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Monday, August 31, 2020

हाथरस : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नामांकित छात्राओं को स्थानीय विद्यालयों में नामांकित करने के सम्बन्ध में

हाथरस : कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में नामांकित छात्राओं को स्थानीय विद्यालयों में नामांकित करने के सम्बन्ध में

हाथरस : परिषदीय शिक्षक/कर्मचारियों के फॉर्म-16 व 26AS में भिन्नता होने पर 15 सितम्बर तक प्रार्थना पत्र देकर त्रुटि निवारण के सम्बन्ध में

हाथरस : परिषदीय शिक्षक/कर्मचारियों के फॉर्म-16 व 26AS में भिन्नता होने पर 15 सितम्बर तक प्रार्थना पत्र देकर त्रुटि निवारण के सम्बन्ध में



फतेहपुर : सौ परिषदीय स्कूलों में लगेंगे सोलर प्लांट, बिजली के साथ पीने के लिए मिलेगा शुद्ध पानी

फतेहपुर : सौ परिषदीय स्कूलों में लगेंगे सोलर प्लांट, बिजली के साथ पीने के लिए मिलेगा शुद्ध पानी।

फतेहपुर। जिले के 100 परिषदीय स्कूलों में शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था में तीन करोड़ खर्च किया जाएगा। इसके लिए सोलर एनर्जी प्लांट लगाए जाएंगे। प्रत्येक स्कूल में करीब तीन लाख की लागत से सोलर एनर्जी प्लांट लगाने का काम शुरू हो गया है।




जिले के 10 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय मिलाकर कुल 100 परिषदीय विद्यालय सुविधा के लिए सूचीबद्ध किए गए हैं। प्रत्येक स्कूल में तीन बड़े पैनल, पांच पंखे, ओवरहेड टैंक और सबमर्सिबल पंप लगाए जाने का प्रावधान है। सोलर एनर्जी प्लांट लगने के बाद इन स्कूलों में दिन के समय बिजली आपूर्ति मिलेगी। इसी के साथ आरओ का शुद्ध पीने का पानी मिलेगा। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन ने सोलर एनर्जी प्लांट लगाने के लिए सीधे नेडा को बजट दे दिया है। कार्यदायी संस्था ने प्लांट लगाने  का काम प्रारंभ कर दिया है। यह काम अगले महीने तक पूरा हो जाएगा।




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E -Gyan Ganga वर्चुअल स्कूल : कक्षा 9, 10 का स्वयंप्रभा 22 चैनल व कक्षा 11, 12 का दूरदर्शन DD UP के जरिये शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से प्रसारण का द्वितीय चरण का TIME TABLE जारी

E -Gyan Ganga वर्चुअल स्कूल : कक्षा 9, 10 का स्वयंप्रभा 22  चैनल व कक्षा 11, 12 का दूरदर्शन DD UP के जरिये शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से प्रसारण का द्वितीय चरण का TIME TABLE जारी

माध्यमिक : नवचयनित सहायक अध्यापकों को सितंबर में मिलेगी नियुक्ति, शासनादेश जल्द जारी होगा

नवचयनित सहायक अध्यापकों को सितंबर में मिलेगी नियुक्ति, शासनादेश जल्द जारी होगा


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग में नवचयनित सहायक अध्यापकों को नियुक्ति सितंबर में दी जाएगी। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि नवचयनित शिक्षकों को ऑनलाइन नियुक्ति देने के साथे उनको ट्रेनिंग भी कराई जाएगी। ट्रेनिंग के लिए कार्यक्रम और पाठ्यक्रम तय किया जा रहा है। नियुक्ति और उसकी प्रक्रिया का शासनादेश जल्द जारी होगा। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से वर्ष 2018 में सहायक अध्यापक के 10 हजार 768 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने अब तक हिंदी, सामाजिक विज्ञान को छोड़कर शेष विषयों में चयनित 3457 अभ्यर्थियों को सूची विभाग को सौंप दी है। विभाग ने नवचयनित शिक्षकों को सितंबर में स्कूलों में नियुक्ति देने की तैयारी शुरू की है। रिक्त पदों की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम अभ्यर्थी चयनित होने के कारण नियुक्ति के मापदंड बनाए जा रहे हैं जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में भी आवश्यकतानुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जा सके। अभ्यर्थियों को वरीयता के अनुसार नियुक्ति के लिए स्कूलों का विकल्प देना होगा।

उच्च शिक्षा : शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 दावेदार, नौ शिक्षकों को मिलेंगे ‘सरस्वती’, ‘शिक्षक श्री’ सम्मान

उच्च शिक्षा : शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 दावेदार।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने शुरू की आवेदनों की मार्किंग

नौ शिक्षकों को मिलेंगे ‘सरस्वती’, ‘शिक्षक श्री’ सम्मान


प्रयागराज। उच्च शिक्षा में राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए प्रदेश भर से 130 शिक्षकों ने दावेदारी की है। उच्च शिक्षा निदेशालय में आए आवेदनों की मार्किंग शुरू कर दी गई है। मार्किंग के बाद ये नाम शासन को भेजे जाएंगे और इसके बाद इन्हीं में से नौ शिक्षकों के नाम राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चयनित किए जाएंगे।
पुरस्कार वितरण समारोह शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर चार सितंबर को आयोजित किया जाएगा। समारोह लखनऊ में होंगे और चयनित शिक्षक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों सम्मानित किए जाएंगे।


राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश भर के राज्य विश्वविद्यालयों, राजकीय महाविद्यालयों और अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों से आवेदन थे। प्रदेश के कुल 130 शिक्षकों ने पुरस्कार के लिए दावेदारी की है। इन सभी के आवेदन उच्च शिक्षा निदेशालय को मिल गए हैं और अब इनकी मार्किंग की जा रही है।



शिक्षकों की योग्यता, कक्षाओं में उनकी उपस्थित, सेमिनार/कांफ्रेंस में भागीदारी, पूर्व में मिले पुरस्कार एवं अन्य बिंदुओं के आधार पर आवेदनों की मार्किंग की जाएगी। इसके बाद मार्किंग के अनुसार क्रमवार शिक्षकों के नाम रखा जाएंगे और 130 शिक्षकों की सूची शासन को प्रेषित कर दी जाएगी।


उच्च शिक्षा निदेशाक डॉ. वंदना शर्मा ने बताया कि शासन स्तर पर गठित कमेटी उच्च शिक्षा निदेशालय से भेजी गई सूची की समीक्षा करेंगी। इसके बाद मार्किंग के हिसाब से सूची में शामिल नौ सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के नाम छांटकर अलग कर लिए जाएंगे। इनमें से तीन शिक्षकों को ‘सरस्वती सम्मान’ दिया जाएगा, जिसके तहत तीन-तीन लाख रुपये का नगद पुरस्कार मिलेगा।


