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Wednesday, August 31, 2022

अटल आवासीय विद्यालयों का निर्माण समय से पूरा करें

अटल आवासीय विद्यालयों का निर्माण समय से पूरा करें


लखनऊ। प्रदेश के श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर ने निर्माणाधीन 18 अटल आवासीय विद्यालयों का काम समय से पूरा करने के निर्देश दिए हैं।


 उन्होंने कहा कि अप्रैल 2023 से इन विद्यालयों में पठन-पाठन का कार्य शुरू होना है। वे मंगलवार को विधानभवन स्थित तिलक हॉल में निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने कार्यदायी संस्था पीडब्ल्यूडी को निर्माण कार्य की अनिवार्य रूप से थर्ड पार्टी जांच कराने के निर्देश दिए। 


उन्होंने कर्मचारी राज्य बीमा योजना की समीक्षा बैठक की। विशेष सचिव पीपी सिंह ने बताया कि यह योजना प्रदेश के 41 जिलों में लागू है, जिसमें 25.04 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। बाकी 34 जिलों में भी इस योजना की सहमति कर्मचारी राज्य बीमा निगम को प्रेषित कर दी गई है। ब्यूरो

माध्यमिक शिक्षकों को अब विषय व वर्गवार दोनो श्रेणियों में दिए जाएंगे 18-18 पुरस्कार, नए मानकों पर दिए जाएंगे अवार्ड

माध्यमिक शिक्षकों को अब विषय व वर्गवार दोनो श्रेणियों में दिए जाएंगे 18-18 पुरस्कार,  नए मानकों पर दिए जाएंगे अवार्ड


माध्यमिक शिक्षा के स्कूलों में अब नए मानकों पर राज्य अध्यापक और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार दिए जाएंगे। वहीं दोनों ही श्रेणियों में 18-18 पुरस्कार दिए जाएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार अब विषयवार दिए जाएंगे। इस संबंध में मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई बैठक में निर्णय लिया गया।



अभी तक 9 अध्यापकों को राज्य अध्यापक पुरस्कार और हर मंडल से एक शिक्षक को मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार दिया जाता था। अब मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार भी शिक्षक दिवस के मौके पर राज्य अध्यापक पुरस्कार की तरह दिए जाएंगे।


विषयों का बनेगा अलग-अलग समूह राज्य अध्यापक पुरस्कार के 18 पुरस्कारों में 2-2 पुरस्कार प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक और शेष 14 पुरस्कार शिक्षकों के लिए विषयवार-वर्गवार निर्धारित किए गए हैं। दोनों ही तरह के पुरस्कारों के लिए चयन नए मानकों के आधार पर होगा।



न्यूनतम 50 फीसदी अंक वाले ही कर सकेंगे आवेदन

वही शिक्षक आवेदन कर सकेंगे जो निर्धारित मानकों में न्यूनतम 50 फीसदी आर्हता अंक रखते हों। जिन्होंने यूपी बोर्ड में पिछले पांच वर्षों में संबंधित विषय में न्यूनतम 90 फीसदी रिजल्ट हर वर्ष दिया हो। इसके अलावा आपराधिक पृष्ठभूमि के लिए एलआईयू की जांच रिपोर्ट अनिवार्य होगी। चयन समिति के सामने शिक्षकों को अपना प्रस्तुतिकरण भी देना होगा। अभी तक राजकीय / सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित रूप से की गई सेवा को मान्य किया गया है लेकिन अब पुरस्कार के लिए मुख्य आकलन प्रदेश में किए गए शिक्षण कार्य के आधार पर किया जाएगा


राज्य अध्यापक पुरस्कार

अब जिले व मंडल स्तर की चयन समितियों से भेजे गए नामों का परीक्षण निदेशालय स्तर पर चयन समिति करेगी। इसके बाद राज्य चयन समिति नाम तय करेगी। अभी निदेशालय स्तर पर समिति नहीं होती थी। समय सारणी को और अधिक व्यावहारिक बनाया गया है। पुरस्कार के लिए केंद्र या अन्य राज्यों के राजकीय, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में नियमित रूप से की गई सेवा को भी मान्य किया गया है। हालांकि पुरस्कार का आकलन प्रदेश में किए गए शिक्षण कार्य के आधार पर ही होगा।


मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार

अब तक मंडल व राज्य स्तरीय चयन समिति अध्यापक का चयन करती थी, लेकिन अब जिले व निदेशालय स्तर पर भी चयन समिति होगी। स्ववित्त पोषित विद्यालय के एक प्रधानाचार्य को भी इसमें सदस्य बनाया जाएगा, लेकिन शर्त होगी कि वह स्वयं पुरस्कार के लिए नामित न हो। यह पुरस्कार पहले दिसंबर या मुख्यमंत्री से निर्धारित तिथि पर दिया जाता था, लेकिन अब 5 सितंबर को दिया जाएगा।

Tuesday, August 30, 2022

यूपी बोर्ड : कक्षा नौ व 11 के पंजीयन तिथि बढ़ी, स्कूलों को राहत

यूपी बोर्ड : कक्षा नौ व 11 के पंजीयन तिथि बढ़ी, स्कूलों को राहत


■ अब दोनों कक्षाओं में पंजीयन की 10 सितंबर तक बोर्ड ने दिया मौका

■ 25 अगस्त रही अंतिम तिथि, कई बच्चों का पंजीकरण नहीं हो सका



माध्यमिक शिक्षा परिषद के कक्षा नौ व 11 छात्रों के पंजीयन तिथि बढ़ाने के फैसले से कॉलेज प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है। पहले पंजीयन की समय सीमा 25 अगस्त निर्धारित रही।


इसके चलते कई बच्चों का पंजीकरण नहीं हो पाया था। अब 10 सितंबर तक पंजीयन से जुड़ी सभी औपरिकताएं पूरी करनी होगी। इसके बाद कोई भी बच्चे छूटे तो प्रबंधन जवाबदेह होगा।


यूपी बोर्ड ने दोनों कक्षाओं का अग्रिम शुल्क 50 रुपये निर्धारति किए हैं। कोषागार में धन जमाकर छात्रों का पंजीकरण 10 सितंबर रात 12 बजे तक बोर्ड के पोर्टल पर कराना अनिवार्य किया गया है। 11 से 15 सितंबर के बीच वेबसाइट पर अपलोड विवरणों की चेकलिस्ट लेकर कॉलेज प्रबंधन उनके नाम, अभिभावक का नाम, जन्मतिथि, विषयों व फोटो की जांच कर सकेंगे।  16 से 30 सितंबर के बीच अपलोड विवरण को संशोधित किया जा सकेगा।


कॉलेज के प्रधानाचार्य की ओर से पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली व कोषागार में जमा धनराशि की प्रतिलिपि डीआईओएस कार्यालय में जमा करेंगे। बोर्ड की ओर से पंजीकरण तिथि बढ़ा देने से कॉलेज प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है। 25 अगस्त तक पूर्व निर्धारित अंतिम तिथि  होने से अंतिम क्षणों में नेटवर्क गड़बड़ होने से पंजीयन नहीं हो पाया था। ऐसे विद्यालय की संख्या ज्यादा होने को देखते हुए बोर्ड का फैसला छात्र हित में बेहतर रहा है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत स्कूलों में भी वर्चुअल लैब से पढ़ाई की सुविधा देने की तैयारी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत स्कूलों में भी वर्चुअल लैब से पढ़ाई की सुविधा देने की तैयारी 

 
● राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत वर्चुअल लैब खोली जाएंगी

● वर्ष 2022-23 में गणित और विज्ञान की 750 लैब बनेंगी


नई दिल्ली : राष्ट्रीय शिक्षा नीति की सिफारिशों के तहत स्कूलों में भी वर्चुअल लैब से पढ़ाई की सुविधा होगी। स्कूलों में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को पाठ्यक्रम की बुनियादी जानकारी देने के बाद वर्चुअल लैब का उपयोग करना सिखाया जाएगा। कृत्रिम बुद्धिमता का उपयोग करके बच्चे आभासी वातावरण में गणित और विज्ञान को आसानी से समझ सकेंगे।


शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बच्चों में तर्कसंगत सोच की क्षमता विकसित करने एवं रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2022-23 के दौरान गणित एवं विज्ञान में 750 वर्चुअल लैब और 75 कौशल ई-लैब स्थापित करने की योजना बनाई गई है।


केंद्रीय मंत्रिमंडल के सामने पेश मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, इस कार्यक्रम के तहत अब तक 200 वर्चुअल लैब स्थापित हुई हैं। इसके तहत कक्षा नौ से 12 तक के लिए भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित और जीव विज्ञान विषय में दीक्षा पोर्टल पर वर्चुअल लैब की रूपरेखा रखी गई है। अधिकारी के अनुसार, वर्चुअल लैब कार्यक्रम से मध्य स्कूल स्तर और माध्यमिक स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों, शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षकों को फायदा होगा। इससे देश में करीब 10 लाख शिक्षक और 10 करोड़ छात्रों के लाभान्वित होने की उम्मीद है।


संस्कृति से जोड़ेगी कलाशाला 
शिक्षा मंत्रालय ने स्थानीय कला को प्रोत्साहित करने एवं समर्थन देने के लिए देश के 750 स्कूलों में ‘कलाशाला’ कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना बनाई है। इस कार्यक्रम का लक्ष्य स्कूली छात्रों को देश की विभिन्न लोक कलाओं के बारे जानकारी देना तथा उन्हें भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी जुटाने में मदद करना है।

Monday, August 29, 2022

प्रदेश के 400 महाविद्यालय बीएड काउंसिलिंग से बाहर, जानिए क्यों?

प्रदेश के 400 महाविद्यालय बीएड काउंसिलिंग से बाहर, जानिए क्यों? 



परफार्मेस अप्रेजल रिपोर्ट जमा नहीं करने वाले प्रदेश के करीब 400 महाविद्यालयों को बीएड काउंसिलिंग से बाहर कर दिया गया है। महात्मा ज्योतिबाफुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय 15 सितंबर के बाद काउंसिलिंग कराने की तैयारी में है, जिसमें इन महाविद्यालयों को सीट आवंटन नहीं होगा।


 एनसीटीई ने परफार्मेस अप्रेजल रिपोर्ट मांगी थी। इसमें बीएड महाविद्यालयों को जमीन, क्षेत्रफल, तैनात शिक्षक, छात्रों की संख्या आदि का ब्योरा मांगा था। पिछले वर्ष तक 400 महाविद्यालयों की ओर से यह ब्योरा नहीं दिया गया। 


एनसीटीई ने कार्रवाई की तैयारी की तो संचालक सुप्रीम कोर्ट चले मगर वहां से भी राहत नहीं मिली। विश्वविद्यालय के अधिकारियों के अनुसार, बीते दिनों हुई बैठक में आदेश दे दिया कि ऐसे महाविद्यालयों को सत्र 2022-23 की काउंसिलिंग में नहीं शामिल करें।

फैसला : बीएड स्पेशल और बीएड दोनों डिग्री एक समान

फैसला :  बीएड स्पेशल और बीएड दोनों डिग्री एक समान 


नई दिल्ली : केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि बीएड स्पेशल और बीएड दोनों डिग्री एक समान है। न्यायाधिकरण ने यह फैसला देते हुए कहा कि ऐसे में बीएड स्पेशल डिग्री धारक भी सामान्य शिक्षक बनने के योग्य हैं।


न्यायाधिकरण के इस फैसले से देशभर के बीएड स्पेशल डिग्री धारक करीब एक लाख युवाओं विशेष शिक्षक बनने के साथ-साथ अब उनके लिए समान्य शिक्षक बनने के रास्ते खुल सकते हैं।


न्यायाधिकरण के सदस्य जस्टिस आर.एन. सिंह और तरुण श्रीधर की पीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के उस निर्णय को रद्द कर दिया है जिसमें उमा रानी को शिक्षक (टीजीटी हिंदी) के लिए आयोग्य ठहरा दिया था। पीठ ने सभी तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि बीएड स्पेशल और बीएड दोनों डिग्री एक समान है, ऐसे में याचिकाकर्ता महिला को टीजीटी हिंदी यानी समान्य शिक्षक बनने के लिए अयोग्य नहीं ठहरा सकते हैं। पीठ ने कहा, यदि महिला सफल हुई हैतो उसे नियुक्त करें।



बीएड स्पेशल वाले भी बन सकते हैं सामान्य शिक्षक

नई दिल्ली। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने महत्पवूर्ण फैसले में कहा है कि बीएड स्पेशल और बीएड दोनों डिग्री एक समान है। न्यायाधिकरण ने यह फैसला देते हुए कहा कि ऐसे में बीएड स्पेशल डिग्री धारक भी सामान्य शिक्षक बनने के योग्य हैं। फैसले से देशभर के बीएड स्पेशल डिग्री धारक करीब एक लाख युवाओं का विशेष शिक्षक बनने के साथ-साथ सामान्य शिक्षक बनने का भी रास्ता खुल सकता है।


न्यायाधिकरण के सदस्य जस्टिस आर.एन. सिंह और तरुण श्रीधर की पीठ ने दिल्ली अधीनस्थ सेवा चयन बोर्ड (डीएसएसएसबी) के उस निर्णय को रद्द कर दिया है, जिसमें एक महिला को टीजीटी हिंदी शिक्षक के लिए अयोग्य ठहरा दिया गया था।


पीठ ने तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि बीएड स्पेशल और बीएड दोनों एक समान डिग्री हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता महिला को टीजीटी हिंदी यानी सामान्य शिक्षक बनने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। पीठ ने डीएसएसएसबी के फैसले के खिलाफ उमा रानी की ओर से अधिवक्ता अनुज अग्रवाल की ओर से दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह फैसला दिया है।


याचिकाकर्ता ने दिल्ली सरकार के स्कूल में टीजीटी हिंदी के लिए 2010 में डीएसएसएसबी की भर्ती प्रक्रिया के लिए आवेदन किया था और परीक्षा में शामिल हुई। 2015 में परिणाम आया तो उनका परिणाम जारी नहीं किया गया था। बोर्ड ने उन्हें बताया गया कि बीएड की डिग्री न होने के चलते वह टीजीटी हिंदी के योग्य नहीं हैं। हालांकि, उनके पास बीएड स्पेशल की डिग्री थी। इसके बाद उन्होंने बोर्ड के फैसले को चुनौती देते हुए रद्द करने की मांग की थी।


कैट का यह फैसला बीएड स्पेशल डिग्री धारक करीब एक लाख युवाओं के लिए राहत भरा है। बीएड स्पेशल डिग्री धारक शिक्षक विशेष जरूरत वाले बच्चों को शिक्षा देने के लिए विशेष तौर पर प्रशिक्षित होते हैं, ऐसे में वे समान्य बच्चों को भी बेहतर शिक्षा देंगे।
-शम्सउद्दीन, महासचिव,
मॉडर्न इंडियन लैंग्वेजेज अध्यापक परिवार

UPMSP : यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार होंगी 1.75 करोड़ कॉपियां, सिलाई के लिए जारी किया गया टेंडर

UPMSP : यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए तैयार होंगी 1.75 करोड़ कॉपियां, सिलाई के लिए जारी किया गया टेंडर


यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए बड़ी संख्या में कॉपियां तैयार की जानी है, सो इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। राजकीय मुद्रणालय की ओर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं की धागे से सिलाई का टेंडर जारी किया गया है।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की वर्ष 2022-23 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाओं की तैयारियां शुरू हो गईं है। इस बार परीक्षा के लिए 1.75 करोड़ कॉपियां तैयार की जाएंगी। राजकीय मुद्रणालय ने कॉपियों की सिलाई का टेंडर जारी कर दिया है।

यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के लिए बड़ी संख्या में कॉपियां तैयार की जानी है, सो इसके लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी गईं हैं। राजकीय मुद्रणालय की ओर से हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की उत्तर पुस्तिकाओं की धागे से सिलाई का टेंडर जारी किया गया है। यह कार्य आउट सोर्सिंग के माध्यम से कराया जाएगा।

मुद्रणालय की ओर से जारी विज्ञापन के अनुसार हाईस्कूल ‘अ’ की 16 पेजों वाली 70 लाख कॉपियों एवं हाईस्कूल ‘ब’ की 12 पेजों वालों 28 लाख कॉपियों और इंटरमीडिएट ‘अ’ की 32 पेजों वाली 59 लाख कॉपियों एवं इंटरमीडिएट ‘ब’ की 12 पेजों वाली 18 लाख कॉपियों की धागे से सिलाई की जानी है।

Sunday, August 28, 2022

CBSE Exam 2023: फरवरी में शुरू होने वाली कक्षा 10, 12 की परीक्षाओं को लेकर IMP नोटिस जारी

CBSE Exam 2023: फरवरी में शुरू होने वाली कक्षा 10, 12 की परीक्षाओं को लेकर IMP नोटिस जारी

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 10, 12 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर अहम नोटिस जारी किया है। सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होंगी और इसके लिए 30 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।


CBSE Board 10th, 12th Exam 2023: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कक्षा 10, 12 की बोर्ड परीक्षाओं को लेकर अहम नोटिस जारी किया है। सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होंगी और इसके लिए 30 अगस्त तक रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है।

सीबीएसई की ओर से 28 अगस्त 2022 को जारी लेटेस्ट नोटिस में कहा गया है कि कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्ट्रेशन की लास्ट डेट 30 अगस्त 2022 है। वहीं छात्रों की लिस्ट जमान कराने की लास्ट डेट 31 अगस्त है।

सीबीएसई ने कहा है कि अब रजिट्रेशन कराने व अभ्यर्थियों की लिस्ट सब्मिट करने डेट नहीं बढ़ेगी। ऐसे में सभी स्कूलों को अंतिम तारीख खत्म होने से पहले सभी सूचनाएं जमा करानी होंगी।

सत्र 2023 की सीबीएसई कक्षा 10, 12 की बोर्ड परीक्षाएं 15 फरवरी से शुरू होनी हैं। सीबीएसई बोर्ड इस बार सिर्फ एक ही परीक्षा कराएगा। यानी टर्म-1 और टर्म-2 का कॉन्सेप्स लागू नहीं होगा।

2022 में बोर्ड ने कोरोना महामारी को देखते  हुए दो टर्म में परीक्षाएं कराई थीं। लेकिन इस बार सीबीएसई ने साल में एक बार कराने का ही फैसला किया है। आपको बता दें कि सीबीएसई बोर्ड की 10वीं और 12वीं परीक्षा में हर साल देशभर के करीब 50 लाख छात्र-छात्राएं भाग लेते  हैं।

निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों व सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में दिनांक 07 सितंबर 2022 को ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन

निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों व सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में दिनांक 07 सितंबर 2022 को ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन


🆕 Update 
🔴 अब 2 के बजाय 7 सितंबर को होगी ऑनलाइन गोष्ठी 


निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों पर सभी मेंटर्स एवं शिक्षक संकुल को अद्यावधिक करने तथा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा दिनांक 07 सितंबर 2022 को सुबह 10.00 बजे से ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। 






उक्त ऑनलाइन गोष्ठी में जनपद के समस्त ARP /SRG / DIET Mentor एवं शिक्षक संकुल की समय से प्रतिभागिता अनिवार्य है।


🔴 ऑनलाइन सेशन से इस लिंक 👇 के जरिए जुड़े।




मान्यता प्रकरण पर पूर्व DIOS अमरकांत के निलंबन पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई, जांच व विभागीय कार्यवाही चलती रहेगी

मान्यता प्रकरण पर पूर्व DIOS अमरकांत के निलंबन पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई, जांच व विभागीय कार्यवाही चलती रहेगी


लखनऊ : डीआईओएस रहे डॉ. अमरकांत सिंह के निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दिया है। हालांकि न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रकरण में विभागीय कार्यवाही चलती रहेगी।


यह आदेश न्यायमूर्ति आलोक माथुर की एकल पीठ ने डॉ. अमरकांत की ओर से दाखिल सेवा सम्बंधी याचिका पर सुनवाई के उपरांत पारित किया है। न्यायालय ने राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का भी आदेश दिया है। याची ने अपने खिलाफ पारित 8 अगस्त के निलम्बन आदेश को चुनौती दी थी। 


याची का कहना था कि सेंटेनियल कॉलेज में जिन दो विरोधी प्रबंध समितियों के बीच विवाद होने की दशा में, ज्वांइट डायरेक्टर एजूकेशन के 31 मार्च 2022 के आदेश का अनुपालन न करने के आरोप में निलम्बन किया गया है, वास्तव में उस आदेश का नियमत वह अनुपालन कर ही नहीं सकते थे। 


न्यायालय ने सुनवाई करते हुए पाया कि इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट के तहत जिला विद्यालय निरीक्षक को प्रबंध तंत्र के जमीन से जूड़े विवाद में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। न्यायालय ने पाया कि प्रथम दृष्टया याची के खिलाफ आरोप ऐसे नहीं हैं कि उसे बर्खास्त किया जाए अत उसे निलम्बित करने का भी कोई औचित्य नहीं है।

जिले के अंदर तबादले की अब भी बाट जोह रहे बेसिक शिक्षक, माह भर बाद भी नहीं खुला ट्रांसफर पोर्टल

जिले के अंदर तबादले की अब भी बाट जोह रहे बेसिक शिक्षक,  माह भर बाद भी नहीं खुला ट्रांसफर पोर्टल

 27 जुलाई को आया था शासनादेश, 10 दिन बाद खुलना था पोर्टल 


जिले के अंदर तबादले की बाट जोह रहे शिक्षकों का इंतजार बढ़ता जा रहा है। 27 जुलाई को आए शासनादेश में 10 दिन बाद स्थानांतरण का पोर्टल खोला जाना था। लगभग माह भर बाद भी पोर्टल नहीं खुला है। करीब सात साल से जिले के अंदर शिक्षकों के स्थानांतरण प्रक्रिया नहीं हुई। 


