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Tuesday, August 22, 2119

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    Tuesday, August 4, 2020

    फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती

    फतेहपुर : NPS से भी शिक्षक महरूम, विभाग मनमर्जी से कर रहा है NPS कटौती


    फतेहपुर : एक अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए तमाम शिक्षकों की सेवा का करीब एक दशक बीत रहा है लेकिन फंड के नाम पर उनके खाते में टका नहीं है। एक वक्त अपने फंड सेवानिवृत्ति लाभों के लिए जानी जाने वाली सरकारी नौकरी परिषदीय शिक्षकों के लिए सिर्फ वेतन मिलने वाली नौकरी ही साबित हो रही है। परिषदीय स्कूलों में अप्रैल 2005 के बाद सेवा में आए शिक्षकों के वेतन से न्यू पेंशन स्कीम के तहत कटौती करने का फैसला जिले में अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका है।

    सैकड़ों बेसिक शिक्षकों की कई साल की नौकरी के बाद भी एक पाई फंड नहीं जमा हो सका है। आईपीएस के समाप्त होने के बाद शासन ने एनपीएस की व्यवस्था दी तो वह भी कई सालों तक व्यवस्था की सरकार रही। पिछले वर्ष एओ ने एनपीएस कटौती के लिए रूचि दिखाई लेकिन दायरे में आने वाले शिक्षकों के वेतन से एनपीएस के अंश की कटौती नहीं हो सकी। विभाग का तर्क था कि अब भी सैकड़ों शिक्षकों को प्रान आवंटित नहीं किया जा सका जिस कारण समस्या आ रही है लेकिन विभाग के पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं है कि जिन शिक्षकों को प्रान आवंटित किया जा चुका है उनके वेतन से कटौती क्यों नहीं की जा रही है। इस समय काफी कम संख्या में शिक्षकों के वेतन से एनपीएस की कटौती की जा रही है। जिसके चलते शिक्षकों के पास एक पैसे का फंड नहीं है।





    दुश्वारी : विभाग मनमानी से कर रहा है एनपीएस कटौती, शासन व वित्त नियंत्रक दे चुके है कटौती के निर्देश।

    अब तक कटौती नही : जिले में ऐसे तमाम शिक्षक हैं जिन्हें प्रान आवंटन किया जा चुका है लेकिन इसके बावजूद कटौती नहीं की जा रही है। पिछले वर्ष विभाग ने ब्लॉकों से प्रान आवंटन व गैर प्रान आवंटित शिक्षकों की सूची मंगाई थी। कहा गया था कि जिनके प्रान आवंटन हो चुके हैं उनकी कटौती शुरू होगी एवं जिन्हें आवंटन नहीं हुआ है उन्हें फार्म भराकर आवंटन कराया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षकों के वेतन से अब तक कटौती नहीं हो सकी है।


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    HRD मंत्री ने कक्षा छठी से 8वीं तक का नया NCERT वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर किया जारी, करें डाउनलोड

    HRD मंत्री ने कक्षा छठी से 8वीं तक का नया NCERT वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर किया जारी
     

    मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अगले 8 सप्ताह के लिए उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6 से 8) की कक्षाओं का कैलेंडर जारी कर दिया है। इससे पहले यह चार सप्ताह का जारी किया गया था। एचआरडी मंत्री निशंक ने सोमवार को ट्वीट करते हुए कहा, 'कक्षा छठी से आठवीं तक का वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी कर दिया है। इस कैलेंडर का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों, स्कूल प्रिंसिपल और अभिभावकों को कोरोना काल में ऑनलाइन टीचिंग के लिए और सशक्त बनाना है।'


    केंद्रीय मंत्री ने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'इस कैलेंडर में शिक्षकों के लिए तकनीक और सोशल मीडिया टूल्स के उपयोग के विस्तृत दिशानिर्देश भी दिए गए हैं, ताकि वो बच्चों को बेहतर तरीके से ऑनलाइन शिक्षा दे सकें।'

    ● कैलेंडर में तनाव और चिंता को दूर करने के तरीके भी सुझाये गए हैं। 

    ● वैकल्पिक कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर अध्यायवार उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है। 

    जिन बच्चों के पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं हैं, उनको शिक्षक मोबाइल पर एसएमएस भेज कर या फोन कर के शिक्षा प्रदान कराने के दिशानिर्देश भी इस कैलेंडर में दिए गए हैं।


    कैलेंडर देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।


    Alternative Academic Calendar
    In this period of Covid-19, which is declared as a global pandemic, our teachers, parents, and students have to remain at homes to prevent its spread in the community. In this situation, it is our responsibility to provide them with multiple alternative ways of learning at home through interesting activities. It is necessary because in the present environment of stress we have to not only keep our children busy but also to maintain continuity of their learning in their new classes. In this context, NCERT has developed an Alternative Academic Calendar for all the stages of school education.


    यूपी बोर्ड के 700 कालेजों को मान्यता का इंतजार, कोरोना के चलते गड़बड़ाया टाइम टेबल

    यूपी बोर्ड के 700 कालेजों को मान्यता का इंतजार, कोरोना के चलते गड़बड़ाया टाइम टेबल

     
    प्रयागराज : यूपी बोर्ड इन दिनों हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म भरवा रहा है और कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण करा रहा है। नए शैक्षिक सत्र में मान्यता पाने के लिए माध्यमिक कालेजों ने आवेदन किया है लेकिन, उन्हें अब तक मान्यता निर्गत नहीं हुई है। प्रदेशभर के करीब 700 से अधिक कालेजों को हाईस्कूल, इंटर की 2020-21 शैक्षिक सत्र की मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया, उसकी पत्रवली तैयार करके शासन को भेजी जा चुकी है।


    यूपी बोर्ड हर साल शैक्षिक सत्र शुरू करने से पहले आवेदक कालेजों को कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक व संकाय आदि की मान्यता निर्गत करता रहा है। पहले ऑफलाइन आवेदन लिए जाते थे लेकिन, इधर ऑनलाइन आवेदन हो रहे हैं, ताकि पारदर्शिता बनी रहे। इस बार भी बोर्ड ने क्षेत्रीय कार्यालयों के परिक्षेत्र में आने वाले कालेजों की फाइलों पर बैठक की और पत्रवली फरवरी में ही शासन को स्वीकृति के लिए भेजी। तब से अब तक मान्यता निर्गत होने की राह देखी जा रही है। 


    कहा जा रहा है कि कोरोना संक्रमण की वजह से मान्यता का टाइम टेबिल गड़बड़ा गया है। बोर्ड ने मान्यता निर्गत किए बिना ही छह जुलाई को प्रवेश शुरू करने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं, हाईस्कूल व इंटर के परीक्षा फार्म भी भरवाए जा रहे हैं। आवेदन करने वाले कालेज प्रबंधक परेशान हैं, जो अभिभावक बच्चों का दाखिला करा चुके हैं उन्हें भी रास्ता नहीं सूझ रहा है। उधर, बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि इस मामले में शासन में मंथन चल रहा है, जल्द ही मान्यता निर्गत की जाएगी।

    कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

    कोरोना काल में क्लास रुम से महंगी ऑनलाइन पढ़ाई, लैपटॉप और मोबाइल की खरीदी से  घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति

     
    आगरा: कोरोना काल में काम-धंधे प्रभावित होने से अभिभावक आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और लगातार स्कूलों से फीस माफ कर राहत देने की मांग कर रहे हैं। उनकी यह परेशानी यूं ही नहीं। स्कूल बंद होने से बच्चे घर पर रहकर ऑनलाइन पढ़ जरुर रहे हैं, लेकिन यह पढ़ाई क्लास रूम से भी महंगी पड़ रही है, जिससे अब घरों का बजट बिगड़ने की स्थिति बनने लगी है।


    समस्या सबसे ज्यादा उन परिवारों में है, जहां एक से ज्यादा बच्चे हैं, जो अलग कक्षाओं में हैं। लिहाजा ऑनलाइन कक्षाओं का समय एक ही होने से दो स्मार्ट फोन या लैपटॉप परिवार की जरुरत बन गए हैं क्योंकि ऑफिस और बिजनेस की शुरूआत होने से अभिभावक भी अपने कामों में व्यस्त हैं। हालांकि उन घरों में अभी थोड़ी राहत है, जहां मां गृहणी हैं और स्मार्ट फोन भी रखती हैं।


    ऐसे बढ़ गया खर्च: कम से कम एक स्मार्ट फोन या लैपटॉप भी लेना पड़े, तो 10 से 30 हजार रुपये का अतिरिक्त करना पड़ रहा है। साथ में इंटरनेट ब्रॉडबैंड डाटा कनेक्शन या पैक लेना भी जरुरी है, जिसकी कीमत 200 से सात सौ रुपये महीना के बीच है। सिर्फ इतना भर होता तो गनीमत थी। स्कूलों फीस और किताबों का खर्च 25 से 40 हजार के बीच चुकाया है या चुकाना बाकि है, लिहाजा 30 से 40 हजार का अतिरिक्त खर्च सिर पर पड़ने से अभिभावक परेशान हैं।


    स्कूल नहीं समझ रहे पीड़ा: अभिभावकों का कहना है कि स्कूल खुले थे, तो उन्होंने बच्चों के भविष्य की खातिर मनमानी फीस देने में कभी आनाकानी नहीं की। हर साल ड्रेस, किताबों, बैग आदि का खर्च अलग करते थे। सालभर में 60 से 80 हजार और एक लाख रुपये तक खर्च करते थे, लेकिन अब कोरोना काल में स्कूल बंद होने और आय प्रभावित होने पर स्कूलों को भी हमारी परेशानी समझनी चाहिए।


    केस वन
    माईथान निवासी मनोज वर्मा के दो बच्चे हैं। बड़ी बेटी 12वीं और बेटा 10वीं है। सिंगल पेरेंट होने के कारण खुद की नौकरी भी देखनी है। स्कूल बंद हुआ, तो ऑनलाइन स्टडी के लिए दोनों बच्चों को लैपटॉप भी दिलाना पड़ा, जिनकी कीमत 60 हजार के करीब थी।


    केस टू
    दयालबाग निवासी तरुण यादव के दो बेटे हैं, दोनों कॉन्वेंट स्कूल के छात्र हैं, लिहाजा उनकी पढ़ाई के लिए लैपटॉप लेना पड़ा क्योंकि फोन से आंखों पर ज्यादा जोर पड़ता था। साथ ही उन्हें अपने काम पर जाना था। लिहाजा इस तरह 80 हजार खर्चने पड़े, क्योंकि दोनों बेटे की क्लास की टाइमिंग एक ही है।

    राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

    राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन का आज आखिरी दिन, उसके बाद यह होगी प्रक्रिया

     
    आगरा : राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए आवेदन करने की मंगलवार को अंतिम तिथि है, लिहाजा आवेदन के इच्छुक शिक्षक चार अगस्त को रात 12 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। बता दें कि इसकी अंतिम तिथि पहले 30 जुलाई तय की गई थी, लेकिन आवेदन बेहद कम रहने पर शासन ने इसे बढ़ा दिया था।


    डीआइओएस रवींद्र सिंह ने बताया कि राज्य अध्यापक पुरस्कार एवं मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए जिले के प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, शिक्षकों के पास अब भी आखिरी मौका है, वह मंगलवार रात 12 बजे तक सभी प्रपत्रों और औपचारिकताएं पूरी कर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। फिलहाल की बात की जाए, तो जिले में अब तक राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 30 और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए कुल 18 शिक्षकों ने आवेदन किए हैं।

    यह होगी प्रक्रिया

    अंतिम तिथि पूरी होने के बाद पांच अगस्त को जिला समिति आवेदनों का परीक्षण व स्थलीय सत्यापन कर पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और मंडलीय समिति को प्रस्ताव भेजेगी। मंडलीय समिति अध्यापक पुरस्कार के लिए 14 से 20 अगस्त के बीच, जबकि मुख्यमंत्री पुरस्कार के लिए पांच से 17 अगस्त के बीच पात्र अध्यापकों का चयन करेगी और राज्य चयन समिति के सदस्य सचिव व शिक्षा निदेशक को प्रस्ताव उपलब्ध कराएगी। इसके बाद शासन स्तर से उनकी घोषणा की जाएगी।

    यूपी बोर्ड : जानिए क्यों नहीं घोषित हो रही कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख?

    यूपी बोर्ड : जानिए क्यों नहीं घोषित हो रही कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख?

     
    यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा का परिणाम घोषित हुए एक महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट परीक्षा की तारीख घोषित नहीं हो सकी है। बोर्ड से जुड़े लोगों का मानना है कि कोरोना के कारण तारीख तय नहीं हो पा रही है। इसका प्रस्ताव तो सवा महीने पहले ही शासन को भेज दिया गया था लेकिन आवेदन इसलिए नहीं लिए जा रहे क्योंकि उसके बाद परीक्षा कराना मुश्किल हो जाएगा।


    वैसे भी ऐसे समय में जब 9 व 16 अगस्त को प्रस्तावित क्रमश: बीएड प्रवेश परीक्षा व खंड शिक्षाधिकारी परीक्षा का विरोध हो रहा है और लोक सेवा आयोग को पीसीएस जैसी परीक्षा की तिथि टालनी पड़ रही है तो ऐसे में बड़ा सवाल है कि हाईस्कूल और इंटर के बच्चों की परीक्षा कैसे होगी। यही कारण है कि इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट के लिए आवेदन शुरू नहीं हो पा रहे हैं।


    इस साल से एक विषय में फेल इंटर के छात्र-छात्राओं को पहली बार कम्पार्टमेंट परीक्षा की सुविधा दी जा रही है। 27 जून को घोषित परिणाम में 12वीं में 35017 छात्र-छात्राएं एक विषय में असफल हैं। हाईस्कूल में एक विषय में फेल अभ्यर्थियों को इम्प्रूवमेंट और दो विषय में फेल छात्र-छात्राओं को कम्पार्टमेंट की सुविधा दी जाती है। इस साल हाईस्कूल में एक विषय में 327663 परीक्षार्थी फेल हैं। 771 बच्चे दो विषयों में फेल है। ये छात्र दो में से एक विषय में कम्पार्टमेंट देकर पास होंगे तभी पास का प्रमाणपत्र जारी होगा।

    परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

    परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू, आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल आधारित प्रशिक्षण जारी

     
    गोरखपुर: परिषदीय स्कूलों को प्रेरक स्कूल बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जनपद में भी शिक्षकों को तीन माड्यूल पर आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधारशिला, ध्यानाकर्षण व शिक्षण संग्रह माड्यूल के अनुसार शिक्षकों को बच्चों को तैयार करना है।


    सरकार की मंशा वर्ष-2021 तक प्रेरक प्रदेश बनाना है। जनपद के बीआरसी पर नियमित 25-25 टीचर्स की ऑनलाइन प्रशिक्षण चल रहा है। प्रशिक्षण के बाद शिक्षक को अपने स्कूल के हर बच्चे को उसके अनुसार तैयार करना होगा। यदि कक्षा एक का बच्चा है तो उसे 1 से 99 तक संख्या की पहचान हो, उसकी तुलना और संख्या को सही क्रम में लगाने आना चाहिए। शासन थर्ड पार्टी से स्कूल के बच्चों की परीक्षा लेगा। जब बच्चे मॉडयूल्स के हिसाब से तैयार हो जाएंगे तब ही स्कूल को प्रेरक का दर्जा मिलेगा।


    शिक्षक को भरना होगा ब्योरा : शिक्षक को प्रेरक स्कूल बनाने के लिए बच्चों को पढ़ाने के साथ ही नियमित प्रेरणा तालिका भरनी होगी। इसमें प्रेरक हो चुके और इससे वंचित बच्चों की संख्या देनी होगी। कब तक बच्चे प्रेरक बन जाएंगे ये भी शिक्षक को चार्ट में भरना होगा। जब सभी बच्चे प्रेरक हो जाएंगे तो इसकी जानकारी शिक्षक अपने अधिकारी को देंगे, जिसके आधार पर शासन द्वारा थर्ड पार्टी भेजकर स्कूल की जांच कराई जाएगी।


    क्या है किस माड्यूल की खासियत

    आधारशिला मॉडयूल: पहला मॉडयूल आधारशिला प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए होगा। इसमें कक्षा एक से पांच तक बच्चों की बेसिक जानकारी और आधार को मजबूत करना होगा।

    ध्यानकर्षण मॉडयूल: दूसरे मॉडयूल ध्यानाकर्षण में क्लास 6-8 तक के बच्चों पर काम करना होगा। यह वो बच्चे होंगे जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं। इनको खोजकर चिह्नित कर दोबारा स्कूल वापस लाया जाएगा। इन बच्चों की छूटी पढ़ाई व पाठ्यक्रम को पूरा कराना होगा।

    शिक्षण संग्रह मॉडयूल: तीसरा मॉडयूल शिक्षण संग्रह शिक्षकों के लिए बनाया गया है। इसमें शिक्षक कैसे लेसन प्लान तैयार करता है। साथ ही शिक्षकों को पढ़ाई के रोचक तरीकों पर काम होगा।

    परिषदीय स्कूलों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देकर प्रेरक प्रदेश बनाने की कवायद चल रही है। बीआरसी पर शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। जिसके बाद शिक्षक विद्यालय में बच्चों को कक्षावार तैयार करेंगे। - भूपेंद्र नारायण सिंह, बीएसए

    कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस, छात्रों की राय जानेगा CBSE बोर्ड


    कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस, छात्रों की राय जानेगा CBSE बोर्ड 
     

    केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) कंपार्टमेंट परीक्षा से पहले छात्रों की राय जानेगा। कोरोना के चलते मुख्य परीक्षा की तरह कंपार्टमेंट परीक्षा को लेकर असमंजस की स्थिति बन गई है। ऐसी स्थिति में बोर्ड छात्रों की राय जानकर उन्हें ग्रेस मार्क के जरिए पास कर सकता है। बोर्ड की ओर से छात्र-छात्राओं को अपना पक्ष रखने के लिए एक सप्ताह का समय दिया जाएगा।


    कुछ छात्रों ने कोरोना के चलते कंपाटमेंट परीक्षा न करवा कर छात्रों को ग्रेस मार्क देकर रिजल्ट जारी करने की मांगी की है।इसको लेकर छात्रों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दाखिल की गई है। सीबीएसई की ओर से कंपार्टमेंट परीक्षा नहीं होने की स्थिति में छात्रों को ग्रेस मार्क देकर पास करने की प्रक्रिया अगले सप्ताह शुरू हो जाएगी।


    कोरोना के चलते देश भर में अक्तूबर से पहले कंपाटमेंट परीक्षा के हालात नहीं बन रहे हैं, ऐसे में दसवीं और बारहवीं के छात्रों का एक साल खराब हो जाएगा। दसवीं में कंपाटमेंट आने वाले बच्चे ग्यारहवीं में नामांकन नहीं करवा पा रहे हैं जबकि बारहवीं के छात्र उच्च् शिक्षा में कहीं प्रवेश नहीं ले पाएंगे। सीबीएसई की ओर से इस समय दसवीं और बारहवीं में अंकों के वेरीफिकेसन के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के नंबर की जांच चल रही है। अंकों के वेरिफिकेशन के लिए जुलाई के अंतिम सप्ताह में आवेदन मांगे गए थे।  


    अंकों के वेरिफिकेशन के बाद जो छात्र कॉपी की पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किए हैं, उनकी कॉपी की दोबारा जांच होगी। बारहवीं में पुनर्मूल्यांकन के लिए एक व दो अगस्त थी, यह बीत चुकी है जबकि दसवीं में छह और सात अगस्त तक आवेदन पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किए जाएंगे।

    Monday, August 3, 2020

    आश्रम पद्धति विद्यालयों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल, जांच के आदेश

    आश्रम पद्धति विद्यालयों में निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल, जांच के आदेश

     
    लखनऊ । प्रदेश के आश्रम पद्धति विद्यालयों में कराए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। बलरामपुर में गुणवत्ता खराब मिलने पर निर्माण कार्य रुकवा दिया गया है। साथ ही जांच के आदेश दिए गए हैं। बलरामपुर के आश्रम पद्धति विद्यालय में दो करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से रसोई, डॉरमेट्रो और डाइनिंग हॉल का निर्माण कराया जा रहा है। कुछ दिनों पहले समाज कल्याण राज्यमंत्री जीएस धर्मेश ने वहां मौका मुआयना किया तो पाया कि काम की गुणवत्ता मानक के अनुसार नहीं है। इस पर उन्होंने अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए।



     इस आश्रम पद्धति विद्यालय का संचालन जनजातीय =e निदेशालय करता है। इस बारे में संपर्क किए जाने पर अपर मुख्य सचिव समाज कल्याण मनोज सिंह ने बताया कि गुणवत्ता संबंधी शिकायतों पर काम रुकवा दिया गया है। मामले की जांच भी कराई जा रही है। जहां भी गुणवत्ता खराब मिलेगी, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

    छात्र-शिक्षक की संख्या का पता लगवा रहा निदेशालय, विज्ञापन संख्या-50 के तहत होनी है असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती

    छात्र-शिक्षक की संख्या का पता लगवा रहा निदेशालय, विज्ञापन संख्या-50 के तहत होनी है असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती।

    प्रयागराज : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद की भर्ती की प्रक्रिया जारी है। उच्च शिक्षा निदेशालय को प्रदेशभर के डिग्री कॉलेजों से 3900 पदों की रिक्तियों का ब्योरा मिला है।


    निदेशालय ब्योरे की नए सिरेबसे पड़ताल करवा रहा है। जिन कॉलेजों से रिक्तियों का ब्योरा आया है उनके छात्र व शिक्षक की संख्या का पता लगाया जा रहा है। जहां छात्र संख्या कम होगी वहां भर्ती नहीं की जाएगी। जहां छात्रों की संख्या अधिक होगी उन्हीं कॉलेज में भर्ती कराई जाएगी। इसके तहत निदेशालय उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को अलग-अलग चरणों मेंअधियाचन भेजेगा। फिर आयोग उसी के अनुरूप भर्ती का विज्ञापन जारी करेगा।



    प्रदेश के एडेड डिग्री कालेजों में अलग-अलग विषय के 4500 पद खाली हैं। शासन ने निदेशालय को 3900 पदों की भर्ती का अधियाचन जारी करने की स्वीकृति दी है। निदेशालय से मिले अधियाचन के अनुरूप आयोग विज्ञापन संख्या 50 के तहत भर्ती निकालेगा। मौजूदा स्थिति को देखते हुए भर्ती का विज्ञापन कई चरणों में निकलने की उम्मीद है। इससे भर्ती प्रक्रिया कई महीनों तक चलेगी।


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    कई शिक्षा अधिकारियों के साथ ही तमाम शिक्षको के संक्रमित होने के चलते यूटा ने परिषदीय स्कूलों को 31 अगस्त तक बन्द करने की मांग

    कई शिक्षा अधिकारियों के साथ ही तमाम शिक्षको के संक्रमित होने के चलते यूटा ने परिषदीय स्कूलों को 31 अगस्त तक बन्द करने की मांग



    फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

    फंदे पर लटकता मिला शिक्षामित्र का शव, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

    शव पोस्टमार्टम के लिए भेजकर जांच में जुटी पुलिस
     

    आगरा : बाह क्षेत्र में चित्राहाट के नगला सुरई गांव में रविवार की सुबह शिक्षामित्र सत्यवान सिंह (42) का शव घर के कमरे में फंदे से लटकता मिला। कमरे का दरवाजा खुला था। साथियों का मानना है कि शिक्षक पद से समायोजन निरस्त होने के अवसाद में यह आत्मघाती कदम उठाया है। हालांकि परिजनों ने हत्या का अंदेशा भी जताया है। शिक्षामित्र संघ से जुड़े लोगों ने सरकार से परिवार की आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। 


    चित्राहाट के नगला सुरई गांव निवासी सत्यवान पुत्र साहब सिंह पारना गांव के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र थे। साथी शिक्षामित्रों और परिजनों ने बताया कि सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने के बाद से सत्यवान गुमशुम रहने लगे थे।
    शनिवार की रात खाना खाने के बाद अपने कमरे में सोने चले गए थे। रविवार की सुबह फंदे पर शव लटका मिला। कमरे का दरवाजा खुला देख घरवाले हत्या की आशंका जता रहे हैं। सूचना पर पहुंची चित्राहाट पुलिस ने छानबीन करने के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा।   


    एसओ चित्राहाट ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार कार्रवाई की जाएगी। वहीं शिक्षामित्र संगठन के अजय भदौरिया, शैलेंद्र भदौरिया, अनिल शर्मा, पंकज बौहरे , पीतम गुर्जर, नेवर सिंह आदि ने सरकार से परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने की गुहार लगाई है।


    पत्नी भी है शिक्षामित्र, मायके गई थी 
    मृतक शिक्षामित्र सत्यवान की पत्नी ऊषा देवी भी नगला सुरई के प्राइमरी स्कूल में शिक्षामित्र है। उनके दो बच्चे अभिनव (12), गीतांजलि (7) वर्ष हैं। दो दिन पहले ही सत्यवान ऊषा देवी को रक्षाबंधन पर मायके इटावा गई थी। सत्यवान खुद छोड़ने गए थे। मौत की खबर लगते ही वह रोते-बिलखते घर लौटी।  

    सरकारी परिषदीय स्कूल अब नहीं बन सकेंगे क्वारंटीन सेंटर

    सरकारी परिषदीय स्कूल अब नहीं बन सकेंगे क्वारंटीन सेंटर


    बिल्हौर। तहसील क्षेत्र के सभी चार विकास खंडों और नगर पालिका बिल्हौर व नगर पंचायत शिवराजपुर के प्राथमिक, जूनियर, सहायता-मान्यता प्राप्त विद्यालय कोरोना संदिग्धों के लिए क्वारंटीन केंद्र नहीं बन सकेंगे। शिक्षा विभाग ने कोराना अनलॉक शुरू होने और पठन-पाठन के कार्य शुरू होने के साथ होम क्वारंटीन की सुविधा प्रदेश सरकार द्वारा चालू करने से शिक्षा विभाग ने आदेश लागू किया है।


    ककवन क्षेत्र के सिहुरा दाराशिकोह गांव में मानेसर से आए 22 प्रवासी श्रमिकों की जांच में छह लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इसके बाद ग्राम प्रधान द्वारा शेष 17 लोगों को सरकारी स्कूल में क्वारंटीन करने के लिए खंड शिक्षाधिकारी ककवन से अनुमति मांगी गई थी। अनुमति न मिल पाने से सभी संदिग्ध प्रवासी श्रमिकों को गांव के बाहर एक अन्य स्थान पर ठहराया जा सका था।


    खंड शिक्षाधिकारी ककवन धर्म प्रकाश ने बताया कि सरकार के आदेश पर पूर्व में विद्यालयों को क्वारंटीन सेंटर बनाया जा चुका है, लेकिन जुलाई से सभी स्कूलों के खुलने और कोरोना अनलाक से किसी भी स्कूल को क्वारंटीन सेंटर नहीं बनाया जाएगा। बेसिक शिक्षाधिकारी कानपुर पवन कुमार की ओर से उन्हें स्पष्ट आदेश भी प्राप्त हुए हैं। स्कूलों के खुल जाने से शिक्षकों के अलावा अभिभावक और अन्य ग्रामीण विद्यालयों में आ जा रहे हैं सुरक्षा के मद्देनजर शिक्षा विभाग द्वारा यह कदम उठाया गया है।

    योगी सरकार ने एक और योजना का नाम बदला, बाल श्रमिक व अनाथ बालकों को 1000 तो बालिकाओं को 1200 रुपये देगी

    योगी सरकार ने एक और योजना का नाम बदला, बाल श्रमिक व अनाथ बालकों को 1000 तो बालिकाओं को 1200 रुपये देगी


    राज्य सरकार ने बाल श्रमिकों के लिए चलाई जा रही कंडीशनल कैश ट्रांसफर योजना का नाम व स्वरूप बदलकर बाल श्रमिक विद्या योजना कर दिया है। इससे 13 मंडलों के दो हजार बाल श्रमिक व अनाथ बच्चे लाभान्वित होंगे।


    राज्य सरकार प्रत्येक बालक को हर माह एक हजार रुपये और बालिकाओं को 1200 रुपये देगी। इस तरह बालकों को साल भर में 12 हजार और बालिकाओं को 14 हजार 400 रुपये दिए जाएंगे। पहले बालक-बालिकाओं को 9200 रुपये सालाना दिए जाते थे।


    राज्य सरकार ने वर्ष 2007-08 में 10 जिलों में बतौर पायलट प्रोजेक्ट कंडीशनल कैश ट्रांसफर योजना शुरू की थी। वर्ष 2015 में 8 मंडलों के 34 जिलों को लाभ मिलने लगा। इसमें श्रम विभाग द्वारा चिह्नित बाल श्रमिकों को प्रतिवर्ष 8000 रुपये की सहायता और 100 रुपये महीने छात्रवृत्ति दिए जाने का प्रावधान था। भाजपा सरकार बनने पर 15 मई 2017 को अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कई विभागों के प्रतिनिधियों की बैठक में योजना का नाम बदलकर बाल श्रमिक विद्या योजना-2019 (बीएसवीवाई) करने का फैसला लिया गया था।

    रिटायरमेंट की उम्र में देना पड़ रहा योग्यता का सुबूत, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जांचे जा रहे डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रपत्र

    रिटायरमेंट की उम्र में देना पड़ रहा योग्यता का सुबूत, फर्जीवाड़ा रोकने के लिए जांचे जा रहे डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रपत्र।


    कानपुर : बेसिक शिक्षा में पकड़े गए फर्जी शिक्षकों के कारण शिक्षा विभाग अब सभी के प्रपत्र जांच रहा है। अब डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच भी की जा रही है। इसमें ऐसे विभागाध्यक्षों व एसोसिएट प्रोफेसरों से उनके प्रपत्रों का ब्योरा मांगा जा रहा है जो सेवानिवृत्त होने वाले हैं कानपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ ने ऐसे अनुभवी शिक्षकों की दोबारा जांच कराए जाने पर नाराजगी जताई है।




    शिक्षक संघ ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखा है कि जब एक बार डिग्री कॉलेजों में पढ़ाने वाले शिक्षकों के प्रपत्रों का सत्यापन हो चुका है तो दोबारा कराने को क्यों कहा जा रहा है। 60 वर्ष से अधिक उम्र के विभागाध्यक्षों व एसोसिएट प्रोफेसरों को इस प्रकार दौड़ाना गलत है। विश्वविद्यालय से संबद्ध 51 सहायता प्राप्त डिग्री कॉलेज हैं, जिनमें ढाई हजार शिक्षक पढ़ा रहे हैं। इसमें शहर में 21 कॉलेज संचालित हैं।

    प्राथमिक स्कूल के फार्मूले को डिग्री कॉलेजों में कैसे लगाया जा सकता है। कॉलेज में पढ़ाते हुए 32 वर्ष हो चुके हैं। वीआरएस से दो दिन पहले उनके प्रपत्रों की जांच हुई थी। डॉ. विजय लक्ष्मी सेवानिवृत्त दर्शनशास्त्र विभाग डीएवी कॉलेज।

    प्रपत्रों का सत्यापन करने में किसी शिक्षक को कोई आपत्ति नहीं है। जिनका रिटायरमेंट करीब है, उन्हें इससे अलग रखना चाहिए। सत्यापन बाद में भी किया जा सकता था। हां. सुनीत अवस्थी अध्यक्ष शिक्षक संघ डीएवी कॉलेज।

    एक बार जब प्रपत्रों की जांच हो चुकी है तो दोबारा करने का क्या औचित्य है ।अभिलेख की प्रमाणिकता की दोबारा जांच करनी है तो यह जिम्मेदारी शासन की है। डॉ.बीडी पांडेय, अध्यक्ष कानपुर विवि शिक्षक संघ

    छात्र छात्राओं को 30 वर्ष से पढ़ा रहे हैं। अभी तक 16 हजार से अधिक छात्रों को पढ़ाया है। अब प्रपत्र दिखाने को कहा जा रहा है। साल भर बाद रिटायरमेंट है। डॉ. ज्योति कुमार विभागाध्यक्ष जंतु विज्ञान विभाग वीपीएन कॉलेज


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    कानपुर में तैनात बीईओ ने कोरोना पॉजिटिव आने पर लगाई फांसी

    पांच दिन बाद भी नहीं आई बीएसए कार्यालय के 20 कर्मचारियों की रिपोर्ट

    पांच बीई ओ पॉजिटिव एक लिपिक भी गंभीर



    कानपुर  : बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पांच खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ), एक लिपिक और एक शिक्षक व इनके परिवार के सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव निकलने से हड़कंप मच गया है। कोरोना पॉजिटिव निकले किदवई नगर, सदर और तीन दिन पहले तक मुख्यालय का भी कार्यभार संभालने वाले बीईओ सुरेश कुमार ने रविवार को उन्नाव में आत्महत्या कर ली। वह शुक्रवार को कार्यालय आए थे और कई कर्मचारियों से मिले थे। बीईओ सदर कार्यालय के एक कर्मचारी कोरोना पॉजिटिव होने के बाद नारायणा के आईसीयू में भर्ती हैं। बीएसए कार्यालय में जिन 20 की पांच दिन पहले जांच हुई थी, उनकी रिपोर्ट अब तक नहीं आ सकी है। बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय और खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों में कोरोना को लेकर हुई लापरवाही अब सामने आने लगी है।





    बीएसए ने माना, स्थिति गंभीर

    बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. पवन कुमार तिवारी ने कहा कि स्थितियां ठीक नहीं हैं। हमारे 50 फीसदी खंड शिक्षा अधिकारी संक्रमित हो चुके हैं। कर्मचारी भी संक्रमित हैं। उन्होंने बताया कि काम अधिक है। अभी चार-पांच दिन पहले बीईओ सुरेश कुमार से उनके आग्रह पर बीईओ मुख्यालय का काम हटाया था। किदवई नगर और तहसील का काम उनके पास था। उन्होंने कहा कि स्थितियों को देखते हुए जो भी सुरक्षा को लेकर कदम उठाए जा सकते हैं, वह उठाएंगे।

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    उन्नाव में खंड शिक्षाधिकारी ने कोरोना पॉजिटिव होने पर फांसी लगा कर दे दी जान।

    उन्नाव :  कानपुर नगर में तैनात खंड शिक्षाधिकारी ने कोरोना रिपोर्ट पॉजीटिव आने के बाद शनिवार देर रात घर में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। पत्नी ने शव लटकता देखा तो होश उड़ गए। परिजन व पुलिस को सूचना दी। सूचना पर पहुंचे चौकी प्रभारी ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।





    शहर कोतवाली क्षेत्र के कल्याणी देवी निवासी सुरेश कानपुर में खंड शिक्षाधिकारी (बीईओ) के पद पर तैनात थे। एक पखवाड़ा पहले तबीयत खराब होने पर 27 जुलाई को उर्सला में टायफाइड और कोरोना की जांच कराई थी। शनिवार दोपहर 2.30 पर उर्सला से फोन पर जानकारी दी गई कि जांच में सुरेश कोरोना से संक्रमित है। परिजनों ने उन्हें समझाया कि चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। जल्दी ही ठीक हो जाएंगे। रात परिवार के सभी सदस्य खाना खाने के बाद अपने अपने कमरों में सोने के लिए चले गए। इसी दौरान सुरने ने पंखे से लटककर जान दे दी।





    रविवार सुबह पत्नी हेमलता ने सुरेश को फंदे से लटकता देखा को सन्न रह गईं। बेटे सुमित ने बताया कि पिता की कानपुर में तैनाती थी। उनके पास तीन ब्लॉक सदर बाजार, किदवईनगर और मुख्यालय था। तबीयत खराब होने पर छुट्टी ले रखी थी। टायफाइड व कोरोना की जांच कराई थी। शनिवार दोपहर उर्सला से फोन पर उनके कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी गई थी।








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    Sunday, August 2, 2020

    नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल

    Fraud in Entrance: नवोदय में प्रवेश के लिए हुआ फर्जीवाड़ा, जांच में खुला सारा खेल


     विद्यालय की जांच में खुली फर्जीवाड़े की पोल। प्रवेश निरस्त करने के लिए मांगी बीएसए से अनुमति। ...


    आगरा । जवाहर नवोदय विद्यालय कौलारा कलां में कक्षा छह के लिए हुई प्रवेश परीक्षा में सेंधमारी हुई है। स्कूली शिक्षकों की जांच कमेटी ने ऐसे 10 अभ्यर्थियों को चिन्हित किया है, जो पिछले साल भी इसी कक्षा के लिए परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन सफल नहीं हो पाए। इस साल सफल होने उन्हें प्रवेश मिल गया, लेकिन डाटा वैरिफाई में रिकॉर्ड पकड़ा गया। स्कूल ने मामले में बीएसए से प्रवेश निरस्त करने की अनुमति मांगी है।


    दरअसल 20 जून को सीबीएसई बोर्ड ने 80 चयनीत अभ्यर्थियों की सूची भेजी, विद्यालय प्रबंध कमेटी और एसडीएम फतेहाबाद को भेजी, सभी अभ्यर्थियों को प्रवेश के लिए सूचित किया गया। चयनित अभ्यर्थियों के प्रपत्रों की जांच के लिए विद्यालय स्तर पर एक पांच सदस्यीय कमेटी उप प्राचार्य की अध्यक्षता में गठित हुई। आवेदन पत्रों की जांच हुई, तो पता चला कि 10 अभ्यर्थियों ने दूसरी बार इस प्रवेश परीक्षा में हिस्सा लिया है, जबकि नवोदय विद्यालय समिति के नियमानुसार इसमें एक ही बार शामिल हो सकते हैं। कक्षा पांचवीं में भी उन्होंने फर्जी तरीके से दो बार प्रवेश लेकर पढ़ाई की। लिहाजा सभी दस अभ्यर्थियों को स्कूल कमेटी ने अपात्र घोषित करते हुए बीएसए से मामले में कार्यवाही की अनुमित मांगी है।


    कोचिंग माफिया पर शक
    मामले के पीछे दबी जुवां में स्कूल में प्रवेश का दम भरने वाली कोङ्क्षचग माफिया का हाथ होने की आशंका लग रही है, क्योंकि अभिभावकों को इसके नियमों की ज्यादा जानकारी नहीं, लिहाजा इस दिशा में भी जांच किए जाने की जरुरत है। इसके लिए पर्याप्त साक्ष्य भी हैं, सिर्फ चिन्हित अभ्यर्थियों ने जहां से दोनों बार पांचवीं की है, उनकी जांच करने की जरुरत है कि उन्होंने बिना जानकारी एक ही कक्षा में दूसरी बार प्रवेश कैसे दे दिया।


    यह नाम मिले संदिग्ध
    - सुमित सौलंकी
    - रौनक
    - कृष्णा चौहान
    - रोहित गुर्जर
    - समीर खान
    - सचिन कुमार
    - पूजा चरग
    - नेहालिका धनगर
    - अरुण
    - अजय

    (उक्त अभ्यर्थी वर्ष 2019 और 2020 दोनों साल अछनेरा, शमसाबाद, बिचपुरी, जगनेर, फतेहपुरसीकरी, बरौली अहीर, फतेहाबाद, जैतपुर कलां और नगर क्षेत्र को ब्लॉक दिखाकर भरे गए। कुछ ने दोनों साल अलग-अलग ब्लॉक भी दिखाए।


    बीएसए ने बीईओ को सौंपी जांच
    बीएसए राजीव कुमार यादव का कहना है कि मामले की जांच खंड शिक्षाधिकारी को सौंपी गई है। वह जांच कर जल्द ही मामले में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।


    इस बार यूपी बोर्ड की परीक्षाएं मार्च से, ऑनलाइन मिलेंगे एडमिट कार्ड, एकेडमिक कैलेंडर में हो रहा बदलाव

    इस बार यूपी बोर्ड की परीक्षाएं मार्च से, ऑनलाइन मिलेंगे एडमिट कार्ड, एकेडमिक कैलेंडर में हो रहा बदलाव


    यूपी बोर्ड की 2021 की हाईस्कूल व इंटर की परीक्षाएं फरवरी के बजाय मार्च में होंगी। कोरोना महामारी को देखते हुए बोर्ड के एकेडमिक कैलेंडर में बदलाव किया जा रहा है। इसी क्रम में छात्रों को ऑनलाइन एडमिट कार्ड जारी होंगे। वहीं, मार्च-अप्रैल में ही स्कूलों को अपनी गृह परीक्षाएं समाप्त कर परिणाम जारी करने होंगे।


    कोरोना संक्रमण की वजह से माध्यमिक स्कूल अभी बंद चल रहे हैं। विभिन्न माध्यमों से छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई कराने का प्रयास किया गया है। बोर्ड ने अपने पाठ्यक्रम भी 30 प्रतिशत तक कम कर दिए हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने पहले जो एकेडमिक कैलेंडर जारी किया था, उसमें अब काफी बदलाव करने जा रहा है। इसे अंतिम रूप देकर जल्द सभी स्कूलों को सूचित कर दिया जाएगा। बोर्ड पिछले कुछ वर्षाें से 10वीं-12वीं परीक्षाएं फरवरी में कराता रहा है। लेकिन इस बार  परीक्षाएं मार्च से शुरू होकर अप्रैल तक जा सकती हैं


    एक बार ही होगी प्री-बोर्ड परीक्षा 
    नए एकेडमिक कैलेंडर के तहत हाईस्कूल और इंटर के छात्रों के लिए इस बार प्री-बोर्ड परीक्षा एक बार ही होगी, जो पहले दो बार हुआ करती थी। जनवरी के अंतिम सप्ताह में प्री-बोर्ड परीक्षा कराने का प्रस्ताव है। वहीं दिसंबर व जनवरी में प्रयोगात्मक परीक्षाएं कराई जाएंगी।


    प्री-बोर्ड परीक्षा परिणाम के आधार पर समीक्षा की जाएगी। वहीं एकेडमिक कैलेंडर में सभी जयंती व प्रमुख दिवसों पर छात्रों के बीच ऑनलाइन गतिविधियां कराने के निर्देश हैं। एनसीसी, स्काउट-गाइड व खेलकूद गतिविधियां ऑफलाइन करा सकते हैं, लेकिन इनमें कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन कड़ाई से करना होगा।


    ऑनलाइन पढ़ाई व मासिक परीक्षा पर जोर
    एकेडमिक कैलेंडर में माहवार की जाने वाली शैक्षणिक व अन्य गतिविधियों की जानकारी दी गई है। क्योंकि एकेडमिक कैलेंडर में बदलाव किया जा रहा है इसलिए अगस्त से मार्च तक की माहवार गतिविधियों का जिक्र है। इससे पहले के महीनों का जिक्र नहीं है। एकेडमिक कैलेंडर में ऑनलाइन पढ़ाई और हर महीने ऑनलाइन मासिक परीक्षा कराने पर जोर दिया गया है। यदि स्थिति थोड़ी सामान्य हुई तो स्कूलों को कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन करते हुए ऑफलाइन कैंपस की कक्षाएं करने का निर्देश दिया जाएगा। 


    नया शैक्षिक पंचांग बनकर तैयार है। जल्द यूपी बोर्ड की तरफ से इसे जारी कर दिया जाएगा। नया पंचांग कोरोना संक्रमण को देखते हुए तैयार किया गया है। स्कूलों को इसका अनुसरण करना होगा। -डॉ. मुकेश कुमार सिंह, डीआईओएस

    संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम

    संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम


    बरेली : यूपी बोर्ड और सीबीएसई की तर्ज पर अब माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड के छात्र-छात्रओं को भी कम सिलेबस से पढ़ाई करनी होगी।


    बोर्ड ने कोविड-19 की वजह से प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक सिलेबस में 30 फीसद कटौती कर दी है। इसके लिए बीते दिनों परिषद की बैठक हुई थी, जिसमें समिति के सदस्यों से सुझाव मांगे गए थे। अब बोर्ड ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

    रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वालों की फौज तैयार करेगी नई शिक्षा नीति, बोले पीएम नरेंद्र मोदी

    रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वालों की फौज तैयार करेगी नई शिक्षा नीति,  बोले पीएम नरेंद्र मोदी

     
    वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित नई शिक्षा नीति का जोर रोजगार मांगने वालों की जगह रोजगार देने वालों को तैयार करना है। इसके जरिए शिक्षा व्यवस्था में व्यवस्थित बदलाव लाने का प्रयास किया गया है। इससे आने वाले समय में नवाचार को और बढ़ावा मिलेगा।


    प्रधानमंत्री शनिवार को स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन-2020 के ग्रैंड फिनाले को आनलाइन संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति यह सुनिश्चित करेगी कि छात्र जो सीखना चाहता है पूरा ध्यान उसी पर हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि युवा देश को आगे बढ़ाने के लिए नए इनोवेशन करेंगे। उन्होंने छात्रों से कहा कि गरीबों को बेहतर जीवन देने के लिए ‘जीवन की सुगमता’ का लक्ष्य हासिल करने में युवा वर्ग की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।


    हर चुनौती का मुकाबला कर सकेंगे युवा : प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति 21वीं सदी के नौजवानों की सोच, उनकी जरूरतों को देखते हुए बनाई गई है। देश के छात्रों के लिए शिक्षा व्यवस्था को सबसे अधिक अग्रिम और आधुनिक बनाने का प्रयास किया गया है। इसके जरिए यह प्रयास किया गया है कि युवा प्रतिभाओं को अवसर मिले और वो हर चुनौती का मुकाबले करने के लिए तैयार हों।


    युवा प्रतिभाओं को पीएम ने सराहा: प्रधानमंत्री ने देश के कोने-कोने में युवाओं की ओर से हो रहे इनावेशन को सराहा। उन्होंने केरल के एर्नाकुलम के एमजीएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी केंद्र पर मौजूद छात्र जगन्नाथ व जयपुर के जेइसीआरसी की वंशिका शर्मा से बात कर उनकी सराहना भी की।


    ● स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन-2020 के ग्रैंड फिनाले में प्रधानमंत्री ने युवाओं को किया संबोधित

    ● कहा, शिक्षा व्यवस्था को युवाओं की सोच और उनकी जरूरत के मुताबिक बनाने का प्रयास


    21 वीं सदी ज्ञान का युग है। यह सीखने, अनुसंधान, नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने का समय है। भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 भी इसी पर जोर देती है। हम भारत में शिक्षा की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

    यूपी बोर्ड बढ़ाएगा परीक्षा फार्म व पंजीकरण की तारीख

    यूपी बोर्ड बढ़ाएगा परीक्षा फार्म व पंजीकरण की तारीख



    प्रयागराज : यूपी बोर्ड इधर हर साल करीब 50 लाख से अधिक छात्र-छात्रओं का कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण कराता रहा है। इतनी ही तादाद हाईस्कूल व इंटर के लिए परीक्षा फार्म भरने वालों की होती रही। इस बार की स्थितियां एकदम उलट हैं, प्रदेश में यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में अपेक्षित छात्र-छात्रएं न तो परीक्षा का फार्म भर रहे हैं और न ही पंजीकरण करा पा रहे हैं। ऐसे में बोर्ड प्रशासन को पंजीकरण व परीक्षा फार्म भरने की तारीखों में इजाफा करना पड़ेगा।





    बोर्ड ने जुलाई माह में पहले 2021 की हाईस्कूल व इंटर परीक्षा के लिए फार्म भरने का कार्यक्रम जारी किया और कुछ दिन बाद कक्षा 9 व 11 में पंजीकरण का कार्यक्रम भी घोषित कर दिया। संयोग से दोनों की अंतिम तारीख पांच अगस्त है। इस तारीख तक छात्र-छात्रओं को फीस प्रधानाचार्यो के पास जमा करनी थी। पिछले 20 दिनों में दोनों प्रक्रिया बेहद धीमी रही हैं। वजह, कोरोना के कारण कालेजों का न खुलना है। बोर्ड ने अब तक परीक्षा फार्म भरने और पंजीकरण कराने वालों की संख्या उजागर नहीं की है लेकिन इस कार्य में लगे अफसरों का कहना है कि पिछले वर्षो से बहुत कम संख्या में छात्रों ने प्रवेश लिया है। हालांकि हाईस्कूल व इंटर में लगभग छात्र-छात्रओं की संख्या तय है, ज्ञात हो कि कक्षा 9 व 11 उत्तीर्ण करने वाले ही इन कक्षाओं में पहुंचे हैं। सबसे खराब स्थिति नए पंजीकरण की है।


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    जौनपुर : बेसिक में समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक की कोरोना से हुई मौत, मौत के बाद कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के लिए गए सैम्पल

    जौनपुर : बेसिक में समेकित शिक्षा की जिला समन्वयक की कोरोना से हुई मौत, मौत के बाद कार्यालय के अन्य कर्मचारियों के लिए गए सैम्पल।


    जौनपुर : बेसिक शिक्षा विभाग में समेकित शिक्षा के जिला समन्वयक पद पर तैनात महिला (52) को तबीयत बिगड़ने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जांच में उनकी रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आने के बाद रेहटी में बने एल-2 श्रेणी के अस्पताल में भेज दिया गया था। हालत बिगड़ने पर बीएचयू रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसकी खबर मिलने के बाद बीएसए कार्यालय के अन्य कर्मचारियों ने भी जांच के लिए सैंपल दिया है।




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    बीएड प्रवेश परीक्षा 09 अगस्त को, तैयारियां हुई तेज

    बीएड प्रवेश परीक्षा 09 अगस्त को,  तैयारियां हुई तेज

     
    लखनऊ : बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा को सकुशल कराने के लिए लखनऊ विश्वविद्यालय ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। नौ अगस्त को प्रदेश भर में लिखित परीक्षा कराई जाएगी। विवि की ओर से परीक्षा केंद्रों को सैनिटाइज कराया जाएगा।


    बीएड परीक्षा की राज्य समन्वयक प्रो. अमिता बाजपेई के मुताबिक परीक्षार्थियों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए जिला प्रशासन से समन्वय स्थापित किया गया है। नौ और 10 अगस्त को सभी प्रकार के यातायात के साधन सुचारु रुप से चालू रहेंगे। प्रवेश पत्र के साथ समुचित आवागमन की अनुमति सरकार की ओर से प्रदान की गई है। परीक्षार्थियों की सुरक्षा को लेकर सभी जागरूक हैं और इस संबंध में समुचित प्रबंध सुनिश्चित किए गए हैं। इस बार चार लाख 31 हजार 904 अभ्यर्थी शामिल होंगे।



    09 अगस्त को पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत होगी बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा 2020, परीक्षार्थियों की सुविधा के लिए 8 और 9 को चलेंगे सभी सार्वजनिक साधन।

    Saturday, August 1, 2020

    गाजीपुर : छह माह से फरार फर्जी महिला शिक्षक गिरफ्तार, बेसिक शिक्षा विभाग ने दर्ज कराया था एफआइआर

    गाजीपुर : छह माह से फरार फर्जी महिला शिक्षक गिरफ्तार, बेसिक शिक्षा विभाग ने दर्ज कराया था एफआईआर ।


    गाजीपुर :  दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के अमारी रेलवे क्रासिंग के पास से शनिवार की सुबह दुल्लहपुर पुलिस ने फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक के पद पर  नौकरी कर रही  महिला शिक्षक अनीता यादव को गिरफ्तार कर लिया। वह विगत छह माह से फरार चल रही थी। आरोपित शिक्षक का प्रमाण पत्र फर्जी पाये जाने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने इसी वर्ष जनवरी माह में दुल्लहपुर थाने में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था।




    इस मामले की विवेचना कर रहे दुल्लहपुर थाने के एसआई रामअनुग्रह पांडेय ने बताया कि पकड़ी गयी फर्जी शिक्षिका अनीता यादव पत्नी शोभनाथ मऊ जनपद के चिरैयाकोट थाना के ग्राम हीरापुर पोस्ट सुल्तानीपुर की रहने वाली है। जिसकी नियुक्ति विकास खंड जखनियां  के  दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के  ओडऱाई स्थित प्राथमिक विद्यालय पर थी। जिसका बीटीसी एवं टेट का प्रमाण पत्र विभागीय जांच में फर्जी पाया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद उसे पकडऩे के लिए पुलिस ने कई बार इसके ठिकाने पर दबिश दी लेकिन फरार हो जाती थी। शनिवार की सुबह मुखबिर से सूचना मिली की उक्त फर्जी शिक्षिका अपने पति के इसी रास्ते से होकर कहीं जाने वाली है। सूचना पर एसआई रामअनुग्रह पांडेय के साथ पुलिस चंद्रमोहन यादव, चंद्रदेव के साथ महिला कांस्टेबल अंबालिका ने घेराबंदी कर फर्जी शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया। रामअनुग्रह पांडेय ने बताया कि उक्त महिला मेडिकल जांच के बाद उसे जेल भेज दिया गया।



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    16 बार में एमडीएम के खाते से निकाल लिया 1.26 लाख रुपये, ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को दो महीने बाद हुई जानकारी, तहरीर दी




    • 16 बार में एमडीएम के खाते से 1.26 लाख की अवैध निकासी
    • महराजपुर के प्राथमिक विद्यालय बरेजी का मामला

    खुखुंदू (देवरिया)। बैंक खातों को लेकर हर कोई सावधान हो जाए। आपकी जानकारी के बगैर भी बैंक सह खातेदार बना सकता है और इसके बाद खाते से आसानी से रुपये भी निकल जाएंगे। आपको जब तक इसकी खबर मिलेगी, तब तक खाते से रकम निकल गई होगी। ऐसा ही मामला खुखुंदू थानाक्षेत्र के महराजपुर के बरेजी के प्राथमिक विद्यालय का सामने आया है। यहां के एमडीएम खाते में सह खातेदार बनकर विद्यालय की पूर्व रसोइए ने 126020 रुपये दो माह पूर्व निकाल लिए। पासबुक प्रिंट कराने पर इस बात की जानकारी ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक को हुई। इस मामले में थाने में तहरीर दी गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
    विकास खंड देवरिया सदर के समिलियन विद्यालय बरेजी का एमडीएम का खाता बड़ोदा यूपी बैंक सिविल लाइंस देवरिया में है। ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यापक का ज्वाइंट खाता है। बताया जा रहा है कि बिना इनके हस्ताक्षर के उस खाते से रुपये की निकासी नहीं होना चाहिए। हालांकि बिना इन दोनों जिम्मेदारों के हस्ताक्षर के ही खाते से 126020 रुपये निकल गए। यहां खास बात है कि मई में खाते से बारी-बारी कर 16 बार में यह रकम गांव और बतरौली के ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाली गई। हालांकि इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। कुछ दिन पूर्व बच्चों के खाते में एमडीएम का पैसा भेजने का मामला आने पर पासबुक को प्रिंट कराने के लिए बैंक में भेजा गया तो निकाली गई रकम की जानकारी हुई।
    शाखा से इसकी जानकारी लेने पर गांव की एक महिला का नाम सामने आया। वह पूर्व में विद्यालय की रसोइया रही है। इसकी जानकारी मिलते ही ग्राम प्रधान अच्युतानन त्रिपाठी और प्रधानाध्यापक रीता मिश्रा ने उसके घर पहुंच रुपये वापसी की मांग की। उसने देने से इनकार कर दिया। ग्राम प्रधान ने इस मामले में थाने में तहरीर दी है। एसओ श्यामसुंदर तिवारी ने बताया कि तहरीर मिली है। प्रकरण की जांच की जाएगी।
    सह खातेदार कैसे जुड़ गया :- इसे सिस्टम की लापरवाही कही जाए या फिर बैंक की मिलीभगत। आखिर एमडीएम खाते में ग्राम प्रधान और प्रधानाध्यायक सह खातेदार हैं तो उसमें तीसरा कोई और कैसे जुड़ गया। एमडीएम खाते में केवल सरकारी पैसा आता है। जिसे प्रधान और प्रधानाध्यापक ही चेक द्वारा निकाल सकते हैं। ऐसे में तीसरा सह खाताधारक कैसे बन गया और उसे चेक कहां से मिला।
    बैंक से रुपये तीसरा कोई कैसे निकाल लिया। बिना चेक से एमडीएम खाते से भुगतान नहीं होता है। इस खाते में दो के अलावा तीसरा सह खातेदार कैसे जुड़ा। इससे यह स्पष्ट हो रहा है कि बैंक की मिलीभगत से यह सब हुआ है। जबकि रसोइया विद्यालय से 2018 में निकाली जा चुकी है।
    -अच्युतानन त्रिपाठी, ग्राम प्रधान
    जुलाई में विद्यालय खुलने पर एमडीएम का पैसा आया है कि नहीं चेक कराने के लिए बैंक में पासबुक भेजने पर रुपये निकासी का पता चला। सभी रुपये ग्राहक सेवा केंद्रों से निकाला गया है। आखिर यह सब कैसे हो गया। सोच कर डर लग रहा है। इसमें सरासर बैंक की लापरवाही झलक रही है।
    -रीता मिश्रा, प्रधानाध्यापक


