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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, July 26, 2026

    10वीं-12वीं परीक्षा के निजी परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वालों को 100 रुपये देना होगा विलंब शुल्क

    10वीं-12वीं परीक्षा के निजी परीक्षार्थियों के आवेदन शुरू, 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वालों को 100 रुपये देना होगा विलंब शुल्क


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल होने वाले व्यक्तिगत (निजी) परीक्षार्थियों के आवेदन की समय सारिणी जारी कर दी है।


    परिषद सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार अभ्यर्थी परिषद की वेबसाइट पर निर्धारित तिथियों के अनुसार ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। अधिसूचना के अनुसार अग्रसारण केंद्रों के प्रधानाचार्य पांच अगस्त तक आवेदन पत्रों का अग्रसारण व परीक्षा शुल्क प्राप्त कर सकेंगे।

    इसके बाद 10 अगस्त तक कोषागार में परीक्षा शुल्क जमा किया जाएगा। कोषागार में जमा शुल्क की सूचना और परीक्षार्थियों का ऑनलाइन विवरण 16 अगस्त (रात्रि 12 बजे तक) अपलोड करना होगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि 10 अगस्त के बाद आवेदन करने वाले व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ 16 अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा करने की सुविधा मिलेगी।

    ऐसे अभ्यर्थियों का ऑनलाइन आवेदन और शैक्षिक विवरण 20 अगस्त (रात्रि 12 बजे तक) अपलोड हो सकेंगे। 21 से 31 अगस्त तक प्रधानाचार्य ऑनलाइन अपलोड किए गए अभ्यर्थियों के नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, विषय, फोटो सहित सभी विवरणों का मिलान करेंगे। यदि किसी प्रकार की त्रुटि मिलती है तो उसका संशोधन एक से 10 सितंबर तक किया जा सकेगा। अंतिम फोटोयुक्त नामावली और संबंधित अभिलेख 30 सितंबर तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करने होंगे।

    परिषद ने परीक्षा के लिए परीक्षा शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। हाईस्कूल व्यक्तिगत परीक्षा का शुल्क 706 रुपये, इंटरमीडिएट का 806 रुपये और विषय सुधार व अतिरिक्त विषय के लिए 206 रुपये निर्धारित किया गया है।

    प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

    प्रह्लाद जोशी बने नए शिक्षा मंत्री, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद हुआ ऐलान

    शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सीजेपी ने खत्म किया आंदोलन

    आंदोलन खत्म करने के एलान के बाद सीजेपी ने प्रदर्शनकारियों से घर लौटने की अपील की

    जनभावनाओं को देखते हुए और ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद त्यागपत्र का फैसला


    नई दिल्ली । धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी अब प्रह्लाद जोशी को सौंप दी गई है. राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री की सलाह पर उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देने की मंजूरी दी है। हालांकि, उनके पास पहले से मौजूद मंत्रालयों की जिम्मेदारी भी बनी रहेगी. यानी फिलहाल वह अपने मौजूदा कामकाज के साथ शिक्षा मंत्रालय का काम भी संभालेंगे। 

    राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया गया है. इसके बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में हुआ है, जब NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन लगातार चर्चा में था 


    नई दिल्लीः नीट पेपर लीक से उठे विवाद में आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। सरकार ने इस्तीफे के साथ साथ आंदोलनकारियों पर हुए सभी केस वापस करने और नीट के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की मांग भी मान ली। इसके साथ ही जंतर मंतर पर काकरोच जनता पार्टी (रॉजेपी) का छात्र आंदोलन भी खत्म हो गया। केंद्रीय स्वास्म्म मंत्री जेपी नड्‌डा और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह के साथ प्रर्ता व सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद सीजेपी के प्रतिनिधि आशुतोष कर संका में जंतर-मंतर पर 35 दिन से चल रहा आंदोलन तत्काल खत्म करने का एलान किया और सभी प्रदर्शनकारियों से अपस अपने घर लौटने की अपील की। इस बीच, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्भु ने प्रधान क इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक शिशारण मंत्री प्रल्हाद जोरी को शिक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

    जनभावनाओं को देखते हुए और सुरक्षा को लेकर ग्राउंड रिपोर्ट मिलने के बाद प्रधान का इस्तीपय लेने का फैसला लिया गया। इस्तीफा देते हुए प्रधान ने भारत की दुवा शक्ति' को देश की असली ताकत बताते हुए कहा कि वह वह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है और पहले ही दिन से इस पर मैंने अपनी जिम्मेदारी ली है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्तियों द्वारा छात्रों को गुमराह करने की कोशिशों लेकर भी का व्यथित हैं। सूत्रों के अनुसार, शनिवार की सुबह उन्हें बताया गया कि आज की स्थिति में त्यागपत्र जरूरी है। प्रधान ने रॉजेपी के साथ सरकार की वार्ता से पहले दोपहर ढाई बजे पोस्ट के जरिये अपने इस्तीफे की घोषणा कर दी। बताते चलें, आंदोलन खत्म करने के लिए सीजेपी की सत्तों में धर्मेंद्र प्रबयान का इस्तीफा, केस वापस लेने और आत्महत्या करने वाले नोट छात्रओं के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग शामिल थी। सोमवार को प्रदर्शनकारियों के सांसद मार्च के पैरान हुई हिंसक झड़पों के बाद से ही सरकार ने इस आंदोलन को खत्म करने को लेकर गंभीरता से सोचना शुरू किया था।


    3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी

    3,890 विद्यालयों पर अभी भी हाईटेंशन तारों का खतरा, अनहोनी की आशंका में पढ़ाई के लिए विवश विद्यार्थी


     लखनऊ : प्रदेश में बहुत बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे आज भी ऐसे सरकारी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर हैं, जिनके ऊपर से 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने चालू वित्तीय वर्ष की जिला शुरुआत में प्रदेश के 9,009 ऐसे सरकारी विद्यालय चिह्नित किए थे, जिनके ऊपर से हाईटेंशन लाइनें गुजर रही थीं। बिजली विभाग ने अब तक 5,119 विद्यालयों के ऊपर से इन लाइनों को हटा दिया है, लेकिन 3,890 विद्यालय अब भी खतरे की जद में हैं।


    हाईटेंशन लाइन का खतरे झेल रहे ऐसे सर्वाधिक 270 विद्यालय प्रयागराज में हैं। दूसरे स्थान पर जौनपुर है जहां ऐसे 267 विद्यालय हैं। इसके अलावा बस्ती में ऐसे 222, आजमगढ़ में 172, गाजीपुर में 169, सोनभद्र में 156, झांसी में 136, सिद्धार्थनगर में 119, फतेहपुर में 115, रायबरेली में 116 और बलिया में 102 विद्यालय इस समस्या से जूझ रहे हैं। 

    विभागीय अधिकारियों के अनुसार कई विद्यालय परिसरों के भीतर बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर भी लगे हुए हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका लगातार बनी रहती है। इसी को देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा हटाने का अनुरोध किया था।

    विद्यार्थियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए प्रदेश सरकार ने स्कूल परिसरों से बिजली ढांचा स्थानांतरित करने के लिए विद्युत निगमों को 100 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इसमें से 80 प्रतिशत राशि जारी की जा चुकी है। इस संबंध में बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि वह लगातार ऊर्जा विभाग के संपर्क में है और प्रयास है कि जल्द ही किसी भी विद्यालय के ऊपर से हाईटेंशन लाइन न गुजरे।

    शिक्षामित्रों ने नियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, प्रदेश भर में मनाया श्रद्धांजलि दिवस, जल्द समायोजन की भी उठाई मांग

    शिक्षामित्रों ने नियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, प्रदेश भर में मनाया श्रद्धांजलि दिवस, जल्द समायोजन की भी उठाई मांग

    शिक्षामित्रों ने मनाया काला दिवस, 25 जुलाई 2017 को सहायक अध्यापक पद पर निरस्त हुआ था समायोजन

    25 जुलाई 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने शनिवार को प्रदेश भर में श्रद्धांजलि दिवस मनाया। इस दौरान 25 जुलाई 2017 को समायोजन निरस्त होने के बाद दिवंगत शिक्षामित्रों को याद किया गया। संघ ने शिक्षामित्रों के नियमितीकरण, जल्द मूल विद्यालय वापसी आदि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा।

    प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला के नेतृत्व में गोंडा में ज्ञापन दिया गया। इसके साथ ही बस्ती, आगरा, हाथरस, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, प्रयागराज, भदोही और बिजनौर आदि में भी आयोजन हुए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए। शिक्षामित्रों को नियमित किया जाए। बेसिक शिक्षकों के लिए होने वाली विशेष टीईटी में शिक्षामित्र भी शामिल किए जाएं।

    संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह शिक्षामित्रों के हित में ठोस कदम उठाए। शिक्षामित्रों को उचित मानदेय, सेवानिवृत्त आयु 62 साल, उन्हें 12 महीने का मानदेय, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को नौकरी देने आदि मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाए।


    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में शिक्षामित्रों ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शनिवार को 'काला दिवस' मनाया। 25 जुलाई 2017 को ही शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त हो गया था। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय मांगपत्र डीएम और बीएसए के माध्यम से भेजा। मांग की कि टीईटी उत्तीर्ण एवं एनसीटीई मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देकर सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया जाए।

    शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने, 11 माह के स्थान पर 12 माह का मानदेय देने तथा सेवा के दौरान दिवंगत शिक्षामित्रों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ एक योग्य सदस्य को नौकरी प्रदान करने की भी मांग की। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा प्राथमिक विद्यालयों में विगत 26 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षामित्र आज भी अपने भविष्य, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तमाम शिक्षामित्र आज भी अपने घर से 80 से 90 किमी दूर विद्यालयों में कार्य करने को विवश हैं।





    शिक्षामित्रों ने की मूल विद्यालय वापसी और समायोजन समेत 62 वर्ष में रिटायरमेंट की मांग, 25 जुलाई को श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाने की तैयारी

    24 जुलाई 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 25 जुलाई को श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाएगा। 25 जुलाई 2017 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों के समायोजन निरस्त किए जाने के बाद से अब तक काफी शिक्षामित्रों का निधन हो चुका है। 25 जुलाई को उन सभी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 


    श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ ही संगठन जिलाध्यक्षों के नेतृत्व में लंबित समस्याओं के समाधान के लिए मांग पत्र भी जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजेगा। इसमें तीन जनवरी 2025 के शासनादेश और महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देशों के बाद भी शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी और समायोजन की प्रक्रिया न पूरा होना प्रमुख है।

    उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने बताया कि इसके साथ ही टीईटी उत्तीर्ण और एनसीटीई मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60000 शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए उन्हें शिक्षक पद पर समायोजित किया जाए। उनकी सेवानिवृत्ति आयु अनुभव और योग्यता को देखते हुए 60 से बढ़ाकर 62 साल की जाए। 

    बदलते तबादला-समायोजन के नियम से पढ़ाई प्रभावित, हाईकोर्ट, आदेशों में संशोधन व आपत्तियों के बीच उलझी प्रक्रिया, शिक्षक असमंजस में, स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित

    बदलते तबादला-समायोजन के नियम से पढ़ाई प्रभावित, हाईकोर्ट, आदेशों में संशोधन व आपत्तियों के बीच उलझी प्रक्रिया, शिक्षक असमंजस में, स्कूलों की पढ़ाई की व्यवस्था प्रभावित


    लखनऊः प्रदेश में राजकीय माध्यमिक और बेसिक विद्यालयों में शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन की प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र से ही उलझी हुई है। जून से शुरू हुई प्रक्रिया में आदेशों में संशोधन करना पड़ा। अलग-अलग मामलों में शिक्षक अदालत भी पहुंचे। इससे विभाग को अपने आदेशों में बदलाव करना पड़ा। इसका असर स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई पर भी दिखाई देने लगा है।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने स्थानांतरण नीति-2017 के तहत वर्ष 2026-27 के लिए सरप्लस और विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के तबादले किए हैं। विभाग ने 271 सरप्लस शिक्षकों का स्थानांतरण किया है। इसके अलावा विशेष परिस्थितियों वाले शिक्षकों के भी तबादले किए गए हैं। वहीं बेसिक शिक्षा विभाग में विशेष परिस्थितियों के आधार पर करीब छह हजार शिक्षकों ने स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। समायोजन को लेकर जारी आदेशों में बदलाव और आपत्तियों के कारण पूरी प्रक्रिया लंबी खिंचती जा रही है। 

    शिक्षक संगठनों का कहना है कि लगातार बदल रहे आदेशों से शिक्षकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई शिक्षक अब तक यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि उनकी अंतिम तैनाती कहां होगी। कुछ स्कूलों में शिक्षक कार्यमुक्त होने की प्रतीक्षा में हैं, जबकि कई विद्यालयों में नए शिक्षक अभी तक नहीं पहुंचे हैं। इसका असर नियमित पढ़ाई, कक्षाओं के संचालन और विषयवार शिक्षण पर पड़ रहा है।

    शिक्षक नेताओं का कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रिया स्पष्ट, पारदर्शी और समयबद्ध होनी चाहिए। यदि आदेश जारी होने के बाद बार-बार संशोधन होंगे और मामले अदालत तक पहुंचेंगे तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों की पढ़ाई का होगा। शिक्षकों का यह भी कहना है कि स्थानांतरण और समायोजन जैसी प्रक्रियाएं शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले पूरी हो जानी चाहिए। सत्र शुरू होने के बाद लंबे समय तक चलने वाली प्रक्रिया से स्कूलों में अनिश्चितता बढ़ती है और इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। 

    दूसरी ओर, विभाग का कहना है कि शिक्षक संगठनों की आपत्तियों, आरटीई के प्रविधानों और न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और नियम सम्मत बनाने के लिए आवश्यक संशोधन किए जा रहे हैं। अधिकारियों का दावा है कि सभी आपत्तियों का निस्तारण कर जल्द ही प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

    राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 अगस्त 2026 के लिये दिशा-निर्देश जारी

    राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 अगस्त 2026 के लिये दिशा-निर्देश


    उच्च शिक्षा के शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेश चिकित्सा के साथ डेढ़ करोड़ रुपये का दुर्घटना बीमा कवर, सीएम योगी की उपस्थिति में विभाग PNB के साथ करेगा MOU

    उच्च शिक्षा के शिक्षकों और कर्मियों को कैशलेश चिकित्सा के साथ डेढ़ करोड़ रुपये का दुर्घटना बीमा कवर, सीएम योगी की उपस्थिति में विभाग PNB के साथ करेगा MOU 

    लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 26 जुलाई को आगरा में उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को दोहरा तोहफा देंगे। एक तरफ वे मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा सुविधा का कार्ड वितरित कर योजना का शुभारंभ करेंगे, वहीं शिक्षकों व कर्मचारियों को डेढ़ करोड़ तक का दुर्घटना बीमा कवर मिलेगा। इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग पीएनबी के साथ एमओयू करेगा।


    एमओयू के तहत शिक्षकों व शिक्षणेतर कर्मचारियों को 1.50 करोड़ तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा, 3 करोड़ तक का हवाई दुर्घटना बीमा, 60 हजार तक का अस्पताल नकद लाभ तथा 12 लाख तक का टर्म लाइफ बीमा जैसी सुविधाएं मिलेंगी। सीएम कैशलेस चिकित्सा सुविधा में प्रदेश के विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों, स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में कार्यरत 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों व उनके आश्रित परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का भी लाभ मिलेगा। 

    योजना के लागू होने के बाद पात्र शिक्षकों और उनके परिवारों को सूचीबद्ध सरकारी व निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। कार्ड बनने के बाद पहले दिन से ही निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा।

    अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उपचार, दवाइयों और डिस्चार्ज तक का पूरा खर्च योजना के अंतर्गत वहन किया जाएगा। इसके साथ ही सभी जिलों में भी कार्यक्रम कर कार्ड वितरण किया जाएगा।

    1900 से अधिक उपचार पैकेज मिलेगा योजना में सूचीबद्ध अस्पतालों में 1900 से अधिक उपचार पैकेजों का लाभ मिलेगा। इनमें कैंसर, हृदय रोग, किडनी रोग, जटिल सर्जरी सहित कई गंभीर बीमारियों का उपचार शामिल है। योजना का संचालन साचीज के माध्यम से किया जाएगा और आयुष्मान भारत की निर्धारित उपचार दरें लागू होंगी। इसके लिए पोर्टल सक्रिय कर शिक्षकों का पंजीकरण किया जा रहा है।

    Saturday, July 25, 2026

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीनस्थ प्रदेश के मण्डलीय एवं जनपदीय कार्यालयों में विभाग द्वारा पदस्थापित कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारियों को सम्बद्ध न किये जाने के सम्बन्ध में।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीनस्थ प्रदेश के मण्डलीय एवं जनपदीय कार्यालयों में विभाग द्वारा पदस्थापित कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी अन्य कर्मचारियों को सम्बद्ध न किये जाने के सम्बन्ध में


    माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों का नए सिरे से होगा चिह्नांकन, पुराना आदेश निरस्त कर फिर से जारी किया जाएगा समायोजन आदेश

    माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों का नए सिरे से होगा चिह्नांकन, पुराना आदेश निरस्त कर फिर से जारी किया जाएगा समायोजन आदेश

    लखनऊ। प्रदेश के ऐसे राजकीय माध्यमिक विद्यालय जहां पर कक्षा छह से कक्षा आठ तक की कक्षाएं चल रही हैं, वहां सरप्लस शिक्षकों की नए सिरे से सूची बनाई जाएगी। पुराने आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के मानकों के आधार पर सूची बनाई जाएगी। अब 30 छात्रों पर एक शिक्षक का मानक लेते हुए नए सिरे से सूची बनेगी।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से इसके लिए आदेश जारी किया गया है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों को चिह्नित कर उन्हें दूसरे स्कूलों में तबादले की प्रक्रिया चल रही है। कई राजकीय माध्यमिक स्कूल ऐसे हैं, जहां कक्षा छह से इंटर तक की पढ़ाई होती है। वहीं कई कक्षा नौ से इंटर तक के हैं। ऐसे विद्यालय जहां कक्षा छह से आठ तक की कक्षाएं चल रही हैं, वहां आरटीई एक्ट के मानकों के अनुसार सरप्लस की नई सूची बनाई जाएगी।

    अभी तक 45 छात्र पर एक शिक्षक का मानक मानते हुए सरप्लस शिक्षकों की सूची बनाई गई थी। इसे लेकर मामला हाईकोर्ट चला गया है। इसमें सुनवाई चल रही है। वहीं विभाग अब वर्ष 2009 के आरटीई एक्ट के तहत 30 छात्र पर एक शिक्षक के मानक के अनुसार सूची बनेगी। ऐसे में सरप्लस शिक्षकों की संख्या बढ़कर करीब 600 होने की संभावना है।

    वहीं कक्षा नौ व कक्षा 10 में 59 छात्र पर एक शिक्षक और कक्षा 11 व 12 में 74 छात्र पर एक शिक्षक का मानक लागू रहेगा। क्योंकि इन कक्षाओं में आरटीई एक्ट लागू नहीं है। ऐसे में इनकी पुरानी नियमावली ही चलेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा निदेशक को इसके अनुसार कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। 


    Friday, July 24, 2026

    28 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन समीक्षा बैठक के सम्बन्ध में निर्देश और एजेंडा जारी, 8 बिंदुओं पर बीएसए बतायेंगे प्रगति

    28 जुलाई 2026 को आयोजित ऑनलाइन समीक्षा बैठक के सम्बन्ध में निर्देश और एजेंडा जारी,  8 बिंदुओं पर बीएसए बतायेंगे प्रगति

    11 अगस्त से शुरू होंगे छात्रवृत्ति आवेदन, यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया

    11 अगस्त से शुरू होंगे छात्रवृत्ति आवेदन, यूपी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया


    लखनऊ। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए पूर्वदशम (कक्षा 9-10) और दशमोत्तर (कक्षा 11-12) छात्रवृत्ति योजनाओं का विस्तृत कार्यक्रम जारी कर दिया है। 

    शासनादेश के अनुसार प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों को 22 जुलाई से 5 अगस्त तक अपना मास्टर डाटा छात्रवृत्ति पोर्टल पर अपलोड करना होगा। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक और संबंधित अधिकारी विद्यालयों की मान्यता, सीटों तथा अन्य विवरणों का सत्यापन करेंगे। अल्पसंख्यक वर्ग के निजी विद्यालयों की पोर्टल पर मार्किंग भी इसी अवधि में पूरी की जाएगी। 


    वीनीकरण श्रेणी के विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन और हार्डकॉपी जमा करने की प्रक्रिया 11 अगस्त से 25 अगस्त तक चलेगी। विद्यालय स्तर पर बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, आवेदन का सत्यापन और अग्रसारण 30 अगस्त तक पूरा किया जाएगा। शासन ने लक्ष्य रखा है कि पात्र विद्यार्थियों के खातों में अक्टूबर 2026 तक लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) के माध्यम से छात्रवृत्ति की राशि सीधे हस्तांतरित कर दी जाए। 

    Thursday, July 23, 2026

    टीईटी से राहत / छूट देने संबंधी लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी, संशोधन, छूट या राहत पर नहीं की कोई पुष्टि

    टीईटी से राहत / छूट देने संबंधी लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा राज्य मंत्री ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी, संशोधन, छूट या राहत पर नहीं की कोई पुष्टि 


    नई दिल्ली। लोकसभा में पूछे गए एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण निर्देशों की जानकारी दी। सरकार ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में स्पष्ट किया है कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए निर्धारित न्यूनतम अनिवार्य अर्हताओं में से एक है।

    सरकार ने यह भी अवगत कराया कि सुप्रीम कोर्ट ने 29 मई 2026 के अपने आदेश में टीईटी अर्हता प्राप्त करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी है, ताकि पात्र शिक्षकों को आवश्यक योग्यता हासिल करने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

    इसके साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों एवं संबंधित प्राधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे टीईटी का आयोजन नियमित रूप से करें तथा संभव हो तो वर्ष में दो बार, लगभग छह माह के अंतराल पर परीक्षा आयोजित करने का प्रयास करें। इससे पात्र अभ्यर्थियों एवं कार्यरत शिक्षकों को निर्धारित समयसीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करने का उचित अवसर मिल सकेगा।

    केंद्र सरकार ने अपने उत्तर में यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती राज्यों तथा केंद्रशासित प्रदेशों के अधिकार क्षेत्र का विषय है। इसलिए टीईटी से संबंधित कार्यरत शिक्षकों का राज्यवार विवरण संबंधित राज्य सरकारों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के पास उपलब्ध है।


    उत्तर में टीईटी से छूट (Exemption/Relaxation) देने के लिए किसी प्रकार की नई पहल, संशोधन प्रस्ताव, या प्रक्रिया चलने की बात नहीं कही गई है।

    पत्र का सार यह है कि—

    1️⃣ केंद्र सरकार ने कहा है कि शिक्षक भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती का विषय राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

    2️⃣ सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर 2025 के निर्णय का उल्लेख किया गया है, जिसमें टीईटी को आरटीई अधिनियम के तहत शिक्षक नियुक्ति के लिए न्यूनतम अनिवार्य योग्यता माना गया।

    3️⃣ 29 मई 2026 के निर्णय का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि टीईटी प्राप्त करने की अंतिम समय-सीमा 31 अगस्त 2027 से बढ़ाकर 31 अगस्त 2028 कर दी गई है।

    4️⃣ राज्यों को सलाह दी गई है कि टीईटी परीक्षा नियमित रूप से, अधिमानतः वर्ष में दो बार आयोजित करने का प्रयास करें ताकि पात्र शिक्षक समय-सीमा के भीतर टीईटी उत्तीर्ण कर सकें।


    ध्यान देने योग्य बात यह है कि प्रश्न (c) और (e) में सांसद ने स्पष्ट रूप से पूछा था कि

    🔴 क्या आरटीई अधिनियम की धारा 23 में संशोधन कर पूर्व नियुक्त शिक्षकों को राहत देने का प्रस्ताव है?

    🔴 क्या किसी प्रकार की संक्रमणकालीन (transitional) राहत पर विचार किया जा रहा है?


    लेकिन सरकार के उत्तर में इन दोनों बिंदुओं पर किसी भी संशोधन, छूट या राहत पर विचाराधीन होने की पुष्टि नहीं की गई। उत्तर केवल वर्तमान कानूनी स्थिति, सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और समय-सीमा बढ़ाने तक सीमित है।

    बोर्डिंग स्कूलों की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे सभी सर्वोदय विद्यालय, समाज कल्याण विभाग व बोर्डिंग स्कूल एसोसिएशन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर

    बोर्डिंग स्कूलों की तर्ज पर विकसित किए जाएंगे सभी सर्वोदय विद्यालय, समाज कल्याण विभाग व बोर्डिंग स्कूल एसोसिएशन के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर


    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग ने प्रदेश के 112 जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों की शैक्षणिक गुणवत्ता और आवासीय व्यवस्था सुधारने के लिए नई पहल की है। इसके तहत बुधवार को समाज कल्याण विभाग और बोर्डिंग स्कूल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएसएआई) के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए। यह एमओयू गोमतीनगर स्थित भागीदारी भवन में संपन्न हुआ।


    इस समझौते के माध्यम से सर्वोदय विद्यालयों में देश के अग्रणी बोर्डिंग स्कूलों की श्रेष्ठ कार्यप्रणालियां अपनाई जाएंगी। इसका उद्देश्य शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना है। साथ ही छात्रावास प्रबंधन, छात्र देखभाल और अनुशासन को सुदृढ़ किया जाएगा। नेतृत्व विकास और जीवन कौशल पर भी ध्यान दिया जाएगा। तकनीक आधारित शिक्षण व्यवस्था को भी मजबूत किया जाएगा। इससे विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक और आवासीय वातावरण उपलब्ध कराया जा सकेगा।


    एसओपी में शैक्षणिक भ्रमण भी
    एमओयू के तहत सर्वोदय विद्यालयों के प्रधानाचार्य और शिक्षक बीएसएआई से संबद्ध स्कूलों का शैक्षणिक भ्रमण करेंगे। वे वहां की शिक्षण व्यवस्था, छात्रावास संचालन और प्रशासनिक प्रणाली का अध्ययन करेंगे। इस अध्ययन के आधार पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार की जाएगी। इसे प्रदेश के सभी 112 सर्वोदय विद्यालयों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

    बोर्डिंग स्कूलों जैसी शिक्षा देना उद्देश्य 
    समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता सर्वोदय विद्यालयों के विद्यार्थियों को सर्वश्रेष्ठ बोर्डिंग स्कूलों जैसी शिक्षा उपलब्ध कराना है। बीएसएआई के साथ यह साझेदारी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रमुख सचिव समाज कल्याण अनुराग यादव ने इसे सर्वोदय विद्यालयों के लिए नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को श्रेष्ठ व्यवस्थाओं से सीखने का अवसर मिलेगा।

    प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी

    प्रदेश के  वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के 3.50 लाख शिक्षकों को भी मिलेगा कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ, शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश जारी 

    प्रधानाध्यापक करेंगे की प्रक्रिया पूरी करने के बाद आवेदन का सत्यापन

    लखनऊ। राजकीय और एडेड विद्यालयों के बाद अब प्रदेश के 2500 से अधिक वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के करीब 3.50 लाख शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिलेगा। शासन ने इसके लिए माध्यमिक शिक्षा निदेशक को शिक्षकों के चिह्नांकन और पंजीकरण कराने का निर्देश दे दिया है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से फरवरी 2026 में राजकीय और एडेड विद्यालय में यह सुविधा शुरू करते हुए कहा गया था कि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई अधिकृत आंकड़ा नहीं है। इसलिए इनके चिह्नह्मांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। इसी क्रम में विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र ने जारी आदेश में कहा है कि वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए विकसित पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा।

    आदेश के मुताबिक शिक्षक खुद और अपने आश्रित का पोर्टल पर आधार कार्ड के अनुसार ब्योरा दर्ज करेंगे। उनके आवेदन का प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य सत्यापन कर अग्रसारित करेंगे। इसमें वे शिक्षक की नियुक्ति नियमानुसार होने और कार्यरत होने का परीक्षण करेंगे। साथ ही संबंधित शिक्षक के किसी कारण से विद्यालय से अलग होने की स्थिति में प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक डीआईओएस को अवगत कराएं। ऐसे शिक्षकों को योजना से अलग रखा जाएगा।

    प्रधानाध्यापक-प्रधानाचार्य के आवेदन को प्रमाणित करने के बाद अंतिम अनुमोदन डीआईओएस द्वितीय करेंगे। डीआईओएस सत्यापन आवेदन स्वीकृत करेंगे। इस क्रम में माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं।



    Wednesday, July 22, 2026

    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    स्नातक पास 50 हजार बेटियों को स्कूटी, टॉप पांच फीसदी मेधावी छात्राओं को मिलेगा इनाम, यूपी कैबिनेट की मंजूरी

    22 जुलाई 2026
    लखनऊ। उच्च शिक्षा के प्रति छात्राओं का रुझान बढ़ाने और उनकी पढ़ाई की राह आसान करने के लिए प्रदेश सरकार स्नातक पास 50 हजार छात्राओं को स्कूटी देगी। योजना का लाभ सत्र 2025-26 में स्नातक पास करने वाली टॉप 5 प्रतिशत मेधावी छात्राओं को मेरिट के आधार पर मिलेगा। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में उच्च शिक्षा विभाग की रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की नियमावली को हरी झंडी दी गई। इस पर इस वित्तीय वर्ष में 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

    योजना का लाभ उन्हीं छात्राओं को मिलेगा जिनके परिवार की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम हो। उत्तर प्रदेश की मूल निवासी हो और राज्य विश्वविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों तथा राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों से स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी मिलेगी। स्कूटी के साथ ही पंजीकरण शुल्क, व्यापक वाहन बीमा, हेलमेट, 5 लीटर पेट्रोल तथा सभी आवश्यक एक्सेसरीज भी मिलेगी।

    उन्होंने कहा कि योजना का उद्देश्य छात्राओं की ड्रॉपआउट दर कम करना, उच्च शिक्षा में उपस्थिति बढ़ाना, उच्च शिक्षण संस्थानों तक उनका आवागमन सुविधाजनक करना और सकल नामांकन अनुपात में वृद्धि करना है। स्कूटी मिलने से विशेषकर ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों की छात्राओं को कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। स्कूटी की खरीद सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जेम) पोर्टल से की जाएगी।

    शहीद परिवार दिव्यांग, निराश्रितों को मेरिट में छूट
    योजना में दिव्यांग, निराश्रित (जिनके माता-पिता नहीं हैं) और शहीद परिवार की बेटियों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। उन्हें मेरिट में छूट दी जाएगी। उनके लिए केवल स्नातक उत्तीर्ण होना ही अनिवार्य होगा।

    राज्यपाल की नाराजगी के बाद संशोधित हुए नियम
    उच्च शिक्षा विभाग ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की नाराजगी के बाद नियमों में संशोधन किया है। राज्यपाल ने अलीगढ़ में दीक्षांत समारोह के दौरान उच्च शिक्षा विभाग द्वारा स्कूटी देने के लिए 90 से 80 फीसदी अंक पाने की शर्त पर नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था कि शहरी क्षेत्र में तो छात्राएं इतने अंक पा सकेंगी लेकिन क्या ग्रामीण क्षेत्र की छात्राएं इसमें शामिल हो पाएंगी। विभाग को अपने नियम की समीक्षा करनी चाहिए। इसके बाद विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए स्नातक की टॉप पांच फीसदी छात्राओं को स्कूटी देने का निर्णय लिया है।

    ऐसे मिलेगा लाभ... विश्वविद्यालय तैयार करेंगे सूची, पोर्टल पर होगी अपलोड
    लखनऊ। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के लिए उच्च शिक्षा विभाग जल्द पोर्टल तैयार करेगा। राज्य विश्वविद्यालयों व उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में पंजीकृत छात्राओं की पात्रता सूची विश्वविद्यालय द्वारा तैयार की जाएगी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव व परीक्षा नियंत्रक के हस्ताक्षर से सूची प्रमाणित व सत्यापित की जाएगी। इस सूची को विश्वविद्यालयों द्वारा संबंधित डीएम, निदेशक उच्च शिक्षा को विभाग की ओर से तैयार पोर्टल पर भेजी जाएगी। पोर्टल पर जिलावार सूची दिखाई जाएगी। इसका सत्यापन डीएम द्वारा कराया जाएगा। सत्यापन के बाद पोर्टल पर ही चयनित वेंडर के माध्यम से छात्राओं को स्कूटी का आवंटन भी डीएम द्वारा कराया जाएगा। हर जिले में समारोह आयोजित कर मेधावी छात्राओं को स्कूटी वितरित की जाएगी। हर जिले में एक सर्विस सेंटर भी बनाया जाएगा और एक शिकायत निवारण पोर्टल भी होगा।



    राज्यपाल की नाराजगी के बाद मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए स्कूटी योजना के लिए प्रस्ताव में होगा संशोधन

    17 जुलाई 2026
    लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में मेधावी व जरूरतमंद छात्राओं को भी स्कूटी मिले, इसके लिए कुछ संशोधन किए जाएंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से 80 से 90 प्रतिशत अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी देने का जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, अब उसमें संशोधन किया जा रहा है। परिवार की वार्षिक आय की सीमा को भी कम किया जाएगा।

    उच्च शिक्षा विभाग की ओर से जो प्रस्ताव तैयार किया गया था, उस पर बीते दिनों अलीगढ़ में एक दीक्षांत समारोह में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने नाराजगी जताई थी। उनका कहना था कि गांव व कस्बों की जरूरतमंद छात्राओं को स्कूटी मिले इस तरह नियम तैयार किए जाएं। ऐसे में 80 प्रतिशत से 75 प्रतिशत तक और गरीब परिवार की छात्राओं को स्कूटी मिले, इसके हिसाब से नियम तैयार किए जा रहे हैं। 



    मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की नियमावली तैयार, 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को मिलेगा लाभ

    6 जुलाई 2026
    लखनऊ। राज्य विवि व महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा की पढ़ाई कर रही मेधावी छात्राओं को रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी वितरण की तैयारी तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। जल्द ही इसको कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। 

    विभाग स्नातक अंतिम वर्ष की मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने की तैयारी में है। 85% से अधिक अंक पाने वाली छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। विभाग एनआईसी के सहयोग से इसके लिए सॉफ्टवेयर भी तैयार करा रहा है। जिसकी मदद से विवि व कॉलेजों के रिजल्ट के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। 10 से 12 लाख तक की वार्षिक आय वाले परिवार की मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। 

    बता दें, इसके लिए सरकार ने 400 करोड़ रुपये का प्रावधान पहले ही कर चुकी है। इससे लगभग 50 हजार मेधावी छात्राओं को पहले चरण में स्कूटी देने की तैयारी है। स्कूटी वितरण से जुड़ी तैयारियां आखिरी चरण में है। कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के बाद इसकी बाकी औपचारिकता पूरी की जाएगी। 



    परिवार की आय 12 लाख रुपये से कम होने पर ही मिलेगी स्कूटी, रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना को लेकर उच्च शिक्षा विभाग की तैयारी तेज

    उच्च शिक्षा मंत्री बोले- छात्राओं को दी जाएगी पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी

    16 जून 2026
    लखनऊ। प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में पढ़ने वाली लगभग 50 हजार छात्राओं को रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के तहत स्कूटी देने की कवायद तेज हो गई है। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है कि जिन छात्राओं के परिवार की सालाना आय 10 से 12 लाख रुपये से कम होगी, उनको स्कूटी दी जाएगी।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े निर्देश के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने स्कूटी देने की कवायद तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों से 80, 85 व 90 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त करने वाली पहले वर्ष की छात्राओं का डाटा लिया है। उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बताया कि स्कूटी वितरण के लिए नियमावली तैयार हो रही है।

    स्नातक प्रथम वर्ष में 80 फीसदी से अधिक नंबर लाने वाली छात्राओं को इसमें शामिल किया जाएगा। इसमें सालाना आय सीमा का भी प्रावधान किया जा रहा है। इसके लिए सालाना 10 से 12 लाख रुपये की आय सीमा तय की जा रही है। उन्होंने बताया कि छात्राओं को पेट्रोल से चलने वाली स्कूटी दी जाएगी।



    उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत यूपी की 70 हजार छात्राओं को मिलेगी इलेक्ट्रिक स्कूटी

    15 मई 2026
    प्रयागराज। उच्च शिक्षण संस्थाओं में अध्ययनरत छात्राओं को स्कूटी देने की सरकार की महत्वाकांक्षी योजना को विधानसभा चुनाव से पहले धरातल की तैयारियां तेज हो गई हैं। मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से घोषित रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना के लिए पात्र छात्राओं की सूची बनाई जा रही है।


    खास बात यह है कि छात्राओं को ईंधन पर खर्च खत्म करने और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए छात्राओं को इलेक्ट्रिक स्कूटी वितरित की जाएगी। एक स्कूटी लगभग 55 हजार रुपये की पड़ रही है।

    इस लिहाज से 400 करोड़ में 72,727 स्कूटी पड़ रही है। कुछ बजट आयोजन वगैरह पर भी पड़ेगा। इसलिए 70 हजार से अधिक छात्राओं को वाहन मिलने की उम्मीद है। हालांकि अभी लाभार्थियों की संख्या का निर्धारण नहीं हो सका है। इसे लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रस्तुति भी दे दी है। माना जा रहा है कि छह महीने के अंदर स्कूटी का वितरण हो जाएगा।

     मुख्यमंत्री ने भी महिला दिवस (आठ मार्च) को जल्द स्कूटी वितरित करने की बात कही थी। सरकार ने 20 फरवरी 2025 को इस योजना के लिए 400 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। पात्रता मानदंड और चयन प्रक्रिया के साथ ही स्कूटी की विशिष्टताएं निर्धारित करने के लिए 11 मार्च 2025 को दो अलग-अलग कमेटियां गठित की गई थी। 

    हालांकि पिछले साल कोई ठोस पहल नहीं हो सकी थी। शिक्षा निदेशालय के अफसरों ने विभिन्न राज्य विश्वविद्यालयों एवं अन्य संस्थाओं से पिछले साल स्नातक और परास्नातक अंतिम वर्ष पास करने वाली छात्राओं की सूची मांगी है। स्कूटी वितरण में सभी वर्ग का भी ध्यान रखा जाएगा। जिस प्रकार नौकरी में अनारक्षित, ओबीसी, एससी, एसटी, ईडब्ल्यूएस और दिव्यांग वर्ग के अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ मिलता है उसी प्रकार स्कूटी वितरण में भी सभी वर्ग की छात्राओं को लाभ दिया जाएगा।

    योजना से ग्रामीण इलाके की छात्राओं को लाभ
     इस महत्वाकांक्षी योजना का सर्वाधिक लाभ ग्रामीण इलाके की छात्राओं को होगा। अमूमन छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए घर से दूर कॉलेज जाना पड़ता है, विशेषकर ग्रामीण इलाके की छात्राओं को रोजाना कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्कूटी की सहायता से छात्राओं को घर से कॉलेज आने-जाने में आसानी होगी और समय भी बचेगा, जिससे वह अन्य कौशल आधारित शिक्षा प्राप्त कर सकेंगी।

    सहायता प्राप्त विद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को ग्रेच्युटी का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया

    सहायता प्राप्त विद्यालयों के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्यों को ग्रेच्युटी का अधिकार, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया


    प्रयागराज : इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने दोहराया है कि राजकीय सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में सेवा दे चुके शिक्षक ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम, 1972 के तहत ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकलपीठ ने कहा, अदालत पहले ही यह घोषित कर चुकी है कि सहायता प्राप्त संस्थानों के शिक्षक ग्रेच्युटी अधिनियम के तहत लाभ पाने के हकदार हैं।


    गोरखपुर निवासी सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य एवं तीन अन्य याचीगण क्रमशः जयनारायण शुक्ला, चंद्राभाई त्रिपाठी व सुरेश कुमार पांडे ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सभी याची प्रधानाचार्य पद से सेवानिवृत्त हो चुके हैं। बाचीगण की ओर से अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी ने मेहर जहां बनाम उत्तर प्रदेश राज्य केस का हवाला दिया। इस मामले में कोर्ट पहले ही ग्रेच्युटी का लाभ दे दे चुकी है। 

    राज्य की ओर से कहा गया कि याचिका बेहद देरी से दाखिल की गई है और इसके लिए कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया गया। इसके जवाब में याचीगण के वकील ने कहा कि ग्रेच्युटी से जुड़े मामलों में समयसीमा लागू नहीं होती। यह विधिक अधिकार है, भुगतान होने तक मांग की जा सकती है। कहा गया है कि सहायता प्राप्त संस्थान को राज्य सरकार के संस्थानों के समकक्ष माना गया है और सेवा में देरी के आधार पर ग्रेच्युटी के दावे को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने को चार सप्ताह का समय दिया है।

    Tuesday, July 21, 2026

    अंतरजनपदीय तबादले के लिए दोबारा आवेदन का मिलेगा मौका, हाईकोर्ट ने दो सप्ताह आवेदन की समयसीमा दो सप्ताह बढ़ाने का दिया आदेश

    अंतरजनपदीय तबादले के लिए दोबारा आवेदन का मिलेगा मौका, हाईकोर्ट ने दो सप्ताह आवेदन की समयसीमा दो सप्ताह बढ़ाने का दिया आदेश

    शिक्षकों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत

    लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले के मामले में प्रभावित शिक्षकों को बड़ी राहत दी है। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 22 जून को जारी स्पष्टीकरण के कारण आवेदन से वंचित रहे शिक्षकों को दोबारा आवेदन का अवसर दिया जाए। इसके लिए आवेदन की समयसीमा दो सप्ताह बढ़ाई जाएगी।

    न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकलपीठ ने ज्योति कुशवाहा सहित पांच शिक्षकों की याचिका का निस्तारण करते हुए कहा कि इस निर्णय का व्यापक प्रचार-प्रसार सरकार अपनी वेबसाइट और समाचार पत्रों के माध्यम से करे। 

    याचिकाकर्ताओं का कहना था कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद 22 जून को जारी स्पष्टीकरण में व्यवस्था बदल दी गई। इससे कई शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह गए।

    🔴 कोर्ट ऑर्डर 👇



    आवेदन से वंचित दिव्यांग व अन्य पात्र शिक्षकों को भी बड़ी राहत मिली

    आवेदन से वंचित दंपती शिक्षकों को हाईकोर्ट से मिला दो सप्ताह का समय

    परिषदीय शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादले का मामला 

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से सोमवार को परिषदीय शिक्षकों के अंतर जनपदीय स्थानांतरण 2026-27 के मामले में आवेदन से वंचित दंपती शिक्षकों, दिव्यांग एवं अन्य पात्र शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इन्हें आवेदन के लिए दो सप्ताह का और समय दिया है। कोर्ट को बताया गया कि 20 जून के बाद जारी स्पष्टीकरण एवं पीटीआर के कारण कई शिक्षक आवेदन नहीं कर सके थे जिसे न्यायालय ने संज्ञान में लिया।

    न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह आदेश ज्योति कुशवाहा एवं चार अन्य शिक्षकों की याचिका पर दिया। इसमें शिक्षक दंपती समेत अन्य पात्र शिक्षकों को अंतर जनपदीय तबादले के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया था।

    कोर्ट ने 22 जून के सर्कुलर से प्रभावित शिक्षकों के अंतर जनपदीय तबादले के लिए आवेदन देने का समय सोमवार से दो सप्ताह बढ़ा दिया है। अदालत ने कहा कि अगर, याचीगण या उनके समान अन्य शिक्षक इसके लिए दो सप्ताह में आवेदन करें तो उनके मामले को कानून के अनुसार गौर करके निस्तारित किया जाएगा।

    कोर्ट ने इसके लिए बेसिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव द्वारा जारी किए गए निर्देशों को अखबारों/वेबसाइट पर प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इन निर्देशों के साथ याचिका निस्तारित कर दी।

    E-KYC में फंसे शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड, शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड करने में बीएसए व बीईओ भी कर रहे देरी

    E-KYC में फंसे शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड, शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड करने में बीएसए व बीईओ भी कर रहे देरी

    4.19 लाख से सापेक्ष 2.74 लाख का हुआ है आवेदन स्वीकृत

    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक के शिक्षकों के लिए सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना का उद्घाटन कर दिया गया है। लगभग 150 शिक्षकों ने इसका लाभ भी ले लिया, किंतु अभी भी काफी संख्या में शिक्षकों के कैशलेस चिकित्सा कार्ड नहीं बन पाए हैं। शिक्षकों के अनुसार ई-केवाईसी करने में दिक्कत आ रही है। वहीं बीईओ भी कुछ जगह पर शिक्षकों का डेटा फॉरवर्ड नहीं कर रहे हैं।


    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से लंबी कवायद के बाद शिक्षकों के लिए सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू की गई है। हालांकि अभी भी इसके लिए छूटे हुए शिक्षकों के रजिस्ट्रेशन व डेटा अपडेशन की प्रक्रिया चल रही है। जानकारी के अनुसार बेसिक में 4.19 लाख से अधिक शिक्षकों के सापेक्ष 2.74 लाख शिक्षकों का आवेदन अप्रूव हुआ है। 53 हजार से ज्यादा का आवेदन बीईओ स्तर पर और 34 हजार से अधिक बीएसए स्तर पर लंबित है।

    शिक्षकों के स्तर पर 38 हजार से अधिक आवेदन लंबित हैं। 18 हजार से अधिक के आवेदन बीएसए व बीईओ ने सुधार के लिए वापस किए हैं। शिक्षकों ने बताया कि ई-केवाईसी करने में दिक्कत आ रही है। कुशीनगर, हरदोई, सीतापुर, फतेहपुर आदि जिलों में ई-केवाईसी न होने से डेटा नॉट फाउंड लिखकर आ रहा है। जब वे ई-केवाईसी करते हैं तो परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी पूरी नहीं आ रही है। इसमें रसोइयों, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। जिनका पहले से आयुष्मान कार्ड बना है। सीएमओ कार्यालय से उनके कार्ड भी डिसेबल नहीं किए जा रहे हैं। दूसरी तरफ विभाग का कहना है कि यह दिक्कत साइट की है। 

    यूपी बोर्ड के स्कूल 20 बाहरी छात्रों को अब दे सकेंगे प्रवेश, अभी तक 10 वीं-12वीं में अधिकतम दस बाहरी छात्रों को प्रवेश देने का नियम

    यूपी बोर्ड के स्कूल 20 बाहरी छात्रों को अब दे सकेंगे प्रवेश, अभी तक 10 वीं-12वीं में अधिकतम दस बाहरी छात्रों को प्रवेश देने का नियम

    दूसरे बोर्ड व राज्यों के छात्र यूपी बोर्ड से जुड़े स्कूलों में लेते हैं प्रवेश

    प्रयागराज । यूपी बोर्ड से जुड़े 28834 स्कूलों में दस बाहरी छात्र-छात्राओं के प्रवेश की शर्त खत्म करने की तैयारी है। शासन के निर्देश पर यूपी बोर्ड ने पिछले दिनों मुख्यालय में कार्यशाला आयोजित की जिसमें राजकीय, सहायता प्राप्त और निजी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से इस विषय पर फीडबैक लिया गया। बैठक के आधार पर शासन को प्रस्ताव भेजा गया है जिसमें बाहरी छात्र-छात्राओं के प्रवेश की सीमा दोगुनी करने की सिफारिश की गई है।


    20 जुलाई 2010 के शासनादेश में यह व्यवस्था दी गई थी कि दूसरे बोर्ड या राज्यों के अधिकतम दस बाहरी छात्र-छात्राओं को कक्षा दस और 12 में सीधे प्रवेश दिया जा सकता है। पिछले दिनों हुई कार्यशाला में कई प्रधानाचार्यों ने अधिकतम दस बाहरी छात्रों की सीमा को बढ़ाने की सिफारिश की है। उनका तर्क है कि कई ऐसे अभिभावक आते हैं जिनका तबादला दूसरे शहर या राज्य से होता है। उनके बच्चे सीबीएसई या सीआईएससीई बोर्ड में पढ़ रहे होते हैं


    अन्य बोर्ड में नहीं है नियम

    यूपी बोर्ड से उलट सीबीएसई और सीआईएससीई के स्कूलों में दूसरे बोर्ड या राज्य के विद्यार्थियों का कक्षा दस या 12 में सीधे प्रवेश का कोई नियम नहीं है। ये स्कूल अपने ही बोर्ड के दूसरे स्कूल के बच्चों का तो सीधे प्रवेश लेते हैं लेकिन दूसरे बोर्ड के बच्चों को दाखिला नहीं देते।

    लेकिन प्रयागराज में इन बोर्ड के स्कूलों की संख्या सीमित होने के कारण सभी का प्रवेश नहीं हो पाता। अंत में यूपी बोर्ड के स्कूलों में इन बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। इससे यह संदेश भी जाता है कि यूपी बोर्ड के स्कूलों के दरवाजे दूसरे बोर्ड के बच्चों के लिए भी खुले हैं बशर्ते वह न्यूनतम योग्यता पूरी करते हों।

    छात्रों के अपार आईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब माता-पिता को मिलेगा ऑप्ट-आउट का अधिकार, सीबीएसई को देश भर में लागू करने आदेश

    छात्रों के अपार आईडी मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: अब माता-पिता को मिलेगा ऑप्ट-आउट का अधिकार, सीबीएसई को देश भर में लागू करने आदेश

    उड़ीसा हाई कोर्ट का फैसला लागू करने का देंगे निर्देशः सुप्रीम कोर्ट

    शिक्षा मौलिक अधिकार, 'आधार की बाध्यता संविधान के खिलाफ


    नई दिल्ली ।  देश भर के लाखों विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को उड़ीसा हाईकोर्ट के उस फैसले को पूरे देश में लागू करने का निर्देश देगा, जिसमें 'अपार' (स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री) आइडी जारी करने के लिए माडल सहमति पत्र में बदलाव करने को कहा गया था। इस संशोधन के बाद अभिभावकों को इससे बाहर निकलने या सहमति देने से मना करने का स्पष्ट विकल्प मिलेगा।

