Wednesday, August 12, 2026
Sunday, April 5, 2026
शैक्षणिक दस्तावेज फर्जी तो नियुक्ति शुरू से शून्यः हाईकोर्ट
Friday, March 27, 2026
कटऑफ से अधिक अंक तो याची नियुक्ति की हकदार, 29334 विज्ञान गणित भर्ती में हाईकोर्ट का आदेश
Monday, March 23, 2026
बिना भर्ती के अवसर की मांग करने की बीटीसी अभ्यर्थियों की याचिका खारिज
Thursday, March 19, 2026
नियुक्ति से पहले शिक्षिका की विवाहित व्यक्ति से शादी दुराचरण नहीं : हाईकोर्ट, सेवा समाप्त करने वाला आदेश रद
Tuesday, February 3, 2026
फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले शिक्षकों के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट का सख्त रुख, नियुक्तियों में मिलीभगत करने वाले अधिकारियों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई के निर्देश
Thursday, January 22, 2026
परिवार पर विपदा सदस्य की उम्र देखकर नहीं आती, अनुकंपा नियुक्ति के नियमों को लचीला बनाएं – हाईकोर्ट
विवाहित पुत्री भी मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पाने की हकदारः हाईकोर्ट
Monday, January 12, 2026
फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश
Monday, October 27, 2025
फर्जी नियुक्तियों की जांच तीन माह बाद भी अधर में, गोंडा के सहायता प्राप्त जूनियर हाई स्कूलों में फर्जी नियुक्तियों की एसआईटी और निदेशालय कर रहे जांच
Friday, September 12, 2025
बेसिक शिक्षा के अफसरों को मनमानी की आदत, हाईकोर्ट ने कहा–याचियों को परेशान करने की नीयत से नहीं करते आदेश का पालन, अफसरों को हाजिर होने का निर्देश
Wednesday, September 10, 2025
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प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति हेतु निर्धारित शैक्षिक अर्हता को निरस्त करते हुए संशोधित शैक्षिक अर्हता निर्धारित किये जाने के संबंध में।
Tuesday, August 26, 2025
नियुक्ति से ही शून्य मानी जाएगी जाली दस्तावेज से मिली नौकरी, हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द कर वेतन वसूली के बीएसए के आदेश को वैध बताया
Saturday, August 9, 2025
प्रशासनिक लापरवाही पर कर्मी को धोखाधड़ी का दोषी नहीं ठहरा सकते – हाईकोर्ट के, सहायक अध्यापक पद से बर्खास्तगी आदेश को दी थी चुनौती
किसी चूक के लिए 14 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति रद्द करना गलत, हाईकोर्ट ने बर्खास्त करने के आदेश को किया रद्द
Saturday, August 2, 2025
रिंकू सिंह के बीएसए बनने में लगा ब्रेक, शैक्षिक योग्यता के चलते फाइल अटकी
Wednesday, July 30, 2025
दिव्यांग, असाध्य बीमारी वाले शिक्षकों को तैनाती में वरीयता, शासन ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को दिए निर्देश
Monday, July 7, 2025
अनुदानित प्रबंधकीय विद्यालयों में प्रधानाध्यापक, सहायक अध्यापक और लिपिक पद पर नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा करने के आरोप में पूर्व बीएसए समेत 18 पर मुकदमा दर्ज
Monday, June 9, 2025
अस्वीकृत पदों पर नियुक्ति के लिए राज्य जिम्मेदार, कर्मचारी नहीं : हाईकोर्ट, राज्य सरकार की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतने दिया जा सकता
अस्वीकृत पदों पर नियुक्ति के लिए राज्य जिम्मेदार, कर्मचारी नहीं : हाईकोर्ट, राज्य सरकार की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतने दिया जा saktaa
एकल पीठ के आदेश को रद्द करते हुए हमीरपुर के शिक्षकों की विशेष अपील की स्वीकार
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि वैध स्वीकृत पदों पर अस्थायी कर्मचारियों के नियमितीकरण के बाद उन्हें इस आधार पर सेवा से बाहर नहीं किया जा सकता कि उनकी मौलिक नियुक्ति अवैध थी। अस्वीकृत पदों पर नियुक्ति के लिए राज्य जिम्मेदार है कर्मचारी नहीं।
वर्षों तक निरंतर सेवा के बाद उनकी नौकरी पर प्रश्नचिह्न लगाना ठीक नहीं है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश को रद्द करते हुए शिक्षक देवेंद्र सिंह और शिक्षक जुझार सिंह की विशेष अपील स्वीकार कर ली।
हमीरपुर स्थित पीएनवी इंटर कॉलेज चिल्ली (मुस्करा) में जुझार सिंह को वर्ष 1987 1987 और देवेंद्र सिंह को 1989 में अस्थायी तौर पर नियुक्त किया गया था। कुछ वर्षों बाद यह कहते हुए उनकी सेवायें समाप्त कर दी गईं कि जिन पदों पर उन्हें नियुक्त किया गया था, वे स्वीकृत नहीं थे। इसके खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
कोर्ट ने अंतरिम आदेश से तत्काल प्रभाव से उनकी बर्खास्तगी पर रोक लगा दी और 2006 में उन्हें स्वीकृत पदों पर समायोजित कर लिया गया। लेकिन वर्ष 2010 में उनकी याचिका को एकल पीठ ने अंतिम रूप से खारिज कर दिया। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने विशेष अपील के जरिए खंडपीठ का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए कहा कि अपीलकर्ताओं की सेवा को 2006 में वैध रिक्तियों पर समायोजित कर दिया गया था। ऐसे में उनकी नियुक्ति में शुरू में यदि कोई अनियमितता रही भी हो, तो उसे अब गलत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि राज्य सरकार को कोई आपत्ति थी, तो उसे समय रहते कार्रवाई करनी चाहिए थी।
कर्मचारियों की कोई व्यक्तिगत गलती नहीं
कर्मचारियों की कोई व्यक्तिगत गलती नहीं थी। उन्हें बाद में स्वीकृत पदों पर समायोजित कर दिया गया था। इतने वर्षों की निरंतर सेवा के बाद उनकी नौकरी पर प्रश्नचिह्न लगाना उचित नहीं है। राज्य सरकार की लापरवाही का खामियाजा कर्मचारियों को नहीं भुगतना चाहिए। एक बार नियमित होने के बाद, पिछली तकनीकी खामियों को भुला देना ही न्यायसंगत है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
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