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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, April 13, 2024

    परिषदीय स्कूलों में दाखिले में बच्चों की उम्र बन रही बाधा, नियमों में छूट नहीं दी गई तो घट जाएगी छात्र संख्या

    नौ अप्रैल को हटाई गई एक अप्रैल से प्रवेश आयु में मिली छूट

    • आठ अप्रैल तक छह वर्ष से कम आयु पर कक्षा एक में हुए प्रवेश से दुविधा में प्रधानाध्यापक

    • निदेशक बेसिक शिक्षा ने छह वर्ष से कम आयु पर कक्षा एक में प्रवेश नहीं लेने के दिए हैं निर्देश


    प्रयागराज : शैक्षिक सत्र 2024-25 के लिए बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कक्षा एक में प्रवेश को लेकर दो आदेश से प्रधानाध्यापक एवं असमंजस में हैं। प्रधानाध्यापकों ने एक अप्रैल से शुरू हुए शैक्षिक सत्र में निर्धारित छह वर्ष की आयु के नियम को आदेशानुसार शिथिल करते हुए इससे कम आयु पर भी बच्चों के - प्रवेश लेने शुरू कर दिया है।

     कुछ बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए) ने आयु शिथिल करते हुए - प्रवेश लेने के निर्देश अलग से जारी - किए। यह प्रक्रिया चल रही थी कि नौ अप्रैल को बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने आदेश जारी किया कि कक्षा एक में एक अप्रैल 2024 को छह वर्ष आयु पूर्ण कर चुके बच्चों को ही प्रवेश दिया जाए। इससे कम आयु पर प्रवेश न किया जाए। अब प्रधानाध्यापक असमंजस में हैं कि आठ अप्रैल तक आयु सीमा शिथिल कर जिन बच्चों के प्रवेश ले लिए हैं, उनका क्या होगा।

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं निपुण भारत मिशन के परिपेक्ष्य में कक्षा एक में न्यूनतम आयु छह वर्ष निर्धारित की गई है। वर्तमान शैक्षिक सत्र में एक अप्रैल से 31 जुलाई 2024 के बीच जो बच्चे छह वर्ष की आयु पूर्ण कर रहे हैं, उन्हें निर्धारित आयु सीमा में शिथिलता प्रदान करते हुए सत्र के प्रारंभ में ही प्रवेश लेने की अनुमति प्रदान की गई है।

     कुछ बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को यह निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के क्रम में परिषदीय स्कूलों में प्रवेश प्रक्रिया गतिमान होने के बीच बेसिक शिक्षा निदेशक ने प्रदेश के सभी बीएसए को नौ अप्रैल को आदेश जारी किया। इसमें निर्देश हैं कि एक अप्रैल 2024 को छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का नामांकन किसी भी दशा में न किया जाए। इसमें यह भी कहा कि छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का नामांकन बाल वाटिका में किया जाए। इस आदेश से प्रधानाध्यापक दोहरे संकट में हैं।

    एक तो यह कि छह वर्ष से कम आयु के बच्चों के हो चुके प्रवेश को लेकर क्या करें। फिलहाल, छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का प्रवेश लेना प्रधानाध्यापकों ने बंद कर दिया है। दूसरा, यह कि निजी स्कूलों में छह वर्ष से कम आयु में प्रवेश पर अभिभावकों का रुझान उस ओर होने से परिषदीय स्कूलों में छात्र संख्या पर असर पड़ सकता है।



    परिषदीय स्कूलों में दाखिले में बच्चों की उम्र बन रही बाधा, नियमों में छूट नहीं दी गई तो घट जाएगी छात्र संख्या


    लखनऊ : सूबे के प्राइमरी स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश के लिए छह वर्ष के आयु की बाध्यता होने से दाखिला प्रभावित हो रहा है। जबकि निजी स्कूलों में तीन वर्ष के बच्चे का नामांकन हो जाता है। शहर और गांव के प्राइमरी स्कूलों के शिक्षक घर-घर जाकर छह वर्षीय बच्चे खोज रहे हैं।


    बेसिक शिक्षा विभाग के प्राइमरी स्कूलों में एक अप्रैल 2024 को छह साल की आयु पूरा करने वाले बच्चों का कक्षा एक में नामांकन किया जा रहा है। उम्र की पुष्टि के लिए उनके पास आधार नंबर होना चाहिए। यदि यह नहीं है तो परिजनों का आधार कार्ड लगेगा। यदि बच्चे की उम्र छह साल से कम मिलती है तो उसका नामांकन नहीं होगा। ऐसे में परिजनों को परेशान होना पड़ रहा है।


    वहीं निजी स्कूलों में तीन साल की उम्र में ही बच्चों का नामांकन हो जाता है। कॉन्वेंट स्कूलों में पीजी, यूकेजी और एलकेजी में पढ़ाई करने के बाद कक्षा एक में प्रवेश लिया जाता है। जबकि प्राइमरी स्कूलों में सिर्फ बालवाटिका की ही कक्षाएं संचलित की जा रही हैं। 


    नियमों में छूट नहीं दी गई तो घट जाएगी छात्र संख्या

    बेसिक शिक्षा विभाग ने प्री प्राइमरी स्कूल (आंगनबाड़ी) में दाखिले की न्यूनतम उम्र तीन साल और कक्षा एक में प्रवेश की न्यूनतम उम्र छह वर्ष निर्धारित की है। इस नियम के चलते अभिभावकों को निजी स्कूलों का रुख करना पड़ रहा है। अगर नियमों में ढील नहीं दी गई, तो सरकारी स्कूलों में छात्र संख्या में गिरावट आ जाएगी। 



    सत्र शुरू होने के बाद जिले से लेकर प्रदेश स्तर से जारी आदेशों के बाद भी परिषदीय स्कूलों में कक्षा एक में प्रवेश की उम्र को लेकर शिक्षक परेशान, जानिए क्यों हैं ऐसे हाल?

    कुछ बीएसए ही करवा रहे 6 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला, अभिभावकों की परेशानी कौन दूर करेगा?

    नया सत्र शुरू होने के बाद भी जारी हो रहे आदेेश 


    UP School Admission Age Row: यूपी के स्कूलों में दाखिले को लेकर विवाद गहरा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की ओर से 6 साल से कम उम्र के बच्चों का स्कूलों में एडमिशन कराने पर रोक है। इसके बाद भी बीएसए की ओर कम उम्र के बच्चों का दाखिला कराया जा रहा है। कड़े आदेश के बाद अभिभावकों की परेशानी बढ़ी हुई है।


    लखनऊ: कक्षा एक में छह साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं किया जाना है। इस बाबत केंद्र सरकार और राज्य सरकार की ओर से लगातार निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके बावजूद प्रदेश के कुछ जिलों में बीएसए ने 6 साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला लेने के आदेश जारी कर दिए हैं। स्कूलों में दाखिले ले भी लिए गए हैं। अब शिक्षक और छात्र परेशान हैं कि जिनके दाखिले हो गए, उनका क्या होगा। पहले राइट टु एजुकेशन (आरटीई) में यही नियम था कि छह साल से कम उम्र के बच्चों का दाखिला नहीं किया जाएगा। अब नई शिक्षा नीति में एक बार फिर से इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।


    स्कूलों में दाखिले को लेकर लगातार जारी हो रहे आदेशों ने अभिभावकों को कंफ्यूज कर दिया है। पिछले साल भी केंद्र सरकार ने इस तरह के आदेश जारी किए थे। तब यह कहते हुए प्रदेश में छूट दे दी गई थी कि बच्चों का दाखिला हो चुका है। ऐसे में अगले साल से इसे सख्ती से लागू किया जाए। इस साल तो केंद्र सरकार ने फरवरी में ही इस बाबत आदेश जारी करके सभी राज्यों को सचेत कर दिया था कि छह साल से कम के बच्चों के दाखिले कक्षा एक में न किए जाएं। उसके बाद डीजी स्कूल शिक्षा ने भी इस बारे में आदेश जारी किए थे।


    एक अप्रैल से शुरू हुए एडमिशन
    प्रदेश में 1 अप्रैल से स्कूल खुले और स्कूल चलो अभियान शुरू हुआ। इसके बाद अलग-अलग जिलों में बीएसए ने अलग-अलग आदेश जारी कर दिए। बाराबंकी के बीएसए ने स्कूलों को आदेश दिए कि 1 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच जिन बच्चों की उम्र 6 साल हो रही है, उनका दाखिला ले लिया जाए। वहीं अयोध्या के बीएसए ने आदेश दिया है कि 5 वर्ष से अधिक उम्र के सभी बच्चों का अनिवार्य तौर पर स्कूल में दाखिला करवाया जाए। कोई भी बच्चा छूटने न पाए। अब एक बार फिर बेसिक शिक्षा निदेशक ने स्पष्ट किया है कि उन बच्चों का दाखिला ही कक्षा एक में किया जाए, जिनकी उम्र 1 अप्रैल को छह साल पूरी हो चुकी है।


    1 अप्रैल को 6 साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों का ही कक्षा एक में दाखिला लिया जाएगा। यह स्पष्ट निर्देश हैं। यदि कहीं बीएसए ने गलत आदेश दिए हैं तो उनसे स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई की जाएगी। –प्रताप सिंह बघेल, निदेशक-बेसिक शिक्षा


    बढ़ेगी छात्रों और शिक्षकों की परेशानी

    बीएसए के इन आदेशों के चलते ज्यादातर जिलों में स्कूल ऐसे बच्चों का दाखिला ले चुके हैं जिनकी उम्र 1 अप्रैल को 6 साल पूरी नहीं हुई है। इस बारे में बाराबंकी के शिक्षक निर्भय सिंह कहते हैं कि सत्र की शुरुआत से पहले ही यह बात स्पष्ट हो जानी चाहिए थी। अब जिनका दाखिला लो चुका है, उनको लेकर असमंजस है। इससे बच्चे, अभिभावकों और शिक्षकों की परेशानी बढ़ेगी। 

    प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह भी कहते हैं कि जिनका दाखिला ले लिया है, उनको निकालते हैं तो विवाद होगा। अफसर कुछ तय नहीं कर पाते और बाद में दोष शिक्षकों पर मढ़ दिया जाता है। कई स्कूलों में आगनबाड़ी केंद्र भी हैं। उनके बच्चों की उम्र कक्षा 6 में दाखिले के लिए पूरी नहीं हुई है तो उसका क्या करेंगे, इस बारे में भी स्पष्ट होना चाहिए।

    अमित भारद्वाज को उच्च शिक्षा निदेशक पद पर फिर मिली तैनाती, पूर्व में चल रही जांच और कार्यवाई समाप्त

    अमित भारद्वाज को उच्च शिक्षा निदेशक पद पर फिर मिली तैनाती, पूर्व में चल रही जांच और कार्यवाई समाप्त 


    लखनऊ। शासन ने डॉ. अमित भारद्वाज को उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनात किया है। उच्च शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर रहते हुए उनके विरुद्ध चल रही जांच की वजह से उन्हें पद से हटाकर उच्च शिक्षा परिषद से संबद्ध किया गया था। हाल में उनके खिलाफ चल रही जांच को समाप्त किया गया है। इसके बाद डॉ. अमित को उच्च शिक्षा निदेशक के पद पर तैनात किया गया है। 

    शासन ने डॉ. अमित भारद्वाज के विरुद्ध चल रही विभागीय कार्रवाई को समाप्त करते हुए उन्हें फिर से निदेशक उच्च शिक्षा के पद पर तैनात कर दिया है। प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल ने शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया।


    इससे पहले 14 फरवरी 2023 को उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए थे। साथ ही उन्हें निदेशक उच्च शिक्षा के पद से हटाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद लखनऊ से संबद्ध कर दिया गया था। जांच के बाद यह विभागीय कार्रवाई 12 अप्रैल 2024 को समाप्त कर दी गई। साथ ही उनकी संबद्धता समाप्त करते हुए उन्हें फिर से निदेशक उच्च शिक्षा के पद पर तैनात करने का फैसला किया गया। 


    डॉ. भारद्वाज को हटाए जाने के बाद डॉ. ब्रह्मदेव कार्यवाहक निदेशक उच्च शिक्षा बनाए गए थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद पहले डॉ. केसी वर्मा और बाद में डॉ. धर्मेन्द्र प्रताप शाही कार्यवाहक निदेशक उच्च शिक्षा बनाए गए। वर्तमान में डॉ. शाही ही प्रभार संभाल रहे थे।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश द्वारा सत्र 2024-25 का तिथिवार एकेडमिक कैलेंडर जारी, करें डॉउनलोड Download Academic Calander MSP

    यूपी बोर्ड का सलाना शैक्षणिक कैलेंडर जारी, शनिवार को कॅरिअर गाइडेंस, बोर्ड परीक्षा फरवरी में कराने की योजना

    नई शिक्षा नीति के अनुसार कार्यक्रम निर्धारित


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) का वार्षिक कैलेंडर शुक्रवार को जारी कर दिया गया है। इस बार नई शिक्षा नीति के अनुसार कई बदलाव किए गए हैं। अब हर शनिवार को सांस्कृतिक और साहित्यिक गतिविधियों के साथ ही कॅरिअर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कैलेंडर में महीनेवार गतिविधियां तय की गई हैं।

    सत्र 2024-25 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। प्रतिदिन सुबह प्रार्थना में शिक्षकों और विद्यार्थियों को सुविचार प्रस्तुत करना होगा। सर्वश्रेष्ठ सुविचार देने वाले को माह के अंत में सम्मानित करना होगा। नए सत्र में नया सवेरा कार्यक्रम होगा। इसमें विद्यार्थियों को जीवन मूल्यों, अनुशासन आदि के बारे में बताया जाएगा। कक्षा नौ से 12 तक के प्रत्येक विद्यार्थी का करियर गाइडेंस पोर्टल पंख पर पंजीकरण करवाया जाएगा। मई के तीसरे सप्ताह और अन्य महीनों के अंतिम सप्ताह में मासिक टेस्ट होगा। मासिक टेस्ट में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे।

    अर्द्धवार्षिक परीक्षा अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में होगी। जनवरी प्रथम सप्ताह तक सभी कक्षाओं का पाठ्यक्रम पूरा करना होगा। इसके दूसरे सप्ताह में कक्षा 12 की प्री बोर्ड प्रयोगात्मक परीक्षा, तृतीय सप्ताह में 10वीं और 12वीं की प्री बोर्ड लिखित परीक्षा होगी।

    जनवरी के अंतिम सप्ताह में नौवीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा होगी। उसके बाद फरवरी में इसका परिणाम आ जाएगा। वहीं, बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षा 21 जनवरी से पांच फरवरी तक और लिखित परीक्षा फरवरी में होगी। यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि सभी कक्षाओं के लिए निर्धारित मासिक पाठ्यक्रम उसी माह पूर्ण करेंगे।



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    10वीं-12वीं की परीक्षाएं वर्ष में दो बार कराने के प्रस्ताव पर संशय, परीक्षा परिणाम व विश्वविद्यालयों में दाखिले के बीच समय नहीं, नए सिरे से मंथन व मांगी रिपोर्ट

    10वीं-12वीं की परीक्षाएं वर्ष में दो बार कराने के प्रस्ताव पर संशय, परीक्षा परिणाम व विश्वविद्यालयों में दाखिले के बीच समय नहीं, नए सिरे से मंथन व मांगी रिपोर्ट


    साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कैसे हो, फैसला जल्द

    परीक्षा परिणाम व विश्वविद्यालयों में दाखिले के बीच समय नहीं, नए सिरे से मंथन व मांगी रिपोर्ट


    नई दिल्ली। साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कैसे और किस समय हो, इस पर जल्द फैसला होगा। इसको लेकर शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई की अगले हफ्ते बैठक होने जा रही है। सीबीएसई ने इस खाका तैयार कर लिया है। 

    बैठक में इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि बोर्ड परीक्षा दो बार करवाने के साथ-साथ स्नातक दाखिले की अन्य राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं से लेकर विश्वविद्यालयों में दाखिले का शेड्यूल न बिगड़े। इसके अलावा विभिन्न प्रदेश शिक्षा बोर्ड के साथ तालमेल भी बिठाना है। ताकि छात्रों को तनाव रहित परीक्षा की सुविधा मिले। 

    सीबीएसई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत 2025 से साल में दो बार बोर्ड परीक्षा करवाने की तैयारी कर चुका है। इसी के तहत शिक्षा मंत्रालय अन्य हितधारकों के साथ सीबीएसई के प्रस्ताव पर मंथन करेगा। सीबीएसई 15 फरवरी से 31 मार्च तक बोर्ड परीक्षा आयोजित करती है। इसके बाद मई के पहले हफ्ते तक रिजल्ट आता है। 

    जनवरी से फरवरी में जेईई मेन का पहले चरण की परीक्षा, फरवरी-मार्च में बोर्ड परीक्षा, अप्रैल में जेईई मेन के दूसरे चरण की परीक्षा, इसी के बीच निफ्ट, क्लैट की परीक्षा, मई में सीयूईटी यूजी की परीक्षा। मई में जेईई एडवांस और नीट की परीक्षा। अब यदि सीबीएसई दूसरी बोर्ड परीक्षा जून में करवाता है तो उसका रिजल्ट जुलाई तक आ पाएगा। 


    10वीं-12वीं की परीक्षाएं वर्ष में दो बार कराने के प्रस्ताव पर संशय

    नई दिल्लीः अगले वर्ष यानी 2025 से दो बार बोर्ड परीक्षाओं को कराने की प्रस्तावित योजना पर ग्रहण लगता दिख रहा है। इसका पहला कारण बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आने और स्कूलों या विश्वविद्यालयों में नए सत्र के होने वाले दाखिले के बीच दूसरी परीक्षा के लिए समय का नहीं होना है। दूसरा कारण बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार कराने के पीछे छात्रों का तनाव दूर करने का जो मकसद था, वह भी हल होता नहीं दिख रहा है। माना जा रहा है कि साल में दो बार बोर्ड परीक्षाएं आयोजित की गईं, - तो छात्र लंबे समय तक परीक्षाओं में ही फंसा रहेगा। यह परीक्षाओं से जुड़े उसके तनाव को कम करने के बजाय और बढ़ा सकता है।

    शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के साथ साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने को लेकर रायशुमारी के बाद शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के बीच इस दिशा में मंथन तेज हुआ है। सूत्रों की मानें तो शिक्षा मंत्रालय ने सीबीएसई से इसे लेकर विस्तृत रिपोर्ट भी देने को कहा है। माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आने के बाद इस पर कोई अंतिम निर्णय लिया जा सकता है। गौरतलब है कि इससे पहले शिक्षा मंत्रालय ने 2025 से दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं को साल में दो बार कराने का ऐलान किया था।


    यह है अड़चन

    विशेषज्ञों की मानें तो साल में दो बार बोर्ड परीक्षा कराने की योजना इसलिए भी उपयुक्त नहीं है, क्योंकि छात्रों का इससे तनाव खत्म होने के बजाय बढ़ेगा। अधिकतर छात्र जेईई मेंस की तरह दोनों परीक्षाओं में शामिल होंगे। ऐसे में दोनों परीक्षा की यह अवधि फरवरी से अगस्त तक हो सकती है। वहीं दूसरी परीक्षा कराने के लिए नई सिरे से सारी तैयारी करनी होगी। छात्रों को अधिक बोर्ड फीस चुकानी होगी। इससे साथ ही दूसरी बड़ी चुनौती यह भी है कि अप्रैल से स्कूलों में नया सत्र शुरू हो जाता है। विश्वविद्यालयों में भी अप्रैल से दाखिले की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। ऐसे में दूसरी परीक्षा के लिए समय कब मिलेगा। वहीं इन्हें कराया गया तो विश्वविद्यालय और स्कूल में उन्हें नए सत्र में दाखिला नहीं मिल पाएगा। 

    प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने चुनाव ड्यूटी के बहिष्कार की दी चेतावनी, कुछ जनपदों में शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी तृतीय बनाए जाने से उपजी नाराजगी

    प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने चुनाव ड्यूटी के बहिष्कार की दी चेतावनी, कुछ जनपदों में शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी तृतीय बनाए जाने से उपजी नाराजगी


    लखनऊ। चुनाव आयोग ने शिक्षामित्रों को मतदान अधिकारी द्वितीय के पद पर तैनात करने का जिला निर्वाचन अधिकारियों को आदेश दिया है। किंतु कुछ जिलों में उनकी ड्यूटी मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में लगाई जा रही है। इस पर प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने नाराजगी जताई है। साथ ही संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को पत्र भेजकर इसमें संशोधन की मांग की है।


    संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि चुनाव आयोग के आदेश का जिले के अधिकारियों द्वारा पालन नहीं किया जा रहा है। गोंडा, चित्रकूट आदि कुछ जिलों में शिक्षामित्र की ड्यूटी मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्र एक शिक्षक के रूप में काम करते हैं। 20 साल से अधिक से चुनाव में मतदान अधिकारी प्रथम व द्वितीय की ड्यूटी करते रहे हैं।


    उन्होंने कहा कि अगर मतदान अधिकारी तृतीय के रूप में शिक्षामित्र की ड्यूटी लगाई गई, तो वह इसका बहिष्कार करेगा। उन्होंने मांग की जिला निर्वाचन अधिकारी अपने इस आदेश में संशोधन करें। ताकि चुनाव को ठीक ढंग से सकुशल संपन्न कराया जा सके।

    संस्कृत बोर्ड के विद्यार्थियों को मिलेगा 20 अंक तक का ग्रेसमार्क्स, 15 से 20 अप्रैल के बीच जारी होगा बोर्ड परीक्षा का परिणाम

    संस्कृत बोर्ड के विद्यार्थियों को मिलेगा 20 अंक तक का ग्रेसमार्क्स, 15 से 20 अप्रैल के बीच जारी होगा बोर्ड परीक्षा का परिणाम 


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद अब अपने बोर्ड परीक्षार्थियों को 16 से बढ़ाकर 20 अंक तक ग्रेस मार्क्स देगा। वहीं बोर्ड सत्र 2023-24 की पूर्व मध्यमा से उत्तर मध्यमा स्तर तक (10वीं, 11वीं व 12वीं) की परीक्षा का परिणाम 15 से 20 अप्रैल के बीच घोषित करेगा। हालांकि इसके लिए वह चुनाव आयोग से अनुमति लेगा।


     यह सहमति शुक्रवार को हुई माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की परीक्षाफल समिति की बैठक में बनी। बैठक में जानकारी दी गई कि 15 फरवरी से एक मार्च तक हुई बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का निर्धारित समय में मूल्यांकन पूरा किया जा चुका है। परीक्षा परिणाम भी आखिरी चरण में है। तय हुआ कि परीक्षाफल 15 से 20 अप्रैल के बीच शासन व चुनाव आयोग की स्वीकृत के बाद घोषित किया जाएगा।


     माध्यमिक शिक्षा निदेशक महेंद्र देव की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि परीक्षा के समय विषय में परिवर्तन करने पर विद्यालय पर आर्थिक दंड लगाया जाएगा। बैठक में सचिव शिवलाल, जितेन्द्र प्रताप सिंह, डा जगदीश प्रसाद शर्मा प्राचार्य, सीएल चौरसिया उप निदेशक संस्कृत, लोकेश वर्मा उप निरीक्षक संस्कृत पाठशाला उपस्थित थे। 

    बीएड : अब तक 1.82 लाख ने भरा प्रवेश परीक्षा फॉर्म, पिछले साल की तुलना में अब तक आधे आवेदन भी नहीं आए

    बीएड : अब तक 1.82 लाख ने भरा प्रवेश परीक्षा फॉर्म, पिछले साल की तुलना में अब तक आधे आवेदन भी नहीं आए


    झांसी। बीएड को लेकर छात्र-छात्राओं का रुझान घटता जा रहा है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा कराई जा रही बीएड की प्रवेश परीक्षा के लिए दो महीने में 1.82 लाख अभ्यर्थियों ने ही आवेदन किया है। पिछले साल की तुलना में अब तक आधे फॉर्म भी नहीं भरे गए हैं। 


    बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी ने बीएड की प्रवेश परीक्षा के लिए 10 फरवरी 2024 से ऑनलाइन आवेदन खोले थे। 10 मार्च तक अभ्यर्थियों को फॉर्म भरने का मौका दिया गया था। इसके बाद शासन ने आवेदन की तिथि सात अप्रैल तक बढ़ा दी। चार अप्रैल को शासन ने आवेदन की तिथि दूसरी बार बढ़ाई। अब बिना विलंब शुल्क के साथ 30 अप्रैल और विलंब शुल्क के साथ सात मई तक बीएड प्रवेश परीक्षा का फॉर्म भरा जा सकता है। 


    नौ जून को निर्धारित केंद्रों पर लिखित परीक्षा कराई जाएगी। इसका परिणाम 30 जून को जारी होगा। 10 जुलाई से काउंसलिंग शुरू होनी है। वहीं, बीयू के आंकड़े देखें तो पिछले दो महीने में 1.82 लाख छात्र-छात्राओं ने ही बीएड की प्रवेश परीक्षा के लिए फॉर्म भरा है। जबकि, पिछले साल 4.72 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। प्रदेश में बीएड की लगभग 2.40 लाख सीटें हैं। बीयू कुलसचिव विनय कुमार सिंह का कहना है कि आवेदनों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। 

    Friday, April 12, 2024

    NCPCR ने आरटीई अधिनियम के तहत आने वाले सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और मूल्यांकन विधियों में एकरूपता सुनिश्चित करने को कहा


    NCPCR ने आरटीई अधिनियम के तहत आने वाले सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और मूल्यांकन विधियों में एकरूपता सुनिश्चित करने को कहा


    नयी दिल्ली, 11 अप्रैल ।  राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने देशभर के स्कूली शिक्षा से संबंधित सभी प्रमुख सचिवों और सचिवों को पत्र लिखकर शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून के तहत आने वाले सभी विद्यालयों में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और मूल्यांकन विधियों में एकरूपता सुनिश्चित करने को कहा है।


    शीर्ष बाल अधिकार निकाय ने अपने पत्र में आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 29 के अनुपालन के महत्व को रेखांकित किया। यह धारा विशेष रूप से प्रारंभिक शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम और मूल्यांकन प्रक्रियाओं की रूपरेखा तैयार करती है।


    नौ अप्रैल को लिखे एक पत्र में विस्तृत सिफारिशों में अकादमिक अधिकारियों, विशेष रूप से केंद्रीय स्तर पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और राज्य स्तर पर संबंधित राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषदों (एससीईआरटी) द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम दिशानिर्देशों को सख्ती से लागू करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।


    इस दिशानिर्देश के माध्यम से अधिनियम के तहत आने वाले केंद्रीय विद्यालयों और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध संस्थानों सहित सभी स्कूलों में पाठ्यक्रम, पाठ्यपुस्तकों और मूल्यांकन विधियों में एकरूपता सुनिश्चित करने को कहा गया है।


    आरटीई अधिनियम के पाठ्यक्रम मानकों के कार्यान्वयन से देशभर में छात्रों और परिवारों को कई लाभ मिलने की उम्मीद है, जिसमें सभी आरटीई-अनुपालक संस्थानों में शैक्षिक सामग्री में एकरूपता, एनसीईआरटी/एससीईआरटी द्वारा अनुमोदित निर्धारित सामग्री को सीमित करके शिक्षा लागत में कमी किया जाना शामिल है।


    एनसीपीसीआर ने इन सिफारिशों पर अमल के लिए स्कूलों के वास्ते 30 दिन की समय सीमा निर्धारित की है। उनका अनुमान है कि ये उपाय आरटीई अधिनियम के उद्देश्यों को मजबूत करेंगे, साथ ही यह भी सुनिश्चित करेंगे कि प्रत्येक बच्चे को वह गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके, जिसके वे कानूनी हकदार हैं।

    बच्चों में जिज्ञासा और सोच बढ़ाएगी CBSE, आठवीं से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए साइंस चैलेंज कार्यक्रम का होगा आयोजन

    बच्चों में जिज्ञासा और सोच बढ़ाएगी CBSE, आठवीं से दसवीं कक्षा के छात्रों के लिए साइंस चैलेंज कार्यक्रम का होगा आयोजन


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने बच्चों में जिज्ञासा, प्रश्न पूछने के कौशल और उच्च स्तरीय सोच को बढ़ाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। बोर्ड इसके लिए आठवीं से दसवीं कक्षा के बच्चों के लिए सीबीएसई साइंस चैलेंज आयोजित करने जा रहा है। बोर्ड ने स्कूलों को इसमें भाग लेने के लिए छात्रों को प्रोत्साहित करने को कहा है। यह साइंस चैलेंज अप्रैल व मई महीने में सीबीएसई प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।


    सीबीएसई का मानना है कि विज्ञान हमारे जीवन से जुड़ा हुआ है और हमें अपने आसपास की दुनिया को बेहतर ढंग से समझने में मदद करता है। इस विषय से जुड़कर छात्र सोचना, समस्याओं का समाधान करना सीखते हैं। ऐसे में बोर्ड छात्रों में जिज्ञासा, प्रश्न पूछने के कौशल और उच्च स्तरीय सोच पैदा करना चाहता है। इसी पहल के रूप में यह चैलेंज शुरू किया जा रहा है। इसकी थीम विज्ञान, पर्यावरण और स्थिरता है। बोर्ड ने स्कूलों को कहा है कि वह इस चैलेंज में भाग लेने के लिए बच्चों को प्रोत्साहित करें, क्योंकि इससे बच्चों को अभ्यास करने और कौशल प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।


    छात्रों को करना होगा पंजीकरण

    यह साइंस चैलेंज दो राउंड (स्कूल स्तर और इंटर स्कूल स्तर) में होगा। आठवीं से दसवीं तक के सभी छात्र इसमें भाग लेने के योग्य हैं। पहले राउंड में स्कूलों को छात्रों का पंजीकरण कराना होगा। दूसरे राउंड में स्कूल 6 छात्रों को नामित करेंगे। इस साइंस चैलेंज में बहु विकल्पीय प्रश्न होंगे।

    भाग लेने वाले छात्रों का कार्य गति और सटीकता दोनों पर केंद्रित होगा। राउंड- 1 के लिए स्कूलों को 19 अप्रैल तक छात्रों को पंजीकृत करना होगा।


    इस कार्यक्रम के लिए जो स्कूल पंजीकृत होंगे उन्हें 22 अप्रैल को साइंस चैलेंज पेपर (बहु विकल्पीय प्रश्न) उपलब्ध कराए जाएंगे। स्कूल 22 अप्रैल से 26 अप्रैल तक साइंस चैलेंज का आयोजन करेंगे। इसमें से वह हर कक्षा (आठवीं से दसवीं) से दो छात्रों का चयन उनके प्रदर्शन के आधार पर अगले राउंड के लिए करेंगे। 


    स्कूल दूसरे राउंड के लिए छात्रों का पंजीकरण 29 अप्रैल से सात मई तक करेंगे। दूसरा राउंड कंप्यूटर आधारित साइंस चैलेंज होगा कि जो कि बोर्ड की ओर से 13 मई से 17 मई तक किया जाएगा।

    Thursday, April 11, 2024

    DGSE से परिषदीय स्कूलों का समय साढ़े 7 से साढ़े 12 तक करने की मांग

    DGSE से परिषदीय स्कूलों का समय साढ़े 7 से साढ़े 12 तक करने की मांग


    उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं प्रांतीय संयोजक अपूर्व दीक्षित द्वारा महानिदेशक को एक पत्र द्वारा भीषण गर्मी व लू के चलते स्कूल समय परिवर्तन की मांग रखी। प्रांतीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय कुमार कनौजिया ने बताया कि स्कूल सुबह 8 से 2 बजे तक है। भीषण गर्मी को देखते हुए विद्यालय का समय सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक करने की बात रखी गई। 




    वर्तमान में पड़ रही भीषण गर्मी में परिषदीय विद्यालयों में अध्यनरत बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के दृष्टिगत विद्यालयों के समय परिवर्तन के सम्बन्ध में PSPSA ने सीएम योगी से की मांग




    परिषदीय विद्यालयों के समय में परिवर्तन करने को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने भी लिखा शासन को पत्र




    कोरोना काल के पश्चात परिवर्तित किए गए परिषदीय विद्यालयों के संचालन समय को पूर्ववत करने के सम्बन्ध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की सीएम योगी से मांग


    विद्यार्थियों का बनेगा पर्सनल एजुकेशन नंबर, प्राथमिक और माध्यमिक विभाग ने तैयारी शुरू की

    विद्यार्थियों का बनेगा पर्सनल एजुकेशन नंबर, प्राथमिक और माध्यमिक विभाग ने तैयारी शुरू की


    कक्षा एक से इंटर तक के विद्यार्थियों का पर्सनल एजुकेशन नंबर (पेन) जारी किया जाएगा। विद्यार्थियों की टीसी (स्थानांतरण प्रमाण पत्र) पर पेन और विद्यालय का यू-डायस कोड भी दर्ज किया जाएगा। शासन से आदेश आने के बाद प्राथमिक और माध्यमिक विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है।

    बिना मान्यता के विद्यालयों के संचालित होने और एक ही विद्यार्थी का दो स्कूलों में नामांकन होने का मामला शिक्षा विभाग के सामने आता रहता है। ऐसे में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब विद्यार्थियों को पेन ( पर्सनल एजुकेशन नंबर) जारी करने का आदेश दिया गया है। 

    नए शैक्षिक सत्र 2024 के लिए पेन नंबर की तैयारी तेज कर दी गई है। इसमें यू-डायस पोर्टल पर विद्यार्थियों की आईडी तैयार की जाएगी। विद्यार्थियों से जुड़ी सभी जानकारी इस नंबर से देखी जा सकेगी।

    विद्यार्थियों के विवरण स्वास्थ्य, कद, ब्लड ग्रुप के साथ शैक्षिक विवरण से जुड़ी जानकारी इसमें रहेगी। शासन से आदेश आने के बाद विभाग ने विद्यालयों को निर्देश जारी कर दिया है। 

    विद्यार्थियों का पेन जारी किया जाएगा। यू डायस पोर्टल पर यह नंबर डालते ही उनसे जुड़ी सभी जानकारियां उपलब्ध हो जाएंगी। इससे फर्जीवाड़ा रोकने में आसानी होगी। एक ही बच्चे का दो जगह नामांकन नहीं किया जा सकेगा।


