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Tuesday, August 22, 2119

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    Monday, April 27, 2026

    सूबे की राजधानी में 100 परिषदीय विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात, हाईकोर्ट ने कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती पर दिया है जोर

    सूबे की राजधानी में 100 परिषदीय विद्यालयों में सिर्फ एक-एक शिक्षक तैनात, हाईकोर्ट ने कम से कम दो शिक्षकों की तैनाती पर दिया है जोर


    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताते हुए प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में कम से कम दो नियमित शिक्षकों की तैनाती का सुझाव दिया है। इसके बावजूद राजधानी में करीब 100 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं, जहां केवल एक-एक शिक्षक ही कार्यरत हैं। इससे करीब पांच हजार बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।


    राजधानी के परिषदीय विद्यालयों में छात्र संख्या और नामांकन बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं दिख रहे हैं। 

    नारायणपुर, यूपीएस नारायणपुर, गोदौली और रौतापुर समेत करीब 100 विद्यालयों में लंबे समय से केवल एक शिक्षक ही तैनात है। इनमें से भी कई शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना और अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दी जाती है, जिससे पढ़ाई और अधिक प्रभावित होती है।

    गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगे ड्यूटी
    उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुधांशु मोहन का कहना है कि पहले से ही शिक्षकों की भारी कमी है, ऊपर से उन्हें गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है। इससे शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। उन्होंने विभाग से हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पर्याप्त संख्या में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग की है।

    1616 विद्यालयों के लिए 4800 शिक्षक
    शिक्षकों के अनुसार राजधानी में करीब 1616 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिनमें दो लाख से अधिक छात्र पंजीकृत हैं। इनके मुकाबले महज 4800 शिक्षक कार्यरत हैं। उनका कहना है कि प्रत्येक विद्यालय में कम से कम चार शिक्षकों की तैनाती होनी चाहिए। शिक्षकों की कमी के चलते अभिभावक भी अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में भेजने से कतराने लगे हैं।

    शिक्षकों की तैनाती पर शासन स्तर से लिया जाता है फैसला
    जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार ने बताया कि शिक्षकों का स्थानांतरण, पुनर्नियोजन और नए पदों पर नियुक्ति का फैसला शासन स्तर पर लिया जाता है वहां से मिले निर्देशों का पालन किया जाएगा।

    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    यूपी बोर्ड ने 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद  शैक्षणिक विवरण में संशोधन का दिया मौका, अंतिम तिथि छह मई

    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष-2026 के 10वीं और 12वीं के परिणाम के बाद शैक्षणिक विवरण की त्रुटि सुधारने के लिए अंतिम अवसर दिया है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।

    सचिव ने बताया कि परीक्षार्थियों के प्रमाण पत्र सह अंकपत्र में नाम, माता-पिता के नाम की वर्तनी, जन्मतिथि, फोटो आदि में किसी प्रकार की त्रुटि को सुधारने का यह आखिरी मौका दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भविष्य में होने वाली असुविधा से बचाना है।

    उन्होंने कहा कि संबंधित विद्यालय के प्रधानाचार्य परिषद की वेबसाइट पर लॉगिन कर निर्धारित प्रारूप एवं मैन्युअल डाउनलोड करें। इसके बाद संशोधन से संबंधित विवरण स्पष्ट रूप से भरकर स्वयं सत्यापित करें और जिला विद्यालय निरीक्षक से अनुमोदन प्राप्त कर पोर्टल पर अपलोड करें।

    यह प्रक्रिया 27 अप्रैल से 6 मई तक चलेगी। निर्धारित अवधि के भीतर विद्यालयों को सभी आवश्यक अभिलेखों के साथ ऑनलाइन आवेदन अपलोड करना अनिवार्य होगा।

    उन्होंने कहा यदि किसी विद्यालय द्वारा निर्धारित समय सीमा के भीतर संशोधन के लिए आवेदन नहीं किया जाता और प्रमाण पत्र जारी होने के उपरांत त्रुटि सुधार की मांग की जाती है, तो ऐसे विद्यालयों को चिह्नित कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। 



    Sunday, April 26, 2026

    पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश

    पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में पहले निलंबित और बाद में पदावनत बेसिक शिक्षक को 17 वर्ष बाद मिला न्याय, सेवानिवृत्ति तक का वेतन और एरियर देने का हाईकोर्ट का आदेश  


    लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उनके खिलाफ पारित पदावनति (रिवर्जन) के आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया कि संबंधित शिक्षक को सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के पद पर मानते हुए वेतन एवं समस्त बकाया भुगतान किया जाए।

    मामला वर्ष 2009 का है, जब एक शिक्षक को पत्रकारिता में संलिप्त होने के आरोप में निलंबित कर बाद में जूनियर बेसिक स्कूल से प्राइमरी स्कूल में पदावनत कर दिया गया था। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए शिक्षक ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

    सुनवाई के दौरान यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया कि— शिक्षक को विधिवत चार्जशीट नहीं दी गई, न ही किसी प्रकार की मौखिक सुनवाई या गवाहों की जिरह कराई गई, शिकायतकर्ता द्वारा स्वयं शिकायत को फर्जी बताया गया, और बिना समुचित जांच के ही विभाग ने कठोर कार्रवाई कर दी।

    न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि बिना उचित सुनवाई और साक्ष्य के की गई विभागीय कार्यवाही प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है, इसलिए यह कानूनी रूप से टिक नहीं सकती।

    इसके साथ ही अदालत ने यह भी माना कि U.P. Government Servant Conduct Rules, 1956 बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों पर लागू नहीं होते, इसलिए केवल पत्रकारिता में संलिप्तता के आधार पर कार्रवाई करना भी अनुचित है।

    हालांकि, शिक्षक 31 मार्च 2020 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें पुनः पदस्थापित करना संभव नहीं है। लेकिन अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें 28 मार्च 2009 से सेवानिवृत्ति तक जूनियर बेसिक स्कूल के सहायक अध्यापक के रूप में मानते हुए वेतन, एरियर एवं अन्य समस्त लाभ दिए जाएं।

    यह फैसला शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों के लिए एक महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है, खासकर उन मामलों में जहां बिना समुचित जांच के विभागीय कार्रवाई की जाती है।


    द्विविवाह के आरोप में बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, सेवा बहाली का आदेश, बेसिक शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 लागू नहीं

    द्विविवाह के आरोप में बर्खास्त शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत, सेवा बहाली का आदेश, बेसिक शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली 1956 लागू नहीं


    इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में द्विविवाह (Bigamy) के आरोप में बर्खास्त किए गए शिक्षक को बड़ी राहत देते हुए उसकी सेवा बहाल करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा के शिक्षकों पर उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 लागू नहीं होती, बल्कि वे केवल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली, 1981 से शासित होते हैं।

    मामला तुफैल अहमद बनाम राज्य उत्तर प्रदेश से संबंधित है, जिसमें याची को 25 जुलाई 2019 को द्विविवाह के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। आरोप था कि उन्होंने पहली पत्नी को तलाक देने के बाद दूसरी शादी की, जिस पर दूसरी पत्नी के पिता ने शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद जिला प्रशासन की संस्तुति पर विभागीय कार्रवाई करते हुए बर्खास्तगी का आदेश पारित किया गया।

    याची की ओर से तर्क दिया गया कि सेवा नियमावली, 1981 में द्विविवाह पर कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है और न ही 1956 की आचरण नियमावली शिक्षकों पर लागू होती है। साथ ही, दूसरी शादी का तथ्य भी न्यायालय में सिद्ध नहीं हुआ था, क्योंकि संबंधित वाद अनुपस्थिति के कारण खारिज हो चुका था।

    न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए पाया कि बर्खास्तगी का आदेश नियमों के गलत अनुप्रयोग पर आधारित है। कोर्ट ने कहा कि 1956 की नियमावली को शिक्षकों पर लागू मानना विधिसम्मत नहीं है। इसके अतिरिक्त, द्विविवाह का आरोप भी विधिक रूप से सिद्ध नहीं हुआ।

    इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने 25 जुलाई 2019 के बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए याची की सेवा बहाल करने और विधि अनुसार वेतन देने का निर्देश दिया। यह निर्णय बेसिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के सेवा संबंधी मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।