शासन स्तर से 27 जुलाई को जनपद के अंदर स्थानांतरण और समायोजन का आदेश आया था। इसमें निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के मानक के अनुसार प्रत्येक विद्यालयों में शिक्षक छात्र अनुपात सुनिश्चित करने के लिए सरप्लस शिक्षकों को आवश्यकता वाले विद्यालयों में समायोजित करना और शिक्षकों का ब्लॉक से ब्लॉक में स्थानातरण किया जाना था।


छात्र शिक्षक अनुपात के लिए 30 अप्रैल 2022 को छात्र संख्याको आधार मानकर ही यह संपूर्ण प्रक्रिया ऑनलाइन किए जाने के निर्देश थे। इसके अनुसार शिक्षकों से ऑनलाइन आवेदन लेकर उनको भाराक के अनुसार प्राथमिकता दी जानी थी। इसी क्रम में शिक्षकों के विवरण मानव संपदा पोर्टल पर संशोधित भी किए जाने की प्रक्रिया अपनाई  गई थी। 


ऑनलाइन आवेदन के लिए एनआईसी पर 10 कार्य दिवसों के अंदर पोर्टल खुलने का स्पष्ट आदेश था लेकिन एक माह होने को है, अभी तक पोर्टल का कुछ अता-पता नहीं है। इससे शिक्षकों में नाराजगी भी है।

जाति, निवास की तरह अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र भी बनेंगे ऑनलाइन, अल्पसंख्यक आयोग ने शासन को भेजा मैनुअल प्रक्रिया को खत्म करने का प्रस्ताव

जाति, निवास की तरह अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र भी बनेंगे ऑनलाइन, अल्पसंख्यक आयोग ने शासन को भेजा मैनुअल प्रक्रिया को खत्म करने का प्रस्ताव

लखनऊ : प्रदेश में जाति, निवास व आय प्रमाणपत्रों की तरह अब अल्पसंख्यक समुदाय के होने का प्रमाणपत्र भी अब ऑनलाइन बनेंगे। राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया को ऑनलाइन करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है।


वर्तमान में अल्पसंख्यक समुदाय में आने वाले मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों के लिए अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया मैनुअल है। यही नहीं इसमें प्रमाणपत्र जारी करने समयसीमा भी तय नहीं है। इससे समुदाय के लोगों को प्रमाणपत्र के लिए बार-बार तहसील व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।

राज्य अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन अशफाक सैफी ने बताया कि सिख, बौद्ध, जैन और ईसाई समुदाय के कई लोगों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अधिकारी अल्पसंख्यक प्रमाणपत्र बनाने में रुचि नहीं दिखाते हैं। वहीं, दूरदराज के जिलों में अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाणपत्रों की जानकारी भी नहीं है। ऐसे में प्रमाणपत्र बनवाने में समस्याएं हो रही हैं। सैफी ने बताया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए आयोग ने शासन को प्रमाणपत्र ऑनलाइन बनवाने और मैनुअल प्रक्रिया को खत्म करने का प्रस्ताव भेजा है।

यूपी बोर्ड : मेधावियों को मिलेगी 80 हजार की ड्रीम स्कॉलरशिप

यूपी बोर्ड : मेधावियों को मिलेगी 80 हजार की ड्रीम स्कॉलरशिप

प्रयागरा :  यूपी बोर्ड से इंटर विज्ञान वर्ग में 2022 की परीक्षा 397/500 (79.40 प्रतिशत) या अधिक अंकों से पास करने वाले छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए सालाना 80 हजार रुपये की स्कालरशिप प्रदान की जाएगी। शर्त यह है कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इंस्पायर योजना का लाभ उन्हीं मेधावियों को मिलेगा जिन्होंने बेसिक एवं नेचुरल साइंस कोर्स (गणित, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान अथवा लाइफ साइंस- वनस्पति विज्ञान एवं जन्तु विज्ञान आदि) में स्नातक अथवा इंटीग्रेटेड स्नातकोत्तर कक्षाओं में प्रवेश लिया हो।


आवेदन पत्र के साथ संलग्न किए जाने वाले एलिजिबिलिटी या एडवाइजरी नोट को यूपी बोर्ड ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड कर दिया है जिसे संबंधित छात्र-छात्राएं डाउनलोड कर सकते हैं। स्कालरशिप के लिए संस्था की वेबसाइट www. online. inspire. gov. iल्ल पर ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

Saturday, August 27, 2022

बेसिक शिक्षा : बच्चों के पास स्मार्ट फोन है नहीं और विभाग ने डिजिटल लर्निंग गतिविधियों को कर दिया लागू

बेसिक शिक्षा : बच्चों के पास स्मार्ट फोन है नहीं और विभाग ने डिजिटल लर्निंग गतिविधियों को कर दिया लागू


● वर्कबुक समेत कई सुविधा एप पर, बच्चों के पास फोन नहीं

● दीक्षा और रीडिंग एप के जरिए उपलब्ध कराई पाठ्य सामग्री


लखनऊ। प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के बच्चों के पास स्मार्ट फोन है नहीं और विभाग ने डिजिटल लर्निंग गतिविधियों को लागू कर दिया। पाठ्य सामग्री, वर्क बुक, सीखने की गतिविधियां दीक्षा व रीडिंग एप से लिंक व पीडीएफ पर उपलब्ध करायी जा रही हैं। शिक्षक इसकी मदद से पढ़ा रहे हैं लेकिन छात्र इस्तेमाल करना नहीं जानते। इन स्कूलों में 80 फीसदी छात्रों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। इससे बच्चे घर पर अभ्यास नहीं कर पा रहे।


शिक्षा विभाग ने कोरोना कॉल मे कॉन्वेंट की तर्ज पर बेसिक स्कूलों के बच्चों को पढ़ाने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की। दीक्षा व रीड एलांग एप शुरू की। महानिदेशक बेसिक शिक्षा विजय किरण आनंद विभागीय अधिकारियों को डिजिटल लर्निंग के प्रचार-प्रसार पर जोर दे रहे हैं।


विभाग के निर्देश पर डिजिटल लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। निपुण भारत मिशन, स्कूल रेडिनेस आदि गतिविधियां करायी जा रही हैं। अभिभावकों पर मोबाइल का दबाव नहीं डाला जा रहा है। अरुण कुमार, बीएसए, लखनऊ


मोबाइल तो है लेकिन इंटरनेट के लिए पैसे नहीं

प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में पढ़ने वाले 20 फीसदी अभिभावकों के पास स्मार्ट फोन तो है लेकिन इंटरनेट चलाने के लिए पैसे नहीं हैं। शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन घर सीखने व पढ़ने के सुझाव को अभिभावक नकार रहे हैं। खासकर ग्रामीण इलाकों के अभिभावक। वहीं प्राइमरी स्कूल के शिक्षकों का कहना है कि मोबाइल न होने की वजह से बच्चे घर पर अभ्यास नहीं कर रहे हैं। जिससे उनकी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है और वे पिछड़ रहे हैं।

फैसला : वित्तविहीन स्कूलों को अब नहीं मिला करेगी सरकारी मदद, अपने निजी स्रोतों से ही सारे खर्च वहन करने पड़ेंगे।

फैसला :  वित्तविहीन स्कूलों को अब नहीं मिला करेगी सरकारी मदद, अपने निजी स्रोतों से ही सारे खर्च वहन करने पड़ेंगे। 



 यूपी बोर्ड ने मान्यता शर्तों में बदलाव करके वित्तविहीन स्कूलों को सरकारी मदद के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। पहले वित्तविहीन स्कूलों को सरकार ग्रांट-इन-एड पर ले लेती थी लेकिन अब जो बदलाव किए गए हैं उनके अनुसार स्कूलों को अपने निजी स्रोतों से ही सारे खर्च वहन करने पड़ेंगे। संशोधित शर्तों में साफ लिखा है कि-विद्यालय संचालन हेतु आवर्तक एवं अनावर्तक व्यय भार निजी स्रोतों से वहन करने का प्रबंध समिति का प्रस्ताव प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।


इंटरमीडिएट एक्ट 1921 की धारा सात के अंतर्गत वित्त विहीन स्कूलों को जो मान्यता दी जाती थी, वह खत्म कर दी गई है। इस धारा के अंतर्गत ही वित्त विहीन स्कूल आगे चलकर ग्रांट-इन-एड पर आ जाते थे। छात्र-छात्राओं से लिए जा रहे शिक्षण शुल्क का लेखाजोखा स्कूल को रखना होगा और शिक्षण शुल्क का कम से कम 70 प्रतिशत शैक्षिक एवं अन्य कमियों के परिलब्धियों (वेतन आदि) पर खर्च करना होगा। यही नहीं नई मान्यता लेने वाली संस्था को शैक्षिक कर्मियों/शिक्षणेत्तर कर्मियों की सेवा शर्तों एवं परिलब्धियों का अनुपालन राज्य सरकार की व्यवस्था के अनुसार करना होगा।

Friday, August 26, 2022

CUET UG Result 2022: सितंबर में जारी हो सकता है संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट, छात्र cuet.samarth.ac.in पर कर सकेंगे चेक

CUET UG Result 2022: सितंबर में जारी हो सकता है संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा का रिजल्ट, छात्र cuet.samarth.ac.in पर कर सकेंगे चेक



सीयूईटी 2022 का रिजल्ट स्कोरकार्ड के फॉर्म में ऑनलाइन जारी किया जाएगा। रिजल्ल्ट घोषित होने के बाद छात्र अपना स्कोरकार्ड सीयूईटी की ऑफिशियल वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर पर प्राप्त कर सकते हैं।



CUET UG Result 2022: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की ओर से संयुक्त विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा (CUET) यूजी 2022 का रिजल्ट सितंबर के पहले पखवारे में जारी किया जा सकता है। हलांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी नहीं हुआ। सीयूईटी यूजी 2022 का रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र आधिकारिक वेबसाइट  nta.ac.in या cuet.samarth.ac.in पर जाकर डाउनलोड कर सकेंगे। सीयूईटी का आयोजन 6 चरणों में किया गया है जिसमें छठवें चरण की परीक्षा 30 अगस्त 2022 को पूरी होगी।

पहले सीयूईटी की परीक्षाएं दो चरणों में पूरी होनी थीं लेकिन तकनीकी दिक्क्तों के चलते परीक्षाएं स्थगित और रद्द करनी पड़ी थीं जिसके चलते यह परीक्षा अब 6 चरणों में पूरी हो रही है।

सीयूईटी 2022 का रिजल्ट स्कोरकार्ड के फॉर्म में ऑनलाइन जारी किया जाएगा। रिजल्ल्ट घोषित होने के बाद छात्र  अपना स्कोरकार्ड सीयूईटी की ऑफिशियल वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर पर प्राप्त कर सकते हैं।

ऐसे चेक कर सकेंगे CUET UG 2022 Result :
रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र वेबसाइट cuet.samarth.ac.in पर जाएं।
होम पेज पर जाएं और  CUET UG 2022 Results के लिंक पर क्लिक करें।
रोल नंबर और डेट ऑफ बर्थ आदि सूचनाओं से लॉगइन करें।
अब रिजल्ट यानी स्कोरकार्ड आपकी स्क्रीन पर होगा।
भविष्य की जरूरत के लिए छात्र इसे प्रिंटआउट भी करा सकते हैं।

