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Tuesday, August 22, 2119

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    Saturday, May 25, 2024

    उच्च शिक्षा में विज्ञान पढ़ने पर मिलेगी इंस्पायर स्कॉलरशिप

    उच्च शिक्षा में विज्ञान पढ़ने पर मिलेगी इंस्पायर स्कॉलरशिप


    उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने बाले विद्यार्थीयों के लिए इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना शुरू की गई है। इंटर उत्तीर्ण कर मेधावी विद्यार्थी विज्ञान क्षेत्र की शिक्षा में जाते हैं तो योजना के तहत हर साल 60 हजार रुपये तक लाभान्वित सकते हैं। योजना का लाभ इंजीनियरिंग, मेडिकल के साथ परास्नातक, रिसर्च और अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले क्यार्थियों को मिलेगा।


     सभी बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्रओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग आने की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देता है। योजना का मकसद अर्तित कर देश के विज्ञान और तकनीकी रिसर्च को बेहतर बनाना है। बताया कि विज्ञान से स्नातक और परास्नताक की पढ़ाई करने वाले छात्र-छासओं को पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस तरह साल भर में विद्यार्थियों को 60 हजार रुपये मिलेंगे। इंस्पायर स्कॉलरशिप छात्रों को पांच वर्ष कोर्स पूरा होने तक दी जाती है।


    आवेदक का भारतीय स्टेट बैंक शाखा में बचत खाता होना जरूरी है। आवेदकों को अपने संस्थान के अध्यक्ष को हस्ताक्षरित वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट भी देनी होगी स्वलरशिप जारी करने के लिए बीएससी, एमएससी की मार्कशीट भी जमा करनी होगी। पहले साल की प्रदर्शन रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद ही स्कॉलरशिप जारी की जाएगी। यदि विद्यार्थीका शैक्षणिक स्कोर दूसरे वर्ष भी अच्छा रहता है तो दूसरे साल को स्कॉलरशिप बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दी जाएगी।


    इस वर्ष के इंस्पायर स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तिथि व आवेदन संबंधी जानकारी के लिए वेबसाइट https://online-inspire.gov.in को देखते रहे।


    इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

    आवेदन करने के लिए कक्षा 10 और 12 की मार्कीट और प्रमाण पत्र के साथ जाति प्रमाण पत्र, कॉलेज के प्रधानाचार्य का हस्तवधरित समर्थनएसई की पासबुकली स्वतक और परास्नातक में दाखिले के समय भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान केमिस्ट्री पिक सहित अन्य विज्ञान के विषयों का चयन करने पर योजना का लाभ मिलेगा।

    अब सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी के, पुस्तकालय का उपयोग बढ़ाने को DGSE का फरमान

    अब सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी केपुस्तकालय का उपयोग बढ़ाने को DGSE का फरमान

    ■ बच्चों को लाइब्रेरी से पुस्तक ले जानी की देंगे सुविधा

    ■ छात्रों में पुस्तकालय के प्रति रुझान बढ़ाने की कोशिश


    प्रयागराज । समग्र शिक्षा अभियान (माध्यमिक) के तहत प्रदेश के 2306 राजकीय विद्यालयों में पुस्तकालयों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र-छात्राओं को सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी में अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने नौ मई को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी किया है। शैक्षिक पंचाग में माहवार उल्लिखित विभिन्न दिवसों पर पुस्कालय में गतिविधियां कराई जाएंगी।

    रीडिंग क्लब, प्रश्नोत्तरी क्लब, साहित्यिक क्लब, वाद-विवाद क्लब आदि के माध्यम से पुस्तकालय की गतिविधियों को सक्रियता बढ़ाएंगे। विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुस्तकालय में बैठकर पढ़ने के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। कुछ निश्चित अवधि (अधिकतम 15 दिन) के लिए विद्यार्थियों को पुस्तक घर ले जाने की सुविधा भी प्रदान करने की व्यवस्था होगी। पुस्तकालय का दायित्व देखने वाले शिक्षक पुस्तकों की प्रदर्शनी, समारोह, प्रतियोगिताएं, पुस्तक मेले आदि का आयोजन भी करेंगे।


    प्रत्येक स्कूल में गठित होगी छात्र पुस्तकालय समिति

    छात्र-छात्राओं में पठन-पाठन के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजकीय स्कूल में छात्र पुस्तकालय समिति भी गठित होगी। इसके अध्यक्ष प्रधानाचार्य होंगे और पुस्तकालयाध्यक्ष या इंचार्ज पुस्तक सहायक सदस्य सचिव बनाए जाएंगे। स्कूल में पढ़ाए जाने वाले तीन मुख्य शिक्षक के एक-एक शिक्षक और विभिन्न कक्षाओं से पुस्तकालय कप्तान चयनित पांच छात्र समिति के सदस्य होंगे। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के एक सदस्य समिति के आमंत्रित सदस्य होंगे। महीने में कम से कम एक बार समिति की बैठक होगी।



    माध्यमिक विद्यालयों की लाइब्रेरी में बनेंगे रीडिंग कॉर्नर

    लखनऊ। सूबे के माध्यमिक विद्यालयों के पुस्तकालयों में छात्रों को पढ़ने के लिए रीडिंग कॉर्नर बनाए जाएंगे। छात्र-छात्राओं में पढ़ने की प्रवृत्ति विकसित करने के उद्देश्य से ऐसी व्यवस्था की जाएगी। पुस्तकालयों के सुचारू संचालन के लिए विद्यालयों में स्टूडेंट लाइब्रेरी काउंसिल का गठन किया जाएगा। यह काउंसिल पुस्तकालयों का संचालन करेगी। 


    इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा का निर्देश पत्र सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि पुस्तकालय विद्यालय का महत्वपूर्ण अंग हैं। इसमें उपलब्ध सुविधाएं छात्रों के पढ़ने और समझने में सहयोग प्रदान करेंगी। साथ ही विद्यार्थियों की मौखिक एवं लिखित भाषा सुदृढ़ होगी। समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय के सुदृढ़ीकरण के लिए यह व्यवस्था की गई है।

    हाईकोर्ट के निर्देश पर माध्यमिक विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था के आकलन की कवायद हुई तेज

    हाईकोर्ट के निर्देश पर माध्यमिक विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था के आकलन की कवायद हुई तेज 


    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर न्यायालय के निर्देश पर विभाग ने कवायद तेज कर दी है। विभाग ने सभी डीआईओएस से जिला स्तर पर स्कूल प्रबंधक, प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर इसकी न्यायालय के आदेश समीक्षा करने पर माध्यमिक शिक्षा में कवायद तेज के निर्देश दिए हैं।


    विभाग ने कहा है कि इन बैठक के जरिये विद्यालयों में सुरक्षा व्यवस्था का आकलन किया जाए। गैर संरचनात्मक सुरक्षा उपाय के तहत विद्यालयों के फर्नीचर, अलमारी, ब्लैक बोर्ड, सीलिंग फैन आदि के गिरने की आशंका न रहे, इसके लिए जरूरी निरीक्षण कर लिया जाए।


     प्रयोगशाला में रखे रसायन व अन्य ज्वलनशील पदार्थ का रखरखाव भी ठीक से किया जाए। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने इसके लिए पूर्व में हुई बैठक के अनुसार एक प्रारूप जारी करते हुए सभी जिलों से सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी भी मांगी है। 

    समय से जारी करें परीक्षा परिणाम ताकि वजीफे से वंचित न हों छात्र

    समय से जारी करें परीक्षा परिणाम ताकि वजीफे से वंचित न हों छात्र

    विवि की लेटलतीफी से तमाम छात्रों को नहीं हो पाता भुगतान, शासन तैयार कर रहा कार्ययोजना, ऑनलाइन फॉर्म भरना भी होगा आसान



    लखनऊ। विश्वविद्यालयों को परीक्षा परिणाम जारी करने में छात्रवृत्ति के शेड्यूल (नियमावली) का भी ध्यान रखना होगा। रिजल्ट समय से जारी न होने के कारण तमाम छात्र योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं, इसलिए शासन इस समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इतना ही नहीं विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया भी आसान की जाएगी।



    बीटीसी और नर्सिंग समेत तमाम पाठ्यक्रमों का रिजल्ट समय से नहीं आता है। जब तक इन छात्रों का रिजल्ट आता है, तब तक समाज कल्याण विभाग भुगतान के लिए डाटा लॉक कर चुका होता है। साथ ही पोर्टल पर रिजल्ट अपलोड न करने वाले छात्रों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है। यह लेटलतीफी तो विश्वविद्यालय स्तर से होती है, लेकिन इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। 


    इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने तय किया है कि सभी विश्वविद्यालयों के साथ बैठकर कार्ययोजना तैयार होगी कि वे छात्रवृत्ति सूची अपलोड करने की अंत्तिम तिथि से पहले अपना रिजल्ट जारी करें। इसी तरह से सभी विश्वविद्यालयों को अपनी फीस निर्धारित करनी होगी। फीस निधर्धारित न होने से भी तमाम छात्र योजना का लाभ नहीं पा पाते हैं। 


    जिन शिक्षण संस्थानों में एक निश्चित संख्या से ज्यादा विद्यार्थी होंगे, उन्हें एक से ज्यादा लॉगइन, पासवर्ड और डिजिटल साइन दिए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों का डाटा अपलोड करने में उन्हें  अभी तक एक शिक्षण संस्थान को एक ही डिजिटल साइन दिया जाता है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन फॉर्म भी छोटा किया जाएगा। इसके अलावा जो जानकारियां आधार कार्ड, विवि के रिकॉर्ड और डीजी लॉकर से ऑटो फेम (स्वतः ग्रहण) की जा सकेंगी, उसे छात्रों से नहीं भरवाया जाएगा।


    शासन उच्च स्तर पर इन समस्याओं के निराकरण के लिए विचार कर रहा है। इसके लिए शीघ्र ही सभी विश्वविद्यालयों के साथ बैठक भी होगी। उनकी दिक्कतें व सुझाव सुनने के बाद नियमावली पर जरूरी बदलाव किए जाएंगे।


    बढ़ सकती है आय की सीमा

    प्रदेश में सामान्य, पिछड़े व अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए सालाना आय की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर दाई लाख रुपये करने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट से ही लगेगी।

    9 जून को होगी बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा

    9 जून को होगी बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा


    मेरठ। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा को लेकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। नौ जून को प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। मेरठ समेत आस पास के जिलों में अभ्यर्थियों की संख्या के हिसाब से केंद्र निर्धारण कर लिया गया है। वहीं हापुड़ व बागपत में अभ्यर्थियों की संख्या कम होने के कारण माना जा रहा है कि हापुड़ के अभ्यर्थी गाजियाबाद व बागपत के अभ्यर्थी मेरठ में परीक्षा देंगे।


    बीएड : वाराणसी में सबसे ज्यादा 52 और प्रयागराज में 33 केन्द्रों पर होगी 9 जून  को बीएड प्रवेश परीक्षा 

    नौ जून को 468 केंद्रों पर होनी है परीक्षा, 2.21 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल


    झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से नौ जून को होने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए पूरे प्रदेश में 468 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रदेश में वाराणसी में सबसे ज्यादा 52 परीक्षा केंद्र बने हैं। जबकि, सीतापुर समेत पांच जिलों में सबसे कम यानी दो-दो ही परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।


    बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार 2.21 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बीयू कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा परीक्षार्थी होने के कारण सर्वाधिक 52 केंद्र वाराणसी में बनाए गए हैं। जबकि प्रयागराज में 33 और गोरखपुर में 30 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। 


    वहीं, बलिया में 20, जौनपुर में 19, गाजियाबाद में 18, अंबेडकर नगर में 17, लखनऊ, आगरा, कुशीनगर में 15-15, आजमगढ़, कानपुर नगर, गाजीपुर, देवरिया में 14-14, मेरठ में 11, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, चंदौली में 10-10 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन जिलों में बने 10 से कम केंद्र प्रवेश परीक्षा के लिए अयोध्या में नौ, सुल्तानपुर, मुरादाबाद में आठ आठ, प्रतापगढ़ में सात, बरेली, बस्ती, मऊ में छह-छह और बिजनौर, इटावा में पांच-पांच केंद्रों पर परीक्षा होगी। बाराबंकी, बुलंदशहर, एटा, जालौन, झांसी, लखीमपुर खीरी, मथुरा, मिर्जापुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर में चार- चार केंद्र बने हैं। वहीं अमरोहा, बांदा, भदोही, बदायूं, गोंडा, हरदोई, रायबरेली, शाहजहांपुर, महाराजगंज में तीन- तीन परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।


    इसके अलावा बहराइच, पीलीभीत, सिद्धार्थ नगर, सीतापुर, सोनभद्र में कम परीक्षार्थी होने के कारण दो-दो ही परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।




    51 जिलों में सवा दो लाख अभ्यर्थी 9 जून को देंगे बीएड प्रवेश परीक्षा 

    झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को लगातार दूसरी बार बीएड प्रवेश परीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। परीक्षा उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में होगी जिसमें करीब दो लाख 21 हजार छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। रजिस्ट्रार विनय कुमार सिंह ने बत्ताया कि यूपी के 468 केंद्रों पर बीएड प्रवेश परीक्षा नौ जून को कराई जाएगी।



    यूपी बीएड : 9 जून को 51 जिलों के 468 केंद्रों पर प्रवेश परीक्षा

    बीयू ने सभी जिलों को भेजी केंद्रों की संख्या की सूची, छह-सात जून को रवाना होंगी टीमें

    झांसी। नौ जून को प्रदेश के 468 केंद्रों में बीएड प्रवेश परीक्षा होगी। बुंदेलखंड विवि ने सभी जिलों को परीक्षा केंद्रों की संख्या की सूची भेज दी है। छह और सात जून को बीयू की सभी टीमें केंद्रों के लिए रवाना होंगी। परीक्षा को लेकर बृहस्पतिवार को हुई कुलपतियों की ऑनलाइन बैठक में बीयू अफसरों की तरफ से कई अहम जानकारियां दी गईं।



    बीयू की तरफ से कराई जाने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए इस बार 2,21,492 छात्र-छात्राओं ने फॉर्म भरा है। नौ जून को प्रदेश के 51 जिलों में प्रवेश परीक्षा होनी है। इसको लेकर बीयू ने 468 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। कुलपतियों की ऑनलाइन बैठक के बाद कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलों को केंद्रों की संख्या की सूची भेज दी गई है कि कहां कितने केंद्र होंगे।


    जिला प्रशासन से चर्चा करके जिला समन्वयक शिक्षण संस्थानों को केंद्र बनाएंगे। छह-सात जून को बीयू से टीमें रवाना हो जाएंगी। आठ जून को नोडल समन्वयक, जिला समन्वयक, ऑब्जर्वर और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के साथ बैठक होगी। बताया गया कि दो पालियों में परीक्षा होगी। सात जून तक सभी जिलों के कोषागार में प्रश्नपत्र पहुंच जाएंगे। सिटी इंचार्ज, बीयू के प्रतिनिधि, जिला समन्वयक, डिप्टी नोडल अधिकारी, कोषाधिकारी इन पेपरों को सुरक्षित रखवाएंगे।


    नौ जून की सुबह पांच बजे पहली पाली की परीक्षा के लिए कोषागार से केंद्रों को प्रश्नपत्र भिजवाए जाएंगे। दूसरी पाली के लिए सुबह नौ बजे कोषागार से पेपर केंद्रों को पेपर भिजवाए जाएंगे। उत्तर पुस्तिका की तीन प्रतियां होंगीं। एक प्रति परीक्षार्थी ले जा सकेंगे। एक प्रति कोषागार में जमा होगी। जबकि, मूल प्रति बीयू की टीम लेकर आएगी।

    Friday, May 24, 2024

    माध्यमिक शिक्षा: विद्यालयों में गठित Eco clubs (इको क्लब) के अन्तर्गत Summer Camps (समर कैम्प) आयोजित किये जाने के संबंध में आदेश जारी

    गर्मियों में समर कैंप स्थगित करने की मांग, शिक्षक संगठनों का विरोध जारी


    लखनऊ। माध्यमिक के विद्यालयों में समर कैंप आयोजित करने को लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। वहीं एमएलसी व प्रश्न एवं संदर्भ समिति के सभापति राजबहादुर सिंह चंदेल ने माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर स्थगित करने की मांग की है। 

    उन्होंने कहा है कि विभाग ने पांच से 11 जून तक समर कैंप अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में भीषण गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए मौसम और गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए इसे स्थगित किया जाए। 


    गर्मी की छुट्टियों में माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप पर शिक्षक नेताओं की आपत्ति

    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी और महामंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा ने समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर पांच से 11 जून के मध्य आयोजित होने वाले समर कैंप पर आपत्ति दर्ज कराई है। 

    उन्होंने कहा कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तों में अर्जित अवकाश न देकर उसके बदले में 40 दिन का ग्रीष्मावकाश मिलता है। ग्रीष्म अवकाश में अगर शिक्षकों से सेवा ली जाती है तो उसका उपार्जित अवकाश दिया जाना चाहिए।


    छुट्टियों के दौरान माध्यमिक विद्यालयों में लगेंगे समर कैंप, छुट्टियों में विद्यालय खोले जाने को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

    छुट्टी में भी आयोजन को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

    लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भी मंगलवार से गर्मी की छुट्टियां हो जाएंगी। हालांकि विभाग ने जून के पहले सप्ताह में पर्यावरण दिवस पर छुट्टियों के दौरान स्कूलों में समर कैंप आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह के इस कैंप में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। वहीं शिक्षकों में छुट्टियों में विद्यालय खोले जाने को लेकर नाराजगी है।

    विभाग के अनुसार विद्यालयों में गठित ईको क्लब के माध्यम से एनईपी के तहत पर्यावरण जागरूकता, जल संरक्षण, सफाई व स्वास्थ्य आदि कौशल विकास के लिए समर कैंप आयोजित किए जाएं। इसमें पांच जून को विद्यार्थियों को प्राकृतिक व पर्यटन स्थलों का भ्रमण, पौधरोपण कर जागरूक करना होगा। छह जून को विद्यालय के किचन गार्डेन में विद्यार्थियों को शामिल करने, पुरानी बाल्टी, बोतल में पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

    कहा गया है सात जून को ई- कचरा इकट्ठा करने का अभियान और विद्यालय पर बूथ स्थापित कर विद्यार्थियों को इसके लिए जागरूक करें। आठ जून को स्वच्छता अभियान चलाएं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि इसी तरह नौ जून को ऊर्जा बचाने, दस जून को पानी बचाने, 11 जून को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग न करने के लिए जागरूक करना है। 

    उन्होंने सभी डीआईओएस को इसके अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। वहीं उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने 21 मई से 30 जून को गर्मी की छुट्टियों में कार्यक्रम निर्धारित करने पर नाराजगी जताई है। ओपी त्रिपाठी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में छात्रों को टूर या गतिविधियां कराना संभव नहीं है। वहीं शिक्षक बाहर जाने के लिए आरक्षण तक करा चुके हैं। विभाग को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।


    माध्यमिक शिक्षा: विद्यालयों में गठित Eco clubs (इको क्लब) के अन्तर्गत Summer Camps (समर कैम्प) आयोजित किये जाने के संबंध में आदेश जारी 

    प्रदेश की खेलकूद प्रतियोगिताओं से CBSE और CISCE बाहर, नए सत्र में स्पोर्ट्स फॉर स्कूल का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित

    प्रदेश की खेलकूद प्रतियोगिताओं से CBSE और CISCE बाहर, नए सत्र में स्पोर्ट्स फॉर स्कूल का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित

    जिला, मंडल व राज्य स्तर पर आयोजित होंगी प्रतियोगिताएं


    लखनऊ। प्रदेश में नए सत्र 2024-25 को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने पढ़ाई के साथ-साथ प्रदेशीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी कैलेंडर जारी किया है। इसमें जहां विभिन्न स्तर पर आयोजन की तिथि तय की गई है वहीं नए सत्र से सीबीएसई व सीआईएससीई के छात्र प्रदेशीय विद्यालयी खेलों में प्रतिभाग नहीं करेंगे।


    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय, जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें माध्यमिक के साथ-साथ बेसिक के कक्षा छह से आठ तक के अंडर 14 आयु वर्ग के छात्र शामिल किए जाएंगे। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को प्रतियोगिताओं में सीधे एक यूनिट के रूप में शामिल किया जाएगा। 


    जबकि इस सत्र से सीबीएसई व सीआईएससीई से संबद्ध प्रदेश के विद्यालयों के छात्र प्रदेशीय विद्यालयी खेलों में प्रतिभाग नहीं करेंगे। विभाग ने इसका स्पष्ट कारण तो नहीं बताया है लेकिन माना जा रहा है कि ऐसा यूपी बोर्ड के छात्रों को ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। इस बार से ट्रायल के तौर पर थांगता मार्शल आर्ट, कलारीपयट्ट, मलखम्भ, शतरंज, योगासन आदि को भी प्रतियोगिताओं में शामिल करने का निर्णय लिया है। इनका ट्रायल तीन साल के लिए होगा।


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा है कि हर जिले में राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय, स्ववित्तपोषित विद्यालय, कस्तूरबा बालिका व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे अनिवार्य रूप से स्पोर्ट्स फॉर स्कूल कार्यक्रम के तहत कम से कम दो खेलों में ब्लॉक व जिला स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होंगे। खेलकूद के आयोजन के लिए जिला स्तर पर डीआईओएस व मंडल स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में समिति काम करेंगी।


    खेलकूद प्रतियोगिताएं 19 वर्ष से कम

    (सीनियर), 17 वर्ष से कम (जूनियर) और 14 साल से कम (सब जूनियर) आयु वर्ग में आयोजित की जाएंगी। इसके लिए 21 अगस्त से अक्तूबर दूसरे सप्ताह तक का प्रदेश स्तर पर कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा है कि विद्यालय स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिता के लिए आयोजन का व्यय क्रीडा शुल्क व रमसा में आवंटित धनराशि से किया जाएगा। जबकि जिला, मंडल व राज्य स्तर पर प्रतियोगिता के लिए अलग से बजट आवंटित किया जाएगा।

    नए खेलों की जानकारी नहीं, खेल शिक्षक कैसे करा सकेंगे प्रशिक्षण, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने थांगता, गतका, कलारीपयट्टू को खेल सूची में जोड़ा

    नए खेलों की जानकारी नहीं, खेल शिक्षक कैसे करा सकेंगे प्रशिक्षण

    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने थांगता, गतका, कलारीपयट्टू को खेल सूची में जोड़ा



    लखनऊ । माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2024-25 में खेल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स फॉर स्कूल कार्यक्रम शुरू किया और नौ नए खेलों को शामिल किया गया। कुछ खेल तो ऐसे हैं जिनका नाम विद्यार्थियों और खेल शिक्षकों ने कभी सुना नहीं। ऐसे में इन खेलों का हिस्सा विद्यार्थी कैसे बन पाएंगे यह बड़ा सवाल है।


    सूबे में  कुछ कॉलेजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में व्यायाम शिक्षक कार्यरत हैं। एक अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र 2024-25 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों में खेल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इस बार खेल सूची में नौ नए खेलों को शामिल किया गया है। शतरंज के साथ ही गतका, कलारीपयट्टू, थांगता जैसे खेलों को शामिल किया गया है।


    विद्यालयों में तैनात अधिकांश व्यायाम शिक्षकों को गतका, कलारीपयट्टू, थांगता खेल के बारे में जानकारी ही नहीं है। शिक्षक एक दूसरे साथी से नए खेल के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। सप्ताह में एक बार आयोजित होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता में इन खेलों के आयोजन को लेकर शिक्षक परेशान है। ऑनलाइन खेल को सर्च करने की कोशिश की जा रही है। मगर, इन खेलों का प्रशिक्षण न होने के कारण व्यायाम शिक्षक इन नए खेलों को संचालित नहीं कर पाएंगे।  खेल को बढ़ावा देने के लिए नौ नए खेल जोड़े गए हैं। सप्ताह में एक बार खेल गतिविधियां विद्यालय में आयोजित करने का आदेश दिया गया है। 


    इन खेलों को किया गया शामिल

    माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शतरंज, थांग ता, गतका, कलारीपयट्टू, जिम्नास्टिक, लॉन टेनिस, तीरंदाजी, जूडो व सॉफ्ट बॉल खेल को शामिल किया है। सभी खेलों का प्रशिक्षण जुलाई माह से सप्ताह में एक बार दिए जाने का निर्देश दिया गया है।


    महत्वपूर्ण हैं जोड़े गए खेल

    थांगता: यह मणिपुर राज्य का मार्शल आर्ट खेल है। तलवार और भाले के साथ खेला जाने वाला यह खेल आत्मरक्षा और युद्ध कला की पारंपरिक गतिविधि है। इसमें खिलाड़ी तलवार, ढाल और भाले के साथ खेलते हैं।

    कलारीपयटूः- यह केरल के मार्शल आर्ट का नाम है। यह लाठी और चाकू चलाने में महारत हासिल करने वाला खेल है। यह व्यक्तिगत युद्ध परीक्षण की एक प्रणाली है। 

    गतकाः इसे गुरुमुखी और शाहमुखी से नाम से भी जाना जाता है। यह लाठी लड़ाई की एक मार्शल आर्ट शैली है। पंजाब में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है।

    Thursday, May 23, 2024

    पॉलीटेक्निक में कई चक्र में प्रवेश और टुकड़ों में परिणाम आने से छात्र हो रहे आक्रोशित

    प्रदेश भर के पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र टुकड़ों में रिजल्ट आने से परेशान

    पॉलीटेक्निक में कई चक्र में प्रवेश और टुकड़ों में परिणाम आने से छात्र हो रहे आक्रोशित 

    सोशल साइट पर छात्रों ने जताया आक्रोश

    पुनर्मूल्यांकन परिणाम का एक हिस्सा ही जारी किया

    जिन छात्रों का परिणाम नहीं आया वे अब दुविधा में हैं

    17 मई को पुनर्मूल्यांकन के परिणाम का एक हिस्सा जारी किया था

    22 अगस्त 2023 को काउंसलिंग शुरू हुई 29 दिसंबर तक चली


    लखनऊ । प्रदेश भर के पॉलीटेक्निक में पढ़ाई कर रहे छात्र प्रावधिक शिक्षा परिषद के तरीकों से परेशान हो गए हैं। पहले पॉलीटेक्निक में प्रवेश टुकड़ों में लिए गए और अब पुनर्मूल्यांकन परिणाम भी लगातार टुकड़ों में जारी किए जा रहे हैं।

    जिन छात्रों का परिणाम जारी हुआ है वो लगाातर सोशल साइट पर सही रिजल्ट जारी नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं और जिनका परिणाम जारी नहीं हुआ वो दुविधा में हैं कि आगामी सम सेमेस्टर के परीक्षा फार्म बिना रिजल्ट के कैसे भरें।


    प्राविधिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट देखते-देखते और कार्यालय पर चक्कर लगा लगा कर पॉलीटेक्निक विषम सेमेस्टर की परीक्षा दे चुके छात्र परेशान हो चुके हैं। क्योंकि छात्रों ने कम अंक आने पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। अभी तक बोर्ड सिर्फ 20 प्रतिशत पुनर्मूल्यांकन के आवेदन का परिणाम ही जारी कर पाया है और बाकी 80 फीसदी परिणाम अभी भी अधर में है। जानकारी के अनुसार इससे पूर्व की परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन परिणाम भी टुकड़ों में ही जारी किए थे। 


    विभागीय सूत्रों की मानें तो स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन की कापियां एक अलग समिति से तीन-तीन बार जांच करायी जा रही हैं। पिछले सत्र की वार्षिक परीक्षा बाद भी स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन के परिणाम में इसी के चलते देरी हुई थी। स्क्रूटनी के परिणाम दीपावली पर जारी हुए थे लेकिन पुनर्मूल्यांकन के परिणाम में तीन महीने लगे। बता दें कि शासन ने कापी की तीन बार जांच कराई। इसमें नंबर बढ़ने व घटने पर पहले कापी जांचने वाले 400 शिक्षकों को डिबार कर दिया था।



    प्रवेश काउंसलिंग भी टुकड़ों में पूरी की गई

    सत्र 2023-24 की प्रवेश काउंसलिंग भी टुकड़ों में हुई थी। 22 अगस्त 2023 को काउंसलिंग शुरू हुई और पांच सितंबर से कक्षाएं लगाने के निर्देश मिल गए लेकिन 29 दिसंबर तक काउंसलिंग चली। अक्टूबर में दो अन्य चरण में काउंसलिंग के बाद भी सीटें नहीं भरी। 17 दिसंबर में फिर दो अन्य चरणों में काउंसलिंग करायी थी। जिन छात्रों का प्रवेश अगस्त माह में हुआ और जिनका दिसम्बर में दोनों की पढ़ाई एक सेमेस्टर में हुई।


    सोशल साइट पर छात्रों ने जताया आक्रोश

    छात्रों का आरोप है कि पुनर्मूल्यांकन परिणाम ऐसे ही जारी करना है तो बोर्ड को पुनर्मूल्यांकन आवेदन बंद कर देना चाहिए। प्रत्येक विषय के लिए पांच सौ रुपए शुल्क देना होता है। जिस प्रकार परीक्षा की कापियां जांची जाती हैं छात्रों को एक से लेकर तीन विषय में आवेदन करना होता है। जिससे समय और पैसा बर्बाद होता है। छात्र-छात्राओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याएं प्रमुखता से उठाई। 

    बता दें कि बोर्ड ने विषम सेमेस्टर परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम का एक हिस्सा 17 मई को जारी कर दिया था। रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल साइट पर बड़ी संख्या में छात्रों ने नाराजगी जतायी। छात्रों का आरोप था कि कापियां बिना जांचे परिणाम जारी कर दिया गया है क्योंकि अधिकांश छात्रों के परिणाम में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला। इससे साफ होता है कि परिणाम बिना जांचे जारी हुआ।

    क्यों नहीं आया शिक्षकों के बकाया वेतन का बजट? वेतन भुगतान की अवहेलना के मामले में हाईकोर्ट ने पूछा सवाल

    क्यों नहीं आया शिक्षकों के बकाया वेतन का बजट? वेतन भुगतान की अवहेलना के मामले में हाईकोर्ट ने पूछा सवाल


    प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बजट के अभाव में वेतन भुगतान रुके होने पर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि इस वित्तीय वर्ष में डेढ़ माह बीतने के बाद भी अब तक इन शिक्षकों के बकाया वेतन का बजट क्यों नहीं रिलीज हुआ। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सहारनपुर एवं महाराजगंज के अध्यापकों को वेतन भुगतान करने के आदेश की अवहेलना के मामले में दिया है।


    कोर्ट ने बेसिक शिक्षा निदेशालय के वित्त नियंत्रक शिवेंद्र सिंह को 30 मई को हाजिर रहने का आदेश दिया है। साथ ही बीएसए सहारनपुर डॉ विनीता एवं महाराजगंज श्रवण कुमार गुप्ता और उनके कार्यालय के लेखाधिकारी वित्त क्रमशः इंद्रेश कुमार एवं विश्वनाथ को उपस्थिति से छूट दे दी है। 


    कोर्ट ने मुख्य स्थायी अधिवक्ता बिपिन बिहारी पांडेय से बजट के अभाव में वेतन भुगतान रुके होने पर प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा से एक सप्ताह में जानकारी प्राप्त करने को कहा है। इससे पहले कोर्ट ने वेतन भुगतान आदेश की अवहेलना करने पर उक्त अधिकारियों को तलब किया था। 


    अधिकारियों ने बताया कि नौ महीने के वेतन भुगतान की मंजूरी दे दी गई है और वित्त नियंत्रक से भुगतान करने का अनुरोध किया गया है। वित्त नियंत्रक ने कहा कि 2024-25 का बजट अभी नहीं आया है। इस पर कोर्ट ने जानकारी प्राप्त करने को कहा है।

    पांच दिन स्कूल या वापस हो समय बढ़ोत्तरी का आदेश, माध्यमिक विद्यालयों का समय बढ़ाए जाने से उपजा आक्रोश

    पांच दिन स्कूल या वापस हो समय बढ़ोत्तरी का आदेश, माध्यमिक विद्यालयों का समय बढ़ाए जाने से उपजा आक्रोश 

    शिक्षकों की कमी बरकरार – समय बढ़ाने पर तकरार, प्रतिवर्ष कम हो रहे शिक्षक 12 हजार


    NEP के तहत छुट्टियाँ के बाद 40 मिनट की होंगी कक्षाएं


    यूपी बोर्ड में एनईपी के तहत स्कूलों के समय में बदलाव हो गया है। स्कूल अब सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक लगेंगे। एनईपी के तहत स्कूलों में 40 मिनट का समय बढ़ा दिया गया है। स्कूल 5 घंटे 20 मिनट की जगह अब 6 घंटे लगेंगे। लेकिन, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट छात्र-शिक्षक के अनुपात को लेकर इस बदलाव से नाखुश है। संघ के पदाधिकारियों ने गर्मी की छुट्टियों के बाद इसका विरोध करने का ऐलान किया है।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि यूपी बोर्ड में एनईपी के तहत स्कूलों का समय बढ़ाया गया है। पहले मध्यांतर के पहले 40 मिनट के चार और मध्यांतर के बाद 35 मिनट के चार पीरियड होते थे। इसमें 20 मिनट मध्यांतर के होते थे। लेकिन, एनईपी के तहत अब प्रत्येक पीरियड स्कूल में 40 मिनट के लगेंगे। इसके निर्देश सभी स्कूलों को दे दिए गए हैं। वहीं, मध्यांतर अभी भी 20 मिनट का ही होगा.


    प्रतिवर्ष कम हो रहे 12 हजार शिक्षक

    सोहन लाल वर्मा ने बताया कि शिक्षण कार्य की गुणवत्ता बढ़ाने के निर्देश दिए जा रहे हैं लेकिन शिक्षकों की कोई भी मांग पूरी नहीं किया जा रहा। ऐडेड स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात बहुत कम है। 80 हजार स्वीकृत पदों पर मात्र 62 हजार शिक्षक ही मौजूद हैं। एक स्कूल में प्रत्येक विषय में 6 से 10 तक एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) में दो शिक्षक चाहिए। प्रवक्ता वर्ग में भी प्रत्येक विषय में दो शिक्षक चाहिए। बोर्ड का गठन नहीं होने से पिछले चार साल से भर्तियां नहीं हो रही हैं। उधर, 200 शिक्षक प्रति मंडल प्रतिवर्ष रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में 12 हजार शिक्षक प्रतिवर्ष कम हो रहे हैं। ऐसे में बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल सकेगी?


    पांच दिन स्कूल या वापस हो निर्देश

    माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के पदाधिकारियों ने शासन के इस निर्देश को वापस लेने की मांग की है। संघ के अध्यक्ष सोहन लाल वर्मा ने बताया कि स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात बहुत कम है। ऐसे में स्कूल पहले की ही तरह लगाए जाएं। अन्यथा, स्कूल हफ्ते में पांच दिन संचालित हों। उन्होंने बताया कि गर्मी की छुट्टियों के बाद संघ इसे लेकर आंदोलन करेगा.

    मदरसा बोर्ड : 30 मई को जारी होगा परीक्षा परिणाम

    मदरसा बोर्ड : 30 मई को जारी होगा परीक्षा परिणाम 


    लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद की सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकेंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं का परिणाम 30 मई को जारी किया जाएगा। कॉपियों के मूल्यांकन होने के बाद अंकों की फीडिंग का काम भी अंतिम चरण में चल रहा है। 


    बोर्ड ने प्रदेश भर के 1,13100 परीक्षार्थियों का रिजल्ट जारी करने की कवायद तेज कर दी है। इस बार परीक्षा में प्रदेश भर 113100 विद्यार्थी शामिल हुए हैं। दरअसल, हाईकोर्ट ने बीते मार्च में यूपी मदरसा शिक्षा परिषद एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इस फैसले के बाद मदरसा बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर असमंजस में था। 

    Wednesday, May 22, 2024

    स्मार्ट क्लास के लिए बेसिक शिक्षकों का होगा एक दिवसीय प्रशिक्षण

    स्मार्ट क्लास के लिए बेसिक शिक्षकों का होगा एक दिवसीय प्रशिक्षण


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    लखनऊ, : समग्र शिक्षा के अन्तर्गत विद्यालयों में स्थापित कराये जा रहे स्मार्ट कक्षाओं के लिए शिक्षकों का प्रशिक्षण कराया जायेगा। इस संबंध में डायट पर एक दिवसीय प्रशिक्षण निर्धारित किया गया है।


    प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट एवं कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में मौजूदा समय में स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा रही है। नये शैक्षिक सत्र में अधिक से अधिक स्कूलों में स्मार्ट कक्षा संचालित हो सके इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। 

    इसी क्रम में प्रदेश के सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को एक दिवसीय प्रशिक्षण कराये जाने के निर्देश जारी किए गये हैं। इसके साथ ही समय सारिणी के अनुसार जिलों के मास्टर ट्रेनर्स व खंड शिक्षा अधिकारियों को प्रशिक्षण में प्रतिभाग करने के लिए निर्देशित किया गया है।


    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए पोर्टल लॉन्च

    राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए पोर्टल लॉन्च


    नई दिल्ली । राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2024 के लिए मंगलवार को पोर्टल लॉन्च कर दिया गया। विजेताओं को शिक्षक दिवस पर सम्मानित किया जाएगा। शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव के संजय मूर्ति और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर टीजी सीतारमन ने पोर्टल लॉन्च किया। 


    चयन मानदंड में शिक्षण और सीखने की प्रभावशीलता, अनुसंधान और नवाचार आदि शामिल होगा। नामांकित व्यक्तियों को उनके संस्थानों का नियमित संकाय सदस्य होना चाहिए और उनकी आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। उम्मीदवार www.awards.gov.in पर नामांकन जमा कर सकते हैं।

    शिकायतें पांच हजार, सुनने को नहीं तैयार, IGRS पर उच्च शिक्षा की शिकायतों का अंबार, निस्तारण न होने से बढ़ी कतार

    शिकायतें पांच हजार, सुनने को नहीं तैयार, IGRS पर उच्च शिक्षा की शिकायतों का अंबार, निस्तारण न होने से बढ़ी कतार


    प्रयागराज : एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली (आईजीआरएस) में पांच हजार से अधिक शिकायतों के बावजूद राज्य विश्वविद्यालयों के जिम्मेदार अफसर सुनने को तैयार नहीं हैं। जीपीएफ, पेंशन या डिग्री कॉलेजों के प्रकरण में विश्वविद्यालय की ओर से यह आख्या दी जा रही है ‘हमसे संबंधित नहीं है’ जो कि निस्तारण का उचित तरीका नहीं है। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी ने उच्च शिक्षा निदेशक, विश्वविद्यालयों के कुलसचिव और क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखा है।


    निर्देश दिया है कि कोई भी शिकायत किसी भी महाविद्यालय से संबंधित है तो वह शिकायत अन्तत उच्च शिक्षा विभाग की शिकायत है। अगर शिकायत के निस्तारण में किसी भी प्रकार की समन्वय की आवश्यकता है तो कुलसचिव सीधे शिकायतकर्ता के मोबाइल नंबर पर बात करके अथवा संबंधित महाविद्यालय से सीधे बात करके कोई औपचारिकता अवशेष है तो उसको पूर्ण कराते हुए प्रकरण का गुणवत्तापूर्वक अंतिम रूप से निस्तारण कराएं। इसी प्रकार निदेशालय को विश्वविद्यालय से जो भी आख्या मिलती है उक्त का एवं संलग्नकों का गुणवत्तापूर्वक परीक्षण करें। 


    यदि आवश्यक हो तो सीधे शिकायतकर्ता से बात करके अथवा विश्वविद्यालय के कुलसचिवों से वार्ता कर या महाविद्यालय से या क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से जो भी उचित हो समन्वय करते हुए शिकायत का अंतिम रूप से गुणवत्तापूर्वक निस्तारण करते हुए आख्या समयबद्ध तरीके से अपलोड की जाएगी। विलम्ब होना, समय से निस्तारण न होना अथवा अधूरी आख्या पर जिम्मेदार अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित किया जाएगा।


    उच्च शिक्षा निदेशक स्तर पर सिर्फ 60 मामले लंबित

    उच्च शिक्षा निदेशक के स्तर से आईजीआरएस के सिर्फ 60 मामले लंबित हैं। 7855 शिकायतें मिली थी जिनमें से 770 का निस्तारण हो चुका है। पांच डिफाल्टर हैं।

    Tuesday, May 21, 2024

    सभी विश्वविद्यालय 21 दिनों में जारी करें परीक्षा परिणाम, राज्यपाल ने दिया अल्टीमेटम

    सभी विश्वविद्यालय 21 दिनों में जारी करें परीक्षा परिणाम, राज्यपाल ने दिया अल्टीमेटम 


    लखनऊ : अब सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा समाप्त होने के बाद 21 दिनों में परिणाम जारी करना होगा। सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कुलपतियों को निर्देश दिए कि वह परीक्षा परिणाम घोषित करने में तत्परता दिखाएं और निर्धारित समय-सीमा का सख्ती से पालन करें। 

    तीन नव स्थापित विश्वविद्यालयों के कार्यों की समीक्षा बैठक में सुधार के लिए उन्होंने कई कदम उठाने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने नव स्थापित महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय आजमगढ़, राजा महेन्द्र प्रताप सिंह विश्वविद्यालय अलीगढ़ और मां शाकुंभरी देवी राज्य विश्वविद्यालय सहारनपुर के प्रगति की समीक्षा की।


     इन विश्वविद्यालयों से संबंधित डिग्री कालेजों के फीस निर्धारण के लिए नियम बनाने और नैक मूल्यांकन के लिए समन्वयक तैनात करने के भी निर्देश दिए। कहा कि परीक्षा केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगवाए जाएं। राज्यपाल ने सभी कुलपतियों को निर्देश दिए हैं कि वह गर्ल्स हास्टल में महीने में एक दिन छात्राओं को उनका मनपसंद भोजन बनाने की छूट दें। उन्हें स्वयं अपना भोजन बनाने के लिए प्रेरित किया जाए। सप्ताह में एक दिन विद्यार्थी व शिक्षक मिलकर विश्वविद्यालय परिसर की सफाई करें।

    77 निजी डीएलएड कालेजों में प्रवेश शून्य, 46,000 सीटें रह गई खाली, सीधे प्रवेश लेने की अनुमति के बाद भी नहीं भरी जा सकी सीटें

    77 निजी डीएलएड कालेजों में प्रवेश शून्य, 46,000 सीटें रह गई खाली

    • सीधे प्रवेश लेने की अनुमति के बाद भी नहीं भरी जा सकी सीटें

    • पांच वर्ष से प्राथमिक शिक्षक भर्ती नहीं आने से घटा रुझान


    प्रयागराज : बेसिक स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान भर्ती नहीं आने के कारण घट रहा है। इसका अनुमान इसी से लगता है कि जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) सहित निजी संस्थानों में सीधे प्रवेश लेने की अनुमति के बावजूद सीटें खाली रह गईं। इतना ही नहीं, प्रदेश में 77 ऐसे निजी संस्थान हैं, जिनमें कोई प्रवेश नहीं हुआ। अन्य प्रशिक्षण संस्थानों की सीटों को मिलाकर 46,041 सीटें खाली रह गईं।


    डीएलएड प्रशिक्षण के लिए प्रदेश भर में 66 डायट एवं एक सीटीई कालेज वाराणसी में है। इन संस्थानों में कुल 10,600 सीटें हैं। इसके अलावा 3045 निजी डीएलएड संस्थान में कुल मिलाकर 2,28,200 सीटें हैं। इस तरह कुल 3112 संस्थानों की 2,38,800 सीटों पर प्रवेश के लिए उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने आनलाइन आवेदन मांगे थे। इसमें 267 अल्पसंख्यक प्रशिक्षण संस्थानों की 12,625 सीटें भी शामिल हैं। 


    सीटों के सापेक्ष आवेदन नहीं आने पर अंतिम तिथि बढ़ाई भी गई, इसके बावजूद कालेजों की सभी सीटें भरी नहीं जा सकीं। इस स्थिति को देखते हुए शासन के निर्देश पर पीएनपी सचिव ने रिक्त रह गईं सीटों पर सीधे प्रवेश लेने की अनुमति दी। सचिव ने बताया कि अल्पसंख्यक कालेजों की सीटों को छोड़कर निजी संस्थानों की 2,15,575 सीटों पर प्रवेश के लिए काउंसिलिंग कराई गई, जिसके सापेक्ष 1,82,938 सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिए। इसके अलावा अल्पसंख्यक कालेजों में 9821 सीटों पर लिए गए प्रवेश को मिलाकर कुल 1,92,759 प्रवेश हुए। इस तरह कुल 46,041 सीटें खाली रह गईं।

    Sunday, May 19, 2024

    एनपीएस लागू होने के बाद नौकरी पाए शिक्षक नहीं हैं पेंशन के हकदार – हाईकोर्ट

    एनपीएस लागू होने के बाद नौकरी पाए शिक्षक नहीं हैं पेंशन के हकदार – हाईकोर्ट 

    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजीपुर निवासी सुषमा यादव की विशेष अपील खारिज की


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि नई पेंशन योजना (एनपीएस) लागू होने की तिथि के बाद नियुक्त हुए सहायक अध्यापक पुरानी पेंशन के हकदार नहीं हैं। भले ही उनका चयन एनपीएस लागू होने से पहले हुआ हो। न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने यह आदेश देते हुए गाजीपुर निवासी सुषमा यादव की विशेष अपील खारिज कर दी।


    याचिका में सिंगल बेंच के चार मार्च 2024 के आदेश को चुनौती दी गई थी। सिंगल बेंच ने याची को पुरानी पेंशन का लाभ देने से इन्कार कर दिया था। याची का कहना था कि उसका चयन एक अप्रैल 2005 को एनपीएस लागू होने की तिथि से पहले हुआ था। ऐसे में उसे पुरानी पेंशन मिलनी चाहिए। याची ने आठ मार्च 1998 को सहायक अध्यापक पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। मगर उसे 2006 को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ। 


