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Tuesday, August 22, 2119

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    Thursday, February 5, 2026

    योग्य शिक्षकों को मिलेगा अवसर, SCERT शुरू कर रहा है कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम, देखें जारी विज्ञप्ति

    योग्य शिक्षकों को मिलेगा अवसर, SCERT शुरू कर रहा है कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम, देखें जारी विज्ञप्ति

    प्रदेश के विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में SCERT का डिजिटल कदम, भौतिक, रसायन, गणित और जीव विज्ञान के लिए रिकॉर्डेड ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करेगा SCERT


    लखनऊ । राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश ने कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल की घोषणा की है। इसके तहत प्रदेश के परिषदीय, माध्यमिक एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित एवं जीव विज्ञान विषयों में रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।

    SCERT द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में विषयगत समझ को गहरा करना, अधिगम स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना तथा कठिन अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रभावी शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रस्तुत करना है। यह पहल विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शैक्षिक संसाधनों तक समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    इस कार्यक्रम के लिए राज्य के परिषदीय, माध्यमिक एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक कार्यरत हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के इच्छुक और योग्य शिक्षक स्वयं नामांकन (सेल्फ-नॉमिनेशन) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया गूगल फॉर्म के जरिए पूरी की जाएगी। चयनित शिक्षक रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन करेंगे, जिससे न केवल विषयवस्तु की स्पष्ट समझ विकसित होगी, बल्कि नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल टूल्स और प्रभावी शैक्षिक रणनीतियों से भी शिक्षक और विद्यार्थी परिचित हो सकेंगे।

    SCERT ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण प्रदान करने वाले चयनित शिक्षकों को निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा। यह पहल शिक्षकों की अकादमिक दक्षता, अनुभव और समर्पण को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक अहम प्रयास है।

    कार्यक्रम से संबंधित पात्रता मानदंड, नामांकन प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया तथा कक्षावार एवं विषयवार समय सारिणी की विस्तृत जानकारी SCERT उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। परिषद ने यह भी बताया कि चयनित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र के साथ निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाने और विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।



    उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार

    उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों तक सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग से जुड़े प्रत्येक कार्मिक को अपने परिवार के सभी सदस्यों का विवरण फैमिली आईडी पोर्टल पर दर्ज कराना होगा।



    प्रदेश भर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और अन्य कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। फैमिली आईडी में पति, पत्नी और बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों का नाम और आधार नंबर दर्ज किया जाएगा। पंजीकरण के दौरान मुख्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा, जिस पर ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी बीईओ और विद्यालय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय से फैमिली आईडी बनवाकर उसकी प्रति विभाग को उपलब्ध कराएं। फैमिली आईडी तैयार होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों का वेतन निर्गत किया जाएगा। इसी कारण फरवरी माह का वेतन फैमिली आईडी पूर्ण होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

    अधिकारियों का कहना है कि फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी डाटाबेस में कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्पष्ट और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा फैमिली आईडी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जा रही है।

    शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कार्मिकों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा करना होगा, ताकि वेतन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी 6 फरवरी को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से करेंगे परीक्षा पे चर्चा, सुबह 10 बजे होगा प्रसारण, जानिए! कहां देखें लाइव प्रसारण?

    परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम अन्तर्गत मा० प्रधानमंत्री जी की विद्यार्थियों के साथ चर्चा का 06 फरवरी को प्रातः 10.00 बजे होगा सजीव प्रसारण 





    Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी 6 फरवरी को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से करेंगे परीक्षा पे चर्चा, सुबह 10 बजे होगा प्रसारण, जानिए! कहां देखें लाइव प्रसारण?

    Pariksha Pe Charcha 2026 Date: परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण 6 फरवरी सुबह 10 बजे आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करेंगे। इस बार कार्यक्रम नए अंदाज में देशभर के छात्रों से जुड़ते हुए आयोजित किया जा रहा है और इसे टीवी व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लाइव देखा जा सकेगा।
     

    Pariksha Pe Charcha 2026: विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक बार फिर आयोजित होने जा रहा है।


    इस साल इसका 9वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसकी तारीख आधिकारिक तौर पर घोषित कर दी गई है। प्रधानमंत्री 6 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद करेंगे।
    इस बार कार्यक्रम का बदला हुआ स्वरूप पिछले वर्षों में यह कार्यक्रम मुख्य रूप से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होता था, लेकिन अब इसके आयोजन के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। 

    नई पहल के तहत प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग क्षेत्रों के छात्रों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर और गुवाहाटी के विद्यार्थियों से बातचीत की।  वहीं कुछ चयनित छात्रों को दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर उनसे मिलने और अपने सवाल साझा करने का अवसर भी मिला।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए इस कार्यक्रम को लेकर अपनी उत्सुकता व्यक्त की और कहा कि परीक्षा के मौसम में ‘परीक्षा पे चर्चा’ की वापसी छात्रों के लिए नई ऊर्जा लेकर आती है। उन्होंने छात्रों से तनावमुक्त होकर परीक्षाओं का सामना करने की अपील भी की।


    रजिस्ट्रेशन में बना नया रिकॉर्ड
    इस वर्ष कार्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। अब तक 4.5 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने इसमें भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो पिछले साल बने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी अधिक बताया जा रहा है। 

    आंकड़ों के मुताबिक, 4.19 करोड़ से ज्यादा छात्र, करीब 24.84 लाख शिक्षक और लगभग 6.15 लाख अभिभावक इस पहल से जुड़ चुके हैं। यह बड़ी भागीदारी दर्शाती है कि परीक्षा के दबाव को कम करने की दिशा में यह कार्यक्रम कितना लोकप्रिय हो चुका है।


    कहां देखें लाइव प्रसारण?
    6 फरवरी को होने वाले इस खास कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट दूरदर्शन के DD National, DD News और DD India चैनलों के साथ-साथ ऑल इंडिया रेडियो पर किया जाएगा। 

    इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव और MyGov.in पोर्टल पर भी छात्र इसे ऑनलाइन देख सकते हैं। कई निजी टीवी चैनल भी इसका प्रसारण करेंगे, ताकि देशभर के विद्यार्थी प्रधानमंत्री के सुझावों से जुड़ सकें।


    'एग्जाम वॉरियर्स' अभियान का हिस्सा
    परीक्षा पे चर्चा केंद्र सरकार की एग्जाम वॉरियर्स पहल से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाली चिंता और दबाव से बाहर निकालना है। फरवरी के मध्य से सीबीएसई सहित विभिन्न बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और अप्रैल में जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। ऐसे समय में यह संवाद छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

    इस कार्यक्रम में छठी कक्षा से ऊपर के छात्र, शिक्षक और अभिभावक हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र और भविष्य के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर भी मिलता है। यह चर्चा केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी युवाओं को प्रेरित करती है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।

    माध्यमिक शिक्षक सरकारी और निजी अस्पतालों में करा सकेंगे मुफ्त इलाज, वित्तविहीन के शिक्षकों का होगा चिह्नांकन, देखें आदेश 


    लखनऊ। कैबिनेट की हरी झंडी के बाद शासन ने बुधवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का शासनादेश जारी कर दिया। इसका लाभ अशासकीयसहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों व मानदेय शिक्षकों, संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों सहित कुल 2.97 लाख शिक्षकों व उनके आश्रित परिवार को मिलेगा।

    अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षकों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी चिकित्सालयों के अलावा निजी चिकित्सालयों में भी उपचार की कैशलेस सुविधा मिलेगी। शिक्षकों व उनके परिवार के सदस्यों के लिए प्रति शिक्षक 3000 सालाना प्रीमियत अनुमानित है। योजना का क्रियान्वयन साचीज के माध्यम से कराया जाएगा। लाभार्थियों व उनके परिवार का पूरा विवरण माध्यमिक शिक्षा विभाग के नामित नोडल अधिकारी हर साल 30 जून तक मुख्य कार्यपालक अधिकारी साचीज को उपलब्ध कराएंगे। 

    वित्तविहीन के शिक्षकों का होगा चिह्नांकन : शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि चूंकि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई अधिकृत आंकड़ा विभाग के पास नहीं होता है। इसलिए वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के चिह्नांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। वहीं जो लोग पहले से केंद्र या राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित किसी अन्य स्वास्थय योजना से लाभांवित हैं, उन्हें इस योजना का लाभअनुमन्य नहीं है।



    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।



    सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

    सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

    किसी का बेटा 12वीं बोर्ड परीक्षा में, किसी की बेटी नीट

    सुप्रीम कोर्ट ने परिषदीय शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया है टीईटी


    प्रयागराज। वर्षों से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने वाले सैकड़ों उम्रदराज शिक्षक आज खुद फिर से परीक्षार्थी बन गए हैं। नौकरी में बने रहने की अनिवार्यता ने उन्हें ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि वे दिन में स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं और रात में खुद की पढ़ाई में जुटते हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों के साथ अब उनके शिक्षक भी किताबें खोलकर बैठने को मजबूर हैं।


    प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि दो दशक से अधिक हो चुकी है, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) और अन्य अनिवार्य अर्हताओं को पूरा करने के दबाव में लगातार तैयारी कर रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जिनके बच्चे 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, और घर का माहौल एक साथ दो पीढ़ियों की पढ़ाई का केंद्र बन गया है।

    इन शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को शिक्षित करने में लगा दिया, लेकिन अब उनकी योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाकर उन्हें फिर से परीक्षा की कसौटी पर खड़ा कर दिया गया है। उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे सिर्फ इसलिए तैयारी कर रहे हैं ताकि वर्षों की सेवा के बाद नौकरी न छिन जाए।

    शिक्षक संगठनों का मानना है कि अनुभव को दरकिनार कर केवल परीक्षा आधारित व्यवस्था थोपना शिक्षा व्यवस्था की विडंबना है। वे कहते हैं कि जो शिक्षक वर्षों से कक्षा में परिणाम दे रहे हैं, उनके लिए सम्मानजनक समाधान होना चाहिए था। मौजूदा स्थिति में शिक्षक मानसिक दबाव, असुरक्षा और अपमान की भावना से गुजर रहे हैं।

    शिक्षा जगत में यह तस्वीर चिंताजनक मानी जा रही है, जहां पढ़ाने वाले खुद असुरक्षित भविष्य के डर से फिर से छात्र बन गए हैं। यह सवाल अब और तेज हो गया है कि क्या अनुभव, सेवा और समर्पण की कोई कीमत नहीं, या फिर शिक्षक को जीवन भर परीक्षा देते रहना ही उसकी नियति बना दी गई है।

    Wednesday, February 4, 2026

    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश

    परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व पोर्टल पर जारी किए जाएंगे निरीक्षकों के परिचय पत्र, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी किए निर्देश

    सचिव भगवती सिंह की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा गया पत्र

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु, पारदर्शी और नकलविहीन संचालन के लिए कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    सचिव ने निर्देश दिया है कि । कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाते ए समय उनके संपूर्ण विवरण की न भलीभांति जांच की जाए। किसी विद्यालय से संबंधित परीक्षा केंद्र रे पर कितने कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता होगी, इसका पूरा 5 विवरण डीआईओएस स्तर से ही निर्गत किया जाएगा। कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर परीक्षा प्रारंभ होने से एक सप्ताह पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा डाउनलोड किए जाएंगे।

    परिचय पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कक्ष निरीक्षक को आवंटित परीक्षा केंद्र का विवरण अंकित कर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को हस्तगत कराया जाएगा। कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापकों को परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से तीन दिवस पूर्व 15 फरवरी को अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर केंद्र व्यवस्थापक को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

    डीआईओएस द्वारा जनपद में बनाए गए सभी परीक्षा केंद्रों के लिए केंद्रवार कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार कर अपने कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिनमें से एक कक्ष निरीक्षक का बाह्य विद्यालय से होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पांच कक्षों पर एक मोचक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापक माध्यमिक शिक्षा परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार न किए गए हों। परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिन परीक्षा केंद्रों पर बालिका परीक्षार्थी परीक्षा दे रही हों, वहां महिला कक्ष निरीक्षकों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाएगी।

    परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में 40 परीक्षार्थियों पर दो तथा 41 से 60 परीक्षार्थियों पर तीन कक्ष निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वकेंद्र पर छात्राओं के परीक्षा कक्षों में उसी विद्यालय के अध्यापकों की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।




    परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला निरीक्षक की लगेगी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा की 30 दिन तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी के 120 केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए परिषद के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला कक्ष की ड्यूटी लगाना जरूरी है। तलाशी की भी उन्हीं को अनुमति होगी।

    परिषद की ओर से जारी आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं। परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्ष निरीक्षकों को भी मोबाइल फोन, कैलकुलेटर व अन्य इलेक्ट्रिॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष व अन्य जगहों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरे में आवाज की भी रिकॉर्डिंग होनी जरूरी है। साथ ही इसका डाटा परीक्षा खत्म होने के 30 दिनों तक रखना अनिवार्य है।

    परिषद के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अनुक्रमांक अनिवार्य रूप से लिखेंगे। कक्ष बोर्ड पर किसी स्तर से कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी।

    परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उस पर लगने वाली फोटो का सही तरीके से मिलान जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होगी। ऐसा पाए जाने पर विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।




    यूपी बोर्ड की परीक्षा में जूते मोजे उतरवाने पर प्रतिबंध, रोज कैमरों और वायस रिकॉर्डर की होगी जांच, एक माह तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    लखनऊ । राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों के जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा लेने पर रोक लगा दी है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ही परीक्षार्थियों की पूरी जांच होगी। केंद्रों पर लगे कैमरों और वायस रिकॉर्ड की जांच होगी। खराब होने पर सूचना तुरंत डीआईओएस के साथ कंट्रोल रूम को देनी होगी और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है। इसमें कहा है कि किसी भी छात्रा की तलाशी पुरुष शिक्षक नहीं करेंगे। केंद्र पर जिस विषय का पेपर है, उसके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। परीक्षार्थियों से अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे। 

    बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के हर पेज पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना होगा। केंद्र पर फोटोग्राफी और प्रेस, मीडिया को ब्रीफिंग नहीं होगी। सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर के बिना किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं होगी। कैमरे, वायस रिकार्डर के डीवीआर की रिकार्डिंग 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट रोज सेक्टर, स्टैटिक मजिस्ट्रेट डीएम, डीआईओएस को देंगे। केंद्रों पर प्रवेश पत्र के साथ कक्ष निरीक्षकों, ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के परिचय पत्र की भी जांच होगी। निरीक्षकों के मोबाइल और गैजेट बाहर जमा कराए जाएंगे।



    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश






    यूपी बोर्ड के अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ करेगी निगरानी, नकल में संलिप्त बाहरी व्यक्तियों पर अंकुश के लिए एलआइयू रहेगी सक्रिय

    थानाध्यक्षों को निर्देश, केंद्र व्यवस्थापक व निरीक्षक माने जाएंगे लोकसेवक


     प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा नकलविहीन और शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, डीएम, पुलिस आयुक्त/एसएससी व एसपी को शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि नकल में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए एलआइयू व अन्य स्त्रोतों से सूचना एकत्र कर परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर आवश्यकतानुसार एसटीएफ को तैनात किया जाए।

    परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों के बाहर पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी)/ जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व व्यवस्थापन कार्य करने वाले अध्यापकों व केंद्राध्यक्षों को लोक सेवक माना जाएगा। ऐसे में इन पर हमला आदि दुर्घटनाओं के मामले में संज्ञेय अपराध के अंतर्गत एफआइआर दर्ज की जाएगी।

     परीक्षा केंद्र से सामूहिक नकल अथवा परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिलने/संदेह होने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आजीवन कारावास तक तथा एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। जनपद को जोन सेक्टर में बांटकर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। यह दायित्व एसडीएम/नगर मजिस्ट्रेट/कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया जाएगा। 

    निरीक्षण व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि प्रत्येक सेक्टर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 10 से अधिक न हो। यथासंभव प्रधानाचार्य पद के समानांतर या उच्च पदधारक कार्मिक अधिकारी को ही स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नियुक्त किए जाएंगे। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर कराई जाएगी।



    बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव हेतु परीक्षा केन्द्रों पर स्ट्रांग रूम की स्थापना व उसमें रखी डबल लॉक आलमारी की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों के वितरण के सम्बन्ध में।


    मदरसा बोर्ड की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 9 से 14 फरवरी तक, डाउनलोड करें समय सारिणी

    मदरसा बोर्ड की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 9 से 14 फरवरी तक, डाउनलोड करें समय सारिणी 


    लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 277 परीक्षा केंद्रों पर 9 से 14 फरवरी तक होंगी। मदरसा बोर्ड ने 71 जिलों में ये केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। परीक्षा में 80933 परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षाएं सुबह 8 से 11 बजे और दोपहर 2 से 5 बजे तक दो पाली में होंगी। बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि फर्नीचर की व्यवस्था वाले मदरसों और इंटर कालेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। 


    छुट्टी के दिन शिक्षकों को ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे, शासन स्तर से भी आदेश जारी किए जाने की तैयारी

    छुट्टी के दिन शिक्षकों को ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे, शासन स्तर से भी आदेश जारी किए जाने की तैयारी


    लखनऊ। कोई भी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अवकाश के दिन शिक्षकों को जबरन ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने पिछले दिनों आदेश भी जारी किए थे लेकिन उस आदेश के अमल में हो रही हीलाहवाली पर अब शासन ने कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में अब बिना ठोस कारण छुट्टी के दिन शिक्षकों को काम पर बुलाना डीआईओएस को महंगा पड़ सकता है। शासन स्तर से भी इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की तैयारी है।

    दरअसल, पिछले महीनों में प्रचंड ठंड के कारण मुख्यमंत्री ने स्कूलों में छुट्टी के आदेश दिए थे। बाद के कुछ दिनों में शासन स्तर से भी आदेश जारी कर भीषण ठंड के कारण स्कूलों में छुट्टी की गई थी। उस दौरान कई जिलों के डीआईओएस ने अवकाश घोषित होने के बावजूद शिक्षकों के लिए उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी। कई जिलों में तो बाद में सूचना देकर शिक्षकों को स्कूल बुलाया गया था। इसको लेकर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। साथ ही छुट्टी के दिन शिक्षकों से जबरन ड्यूटी कराए जाने की कई शिकायतें शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक को की थी।


    अवकाश में ड्यूटी के के लिए जेडी की अनुमति जरूरी

    शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिए थे कि इसको लेकर एक दिशा निर्देश जारी करे। बताया जाता है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बारे में जारी दिशा-निर्देश पर अमल नहीं होने पर अब शासन स्तर से इसके लिए निर्देश जारी करने की तैयार की जा रही है। जिसमें अवकाश के दिनों में किसी शिक्षक को ड्यूटी पर बुलाने से पहले जेडी (संयुक्त शिक्षा निदेशक) से अनुमति लेना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।

    Tuesday, February 3, 2026

    हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार

    हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार


    केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो सुरक्षित आवास की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ देती थीं। हॉस्टल से छात्राओं को आत्मविश्वास, शिक्षा की निरंतरता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी।


    लखनऊ । केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की छात्राओं के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। आज भी बड़ी संख्या में बेटियां सिर्फ इस वजह से आगे की पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके जिले या आसपास सुरक्षित आवास की व्यवस्था नहीं होती। ग्रामीण छात्राओं को उच्च शिक्षा तक सीधी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में इंटर, स्नातक या तकनीकी शिक्षा के संस्थान अक्सर जिला मुख्यालय या शहरी क्षेत्रों में होते हैं। आवास की सुविधा नहीं होने के कारण छात्राओं को रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं।


    हॉस्टल बनने से उन्हें सुरक्षित और सुलभ आवास मिलेगा, जिससे वे बिना किसी बाधा के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर सकेंगी। बालिका शिक्षा में गिरावट पर लगेगा अंकुश आर्थिक कमजोरी और सुरक्षा की चिंता के कारण कई परिवार बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजते। जिले में ही छात्रा हॉस्टल होने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। इससे बालिकाओं की शिक्षा निरंतरता बनी रहेगी। सुरक्षित वातावरण से आत्मविश्वास में वृद्धि छात्राओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए हॉस्टल में सुरक्षा, वार्डन, सीसीटीवी और अन्य मूलभूत सुविधाएं होंगी। सुरक्षित माहौल मिलने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास पर भी ध्यान दे सकेंगी। 

    आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत किराए के मकान या निजी हॉस्टल का खर्च गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भारी होता है। सरकारी हॉस्टल कम शुल्क पर उपलब्ध होने से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और बेटियों की शिक्षा पर खर्च करना आसान होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सुविधा जिला मुख्यालयों में स्थित लाइब्रेरी, कोचिंग संस्थान और डिजिटल संसाधनों तक छात्राओं की पहुंच बढ़ेगी। इससे ग्रामीण छात्राएं भी इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगी। सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव जब बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगी, तो समाज में शिक्षा के प्रति सोच बदलेगी। यह योजना महिला सशक्तिकरण को मजबूती देगी और “बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ” के संकल्प को जमीन पर उतारेगी। कुल मिलाकर, हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल की व्यवस्था न केवल शिक्षा तक पहुंच आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।

    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी

    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी
     

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन में याची शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 13 जनवरी को लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है।

    अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कुल 130 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सोमवार को पक्षकारों ने जवाबी शपथ पत्र व प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने अंतिम सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय कर तब तक के लिए अंतरिम रोक बढ़ा दी।



    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया आदेश

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही। पर लगी रोक को 19 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी तक कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है।

