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Wednesday, August 13, 2025

बेसिक स्कूलों में 50 छात्रों पर दो शिक्षक व एक शिक्षामित्र होंगे तैनात

बेसिक स्कूलों में 50 छात्रों पर दो शिक्षक व एक शिक्षामित्र होंगे तैनात

विधान सभा प्रश्नकाल में बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह बोले, छात्र-शिक्षक अनुपात और बेहतर बनाया जाएगा

कहा- विपक्ष ने विलय व्यवस्था का राजनीतिकरण कर आमजन को किया है गुमराह


लखनऊ । बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को विधान सभा में एक प्रश्न के जवाब में बताया कि विलय के बाद विद्यालयों में 50 छात्रों पर दो शिक्षक और एक शिक्षामित्र की तैनाती की जाएगी। छात्र-शिक्षक अनुपात को सुधारने और शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए ऐसा किया जाएगा। स्कूलों में बच्चों के प्रवेश की आयु चार वर्ष करना संभव नहीं, शिक्षा के अधिकार अधिनियम के प्रविधान इसकी अनुमति नहीं देते हैं। तीन से छह वर्ष के बच्चों के लिए आंगनबाड़ी में पढ़ाई व पोषण की व्यवस्था पहले से है। वर्तमान में प्राथमिक विद्यालयों में 1.05 करोड़ बच्चे नामांकित हैं। इनमें 3,38,590 शिक्षक और 1,43,450 शिक्षामित्र तैनात हैं।


सपा के पंकज पटेल, अनिल प्रधान व प्रभु नारायण सिंह के प्रश्न पर संदीप ने कहा कि विपक्ष ने स्कूलों की विलय व्यवस्था का पूरी तरह राजनीतिकरण कर आमजन को गुमराह किया है। सच्चाई यह है कि सरकार ने शिक्षा के स्तर को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए ऐतिहासिक कार्य किए हैं। वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में कुल नामांकित छात्रों की संख्या लगभग 1.48 करोड़ से अधिक है। परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की कुल संख्या 6.28 लाख से अधिक है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 43,01,483 बच्चों को पढ़ाने के लिए 1,20,860 शिक्षक और 25,223 अनुदेशक हैं।

प्राथमिक शिक्षा में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 और उच्च प्राथमिक शिक्षा में 35:1 का अनुपात है। यह पूरी तरह संतुलित है और इसे बनाए रखने की कार्रवाई जारी रहेगी। स्कूल बंद करने के आरोपों को खारिज करते हुए मंत्री ने कहा कि सरकार ने एक भी विद्यालय बंद करने का निर्णय नहीं किया है।

सभी परिषदीय विद्यालय बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित हो रहे हैं। स्कूलों के विलय पर मंत्री ने बताया कि एक किलोमीटर के दायरे और 50 से कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों की ही पेयरिंग की गई है। इन स्कूलों को संसाधनयुक्त विद्यालयों में समाहित किया गया है, ताकि बच्चों को बेहतर सुविधा और निकटतम स्कूल की पहुंच मिले। 

Monday, July 11, 2022

शिक्षक-छात्र अनुपात के आकलन में फंसी बेसिक शिक्षक भर्ती, मंत्री के बयान से बेरोजगार आहत

शिक्षक-छात्र अनुपात के आकलन में फंसी बेसिक शिक्षक भर्ती,  मंत्री के बयान से बेरोजगार आहत


प्रयागराज। शिक्षक-छात्र अनुपात के आकलन में प्राथमिक शिक्षक भर्ती फंसी हुई है। अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के उस बयान पर आपत्ति जताई है, जिसमें उन्होंने शिक्षक-छात्र अनुपात के आकलन के बाद ही नई भर्ती की जाएगी। 


अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने खुद ही सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा दिया है कि 51112 पद खाली है। विभाग ने चुनाव से पूर्व 16200 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने की बात कही थी। हजारों पद रिक्त होने के बावजूद टीईटी और सीटीईटी पास अभ्यर्थी नौकरी के लिए भटक रहे हैं। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि रिक्त पदों का विज्ञापन शीघ्र जारी किया जाए।


