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Tuesday, August 22, 2119

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    Sunday, February 8, 2026

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा को पढ़ाने के लिए 60 हजार अनुदेशकों की भर्ती होगी


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों में एक अप्रैल से शुरू हो रहे शैक्षिक सत्र 2026-27 से लगभग 60 हजार अनुदेशक रखे जाएंगे। बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 में व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत प्रत्येक स्कूल को कम से कम दो कोर्स पढ़ाना होगा। इसके लिए प्रत्येक स्कूल को अपने संसाधनों से दो-दो अनुदेशक रखने होंगे। बोर्ड के विशेषज्ञ स्कूलों में रखे जाने वाले अनुदेशकों की अर्हता तय करेंगे। अनुदेशकों की अर्हता के संबंध में जल्द ही स्कूलों को निर्देश भेजे जाएंगे।


    पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग से तैयार इन व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी जरूरतों, उद्योग जगत की अपेक्षाओं व विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखते हुए व्यवहारिक, कौशल-आधारित एवं रोजगारोन्मुखी विषयवस्तु को शामिल किया गया है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुरूप छात्र-छात्राओं को प्रोत्साहित करेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार यह कदम विद्यालयी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने, छात्रों को व्यावहारिक ज्ञान देने तथा उन्हें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।


    108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे

    व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कक्षा 9 और 11 के विद्यार्थियों हेतु एक साथ 108 नए व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू करने जा रहा है। इन कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एयरोस्पेस, मीडिया और ऑटो सर्विस टेक्निशियन जैसे आधुनिक विषयों को शामिल किया गया है।

    स्कूल भौगोलिक आधार पर करेंगे विषयों का चयन

    प्रत्येक स्कूल को अपनी भौगोलिक स्थिति के आधार पर कम से कम दो विषयों का चयन करना होगा। बोर्ड का उद्देश्य छात्रों को स्थानीय उद्योगों से जोड़ना है, जैसे भदोही में कालीन उद्योग से संबंधित प्रशिक्षण। संबंधित औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 10 दिनों की अनिवार्य इंटर्नशिप का प्रावधान भी रखा गया है।


    यूपी बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन, छात्रों के नाम, विषय आदि की त्रुटियों में संशोधन के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र

    यूपी बोर्ड परीक्षा से ठीक पहले विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन, छात्रों के नाम, विषय आदि की त्रुटियों में संशोधन के बाद जारी होंगे प्रवेश पत्र 

    7 फरवरी 2026
    प्रयागराज। हाईस्कूल, इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से शुरू हो रही है। परीक्षा में शामिल होने वाले ऐसे छात्रों जिनके नाम, विषय, माता-पिता के नाम आदि में गड़बड़ी है, उसे यूपी बोर्ड संशोधन करने में जुटा है। ऐसे में परीक्षा के बाद होने वाली परेशानी से छात्रों को वेवजह बोर्ड का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। संशोधन के बाद छात्रों को संशोधित प्रवेश पत्र भी दिए जाएंगे। छात्रों के विवरण में त्रुटि से संशोधन के नाम पर होने वाली परेशानी बचाने के लिए यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने एक मौका देते हुए प्रदेश के सभी डीआईओएस को निर्देशित किया था कि आवश्यक प्रपत्रों के साथ 25 जनवरी तक प्रधानाचार्यों से संशोधन के लिए आवेदन पत्र प्राप्त कर लें।

    साथ ही सभी प्रकरणों के परीक्षण के बाद अवशेष त्रुटियों, रिस्टोर व डिलीट का विद्यालयवार विवरण साक्ष्यों, अभिलेखों और अपनी संस्तुति के साथ 31 जनवरी तक अनिवार्य रूप से संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध करा दें।

    पांच क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, मेरठ, वाराणसी, बरेली और गोरखपुर तमाम संशोधन के प्रकरण आए हैं। लेकिन बोर्ड के द्वारा संशोधन कार्य अभी नहीं किया जा सका है। उधर बोर्ड सचिव भगवती सिंह का कहना है कि विवरण में संशोधन के बाद परीक्षार्थियों को संशोधित प्रवेश पत्र भी जारी किए जाएंगे।



    2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को यूपी बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का दिया आखिरी मौका

    20 जनवरी 2026
    लखनऊ। यूपी बोर्ड की परीक्षा 2026 में पंजीकृत छात्र-छात्राओं को बोर्ड ने शैक्षिक प्रपत्रों में सुधार का आखिरी मौका दिया है। इस अवसर के अन्तर्गत छात्र-छात्राएं नाम, जन्मतिथि, माता पिता के नाम में संशोधन करा सकेंगे। जेंडर व जाति में यदि कोई गलती की आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र जारी किया है। इसमें 25 जनवरी तक सभी स्कूलों प्रधानाचार्यों को डीआईओएस कार्यालय में छात्र का शुद्ध आवेदन पत्र जमा कराना होगा।

    माध्यमिक शिक्षा परिषद से पत्र जारी होने के डीआईओएस ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्य को पत्र भेजते हुए तय तिथि में कार्यालय को आवेदन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। ऐसा नहीं करने पर स्कूल और छात्र अपने गलत शैक्षिक प्रपत्र के लिए स्वयं जिम्मेदार होंगे।



    यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों के शैक्षिक विवरण की त्रुटि में संशोधन का अंतिम अवसर, संशोधन के लिए साक्ष्य के साथ क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक आवेदन भेजने के निर्देश

    प्रयागराज । हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षा में सम्मिलित होने वाले परीक्षार्थियों के विवरण बार-बार पोर्टल खोलने के बाद भी संशोधित नहीं किए जाने पर बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने नाराजगी जताई है। साथ ही परीक्षार्थियों के हित में उनके विवरण में संशोधन का अंतिम अवसर दिया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि वे संशोधन संबंधी सभी आवश्यक प्रपत्र के साथ प्रधानाचार्य से 25 जनवरी तक आवेदनपत्र लेकर संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 31 जनवरी तक भेजना सुनिश्चित करें, ताकि संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जा सके।

    बोर्ड सचिव ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में कहा है कि कई जनपदों से प्रधानाचार्य एवं परीक्षार्थियों ने जानकारी दी है कि उनके कई विवरण में त्रुटियां संशोधित नहीं हुई हैं। इससे स्पष्ट है कि कुछ प्रधानाचार्यों ने अपने कार्य के प्रति लापरवाही बरतते हुए अपने दायित्वों का सही ढंग से निर्वहन नहीं किया, जिसके कारण परीक्षार्थियों को परेशानी हो रही है। 