    उसने पुरानी पेंशन के लिए बीएसए गाजीपुर व अन्य अधिकारियों को प्रत्यावेदन दिया मगर उन्होंने स्वीकार नहीं किया। याची ने कहा कि चयन प्रक्रिया 1998 में शरू हुई हुई। मगर नियोजकों ने उसे पूरा नहीं किया और कोर्ट के आदेश के बाद उसे 2006 में नौकरी मिल सकी। इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। 


    याची अधिवक्ता ने नंदलाल केस का हवाला देते हुए कहा की चयन प्रक्रिया यदि नई पेंशन योजना लागू होने से पहले शुरू हो चुकी है और नियुक्ति नई पेंशन लागू होने के बाद मिली है तो वह पुरानी पेंशन का लाभ पाने की हकदार है। वहीं मुख्य स्थाई अधिवक्ता विपिन बिहारी पांडे ने कहा कि नंदलाल केस याची के मामले में लागू नहीं होता है।


    कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद याचिका खारिज कर दी। कहा कि याची का चयन और नियुक्ति नई पेंशन योजना लागू होने के बाद हुई है। याची ने नियुक्ति के 17 वर्षों के बाद पुरानी पेंशन की मांग की है। नियुक्ति के दौरान इसपर कोई आपत्ति नहीं की थी। इसलिए उसे पुरानी पेंशन का लाभ नहीं मिल सकता।


    अवमानना नोटिस नहीं लेने पर बेसिक शिक्षा निदेशक को हाईकोर्ट ने किया तलब

    अवमानना नोटिस स्वीकार नहीं करने पर बेसिक शिक्षा निदेशक को हाईकोर्ट ने किया तलब


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना याचिका पर जारी नोटिस स्वीकार नहीं करने पर निदेशक बेसिक शिक्षा, लखनऊ को जमानती वारंट जारी किया है। कोर्ट ने उन्हें निर्देश दिया है कि सीजेएम लखनऊ के समक्ष हाजिर होकर 20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र दाखिल कर अगली सुनवाई 17 मई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में हाजिर हों। 


    यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की कोर्ट ने दीपक गुप्ता की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूर्व बेसिक शिक्षा सचिव प्रताप सिंह बघेल को नोटिस जारी किया था। 14 मई को नोटिस का जवाब देना था। कोर्ट को बताया गया कि बघेल ने यह कहकर स्वीकार नहीं किया कि अब वह निदेशक बेसिक शिक्षा के पद पर हैं और नोटिस सचिव बेसिक शिक्षा के लिए है। 


    इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा, निदेशक ने दोहरी अवमानना की है। एक तो आदेश का पालन नहीं किया और दूसरा नोटिस लेने से इन्कार कर दिया। कहा, अवमानना की कार्यवाही अवमानना करने वाले के लिए व्यक्तिगत होती है। यदि अदालत ने नोटिस जारी किया है तो यह उनकी जिम्मेदारी है कि स्वीकार कर जवाब दें।

    याची का वेतन बकाया है तो इसका भुगतान किया जाना चाहिए, सरकार की वित्तीय स्थिति चाहे जो हो, सरकार की सुविधानुसार लागू नहीं होता कानून: हाईकोर्ट

    याची का वेतन बकाया है तो इसका भुगतान किया जाना चाहिए, सरकार की वित्तीय स्थिति चाहे जो हो

    सरकार की सुविधानुसार लागू नहीं होता कानून: हाईकोर्ट


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षिका का बकाया वेतन भुगतान न करने और फंड की कमी का हवाला देने पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि कानून अपने तरीके से काम करता है न कि राज्य सरकार की सुविधा के अनुसार। 


    यदि याची का वेतन बकाया है तो इसका भुगतान किया जाना चाहिए, सरकार की वित्तीय स्थिति चाहे जो भी हो। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की कोर्ट ने यह आदेश अलीगढ़ की संतोष कुमारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा लखनऊ से इसपर जवाब मांगा था।


    कमजोर विद्यार्थियों के लिए चलेंगी विशेष कक्षाएं, माध्यमिक विद्यालयों में तैयार होंगे अलग पाठ्यक्रम, शिक्षण कार्यों की होगी मॉनिटरिंग

    कमजोर विद्यार्थियों के लिए चलेंगी विशेष कक्षाएं, माध्यमिक विद्यालयों में तैयार होंगे अलग पाठ्यक्रम, शिक्षण कार्यों की होगी मॉनिटरिंग


    लखनऊ । सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। इन विद्यार्थियों के लिए अलग पाठ्यक्रम तैयार कर शिक्षक विशेष कक्षाएं संचालित करेंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कमजोर विद्यार्थियों के शिक्षण कार्यों की हर महीने मॉनिटरिंग होगी। शिक्षक इन विद्यार्थियों के शिक्षण कार्यों की रिपोर्ट तैयार करेंगे, ताकि इन बच्चों में हो रहे सुधार का पता चल सके।


     माध्यमिक विद्यालयों में जुलाई से विशेष प्रतिभाशाली व सामान्य से कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। चयन के बाद कमजोर विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्तर पर विशेष कक्षाएं संचालित होंगी। इन विशेष कक्षाओं के लिए शिक्षक अलग से पाठ्यकम तैयार करेंगे।


     इसके साथ ही इन विद्यार्थियों को बेहतर बनाने के लिए विद्यालय प्रधानाचार्य द्वारा विशेष संबोधन दिया जाएगा। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि जुलाई महीने में विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की पहचान होने के बाद उनको विशेष तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

    ग्रीष्मावकाश: परिषदीय विद्यालय 17 जून व इंटर कॉलेज 30 जून तक बंद

    ग्रीष्मावकाश: परिषदीय विद्यालय 17 जून व इंटर कॉलेज 30 जून तक बंद


    सूबे के कक्षा एक से आठ तक स्कूलों में शनिवार को गर्मी की छुट्टी घोषित कर दी गई। शिक्षासत्र के मुताबिक 20 मई से ग्रीष्मावकाश घोषित था, इसलिए शनिवार से ही स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है। परिषदीय स्कूल अब 18 जून को खुलेंगे। 

    इधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग के हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में 30 जून तक गर्मी का अवकाश घोषित किया गया है। इंटर कॉलेज अब एक जुलाई को खुलेंगे। 




    परिषदीय विद्यालयों में कल से ग्रीष्मकालीन अवकाश

    प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में इस बार 19 मई से गर्मी की छुट्टियां प्रारंभ हो रही हैं। छुट्टी के दौरान बच्चों को होमवर्क दिया जाएगा। साथ ही शिक्षक ऑनलाइन बच्चों को पढ़ाएंगे। 



    बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित विद्यालय जिसमें एक अप्रैल से शैक्षिक सत्र शुरू हो गया था। नामांकन की प्रक्रिया अभी चल रही है। इस साल 18 मई के बाद ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होगा, जो 17 जून तक चलेगा। 

    अभी तक भीषण गर्मी पड़ रही है। जिससे परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को कड़ी धूप में आने- जाने में परेशानी हो रही है, लेकिन गर्मी की छुट्टी होने से बच्चों की परेशानी अब दूर हो जाएगी।




    ग्रीष्मावकाश 20 मई से 15 जून

    नोट - ग्रीष्मावकाश 20 मई से ही प्रारम्भ हो जाएगा अर्थात 20 मई से ही विद्यालयों में अवकाश रहेगा।

    ➡️ इस बार 18 मई को विद्यालय का अंतिम दिवस होगा (19 मई रविवार)
    ➡️ 16 जून रविवार 17 जून ईद उल जुहा का अवकाश होने के कारण 18 जून को ही विद्यालय खुलेगे।

    Saturday, May 18, 2024

    मई के दूसरे सप्ताह में दीक्षा एप से पढ़ाने में सीतापुर अव्वल, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जारी की जिलेवार रैंकिंग

    मई के दूसरे सप्ताह में दीक्षा एप से पढ़ाने में सीतापुर अव्वल, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जारी की जिलेवार रैंकिंग

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    मई के प्रथम सप्ताह में दीक्षा एप से पढ़ाने में प्रयागराज अव्वल, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जारी की जिलेवार रैंकिंग

    प्रतापगढ़ तीसरे, सीतापुर चौथे, जौनपुर पांचवें स्थान पर, संभल, हमीरपुर और चित्रकूट का प्रदर्शन निराशाजनक

    प्रयागराज । दीक्षा एप की मदद से पढ़ाने में प्रयागराज के शिक्षक पूरे प्रदेश में अव्वल हैं तो वहीं राजधानी लखनऊ का दूसरा स्थान है। तकनीक की सहायता से परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालय के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के उद्देश्य से दीक्षा एप पर शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराई गई है।


    महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा की ओर से जारी जिलों की रैंकिंग में प्रयागराज के शिक्षकों ने मई के प्रथम सप्ताह में 26772 डिवाइस (मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट आदि) का उपयोग करते हुए कुल 49823 सामग्री से बच्चों को पढ़ाने की कोशिश की है।


    इस रैंकिंग में लखनऊ का दूसरा स्थान है। लखनऊ में 16430 डिवाइस से 48151, जबकि तीसरा स्थान पाने वाले प्रतापगढ़ के शिक्षकों ने 13311 डिवाइस से 43448 सामग्री का उपयोग किया है। चौथा नंबर पाने वाले सीतापुर में 122229 डिवाइस से 35533 और पांचवें स्थान पर रहे जौनपुर में 7566 डिवाइस से 23143 सामग्री का उपयोग किया गया। मई के पहले सप्ताह में प्रदेश के सभी 75 जिलों में 286888 डिवाइस से दीक्षा एप पर कुल 818397 शैक्षणिक सामग्री से बच्चों को पढ़ाया गया है। 


    संभल, हमीरपुर और चित्रकूट का प्रदर्शन निराशाजनक

    दीक्षा एप के उपयोग में सबसे निराशाजनक प्रदर्शन संभल का है। यहां 428 डिवाइस से 1287 सामग्री का उपयोग किया गया। 74वें स्थान पर हमीरपुर है जहां 932 डिइवाइस से 2634 सामग्री से अध्यान हुआ, जबकि 73वें स्थान पर चित्रकूट है जहां 1017 डिवाइस से बच्चों को 2990 कंटेंट दिखाया गया।

    हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों के आदेशों को किया रद्द, माध्यमिक शिक्षकों का नियमितीकरण न करने के खिलाफ 37 याचिकाएं मंजूर

    हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों के आदेशों को किया रद्द, माध्यमिक शिक्षकों का नियमितीकरण न करने के खिलाफ 37 याचिकाएं मंजूर 


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों के नियमितीकरण मामले में अहम फैसला दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षकों का नियमितीकरण न करने के खिलाफ 37 याचिकाएं मंजूर कर इनमें चुनौती दिए गए क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों के आदेशों को रद्द कर दिया। वहीं, सभी याची शिक्षकों को सेवा में बहाल रखकर वेतन देने के आदेश दिए हैं।


    न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शुक्रवार को यह फैसला और आदेश तीर्थराज समेत अन्य शिक्षकों की 37 याचिकाओं को मंजूर करके दिया। याचिकाओं में प्रदेश के क्षेत्रीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों के अध्यक्षता वाली क्षेत्रीय समितियों के उन आदेशों को चुनौती दी गई थी, जिनमें याची शिक्षकों के सेवा में नियमितीकरण को खारिज कर दिया गया था।


    शिक्षकों का कहना था कि वे समय-समय पर नियुक्त हुए। 23 मार्च 2016 से अधिनियम में 33- जी धारा जोड़ी गई। इसके तहत क्षेत्रीय समितियों को याचियों के नियमितीकरण मामले में गहराई से परीक्षण करना चाहिए था। दलील दी गई कि क्षेत्रीय समितियों ने इस कानूनी प्रावधान की उपेक्षा कर संबंधित प्रबंध समिति से प्रत्येक याची शिक्षक का रिकॉर्ड देखना सुनिश्चित किए बिना नियमितीकरण खारिज करने का आदेश दिया। यह कानून की मंशा के खिलाफ होने की वजह से रद्द करने योग्य है। 


    उधर, सरकारी वकील ने याचिकाओं का विरोध किया। कोर्ट ने कई नजीरों का हवाला देते हुए कहा कि सभी मामलों में नियमितीकरण खारिज करने के आदेश संबंधित प्रबंध समितियों और डीआईओएस से बिना रिकॉर्ड मांगे एक ही तरह से पारित किए गए। यह त्रुटिपूर्ण है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने याचिकाओं में चुनौती दिए गए आदेशों को रद्द कर याचिकाएं मंजूर कर लीं। साथ ही मामलों को वापस भेजकर इनमें क्षेत्रीय समितियों को तीन माह में नए आदेश पारित करने को कहा है।

    राज्य विवि में कर सकेंगे चार वर्षीय स्नातक एवं एक साल का पीजी कोर्स, नई शिक्षा नीति के तहत एक वर्ष में सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद भी मिलेगा डिप्लोमा

    राज्य विवि में कर सकेंगे चार वर्षीय स्नातक एवं एक साल का पीजी कोर्स

    नई शिक्षा नीति के तहत एक वर्ष में सर्टिफिकेट, दूसरे साल के बाद भी मिलेगा डिप्लोमा


    प्रयागराज। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह रज्जू भय्या विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति के तहत दाखिले एवं डिग्री देने की पूरी व्यवस्था बदल दी गई है। इसके तहत स्नातक में दाखिला लेने वाले विद्यार्थी बीच में पढ़ाई छोड़ते हैं तब भी डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट दिए जाएंगे। इतना ही नहीं स्नातक तीन वर्षीय पाठ्यक्रम के विद्यार्थी चार वर्षीय पाठ्यक्रम में भी दाखिला ले सकेंगे। साथ ही इसके बाद एक साल की पढ़ाई करके परास्नातक की डिग्री पा सकेंगे।


    नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत स्नातक एवं परास्नातक पाठ्यक्रमों में बहु प्रवेश एवं बहु निकास की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत स्नातक में दाखिला लेने वाला विद्यार्थी एक साल में पढ़ाई छोड़ देता है तो सर्टिफिकेट दिया जाएगा। वहीं दो साल पर डिप्लोमा दिया जाएगा। तीन साल पर डिग्री दी जाएगी। विद्यार्थी चार साल की पढ़ाई करके ऑनर्स की डिग्री हासिल कर सकेंगे। इसके बाद एक साल की पढ़ाई करके परास्नातक की डिग्री ले सकेंगे।


    विश्वविद्यालय एवं संबद्ध कॉलेजों में यह व्यवस्था इसी सत्र से लागू कर दी गई है। खास यह कि यह सुविधा वर्तमान में पंजीकृत विद्यार्थी भी ले सकते हैं। तीन साल की पढ़ाई के बाद उन्हें एक विषय के साथ चौथे वर्ष में दाखिला लेना होगा। पढ़ाई पूरी करने के बाद ऑनर्स की डिग्री दी जाएगी। इसके बाद परास्नातक की पढ़ाई पूरी कर सकेंगे। 


    चार साल के स्नातक के बाद कर सकेंगे नेट-पीएचडी : यूजीसी की गाइडलाइन के अनुसार चार वर्षीय स्नातक कोर्स करने के बाद सीधे नेट कर सकेंगे। इसके अलावा पीएचडी में भी दाखिला ले सकेंगे। हालांकि, इसके बाद उन्हें एक वर्ष का कोर्स वर्क करना होगा।


    वहीं परास्नातक की पढ़ाई के बाद पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वालों को कोर्स वर्क से छूट दी जाएगी। राज्य विश्वविद्यालय में इसकी नियमावली तैयार कर ली गई है। एकेडमिक काउंसिल की अगली बैठक में इसे रखा जाएगा। काउंसिल से अनुमति के बाद दाखिले की प्रकिया शुरू की जाएगी।

    Friday, May 17, 2024

    यूपी के सरकारी मदरसों में गणित विज्ञान पढ़ाना अनिवार्य होगा

    यूपी के सरकारी मदरसों में गणित विज्ञान पढ़ाना अनिवार्य होगा


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की संस्तुति के अनुसार अब राज्य के अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार प्राथमिक गणित, प्राथमिक विज्ञान, नागरिक शास्त्रत्त् व इतिहास आदि विषयों को बतौर अनिवार्य विषय पढ़ाया जाएगा। हिन्दुस्तान से बातचीत में बोर्ड की रजिस्ट्रार प्रियंका अवस्थी ने कहा कि लोकसभा चुनाव की आचार संहिता हटने के बाद इस बारे में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को पत्र जारी किया जाएगा।

    मदरसा शिक्षकों के संगठन ऑल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महासचिव वहीदुल्लाह खान सईदी ने मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार को पत्र भी लिखा है। पत्र में रजिस्ट्रार से अनुरोध किया कि मदरसा बोर्ड की 12 अक्तूबर 2021 को हुई बैठक में पारित प्रस्ताव के अनुसार गणित, विज्ञान, इतिहास व नागरिक शास्त्रत्त् को कक्षा एक से हाईस्कूल तथा इण्टर तक अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने का आदेश जारी किया जाए।

    इसी पत्र का हवाला देते हुए जब रजिस्ट्रार प्रियंका अवस्थी से बात की गयी तो उन्होंने उपरोक्त उत्तर दिया। वहीदुल्लाह खान सईदी ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि बोर्ड में पारित प्रस्ताव के बावजूद राज्य के सरकारी मदरसों में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के मुताबिक अनिवार्य विषयों की पढ़ाई नहीं हो पा रही है।

    उनके इस पत्र के अनुसार बोर्ड ने विगत 12 अक्तूबर 2021 को हुई अपनी बैठक में पारित प्रस्ताव में कई विषयों को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाए जाने का निर्णय लिया था। मगर पढ़ाए जाने का आदेश जारी नहीं हुआ।


    आरोप: रजिस्ट्रार बोर्ड के निर्णयों को नहीं मानते

    बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद का कहना है कि रजिस्ट्रार बोर्ड के निर्णयों का पालन नहीं करते। पिछले दो दशकों से बोर्ड के रजिस्ट्रार पद पर कोई बाहर का अधिकारी तैनात नहीं हुआ बल्कि अल्पंसख्यक कल्याण विभाग के अधिकारी तैनात रहे। रजिस्ट्रार जो अधिकारी बनता है वह अधिकारियों से आदेश लेकर ही मदरसा बोर्ड में फैसले लेता है।



    मदरसों में बतौर अनिवार्य विषय नहीं पढ़ाया जा रहा गणित, विज्ञान इतिहास और नागरिक शास्त्र

    लखनऊ। प्रदेश के मदरसों में गणित, विज्ञान, इतिहास और नागरिक शास्त्र अनिवार्य विषय के तौर पर नहीं पढ़ाया जा रहा है। ऐसा तब है जब मदरसा शिक्षा परिषद साल 2021 में इन विषयों को अनिवार्य तौर पर पाठ्यक्रम में शामिल करने के 2021 में ही मदरसा बोर्ड लगा चुका है प्रस्ताव पर मुहर प्रस्ताव पर मुहर लगा चुका है। 


    ऑल इंडिया टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया ने मदरसा बोर्ड से इन विषयों को पाठ्यक्रम में अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की है। एसोसिएशन के महामंत्री वहीदुल्लाह खान सईदी ने मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद को पत्र भेज कर बताया कि कि 12 अक्तूबर 2021 को मदरसा शिक्षा परिषद एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार कक्षा एक से लेकर हाईस्कूल स्तर तक प्राथमिक गणित, प्राथमिक विज्ञान, इतिहास एंव नागरिक शास्त्र को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाये जाने का प्रस्ताव पारित किया गया था। 


    इसके बावजूद रजिस्ट्रार ने इन विषयों को पढ़ाने व परीक्षा में अनिवार्य रूप से शामिल करने का आदेश नहीं किया। इसकी वजह से परिषद की वर्ष 2022, 2023 तथा 2024 की परीक्षा बिना अनिवार्य विषय के रूप में संपन्न हुई। नतीजतन मदरसे के विद्यार्थियों का अहित हुआ है। लिहाजा इन विषयों को अनिवार्य रूप से पढ़ाने और परीक्षा शामिल करने के लिए मदरसों को आदेश जारी किया जाए। 

    उच्च शिक्षा में इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना अंर्तगत हर साल मिलेंगे 80 हजार रुपये, योजना की ये होंगी शर्तें

    उच्च शिक्षा में इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना अंर्तगत हर साल मिलेंगे 80 हजार रुपये, योजना की ये होंगी शर्तें


    उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना शुरू की गई है। अगर इंटरमीडिएट उत्तीर्ण मेधावी विज्ञान क्षेत्र की शिक्षा में जाते हैं तो योजना के तहत हर साल 80 हजार रुपये तक लाभान्वित हो सकते हैं। योजना इंजीनियरिंग, मेडिकल के साथ डिग्री कोर्स, पीजी, रिसर्च और इनोवेशन (अनुसंधान और नवाचार) के क्षेत्र में जाने वाले छात्र-छात्राओं के लिए वरदान साबित हो सकती है।


    मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी लखनऊ मंडल डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि सभी बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्राओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग आगे की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देता है। योजना का मकसद विज्ञान के क्षेत्र में उच्चशिक्षा अर्जित कर देश के विज्ञान और तकनीकी रिसर्च को बेहतर बनाना है

    बताया कि प्राकृतिक और बुनियादी विज्ञान में बैचलर डिग्री व मास्टर डिग्री करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए पांच हजार रुपये प्रतिमाह अथवा 60 हजार रुपये सालाना के अलावा भारत के किसी मान्यता प्राप्त रिसर्च सेंटर में सक्रिय गाइड के मार्गदर्शन में अनिवार्य समर रिसर्च प्रोजेक्ट के लिए 20 हजार यानी कुल 80 हजार रुपये प्रति साल दिया जाएगा।

    बैचलर व मास्टर डिग्री के लिए इन विषयों का करें चुनाव
    फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोकेमिस्ट्री, मैथ्स, बायोलॉजी, स्टेटिस्टिक्स, जियोलॉजी, एस्ट्रोनॉमी, इलेक्ट्रानिक्स, बॉटनी, एंथ्रोपोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, जियोफिजिक्स, एटमोस्फियरिक साइंस, ओशनिक साइंस, एस्ट्रोफिजिक्स, इकोलॉजी, मरीन बायोलॉजी, जेनेटिक्स, बायोफिजिक्स को चुनकर स्कालरशिप का लाभ उठा सकते हैं


    योजना की यह होंगी शर्तें
    स्कॉलरशिप छात्रों को पांच वर्षों या कोर्स पूरा होने तक दी जाती है। नाम के साथ एसबीआई में बचत खाता जरूरी है। शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों को संस्थान के अध्यक्ष की हस्ताक्षरित वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट और मार्कशीट भी जमा करनी जरूरी है।



    12 वीं पास के पास हर साल 80 हज़ार रुपये की छात्रवृत्ति पाने का मौका

    लखनऊ। इस साल 12 वीं पास करने वाले मेधावी पढ़ाई के लिए अगले पांच वर्ष तक हर साल 80 हज़ार रुपये की छात्रवृत्ति पा सकते हैं। इंजीनियरिंग, मेडिकल के साथ स्नातक और परास्नातक की पढ़ाई के लिए यह मदद मिलेगी।

     केन्द्र सरकार का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग अनुसंधान और नवाचार में रुचि रखने छात्र छात्राओं को इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना के तहत छात्रवृत्ति देगा। मण्डलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी लखनऊ मण्डल डॉ. दिनेश कुमार ने बताया कि योजना में सीआईएससीई, यूपी बोर्ड, सीबीएसई तीनों के मेधावी शामिल हैं।

    CBSE : 12वीं में स्क्रूटनी के लिए आवेदन 17 मई से और 10वीं में 20 मई से

    CBSE : 12वीं में स्क्रूटनी के लिए आवेदन 17 मई से और 10वीं में 20 मई से


    प्रयागराज। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 10वीं के विद्यार्थी 20 मई से स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकेगा। इसके लिए विद्यार्थी को पांच दिन का मौका मिलेगा। स्क्रूटनी से संतुष्ट न होने पर छात्र अपनी कॉपी की फोटो प्रति भी ले सकते हैं और शुल्क जमा करके फिर से प्रश्न की जांच करवा सकते हैं।

    सीबीएसई बोर्ड ने 13 मई को 10वीं और 12वीं का परिणाम जारी किया था। परिणाम जारी करने के बाद बोर्ड ने स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 17 से 21 मई तक 12वीं के विद्यार्थी स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, 10वीं के लिए 20 मई से ऑनलाइन आवेदन शुरू होगा और 24 मई की रात 11:59 तक चलेगा। स्क्रूटनी के लिए प्रत्येक विषय के लिए 500 रुपये शुल्क देना होगा।

    स्क्रूटनी का परिणाम सप्ताहभर में सीबीएसई की वेबसाइट पर आ जाएगा। उससे संतुष्ट न होने पर चार और पांच जून को 10वीं के विद्यार्थी अपनी कॉपी की फोटो प्रति लेने के लिए वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। प्रत्येक कॉपी इसका शुल्क 500 रुपये देना होगा। इसके लिए वही आवेदन कर सकते हैं, जो स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर चुके होंगे।



    सीबीएसई स्क्रूटनी के लिए 17 से 21 मई तक ऑनलाइन आवेदन
     
    उत्तरपुस्तिकाओं की फोटोकॉपी लेने के लिए एक व दो जून को ऑनलाइन आवेदन

    प्रयागराज। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा 12 के परीक्षार्थियों के लिए स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन संबंधी सूचना जारी कर दी है। स्क्रूटनी के लिए 17 से 21 मई तक ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। आवेदकों को 500 रुपये प्रति विषय के हिसाब से शुल्क देना होगा।


    इसके अलावा परीक्षार्थी आरटीई के तहत अपनी जंची हुई उत्तरपुस्तिका की फोटोकॉपी भी प्राप्त कर सकते हैं। फोटोकॉपी लेने के लिए एक व दो जून को ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। प्रति उत्तरपुस्तिका 700 रुपये शुल्क देना होगा। यदि इन दो चरणों में मूल्यांकन से परीक्षार्थी संतुष्ट नहीं हैं तो वह पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए छह और सात को ऑनलाइन आवेदन होंगे।


    प्रयागराज। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का परिणाम जारी होने के बाद अब 17 मई से स्क्रूटनी के लिए आवेदन शुरू होंगे। बोर्ड की वेबसाइट पर पांच दिन तक ही आवेदन का मौका मिलेगा। इससे संतुष्ट न होने पर कॉपी की फोटो प्रति ले सकते हैं। उसके बाद फीस जमा करके उत्तर की जांच भी करवा सकते हैं। यह प्रक्रिया जून तक पूरी कर ली जाएगी।

    सीबीएसई बोर्ड ने सोमवार को 10वीं व 12वीं का परिणाम जारी कर दिया था। अब स्क्रूटनी के लिए गाइडलाइन जारी की गई है। स्क्रूटनी के लिए बोर्ड की वेबसाइट पर 17 मई की सुबह लिंक जारी कर दिया जाएगा। उसके माध्यम से प्रति विषय पांच सौ रुपये शुल्क जमा करके 21 मई तक आवेदन किया जा सकेगा। आवेदन होने के बाद कॉपियों की स्क्रूटनी होगी। सप्ताहभर में स्क्रूटनी का परिणाम वेबसाइट पर जारी कर दिया जाएगा। परिणाम देखने के बाद जो विद्यार्थी संतुष्ट नहीं होंगे, वह अपनी कॉपी की फोटो प्रति ले सकते हैं।

    सीबीएसई बोर्ड ने कॉपियों के मूल्यांकन को पारदर्शी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था की है। कॉपी की फोटो प्रति लेने के लिए एक और दो जून को वेबसाइट पर आवेदन होगा। प्रति कॉपी 700 रुपये शुल्क जमा करना होगा। इसमें वही आवेदन कर सकेंगे, जो स्क्रूटनी के लिए आवेदन कर चुके होंगे। कॉपी देखने के बाद अगर विद्यार्थी को लगता है कि किसी प्रश्न का मूल्यांकन गलत हुआ है।