    हाईकोर्ट ऑर्डर 👇 

    RTE के तहत प्रवेश के लिए मैनुअल आवेदन भी स्वीकार किए जाएं : हाईकोर्ट

    RTE के तहत प्रवेश के लिए मैनुअल आवेदन भी स्वीकार किए जाएं : हाईकोर्ट

    प्रयागराज । इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट) का उद्देश्य सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है, खासकर कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को। केवल आनलाइन आवेदन की बाध्यता से इस उद्देश्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सरकार के आदेश में स्पष्ट है कि अभिभावक आनलाइन आवेदन नहीं कर पाते तो बीएसए को मैनुअल आवेदन स्वीकार कर उसे आगे बढ़ाना होगा। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने ख्वाजा शमशाद अहमद की याचिका स्वीकार करते हुए की है। कोर्ट ने बीएसए प्रयागराज को आदेश दिया है कि याची के आवेदन को एक सप्ताह के भीतर क्रियान्वित करें। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इस व्यवस्था को सुधारने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अपनाए और सभी जिलों के बीएसए को यह आदेश लागू करने के लिए निर्देशित किया जाए।

    याची ख्वाजा शमशाद अहमद ने बेटे ख्वाजा अशर के नर्सरी में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन तकनीकी कारणों से आनलाइन आवेदन नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने बीएसए प्रयागराज के कार्यालय में मैनुअल आवेदन किया, जिसे स्वीकार नहीं किया गया। इस पर यह याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने कहा, आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 12 (1) (सी) के तहत प्रवेश दिलाने के लिए केवल आनलाइन आवेदन अनिवार्य नहीं किया जा सकता। 

    अभिभावक किसी कारणवश आनलाइन आवेदन नहीं कर पाते तो उनका आफलाइन आवेदन भी स्वीकार किया जाना चाहिए और संबंधित अधिकारी का दायित्व है कि वह उसे प्रक्रिया में शामिल करे। राज्य सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि अब पूरी प्रक्रिया आनलाइन है, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया।



    शिक्षा के अधिकार के तहत ऑफलाइन आवेदन स्वीकार करने का आदेश, 
    हाईकोर्ट ने कहा- निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए नहीं हो सकती सिर्फ ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेश के लिए केवल ऑनलाइन आवेदन की अनिवार्यता नहीं हो सकती। कोर्ट ने कहा कि यदि वंचित वर्ग के अभिभावक तकनीक के अभाव में ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थ हैं तो उनका मैन्युअल (ऑफलाइन) आवेदन स्वीकार करना बेसिक शिक्षा अधिकारी का कर्तव्य है।


    यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की पीठ ने प्रयागराज के बालक ख्वाजा अशर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिकाकर्ता के पिता ने ऑनलाइन फॉर्म भरने में असमर्थता जताते हुए मैन्युअल आवेदन दिया था, जिसे अधिकारियों ने यह कहते हुए स्वीकार करने से इन्कार कर दिया कि अब केवल ऑनलाइन प्रक्रिया ही मान्य है। इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।

    कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल ऑनलाइन पोर्टल का सहारा लेना संविधान के अनुच्छेद 21-ए और शिक्षा के अधिकार कानून की मूल भावना के विपरीत है। यह गरीब और कम पढ़े-लिखे परिवारों को उनके अधिकारों से वंचित कर सकता है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि सत्र 2024-25 और 2025-26 के दौरान हजारों बच्चों ने स्कूल आवंटित होने के बावजूद प्रवेश नहीं लिया।

    साथ ही कई स्कूलों में 25 प्रतिशत कोटे के मुकाबले केवल एक या दो बच्चों को ही प्रवेश दिया गया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वह उन अभिभावकों के लिए एक एसओपी तैयार करे जो ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सकते, ताकि उन्हें बेसिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय के माध्यम से सुविधा मिल सके। अदालत ने प्रयागराज के बेसिक शिक्षा अधिकारी को एक सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ता के आवेदन पर कार्रवाई करने का आदेश देते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है। 

    Saturday, April 25, 2026

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे

    अब हाईस्कूल के छात्रों के लिए भी पत्राचार शिक्षा का रास्ता खुला, 

    कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे, नए सत्र के लिए पंजीकरण शुरू



    लखनऊप्रदेश में अब कक्षा नौ और दस के छात्र भी पत्राचार शिक्षा के माध्यम से पढ़ाई कर सकेंगे। शिक्षा निदेशक माध्यमिक महेंद्र देव द्वारा जारी आदेश के मुताबिक नए शैक्षिक सत्र से इसके लिए पंजीकरण शुरू किया जा रहा है। अभी तक यह व्यवस्था सिर्फ इंटरमीडिएट के छात्रों के लिए ही लागू थी।


    प्रयागराज स्थित पत्राचार शिक्षा संस्थान की स्थापना वर्ष 1980 में शासनादेश के तहत की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे अभ्यर्थियों को पढ़ाई का अवसर देना था, जो माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं में व्यक्तिगत (प्राइवेट) परीक्षार्थी के रूप में शामिल होते हैं। इसमें यह भी तय किया गया था कि व्यक्तिगत परीक्षार्थियों को संस्थान में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा और उन्हें संस्थान द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करना होगा। 

    समय के साथ ऐसे छात्रों की संख्या लगातार बढ़ती गई, जिसके चलते अब इस व्यवस्था का विस्तार किया गया है। इससे उन छात्रों को बड़ी राहत मिलेगी, जो नियमित स्कूल में पढ़ाई नहीं कर पाते लेकिन बोर्ड परीक्षा देना चाहते हैं।

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें

    यूपी बोर्ड: 17 मई तक स्क्रूटनी के लिए आवेदन करें


    यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अपने परिणाम से असंतुष्ट छात्र-छात्राएं स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए 17 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

    नियमतः परिणाम घोषित होने के 25 दिन तक स्क्रूटनी के आवेदन लिए जाते हैं। लिखित एवं प्रयोगात्मक खंड के लिए 500 रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर निर्धारित है। स्क्रूटनी से संबंधित आवश्यक निर्देश बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है।

    इच्छुक अभ्यर्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। उसके बाद स्क्रूटनी के ऑनलाइन फॉर्म के प्रिंटआउट के साथ चालान पत्र संलग्न कर रजिस्टर्ड डाक से बोर्ड के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को 17 मई तक भेजेंगे।



    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

    नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


    नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


    कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

    एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



    संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

    कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


    नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा

    उत्तर प्रदेश संस्कृत बोर्ड की 10वीं और 12 वीं का परिणाम घोषित, प्रतापगढ़ का रहा दबदबा


    लखनऊ । माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा का परिणाम शुक्रवार को घोषित कर दिया गया। इस बार दोनों ही कक्षाओं में प्रतापगढ़ जिले का दबदबा रहा। 10वीं में जहां कन्नौज की सृष्टि ने 94.43 फीसदी के साथ टॉप किया, वहीं 12 वीं में प्रतापगढ़ के रजनीश यादव 89.36 फीसदी अंकों के साथ पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहे।

    गौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही कक्षाओं के टॉप-चार में प्रतापगढ़ के 3-3 विद्यार्थी शामिल हैं। परिणाम के अनुसार 10वीं में 14,199 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से और 816 विद्यार्थी द्वितीय श्रेणी में पास हुए हैं जबकि पांच विद्यार्थी तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए।

    वहीं 12वीं में 5,661 विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से तथा 6,087 द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण हैं जबकि 555 विद्यार्थी तृतीय श्रेणी से पास हुए हैं। कन्नौज जिले के राधा देवी आदर्श संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, गुरसहायगंज की छात्रा सृष्टि ने 94.43 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे स्थान पर प्रतापगढ़ की खुशबू सरोज 94.29 फीसदी के साथ रहीं जो वहां के जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय, भुजाही बाजार की छात्रा हैं। इसमें तीसरे स्थान पर 93.29 फीसदी के साथ संयुक्त रूप से प्रतापगढ़ के ही दो विद्यार्थी रहे, जिन्हें समान रूप से कुल 653 अंक हासिल हुए। दोनों विद्यार्थियों में से एक मुलायम सिंह यादव जो श्री राम टहल संस्कृत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय यदुनाथपुर सैफाबाद से और दूसरी प्रियंका सरोज जय गुरुदेव संस्कृत माध्यमिक विद्यालय भुजाही बाजार प्रतापगढ़ की हैं।


    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे

    हाईकोर्ट के निर्णय से डीएलएड (ODL) अभ्यर्थी यूपी-टीईटी 2026 परीक्षा में प्रोविजिनल रूप से बैठ सकेंगे


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने डीएलएड (ओडीएल) करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत देते हुए उन्हें यूपी-टीईटी 2026 में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे अभ्यर्थियों को फिलहाल (प्रोविजनल) रूप से परीक्षा में बैठने दिया जाए। स्पष्ट किया कि इनके चयन का मामला याचिका में पारित होने वाले अंतिम आदेश के अधीन रहेगा। 


    कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाबी हलफनामा भी मांगा है। अगली सुनवाई 22 मई को होगी। न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने शुभम शुक्ला समेत 36 याचियों की याचिका पर यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वे अभ्यर्थी, जो 10 अगस्त 2017 या उससे पहले से कार्यरत हैं।

    Friday, April 24, 2026

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम

    यूपी बोर्ड 10वीं, 12वीं कक्षाओं का रिजल्ट : बेटियों ने फिर लहराया मेधा का परचम


    प्रयागराज। यूपी बोर्ड के परीक्षा परिणामों में बाराबंकी जिला टॉपर बनकर उभरा है। हाईस्कूल में टॉपर समेत जिले की तीन और इंटर में दो बेटियों ने टॉप-3 में जगह बनाई है। हाईस्कूल और इंटर की टॉपर समेत टॉप-3 में तीन बेटियों के साथ सीतापुर दूसरे स्थान पर रहा।

    बृहस्पतिवार को जारी परीक्षा परिणामों के मुताबिक हाईस्कूल में सीतापुर की कशिश वर्मा और बाराबंकी की अंशिका वर्मा ने 97.83 फीसदी अंकों के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया। इंटरमीडिएट में सीतापुर की शिखा वर्मा ने 97.60 फीसदी अंकों के साथ प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया है।

    हाईस्कूल में दूसरे स्थान पर बाराबंकी की अदिति और तीसरे स्थान पर सीतापुर की अर्पिता, झांसी के ऋषभ साहू व बाराबंकी की परी वर्मा शामिल हैं। इंटरमीडिएट में बरेली की नंदिनी गुप्ता व बाराबंकी की श्रेया वर्मा संयुक्त रूप से दूसरे और बरेली की सुरभि यादव व बाराबंकी की पूजा पाल संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं। सीतापुर की टॉपर शिखा वर्मा और कशिश वर्मा ने बाबूराम सावित्री देवी शेखपुर, विलौली बाजार से पढ़ाई की है। अंशिका वर्मा बाराबंकी के मॉडर्न एकेडमी इंटर कॉलेज, जैदपुर की छात्रा है।





    यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के नतीजे 23 अप्रैल को

    ऐसे चेक करें रिजल्ट

    1 स्टेप
    सबसे पहले वेबसाइट UPMSP.EDU.IN पर जाना होगा।

    2 स्टेप
    होम पेज पर आपको जिस कक्षा का रिजल्ट चेक करना होगा, उस पर क्लिक करना है।

    3 स्टेप
    अब आपको रोल नंबर भरकर सबमिट करना होगा।

    4 स्टेप
    रिजल्ट स्क्रीन पर ओपन हो जाएगा, चेक करने के साथ ही मार्कशीट को डाउनलोड कर सकेंगे।


    23 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद बृहस्पतिवार को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परीक्षा परिणाम घोषित करेगा। यह पिछले वर्ष से तीन दिन पहले है। परिणाम शाम चार बजे निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेंद्र देव और परिषद के सचिव भगवती सिंह जारी करेंगे।

    परीक्षा में कुल 5337778 परीक्षार्थी पंजीकृत हुए, जिनमें 2523112 छात्राएं, 28,14,612 छात्र और 54 ट्रांसजेंडर शामिल थे। परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च तक 8033 केंद्रों पर आयोजित हुईं। हाईस्कूल में करीब 26 लाख और इंटरमीडिएट में लगभग 24.5 लाख छात्रों ने भाग लिया, जबकि जेलों में बंद 360 परीक्षार्थियों ने भी परीक्षा दी।

    मूल्यांकन कार्य 254 केंद्रों पर 2.75 करोड़ उत्तर पुस्तिकाओं का 18 मार्च से 4 अप्रैल के बीच 15 कार्य दिवसों में पूरा हुआ। इस बार त्रुटिहीन परिणाम सुनिश्चित करने के लिए प्रधानाचार्यों और वरिष्ठ प्रवक्ताओं को अंकेक्षक बनाया गया था। सचिव भगवती सिंह ने बताया कि छात्र अपना रिजल्ट माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट पर भी देख सकेंगे। 





    यूपी बोर्ड का परिणाम तैयार, घोषणा जल्द, 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना

    22 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 का परिणाम लगभग बनकर तैयार है। परिणाम की समीक्षा अंतिम दौर में है। 25 से 29 अप्रैल के बीच परिणाम घोषित होने की संभावना जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार बोर्ड की ओर से जल्द ही परिणाम किस दिन घोषित होगा इसकी अधिकृत सूचना जल्द जारी होगी। परीक्षा में सम्मिलित 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को भी परिणाम का बेसब्री से इंतजार है।



    यूपी बोर्ड : 28-29 अप्रैल को आ सकता है परीक्षाओं का परिणाम

    10 अप्रैल 2026
    प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2026 का परिणाम 28 या 29 अप्रैल को घोषित किया जा सकता है। परिषद ने परिणाम जारी करने की तैयारियां तेज कर दी हैं। परिषद के स्तर पर परीक्षार्थियों के आंतरिक अंक अपलोड कर दिए गए हैं। वहीं, जिन छात्रों की प्रयोगात्मक (प्रैक्टिकल) परीक्षाएं छूट गई थीं, उन्हें भी संपन्न करा लिया गया है।

    हाल ही में ऑनलाइन डाटा परीक्षण के दौरान यह सामने आया कि 652 प्रयोगात्मक परीक्षा केंद्रों पर बाह्य परीक्षकों द्वारा अंक अपलोड किए जाने के बावजूद आंतरिक परीक्षकों ने विद्यालय लॉगिन से अंक अपलोड नहीं किए। इससे करीब 34,637 परीक्षार्थियों का परिणाम प्रभावित होने की आशंका थी। स्थिति को देखते हुए परिषद ने छह व सात अप्रैल को वेबसाइट फिर से सक्रिय कर आंतरिक अंकों को अपलोड करने का मौका दिया, जिससे छात्रों को राहत मिली।


    प्रैक्टिकल परीक्षाएं लगभग पूरीइंटरमीडिएट की शेष प्रयोगात्मक परीक्षाएं नौ व 10 अप्रैल को आयोजित होनी थीं, जो लगभग पूरी हो चुकी हैं। ये परीक्षाएं छात्रों के अपने विद्यालय में कराई गईं। छूटे हुए छात्रों की परीक्षा डीआईओएस व क्षेत्रीय कार्यालयों की देखरेख में जिला मुख्यालय पर कराई गई।

    त्रुटियों में संशोधन के निर्देश

    जिन परीक्षार्थियों के नाम, माता-पिता के नाम या जेंडर में अंग्रेजी से हिंदी रूपांतरण के कारण त्रुटियां थीं, उनमें 10 अप्रैल तक हर हाल में सुधार के निर्देश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने प्रदेश के सभी प्रधानाचार्यों को दिए हैं।

    पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार थोड़ी देरी संभव

    वर्ष 2025 में यूपी बोर्ड का परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस बार मूल्यांकन में तीन दिन की देरी के चलते परिणाम तीन-चार दिन बाद आने की संभावना जताई जा रही है। परिषद के सचिव भगवती सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने की सभी तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द इसे जारी कर दिया जाएगा।




    जानिए! कब आयेगा यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट? 

    यूपी बोर्ड परीक्षा 2026 का परिणाम 23 अप्रैल के बाद होगा घोषित

    26 मार्च 2026
    लखनऊ: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी वोर्ड) की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम अप्रैल के आखिरी सप्ताह में घोषित होने की संभावना है। मार्च महीने में कई छुट्टियां होने के कारण उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम तय समय पर पूरा नहीं हो सका। बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार, पहले मूल्यांकन कार्य अप्रैल तक खत्म होना था, लेकिन अब यह चार अप्रैल तक पूरा होने की उम्मीद है। 


    इसके बाद रिजल्ट तैयार करने की एक प्रक्रिया शुरू होगी। ऐसे में परिणाम 23 से 30 अप्रैल के बीच जारी किया जा सकता है। पिछले साल यूपी बोर्ड का रिजल्ट 25 अप्रैल को घोषित हुआ था, जबकि वर्ष 2024 में यह 20 अप्रैल को जारी किया गया था। इस बार बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 छात्र-जत्राएं पंजीकृत थे। इनमें हाईस्कूल के 27,61,696 और इंटरमीडिएट के 25,76,082 विद्यार्थी शामिल है। यूपी बोर्ड की परीक्षाएं 18 फरवरी से 12 मार्च के वीच कराई गई थी। अब छात्र-छात्राएं अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं।

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले, प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    स्कूली शिक्षा सुधार के लिए एनसीईआरटी शुरू करेगा शिक्षक डिग्री कार्यक्रम, सत्र 27-28 से होंगे दाखिले

    प्रवेश परीक्षा की मेरिट से बीए-बीएड, बीएससी-बीएड, बीकॉम-बीएड में एनसीईआरटी और 6 कॉलेजों में मिलेगा दाखिला

    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने के साथ-साथ शिक्षक शिक्षा में भी बड़ा बदलाव करने जा रहा है। शैक्षणिक सत्र 2027-28 से एनसीईआरटी स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी स्तर पर अपने डिग्री कार्यक्रम शुरू करेगा, जिनमें बीए-बीएड, बीएससी-बीएड और बीकॉम-बीएड कोर्स शामिल होंगे।

    पहली बार स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम के आधार पर शिक्षक बनने की पढ़ाई का पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा। इससे पहले इस पाठ्यक्रम की समीक्षा रिपोर्ट तैयार होगी और उसमें मौजूद कमियों को दूर किया जाएगा। इसके लिए एनसीईआरटी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के साथ मिलकर काम करेगा। इन पाठ्यक्रमों में दाखिला एनसीटीई की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा की मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। इसके तहत एनसीईआरटी परिसर और छह अन्य कॉलेजों में सीटें उपलब्ध होंगी।

    केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रस्ताव पर एनसीईआरटी को 'डीम्ड टू-बी विश्वविद्यालय' का दर्जा दिया है। अब तक एनसीईआरटी बालवाटिका से कक्षा 12 तक के पाठ्यक्रम और किताबें तैयार करता रहा है, लेकिन उसी आधार पर शिक्षक प्रशिक्षण के पाठ्यक्रम में एकरूपता नहीं थी।

    नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार पर रहेगा फोकस नई पहल के तहत शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार, पढ़ाने के तरीकों में बदलाव, खेल-आधारित शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग और तकनीक आधारित शिक्षण को आसान बनाने के तरीकों पर शोध किया जाएगा।




    एनसीईआरटी अब खुद देगा अपनी डिग्रियां

    डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के बाद एनसीईआरटी अब खुद अपनी डिग्री दे सकेगा। साथ ही देश भर में उसके जो छह क्षेत्रीय संस्थान है, वह भी अपनी डिग्री दे सकेंगे। अभी तक एनसीईआरटी के क्षेत्रीय संस्थानों को डिग्री देने के लिए स्थानीय राज्य विश्वविद्यालयों से संबद्धता लेनी पड़ती थी। इन संस्थानों में अभी शिक्षक प्रशिक्षण से जुड़े कोर्स संचालित किए जा रहे है। हालांकि इस दर्ज के बाद अब जल्द ही वह कुछ और नए कोर्स भी शुरू कर सकता है।


    NCERT अब डीम्ड यूनिवर्सिटी, स्नातक से पीएचडी तक की मिलेगी डिग्री

    शिक्षा मंत्रालय ने मंजूरी दी, एनसीईआरटी के छह संस्थान भी होंगे शामिल

    04 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) किताबें बनाने के साथ-साथ अब डिग्री, डिप्लोमा व पीएचडी की पढ़ाई भी कराएगी। केंद्र सरकार ने एनसीईआरटी को डीम्ड-टू-बी यूनिवर्सिटी (मानद विश्वविद्यालय) का दर्जा दे दिया है। इसी हफ्ते इसकी अधिसूचना जारी होगी।

    एनसीईआरटी के साथ उसके छह संस्थानों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान के अजमेर, ओडिशा के भुवनेश्वर, कर्नाटक के मैसूर, मेघालय के शिलांग और मध्य प्रदेश के भोपाल का पंडित सुंदरलाल शर्मा व्यावसायिक शिक्षा संस्थान है।

    एनसीईआरटी अब तक सीबीएसई बोर्ड समेत राज्यों के लिए स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करती थी। नई व्यवस्था के बाद आगामी शैक्षणिक सत्र से अन्य विश्वविद्यालयों की तर्ज पर डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई करवा सकेगी। परिषद को कुछ सख्त शर्तों के साथ यह दर्जा मिला है, जिसमें संस्थान अपनी संपत्ति या फंड बिना सरकार और यूजीसी की अनुमति के ट्रांसफर नहीं कर सकता।

    एनसीईआरटी ने 2025 में सरकार को दी थी रिपोर्ट

    यूजीसी ने 2023 में कुछ शर्तों के साथ लेटर ऑफ इंटेंट जारी किया था, जिसमें एनसीईआरटी को तीन साल में सभी शर्तों को पूरा करना था। एनसीईआरटी ने सरकार को 2025 में रिपोर्ट दी थी। इसके बाद, विशेषज्ञ समिति की सिफारिश के आधार पर यूजीसी ने प्रस्ताव को मंजूरी दी थी।

    शोध पर होगा काम 
    विश्वविद्यालय के रूप में एनसीईआरटी शोध पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करेगी। नए कोर्स, ऑफ कैंपस सेंटर या विदेशी कैंपस भी तय नियमों के तहत ही शुरू किए जा सकेंगे। विद्यार्थियों के दाखिले, सीटों की संख्या और फीस से जुड़े नियमों का पालन करना भी जरूरी होगा।





    NCERT को इस महीने के अंत तक डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा मिल जाएगा, स्कूलों से जुड़ी पाठ्य पुस्तकें तैयार करने के साथ ही शोध विश्वविद्यालय के रूप में करेगा काम

    यूजीसी ने इसे लेकर जमीनी तैयारियों को किया पूरा, बोर्ड की मंजूरी मिलते ही जारी हो जाएगा नोटिफिकेशन


    10 जनवरी 2026
    नई दिल्ली: स्कूली बच्चों के लिए शोधपरक व सस्ती पाठ्य पुस्तकें तैयार करने वाला राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) अब जल्द ही एक शोध विश्वविद्यालय के रूप में काम करते हुए दिखेगा। जहां छात्रों को रिसर्च आधारित कुछ नए डिग्री कोर्स पढ़ने को मिल सकते हैं। इनमें बीए व बीएससी विद रिसर्च जैसे कोर्स शामिल हैं। 


    शिक्षा मंत्रालय की सहमति के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर अपनी सारी तैयारी पूरी कर ली है। जो संकेत मिल रहे हैं, उनमें इस महीने के अंत तक होने वाली यूजीसी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाएगी। साथ ही नोटिफिकेशन भी जारी हो जाएगा।


    एनसीईआरटी के शिक्षा व शोध क्षेत्र से जुड़े लंबे अनुभव को देखते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 2023 में ही इसको विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील करने का एलान किया था। तभी से इसके विश्वविद्यालय बनाने की पहल शुरू हुई थी। सूत्रों की मानें तो इसके स्वरूप व कामकाज के दायरे को लेकर चले लंबे मंथन के बाद आखिरकार इसको पूर्व की जिम्मेदारियों के साथ इसके अनुभव से नई पीढ़ी को जोड़ने को लेकर सहमति दी गई। जिसमें वह शोध आधारित नए डिग्री व पीएचडी जैसे कोर्सों को शुरू कर सकता है। एनसीईआरटी का गठन 1961 में किया गया था। तब से वह स्कूली पाठ्य पुस्तकों को तैयार करने व प्रशिक्षण का काम कर रहा है।


    इस दर्जे के बाद एनसीईआरटी का पहले की तरह केंद्रीय संस्थान का स्वरूप बरकरार रहेगा। साथ ही उन्हें शिक्षा मंत्रालय से मिलने वाली वित्तीय मदद भी जारी रहेगी। वहीं विश्वविद्यालय का दर्जा मिलते ही उसकी स्वायत्तता बढ़ जाएगी। शिक्षा मंत्रालय की इस पहल को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की उस पहल से भी जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने की सिफारिश की गई है। एनसीईआरटी अभी शिक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े कई डिप्लोमा कोर्सों को संचालित कर रहा है।

    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी

    यूपी में सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक तो निजी विद्यालयों में 50 प्रतिशत ही बन सकीं अपार आईडी 

    23 अप्रैल 2026
    लखनऊ। यूपी में अब कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर नहीं रहेगा। उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो रही है। योगी सरकार के ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, अपार प्लस (अपार+) मिशन के तहत हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा रही है, जिससे उसकी पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। मतलब साफ है, न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की जा रही है।

    2.68 करोड़ से अधिकबच्चों को जोड़ाः आगामी 30 जून तक चलने वाले इस मिशन में 4.24 करोड़ छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चों को शामिल कर 63 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक बच्चों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इससे शिक्षा को जमीनी स्तर तक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में तेज प्रगति दिखाई दे रही है। इसमें सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।

    विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रोफाइल डिजिटली सुरक्षित रहेगी

    अपार प्लस व्यवस्था के तहत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वतः स्थानांतरित हो जाता है। इससे ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डाटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।




    30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी 

    13 अप्रैल 2026
    नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।

    पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।

    इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।

    पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।

    मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।

    शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।


    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट

    सीबीएसई 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा 15 मई से होंगी, डाउनलोड करें डेटशीट 

    नई दिल्लीः सीबीएसई ने 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा की तारीख जारी कर दी है। इसमें विभिन्न विषयों की परीक्षाएं 15 मई से शुरू होकर 21 मई तक चलेंगी। इस नई व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों को एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार बोर्ड परीक्षा देने - का अवसर मिलेगा, जिससे वे अपने अंकों में सुधार कर सकेंगे।

    बोर्ड द्वारा इस वर्ष से लागू किए गए इस सिस्टम में दूसरी परीक्षा देना पूरी तरह से वैकल्पिक रखा गया है। यानी जो छात्र मुख्य परीक्षा में अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, वे दूसरी बोर्ड परीक्षा देकर अपने अंकों को बेहतर कर सकते हैं। अधिकांश परीक्षाएं सुबह साढ़े दस बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक होंगी, जबकि कुछ विषयों की परीक्षाएं दोपहर साढ़े बारह बजे तक ही समाप्त हो जाएंगी। बोर्ड ने विद्यार्थियों को सलाह दी है कि वे अपने एडमिट कार्ड के साथ समय से पहले परीक्षा केंद्र पर पहुंचें।



    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    राजकीय माध्यमिक विद्यालयों को जल्द मिलेंगे 500 नियमित प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारियों को जल्द ही मिलेगी तैनाती

    लोक सेवा आयोग ने आयोजित की डीपीसी, प्रक्रिया तेज

    लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यामक विद्यालयों में प्रधानाचार्य के खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज हो गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग को जल्द ही 500 नियमित प्रधानाचार्य मिलेंगे। लोक सेवा आयोग ने इसके लिए हाल ही में डीपीसी (विभागीय प्रोन्नति समिति) आयोजित की है।


    शासन ने खंड शिक्षा अधिकारियों व पुरुष-महिला शिक्षकों का नया कोटा हाल ही में तय किया है। पदोन्नति के लिए नई व्यवस्था बनाई गई है। इसमें खंड शिक्षा अधिकारियों के लिए 34 फीसदी कोटा निर्धारित है, जो पहले 17 फीसदी था। महिला-पुरुष शिक्षकों के लिए 33-33 फीसदी कोटा तय किया गया है, जो पहले क्रमशः 22 व 61 फीसदी था।

    डीपीसी में बीईओ व विभाग के वरिष्ठ शिक्षकों के पदोन्नति के पद भरे जाएंगे। निर्धारित मानक पूरे करने वाले खंड शिक्षा अधिकारी प्रधानाचार्य बनेंगे। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक भी पदोन्नति पाकर प्रधानाचार्य बनेंगे। इसका असर विद्यालयों के कामकाज पर पड़ेगा।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि डीपीसी के बाद लोक सेवा आयोग योग्य अभ्यर्थियों की सूची शासन को भेजेगा। शासन औपचारिकताएं पूरी कर इन प्रधानाचार्यों को विद्यालयों में तैनाती देगा। प्रदेश के 2400 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में से 600 से ज्यादा में नियमित प्रधानाचार्य नहीं हैं।


    बीईओ के खाली पद भरेंगे

    प्रधानाचार्य पद पर पदोन्नति के बाद प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के काफी पद खाली होंगे। बेसिक शिक्षा विभाग ने इन्हें भरने की प्रक्रिया पहले से ही शुरू कर दी है। विभाग खाली पदों की जानकारी जुटा रहा है। ताकि इसके अनुसार नई भर्ती के लिए लोक सेवा आयोग को प्रस्ताव भेजा जा सके। बेसिक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा है।

    Thursday, April 23, 2026

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

    अपर मुख्य सचिव और निदेशक से मिले शिक्षामित्र पदाधिकारी


    लखनऊ। उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा व बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्थानांतरण (मूल विद्यालय वापसी) जैसी सुविधाओं को लागू करने की मांग की।


    प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ देने संबंधी औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है। इसे जल्द पूरा किया जाए ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षामित्रों को समय पर उपचार मिल सके। वहीं तबादले के लिए जिला स्तर पर प्रक्रिया नहीं हो रही है। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जाए। अधिकारियों ने इस पर जल्द सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

     प्रतिनिधिमंडल में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (तिवारी गुट) के अध्यक्ष एसपी तिवारी, शिक्षामित्र संघ प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, विनोद वर्मा, अजीत कुमार यादव, सुशील तिवारी आदि उपस्थित थे। 

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा

    एडेड माध्यमिक स्कूलों में नियमित के समान ही कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को भी वेतन मिलेगा


    लखनऊ। एडेड (अशासकीय सहायता प्राप्त) माध्यमिक स्कूलों के कार्यवाहक प्रधानाचार्य जल्द ही नियमित प्रधानाचार्यों के समान वेतन पाने लगेंगे। शासन के कड़े रुख के बाद मंडल स्तर पर इसके लिए आदेश जारी होने शुरू हो गए हैं। मंगलवार को आजमगढ़ मंडल में संयुक्त शिक्षा निदेशक ने अपने मंडल के जिला विद्यालय निरीक्षकों को जिले के एडेड स्कूल प्रबन्धनों से तत्काल प्रस्ताव मंगाने के निर्देश दिए हैं।


    इसी प्रकार दो अन्य मंडलों के संयुक्त शिक्षा निदेशकों ने इस प्रकरण में एक दो दिनों के भीतरजिलाविद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर उनके जिले से प्रस्ताव मंगाने केलिएपत्रावलियों पर सहमति दे दी है। 

    दरअसल, हाईकोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन दिए जाने का आदेश देते हुए कहा था कि यदि किसी वरिष्ठ शिक्षक के हस्ताक्षर प्रमाणित हो चुके हैं और वह कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्य कर रहा है तो ऐसे शिक्षक को हस्ताक्षर प्रमाणन के तीन माह बाद से लेकर नियमित प्रधानाचार्य की नियुक्ति होने तक अथवा उसके सेवानिवृत्त होने तक, प्रधानाचार्य पद का पूर्ण वेतनमान दिया जाएगा। 

    कोर्ट ने समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को आधार बनाते हुए माना कि जब कोई शिक्षक वास्तविक रूप से प्रधानाचार्य की जिम्मेदारियां निभा रहा है, तो उसे उस पदके अनुरूप वेतन मिलना ही चाहिए।

    विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया

    विधान भवन पर 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित अभ्यर्थी जुटे, पुलिस ने जबरन इको गार्डन पहुंचाया 