    याची शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित करते हुए अंतरिम आदेश दिया है कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 के संबंध में आगे की कार्यवाही नहीं करेंगे। 

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का लाभ इस याचिका से संबद्ध अन्य याचिकाओं के याची शिक्षकों को भी मिलेगा। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।

    याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण संबंधी शासनादेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने नियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जा सकता। मामले में राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। 



    मध्य सत्र में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 

    कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।


    अमेठी, बाराबंकी और श्रावस्ती में भी समायोजन 3.0 पर लगी रोक, पुरानी  याचिकाओं के साथ कनेक्ट करते हुए 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई, देखें कोर्ट ऑर्डर 





    शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक

    लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

    कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

    कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं। 



    फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश

    फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश



    फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि ऐसे सभी असिस्टेंट टीचरों के मामलों की पूरे राज्य में व्यापक जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। जस्टिस मंजू रानी चौहान की सिंगल बेंच ने इस संबंध में राज्य सरकार को मैंडमस जारी किया है।


    हाईकोर्ट ने प्रिंसिपल सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा को निर्देश दिया है कि यह जांच संभव हो तो छह महीने के भीतर पूरी की जाए। कोर्ट ने साफ कहा कि केवल अवैध नियुक्तियों को रद्द करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसे शिक्षकों से अब तक ली गई सैलरी की रिकवरी भी की जाए। इसके साथ ही फर्जी नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

    कोर्ट ने टिप्पणी की कि राज्य सरकार द्वारा कई सर्कुलर और निर्देश जारी किए जाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी समय पर और प्रभावी कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। यह निष्क्रियता न सिर्फ धोखाधड़ी को बढ़ावा देती है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को कमजोर करती है। कोर्ट ने कहा कि इससे छात्रों के हितों को गंभीर नुकसान होता है, जो न्यायालय के लिए सर्वोपरि है।

    Monday, February 2, 2026

    बजट 2026 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब बनेंगीं, शिक्षा बजट में इस बार 8.27 प्रतिशत वृद्धि

    बजट 2026 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब बनेंगीं, शिक्षा बजट में इस बार 8.27 प्रतिशत वृद्धि

    03 नए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एजुकेशन एंड रिसर्च खुलेंगे

    05 विश्वविद्यालय खोलने में मदद देगी केंद्र सरकार


    नई दिल्ली केंद्रीय बजट 2026-27 में शिक्षा क्षेत्र को लेकर अहम घोषणाएं की गई हैं। स्कूल-कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब बनेंगी। वहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में पांच यूनिवर्सिटी टाउनशिप बनाई जाएंगी। खास बात यह है कि ये सभी यूनिवर्सिटी टाउनशिप प्रमुख औद्योगिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर के आसपास विकसित की जाएंगी। ऐसे में इसका सीधा लाभ यहां पढ़ने वाले छात्रों को मिलेगा। यह पहल इसलिए की जा रही है ताकि इंडस्ट्री और रोजगार सीधे उच्च शिक्षा के साथ जुड़ सकें।


    इसके साथ ही सेवा क्षेत्र के विकास पर ध्यान केंद्रित करने वाले उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्च-स्तरीय 'शिक्षा से रोजगार और उद्यम' स्थायी समिति गठित करने की घोषणा से शिक्षा को कौशल से जोड़ने और उद्योगों की जरूरतों के मुताबिक शैक्षिक ढांचे पर फोकस बढ़ेगा। हर जिले में गर्ल्स हास्टल बनाने का ऐलान लड़कियों की इनरोलमेंट दर बढ़ाने के मकसद से किया गया है। बजट में हुए ऐलान के मुताबिक, देशभर के 15,000 स्कूलों और 500 कॉलेजों में कंटेंट क्रिएटर लैब्स तैयार की जाएंगी।


    इडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज बनेगा:

    इसके साथ ही सरकार कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए सेट अप भी लगाएगी। बजट में अनुमान लगाया गया है कि 2030 तक देश में एवीजीसी सेक्टर के लिए 20 लाख से अधिक प्रोफेशनल्स की जरूरत होगी। सरकार मुंबई में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज की स्थापना भी करेगी। कंटेंट के उभरते बाजार को देखते हुए सरकार का यह घोषणा काफी महत्वपूर्ण है।


    शिक्षा बजट में इस बार 8.27 प्रतिशत वृद्धि : शिक्षा के कुल बजट में इस बार 8.27 फीसदी बढ़ोतरी की गई है। वर्ष 2026-27 में 139289 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। पिछले वर्ष यह आवंटन 128650 करोड़ रुपये का था। अटल टिंकरिंग लैब के लिए आवंटन बढ़ाकर 3200 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा आईआईटी, आईआईएम जैसे संस्थानों को दी जाने वाली मदद में भी बढ़ोतरी की गई है।

    सेवा क्षेत्र पर स्थायी समिति की घोषणा की गई : एक उच्च-स्तरीय स्थायी समिति सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करेगी, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी निर्यात और एआई एकीकरण को बढ़ावा देगी ताकि कौशल को भविष्य की कार्यबल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाया जा सके।


    राज्यों के साथ मिलकर टाउनशिप बनेंगी

    केंद्र सरकार ने साफ किया है कि 'यूनिवर्सिटी टाउनशिप' बनाने में केंद्र सरकार विभिन्न राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करेगी। यानी यूनिवर्सिटी बनाने, ढांचा खड़ा करने और सुविधाएं विकसित करने में राज्यों को केंद्र की मदद मिलेगी। इस पूरी योजना का मकसद यह है कि हर क्षेत्र की जरूरत के हिसाब से आधुनिक और मजबूत शिक्षा संस्थान तैयार किए जाएं।


    यह होगा खास

    इन विश्वविद्यालयों में स्किल सेंटर बनाए जाएंगे, जहां पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण होगा

    यूनिवर्सिटी में हाईटेक लेबोरेटरी, आधुनिक कॉलेज, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब भी होंगे

    छात्रों को अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाएं मिलेंगी, शोध को बढ़ावा



    पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन खोला जाएगा

    केंद्र सरकार ने बजट में पूर्वी भारत में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन खोलने का भी एलान किया गया है। इसका सीधा मकसद है कि इस क्षेत्र में डिजाइन की पढ़ाई, क्रिएटिव सोच और इनोवेशन को मजबूती मिले। वहीं, आईआईटी मुंबई व्यावहारिक नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए क्रिएटर लैब्स की स्थापना करेगा, जिससे छात्रों को बड़ा लाभ मिलेगा।

    Sunday, February 1, 2026

    यूपी बोर्ड परीक्षा अवधि के दौरान सीएमओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र के बाद ही मिल सकेगा चिकित्सकीय अवकाश

    यूपी बोर्ड  परीक्षा अवधि के दौरान सीएमओ द्वारा जारी प्रमाण पत्र के बाद ही मिल सकेगा चिकित्सकीय अवकाश



    अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों के प्रवेश लिये जाने हेतु आवेदन पत्र प्राप्त किये जाने की अंतिम तिथि 15 फरवरी तक बढ़ी

    अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों के प्रवेश लिये जाने हेतु आवेदन पत्र प्राप्त किये जाने की अंतिम तिथि 15 फरवरी तक बढ़ी





    अटल आवासीय विद्यालय में कक्षा 6 और 9 में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, आवेदन की अंतिम तिथि 31 जनवरी और 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा


    लखनऊ। अटल आवासीय विद्यालयों में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के कक्षा छह व नौ में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। हर ब्लाक के अधिक से अधिक बच्चों को प्रवेश मिल सके इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। आवेदन प्रक्रिया ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनो मोड में पूरी की जाएगी।

    अंतिम तिथि 31 जनवरी है। जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते हैं वह ऑफलाइन आवेदन कर सकते हैं। इस विद्यालय में निर्माण श्रमिक, अनाथ श्रेणी, कोविड से अनाथ और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना से जुड़े बच्चे आवेदन के पात्र होंगे। उन्हें निशुल्क शिक्षा दी जाती है। 

    इस तरह से करें आवेदन
    ऑनलाइन के लिए pbocw.in पर जाएं ऑफलाइन के लिए श्रम कार्यालय से फॉर्म प्राप्त करें।

    ये है उम्र सीमा
    कक्षा छह में प्रवेश के लिए जन्मतिथि 1 मई 2014 से 31 अगस्त 2016 दोनों के बीच होनी चाहिए। कक्षा नौ में प्रवेश के लिए जन्मतिथि 1 मई 2011 से 31 अगस्त 2013 के बीच होनी चाहिए।


    ये शैक्षिक अभिलेख जरूरी

    कक्षा छह में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी सत्र 2025-26 में कक्षा पांच में पास होना चाहिए।

    कक्षा नौ में प्रवेश के लिए सत्र 2025-26 में कक्षा आठ पास होना चाहिए


    इन बातों का रखें ध्यान

    एक परिवार से दो बच्चे ही कर सकेंगे आवेदन। सभी वर्गों को आरक्षण नियमानुसार मिलेगा।

    आवेदन के लिए ये भी जरूरी
    निर्माण श्रमिक कार्ड।
    अनाथ होने की दशा में माता पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र। कमजोर वर्ग के लिए ईडब्लूएस प्रमाणपत्र।
    जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड।
    आवेदक का पैन नंबर।
    जाति प्रमाणपत्र।
    पासपोर्ट साइज के फोटो।




    अटल आवासीय विद्यालय में प्रवेश के लिए आवेदन शुरू, 31 जनवरी तक जमा किए जाएंगे फॉर्म, 22 फरवरी को होगी प्रवेश परीक्षा




    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड की ओर से संचालित अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए ऑफलाइन व ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया  शुरू हो गई है।

    आवेदन पत्र पूर्ण रूप से भरकर जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी (शाम पांच बजे तक) और प्रवेश पत्र प्राप्त करने की अंतिम तिथि सात फरवरी है। प्रवेश परीक्षा 22 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन upbocw.in के माध्यम से या समिति कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराए गए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर किया जा सकता है।

    ऑफलाइन आवेदन पत्रों का वितरण जिलों के खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, खंड विकास अधिकारी कार्यालय, बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और जनपदीय श्रम कार्यालय व जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के द्वारा किया जा रहा है। सुबह 10 से शाम पांच बजे तक इन कार्यालयों से फॉर्म प्राप्त करके वहीं जमा किए जा सकते हैं। छात्र व छात्राओं को 50-50 फीसदी सीटों पर प्रवेश दिया जाएगा। 



    शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में



    कृपया उपर्युक्त विषयक उ०प्र० शासन, श्रम अनुभाग-02 के पत्र संख्या-1/1186369/2025-1703264 दिनांक 24.12.2025 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।


    उपर्युक्त के क्रम में मा० मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा "मण्डल स्तरीय अनुश्रवण समिति" के माध्यम से कराये जाने के क्रम में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 की प्रवेश परीक्षा की मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पत्र के साथ संलग्न कर इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि कृपया प्रवेश परीक्षा के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही कराने का कष्ट करें। 


    एडेड माध्यमिक विद्यालयों में देयक भुगतान की नई व्यवस्था लागू, देखें जारी शासनादेश

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने जारी किया आदेश

    डीआईओएस कर सकेंगे शिक्षकों को दो लाख तक एरियर का भुगतान, 4 लाख संयुक्त शिक्षा निदेशक व अपर शिक्षा निदेशक 8 लाख रुपये तक भुगतान कर सकेंगे

    33 हजार शिक्षकों व कर्मियों के एरियर भुगतान की फाइलें जिलों में से से लेकर निदेशक कार्यालयों में लंबित

    डीआईओएस से लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक तक की जवाबदेही नई व्यवस्था से तय होगी

    शिक्षक संगठनों ने कहा, फैसले से अध्यापकों और कर्मचारियों को मिली बड़ी राहत


    लखनऊ । अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों व कर्मचारियों को अब एरियर भुगतान के लिए विभाग के चक्कर नहीं लगाने होंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अपने स्तर से दो लाख तक का भुगतान कर सकेंगे। संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) चार लाख व अपर शिक्षा निदेशक (एडी) आठ लाख रुपये तक एरियर का भुगतान अपने स्तर से कर सकेंगे।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक आठ लाख या उससे अधिक के एरियर का भुगतान कर सकेंगे। अब सिर्फ उन्हें भुगतान के संबंध में जानकारी से शासन को अवगत कराना होगा। अभी तक धनराशि के अनुमोदन और फाइलें गुम होने के कारण शिक्षकों व कर्मियों को बेवजह दौड़ाया जाता था। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। एडेड माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को महंगाई भत्ते, चयन वेतनमान, एससीपी व उपार्जित अवकाश के नकदीकरण इत्यादि का एरियर पाने के लिए शिक्षा विभाग के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस व्यवस्था से शिक्षा विभाग में डीआईओएस से लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक तक की जवाबदेही तय होगी।

    इस फैसले से 61 हजार शिक्षक व 10800 शिक्षणेत्तर कर्मियों को इससे राहत मिलेगी। लगभग 33 हजार शिक्षकों व कर्मियों के एरियर भुगतान की फाइलें जिलों में डीआईओएस से लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक कार्यालयों में लंबित हैं। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा कहते हैं कि इससे शिक्षकों व कर्मचारियों को बड़ी राहत मिलेगी। अधिकारी व कार्यालयों के कर्मचारी छोटे-छोटे भुगतान के लिए परेशान नहीं कर सकेंगे। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी का कहना है कि इस निर्णय से शिक्षकों व कर्मचारियों को बड़ी राहत मिल गई है।

    लंबित एरियर भुगतान के मुकदमे कम होंगे

    अभी शिक्षकों व कर्मियों को एरियर भुगतान करने में शिक्षा विभाग लंबी दौड़ लगवाता है। ऐसे में अभी तक शिक्षक अपने भुगतान को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाने को मजबूर रहते थे। अब इस पारदर्शी व्यवस्था के लागू होने के बाद कोर्ट में वादों की संख्या कम होगी। अधिकारियों की लापरवाही के कारण अवमानना का कई बार कोर्ट से नोटिस भी जारी होता है। नई व्यवस्था से शिक्षकों व कर्मियों को बड़ी राहत मिलेगी।




    एडेड माध्यमिक विद्यालयों में देयक भुगतान की नई व्यवस्था लागू, देखें जारी शासनादेश 

    लखनऊ। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों के बकाया देयकों के भुगतान की नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके लिए पूर्व में जारी आदेश को संशोधित किया गया है। 

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने कहा है कि दो लाख तक का भुगतान व अनुमति डीआईओएस के स्तर से, दो से चार लाख तक का मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक स्तर से होगी। चार से आठ लाख तक की राशि अपर शिक्षा निदेशक व आठ लाख से अधिक की राशि शिक्षा निदेशक माध्यमिक के अनुमोदन के बाद निदेशालय स्तर से जारी होगी। 

    उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के क्रम में इस सीमा का ध्यान नहीं रखा जाएगा। शिक्षा निदेशक माध्यमिक आठ लाख से अधिक के अवशेष देयकों के भुगतान करने पर जानकारी शासन को भी देंगे। 



    Saturday, January 31, 2026

    यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला : 15 लाख शिक्षकों व कर्मियों को पांच लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा, सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी करा सकेंगे इलाज

    उत्तर प्रदेश : बड़ा शिक्षक वर्ग कैशलेस इलाज के निर्णय से छूटा

    लखनऊ। कैशलेस इलाज की सुविधा से जुड़ा शिक्षा क्षेत्र का एक बड़ा वर्ग कैबिनेट निर्णय की परिधि से अछूता रह गया। महत्वपूर्ण बात यह है कि बीते पांच सितंबर को मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा में इस वर्ग को भी प्रमुखता से शामिल किया गया था।

    गुरुवार को हुई कैबिनेट की बैठक में हुए निर्णय में इस वर्ग का कहीं भी कोई जिक्र नहीं होने से भारी नाराज़गी है। इसमें उच्च शिक्षा से जुड़े अशासकीय एडेड डिग्री कालेजों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के साथ-साथ स्ववित्त पोषित डिग्री कालेजों के शिक्षक के अलावा अल्प मानदेय वाले कस्तूरबा के चपरासी, चौकीदार एवं रसोइये शामिल हैं।

    कैबिनेट ने बेसिक से लेकर माध्यमिक तक के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को यह सुविधा प्रदान करने के प्रस्ताव को स्वीकृति तो दी लेकिन उच्च शिक्षा के अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मियों को शामिल नहीं किया गया।

    स्ववित्तपोषित एवं एडेड डिग्री कालेजों के शिक्षकों का कहना है कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की कमी के चलते निजी स्त्रोतों से रखे गए शिक्षक और शिक्षिकाएं लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उन्हें भी इस योजना में सम्मिलित करनाजरूरी है।

    रिटायर शिक्षकों को भी कैशलेस सुविधा देने की मांगः उत्तर प्रदेश अवकाश प्राप्त माध्यमिक शिक्षक कल्याण एसोसिएशन ने सेवानिवृत शिक्षकों की वेदना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री से रिटायर्ड शिक्षकों के लिए भी कैशलेस चिकित्सा की सुविधा दिलाए जाने का अनुरोध किया है।

    इन संगठनों ने शासन को भेजा पत्र
    उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र सिंह चौहान तथा लुआक्टा के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडेय के अलावा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (ठकुराई गुट) के महामंत्री लालमणि द्विवेदी के साथ-साथ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय शिक्षक-शिक्षणेत्तर यूनियन आल इन्डिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष अतुल कुमार बंसल ने शासन को पत्र भेजकर छूटे कर्मियों को भी इस योजना से जोड़ने की अपील की है।




    यूपी कैबिनेट का बड़ा फैसला
    15 लाख शिक्षकों व कर्मियों को पांच लाख तक कैशलेस इलाज की सुविधा,  सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी करा सकेंगे इलाज

    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को बड़ा तोहफा मिला है। 15 लाख से अधिक शिक्षकों, शिक्षणेतर कर्मचारियों व उनके आश्रितों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। लाभसरकारी और निजी अस्पताल दोनों में मिलेगा। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इससे संबंधित प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।

    योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज से जुड़े निजी अस्पतालों में भी मिलेगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा तय मानकों के अनुसार होंगी। इस फैसले के तहत लगभग 448 करोड़ रुपये का व्यय होगा।

    बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों व परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों (अनुदानित एवं स्ववित्त पोषित) में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों, विशेष शिक्षकों, अनुदेशकों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में कार्यरत वार्डेन, पूर्ण कालिक, अंशकालिक शिक्षकों व पीएम पोषण योजना के तहत रसोइयों और उनके आश्रितों को भी इसका लाभ मिलेगा।

    शिक्षक दिवस पर सीएम ने की थी घोषणा
    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच सितंबर 2025 को शिक्षक दिवस पर शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों व रसोइयों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा की थी। इस पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर अब कैबिनेट ने मुहर लगा दी है। इसके बाद जल्द ही इसका शासनादेश जारी होगा और योजना को प्रभावी बनाया जाएगा।

    बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना से बेसिक शिक्षा परिषद के 11.95 लाख से अधिक शिक्षकों और कर्मचारियों को लाभमिलेगा। सरकार की इस विशेष पहल से प्रति कर्मचारी करीब 3000 रुपये सालाना प्रीमियम के हिसाब से कुल 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक खर्च अनुमानित है।

    माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी ने बताया कि विभाग के अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों (व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों व मानदेय शिक्षकों सहित),संस्कृत शिक्षा परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों (मानदेय शिक्षकों सहित), माध्यमिक शिक्षा परिषद व संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों और माध्यमिक शिक्षा विभाग के राजकीय व सहायता प्राप्त विद्यालयों में मानदेय पर कार्यरत व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों व उनके आश्रितों को यह सुविधा मिलेगी। सरकार की इस पहल का लाभ 2.97 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा। इस पर 89.25 करोड़ का व्यय अनुमानित है।


    स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों का होगा सत्यापन: बेसिक के स्ववित्तपोषित मान्यता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों को सत्यापन के बाद योजना का लाभ मिलेगा। इसके लिए जिलों में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया जाएगा। उनकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।


    बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत कार्यरत उपर्युक्त शिक्षकों/कार्मिकों एवं उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा अनुमन्य कराये जाने में प्रति कार्मिक अनुमानित रू0 3000/- वार्षिक प्रीमियम की दर से व्यय भार अनुमानित है। इससे लाभांवित होने वाले कुल कार्मिकों की संख्या- 11,95,391 के सापेक्ष धनराशि रू० 358.61 करोड़ का वार्षिक वित्तीय व्यय भार अनुमानित है। 

    उक्त कैशलेस उपचार सुविधा योजना का क्रियान्वयन State Agency for Comprehensive health and integrated services (साचीज) के माध्यम से कराया जाना प्रस्तावित है। उक्त सुविधा राजकीय चिकित्सालयों तथा साचीज के साथ सम्बद्ध निजी चिकित्सालयों में अनुमन्य होगी, जिसकी दरें वही होगी जो प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण (NHA) द्वारा समय-समय पर संसूचित की जायेगी।



    यूपी के शिक्षकों को योगी सरकार की सौगात, कैशलेस मेडिकल सुविधा का तोहफा किया कैबिनेट ने पास 

    UP Teachers Cashless Medical: उत्तर प्रदेश में टीचर्स को योगी सरकार ने बड़ा तोहफा दिया है। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि कैबिनेट बैठक के बाद 30 प्रस्ताव पर निर्णय हुआ। बेसिक शिक्षा विद्यालयों के टीचर्स को कैशलेस चिकित्सा सुविधा दी जाएगी। 11 लाख 95 हजार 391 टीचर्स को कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। इसमें 358.61 करोड़ रुपये की लागत आएगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के टीचर्स को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा मिलेगी। लगभग 3 लाख टीचर्स को ये सुविधा मिलेगी।






