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Wednesday, January 31, 2024

वर्ष 2023 के राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए 13 माध्यमिक शिक्षकों का चयन

राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कारों के लिए 13 चयनित 

वर्ष 2023 के लिए चयन समिति की संस्तुति के बाद हुई घोषणा

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लखनऊ। प्रदेश में राजकीय व अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए राज्य व मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कारों की घोषणा मंगलवार को कर दी गई। शासन ने वर्ष 2023 के लिए चयन समिति की संस्तुति और राज्यपाल की सहमति से चयनित अध्यापकों के नामों का एलान किया। जल्द ही इन्हें सम्मानित किया जाएगा।

राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए चयनितों में मेरठ के चौधरी प्रेमनाथ सिंह केवी इंटर कॉलेज माछरा के प्रधानाचार्य राजेश कुमार त्यागी, वाराणसी के महामना मालवीय इंटर कॉलेज बछाव के प्रधानाचार्य डॉ. चंद्रमणि सिंह, अमरोहा के राजकीय इंटर कॉलेज धनौरा के प्रधानाध्यापक पवन कुमार त्यागी, बरेली के राजकीय हाईस्कूल तालगोटिया क्यारा के प्रधानाध्यापक सुभाष चंद्र मौर्या शामिल हैं। 

इसमें सुल्तानपुर के राजकीय इंटर कॉलेज के मानविकी के शिक्षक केशव प्रसाद सिंह, लखनऊ के बीकेटी इंटर कॉलेज के मानविकी के शिक्षक रविंद्र कुमार, अमेठी के एएच इंटर कॉलेज मुसाफिरखाना के विज्ञान के शिक्षक डॉ. रमाशंकर पांडेय भी हैं। 

इनके अलावा अमरोहा के राजकीय इंटर कॉलेज के मानविकी के शिक्षक ऋषिपाल सिंह, बागपत के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज के विज्ञान  के शिक्षक डॉ. प्रीति शर्मा, आगरा के एमडी जैन इंटर कॉलेज हरी पर्वत के विज्ञान के शिक्षक डॉ. निखिल जैन व चित्रकूट के चित्रकूट इंटर कॉलेज कर्वी के कला शिक्षक लालमन शामिल हैं।


वहीं, अशासकीय माध्यमिक विद्यालय (वित्तविहीन) के लिए मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार दिए जाएंगे। इसके लिए अलीगढ़ के सूरज प्रसाद डागा सरस्वती विद्या मंदिरइंटर कॉलेज कासगंज के प्रधानाचार्य भूपेंद्र कुमार सिंह व कानपुर के सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज तिर्वा, कन्नौज के प्रधानाचार्य अनिल कुमार मिश्रा का चयन किया गया है। हालांकि इन्हें राष्ट्रीय व राज्य शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों के लिए दिए जाने वाले लाभ व सुविधाएं अनुमन्य नहीं होंगी।


वर्ष 2023 के राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए 13 माध्यमिक शिक्षकों का चयन

लखनऊ: राज्य सरकार ने राज्य शिक्षक पुरस्कार की घोषणा कर दी है अबकि प्रदेश के 13 माध्यमिक शिक्षकों को 2023 के राज्य शिक्षक पुरस्कार के लिए चुना गया है। राज्य पुरस्कार पाने वाले शिक्षकों में दो निजी स्कूलों के और 11 सरकारी व एडेड स्कूलों के हैं। लखनऊ से बीकेटी इंटर कॉलेज के रवींद्र कुमार को पुरस्कार मिला है।

सरकारी और एडेड कॉलेज के राजेश कुमार त्यागी(मेरठ), चंद्रमणि सिंह (वाराणसी), पवन कुमार त्यागी (अमरोहा), सुभाष चंद्र मौर्य (बरेली), केशवर प्रसाद सिंह (सुल्तानपुर), रवींद्र कुमार (लखनऊ), ऋषिपाल सिंह (अमरोहा), डॉ. निखिल जैन (आगरा), डॉ. रामशंकर पांडेय (अमेठी) और लालमन (चित्रकूट) को राज्य पुरस्कार के लिए चुना गया है।

वहीं निजी स्कूलों के भूपेंद्र कुमार सिंह(अलीगढ़) और अनिल कुमार मिश्र (कानपुर) का चयन हुआ है। पुरस्कारों के लिए जारी आदेश में कहा गया है कि निजी स्कूलों के शिक्षकों को पुरस्कार दिया जाएगा लेकिन एडेड और राजकीय शिक्षकों की तरह सेवा विस्तार और अन्य लाभ नहीं दिए जाएंगे। 



संस्कृत शिक्षक भी पाएंगे माध्यमिक शिक्षकाें के बराबर वेतन और सुविधाएं

संस्कृत शिक्षक भी पाएंगे माध्यमिक शिक्षकाें के बराबर वेतन और सुविधाएं 

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लखनऊ : प्रदेश के दो हजार से अधिक स्थाई संस्कृत शिक्षकों को जल्द ही माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के समान वेतन और अन्य सुविधाएं मिलने लगेगी। संस्कृत शिक्षक लम्बे समय से समान कार्य के लिए समान वेतन एवं सुविधाओं की मांग करते रहे हैं। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शासन को एक प्रस्ताव भेजा है जिसमें संस्कृत शिक्षकों को भी माध्यमिक शिक्षकों की भांति वेतन व अन्य सुविधायें दिये जाने की सरकार से संस्तुति की है।


प्रदेश में संस्कृत के 1246 विद्यालयों में से 973 एडेड विद्यालय हैं, जिनमें करीब 2100 स्थाई शिक्षक कार्यरत हैं। इन संस्कृत शिक्षकों की लंबे समय से वेतन विसंगतियां है। एडेड माध्यमिक विद्यालयों की तुलना में इनका वेतन काफी कम है। ये पिछले काफी समय से वेतन विसंगतियों को दूर कर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के वेतन के बराबर करने की मांग कर रहे हैं। इनकी मांगों के आधार पर वर्ष 2017 में भी एक प्रस्ताव माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से शासन को भेजा गया था लेकिन तब किसी कारण से यह प्रस्ताव ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।


इस संबंध में एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है जो वहां अभी विचाराधीन है। वहां से निर्णय होते ही शासन के निर्देशानुसार आदेश जारी किये जायेंगे। -डा. महेन्द्र देव, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, उत्तर प्रदेश।

117 करोड़ से बनेंगे 16 संस्कृत विद्यालय, प्रयागराज, अयोध्या समेत पांच स्कूलों में आवासीय सुविधा

117 करोड़ से बनेंगे 16 संस्कृत विद्यालय, प्रयागराज, अयोध्या समेत पांच स्कूलों में आवासीय सुविधा

● इन विद्यालयों में उत्तर मध्यमा स्तर तक की होगी पढ़ाई

● कार्यदायी संस्था नामित, जारी किए गए पांच करोड़

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प्रयागराज : देववाणी संस्कृत की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रदेश में 16 राजकीय संस्कृत विद्यालय खोले जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों के निर्माण के लिए 117 करोड़ रुपये के बजट की मांग की है। शासन के विशेष सचिव आलोक कुमार ने 18 जनवरी के पत्र में इन विद्यालयों के निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था को नामित किया है।


शासन की ओर से टोकन मनी के रूप में पांच करोड़ की राशि जारी भी कर दी गई है। विशेष सचिव ने नामित कार्यदायी संस्थाओं से संबंधित जिलों के विद्यालय निर्माण के लिए वित्तीय और प्रशासनिक स्वीकृत का प्रस्ताव उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। 


खास बात यह है कि इन 16 विद्यालयों में से पांच में 100-100 बेड के छात्रावास की सुविधा भी दी जाएगी। शासन के निर्देश पर शिक्षा निदेशालय की ओर से स्कूलों के निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। इन नवनिर्मित संस्कृत विद्यालयों में उत्तर मध्यमा (12वीं तक) की पढ़ाई कराई जाएगी। 


वर्तमान में प्रदेश में केवल एक राजकीय संस्कृत विद्यालय व महाविद्यालय संचालित हैं। इनके अलावा सरकारी सहायता प्राप्त 570 माध्यमिक और 403 महाविद्यालयों में संस्कृत की पढ़ाई हो रही है।


