DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, August 12, 2020

फतेहपुर : 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का होगा चयन, विद्यालय के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान

फतेहपुर : 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का होगा चयन, विद्यालय के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान।

सभी 13 ब्लॉकों से पांच-पांच स्कूलों का होगा चयन

उत्कृष्ट स्कूल के बेहतर शिक्षक को मिलेगा सम्मान


फतेहपुर :  बेसिक शिक्षा विभाग जिले में 65 और उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन करेगा। इन स्कूलों के सर्वाधिक क्रियाशील एक शिक्षक को पांच सितंबर को डीएम सम्मानित करेंगे। इससे पहले जिले में 357 उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन हो चुका है। उत्कृष्ट विद्यालयों के चयन के लिए बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने अपने-अपने ब्लाक से पांच-पांच स्कूलों की सूची मांगी है। चयनित विद्यालयों की पत्रावली 14 अगस्त को बीएसए कार्यालय में जमा करना होगा।



उत्कृष्ट विद्यालयों के चयन की व्यवस्था 2017-18 से लागू हुई है। इस सत्र में कुल 93 उत्कृष्ट विद्यालय चयनित हुए थे। 2018 19 में 264 उत्कृष्ट विद्यालय का चयन किया गया था। इस तरह से वर्तमान समय में जिले में कुल 357 उत्कृष्ट विद्यालय संचालित हैं। चालू सत्र में प्रति ब्लाक पांच उत्कृष्ट विद्यालयों का चयन किया जाना है। इसके लिए बीएसए ने सभी बीईओ को मंगलवार को पत्र जारी कर दिया है।

उत्कृष्ट विद्यालय के मानकों में पौधरोपण भी  :: 2018-19 और 2019-20 के नामांकन में वृद्धि के प्रतिशत के से दिसंबर तक वार्षिक परीक्षा के प्राप्तांक के साथ फर्नीचर आदि। नवाचार एवं साथ छह से 14 वर्ष के बच्चों की कुल जनसंख्या के सापेक्ष विद्यालयों में अधिकतम नामांकन। नामांकन के सापेक्ष अक्तूबर उपस्थिति में वृद्धि का तुलनात्मक विवरण प्रतिशत में। पिछले सत्र की परिणाम सीट। भौतिक वातावरण में विद्यालय का परिवेश जैसे रंगाई पुताई, पेयजल, टाइल्स, पौधरोपण, आईसीटी विधि से बच्चों की पढ़ाई। यह सभी मानक पूरे करने वाले स्कूल उत्कृष्ट विद्यालयों की श्रेणी में शामिल होंगे।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

बाराबंकी : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

बाराबंकी : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।



 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Tuesday, August 11, 2020

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता, बीएसए ने अंतिम अवसर देते हुए जारी की चेतावनी

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता।

मान्यता प्राप्त जिन विद्यालयों ने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी। इन विद्यालयों को अब अंतिम अवसर देते हुए शीघ्र ही प्रपत्र अपलोड करने की बेसिक शिक्षा विभाग ने चेतावनी दे दी है। अन्यथा उन पर मान्यता प्रत्याहरण कार्रवाई की जाएगी। जिले में ऐसे करीब आधा सैकड़ा विद्यालय हैं जिन्होंने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं।



बीएसए शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीएसए, डीआईओएस, समाज कल्याण विभाग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन संचालित परिषदीय शासकीय सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों को कई बार डाटा कैप्चर फार्मेट भरने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। इसके बाद भी इस कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। अभी भी जिले 50 विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने यह विवरण अपलोड नहीं किया है। अंतिम चेतावनी जारी करते हुए इन विद्यालयों से कहा गया है कि शीघ्र ही डीसीएफ भर दें। अन्यथा की स्थिति में उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।





इसके लिए विद्यालयों से बीआरसी से संपर्क करके यह प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के लिए कहा गया है। बीएसए ने साफ कहा है कि कई बार कहने के बाद भी यह कार्य नहीं किया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और कार्रवाई की जाएगी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर : फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के चलते शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त, होगी कार्रवाई

गोरखपुर में कार्यरत एक शिक्षिका की विशिष्ट बीटीसी की डिग्री निरस्त कर दी गयी है। शिक्षिका ने कूटरचित दिव्यांग प्रमाण-पत्र के सहारे डायट देवरिया में विशिष्ट बीटीसी-2008 प्रशिक्षण में दाखिला लिया था। जांच के बाद डायट प्राचार्य ने यह कार्रवाई की है। इस मामले में शिक्षिका पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।   

गोरखपुर के गुलरिहा थाना क्षेत्र के शिवपुरी, शहबाजपुर निवासी चित्रलेखा कुमारी ने जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थान रामपुर कारखाना में वर्ष 2009 में दिव्यांग कोटे के तहत विशिष्ट बीटीसी में प्रवेश लिया था। इसी आधार पर परिषदीय विद्यालय में शिक्षिका की नौकरी हासिल कर गोरखपुर जिले में कार्यरत थी। इसी बीच शासन के निर्देश पर दिव्यांग प्रमाण-पत्र के आधार पर प्रशिक्षण पाए सभी शिक्षकों को लखनऊ में सीएमओ द्वारा गठित मेडिकल बोर्ड के सामने बुलाया गया। इसके तहत डायट रामपुर कारखाना से प्रशिक्षण प्राप्त शिक्षकों के प्रमाण-पत्र भी खंगाले गए। 

इसमें डायट रामपुर कारखाना में भी विकलांग प्रमाण-पत्रों पर प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके शिक्षकों को बुलाकर उन्हें लखनऊ जाने के लिए सूचित किया जाने लगा। इसी दौरान डायट की जांच में शिक्षिका चित्रलेखा के विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथियां अंकित मिलीं। एक तिथि आवेदन करने की अंतिम तिथि के पूर्व की अंकित थी। 


वहीं दूसरी तिथि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद की अंकित थी। मामला संदिग्ध लगा तो डायट प्राचार्य ने शिक्षिका को चार जून को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने को कहा। शिक्षिका उपस्थित नहीं हुईं तो दूसरी बार 15 जून को नोटिस दिया गया। इस बार भी शिक्षिका डायट नहीं पहुंची। तीसरी बार तीन जुलाई को फिर डायट से नोटिस भेजा गया। इस बार नोटिस रीसिव नहीं हुआ और पत्र वापस आ गया। 

इसके बाद डायट प्राचार्य ने विकलांग प्रमाण-पत्र को गोरखपुर सीएमओ कार्यालय को भेजकर सत्यापित कराया। इसमें प्रमाण-पत्र सही मिला, पर आवेदन की अंतिम तिथि के बाद 09.03.2009 को प्रमाण-पत्र जारी किया गया था। विज्ञापन की शर्त के अनुसार सभी प्रमाण-पत्र अंतिम तिथि के पूर्व जारी होने चाहिए थे। डायट प्राचार्य ने इस आधार पर शिक्षिका का विशिष्ट बीटीसी-2008 के प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र को निरस्त कर दिया है।


चित्रलेखा ने विशिष्ट बीटीसी के आवेदन में लगाया गए विकलांग प्रमाण-पत्र पर दो तिथि अंकित है। इसका सत्यापन सीएमओ गोरखपुर से कराया गया है। सीएमओ ने प्रमाण-पत्र जारी करने की तिथि 09.03.2009 बताई है। इससे स्पष्ट है कि आवेदन की अंतिम तिथि के बाद विकलांग प्रमाण-पत्र जारी किया गया है। गड़बड़ी पाए जाने पर चित्रलेखा का प्रमाण-पत्र निरस्त कर दिया गया है।
राजेंद्र प्रसाद यादव, प्राचार्य, डायट

हाथरस : लॉकडाउन एवं ग्रीष्मावकाश अवधि में मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों के मानदेय भुगतान के सम्बन्ध में

हाथरस : लॉकडाउन एवं ग्रीष्मावकाश अवधि में मध्याह्न भोजन योजना में कार्यरत रसोइयों के मानदेय भुगतान के सम्बन्ध में

हाथरस : विभागीय योजनाओं की संतोषजनक प्रगति हेतु प्र0अ0 की समीक्षा बैठक आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में

हाथरस : विभागीय योजनाओं की संतोषजनक प्रगति हेतु प्र0अ0 की समीक्षा बैठक आयोजित किये जाने के सम्बन्ध में

केंद्रीय विद्यालय ने पहली कक्षा के लिए मेरिट लिस्ट की जारी, ऐसे करें चेक

KV Admission Result of Class 1 : केंद्रीय विद्यालय ने kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर पहली कक्षा के लिए मेरिट लिस्ट की जारी, पैरेंट्स करें चेक।

KV Admission Result of Class 1 : केंद्रीय विद्यालय संगठन (Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) द्वारा देश भर के केंद्रीय विद्यालयों में सत्र 2020-21 में पहली कक्षा कक्षा में दाखिले के लिए मेरिट लिस्ट की घोषणा आज यानी कि 11 अगस्त 2020 को कर दी है। नतीजों का ऐलान विद्यालय ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर किया है। इसके अलावा पैरेंट्स बच्चों का रिजल्ट चेक करने के लिए आधिकारिक वेबसाइट का भी रुख कर सकते हैं। इसके लिए पैरेंट्स को kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर जाकर लॉग इन करना होगा। इसके बाद पैरेंट्सअपना स्कोर चेक कर पाएंगे।





