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Sunday, May 17, 2026

अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज

अनुकंपा नियुक्ति पर दूसरी बार ऊंचे पद का दावा नहीं स्वीकार्य : हाईकोर्ट, चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी मिलने के बाद एलटी ग्रेड शिक्षक पद की मांग खारिज


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने सेवा मामलों से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि यदि किसी मृतक कर्मचारी के आश्रित को एक बार अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिल चुकी है, तो बाद में उसे किसी ऊंचे पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जा सकती। अदालत ने इसी आधार पर सुल्तानपुर निवासी दिलीप कुमार जायसवाल की याचिका खारिज कर दी।


यह आदेश न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की एकल पीठ ने दी। याचिकाकर्ता दिलीप कुमार जायसवाल के पिता सुल्तानपुर के एक इंटर कॉलेज में सहायक शिक्षक थे। 2003 में उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 2004 में दिलीप को अनुकंपा के आधार पर दूसरे इंटर कॉलेज में चपरासी के पद पर नौकरी दी गई। 

बाद में दिलीप ने स्नातकोत्तर और बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली। इसके आधार पर उसने एलटी ग्रेड सहायक शिक्षक के पद पर दोबारा अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग की। लेकिन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) सुल्तानपुर ने 2007 में उसका आवेदन खारिज कर दिया।

याचिकाकर्ता ने डीआईओएस के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि डीआईओएस का फैसला पूरी तरह सही और कानून के अनुरूप है। इसमें दखल की जरूरत नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना होता है, न कि बाद में बेहतर पद प्राप्त करने का अवसर देना। इसी टिप्पणी के साथ अदालत ने याचिका खारिज कर दी।

Thursday, February 26, 2026

आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वैध चुनौती के बिना शासनादेश असंवैधानिक नहीं: हाईकोर्ट

आश्रित कोटे में शिक्षकों की नियुक्ति का रास्ता साफ, वैध चुनौती के बिना शासनादेश असंवैधानिक नहीं: हाईकोर्ट


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने सहानुभूति के आधार पर मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति देने के एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसडी सिंह एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने मेरठ के अनिरुद्ध यादव की विशेष अपील पर दिया है।


विशेष अपील पर बहस करते हुए अपीलार्थी के अधिवक्ता शिवम यादव एवं हिमांशु बंसल ने कहा कि चार सितंबर 2000 एवं 15 फरवरी 2013 के शासनादेशों को उनकी वैधता पर स्पष्ट और प्रत्यक्ष चुनौती दिए बिना असंवैधानिक घोषित नहीं किया जा सकता। खंडपीठ ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि किसी भी वैधानिक नियम या शासनादेश को तब तक असंवैधानिक नहीं ठहराया जा सकता, जब तक उसकी विधिक वैधता को विधिवत चुनौती न दी गई हो। 


खंडपीठ ने इसी आधार पर एकल पीठ के निर्णय के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी गई। इस अंतरिम आदेश के बाद मृतक आश्रित कोटे में शिक्षक भर्ती का रास्ता साफ हो गया है।

Wednesday, February 25, 2026

विशेष परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु विशेष आदेश दे सकती है सरकार – हाईकोर्ट

विशेष परिस्थितियों में अनुकंपा नियुक्ति हेतु विशेष आदेश दे सकती है सरकार – हाईकोर्ट 

मृतक आश्रित भर्ती नियमावली-1974 में सरकार के पास विशेष परिस्थितियों में आदेश पारित करने की शक्तिः हाईकोर्ट

अध्यापक की मौत के बाद पत्नी का भी निधन होने से बेटी अनाथ हो गई थी, कोर्ट ने मृतक आश्रित के रूप में चाची के आवेदन पर एक हफ्ते में आदेश पर निर्णय लेने का दिया है निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मृतक आश्रित भर्ती नियमावली-1974 का उद्देश्य कर्मचारी के परिवार को दरिद्रता से बचाना है। नियमों की व्याख्या ऐसी नहीं होनी चाहिए, जिससे वास्तविक रूप से पीड़ित और निराश्रित परिवार लाभ से वंचित रह जाए। राज्य सरकार के पास इस प्रावधान के नियम-10 के तहत विशेष परिस्थितियों व लोकहित में आदेश पारित करने की शक्ति है।


इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ल की खंडपीठ ने अनाथ बच्ची से जुड़े दया नियुक्ति मामले में सरकार को विचार करने का निर्देश दिया है।

शैलेंद्र कुमार भारती बलिया के जोगीडील प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक थे। सात जून 2018 को सड़क हादसे में उनकी सेवा के दौरान मौत हो गई थी। 10 जुलाई 2018 को पत्नी का भी निधन हो गया। इससे उनकी ढाई साल की बेटी अनाथ हो गई।

मामले में बलिया के अपर जिला जज ने तीन मार्च 2021 को बच्ची की चाची राजकुमारी को विधिक संरक्षक नियुक्त किया तो उन्होंने मृतक आश्रित के रूप में दया नियुक्ति का आवेदन किया, जिसे बलिया के बेसिक शिक्षा अधिकारी ने खारिज कर दिया। कहा, वह 1974 के नियमों में परिभाषित परिवार की श्रेणी में नहीं आतीं हैं। मामला हाईकोर्ट गया तो वहां एकल पीठ ने याचिका खारिज कर दी। फिर याची ने खंडपीठ के पास सुनवाई की गुहार लगाई थी।


कोर्ट ने कहा-सरकार मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाए : कोर्ट ने कहा कि बच्ची नौ साल की है। उसके पास चाचा-चाची के अतिरिक्त कोई सहारा नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार मानवीय दृष्टिकोण अपनाए। साथ ही अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता को निर्देश दिया कि राज्य सरकार से लिखित निर्देश प्राप्त कर एक सप्ताह में मेरिट के आधार पर उचित आदेश पारित कराया जाए। 27 फरवरी को फिर मामले की सुनवाई होगी।

Thursday, January 22, 2026

परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं – हाईकोर्ट

परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं

हाईकोर्ट ने कहा-परिवार आर्थिक तंगी में है तो केवल अधिक आयु के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य अचानक आए आर्थिक संकट से परिवार को उबारना है। परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती है। भर्ती नियमों की कठोरता को इसके उद्देश्यों को विफल करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसकी नियुक्ति में आयु सीमा की बाधा को दूर करें और नियमों को लचीला बनाएं।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) की अनुकंपा नियुक्ति समिति की एकल पीठ के खिलाफ दायर विशेष अपील पर की। कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह याचिकाकर्ता की आयु में छूट के अनुरोध पर एक महीने के भीतर विचार करे।

प्रतिवादी/याची एन. शांगबनाबी देवी की बहन की 2015 में बीएचयू में सेवा के दौरान मौत हो गई थी। उन्होंने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था, जिसे विवि ने खारिज कर दिया। कहा कि उनकी आयु घटना के समय 37 वर्ष थी, जो ओबीसी श्रेणी के लिए निर्धारित अधिकतम आयु सीमा (33 वर्ष) से अधिक थी। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी तो एकल पीठ ने उनके पक्ष में आदेश दिया। 

इस पर बीएचयू ने एकल पीठ के पांच फरवरी 2025 के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में विशेष अपील दायर की। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद बीएचयू की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि कार्यकारी परिषद ने केवल विधवाओं या तलाकशुदा महिलाओं को आयु में छूट देने का प्रस्ताव पारित किया है। कहा कि जब तक मूल अनुकंपा नियमों में संशोधन नहीं होता, तब तक ऐसे प्रशासनिक प्रस्ताव किसी अन्य आश्रित (जैसे वहन) के अधिकार को कम नहीं कर सकते। 

कोर्ट ने कहा कि परिवार वास्तव में आर्थिक तंगी में है तो केवल अधिक आयु के आधार पर उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। मुकदमेबाजी के दौरान हुई देरी को भी नजरअंदाज करने का निर्देश दिया है।





बीएचयू को याची की नियुक्ति के संबंध में विचार कर एक महीने में निर्णय लेने का निर्देश

भर्ती नियमों के तहत सीमित नहीं की जा सकती अनुकंपा नियुक्ति – हाईकोर्ट 


प्रयागराजः इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया का अपवाद है और इसे भर्ती नियमों से आच्छादित मानकर अस्वीकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने सुश्री नामीराकपन शांगबनाश्री देवी की नियुक्ति मामले में विचार करने संबंधी एकलपीठ के आदेश के खिलाफ दायर काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) वाराणसी की विशेष अपील निस्तारित करते हुए यह टिप्पणी की है।

कोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा नियुक्ति के लिए मूल याची के दावे पर विचार करने से पहले देरी के मुद्दे की जांच करना आवश्यक है। कोर्ट ने बीएचयू की अनुकंपा नियुक्ति समिति को निर्देश दिया है कि वह पहले मूल याची की उम्र में छूट के अनुरोध पर विचार करे, वह भर्ती नियमों के अनुसार नहीं, बल्कि अनुकंपा नियमों के अनुसार। इसके बाद उसके दावे पर विचार किया जाए, जिसमें पारिवारिक सदस्यों की निर्भरता, वित्तीय कठिनाई और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों को ध्यान रखा जाए। यह निर्णय एक महीने में के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने कहा है कि भर्ती नियम संविधान के अनुच्छेद 16 की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए हैं, जबकि अनुकंपा नियुक्ति नियम इसके अपवाद हैं और इनका उद्देश्य वित्तीय संकट में आए पीड़ित परिवार को तात्कालिक सहायता प्रदान करना है। अनुकंपा नियुक्ति नियमों को भर्ती नियमों के तहत सीमित नहीं किया जा सकता है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई आवेदक भर्ती नियमों की कुछ शर्तों को पूरा नहीं करता है तो भी उसकी अनुकंपा नियुक्ति के लिए बिचार किया जा सकता है बशर्ते उसके परिवार को सहायता मिलती हो। 

हाई कोर्ट की एकलपीठ के पांच फरवरी 2025 के उस आदेश को इस अपील में चुनौती दी गई थी, जिसमें बीएचयू का नौ मार्च 2018 का अनुकंपा नियुक्ति देने से इन्कार करने वाला आदेश रद कर दिया गया था। एकल न्यायाधीश ने यह भी कहा था कि भर्ती नियम अनुकंपा नियुक्ति पर लागू नहीं होते। विश्वविद्यालय का तर्क था कि अनुकंपा नियुक्ति के नियमों में भर्ती नियमों के अनुसार पात्रता शर्तें शामिल हैं। मृतक की बहन की उम्र 37 वर्ष थी, जो अधिकतम आयु सीमा से चार वर्ष अधिक है। 

यूनिवर्सिटी के कार्यकारी परिषद ने एक अन्य मामले में फैसला दिया था कि उम्र में छूट भर्ती नियमों के अनुसार ही दी जाएगी। याची की तरफ से कहा गया है कि अनुकंपा नियमों में उम्र में छूट का प्रविधान है और कार्यकारणी परिषद का फैसला इन नियमों को ओवरराइड नहीं कर सकता। भर्ती नियम केवल अन्य पात्रता शर्तों पर लागू होते हैं, न कि उम्र पर।

विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट

विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट

कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को दो माह में आदेश पारित करने का दिया निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि विवाहित पुत्री भी नियुक्ति पाने की पात्र है। कोर्ट ने सिद्धार्थनगर के बीएसए को निर्देश दिया है कि वह परिवार की आर्थिक स्थिति और आश्रितों की संख्या को ध्यान में रखते हुए दो माह में निर्णय लेकर आदेश पारित करें। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने नीतू अनिता देवी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।


अधिवक्ता ने दलील दी कि याची के पिता सिद्धार्थनगर के इटवा गौरा में प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सेवाकाल के दौरान आठ जनवरी 2020 को उनका निधन हो गया। परिवार में केवल बेटी थी, जिसने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के लिए आवेदन किया। निर्णय न होने पर याची ने हाईकोर्ट में अपील की थी। जिस पर हाईकोर्ट ने पहले ही बीएसए को आदेश पारित करने का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बाद बीएसए ने यह कहते हुए नियुक्ति से इन्कार कर दिया कि विवाहित पुत्री परिवार की सदस्य नहीं है।

इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। याची ने दलील दी कि विमला श्रीवास्तव सहित कई मामलों में हाईकोर्ट पहले ही विवाहिता बेटी को परिवार का सदस्य मान चुका है। साथ ही 12 नवंबर 2021 की अधिसूचना के जरिये सरकार ने नियमावली से अविवाहित शब्द हटा दिया है। कोर्ट ने सक्षम प्राधिकारी को दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

Tuesday, September 30, 2025

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया?

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया? 

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत एटा निवासी ने दाखिल की है याचिका, नियुक्ति के बाद भी मिल रहा 2550 रुपये मानदेय


बड़ी संख्या में अनुकंपा के आधार पर कई आश्रितों की निश्चित मानदेय पर नियुक्तियां की गई हैं। यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक की मृत्यु के उपरांत उसके आश्रितों की भर्ती नियमावली-1974 की अवहेलना है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर की गई नियुक्ति को नियमित करने में कथित मनमानी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एटा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को तलब कर उनसे पूछा है कि किस प्रावधान के तहत अनुकंपा नियुक्ति निश्चित वेतन पर की जा रही है।


याची की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित करने में क्या कानूनी अड़चन आ रही है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने आशीष कुमार की याचिका पर दिया है। आशीष कुमार सिंह ने चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति को नियमित करने और 15 सितंबर 2007की प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सभी परिणामी लाभ दिए जाने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।


अधिवक्ता ने दलील दी कि बीएसए ने याची के समान मामले में दिनेश कुमार नाम के एक व्यक्ति का मर्जी के अनुसार उसकी सेवाओं को प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित कर दिया है। सभी परिणामी लाभ दिए। वहीं, याची को उसके वैध हक से वंचित किया जा रहा है। याची को करीब 18 साल बाद भी केवल 2550 रुपये के अल्प निश्चित वेतन पर जीवनयापन करने के लिए छोड़ दिया गया है।


हाईकोर्ट ने बीएसए को 15 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार अनुपालन व प्रतिवादी वकील को इस आदेश को तत्काल बीएसए को प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

Monday, August 25, 2025

विवाहित पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार: हाईकोर्ट

विवाहित पुत्री भी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार: हाईकोर्ट 


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति देने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) देवरिया को निर्देश दिया कि वह अपीलकर्ता की अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर फिर से विचार करें और आठ सप्ताह के भीतर निर्णय लें। 


यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्र की खंडपीठ ने चंदा देवी की विशेष अपील पर दिया है। देवरिया निवासी चंदा देवी के पिता संपूर्णानंद पांडेय पूर्व प्राथमिक विद्यालय गजहड़वा, ब्लॉक बनकटा, तहसील भाटपाररानी में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान 2014 में उनकी मृत्यु हो गई। 


चंदा देवी ने अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया। दिसंबर 2016 में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उनके आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह विवाहित बेटी हैं, इसलिए वह शासनादेश चार सितंबर 2000 के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र नहीं हैं।


 चंदा देवी ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। एकलपीठ ने मई 2025 में उनकी याचिका खारिज कर दी। एकल पीठ ने माना कि विवाहित बेटी भी पात्र है, लेकिन चंदा देवी यह साबित नहीं कर पाईं कि उनके पति बेरोजगार हैं और वह अपने पिता पर आश्रित थी। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके पिता का निधन 2014 में हुआ था। अब लगभग 11 साल बीत चुके हैं

Saturday, August 9, 2025

किसी चूक के लिए 14 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति रद्द करना गलत, हाईकोर्ट ने बर्खास्त करने के आदेश को किया रद्द

मनमाने तौर पर निरस्त नहीं कर सकते नियमित नियुक्ति : हाई कोर्ट



 प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अधिकारी अपनी लापरवाही के लिए 14 वर्ष बाद विहित प्रक्रिया से की गई अनुकंपा नियुक्ति को निरस्त नहीं कर सकते। याची पर फ्राड या मिथ्या तथ्य देकर नियुक्ति पाने का आरोप नहीं है, उसने अपनी मां के सहायक अध्यापक होने का तथ्य भी नियुक्ति के समय छिपाया नहीं था। अधिकारियों ने सभी दस्तावेजों का सत्यापन करके नियुक्ति की थी।

विभाग में ही कार्यरत मां के बारे में पता न लगा पाने वाले अधिकारी लंबे अंतराल के बाद तथ्य छिपाने के आरोप में याची लिपिक की अनुकंपा नियुक्ति निरस्त नहीं कर सकते।

नियुक्ति का ऐसा कोई फार्मेट नहीं था जिसमें मां के सरकारी सेवा में होने का जिक्र किया जाता, ऐसा करना बाध्यकारी नहीं था। नियमित नियुक्ति को बिना कानूनी प्रक्रिया के मनमाने तौर पर निरस्त नहीं

किया जा सकता। सभी दस्तावेजों की समीक्षा के बाद हुई नियुक्ति वापस नहीं ली जा सकती। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने शिवकुमार की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने हाथरस में वरिष्ठ लिपिक शिव कुमार के खिलाफ 31 मई 2023 का बर्खास्तगी आदेश रद कर सभी सेवाजनित परिलाभों के साथ तत्काल बहाली का निर्देश बेसिक शिक्षा अधिकारी को दिया है।




किसी चूक के लिए 14 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति रद्द करना गलत, हाईकोर्ट ने बर्खास्त करने के आदेश को किया रद्द 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति में कोई धोखाधड़ी या महत्वपूर्ण तथ्य नहीं छिपाया गया है तो वर्षों बाद नियुक्ति को निरस्त नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने मां के सरकारी स्कूल में शिक्षिका होने के आधार पर अनुकंपा नियुक्ति के तहत क्लर्क के पद पर कार्यरत कर्मचारी को बर्खास्त करने के आदेश को रद्द कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने शिव कुमार की याचिका पर दिया।

हाथरस निवासी शिव कुमार के पिता सहायक अध्यापक थे। उनके निधन के बाद 2001 में शिव कुमार को अनुकंपा के आधार पर जूनियर क्लर्क पद पर नियुक्ति मिली। बाद में सीनियर क्लर्क बने। वहीं, 31 मई 2023 में उनकी सेवा यह कहकर समाप्त कर दी गई कि नियुक्ति के समय यह तथ्य नहीं बताया था कि उनकी मां सरकारी नौकरी में हैं। शिव कुमार ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

अधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्ति आवेदन के समय कोई निर्धारित फॉर्म नहीं था जिसमें परिवार के सदस्यों की नौकरी की जानकारी देना आवश्यक हो। फिर भी उनकी मां ने हलफनामा देकर बताया था कि वे सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं। दस्तावेजों की जांच की गई थी। ऐसे में अधिकारियों की किसी भी चूक के लिए याची जिम्मेदार नहीं है। 

कोर्ट ने कहा कि नियुक्ति से पहले सभी दस्तावेज की जांच की गई है और कोई धोखाधड़ी नहीं पाई गई। ऐसे में 14 साल बाद की गई कार्रवाई न्यायसंगत नहीं है।

देखें कोर्ट ऑर्डर 👇 

Sunday, January 5, 2025

मृतक आश्रितों की नियुक्ति में लापरवाही पर नाराजगी के बाद जागा माध्यमिक शिक्षा विभाग, आवेदन पत्र मिलते ही तुरंत निर्णय लेने का निर्देश जारी

मृतक आश्रितों की नियुक्ति में लापरवाही पर नाराजगी के बाद जागा माध्यमिक शिक्षा विभाग,  आवेदन पत्र मिलते ही तुरंत निर्णय लेने का निर्देश जारी 


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने मृतक आश्रितों की नियुक्ति में जिला स्तर पर हो रही लापरवाही पर नाराजगी जताई है। विधान परिषद सदस्यों की ओर से यह मामला उठाने पर विभाग ने इस पर तेजी से कार्यवाही शुरू की है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (डीआईओएस) को निर्देश दिया है कि इसके आवेदन पत्र मिलते ही तुरंत निर्णय लिया जाए।

 उन्होंने कहा है कि विधान परिषद की विनियमन समीक्षा की सात जनवरी को बैठक प्रस्तावित है। इसे लेकर एमएलसी राजबहादुर सिंह चंदेल द्वारा नियम 110 के तहत सूचना दी गई है कि संस्था प्रबंधकों द्वारा मृतक आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति में बाधा पैदा की जा रही है। इससे शिक्षकों व कर्मचारियों में नाराजगी है। 



Madhymik Shiksha Mritak Ashrit Niyukti : उत्तर प्रदेश में शिक्षक, कर्मचारी, अधिकारी की सेवा में मृत्यु की परिस्थिति में उसके मृतक आश्रित को योग्यतानुसार अराजपत्रित पदों पर नियुक्ति किये जाने के सम्बन्ध में आदेश जारी 


Tuesday, October 29, 2024

पिता पेंशनभोगी तो भी सेवारत मां की मौत पर बेटी को दें अनुकंपा नियुक्ति, हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के बीएसए के आदेश को रद्द कर नया पारित करने को कहा

पिता पेंशनभोगी तो भी सेवारत मां की मौत पर बेटी को दें अनुकंपा नियुक्ति, हाईकोर्ट ने मुरादाबाद के बीएसए के आदेश को रद्द कर नया पारित करने को कहा

देखें कोर्ट ऑर्डर 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पिता पेंशनभोगी है, तब भी सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत मां की मौत पर बेटी अनुकंपा नियुक्ति की हकदार है। कोर्ट ने यह टिप्पणी कर मुरादाबाद के बीएसए के आदेश को रद्द कर छह सप्ताह के भीतर नया पारित करने के लिए कहा है।

यह आदेश प्रकाश पाडिया की अदालत ने मुरादाबाद की फरहा नसीम की याचिका पर दिया। दो नवंबर 2023 को सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत रहीं नसीम की मां शहाना बी की मौत हो गई थी। नसीम ने बीएसए के समक्ष अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। नसीम की बहनें सहायक शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं।

वहीं, पिता सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे में याची को कोई वित्तीय संकट नहीं है। इन्हीं दो बिंदुओं को आधार बना बीएसए के 12 जून 2024 के आदेश से अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को खारिज कर दिया गया।



HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
Neutral Citation No. - 2024:AHC:154724
Court No. - 7
Case :- WRIT - A No. - 13350 of 2024

Petitioner :- Kumari Farha Naseem
Respondent :- State Of Up And 2 Others
Counsel for Petitioner :- Kamal Kumar Kesherwani
Counsel for Respondent :- Akanksha Sharma,C.S.C.

Hon'ble Prakash Padia,J.
1. Heard learned counsel for the petitioner, learned Standing Counsel for the respondent no.1, Ms. Akanksha Sharma, learned counsel for the respondents no.2 & 3 and perused the records.
2. The order dated 12.06.2024 passed by the respondent no.3-District Basic Education Officer, Moradabad by which the claim for compassionate appointment of the petitioner has been rejected, is under challenged in the present writ petition.
3. The facts in brief as contained in the writ petition is that mother of the petitioner namely Smt. Shahana Bi while working on the post of Assistant Teacher died on 02.11.2023. After her death petitioner submitted online application for compassionate appointment, copy of which is appended as annexure-5 to the writ petition. It is stated in paragraph 11 of the writ petition that other family members of the petitioner has given no objection certificate along-with notary affidavit in favour of the petitioner before the District Basic District Basic Education Officer, Moradabad/respondent no.3 in which they have stated that if the appointment is offered to the petitioner they have no objection.
4. It is argued by counsel for the petitioner that wholly illegally without considering relevant aspect of the matter claim for compassionate appointment has been rejected by the District Basic Education Officer, Moradabad/respondent no.3 vide its order dated 12.06.2024 on the following grounds (1) the sisters of the petitioner are working as Assistant Teacher but their marital status is not on record (2) petitioner's father was retired employee and getting pension, hence petitioner has no financial stress.
5. It is stated in paragraph 13 of the writ petition that father of the petitioner namely Nasim Ahmad was working in the District Court, Sambhal at Chandausi, who retired from service on 30.10.2018 after attaining age of superannuation and is getting pension, so there is no dispute about the employment of the petitioners' father prior to death of her mother hence impugned order passed by the respondent no.3 is not sustainable in the eyes of law. In so far as second ground taken regarding marital status of the sisters of the petitioner is concerned, it is stated that both the sisters were married prior to death of their mother and enquiry in this regard was conducted by the authorities in which
is found that they have been married prior to death of their mother. It is further argued that in case sisters of the petitioner are working somewhere else it will not effect the consideration of the appointment of petitioner on compassionate ground. He placed reliance upon judgement and order dated 09.02.2016 passed in Special Appeal Defective No.73 of 2016 (Kr. Vanshika Nigam Vs. State of U.P. and 3 others) Neutral Citation No. - 2016:AHC:24233-DB. The order dated 09.02.2016 reads as follows :-
"The mother of the appellant was a Staff Nurse employed in a government hospital. It is not in dispute that she died in harness on 22 February 2014. The appellant sought compassionate appointment, but her application was rejected by the Chief Medical Superintendent on 11 May 2015 on the ground that the appellant did not fall within the purview of the Uttar Pradesh Recruitment of Dependent of Government Servant Dying-in-Harness Rules, 1974. No specific reason was adduced in the order of the Chief Medical Superintendent as to why the appellant did not fulfill the requirements of the Rules of 1974.
The learned Single Judge has proceeded on the basis that since the father of the appellant is a retired employee and is alive, this would be deemed to mean that the appellant is dependent upon her father.
We are not in agreement with the view which has been expressed by the learned Single Judge. An inference to the effect that the appellant is dependent upon her father cannot be drawn merely on the basis that her father is alive. During the course of the hearing, it is an agreed position that the father of the appellant was a Class-III employee in the Nagar Nigam and he has since retired and is in receipt of the pension. The adequacy of the means and resources available with the father and the issue of dependency have to be considered by the competent authority. The order of the competent authority was clearly a non-speaking order. Hence, the learned Single Judge ought to have remanded the proceedings back to the competent authority for fresh consideration after due consideration of all the relevant facts and circumstances.
We, accordingly, allow the special appeal and set aside the impugned order dated 23 November 2015. We direct the competent authority to reconsider the application submitted by the appellant after duly keeping in mind all the relevant circumstances as mandated by the Rules of 1974.
The special appeal is, accordingly, disposed of. There shall be no order as to costs."

6. He further placed reliance upon a judgement and order dated 09.11.2021 passed in Writ A No.14123 of 2021 (Shobhit Saxena Vs. State of U.P. and 2 others) Neutral Citation No. - 2021:AHC:132764. He also placed reliance upon the order dated 26.07.2024 passed in Writ A No.8787 of 2024 (Pramod Kumar Vs. State of U.P. and 2 others) Neutral Citation No. - 2024:AHC:120155.
7. From perusal of the record, it is clear that the claim for compassionate appointment of the petitioner was rejected on two grounds, namely (1) the sisters of the petitioner are working as Assistant Teacher but their marital status is not on record (2) petitioner's father was retired employee and getting pension hence petitioner has no financial stress.
8. From perusal of the record as well as the law laid down by this Court in the case of Kr. Vanshika Nigam (supra), both the aforesaid grounds are not sustainable in the eyes of law.
9. In this view of the matter, the order dated 12.06.2024 passed by the District Basic Education Officer, Moradabad/respondent no.3 is liable to be set aside and the same is hereby set aside.
10. The respondent no.3 is directed to pass fresh order strictly in accordance with law most expeditiously and preferably within a period of six weeks from the date of production of certified copy of this order.

Order Date :- 23.9.2024

16 हजार मृतक आश्रितों को है सम्मानजनक नौकरी का इंतजार, मृतक आश्रित कोटे से चपरासी बने कर्मी कर रहे हैं उच्च पद की मांग

16 हजार मृतक आश्रितों को है सम्मानजनक नौकरी का इंतजार, मृतक आश्रित कोटे से चपरासी बने कर्मी कर रहे हैं उच्च पद की मांग

■ बीटेक, एलएलबी, एमबीए, बीसीए, पीएचडी डिग्रीधारी बने हैं चपरासी


प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद के उच्च प्राथमिक स्कूलों में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त प्रदेशभर के लगभग 16 हजार उच्च योग्यताधारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सम्मानजनक नौकरी का इंतजार है। शासन ने विभिन्न जिलों में परिचारक (चपरासी) के पद पर कार्यरत बीटेक, एलएलबी, एमबीए, बीसीए, पीएचडी जैसे डिग्रीधारी कर्मचारियों को डीएलएड का प्रशिक्षण कराकर और उन्हें टीईटी में शामिल होने का मौका देते हुए शिक्षक पद पर नियुक्त करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को नीति बनाने के निर्देश 16 मार्च 2023 को दिए थे। जिस पर अफसरों ने 17 अप्रैल 2023 को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा था।

उससे संबंधित कुछ सूचनाएं शासन ने मांगी थी जो उपलब्ध नहीं कराई गई। 16 जुलाई 2024 को प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग ने जानकारी नहीं दी। 27 सितंबर को फिर से रिमाइंडर भेजा गया, लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई। प्रदेश में 26 जुलाई 2011 को आरटीई लागू होने के बाद से परिषदीय प्राथमिक हो गया। जिन मृतक आश्रितों के पास यह अर्हता थी उन्हें तो शिक्षक पद पर नियुक्ति दे दी गई, लेकिन तमाम डीएलएड पास मृतक आश्रितों को टीईटी अर्हता न होने के कारण चतुर्थ श्रेणी के पद पर ज्वाइन करना पड़ा। बाद में उन्होंने टीईटी पास कर भी ली

मुख्य सचिव की हुई बैठक के डेढ़ साल बाद भी उच्च योग्यताधारी मृतक आश्रित कर्मचारियों के शिक्षक पद पर समायोजन के संबंध समुचित कार्रवाई नहीं हो सकी है। लगता है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इन कार्मिकों की मांग से कोई वास्ता नहीं है। ~ जुबेर अहमद, प्रदेश अध्यक्ष, मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ



सम्मानजनक नौकरी के इंतजार में मृतक आश्रितहजारों उच्च योग्यताधारी चतुर्थ श्रेणी में कार्यरत

बीटेक, एमबीए, बीसीए, डिग्रीधारी बने हैं चपरासी


प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त उत्तर प्रदेश के लगभग 16 हजार उच्च योग्यताधारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सम्मानजनक नौकरी का इंतजार है। 


शासन ने विभिन्न जिलों में परिचारक के पद पर कार्यरत बीटेक, एलएलबी, एमबीए, बीसीए, पीएचडी जैसे डिग्रीधारी कर्मचारियों को डीएलएड का प्रशिक्षण कराकर और उन्हें टीईटी में शामिल होने का मौका देते हुए शिक्षक पद पर नियुक्त करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग को नीति बनाने के निर्देश 16 मार्च 2023 को दिए थे। 


जिस पर अफसरों ने 17 अप्रैल 2023 को एक प्रस्ताव बनाकर भेजा था। कुछ सूचनाएं शासन ने मांगी थी जो उपलब्ध नहीं कराई गई। 16 जुलाई 2024 को प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

Saturday, September 28, 2024

डीजीएसई कार्यालय की सुस्ती से मृतक आश्रित कर्मियों की समस्याओं का समाधान लंबित, शासन ने तीसरी बार भेजा अनुस्मारक

डीजीएसई कार्यालय की सुस्ती से मृतक आश्रित कर्मियों की समस्याओं का समाधान लंबित, शासन ने तीसरी बार भेजा अनुस्मारक


लखनऊ, 28 सितंबर 2024
उत्तर प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित के रूप में नियुक्त चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की समस्याओं के निराकरण को लेकर शासन द्वारा लगातार निर्देश जारी किए जा रहे हैं, परंतु समस्याओं का समाधान अभी भी लंबित है। इस संदर्भ में शासन ने तीसरी बार अनुस्मारक भेजते हुए संबंधित जानकारी और प्रस्ताव त्वरित रूप से मांगा है।

शासन के पत्र क्रमांक 1/448504/2023 और 1/499049/2024, दिनांक 14 दिसंबर 2023 और 19 फरवरी 2024, के अंतर्गत संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, अब तक यह सूचना शासन तक नहीं पहुंच पाई है। 

उल्लेखनीय है कि मृतक आश्रित चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की मांगों और समस्याओं के समाधान हेतु प्रमुख सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 16 जुलाई 2024 को एक बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक के कार्यवृत्त के अनुसार, समस्याओं का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बावजूद, शासन को संबंधित आख्या अभी तक प्राप्त नहीं हुई है।

शासन ने अब इस प्रकरण पर गंभीरता दिखाते हुए 27 सितंबर 2024 को तीसरी बार अनुस्मारक जारी किया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि सभी संबंधित अधिकारियों को 02 कार्यदिवस के भीतर आख्या और प्रस्ताव शासन को प्रस्तुत करने होंगे। 

सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे के लंबित होने के कारण कई चतुर्थ श्रेणी कर्मियों की समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है, जिससे कर्मियों में असंतोष व्याप्त है। 

अब देखना होगा कि इस बार शासन के सख्त रुख के बाद क्या बेसिक शिक्षा विभाग त्वरित कार्रवाई कर इन कर्मियों की समस्याओं का समाधान करता है या यह मुद्दा और लंबित रहेगा। 


Monday, March 25, 2024

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति में पेच, बदलेगा नियम

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति में पेच,  बदलेगा नियम


प्रयागराज । सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मृतक आश्रित कोटे के तहत कला विषय के सहायक अध्यापक की नियुक्ति को लेकर पेच फंस गया है। इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के अनुसार प्राविधिक कला के साथ यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा पास होना अनिवार्य है। ऐसे में यदि कोई आश्रित सीबीएसई या अन्य बोर्ड से 12वीं पास हो एवं इंटर एकल विषय ड्राइंग टेक्निकल हो तो उसके समायोजन में अड़चन है।


इस पर माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव को छह मार्च को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने का अनुरोध किया था। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यूपी बोर्ड के सचिव दिब्यकांत शुक्ल से नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव मांग लिया है।


बेसिक में नियुक्ति में देरी: बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों-कर्मचारियों के मृतक आश्रितों की नियुक्ति प्रक्रिया तो ऑनलाइन हो चुकी है लेकिन अफसरों की लापरवाही के कारण मामलों के निस्तारण में देरी हो रही है। पिछले दिनों समीक्षा में 109 प्रकरण लंबित मिलने पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने 12 मार्च को सभी बीएसए को पत्र लिखकर चेताया है।


ऑनलाइन होगी नियुक्ति

प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मृतक आश्रितों की नियुक्ति प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को 11 मार्च को पत्र लिखा है कि मृतक आश्रित की नियुक्ति संबंधी ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था के लिए मानव संपदा पोर्टल पर कार्य एनआईसी के स्तर से किया जा रहा है। तब तक नियुक्ति संबंधी कार्यवाही अग्रिम आदेशों तक ऑफलाइन करना सुनिश्चित करें।

Sunday, March 24, 2024

बेसिक शिक्षा निदेशक को अवमानना मामले में हाईकोर्ट ने किया तलब

बेसिक शिक्षा निदेशक को अवमानना मामले में हाईकोर्ट ने किया तलब 


बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल को आदेश का अनुपालन नहीं होने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तलब किया है. सुभाषचंद्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश कोर्ट ने दिया है.


प्रयागराज:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति के मामले में आदेश का अनुपालन नहीं होने पर बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल को तलब किया है. यह आदेश न्यायमूर्ति दिनेश कुमार पाठक ने सुभाषचंद्र की अवमानना याचिका पर उसके अधिवक्ता कमल कुमार केसरवानी को सुनकर दिया है.


याची सुभाषचंद्र वर्ष 2011 में मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त हुआ था. लेकिन टीईटी प्रमाणपत्र न होने के कारण सुभाष चंद्र की नियुक्ति वर्ष 2012 में समाप्त कर दी गई. इसके विरुद्ध याचिका दाखिल की गई, जिसे एकलपीठ ने खारिज कर दिया .लेकिन यह आदेश दिया कि तृतीय/चतुर्थ श्रेणी के पद पर याची की नियुक्ति के संदर्भ में विचार किया जाए. 


एकल पीठ के आदेश के विरुद्ध याची ने विशेष अपील की, जो खारिज हो गई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल की लेकिन किया वह भी खारिज हो गई. इसके बाद याची ने एकल पीठ के आदेश के क्रम तृतीय/चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति के लिए प्रत्यावेदन दिया. इस पर कोई विचार नहीं किया गया तो याची ने पुनः याचिका दाखिल की.


हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि याची के प्रत्यावेदन पर 2012 में पारित आदेश के क्रम में तृतीय/चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्ति पर विचार किया जाए. इसके बाद सचिव बेसिक शिक्षा ने याची का प्रत्यावेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया कि उसने आवेदन प्रारूप में नहीं दिया. याची ने फिर सचिव बेसिक शिक्षा के आदेश को चुनौती दी. कोर्ट ने पुनः याची के पक्ष में आदेश दिया और सचिव बेसिक शिक्षा का आदेश निरस्त कर दिया. साथ ही सचिव बेसिक शिक्षा को पुनः नियुक्ति पर विचार के लिए आदेश दिया. 


आदेश का अनुपालन न होने पर अवमानना याचिका दाखिल की तो सचिव प्रताप सिंह बघेल ने पुनः उसी आधार पर आदेश किया, जिसे कोर्ट ने निरस्त किया था. हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया एवं प्रताप सिंह बघेल को तलब कर लिया, जो वर्तमान में बेसिक शिक्षा निदेशक के पद पर हैं.

Monday, February 12, 2024

हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने का बीएसए का आदेश निरस्त करते हुए दो माह में विचार कर नया आदेश लेने का दिया निर्देश

हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने का बीएसए का आदेश निरस्त करते हुए दो माह में विचार कर नया आदेश लेने का दिया निर्देश 

गोरखपुर की कुमारी निशा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका

🔴 हाईकोर्ट ऑर्डर अपडेटेड 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में गोरखपुर की कुमारी निशा के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की ओर से अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की कोर्ट ने बीएसए को नए सिरे से विचार करने और दो माह में नया आदेश पारित करने को कहा।


याची के पिता बेलाघाट ब्लाक के एक प्राथमिक विद्यालय में हेड मास्टर के रूप में कार्यरत थे, जिनकी मृत्यु हो गई। याची दिव्यांग और पूरी तरह से अपने पिता पर निर्भर है। पीएसी में कार्यरत याची के बड़े भाई परिवार सहित जौनपुर में रहते हैं।


उन्होंने शपथपत्र देकर कहा कि याची को अनुकंपा नियुक्ति मिलती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने "मृतक का बड़ा बेटा पीएसी में कार्यरत है, इसलिए कोई वित्तीय संकट नहीं है।" को आधार बनाते हुए अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को खारिज कर दिया था। ऐसे में याची ने बीएसए के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने बीएसए के आदेश को रद्द कर दिया।

🔴 हाईकोर्ट ऑर्डर 👇

हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने का बीएसए का आदेश निरस्त करते हुए दो माह में विचार कर नया आदेश लेने का दिया निर्देश

हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने का बीएसए का आदेश निरस्त करते हुए दो माह में विचार कर नया आदेश लेने का दिया निर्देश 

गोरखपुर की कुमारी निशा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में दायर की थी याचिका


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट में गोरखपुर की कुमारी निशा के मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) की ओर से अनुकंपा नियुक्ति खारिज करने के आदेश को निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की कोर्ट ने बीएसए को नए सिरे से विचार करने और दो माह में नया आदेश पारित करने को कहा।


याची के पिता बेलाघाट ब्लाक के एक प्राथमिक विद्यालय में हेड मास्टर के रूप में कार्यरत थे, जिनकी मृत्यु हो गई। याची दिव्यांग और पूरी तरह से अपने पिता पर निर्भर है। पीएसी में कार्यरत याची के बड़े भाई परिवार सहित जौनपुर में रहते हैं।


उन्होंने शपथपत्र देकर कहा कि याची को अनुकंपा नियुक्ति मिलती है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने "मृतक का बड़ा बेटा पीएसी में कार्यरत है, इसलिए कोई वित्तीय संकट नहीं है।" को आधार बनाते हुए अनुकंपा नियुक्ति के आवेदन को खारिज कर दिया था। ऐसे में याची ने बीएसए के आदेश के विरुद्ध हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने बीएसए के आदेश को रद्द कर दिया।

Saturday, February 3, 2024

पूर्व माध्यमिक विद्यालयों /ब्लाक संसाधन केन्द्रों पर कार्यरत परिषदीय मृतक आश्रित शिक्षेणत्तर कर्मचारियों की लम्बित समस्याओं के निराकरण के सम्बन्ध में

सीतापुर : पूर्व माध्यमिक विद्यालयों /ब्लाक संसाधन केन्द्रों पर कार्यरत परिषदीय मृतक आश्रित शिक्षेणत्तर कर्मचारियों की लम्बित समस्याओं के निराकरण के सम्बन्ध में


Friday, December 8, 2023

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मृत्यु के उपरान्त मृतक आश्रित की नियुक्ति हेतु मानव सम्पदा पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करने के सम्बन्ध में।

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की मृत्यु के उपरान्त मृतक आश्रित की नियुक्ति हेतु मानव सम्पदा पोर्टल पर आनलाइन आवेदन करने के सम्बन्ध में।




Wednesday, August 23, 2023

फैसला : अनुकंपा नियुक्ति एकमुश्त वेतनमान पर नहीं –हाईकोर्ट

फैसला : अनुकंपा नियुक्ति एकमुश्त वेतनमान पर नहीं –हाईकोर्ट 



प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि अनुकंपा कोटे में एकमुश्त वेतनमान पर कर्मचारी की नियुक्ति नहीं की जा सकती है। उसे नियमित वेतनमान पर नियमित नियुक्ति ही दी जा सकती है। इसी के साथ कोर्ट ने एकमुश्त वेतनमान पर नियुक्त बेसिक शिक्षा विभाग के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को उसकी नियुक्ति की तिथि से नियमित वेतनमान देने का आदेश दिया है। साथ ही इस संदर्भ में बेसिक शिक्षा अधिकारी का आदेश रद्द कर दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल ने प्रवीण कुमार की याचिका पर अधिवक्ता विभु राय एवं धनंजय राय को सुनकर दिया है। एडवोकेट विभु राय व धनंजय राय का कहना था कि याची वर्ष 2004 में 2850 रुपये प्रतिमाह के एकमुश्त वेतनमान पर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पद पर नियुक्त किया गया । वर्ष 2010 में उसे नियमित वेतनमान पर नियुक्ति दी गई। तब से वह लगातार नियमित वेतन पा रहा है। 



याची ने बेसिक शिक्षा अधिकारी कासगंज को प्रत्यावेदन देकर नियुक्ति तिथि से नियमित वेतनमान की मांग की, जिसे बेसिक शिक्षा अधिकारी ने निरस्त कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका की गई। हाईकोर्ट ने बीएसए कासगंज को रवि करण सिंह केस के निर्णय के आलोक में याची के मामले पर विचार करने का आदेश दिया। 


इसके बाद भी बीएसए ने यह कहते हुए याची का प्रत्यावेदन खारिज कर दिया कि 17 जून 1996 को निदेशक बेसिक शिक्षा ने आदेश किया था कि एकमुश्त वेतनमान पर नियुक्त कर्मचारियों को नियमित वेतनमान, नियमित किए जाने की तिथि से ही देय होगा । उससे पूर्व की सेवा के लिए नियमित वेतनमान नहीं दिया जा सकता। बीएसए के इस आदेश को पुनः हाईकोर्ट में चुनौती दी गई । एडवोकेट विभु राय ने हाईकोर्ट के पूर्व का निर्देश दिया है।


आदेशों की नजीर पेश करते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुकंपा के आधार पर एकमुश्त वेतनमान पर नियुक्ति नहीं की जा सकती। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार के बाद कहा कि अनुकंपा नियुक्ति एकमुश्त वेतनमान पर नहीं की जा सकती। यह नियुक्ति नियमित वेतनमान पर ही होनी चाहिए। इसलिए जिन्हें एकमुश्त वेतनमान पर नियुक्ति दी गई है, उन्हें नियुक्ति तिथि से नियमित वेतनमान देय होगा। कोर्ट ने बीएसए का आदेश रद्द करते हुए उन्हें हाईकोर्ट के इस आदेश के आलोक में याची के प्रकरण पर दो माह के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया।

Thursday, August 10, 2023

मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर टालमटोल पड़ी भारी, परिषद सचिव की अपील 10 हजार हर्जाने के साथ हाईकोर्ट ने की खारिज

मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर टालमटोल पड़ी भारी, परिषद सचिव की अपील 10 हजार हर्जाने के साथ हाईकोर्ट ने की खारिज



प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में रिक्त पद के सापेक्ष नियुक्ति करने के आदेश के विरुद्ध दाखिल बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की अपील 10 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दी है। कोर्ट ने हर्जाने की राशि का दो सप्ताह में भुगतान करने और एकल पीठ के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश भी दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता एंव न्यायमूर्ति डी रमेश की खंडपीठ ने बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव की अपील पर सरकारी वकील और याची अनूप कुमार सत्संगी के अधिवक्ता कमल कुमार केशरवानी को सुनकर दिया है।


मामले के तथ्यों के अनुसार याची अनूप कुमार सत्संगी की मां इटावा जिले के एक प्राथमिक विद्यालय मे प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थीं। उनकी वर्ष 2013 में सेवा के दौरान मृत्यु हो गई। उसके बाद याची ने लिपिक के पद के लिए मृतक आश्रित कोटे में आवेदन किया। 


तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी ने पद न होने का हवाला देकर याची का आवेदन निरस्त कर दिया था, जिसके विरुद्ध याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने याचिका पर बीएसए से वर्तमान स्थिति का व्यक्तिगत हलफनामा मांगा। 


बीएसए ने बताया कि वर्तमान में एक पद रिक्त है। कोर्ट ने रिक्त पद के सापेक्ष लिपिक के पद का नियुक्ति पत्र जारी करने का आदेश दिया। इस आदेश के विरुद्ध सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने विशेष अपील दाखिल की। 


खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को सही माना और सचिव बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज की अपील को 10 हजार रुपये हर्जाने के साथ खारिज कर दिया। कोर्ट ने हर्जाने की राशि दो सप्ताह में भुगतान करने का निर्देश दिया है। साथ ही एकल पीठ के आदेश का तत्काल अनुपालन करने का भी निर्देश दिया है।