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Wednesday, June 30, 2021

प्रशासनिक कार्य हेतु 01 जुलाई से माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने का आदेश जारी, देखें

प्रशासनिक कार्य हेतु 01 जुलाई से माध्यमिक विद्यालयों को खोले जाने का आदेश जारी, देखें





 

उ0प्र0 में केंद्र के समान पेंशन मेमोरेण्डम जारी होने की दिशा में बढ़े कदम


▪️राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उ0प्र0 के माँगपत्र को उपमुख्यमंत्री ने किया मुख्यमंत्री को अग्रसारित
▪️बेसिक शिक्षा मंत्री ने भी प्रतिनिधिमंडल को किया आश्वस्त
लखनऊ। केंद्र सरकार ने 1 जनवरी 2004 को नेशनल पेंशन सिस्टम लागू करके पुरानी पेंशन व्यवस्था को समाप्त किया जिसको स्वीकार करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने भी उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2005 को नेशनल पेंशन सिस्टम लागू करते हुए पुरानी पेंशन व्यवस्था समाप्त कर दिया। 
केंद्र सरकार ने अपने बीच के ऐसे शिक्षक- कर्मचारी जिनकी नियुक्ति या नियुक्ति पूर्व प्रशिक्षण हेतु चयन 1 जनवरी 2004 को केंद्र में नेशनल पेंशन सिस्टम लागू होने से पहले हो गई थी परंतु उनकी रेगुलर नियुक्ति 1 जनवरी 2004 को नेशनल पेंशन सिस्टम लागू होने बाद हुई उनको नयी या पुरानी पेंशन का विकल्प चुनने के लिए 5 मार्च 2008, 17 फरवरी 2020, 25 जून 2020 तथा 31 मार्च 2021 को केंद्रीय पेंशन मेमोरेंडम जारी करके अवसर दिया था परंतु उत्तर प्रदेश सरकार जो अपने यहां केंद्र की सभी नीतियां लागू करती है उसने केंद्र के उपरोक्त पेंशन मेमोरेंडम को आज तक जारी नहीं किया जिसकी वजह से उत्तर प्रदेश में 1 अप्रैल 2005 को लागू नेशनल पेंशन सिस्टम से पहले ही नियुक्त या नियुक्ति पूर्व प्रशिक्षण हेतु चयनित शिक्षकों-कर्मचारियों को केंद्र के समान नये या पुराने पेंशन का विकल्प चुनने का आज तक अवसर नही मिल पाया।


उत्तर प्रदेश राज्य में भी केंद्र के समान पेंशन मेमोरेंडम जारी कराने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश का प्रतिनिधिमंडल उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी  से मिला और ज्ञापन सौंपा। इस मुलाकात के दौरान उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा और बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने माना कि उत्तर प्रदेश में भी यह मेमोरेंडम जारी होना चाहिए जिसके लिए वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निवेदन करेंगे। इसी कड़ी में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के पेंशन मेमोरेंडम ज्ञापन को तुरंत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विचार करने के लिए अग्रसारित कर दिया।
उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा एवं बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी से राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की तरफ से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मेन विंग की प्रदेश अध्यक्षा डॉ निर्मला यादव, कार्यकारी अध्यक्ष संजय मेधावी, डॉ दिलीप सरदेसाई, मनोज अवस्थी, डॉ जयशंकर पाण्डेय, डॉ  मनोज पाण्डेय व राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह, कार्यकारी अध्यक्ष मातादीन द्विवेदी, संगठन मंत्री शिवशंकर सिंह तथा संयुक्त मंत्री शशांक कुमार पाण्डेय शामिल थे।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद स्कूली पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद स्कूली पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी


स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल होंगे गेम्स व पहेलियां


नई दिल्ली : नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद स्कूली पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। फिलहाल इनमें जो बड़ा फेरबदल दिखेगा, वह पहले के मुकाबले रुचिकर होगा। इसमें गेम्स और पहेलियां भी होंगी। खासकर गणित और विज्ञान जैसे विषयों में इसे प्रमुखता से शामिल करने की तैयारी है। शिक्षा मंत्रलय ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को इस संबंध में जरूरी कदम उठाने के लिए कहा है। वैसे भी नए स्कूली पाठ्यक्रम को तैयार करने पर काम चल रहा है।



खास बात है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पाठ्यक्रम को रुचिकर बनाने के लिए गेम्स और पहेलियों को शामिल करने की सिफारिश की गई थी। फिलहाल मंत्रलय ने यह कदम इसलिए भी उठाया है, क्योंकि मौजूदा समय में पाठ्यक्रम को तैयार करने का काम तेजी से चल रहा है। इसके तहत वर्ष 2022 तक पाठ्यक्रम को तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में इस दौरान इन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी होगा। इस बीच पाठ्यक्रम में गेम्स और पहेलियों को शामिल करने के पीछे जो मुख्य तर्क है, उसमें छात्रों को आसानी से संबंधित विषयों से जुड़ी शिक्षा देना है। मौजूदा समय में छात्र गणित जैसे विषयों की पढ़ाई से डरते है। इस बदलाव से उन्हें मदद मिलेगी।


शिक्षा मंत्रलय इससे पहले भी स्कूली शिक्षा में कोडिंग और डाटा साइंस को शामिल करने का प्रस्ताव कर चुका है। इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार करने का काम शुरू हो चुका है। स्कूलों में कोडिंग की पढ़ाई छठी से आठवीं कक्षा तक और डाटा साइंस की पढ़ाई आठवीं से 12वीं तक होनी प्रस्तावित है। सूत्रों की मानें तो मंत्रलय ने स्कूली पाठ्यक्रम से जुड़े सभी विषयों को तेजी से काम शुरू किया है। वैसे भी यह नई राष्ट्रीय नीति को लागू करने के लिए तय किए गए लक्ष्यों की प्राथमिकता में शामिल है।


इसके साथ ही स्कूली शिक्षा से जुड़ी ज्यादातर सिफारिशों को अगले साल तक लागू करने का लक्ष्य है। इसमें सभी स्कूली छात्रों को कम से कम किसी एक स्किल से जोड़ना, सभी छात्रों का नया रिपोर्ट कार्ड तैयार करना शामिल है। इसमें उनके स्वास्थ्य सहित पूरी शैक्षणिक गतिविधियों की जानकारी होगी।