    अब अंतिम अवसर देते हुए सचिव ने भेजे पत्र में स्पष्ट किया है कि शैक्षिक विवरण में किस-किस स्तर की त्रुटियां ठीक की जाएंगी। इनमें विद्यार्थी का विवरण रिस्टोर किया जाएगा, विद्यार्थी का विवरण डिलीट किया जाएगा, उनके नाम अथवा माता-पिता के नाम में वर्तनी त्रुटि ठीक की जा सकेगी। साथ ही विषय वर्ग में संशोधन, विद्यार्थी की जन्मतिथि, जेंडर एवं जाति में संशोधन किया जा सकेगा, लेकिन संशोधन के संबंध में साक्ष्य अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने होंगे। संशोधन के लिए आवश्यक प्रपत्र संलग्न कर उसका भलीभांति परीक्षण करते हुए जिला विद्यालय निरीक्षक अपनी संस्तुति के साथ आवेदन पत्र क्षेत्रीय कार्यालय को उपलब्ध कराएंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पर 25 जनवरी के बाद प्राप्त आवेदन पत्र मान्य नहीं किए जाएंगे।


    सख्ती : परीक्षा में पर्चा लीक व अफवाह रोकेगी क्यूआरटी

    सख्ती : परीक्षा में पर्चा लीक व अफवाह रोकेगी क्यूआरटी

    लखनऊ : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा में पर्चा लीक कराने व सोशल मीडिया पर इसे लेकर अफवाह फैलाने वालों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली गई है। राज्य व जिला स्तर पर क्विक रिस्पांस टीमें (क्यूआरटी) बनाई गई हैं। पर्चा व कापियों की सुरक्षा को रात में भी स्ट्रांग रूम का औचक निरीक्षण होगा। परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ भी नजर रखेगी।


    18 फरवरी से शुरू हो रहीं यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 8033 केंद्रों पर होगी। इसमें 52.30 लाख परीक्षार्थी शामिल होंगे। ऐसे में नकल के साथ-साथ पर्चा लीक कराने वाले नकल माफिया व सोशल मीडिया पर पर्चा लीक की भ्रामक सूचना डालने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अगर कहीं कोई अफवाह व पर्चा लीक होने की खबर सामने आती है, तो क्यूआरटी समय रहते नियंत्रण करेगी। अफवाह फैलाने वालों को चिह्नित किया जाएगा कोई नेटवर्क है तो ध्वस्त

    पर्यवेक्षकों की तैनाती

    यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने के लिए मंडल व जिलों में एक-एक पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। अयोध्या में निदेशक साक्षरता अनिल भूषण चतुर्वेदी, लखनऊ में संयुक्त शिक्षा निदेशक विवेक नौटियाल, देवीपाटन में सीटीई प्राचार्य अजय कुमार सिंह को पर्यवेक्षक बनाया गया है।

    Saturday, February 7, 2026

    नयी पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, जिन्हे पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है, के प्रकरण निस्तारित किए जाने के सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी

    नयी पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, जिन्हे पुरानी पेंशन योजना से आच्छादित किया गया है, के प्रकरण निस्तारित किए जाने के सम्बन्ध में दिशानिर्देश जारी


    Friday, February 6, 2026

    Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी 6 फरवरी को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से करेंगे परीक्षा पे चर्चा, सुबह 10 बजे होगा प्रसारण, जानिए! कहां देखें लाइव प्रसारण?

    परीक्षा पे चर्चा आज, पीएम मोदी बच्चों से करेंगे संवाद, होगा सजीव प्रसारण


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शुक्रवार को होने वाले परीक्षा पे चर्चा के विशेष एपिसोड में वह परीक्षाओं से जुड़े विषयों, तनावमुक्त रहने और सीखने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत पर बात करेंगे। यह कार्यक्रम सुबह 10 बजे प्रसारित होगा। इस वर्ष परीक्षा पे चर्चा के लिए 4.5 करोड़ से अधिक लोगों ने पंजीकरण कराया है। 

    प्रधानमंत्री ने बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहाि इस वर्ष का परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम कई रोचक विषयों को शामिल करेगा, जिनमें खास तौर पर परीक्षा के दौरान तनाव से दूर रहने और आत्मविश्वास बनाए रखने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह मंच उन्हें देशभर के होनहार विद्यार्थियों से संवाद का अवसर देता है, जिसे वह हमेशा पसंद करते हैं।

    परीक्षा पे चर्चा का यह एपिसोड टेलीविजन के साथ-साथ सोनीलिव, प्राइम वीडियो और जी 5 जैसे ओटीटी मंचों पर भी उपलब्ध रहेगा। इस साल परीक्षा पे चर्चा के तहत प्रधानमंत्री ने गुजरात के देवमोगरा, तमिलनाडु के कोयंबटूर, छत्तीसगढ़ के रायपुर, असम के गुवाहाटी और नई दिल्ली स्थित 7 लोक कल्याण मार्ग पर विद्यार्थियों से संवाद किया। इन बैठकों में उन्होंने परीक्षा को बोझ नहीं, बल्कि सीखने का अवसर मानने की बात कही और संतुलन बनाए रखने के व्यावहारिक सुझाव दिए। 



    परीक्षा पर चर्चा कार्यक्रम अन्तर्गत मा० प्रधानमंत्री जी की विद्यार्थियों के साथ चर्चा का 06 फरवरी को प्रातः 10.00 बजे होगा सजीव प्रसारण 





    Pariksha Pe Charcha 2026: पीएम मोदी 6 फरवरी को छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से करेंगे परीक्षा पे चर्चा, सुबह 10 बजे होगा प्रसारण, जानिए! कहां देखें लाइव प्रसारण?

    Pariksha Pe Charcha 2026 Date: परीक्षा पे चर्चा का 9वां संस्करण 6 फरवरी सुबह 10 बजे आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से संवाद करेंगे। इस बार कार्यक्रम नए अंदाज में देशभर के छात्रों से जुड़ते हुए आयोजित किया जा रहा है और इसे टीवी व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर लाइव देखा जा सकेगा।
     

    Pariksha Pe Charcha 2026: विद्यार्थियों को परीक्षा के तनाव से बाहर निकालने और उन्हें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने वाला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोकप्रिय कार्यक्रम ‘परीक्षा पे चर्चा’ एक बार फिर आयोजित होने जा रहा है।


    इस साल इसका 9वां संस्करण आयोजित किया जा रहा है, जिसकी तारीख आधिकारिक तौर पर घोषित कर दी गई है। प्रधानमंत्री 6 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे देशभर के छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से सीधे संवाद करेंगे।
    इस बार कार्यक्रम का बदला हुआ स्वरूप पिछले वर्षों में यह कार्यक्रम मुख्य रूप से दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित होता था, लेकिन अब इसके आयोजन के तरीके में बदलाव देखने को मिल रहा है। 

    नई पहल के तहत प्रधानमंत्री देश के अलग-अलग क्षेत्रों के छात्रों से सीधे मुलाकात कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने देवमोगरा, कोयंबटूर, रायपुर और गुवाहाटी के विद्यार्थियों से बातचीत की।  वहीं कुछ चयनित छात्रों को दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास (7, लोक कल्याण मार्ग) पर उनसे मिलने और अपने सवाल साझा करने का अवसर भी मिला।

    प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया के जरिए इस कार्यक्रम को लेकर अपनी उत्सुकता व्यक्त की और कहा कि परीक्षा के मौसम में ‘परीक्षा पे चर्चा’ की वापसी छात्रों के लिए नई ऊर्जा लेकर आती है। उन्होंने छात्रों से तनावमुक्त होकर परीक्षाओं का सामना करने की अपील भी की।


    रजिस्ट्रेशन में बना नया रिकॉर्ड
    इस वर्ष कार्यक्रम को लेकर छात्रों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। अब तक 4.5 करोड़ से ज्यादा छात्रों ने इसमें भाग लेने के लिए रजिस्ट्रेशन किया है, जो पिछले साल बने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड से भी अधिक बताया जा रहा है। 

    आंकड़ों के मुताबिक, 4.19 करोड़ से ज्यादा छात्र, करीब 24.84 लाख शिक्षक और लगभग 6.15 लाख अभिभावक इस पहल से जुड़ चुके हैं। यह बड़ी भागीदारी दर्शाती है कि परीक्षा के दबाव को कम करने की दिशा में यह कार्यक्रम कितना लोकप्रिय हो चुका है।


    कहां देखें लाइव प्रसारण?
    6 फरवरी को होने वाले इस खास कार्यक्रम का लाइव टेलीकास्ट दूरदर्शन के DD National, DD News और DD India चैनलों के साथ-साथ ऑल इंडिया रेडियो पर किया जाएगा। 

    इसके अलावा शिक्षा मंत्रालय के यूट्यूब चैनल, फेसबुक लाइव और MyGov.in पोर्टल पर भी छात्र इसे ऑनलाइन देख सकते हैं। कई निजी टीवी चैनल भी इसका प्रसारण करेंगे, ताकि देशभर के विद्यार्थी प्रधानमंत्री के सुझावों से जुड़ सकें।


    'एग्जाम वॉरियर्स' अभियान का हिस्सा
    परीक्षा पे चर्चा केंद्र सरकार की एग्जाम वॉरियर्स पहल से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य छात्रों को परीक्षा के दौरान होने वाली चिंता और दबाव से बाहर निकालना है। फरवरी के मध्य से सीबीएसई सहित विभिन्न बोर्ड परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं और अप्रैल में जेईई मेन जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं भी आयोजित होंगी। ऐसे समय में यह संवाद छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने में मददगार माना जाता है।

    इस कार्यक्रम में छठी कक्षा से ऊपर के छात्र, शिक्षक और अभिभावक हिस्सा ले सकते हैं। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र और भविष्य के कार्यक्रमों में शामिल होने का अवसर भी मिलता है। यह चर्चा केवल परीक्षा की तैयारी तक सीमित नहीं रहती, बल्कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए भी युवाओं को प्रेरित करती है।

    प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि अब 15 फरवरी

    प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों और सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि अब 15 फरवरी


    लखनऊ। प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों, महाविद्यालयों और
    सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों के लिए छात्रवृत्ति आवेदन की तारीख बढ़ाकर 15 फरवरी कर दी गई है। आवेदन केवल ऑनलाइन पोर्टल scholarship.up.gov.in पर ही स्वीकार किए जाएंगे। 


    माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने बताया कि इसके बाद कोई आवेदन या संशोधन नहीं होगा। छात्र विस्तृत जानकारी विभागीय वेबसाइटों पर देख सकते हैं। किसी भी सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक संपर्क किया जा सकता है। 

    योग्य शिक्षकों को मिलेगा अवसर, SCERT शुरू कर रहा है कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम, देखें जारी विज्ञप्ति


    कक्षा छह से 12 के छात्र छात्राओं को अब ऑनलाइन क्लास की भी सुविधा, योग्य शिक्षकों को मिलेगा अवसर

    लखनऊ। प्रदेश में बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से छात्र-छात्राओं को डिजिटल पठन-पाठन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में अब कक्षा छह से 12 के छात्रों को ऑनलाइन क्लास की भी सुविधा मिलेगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) की ओर से छात्रों को शिक्षकों के रिकॉर्डेड लेक्चर उपलब्ध कराए जाएंगे। 

    बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की पहल पर एससीईआरटी ने यह कवायद शुरू की है। ताकि छात्र कक्षाओं से खाली समय में या फिर शाम को घर में भी इनको सुनकर भौतिक, रसायन व जीव विज्ञान और गणित की तैयारी कर सकेंगे। यह पूरी तरह निःशुल्क होगा। यह एससीईआरटी की वेबसाइट, समग्र शिक्षा की वेबसाइट के साथ-साथ दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध होगा। आगे चलकर इसे पीएम ई-विद्या चैनल पर भी चलाया जाएगा।

    एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि इस शैक्षिक पहल का उद्देश्य कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों में विषय की समझ को और बेहतर किया जाए। उनके अधिगम स्तर में निरंतर सुधार किया जाए। साथ ही कठिन चीजों को सरल, रोचक और प्रभावी शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाए। 


    योग्य शिक्षकों को मिलेगा अवसर, SCERT शुरू कर रहा है कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम, देखें जारी विज्ञप्ति

    प्रदेश के विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने की दिशा में SCERT का डिजिटल कदम, भौतिक, रसायन, गणित और जीव विज्ञान के लिए रिकॉर्डेड ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करेगा SCERT


    लखनऊ । राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT), उत्तर प्रदेश ने कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों के शैक्षिक स्तर को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण शैक्षिक पहल की घोषणा की है। इसके तहत प्रदेश के परिषदीय, माध्यमिक एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से संबद्ध विद्यालयों में अध्ययनरत छात्रों के लिए भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, गणित एवं जीव विज्ञान विषयों में रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन किया जाएगा।

    SCERT द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में विषयगत समझ को गहरा करना, अधिगम स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना तथा कठिन अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रभावी शिक्षण विधियों के माध्यम से प्रस्तुत करना है। यह पहल विद्यार्थियों को गुणवत्तायुक्त शैक्षिक संसाधनों तक समान अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

    इस कार्यक्रम के लिए राज्य के परिषदीय, माध्यमिक एवं केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के विद्यालयों में कक्षा 6 से 12 तक कार्यरत हिंदी एवं अंग्रेजी माध्यम के इच्छुक और योग्य शिक्षक स्वयं नामांकन (सेल्फ-नॉमिनेशन) के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया गूगल फॉर्म के जरिए पूरी की जाएगी। चयनित शिक्षक रिकॉर्डेड मॉडल ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन करेंगे, जिससे न केवल विषयवस्तु की स्पष्ट समझ विकसित होगी, बल्कि नवाचार आधारित शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल टूल्स और प्रभावी शैक्षिक रणनीतियों से भी शिक्षक और विद्यार्थी परिचित हो सकेंगे।

    SCERT ने स्पष्ट किया है कि कार्यक्रम के अंतर्गत शिक्षण प्रदान करने वाले चयनित शिक्षकों को निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा। यह पहल शिक्षकों की अकादमिक दक्षता, अनुभव और समर्पण को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक अहम प्रयास है।

    कार्यक्रम से संबंधित पात्रता मानदंड, नामांकन प्रक्रिया, चयन प्रक्रिया तथा कक्षावार एवं विषयवार समय सारिणी की विस्तृत जानकारी SCERT उत्तर प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराई गई है। परिषद ने यह भी बताया कि चयनित शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र के साथ निर्धारित मानदेय प्रदान किया जाएगा।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रदेश में डिजिटल शिक्षा को सशक्त बनाने और विद्यार्थियों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक ठोस कदम साबित हो सकती है।



    प्राइमरी में मोबाइल से पढ़ाई पर रोक लगाने के लिए उप्र महिला आयोग की अध्यक्ष ने सभी डीएम को भेजा पत्र

    प्राइमरी में मोबाइल से पढ़ाई पर रोक लगाने के लिए उप्र महिला आयोग की अध्यक्ष ने सभी डीएम को भेजा पत्र


    लखनऊ। उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की ओर से गुरुवार को सभी जिलों के डीएम को पत्र लिख कर प्राथमिक कक्षाओं में तत्काल मोबाइल फोन से पढ़ाई कराने जाने पर रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं। 

    गाजियाबाद में तीन बहनों के कोरियन लव गेम के चक्कर में आत्महत्या किए जाने के बाद मोबाइल की लत छुड़ाने के लिए यह आदेश जारी किया गया है।

    उप्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान का कहना है कि विद्यार्थी मोबाइल के लती बन रहे हैं। प्राथमिक स्तर की कक्षाओं में पढ़ाई के लिए मोबाइल का उपयोग करने वाले बच्चे अनजान में कई खतरनाक मोबाइल गेम खेलने लगते हैं।



    प्राथमिक विद्यालयों में ऑनलाइन कक्षाओं पर लगेगा प्रतिबंध, राज्य महिला आयोग ने जिलाधिकारियों को दिया निर्देश

    लखनऊ। राज्य महिला आयोग ने सभी जिलाधिकारियों को प्राथमिक विद्यालयों में फोन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध का निर्देश दिया है। यह कदम फोन की लत की वजह से गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या बाद उठाया गया है।

    राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष की ओर से जारी आदेश में मोबाइल आधारित शैक्षणिक गतिविधियों और ऑनलाइन कक्षाओं को रोकने का निर्देश दिया है। अध्यक्ष डॉ. बबीता सिंह चौहान ने बताया कि शिक्षा के नाम पर लापरवाही देखने को मिलती है। कक्षा पांच तक के बच्चों में फोन की लत लगने का खतरा सबसे अधिक है।

    ऐसे में समाज एवं शैक्षणिक व्यवस्थाएं सुधारने की जरूरत है। वर्तमान में स्कूलों की ओर से बच्चों के होमवर्क, असाइनमेंट एवं अन्य शैक्षणिक गतिविधियां अनिवार्य रूप से व्हाट्सएप ग्रुप अथवा अन्य डिजिटल माध्यमों से मोबाइल फोन पर भेजी जा रही हैं। इस पर रोक लगने की जरूरत है। उन्होंने गाजियाबाद जैसी घटना भविष्य में न हो इसके लिए उचित कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। संवाद

    Thursday, February 5, 2026

    उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार

    उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार


    लखनऊ । उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों तक सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग से जुड़े प्रत्येक कार्मिक को अपने परिवार के सभी सदस्यों का विवरण फैमिली आईडी पोर्टल पर दर्ज कराना होगा।



    प्रदेश भर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और अन्य कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। फैमिली आईडी में पति, पत्नी और बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों का नाम और आधार नंबर दर्ज किया जाएगा। पंजीकरण के दौरान मुख्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा, जिस पर ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी बीईओ और विद्यालय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय से फैमिली आईडी बनवाकर उसकी प्रति विभाग को उपलब्ध कराएं। फैमिली आईडी तैयार होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों का वेतन निर्गत किया जाएगा। इसी कारण फरवरी माह का वेतन फैमिली आईडी पूर्ण होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

    अधिकारियों का कहना है कि फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी डाटाबेस में कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्पष्ट और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा फैमिली आईडी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जा रही है।

    शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कार्मिकों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा करना होगा, ताकि वेतन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।

    माध्यमिक शिक्षक सरकारी और निजी अस्पतालों में करा सकेंगे मुफ्त इलाज, वित्तविहीन के शिक्षकों का होगा चिह्नांकन, देखें आदेश 


    लखनऊ। कैबिनेट की हरी झंडी के बाद शासन ने बुधवार को माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने का शासनादेश जारी कर दिया। इसका लाभ अशासकीयसहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालयों के शिक्षकों, स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों, व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञों व मानदेय शिक्षकों, संस्कृत शिक्षा परिषद के मान्यता प्राप्त अनुदानित विद्यालयों के शिक्षकों सहित कुल 2.97 लाख शिक्षकों व उनके आश्रित परिवार को मिलेगा।

    अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शिक्षकों व उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सरकारी चिकित्सालयों के अलावा निजी चिकित्सालयों में भी उपचार की कैशलेस सुविधा मिलेगी। शिक्षकों व उनके परिवार के सदस्यों के लिए प्रति शिक्षक 3000 सालाना प्रीमियत अनुमानित है। योजना का क्रियान्वयन साचीज के माध्यम से कराया जाएगा। लाभार्थियों व उनके परिवार का पूरा विवरण माध्यमिक शिक्षा विभाग के नामित नोडल अधिकारी हर साल 30 जून तक मुख्य कार्यपालक अधिकारी साचीज को उपलब्ध कराएंगे। 

    वित्तविहीन के शिक्षकों का होगा चिह्नांकन : शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि चूंकि वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों का कोई अधिकृत आंकड़ा विभाग के पास नहीं होता है। इसलिए वित्तविहीन विद्यालयों के शिक्षकों के चिह्नांकन के लिए अलग से आदेश जारी किया जाएगा। वहीं जो लोग पहले से केंद्र या राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित किसी अन्य स्वास्थय योजना से लाभांवित हैं, उन्हें इस योजना का लाभअनुमन्य नहीं है।



    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधीन अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों तथा स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ प्रदान किये जाने के सम्बन्ध में।



    सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

    सात / आठ फरवरी को प्रस्तावित सीटीईटी की तैयारियों में जुटे हैं उम्रदराज शिक्षक

    किसी का बेटा 12वीं बोर्ड परीक्षा में, किसी की बेटी नीट

    सुप्रीम कोर्ट ने परिषदीय शिक्षकों के लिए अनिवार्य किया है टीईटी


    प्रयागराज। वर्षों से कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को पढ़ाने वाले सैकड़ों उम्रदराज शिक्षक आज खुद फिर से परीक्षार्थी बन गए हैं। नौकरी में बने रहने की अनिवार्यता ने उन्हें ऐसी स्थिति में ला खड़ा किया है कि वे दिन में स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं और रात में खुद की पढ़ाई में जुटते हैं। बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे बच्चों के साथ अब उनके शिक्षक भी किताबें खोलकर बैठने को मजबूर हैं।


    प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बड़ी संख्या में शिक्षक, जिनकी सेवा अवधि दो दशक से अधिक हो चुकी है, शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) और अन्य अनिवार्य अर्हताओं को पूरा करने के दबाव में लगातार तैयारी कर रहे हैं। कई शिक्षक ऐसे हैं जिनके बच्चे 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा या प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, और घर का माहौल एक साथ दो पीढ़ियों की पढ़ाई का केंद्र बन गया है।

    इन शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने जीवन का बड़ा हिस्सा बच्चों को शिक्षित करने में लगा दिया, लेकिन अब उनकी योग्यता पर प्रश्नचिह्न लगाकर उन्हें फिर से परीक्षा की कसौटी पर खड़ा कर दिया गया है। उम्र, स्वास्थ्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बावजूद वे सिर्फ इसलिए तैयारी कर रहे हैं ताकि वर्षों की सेवा के बाद नौकरी न छिन जाए।

    शिक्षक संगठनों का मानना है कि अनुभव को दरकिनार कर केवल परीक्षा आधारित व्यवस्था थोपना शिक्षा व्यवस्था की विडंबना है। वे कहते हैं कि जो शिक्षक वर्षों से कक्षा में परिणाम दे रहे हैं, उनके लिए सम्मानजनक समाधान होना चाहिए था। मौजूदा स्थिति में शिक्षक मानसिक दबाव, असुरक्षा और अपमान की भावना से गुजर रहे हैं।

    शिक्षा जगत में यह तस्वीर चिंताजनक मानी जा रही है, जहां पढ़ाने वाले खुद असुरक्षित भविष्य के डर से फिर से छात्र बन गए हैं। यह सवाल अब और तेज हो गया है कि क्या अनुभव, सेवा और समर्पण की कोई कीमत नहीं, या फिर शिक्षक को जीवन भर परीक्षा देते रहना ही उसकी नियति बना दी गई है।

    Wednesday, February 4, 2026

    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश

    परीक्षा शुरू होने से एक सप्ताह पूर्व पोर्टल पर जारी किए जाएंगे निरीक्षकों के परिचय पत्र, यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी किए निर्देश

    सचिव भगवती सिंह की ओर से सभी डीआईओएस को भेजा गया पत्र

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं के सुचारु, पारदर्शी और नकलविहीन संचालन के लिए कक्ष निरीक्षकों की नियुक्ति को लेकर सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।

    सचिव ने निर्देश दिया है कि । कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगाते ए समय उनके संपूर्ण विवरण की न भलीभांति जांच की जाए। किसी विद्यालय से संबंधित परीक्षा केंद्र रे पर कितने कक्ष निरीक्षकों की आवश्यकता होगी, इसका पूरा 5 विवरण डीआईओएस स्तर से ही निर्गत किया जाएगा। कक्ष निरीक्षकों के परिचय पत्र माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर परीक्षा प्रारंभ होने से एक सप्ताह पूर्व जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा डाउनलोड किए जाएंगे।

    परिचय पत्र पर जिला विद्यालय निरीक्षक द्वारा कक्ष निरीक्षक को आवंटित परीक्षा केंद्र का विवरण अंकित कर संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य को हस्तगत कराया जाएगा। कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापकों को परीक्षा प्रारंभ होने की तिथि से तीन दिवस पूर्व 15 फरवरी को अपने आवंटित परीक्षा केंद्र पर उपस्थित होकर केंद्र व्यवस्थापक को रिपोर्ट करना अनिवार्य होगा।

    डीआईओएस द्वारा जनपद में बनाए गए सभी परीक्षा केंद्रों के लिए केंद्रवार कक्ष निरीक्षकों की सूची तैयार कर अपने कार्यालय में सुरक्षित रखी जाएगी। निर्देशों के अनुसार प्रत्येक परीक्षा कक्ष में न्यूनतम दो कक्ष निरीक्षक नियुक्त किए जाएंगे, जिनमें से एक कक्ष निरीक्षक का बाह्य विद्यालय से होना अनिवार्य होगा। इसके अलावा पांच कक्षों पर एक मोचक की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।

    सचिव ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिला विद्यालय निरीक्षक यह सुनिश्चित करें कि कक्ष निरीक्षण कार्य में लगाए गए अध्यापक माध्यमिक शिक्षा परिषद के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार न किए गए हों। परीक्षा समिति की बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार, जिन परीक्षा केंद्रों पर बालिका परीक्षार्थी परीक्षा दे रही हों, वहां महिला कक्ष निरीक्षकों की अनिवार्य रूप से नियुक्ति की जाएगी।

    परीक्षा केंद्रों पर प्रत्येक कक्ष में 40 परीक्षार्थियों पर दो तथा 41 से 60 परीक्षार्थियों पर तीन कक्ष निरीक्षक तैनात किए जाएंगे। साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि स्वकेंद्र पर छात्राओं के परीक्षा कक्षों में उसी विद्यालय के अध्यापकों की कक्ष निरीक्षक के रूप में ड्यूटी नहीं लगाई जाएगी।




    परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला निरीक्षक की लगेगी ड्यूटी, बोर्ड परीक्षा की 30 दिन तक रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया आदेश

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होने जा रही हैं। राजधानी के 120 केंद्रों पर परीक्षा को सुचारू और निष्पक्ष ढंग से संपन्न कराने के लिए परिषद के निर्देश पर जिला विद्यालय निरीक्षक ने आदेश जारी किए हैं। इसके अनुसार परीक्षा कक्ष में छात्राओं के रहने पर महिला कक्ष की ड्यूटी लगाना जरूरी है। तलाशी की भी उन्हीं को अनुमति होगी।

    परिषद की ओर से जारी आदेश में सख्त निर्देश दिए गए हैं। परिसर के अंदर छात्र-छात्राओं के साथ ही कक्ष निरीक्षकों को भी मोबाइल फोन, कैलकुलेटर व अन्य इलेक्ट्रिॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होगी। स्ट्रांग रूम, परीक्षा कक्ष व अन्य जगहों पर लगने वाले सीसीटीवी कैमरे में आवाज की भी रिकॉर्डिंग होनी जरूरी है। साथ ही इसका डाटा परीक्षा खत्म होने के 30 दिनों तक रखना अनिवार्य है।

    परिषद के अनुसार, प्रत्येक विद्यार्थी अपनी उत्तर पुस्तिका के प्रत्येक पेज पर अनुक्रमांक अनिवार्य रूप से लिखेंगे। कक्ष बोर्ड पर किसी स्तर से कुछ भी लिखने की अनुमति नहीं होगी।

    परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र और उस पर लगने वाली फोटो का सही तरीके से मिलान जरूरी है। परीक्षा के दौरान किसी भी बाहरी व्यक्ति के प्रवेश पर रोक होगी। ऐसा पाए जाने पर विभागीय व प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।




    यूपी बोर्ड की परीक्षा में जूते मोजे उतरवाने पर प्रतिबंध, रोज कैमरों और वायस रिकॉर्डर की होगी जांच, एक माह तक सुरक्षित रखनी होगी रिकॉर्डिंग

    लखनऊ । राज्य सरकार ने यूपी बोर्ड में परीक्षार्थियों के जूते-मोजे उतरवाकर परीक्षा लेने पर रोक लगा दी है। केंद्र के मुख्य द्वार पर ही परीक्षार्थियों की पूरी जांच होगी। केंद्रों पर लगे कैमरों और वायस रिकॉर्ड की जांच होगी। खराब होने पर सूचना तुरंत डीआईओएस के साथ कंट्रोल रूम को देनी होगी और अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने शासनादेश जारी करते हुए मंडलायुक्तों जिलाधिकारियों को निर्देश भेज दिया है। इसमें कहा है कि किसी भी छात्रा की तलाशी पुरुष शिक्षक नहीं करेंगे। केंद्र पर जिस विषय का पेपर है, उसके शिक्षकों की ड्यूटी नहीं लगेगी। परीक्षार्थियों से अभद्र व्यवहार नहीं करेंगे। 

    बोर्ड परीक्षा के परीक्षार्थियों को उत्तर पुस्तिका के हर पेज पर रोल नंबर और उत्तर पुस्तिका क्रमांक लिखना होगा। केंद्र पर फोटोग्राफी और प्रेस, मीडिया को ब्रीफिंग नहीं होगी। सीसीटीवी कैमरे, वायस रिकार्डर के बिना किसी भी कीमत पर परीक्षा नहीं होगी। कैमरे, वायस रिकार्डर के डीवीआर की रिकार्डिंग 30 दिन सुरक्षित रखनी होगी। केंद्रों के निरीक्षण की रिपोर्ट रोज सेक्टर, स्टैटिक मजिस्ट्रेट डीएम, डीआईओएस को देंगे। केंद्रों पर प्रवेश पत्र के साथ कक्ष निरीक्षकों, ड्यूटी में लगे कर्मचारियों के परिचय पत्र की भी जांच होगी। निरीक्षकों के मोबाइल और गैजेट बाहर जमा कराए जाएंगे।



    माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश प्रयागराज द्वारा संचालित बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के सफल संचालन के सम्बन्ध में शासनादेश जारी, देखें क्या करें और क्या न करें संबधी निर्देश






    यूपी बोर्ड के अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर एसटीएफ करेगी निगरानी, नकल में संलिप्त बाहरी व्यक्तियों पर अंकुश के लिए एलआइयू रहेगी सक्रिय

    थानाध्यक्षों को निर्देश, केंद्र व्यवस्थापक व निरीक्षक माने जाएंगे लोकसेवक


     प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा नकलविहीन और शुचितापूर्ण संपन्न कराने के लिए प्रदेश के सभी मंडलायुक्तों, एडीजी, डीएम, पुलिस आयुक्त/एसएससी व एसपी को शासन स्तर से निर्देश जारी किए गए हैं। कहा गया है कि नकल में संलिप्त बाह्य व्यक्तियों पर अंकुश लगाने के लिए एलआइयू व अन्य स्त्रोतों से सूचना एकत्र कर परीक्षा केंद्रों पर आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय किए जाएं। अतिसंवेदनशील परीक्षा केंद्रों पर आवश्यकतानुसार एसटीएफ को तैनात किया जाए।

    परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों के बाहर पुलिस बल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस अनुरूप व्यवस्था बनाने के निर्देश यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों (जेडी)/ जिला विद्यालय निरीक्षकों को दिए हैं। यूपी बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर निरीक्षण व व्यवस्थापन कार्य करने वाले अध्यापकों व केंद्राध्यक्षों को लोक सेवक माना जाएगा। ऐसे में इन पर हमला आदि दुर्घटनाओं के मामले में संज्ञेय अपराध के अंतर्गत एफआइआर दर्ज की जाएगी।

     परीक्षा केंद्र से सामूहिक नकल अथवा परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र लीक की सूचना मिलने/संदेह होने पर उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के अंतर्गत कार्रवाई की जाएगी। इसमें आजीवन कारावास तक तथा एक करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रविधान है। जनपद को जोन सेक्टर में बांटकर मजिस्ट्रेट नियुक्त किए जाएंगे। यह दायित्व एसडीएम/नगर मजिस्ट्रेट/कार्यकारी मजिस्ट्रेट को दिया जाएगा। 

    निरीक्षण व्यवस्था इस तरह बनाई जाए कि प्रत्येक सेक्टर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 10 से अधिक न हो। यथासंभव प्रधानाचार्य पद के समानांतर या उच्च पदधारक कार्मिक अधिकारी को ही स्टैटिक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जाएगा। स्टैटिक मजिस्ट्रेट प्रत्येक परीक्षा केंद्र पर नियुक्त किए जाएंगे। परीक्षा 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर कराई जाएगी।



