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Saturday, April 30, 2022

हर माध्यमिक विद्यालय की बनेगी वेबसाइट, बायोमेट्रिक के लिए जारी होगा आदेश

हर माध्यमिक विद्यालय की बनेगी वेबसाइट, बायोमेट्रिक के लिए जारी होगा आदेश



लखनऊ : प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों को हाईटेक बनाने की तैयारियां तेज हो गई हैं। विद्यालयों की वेबसाइट के साथ ही बायोमीट्रिक हाजिरी लगाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कालेजों को भेजे वार्षिक बजट में बायोमीट्रिक हाजिरी लगाने के निर्देश दिए थे, उनका अनुपालन अब जांचा जा रहा है, सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से रिपोर्ट मांगी गई है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले दिनों विभागवार कार्ययोजना में माध्यमिक शिक्षा विभाग के कार्य भी गिनाए थे, अब अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला उनका अनुपालन करा रही हैं। अगले तीन महीने में सभी राजकीय स्कूलों में वाई-फाई की सुविधा, सभी विद्यालयों की वेबसाइट के साथ ही हर छात्र- छात्रा की ईमेल आइडी बनाई जानी है। इसके अलावा राजकीय विद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी भी शुरू होनी है। शुक्ला ने शिक्षा निदेशक माध्यमिक को निर्देश दिया कि चारों बिंदुओं पर सभी जिलों में चल रहे विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों से कराकर रिपोर्ट सौंपा जाए।


माध्यमिक शिक्षा विभाग रिपोर्ट मिलने के बाद कार्ययोजना तैयार करेगा, ताकि समय पर इसका अनुपालन हो सके। इसी वर्ष विभाग ने स्कूलों को भेजे वार्षिक धनराशि में बायोमीट्रिक हाजिरी के लिए मशीन लेने का निर्देश दिया था, रिपोर्ट से यह भी स्पष्ट होगा कि आखिर कितने कालेजों ने धन मशीन खरीदने पर खर्च किया है। वैसे माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में अभी तक बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य नहीं है। अब विभाग इस संबंध में आदेश जारी कर सकता है। ज्ञात हो कि प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में बायोमीट्रिक हाजिरी अब तक लागू नहीं हो सकी है।

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अंतर्गत नए स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर इंतजार होगा समाप्त

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति अंतर्गत नए स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर  इंतजार होगा समाप्त


नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप नए स्कूली पाठ्यक्रम को लेकर अब लंबा इंतजार नहीं करना होगा। शिक्षा मंत्रलय की देखरेख में पाठ्यक्रम तैयार करने में जुटी टीम ने विस्तृत गाइडलाइन तैयार की है, जिसमें सबसे पहले स्कूली पाठ्यक्रम के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दिया जाएगा। आने वाली वसंत पंचमी तक प्ले स्कूल के पाठ्यक्रम का फ्रेमवर्क तैयार किया जाएगा। बाकी स्कूली पाठ्यक्रम को भी अगले कुछ महीनों में अंतिम रूप दे दिया जाएगा।



नए पाठ्यक्रम के लिए फ्रेमवर्क को अंतिम रूप देने की खातिर शिक्षा मंत्री धमेर्ंद्र प्रधान ने गाइडलाइन जारी की। इसके तहत नए पाठ्यक्रम की रूपरेखा को लेकर सभी पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। खास बात है कि यह पूरी कवायद डिजिटल मोड में संचालित होगी। इसमें कोई भी आनलाइन या मोबाइल एप के जरिये अपना सुझाव दे सकेगा। यह पहल ठीक उसी तरह आयोजित की जा रही है, जैसा एनईपी को लेकर अपनाई गई थी।


शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि नया पाठ्यक्रम 21वीं सदी की मांगों को पूरा करने वाला है। पाठ्यक्रम को लेकर जो भी कदम उठाया जा रहा है, वह इसी सोच पर आधारित है। उन्होंने जापान का उदाहरण देते हुए कहा कि देश में अब भाषा की राजनीति बंद होनी चाहिए। एनईपी में सभी स्थानीय और मातृभाषा में स्कूली शिक्षा देने की सिफारिश की गई है। हम इसी सोच को आगे बढ़ाने में जुटे हुए हैं।


 प्रधान ने कहा कि जापान आज उत्पादन का बड़ा केंद्र है। वहां लोगों को अपनी मातृभाषा में ही शिक्षा दी जाती है। इस मौके पर नेशनल कैरीकुलम फ्रेमवर्क (एनसीएफ) तैयार करने को गठित राष्ट्रीय संचालन समिति के अध्यक्ष डा के कस्तूरीरंगन, स्कूली शिक्षा सचिव अनीता करवाल आदि मौजूद थीं।

KVS Admissions 2022: केन्द्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में एडमिशन के लिए रिवाइज्ड शेड्यूल जारी, देखें

KVS Admissions 2022: केन्द्रीय विद्यालयों में पहली कक्षा में एडमिशन के लिए रिवाइज्ड शेड्यूल जारी, देखें


KVS Admissions 2022: Revised schedule: केंद्रीय विद्यालय में पहली क्लस में अपने बच्चे के एडमिशन को लेकर चिंतित हैं तो बता दें कि केंद्रीय विद्यालय में पहली क्लास में एडमिशन के लिए संशोधित शेड्यूल जारी कर दिया है। इससे पहले 18 अप्रैल को लॉटरी निकलने के दिन इसे स्थगित कर दिया गया था। तभी से अभिभावकों को एडमिशन को लेकर चिंता होनी लगी थी। 


अब KVS संगठन ने नई तरीखों की घोषणा के साथ सभी एडमिशन की तैयारी में लगे हैं। शेड्यूल के मुतबिक पहली प्रोविजनल औप वेटलिस्ट या रजिस्टर्ड उम्मीदवारों की लिस्ट 29 अप्रैल को जारी होगी। दूसरी लिस्ट 6 मई को जारी होगी और तीसरी लिस्ट 10 मई को जारी होगी। प्रोविजनल सेलेक्ट लिस्ट प्राथमिकता के आधार पर बिना आरक्षित बच्चों की 6 से 17 मई तक आ जाएगी। 


कक्षा एक के लिए सोमवार को लॉटरी नहीं निकाली जाएगी। केवीएस द्वारा इसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। नई तिथि जल्द जारी की जाएगी। इसके बाद सभी केवि में लॉटरी निकाली जाएगी। ज्ञात हो कि पहले 18 अप्रैल को लॉटरी निकालने की तिथि तय की गयी थी। इस बार कक्षा एक के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि भी बढ़ाई गई थी। दूसरी बार मौका 10 से 13 अप्रैल तक दिया गया था। दूसरी क्लास में एडमिशन 8 अप्रैल से 16 अप्रैल तक होंगे। लिस्ट 21 अप्रैल तक आ जाएगी और 22 से 18 अप्रैल तक एडमिशन हो जाएंगे।  11वीं को छोड़कर बाकी क्लासों के एडमिशन 30 जून को होंगे। 


केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) ने कक्षा 1 में दाखिला के लिए न्यूनतम आयु बढ़ाकर छह वर्ष और अधिकतम आठ वर्ष कर दी है। पहले पांच से सात वर्ष की आयु के बीच कक्षा एक में दाखिला पा सकते थे।


Friday, April 29, 2022

दत्तक ग्रहण अवकाश, अवैतनिक अवकाश, अंतर्जनपदीय एवं जनपदीय स्थानांतरण के संबंध में उ०प्र० महिला शिक्षक संघ ने मा० बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन

दत्तक ग्रहण अवकाश, अवैतनिक अवकाश, अंतर्जनपदीय एवं जनपदीय स्थानांतरण के संबंध में उ०प्र० महिला शिक्षक संघ ने मा० बेसिक शिक्षा मंत्री को दिया ज्ञापन






स्कूली पाठ्यक्रम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होगा

स्कूली पाठ्यक्रम नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होगा


नई दिल्ली: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आने के बाद से ही स्कूलों के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने का काम भी तेजी से चल रहा है। हालांकि अभी इसके तैयार होने में साल भर से ज्यादा वक्त लगेगा। लेकिन इससे पहले ही इसके स्वरूप को लेकर तरह-तरह की शंकाएं उठना शुरू हो गई हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा नीति आने से पहले शिक्षा का भगवाकरण करने का आरोप लगाया जा रहा था।


एनसीईआरटी ने इस बीच साफ किया है कि नया स्कूली पाठ्यक्रम बिल्कुल नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप ही होगा। साथ ही यह भी नीति की तरह निर्विवाद और भविष्य की जरूरतों पर फोकस करते हुए होगा। खास बात यह है कि स्कूलों के लिए तैयार हो रहे नए पाठ्यक्रम की नीति के अनुरूप रखने के लिए सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक संचालन समिति भी गठित कर रखी है। जिसका प्रमुख पूर्व इसरो प्रमुख और देश के वरिष्ठ वैज्ञानिक डाक्टर के. कस्तूरीरंगन को बनाया गया है।


 नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी कस्तूरीरंगन की अगुवाई में तैयार की गई थी। जो अब तक विवादों से लगभग दूर रही है। सरकार की सोच स्कूलों vec Phi लिए तैयार हो रहे पाठ्यक्रम को भी नीति की तरह विवादों से दूर रखने की है। इस कमेटी में कस्तूरीरंगन के अलावा शिक्षा vec K क्षेत्र से जुड़े 12 और अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है।


राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने में जुटी विशेषज्ञों की टीम को सुझाव दिया गया है कि वे स्कूली पाठ्यक्रम में उन्हीं विषयवस्तुओं को शामिल करें, जो शोधपरक होने के साथ ही तथ्यपरक भी हों। ताकि इन्हें लेकर किसी तरह का कोई विवाद या मत भिन्नता की स्थिति पैदा न हो। हालांकि इस बीच स्कूली पाठ्यक्रम तैयार करने का शिक्षा मंत्रालय ने जो लक्ष्य रखा है, उनमें इसकी रूपरेखा इसी साल के अंत overline d Phi यानी वर्ष 2022 के भीतर तैयार हो जाएगी। वहीं नया स्कूली पाठ्यक्रम भी अगले साल यानी वर्ष 2023 में बनकर तैयार हो जाएगा।

Thursday, April 28, 2022

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा 2022 उत्तरमाला और आपत्ति के संबंध में

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा 2022 उत्तरमाला और आपत्ति के संबंध में



सरकारी माध्यमिक स्कूलों में 3 महीने के अंदर शुरू होगी बायोमेट्रिक हाजिरी

सरकारी माध्यमिक स्कूलों में 3 महीने के अंदर शुरू होगी बायोमेट्रिक हाजिरी


यूपी के प्राइमरी स्कूल भले ही बायोमीट्रिक हाजिरी अभी तक लागू नहीं कर पाए हों लेकिन माध्यमिक स्कूलों में इस पर काम शुरू हो गया है। सभी स्कूलों को 100 दिन के अंदर इसे लागू करना है। वहीं हर सरकारी स्कूल में वाईफाई की व्यवस्था भी की जाएगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने प्रदेश भर के स्कूलों की वस्तुस्थिति के बारे में रिपोर्ट तलब की है।


इस रिपोर्ट के मिलने के बाद इसे लागू करने की कार्ययोजना बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री के सामने रखी गई 100 दिन की कार्ययोजना में स्कूलों की अपनी वेबसाइट और अपना ई-मेल आईडी भी बनाना होगा। इसे कैसे लागू किया जाएगा, इसमें कितने बजट की आवश्यकता है और किस तरह से बायोमीट्रिक हाजिरी की मॉनिटरिंग की जाए, इस पर कार्ययोजना बनाई जाएगी।


शिक्षकों की हाजिरी प्रदेश में बड़ा मुद्दा

माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में अभी तक बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य नहीं है। कई बार विभाग ने कवायद शुरू की लेकिन कभी शिक्षक संगठनों के विरोध तो कभी बजट के अभाव में काम नहीं हो पाया। हालांकि प्रदेश के कुछ स्कूलों में उत्साही प्रधानायापकों या डीआईओएस के कारण बायोमीट्रिक हाजिरी का प्राविधान लागू किया गया है। शिक्षकों की हाजिरी प्रदेश में बड़ा मुद्दा रही है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पिछले कार्यकाल में इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। पिछले वर्ष इसके लिए कमेटी भी बनाई गई थी लेकिन इसकी रिपोर्ट पर भी कार्रवाई नहीं हो पाई।


बेसिक के स्कूलों में अभी तक लागू नहीं

बेसिक शिक्षा के स्कूलों में 2017 से बायोमीट्रिक हाजिरी लेने की योजना है। पहले सेल्फी से हाजिरी की योजना लागू की गई लेकिन शिक्षकों के विरोध के कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा। वर्ष 2019 में टैबलेट के माध्यम से बायेामीट्रिक हाजिरी पर सहमति बनी लेकिन अभी तक टैबलेट खरीदे नहीं जा सके हैं।



मंत्रिमण्डल के समक्ष विभागीय प्रस्तुतिकरण दिनांक 20-4-2022 में 100 दिवस की कार्ययोजना में अतिरिक्त विन्दुओं को सम्मिलित करने विषयक


बलरामपुर : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति जारी।

बलरामपुर : कस्तूरबा विद्यालयों में रिक्त पदों पर नियुक्ति हेतु विज्ञप्ति जारी।



Wednesday, April 27, 2022

डीएलएड बैक पेपर में प्रत्यावेदन के बावजूद अवसर न मिलने पर प्रशिक्षु निराश, उठाए प्रश्न

डीएलएड बैक पेपर में प्रत्यावेदन के बावजूद अवसर न मिलने पर प्रशिक्षु निराश, उठाए प्रश्न


 प्रयागराज : डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) बैक पेपर में अधिकांश प्रशिक्षु चौथा मौका न मिलने से निराश हैं। कहा है कि करीब दस हजार प्रशिक्षुओं के प्रत्यावेदन में लगभग दो हजार को ही मौका दिया जाना न्यायसंगत नहीं है। इसे भेदभाव की संज्ञा देकर प्रशिक्षुओं ने मुख्यमंत्री पोर्टल पर आनलाइन शिकायत दर्ज कराई है।



 कहा है कि स्टेट काउंसिल आफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एससीईआरटी) और परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) के बीच प्रशिक्षु उलझे हुए हैं। 


डीएलएड संघ के अध्यक्ष रजत सिंह ने कहा है कि प्रत्यावेदन देने वाले सभी प्रशिक्षुओं को चौथा मौका न देकर उनके साथ खिलवाड़ किया गया है। एससीईआरटी निदेशक द्वारा तीसरे और चौथे सेमेस्टर वाले प्रशिक्षुओं को बैक पेपर में चौथा मौका दिए जाने के निर्णय का उन्होंने स्वागत तो किया, लेकिन कहा कि पोर्टल पर करीब दो हजार प्रशिक्षुओं की ही सूची होने से बाकी को झटका लगा है।


 वह बताते हैं कि एससीईआरटी की ओर से बताया जाता है कि सूची पीएनपी कार्यालय को भेज दी गई है, जबकि पीएनपी में बताया जाता है कि जितने प्रशिक्षुओं की सूची पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई थी, उन्हें बैक पेपर परीक्षा में सम्मिलित किया गया है। पीएनपी से राहत नहीं मिलने पर प्रशिक्षुओं ने एससीईआरटी और मुख्यमंत्री से शिकायत की है।

एक मई तक डीएलएड प्रशिक्षुओं के ऑनलाइन आवेदन के निर्देश

एक मई तक डीएलएड प्रशिक्षुओं के ऑनलाइन आवेदन के निर्देश



प्रयागराज : डीएलएड प्रशिक्षण बैच 2021 के प्रथम सेमेस्टर, 2017 एवं 2018 के प्रथम सेमेस्टर (अनुत्तीर्ण) और बीटीसी प्रशिक्षण-2013, 2014, 2015 सेवारत उर्दू व मृतक आश्रित के अभ्यर्थियों के आनलाइन आवेदन पत्र भरने के निर्देश डायट प्राचार्यों को दिए गए हैं।



उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने यह कार्य 27 अप्रैल से एक मई के मध्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं। डीएलएड-2021 से प्रथम बार आनलाइन शुल्क जमा करने की व्यवस्था की गई है। शुल्क 400 रुपया प्रति प्रशिक्षणार्थी निर्धारित किया गया है। सचिव ने निर्देश दिया है कि आनलाइन आवेदन में की जाने वाली प्रविष्टियों को भली भांति मिलान करने के उपरांत ही सेव करते हुए सुरक्षित करें।


 इसमें किसी भी त्रुटि के लिए डायट प्राचार्य एवं संबंधित संस्था प्रमुख जिम्मेदार होंगे। आवेदन पत्र आनलाइन करने के लिए तय की गई तिथि के बाद कोई अतिरिक्त अवसर नहीं दिया जाएगा। किसी भी परिस्थिति में आफलाइन आवेदन पत्र स्वीकार नहीं किए जाएंगे।


 सचिव ने यह भी कहा है कि विगत सेमेस्टर की परीक्षा में आवेदन आनलाइन कराए जाने की प्रक्रिया के बीच कुछ डायट प्राचार्यों ने आफलाइन आवेदन पीएनपी कार्यालय को भेजे थे, यह स्थिति कदापि ठीक नहीं है। ऐसी स्थिति पुन: आती है तो उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए दंडात्मक कार्यवाही के लिए अनुशंसा की जाएगी। आनलाइन आवेदन के लिए प्राचार्यों को तरीका भी समझाया गया है।

अब एडेड कॉलेजों में भी होगी कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति, सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा

अब एडेड कॉलेजों में भी होगी कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति, सरकार ने माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा 


कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति अब एडेड कॉलेजों में भी होगी


प्रयागराज। प्रदेश के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में भी कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति होगी। प्रदेश सरकार ने कम्प्यूटर शिक्षकों के पदसृजन के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग से प्रस्ताव मांगा है।


अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेंद्र देव ने यूपी बोर्ड के सचिव को 21 अप्रैल को पत्र लिखकर जानकारी मांगी है। जिन स्कूलों में कम्प्यूटर विषय/शिक्षा की मान्यता (हाईस्कूल व इंटर की अलग-अलग) है और पढ़ाई हो रही है, उनकी सूची शासन को भेजी गई है। पहले कभी इन स्कूलों में नियमित कम्प्यूटर शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। पदसृजन की मंजूरी के बाद माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से नियुक्ति की जाएगी।


कम्प्यूटर लैब पर वर्षों से ताले: सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 10 साल पहले आईसीटी योजना के तहत कम्प्यूटर शिक्षा शुरू की गई थी। प्रत्येक स्कूल को 10-10 कम्प्यूटर देने के साथ निजी एजेंसियों से आउटसोर्स पर शिक्षक 15 हजार रुपये मानदेय पर रखे गए थे। लेकिन पांच साल बाद पूरी योजना बंद हो गई। अधिकांश स्कूलों में कम्प्यूटर लैब में चार-पांच साल से ताला पड़ा है। कुछ स्कूलों में प्राइवेट शिक्षक हैं जिनके मानदेय का भुगतान बच्चों से लेकर किया जाता है।


राजकीय स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी

प्रदेश के 2200 से अधिक राजकीय विद्यालयों में भी कम्प्यूटर शिक्षकों की कमी है। पहली बार एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) भर्ती 2018 में कम्प्यूटर शिक्षकों की नियुक्ति के लिए पद विज्ञापित किए गए थे। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने इस भर्ती का परिणाम 23 अक्तूबर 2019 को जारी किया था। लेकिन कुल 36 सफल हो सके थे, बाकी पद खाली रह गए थे।

जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा- 2021 के मामले में परीक्षा नियामक से जवाब-तलब

जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा- 2021 के मामले में परीक्षा नियामक से जवाब-तलब


