DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Thursday, May 13, 2021

चुनावी ड्यूटी में कोरोना से प्रयागराज में 74 कर्मियों और प्रतापगढ़ में 49 कर्मियों की मौत की रिपोर्ट।, देखें न्यूज़ रिपोर्ट

उफ्फ 😢  : चुनावी ड्यूटी में कोरोना से प्रयागराज में 74 कर्मियों  और प्रतापगढ़ में 49 कर्मियों की मौत की रिपोर्ट।, देखें न्यूज़ रिपोर्ट

शुल्क भरपाई के लिए नैक व एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता होगी खत्म, निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को मिलेगी बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने तैयार किया प्रस्ताव, शीघ्र शासन को भेजा जाएगा।

शुल्क भरपाई के लिए नैक व एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता होगी खत्म, निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों को मिलेगी बड़ी राहत, समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने तैयार किया प्रस्ताव, शीघ्र शासन को भेजा जाएगा।


लखनऊ : कोरोना संकट के दौर में निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में शुल्क भरपाई के लिए नैक और एनबीए की ग्रेडिंग की अनिवार्यता से वर्ष 2024-25 तक छूट रहेगी। इसके लिए समाज कल्याण विभाग निदेशालय ने प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे शीघ्र ही शासन को भेजा जाएगा।


छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना में वर्ष 2020-21 से निजी विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के लिए क्रमशः नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रीडिटेशन काउंसिल (नैक) और नेशनल बोर्ड आफ एक्रीडिटेशन (एनबीए) की ग्रेडिंग अनिवार्य कर दी गई थी। स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि प्रदेश में 28 निजी विश्वविद्यालय हैं, इनमें से सिर्फ पांच के पास ही नैक की ग्रेडिंग है। वहीं, करीब दो हजार तकनीकी संस्थानों में बमुश्किल 25 ही एनबीए ग्रेडिंग प्राप्त हैं।

नतीजतन पिछले वित्त वर्ष में ग्रेडिंग हासिल न कर पाने वाले निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों को योजना के दायरे से बाहर कर दिया गया था। इन विद्यार्थियों ने पॉलिटेक्निक, बीटेक, एमबीए, एमसीए और एमटेक आदि पाठ्यक्रमों में दाखिला लिया था निजी शिक्षण संस्थानों का तर्क है कि कोरोना वायरस के हमले के कारण उत्पन्न परिस्थितियों में वे अपने संस्थानों का नैक और एनबीए की टीम से मुआयना कराने में असमर्थ हैं। केंद्र सरकार ने भी नैक और एनबीए की ग्रेडिंग वर्ष 2025 26 से ही अनिवार्य की है। यही वजह है कि समाज कल्याण निदेशालय ने भी वर्ष 2024-25 तक यूपी में निजी विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को इस ग्रेडिंग से छूट देने के लिए प्रस्ताव तैयार कर लिया है। समाज कल्याण निदेशालय के एक उच्च पदस्थ अधिकारी ने बताया यह प्रस्ताव शासन की सहमति से ही तैयार किया गया है, इसलिए मंजूरी मिलना पर है तय है।

ऑनलाइन क्लास बंद, अब वीडियो तैयार कर पढ़ाई : कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लास बंद करने से बदला पढ़ाई का तरीका

ऑनलाइन क्लास बंद, अब वीडियो तैयार कर पढ़ाई 

कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लास बंद करने से बदला पढ़ाई का तरीका


कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद से प्रदेश सरकार के निर्देश पर ऑनलाइन क्लास बंद कर दिए गए हैं। निजी स्कूलों की ओर से अब छात्रहित में शिक्षक चैप्टर के अनुसार कोर्स का वीडियो तैयार कर रहे हैं। स्कूल वेबसाइट और यू ट्यूब के माध्यम से बच्चों तक इस अध्ययन सामग्री को पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। कोरोना संक्रमण के दौर में स्कूलों में क्लासरूम की पढ़ाई ठप पड़ने के बाद ऑनलाइन क्लास शुरू हुए। प्रदेश सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लास ठप करने के बाद पढ़ाने के नए विकल्प खोजे जा रहे हैं।


प्रदेश में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद स्कूल-कॉलेज अप्रैल से ही बंद चल रहे हैं। शासन के निर्देश पर प्राथमिक से लेकर सभी शैक्षिक संस्थानों को 20 मई तक बंद कर दिया गया है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं स्थगित कर दी गई हैं। ऑनलाइन क्लास ठप हो जाने के बाद बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ गई है। इस बात को ध्यान में रखकर निजी स्कूलों की ओर से अपने पैटर्न के अनुसार हर कक्षा के लिए अलग-अलग विषय के अनुसार प्रत्येक चैप्टर के लिए वीडियो बनाए जा रहे हैं।

स्कूल इन वीडियो को अपनी वेबसाइट पर अपलोड करके बच्चों तक पहुंचाएंगे। विषय विशेषज्ञ 30 से 45 मिनट का वीडियो तैयार कर रहे हैं। स्कूल अपनी अध्ययन सामग्री दूसरे तक पहुंचने से रोकने के लिए कक्षावार छात्रों को आईडी-पासवर्ड भी देंगे। इसके जरिए छात्र-छात्राएं घर बैठे पढ़ाई कर सकेंगे। यूपी बोर्ड और बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों की ओर से वीडियो तैयार करके पढ़ाई 2020 में ही शुरू किया जा चुका है।

Wednesday, May 12, 2021

फर्रुखाबाद : बीएसए, वित्त एवं लेखाधिकारी और दो लिपिकों का रोका वेतन, नवनियुक्त व स्थानांतरित शिक्षकों के वेतन भुगतान में लापरवाही का मामला

अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश पर अफसर व लिपिकों पर हुई कार्रवाई

फर्रुखाबाद। अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश पर शिक्षा निदेशक बेसिक डॉ. सवेंद्र विक्रम बहादुर सिंह ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी लालजी यादव, वित्त एवं लेखाधिकारी अजीत कुमार व दो लिपिकों का वेतन रोक दिया है। यह कार्रवाई 69 हजार सहायक अध्यापक के तहत जिले में नियुक्त हुए शिक्षक व अंतर जनपदीय स्थानांतरण पर आए शिक्षकों का वेतन दिए जाने की कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर की गई है।
69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत जिले में करीब साढ़े नौ सौ शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शैक्षिक अभिलेखों के बाद वेतन दिया जाना है। पटल सहायक और अधिकारी नवनियुक्त शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन कराने में दिलचस्पी नहीं ले रहे हैं। इस कारण चार माह से शिक्षकों को वेतन नहीं मिल रहा है। अंतर जनपदीय स्थानांतरण पर भी जिले में करीब चार सौ शिक्षक आए थे। इनको भी वेतन दिए जाने की कार्रवाई विभागीय अधिकारी और पटल लिपिक ने नहीं की। नवनियुक्त व अंतर जनपदीय स्थानांतरित शिक्षकों के वेतन भुगतान संबंधी कार्रवाई, मानव संपदा पोर्टल पर शिक्षकों का विवरण अपलोड किए जाने व अन्य विभागीय कार्यों की अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा की अध्यक्षता में सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा हुई थी। फर्रुखाबाद जिले की स्थिति अधिक खराब पाई गई।

जिले से नवनियुक्त शिक्षकों को अभिलेख सत्यापन के नाम पर परेशान की लगातार शिकायतें मिलने पर बीएसए, वित्त एवं लेखाधिकारी और 69 हजार शिक्षक भर्ती का पटल देख रहे लिपिक सुरेंद्र नाथ अवस्थी व अंतर जनपदीय स्थानांतरण पटल देख रखे रिषभ शुक्ला का वेतन रोक दिया गया है। इस संबंध में आदेश जिला मुख्यालय आ गया है।






UPTET 2020 व एडेड शिक्षक भर्ती : दो माह में दो अहम परीक्षाएं स्थगित

UPTET 2020 व एडेड शिक्षक भर्ती :  दो माह में दो अहम परीक्षाएं स्थगित


■ 18 अप्रैल को एडेड जूनियर हाईस्कूल शिक्षक भर्ती पंचायत चुनाव से टली

■ अब यूपीटीईटी 2020 का संक्रमण से विज्ञापन व आवेदन रोकना पड़ा


प्रयागराज : प्राथमिक स्तर की परीक्षा कराने वाली संस्था को दो माह में दो अहम परीक्षाएं स्थगित करना पड़ा है। ये नौबत इसलिए आई क्योंकि शासन ने दोनों प्रकरणों में अनुमति देने में देरी की। परीक्षा संस्था ने तय समय पर प्रस्ताव भेजे थे लेकिन, वे लंबे समय तक अनुमति के इंतजार में लटके रहे। हालांकि दोनों परीक्षाओं को अलग वजहों से टालना पड़ा है। अब हालात सामान्य होने पर ही दोनों परीक्षाओं की तारीखें नए सिरे से तय होंगी।


परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय उप्र ने फरवरी माह में ही उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) 2020 कराने का प्रस्ताव भेजा था लेकिन, उस पर मुहर करीब एक माह बाद 15 मार्च को लग सकी। उस समय शासन ने आवेदन से लेकर परीक्षा व परिणाम तक की समय सारिणी घोषित कर दी। इसमें 11 मई को विज्ञापन, 18 मई से ऑनलाइन पंजीकरण व आवेदन और 25 जुलाई को परीक्षा होनी थी। इस इम्तिहान के बाद ही प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती परीक्षा होती है। यदि उसी समय आवेदन लिए जाते तो शायद अब तक परीक्षा हो जाती। लेकिन, इधर कोरोना संक्रमण की वजह से परीक्षा के साथ ही उसकी आवेदन आदि की प्रक्रिया रोकनी पड़ी है।


इसी तरह से प्रदेश के तीन हजार से अधिक अशासकीय सहायताप्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में प्रधानाध्यापक व सहायक अध्यापक के 1894 पदों की लिखित परीक्षा 18 अप्रैल को होना प्रस्तावित थी। इसके आवेदन हो चुके थे लेकिन, परीक्षा के ठीक दूसरे दिन त्रिस्तरीय ग्राम पंचायत चुनाव होने की वजह से कुछ दिन पहले ही परीक्षा स्थगित करनी पड़ी, क्योंकि कई जिलों के डीएम ने इम्तिहान कराने में असमर्थता जताई थी।


अब इन दोनों परीक्षाओं की नई तारीखें हालात सामान्य होने के बाद ही तय होंगी। साथ ही प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती की परीक्षा के लिए भी प्रतियोगियों को इंतजार करना पड़ेगा।

CBSE : परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्र नहीं दे पाएंगे चुनौती

CBSE : परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद छात्र नहीं दे पाएंगे चुनौती


इस बार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कंक्षा 10 का परिणाम जारी करने के बाद छात्र उसको चुनौती नहीं दे पाएंगे। छात्र न तो पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर पाएंगे न ही अंको के सत्यापन की मांग कर सकेंगे। कोरोना की वजह से 10वीं बोर्ड परीक्षा रद्द होने के बाद जो नई मूल्यांकन नीति जारी की गई उसमे इस बार यह व्यवस्था खत्म कर दी गयी है।


कोरोना संक्रमण को देखते हुए बोर्ड ने 10वीं की परीक्षा रद्द करती है। ऐसे में बोर्ड ने परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर नई मूल्यांकन नीति तैयार की है। जिसे सभी स्कूलों को भेज दिया गया है। वहीं परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने स्कूलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर मूल्यांकन नीति के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा भी की है। नई मूल्यांकन नीति के अनुसार छात्रों का परिणाम यूनिट टेस्ट, अर्धवार्षिक परीक्षा और प्री बोर्ड परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर तैयार किया जाएगा। 10 अंक यूनिट टेस्ट, 30 अंक अर्धवार्षिक परीक्षा और 40 अंक प्री बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं शेष 20 अंक आंतरिक मूल्यांकन के हैं। बोर्ड द्वारा परीक्षा परिणाम जारी करने की प्रस्तावित तिथि 20 जून है। 


परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद इस बार छात्र उसे चुनौती नहीं दे पाएंगे। ना तो अंको का सत्यापन करा पाएंगे और ना ही पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे नई मूल्यांकन नीति में छात्रों को यह सुविधा नहीं दी गई है। इसको लेकर बोर्ड ने अपना तर्क भी स्पष्ट किया है। बोर्ड ने साफ किया है कि इस बार परीक्षा परिणाम स्कूलों के टेस्ट व प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर तैयार किया जा रहा है। ऐसे में छात्रों को पहले ही स्कूलों में उसकी कॉपियां दिखाई जा चुकी होंगी। छात्रों ने पहले ही अंकों का सत्यापन कर लिया होगा। ऐसे में परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद दोबारा सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की जरूरत नहीं होगी।


बोर्ड कर सकता है अंकों का सत्यापन
हालांकि छात्रों के पास अंकों के सत्यापन पुनर्मूल्यांकन की सुविधा नहीं होगी लेकिन वह जब चाहे अपने स्तर से इसका सत्यापन कर सकेगा। बोर्ड ने स्कूलों को परीक्षा परिणाम से संबंधित सभी प्रपत्र सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। बोर्ड ने साफ किया है कि वह कभी भी स्कूलों में टीम भेजकर परीक्षा परिणाम का सत्यापन करा सकता है।


कम्पार्टमेंट की मिलेगी सुविधा 
बोर्ड छात्रों को कंपार्टमेंट में बैठने की सुविधा जरूर देगा। परीक्षा परिणाम में यदि कोई छात्र उतीर्ण नहीं हुआ तो वह कंपार्टमेंट परीक्षा में बैठ सकता है। परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने इसको लेकर भी स्कूलों से चर्चा की। बोर्ड द्वारा स्कूलों को सैंपल पेपर भेजा जाएगा जिसके आधार पर स्कूल प्रश्न पत्र तैयार करेंगे और ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा आयोजित करेंगे। परीक्षा ऑब्जेक्टिव टाइप होगी, छात्रों पर ज्यादा बोझ नहीं होगा।

शिक्षामित्रों की हालत को लेकर सरकार पर बेरुखी और वादे न पूरे करने का आरोप

शिक्षामित्रों की हालत को लेकर सरकार पर बेरुखी और वादे न पूरे करने का आरोप

 


लखनऊ। उप्र. दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ ने आरोप लगाया है कि प्रदेश सरकार के चार साल के कार्यकाल के बाद भी शिक्षामित्रों की हालत जस की तस है। संघ के अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार शिक्षामित्रों को समस्याओं के निस्तारण पर ध्यान नहीं दे रही है। 


उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षामित्रों से किया गया एक भी वादा पूरा नहीं किया है। इससे शिक्षामित्र हताश हैं। उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान संक्रमित होने से करीब दो सौ शिक्षामित्रों की मृत्यु हुई है। 


उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों के आश्रितों को भी 50 लाख रुपये मुआबजा और सरकारी नौकरी मिलनी चाहिए। सरकार को प्रदेश के विभिन्‍न अस्पतालों में भर्ती कोरोना संक्रमित शिक्षामित्रों के भी इलाज का उचित प्रबंध करना चाहिए।

परिषदीय बच्चों को सितंबर 20 से फरवरी 21 तक का अनाज और परिवर्तन लागत मिलेगी

परिषदीय बच्चों को सितंबर 20 से फरवरी 21 तक का अनाज और परिवर्तन लागत मिलेगी



लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यार्थियों को 1 सितंबर 2020 से लेकर 9 फरवरी 2021 तक के मिड डे मील के अनाज और परिवर्तन लागत का नकद भुगतान किया जाएगा। 


कक्षा एक से पांच तक के विद्यार्थियों को 4.6 किलो गेहूं, 9.2 किलो चावल सहित कुल 13.8 किलो अनाज दिया जाएगा। परिवर्तन लागत के रूप में 685 रुपये प्रत्येक विद्यार्थी को दिए जाएंगे। 


कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों को 6.2 किलो गेहूं, 12.4 किलो चाबल सहित कुल 18.6 किलो अनाज दिया जाएगा। प्रत्येक विद्यार्थी को 923 रुपये परिवर्तन लागत का भुगतान भी किया जाएगा। 


बेसिक शिक्षा विभाग ने मिड डे मील के अनाज और परिवर्तन लागत भुगतान के लिए वाउचर भी जारी कर दिया है।

Tuesday, May 11, 2021

कोरोना से मृत परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों के आश्रितों को नौकरी देने की तैयारी