इन जिलों में बनेंगे नए राजकीय संस्कृत विद्यालय

सरकार ने प्रयागराज, अयोध्या, सीतापुर, मथुरा व चित्रकूट में 100-100 बेड छात्रावास समेत राजकीय संस्कृत विद्यालय के निर्माण की मंजूरी दी है। इसके अलावा जालौन, एटा, वाराणसी, सहारनपुर, मुरादाबाद, बिजनौर, मुजफ्फरपुर, शामली, रायबरेली, हरदोई और अमेठी में उत्तर मध्यमा स्तर तक के संस्कृत विद्यालय स्थापित होंगे।

अब तक नहीं आई कंपोजिट ग्रांट! कैसे होंगे स्कूलों के विकास के काम? नहीं बन पाएंगी स्मार्ट क्लास

अब तक नहीं आई कंपोजिट ग्रांट!  कैसे होंगे स्कूलों के विकास के काम? नहीं बन पाएंगी स्मार्ट क्लास

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75 फीसदी स्कूल कम्पोजिट ग्रांट नहीं निकाल पाए थे

पिछले वर्ष प्रधानाध्यापकों ने अपनी तनख्वाह से काम कराया था

कम्पोजिट ग्रांट के पांच करोड़ रुपये वापस हो गए थे पिछले साल


लखनऊ। प्राथमिक स्कूलों में इस साल स्मार्ट कक्षाएं नहीं बन पाएंगी। स्कूलों को अभी तक कम्पोजिट ग्रांट नहीं मिली है। ऐसे में स्कूलों में रंगाई पोताई, पठन पाठन की सामाग्री की खरीददारी के साथ ही मरम्मत के काम कैसे होंगे? 


पिछले वर्ष प्रधानाध्यापकों ने अपनी तनख्वाह से काम कराया था। जिसका भुगतान अभी तक नहीं हो पाया है। प्रधानाध्यापकों का कहना है कि बजट जारी भी हो जाएगा तो उनका और स्कूल में काम कराने वाले वेंडर के पंजीकरण की प्रक्रिया में मार्च गुजर जाएगा। लखनऊ में 1618 प्राथमिक, जूनियर और कम्पोजिट स्कूल हैं। 


सरकार हर साल इन स्कूलों में में स्मार्ट क्लास बनाने समेत दूसरे विकास कार्यों के लिए कम्पोजिट ग्रांट देती है। 100 बच्चों पर 25 हजार, 100 से 250 बच्चों पर 50 हजार व 250 से अधिक बच्चों वाले स्कूलों को 75 हजार रुपये कम्पोजिट ग्रांट की व्यवस्था है। पिछले साल शासन ने लखनऊ को 6 करोड़ 32 लाख रुपये जारी किये थे। यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ के मंत्री वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि बीते साल 75 फीसदी स्कूल कम्पोजिट ग्रांट नहीं निकाल पाए थे।


बीएसए राम प्रवेश ने बताया कि कम्पोजिट ग्रांट की राशि एक हफ्ते में आने की उम्मीद है। इसका भुगतान बीते साल की तर्ज पर पोर्टल से ही किया जाएगा।

Tuesday, January 30, 2024

मांग : बीमार व महिला शिक्षक कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मिले छूट

मांग : बीमार व महिला शिक्षक कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी से मिले छूट 


लखनऊ। उप्र बीटीसी शिक्षक संघ ने गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व महिला शिक्षकों-कर्मचारियों की लोकसभा चुनाव में ड्यूटी न लगाने की मांग की है। इस संबंध में चुनाव आयोग को पत्र भेजा है। 


संघ ने कहा है कि चुनाव ड्यूटी के लिए शिक्षकों व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने के लिए ऑनलाइन विवरण मांगा गया है। इसमें उन शिक्षकों-कर्मचारियों और महिलाओं का भी विवरण भेजा जा रहा है, जो गंभीर बीमारियों से ग्रस्त व दिव्यांग हैं। कुछ तो मेडिकल अवकाश पर चल रहे हैं। 


संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि जो महिलाएं मैटरनिटी लीव पर हैं, उनको भी शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इनका विवरण अपडेट होने और ड्यूटी लगवाने के बाद उन्हें इसको कटवाने के लिए अनावश्यक भागदौड़ व परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