    23 अप्रैल 2026
    लखनऊ । 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में याची बनकर न्याय की लड़ाई लड़ रहे आरक्षित श्रेणी के भारी संख्या में अभ्यर्थी बुधवार को विधान भवन के सामने प्रदर्शन कर धरने पर बैठ गए। आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों ने योगी जी हमें न्याय दो, सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों के पक्ष में याची लाभका प्रस्ताव पेश करो के नारे लगाने लगे। पुलिस ने आकर अभ्यर्थियों को रोक लिया। दोनों के बीच गहमागहमी होने लगी। पुलिस ने इनकी एक नहीं सुनी। सभी को जबरन पुलिस बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। अभ्यर्थी पहले भी न्याय के लिये डिप्टी सीएम समेत शिक्षामंत्री आदि के यहां कई बार प्रदर्शन कर चुके हैं।


    धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप एवं धनंजय गुप्ता का कहना है कि आरक्षण घोटाले का यह मामला लखनऊ हाई कोर्ट में वर्ष 2020 से चल रहा है। इस भर्ती में ओबीसी वर्ग को 27% की जगह सिर्फ 3.86% वहीं एससी वर्ग को ज्यादा आरक्षण दिया गया है।

     बेसिक शिक्षा नियमावली 1981 तथा आरक्षण नियमावली 1994 का घोर उल्लंघन किया गया है। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ 13 अगस्त 2024 को इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को रद्द कर चुकी है। प्रदेश सरकार को शिक्षक भर्ती की सूची तीन महीने के अंदर मूल चयन सूची के रूप में लिस्ट बनाने का आदेश दे चुकी है लेकिन सरकार ने कुछ नहीं किया।

    जारी रहेगा प्रदर्शन...
    पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश प्रदेश महासचिव सुमित यादव का कहना है कि प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण पीड़ित यांची अभ्यर्थियों के पक्ष में उन्हें न्याय देने के लिए याची लाभ का प्रपोजल पेश नहीं कर देती तब तक आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थी धरना प्रदर्शन करते रहेंगे। प्रदर्शन में सुशील कश्यप, धनंजय गुप्ता, सुमित यादव आदि शामिल रहे।




    69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई में देरी से नाराज अभ्यर्थियों संग परिजन भी करेंगे 22 अप्रैल को आंदोलन

    18 अप्रैल 2026
    लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से नाराज आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थी 22 अप्रैल को फिर से राजधानी में दम दिखाएंगे। इस बार अभ्यर्थियों के साथ-साथ उनके परिजन और अलग-अलग कई संगठन एकजुट होकर आंदोलन करेंगे। अभ्यार्थियों ने बताया कि दो फरवरी से राजधानी के ईको गार्डेन में उनका अनवरत धरना चल रहा है। किंतु सरकार इस मामले में चुप्पी साधे बैठी है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सरकार कोई पहल नहीं कर रही, जिससे मामला टल रहा है। इस प्रकारण की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में सितंबर 2024 में हुई थी। उसके बाद से लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।


    अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि पिछली सुनवाई 19 मार्च को होनी थी लेकिन नहीं हुई। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में अनलिस्टेड है। इससे सभी अभ्यर्थियों में बहुत आक्रोश है। हमने 22 अप्रैल को महाआंदोलन करने का फैसला लिया है। सुशील कश्यप ने बताया कि सभी जिले में समन्वयक बनाकर ब्लाक स्तर पर संपर्क किया जा रहा है, ताकि अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी आ सकें।

    आंदोलन में शामिल सुमित कुमार, विक्रम, अमित मौर्या आदि ने कहा कि इस मामले में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाईकोर्ट डबल बेंच का फैसला, सब हमारे पक्ष में है। फिर भी हमारे साथ न्याय इसलिए किया जा रहा है क्योंकि हम पिछड़े समाज से आते हैं। सरकार जल्द इस मामले में ठोस पहल नहीं करती है तो आंदोलन व्यापक होगा।

    Wednesday, April 22, 2026

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में हर दिन दर्ज होगी आनलाइन उपस्थिति, निर्देश जारी

    यूपी बोर्ड के स्कूलों में हर दिन दर्ज होगी आनलाइन उपस्थिति, निर्देश जारी

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों के लिए जारी किया आदेश

    प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने राज्य के सभी माध्यमिक विद्यालयों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड से जुड़े 29,208 राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों के लिए अब छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की दैनिक उपस्थिति आनलाइन दर्ज करना अनिवार्य कर दिया गया है।

    बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने 20 अप्रैल को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को इस संबंध में निर्देश जारी किए।

    पत्र के अनुसार सभी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में आनलाइन उपस्थिति दर्ज कराने की व्यवस्था पहले से लागू है, लेकिन शैक्षिक सत्र 2026-27 में इस व्यवस्था का क्रियान्वयन संतोषजनक नहीं पाया गया। निर्देशों के अनुसार अब विद्यालयों को प्रतिदिन पहले पीरियड में ही छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों की उपस्थिति आनलाइन दर्ज करनी होगी। इसके लिए प्रत्येक विद्यालय को अपनी लागइन आइडी का उपयोग करना होगा। बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर इसके लिए अलग से उपस्थिति पोर्टल लिंक और यूजर मैनुअल उपलब्ध कराया गया है।

    डिजिटल प्रक्रिया को और आसान बनाने के लिए बोर्ड ने मोबाइल एप के जरिये भी उपस्थिति दर्ज करने की सुविधा दी है। बोर्ड ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को विशेष जिम्मेदारी देते हुए निर्देशित किया है कि वे अपने जिले के शत-प्रतिशत विद्यालयों से आनलाइन उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। साथ ही नियमित निगरानी कर यह देखा जाए कि कोई भी विद्यालय इस व्यवस्था से बाहर न रहे।


    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य, सरकार की फाइनेंशियल हैंड बुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं: हाईकोर्ट

    05 साल पूर्व बच्चे के जन्म के दो साल बाद दूसरा अवकाश नहीं मिला


    लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहला मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक के प्रावधान मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं हो सकते। यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 



    याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिए याची की दूसरे मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरानयाची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 लाभकारी कानून है। इसके प्रावधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। राज्य की ओर सेवित्तीय हैंडबुक के नियम 153 (1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो प्रसूति अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष जरूरी हैं।




    दो साल से कम अंतर पर भी दूसरा मातृत्व अवकाश मान्य

    इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा, सरकार की वित्तीय हैंडबुक मातृत्व लाभ कानून के ऊपर नहीं

    लखनऊइलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि पहली मातृत्व अवकाश लेने के दो वर्ष के भीतर दूसरे मातृत्व अवकाश पर रोक नहीं लगाई जा सकती है। न्यायालय ने यह भी कहा कि इस विषय में वित्तीय हैंडबुक (वित्तीय नियम संग्रह) के प्रविधान मातृत्व लाभकानून के ऊपर नहीं हो सकते हैं।

    यह आदेश न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की एकल पीठ ने मनीषा यादव की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में चार अप्रैल 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके जरिये याची की दूसरी मातृत्व अवकाश की मांग को अस्वीकार कर दिया गया था। सुनवाई के दौरान याची की ओर से अधिवक्ता चिन्मय मिश्रा ने दलील दी कि मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 एक लाभकारी कानून है और इसके प्रविधानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। वहीं, राज्य की ओर से वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए कहा गया कि दो मातृत्व अवकाश के बीच कम से कम दो वर्ष का अंतर होना आवश्यक है।

    अदालत ने पूर्व के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि मातृत्व लाभ अधिनियम संसद द्वारा बनाया गया कानून है और यह किसी भी कार्यपालिका निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रविधानों से ऊपर है। ऐसे में यदि दोनों में कोई विरोधाभास हो तो अधिनियम के प्रविधान ही प्रभावी होंगे। कोर्ट ने पाया कि याची की पहली संतान 2021 में हुई थी और इसके बाद उन्होंने 2022 में दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए आवेदन किया था, जिसे गलत आधार पर खारिज कर दिया गया। अदालत ने इस आदेश को रद करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि याची को छह अप्रैल 2026 से दो अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश प्रदान किया जाए।

    मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

    मदरसे की मान्यता निलंबन के आधार पर नहीं रोका जा सकता मदरसा शिक्षकों का वेतन : हाईकोर्ट

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। केवल मान्यता निलंबन के आधार पर वहां के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों का वेतन रोका जाना अवैधानिक है।


    यह टिप्पणी न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने आजमगढ़ स्थित दारुल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशर्फियां मिसबाहुल उलूम मुबारकपुर में तैनात रहे बदरे आलम और अन्य 19 शिक्षकों व कर्मचारियों की ओर से दाखिल याचिका पर की है। याचियों ने नौ जनवरी को जारी उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के रजिस्ट्रार के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें मदरसे की मान्यता निलंबन की स्थिति में शिक्षकों का वेतन रोके जाने का आदेश दिया गया था।

    वेतन की मांग को लेकर हाईकोर्ट पहुंचे याचियों के वकील ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा विनियमावली-2016 के विनियम 13 (6) के अनुसार, जब तक किसी मदरसे की मान्यता अंतिम रूप से रद्द नहीं हो जाती, तब तक वहां के कर्मचारी वेतन पाने के हकदार हैं। 

    धोखाधड़ी के प्रमाण के बिना दशकों पुरानी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

    धोखाधड़ी के प्रमाण के बिना दशकों पुरानी नियुक्ति रद्द नहीं की जा सकती : हाईकोर्ट

    गौतमबुद्ध नगर के मुकेश कुमार शर्मा ने याचिका दायर कर बर्खास्तगी आदेश को हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी कर्मचारी ने लंबे समय तक सेवा दी है और उसकी नियुक्ति में धोखाधड़ी या जालसाजी का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं है तो दशकों बाद उसकी सेवा समाप्त करना पूरी तरह से अवैध है। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने गौतमबुद्ध नगर के कंपोजिट विद्यालय जेवर में कार्यरत हेडमास्टर मुकेश कुमार शर्मा की बर्खास्तगी को रद्द कर दिया।


    यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने दिया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 11 दिसंबर 2025 के आदेश से याची की सेवाएं इस आधार पर समाप्त कर दी थीं कि उन्होंने शैक्षणिक सत्र 1993-94 में एक साथ दो नियमित पाठ्यक्रम शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र और इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। याची ने बीएसए के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी।

    विभाग के वकील ने दलील दी कि एक ही वर्ष में दो परीक्षाएं उत्तीर्ण करना और इस तथ्य को छिपाना नियुक्ति को अवैध बनाता है। हालांकि, हाईकोर्ट ने विभाग के इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जब तक किसी अभ्यर्थी के प्रमाणपत्र सक्षम प्राधिकारी की ओर से रद्द या अवैध घोषित नहीं किए जाते, तब तक वे पूरी तरह प्रभावी माने जाएंगे।

    इस मामले में याची के हाईस्कूल (1991), शारीरिक शिक्षा प्रमाणपत्र (1993-94) और इंटरमीडिएट (1995) के प्रमाणपत्र आज भी वैध हैं। कोर्ट ने कहा कि तीन दशक की निष्कलंक सेवा के बाद इस तरह की कार्रवाई अवैध और न्याय के सिद्धांतों के विरुद्ध है।


    बर्खास्तगी प्रक्रिया में पाईं गंभीर खामियां

    कोर्ट ने बर्खास्तगी प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाईं। उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के तहत कोई नियमित विभागीय जांच नहीं की गई थी। कोर्ट ने कहा कि बिना आरोप पत्र तैयार किए और बिना साक्ष्य प्रस्तुत किए, महज नोटिस के आधार पर सेवा समाप्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। इन सभी आधारों पर अदालत ने बीएसए के बर्खास्तगी आदेश को मनमाना और दोषपूर्ण करार देते हुए रद्द कर दिया और याची की रिट याचिका को स्वीकार कर लिया।

    प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के बिना निलंबन मंजूर नहीं, निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं – हाईकोर्ट

    प्रबंधन समिति के प्रस्ताव के बिना निलंबन मंजूर नहीं, निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं – हाईकोर्ट

    मऊ के रानीपुर के इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य के निलंबन का मामला


    प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान में कर्मचारी/प्राचार्य को निलंबित करने का अधिकार केवल प्रबंधक (मैनेजर) को व्यक्तिगत रूप से नहीं है, बल्कि इसके लिए प्रबंधन समिति का विधिवत प्रस्ताव आवश्यक है। यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकल पीठ ने राजीव कुमार द्विवेदी की याचिका पर दिया है।


    मऊ के रानीपुर क्षेत्र में स्थित जनता इंटर कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य राजीव कुमार द्विवेदी को 15 जनवरी 2026 को प्रबंधक की ओर से निलंबित कर दिया गया था। निलंबन को जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) ने सात मार्च 2026 को मंजूरी दे दी थी।

    याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि प्रबंधक ने अपने व्यक्तिगत स्तर पर निलंबन आदेश जारी किया। इसके लिए प्रबंधन समिति का कोई प्रस्ताव नहीं था। ऐसे में डीआईओएस की ओर से दी गई मंजूरी अवैध है। विपक्षी की ओर से दलील दी गई कि प्रबंधन समिति ने 15 जनवरी 2026 को प्रस्ताव पारित किया था। उक्त प्रस्ताव को निलंबन आदेश के साथ डीआईओएस को भेजा गया था।

    कोर्ट ने डीआईओएस की ओर से सात मार्च 2026 को दिया गया निलंबन आदेश रद्द कर दिया। साथ ही मामले को पुनः डीआईओएस के पास भेजते हुए निर्देश दिया कि यदि प्रबंधन समिति का कोई प्रस्ताव उपलब्ध हो तो एक महीने के भीतर नया आदेश पारित करें। साथ ही कोर्ट ने दोनों पक्षों को निर्देश दिया कि वे 30 अप्रैल 2026 को डीआईओएस के समक्ष आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित हों।

    Tuesday, April 21, 2026

    हीट वेव के दृष्टिगत मदरसों में भी पठन-पाठन का समय परिवर्तन, 8 से 2 बजे के स्थान पर अब 7 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक होंगे संचालित

    हीट वेव के दृष्टिगत मदरसों में भी पठन-पाठन का समय परिवर्तन,  8 से 2 बजे के स्थान पर अब 7 बजे से अपराह्न 12:30 बजे तक होंगे संचालित 



    Sunday, April 19, 2026

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    गर्मी की छुट्टियों में भी ठंडी रहेगी बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया, मई के अंत में शुरू होगी जनगणना से जुड़ी ड्यूटी

    जून में हफ्ते-दस दिन का ही समय मिलने की संभावना

    19 अप्रैल 2026
    लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए इन गर्मी की छुट्टियों में भी तबादले के आसार नजर नहीं आ रहे हैं। मई में जनगणना के लिए घर-घर प्रगणन का काम शुरू होने वाला है। ऐसे में स्थानांतरण की प्रक्रिया इस बार भी शुरू होने की उम्मीद नहीं है।

    प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के जिले के अंदर और एक से दूसरे जिले में परस्पर तबादले पिछले साल गर्मी की छुट्टियों में हुए थे। जबकि सर्दी की छुट्टियों (दिसंबर) में एसआईआर के कारण उनके तबादले की प्रक्रिया नहीं की गई। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार गर्मी की छुट्टियों में उन्हें इसका मौका मिलेगा। किंतु इसके आसार नहीं दिख रहे हैं।

    शिक्षकों ने बताया कि जनगणना के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है। वहीं 22 मई से 20 जून तक घर-घर जनगणना के लिए उनकी ड्यूटी लगनी है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह ने कहा कि अगर तिथि नहीं बढ़ी तो जून में दस दिन का समय विभाग को मिलेगा। लेकिन इसके लिए उन्हें सभी आवश्यक प्रक्रिया पहले से पूरी करनी होगी। वहीं अगर जनगणना की तिथि केंद्र ने बढ़ा दी तो फिर इसकी भी संभावना समाप्त हो जाएगी।

    हालांकि, तबादला नीति इसी महीने आ रही है, विभाग चाहे तो मई में जनगणना शुरू होने से पहले भी इसकी प्रक्रिया पूरी कर सकता है। हमारी मांग है कि विभाग इस तरफ ध्यान दे। दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जनगणना की वजह से इस बार तबादला प्रक्रिया शुरू करना संभव नहीं दिख रहा है। अगर दस दिन का मौका मिलता है तो जिले के अंदर परस्पर तबादले किए जा सकते हैं। किंतु इसके लिए उच्च अधिकारियों की सहमति जरूरी होगी।




    ग्रीष्मावकाश में स्थानांतरण की राह देख रहे बेसिक शिक्षकों को लग सकता है झटका, जानिए क्यों? 