बेसिक शिक्षक भर्ती पर मंत्री के बयान से आहत


प्रयागराज। योगीराज 2.0 के 100 दिन की कार्ययोजना के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के बयान, अभी विभाग शिक्षक छात्र अनुपात का आकलन कर रहा है उसके बाद ही जरूरत पड़ने पर नई शिक्षक भर्ती देंगे, से बेरोजगार आहत हैं। शिक्षक भर्ती अभियान से जुड़े पंकज मिश्रा का कहना है बेसिक शिक्षा विभाग ने खुद ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर बताया है कि परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 51,112 पद खाली हैं। अब इस प्रकार का बयान बेहद दुखद है।

Friday, June 17, 2022

शिक्षामित्रों को पूर्णकालिक शिक्षक पदों की संख्या में न जोड़ें जाने की मांग

शिक्षामित्रों को पूर्णकालिक शिक्षक पदों की संख्या में न जोड़ें जाने की मांग 


प्रयागराज : परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए प्रशिक्षितों ने शिक्षक - छात्र अनुपात का डाटा सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। प्रशिक्षितों ने गुरुवार को सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को संबोधित ज्ञापन उपसचिव को दिया। 


वार्ता में उनसे बताया कि प्रशिक्षित अभ्यर्थी काफी समय से शिक्षक भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे हैं। रिक्त पदों की संख्या के संबंध में स्पष्ट किया कि शिक्षामित्रों के पदों को पूर्णकालिक शिक्षक के रूप में न जोड़ा जाए, जिससे पदों को नुकसान न हो । 


उपसचिव ने प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को बताया कि सभी जिलों से शिक्षकों का आंकड़ा मंगाया जा रहा है।

Saturday, October 2, 2021

परिषदीय जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते 70% शिक्षक पढ़ा रहे सभी विषय

परिषदीय जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षकों की कमी के चलते 70% शिक्षक पढ़ा रहे सभी विषय


प्रयागराज : सूबे की बेसिक शिक्षा पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कहीं न कहीं कमी बनी हुई है। राज्य सरकार की ओर से समग्र शिक्षा अभियान 2021-22 के लिए भेजी गई रिपोर्ट पर गौर करने से साफ है कि उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं की जा सकी है।


स्थिति यह है कि कक्षा छह से आठ तक के 70 प्रतिशत शिक्षक तीनों विषय (भाषा, गणित/विज्ञान और सामाजिक विषय) पढ़ा रहे हैं। सामाजिक विषय में 1183 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक उपलब्ध है। शिक्षकों की कमी का मुख्य कारण उच्च प्राथमिक स्तर पर सीधी भर्ती और प्रमोशन न होना है।


आखिरी बार उच्च प्राथमिक स्तर पर 2013 में विज्ञान व गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई थी। उसके बाद से भर्ती न होने और तमाम जिलों में प्रमोशन न होने के कारण इन स्कूलों में शिक्षकों के 9451 पद खाली हैं।

Thursday, June 24, 2021

बड़ी समस्या : शिक्षकों की कमी से जूझ रहे शहरी बेसिक स्कूल

बड़ी समस्या : शिक्षकों की कमी से जूझ रहे शहरी बेसिक स्कूल


वाराणसी : जिले के बेसिक स्कूलों का कायाकल्प करने के लिए स्मार्ट सिटी से लेकर विभिन्न योजनाओं से इन्हें जोड़ा गया है। ऑनलाइन शिक्षण पद्धति मिशन प्रेरणा जैसी योजनाएं भी जारी है। मगर शहर के स्कूलों को देखकर लगता है कि योजनाओं को अभी लंबा सफर तय करना है। शहर के 101 बेसिक स्कूलों में 32 ऐसे हैं, जहां एक शिक्षक है और छह ऐसे भी हैं जहां शिक्षामित्र कमान संभाले हुए हैं।


 नए परिसीमन के मुताबिक शहरी स्कूलों की संख्या 161 हो जाएगी। वरुणापार का हाल सबसे खराबः शहर में बेसिक स्कूलों को पांच जोन में बांटा गया है। बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो बरुणापार जोन का हाल सबसे खराब है। यहां 10 एकल स्कूल यानी एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूल है। साथ ही शहर के छह शिक्षकविहीन स्कूलों में चार इसी जोन में हैं। इन कुल 16 स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 1260 है, जबकि इस जोन में कुल 3347 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। 


