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Tuesday, May 31, 2022

अलीगढ़ : जुवेनाइल अपराध की स्थिति में जन्मतिथि निर्धारण हेतु विद्यालय अभिलेख की मांग के चलते विद्यालयों में कोई भी प्रवेश बिना आवश्यक अभिलेख के न किए जाने के संबंध में

अलीगढ़ : जुवेनाइल अपराध की स्थिति में जन्मतिथि निर्धारण हेतु विद्यालय अभिलेख की मांग के चलते विद्यालयों में कोई भी प्रवेश बिना आवश्यक अभिलेख के न किए जाने के संबंध में


बांदा : शासकीय कार्य हेतु प्रoअo / इंचार्ज को ग्रीष्मावकाश में उपस्थित हेतु निर्देशित करने पर उपार्जित अवकाश लेखे में दर्ज किए जाने के संबंध में आदेश

बांदा : शासकीय कार्य हेतु प्रoअo / इंचार्ज को ग्रीष्मावकाश में उपस्थित हेतु निर्देशित करने पर उपार्जित अवकाश लेखे में दर्ज किए जाने के संबंध में आदेश



हाईकोर्ट : मदरसों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किए जाने की जनहित याचिका खारिज

हाईकोर्ट :  मदरसों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किए जाने की जनहित याचिका खारिज

याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई अनुतोष स्पष्ट नहीं है और कोर्ट इस प्रकार का अनुतोष नहीं दे सकती। कोर्ट ने याची से कहा कि वह स्पष्टता के साथ अपनी मांग को लेकर याचिका दाखिल कर सकती हैं।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में स्थित मदरसों को उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध किए जाने को लेकर दाखिल एक जनहित याचिका खारिज कर दी। याचिका हाईकोर्ट की एक अधिवक्ता व सामाजिक कार्यकर्ता सहर नकवी ने दाखिल की थी।

याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ ने कहा कि याचिका में मांगी गई अनुतोष स्पष्ट नहीं है और कोर्ट इस प्रकार का अनुतोष नहीं दे सकती। कोर्ट ने याची से कहा कि वह स्पष्टता के साथ अपनी मांग को लेकर याचिका दाखिल कर सकती हैं। परंतु कोर्ट ने इसी याचिका में संशोधन कर पूरक शपथ पत्र दाखिल करने की याची की मांग को अस्वीकार कर दिया। 

पेशे से अधिवक्ता व याचिकाकर्ता सहर नकवी ने कोर्ट में बहस करते हुए कहा कि कई प्रकार के मदरसे उत्तर प्रदेश में संचालित हैं। कहा गया कि कुछ मदरसे बरेलवी तो कुछ देवबंदी व अन्य सेक्टर की तरफ से संचालित हो रहे हैं। कहा गया कि इस प्रकार के मदरसे बंद कर इनको यूपी बोर्ड  में शामिल किया जाए, ताकि शिक्षा में एकरूपता व समानता बनी रहे। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि याची द्वारा याचिका के मार्फत मांगी गई अनुतोष में स्पष्टता नहीं है और कोर्ट इस कारण याची को इस प्रकार की राहत मंजूर नहीं कर सकती।

शिक्षक शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता अहम, खराब और निम्न गुणवत्ता वाले संस्थान होंगे बंद, तैयारी तेज

शिक्षक शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता अहम

◆ खराब और निम्न गुणवत्ता वाले संस्थान होंगे बंद, तैयारी तेज

◆ फिलहाल ऐसे संस्थानों की जुटाई जा रही है जानकारी


नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को दुरुस्त करने की मुहिम सिर्फ स्कूलों तक नहीं रहेगी। इसके दायरे में शिक्षक तैयार करने वाले देशभर के शैक्षणिक संस्थान भी शामिल होंगे। फिलहाल इन संस्थानों की गुणवत्ता को दुरुस्त करने को लेकर सरकार बड़ी तैयारी में जुटी है। खराब या निम्न गुणवत्ता वाले शिक्षक शिक्षा संस्थानों पर ताला लगना तय है। इससे पहले शिक्षक शिक्षा देने वाले देशभर के संस्थानों की गुणवत्ता से जुड़ी जानकारी जुटाई जा रही है।


सरकार ने यह कवायद उस समय शुरू की है, जब स्कूली शिक्षा के स्तर पर काफी कोशिशों के बाद भी गुणवत्ता में अपेक्षा के अनुरूप सुधार होता नहीं दिख रहा है। इसकी एक बड़ी वजह शिक्षक भी माने जा रहे हैं। मौजूदा समय में ज्यादातर शिक्षक ऐसे हैं, जो गणित व विज्ञान सहित उन विषयों में दक्ष नहीं हैं, जिनके आधार पर स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को परखा जाता है। हाल ही में देशभर के स्कूलों में कराए गए नेशनल अचीवमेंट सर्वे 2021 में छात्रों की सीखने - की क्षमता का आकलन गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, पर्यावरण विज्ञान और अंग्रेजी जैसे विषयों को लेकर किया गया था। यह सर्वे तीसरी पांचवीं, आठवीं और दसवीं के छात्रों के बीच कराया गया। इनमें सरकारी और निजी स्कूल दोनों शामिल थे। सरकार का मानना है कि जब तक स्कूलों में बेहतर शिक्षक नहीं आएंगे, तब तक गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव नहीं है। शिक्षा मंत्रालय से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बेहतर शिक्षक तैयार करने की दिशा ही चार साल का एकीकृत बीएड कोर्स शुरू करने की पहल की गई है। बीएससी-बीएड, बीए-बीएड और बीकाम - बीएड जैसे कोर्स शुरू किए जाएंगे। इससे न सिर्फ पढ़ाने के लिए समर्पित शिक्षक तैयार होंगे, बल्कि विज्ञान व गणित, कामर्स जैसे विषयों के विशेषज्ञ शिक्षक भी बनेंगे।

इसके साथ ही देशभर में शिक्षक शिक्षा दे रहे मौजूदा संस्थानों की गुणवत्ता को भी परखा जाएगा। इनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ पर्याप्त फैकल्टी के भी स्तर को जांचा जाएगा। मौजूदा समय में बड़ी संख्या में शिक्षक शिक्षा संस्थान जैसे-तैसे चल रहे हैं। रिपोर्ट तैयार होने के बाद जैसे-तैसे वाली स्थिति में चल रहे सभी संस्थान बंद होंगे। मंत्रालय समयबद्ध तरीके से इन सभी संस्थानों को बंद करने की तैयारी में जुटा है।

Monday, May 30, 2022

फतेहपुर : स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों के चयन पर खड़े हुए सवाल!

फतेहपुर : स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों के चयन पर खड़े हुए सवाल!

फतेहपुर :  जिले के 220 परिषदीय स्कूलों में स्मार्ट क्लास की सुविधाओं की अवस्थापना के लिए ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने टेण्डर आमंत्रित कर दिए। स्कूलों की सूची सामने आते ही अनेक स्कूलों के चयन पर सवाल खड़े हो गए। चयनित स्कूलों में शिक्षक नेता और उनके चहेतों की भरमार हैं।


आरईएस ने ई टेण्डरिंग के माध्यम से पंजीकृत निविदाताओं से निविदा मांगी है। चयनित किए गए 220 विद्यालयों में प्रति विद्यालय पचास हजार रूपए की लागत से स्मार्ट क्लास की सुविधाओं की अवस्थापना का कार्य होना है। माना जा रहा था कि बेसिक शिक्षा विभाग निष्पक्ष तरीके से अपने उन स्कूलों को चयनित करेगा जिनका पिछले कई सत्रों में उल्लेखनीय प्रदर्शन रहा है। छात्र नामांकन से लेकर जनप्रतिनिधियों एवं अफसरों के निरीक्षण में अव्वल रहने वाले एवं बेहतर सामाजिक छवि वाले विद्यालयों का चयन किया जाएगा लेकिन सूत्र बताते हैं कि सूची पूरी तरह से ‘ईमानदार एवं निष्पक्ष’ नहीं है। सबसे अधिक सवाल ऐरायां ब्लॉक को लेकर है।

इस ब्लॉक के तमाम बेहतर छवि वाले स्कूलों को छोड़ दिया गया है। कई स्कूल ऐसे भी हैं जो अब तक किसी स्तर पर उल्लेखनीय प्रदर्शन के लिए नहीं जाने गए हैं। बताया जा रहा है कि चयनित स्कूलों में से कई का सम्बन्ध शिक्षक संघ के पदाधिकारियों एवं उनसे जुड़े लोगों से भी है।

इन स्कूलों का चयन करीब डेढ़ वर्ष पूर्व किया गया था। इनके लिए कुछ मानक बनाए गए थे। इन्हीं मानकों के आधार पर स्कूलों का चयन हुआ था।

-संजय कुशवाहा, बीएसए

स्मार्ट क्लास के लिए स्कूलों का चयन एक साल पहले हुआ था, उस वक्त तय गाइड के मुताबिक स्कूल चिंहित किए गए होंगे। जल्द ही अन्य विद्यालयों को स्मार्ट क्लास के लिए चिंहित किया जाना है, जिसमें पूरी पारिदर्शिता बरती जाएगी।

- अपूर्वा दुबे, जिलाधिकारी

फतेहपुर : हेडमास्टरों और इंचार्ज का वेतन बहाल, मई माह का वेतन जारी करने का हुआ आदेश

फतेहपुर : हेडमास्टरों और इंचार्ज का वेतन बहाल, मई माह का वेतन जारी करने का हुआ आदेश 

फतेहपुर : बीएसए ने गत दो मई को नामांकन लक्ष्य पूरा न करने वाले जिले के सैकड़ों परिषदीय स्कूलों के हेडमास्टर एवं प्रभारी प्रधानाध्यापकों के अवरुद्ध वेतन को सशर्त बहाल कर दिया है। बीएसए ने अगली डेडलाइन 20 जून मुकर्रर की है। यदि इस तिथि तक नामांकन लक्ष्य पूरा नहीं किया जाता है तो जून माह का वेतन रोक दिया जाएगा।


बीते अप्रैल में स्कूल चलो अभियान के दौरान पिछले सत्र के मुकाबले नामांकन करने में विफल रहने वाले सभी 13 ब्लॉकों एवं नगर क्षेत्र के सैकड़ों हेड व इंचार्ज हेड का वेतन बीएसए ने अवरूद्ध कर दिया था। ब्लॉक की नामांकन समीक्षा के दौरान बीएसए ने जिन विद्यालयों में 30 सितंबर 2021 की तुलना में नामांकन कम पाया गया, उन विद्यालयों के हेडमास्टरों व इंचार्ज का वेतन रोका गया था। 30 अप्रैल को बीईओ द्वारा दी गई रिपोर्ट की समीक्षा के बाद निकले आंकड़ों को आधार बनाकर बीएसए संजय कुशवाहा ने यह कार्रवाई की थी।


एक की कमी पर भी रुका हुआ था वेतन

ब्लॉकों की समीक्षा के दौरान बीएसए ने उन हेड व इंचार्ज का भी वेतन रोक दिया है जिनके नामांकन में पिछले सत्र के मुकाबले एक, दो, तीन या चार बच्चों की कमी थी।