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    फतेहपुर : किचन गार्डन से लैस होंगे चार सौ स्कूल, गार्डन में होने वाला खर्च ग्राम पंचायत निधि से होगा

    फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों में किचन गार्डन बनाने के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक विजय किरण आनंद ने जिले के 400 स्कूलों को चयनित किया है। यह भी साफ कर दिया है कि गार्डन में होने वाला खर्च ग्राम निधि से किया जाएगा।





    स्कूलों को हरा भरा बनाकर उनमें एमडीएम के उपयोग में आने वाली सब्जी उगाई जाएगी। करीब आठ माह पूर्व लिए गए निर्णय को धरातल पर क्रियान्वित करने के लिए 8 माह पूर्व निर्णय लिया था। इसके बाद जिले के परिषदीय स्कूलों की सूची बनाई गई जहां पर जमीन की उपलब्धता है। ऐसे विद्यालयों की सूची बनाकर शासन को भेजी गई थी। जिस पर बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने निर्णय ले लिया है। बीएसए शिंवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रथम चरण में 400 परिषदीय विद्यालय किचन गार्डन के लिए चयन हुआ है। इसमें ग्राम पंचायत की निधि खर्च होगी। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी और बीडीओ अधिकारी के बीच समन्वय स्थापित होगी। वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक और ग्राम प्रधान के आपसी समन्वय से कार्य कराया जाएगा।


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    फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2020-21 में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के बच्चों के प्रवेश के सम्बन्ध में

    फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2020-21 में  निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम 2009 की धारा 12(1)(ग) के अंतर्गत प्रवासी मजदूरों के बच्चों के प्रवेश के सम्बन्ध में।








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    अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

    अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन ने दी स्कूल फीस में सशर्त छूट, सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय पर नहीं मिलेगी छूट

     

    लखनऊ : अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने लॉकडाउन के दौरान आर्थिक संकट का सामना करने वाले अभिभावकों को फीस 20 फीसद तक फीस माफी की घोषणा की है।


    शुक्रवार को क्राइस्ट चर्च कॉलेज में बैठक का आयोजन हुआ। इसमें एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि यह व्यवस्था सरकारी कर्मचारी अथवा मेडिकल व्यवसाय के लोगों पर लागू नहीं होगी। वहीं, सीएमएस की अध्यक्ष डॉ. गीता गांधी ने कहा कि हम बच्चों की पढ़ाई रुकने नहीं देंगे, पर इस स्थिति में अभिभावकों को भी विद्यालयों की समस्याओं को समझना चाहिए। इस दौरान अन्य विद्यालयों के प्रबंधक भी मौजूद रहे।


    इन मदो में दी गई राहत : ’ फीस में 20 फीसद तक की होगी छूट ’ पुराने बच्चों से एडमिशन फीस नहीं ली जाएगी, पर दाखिला लेने वाले बच्चों से ली जाएगी ’ स्कूल बंद रहने की अवधि मेंटीनेंस चार्ज, लाइब्रेरी शुल्क नहीं ली जाएगी।


    ऐसे मिलेगा फीस में 20 फीसद तक माफी का लाभ : फीस में छूट या लाभ लेने के लिए अभिभावकों को साक्ष्यों के साथ स्कूल के प्रबंधक अथवा ¨प्रसिपल से मिलकर उन्हें प्रार्थना पत्र देकर उसमें अपने व्यवसाय और आर्थिक संकट का जिक्र करना होगा। इसके बाद विद्यालय प्रबंधन अभिभावकों की आर्थिक स्थिति के अनुसार उन्हें फीस में छूट देगी। अनिल अग्रवाल ने बताया कि सक्षम अथवा अन्य अभिभावक 10 अगस्त तक अपने बच्चों की फीस जमा कर दें, नहीं तो ऑनलाइन कक्षाएं बंद कर दी जाएंगी।

    अब नियुक्ति के बाद होगा शिक्षकों के दस्तावेज का सत्यापन, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किया शासनादेश

    माध्यमिक शिक्षा बोर्ड नहीं, डीआईओएस कराएंगे अब सत्यापन


    अब नियुक्ति के बाद होगा शिक्षकों के दस्तावेज का सत्यापन, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने जारी किया शासनादेश


    माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से सहायता प्राप्त स्कूलों के लिए चयनित शिक्षकों, प्रवक्ता और प्रधानाचार्य की नियुक्ति के बाद उनके शैक्षिक दस्तावेज का सत्यापन कराया जाएगा। दस्तावेज सत्यापन के इंतजार में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने में विलंब को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने यह निर्णय किया है। विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने इसका शासनादेश भी जारी किया है।

    अपर मुख्य सचिव के अनुसार शासन के संज्ञान में आया है कि बोर्ड द्वारा चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र के सत्यापन के इंतजार में जिलावार और विद्यालयवार नियुक्ति के आदेश जारी करने में विलंब किया जाता है।


    उन्होंने आदेश दिए हैं कि अब चयनित शिक्षकों, प्रवक्ता और प्रधानाचार्य की स्कूल में नियुक्ति के बाद प्रमाण पत्र का सत्यापन कराया जाएगा। प्रमाण पत्र सत्यापन के बाद ही उन्हें वेतन भुगतान शुरू किया जाएगा। इसके लिए चयनित अभ्यर्थियों से एक शपथ पत्र भी लिया जाएगा। जिला विद्यालय निरीक्षक संबंधित बोर्ड और विश्वविद्यालय से समयबद्ध दस्तावेज का सत्यापन कराएंगे। दस्तावेज सत्यापन की रिपोर्ट पंजीकृत डाक से ही मंगाई जाएगी।


    जिलावार और विद्यालयवार आवंटन की सूची नहीं भेजने पर जताई आपत्ति


    अपर मुख्य सचिव ने माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से चयनित अभ्यर्थियों की जिलावार और विद्यालयवार आवंटन की सूची जिला विद्यालय निरीक्षक और मंडलीय उप निदेशक को नहीं भेजने पर भी आपत्ति जताई है।


    उनका कहना है कि इससे जिला और मंडल स्तर पर चयनित शिक्षकों की नियुक्ति की समीक्षा और निगरानी नहीं हो पाती है। कई बार नियुक्ति नहीं मिलने पर मामला न्यायालय में भी चला जाता है। उन्होंने चयनित अभ्यर्थियों की जिलावार सूची डीआईओएस, मंडलीय उप निदेशक और निदेशक को भी भेजने के निर्देश दिए हैं।


    अब माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देकर सीधे स्कूलों में भेजेगा। उसे अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों का सत्यापन नहीं करवाना होगा। सत्यापन अब जिला विद्यालय निरीक्षक करवाएंगे। 


    अभी तक चयन बोर्ड सत्यापन के नाम पर अनावश्यक रूप से विलम्ब करता है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी कर दिया है।

    आज से भरे जा सकेंगे छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन, कोरोना के चलते इस बार की परिस्थितियां अलग

    आज से भरे जा सकेंगे छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन, कोरोना के चलते इस बार की परिस्थितियां अलग



    लखनऊ : दशमोत्तर छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन पत्र एक अगस्त से भरे जाएंगे। यह पहला मौका है कि जब स्कूल कॉलेज बगैर खुले छात्रवृत्ति के ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने शुरू हो जाएंगे। 


    समाज कल्याण विभाग ने अपनी तैयारियां पूरी कर ली हैं। आवेदन फार्म पांच नवंबर तक वेबसाइट पर जाकर भरे जा सकते हैं। समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति के लिए हर साल 57-58 हजार छात्र-छात्रएं आवेदन करते हैं। इस बार की परिस्थितियां अलग हैं।