    13 अप्रैल 2026
    प्रयागराज : ग्रीष्म अवकाश में अंतरजनपदीय तथा अंत जनपदीय स्थानांतरण की उम्मीद संजोए बेसिक शिक्षा परिषद के हजारों शिक्षकों को झटका लग सकता है। देश व प्रदेश में चल रहे जनगणना कार्यक्रम के सुचारु संचानल के लिए इसमें लगे अधिकारियों के स्थानांतरण पर रोक लगाने के लिए भारत सरकार की ओर से पत्र लिखा गया है। इस पत्र से बेसिक शिक्षक अपने स्थानांतरण को लेकर सशंकित हो गए हैं।


     जनगणना कार्य में शिक्षकों को प्रगणक बनाया गया है। प्रगणक बनाए गए शिक्षकों के विवरण की आनलाइन फीडिंग की जा रही है। ड्यूटी लगाए जाने का मैसेज कई शिक्षकों के मोबाइल नंबर पर आया है। शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी, ताकि वह कार्य को निर्धारित कार्ययोजना के अनुरूप पूर्ण कर सकें। 

    अधिकारियों व प्रगणकों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षण देने की योजना तैयार कर ली गई है। इस बीच स्थानांतरण किए जाने से जनगणना कार्य प्रभावित होने को देखते हुए अधिकारियों के स्थानांतरण न किए जाने की तैयारी है।

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती

    प्रोजेक्ट अलंकार के बजट का न इस्तेमाल किया न लौटाया, तीन किश्त जारी लेकिन पहले का ही नहीं हुआ प्रयोग, माध्यमिक शिक्षा विभाग ऐसे विद्यालयों पर करेगा सख्ती


    लखनऊ। प्रदेश में जर्जर व पुराने हो चुके राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों में सुधार के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट अलंकार योजना शुरू की गई। लेकिन विद्यालय विभाग की इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वे बजट तो ले ले रहे हैं मगर न तो इसका प्रयोग कर रहे हैं न ही विभाग को इसकी जानकारी दे रहे हैं।


    प्रदेश के राजकीय व एडेड कॉलेजों में निर्माण, मरम्मत व अवस्थापना सुविधाओं के लिए प्रोजेक्ट अलंकार के तहत बजट दिया जाता है। खास यह कि इसमें राजकीय विद्यालयों को 95 फीसदी तक तो एडेड में 75 फीसदी तक कुल आगणन का पैसा दिया जा रहा है। इसके बाद भी कई बार प्रस्ताव भेजने में आनाकानी की जाती है, वहीं कई जिलों में बजट के सदुपयोग नहीं हो पा रहा है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रोजेक्ट अलंकार योजना में वर्ष 2023-24, 2024-25 व 2025-26 में एडेड कॉलेजों के प्रस्ताव पर शासन व निदेशालय की ओर से तीन किश्तें जारी की जा चुकी हैं। लेकिन इसमें कई विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने एक साल से अधिक समय बीतने के बाद भी अभी तक न तो पहली किश्त का प्रयोग किया न ही बजट सरेंडर करने की जानकारी निदेशालय को भेजी गई है।

    माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक (अर्थ) महेंद्र कुमार सिंह ने सभी डीआईओएस को पत्र भेजकर कहा है कि जिलों में यह कहा जाता है कि संस्था को आवंटित धनराशि समर्पित कर दी गई है। जबकि निदेशालय को इसकी जानकारी ही नहीं मिली है। उन्होंने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया है कि जिलों में विद्यालयों को आवंटित पहली किश्त की राशि का प्रयोग किया गया या नहीं? या इसको समर्पित कर दिया गया है? इसके बारे में जल्द सूचना उपलब्ध कराएं। ऐसा न करने पर अब विभाग सख्ती करते हुए इससे शासन को भी अवगत कराएगा।


    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    जानिए क्यों जारी हुआ बीएसए लखनऊ के खिलाफ 50 हजार का जमानती वारंट? मानवाधिकार आयोग सख्त, अगली सुनवाई 19 मई को

    18 अप्रैल 2026
    लखनऊ। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने एक मामले की सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) लखनऊ की अनुपस्थिति पर सख्त रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। आयोग ने यह वारंट पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से जारी करने को कहा है।

    लखनऊ और बहराइच के विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने वाली भारतीय हरित खादी ग्रामोदय संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं मिला है। संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत कर बताया था कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 में मोहनलालगंज, चिनहट व बहराइच के रिसिया ब्लॉक में आपूर्ति के बाद 1.33 करोड़ रुपये बकाया हैं।

    पत्राचार के बावजूद सुनवाई न होने से संस्था आर्थिक संकट में है। आयोग मामले का संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। 15 मार्च को आयोग ने दोनों जिलों के बीएसए को 16 अप्रैल को सुनवाई में उपस्थित होने का आदेश दिया था।

    आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति राजीव लोचन मेहरोत्रा की पीठ के समक्ष 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष से अनूप यादव और भारती हरित ग्राम उदय संस्था के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक पाठक उपस्थित हुए। मामले में बहराइच के खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए बहराइच के

    18 अप्रैल तक अवकाश पर होने की जानकारी दी। वहीं, बीएसए लखनऊ सुनवाई में उपस्थित नहीं हुए, जबकि उन्हें सूचना दी गई थी। सुनवाई के दौरान बीईओ बहराइच ने बताया कि यदि संबंधित स्कूलों की सूची और उनसे वसूली योग्य राशि उपलब्ध करा दी जाए तो बीएसए स्तर पर वसूली में सहयोग किया जा सकता है। इस पर आयोग ने आवेदक को निर्देश दिया कि वह बहराइच व लखनऊ के स्कूलों की सूची और वसूली योग्य राशि सात दिन के भीतर उपलब्ध कराएं।

    आयोग ने जिलाधिकारी बहराइच और पुलिस कमिश्नर लखनऊ को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर दोनों जिलों के बीएसए की उपस्थिति सुनिश्चित कराएं। मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को होगी।



    1.33 करोड़ रुपये के बकाए को लेकर बेसिक शिक्षा निदेशक और दो बीएसए से मांगा स्पष्टीकरण, ड्रेस आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल से भुगतान नहीं होने पर मानवाधिकार आयोग की 16 अप्रैल को सुनवाई

    16 मार्च 2026
    लखनऊ। राजधानी और बहराइच के कुछ विद्यालयों में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति करने वाली संस्था को पांच साल बकाया भुगतान नहीं किया जा रहा है। शिकायत पर मानवाधिकार आयोग ने बेसिक शिक्षा निदेशक से स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ और बहराइच के बीएसए को तलब किया है। दोनों अधिकारियों को 16 अप्रैल को सुनवाई के दौरान आयोग में उपस्थित होना होगा।

    लखनऊ की भारतीय हरित खादी ग्रामोदाय संस्था को विद्यालयों में स्कूल ड्रेस आपूर्ति करने का काम मिला था। संस्था ने वर्ष 2019-20 और 2020 21 में लखनऊ के मोहनलालगंज व चिनहट, बहराइच के रिसिया ब्लॉक में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति की थी।

    संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने पिछले साल मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी कि ड्रेस की आपूर्ति करने के बाद अब तक 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान ही नहीं किया गया। इसको लेकर विजय शंकर ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों से पत्राचार किया लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। लिहाजा अब तक भुगतान नहीं हुआ। अधिक रकम होने की वजह से उनकी संस्था व वह खुद आर्थिक तंगी की स्थिति में आ गए हैं। आयोग ने शिकायत का संज्ञान लिया।

    12 मार्च को आयोग ने आदेश दिया है कि जो आपत्तियां विजय शंकर की तरफ से दर्ज कराई गई हैं वह बेसिक शिक्षा के निदेश को भेजी जाएं। उनसे इस पर स्पष्टीकरण मांगा है। लखनऊ व बहराइच के बीएसए को 16 अप्रैल को दोपहर 12:30 बजे उपस्थित होना होगा। आदेश का अनुपालन कराने की जिम्मेदारी निदेशक को दी है। सुनवाई के बाद आयोग अपना निर्णय सुनाएगा।