प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जूनियर एडेड हाईस्कूल भर्ती परीक्षा-2021 के परिणाम के मामले में दाखिल याचिका पर परीक्षा नियामक प्राधिकरण से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने कहा कि प्राधिकरण मामले में दो हफ्ते में जवाब दाखिल करे। कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर प्रतिवादी जवाब नहीं दाखिल कर पाते हैं तो उन्हें पेश होना होगा।


 मामले की सुनवाई के लिए 11 मई की तिथि निर्धारित की है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने मुकुल गोस्वामी पांच अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट में याचीयों की ओर से कहा गया है कि परीक्षा केदौरान अभ्यर्थियों को विषय कोड से संबंधित दिए गए दो कॉलम में एक ही को भरना था लेकिन बहुत से अभ्यर्थियों ने दोनों कॉलम भर दिए। इस वजह उनका परिणाम अवैध घोषित कर दिया गया।

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट

आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहायक कानून के तहत ग्रेच्युटी के हकदार : सुप्रीम कोर्ट



नयी दिल्ली, 25 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति अभय एस. ओका की पीठ ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं तथा वे सरकार की विस्तारित इकाई बन गए हैं। पीठ ने कहा कि 1972 (ग्रेच्युटी का भुगतान) कानून आंगनवाड़ी केंद्रों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायकों पर लागू होगा।


पीठ ने कहा कि इन अपीलों में शामिल विषय यह है कि क्या एकीकृत बाल विकास योजना (आईसीडीएस) के तहत स्थापित आंगनवाड़ी केंद्रों में काम करने के लिए नियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायक ग्रेच्युटी भुगतान कानून, 1972 के तहत ग्रेच्युटी के हकदार हैं।


पीठ ने कहा कि गुजरात उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने इस निष्कर्ष की पुष्टि की लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने जिला विकास अधिकारी द्वारा दायर अपीलों पर एकल पीठ के फैसले को खारिज करते हुए निर्णय दिया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को 1972 के कानून की धारा 2(ई) के अनुसार कर्मचारी नहीं कहा जा सकता तथा आईसीडीएस परियोजना को उद्योग नहीं कहा जा सकता है।


उच्चतम न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, 2013 के प्रावधानों और शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 11 के कारण आंगनवाड़ी केंद्र भी वैधानिक कर्तव्यों का पालन करते हैं।
न्यायमूर्ति ओका ने एक अलग फैसले में कहा कि इस प्रकार, आंगनवाड़ी केंद्र राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और गुजरात सरकार द्वारा बनाए गए नियमों के मद्देनजर सरकार की एक विस्तारित शाखा बन गए हैं।


 उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 47 के तहत परिभाषित राज्य के दायित्वों को प्रभावी बनाने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों की स्थापना की गई है और ऐसे में कहा जा सकता है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी सहायक के पद वैधानिक हैं।

केन्द्रीय विद्यालय में एडमिशन के लिए नई गाइडलाइंस जारी, जानिए किसे मिलेगा एडमिशन?

केन्द्रीय विद्यालय में एडमिशन के लिए नई गाइडलाइंस जारी, जानिए किसे मिलेगा एडमिशन?


केंद्रीय विद्यालय संगठन ने पहली क्लास से लेकर 12वीं क्लास तक के एडमिशन के लिए संशोधित गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। केवीएस की आधिकारिक वेबसाइट kvsangathan.nic.in पर जाकर पैरेंट्स और स्टूडेंट्स ये गाइडलाइंस पढ़ सकते हैं।


नई गाइडलाइंस के अनुसार एकेडमिक 2022-23 में केंद्रीय विद्यालयों में एमपी कोटे से अब एडमिशन नहीं होंगे।  केंद्रीय विद्यालयों में सांसदों का विवेकाधीन कोटा खत्म कर दिया गया है।


कोविड-19 महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों का एडमिशनकोविड-19 महामारी के कारण अनाथ हुए बच्चों को अब पीएम केयर चाइल्ड स्कीम के तहत अब इन बच्चों को एडमिशन में प्राथमिकता मिलेगी।


इन बच्चों का एडमिशन जिला मजिस्ट्रेट की लिस्ट देने के बाद ही होगा। इसके तहत 10 बच्चे हर केवी में और हर क्लास में दो बच्चे हो सकते हैं। इन बच्चों को ट्यूशन फीस, कंप्यटर फंड पहली से 12वीं तक में छूट भी मिलेगी।


आर्म्ड फोर्स, जैसे वायुसेना, नौवी, कोस्ट गार्ड अपने डिफेंस पर्सेनल के अधिकतम कुल 6 बच्चों के नाम केंद्रीय विद्यालय में एडमिशन के लिए भेज सकते हैं।


कर्मचारियों के बच्चों का भी सीधा दाखिलाकेंद्रीय विद्यालय में काम करने वाले कर्मचारियों के बच्चों का भी केवीएस में एडमिशन हो सकेगा।  इसके लिए उन्हें कोई एंट्रेंस नहीं देनी है। लेकिन 9वीं में एंट्रेंस पास करना होगा। केंद्रीय विद्यालय संगठन के मुताबिक जिन केंद्रीय कर्मचारियों की नौकरी के दौरान ही मौत हो गई थी, उनके बच्चों का भी केन्द्रीय विद्यालय में सीधा एडमिशन हो पाएगा.


ऐसे भारतीय सैनिक जिन्हें परमवीर चक्र, महावीर चक्र, वीर चक्र, अशोक चक्र, कीर्ति चक्र, शौर्य चक्र, सेना मेडल, नौसेना मेडल या वायुसेना मेडल में से कोई एक पुरस्कार मिला हो उनके बच्चों का केंद्रीय विद्यालय में सीधा एडमिशन  होगा।



केंद्रीय विद्यालयों में कोटे से प्रवेश बंद, केंद्र सरकार ने लिया प्रवेश से जुड़ा बड़ा फैसला


प्रधानमंत्री की पहल पर केंद्र सरकार ने लिया प्रवेश से जुड़ा बड़ा फैसला

हर साल विशेष कोटे से करीब 40 हजार छात्रों का होता था दाखिला

सांसद, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारी सहित लगभग सभी कोटा खत्म


नई दिल्ली : केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने इनमें लागू कोटा प्रथा को लगभग समाप्त कर दिया है। इस फैसले के तहत जो कोटे खत्म किए गए हैं, उनमें सांसदों, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारियों, केंद्रीय विद्यालयों के सेवानिवृत्त कर्मचारियों और स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष सहित प्रवेश से जुड़े करीब दर्जन भर कोटे शामिल हैं। केंद्रीय विद्यालयों में कोटे से हर साल 40 हजार सीटें भरी जाती थीं। इनमें अकेले करीब आठ हजार सीटें सांसदों की सिफारिश से भरी जाती थीं। प्रत्येक सांसद को 10 सीटों का कोटा दिया गया था।


विशेष कोटे से भरी जाने वाली ये सीटें स्कूलों में निर्धारित क्षमता के अतिरिक्त होती थीं। ऐसे में इस प्रवेश से केंद्रीय विद्यालयों की गुणवत्ता सहित छात्र-शिक्षक अनुपात और कई अन्य मानक प्रभावित हो रहे थे। प्रधानमंत्री ने इसमें हस्तक्षेप किया और कोटे की इस प्रथा को खत्म करने के लिए कहा। 


सबसे पहले शिक्षा मंत्री ने खुद अपना कोटा खत्म किया। साथ ही केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) को प्रवेश से जुड़े विशेष कोटे की नए सिरे से समीक्षा करने के निर्देश दिए। पीएम की पहल और शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद केवीएस ने पिछले दिनों कोटे पर रोक लगा थी। साथ ही पूरे मामले की समीक्षा करने का फैसला लिया था।


केवीएस ने मंगलवार को प्रवेश से जुड़े करीब दर्जन भर विशेष कोटे को खत्म करने के साथ प्रवेश को लेकर एक संशोधित गाइडलाइन भी जारी की है। इसके तहत केवीएस ने सांसदों, शिक्षा मंत्रलय के कर्मचारियों, केंद्रीय विद्यालय के सेवानिवृत्त कर्मचारियों, प्रायोजित एजेंसियों, स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष (जिला कलेक्टरों या ऐसी एजेंसियों के प्रमुख जो स्कूल निर्माण के लिए भूमि मुहैया कराते हैं) के अतिरिक्त राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों आदि के कोटे को खत्म किया है।


सांसद अब अपने बच्चों को भी नहीं दिला पाएंगे प्रवेश

केंद्रीय विद्यालय में अपने विशेष कोटे से दूसरों को प्रवेश दिलाने वाले सांसद अब अपने बच्चों और नाती-पोतों को भी प्रवेश नहीं दिला सकेंगे।


प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और कोविड में अनाथ बच्चों को कोटा

केवीएस ने खेल, स्काउट गाइड और फाइन आर्ट्स जैसी विधाओं से जुड़े प्रतिभाशाली बच्चों, एक बालिका और वीरता व बालश्री पुरस्कार प्राप्त बच्चों के कोटे को बरकरार रखा है। कोविड के चलते अनाथ हुए बच्चों और कश्मीरी विस्थापितों के बच्चों के लिए विशेष रियायत जारी रखने का भी फैसला लिया गया है। 

कोविड में अनाथ हुए बच्चों को दाखिला पीएम केयर स्कीम के तहत दिया जाएगा। इसके तहत जिला कलेक्टर की सिफारिश पर किसी भी स्कूल में ऐसे 10 बच्चों को और एक कक्षा दो बच्चों को दाखिला देने का प्रविधान किया गया है। इनकी फीस भी माफ की गई है।

मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले प्रदेश के 7442 मदरसों की जांच के आदेश

मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले प्रदेश के 7442 मदरसों की जांच के आदेश


लखनऊ : मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले सभी 7442 मदरसों की जांच होगी। शासन ने जिलाधिकारियों के माध्यम से भौतिक अवस्थापना सुविधाओं की जांच के आदेश दिए हैं, 15 मई तक जांच रिपोर्ट तय प्रारूप पर शासन को भेजी जानी है। जांच के लिए नगरीय व ग्रामीण क्षेत्र के लिए अलग-अलग तीन-तीन अफसरों की कमेटी बनाई गई है।


अमरोहा, कुशीनगर व गोंडा जिलों में चल रहे फर्जी मदरसों की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने यह निर्णय लिया है। केंद्र की ओर से मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत मुस्लिम बच्चों को गुणवत्ता व आधुनिक शिक्षा के लिए अनुदान दिया जाता है। 


पारंपरिक शिक्षा के अलावा विज्ञान, गणित, अंग्रेजी, हंिदूी व सामाजिक अध्ययन जैसे विषय पढ़ाने के लिए हर मदरसे में तीन-तीन शिक्षक रखे जाते हैं। स्नातक शिक्षकों को छह हजार व परास्नातक शिक्षकों को 12 हजार रुपये मानदेय दिया जाता है। प्रदेश सरकार भी स्नातक शिक्षकों को दो हजार व परास्नातक शिक्षकों को तीन हजार रुपये मानदेय देती है। इस योजना में प्रदेश के 7442 मदरसों के 21126 शिक्षक शामिल हैं।


पिछले दिनों उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद की बोर्ड बैठक में सदस्य तनवीर रिजवी की ओर से योजना में शामिल अमरोहा के कई मदरसों के अस्तित्व में न होने संबंधी शिकायत पर बोर्ड ने सर्वसम्मति से प्रदेश के सभी संबंधित मदरसों की जांच कराने का निर्णय लिया।


 बताया गया कि एक ही सोसायटी कई मदरसों का संचालन कर रही है। अब उप सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने मदरसा आधुनिकीकरण योजना का लाभ लेने वाले मदरसों का भौतिक सत्यापन कराने का आदेश रजिस्ट्रार उप्र मदरसा शिक्षा परिषद को दिया है। परिषद ने भी सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिया है। इसमें भवन, भूमि, किराया नामा, शिक्षक व छात्रों आदि की जांच की जाएगी।


जांच समिति ग्रामीण क्षेत्र

उप जिलाधिकारी>>अध्यक्ष
खंड शिक्षा अधिकारी>>सदस्य
खंड विकास अधिकारी की ओर से नामित अवर अभियंता >> सदस्य


जांच समिति नगर क्षेत्र

उप जिलाधिकारी>>अध्यक्ष
नगर शिक्षा अधिकारी>>सदस्य
अधिशासी अधिकारी नगर पालिका, नगर पंचायत, नगर आयुक्त की ओर से नामित अभियंता>>सदस्य

Tuesday, April 26, 2022

माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटाए गए विनय कुमार पाण्डेय को अब किया गया निलंबित

शिक्षा विभाग के कुछ और अधिकारियों पर गिर सकती है गाज, जानिए क्यों?


माध्यमिक शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि विनय पाण्डेय पर यूपी बोर्ड के कामों में रुचि न लेने, कुछ मामलों में बहुत देर से कार्रवाई करने, हाईकोर्ट के कुछ प्रकरणों में बिना शासन से परीक्षण करवाए रिपोर्ट देने के आरोप हैं। निलम्बन अवधि में वह महानिदेशक स्कूल शिक्षा से सम्बद्ध रहेंगे। सूत्रों के मुताबिक, अभी एक-दो और अफसरों पर गाज गिर सकती है।


विनय पाण्डेय को 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा विभाग से हटाया गया था। विभागीय मंत्री गुलाब देवी भी उनकी कार्यशैली से संतुष्ट नहीं थीं। विनय पाण्डेय को वर्ष 2018 में निदेशक के पद का कार्यभार सौंपा गया था।


वर्ष 2021 में उन्हें प्रोन्नत कर निदेशक बनाया गया। बीते पांच सालों से यूपी बोर्ड को नकलविहीन छवि बनाने में राज्य सरकार सफल रही थी लेकिन इस वर्ष पेपर लीक कांड हो गया। 24 जिलों में पेपर दोबारा लिया गया।


सपा सरकार में थी पहुंच योगी ने किया था बर्खास्त

विनय पांडे को सपा सरकार के कार्यकाल में वर्ष 2016 में हाईकोर्ट ने बर्खास्त करने का आदेश दिया था लेकिन इस पर तत्कालीन समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस पर अमल नहीं किया। बाद में भाजपा सरकार बनने के बाद वर्ष 2018 में उनकी बर्खास्तगी के फैसले पर अमल किया गया और उन्हें बर्खास्त कर दिया।


इस पर विनय कुमार ने हाईकोर्ट से स्टे लिया और विभाग ने उन्हें दोबारा बहाल करते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक का कार्यभार सौंप दिया था।



माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटाए गए विनय कुमार पाण्डेय को अब किया गया निलंबित

बड़ी कार्रवाई : सीएम योगी ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय पांडेय को किया निलंबित


मुख्यमंत्री योगी ने तत्कालीन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) विनय पांडये को निलंबित करने का आदेश दिया है, जो आधिकारिक कर्तव्यों का ठीक से निर्वहन नहीं करने, सरकारी कार्यों के प्रति लापरवाही और उदासीनता और सरकारी स्तर के निर्देशों का पालन न करने के लिए प्रथम दृष्टया दोषी मिले हैं।




विनय पांडे को 21 अप्रैल को माध्यमिक शिक्षा निदेशक के पद से हटा दिया गया था और उन्हें साक्षरता वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू और प्राच्य भाषाओं के निदेशक के रूप में तैनात किया गया था। पिछले महीने बलिया में प्रश्नपत्र लीक होने के बाद 24 जिलों में उत्तर प्रदेश माध्यमिक विद्यालय बोर्ड की परीक्षा रद्द कर दी गई थी। मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मामले में कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को लागू करने का आदेश दिया था। रद्द की गई परीक्षा 13 अप्रैल को फिर से आयोजित की गई थी।



मुख्यमंत्री कार्यालय के एक ट्वीट में कहा गया, "मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही पर एक और सख्त कार्रवाई। तत्कालीन शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) को निलंबित कर दिया गया।"

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की डेटशीट जारी

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की डेटशीट जारी

UP Madarsa Board Exam 2022 Dates : उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं आगामी 14 मई से शुरू होंगी। परिषद की सेकेण्ड्री, सीनियर सेकेण्ड्री, कामिल व फाजिल पाठ्यक्रमों की यह परीक्षाएं 23 मई तक चलेंगी। परिषद के रजिस्ट्रार एस.एन.पाण्डेय ने परीक्षा कार्यक्रम घोषित कर दिया है। इसके अनुसार सेकेण्ड्री कक्षाओं की परीक्षा पहली पाली में सुबह आठ बजे से पूर्वान्ह 11 बजे के बीच और सीनियर सेकेण्ड्री, कामिल व फाजिल की परीक्षाएं दूसरी पाली में दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे के बीच होंगी। परीक्षा का कार्यक्रम परिषद के पोर्टल पर भी उपलब्ध करवा दिया गया है।


- वर्ष 2021 में 1,23,046 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे थे 
- 1,22,132 परीक्षार्थी परीक्षा में बैठे थे।  
- वर्ष 2020 में 1,82, 259 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे 
- 1,41,052 परीक्षार्थियों ने परीक्षा दी थी। 

परिषद से मिली जानकारी के अनुसार, इस बार की वार्षिक परीक्षा के लिए कुल 1,62, 631 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे हैं। इनमें सर्वाधिक सेकेण्ड्री कक्षाओं के लिए 91,467, सीनियर सेकेण्ड्री के लिए 25,921, कामिल प्रथम वर्ष के लिए 13,161 ने पंजीकरण करवाया है। कामिल द्वितीय वर्ष के लिए 10,888, कामिल तृतीय वर्ष के लिए 9796, फाजिल प्रथम वर्ष के लिए 5,197 और फाजिल द्वितीय वर्ष के लिए 6,201 परीक्षार्थियों ने फार्म भरे हैं।

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का मिलेगा पैसा

रसोइयों और अंशकालिक अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, साथ ही महिला रसोइयों को साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट का  मिलेगा पैसा


लखनऊ : योगी सरकार ने बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 27,555 अंशकालिक अनुदेशकों और सरकारी, परिषदीय व सहायताप्राप्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में मिड-डे मील पकाने वाले 3,77,520 रसोइयों का मानदेय बढ़ाने का फैसला कर उनसे किया गया वादा निभाया है। 


अंशकालिक अनुदेशकों के मानदेय में 2000 रुपये और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपये प्रतिमाह की वृद्धि की गई है। इसके साथ ही प्रत्येक शैक्षिक सत्र में महिला रसोइयों को ड्रेस के तौर पर साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट के लिए उनके बैंक खातों में 500 रुपये की रकम भेजने का भी निर्णय हुआ है।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को लाल बहादुर शास्त्री भवन में हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। कैबिनेट बैठक में नौ प्रस्ताव मंजूर हुए जबकि एक स्थगित कर दिया गया। बैठक के बाद बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने बताया कि परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अंशकालिक अनुदेशकों को अभी तक 7000 रुपये मानदेय मिलता था जिसे बढ़ाकर 9000 प्रतिमाह करने का फैसला किया गया है।


 वहीं रसोइयों का मानदेय 1500 रुपये से बढ़ाकर 2000 रुपये करने का निर्णय हुआ है। सरकार ने रसोइयों की ओर से ड्रेस की मांग को स्वीकार करते हुए महिला रसोइयों को प्रत्येक शैक्षिक सत्र में साड़ी और पुरुष रसोइयों को पैंट-शर्ट उपलब्ध कराने के लिए 500 रुपये देने का भी निर्णय किया है। इस निर्णय से राज्य सरकार पर 268.26 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्ययभार आएगा।


गौरतलब है कि पिछले वर्ष 16 दिसंबर को विधान सभा में वित्तीय वर्ष 2021-22 के लिए पेश किये गए दूसरे अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने अंशकालिक अनुदेशकों और रसोइयों का मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी।



यूपी कैबिनेट के महत्वपूर्ण फैसले : अंशकालिक अनुदेशको के मानदेय में 2000 और रसोइयों के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोत्तरी



यूपी कैबिनेट में सोमवार को कुल 10 प्रस्ताव आए, जिसमें से नौ प्रस्ताव पास हुए।


🔴  27505 अंशकालिक अनुदेशक का मानदेय 2000 रुपये बढ़ा। 7000 की जगह 9000 रुपये मिलेगा।


🔵  377520 रसाेईये का अनुदान बढ़ाकर 1500 की जगह 2000 रुपये किया गया है। साल में एक बार 500 रुपये साड़ी, या पैंट शर्ट के लिये दिए जाएंगे।




अभी तक चीन से एचपीसीएल आयात करते थे। यह एक प्रकार का एथनॉल है। अब 10 लाख लीटर खुद यूपी बनाएगा। यह लैब से जुड़े कार्य मे उपयोग होता है। 

विधानसभा सत्र में असरकारी प्रस्ताव पर समिति बनेगी। बेबीरानी, जयवीर और धर्मपाल सदस्य होंगे। सुरेश खन्ना अध्यक्ष होंगे। योगेंद्र उपाध्याय भी असरकारी समिति में शामिल हैं।

पूर्वांचल एक्सप्रेस वे के लिए टोल प्लाजा, एम्बुलेंस आदि के लिए 222 करोड़ रुपये की निविदा हुई। छह एम्बुलेंस, 12 पेट्रोलिंग वाहन सहित अन्य सुविधाएं देंगे।

पीजीआई के सामने तीमारदारों के लिये भवन बनेगा। 5393 वर्गमीटर जमीन दी गई है। सिंचाई विभाग की जमीन थी।

एक मई से पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर टोल लगेगा। 

69000 शिक्षक भर्ती में गृह जनपद आवंटित न करने पर जवाब तलब

69000 शिक्षक भर्ती में गृह जनपद आवंटित न करने पर जवाब तलब


प्रयागराज : इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में बिजनौर जिला निवासी अनुसूचित जाति के याची को गृह जनपद आवंटित करने के लिए दाखिल याचिका पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने राज्य सरकार और अन्य विपक्षियों से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। 



यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव जोशी ने अमित कुमार चौधरी की याचिका पर दिया है। याचिका में सचिव उप्र बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज को क्वालिटी प्वाइंट अंक व जिला वरीयता के आधार पर पुनरीक्षित आवंटन सूची जारी करने संबंधी समादेश जारी करने की मांग की गई है।


 याची की तरफ से अधिवक्ता एमए सिद्दीकी ने बताया कि काउंसिलिंग के बाद शाहजहांपुर जिला आवंटित किया गया है। नियुक्ति पत्र भी जारी कर दिया गया है। याची को 62.5 क्वालिटी प्वाइंट अंक मिले हैं, जबकि विपक्षी संख्या चार से 14 तक ने उससे कम अंक प्राप्त किए हैं और उन्हें गृह जनपद आवंटित किया गया है। कोर्ट ने विपक्षियों को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याची का कहना है कि 1133 सीटें अभी भी खाली हैं, इसलिए उसे गृह जनपद िदया जाए।

राजनीतिक लाभ के लिए घोषणाओं पर कोर्ट के तीखे सवाल, कहा- व्यापक विमर्श और वित्तीय आकलन के बाद बननी चाहिए योजनाएं

राजनीतिक लाभ के लिए घोषणाओं पर कोर्ट के तीखे सवाल, कहा- व्यापक विमर्श और वित्तीय आकलन के बाद बननी चाहिए योजनाएं



पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं। केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी घोषणाओं को लेकर कोर्ट ने तीखे सवाल किए हैं। योजनाएं और कानून बनाने से पहले व्यापक जन बहस और उसके वित्तीय परिणाम पर भी चर्चा जरूरी है।


पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं।


नई दिल्ली। पिछले दिनों में मुफ्त उपहारों की योजनाओं को लेकर हर स्तर पर सवाल खड़े होते रहे हैं। केवल राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी घोषणाओं को लेकर कोर्ट ने तीखे सवाल किए हैं। वहीं यह बहस भी छिड़ गई है कि योजनाएं और कानून बनाने से पहले व्यापक जन बहस और उसके वित्तीय परिणाम पर भी चर्चा जरूरी है। अदालत ने पिछले दिनों ऐसी कई योजनाओं पर गंभीर आपत्ति जताई है जो या तो जल्दबाजी में बने हैं या फिर वित्तीय कारणों से जमीन पर नहीं उतर पा रहे हैं।


शीर्ष अदालत ने हाल में शिक्षा के अधिकार मामले पर एक सुनवाई के दौरान कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि अगर हर स्तर पर स्कूलों में शिक्षकों का नियुक्ति नहीं की जा रही है तो कानून ही क्यों लाया गया। 

पांच पाच हजार वेतन के शिक्षक रखकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे दी जा सकती है। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कानून बनाने से पहले वित्तीय आकलन जरूर किया जाना चाहिए और यह व्यापक विमर्श के बाद ही होना चाहिए। 


इसी तरह बिहार के शराब बंदी कानून के मामले में सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के ज्यादातर न्यायाधीशों के इस कानून में आरोपितों की जमानत सुनने में व्यस्त होने पर कानून को लेकर सवाल उठाया था। जिसके बाद बिहार सरकार कानून में संशोधन लाई है।


किसानों के देशव्यापी विरोध को देखते हुए पिछले दिनों सरकार ने नये कृषि कानून वापस ले लिए थे। इससे पहले इसी तरह के विरोध को देखते हुए भूमि अधिग्रहण संसोधन कानून वापस ले लिया गया था। कृषि कानून, सीएए, तीन तलाक कुछ ऐसे उदाहरण हैं जिनका संसद से लेकर सड़क तक बड़े स्तर पर विरोध हुआ हालांकि कृषि कानून के अलावा बाकी दोनों कानून कायम हैं। ऐसा नही है कि वापस लिए गए कानून ठीक नहीं थे कृषि कानून देश की कृषि नीति तय करने वाले और किसानों को बिचौलियों के चुंगल से मुक्त करने वाले थे।


पूर्व विधि सचिव पीके मल्होत्रा भी कहते हैं कि कई कानूनों को लाने के पीछे का उद्देश्य अच्छे हो सकते हैं लेकिन अगर निर्विवाद रूप से क्रियान्वयन न हो तो सवाल खडे होते हैं। सीएए और कृषि कानून के बारे में भी ऐसा ही हुआ। ध्यान रहे कि कुछ कानूनों को लेकर राजनीतिक रूप से भी माहौल गर्म रहा है। यही हाल मे राज्य सरकारों की कुछ घोषणाओं को लेकर भी रहा है।


खासकर मुफ्त बिजली अर्थशास्‍त्रियों से लेकर बिजली कंपनियों तक को नागवार गुजर रहा है। हाल में एसबीआइ की इकोरैप ने तो राजस्थान, छत्तीसगढ़, पंजाब, आंध्र प्रदेश जैसे कई राज्यों को नाम लेते हुए कहा था कि यहां राज्य की जितनी आय है कि उससे 20-35 फीसद तक अधिक खर्च हो रहे हैं जिसके कारण इनकी वित्तीय स्थिति खराब है।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: बेसहारा बच्चों की सुरक्षा के लिए SOP लागू करे राज्य सरकारें, जानिए पूरा मामला

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: बेसहारा बच्चों की सुरक्षा के लिए SOP लागू करे राज्य सरकारें, जानिए पूरा मामला


सड़क पर रहने वाले बच्चों को लेकर उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को सभी राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि राज्य सरकारें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) द्वारा तैयार एसओपी को लागू करें। न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने ये निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि राज्य सरकारों द्वारा इस दिशा में अब तक उठाए गए कदम संतोषजनक नहीं हैं। पीठ ने कहा कि बच्चों को बचाने का काम अस्थायी नहीं होना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बच्चों का पुनर्वास किया जाए।


इसके साथ ही पीठ ने सुनवाई करते हुए कहा कि आज से दो सप्ताह की अवधि के भीतर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा इस पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल की जाए। पीठ ने इस मामले की अगली सुनवाई मई के दूसरे सप्ताह में करने का निर्देश दिया है। 


सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत को बताया गया कि तमिलनाडु और दिल्ली सरकार ने पहले ही बेसहारा बच्चों को बचाने और उनके पुनर्वास के लिए योजना तैयार कर ली है। इस पर न्यायालय ने तमिलनाडु और दिल्ली राज्यों को एनसीपीसीआर को इसकी एक प्रति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु और दिल्ली राज्यों को इस योजना को लागू करने का निर्देश देते हुए कहा है कि सरकार बेसहारा बच्चों की पहचान करने और उनके पुनर्वास के लिए तत्काल कदम उठाए।


इससे पहले शीर्ष अदालत ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) को बेसहारा बच्चों के लिए पुनर्वास नीति तैयार करने के सुझावों को लागू करने का निर्देश दिया था। इस दौरान अदालत ने कहा था कि  यह केवल कागजों पर नहीं रहना चाहिए।


तब अदालत ने कहा था कि अब तक केवल 17,914 स्ट्रीट चिल्ड्रन के बारे में जानकारी प्रदान की गई है, जबकि उनकी अनुमानित संख्या 15-20 लाख है। शीर्ष अदालत ने कहा था कि संबंधित अधिकारियों को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के वेब पोर्टल पर आवश्यक सामग्री को बिना किसी चूक के अपडेट करना होगा।

चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के लिए अभी और इन्तजार, कोर्स को कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट पहुंचा

चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स के लिए अभी और इन्तजार, कोर्स को कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट पहुंचा



नई दिल्ली: शैक्षणिक सत्र 2022-23 से शुरू होने वाले चार वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स को लेकर छात्रों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। वजह इस कोर्स को सिर्फ देश के कुछ चुनिंदा संस्थानों से ही शुरू करने का मामला कोर्ट में पहुंच गया है। ऐसे में इसे शुरू करने में कुछ देरी हो सकती है। फिलहाल इस मामले की सुनवाई कोर्ट में इसी हफ्ते होनी है। ऐसे में माना जा रहा है कि इसके बाद स्थिति साफ हो सकती है।


नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिश के बाद राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने शैक्षणिक सत्र 2022-23 से इंटीग्रेटेड बीएड कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव किया था। इसे देश के करीब पचास संस्थानों से शुरू किया जाएगा। बाद में इसे और संस्थानों में विस्तार दिया जाएगा। नीति में सिफारिश की गई है कि 2030 के बाद स्कूलों में चार वर्षीय बीएड करने वाले छात्रों को ही बतौर शिक्षक नियुक्ति दी जाए।

Monday, April 25, 2022

शिक्षक संघ की मांग - अधिकारी दें ध्यान, बच्चों और अभिभावकों के सामने ही अध्यापकों का अपमान उचित नहीं

शिक्षक संघ की मांग - अधिकारी दें ध्यान,  बच्चों और अभिभावकों के सामने ही अध्यापकों का अपमान उचित नहीं



बांदा । परिषदीय स्कूलों के निरीक्षण में अधिकारियों द्वारा बच्चों और अभिभावकों के सामने अध्यापकों को डांट फटकार और अपमानित करने पर उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया। कहा कि शिक्षक को सरेआम बेइज्जत करना न्याय संगत नहीं है और न ही इससे शिक्षा की प्रगति होगी।



रविवार को संघ के तत्वावधान में आयोजित संवाद कार्यशाला में यह विरोध शिक्षक नेताओं ने बीएसए रामपाल सिंह की मौजूदगी में जताया। अध्यक्ष आशुतोष त्रिपाठी ने कहा कि उच्चाधिकारी निरीक्षण के दौरान छात्र-छात्राओं और अभिभावकों के सामने ही शिक्षकों को अपमानित कर रहे हैं।


गलतियां और कमियां हो सकती हैं, लेकिन जिन बच्चों को शिक्षक पढ़ा रहे हैं, उन्हीं के सामने अपमानित करना ठीक नहीं। बेसिक शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने पर मुख्यमंत्री का आभार जताया। जिला मंत्री प्रजीत सिंह ने कहा कि नए शिक्षकों की अवशेष सूची अब तक अपडेट नहीं की गई। पदोन्नति नहीं हो रही है।



अफसरों को नहीं दिख रह्रे चहारदीवार विहीन 300 स्कूल

कार्यशाला में प्राथमिक शिक्षक संघ नेताओं ने कहा कि अध्यापकों की जरा सी चूक पर उनकी सरेआम फजीहत करने वाले अधिकारियों को जिले के वह 300 विद्यालय नजर नहीं आ रहे, जहां चहारदीवारी नहीं है। इसके अलावा और भी कई समस्याओं से विद्यालय जूझ रहे हैं। अतिक्रमण व पेयजल संकट है। प्रशासन को यह भी समझना चाहिए।

बीमारी से पीड़ित बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्‍हा का निधन

बीमारी से पीड़ित बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्‍हा का निधन



बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्हा का निधन हो गया है। सोमवार को प्रयागराज के निजी अस्‍पताल में उन्‍होंने सोमवार को अंतिम सांस ली। बताते हैं कि वह इन दिनों बीमारी से पीडि़त थे। 


प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव एवं साक्षरता के निदेशक रह चुके संजय सिन्हा का निधन हो गया। आज सोमवार को प्रयागराज में फीनिक्स अस्पताल मेंं निधन हो गया है। वह सेवानिवृत्त हो चुके थे। पिछलेे कुछ समय से बीमार थे। 



संजय सिन्‍हा का कार्यकाल : बेसिक शिक्षा परिषद के पूर्व सचिव संजय सिन्हा का निधन हो गया है। सोमवार को एक निजी अस्पताल में उन्‍होंने अंतिम सांस ली। बताते हैं कि वह लिवर की बीमारी से ग्रसित थे। 



दिसंबर 2012 से सितंबर 2018 तक बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव रहे संजय सिन्हा के कार्यकाल में परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में 72,825 समेत बड़ी संख्या में सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई थी। संजय सिन्‍हा 31 अगस्त 2021 को निदेशक साक्षरता, वैकल्पिक शिक्षा, उर्दू एवं प्राच्य भाषाएं पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पत्‍नी व एक बेटी हैं।

शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थान अब अपने बेहतर कामों को करेंगे साझा

शीर्ष उच्च शिक्षण संस्थान अब अपने बेहतर कामों को करेंगे साझा


नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थानों को विश्वस्तरीय बनाने की छिड़ी मुहिम के बीच विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने एक और अहम कदम उठाया है। जिसमें उच्च शिक्षा के शीर्ष संस्थान अब अपनी प्रत्येक अच्छी शैक्षणिक पहलों को दूसरे संस्थानों के साथ साझा करेंगे। इसकी शुरुआत इसी महीने से होगी, जो पूरे एक साल तक चलेगी।



 इस दौरान हर सप्ताह देश का कोई एक शीर्ष संस्थान उदाहरणों के साथ अपनी किसी एक अच्छी पहल को सभी के सामने रखेगा। यूजीसी ने यह कदम तब उठाया है, जब उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बड़े बदलावों को अपनाया जा रहा है। 



माना जा रहा है कि बदलावों के साथ शीर्ष संस्थानों की अच्छी पहलों को भी यदि अन्य उच्च शिक्षण संस्थान अपना लेते हंै, तो तय लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया जा सकता है। यह कदम इसलिए भी अहम है, क्योंकि मौजूदा समय में देश में एक हजार से ज्यादा विश्वविद्यालय व करीब 42 हजार कालेज हैं, हालांकि इनमें से विश्वस्तरीय रैंकिंग में कुछ ही चुनिंदा संस्थान शामिल हैं।

रिश्वत लेते पकड़े गए बेसिक शिक्षा विभाग के 14 अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी हो चुके हैं गिरफ्तार, आगरा में रिश्वत की आंच

रिश्वत लेते पकड़े गए बेसिक शिक्षा विभाग के 14 अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी हो चुके हैं गिरफ्तार, आगरा में रिश्वत की आंच



आगरा। बेसिक शिक्षा विभाग के 14 अधिकारी, शिक्षक और कर्मचारी गत आठ साल में रिश्वत लेते हुए पकड़े जा चुके है वर्ष 2014 से अब कुल 15 लोगों को रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा गया है। एक लेखपाल को छोड़ दिया जाए तो बाकी सभी बेसिक शिक्षा विभाग से ही जुड़े हैं।


 वर्ष 2014 से एक वर्ष भी ऐसा नहीं गया, जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग से जुड़ा कोई न से कोई रिश्वत लेने के आरोप में पकड़ा न गया हो। दो वित्त एवं लेखाधिकारी और दो खंड शिक्षा अधिकारियों के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। 



● वर्ष 2014 में वित्त एवं लेखाधिकारी राकेश चंद मौर्य को पकड़ा गया

● वर्ष 2015 में पेंशन निदेशालय, आगरा के लिपिक आरएस प्रजापति को पकड़ा गया।

● वर्ष 2016 में एबीआरसी, फतेहाबाद उत्तम सिंह को पकड़ा गया।

● वर्ष 2016 में एबीआरसी, फतेहाबाद भूप सिंह मौर्य को पकड़ा गया।

● वर्ष 2017 में खंड शिक्षा अधिकारी, शमसाबाद, पूनम चौधरी को पकड़ा गया।

● वर्ष 2017 में वित्त एवं लेखाधिकारी कन्हैयालाल सारस्वत को पकड़ा गया।

● वर्ष 2018 में वेतन बिल लिपिक (शिक्षक), शमसाबाद सोबरन सिंह को पकड़ा गया।

● वर्ष 2019 में वेतन बिल लिपिक (शिक्षक) शमसाबाद, देव प्रकाश को पकड़ा गया।

● वर्ष 2019 में वेतन बिल लिपिक, अछनेरा प्रकल दुबे को पकड़ा गया।

● वर्ष 2019 में एबीआरसी, बरौली अहोर हरिओम दुबे को पकड़ा गया।

● वर्ष 2020 में वेतन बिल लिपिक, फतेहाबाद, राहुल गुप्ता को पकड़ा गया।

● वर्ष 2021 में एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी), चरौली अहीर जितेंद्र कुमार शर्मा को पकड़ा गया।

● वर्ष 2021 में खंड शिक्षा अधिकारी, शमसाबाद बृजराज सिंह को पकड़ा गया।

● 20 अप्रैल 2022 को प्रधानाध्यापक भैरवनाथ झा को पकड़ा गया।

दूसरी बार सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ की नजरें अब यूपी के सरकारी स्कूलों पर टिकी, जानिए यूपी के सरकारी स्कूलों को लेकर CM योगी का प्लान

दूसरी बार सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ की नजरें अब यूपी के सरकारी स्कूलों पर टिकी, जानिए यूपी के सरकारी स्कूलों को लेकर CM योगी का प्लान

यूपी : हर वर्ष 25000 प्राइमरी स्कूलों को फर्नीचर और 21 हजार को स्मार्ट क्लास


लखनऊ। प्रदेश सरकार अपने बजट से प्रदेश के सभी प्राइमरी स्कलों को फर्नीचर मुहैया करवाएगी। हर वर्ष 25,000 स्कूलों को फर्नीचर दिया जाएगा। वहीं निजी स्कूलों की तरह सरकारी विद्यालयों में ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्ट के साथ हर स्कूल में एक स्मार्ट क्लास रूम बनाने की भी योजना है। प्रतिवर्ष 21 हजार प्राइमरी स्कूलों में स्मार्ट क्लास बनवाया जाएगा।


फर्नीचर के लिए सरकार पर 900 करोड़ रुपए का भार आएगा। प्रदेश में लगभग 87400 प्राइमरी स्कूलों को इससे फायदा होगा। वहीं हर माध्यमिक स्कूल में पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब, आर्ट रूम बनाने के साथ वाई-फाई की व्यवस्था होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2019 में आपरेशन कायाकल्प की शुरुआत की थी। इसके तहत सभी स्कूलों में 19 मानकों पर काम किया जा रहा है। इसे पूरा करने की समयसीमा 2023 तक बढ़ाई जा रही है।



दूसरी बार सत्ता संभालने वाले योगी आदित्यनाथ की नजरें अब यूपी के सरकारी स्कूलों पर टिक गई हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपी के सरकारी स्कूलों की सेहत सुधारने की कवायद शुरू कर दी है। योगी सरकार ऑपरेशन कायाकल्प के तहत स्कूलों को स्मार्ट बनाने की तैयारी कर रही है। 


सूत्रों के अनुसार योगी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में ऑपरेशन कायाकल्प से प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों की स्मार्टनेस को और बढ़ाने जा रही है। इसके लिए उसने पूरी तैयारी कर ली है। यूपी के सभी प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों के लिए अनुकूल फर्नीचर जैसे टेबल, बैंच आदि की व्यवस्था होगी।


30000 माध्यमिक विद्यालयों के बुनियादी ढांचे का नवीनीकरण भी किया जाएगा। निजी स्कूलों की तरह सरकारी विद्यालयों में ऑडियो-वीडियो प्रोजेक्ट के साथ स्मार्ट क्लास रूम बनाने की भी योजना है। यूपी के प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देंगे। उनमें पुस्तकालय, कम्प्यूटर लैब, साइंस लैब, आर्ट रूम बनाने के साथ-साथ वाई-फाई की व्यवस्था होगी। निजी स्कूलों की तरह बच्चों की बेहतर पढ़ाई के लिए हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। कई विद्यालयों में बच्चों के लिए खेलने के लिए मैदान की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।


सरकारी विद्यालयों के आधुनिक होने की दिशा में बढ़ते कदमों का परिणाम हैं कि प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय कान्वेंट स्कूलों को टक्कर देने लगे हैं। जिन सरकारी स्कूलों में अभिभावक अपने बच्चों को भेजना नहीं चाहते थे उनमें छात्रों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 2019 में ऑपरेशन कायाकल्प की शुरुआत की। इसके तहत 1.33 लाख परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले 1.64 लाख बच्चों को आधुनिक परिवेश के साथ स्वच्छ और सुरक्षित माहौल देने का प्रयास किया जा रहा है। योजना के तहत विद्यालय का सौंदर्यीकरण, शुद्ध पेयजल, शौचालय, फर्नीचर आदि की व्यवस्था भी की जा रही है।

Sunday, April 24, 2022

यूपी : लखनऊ समेत NCR के जिलों में स्कूलों में मास्क अनिवार्य, शासनादेश जारी

यूपी : लखनऊ समेत NCR के जिलों में स्कूलों में मास्क अनिवार्य, शासनादेश जारी


कोविड संक्रमण से बचाव के लिए शासन ने सभी बोर्डों के विद्यालयों के लिए जारी किए निर्देश। प्रदेश भर में स्कूलों में हैंड सेनेटाइज्ड कराने के बाद ही विद्यार्थियों को प्रवेश देन के लिए कहा गया है। 


शासन ने कोविड संक्रमण से बचाव के लिए लखनऊ समेत एनसीआर क्षेत्र के विभिन्न जिलों के विद्यालयों में मास्क अनिवार्य कर दिया है। यही नहीं प्रदेश के सभी बोर्डों के विद्यालयों में हैंडवाश, हैंड सेनेटाइज्ड किए जाने के बाद ही विद्यार्थियों को प्रवेश दिए जाने के निदेश भी दिए गए हैं। 


साथ ही कहा गया है कि यदि विद्यालय में किसी छात्र, शिक्षक एवं कर्मचारी में बुखार, खांसी, जुकाम आदि से संबंधित लक्षण दिखाई दें तो उनको चिकित्सकीय परामर्श के साथ घर में सुरक्षित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।


इस संबंध में अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की ओर से शासनादेश जारी किया गया है। आदेश के अनुसार लखनऊ के अलावा एनसीआर क्षेत्र के गौतमबुद्ध नगर, मेरठ, गाजियाबाद, हापुड़, बागपत व बुलंदशहर के सभी विद्यालयों में शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य कर्मचारियों के लिए मास्क अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा कोविड-19 से बचाव के लिए सभी पात्र विद्यार्थियों के वैक्सीनेशन के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।


सभी मूल्याकंन केंद्रों पर कोविड से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने के लिए कहा गया है। सभी संयुक्त शिक्षा निदेशक व जिला विद्यालय निरीक्षकों को इसका अनुपालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशक को नोडल अधिकारी नामित करने को कहा गया है।

यूपीबोर्ड : मूल्यांकन में परीक्षकों के लिए दो वर्ष के अनुभव की बाध्यता खत्म

यूपीबोर्ड : मूल्यांकन में परीक्षकों के लिए दो वर्ष के अनुभव की बाध्यता खत्म

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रायोगिक परीक्षा - 2022 के बीच में ही शनिवार से मूल्यांकन कार्य भी शुरू करा दिया। बोर्ड ने मूल्यांकन में लगाए जाने वाले परीक्षकों के दिए दो वर्ष का शिक्षण अनुभव अनिवार्य किया था, जिसे अब खत्म कर दिया। गया है। अब योग्यता के अनुसार परीक्षकों की ड्यूटी लगाई जा रही है।


यूपी बोर्ड दो चरणों में प्रायोगिक परीक्षा आयोजित करा रहा है। पहले चरण की प्रयोगिक परीक्षा दस मंडलों में 27 तक चलेगी। 28 अप्रैल से आठ मंडलों के जिलों में दूसरे चरण के प्रायोगिक परीक्षा होगी, जो पांच मई तक चलेगी। उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई। मूल्यांकन कार्य के लिए प्रदेश में 271 केंद्र बनाए गए हैं। मूल्यांकन के लिए सवा लाख से अधिक परीक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है, जो करीब ढाई करोड़ उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे। सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बताया कि परीक्षकों के शिक्षण अनुभव को इसलिए शिथिल किया गया, क्योंकि वह योग्यता के आधार पर चयनित होते हैं।

पहले दिन मूल्यांकन के लिए नहीं आए 1269 परीक्षक

जासं, प्रयागराज : यूपी बोर्ड परीक्षा की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की कापियों का मूल्यांकन शनिवार से शुरू हो गया। पहले दिन कापियों को जांचने के लिए कुल 3812 परीक्षक लगाए गए। इनमें से मात्र 2543 परीक्षक उपस्थित हुए। 1269 परीक्षक नदारद रहे। इंटरमीडिएट के लिए 1465 परीक्षक और 158 डीएचई लगाए गए थे। इनमें से 774 परीक्षक और 67 डीएचई आए। हाईस्कूल में 2347 परीक्षक और 239 डीएचई में से मात्र 1769 परीक्षक और 137 डीएचई आए।

Saturday, April 23, 2022

यूपी बोर्ड : साल 2023 से बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में होगा बड़ा बदलाव,10वीं में 30 फीसदी पूछे जाएंगे MCQ प्रश्न

यूपी बोर्ड : साल 2023 से बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में होगा बड़ा बदलाव,10वीं में 30 फीसदी पूछे जाएंगे MCQ प्रश्न

UP Board Exam 2022 यूपी बोर्ड 9वीं और 11वीं को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार से जोड़ने के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रमों की शुरूआत होगी। यूपी बोर्ड कक्षा 9 और कक्षा 11 के छात्रों के लिए अपने नियमित पाठ्यक्रम के साथ इंटर्नशिप को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है।


नई दिल्ली : UP Board Exam 2023: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद अगले साल से बोर्ड परीक्षाओं के पैटर्न में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इसके अनुसार, अगले साल यानी कि 2023 से 10वीं की बोर्ड परीक्षा के सभी विषयों में MCQ प्रश्न पूछे जाएंगे। यूपी बोर्ड 10वीं परीक्षा 2023 के लिए योजनाबद्ध सबसे बड़े परिवर्तनों में से एक एमसीक्यू या बहुविकल्पीय प्रश्नों की शुरूआत है। इसके तहत दसवीं कक्षा में सभी विषयों से 30 फीसदी प्रश्न पूछे जाएगें। इसके लिए स्टूडेंट्स को ओएमआर यानी कि छात्रों को उत्तर देने के लिए ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन शीट (OMR) दी जाएगी। फिलहाल यूपी बोर्ड 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए पूरी तरह से वर्णनात्मक या सब्जेक्टिव तरीके से हाईस्कूल की परीक्षा आयोजित करता है।

वहीं इस संबंध में मीडिया रिपोर्ट्स में यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ला ने इस बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा गया है, “परीक्षाओं में सभी प्रश्नों में से तीस प्रतिशत एमसीक्यू प्रकार के होंगे, और छात्रों को उनका उत्तर देने के लिए ओएमआर शीट प्रदान की जाएगी। हमने इस प्रारूप का उपयोग कक्षा 9 की परीक्षाओं में किया है और अगले साल से इसे कक्षा 10 की परीक्षाओं में भी दोहराया जाएगा। इसके अलावा, मीडिया रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि यूपी बोर्ड 2025 से कक्षा 12 के छात्रों के लिए एमसीक्यू भी पेश कर सकता है।

9वीं और 11वीं के स्टूडेंट्स के लिए होगी इंटर्नशिप

यूपी बोर्ड 9वीं और 11वीं को शिक्षा के साथ-साथ रोजगार से जोड़ने के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रमों की शुरूआत होगी। यूपी बोर्ड कक्षा 9 और कक्षा 11 के छात्रों के लिए अपने नियमित पाठ्यक्रम के साथ इंटर्नशिप को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है। अपने स्कूल के दिनों में इंटर्नशिप करने से छात्रों को आवश्यक स्किल्स सीखने मिलेगा, जिससे भविष्य में उन्हें बेहतर जॉब मिलने किसी दिक्कत का सामना न करना पड़ें।

CBSE Syllabus 2023 : सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2023 के लिए जारी किया पाठ्यक्रम, यहां जानें क्या हुए बड़े बदलाव

CBSE Syllabus 2023 : सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2023 के लिए जारी किया पाठ्यक्रम, यहां जानें क्या हुए बड़े बदलाव

CBSE Syllabus 2023 साल 2023 के लिए 12वीं कक्षा के लिए जारी हुए पाठ्यक्रम के लिए फिजिक्स के पाठ्यक्रम में मामूली कटौती की गई है। इसके तहत पिछले साल की अपेक्षा इस बार भौतिक विज्ञान में 15 प्रतिशत पाठ्यक्रम में कटौती की गई है।

नई दिल्ली : CBSE Class 12 Syllabus 2023: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (Central Board of Secondary Education,CBSE) ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23 के लिए पाठ्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके अलावा, सीबीएसई बोर्ड ने अगले साल के लिए कक्षा 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं के पाठ्यक्रम की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही बोर्ड ने यह स्पष्ट कर दिया है कि, अगले साल यानी कि 2023 से दो टर्म में परीक्षाएं आयोजित नहीं करेगा। ऐसे में इन कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं और शिक्षक बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट cbseacademic.nic.in पर जाकर पाठ्यक्रम देख सकते हैं।


साल 2023 के लिए 12वीं कक्षा के लिए जारी हुए पाठ्यक्रम के लिए फिजिक्स के पाठ्यक्रम में मामूली कटौती की गई है। इसके तहत, पिछले साल की अपेक्षा इस बार भौतिक विज्ञान में 15 प्रतिशत पाठ्यक्रम में कटौती की गई है। वहीं कई टॉपिक्स जैसे इलेक्ट्रानिक्स, Magnetism सहित अन्य टॉपिक्स को भी फिर जोड़ दिया गया है।सीबीएसई कक्षा 12 गणित पाठ्यक्रम को देखें तो यह काफी हद तक समान है। हालांकि यह कुछ विषयों को वापस जोड़ा गया है तो वहीं कुछ को हटा भी दिया गया है। मोटे तौर पर अगर देखा तो पाठ्यक्रम समान ही है।इसके अलावा सीबीएसई पाठ्यक्रम 2022-23 में 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जो कि छात्र-छात्राएं ऑफिशियल वेबसाइट पर देख सकते हैं।

कोरोना महामारी के चलते हुया था फैसला

साल 2020 में आई कोरोना महामारी के चलते सीबीएसई बोर्ड ने इस साल यानी कि 2022 में बोर्ड परीक्षाओं को दो टर्म में बांटने का फैसला किया है। इसके मुताबिक, सीबीएसई टर्म 1 की परीक्षा 2022 नवंबर-दिसंबर, 2021 में आयोजित की गई थी। वहीं टर्म-2 परीक्षा इस महीने यानी 26 अप्रैल से शुरू हो रही है। इसके अनुसार, कक्षा 10 के लिए यह 24 मई और कक्षा 12 के लिए 15 जून को समाप्त होंगी।

चपरासी पद पर नियुक्त को बीएड करने के बाद सहायक अध्यापक पर नियुक्त करने को हाईकोर्ट ने दिया अवैध करार

चपरासी पद पर नियुक्त को बीएड करने के बाद सहायक अध्यापक पर नियुक्त करने को हाईकोर्ट ने दिया अवैध करार 

चपरासी से सहायक अध्यापक बने मृतक आश्रित को चपरासी बनाए रखें


 प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने मृतक आश्रित कोटे में चपरासी पद पर नियुक्त याची संजय कुमार वर्मा को बीएड करने के बाद सहायक अध्यापक नियुक्त करने को अवैध करार दिया है। कहा है कि मृतक आश्रित सेवा नियमावली परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से उबारने के लिए है। यह रोजगार पाने का श्रोत नहीं है। खंडपीठ ने कहा कि जिला विद्यालय निरीक्षक को याची को सहायक अध्यापक नियुक्त करने का अधिकार नहीं था।


खंडपीठ ने एकलपीठ के याची को सहायक अध्यापक पद पर बने रहने व वेतन भुगतान करने के आदेश को रद्द कर दिया है और कहा है कि याची को चपरासी पद पर कार्य करने दिया जाए। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल तथा न्यायमूर्ति पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार की एकलपीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल विशेष अपील को स्वीकार करते हुए दिया है।


अपील पर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी व स्थाई अधिवक्ता राजीव सिंह ने बहस की। मालूम हो कि याची के पिता हरिन्द्र राम वर्मा जनता इंटर कालेज नवा नगर, बलिया में सहायक अध्यापक थे। जिनकी सेवाकाल में 18 सितंबर 1985 को मौत हो गई। पीछे विधवा पत्नी व नाबालिग बेटा था। 


सन 2000 में मां ने बालिग होने पर अपने बेटे याची की चपरासी पद पर नियुक्ति का आवेदन दिया। जिसका अनुमोदन नहीं मिला। याची ने 2004 में बी एड कर लिया और सहायक अध्यापक नियुक्त किए जाने की अर्जी दी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने नियुक्ति का अनुमोदन भी कर दिया। 2011 में कोर्ट का फैसला आया कि अध्यापक छात्र अनुपात में ही नियुक्त किए जाएं।


कोर्ट आर्डर 👇



सीतापुर : रिक्त पदों पर ARP चयन हेतु विज्ञप्ति जारी।

सीतापुर : रिक्त पदों पर ARP चयन हेतु विज्ञप्ति जारी।


आगरा मंडल के 64 परीक्षक डिबार : नहीं कर सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों मूल्यांकन

आगरा मंडल के 64 परीक्षक डिबार : नहीं कर सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षाओं की कॉपियों मूल्यांकन

आगरा मंडल के 64 परीक्षकों को डिबार कर दिया गया है। इनमें सबसे अधिक 50 परीक्षक मैनपुरी के हैं। आगरा के 13 और मथुरा के एक परीक्षक को डिबार किया गया है। 


आगरा मंडल के 64 परीक्षक यूपी बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन नहीं कर सकेंगे। उन्हें परीक्षा के अन्य पारिश्रमिक कार्यों से वंचित किया गया है। यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से जारी सूची मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक ने मंडल के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेज दी है।
 
आगरा के 13 परीक्षक डिबार किए गए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से डिबार किए गए परीक्षकों की सूची जिले के पांचों मूल्यांकन केंद्रों को उपलब्ध करा दी गई है। उप नियंत्रकों से अपेक्षा की गई है कि वह सुनिश्चित करें कि किसी डिबार परीक्षक की ड्यूटी यूपी बोर्ड परीक्षा की कॉपियों के मूल्यांकन कार्य में न लगे। 

आगरा में इन केंद्रों के परीक्षक हुए डिबार
जिले में राष्ट्रीय इंटर कॉलेज, बरहन के विनोद कुमार शुक्ला, एसएसपीआर इंटर कॉलेज, अछनेरा के देवेंद्र कुमार द्विवेदी, डीएवी इंटर कॉलेज, कुंडौल के अर्जुन सिंह धाकरे, केसीसीएस इंटर कॉलेज, धिमश्री के नरेंद्र कुमार चाहर व महाराज सिंह त्यागी, चंद्रा बालिका विद्यापीठ इंटर कॉलेज की सुधा वर्मा, श्री नर्मदा देवी कन्या इंटर कॉलेज, अजीजपुर के हरेंद्र कुशवाह, चुन्नीलाल उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, बगदा, बरौली अहीर के पंकज शर्मा (लिपिक), श्री डीपी सिंह इंटर कॉलेज, पिनाहट के मुनेश शर्मा व वीरेंद्र कुमार और महेंद्र सिंह पचौरी इंटर कॉलेज, बुर्ज अतिबल, बरहन के श्रीकांत को डिबार किया गया है। 

मैनपुरी के 50 परीक्षक सूची में 
मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. मुकेश अग्रवाल के मुताबिक मंडल में कुल 64 परीक्षकों को मूल्यांकन कार्य व अन्य परीक्षा के पारिश्रमिक कार्यों से डिबार किया गया है। सर्वाधिक 50 परीक्षक मैनपुरी जिले के हैं। आगरा के 13 और मथुरा के एक शिक्षक का नाम सूची में है। फिरोजाबाद का कोई शिक्षक सूची में नहीं शामिल है।

प्रयागराज : कस्तूरबा विद्यालय में छात्राओं को नहीं मिला खाना और नाश्ता, बीईओ निलंबित

प्रयागराज : कस्तूरबा विद्यालय में छात्राओं को नहीं मिला खाना और नाश्ता, बीईओ निलंबित



प्रयागराज : कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में छात्राओं को बिना भोजन और नाश्ते के रहना पड़ा। मामला जिले के बहादुरपुर विकास खंड स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय का है। जांच में लापरवाही मिलने पर बीईओ बहादुरपुर केपी शुक्ला को निलंबित कर दिया गया है। 



कस्तूरबा गांधी विद्यालय में छात्राओं को न तो भोजन मिला और न ही उन्हें नाश्ता नसीब हुआ। महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा टीम ने मामले की जांच की तो पता चला कि खंड शिक्षा अधिकारी बहादुरपुर केपी शुक्ला की लापरवाही के चलते रसोई गैस की व्यवस्था नहीं हो पाई। इतना ही नहीं बीआरसी पर पाठ्य पुस्तकों एवं कार्यपुस्तिकाओं की आपूर्ति एवं वितरण के संबंध में कोई अभिलेख नहीं मिला। नि:शुल्क ड्रेस वितरण, डीबीटी के संदर्भ में अपेक्षित कार्यवाही नहीं की गई। अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना की गई। 

महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा की संस्तुति पर अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ललिता प्रदीप ने बहादुर विकासखंड के शिक्षा अधिकारी केपी शुक्ला को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में बीईओ मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक प्रयागराज कार्यालय से संबद्ध रहेंगे। मामले की जांच प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान को सौंपी गई है। साथ ही निलंबित खंड शिक्षा अधिकारी को आरोप अलग से दिया जाएगा।