Pariksha Pe Charcha 2024 : प्रधानमंत्री मोदी ने की छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से बात, कहा दूसरे से नहीं खुद से करें कंपटीशन

बच्चों का रिपोर्ट कार्ड अभिभावक का विजिटिंग कार्ड नहीं, परीक्षा पे चर्चा में पीएम मोदी की नसीहत 

परीक्षा पे चर्चा : पीएम ने परीक्षा का तनाव घटाने व तैयारी मजबूत रखने के लिए विद्यार्थियों के साथ-साथ माता-पिता व शिक्षकों को भी दिए मंत्र



नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि माता-पिता को बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड बनाने से बचना चाहिए। ऐसा करना बच्चों के भविष्य के लिए सही नहीं होगा। अपने सालाना लोकप्रिय कार्यक्रम परीक्षा पे चर्चा के सातवें संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों और शिक्षकों को भी संबोधित किया। इस साल भारत मंडपम में हुए कार्यक्रम में शामिल होने के लिए 2.26 करोड़ विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। 


अगले दो महीनों में अहम परीक्षाएं देने जा रहे विद्यार्थियों से चर्चा के बीच पीएम ने कहा, कुछ अभिभावक, जो अपने जीवन में बहुत सफल नहीं रहे, वे बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को ही अपना विजिटिंग कार्ड बना लेते हैं। किसी से मिलते हैं, तो बच्चों की कहानी सुनाने लगते हैं। उन्हें एक बच्चे की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए। यह 'रनिंग कमेंट्री' बच्चों के भविष्य को नुकसान पहुंचा सकती है। इसके बजाय उन्हें बच्चों को दबाव के सामने न झुकने में सक्षम बनाना चाहिए।


Pariksha Pe Charcha 2024
परीक्षा पे चर्चा 2024 : प्रधानमंत्री मोदी ने की छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से बात, कहा दूसरे  से नहीं खुद से करें कंपटीशन  


✅ टिप्स
🔴 दोस्ती बहुत जरूरी
🔵 टीचर से ज्यादा देस्त की जरूरत, पीएम ने दिए टिप्स
🔴 परीक्षा में तनाव से मुक्ति, पेरेंट्स को भी सुझाव
🔵 PM ने बताया कैसे करें परीक्षा की शुरुआत
🔴 अगल-बगल पर भरोसा न करें
🔵 कंफ्यूजन सब खराब कर देता है
🔴 बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को विजिटिंग कार्ड न मानें 


प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने 29 जनवरी को परीक्षा पे चर्चा के 7वें संस्करण में नई दिल्ली के भारत मंडपम में छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के साथ बातचीत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चों के तनाव को कम करने में शिक्षक की अहम भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को अपने काम को केवल नौकरी के रूप में नहीं लेना चाहिए बल्कि उन्हें इसे छात्रों के जीवन को सशक्त बनाने के साधन के रूप में लेना चाहिए। 


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कुछ माता-पिता अपने बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड मानते हैं, यह अच्छा नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि आपको एक बच्चे की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह उनके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है। उन्होंने छात्रों से यह भी कहा कि दूसरों से नहीं, खुद से प्रतिस्पर्धा करें। उन्होंने कहा कि हमें किसी भी प्रेशर को झेलने के लिए खुद को सामर्थ्यवान बनाना चाहिए। दबाव को हमें अपने मन की स्थिति से जीतना जरूरी है। किसी भी प्रकार की बात हो, हमें परिवार में भी चर्चा करनी चाहिए। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए लगभग 2.26 करोड़ रजिस्ट्रेशन कराए गए थे।


PPC 2024 with PM Modi: प्रधानमंत्री मोदी ने अभिभावकों एवं शिक्षकों को सुझाव देते हुए कहा, ‘‘आपको एक बच्चे की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह उनके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है. कुछ माता-पिता अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड समझते हैं, यह अच्छा नहीं है.’’


नई दिल्ली: Pariksha Pe Charcha 2024: बोर्ड परीक्षा के तनाव को कम करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को नई दिल्ली के बारत मंडपम में परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम में भाग लिया है. कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे अपने बच्चे के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड न मानें. साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि छात्रों को खुद से प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, दूसरों से नहीं. 