तो पूरे स्टाफ का रुकेगा वेतन

यदि आगामी बीस जून तक नामांकन लक्ष्य प्राप्त नहीं होगा विद्यालयों के सभी शिक्षकों का वेतन अवरूद्ध कर दिया जाएगा। शिक्षक संघों के प्रतिनिधियों ने वेतन बहाली को लेकर बीएसए से मुलाकात की थी।

उच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक छात्रवृत्ति बढ़ेगीउच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक बढ़ेगी छात्रवृत्ति

उच्च शिक्षा में जरूरत के मुताबिक बढ़ेगी छात्रवृत्ति
 

नई दिल्ली : शिक्षा से जुड़ी संसदीय समिति ने छात्रों को उच्च शिक्षा में विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली छात्रवृत्ति व वित्तीय सहायता को बढ़ाकर तर्कसंगत करने की सिफारिश की है। समिति का कहना है कि निम्न आय वर्ग या वंचित तबके के जिन लाभार्थियों को मदद दी जाती है, वह उनकी जरूरतों को पूरा नही कर पाती। सबसे ज्यादा खर्च कोर्स की फीस पर होता है और उच्च शिक्षा में छात्रों की मेंटेनेंस लागत को पूरा करने के लिए राशि पर्याप्त नहीं होती।


समिति ने यह भी कहा है कि इस संबंध में उचित विश्लेषण और अध्ययन के जरिए सरकार योजनाओं की राशि और कवरेज को संशोधित करे। विभिन्न श्रेणियों में वंचित तबके को मिलने वाले लाभ का प्रामाणिक आंकड़ों की जनकारी के लिए भी अध्ययन की जरूरत बताई गई है। इससे कमियों को पहचानने और योजनाओं में सुधार करने में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर कवायद हो रही है। इस संबंध में अलग-अलग सुझाव और प्रस्ताव विचार- विमर्श के दौरान सामने आए हैं।

सरकार कई तरह के सुधारों पर गौर कर रही है, जिससे लाभार्थी योजनाओं को तर्कसंगत बनाकर कवरेज का दायरा सही लोगों तक सुनिश्चित किया जाए। वंचित, दलित, आदिवासी और लड़कियों की शिक्षा पर काफी फोकस किया जा रहा है। उच्च शिक्षा में नामांकन के साथ छात्रों को ज्यादा विकल्प के साथ उन्हें पढ़ाई से जोड़े रखने की कवायद भी साथ-साथ चल रही है।

जिन वित्तीय सहायता योजनाओं में उपयोग की दर कम है या तय आवंटन की तुलना में खर्च नही हुआ है, उनकी नए सिरे से पड़ताल की जा रही है। वास्तविक आकलन के आधार पर योजनाओं की समीक्षा की जा रही है।

Sunday, May 29, 2022

रिकार्ड आवेदन के बाद बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए 1400 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी

रिकार्ड आवेदन के बाद बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए 1400 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी



बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराने की तैयारी में जुटा है। इस बार परीक्षा के लिए 1400 से अधिक केंद्र बनाने की तैयारी है। इससे पहले इस परीक्षा के लिए कभी इतनी बड़ी संख्या में केंद्र नहीं बनाए गए हैं।


बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए फार्म 20 मई तक भरवाए गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय की ओर आवेदनों और उनके साथ संलग्न प्रमाणपत्रों, भारांकों की जांच के लिए टीम बनाई गई है। जांच किस तरह होगी और अंकों का जोड़ कैसे लगाया जाएगा, इसके लिए तकनीकी एजेंसी विश्वविद्यालय के 25 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षण दे रही है।


 इसी के साथ विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करने में भी जुट गया है। इस बार 1400 से अधिक परीक्षा केंद्र बनाने की तैयारी है। विश्वविद्यालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि अभ्यर्थियों को इस बार उनके जनपद में ही परीक्षा देने का मौका मिलेगा। उन्हें लंबी दौड़ नहीं लगानी होगी। इस बार विश्वविद्यालय को आवेदन भी रिकॉर्ड 6.69 लाख मिले हैं। आवेदनों की जांच में 20 दिन लग सकते हैं। इसके बाद प्रवेशपत्र जारी किए जाएंगे।

परिणाम से पहले यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों से होने लगी वसूली, साइबर कैफे से फॉर्म भरवाने में लीक हो रहे नंबर

परिणाम से पहले यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों से होने लगी वसूली, साइबर कैफे से फॉर्म भरवाने में लीक हो रहे नंबर

प्रयागराज : यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणाम से पहले छात्र-छात्राओं को फोन कर वसूली शुरू हो गई है। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का मूल्यांकन और प्रायोगिक परीक्षा पूरी होने के बाद बोर्ड का पूरा अमला परिणाम तैयार करने में जुटा है। इस बीच मेरठ, गाजियाबाद और वाराणसी आदि जिलों से वसूली की शिकायत मिल रही है।


असामाजिक तत्व अंक बढ़वाने या परीक्षार्थियों को फेल से पास करवाने के नाम पर रुपयों की मांग कर रहे हैं। यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने ऐसे असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए सिविल लाइंस थाने में एफआईआर कराई है। साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रयागराज को भी सूचना दी है। सचिव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर ऐसी घटना का पता चलने पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने को कहा है। गौरतलब है कि जून के दूसरे सप्ताह में यूपी बोर्ड की परीक्षा में हाईस्कूल और इंटर के 4775749 बच्चों का परिणाम संभावित है।

कैसे बचें जाल से

बोर्ड ऑफिस का कोई कर्मचारी नंबर बढ़ाने के नाम पर बच्चों को फोन नहीं करता। किसी भी परीक्षार्थी के पास ऐसी कॉल आती है तो उसे तत्काल डीआईओएस स्कूल के प्रधानाचार्य या शिक्षक के साथ ही पुलिस को सूचित करना चाहिए। नंबर बढ़वाने या फेल से पास करवाने का कोई दावा करे तो उसकी कॉल को रिकॉर्ड कर लें। किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर उसके खाते में रुपये ट्रांसफर न करें।

बोर्ड सभापति के रिश्तेदार तक को कर चुके फोन

नंबर बढ़वाने के नाम पर बोर्ड परीक्षार्थियों को फोन करने के मामले पिछले वर्षों में भी सामने आ चुके हैं। पूर्व माध्यमिक शिक्षा निदेशक और यूपी बोर्ड के पूर्व सभापति अमरनाथ वर्मा के एक रिश्तेदार को फोन कर नंबर बढ़ाने का मामला भी पिछले वर्षों में सामने आ चुका है। इतना कुछ होने के बावजूद मामले में अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।

अंक बढ़ाने या फेल से पास कराने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों को फोन कर अनावश्यक प्रलोभन दिया जा रहा है। परीक्षार्थियों एवं उनके अभिभावकों से अनुरोध है कि प्रलोभन में न आएं।

-दिव्यकांत शुक्ल, सचिव यूपी बोर्ड

10वीं-12वीं के परीक्षार्थियों के नंबर पर साइबर अपराधियों के फोन जाने से बोर्ड की गोपनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्कूलों के प्रधानाचार्य बोर्ड के पोर्टल पर छात्र-छात्राओं से संबंधित सूचनाएं भेजते हैं और सारी सूचनाएं स्कूल, डीआईओएस कार्यालय व बोर्ड ऑफिस के बीच रहती है। ऐसे में साइबर अपराधियों तक नंबर पहुंचना कई सारे सवाल खड़े करता है। हालांकि सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में बोर्ड के सारे कार्य ऑनलाइन हो गए हैं।

स्कूल संचालक साइबर कैफे से बच्चों के हाईस्कूल और इंटर के फॉर्म भरवाते हैं। इन साइबर कैफे वालों के पास सारी सूचनाएं होती हैं। जहां से मोबाइल नंबर लीक होने की अधिक आशंका है।


झारखंड-छत्तीसगढ़ के निकले नंबर

बोर्ड परीक्षा में पास कराने के नाम पर रुपये वसूलने वालों के नंबर झारखंड और छत्तीसगढ़ के पते पर जारी हुए हैं। इस बात का खुलासा मेरठ, गाजियाबाद और वाराणसी के परीक्षार्थियों को जिस नंबर से कॉल आई थी, उसकी जांच कराने के बाद हुआ।

बोर्ड का कर्मचारी बनकर देते हैं झांसा

ये शातिर खुद को बोर्ड ऑफिस का कर्मचारी बताकर झांसा दे रहे हैं। पूर्व के वर्षों में ये शातिर बच्चों या उनके अभिभावक से अपने खाते में सीधे रुपये ट्रांसफर करने को कहते थे। लेकिन इस साल नंबर बढ़वाने के लिए पहले मिलने को बोल रहे हैं।

Saturday, May 28, 2022

CUET UG : 31 मई तक आवेदन पत्र भरने का अवसर, आवेदन पत्र भरने की विंडो दोबारा खुली

CUET UG : 31 मई तक आवेदन पत्र भरने का अवसर, आवेदन पत्र भरने की विंडो दोबारा खुली 

रात नौ बजे तक एनटीए वेबसाइट पर होंगे आवेदन

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने लिया फैसला


नई दिल्ली। विश्वविद्यालयों में स्नातक प्रोग्राम में दाखिले के लिए कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट (सीयूईटी यूजी)- 2022 की ऑनलाइन आवेदन पत्र भरने की विंडो दोबारा खोल दी गई है। छात्रों की मांग पर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने ऑनलाइन आवेदन पत्र विंडो दोबारा खोलने का फैसला लिया है। अब छात्र 31 मई रात नौ बजे तक ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। जिन छात्रों ने अभी तक ऑनलाइन आवेदन पत्र नहीं भरा है, उनके पास भी विकल्प है।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. एम जगदीश कुमार ने बताया कि छात्रों की मांग पर यह फैसला लिया गया है। केंद्रीय विश्वविद्यालय, डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी के अलावा कई स्टेट यूनिवर्सिटी ने भी स्नातक प्रोग्राम में इसी सीयूईटी यूजी 2022 की मेरिट स्कोर से दाखिला सीट देने का फैसला लिया है। अभी तक 11 लाख से अधिक छात्रों ने ऑनलाइन आवेदन पत्र भरे हैं। छात्र सीयूईटी यूजी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए एनटीए के हेल्पलाइन नंबर 011 40759000 पर फोन कर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा cuet-ug@nta.ac.in पर ईमेल करके भी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

2005 से पहले चयनित शिक्षकों को पुरानी पेंशन पर विचार करेगी सरकार

2005 से पहले चयनित शिक्षकों को पुरानी पेंशन पर विचार करेगी सरकार

निर्दल समूह के सवाल पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने सदन में दिया आश्वासन


लखनऊ। प्रदेश सरकार 31 मार्च 2005 से पहले चयनित माध्यमिक शिक्षकों को पुरानी पेंशन देने के मामले पर विचार करेगी । विधान परिषद में प्रश्न प्रहर में निर्दल समूह के राज बहादुर सिंह चंदेल के सवाल के जवाब में यह आश्वासन माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने दिया।


चंदेल ने कहा कि 31 मार्च 2005 से पूर्व नियुक्त किए गए माध्यमिक शिक्षकों को प्रबंधतंत्र की शिथिलता, प्रशासनिक कमी और जटिल समायोजन प्रक्रिया के कारण 31 मार्च 2005 के बाद कार्यभार ग्रहण कराया गया। इन्हें केंद्र सरकार के समान ही पुरानी पेंशन योजना में शामिल किया जाए। जवाब में गुलाब देवी ने कहा कि 31 मार्च 2005 के बाद कार्यभार ग्रहण करने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों को प्रदेश सरकार की अधिसूचना के तहत पुरानी पेंशन का विकल्प नहीं दिया गया है। विधान परिषद सदस्यों ने कहा कि जब लापरवाही प्रबंधन की है, तो इसका दंड शिक्षक क्यों भुगतें। इस पर गुलाब देवी ने कहा कि यह महत्वपूर्ण प्रश्न है। हम इस पर विचार करके उचित निर्णय लेंगे।


शिक्षामित्रों को स्थायी करने की मांग पर सपा का विधान परिषद से बहिर्गमन

शिक्षामित्रों को स्थायी करने की मांग पर सपा का विधान परिषद से बहिर्गमन



लखनऊ। विधान परिषद में शुक्रवार को शिक्षामित्रों की समस्याओं पर सपा सदस्य कार्यस्थगन प्रस्ताव लाए। उन्होंने सरकार पर शिक्षामित्रों की उपेक्षा का आरोप लगाया। नेता सदन स्वतंत्रदेव सिंह के जवाब से असंतुष्ट सपा के सदस्यों ने वॉकआउट किया। इसके अलावा उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्तावों का उनका कोटा दो से एक किए जाने पर भी नाराजगी जताई और सदन से बाहर चले गए।


सपा के डॉ. मान सिंह यादव ने कहा कि भाजपा ने चुनाव से पहले शिक्षामित्रों को स्थायी करने का वादा किया था लेकिन अब उनके साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये मानदेय और 11 माह का वेतन देकर उन्हें आत्महत्या के लिए मजबूर किया जा रहा है। 


आशुतोष सिन्हा ने कहा कि शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट देकर उन्हें स्थायी शिक्षक बनाया जाना चाहिए, जैसा कि सपा सरकार में किया गया था। 


नेता प्रतिपक्ष लाल बिहारी यादव ने कहा कि इस बारे में सरकार संसद से प्रस्ताव पास कराए ताकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से इतर जाकर शिक्षामित्रों के हित में निर्णय हो सके।


 नेता सदन ने कहा कि सरकार शिक्षामित्रों की समस्याओं का जरूर समाधान करेगी।

बहराइच : रिक्त ARP पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी

बहराइच : रिक्त ARP पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी




जनपद में एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) विज्ञप्ति जारी


पदों के सत्यापन को अब 30 तक खुलेगा पोर्टल

पदों के सत्यापन को अब 30 तक खुलेगा पोर्टल
 

प्रयागराज :  प्रदेश के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी), प्रवक्ता (पीजीटी) और प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों का सत्यापन निर्धारित समयसीमा 25 मई तक पूरा नहीं हो सका।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव नवल किशोर ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि टास्क फोर्स के माध्यम से ऑनलाइन अधियाचित पदों का सत्यापन कराते हुए हर हाल में 30 मई तक सत्यापन करा दिया जाए। उसके बाद पोर्टल नहीं खुलेगा।


 19 मई को शासन स्तर पर हुई बैठक में रिक्त पदों का दोबारा सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए 23 से 25 मई तक अधियाचन पोर्टल खोला गया, लेकिन समयसीमा में सत्यापन न होने पर कुछ डीआईओएस ने और समय देने का अनुरोध किया था। स्कूलों में छात्रसंख्या, विषयवार स्वीकृत पदों और आरक्षण श्रेणी के मद्देनजर दोबारा रिक्त पदों की स्थिति देखी जानी है, ताकि चयन के बाद अभ्यर्थियों को भटकना न पड़े। 


जिलों से सहायक अध्यापक के 4500, प्रवक्ता के 850 और प्रधानाचार्यों के 1918 रिक्त पदों की सूचना मिली थी। इन पदों के सत्यापन के लिए 16 से 25 अप्रैल तक पहली बार अधियाचन पोर्टल खोला गया था।


अधियाचित पदों के सत्यापन को चयन बोर्ड ने बढ़ाई तिथि

बोर्ड ने आधी रात तक कार्य कर पूरा किया भर्तियों का बैकलाग

कल खत्म हो जाएगा बोर्ड के सभी पांच सदस्यों का कार्यकाल


प्रयागराज : एडेड माध्यमिक विद्यालयों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेजे आनलाइन अधियाचन का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए चयन बोर्ड ने 23 से 25 मई के लिए अधियाचन पोर्टल खोला, लेकिन सत्यापन न होने पर तिथि बढ़ाकर 30 मई कर दी जाएगा। शासन के निर्देश के अनुसार आनलाइन अधियाचन का सत्यापन इस अवधि में करने के निर्देश चयन बोर्ड सचिव नवल किशोर ने प्रदेश भर के सभी डीआइओएस को दिए हैं।


चयन बोर्ड सचिव के मुताबिक पांच अप्रैल 2022 तक 2022- 2023 के लिए आनलाइन प्राप्त अधियाचन के सत्यापन के लिए 16 से 25 अप्रैल 2022 तक अधियाचन पोर्टल खोला गया था। चयन बोर्ड अध्यक्ष वीरेश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में विषयवार स्वीकृत पढ़ें, आरक्षण श्रेणी तथा छात्र संख्या के दृष्टिगत औचित्य का परीक्षण के बाद सत्यापन करने का निर्देश दिया था ताकि वेतन भुगतान या नियुक्ति को लेकर कोई विवाद न हो। अब शासन ने जनपद स्तर पर गठित टास्क फोर्स के माध्यम से छात्र संख्या के आधार पर सत्यापन कार्य किए जाने का निर्देश दिया है। इसके लिए टास्क फोर्स के माध्यम से तीन दिन में सत्यापन के लिए अधियाचन पोर्टल खोला गया। इस अवधि में सत्यापन नहीं किए जाने पर सत्यापन की तिथि बढ़ाकर 30 मई कर दी गई है। इस अवधि में सत्यापन कार्य पूरा किया जाना है।

संस्कृत विश्वविद्यालय में भी शुरू होंगे प्रोफेशनल कोर्स

संस्कृत विश्वविद्यालय में भी शुरू होंगे प्रोफेशनल कोर्स


राजधानी में वेद, पुराण, उपनिषद के साथ पारंपरिक कोर्स पढ़ाने वाले संस्कृत विश्वविद्यालय नई शिक्षा नीति के तहत कई प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने जा रहे हैं। इसको लेकर प्रारूप तैयार किया जा रहा है।


नई दिल्ली : राजधानी स्थित केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और श्रीलाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में पैरामेडिकल, वास्तु के अलावा आयुर्वेद मेडिसिन और सिविल सर्विस से संबंधित चैप्टर की पढ़ाई शुरू करने की तैयारी है। श्री लालबहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने बताया कि हमारे यहां कई प्रोफेशनल कोर्स शुरू होने वाले हैं। इसको लेकर अभी प्रारूप तैयार किया जा रहा है।


संस्कृत के अलावा, योग, संगीत, आयुष आदि के तहत पढ़ाई का प्रावधान करने की तैयारी है। प्रोफेशनल कोर्स में ज्योतिष और वास्तु का कर रहे हैं। इसके अलावा जुलाई से योग और नेचुरोपैथी में पीजी डिप्लोमा शुरू करने की योजना है। इसकी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। इसमें इस विषय की सैद्धांतिक पढ़ाई हम कराएंगे और प्रयोगात्मक पढ़ाई के लिए विद्यार्थी राजधानी स्थित प्राकृतिक चिकित्सा केंद्र में जाएंगे।


विदेशी विश्वविद्यालयों से अनुबंध करेंगे : प्रो. पाठक ने कहा कि भविष्य में विदेशी विश्वविद्याल के साथ हम अनुबंध करेंगे तो इसमें अन्य प्रोफेशनल कोर्स शुरू करने की संभावना बढ़ जाएगी। सिविल सर्विस के कंटेट भी किसी न किसी माध्यम से विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। हमारे यहां योग में बीए और एमए शुरू किया गया है।


अगले वर्ष से प्राकृत भाषा में एमए खोलने की तैयारी : प्रो. पाठक ने बताया कि नई शिक्षा नीति में प्राकृत भाषा को काफी महत्व दिया गया है और हमारी कोशिश है कि अगले वर्ष से विश्वविद्यालय प्राकृत भाषा में एमए कोर्स शुरू करें।


आयुर्वेद संकाय के लिए मांगी 200 एकड़ जमीन : प्रो. पाठक ने बताया कि आयुर्वेद संकाय खोलने के लिए हमने दिल्ली एनसीआर में 200 एकड़ जमीन की मांग सरकार से की है। यहां पर बीएएमएस और आयुर्वेदाचार्य की कंबाइंड डिग्री देंगे। इसके लिए शिक्षा मंत्रालय से मांग की है।

Friday, May 27, 2022

BSA द्वारा बैक डेट में निलंबित करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, चार सप्ताह में मांगा जवाब

BSA द्वारा बैक डेट में निलंबित करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने  लगाई रोक, चार सप्ताह में मांगा जवाब


प्रयागराज । हाईकोर्ट के वरीयता के आधार पर याची सहायक अध्यापिका को अलीगढ़ में तैनात करने के आदेश के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कासगंज द्वारा बैक डेट में निलंबित करने के आदेश पर रोक लगा दी है और राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।

■ हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब तलब किया 

■ बीएसए पर मनमाने तरीके से काम करने का आरोप


यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अंजू सिंह की याचिका पर अधिवक्ता आरएन यादव व अभिषेक यादव को सुनकर दिया है। याची सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित हुई। उसने अलीगढ़ को वरीयता दी लेकिन उसे अलीगढ़ में नियुक्ति न देकर कासगंज में नियुक्ति दी गई। उसने ज्वाइन कर लिया और याचिका कर अलीगढ़ में नियुक्ति की मांग की।


 याची का कहना था कि उससे कम क्वालिटी प्वाइंट अंक वालों को अलीगढ़ में नियुक्ति दी गई है। अधिक क्वालिटी प्वाइंट अंक प्राप्त करने के बावजूद उसे वहां नियुक्ति नहीं दी गई। कोर्ट ने गत 28 अप्रैल को याची को अलीगढ़ में नियुक्ति देने का निर्देश दिया तो इस पर कासगंज बीएसए राजीव कुमार ने याची को स्कूल में गैरहाजिर होने के आरोप में 25 अप्रैल को निलंबित कर दिया।

कोर्ट आर्डर


कैसा रहा शिक्षा क्षेत्र के लिए यूपी का नया बजट? जानिए शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या है सौगातें?

