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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, April 17, 2026

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय

    सेवानिवृत्त शिक्षक को ग्रेच्युटी के लिए आयु सीमा का बंधन नहीं, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के हित में हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय


    प्रयागराजइलाहाबाद हाई कोर्ट ने सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के हित में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के बाद शिक्षक ग्रेच्युटी (उपदान) पाने के हकदार हैं और इसके लिए आयु सीमा का कोई बंधन नहीं लगाया जा सकता। न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने मेहरजहां की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। 


    याची ने एक सहायता प्राप्त संस्थान में अपनी सेवाएं पूरी करने के बाद 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्ति प्राप्त की थी, लेकिन उन्हें ग्रेच्युटी का लाभनहीं दिया गया था।

    अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उत्तर प्रदेश स्कूल और कालेज शिक्षक ग्रेच्युटी फंड नियमावली 1964 के तहत ग्रेच्युटी केवल सेवा के दौरान मृत्यु होने पर ही देय थी, जो सेवानिवृत्त शिक्षकों के अधिकारों का पूर्ण संरक्षण नहीं करती। 

    कोर्ट ने माना कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक राज्य सरकार के कर्मचारियों के समान ही होते हैं। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई थी कि शिक्षक ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने का विकल्प नहीं चुना था, इसलिए वे ग्रेच्युटी की पात्र नहीं हैं। कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि एक सरकारी आदेश किसी वैधानिक प्रविधान या नियम का स्थान नहीं ले सकता।

    पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि ग्रेच्युटी का भुगतान करना नियोक्ता की वैधानिक जिम्मेदारी है और इसे केवल देरी के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने 'पेमेंट आफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के प्रविधानों का हवाला देते हुए कहा कि याची इस कानून के तहत लाभ पाने की पात्र हैं। संबंधित अधिकारियों को कोर्ट ने निर्देश दिया है कि वह याची की ग्रेच्युटी की गणना कर आठ सप्ताह के भीतर उसका भुगतान सुनिश्चित कराएं।

    Thursday, April 16, 2026

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट

    CBSE 10th Result 2026: सीबीएसई 10वीं के नतीजे जारी, 93.70% स्टूडेंट्स हुए पास; ऐसे देखें अपना रिजल्ट 


    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 10वीं कक्षा के परिणाम आज, 15 अप्रैल को नतीजे जारी हो चुके हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं।


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। यह परिणाम आज शाम 4 बजे जारी हुए हैं। आप अपने रिजल्ट result.cbse.nic.in 2026 पर देख सकते हैं। सीबीएसई द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, कुल 93.70 प्रतिशत बच्चे पास हुए हैं। बीते वर्ष से कुल पास प्रतिशत 0.04 प्रतिशत की दर से बढ़ा है।


    जरूरी आंकड़े
    10वीं में कुल पास छात्र- 23,16,008
    बीते वर्ष कुल पास छात्र- 22,21,636
    कुल पास प्रतिशत- 93.70%

    सीबीएसई 10वीं बोर्ड परीक्षाओं में 2.20 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए, जबकि 55,000 से अधिक छात्र-छात्राओं ने 95 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए हैं। लड़कियों ने इस बार भी रिजल्ट में बाजी मारी और कुल 94.99 प्रतिशत लड़कियां पास हुईं। वहीं 92.69 प्रतिशत लड़के पास हुए।


    इस साल भी नहीं जारी हुई टॉपर्स लिस्ट
    हालांकि, बोर्ड ने इस वर्ष भी मेरिट सूची नहीं जारी की है। बोर्ड 0.1 प्रतिशत छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र जारी करेगा, ये वो छात्र होंगे जिन्होंने विषयों में सबसे अधिक अंक प्राप्त किए हैं।

    मेरिट प्रमाण पत्र संबंधित छात्र के डिजिलाकर में उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं, परीक्षार्थियों को मार्कशीट भी उनके डिजिलाकर खातों में उपलब्ध कराई गई है।

    सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने कहा कि बोर्ड जल्द ही छात्रों को उनके स्कूल के माध्यम से उत्तीर्ण प्रमाण पत्र उपलब्ध कराएगा। वहीं, इस वर्ष कंपार्टमेंट लाने वाले विद्यार्थियों की कंपार्टमेंट परीक्षाएं जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी।



    रिजल्ट देखने एवं डाउनलोड करने के लिए सबसे पहले सीबीएसई की ऑफिशियल वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं।

    इसके बाद वेबसाइट के होमपेज पर रिजल्ट एक्टिव लिंक पर क्लिक करें।

    लिंक पर क्लिक करने के बाद अपना लॉगिन डिटेल डालें।
    लॉगिन डिटेल डालने के बाद सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा।

    चाहें तो रिजल्ट का प्रिंट आउट भी निकाल सकते हैं।

    Wednesday, April 15, 2026

    सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नतियों की जांच आगे बढ़ी, तत्कालीन प्रमुख सचिव, सचिव व विशेष सचिव से लिखित पक्ष लेगा नियुक्ति विभाग


    सर्वोदय विद्यालयों में नियम विरुद्ध 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नतियों की जांच आगे बढ़ी, तत्कालीन प्रमुख सचिव, सचिव व विशेष सचिव से लिखित पक्ष लेगा नियुक्ति विभाग

    14 अप्रैल 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किए जाने की जांच रफ्तार पकड़ रही है। नियुक्ति विभाग उच्चस्तर से सहमति प्राप्त होने के बाद अब इस मामले में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का लिखित में पक्ष लेगा। इसके अलावा सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए पत्र भेज दिया गया है।

    समाज कल्याण विभाग प्रदेश में 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे

    सचिवालय प्रशासन विभाग के चार अधिकारियों के खिलाफ भी भेजा गया पत्र

    और प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। यहां बता दें कि 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य के पद पर नियम विरुद्ध पदोन्नतियां दे दी गईं।

    सूत्रों के मुताबिक, ये पदोन्नतियां दिए जाने के बाद समाज कल्याण विभाग में तैनाती पाने वाले एक समीक्षा अधिकारी ने यह मामला पकड़ा और पूरे प्रकरण पर फाइल

    चला दी। इसके बाद शासन स्तर से सभी पदोन्नतियां रद्द कर दी गईं। साथ ही समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक व योजना प्रभारी जे राम के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शासन ने समीक्षा अधिकारी धर्मेंद्र, अनुभाग अधिकारी अरविंद प्रकाश, उप सचिव रजनीकांत पांडेय और विशेष सचिव शशिकांत कनौजिया की जिम्मेदारी तय करने के लिए सचिवालय प्रशासन विभाग को पत्र भेज दिया है।

    शासन के सूत्रों के मुताबिक, पूरे प्रकरण में तत्कालीन प्रमुख सचिव डॉ. हरिओम, सचिव समीर वर्मा और विशेष सचिव रजनीश चंद्रा का पक्ष मिलने के बाद जांच की आगे की दिशा तय हो सकेगी। इसके लिए इन अधिकारियों को शासन से पत्र जारी किया जा रहा है।



    सर्वोदय विद्यालय के 100 प्रवक्ताओं को नियमविरुद्ध पदोन्नति, प्रमुख सचिव तक पहुंची जांच की आंच

    दो साल पहले समाज कल्याण विभाग में 100 प्रवक्ताओं को दी गई थी गलत पदोन्नति

    06 अप्रैल 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में 100 प्रवक्ताओं को गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति मामले में जांच की आंच तत्कालीन प्रमुख सचिव और विशेष सचिव तक पहुंच गई है। प्राथमिक जांच में निदेशालय के अधिकारी-कर्मचारियों के साथ साथ शासन के वरिष्ठ अधिकारी भी जिम्मेदार ठहराए गए हैं। उच्चपदस्थ सूत्रों के मुताबिक, इसी सप्ताह इन वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ आगे की जांच शुरू हो सकती है।

    समाज कल्याण विभाग 101 सर्वोदय विद्यालयों (आश्रम पद्धति) को संचालित कर रहा है। वर्ष 2024 में इन विद्यालयों में कार्यरत 100 प्रवक्ताओं को 4800 रुपये ग्रेड पे से सीधे 7600 रुपये ग्रेड पे प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति दे दी गई। जबकि, 24 नवंबर 2023 को अपर मुख्य सचिव, वित्त की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह तय हो चुका था कि प्रवक्ता एवं प्रधानाचार्य (इंटर अनुभाग) के मध्य उप प्रधानाचार्य का पद सृजित कराकर पदोन्नतियां की जाएं। 4800 रुपये और 7600 रुपये ग्रेड पे के बीच दो ग्रेड पे (5400 और 6600 रुपये) और होते हैं। इसके बाद भी नियमविरुद्ध पदोन्नति का प्रस्ताव आगे बढ़ा दिया है।



    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर मिलेगी प्रोन्नति


    20 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन किया गया है। प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर गलत ढंग से की गई प्रोन्नति को निरस्त किए जाने के बाद यह निर्णय गया है। अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। प्रवक्ता के 22 साल की सेवा पूरी होने पर उसे प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति दी जाएगी।

    इन विद्यालयों में उप्र समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली का उल्लंघन कर 4800 रुपये पे ग्रेड पर कार्यरत प्रवक्ताओं को सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड पर पदोन्नति दी गई थी। अब संशोधन कर उप प्रधानाचार्य 2 का पद सृजित किया गया है। मामले में उप निदेशक जे.राम पर विभागीयम कार्रवाई की जाएगी।

    नए आदेशों के तहत यूपी में 93 सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के एक-एक पद का सृजन किया गया है। पुनरीक्षित पे मैट्रिक्स लेवल 10 पर 56100-177500 रुपये वेतनमान निर्धारित किया गया है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से पद सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है।




    प्रधानाचार्य बनाए गए 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति रद्द, समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों का मामला

    19 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों में 100 प्रवक्ताओं की गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर हुई प्रोन्नति को रद कर दिया गया है।


    नियम विपरीत प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति किए जाने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग यूपी में 101 जयप्रकाशनारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित कर रहा है। 

    यहां कार्यरत करीब 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पर दो वर्ष पूर्व प्रोन्नति दी गई। प्रवक्ताओं को 4800 रुपये पे ग्रेड से सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड के प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति दी गई। इसका प्रस्ताव 11 जनवरी 2024 को भेजा गया और उस समय इस पद पर प्रोन्नति के लिए पोषक संवर्ग भी उपलब्ध नहीं था। नियम के अनुसार, इन्हें पहले उप प्रधानाचार्य बनाना चाहिए था, फिर प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किया जाना चाहिए था।

    स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं

    स्कूल खुलने के 15 दिन बाद भी किताबों का इंतजार, व्यवस्था सुधारने के निर्देश, 25 जिलों में वितरण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं


    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग का नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो गया है। जोर शोर से स्कूल चलो अभियान भी चलाया जा रहा है। पहले दिन से विद्यार्थियों को सभी किताबें उपलब्ध भी कराई जानी थीं। किंतु हालत यह है कि 15 दिन बाद भी विद्यालयों में किताबों का इंतजार हो रहा है। विभाग ने इस पर नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए हैं। 


    हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा में बताया गया कि किताब वितरण की गति 25 जिलों में अपेक्षाकृत धीमी है। इसमें इटावा व हाथरस ने कोई रिपोर्ट ही नहीं दी है। जबकि बहराइच के 2834 में से 2002 विद्यालयों में किताबें नहीं वितरित हुई हैं। बता दें कि बहराइच में ही फरवरी की शुरुआत में कबाड़ में किताबें बेचने का मामला सामने आया था।

    आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों में, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों में, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों में, चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में किताबें नहीं पहुंची हैं। इसी क्रम में अयोध्या में 335, गोरखपुर में 247, सीतापुर में 52, अमेठी में 50, लखनऊ के 33 विद्यालयों में अभी तक सभी किताबें नहीं पहुंची हैं। इसका असर यहां के बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। 

    Tuesday, April 14, 2026

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी 


    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

    पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी

    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में नए निर्देश जारी 

    आदर्श प्रशासन योजना में सदस्य नहीं होंगे अधिकारी व शिक्षाविद, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किए कड़े निर्देश, एडेड कॉलेजों की समिति में बनाए जाते हैं सदस्य


    लखनऊ। प्रदेश में अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के संचालन के लिए प्रबंध समिति व आदर्श प्रशासन योजना समिति का गठन किया जाता है। किंतु आदर्श प्रशासन योजना में सदस्यों के मनोनयन में गड़बड़ी व मनमानी पर माध्यमिक शिक्षा विभाग सख्त हुआ है। विभाग ने इसमें से विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य बनाने की व्यवस्था खत्म करने के कड़े निर्देश दिए हैं।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश में हाईकोर्ट के एक आदेश का हवाला देते हुए कहा गया है कि आदर्श प्रशासन योजना को निरस्त कर दिया गया है। कुछ संस्थाओं में आदर्श प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के विपरीत है।

    इसलिए जिन संस्थाओं में प्रशासन योजना में विभागीय अधिकारियों व शिक्षाविदों को सदस्य मनोनीत करने की व्यवस्था, वे साधारण सभा से प्रस्ताव प्राप्त कर इस व्यवस्था को तत्काल समाप्त कराएं। इसका आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। जानकारी के अनुसार कुछ विद्यालयों में समिति के सदस्यों की ओर से आगे चलकर विद्यालयों के एसेट आदि पर अधिकार कर लिया गया है। इसकी शिकायत विभाग में हुई है।

    वहीं माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रबंध समिति के चुनाव के लिए संस्था द्वारा पर्यवेक्षक की मांग करने पर डीआईओएस को सात दिन में पर्यवेक्षक नामित करना होगा। यदि डीआईओएस समय से चुनाव पर्यवेक्षक की नियुक्ति नहीं करते हैं तो प्रबंधतंत्र को निर्धारित समय में चुनाव कराने का अधिकार होगा। इस चुनाव को डीआईओएस द्वारा अमान्य नहीं किया जाएगा।

    प्रबंध समिति का चुना होने के बाद हस्ताक्षर प्रमाणित करने के लिए डीआईओएस को 14 दिन के अंदर भेजा जाएगा। निर्विवाद रूप से कार्यरत प्रबंध समिति के चुनाव में पूर्व प्रबंधक चुने जाते हैं तो फिर से हस्ताक्षर प्रमाणित करने की जरूरत नहीं है। वहीं पदाधिकारी व समिति के सदस्यों का का कार्यकाल पांच साल का होगा। अगर आदर्श प्रशासन योजना निरस्त भी होती है तो प्रबंध समिति का कार्यकाल वही होगा जो संस्था की प्रशासन योजना में पहले से तय है।


    प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की प्रबन्ध समितियों के गठन के सरलीकरण के सम्बन्ध में।

    यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता

    यूपी के 47.69 लाख बच्चे आउट आफ स्कूल, इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए NIOS से समझौता 


    प्रयागराज : पढ़ाई छोड़ चुके बच्चों को पुनः मुख्यधारा से जोड़ने के उद्देश्य से भारत सरकार के कराए गए सर्वे में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसमें 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के ऐसे बच्चों की पहचान की गई है, जिन्होंने प्रारंभिक कक्षाओं में पढ़ाई तो की, लेकिन 10वीं या 12वीं तक पहुंचने से पहले ही विद्यालय जाना बंद कर दिया। देश भर में यह संख्या दो करोड़ 72 लाख है, जिनमें से उत्तर प्रदेश के 47.69 लाख हैं। उत्तर प्रदेश के 'आउट आफ स्कूल' बच्चों को इंटरमीडिएट तक शिक्षा देने के लिए योजना तैयार की गई है। इसके लिए प्रदेश सरकार और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी संस्थान (एनआइओएस) के बीच समझौता पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं।


    यह सर्वे करीब तीन वर्ष की अवधि में किया गया है। इन बच्चों की पहचान उन्हें विद्यालय से मिलने वाले यूनिक नंबर (अपार आइडी) के आधार पर की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने इन बच्चों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने के लिए ठोस योजना तैयार की है। एनआइओएस की मदद से इन बच्चों को दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई का अवसर दिया जाएगा। इसके लिए जिला या ब्लाक स्तर पर पीएमश्री विद्यालय में इनके नामांकन प्रदेश सरकार कराएगी। इसके बाद एनआइओएस के माध्यम से पाठ्यसामग्री संबंधित विद्यार्थियों के घर भेजी जाएगी।

    लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट, 19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल

    लंबी सेवा के बाद केवल तकनीकी आधार पर शिक्षकों की बर्खास्तगी अनुचित : हाईकोर्ट,  19 साल से कार्यरत शिक्षकों की सेवा बहाल 


    प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि लंबी सेवा के बाद शिक्षकों की सेवा सिर्फ तकनीकी आधार समाप्त करना अनुचित है। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के कई आदेशों को अवैध ठहराते हुए कोर्ट ने निरस्त कर संबंधित शिक्षकों को सभी लाभ देने का निर्देश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है।


    मुकदमे से जुड़े तथ्य यह हैं कि गौतमबुद्ध नगर स्थित राम सिंह विश्व चैतन्य कन्या जूनियर हाई स्कूल में वर्ष 2006 में दो सहायक शिक्षकों की नियुक्ति की गई थी। बाद में विद्यालय को अनुदान सूची में शामिल किया गया, लेकिन इन शिक्षकों को लंबे समय तक वेतन नहीं मिला। वर्ष 2014 में शासनादेश के बाद वेतन भुगतान की प्रक्रिया शुरू हुई और 2018 में क्षेत्रीय अनुमोदन समिति ने नियुक्तियों को सही मानते हुए वेतन देने का आदेश दिया। 

    वर्ष 2025 में अधिकारियों ने नियुक्ति को अवैध बताते हुए सेवा समाप्त करने का आदेश दे दिया। शिक्षकों ने कोर्ट में दलील दी कि उनकी नियुक्ति नियमों के अनुरूप थी। 2018 में सक्षम प्राधिकारी द्वारा अनुमोदन मिल चुका है। उन्हें बिना सुनवाई के सेवा से रोका गया जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।  

    खंडपीठ ने पहले ही केवल वेतन विवाद तक सीमित जांच का निर्देश दिया था। राज्य सरकार का कहना था कि नियुक्ति विज्ञापन में न्यूनतम योग्यता का उल्लेख नहीं था। वर्ष 2006 में बीएड योग्यता मान्य नहीं थी। इसलिए नियुक्तियां नियमों के विरुद्ध थीं। पीठ ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अधिकारियों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियुक्ति की वैधता पर दोबारा फैसला किया है। 2018 में नियुक्ति को सही मानकर आदेश दिया जा चुका था, इसलिए इसे दोबारा नहीं खोला जा सकता।

    शिक्षकों को बिना सुनवाई के सेवा से हटाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। शिक्षक करीब 19 वर्षों से कार्यरत हैं, ऐसे में केवल तकनीकी आधार पर सेवा समाप्त करना गलत है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति को आसानी से रद नहीं किया जा सकता। यदि धोखाधड़ी नहीं है तो कर्मचारियों के हितों की रक्षा जरूरी है। कोर्ट ने 26 अगस्त 2025, 30 अगस्त 2025, एक सितंबर 2025 और आठ सितंबर 2025 के सभी आदेश रद करते हुए शिक्षकों की सेवा जारी रखने और सभी वेतन व अन्य लाभ देने का निर्देश दिया है।

    81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी

    81 नवनिर्मित और निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी

    प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज शामिल


    प्रयागराज। प्रदेश में 81 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य पद के सृजन की स्वीकृति मिल गई है। इनमें 32 निर्माणाधीन तथा प्रधानमंत्री जन विकास योजना के तहत पूर्ण हो चुके 49 राजकीय इंटर कॉलेज भी शामिल हैं।

    माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-1 के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्त ने बताया कि इन पदों पर भर्ती उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा (पंचम संशोधन) नियमावली-2025 के तहत की जाएगी। इससे प्रदेश में नए विद्यालयों के संचालन को गति मिलेगी।

    प्रधानमंत्री जन विकास योजना के अंतर्गत निर्मित 49 राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्य के पद सृजित किए गए हैं। इनमें अंबेडकरनगर के टांडा, बदायूं के सैदपुर, बहराइच के गुरघुट्टा, अचौलिया और बसहियापाते, बरेली के उरला जागीर व पैंगा रिछा सहित सिद्धार्थनगर, कई जनपदों के विद्यालय शामिल हैं। इसके अतिरिक्त संभल, पीलीभीत, अमरोहा, शाहजहांपुर, गाजियाबाद, संतकबीरनगर, मेरठ और हापुड़ में एक-एक, जबकि बिजनौर, लखीमपुर, सीतापुर और रामपुर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं। शामली, मुरादाबाद और सीतापुर में तीन-तीन, मुजफ्फरनगर में चार तथा सहारनपुर और बरेली में छह-छह कॉलेज इस सूची में शामिल हैं।

    32 निर्माणाधीन कॉलेज भी शामिल: इसके साथ ही 32 निर्माणाधीन राजकीय इंटर कॉलेजों में भी प्रधानाचार्य पद सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें मैनपुरी, अयोध्या, एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, संभल, कन्नौज, शामली, अमेठी, मेरठ और सोनभद्र में एक-एक, जबकि सीतापुर और बिजनौर में दो-दो कॉलेज शामिल हैं।


