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Tuesday, August 22, 2119

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    Wednesday, May 25, 2022

    कानपुर देहात : शिक्षक समाधान दिवस में आई गंभीर शिकायतों से बेसिक शिक्षा कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

    कानपुर देहात : शिक्षक समाधान दिवस में आई गंभीर शिकायतों से बेसिक शिक्षा कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल






    छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको की तैयार करायी जा रही ईमेल आईडी को माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर अपलोड कराये जाने के सम्बन्ध में

    छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको की तैयार करायी जा रही ईमेल आईडी को माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर अपलोड कराये जाने के सम्बन्ध में


    विधानसभा में परिषदीय स्कूल के बच्चों के डीबीटी - यूनिफार्म और मिड डे मील को कनवर्जन कास्ट को लेकर सवालों पर छिड़ी बहस, पढ़िए पूरा मामला

    विधानसभा में परिषदीय स्कूल के बच्चों के डीबीटी - यूनिफार्म और मिड डे मील को कनवर्जन कास्ट को लेकर सवालों पर छिड़ी बहस, पढ़िए पूरा मामला

    1100 रुपये में नहीं मिलती यूनिफॉर्म- बच्चों को नहीं मिल रहा डीबीटी का लाभ, सरकार ने कहा- डीबीटी बंद नहीं करेंगे



    उत्तर प्रदेश विधान सभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष में इस बात को लेकर बहस हुई कि परिषदीय स्कूलों के बच्चों की यूनिफार्म में नाप ज्यादा जरूरी है या कपड़े की गुणवत्ता। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अभिभावकों की मांग थी कि यदि वे खुद यूनिफार्म खरीद सकेंगे तो नाप सही होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने पूछा कि सरकार वह दुकान बता दे जहां से 1100 रुपये में बच्चों के लिए यह सारा सामान मिल जाएगा।


    विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सपा के विरेन्द्र कुमार यादव के सवाल पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों के हर बच्चे को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में दो जोड़ी यूनिफार्म, एक जोड़ी जूता व दो जोड़ी मोजे, एक स्वेटर और एक स्कूल बैग देने के लिए अभिभावक के खाते में 1100 रुपये दिए जाते हैं। सत्र 2021-22 में इसके लिए 1852.52 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हुई थी जिसमें से 1695.05 करोड़ रुपये खातों में भेजे गए हैं।


    संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि पहले जो सिली-सिलाई यूनिफार्म मिलती थी, उसमें बच्चों को उनकी नाप के कपड़े नहीं मिल पाते थे। अभिभावकों की मांग थी कि यदि वे खुद यूनिफार्म खरीद सकेंगे तो नाप सही होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव और सपा के लालजी वर्मा ने पूछा कि सरकार वह दुकान बता दे जहां से 1100 रुपये में बच्चों के लिए यह सारा सामान मिल जाएगा।


    सुरेश खन्ना ने कहा कि मिल जाएगा बशर्ते यूनिफार्म के लिए 1000 रुपये प्रति मीटर वाला कपड़ा न लिया जाए। इस पर अखिलेश ने कहा कि कपड़े की गुणवत्ता से ही यूनिफार्म की कीमत बढ़ती है। डबल इंजन की सरकार को बच्चों को 1000 रुपये प्रति मीटर वाला कपड़ा देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि गुणवत्ता पहले देखी जाए या नाप? जवाब में खन्ना ने कहा कि नाप पहले जरूरी है, गुणवत्ता बाद में।


    महंगाई बढ़ी तो मिड-डे मील का लागत मूल्य क्यों नहीं : राष्ट्रीय लोक दल के प्रसन्न कुमार ने बेतहाशा बढ़ती महंगाई के सापेक्ष बच्चों को स्कूल में दिये जाने वाले मिड-डे मील के लागत मूल्य में पिछले दो वर्षों के दौरान वृद्धि न किये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि महंगाई को देखते हुए कम लागत मूल्य में भोजन की पौष्टिकता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि समय-समय पर मिड-डे मील की परिवर्तन लागत में वृद्धि होती रही है। बच्चों को निर्धारित मेन्यू के तहत भोजन दिया जाता है जिसकी पौष्टिकता भी सुनिश्चित की जाती है। उनके जवाब से असंतुष्ट प्रसन्न कुमार ने कहा कि क्या जहर खिला देंगे बच्चों को?

    17000 अनुदेशक मानदेय मामले में बिना रिकॉर्ड के आए अंडर सेक्रेट्री के आचरण से हाईकोर्ट नाराज, सुनवाई टली - अगली सुनवाई 11 जुलाई को

    17000 अनुदेशक मानदेय मामले में बिना रिकॉर्ड के आए अंडर सेक्रेट्री के आचरण से हाईकोर्ट नाराज, सुनवाई टली - अगली सुनवाई 11 जुलाई को


    बिना रिकार्ड के खंडपीठ के समक्ष पेश हुए थे केंद्र सरकार के अधिकारी पर बरसा हाईकोर्ट का गुस्सा,  प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के मानदेय से जुड़ा मसला



    प्रयागराज: प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27 हजार से अधिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपया प्रतिमाह मानदेय देने संबंधी एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर मंगलवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। 


    भारत सरकार की तरफ से मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ में अनुसचिव (अंडर सेक्रेटी) स्वर्निश कुमार सुमन बिना किसी रिकॉर्ड पेश हुए। उनके व्यवहार से खफा कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार उन्हें प्रयागराज आने का यात्रा भत्ता नहीं दें। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह प्रयागराज घूमने आए हैं। अपर सालिसिटर जनरल (एएसजी) शशि प्रकाश सिंह के अनुरोध पर मुकदमे की सुनवाई को फिर टाल दिया गई। अब सुनवाई 11 जुलाई को होगी। 


    मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल तथा जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा दाखिल अपीलों की सुनवाई कर रही है। राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ तथा लखनऊ बेंच में अपील की है। इनकी एक साथ सुनवाई हो रही है। लखनऊ से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्र तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी राज्य सरकार की तरफ से उपस्थित रहे। 


    अनुसचिव को भारत सरकार के एएसजी ने स्वयं कोर्ट से अनुरोध कर बुलाया था। केंद्र सरकार की तरफ पिछली तिथि पर अनुरोध किया गया था कि एक मौका दिया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 24 मई को केस सुनने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार को यह बताना है कि अनुदेशकों को दिए जाने वाले मानदेय के मद में उसने राज्य सरकार को कितना पैसा दिया?


     राज्य सरकार का कहना है कि अनुदेशकों की नियुक्ति कांट्रेक्ट आधार पर की गई है। कांट्रेक्ट में उल्लेखित शतर्ें और मानदेय लागू होगा। केंद्र सरकार ने अपना अंश राज्य सरकार को नहीं दिया है। अनुदेशकों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनका मानदेय 2017 में 17 हजार रुपये कर दिया था। इसके बाद भी उन्हें बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिल रहा है।

    IGNOU : जुलाई सत्र के लिए 30 जून तक करें दोबारा पंजीकरण

    IGNOU  : जुलाई सत्र के लिए 30 जून तक करें दोबारा पंजीकरण


    नई दिल्ली। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के तहत जुलाई सत्र में दाखिले के लिए उम्मीदवार 30 जून तक दोबारा रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। स्नातक, स्नातकोत्तर प्रोग्राम के सभी छात्रों को पंजीकरण करना अनिवार्य है। इग्नू में दोबारा जुलाई सत्र में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन समर्थ पोर्टल पर लॉगइन करके रजिस्ट्रेशन करना होगा।


    विश्वविद्यालय प्रशासन मुताबिक, इग्नू में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में विभिन्न डिग्री प्रोग्राम में अगले सेमेस्टर में दाखिले के सभी छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होता है। इसलिए विश्वविद्यालय में पहले से विभिन्न डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे छात्र दोबारा रजिस्ट्रेशन 30 जून तक कर लें।


     सबसे पहले समर्थ पोर्टल पर https://ignou.samarth.edu.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद छात्र दोबारा ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। पोर्टल पर जाकर न्यू रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करना होगा। यहां छात्र को अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी लिखना होगा। इसी पर विश्वविद्यालय के जरूरी जानकारियां भेजी जाएंगी। यदि छात्र ने पहले से पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर रखा होगा तो उसे अपना नाम और पासवर्ड डालकर ओपन करना होगा। इसके बाद छात्र को अपना कोर्स, डिग्री नाम या प्रोग्राम चुनना होगा।

    खंड शिक्षा अधिकारियों की चयन सूची रद्द करने के मामले में आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब तलब

    खंड शिक्षा अधिकारियों की चयन सूची रद्द करने के मामले में आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब तलब


     हाईकोर्ट ने प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के 309 पदों पर चयन की जारी सूची को लेकर दाखिल याचिका पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने धर्मेंद्र कुमार यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 


    याचिका में कहा गया है कि चयन में ओबीसी अभ्यर्थियों का आरक्षण सही से लागू नहीं किया गया है, इसलिए चयन सूची रद्द की जाए। याचियों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को घोषित पदों की तुलना में कम आरक्षण दिया गया है। 309 पदों के सापेक्ष सिर्फ 31 ओबीसी चयनित हुए हैं जबकि 27 प्रतिशत के हिसाब से 83 पद मिलना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में 31 चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाते हुए सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

    Tuesday, May 24, 2022

    फतेहपुर : रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया बेसिक शिक्षा विभाग का बाबू, एरियर भुगतान के नाम पर शिक्षक से वसूली का प्रयास पड़ा भारी

    फतेहपुर : रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया बेसिक शिक्षा विभाग का बाबू, एरियर भुगतान के नाम पर शिक्षक से वसूली का प्रयास पड़ा भारी


    यूपी के फतेहपुर जिले में आज एंटी करप्शन कानपुर की टीम ने आज शिक्षा विभाग के वरिष्ठ लिपिक को रंगे हाथ पैसा लेते हुए धर दबोचा है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्यवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने वरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर थाने ले गई जहाँ आरोपी लिपिक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है 

    बीच में आरोपित लिपिक जितेंद्र 


    फतेहपुर जिले में जिला पंचायत कार्यालय स्थित डीआई ऑफिस पहुंचकर एंटी करप्शन टीम ने छापेमारी कर ऑफिस में तैनात वरिष्ठ लिपिक को 12 हजार का रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ धर दबोच लिया और एंटी करप्शन टीम की इस कार्यवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने वरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर थाने ले गई जहाँ आरोपी लिपिक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है। 


    आपको बताते चलें कि जिले के हथगाम ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में तैनात टीचर देवेंद्र सिंह अपने एरियर का 2 लाख 68 हजार रुपए निकलवाने के लिए काफी दिनों से ऑफिस का चक्कर काट रहा था लेकिन रिश्वत की मांग पूरी न होने के कारण उसका पैसा बाबू द्वारा पास नहीं किया जा रहा था। जिसके बाद उसने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और अपनी पूरी बात अधिकारीयों से बताई , जिसके बाद टीम के निर्देश पर टीचर ने पूरी भूमिका रची और टीम के साथ डीआई ऑफिस पहुंचा और वरिष्ठ लिपिक द्वारा मांगी गई 14 हजार की रिश्वत की जगह उसने 12 हजार की रिश्वत उसके हाथ में पकड़ा दी। 


    जिसके बाद मौके पर मौजूद एंटी करप्शन की टीम ने वरिष्ठ लिपिक जितेंद्र श्रीवास्तव को मौके पर रंगे हाथ धर दबोचा और अपने साथ थाने ले जाकर पूछताछ करते हुए सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है।


    फतेहपुर।  एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को डीआई कार्यालय के दफ्तर में छापा मारा। यहां तैनात लिपिक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। वह खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय में हथगाम और हसवा ब्लाक का कार्यभार देखता है। पटल प्रभारी लिपिक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ हथगाम ब्लाक के शिक्षक ने भ्रष्टाचार निवारण विभाग में शिकायत की थी। वह एरियर भुगतान के एवज में रिश्वत मांग रहा था।


    इस पर योजना के तहत शिक्षक को टीम ने रुपये देकर खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय दफ्तर में भेजा। लिपिक ने जैसे ही रिश्वत के रुपये पकड़े तो पीछे से आई टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। इसके बाद टीम उसे लेकर कोतवाली चली गई। हथगाम ब्लाक के शिक्षक देवेन्द्र को एरियर भुगतान में वह परेशान कर रहा था। लिपिक पर कार्रवाई के लिए पुलिस के पास ले जाया गया है, जहां मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

    सीआईएससीई : कक्षा 10 और 12 के विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव, स्कूलों को भेजा गया बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप

    सीआईएससीई : कक्षा 10 और 12 के विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव, स्कूलों को भेजा गया बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप

    सीआईएससीई के सचिव गैरी अरथून ने स्कूलों को पत्र जारी कर बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप जारी किया है। इस सत्र में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा दो सेमेस्टर की बजाय पूर्व की भांति एक बार में ही होगी।


    काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) ने कक्षा 10 और 12 के कई पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है। वर्ष 2023 में होने वाली बोर्ड परीक्षा बदले हुए पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। 

    सीआईएससीई के सचिव गैरी अरथून ने स्कूलों को पत्र जारी कर बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप जारी किया है। इस सत्र में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा दो सेमेस्टर की बजाय पूर्व की भांति एक बार में ही होगी। सचिव ने स्कूलों को बदले पाठ्यक्रम के अनुसार ही पठन-पाठन और परीक्षा कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि जुलाई में विषयों के मॉडल प्रश्न पत्र भी जारी कर दिए जाएंगे।

    इन विषयों के पाठ्यक्रम में किया है बदलाव
    कक्षा 10 में अंग्रेजी, इंडियन लैंग्वेजेस, मॉडर्न फॉरेन लैंग्वेज, हिस्ट्री एंड सिविक्स, जियोग्राफी, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, इकोनॉमिक्स, कामर्शियल स्टडीज, क्लासिकल लैंग्वेज, एनवायरमेंटल साइंस, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, इकोनॉमिक एप्लीकेशंस, कामर्शियल एप्लीकेशंस, आर्ट, परफॉर्मिंग आर्ट्स, होम साइंस, कुकरी, फैशन डिजाइनिंग, फिजिकल एजुकेशन, योगा, टेक्निकल ड्राइंग एप्लीकेशंस, एनवायरमेंटल एप्लीकेशंस, मास मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। कक्षा 12 में इंग्लिश, इंडियन लैंग्वेजेस, मॉडर्न फॉरेन लैंग्वेजेज, क्लासिकल लैंग्वेजेज, इलेक्टिव इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, जियोग्राफी, सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स, कॉमर्स, अकाउंट्स, बिजनेस स्टडीज, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, होम साइंस, फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रिसिटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सांइस, कंप्यूटर साइंस, जियोमेट्रिकल एंड मैथमेटिकल ड्राइंग, जियोमेट्रिकल एंड बिल्डिंग ड्राइंग, आर्ट, म्यूजिकल, फिजिकल एजुकेशन, एनवायरमेंटल साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, मास मीडिया कम्यूनिकेशन, हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट और लीगल स्टडीज में बदलाव किया गया है।

    राज्य अध्यापक पुरस्कार : 10 जिलों से सिर्फ 12 आवेदन, शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है चयन प्रक्रिया

    राज्य अध्यापक पुरस्कार : 10 जिलों से सिर्फ 12 आवेदन, शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है चयन प्रक्रिया


    वाराणसी : उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षक सम्मान की चयन प्रक्रिया की शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है।


    सरकार ने प्रदेश भर से शिक्षकों से आवेदन मांगे हैं, लेकिन वह आवेदन ही नहीं कर रहे हैं। हालात ये है कि प्रदेश के 28 जिलों से एक भी आवेदन नहीं आए हैं। भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी भी इसमें शामिल है। प्रयागराज में पांच, आजमगढ़ व सिद्धार्थनगर में चार आवेदन आए हैं। बस्ती, फिरोजाबाद, जौनपुर, सहारनपुर, सीतापुर में तीन आवेदन आए हैं। वहीं, बलिया, चंदौली, गाजीपुर में दो आवेदन आए है। एडी बेसिक व बीएसए के आदेश के बाद भी भदोही और वाराणसी से एक भी आवेदन नहीं आए हैं।

    यू-डायस में भरा जाएगा स्मार्ट टीवी व प्रोजेक्टर का भी ब्योरा

    गोरखपुर : यू-डायस में भरा जाएगा स्मार्ट टीवी व प्रोजेक्टर का भी ब्योरा


    ◆ गलत आंकड़ा देने पर वाले स्कूलों पर होगी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई

    ◆ यू-डायस में विस्तृत विवरण भरने का 31 मई तक का समय दिया गया


    गोरखपुर : परिषदीय स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर का डाटा भी यू-डायस ( यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन) पर भरा जाएगा। चाहे वह किसी भी साधन से स्कूल में लगाया गया हो। इसे अंकित न करने पर परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआइ) रैंकिंग में प्रदेश को अंक नहीं मिलते। इसको देखते हुए शासन स्तर से 31 मई तक यू-डायस में विवरण भरने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यदि एक स्कूल परिसर में एक से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं तो उनका कोड भी अंकित करना होगा।

    यदि स्कूलों में किसी भी तरह की मरम्मत की जरूरत है तो संबंधित फार्म में उसका ब्योरा भरा जाए अन्यथा प्रस्ताव नामंजूर कर दिया जाएगा। इस बार प्री-प्राइमरी में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। अब इसके लिए भी प्रस्ताव पीएबी में भेजा गया है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यदि यू-डायस के अंतर्गत डाटा कैप्चर फार्मेट में भरे गए आंकड़े व ब्योरा सही नहीं मिलते हैं तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रबंधक, शिक्षक संकुल तथा खंड शिक्षाधिकारी उत्तरदायी होंगे। मान्यता प्राप्त विद्यालय, मदरसा, सीबीएसई व आइसीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालय अपना ब्योरा आनलाइन नहीं कराता है तो उनके विरुद्ध मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।

    हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

    हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

    प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम ललितपुर को निर्देश दिया है कि चुनाव ड्यूटी में कोविड महामारी से मृत सहायक अध्यापक के दो नाबालिग बच्चों की अर्जी पर दो हफ्ते में सुनवाई करें और दो माह के भीतर एक जून 2021 के शासनादेश के तहत मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने मुआवजा अर्जी अपलोड करने की तिथि 15 जून 2022 तक बढ़ा दी है और कहा है कि यह आदेश दिया है। विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है। इसका लाभ अन्य लोगों को नहीं मिलेगा।


    हाईकोर्ट ने कहा है कि मुआवजा राशि दोनों नाबालिग बच्चों के नाम राष्ट्रीय बैंक में सावधि जमा की जाए और बालिग होने तक जिलाधिकारी उनके वैधानिक संरक्षक के जरिये निगरानी रखें। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललितपुर को भी उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही महानिबंधक को रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी तथा न्यायमूर्ति वीडी चौहान की खंडपीठ ने कुमारी प्रियंका व अभिषेक की याचिका को स्वीकार करते हुए

    याचीगण की ओर से कहा गया कि उनके पिता सहायक अध्यापक थे। चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से उनकी मौत हो गई। शासनादेश के तहत उन्होंने बीएसए ललितपुर को अर्जी दी लेकिन जिलाधिकारी के जरिये समय रहते उसे पोर्टल पर अपलोड नहीं करा सके। भगवान सिंह ने कोर्ट से वैधानिक संरक्षक का आदेश लेकर मदद की सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली जिस पर कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।

    पढ़ाई के बाद अब बेरोजगार नहीं रहेंगे छात्र, तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार

    पढ़ाई के बाद अब बेरोजगार नहीं रहेंगे छात्र, तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार



    ◆ उच्च शिक्षा के दौरान प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य रूप से मिलेगी स्किल की भी शिक्षा

    ◆ तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार

    ◆ प्रत्येक सेमेस्टर में स्किल का एक न्यूनतम क्रेडिट स्कोर होगा तय


    नई दिल्ली : उच्च शिक्षा की पढ़ाई अब सिर्फ डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बटोरने के लिए नहीं होगी, बल्कि छात्रों को इस तरह से तैयार भी करेगी कि पढ़ाई के बाद उन्हें बेकार न घूमना पड़े। उच्च शिक्षा के नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने में जुटे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर जो मसौदा तैयार किया है, उसके तहत उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्रों को अब अनिवार्य रूप से कौशल ( स्किल) की शिक्षा भी दी जाएगी।

    इसके तहत नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) के साथ नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) को जोड़ा जा रहा है। जो जल्द ही नए रूप में सामने आएगा। इसके साथ ही एक नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क भी तैयार होगा। यूजीसी के अनुसार, इस पहल से उच्च शिक्षा के लिए जो नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क तैयार होगा, उसमें छात्र को उच्च शिक्षा की पढ़ाई के दौरान किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाएगा, जिसके आधार पर वह कहीं भी नौकरी या फिर अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकेगा। यूजीसी ने इस दौरान उच्च शिक्षा के सभी स्तरों के लिए स्किल को शामिल करते हुए जो नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क बनाया है। इसमें एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स करने वालों को स्किल का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसका क्रेडिट उसमें दर्ज होगा। इसी तरह डिप्लोमा या फिर डिग्री कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में स्किल से जुड़े प्रशिक्षण के साथ कोर्स के पूरा होने पर इंटर्नशिप भी कराया जाएगा। इनमें बीए, बीएससी और बीकाम जैसी पढ़ाई करने वाले छात्र भी शामिल होंगे। मौजूदा समय में बीए, बीएससी और बीकाम के बाद छात्रों के लिए कोई नौकरी नहीं है, क्योंकि उन्हें सिर्फ विषयों की पढ़ाई कराई गई है। इसके अलावा उनके पास कोई स्किल नहीं होता है। ऐसी स्थिति में वह उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी नौकरी या रोजगार की तलाश में भटकते रहते हैं।

    सत्र में देरी से नहीं घबराएं छात्र, सीबीएसई ने घटाया पाठ्यक्रम

    सत्र में देरी से नहीं घबराएं छात्र, सीबीएसई ने घटाया पाठ्यक्रम

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से नौवीं से 12वीं के परीक्षा पैटर्न में बदलाव के साथ-साथ पाठ्यक्रम को भी 30 प्रतिशत तक घटाया है। शिक्षा सत्र देरी से शुरू होने के चलते विद्यार्थियों पर ज्यादा दबाव न आए, इसके लिए कुछ कविताएं और पाठ हटाए गए हैं। बोर्ड ने कोरोना महामारी के चलते बीते साल भी लगभग 30 प्रतिशत तक पाठ्यक्रम घटाया था। हालांकि, सत्र 2021-22 में जो पाठ घटाए थे, उन्हें सत्र 2022-23 में शामिल करके कई अन्य पाठ घटाएं हैं। बदलाव केवल हिंदी साहित्य में किए है। व्याकरण में कोई भी पाठ नहीं घटाया गया है। बोर्ड ने नौवीं कक्षा से सियारामशरण गुप्त की कविता ‘एक फूल की चाह’ को हटाया है। इसमें एक दलित लड़की पर ऊंची जाति के लोग अत्याचार करते हैं। इसके साथ ही ‘धर्म की आड़’ और लेखिका चपला देवी का पाठ नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कम दिया गया, हजारी प्रसाद द्विवेदी का पाठ एक कुत्ता और एक मैना हटाया गया है। साथ ही 11वीं में कबीर और मीरा के पद नंबर दो और पंत की ‘वे आंखें’ को हटाया गया है। 12वीं में निराला, केशव दास, घनानंद की कविताओं को हटाया है।


    नौवीं और 10वीं में हटाए गए पाठ - हिंदी मातृभाषा (क्षितिज भाग- 1)- काव्य खंड- ’केदारनाथ अग्रवाल- चंद्र गहना से लौटती बेर ’चंद्रकांत देवताले- यमराज की दिशा गद्य खंड- ’चपला देवी - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कम दिया गया ’हजारी प्रसाद द्विवेदी- एक कुत्ता और एक मैना हिंदी मातृभाषा (क्षितिज भाग -2)- काव्य खंड- ’देव- सवैया, कवित्त ’गिरिजाकुमार माथुर- छाया मत छूना ’त्रतुराज- कन्यादान गद्य खंड- ’महावीरप्रसाद द्विवेदी- स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन ’सर्वेश्वर दयाल सक्सेना- मानवीय करुणा की दिव्य चमक


    11वीं और 12वीं में घटाए गए पाठ- हिंदी आधार, (काव्य खंड) ’ गजानन माधव मुक्तिबोध- सहर्ष स्वीकारा है ’ फिराक गोरखरपुरी- गजल हिंदी आधार, (गद्य खंड)- ’ विष्णु खरे- चार्ली चैप्लिन यानी हम सब ’ रजिया सज्जाद जहीर - नमक - एन फ्रैंक- डायरी के पन्ने हिंदी ऐच्छिक- पाठ्यपुस्तक- (अंतरा भाग 1) ’ नए जन्म की कुंडली ’ पद्माकर ’ महादेवी वर्मा- सब आंखों के आंसू उजले ’ नरेंद्र शर्मा- नींद उचट जाती है अंतरा भाग 2 ’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला - गीत गाने दो मुझे ’ विष्णु खरे- एक कम, सत्य ’ केशवदास- रामचंद्रिका ’ घनानंद-सवैया ’ ब्रजमोहन व्यास- कच्चा चिट्ठा ’ रामविलास शर्मा- यशास्मै रोचते विश्वम अनुपूरक पाठ्यपुस्तक-अंतराल 1 ’ अंडे के छिलके (एकांकी) पूरक पाठ्यपुस्तक- अंतराल 2 ’ संजीव- आरोहण


    नौवीं और 10वीं हिंदी मातृभाषा - (कृतिका भाग-1)- ’ विद्यासागर नौटियाल- माटी वाली ’ शमशेर बहादुर सिंह- किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया हिंदी मातृभाषा -(कृतिका भाग- 2) ’ 1-एही ठैयां झुलनी हेरामी हो रामा ’ 2- जार्ज पंचम की नाक


    ’कोरोना महामारी के चलते बीते साल भी की गई थी कटौती ’अब केवल हिंदी साहित्य में किए गए हैं कुछ बदलाव

    द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी नौवीं और 10वीं - पाठ्यपुस्तक स्पर्श, (भाग-1)- ’धर्म की आड़ ’आदमीनामा ’एक फूल की चाह पाठ्यपुस्तक, स्पर्श, (भाग -2)- ’बिहारी- दोहे ’महादेवी वर्मा- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल ’अंतोन चेखव- गिरगिट पाठ्यपुस्तक संचयन(भाग-1) ’हामिद खां ’दिये जल उठे - पूरक पुस्तक संचयन, (भाग-2) कोई परिवर्तन नहीं।

    भ्रष्ट आचरण के चलते गाजीपुर जिलाधिकारी के निशाने पर रही BEO के खिलाफ शासन का निर्णय, अन्यत्र स्थानांतरण के साथ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश

    भ्रष्ट आचरण के चलते गाजीपुर जिलाधिकारी के निशाने पर रही BEO के खिलाफ शासन का निर्णय, अन्यत्र स्थानांतरण के साथ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश 

    गाजीपुर की विवादित खंड शिक्षा अधिकारी का तबादला


    लखनऊ: शासन ने गाजीपुर के मरदह ब्लॉक की खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. कल्पना के विरुद्ध अनुशासिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही डा. कल्पना का तबादला गाजीपुर से बाहर करने के निर्देश दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव आरवी सिंह ने मंगलवार को आदेश जारी किया। खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ गाजीपुर के जिलाधिकारी ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। कल्पना के खिलाफ जिलाधिकारी ने अपनी रिपेार्ट में लिखा था कि वह लगातार विवादों के घेरे में है। उनकी विवादित कार्यशैली और पर्यवेक्षण में अनियमितता के कारण मरदह में शिक्षक कार्य नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है।


    Monday, May 23, 2022

    यूपी बोर्ड : वेबसाइट पर होगा 28 हजार स्कूलों का लेखा-जोखा

    अब यूपी बोर्ड के पोर्टल पर मिलेगी स्कूलों की जानकारी


    प्रयागराज । प्रदेश के 28 हजार से अधिक राजकीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों से जुड़ीं महत्वपूर्ण जानकारियां अब यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी।


    इसके लिए बोर्ड की वेबसाइट 'www.upmsp.edu.in' पर अलग से वेबपेज तैयार कराया जा रहा है। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी कर प्रत्येक स्कूल की फोटो, उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियां बोर्ड की वेबसाइट के स्कूल पोर्टल पर 25 मई तक अपलोड कराने के निर्देश दिए हैं। प्रधानाचार्यों को भी आवश्यक सूचनाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।




    यूपी बोर्ड : वेबसाइट पर होगा 28 हजार स्कूलों का लेखा-जोखा

    प्रयागराज : यूपी बोर्ड से जुड़े प्रदेश के 28 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों का लेखा-जोखा अब यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर होगा। सूचनाओं से संबंधित वेबपेज बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर तैयार कराया जा रहा है। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को 21 मई को पत्र लिखकर स्कूल की फोटो, महत्वपूर्ण उपलब्धियां बोर्ड की वेबसाइट पर स्कूल के पोर्टल पर 25 मई तक अपलोड करवाने के निर्देश दिए हैं।


    ये भी होना है
     
    ● 9वीं से 12वीं तक के एक करोड़ से अधिक बच्चों की ई-मेल आईडी होगी।

    ● स्कूल की वेबसाइट और सभी शिक्षकों की ई-मेल आईडी भी बनवाई जाएगी।

    उच्च शिक्षा में परीक्षा से संबंधित शिकायत के लिए WhatsApp नंबर जारी

    उच्च शिक्षा में परीक्षा से संबंधित शिकायत के लिए WhatsApp नंबर जारी

    विश्वविद्यालयों में परीक्षा के दौरान अनियमितता होने पर इसकी शिकायत व्हाट्सएप नंबर-8081572223 पर की जा सकती है। यह नंबर जारी करते हुए प्रदेश के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रश्नपत्रों एवं उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित तरीके से पहुंचाने के लिए इन्हें जियो टैगिंग युक्त वाहनों से पहुंचाया जाए। श्री उपाध्याय रविवार को वर्चुअल बैठक कर निर्देश दिए।


    उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा में परीक्षाओं की शुचिता, गरिमा व गोपनीयता को बनाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित स्नातक, परास्नातक और अन्य पाठ्यक्रम से संबंधित संचालित हो रही परीक्षाओं का जायजा लिया।

    सभी परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने के 30 मिनट पहले ही पहुंचाया जाए। उन्होंने परीक्षा केंद्रों की जांच के लिए सचल दल की संख्या में वृद्धि करने के भी निर्देश दिए। नोडल सेंटर पर पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाए।

    आपको बता दें, आए दिन परीक्षा से पहले पेपर लीक होने जैसी खबरें आ जाती है, जिसका सबसे ज्यादा असर उन उम्मीदवारों पर होता है जो दूर दराज से परीक्षा देने के लिए केंद्र पहुंचते हैं। परीक्षा लीक होने के बाद, परीक्षा रद्द कर दी जाती है, और उम्मीदवार परीक्षा की नई तारीख के इंतजार में बैठे रहते हैं। जितनी देर से परीक्षा होती है, उतनी ही देरी से रिजल्ट जारी किया जाता है। इसी के  साथ नियुक्ति प्रक्रिया में देरी होती है। इन सभी परिस्थितियों से बचने के लिए व्हाट्सएप नंबर जारी किया गया है। ताकि परीक्षा का संचालन सही से ढंग से कियाी जा  सके।

    सरकार ने मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान की

    सरकार ने मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान की


    उच्च शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की दिशा में सरकार ने एक और अहम कदम उठाया है। देश में मुक्त विश्वविद्यालय खोलने की राह आसान बना दी है। अब सिर्फ पांच एकड़ के विकसित भूखंड पर ही मुक्त विश्वविद्यालय को खोलने की मंजूरी मिल जाएगी। अभी इसके लिए 40 से 60 एकड़ विकसित भूखंड होना जरूरी था। देश में मुक्त विश्वविद्यालयों के विस्तार की राह में यह एक बड़ी अड़चन थी। शहरी क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर भूमि मिलना मुश्किल था।


    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मुक्त विश्वविद्यालयों के लंबे समय से अटके कई प्रस्तावों पर मंथन के बाद यह फैसला लिया है। इसे लेकर अधिसूचना भी जारी हो गई है। वैसे भी मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने के मौजूदा नियम करीब 33 साल पहले यानी 1989 में तैयार किए गए थे। तब से यही प्रचलन में है। इस बीच इन्हीं अड़चनों के चलते देश में अब तक सिर्फ एक केंद्रीय मुक्त विश्वविद्यालय सहित करीब 14 मुक्त विश्वविद्यालय ही खुल सके हैं। यूजीसी के चेयरमैन डाक्टर एम जगदीश कुमार के मुताबिक, मुक्त विश्वविद्यालयों को खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने से देश में मुक्त विश्वविद्यालय तेजी से खुलेंगे। इनकी पहुंच भी देश के कोने-कोने तक होगी। अभी देश का एक बड़ा वर्ग इसलिए भी उच्च शिक्षा से वंचित है, क्योंकि उच्च शिक्षा अभी भी उनकी पहुंच से काफी दूर है। साथ ही उनके पास संसाधन भी नहीं है।


    यूजीसी ने मुक्त विश्वविद्यालयों के खोलने से जुड़े नियमों को शिथिल करने के साथ ही अन्य नियमों को यथावत रखा है। जिसमें फैकल्टी और दूसरी सुविधाएं शामिल हैं। यूजीसी का मानना है कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। मुक्त विश्वविद्यालयों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देनी होगी।

    Sunday, May 22, 2022

    बीएसए फिरोजाबाद पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड, सूचनाएं मुहैया नहीं कराने पर हुई कार्रवाई

    बीएसए फिरोजाबाद पर 25 हजार रुपए का अर्थदंड, सूचनाएं मुहैया नहीं कराने पर हुई कार्रवाई



    फिरोजाबाद। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई सूचनाएं मुहैया न कराने पर बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) पर 25 हजार रुपये का अर्थदंड लगा है। यह कार्रवाई राज्य सूचना आयुक्त ने की है। अर्थदंड की धनराशि की कटौती करने के लिए राज्य सूचना आयोग की ओर से उच्चाधिकारियों को पत्र भेजा गया है।


    टूंडला क्षेत्र के गांव जटपुरा निवासी पुन्नीराम ने बेसिक शिक्षा विभाग से सूचनाएं मांगी थी। न मिलने पर आगे अपील की। अपील के बाद भी सूचनाएं मुहैया नहीं कराए जाने को राज्य सूचना आयुक्त ने गंभीरता से लिया। अर्थदंड की धनराशि वसूलने के आदेश मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा को दिए हैं।

    सीबीएसई ने किया बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पैटर्न में बदलाव

    CBSE : बोर्ड परीक्षा में 30% वैकल्पिक सवाल घटाए गए, योग्यता आधारित सवालों की संख्या 10% बढ़ी


    लखनऊ : केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद (सीबीएसई) ने सत्र 2022-23 की बोर्ड परीक्षाओं का पैटर्न जारी कर दिया है। पैटर्न से साफ हो गया है कि बोर्ड परीक्षाओं में वही छात्र आगे रहेंगे जो रटने की बजाय समझकर पढ़ाई करेंगे। इस बार वैकल्पिक सवालों को 50प्रतिशत से घटाकर 20 फीसदी कर दिया गया है। कुल 30 वैकल्पिक सवाल पैटर्न में कम किए गए हैं।


    समझ को बताते हैं केस स्टडी पर सवाल: विशेषज्ञों की मानें तो बीते दो वर्षों में कोरोना की वजह से सीबीएसई के प्रश्न पत्र बोर्ड परीक्षा में काफी सरल रहे। अब हालात सामान्य होने पर बोर्ड ने एक बार फिर पुराने रुख पर लौटते हुए छात्रों के सामने केस स्टडी, क्षमता जांच आधारित प्रश्न को समाहित करने का फैसला लिया है। केस स्टडी पर आधारित सवाल छात्र की क्षमता का सही आकलन करेंगे। इसके लिए छात्रों को अच्छी तैयारी के साथ बोर्ड परीक्षा में जाना होगा।


    वर्ष 2021-22 में बोर्ड की परीक्षाएं दो भागों टर्म एक और टर्म दो में बांट कर करायी गई। जिसे सत्र 2022-23 से खत्म कर दिया गया है। अब एक ही परीक्षा में छात्रों का मूल्यांकन किया जाना है। आगामी बोर्ड परीक्षाओं में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव भी दिखेगा। इसी के आधार पर तैयारी कराने के निर्देश दिए गए हैं।


    नए प्रारूप के हिसाब से तैयारी: सीबीएसई  बोर्ड की ओर से सत्र 2021-22 की परीक्षाओं के प्रश्न पत्र का प्रारूप आ गया है। सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है इसी प्रारूप के आधार पर छात्र-छात्राओं की तैयारी कराएं। ताकि समय से छात्र परीक्षा के लिए खुद को तैयार कर सकें। छात्रों की समझ को देखने के लिए केस स्टडी सवाल अहम भूमिका अदा करते हैं। क्योंकि केस स्टडी पर आधारित सवालों को रटने से हल नहीं किया जा सकता है।


    योग्यता आधारित सवालों की संख्या 10 बढ़ी
    सत्र 2022-23 में कक्षा नौ से 12 की परीक्षाओं में छात्रों का मूल्यांकन छात्र की समझ, योग्यता आधारित शिक्षा पर केन्द्रित होगा। नए सत्र की परीक्षाओं में योग्यता आधारित सवालों की संख्या दस फीसदी तक बढ़ाई जाएगी। बोर्ड ने इस सम्बंध में सभी प्रधानाचार्यों के लिए सर्कुलर जारी कर दिया है। 2021-22 की परीक्षाओं में 50 वैकल्पिक प्रश्न पूछे गए थे। जिन्हें घटाकर आगामी परीक्षाओं में 20 कर दिया गया है। कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के साथ कक्षा नौ और 11 की वार्षिक परीक्षाएं भी इसी प्रारूप पर होंगी। आन्तरिक मूल्यांकन में बदलाव नहीं किया गया।

    योग्यता आधारित प्रश्न
    50%

    लघु-दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
    30%

    वैकल्पिक प्रश्न
    20%


    सीबीएसई ने किया बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्र पैटर्न में बदलाव


    अब शैक्षणिक सत्र के अंत में एक बार वार्षिक परीक्षा लेगा बोर्ड
    नौवीं और 11वीं में भी इसी बदले हुए पैटर्न पर ली जाएगी परीक्षा


    नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने दसवीं व 12वीं की बोर्ड परीक्षा के प्रश्नपत्रों के पैटर्न में बदलाव किया है। नई शिक्षा नीति के तहत किए गए ये बदलाव मौजूदा सत्र से ही लागू होंगे। इसके तहत एक प्रश्नपत्र तीन घंटे का होगा। सीबीएसई पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इसी सत्र (2022-23) से 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं कोरोना पूर्व के वर्षो की भांति एक ही टर्म में सत्र के अंत में वार्षिक परीक्षा के रूप में आयोजित की जाएंगी।


    सीबीएसई के निदेशक (अकादमिक) द्वारा जारी परिपत्र के अनुसार, इस वर्ष से 10वीं की सालाना बोर्ड परीक्षा में लगभग 40 प्रतिशत प्रश्न समझ आधारित होंगे। ये बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे, जिनमें केस स्टडी आधारित व पैराग्राफ पर आधारित प्रश्न प्रश्न होंगे। 20 प्रतिशत प्रश्न वस्तुनिष्ठ होंगे और बाकी के 40 प्रतिशत प्रश्न लघु उत्तरीय व दीर्घ उत्तरीय होंगे।


     12वीं की परीक्षा में 30 प्रतिशत प्रश्न समझ आधारित बहुविकल्पीय होंगे, जिनमें केस स्टडी व पैराग्राफ आधारित प्रश्न होंगे। 20 प्रतिशत वस्तुनिष्ठ प्रश्न होंगे, जबकि शेष 50 प्रतिशत प्रश्न लघु और दीर्घ उत्तरीय पूछे जाएंगे। सीबीएसई के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बोर्ड ने पहले की तरह वार्षिक परीक्षाओं का निर्णय सभी हितधारकों की प्रतिक्रिया लेने के बाद लिया है। ये परीक्षाएं तीन घंटे की होंगी।


    सीबीएसई ने कोरोना महामारी के कारण सत्र 2021-22 में 10वीं और 12वीं की परीक्षा दो टर्म में लेने का निर्णय किया था, लेकिन मौजूदा स्थितियों को देखते हुए बोर्ड ने पहले की तरह शैक्षणिक सत्र से अंत में एक वार्षिक परीक्षा लेने का निर्णय किया है।
    संयम भारद्वाज, परीक्षा नियंत्रक, सीबीएसई



    पाठ्यक्रम में बदलाव : CBSE बोर्ड 10वीं व 12वीं में 20 फीसदी होंगे वस्तुनिष्ठ प्रश्न



    सीबीएसई के 10वीं बोर्ड में 40 फीसदी क्षमता (कंपीटेंसी) आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। वहीं 12वीं में क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या 30 फीसदी रहेगी। अभी तक दसवीं और 12वीं में 10 फीसदी ही क्षमता आधारित प्रश्न रहते थे। इस बार से बोर्ड ने क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ा दी है। बोर्ड ने 2022-23 सत्र का मूल्यांकन पैटर्न जारी कर दिया है। दसवीं और 12वीं में वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या 20 फीसदी रहेगी।



    बोर्ड की मानें तो क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या इस बार बढ़ाई गयी है। पहले दसवीं और 12वीं बोर्ड में 10 फीसदी प्रश्न क्षमता आधारित होते थे, लेकिन अब इसकी संख्या बढ़ा दी गयी है। अभी तक क्षमता आधारित प्रश्न केवल दीर्घ उत्तरीय ही पूछे जाते थे। अब मल्टीपल च्वाइस, केस स्टडी, लघु उत्तरीय प्रश्न में भी क्षमता आधारित प्रश्न को शामिल किया गया है।


    ज्ञात हो कि कोरोना संक्रमण के कारण दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा दो पार्ट में टर्म-1 और टर्म-2 ली गयी लेकिन 2023 में फिर एक ही बोर्ड की परीक्षा होगी। इसके लिए बोर्ड ने नौंवी-दसवीं और 11वीं-12वीं का प्रश्न पत्र पैटर्न जारी किया है।



    मल्टीपल च्वाइस वाले भी होंगे प्रश्न : बोर्ड द्वारा मल्टीपल च्वाइस वाले प्रश्न को रखा गया है। टर्म-1 परीक्षा में मल्टीपल च्वाइस के प्रश्न पूछे गये थे, जो विषयवार सिलेबस का 50 फीसदी था। अब 20 फीसदी वस्तुनिष्ठ प्रश्न में ही मल्टीपल च्वाइस के रहेंगे।


    नौवीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा इसी पैटर्न पर : बोर्ड ने स्कूलों को नौवीं और 11वीं की वार्षिक परीक्षा भी इसी पैटर्न पर लेने का निर्देश दिया है। इससे छात्र अपना आकलन कर पायेंगे। बोर्ड द्वारा आंतरिक मूल्यांकन में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। आंतरिक मूल्यांकन पहले जैसे ही 20 फीसदी रखा गया है।


    किताबी दुनिया से अलग सोचें बच्चे : किताबी दुनिया से बच्चे अलग सोचें, इसके लिए क्षमता आधारित प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गयी है।


    इसके तहत वास्तविक जीवन से जुड़े प्रश्न बोर्ड परीक्षा में पूछे जाएंगे। इससे छात्रों को वास्तविक जीवन और दिनचर्या की जानकारी होगी। बता दें कि अभी तक किताबी दुनिया से जुड़े प्रश्न ही परीक्षा के दौरान छात्रों से पूछे जाते थे। इसे देखते हुए लंबे विचार के बाद सीबीएसई बोर्ड ने प्रश्न पत्र के पैटर्न में यह बदलाव लाने का निर्णय लिया है। 

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण बढ़ रहे अवमानना के मामले, लापरवाह शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का आदेश

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण बढ़ रहे अवमानना के मामले,  लापरवाह शिक्षा अधिकारियों पर कार्रवाई का हाईकोर्ट का आदेश

    शिक्षा विभाग के अधिकारी म्यूजिकल चेयर गेम में लिप्त,  अपना काम न कर दूसरे पर मढ रहे तोहमत : इलाहाबाद हाईकोर्ट


    इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अपना काम न कर दूसरे पर तोहमत मढ़ने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना मामलों की बाढ़ है। अधिकतर मामले प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के हैं।


     शिक्षा विभाग के अधिकारियों की नाकाबिलियत के कारण अवमानना के मामले बढ़ रहे हैं। इससे कोर्ट कार्यवाही में समय खराब हो रहा है क्योंकि एक अवमानना केस वर्षों चलता है और अंत में आदेश का पालन किया जाता है। ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का आदेश दिया है ताकि कोर्ट को इनके खिलाफ आदेश न करना पड़े।


    यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने सुनील कुमार दुबे की अवमानना याचिका पर अधिवक्ता शैलेश पांडेय व अन्य को सुनकर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आठ माह तक जिला विद्यालय निरीक्षक व अपर शिक्षा निदेशक बैठे रहे। जब अवमानना मामले की तारीख पास आई तो कहा उन्हें दो लाख से अधिक के भुगतान का अधिकार नहीं है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन पर ही भुगतान किया जा सकता है। यह भी कहा कि शिक्षा निदेशक को संस्तुति भेज दी गई है।


    कोर्ट ने कहा कि माध्यमिक व प्राथमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की आदत है कि अपना कर्तव्य पालन न करना और ठीकरा दूसरे अधिकारी पर फोड़ देना। अधिकारियों को सर्कुलर की जानकारी थी कि निदेशक का अनुमोदन जरूरी है, फिर भी चुपचाप बैठे रहे और कोर्ट में पेश होने से पहले शिक्षा निदेशक को पत्रावली भेज दी। उसके बाद समय मांग लिया जबकि संस्तुति तत्काल भेजनी थी। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक को एक सप्ताह में निर्णय लेकर अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।


    याची आदर्श इंटर कॉलेज मिर्जापुर में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी है। हाईकोर्ट ने जिला विद्यालय निरीक्षक को छठें व सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत याची को अवशेष वेतन भुगतान करने का आदेश दिया था। याची को 20,73418 रुपये का भुगतान किया जाना है, जिसका पालन नहीं किया गया।


    ✍️  कोर्ट आर्डर

    Saturday, May 21, 2022

    परिषदीय विद्यालयों में इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को पूर्णकालिक प्र०अ० का वेतनमान एवं अन्य लाभ दिए जाने के संबंध में उ०प्र० प्राथमिक शिक्षक संघ जनपद ईकाई का बीएसए सीतापुर को ज्ञापन

    परिषदीय विद्यालयों में इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को पूर्णकालिक प्र०अ० का वेतनमान एवं अन्य लाभ दिए जाने के संबंध में उ०प्र० प्राथमिक शिक्षक संघ का ज्ञापन





    जुलाई से बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी, 2273 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सबसे पहले होगा लागू

    जुलाई से बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी


    2273 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सबसे पहले होगा लागू

    इसके बाद एडेड, वित्तविहीन विद्यालयों में कराया जाएगा अमल


    लखनऊ : प्रदेश के 33 हजार से अधिक माध्यमिक विद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने की तैयारी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसे चरणवार लागू करेगा। सबसे पहले राजकीय माध्यमिक कालेजों में इसे जुलाई से ही लागू किया जा सकता है। इसके बाद अशासकीय सहायताप्राप्त यानी एडेड और फिर अंत में वित्तविहीन माध्यमिक कालेजों में अमल कराया जाएगा।


    राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राज्य विश्वविद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य कर दिया है। साथ ही वहां वेतन भुगतान इसी उपस्थिति के आधार पर करने के निर्देश हैं। इसी तर्ज पर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने भी कदम बढ़ाया है। प्रदेश में अभी 33,734 माध्यमिक विद्यालय हैं जिनमें 1.27 करोड़ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन्हें पढ़ाने के लिए 3.92 लाख शिक्षक कार्यरत हैं।


    विभाग ने स्कूलों को दिए जाने वाले वार्षिक बजट में पहले ही प्रविधान किया था कि विद्यालय बायोमीट्रिक मशीन लगवाएं ताकि उनकी हाजिरी दर्ज हो सके। कई स्कूलों ने बायोमीट्रिक मशीनें लगाई हैं और कुछ जगह लगाई जा रही हैं। इसी वजह से मुख्यमंत्री के समक्ष 100 दिन की कार्ययोजना में इसे शामिल किया गया । अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला ने बताया कि बायोमीट्रिक हाजिरी प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में लागू की जाएगी। पहले चरण में 2273 कालेजों में जुलाई से ही इसे अनिवार्य किया जा सकता है।

    मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 2000 बच्चों को दिए जाएंगे लैपटाप

    मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के 2000 बच्चों को दिए जाएंगे लैपटाप


    लखनऊ: प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के दो हजार बच्चों को लैपटाप प्रदान करने का निर्णय लिया है। सरकार ने इन बच्चों को छह माह में लैपटाप प्रदान करने का लक्ष्य रखा है। इस पर करीब आठ करोड़ रुपये खर्च होंगे।


    कोरोना वायरस के कारण निराश्रित हुए बच्चों के लिए सरकार ने उप्र मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना जून 2021 में शुरू की थी। सरकार इन बच्चों के पालन-पोषण से लेकर इनकी पढ़ाई तक का खर्च उठाती है। 


    ऐसे बच्चों को चार हजार रुपये प्रति माह सरकार देती है। योजना के तहत अब तक 11,049 पात्र बच्चों का चयन हुआ है। इन्हें प्रत्येक तीन माह पर 12-12 हजार रुपये प्रदान किए जाते हैं। इनमें से 480 बच्चे ऐसे हैं जिनके माता-पिता दोनों की ही मृत्यु कोरोना के कारण हुई थी। शेष 10,569 ऐसे बच्चे हैं जिनके माता या पिता में से किसी एक की मृत्यु हुई है। 


    प्रदेश सरकार विद्यालय जाने योग्य सभी बच्चों की शिक्षा सुनिश्चित करवा रही है। इनमें से दो हजार बच्चों को सरकार आगामी छह माह के अंदर लैपटाप प्रदान करेगी।

    गर्मी की छुट्टी में शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर आपत्ति

    गर्मी की छुट्टी में शिक्षकों को स्कूल बुलाने पर आपत्ति



    प्रयागराज। माध्यमिक स्कूलों में 21 मई से 30 जून तक ग्रीष्मावकाश में समर क्लास के नाम पर शिक्षकों और बच्चों को बुलाने के कुछ जिला विद्यालय निरीक्षकों के आदेश पर शिक्षक विधायक सुरेश कुमार त्रिपाठी ने आपत्ति जताई है।


     शिक्षक विधायक ने शुक्रवार को यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया। कहा कि ऐसे समय में जबकि अधिकतम तापमान 45 डिग्री के ऊपर चल रहा है तो किसी छात्र या छात्रा के साथ कोई घटना हो जाती है तो जिम्मेदार कौन होगा। 


    माध्यमिक शिक्षक संघ के मंडल मंत्री अनुज कुमार पांडेय ने बताया कि बोर्ड सचिव ने कहा कि उन्होंने केवल शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया है। ग्रीष्मावकाश में विद्यालय खोलने का कोई निर्देश जारी नहीं किया है। प्रतिनिधिमंडल में जिलाध्यक्ष राम प्रकाश पांडेय, जिला मंत्री जगदीश प्रसाद, कोषाध्यक्ष रविंद्र त्रिपाठी आदि रहे।

    UP Board Result 2022 Kab Aayega? 47 लाख छात्र पूछ रहे सवाल; UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट

    UP Board Result 2022 Kab Aayega? 47 लाख छात्र पूछ रहे सवाल; UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट

    UP Board Result 2022 Kab Aayega? एक तरफ यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 कब आएगा जैसे 47 लाख छात्र-छात्राएं पूछ रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर UPMSP द्वारा यूपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 202 और यूपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2022 ईमेल से भेजने की तैयारियां की जा रही हैं।


    नई दिल्ली : UP Board Result 2022 Kab Aayega? यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में सम्मिलित हुए 47 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के मन में यही सवाल है कि यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 कब आएगा? उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) की तरफ से आधिकारिक तौर पर UP Board Result 2022 Date को लेकर कोई भी घोषणा अभी तक नहीं की गई है। हालांकि, परिषद के सूत्रों से प्राप्त अपडेट के आधार पर प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 8 मई 2022 तक हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का कार्य पूरा हो जाने के बाद शासन से अनुमति मिल गई है और इस समय यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 बनाए जा रहे हैं।

    UPMSP ईमेल पर भेजेगा हाई स्कूल, इंटर रिजल्ट (UP Board Result 2022 on Email)

    दूसरी तरफ, यूपीएमएसपी द्वारा यूपी बोर्ड रिजल्ट 2022 को इस बार आधिकारिक वेबसाइट, upmsp.edu.in और यूपी रिजल्ट पोर्टल, upresults.nic.in पर जारी किए जाने के साथ-साथ ईमेल (UP Board Result 2022 on Email) से भी उपलब्ध कराए जाने की तैयारियां की जा रही हैं। यूपी बोर्ड के अधिकारियों से प्राप्त जानकारियों के अनुसार हाई स्कूल के 25.25 लाख स्टूडेंट्स को उनका यूपी बोर्ड 10वीं रिजल्ट 2022 और इंटर के 22.50 लाख स्टूडेंट्स को उनका यूपी बोर्ड 12वीं रिजल्ट 2022 घर बैठे ही उनके रजिस्टर्ड ईमेल आइडी पर मिल जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इस नई प्रक्रिया से स्टूडेंट्स को साइबर कैफे के चक्कर नहीं लगाने होंगे और परिणाम देखने के लिए अत्यधिक यूजर्स के एकसाथ विजिट करने से वेबसाइट हैंग होने की समस्या भी नहीं रहेगी।

    बता दें कि यूपी बोर्ड द्वारा हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन 24 मार्च से 12 अप्रैल 2022 तक किया गया था। इसके बाद, मूल्यांकन कार्य 8 मई तक पूरा कर लिया गया। हालांकि, एक लाख से अधिक छात्रों के छूटे प्रैक्टिकल का आयोजन 17 मई से 20 मई 2022 तक पूरे किए जाने के निर्देश बोर्ड द्वारा जारी किए गए थे।

    Friday, May 20, 2022

    कार्यवाहक प्रधानाचार्य को सेवानिवृत्ति के बाद प्रवक्ता की पेंशन देना नियमविरुद्ध, न्यायालय ने दिया प्रधानाचार्य पद के वेतन के आधार पर लाभ देने का आदेश

    कार्यवाहक प्रधानाचार्य को सेवानिवृत्ति के बाद प्रवक्ता की पेंशन देना नियमविरुद्ध, न्यायालय ने दिया प्रधानाचार्य पद के वेतन के आधार पर लाभ देने का आदेश
    बिना पदोन्नति सालों साल कार्यवाहक प्र०अ० के रूप में कार्यरत बेसिक शिक्षक क्यों अपने हक के लिए नहीं लड़ते!!?


    परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं की गतिमान स्थानांतरण/समायोजन प्रक्रिया के संबंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को लिखा पत्र

    परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षिकाओं की गतिमान स्थानांतरण/समायोजन प्रक्रिया के संबंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को लिखा पत्र

    हरदोई में बेसिक शिक्षा का रिश्वतखोर बाबू घूस लेते गिरफ्तार, सात लाख एरियर भुगतान के लिए मांगे थे 1.40 लाख

    हरदोई में बेसिक शिक्षा का रिश्वतखोर बाबू घूस लेते गिरफ्तार, सात लाख एरियर भुगतान के  लिए मांगे थे 1.40 लाख

    एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार घूस लेते दबोचा


    हरदोई । शिक्षक से एरियर भुगतान के लिए घूस मांगने वाले उपबेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के लिपिक जैनुल खां को गुरुवार को एंटी करप्शन टीम ने 10 हजार रुपये लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। सात लाख एरियर भुगतान के लिए 20 फीसदी यानी 1.40 लाख रुपये घूस मांगी थी।


    पिहानी के संविलियन विद्यालय जाजूपुर में तैनात सहायक अध्यापक महेश कुमार 2019 में गम्भीर बीमारी के शिकार हो गए। कई महीने इलाज चला। इस अवधि का उनका सात लाख एरियर बकाया था। कई बार चक्कर लगाने पर भी सुनवाई नहीं हुई। इस पर उन्होंने लिपिक जैनुल से बात की।


    उन्होंने 20 फीसदी कमीशन पर एरियर भुगतान कराने को कहा। महेश कुमार ने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया। गुरुवार को जैनुल ने महेश को दस हजार रुपये लेकर कार्यालय आने को कहा। कार्यालय पहुंच जैसे ही 10 हजार रुपये बाबू को दिए एंटी करप्शन की टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिए। सदर कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बीएसए वीपी सिंह ने बताया कि नियमानुसार कार्रवाई होगी। 

    Thursday, May 19, 2022

    हर स्कूल को मिलेंगे कंप्यूटर और प्रोजेक्टर, संचालित होगी उत्कृष्ट योजना

    हर स्कूल को मिलेंगे कंप्यूटर और प्रोजेक्टर, संचालित होगी उत्कृष्ट योजना

    विश्व बैंक देगा 500 मिलियन डालर, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों का भी होगा कायाकल्प


    लखनऊ  :  प्रदेश में शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए विश्व बैंक की सहायता से उत्कृष्ट (यूपी नालेज बेस्ड रिस्पांस टू स्कूलिंग एंड टीचिंग ) योजना संचालित की जाएगी। योजना के संचालन के लिए विश्व बैंक 500 मिलियन डालर (तकरीबन 3850 करोड़ रुपये) की आर्थिक सहायता देगा। उत्कृष्ट योजना के तहत प्री प्राइमरी, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा, कौशल विकास और शिक्षक प्रशिक्षण के ढांचे को डिजिटल टेक्नोलाजी से लैस करने के साथ शिक्षकों को भी डिजिटल शिक्षा के लिए तैयार किया जाएगा। राज्य सरकार ने योजना के संचालन के लिए सैद्धांतिक सहमति दे दी है। प्रदेश में योजना के संचालन के लिए विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है।


    प्री-प्राइमरी शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों को तकनीकी से लैस किया जाएगा। पढ़ाई शुरू करने वाले बच्चों के लिए टीचिंग-लर्निंग मैटीरियल उपलब्ध कराया जाएगा। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को छह माह के सेवारत प्रशिक्षण के माध्यम से उनका पेशेवर तरीके से विकास किया जाएगा। 


    वहीं बेसिक शिक्षा के क्षेत्र में बच्चों के सीखने-समझने की क्षमता में वृद्धि के लिए टेक्नोलाजी का इस्तेमाल किया जाएगा। डिजिटल शिक्षा के लिए 1.35 लाख स्कूलों में कंप्यूटर और प्रोजेक्टर उपलब्ध कराए जाएंगे। विशिष्ट आवश्यकताओं वाले बच्चों के लर्निंग आउटकम को बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किये जाएंगे। 


    बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने में शिक्षकों के लिए मददगार साबित होने वाले डिजिटल तकनीक पर आधारित ट्रेनिंग माड्यूल और शैक्षिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों और पालिटेक्निक के सहयोग से 2000 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं के कौशल विकास के लिए ऐसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किये जाएंगे जिनकी बाजार में मांग हो।


    डायट बनेंगे स्मार्ट

    शिक्षक प्रशिक्षण के राज्य और जिला स्तरीय संस्थानों को तकनीकी दृष्टि से सुदढ़ करना भी योजना का एक प्रमुख उद्देश्य है। इसके लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में स्मार्ट कलास विकसित किये जाएंगे। हर डायट में वाई-फाई सुविधा से युक्त कंप्यूटर लैब, विभिन्न विषयों के लैब और पुस्तकालय स्थापित किये जाएंगे। आवासीय प्रशिक्षण के लिए प्रत्येक डायट में हास्टल भी बनाए जाएंगे।


    योजना के ये भी हैं उद्देश्य

    • कोरोना महामारी और आपदाओं के कारण बच्चों की पढ़ाई और उनके सीखने-समझने की क्षमता में के लिए शैक्षिक व्यवस्था को सक्षम बनाना।

    • स्कूलों में बच्चों और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में किशोर वय की छात्राओं के ड्रापआउट रेट में कमी लाना।

    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की मंशा के अनुरूप आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्कूलों के बीच समन्वय स्थापित करना

    Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

    Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

    शिक्षा की गुणवत्ता परखने को इसी साल से मुहिम, स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
     

    स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता (quality of school education) को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब शैक्षणिक बदलावों की सालाना परख होगी। इस पूरी व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर गठित एक स्वतंत्र इकाई देखेगी।


    नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच उसमें आने वाले बदलावों की अब सालाना परख भी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र इकाई गठित होगी, जो इस पूरी व्यवस्था को देखेगी। फिलहाल इस प्रस्तावित एजेंसी को 'परख' नाम दिया गया है। वहीं इस पूरी मुहिम को इसी साल से शुरू करने की तैयारी भी है। इसमें स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा।




    एनसीईआरटी को सौंपी जिम्‍मेदारी

    इसके आधार पर ही उन्हें जरूरी सुविधाएं और मदद मुहैया कराई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इसके लिए रोडमैप तैयार करने का जिम्मा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को सौंपा गया है। जो जल्द ही इस रिपोर्ट को शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगी।


    जिम्मा एनसीईआरटी के पास

    वैसे अभी भी स्कूली शिक्षा को गुणवत्ता को परखने का जिम्मा एनसीईआरटी के पास ही है। जो फिलहाल नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) के जरिए इसे जांचने का काम करती है। इस बीच एनएएस- 2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट जल्द ही जारी होने के संकेत दिए गए है। सूत्रों की मानें तो स्कूलों की गुणवत्ता को परखने के लिए एनएएस-2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट ही आधार बनेगी।


    बदलावों को परखा जाएगा

    इसके आधार पर बदलावों को परखा जाएगा। मंत्रालय की प्रस्तावित योजना के मुताबिक परख देश भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की गुणवत्ता को जांचने का काम करेगी। यह एक स्वतंत्र एजेंसी रहेगी। इसके साथ ही इसमें ऐसे प्रोफेशनल्स को शामिल किया जाएगा, जिनकी इस तरह के आकलन में विशेषज्ञता है। यह पूरा आकलन आनलाइन होगा।


    प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी

    इसके जरिए जहां स्कूलों की गुणवत्ता का पता चलेगा, वहीं प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी। गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को जांचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस पहल के साथ राज्यों से भी अपने स्तर पर गुणवत्ता को आंकने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।


    इनोवेशन पर भी होगा फोकस

    स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को परखने में अब इनोवेशन पर भी फोकस होगा। जिसमें प्रत्येक स्कूलों में इस दिशा में उठाए गए कदमों और ऐसी प्रतिभाओं को पहचाना जाएगा। साथ ही स्कूलों की रुचि को पहचान करके उन्हें आगे बढ़ने में मदद दी जाएगी। वैसे भी स्कूली छात्रों को इनोवेशन से जोड़ने के लिए मौजूदा समय में स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (Atal Tinkering Labs, ATL) स्थापित किए जा रहे है। जहां बच्चे अपनी इनोवेशन से जुड़ी प्रतिभा को निखार सकते है।

    "Building perspective on Education" विषय पर यू-ट्यूब टॉक सेशन के सम्बन्ध में।

    "Building perspective on Education" विषय पर यू-ट्यूब टॉक सेशन के सम्बन्ध में।



    ✍️ जुड़ने के लिए यूट्यूब लिंकhttps://youtu.be/YrQKxdIOETM


    परिषदीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 20 मई से

    परिषदीय विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां 20 मई से



    लखनऊ: बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियां शुक्रवार से शुरू हो रही हैं। शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार 16 जून से विद्यालय खुल जाएंगे और पठन-पाठन होगा। शैक्षिक सत्र जुलाई के बजाए अब एक अप्रैल से शुरू होता है। 


    अवकाश की समय सारिणी भी बदल चुकी है। 21 मई से 30 जून तक मिलने वाला ग्रीष्मावकाश अब 20 मई से 15 जून तक रहेगा। प्राथमिक स्कूलों में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश भी होता है।






     परिषद सचिव प्रताप सिंह बघेल ने बताया कि विद्यालयों में गुरुवार तक पढ़ाई होगी, शुक्रवार से छुट्टियां शुरू होंगी जो 15 जून तक रहेंगी। 16 जून को स्कूल सुबह साढ़े सात बजे खुलेंगे और तेजी से पढ़ाई कराई जाएगी।

    अनुदेशकों के मानदेय में प्रदेश सरकार को कितना बजट दिया, नहीं बता सका केंद्र, अगली सुनवाई 24 मई को

    अनुदेशकों के मानदेय में प्रदेश सरकार को कितना बजट दिया, नहीं बता सका केंद्र, अगली सुनवाई 24 मई को

    New update 21 May 2022

    इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27000 से अधिक अनुदेशकों का मानदेय 17000 रुपये प्रतिमाह देने के एकल खंडपीठ के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर शुक्रवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। भारत सरकार की ओर से मुख्य न्यायमूर्ति की खंडपीठ के सामने उपस्थित एएसजीआई कोर्ट में यह स्पष्ट नहीं कर सके कि केंद्र सरकार ने अनुदेशकों को दिए जाने वाले मानदेय के मद में राज्य सरकार को कितना पैसा दिया। मामले की अगली सुनवाई 24 मई को होगी।


    एएसजीआई ने कोर्ट से अनुरोध किया कि उन्हें इस मुद्दे पर बात रखने के लिए कुछ और समय दिया जाए। केंद्र की तरफ से यह भी कहा गया कि अगली तारीख पर किसी अधिकारी को कोर्ट में बुलाया जाएगा ताकि इस मामले में सही जानकारी से कोर्ट को अवगत कराया जा सके।


    मुख्य न्यायमूर्ति राजेश बिंदल व न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की खंडपीठ इस मामले में राज्य सरकार द्वारा दाखिल अपीलों पर सुनवाई कर रही है। एकल जज के आदेश के खिलाफ सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट व लखनऊ बेंच दोनों जगह पर अपील कर रखी है। सरकार की इन अपीलों पर एक साथ सुनवाई हो रही है।


    पैसा जारी करने के बावजूद नहीं दिया गया 17 हजार मानदेय

    लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये वहां के वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी इस मामले में सरकार की तरफ से उपस्थित रहे। सरकार का कहना है कि अनुदेशकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है और ऐसे में संविदा में दी गईं शर्तें और मानदेय उन पर लागू होगा। कहा गया कि केंद्र सरकार ने इस मद में आवश्यकतानुसार पैसा राज्य सरकार को अपने अंश का नहीं दिया है। ऐसे में सरकार अपने स्तर से अनुदेशकों को भुगतान कर रही है।


    अनुदेशकों की तरफ से कहा गया कि केंद्र सरकार ने अपनी योजना के तहत परिषदीय विद्यालयों के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय 2017 में 17 हजार कर दिया था। यह भी कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा पैसा जारी करने के बावजूद उनको 17000 प्रतिमाह की दर से मानदेय नहीं दिया जा रहा है, जो गलत है। कोर्ट अब इन अपीलों पर 24 मई को सुनवाई करेगी।





    उच्च प्राथमिक स्कूलों के अनुदेशकों के मानदेय में अब सुनवाई 20 मई को



     प्रयागराज : प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27000 से अधिक अनुदेशकों का मानदेय 17000 रुपया प्रतिमाह देने के एकल जज के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर बुधवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। 


    प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट प्रयागराज व लखनऊ की खंडपीठों में अपीलें दाखिल कर रखी हैं। लखनऊ से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्रा तथा इलाहाबाद से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी सरकार की ओर से बहस कर रहे हैं। 



    अनुदेशकों की नियुक्ति संविदा के आधार पर की गई है और ऐसे में संविदा शर्तों और तय मानदेय उन पर लागू होगा। कहा गया कि केंद्र ने राज्य सरकार को अपने अंश का पूरा भुगतान नहीं किया है। राज्य सरकार अपने स्तर से अनुदेशकों का भुगतान कर रही है। सुनवाई मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति जे जे मुनीर की खंडपीठ कर रही है।

    JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा के परिणाम पर बड़ी खबर, जानें कब होगा घोषित

    JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा के परिणाम पर बड़ी खबर, जानें कब होगा घोषित


    JNVST Class 6th Result 2022 नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 30 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही स्टूडेंट्स रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। परीक्षार्थी ध्यान दें कि नतीजे जारी होने के बाद वे एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट पर नतीजे देख पाएंगे।



    नई दिल्ली : JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय 6वीं कक्षा का परिणाम इंतजार कर रहे छात्र-छात्राओं के साथ-साथ उनके पैरेंट्स के लिए अहम खबर है। नवोदय विद्यालय समिति,एनवीएस (Navodaya Vidyalaya Samiti (NVS) जल्द ही छठवीं कक्षा का परिणाम जारी करेगा। 


    इस कक्षा में प्रवेश के लिए आयोजित हुई जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) 2022 का परिणाम का लिंक एनवीएस की आधिकारिक वेबसाइट navodaya.gov.in पर उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे में जो भी, छात्र-छात्राएं जेएनवीएसटी कक्षा 6 परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, वे ध्यान रखें कि एक बार रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र और उनके माता-पिता स्टूडेंट्स के परीक्षा के पंजीकरण संख्या / रोल नंबर और जन्म तिथि का उपयोग करके जेएनवी कक्षा 6 प्रवेश परिणाम 2022 की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा, स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के लिए नीचे आसान स्टेप्स दिए गए हैं, जिनको फाॅलो करके भी रिजल्ट देखा जा सकता है।




    JNVST Class 6th Result 2022: नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा परिणाम जांचने के लिए इन स्टेप्स को करें फॉलो


    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा परिणाम जांचने के लिए सबसे पहले स्टूडेंट्स आधिकारिक वेबसाइट- navodaya.gov.in पर जाएं। इसके बाद, "जेएनवीएसटी कक्षा 6 परिणाम 2022" लिंक पर क्लिक करें। अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, जन्म तिथि दर्ज करें और सबमिट पर क्लिक करें। इसके बाद, आपका जेएनवीएसटी कक्षा 6 का परिणाम स्क्रीन पर प्रदर्शित होगा। परिणाम डाउनलोड करें और भविष्य के संदर्भ के लिए एक प्रिंटआउट लें।


    नवोदय विद्यालय कक्षा 6 प्रवेश परीक्षा 30 अप्रैल को आयोजित की गई थी। इसके बाद से ही स्टूडेंट्स रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि स्टूडेंट्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जेएनवीएसटी 6वीं कक्षा परिणाम 2022 की तारीख और समय के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। केवल मीडिया रिपोर्ट्स में संभावना जताई जा रही है कि नतीजे जल्द घोषित हो सकते हैं, इसलिए स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट पर विजिट करते रहें।

    Wednesday, May 18, 2022

    यूपी के डिग्री कॉलेजों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है योगी सरकार, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

    यूपी के डिग्री कॉलेजों को लेकर बड़ा कदम उठाने जा रही है योगी सरकार, जानें क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं

    यूपी के डिग्री कॉलेजों में सुविधाएं बढ़ाने को लेकर योगी सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार सरकारी डिग्री कॉलेज में सरकार पढ़ाई-लिखाई के अलावा खेल-कूद, और योग को प्रोत्साहन की तैयारी है।


    यूपी के सरकारी डिग्री कॉलेजों को लेकर योगी सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। योगी सरकार ऐसे डिग्री कॉलेजों में कई तरह की सुविधाएं देने की तैयारी में हैं। जानकारी के अनुसार पढ़ाई-लिखाई के साथ खेलकूद, शारीरिक शिक्षा और योग को प्रोत्साहन देने के लिए योगी सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। 

    आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि सरकारी डिग्री कॉलेजों को वित्तीय मदद सूबे का खेलकूद विभाग उपलब्ध कराएगा। विभाग ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत ऊंची और लंबी कूद, डिस्कस थ्रो के साथ ही सामान्य कोर्ट, सिंथेटिक कोर्ट तैयार किये जाएंगे। वहीं शारीरिक शिक्षकों को योग का प्रशिक्षण दिया जाएगा। खेलकूद विभाग द्वारा प्रस्तावित सुविधाएं के तहत सरकारी महाविद्यालयों में दौड़ने के लिए ट्रैक तैयार किये जाएंगे। डिस्कस थ्रो, लांग व हाई जंप के अलावा सामान्य कोर्ट/सिंथेटिक कोर्ट, वुमेन फ्लोरिंग/ग्रास कोर्ट तैयार किए जाएंगे।

    साथ ही मेडिसिन बाल उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सुविधाओं के लिए एक लाख रुपये प्रति महावद्यिालय की दर से दो करोड़ के बजट का प्रावधान एसएनडी (नई मांग) के जरिए प्रस्तावित किया गया है। उन्होंने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों में योग को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने शारीरिक शक्षिकों को योग का प्रशिक्षण दिलाएगी।

    इन शारीरिक शिक्षकों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा संचालित एचआरडी सेंटर व राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज द्वारा संचालित कार्यक्रमों में योग का प्रशक्षिण दिलाया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि वर्तमान में राजकीय महाविद्यालयों में 86 शिक्षक कार्यरत हैं। 28 रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार अधियाचन लोक सेवा आयोग को भेज रही है। साथ ही जिन 58 राजकीय कालेजों में शारीरिक शिक्षा के पद सृजित नहीं हैं, वहां पद सृजन का प्रस्ताव वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

    शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु स्थानांतरण नीति की गतिमान प्रक्रिया को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को पत्र लिखकर रखीं अपनी मांगे।

    शैक्षिक सत्र 2022-23 हेतु स्थानांतरण नीति की गतिमान प्रक्रिया को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को पत्र लिखकर रखीं अपनी मांगे।


    जनपद के अंदर स्थानांतरण को लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सचिव परिषद को पत्र लिख रखीं मांगें, देखें

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