वहीं, छह शिक्षकों को ‘शिक्षक श्री’ सम्मान के तहत डेढ़-डेढ़ लाख रुपये पुरस्कार स्वरूप दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री लखनऊ में शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर चार सितंबर को शिक्षकों को सम्मानित करेंगे।

यूपी बोर्ड : ऑनलाइन क्लास और टीवी से पढ़ाई बनी टेंशन, स्कूल के टाइम टेबल और ई गंगा की क्लास में फंसे छात्र

यूपी बोर्ड : ऑनलाइन क्लास और टीवी से पढ़ाई बनी टेंशन, स्कूल के टाइम टेबल और ई गंगा की क्लास में फंसे छात्र।

लखनऊ : स्कूलों की ऑनलाइन क्लास और ई गंगा कार्यक्रम में तालमेल की कमी का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है।

आलोक कुमार आशियाना के एक निजी स्कूल में यूपी बोर्ड दसवीं का छात्र है । लॉक डाउन शुरू होने पर इनके स्कूल में ऑनलाइन क्लास शुरू की गई। यूट्यूब चैनल बनाया गया। शिक्षक वीडियो अपलोड करते हैं। ऑनलाइन क्लास भी चलाई जा रही है। शासन के निर्देश पर ई - गंगा प्रोग्राम का प्रसारण भी देख रहे हैं। आलोक कहते हैं कि पहले स्कूल की ऑनलाइन क्लास और उसके बाद टीवी पर प्रसारित होने वाली क्लास देखते हैं।






स्कूल में कुछ और पढ़ा रहे हैं। टीवी पर कोई और टॉपिक चल रहा है। दोनों एक साथ चलने के कारण एक भी समझ में नहीं आ रहा है। यह हाल सिर्फ आलोक का नहीं है। यूपी बोर्ड के ज्यादातर छात्र परेशान हैं।


09 वीं से लेकर 12वीं तक के छात्र परेशान

02 से अधिक विषय एक दिन में नहीं पढ़ाते।

एक दिन में एक-दो सब्जेक्ट बाकी का क्या होगा : शिक्षकों की माने तो स्वयं प्रभा या दूरदर्शन के माध्यम से होने वाली कक्षाओं की सीमाएं हैं। सिर्फ 9 वीं कक्षा में एक दिन में एक दो विषय की क्लास चैनल पर प्रसारित होती हैं। ऐसे में अन्य विषयों का क्या होगा?

उसकी तैयारी छात्र कैसे करेंगे? इन सवालों के जवाब भी फिलहाल किसी के पास नहीं है।


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यूपी बोर्ड : 412 स्कूलों को मिली इंटर की मान्यता

यूपी बोर्ड : 412 स्कूलों को मिली इंटर की मान्यता।

यूपी बोर्ड : 2022 की बोर्ड परीक्षा के लिए 412 स्कूलों को इंटर की मान्यता मिली है। विशेष सचिव आर्यका अखौरी ने 29 अगस्त को इंटरमीडिएट स्तर पर नवीन, अतिरिक्त विषय एवं अतिरिक्त वर्ग की मान्यता के आदेश जारी कर दिए। हालांकि हाईस्कूल की मान्यता के आदेश अभी जारी नहीं हो सके। नियमानुसार यह आदेश एक अप्रैल को सत्र शुरू होने से पहले ही जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन कोरोना के कारण पांच महीने का समय लग गया। इन स्कूलों में वर्तमान सत्र में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राएं 2021 में 11वीं की परीक्षा देंगे और 2022 में बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित किया जाएगा।





आदेश के मुताबिक सर्वाधिक 142 मान्यता प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय के अधीन स्कूलों को मिली है। मेरठ के 95, वाराणसी के 92, गोरखपुर के 59 और बरेली क्षेत्रीय कार्यालय के 24 स्कूलों को मान्यता दी गई है। सूत्रों के अनुसार मानक पूरा न करने के कारण कुछ स्कूलों को मान्यता जारी नहीं की गई है। जल्द ही यूपी बोर्ड की वेबसाइट पर स्कूलों के मान्यता आदेश अपलोड कर दिए जाएंगे ताकि स्कूल प्रबंधकों को चक्कर न काटना पड़े। गौरतलब है कि इस साल महज 173 स्कूलों ने नवीन मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें हाईस्कूल के 82 और इंटर के 91 स्कूलों ने नवीन मान्यता के लिए आवेदन किया है। 42 स्कूल ऐसे हैं जो पूर्व से संचालित हैं और जिन्होंने नये विषय या वर्ग की मान्यता के लिए आवेदन किया है।


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फतेहपुर : अरविंदो सोसाइटी जिले में बनाएगी 20 रोल मॉडल स्कूल, देखें योजना के प्रमुख बिंदु

फतेहपुर : अरविंदो सोसाइटी जिले में बनाएगी 20 रोल मॉडल स्कूल।

फतेहपुर : जिले 2650 परिषदीय स्कूलों में से 20 को नामचीन बनाकर बेसिक शिक्षा के क्षितिज में चमकाया जाएगा। निजी तौर पर काम करने वाली संस्था के सहयोग से चयनित स्कूल में इनोवेटिव (नवाचारी) पाठशाला भी लगाई जाएगी। इसके साथ हीस्कूल की बेहतरी के लिए किए गए प्रयासों की प्रदर्शनी जिले व मंडल स्तर पर लगेगी।

बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने जिले के 20 परिषदीय स्कूलों को रोल मॉडल के रूप में स्थापित करने का निर्णय लिया है। संस्था अरविदों सोसाइटी के साथ विभाग ने हाथ मिलाया है। इनोवेटिव प्रोग्राम के तहत चयनित विद्यालयों को चमकाया जाएगा। खासबात यह है कि इस मिशन में विभाग को अनुमति के सिवा कुछ भी नहीं देना होगा। सारे खर्च संस्था करेगी। खुद के शोधपरक कार्यक्रमों का पढ़ाई में प्रयोग करने के साथ ही शिक्षकों के खुद के बेहतर विकल्पों का संयुक्त संयोजन इन विद्यालयों में दिखेगा।








योजना के प्रमुख बिद

- बीएसए के समन्वय से चयनित होंगे 20 परिषदीय स्कूल।

- एक दिवसीय इनोवेटिव कार्यशाला का जिला स्तर पर होगा आयोजन।

- संस्था द्वारा 20 विद्यालयों में वेबीनार के माध्यम से शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण।

- शिक्षकों का बेहतर अभिलेखीकरण चयनित विद्यालयों में क्रियान्वयन होगा।

- विद्यालयों में नवाचारी पाठशाला के आयोजन होंगे।

- पांच विद्यालयों की केस स्टडी का अभिलेखीय डाटा तैयार किया जाएगा।

- संस्था द्वारा जिला और मंडल स्तर पर शैक्षिक प्रदर्शनी का आयोजन जनवरी में होगा।

...............

महानिदेशक बेसिक शिक्षा के निर्देश पर मॉडल स्कूलों का चयन किया जाना है। इसकी गाइड लाइन जारी की गई। संस्था के सहयोग से उसका क्रियान्वयन कराया जाएगा। मॉडल स्कूलों से निश्चित तौर पर शिक्षा का स्तर सुधरेगा।

-शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए


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Sunday, August 30, 2020

बीएड में प्रवेश हेतु काउंसलिंग और परीक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी

बीएड में प्रवेश हेतु काउंसलिंग और परीक्षा के लिए नई गाइडलाइन जारी



कोरोना काल में बीएड के प्रवेश से लेकर वार्षिक परीक्षा कराने की गाइडलाइन नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन एनसीटीई ने जारी कर दी है। एहतियात के साथ कॉलेजों में प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाए, जबकि पढ़ाई के 200 दिन पूरे होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन परीक्षा करा सकते हैं। 


बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा हो चुकी है। अब पांच सितंत्र को परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया जाएगा। इसके बाद काउंसिलिंग व कॉलेजों में प्रवेश देने का सिलसिला शुरू होगा। बीएड कॉलेजों में प्रवेश के मद्देनजर एनसीटीई ने गाइडलाइन बनाई है। यह गाइडलाइन कॉलेज में काउंसिलिंग के लिए आने वाले उम्मीदवारों के लिए है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सभी के दूर-दूर बैठने की व्यवस्था की जाएगी। 



यह हैं प्रवेश की गाइडलाइन

● एक कक्ष में एक ही काउंटर होगा। प्रत्येक काउंटर के सामने दो गज की
● दूरी पर सफेद गोले बनाए जाएं। उनगोलों में ही छात्र-छात्राओं को खड़ा किया जाए।
● ऐसे में मास्क का उपयोग करना जरूरी है।
● टोकन से छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाए।
● प्रवेश के दौरान उनकी थर्मल स्क्रीनिंग हो।
● शौचालय, पेजयल वाले स्थलों को सैनिटाइज किया जाए।
● काउंसलिंग के दौरान दस्तावेज सत्यापन के स्थान सैनिटाइज किए जाए।
● कॉलेजों में कर्मचारियों की रोटेशन में झ्यूटी लगाई जाए।


छात्रों को वार्षिक परीक्षा का इंतजार
सीएसजेएमयू के विद्यार्थी बीएड की वार्षिक परीक्षा का इंतजार पांच महीने से कर रहे हैं। नियमानुसार प्रवेश से 200 दिन पढ़ाई पूरी होने के बाद वार्षिक परीक्षा हो जानी चाहिए। पढ़ाई प्रारंभ हुए नौ महीने बीत चुके हैं, जबकि जो परीक्षा कराने की जो गाइडलाइन एनसीटीई की है, उसके अंतर्गत मानक के अनुसार कक्षाएं लगे पांच महीने से ऊपर बीत चुका है। स्ववित्तपोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी का कहना है कि एनसीटीई से संपर्क किए जाने पर बताया गया कि परीक्षा कराना विवि की जिम्मेदारी है। अगर कक्षाएं पूरी लग चुकी है तो परीक्षा आयोजित कराई जा सकती हैं।

मिडिल स्कूल स्तर से कृषि की पढ़ाई को पीएम मोदी ने बताया जरूरी

मिडिल स्कूल स्तर से कृषि की पढ़ाई को पीएम मोदी ने बताया जरूरी


नई दिल्ली/झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, कृषि से जुड़ी शिक्षा को स्कूल में माध्यमिक स्तर पर ले जाना जरूरी है। 


झांसी में रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक व प्रशासनिक भवन का शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से उद्घाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा, प्रयास है कि गांव में मिडिल स्कूल स्तर पर ही कृषि विषय को शुरू किया जाए। इससे खेती का वैज्ञानिक तरीके से विस्तार होगा। बच्चे खेती से जुड़ी तकनीक के बारे में परिवार को बता पाएंगे।

फतेहपुर : अब टैबलेट से होगी डिजिटल लर्निंग की मॉनीटरिंग, सभी एआरपी और प्रधानाध्यापकों को जल्द मिलेंगे टैबलेट

फतेहपुर : अब टैबलेट से होगी डिजिटल लर्निंग की मॉनीटरिंग, सभी एआरपी और प्रधानाध्यापकों को जल्द मिलेंगे टैबलेट।

फतेहपुर : कोरोना संक्रमण को देखते हुए डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने के प्रशिक्षण भी दिया जाएगा टैबलेट के जरिए विद्यार्थियों को रोचक तरीके से पढ़ाई के लेक्चर रिकार्ड कर सकें। एकेडमिक रिसोर्स पर्सन्स (एआरपी) को भी टैबलेट दिए जाएंगे। इसके लिए भारत सरकार द्वारा बजट भी जारी कर दिया गया है। प्रदेश सरकार से हरी झंडी मिलते ही प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। कोरोना काल में परिषदीय लिए सभी परिषदीय स्कूलों को टैबलेट दिए जाएंगे।




शिक्षकों को विद्यालयों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। इसके लिए सरकार हर सम्भव प्रयास कर रही है। अधिकतर छात्र-छात्राएं ग्रामीण क्षेत्र से हैं। यहां अभिभावक मजदूरी कर के बमुश्किल परिवार का पालन पोषण कर पा रहा है। कोरोना काल में लॉक डाउन में ग्रामीणों की कमर तोड़ रखी है। कई शिक्षकों के पास भी एंड्राइड मोबाइल नहीं हैं। जिसके पास हैं भी तो शिक्षक अनलाइन पढ़ाई में आनाकानी कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि विभागीय कई एप्स हैं। इसकी बजह से उनके मोबाइल हैंग करने लगते हैं। शासन ने शिक्षा देने के लिए नए शिक्षा सत्र के लिए समग्र शिक्षा अभियान के तहत करोड़ो रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। डीसी अखिलेश सिंह ने बताया कि केन्द्र से बजट पास हुआ है।

हर बिंदु पर व्यवस्था होगी बेहतर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित प्राथमिक तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था के साथ साथ भवन निर्माण व विस्तार तथा फर्नीचर, शैक्षिक सामग्री व स्वच्छता एक्शन प्लान, गुणवत्ता सुधार के लिए बजट मिला है। स्कूलों में पीने के साफ पानी की व्यवस्था की जाएगी तथा विद्युतीकरण के साथ ही जर्जर भवनों का ठीक कराया जाएगा। छात्राओं को आत्मरक्षा बनाने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

आंकड़ों पर एक नजर :
जिले में कुल एआरपी- 53
जिले में कुल स्कूल- 2128
कुल प्रधानाध्यापक- 2128

सभी एआरपी व प्रधानाध्यापकों को जल्द मिलेंगे टैबलेट,  डिजिटल लर्निंग को बढ़ावा देने को भारत सरकार से बजट जारी।


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स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट

स्कूल खुलने तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते : दिल्ली हाईकोर्ट


दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने कहा है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक (Annual Charge) और विकास शुल्क (Development Fee) नहीं लिए जा सकते।


जस्टिस जयंत नाथ ने 25 अगस्त को एक निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। याचिका में स्कूल द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने को चुनौती दी गई है।


हाईकोर्ट ने जुलाई महीने से अगले आदेश तक अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से स्कूलों को रोक दिया है। अदालत ने दिल्ली सरकार और स्कूल को भी एक नोटिस जारी कर अभिभावकों के संगठन की याचिका पर उनका पक्ष जानना चाहा है। अदालत मामले पर आगे 16 सितंबर को सुनवाई करेगी।


वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये सुनवाई के दौरान स्कूल ने दलील दी कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वाषिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं।


दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीश ने कहा कि पहली नजर में, मेरी राय में ऐसा लगता है कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिए जा सकते। अदालत ने कहा कि अभिभावकों को ट्यूशन फीस देनी होगी।

विश्वविद्यालय व डिग्रीकॉलेजों में इस बार बढ़ेंगी ज्यादा सीटें, विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ने का भेजेंगे प्रस्ताव, मिलेगी मंजूरी - उप मुख्यमंत्री

विश्वविद्यालय व डिग्रीकॉलेजों में इस बार बढ़ेंगी ज्यादा सीटें, विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ने का भेजेंगे प्रस्ताव, मिलेगी मंजूरी - उप मुख्यमंत्री।


कोरोना के कारण दूसरे राज्य में पढ़ने नहीं जा हे सूबे के विद्यार्थी

कोरोना महामारी के कारण इस बार दूसरे राज्यों में उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए बहुत कम विद्यार्थी जा रहे हैं। वहीं इस वर्ष इंटरमीडिएट का रिजल्ट भी काफी अच्छा गया है। ऐसे में यूपी के विश्वविद्यालयों व डिग्री कॉलेजों में बीते सालों के मुकाबले दो से तीन गुने तक फार्म आए हैं। एक-एक सीट पर दाखिले के लिए जबरदस्त मुकाबला है, मगर उच्च शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों को राहत देने का फैसला किया है। हर साल करीब 33 फीसद तक सीटें बढ़ती है मगर इस बार  बीते वर्षों के मुकाबले स्नातक व परास्नातक कोर्सेज में कहीं ज्यादा सीटें बढ़ाई जाएंगी।




उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि विश्वविद्यालय जितनी भी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव भेजेंगे उन्हें महामारी को देखते हुए मंजूर कर दिया जाएगा। ताकि विद्यार्थियों को आसानी से दाखिला मिल सके। यूपी में 16 राज्य विश्वविद्यालय, 27 निजी विश्वविद्यालय, को डीम्ड विश्वविद्यालय व एक मुक्त विश्वविद्यालय है। वहीं 170 राजकीय डिग्री कॉलेज, 331 एडेड डिग्री कॉलेज व 6682 सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेज हैं। यहां स्नातक की करीब नौ लाख सीटें और परास्नातक की दो लाख सीटें हैं।

इंटरमीडिएट यूपी बोर्ड में ही करीब 18.54 लाख विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं, इसके अलावा अन्य बोर्ड के  विद्यार्थी भी शामिल हैं। फिलहाल  बीए, बीएससी व बीकॉम की हर साल करीब 33 फीसद तक सीटें बढ़ाई जाती रहेंगी लेकिन इस बार जरूरत के अनुसार 50%या इससे भी अधिक सीटें बढ़ाई जाएंगी।


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यूपी बोर्ड : 9वीं व 11वीं में प्रवेश के लिए कल आखिरी मौका, 31 अगस्त तक निर्धारित की है बोर्ड ने तारीख

यूपी बोर्ड : 9वीं व 11वीं में प्रवेश के लिए कल आखिरी मौका, 31 अगस्त तक निर्धारित की है बोर्ड ने तारीख।

प्रयागराज : यूपी बोर्ड के तहत संचालित विद्यालयों में 9वीं व 11वीं में प्रवेश लेने के लिए छात्र-छात्राओं के लिए कल यानी सोमवार को आखिरी मौका है। अगर प्रवेश लेने से चूके तो आगे मौका नहीं मिलेगा। फिर पूरा साल खराब हो जाएगा, क्योंकि यूपी बोर्ड प्रवेश की तारीख बढ़ाने के मूड में नजर नहीं आ रहा है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए यूपी बोर्ड प्रवेश व रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ा चुका है।



यूपी बोर्ड ने इसके पहले 9वीं व 11वीं में दाखिले के लिए पांच अगस्त तक तारीख निर्धारित की थी। लेकिन, प्रवेश की संख्या अपेक्षा से काफी कम होने के कारण तारीख बढ़ाकर 31 अगस्त तक कर दी गई। 9वीं व 11वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले छात्र छात्राएं अगले साल बोर्ड की 10वीं व 12वीं की परीक्षा में शामिल होंगे। हर साल जुलाई में प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। जबकि अगस्त में रजिस्ट्रेशन का कराया जाता था। लेकिन, इस बार प्रवेश लेने वालों की संख्या अपेक्षा से काफी कम है।


21 तक जमा होगी फीस

 प्रयागराज : 9वीं व 11वीं में प्रवेश लेकर रजिस्ट्रेशन कराने वाले छात्र-छात्राओं की फीस यूपी बोर्ड के कोषागार में जमा होगी। फीस जमा करने की अंतिम तारीख 21 सितंबर निर्धारित की गई है। स्कूल के प्रधानाचार्य को तय तारीख के अंदर फीस जमा करनी होगी।

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कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश

कौशाम्बी : अब देखी जाएगी कायाकल्प में हुए काम की हकीकत, बीएसए ने सत्यापन के लिए जारी किया निर्देश।


जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है।



जिले के परिषदीय स्कूलों के सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कायाकल्प योजना से कराने के बाद अब इन कार्यों की जांच होगी। शासन के निर्देश पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को सत्यापन का निर्देश दिया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि विद्यालयों में कराए गए कार्यों की जांच अपने स्तर से कर ले। बाद में किसी प्रकार की शिकायत मिली तो रिपोर्ट लगाने वाले प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जनपद के 1165 परिषदीय स्कूलों में कायाकल्प योजना से ग्राम पंचायतों ने सुंदरीकरण व मरम्मत का कार्य कराया था। इसमें ग्राम निधि के लाखों रुपये खर्च हुए। अब राज्य परियोजना निदेशक ने कायाकल्प के तहत हुए कार्यों के सत्यापन का फैसला लिया है। इसको लेकर निदेशक ने डीएम व बीएसए को पत्र भेजा है। जल्द ही स्कूलों में जांच होगी। जांच में जिन विद्यालयों की स्थिति खराब मिलेगी, उनकेप्रधानाध्यापक के खिलाफ कार्रवाई होगी। जांच से पूर्व बीएसए ने सभी शिक्षकों को अपने स्तर से एक बार स्कूल की स्थिति का मूल्यांकन का निर्देश दिया है। बीएसए ने बताया कि सभी स्कूलों की जांच 33 बिदुओं पर होगी जिसमें स्कूल में पेयजल, बालक व बालिका के लिए अलग-अलग क्रियाशील शौचालय, मल्टीपल हैंड वाशिंग यूनिट, रसोईघर, क्लास रूम की फर्श पर टाइल, रंगाई-पोताई, दिव्यांग सुलभ रैंप व रेलिग, वायरिग, विद्युत उपकरण, स्कूल में तैनात शिक्षक, शिक्षामित्र व अनुदेशकों की संख्या, छात्रों की उपस्थिति, लर्निंग आउटकम प्रशिक्षण की निगरानी, रेमेडियल क्लास का संचालन, यूनिफार्म, किताबों का वितरण आदि बिदु शामिल हैं।

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यूपी में खुलेंगे नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालय, 30 से 40 लाख रुपये मिलेगा अनुदान

यूपी में खुलेंगे नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालय, 30 से 40 लाख रुपये मिलेगा अनुदान।

प्रदेश में नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने निजी प्रबंधतंत्रों से आवेदन मांगे हैं। इन महाविद्यालयों की स्थापना असेवित विकास खंडों में की जानी है। प्रबंधतंत्रों को वित्तीय वर्ष 2020-21 के तहत महाविद्यालयों की स्थापना के लिए 30 से 40 लाख रुपये अनुदान के रूप में दिए जाएंगे। नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना से रोजगार का सृजन होगा और ग्रामीण इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच आसान होगी।





आवेदन के लिए मानक तय किए गए हैं कि स्ववित्त पोषित महाविद्यालय वहां स्थापित किए जाने हैं, जहां पूर्व से सहशिक्षा के लिए कोई संकाय या महिला महाविद्यालय संचालित न हो। असेवित विकास खंड सीमा से संयुक्त दूसरे असेवित विकास खंड की स्थिति में स्थापित किए जाने वाले महाविद्यालय की पारस्परिक सीधी दूरी (एरियल डिस्टेंस) पांच किलोमीटर से कम न हो एवं छात्र-छात्राओं की उपलब्धता सुनिश्चित हो। साथ ही प्रस्तावित महाविद्यालय की स्थापना के लिए भूमि भू-अभिलेखों में ‘महाविद्यालय द्वारा सोसाइटी’ के नाम संक्रमणीय भूमिधर के रूप में अनिवार्य रूप से दर्ज हो एवं संयुक्त हो और महाविद्यालय के लिए संपर्क मार्ग अनिवार्य रूप से स्थित हो।


सहशिक्षा महाविद्यालय की स्थापना के लिए 10 हजार वर्ग मीटर और कन्या महाविद्यालय के लिए पंाच हजार वर्ग मीटर भूमि अनिवार्य है। संस्था के आय का स्नोत कम से कम पांच लाख रुपये वार्षिक या उससे अधिक हो। इसके योजना के स्नातक स्तर पर विज्ञान संकाय के लिए अधिकतम 40 लाख और कला/वाणिज्य संकाय के लिए अधिकतम 30 लाख रुपये तक का अनुदान दिया जाएगा। अनुदान तीन किस्तों में दिया जाएगा।


आवेदन पत्र ट्रेजरी चालान के माध्यम से 21 सितंबर तक प्राप्त एवं जमा किए जा सकते हैं। 21 सितंबर को शाम पांच बजे के बाद आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे। जिन प्रबंधतंत्रों द्वारा पूर्व में आवेदन किए गए थे, लेकिन महाविद्यालय की स्थापना के लिए अनुदान स्वीकृत नहीं हुआ था, उन्हें नए सिरे से आवेदन करने होंगे।


प्रदेश में नए स्ववित्त पोषित महाविद्यालयों की स्थापना के लिए प्रबंधतंत्रों से आवेदन मांगे गए हैं। इसके लिए अनुदान दिया जाएगा। इससे ग्रामीण इलाकों में रहने वाले छात्र-छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही शिक्षकों, कर्मचारियों की भर्ती होने से रोजगार का सृजन होगा। डॉ. वंदना शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक

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Saturday, August 29, 2020

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ AIPTF ने नई शिक्षा नीति 2020 को बतलाया आकर्षक, समावेशी न होने पर उठाए सवाल

अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ AIPTF ने नई शिक्षा नीति 2020 को बतलाया आकर्षक, समावेशी न होने पर उठाए सवाल



सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग

सैलरी न मिलने से निजी वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक बदहाल, सरकार से 15 हजार मानदेय देने की मांग


किसी के घर में राशन का संकट, कोई नहीं जमा कर पा रहा बच्चों की फीस

कोरोना काल में वेतन देने का सरकारी कोशिश बेअसर, नौकरी पर संकट भी


प्रयागराज। सरकारी दावे के बाद भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को वेतन नहीं दे रहे हैं। खासकर वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक तो भुखमरी की कगार पर आ गए हैं। अपने ही बच्चों की फीस जमा कर पाने में असमर्थ शिक्षकों के घर में अकसर राशन का संकट भी खड़ा हो जाता है। ऐसे में साथी शिक्षक एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं।


नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि निजी स्कूल तो अभिभावकों की ओर से फीस जमा करने में देरी होने पर बच्चों की ऑनलाइन क्लास बंद कर देते हैं, नोटिस भेजकर फीस जमा करने का दबाव बनाते हैं। ऐसे में स्कूल वालों का यह कहना है कि फीस नहीं जमा होने से वह वेतन नहीं दे पा रहे हैं, समझ से परे है। वहीं शहर के कुछ स्कूलों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में शिक्षकों एवं कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने की धमकी भी दी गई है। ऐसे में शिक्षक व कर्मचारी दबी जुबां से अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं।


एक शिक्षक ने बताया कि उनका और उनके परिवार का बीपीएल कार्ड भी नहीं बन सकता, नहीं तो इस दौर में कुछ राहत मिलती। शहर के ही एक स्कूल में शिक्षक के परिवार के सामने उस समय विषम परिस्थिति खड़ी हो गई, जब उनके परिवार में राशन खत्म हो गया। इसकी जानकारी उनके साथी शिक्षकों को होने के बाद उनके घर मदद पहुंची। शिक्षक के दो बच्चों की फीस नहीं जमा होने पर उन्हें ऑनलाइन क्लास से रोक दिया गया। शिक्षक विधायक सुरेश त्रिपाठी ने शुक्रवार को वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को वेतन नहीं मिलने के मामले को विधान परिषद में उठाया। उन्होंने प्रदेश सरकार से शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय देने की मांग की है।

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प

राज्य वित्त आयोग के बजट से होगा गांवों के स्कूलों का कायाकल्प


लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित परिषदीय स्कूलों का कायाकल्प अब राज्य बित्त आयोग के बजट से किया जाएगा। परिषदीय स्कूलों में पानी, बिजली, फर्नीचर, शौचालय, चारदीयारी, कक्षा कक्ष निर्माण और रंग-रोगन आदि कार्यों के लिए ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए गए थे। ग्राम पंचायतों को अपने बजट से यह काम करवाना था। 


प्रदेश के 80 हजार स्कूलों में यह काम शुरू भी हो गया था, लेकिन उसके बाद ग्राम प्रधान अपने लिए चुनावी वर्ष होने के कारण स्कूलों के कायाकल्प की जगह सामुदायिक भवन और सामुदायिक शौचालय बनवाने को प्राथमिकता देने लगे। कई ग्राम पंचायतों में प्रधानों ने स्कूल परिसर में ही शौचालय व सामुदायिक भवन जनवाना शुरू कर दिया। बेसिक शिक्षा विभाग को आदेश जारी कर इस पर रोक लगवानी पड़ी। 


विभाग के अधिकारियों ने गांवों में स्कूलों के कायाकल्प का काम प्रभावित होने की जानकारी मुख्यमंत्री को दी। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने बताया कि अब राज्य वित्त आयोग और डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड सहित अन्य मदों के बजट से स्कूलों का कायाकल्प कराया जाएगा।

परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी दीक्षा एप के जरिये चलचित्र के माध्यम से करेंगे पढ़ाई

परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी दीक्षा एप के जरिये चलचित्र के माध्यम से करेंगे पढ़ाई, 



निजी विद्यालयों की तरह ही अब परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी स्मार्ट क्लास में अत्याधुनिक विधा से पढ़ाई करेंगे। कोरोनाकाल के बाद विद्यालय खुलते ही बच्चे चलचित्र के माध्यम से पढ़ाई करेंगे। शिक्षक अपने मोबाइल, लैपटॉप और विद्यालयों में मुहैया कराए जा रहे प्रोजेक्टर पर वीडियो और काटरून के माध्यम से पढ़ाएंगे। इसके लिए सभी शिक्षकों की ट्रेनिंग भी पूरी हो गई है।


अब शिक्षकों के मोबाइल पर दीक्षा एप डाउनलोड कराया जा रहा है। दीक्षा एप पर बच्चों के पाठ्य के काटरून वीडियो दिए गए हैं। पहले फेज में जिन बच्चों के परिवारीजनों के पास एंड्रॉयड मोबाइल हैं, उन्हें वाट्सएप ग्रुप पर जोड़कर शिक्षक वीडियो पोस्ट करने लगे हैं। बीकेटी ब्लाक के एआरपी (एकेडमिक) रिसोर्स पर्सन अनुराग सिंह राठौर ने यह कार्य अपने क्षेत्र के विद्यालयों में यह कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए सभी ब्लाकों में शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक की ट्रेनिंग भी पूरी हो गई है। अब शिक्षकों के मोबाइल पर दीक्षा एप डाउनलोड कराने और उसे मानव संपदा से जोड़ने का कार्य शनिवार से शुरू होगा।


शिक्षक नहीं दे पाएंगे गलत जानकारी : दीक्षा एप को अब मानव संपदा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। इसके माध्यम से शिक्षक जितनी देर दीक्षा एप के माध्यम से बच्चों को पढ़ाएंगे, उसकी टाइमिंग उनकी आइडी पर सेव हो जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि किस शिक्षक ने कितनी देर बच्चों कोवीडियो और काटरून विधा से पढ़ाई कराई।


परिषदीय विद्यालय खुलते ही लागू होगी यह व्यवस्था, बच्चों के पाठ्य को प्रोजेक्टर पर कार्टून वीडियो से दिखाएंगे शिक्षक


ऐसा होगा पाठ्यक्रम

जैसे बच्चों को समुद्र के बारे में जानकारी दी जानी है तो दीक्षा एप पर समुद्र का वीडियो होगा, जिसे बच्चे देखेंगे कैसे आवाज करती हुई लहरें समुद्र में उठती हैं या फिर किसी चिड़िया की आवाज बच्चों को बतानी है तो वीडियो के माध्यम से उस चिड़िया का वीडियो दिखाकर बच्चों को आवाज सुनाई जाएगी। इसी तरह गणित के जोड़-घटाने से सम्बंधित भी काटरून वीडियो के माध्यम से ही बच्चों को पढ़ाया जाएगा।


दीक्षा एप से बच्चों को वीडियो के माध्यम से कैसे पढ़ाया जाए, बच्चों को अक्षरों की पहचान समेत अन्य जानकारियां वीडियो के माध्यम से दी जाएंगी। इसके लिए सभी शिक्षकों की ट्रेनिंग भी कराई गई है। विद्यालय खुलने के बाद यह व्यवस्था शुरू की जाएगी। - दिनेश कुमार, बीएसए

शाहजहांपुर : ऑडिट में उगाही का देखें वायरल वीडियो, बीईओ से जवाब-तलब, शिक्षकों से 500 व 1000₹ तक की वसूली का आरोप

शाहजहांपुर : ऑडिट में उगाही का देखें वायरल वीडियो, बीईओ से जवाब-तलब, शिक्षकों से 500 व 1000₹ तक की वसूली का आरोप


शाहजहांपुर ;  बेसिक स्कूलों के ऑडिट में धनउगाही का वीडियो वायरल हुआ। जिसके बाद बीएसए राकेश कुमार ने जलालाबाद ब्लॉक के खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश चंद्र को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। बीईओ की रिपोर्ट में एक बीआरसी के अनुचर समेत एक शिक्षक को दोषी पाया गया है।




वायरल वीडियो 26 अगस्त का है। जलालाबाद बीआरसी पर ऑडिट के दैरान वहां का अनुचर तथा एक अन्य व्यक्ति शिक्षकों से 500 व 1000 रुपये वसूल रहा है। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।  जनपद के बेसिक स्कूलों का 24 अगस्त से ऑडिट शुरू किया गया है। बीएसए को 26 अगस्त की रात ही वीडियो मिल गया था।


खंड शिक्षा अधिकारी ने बीएसए को भेजी रिपोर्ट: 27 अगस्त को खंड शिक्षा अधिकारी सुरेश चंद्र ने वायरल वीडियो की बीएसए को रिपोर्ट भेज दी। कहा जो व्यक्ति पैसे लेते दिखाया गया है वह उनके कार्यालय का ही अनुचर है, जबकि पास बैठा व्यक्ति एक प्राथमिक विद्यालय का प्रधानाध्यापक है। 


24अगस्त से जनपद में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का चल रहा है ऑडिट, पूर्व एवीआरसी व सेवक के आए सामने नाम


वायरल वीडियो के मामले में खंड शिक्षा अधिकारी से जवाब तलब किया गया है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी -राकेश कुमार, बीएसए


एक शिक्षक व अनुचर की पहचान हो गई है। बीएसए को दोनों के खिलाफ रिपोर्ट भेज दी गई है। जिस समय का वीडियो है, उस समय मैं मदनापुर में था। -सुरेश चंद, खंड शिक्षा अधिकारी जलालाबाद

फतेहपुर : 113 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों व 97 सहायिकाओं की सेवा समाप्त

फतेहपुर : 113 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों व 97 सहायिकाओं की सेवा समाप्त।

फतेहपुर : 62 वर्ष की आयु पूरी करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं की सेवा नोटिस देकर समाप्त कर दी गई हैं। शासन के निर्देश के तहत जिले के सभी 13 ब्लाकों में दायरे में आने वाली सभी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं का मानदेय भी रोक दिया गया है। व्यवस्था के तहत 113 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों व 97 सहायिकाओं की सेवा समाप्त की गई है।



वर्षो से काम कर रहीं आंगनवाड़ी कार्यकत्रियों एवं सहायकिाओं के लिए बुरी खबर है। शासन के निर्देश पर 62 वर्ष की आयु पूरी करने वाली कार्यकत्रियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। शासन के निर्देश पर जिला कार्यक्रम विभाग द्वारा जिले के सभी 13 ब्लाकों में इस दायरे में आने वाली आंगनवाड़ी कार्यकत्रियां एवं सहायिकाओं का चिन्हीकरण कराया गया। उसके बाद सेवा समाप्ति की कार्यवाही की गई। डीपीओ जया त्रिपाठी ने बताया कि जिले में 113 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां व 97 सहायिकाएं इस शासनादेश के अंतर्गत आ रही थी। ऐसे में 62 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी कार्यकत्रियों व सहायिकाओं के मानदेय रोकने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं। बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ सहायिकाओं की भी सेवा समाप्त की गई हैं। इनके स्थान पर आसपास के केंद्रों की कार्यकत्री व सहायिकाओं को प्रभार देकर उनसे काम कराया जाएगा।


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यूपी बोर्ड : मान्यता पर निर्णय नहीं, दांव पर छात्रों का भविष्य

यूपी बोर्ड : मान्यता पर निर्णय नहीं, दांव पर छात्रों का भविष्य।

यूपी बोर्ड की मंजूरी के बाद 767 नए स्कूलों को मान्यता के लिए शासन की अनुमति का इंतजार

- 31 अगस्त है नौवीं-ग्यारहवीं में पंजीकरण कराने वाले छात्रों के प्रवेश की अंतिम तिथि।


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की ओर स्कूलों की मान्यता पर निर्णय नहीं होने से हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है। बोर्ड की ओर से मंजूरी के बाद स्कूलों की मान्यता की फाइल शासन के पास लंबित होने से परेशानी बढ़ी है। 767 स्कूलों में पढ़ रहे छात्र-छात्राओं का भविष्य दांव पर लगा है। 31 अगस्त को 9वीं व 11वीं कक्षा में पंजीकरण के लिए आवेदन की अंतिम तिथि है, ऐसे में मान्यता पर निर्णय नहीं होने से इन विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चे परेशान हैं।




प्रदेश भर के 767 विद्यालयों में को मान्यता के लिए शासन की मंजूरी के लिए यूपी बोर्ड की ओर से फाइल जनवरी 20 में ही भेज दी गई थी। शासन की ओर से नए स्कूलों की मान्यता पर फैसला मार्च के अंत और अप्रैल तक लिया जाता रहा है। लेकिन, इस बार फैसला लेने में देरी से स्कूल प्रबंधन और इन विद्यालयों में पढ़ रहे बच्चों की परेशानी बढ़ी है।


31 अगस्त तक बढ़ाई प्रवेश की तिथि

यूपी बोर्ड ने नौवीं एवं ग्यारहवीं में पंजीकरण करवाने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूल में फीस जमा करने के साथ प्रवेश लेने की अंतिम तिथि 31 अगस्त तय की है। इससे पहले बोर्ड ने पांच अगस्त प्रवेश की तिथि तय की थी। प्रवेश की गति धीमी होने और कोरोना की बात कहकर शासन की अनुमति पर बोर्ड ने प्रवेश की तिथि तो बढ़ा दी लेकिन 31 अगस्त तक मान्यता पर फैसला नहीं हुआ तो वहां पढ़ रहे छात्रों का क्या होगा।


1864 स्कूलों ने मान्यता के लिए किया था आवेदन
यूपी बोर्ड ने शासन को मान्यता के कुल 984 प्रकरण शासन को भेजे हैं। हाईस्कूल की नवीन मान्यता के 354, इंटर की नवीन मान्यता के 292, हाईस्कूल एवं इंटर नवीन मान्यता के 121 कुल मिलाकर 767 और इसके साथ इंटर अतिरिक्त वर्ग के 203 और इंटर अतिरिक्त विषय के 14 केस हैं। मान्यता के लिए प्रदेश भर के 1864 स्कूलों ने ऑनलाइन आवेदन किया था।


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विवि व कॉलेजों में ई-प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश

विवि व कॉलेजों में ई-प्रकोष्ठ बनाने के निर्देश।

राज्य मुख्यालय : उच्च शिक्षा विभाग ने उत्तर प्रदेश स्टार्ट-अप नीति 2020 के तहत सभी राज्य विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को ई-प्रकोष्ठ स्तापित करने का निर्देश दिया है। यह प्रकोष्ठ छात्रों को अपना उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। विश्वविद्यालयों को स्टार्ट अप संस्कृति की मजबूती के लिए नोडल संस्था की सलाह से नवाचार व उद्यमिता पाठ्यक्रम शुरू करने को कहा गया है।



इस पाठ्यक्रम को संबद्ध महाविद्यालयों को भी स्वीकार करना होगा। महाविद्यालय स्तर पर नवाचार व उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय व महाविद्यालय स्तर पर फैकल्टी विकास कार्यक्रमों का आयोजन करने को भी कहा गया है। शासनादेश में कहा गया है कि जो छात्र उद्यमिता के क्षेत्र में आगे आना चाहते हैं, उन्हें स्नातक व स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष के बाद एक वर्ष का अवकाश (अंतराल वर्ष) लेने की अनुमति दी जाएगी। पाठ्यक्रम की पूर्ति के लिए आवश्यक अधिकतम अवधि में एक वर्ष के अंतराल वर्ष की गणना नहीं की जाएगी। पाठ्यक्रम की निरंतरता बनाए रखने के लिए अंतराल वर्ष की सुविधा को पाठ्यक्रम में पुन: शामिल होते समय दिया जा सकता है।


किसी स्टार्ट अप अवधारणा पर काम करने वाले छात्र उद्यमी को डिग्री की पूर्णता के लिए अपनी स्टार्ट अप परियोजना को अपने अंतिम वर्ष की परियोजना के रूप में बदलने की अनुमति दी जाएगी। शासन के इस आदेश पर स्टार्ट-अप नीति के क्रियान्वयन के संबंध में उच्च शिक्षा निदेशालय ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों, सभी क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों तथा राजकीय व सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राचार्यों से रिपोर्ट मांगी है।






Friday, August 28, 2020

कपड़ा दिखाया न नाप ली, तैयार कर दी ड्रेस, कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं


लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म वितरण में स्वयं सेवी संस्थाओं ने फिर खेल शुरू कर दिया है। मोहनलालगंज, माल व अन्य ग्रामीण ब्लाकों में स्वयं सेवी संस्थाओं ने विद्यालय में बच्चों की न नाप ली और नहीं विद्यालय प्रबंध समिति को कपड़े प्रबंध समिति का गठन की गुणवत्ता दिखाई पर यूनिफार्म तैयार करवा दी। खंड विकास अधिकारी की ओर से पत्र जारी करा कर स्वयं सेवी संस्था विद्यालय पर आपूर्ति का दबाव बना रही है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निशुल्क यूनिफार्म का वितरण किया जाता है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर प्रबंध समिति का गठन किया जाता है। इसमें शिक्षकों के साथ अभिभावक भी रहते हैं। जो कपड़े की गुणवत्ताजांच के बादयूनिफार्म सिलाई का आर्डरस्थानीय दर्जी, स्वयं सेवी संस्था या फिर ग्रामीण इलाकों के महिला समूह को दे सकते हैं। हालांकि हर ब्लाक में कुछ काम स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिए कराने के निर्देश हैं। इसमें मोहनलालगंज में करीब 15 हजार यूनिफॉर्म सिलने की जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं को दी गई है।
शासनादेश के मुताबिक संस्थाओं से सिर्फ यूनिफॉर्म सिलाई का काम लिया जाएगा लेकिन संस्थाएं विद्यालय प्रबंध समिति को बिना कपड़े की जांच कराए और बच्चों की नाप लिए बिना ही यूनिफॉर्म तैयार कर रहे हैं। 



कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं : यूनिफार्म तैयार करने वाली बहुत सी संस्थाएं सिर्फ कागजों पर ही चल रही हैं। जानकारों के अनुसार ये संस्थाएं खुद ड्रेस सिलने के बजाए उन्नाव मौरावां रोड स्थित एक दुकान से सस्ती ड्रेस खरीदकर विद्यालय में सप्लाई का दबाव प्रबंध समिति पर बना रहीं हैं। बीएसए दिनेश कुमार के मुताबिक उनको भी कई स्वयं सेवी संस्थाओं के बारे में पता किया गया कि मौके पर जाकर वहां जांच की जाए लेकिन उनके पते की जानकारी नहीं हो पा रही है।

शासन के उच्च शिक्षा अधिकारियों ने अपने आदेश में कहा है कि विद्यालय प्रबंध समिति प्रत्येक बच्चे का नाप करवाकर निःशुल्क यूनिफार्म स्वयं सहायता समूह/महिला समूह/स्थानीय दर्जी से सिलाई के लिए सेवा ले सकती है,परंतु 
ब्लाकों में ये समूह बिना नाप लिए यूनिफार्म स्कूलों में देने के लिए दबाव बना रहे,जो उचित नहीं है।
 - विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, 
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कपड़े की गुणवत्ता की जांच और बच्चों की नाप कराए बिना यूनिफार्म न लें। 
- दिनेश कुमार, बीएसए

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : मानव सम्पदा पोर्टल पर परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों, शिक्षामित्रों एवं अनुदेशकों का विवरण ऑनलाइन गूगल सीट पर अपलोड कराने के सम्बन्ध में।





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फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2019-20 यू-डायस को पूर्ण कराए जाने के सम्बन्ध में

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हाथरस : जन पहल रेडियो कार्यक्रम सुनाए जाने एवं फीडबैक उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

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फतेहपुर : जीरो इन्वेस्टमेंट इनोवेशन फ़ॉर एजुकेशन इनीशिएटिव, इनोवोटिव पाठशाला (ZIIEI) एवं Auro Scholar Application संचालित कराए जाने के सम्बन्ध में

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