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Saturday, January 12, 2019

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों में नहीं दिखता छात्र-शिक्षक अनुपात, 60 बच्चों में दो शिक्षक होने का शासन से मानक तय, कहीं कम बच्चों में शिक्षक अधिक तो कहीं शिक्षकों की संख्या रही कम

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों में नहीं दिखता छात्र-शिक्षक अनुपात, 60 बच्चों में दो शिक्षक होने का शासन से मानक तय, कहीं कम बच्चों में शिक्षक अधिक तो कहीं शिक्षकों की संख्या रही कम।


Monday, October 29, 2018

हाथरस : नवनियुक्ति के उपरांत विद्यालयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

हाथरस : नवनियुक्ति के उपरांत विद्यालयवार छात्र-शिक्षक अनुपात की सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

Tuesday, April 24, 2018

फतेहपुर : नगर क्षेत्र में 85 स्कूल और कुल 70 शिक्षक, एकल शिक्षकों के सहारे चल रही है प्राथमिक शिक्षा की गाड़ी, 20 जगहों पर केवल शिक्षामित्र

■ अवकाश पर जाने से कई स्कूलों में लग जाता ताला,

■ एक शिक्षक को दो स्कूलों की संभालनी पड़ती जिम्मेदारी

फतेहपुर : नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों का पुरसाहाल नहीं है। शिक्षकों की बेहद कमी के चलते शासन के आदेश हवा में तैर रहे हैं। जिम्मेदार चाह कर भी इन स्कूलों की बदहाली को दूर नहीं कर पा रहे हैं। एक जगह तैनाती के साथ शिक्षकों को अन्य कामों के संपादन के लिए दूसरे स्कूलों का दायित्व निभाना पड़ रहा है। पठन पाठन का कार्य भगवान भरोसे ही चल रहा है।


नगर क्षेत्र मुख्यालय एवं ¨बदकी में 85 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूल संचालित किए जा रहे हैं इन स्कूलों में चालू सत्र में महज 70 शिक्षक की तैनात है। बीते सत्र में 6 शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं आने वाले समय में इसी क्रम में सेवानिवृत्त का सिलसिला चलेगा। विभाग के शिक्षकों की इतनी तैनाती नहीं है कि वह कुल स्कूलों में एक-एक शिक्षक ही तैनात कर पाए। शासन के दिशा निर्देश पर एक विद्यालय में दो से अधिक शिक्षक-शिक्षिकाएं तैनात हैं लेकिन इनमें से प्रधानाध्यापक को छोड़कर दूसरे शिक्षकों को अन्य स्कूलों का दायित्व विशेष आदेश पर दिया गया है। प्राथमिक की पांच कक्षाएं एवं उच्च प्राथमिक की तीन कक्षाओं को पढ़ाने के लिए अधिसंख्य जगहों में एकल शिक्षक के सहारे शिक्षा की गाड़ी चल रही है।



शिक्षकों की कमी के चलते शैक्षिक स्तर का क्या हाल होगा इसका अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है। जब शिक्षा के मंदिरों में गुरुजन ही नहीं होंगे तो फिर नौनिहालों कैसे पढ़ लिखकर बढ़ेंगे। यही वजह है कि लोग अपने पाल्यों को ऐसे विद्यालयों में प्रवेश कराने से कतराते हैं।


■ 20 प्राथमिक स्कूल शिक्षामित्रों के हवाले : बेसिक शिक्षा के प्राथमिक स्कूल बदहाली से उबर नहीं पा रहे हैं। शिक्षकों के टोटे की वजह से 20 स्कूल ऐसे हैं जिन्हें न चाहकर भी शिक्षामित्रों के हवाले कर दिया गया है। तमाम बंदिशों के बाद मिले दायित्व के शिक्षामित्र निभा रहे हैं।

एक अथवा दो शिक्षामित्र पांच कक्षाओं की जिम्मेदार उठा रहे हैं। अधिकारियों के आदेश के अनुपालन में जहां दायित्व निर्वहन कर रहे हैं वहीं तमाम अड़चनों से पीछा नहीं छुड़ा पा रहे हैं। निरीक्षण के समय खामी पकड़े जाने के बाद अधिकारी त्वरित फटकार आदि लगाने के बाद कार्यवाही की कलम नहीं चला पाते हैं। दोनों क्षेत्रों में 38 शिक्षामित्र कार्यरत हैं।

नगर क्षेत्र में शिक्षकों की कमी के चलते 20 स्कूलों को शिक्षामित्रों से संचालित करवाया जा रहा है। शासन की तमाम योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए नियमित शिक्षकों से इन विद्यालयों का काम लिया जा रहा है। शिक्षकों की कमी का असर पठन पाठन में पड़ रहा है जिसे दूर करने का प्रयास हो रहा है। विशेष आदेश के जरिए एमडीएम आदि योजनाओं के लिए शिक्षकों को लगाकर खाता संचालित कराया जा रहा है। - नाहिद इकबाल फारूकी, खंड शिक्षाधिकारी नगर

Saturday, March 17, 2018

फतेहपुर : शिक्षामित्रों के हवाले जिले के 150 प्राथमिक स्कूल, नौनिहालों के साथ हो रहा मजाक

फतेहपुर : शिक्षामित्रों के हवाले जिले के 150 प्राथमिक स्कूल, नौनिहालों के साथ हो रहा मजाक।

 

Tuesday, February 20, 2018

नए सत्र में माध्यमिक कालेजों में पढ़ाई का संकट, राजकीय व अशासकीय कालेजों में बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली

■ राजकीय में दस हजार पद रिक्त

■ मॉडल कालेजों को कब मिलेंगे शिक्षक

■ अशासकीय कालेजों का पुरसाहाल नहीं

■ अंग्रेजी माध्यम स्कूल बढ़ाएंगे सिरदर्द


इलाहाबाद  : योगी सरकार को नए शैक्षिक सत्र में फिर एक परीक्षा से गुजरना होगा। राजकीय और अशासकीय कालेजों में शिक्षकों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं, ऐसे में छात्र-छात्रओं की पढ़ाई कैसे होगी यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। इसी बीच सरकार एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से किताबों का इंतजाम कर रही है लेकिन, उन्हें पढ़ाने वालों की व्यवस्था पर कोई गंभीर नहीं है। केवल नए-नए प्रयोग करने की तैयारी जरूर है।



प्रदेश के माध्यमिक कालेजों का नया शैक्षिक सत्र एक अप्रैल से शुरू होना है। होली की छुट्टियां निकाल दें तो इसमें अब एक माह का समय बचा है। इसके बाद भी सरकार इन कालेजों पढ़ाई कराने के पुख्ता इंतजाम नहीं कर सकी है। इस बार का शैक्षिक पिछले वर्षो की अपेक्षा अलग होगा, क्योंकि शिक्षक व छात्र दोनों को नए सेलेबस और पढ़ाई से दो-चार होना पड़ेगा।



■ राजकीय में दस हजार पद रिक्त : प्रदेश के राजकीय कालेजों में दस हजार एलटी ग्रेड शिक्षक के पद एक साल से खाली पड़े हैं। 2016 में ही इन पदों को भरने का विज्ञापन निकला था लेकिन, सरकार ने उस प्रक्रिया को निरस्त करके और मार्च में खाली और पदों को जोड़कर उप्र लोकसेवा आयोग भर्ती के लिए भेजा है। आयोग ने इसकी लिखित परीक्षा छह मई को कराने का कार्यक्रम जारी किया है। अब तक आवेदन शुरू नहीं हुए हैं। यदि तय समय पर भी परीक्षा हुई तो जुलाई से पहले कालेजों को शिक्षक नहीं मिलेंगे।

■ मॉडल कालेजों को कब मिलेंगे शिक्षक : सरकार ने प्रदेश के 17 मंडलों के जिलों में 125 मॉडल कालेज खोलने का आदेश दिया है। हर कालेज में दस प्रवक्ता तैनात होंगे। इनका अब तक अधियाचन शिक्षा निदेशालय से आयोग को भेजा नहीं गया है। यदि राजकीय कालेजों के प्रवक्ता इन कालेजों में जाएंगे तो पहले से संचालित कालेजों में पढ़ाई प्रभावित होगी। पहले से इन कालेजों में प्रवक्ता कम हैं और 1250 प्रवक्ता और कम हो जाएंगे।


■ अशासकीय कालेजों का पुरसाहाल नहीं : अशासकीय माध्यमिक कालेजों में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों का चयन करने वाले माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड का अब तक गठन नहीं हुआ है। यदि जल्द गठन हो जाता है तब भी 2011 भर्ती के शिक्षकों का साक्षात्कार व 2016 की लिखित परीक्षा व इंटरव्यू कराने में ही कई माह लगेंगे। इन भर्तियों की ही करीब दस हजार से अधिक संख्या है। वहीं करीब चार हजार से अधिक नए अधियाचन चयन बोर्ड पहुंच चुके हैं। प्रधानाचार्यो की तैनाती यहां कई वर्षो से नहीं हो सकी है।


■ अंग्रेजी माध्यम स्कूल बढ़ाएंगे सिरदर्द : प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक राजकीय कालेजों को भी अंग्रेजी माध्यम से संचालित करने पर मंथन चल रहा है। इसके लिए सुझाव मांगे गए हैं लेकिन, शिक्षकों की पहले से संकट है ऐसे में यदि अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोले जाते हैं तो वहां पर पढ़ाएगा कौन?।

Monday, February 19, 2018

महज एक शिक्षक का हाथ - कई कक्षाओं के साथ, सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती आरटीई के मुताबिक नहीं

फतेहपुर : महज एक शिक्षक का हाथ - कई कक्षाओं के साथ, सैकड़ों स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती आरटीई के मुताबिक नहीं।


Thursday, June 22, 2017

बाराबंकी : प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर पद सृजन का आधार 30 सितम्बर 2016 की छात्र संख्या लेने के सम्बन्ध में बीएसए ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को लिखा पत्र, देखें

बाराबंकी : प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर पद सृजन का आधार 30 सितम्बर 2016 की छात्र संख्या लेने के सम्बन्ध में बीएसए ने सचिव बेसिक शिक्षा परिषद को लिखा पत्र, देखें

Wednesday, June 15, 2016

सीतापुर : ट्रांसफर पोर्टल तय करेगा शिक्षकों का तबादला, शिक्षकों के स्थानांतरण में अब अफसर मनमानी नही कर सकेंगे, जिलाधिकारी ने कसा शिकंजा

शिक्षकों के स्थानांतरण में अब अफसर मनमानी नही कर सकेंगे। इसके लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर एनआइसी एक नई वेबसाइट तैयार कर रहा है। ट्रांसफर पोर्टल नाम के इस वेबसाइट पर जिले भर के शिक्षकों व छात्रों की संख्या को फीड़ किया जाएगा। जिसके बाद छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से पोर्टल ऐसे विद्यालयों जहां मानक से अधिक शिक्षक जमें हैं उनमें से पुराने शिक्षकों को हटाकर ऐसे स्कूल में ट्रांसफर कर देगा जहां मानक से कम शिक्षक हैं।

महिला व विकलांग शिक्षकों से विकल्प के तौर पर मांगे गए तीन स्कूलों में से एक विद्यालय में तैनाती दी जाएगी।  परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों की स्थानांतरण नीति पिछले दो सालों से नही आई है। जिसके चलते दूरस्थ विद्यालयों में तैनात रसूखदार शिक्षक बेसिक शिक्षा सचिव से आदेश लाकर अपना तबादला करा रहे हैं।

स्थानांतरण नीति न आने से शिक्षकों ने जिलों से लेकर प्रदेश मुख्यालय तक प्रदर्शन किया है। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में प्रदेश सरकार से गैरजनपदीय व अंतर्जनपदीय तबादला नीति आ सकती है। इस नीति की ओट में अफसर मनमानी न कर सकें इसके लिए जिलाधिकारी अमृत त्रिपाठी ने एनआइसी पर एक नया साफ्टवेयर तैयार करा रहे हैं। ट्रांसफर पोर्टल नाम की इस वेबसाइट में जिले भर के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की स्कूलवार छात्र संख्या और तैनात शिक्षकों का व्यौरा फीड़ किया जाएगा। विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुपात में तैनात अधिक शिक्षकों को यह पोर्टल स्वत: ऐसे विद्यालय में भेज देगा, जहां छात्रों के अनुपात में कम शिक्षक कार्यरत हैं। महिला व विकलांग शिक्षकों से तीन विद्यालयों के पसंदीदा विकल्प मांगे जाएंगे। विद्यालय में जगह रिक्त होने पर संबंधित शिक्षक को वहां पोर्टल स्थानांतरित कर देगा।

साफ्टवेयर इतना पारदर्शी होगा कि इसमें गड़बड़ी की लेसमात्र आशंका नहीं रहेगी। जिलाधिकारी के निर्देश पर सभी बीईओ अपने ब्लॉक के विद्यालयों में छात्रों व शिक्षकों डाटा जुटा रहे हैं।

यह है छात्र-शिक्षक अनुपात
प्राथमिक विद्यालयों में 30 छात्रों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। 151 से 200 छात्र संख्या होने पर छह टीचर तथा 200 से अधिक होने पर छात्र संख्या भाग 40 प्लस एक के हिसाब से शिक्षक होने चाहिए। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय में 33 छात्रों पर एक शिक्षक होना चाहिए। 101 से 105 छात्र संख्या होने पर चार शिक्षक जबकि 105 से अधिक छात्र होने पर छात्र संख्या भाग 35 प्लस एक के हिसाब से शिक्षक तैनाती का मानक निर्धारित है।

परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षकों के स्थानांतरण में गड़बड़ी न हो इसके लिए ट्रांसफर पोर्टल बनाया जा रहा है। ट्रांसफर नीति आने से पहले छात्रों व शिक्षकों का आंकड़ा जुटाकर फीड़ करा दिया जाएगा, जिससे विद्यालयों में छात्र संख्या के अनुरूप शिक्षक तैनात किए जा सकेंगे। -अमृत त्रिपाठी, जिलाधिकारी

Sunday, June 12, 2016

सीतापुर : शिक्षको के ट्रान्सफर पोस्टिंग पर रहेगी अब डीएम की नजर, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा छात्र संख्या और अध्यापकों का ब्यौरा

सीतापुर : शिक्षको के ट्रान्सफर पोस्टिंग पर रहेगी अब डीएम की नजर, बेसिक शिक्षा विभाग से माँगा  छात्र संख्या और अध्यापकों का ब्यौरा

Sunday, November 22, 2015

लखनऊ : डायट लखनऊ और 'असर' के अध्ययन में हुआ खुलासा, ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात आरटीई के मुताबिक नहीं मिला


लखनऊ : जिला शिक्षा प्रशिक्षण संस्थान (डायट) में प्रशिक्षण पा रहे बीटीसी छात्रों ने लखनऊ के प्राइमरी स्कूलों का स्तर जांचा। वे चुनिंदा स्कूलों में गए तो वहां की बुनियादी सुविधाएं और पढ़ाई का स्तर परखा। नतीजा यह आया कि ज्यादातर स्कूलों में शिक्षक छात्र अनुपात आरटीई के मुताबिक नहीं मिला। शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था 'असर' ने डायट के सहयोग से यह अध्ययन करवाया था। 

बीटीसी प्रशिक्षुओं के लिए डायट ने 18 से 21 नवंबर तक कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें उन्हें आरटीई के मानक और स्कूलों की मूलभूत सुविधाओं की बारे में जानकारी दी गई। 'असर' के ही तैयार किए गए सर्वेक्षण नमूने के आधार पर ये प्रशिक्षु शहर के चुनिंदा स्कूलों में गए। वहां उन्होंने शौचालय, एमडीएम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को परखा। साथ ही छात्र शिक्षक अनुपात और पढ़ाई के तौर-तरीकों की भी जानकारी ली।कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर के तौर पर सुनील कुमार, दिलीप कुमार, राजेश दुबे और निमिषा दुबे ने इन प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया।