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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, March 21, 2026

    शिक्षकों के निलंबन का अनुमोदन 60 दिनों में नहीं किया तो कार्रवाई, शासन स्तर पर 39 जिले चिन्हित

    शिक्षकों के निलंबन का अनुमोदन 60 दिनों में नहीं किया तो कार्रवाई, शासन स्तर पर 39 जिले चिन्हित 


    लखनऊ। शिक्षकों के निलंबन कर उसे 60 दिनों में अनुमोदित नहीं करना तथा निलम्बन के नाम अध्यापकों का उत्पीड़न करना माध्यमिक शिक्षा विभाग के जिले, मंडल व निदेशालय तक के अधिकारियों के लिए महंगा पड़ेगा। शासन ऐसे अधिकारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी।


    निलंबन के मामलों को तय समय सीमा से अधिक लटकाने की बढ़ती प्रवृत्ति के विरुद्ध शासन ने चेतावनी जारी की है। जिसमें कहा गया है कि निलंबन के मामले को 60 दिनों बाद भी लटकाए रखकर शिक्षकों के उत्पीड़न की शिकायतें बढ़ती जा रही है जो सिटिजन चार्टर के प्रतिकूल है। प्रदेश के 39 ऐसे जिले चिन्हित किए गए हैं, जहां इस तरह के मामलों को लंबे समय तक लटकाए जाने की दर्जनों शिकायतें हैं। 


    नियमानुसार निलम्बन के 60 दिनों के भीतर उसका अनुमोदन या अनानुमोदन का निर्णय नहीं होने पर कृत कार्यवाही को विधि शून्य माने जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद दर्जनों ऐसी शिकायतें हैं जिनमें पांच से छह माह बाद भी निलम्बन का अनुमोदन या अनानुमोदन नहीं किया गया है। इस प्रकरण को विधान परिषद में शिक्षक नेताओं की ओर से भी कई बार उठाया जा चुका है, जिसके जवाब में सरकार की ओर से कहा गया था कि इस तरह के मामलों की विशेष निगरानी की जा रही है। इसी कवायद में शासन स्तर पर 39 जिलों को चिन्हित किया गया है।

    KVS admission 2026: बालवाटिका और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कैसे होगा चयन, ऐसे करना होगा अप्लाई

    KVS admission 2026: बालवाटिका और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए रजिस्ट्रेशन शुरू, जानें कैसे होगा चयन, ऐसे करना होगा अप्लाई

    🔴 आवेदन हेतु वेबसाइट : https://admission.kvs.gov.in/


    नई दिल्ली। हर साल की तरह इस बार भी लाखों माता-पिता अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए अच्छे स्कूल की तलाश में हैं और इसी बीच केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) ने  2026-27 सेशन के लिए एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी है. 20 मार्च से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन शुरू हो चुका है और अब अभिभावक अपने बच्चों के लिए आवेदन कर सकते हैं. केंद्रीय विद्यालय देश के सबसे भरोसेमंद सरकारी स्कूलों में गिने जाते हैं, जहां पढ़ाई के साथ अनुशासन और अच्छा माहौल मिलता है, यही वजह है कि यहां एडमिशन के लिए हर साल बड़ी संख्या में आवेदन आते हैं.


    इस बार भी कक्षा 1 और बाल वाटिका में एडमिशन पूरी तरह ऑनलाइन होगा. अभिभावकों को आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर फॉर्म भरना होगा और आवेदन की अंतिम तारीख 2 अप्रैल 2026 तय की गई है. अधिकारियों ने सलाह दी है कि आखिरी समय की परेशानी से बचने के लिए समय रहते आवेदन पूरा कर लें.


    क्या है सिस्टम?
    कक्षा 1 में एडमिशन के लिए किसी भी तरह की लिखित परीक्षा या इंटरव्यू नहीं लिया जाता, बल्कि बच्चों का चयन लॉटरी सिस्टम के जरिए किया जाता है. यानी किस बच्चे का नाम आएगा, यह तय प्रक्रिया और किस्मत दोनों पर निर्भर करता है. लॉटरी के बाद जिन बच्चों का नाम सूची में आता है, उन्हें अपने संबंधित केंद्रीय विद्यालय में जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं और फीस भरने के बाद उनका एडमिशन पक्का हो जाता है.


    उम्र क्या होनी चाहिए?
    एडमिशन के लिए बच्चे की उम्र भी तय की गई है. 31 मार्च 2026 तक बच्चे की उम्र कम से कम 6 साल और ज्यादा से ज्यादा 8 साल होनी चाहिए, जबकि 1 अप्रैल को जन्मे बच्चों को भी इसमें शामिल किया जाएगा. विशेष जरूरत वाले बच्चों को उम्र में कुछ छूट भी दी जाती है.


    ये है जरूरी डेट्स
    जरूरी तारीखों की बात करें तो रजिस्ट्रेशन 20 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा. पहली चयन सूची 8 या 9 अप्रैल को जारी की जाएगी, जबकि दूसरी और तीसरी सूची क्रमशः 16 और 21 अप्रैल को जारी हो सकती है, अगर सीटें खाली रहती हैं.


    रिजर्वेशन सिस्टम?
    केंद्रीय विद्यालयों में आरक्षण की व्यवस्था भी लागू होती है ताकि हर वर्ग के बच्चों को मौका मिल सके. 25 प्रतिशत सीटें आरटीई के तहत, 15 प्रतिशत एससी, 7.5 प्रतिशत एसटी, 27 प्रतिशत ओबीसी और 3 प्रतिशत सीटें विशेष जरूरत वाले बच्चों के लिए तय की गई हैं.


    कैसे भर सकते हैं फॉर्म
    अभिभावकों को वेबसाइट पर जाकर “Admission 2026” सेक्शन में रजिस्ट्रेशन करना होगा, फिर बच्चे और अपने बारे में जानकारी भरनी होगी, जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे और अंत में फॉर्म सबमिट करके उसकी कॉपी रखनी होगी

    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन, गलत ढंग से दी गई पदोन्नति रद्द करने के बाद शासन का फैसला

    अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर मिलेगी प्रोन्नति


    20 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के 93 पदों का सृजन किया गया है। प्रवक्ता से सीधे प्रधानाचार्य पद पर गलत ढंग से की गई प्रोन्नति को निरस्त किए जाने के बाद यह निर्णय गया है। अब प्रवक्ता के पद पर 10 वर्ष की सेवा के बाद उप प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति मिलेगी। प्रवक्ता के 22 साल की सेवा पूरी होने पर उसे प्रधानाचार्य के पद पर प्रोन्नति दी जाएगी।

    इन विद्यालयों में उप्र समाज कल्याण राजपत्रित अधिकारी सेवा (प्रथम संशोधन) नियमावली का उल्लंघन कर 4800 रुपये पे ग्रेड पर कार्यरत प्रवक्ताओं को सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड पर पदोन्नति दी गई थी। अब संशोधन कर उप प्रधानाचार्य 2 का पद सृजित किया गया है। मामले में उप निदेशक जे.राम पर विभागीयम कार्रवाई की जाएगी।

    नए आदेशों के तहत यूपी में 93 सर्वोदय विद्यालयों में उप प्रधानाचार्य के एक-एक पद का सृजन किया गया है। पुनरीक्षित पे मैट्रिक्स लेवल 10 पर 56100-177500 रुपये वेतनमान निर्धारित किया गया है। समाज कल्याण विभाग के विशेष सचिव राजेन्द्र सिंह की ओर से पद सृजन का आदेश जारी कर दिया गया है।




    प्रधानाचार्य बनाए गए 100 प्रवक्ताओं की पदोन्नति रद्द, समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों का मामला

    19 मार्च 2026
    लखनऊ। समाज कल्याण विभाग के जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूलों में 100 प्रवक्ताओं की गलत ढंग से प्रधानाचार्य के पद पर हुई प्रोन्नति को रद कर दिया गया है।


    नियम विपरीत प्रवक्ता पद से सीधे प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति किए जाने पर शासन ने सख्त नाराजगी जताई है समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक जे. राम के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। समाज कल्याण विभाग यूपी में 101 जयप्रकाशनारायण सर्वोदय विद्यालय संचालित कर रहा है। 

    यहां कार्यरत करीब 100 प्रवक्ताओं को प्रधानाचार्य पर दो वर्ष पूर्व प्रोन्नति दी गई। प्रवक्ताओं को 4800 रुपये पे ग्रेड से सीधे 7600 रुपये पे ग्रेड के प्रधानाचार्य पर प्रोन्नति दी गई। इसका प्रस्ताव 11 जनवरी 2024 को भेजा गया और उस समय इस पद पर प्रोन्नति के लिए पोषक संवर्ग भी उपलब्ध नहीं था। नियम के अनुसार, इन्हें पहले उप प्रधानाचार्य बनाना चाहिए था, फिर प्रधानाचार्य के पद पर पदोन्नति किया जाना चाहिए था।

    यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

    यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियां ईद व रामनवमी के दिन नहीं जांची जाएंगी, स्थगित रहेगा उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य

    यूपी बोर्ड ने शिक्षकों को राहत देते हुए ईद और रामनवमी के दिन उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्थगित कर दिया है। बोर्ड के सचिव ने शिक्षकों की मांग पर यह फैसला लिया है। जिन मूल्यांकन केंद्रों पर प्रतियोगी परीक्षाएं हैं, वहां परीक्षा के बाद दोपहर एक बजे से मूल्यांकन शुरू होगा।


    यूपी बोर्ड सचिव ने कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों को राहत दी

    शिक्षकों की मांग पर यूपी बोर्ड सचिव ने जारी किया आदेश

    प्रतियोगी परीक्षा वाले केंद्र पर उस दिन एक बजे से मूल्यांकन


    प्रयागराज। हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बीच कुछ प्रतियोगी परीक्षाएं होने के साथ-साथ ईद और रामनवमी पर्व भी है। कुछ मूल्यांकन केंद्रों पर मूल्यांकन के दिन प्रतियोगी परीक्षा प्रस्तावित होने से भी संकट है। इसके अलावा मूल्यांकन कार्य कर रहे कुछ परीक्षक प्रतियोगी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी लगने से परेशान हैं।

    21 व 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित
    इन सभी मामलों में शिक्षकों व शिक्षक संगठनों की मांग पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के सचिव भगवती सिंह ने ईद पर 21 मार्च को तथा रामनवमी पर 26 मार्च को मूल्यांकन स्थगित किए जाने का आदेश जारी कर दिया है।

    बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान किया
    उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य एक अप्रैल तक चलना है। इस बीच पर्वों के दिन मूल्यांकन स्थगित करने की शिक्षक संगठनों की मांग का समाधान करते हुए बोर्ड सचिव ने अन्य समस्याओं का भी समाधान कर दिया है। कहा है कि जिन मूल्यांकन केंद्रों पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की एपीओ परीक्षा प्रस्तावित है, उन केंद्रों पर उस दिन मूल्यांकन कार्य परीक्षा संपन्न होने के बाद दोपहर एक बजे से शुरू कराया जाएगा।

    मूल्यांकन अवधि में ही वह दोनों कार्य पूर्ण हो सकेंगे
    बोर्ड सचिव ने कहा कि ऐसे में जिन शिक्षकों की ड्यूटी परीक्षा में कक्ष निरीक्षक के रूप में लगी है, वह वहां से ड्यूटी पूर्ण करने के बाद मूल्यांकन केंद्र पर उपस्थित होकर काॅपियां जांचेंगे। इस तरह मूल्यांकन अवधि के समय में ही वह दोनों कार्य पूर्ण कर सकेंगे। उन्होंने सभी परीक्षकों, अंकेक्षकों, उप प्रधान परीक्षकों से शुचितापूर्ण और गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।


    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी

    एडेड माध्यमिक के विषय विशेषज्ञों को भी पुरानी पेंशन, शासनादेश जारी 

    लखनऊ। प्रदेश के एडेड माध्यमिक स्कूलों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी पुरानी पेंशन की सुविधा मिलेगी। शासन ने इससे संबंधित एक आदेश शुक्रवार को जारी कर दिया। इससे प्रदेश भर में कार्यरत करीब 2200 विषय विशेषज्ञों को इसका लाभ मिलेगा।

    शुक्रवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चन्द्र ने इस संबंध में शासनादेश भी जारी कर दिया। आदेश में कहा गया है कि प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों को भी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के स्थान पर पुरानी पेंशन के विकल्प में सम्मिलित किए जाने के प्रस्ताव को स्वीकृत कर दिया गया है। 

    आदेश का माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री योगी का आभार व्यक्त किया है। विषय विशेषज्ञों को पुरानी पेंशन का लाभ दिए जाने का मुद्दा विधान परिषद में भी शिक्षक नेताओं ने कई बार उठाया था।


    Friday, March 20, 2026

    एक्सपोजर विजिट में लापरवाही, शिक्षकों और बच्चों को बजट के बावजूद शैक्षिक भ्रमण कराने में जिले हुए फिसड्डी, DGSE ने जताई नाराजगी

    एक्सपोजर विजिट में लापरवाही, शिक्षकों और बच्चों को बजट के बावजूद शैक्षिक भ्रमण कराने में जिले हुए फिसड्डी, DGSE ने जताई नाराजगी 

    मात्र बस्ती मंडल में शिक्षकों को कराया गया भ्रमण

    बच्चों को भ्रमण कराने की भी नहीं मिली जानकारी

    लखनऊ। प्रदेश में पीएमश्री योजना के तहत 150 शिक्षकों व राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में बच्चों को एक्सपोजर विजिट कराने के लिए पूर्व में बजट दिया गया था। किंतु इसमें जिला स्तर पर लापरवाही देखने को मिली है। शिक्षकों के मामले में मात्र बस्ती मंडल ने ही भ्रमण कराया है। वहीं बच्चों के भ्रमण की सूचना अभी तक किसी जिले से नहीं दी गई है। मुख्यालय ने इस पर नाराजगी जताई है।


    महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी की ओर से सभी मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक व बीएसए को भेजे पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के 150 शिक्षकों को एक्सपोजर विजिट कराना था। अभी तक मात्र बस्ती मंडल में शिक्षकों का एक्सपोजर विजिट कराया गया है। अन्य मंडल में इसके पूरा न कराने की स्थिति खेदजनक है। उन्होंने निर्देश दिया है कि इसकी जानकारी 31 मार्च तक हर हाल में पोर्टल पर उपलब्ध कराएं।

    श्रीहरिकोटा, इसी तरह राष्ट्रीय अविष्कार अभियान में 150 छात्रों को बंगलुरू, अहमदाबाद, गांधीनगर का चार दिन की एक्सपोजर विजिट कराना है। इसमें जिले से दो मॉडल का निर्माण कराने वाले विजेता को फरवरी में भ्रमण कराना था। किंतु कहीं से भी अभी तक एक्सपोजर विजिट की जानकारी परियोजना कार्यालय को नहीं दी गई है। यह स्थिति खेदजनक है। ऐसे में 31 मार्च तक बच्चों का भ्रमण कराते हुए इसकी सूचना उपलब्ध कराएं।

    संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग

    संसदीय समिति ने दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की, केंद्र व राज्य सरकारों से की अंशदान बढ़ाने की मांग


    संसदीय समिति ने पीएम पोषण योजना के तहत स्कूली बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की सिफारिश की है। समिति ने केंद्र और राज्य सरकारों से इसके लिए मदद बढ़ाने का आग्रह किया।

    स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत सुबह का नाश्ता मिले।

    नौवीं से बारहवीं कक्षा के छात्रों को भी दोपहर का भोजन मिले।

    केंद्र-राज्य सरकारें पोषण योजना में अपना अंशदान बढ़ाएँ।


    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय से जुडी संसदीय समिति ने देश भर के स्कूली बच्चों को पीएम पोषण के तहत दिए जाने वाले दोपहर के भोजन के साथ सुबह का हल्का नाश्ता देने की भी सिफारिश की है। साथ ही कहा है कि केंद्र सरकार को इसके लिए राज्यों को मदद देनी चाहिए।


    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि नाश्ता जो दिन का पहला आधार होता है, वह विद्यार्थियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह पढ़ाई के दौरान एकाग्रता के लिए आवश्यक उर्जा और स्मरण शक्ति में सुधार करता है।


    समिति की सिफारिश
    समिति ने सिफारिश की है कि ऐसे स्कूल जो सुबह की पाली में चलते है, उनमें बच्चों को हल्का नाश्ता देने की व्यवस्था तुरंत शुरू की जाए। इसके लिए केंद्र व राज्य सरकारें अपने-अपने अंशदान में वृद्धि करें। समिति ने इसके साथ ही स्कूलों में नौवीं से बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाले बच्चों को भी दोपहर का भोजन मुहैया कराने की सिफारिश की है।

    समिति का मानना है कि छात्रों की यह उम्र किशोरावस्था की होती है। ऐसे में उन्हें उस उम्र में पर्याप्त पोषण की सबसे अधिक जरूरत होती है। मौजूदा व्यवस्था में स्कूलों में आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों को ही दोपहर का भोजन दिया जाता है। समिति का कहना है कि यह ठीक वैसे ही जैसे बाल्टी भरने से पहले नल को बंद कर दिया जाए।

    Thursday, March 19, 2026

    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया

    देवरिया की निलंबित बीएसए और लिपिक अब तक फरार, 10 हजार के घोषित इनाम को बढ़ाकर 25 हजार किया गया


    अपडेट 19 मार्च 2026


    निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया

    16 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में फरार चल रहीं देवरिया की निलंबित बीएस शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह के खिलाफ गुलरिहा पुलिस ने कोर्ट से गैरजमानती वारंट जारी कराया है। इससे अब दोनों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। अगर वे सरेंडर नहीं करते हैं तो फिर कुर्की की कार्रवाई भी हो सकती है। इनके खिलाफ पहले से 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित है, जिसे बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की तैयारी है।

    पुलिस की टीमें लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया के अलावा दूसरे प्रदेशों में भी दबिश दे रही है। निलंबित बीएसए शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है, मगर वे भी जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं।

    वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर रखा है। पुलिस को उसका भी कोई सुराग नहीं मिला है। दोनों ने प्रयागराज में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की थी लेकिन गिरफ्तारी के डर से कोर्ट में भी दाखिल नहीं हुए।

    यह है मामला
    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह ने गुलरिहा इलाके के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के मकान में 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी। मौत से पहले सुसाइड नोट लिखकर देवरिया बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह सहित अन्य को इसके लिए जिम्मेदार बताया था। कृष्ण मोहन सिंह ने सुसाइड नोट में पैसे का जिक्र करते हुए साथी अध्यापक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह के बारे में भी बताया था। 

    इनका बयान दर्ज करने के बाद पुलिस ने सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेजवा चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप था कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था और बहाली कराने के लिए 16-16 लाख रुपये की रकम तय कराई थी। साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने जब इनकी तलाश शुरू की तो यह फरार हो गए।



    फरार बीएसए और लिपिक अग्रिम जमानत के प्रयास में पहुंचे हाईकोर्ट, मामले में मिली अगली तारीख 

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के केस में दोनों की तलाश में जुटी पुलिस 

    09 मार्च 2026
    गोरखपुर। शिक्षक खुदकुशी कांड में फरार चल रही देवरिया की निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। सोमवार को बीएसए की अर्जी पर सुनवाई होनी थी लेकिन किन्हीं वजहों से अगली तारीख पड़ गई वहीं, लिपिक की अर्जी पर अब मंगलवार को सुनवाई होनी है। इस मामले में पुलिस भी अपना पक्ष रखने के प्रयास में जुट गई। इसके साथ दोनों की गिरफ्तारी के लिए एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाला है।गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुर, सहबाजगंज निवासी शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने उत्पीड़न और नियुक्ति बहाली के नाम पर 16 लाख रुपये की मांग के चलते 20 फरवरी की रात में आत्महत्या कर ली थी।

    इस मामले में निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर केस दर्ज किया गया है। दोनों फरार हैं उनकी गिरफ्तारी के लिए एसएसपी गोरखपुर ने दस-दस हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। दोनों की तलाश में पुलिस की चार टीमें लगी है इस बीच उनकी तरफ से अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई है। पुलिस को जब इस बारे में जानकारी हुई तो एक टीम ने प्रयागराज में डेरा डाल दिया। आरोपितों की तलाश में पुलिस की घेराबंदी रही।

    पुलिस सूत्रों ने बताया कि सुनवाई न होने के कारण आरोपी कोर्ट नहीं पहुंचे और पुलिस को इंतजार करना पड़ा। पुलिस ने आरोपी बीएसए और लिपिक के अग्रिम जमानत को रद्द करने के लिए फाइल तैयार की है। सोमवार को बीएसए की अग्रिम जमानत पर सुनवाई तय थी, लेकिन विभिन्न कारणों से यह टल गई। अब अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद होगी। जबकि लिपिक की सुनवाई मंगलवार को होगी।

    बलिया जिले के हैं बीएसए और लिपिक
    मुख्य आरोपित संजीव सिंह बलिया जिले का मूल निवासी है, उसने देवरिया के रामनाथ कॉलोनी में भी मकान बनवाया है। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव भी बलिया की निवासी हैं। पुलिस की चार टीमें बलिया, देवरिया, लखनऊ और प्रयागराज में लगातार दबिश दे रही हैं और संभावित ठिकानों की तलाश में जुटी हैं। संजीव सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उसके चचेरे भाई और साले को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इससे पहले आरोपी बीएसए और लिपिक के परिवार से पूछताछ भी की जा चुकी है, लेकिन तब तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला था।



    शिक्षक आत्महत्या मामले में निलंबित बीएसए की याचिका पर आज होगी हाईकोर्ट में सुनवाई, मामले में एक और लिपिक निलंबित, फरार बीएसए की तलाश अभी भी जारी

    देवरिया। शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की खुदकुशी मामले में आरोपी निलंबित बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में सुनवाई नौ मार्च को होगी। इसके बाद निलंबित बीएसए के मामले में पुलिस की कार्रवाई आगे बढ़ने के आसार हैं। निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और उनके पटल सहायक संजीव सिंह के खिलाफ गोरखपुर जिले के गुलरिया थाने में शिक्षक कृष्णमोहन सिंह की आत्महत्या से जुड़े मामले में प्राथमिक की दर्ज है।

    देवरिया के शिक्षक कृष्णमोहन सिंह खुदकुशी प्रकरण में बीएसए कार्यालय के वरिष्ठ लिपिक तनुज श्रीवास्तव को शासन ने निलंबित कर दिया है। शनिवार की देर शाम को निलंबन की कार्रवाई होने के बाद से बीएसए कार्यालय में खलबली मच गई है। इस मामले में यह तीसरी बड़ी कार्रवाई हुई है। इस मामले में केस दर्ज होने के बाद बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। घटना के बाद से दोनों फरार हैं और उन पर 10 हजार इनाम भी घोषित हो चुका है।



    देवरिया की फरार बीएसए व लिपिक पर पुलिस ने घोषित किया 10–10 हजार रुपए का इनाम

    गोरखपुरः बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पर गोरखपुर पुलिस ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया है। शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में दोनों पर गुलरिहा थाने में मुकदमा दर्ज है और वे फरार हैं। पुलिस की चार टीमें देवरिया, बलिया, लखनऊ और प्रयागराज में दबिश दे रही हैं। देवरिया के गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 37 वर्षीय सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने 21 फरवरी की सुबह फंदे पर लटककर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह व सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह पर 16 लाख रुपये की मांग और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे।



    फरार बीएसए देवरिया और लिपिक का एक सप्ताह बाद भी पुलिस नहीं लगा सकी सुराग, पुलिस ने बीएसए के सरकारी आवास से डीवीआर किया बरामद, साक्ष्य मिटाने जाने की आशंका

    गोरखपुर। वरिष्ठ संवाददाता शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में निलंबित बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह पुलिस को एक सप्ताह से चकमा दे रहे हैं। दोनों के लखनऊ, प्रयागराज, देवरिया और बलिया जिले में स्थित संभावित ठिकानों पर पुलिस की चार टीमें दबिश दे रही हैं। शालिनी के करीबियों और परिवार वालों से पूछताछ की जा रही है। लेकिन वे भी कोई जानकारी देने से इनकार कर रहे हैं। वहीं घटना के बाद से ही लिपिक संजीव सिंह ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

    21 फरवरी को कृष्ण मोहन सिंह के आत्महत्या करने और सुसाइड नोट मिलने के बाद से निलंबित बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह फरार हैं। संजीव का मोबाइल फोन बंद होने की वजह से उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो पा रही है। हालांकि, पुलिस ने हाल ही में शालिनी के सरकारी आवास से वह डीवीआर बरामद कर लिया है, जिसके गायब होने से साक्ष्य मिटाने की आशंका जताई जा रही थी। इस डीवीआर में 20 फरवरी का फुटेज होने की संभावना है, जिसमें कृष्ण मोहन सिंह, अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह बीएसए कार्यालय में दिखे थे। 

    पुलिस इस फुटेज की फोरेंसिक जांच कराएगी। इस मामले में सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह को गिरफ्तार कर पुलिस जेल भेज चुकी है। अनिरुद्ध पर आरोप है कि उसने कृष्ण मोहन सिंह का परिचय लिपिक संजीव सिंह से कराया था इसके अलावा शिक्षक अपर्णा तिवारी और ओंकार सिंह से भी पूछताछ की जा चुकी है। दोनों ने बताया था कि उनसे भी पैसे की मांग की गई थी। ओंकार सिंह ने गोल्ड लोन लेकर नौ लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। वहीं कृष्ण मोहन सिंह ने 14 लाख रुपये ओंकार के जरिए भेजवाए थे, जो अनिरुद्ध के माध्यम से संजीव को दिए गए। 

    आरोपितों की तलाश के साथ ही बीएसए, लिपिक, सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक के अलावा अपर्णा तिवारी, ओंकार सिंह और मृतक कृष्ण मोहन सिंह के बैंक खातों की जांच जा रही है। यह विवरण मिलने की उम्मीद है, जिससे वित्तीय लेन-देन की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सकेगी।


    बीएसए और लिपिक की तलाश में चार जिलों में छापेमारी

    उधर, शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के मामले में आरोपित शालिनी श्रीवास्तव और लिपिक संजीव सिंह की तलाश में पुलिस ने दबिश तेज कर दी है। दोनों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कर चार जिलों में छापेमारी की जा रही है। वहीं पुलिस ने आरोपितों के साथ ही पीड़ितों के खातों का डिटेल बैंक से मांगी गई है। इससे लेनदेन का सुराग जुटाने का प्रयास किया जा रहा है। आरोपित बीएसए और लिपिक की तलाश में पुलिस की टीमें बलिया, लखनऊ, प्रयागराज और देवरिया में चिह्नित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।




    शिक्षक की आत्महत्या के मामले में बीएसए देवरिया निलंबित, शासन ने बैठाई जांच

    हाईकोर्ट के आदेश का एक साल में नहीं करा पाईं अनुपालन

    शिक्षक की आत्महत्या प्रकरण में की गई कड़ी कार्रवाई

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले में अंततः जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव पर कार्रवाई की गई। शासन ने उन्हें निलंबित करते हुए संयुक्त शिक्षा निदेशक, गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित किया है।

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि डीएम देवरिया द्वारा गठित जांच समिति की आख्या शासन को मिली है। इसमें पाया गया है कि उच्च न्यायालय में  दाखिल रिट याचिका में 13 फरवरी में पारित आदेश में बीएसए को स्पीकिंग ऑर्डर जारी करना चाहिए था या आदेश का अनुपालन करना चाहिए था।

    किंतु लगभग एक साल बीतने के बाद भी बीएसए कार्यालय द्वारा हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में कार्यवाही न कर अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन न करने और शासकीय कार्यों में लापरवाही बरतने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। उन्होंने संयुक्त शिक्षा निदेशक गोरखपुर मंडल को जांच अधिकारी नामित करते हुए शालिनी श्रीवास्तव को बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय से संबद्ध किया है।

    बता दें कि शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभाग के बाबुओं लाखों रुपये लेने और उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। उनकी आत्महत्या के बाद बीएसए समेत कई लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई थी। वहीं संबंधित बाबू पर पहले ही कार्यवाही की जा चुकी है। डीएम की रिपोर्ट के बाद अब बीएसए को भी निलंबित कर दिया गया है। जबकि विभाग की ओर से गठित कमेटी ने भी अपनी जांच रिपोर्ट शासन को दे दी है।



    शिक्षक की खुदकुशी में बीएसए देवरिया के निलंबन की संस्तुति

    देवरिया। देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को लखनऊ और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने संयुक्त रूप से बीएसए कार्यालय पहुंचकर जांच शुरू कर दी। सीडीओ की अध्यक्षता में गठित जिला कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी है। 

    कुशीनगर जिले के कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के हरैया बुजुर्ग के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन में सहायक अध्यापक थे। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। गत 20 फरवरी की रात उन्होंने फंदा लगाकर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

    इस मामले में गोरखपुर के गुलरिहा थाने में बीएसए, लिपिक और अन्य पर केस दर्ज है। प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सीडीओ राजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंचे थे। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम में शामिल संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, उप शिक्षा निदेशक (प्राइमरी) संजय कुमार उपाध्याय और मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) संगीता सिंह भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और जांच कमेटी ने एक-एक बिंदु पर देर रात तक जांच की। डीएम दिव्या मित्तल ने भी पहुंचकर जांच कमेटी से जानकारी ली। जांच कमेटी के सवालों से बीएसए असहज नजर आईं।

    जिला स्तर पर गठित कमेटी द्वारा देर रात डीएम को सौंपी गई जांच आख्या में यह तथ्य प्रकाश में आया है कि उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के बावजूद लगभग एक वर्ष तक बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। जांच में यह भी उल्लेखित किया गया कि आदेश के अनुपालन में विलंब एवं उदासीनता के कारण परिस्थितियां प्रतिकूल बनीं, जिससे यह अप्रिय घटना हुई।

    शिक्षक की आत्महत्या के मामले की दो कमेटियां जांच कर रही थीं। मैंने सीडीओ की अध्यक्षता में टीम गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन और विभागीय कार्रवाई की संस्तुति शासन को भेजी गई है। –दिव्या मित्तल, डीएम, देवरिया



    बेसिक शिक्षा विभाग की समिति पहुंची देवरिया, जुटाए तथ्य, शिक्षक के आत्महत्या मामले में बनाई गई है जांच कमेटी

    लखनऊ। कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार देवरिया के शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या मामले ने बेसिक शिक्षा विभाग के जिलों में स्थित कार्यालयों की एक बार फिर पोल खोल दी है। हालांकि, महानिदेशालय ने इस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विभागीय जांच के लिए एक चार सदस्यीय कमेटी बनाई है जिसने सोमवार को मौके पर जाकर तथ्य जुटाए हैं।

    शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह ने अपनी बहाली के लिए विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों पर लाखों रुपये घूस लेने का आरोप लगाया था। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने चार सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया था। साथ ही तत्काल भ्रमण कर जांच आख्या मांगी है। 

    इस समिति में उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी संजय कुमार उपाध्याय, संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. पवन सचान, एसडीएम व मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक, गोरखपुर मंडल शामिल हैं। शासन के कड़े निर्देश पर समिति सोमवार को देवरिया पहुंची और बीएसए कार्यालय में इस घटना से जुड़े कागजात देखे और उसकी कॉपी भी अपने साथ ले आए हैं। साथ ही विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों से इस मामले में पूछताछ भी की। जल्द ही यह समिति अपनी रिपोर्ट देगी। 

    इसके आधार पर विभाग अपने स्तर से इस मामले में कार्रवाई व विभागीय कार्यालयों में कामकाज को लेकर निर्देश जारी करेगा। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में जिला प्रशासन की ओर से भी जांच कराई जा रही है। इसकी रिपोर्ट भी विभागीय अधिकारियों को दी जाएगी। 



    शिक्षक को आत्महत्या के लिए उकसाने और लेनदेन के मामले में देवरिया बीएसए समेत तीन पर मुकदमा, मामले की गंभीरता को देखते हुए DGSE ने चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की 16 लाख देने पर भी नहीं हुआ था वेतन का भुगतान, पढ़ें पूरा मामला  


    गोरखपुर: शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद पत्नी गुड़िया की तहरीर पर गोरखपुर पुलिस ने बलिया निवासी व देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) शालिनी श्रीवास्तव, उनके कार्यालय में तैनात लिपिक संजीव सिंह और एक अन्य के विरुद्ध आत्महत्या के लिए उकसाने सहित धमकी देने का मुकदमा दर्ज किया है। डीएम देवरिया के निर्देश पर बीएसए ने संजीव सिंह को निलंबित कर दिया है। सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने भी उप शिक्षा निदेशक प्राइमरी, संजय कुमार उपाध्याय की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित की है।

    कुशीनगर के मूल निवासी कृष्ण मोहन सिंह परिवार के साथ गोरखपुर के गुलरिहा में रहते थे। वह कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन, गौरी बाजार (देवरिया) में सहायक अध्यापक थे। पत्नी गुड़िया सिंह ने बताया कि वर्ष 2021 में तत्कालीन बीएसए की ओर से कराई गई जांच के बाद कई शिक्षकों पर एफआइआर हुई। इसके बाद वह लोग हाई कोर्ट चले गए। 13 फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में आदेश आया। हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जब वह बीएसए कार्यालय पहुंचे तो उन्हें नया संकट झेलना पड़ा। 

    तहरीर के अनुसार, बीएसए शालिनी श्रीवास्तव और बाबू संजीव सिंह ने कृष्ण मोहन से 16 लाख रुपये मांगे। रकम देने के बाद और रुपये मांगे गए। बात न मानने पर फर्जी मुकदमे में जेल भेजने की धमकी दी गई। 20 फरवरी, 2026 को कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय बुलाया गया। वहां उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया और जेल भेजने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटकर उन्होंने ये बातें उनसे बताई थीं। अगली सुबह उनका शव फंदे से लटका मिला। मरने से पहले उन्होंने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा था, जिसमें पूरे घटनाक्रम का जिक्र है। 



    शिक्षक खुदकुशी मामले में बीएसए समेत तीन पर केस

    गोरखपुर/देवरिया। सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की खुदकुशी के मामले में रविवार को गुलरिहा पुलिस ने देवरिया की बेसिक शिक्षा अधिकारी शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह और एक अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी। शिक्षक की पत्नी गुड़िया सिंह की तहरीर पर केस दर्ज किया गया है। वहीं देवरिया की डीएम ने बीएसए कार्यालय के लिपिक को निलंबित करते हुए सीडीओ की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर एक हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के रहने वाले कृष्ण मोहन सिंह की देवरिया के गौरीबाजार ब्लॉक स्थित कृषक लघु मावि, मदरसन में सहायक अध्यापक पद पर तैनाती हुई थी। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज में अपने भाई के यहां रहते थे। उनकी पत्नी गुड़िया सिंह द्वारा गुलरिहा थाने में दी गई तहरीर के मुताबिक गत 20 फरवरी को उनके कृष्ण मोहन सिंह को बीएसए कार्यालय में बुलाकर अपमानित किया गया और फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी दी गई। शाम को घर लौटने पर उन्होंने पूरी घटना बताई। वह अत्यंत व्यथित दिखाई दिए। उसी रात उन्होंने घर के निचले कमरे में पंखे से लटककर आत्महत्या कर ली। सुबह जब वह कमरे में पहुंचीं तो उन्हें फांसी पर लटकते हुए पाया। मोहन सिंह की जेब से चार पेज का सुसाइड नोट मिला, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए गंभीर आरोप लगाए थे।



    विभागीय प्रताड़ना से त्रस्त शिक्षक ने जान दी, देवरिया के स्कूल में तैनात था कुशीनगर का शिक्षक

    सुसाइड नोट व वीडियो में बाबू पर प्रताड़ना व रुपये लेने का आरोप

    गोरखपुर/देवरिया। देवरिया के एक शिक्षक ने गुलरिहा क्षेत्र के शिवपुर सहबाजगंज नहर रोड स्थित आवास पर शनिवार की सुबह फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली। आत्महत्या से पहले शिक्षक ने चार पेज का सुसाइड नोट लिखा और एक वीडियो भी बनाया, जिसमें देवरिया के शिक्षा विभाग के एक लिपिक पर प्रताड़ित करने और 16 लाख रुपये लेने का आरोप लगाया है। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

    मूल रूप से कुशीनगर के कुबेरस्थान क्षेत्र के हरैया गांव निवासी 37 वर्षीय कृष्ण मोहन सिंह देवरिया के गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में शिक्षक थे। वह शिवपुर सहबाजगंज में बड़े भाई अवधेश सिंह के यहां परिवार के साथ रहते थे। शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे उन्होंने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। आरोप है कि शुक्रवार को देवरिया में संबंधित बाबू ने उन्हें बुलाकर रुपये को लेकर अपमानित किया था, जिससे वह आहत थे।

    16 लाख देने पर भी नहीं हुआ वेतन का भुगतान

    कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन में 2016 में जिन शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी, उनका वेतन 2022 में बाधित कर दिया गया था। इसमें कृष्ण मोहन भी शामिल थे। हाईकोर्ट ने वेतन भुगतान का आदेश दिया था। कृष्णमोहन के पास से मिले सुसाइड नोट के अनुसार बीएसए कार्यालय के एक बाबू ने 20 लाख रुपये मांगे। उसने कर्ज लेकर 16 लाख रुपये दिए। इसके बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया।

    अध्यापकों को प्रताड़ित करने के आरोप में कानपुर के बीईओ निलंबित, शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किया निलंबन का आदेश, बीएसए ने की थी संस्तुति

    अध्यापकों को प्रताड़ित करने के आरोप में कानपुर के बीईओ निलंबित, शिक्षा निदेशक बेसिक ने जारी किया निलंबन का आदेश, बीएसए ने की थी संस्तुति

    31 जनवरी को बेसिक शिक्षा अधिकारी ने जांच के बाद की थी निलंबन की संस्तुति

    कानपुर: बिधनू ब्लाक के शिक्षकों को प्रताड़ित करने और विभागीय आदेशों की अवहेलना करने, स्वेच्छाचारिता के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) भरत कुमार वर्मा को सोमवार को निलंबित कर दिया गया। बीएसए ने आरोपों की जांच के बाद शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज को निलंबन करने की संस्तुति की थी जिसके बाद शिक्षा निदेशक (बेसिक), प्रयागराज की ओर से निलंबन आदेश जारी किया गया है। इस आदेश को तत्काल प्रभाव से अमल में लाते हुए निलंबित बीईओ को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, नर्वल से संबद्ध कर दिया गया है। प्रकरण में आगे की जांच के लिए मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

    अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामताराम, पाल की ओर से जारी आदेश में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, कानपुर नगर के 31 जनवरी 2026 को भेजे गए पत्र का उल्लेख किया गया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बिधनू, बीईओ कार्यरत शिक्षकों के मानव संपदा पोर्टल पर अवकाश आवेदन जैसे बाल्य देखभाल और चिकित्सा अवकाश आदि को बिना किसी ठोस वजह के आपत्ति लगाकर निरस्त कर देते हैं। इससे शिक्षकों में रोष व्याप्त रहता है और विभाग की छवि धूमिल होती है। यह भी आरोप लगाया गया कि डीएम के स्तर पर बुलाई गई विभागीय समीक्षा बैठक में अक्सर अनुपस्थित रहते हैं और इसकी जानकारी विभाग को नहीं दी जाती। 

    शिक्षामित्रों और अनुदेशकों से संचालित समर कैंप का मानदेय समय से नहीं देते हैं। सेवानिवृत्त सहायक अध्यापक जियाउल्लाह खां की पत्रावली समय से न देने के भी आरोप हैं। गठित जांच समिति के समक्ष बीईओ ने आरोपों को लेकर अपना पक्ष न रखकर बार-बार जांच के लिए समय मांगते रहे। उन पर विभागीय कार्यप्रणाली में बाधा उत्पन्न करने के आरोप भी लगाए गए हैं। निलंबित बीईओ भरत कुमार वर्मा से उनका पक्ष जानने लिए बार-बार मोबाइल फोन नंबर पर काल किया गया लेकिन उन्होंने जवाब नहीं दिया।

    हालांकि, बीईओ ने बीएसए को पत्र लिखकर स्वास्थ्य खराब होने का हवाला देकर चिकित्सा अवकाश देने  को कहा है। वहीं, बीएसए सुरजीत  कुमार सिंह ने कहा कि अपर शिक्षा अ निदेशक (बेसिक) से जारी बीईओ  का निलंबन आदेश तत्काल प्रभाव से कि अमल में लाते हुए डायट, नर्वल से संबद्ध कर दिया गया है। 

    उच्चाधिकारियों ने निलंबन के बाद सा प्रकरण की जांच के लिए मंडलीय वि सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) को प्रस जांच अधिकारी नामित किया है। कि बीईओ का चिकित्सा अवकाश आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है।



    नियुक्ति से पहले शिक्षिका की विवाहित व्यक्ति से शादी दुराचरण नहीं : हाईकोर्ट, सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद

    नियुक्ति से पहले शिक्षिका की विवाहित व्यक्ति से शादी दुराचरण नहीं : हाईकोर्ट, सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद 


    प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सरकारी स्कूल में शिक्षिका के रूप में नियुक्ति से पहले किसी महिला की विवाहित व्यक्ति से दूसरी शादी को दुराचरण नहीं माना जा सकता है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान की एकलपीठ ने इस टिप्पणी के साथ रीना नामक शिक्षिका की याचिका स्वीकार करते हुए सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद कर दिया है और प्रतिवादी अधिकारियों को यह निर्देश दिया कि वे याची को उचित नोटिस देने के बाद नया और तर्कसंगत आदेश पारित करें।


    वर्ष 2015 में याची को प्राथमिक विद्यालय में सहायक शिक्षक पद पर नियुक्त किया गया। इस शिकायत पर कि उसने ऐसे व्यक्ति से विवाह किया जो पहले से ही विवाहित था, उसकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। कहा गया कि उसकी सेवाएं समाप्त करने से पूर्व कोई जांच नहीं की गई और उसे अपने पति के पहले विवाह के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। 


    कोर्ट ने कहा, यूपी सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली, 1956 का नियम 29 (2) यह प्रविधान करता है कि कोई भी महिला कर्मचारी सरकार की पूर्व अनुमति के बिना ऐसे पुरुष से विवाह नहीं करेगी, जिसकी पत्नी जीवित हो। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि यूपी बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1972 की धारा 19, राज्य सरकार को यह अधिकार देती है कि वह बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त बेसिक स्कूलों में शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के पदों पर भर्ती तथा नियुक्त व्यक्तियों की सेवा शर्तों के संबंध में नियम बनाए। 


    कोर्ट ने कहा कि आचरण नियमावली की प्रयोज्यता केवल उन लोगों तक सीमित है, जो सरकारी सेवा में आ चुके हैं। नियुक्ति से पहले के चरण में किसी व्यक्ति के खिलाफ इन नियमों का हवाला नहीं दिया जा सकता। चूंकि कथित वैवाहिक अनियमितता वर्ष 2009 से संबंधित है, यानी याची की 2015 में हुई नियुक्ति से काफी पहले की बात है, इसलिए आचरण नियमावली, 1956 के नियम 29 के प्रविधान याचिकाकर्ता के मामले पर स्पष्ट रूप से लागू नहीं होते।

    Wednesday, March 18, 2026

    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 का रिजल्ट जारी, जानें आगे कैसे होगा एडमिशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में

    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 का रिजल्ट जारी, जानें आगे  कैसे होगा एडमिशन और जरूरी डॉक्यूमेंट्स के बारे में 


    रिजल्ट देखें इस लिंक से : https://cbseit.in/cbse/2026/nvsrst/NVS_Cls6.aspx

    JNVST Class 6 Result 2026 : जवाहर नवोदय विद्यालयों में कक्षा 6 में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट जारी हो गया है. स्टूडेंट्स अपने रिजल्ट नवोदय विद्यालय समिति की वेबसाइट और सीबीएसई पोर्टल पर जाकर अपने नतीजे चेक कर सकते हैं. आइए जानते हैं रिजल्ट के बाद के स्टेप्स के बारे में.


    JNVST Class 6 Result 2026 : नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने 17 मार्च को कक्षा 6 के की प्रवेश परीक्षा (JNVST) का रिजल्ट जारी कर दिया. स्टूडेंट्स अब अपना रिजल्ट नवोदय की वेबसाइट navodaya.gov.in या सीबीएसई पोर्टल cbseit.in पर जाकर चेक कर सकते हैं. कक्षा 6 में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा देने वाले बच्चों को को इस रिजल्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा. अब एडमिशन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी.
     

    JNVST Class 6 Result 2026 देश में कुल 661 नवोदय विद्यालय हैं. नवोदय विद्यालयों में एडमिशन के लिए अभी कई प्रोसेस बाकी हैं. जिसमें डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन, मेडिकल चेकअप, एडमिशन फॉर्म भरना, स्कूल अलॉटमेंट और ज्वाइनिंग शामिल है. इसके अलावा पेरेंट्स काउंसलिंग/मीटिंग भी होती है. आइए जानते हैं पूरी प्रक्रिया को विस्तार से.


    कैसे चेक करें JNVST Class 6 रिजल्ट?

    सबसे पहले नवोदय की ऑफिशियल वेबसाइट navodaya.gov.in या cbseit.in पर जाएं.

    होमपेज पर आपको View JNVST Class 6 Result 2026 का लिंक दिखेगा, उस पर क्लिक करिए.

    अब आपके सामने एक नया पेज खुलेगा.
    यहां अपना Roll Number और Date of Birth भरिए.
    इसके बाद Submit बटन पर क्लिक करिए.
    आपका रिजल्ट स्क्रीन पर आ जाएगा.

    इसे डाउनलोड करके एक प्रिंटआउट जरूर निकाल लें.


    नवोदय विद्यालय में एडमिशन के लिए स्टेप्स

    डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन
    रिजल्ट जारी होने के बाद अब नवोदय विद्यालयों में एडमशन की प्रक्रिया शुरू होगी. अगर आपका चयन हो गया है तो डॉक्यूमेंट्स वेरीफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा. वेरीफिकेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट-

    जन्म प्रमाण पत्र
    आधार कार्ड
    निवास (Residence) प्रमाण
    कास्ट/कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू)
    पासपोर्ट साइज फोटो
    पिछली कक्षा की मार्कशीट
    ट्रांसफर सर्टिफिकेट


    हेल्थ चेकअप
    एडमिशन से पहले बच्चे का हेल्थ चेकअप कराया जाता है. फिटनेस और सामान्य स्वास्थ्य जांच जरूरी होती है.

    एडमिशन फॉर्म भरना
    स्कूल एडमिशन के लिए फॉर्म देता है. जिसे भरकर जमा करना होगा. पेरेंट्स के लिए सलाह है कि फॉर्म को ध्यान से और सही-जानकारी भरें.

    स्कूल अलॉटमेंट और ज्वाइनिंग
    आपको किस जवाहर नवोदय विद्यालय में एडमिशन मिलेगा इसकी जानकारी दी जाएगी. तय तारीख पर स्कूल में रिपोर्ट करना होगा.

    पेरेंट्स काउंसलिंग/मीटिंग
    जिस स्कूल में एडमिशन मिलेगा उसके नियम, हॉस्टल, पढ़ाई आदि की जानकारी पेरेंट्स को दी जाती है. माता-पिता को जरूरी निर्देश दिए जाते हैं.

    प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

    प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

    जल्द ही शुरू किए जाएंगे विद्यालयों के निर्माण कार्य

    लखनऊ। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा को और मजबूती देने के लिए समग्र शिक्षा के तहत 62 माध्यमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया जाएगा। कक्षा आठ तक की पढ़ाई करा रहे 30 विद्यालय 10वीं तक और 10वीं तक की पढ़ाई करा रहे 32 विद्यालय 12वीं तक अपग्रेड किए जाएंगे। इसके लिए 106 करोड़ का बजट स्वीकृत कर दिया गया है।


    जल्द ही इसका काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें प्रति हाईस्कूल की लागत 1.48 करोड़ और इंटर की 2.21 करोड़ है। इस तरह इन विद्यालयों की कुल लागत 106 करोड़ होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस राशि से इन विद्यालयों के लिए आवश्यक बिल्डिंग, क्लास रूम आदि का निर्माण कराएगा। साथ ही यहां पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।



    69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

    18 मार्च 2026
    प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के मामले में 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस एजी मसीह की बेंच में होगी। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर सरकार से याची लाभका प्रस्ताव सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

    पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि पीड़ित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर याची लाभ' की मांग कर रहे हैं। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती सूची को रद कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था, जिसमें आरक्षण नियमावली के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। 

    अब प्रकरण पिछले 18 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पैरवी न होने के कारण मामला लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि सरकार 19 मार्च की सुनवाई में 'याची लाभ' का प्रस्ताव प्रस्तुत करती है, तो यह विवाद समाप्त हो सकता है।



    69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा निदेशालय

    10 मार्च 2026
    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय घेर लिया। बेसिक शिक्षा निदेशक से मिले आश्वासन के बाद भी असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने धरना जारी रखा। बाद में पुलिस ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डेन पहुंचाया।


    आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग की। अभ्यर्थियों की तरफ से धनंजय गुप्ता ने कहा कि सरकार खुद ही जाकर नई डेट ले आती है। ऐसे में उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। धरने में राज बहादुर, हसीन, अनूप गुप्ता, बृजेश सिंह, श्यामलता सिंह शामिल थे। वहीं, पिछडा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक में अभ्यर्थियों ने फिर से याची लाभ देने की मांग उठाई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के साथ ही 29334 गणित-विज्ञान भर्ती के अभ्यर्थी भी सोमवार को धरना देने पहुंचे।

    इसलिए आक्रोश : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

    Tuesday, March 17, 2026

    अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में

    अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में 



    डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका

    डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका 

    17 मार्च 2026


    डीएलएड की स्क्रूटनी को 14 मार्च तक करें आवेदन

    6 मार्च 2026
    प्रयागराज। डीएलएड के विभिन्न बैच के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा के 25 फरवरी को घोषित परिणाम से असंतुष्ट प्रशिक्षु स्क्रूटनी के लिए 14 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि आवेदन पत्र की प्रति के साथ स्क्रूटनी फीस की मूल रसीद संलग्न कर 18 मार्च तक उपलब्ध कराएं। 

    स्क्रूटनी के लिए प्रशिक्षुओं को प्रति विषय 150 रुपये फीस देनी होगी। डायट प्राचार्य एक से 15 मार्च तक आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करेंगे। गौरतलब है कि 25 फरवरी को घोषित परिणाम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षु फेल हो गए थे। सर्वाधिक 101279 (57 प्रतिशत) प्रशिक्षु डीएलएड 2024 के प्रथम सेमेस्टर में फेल थे।



    डीएलएड परीक्षा की स्क्रूटनी के लिए आज से आवेदन, जानिए! कैसे और कहां करें आवेदन

    प्रयागराज । डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा वर्ष अक्टूबर व नवंबर 2025 की स्क्रूटनी के लिए आनलाइन आवेदन शनिवार से किए जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने अंतिम तिथि 14 मार्च निर्धारित की है। आफलाइन आवेदन नहीं स्वीकार किए जाएंगे। प्रशिक्षण-2018, 2021 एवं 2023 बैच के अभ्यर्थी http://www.btcexam.in पर आवेदन करेंगे, जबकि 2019, 2022 एवं 2024 के अभ्यर्थियों को https://www.updeledexam.in के माध्यम से आवेदन करना होगा।


    डीएलएड-2024 के प्रथम सेमेस्टर में आधे से अधिक परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण

    परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने परीक्षाओं का घोषित किया परिणाम

    1.84 लाख परीक्षार्थियों में से 43 फीसदी उत्तीर्ण, 3525 अनुपस्थित, 1334 का रिजल्ट अपूर्ण

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड प्रशिक्षण के विभिन्न बैच का अक्तूबर एवं नवंबर-2025 में आयोजित प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया।

    जारी परिणाम के अनुसार, वर्ष-2024 के प्रथम सेमेस्टर के कुल 1,84,576 परीक्षार्थियों में से 78,125 ही सफल हुए हैं। इनमें से 3525 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। जबकि, 1334 परीक्षार्थियों का परिणाम अपूर्ण व 309 परीक्षार्थियों के परिणाम किसी कारण से रोके गए हैं।

    इसी प्रकार, वर्ष 2017 के थर्ड सेमेस्टर का परिणाम शत प्रतिशत रहा। इसमें एक परीक्षार्थी ही पंजीकृत था, जो कि सफल रहा। वहीं, वर्ष-2018, 2019, 2021, 2022 व 2023 के भी परिणाम घोषित किए गए हैं। परीक्षार्थी अपना परिणाम विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन देख सकते हैं।

    जिन अभ्यर्थियों का परिणाम अपूर्ण है या रोका गया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यक अभिलेखों एवं औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा।


    स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश

    स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें,  बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश


    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। इससे पहले विद्यालयों के कील-कांटे दुरुस्त किए जा रहे हैं। साथ ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी की जा रही हैं। इस क्रम में सोमवार को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर निर्देश दिए।


    उन्होंने कहा कि किताबों की आपूर्ति जिला स्तर पर हो गई है। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूल चलो अभियान (एक अप्रैल) से पहले किताबें विद्यालयों में उपलब्ध हों। ताकि पहले दिन से बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि स्कूल चलो अभियान का विस्तृत निर्देश जारी किया जा चुका है। इसके तहत बच्चों का नामांकन कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी छात्र ड्राप आउट न हो।

    अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि आरटीई में जिन बच्चों को दो चरणों में निजी विद्यालयों में सीट मिली है, उनका दाखिला सुनिश्चित कराया जाए। तीसरे चरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराए जाएं। सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की गुणवत्ता व प्रगति सुनिश्चित की जाए। समग्र शिक्षा में केजीबीवी, सामुदायिक सहभागिता, कंपोजिट ग्रांट, विभिन्न निर्माण कार्य आदि में तेजी लाई जाए।

    उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल क्लास को प्रभावी बनाने के लिए बजट जारी किया गया है। इसका बेहतर रूप से संचालन कराया जाए। सामुदायिक सहभागिता के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों के सहयोग से प्रशिक्षण किया जाए। केजीबीवी के खाली कार्मिकों के पदों को जल्द भरा जाए। वहीं उनके यहां विभिन्न सुविधाओं के लिए जारी राशि का समय से पूरा प्रयोग किया जाए। माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रोजेक्ट अलंकार के लिए जारी राशि का समय से प्रयोग करें।

    जिन विद्यालयों को निपुण घोषित किया गया है। उनके लिए निपुण सम्मान समारोह आयोजित किया जाए। साथ ही अगले साल और अधिक विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए प्रयास किए जाएं। बैठक में महानिदेशक स्कूल शिक्षा व बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे। 

    29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष कटऑफ अंक की स्थिति स्पष्ट करने का हाईकोर्ट का निर्देश

    29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष कटऑफ अंक की स्थिति स्पष्ट करने का हाईकोर्ट का निर्देश

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों और कटऑफ को लेकर दाखिल याचिका पर बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता व याची अधिवक्ता को दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 


    याचियों के अधिवक्ता संजय कुमार यादव के अनुसार 29000 सहायक शिक्षक भर्ती में सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को रिक्त रह गई सीटों पर याचियों को शामिल करने का आदेश दिया था। 


    एडवोकेट संजय यादव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कटऑफ अंक के बारे में स्पष्ट किया है कि काउंसिलिंग प्रक्रिया के समय जिस जिले का न्यूनतम कटऑफ था, उससे अधिक अंक पाने वाले याचियों को ही नियुक्ति दी जाए।

    एडेड संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों को मिली सौगात, ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय

    एडेड संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों को मिली सौगात, ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय

    पहले 20 लाख थी ग्रेच्युटी की राशि, राजकीय विद्यालयों में पहले से लागू है व्यवस्था

    लखनऊ। सरकार ने प्रदेश के 4500 से अधिक अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के सवा लाख से अधिक शिक्षकों व कर्मचारियों को बढ़ा तोहफा दिया है। उनकी ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय लिया गया है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में यह व्यवस्था पिछले साल से लागू है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार एडेड विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 फीसदी हो जाने पर ग्रेच्युटी की राशि 20 से बढ़ाकर अधिकतम 25 लाख किए जाने का निर्णय लिया गया है। विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इसके लिए वित्त विभाग से सहमति मिल गई है।

    पिछले साल ही प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जा रहा है। इसके बाद से एडेड माध्यमिक विद्यालयों की ओर से इसके लिए मांग की जा रही थी। इस क्रम में यह निर्णय लिया गया है। वहीं सेवा के दौरान विकल्प देने पर व सेवा के दौरान निधन होने पर शिक्षकों-कर्मचारियों के परिजनों को ग्रेच्युटी नियमानुसार देने की व्यवस्था है।



    Monday, March 16, 2026

    यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

    यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

    अगले वर्ष लागू होगा नया पाठ्यक्रम, भाषा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ेंगे विद्यार्थी


    लखनऊ: उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) कक्षा नौ से 12 तक की हिंदी पढ़ाई का स्वरूप बदलने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार वर्ष 2027 से हिंदी का नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसनें रचनात्मक लेखन, अभिव्यक्ति और भाषा के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर रहेगा। खास बात यह है कि जहां अन्य विषयों में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाया गया है, वहीं हिंदी के लिए प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है। अब हिंदी के मौजूदा पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किए जाने की तैयारी है।


    हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा वाला यह प्रदेश रहा भारतेंद हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अज्ञेय जैसे कालजयी साहित्यकारों की विरासत वहां की पहचान रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश का हिंदी पाठ्‌यक्रम भी ततन ही समृद्ध और उच्च स्तर का होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी हिंदी को रटने के बजाय उसकी गहराई को समझते हुए अप्नी सृजनात्मक क्षमता को विकसित कर सकें। परिषद के अनुसार हिंदी भाषी प्रदेश में विद्यार्थियों की भाषाई जरूरतें भी विशिष्ट हैं।

    एनसीईआरटी की मैजूदा हिंदी पुस्तकों में कई बार प्रदेश के सामाजिक जीवन, लोक संस्कृति और स्थानीय संदर्भों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। इसी वजह से यूपी बोर्ड अपने स्तर पर हिंदी का ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करता है, जो विद्यार्थियों को भाषा के साथ साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ सके। अगे हिंदी को केवल व्याकरण और पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रखा जाएगा प्रस्तावित पाठ्यक्रम में कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध, संवाद लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक महत्व देने की योजना है। इससे छात्र केवल परीक्ष पास करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी सोच, अनुभव और भावनाओं को प्रभात्री ढंग से व्यक्त करना भी सीखेंगे।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी गई है। पाठ्यक्रम तैयर करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही हिंदी शिक्षण में नवाचार और व्यावहारिक उपयोगिता को भी प्रमुखता दी जाएगी। इससे प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी लेखन और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में मजबूत पहचान बना सकेंगे।

    1.33 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक और दो बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण, ड्रेस आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं होने पर मानवाधिकार आयोग की 16 अप्रैल को सुनवाई

    1.33 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक और दो बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण, ड्रेस आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं होने पर मानवाधिकार आयोग की 16 अप्रैल को सुनवाई


    लखनऊ। राजधानी और बहराइच के कुछ विद्यालयों में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने बेसिक शिक्षा निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ और बहराइच के बीएसए को तलब किया है। दोनों अधिकारियों को 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान आयोग में उपस्थित होना होगा।


    लखनऊ की भारतीय हरित खादी ग्रामोदाय संस्था को विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने का काम मिला था। संस्था ने वर्ष 2019-20 और 2020 21 में लखनऊ के मोहनलालगंज व चिनहट, बहराइच के रिसिया ब्लॉक में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति की थी।

    संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने पिछले साल मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी कि ड्रेस की आपूर्ति करने के बाद अब तक 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। इसको लेकर विजय शंकर ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से पत्राचार किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा अब तक भुगतान नहीं हुआ। अधिक रकम होने की वजह से उनकी संस्था व वह खुद आर्थिक तंगी की स्थिति में आ गए हैं। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लिया।

    12 मार्च को आयोग ने आदेश दिया है कि जो आपत्तियां विजय शंकर की तरफ से दर्ज कराई गई हैं वह बेसिक शिक्षा के निदेश को भेजी जाएं। उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ व बहराइच के बीएसए को 16 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे उपस्थित होना होगा। आदेश का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी निदेशक को दी है। सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय सुनाएगा। 

    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    यूपी बोर्ड मूल्यांकन में 2% गलती तो 3 साल के लिए डिबार, परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी

    यूपी बोर्ड के सचिव ने सभी केंद्रों के उपनियंत्रक को भेजे निर्देश

    अंकेक्षण के बावजूद गलती तो नकल अधिनियम में होगी कार्रवाई


    प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू हो रहा है। कॉपियों के मूल्यांकन में किसी प्रकार की त्रुटि न रह जाए, इसके लिए बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी 250 केंद्रों के उपनियंत्रकों (प्रधानाचार्यों) को सख्त निर्देश दिए हैं। मूल्यांकन के लिए भेजे निर्देश में लिखा है कि मूल्यांकन में दो प्रतिशत तक त्रुटि पाए जाने पर परीक्षक के मानदेय में से 85 प्रतिशत की कटौती की जाएगी तथा संबंधित परीक्षक को तीन वर्ष के लिए डिबार कर दिया जाएगा। एक प्रतिशत तक त्रुटि मिलने पर मानदेय में 50 प्रतिशत की कटौती होगी तथा दशमलव पांच प्रतिशत तक त्रुटि होने पर 25 प्रतिशत की कटौती की जाएगी।

    अंकेक्षण (दोबारा जांच) के बाद भी यदि किसी उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन में त्रुटि पाई जाएगी तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित अंकेक्षक की होगा। कॉपी जांचने या अंकेक्षण में लापरवाही पर बोर्ड के नियम /विनियम एवं उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के नियमानुसार संबंधित के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी। अंकेक्षक की व्यवस्था का उद्देश्य है कि मूल्यांकन कार्य शुद्ध और त्रुटिविहीन हो तथा त्रुटि/लापरवाही के कारण छात्रों के साथ अन्याय न हो। अंक सावधानी पूर्वक चढ़ाए जाएं क्योंकि कटिंग होने पर कम्प्यूटर अंक स्वीकार नहीं करेगा और परीक्षार्थी का परीक्षाफल अपूर्ण रह जाएगा।

    विज्ञान-सोशल की कॉपियों का पैनल मूल्यांकन
    हाईस्कूल की सामाजिक विज्ञान एवं विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं का पैनल मूल्यांकन होगा। सामाजिक विज्ञान के प्रथम खंड को इतिहास एवं राजनीति शास्त्र के साथ स्नातक प्रशिक्षित तथा द्वितीय खंड अर्थशास्त्र एवं भूगोल के साथ स्नातक प्रशिक्षित योग्यताधारी परीक्षक मूल्यांकन करेंगे। विज्ञान की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रथम खंड को भौतिक विज्ञान के साथ बीएससी प्रशिक्षित स्नातक तथा द्वितीय एवं तृतीय खंड को रसायन विज्ञान तथा जीव विज्ञान विषयों के साथ बीएससी प्रशिक्षित परीक्षक मूल्यांकन करेंगे।




    किसी भी प्रश्न का न हो गलत मूल्यांकन : भगवती सिंह
    यूपी बोर्ड के सचिव ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी किए निर्देश

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से आयोजित यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 में मूल्यांकन को लेकर सचिव भगवती सिंह ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कहा कि उप नियंत्रक और सभी मूल्यांकन केंद्र ध्यान रखें कि कोई भी उत्तर अमूल्यांकित न रह जाए और किसी भी उत्तर का गलत मूल्यांकन न हो। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन पूरी सजगता और जिम्मेदारी के साथ किए जाएं। इसके लिए उप प्रधान परीक्षक और परीक्षक समुचित व्यवस्था कर लें। 

    बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन प्रयागराज सहित प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। शिक्षक संगठनों के विरोध के बावजूद मूल्यांकन कार्य 18 मार्च से शुरू करने की तैयारी है। जो एक अप्रैल तक चलेगा। इसके लिए परीक्षक नियुक्त करने की प्रक्रिया चल रही है।

    सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि मूल्यांकन कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अगर कोई परीक्षक अनुपस्थित रहता है तो उप नियंत्रक स्वयं किसी की नियुक्ति नहीं करेंगे। परिषद की प्रतीक्षा सूची से ही विषयवार और केंद्रवार शिक्षकों की तैनाती की जाएगी।


    भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच भाषा विषयों में ही की जाए

    हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा में से 20 अंकों के वस्तुनिष्ठ प्रश्नों के उत्तर ओएमआर शीट पर दर्ज कराए गए हैं। जबकि शेष 50 अंकों की परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं पर हुई है। निर्देश दिया गया कि भाषा संबंधी त्रुटियों की जांच केवल भाषा विषयों में ही की जाए। परिषद ने मूल्यांकन को निष्पक्ष और त्रुटिरहित बनाने के लिए कई जरूरी निर्देश दिए हैं।

    निर्देश में यह भी कहा गया है कि अगर परीक्षार्थियों ने गणित, विज्ञान या अन्य किसी विषय में उत्तर बाएं पृष्ठ पर भी लिखे हैं तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। गणित और विज्ञान विषय की उत्तर पुस्तिकाओं में स्टेप मार्किंग लागू की जाएगी।


    यूपी बोर्ड मूल्यांकन के संबंध में जारी निर्देश, मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो, बाएं पन्ने पर उत्तर हो तो उसे भी जांचें, गणित-विज्ञान में स्टेप मार्किंग, भाषा में ही जांचें शाब्दिक त्रुटि

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त होने के बाद 18 मार्च से उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होगा। मूल्यांकन के लिए पूरे प्रदेश में 249 केंद्र बनाए गए हैं। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने मूल्यांकन के संबंध में सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों, डीआईओएस व मूल्यांकन केंद्र प्रभारियों को शनिवार को निर्देश भेजे हैं। सचिव ने परीक्षकों को सलाह दी है कि गणित एवं विज्ञान विषय की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में स्टेप मार्किंग की जाए।

    गणित, विज्ञान अथवा अन्य किसी भी विषय में यदि परीक्षार्थियों ने बाएं पृष्ठ पर भी उत्तर लिखे हों तो उनका भी समुचित मूल्यांकन किया जाए। भाषाई त्रुटि की जांच हिन्दी, अंग्रेजी जैसे भाषा के विषय में ही की जाए। अन्य विषयों की उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में उदार दृष्टिकोण अपनाएं। हाईस्कूल में 70 अंकों की लिखित परीक्षा के तहत 20 अंकों की वस्तुनिष्ठ परीक्षा ओएमआर शीट पर हुई है। शेष 50 अंकों की परीक्षा लिखित उत्तरपुस्तिकाओं पर कराई गई है। जांची जा रही उत्तरपुस्तिका में निर्धारित पूर्णांक 50 से अधिक प्राप्तांक किसी भी दशा में न हो। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि कोई भी प्रश्नोत्तर न तो अमूल्यांकित रहे और न ही किसी प्रश्नोत्तर का गलत मूल्यांकन हो।

    मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो

    सचिव ने केवल पारिश्रमिक बढ़ाने के उद्देश्य से अत्यधिक कॉपियां जांचने की प्रवृत्ति पर रोक लगाने के निर्देश दिए है। लिखा है कि मूल्यांकन में केवल 'खानापूर्ति' न हो। विद्यालयों के शिक्षकों के लिए प्रति दिन उत्तरपुस्तिकाओं की न्यूनतम संख्या (जैसे हाईस्कूल में 50 और इंटरमीडिएट में 45) अनिवार्य रूप से निर्धारित की जाए। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उप प्रधान परीक्षक प्रतिदिन दस से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन स्वयं नहीं करेंगे। प्रत्येक केन्द्र पर मूल्यांकन कार्य सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में हों एवं वेब कास्टिंग के माध्यम से राज्य एवं जनपद स्तरीय कंट्रोल रूम पर लाइव फीड सुनिश्चित कराई जाए। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की गोपनीयता भंग होने पर संबंधित के खिलाफ विभागीय अधिनियम/विनियम और उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई की जाएगी।



    18 मार्च से शुरू होगा यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन, प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए

    प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 18 मार्च से शुरू होकर एक अप्रैल तक प्रदेश के 249 मूल्यांकन केंद्रों पर किया जाएगा। मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह गोपनीय और पारदर्शी बनाए रखने के लिए परिषद ने सख्त निर्देश जारी किए हैं।

    परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं की गोपनीयता बनाए रखना अनिवार्य होगा। किसी भी स्तर पर मौखिक, लिखित, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उत्तर पुस्तिका अथवा मूल्यांकन से संबंधित किसी भी सूचना को साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है। गोपनीयता भंग होने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

    मूल्यांकन कार्य की निगरानी के लिए प्रत्येक जिले में एक पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएंगे। वहीं, प्रत्येक मूल्यांकन केंद्र पर जिलाधिकारी द्वारा स्टैटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। मूल्यांकन कार्य वॉयस रिकॉर्डर युक्त सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में कराया जाएगा। इसकी कनेक्टिविटी जनपद तथा राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम से होगी।

    मूल्यांकन कार्य में लगे शिक्षकों और कर्मचारियों को मोबाइल फोन या किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मूल्यांकन कक्ष में ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

    मूल्यांकन केंद्रों की सुरक्षा के लिए अवांछनीय तत्वों पर नजर रखने हेतु एलआईयू और सादे कपड़ों में पुलिसकर्मियों की तैनाती भी की जाएगी। मूल्यांकन कार्य समाप्त होने के बाद उत्तर पुस्तिकाओं के बंडलों को परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचाने के लिए प्रत्येक ट्रक के साथ दो सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

    परिषद के अनुसार, 17 मार्च को सभी मूल्यांकन केंद्रों पर उप नियंत्रक द्वारा मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। 



    हाईस्कूल की 700, इंटरमीडिएट की 600 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षक

    प्रयागराजः हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के महत्वपूर्ण विषयों की परीक्षाएं संपन्न हो चुकी हैं। अब शेष बचे विषयों की पांच दिवसों में परीक्षाएं संपन्न कराए जाने की तैयारी के बीच यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की रूपरेखा तय कर दी है। गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन के लिए पूरे मूल्यांकन अवधि में हाईस्कूल के परीक्षकों को अधिकतम 700 तथा इंटरमीडिएट के परीक्षकों को 600 से अधिक उत्तरपुस्तिकाएं आवंटित नहीं की जाएंगी। कला विषय के परीक्षक पूरी अवधि में अधिकतम 800 उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन कर सकेंगे। इस तरह एक परीक्षक एक दिन में हाईस्कूल की 50 तथा इंटरमीडिएट की 45 से ज्यादा कापियां नहीं जांच सकेंगे।

    18 फरवरी से आरंभ हुईं यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 12 मार्च को संपन्न होंगी। इसके बाद उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन के लिए 249 केंद्रों पर भेजा जाएगा। परीक्षा संपन्न होने के एक सप्ताह में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू कराया जाएगा। इस तरह 19 मार्च से मूल्यांकन शुरू कराया जा सकता है। उत्तरपुस्तिकाओं के जांचने क कार्य 15 दिन चलेगा। इसके लिए पिछले वर्ष की तरह करीब 1.48 लाख परीक्षक नियुक्त किए जाएंगे



    1.40 लाख से अधिक शिक्षक करेंगे बोर्ड परीक्षा की कॉपियों का मूल्यांकन, यूपी बोर्ड ने तेज की तैयारी

    ऑनलाइन प्रक्रिया के तहत चुने जाएंगे परीक्षक

    कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की लगातार निगरानी की जाएगी

    10वीं की एक कॉपी पर 14 और 12वीं की कॉपी पर 15 रुपये मानदेय

    सचिव ने बताया कि मूल्यांकन कार्य में लगाए गए शिक्षकों को हाईस्कूल की एक कॉपी को जांचने के एवज में 14 रुपये और इंटर की कॉपी जांचने पर 15 रुपये मानदेय दिया जाएगा। एक परीक्षक 10वीं की रोजाना 50 और 12वीं की 45 कॉपियां जांच सकेगा।

    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर बोर्ड ने तैयारी तेज कर दी है। प्रदेश भर के 1.40 लाख से ज्यादा शिक्षक कॉपियों का मूल्यांकन करेंगे। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षा 12 मार्च को समाप्त होगी।

    बताया गया कि संकलन केंद्रों से मूल्यांकन केंद्रों तक उत्तर पुस्तिकाएं ट्रकों से भेजी जाएंगी। ट्रक के साथ ड्यूटी पर लगाए गए कर्मचारियों के लिए अलग से वाहन की व्यवस्था रहेगी। ट्रक में किसी भी कर्मचारी के बैठने की अनुमति नहीं होगी।

    उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिये परीक्षकों की नियुक्ति होगी। आवश्यकता पड़ने पर मूल्यांकन - केंद्रों के उप नियंत्रक परिषद के पोर्टल पर उपलब्ध प्रतीक्षा सूची से भी परीक्षकों की ऑनलाइन नियुक्ति की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के स्ट्रॉन्ग रूम की तरह ही कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से मूल्यांकन केंद्रों की भी लगातार निगरानी की जाएगी।

    कॉपियों के हर पृष्ठ पर दर्ज हैं गोपनीय न्यूमेरिक नंबरः परिषद ने इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी किया है। पहली बार सभी विषयों की उत्तर पुस्तिकाओं के प्रत्येक पृष्ठ पर केंद्रवार गोपनीय न्यूमेरिक नंबर दर्ज किए गए हैं। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि मूल्यांकन अवधि में कला वर्ग का एक परीक्षक अधिकतम 800 कॉपियां जांच सकेगा। वहीं, विज्ञान वर्ग के इंटरमीडिएट में 600 और हाईस्कूल में 700 कॉपियां जांचने की सीमा तय की गई है। परीक्षकों के मानदेय में वृद्धि का कोई प्रस्ताव नहीं है, क्योंकि वर्ष 2019 और 2023 में पहले ही मानदेय बढ़ाया जा चुका है।



    यूपी बोर्ड : 18 मार्च से कॉपियों के मूल्यांकन शुरू होने के आसार, शासन को भेजा प्रस्ताव

    मंजूरी मिलने के बाद तिथि घोषित होगी, 249 केंद्रों पर मूल्यांकन शुरु होने की संभावना, 12 मार्च को समाप्त होंगी परीक्षाएं

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाएं 12 मार्च को समाप्त हो जाएंगी। इसके बाद 18 मार्च से प्रदेश के 249 केंद्रों पर उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन शुरू होने की संभावना है। इस संबंध में बोर्ड के सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद मूल्यांकन प्रक्रिया की तिथि घोषित की जाएंगी।


    प्रदेश के 8033 केंद्रों पर हो रही अधिकांश मुख्य विषयों की परीक्षाएं पूरी हो चुकी हैं। होली के बाद नौ मार्च से परीक्षाएं फिर से शुरू होंगी। उस दिन प्रथम पाली में हाईस्कूल उर्दू तथा द्वितीय पाली में इंटरमीडिएट के मनोविज्ञान, शिक्षा शास्त्र और तर्कशास्त्र विषय की परीक्षाएं होंगी।

    बोर्ड का लक्ष्य है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पूरा कर 15 अप्रैल तक परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाए। इस वर्ष बोर्ड परीक्षा में 52 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं, हालांकि इनमें से बड़ी संख्या में परीक्षार्थियों ने परीक्षा छोड़ दी है।

    पिछले वर्ष के आंकड़ों के अनुसार हाईस्कूल में 27,32,165 और इंटरमीडिएट में 27,05,009 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। वर्ष 2025 में बोर्ड परीक्षा 24 फरवरी से शुरू होकर 2 अप्रैल तक मूल्यांकन प्रक्रिया चली थी। इसके बाद 25 अप्रैल को परीक्षा परिणाम घोषित किया गया था। उस वर्ष हाईस्कूल में 90.11 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 81.15 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए थे।

    टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

    टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के विरोध में चलाए जा रहे अभियान में काफी शिक्षक जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए महासंघ ने पाती लिखने के अभियान को एक सप्ताह बढ़ाने का निर्णय लिया है।

    महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि आरटीई एक्ट 2009 तथा एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए चलाए जा रहे शिक्षक की पाती अभियान में शिक्षकों की व्यापक सहभागिता हुई है। एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, नेता प्रतिपक्ष व मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ई-मेल से अपनी मांगों को भेजा है।

    अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा दे। ताकि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान शिक्षक समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ विषय है।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी हरिशंकर राठौर ने बताया कि शिक्षक की पाती अभियान 9 से 15 मार्च तक घोषित था। शिक्षकों के उत्साह को देखते हुए अभियान को 16 मार्च से अगले एक सप्ताह तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की सेवा सम्मान को देखते हुए महासंघ में अब तक 23 संगठन जुड़कर संघर्ष कर रहे हैं। 




    तीन लाख शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में लिखी पाती

    लखनऊ। देश भर में 8वीं कक्षा तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से पाती लिखने का अभियान जारी है। इसके तहत तीन दिन में सवा तीन लाख से ज्यादा शिक्षकों ने टीईटी से राहत देने के लिए राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखा है। 

    महासंघ ने कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके साथ यह अन्यायपूर्ण निर्णय है। इससे उनको राहत दी जानी चाहिए। पूर्व में शिक्षा मंत्री ने इसके लिए सकारात्मक पहल की बात कही थी लेकिन आज तक केंद्र सरकार द्वारा इस पर कुछ नहीं किया गया। इससे देश भर के शिक्षकों में नाराजगी है। यदि जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो शिक्षक अपने आंदोलन को तेज करेंगे। 



    टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों ने लिखी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को पाती

    प्राथमिक शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के खिलाफ अभियान शुरू किया। शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और अन्य को ई-मेल और पोस्टकार्ड भेजकर टीईटी को समाप्त करने की मांग की है।


    लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्य के खिलाफ सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शिक्षक पाती लिखने का अभियान शुरू किया। इसके तहत शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाई जा रही है।अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के करीब 1,07000 शिक्षकों ने पत्र भेजकर टेट से राहत देने की अपील की। महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम 15 मार्च तक अनवरत चलेगा।

    आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पूर्व में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मिला था और उन्होंने इस बारे में सकारात्मक आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल केंद्र द्वारा नहीं किया गया है। इससे प्रदेश के एक लाख 86हजार शिक्षक उदास एवं हताश है। उन्होंने बताया कि एनसीटीई के गलत फैसले पूरे देश से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। 


    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती

    लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से एक सप्ताह तक प्रदेश व देश के शिक्षक पाती लिखने का अभियान चलाएंगे। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाएंगे।

    महासंघ ने कहा कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। बता दें कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के लिए एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने महासंघ का गठन किया है।


    जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 20 संगठन

    तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा।

    नौ मार्च से ‘शिक्षक की पाती’ अभियान से होगी शुरुआत


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।

    आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।

    तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।

    महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।






    टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 23 शिक्षक संगठनों की 3 मई को लखनऊ कूच की तैयारी

    लखनऊ । शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क से सदन तक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। इसके लिए लखनऊ में संयुक्त मोर्चा के सभी शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ बनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संगठन सम्मिलित है।

    ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय के आह्वान पर हुई सभी शिक्षक संगठनों की बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, जूनियर शिक्षक संघ, विशिष्ट BTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश BTC शिक्षक संघ, TSCT सहित 23 शिक्षक संगठन सम्मिलित है और सभी संगठनों ने सर्वसहमति से TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का ऐलान किया है।

    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने एकजुट संघर्ष को शिक्षकों की सेवा शर्तों व सम्मान की लड़ाई बताया साथ ही उन्होंने कहा कि कोई नियम आदेश आने के बाद लागू होता है न कि पूर्व से। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक एकतरफा बताया वही अटेवा प्रमुख विजय कुमार बंधु ने टीईटी अनिवार्यता को सरकार की तानाशाही बताकर गरीबों की शिक्षा पर कुठाराघात करार देते हुए निजीकरण को बढ़ावा करार दिया।

    प्राथमिक शिक्षक संघ मीडिया प्रभारी हरि शंकर राठौर ने जानकारी दी कि टीईटी आंदोलन कों चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया जिसमें 3 मई को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ के ईको गॉर्डन में ऐतिहासिक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद शाम को शिक्षक विधानसभा की ओर कूच करेंगे। इससे पहले दिनांक 9 मार्च से 15 मार्च तक शिक्षकों की पाती अभियान चलेगा व 13 अप्रैल कों सभी जिला मुख्यालयों पर सायं 4 बजे से विरोध प्रदर्शन कर मशाल जुलुस निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम प्रधानमंत्री भारत सरकार कों ज्ञापन भेजा जायेगा।



    टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में तीन मई को लखनऊ में रैली करेंगे शिक्षक, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ तेज करेगा आंदोलन


    लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए शिक्षकों का आंदोलन तेज हो रहा है। इसके तहत गठित अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने तीन मई को राजधानी लखनऊ में रैली व विधानसभा तक मार्च करने की घोषणा की है।


    महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा । कि इसके तहत पहले चरण में नौ से 15 मार्च के बीच शिक्षक की पाती लिखने का कार्यक्रम होगा। इसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष को ई मेल, पोस्टकार्ड से टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में पत्र लिखेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालेंगे।

    तब भी मांगे नहीं मानी गई तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में एकत्र होकर रैली करेंगे। साथ ही विधानसभा तक मार्च भी करेंगे। महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि फिर भी इसका समाधान नहीं हुआ तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का शिक्षक घेराव करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक बैठक फिर से राजधानी में सभी संगठनों की होगी।


    धर्मेंद्र प्रधान के बयान से नाराजगी

    शिक्षक-कर्मचारी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कहा कि पहले आप मेरी सरकार बनाओ, फिर हम टीईटी की अनिवार्यता पर विचार करेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय एवं विजय कुमार बंधु ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान सौदेबाजी है।


    महासंघ के समर्थन में आए कई संघ

    अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के समर्थन में कई और शिक्षक संगठन आए हैं। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि टीईटी की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने पत्र लिखकर समर्थन दिया है।