▪️👉🏻 यहाँ क्लिक करके देखें अपना चयन स्कोर





पैरेंट्स ध्यान दें कि यह एक प्रोविजनिल लिस्ट है। दाखिले के लिए फाइनल लिस्ट संबंधित स्कूलों द्वारा जारी की जाएगी और केवीएस पोर्टल द्वारा संकलित की जाएगी। इसके बाद केवीएस के पोर्टल पर पैरेंट्स रिजल्ट की जांच कर सकेंगे। वहीं माता-पिता केवीएस प्रवेश मेरिट सूची 2020 में अपने बच्चे के नाम की जांच करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन कर सकते हैं:


KV Admission Result of Class 1: पैरेंट्स ऐसे चेक कर सकते हैं ऑनलाइन मेरिट

- केवीएस प्रवेश 2020-21 की आधिकारिक वेबसाइट kvsonlineadmission.kvs.gov.in पर जाएं

- होमपेज पर उपलब्ध "चेक एप्लिकेशन स्टेटस" लिंक पर क्लिक करें

- रजिस्टर्ड यूजर लॉगिन कोड, बच्चे के जन्म की तारीख, मोबाइल नंबर, कैप्चा कोड का उपयोग कर साइन इन कर सकते है

- लॉगिन करने के बाद आपके बच्चे के मेरिट लिस्ट आपकी स्क्रीन पर प्रदर्शित हो जाएगी।

- मेरिट लिस्ट की कॉपी को भविष्य के लिए रख लें।

 संगठन ने कक्षा 1 के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 20 जुलाई से शुरू की थी और 7 अगस्त तक चलीथी। वहीं कक्षा 1 में दाखिले के लिए संगठन कुल तीन सूची जारी की जाएंगी। इसके तहत आज यानी कि 11 अगस्त को पहली सूची के बाद दूसरी सूची 24 अगस्त को जारी की जाएगी और तीसरी सूची 28 अगस्त, 2020 को जारी की जाएगी। पिछले साल कक्षा 1 में प्रवेश के लिए लगभग 7.95 लाख आवेदन आए थे।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

हरदोई : विज्ञान- गणित शिक्षक भर्ती के 14 बर्खास्त शिक्षकों पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट

हरदोई : विज्ञान- गणित के 14 बर्खास्त शिक्षकों पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट।

हरदोई : परिषदीय विद्यालयों में फर्जीवाड़े में एक और बड़ी कार्रवाई की गई है। उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान-गणित शिक्षक भर्ती में फर्जी अंक पत्र के आधार पर नौकरी हासिल करने वाले बर्खास्त 14 अध्यापकों पर कोतवाली शहर में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।

वर्ष 2005-06 में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हुई विज्ञान-गणित की भर्ती में फर्जी टीईटी अंक पत्र के आधार पर 15 ने नौकरी हासिल की थी। जांच में पकड़े जाने पर उन्हें बखार्स्त कर एफआईआर का आदेश दिया गया था, लेकिन कछौना क्षेत्र में एक पर एफआईआर दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। अब शासन स्तर से सख्ती की गई तो शेष 14 पर भी एफआईआर दर्ज कराई गई है।




बीएसए कार्यालय से दी गई तहरीर के अनुसार उच्च प्राथमिक विद्यालयों में हरियावां विकास खंड में जूनियर टाटपुर जुड़ौरा के कौशलेंद्र यादव, जूनियर सिरसा के रविंद्र सिंह, जूनियर इंदौर के उपेंद्र सिंह,। टोडरपुर विकास खंड में जूनियर पीला महुआ के पंकज कुमार, जूनियर सेमरियावां के प्रमोद कुमार, जूनियर सरायरानक के महेंद्र सिंह। भरखनी विकास खंड के जूनियर उचिया कला के अमर सिंह, जूनियर चकराता के महादेव सरन, जूनियर रतनपुर के मक्खन लाल। भरावन विकास खंड में जूनियर श्याम दिसपुर की भुवनेश। कावां विकास खंड में जूनियर त्योनाकला के देवेंद्र कुमार रघुवंशी। पिहानी के जूनियर मगरापुर के मितेंद्र सिंह, हरपालपुर के जूनियर महादयानकला के जितेंद्र सिंह व जूनियर नेवादा चौगवां के अरुण शर्मा का नाम शामिल है। कोतवाल जगदीश कुमार ने बताया कि तहरीर मिल गई है। सभी के विरुद्ध मामला दर्ज लिया गया है।



 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के लाभ से 218 बच्चे वंचित, स्कूलों में सीटें न खाली होने से आवेदकों को मिली निराशा

फतेहपुर : अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के लाभ से 218 बच्चे वंचित, स्कूलों में सीटें न खाली होने से आवेदकों को मिली निराशा।

फतेहपुर : ऑनलाइन आवेदन के बाद गरीब परिवार के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला मिलना कठिन हो रहा है। लाटरी सिस्टम से स्कूलों का आवंटन होने से 218 गरीब बच्चों को निजी स्कूलों दाखिला नहीं मिल सका। दो चरण की ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के सत्यापन में 370 आवेदन फार्म रिजेक्ट भी हुए हैं। अंतिम चरण की आवेदन प्रक्रिया सोमवार की रात को समाप्त हो जाएगी।



अनिवार्य शिक्षा अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में पहली कक्षा से गरीब परिवार के बच्चों का 25 प्रतिशत सीटों पर दाखिला लेना जरूरी होता है। इन बच्चों की पांच सौ रुपये मासिक फीस स्कूल के खाते में शासन से भेजा जाता है। इसके अलावा 5000 रुपये अभिभावक के खाते में सालाना दिए जाते हैं। पहले चरण में 525 और दूसरे चरण में 174 बच्चों को निजी स्कूलों में अनिवार्य शिक्षा अधिनियम में दाखिला मिला है। पहले चरण में 165 और दूसरे चरण में 53 गरीब परिवार के बच्चों का नाम लाटरी सिस्टम में नहीं आया। अभी तीसरे एवं अंतिम चरण की आवेदन प्रक्रिया चल रही है। सोमवार रात 12 बजे तक ही अभिभावक बच्चे के प्रवेश के लिए आवेदन कर सकते हैं। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि आवेदन लेने के बाद फार्मों का सत्यापन किया जाता है। जो आवेदन सही पाए जाते हैं, उनमें लाटरी सिस्टम से स्कूल आवंटित होते हैं। अगर किसी की सीटें स्कूल भर गई हैं, तो उसमें प्रवेश के लिए आए आवेदन रद्द कर दिए जाते हैं। क्योंकि कोई भी स्कूल अपने तय कोटे से अधिक प्रवेश नहीं ले सकता है।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों को अगले सप्ताह से मिलेगा हाईस्कूल का अंकपत्र, जिलों में पहले ही पहुंच चुके इंटर के अंकपत्र

यूपी बोर्ड परीक्षार्थियों को अगले सप्ताह से मिलेगा हाईस्कूल का अंकपत्र, जिलों में पहले ही पहुंच चुके इंटर के अंकपत्र


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल परीक्षा 2020 का परिणाम घोषित होने के करीब डेढ़ माह बाद परीक्षार्थियों को अंक सहप्रमाणपत्र हासिल हो सकेगा। क्षेत्रीय कार्यालयों में यह पहुंच चुके हैं, जन्माष्टमी बाद उन्हें जिलों में भेजा जाएगा। उम्मीद है कि 15 अगस्त के बाद इनका वितरण शुरू होगा। वहीं, इंटर के अंकपत्र पहले ही जिलों में पहुंचाए जा चुके हैं। जिलों में परीक्षार्थियों को मिलने में देरी की वजह कोरोना संकट है। कागज मिलने में देरी के कारण प्रिंटिंग संस्थाएं इसे अब मुहैया करा सकी हैं। हालांकि डिजिटल अंकपत्र परीक्षार्थियों को बांटे जा रहे थे।





उप मुख्यमंत्री डा. दिनेश शर्मा ने 27 जून को हाईस्कूल व इंटर का परिणाम घोषित किया था, उसी दिन ऐलान हुआ था कि इंटर का अंकपत्र 15 और हाईस्कूल का 31 जुलाई से वितरित किया जाएगा। इस बीच छात्र-छात्रओं की सहूलियत के लिए डिजिटल अंकपत्र देने के निर्देश हुए थे। जैसे-तैसे इंटर का अंकपत्र प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय कुछ दिन पहुंच गया है लेकिन उसका वितरण काफी दिन बाद जिलों में शुरू हो सका।

वहीं, प्रिंटिंग संस्थाओं ने हाईस्कूल के अंकपत्र में देरी होने का संकेत बोर्ड का भेजा था। संस्थाओं का कहना है कि हाईस्कूल के परीक्षार्थियों की संख्या अधिक है, उस अनुपात में कागज नहीं मिल पा रहा है। अफसरों का कहना है कि कुछ दिन पहले अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों तक पहुंचे हैं। सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि जिलों में दोनों अंक पत्रों का वितरण शुरू हो रहा है। इंटर की प्रक्रिया शुरू है अब हाईस्कूल का अंकपत्र भी मुहैया कराया जाएगा।



