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Tuesday, August 22, 2119

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    Friday, June 19, 2026

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की तैयारी

     शिक्षक कृष्ण मोहन की आत्महत्या मामले में अभियुक्त हैं निलंबित बीएसए शालिनी

    गिरफ्तार निलंबित बीएसए को जेल भेजा गया, लिपिक के घर की कुर्की की taiyaari

    नामजद आरोपी लिपिक संजीव सिंह के घर चस्पा हो चुका है नोटिस, अब कुर्की की तैयारी

    जांच के दौरान भ्रष्टाचार का मामला आने पर पूर्व प्रधानाध्यक को भेजा जा चुका है जेल

    19 जून 2026

    गोरखपुर । गुलरिहा इलाके में बर्खास्त शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में नामजद आरोपी व 25 हजार की इनामी देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को बुधवार को जेल भेज दिया गया। पुलिस ने आरोपी शालिनी को दिल्ली से गिरफ्तार किया था और फिर ट्रांजिट रिमांड पर लेकर बुधवार को गोरखपुर पहुंची। पूछताछ के बाद बीएसए को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया। उधर, मामले में नामजद फरार आरोपी निलंबित लिपिक संजीव सिंह के घर की कुर्की की तैयारी शुरू कर दी गई है।

    शालिनी श्रीवास्तव पत्नी सौरभकुमार सिन्हा मूल रूप से बलिया जिले के कोतवाली क्षेत्र स्थित आनंद नगर, बड़ी काली मंदिर की निवासी हैं। जानकारी के मुताबिक, 21 फरवरी 2026 को शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने खुदकुशी कर ली थी। अगले दिन उनकी पत्नी गुड़िया सिंह ने गुलरिहा थाने में तहरीर देकर तत्कालीन बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि दोनों ने शिक्षक को लगातार प्रताड़ित किया, झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी और मानसिक दबाव बनाया, जिससे आहत होकर उन्होंने आत्मघाती कदम उठा लिया।

    तहरीर के आधार पर गुलरिहा थाने में आत्महत्या के लिए दुष्प्रेरित करने, धमकी देने, साक्ष्य मिटाने तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था। विवेचना के दौरान यह भी आरोप सामने आया कि हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन कराने के नाम पर शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अपर्णा तिवारी से 16-16 लाख रुपये की मांग की गई थी। आरोप है कि 20 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह को कार्यालय बुलाकर अपमानित भी किया गया था। इसके अगले दिन उन्होंने आत्महत्या कर ली।

    जांच के दौरान एक रिटायर प्रधानाध्यक अनिरुद्ध का नाम आया, जिसे पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया। वहीं, मुकदमा दर्ज होने के बाद से शालिनी व लिपिक संजीव फरार चल रहे थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कराने के साथ 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। शालिनी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए न्यायालय की शरण भी ली थी, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब उन्हें जेल भेजा गया।

    गुलरिहा थाने में दर्ज केस मैं आरोपी निलंबित बीएसए को गिरफ्तार कर जेल भिजवा दिया गया। लिपिक की तलाश की जा रही है। उसके खिलाफ कुर्की का नोटिस जारी हो चुका है। अग्रिम कानूनी कार्रवाई की जा रही है। - निमिष पाटील, एसपी सिटी



    शिक्षक की आत्महत्या मामले में देवरिया की फरार निलम्बित बीएसए दिल्ली से गिरफ्तार, लिपिक अभी भी फरार


    शिक्षक आत्महत्या मामले में चल रहीं थीं शालिनी श्रीवास्तव फरार

    16 जून 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह आत्महत्या कांड में चार महीने से फरार चल रहीं बीएसए शालिनी श्रीवास्तव को पुलिस ने दिल्ली से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बीएसए और लिपिक की गिरफ्तारी के लिए 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, कोर्ट से गैर जमानती वारंट भी जारी था।

    गिरफ्तारी से बचने के लिए बीएसए शालिनी श्रीवास्तव ने हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत अर्जी दी थी लेकिन कोर्ट ने खारिज कर दिया था। वहीं लिपिक संजीव सिंह अभी भी फरार है। कुशीनगर के रहने वाले और देवरिया में तैनात शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की पत्नी गुड़िया सिंह ने 22 फरवरी 2026 को गुलरिहा थाने में केस दर्ज कराया था।



    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया के बीएसए और लिपिक भगोड़ा घोषित होंगे

    27 अप्रैल 2026

    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहे देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद दोनों के अदालत में पेश न होने पर अब पुलिस उन्हें भगोड़ा घोषित कराने के लिए कोर्ट में आवेदन करेगी। भगोड़ा घोषित होने के बाद उनके घर 82 का नोटिस चस्पा किया जाएगा और फिर संपत्ति कुर्क कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।


    कुशीनगर जिले के हरैया बुजुर्ग निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरी बाजार स्थित एक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। वेतन बहाल न होने और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर उन्होंने 21 फरवरी को गुलरिहा स्थित अपने आवास में फंदे से लटक आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद सरगर्मी मची थी।

    कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट और वीडियो में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग और मानसिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पुलिस ने इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बीएसए और लिपिक अब भी फरार हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों पर पहले 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बढ़ाकर 25-25 हजार रुपये कर दिया गया है।


    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026
    निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम

    स्वच्छ व हरित विद्यालयों की राष्ट्रीय सूची में छाए यूपी के परिषदीय विद्यालय,  बेसिक शिक्षा विभाग के 9 स्कूलों ने बनाई पहचान

    19 जून 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव का विषय है कि विभाग द्वारा संचालित नौ परिषदीय विद्यालयों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। विभिन्न शैक्षिक मानकों, नवाचारों, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालयी वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के आधार पर तैयार राष्ट्रीय सूची में इन विद्यालयों को स्थान मिला है। इस उपलब्धि को प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में हो रहे सकारात्मक बदलाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। 

    राष्ट्रीय सूची में शामिल विद्यालयों में जनपद संभल का प्राथमिक विद्यालय इटायला माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चौखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गढ़छपा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), रायबरेली का प्राथमिक विद्यालय दौलरा, महाराजगंज (रैंक 51), बदायूं का कम्पोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36), सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55), श्रावस्ती की केजीबीवी हरिहरपुर रानी (रैंक 9) तथा जालौन की केजीबीवी कोंच (रैंक 14) शामिल हैं।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह सफलता निपुण भारत मिशन, पीएमश्री विद्यालयों की पहल, बेहतर अधिगम परिणाम, डिजिटल नवाचार तथा विद्यालयों में विकसित सकारात्मक शैक्षिक वातावरण का प्रतिफल है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, स्मार्ट कक्षाओं, पुस्तकालयों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है। 

    शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इसे परिषदीय विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक सफलता बताया है। माना जा रहा है कि इन विद्यालयों की उपलब्धियां अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगी और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा को नई दिशा देंगी।



    राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम 

    17 जून 2026
    लखनऊ। केंद्रीय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26 में यूपी के 11 विद्यालयों को जगह मिली है। इनमें 6 परिषदीय विद्यालय और 2 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रैंकिंग में दो अन्य श्रेणी के विद्यालय और एक निजी विद्यालय को भी जगह मिली है।


    प्रदेश के बेसिक विद्यालयों ने स्वच्छता, हरित परिसर और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि पाई है। साथ ही देश भर के निजी स्कूलों को भी कड़ी टक्कर दी है। प्रतियोगिता के तहत राज्य स्तर पर चयनित शीर्ष 20 विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के लिए भेजा गया था। इनमें से 11 विद्यालयों ने राष्ट्रीय सूची में स्थान बनाया।

    प्रतियोगिता में देशभर से कुल 191 विद्यालयों का चयन किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यालयों को जल्द सम्मानित करने का निर्णय लिया है। ताकि अन्य विद्यालय भी स्वच्छता और हरित परिसर के क्षेत्र में प्रेरणा ले सकें।

    अपर निदेशक बेसिक श्याम किशोर तिवारी ने कहा कि यह सफलता प्रदेश के शिक्षकों, विद्यार्थियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विद्यालयों में स्वच्छता, हरियाली और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।


    राष्ट्रीय रैंकिंग में इन विद्यालयों को मिली जगह

    संभल का प्राथमिक विद्यालय इटालिया माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चोखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गंछापा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), बदायूं का कंपोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36) और सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55) शामिल है। वहीं, श्रावस्ती का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हरिहरपुर रानी (रैंक 9) व जालौन का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कोंच (रैंक 14) को भी जगह मिली है। रैंकिंग में प्रयागराज का एयरफोर्स स्कूल मनौरी (रैंक 31) और वाराणसी का जवाहर नवोदय विद्यालय, गजोखर (रैंक 46) भी है। वहीं, निजी विद्यालय श्रेणी में मेरठ के दयावती मोदी अकादमी-1 (रैंक 4) ने स्थान पाया है।


    परिषदीय विद्यालयों में हो रहा संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल :

    एसएचवीआर रेटिंग में विद्यालयों का मूल्यांकन स्वच्छता, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिसर और सामुदायिक सहभागिता जैसे मानकों पर किया गया है। इनमें परिषदीय विद्यालयों ने संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और जनभागीदारी के बल पर उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया है। इन विद्यालयों में स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, जल संरक्षण और कायाकल्प जैसी पहल का सकारात्मक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखा है। इससे विभाग भी उत्साहित है।

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित, छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन

    यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित,  छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की समय-सारिणी जारी की है। इसके साथ ही वर्ष 2027 की कृषि भाग-एक परीक्षा में शामिल होने वाले 11वीं के छात्रों का भी पंजीकरण किया जाएगा। यह प्रक्रिया परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर ऑनलाइन पूरी की जाएगी।

    कक्षा नौवीं और 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि पांच अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। हाईस्कूल कंपार्टमेंट या पुनरीक्षण परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि 20 अगस्त 2026 नियत है। संस्था को 25 अगस्त तक छात्रों का अग्रिम पंजीकरण शुल्क (प्रति छात्र 40 रुपये) कोषागार में जमा करना होगा। जमा शुल्क की जानकारी और छात्रों का शैक्षिक विवरण भी इसी तिथि तक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

    वेबसाइट पर अपलोड किए गए विवरणों की जांच के लिए 26 अगस्त से पांच सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इस अवधि में कोई नया विवरण अपलोड नहीं किया जा सकेगा। विवरणों में छह सितंबर से 20 सितंबर, 2026 तक संशोधन किया जा सकता है। इस संशोधन अवधि में भी नए छात्रों का विवरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क और प्रक्रिया पंजीकरण शुल्क प्रति छात्र चालीस रुपये निर्धारित है। यह शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में एकमुश्त जमा करना होगा।  संस्था के प्रधानों को जमा शुल्क की सूचना और छात्रों के शैक्षिक विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। यह कार्य 25 अगस्त, 2026 की मध्यरात्रि तक पूरा करना अनिवार्य है। 


    विवरणों की शुद्धता और अंतिम जमा : छात्रों के शैक्षिक विवरणों जैसे नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, विषय और फोटो की जांच महत्वपूर्ण है। कक्षाध्यापक और प्रधानाचार्य को विद्यालय के अभिलेखों के अनुसार इनकी भली-भांति जांच करनी होगी।

    किसी भी त्रुटि या विसंगति के लिए कक्षाध्यापक या प्रधानाचार्य ही उत्तरदायी होंगे। पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली और कोषपत्र की एक प्रति 30 सितंबर, 2026 तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करनी होगी। यह प्रतियां परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जाएंगी।


    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी

    सर्टिफिकेट ने फंसा दिया राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला, आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ी 

    ◾ गुरुवार को खत्म हो रही आवेदन तिथि को बढ़ाया 
    ◾ डीआईओएस व प्राचार्य नहीं बढ़ा रहे आवेदन फॉर्म


    19 जून 2026
    लखनऊ । यूपी में राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों का तबादला सर्टिफिकेट के फेर में फंस गया है। प्राचार्यों से सर्टिफकेट मांगा जा रहा है कि शिक्षक के तबादले से पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। ऐसे में प्राचार्य व जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) तबादला फॉर्म आगे नहीं बढ़ा रहे। जिसके कारण अब आवेदन की तारीख 21 जून तक बढ़ा दी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से सभी जिलों के डीआईओएस को पत्र लिखकर नाराजगी जताई गई है कि आखिर स्थानांतरण के लिए आवेदन करने वाले राजकीय माध्यमिक स्कूलों के शिक्षकों के फॉर्म आगे क्यों नहीं बढ़ाए जा रहे हैं। अब निदेशक की ओर से नई ईमेल directorsecondaryeducation2026@gmail.com निर्धारित की गई है। राजकीय शिक्षक संघ के संरक्षक रामेश्वर पांडेय का कहना है कि शिक्षकों को स्थानांतरण के लिए परेशान किया जा रहा है।




    माध्यमिक विद्यालयों के सरप्लस शिक्षकों की सूची 12 जून को आएगी, जून 18 तक शिक्षक डीआईओएस कार्यालय में तबादले के लिए करेंगे आवेदन

    सरप्लस वाले शिक्षकों को खुद आवेदन पर मिल सकेगा बेहतर विकल्प

    लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया 12 जून से शुरू होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसमें सरप्लस के लिए स्वतः आवेदन करने वाले शिक्षकों को बेहतर विकल्प मिल सकेगा।

    माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल की ओर से जारी निर्देश के अनुसार 12 जून तक डीआईओएस एनआईसी की वेबसाइट पर सरप्लस शिक्षकों की सूची जारी करेंगे। शिक्षक 18 जून तक डीआईओएस ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन करेंगे। डीआईओएस 25 जून तक आवेदन पत्रों का परीक्षण कर अनुमोदन माध्यमिक शिक्षा निदेशक को भेजेंगे। 30 जून तक शिक्षकों को कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि सरप्लस शिक्षकों से मिले विकल्पों पर तैनाती के लिए तय मानक के आधार पर वरीयता क्रम में रखा जाएगा। वहीं सरप्लस शिक्षक यदि अपनी नई तैनाती के लिए खुद आवेदन नहीं करते हैं तो खाली पद के सापेक्ष उन्हें किसी भी विद्यालय में समायोजित या स्थानांतरित कर दें। सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए सबसे आखिर में आने वाले शिक्षकों को सबसे पहले तबादला होगा। उन्हें सरप्लस माना जाएगा। 

    निदेशक ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जोन एक में जिले की नगरीय सीमा या जिला मुख्यालय से आठ किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन दो में जिले में तहसील मुख्यालय से दो किमी की दूरी मानी जाएगी। जोन तीन में उपरोक्त से अतिरिक्त क्षेत्र के विद्यालय आएंगे। शासन ने जोन वाइज शिक्षकों के लिए मानक तय किए हैं।

    निदेशक ने सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए भी विस्तृत मानक की व्याख्यान की है। उन्होंने कहा है कि नई नियुक्ति-तैनाती में जोन तीन में सबसे पहले नियुक्ति-तैनाती की जाएगी। इसकी न्यूनतम अवधि तीन साल की होगी। पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसके बाद निर्धारित श्रेणी के शिक्षकों को तबादले का विकल्प दिया जाएगा।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक / शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण के संबंध में विभागीय आदेश जारी 
     




    राजकीय माध्यमिक विद्यालय के शिक्षकों के जून अंत तक होंगे तबादले, शासन ने जारी किया शासनादेश, संवर्ग में 20 फीसदी से अधिक नहीं किए जाएंगे तबादले


    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादले को शासन ने हरी झंडी दे दी है। इसके तहत जून में पहले सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। बाद में सामान्य तबादले होंगे। संवर्ग की संख्या के 20 फीसदी तक तबादले किए जाएंगे।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की सचिव किंजल सिंह ने निर्देश जारी किया। कहा, राजकीय हाईस्कूल व इंटर कॉलेजों में पहले चरण में सरप्लस शिक्षकों का समायोजन किया जाएगा। इसमें कार्यरत विद्यालय में बाद में कार्यभार संभालने वाले को पहले सरप्लस माना जाएगा। वहीं, सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक को इसमें यथासंभव शामिल नहीं किया जाएगा।

    उन्होंने कहा है कि इसकी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दूसरे चरण में चार श्रेणी के शिक्षकों को निर्धारित मानक पर तबादला दिया जाएगा। इसमें सेना से जुड़े लोगों के पति-पत्नी, कैंसर आदि गंभीर बीमारी से ग्रस्त, जिनकी आयु 30 जून को 58 साल पूरी हो रही है, यदि पति-पत्नी दोनों शासकीय सेवा में अलग-अलग जिले में तैनात हैं। तीसरे चरण में शेष शिक्षकों का तबादला किया जाएगा।

    सचिव ने कहा है कि संवर्ग की संख्या के 20 प्रतिशत सीमा तक तबादले होंगे। इसे बढ़ाने का अधिकार विभागीय मंत्री के पास होगा। आवेदन से लेकर तबादला प्रक्रिया जून में ही पूरी की जाएगी। ताकि विद्यालय खुलने से पहले शिक्षकों की तैनाती हो सके। उन्होंने यह भी कहा है कि किसी भी शिक्षक को उसकी मूल तैनाती के स्थान से अलग संबद्ध नहीं किया जाएगा। किसी भी विद्यालय में मानक से अधिक शिक्षक तैनात नहीं किए जाएंगे। उन्होंने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसे पूरा कराने के निर्देश दिए हैं।


    सरप्लस शिक्षकों के लिए मानक

    ◾खुद के दिव्यांग होने पर 10 से 20 नंबर

    ◾पत्नी-पति, बच्चे के दिव्यांग होने पर 10 नंबर

    ◾राष्ट्रीय-राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षक होने पर 10 नंबर