    यूपी : अब कक्षा एक से इंटर तक के विद्यार्थियों के लिए 'पेन' अनिवार्य, प्रदेश में लागू कराने के लिए आदेश जारी


    लखनऊ : अब कक्षा एक से इंटरमीडिएट तक के विद्यार्थियों का पर्सनल एजुकेशन नंबर (पेन) अनिवार्य कर दिया गया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश को प्रदेश में लागू कराने के लिए आदेश जारी कर दिए गए हैं। 

    स्कूली शिक्षा महानिदेशालय की ओर से सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों व जिला विद्यालय निरीक्षकों को इसे बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। पेन के बिना विद्यार्थियों की गणना किसी भी प्रकार के शैक्षिक सरकारी रिकार्ड में नहीं हो स्कूलों सकेगी। शैक्षिक सरकारी रिकार्ड में नाम न होने के कारण विद्यार्थियों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) नहीं मिल सकेगी। छात्रवृत्ति व अन्य सरकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो जाएंगे। 


    यही नहीं, शासकीय प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा व मान्य में पंजीकरण नहीं हो सकेगा। ऐसे में सरकारी , अशासकीय सहायता प्राप्त ऐडेड स्कूलों व निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए यह बहुत जरूरी है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय में पढ़ रहे 1.96 करोड़ विद्यार्थियों का पेन बनाने के लिए यू-डायस प्लस पोर्टल पर प्रोफाइल अपडेट करने के निर्देश सभी बीएसए को दिए गए हैं।



    PEN : प्रदेश में पर्सनल एजुकेशन नंबर बनाने की प्रक्रिया हुई तेज

    लखनऊ। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के निर्देश के क्रम में प्रदेश में भी कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों की पर्सनल एजुकेशन नंबर (पेन) को अनिवार्य बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसमें कहा गया है कि पेन के बिना विद्यार्थियों की गिनती किसी शैक्षिक रिकॉर्ड में नहीं की जाएगी। इसे लेकर जिला स्तर पर कवायद तेज हो गई है। 

    जानकारी के अनुसार विभाग की ओर से सभी बीएसए व डीआईओएस को इसे बनवाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके बिना विद्यार्थियों को ट्रांसफर सर्टिफिकेट नहीं मिल सकेगा। यह भी कहा जा रहा है कि विद्यार्थी छात्रवृत्ति या अन्य सरकारी योजनाओं से भी लाभान्वित नहीं हो पाएंगे। ऐसे में सरकारी स्कूलों के साथ-साथ एडेड व निजी स्कूलों के विद्यार्थियों के लिए भी यह जरूरी है। 

    देवरिया, गोंडा, सीतापुर आदि जिलों में बीएसए की ओर से निर्देश दिए गए हैं कि यू-डायस पोर्टल पर विद्यार्थी का प्रोफाइल, नामांकन प्रोफाइल दर्ज किए जाएं। 



    अब परमानेंट एजुकेशन नम्बर की मदद से फर्जीवाड़े पर लगेगी रोक, यू-डाइस के जरिए विद्यार्थीयों  को PEN नंबर होगा अलॉट 

    Permanent education number अब फर्जी डिग्री का उपयोग कर नौकरी लगने वाले लोगों का भंडाफोड़ किया जाएगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय पैन कार्ड के समान छात्रों को परमानेंट एजुकेशन नम्बर (permanent education number, PEN) देने की योजना बनाई गईं है।

    इन कार्ड में छात्रों की शैक्षणिक सम्बन्धी सभी विवरण शामिल होंगे। यू-डाइस (यूनिफाइड़ डिस्ट्रिक इनफॉर्मेशन सिस्टम फोर एजुकेशन) के जरिए ये नंबर तैयार किया जा रहा है। PEN के माध्यम से फर्जी मार्कशीट से नौकरी पर अंकुश लग सकेगा। वहीं सरकारी योजनाओं में फर्जी तरीके से लाभ लेने की सूचना मिलती है

    इस पर भी पाबंदी लग सकेगी। क्योंकि केवल एक नम्बर के माध्यम से ही विद्यार्थी की सभी प्रकार की सूचनाएं पोर्टल के माध्यम से देखी जा सकेंगी। विद्यार्थियों की 53 प्रकार की सूचनाएं संग्रहित रहेंगी। इसमें विद्यार्थियों की हेल्थ, हाइट, ब्लड ग्रुप व वजन आदि की जानकारी भी रहेगी। 



    टीसी के साथ नहीं मिल पा रहा PEN (Permanent Education Number), जानिए क्यों जरूरी है यू-डायस और पेन नंबर?

    नए सत्र में अभिभावकों के लिए एक स्कूल से दूसरे स्कूल में बच्चे का प्रवेश करवाना मुश्किल होता जा रहा है। इस तरह के प्रवेश के लिए ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) के साथ परमानेंट एजुकेशन नंबर (PEN) भी जरूरी है। ज्यादातर स्कूल टीसी पर PEN दर्ज नहीं कर रहे, जबकि नए स्कूल में PEN के बिना प्रवेश नहीं हो रहा। ऐसे में अभिभावक टीसी मिलने के बाद भी प्रवेश के लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। 


    स्कूलों में प्रवेश के लिए बीते सत्र से परमानेंट एजुकेशन नंबर अनिवार्य हो गया है। इसके लिए स्कूलों को अपने यहां पढ़ने वाले स्टूडेंट्स का रेकॉर्ड यू-डायस पर चढ़ाना होता है। इससे उनका परमानेंट एजुकेशन नंबर जनरेट होता है, लेकिन स्कूल टीसी के साथ स्टूडेंट का परमानेंट एजुकेशन नंबर नहीं दे रहे। 


    माध्यमिक विद्यालयों, सीबीएसई और सीआईएससीई स्कूलों को अभी तक टीसी पर यू-डायस कोड और पेन दर्ज करने का लिखित आदेश भी जारी नहीं हुआ है। इसके साथ टीसी पर पेन और आधार दर्ज करने का अलग कॉलम भी तय नहीं है। दूसरे स्कूल में बच्चे का प्रवेश करवाने जा रहे अभिभावकों को मुसीबतें उठानी पड़ रही हैं।


    पेन नंबर की व्यवस्था पिछले साल लागू हुई है। । इस सत्र में सभी बच्चों के रेकॉर्ड ऑनलाइन हो जाएंगे। फिलहाल टीसी के साथ पेन नंबर और यू-डायस कोड लिखने के निर्देश दिए गए हैं। - राकेश कुमार पांडे, डीआईओएस, लखनऊ


    राजधानी समेत प्रदेश में कई स्कूल रजिस्टर्ड नहीं है। कई
    बच्चों के नाम एक से अधिक स्कूल में दर्ज होने के मामले
    भी सामने आते हैं। यह फर्जीवाड़ा रोकने के लिए रजिस्टर्ड स्कूलों का यू-डायस और स्टूडेंट का PEN जारी किया जा रहा है। स्कूल यू-डायस पर स्टूडेंट्स का पूरा रेकॉर्ड आधार, कक्षा, सेक्शन, माता-पिता का नाम, पता, जन्मतिथि वगैरह दर्ज करते हैं। रेकॉर्ड दर्ज करते ही स्टूडेंट का पेन नंबर जनरेट हो जाता है। स्कूलों को टीसी के साथ PEN देने के निर्देश हैं, लेकिन नई व्यवस्था के कारण स्कूलों में गलती हो रही है। कई स्कूलों में अभी बच्चों के रेकॉर्ड यू-डायस पर अपलोड नहीं हो सके हैं। ऐसे में अभिभावक टीसी लेते समय स्कूल से PEN की मांग कर सकते हैं।

    छठी, नौवीं व ग्यारहवीं में लागू होगा क्रेडिट सिस्टम, सीबीएसई ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 से लागू करने की योजना बनाई

    छठी, नौवीं व ग्यारहवीं में लागू होगा क्रेडिट सिस्टम, सीबीएसई ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 से लागू करने की योजना बनाई


    नई दिल्ली। अब स्कूलों में नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के अंतर्गत क्रेडिट सिस्टम से पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इस सिस्टम को पॉयलट प्रोजेक्ट के तौर पर शैक्षणिक सत्र 2024-25 से छठी, नौवीं व ग्यारहवीं में लागू करने की तैयारी की है। इस सिस्टम के तहत नौंवी में साल भर में 210 घंटे की पढ़ाई करने पर छात्रों को 40-54 क्रेडिट अंक मिलेंगे। यह क्रेडिट सभी विषयों में परीक्षा पास करने पर ही मिलेंगे। इसके लिए साल भर में एक कक्षा में 75 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होगी।


    सीबीएसई ने इस सिस्टम का हिस्सा बनने के लिए स्कूलों को आमंत्रित किया है। इस संबंध में बोर्ड की ओर से सीबीएसई से संबद्ध सभी स्कूल प्रमुखों को दिशा-निर्देशों की जानकारी भेजी गई है। बोर्ड ने नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क की गाइडलाइंस तैयार कर उससे संबंधित कई कार्यशालाएं की हैं।


     अब बोर्ड ने इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण, मूल्यांकन करने के लिए छठी, नौवीं व ग्यारहवीं कक्षा में इन दिशा निर्देशों के एक पायलट कार्यान्वयन की योजना बनाई है। सीबीएसई नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क के सफल परीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता सत्र, परामर्श कार्यक्रम आयोजित करेगा। इसके साथ ही पायलट कार्यक्रम में भाग लेने वाले स्कूलों को मार्गदर्शन प्रदान करेगा।


    छात्र को प्राप्त होने वाले क्रेडिट एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट में जुड़ते रहेंगे। नौंवी के लिए संभावित प्रस्तावित क्रेडिट के अनुसार छात्र को पांच विषयों को पास करना होगा। इसमें दो भाषा और तीन विषय शामिल होंगे। इनमें पास होने पर ही छात्र क्रेडिट हासिल कर पाएंगे। प्रति विषय के लिए 210 घंटे होंगे। 


    इस तरह से 1050 घंटे पांच अनिवार्य विषयों के लिए आवंटित होंगे। 150 घंटे आंतरिक मूल्यांकन, शारीरिक शिक्षा, आर्ट एजुकेशन और कार्य अनुभव के लिए होंगे। हर विषय के लिए सात क्रेडिट होंगे। नौवीं में पांच विषयों को पास करने पर छात्र 40 क्रेडिट के लिए योग्य होगा। यदि छात्र छठा व सातवां विषय लेता है तो उसके क्रेडिट 47-54 तक हो जाएंगे। 


    11वीं में एक भाषा व 04 विषयों में पास होने पर 40 क्रेडिट

    ग्यारहवीं में एक भाषा और चार विषयों में पास होने पर 40 क्रेडिट पाने के योग्य होंगे। 210 घंटे प्रति विषय के लिए आवंटित होंगे। नौंवों की तरह ही 150 घंटे आंतरिक मूल्यांकन, शारीरिक शिक्षा, कार्य अनुभव व जरनल स्टडी के लिए होंगे। यदि कोई छात्र पांच विषयों के अलावा छठा विषय लेता है तो वह 47 क्रेडिट पाने के योग्य होगा।

    JNU भारत में सर्वोच्च रैंक वाला विवि, क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 69 भारतीय विश्वविद्यालय

    JNU भारत में सर्वोच्च रैंक वाला विवि,  क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में 69 भारतीय विश्वविद्यालय

    ■ आईआईएम अहमदाबाद ने दुनिया भर में 22वां स्थान हासिल किया

    नई दिल्ली । विषय के आधार पर क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2024 बुधवार को जारी कर दी गई। इस सूची में भारत से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) सर्वोच्च रैंक वाला विश्वविद्यालय है। विकास अध्ययन के लिए जेएनयू को सूची में 81.3 के स्कोर के साथ 20वें स्थान पर रखा गया है। 