 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

कोरोना के चलते स्कूल खोलने के लिए सरकार की ओर से नहीं तय की गई कोई समयसीमा

कोरोना के चलते स्कूल खोलने के लिए सरकार की ओर से नहीं तय की गई कोई समयसीमा



नई दिल्ली । कोरोना संकट के चलते देश के अधिकतर स्कूल बंद हैं। स्कूल खोलने के लिए सरकार की तरफ से अभी तक कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। समाचार एजेंसी एएनआइ के सरकारी सूत्रों के अनुसार स्कूलों के खोले जाने का फैसला कोरोना की स्थिति पर ही निर्भर करेगा। अभी तक केवल केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ ने ही स्कूल खोलने का इरादा जताया है।


देश में कोरोना का संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। इसके चलते सरकार अभी स्कूलों के खोले जाने पर निर्णय नहीं ले पा रही है। कोरोना और लॉकडाउन के चलते देश के अधिकतर राज्यों के स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं चलाई जा रही हैं। 


देश में तेजी से बढ़ रहे कोरोना के मामले

भारत में तेजी से बढ़ते कोरोना वायरस के (COVID-19)मामलों के बीच देश में संक्रमण से ठीक हुए मरीजों की संख्या 15 लाख को पार कर गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने इसकी जानकारी दी है। मंत्रालय के अनुसार 10 राज्यों से 80 फीसद मामले सामने आ रहे हैं। इसके द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले 24 घंटे में  62,064 मामले सामने आए हैं 1,007 लोगों की मौत हो गई है। वहीं इस दौरान  4,77,023 सैंपल टेस्ट हुए। लगातार चौथे दिन कोरोना के 60 हजार से ज्यादा मामले सामने आ गए हैं।

टीईटी फेल को भी 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा करा दिया पास, एसटीएफ की जांच में सामने आई बात

टीईटी फेल वालों को भी 69000 शिक्षक भर्ती परीक्षा करा दिया पास, एसटीएफ की जांच में सामने आई बात

 
प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैस-वैसे चौंकाने वाली बातें सामने आ रही हैं। पता चला है कि नकल माफिया गिरोह ने ऐसे अभ्यर्थियों को भी परीक्षा पास करा दी, जो टीईटी तक में उत्तीर्ण नहीं हो सके। गिरोह के कब्जे से मिली डायरी में लिखे नाम वाले अभ्यर्थियों से पूछताछ में यह बात सामने आई है।


शिक्षक भर्ती परीक्षा धांधली मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए नकल मफिया गिरोह सरगना केएल पटेल समेत अन्य के कब्जे से डायरी बरामद हुई थी। इसमें कई अभ्यर्थियों के नाम थे जो न सिर्फ शिक्षक भर्ती परीक्षा में पास हुए थे बल्कि उन्होंने अच्छे खासे नंबर भी हासिल किए थे। विवेचना के दौरान एसटीएफ ने इन अभ्यर्थियों की जांच पड़ताल शुरू की तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि इनमें ऐसे भी अभ्यर्थी शामिल थे, जिन्होंने शिक्षक भर्ती परीक्षा में तो पासिंग नंबर आसानी से हासिल कर लिए लेकिन वह टीईटी तक पास नहीं कर पाए।



यह अभ्यर्थी नकल माफिया गिरोह के संपर्क में थे और गिरोह की मदद से ही उन्होंने परीक्षा पास की। हालांकि बेसिक जानकारी न होने के कारण वह टीईटी उत्तीर्ण नहीं कर सके। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि डायरी में एक महिला अभ्यर्थी का भी नाम था जो परीक्षा में उत्तीर्ण थी। लेकिन जब उससे पूछताछ की गई तो पता चला कि वह टीईटी में पास नहीं हो सकी।


तीन अभ्यर्थी भेजे जा चुके हैं जेल
शिक्षक भर्ती परीक्षा मामले में अब तक कुल 14 आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं। इनमें से तीन अभ्यर्थी भी हैं। दो अभ्यर्थी धर्मेंद्र पटेल व विनोद कुमार को सोरांव पुलिस ने जेल भेजा था जबकि बलवंत कुमार नाम के एक अभ्यर्थी को हाल ही में एसटीएफ ने गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सूत्रों की मानें तो गिरोह के संपर्क में रहने वाले कई अन्य अभ्यर्थी भी एसटीएफ के रडार पर हैं।

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप

69000 शिक्षक भर्ती घोटाले में आगे नहीं बढ़ सकी एसटीएफ की जांच, आरोपी नेता को बचाने का आरोप


प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में हुए फर्जीवाड़े की जांच अब एसटीएफ कर रही है. एसटीएफ को जांच मिले हुए दो महीने से ज्यादा का वक्त बीत गया है, लेकिन तेज-तर्रार बताई जाने वाली ये एजेंसी इन दो महीनों में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है. एक अभ्यर्थी को छोड़ दिया जाए तो एसटीएफ न तो किसी आरोपी को गिरफ्तार कर सकी है और न ही जांच को जरा भी आगे बढ़ा सकी है. जांच एजेंसी एसटीएफ इस मामले में मोस्टवांटेड बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव पर तो पूरी तरह मेहरबान नजर आ रही है. न तो अभी तक उसकी गिरफ्तारी की गई है और न ही उस पर कानूनी शिकंजा कसा गया है.


शिक्षक भर्ती मामले में एसटीएफ की नाकामी सवालों के घेरे में है. सवाल ये भी उठ रहे हैं कि एसटीएफ वाकई नाकाम है या फिर वह कुछ बड़े लोगों को बचाने के लिए जानबूझकर जांच और कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डाले हुए है. एसटीएफ के ढुलमुल रवैये के बाद अभ्यर्थी और छात्र संगठन अब इस मामले की सीबीआई या न्यायिक जांच कराए जाने की मांग करने लगे हैं. बीजेपी नेता चंद्रमा यादव यूपी के एक कैबिनेट मंत्री का प्रतिनिधि रहा है और वो इससे पहले टीईटी परीक्षा का पेपर लीक कराने के आरोप में भी पांच महीनों तक जेल में रह चुका है. एसटीएफ ने बीजेपी नेता चंद्रमा को अब तक न तो भगोड़ा घोषित किया है और न ही उस पर इनाम जारी किया है.


गौरतलब है कि, यूपी के प्राइमरी स्कूलों में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में पैसे लेकर पास कराने के आरोप में प्रयागराज पुलिस ने प्रतापगढ़ के अभ्यर्थी राहुल सिंह की शिकायत पर इसी साल चार जून को केस दर्ज जांच शुरू की थी. प्रयागराज पुलिस ने इस मामले में मास्टरमाइंड केएल पटेल और दो टॉपर्स समेत 11 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था. इतना ही नहीं पुलिस ने यूपी के कैबिनेट मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह के प्रतिनिधि रहे बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव को भी इस मामले में आरोपी बनाया था. प्रयागराज पुलिस ने ये सारी कार्रवाई चार दिन में कर ली थी. भर्ती घोटाले का मामला सियासी गलियारों में गूंजने के बाद यूपी सरकार ने 9 जून को जांच प्रयागराज पुलिस से वापस लेकर एसटीएफ को सौंप दी थी. इसके साथ ही हफ्ते भर में ही तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज को हटाने पर भी खूब कोहराम मचा था.


बीजेपी नेता चंद्रमा सिंह यादव सूबे के कैबिनेट मंत्री और सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह का प्रतिनिधि रह चुका है. उसकी गिनती प्रयागराज में बीजेपी के रसूखदार नेताओं में होती है. चंद्रमा यादव बीजेपी में महानगर उपाध्यक्ष के साथ ही किसान मोर्चे की प्रदेश कार्य समिति का सदस्य भी रह चुका है. वो एक इंटर कॉलेज का प्रबंधक भी है. अपने कॉलेज पंचमलाल आश्रम इंटर कालेज को वो रसूख का इस्तेमाल कर तमाम प्रतियोगी परीक्षाओं का सेंटर बनवाता था और वहीं से पेपर लीक कराकर अपने गिरोह को देता था.



टीईटी पेपर लीक मामले में वो पांच महीने तक जेल में रह चुका है. वैसे एसटीएफ को जांच सौंपने और चंद्रमा को गिरफ्तार नहीं किए जाने पर विपक्षी पार्टियां पहले ही सवाल उठा रही थीं. एसटीएफ ने दो महीने में इस मामले में सिर्फ एक अभ्यर्थी को गिरफ्तार किया है. इसके अलावा वो न तो किसी की गिरफ्तारी कर सकी है और न ही जांच में एक कदम भी आगे बढ़ सकी है. एसटीएफ की ये नाकामी सवालों के घेरे में है. आरोप लग रहा है कि सरकार को इस मामले का सनसनीखेज खुलासा रास नहीं आया, इसलिए उसने तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का तबादला किया और उसके बाद जांच को ठंडे बस्ते में डालने के लिए मामला एसटीएफ के सुपुर्द कर दिया.


प्रयागराज में आइसा के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश पासवान, सपा छात्र सभा से जुड़े अजय यादव सम्राट और एनएसयूआई के ऋषि यादव ने एसटीएफ पर मामले को रफा-दफा करने का आरोप लगाते हुए इस मामले की जांच अब सीबीआई या फिर हाईकोर्ट के किसी रिटायर्ड जज से कराए जाने की मांग की है.

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं तो डिग्री मान्य नहीं, UGC ने परीक्षाएं नहीं कराने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में बताया गलत

 
नई दिल्ली : राज्य विश्वविद्यालयों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं रद करने के दिल्ली और महाराष्ट्र सरकार के फैसले को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट में गलत बताते हुए इसे नियमों का उल्लंघन बताया है। साथ ही कहा है कि यदि छात्रों की अंतिम वर्ष की परीक्षाएं नहीं कराई गईं तो उनकी डिग्रियों को मान्यता नहीं दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने यूजीसी का पक्ष सुनने के बाद मामले की सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए टाल दी।


यूजीसी ने सुप्रीम कोर्ट से यह जानकारी भी साझा की कि देश के ज्यादातर विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने को तैयार हैं। साथ ही बताया कि बड़ी संख्या में विश्वविद्यालय अंतिम वर्ष की परीक्षाएं करा भी चुके हैं। ऐसे में यदि कोई राज्य परीक्षाएं नहीं कराता है तो इससे शैक्षणिक गुणवत्ता पर असर पड़ेगा। यूजीसी ने कहा कि कोरोना संक्रमण की स्थिति के मद्देनजर विश्वविद्यालयों को अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया गया है।

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि यूजीसी के नियमों में राज्य बदलाव नहीं कर सकते क्योंकि डिग्री प्रदान करने के लिए नियम निर्धारित करने का अधिकार सिर्फ यूजीसी को है। शीर्ष अदालत उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी जिनमें सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 30 सितंबर तक अंतिम वर्ष की परीक्षाएं कराने के छह जुलाई के दिशानिर्देश को चुनौती दी गई है। तुषार मेहता ने शीर्ष अदालत को दिल्ली और महाराष्ट्र के फैसले की सूचना देते हुए कहा कि उनके हलफनामों पर यूजीसी अपना जवाब दाखिल करेगा। वहीं, कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता अलख आलोक श्रीवास्तव ने दावा किया कि छह जुलाई के दिशानिर्देश न तो कानूनी तौर पर और न ही संवैधानिक तौर पर वैध हैं। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने 31 जुलाई को उक्त याचिकाओं पर कोई अंतरिम आदेश जारी करने से इन्कार कर दिया था।

कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को समाचार पत्रों के जरिए पढ़ाने का संसदीय सामिति का प्रस्ताव

कोरोना काल में ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को समाचार पत्रों के जरिए पढ़ाने का संसदीय सामिति का  प्रस्ताव

 
नई दिल्ली : कोरोना संकट काल में घरों में बैठे स्कूली बच्चों को पढ़ाने के लिए सरकार वैसे तो सभी जरूरी कदम उठा रही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों तक उसकी पहुंच अभी भी अधूरी है। शिक्षा मंत्रलय की संसदीय मामलों की स्थायी समिति ने सोमवार को इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। साथ ही सुझाव दिया है कि ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों के बच्चों को पढ़ाने के लिए समाचार पत्रों की मदद ली जाए।


समिति का कहना था कि इस संकट काल में भी गांव-गांव तक समाचार पत्र पहुंच रहे हैं। ऐसे में छात्रों तक उसके जरिए अध्ययन सामग्री पहुंचाई जाए। शिक्षा मंत्रलय से जुड़ी स्थायी समिति की बैठक भाजपा के वरिष्ठ सांसद डा.विनय सहत्रबुद्धे की अगुवाई में हुई। इसके कुल 30 सदस्यों में से करीब 17 बैठक में पहुंचे थे। 


संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में मंत्रलय के सामने परीक्षाओं के तरीकों को लेकर भी चर्चा हुई। जिसमें क्वेश्चन बैंक आधारित सिस्टम को अपनाने पर जोर दिया गया। इस पर मंत्रलय ने अपनी सहमति दे दी है। साथ ही समाचार पत्रों के जरिए दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों तक पहुंचने के सुझाव पर भी अपनी सहमति जताई है।

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटर के नाम में नहीं होगा अंतर, इस साल अब 10वीं के रोल नम्बर से 11वीं में करा रहे पंजीकरण

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल और इंटर के नाम में नहीं होगा अंतर, इस साल अब 10वीं के रोलनम्बर से 11वीं में करा रहे पंजीकरण।


प्रयागराज : यूपी बोर्ड के छात्र-छात्राओं के हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में नाम या माता-पिता के नाम में भी अंतर नहीं होगा। लाखों परीक्षार्थियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने इस साल से 11वीं का रजिस्ट्रेशन 10वीं के रोल नंबर से करने का अनूठा प्रयोग शुरू किया है।



इस साल हाईस्कूल की परीक्षा पास करने वाले छात्र छात्राओं के 11वीं में अग्रिम पंजीकरण के लिए सिर्फ 10वीं का रोल नंबर ऑनलाइन फॉर्म में भरना होगा। ऐसा करने पर बच्चे का पूरा विवरण जैसे नाम, माता-पिता का नाम (हिन्दी व अंग्रेजी) आदि अपनेआप आ जाएगा। उसके बाद प्रधानाचार्यों को बच्चे द्वारा सिर्फ 11वीं में लिए गए विषय और फीस आज का ब्योरा अलग से भरना होगा।



इसका फायदा यह होगा कि जो सूचनाएं हाईस्कूल के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में है वही सूचनाएं 11वीं के अग्रिम पंजीकरण में अपनेआप आ जाएगी और उन्हीं के आधार पर आगे इंटर का फॉर्म भरा जाएगा। इस प्रयोग से बच्चों को 10वीं और 12वीं के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र में अपने या माता-पिता के नाम में गड़बड़ी के संशोधन के लिए भटकना नहीं होगा। वर्तमान में यूपी बोर्ड के 10वीं के 28 हजार और 12वीं तक के 17 हजार स्कूल हैं।


 बड़ी संख्या में 10वीं पास करने वाले छात्र 11वीं में दूसरे स्कूलों में प्रवेश लेते हैं। नये सिरे से फॉर्म भरने के कारण टाइपिंग में बड़ी गलतियां होती है। वैसे प्रधानाचार्य स्कूल स्तर पर अभी पुराने तरीके से ही बच्चों का फॉर्म भरवा रहे हैं। उनका कहना है कि स्कूल के अपने रिकॉर्ड और 11वीं में विषय के चुनाव के लिए फॉर्म भरवाया जा रहा है। लेकिन इन्हीं बच्चों का यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर फॉर्म 10वीं के रोल नंबर के आधार पर ही भरा जाएगा। हालांकि दूसरे बोर्ड सीबीएसईया सीआईएससीई से आकर यूपी बोर्ड के स्कूलों में 11वीं में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं का फॉर्म प्रधानाचार्यों को नये सिरे से भरना होगा। क्योंकि उनका डाटा बैंक बोर्ड के पास नहीं है।

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के अंकपत्र में छात्र-छात्राओं और उनके माता-पिता के नाम में त्रुटि की बड़ी शिकायत मिलती थी। इसे दूर करने के लिए पिछले साल अभिभावकों की अंडरटेकिंग लेना शुरू किया गया था। इस साल से 11वीं का अग्रिम पंजीकरण 10वीं के रोल नंबर से करवा रहे हैं ताकि इस गड़बड़ी को दूर किया जा सके। -दिव्यकांत शुक्ल, सचिव यूपी बोर्ड

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

प्रतापगढ़ : प्राइमरी स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचा खंड शिक्षाधिकारी निकला फर्जी, ग्रामीणों ने जम कर की धुनाई

प्रतापगढ़ : प्राइमरी स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचा खंड शिक्षाधिकारी निकला फर्जी, हुई पिटाई।

ग्रामीण फर्जी बीईओ से परिचय पत्र मांगने लगे तो वह सकपका गया। इतने में ग्रामीणों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस उसे पकड़कर थाने ले गई।

प्रयागराज :: पडोसी जनपद प्रतापगढ़ में एक प्राथमिक स्‍कूल में जांच के लिए पहुंचे खंड शिक्षाधिकारी ही फर्जी निकले। जब यह राज खुला तो शिक्षिका ने ग्रामीणों को बुला लिया। इसके बाद खंड शिक्षाधिकारी ग्रामीणों ने जमकर धुनाई कर दी। इसके बाद आरोपित को पुलिस के हवाले कर दिया। शिक्षिका ने मामले में संग्रामगढ़ पुलिस को तहरीर दी है।




 यह था मामला

संग्रामगढ़ थाना क्षेत्र के चुभकी गांव निवासी सुशीला यादव अपने ही गांव के प्राइमरी स्कूल में सहायक अध्यापिका पद पर तैनात है। उनके विद्यालय में तीन दिन पहले एक युवक पहुंचा और खुद को खंड शिक्षाधिकारी बताते हुए कहा कि उनके खिलाफ शिकायत हुई है, उसी की जांच करने आए हैं। अगर दस हजार रुपये दे देंगी तो सब कुछ मैनेज कर लिया जाएगा।  बातचीत के दौरान सुशीला को शक हो गया कि जो युवक खुद को खंड शिक्षाधिकारी बता रहा है, वह जालसाज है। क्योंकि उनके यहां के खंड शिक्षाधिकारी मोहम्मद रिजवान हैं। यह पूछने पर वह कहने लगा कि मैंने जल्द ही चार्ज लिया है। बातचीत करने के बाद शिक्षिका का फोन नंबर लेकर वह युवक स्कूल से चला गया। उसी दिन से वह युवक सुशीला देवी को फोन करके पैसा देने का दबाव बनाने लगा।




घूस की रकम लेने पहुंचे फर्जी खंड शिक्षाधिकारी की ग्रामीणों ने की पिटाई

आजिज आकर शिक्षिका सुशीला देवी ने उसे सोमवार को पैसा देने के लिए स्कूल बुलाया। यही नहीं उन्होंने पूरे प्रकरण की जानकारी ग्रामीणों को भी दे दी। सोमवार को सुबह स्कूल खुलते ही करीब साढ़े नौ बजे वह जालसाज युवक पैसा लेने के लिए पहुंच गया। इतने में स्कूल पर नजर गड़ाए ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे घेर लिया। ग्रामीण उससे परिचय पत्र मांगने लगे तो वह सकपका गया। इतने में ग्रामीणों ने उसे पीटना शुरू कर दिया। मौके पर पहुंची पुलिस युवक को पकड़कर थाने ले गई।


पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

थाने में पूछताछ में पकड़े गए जालसाज ने अपना नाम राजेंद्र कुमार यादव पुत्र छेदीलाल यादव भिटारी गांव का निवासी बताया। शिक्षिका सुशीला देवी की तहरीर पर पुलिस ने राजेंद्र यादव के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कर लिया। संग्रामगढ़ एसओ आशुतोष तिवारी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करके राजेंद्र यादव को गिरफ्तार कर  लिया गया है।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

प्रतापगढ़ : 555 ग्राम पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों को इंटरनेट की सौगात

प्रतापगढ़ में 555 ग्राम पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों को इंटरनेट की सौगात।

शासन ने यह कार्य 31 मार्च 2021 तक पूरा करने को कहा है। शासन की सख्ती के बाद दूर संचार निगम ग्राम पंचायतवार विद्यालयों की सूची मंगाया है।

प्रयागराज : पडोसी जनपद प्रतापगढ़ में ग्राम पंचायतों के पंचायत भवन ही नहीं बल्कि प्राथमिक विद्यालयों को भी इंटरनेट से जोडऩे की तैयारी चल रही है। शासन के इस प्रयोग से एक ओर जहां विद्यालय में पढऩे वाले हाईटेक बन सकेंगे, वहीं दूसरी ओर ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था शुरू हो सकेगी। शासन के इस प्रयोग से बच्चों का भविष्य संवरेगा।




ग्राम पंचायतों के विदयालयों को जल्‍द इंटरनेट से जोडने की कवायद

जिले में 17 ब्लाक हैं। इसके अंतर्गत कुल 1241 ग्राम पंचायतें हैं। सात ब्लाक यानि बिहार, मंगरौरा, मानधाता, सदर, संडवा चंद्रिका, सांगीपुर व आसपुर देवसरा ब्लाक की 555 ग्राम पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों को हाईस्पीड इंटरनेट से जोडऩे की कवायद चल रही है। शासन ने यह कार्य 31 मार्च 2021 तक पूरा करने को कहा है। शासन की सख्ती के बाद दूर संचार निगम ग्राम पंचायतवार विद्यालयों की सूची मंगाया है। इसके अलावा निगम के कर्मी भी जाकर स्थलीय निरीक्षण करके कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। शासन का मकसद है कि ग्राम पंचायतों के विद्यालय जल्द इंटरनेट से जुड़ें ताकि बच्चों को इंटरनेट के जरिए तमाम जानकारियां शिक्षक के माध्यम से मिले। इसके लिए दूरसंचार विभाग द्वारा इन गांवों में आप्टिकल फाइबर केबल बिछाने का काम शुरू करने जा रहा है। जिला प्रबंधक (दूर संचार निगम) राघवेंद्र कुमार ने बताया कि पहले फेज में 10 ब्लाकों की ग्राम पंचायतों के प्राथमिक विद्यालयों को इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है। बाकी के बचे विद्यालयों को नेट से जोडऩे की कवायद चल रही है। कुछ गांवों को यह सुविधा दी जा चुकी है।



इन ब्लाकों को किया गया है शामिल

जिले के बिहार ब्लाक के अंतर्गत कुल 81 ग्राम पंचायतें हैं। इसके अलावा मंगरौरा में 68, मानधाता में 101, सदर में 80, संडवा चंद्रिका में 70, सांगीपुर में 75 व आसपुर देवसरा में 84 सहित कुल 555 ग्राम पंचायतों के विद्यालयों को हाईटेक बनाने की योजना चल रही है।

10 ब्लाक में कार्य हो चुका है पूरा

कुंडा, कालाकांकर, पट्टी, गौरा, शिवगढ़, बाबागंज, बाबा बेलखरनाथ धाम सहित 10 ब्लाकों की करीब एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के विद्यालयों को पहले से ही इंटरनेट से जोड़ा जा चुका है। कोरोना के चलते विद्यालय बंद पड़े हैं। यहीं वजह है कि अभी यहां पर ऑनलाइन पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी। शासन की यह योजना बच्चों के लिए कारगर साबित होगी।

निगम के अफसर कर रहे मॉनीटरिंग

विद्यालयों को इंटरनेट से जोडऩे का कार्य तेजी से चल रहा है। निगम के अफसर इसकी प्रतिदिन समीक्षा भी कर रहे हैं। इसके अलावा मंडलीय टीम भी इसकी मॉनीटरिंग कर रही है।

Monday, August 10, 2020

देवरिया : दो फर्जी शिक्षक जल्द होंगे बर्खास्त, बीएसए के नोटिस का नहीं दिया जवाब

देवरिया : दो फर्जी शिक्षक जल्द होंगे बर्खास्त, बीएसए के नोटिस का नहीं दिया जवाब।

देवरिया :: परिषदीय विद्यालय में फर्जी मिले दो शिक्षक, शीघ्र ही बर्खास्त होंगे। यह शिक्षक जांच शुरू होने के बाद से ही फरार चल रहे हैं। इन शिक्षकों ने बीएसए की नोटिसों का जवाब नहीं दिया है। परिषदीय विद्यालयों में फर्जी शिक्षकों की जांच तेजी से चल रही है। अब तक 41 शिक्षकों के खिलाफ बर्खास्तगी की कार्रवाई हो चुकी है। इनमें से एक दर्जन से अधिक के खिलाफ केस दर्ज कराया जा चुका है। इसमें पुलिस जांच कर रही है।




दूसरी तरफ अन्य फर्जी शिक्षक भी सामने आ रहे हैं। ताजा मामला एक समान पैन कार्ड पर कार्यरत मिले शिक्षकों से जुड़ा है। बीएसए ने समान पैन कार्ड पर कार्यरत मिले सभी सभी शिक्षकों को नोटिस देकर पक्ष रखने को कहा था। इसमें से दो शिक्षकों ने नोटिस का जवाबनहीं दिया। बीएसएफ की तरफ से दूसरी और तीसरी नोटिस भेजी गयी पर दोनों शिक्षकों ने जवाब नहीं दिया। अब प्रेस विज्ञप्ति प्रकाशित कर सूचना दी गयी है। सूत्रों का कहना है कि दोनो शिक्षक जांच में फर्जी पाए गए हैं। इसके चलते नोटिस पर उपस्थित नहीं हो रहे हैं।

● जांच शुरू होने के बाद से विद्यालय से हैं फरार

• बीएसए के नोटिस का भी नहीं दिया जवाब

जिले में अब तक हो चुकी है 41 शिक्षकों की बर्खास्तगी।

कस्तूरबा के शिक्षकों के खिलाफ हो रही है जांच : फर्जी शिक्षकों के मामले में जिले के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय प्रदेश में अव्वल हैं। राज्य परियोजना में हुई जांच में 14 शिक्षक फर्जी मिले। इन्हें बीएसए ने बर्खास्त कर दिया है। 11 शिक्षकों के खिलाफ जांच चल रही है। प्रमाणपत्रों का सत्यापन कराया जा रहा है। फर्जी मिलने पर इनके खिलाफ भी कार्रवाई होगी। एक वार्डेन को किसी व्यक्ति की शिकायत पर बर्खास्त किया जा चुका था।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

बीईओ बोलीं, 10 हजार से नीचे नहीं हो पाएगा काम, वायरल वीडियो के खलबली मचाने के बाद दी प्रतिकूल प्रविष्टि, बीएसए ने बताया आरोपों को निराधार



----------- ----------- ----------- ----------- --------

बीईओ बोलीं, 10 हजार से नीचे नहीं हो पाएगा काम,  वायरल वीडियो के खलबली मचाने के बाद दी प्रतिकूल प्रविष्टि, बीएसए ने बताया आरोपों को निराधार


हरदोई: बेसिक शिक्षा विभाग में वायरल वीडियो ने खलबली मचा दी है। खंड शिक्षा अधिकारी शाहाबाद शुचि गुप्ता की एक सेवानिवृत्त अध्यापक से बातचीत के वायरल वीडियो के अनुसार..मास्टर साहब, हम क्या बताएं इसमें, हमें तो बीएसए को भी देना पड़ता है। बीएसए साहब को क्या हम पैसे अपने पास से देंगे। आप से तो कोई ज्यादा मांगे भी नहीं हैं, केवल 10 हजार रुपये की बात हुई है। आप पता कर लो कि हम बाकी का कितने में कर रहे हैं। जितना बीएसए को देना है उतना तो पूरा हो जाए हमारा।. .नहीं मास्टर साहब इससे कम हम क्या कर लें। आप हमारे घर आए थे तो हमने आपकी बात रख ली। बात यह है कि हमें तो फाइलें गिनकर बीएसए को हिसाब देना पड़ता है। कम से कम उनके खर्चा भर को तो निकल आए। बीएसए को पता होता है कि इतने लोग रिटायर हो रहे हैं। दस हजार रुपये में हम क्या उन्हें देंगे और क्या खुद रखेंगे। दस में भी चलो उनके भर का मिल जाए हमें नहीं मिल रहा है तब भी कोई बात नहीं। ..हालांकि यह वीडियो पुराना बताया जा रहा है और इसके चर्चा में आने पर 31 जुलाई को बीएसए, बीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी कर चुके थे, लेकिन शनिवार रात सोशल मीडिया पर छाए वीडियो ने खलबली मचा दी है।


वायरल वीडियो के अनुसार खंड शिक्षा अधिकारी शुचि गुप्ता से कोई सेवानिवृत्त अध्यापक अपनी फाइल निस्तारण की बात कहता है। उससे पूर्व में 10 हजार रुपये की बात हुई और रुपयों के लिए ही वह बीईओ से मिलने आया। फोन पर किसी से बात करने के बाद बीईओ सेवानिवृत्त अध्यापक से मुखातिब होती हैं और 10 हजार रुपये से कम में काम न हो पाने की बात कहती हैं। इतना ही नहीं वह अन्य सेवानिवृत्त अध्यापकों का भी हवाला देती हैं कि किसी ने कोई सिफारिश नहीं लगवाई। सभी आए और अपना हिसाब कर काम करा ले गए। 


भाजपा जिलाध्यक्ष के गांव के एक सेवानिवृत्त अध्यापक की भी वह नजीर देती हैं। कहती हैं कि वह तो अध्यक्ष जी के रिश्तेदार थे, लेकिन कोई सिफारिश नहीं कराई, रुपये दिए और काम करवाया। वह खंड शिक्षा अधिकारी और अध्यापक के बीच आपसी रिश्तों का भी हवाला देती हैं। करीब छह मिनट 28 सेकेंड के वीडियो में अध्यापक कुछ अन्य के लिए भी पूछता है तो वह कहती हैं कि उनसे 18 हजार रुपये लिए, अपनी जल्दी फाइल करवा लो। शाहाबाद में किसी भी दिन चले आना और चुपचाप रुपये देना बस। बीईओ के रुपये मांगने के वीडियो की बात संज्ञान में आने पर 31 जुलाई को ही बीईओ शुचि गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा गया था। बीईओ उनका नाम लेकर जो भी बात कह रही हैं वह पूरी तरह निराधार है। रुपये मांगने के वीडियो पर बीईओ शुचि गुप्ता को प्रतिकूल प्रविष्टि देते हुए कार्रवाई के लिए शासन को लिखा गया है।


वीडियो पुराना है, पूरी साजिश करके आवाज बदलकर इसे बनाया गया है और इसके नाम पर ब्लैकमेलिग की भी कोशिश की गई। पत्रावली निस्तारण के नाम पर कोई रुपये नहीं मांगे, उनके ऊपर लगाए गए आरोप गलत हैं। - हेमंतराव, बीएसए


नया अपडेट ☝️
--------------- ---------------- --------------- -------
पुराना अपडेट 👇

हरदोई : फाइलें गिनकर बीएसए को पहुंचाना होता है हिस्सा, वायरल वीडियो में बीईओ का खुलासा, बीएसए ने थमाया नोटिस




● काम में लापरवाही पर भरखनी बीईओ को नोटिस
● बीएसए ने तीन दिन में मांगा जवाब, कार्रवाई की चेतावनी
● सोशल साइट पर वायरल वीडियो में पेंशन के पैसे मांगने का भी आरोप



हरदोई। शिक्षा विभाग के कामों में लापरवाही बरतने और सोशल साइट पर पेंशन की धनराशि मांगने के आरोप के बाद बीएसए ने भरखनी खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। बीएसए ने चेतावानी दी कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।  बीएसए हेमंत राव ने बताया कि भरखनी बीईओ शुचि गुप्ता के पास शाहाबाद का भी अतिरिक्त प्रभार है। 


मिशन प्रेरणा से संबंधित कार्य, कंपोजिट ग्रांट से कराए गए कामों की फीडिंग, एमडीएम डाटा आदि की फीडिंग में दोनों ब्लाक पिछड़े हुए हैं। इसके अलावा विकास खंड भरखनी में विद्युतीकरण भी कम है। मानव संपदा के तहत अपलोडिंग भरखनी 53 प्रतिशत, नगर पंचायत पाली 29 प्रतिशत और शाहाबाद में सिर्फ 43 प्रतिशत हुई है। बार-बार पत्र लिखने के बाद भी अगर काम में प्रगति नहीं आ रही है, तो यह अनुशासन हीनता की श्रेणी में आता है। 


इसी तरह सोशल साइट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें पेंशन से रुपये भी मांगे जा रहे हैं, इन सब आरोपों के बाद उनको कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। तीन दिन का समय दिया गया है, यदि तीन दिन के बाद मिले स्पष्टीकरण से संतुष्टी न हुई तो उनके कार्रवाई करने की बात कही।


● खंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी

● हरदोई विकास खंड भरखनी-शाहाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ है. जिसमें रुपये मांगने की बात कही गई है।...



हरदोई : विकास खंड भरखनी-शाहाबाद का एक वीडियो वायरल हुआ है,. जिसमें रुपये मांगने की बात बताई जा रही है। बीएसए ने वीडियो के साथ ही कार्यों में उदासीनता पर उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया है।


बीएसए हेमंत राव ने खंड शिक्षा अधिकारी भरखनी/शाहाबाद शुचि गुप्ता को जारी पत्र में कहा गया है कि 31 जुलाई 2010 को सोशल मीडिया पर पेंशनर से धनराशि मांगे जाने का वीडियो वायरल हुआ है, जो अत्यंत निदाजनक व आपकी अनुशासनहीनता का प्रतीक है। इस कृत्य से विभाग की छवि खराब हुई है। ऐसा प्रतीत होता है कि आपके द्वारा जानबूझ कर विभाग की छवि धूमिल की गई। इसके अलावा मिशन प्रेरणा से संबंधित कार्यो के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए थे। मगर विकास खंड भरखनी और शाहाबाद का कार्य पूर्ण नहीं कराया गया, जो आदेशों की अवहेलना है। बीएसए ने खंड शिक्षा अधिकारी से तीन दिन के अंदर स्पष्टीकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


खबर साभार :  दैनिक जागरण / अमर उजाला

प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान

प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान 


प्रदेश में सीबीएसई स्कूल खोलने और हॉस्टल निर्माण की अनुमति लेना अब आसान होगा। केंद्र सरकार के निर्देश पर इन दोनों कार्यों से संबंधित अनुमति ऑनलाइन देने कौ तैयारी शुरू हो गई है। केंद्र सरकार ने बित्त वर्ष 2020- 21 में प्रदेश को जीएसडीपी का दो प्रतिशत अतिरिक्त ऋण लेने की मंजूरी दी है। इसमें से एक प्रतिशत ऋण के लिए कई सुधारों को लागू करने की शर्त जोड़ दी है। इसमें कई कारोबारी सुधार (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) भी शामिल किए गए हैं। इनमें सीबीएसई स्कूल खोलने के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) व हॉस्टल बनाने के लिए मंजूरी के लिए लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन करने की कार्यवाही भी शामिल है। इसके लिए संबंधित पोर्टल पर एनओसी व अप्रूबल से जुड़ी आवश्यक प्रक्रिया व चेकलिस्ट पब्लिश करनी होगी। 


एनओसी व अप्रूवल से जुड़ी कार्यवाही जनहित गारंटी अधिनियम के दायरे में होगी। इसके अंतर्गत प्रत्येक कार्यवाही की टाइमलाइन तय की जाएगी। सभी काम तय समय में पूरे होंगे। इससे स्कूल खोलने से जुड़े निवेशक को अनावश्यक दौड़धूप नहीं करनी पड़ेगी। इन सुधारों को लागू करने की कार्यवाही माध्यमिक शिक्षा विभाग के स्तर से की जानी है। अपर मुख्य सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में शामिल दोनों कार्यों पर समयबद्ध कार्यवाही के लिए प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला को पत्र लिखा है। उन्हें कहा है कि इन सुधारों पर कार्यवाही कर 31 अक्तूबर तक केंद्र सरकार को बताया जाना है।


विभव टीम लीडर नियुक्त : औद्योगिक विकास विभाग ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित कार्यों के लिए विभव शुक्ला को उद्योग बंधु में टीम लीडर नामित किया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग से कहा गया है कि इस कार्य में किसी सहायता के लिए विभव के मोबाइल नंबर 7536881188 पर सहयोग ले सकते हैं।

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस, विभाग ने लिया फैसला

पॉलीटेक्निक के 3 लाख छात्रों की नहीं बढ़ेगी फीस

प्रदेश भर के राजकीय,अनुदानित और निजी पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले करीब 3 लाख छात्रों के लिए खुशखबरी है। प्राविधिक शिक्षा विभाग ने इस बार छात्रों की वार्षिक फीस नहीं बढ़ाने का फैसला लिया है।




प्राविधिक शिक्षा परिषद के सचिव संजीव सिंह ने बताया कि राजकीय पॉलीटेक्निक में छात्रों की फीस प्राविधिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से तय की जाती है। यह एक साल के लिए होती है। वर्तमान में यह 11326 रुपए है। वहीं, निजी संस्थानों में फीस बढ़ाने या पुनः निर्धारण करने का फैसला फीस नियमन समिति करती है। निजी संस्थानों के छात्रों को  करीब 30 हजार रुपए वार्षिक शुल्क जमा करना पड़ता है। इस बार उसमें भी किसी तरह की कोई बढ़ोतरी नहीं की है। 

फीस न बढ़ने की मांग कर रहे थे छात्र
पॉलीटेक्निक के छात्र मुहिम चलाकर सोशल मीडिया के माध्यम से लगातार मांग करते रहे हैं कि इस बार फीस न बढ़ाई जाए, क्योंकि लॉकडाउन के चलते उनके परिजनों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में फीस वृद्धि कर उन पर नया बोझ लादना सही नहीं होगा।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

निरंकुश खंड शिक्षा अधिकारी, अध्यापक परेशान, शिक्षक संघ की चुप्पी भी कर रही हैरान

निरंकुश खंड शिक्षा अधिकारी, अध्यापक परेशान, शिक्षक संघ की चुप्पी भी कर रही हैरान

 
प्रकरण एक- बीएसए ने बीईओ भरावन को फर्जी अध्यापक के विरुद्ध एफआइआर दर्ज कराने का आदेश दिया। बीईओ ने न केवल उसे मानने से मना किया बल्कि बीएसए के लिए भी खरी खोटी सुनाईं। जिसका वीडियो खूब वायरल हुआ, अब जांच हो रही है।


प्रकरण दो: बीईओ हरपालपुर पर विकास खंड क्षेत्र के ही अध्यापक ने उत्पीड़न का आरोप लगाया। मामला बेसिक शिक्षा मंत्री तक पहुंचा, जिसकी जांच का आदेश दिया गया, लेकिन धीरे धीरे फाइलों में खो गया। अध्यापक शिकायत करते घूम रहा है। 


 हरदोई: खंड शिक्षा अधिकारियों की विद्यालयों पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी होती है, लेकिन देखा जाए तो वही निरंकुश होते जा रहे हैं। खबर में शामिल दो मामले तो लिखापढ़ी में हैं। बीएसए के नाम पर रुपये मांगने का वायरल वीडियो बीईओ की निरंकुशता की गवाही दे रहा है और इसका खामियाजा अध्यापक भुगत रहे हैं। अध्यापकों का कहना है कि सीसीएल, प्रसूति अवकाश के तो रेट ही निर्धारित हैं। अध्यापकों को जरा जरा सा काम के लिए बीआरसी बुलाया जाता है।



 पाठ्य पुस्तकों को विद्यालयों तक पहुंचाने की धनराशि आती है, लेकिन अध्यापकों को निजी संसाधनों से किताबें ले जानी पड़ती हैं। जिले के 19 विकास खंडों में कई बीईओ सराहनीय काम कर रहे हैं, लेकिन कुछ पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगा देते। निरीक्षण के नाम पर शोषण किया जाता है। बीईओ के चहेते अध्यापक स्कूल नहीं जाते, लेकिन अन्य कोई देर से पहुंचे तो कार्रवाई निश्चित।



शिक्षक संघ भी साधे बैठा चुप्पी

शिक्षकों की परेशानी के आए दिन मामले सामने आते रहते हैं। देखा जाए तो बीएसए कार्यालय से लेकर बीआरसी तक शिक्षक-शिक्षिकाएं परेशान रहते हैं और उन्हें टरकाया जाता है, लेकिन शिक्षक संघ चुप्पी साधे बैठा है। जूनियर शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है कि जो भी मामला सामने आता है उसे उठाया जाता है और अध्यापकों का उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा।  प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय कोषाध्यक्ष शिवशंकर पांडेय का कहना है कि संघ अध्यापकों के साथ है। 


बीईओ की जहां भी लापरवाही सामने आती है। कार्रवाई होती, उन्हें नोटिस जारी किया जाता है। किसी भी अध्यापक को परेशान नहीं होने दिया जाएगा। अगर कोई परेशानी है तो विद्यालय के समय के बाद अध्यापक उन्हें मिलकर या फोन कर अपनी परेशानी बता सकता है। जो बीईओ निरंकुशता कर रहे हैं, उन पर भी कार्रवाई हो रही है। -हेमंतराव, बीएसए

जीपीएफ ट्रांसफर : कई डीआईओएस पर गिर सकती है कार्रवाई गाज

जीपीएफ ट्रांसफर : कई डीआईओएस पर गिर सकती है कार्रवाई गाज।

प्रयागराज : भविष्य निधि खातों धनराशि ट्रांसफर में लापरवाही पर कई से जिला विद्यालय निरीक्षकों पर कार्रवाई हो सकती है। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा डॉ. महेन्द्र देव ने उप शिक्षा निदेशकों को पत्र लिखकर मंडलवार ब्योरा मांगा है। रिपोर्ट मिलने पर शासन को कार्रवाई को प्रस्ताव भेजा जाएगा।



अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के भविष्य निर्वाह निधि खाते में 31 मार्च 2002 को लेखाशीर्षक 8338 स्थानीय निधियों की जमा में बैलेंस धनराशि को लेखाशीर्षक 8009 राज्य भविष्य निधि में ट्रांसफर करने को निर्देशित किया गया था। लेकिन अधिकांश जिलों में यह धनराशि ट्रांसफर नहीं की गई। इस लापरवाही से वर्तमान में बहुत अधिक धनराशि की आवश्यकता है। इसे गंभीरता से लेते हुए शासन ने जनपदों के अधिकारियों का उत्तरदायित्व निर्धारित करते हुए उन पर कार्रवाई का प्रस्ताव भेजने के लिए अपर निदेशक को निर्देशित किया है।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

69000 शिक्षक भर्ती : स्कूल प्रबंधक समेत सभी आरोपी होंगे भगोड़ा घोषित

69000 शिक्षक भर्ती : स्कूल प्रबंधक समेत सभी आरोपी होंगे भगोड़ा घोषित।

प्रयागराज : 69000 सहायक शिक्षक भर्ती में वांटेड स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव समेत अन्य के खिलाफ गैर जमानती वारंट लेने के बाद अब एसटीएफ उन्हें भगोड़ा घोषित कराने में लगी है । कोर्ट खुलते ही कार्रवाई की जाएगी। उन पर इनाम घोषित कराया जाएगा। इस दौरान अगर उनकी गिरफ्तारी नहीं हुई तो पुलिस कोर्ट के आदेश पर उनके घरों की कुर्की करेगी।



69000 शिक्षक भर्ती में फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपियों में स्कूल प्रबंधकचंद्रमा यादव, प्रतापगढ़ का दुर्गेश, भदोही के मायावती दुबे और डॉक्टर कृष्ण लाल पटेल के रिश्तेदार समेत सात आरोपियों की गिरफ्तारी बाकी है। एसटीएफ ने शनिवार को ही अभ्यर्थी बलवंत पटेल को गिरफ्तार करके भेजा था जिसने डॉक्टर केएल पटेल से मिलकर अभ्यर्थियों को पास कराने के नाम पर लाखों रुपए दिलवाए थे। उससे पूछताछ कर एसटीएफ को इस फर्जीवाड़ा करने वाले गैंग के बारे में कई जानकारी मिली है।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

स्कूल परिसरों से 50 मीटर की दूरी तक जंक फूड की बिक्री पर रोक की तैयारी

स्कूल परिसरों से 50 मीटर की दूरी तक जंक फूड की बिक्री पर रोक की तैयारी

 
 स्कूली बच्चों के लिए सुरक्षित और पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य क्षेत्र के नियामक एफएसएसएआइ ने कमर कस ली है। इसीलिए स्कूलों की कैंटीनों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में ‘जंक फूड’ और बीमार करने वाले भोज्य पर्दाथों की बिक्री और उसका विज्ञापन करने पर रोक लगाने की तैयारी कर ली है। इसके साथ ही स्कूल और कालेज परिसरों से पचास मीटर की दूरी तक भी इनकी ब्रिकी और प्रचार निषिद्ध किया जाएगा। इस बीच, एफएसएसएआइ को ‘ईट इंडिया मूवमेंट विजन’ के तहत फूड सिस्टम विजन ईनाम मिला है।


भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) के सीईओ अरुण सिंघल ने रविवार को बताया कि यह संस्था अब पहली बार खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत एक नई नियमावली लेकर आ रही है। इन नये नियमों का मकसद स्कूलों के बच्चों को सुरक्षित, पौष्टिक और सेहतमंद भोजन उपलब्ध कराना होगा। एफएसएसएआइ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नये नियम इसलिए बनाए जा रहे हैं ताकि स्कूली बच्चों को अधिक वसा, नमक और शर्करा वाला खाद्य पदार्थ स्कूल में या उसके आसपास नहीं मिले। सेहत के लिए बेहद हानिकारक जंक फूड स्कूलों की कैंटीनों या मेस परिसरों या हॉस्टल मेस में बेचना बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा, शिक्षण संस्थानों के बाहर 50 मीटर की दूरी तक भी जंक फूड जैसे चिप्स, कोल्ड डिंक्स, बर्गर, पीजा आदि की बिक्री पर रोक रहेगी। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में अधिसूचना जारी होने के बाद हरेक स्कूल को इसका सख्ती से पालन करना होगा।

लापरवाही : बीएड प्रवेश परीक्षा में हिंदी का सवाल रिपीट, अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति

लापरवाही : बीएड प्रवेश परीक्षा में हिंदी का सवाल रिपीट, अभ्यर्थियों ने दर्ज कराई आपत्ति

 
बीएड प्रवेश परीक्षा का पेपर तैयार करने में हुई लापरवाही सामने आई है। पहली पाली में सामान्य ज्ञान और हिंदी के पेपर में हिंदी का सवाल दो बार पूछ लिया गया। अभ्यर्थियों के बीच असमंजस की स्थिति है कि अब मार्किंग किस आधार पर की जाएगी। हालांकि, अभ्यर्थियों को पेपर सामान्य और संतुलित लगा, लेकिन तर्कशास्त्र के सवालों ने अभ्यर्थियों को उलझाया।


पहली पाली में सामान्य ज्ञान के 50 सवाल और हिंदी अथवा अंग्रेजी में से किसी एक विषय के 50 सवाल यानी कुल 100 सवाल हल करने थे। दूसरी पाली की परीक्षा में तर्कशास्त्र और विषय के 50-50 सवाल थे। तीन-तीन घंटे की दो पालियों में कुल 100-100 सवाल हल करने थे। पहली पाली में हिंदी का एक सवाल रिपीट हुआ है।


बुकलेट संख्या - जे में 75वें और 88वें नंबर पर एक ही सवाल दो बार पूछा गया, ‘निम्नलिखित में रूढ़ शब्द कौन सा है?’ अभ्यर्थियों को समझ में नहीं आया कि दोनों सवालों का जवाब दें या एक ही बार उत्तर दें। कुछ ने दो तो कुछ ने एक बार ही उत्तर दिया। अभ्यर्थियों के बीच इस बात को लेकर असमंजस है कि मार्किंग किस आधार पर की जाएगी? 


सामान्य ज्ञान में कोरोना से जुड़ा कोई सवाल नहीं पूछा गया। अभ्यर्थी इस आधार पर अनुमान लगा रहा है कि पेपर सेटिंग काफी पहले ही तैयार कराया जा चुका था, क्योंकि पहले यह परीक्षा अप्रैल में प्रस्तावित थी लेकिन लॉकडाउन के कारण स्थगित हो गई थी। दौलत हुसैन इंटर कॉलेज केंद्र में परीक्षा देने जौनपुर से आईं सृष्टि ने बताया कि जो पढ़ा था, उसमें से बहुत कम सवाल पूछे गए। सोनी यादव ने बताया कि पेपर संतुलित था, वहीं नीतू यादव का कहना था कि पेपर कठिन आया। अभ्यर्थी नीतू और प्रतिभा के मुकाबले पिछले साल के मुकाबले इस बार तर्कशास्त्र से जुड़े सवाल ज्यादा कठिन थे। 

परीक्षा कक्ष में मानक से अधिक बैठाए गए अभ्यर्थी
परीक्षा केंद्रों के लिए अभ्यर्थियों को बैठाने के मानक तय किए गए थे। एक कक्ष में अधिकतम 24 अभ्यर्थियों को ही बैठाया जा सकता था, लेकिन डीपी गर्ल्स इंटर कॉलेज में एक-एक कमरे में 28-28 अभ्यर्थियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। वहीं, आर्य कन्या कॉलेज के ऊपरी तल पर स्थित कमरों में भी मानक से अधिक अभ्यर्थियों को बैठाया गया था।

बीएड परीक्षा में कोरोना से बचाव के निर्देशों के उल्लंघन पर नूतन ठाकुर ने की परीक्षा आयोजकों पर एफआईआर की मांग

बीएड परीक्षा में कोरोना से बचाव के निर्देशों के उल्लंघन व सोशल डिस्टेंसिंग के पालन न करने पर परीक्षा आयोजकों पर एफआईआर की मांग 

 
एक्टिविस्ट डॉ नूतन ठाकुर ने आज हुए बीएड परीक्षा में सोशल डिस्टेंस तथा कोरोना से बचाव के समस्त निर्देशों का पूरी तरह से खुलेआम उल्लंघन होने के संबंध में परीक्षा संचालक लखनऊ विश्वविद्यालय के अधिकारीगण के खिलाफ एफआईआर दर्ज किये जाने की मांग की है. 


प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे अपने पत्र में नूतन ने कहा कि जहाँ एक ओर केंद्र एवं राज्य सरकारें निरंतर कोरोना से बचाव के लिए नए-नए निर्देश दे रही है, वहीँ इस परीक्षा ने इन पूरे प्रयासों को मिटटी में मिला दिया, जहाँ लाखों की संख्या में अभ्यर्थी एवं अन्य लोग बहुत ही भीड़ भाड़ वाले स्थानों पर एकसाथ एकत्र हुए तथा सोशल डिस्टेंस का नियम पूरी तरह दरकिनार हो गया और लोक स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ हुआ.


नूतन ने कहा कि परीक्षा संचालक इन तथ्यों से पूरी तरह भिज्ञ थे और उनसे हजारों अभ्यर्थियों से अनुरोध भी किया, इसके बाद भी वे जानबूझ कर इस ओर पूरी तरह लापरवाह रहे. 
अतः उन्होंने उत्तरदायी अधिकारीगण के विरुद्ध महानगर थाना, लखनऊ में एफआईआर की मांग की है. साथ ही उन्होंने 16 अगस्त 2020 को यूपी लोक सेवा आयोग द्वारा संपादित होने वाले बीईओ (खंड शिक्षा अधिकारी) प्रवेश परीक्षा को स्थगित किये जाने की भी मांग की है.

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : हिंदी और रीजनिंग के प्रश्नों में उलझे परीक्षार्थी, सामान्य ज्ञान भी रहा टफ

यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा : हिंदी और रीजनिंग के प्रश्नों में उलझे परीक्षार्थी, सामान्य ज्ञान भी रहा टफ


उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा में प्रश्नपत्रों को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाए। तर्कशास्त्र (रीजनिंग) के सवालों ने भी अभ्यर्थियों को खूब उलझाया। बीएड प्रवेश परीक्षा में पहली पाली में अंग्रेजी अथवा हिंदी के 50 सवाल पूछे गए थे। इसके अलावा सामान्य ज्ञान से 50 सवाल थे। हिंदी का पर्चा सामान्य जरूर था, लेकिन बुकलेट संख्या जे में प्रश्न संख्या 75 और 88 एक ही था। इसमें पूछा गया था कि निम्नलिखित में रूढ़ शब्द कौन सा है। दोनों में विकल्प भी एक थे।


अभ्यर्थियों ने बताया कि सभी बुकलेट में इस सवाल का दोहराव था। ऐसे में इसका मूल्यांकन कैसे होगा, इस पर भी सवाल उठ रहे हैं। इसके बाद दूसरी पाली में विषय से संबंधित 50 सवाल और तर्कशास्त्र के 50 सवाल पूछे गए थे। अभ्यर्थियों की मानें तो तर्कशास्त्र के सवालों ने उन्हें खूब उलझाया। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसके पहले प्रस्तावित परीक्षा का जो पर्चा तैयार किया गया था उससे ही पेपर करा लिया गया। क्योंकि, कोरोना महामारी से जुड़े एक भी सवाल नहीं पूछे गए थे।


जीके के प्रश्नों ने किया परेशान
बीएड प्रवेश परीक्षा में जनरल नॉलेज के सवालों ने छात्रों को खासा परेशान किया। परीक्षार्थियों ने कहा कि कोरोना काल में परीक्षा को लेकर असमंजस रहा। इससे परीक्षा की तैयारी नहीं हो सकी। पेपर कठिन रहा। 


लूकरगंज परीक्षा केंद्र के संदीप ने कहा कि केंद्र पर सेनिटाइजर नहीं रहा। अमूमन प्रश्न सरल रहा लेकिन जनरल नॉलेज थोड़ा कठिन था। वहीं, प्रमोद कुमार ने कहा परीक्षा अच्छी रही। पहली पाली में अच्छा पेपर हुआ लेकिन दूसरी पाली में थोड़ा कठिन था। जनरल नॉलेज से कठिन प्रश्न पूछे गए थे।


सचिन मौर्य ने बताया कि डीवीएस जीपी गोविंदपुर परीक्षा केंद्र पर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई गई। परीक्षा मॉडल साधारण था, सबसे ज्यादा प्रश्न जनरल नॉलेज से पूछे गए। वहीं, धर्मेंद्र पटेल ने कहा कि दूसरी पॉली के प्रश्नपत्र में जनरल नॉलेज के प्रश्न काफी कठिन रहे। केंद्र पर कोविड-19 से निपटने के लिए उचित उपाय नहीं किए गए थे।