    ◾विधवा-तलाकशुदा महिला शिक्षिका को 10 नंबर

    ◾आश्रित बच्चों की देखभाल वाले पुरुष शिक्षकों को 10 नंबर

    ◾महिला शिक्षिका होने पर 10 नंबर

    ◾जोन 3 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾जोन 2 में तैनात शिक्षक को अधिकतम 10 नंबर

    ◾शिक्षक की आयु के अनुसार हर साल के लिए एक नंबर



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षक/शिक्षिका के लिए स्थानान्तरण / समायोजन नीति 2017 के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2026-27 में स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी 


    केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना

    केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, बेरोजगारों या शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर विवाद होना तय, गाइडलाइन बनी बाधा

    पहले उर्दू की विशेष टीईटी को एनसीटीई ने गलत माना था

    सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना


    प्रयागराज । चुनावी साल में सेवारत परिषदीय शिक्षकों को तोहफा देते हुए प्रदेश सरकार विशेष टीईटी कराने पर विचार कर रही है लेकिन इसे कराना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 और उसके बाद के फैसलों के बाद सरकार यह कदम उठाने जा रही है ताकि हजारों शिक्षकों की सेवा बनी रहे। सर्वोच्च न्यायालय ने दो टूक कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी करना अनिवार्य है।


    इस बीच महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है कि क्या आरटीई के तहत टीईटी में बैठने के पात्र योग्य अभ्यर्थियों को विशेष टीईटी के आवेदन से वंचित किया जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि टीईटी सभी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुला होना चाहिए। परीक्षा का आयोजन केंद्र और राज्य सरकारें करेंगी, पर एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। इसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और समान अवसर पर विशेष बल दिया गया।

    सरकार यदि विशेष टीईटी से शिक्षामित्र और अन्य पात्र अभ्यर्थियों (नए युवा उम्मीदवारों) को पूरी तरह बाहर रखती है तो यह आरटीई एक्ट 2009 का उल्लंघन होगा क्योंकि एनसीटीई टीईटी को सभी योग्य व्यक्तियों के लिए न्यूनतम बेंचमार्क मानती हैं, न कि केवल इन-सर्विस शिक्षकों तक सीमित है। उधर शिक्षामित्र भी अपनी लंबी सेवा का हवाला देते हुए लंबे समय से विभागीय टीईटी की मांग कर रहे हैं।

    वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी, उर्दू और संस्कृत की भाषा टीईटी कराई थी जिसमें एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए निबंधात्मक प्रश्न तक पूछे गए थे। उर्दू उत्तीर्ण लगभग छह हजार बेरोजगारों को नौकरी भी दे दी थी। उक्त भाषा टीईटी को नूतन ठाकुर ने जनहित याचिका में चुनौती दी थी। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह भविष्य में एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही टीईटी आयोजित करेगी, जिस पर उच्च न्यायालय ने नियुक्त हो चुके शिक्षक शिक्षिकाओं को राहत प्रदान कर दी थी।

    इस तरह से भाषा टीईटी को निरस्त तो नहीं किया गया लेकिन सरकार को उच्च न्यायालय ने ऐसी गलती न दोहराने की हिदायत दी थी। ऐसे में विशेष टीईटी कराना सरकार के लिए अग्निपरीक्षा साबित होगी।

    1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र से शुरू होगी व्यावसायिक शिक्षा, एजेंसियों के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण

    1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र से शुरू होगी व्यावसायिक शिक्षा, एजेंसियों के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण

    पर्यटन, रिटेल, आईटी, कृषि जैसे क्षेत्रों की दी जाएगी जानकारी

    18 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के 1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र 2026-27 से व्यावसायिक शिक्षा शुरू होगी। इसका उद्देश्य युवाओं को पढ़ाई के साथ रोजगार व स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा नौ से छात्रों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    इसमें 731 राजकीय और 970 अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय शामिल हैं। हर विद्यालय में दो-दो ट्रेड की पढ़ाई और प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यालयों को ट्रेड आवंटित कर दिए हैं। व्यावसायिक प्रशिक्षक और व्यावसायिक समन्वयक की तैनाती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

     महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कक्षा नौ में कम से कम 25 छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित करने को कहा है। विद्यालयों की समय सारिणी में व्यावसायिक विषयों के व्याख्यान निर्धारित होंगे। पंडित सुंदर लाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल प्रशिक्षक उपलब्ध कराएगा। कुल 3402 प्रशिक्षक तैनात होंगे, जिन्हें 15 हजार रुपये प्रति माह अधिकतम दस महीने मिलेंगे। व्यावसायिक समन्वयक को 20 हजार रुपये प्रति माह 11 महीने तक दिए जाएंगे।

