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Sunday, October 4, 2026

28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार, 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं

28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार,  2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं


लखनऊ। प्रदेश में 28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय वापसी का इंतजार है। सिर्फ पांच जिलों में मात्र 2000 शिक्षामित्रों को ही इसका लाभ मिल सका है। आरोप है कि जनवरी 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अधिकारी मनमानी दिखा रहे हैं।


दरअसल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया था। वर्ष 2017 में इनका समायोजन रद्द कर इन्हें दोबारा शिक्षामित्र बनाया गया। जून 2018 में शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी की गई, मगर तमाम शिक्षामित्र छूट गए। उसके बाद शिक्षामित्रों ने लगभग सात साल तक संघर्ष किया और जनवरी 2025 में शासनादेश जारी कर इन्हें अपने मूल विद्यालय भेजने के आदेश दिए गए।

यह अपने निवास स्थान की जिन ग्राम पंचायतों में शिक्षामित्र पद पर रखे गए थे वहीं इन्हें वापस भेजा जाना है। सबसे अधिक कठिनाई वह महिला शिक्षामित्र उठा रही हैं जिन्हें शादी के बाद दूसरे जिले में जाना पड़ा। अब वह अपने मायके वाले जिले में लंबी दूरी नापकर पढ़ाने आती है या उन्हें मायके में ही रहना पड़ रहा है। अब तक सिर्फ बाराबंकी, लखनऊ, अंबेडकरनगर, चित्रकूट और बरेली में ही शिक्षामित्रों को लाभ मिल सका है और वह अपने मूल विद्यालय वापस आ चुके हैं। बाकी जिलों में शिक्षामित्र परेशान हैं।

उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के व प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव के कहते हैं कि शासन की मंशा पर प्र अधिकारी पानी फेर रहे हैं। शासनादेश जारी होने के एक साल 10 महीने बाद भी शिक्षामित्र परेशान हैं।

Friday, October 2, 2026

स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

नियमित शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है स्पेशल टीईटी


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पेशल टीईटी कोई नई भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सेवारत (इन-सर्विस) नियमित शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

मामले के तथ्यों के अनुसार उत्तर प्रदेश शासन ने गत दो सितंबर को एक शासनादेश जारी किया था, जिसके तहत उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को स्पेशल टीईटी आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आयोग ने गत तीन सितंबर को परीक्षा की अधिसूचना जारी की।

याची शिक्षामित्रों ने इस शासनादेश और अधिसूचना को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि वे लगभग 26 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियमित सहायक अध्यापकों की तरह ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं। एनसीटीई की न्यूनतम अर्हता रखने के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 16 (अवसर की समानता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में उन्हें भी अपनी सेवा सुरक्षा व भविष्य के लिए इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए।

आयोग व राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट व समीक्षा याचिका आदेश) के अनुपालन में केवल उन इन-सर्विस शिक्षकों को छूट/अवसर दिया गया है, जिनकी नियुक्ति टीईटी अनिवार्य होने से पूर्व हो चुकी थी और जिनकी सेवा निरंतरता टीईटी पास करने पर निर्भर है।

शिक्षामित्र संविदा व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और वे नियमित इन-सर्विस शिक्षकों के समकक्ष नहीं हैं। जुलाई 2026 में आयोजित नियमित टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्र आवेदन करने के लिए पात्र थे लेकिन उन्होंने उसमें भाग नहीं लिया। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि स्पेशल टीईटी किसी नई नियुक्ति, पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं है। यह केवल उन सेवारत शिक्षकों के लिए एक संक्रांतिकालीन व्यवस्था है, जिनकी नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करना अनिवार्य किया है। 

शिक्षामित्रों की नियुक्ति का स्वरूप और विधिक दर्जा नियमित सहायक अध्यापकों से पूरी तरह भिन्न है। असमान वर्गों को एक समान नहीं माना जा सकता इसलिए सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा कराना अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है। राज्य सरकार ने शासनादेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के दायरे को हाईकोर्ट अपनी मर्जी से नहीं बढ़ा सकता।

... तो खटखटा सकते हैं न्यायालय का दरवाजा

कोर्ट ने इसी मुद्दे पर प्रतीक मिश्र व दो अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी व सरकारी वकील को सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए याचियों को यह छूट दी है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार स्पेशल टीईटी प्राप्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध कोई अनुचित वरीयता या आरक्षण देती है, तो वे उसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



विभागीय  TET  में बैठने की मांग को लेकर दायर शिक्षामित्रों की याचिका खारिज, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर

01 अक्टूबर 2026





शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर देने की मांग के लिए दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित

25 सितंबर 2026
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में आवेदन का अवसर दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर गुरुवार को निर्णय सुरक्षित कर लिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिया।

वसीम अहमद एवं 220 अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से अधिवक्ता जेन अब्बास ने शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों का करीब 26 वर्षों से बतौर शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ निर्वाचन कार्य, चुनाव ड्यूटी, एसआईआर, जनगणना, मतगणना, बालगणना, विद्यालय संचालन प्रभार, सरकार द्वाराजैन अब्बास आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में कक्ष निरिक्षक ड्यूटी, गुणवत्ता संवर्धन के लिए विभाग द्वारा कराए जाने वाले समस्त प्रशिक्षण अध्यापक के समान अनुभव है।

इसके बाद भी विशेष टीईटी में आवेदन के अवसर को लेकर शिक्षामित्रों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है जबकि अन्य श्रेणियों में कार्यरत शिक्षकों एवं विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है। यह भी तर्क रखा गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए टीईटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर दिया जाना आवश्यक है।



विशेष टीईटी में योग्यता में छूट को दी चुनौती, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। हाईकोर्ट में बीटीसी (डीएलएड), बीएड एवं दूरस्थ बीटीसी पास प्रतीक मिश्रा एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने विशेष टीईटी के लिए निर्धारित योग्यता में छूट को चुनौती दी है। याचिका में दो सितंबर के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी योग्यता संबंधी शर्त को शिथिल कर दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाया था कि सेवारत शिक्षकों को दो साल के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य है। पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्ष की छूट को तीन वर्ष कर दिया है। इस तरह से सेवारत शिक्षकों को एक सितंबर 2028 के पूर्व टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। याचियों का आरोप है कि राज्य सरकार के आदेश से सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आरटीई एक्ट 2009 की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।



विशेष टीईटी में मौके पाने की जद्दोजहद में हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षामित्र, आज सुनवाई 

हाईकोर्ट में कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों ने दायर की याचिका

सरकार ने टीईटी में केवल सेवारत एवं विशेष शिक्षकों से मांगे आवेदन

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से सेवारत एवं विशेष शिक्षकों के लिए कराई जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अवसर देने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की है। कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें भी स्पेशल टीईटी में बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि वे नियमित शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजर अंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद अब इसे 16 सितंबर को प्रतीक मिश्रा व तीन अन्य की याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।


स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल TET' (विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। शिक्षामित्रों की इस पहल से परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के आगामी फैसलों पर टिक गई हैं।


शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिकाओं और उनकी स्थिति का विवरण निम्न प्रकार है:


Writ A 14346/2026 (प्रतीक मिश्रा व अन्य): इस याचिका पर 10 सितंबर 2026 को प्रारंभिक सुनवाई संपन्न हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर 2026 तय की है।

Writ A 14495/2026 (कुमारी गुलाबी व अन्य): शिक्षामित्रों द्वारा राहत की मांग को लेकर दाखिल की गई इस दूसरी याचिका पर आज 14 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की पीठ में सुनवाई होनी तय हुई है।

इन दोनों ही याचिकाओं के माध्यम से शिक्षामित्रों ने माननीय न्यायालय से प्रार्थना (Prayer) की है कि उन्हें भी स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। 14 और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत शिक्षामित्रों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं।


Tuesday, September 29, 2026

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश, 11508 शिक्षक भर्ती का मामला

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश,  11508 शिक्षक भर्ती का मामला
 
29 सितंबर 2026
प्रयागराज । नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में पूछताछ की है। चयन आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने 24 सितंबर को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेनशर्मा को इस संबंध में पत्र लिखा है।

चयन आयोग का कहना है कि 15 सितंबर को सहायक अध्यापकों के 11508 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 17 सितंबर को यह अवगत कराया है कि उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में शिक्षामित्रों को 68500 एवं 69000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में उनके प्रत्येक अध्यापन वर्ष के लिए 2.5 अंक, अधिकतम 25 अंक तक (जो भी कम हो) का भारांक तथा आयु में छूट प्रदान की गयी है।

उच्चतम न्यायालय ने राम शरण मौर्या के मामले में 18 नवंबर 2020 को शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने के आदेश दिए हैं। सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के पत्र के संबंध में चयन आयोग ने लिखा है कि इस भर्ती में शिक्षामित्रों को आयु सीमा में 60 वर्ष तक छूट प्रदान की गयी है। हालांकि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 की धारा 30 में उल्लिखित है कि अध्यापकों या अनुदेशकों के चयन के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के नियमों, विनियमों या परिनियमों में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी चयन आयोग का अधिनियम प्रभावी होगा। आयोग के अधिनियम एवं विनियमावली में मात्र लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों के चयन की व्यवस्था है।

वहीं आयोग को यह सूचना नहीं दी गई है कि उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के आदेश के क्रम में शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अवसर प्रदान करने संबंधी राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किसी आदेश का उल्लेख नहीं है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग ने क्या निर्णय लिया व शिक्षामित्रों को भारांक किस प्रकार दिए जाने की व्यवस्था तय की गयी है। लिहाजा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों से आयोग को अवगत कराएं ताकि चयन प्रक्रिया की कार्यवाही सम्पादित की जा सके।



टीईटी पास शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, प्रदेश में टीईटी पास 75 हजार शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ

26 सितम्बर 2026
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में भारांक (वेटेज) दिए जाने की सौगात मिल सकती है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से शुक्रवार को शासन को पत्र भी भेज दिया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश का हवाला देते हुए भारांक दिए जाने की अनुमति मांगी है।

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के परिषदीय स्कूलों में 1,43,470 शिक्षामित्र कार्यरत हैं जिसमें 75 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने टीईटी पास कर ली है। भारांक मिलने से सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में इन्हें सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, प्रदेश सरकार पिछली दो भर्तियों 68,500 और 69,000 में भारांक दे चुकी है। इसमें काम के अनुभव के हिसाब से प्रतिवर्ष 2.5 अंक या अधिकतम 25 अंक का भारांक मिले थे। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह का कहना है कि शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार है।

2017 में निरस्त हो गया था शिक्षामित्रों का समायोजन
उप्र शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बगैर टीईटी पास प्रदेश भर के शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया था और उन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलने लगा था। इसमें 1.37 हजार शिक्षामित्र शामिल थे।

स्पेशल टीईटी में शामिल होने की कर रहे मांग
कुछ महीने पहले ही परिषदीय स्कूलों के सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता की बात कही गई थी। बाद में सरकार ने सहायक अध्यापकों की सहूलियत के लिए स्पेशल टीईटी कराए जाने की घोषणा की थी। अब प्रदेश भर के ऐसे शिक्षामित्र भी इस स्पेशल टीईटी में आवेदन करने का मौका मांग रहे हैं जो अभी टीईटी पास नहीं हैं।




शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवा चयन आयोग को लिखा पत्र

चयन आयोग ने गठित की चार सदस्यीय कमेटी, मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को भारांक देने का दिया था आदेश

आज होने वाली चयन आयोग की बैठक में हो सकता है निर्णय

22 सितंबर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी है।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती के विज्ञापन में भारांक का जिक्र नहीं होने संबंधी समाचार प्रकाशित होने के बाद अफसर बैकफुट पर हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के उस आदेश की जानकारी दी है, जिसमें शिक्षामित्रों को आगामी शिक्षक भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाने के आदेश पारित दिए गए थे।


सचिव का पत्र मिलने के बाद इस मामले में निर्णय लेने के लिए चयन आयोग ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। माना जा रहा है कि मंगलवार को होने वाली आयोग की बैठक में इस पर भी विचार किया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षामित्रों को भारांक देने की उम्मीद जगी है क्योंकि भारांक नहीं मिलने पर शिक्षामित्र कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं और ऐसा होने पर पूरी भर्ती ही फंस जाएगी। शासन स्तर पर भी शिक्षामित्रों के भारांक की अनदेखी, नियमावली में संशोधन और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आरक्षण नहीं देने पर विचार हो रहा है। शासन में भी इसी सप्ताह इन मुद्दों पर बैठक होने की उम्मीद है।


अधियाचन भेजते समय नहीं दी आदेश की सूचना

इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही सामने आई है। 11508 सहायक अध्यापक के पदों पर चयन एवं नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक ने 17 मई को चयन आयोग को अधियाचन भेजा था। उसके चार महीने बाद 15 सितंबर को चयन आयोग ने भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। वैसे तो बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को अधियाचन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सूचना देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही नहीं अधियाचन भेजने के चार महीने बाद तक बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इस आदेश की सूचना देने की चिंता नहीं हुई। भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद जब शिक्षामित्रों को भारांक नहीं देने का समाचार प्रकाशित हुआ तब जाकर बेसिक के अफसर नींद से जागे और उच्चतम न्यायालय के आदेश की सूचना भेजी।



नियमावली में संशोधन नहीं, खत्म कर दी मेरिट,  प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती का मामला

बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली में एकेडमिक मेरिट मौजूद, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन में नहीं है जिक्र

18 सितम्बर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में नियमावली संशोधन की अड़चन आ सकती है। बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में अभी भी 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान है जिसे हटाए बगैर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का विज्ञापन जारी कर दिया है। भर्ती के विज्ञापन में चयन पूरी तरह 360 अंकों की लिखित परीक्षा (120 बहुविकल्पीय प्रश्न) की मेरिट पर करने की बात लिखी है। शैक्षिक योग्यता (हाईस्कूल, इंटर, स्नातक प्रशिक्षण) के अंकों को मेरिट में शामिल नहीं किया गया है। अंक समान होने की स्थिति में सिर्फ स्नातक, प्रशिक्षण प्रतिशत व उम्र को आधार बनाया है।


यह व्यवस्था सेवा नियमावली के विपरीत है। नियमावली में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और डीएलएड (बीटीसी) / प्रशिक्षण के अंकों को (दस-दस कुल 40 प्रतिशत) वेटेज (भारांक) गुणवत्ता बिंदुओं के रूप में जोड़ा जाता है, जबकि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अंकों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। जानकारों की मानें तो नियमावली में बिना संशोधन चयन का आधार बदलना नियम विरुद्ध है। यदि लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती करनी थी तो पहले सरकार को कैबिनेट से नियमावली में 26वां संशोधन कर शैक्षिक मेरिट समाप्त करनी चाहिए थी और चयन का आधार पूर्णतया लिखित परीक्षा करना चाहिए था।

2017 से 2019 तक नियमावली में हुए छह संशोधन

बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में 2017 से 2019 तक हुए 20वें से 25वें संशोधनों में एटीआरई परीक्षा, बीएड योग्यता और अपेंडिक्स में कई बदलाव किए गए थे, लेकिन शैक्षिक मेरिट का प्रावधान आज भी कायम है। एकेडमिक मेरिट के आधार पर ही 68500 और 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। यदि चयन प्रक्रिया बदलना है तो नियमावली में संशोधन अनिवार्य है, अन्यथा भर्ती प्रक्रिया में विधिक अड़चन आ सकती है।

चयन की प्रक्रिया परीक्षा लेने वाली संस्था (उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग) ही तय करती है। ऐसे में 11508 भर्ती का जो विज्ञापन जारी हुआ है वह नियम संगत है। - डॉ. संजय कुमार सिंह, पीआरओ चयन आयोग



11508 भर्ती में शिक्षामित्रों को नहीं मिलेगा भारांक, चयन आयोग के विज्ञापन में जिक्र नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भारांक देने का दिया था आदेश

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में साढ़े सात साल बाद शुरू हुई 11508 सहायक अध्यापकों की भर्ती से प्रदेश के लगभग 1.42 लाख शिक्षामित्रों को निराशा हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु (60 साल) तक आवेदन के लिए अर्ह माना है, लेकिन भारांक का कोई जिक्र नहीं है। राम शरण मौर्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।


शीर्ष अदालत ने यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था कि इस अवसर का लाभ शिक्षामित्र किस प्रकार और किन प्रक्रियाओं व्यवस्थाओं के तहत उठा सकेंगे। यही नहीं 69000 शिक्षक भर्ती के कटऑफ विवाद के मामले में सरकार ने 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के रिक्त 51112 पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

इससे पहले जुलाई 2017 में 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार पर दस से 25 अंक तक का भारांक मिला था।

15 हजार शिक्षामित्रों को ही मिली नौकरी

बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 में निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश पर प्रदेश सरकार ने 68500 और 69000 भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिया था। क्रमशः लगभग सात और आठ हजार शिक्षामित्रों को ही नौकरी मिल सकी थी।

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव 

लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सपा मुख्यालय पर विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनाव की तैयारी को लेकर पार्टी विधायकों और प्रत्याशियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें सपा के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने जा रही है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेताजी के समय से शिक्षकों के लिए काम करती रही है।


अखिलेश ने कहा कि जब भी मौका मिला, समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों के हित में फैसले लिए। वित्तविहीन शिक्षकों के लिए बजट में मानदेय के लिए व्यवस्था करेंगे। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और तदर्थ प्रधानाचार्यों के वेतन संबंधी धारा 12,18 व 21 को बहाल किया जाएगा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का वेतन बहाल किया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का समाधान होगा। 

शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाकर सम्मान देने का काम किया जाएगा। डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करेंगे। अनुदेशक, रोजगार और आंगनबाड़ी की समस्याओं का समाधान करेंगे।

Sunday, September 20, 2026

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?

सभी जिला मुख्यालयों पर 28 सितंबर से धरना-प्रदर्शन शुरू करेंगे शिक्षामित्र, जानिए क्यों?


लखनऊः उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 28 सितंबर से सभी जिला मुख्यालयों पर अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू करेगा। संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने शिक्षामित्रों के प्रति सरकार के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया है। साथ ही यह असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों के स्थानांतरण आदेश का अब तक अनुपालन नहीं हुआ है।


विभागीय टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किया गया। अन्य कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष किए जाने के बावजूद शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु नहीं बढ़ाई गई है। संघ की मांग है कि टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को नई शिक्षक भर्ती में पूर्व की भर्तियों की तरह 25 अंक का भारांक या वरीयता दी जाए।

Monday, September 14, 2026

शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी, आंदोलन करने की तैयारी

विशेष टीईटी से शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर पनप रहा आक्रोश

प्रयागराज। विशेष टीईटी के शासनादेश में शिक्षामित्रों को शामिल नहीं किए जाने के विरोध में प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने का ऐलान किया है। रविवार को चंद्रशेखर आजाद पार्क में आयोजित संघ की बैठक में विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को शामिल करने के साथ ही टीईटी उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को उनके शिक्षण अनुभव का लाभ देते हुए सुपर टेट में छूट प्रदान कर नियमित किए जाने की मांग उठाई गई।

वक्ताओं ने कहा कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजरअंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है।

 प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि शिक्षामित्रों ने वर्षों तक ग्रामीण और दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जिस शिक्षामित्र ने वर्षों तक विद्यालय में बच्चों को पढ़ाया है, उसके अनुभव को किसी भी चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। सरकार को शिक्षामित्रों की वास्तविक स्थिति को समझते हुए विशेष टीईटी में उन्हें शामिल करना चाहिए। अनदेखी किए जाने पर आवाज बुलंद की जाएगी।



शिक्षामित्रों को भी मिले टीईटी में शामिल होने का अवसर, प्रदेश में करीब 70 हजार शिक्षामित्र नहीं पास हैं टीईटी,  आंदोलन करने की तैयारी

प्रयागराज। शिक्षकों के लिए विशेष टीईटी आयोजित कराए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है। इस परीक्षा में शिक्षामित्रों को नहीं शामिल किया गया है। इससे शिक्षामित्रों में नाराजगी है। प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की ओर से मांग की गई है कि इस पर सरकार को विचार करने की जरूरत है।


शिक्षामित्र भी लंबे समय से विद्यालयों में कार्यरत हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों ने सेवा के दौरान बीटीसी प्रशिक्षण पूरा किया है। इसके बावजूद उन्हें विभागीय टीईटी का अवसर न दिया जाना गलत है। करीब 1.43 लाख में करीब 70 हजार शिक्षामित्र हैं जो टीईटी पास नहीं हैं।

प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा, "सरकार जब सेवारत अध्यापकों को विभागीय टीईटी के माध्यम से अपनी पात्रता पूरी करने का अवसर दे सकती है तो 26 वर्षों से विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षामित्रों के लिए ऐसा अवसर क्यों नहीं? यदि शिक्षामित्रों शिक्षामित्रा को नजरअंदाज किया गया तो प्रयागराज से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू होगा।"

संघ के जिला महामंत्री सुनील तिवारी ने कहा, "एक तरफ सेवारत अध्यापकों के लिए विशेष टीईटी की व्यवस्था की जा रही है और दूसरी तरफ शिक्षामित्रों को उस अवसर से वंचित किया जा रहा है।

Sunday, September 13, 2026

शिक्षामित्रों की स्थायी पद, समायोजन व समान वेतनमान की मांग पर शिक्षा निदेशक (बेसिक) 16 सितंबर को करेंगे सुनवाई

शिक्षामित्रों की स्थायी पद, समायोजन व समान वेतनमान की मांग पर शिक्षा निदेशक (बेसिक) 16 सितंबर को करेंगे सुनवाई


लखनऊ/वाराणसी। उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों से जुड़े महत्वपूर्ण मामले में शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने 16 सितंबर 2026 को सुनवाई निर्धारित की है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल रिट याचिका संख्या 4242/2026, विवेकानन्द व 269 अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व 05 अन्य से संबंधित है।

प्रकरण में वाराणसी निवासी विवेकानन्द की ओर से 14 अप्रैल 2026 को दिए गए प्रत्यावेदन में शिक्षामित्र कैडर के अनुरूप स्थायी पदों का सृजन कर शिक्षामित्रों को समायोजित करने, सहायक अध्यापक के समान वेतनमान देने तथा नियमितीकरण किए जाने की मांग की गई है। उपलब्ध पूर्ववर्ती रिपोर्ट में भी इस प्रकरण को शिक्षामित्रों के समायोजन, नियमितीकरण और समान वेतनमान की मांग से जुड़ा बताया गया है। 

शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी पत्र के अनुसार हाईकोर्ट के 28 मार्च 2026 के आदेश के अनुपालन में प्रकरण के निस्तारण के लिए 16 सितंबर 2026 को दोपहर 12 बजे शिक्षा निदेशक (बेसिक), उत्तर प्रदेश, लखनऊ के कार्यालय कक्ष में सुनवाई होगी।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, वाराणसी को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित अभिलेखों एवं स्पष्ट आख्या के साथ स्वयं सुनवाई में उपस्थित हों तथा याचिकाकर्ताओं को भी निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए लिखित सूचना उपलब्ध कराएं।

हालांकि, इस पत्र से शिक्षामित्रों के समायोजन, नियमितीकरण अथवा समान वेतनमान का कोई अंतिम निर्णय होने की पुष्टि नहीं होती है। यह पत्र केवल हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विभागीय स्तर पर सुनवाई की प्रक्रिया निर्धारित किए जाने से संबंधित है।


Friday, August 7, 2026

शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 62 साल करने सहित रखी कई मांगें, मुख्यमंत्री से मिले एमएलसी व शिक्षामित्र संघ के पदाधिकारी

7 अगस्त 2026
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान को लेकर शिक्षामित्र संघ का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उनके सरकारी आवास पर मिला। मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को सुनकर उचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।


एमएलसी कुंवर महाराज सिंह के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने सीएम से शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से 62 साल करने, शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने, टीईटी पास शिक्षामित्र जो एनसीटीई की सभी अर्हताओं को पूरा करते हैं, उन्हें नियमित करने का अनुरोध किया। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला ने बताया कि इसके साथ ही महिला शिक्षामित्रों के तबादले व मूल विद्यालय वापसी व्यवस्था को पूरा कराने, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को आर्थिक सहायता के साथ नौकरी देने का अनुरोध भी किया गया। इसके साथ ही शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि, कैशलेस चिकित्सा कार्ड और जीवन सुरक्षा कवर जैसी व्यवस्था लागू करने के लिए आभार भी जताया। मुलाकात में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार भी उपस्थित थे। 



शिक्षामित्रों को सुपरटेट से छूट सहित सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने और विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल करने की रखी मांग

बेसिक शिक्षा मंत्री से मिला शिक्षामित्र संघ का प्रतिनिधिमंडल

5 अगस्त 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह से मुलाकात की। इसमें शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए नियमितीकरण की मांग की गई।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में गए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि टीईटी पास व एनसीटीई के सभी मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए उन्हें विद्यालयों में शिक्षकों को मिलने वाली सभी सुविधाओं के साथ समायोजित किया जाए। 

सेवानिवृत्ति की आयु 60 साल से बढ़ाकर 62 साल की जाए और पूरे 12 महीने का मानदेय दिया जाए। बेसिक स्कूलों के शिक्षकों के लिए होने वाली विशेष टीईटी में शिक्षामित्रों को भी शामिल होने का अवसर दिया जाए। 

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने शिक्षामित्रों की मांगों को पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, रामसेवक पाल, मंडल उपाध्यक्ष अयोध्या दिनेश वर्मा शामिल थे।

Sunday, July 26, 2026

शिक्षामित्रों ने नियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, प्रदेश भर में मनाया श्रद्धांजलि दिवस, जल्द समायोजन की भी उठाई मांग

शिक्षामित्रों ने नियमितीकरण के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, प्रदेश भर में मनाया श्रद्धांजलि दिवस, जल्द समायोजन की भी उठाई मांग

शिक्षामित्रों ने मनाया काला दिवस, 25 जुलाई 2017 को सहायक अध्यापक पद पर निरस्त हुआ था समायोजन

25 जुलाई 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने शनिवार को प्रदेश भर में श्रद्धांजलि दिवस मनाया। इस दौरान 25 जुलाई 2017 को समायोजन निरस्त होने के बाद दिवंगत शिक्षामित्रों को याद किया गया। संघ ने शिक्षामित्रों के नियमितीकरण, जल्द मूल विद्यालय वापसी आदि मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा।

प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला के नेतृत्व में गोंडा में ज्ञापन दिया गया। इसके साथ ही बस्ती, आगरा, हाथरस, बरेली, शाहजहांपुर, पीलीभीत, प्रयागराज, भदोही और बिजनौर आदि में भी आयोजन हुए। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को शिक्षामित्रों के भविष्य को सुरक्षित करना चाहिए। शिक्षामित्रों को नियमित किया जाए। बेसिक शिक्षकों के लिए होने वाली विशेष टीईटी में शिक्षामित्र भी शामिल किए जाएं।

संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि वह शिक्षामित्रों के हित में ठोस कदम उठाए। शिक्षामित्रों को उचित मानदेय, सेवानिवृत्त आयु 62 साल, उन्हें 12 महीने का मानदेय, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को नौकरी देने आदि मांगों पर सकारात्मक विचार किया जाए।


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के आह्वान पर प्रदेशभर में शिक्षामित्रों ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर शनिवार को 'काला दिवस' मनाया। 25 जुलाई 2017 को ही शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर सुप्रीम कोर्ट से समायोजन निरस्त हो गया था। इस अवसर पर दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत शिक्षामित्रों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई तथा संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्रीय मांगपत्र डीएम और बीएसए के माध्यम से भेजा। मांग की कि टीईटी उत्तीर्ण एवं एनसीटीई मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60 हजार शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देकर सहायक अध्यापक पद पर समायोजित किया जाए।

शिक्षामित्रों की सेवानिवृत्ति आयु 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करने, 11 माह के स्थान पर 12 माह का मानदेय देने तथा सेवा के दौरान दिवंगत शिक्षामित्रों के आश्रित परिवारों को आर्थिक सहायता के साथ एक योग्य सदस्य को नौकरी प्रदान करने की भी मांग की। संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जिलाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा प्राथमिक विद्यालयों में विगत 26 वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षामित्र आज भी अपने भविष्य, सेवा सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन के लिए संघर्ष कर रहे हैं। तमाम शिक्षामित्र आज भी अपने घर से 80 से 90 किमी दूर विद्यालयों में कार्य करने को विवश हैं।





शिक्षामित्रों ने की मूल विद्यालय वापसी और समायोजन समेत 62 वर्ष में रिटायरमेंट की मांग, 25 जुलाई को श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाने की तैयारी

24 जुलाई 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ 25 जुलाई को श्रद्धांजलि दिवस के रूप में मनाएगा। 25 जुलाई 2017 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शिक्षामित्रों के समायोजन निरस्त किए जाने के बाद से अब तक काफी शिक्षामित्रों का निधन हो चुका है। 25 जुलाई को उन सभी को श्रद्धांजलि दी जाएगी। 


श्रद्धांजलि कार्यक्रम के साथ ही संगठन जिलाध्यक्षों के नेतृत्व में लंबित समस्याओं के समाधान के लिए मांग पत्र भी जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री को भेजेगा। इसमें तीन जनवरी 2025 के शासनादेश और महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देशों के बाद भी शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी और समायोजन की प्रक्रिया न पूरा होना प्रमुख है।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह ने बताया कि इसके साथ ही टीईटी उत्तीर्ण और एनसीटीई मानकों को पूरा करने वाले लगभग 60000 शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी से छूट देते हुए उन्हें शिक्षक पद पर समायोजित किया जाए। उनकी सेवानिवृत्ति आयु अनुभव और योग्यता को देखते हुए 60 से बढ़ाकर 62 साल की जाए। 

Saturday, July 18, 2026

टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

टीईटी पास शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया नोटिस

केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाना था जो शिक्षक पात्रता परीक्षा उत्तीर्ण नहीं थे


प्रयागराज। टीईटी पास शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। जुलाई 2017 में उन शिक्षकों का समायोजन भी रद्द हो गया था जिन्होंने पूर्व में टीईटी पास कर रखी थी। इसके खिलाफ शिक्षमित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की थीं। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 29 जनवरी 2026 को यह कहते हुए मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था कि इस प्रकरण में निर्णय हो चुका है। इसके खिलाफ उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) दायर की थीं। इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने 13 जुलाई 2026 को राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।


सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के आदेश से इसलिए प्रभावित हैं क्योंकि उन्हें उन व्यक्तियों के समान मान लिया गया है, जिनके विरुद्ध सेवा से अलग करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि याचिकाकर्ता स्वयं टीईटी उत्तीर्ण हैं।

 सुप्रीम कोर्ट के आदेश में दर्ज है कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार जिन व्यक्तियों ने टीईटी उत्तीर्ण कर ली थी, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाना था और केवल ऐसे शिक्षामित्रों को हटाया जाना था जिन्होंने टीईटी उत्तीर्ण नहीं की थी। पीठ ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है तथा मामले को 27 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

Saturday, May 30, 2026

शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बना नियमित किए जाने से इन्कार को हाई कोर्ट में चुनौती, केंद्र व राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बना नियमित किए जाने से इन्कार को हाई कोर्ट में चुनौती, केंद्र व राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश

30 मई 2026
प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राथमिक - विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को पद सृजित कर सहायक अध्यापक पद पर नियमित करने और वेतन भुगतान की मांग में दाखिल याचिका पर केंद्र सरकार व राज्य सरकार - से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। - याचिका की अगली सुनवाई की -तिथि 17 जुलाई नियत की है।

यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी - चौहान ने वाराणसी के जितेंद्र कुमार भारती की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। याचिका में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा द्वारा 11 मई 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें शिक्षामित्रों को नियमित अध्यापक नियुक्त करने से इन्कार कर दिया गया है। याची के अधिवक्ता सत्येन्द्र चंद्र त्रिपाठी का कहना है कि प्रदेश में लगभग 1.70 लाख शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं। उन्हें मात्र 18 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है जबकि वे सहायक अध्यापक की तरह कार्य कर रहे हैं। उनके रिटायरमेंट के उपरांत उन्हें न तो ग्रेच्युटी मिलती है और न ही पेंशन। ऐसे शिक्षामित्र विगत 25 वर्षों से निरंतर शैक्षिक कार्य कर रहे हैं।

इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षामित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी व परिवार को कोई पेंशन नहीं मिलती जबकि पेमेंट आप ग्रेच्युटी एक्ट तथा ईपीएफ एक्ट शैक्षिक संस्थाओं में लागू है। संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक भोगी संविदा एवं अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। राज्य अपना दायित्व शिक्षामित्रों के मामले में नहीं निभा रही है।




शिक्षामित्र की ग्रेच्युटी, भविष्य निधि व पेंशन पर निर्णय लेने का निर्देश

बीएसए वाराणसी को छह सप्ताह में याची को सुनकर सकारण आदेश करने को कहा

20 मई 2026
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्र को ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि, पारिवारिक पेंशन का लाभ देने की मांग में दाखिल याचिका पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वाराणसी को छह सप्ताह में नियमानुसार याची को सुनकर सकारण आदेश करने का निर्देश दिया है।


कोर्ट ने याची से तीन सप्ताह में नए सिरे से प्रत्यावेदन देने को कहा है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने शहनाज बेगम की याचिका पर अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी को सुनने के बाद याचिका निस्तारित करते हुए दिया है। 

एडवोकेट सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी का कहना था कि उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख 70 हजार शिक्षामित्र प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत हैं, जिन्हें मात्र 10 हजार रुपये प्रत्येक माह दिया जाता था, जो वर्तमान में 18 हजार रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है लेकिन रिटायरमेंट के बाद उन्हें न तो ग्रेच्युटी जबकि और न ही पेंशन दिया जा रहा है ऐसे शिक्षामित्र 25 वर्षों से निरंतर शैक्षणिक कार्य कर रहे हैं। 

