DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Thursday, February 29, 2024

ललितपुर BSA समेत आठ पर दर्ज होगा मुकदमा, जानिए क्यों?

ललितपुर BSA समेत आठ पर दर्ज होगा मुकदमा, जानिए क्यों? 


वाराणसी: मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हितेश अग्रवाल की कोर्ट ने फर्जी दस्तावेज के आधार पर प्रधानाचार्य की नियुक्ति मामले में ललितपुर में तैनात बीएसए हरिकेश यादव सहित आठ के खिलाफ चोलापुर थाने में मुकदमा दर्ज कराने का आदेश दिया है। हरिकेश यादव बनारस में भी बीएसए थे। अभियुक्तों में प्रधानाचार्या मीला यादव, सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गणेश यादव, मनोज मिश्रा, संजीव सिंह, संतोष कुशवाहा भी हैं। 


मार्च 2018 में अजीत प्रसाद ने अधिवक्ता अनुपम द्विवेदी के माध्यम से कोर्ट में 156 (3) के तहत प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि प्रार्थी शासन से वित्तीय सहायता प्राप्त श्रीविश्वकर्मा माध्यमिक विद्यालय रौनाखुर्द की वर्किंग कमेटी का स्थाई सदस्य हैं। वर्तमान में उपरोक्त विद्यालय की प्रधानाध्यापिका मीला यादव की नियुक्ति फर्जी विज्ञापन के आधार पर हुई है।


मीला यादव का अनुमोदन तत्कालीन बीएसए हरिकेश यादव, बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात मनोज मिश्रा,संजीव सिंह और संतोष कुशवाहा ने किया था। नियुक्ति में प्रयुक्त अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी और कूटरचित है। मीला यादव सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष गणेश यादव की पत्नी भी हैं। वर्ष 2016 में बीएसए ने कर्मचारियों के साथ एक बार फिर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर सगे-सम्बन्धियों को बतौर सहायक अध्यापक नियुक्त व अनुमोदित करा लिया।


मीला यादव श्रीविश्वकर्मा माध्यमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापिका के पद पर नियुक्त होने के बाद शिव दुर्गेश्वरी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय असवारी- व पुष्परंजन बालिका विद्यालय-पांडयेपुर में फर्जी तरीके से प्रधानाध्यापिका बनकर अपने करीबियों को की नियुक्तियां कीं।

अब मदरसा छात्रों को केंद्रीय विवि में आसानी से मिलेगा प्रवेश, मदरसा बोर्ड को कोबसे से मिली मान्यता, छात्र विदेश में भी कर सकेंगे पढ़ाई

अब मदरसा छात्रों को केंद्रीय विवि में आसानी से मिलेगा प्रवेशमदरसा बोर्ड को कोबसे से मिली मान्यता, छात्र विदेश में भी कर सकेंगे पढ़ाई


लखनऊ। प्रदेश के मदरसा छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए केंद्रीय विश्वविद्यालयों में अब आसानी से दाखिला मिल सकेगा। वहीं, विदेश में पढ़ने की चाहत रखने वाले छात्रों को भी कोई बाधा नहीं रहेगी। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद को भारतीय विद्यालय शिक्षा बोर्ड परिषद (सीओबीएसई यानी कोबसे) ने पंजीकरण के बाद मान्यता दे दी है।


उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद से करीब 16,460 मदरसे मान्यता प्राप्त हैं। इन मदरसों में मुंशी-मौलवी हाई स्कूल समकक्ष, आलिम इंटर समकक्ष, कामिल स्नातक और फाजिल परास्नातक के समकक्ष पढ़ाई होती है। 


मदरसा बोर्ड का पंजीकरण अभी तक कोबसे में नहीं था। बोर्ड के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद ने बताया कि मदरसा बोर्ड का कोबसे में पंजीकरण न होने से भारतीय सेना सशस्त्र बल में भर्ती, केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश और विदेश में उच्च शिक्षा के लिए बाधा आ रही थीं। 


संबंधित संस्थाएं व विभाग कोबसे पंजीकरण प्रमाणपत्र मांगते थे। अब उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद का भी अन्य सभी बोर्डों की तरह कोबसे में पंजीकरण हो गया है। कोबसे ने मान्यता प्रमाणपत्र भी भेज दिया है। उन्होंने बताया कि कोबसे से मान्यता मिलने के बाद मदरसा बोर्ड के प्रमाणपत्र का महत्व बढ़ जाएगा। 