परिवर्तन : छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में हुआ बड़ा सुधार

परिवर्तन : छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में हुआ बड़ा सुधार



नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा में सुधार को लेकर उठाए गए कदमों का असर दिखने लगा है। इसमें बड़ा सुधार छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में देखने को मिला है, जहां स्कूलों में औसतन 22 छात्रों को पढ़ाने के लिए अब एक शिक्षक है। वर्ष 2012-13 में यह आंकड़ा औसतन 32 था।


हायर सेकेंडरी स्तर पर सुधार सबसे ज्यादा दिखा है, जहां पहले औसतन 40 छात्रों पर एक शिक्षक थे, पर अब 26 छात्रों पर एक शिक्षक है। स्कूलों में इसके साथ छात्रों के सकल नामांकन अनुपात और इन्फ्रास्ट्रक्चर में भी सुधार हुआ है। यह जानकारी यू-डीआइएसई प्लस (एकीकृत जिला शिक्षा सूचना प्रणाली) की वर्ष 2019-20 की रिपोर्ट से सामने आई है। शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को इस रिपोर्ट को जारी किया।

परिषदीय स्कूलों का बिजली बिल अब पंचायत करायेगी जमा

परिषदीय स्कूलों का बिजली बिल अब पंचायत करायेगी जमा


बहराइच : परिषदीय स्कूलों के बकाया बिजली के बिल ग्राम पंचायत सचिव जमा कराएंगे। इसको लेकर ब्लाक व पंचायतीराज विभाग को पत्र भेजकर निर्देशित किया जाएगा। प्रधानाध्यापकों की ओर से ग्राम पंचायत सचिवों को स्कूलों का बकाया बिजली बिल उपलब्ध करा दिया गया है। यदि जल्द बिजली बिल का भुगतान नहीं किया गया तो विभाग स्कूलों की बिजली काट सकता है।


जिले के 15 विकास खंडों में तकरीबन 1834 प्राथमिक विद्यालय, 382 जूनियर विद्यालय व 606 संविलियन विद्यालय संचालित है। इन विद्यालयों में विद्युतीकरण कर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन विद्यालयों के बिजली का बिल भुगतान करने में विभाग की उदासीनता उजागर हुई। ऐसे में बिजली विभाग ने जल्द बिल जमा न होने पर कनेक्शन काटने की चेतावनी दी है।


ङोलनी पड़ेगी परेशानी: वर्तमान में स्कूलों में पठन-पाठन भले ही बंद है, लेकिन एक जुलाई से शिक्षक व कर्मी विभागीय कामकाज करने के लिए आएंगे। बिजली के अभाव में उन्हें परेशानी ङोलनी पड़ सकती है।


बिजली कटने से गहराएगा पेयजल संकट: जिले में कई परिषदीय स्कूल ऐसे हैं, जहां पानी के लिए मोटर अथवा सबमर्सिबल पंप लगाए गए हैं। यदि स्कूलों का कनेक्शन कटा तो पेयजल का संकट भी गहरा सकता है। ऐसे में बिजली बिल जमा कराने में शिक्षा विभाग व ग्राम पंचायत को सक्रियता दिखानी होगी, ताकि कनेक्शन विच्छेद की नौबत न आए।


शासनादेश के क्रम में बकाया बिजली का बिल ग्राम पंचायत सचिवों को उपलब्ध कराए जाएंगे तथा समय से भुगतान भी कराया जाएगा। - उदयराज यादव, जिला बेसिक शिक्षाधिकारी

उच्च शिक्षा : प्राचार्य प्रवक्ता के तबादले की सूची छह जुलाई को

उच्च शिक्षा : प्राचार्य प्रवक्ता के तबादले की सूची छह जुलाई को

लखनऊ :  प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों व प्रवक्ताओं के ऑनलाइन तबादले की सूची छह जुलाई को जारी की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव योगेन्द्र दत्त त्रिपाठी ने ऑनलाइन स्थानांतरण की समयसारिणी मंगलवार को जारी कर दी है। लखनऊ के महाविद्यालयों को मॉडल कॉलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है इसलिए यहां से प्राचार्यो प्रवक्ताओं के ऑनलाइन तबादले नहीं किए जाएंगे।


लखनऊ के लिए बाद में विचार किया जाएगा। प्राचार्य प्रवक्ता एक व दो जुलाई को विकल्प फीड कर सकेंगे। ऐसे महाविद्यालय जहां दो से कम प्रवक्ता तैनात हैं, वहां के प्रवक्ताओं के तबादले का आदेश भी मान्य होगा जब उस महाविद्यालय में दूसरा प्रवक्ता कार्यभार ग्रहण करेगा । महात्वाकांक्षी जिलों में किसी प्रवक्ता का तबादला नहीं होगा लेकिन यहां पर स्थानांतरित होकर लोग आ सकेंगे । स्थानांतरण से संबंधित पोर्टल पर महाविद्यालय अपना डाटा, रिक्तियों की सूची फीड करेंगे ।

प्रदेश के 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलेगा फर्नीचर, प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की प्रदेश सरकार की तैयारी

प्रदेश के 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों को मिलेगा फर्नीचर, प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने की प्रदेश सरकार की तैयारी

आंगनबाड़ी में अब छोटे बच्चों के लिए रंगबिरंगा फर्नीचर भी होगा। बेसिक शिक्षा विभाग प्रदेश के 10 हजार केन्द्रों में फर्नीचर देने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश सरकार इस सत्र से आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं शुरू करने वाली है।


प्रदेश में 1.80 लाख केन्द्र हैं और इनमें से लगभग 70 हजार केन्द्र प्राइमरी स्कूलों के कैम्पस में है। इन कैम्पस के 10 हजार स्कूलों में फर्नीचर दिया जाएगा। राज्य सरकार ने केन्द्र से इसके लिए बजट मांगा है जिसकी सैद्धांतिक सहमति केन्द्र ने दे दी है। इसके लिए इन आंगनबाड़ी केन्द्रों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है कि वे संचालन की स्थिति में है या नहीं और वहां पर बच्चों के नामांकन की संख्या कितनी है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों में तीन से छह वर्ष तक के 39.56 लाख बच्चे पंजीकृत हैं।

आंगनबाड़ी केन्द्रों में प्री-प्राइमरी की कक्षाएं संचालित करने के लिए पाठ्यक्रम का निर्धारण पिछले वर्ष हो चुका है और केन्द्रों पर पढ़ाने के लिए निजी स्कूलों की तर्ज पर रंगबिरंगे खिलौनों, ब्लॉक, स्लेट आदि से युक्त एक किट भी खरीदी गई है ताकि छोटे बच्चों को मनोरंजक तरीके से पढ़ाया जा सके। आंगनबाड़ी सहायिकाओं व कार्यकत्रियों को बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रशिक्षित भी किया है।

कॉलेजों में नए कोर्सों के लिए 18 अगस्त तक मिलेगी सम्बद्धता, 22 जुलाई तक जमा होंगे ऑनलाइन आवेदन

कॉलेजों में नए कोर्सों के लिए 18 अगस्त तक मिलेगी सम्बद्धता, 22 जुलाई तक जमा होंगे ऑनलाइन आवेदन

प्रदेश के विश्वविद्यालयों में नए पाठ्यक्रमों के लिए अनापत्ति प्रस्ताव 8 जुलाई तक ऑनलाइन जमा किए जा सकेंगे। एनओसी जारी करने की अंतिम तिथि 22 जुलाई और विवि द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त है। इस संबंध में मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है।


सम्बद्धता व एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जाएगा। संशोधित समय सारणी के अनुसार विश्वविद्यालय में ऑनलाइन जमा किए गए प्रस्ताव के भूमि संबंधित अभिलेखों का राजस्व विभाग से सत्यापन कराए जाने की तिथि 15 जुलाई कर दी गई है। एनओसी भी 22 जुलाई तक ऑनलाइन जारी की जाएगी।

संस्था द्वारा निरीक्षण मंडल गठन के लिए आवेदन किए जाने की तिथि 26 जुलाई तय की गई है। 30 जुलाई तक निरीक्षण मंडल का गठन कर निरीक्षण रिपोर्ट 10 अगस्त तक देनी होगी। विवि द्वारा संबद्धता ऑनलाइन प्रदान करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त निर्धारित की गई है। यदि किसी को इस पर आपत्ति है तो शासन में अपील करने की अंतिम तिथि 24 अगस्त और शासन स्तर से अपील निस्तारित करने की अंतिम तिथि 31 अगस्त निर्धारित की गई।

Tuesday, June 29, 2021

बेसिक शिक्षकों की लम्बित मांगों एवं समस्याओं के निस्तारण के सम्बन्ध में उ0प्र0जू0हा0 शिक्षक संघ ने दिया ज्ञापन देखें

बेसिक शिक्षकों की लम्बित मांगों एवं समस्याओं के निस्तारण के सम्बन्ध में उ0प्र0जू0हा0 शिक्षक संघ ने दिया ज्ञापन देखें



महराजगंज : आगामी 1 जुलाई से परिषदीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के खुलने, उपस्थिति तथा विभिन्न विभागीय कार्यों के निष्पादन के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किया आदेश

महराजगंज : आगामी 1 जुलाई से कक्षा 1 से 8 तक समस्त परिषदीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के खुलने, उपस्थिति तथा विभिन्न विभागीय कार्यों के निष्पादन के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किया आदेश।


यूपी बोर्ड : छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे मेधावी, नहीं बनेगी मेरिट

यूपी बोर्ड : छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे मेधावी, नहीं बनेगी मेरिट

◆ बिट्स पिलानी हर साल इंटर के टॉपर को देता है दाखिला

◆ रिलायंस व अन्य संस्थाएं भी होनहारों को देती है छात्रवृत्ति

प्रयागराज  : कोरोना के कारण बोर्ड परीक्षाओं के निरस्त होने से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के मेधावियों को नुकसान होगा । उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने साफ कर दिया है कि इस बार मेरिट सूची जारी नहीं होगी। इसके चलते पूरे प्रदेश में टॉप करने वाले मेधावी एवं दिव्यांग छात्र-छात्राएं हर साल मिलने वाली छात्रवृत्ति और दूसरे लाभ से वंचित रह जाएंगे।


बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस (बिट्स पिलानी) हर साल इंटरमीडिएट में गणित व जीव विज्ञान वर्ग में पूरे प्रदेश में टॉप करने वाले मेधावियों को सीधे प्रवेश देता था। टॉप करने वाले एक से अधिक मेधावी होने पर उन सभी को दाखिला मिलता था । लेकिन इस साल मेधावियों को ये मौका नहीं मिलेगा। इसी प्रकार रिलायंस की ओर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 10-10 टॉपर नेत्रहीन छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जाती थी । हिन्दुजा समूह की ओर से हाईस्कूल के टॉप 25 मेधावियों को भी वजीफा दिया जाता था। इसके लिए ये संस्थाएं हर साल यूपी बोर्ड से संपर्क कर मेधावियों की सूची लेती थीं और फिर उनसे संपर्क कर लाभान्वित करती थीं।

इस बार मेधावियों के नाम पर नहीं बनेगी सड़क

प्रयागराज :  2021 की मेरिट सूची नहीं  बनने से इस बार 10वीं 12वीं के  टॉपर के नाम सड़क भी नहीं बनेगी ।  पिछले चार साल से प्रदेश सरकार टॉप टेन में स्थान बनाने वाले मेधावियों के नाम पर उनके गांव तक सड़क बनवा रही थी। सड़क पर बकायदा बोर्ड  लगता था जिस पर टॉपर की फोटो भी लगती थी। लेकिन इस साल ये योजना भी लागू नहीं हो पाएगी।

ईएल की मांग को लेकर बेसिक शिक्षकों ने ट्विटर पर फिर उठाई मांग

ईएल की मांग को लेकर बेसिक शिक्षकों ने ट्विटर पर फिर उठाई मांग


बेसिक शिक्षा परिषद के "स्वतः स्फूर्त शिक्षक" प्रदेश सरकार से अपनी समस्याओं के निराकरण वास्ते पिछले काफी समय से माननीय योगी जी मुख्यमंत्री एवं बेसिक शिक्षा मंत्री श्री सतीश द्विवेदी जी को टैग करके ट्विटर पर मुहिम चला रहे हैं। 


आज सोमवार 28 जून को भी प्रदेश भर के बेसिक शिक्षकों ने एकस्वर में  #TeachersNeedEL व  #SummerVacationIsHoax को कुछेक मिनटों में ही ट्विटर पर टॉप ट्रेंड्स में शामिल कराते हुए, इन्होंने सरकार से समाधान की उम्मीद में अर्जित अवकाश की माँग बुलन्द की है।


आज कहीं भी भीड़ लगाना कोरोना को न्योता हो सकता है, इसलिए ट्विटर पर हरेक सोमवार को शिक्षक अपनी किसी समस्या अथवा जरूरत के मुद्दे को ट्रेंड करवाकर सरकार से सुधार का अनुरोध करते हैं। पिछले 2 सप्ताह से  ट्विटर पर यह शिक्षक अपने लिए अर्जित अवकाश E.L. की माँग कर रहे हैं। 

उनका कहना है कि मई जून में ही प्रतिवर्ष यूडाइस प्रारूप, अभिभावक के डिटेल्स अपडेशन, बच्चों के बैंक खाते, कन्वर्जन कॉस्ट वितरण, शिक्षकों के ऑनलाइन व ऑफलाइन विभागीय ट्रेनिंग्स, हाउसहोल्ड सर्वे, बी.एल.ओ., निर्माण एवं मरम्मत कार्य, स्कूल भवनों की साफ सफाई का तो बाकायदा आदेश निकाल दिया गया है कि यह कार्य जून में ही होंगे, इसके साथ ही कभी बच्चों की ड्रेस तो कभी जूता मोजा, कभी मानव सम्पदा, कभी प्रेरणा पोर्टल , कभी आधार अपडेट्स आदि अनेकों कार्य के लिए स्कूल, तो कभी बी.आर.सी. बुलाकर कार्य करवाया ही जाता है। इन सभी कार्यों के बदले उनको विधिसम्मत उपार्जित अवकाश की स्वीकृति भी नही की जाती है। 


वर्तमान में उनको मात्र 14आकस्मिक अवकाश ही देय हैं , एवं ग्रीष्मावकाश की छुट्टियाँ उनके किसी काम की नही हैं इसलिए उनका पारिवारिक सामाजिक जीवन नष्ट हो रहा है। रिश्तेदारों के दुःख दर्द अथवा मांगलिक कार्यों में शामिल न हो पाने से उनसे दूरी बन रही है एवं सामाजिक दूरी व पारिवारिक तानाबाना बिगड़ रहा है।

 यह कतई सम्भव नही है कि किसी व्यक्ति के सभी व्यक्तिगत यथा माता-पिता, पत्नी बच्चों का इलाज, बच्चों के स्कूल की पेरेंट्स मीटिंग, मांगलिक कार्य अथवा रिश्तेदारों की अंतिम क्रिया आदि कार्य मात्र 14 दिन में पूर्ण किये जा सकें।

इसी दबाव में C.L. को वक्त जरूरत वास्ते बचाने के चक्कर मे अध्यापक बड़ी संख्या में सड़क दुर्घटना में घायल होने से मृत्यु तक को प्राप्त हो रहे हैं। बड़ी संख्या में लोग गैर जनपदों में भी नियुक्त है, वे इन्ही कारणों से परिवार माता पिता, परिजनों के इलाज आदि में साथ नही रह पाते अवसाद की स्थिति में हैं, पारिवारिक विघटन हो रहा है।


शिक्षकों का मानना है कि इस सब का निदान यही है कि उनको भी अन्य सरकारी कार्मिकों की भाँति प्रतिवर्ष 30 अर्जित अवकाश E.L. दिए जाएं, भले ही इसके लिए कतई अनुपयोगी ग्रीष्मावकाश को ही खत्म करना पड़े। अर्जित अवकाश देय होने से  वक्त जरूरत पर वे स्वेच्छा से उपभोग कर परिवार व नौकरी के बीच बेहतर तालमेल भी बिठा पाएंगे, जिससे उनकी क्षमताओं, शिक्षण गुणवत्ता में भी वृद्धि होगी। यह "स्वतः स्फूर्त शिक्षक" पूर्व में भी तर्कसंगत सामूहिक बीमा, कैशलेश चिकित्सा की माँग भी ज़ोरदार तरीके से उठा चुके हैं।


Monday, June 28, 2021

हाथरस : दिनाँक 01 जुलाई 2021 से विद्यालयों में शिक्षकों/कर्मचारियों की आवश्यकतानुसार उपस्थिति सम्बन्धी आदेश जारी

हाथरस : दिनाँक 01 जुलाई 2021 से विद्यालयों में शिक्षकों/कर्मचारियों की आवश्यकतानुसार उपस्थिति सम्बन्धी आदेश जारी



स्थानांतरण, पदोन्नति एवं अन्य लंबित मांगों पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, देखें

स्थानांतरण, पदोन्नति एवं अन्य लंबित मांगों पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने दिया ज्ञापन, देखें














 





फतेहपुर : अंशकालिक अनुदेशकों के सत्र 2021-22 हेतु अनुबन्ध पत्र भराने के सम्बन्ध में आदेश जारी, देखें

फतेहपुर : अंशकालिक अनुदेशकों के सत्र 2021-22 हेतु अनुबन्ध पत्र भराने के सम्बन्ध में आदेश जारी, देखें।

हाथरस : अधिकारियों / कर्मचारियों के साथ शिक्षकों को भी चल-अचल संपत्ति विवरण उपलब्ध कराने का आदेश, देखें

हाथरस : अधिकारियों / कर्मचारियों के साथ शिक्षकों को भी चल-अचल संपत्ति विवरण उपलब्ध कराने का आदेश, देखें



माध्यमिक शिक्षकों के ऑनलाइन तबादले का आवेदन आज से, 2 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन

माध्यमिक शिक्षकों के ऑनलाइन तबादले का आवेदन आज से, 2 जुलाई तक किए जा सकेंगे आवेदन


राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादले की सूची आठ जुलाई को होगी जारी 

माध्यमिक शिक्षकों के ऑनलाइन तबादला हेतु आवेदन आज से, इस वेबसाइट से करें आवेदन

लखनऊ : प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्यों, उप प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों के तबादले के लिए ऑनलाइन आवेदन 28 जून से 2 जुलाई तक मांगे गए हैं। स्थानांतरित शिक्षकों को ट्रांसफर की सूचना भी मोबाइल संदेश के जरिए दी जाएगी। 15 जुलाई को एक वर्ष की सेवा पूर्ण करने वाले शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे।


उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने बताया कि स्थानांतरण सत्र 2021- 22 में ऑनलाइन तबादले किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सेना अथवा केंद्रीय अर्द्धसैनिक बलों में कार्यरत कर्मियों की पत्नी / पति को तबादले में वरीयता दी जाएगी। यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं या अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय/महाविद्यालय / तथा बेसिक शिक्षा के अधीन कार्यरत अध्यापक हैं, तो उन्हें भी वरीयता दी जाएगी। ऑनलाइन आवेदन से लेकर तबादले तक की सभी प्रक्रिया की जानकारी मोबाइल पर संदेश भेजकर दी जाएगी।

विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने बताया कि वेबसाइट पर प्रदर्शित रिक्तियों के सापेक्ष प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक एवं शिक्षक अधिकतम 5 विकल्पों का वरीयता क्रम में चयन कर सकते हैं। तबादले के लिए निर्धारित मानक एवं गुणांक के आधार पर वरीयताक्रम तैयार किया जाएगा। गंभीर रोग से ग्रस्त शिक्षकों, दिव्यांगों और 31 मार्च 2021 को 58 वर्ष की आयु पूरी करने वाले आवेदकों को भी वरीयता दी जाएगी।


माध्यमिक शिक्षकों के ऑनलाइन तबादला हेतु आवेदन आज से, इस वेबसाइट से करें आवेदन

लखनऊ : प्रदेश के राजकीय माध्यमिक स्कूलों में कार्यरत प्रधानाचार्य, उप प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक व शिक्षक स्थानांतरण के लिए सोमवार से आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। वेबसाइट http://upsecgtt.upsdc.gov.in/ पर तबादले के लिए दो जुलाई तक आनलाइन आवेदन किया जा सकेगा।

अपर मुख्य सचिव (माध्यमिक शिक्षा) आराधना शुक्ला ने बताया कि स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई गई है। शिक्षक तबादले के लिए पांच विकल्प देगा और स्थानांतरण नीति के अनुसार तय मानक व गुणांक के आधार पर वरीयता सूची तैयार की जाएगी। ऐसे शिक्षक जो 15 जुलाई 2021 को जो शिक्षक एक साल की सेवा पूरी करेंगे, उन्हें भी स्थानांतरण की सुविधा मिलेगी। वह भी आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। अगर पति या पत्नी में से कोई एक सेना व अर्ध सैनिक बल आदि में कार्यरत है तो उसे वरीयता दी जाएगी। यदि पति व पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं तो उन्हें भी प्राथमिकता मिलेगी। उधर ऐसे शिक्षक जो 58 वर्ष की आयु पूरी करने वाले, गंभीर रोग से ग्रस्त शिक्षकों को भी वरीयता दी जाएगी।

आवेदन करने वाले शिक्षकों को स्थानांतरण आदेश आनलाइन जारी किया जाएगा। उन्हें स्थानांतरण के संबंध में मोबाइल पर एसएमएस के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। वह स्थानांतरण आदेश आनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे।


राजकीय इंटर कॉलेजों के टीचर और प्रिंसिपल 28 जून से 2 जुलाई तक कर लें यह काम, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने जारी किया आदेश

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादले की समय सारिणी जारी कर दी गई। तबादले के आवेदन 28 जून से दो जुलाई तक लिए जाएंगे। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक विनय कुमार पांडेय ने सोमवार को आदेश जारी कर दिया है। 


29 जून से प्रवक्ता-सहायक अध्यापक को अपने आवदेन का प्रिंटआउट प्रधानाचार्य की संस्तुति के बाद डीआईओएस कार्यालय में जमा कर रसीद प्राप्त करनी होगी। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक या उप प्रधानाचार्य आवेदन पत्र सीधे डीआईओएस को देंगे।  

डीआईओएस इन आवेदन पत्रों का परीक्षण कर एक्सेप्ट या रिजेक्ट कर चार जुलाई तक लॉक करेंगे। अपर शिक्षा निदेशक पांच जुलाई तक आवेदन पत्रों को  लॉक करेंगे। वहीं सात जुलाई तक एनआईसी गुणांक के आधार पर मेरिट तैयार करेगा और आठ जुलाई को इसका आदेश जारी होगा।

आवेदक प्रदर्शित रिक्तियों में से अधिकतम पांच विकल्प चुन सकते हैं। आदेश के मुताबिक सैन्य बलों आदि के पति-पत्नी को 100 नंबर का गुणांक दिया जाएगा। वहीं स्वयं कैंसर, लीवर, किडनी या एड्स समेत अन्य असाधय बीमारियों के होने पर 100, ऐसे प्रधानाचार्य-प्रधानाध्यापक जिनकी आयु 58 वर्ष पूरी हो गई हो या फिर पति-पत्नी के सरकारी सेवा में होने पर एक ही नगर, जिले या स्थान पर होने पर 100-100 अंकों का गुणांक दिया जाएगा। इसके अलावा सात अन्य सहायक मानक तय किए गए हैं।

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादले की सूची आठ जुलाई को होगी जारी 

राजकीय इंटर कॉलेजों के शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादले की समय सारिणी जारी कर दी गई तबादले के आवेदन 28 जून से दो जुलाई तक लिए जाएंगे। इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। 29 जून से प्रवक्ता सहायक अध्यापक को अपने आवदेन का प्रिंटआउट प्रधानाचार्य की संस्तुति के बाद डीआईओएस कार्यालय में जमा कर रसीद प्राप्त करनी होगी। प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक या उप प्रधानाचार्य आवेदन पत्र सीधे डीआईओएस को देंगे । डीआई ओएस इन आवेदन पत्रों का परीक्षण कर मंजूर या रिजेक्ट कर चार जुलाई तक लॉक करेंगे। वहीं सात जुलाई तक एनआईसी गुणांक के आधार पर मेरिट तैयार करेगा और आठ जुलाई को इसका आदेश जारी होगा।

शासन के इस फरमान से बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में मचा हड़कंप, पोर्टल पर लोड करना होगा संपत्ति का व्यौरा

शासन के फरमान से बेसिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में मचा हड़कंप, पोर्टल पर लोड करना होगा संपत्ति का व्यौरा



बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी कर्मचारियों को अब अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा देना होगा। इसके लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने बीएसए को पत्र लिखकर जिले में कार्यरत सभी कर्मचारियों को सूचित करने को कहा है।


बरेली । Basic Education News: बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत सभी कर्मचारियों को अब अपनी चल अचल संपत्ति का ब्योरा देना होगा। इसके लिए महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने बीएसए को पत्र लिखकर जिले में कार्यरत सभी कर्मचारियों को सूचित करने को कहा है।

जिला बेसिक शिक्षाधिकारी विनय कुमार ने बताया कि सभी खंड शिक्षाधिकारियों के साथ ही कर्मचारियों को अपनी संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर उपलब्ध कराना है। इसके लिए विभाग की ओर से 20 जुलाई की तिथि को निर्धारित किया गया है। बताया कि अपनी नियुक्ति तिथि से लेकर अगले पांच साल तक की चल और अचल संपत्ति का ब्योरा देना है। निर्धारित समय तक पोर्टल पर जानकारी ने देने पर या इसमें लापरवाही करने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी

एक जुलाई से फिर से स्कूल खोले जा रहे, 100 दिन बाद खुल रहे स्कूल

एक जुलाई से फिर से स्कूल खोले जा रहे, 100 दिन बाद खुल रहे स्कूल


कुशीनगर । बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल कोरोना संक्रमण के चलते 20 मार्च को बंद कर दिए गए थे। केस नियंत्रित होने की दशा में एक जुलाई से फिर से स्कूल खोले जा रहे हैं। हालांकि अभी केवल अध्यापक ही स्कूल आएंगे। 100 दिन बाद खुल रहे स्कूल में पहले दिन ही अध्यापकों को सफाई, बिजली, पानी जैसी समस्याओं से जूझना होगा।


कोरोना संक्रमण का सर्वाधिक असर स्कूलों पर ही पड़ा है। पिछले साल मार्च में लॉकडाउन के दौरान जो स्कूल बंद हुए तो पढ़ाई की व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं लौटी है। इस साल भी कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान गत 20 मार्च को सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे। बच्चों को अगली कक्षाओं में प्रोन्नत किया जाना है।

 अब कोरोना संक्रमितों की संख्या होने लगी है। इसको देखते शासन ने एक जुलाई से स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया है। हालांकि अभी केवल शिक्षकों को ही बुलाया जाएगा। इस दौरान शिक्षक विद्यालय में पहुंचकर विद्यालय में नामांकित बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के साथ विभागीय अन्य कार्य निपटाएंगे। सौ दिनों तक लगातार बंद रहे स्कूलों में पहुंचने पर शिक्षकों को विद्यालय में सफाई, बिजली और पानी समेत परेशानियों से जूझना पड़ेगा।

बीएसए विमलेश कुमार ने बताया कि कोरोना संक्रमितों की संख्या कम हुई है। इसको देखते हुए शासन की तरफ से पहली जुलाई से स्कूल खोलने का निर्देश मिला है। लेकिन अभी केवल शिक्षकों को ही स्कूल बुलाया गया है।

 शासन के निर्देश पर जिले के सभी बीईओ और शिक्षकों को एक जुलाई से स्कूल खोलने का निर्देश दे दिया गया है। एक जुलाई को स्कूल पहुंचकर शिक्षक स्कूल की साफ-सफाई कराने समेत अन्य संसाधनों को सुव्यवस्थित करेंगे। इसके अलावा विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई कराने के साथ विभागीय कार्य निपटाएंगे

Sunday, June 27, 2021

नई शिक्षक भर्ती के लिए प्रशिक्षितों का महाधरना कल

नई शिक्षक भर्ती के लिए प्रशिक्षितों का महाधरना कल,

डीएलएड, बीटीसी, बीएड प्रशिक्षित टीईटी पास अभ्यर्थी शिक्षक  भर्ती के लिए दे रहे धरना


प्रयागराज। प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में खाली पड़े पदों को भरने के लिए प्रदेश के कई जिलों के डीएलएड, बीएड, बीटीसी प्रशिक्षित अभ्यर्थी 22 जून से लगातार एससीईआरटी लखनऊ में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं।


रविवार को अपनी एकजुटता दिखाने के लिए प्रशिक्षित अभ्यर्थी महाधरना देंगे। अभ्यर्थियों का कहना है कि प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक भर्ती के लिए संचालित कोर्स डोएलएड, बीटीसी, बीएड करने के साथ शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी, सीटोईटी) पास करने के बाद भी वह दो वर्ष से बेरोजगार हैं। सरकार के पास खाली पद होने के बाद भी वह भर्ती जारी नहीं कर रहो है। 


धरने पर बैठे अभ्यर्थियों का कहना हैं कि सरकार ने 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने हलफनामे में कहा था कि हमारे पास 51112 पद रिक्त हैं, लेकिन उसके बाद दो वर्ष बीतने के बाद भी कोई भर्ती घोषित नहीं की। हर वर्ष से हजार से डेढ़ हजार शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। इन पदों को भरने के लिए सरकार कुछ नहीं कर रही।

CBSE : सीबीएसई 10वीं और 12वीं के सिलेबस में फिर कटौती की संभावना

CBSE : सीबीएसई 10वीं और 12वीं के सिलेबस में फिर कटौती की संभावना


सीबीएसई द्वारा कोरोना संक्रमण के कारण फिर एक बार 10वीं-12वीं के सत्र 2021-22 के सिलेबस में कटौती की जाएगी। इसको लेकर बोर्ड द्वारा योजना बनाई जा रही है। बोर्ड की मानें तो कोविड-19 का असर इस बार के भी शैक्षणिक सत्र पर हुआ है। अप्रैल से ही ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं। ऐसे में सिलेबस कटौती की संभावना इस बार भी बन रही है। बोर्ड द्वारा 2020 में कोरोना के कारण स्कूल बंद होने और सिलेबस पूरा नहीं होने के कारण 30 फीसदी सिलेबस में कटौती की गयी थी। 


दसवीं-12वीं बोर्ड परीक्षा में भी सिलेबस कम किया गया था। वहीं नौंवी-11वीं में भी 30 फीसदी सिलेबस कम किया गया। बोर्ड अब इस 30 फीसदी को 2022 के बोर्ड परीक्षा में भी लागू कर सकता है। जल्द ही इसकी जानकारी बोर्ड द्वारा स्कूलों को दी जाएगी।

ऑनलाइन पढ़ाई का असर सिलेबस पर होता है। अब भी कई स्कूल ऑनलाइन पढ़ाई नहीं करवा पा रहे हैं। ऐसे में सिलेबस कम रहेगा तो छात्रों को राहत मिलेगी। सिलेबस कम होने की संभावना है। 

30 फीसदी सिलेबस हटा कर हो रही पढ़ाई 
ज्यादातर स्कूलों में 30 फीसदी सिलेबस को कम करके ही पढ़ाया जा रहा है। चूंकि सिलेबस नौंवी से 12वीं तक कम हुआ है। ऐसे में नौंवी और 11वीं के छात्र इस बार प्रमोट करके 10वीं और 12वीं में गये हैं। ऐसे में उन्हें 30% सिलेबस कम करके ही पढ़ाई करवायी जा रही है।

कक्षा 1 से 12 तक कैसा होगा सिलेबस, तैयार करने के लिए जुटाया जा रहा इनपुट

कक्षा 1 से 12 तक कैसा होगा सिलेबस,  तैयार करने के लिए  जुटाया जा रहा इनपुट


पिछले दिनों संसद की एक समिति ने शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई के वरिष्ठ अधिकारियों को सुझाव दिया कि कोरोना महामारी में स्कूलों के बंद होने के कारण पढ़ाई संबंधी जो अंतर (लर्निंग गैप) पैदा हुआ है, उसे दूर करने के लिए उपग्रह टेलीविजन का इस्तेमाल किया जाए।
 
   
नई दिल्ली  :  नेशनल लेवल पर पहली बार क्लास वन से 12 वीं तक के पाठ्यक्रम को नए सिरे से तैयार करने का निर्णय लिया गया है। अधिकांश राज्यों से NCERT राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद ने चार विभिन्न सेक्टर में राज्य स्तरीय पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए कहा है। राज्यों से मिलने वाले पाठ्यक्रम सुझावों को शामिल करते हुए राष्ट्रीय करिकुलम फ्रेमवर्क एनसीएफ तय होगा। शिक्षा मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय पाठ्यक्रम जिला स्तर पर इनपुट के आधार पर तैयार किया जाएगा।

कैसा हो नया सिलेबस
मंत्रालय ने शिक्षा की संसदीय समिति को पिछले दिनों बताया कि पहले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का पाठ्यक्रम आएगा इसके बाद जिला स्तर पर भी परामर्श किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और बीजेपी सांसद विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बताया कि कमेटी अपनी रिपोर्ट जुलाई के अंत तक जमा कर देगी। उन्होंने कहा कि इतिहास, भूगोल और साहित्य के सिलेबस में स्थानीय चीजों को भी शामिल करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि नए सिलेबस में नई शिक्षा नीति की झलक देखने को मिलेगी। किताबें बहुत मोटी हों इसकी जरूरत नहीं बल्कि रुचिकर हो इसका ध्यान रखा जाए। प्रत्येक पाठ्यपुस्तक का ई टेस्टबुक भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मेरा व्यक्तिगत मानना है कि छात्रों से भी इस बारे में फीडबैक लेना चाहिए।

छात्रों का इनपुट हो सकता है बेहद महत्वपूर्ण

कक्षा नौ में पढ़ने वालो छात्र से क्लास 5 की पाठ्य पुस्तक तैयार करने के लिए कहना चाहिए। मेरे हिसाब से वो पाठ्यपुस्तक बहुत सटीक होगी। उससे हमें एक आइडिया भी मिल जाएगा कि छात्र क्या सोच रहे हैं। दूसरी और तीसरी क्लास के लिए किताबें अमर चित्र कथा जैसी हों। क्यों नहीं कॉमिक जैसे दो- तीन पाठ हों। कुछ पाठ को समझाने के लिए नाटकीय सहारा भी लेना चाहिए। उन्होंने पाठ्यक्रम के लिए लोकल कंटेंट के शामिल करने की भी बात कही। विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे ने कहा कि इतिहास के विषय में 17 पाठ प्राचीन इतिहास से है तो तीन पाठ स्थानीय इतिहास से भी जुड़ा हो। यह सिर्फ इतिहास ही नहीं भूगोल और साहित्य के लिए भी ऐसा किया जा सकता है।


जो सुनने में ही अटपटा लगे
‘छह साल की छोकरी, भरकर लाई टोकरी, टोकरी में आम है, नहीं बताती दाम है। दिखा दिखाकर टोकरी हमें बुलाती छोकरी।’कक्षा एक की एनसीईआरटी की हिंदी की किताब ‘रिमझिम’ के तीसरे अध्याय की इस कविता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने आपत्ति भी दर्ज कराई। विनय प्रभाकर सहस्रबुद्धे ने कहा मेरा मानना है कि जो भी सुनने में अटपटा लगे वो कविता पाठयक्रम में नहीं जानी चाहिए। बिना गंभीर विचार के पाठ्यक्रम में शामिल नहीं करना चाहिए। मैंने सुझाव दिया है कि एक मैकेनिज्म होना चाहिए और जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

एडेड स्कूलों में फर्जी व संदिग्ध शिक्षकों पर सख्ती, सभी बीएसए से मांगी गयी रिपोर्ट

एडेड स्कूलों में फर्जी व संदिग्ध शिक्षकों पर सख्ती, सभी बीएसए से मांगी गयी रिपोर्ट


प्रयागराज : प्रदेश के 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में फर्जी और संदिग्ध शिक्षकों को लेकर शासन सख्त है। महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने 24 जून को सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों से ऐसे शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए हैं।


महानिदेशक ने एक जून को पत्र भेजकर अभिलेखों की जांच के संबंध में अब तक की कार्रवाई की सूचना 15 जून तक मांगी थी। लेकिन अधिकांश जिलों के बीएसए ने सूचना नहीं भेजी। इसके बाद 24 जून को पत्र लिखकर तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। देरी पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रबंधकों की सांठगांठ से हुई थी मनमानी भर्तीः अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के प्रबंधक पहले बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सांठगांठ कर शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति कर लेते थे। इसमें लाखों का खेल होता था। 2011 से 2016 तक सैकड़ों नियुक्तियां की गई। प्रयागराज में ही एक स्कूल की अनुमन्यता न होने के बावजूद 4 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई थी।

शासन के निर्देश पर जिले के 106 एडेड जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश खंड शिक्षाधिकारियों को दिए हैं ताकि सत्यापन कराया जा सके। ये सूचनाएं मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड की
जाएगी। - संजय कुशवाहा, बेसिक शिक्षा अधिकारी

मथुरा में बीएड की फर्जी डिग्री मामले में 32 बेसिक शिक्षकों पर मामला दर्ज

मथुरा में बीएड की फर्जी डिग्री मामले में 32 बेसिक शिक्षकों पर मामला दर्ज


मथुराः मथुरा में कथित तौर पर फर्जी डिग्री दिखाकर नौकरी लेने के मामले में 32 सहायक अध्यापकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी ।


एसआईटी जांच में डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा के शैक्षणिक सत्र 2004-05 की इनकी डिग्री फर्जी पाई गई। इस जांच में मथुरा जनपद के उन शिक्षकों के नाम भी शामिल थे, जिनकी बीएड डिग्री को एसआईटी ने फर्जी या फिर छेड़छाड़ वाली सूची में शामिल किया था। विभागीय आदेश मिलने के बाद जनपद स्तर पर ऐसे शिक्षकों की पहचान करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सेवा समाप्ति की कार्रवाई की थी । इन पर केस दर्ज करवाया था।

कुछ शिक्षक कोर्ट की शरण में भी कुछ गए थे । अब एक बार फिर विभागीय स्तर पर जनपद में 32 सहायक अध्यापकों के खिलाफ फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने का मामला दर्ज हुआ है।

शासन ने मांगा संपत्ति का ब्यौरा, धन्नासेठ बाबुओं में मची खलबली

शासन ने मांगा संपत्ति का ब्यौरा,  धन्नासेठ बाबुओं में मची खलबली


कईओं ने एकत्र कर ली है करोड़ों की संपत्ति, शहर में हैं आलीशान बहुमंजिला मकान और जमीनें


प्रतापगढ़ : शासन से संपत्ति का ब्यौरा मांगे जाने के बाद शिक्षा विभाग के कई धन्नासेठ बाबुओं में खलबली मच गई है। संपत्ति का ब्यौरा आनलाइन करने का आदेश मिलने के बाद बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग में एक ही पटल पर वर्षों से जमे मोटी कमाई करने वाले बाबुओं के चेहरे की रौनक गायब हो गई है। कई बाबुओं ने इस छोटी सी नौकरी में ही शहर में आलीशान बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर ली हैं। कई जगहों पर उनकी जमीनें भी हैं। शासन के आदेश के बाद अब वे बचाव का रास्ता खोज रहे हैं।

बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा विभाग के बाबुओं से संपत्ति का ब्यौरा मांगा गया है। एक ही पटल पर दस-दस वर्षों से जमे बाबुओं ने विभाग पर पूरी तरह कब्जा कर रखा है। हर काम के लिए रुपये का मानक निर्धारित कर रखा है। दोनों विभागों में किसी भी काम के लिए पहुंचने वाले लोगों को इनकी परिक्रमा करनी पड़ती है। अगर कोई व्यक्ति सीधे अफसर से मिलकर अपनी बात रखता है, तो ये बाबू अफसरों को कागजों के हेरे- फेर में ऐसे उलझा देते हैं कि वे भी उनकी हर बात मानने को विवश हो जाते हैं। 

शिक्षकों की संबद्धता, एरियर भुगतान मृतक आश्रित नियुक्ति, स्कूलों की मान्यता परीक्षा केंद्रों के निर्धारण में अफसरों का हवाला देकर मोटी कमाई की जाती है। वर्षों से जमे इन बाबुओं के कागजी कीड़ा होने से अफसर भी इनकी कमी नहीं पकड़ पाते हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग में परीक्षा केंद्रों की नीलामी और बच्चों की शिफ्टिंग का खेल किसी से छिपा नहीं है। प्रतिवर्ष लाखों का खेल होता है, मगर अधिकारी पूरी तरह अनजान बने होते हैं।

बाबुओं के इस खेल में अफसरों की हां होती है, मगर वह खुलकर सामने नहीं आते हैं। इसका पूरा फायदा बाबू उठाते हैं करोड़ों की बिल्डिंग खड़ी करने वाले इन बाबुओं के लिए शासन का नया फरमान परेशानी का सबब बन गया है हालांकि अधिकांश बाबुओं ने अपने बचाव का रास्ता पहले से ही खोज निकाला है।

उन्होंने बैंक बैलेंस के साथ ही आशियाना भी घर के किसी और सदस्य या फिर रिश्तेदारों के नाम कर रखा है। डीआईओएस डॉ. सर्वदानंद और बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि शासन ने बाबुओं की संपत्ति का ब्यौरा ऑनलाइन करने का निर्देश दिया है। सभी को पत्र जारी किया गया है। अभी तक किसी ने भी ब्यौरा उपलब्ध नहीं कराया है।

नेताओं और अफसरों के बीच बना रखी है पैठ

विभाग में वर्षों में जमे कर्मचारियों ने नेताओं और शीर्ष अफसरों के बीच भी अपनी पैठ बना रखी है। पटल परिवर्तन का आदेश आते ही स्थानीय नेताओं के दरवाजे पर दस्तक देकर अफसरों पर दबाव बनाने के साथ ही विभाग में पूर्व में तैनात रहे शीर्ष अफसरों से भी सिफारिश करा रहे हैं।


पटल बदलने के लिए हर वर्ष आता है आदेश

शासन हर वर्ष बाबुओं का पटल परिवर्तित करने का निर्देश देता है और अधिकारी 20 प्रतिशत के मानक को पूरा करने लिए दूसरे कर्मचारियों की पटल बदल देते हैं, मगर कमाई करने वाले बाबुओं को नहीं छेड़ते हैं। दरअसल, इन बाबुओं के माध्यम से अधिकारी भी अपनी जेब भरते हैं। इसलिए उनको हां में हो मिलाने के लिए मजबूर होते हैं।

69000 शिक्षक भर्ती के रिक्त 6696 पदों पर काउन्सलिंग हेतु जनपदवार विज्ञप्तियां जारी, लगातार अपडेटेड

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