात्र संतुष्ट नहीं है, तो उनके पास बाद में परीक्षा के लिए फिर से उपस्थित होने का विकल्प होगा.


    CISE, ISC 2019 class 10th and 12th Results: ऐसे देखें रिजल्ट

    स्टेप 1- रिजल्ट देखने के लिए सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट cisce.org पर जाएं.

    स्टेप 2- अब रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें.

    स्टेप 3- ID नंबर और पूछी गई जानकारी भरें.

    स्टेप 4- आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखने लगेगा.

    स्टेप 5- भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें

    फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर बिना फीडिंग के नहीं मिल सकेगी पगार, ऑनलाइन फीडिंग के लिए शासन ने 15 जुलाई तक तय की तारीख

    फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर बिना फीडिंग के नहीं मिल सकेगी पगार, ऑनलाइन फीडिंग के लिए शासन ने 15 जुलाई तक तय की तारीख।

    फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक और अध्यापिकाओं के साथ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का ऑनलाइन ब्योरा तैयार करने का शासन से आदेश मिलने के बाद भी तीन माह में यह काम पूरा नहीं हो सका है। शासन ने साफ कर दिया है कि जब तक मानव संपदा में फीडिंग पूरी नहीं हो पाएगी तब तक पगार नहीं मिल जाएगी। ऑनलाइन फीडिंग के लिए निदेशक ने 15 जुलाई तक की मियाद तय कर रखी है। बेसिक शिक्षा विभाग में 9234 शिक्षक शिक्षिकाएं और 167 शिक्षणेत्तर कर्मचारी तैनात हैं। इन सरकारी कर्मचारियों का संपूर्ण ब्योरा ऑनलाइन किया जाना है। फीडिंग के मामले में जिला शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की फीडिंग में टॉपटेन में शामिल है। वहीं 2945 शिक्षामित्रों की ऑनलाइन फीडिंग में यह टॉप 50 में पहुंच जाता है। कमोबेश यही स्थिति अन्य जिलों की भी है। शिक्षामित्रों की ऑनलाइन फीडिंग सुस्त है जिसका खामियाजा पगार पर पड़ रहा है। पहली जुलाई को हर सरकारी मुलाजिम को वेतन आरटीजीएस के माध्यम से खाते में मिल जाता रहा है लेकिन अभी तक वेतन नहीं मिल पाया है। इससे फीडिंग का काम करने वाले शिक्षक शिक्षकों परेशान हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस समय में जिले से काम पूरा कराया जाएगा। सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वह ब्लॉक स्तर पर मॉनीटरिंग करें और काम पूरा कराएं।





    ऑनलाइन लोडिंग के लिए शासन ने 15 जुलाई तक तब की तारीख, शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का ऑनलाइन वार हो रहा ब्यौरा


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    राहतः पीएम केयर्स फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक की गिरफ्तारी पर रोक


    शिक्षक को राहतः पीएम केयर्स फंड पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक की गिरफ्तारी पर रोक


    पीए केयर्स फंड को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने वाले शिक्षक नेता को राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी गिरफ़तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत शिक्षक नेता पर मुकदमा दर्ज करने पर संबंधित आईओ को तलब कर लिया है।

    कोर्ट ने कहा कि आईटी एक्ट की धारा 66 ए में मुकदमा दर्ज करना सुप्रीमकोर्ट के आदेश का स्पष्ट उलघंन है। इस मामले में अदालत प्रदेश के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को तलब करना चाह रही थी, मगर मौजूदा कोविड 19 महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों के कारण ऐसा न करते हुए सिर्फ आईओ को तलब किया है। 


    एटा के शिक्षक नेता नंदलाल सिंह यादव की याचिका पर न्यायमूर्ति पंकज नकवी और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की पीठ सुनवाई कर रही है। याची के अधिवक्ता सुनील यादव का कहना कहना था कि याची ने पीएम केयर्स फंड को लेकर सोशल मीडिया पर टिप्पणी की थी। जिस पर उसके खिलाफ मिराहची थाने में आईटी एक्ट की धारा 66 ए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया। अधिवक्ता का कहना था कि धारा 66 ए अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ है।


     सुप्रीमकोर्ट श्रेया सिंघल बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में इस धारा को असंविधानिक (अल्ट्रा वायरस) घोषित कर चुका है। सर्वोच्च अदालत ने इस आदेश की प्रति सभी राज्यों के उच्चन्यायालयों और मुख्य सचिवों को भी भेजने का निर्देश दिया ताकि इस धारा के तहत मुकदमे दर्ज न किए जाएं। इसके बावजूद उत्तर प्रदेश में धारा 66 ए के तहत बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। 


    कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सुप्रीमकोर्ट की रोक के बावजूद मुकदमे दर्ज करना सर्वोच्च अदालत के आदेश का स्पष्ट उल्घंन है। कोर्ट ने याची पर दर्ज मुकदमे की जांच और उसकी गिरफ्तारी पर अगली सुनवाई तक रोक लगाते हुए विवेचनाधिकारी को अदालत में रिकार्ड के साथ हाजिर हाजिर होने का निर्देश दिया है। इस आदेश की प्रति संबंधित जिले के एसएसपी और डीजीपी को भी भेजने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को होगी।

    यूपी बोर्ड : कक्षा- 9 व 11 के अग्रिम पंजीकरण 25 अगस्त तक, सचिव ने जारी किया 2020-21 के लिए पंजीकरण कार्यक्रम

    यूपी बोर्ड : कक्षा- 9 व 11 के अग्रिम पंजीकरण 25 अगस्त तक, सचिव ने जारी किया 2020-21 के लिए पंजीकरण कार्यक्रम।


    प्रयागराज : यूपी बोर्ड के 28 हजार से अधिक स्कूलों में कक्षा 9 व 11 में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं का ग्रुप पंजीकरण 25 अगस्त तक होगा। सचिव दिव्यकान्त शुक्लने गुरुवार को 2020 21 सत्र के लिए पंजीकरण कार्यक्रम जारी कर दिया। ये छात्र 2022 कीबोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। कक्षा 9 व 11 में छात्र-छात्राओं के प्रवेश की अंतिम तिथि 5 अगस्त है। प्रधानाचार्य प्रति छात्र अग्रिम पंजीकरण शुल्क 50 रुपये की दर से चालान से कोषागार में जमा करेंगे। पंजीकरण शुल्क की सूचना तथा छात्र छात्राओं के शैक्षिक विवरणों को बोर्ड की वेबसाइट www. upmsp.edu.in पर 25 अगस्त की रात 12 बजे तक ऑनलाइन अपलोड किया जा सकेगा।





    प्रधानाचार्य 26 अगस्त से 5 सितंबर तक छात्र-छात्राओं के विवरणों की चेकलिस्ट प्राप्त कर उसकी जांच करेंगे।जांच के बाद ऑनलाइन विवरण में किसी प्रकार का संशोधन होना है तो प्रधानाचार्य 6 से 20 सितंबर की रात 12 बजे तक कर सकेंगे। इस अवधि में किसी नवीन छात्र का विवरण अपलोड या स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल संशोधन ही स्वीकार होंगे। प्रधानाचार्य पंजीकृत की फोटोयुक्त नामावली एवं कोष पत्र की प्रति 30 सितंबर तक डीआईओएस कार्यालयों में जमा करेंगे। संबंधित क्षेत्रीय कार्यालयों में सूचना उपलब्ध कराई जाएगी। बोर्ड की ओर से 2022 की परीक्षा से नवीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों को यूजर आईडी व पासवर्ड संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक जारी करेंगे।


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