कुछ दिन पहले  ही एनटीए के अफसर ने मीडिया को बताया कि था कि सीयूईटी का रिजल्ट 7 सितंबर तक जारी किया जा सकता है। हालांकि अभी तक इस संबंध में आधिकारिक तौर पर कोई सूचना जारी नहीं की गई। माना जा रहा है कि 7 सितंबर तक कॉपियों का मूल्यांकन पूरा जाएगा। इसके बाद किसी भी वक्त रिजल्ट जारी किया जा सकता है।

यूजीसी ने 21 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया, सबसे ज्यादा दिल्ली और उत्तर प्रदेश में, देखें सूची

यूजीसी ने 21 विश्वविद्यालयों को फर्जी घोषित किया, सबसे ज्यादा दिल्ली और उत्तर प्रदेश में, देखें सूची

फर्जी घोषित किए गए 21 विश्वविद्यालयों में उत्तर प्रदेश के चार


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 21 विश्वविद्यालयों को 'फर्जी' घोषित किया है जो डिग्री प्रदान नहीं कर सकते हैं । इसमें सबसे अधिक फर्जी' विश्वविद्यालय दिल्ली और उसके बाद उत्तर प्रदेश में हैं। यूजीसी द्वारा फर्जी विश्वविद्यालयों के बारे में जारी सार्वजनिक सूचना में कहा गया है कि छात्रों एवं जनसाधारण को सूचित किया जाता है कि देश के विभिन्न भागों में 21 स्वत: अभिकल्पित, गैर मान्यता प्राप्त संस्थान कार्यरत हैं जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियमन 1956 का उल्लंघन कर रहे हैं । इनमें सबसे अधिक दिल्ली में 8, उत्तर प्रदेश में 4, पश्चिम बंगाल एवं ओडिशा में 2-2 तथा कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, पुडुचेरी और आंध्र प्रदेश में एक-एक फर्जी विश्वविद्यालय हैं।


सार्वजनिक सूचना के अनुसार, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम 1956 के अनुच्छेद 22 (1) के अनुसार, केंद्रीय, राज्य, प्रांतीय अधिनियम के तहत स्थापित विश्वविद्यालय अथवा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुच्छेद 3 के तहत स्थापित मानद विश्वविद्यालय ही उपाधि प्रदान कर सकते हैं जिन्हें संसदीय अधिनियम द्वारा उपाधि प्रदान करने के लिये विशेष रूप से अधिकार दिया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अनुच्छेद 23 के अनुसार, उपरोक्त के अलावा अन्य किसी संस्थान द्वारा 'विश्वविद्यालय' शब्द का प्रयोग निषिद्ध है। फर्जी विश्वविद्यालयों की सूची में दिल्ली में आल इंडिया इंस्टीट्यूट आफ पब्लिक फिजिकल हेल्थ साइंस यूनिवर्सिटी, कमर्शियल यूनिवर्सिटी लिमिटेड, यूनाइटेड नेशन्स यूनिवर्सिटी, वॉकेशनल यूनिवर्सिटी, एडीआर सेन्ट्रिक ज्यूरिडिकल यूनिवर्सिटी, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ साइंस एंड इंजीनियरिंग, विश्वकर्मा ओपन यूनिवर्सिटी फार सेल्फ एम्प्लायमेंट इंडिया और आध्यात्मिक विश्वविद्यालय शामिल हैं । उत्तर प्रदेश से सूची में दर्ज फर्जी विश्वविद्यालयों में गांधी हिन्दी विद्यापीठ प्रयाग , नेशनल यूनिवर्सिटी आफ इलेक्ट्रो कम्प्लेक्स होम्योपैथी कानपुर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस यूनिवर्सिटी अलीगढ़ और भारतीय शिक्षा परिषद फैजाबाद शाामिल हैं।

यूपी की उच्च शिक्षा को सुधारेंगे अब हार्वर्ड के विशेषज्ञ !

यूपी की उच्च शिक्षा को सुधारेंगे अब हार्वर्ड के विशेषज्ञ !

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के लिए हुए प्रस्तुतीकरण में सरकार का दावा : अमेरिकी यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कराने की तैयारी


लखनऊ : सूबे की शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव करने की तैयारी है। विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों की शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों को हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों से प्रशिक्षण दिलाने की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश सरकार जल्द ही अमेरिकी यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर सकती है।


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 पर अमल कराने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय सतत प्रयासरत है। पिछले दिनों प्रदेश सरकार की ओर से शिक्षा मंत्रालय के समक्ष प्रजेंटेशन में कहा गया कि वह अपने कालेजों के शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने के लिए हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों की मदद लेने की प्रक्रिया में हैं। ज्ञात हो कि उच्च विभाग की ओर से एनईपी के प्रविधानों को लागू करने के लिए कई स्तरों पर कार्य किया जा रहा है।


सूबे में कालेजों और यूनिवर्सिटी में ई-कंटेंट स्टूडियो और इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। दो विश्वविद्यालयों में ई-कंटेंट स्टूडियो स्थापित हो चुका है, जबकि उच्च शिक्षा निदेशालय में इसकी स्थापना की जा रही है। वहीं, 24 विश्वविद्यालयों में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो 200 से अधिक स्टार्टअप की मदद कर रहे हैं।


 इन कदमों से उच्च शिक्षा क्षेत्र में लर्निंग टेक्नोलाजी में सुधार दिखाई पड़ेंगे। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस गर्ग ने बताया कि उच्च शिक्षा निदेशालय परिसर में ई-कंटेंट स्टूडियो स्थापित कराने के लिए एक करोड़ रुपये स्वीकृत हो चुके हैं। 119 राजकीय महाविद्यालयों में ई-लर्निंग पार्क स्थापित किए गए हैं, ताकि डिजिटल टीचिंग व लर्निंग को बढ़ावा मिले।


उन्होंने बताया कि प्रदेश में 2021 से ही विश्वविद्यालय व महाविद्यालय एमएसएमई के तहत छोटे-बड़े उद्योग व अन्य संस्थानों से 500 से अधिक एमओयू पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुरूप कालेज तकनीकी और गैर-तकनीकी दोनों पाठ्यक्रमों में स्नातक छात्रों को अनिवार्य इंटर्नशिप दिलाने के लिए भी काम करेंगे। इसके लिए तेजी से प्रयास किए जा रहे हैं।

शिक्षण संस्थानों के आसपास से हटेंगी पान की दुकानें, सौ गज के दायरे में पान की दुकान खोलने पर लगेगी रोक

शिक्षण संस्थानों के आसपास से हटेंगी पान की दुकानें, सौ गज के दायरे में पान की दुकान खोलने पर लगेगी रोक


 राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम की राज्य वर्किंग कमेटी की बैठक

लखनऊ : शिक्षण संस्थानों के आसपास सौ गज की दूरी पर तंबाकू उत्पाद बेचने वाली पान की दुकानें किसी भी कीमत पर न हों। वहीं विद्यार्थियों को तंबाकू के दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाए और तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान घोषित करने पर जोर दिया जाए। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इसके लिए शिक्षा विभाग से मदद ले। गुरुवार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महानिदेशक डा. लिली सिंह की अध्यक्षता में राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत राज्य स्तरीय वर्किंग ग्रुप कमेटी की बैठक हुई।


स्वास्थ्य भवन के सभागार में आयोजित इस बैठक में राज्य नोडल अधिकारी डा. सुनील पांडेय ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु के लोगों को तंबाकू उत्पाद की बिक्री पर सख्ती से रोक लगाई जाए। स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के डीआइजी अब्दुल हामिद ने बताया कि तंबाकू की अवैध सप्लाई के खिलाफ पुलिस कार्रवाई कर रही है। पुलिस मदद करने को तैयार है। बैठक में निदेशक, स्वास्थ्य डा. रागिनी गुप्ता व अपर निदेशक, स्वास्थ्य सतीश त्रिपाठी आदि मौजूद रहे।

माध्यमिक शिक्षकों ने धरना देकर विरोध दर्ज कराया

माध्यमिक शिक्षकों ने धरना देकर विरोध दर्ज कराया


माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष एवं नेता शिक्षक दल सुरेश कुमार त्रिपाठी नेतृत्व में गुरुवार को पार्क रोड स्थित शिक्षा निदेशक कार्यालय पर शिक्षकों ने धरना देकर विरोध दर्ज कराया।


लंबित मांगों को लेकर शिक्षकों ने उच्च अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की। शिक्षकों ने मुख्यमंत्री को सम्बोधित शिक्षा निदेशक डॉ. सरिता तिवारी को ज्ञापन सौपा। शिक्षा निदेशक ने मांगों के निराकरण का आश्वासन दिया। बारिश के बावजूद हजारों की संख्या में शिक्षकों ने धरना स्थल पर अपनी मांगें रखी।


संगठन के प्रदेश मंत्री एवं प्रवक्ता डॉ. आरपी मिश्र ने कहा ज्ञापन में तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण, तदर्थ शिक्षकों के रोके गए वेतन का भुगतान, पुरानी पेंशन की बहाली, वित्त विहीन विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समान कार्य के लिए समान वेतन समेत 17 सूत्रीय मांगें हैं। इस मौके पर संगठन के अध्यक्ष सुरेश त्रिपाठी ने कहा कि तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण एवं वेतन भुगतान जल्द करने की मांग की। धरने शिक्षक महासंघ के संयोजक डॉ. दिनेश चन्द्र शर्मा ने माध्यमिक शिक्षकों की मांगों समर्थन दिया।


इस मौके पर एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कहा कि शिक्षक समस्याओं के निराकरण के लिए जेल जाना पड़े तो वह जेल जाने के लिए तैयार हैं। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी कर विरोध जताया। धरने में संगठन के महामंत्री इन्द्रासन सिंह, हेम सिंह पुण्डीर, जगवीर किशोर जैन आदि मौजूद रहे

यूपी बोर्ड : छात्राओं के लिए कॉलेज में होगी सेनेटरी पैड की व्यवस्था, तभी मिलेगी मान्यता

यूपी बोर्ड : छात्राओं के लिए कॉलेज में होगी सेनेटरी पैड की व्यवस्था, तभी मिलेगी मान्यता


माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्त विहीन स्कूलों की मान्यता की शर्तों में बदलाव किया है। इसके तहत विद्यालयों में किन-किन व्यवस्थाओं का होना जरूरी है, इसका निर्धारण किया गया है।


यूपी बोर्ड की मान्यता लेने के लिए स्कूल कॉलेजों को अब छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड की व्यवस्था अनिवार्य रूप से करनी होगी। वहीं दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए भूतल पर पृथक शौचालय, हैंड रेल, रैंप रेलिंग सहित साइनेज की सुविधा होने पर ही विद्यालयों को मान्यता मिलेगी। 


माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्त विहीन स्कूलों की मान्यता की शर्तों में बदलाव किया है। इसके तहत विद्यालयों में किन-किन व्यवस्थाओं का होना जरूरी है, इसका निर्धारण किया गया है। पेयजल व्यवस्था के तहत दिव्यांगों की सहूलियत के लिए अलग-अलग ऊंचाई की प्लेटफार्म की व्यवस्था होनी चाहिए। शिक्षक और विद्यार्थियों के लिए अलग-अलग शौचालय होना अनिवार्य है। इसमें वाटर टैंक, एक्जास्ट फैन, वॉश बेसिन की सुविधा होनी चाहिए। साथ ही छात्राओं के लिए सेनेटरी पैड एवं इंसीनिरेटर की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होगी।


विद्यालयों को शिक्षकों और कर्मचारियों के वेतन का भुगतान भी बैंक के माध्यम से सीधे खाते में करना होगा। साथ ही विद्यालय की ओर से शिक्षण शुल्क का स्पष्ट लेखा-जोखा रखा जाएगा। शिक्षण शुल्क का कम से कम 70 प्रतिशत शैक्षिक एवं अन्य कर्मियों के परिलब्धियों पर व्यय किया जाएगा। 


व्यावसायिक शिक्षा पर जोर 
नई मान्यता प्राप्त करने वाले विद्यालयों को दो ट्रेड विषयों को पढ़ाना अनिवार्य होगा। वोकेशनल ट्रेड का चयन इलाके की आवश्यकता और रोजगार की संभावना पर निर्भर रहेगा। विद्यालय की ओर से संचालित ट्रेड के व्यावहारिक ज्ञान के लिए नजदीक के वर्कशाप, उद्योग, कंपनी आदि से संपर्क स्थापित करना अनिवार्य होगा। यह बदलाव नई शिक्षा नीति के अनुसार व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने के संकल्प के अनुसार है ताकि विद्यार्थियों के व्यवसाय के कौशल विकास का समुचित वातावरण सृजित हो सके। साथ ही प्रतिदिन छात्रों और शिक्षकों की उपस्थिति का विवरण पोर्टल और वेबसाइट पर देना होगा 


पुस्तकालय में समाचार पत्र रखना होगा अनिवार्य 
नई मान्यता लेने वाले स्कूलों में पुस्तकालय अनिवार्य रूप से होगा। इसमें पाठ्यपुस्तकें, महापुरुषों की जीवनी, विश्व ज्ञानकोष, शब्दकोष, कथा साहित्य, ई जनरल, शोध पत्र, ई मैग्जीन के साथ समाचार पत्र, पत्रिका आदि जरूर रखनी होगी।

खण्ड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) ने उच्चाधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया

खण्ड शिक्षा अधिकारियों (BEOs) ने उच्चाधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया

कार्रवाई के खिलाफ लामबंद हुए बीईओ : उठाया सवाल - बीएसए, शिक्षा निदेशक, महानिदेशक कार्यालयों के लिए 360 डिग्री फीडबैक जरुरी क्यों नहीं?

प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के खिलाफ खण्ड शिक्षा अधिकारियों में उबाल, बेसिक शिक्षा निदेशक के प्रति निंदा प्रस्ताव पारित कर काली पट्टी बांध काम करने का निर्णय। 



लखनऊ : स्कूलों के मान्यता प्रकरण में समय से रिपोर्ट न दिए जाने के चलते प्रतिकूल प्रविष्टि दिए जाने के खिलाफ खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) लामबंद हो गए हैं। गुरुवार को यूपी खंड शिक्षा अधिकारी संघ की बैठक में इसके खिलाफ आंदोलन की रणनीति तय की गई।


 प्रदेश अध्यक्ष प्रमेंद्र कुमार शुक्ला और महामंत्री वीरेंद्र कनौजिया के नेतृत्व में हुई बैठक में पदाधिकारियों ने सवाल उठाए कि गलत ऐप के आधार पर बीईओ को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई। 


पदाधिकारियों का कहना है कि निजी मोबाइल फोन पर विभागीय कार्य संचालित करने की बाध्यता खत्म होनी चाहिए। बीईओ का 360 डिग्री फीडबैक जरूरी है तो बीएसए, शिक्षा निदेशक, महानिदेशक कार्यालयों के लिए यह व्यवस्था क्यों नहीं लागू की जा रही है?


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग के बीईओ ने उच्च अधिकारियों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है। गुरुवार को खंड शिक्षा अधिकारी एसोसिएशन और विद्यालय निरीक्षक संघकी बैठक हुई, जिसमें आंदोलन की रणनीति पर चर्चा की गई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रमेन्द्र शुक्ला ने कहा कि बीईओ के प्रति विभागीय अधिकारी मनमानी कार्रवाई कर रहे हैं।


 119 बीईओ को प्रतिकूल प्रवृष्टि दी गई। निदेशक द्वारा खराब एप के आधार पर मान्यता स्कूलों के प्रकरण में प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी है। जबकि बीईओ अवकाश पर थे | प्रकरण की मजिस्ट्रेट जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठायी। मुख्यमंत्री एवं मुख्य सचिव से इसकी शिकायत करेंगे। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शुक्ला, , महामंत्री वीरेन्द्र कुमार , संयुक्त मंत्री आरपी यादव मौजूद रहे।


खंड शिक्षा अधिकारियों ने वर्ष 1988 से पदोन्नति न करने और निदेशालय स्तर पर लंबित एसीपी प्रकरणों के निस्तारण की अनदेखी का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री व मुख्य सचिव से इसे संज्ञान में लेकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। बैठक में वेतन विसंगति दूर करने, तबादलों की पारदर्शी व्यवस्था बनाने समेत कई मांगें उठाई गई। बैठक में वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय शुक्ला, महामंत्री वीरेंद्र कुमार कनौजिया, संयुक्त मंत्री आरपी यादव, उपाध्यक्ष इंदिरा सहित कई अधिकारी शामिल हुए।

Thursday, August 25, 2022

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का बेमियादी धरना शुरू

शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों का बेमियादी धरना शुरू



लखनऊ । बेसिक शिक्षा के 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने बुधवार को ईको गार्डेन में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। यह अभ्यर्थी दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी को पांच फीसदी की छूट प्रदान कर, उत्तीर्ण अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने की मांग कर रहे हैं।



अभ्यर्थी तूफान सिंह ने बताया कि 68500 शिक्षक भर्ती 2018 में हुई। जिसमें ओबीसी, दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के परिजन आदि को सामान्य वर्ग के साथ 45% नम्बर पर रखा गया। जबकि आरक्षित वर्ग में केवल एससी व एसटी को 40% नम्बर पर रखा गया। इसको लेकर अभ्यर्थियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग व राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग व सामाजिक न्याय व सद्भावना समिति विधान परिषद में शिकायत की थी। इसकी सुनवाई लम्बे समय तक चली। 



अभ्यर्थियों ने बताया कि आयोग ने अपनी संस्तुति व रिपोर्ट में आरक्षित वर्ग में ओबीसी दिव्यांग, भूतपूर्व सैनिक व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आदि को इस भर्ती में आरक्षित वर्ग मानते हुए पासिंग नम्बर में पांच फीसदी की छूट देकर सफल अभ्यर्थियों की नियुक्ति का आदेश दिया। बीते छह माह से आदेश के बाद भी बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

Wednesday, August 24, 2022

बाबुओं के तबादलों में संशोधन फिर भी खामियां, महानिदेशक कराएंगे त्रुटियों का परीक्षण, आंदोलन स्थगित

बाबुओं के तबादलों में संशोधन फिर भी खामियां, महानिदेशक कराएंगे त्रुटियों का परीक्षण, आंदोलन स्थगित


लखनऊ। शिक्षा विभाग के समूह के तबादलों में त्रुटियां दूर न होने के विवाद पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने खुद परीक्षण कराने की बात कही है। उन्होंने बेसिक शिक्षा निदेशालय में मंगलवार से क्रमिक धरना शुरू करने वाले यूपी एजुकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफीसर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों को बुलाकर उनकी बात सुनी। साथ ही प्रत्येक अनियमित स्थानांतरण की आपत्ति का परीक्षण अपने स्तर से करकर नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद एसोसिएशन ने दस दिन के लिए आंदोलन स्थगित कर दिया है।



किसी की ज्वाइनिंग नहीं हो पा रही तो कोई पद खाली न होने से भटक रहा

शिक्षा विभाग के समूह ग के तबादलों में अब भी खामियां


लखनऊ। बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के समूह ग के तबादलों में हुई गड़बड़ियां दूर नहीं हो पा रहीं करीब सौ से अधिक तबादलों की गड़बड़ियां सुधारी गई हैं। चार बाबुओं को निलंबित करने के लिए चार्जशीट दी गई है, फिर भी बड़ी संख्या में खामियां बरकरार हैं। किसी की ज्वाइनिंग नहीं हो रही तो कोई पद खाली न होने से भटक रहा। कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के देवक तक रुके हैं। कर्मचारी भटक रहे हैं, लेकिन तबादलों की तर्कसंगत त्रुटियाँ नहीं सुधारी जा रहीं।


जिलो में अलग-अलग कर्मचारियों ने  अपनी दिक्कतें गिनाई है। यूपी एजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विवेक यादव व प्रांतीय महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले 200 से अधिक गड़बड़ियां बताई थीं। इन पर अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ने 124 गड़बड़ियां दूर करने का दावा किया था, लेकिन करीब 100 तबादले ही दुरुस्त किए गए और उनमें भी गड़बड़ियां कर दी गई हैं।


वरिष्ठ को दे दिया कनिष्ठ पद

डीआईओएस गाजीपुर कार्यालय में वरिष्ठ सहायक अनिल कुमार का गाजीपुर में ही जीजीआईसी गंगोली में कनिष्ठ लिपिक पद पर तबादला कर दिया गया। अब उनकी कनिष्ठ पद पर भी ज्यॉइनिंग हो नहीं रही और उनका वेतन भी फंसा है।


ऐसी जगह तबादला जहां पद ही नहीं

लखनऊ में वरिष्ठ सहायक प्रवीण कुमार का तबादला जीजीआईसी सिंगारनगर से बीएसए कार्यालय में किया गया था। वहां जगह न होने पर संशोधित तबादला आदेश में उन्हें जीजीआई माल स्थानांतरित कर दिया गया है, लेकिन वहां भी जगह नहीं। ऐसे में वे भटक ही रहे हैं।


संशोधन में जहां से हटाया, फिर वहीं भेजा

डीआईओएस कार्यालय हरदोई में तैनात प्रदीप कुमार का तबादला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज हरदोई किया गया था। वहां पद खाली न होने पर उन्होंने जिले में कहीं और तबादले की गुहार लगाई तो उनका आदेश संशोधित कर विद्यालय का नाम राजकीय कन्या इंटर कॉलेज हरदोई करके स्थानांतरित कर दिया। यानी सिर्फ बालिका की जगह कन्या कर दिया, लेकिन विद्यालय वही रहा।


त्रुटि सुधारी तो जिले से बाहर कर दिया

डीआईओएस कार्यालय बरेली में तैनात इदरीश अहमद का तबादला कार्यालय उप शिक्षा निदेशक बरेली में जिन धीरज शर्मा के स्थान पर किया गया, उस नाम का वहां कोई था ही नहीं इसलिए तबादले में संशोधन करके अब इदरीश को जीजीआईसी शाहजहांपुर भेज दिया गया है। अब इदरीश ने प्रत्यावेदन दिया है कि उनका बरेली के आंवला स्थित जीजीआईसी में रिक्त पद पर तबादला करा दिया जाए।

मदरसा विनियमावली में दंड के खिलाफ अपील की हो व्यवस्था, विनियमावली - 2016 में संशोधन के लिए बुलाई गई बैठक में शिक्षाविदों ने दिए अहम सुझाव

मदरसा विनियमावली में दंड के खिलाफ अपील की हो व्यवस्था, विनियमावली - 2016 में संशोधन के लिए बुलाई गई बैठक में शिक्षाविदों ने दिए अहम सुझाव


लखनऊ : मदरसा विनियमावली 2016 में संशोधन के लिए शिक्षाविदों ने कई अहम सुझाव दिए। इनमें दंड के खिलाफ अपील की व्यवस्था, शिक्षकों का स्थानांतरण, मातृत्व अवकाश, टीईटी की तरह एमटीईटी लागू करने और अवकाश के नियम परिभाषित करने समेत कई बिंदु प्रमुख रूप से शामिल हैं।


मदरसा शिक्षा परिषद की ओर से मंगलवार को अल्पसंख्यक कल्याण सभागार में आयोजित बैठक में टीचर्स एसोसिएशन मदारिसे अरबिया के महामंत्री हाजी दीवान साहेब जमां ने अपने सुझाव दिए । उन्होंने परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद को बताया कि विनियमावली 2016 में दंड के खिलाफ अपील की कोई व्यवस्था नही है। इसके कारण प्रबंध समितियां मनमाने ढंग से शिक्षकों का निलंबन, उन्हें निकालने, वेतन वृद्धि रोकने, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और शिक्षकों का आर्थिक शोषण करती हैं। रजिस्ट्रार की शक्तियां, कर्तव्य और अधिकार विहित नहीं होने से पीड़ित शिक्षक को राहत नहीं मिलती। इरम एजुकेशनल ग्रुप के ख्वाजा सैयद फैजी यूनुस ने कहा टीईटी की तरह विनियमावली में एमटीईटी को शामिल करने से पहले छात्रों की स्किल, शैक्षिक बैकग्राउंड का भी ध्यान रखना होगा।

छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिये ड्रेस कोड लागू किया जाए। मदरसा शिक्षक अब्दुल्लाह बुखारी ने शिक्षकों के स्थानांतरण की व्यवस्था के बिंदु पर खुशी जाहिर की। चेयरमैन डॉ. इफ्तेखार ने कहा कि विनियमावली में संशोधन के लिए  अभी कई बैठकें होंगी।

'उर्दू साहित्य की अनिवार्यता खत्म कर रहा मदरसा बोर्ड'

उधर, बैठक में न बुलाने से नाराज मदरसा आधुनिकीरण शिक्षकों ने बोर्ड पर मदरसों में उर्दू साहित्य की अनिवार्यता खत्म करने का आरोप लगाया है। इस्लामिक मदरसा आधुनिकीकरण शिक्षक एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष एजाज अहमद की अगुवाई में तमाम शिक्षक बैठक में शामिल होने के लिए इंदिरा भवन पहुंचे, लेकिन बोर्ड की ओर से निमंत्रण न होने से इन्हें बाहर ही रोक दिया गया। इस पर एजाज अहमद ने कहा कि बोर्ड के चेयरमैन और रजिस्ट्रार 20 साल से आधुनिकीकरण शिक्षकों के साथ सौतेला व्यवहार कर उनकी अनदेखी कर रहे हैं। बोर्ड के अधिकारी मदरसों की प्रबंध समिति के अधिकारों में हस्तक्षेप करने की कोशिश कर रहे हैं।

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी किताबें खरीदने का छात्रों पर दबाव बना रहे अधिकारी, डीआईओएस के आदेश से स्कूलों में शिक्षक के साथ अभिभावक भी परेशान

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी किताबें खरीदने का छात्रों पर दबाव बना रहे अधिकारी, डीआईओएस के आदेश से स्कूलों में शिक्षक के साथ अभिभावक भी परेशान

◆ 2 लाख बच्चे यूपी बोर्ड में कक्षा नौ से 12 तक पंजीकृत

◆ 20 हजार बच्चों को ही पूरी किताबें मिल सकी हैं अभी



लखनऊ : यूपी बोर्ड के कक्षा नौ से 12 तक के शैक्षिक सत्र शुरू हुए पांच माह होने वाले हैं। शासन द्वारा अधिकृत एनसीईआरटी की सभी किताबें बाजार में अभी तक उपलब्ध नहीं हो पायी हैं। किताबें न मिलने पर पढ़ाई पिछड़ने की वजह से शिक्षकों ने बच्चों को दूसरे प्रकाशकों की किताबें खरीदवा कर पढ़ाई शुरू करा दी। बच्चों ने पढ़ाई के साथ ही नोट्स भी बना लिये हैं।

मंगलवार को डीआईओएस द्वारा प्रधानाचार्यों को भेजे पत्र में बच्चों को अधिकृत एनसीईआरटी की किताबें खरीदवाने और शिक्षकों पर इन्हीं पुस्तकों से पढ़ाने के आदेश से बच्चे और अभिभावकों के साथ शिक्षक व प्रधानाचार्य भी हैरान हैं।

प्रकाशक भी मुहैया नहीं करा पाए पुस्तकें बाजार में किताबें न मिलने पर जुलाई के आखिर में डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय के निर्देश पर राजकीय जुबिली कॉलेज में अधिकृत प्रकाशकों ने पांच दिन स्टाल लगवाया था। यहां सिर्फ 16 हजार किताबें बिकीं। अंग्रेजी, फिजिक्स, केमेस्ट्री, हिन्दी की किताबें कम पड़ गईं थी।

डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय ने प्रधानाचार्यों को भेजे आदेश में कहा कि विशेष सचिव की अध्यक्षता में मंगलवार को ऑनलाइन बैठक में परिषद द्वारा अधिकृत प्रकाशकों की एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाने के निर्देश जारी किये हैं। जिसके बाद उन्होंने लखनऊ के सभी प्रधानाचार्या को इसका पालन सुनश्चित किये जाने के निर्देश दिये।

निजी प्रकाशकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी

प्रधानाचार्य सूचना पट पर अधिकृत प्रकाशकों के नाम उनकी पुस्तकों के नाम, दाम लिखें। बच्चों से कहें कि वह ये किताबें खरीदें। शिक्षक इन्हीं किताबों से बच्चों को पढ़ाएं। विभाग द्वारा निरीक्षण में दूसरे प्रकाशकों की किताबें पढ़ाते पाए जाने पर प्रधानाचार्य जिम्मेदार होंगे। निजी प्रकाशकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

अभिभावक बोले

अधिकृत किताबों के लिए दो बार अमीनाबाद गए लेकिन नहीं मिलीं। शिक्षकों के दबाव के बाद दूसरे प्रकाशकों की किताबें खरीदी हैं। अब दोबारा किताबें खरीदना संभव नहीं है। इससे आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
करन रावत, मोहनलालगंज

बेटे को किताबें दिलाने के लिए मोहनलालगंज से लेकर लखनऊ तक एनसीईआरटी की किताबों की तलाश की। शिक्षकों के कहने पर दूसरे प्रकाशकों की किताबें खरीदकर बेटा पढ़ाई कर रहा है। दोबारा खरीदना संभव नहीं है। मो. ताहिर, रहीमाबाद

34 किताबों में सिर्फ दर्जन भर उपलब्ध

कक्षा नौ से 12 तक परिषद द्वारा पढ़ाने के लिए 34 किताबें अधिकृत की गईं। इनमें से सिर्फ एक दर्जन किताबें ही बाजार में उपलब्ध हैं। इसमें हाईस्कूल की गणित, सामाजिक विज्ञान और इंटरमीडिएट में फिजिक्स, केमेस्ट्री गणित जीव विज्ञान, अर्थशास्त्रत्त्, इतिहास आदि की किताबें पुस्तक विक्रेताओं के पास नहीं हैं। पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि प्रकाशकों द्वारा मांग के अनुसार किताबें उपलब्ध नहीं करायी जा रही।

बीच सत्र में दबाव ठीक नहीं, आर्थिक बोझ पड़ेगा संघ

उप्र. माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रवक्ता व प्रदेश मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा का कहना है कि शासन की लापरवाही से बच्चों को समय से किताबें नहीं मिल पायी हैं। सत्र अप्रैल में शुरू होता है। माध्यमिक शिक्षा परिषद को पहले से पुस्तकों के प्रकाशकों के नाम तय करने चाहिए थे ताकि समय से बच्चों को पुस्तकें मिल सकें। सभी स्कूलों के बच्चों ने किताबें खरीद ली हैं। अब बीच सत्र में नई किताबें खरीदवाने का कोई औचित्य नहीं है। इससे अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा।

जिन्होंने किताबें नहीं लीं, उनके लिए आदेश डीआईओएस

डीआईओएस राकेश कुमार पाण्डेय का कहना है कि जिन बच्चों ने किताबें नहीं खरीदी हैं। उन्हें अधिकृत किताबें खरीदने के लिए प्रधानाचार्यों से कहा गया है। प्रकाशकों के पास अधिकृत पुस्तकें उपलब्ध हैं। पुस्तक विक्रेता अधिकृत प्रकाशकों की पुस्तकें नहीं बेच रहे हैं। अब इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यूपी बोर्ड में पढ़ाई अब ऑनलाइन भी होगी, मान्यता के नियम बदले

यूपी बोर्ड में पढ़ाई अब ऑनलाइन भी होगी, मान्यता के नियम बदले


🔴 प्रदेश में अब कंपनियां भी संचालित कर सकेंगी विद्यालय
■ अब तक सोसायटी और ट्रस्ट ही विद्यालय संचालित करते थे ■ यूपी बोर्ड ने सीबीएसई की कई मान्यता शर्तों को लागू किया



बोर्ड ने शासन को भेजा प्रस्ताव
ब्लेंडेड लर्निंग लागू करने के लिए यूपी बोर्ड ने शासन को प्रस्ताव भेजा है। सूत्रों के अनुसार इस संबंध में बोर्ड मुख्यालय में दो बार विशेषज्ञों की बैठक भी हो चुकी है।


मान्यता के नियम बदले

यूपी में अब कंपनियां भी माध्यमिक विद्यालय चलाएंगी। यूपी बोर्ड ने मान्यता शर्तों में बड़ा बदलाव किया है। अब कंपनी अधिनियम 2013 के अध्याय आठ के तहत पंजीकृत कंपनी भी स्कूल संचालन के लिए मान्यता ले सकेगी। अब तक सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट में पंजीकृत संस्था या ट्रस्ट को ही स्कूल संचालन के लिए मान्यता दी जाती थी। यूपी में पूर्व में भी कंपनियां स्कूल चलाती रही हैं लेकिन इसके लिए उन्हें सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट 1860 के तहत पंजीकरण कराना होता था।


डिजिटल रिपॉजिटरी का करेंगे विकास

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत ही डिजिटल रिपॉजिटरी का भी विकास करने की योजना है। रिपॉजिटरी एक ऐसा पोर्टल होगा जिसमें अच्छी और ज्ञानवर्द्धक विषयवस्तु सुलभ होगी। राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की ऐसी कहानियां, विकास और नवाचार आदि को इसमें रखेंगे जो शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बदलाव ला रहा हो।


प्रयागराज। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने के लिए यूपी बोर्ड ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसके तहत कक्षा नौ से 12 तक के तकरीबन एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं के लिए ब्लेंडेड लर्निंग यानि ऑफलाइन के साथ ऑनलाइन पढ़ाई को बढ़ावा देने की योजना है। विभिन्न विषयों के लिए अलग-अलग कार्ययोजना बनाई जाएगी।

मोबाइल एप, ऑनलाइन कोर्स/मॉड्यूल, सैटेलाइट आधारित टीवी चैनल, ऑनलाइन किताबें, आईसीटी युक्त पुस्तकालय आदि की सहायता से बच्चों की पढ़ाई को अधिक से अधिक समृद्ध करने का प्रस्ताव है। कोरोना काल के दौरान स्कूलों के साथ ही अभिभावकों ने भी ऑनलाइन पढ़ाई की जरूरत महसूस की थी।

Tuesday, August 23, 2022

केंद्र सरकार ने देश में पढ़ाई के लिए विदेशी छात्रों का रुझान बढ़ाने के लिए स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया, ब्रांड बनेंगे संस्थान

केंद्र सरकार ने देश में पढ़ाई के लिए विदेशी छात्रों का रुझान बढ़ाने के लिए स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम शुरू किया, ब्रांड बनेंगे संस्थान



केंद्र सरकार ने देश में पढ़ाई के लिए विदेशी छात्रों का रूझान बढ़ाने के लिए वर्ष 2018 में स्टडी इन इंडिया प्रोग्राम की शुरुआत की थी। इसके लिए सरकार ने 150 करोड़ रुपये का बजट भी स्वीकृत किया था। इस बजट से देश में पढ़ने के लिए आने वाले विदेशी छात्रों को सशर्त आर्थिक सहायता भी मुहैया करानी थी।


छात्रों को आकर्षित करने को ब्रांड बनेंगे संस्थान

विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए देश के उच्च शिक्षण संस्थान खुद को ब्रांड की तरह पेश करेंगे। भारत को एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में पेश करने के लिए यूजीसी ने भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को सुनियोजित ब्रांड निर्माण अभियान तैयार करने का सुझाव दिया है। आयोग के एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि उच्च शिक्षण संस्थानों के वैश्विक दर्जे और विदेशी छात्रों को आकर्षित करने की लिहाज से सुनियोजित ब्रांड निर्माण अभियान आवश्यक है। भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों को संभावित विदेशी छात्रों की प्राथमिकता को लेकर अकादमिक एवं बाजार शोध के अनुरूप अलग अलग देश पर केंद्रित रिपोर्ट एवं रणनीति तैयार करने का सुझाव दिया गया है। इन्हें सरकार एवं नियामक निकायों की मदद से लागू करने की बात कही गई।


विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षक संकाय के रूप में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की हो सकेगी नियुक्ति, औपचारिक पात्रता अनिवार्य नहीं होगी

विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान में शिक्षक संकाय के रूप में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों की हो सकेगी नियुक्ति, औपचारिक पात्रता अनिवार्य नहीं होगी

अब प्रोफेसर बनना होगा आसान खत्म होगी डिग्री की बाध्यता

• विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रोफेसर बना सकेंगे विश्वविद्यालय

• शोधपत्रों के प्रकाशन और अन्य योग्यता शर्तों से भी छूट दी जाएगी


नई दिल्ली  : विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रोफेसर बनना अब आसान होगा। विभिन्न क्षेत्रों के मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों को उच्च शिक्षण संस्थान फैकल्टी मेंबर के तौर पर नियुक्त कर सकेंगे। 'प्रोफेसर आफ प्रैक्टिस' योजना के तहुत शिक्षकों की नियुक्ति के लिए औपचारिक अकादमिक योग्यता (डिग्री) की कोई बाध्यता नहीं रहेगी। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की बैठक में यह फैसला लिया गया। इस योजना को अगले महीने अधिसूचित कर दिए जाने की उम्मीद है।

विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को प्रोफेसर बनाने के लिए शोधपत्रों के प्रकाशन व अन्य योग्यता शर्तों से भी छूट दी जाएगी। हालांकि, शिक्षण संस्थानों में प्रोफेसर आन प्रैक्टिस की संख्या कुल स्वीकृत पदों के 10 से अधिक नहीं होगी। यूजीसी की योजना के मुताबिक, इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता समाज विज्ञान, फाइन आर्ट, सिविल सेवा व सशस्त्र बल सहित अन्य क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों को उच्च शिक्षण संस्थान प्रोफेसर के तौर पर नियुक्त कर सकेंगे।


नई दिल्ली । विश्वविद्यालय एवं उच्च शिक्षण संस्थान जल्द ही एक नई श्रेणी के तहत शिक्षक संकाय के रूप में प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को नियुक्त कर सकेंगे। इसके लिए औपचारिक पात्रता अनिवार्य नहीं होगी।

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की पिछले सप्ताह हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस (पेशेवर प्रोफेसर) योजना के अगले महीने अधिसूचित किए जाने की संभावना है। आयोग ने निर्णय किया है कि उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ की संख्या मंजूर पदों के 10 फीसदी से अधिक नहीं होगी।


आयोग द्वारा मंजूर इस योजना के मसौदा दिशा निर्देश के अनुसार इंजीनियरिंग, विज्ञान, मीडिया, साहित्य, उद्यमिता, सामाजिक विज्ञान, ललित कला, लोक सेवा, सशस्त्रत्त् बल आदि क्षेत्रों के विशेषज्ञ इस श्रेणी में नियुक्ति के पात्र होंगे। मसौदे के अनुसार जिन लोगों ने विशिष्ट पेशों में विशेषज्ञता साबित हो या जिनका सेवा या अनुभव कम से कम 15 वर्षो का हो, विशेष रूप से वे वरिष्ठ स्तर पर हों, वे प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस श्रेणी के लिए पात्र होंगे। उनका शानदार पेशेवर अनुभव या कार्य हो, तब औपचारिक अकादमिक पात्रता अनिवार्य नहीं होगी।


 आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होने की संभावना है। इसमें कहा गया है कि विशेषज्ञों को प्रोफेसर स्तर पर शिक्षक संकाय के रूप में नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रकाशन एवं अन्य पात्रता दिशानिर्देशों से छूट होगी।


चयन पर समिति करेगी अंतिम फैसला

कुलपति या निदेशक ‘प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस’ के लिए जाने माने विशेषज्ञों से नामांकन आमंत्रित कर सकते हैं। इन नामांकनों पर चयन समिति विचार करेगी, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों के दो वरिष्ठ प्रोफेसर और एक बाहरी सदस्य शामिल होंगे।


अधिकतम तीन वर्ष की सेवा अवधि

शुरुआत में इन पदों पर एक वर्ष के लिए नियुक्ति की जाएगी। प्रारंभिक अवधि पूरा होने के बाद संस्थानों द्वारा मूल्यांकन के बाद अवधि को बढ़ाने के बारे में निर्णय लिया जा सकता है। ऐसे पदों की सेवा अवधि तीन वर्षों से अधिक नहीं हो सकती।

राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ताओं की भर्ती में भी अनिवार्य होगा बीएड

राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ताओं की भर्ती में भी अनिवार्य होगा बीएड

प्रवक्ता में बीएड अनिवार्य, 100 साल पुराने नियमों में होगा बदलाव



प्रयागराज :  राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती में भी बीएड को अनिवार्य किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अर्हता लागू करने के लिए शासन स्तर पर मंथन तेज हो गया है। इस संबंध में बुधवार को शासन में उच्च स्तरीय बैठक होने जा रही है।


एनसीटीई ने 16 दिसंबर 2014 को जारी अधिसचूना में प्रवक्ता भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड को अनिवार्य कर दिया था।


केंद्रीय विद्यालयों में भी पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती में बीएड अर्हता अनिवार्य है। लेकिन एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के तकरीबन आठ साल बाद भी यूपी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से की जाने वाली राजकीय विद्यालयों की प्रवक्ता भर्ती और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए दोनों भर्तियों की नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक या एलटी ग्रेड भर्ती) में बीएड अनिवार्य योग्यता है।


प्रयागराज। राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में प्रवक्ता भर्ती में भी बीएड को अनिवार्य किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षक भर्ती में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की अर्हता लागू करने के लिए शासन स्तर पर मंथन तेज हो गया है। इस संबंध में बुधवार को शासन में उच्च स्तरीय बैठक होगी। एनसीटीई ने 16 दिसंबर 2014 को जारी अधिसचूना में प्रवक्ता भर्ती के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ बीएड को अनिवार्य कर दिया था।


केंद्रीय विद्यालयों में भी पीजीटी (प्रवक्ता) भर्ती में बीएड अर्हता अनिवार्य है। लेकिन एनसीटीई की अधिसूचना जारी होने के तकरीबन आठ साल बाद भी यूपी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की ओर से की जाने वाली राजकीय विद्यालयों की प्रवक्ता भर्ती और उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की ओर से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में बीएड की अनिवार्यता नहीं है। इसके लिए दोनों भर्तियों की नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। गौरतलब है कि सहायक अध्यापक (प्रशिक्षित स्नातक या एलटी ग्रेड भर्ती) में बीएड अनिवार्य योग्यता है।


100 साल पुराने नियम में होगा बदलाव

सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी) और प्रवक्ता (पीजीटी) भर्ती में इंटरमीडिएट एक्ट 1921 के नियमों के आधार पर भर्ती होती है। यही कारण है कि कला शिक्षकों की भर्ती में अब तक लाहौर की डिग्री मान्य है और बीएफए, एमएफए जैसी डिग्री लेने वाले अभ्यर्थी आवेदन नहीं कर पाते। इसी प्रकार अन्य विषयों की शिक्षक भर्ती में भी विसंगतियां हैं। सूत्रों के अनुसार नियमावली में संशोधन का प्रस्ताव तैयार है। विधानसभा से पास होने के बाद लागू होगा।

Monday, August 22, 2022

फर्जी शिक्षक मामले में तीनों प्रिंसिपल निलंबित, 2016 के बाद हुईं नियुक्तियों की होगी जांच

फर्जी शिक्षक मामले में तीनों प्रिंसिपल निलंबित, 2016 के बाद हुईं नियुक्तियों की होगी जांच