कैसा रहा शिक्षा क्षेत्र के लिए यूपी का नया बजट? जानिए शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या है सौगातें?


उत्तर प्रदेश सरकार ने गुरुवार 26 मई, 2022 को विधानसभा में बजट, 2022 को पेश कर दिया है। राज्य के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में कुल 6 लाख 15 हजार 518 करोड़ रुपये का बजट पेश किया। इस बजट में विभिन्न क्षेत्रों के लिए अहम घोषणाएं की गईं। वहीं, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र को भी कई अहम सौगातें मिली हैं। आइए जानते हैं शिक्षा के लिए कैसा रहा इस साल का बजट और इसमें कौन सी बड़ी घोषणाएं की गईं।


शिक्षा क्षेत्र के लिए क्या है सौगातें?


शिक्षा क्षेत्र के लिए उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने कई बड़ी घोषणाएं की। आइए इन्हें प्वाइंट्स में जानते हैं :


आगामी 05 वर्षों में 02 करोड़ स्मार्ट फोन / टैबलेट वितरित किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए 1500 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

युवाओं के बीच उद्यमशीलता एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए नयी उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति-2020 के अन्तर्गत 05 वर्ष में प्रत्येक जनपद में कम से कम से एक तथा कुल 100 इन्क्यूबेटर्स एवं 10,000 स्टार्टअप्स की स्थापना का लक्ष्य है।

प्रतियोगी छात्रों को अपने घर के समीप ही कोचिंग की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के लिए 30 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

जनपद वाराणसी में अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की स्थापना के लिये भूमि क्रय हेतु 95 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

खेल के विकास एवं उत्कृष्ट कोटि के खिलाड़ी तैयार करने हेतु जनपद मेरठ में मेजर ध्यानचन्द खेल विश्वविद्यालय पर 700 करोड़ रूपये की धनराशि खर्च होगी।

भारत सरकार की खेलो इण्डिया एक जनपद- एक खेल योजनान्तर्गत प्रदेश के

75 जनपदों में खेलों इण्डिया सेन्टर्स की स्थापना की जाएगी।

प्रदेश के 16 असेवित जनपदों में मेडिकल कॉलेजों की स्थापना हेतु राज्य सरकार द्वारा पीपीपी नीति घोषित की गयी है। इसमें निजी निवेश के माध्यम से मेडिकल कॉलेज स्थापित किये जायेंगे।

एमबीबीएस एवं पीजी पाठ्यक्रमों में सीटों में वृद्धि के लिए 500 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

नर्सिंग कॉलेज की स्थापना हेतु 25 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ की स्थापना हेतु

100 करोड़ 45 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। प्रदेश के 14 जनपदों में निर्माणाधीन नये मेडिकल कॉलेजों के लिए 2100 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

गोरखपुर में आयुष विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु 113 करोड़ 52 लाख रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।



🔵 बेसिक शिक्षा

वर्ष 2022-2023 में परिषदीय विद्यालयों में स्कूल चलो अभियान के अन्तर्गत छात्र नामांकन का लक्ष्य 2 करोड़ रखा गया है। वर्तमान में यह आंकड़ा 1.66 करोड़ का है।

समग्र शिक्षा अभियान हेतु 18,670 करोड़ 72 लाख रूपये की व्यवस्था

प्रस्तावित की गई है। • कक्षा एक से आठ तक के छात्रों के खाते में सीधे पैसे भेजने के लिए 370 करोड़ रूपये की प्रस्तावित की गई है।


🔵 माध्यमिक शिक्षा

सैनिक स्कूलों के संचालन हेतु 98 करोड़ 38 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

संस्कृत पाठशालाओं को अनुदान हेतु 324 करोड़ 41 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

• समग्र शिक्षा अभियान के अन्तर्गत 836 करोड़ 80 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।


🔵 उच्च शिक्षा

राजकीय महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज की स्थापना हेतु 10 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

राजकीय महाविद्यालयों के निर्माणाधीन भवनों को पूर्ण किये जाने हेतु 200 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

प्रदेश में 75 नये राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना का कार्य प्रगति पर है।

छात्रों को मुफ्त ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण देने के लिए संपूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी में ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित किया जाएगा। इसकी स्थापना के लिए 01 करोड़ 16 लाख रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।



🔵 प्राविधिक शिक्षा

सरकार की वन ट्रिलियन डॉलर इकोनामी योजना के क्रम में छात्र / छात्राओं को सत्र 2022-2023 में न्यू एज ट्रेडस् के अन्तर्गत 04 पाठ्यक्रम डाटा साइंस एवं मशीन लर्निंग, इण्टरनेट ऑफ थिग्स साइबर सेक्योरिटी और ड्रोन टेक्नोलाजी में शिक्षण प्रशिक्षण कराया जाएगा।


🔵 व्यवसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास

प्रदेश के 04 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को मॉडल आईटीआई के रूप में विकसित किया जाएगा।

विभिन्न जनपदों में स्थापित नवीन राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में से 31 को पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा वर्ष 2022-2023 में 2 लाख युवाओं को पंजीकृत करते हुये प्रशिक्षण प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है।



शिक्षा सेक्टर समग्र शिक्षा अभियान के लिए 18670 करोड़ रुपये, सभी सरकारी महाविद्यालयों में होगी स्मार्ट क्लास


प्रदेश के सभी राजकीय महाविद्यालयों में स्मार्ट क्लासों की व्यवस्था होगी। सरकार ने बजट में इसके लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। इसके साथ ही खेलकूद पर भी सरकारी महाविद्यालयों पर ध्यान दिया जाएगा और इसके लिए 1.72 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। समग्र शिक्षा अभियान 18670 करोड़ 72 लाख और प्रधानमंत्री पोषण योजना (मिड-डे मिल) के लिए 3548.93 करोड़ और फल वितरण मद में 166.71 करोड़ रुपये दिए गए हैं।


सरकार ने सैनिक स्कूलों के संचालन के लिए बजट में 98.38 करोड़ रुपये दिए है। संस्कृत पाठशालाओं के अनुदान के लिए 324.41 करोड़ रुपये रखे हैं। संस्कृत को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में निशुल्क आनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया है। इसके लिए सरकार ने बजट में 1.16 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है।


प्रदेश सरकार ने चार राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को माडल आईटीआई और 31 को पीपीपी माडल पर संचालित करने का लक्ष्य तय किया है। आईटीआई में वर्ष 2022-23 में न्यूज़ एज ट्रेड्स के तहत 4 नये पाठ्यक्रम- डाटा साइंस एवं मशीन लर्निंग इंटरनेट आफ थिग्स साइबर सेक्यूरिटी एवं ड्रोन टेक्नोलॉजी में शिक्षण और प्रशिक्षण कराने का निर्णय लिया है।


जानें- जरूरी बातें

- राजकीय महाविद्यालय के निर्माणाधीन भवनों को पूरा कराने के लिए 200 करोड़ रुपये

-  समग्र शिक्षा अभियान में अवस्थापना सुविधाओं के लिए 836.30 करोड़ रुपये

- उच्च शिक्षा निदेशालय में ई कंटेंट रिकार्डिंग स्टूडियो की स्थापना के लिए एक करोड़ रुपये

- असेवित मंडलों में राजकीय महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 10 लाख रुपये

- माध्यमिक शिक्षा निदेशालय में सभाकक्ष समेत जर्जर आवास, कार्यालय कक्ष आदि की मरम्मत के लिए तीन करोड़ रुपये

-हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के प्रश्नपत्र मुद्रण गुप्त सेवा व्यय के लिए 15 करोड़ रुपये

रिश्वतकांड के बाद जागा फतेहपुर का बेसिक शिक्षा और लेखा विभाग, ताबड़तोड़ आदेश जारी कर मांगी लंबित देयकों की सूचना

रिश्वतकांड के बाद जागा फतेहपुर का बेसिक शिक्षा और लेखा विभाग, ताबड़तोड़ आदेश जारी कर मांगी लंबित देयकों की सूचना 



फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के वित्त एवं लेखाधिकारी ने लंबित देयकों पर कड़ा रुख अख्तियार कर लंबित देयकों की सूचना मांगी है। उन्होंने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी करते हुए इस बात का प्रमाण पत्र मांगा है कि इस साल दिनांक 26 मई तक का बीआरसी स्तर पर कोई भी देयक लंबित नहीं है।


बीते दिनों खंड शिक्षा अधिकारी हथगाम के बिल बाबू को रिश्वत लेते रंगे हाथों दबोचे जाने के बाद जागे बेसिक शिक्षा विभाग ने लंबित देयकों के भुगतान के लिए कमर कस ली है। वित्त एवं लेखाधिकारी ने गुरूवार को जिले के सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को एक पत्र जारी करते हुए कहा है कि ब्लॉकों में परिषदीय शिक्षकों एवं शिक्षणेत्तर कर्मियों के दिनांक 26 मई तक लंबित समस्त प्रकार के अवशेष देयकों जैसे नियुक्ति वेतन अवशेष, चिकित्सा अवकाश देय का परीक्षण कर सुसंगत अभिलेखों सहित 6 जून तक अनिवार्य रूप से लेखा कार्यालय में उपलब्ध करा दिया जाए।


बीईओ को देना होगा प्रमाण पत्र

वित्त एवं लेखाधिकारी ने सभी बीईओ को निर्देश भी दिए कि सभी बीईओ इस आशय का प्रमाण पत्र भी दें कि उनके कार्यालय में दिनांक 26 मई के पूर्व का कोई भी देयक शेष नहीं है। लेखाधिकारी ने यह भी कहा है कि देयक प्रस्तुत न करने या बिलंब से देने पर इसे शासकीय एवं वित्तीय कार्यों में लापरवाही मानते हुए विभागीय कार्यवाही हेतु उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।

Thursday, May 26, 2022

उम्मीद खत्म: तदर्थ शिक्षकों को अब न नौकरी, न ही वेतन, अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में हैं तैनात, शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने 2000 के बाद की नियुक्तियों के संबंध में साफ की स्थिति

उम्मीद खत्म: तदर्थ शिक्षकों को अब न नौकरी, न ही वेतन, अशासकीय सहायता प्राप्त कॉलेजों में हैं तैनात, शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने 2000 के बाद की नियुक्तियों के संबंध में साफ की स्थिति

एडहॉक टीचर नहीं हो सकते परमानेंट, UPSESSB ने TGT PGT भर्ती में दिया था मौका

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी ने साफ कर दिया है कि तदर्थ शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रश्न के जवाब में यह लिखा गया है।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी ने साफ कर दिया है कि तदर्थ शिक्षकों को नियमित नहीं किया जा सकता। एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह के प्रश्न के जवाब में लिखा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती 2021 ( UPSESSB TGT PGT Recruitment ) में तदर्थ शिक्षकों को अवसर दिया था।

नियुक्ति के आधार पर भारांक देते हुए सफल तदर्थ शिक्षकों को नियमित शिक्षक के रूप में पैनल व कार्यभार ग्रहण कराने के आदेश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के सात दिसंबर 2021 के आदेश में परीक्षा में असफल या प्रतिभाग न करने वाले तदर्थ शिक्षकों को विनियमित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। इस प्रकार 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों को सेवा में बनाए रखना या वेतन दिया जाना नियम संगत नहीं है। 


30 दिसंबर 2000 के पूर्व से नियुक्त एवं वर्तमान में कार्यरत ऐसे शिक्षक जो कोर्ट के अंतरिम आदेश से वेतन प्राप्त कर रहे हैं, उनके विनियमितीकरण के संबंध में वित्त एवं न्याय विभाग की सहमति नहीं है।

अरबी-फारसी मदरसों में समूह 'घ' की भर्तियों की जांच शुरू

अरबी-फारसी मदरसों में समूह 'घ' की भर्तियों की जांच शुरू

विशेष सचिव जेपी सिंह ने कहा- नियमित नियुक्तियों पर थी रोक।

निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म डॉ. रोशन जैकब को सौंपी गई जांच।


लखनऊ : अरबी-फारसी मदरसों में समूह घ के पदों पर नियमित नियुक्तियों की जांच होगी। अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव ने जांच के आदेश जारी करते हुए कहा है कि इन पदों पर केवल आउटसोर्सिंग के माध्यम से भर्तियां किए जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके मदरसा बोर्ड के तत्कालीन रजिस्ट्रार एसएन पांडेय ने अनियमित तरीके से इन नियुक्तियों की वित्तीय सहमति प्रदान कर दी। पूरे प्रकरण की जांच निदेशक भूतत्व एवं खनिकर्म डा. रोशन जैकब को जांच सौंपी गई है।

मामला सेवा नियमावली वर्ष 2016-2017 से जुड़ा है। विशेष सचिव जेपी सिंह ने आदेश में कहा है कि उप्र अशासकीय अरबी और फारसी मदरसों में चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमित नियुक्तियां किए जाने पर रोक लगाई गई थी। ऐसे पदों पर केवल आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्तियों का प्रावधान था। इसके बावजूद 22 जुलाई 2016 के बाद तत्कालीन रजिस्ट्रार मदरसा बोर्ड एसएन पांडेय (संयुक्त निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग) द्वारा अनियमित तरीके से समूह घ के पदों पर नियमित नियुक्ति का अनुमोदन व वित्तीय सहमति दे दी गई। उधर विभाग के उप सचिव शकील सिद्दीकी ने सभी जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारयों को पत्र भेजकर इस दौरान मदरसों में हुई समूह घ की सभी भर्तियों की सूचना दो दिन में भेजने को कहा है। 

नियुक्तियां वैध, क्लीन चिट दे चुकी है सरकार : पांडेय

संयुक्त निदेशक एसएन पांडेय ने बताया कि नियुक्तियों का अनुमोदन नियमानुसार दिया गया है। इस प्रकरण में 22 जुलाई 2019 को विधानसभा में उठाए गए एक सवाल के जवाब में सरकार इन नियुक्तियों को क्लीन चिट दे चुकी है। इस प्रकरण के सवाल के जवाब में विभाग के तत्कालीन मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी ने जवाब दिया था कि 15 नियुक्तियों का यह मामला हाईकोर्ट में गया तो हाईकोर्ट द्वारा उप्र मदरसा सेवा विनियमावली में किए गए प्रथम संशोधन 22 सितंबर 2017 के पूर्ववर्ती होने के कारण नियुक्तियां वैध मानते हुए आदेश पारित किए जिसके क्रम में नियमानुसार अनुमोदन प्रदान किया गया।

स्कूल भी बनेंगे फाइव स्टार, उत्कृष्ट स्कूलों को फाइव स्टार ग्रेडिंग देकर किया जाएगा सम्मानित

स्कूल भी बनेंगे फाइव स्टार, उत्कृष्ट स्कूलों को फाइव स्टार ग्रेडिंग देकर किया जाएगा सम्मानित


प्रयागराज : सर्वसुविधा युक्त फाइव स्टार होटलों के बारे में आपने सुना होगा। उसमें समय भी व्यतीत किया होगा। उसी की तर्ज पर स्कूलों की स्टार ग्रेडिंग की जाएगी। उत्कृष्ट स्कूलों को फाइव स्टार ग्रेडिंग देकर सम्मानित किया जाएगा। इसके लिए स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना का आयोजन किया जा रहा है। 



इसमें जल व्यवस्था और स्वच्छता को प्रोत्साहित करने के साथ आधारभूत जरूरतों की जांच होगी। इसे राज्य परियोजना निदेशक की ओर से कराया जाएगा। प्रदेश के सभी 132915 परिषदीय स्कूल, 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय प्रतिभाग करेंगे।


निजी स्कूल भी आवेदन कर सकते हैं।  स्कूलों के सर्वे में देखा जा रहा है कि पर्याप्त स्वच्छ जल, शौचालय में पानी की व्यवस्था, हाथ धुलने के लिए पानी, बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग क्रियाशील मूत्रालय, दिव्यांग विद्यार्थियों, अध्यापकों व कर्मियों के लिए शौचालय है या नहीं। 

स्कूल में हाथ धुलने के लिए साबुन, हैंडवाश के लिए मल्टीपल टोटी होना भी जरूरी है। कूड़ा निस्तारण के साथ पर्यावरणीय सफाई का भी मूल्यांकन किया जा रहा है। मिड डे मील बनाने वाले रसोइयों के कार्य व्यवहार का भी परीक्षण प्रतियोगिता का हिस्सा है। कोविड-19 से बचाव संबंधी उपायों को लेकर भी व्यवस्था जांची जा रही है।

विद्यालयों को देने हैं 59 प्रश्नों के उत्तर

राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान की तरफ से जारी पत्र में निर्देशित है कि प्रतियोगिता में शामिल विद्यालयों की वस्तुस्थिति का निर्धारण के लिए 59 प्रश्न तय किए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न के लिए अगल अलग अंक हैं। जैसे जल व्यवस्था के मूल्यांकन के लिए कुल 22, शौचालय के लिए 27, साबुन से हाथ धुलने के लिए 14, संचालन एवं रख रखाव के लिए 21 अंक निर्धारित हैं। इसी क्रम में व्यवहार परिवर्तन एवं क्षमता निर्माण के लिए 11, कोविड 19 से बचाव के उपाय के लिए 15 अधिकतम अंक तय हैं। 

सभी को मिलाकर देखें तो 110 अंकों में मूल्यांकन होना है। बाद में विद्यालयों को एक से लेकर पांच तक की ग्रेडिंग भी दी जाएगी। सब से अच्छे स्कूल को फाइव स्टार मिलेंगे।

स्टार ग्रेडिंग के मानक जो विद्यालय 90 से 100 प्रतिशत मानक पूरा करेंगे उन्हें फाइव स्टार दिया जाएगा। उन्हें उत्कृष्ट लिखते हुए इसे बनाए रखने की टिप्पणी दी जाएगी। 75 से 89 प्रतिशत अंक पाने वाले फोर स्टार बनेंगे, उनके लिए बहुत अच्छा लिखा जाएगा। 51 से 74 प्रतिशत अंक पाने वाले स्कूलों को तीन स्टार मिलेंगे। यह भी टिप्पणी होगी कि अच्छा, परंतु यहां थोड़े और सुधार की आवश्यकता है।

35 से 50 प्रतिशत अंक पाने वालों को दो स्टार दिए जाएंगे। उनके लिए अच्छा और सुधार की संभावना है लिखा जाएगा। 35 प्रतिशत से कम अंक पाने वालों को एक स्टार मिलेगा। उन्हें खराब एवं विचारणीय, सुधार की आवश्यकता है लिखा जाएगा।

मान्यता और वित्त पोषित कॉलेजों का ब्योरा हाईकोर्ट ने किया तलब

मान्यता और वित्त पोषित कॉलेजों का ब्योरा हाईकोर्ट ने किया तलब
 
लखनऊ : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव को प्रदेश के सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की जनशक्ति निर्धारण, शिक्षकों के सृजित पद, प्राप्त अधियाचनों एवं वर्तमान समय में शिक्षकों के रिक्त पदों की जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधनों की ओर से अधियाचन भेजने के बाद भी चयन बोर्ड से भेजे गए अभ्यर्थियों को नियुक्ति न देना अत्यंत संदेहास्पद है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने बस्ती के किसान इंटर कॉलेज की प्रबंध समिति की याचिका पर दिया है।



प्रबंध समिति के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि विद्यालय में इतिहास विषय के प्रवक्ता के रूप में नितेश कुमार शुक्ल कार्यरत हैं, जिन्हें विद्यालय प्रबंधन ने वर्ष 2018 में नियुक्त किया था। उक्त प्रवक्ता न्यायालय के स्थगनादेश पर कार्य कर रहे हैं। फिर भी चयन बोर्ड ने नए अभ्यर्थी को भेज दिया। सरकारी वकील का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2020 में संजय सिंह केस में दिए गए निर्णय के उपरांत एडहॉक अध्यापक कार्य नहीं कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि राज्य के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय चयन बोर्ड को अधियाचन प्रेषित कर देते हैं लेकिन चयनितोंको विद्यालय में ज्वाइन नहीं कराते।

डीएलएड और बीटीसी प्रशिक्षितों ने मांगा मौका, मंत्री को लिखा आगामी TGT भर्ती के लिए पत्र

डीएलएड और बीटीसी प्रशिक्षितों ने मांगा मौका, मंत्री को लिखा आगामी TGT भर्ती के लिए पत्र


प्रयागराज : प्रदेश के समस्त बीटीसी/डीएलएड प्रशिक्षितों ने आगामी प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती में शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री, माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा मंत्री को पत्र लिखा है। 


डिप्लोमा इन एलीमंट्री एजूकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षित पंकज मिश्रा के मुताबिक जिस प्रकार 69000 शिक्षक भर्ती में ब्रिज कोर्स कराकर बीएड प्रशिक्षितों को शामिल किया गया, उसी प्रकार इसी कोर्स को कराकर समस्त बीटीसी/डीएलएड प्रशिक्षितों को टीजीटी भर्ती में शामिल किया जाए। 

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षक बनने के लिए बीएड, बीटीसी, डीएलएड जैसे कोर्सों का संचालन कराया जाता है। टीजीटी भर्ती में केवल बीएडधारी ही मान्य हैं, जबकि बीटीसी, डीएलएड, बीएड आदि सभी कोर्सों की न्यूनतम शैक्षिक अर्हता स्नातक है।

Wednesday, May 25, 2022

कानपुर देहात : शिक्षक समाधान दिवस में आई गंभीर शिकायतों से बेसिक शिक्षा कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

कानपुर देहात : शिक्षक समाधान दिवस में आई गंभीर शिकायतों से बेसिक शिक्षा कार्यालय की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल






छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको की तैयार करायी जा रही ईमेल आईडी को माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर अपलोड कराये जाने के सम्बन्ध में

छात्र/छात्राओं एवं शिक्षको की तैयार करायी जा रही ईमेल आईडी को माध्यमिक शिक्षा परिषद के पोर्टल पर अपलोड कराये जाने के सम्बन्ध में