कोबसे पंजीकरण से मदरसा छात्रों को सेना में भर्ती होना आसान हो जाएगा। विदेश में उच्च शिक्षा के लिए जाने वाले मदरसा छात्रों के सामने कोई बाधा नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में यूपी मदरसा बोर्ड के छात्रों को आसानी से प्रवेश मिलने के साथ ही पासपोर्ट बनवाने में होने वाली असुविधा से मुक्ति मिलेगी। 


मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार डॉ. प्रियंका अवस्थी ने बताया कि कोबसे भारत के सभी स्कूल बोर्डों का महासंघ है, जो भारत सरकार के अधीन एक स्वायत्त संस्था है। इसमें देश भर के सभी स्कूल बोर्ड पंजीकृत हैं। 

Wednesday, February 28, 2024

क्या है SWAYAM Plus पोर्टल, जो शिक्षा मंत्रालय ने किया लाॅन्च? जानिये इसके फायदे


क्या है SWAYAM Plus पोर्टल, जो शिक्षा मंत्रालय ने किया लाॅन्च?  जानिये इसके फायदे


शिक्षा मंत्रालय की ओर से SWAYAM Plus पोर्टल लाॅन्च किया गया है. पोर्टल पर रोजगार परक कोर्स पेश किए जाएंगे, जिससे की पढ़ाई के बाद युवाओं को आसानी से नौकरी मिल सकें. पढ़ाई के साथ युवाओं के कौशल विकास पर अधिक ध्यान दिया जाएगा. पोर्टल का संचालन आईआईटी मद्रास की ओर से किया जाएगा.


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से SWAYAM Plus पोर्टल लाॅन्च किया है. इसे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने लाॅन्च किया. उद्योग के साथ सहयोग से विकसित पाठ्यक्रमों की पेशकश करने के लिए इसे लॉन्च किया गया है. रोजगार, योग्यता और व्यावसायिक विकास-केंद्रित प्रोग्राम एलएंडटी, माइक्रोसॉफ्ट और सिस्को सहित उद्योगों के साथ मिलकर विकसित किया गया है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य शिक्षा को उद्योग-योग्य बनाना है. शिक्षार्थियों को पेशेवर दुनिया में सफल होने के लिए आवश्यक कौशल और ज्ञान प्रदान करना है.


भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास इस पोर्टल का संचलान करेगा. आईआईटी मद्रास की ओर से स्वयं-एनपीटीईएल और मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्स शुरू किया गया है ,जो शैक्षिक अवसर प्रदान करता है. आईआईटी मद्रास के एक बयान में कहा गया है कि SWAYAM के पास आज सबसे बड़ा रजिस्ट्रेशन आधार है. कुल नामांकन 2017 में 31 लाख से बढ़कर 2023 के अंत तक 72 लाख से अधिक हो गया है.


क्यों लाॅन्च किया गया प्लेटफाॅर्म?
SWAYAM प्लस की स्थापना का उद्देश्य कॉलेज के छात्रों आदि की रोजगार क्षमता को बढ़ाना है. प्लेटफॉर्म के जरिए भारतीय ज्ञान प्रणालियों के अलावा विनिर्माण, ऊर्जा, कंप्यूटर विज्ञान और इंजीनियरिंग, आईटी या आईटीईएस, प्रबंधन अध्ययन, स्वास्थ्य देखभाल, आतिथ्य और पर्यटन सहित कई सेक्टरों से संंबंधित प्रोग्राम पेश किए जाएंगे.


पोर्टल लॉन्च करते हुए धर्मेद्र प्रधान ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) लागू है और पहली बार प्रतिष्ठित उद्योग अपनी स्वयं की अकादमी के साथ आएंगे. यूजीसी और शिक्षा विभागों के साथ साझेदारी करेंगे, आईआईटी मद्रास जैसे संस्थान की ओर से इन सभी पाठ्यक्रमों को मान्यता दी जाएगी.


क्या होगा फायदा?
आईआईटी मद्रास के अनुसार इन पाठ्यक्रमों के माध्यम से छात्रों को पढ़ाई के साथ स्किल भी सिखाई जाएगी. मार्केट में नौकरी की मांग के अनुसार इन्हें तैयार किया जाएगा. संस्थान ने कहा कि पाठ्यक्रम शिक्षा और उद्योग के बीच की खाई को पाटने में बहुत मददगार होंगे. जिससे कॉलेज के स्नातक अधिक नौकरी पा सकेंगे. बहुभाषी सामग्री, छात्रों की सहायता के लिए एआई-सक्षम चैटबॉट और क्रेडिट पहचान SWAYAM प्लस प्लेटफॉर्म की विशेषताएं हैं.