    आज की कैबिनेट बैठक में मिल सकती शिक्षक-कर्मियों को कैशलेस इलाज के प्रस्ताव को मंजूरी 

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रदेश कैबिनेट की बैठक गुरुवार को होगी। इसमें 29 से अधिक प्रस्तावों को मंजूरी के लिए कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। योगी सरकार माध्यमिक और बेसिक शिक्षकों, शिक्षामित्रों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। इन्हें पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी मिल सकती है।


    प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों तथा स्ववित्त पोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के साथ ही बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, वार्डन, रसोइया व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस इलाज की सुविधा देने का प्रस्ताव है। इससे पांच लाख से अधिक शिक्षक व अन्य लाभान्वित होंगे। 

    यूजीसी के नए कानूनों में समरसता की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर शिक्षा मंत्रालय व यूजीसी में नियम के नए स्वरूप को लेकर दिनभर चलीं बैठकें

    यूजीसी के नए कानूनों में समरसता की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ध्यान में रखकर शिक्षा मंत्रालय व यूजीसी में नियम के नए स्वरूप को लेकर दिनभर चलीं बैठकें

    नई दिल्लीः विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के विवादित समता नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक और इसकी खामियों को दूर करने के स्पष्ट निर्देश के बाद शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी में शुक्रवार को दिनभर बैठकों का दौर चला। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के फैसले और उसकी टिप्पणियों को ध्यान में रखते हुए नियमों से जुड़ी खामियों को दूर करने पर विस्तार से मंथन हुआ। जो संकेत मिले हैं, उनसे साफ है कि नए समता नियमों में उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव को बढ़ावा देने वाले बिंदुओं से परहेज करते हुए एकता और समरसता बढ़ाने वाले बिंदुओं को प्रमुखता से शामिल किया जा सकता है।

    अभी हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसका स्वरूप क्या होगा। लेकिन माना जा रहा है कि मूल प्रारूप के अनुसार एससी-एसटी के साथ-साथ अब सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के प्रति भेदभाव की भी बात होगी। साथ ही गलत शिकायत पर कार्रवाई का प्रविधान भी वापस लाया जा सकता है। अब यह तय है कि नए नियमों में ऐसी कोई चीज नहीं रखी जाएगी, जिससे एक ही संस्थान में पढ़ने वाले बच्चों के बीच भेदभाव दिखे। साथ ही यदि भेदभाव का कोई भी मामला आता है तो उससे सख्ती से निपटा जाएगा।

    इसके लिए एक मजबूत तंत्र बनाने पर भी विचार किया जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निश्चित की गई है। सूत्रों के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय और यूजीसी में शीर्ष स्तर पर हुई बैठकों में समता नियमों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और टिप्पणियों को सूचीबद्ध किया गया। साथ ही अब इन सभी बिंदुओं पर विशेषज्ञों और कानूनविदों के साथ चर्चा की जाएगी। जानकारों की मानें तो यदि इसे लेकर समाज के अलग-अलग वर्गों की ओर से किया जा रहा आंदोलन नहीं थमा तो इसे लेकर एक कमेटी गठित करके कुछ समय के लिए टाला भी जा सकता है। गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव मिटाने के लिए यूजीसी ने यह विधेयक 13 जनवरी, 2026 को अधिसूचित किया था।



    यूजीसी के नए नियम विभाजनकारी, अस्पष्ट, दुरुपयोग की भी आशंका, सुप्रीम कोर्ट की रोक, सुनवाई पूरी होने तक 2012 की पुरानी नियमावली ही रहेगी प्रभावी

    यह बेहद गंभीर मामला है। अगर हम दखल नहीं देंगे, तो समाज के लिए विभाजनकारी हो सकता है और इसके खतरनाक परिणाम हो सकते हैं। क्या हम जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने के बजाय पीछे जा रहे हैं?... नियमों की भाषा प्रथमदृष्ट्या अस्पष्ट है। इसे स्पष्ट और संतुलित बनाने के लिए विशेषज्ञों को विचार करना चाहिए, ताकि इनका दुरुपयोग न हो सके। - सुप्रीम कोर्ट

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए समता विनियम-2026 को लेकर चल रहे विवाद के बीच इन नियमों को समाज के लिए विभाजनकारी करार देते हुए क्रियान्वयन पर बृहस्पतिवार को रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने कहा, पहली नजर में इन नियमों की भाषा अस्पष्ट है और इनके दुरुपयोग की पूरी आशंका है। यदि इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो इसके खतरनाक परिणाम होंगे। समाज बंट जाएगा और इसके गंभीर नतीजे होंगे।

    मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा, 75 वर्षों के बाद, जातिविहीन समाज की दिशा में हमने जो कुछ भी हासिल किया है, क्या हम प्रतिगामी दिशा में जा रहे हैं? पीठ ने भारतीय शिक्षण संस्थानों में समावेशिता और एकता की रक्षा करने की जरूरत पर जोर दिया। पीठ ने केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी कर 19 मार्च तक जवाब तलब किया है। उन्होंने विनियम की जांच विशेषज्ञ समिति से कराने की भी जरूरत बताई। साथ ही, स्पष्ट किया कि अगले आदेश तक समता विनियम-2026 स्थगित रहेंगे और शैक्षणिक संस्थानों में 2012 की पुरानी नियमावली ही लागू रहेगी।

    पुनर्समीक्षा जरूरी, केंद्र विधि विशेषज्ञों की समिति बनाए
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इन नियमों की पुनर्समीक्षा बहुत जरूरी है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को पीठ ने सुझाव दिया कि नियमों की पुनर्समीक्षा के लिए प्रख्यात विधिवेत्ताओं की एक उच्चस्तरीय समिति बनानी चाहिए। समिति समाज की वास्तविकताओं और सामाजिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए नियमों पर पुनर्विचार करे। पीठ ने कहा, हमें यह भी देखना होगा कि कैंपस के भीतर लिए गए फैसलों का कैंपस के बाहर समाज पर क्या असर पड़ेगा। समाज का समग्र विकास तभी होगा, जब नियम समावेशी होंगे।

    क्या भेदभाव के विशिष्ट रूप में रैगिंग शब्द को छोड़ देना, नए विनियम में प्रतिगामी व बहिष्कृत विधायी चूक है? यदि हां, तो क्या ऐसी चूक इन्साफ तक पहुंच में विषमता पैदा करके भेदभाव पीड़ितों के साथ असमान व्यवहार करती है? यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन नहीं है?

    पीठ ने पूछा, सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों को रैगिंग से बचाने के लिए कोई प्रभावी तंत्र क्यों नहीं
    सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि यदि सामान्य वर्ग के किसी विद्यार्थी के साथ रैगिंग होती है या क्षेत्रीयता के आधार पर अपमानजनक व्यवहार होता है, तो नए नियमों में उसके संरक्षण के लिए कोई प्रभावी तंत्र क्यों नहीं है?