    वहीं आईआईएम अहमदाबाद व्यवसाय और प्रबंधन अध्ययन के लिए दुनिया भर में 22वां स्थान हासिल करने में सफल रहा, जबकि आईआईएम बैंगलोर और आईआईएम कलकत्ता को शीर्ष 50 में जगह मिली है। रैंकिंग में चेन्नई के सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज को दंत चिकित्सा अध्ययन श्रेणी में 24वें स्थान पर रखा गया है।


    रैंकिंग सूची लंदन : स्थित उच्च शिक्षा विशेषज्ञ क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) ने जारी की है। रैंकिंग में रिकॉर्ड 1559 संस्थान शामिल हैं, जिसमें पहली बार 69 भारतीय विश्वविद्यालयों को जगह मिली है। भारत की ओर से कुल 424 प्रविष्टियां भेजी गई। यह पिछले वर्ष की 355 प्रविष्टियों से 19.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। 


    भारत की ओर से भेजी गई प्रविष्टियों में खास बात यह है कि इस साल 72 प्रतिशत प्रविष्टियां सूची में नई हैं या सुधार हुआ है या उन्होंने अपनी स्थिति बरकरार रखी है। इसमें से सिर्फ 18 प्रतिशत में गिरावट देखी गई है। 


    यानी कुल मिलाकर भारत ने साल-दर-साल 17 प्रतिशत का महत्वपूर्ण सुधार प्रदर्शित किया है। क्यूएस के अनुसार, भारत दुनिया में सबसे तेजी से विस्तार करने वाले शोध केंद्रों में से एक है। उसने कहा कि 2017 से 2022 के बीच शोध में 54 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है जो न केवल वैश्विक औसत के दोगुने से अधिक है।

    20 अप्रैल के बाद कभी भी आ सकता है यूपी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट, 22 फरवरी से नौ मार्च तक हुई थी परीक्षा, शामिल हुए थे करीब 55 लाख विद्यार्थी

    20 अप्रैल के बाद कभी भी आ सकता है यूपी बोर्ड परीक्षा रिजल्ट, 22 फरवरी से नौ मार्च तक हुई थी परीक्षा, शामिल हुए थे करीब 55 लाख विद्यार्थी


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर का परीक्षा परिणाम 25 अप्रैल से पहले जारी किया जा सकता है। अगर 25 से पहले परिणाम जारी हुआ तो यूपी बोर्ड अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगा। इसके पहले 2023 में बोर्ड ने 25 अप्रैल को परिणाम जारी किया था।


    यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 22 फरवरी से शुरू हुई थीं। परीक्षा में प्रदेश भर के करीब 55 लाख विद्यार्थी शामिल हुए थे। मुख्यालय से सभी केंद्रों की ऑनलाइन निगरानी की गई थी। परीक्षा के लिए आठ हजार से अधिक केंद्र बनाए गए थे और नौ मार्च तक परीक्षाएं पूरी हुई थीं।


    प्रदेश के सभी जिलों में मूल्यांकन केंद्र बनाए गए। 31 मार्च तक मूल्यांकन भी हो गया। मूल्यांकन के दौरान एक शिक्षक की हत्या के चलते कई दिन तक प्रक्रिया बाधित भी हुई। मूल्यांकन के बाद कापियां क्षेत्रीय कार्यालयों में रख दी गई हैं। अब परिणाम तैयार करने का काम चल रहा है। आसार है कि 25 अप्रैल से पहले परिणाम उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर जारी कर दिया जाएगा।


    पूर्व में कब-कब जारी हुए थे परिणामः यूपी बोर्ड ने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2023 में 25 अप्रैल को परिणाम जारी कर दिया था। उससे पहले 2022 में 18 जून को, 2021 में 31 जुलाई को, 2020 में 27 जून को, 2019 में 27 अप्रैल को, 2018 में 29 अप्रैल को जारी किया था।


    परिणाम जारी करने की तैयारी चल रही है। । इस बार परिणाम जारी करने में पिछले वर्ष का भी रिकार्ड तोड़ने की योजना है। 20 अप्रैल के बाद किसी भी दिन परिणाम आ सकता है। - दिब्यकांत शुक्ल, सचिव, यूपी बोर्ड, प्रयागराज

    Wednesday, April 10, 2024

    असाध्य रोगों से पीड़ित और पति पत्नी दोनो के सेवा में होने की स्थिति में लोकसभा निर्वाचन ड्यूटी से छूट दिए जाने हेतु प्राथमिक शिक्षक संघ की मांग

    असाध्य रोगों से पीड़ित और पति पत्नी दोनो के सेवा में होने की स्थिति में लोकसभा निर्वाचन ड्यूटी से छूट दिए जाने हेतु प्राथमिक शिक्षक संघ का ज्ञापन


    बेसिक शिक्षा परिषद के नियत्रंणाधीन परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक, शिक्षिकाओं जो असाध्य रोग से पीड़ित हैं अथवा पति एंव पत्नी सरकारी सेवा में है लोक सभा निर्वाचन-2024 में छूट प्रदान किए जाने के संबंध में ज्ञापन मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन


    पांच महीने बाद भी राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा का परिणाम नहीं, आठवीं पास विद्यार्थियों को है रिजल्ट का इंतजार

    पांच महीने बाद भी राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा का परिणाम नहीं, आठवीं पास विद्यार्थियों को है रिजल्ट का इंतजार

    05 नवंबर को 1.88 लाख ने दी दी थी परीक्षासफल यूपी के 15143 होंगे छात्रवृत्ति को पात्र


    प्रयागराज । राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2024-25 का परिणाम पांच महीने बाद भी जारी नहीं हो सका है। इसके चलते परीक्षा में शामिल डेढ़ लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परेशान हैं। परीक्षा में सफल प्रदेश के 15143 मेधावी विद्यार्थियों को शिक्षा मंत्रालय की ओर से कक्षा नौ से 12 तक प्रतिमाह एक-एक हजार रुपये की छात्रवृत्ति दी जाएगी।


    राजकीय, सहायता प्राप्त एवं परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा आठ के 188228 विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति परीक्षा के लिए आवेदन किया था। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से पांच नवंबर को प्रदेशभर के 435 केंद्रों पर परीक्षा कराई गई थी। इसमें 157622 विद्यार्थी शामिल हुए थे। परीक्षा देने वाले छात्र- छात्राओं ने आठवीं पास करके कक्षा में नौ में दाखिला भी ले लिया है लेकिन परिणाम घोषित नहीं हो सका है। 


    परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी का कहना है कि परिणाम तैयार करके जांच के लिए मनोविज्ञानशाला भेजा गया है। परिणाम जल्द जारी होने की उम्मीद है।

    इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मेसी, ऑर्किटेक्चर जैसे पाठ्यक्रमों के छात्र क्षेत्रीय भाषाओं में दे सकेंगे परीक्षा, AICTE ने सभी तकनीकी कॉलेजों को लिखा पत्र

    इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मेसी, ऑर्किटेक्चर जैसे पाठ्यक्रमों के छात्र क्षेत्रीय भाषाओं में दे सकेंगे परीक्षा, AICTE ने सभी तकनीकी कॉलेजों को लिखा पत्र


    नई दिल्ली। इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मेसी, ऑर्किटेक्चर जैसे पाठ्यक्रमों के छात्र शैक्षणिक सत्र 2023-24 की वार्षिक परीक्षा भारतीय भाषाओं में दे सकेंगे। एआईसीटीई के सदस्य सचिव प्रो. राजीव कुमार के मुताबिक, स्नातक पाठ्यक्रम और डिप्लोमा छात्रों को भारतीय भाषाओं में प्रश्नपत्र हल करने की सुविधा मिलने जा रही है।


    तकनीकी कॉलेजों को भारतीय भाषाओं में पढ़ाई के बाद क्षेत्रीय भाषाओं में ही प्रश्नपत्र हल करने की सुविधा देने का फैसला किया गया। इसके लिए तकनीकी कॉलेजों को पत्र लिखकर भारतीय भाषाओं में प्रश्नपत्र तैयार करने का आग्रह किया गया है। इसमें कॉलेज एक स्थानीय भाषा चुन सकते हैं। इसके अलावा, एक अतिरिक्त भाषा में हिंदी, अंग्रेजी या अन्य हो सकती है। स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई की आजादी से सबसे अधिक फायदा दूरदराज, ग्रामीण इलाकों के छात्रों को होगा।


    विशेषज्ञों के मुताबिक, कोई भी छात्र अपनी भाषा में बेहतर तरीके से जवाब दे सकता है। अपनी भाषा में प्रश्नपत्र होने से छात्र उसे बेहतर समझते हुए अच्छे से उत्तर लिख सकता है। इससे उसके परीक्षा मूल्यांकन में बेहतर सुधार दिखेगा।


    बेहतर समझ से दे सकेंगे जवाब

    बीच में नहीं छूटेगी पढ़ाई : अक्सर छात्र परीक्षा में फेल होने के डर से पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं, पर अब छात्रों को अपनी स्थानीय भाषा में प्रश्न पत्र मिलेगा तो वे अच्छी तरह उत्तर लिख सकेंगे।

    Monday, April 8, 2024

    निजी स्कूल बसों और वैन के जरिए भी लूट का शिकार हो रहे बच्चे और अभिभावक, डीजल / पेट्रोल के दाम घटने के बाद भी एक साल में 20 से 30 फीसदी की हुई बढ़ोत्तरी

    निजी स्कूल बसों और वैन के जरिए भी लूट का शिकार हो रहे बच्चे और अभिभावक, डीजल / पेट्रोल के दाम घटने के बाद भी एक साल में 20 से 30 फीसदी की हुई बढ़ोत्तरी 


    प्रयागराज : नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होते ही निजी स्कूल संचालकों ने फीस के साथ ही स्कूल बसों का भी किराया बढ़ा दिया है। 20-30 फीसदी किराया बढ़ाने से अभिभावकों को अब एक किमी परिधि के लिए प्रतिदिन 56 रुपये की दर से किराया देना होगा।

    निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाने के साथ ही ट्रांसपोर्ट फीस के नाम पर 20 से 30 फीसदी का इजाफा कर दिया है। तीन किमी तक परिधि में स्कूल बसों का किराया 1800 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है।

    बीते सत्र में बस के किराये के रूप में जिन अभिभावकों को करीब 2600 से 3000 रुपये देने पड़ते थे, नए सत्र में उन्हें अब करीब 2800 से 3500 रुपये देने रड़ेंगे। अभिभावकों का कहना है के बस के किराये में हर बार बस किराया प्रतिवर्ष बढ़ाया जाता है। अभिभावक मजबूर होकर किराया चुकाते हैं। निजी स्कूलों की मनमानी पर रोक लगाने की कोई पहल नहीं की जाती है। जिला प्रशासन को ऐसे लोगों पर अंकुश लगाना चाहिए।


    डग्गामार बसें फिर भी बढ़ा दिया किराया

    जिले में कई स्कूलों में डग्गामार बसे संचालित हो रही हैं। बिना फिटनेस प्रमाण पत्र के सड़कों पर बसें दौड़ती रहती हैं। हादसा होने के बाद एआरटीओ से लेकर शिक्षा विभाग जागता है। पिछले वर्ष एआरटीओ ने बिना फिटनेस के चलने वाली 319 स्कूल बसों का चालान किया था।



    कॉपी-किताबों के नाम पर स्कूलों में लूट का खेल, अभिभावकों का आरोप, निजी स्कूलों और दुकानदारों की है मिलीभगत 

    नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत होने के साथ ही फीस से लेकर कॉपी-किताबों के नाम पर लूट का खेल शुरू हो गया है। कई स्कूलों की ओर से किताबों की सूची तक दुकानदार ही दे रहे हैं। कॉपी-किताबों के इस सेट में कई ऐसी भी किताबें हैं, जो न कभी खोली जानी हैं और ना ही उनका पाठ्यक्रम से कोई सीधा नाता है। मनमानी की इस चक्की में अभिभावकों के पिसने के बावजूद अफसर चुप हैं। शिकायत के बाद न तो इस पर अंकुश लग सका है ना ही कोई कार्रवाई हो सकी है।

    बाजारों से सरकारी किताबें गायब
    कान्वेंट स्कूल प्रबंधनों के स्तर से किताबों का चयन किए जाने के कारण सरकारी किताबें बाजार से नया सत्र शुरू होने से पहले ही गायब हो गई हैं। इसकी वजह यह भी है कि यह किताबें दुकानदारों को प्रिंट रेट पर मिल रही हैं। इन किताबों को बेचने में दुकानदारों को कोई फायदा भी नहीं हैं। इसलिए सरकारी किताबें बाजारों में नहीं दिखाई पड़ रही हैं। अगर सरकारी किताबें चला दी जाए तो अभिभावकों का बोझ कुछ हद तक कम हो जाएगा।

    स्कूल में वसूली जाती है अलग-अलग फीस
    इलाके में स्थित सभी कॉन्वेंट स्कूलों में अलग-अलग फीस वसूल की जाती है। यहां कोई भी ऐसा कान्वेंट स्कूल नहीं है जो माह में एक हजार से कम फीस वसूल करता हो। कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां प्रति बच्चे 2100 से 3200 रुपये तक फीस प्रतिमाह वसूल की जाती है। यहां तक कि देहात में कान्वेंट स्कूल का बोर्ड लगाकर 1200 से 1500 रुपये प्रति बच्चे फीस वसूल की जा रही है।



    फीस को लेकर निजी स्कूलों की मनमानी के आगे लाचार शिक्षा विभाग के अफसर

    नये सिरे से प्रवेश के नाम पर हजारों रुपये वसूले

    स्कूल में कक्षा बदली और ले लिया प्रवेश शुल्क

    प्रयागराज । शैक्षणिक सत्र शुरू होने के साथ ही स्कूलों की मनमानी के एक से बढ़कर एक मामले सामने आने लगे हैं। मनमानी फीसवृद्धि करने के साथ ही स्कूलों ने वसूली का नया तरीका अपनाया है। प्रतिष्ठित सेंट एंथोनी गर्ल्स कॉलेज में कक्षा पांच पास करने के बाद छठवीं में दाखिला लेने पर बच्चों से फिर से प्रवेश शुल्क (एडमिशन फीस) लिया जा रहा है।



    किताबों के दाम में 30 प्रतिशत की वृद्धि से अभिभावकों की कमर टेढ़ी, नए सत्र में शिक्षण सामग्री महंगी होने से आफत

    यूकेजी की किताबों का सेट सात हजार के पार


    प्रयागराज। नया शैक्षिक सत्र शुरू होने के साथ ही किताबों के नाम पर अभिभावकों की जेब पर डाका डालने का खेल शुरू हो गया है। इस बार 30 प्रतिशत तक किताबों के दाम में वृद्धि हुई है। इतना ही नहीं कॉपी-किताबों के बने बनाए सेट ही दिए जा रहे हैं। बजट न होने पर एक किताब बाद में खरीदने का आग्रह करने पर अभिभावकों को वापस कर दिया जा रहा है। इससे जहां बच्चों की पढ़ाई महंगी हो गई है, वहीं बढ़ते आर्थिक बोझ से अभिभावक परेशान हो उठे हैं।

    निजी स्कूल प्रबंधनों की मनमानी से इस बार कॉपी-किताब खरीदने में ही पसीने छूट जा रहे हैं। अभिभावक हर साल किताबें बदले जाने से भी परेशान हैं। जो कॉपी 20 रुपये में मिल रही थी, अब उसके दाम बढ़कर 30 रुपये हो गए हैं। स्कूलों में दाखिले के साथ बच्चों के लिए स्टेशनरी, बैग, बोतल खरीदने में जेब ढीली हो रही है। किताब खरीदने आईं कटरा की शिल्पी चौरसिया बताती हैं कि सीबीएसई सहित अन्य बोडों से संबंधित किताबों के प्रकाशकों ने 30 फीसदी तक दाम बढ़ा दिए हैं।

    वहीं, किताबों के साथ स्टेशनरी के दामों में भी काफी इजाफा हुआ है। पिछले साल नर्सरी से तीसरी कक्षा तक की किताब कॉपियों का सेट ढाई से तीन हजार रुपये में मिलता था, इस साल 4000-5000 रुपये में मिल रहा है। स्कूलों ने कॉपी, किताब और स्टेशनरी खरीदने के लिए दुकानें पहले से तय कर रखी हैं। इसलिए यहां जो कीमतें बताई जाती हैं, मजबूरन अदा करना पड़ता है। 


    अल्लापुर की श्वेता साहू के तीन बच्चे अलग-अलग जगह निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। जिसमें एक बेटा पांचवीं, दूसरा 10वीं और बेटी भी 10वीं में है। वह अपने बच्चों के लिए कॉपी- किताब खरीदने गईं तो दाम सुनकर ही हैरान रह गईं। उन्हें तीनों बच्चों की किताबों के लिए 15,500 रुपये चुकाने पड़े। जबकि, पिछले साल उन्होंने 12,500 रुपये में ही किताबें खरीदी थीं।

    इसी तरह कटरा की रहने वाली आरती प्रकाश ने इस बार एक निजी स्कूल में अपनी बेटी का दाखिला यूकेजी में कराया है। जब कॉपी-किताब के सेट का दाम पूछने आई तो सन्न रह गई। यूकेजी का सेट सात हजार रुपये में है। कहा कि निजी प्रकाशकों की ओर से नई डिजाइन, बेहतर प्रिंट, और क्वालिटी के नाम पर अभिभावकों पर बोझ डाल दिया जाता है।

    वहीं, अभिभावक पंकज बताते हैं कि स्कूल प्रबंधन से दाम कम करने की बात कहने पर सीधे वापस कर दिया जा रहा है। किताबों के सेट में से एक किताब भी कम कराई गई, तब भी अभिभावकों से रुखा व्यवहार किया जा रहा है। किताबें नहीं दी जा रही हैं



    निजी विद्यालयों ने बढ़ाई फीस, अभिभावक परेशान, नए सत्र से महंगी हुई शिक्षा,  प्रवेश शुल्क में भी बढ़ोतरी, कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म के दाम भी बढ़े


    लखनऊ। अप्रैल में नया सत्र शुरू होते ही अभिभावकों पर बढ़ी फीस का बोझ पड़ गया है। उत्तर प्रदेश अनएडेड स्कूल एसोसिएशन ने पांच से सात फीसदी फीस बढ़ाने की घोषणा की है। हालांकि एडमिशन फीस और कई अन्य मदों की वजह से काफी विद्यालयों में यह फीस बढ़ोतरी 10 से 12 फीसदी तक पहुंच गई है। इससे अभिभावक परेशान हैं।


    इंदिरानगर निवासी अर्चना ने बताया कि - मेरी दो बेटियां हैं, नए सत्र से एक बेटी पांचवीं जबकि दूसरी सातवीं कक्षा में प्रवेश करेगी। फीस बढ़ने से नए सिरे से बजट तैयार करना होगा। बच्चों को पढ़ाना जरूरी है इसलिए अन्य मदों में कटौती करनी होगी। उनके अनुसार, स्कूल की ओर से बताया गया कि इस बार 200 रुपये प्रतिमाह फीस बढ़ाई गई है। पिछले साल मासिक फीस 2850 रुपये थी जो नए सत्र से 3050 हो गई है। साउथ सिटी निवासी अतुल ने बताया कि मेरे बेटे आदित्य का एडमिशन नर्सरी कक्षा में होना है। बताया, स्कूल की ओर से जानकारी दी गई कि प्रवेश शुल्क 20 हजार रुपये है। 

    इसके बाद हर महीने अच्छी-खासी अलग से फीस देनी है। कुल फीस के साथ ही निजी विद्यालयों में करीब 12 फीसदी एडमिशन फीस बढ़ाई गई है। इसमें कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स भी शामिल है।

    फीस ही नहीं बच्चों की किताबें, ड्रेस व वाहन शुल्क भी बढ़ाया गया है। सत्र 2024-25 के लिए शहर के नामचीन विद्यालयों में नर्सरी और यूकेजी कक्षा में बच्चों का प्रवेश शुल्क 20 हजार रुपये तक है।

    निजी विद्यालयों में शिक्षा व अन्य व्यवस्थाओं की फीस दर अलग-अलग हैं। इसके बावजूद कॉपी-किताब और यूनिफॉर्म की कीमत लगभग हर जगह काफी अधिक है।

    नियमानुसार पांच से सात फीसदी की होती है बढ़ोतरी

    महंगाई के आधार पर ही फीस की बढ़ती है। फीस की गाइडलाइन सभी निजी विद्यालयों की वेबसाइट पर अपडेट की गई हैं। प्रत्येक साल नियमतः करीब पांच से सात फीसदी की फीस शुल्क बढ़ाया जाता है। स्कूल मे बेहतर शिक्षा का माहौल हो, इसके लिए विद्यार्थियों को बेहतर व्यवस्थाएं दी जाती हैं।
    अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष उत्तर प्रदेश अनएडेड स्कूल एसोसिएशन



    शर्ट, पैंट, फ्रॉक, टी शर्ट, लोअर व जूते में 50 से 200 रुपये बढ़ाए, टाई, बेल्ट, मोजे और हेयर बैंड में 10 से 50 रुपये का इजाफा

    निजी स्कूलों की यूनिफार्म खरीदना हुआ अब और महंगा,  दाम 5 से 20 फीसदी तक बढ़ गए 


    लखनऊ । नये सत्र के शुरू होते ही निजी स्कूलों के बच्चों की किताबों व कापियों के साथ ही यूनिफार्म के दामों में पांच से 20 फीसदी तक बढ़ गए हैं।

    स्कूलों के नामित दुकानदारों ने प्रति शर्ट, पैंट, फ्राक, टी शर्ट, लोअर व जूते में 50 से 200 रुपये तक बढ़ा दिये हैं। वहीं टाई, बेल्ट, मोजे और हेयर बैंड में 10 से 50 रुपये रुपये का इजाफा किया। अभिभावकों की जेब पर इस साल प्रति बच्चे 500 से 1000 रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है। कई स्कूलों ने यूनिफार्म व जूते में बदलाव कर दिया है। शहर में सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी बोर्ड और यूपी बोर्ड के करीब एक हजार निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इन स्कूलों की गर्मी और सर्दी की अलग-अलग यूनिफार्म चलती है। इन स्कूलों में हाउस ड्रेस और स्पोर्ट ड्रेस अलग से चलती है।


    नर्सरी के बच्चे की यूनिफार्म 1500 से 2000 रुपये में: अलीगंज स्थित एक निजी स्कूल में प्ले वे से नर्सरी कक्षा के बच्चे की यूनिफार्म (गर्मी) 1000 से 1500 रुपये की है। इस स्कूल की नर्सरी के बच्चे यूनिफार्म में शर्ट की कीमत 250, पैंट 280, बेल्ट 160, टाई 60, जूता 500 का है। साथ ही हाउस ड्रेस में टी शर्ट और लोवर 500 रुपये का जूता 300 रुपये का है। कक्षा जबकि कक्षा तीन के बच्चे की शर्ट की कीमत 280, पैंट 300, बेल्ट 170, टाई 80, जूता 650 का है। हाउस ड्रेस 600 से 700की और जूता 300 से 500 रुपये का है। वहीं कक्षा छह के बच्चे की शर्ट 300, पैंट 350, बेल्ट 200, टाई 100, जूता 500 से 800 रुपये, हाउस ड्रेस 800 व जूता 500 से 600 रुपये का। वहीं कक्षा नौ से 12 वीं के बच्चे का शर्ट 350 से 500 रुपये, पैंट 400 से 700 रुपये, बेल्ट 200 से 300 रुपये, टाई 150 रुपये तक, हाउस ड्रेस 1000 से 1500 व जूते की कीमत 1000 तक है। वहीं गोमतीनगर और अंसल गोल्स सिटी के कई नामी स्कूलों में नर्सरी के बच्चों की गर्मी की यूनिफार्म दो से तीन हजार रुपये के बीच है। वहीं सर्दी की यूनीफार्म तीन से पांच हजार रुपये की बीच है।



    महंगाई: नए सत्र में निजी प्रकाशकों ने किताब-कॉपियों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ाये

    प्रिंटिंग सामग्री हुई महंगी, मुनाफे के लिए हर बार बदल देते हैं किताब


    लखनऊ। नए सत्र में निजी प्रकाशकों ने किताब-कॉपियों के दाम 30 फीसदी तक बढ़ा दिये हैं। विषयवार प्रति किताब के दाम में 20 से 100 रुपये तक इजाफा हुआ है। कापियों व रजिस्ट्रर में पांच से 12 रुपये तक दाम बढ़ाये हैं। बाजार में निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा महंगी हैं। 


    एनसीईआरटी में 10वीं और 12वीं की किताबों का सेट 1500 के भीतर मिल रहा है। जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें छह से आठ हजार के बीच में मिल रही हैं। निजी स्कूलों में कक्षा प्ले वे से 12वीं के बच्चों को पढ़ाने वाले प्रति बच्चा अभिभावकों की जेब पर 600 से 2000 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।


    सीबीएसई, आईसीएसई, आईएससी बोर्ड और यूपी बोर्ड के निजी स्कूलों ने नया सत्र शुरू कर दिया है। यूपी बोर्ड के वित्तविहीन स्कूल और सीबीएसई व सीआईएससीई स्कूलों के प्रबंधक एनसीईआरटी के किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की किताबों से बच्चों की पढ़ाई करा रहे हैं। यह किताबें स्कूलों द्वारा नामित पुस्तक विक्रेताओं के यहां मिलती हैं। स्कूलों से किताब-कॉपियों की सूची के साथ नामित बुक डिपो के पर्चे भी दे रहे हैं। बाजार में किसी अन्य दुकान पर यह किताबें नहीं मिलतीं।



    प्रिंटिंग सामग्री हुई महंगी, मुनाफे के लिए हर बार बदल देते हैं किताब

    यह स्कूल निजी प्रकाशकों की किताबें खुद तय करते हैं। मुनाफे के लिए हर बार किताबें बदल दी जाती हैं। सीआईएससीई बोर्ड में नर्सरी में किताब और कापियों का सेट 3500 रुपये में दे रहे हैं। जबकि बीते साल इसकी कीमत तीन हजार के भीतर थी। कक्षा तीन में किताब कॉपियों का सेट 6000 में मिल रहा है। बीते सत्र में यह सेट 5000 हजार था। वहीं सीबीएसई में कक्षा चार का सेट 6500 में दे रहे हैं। वहीं 10 वीं कक्षा मेंसेट 10 हजार और 12 वीं का सेट 12 हजार तक है पिछले साल यह सेट 10 हजार के भीतर था।


    सरकार किताबों के दाम तय करे

    सरकार को चाहिए कि किताबों के दाम तय करे। एनसीईआरटी की किताबें सभी बोर्डों के लिए लागू कराये। स्कूलों के प्रबंधक मुनाफे के लिए हर बार किताबें बदल देते हैं। यह खुद प्रकाशकों के नाम तय करने के एवज में मोटा कमीशन लेते हैं। इसका असर अभिभावकों पर पड़ता है। इस पर रोक लगनी चाहिए। प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष, अभिभावक कल्याण संघ

    राजकीय पॉलीटेक्निक : वर्चुअल क्लास रूम में होगी पढ़ाई, काम शुरु, नए शैक्षिक सत्र 2024-25 में शुरू होगी पढ़ाई

    राजकीय पॉलीटेक्निक : वर्चुअल क्लास रूम में होगी पढ़ाई, काम शुरु, नए शैक्षिक सत्र 2024-25 में शुरू होगी पढ़ाई

    पहले चरण में 15 संस्थानों में स्मार्ट क्लास की होगी स्थापना


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों में नए सत्र 2024-25 से वर्चुअल क्लास रूम में पढ़ाई होगी। इसके संस्थानों को अपग्रेड करने के साथ ही वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना की जा रही है।

    प्राविधिक शिक्षा विभाग इन दिनों राजकीय आईटीआई और पॉलीटेक्निक संस्थानों को अपग्रेड करने की कवायद कर रहा है। इसके तहत जहां टाटा के साथ एमओयू कर 150 आईटीआई को अपग्रेड किया जा रहा है। वहीं, नए बनकर तैयार 47 आईटीआई व पॉलीटेक्निक संस्थानों को भी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर चलाने के लिए एमओयू किया गया है। इसका उद्देश्य आज की जरूरतों के अनुरूप आधुनिक तरीके से पठन- पाठन हो।


    इसी क्रम में विभाग ने पहले से संचालति राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थानों को भी अपग्रेड करने की प्रक्रिया शुरू की है। पहले चरण में 15 संस्थानों में वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना की जा रही है। इसके लिए कार्यदायी संस्था यूपी डेस्को को बजट भी दिया जा चुका है। विभाग का लक्ष्य है कि नए सत्र शुरू होने से पहले यह काम पूरा हो जाए।

    वहीं, अन्य पॉलीटेक्निक संस्थानों में वर्चुअल क्लास रूम की स्थापना व लैब आदि को को अपग्रेड करने का काम चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। पर, खास बात यह है कि शिक्षकों को भी प्रशिक्षण देकर अपग्रेड किया जाएगा। जिससे संस्थानों के संचालन में दिक्कत न आए और शिक्षक ऑनलाइन पठन-पाठन करा सकें। गौरतलब है कि कोविड काल के बाद काफी संख्या में ई कंटेंट तैयार कराए गए हैं। वर्चुअल क्लास रूम के माध्यम से विद्यार्थी इसका लाभ ले सकेंगे।


    क्या होता है वर्चुअल क्लास रूम

    वर्चुअल क्लास रूम में विद्यार्थी ऑनलाइन कंटेंट से पढ़ाई कर सकते हैं। ऑनलाइन या रिकॉर्डेड लेक्चर सुन सकते हैं। इसमें प्रोजेक्टर के माध्यम से भी चीजों को विस्तार से समझाया जाता है। क्लास में बैठकर देश-विदेश के किसी भी संस्थान के शिक्षक या विशेषज्ञ से संवाद कर सकते हैं। उनकी क्लास में भी शामिल हो सकते हैं। अब वाइवा और इंटरव्यू आदि भी ऑनलाइन हो रहे हैं।

    मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चाचा चौधरी और साबू भी उतरे चुनाव मैदान में

    मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए चाचा चौधरी और साबू भी उतरे चुनाव मैदान में


    लखनऊ। आपको कार्टून कैरेक्टर चाचा चौधरी और साबू तो याद ही होंगे। बचपन में इनकी कहानियों व करतब ने आपको खूब गुदगुदाया होगा। चाचा चौधरी के दिमाग की तो दाद दी जाती थी। ये तो हुई पुरानी बातें। अब वही चाचा चौधरी और साबू नए अवतार में आपके सामने होंगे। चाचा चौधरी और साबू लोगों को मतदान की अहमियत समझाएंगे।


    ईवीएम, बूथ, वोटर हेल्पलाइन की जानकारी भी देंगे। देश-प्रदेश में मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए कवायदें चल रही हैं। चाचा चौधरी और साबू को मैदान में उतारना चुनाव आयोग का इनोवेटिव आइडिया है। इसके लिए आयोग ने चाचा चौधरी कॉमिक्स की सॉफ्ट कॉपी तैयार कराई है। बेसिक शिक्षा विभाग की मदद से ये कॉमिक्स कैरेक्टर घरों तक पहुंचेंगे। न केवल पहुंचेंगे, अभिभावकों से संकल्प पत्र भी भरवाएंगे।


    ■ चाचा चौधरी और साबू अपना पूरा असर दिखा सकें इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग शिक्षक संकुल की विशेष बैठकें आयोजित कर रहा है। इसमें स्थानीय स्तर पर सभी शिक्षकों व अभिभावकों को शामिल किया जा रहा। वहीं ऐसे मतदाता जो होली के अवसर पर घर आने वाले हैं, उनके बच्चे के जरिये घर पर संकल्प पत्र भेजा जाएगा। संकल्प पत्र में अभिभावक को बताना होगा कि उन्होंने अपना नाम मतदाता सूची में चेक कर लिया है या नहीं।

    ■ यदि किसी कारण से उनका नाम मतदाता सूची में नहीं है, तो तुरंत पंजीकृत करवाने के लिए संकल्प लेना होगा। इतना ही नहीं वे लोकसभा चुनाव में वोट डालने जरूर जाएंगे और अपने रिश्तेदारों व पडोसियों को भी प्रेरित करेंगे, इसका भी अभिभावक संकल्प लेंगे।


    बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी बीएसए को निर्देश दिया है कि बैठकों में भारत निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले कॉमिक्स चाचा चौधरी की सॉफ्ट कॉपी को वितरित कराएं। उन्होंने यह भी कहा है कि विभाग छात्रों की बुलावा टीमें भी गठित करेगा। बुलावा टीमें वोटिंग के दिन घर-घर जाकर मतदान के लिए प्रेरित करेंगी। बता दें कि अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी निधि श्रीवास्तव ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर इस अभियान में सहयोग करने और अभिभावकों से संकल्प पत्र भरवाकर पांच अप्रैल तक उपलब्ध कराने को कहा है।

    एनपीएस आच्छादित कई अध्यापक सेवानिवृत्त, न फंड मिला न पेंशन आदेश

    एनपीएस आच्छादित कई अध्यापक सेवानिवृत्त, न फंड मिला और न पेंशन आदेश

    • प्रान खाते में धनराशि अपडेट नहीं होने से बढ़ी शिक्षकों की परेशानी
    • कई जिलों में शिक्षकों के प्रान खाते में धनराशि ही नहीं भेजी गई


    प्रयागराज : एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त एडेड माध्यमिक विद्यालयों के कई शिक्षकों व कर्मचारियों की कटौती की धनराशि नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) के तहत उनके प्रान (परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर) खाता में जमा नहीं होने से उनके सामने नया संकट खड़ा हो गया है। जो शिक्षक व कर्मचारी 31 मार्च को सेवानिवृत्त हुए, उसमें से कई के प्रान खाता में कटौती की धनराशि समय से जमा नहीं करने से उन्हें उनके देयक एक अप्रैल को नहीं मिले। अब सेवानिवृत्त होने से वेतन भी नहीं मिलेगा और प्रान खाते में जमा धनराशि से मिलने वाली 40 प्रतिशत धनराशि व पेंशन आदेश नहीं मिलने से वह परेशानी में हैं।


    एक अप्रैल 2005 के बाद नियुक्त शिक्षक/कर्मचारी नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) से आच्छादित हैं। उनके वेतन से दस प्रतिशत कटौती की जाती है और 14 प्रतिशत सरकार अंशदान देती है। कई जिलों में शिक्षकों व कर्मचारियों के प्रान खाते में सरकार का अंशदान जमा ही नहीं किया गया है। कई जिलो में धनराशि डीआइओएस/डीडीओ के यहां पड़ी है। कुछ जिलों में सरकार का अंशदान ही नहीं मिला है, जबकि जिलों से डिमांड भेजी गई है। 


    प्रयागराज में आठ, फतेहपुर में नौ, मऊ में एक तथा कई और जिलों में एनपीएस से आच्छादित शिक्षक 31 मार्च को सेवानिवृत्त हो गए। प्रयागराज, कासगंज, बस्ती और कुशीनगर सहित कई जिलों में शिक्षकों का प्रान खाता अपडेट ही नहीं है, जिससे धनराशि का आगणन नहीं हो सका है।


    उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश संरक्षक डा. हरिप्रकाश यादव ने बताया कि कई जिलों में आठ महीने से लेकर 18 महीने से कटौती की राशि शिक्षकों के प्रान खाते में जमा ही नहीं की गई है। धनराशि जिलों में ही पड़ी है, जबकि सेवानिवृत्ति से तीन महीने पहले कटौती इसलिए बंद कर दी जाती है कि उनके देयकों का आगणन कर सेवानिवृत्ति के समय नियमानुसार भुगतान किया जा सके। देयकों के भुगतान नहीं होने से सेवानिवृत्त हुए शिक्षकों व कर्मचारियों को आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ेगा।

    चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को गोद में नहीं ले सकेंगे नेता और प्रत्याशी, चुनाव कार्यों में बच्चों के उपयोग को किया प्रतिबंधित

    बच्चों से चुनाव प्रचार कराया तो प्रत्याशी पर होगी कार्रवाई 

    चुनाव प्रचार के दौरान बच्चों को गोद में नहीं ले सकेंगे नेता और प्रत्याशी, चुनाव कार्यों में बच्चों के उपयोग को किया प्रतिबंधित


    लखनऊ। भारत निर्वाचन आयोग ने आगामी लोकसभा चुनाव में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का चुनाव प्रचार या चुनाव से जुड़े किसी भी कार्यक्रम में उपयोग करने पर प्रतिबंध लगाया है। चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों के नेता और प्रत्याशी छोटे बच्चों को गोद में भी नहीं ले सकेंगे।

    मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने बुधवार को बताया कि आयोग ने बालश्रम कानून के तहत आगामी लोकसभा चुनाव में प्रचार अभियानों व अन्य चुनावी गतिविधियों में बच्चों के उपयोग के प्रति शून्य सहनशीलता का संदेश दिया है। 

    बताया कि राजनीतिक दलों, अभ्यर्थियों एवं चुनाव से जुड़े प्रशासनिक तंत्र को नाबालिग बच्चों का उपयोग नहीं करने का निर्देश दिए हैं। चुनाव के दौरान बच्चों को रैलियां निकालने, नारे लगवाने, पोस्टर एवं पत्रक बांटने के कार्य में नहीं लगाया जाएगा। 

    राजनीतिक दलों के नेता और प्रत्याशी की ओर से बच्चों को गोद में लेने, वाहन या रैलियों में बच्चे को ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। किसी राजनीतिक दल की भारत निर्वाचन आयोग ने उपलब्धियों को बढ़ावा देने या विरोधी दलों व अभ्यर्थियों की आलोचना करने सहित किसी भी प्रकार से प्रचार- अभियान की झलक बनाने के लिए बच्चों का उपयोग करने पर भी प्रतिबंध लगाया है। 

    कहा कि चुनाव कार्य में किसी भी राजनीतिक दल, प्रत्याशी या सरकारी मशीनरी की ओर से बच्चों का उपयोग पाया गया तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी



    राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव प्रचार में बच्चों का इस्तेमाल पड़ेगा भारी, चुनाव आयोग हुआ सख्त
     
    चुनाव प्रचार अभियान में बच्चों का इस्तेमाल करने पर इलेक्शन कमीशन ने कड़ी नाराजगी जताई है। लोकसभा चुनाव से पहले निर्वाचन आयोग ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे पोस्टर और पर्चों सहित प्रचार की किसी भी सामग्री में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी रूप में न करें। राजनीतिक दलों को इसे लेकर EC ने परामर्श जारी किया। इसमें आयोग ने दलों और उम्मीदवारों की ओर से किसी भी तरीके से बच्चों का इस्तेमाल किए जाने के प्रति अपनी कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति से अवगत कराया।


    चुनाव आयोग ने कहा कि नेताओं और उम्मीदवारों को प्रचार गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी तरीके से नहीं करना चाहिए, चाहे वे बच्चे को गोद में उठा रहे हों या वाहन में या फिर रैलियों में बच्चे को ले जाना हो। इलेक्शन कमीशन की ओर से जारी बयान में कहा गया, 'किसी भी तरीके से राजनीतिक प्रचार अभियान चलाने के लिए बच्चों के इस्तेमाल पर भी यह प्रतिबंध लागू है जिसमें कविता, गीत, बोले गए शब्द, राजनीतिक दल या उम्मीदवार के प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन शामिल है।' गौरतलब है कि हाल-फिलहाल में चुनावी कैंपेन के दौरान बच्चों का इस्तेमाल बढ़ता देखा गया है। अलग-अलग पार्टियों के नेता चुनाव प्रचार के दौरान छोटे बच्चों के साथ वोट मांगते दिख जाते हैं। 


    किन लोगों को मिलेगी छूट, चुनाव आयोग ने बताया
    आयोग ने कहा, 'अगर कोई नेता जो किसी भी राजनीतिक दल की चुनाव प्रचार गतिविधि में शामिल नहीं है और वह कोई बच्चा अपने माता-पिता या अभिभावक के साथ उसके समीप केवल मौजूद रहता है। ऐसी परिस्थिति में यह दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।' मुख्य निर्वाचन आयुक्त राजीव कुमार ने निर्वाचन आयोग के प्रमुख हितधारकों के रूप में राजनीतिक दलों की महत्वपूर्ण भूमिका पर लगातार जोर दिया है। खासतौर से उन्होंने आगामी संसदीय चुनावों के मद्देनजर लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने में उनसे सक्रिय भागीदार बनने का आग्रह किया है। 



    चुनाव प्रचार और रैलियों में बच्चों के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की नज़र टेढ़ी, जारी की सख्त गाइडलाइन


    नई दिल्ली। आयोग ने कहा कि नेताओं और उम्मीदवारों को प्रचार गतिविधियों में बच्चों का इस्तेमाल किसी भी तरीके से नहीं करना चाहिए। चाहे वे बच्चे को गोद में उठा रहे हों या वाहन में या फिर रैलियों में बच्चे को ले जाना हो।

    आयोग ने एक बयान में कहा कि किसी भी तरीके से राजनीतिक प्रचार अभियान चलाने के लिए बच्चों के इस्तेमाल पर भी यह प्रतिबंध लागू है, जिसमें कविता, गीत, बोले गए शब्द, राजनीतिक दल या उम्मीदवार के प्रतीक चिह्न का प्रदर्शन शामिल है।

    आयोग ने कहा कि लेकिन यदि कोई नेता जो प्रचार गतिविधि में शामिल नहीं है और कोई बच्चा अभिभावक के साथ उसके समीप केवल मौजूद होता है तो यह दिशानिर्देशों का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।


    ECI ने चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह से बच्चों को शामिल करने के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही

    लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Election 2024) से पहले चुनाव आयोग (Election Commission) ने राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रचार से जुड़ा सख्त गाइडलाइन जारी किया है. आयोग ने चुनाव प्रचार में बच्चों और नाबालिग को शामिल करने पर रोक लगा दी है. आयोग का कहना है कि अगर कोई उम्मीदवार गाइडलाइन का उल्लंघन करते पाया जाएगा तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


    चुनाव आयोग की गाइडलाइंस में क्या है?
    लोकसभा चुनाव की तैयारियों के बीच निर्वाचन आयोग ने सोमवार, 5 जनवरी को सख्त निर्देश जारी किए हैं. इसके तहत चुनाव प्रचार में बच्चों या नाबालिगों को शामिल करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. आयोग ने पार्टियों और उम्मीदवारों द्वारा चुनावी प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह से बच्चों को शामिल करने के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही है.

    आयोग ने कहा है कि "राजनीतिक दलों को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया जाता है कि वो बच्चों को किसी भी प्रकार के चुनाव अभियान में शामिल न करें, जिसमें रैलियां, नारे लगाना, पोस्टर या पैम्फलेट का वितरण, या कोई अन्य चुनाव-संबंधी गतिविधि शामिल है."

    इसके साथ ही आयोग ने कहा कि राज नेताओं और उम्मीदवारों को किसी भी तरह से प्रचार गतिविधियों में बच्चों को शामिल नहीं करना चाहिए, जिसमें बच्चे को गोद में लेना, वाहन में बच्चे को ले जाना या रैलियों में शामिल करना शामिल है।


    चुनाव आयोग की गाइडलाइन के मुताबिक, राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों द्वारा कविता, गीत, बोले गए शब्दों, प्रतीक चिन्हों, राजनीतिक दल की विचारधारा, उनकी उपलब्धियों को बढ़ावा देने सहित किसी भी तरीके से राजनीतिक अभियान से जुड़ी गतिविधियों में बच्चों को शामिल करने पर रोक रहेगी.
    सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को बाल श्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 द्वारा संशोधित बाल श्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करना आवश्यक है. इसके साथ ही आयोग ने सभी चुनाव अधिकारियों और मशीनरी को स्पष्ट रूप से निर्देश दिया है कि वो चुनाव-संबंधी कार्य या गतिविधियों के दौरान किसी भी क्षमता में बच्चों को शामिल करने से बचें।


    आयोग ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का दिया हवाला
    आयोग ने गाइडलाइन जारी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया है. चेतन रामलाल भुटाडा बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य केस में 4 अगस्त, 2014 को अपने फैसले में कोर्ट ने यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था कि राजनीतिक दल बच्चों को चुनाव प्रचार में शामिल न करें और अपने उम्मीदवारों को भी इसकी अनुमति न दें।

    Sunday, April 7, 2024

    ACP प्रत्यावेदन का करें समयबद्ध निस्तारण, माध्यमिक शिक्षा विभाग जनवरी-जुलाई में आयोजित करेगा बैठक

    ACP प्रत्यावेदन का करें समयबद्ध निस्तारण, माध्यमिक शिक्षा विभाग जनवरी-जुलाई में आयोजित करेगा बैठक


    लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को समय से एश्योरड कॅरियर प्रमोशन (एसीपी) का लाभ दिए जाए। इसे लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों को निर्देश जारी किए हैं। 


    माध्यमिक शिक्षा के अपर शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा है कि मंडल व जिला स्तर पर प्राप्त आवेदनों के निस्तारण के लिए जनवरी व जुलाई में दो बार निश्चित रूप से बैठकें की जाएं। कर्मचारियों के आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण अनिवार्य रूप से किया जाए। 


    उन्होंने यह भी निर्देश दिया है कि प्रकरण से अलग किसी अनावश्यक कागज की मांग संबंधित कर्मचारी या प्रबंधतंत्र से न की जाए। शासनादेश के अनुसार सभी कागजों के आधार पर प्रकरण का समय से निस्तारण किया जाए।