इस जोन के कंपोजिट विद्यालय शिवपुर में 313 विद्यार्थी हैं, इसे एकल विद्यालय बी में रखा गया है। इसके बाद दशाश्वमेघ जोन में 9 एकल और एक शिक्षकविहीन स्कूल में 560 विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इस जोन के स्कूलों में कुल 1813 विद्यार्थी हैं। आदमपुर जोन के पांच एकल और एक शिक्षकविहीन स्कूल में 665 विद्यार्थी हैं। इसी जोन के छितनपुरा प्रा. विद्यालय में एक शिक्षामित्र के जिम्मे 82 बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है।

यह है परेशानी की बड़ी वजह

बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों के लिए शहरी व ग्रामीण कैडर बेटा है। गांवों के स्कूल मुख्यालय से दूर पड़ते हैं। इसलिए वही ज्यादा शिक्षक तैनाती चाहते हैं। ऐसे में शहर के स्कूलों में शिक्षकों की संख्या कम होती जा रही है। रविवार को आए बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चंद्र द्विवेदी ने भी इन हालात पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया कि कैबिनेट में शिक्षकों का कैंडर खत्म करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसे स्वीकृति मिलते ही शिक्षकों की कम संख्या को पूरा किया जा सकेगा।


शहरी क्षेत्र में शिक्षकों की कमी पूरी करने का प्रयास किया जा रहा है। नई भर्ती में वाराणसी को 27 शिक्षक मिलेंगे, जिन्हें इन स्कूलों में समायोजित करने की कोशिश रहेगी स्कूल में बच्चों के आने से पहले शिक्षकों की कमी पूरी कर ली जाएगी ताकि शिक्षण कार्य प्रभावित न हों। राकेश सिंह, बीएसए-वाराणसी

Saturday, January 12, 2019

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों में नहीं दिखता छात्र-शिक्षक अनुपात, 60 बच्चों में दो शिक्षक होने का शासन से मानक तय, कहीं कम बच्चों में शिक्षक अधिक तो कहीं शिक्षकों की संख्या रही कम

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों में नहीं दिखता छात्र-शिक्षक अनुपात, 60 बच्चों में दो शिक्षक होने का शासन से मानक तय, कहीं कम बच्चों में शिक्षक अधिक तो कहीं शिक्षकों की संख्या रही कम।


Monday, October 29, 2018

हाथरस : नवनियुक्ति के उपरांत विद्यालयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

हाथरस : नवनियुक्ति के उपरांत विद्यालयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

Tuesday, April 24, 2018

फतेहपुर : नगर क्षेत्र में 85 स्कूल और कुल 70 शिक्षक, एकल शिक्षकों के सहारे चल रही है प्राथमिक शिक्षा की गाड़ी, 20 जगहों पर केवल शिक्षामित्र

■ अवकाश पर जाने से कई स्कूलों में लग जाता ताला,

■ एक शिक्षक को दो स्कूलों की संभालनी पड़ती जिम्मेदारी

फतेहपुर : नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का पुरसाहाल नहीं है। शिक्षकों की बेहद कमी के चलते शासन के आदेश हवा में तैर रहे हैं। जिम्मेदार चाह कर भी इन स्कूलों की बदहाली को दूर नहीं कर पा रहे हैं। एक जगह तैनाती के साथ शिक्षकों को अन्य कामों के संपादन के लिए दूसरे स्कूलों का दायित्व निभाना पड़ रहा है। पठन पाठन का कार्य भगवान भरोसे ही चल रहा है।


नगर क्षेत्र मुख्यालय एवं ¨बदकी में 85 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित किए जा रहे हैं इन स्कूलों में चालू सत्र में महज 70 शिक्षक की तैनात है। बीते सत्र में 6 शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं आने वाले समय में इसी क्रम में सेवानिवृत्त का सिलसिला चलेगा। विभाग के शिक्षकों की इतनी तैनाती नहीं है कि वह कुल स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही तैनात कर पाए। शासन के दिशा निर्देश पर एक विद्यालय में दो से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं लेकिन इनमें से प्रधानाध्यापक को छोड़कर दूसरे शिक्षकों को अन्य स्कूलों का दायित्व विशेष आदेश पर दिया गया है। प्राथमिक की पांच कक्षाएं एवं उच्च प्राथमिक की तीन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अधिसंख्य जगहों में एकल शिक्षक के सहारे शिक्षा की गाड़ी चल रही है।