विधानसभा में परिषदीय स्कूल के बच्चों के डीबीटी - यूनिफार्म और मिड डे मील को कनवर्जन कास्ट को लेकर सवालों पर छिड़ी बहस, पढ़िए पूरा मामला

विधानसभा में परिषदीय स्कूल के बच्चों के डीबीटी - यूनिफार्म और मिड डे मील को कनवर्जन कास्ट को लेकर सवालों पर छिड़ी बहस, पढ़िए पूरा मामला

1100 रुपये में नहीं मिलती यूनिफॉर्म- बच्चों को नहीं मिल रहा डीबीटी का लाभ, सरकार ने कहा- डीबीटी बंद नहीं करेंगे



उत्तर प्रदेश विधान सभा में मंगलवार को सत्ता पक्ष और विपक्ष में इस बात को लेकर बहस हुई कि परिषदीय स्कूलों के बच्चों की यूनिफार्म में नाप ज्यादा जरूरी है या कपड़े की गुणवत्ता। संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि अभिभावकों की मांग थी कि यदि वे खुद यूनिफार्म खरीद सकेंगे तो नाप सही होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव ने पूछा कि सरकार वह दुकान बता दे जहां से 1100 रुपये में बच्चों के लिए यह सारा सामान मिल जाएगा।


विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सपा के विरेन्द्र कुमार यादव के सवाल पर बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों के हर बच्चे को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में दो जोड़ी यूनिफार्म, एक जोड़ी जूता व दो जोड़ी मोजे, एक स्वेटर और एक स्कूल बैग देने के लिए अभिभावक के खाते में 1100 रुपये दिए जाते हैं। सत्र 2021-22 में इसके लिए 1852.52 करोड़ रुपये की धनराशि जारी हुई थी जिसमें से 1695.05 करोड़ रुपये खातों में भेजे गए हैं।


संसदीय कार्यमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि पहले जो सिली-सिलाई यूनिफार्म मिलती थी, उसमें बच्चों को उनकी नाप के कपड़े नहीं मिल पाते थे। अभिभावकों की मांग थी कि यदि वे खुद यूनिफार्म खरीद सकेंगे तो नाप सही होगी। इस पर नेता प्रतिपक्ष अखिलेश यादव और सपा के लालजी वर्मा ने पूछा कि सरकार वह दुकान बता दे जहां से 1100 रुपये में बच्चों के लिए यह सारा सामान मिल जाएगा।


सुरेश खन्ना ने कहा कि मिल जाएगा बशर्ते यूनिफार्म के लिए 1000 रुपये प्रति मीटर वाला कपड़ा न लिया जाए। इस पर अखिलेश ने कहा कि कपड़े की गुणवत्ता से ही यूनिफार्म की कीमत बढ़ती है। डबल इंजन की सरकार को बच्चों को 1000 रुपये प्रति मीटर वाला कपड़ा देना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि गुणवत्ता पहले देखी जाए या नाप? जवाब में खन्ना ने कहा कि नाप पहले जरूरी है, गुणवत्ता बाद में।


महंगाई बढ़ी तो मिड-डे मील का लागत मूल्य क्यों नहीं : राष्ट्रीय लोक दल के प्रसन्न कुमार ने बेतहाशा बढ़ती महंगाई के सापेक्ष बच्चों को स्कूल में दिये जाने वाले मिड-डे मील के लागत मूल्य में पिछले दो वर्षों के दौरान वृद्धि न किये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि महंगाई को देखते हुए कम लागत मूल्य में भोजन की पौष्टिकता कैसे सुनिश्चित की जा सकती है। इस पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि समय-समय पर मिड-डे मील की परिवर्तन लागत में वृद्धि होती रही है। बच्चों को निर्धारित मेन्यू के तहत भोजन दिया जाता है जिसकी पौष्टिकता भी सुनिश्चित की जाती है। उनके जवाब से असंतुष्ट प्रसन्न कुमार ने कहा कि क्या जहर खिला देंगे बच्चों को?

17000 अनुदेशक मानदेय मामले में बिना रिकॉर्ड के आए अंडर सेक्रेट्री के आचरण से हाईकोर्ट नाराज, सुनवाई टली - अगली सुनवाई 11 जुलाई को

17000 अनुदेशक मानदेय मामले में बिना रिकॉर्ड के आए अंडर सेक्रेट्री के आचरण से हाईकोर्ट नाराज, सुनवाई टली - अगली सुनवाई 11 जुलाई को


बिना रिकार्ड के खंडपीठ के समक्ष पेश हुए थे केंद्र सरकार के अधिकारी पर बरसा हाईकोर्ट का गुस्सा,  प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों के मानदेय से जुड़ा मसला



प्रयागराज: प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 27 हजार से अधिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपया प्रतिमाह मानदेय देने संबंधी एकल पीठ के निर्णय के खिलाफ प्रदेश सरकार की अपीलों पर मंगलवार को भी सुनवाई पूरी नहीं हो सकी। 


भारत सरकार की तरफ से मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ में अनुसचिव (अंडर सेक्रेटी) स्वर्निश कुमार सुमन बिना किसी रिकॉर्ड पेश हुए। उनके व्यवहार से खफा कोर्ट ने आदेश दिया कि सरकार उन्हें प्रयागराज आने का यात्रा भत्ता नहीं दें। कोर्ट ने टिप्पणी की कि वह प्रयागराज घूमने आए हैं। अपर सालिसिटर जनरल (एएसजी) शशि प्रकाश सिंह के अनुरोध पर मुकदमे की सुनवाई को फिर टाल दिया गई। अब सुनवाई 11 जुलाई को होगी। 


मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेश बिंदल तथा जस्टिस जेजे मुनीर की खंडपीठ प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा दाखिल अपीलों की सुनवाई कर रही है। राज्य सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की प्रयागराज स्थित प्रधान पीठ तथा लखनऊ बेंच में अपील की है। इनकी एक साथ सुनवाई हो रही है। लखनऊ से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से वरिष्ठ अधिवक्ता एलपी मिश्र तथा इलाहाबाद हाई कोर्ट से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी राज्य सरकार की तरफ से उपस्थित रहे। 


अनुसचिव को भारत सरकार के एएसजी ने स्वयं कोर्ट से अनुरोध कर बुलाया था। केंद्र सरकार की तरफ पिछली तिथि पर अनुरोध किया गया था कि एक मौका दिया जाए। इस पर मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 24 मई को केस सुनने का निर्देश दिया था। केंद्र सरकार को यह बताना है कि अनुदेशकों को दिए जाने वाले मानदेय के मद में उसने राज्य सरकार को कितना पैसा दिया?


 राज्य सरकार का कहना है कि अनुदेशकों की नियुक्ति कांट्रेक्ट आधार पर की गई है। कांट्रेक्ट में उल्लेखित शतर्ें और मानदेय लागू होगा। केंद्र सरकार ने अपना अंश राज्य सरकार को नहीं दिया है। अनुदेशकों का कहना है कि केंद्र सरकार ने उनका मानदेय 2017 में 17 हजार रुपये कर दिया था। इसके बाद भी उन्हें बढ़ा हुआ मानदेय नहीं मिल रहा है।

IGNOU : जुलाई सत्र के लिए 30 जून तक करें दोबारा पंजीकरण

IGNOU  : जुलाई सत्र के लिए 30 जून तक करें दोबारा पंजीकरण


नई दिल्ली। इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (इग्नू) में शैक्षणिक सत्र 2022-23 के तहत जुलाई सत्र में दाखिले के लिए उम्मीदवार 30 जून तक दोबारा रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। स्नातक, स्नातकोत्तर प्रोग्राम के सभी छात्रों को पंजीकरण करना अनिवार्य है। इग्नू में दोबारा जुलाई सत्र में दाखिले के लिए ऑनलाइन आवेदन समर्थ पोर्टल पर लॉगइन करके रजिस्ट्रेशन करना होगा।


विश्वविद्यालय प्रशासन मुताबिक, इग्नू में स्नातक और स्नातकोत्तर प्रोग्राम में विभिन्न डिग्री प्रोग्राम में अगले सेमेस्टर में दाखिले के सभी छात्रों को दोबारा रजिस्ट्रेशन करना अनिवार्य होता है। इसलिए विश्वविद्यालय में पहले से विभिन्न डिग्री प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे छात्र दोबारा रजिस्ट्रेशन 30 जून तक कर लें।


 सबसे पहले समर्थ पोर्टल पर https://ignou.samarth.edu.in पर रजिस्ट्रेशन करना होगा। इसके बाद छात्र दोबारा ऑनलाइन आवेदन पत्र भर सकते हैं। पोर्टल पर जाकर न्यू रजिस्ट्रेशन बटन पर क्लिक करना होगा। यहां छात्र को अपना मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी लिखना होगा। इसी पर विश्वविद्यालय के जरूरी जानकारियां भेजी जाएंगी। यदि छात्र ने पहले से पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर रखा होगा तो उसे अपना नाम और पासवर्ड डालकर ओपन करना होगा। इसके बाद छात्र को अपना कोर्स, डिग्री नाम या प्रोग्राम चुनना होगा।

खंड शिक्षा अधिकारियों की चयन सूची रद्द करने के मामले में आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब तलब

खंड शिक्षा अधिकारियों की चयन सूची रद्द करने के मामले में आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब तलब


 हाईकोर्ट ने प्रदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों के 309 पदों पर चयन की जारी सूची को लेकर दाखिल याचिका पर उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग सहित सभी पक्षकारों से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने धर्मेंद्र कुमार यादव व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। 


याचिका में कहा गया है कि चयन में ओबीसी अभ्यर्थियों का आरक्षण सही से लागू नहीं किया गया है, इसलिए चयन सूची रद्द की जाए। याचियों का कहना है कि ओबीसी वर्ग को घोषित पदों की तुलना में कम आरक्षण दिया गया है। 309 पदों के सापेक्ष सिर्फ 31 ओबीसी चयनित हुए हैं जबकि 27 प्रतिशत के हिसाब से 83 पद मिलना चाहिए। कोर्ट ने इस मामले में 31 चयनित अभ्यर्थियों को भी पक्षकार बनाते हुए सभी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Tuesday, May 24, 2022

फतेहपुर : रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया बेसिक शिक्षा विभाग का बाबू, एरियर भुगतान के नाम पर शिक्षक से वसूली का प्रयास पड़ा भारी

फतेहपुर : रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया बेसिक शिक्षा विभाग का बाबू, एरियर भुगतान के नाम पर शिक्षक से वसूली का प्रयास पड़ा भारी


यूपी के फतेहपुर जिले में आज एंटी करप्शन कानपुर की टीम ने आज शिक्षा विभाग के वरिष्ठ लिपिक को रंगे हाथ पैसा लेते हुए धर दबोचा है। एंटी करप्शन टीम की इस कार्यवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने वरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर थाने ले गई जहाँ आरोपी लिपिक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है 

बीच में आरोपित लिपिक जितेंद्र 


फतेहपुर जिले में जिला पंचायत कार्यालय स्थित डीआई ऑफिस पहुंचकर एंटी करप्शन टीम ने छापेमारी कर ऑफिस में तैनात वरिष्ठ लिपिक को 12 हजार का रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ धर दबोच लिया और एंटी करप्शन टीम की इस कार्यवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया। टीम ने वरिष्ठ लिपिक को गिरफ्तार कर थाने ले गई जहाँ आरोपी लिपिक के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है। 


आपको बताते चलें कि जिले के हथगाम ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय में तैनात टीचर देवेंद्र सिंह अपने एरियर का 2 लाख 68 हजार रुपए निकलवाने के लिए काफी दिनों से ऑफिस का चक्कर काट रहा था लेकिन रिश्वत की मांग पूरी न होने के कारण उसका पैसा बाबू द्वारा पास नहीं किया जा रहा था। जिसके बाद उसने एंटी करप्शन टीम से संपर्क किया और अपनी पूरी बात अधिकारीयों से बताई , जिसके बाद टीम के निर्देश पर टीचर ने पूरी भूमिका रची और टीम के साथ डीआई ऑफिस पहुंचा और वरिष्ठ लिपिक द्वारा मांगी गई 14 हजार की रिश्वत की जगह उसने 12 हजार की रिश्वत उसके हाथ में पकड़ा दी। 


जिसके बाद मौके पर मौजूद एंटी करप्शन की टीम ने वरिष्ठ लिपिक जितेंद्र श्रीवास्तव को मौके पर रंगे हाथ धर दबोचा और अपने साथ थाने ले जाकर पूछताछ करते हुए सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करते हुए आगे की कार्यवाई में जुट गई है।


फतेहपुर।  एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को डीआई कार्यालय के दफ्तर में छापा मारा। यहां तैनात लिपिक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। वह खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय में हथगाम और हसवा ब्लाक का कार्यभार देखता है। पटल प्रभारी लिपिक जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ हथगाम ब्लाक के शिक्षक ने भ्रष्टाचार निवारण विभाग में शिकायत की थी। वह एरियर भुगतान के एवज में रिश्वत मांग रहा था।


इस पर योजना के तहत शिक्षक को टीम ने रुपये देकर खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय दफ्तर में भेजा। लिपिक ने जैसे ही रिश्वत के रुपये पकड़े तो पीछे से आई टीम ने उसे रंगे हाथ दबोच लिया। इसके बाद टीम उसे लेकर कोतवाली चली गई। हथगाम ब्लाक के शिक्षक देवेन्द्र को एरियर भुगतान में वह परेशान कर रहा था। लिपिक पर कार्रवाई के लिए पुलिस के पास ले जाया गया है, जहां मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।

सीआईएससीई : कक्षा 10 और 12 के विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव, स्कूलों को भेजा गया बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप

सीआईएससीई : कक्षा 10 और 12 के विषयों के पाठ्यक्रम में बदलाव, स्कूलों को भेजा गया बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप

सीआईएससीई के सचिव गैरी अरथून ने स्कूलों को पत्र जारी कर बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप जारी किया है। इस सत्र में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा दो सेमेस्टर की बजाय पूर्व की भांति एक बार में ही होगी।


काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशंस (सीआईएससीई) ने कक्षा 10 और 12 के कई पाठ्यक्रमों में बदलाव किया है। वर्ष 2023 में होने वाली बोर्ड परीक्षा बदले हुए पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। 

सीआईएससीई के सचिव गैरी अरथून ने स्कूलों को पत्र जारी कर बदले पाठ्यक्रम का प्रारूप जारी किया है। इस सत्र में कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा दो सेमेस्टर की बजाय पूर्व की भांति एक बार में ही होगी। सचिव ने स्कूलों को बदले पाठ्यक्रम के अनुसार ही पठन-पाठन और परीक्षा कराने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि जुलाई में विषयों के मॉडल प्रश्न पत्र भी जारी कर दिए जाएंगे।

इन विषयों के पाठ्यक्रम में किया है बदलाव
कक्षा 10 में अंग्रेजी, इंडियन लैंग्वेजेस, मॉडर्न फॉरेन लैंग्वेज, हिस्ट्री एंड सिविक्स, जियोग्राफी, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, इकोनॉमिक्स, कामर्शियल स्टडीज, क्लासिकल लैंग्वेज, एनवायरमेंटल साइंस, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, इकोनॉमिक एप्लीकेशंस, कामर्शियल एप्लीकेशंस, आर्ट, परफॉर्मिंग आर्ट्स, होम साइंस, कुकरी, फैशन डिजाइनिंग, फिजिकल एजुकेशन, योगा, टेक्निकल ड्राइंग एप्लीकेशंस, एनवायरमेंटल एप्लीकेशंस, मास मीडिया एंड कम्यूनिकेशन, हॉस्पिटैलिटी मैनेजमेंट, ब्यूटी एंड वेलनेस के पाठ्यक्रम में बदलाव किया गया है। कक्षा 12 में इंग्लिश, इंडियन लैंग्वेजेस, मॉडर्न फॉरेन लैंग्वेजेज, क्लासिकल लैंग्वेजेज, इलेक्टिव इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस, जियोग्राफी, सोशियोलॉजी, साइकोलॉजी, इकोनॉमिक्स, कॉमर्स, अकाउंट्स, बिजनेस स्टडीज, मैथमेटिक्स, फिजिक्स, केमेस्ट्री, बायोलॉजी, होम साइंस, फैशन डिजाइनिंग, इलेक्ट्रिसिटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग सांइस, कंप्यूटर साइंस, जियोमेट्रिकल एंड मैथमेटिकल ड्राइंग, जियोमेट्रिकल एंड बिल्डिंग ड्राइंग, आर्ट, म्यूजिकल, फिजिकल एजुकेशन, एनवायरमेंटल साइंस, बायोटेक्नोलॉजी, मास मीडिया कम्यूनिकेशन, हॉस्पिटेलिटी मैनेजमेंट और लीगल स्टडीज में बदलाव किया गया है।

राज्य अध्यापक पुरस्कार : 10 जिलों से सिर्फ 12 आवेदन, शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है चयन प्रक्रिया

राज्य अध्यापक पुरस्कार : 10 जिलों से सिर्फ 12 आवेदन, शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है चयन प्रक्रिया


वाराणसी : उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षक सम्मान की चयन प्रक्रिया की शुरुआत से ही सवालों में घिर गई है।


सरकार ने प्रदेश भर से शिक्षकों से आवेदन मांगे हैं, लेकिन वह आवेदन ही नहीं कर रहे हैं। हालात ये है कि प्रदेश के 28 जिलों से एक भी आवेदन नहीं आए हैं। भदोही, मिर्जापुर, वाराणसी भी इसमें शामिल है। प्रयागराज में पांच, आजमगढ़ व सिद्धार्थनगर में चार आवेदन आए हैं। बस्ती, फिरोजाबाद, जौनपुर, सहारनपुर, सीतापुर में तीन आवेदन आए हैं। वहीं, बलिया, चंदौली, गाजीपुर में दो आवेदन आए है। एडी बेसिक व बीएसए के आदेश के बाद भी भदोही और वाराणसी से एक भी आवेदन नहीं आए हैं।

यू-डायस में भरा जाएगा स्मार्ट टीवी व प्रोजेक्टर का भी ब्योरा

गोरखपुर : यू-डायस में भरा जाएगा स्मार्ट टीवी व प्रोजेक्टर का भी ब्योरा


◆ गलत आंकड़ा देने पर वाले स्कूलों पर होगी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई

◆ यू-डायस में विस्तृत विवरण भरने का 31 मई तक का समय दिया गया


गोरखपुर : परिषदीय स्कूलों में उपलब्ध स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर का डाटा भी यू-डायस ( यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन) पर भरा जाएगा। चाहे वह किसी भी साधन से स्कूल में लगाया गया हो। इसे अंकित न करने पर परफार्मेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआइ) रैंकिंग में प्रदेश को अंक नहीं मिलते। इसको देखते हुए शासन स्तर से 31 मई तक यू-डायस में विवरण भरने का निर्देश दिया गया है। साथ ही यदि एक स्कूल परिसर में एक से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र हैं तो उनका कोड भी अंकित करना होगा।

यदि स्कूलों में किसी भी तरह की मरम्मत की जरूरत है तो संबंधित फार्म में उसका ब्योरा भरा जाए अन्यथा प्रस्ताव नामंजूर कर दिया जाएगा। इस बार प्री-प्राइमरी में पढ़ाई शुरू हो चुकी है। अब इसके लिए भी प्रस्ताव पीएबी में भेजा गया है। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी रमेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि यदि यू-डायस के अंतर्गत डाटा कैप्चर फार्मेट में भरे गए आंकड़े व ब्योरा सही नहीं मिलते हैं तो संबंधित विद्यालय के प्रधानाध्यापक, प्रबंधक, शिक्षक संकुल तथा खंड शिक्षाधिकारी उत्तरदायी होंगे। मान्यता प्राप्त विद्यालय, मदरसा, सीबीएसई व आइसीएसई से मान्यता प्राप्त विद्यालय अपना ब्योरा आनलाइन नहीं कराता है तो उनके विरुद्ध मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।

हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

हाईकोर्ट : सहायक अध्यापक की कोरोना से मौत पर दो नाबालिग बच्चों को मुआवजा देने का आदेश

प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डीएम ललितपुर को निर्देश दिया है कि चुनाव ड्यूटी में कोविड महामारी से मृत सहायक अध्यापक के दो नाबालिग बच्चों की अर्जी पर दो हफ्ते में सुनवाई करें और दो माह के भीतर एक जून 2021 के शासनादेश के तहत मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करें। हाईकोर्ट ने मुआवजा अर्जी अपलोड करने की तिथि 15 जून 2022 तक बढ़ा दी है और कहा है कि यह आदेश दिया है। विशेष परिस्थितियों को देखते हुए दिया गया है। इसका लाभ अन्य लोगों को नहीं मिलेगा।


हाईकोर्ट ने कहा है कि मुआवजा राशि दोनों नाबालिग बच्चों के नाम राष्ट्रीय बैंक में सावधि जमा की जाए और बालिग होने तक जिलाधिकारी उनके वैधानिक संरक्षक के जरिये निगरानी रखें। कोर्ट ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ललितपुर को भी उन्हें निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। साथ ही महानिबंधक को रिपोर्ट भेजने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी तथा न्यायमूर्ति वीडी चौहान की खंडपीठ ने कुमारी प्रियंका व अभिषेक की याचिका को स्वीकार करते हुए

याचीगण की ओर से कहा गया कि उनके पिता सहायक अध्यापक थे। चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना से उनकी मौत हो गई। शासनादेश के तहत उन्होंने बीएसए ललितपुर को अर्जी दी लेकिन जिलाधिकारी के जरिये समय रहते उसे पोर्टल पर अपलोड नहीं करा सके। भगवान सिंह ने कोर्ट से वैधानिक संरक्षक का आदेश लेकर मदद की सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट की शरण ली जिस पर कोर्ट ने बड़ी राहत दी है।

पढ़ाई के बाद अब बेरोजगार नहीं रहेंगे छात्र, तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार

पढ़ाई के बाद अब बेरोजगार नहीं रहेंगे छात्र, तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार



◆ उच्च शिक्षा के दौरान प्रत्येक स्तर पर अनिवार्य रूप से मिलेगी स्किल की भी शिक्षा

◆ तैयार होगा एक सिंगल नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क, यूजीसी ने नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क का मसौदा किया तैयार

◆ प्रत्येक सेमेस्टर में स्किल का एक न्यूनतम क्रेडिट स्कोर होगा तय


नई दिल्ली : उच्च शिक्षा की पढ़ाई अब सिर्फ डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट बटोरने के लिए नहीं होगी, बल्कि छात्रों को इस तरह से तैयार भी करेगी कि पढ़ाई के बाद उन्हें बेकार न घूमना पड़े। उच्च शिक्षा के नए क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने में जुटे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इसे लेकर जो मसौदा तैयार किया है, उसके तहत उच्च शिक्षा के सभी स्तरों पर छात्रों को अब अनिवार्य रूप से कौशल ( स्किल) की शिक्षा भी दी जाएगी।

इसके तहत नेशनल हायर एजुकेशन क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएचईक्यूएफ) के साथ नेशनल स्किल क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) को जोड़ा जा रहा है। जो जल्द ही नए रूप में सामने आएगा। इसके साथ ही एक नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क भी तैयार होगा। यूजीसी के अनुसार, इस पहल से उच्च शिक्षा के लिए जो नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क तैयार होगा, उसमें छात्र को उच्च शिक्षा की पढ़ाई के दौरान किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाएगा, जिसके आधार पर वह कहीं भी नौकरी या फिर अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकेगा। यूजीसी ने इस दौरान उच्च शिक्षा के सभी स्तरों के लिए स्किल को शामिल करते हुए जो नया क्वालीफिकेशन फ्रेमवर्क बनाया है। इसमें एक साल का सर्टिफिकेट कोर्स करने वालों को स्किल का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसका क्रेडिट उसमें दर्ज होगा। इसी तरह डिप्लोमा या फिर डिग्री कोर्स की पढ़ाई करने वाले छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर में स्किल से जुड़े प्रशिक्षण के साथ कोर्स के पूरा होने पर इंटर्नशिप भी कराया जाएगा। इनमें बीए, बीएससी और बीकाम जैसी पढ़ाई करने वाले छात्र भी शामिल होंगे। मौजूदा समय में बीए, बीएससी और बीकाम के बाद छात्रों के लिए कोई नौकरी नहीं है, क्योंकि उन्हें सिर्फ विषयों की पढ़ाई कराई गई है। इसके अलावा उनके पास कोई स्किल नहीं होता है। ऐसी स्थिति में वह उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद भी नौकरी या रोजगार की तलाश में भटकते रहते हैं।

सत्र में देरी से नहीं घबराएं छात्र, सीबीएसई ने घटाया पाठ्यक्रम

सत्र में देरी से नहीं घबराएं छात्र, सीबीएसई ने घटाया पाठ्यक्रम

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से नौवीं से 12वीं के परीक्षा पैटर्न में बदलाव के साथ-साथ पाठ्यक्रम को भी 30 प्रतिशत तक घटाया है। शिक्षा सत्र देरी से शुरू होने के चलते विद्यार्थियों पर ज्यादा दबाव न आए, इसके लिए कुछ कविताएं और पाठ हटाए गए हैं। बोर्ड ने कोरोना महामारी के चलते बीते साल भी लगभग 30 प्रतिशत तक पाठ्यक्रम घटाया था। हालांकि, सत्र 2021-22 में जो पाठ घटाए थे, उन्हें सत्र 2022-23 में शामिल करके कई अन्य पाठ घटाएं हैं। बदलाव केवल हिंदी साहित्य में किए है। व्याकरण में कोई भी पाठ नहीं घटाया गया है। बोर्ड ने नौवीं कक्षा से सियारामशरण गुप्त की कविता ‘एक फूल की चाह’ को हटाया है। इसमें एक दलित लड़की पर ऊंची जाति के लोग अत्याचार करते हैं। इसके साथ ही ‘धर्म की आड़’ और लेखिका चपला देवी का पाठ नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कम दिया गया, हजारी प्रसाद द्विवेदी का पाठ एक कुत्ता और एक मैना हटाया गया है। साथ ही 11वीं में कबीर और मीरा के पद नंबर दो और पंत की ‘वे आंखें’ को हटाया गया है। 12वीं में निराला, केशव दास, घनानंद की कविताओं को हटाया है।


नौवीं और 10वीं में हटाए गए पाठ - हिंदी मातृभाषा (क्षितिज भाग- 1)- काव्य खंड- ’केदारनाथ अग्रवाल- चंद्र गहना से लौटती बेर ’चंद्रकांत देवताले- यमराज की दिशा गद्य खंड- ’चपला देवी - नाना साहब की पुत्री देवी मैना को भस्म कम दिया गया ’हजारी प्रसाद द्विवेदी- एक कुत्ता और एक मैना हिंदी मातृभाषा (क्षितिज भाग -2)- काव्य खंड- ’देव- सवैया, कवित्त ’गिरिजाकुमार माथुर- छाया मत छूना ’त्रतुराज- कन्यादान गद्य खंड- ’महावीरप्रसाद द्विवेदी- स्त्री शिक्षा के विरोधी कुतर्कों का खंडन ’सर्वेश्वर दयाल सक्सेना- मानवीय करुणा की दिव्य चमक


11वीं और 12वीं में घटाए गए पाठ- हिंदी आधार, (काव्य खंड) ’ गजानन माधव मुक्तिबोध- सहर्ष स्वीकारा है ’ फिराक गोरखरपुरी- गजल हिंदी आधार, (गद्य खंड)- ’ विष्णु खरे- चार्ली चैप्लिन यानी हम सब ’ रजिया सज्जाद जहीर - नमक - एन फ्रैंक- डायरी के पन्ने हिंदी ऐच्छिक- पाठ्यपुस्तक- (अंतरा भाग 1) ’ नए जन्म की कुंडली ’ पद्माकर ’ महादेवी वर्मा- सब आंखों के आंसू उजले ’ नरेंद्र शर्मा- नींद उचट जाती है अंतरा भाग 2 ’ सूर्यकांत त्रिपाठी निराला - गीत गाने दो मुझे ’ विष्णु खरे- एक कम, सत्य ’ केशवदास- रामचंद्रिका ’ घनानंद-सवैया ’ ब्रजमोहन व्यास- कच्चा चिट्ठा ’ रामविलास शर्मा- यशास्मै रोचते विश्वम अनुपूरक पाठ्यपुस्तक-अंतराल 1 ’ अंडे के छिलके (एकांकी) पूरक पाठ्यपुस्तक- अंतराल 2 ’ संजीव- आरोहण


नौवीं और 10वीं हिंदी मातृभाषा - (कृतिका भाग-1)- ’ विद्यासागर नौटियाल- माटी वाली ’ शमशेर बहादुर सिंह- किस तरह आखिरकार मैं हिंदी में आया हिंदी मातृभाषा -(कृतिका भाग- 2) ’ 1-एही ठैयां झुलनी हेरामी हो रामा ’ 2- जार्ज पंचम की नाक


’कोरोना महामारी के चलते बीते साल भी की गई थी कटौती ’अब केवल हिंदी साहित्य में किए गए हैं कुछ बदलाव

द्वितीय भाषा के रूप में हिंदी नौवीं और 10वीं - पाठ्यपुस्तक स्पर्श, (भाग-1)- ’धर्म की आड़ ’आदमीनामा ’एक फूल की चाह पाठ्यपुस्तक, स्पर्श, (भाग -2)- ’बिहारी- दोहे ’महादेवी वर्मा- मधुर-मधुर मेरे दीपक जल ’अंतोन चेखव- गिरगिट पाठ्यपुस्तक संचयन(भाग-1) ’हामिद खां ’दिये जल उठे - पूरक पुस्तक संचयन, (भाग-2) कोई परिवर्तन नहीं।

भ्रष्ट आचरण के चलते गाजीपुर जिलाधिकारी के निशाने पर रही BEO के खिलाफ शासन का निर्णय, अन्यत्र स्थानांतरण के साथ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश

भ्रष्ट आचरण के चलते गाजीपुर जिलाधिकारी के निशाने पर रही BEO के खिलाफ शासन का निर्णय, अन्यत्र स्थानांतरण के साथ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश 

गाजीपुर की विवादित खंड शिक्षा अधिकारी का तबादला


लखनऊ: शासन ने गाजीपुर के मरदह ब्लॉक की खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. कल्पना के विरुद्ध अनुशासिक कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही डा. कल्पना का तबादला गाजीपुर से बाहर करने के निर्देश दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव आरवी सिंह ने मंगलवार को आदेश जारी किया। खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ गाजीपुर के जिलाधिकारी ने शासन को रिपोर्ट भेजी थी। कल्पना के खिलाफ जिलाधिकारी ने अपनी रिपेार्ट में लिखा था कि वह लगातार विवादों के घेरे में है। उनकी विवादित कार्यशैली और पर्यवेक्षण में अनियमितता के कारण मरदह में शिक्षक कार्य नकारात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है।


Monday, May 23, 2022

यूपी बोर्ड : वेबसाइट पर होगा 28 हजार स्कूलों का लेखा-जोखा

अब यूपी बोर्ड के पोर्टल पर मिलेगी स्कूलों की जानकारी


प्रयागराज । प्रदेश के 28 हजार से अधिक राजकीय सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों से जुड़ीं महत्वपूर्ण जानकारियां अब यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड की जाएंगी।


इसके लिए बोर्ड की वेबसाइट 'www.upmsp.edu.in' पर अलग से वेबपेज तैयार कराया जा रहा है। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी कर प्रत्येक स्कूल की फोटो, उनकी महत्वपूर्ण उपलब्धियां बोर्ड की वेबसाइट के स्कूल पोर्टल पर 25 मई तक अपलोड कराने के निर्देश दिए हैं। प्रधानाचार्यों को भी आवश्यक सूचनाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।




यूपी बोर्ड : वेबसाइट पर होगा 28 हजार स्कूलों का लेखा-जोखा

प्रयागराज : यूपी बोर्ड से जुड़े प्रदेश के 28 हजार से अधिक राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों का लेखा-जोखा अब यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर होगा। सूचनाओं से संबंधित वेबपेज बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर तैयार कराया जा रहा है। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को 21 मई को पत्र लिखकर स्कूल की फोटो, महत्वपूर्ण उपलब्धियां बोर्ड की वेबसाइट पर स्कूल के पोर्टल पर 25 मई तक अपलोड करवाने के निर्देश दिए हैं।


ये भी होना है
 
● 9वीं से 12वीं तक के एक करोड़ से अधिक बच्चों की ई-मेल आईडी होगी।

● स्कूल की वेबसाइट और सभी शिक्षकों की ई-मेल आईडी भी बनवाई जाएगी।