इतना ही नहीं यदि किसी शिक्षा मित्र की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है तो उनके उत्तराधिकारी एवं परिवार को कोई सहायता नहीं दी जाती जबकि ग्रेच्युटी ऑफ पेमेंट एक्ट व कर्मचारी भविष्य निधि कानून शैक्षणिक संस्थाओं में लागू है। साथ ही संविधान की धारा 39, 42, 43, 47 में भी दैनिक वेतन भोगी, संविदाकर्मी एवं अन्य कार्मिकों को सामाजिक सुरक्षा देने का दायित्व राज्य का है। वाराणसी में कार्यरत शिक्षामित्र की 48 वर्ष में मृत्यु हो जाने के कारण उनकी पत्नी ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से पारिवारिक पेंशन एवं ग्रेच्युटी भुगतान के लिए अनुरोध किया।

Thursday, April 23, 2026

शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

शिक्षामित्रों की मांग, कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के साथ मूल विद्यालय में कराएं वापसी

अपर मुख्य सचिव और निदेशक से मिले शिक्षामित्र पदाधिकारी


लखनऊ। उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने बुधवार को बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा व बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल से मुलाकात की। उन्होंने शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा और स्थानांतरण (मूल विद्यालय वापसी) जैसी सुविधाओं को लागू करने की मांग की।


प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि शिक्षामित्रों को कैशलेस चिकित्सा का लाभ देने संबंधी औपचारिकता अभी पूरी नहीं हुई है। इसे जल्द पूरा किया जाए ताकि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे शिक्षामित्रों को समय पर उपचार मिल सके। वहीं तबादले के लिए जिला स्तर पर प्रक्रिया नहीं हो रही है। इसके लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिया जाए। अधिकारियों ने इस पर जल्द सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

 प्रतिनिधिमंडल में राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (तिवारी गुट) के अध्यक्ष एसपी तिवारी, शिक्षामित्र संघ प्रदेश संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह, विनोद वर्मा, अजीत कुमार यादव, सुशील तिवारी आदि उपस्थित थे। 

Friday, April 10, 2026

पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश

पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का हाईकोर्ट का निर्देश 

2005 तक चयनित ऐसे शिक्षामित्रों का मामला जो बाद में अध्यापक बन गए

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को पुरानी पेंशन का विकल्प भरने वाले शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने याचियों की पेंशन के मामले में दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने अनूप कुमार सिंह व अन्य की याचिका सुनवाई करते हुए दिया है।


सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से दलील दी गई कि सरकार के 28 जून 2024 एवं 30 जुलाई 2025 के शासनादेशों के तहत पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र दिया गया है और याचियों का दावा संबंधित अधिकारियों के पास लंबित है लेकिन उस पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

सरकारी वकील ने याचियों की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। कोर्ट ने तथ्यों और पक्षकारों की दलीलों को सुनने के बाद याचिका का निस्तारण करते हुए उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव को याचियों के दावे पर नियमानुसार विचार कर उन्हें सुनवाई का समुचित अवसर प्रदान करते हुए दो माह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। गौरतलब है कि वर्ष 2005 तक चयनित ऐसे शिक्षा मित्र जो बाद की सीधी भर्तियों में अध्यापक बन गए हैं, उन्होंने पुरानी पेंशन के लिए विकल्प पत्र भरा है जिस पर शासन को निर्णय लेना है।

Wednesday, April 8, 2026

शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में

शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय देने पर कैबिनेट की मुहर, अप्रैल माह से बढ़ा मानदेय एक मई को पहुंचेगा खातों में 

1.43 लाख शिक्षामित्रों और 24 हजार अनुदेशकों को मिली राहत

सरकार पर आएगा 1475 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार

8 अप्रैल 2026
लखनऊः परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को अब 18 हजार रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। मानदेय में बढ़ोतरी के प्रस्ताव पर मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मुहर लगा दी गई। इस निर्णय को एक अप्रैल से लागू किया गया है। बढ़ा हुआ मानदेय एक मई को शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। 


अभी तक शिक्षामित्रों को 10 हजार और अनुदेशकों को नौ हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा था। इस तरह दोनों के मानदेय में 8,000 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि करने का निर्णय हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले वर्ष पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर और इस वर्ष 20 फरवरी को विधान सभा में मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।

कैबिनेट के निर्णय की जानकारी देते हुए बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनमें से 1,29,332 शिक्षामित्रों का मानदेय अब तक समग्र शिक्षा अभियान के तहत केंद्र और राज्य सरकार के बीच 60:40 के अनुपात में दिया जाता रहा है। मानदेय बढ़ने के बाद इस पर 1138.12 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय आएगा, जिसे प्रदेश सरकार वहन करेगी। इसके अलावा 13,597 शिक्षामित्र ऐसे हैं, जिनका मानदेय पूरी तरह राज्य सरकार देती है। इनके लिए 119.65 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार भी राज्य सरकार उठाएगी।



शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव पर आज लगेगी कैबिनेट की मुहर

07 अप्रैल 2026
लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लोक भवन में सुबह 10:30 बजे कैबिनेट की बैठक होगी। इसमें करीब एक दर्जन से अधिक प्रस्तावों को स्वीकृति मिल सकती है। 

सबसे अहम प्रस्ताव बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में कार्यरत 1.43 लाख शिक्षामित्रों और 25 हजार अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने से संबंधित है। शिक्षामित्रों का मानदेय 10 हजार रुपये से बढ़ाकर 18 हजार रुपये किया जाएगा और अनुदेशकों का मानदेय 9 हजार से बढ़ाकर 17 हजार किया जायेगा। वर्ष 2017 के बाद अब इनका मानदेय बढ़ने जा रहा है। इन्हें एक अप्रैल से बढ़ा हुआ मानदेय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने इसकी घोषणा विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान की थी।



शिक्षामित्रों को 18 और अनुदेशकों को 17 हजार इसी महीने से : सीएम योगी, पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी होगी उपलब्ध 

05 अप्रैल 2026
वाराणसी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शिक्षामित्रों को 18 हजार और अनुदेशकों को 17 हजार मानदेय इसी महीने से दिए जाने की घोषणा की। सीएम ने ये घोषणा वाराणसी के शिवपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय से स्कूल चलो अभियान के शुभारंभ के मौके पर की। उन्होंने कहा, शिक्षकों, शिक्षामित्रों, रसोइयों और अनुदेशकों को पांच लाख रुपये की कैशलेस स्वास्थ्य सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।


1.68 लाख शिक्षामित्रों-अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय

लखनऊः सरकार द्वारा बढ़ाए गए मानदेय का लाभ प्रदेश के 1.68 लाख से अधिक शिक्षामित्रों व अंशकालिक अनुदेशकों को मिलेगा। बढ़ाए गए मानदेय का भुगतान करने के लिए सरकार हर वर्ष 1480 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च करेगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद शिक्षामित्रों को 18,000 रुपये और अंशकालिक अनुदेशकों को 17,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाएगा। दोनों को हर शैक्षिक सत्र में 11 माह के लिए मानदेय का भुगतान किया जाता है। प्रदेश में वर्तमान में 1,43,450 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वर्तमान में उन्हें 10,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। शिक्षामित्रों का मानदेय बढ़ने पर 1,262.36 करोड़ रुपये अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा। वहीं 24,781 अंशकालिक अनुदेशकों को अभी 9,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जा रहा है। उनके मानदेय की राशि बढ़ने पर 218.07 करोड़ रुपये 1,480 करोड़ रुपये सालाना अतिरिक्त खर्च करेगी सरकार सरक बढे मानदेय पर अतिरिक्त वार्षिक व्यय होगा।

Wednesday, March 11, 2026

शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर दो माह में निर्णय लेंः हाईकोर्ट

शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर दो माह में निर्णय लेंः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने 115 शिक्षा मित्रों की याचिका पर दिया आदेश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षामित्रों की सेवा नियमित करने के मामले में निर्णय लेने का निदेश दवा को कोर्ट ने यह आदेश जाग्गों, श्रीपाल केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 115 याची प्रत्यावेदन । तीन सप्ताह में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को दें और अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा दो माह में विचार कर सहायक अध्यापक पद पर नियमितीकरण मामले में फैसला लें।


 यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने तेज बहादुर मौर्य और 114 अन्य शिक्षा मित्रों की याचिका निस्तारित कर दिया है। याचियों के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी के अनुसार याची बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र के रूप में वर्षों से कार्यरत हैं। लंबी सेवा को देखते हुए उन्हें सहायक अध्यापक के रूप में नियमित करने की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 11 जून 2025 के आदेश के अनुसार याची नियमित किए जाने के हकदार हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ऐसे ही मामले में विशेष अपील खारिज कर चुका है। यह सरकार का नीतिगत मामला है इसमें कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। याची के अधिवक्ता ने कहा कि बदली परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में याची नियमित होने के हकदार हैं, इसलिए उनके मामले में विचार किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने सरकार को याचियों के मामले में दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

कोर्ट ऑर्डर 👇


Thursday, February 19, 2026

एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब

एसआईआर के बाद अपनी ग्राम पंचायतों में तैनाती पा सकेंगे शिक्षामित्र, विधान सभा सत्र में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह का जवाब


लखनऊ। यूपी के विधानसभा में सत्र के दौरान सपा विधायक ओम प्रकाश ने बुधवार को शिक्षामित्रों के मानदेय और उनकी गृह जिले की ग्राम पंचायत में तैनाती का मामला उठाया। उनकी बात सुनने के बाद बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शिक्षामित्रों को उनके गृह जिलों की ग्राम पंचायतों में तैनाती के लिए मुक्त कर दिया जाएगा। आदेश पहले ही हो चुके हैं। एसआईआर की वजह से उन्हें फिलहाल मुक्त नहीं किया जा रहा है।


ओम प्रकाश ने कहा कि सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक शिक्षामित्रों की भर्ती हुई थी। हालांकि अब शिक्षामित्र लाचार हैं। एक ही विद्यालय में उनके साथ पढ़ाने वाले अध्यापकों को 80 हजार से एक लाख रुपये तनख्वाह दी जा रही है, जबकि शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। 

शिक्षा मित्रों में से 37 हजार टीईटी पास हैं। बावजूद इसके शिक्षामित्रों को न तो 68,500 और न ही 69 हजार शिक्षक भर्ती में शामिल किया गया। तमाम शिक्षामित्र अपने निवास से दूर तैनात हैं। इससे भी उन्हें दिक्कत हो रही है। मेरे गांव में 13 शिक्षामित्र हैं। जब वह अपनी दिक्कत कहते हैं तो हम केवल मूकदर्शक बने सुनते रहते हैं। पूरे देश में शिक्षामित्र बने थे। यूपी में इनकी संख्या 1,37,500 है। सभी राज्यों में उनकी तनख्वाह बढ़ गई, जबकि यूपी में नहीं हुआ। इनकी समस्याओं का समाधान किया जाए।


कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका

बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने जवाब दिया कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और शिक्षकों के कैशलेस इलाज का आदेश जारी हो चुका है। ग्राम पंचायतों में भी तैनाती का आदेश जारी हो चुका है। हालांकि, एसआईआर की प्रक्रिया में इनकी ड्यूटी लगी है। इसके बाद ही इनकी रिलीविंग की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उन्होंने कहा कि 2017 में शिक्षामित्रों का मानदेय 3500 रुपये था जिसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया गया है। आगे भी जो बेहतर होगा वह किया जाएगा। मंत्री के जवाब पर सपा सदस्यों ने कहा कि हमने तो शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर उन्हें 40 हजार रुपये वेतन दिया था। सपा सरकार तो उनकी बेहतरी चाहती थी।

नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

नई शिक्षक भर्ती की गुहार लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे यूपी के शिक्षामित्र, 69000 भर्ती में आरक्षण विवाद संग इस मामले की होगी सुनवाई

आदेश के पांच साल बाद भी प्रदेश भी में शुरू नहीं हुई शिक्षक भर्ती

शीर्ष अदालत के पहले के आदेश पर आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने भी दी थी सहमति 

पूर्व में उच्चतम न्यायालय ने अवसर, वेटेज और आयु में छूट देने के लिए कहा था


प्रयागराज। 69000 शिक्षक भर्ती से जुड़े प्रकरण में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। सिविल अपील राम शरण मौर्य बनाम स्टेट ऑफ यूपी में शिक्षामित्रों ने सुप्रीम कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र दाखिल करते हुए नई शिक्षक भर्ती शुरू करने का अनुरोध किया है।


शिक्षामित्रों का कहना है कि शीर्ष अदालत ने अपने पूर्व आदेश में अगली शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को अवसर, वेटेज (भारांक) तथा आयु/पात्रता में उपयुक्त छूट देने की बात कही थी, जिस पर राज्य सरकार ने भी सहमति व्यक्त की थी। हालांकि, आदेश के बाद पांच वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नई शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई है। 
प्रार्थना में यह भी उल्लेख है कि राज्य सरकार ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के 51112 पद खाली थे। साथ ही 68500 शिक्षक भर्ती से संबंधित 27,713 रिक्त पदों को नई विज्ञप्ति जारी कर भरने के निर्देशों का भी अब तक अनुपालन नहीं हुआ है। 

इस पर याचिकाकर्ताओं ने शीघ्र भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ कराने और पूर्व निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग की है। उधर इस मामले से जुड़े लोग इस मिसलेनियस एप्लीकेशन (एमए) को आगामी सुनवाई के संदर्भ में महत्वपूर्ण मान रहे हैं। 

यह आवेदन भविष्य की भर्ती नीति और प्रक्रियात्मक दिशा को प्रभावित कर सकता है। 69000 शिक्षक भर्ती पहले से ही व्यापक न्यायिक विमर्श का विषय रही है और संबंधित पक्षकार लंबित निर्देशों के अनुपालन पर विशेष जोर दे रहे हैं। शिक्षामित्रों के प्रार्थना पत्र की सुनवाई भी 69000 आरक्षण विवाद के साथ की जाएगी।

Tuesday, February 17, 2026

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार

आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ेगा, सीएम योगी की विधानसभा में घोषणा, कहा –शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकार


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को विधान परिषद में आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की है। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। हाल ही में इनके लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की घोषणा हुई है। 


एक अप्रैल से पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा निशुल्क उपलब्ध होगी। सीएम ने कहा रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं, महिला सशक्तीकरण पर विशेष ध्यान दिया। युवाओं के लिए नई योजनाएं शुरू की गईं।


शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के लिए भी काम कर रही सरकारः उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों, अनुदेशकों के लिए भी सरकार काम कर रही है। शिक्षक चाहे बेसिक के हों, माध्यमिक या उच्च शिक्षा केइसके अलावा शिक्षणेत्तर कर्मचारियों, रसोइयों को भी पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की गई है। एक अप्रैल से इसका लाभ भी मिलने लगेगा।

Thursday, February 5, 2026

उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार

उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी होगी तैयार


लखनऊ । उत्तर प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के सभी शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की फैमिली आईडी तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का लाभ पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों तक सुनिश्चित करना है। इस प्रक्रिया के तहत शिक्षा विभाग से जुड़े प्रत्येक कार्मिक को अपने परिवार के सभी सदस्यों का विवरण फैमिली आईडी पोर्टल पर दर्ज कराना होगा।



प्रदेश भर में संचालित परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग लाखों शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक, रसोइया और अन्य कर्मचारी इस दायरे में आएंगे। फैमिली आईडी में पति, पत्नी और बच्चों सहित परिवार के सभी सदस्यों का नाम और आधार नंबर दर्ज किया जाएगा। पंजीकरण के दौरान मुख्य व्यक्ति का मोबाइल नंबर अनिवार्य होगा, जिस पर ओटीपी के माध्यम से सत्यापन किया जाएगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार सभी बीईओ और विद्यालय स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे समय से फैमिली आईडी बनवाकर उसकी प्रति विभाग को उपलब्ध कराएं। फैमिली आईडी तैयार होने के बाद ही संबंधित कर्मचारियों का वेतन निर्गत किया जाएगा। इसी कारण फरवरी माह का वेतन फैमिली आईडी पूर्ण होने के बाद ही जारी किया जाएगा।

अधिकारियों का कहना है कि फैमिली आईडी के माध्यम से सरकारी डाटाबेस में कर्मचारियों और उनके परिवारों की स्पष्ट और अद्यतन जानकारी उपलब्ध होगी, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी। प्रदेश के कई जिलों में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा फैमिली आईडी बनवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और विभागीय स्तर पर इसकी निगरानी भी की जा रही है।

शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित कार्मिकों को इस प्रक्रिया को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र पूरा करना होगा, ताकि वेतन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।

Wednesday, January 7, 2026

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को जल्द मिलेगा कैशलेश इलाज, मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती; बेसिक शिक्षा मंत्री ने कहा- नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें, कदम से कदम मिलाकर साथ चलें, हर दिक्कत का होगा समाधान



शिक्षामित्रों को जल्द मिलेगा कैशलेस इलाजः बेसिक शिक्षामंत्री

लखनऊ । बेसिक शिक्षामंत्री संदीप सिंह ने मंगलवार को प्राथमिक शिक्षामित्र संघ का प्रान्तीय सम्मेलन में कहा कि सरकार जल्द शिक्षामित्रों को कैशलेस इलाज और बढ़ा हुआ मानदेय देगी। शिक्षामंत्री ने शिक्षामित्रों की लंबित मांगों के निस्तारण का आश्वासन दिया। मंगलवार को लोक निर्माण विभाग के विश्वसरैया सभागार में आयोजित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रान्तीय सम्मेलन में शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों ने बेसिक शिक्षा मंत्री का स्वागत किया। सभी ने प्रदेश सरकार के शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों को कैसलेस चिकित्सा में शामिल करने एवं शिक्षामित्र को मूल विद्यालय वापसी की कार्रवाई शुरू किये जाने पर शिक्षामंत्री का स्वागत कर मुख्यमंत्री योगी को धन्यवाद ज्ञापित किया।



शिक्षामित्रों की मनचाहे विद्यालय में होगी तैनाती

लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि शिक्षामित्रों को जल्द ही उनके घर के पास, मनचाहे विद्यालयों में तैनाती दी जाएगी। राजधानी में मंगलवार को आयोजित उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रांतीय सम्मेलन एवं सम्मान समारोह में उन्होंने कहा कि इस दिशा में कार्य तेजी से चल रहा है और शीघ्र ही इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाएगा।

राज्यमंत्री ने शिक्षामित्रों को आश्वस्त करते हुए कहा कि सरकार उनकी सभी आवश्यक मांगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपील की कि शिक्षामित्र नकारात्मकता को छोड़कर एकजुट रहें और सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर आगे बढ़ें। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षामित्र किसी भी तरह से समस्या नहीं, बल्कि वे बेसिक शिक्षा के अभिन्न अंग हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षामित्रों की मांगों को मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है और उचित समय पर इसकी औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा में एडेड और वित्तविहीन विद्यालयों के सभी शिक्षकों को शामिल करने का निर्णय लिया है। इसी कारण इसमें कुछ समय लग रहा है।

सम्मेलन में एमएलसी व विधायक श्रीचंद्र शर्मा, वीरेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह लोधी, देवेंद्र सिंह राजपूत, उमेश द्विवेदी, हरिओम वर्मा, अवनीश सिंह, मानवेंद्र सिंह सहित प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला, महामंत्री सुशील कुमार, संगठन मंत्री कौशल कुमार सिंह तथा अनुदेशक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विक्रम सिंह सहित बड़ी संख्या में शिक्षामित्र उपस्थित रहे। 


सरकार विरोधी छवि सुधारनी होगी

शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने कहा कि शिक्षामित्रों को अपनी सरकार विरोधी छवि सुधारने की आवश्यकता है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार शिक्षामित्रों के साथ खड़ी है और हर स्तर पर सहयोग करेगी। एमएलसी मानवेंद्र सिंह ने शिक्षामित्रों को बेसिक शिक्षा की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार किसी भी स्थिति में उनका नुकसान नहीं होने देगी। वहीं, एमएलसी अवनीश सिंह ने कहा कि शिक्षामित्र अपने कर्तव्यों का निष्ठा से निर्वहन करें, उनके अधिकारों की लड़ाई जनप्रतिनिधि पूरी मजबूती से लड़ते रहेंगे।