शिक्षकों की कमी के चलते शैक्षिक स्तर का क्या हाल होगा इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। जब शिक्षा के मंदिरों में गुरुजन ही नहीं होंगे तो फिर नौनिहालों कैसे पढ़ लिखकर बढ़ेंगे। यही वजह है कि लोग अपने पाल्यों को ऐसे विद्यालयों में प्रवेश कराने से कतराते हैं।


■ 20 प्राथमिक स्कूल शिक्षामित्रों के हवाले : बेसिक शिक्षा के प्राथमिक स्कूल बदहाली से उबर नहीं पा रहे हैं। शिक्षकों के टोटे की वजह से 20 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें न चाहकर भी शिक्षामित्रों के हवाले कर दिया गया है। तमाम बंदिशों के बाद मिले दायित्व के शिक्षामित्र निभा रहे हैं।

एक अथवा दो शिक्षामित्र पांच कक्षाओं की जिम्मेदार उठा रहे हैं। अधिकारियों के आदेश के अनुपालन में जहां दायित्व निर्वहन कर रहे हैं वहीं तमाम अड़चनों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। निरीक्षण के समय खामी पकड़े जाने के बाद अधिकारी त्वरित फटकार आदि लगाने के बाद कार्यवाही की कलम नहीं चला पाते हैं। दोनों क्षेत्रों में 38 शिक्षामित्र कार्यरत हैं।

नगर क्षेत्र में शिक्षकों की कमी के चलते 20 स्कूलों को शिक्षामित्रों से संचालित करवाया जा रहा है। शासन की तमाम योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए नियमित शिक्षकों से इन विद्यालयों का काम लिया जा रहा है। शिक्षकों की कमी का असर पठन पाठन में पड़ रहा है जिसे दूर करने का प्रयास हो रहा है। विशेष आदेश के जरिए एमडीएम आदि योजनाओं के लिए शिक्षकों को लगाकर खाता संचालित कराया जा रहा है। - नाहिद इकबाल फारूकी, खंड शिक्षाधिकारी नगर

Saturday, March 17, 2018

फतेहपुर : शिक्षामित्रों के हवाले जिले के 150 प्राथमिक स्कूल, नौनिहालों के साथ हो रहा मजाक

फतेहपुर : शिक्षामित्रों के हवाले जिले के 150 प्राथमिक स्कूल, नौनिहालों के साथ हो रहा मजाक।

 

Tuesday, February 20, 2018

नए सत्र में माध्यमिक कालेजों में पढ़ाई का संकट, राजकीय व अशासकीय कालेजों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली

■ राजकीय में दस हजार पद रिक्त

■ मॉडल कालेजों को कब मिलेंगे शिक्षक

■ अशासकीय कालेजों का पुरसाहाल नहीं

■ अंग्रेजी माध्यम स्कूल बढ़ाएंगे सिरदर्द


इलाहाबाद  : योगी सरकार को नए शैक्षिक सत्र में फिर एक परीक्षा से गुजरना होगा। राजकीय और अशासकीय कालेजों में शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं, ऐसे में छात्र-छात्रओं की पढ़ाई कैसे होगी यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इसी बीच सरकार एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से किताबों का इंतजाम कर रही है लेकिन, उन्हें पढ़ाने वालों की व्यवस्था पर कोई गंभीर नहीं है। केवल नए-नए प्रयोग करने की तैयारी जरूर है।



प्रदेश के माध्यमिक कालेजों का नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होना है। होली की छुट्टियां निकाल दें तो इसमें अब एक माह का समय बचा है। इसके बाद भी सरकार इन कालेजों पढ़ाई कराने के पुख्ता इंतजाम नहीं कर सकी है। इस बार का शैक्षिक पिछले वर्षो की अपेक्षा अलग होगा, क्योंकि शिक्षक व छात्र दोनों को नए सेलेबस और पढ़ाई से दो-चार होना पड़ेगा।



■ राजकीय में दस हजार पद रिक्त : प्रदेश के राजकीय कालेजों में दस हजार एलटी ग्रेड शिक्षक के पद एक साल से खाली पड़े हैं। 2016 में ही इन पदों को भरने का विज्ञापन निकला था लेकिन, सरकार ने उस प्रक्रिया को निरस्त करके और मार्च में खाली और पदों को जोड़कर उप्र लोकसेवा आयोग भर्ती के लिए भेजा है। आयोग ने इसकी लिखित परीक्षा छह मई को कराने का कार्यक्रम जारी किया है। अब तक आवेदन शुरू नहीं हुए हैं। यदि तय समय पर भी परीक्षा हुई तो जुलाई से पहले कालेजों को शिक्षक नहीं मिलेंगे।

■ मॉडल कालेजों को कब मिलेंगे शिक्षक : सरकार ने प्रदेश के 17 मंडलों के जिलों में 125 मॉडल कालेज खोलने का आदेश दिया है। हर कालेज में दस प्रवक्ता तैनात होंगे। इनका अब तक अधियाचन शिक्षा निदेशालय से आयोग को भेजा नहीं गया है। यदि राजकीय कालेजों के प्रवक्ता इन कालेजों में जाएंगे तो पहले से संचालित कालेजों में पढ़ाई प्रभावित होगी। पहले से इन कालेजों में प्रवक्ता कम हैं और 1250 प्रवक्ता और कम हो जाएंगे।


■ अशासकीय कालेजों का पुरसाहाल नहीं : अशासकीय माध्यमिक कालेजों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों का चयन करने वाले माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का अब तक गठन नहीं हुआ है। यदि जल्द गठन हो जाता है तब भी 2011 भर्ती के शिक्षकों का साक्षात्कार व 2016 की लिखित परीक्षा व इंटरव्यू कराने में ही कई माह लगेंगे। इन भर्तियों की ही करीब दस हजार से अधिक संख्या है। वहीं करीब चार हजार से अधिक नए अधियाचन चयन बोर्ड पहुंच चुके हैं। प्रधानाचार्यो की तैनाती यहां कई वर्षो से नहीं हो सकी है।


■ अंग्रेजी माध्यम स्कूल बढ़ाएंगे सिरदर्द : प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक राजकीय कालेजों को भी अंग्रेजी माध्यम से संचालित करने पर मंथन चल रहा है। इसके लिए सुझाव मांगे गए हैं लेकिन, शिक्षकों की पहले से संकट है ऐसे में यदि अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जाते हैं तो वहां पर पढ़ाएगा कौन?।

Monday, February 19, 2018

महज एक शिक्षक का हाथ - कई कक्षाओं के साथ, सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती आरटीई के मुताबिक नहीं

फतेहपुर : महज एक शिक्षक का हाथ - कई कक्षाओं के साथ, सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती आरटीई के मुताबिक नहीं।


Thursday, June 22, 2017

बाराबंकी : प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर पद सृजन का आधार 30 सितम्बर 2016 की छात्र संख्या लेने के सम्बन्ध में बीएसए ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को लिखा पत्र, देखें

बाराबंकी : प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर पद सृजन का आधार 30 सितम्बर 2016 की छात्र संख्या लेने के सम्बन्ध में बीएसए ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को लिखा पत्र, देखें

Wednesday, June 15, 2016

सीतापुर : ट्रांसफर पोर्टल तय करेगा शिक्षकों का तबादला, शिक्षकों के स्थानांतरण में अब अफसर मनमानी नही कर सकेंगे, जिलाधिकारी ने कसा शिकंजा

शिक्षकों के स्थानांतरण में अब अफसर मनमानी नही कर सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर एनआइसी एक नई वेबसाइट तैयार कर रहा है। ट्रांसफर पोर्टल नाम के इस वेबसाइट पर जिले भर के शिक्षकों व छात्रों की संख्या को फीड़ किया जाएगा। जिसके बाद छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से पोर्टल ऐसे विद्यालयों जहां मानक से अधिक शिक्षक जमें हैं उनमें से पुराने शिक्षकों को हटाकर ऐसे स्कूल में ट्रांसफर कर देगा जहां मानक से कम शिक्षक हैं।

महिला व विकलांग शिक्षकों से विकल्प के तौर पर मांगे गए तीन स्कूलों में से एक विद्यालय में तैनाती दी जाएगी।  परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की स्थानांतरण नीति पिछले दो सालों से नही आई है। जिसके चलते दूरस्थ विद्यालयों में तैनात रसूखदार शिक्षक बेसिक शिक्षा सचिव से आदेश लाकर अपना तबादला करा रहे हैं।

स्थानांतरण नीति न आने से शिक्षकों ने जिलों से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक प्रदर्शन किया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश सरकार से गैरजनपदीय व अंतर्जनपदीय तबादला नीति आ सकती है। इस नीति की ओट में अफसर मनमानी न कर सकें इसके लिए जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने एनआइसी पर एक नया साफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं। ट्रांसफर पोर्टल नाम की इस वेबसाइट में जिले भर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्कूलवार छात्र संख्या और तैनात शिक्षकों का व्यौरा फीड़ किया जाएगा। विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात में तैनात अधिक शिक्षकों को यह पोर्टल स्वत: ऐसे विद्यालय में भेज देगा, जहां छात्रों के अनुपात में कम शिक्षक कार्यरत हैं। महिला व विकलांग शिक्षकों से तीन विद्यालयों के पसंदीदा विकल्प मांगे जाएंगे। विद्यालय में जगह रिक्त होने पर संबंधित शिक्षक को वहां पोर्टल स्थानांतरित कर देगा।

साफ्टवेयर इतना पारदर्शी होगा कि इसमें गड़बड़ी की लेसमात्र आशंका नहीं रहेगी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी बीईओ अपने ब्लॉक के विद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों डाटा जुटा रहे हैं।

यह है छात्र-शिक्षक अनुपात
प्राथमिक विद्यालयों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। 151 से 200 छात्र संख्या होने पर छह टीचर तथा 200 से अधिक होने पर छात्र संख्या भाग 40 प्लस एक के हिसाब से शिक्षक होने चाहिए। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय में 33 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। 101 से 105 छात्र संख्या होने पर चार शिक्षक जबकि 105 से अधिक छात्र होने पर छात्र संख्या भाग 35 प्लस एक के हिसाब से शिक्षक तैनाती का मानक निर्धारित है।

परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण में गड़बड़ी न हो इसके लिए ट्रांसफर पोर्टल बनाया जा रहा है। ट्रांसफर नीति आने से पहले छात्रों व शिक्षकों का आंकड़ा जुटाकर फीड़ करा दिया जाएगा, जिससे विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षक तैनात किए जा सकेंगे। -अमृत त्रिपाठी, जिलाधिकारी

Sunday, June 12, 2016

सीतापुर : शिक्षको के ट्रान्सफर पोस्टिंग पर रहेगी अब डीएम की नजर, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा छात्र संख्या और अध्यापकों का ब्यौरा

सीतापुर : शिक्षको के ट्रान्सफर पोस्टिंग पर रहेगी अब डीएम की नजर, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा  छात्र संख्या और अध्यापकों का ब्यौरा

Sunday, November 22, 2015

लखनऊ : डायट लखनऊ और 'असर' के अध्ययन में हुआ खुलासा, ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात आरटीई के मुताबिक नहीं मिला


लखनऊ : जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्रशिक्षण पा रहे बीटीसी छात्रों ने लखनऊ के प्राइमरी स्कूलों का स्तर जांचा। वे चुनिंदा स्कूलों में गए तो वहां की बुनियादी सुविधाएं और पढ़ाई का स्तर परखा। नतीजा यह आया कि ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात आरटीई के मुताबिक नहीं मिला। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था 'असर' ने डायट के सहयोग से यह अध्ययन करवाया था। 

बीटीसी प्रशिक्षुओं के लिए डायट ने 18 से 21 नवंबर तक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें उन्हें आरटीई के मानक और स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं की बारे में जानकारी दी गई। 'असर' के ही तैयार किए गए सर्वेक्षण नमूने के आधार पर ये प्रशिक्षु शहर के चुनिंदा स्कूलों में गए। वहां उन्होंने शौचालय, एमडीएम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को परखा। साथ ही छात्र शिक्षक अनुपात और पढ़ाई के तौर-तरीकों की भी जानकारी ली।कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर के तौर पर सुनील कुमार, दिलीप कुमार, राजेश दुबे और निमिषा दुबे ने इन प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया।