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Wednesday, October 28, 2026

ग्रामीण संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 48,883 पदों का आंकड़ा आया सामने, भर्ती के विज्ञापन का शुरू हुआ इंतजार

ग्रामीण संवर्ग में सहायक अध्यापकों के 48,883 पदों का आंकड़ा आया सामने, भर्ती के विज्ञापन का शुरू हुआ इंतजार


नौ वर्ष में 23 प्रतिशत डीएलएड प्रशिक्षु बन पाये शिक्षक

नौ वर्ष में प्रदेश में 5,79,967 डीएलएड प्रशिक्षु निकले

अब तक 126,371 प्रशिक्षुओं को मिली नियुक्ति


प्रयागराज : परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से पिछले नौ वर्ष में पांच लाख 35 हजार 389 प्रशिक्षुओं को डीएलएड प्रशिक्षण प्रदेशभर में कराया गया। इनमें से एक लाख 26 हजार 371 प्रशिक्षत अभ्यर्थियों को शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई है। अर्थात करीब 23 प्रतिशत अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्राप्त कर ली है। यह आंकड़ा मार्च 2026 तक का है। यह जानकारी विधान सभा के तृतीय सत्र में सपा नेता अनिल प्रधान की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में राज्य मंत्री संदीप सिंह ने दी।



यह भी बताया गया कि सहायक अध्यापक के 48,883 पद ग्रामीण संवर्ग के और नगर क्षेत्र के 12075 पद सीधी भर्ती से भरे जाने हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने विज्ञापन संख्या 05/2026 के तहत बेसिक शिक्षा विभाग में 12,405 पदों पर सहायक अध्यापकों की भर्ती के लिए विज्ञापन जारी कर दिया है। इसमें शहरी क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 11,508 पद हैं जबकि अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में सहायक अध्यापक (संबद्ध प्राइमरी) के 897 पद हैं।

चुनावी वर्ष में नियुक्तियों और भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने की कवायद तेजी से चल रही है। सत्ताधारी दल रोजगार के पर्याप्त अवसर देने का दावा कर रहा है, जबकि विपक्ष बेरोजगारी और सरकारी नौकरियों के न विज्ञापित होने का आरोप लगा रहा है। इन सब के बीच विधान सभा के तृतीय सत्र में सपा नेता अनिल प्रधान की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब महत्वपूर्ण हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को अब भी ग्रामीण संवर्ग के 48,883 सहायक अध्यापकों की भर्ती के विज्ञापन का इंतजार बना हुआ है।

पीएनपी सचिव राजेंद्र प्रताप के अनुसार प्रदेश में कुल 3423 डीएलएड कालेज हैं। इनमें 67 डायट, 253 अल्पसंख्यक संस्थान और 3103 निजी क्षेत्र के कालेज हैं। कुल 2,39,500 सीटें हैं। मार्च 2026 के बाद पीएनपी ने दो परीक्षा परिणाम घोषित किए। मई 2026 में एक लाख 24 हजार 909 और सितंबर-अक्टूबर की परीक्षा में 19,669 नए डीएलएड प्रशिक्षु निकले।

Tuesday, October 27, 2026

897 सहायक अध्यापक के पदों पर बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को मिला मौका, हाईकोर्ट ने अधिसूचना रद्द कर आवेदन का अवसर देने का दिया आदेश, देखें कोर्टऑर्डर

बीएलएड अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, 897 पदों पर आवेदन का रास्ता साफ, काम-वेतन समान होने पर भी योग्यता में भिन्नता पर उठा था सवाल

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने प्राइमरी स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती के 897 पदों पर बीएलएड डिग्री और दो वर्षीय विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को भी शामिल करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक की ओर से 11 सितंबर को जारी नोटिफिकेशन को एनसीटीई एक्ट और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के विपरीत मानते हुए रद कर दिया है। यह आदेश महेश कुमार और 18 अन्य की याचिका पर न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकलपीठ ने दिया है।

याचियों की ओर से अधिवक्ता राहुल मिश्र व सौरभ कुमार भार्गव ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग प्रयागराज ने शहरी क्षेत्र के 11,508 सहायक अध्यापक पदों और संबद्ध प्राइमरी स्कूलों के 897 पदों के लिए भर्ती

निकाली है। विज्ञापन के क्लाज 7.1 में दो वर्षीय डिप्लोमा इन स्पेशल एजुकेशन और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को 11,508 अर्बन एरिया पदों के लिए मान्य किया गया, लेकिन 897 एडेड प्राइमरी स्कूल पदों से बाहर रखा गया। याचिका में कहा

गया कि सहायक अध्यापक के लिए सीनियर सेकेंडरी में 50 प्रतिशत अंकों के साथ चार वर्षीय बीएलएड वैध न्यूनतम योग्यता है। दोनों तरह के स्कूलों में काम और वेतन समान होने पर योग्यता अलग रखने पर भी सवाल उठाया गया।

याचियों के अनुसार स्कूल बेसिक शिक्षा परिषद के हों या माध्यमिक शिक्षा के, योग्यता तय करने का अधिकार केंद्र की एनसीटीई के पास है। कोर्ट ने कहा कि दोनों नोटिफिकेशन अधिनियम और 23 अगस्त 2010 के नोटिफिकेशन के अनुरूप नहीं हैं। इसलिए उन्हें उस सीमा तक निरस्त किया जाता है, जहां बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को 897 पदों से बाहर रखा गया है। कोर्ट ने विज्ञापन सुधार कर जारी करने का आदेश दिया, ताकि इन योग्यताओं वाले अभ्यर्थी भी आवेदन कर सकें। याचियों और समान स्थिति वाले अभ्यर्थियों को आवेदन का उचित अवसर देने तथा जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का निर्देश भी दिया गया है।



897 सहायक अध्यापक के पदों पर बीएलएड और विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारकों को मिला मौका, हाईकोर्ट ने अधिसूचना रद्द कर आवेदन का अवसर देने का दिया आदेश, देखें कोर्ट ऑर्डर 


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक भर्ती में बीएलएड डिग्री धारकों और विशेष शिक्षा में दो वर्षीय डिप्लोमा प्राप्त अभ्यर्थियों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने 897 पदों पर होने वाली भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखने संबंधी अधिसूचना को नियमों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया है।

साथ ही भर्ती विज्ञापन में तत्काल संशोधन जारी कर इन्हें आवेदन का अवसर देने का आदेश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने महेश कुमार व 18 अन्य की याचिका पर दिया।

याचियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 11,508 सहायक अध्यापक पदों के साथ एडेड प्राथमिक विद्यालयों के लिए 897 पद विज्ञापित किए हैं। इसके क्लॉज 7.1 में विशेष शिक्षा के दो वर्षीय डिप्लोमा और चार वर्षीय बीएलएड डिग्री को केवल 11,508 पदों के लिए ही मान्य किया गया है जबकि 897 पदों की भर्ती से इन अभ्यर्थियों को बाहर रखा गया।

याचिका में सवाल उठाया गया कि जब दोनों प्रकार के विद्यालयों में शिक्षकों के कार्य व वेतन समान हैं तो शैक्षणिक अर्हता (योग्यता) अलग-अलग क्यों रखी गई है। कोर्ट ने 11 सितंबर को जारी दोनों नोटिफिकेशन को एनसीटीई अधिनियम और 23 अगस्त 2010 की अधिसूचना के अनुरूप नहीं माना।

कोर्ट ने विज्ञापन संख्या 5/2026 में तत्काल संशोधन कर अभ्यर्थियों को आवेदन का अवसर देने और जरूरत पड़ने पर अंतिम तिथि बढ़ाने का आदेश दिया है। 


Wednesday, October 14, 2026

शिक्षक भर्ती के आवेदन की अंतिम तिथि करीब, अंक पत्र के लिए दौड़ लगा रहे छात्र, प्रदेश भर से छात्र प्रशिक्षण और टीईटी के अंकपत्र के लिए पहुंच रहे PNP कार्यालय

शिक्षक भर्ती के आवेदन की अंतिम तिथि करीब, अंक पत्र के लिए दौड़ लगा रहे छात्र, प्रदेश भर से छात्र प्रशिक्षण और टीईटी के अंकपत्र के लिए पहुंच रहे PNP कार्यालय


प्रयागराज। इन दिनों पीएनपी (परीक्षा नियामक प्राधिकारी) कार्यालय पर डीएलएड व टीईटी पास कर चुके छात्र बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं।

इनमें वे अभ्यर्थी शामिल हैं जिन्होंने वर्षों बाद भी डीएलएड व टीईटी का अंक पत्र प्राप्त नहीं किया है। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जिनके अंक पत्र में नाम या अन्य विवरण त्रुटिपूर्ण हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से निकाली गई शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 15 अक्तूबर है। मार्कशीट नहीं होने की वजह से छात्र भर्ती के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में पीएनपी आने वाले अभ्यर्थी अफसरों व कर्मचारियों से जल्द मार्कशीट दिए जाने की मांग कर रहे हैं।


भर्ती आई तो याद आई मार्कशीट

यहां आने वाले छात्रों में कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने आठ से दस वर्ष पहले डीएलएड/बीटीसी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया। उनके मार्कशीट में कुछ त्रुटियां थी जिन्हें समय रहते संशोधित नहीं कराया गया। अब शिक्षक भर्ती आने पर छात्रों को मार्कशीट में संशोधन की याद आई यही कारण है कि लगातार बड़ी संख्या में छात्र पीएनपी पहुंच रहे हैं। इसी तरह छात्रों ने टीईटी की परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली। लेकिन, भर्ती नहीं आने की वजह से उन्होंने कार्यालयों से अंक पत्र प्राप्त नहीं किया। आवेदन में टीईटी अंक पत्र क्रमांक की अनिवार्यता के कारण अंक पत्र लेने कार्यालय पहुंच रहे हैं।


सत्र में देरी से छात्रवृत्ति के लिए नहीं कर सके आवेदन

डीएलएड बैच-2025 के प्रशिक्षुओं ने मंगलवार को जिला समाज कल्याण अधिकारी को ज्ञापन सौंपा। बताया कि शैक्षणिक सत्र का संचालन देर से शुरू होने से छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन नहीं कर सके। पोर्टल 14 जनवरी को बंद हो गया था जबकि प्रवेश प्रक्रिया इसके बाद भी जारी रही। ऐसे में पात्र होने के बाद भी आवेदन से वंचित रह गए। प्रशिक्षुओं ने पोर्टल फिर से खोले जाने की मांग की। इस दौरान अमित, राहुल यादव, रत्नेश समेत अन्य रहे।


सभी कर्मचारियों को निर्देश दिए गए हैं कि एक से दो दिन के अंदर हर हाल में अंक पत्र अभ्यर्थियों को उपलब्ध कराया जाए। एक साथ कई छात्र अंक पत्र लेने व सुधार कराने के लिए पहुंच रहे हैं इससे कुछ असुविधाएं हो रही हैं। - राजेंद्र प्रताप सिंह, सचिव, परीक्षा नियामक प्राधिकारी

Tuesday, October 13, 2026

एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रबंधक ही करेंगे नियुक्ति, शिक्षा निदेशालय ने कैबिनेट नोट के लिए भेजा प्रस्ताव

अब फिर से प्रबंधकों के हाथ में चयन का जिम्मा सौपेंगे

प्रयागराज । प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति एक बार फिर से प्रबंधक ही करेंगे। शिक्षा निदेशालय की ओर से पूर्व की तरह प्रबंधकों के माध्यम से ही शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कैबिनेट मंजूरी को प्रस्ताव भेजा गया है। पिछले कई सालों सेइन संस्थाओं में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई है। शिक्षकों की कमी से स्कूलों में चार साल पहले स्थायी शिक्षकों की मानदेय पर नियुक्ति की गई थी।


सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली 2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। उसके बाद 2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों के रिक्त पदों की सूचना भेजी थी। इसी प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। हालांकि इन दोनों ही संस्थाओंका नवगठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। नवगठित आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में स्थायी शिक्षकों की चयन की समस्या दूर करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने नए सिरे से शासन को प्रस्ताव भेजा है।


शिक्षकों के आधे से अधिक पद हैं खाली
संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में स्थायी शिक्षकों के आधे से अधिक पद खाली हैं। 17 मार्च 2023 को शासन में हुई बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के अनुसार एडेड संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में अध्यापकों के सृजित 2085 पदों में से 1064 कार्यरत थे और 1021 खाली थे। प्रधानाचार्यों के सृजित 570 पदों में से 263 कार्यरत और 307 रिक्त थे। महाविद्यालयों में प्राचार्य के 403 पदों में से 154 कार्यरत और 249 रिक्त थे और शिक्षकों के 1889 पदों में से 960 कार्यरत और 929 खाली थे। उसके बाद से बड़ी संख्या में शिक्षक सेवानिवृत्त हुए हैं।


Sunday, October 11, 2026

69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

69,000 शिक्षकों की भर्ती पर आए फैसला तो और मिलेगा मौका, विभाग को मिल चुका है 45 हजार से ज्यादा रिक्त पदों का अधियाचन

प्रयागराज। बेसिक शिक्षा विभाग के शहरी परिषदीय स्कूलों में 11508 शिक्षक भर्ती का विज्ञापन आने के बाद अब अभ्यर्थियों को 69,000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार है। इस फैसले के बाद ही करीब 45,000 ग्रामीण शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए रास्ता साफ होगा।


ग्रामीण शिक्षक भर्ती के लिए विभाग ने रिक्त पदों का अधियाचन भी मंगा लिया है। करीब 45000 रिक्त पद इसमें शामिल हैं। दरअसल, चार दिसंबर 2018 को 69,000 शिक्षक भर्ती के पदों का विज्ञापन जारी किया गया था। इसमें करीब 19,000 पदों पर आरक्षण का मामला फंस गया था।

विभाग के अधिकारियों का कहना है कि कोर्ट इन पदों को लेकर क्या निर्णय लेती है इसके बाद ही अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजा जाएगा। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र कुमार तिवारी का कहना है कि ग्रामीण शिक्षक भर्ती का विवरण तो मिल चुका है। कोर्ट के फैसले के बाद पदों में कुछ बदलाव होने की स्थिति को देखते हुए अभी चयन आयोग को अधियाचन नहीं भेजा गया है।

Thursday, October 8, 2026

प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं

प्रधानाचार्य भर्ती की अर्हता को लेकर अब बढ़ा विवाद, नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में दायर की याचिकाएं 

परास्नातक में 50 प्रतिशत अंक के नियम का हो रहा विरोध

आठ अक्तूबर से प्रस्तावित है प्रधानाचार्य भर्ती के आवेदन

8 अक्टूबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य 1172 एवं प्रधानाध्यापक 1475 पदों पर भर्ती के आवेदन शुरू होने से पहले ही विवाद शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से 13 साल बाद आठ अक्तूबर से इस भर्ती के आवेदन प्रस्तावित हैं। इस बीच नए नियमों के विरोध में शिक्षकों ने हाईकोर्ट इलाहाबाद और लखनऊ बेंच में याचिकाएं दायर कर दी हैं।

 इलाहाबाद हाईकोर्ट में दुर्गेश कुमार और नौ अन्य की ओर से 28 सितंबर को याचिका दायर की गई है। सर्वाधिक विरोध बीएड और परास्नातक में 50 प्रतिशत अंकों की अनिवार्यता को लेकर है। शिक्षकों का कहना है कि बिना बीएड नियुक्त हजारों शिक्षक आवेदन से वंचित हो जाएंगे।

वहीं परास्नातक में 50 प्रतिशत की अनिवार्यता संबंधी राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की कोई गाइडलाइन नहीं होने के बावजूद इसे लागू करना अनुचित है। लिहाजा नियमानुसार पूर्व से नियुक्त प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापकोंको अनुभवके आधार पर बीएड प्रशिक्षण से छूट प्रदान करने तथा बीएड के समकक्ष (एलटी आदि) प्रशिक्षणों को स्वीकार करने की मांग कर रहे हैं।

दो सितंबर को जारी संशोधन में प्रधानाचार्य भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) और केन्द्र /राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता या सहायक अध्यापक या हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्युनतम चार वर्ष का शिक्षण अनुभव रखने वाले अभ्यर्थियों को आवेदन के लिए मान्य किया गया है। 

प्रधानाध्यापक भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातकोत्तर उपाधि तथा शिक्षा स्नातक (बीएड) अथवा बीपीएड की उपाधि अनिवार्य है। अभ्यर्थी के पास केन्द्र/राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था की उच्चतर कक्षाओं (कक्षा नौ से 12) में प्रवक्ता अथवा सहायक अध्यापक अथवा जूनियर हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद पर न्यूनतम चार वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। अभ्यर्थी की आयु 30 वर्ष से कम आयु नहीं होनी चाहिए।




वित्तविहीन शिक्षक बनेंगे प्रधानाचार्य, सरकारी बाहर, भर्ती से हजारों एलटी प्रशिक्षित शिक्षकों को बाहर करने से नाराजगी, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने पैदा की अजीब स्थिति

केवल बीएड अभ्यर्थियों को मान्य किए जाने का विरोध कर रहे कार्यरत शिक्षक

तीन सितंबर को जारी आदेश में बीएड अनिवार्य और पीजी में 50% का प्रावधान

10 सितंबर 2026
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के पदों पर भर्ती के लिए संशोधित नियमों ने अजीब स्थिति पैदा कर दी है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने एक तरफ वित्तविहीन स्कूल के शिक्षकों को इन पदों पर भर्ती के लिए मान्य कर लिया है तो वहीं एडेड कॉलेजों में सालों से पढ़ा रहे हजारों शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। 2013 के बाद प्रधानाध्यापक के 1172 और प्रधानाचार्य के 1475 पदों पर अब शुरू होने जा रही भर्ती में तीन सितंबर के शासनादेश के जरिए बीएड अनिवार्य किए जाने के कारण गैर-बीएड वाले शिक्षकों को अयोग्य कर दिया है।


इससे एलटी प्रशिक्षित, कला, व्यायाम और संगीत आदि विषयों के शिक्षक आवेदन नहीं कर सकेंगे। पूर्व में विभागीय कायदे-कानून के तहत इनकी नियुक्ति हुई थी, लेकिन अब इन्हें एक झटके में बाहर कर दिया गया है। इसे लेकर इन शिक्षकों में खासी नाराजगी है। इसके अलावा परास्नातक में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता का भी विरोध हो रहा है। 


शिक्षकों का तर्क है कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की 12 नवंबर 2014 की अधिसूचना में पूर्वप्राथमिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन के लिए शिक्षकों के विभिन्न स्तर की अहर्ताओं में प्रतिशत (45% या 50%) की अनिवार्यता का निर्देश दिया गया है। हालांकि संस्था प्रधान (प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापकों) के पदों के अर्हता में स्नातकोत्तर में 50% अंक के अनिवार्यता का कोई निर्देश नहीं है।


 देश और प्रदेश के विभिन्न विश्वविद्यालयों का पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भिन्नता है तथा इन विश्वविद्यालयों में पिछले 25 से 30 वर्षों के समयांतराल में पाठ्यक्रम, परीक्षा प्रणाली एवं मूल्यांकन के मानक स्तर में भी परिवर्तन हो गया है, जिसके कारण इस प्रकार की शर्त उचित नहीं है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग संस्था प्रधान भर्ती का विज्ञापन जल्द जारी करने जा रहा है।


प्रधानाचार्य एवं प्रधानाध्यापक भर्ती में शिक्षा स्नातक तक (बीएड) के साथ एलटी प्रशिक्षण को भी समकक्ष अर्हता के रूप में शामिल करना चाहिए। साथ ही स्नात्तकोत्तर में 50 प्रतिशत अंक की बाध्यता समाप्त होनी चाहिए। ये विसंगतियां दूर नहीं हुईं तो उच्च न्यायालय में याचिकाएं होने की आशंका है, जिसके कारण संस्था प्रधान की चयन प्रक्रिया अनावश्यक रूप से बाधित हो सकती है। - लालमणि द्विवेदी, प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट।

Tuesday, September 29, 2026

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश, 11508 शिक्षक भर्ती का मामला

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश,  11508 शिक्षक भर्ती का मामला
 
29 सितंबर 2026
प्रयागराज । नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में पूछताछ की है। चयन आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने 24 सितंबर को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेनशर्मा को इस संबंध में पत्र लिखा है।

चयन आयोग का कहना है कि 15 सितंबर को सहायक अध्यापकों के 11508 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 17 सितंबर को यह अवगत कराया है कि उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में शिक्षामित्रों को 68500 एवं 69000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में उनके प्रत्येक अध्यापन वर्ष के लिए 2.5 अंक, अधिकतम 25 अंक तक (जो भी कम हो) का भारांक तथा आयु में छूट प्रदान की गयी है।

उच्चतम न्यायालय ने राम शरण मौर्या के मामले में 18 नवंबर 2020 को शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने के आदेश दिए हैं। सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के पत्र के संबंध में चयन आयोग ने लिखा है कि इस भर्ती में शिक्षामित्रों को आयु सीमा में 60 वर्ष तक छूट प्रदान की गयी है। हालांकि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 की धारा 30 में उल्लिखित है कि अध्यापकों या अनुदेशकों के चयन के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के नियमों, विनियमों या परिनियमों में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी चयन आयोग का अधिनियम प्रभावी होगा। आयोग के अधिनियम एवं विनियमावली में मात्र लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों के चयन की व्यवस्था है।

वहीं आयोग को यह सूचना नहीं दी गई है कि उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के आदेश के क्रम में शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अवसर प्रदान करने संबंधी राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किसी आदेश का उल्लेख नहीं है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग ने क्या निर्णय लिया व शिक्षामित्रों को भारांक किस प्रकार दिए जाने की व्यवस्था तय की गयी है। लिहाजा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों से आयोग को अवगत कराएं ताकि चयन प्रक्रिया की कार्यवाही सम्पादित की जा सके।



टीईटी पास शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, प्रदेश में टीईटी पास 75 हजार शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ

26 सितम्बर 2026
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में भारांक (वेटेज) दिए जाने की सौगात मिल सकती है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से शुक्रवार को शासन को पत्र भी भेज दिया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश का हवाला देते हुए भारांक दिए जाने की अनुमति मांगी है।

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के परिषदीय स्कूलों में 1,43,470 शिक्षामित्र कार्यरत हैं जिसमें 75 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने टीईटी पास कर ली है। भारांक मिलने से सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में इन्हें सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, प्रदेश सरकार पिछली दो भर्तियों 68,500 और 69,000 में भारांक दे चुकी है। इसमें काम के अनुभव के हिसाब से प्रतिवर्ष 2.5 अंक या अधिकतम 25 अंक का भारांक मिले थे। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह का कहना है कि शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार है।

2017 में निरस्त हो गया था शिक्षामित्रों का समायोजन
उप्र शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बगैर टीईटी पास प्रदेश भर के शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया था और उन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलने लगा था। इसमें 1.37 हजार शिक्षामित्र शामिल थे।

स्पेशल टीईटी में शामिल होने की कर रहे मांग
कुछ महीने पहले ही परिषदीय स्कूलों के सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता की बात कही गई थी। बाद में सरकार ने सहायक अध्यापकों की सहूलियत के लिए स्पेशल टीईटी कराए जाने की घोषणा की थी। अब प्रदेश भर के ऐसे शिक्षामित्र भी इस स्पेशल टीईटी में आवेदन करने का मौका मांग रहे हैं जो अभी टीईटी पास नहीं हैं।




शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवा चयन आयोग को लिखा पत्र

चयन आयोग ने गठित की चार सदस्यीय कमेटी, मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को भारांक देने का दिया था आदेश

आज होने वाली चयन आयोग की बैठक में हो सकता है निर्णय

22 सितंबर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी है।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती के विज्ञापन में भारांक का जिक्र नहीं होने संबंधी समाचार प्रकाशित होने के बाद अफसर बैकफुट पर हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के उस आदेश की जानकारी दी है, जिसमें शिक्षामित्रों को आगामी शिक्षक भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाने के आदेश पारित दिए गए थे।


सचिव का पत्र मिलने के बाद इस मामले में निर्णय लेने के लिए चयन आयोग ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। माना जा रहा है कि मंगलवार को होने वाली आयोग की बैठक में इस पर भी विचार किया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षामित्रों को भारांक देने की उम्मीद जगी है क्योंकि भारांक नहीं मिलने पर शिक्षामित्र कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं और ऐसा होने पर पूरी भर्ती ही फंस जाएगी। शासन स्तर पर भी शिक्षामित्रों के भारांक की अनदेखी, नियमावली में संशोधन और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आरक्षण नहीं देने पर विचार हो रहा है। शासन में भी इसी सप्ताह इन मुद्दों पर बैठक होने की उम्मीद है।


अधियाचन भेजते समय नहीं दी आदेश की सूचना

इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही सामने आई है। 11508 सहायक अध्यापक के पदों पर चयन एवं नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक ने 17 मई को चयन आयोग को अधियाचन भेजा था। उसके चार महीने बाद 15 सितंबर को चयन आयोग ने भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। वैसे तो बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को अधियाचन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सूचना देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही नहीं अधियाचन भेजने के चार महीने बाद तक बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इस आदेश की सूचना देने की चिंता नहीं हुई। भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद जब शिक्षामित्रों को भारांक नहीं देने का समाचार प्रकाशित हुआ तब जाकर बेसिक के अफसर नींद से जागे और उच्चतम न्यायालय के आदेश की सूचना भेजी।



नियमावली में संशोधन नहीं, खत्म कर दी मेरिट,  प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती का मामला

बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली में एकेडमिक मेरिट मौजूद, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन में नहीं है जिक्र

18 सितम्बर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में नियमावली संशोधन की अड़चन आ सकती है। बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में अभी भी 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान है जिसे हटाए बगैर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का विज्ञापन जारी कर दिया है। भर्ती के विज्ञापन में चयन पूरी तरह 360 अंकों की लिखित परीक्षा (120 बहुविकल्पीय प्रश्न) की मेरिट पर करने की बात लिखी है। शैक्षिक योग्यता (हाईस्कूल, इंटर, स्नातक प्रशिक्षण) के अंकों को मेरिट में शामिल नहीं किया गया है। अंक समान होने की स्थिति में सिर्फ स्नातक, प्रशिक्षण प्रतिशत व उम्र को आधार बनाया है।


यह व्यवस्था सेवा नियमावली के विपरीत है। नियमावली में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और डीएलएड (बीटीसी) / प्रशिक्षण के अंकों को (दस-दस कुल 40 प्रतिशत) वेटेज (भारांक) गुणवत्ता बिंदुओं के रूप में जोड़ा जाता है, जबकि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अंकों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। जानकारों की मानें तो नियमावली में बिना संशोधन चयन का आधार बदलना नियम विरुद्ध है। यदि लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती करनी थी तो पहले सरकार को कैबिनेट से नियमावली में 26वां संशोधन कर शैक्षिक मेरिट समाप्त करनी चाहिए थी और चयन का आधार पूर्णतया लिखित परीक्षा करना चाहिए था।

2017 से 2019 तक नियमावली में हुए छह संशोधन

बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में 2017 से 2019 तक हुए 20वें से 25वें संशोधनों में एटीआरई परीक्षा, बीएड योग्यता और अपेंडिक्स में कई बदलाव किए गए थे, लेकिन शैक्षिक मेरिट का प्रावधान आज भी कायम है। एकेडमिक मेरिट के आधार पर ही 68500 और 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। यदि चयन प्रक्रिया बदलना है तो नियमावली में संशोधन अनिवार्य है, अन्यथा भर्ती प्रक्रिया में विधिक अड़चन आ सकती है।

चयन की प्रक्रिया परीक्षा लेने वाली संस्था (उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग) ही तय करती है। ऐसे में 11508 भर्ती का जो विज्ञापन जारी हुआ है वह नियम संगत है। - डॉ. संजय कुमार सिंह, पीआरओ चयन आयोग



11508 भर्ती में शिक्षामित्रों को नहीं मिलेगा भारांक, चयन आयोग के विज्ञापन में जिक्र नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भारांक देने का दिया था आदेश

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में साढ़े सात साल बाद शुरू हुई 11508 सहायक अध्यापकों की भर्ती से प्रदेश के लगभग 1.42 लाख शिक्षामित्रों को निराशा हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु (60 साल) तक आवेदन के लिए अर्ह माना है, लेकिन भारांक का कोई जिक्र नहीं है। राम शरण मौर्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।


शीर्ष अदालत ने यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था कि इस अवसर का लाभ शिक्षामित्र किस प्रकार और किन प्रक्रियाओं व्यवस्थाओं के तहत उठा सकेंगे। यही नहीं 69000 शिक्षक भर्ती के कटऑफ विवाद के मामले में सरकार ने 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के रिक्त 51112 पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

इससे पहले जुलाई 2017 में 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार पर दस से 25 अंक तक का भारांक मिला था।

15 हजार शिक्षामित्रों को ही मिली नौकरी

बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 में निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश पर प्रदेश सरकार ने 68500 और 69000 भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिया था। क्रमशः लगभग सात और आठ हजार शिक्षामित्रों को ही नौकरी मिल सकी थी।

Monday, September 28, 2026

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग


प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में 11,508 पदों पर शिक्षक भर्ती से पहले डीएलएड करने वाले कई अभ्यर्थी पुनर्परीक्षा की अनुमति मांग रहे हैं। वहीं, परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव राजेंद्र प्रताप ने एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि दो बार सेमेस्टर बैक वाले अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा। कार्यालय के चक्कर लगाने से नियमों में बदलाव संभव नहीं है। सचिव ने बताया कि यह आदेश डीएलएड प्रशिक्षण के नियमों के अनुरूप है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर नियम का पालन किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को इस संबंध में आदेश दिया था।

Sunday, September 27, 2026

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सात साल बाद आई भर्ती में पदों की संख्या को लेकर लाखों बेरोजगारों में असंतोष पनप रहा है। एक तरफ डीएलएड और टीईटी पास बेरोजगार पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 60 हजार करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर हजारों रिक्त पद दबाए बैठे हैं।


 बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने नगर क्षेत्र के स्कूलों में सहायक अध्यापकों के केवल 11,508 रिक्त पदों की सूचना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजी है।

आठ साल पहले शुरू हुई 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त 27,713 पदों पर चयन की कार्रवाई दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 33/30 कटऑफ विवाद को खारिज करते हुए अगस्त 2024 के अंत में बेसिक शिक्षा विभाग को दो महीने में रिक्त 27,713 पदों पर नए सिरे से भर्ती शुरू करने के आदेश दिए थे। 

इस बीच शिक्षामित्र, बीटीसी और डीएलएड अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले विशेष अनुज्ञा याचिका खारिज की। उसके बाद दाखिल क्यूरेटिव पेटीशन को पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सात अक्तूबर 2025 को खारिज कर दी थी। 

उसके बाद से 27713 पदों पर भर्ती को लेकर कोई अड़चन नहीं बची है। इसके बावजूद अधिकारियों ने इन पदों की सूचना चयन आयोग को नहीं भेजी।

Wednesday, September 23, 2026

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान 


लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित शिक्षकों को नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर पैसे मांगने वालों को जेल जाना पड़ेगा। 


मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या सहायक अध्यापक को कार्यभार ग्रहण करने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी प्रबंधक को कोई समस्या है तो वह शासन को बताए, लेकिन नियुक्ति के बाद किसी भी स्तर पर लेनदेन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समारोह में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) और 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल रहे। 

मुख्यमंत्री ने 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कहा कि चार दिनों में तीन बड़े नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों के जरिये 5297 युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ा गया है। पिछले नौ वर्षों में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अगले छह माह में एक लाख और सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य है। 

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

सरकार ने 2018 में शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था अधिकार

2022 से संविदा शिक्षकों के सहारे संस्कृत स्कूलों में पढ़ाई

प्रयागराज। संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ तो सरकार ने प्रत्येक विद्यार्थी को छात्रवृत्ति देने जैसी योजना शुरू की है, वहीं संस्कृत अध्यापन को लेकर कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापकों के 1300 से अधिक पदों पर चयन के लिए अब तक किसी भर्ती संस्था को अधिकृत नहीं किया जा सका है।


सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली-2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। 


2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा था। इसी  प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। इन दोनों ही संस्थाओं का 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। 

हालांकि नए आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल है कि एडेड संस्कृत
कॉलेजों में नियमित शिक्षकों का चयन किस माध्यम से होगा। नियमित शिक्षकों की नियुक्ति में देरी के कारण ही संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संविदा पर शिक्षकों का चयन हो रहा है।

बढ़ावा देने के लिए सहायता प्राप्त संस्कृत संस्थाओं में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। - सुरेश कुमार त्रिपाठी पूर्व एमएलसी व प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ।

Sunday, September 20, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश

शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश देते हुए 21 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को अब संबंधित संस्थाओं में कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा। शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार आयोग से प्राप्त पैनल के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चयन के बाद संस्था आवंटन और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया शिक्षा निदेशालय के स्तर से पूरी की जाएगी।

इस आदेश से आयोग की ओर से चयनित होकर पैनल में शामिल अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया का अगला चरण स्पष्ट हो गया है। संबंधित अभ्यर्थियों को पैनल और विभागीय निर्देशों के अनुसार निर्धारित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा।


उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश 


Thursday, September 17, 2026

डीएलएड प्रशिक्षित महिलाएं उत्तराखंड में शादी के बाद बन सकेंगी शिक्षक, शिक्षा विभाग ने दी राहत, लेकिन ऐसे अभ्यर्थी को उत्तराखंड में लागू आरक्षण नहीं मिलेगा

डीएलएड प्रशिक्षित महिलाएं उत्तराखंड में शादी के बाद बन सकेंगी शिक्षक, शिक्षा विभाग ने दी राहत, लेकिन ऐसे अभ्यर्थी को उत्तराखंड में लागू आरक्षण नहीं मिलेगा

उत्तराखंड में विवाह के बाद निवास प्रमाण पत्र को लेकर चल रहा था विवाद

देहरादूनः उत्तराखंड में बेसिक शिक्षक बनने की तैयारी कर रही अन्य राज्यों से दो वर्षीय डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) करने वाली विवाहित महिला अभ्यर्थियों को शिक्षा विभाग ने राहत दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि उत्तर प्रदेश अथवा किसी अन्य राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान से डीएलएड करने वाली महिला, जिसका विवाह उत्तराखंड में हुआ है, प्रदेश में बेसिक शिक्षक पद के लिए पात्र मानी जाएगी। हालांकि, ऐसी अभ्यर्थियों को उत्तराखंड में लागू आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा।


 शिक्षा विभाग के अनुसार, मूल राज्य में आरक्षित वर्ग की होने के बावजूद उत्तराखंड में विवाह के बाद नौकरी के लिए आवेदन करने वाली इन महिलाओं को सामान्य श्रेणी का अभ्यर्थी माना जाएगा। इसके लिए डीएलएड प्रमाण पत्र संबंधित राज्य के मान्यता प्राप्त संस्थान का होना आवश्यक है। 

यह मामला वर्ष 2024 में बेसिक शिक्षकों के 2906 पदों पर निकली भर्ती के बाद सामने आया था। भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के पश्चात बाहरी राज्यों से डीएलएड करने वाली और उत्तराखंड में विवाह करने वाली करीब 95 महिला समेत 152 अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच शुरू कर दी गई थी। जिनमें कुछ ऐसे मामले भी थे कि विवाहिता ने बेसिक शिक्षक बनने के लिए पूर्व से मिल रहे आरक्षण का दावा किया था। जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

Wednesday, September 9, 2026

भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट, बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की

भर्ती की अंतिम तिथि तक निर्धारित योग्यता जरूरी- हाईकोर्ट,  बैक पेपर से बाद में मिली बीटीसी योग्यता से नहीं मिल सकता शिक्षक पद, कोर्ट ने बलिया के चार शिक्षकों की याचिका खारिज की
 

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बाद में बैंक पेपर देकर बीटीसी उत्तीर्ण करने वाले चार शिक्षकों को राहत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती की अंतिम तिथि तक अभ्यर्थी के पास निर्धारित योग्यता होना अनिवार्य है। बाद में हासिल की गई योग्यता से पिछली तारीख से पात्रता पैदा नहीं हो सकती।


बलिया के के चार सहायक अध्यापकों की न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने याचिका खारिज करते हुए बेसिक शिक्षा अधिकारी, बलिया के 30 अप्रैल 2025 और उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव के 29 मई 2026 के आदेश को बरकरार रखा।

याचियों ने 2019 की सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में भाग लिया था। उनका कहना था कि आवेदन करते समय उन्होंने अपने अंकों की सही जानकारी दी थी और उनके आवेदन स्वीकार किए गए तथा प्रवेश पत्र भी जारी हुए। परीक्षा में सफल होने के बाद उन्हें बलिया में नियुक्ति मिली और उन्होंने लंबे समय तक सेवा भी की। उन्होंने बाद में बैक पेपर देकर बीटीसी परीक्षा उत्तीर्ण की और 7 अगस्त 2019 को प्रमाणपत्र जारी हुआ। 

कोर्ट ने कहा कि आवेदन की अंतिम तिथि 22bदिसंबर 2018 थी, जबकि याचियों ने बीटीसी की आवश्यक योग्यता बैंक पेपर का परिणाम आने के बाद हासिल की। इसलिए उस तारीख को वे भर्ती के लिए पात्र नहीं थे। आवेदन स्वीकार होना, प्रवेश पत्र जारी होना, परीक्षा में सफल होना या बाद में नियुक्ति निल कर सकता। कोर्ट यह कहा किलंये जाना पात्रता को मूल कमी को दूर नहीं समय तक नौकरी करने और वेतन पाने के कारण सहानुभूति हो सकती है, लेकिन सार्वजनिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और निर्धारित योग्यता की अनिवार्यता से समझौता नहीं किया जा सकता। 

दूसरे अभ्यर्थियों को समान आधार पर नौकरी मिलने का तर्क भी स्वीकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि किसी अन्य को मिली गलत राहत के आधार पर समान गलत लाभ का दावा नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब नियुक्ति की बुनियाद ही निर्धारित योग्यता के अभाव मैं कानूनी रूप से दोषपूर्ण हो, तो सेवा समाप्त करने के लिए अलग से विभानीय अनुशासनात्पक जांच जरूरी नहीं है। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी।

Wednesday, August 12, 2026

यूपी बेसिक शिक्षा में शिक्षकों के 60,958 पद रिक्त, नगर क्षेत्र के 11508 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव प्रेषित

यूपी बेसिक शिक्षा में शिक्षकों के 60,958 पद रिक्त,  नगर क्षेत्र के 11508 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव प्रेषित 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र 2026 के प्रथम मंगलवार को विधायक श्री तेज प्रताप सिंह (करहल) द्वारा पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-51 के जवाब में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में छात्र-शिक्षक अनुपात और शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर महत्वपूर्ण आंकड़े सामने रखे हैं।

प्रश्न के जवाब में राज्य सरकार ने बताया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 में निर्धारित मानक के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात 30:1 तथा उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 35:1 है।

विधानसभा में पूछे गए सवाल में शिक्षकों के स्वीकृत पदों और वर्तमान रिक्तियों की जानकारी भी मांगी गई थी। विभाग के अनुसार प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापकों की सीधी भर्ती के कुल 3,27,804 स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में 60,958 पद रिक्त हैं।

रिक्त पदों पर भर्ती के सवाल पर सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के गठन के लिए शासन की अधिसूचना संख्या-415/79-शि0-1-2023-1-क-14-2023, दिनांक 21 अगस्त 2023 जारी की जा चुकी है। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में नगर क्षेत्र के सहायक अध्यापकों के 11,508 पदों पर सीधी भर्ती के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक कार्यालय द्वारा 17 मई 2026 को अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को भेजा गया है।

इससे स्पष्ट है कि सरकार के सामने बेसिक शिक्षा विभाग में बड़ी संख्या में रिक्त शिक्षक पदों का मुद्दा मौजूद है और भर्ती प्रक्रिया के लिए कम से कम 11,508 पदों का अधियाचन आयोग को भेजे जाने की जानकारी विधानसभा में दी गई है।

हालांकि प्रश्नोत्तरी में यह भी उल्लेखनीय है कि रिक्त पदों पर भर्ती किए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्न के बाद “यदि नहीं, तो क्यों?” का प्रश्न ही नहीं उठता, और विभागीय उत्तर में भी आगामी भर्ती की समयसीमा अथवा सभी 60,958 रिक्त पदों को भरने की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई गई है।

विधानसभा में प्रस्तुत यह जवाब ऐसे समय में सामने आया है जब प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में स्वीकृत पदों और कार्यरत शिक्षकों के बीच रिक्तियों का आंकड़ा हजारों में है। ऐसे में 30:1 और 35:1 के निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात को जमीन पर बनाए रखने के लिए रिक्त पदों को भरना कितना जरूरी है, यह सवाल भी इस प्रश्नोत्तरी के आंकड़ों के साथ एक बार फिर सामने आता है।




प्राथमिक शिक्षकों के 11508 रिक्त पदों का अधियाचन पोर्टल पर अपलोड, करीब 30 वर्ष बाद नगरीय विद्यालयों के लिए अधियाचन प्रेषित

प्रयागराज। प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू होने के आसार हैं। नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालयों के लिए 11,508 पदों का अधियाचन राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) के ई-पोर्टल पर अपलोड किया गया है। नगरीय विद्यालयों में इतनी संख्या में रिक्त पदों पर अधियाचन करीब 30 वर्ष बाद अपलोड किए गए हैं।

ग्रामीण अंचल के विद्यालयों के लिए 48 हजार पदों का अधियाचन अपलोड करने की तैयारी की सूचना है। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग अधियाचन का परीक्षण कर करीब 59 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तेज कर सकता है।

प्रदेश में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के 2.25 लाख से अधिक विद्यालय हैं। आंकड़ों के मुताबिक, इनमें डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों के पद रिक्त हैं। जून में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेंद्र तिवारी ने नगरीय क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष रूप से अधियाचन भेजा था। विधानसभा में पूछे गए सवालों के जवाब में पदों की पुष्टि की गई थी।

नगर क्षेत्र में 15 हजार तक हैं रिक्तियां
नगरीय विद्यालयों में 12 से 15 हजार शिक्षकों के पद रिक्त हैं। बेसिक शिक्षा परिषद ने 11,508 पदों के लिए अधियाचन ई-पोर्टल पर अपलोड किया है। 2010 के बाद ग्रामीण अंचल में शिक्षकों की कमी को देखते हुए नगरीय क्षेत्रों के अध्यापकों के तबादले किए गए थे। इस वजह से नगरीय विद्यालयों में पद रिक्त हो गए थे। अब उन्हें भरने की कवायद तेज हो गई है।




उत्तर प्रदेश में 60,958 सहायक अध्यापक पद रिक्त, नगर क्षेत्र के 11,508 पदों पर सीधी भर्ती की प्रक्रिया शुरू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के तृतीय सत्र में पूछे गए अतारांकित प्रश्न संख्या-153 के उत्तर में बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश में सहायक अध्यापकों के रिक्त पदों और भर्ती की स्थिति स्पष्ट की है।

सरकार के अनुसार वर्ष 2017 से 9 मार्च 2026 तक कुल 5,35,389 प्रशिक्षुओं को डीएलएड (D.El.Ed.) का प्रशिक्षण प्रदान किया गया, जबकि 1,26,371 प्रशिक्षुओं को शिक्षक पद पर नियुक्ति दी गई है।

विभाग ने बताया कि वर्तमान में परिषदीय विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र में सहायक अध्यापकों के 48,883 तथा नगर क्षेत्र में 12,075 सीधी भर्ती के पद रिक्त हैं।

रिक्त पदों पर भर्ती के संबंध में सरकार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम-2023 लागू होने के बाद परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक पदों पर चयन एवं नियुक्ति की प्रक्रिया अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के माध्यम से की जाएगी।

इसी क्रम में नगर क्षेत्र के 11,508 सहायक अध्यापक पदों पर सीधी भर्ती के लिए 17 मई 2026 को शिक्षा निदेशक (बेसिक) कार्यालय द्वारा अधियाचन उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, प्रयागराज को भेजा जा चुका है। सरकार ने संकेत दिया है कि आगे की भर्ती प्रक्रिया आयोग के माध्यम से नियमानुसार संपन्न कराई जाएगी।


Tuesday, August 11, 2026

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे

यूपी को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले, 1810 पद स्वीकृत सीधी भर्ती व पदोन्नति से भरे जाएंगे


लखनऊ। प्रदेश को 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालय मिले हैं। नए सत्र 2026-27 से यहां प्रवेश व पढ़ाई भी शुरू होगी। शासन ने यहां प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता, कनिष्ठ लिपिक आदि के 1810 पदों का सृजन भी कर दिया है। इन स्वीकृत पदों को सीधी भर्ती व पदोन्नति के माध्यम से भरा जाएगा।


प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत 68 राजकीय इंटर कॉलेज (बालक-बालिका) तथा 58 राजकीय हाईस्कूल कुल 126 नए राजकीय माध्यमिक विद्यालयों का निर्माण व हस्तांतरण किया गया है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इन विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 68, प्रधानाध्यापक के 58, प्रवक्ता के 680, सहायक अध्यापक (एलटी) के 819 तथा कनिष्ठ सहायक के 185 नियमित पदों का सृजन किया है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 50 फीसदी पद सीधी भर्ती से उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से भरे जाएंगे। जबकि शेष 50 फीसदी पद पदोन्नति से भरे जाएंगे। इन विद्यालयों में छठवीं व नवीं क्लास में 80-80 विद्यार्थियों को प्रवेश मिलेगा। यह प्रक्रिया जल्द पूरी होगी।

इन राजकीय इंटर कॉलेजों में हिंदी, अंग्रेजी, इतिहास, कंप्यूटर, नागरिक शास्त्र, अर्थशास्त्र, गणित, सामाजिक विज्ञान, संस्कृत, भौतिक विज्ञान, रसायन व जीव विज्ञान की पढ़ाई होगी। नए व हस्तांतरित विद्यालयों में से प्रतापगढ़ में एक, बलरामपुर में सात, बाराबंकी में तीन, सुल्तानपुर में चार, अयोध्या में दो, सीतापुर, रायबरेली व लखनऊ में एक-एक समेत आदि जिलों के विद्यालय शामिल हैं। 

Sunday, July 5, 2026

एक अंक का लाभ देने को लेकर 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती विवाद में अवमानना याचिका पर सुनवाई पांच अगस्त को

एक अंक का लाभ देने को  लेकर 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती विवाद में अवमानना याचिका पर सुनवाई पांच अगस्त को


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े अंक विवाद को लेकर दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई के लिए पांच अगस्त की तारीख लगाई है। यह आदेश न्यायमूर्ति विकास बुधवार की अदालत ने विजय कुमार भारती व अन्य की अवमानना याचिकाओं पर दिया है। 


अवमानना याचिका में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव व अन्य पर हाईकोर्ट के 12 जनवरी 2023 के आदेश की जानबूझकर अवमानना करने का आरोप लगाया गया है। इससे पहले कोर्ट ने अभ्यर्थियों को एक अंक का लाभ देने का आदेश दिया था। 

इसके अनुपालन में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से यह तो स्वीकार कर लिया गया कि याची एक अतिरिक्त अंक का हकदार है लेकिन उसे नियुक्ति देने की प्रक्रिया को विभिन्न कानूनी अपीलों के लंबित होने का हवाला देकर टाला जा रहा था। 

सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि इस पूरी भर्ती से जुड़ा मुख्य मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने बीते 19 मई को इस मामले पर सुनवाई की थी, जहां राज्य सरकार ने उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने की इच्छा जताई है जो शीर्ष अदालत पहुंचे हैं। वहां मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई को होगी। 

Friday, May 22, 2026

69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े


69000 शिक्षक भर्ती में फिर बनेगी मूल चयन सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग पर अड़े

69000 शिक्षक भर्ती: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बेसिक शिक्षा विभाग ने शुरू किया मंथन

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद 69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू, आरक्षण के नियमों के अनुसार बनेगी सूची, चयन से वंचित याची लाभ देने की मांग कर रहे

22 मई 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने नई चयन सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर विभाग आरक्षण नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने पर मंथ कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर छह सप्ताह में नई सूची तैयार करने का निर्देश दिया है। विभागीय अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिलने के बाद बैठक कर आगे की रणनीति पर चर्चा की। दूसरी ओर, पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में आरक्षण से प्रभावित सभी याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे। मोर्चा का कहना है कि 2020 से हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ रहे अभ्यर्थियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। 


69 हजार शिक्षक भर्ती की नए सिरे से मेरिट बनाने की तैयारी शुरू

लखनऊ। यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब बेसिक शिक्षा विभाग ने नए सिरे से चयन सूची तैयार करने पर मंथन कर रहा है। अब आरक्षण के नियमों का पालन करते हुए मूल चयन सूची बनाने की तैयारी है। वहीं चयन से वंचित अभ्यर्थी याची लाभ देने की मांग कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से हाईकोर्ट के 13 अगस्त 2024 के फैसले के आधार पर मूल चयन सूची बनाने का आदेश दिए हैं। जिसके लिए सरकार को छह हफ्ते का समय दिया गया है। इसके तहत बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट का आदेश मिल गया। विभागीय अधिकारियों ने इसके अनुसार बैठक कर मंथन शुरू किया।

 वहीं पिछड़ा - दलित संयुक्त मोर्चा ने मांग की है कि प्रदेश सरकार 21 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में सभी आरक्षण प्रभावित याची अभ्यर्थियों को नौकरी देने का प्रस्ताव पेश करे तो यह मामला पूरी तरह से समाप्त हो जाएगा। क्योंकि इस पर पहला हक उन प्रभावित अभ्यर्थियों का है जो 2020 से हाईकोर्ट में याची बनकर तथा 2023 से डबल बेंच में याची बनकर जीते और अब सुप्रीम कोर्ट में प्रतिवादी के रूप में लड़ाई लड़ रहे हैं। पीड़ितों की याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट की सामान्य बेंच 21 जुलाई को सुनवाई करेगी।



न्यूनतम योग्यता वाले आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर होगा विचार, 69000 शिक्षक भर्ती मामले में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखा प्रस्ताव

उत्तर प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत में कहा- मगर यह भविष्य के लिए नजीर नहीं होगा

कोर्ट ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को रिकार्ड में लेते हुए छह सप्ताह का दिया समय

भर्ती का मामला वर्ष 2018 से है लंबित, सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने दी है चुनौती

20 मई 2026
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षकों की भर्ती के मामले में नियुक्ति की योग्यता रखने वाले लेकिन चयन सूची से बाहर रह गए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए एक नई उम्मीद जगी है। उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में क्हा कि वह उन अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने पर विचार करने के लिए राजी है, जो हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के आदेश के अनुसार मूल चयन सूची में शामिल होने की योग्यता रखते हैं। हालांकि, यह नियुक्ति उम्मीदवारों की प्राथमिक शिक्षकों की न्यूनतम योग्यता मानदंडों को पूरा करने और उपलब्ध रिक्तियों के अधीन होगी।


राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय मामले की विशिष्ट परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा और इसे भविष्य में किसी अन्य चयन में नजीर नहीं माना जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से दिए गए इस प्रस्ताव को रिकार्ड पर लिया और प्रक्रिया तैयार करने के लिए छह  सप्ताह का समय दिया है। मामले की आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

इस भर्ती का मामला 2018 से लंबित है। सामान्य वर्ग के अभ्यर्थियों ने इलाहाबाद हाई कोर्ट की खंडपीठ के 13 अगस्त 2024 के फैसले को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने भर्ती की मेरिट लिस्ट को रद कर दिया था और प्रदेश सरकार को आदेश दिया था कि इस शिक्षक भर्ती की पूरी लिस्ट को मूल चयन सूची के रूप में आरक्षण के सभी नियमों के अनुसार तीन महीने के भीतर फिर से तैयार किया जाए।

रद हुई चयन सूची के अनुसार, सामान्य वर्ग के जिन शिक्षकों की नियुक्ति हो चुकी थी, उन्होंने नौकरी पर खतरे को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट ने शुरू में ही हाई कोर्ट के इस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी। आरक्षण के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगा रहे आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने भी सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप अर्जियां दाखिल की हैं और वे मूल याचिका में प्रतिवादी भी हैं। 
पिछली सुनवाई पर आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के वकील मनीष गोस्वामी ने कहा था कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के साथ इस मामले में अन्याय हुआ है और वे न्याय के लिए 2020 से भटक रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मांग यह नहीं है कि जिन शिक्षकों की भर्ती हो गई है और जो पांच साल से नौकरी कर रहे हैं, उन्हें नौकरी से बाहर किया जाए।

इस सिलसिले में मंगलवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ में हुई सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी और अंकित गोयल ने राज्य सरकार का प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखा। भाटी ने कहा कि राज्य सरकार मामले पर विचार करने के लिए राजी है और प्रक्रिया पूरी करके कोर्ट में स्थिति रिपोर्ट देगी। कोर्ट ने उनके प्रस्ताव को रिकार्ड पर लेते हुए राज्य सरकार को छह सप्ताह का समय दिया। दूसरी ओर, कुछ वकीलों ने प्रदेश सरकार के प्रस्ताव पर दलीलें देने की कोशिश की, लेकिन पीठ ने कहा कि पहले राज्य सरकार को काम करने दिया जाए।




69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पर टिकीं निगाहें, 
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर प्रदर्शन

18 मई 2026
लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास के बाहर प्रदर्शन किया। अभ्यर्थियों ने दंडवत प्रणाम करते हुए धरना दिया। उनका कहना था कि वे छह साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस मामले में अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जार्ज मसीह की बेंच में होनी है। सरकार इसमें अपना पक्ष पर रख देती है तो मामले का जल्द समाधान हो सकता है।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट में हुई थी। इसके बाद लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन मामले का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से नहीं रख रही, जिससे मामला लटकता जा रहा है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने कहा कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और लखनऊ हाई कोर्ट की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिल रहा। 


अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमण्डल ने बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन, मिला आश्वासन

69 हजार शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का तपती सड़क पर लेटकर प्रदर्शन


लखनऊ ।  प्राइमरी स्कूल की 69 हजार शिक्षक भर्ती के सुप्रीम कोर्ट में याची बने आरक्षित अभ्यर्थी सोमवार पूर्वाह्न करीब 11 बजे भीषण गर्मी में तपती सड़क पर लेट-लेट कर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पहुंचे। अभ्यर्थियों ने 20 मिनट तक लेटकर प्रदर्शन किया और खूब नारेबाजी की। हाथ, पैर व पेट सड़क की गर्मी से तप गया। बेहाल अभ्यर्थी पसीने से तर-बतर हो गए। बेहाल अभ्यर्थियों को पुलिस ने पानी पिलाया।

सूचना मिलते ही बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल को बुलाकर वार्ता की। अभ्यर्थियों ने उन्हें ज्ञापन देकर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को होने वाली सुनवाई पर बात की। अभ्यर्थियों कहा कि प्रदेश सरकार याची लाभ का प्रस्ताव पेश कर ने इस मामले का निस्तारण करे। मंत्री अभ्यर्थियों के प्रस्ताव पर सहमति और आश्वासन दिया। इसके बाद पुलिस ने इन्हें बस में बैठाकर इको गार्डन भिजवाया। पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में 31 बार यह मामला सूचीबद्ध हो चुका है, लेकिन किसी भी तारीख में सरकार अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित नहीं हुई। अब फिर मंगलवार को सुनवाई होनी है।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रामविलास, सुमित यादव, धनंजय गुप्ता, अमित, विक्रम ने बताया कि अभ्यर्थी न्याय के लिए बीते छह साल से याची बनकर न्याय मांग रहे हैं। चार दिसंबर 2018 को 69000 सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन मांगे गए। छह जनवरी 2019 परीक्षा हुई। एक जून 2020 को परिणाम जारी हुआ। आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थी 19000 आरक्षण सीट पर अनियमितता का आरोप लगाकर हाईकोर्ट चले गए


इतनी बार अभ्यर्थियों ने किया प्रदर्शन

मुख्यमंत्री आवास का घेराव-छह बार
डिप्टी सीएम के आवास का घेराव व प्रदर्शन- 10 बार
बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव 10 से अधिक बार
पूर्व शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के आवास का घेराव-8 बार

Tuesday, May 19, 2026

परिषदीय नगर क्षेत्र के विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को समायोजित करने नगर क्षेत्र के अधियाचन को समाप्त करने और ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करने की PSPSA की मांग

बेसिक शिक्षा परिषद के परिषदीय नगर क्षेत्र के विद्यालयों में ग्रामीण क्षेत्र के शिक्षकों को समायोजित करने नगर क्षेत्र के अधियाचन को समाप्त करने और ग्रामीण क्षेत्र के रिक्त शिक्षकों के पदों पर नियुक्ति करने की PSPSA की मांग 


Thursday, May 7, 2026

प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों की सूचना नहीं दी, तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश

प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों की सूचना नहीं दी, तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश 


प्रयागराज। अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधकों ने प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के सभी रिक्त पदों की सूचना चयन के लिए नहीं भेजी है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को चार मई को पत्र लिखकर तीन दिन में सूचना शिक्षा निदेशालय को उपलब्ध करने के निर्देश दिए हैं। 

निदेशक ने लिखा है कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 27 फरवरी को सूचित किया था कि हाईकोर्ट ने 26 फरवरी को छह महीने में प्रधानाचार्यों की भर्ती पूरी करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में एडेड कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापक के रिक्त पदों का अधियाचन भेजने के निर्देश दिए गए थे।