छह राज्यों का समग्र शिक्षा योजना फंड रोकेगी केन्द्र सरकार; पैसा लेने के बावजूद योजना पर अमल नहीं करने की मिलेगी सजा


छह राज्यों का समग्र शिक्षा योजना फंड रोकेगी केन्द्र सरकार; पैसा लेने के बावजूद योजना पर अमल नहीं करने की मिलेगी सजा


केंद्र सरकार ने छह राज्यों को मिलने वाले फंड पर रोक लगाने का फैसला लिया है। मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा है। आरोप हैं कि राज्यों ने केंद्र से पैसे लेने के बावजूद योजना पर अमल नहीं किया।


वित्तीय मदद लेने के बाद भी मनमानी और लचर रवैया दिखाना छह राज्यों को भारी पड़ने वाला है। दरअसल, केंद्र सरकार शिक्षा में सियासत करने के साथ कोताही बरतने वाले दिल्ली, पंजाब समेत छह राज्यों पर लगाम लगाने की तैयारी कर रही है। यह राज्य स्कूली शिक्षा के लिए समग्र शिक्षा योजना में फंडिंग तो लेते हैं, लेकिन योजनाओं को लागू नहीं कर रहे हैं। 


इसमें दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, केरल की प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) की सिफारिश के तहत पीएमश्री स्कूलों के लिए शिक्षा मंत्रालय के साथ बार-बार नोटिस भेजने के बाद समझौता हस्ताक्षर से इंकार कर दिया है। अब ऐसे राज्यों को समग्र शिक्षा योजना में मिलने वाली पैसा नहीं दिया जाएगा।


नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षा जगत में बदलाव की तैयारियां
सूत्रों के मुताबिक, एनईपी 2020 के तहत ही सरकारी स्कूलों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, इंफ्रास्ट्रक्चर और आम छात्रों को अच्छी शिक्षा देने के मकसद से पीएम श्री स्कूलों को शुरू किया गया है। इसके लिए समग्र शिक्षा योजना के तहत केंद्र सरकार फंडिंग दे रही है। इसमें सरकारी स्कूलों को पीएम श्री स्कूल में बदलने के बाद उसका सारा खर्चा केंद्र की ओर से दिया जाता है।


90 फीसदी खर्च केंद्र का, 10 फीसदी राज्य सरकार देती है
इसके अलावा पीएम श्री स्कूल अन्य सरकारी स्कूलों को रोल मॉडल बनकर आगे बढ़ने में मदद कर सकते हैं। हालांकि उक्त राज्यों ने पैसा तो ले लिया, लेकिन योजना को लागू नहीं किया। शिक्षा मंत्रालय के बार-बार आग्रह के बाद अब समझौता हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया है।


 स्कूली शिक्षा के लिए उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू-कश्मीर,लददाख और नॉर्थ ईस्ट के राज्यों को 90 फीसदी केंद्र और 10 फीसदी राज्य सरकार खर्च करती है। जबकि अन्य राज्यों में 60 फीसदी पैसा केंद्र सरकार और 40 फीसदी राज्य खर्च करते हैं। वहीं, पीएम श्री स्कूलों पर सारा खर्चा केंद्र सरकार देती है।

यूपी के 14 विश्वविद्यालयों की बदलेगी सूरत

यूपी के 14 विश्वविद्यालयों की बदलेगी सूरत

पीएम उषा के तहत 740 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए

उच्च शिक्षा मंत्री व कुलपतियों ने विकास के पंच सूत्र तय


लखनऊ : केंद्र सरकार ने प्रदेश के 14 विश्वविद्यालयों को प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) के तहत 740 करोड़ रुपये दिए हैं। अब इन विश्वविद्यालयों में नवाचार व बहुविषयक शोध को बढ़ावा दिया जाएगा और जरूरी आधारभूत सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा। पुराने जर्जर भवन की जगह नए भवनों का निर्माण कराया जाएगा। योजना भवन में मंगलवार को समागम वर्ष 2024 का आयोजन कर केंद्र सरकार का आभार जताया गया और आगे की रणनीति तय की गई।


उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने कहा कि समागम में तय किए गए पंच सूत्र से विश्वविद्यालयों को तेजी से विकास होगा। पंच सूत्र में समाज, सहयोग, सुधार, सततता व संस्कार शामिल हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र पोषित योजनाओं का यूपी के विश्वविद्यालय अधिक से अधिक लाभ उठाने में कामयाब हुए हैं। वर्ष 2026 तक सकल नामांकन दर को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना होगा। उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने कहा कि शोध की ओर विद्यार्थियों का रुझान बढ़ेगा और नए-नए कोर्सेज शुरू किए जाएंगे।


लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय ने कहा कि बहुविषयक शोध व नवाचार के लिए उपकरण और अन्य जरूरी संसाधन आसानी से जुटाए जा सकेंगे। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को भी विश्वविद्यालय तेजी से बढ़ाएंगे और विद्यार्थियों के लिए शिक्षा के साथ-साथ रोजगार व स्वरोजगार के अवसर भी विकसित होंगे। 

बहु-अनुशासनात्मक शिक्षा व अनुसंधान विश्वविद्यालय तहत यूपी के छह विश्वविद्यालयों को सौ-सौ करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। जिन विश्वविद्यालयों को यह धनराशि दी गई है उसमें लखनऊ विश्वविद्यालय, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी, दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली और डा. राम मनोहर लोहिया विश्वविद्यालय शामिल हैं। वहीं विश्वविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के लिए आठ विश्वविद्यालयों को धनराशि दी  गई है।



पीएम उषा योजना में यूपी के छह विश्वविद्यालयों को मिले 100-100 करोड़

शोध की गुणवत्ता बढ़ाने तथा जर्जर भवनों के सुंदरीकरण पर अनुदान का होगा प्रयोग

छह अन्य राज्य विश्वविद्यालयों को भी 20-20 करोड़, दो अन्य को भी राशि स्वीकृत


लखनऊ। केंद्र सरकार की योजना प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) के तहत उत्तर प्रदेश को देश में सर्वाधिक अनुदान मिला है। विभिन्न मदों में लगभग 740 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं। इसके तहत जहां राजधानी के लविवि समेत छह विवि को 100-100 करोड़ मिला है, वहीं छह अन्य को 20-20 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए गए हैं।


इस अनुदान से विश्वविद्यालयों में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, जर्जर हो चुके पुराने भवनों के सुंदरीकरण, लैब सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। 


इस योजना के तहत प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों लखनऊ विवि लखनऊ, डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विवि अयोध्या, महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखण्ड विवि बरेली, दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि गोरखपुर, बुंदेलखण्ड विवि झांसी, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ को 100-100 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है।


 इसी तरह विश्वविद्यालयों के सुंदरीकरण के अंतर्गत प्रदेश के चार विश्वविद्यालयों डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि आगरा, छत्रपति शाहू जी महाराज विवि कानपुर, मां शाकुम्भरी विवि सहारनपुर और महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी को 20-20 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए हैं।


वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विवि जौनपुर को 19.99 करोड़, प्रो राजेन्द्र सिंह (रज्जू भईया) विवि प्रयागराज को 19.99 करोड़, जननायक चन्द्रशेखर विवि बलिया को 13.38 करोड़ और सिद्धार्थ विवि कपिलवस्तु को 6.53 करोड़ स्वीकृत हुआ है। 


प्रदेश में इस अनुदान का प्रयोग डिजिटल शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचे को विकसित करने, नई लैब बनाने, पुरानी लैब व क्लास के निर्माण, हॉस्टल निर्माण, पुराने भवनों के रिनोवेशन आदि मूलभूत जरूरत के लिए किया जाएगा। 


पीएम उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत उप्र को 740 करोड़ अनुदान

लखनऊ : केंद्र सरकार की योजना प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के तहत उत्तर प्रदेश को देश में सर्वाधिक अनुदान स्वीकृत किया गया है। प्रदेश को विभिन्न मदों में लगभग 740 करोड़ रुपये का अनुदान जारी किया गया है। स्वीकृत अनुदान का उपयोग विश्वविद्यालयों में शोध की गुणवत्ता को बढ़ाने तथा जर्जर हो चुके पुराने भवनों के जीर्णोद्धार पर किया जाएगा।

प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान के अंतर्गत चिह्नित न्यूनतम सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) के क्रम में असेवित क्षेत्रों में नए राजकीय माडल महाविद्यालयों के लिए अनुदान प्रदान किया गया है। इस केंद्र प्रायोजित योजना के अंतर्गत वर्ष 2026 के अंत तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 35 प्रतिशत तक बढ़ाना है। बहु-विषयक शिक्षा और अनुसंधान की सुविधा विकसित करने के लिए प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों को अनुदान दिया गया है। 

इनमें अयोध्या के डा. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, बरेली के महात्मा ज्योतिबा फूले रुहेलखंड झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को मिले 100 करोड़ रुपये कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय को 20 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय, दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, झांसी के बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय, मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय 100-100 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है।

 इसी तरह विश्वविद्यालयों के सुदृढ़ीकरण के अंतर्गत पूरे देश में चिह्नित 52 विश्वविद्यालयों में से उत्तर प्रदेश के आठ विश्वविद्यालयों को अनुदान दिया गया। इनमें आगरा के डा. भीम राव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, कानपुर के छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, सहारनपुर के मां शाकम्भरी विश्वविद्यालय और वाराणसी के महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ को 20-20 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। जौनपुर के वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय को 19.99 करोड़ रुपये प्रदान किए गए।

Tuesday, February 27, 2024

Free Computer Coaching: यूपी में OBC छात्र कर सकेंगे फ्री में CCC और O लेवल कंप्यूटर कोर्स

Free Computer Coaching: यूपी में OBC छात्र कर सकेंगे फ्री में CCC और O लेवल कंप्यूटर कोर्स 


OBC Computer Training: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स का ऐलान किया है। इस कोर्स के लिए इच्छुक उम्मीदवार जून से जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। 


UP Free Computer Course: उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के उम्मीदवारों के लिए मुफ्त में कंप्यूटर कोर्स का ऐलान किया है। ओबीसी कैटेगरी के छात्रों के लिए यह एक शानदार अवसर है जो कंप्यूटर कोर्स करना चाहते हैं। इस कोर्स के तहत, छात्रों के लिए सीसीसी (कंप्यूटर कॉन्सेप्ट कोर्स) और ओ-लेवल कंप्यूटर कोर्स मुफ्त हैं। ओ-लेवल कंप्यूटर कोर्स में फाउंडेशन-स्तर के सिलेबस हैं।



इस दिन तक कर सकते हैं आवेदन
इस कोर्स के लिए इच्छुक उम्मीदवार जून से जुलाई तक आवेदन कर सकते हैं। उम्मीदवार इस कोर्स के लिए यूपी पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के ओ-लेवल और सीसीसी कंप्यूटर प्रशिक्षण योजना पोर्टल obccomputertraining.upsdc.gov.in के माध्यम से नामांकन कर सकते हैं।


अवधि और आवेदन प्रक्रिया
इच्छुक उम्मीदवारों की आयु 35 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। कोर्स के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है। आवेदन की प्रक्रिया के लिए कोई फीस नहीं है और आवेदन को सही रूप से भरकर उम्मीदवारों को ऑनलाइन प्रिंटआउट लेना चाहिए। इसके बाद, उम्मीदवारों को आवश्यक दस्तावेजों के साथ जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी के कार्यालय में जमा करना होगा।


कौन ले सकता है एडमिशन?
जिन उम्मीदवारों ने 12वीं पास की है, वे इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। चयन 12वीं में प्राप्त अंकों के आधार पर किया जाएगा। इसके साथ ही, आवेदक को सरकारी योजनाओं जैसे स्कॉलरशिप/फीस रिम्बर्समेंट आदि का कोई लाभ नहीं लिया होना चाहिए। वहीं, परिवार की वार्षिक आय 1,00,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए।


ट्रेनिंग की अनिवार्यता और नियम
ट्रेनिंग के दौरान 75 प्रतिशत बायोमेट्रिक उपस्थिति आवश्यक है और यदि कोई उम्मीदवार बीच में कोर्स छोड़ता है तो रजिस्ट्रेशन फीस को वापस करना होगा। इसके अलावा, बिना किसी कारण बताए ट्रेनिंग के दौरान 15 दिन से अधिक अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों को आगे की ट्रेनिंग की अनुमति नहीं होगी।


69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा अपना दल कार्यालय

69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने घेरा अपना दल कार्यालय


27 फरवरी 2024
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने सोमवार को नियुक्ति की मांग को लेकर अपना दल कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान उनकी प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल से वार्ता हुई, लेकिन अभ्यर्थी संतुष्ट नहीं हुए और धरना जारी रखा। 


पुलिस देर रात तक अभ्यर्थियों की मान-मनौव्वल में जुटी रही। काफी दिन से लगातार आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी 6800 सीटों पर नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में वह अपना दल कार्यालय, माल एवेन्यू पहुंचे। 




69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा जल शक्ति मंत्री का आवास, नियुक्ति को लेकर तेज हुआ अभ्यर्थियों का आंदोलन, पुलिस से हुई नोकझोंक और धक्कामुक्की

25 फरवरी 2024
लखनऊ। प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। शनिवार को अभ्यर्थियों ने सुबह जल शक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास का घेराव किया। इस दौरान अभ्यर्थियों की पुलिस से तीखी नोकझोंक व धक्कामुक्की हुई।

कुछ दिनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थी सुबह अचानक मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के आवास पहुंच गए। इसकी सूचना मिलने पर काफी पुलिस बल वहां पहुंचा और अभ्यर्थियों को हटाने का प्रयास किया। लेकिन अभ्यर्थी मंत्री से मिलने के लिए अड़े रहे। इसे लेकर उनकी पुलिस से झड़प भी हुई।

इसके बाद ने उन्हें जबर्दस्ती उठाकर बस से ईको गार्डन पहुंचाया। अभ्यर्थियों का नेतृत्व कर रहे विजय यादव ने कहा कि पुलिस ने कई युवाओं को पीटा। इसमें कुछ चोटिल भी हुए हैं। पुलिस पीड़ित युवाओं को न्याय दिलाने की जगह उनका उत्पीड़न कर रही है। अब पुलिसकर्मी हमें न्याय मांगने के लिए आंदोलन न करने का दबाव बना रहे हैं। 


69000 शिक्षक भती के अभ्यर्थियों ने भाजपा कार्यालय का किया घेराव, हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से लचर पैरवी का आरोप


लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति के लिए आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने सरकार पर हाईकोर्ट में लचर पैरबी का आरोप लगाया। शिक्षक भर्ती में 6800 सूची के चयनित अभ्यर्थी अपनी नियुक्ति के लिए लगातार आंदोलन कर रहे हैं।


प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि यह मामला हाईकोर्ट में चल रहा है। लेकिन सरकार ठीक से पैरवी न करके उनके भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे विजय प्रताप ने बताया कि 6800 ३ अरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की द्वितीय लिस्ट जारी हुए दो साल होने को है, पर अब तक उन्हें नियुक्ति नहीं मिली है। 

अभ्यर्थी भाजपा नेताओं से मिलने की मांग पर अड़े थे। इसे लेकर उनकी पुलिस से नोकझोंक भी हुई। अंत में पुलिस ने जबर्दस्ती अभ्यर्थियों को बस से इंको गार्डन पहुंचा दिया। घेराव में वीरेंद्र वीर, यशवंत, गंगा शरण, भोला नाथ आंबेडकर, अर्चना शर्मा, नजमा, प्रियंका मोदनवाल, अवनीश कुमार, नवनीत कुमार आदि अभ्यर्थी शामिल थे।



भाजपा कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर रहे 69000 शिक्षक भर्ती  अभ्यर्थियों को घसीटते हुए ले गई पुलिस

यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती के 6800 अभ्यर्थियों ने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय का घेर कर प्रदर्शन किया. शिक्षक अभ्यर्थियों का आरोप है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों की हीलाहवाली से उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है.


लखनऊ : 69000 शिक्षक भर्ती के अंतर्गत चयनित 6800 आरक्षित वर्ग के शिक्षक अभ्यर्थियों ने नियुक्ति की मांग को लेकर शुक्रवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय का घेराव किया. अभ्यर्थी बीते एक सप्ताह से लगातार नियुक्ति की मांग को लेकर राजधानी में जगह-जगह पर प्रदर्शन कर रहे हैं. वह कभी मुख्यमंत्री आवास का घेराव करते हैं तो कभी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचते हैं. इसके अलावा डिप्टी सीएम के आवास के बाहर प्रदर्शन भी प्रदर्शन कर चुके हैं. इसी कड़ी में शुक्रवार को 6800 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने भाजपा कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया और उपेक्षा का आरोप लगाते हुए नारेबाजी भी की.


पुलिस ने जबरदस्ती बस में बैठाया

अभ्यर्थियों के घेराव करने की सूचना पाकर पहले से ही भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था. भाजपा कार्यालय की गेट से शिक्षक अभ्यर्थियों को हटाने के लिए पुलिस को बल का प्रयोग करना पड़ा. इस दौरान अभ्यर्थियों और शिक्षकों के बीच में जमकर धक्का मुक्की और बहसबाजी हुई. प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग और प्रशासन के लोग वादाखिलाफी कर रहे हैं. पुलिस प्रशासन ने अभ्यर्थियों की मुलाकात मुख्यमंत्री से कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अभी तक उनकी मुलाकात नहीं हो पाई. इसी बात से नाराज अभ्यर्थी एक बार फिर भाजपा कार्यालय पहुंचकर नारेबाजी करने लगे. बहरहाल पुलिस ने सभी अभ्यर्थियों को जबरदस्ती बस में बैठाकर इको गार्डन धरनास्थल ले जाकर छोड़ दिया.


आरोप : 6800 दलित पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नहीं मिल रहा न्याय
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच में 69000 शिक्षक भर्ती संबंधित मामले की सुनवाई चल रही है. इस संबंध में शिक्षा मंत्री संदीप सिंह और विभाग के अधिकारी ने हम अभ्यर्थियों से मीटिंग में जो वादे किए थे उसके मुताबिक सरकार के वकील कोर्ट में पक्ष नहीं रख रहे हैं. बल्कि आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का विरोध कर रहे हैं. यह अभ्यर्थी चाहते हैं कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करवाई जाए. 


अमरेंद्र पटेल ने बताया कि मुख्यमंत्री के ही आदेश से हुई जांच के बाद 6800 आरक्षित वर्ग की चयन सूची आई थी. अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री से होने पर पूरे मामले का सही निस्तारण हो जाएगा. अमरेंद्र पटेल ने कहा की 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण लागू करने में घोर अनियमितता बरती गई, जिस कारण आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नौकरी से वंचित कर दिया गया. बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विसंगति को सुधारने के उपरांत 6800 दलित पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का वादा करते हुए सूची जारी की थी, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिल सका है.

डीएलएड प्रशिक्षितों की मांग : नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करे सरकार

डीएलएड प्रशिक्षितों की मांग : नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन जारी करे सरकार


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों की नई भर्ती निकालने की मांग को लेकर डीएलएड प्रशिक्षितों ने सोमवार को 23 वें दिन भी ईको गार्डन में धरना जारी रखा। नई प्राथमिक शिक्षक भर्ती निकालने डीएलएड प्रशिक्षितों की मांग को लेकर धरना दे रहे डीएलएड प्रशिक्षितों की अगुवाई ने की मांग कर रहे डीएलएड संघ के अध्यक्ष रजत सिंह ने कहा कि पांच वर्ष से अधिक समय से भर्ती न आने के कारण डीएलएड प्रशिक्षित मानसिक तनाव से सूझ रहे हैं।


विभाग में लाखों पद रिक्त होने के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग प्राथमिक शिक्षक भर्ती का विज्ञापन नहीं जारी नहीं कर रहा है। कहा कि विधानसभा चुनाव के समय तत्कालीन शिक्षामंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने 17000 शिक्षक भर्ती को लेकर लिखित आदेश दिया था। लेकिन अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग ने भर्ती नहीं निकाली। धरने में मुख्य रूप से ज्ञानेंद्र वर्मा, राहुल यादव, अरुण कुमार, नूतन, राधिका आलोक पांडेय आदि मौजूद रहे।

यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लंबित पारिश्रमिक के लिए 15.19 करोड़ आवंटित, चार वर्ष के लंबित भुगतान करने के का निर्देश


यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लंबित पारिश्रमिक के लिए 15.19 करोड़ आवंटित चार वर्ष के लंबित भुगतान करने के का निर्देश


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की वर्ष 2018, 2019, 2020 एवं 2022 की परीक्षा से संबंधित लंबित पारिश्रमिक के देयकों के भुगतान के लिए धनराशि आवंटित की गई है। वरिष्ठ वित्त एवं लेखाधिकारी माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज तेज बहादुर सिंह ने पुनर्विनियोग के माध्यम से प्राप्त धनराशि 15 करोड 19 लाख 59 हजार रुपये से भुगतान करने के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखा है। इसके लिए जिलावार सूची जारी की है।


शासन से विगत वर्षों के लंबित पारिश्रमिक के देयकों की मांग के क्रम में बजट की मांग की गई थी। धन आवंटित होने से लंबित मूल्यांकन केंद्रों, संकलन केंद्रों एवं परीक्षा केंद्रों के पारिश्रमिक देयकों का भुगतान किया जाना है। उन्होंने कहा कि आवंटित धनराशि का व्यय वित्तीय नियमों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किए जाने के पश्चात ही किया जाए। इसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता की स्थिति में संपूर्ण दायित्व आहरण अधिकारी का होगा।


वितरण इस धनराशि का उपयोग उसी प्रयोजन के लिए किया जाए, जिसके निमित्त धनराशि आवंटित की गई है। स्वीकृत धनराशि को किसी अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग न किया जाए। साथ ही भुगतान ई-कुबेर के माध्यम से इलेक्ट्रानिकली सीधे लाभार्थी के खाते में क्रेडिट किए जाएंगे। यह व्यय चालू वित्तीय वर्ष 2023-24 में ही नियमानुसार किया जाए। यह भी अनिवार्य किया गया है कि आवंटित धनराशि का समर्पण किसी भी स्थिति में न किया जाए।



यूपी बोर्ड: हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट के विगत वर्षों (2018, 2019, 2020 एवं 2022) के लम्बित पारिश्रमिक के देयकों के भुगतान हेतु पुनर्विनियोग के माध्यम से प्राप्त धनराशि के धनावंटन की सूची एवं तत्सम्बन्धी निर्देश के सम्बन्ध में



Monday, February 26, 2024

पटना हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, कहा कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं, देखें कोर्ट ऑर्डर

पटना हाईकोर्ट के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर, कहा कि विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं

शिक्षकों की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर


🔴 देखें कोर्ट ऑर्डर 👇

दिल्ली/पटना । बिहार के लाखों नियोजित शिक्षकों की आपत्ति को सही ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी पटना हाईकोर्ट के आदेश पर मुहर लगा दी है. मामला वर्ष 2016 का है जब शिक्षा विभाग के तत्कालीन प्रधान सचिव और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव ने संयुक्त रूप से आदेश जारी कर स्कूलों की जांच में जीविका दीदियों को लगा दिया था और 75 प्रतिशत से कम छात्र की उपस्थिति पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के वेतन से 50 प्रतिशत तक कटौती करने का आदेश दे दिया था.

इसे परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष वंशीधर ब्रजवासी ने पटना हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. इस बारे में वंशीधर ब्रजवासी ने बताया कि इसकी सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने दो अगस्त, 2018 को आदेश पारित करते हुए सरकार के इस आदेश को निरस्त कर दिया और स्पष्ट किया कि बच्चों की उपस्थिति के लिए शिक्षक जिम्मेदार नहीं हैं और यह भी कहा कि जीविका दीदियां गैरसरकारी संगठन की सदस्य मात्र हैं, जिन्हें स्कूलों के निरीक्षण का कोई अधिकार नहीं है.

ब्रजवासी ने बताया कि उसके बाद पटना हाईकोर्ट के फैसले को सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गयी. सुप्रीम कोर्ट में सरकार द्वारा दायर एसएलपी को शुक्रवार 23 फरवरी को खारिज कर दिया. फैसले से शिक्षा विभाग के उस आदेश पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें छात्रों की कम उपस्थिति के लिए शिक्षकों को दोषी ठहराया जाता है. यही नहीं अब जीविका दीदी या समकक्ष से विद्यालय निरीक्षण भी सरकार नहीं करवा सकेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि सरकारी स्कूलों व शिक्षकों की जांच जीविका दीदी या टोला सेवक लेखपाल या कोई सरकारी लिपिक नहीं कर सकते हैं बल्कि विद्यालय और शिक्षकों की जांच अधिकारी ही कर सकते हैं साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि बच्चों की उपस्थित सब प्रतिशत कारण शिक्षकों की जिम्मेदारी नहीं है 


हाई कोर्ट आर्डर 👇

We find that the teachers or headmaster of the school may be facilitated with the infrastructures and systems by which they can inform the parents/guardians of a student about the attendance and other developments with regard to their respective wards, but the headmaster and teachers whose only duty is to teach the students cannot be burdened with a duty to contact the parents individually. It is for the State Government to provide such infrastructures/systems/devices in the schools which may be used to inform the parents/guardians of the students. We are also of the opinion that for the shortage of attendance of the school on the day.

of inspection by no means the headmaster or teachers of the school may be punished by deducting their salary. Deduction of salary has got a civil consequence and, therefore, such punishment cannot be imposed only because the students were found short in attendance on the day of inspection of the school. We, therefore, find that Clause-3 of the letter providing for the penal provision is also bad in law and cannot be allowed to operate. 15. In result, the impugned letter no.6067 dated 03.08.2016 in so far as it talks of conferment of power on Jeevika to inspect and supervise the school and then provides for penal provision under Clause-3 of the letter wherein salary of the headmaster and teachers of the school may be deducted in case of shortage of attendance of the students below 75% on the day of inspection stands quashed.

सुप्रीम कोर्ट ऑर्डर 👇


हाईकोर्ट ऑर्डर 👇