प्रधानमंत्री ने परीक्षा पे चर्चा 2024 के सातवें संस्‍करण में कहा कि प्रतिस्पर्धा और चुनौतियां जीवन में प्रेरणा का काम करती हैं लेकिन प्रतिस्पर्धा स्वस्थ होनी चाहिए. उन्होंने अभिभावकों एवं शिक्षकों को सुझाव देते हुए कहा, ‘‘आपको एक बच्चे की तुलना दूसरे से नहीं करनी चाहिए क्योंकि यह उनके भविष्य के लिए हानिकारक हो सकता है. कुछ माता-पिता अपने बच्चों के रिपोर्ट कार्ड को अपना विजिटिंग कार्ड समझते हैं, यह अच्छा नहीं है.''



प्रधानमंत्री ने बताया कि छात्रों पर तनाव तीन प्रकार का होता है. उन्होंने कहा कि यह कभी साथियों के दबाव से प्रेरित होता है तो कभी माता-पिता द्वारा और कभी स्वयं से भी प्रेरित होता है. उन्होंने कहा कि माता-पिता, शिक्षकों या रिश्तेदारों की 'रनिंग कमेंट्री' और हर बार नकारात्मक तुलना एक छात्र की मानसिक भलाई के लिए हानिकारक है.


उन्होंने कहा, ‘‘ यह भलाई के बजाय नुकसान ज्यादा करता है। हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि शत्रुतापूर्ण तुलनाओं और वार्ताओं के माध्यम से छात्रों के मनोबल और आत्मविश्वास को कम करने के बजाय उनके साथ उचित और सौहार्द्रपूर्ण बातचीत के माध्यम से इस मुद्दे का समाधान किया जाए.'' उन्होंने कहा कि दबाव इतना नहीं होना चाहिए कि यह किसी की क्षमताओं को प्रभावित करें. 


उन्होंने कहा, ‘‘कई बार बच्चे खुद पर दबाव बनाते हैं कि वे उम्मीद के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर रहे हैं। मेरा सुझाव है कि आपको तैयारी के दौरान छोटे लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और धीरे-धीरे अपने प्रदर्शन में सुधार करना चाहिए. इस तरह आप परीक्षा से पहले पूरी तरह से तैयार हो जाएंगे.''प्रधानमंत्री ने शिक्षकों और छात्रों के बीच संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि यह संबंध ऐसा होना चाहिए कि छात्रों को शिक्षक के साथ 'विषय से संबंधित बंधन' से परे कुछ महसूस हो.


उन्होंने कहा, ‘‘यह बंधन गहरा होना चाहिए! यह रिश्ता ऐसा होना चाहिए कि छात्र अपने तनाव, समस्याओं और असुरक्षा के बारे में अपने शिक्षकों से खुलकर चर्चा कर सकें.'' उन्होंने कहा कि जब शिक्षक अपने छात्रों को अच्छी तरह से सुनेंगे और उनके मुद्दों को पूरी ईमानदारी से संबोधित करेंगे, तभी छात्र बेहतर करेंगे. प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि शिक्षक का काम सिर्फ नौकरी करना या उसे बदलना नहीं है बल्कि उसका काम जिंदगी को संवारना है तथा जिंदगी को सामर्थ्य देना है. उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे ही शिक्षक परिवर्तन लाते हैं.''


छात्रों को भारत के भविष्य को आकार देने वाला बताते हुए मोदी ने कहा कि ‘परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम उनके लिए भी एक परीक्षा की तरह है. परीक्षाओं से पहले छात्रों के साथ अपने संपर्क कार्यक्रम की सातवीं कड़ी में उन्होंने कहा कि छात्र पहले से कहीं अधिक नवाचारी हो गए हैं. मोदी ने कहा, ‘‘हमारे छात्र हमारे भविष्य को आकार देंगे.''


शिक्षा मंत्रालय द्वारा पिछल छह साल से परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. यह कार्यक्रम का सातवां संस्करण हैं. कोरोना महामारी के कारण चौथा संस्करण ऑनलाइन आयोजित किया गया था जबकि पांचवां और छठा संस्करण टाउन-हॉल में हुआ था.