    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों ने जलाई मशाल, राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में जुलूस निकालकर भेजा ज्ञापन

    अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के संयोजन में दर्ज कराया विरोध

    14 अप्रैल 2026
    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को पूरे प्रदेश में शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने के लिए मशाल जलाई। शिक्षकों व कर्मचारियों ने मशाल जुलूस निकालकर अपना विरोध दर्ज कराया। साथ ही केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजकर शिक्षकों को राहत देने की मांग की।


    राजधानी लखनऊ में बीएन सिंह की प्रतिमा के पास से शिक्षकों ने मशाल जुलूस निकाला। नो टीईटी बिफोर आरटीई की तख्तियां लिए शिक्षकों ने 2017 में गोपनीय तरीके से किए गए टीईटी अनिवार्यता के संशोधन को निरस्त करने की मांग की। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि 25 साल की लंबी सेवा करने के बाद अब वे परीक्षा देने की स्थिति में नहीं हैं। उनके रोजगार पर लटकी तलवार को हटाया जाए। जिलों में भी शिक्षकों ने टीईटी के विरोध में मशाल जलाई।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय व विजय कुमार बंधु ने कहा कि सरकार लगातार शिक्षकों व कर्मचारियों पर अव्यवहारिक नियम थोप रही है, जिससे उनका मनोबल गिर रहा है। टीईटी की अनिवार्यता, पेंशन समाप्त करना, निजीकरण और सेवा शर्तों में लगातार हो रहे बदलाव जैसे मुद्दे आज पूरे शिक्षक व कर्मचारियों के लिए चिंता का विषय है।

    विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद ने कहा कि सरकार टेट अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करे। पुरानी पेंशन बहाल कर शिक्षकों व कर्मचारियों के भविष्य को सुरक्षित करे। जुलूस में अनिल यादव, दिलीप चौहान, हरिशंकर राठौर, उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष शालिनी मिश्रा, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह आदि शामिल थे।



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आज शिक्षक निकालेंगे मशाल जुलूस

    13 अप्रैल 2026
    लखनऊ। टीईटी अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों पर शिक्षक मशाल जुलूस निकालेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय और अटेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि आरटीई एक्ट लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी जैसी नई शर्तें थोपना अनुचित है।

     मुख्य विधिक प्रभारी विवेकानन्द ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता हटाने के लिए न्यायालय तक संघर्ष जारी रहेगा। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के संजय मणि त्रिपाठी और विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के संतोष तिवारी ने आंदोलन को निर्णायक बताया।

     इसके अलावा कमलेश पांडेय, अपूर्व दीक्षित, दिनेश विद्रोही, विनय सिंह, डॉ. महेंद्र यादव, सोहन लाल वर्मा, रवींद्र सिंह, बंदना सिंह चौहान, शालिनी मिश्रा तथा ओपी त्रिपाठी समेत कई शिक्षक नेताओं ने शिक्षकों से बड़ी संख्या में शामिल होकर सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की अपील की। 



    टीईटी अनिवार्यता के विरोध हेतु 13 अप्रैल को जनपद मुख्यालयों में मशाल जुलूस के लिए किया जा रहा शिक्षकों से व्यापक जनसंपर्क

    10 अप्रैल 2026
    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर टीईटी अनिवार्यता के विरोध में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। इसके माध्यम से आरटीई एक्ट लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग की जाएगी। 

    महासंघ के सभी घटक संगठनों द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर जनसंपर्क किया जा रहा है। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय व समन्वयक विजय कुमार बंधु ने बताया कि विभिन्न शिक्षक संगठनों ने इस आंदोलन को शिक्षकों के सम्मान, सेवा सुरक्षा व न्यायपूर्ण व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा मानकर समर्थन दिया है। 

    आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर नई शर्तें थोपना अनुचित है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। उन्होंने सभी शिक्षक संगठनों व शिक्षकों से अपील की कि जिला स्तर पर समन्वय स्थापित कर अधिकतम संख्या में सहभागिता सुनिश्चित करें। 



    टीईटी के विरोध में 13 को फिर हुंकार भरेंगे शिक्षक, जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस, दर्ज कराएंगे विरोध, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले दो दर्जन संगठन लामबंद

    6 अप्रैल 2026
    लखनऊ। टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक फिर हुंकार भरेंगे। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले करीब दो दर्जन संगठन सड़क पर उतरेंगे। संगठन 13 अप्रैल को प्रदेश भर में - मशाल जुलूस निकालेंगे।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि मशाल जुलूस निकालने के लिए हर - जिले में बैठक कर रणनीति बनाई जा रही है। गाजियाबाद, एटा, - लखनऊ, बाराबंकी, अयोध्या, गोंडा, प्रयागराज में तैयारियां जोरशोर से की जा रही हैं। जुलूस के लिए हर न्याय पंचायत पर एक सह प्रभारी, ब्लॉक स्तर प्रभारी व जिला स्तर पर एक जिला समन्वयक की नियुक्ति की गई है। 

    शिक्षक इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने के प्रति गंभीर नहीं है। इसी वजह से 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस के साथ शिक्षक सड़क पर उतरेंगे।

    सुप्रीम कोर्ट के टीईटी अनिवार्यता के आदेश से प्रदेश के 1 लाख 86 हजार शिक्षकों सहित देश के लगभग 18 लाख शिक्षक काफी आहत हैं। केंद्र सरकार इन्हें जल्द राहत दे। अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु, टीएससीटी के संस्थापक अध्यक्ष विवेकानंद आर्य, एससीएसटी बेसिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश विद्रोही ने कहा जब तक सेवारत शिक्षकों पर से अव्यावहारिक टेट अनिवार्यता का नियम नहीं हटेगा शिक्षक पूरे जोर शोर से लगातार आंदोलन करता रहेगा। बता दें, टीचर फेडरेशन ऑफ इंडिया के आह्वान पर शनिवार को देश भर के शिक्षकों ने दिल्ली में टीईटी के विरोध में रैली की थी।



    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों की दोहरी लड़ाई, सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की भी तैयारी, 13 अप्रैल को मशाल जुलूस की तैयारी

    23 संगठनों का महासंघ एकजुट, 

    लखनऊः शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के मुद्दे पर देशभर के शिक्षक अब सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ने की तैयारी में हैं। कई शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले आंदोलन तेज कर दिया है। शिक्षक की पाती अभियान के बाद अब 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालने की तैयारी चल रही है। इसी के साथ महासंघ के पदाधिकारी सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी के लिए दिल्ली पहुंच चुके हैं।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडे ने बताया कि 23 शिक्षक संगठनों से बना यह महासंघ ब्लाक, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन चला रहा है। इसके साथ ही कानूनी लड़ाई को भी पूरी मजबूती से लड़ा जाएगा। इस मुद्दे पर दिल्ली में अधिवक्ताओं के साथ बैठक की गई है, जिसमें आगामी सुनवाई की रणनीति तय की गई। 

    दावा किया कि प्रदेश के करीब 1.86 लाख और देशभर के लगभग 18 लाख शिक्षकों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। वहीं, महासंघ की लीगल टीम के राष्ट्रीय प्रभारी विवेकानंद आर्य ने बताया कि शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई दो अप्रैल के बाद कभी भी हो सकती है, जिसे लेकर वकीलों से विस्तृत चर्चा की गई है।




    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकालेंगे शिक्षक

    प्रयागराज : शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को अनिवार्य किए जाने के विरोध में प्रदेश भर के शिक्षक अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के बैनर तले 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलुस निकालेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारियो को सौपकर अध्यादेश लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग करेंगे।


     महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने कहा है कि आरटीई एक्ट (शिक्षा का अधिकार) अधिनियम-2009 लागू होने से पहले जिन महिला/पुरुष शिक्षकों ने निर्धारित योग्यता के आधार पर नौकरी प्राप्त की थी, उन्हें 20 से 25 वर्ष की सेवा के बाद टीईटी उत्तीर्ण करने के लिए बाध्य किया जाना उचित नहीं है। अधिकांश ऐसे शिक्षकों की आयु 50 वर्ष के आसपास है और अब उन पर पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां अधिक हैं। ऐसे में उन्हें अपने बच्चों की उम्र के अभ्यर्थियों के साथ परीक्षा देने के लिए मजबूर करना न्यायसंगत नहीं है।


     उन्होंने कहा है कि इस अभियान को कई शिक्षक संगठनों का समर्थन प्राप्त है, जिनमें प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, विशिष्ट बीटीसी संघ, उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ, यूटा, एससी-एसटी शिक्षक संघ, शिक्षामित्र संघ, अनुदेशक संघ, उर्दू शिक्षक कर्मचारी संघ, महिला मोर्चा तथा विशेष शिक्षक एसोसिएशन सहित अन्य संगठन शामिल हैं। सभी संगठन मिलकर मशाल जुलूस निकाल कर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग तेज करेंगे।

    यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा

    यूपी के 2441 माध्यमिक विद्यालयों में मिलेगी वाई-फाई की सुविधा, स्मार्ट क्लास व ऑनलाइन पठन-पाठन को मिलेगा बढ़ावा

    छात्रों के साथ विद्यालय के कामकाज में होगा उपयोगी

    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक नई पहल की जा रही है। इसके तहत छात्रों को नए सत्र 2026-27 में निःशुल्क वाई-फाई की सुविधा मिलेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग कंपोजिट ग्रांट से प्रदेश के 2441 विद्यालयों में वाई-फाई लगवाएगा। जो छात्रों के साथ-साथ विद्यालय के कामकाज में भी उपयोगी होगी।


    हाल के वर्षों में प्रदेश के राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में पठन-पाठन से जुड़े संसाधन बेहतर करने के लिए कवायद की जा रही है। इसी क्रम में विद्यालयों में वाई-फाई लगवाया जाएगा। यह छात्रों के साथ-साथ विद्यालयों में बनी स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब, प्रधानाचार्य को मिले टैबलेट आदि के संचालन में भी उपयोगी होगा।

    इससे ऑनलाइन पठन-पाठन को विद्यालयों में बढ़ावा दिया जा सकेगा। विद्यालयों में वाई-फाई की सुविधा का विस्तार होने से छात्रों को न केवल अपनी पढ़ाई के लिए इंटरनेट का प्रयोग करने का अवसर मिलेगा, बल्कि वे विभिन्न शैक्षिक संसाधनों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे छात्र ऑनलाइन ट्यूटोरियल, ई-बुक्स और अन्य डिजिटल शैक्षिक सामग्री का लाभ उठा सकेंगे।

    गणित-विज्ञान जैसे विषयों को विजुअल समझाया जा सकेगा। शिक्षक प्रोजेक्टर या स्मार्ट बोर्ड के जरिए लाइव कंटेंट दिखा सकते हैं। वाई-फाई की सुविधा पढ़ाई को रोचक भी बनाने में मददगार होगी। छात्रों को किसी भी चीज में शोध करने में आसानी होगी। वहीं ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों के छात्रों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। क्योंकि शहरी क्षेत्रों की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालयों में अभी भी संसाधनों की कमी है।


    स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब का बेहतर उपयोग

    माध्यमिक विद्यालयों में पहले से बनी स्मार्ट क्लासरूम और आईसीटी लैब भी इस सुविधा के मिलने से पूरी क्षमता से काम करेंगे। वाई-फाई की सुविधा इन अत्याधुनिक शिक्षण उपकरणों के प्रभावी प्रयोग को सुनिश्चित करेगी। शिक्षक इन संसाधनों से इंटरैक्टिव पढ़ाई करा सकेंगे, जिससे छात्रों की समझ और जुड़ाव बढ़ेगा। वहीं प्रधानाचार्यों को दिए गए टैबलेट का संचालन भी वाई-फाई से अधिक सुचारू रूप से हो सकेगा, जिससे विद्यालय प्रबंधन में दक्षता आएगी।

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

    आरटीई लागू होने से पूर्व नियुक्त शिक्षक कर रहे हैं इसका विरोध

    सुप्रीम कोर्ट ने सभी सेवारत शिक्षकों के लिए बताया है अनिवार्य

    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज, जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ और यूटा ने सुप्रीम कोर्ट में की थी याचिका

    उन शिक्षकों को मिली है छूट जिनकी बची है पांच साल की नौकरी


    प्रयागराज। कक्षा एक से आठ तक  के सभी सरकारी शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्यता से राहत मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने दस अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल टीचर (पूर्व माध्यमिक) एसोसिएशन की रिट याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में इस कोर्ट के पहले दिए गए फैसले को ही चुनौती दी गई है, इसलिए इसमें कोई दम नहीं है।


    इससे पहले 17 नवंबर 2025 को भी सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अतुल एस. चंदूरकर की खंडपीठ ने यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटीए) उत्तर प्रदेश की रिट याचिका को खारिज कर दिया था। उस समय कोर्ट ने साफ कहा था कि याचिका की सारी प्रार्थनाएं एक सितंबर 2025 के अंजुमन इशात-ए-तालीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य के फैसले से पहले ही तय हो चुकी हैं। एक सितंबर को शीर्ष अदालत ने आरटीई एक्ट के तहत गैर-माइनॉरिटी स्कूलों में टीईटी अनिवार्य माना था।

    सेवारत पुराने शिक्षकों को भी टीईटी पास करना जरूरी है। जिन शिक्षकों के पास पांच साल से कम की सेवा बाकी है, उन्हें बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम करने की छूट दी थी लेकिन उन्हें पदोन्नति नहीं मिलेगी। जिनके पास पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास करना होगा, वरना अनिवार्य सेवानिवृत्ति लेनी होगी।


    दोनों फैसलों का मतलब

    सुप्रीम कोर्ट ने अब दो बार (17 नवंबर 2025 और दस अप्रैल 2026) यूपी के शिक्षक संगठनों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। दोनों मामलों में कोर्ट का रुख बिल्कुल साफ है कि आरटीई कानून और टीईटी की अनिवार्यता पर कोई ढील नहीं मिलेगी। प्रयागराज समेत पूरे उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षकों पर अब टीईटी पास करने का दबाव बढ़ गया है। जिन शिक्षकों की पांच साल से अधिक की सेवा बाकी है, उन्हें दो साल के अंदर टीईटी पास न करने पर नौकरी गंवानी पड़ सकती है।

    जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट

    जन्मतिथि की विसंगति मात्र सेवा समाप्ति का आधार नहीं– हाईकोर्ट 

    मऊ निवासी याची ने आदेश को को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती, शिक्षक का निलंबन रद्द

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों में दर्ज जन्मतिथि की भिन्नता को धोखाधड़ी या जानबूझकर की गई गलतबयानी नहीं माना जा सकता। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने मऊ के सहायक अध्यापक विजय यादव की बर्खास्तगी के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि अभ्यर्थी ने गलत जन्मतिथि का सहारा लेकर किसी प्रकार का अनुचित लाभ प्राप्त किया है, तब तक ऐसी विसंगति को सेवा समाप्ति का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने दिया है।


    याची की 2014 में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति की गई थी। सेवा के कई साल बाद एक शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने जांच शुरू की, जिसमें यह पाया गया कि उनकी आठवीं क्लास के रिकॉर्ड और हाईस्कूल गजट में जन्मतिथि दो जुलाई 1984 दर्ज थी। वहीं, नियुक्ति के लिए प्रस्तुत 'पूर्व मध्यमा' प्रमाणपत्र में यह तिथि सात जुलाई 1987 अंकित थी। इसी विसंगति को तथ्यों को छिपाना और धोखाधड़ी मानते हुए विभाग ने 27 जून 2019 को याची को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश भी दिया था। इस फैसले को याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    अधिवक्ता ने दलील दी कि याची ने कभी भी हाईस्कूल के उस प्रमाणपत्र का उपयोग नहीं किया, जिसमें 1984 की जन्मतिथि दर्ज थी। स्पष्ट किया कि याची की पूरी शैक्षणिक यात्रा और नियुक्ति पूर्व मध्यमा, उत्तर मध्यमा और शास्त्री की डिग्री पर आधारित थी, जो पूर्णतः वैध है।


    दस्तावेज फर्जी मिलते हैं तो कार्रवाई को स्वतंत्र

    कोर्ट ने पाया कि विभाग ने याची के किसी भी प्रमाणपत्र को फर्जी या जाली नहीं पाया गया है। यदि हाईस्कूल वाली जन्मतिथि (1984) को भी सही मान लिया जाए तो भी वह निर्धारित आयु व पात्रता के दायरे में ही है। ऐसी स्थिति में यह नहीं कहा जा सकता कि याची ने किसी गलत मंशा से इस जानकारी को छिपाया था। कोर्ट ने याची को तत्काल प्रभाव से बहाल करने का आदेश दिया। साथ ही विभाग को छूट भी दी है कि यदि भविष्य में याची के प्रस्तुत मूल दस्तावेज कभी फर्जी या जाली पाए जाते हैं तो अधिकारी कानून के अनुसार पुनः कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।

    Monday, April 13, 2026

    ग्रीष्मावकाश में स्थानांतरण की राह देख रहे बेसिक शिक्षकों को लग सकता है झटका, जानिए क्यों?

    ग्रीष्मावकाश में स्थानांतरण की राह देख रहे बेसिक शिक्षकों को लग सकता है झटका, जानिए क्यों? 


    प्रयागराज : ग्रीष्म अवकाश में अंतरजनपदीय तथा अंत जनपदीय स्थानांतरण की उम्मीद संजोए बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों शिक्षकों को झटका लग सकता है। देश व प्रदेश में चल रहे जनगणना कार्यक्रम के सुचारु संचानल के लिए इसमें लगे अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार की ओर से पत्र लिखा गया है। इस पत्र से बेसिक शिक्षक अपने स्थानांतरण को लेकर सशंकित हो गए हैं।


     जनगणना कार्य में शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है। प्रगणक बनाए गए शिक्षकों के विवरण की आनलाइन फीडिंग की जा रही है। ड्यूटी लगाए जाने का मैसेज कई शिक्षकों के मोबाइल नंबर पर आया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि वह कार्य को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूर्ण कर सकें। 

    अधिकारियों व प्रगणकों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की योजना तैयार कर ली गई है। इस बीच स्थानांतरण किए जाने से जनगणना कार्य प्रभावित होने को देखते हुए अधिकारियों के स्थानांतरण न किए जाने की तैयारी है।

    रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार

    रिक्त पद भरकर कस्तूरबा विद्यालयों में सुविधाएं भी बढ़ाईं, हॉस्टल, डॉरमेटरी, कंप्यूटर लैब, टॉयलेट ब्लॉक जैसी सुविधाओं का हो रहा विस्तार


    लखनऊ। प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (केजीबीवी) में छात्राओं को और बेहतर सुविधा देने की कवायद नए सत्र से पहले पूरी हो रही है। एक ओर जहां खाली पदों को तेजी से भरा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर आधारभूत ढांचे और छात्राओं की दैनिक सुविधाओं के विस्तार में भी प्रगति आई है।


    केजीबीवी में एकेडमिक हॉस्टल, अतिरिक्त डॉरमेट्री, कंप्यूटर लैब और टॉयलेट ब्लॉक जैसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार हुआ है। प्रयागराज में 43, बलिया में 42, उन्नाव में 39 और एटा में 35 रिक्तियों को चिह्नित कर इनको भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। जबकि श्रावस्ती, रायबरेली, आजमगढ़, ललितपुर आदि में कोई भी पद खाली नहीं है। 


    दूसरी तरफ छात्राओं के दैनिक जीवन को सुगम बनाने के लिए रोटी मेकिंग मशीन, सोलर गीजर, जेनसेट व वाशिंग मशीन जैसी सुविधाओं का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही फोक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट, ओपन जिम और एक केजीबीवी-एक खेल जैसी पहल भी छात्राओं के समग्र विकास में सहयोगी बन रही हैं।

    Sunday, April 12, 2026

    उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन के संबंध में

    उत्तर प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के आयोजन के संबंध में

    बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग

    बेसिक शिक्षकों को प्रतिकर अवकाश दिए जाने की मांग

    लखनऊ। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन ने गर्मी की छुट्टियों में जनगणना कार्य के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी लगाए जाने पर उन्हें प्रतिकर अवकाश देने की मांग उठाई है। संगठन ने इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा है।


     प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी एवं प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने कहा कि गर्मी की छुट्टियां शिक्षकों को उनके आवश्यक एवं व्यक्तिगत कार्यों के लिए प्रदान की जाती हैं, इसलिए यदि इस अवधि में उनकी ड्यूटी शासकीय कार्यों में लगाई जाती है तो उनका अवकाश प्रभावित होता है। ऐसे में जिन शिक्षकों और कर्मचारियों की ड्यूटी जनगणना अथवा अन्य सरकारी कार्यों में लगाई जाए, उन्हें बाद में प्रतिकर अवकाश दिया जाना चाहिए। 

    उन्होंने कहा कि इससे शिक्षकों का मनोबल बना रहेगा और वे पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ शासकीय कार्यों का निर्वहन करेंगे। संगठन ने यह भी मांग की है कि गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के अंतरजनपदीय एवं जिले के भीतर तबादलों की प्रक्रिया भी आयोजित की जाए। 

    International Maths Olympiad 2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।

    International Maths Olympiad 2026 के आयोजन के सम्बन्ध में।


    Saturday, April 11, 2026

    प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश

    प्रदेश के महाविद्यालयों में छात्र संख्या बढ़ाने के निर्देश, 15 किमी दायरे में संपर्क अभियान चलाने का आदेश


    प्रयागराज, 10 अप्रैल 2026।
    उत्तर प्रदेश के शिक्षा निदेशक (उच्च शिक्षा) द्वारा जारी एक महत्वपूर्ण पत्र के माध्यम से प्रदेश के सभी राजकीय एवं सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों को छात्र संख्या बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

    जारी निर्देश के अनुसार, आगामी 28 एवं 29 अप्रैल 2026 को इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम घोषित होने की संभावना को देखते हुए महाविद्यालयों को पहले से सक्रिय होने को कहा गया है। इसके तहत सभी महाविद्यालय अपने-अपने क्षेत्र के 15 किलोमीटर के दायरे में स्थित इंटर कॉलेजों से संपर्क स्थापित करेंगे और प्रवेश प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए “प्रवेश उत्सव” कार्यक्रम आयोजित करेंगे।

    पत्र में यह भी निर्देशित किया गया है कि छात्र-छात्राओं को आकर्षित करने के लिए काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएं, जिनकी फोटोग्राफी, ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ प्रमाण भी संकलित किए जाएं। इन गतिविधियों की रिपोर्ट संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के माध्यम से विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी।

    शिक्षा निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि महाविद्यालयों में छात्र संख्या में वृद्धि करना अनिवार्य है। यदि किसी महाविद्यालय में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती है, तो संबंधित प्राचार्य, शिक्षक एवं कार्मिकों के कार्य मूल्यांकन में इस तथ्य को शामिल किया जाएगा और शासन को अवगत कराया जाएगा।

    इस आदेश की प्रतिलिपि सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिया गया है कि वे अभियान की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करें।

    शिक्षा विभाग के इस कदम को उच्च शिक्षा संस्थानों में नामांकन बढ़ाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।



    Friday, April 10, 2026

    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश

    पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश 

    2005 तक चयनित ऐसे शिक्षामित्रों का मामला जो बाद में अध्यापक बन गए

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अनूप कुमार सिंह व अन्य की याचिका सुनवाई करते हुए दिया है।


    सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 28 जून 2024 एवं 30 जुलाई 2025 के शासनादेशों के तहत पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र दिया गया है और याचियों का दावा संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

    सरकारी वकील ने याचियों की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को याचियों के दावे पर नियमानुसार विचार कर उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करते हुए दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि वर्ष 2005 तक चयनित ऐसे शिक्षा मित्र जो बाद की सीधी भर्तियों में अध्यापक बन गए हैं, उन्होंने पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र भरा है जिस पर शासन को निर्णय लेना है।

    बेसिक शिक्षकों ने की आकांक्षी जनपद से वरिष्ठता के आधार पर स्थानांतरण की मांग

    बेसिक शिक्षकों ने की आकांक्षी जनपद से वरिष्ठता के आधार पर स्थानांतरण की मांग

    बहराइच। पिछले 10 से 15 वर्षों से बहराइच जनपद में कार्यरत शिक्षकों ने आज दिनांक 09 04 2026 को माननीय मुख्यमंत्री महोदय उत्तर प्रदेश सरकार, लखनऊ को जिलाधिकारी महोदय बहराइच के माध्यम से बेसिक शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण में भारांक नीति को समाप्त करके बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 के नियम-22 के अनुसार वरिष्ठता आधारित अन्तर्जनपदीय स्थानान्तरण करने के सम्बन्ध में ज्ञापन कार्यक्रम दिया।


    ज्ञापन के माध्यम से बहराइच के शिक्षकों ने माननीय मुख्यमंत्री महोदय से विनम्र निवेदन किया कि विगत 10 से 15 वर्षों से अधिक समय से आकांक्षी जनपदों सहित अन्य जनपदों से भारांक नीति के कारण सेवा में वरिष्ठ शिक्षकों का स्थानान्तरण गृह जनपद में नहीं हो पा रहा है।जबकि कनिष्ठ शिक्षक लाभान्वित हो जा रहे हैं।

    भारांक नीति से वरिष्ठ शिक्षको के संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार अनुच्छेद 14, 15, और 16 का हनन हो रहा है।शिक्षक लक्ष्मीकांत दुबे ने बताया कि यदि भारांक नीति समाप्त न की गई तो पीड़ित शिक्षक पूरे सेवा काल में स्थानानारण से वचित रहेंगे।विजय पाण्डेय ने बताया कि आकांक्षी जनपदों से 2018 और 2020 में अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध था और शासन द्वारा जारी ट्रासफर नीति में यह कहा गया था कि दो वर्ष के अंदर विकल्प लेकर ट्रांसफर कर दिया जाएगा लेकिन अभी भी सभी ट्रांसफर से वंचित है।

    दीपक यादव ने बताया कि आकांक्षी जनपदों में कार्यरत शिक्षकों का परिवार ट्रांसफर न होने से अत्याधिक पीड़ा से गुजर रहा है।राजकुमार सिंह ने बताया कि माता-पिता उम्र के इस पड़ाव पर है कि पारिवारिक जिम्मेदारियां भी बढ़ती जा रही है जिसरो अत्यधिक तनाव पूर्ण स्थिति होती जा रही है।

    आकांक्षी जनपद बहराइच के शिक्षकों ने कहा कि अंतर्जनपदीय स्थानांतरण वरिष्ठता के क्रम में प्रत्येक वर्ष किए जाए जो कि 2023 से नहीं किए गए है, उक्त के सम्बंध में शिक्षकों ने अवगत कराया कि पूर्व में हुए अंतर्जनपदीय स्थानांतरण में जिन शिक्षकों के पास भारांक नहीं रहे है। उनमें से किसी भी शिक्षक का स्थानांतरण नहीं हुआ जबकि उनकी सेवा का अंतर जनपदीय स्थानांतरण का लाभ प्राप्त कर चुके शिक्षकों से अधिक है। उसका कारण भारांक का न होना है।

    शिक्षकों ने सरकार से निवेदन किया कि इसी वर्ष मई माह में आवेदन लेकर अंतर्जनपदीय स्थानांतरण किए जाए जिससे कि हम अपने गृह जनपद या उसके नजदीक के जनपद में पहुँच कर पूर्ण मनोयोग से कार्य कर सके एवं परिवार का सहयोग कर सके।

    इस ज्ञापन कार्यक्रम में लक्ष्मीकांत दुबे, आलोक सिंह, विजय पाण्डेय, सुनील परिहार, प्रवीण सिंह, शैलेन्द्र मौर्य, पवन दुबे, नितिन शर्मा, दीपक यादव, आशीष मिश्रा, के साथ सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं उपस्थित रही।

    Thursday, April 9, 2026

    डाउनलोड करें – माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जनपदवार सूची

    यूपी बोर्ड ने 29,208 मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची वेबसाइट पर डाली


    डाउनलोड करें – माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) द्वारा मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जनपदवार सूची


    🔴 वेबसाइट लिंक👇
    https://upmsp.edu.in/recognised-district.html

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    HARDOI

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    LUCKNOW

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    KANPUR NAGAR

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    KANPUR DEHAT

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    SANT KABIR NAGAR

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    SIDDHARTA NAGAR

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    GORAKHPUR

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    MAHARAJGANJ

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    KUSHINAGAR

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    AZAMGARH

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    BHADOHI

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    बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे


    प्रयागराज। प्रदेश में बिना मान्यता के चल रहे स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बड़ा कदम उठाया है। परिषद ने बुधवार को करीब 30 हजार मान्यता प्राप्त विद्यालयों की सूची अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। इस पहल से जहां अभिभावकों को सही स्कूल चुनने में सुविधा मिलेगी, वहीं विभागीय अधिकारियों के लिए भी अवैध रूप से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई करना आसान होगा।

    परिषद के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9-10) के 10,295 और इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 9-12) के 18,913 विद्यालय मान्यता प्राप्त हैं। इस प्रकार कुल 29,208 स्कूल आधिकारिक रूप से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में स्कूल नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। कई ऐसे विद्यालय हैं, जिन्हें केवल हाईस्कूल तक की मान्यता मिली है, लेकिन वे इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित कर रहे हैं। इतना ही नहीं, कुछ स्कूलों में सिर्फ विज्ञान वर्ग की मान्यता होने के बावजूद कला वर्ग की पढ़ाई भी कराई जा रही है। हाल ही में 262 स्कूलों ने मान्यता के लिए आवेदन किया है, जिनमें से 107 स्कूलों को मान्यता देने की संस्तुति शासन को भेजी गई है, जबकि 36 मामलों को पुनर्विचार के लिए अग्रसारित किया गया है।

    चौंकाने वाली बात यह है कि प्रदेश भर में एक हजार से अधिक स्कूल बिना मान्यता के संचालित हो रहे हैं। ऐसे ही मामलों में हाल में देवरिया जिले में दो स्कूलों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई, जिन्होंने बिना मान्यता के बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरवाए थे।


    नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत से पहले मान्यता प्राप्त सभी विद्यालयों की सूची पोर्टल पर अपलोड कर दी गई है। अभिभावकों से अपील है कि नामांकन से पहले यह जरूर जांच लें कि संबंधित विद्यालय को किस स्तर तक की मान्यता प्राप्त है। यह कदम शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा। - भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद

    Wednesday, April 8, 2026

    अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश

    अमान्य विद्यालयों का संचालन बंद कराएगा यूपी बोर्ड, 18 अप्रैल तक अभियान चलाकर निरीक्षण के निर्देश

     निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी होगी जांच

    वेबसाइट पर अपलोड संबद्ध 29,208 स्कूलों की सूची से होगी अमान्य की पहचान


    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी - बोर्ड) ने परिषद से संबद्ध 29,208 - विद्यालयों की सूची upmsp.edu.in पर अपलोड कर अमान्य विद्यालयों की पहचान सुगम कर दी है। इसके साथ ही बोर्ड के - सचिव भगवती सिंह ने सभी - डीआइओएस, बीएसए व बीईओ को - पत्र लिखकर अमान्य विद्यालयों के विरुद्ध 18 अप्रैल तक सघन - अभियान चलाकर उनके विरुद्ध - कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। साथ - ही कहा है कि जांच के दौरान निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की भी जांच कर उनके विरुद्ध कार्रवाई करें। इस कार्रवाई की रिपोर्ट भी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


    यूपी बोर्ड से संबद्ध प्रदेश भर में संचालित विद्यालयों में 10,295 हाईस्कूल स्तर (कक्षा नौ-10) के हैं, जबकि 18,913 विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर तक (कक्षा नौ से = 12) के हैं। इसके अलावा संचालित अन्य विद्यालय अमान्य माने जाएंगे।

    बोर्ड सचिव ने कहा है कि परिषद की विनियमावली तथा शिक्षा का - अधिकार अधिनियम के तहत बिना मान्यता प्राप्त किए विद्यालय की स्थापना या संचालन पूर्णतया प्रतिबंधित है। संचालन पर इनके विरुद्ध भारी अर्थदंड व विधिक कार्यवाही का प्रविधान है। उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम अधिनियम 2002 के अनुसार मान्यता प्राप्त विद्यालय में कार्यरत शिक्षक का निजी कोचिंग संस्थान में सेवाएं देना वर्जित है।

    हाई कोर्ट ने भी एक याचिका पर आदेश दिए हैं कि प्रदेश भर में संचालित अमान्य संस्थानों को चिह्नित किया जाए। मामले में कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए शासन के नौ जून 2025 के निर्देश पर सभी जिलों में डीआइओएस की अध्यक्षता में समिति गठित है। समिति के माध्यम से अभियान चलाकर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट देने के लिए बोर्ड ने एक प्रारूप भी जारी किया है। इसमें जनपदवार संचालित अमान्य विद्यालयों की संख्या, उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई, निजी कोचिंग में संलग्न शिक्षकों की संख्या व उनके विरुद्ध की गई कार्रवाई का विवरण 30 अप्रैल तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

    परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने की जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मांग, माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में अधिक शिक्षण अवधि पर जताई चिंता

    परिषदीय विद्यालयों का समय बदलने की जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ की मांग, माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में अधिक शिक्षण अवधि पर जताई चिंता


    लखनऊ/हरदोई, 7 अप्रैल 2026
    उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व माध्यमिक) शिक्षक संघ ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के समय में बदलाव की मांग को लेकर शासन को ज्ञापन सौंपा है। संघ का कहना है कि बढ़ती गर्मी के कारण छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, ऐसे में विद्यालयों का समय तत्काल परिवर्तित किया जाना आवश्यक है।

    ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों का समय प्रातः 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक निर्धारित है, जबकि माध्यमिक विद्यालयों का समय सुबह 7:50 से 12:50 तक है। इस असमानता के कारण छोटे बच्चों को अधिक गर्मी में पढ़ाई करनी पड़ रही है, जिससे उनके बीमार होने की संभावना बढ़ रही है।

    शिक्षक संघ ने विशेष रूप से बुंदेलखंड और पूर्वांचल के जिलों—जैसे जालौन, महोबा, हमीरपुर, मिर्जापुर, सोनभद्र, बांदा और झांसी—का उल्लेख करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में तापमान अत्यधिक बढ़ जाता है। इसके अलावा, कई गांवों में बच्चों को विद्यालय तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, जिससे गर्मी में उनकी परेशानी और बढ़ जाती है।

    संघ ने यह भी कहा कि नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षण कार्य का समय लगभग 5 घंटे निर्धारित है, इसलिए विद्यालय समय को सुबह 7:30 से दोपहर 12:30 तक किया जा सकता है। इससे बच्चों को तेज धूप और लू से राहत मिलेगी तथा उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी।

    ज्ञापन में शासन से मांग की गई है कि बच्चों के स्वास्थ्य और हितों को ध्यान में रखते हुए परिषदीय विद्यालयों का समय शीघ्र ही संशोधित किया जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों से इस मुद्दे पर त्वरित निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।

    शिक्षक संघ ने उम्मीद जताई है कि सरकार इस मांग पर संवेदनशीलता दिखाते हुए जल्द ही आवश्यक कदम उठाएगी, जिससे लाखों विद्यार्थियों को राहत मिल सकेगी।