    समानता के अधिकार का उल्लंघन: याचिकाकर्ताओं के वकील विष्णुशंकर जैन और अन्य ने दलील दी कि नई नियमावली का नियम 3(1) (सी) भेदभाव की सुरक्षा को केवल एससी/एसटी व ओबीसी वर्ग तक सीमित करता है। इसमें सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों से भेदभाव को पूरी तरह अनदेखा किया है। यह संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन है।

    हम अमेरिका जैसी व्यवस्था अपने यहां नहीं अपना सकते
    सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, हम अमेरिका जैसी व्यवस्था यहां नहीं अपना सकते, जहां श्वेत और अश्वेत बच्चों के लिए अलग-अलग स्कूल हुआ करते थे। जस्टिस बागची ने भी सहमति जताते हुए कहा कि भारत की एकता का प्रतिबिंब हमारे शैक्षणिक संस्थानों में दिखना चाहिए, न कि वहां अलगाववाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।


    शीर्ष कोर्ट ने विचार के लिए तय किए महत्वपूर्ण सवाल

    क्या जाति-आधारित भेदभाव परिभाषित करने वाले उपनियम 3(सी) को शामिल करने का कोई उचित व तर्कसंगत संबंध है। खासकर इस तथ्य को देखते हुए कि जाति-आधारित भेदभाव से निपटने के लिए कोई अलग या विशेष प्रक्रियात्मक तंत्र तय नहीं किया है, जैसा कि उपनियम 3 (ई) के तहत दी भेदभाव की विस्तृत व समावेशी परिभाषा के विपरीत है?

    क्या जाति-आधारित भेदभाव की शुरुआत और प्रक्रिया का अनुसूचित जातियों, जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्ग में सबसे पिछड़े वर्गों के मौजूदा सांविधानिक और वैधानिक उप-वर्गीकरण पर कोई असर पड़ेगा? क्या यह विनियम ऐसे अत्यंत पिछड़े वर्गों को भेदभाव और संरचनात्मक नुकसान के खिलाफ पर्याप्त और प्रभावी सुरक्षा उपाय है?

    छात्रावास के नाम पर बंटवारे को लेकर नाराजगी, कहा-भगवान के लिए ऐसा न करें: पीठ ने नए नियमों के उन प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जो कैंपस के भीतर जातिगत आधार पर विभाजन का संकेत देते हैं। अलग-अलग जातियों के लिए अलग हॉस्टल के विचार पर सीजेआई सूर्यकांत ने सख्त लहजे में कहा, भगवान के लिए ऐसा मत कीजिए। हम सब सदियों से साथ रहते आए हैं, हमारे समाज में अंतरजातीय विवाह तक होते हैं। क्या हम एक जातिविहीन समाज की ओर बढ़ने के बजाय पीछे जा रहे हैं?

    क्या उपनियम 7 (डी) में अलगाव शब्द को शामिल करना, छात्रावास, कक्षा, मेंटरशिप ग्रुप या ऐसी ही शैक्षणिक वा आवासीय व्यवस्था के आवंटन के संदर्भ में, भले ही पारदर्शी और गैर-भेदभावपूर्ण मानदंडों पर हो, अलग पर समान वर्गीकरण के बराबर होगा? इससे अनुच्छेद 14, 15 और संविधान की प्रस्तावना के तहत समानता और भाईचारे की सांविधानिक गारंटी का उल्लंघन होगा?



    यूजीसी नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की पीठ करेगी सुनवाई, तीन याचिकाएं हुई हैं दाखिल

    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के समानता विनियमन-2026 के प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत एवं जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ यह सुनवाई करेगी। यूजीसी नियमों के विरोध में तीन याचिकाएं शीर्ष कोर्ट आई हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की गैर समावेशी परिभाषा दी गई है, जिसमें कुछ वर्गों को संस्थागत संरक्षण से बाहर रखा गया है।

    सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने बुधवार को याचिकाकर्ता वकील विनीत जिंदल की तत्काल सुनवाई की मांग वाली दलीलों पर गौर किया। याचिकाकर्ता ने कहा, तत्काल सुनवाई की जरूरत इसलिए है, क्योंकि इन नियमों में कुछ प्रावधान ऐसे हैं जिनसे सामान्य वर्ग के साथ भेदभाव किया जा सकता है। इस पर सीजेआई ने कहा, हमें पता है कि क्या हो है। आप अपना केस नंबर दीजिए और यह सुनिश्चित करें कि याचिका में कमियां दूर कर दी गई हैं। हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। 

    याचिका में नियम 3 (सी) को असांविधानिक करार देने की मांग की गई है। नियम 3 (सी) के अनुसार, जाति आधारित भेदभाव का अर्थ सिर्फ अनुसूचित जाति-जनजाति व ओबीसी के सदस्यों के खिलाफ जाति या जनजाति के आधार पर किया गया भेदभाव है। यह परिभाषा गैर एससी, एसटी व ओबीसी के लोगों को संस्थागत संरक्षण व शिकायत निवारण के अधिकार से वंचित करती है।


    भेदभाव की परिभाषा समावेशी हो

    याचिका में तर्क है कि मौजूदा प्रावधान जाति-निरपेक्ष नहीं है। याचिकाकर्ता की मांग है कि जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा को संविधान के अनुरूप व समावेशी बनाया जाए, ताकि किसी व्यक्ति को जाति के आधार पर भेदभाव का सामना करने पर समान संरक्षण मिल सके। उसने आग्रह किया, जब तक नियम 3 (सी) पर पुनर्विचार नहीं हो जाता, तब तक क्रियान्वयन से रोका जाए। जाति के आधार पर शिकायत निवारण से वंचित करना अस्वीकार्य भेदभाव घोषित किया जाए।

    यूजीसी ने 13 जनवरी को अधिसूचित किए नियमों के तहत उच्च शिक्षा संस्थानों को परिसर में भेदभाव संबंधी शिकायतों की जांच करने और समानता को बढ़ावा देने के लिए समानता समितियां गठित करनी होंगी। इन समितियों में अन्य ओबीसी, एससी, एसटी, दिव्यांगजन और महिलाओं के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य बनाया गया है। ये नियम 2019 में दायर जनहित याचिका के बाद बनाए गए थे। याचिका रोहित वेमुला और पायल तड़वी की मांओं ने दी थी। दोनों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालयों में जातिगत भेदभाव के कारण आत्महत्या कर ली थी।



    विश्वविद्यालयों में नहीं होगा किसी तरह का भेदभाव, यूजीसी के निर्देश पर होगी समान अवसर केंद्र की स्थापना

    लखनऊ। देश के सरकारी, निजी और डीम्ड विश्वविद्यालयों में अब जाति, धर्म, लिंग, जन्म स्थान या दिव्यांगता के आधार पर किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के निर्देशों के तहत सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में समान अवसर केंद्र और समता समिति की स्थापना अनिवार्य की जा रही है। इसके लिए प्रदेशों के विश्वविद्यालयों में भी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

    यूजीसी ने हाल ही में समता के लिए संवर्धन विनियम-2026 जारी किए हैं। इनके तहत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर और दिव्यांग छात्रों व कर्मचारियों के अधिकारों और सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। हर विवि और कॉलेज में समान अवसर केंद्र वंचित वर्ग के छात्रों और कर्मचारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएगा। इसके साथ ही समता समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें शिक्षक, कर्मचारी और छात्र प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की जांच कर कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। यूजीसी ने शिकायत निवारण के लिए हेल्पलाइन और ऑनलाइन व्यवस्था शुरू करना भी अनिवार्य किया है।