    एक वोकेशनल ट्रेनर अधिकतम एक विद्यालय में व्याख्यान देगा। एक ट्रेनर को एक से अधिक विद्यालय में एक से अधिक ट्रेड के लिए अनुबंधित नहीं किया गया है।


    इन क्षेत्रों की पढ़ाई व प्रशिक्षण
    योजना के तहत पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, आईटी, बीएफएसआई, मैनेजमेंट एंड इंटरप्रेन्योरशिप व प्रोफेशनल स्किल, एग्रीकल्चर, ब्यूटी एंड वेलनेस आदि प्रमुख क्षेत्र हैं। इनमें फूड एंड बेवरेज सर्विस असिस्टेंट, रिटेल स्टोर ऑपरेशन असिस्टेंट, डोमेस्टिक डाटा एंट्री ऑपरेटर, माइक्रोफाइनेंस एक्जीक्यूटिव, ऑफिस असिस्टेंट, सोलैनेशियस क्रॉप कल्टीवेटर, असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट आदि जॉब रोल शामिल हैं।

    उद्योगों का भ्रमण भी कराएंगे 
    चयनित व्यावसायिक प्रशिक्षण भागीदार को उद्योगों के भ्रमण और गेस्ट लेक्चर के लिए अलग से बजट मिलेगा। उद्योगों के भ्रमण से युवाओं को वास्तविक व व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी। छात्रों की अलग से उपस्थिति पंजिका बनेगी, जिसकी जांच प्रधानाचार्य करेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक भी ट्रेडों के संचालन और पढ़ाई का मासिक निरीक्षण करेंगे।




    यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी 

    23 मई 2026
    लखनऊ। यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसमें 971 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक और बाकी राजकीय माध्यमिक स्कूल होंगे। यहां कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जाएगी। 17 विभिन्न ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

    यूपी बोर्ड कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी इन 17 विभिन्न ट्रेड में से कोई भी मनपसंद ट्रेड वैकल्पिक विषय के रूप में चुनेंगे और व्यावसायिक प्रशिक्षकों की मदद से इन्हें ट्रेनिंग व पढ़ाई की सुविधा दी जाएगी। जुलाई से इन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार व स्वरोजगार की शिक्षा भी मिल सकेगी।

    ये पढ़ाया जाएगा
    विद्यार्थियों को माइक्रोफाइनेंस एग्जीक्यूटिव, असिस्टेंट ब्यूटी वेलनेस कंसल्टेंट, ब्यूटी थेरेपिस्ट, कंज्यूमर एनर्जी मीटर टेक्नीशियन टेक्नीशियन, जैम, जैली व केचअप प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, फोर व्हीलर सर्विस, सिलाई मशीन ऑपरेटर, डेयरी वर्कर, सोलैनेसी क्रॉप कल्टीवेटर, डोमेस्टिक डाटा इंट्री ऑपरेटर, फिजिकल एजुकेशन असिस्टेंट।



    माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

    जून के प्रथम सप्ताह से तैयारी

     14 मई 2026
    लखनऊराजधानी समेत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को हुनर का ज्ञान भी दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में कौशल विकास की विशेष पाठशाला शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जून के प्रथम सप्ताह से इसकी शुरुआत होने की संभावना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही निश्शुल्क तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।


    कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का अनुरोध किया गया है। योजना के अनुसार छात्र-छात्राओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वह पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। तीन महीने से लेकर एक साल तक के कोर्स की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीयों की इच्छा के एन यूरोप प्रवेश दिया जाएगा। हर ट्रेड में 30 विद्यार्थियों का ही प्रवेश होगा।

    इन ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण :
    इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, कंप्यूटर आपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, डाटा एंट्री आपरेटर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई एवं कढ़ाई,


    मोबाइल रिपेयरिंग, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग, हेल्थकेयर असिस्टेंट, होटल मैनेजमेंट एवं फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, सीसीटीवी एवं सिक्योरिटी सिस्टम इंस्टालेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैली एवं अकाउंटिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण, डेयरी एवं पशुपालन, ड्रोन टेक्नोलाजी एवं संचालन, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-रिक्शा एवं ईवी रिपेयरिंग, फर्नीचर एवं बढ़ई का कार्य, पेंटिंग एवं पालिशिंग, फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट।


    विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की शुरुआत होने से विद्यार्थी कम उम्र में ही रोजगारपरक शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इस मिशन का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा के अलावा अल्प संख्यक कल्याण विभाग, महिला कल्याण व नगर विकास समेत 13 विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। –पुलकित खरे, मिशन निदेशक


    आइसीटी लैब संचालन प्रशिक्षण 16 को
    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित आइसीटी लैब उपकरणों के सुचारु संचालन को लेकर 16 मई निशागंज के राजकीय इंटर कालेज एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मंडल के छह जनपदों के 129 प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण आईसीटी लैब सेवा द्वारा दो सत्रों में आयोजित होगा। सुबह 11 बजे से से दोपहर एक बजे व द्वितीय सत्र तीन से शाम पांच बजे तक चलेगा।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित परीक्षा वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य हेतु परीक्षकों इत्यादि के पारिश्रमिक देयकों एवं यात्रा व्यय का भुगतान हेतु बजट आवंटन किये जाने के सम्बन्ध में।

    यूपी बोर्ड : 10वीं और 12वीं परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए 87 करोड़ रुपये का बजट जारी

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 87 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। यह धनराशि कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए आवंटित की गई है। 

    बोर्ड के वित्त व लेखाधिकारी विक्रम सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार परीक्षा केंद्रों व संकलन केंद्रों पर नियुक्त केंद्र व्यवस्थापकों, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापकों, कक्ष निरीक्षकों, लिपिकों, बंडल वाहकों, अग्रसारण अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के पारिश्रमिक भुगतान के लिए 27.86 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 

    उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए परीक्षकों, मुख्य नियंत्रक, उप नियंत्रक व अन्य कर्मियों के पारिश्रमिक और यात्रा व्यय के लिए 58.88 करोड रुपये का बजट जारी किया है। इसमें करीब 2.33 करोड़ रुपये यात्रा व्यय और 56.54 करोड़ रुपये की धनराशि सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को केंद्रवार भुगतान के लिए भेजी गई है। बोर्ड ने निर्देश दिए है कि आवंटित धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाए। 


    माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित परीक्षा वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य हेतु परीक्षकों इत्यादि के पारिश्रमिक देयकों एवं यात्रा व्यय का भुगतान हेतु बजट आवंटन किये जाने के सम्बन्ध में।


    यूपी बोर्ड की वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी

    यूपी बोर्ड की वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी


    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UPMSP) ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी कर दी है। परिषद सचिव द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्धारित तिथियों के भीतर छात्रों का पंजीकरण एवं परीक्षा संबंधी कार्यवाही पूर्ण करनी होगी।

    विज्ञप्ति के अनुसार कक्षा 10 एवं 12 में अध्ययनरत छात्रों के प्रवेश एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद विद्यालयों को छात्रों से प्राप्त शुल्क को 10 अगस्त 2026 तक एकमुश्त चालान के माध्यम से कोषागार में जमा करना होगा।

    विद्यालयों द्वारा छात्रों के शैक्षिक विवरण एवं परीक्षा शुल्क संबंधी सूचना परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। विलंब की स्थिति में प्रति छात्र 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिसकी अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 निर्धारित है।

    परिषद ने 21 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक छात्रों के विवरणों की जांच (चेकलिस्ट सत्यापन) की अवधि निर्धारित की है। यदि किसी छात्र के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, विषय या अन्य विवरण में त्रुटि पाई जाती है तो उसका संशोधन 1 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक किया जा सकेगा।

    विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संस्थागत छात्रों की अंतिम फोटोयुक्त नामावली एवं संबंधित अभिलेखों को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में 30 सितंबर 2026 तक जमा करना अनिवार्य होगा।

    🔴 प्रमुख तिथियां एक नजर में

    ◾प्रवेश एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि – 5 अगस्त 2026

    ◾शुल्क कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि – 10 अगस्त 2026

    ◾ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि – 16 अगस्त 2026

    ◾चेकलिस्ट सत्यापन अवधि – 21 से 31 अगस्त 2026

    ◾त्रुटि संशोधन अवधि – 1 से 10 सितंबर 2026

    ◾फोटोयुक्त नामावली जमा करने की अंतिम तिथि – 30 सितंबर 2026


    परीक्षा शुल्क भी घोषित

    परिषद ने वर्ष 2027 की परीक्षाओं के लिए हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के संस्थागत तथा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। संस्थागत हाईस्कूल परीक्षार्थियों के लिए शुल्क 500 रुपये, जबकि संस्थागत इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के लिए 600 रुपये निर्धारित किया गया है। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए शुल्क अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार निर्धारित रहेगा।

    परिषद ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि छात्रों के शैक्षिक विवरण पूरी तरह सत्यापित कर ही वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं, क्योंकि किसी भी त्रुटि के लिए संबंधित विद्यालय प्रशासन उत्तरदायी होगा। इससे वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाने में सहायता मिलेगी।


    Thursday, June 18, 2026

    यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन – 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त, एडमिशन पर भी लगाई रोक, जानिए क्यों?