    यह पूरा मामला चार छात्रों के अभिभावकों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू की गई 12 अंकों की डिजिटल 'अपार' आइडी को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट इंदिरा जयसिंह ने तर्क दिया कि सरकार इसे भले ही ऐच्छिक बताती हो, लेकिन व्यावहारिक रूप से बच्चों को 'आधार' व 'अपार' आइडी के बिना परीक्षाओं में बैठने से वंचित किया जा रहा है।

    क्या है 'अपार' आइडी ?
    'अपार' का पूरा नाम स्वचालित स्थायी शैक्षणिक खाता रजिस्ट्री है। यह शिक्षा मंत्रालय द्वारा 'एक राष्ट्र, एक छात्र आइडी' पहल के तहत शुरू किया गया 12 अंकों का एक विशिष्ट डिजिटल पहचान नंबर है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हिस्सा है। यह छात्रों के शैक्षणिक रिकार्ड (जैसे - मार्कशीट, डिग्री, क्रेडिट स्कोर, और अन्य उपलब्धियां) को आजीवन डिजिटल रूप से सुरक्षित रखता है। इसके माध्यम से छात्र किसी भी शैक्षणिक संस्थान में आसानी से अपने क्रेडिट ट्रांसफर कर सकते हैं। नौकरी या प्रवेश के दौरान मूल दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होती।



    अपार आईडी से जुड़ा फैसला देशभर में लागू होगा


    नई दिल्ली । 'अपार' आईडी योजना की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि चूंकि केंद्र सरकार ने ओडिशा हाईकोर्ट के दिसंबर 2025 के फैसले को चुनौती नहीं दी है, इसलिए हम सीबीएसई को पूरे देश में हाईकोर्ट फैसले को लागू करने का निर्देश देंगे, क्योंकि हाईकोर्ट का आदेश स्वीकार कर लिया गया है।

    हाईकोर्ट ने कहा था कि इस योजना से बाहर निकलने का विकल्प दिया जाए। पीठ ने कहा कि हम सीबीएसई को इन मुद्दों की जांच करने का भी निर्देश दे रहे हैं।

    अदालत ने कहा कि औपचारिक आदेश बाद में अपलोड किया जाएगा। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि वह सीबीएसई से याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए सहमति और डाटा सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान देने के लिए कहेगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कहा कि सरकार द्वारा अपार को स्वैच्छिक बताए जाने के बावजूद, बच्चों को असल में एक गैर-कानूनी योजना के तहत पंजीकरण कराने के लिए मजबूर किया जा रहा है।


    डीपीडीपी अधिनियम का पालन नहीं किया गया

    जयसिंह ने कहा कि इस योजना को लागू करने में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 का पालन नहीं किया गया। उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा सहमति फॉर्म एक स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट जैसा था, जिसमें सहमति देने से इनकार करने का मौका नहीं दिया गया था।

    हर चीज शक की नजर से न देखें : सीजेआई

    मुख्य न्यायाधीश ने यह एक स्वागत योग्य कदम है। इसका मकसद हर छात्र के लिए एक यूनिक एकेडमिक पहचान बनाना और शिक्षा प्रशासन को बेहतर बनाना है। यूनिक आइडेंटिफायर से शिक्षा अधिकारियों को छात्रों के सही रिकॉर्ड रखने में मदद मिलेगी।

    जानिए... क्या है 'अपार' आईडी योजना

    अपार योजना को शिक्षा मंत्रालय द्वारा 'नई शिक्षा नीति, 2020' के तहत शुरू किया गया था। इस योजना के तहत छात्रों के लिए एक अनोखी, जीवनभर चलने वाली 12 अंकों की यूनिक आईडी बनाई जाती है। यह रिकॉर्ड के लिए एक डिजिटल पासपोर्ट की तरह काम करती है।

    Sunday, July 19, 2026

    सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के अनुदान भुगतान की व्यवस्था बदली, 18 क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बनाया गया आहरण एवं वितरण अधिकारी

    सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के अनुदान भुगतान की व्यवस्था बदली,  18 क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को बनाया गया आहरण एवं वितरण अधिकारी

    क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को मिली बड़ी जिम्मेदारी


    लखनऊ। प्रदेश सरकार ने सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों और अनुदानित विश्वविद्यालयों को मिलने वाले अनुदान के भुगतान की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। वित्त विभाग ने शनिवार को जारी दो अलग-अलग शासनादेशों के माध्यम से प्रदेश के सभी 18 क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को नई वित्तीय जिम्मेदारियां सौंप दी हैं। इसके साथ ही पूर्व में जारी तीन पुराने शासनादेश भी निरस्त कर दिए गए हैं।


    नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के 18 क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को उनके अधीन आने वाले सहायता प्राप्त अशासकीय महाविद्यालयों और अनुदानित विश्वविद्यालयों के लिए आहरण एवं वितरण अधिकारी (डीडीओ) नामित किया गया है। सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के अनुदान के लिए डीडीओ कोड 4566 तथा अनुदानित विश्वविद्यालयों के लिए 4570 आवंटित किया गया है।

    वित्त विभाग ने एक अन्य शासनादेश में सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के स्थापना संबंधी व्यय के लिए भी एक समान व्यवस्था लागू कर दी है। पहले अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग डीडीओ कोड लागू थे, लेकिन अब सभी 18 क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के लिए एक समान डीडीओ कोड 4571 निर्धारित किया गया है। इसके लिए वर्ष 1998 तथा तीन फरवरी 2026 के शासनादेश निरस्त कर दिए गए हैं।

    नई व्यवस्था के तहत आगरा, कानपुर, गोरखपुर, झांसी, बरेली, मेरठ, लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, चित्रकूटधाम-बांदा, अयोध्या, देवीपाटन-गोंडा, बस्ती, विंध्याचल-मिर्जापुर, आजमगढ़, मुरादाबाद, सहारनपुर और अलीगढ़ मंडलों के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को उनके अधिकार क्षेत्र के सभी जिलों के सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के अनुदान भुगतान का अधिकार दिया गया है।

    संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी अनुदान संबंधी देयकों की शुद्धता, महालेखाकार कार्यालय से आंकड़ों के मिलान तथा आहरण एवं वितरण अधिकारी के सभी दायित्वों के निर्वहन के लिए व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।

    Saturday, July 18, 2026

    टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

    टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

    केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाना था जो शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं थे


    प्रयागराज। टीईटी पास शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। जुलाई 2017 में उन शिक्षकों का समायोजन भी रद्द हो गया था जिन्होंने पूर्व में टीईटी पास कर रखी थी। इसके खिलाफ शिक्षमित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की थीं। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 29 जनवरी 2026 को यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था कि इस प्रकरण में निर्णय हो चुका है। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) दायर की थीं। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 13 जुलाई 2026 को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।


    सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के आदेश से इसलिए प्रभावित हैं क्योंकि उन्हें उन व्यक्तियों के समान मान लिया गया है, जिनके विरुद्ध सेवा से अलग करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि याचिकाकर्ता स्वयं टीईटी उत्तीर्ण हैं।

     सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार जिन व्यक्तियों ने टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना था और केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाया जाना था जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं की थी। पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है तथा मामले को 27 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

    Friday, July 17, 2026

    डॉ. मोनिका सिंह बनीं कार्यवाहक उच्च शिक्षा निदेशक, कैशलेस चिकित्सा सुविधा की तैयारियों को गति न दे पाने के कारण पूर्व निदेशक को पड़ा हटना

    डॉ. मोनिका सिंह बनीं कार्यवाहक उच्च शिक्षा निदेशक, कैशलेस चिकित्सा सुविधा की तैयारियों को गति न दे पाने के कारण पूर्व निदेशक को पड़ा हटना


    लखनऊ। शासन ने राजकीय पीजी कॉलेज नोएडा गौतमबुद्ध नगर की प्राचार्य डॉ. मोनिका सिंह को कार्यवाहक निदेशक उच्च शिक्षा निदेशक बनाया है। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव बद्रीनाथ सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार डॉ. बीएल शर्मा को 31 दिसंबर 2025 को उच्च शिक्षा का कार्यवाहक निदेशक बनाया गया था। विभागीय चर्चा के अनुसार कैशलेस चिकित्सा सुविधा की तैयारियों को निर्धारित गति न दे पाने के कारण डॉ. शर्मा को इतने कम समय में ही हटा दिया गया है। 


    Wednesday, July 15, 2026

    त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्कार, कहा- कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं जाता, कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया

    त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इन्कार, कहा- कोई भी भाषा सीखना बेकार नहीं जाता, कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया

    15 जुलाई 2026
    नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कक्षा 9 के छात्रों के लिए लागू की गई सीबीएसई की त्रिभाषा नीति को चुनौती देने वाली दो नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से 10 दिन के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने सीबीएसई की त्रिभाषा नीति पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए कहा कि कोई भाषा सीखना बेकार नहीं जाता।

    अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 29 जुलाई को तय की है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर और गोपाल शंकरनारायणन की दलीलें सुनने के बाद केंद्र, सीबीएसई और एनसीईआरटी को नोटिस जारी किया। नई याचिकाएं अमनदीप कौर और अर्पण रॉय चौधरी ने दायर की हैं।

    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि त्रिभाषा नीति को बिना पर्याप्त तैयारी के लागू किया जा रहा है। कई अभिभावकों व स्कूलों ने किताबों की कमी, शिक्षकों की अनुपलब्धता व अचानक लागू किए गए नियमों को लेकर चिंता जताई है। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने कहा कि सीबीएसई के परिपत्र शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अनुरूप नहीं हैं और छात्रों पर वैकल्पिक व्यवस्था के बिना भाषाएं थोपी जा रही हैं।


    22 भाषाओं में से केवल तीन भाषाओं की पुस्तकें ही उपलब्ध
    वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार ने एक जुलाई तक सभी भाषाओं की किताबें उपलब्ध कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक 22 भाषाओं में से केवल तीन भाषाओं की पुस्तकें ही उपलब्ध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इससे शिक्षकों और अन्य संसाधनों की गंभीर समस्या पैदा हो गई है। उनके अनुसार, अब अंग्रेजी को भी गैर-भारतीय भाषा की श्रेणी में माना जा रहा है।

    वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि जो छात्र अब तक अंग्रेजी और फ्रेंच जैसी भाषाएं पढ़ रहे हैं, उन्हें अचानक तमिल जैसी नई भारतीय भाषा पढ़ने के लिए कहा जा रहा है। ऐसे में आवश्यक शिक्षक और आधारभूत ढांचा कहां से आएगा, यह बड़ा सवाल है।

    इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि अदालत सभी पक्षों को नोटिस जारी कर रही है और वे निर्धारित समय के भीतर अपना जवाब दाखिल करें। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से सीबीएसई की तैयारियों पर रिपोर्ट मांगी थी।

    कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति अनिवार्य किया
    सीबीएसई ने 15 मई को जारी परिपत्र में कहा था कि एक जुलाई 2026 से कक्षा 9 के छात्रों के लिए त्रिभाषा नीति लागू होगी। इसके तहत तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होंगी। यह व्यवस्था राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और स्कूल शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ-एसई) 2023 के अनुरूप लागू की जा रही है। बोर्ड के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो वह उसे दो भारतीय भाषाएं पढ़ने के बाद तीसरी भाषा के रूप में या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में चुन सकेगा।

    जब तक तीसरी भाषा की नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो जातीं, तब तक कक्षा 9 के छात्र संबंधित भाषा की कक्षा 6 की 2026-27 संस्करण की पुस्तकें पढ़ेंगे। साथ ही, छात्रों पर अतिरिक्त दबाव से बचने के लिए कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी।




    तीसरी भाषा में लिखने-पढ़ने से अधिक अंक बोलने-सुनने पर मिलेंगे, तय किए 9वीं में तीसरी भाषा के मूल्यांकन के मानक, वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई तीसरी भाषा की अध्ययन सामग्री

    4 जुलाई 2026
    सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा नौ की तीसरी भाषा (आर-3) के मूल्यांकन के मानक तय कर दिए । विद्यार्थियों को तीसरी भाषा में लखने-पढ़ने के बजाय बोलने नौर सुनने में सर्वाधिक अंक चलेंगे। नई व्यवस्था के तहत भाषा को पढ़ने व लिखने के बजाय सुनने बोलने की क्षमता विकसित करने पर अधिक जोर दिया जाएगा। सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों के ाचार्यों को नए मूल्यांकन ढांचे को लागू करने के निर्देश दिए हैं। तीसरी भाषा के लिए तैयार अध्ययन सामग्री एनसीईआरटी की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है।

    बोर्ड ने 'ओरल-फर्स्ट पेडागाजी' मौखिक-प्रथम शिक्षण पद्धति) को नपनाते हुए 100 अंकों के स्कूल नाधारित मूल्यांकन में सर्वाधिक ० अंक लिसनिंग और स्पीकिंग स्कल्स के लिए निर्धारित किए । इसके मुकाबले रीडिंग के नए 20, रचनात्मक लेखन के लिए 15, पाठ्यपुस्तक आधारित लेखन के लिए 10 और प्रोजेक्ट वर्क के लिए 15 अंक तय किए गए हैं। सीबीएसई के अनुसार यह पाठ्यक्रम एनसीईआरटी ने विकसित किया है। इसका उद्देश्य छात्रों में भाषा को पहले सुनकर समझने और बोलने का आत्मविश्वास विकसित करना है ताकि वे स्वाभाविक रूप से भाषा का प्रयोग कर सकें। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया स्कूल स्तर पर ही संचालित होगी।

    नई व्यवस्था में सुनने और बोलने का मूल्यांकन परीक्षा के बजाय पूरे शैक्षणिक सत्र के दौरान विभिन्न कक्षा गतिविधियों के माध्यम से किया जाएगा। शिक्षकों को निर्धारित सूची में से किसी भी आठ गतिविधियों का मूल्यांकन करना होगा और प्रत्येक गतिविधि के लिए पांच अंक निर्धारित होंगे।

    इस प्रकार कुल 40 अंक सुनने और बोलने के होंगे। इन गतिविधियों में सुनकर प्रश्नों के उत्तर देना, चित्र या घटना का वर्णन करना, समूह चर्चा, स्वयं एवं परिवार का परिचय देना, रोल प्ले, वाद-विवाद, दैनिक जीवन से जुड़े संवाद और अन्य मौखिक गतिविधियां शामिल हैं। बोर्ड ने स्कूलों को छात्रों की रुचि के अनुसार गतिविधियों का चयन करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है।

    रीडिंग स्किल के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें अध्ययन सामग्री से लगभग 100-100 शब्दों के दो पठित गद्यांश दिए जाएंगे, जिन पर आधारित बहुविकल्पीय प्रश्न, सही-गलत, रिक्त स्थान पूर्ति और अति लघु उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। रचनात्मक लेखन (क्रिएटिव राइटिंग) के लिए 15 अंक निर्धारित किए गए हैं। इसमें 30-40 शब्दों का अनौपचारिक निमंत्रण या संदेश, चित्र वर्णन, 100 शब्दों तक की सरल कहानी और दैनिक जीवन की परिस्थितियों पर आधारित संवाद लेखन शामिल होगा। इसके अतिरिक्त पाठ्य सामग्री पर आधारित लेखन कौशल के लिए 10 अंक निर्धारित किए गए जिनमें लघु एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाएंगे। हैं,

    बोर्ड ने 15 अंकों का प्रोजेक्ट वर्क भी अनिवार्य किया है। इसके लिए स्थानीय रीति-रिवाज, त्योहार, लोक कला, तकनीकी नवाचार, स्थानीय साहित्यकार या क्षेत्रीय संस्कृति जैसे विषय सुझाए गए हैं। सीबीएसई ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रोजेक्ट का मूल्यांकन उसकी सजावट के आधार पर नहीं, बल्कि छात्र की मौलिकता, शोध, समझ और विषयवस्तु की गुणवत्ता के आधार पर किया जाएगा। प्रोजेक्ट के साथ पांच अंकों का मौखिक परीक्षण (वाइवा) भी होगा।




    सातवीं से नौवीं तक तीसरी भाषा में नहीं देनी होगी परीक्षा, विस्तृत दिशा-निर्देश जारी CBSE ने बताया कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू होगी


    नई दिल्लीः राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत लागू की जा रही तीन-भाषा नीति को लेकर विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्कूलों में चल रही तमाम उलझनों पर केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को विराम लगा दिया। बोर्ड ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर साफ किया है कि तीन भाषा पढ़ाए जाने की नई व्यवस्था पूरी तरह से कक्षा छह में लागू की जाएगी। कक्षा नौवीं और 10वीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं देनी होगी। कक्षा सातवीं और आठवीं के विद्यार्थियों को तीसरी भाषा पढ़नी तो होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उन्हें तीसरी भाषा का पेपर नहीं देना होगा।

    बोर्ड के अनुसार, तीन-भाषा नीति का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं से जोड़ना बहुभाषी बनाना है। इसी कारण मौजूदा बैचों को राहत दी गई है, नई व्यवस्था को पूरी तरह वर्तमान कक्षा छह से लागू किया जाएगा।

    इन छात्रों को मिलेगी छूटः दिव्यांग छात्रों को तीसरी भाषा की अनिवार्यता से छूट मिलेगी। विदेशों में स्थित सीबीएसई स्कूलों और विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को भी भारतीय भाषा को तीसरी भाषा के रूप में पढ़ना अनिवार्य नहीं होगा। यदि छात्र के माता-पिता का दूसरे राज्य में तबादला होता है, तो छात्र चुने गए भाषा संयोजन को जारी रख सकेगा।


    सीबीएसई: किस कक्षा के लिए क्या है नियम

    कक्षा 10: इस बैच के लिए कोई बदलाव नहीं किया गया है। छात्र पहले की तरह दो भाषाओं के साथ ही बोर्ड परीक्षा देंगे। तीसरी भाषा न पढ़नी होगी और न उसकी बोर्ड परीक्षा होगी।

    कक्षा नौः इस बैच के छात्रों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं अनिवार्य होंगी। हालांकि, जब ये छात्र अगले वर्ष कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा की बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। तीसरी भाषा का मूल्यांकन केवल स्कूल स्तर पर आंतरिक परीक्षा से होगा।

    कक्षा सात व आठः इन छात्रों के लिए भी यही व्यवस्था रहेगी। तीसरी भाषा पढ़नी होगी, लेकिन 10वीं की बोर्ड में उसकी परीक्षा नहीं होगी। मूल्यांकन स्कूल करेगा। 

    कक्षा छहः यही पहला बैच होगा, जिस पर तीन-भाषा नीति पूरी तरह लागू होगी। इन छात्रों को कक्षा छह से तीन भाषाएं पढ़नी होंगी और जब ये कक्षा 10 में पहुंचेंगे, तब तीसरी भाषा (आर-3) की बोर्ड परीक्षा भी देनी होगी।

    उदाहरण से समझें: यदि कोई छात्र पहले से दो भारतीय भाषाएं, जैसे हिंदी और संस्कृत, या हिंदी और तमिल पढ़ रहा है, तो वह तीसरी भाषा के रूप में एक और भारतीय भाषा या अंग्रेजी, फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश जैसी विदेशी भाषा चुन सकता है। यदि छात्र एक भारतीय भाषा और एक विदेशी भाषा, जैसे हिंदी और अंग्रेजी पढ़ रहा है, तो उसे तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा ही लेनी होगी, ताकि तीन भाषाओं में कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल रहें।

    वहीं, जिन छात्रों ने पहले से दो विदेशी भाषाएं, जैसे अंग्रेजी और फ्रेंच या अंग्रेजी और जर्मन चुनी हुई हैं, उन्हें भी राहत दी गई है। वर्तमान में सातवीं, आठवीं और नौवीं के ऐसे छात्र अपनी दोनों विदेशी भाषाएं जारी रख सकेंगे, लेकिन उनके साथ एक भारतीय भाषा भी जोड़नी होगी।




    सीबीएसई : 10वीं तक नहीं बदलनी होगी विदेशी भाषा, तीन भाषाओं वाली नीति में विद्यार्थियों को बड़ी राहत

    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में तीन भाषाओं वाली नीति (त्रि-भाषा फॉर्मूला) को लेकर भ्रम को दूर किया है, जिससे लाखों छात्रों को बड़ी राहत मिली है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में 7वीं, 8वीं और 9वीं में पढ़ने वाले जिन विद्यार्थियों ने त्रि-भाषा नीति के तहत दो विदेशी भाषाओं को चुना है, उन्हें मौजूदा भाषाएं बदलने की जरूरत नहीं है। ये विद्यार्थी कक्षा 10 तक अपनी चुनी भाषाओं के साथ पढ़ाई जारी रख सकेंगे।


    सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि नई भाषा नीति के तहत कम के कम दो भारतीय भाषाओं को पढ़ने की अनिवार्यता को आगामी सत्र से केवल कक्षा 6 से लागू किया जाएगा। इसे कक्षा 7 से 9 में पहले से पढ़ रहे विद्यार्थियों पर नहीं थोपा जाएगा। सीबीएसई ने मई में जारी सर्कुलर में कहा था कि 1 जुलाई से कक्षा 9 में प्रवेश करने वाले विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होनी चाहिए। बोर्ड के इस नियम के खिलाफ विद्यार्थियों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था और कई विद्यार्थियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था। 


    पहले अनिवार्य की थीं तीन भाषाएं
    बोर्ड ने 15 मई को सर्कुलर में कहा था कि जब तक तीसरी भाषा की नई पुस्तकें नहीं आ जाती हैं, तब तक कक्षा 9 के विद्यार्थी चुनी भाषा के लिए कक्षा 6 की किताबों का इस्तेमाल करेंगे। अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 6 से त्रि-भाषा नीति लागू करने और कक्षा 9 के लिए गणित व विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी।

    Tuesday, July 14, 2026

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 17 जुलाई तक

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन अब 17 जुलाई तक

    अब तक उत्तर प्रदेश से मात्र 124 शिक्षकों ने ही किया आवेदन

    13 जुलाई 2026
    लखनऊ। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि 10 जुलाई से बढ़ाकर 17 जुलाई कर दी है। प्रदेश में अब तक 124 शिक्षकों ने ही आवेदन किया है। बेसिक और माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, जिला विद्यालय निरीक्षकों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को अधिक से अधिक पात्र शिक्षकों और प्रधानाचार्यों से आवेदन कराने के निर्देश दिए हैं। 



    ट्यूशन पढ़ाने वालों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार नहीं मिलेगा

    30 जून 2026
    प्रयागराज। राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार 2026 के लिए 13 जुलाई तक शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने सभी संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देशित किया है कि अधिक से अधिक शिक्षकों से आवेदन कराएं।

    खास बात यह है कि ट्यूशन जैसी गतिविधियों में संलिप्त शिक्षक या प्रधानाचार्य आवेदन नहीं कर सकते हैं। संविदा पर कार्यरत शिक्षक या शिक्षामित्र भी आवेदन के लिए अर्ह नहीं है। केवल न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा वाले नियमित शिक्षक, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य पात्र है। राष्ट्रीय अध्यापक पुरस्कार पोर्टल http://nationalawardstoteachers.education.gov.in पर पंजीकरण की अंतिम तिथि 10 जुलाई और सबमिट करने की आखिरी तारीख 13 जुलाई है। आवेदक को आवेदन पत्र के साथ एक ऑनलाइन पोर्टफोलियो अपलोड करना है, जिसमें आवश्यक अभिलेख, टूल्स, एक्टिविटी रिपोर्ट, फील्ड विजिट, फोटो, ऑडियो या वीडियो आदि सम्मिलित होंगे।



    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार को लेकर शिक्षकों की बेरुखी से बढ़ी शिक्षा विभाग की परेशानी, 13 जुलाई तक आनलाइन आवेदन का मौका, जिले में कराना होगा 25 आवेदन

    शिक्षकों को प्रेरित कर अधिक से अधिक आवेदन कराने में जुटा विभाग

    लखनऊ । राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार-2026 के लिए आनलाइन स्व-नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन आवेदन की रफ्तार धीमी होने से विभागीय अधिकरियों की परेशानी बढ़ गई है। ऐसे में शिक्षा निदेशालय ने पात्र शिक्षकों के बीच व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक आनलाइन आवेदन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। 


    इस वर्ष शिक्षा मंत्रालय ने यूपी को दो हजार नामांकन का लक्ष्य दिया है। इस हिसाब से जिले में कमसे कम 25 शिक्षकों को आवेदन करने  होंगे। विभाग की तरफ से इसके लिए संबंधित अधिकारियों से अपने-अपने क्षेत्र के दो से तीन उत्कृष्ट शिक्षकों की पहचान कर उन्हें राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार पोर्टल पर आवेदन कराने और तकनीकी सहयोग उपलब्ध कराने को कहा गया है। शिक्षा निदेशालय के अनुसार 25 जून तक प्रदेश भर में केवल 24 शिक्षकों ने पंजीकरण कराया था, जबकि अंतिम रूप से एक भी आवेदन जमा नहीं हुआ था। 

    बड़ी संख्या में जिले ऐसे हैं, जहां अब तक एक भी नामांकन नहीं हुआ है।  इसी के मद्देनजर यहां आवेदन संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए पात्र शिक्षक 10 जुलाई तक आनलाइन स्व-नामांकन कर सकते हैं, जबकि 13 जुलाई तक आवेदन अंतिम रूप से सबमिट करना होगा।


    अब यूपीटीईटी में त्रुटिपूर्ण OMR में संशोधन हेतु लगी कतार, पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रार्थना पत्र भेजे

    अब यूपीटीईटी में त्रुटिपूर्ण OMR में संशोधन हेतु लगी कतार, पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने प्रार्थना पत्र भेजे


    14 जुलाई 2026
    प्रयागराज। दो से चार जुलाई तक आयोजित यूपीटीईटी के ओएमआर में गड़बड़ी करने वालों की अब चयन आयोग पर कतार लगने लगी है। किसी शरारती तत्व बिना किसी अधिकृत सूचना के सोशल मीडिया पर प्रत्यावेदन का प्रोफार्मा जारी कर ऐसे अभ्यर्थियों को चयन आयोग में प्रत्यावेदन देने की सलाह दे दी जिनके उत्तरपत्रक में गलती है। 

    उसके बाद सोमवार को सैकड़ों अभ्यर्थियों ने लाइन में लगकर त्रुटिपूर्ण भरे गए ओएमआर (उत्तर पत्रक) के मूल्यांकन का अनुरोध किया। ई-मेल और पंजीकृत डाक से भी बड़ी संख्या में प्रत्यावेदन भेजे गए हैं। अब तक पांच हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने चयन आयोग में स्वयं उपस्थित होकर या ई-मेल और डाक से प्रार्थना पत्र भेजे हैं।



    टीईटी की ओएमआर शीट भरने में त्रुटि पर प्रत्यावेदन देने उमड़े अभ्यर्थी

    प्रयागराजः उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) की उत्तरकुंजी जारी कर कोई विसंगति होने पर अभ्यर्थियों से साक्ष्य सहित प्रत्यावेदन मांगे हैं, लेकिन सोमवार को बड़ी संख्या में अभ्यर्थी ओएमआर शीट पर विवरण भरने में त्रुटि हो जाने पर प्रत्यावेदन लेकर आयोग पहुंच गए। आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों के लिए कोई अवसर नहीं दिया है, लेकिन अभ्यर्थियों ने पहुंचकर काउंटर पर अपने प्रत्यावेदन देकर सुधार का अवसर दिए जाने की मांग की।

    आयोग ने ओएमआर शीट भरने में किसी तरह की त्रुटि पर सुधार के लिए तो अवसर नहीं दिया, लेकिन किसी ने इंटरनेट मीडिया पर सूचना प्रसारित कर दी कि यदि किसी अभ्यर्थी से ओएमआर शीट भरने में कोई त्रुटि हो गई तो वह शिक्षा सेवा चयन आयोग पहुंचकर अपना आवेदन दे सकते हैं। इसके लिए बाकायदा एक प्रारूप भी इंटरनेट मीडिया पर जारी किया गया। 

    अचानक प्रत्यावेदन लेकर अभ्यर्थियों के पहुंच जाने से आयोग के अधिकारी हैरान हो गए। पुलिस लगाकर अभ्यर्थियों को रोकने की कोशिश की गई, लेकिन वह नहीं माने। ऐसे में आयोग के पूछताछ काउंटर पर अभ्यर्थियों ने अपने प्रत्यावेदन दिए। इसमें कुछ ने अनुक्रमांक गलत अंकित किए हैं तो किसी ने केंद्र का कोड गलत लिख दिया है। कुछ के विषय चयन में भी त्रुटि हुई है।

    Monday, July 13, 2026

    10 साल में नहीं बढ़ी ₹4 की फल मद, बढ़ती महंगाई के बीच स्कूलों में पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल

    10 साल में नहीं बढ़ी ₹4 की फल मद, बढ़ती महंगाई के बीच स्कूलों में पोषण व्यवस्था पर उठे सवाल


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में मध्याह्न भोजन योजना के अंतर्गत विद्यार्थियों को सप्ताह में एक दिन ताजा एवं मौसमी फल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में जारी शासनादेश के अनुसार प्रति छात्र ₹4 की अनुमानित लागत निर्धारित की गई थी। शासनादेश में स्पष्ट किया गया था कि प्रत्येक सोमवार को विद्यार्थियों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध मौसमी फल मॉर्निंग स्नैक के रूप में वितरित किए जाएंगे, जिससे उन्हें अतिरिक्त पोषण मिल सके। 


    दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्ष 2016 से लेकर आज तक फल वितरण के लिए निर्धारित इस ₹4 प्रति छात्र की राशि में किसी संशोधन का उल्लेख नहीं मिलता। जबकि इसी अवधि में फलों सहित लगभग सभी खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ऐसे में शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि वर्तमान बाजार दरों में ₹4 में गुणवत्तापूर्ण मौसमी फल उपलब्ध कराना बेहद कठिन हो गया है।

    वर्ष 2016 में शुरू की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य बच्चों के पोषण स्तर में सुधार करना था और इसके लिए राज्य सरकार ने अलग से बजटीय प्रावधान भी किया था।  अब दस वर्ष बाद सवाल यह उठ रहा है कि जब महंगाई लगातार बढ़ी है, तब फल वितरण की प्रति छात्र लागत का पुनर्निर्धारण क्यों नहीं हुआ। शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का मूल उद्देश्य बच्चों को गुणवत्तापूर्ण पोषण उपलब्ध कराना है, तो वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप फल मद की राशि की समीक्षा और संशोधन किया जाना समय की आवश्यकता है।