गोरखपुर : कोरोना महामारी आपदा में मृतक शिक्षकों के आश्रितों को अनुकम्पा के आधार पर तत्काल मृतक आश्रित नियुक्ति, अन्य देयकों के भुगतान आदि का लाभ दिये जाने के सम्बन्ध में।


गोरखपुर: जनपद में कोरोना से मृत परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों व कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी तथा अन्य देयकों के भुगतान की बेसिक शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। बीएसए ने चार सदस्यीय समिति गठित करते हुए खंड शिक्षाधिकारियों से ब्लाकवार मृत शिक्षकों से संबंधित कागजात उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जा सके।

पंचायत चुनाव से लेकर अब तक जनपद में परिषदीय विद्यालय के 50 शिक्षकों व शिक्षणोत्तर कर्मचारियों की कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु हो चुकी है। इन शिक्षकों के आश्रितों को नियमानुसार अनुकंपा के आधार पर नौकरी तथा जीपीएफ, बीमा व अन्य देयकों का भुगतान देने का प्रावधान है। इस प्रकरण का समय से निस्तारण करने को लेकर विभाग ने तेजी से पहल करते हुए निर्देश जारी कर दिया है। विभाग ने जिले के सभी खंड शिक्षाधिकारियों को 17 मई तक अपने-अपने ब्लाकों के मृतक शिक्षकों की सूची व उनसे संबंधित आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने को कहा है।

चार सदस्यीय है मृतक आश्रित निस्तारण समिति : बीएसए ने मृतक शिक्षकों व कर्मचारियों के प्रकरण के निस्तारण के लिए नोडल अधिकारी के नेतृत्व में चार सदस्यीय मृतक आश्रित निस्तारण समिति गठित की है। इसके प्रभारी व नोडल अधिकारी कैंपियरगंज के बीईओ सुबास गुप्ता को बनाया गया है। संबंधित ब्लाकों के खंड शिक्षाधिकारी सहयोगी अधिकारी व पटल सहायक फैसल हसन सिद्दीकी व मिथिलेश नंदन बतौर सहयोगी समिति में शामिल किए गए हैं।

कोरोना से मृत जिले के शिक्षकों व कर्मचारियों के आश्रितों को नौकरी व देयकों के भुगतान के लिए समिति गठित कर दी गई है। समय से यह प्रकिया पूरी करने के लिए नोडल अधिकारी द्वारा इसकी नियमित समीक्षा की जाएगी। -बीएन सिंह, बेसिक शिक्षाधिकारी

ललितपुर : शिक्षकों को नहीं मिल रहा समय पर वेतन, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमन्त्री को ज्ञापन भेज कर समस्या से कराया अवगत

  

ललितपुर ब्यूरो : राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने मुख्यमन्त्री को एक ज्ञापन भेजा, जिसमें शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिलने की समस्या से अवगत कराया। ज्ञापन में कहा गया कि कोरोना काल में शिक्षकों ने पूर्ण निष्ठा के साथ कार्य किया और कई शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारी के मौत के आगोश में समा गये। शिक्षकों को शासनादेश के तहत माह के एक तारीख को वेतन दिया जाना चाहिये लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। अफसरों की लापरवाही का खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। ज्ञापन में शिक्षकों को हर माह की एक तारीख को वेतन दिलाये जाने की माँग की है। 

ज्ञापन में कहा गया कि विभिन्न शासनादेशों व विभागीय निर्देशों के क्रम में शिक्षकों का वेतन प्रत्येक माह की 1 तारीख तक किये जाने के निर्देश हैं। वर्तमान में ई-पेमेंट व्यवस्था लागू होने अर्थात मानव सम्पदा पोर्टल पर पैरोल माड्यूल के माध्यम से ऑनलाईन भुगतान हर स्थिति में प्रतिमाह की एक तक किये जाने के निर्देश किये गये हैं, किन्तु शासनादेशों व वर्तमान में ऑनलाईन पैरोल माड्यूल व्यवस्था लागू होने के बाद भी अधिकारियो की लचर कार्यप्रणाली के चलते प्रत्येक माह की एक तारीख को वेतन भुगतान नहीं कर हमेशा 15 या 20 तारीख के पूर्व वेतन भुगतान नहीं किया जाता है जो निन्दनीय है। इस सम्बन्ध में संगठन द्वारा कई बार प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियो को ज्ञापन दिये गये हैं। ज्ञापन में कहा गया कि वर्तमान में अति विषम कठिन परिस्थिति के दौर में जब कोरोना महामारी विकराल रूप धारण कर चुकी है व दर्जनों शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारी मौत के आगोश में समा चुके है तथा घर घर में लोग बीमार है और उन्हें पैसों की नितांत आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में भी अधिकारियो की मनमानी के चलते शासनादेशों को ताक पर शिक्षको को वेतन माह की एक तारीख को उपलब्ध नही कराई जा रही है। शासनादेशों व विभागीय निर्देशों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। ज्ञापन में शिक्षकों का माह अप्रैल के वेतन का अविलम्ब भुगतान कराकर शासनादेशों के तहत प्रतिमाह की 1 तारीख तक वेतन का भुगतान कराने व देरी से वेतन भुगतान के जिम्मेदार दोषी अधिकारियो के विरूद्ध अविलम्ब ठोस दंडात्मक अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की माँग की गई। साथ ही चेतावनी दी कि यदि ऐसा नहीं किया गया तो आन्दोलन किया जायेगा ।

 ज्ञापन पर मण्डल अध्यक्ष अरविंद तिवारी, जिलाध्यक्ष रविकान्त ताम्रकार, जिला महामंत्री हरभजन सिंह, जिला मंत्री अनिल शर्मा, जिला संगठन मंत्री तृप्ति सिंह, जिला कोषाध्यक्ष कैलाशचन्द्र राणा ने हस्ताक्षर किये।


उच्च शिक्षा : बिना परीक्षा पास किये प्रमोट किये जाने को लेकर UGC का खंडन जारी, जानें पूरी सच्चाई

उच्च शिक्षा : बिना परीक्षा पास किये प्रमोट किये जाने को लेकर UGC का खंडन जारी, जानें पूरी सच्चाई



यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया गया है और गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई है।


कोरोना महामारी के इस भयावह दौर में भ्रामक सूचनाओं और फर्जी खबरों की रोकथाम और पड़ताल कोई आसान काम नहीं है। कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के कारण जहां एक और हर रोज किसी न किसी परीक्षा के रद्द या स्थगित होने की घोषणाएं हो रही हैं। वहीं, इनके सबके बीच, कई शरारती तत्व और बेपरवाह मीडिया संस्थान बिना प्रमाणिकता के खबरों का प्रकाशन और प्रसारण कर देते हैं।


इससे कई विद्यार्थी और उम्मीदवार गुमराह हो जाते हैं। ऐसी ही एक खबर वायरल हो रही है कि यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर बिना परीक्षा के छात्रों को उत्तीर्ण करने और अगली कक्षा में प्रमोट करने संबंधी निर्देश जारी किए हैं। जिसका खंडन यूजीसी ने किया है। 


वायरल खबर में दावा किया जा रहा है कि यूजीसी ने विद्यार्थियों के अगली कक्षा में प्रमोशन की नई गाइडलाइन जारी कर दी है। इसके अनुसार अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों को छोड़कर अन्य कक्षाओं के स्टूडेंट्स के प्रमोशन का निर्णय विश्वविद्यालय ही कर सकेंगे।


दावे के अनुसार, यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालय अपने यहां की स्थानीय परिस्थितियों को देखकर परीक्षाएं कराने या विद्यार्थियों को सीधे प्रमोट करने का फैसला ले सकेंगे। अब तक जो स्थिति है, उसमें ज्यादातर विश्वविद्यालयों ने अंतिम वर्ष को छोड़कर बाकी सभी को बगैर परीक्षा के ही अगली कक्षाओं में प्रमोट करने की तैयारी शुरू कर दी है।


लेकिन बता दें कि यूजीसी ने ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया है और न ही कोई गाइडलाइन जारी की है।  
यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मंगलवार, 11 मई, 2021 को एक स्पष्टीकरण नोटिस जारी कर स्पष्ट किया कि आयोग की ओर से ऐसा कोई सर्कुलर और पत्र जारी नहीं किया गया है और गाइडलाइन भी जारी नहीं की गई है।


हालांकि, यूजीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी ओर से 06 मई, 2021 को एक परामर्श जारी किया गया था। कोरोना संक्रमण की वर्तमान दर को मद्देनजर रखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मई माह में होने वाली अपनी सभी ऑफलाइन परीक्षाओं को स्थगित कर दिया था।

साथ ही सभी विश्वविद्यालयों और राज्यों को पत्र लिखकर मई माह में कोई भी ऑफलाइन परीक्षा आयोजिन न करने को कहा था। पत्र में यह भी लिखा गया है कि जून में समीक्षा बैठक के बाद ही इन परीक्षाओं के संबंध में कोई फैसला किया जाए।

इसके साथ ही यूजीसी ने लिखा था, हालांकि, कोरोना संक्रमण के रोकथाम के लिए केंद्र / राज्य सरकार, शिक्षा मंत्रालय, या यूजीसी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उच्च शिक्षा संस्थान और विश्वविद्यालय ऑनलाइन परीक्षाओं के संचालन के संबंध में उचित निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं।  

KVS School : केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां घोषित

KVS School : केंद्रीय विद्यालय संगठन के स्कूलों में गर्मियों की छुट्टियां घोषित

KVS School News : केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने अपने देशभर के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियों का संशोधित आदेश जारी किया है। देश में कोरोना महामारी के बढ़ते मामलों के चलते केवीएस के सभी स्कूलों में 3 मई से 20 जून तक गर्मी की छुट्टियां घोषित की गई हैं।


यह गर्मी की छुट्टियां देश ठंडे और सबसे ठंडे इलाकों को छोड़कर बाकी देश के पूरे स्कूलों में रहेंगी। हालांकि कक्षा 10 के शिक्षकों को कहा इस दौरान स्टेशन न छोड़ने के लिए कहा गया है। जिससे कि सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट 2021 समय पर तैयार किया जा सके।

केंद्रीय विद्यालय संगठन ने गर्मी की छुट्टियों का आदेश क्षेत्रीय कार्यालयों - आगरा, चंडीगढ़, कोलकाता, देहरादून, दिल्ली, गिरिग्राम, गुवाहाटी, जयपुर, जम्मू, लखनऊ, पटना, रांची, सिलचर, तिनसुकिया, वाराणसी, अहमदाबाद, बेंगलुरु, चेन्नई, एर्नाकुलम,हैदराबाद, जबलपुर, मुंबई, रायपुर, भुवनेश्वर और भोपाल के अंतर्गत आने वाले केवीएस स्कूलों के लिए जारी किया है।


KVS Summer Vacations 2021 Notice


वहीं लेह, कार्गिल, लद्दाक, तवांग और डलहौजी व केवी काठमांडु क्षेत्रीय केंद्रों के स्कूलों में गर्मी की छुट्टियां 1 जून से शुरू होंगी। शिक्षकों को कहा गया है कि जब तक सीबीएसई 10वीं का रिजल्ट न जारी हो जाए तब तक वह अपने इलाके में ही रहें। अभी 10वीं कक्षा के छात्रों का मूल्यांकन कार्य चल रहा है।


कोरोना के चलते केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया भी स्थगित कर दी गई है क्योंकि अभी तक छात्रों की लिस्ट नहीं जारी की गई। लिस्ट 30 अप्रैल को जारी की जानी थी। कक्षा 9 की प्रवेश परीक्षा भी रद्द कर दी गई है।

Monday, May 10, 2021

गोरखपुर : त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2021 में चुनाव ड्यूटी में तैनात किये जाने वाले कार्मिकों को अनुग्रह धनराशि के भुगतान के संबंध में ।

त्रिस्तरीय पंचायतों के सामान्य निर्वाचन 2021 में चुनाव ड्यूटी में तैनात किये जाने वाले कार्मिकों को अनुग्रह धनराशि के भुगतान के संबंध में ।

फतेहपुर : छह महीने से वेतन के लिए भटक रहे 475 शिक्षक, गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन

फतेहपुर : छह महीने से वेतन के लिए भटक रहे 475 शिक्षक, गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन


फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग में वेतन को लेकर मारामारी है। छह महीने पहले नियुक्त 475 शिक्षकों के अभी तक वेतन नहीं मिला है। ये शिक्षक वेतन न मिलने के कारण आर्थिक तंगी के शिकार हैं। इनके साथ नियुक्त अन्य जिलों के शिक्षकों को वेतन भुगतान किया जा चुका है।


प्रदेश के पिछड़े जिलों में शुमार और सूची में सातवें स्थान पर दर्ज जिले शिक्षा का स्तर मजबूत करने के लिए शासन ने पूरा जोर लगा रखा है। जिले के 26503 स्कूलों में सृजित शत प्रतिशत पद भरने के लिए शासन पूरा प्रयास कर रहा है। इसके तहत नवंबर 2020 में जिले के प्राथमिक स्कूलों के 475 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। पूरे छह महीने गुजर गए, लेकिन इन्हे वेतन के नाम पर एक धेला नहीं मिला है। ऐसे में ये शिक्षक आर्थिक तंगी के शिकार हैं। इन्हें स्कूल तक पहुंचने के लिए मोटरसाइकिल में पेट्रोल भराने के लिए कर्ज लेना पड़ रहा है। खास बात तो यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग में शैक्षिक मूल अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराकर वेतन भुगतान कराने का प्रावधान है। इस लंबी अवधि में विभाग इन शिक्षकों के अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराने में असफल रहा है।

बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिले में नवनियुक्त तीन बीईओ को शिक्षकों के अभिलेखों का ऑनलाइन सत्यापन कराने के लिए लगाया गया है। सत्यापन का काम पूरा होने पर वेतन जारी कर दिया जाएगा। ऑफलाइन सत्यापन पूरा होने पर बकाए वेतन के एरियर का भुगतान किया जाएगा।

गैर जिलों से आए 200 शिक्षकों को भी नहीं मिला वेतन

अंतरजनपदीय तबादले पर आए दो सौ शिक्षक भी तीन महीने से वेतन के लिए भटक रहे हैं। इनके साथ आए 175 शिक्षकों को विभाग ने वेतन जारी कर दिया है। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि जिन शिक्षकों का ब्योरा उनके जिलों से आ चुका है, उन्हें वेतन भुगतान कर दिया गया है। जिनका ब्यौरा प्राप्त नहीं हुआ है, उन्हें वेतन भुगतान नहीं किया गया है।

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत शासन के निर्देश के बाद प्रदेश के समस्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई तक पठन-पाठन बन्द करने सम्बंधी आदेश जारी

कोरोना संक्रमण के दृष्टिगत शासन के निर्देश के बाद प्रदेश के समस्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 मई तक पठन-पाठन बन्द करने सम्बंधी आदेश जारी


प्रयागराज : प्रदेश में सभी माध्यमिक कालेजों व उच्च शिक्षा संस्थानों को 20 मई तक बंद कर दिया गया है। उच्च शिक्षा व माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सोमवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री ने रविवार को ही कोरोना कर्फ्यू की समय सीमा बढ़ाते हुए इस संबंध में निर्देश दिए थे। माध्यमिक कालेजों व उच्च शिक्षा संस्थानों को पहले 15 मई तक बंद रखने के निर्देश थे, अब समय सीमा 20 मई तक बढ़ा दी गई है। 

इस दौरान कालेजों के परिसर में किसी भी शिक्षक, विद्यार्थी, कर्मचारी व अधिकारी की उपस्थिति नहीं रहेगी। साथ ही इस अवधि में ऑनलाइन परीक्षाएं व कक्षाएं भी स्थगित रहेंगी। ऑनलाइन कक्षाएं भी नहीं चलेंगी।


न प्रशिक्षण, न सुरक्षा : कोविड सेंटरों पर शिक्षकों की ड्यूटी पर उठाए सवाल

न प्रशिक्षण, न सुरक्षा : कोविड सेंटरों पर शिक्षकों की ड्यूटी पर उठाए सवाल


सहारनपुर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी हेम सिंह पुंडीर ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवम अपर सचिव माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेजकर कोविड सेंटरों पर शिक्षकों की ड्यूटी न लगाने की मांग की है।

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री एवम अपर सचिव को भेजे पत्र में हेम सिंह पुंडीर ने कहा कि शिक्षकों को न तो कोरोना से लड़ने का कोई प्रशिक्षण ही है और न ही उनकी सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम ही हैं अतः उनकी कोविड केंद्रों पर ड्यूटी लगाने का अर्थ उन्हें मौत के मुह में धकेलना होगा।


 हेम सिंह पुंडीर ने पत्र में कहा कि चुनाव व मतगणना की ड्यूटी के बाद 2000 से अधिक शिक्षक व कर्मचारी मौत का शिकार हो चुके हैं तथा इस प्रकार की ड्यूटी से शिक्षकों के मानवाधिकारों का न सिर्फ हनन हो रहा है वरन! उनकी जान खतरे में पड़ गई है।

कोरोना से मृत शिक्षकों के आश्रितों को टीईटी से छूट अध्यापक बनाने की मांग

कोरोना से मृत शिक्षकों के आश्रितों को टीईटी से छूट  अध्यापक बनाने की मांग

कोरोना महामारी के दौरान त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने से बड़ी संख्या में शिक्षकों की मौत हुई है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने 29 अप्रैल को 706 शिक्षकों के निधन का दावा किया था, उनकी संख्या बढ़कर 800 हो गई है। पूरक सूची तैयार करके विभाग को भेजी जाएगी, साथ ही संघ ने सरकार से मांग की है कि मृतक शिक्षकों के आश्रितों वे आश्रित जो बीटीसी, बीएड या फिर डीएलएड आदि की योग्यता रखते हैं, उन्हें शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देकर सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति दी जाए। वहीं, वे आश्रित जो इंटर या फिर स्नातक उत्तीर्ण हैं उन्हें लिपिक के पद पर नियुक्त किया जाए।



उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा की अगुवाई में प्रदेशीय कार्यकारिणी की वर्चुअल बैठक में कोरोना संक्रमण के कारण शिक्षकों की बड़ी संख्या में मृत्यु होने पर चिंता जताई गई। सरकार से यह मांग भी की जाएगी कि मृत शिक्षकों के आश्रितों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। शिक्षक के परिजनों को एक अप्रैल 2005 से पूर्व लागू पुरानी पेंशन व्यवस्था के तहत पारिवारिक पेंशन दी जाए। ऐसे सभी मृत शिक्षक जो 60 वर्ष या फिर उससे कम आयु के थे उनके परिवार को शासनादेश के अनुसार ग्रेच्युटी का भुगतान हो। सभी मृतक व कार्यरत शिक्षकों को कोरोना योद्धा घोषित किया जाए।


उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ की यह भी मांग है कि संक्रमण के दौरान इलाज कराकर स्वस्थ हो चुके शिक्षकों के इलाज पर व्यय धनराशि का भी भुगतान किया जाए। पदाधिकारियों ने दो मिनट का मौन रखकर सभी मृतक शिक्षक व कर्मचारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। बैठक में शिवशंकर पांडेय, राधेरमण त्रिपाठी, देवेंद्र श्रीवास्तव, सुरेंद्र यादव, वंदना सक्सेना, अर्चना मिश्रा आदि थे।

अनुग्रह राशि के शासनादेश मे संशोधन के साथ स्वास्थ्य व ग्राम्य विकास कर्मियों की भांति बेसिक शिक्षकों को भी फ्रंटलाइन योद्धा मानते हुए लाभ देने की मांग

अनुग्रह राशि के शासनादेश मे संशोधन के साथ  स्वास्थ्य व ग्राम्य विकास कर्मियों की भांति बेसिक शिक्षकों को भी फ्रंटलाइन योद्धा मानते हुए लाभ देने की मांग


ज्ञात हो शासन ने 8 मई 2021 को जारी शासनदेश मे चुनाव ड्युटी से घर  जाने के दौरान ही मृत्यु पर अनुग्रह राशि देने की बात कही है जिसे विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा  विल्कुल ही अमानवीय बताया गया है।

विशिष्ट बी टी सी शिक्षक वेलफेयर एसो.उ प्र ने मा.मुख्यमंत्री उ प्र को पत्र लिखकर माँग की है कि इस महामारी मे चुनाव दौरान  कोरोना से संक्रमित चुनाव बाद यदि किसी भी शिक्षक/कर्मचारी की मौत हुई तो उसे हर हाल मे अनुग्रह राशि ₹50,00,000 दी जाए साथ ही अन्य स्वास्थ्य एवं ग्राम विकास राज्य कर्मचारियो की भाँति ड्यूटी निभा रहे शिक्षको को भी फ्रन्ट लाइन वर्कर मानते हुए सभी चिकित्सिए लाभ  व अतिरिक्त भत्ते प्रदान किए जाएं। 



दीप जला दिवंगत शिक्षकों को दी श्रद्धांजलि , 50 लाख की मदद देने की मांग

दीप जला दिवंगत शिक्षकों को दी श्रद्धांजलि , 50 लाख की मदद देने की मांग


प्रयागराज  :  पंचायत चुनाव के दौरान कोराना संक्रमण के कारण दिवंगत हुए एक हजार से अधिक शिक्षकों को टीचर्स सेल्फ केयर टीम ने दीप जलाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। साथ ही प्रत्येक शिक्षक के परिजनों को 50 लाख रुपये के आर्थिक सहयोग की सरकार से मांग की।


शिक्षकों ने कहा कि राज्यकर्मियों के समान शिक्षकों को भी चिकित्सा सुविधा दी जाए।

इस मौके पर विवेकानंद, सुधेश पांडेय, महेंद्र वर्मा, संजीव रजक, अभिषेक पटेल, विपुल आदि मौजूद रहे। दूसरी ओर से वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने भी प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रकाश सिंह के नेतृत्व में ऑनलाइन बैठक कर कोविड संक्रमण से दिवंगत हुए शिक्षकों को श्रद्धांजलि दी और पीड़ित परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद दिए जाने की मांग की।



टीचर्स सेल्फ केयर टीम के सदस्यों ने रविवार शाम 7 बजे अपने घरों में दीप जलाकर पंचायत चुनाव के दौरान कोरोना संक्रमण के कारण दिवंगत परिषदीय शिक्षकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। संस्थापक विवेकानंद ने कोरोना काल में दिवंगत हुए शिक्षक के परिवार को 50 लाख की आर्थिक मदद, शिक्षकों को सुरक्षा बीमा तथा कैशलेस चिकित्सा देने की मांग की।

वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की वर्चुअल बैठक प्रदेश अध्यक्ष डॉ. ज्ञान प्रकाश सिंह के नेतृत्व में हुई। कोरोना से दिवंगत शिक्षकों को श्रद्धांजलि देते हुए 50 लाख रुपये मुआवजा देने, बिना सुरक्षा इंतजाम के शिक्षकों से कोरोना ड्यूटी नहीं करवाने, अंतर जनपदीय तबादले से आए शिक्षकों को वेतन देने और 69000 भर्ती के शिक्षकों को ऑनलाइन सत्यापन पर वेतन देने की मांग की।

प्रयागराज : कोरोना संक्रमित शिक्षकों ने दिया प्रत्यावेदन, राहत के आसार, संगठन ने केवल बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का किया विरोध

प्रयागराज : कोरोना संक्रमित शिक्षकों ने दिया प्रत्यावेदन, राहत के आसार, संगठन ने केवल बेसिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का किया विरोध


कोरोना ड्यूटी के दौरान संक्रमित शिक्षकों को वेतन जारी करने के मकसद से बीएसए संजय कुमार कुशवाहा ने रविवार को ऐसे शिक्षकों से प्रत्यावेदन लिया। तीन दर्जन से अधिक शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय पहुंचकर अपनी कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट और दूसरी जांच के लिए दिए सैंपल आदि साक्ष्य के साथ आवेदन पत्र सौंपा।


प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेन्द्र कुमार श्रीवास्तव ने भी बीएसए को 23 शिक्षकों की सूची भेजते हुए वेतन जारी करने की मांग की है। शिक्षकों का वेतन रोकने की निंदा करते हुए कहा है कि कोरोना की रोकथाम में सिर्फ परिषदीय शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई जबकि अन्य संवर्ग के शिक्षकों व कर्मचारियों की भी ड्यूटी लगनी चाहिए।


प्रयागराज:- इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम (आई. ट्रिपलसी) में अनुपस्थित पाए गए जिन शिक्षकों का अप्रैल माह का वेतन रोका गया है, उनमें सी कई शिक्षकों को राहत मिलने के आसार हैं। ड्यूटी पर तैनात तमाम शिक्षक खुद संक्रमित हो गए थे और इसी वजह से वे ड्यूटी पर नहीं पहुंच सके। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) ने ऐसे शिक्षकों से कोविड पॉजिटिव होने के प्रमाण सहित उनसे प्रत्यावेदन लिए हैं। वहीं, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ की ओर से भी कई शिक्षकों के नाम बीएसए को दिए गए हैं।

कोविड संक्रमित जो मरीज होम आइसालेशन में हैं, उनका हालचाल जानने के लिए परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी आई. ट्रिपलसी में लगाई गई थी। निरीक्षण के दौरान आई. ट्रिपलसी में 92 शिक्षक अनुपस्थित मिले, जिनका अप्रैल माह 2021 का वेतन रोक लिया गया, जबकि इनमें से तमाम शिक्षक खुद कोविड से संक्रमित हो गए थे और इसी वजह से ड्यूटी पर नहीं पहुंच सके। शिक्षकों का कहना है कि संक्रमित कर्मचारियों को स्वास्थ्य लाभ के लिए 28 दिनों की छुट्टी दिए जाने का सरकारी नियम है, लेकिन शिक्षा विभाग ने इस नियम की अनदेखी की।


20 मई तक बंद रहेंगे यूपी के सभी स्कूल, कॉलेज व कोचिंग

20 मई तक बंद रहेंगे यूपी के सभी स्कूल कॉलेज व कोचिंग 



शासन के विशेष सचिव ने  आदेश में कहा है कि प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय महाविद्यालय, राज्य/निजी विश्वविद्यालय तथा उच्च शिक्षण संस्थान 20 मई तक बंद रहेंगे।



कोरोना संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए यूपी सरकार ने एक और फैसला लिया है। सीएम योगी ने प्रदेश के सभी सरकारी एवं निजी शैक्षणिक संस्थानों/कोचिंग इंस्टीट्यूट में 20 मई तक अवकाश रखने का आदेश दिया है। इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं बंद रखने के लिए कहा है। मुख्यमंत्री ने ये निर्देश रविवार को टीम 9 के अधिकारियों के साथ बैठक में दिए।

 उन्होंने कहा कि आंशिक कोरोना कर्फ्यू के दौरान प्रदेश की जनता की ओर से भी भरपूर सहयोग प्राप्त हो रहा है। एक्टिव केस लगातार कम हो रहे हैं। 


20 मई तक बंद रहेंगे निजी व सरकारी शैक्षणिक संस्थान


 प्रदेश में माध्यमिक और उच्च शिक्षा विभाग के सभी शिक्षण संस्थान एवं कोचिंग सेंटर 20 मई तक बंद रहेंगे। रविवार को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में आयोजित टीम-9 की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रदेश सरकार ने कोरोना संक्रमण के चलते बेसिक शिक्षा विभाग के पहली से आठवीं तक के सभी स्कूलों को 20 मई, माध्यमिक शिक्षा के सभी विद्यालयों, उच्च शिक्षा विभाग के सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ कोचिंग संस्थानों को 15 मई तक बंद करने का आदेश जारी किया था। शनिवार को टीम-9 की बैठक में प्रदेश में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति के मद्देनजर इसे 20 मई तक बढ़ाया गया है।


माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्कूलों में 20 मई से ग्रीष्मावकाश शुरू हो जाएगा। ऐसे में अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के स्कूल जुलाई में ही खुलेंगे। ऑनलाइन क्लास भी स्थगित रहेगी। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि  महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के साथ यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के संबंध में जल्द निर्णय किया जाएगा। 

UP Board 10th, 12th Exam 2021 : यूपीएमएसपी हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं पर अभी फैसला नहीं, छात्र 20 मई के बाद पा सकेंगे अपडेट

UP Board 10th, 12th Exam 2021 : यूपीएमएसपी हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं पर अभी फैसला नहीं, छात्र 20 मई के बाद पा सकेंगे अपडेट

UP Board 10th, 12th Exam 2021 : उत्तरर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) यानी यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षाओं पर अभ कोई फैसला नहीं किया गया है। 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ की अध्यक्षता में हुई कोरोना समीक्षा बैठक में बोर्ड परीक्षाओं को 20 मई 2021 तक स्थगित करने फैसला लिया गया था। अब 20 मई के बाद ही यूपी बोर्ड परीक्षाओं पर कुछ अपडेट मिल सकता है। इस दौरान स्कूल के शिक्षकों को वर्क फ्रॉम होम काम करने की अनुमति दी गई है। लेकिन महामारी के बढ़़ते प्रकोप के कारण जिस तरह से सीबीएसई और आईसीएससीई बोर्ड ने कक्षा 10 की परीक्षाओं को रद्द कर दिया था उससे यूपी बोर्ड 10वीं के भी कई छात्र परीक्षा रद्द होने को लेकर असमंजस में हैं।


चूंकि सरकार ने  पहले ही परीक्षाओं को 20 मई तक के लिए स्थगित किया है ऐसे में अब परीक्षाओं को लेकर नई सूचना 20 मई के बाद ही मिल सकती है। यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने मीडिया को बताया कि अभी 10वीं परीक्षा को रद्द किए जाने को लेकर कोई फैसला नहीं किया गया है। 

यूपी सरकार ने राज्य के सभी स्कूल-कॉलेज और शिक्षण संस्थाओं को 15 तक बंद रखने का आदेश दिया था। लेकिन अब राज्य में लॉकडान 17 मई तक होने से इस दौरान स्कूल कॉलेज भी बंद रह सकते हैं।


परीक्षाओं को लेकर चिंतित छात्र और शिक्षक-
कोरोना महारी के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कई छात्र और शिक्षक चिंतित हैं। उन्हें डर सता रहा है कि इस महामारी के दौर में परीक्षाएं कराने से कहीं संक्रमण छात्रों में भी न फैल जाए। वहीं यह भी चिंता है कि कहीं परीक्षाएं रद्द हो गई तो उनकी मेहनत न बेकार  चली जाए।

56 लाख छात्रों को परीक्षा का इंतजार :
यूपी बोर्ड कक्षा  इसमें से कक्षा 12 परीक्षा के लिए 29,94,312 छात्रों ने और कक्षा 10 परीक्षा के लिए 26,09,501 छात्रों ने आवेदन किया है। कुल मिलाकर 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 56,03,813 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया है।

बदलाव : मैनेजमेंट कोटे के सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सुविधा

बदलाव : मैनेजमेंट कोटे के सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को नहीं मिलेगी छात्रवृत्ति व फीस भरपाई की सुविधा

प्रदेश के समाज कल्याण विभाग ने छात्रवृत्ति और फीस भरपाई से संबंधित अपनी नियमावली में बदलाव कर दिया है। इस बदलाव की वजह से अब राज्य के शिक्षण संस्थानों में मैनेजमेंट कोटे से दाखिला लेने वाले सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सरकारी सुविधा नहीं मिल पाएगी। यह प्रावधान आगामी शैक्षिक सत्र से लागू माना जाएगा।


विभाग अनुसूचित जाति के छात्रों के साथ ही सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को भी प्रवेश परीक्षा से इतर मैनेजमेंट कोटा या मौके पर रिक्त सीट पर शिक्षा के क्षेत्र में प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति देता रहा है।

केन्द्र सरकार ने वर्ष 2018 से अनुसूचित जाति के छात्रों को इस तरह के प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति नहीं देने का फैसला किया। केन्द्र का यह प्रावधान यूपी में भी लागू हुआ। मगर उत्तर प्रदेश में समाज कल्याण विभाग यह कि विभाग सामान्य वर्ग के गरीब छात्रों को ऐसी छात्रवृत्ति देता रहा। एक ही विभाग में दो तरह की व्यवस्था होने की स्थिति में सरकार ने अब सामान्य श्रेणी के गरीब छात्रों को भी मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति नहीं देने के लिए नियमावली में बदलाव कर दिया है।


विभाग के संयुक्त निदेशक पीके त्रिपाठी के मुताबिक सरकार ने विभाग की नियमावली में बदलाव को मंजूर कर दिया है। इसके मद्देनजर वित्तीय वर्ष 2021-22 में अब मैनेजमेंट कोटे से प्रवेश लेने वाले ऐसे छात्रों को छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिलेगा।

Sunday, May 9, 2021

BSA गोरखपुर की अच्छी पहल : वेतन नही मिला तो गूगल फॉर्म भरें, समस्या होगी दूर

BSA गोरखपुर की अच्छी पहल : वेतन नही मिला तो गूगल फॉर्म भरें, समस्या होगी दूर

कोरोना ने यूपी बोर्ड को दिखाया परीक्षा में सुधार का रास्ता

कोरोना ने यूपी बोर्ड को दिखाया परीक्षा में सुधार का रास्ता


 प्रयागराज : कोरोना की दूसरी लहर ने बड़ी संख्या में लोगों की सांसें छीन ली है और हजारों लोग बीमारी से जूझ रहे हैं। विकट दौर ने परीक्षार्थियों की संख्या के हिसाब से सबसे बड़े परीक्षा संस्थान यूपी बोर्ड में सुधार करने का रास्ता भी दिखाया है। इस समय परीक्षाएं होना संभव नहीं और सीबीएसई की तरह यूपी बोर्ड हाईस्कूल के छात्र-छात्रओं को प्रमोट करने की स्थिति में नहीं है। बोर्ड के पास विद्यालय स्तर पर होने वाली वर्षभर की परीक्षाओं का रिकॉर्ड नहीं है। बोर्ड के साथ शासन भी इसका रास्ता खोज रहा है।




असल में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने अप्रैल माह में निर्णय लिया कि इस वर्ष हाईस्कूल की परीक्षा नहीं होगी, परीक्षार्थी अगली कक्षा में प्रमोट होंगे। इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। इंटर के संबंध में फैसला होना है। सीबीएसई व यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम लगभग समान है लेकिन, दोनों की परीक्षा प्रणाली में अंतर बरकरार है। सीबीएसई में मासिक टेस्ट के अलावा छमाही व वार्षिक परीक्षा का पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन है। केंद्रीय बोर्ड छात्र-छात्रओं के प्रदर्शन के आधार पर हाईस्कूल में आसानी से प्रमोट कर सकता है।

कोरोना संक्रमण से जूझ रहे बेसिक शिक्षकों का सरकार कराए निःशुल्क इलाज- संगठन की मांग

कोरोना संक्रमण से जूझ रहे बेसिक शिक्षकों का सरकार कराए निःशुल्क इलाज- संगठन की मांग



लखनऊ। उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से कोरोना संक्रमण से जूझ रहे शिक्षकों का अच्छे अस्पतालों में निशुल्क इलाज कराने की मांग की। संघ के महामंत्री उमाशंकर सिंह ने कहा कि पंचायत चुनाव की ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से मृत शिक्षकों के आश्रितों को 50 लाख का मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए। 


संघ का आरोप है कि चुनाव ड्यूटी में प्रशिक्षण से लेकर मतगणना तक कोविड प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने से हजारों की संख्या में शिक्षक संक्रमित हुए हैं और इनमें से कई शिक्षकों की मौत हुई हैं। संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने आरोप लगाया है कि चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण के लक्षण आने पर भी उनकी कोविड जांच नहीं कराई गई।


शिक्षकों ने स्वयं के स्तर पर जांच कराई, लेकिन जांच केंद्रों ने समय से रिपोर्ट नहीं दी। इसके चलते शिक्षक ड्यूटी करते रहे। महामंत्री उमाशंकर सिंह ने संक्रमित शिक्षकों का अच्छे अस्पतालों में निशुल्क इलाज कराने की मांग की।

कोविड ड्यूटी के दौरान कई शिक्षक संक्रमित और अब वेतन भी बाधित

कोविड ड्यूटी के दौरान कई शिक्षक संक्रमित और अब वेतन भी बाधित



प्रयागराज : कोरोना संक्रमण से प्रभावित लोगों के स्वास्थ्य की कुशलता जानने के लिए इंटीग्रेटेड कोविड कंट्रोल रूम (आई. ट्रिपलसी) में परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। इनमें से 92 शिक्षक ड्यूटी से नदारद मिल हैं, जिनका अप्रैल माह का वेतन रोक लिया गया है। हालांकि शिक्षा विभाग की इस कार्रवाई से शिक्षकों में रोष है, क्योंकि इनमें से तमाम शिक्षक खुद कोविड संक्रमण का शिकार हो गए थे और इसी वजह से वे आई. ट्रिपलसी में ड्यूटी करने नहीं पहुंच सके।



शिक्षकों को ड्यूटी दी गई थी कि वे फोन के माध्यम से उन रोगियों के स्वास्थ्य की कुशलता पूछते रहें, जो कोविड संक्रमण के कारण होम आइसोलेशन में हैं। शिक्षक ड्यूटी पर आ रहे हैं या नहीं, इसके लिए आई. ट्रिपलसी का निरीक्षण कराया गया, जिसमें 92 शिक्षक अनुपस्थित पाए गए। ऐसे शिक्षकों को अप्रैल माह 2021 का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है।


इस बाबत जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने कार्यालय आदेश भी जारी कर दिया है। उधर, शिक्षक में इस कार्रवाई से रोष है। उनका कहना है कि शिक्षकों ने जान हथेली पर लेकर अपनी ड्यूटी की । धनूपुर के सुरजीत गौतम, अनिल कुमार, संजय कुमार, फूलपुर के अंकित कुमार, उग्रसेन सिंह तोमर, शंकरगढ़ के शिवम मिश्र, सुरेंद्र कुमार समेत तमाम शिक्षक कोविड संक्रमण की चपेट में आ गए। शिक्षकों का आरोप है कि उनके प्रति सहानुभूति दिखाने की बजाय उनका वेतन रोकना अन्याय है।


संक्रमित शिक्षकों को नहीं मिल रहा स्वास्थ्य लाभ का समय

प्रयागराज : कोरोना पर नियंत्रण के लिए परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को भी जिम्मेदारी दी गई है। वह कोविड कंट्रोल रूम में ड्यूटी दे रहे हैं। पिछले दिनों कई शिक्षक ड्यूटी के दौरान संक्रमित हो गए थे। वे सभी आइसोलेशन में थे तभी दोबारा ड्यूटी पर बुलाया जाने लगा। शासन का निर्देश है कि 28 दिन बाद ही स्वस्थ होने पर ड्यूटी के लिए किसी कर्मचारी को बुलाया जाए।


पीड़ित शिक्षक उमाशंकर यादव का कहना है कि कमजोरी व अन्य समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। डॉक्टर ने सावधानी बरतने व आइसोलेशन में रहने की हिदायत दी है। 92 अध्यापकों का अप्रैल का वेतन भी रोक दिया गया है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के जिला संयुक्त मंत्री अफरोज अहमद ने बताया कि इस प्रकरण में बीएसए से वार्ता की गई तो उन्होंने कहा कि संक्रमण के शिकार अध्यापक साक्ष्य के साथ प्रत्यावेदन दें तो उनका वेतन अवमुक्त कर दिया जाएगा। अजय सिंह ने भी इसका समर्थन किया है।

Saturday, May 8, 2021

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण अन्तर्गत पदावनत शिक्षकों को विद्यालय आवंटन व वेतन और बीएसए गोरखपुर द्वारा ऑफलाइन पदावनति के कारण वापसी किये जाने को लेकर PSPSA ने शासन को लिखा पत्र

अंतर्जनपदीय स्थानांतरण अन्तर्गत पदावनत शिक्षकों को विद्यालय आवंटन व वेतन और बीएसए गोरखपुर द्वारा ऑफलाइन पदावनति के कारण वापसी किये जाने को लेकर PSPSA ने शासन को लिखा पत्र



स्वैच्छिक सामूहिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को लागू करने को लेकर शीघ्रता से निर्णय करने की मांग को लेकर RSM ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

स्वैच्छिक सामूहिक स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी को लागू करने को लेकर शीघ्रता से निर्णय करने की मांग को लेकर RSM ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र

हरियाणा में बड़ा फैसला : निजी स्कूलों में चलेंगी NCERT की किताबें।

हरियाणा :  NCERT से बाहर की किताबें नहीं पढ़ा सकेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

हरियाणा के निजी स्कूलों में चलेंगी एनसीईआरटी की किताबें। 


हरियाणा में सभी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लगाने का निर्देश दिया गया है। राज्य के निजी स्कूल अब कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे।


चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल संचालक अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से बाहर की पुस्तकें नहीं पढ़ा सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पहली से बारहवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगाने के आदेश दिए हैं।


स्कूल निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं। इससे निजी स्कूल मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे। अभी तक अधिकतर निजी स्कूलों में कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रहीं थी।


वर्ष 2016 से यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन चल रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शिक्षा नियमावली 2003 में शिक्षा निदेशक को अधिकार नहीं था कि वह पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करें। प्रदेश सरकार ने विगत एक मार्च को नियमावली में संशोधन कर अब यह अधिकार शिक्षा निदेशक को दे दिया है।


हरियाणा में किसी भी बोर्ड से संबंद्धता रखने वाले सभी निजी स्कूलों में अब एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करनी होंगी। एनसीईआरटी की कक्षा पहली से बारहवीं तक की किताबें अमूमन 500 से 800 रुपये तक मिल जाती हैं, जबकि निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर बच्चों से छह हजार से आठ हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। कई निजी प्रकाशकों द्वारा निजी स्कूल संचालकों को किताबों पर 70 फीसद तक कमीशन दिया जाता है, जिसकी मार अभिभावकों की जेब पर पड़ती है।

राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में दी जानकारी, 28 जिलों में 77 कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी के बाद हुई मौत

राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में दी जानकारी,  28 जिलों में 77 कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी के बाद हुई मौत।


अन्य जिलों की जानकारी अगली सुनवाई पर पेश करेंगे

राज्य चुनाव आयोग ने पेश की मतगणना की फुटेज


प्रयागराज: सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने मतगणना फुटेज पेन ड्राइव में पेश किया और कहा कि अभी नोडल अधिकारियों की पूरी रिपोर्ट नहीं आई है। अब तक 28 जिलों में चुनाव ड्यूटी पर 77 लोगों की मौत की सूचना मिली है। राज्य सरकार ने मृतक परिवार को 30 लाख मुआवजे के भुगतान की घोषणा की है।


प्रयागराज : कोविड संक्रमण को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई, राज्य निर्वाचन आयोग ने कोर्ट में दी जानकारी, 28 जिलों में 77 कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी के कारण हुई मौत, अन्य जिलों की जानकारी अगली सुनवाई पर पेश करेंगे, कोरोना से मरने वाले कर्मचारियों को सरकार ने 30 लाख मुआवजे का निर्णय।


वेतन न मिलने से इलाज नहीं करवा पा रहे अंतर्जनपदीय व नवनियुक्त बेसिक शिक्षक

वेतन न मिलने से इलाज नहीं करवा पा रहे अंतर्जनपदीय व नवनियुक्त बेसिक शिक्षक


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में नवनियुक्त और तबादला पाये शिक्षकों को पिछले तीन माह से अधिकारियों की लापरवाही से वेतन नहीं मिल पाया है। इस स्थिति में कोरोना संक्रमण व अन्य बीमारियों की चपेट में आये शिक्षक अपना इलाज नहीं करवा पा रहे हैं। इस संबंश में शिक्षक संगठनों की ओर से मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक को अधिकारियों की ओर से लापरवाही कि लिखित शिकायत भेजी गयी है। राष्ट्रीय शैक्षिक संघ लखनऊ मंडल की ओर से मांग करते हुए कहा गया कि शिक्षकों को वेतन तत्काल जारी कराया जाये, वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ और महिला शिक्षक संघ की ओर से भी तत्काल वेतन भुगतान कराये जाने
की मांग की गयी है।


सत्यापन न होने से शिक्षकों का अधर में लटका वेतन

यूनाइटेड टीचर एसोसिएशन यूटा की ने भी नवनियुक्त शिक्षकों के अभिलेखों की जांच में देरी पर बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी और अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार को ज्ञापन भेजा है। इसके साथ ही महानिदेशक भी पत्र लिखा है। यूटा के प्रदेश
अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने कहा कि 69 हजार भर्ती प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पाये शिक्षकों के अभिलेखों के सत्यापन की मांग की गयी है ताकि समय से वेतन मिल सके।


एलपीसी आने के बाद भी वेतन नहीं
इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक संगठन की कार्यकारी अध्यक्ष रीना त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षकों के एलपीसी आने | के बाद भी वेतन नहीं किया रहा है, इससे परेशानी हो रही है।


वेतन न जारी करना गलत
इस संबंध में महिला शिक्षक संघ की प्रदेश अध्यक्ष सुलोचना मौर्या कहती है कि शिक्षकों का वेतन भुगतान न किया जाना गलत है, अधिकारियों को ध्यान देना चाहिए।


अधिकारी ध्यान दें
इस संबंध में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के महामंत्री खुश्तर रहमान कहते है कि पाये शिक्षको को शिक्षको सारा काम पूरा हो चुका है, वहीं नवनियुक्त शिक्षकों को जिनका सत्यापन पूरा हो चुका है वेतन दिया जाना चाहिए, अधिकारी लापरवाही न करें।


परेशानी में हैं शिक्षक
इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के मंडलीय अध्यक्ष आदेश तत्काल जारी किया जाना चाहिए, ताकि कोरोना संक्रमण काल में परेशानी से जूझ रहे शिक्षकों को राहत मिल सके।



शिक्षकों के वेतन संबंधी जो भी परेशानी है उसे तत्काल निपटाया जायेगा, इस संबंध में सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को दिशा निर्देश भी जारी किए गये है। - पीएन सिंह, मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक

CBSE : कोरोना संक्रमित 10वीं के छात्रों का रिजल्ट 9वीं के अंक के आधार पर

CBSE : कोरोना संक्रमित 10वीं के छात्रों का रिजल्ट 9वीं के अंक के आधार पर



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने देश भर के स्कूलों के प्रधानाचार्यों के साथ बातचीत के बाद 10वों के छात्रों के प्रमोशन के नियम तय कर दिए हैं। बोर्ड की ओर से कहा गया है कि 10वों कक्षा में एक भी परीक्षा नहीं लेने वाले स्कूलों को अपने बच्चों की ऑनलाइन परीक्षा लेनी होगी। 


बोर्ड का कहना है कि 10वीं का छात्र कोरोना संक्रमित है अथवा किसी कारण से स्कूल ऑनलाइन परीक्षा लेने की स्थिति में नहीं हैं तो ऐसे छात्रों का रिजल्ट नौवीं के वार्षिक परिणाम के आधार पर जारी किया जायेगा। बोर्ड ने रिजल्ट तैयार करने के लिए स्कूलों को 15 मई तक का समय दिया है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज ने देश भर के स्कूलों के साथ बेबिनार में कहा कि जिन छात्रों ने यूनिट टेस्ट, प्री-बोर्ड, अर्डवार्षिक परीक्षा नहीं दिया है, ऐसे सभी छात्रों का ऑनलाइन मूल्यांकन किया जाए। यह ऑनलाइन मूल्यांकन स्कूल की परीक्षा समिति करे। मूल्यांकन के बाद परीक्षा समिति 15 मई रिजल्ट तैयार कर ले।


 बैठक में शामिल प्रधानाचार्यों ने बताया कि बोर्ड की ओर से आयोजित वेबिनार में मिले निर्देशों के आधार पर जल्द छात्रों का असेसमेंट करके रिजल्ट तैयार कर लिया जाएगा।


 इंटरनल असेसमेंट में पास नहीं हुए तो देनी होगी कंपार्टमेंट परीक्षा
भारद्वाज ने कहा कि बच्चे स्कूल की ओर से इंटनरल असेसमेंट में पास नहीं होंगे। ऐसे छात्रों के लिए स्कूल स्तर पर कंपार्टमेंट परीक्षा कराई जाएगी। सीबीएसई की ओर से ऑनलाइन असेसमेंट के लिए सैंपल पेपर भेजा जाएगा। स्कूल सैंपल पेपर के आधार पर अपने प्रश्नपत्र तैयार करेंगे। स्कूल स्तर पर तैयार होने वाले रिजल्ट से यदि कोई छात्र असंतुष्ट है तो वह बोर्ड की ओर से होने बाली परीक्षा में शामिल हो सकता है। यह परीक्षा कोरोना संकट थमने के बाद कराई जा सकतो है।


सभी स्कूलों को 80 नंबर का असेसमेंट कराना जरुरी 
ऑनलाइन परीक्षा पूरी कराने अथवा नहीं कराने वाले दोनों तरह के स्कूलों के लिए 80 नंबर का असेसमेंट कराना अनिवार्य है। स्कूलों को 25 मई तक असेसमेंट का काम पूरा करके पूरा रिजल्ट तैयार कर लेना है। बोर्ड ने निर्देश दिया है कि स्कूल के बीते तीन साल के रिजल्ट के औसत के आधार पर 10वीं का रिजल्ट तैयार किया जाएगा।