    शैक्षणिक गतिविधियों में निष्क्रिय 465 विद्यालयों की मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्ववित्तपोषित स्कूलों की मान्यता पर की कार्रवाई

    लगातार दो वर्ष तक कोई भी छात्र परीक्षा में सम्मिलित न होने पर मान्यता समाप्ति के सम्बन्ध में

    यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन – 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त, एडमिशन पर भी लगाई रोक, जानिए क्यों? 


    प्रयागराज । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने राज्य भर के 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता को पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। यह कार्रवाई उन स्कूलों के खिलाफ हुई है जो केवल कागजों पर या नाममात्र के लिए चल रहे थे, लेकिन धरातल पर वहां न तो नियमित कक्षाएं लग रही थीं और न ही कोई छात्र पढ़ाई कर रहा था। बोर्ड के इस कड़े कदम के बाद पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत और स्कूल संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है।

    क्या है मान्यता रद्द होने का असली कारण?

    यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह सख्त फैसला 'इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921' के नियमों और विनियमों के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के नियम 11(d) में यह साफ प्रावधान है कि यदि हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर के किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय में लगातार दो वर्षों तक एक भी छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होता है, या वहां कक्षाएं संचालित नहीं की जाती हैं, तो उस स्कूल की मान्यता 'स्वतः समाप्त' समझी जाएगी।

    समीक्षा के दौरान पाया गया कि इन 465 स्कूलों में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों—सत्र 2024-25 और सत्र 2025-26 के दौरान नामांकन पूरी तरह शून्य रहा। इन दो सालों में इन स्कूलों का एक भी छात्र यूपी बोर्ड की 10वीं या 12वीं की मुख्य परीक्षा में शामिल होने नहीं पहुंचा। इसके बाद बोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये स्कूल पूरी तरह से बंद हैं और इन्हें मान्यता जारी रखने का कोई हक नहीं है।

    प्रभावित विद्यालयों की संख्या

    आगरा के 12, फिरोजाबाद के नौ, शिकोहाबाद का एक, मैनपुरी के 10, एटा के 18, मथुरा के 11, अलीगढ़ के 14, हाथरस के पांच, कासगंज के तीन, बुलंदशहर के चार, गाजियाबाद के छह, गौतमबुद्धनगर के दो, मेरठ के पांच, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, कानपुर देहात, झांसी, ललितपुर जिले के एक- एक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा मुरादाबाद के नौ, अमरोहा के छह, बिजनौर के तीन, संभल के पांच, बरेली के दो, बदायूं के पांच, शाहजहांपुर के तीन, सीतापुर के दो, हरदोई के 14, लखनऊ के 15, उन्नाव के दो, रायबरेली के पांच, कानपुर नगर के 19, फर्रुखाबाद के तीन, इटावा के पांच, कन्नौज के नौ, औरैया के तीन, जालौन के तीन, चित्रकूट के दो, प्रतापगढ़ के 10, फतेहपुर के 13, कौशाम्बी के 11, सुल्तानपुर के आठ, अयोध्या के आठ, बाराबंकी के दो, अंबेडकरनगर के नौ, अमेठी के दो, बहराइच, हमीरपुर, बांदा, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, चंदौली और भदोही जिले के एक- एक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा बस्ती के पांच, संतकबीर नगर के 12, गोरखपुर के आठ, देवरिया के पांच, कुशीनगर के तीन, आजमगढ़ के 16, मऊ के 15, बलिया के 10, जौनपुर के 10, गाजीपुर के 47, वाराणसी के चार, मिर्जापुर के छह और सोनभद्र के तीन समेत कुल 265 विद्यालय शामिल हैं।

    मान्यता समाप्ति के नियम और प्रावधान

    इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गठित परिषद विनियमों के अध्याय सात में संस्थाओं को मान्यता देने संबंधी प्रावधान हैं। इसी के विनियम 11 (ढ़) के अनुसार, यदि कोई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट नवीन (वन टाइम) या इंटरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता प्राप्त विद्यालय से लगातार दो शैक्षिक सत्रों तक कोई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होता है या कक्षाएं संचालित नहीं की जाती हैं, तो उस विद्यालय की प्रदत्त मान्यता स्वतः समाप्त समझी जाएगी।