    बोर्ड परीक्षा वर्ष 2026 के प्रश्नपत्रों के सुरक्षित रख-रखाव हेतु परीक्षा केन्द्रों पर स्ट्रांग रूम की स्थापना व उसमें रखी डबल लॉक आलमारी की सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रश्नपत्रों के वितरण के सम्बन्ध में।


    मदरसा बोर्ड की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 9 से 14 फरवरी तक, डाउनलोड करें समय सारिणी

    मदरसा बोर्ड की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 9 से 14 फरवरी तक, डाउनलोड करें समय सारिणी 


    लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद की मुंशी/मौलवी और आलिम की परीक्षाएं 277 परीक्षा केंद्रों पर 9 से 14 फरवरी तक होंगी। मदरसा बोर्ड ने 71 जिलों में ये केंद्र बनाए गए हैं। केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है। परीक्षा में 80933 परीक्षार्थी शामिल होंगे। परीक्षाएं सुबह 8 से 11 बजे और दोपहर 2 से 5 बजे तक दो पाली में होंगी। बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि फर्नीचर की व्यवस्था वाले मदरसों और इंटर कालेजों को परीक्षा केंद्र बनाया गया है। 


    छुट्टी के दिन शिक्षकों को ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे, शासन स्तर से भी आदेश जारी किए जाने की तैयारी

    छुट्टी के दिन शिक्षकों को ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे, शासन स्तर से भी आदेश जारी किए जाने की तैयारी


    लखनऊ। कोई भी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) अवकाश के दिन शिक्षकों को जबरन ड्यूटी पर नहीं बुला सकेंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने पिछले दिनों आदेश भी जारी किए थे लेकिन उस आदेश के अमल में हो रही हीलाहवाली पर अब शासन ने कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं। ऐसे में अब बिना ठोस कारण छुट्टी के दिन शिक्षकों को काम पर बुलाना डीआईओएस को महंगा पड़ सकता है। शासन स्तर से भी इस संबंध में आदेश जारी किए जाने की तैयारी है।

    दरअसल, पिछले महीनों में प्रचंड ठंड के कारण मुख्यमंत्री ने स्कूलों में छुट्टी के आदेश दिए थे। बाद के कुछ दिनों में शासन स्तर से भी आदेश जारी कर भीषण ठंड के कारण स्कूलों में छुट्टी की गई थी। उस दौरान कई जिलों के डीआईओएस ने अवकाश घोषित होने के बावजूद शिक्षकों के लिए उपस्थिति अनिवार्य कर दी थी। कई जिलों में तो बाद में सूचना देकर शिक्षकों को स्कूल बुलाया गया था। इसको लेकर शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध किया था। साथ ही छुट्टी के दिन शिक्षकों से जबरन ड्यूटी कराए जाने की कई शिकायतें शिक्षा निदेशालय से लेकर शासन तक को की थी।


    अवकाश में ड्यूटी के के लिए जेडी की अनुमति जरूरी

    शासन ने माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को निर्देश दिए थे कि इसको लेकर एक दिशा निर्देश जारी करे। बताया जाता है कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से इस बारे में जारी दिशा-निर्देश पर अमल नहीं होने पर अब शासन स्तर से इसके लिए निर्देश जारी करने की तैयार की जा रही है। जिसमें अवकाश के दिनों में किसी शिक्षक को ड्यूटी पर बुलाने से पहले जेडी (संयुक्त शिक्षा निदेशक) से अनुमति लेना अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।

    Tuesday, February 3, 2026

    हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार

    हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा से शिक्षा में बराबरी का सपना होगा साकार


    केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाने की घोषणा की गई है। यह योजना विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों की छात्राओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो सुरक्षित आवास की कमी के कारण पढ़ाई छोड़ देती थीं। हॉस्टल से छात्राओं को आत्मविश्वास, शिक्षा की निरंतरता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद मिलेगी।


    लखनऊ । केंद्रीय बजट 2026-27 में हर जिले में छात्राओं के लिए एक-एक हॉस्टल बनाने की घोषणा को शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा और दूरगामी कदम माना जा रहा है। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की छात्राओं के लिए यह योजना वरदान साबित होगी। आज भी बड़ी संख्या में बेटियां सिर्फ इस वजह से आगे की पढ़ाई छोड़ देती हैं क्योंकि उनके जिले या आसपास सुरक्षित आवास की व्यवस्था नहीं होती। ग्रामीण छात्राओं को उच्च शिक्षा तक सीधी पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों में इंटर, स्नातक या तकनीकी शिक्षा के संस्थान अक्सर जिला मुख्यालय या शहरी क्षेत्रों में होते हैं। आवास की सुविधा नहीं होने के कारण छात्राओं को रोज लंबी दूरी तय करनी पड़ती है या वे पढ़ाई बीच में ही छोड़ देती हैं।


    हॉस्टल बनने से उन्हें सुरक्षित और सुलभ आवास मिलेगा, जिससे वे बिना किसी बाधा के कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ाई कर सकेंगी। बालिका शिक्षा में गिरावट पर लगेगा अंकुश आर्थिक कमजोरी और सुरक्षा की चिंता के कारण कई परिवार बेटियों को दूर पढ़ने नहीं भेजते। जिले में ही छात्रा हॉस्टल होने से अभिभावकों का भरोसा बढ़ेगा और ड्रॉपआउट दर में कमी आएगी। इससे बालिकाओं की शिक्षा निरंतरता बनी रहेगी। सुरक्षित वातावरण से आत्मविश्वास में वृद्धि छात्राओं के लिए विशेष रूप से बनाए गए हॉस्टल में सुरक्षा, वार्डन, सीसीटीवी और अन्य मूलभूत सुविधाएं होंगी। सुरक्षित माहौल मिलने से छात्राओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे पढ़ाई के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और कौशल विकास पर भी ध्यान दे सकेंगी। 

    आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत किराए के मकान या निजी हॉस्टल का खर्च गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए भारी होता है। सरकारी हॉस्टल कम शुल्क पर उपलब्ध होने से परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा और बेटियों की शिक्षा पर खर्च करना आसान होगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सुविधा जिला मुख्यालयों में स्थित लाइब्रेरी, कोचिंग संस्थान और डिजिटल संसाधनों तक छात्राओं की पहुंच बढ़ेगी। इससे ग्रामीण छात्राएं भी इंजीनियरिंग, मेडिकल, प्रशासनिक और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकेंगी। सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव जब बेटियां पढ़-लिखकर आगे बढ़ेंगी, तो समाज में शिक्षा के प्रति सोच बदलेगी। यह योजना महिला सशक्तिकरण को मजबूती देगी और “बेटी पढ़ाओ, बेटी बढ़ाओ” के संकल्प को जमीन पर उतारेगी। कुल मिलाकर, हर जिले में छात्राओं के लिए हॉस्टल की व्यवस्था न केवल शिक्षा तक पहुंच आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण भारत की बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।

    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी

    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर हाईकोर्ट की रोक 17 फरवरी तक बढ़ी
     

    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन में याची शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 13 जनवरी को लगी अंतरिम रोक अगली सुनवाई तक बढ़ा दी है।

    अगली सुनवाई 17 फरवरी को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने कुल 130 अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। सोमवार को पक्षकारों ने जवाबी शपथ पत्र व प्रत्युत्तर शपथ पत्र दाखिल किया। इस पर न्यायालय ने अंतिम सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तारीख तय कर तब तक के लिए अंतरिम रोक बढ़ा दी।



    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन 3.0 पर आगे की कार्यवाही पर 2 फरवरी तक रोक बढ़ी, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को दिया जवाब दाखिल करने का समय

    प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया आदेश

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सोमवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में आगे किसी भी प्रकार की कार्यवाही। पर लगी रोक को 19 जनवरी से बढ़ाकर 2 फरवरी तक कर दिया है। साथ ही राज्य सरकार को मामले में जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है।

    याची शिक्षकों की ओर से अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह परिहार ने बताया कि कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 फरवरी को निर्धारित करते हुए अंतरिम आदेश दिया है कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 के संबंध में आगे की कार्यवाही नहीं करेंगे। 

    कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस अंतरिम आदेश का लाभ इस याचिका से संबद्ध अन्य याचिकाओं के याची शिक्षकों को भी मिलेगा। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया है। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश बाराबंकी की संगीता पाल सहित 29 प्राथमिक शिक्षकों द्वारा दाखिल याचिका पर पारित किया।

    याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 को बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण संबंधी शासनादेश को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने की मांग की गई है। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने नियम 21 का हवाला देते हुए कहा कि शिक्षक की सहमति के बिना समायोजन नहीं किया जा सकता। मामले में राज्य सरकार की ओर से भी अधिवक्ता उपस्थित हुए। कोर्ट ने अगली सुनवाई तक याचियों को मिली अंतरिम राहत को बढ़ाते हुए राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए समय प्रदान किया है। 



    मध्य सत्र में बेसिक शिक्षकों के समायोजन पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

    प्रयागराजः इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद और राज्य सरकार से प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और सहायक अध्यापकों का मध्य सत्र में स्थानांतरण और समायोजन करने के मामले में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि इस दौरान अध्यापकों के विरुद्ध कोई उत्पीड़नात्मक कार्रवाई न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अरुण प्रताप व 37 अन्य अध्यापकों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 

    कोर्ट ने जवाब के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। याचिका के अनुसार याची चित्रकूट के प्राथमिक विद्यालयों में हेड मास्टर और सहायक अध्यापक हैं। उन्हें उन विद्यालयों में समायोजित किया जा रहा है, जहां या कोई अध्यापक नहीं है या फिर बंद हो चुके हैं। याचियों का कहना है कि मध्य सत्र में समायोजन का कोई औचित्य नहीं है जबकि सत्र अप्रैल में प्रारंभ होता है। यह यूपी आरटीई एक्ट 2011 के नियम 21 का उल्लंघन भी है। याचियों को शीघ्र पदन करने का निर्देश दिया गया है।


    अमेठी, बाराबंकी और श्रावस्ती में भी समायोजन 3.0 पर लगी रोक, पुरानी  याचिकाओं के साथ कनेक्ट करते हुए 19 जनवरी को होगी अगली सुनवाई, देखें कोर्ट ऑर्डर 





    शिक्षकों की समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक अंतरिम रोक

    लखनऊ । हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों में समायोजन के मामले में महत्वपूर्ण आदेश देते हुए याची शिक्षकों के समायोजन प्रक्रिया पर 19 जनवरी तक के लिए अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायालय ने कहा है कि 19 जनवरी को वह मामले पर अंतिम सुनवाई करेगी।

    यह आदेश न्यायमूर्ति श्री प्रकाश सिंह की एकल पीठ ने शिक्षकों की ओर से दाखिल 12 अलग-अलग याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने राज्य सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया है। साथ ही यह भी आदेश दिया है कि याची शिक्षकों के संबंध में कोई अग्रिम कार्यवाही न की जाए। याचिकाओं में तीसरे चरण के समायोजन में नियमों की अनदेखी को आधार बनाया गया है।

    कहा गया है कि पहले चरण के समायोजन में विभिन्न जिलों के तमाम स्कूल एकल हो गए थे, उसके बाद अगस्त में दूसरे चरण का समायोजन तो हुआ लेकिन विसंगतियां दूर नहीं हो सकी तथा मनमाने तरीके से कुछ जिलों में वरिष्ठ तो कुछ में कनिष्ठ शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।



    परिषदीय शिक्षकों के समायोजन 3.0 में आगे की कार्यवाही पर 19 तक हाईकोर्ट की रोक, अगली सुनवाई 19 जनवरी को, देखें कोर्ट ऑर्डर 

    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन-3 मामले में किसी भी आगे की कार्रवाई पर 19 जनवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 19 जनवरी निर्धारित की और अंतरिम आदेश दिया कि तब तक बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी समायोजन-3 मामले में कोई कदम नहीं उठाएंगे।

    कोर्ट ने यह अंतरिम राहत इस याचिका से जुड़ी 11 अन्य याचिकाओं के याचियों को भी उपलब्ध कराई है। यह आदेश प्राथमिक शिक्षकों के समायोजन/स्थानांतरण-3.0 के शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर दिया गया। न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने बाराबंकी की संगीता पाल समेत 29 शिक्षकों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। याचिकाओं में 14 नवंबर 2025 के बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी समायोजन/स्थानांतरण के शासनादेश को रद्द करने का अनुरोध किया गया है।

    याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचजीएस परिहार ने कहा कि यह शासनादेश आरटीई अधिनियम और बेसिक शिक्षा अधिनियम, 1981 के नियमों का उल्लंघन करता है। नियम 21 के तहत शिक्षक की सहमति के बिना उन्हें समायोजित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि इस समायोजन से शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो रही है और अन्य विसंगतियां भी उत्पन्न हो रही हैं।