2016 से जारी ऑफलाइन नियुक्ति पत्रों की पुष्टि प्रयागराज स्थित निदेशालय से करने को कहा गया है। वहीं 23 अक्टूबर 2020 व उसके बाद नियुक्त सभी सहायक अध्यापकों, प्रवक्ताओं के नियुक्ति पत्रों व प्रमाणपत्रों के प्रपत्रों की जांच ऑनलाइन होगी।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक सरिता तिवारी ने झांसी में पांच फर्जी शिक्षकों को कार्यभार कराने की आरोपी तीन अलग-अलग राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही फर्जी शिक्षकों की धरपकड़ के लिए प्रदेश के सभी डीआईओएस को राजकीय इंटर कॉलेजों व राजकीय हाईस्कूल विद्यालयों में वर्ष 2016 के बाद हुईं पुरुष, महिला शिक्षकों की नियुक्तियों के प्रपत्रों की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। 


इसके लिए 2016 से जारी ऑफलाइन नियुक्ति पत्रों की पुष्टि प्रयागराज स्थित निदेशालय से करने को कहा गया है। वहीं 23 अक्टूबर 2020 व उसके बाद नियुक्त सभी सहायक अध्यापकों, प्रवक्ताओं के नियुक्ति पत्रों व प्रमाणपत्रों के प्रपत्रों की जांच ऑनलाइन होगी। सभी नवनियुक्त सहायक अध्यापकों, प्रवक्ताओं का विवरण निर्धारित प्रारूप पर 25 अगस्त तक निदेशालय में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।


अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता के अनुसार झांसी जिले के राजकीय हाईस्कूल बम्हौरी सुहागी की प्रिंसिपल पूनम के साथ ही राजकीय हाईस्कूल वीरा की ऊषा पठवार व राजकीय हाईस्कूल खडौरा की प्रभारी प्रिंसिपल प्रीति सागर को निलंबित किया गया है। इनमें बम्हौरी सुहागी व वीरा के विद्यालय में एक-एक फर्जी शिक्षक ने कार्यभार ग्रहण किया था। वहीं राजकीय हाईस्कूल खडौरा में तीन फर्जी शिक्षक कार्य कर रहे थे। 


प्रिंसिपल पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी नियुक्ति पत्रों की जांच किए बगैर ही कार्यभार ग्रहण करा दिया। उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक या उनके कार्यालय से इस संबंध में जानकारी भी नहीं की। पकड़े गए पांचों फर्जी शिक्षक आजमगढ़ के निवासी हैं और जुलाई में इन्होंने विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण कर लिया था।


उधर, प्रदेश भर में नियुक्तियों की जांच के लिए अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्ष 2020 से लोक सेवा आयोग उप्र. द्वारा सीधी भर्ती के माध्यम से प्रवक्ता व एलटी ग्रेड के पदों पर नियुक्ति की जा रही है। इसके तहत चयनित अभ्यर्थियों के एनआईसी के माध्यम से ऑनलाइन नियुक्ति पत्र जारी होते हैं। 


पहले चरण में 23 अक्टूबर 2020 को नियुक्ति पत्र जारी हुए थे। उसी समय शिक्षा निदेशक की ओर से कार्यभार ग्रहण कराने के लिए विस्तृत दिशा निर्देश जारी किए गए थे। कहा गया था कि जिला विद्यालय निरीक्षक नियुक्ति पत्र का मिलान अपनी लॉगिन से कर लें। साथ ही मूल प्रमाणपत्रों की भी जांच कर लें। इसके बाद ही नियुक्ति पत्र जारी होने के 15 दिन में कार्यभार ग्रहण कराएं। पहले चरण के बाद दूसरे चरण में 19 जनवरी 2021, तीसरे चरण में 12 अगस्त 2021 व चौथे चरण में 6 जनवरी 2022 को ऑनलाइन नियुक्ति पत्र जारी हुए। इसके बाद से ऑनलाइन किसी सहायक अध्यापक, प्रवक्ता पद के लिए नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए।


निदेशालय से जारी निर्देशों के तहत ऑनलाइन जारी नियुक्ति पत्र में अभ्यर्थियों को सीधे प्रधानाचार्य को कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश नहीं हैं। संबंधित जिले के डीआईओएस द्वारा अनुमति दिए जाने के बाद कार्यभार ग्रहण कराया जाता है। चूंकि झांसी में फर्जी नियुक्ति पत्र पर कार्यभार ग्रहण करने का मामला सामने आया है, इसलिए ऐसा मामला अन्य जिलों में भी संभावित है। इसी क्रम में नियुक्तियों की जांच करके ब्योरा निदेशालय को भेज दें। इसके साथ ही भविष्य में शिक्षकों को कार्यभार ग्रहण कराने से पहले लॉगिन से मिलान कर लें। साथ ही कार्यभार ग्रहण कराने की सूचना उसी समय वेबसाइट पर भी दर्ज कर दें।


पहले जारी होते थे ऑफलाइन नियुक्ति पत्र
वर्ष 2020 में लोकसेवा आयोग से सीधी भर्ती शुरू होने से पहले ऑफलाइन नियुक्ति पत्र निदेशालय से जारी होते थे। इसी क्रम में ऑफलाइन जारी नियुक्ति पत्रों की पुष्टि शिक्षा निदेशालय उप्र. प्रयागराज से कराने के लिए सभी डीआईओएस को कहा गया है। 


अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) के अनुसार वर्ष 2016 से उच्च न्यायालय से जुड़े प्रकरणों में कुछ अभ्यर्थियों को ऑफलाइन नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। इसके साथ ही सामान्य चयन के माध्यम से भी प्रवक्ता पदों पर नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं। ऐसे सभी नियुक्ति पत्रों की पुष्टि करने को कहा गया है। साथ ही ऑफलाइन नियुक्तियों का ब्योरा भी निर्धारित प्रपत्र पर निदेशालय भेजने को कहा गया है।



झांसी प्रकरण के बाद सभी जिलों में होगी फर्जी शिक्षकों की जांच

लखनऊ। झांसी में फर्जी नियुक्ति पत्र पर सरकारी विद्यालयों में नौकरी करते पांच शिक्षकों के पकड़े जाने के बाद अब माध्यमिक शिक्षा विभाग पूरे प्रदेश में शिक्षकों के पदभार ग्रहण करने की जांच कराएगा। वहीं, झांसी प्रकरण में फर्जी शिक्षकों को बिना पड़ताल कार्यभार ग्रहण कराने वाली प्रधानाध्यापिकाओं पर कार्रवाई भी सोमवार को हो सकती है।


अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता ने बताया कि फर्जीवाड़ा करने वालों की धरपकड़ के लिए प्रदेश भर में बीते कुछ महीनों में हुई ज्वानिंग की जांच कराई जाएगी। इसमें पता किया जाएगा कि किसी विद्यालय में कोई फर्जीवाड़ा करके नई नियुक्ति या तबादले का आदेश दिखाकर किसी ने कार्यभार तो ग्रहण नहीं कर लिया है। इस संबंध में जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी होंगे।


उन्होंने कहा कि झांसी प्रकरण में पुलिस की पड़ताल में अगर विभाग के किसी भी बाबू या अन्य व्यक्ति की संलिप्तता मिलेगी तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

NCERT ने स्कूलों के लिए दिव्यांगता और अक्षमता जांच की पहचान सूची का मसौदा तैयार किया

NCERT ने स्कूलों के लिए दिव्यांगता और अक्षमता जांच की पहचान सूची का मसौदा तैयार किया



राष्ट्रीय शिक्षा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने विशेष जरूरत वाले छात्रों पर खास ध्यान देने के उद्देश्य से स्कूलों के लिये 'दिव्यांगता और अक्षमता जांच की पहचान सूची' (डीएससीएस) का मसौदा तैयार किया है जिसके आधार पर स्कूलों का समग्र डाटा तैयार किया जायेगा और बच्चों को श्रेणीबद्ध किया जाएगा। 


एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने 'भाषा' को बताया, ''स्कूलों के लिये डीएससीएस से शिक्षकों एवं विशेष जरूरतों से संबंधित प्रशिक्षकों को प्रारंभिक स्तर पर ही छात्रों की जांच करने एवं पहचान के लिये आगे भेजने का मौका मिलेगा।'' उन्होंने कहा कि डीएससीएस का उद्देश्य दिव्यांग जनों के अधिकार अधिनियम 2016 के तहत मान्य दिव्यांगता से संबंधित शर्तों के अनुरूप छात्रों की जांच करना एवं अनुमानित रूप से श्रेणीबद्ध करना है।


अधिकारी ने कहा कि स्कूलों में दिव्यांगता जांच की पहचान सूची को सर्वेक्षण एवं जमीनी विश्लेषण एवं कार्यशालाओं में एकत्र आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञों एवं शिक्षकों द्वारा तैयार किया गया है। मसौदा के अनुसार, स्कूलों में दिव्यांगता जांच की पहचान सूची को दो हिस्सों में बांटा गया है जिसमें पहले में विभिन्न गतिविधियों के आधार पर छात्रों को चिन्हित किया जायेगा और इसके बाद उन्हें दिव्यांगता के तहत श्रेणीबद्ध किया जायेगा। इसमें कहा गया है कि किसी छात्र के पठन-पाठन में हिस्सा लेने में कमी का मतलब यह नहीं है कि उनमें किसी तरह की अक्षमता ही हो।


मसौदा के अनुसार, डीएससीए के पहले हिस्से में प्रश्नावली में छात्रों के व्यवहार एवं अन्य जानकारी को विषय शिक्षक एवं कक्षा के प्रमुख शिक्षक (क्लास टीचर) मिलकर दर्ज करेंगे। इसमें छात्रों के व्यवहार के आधार पर यह चिन्हित किया जायेगा कि क्या छात्र को चलने में कठिनाई है या उसे चलने एवं सीढ़ी चढ़ने के लिये सहारे की जरूरत है? क्या किसी छात्र को हाथ या शरीर के किसी को घुमाने में परेशानी है ? क्या किसी छात्र के हाथ, अंगुलियों या पैर में उत्तेजनशीलता का अभाव है ? क्या किसी छात्र को कोई सामना पकड़ने, धोने आदि में समस्या है ? मसौदे के अनुसार, इस बारे में भी उल्लेख किया जायेगा कि क्या किसी छात्र को बोली अस्पष्ट है ? क्या किसी छात्र का सिर काफी बड़ा है ? क्या कोई छात्र एसिड हमले का पीड़ित है ? 


इसमें यह भी जिक्र किया जायेगा कि क्या किसी छात्र को कम रोशनी में देखने में कठिनाई महसूस होती है ? क्या कोई छात्र अक्सर आंखे मलता रहता है ? क्या कोई छात्र कक्षा में पुकारे जाने पर प्रतिक्रिया नहीं देता है ? डीएससीए के पहले हिस्से में यह भी दर्ज किया जायेगा कि क्या कोई छात्र ज्यादा तेज आवाज में बोलता है और शब्दों का उच्चारण अक्सर गलत करता है ? क्या कोई छात्र बार बार संवाद को दोहराने को कहता है ? 


मसौदा के अनुसार, स्कूलों में निशक्तता जांच की पहचान सूची के दूसरे हिस्से में इन क्रियाकलापों एवं व्यवहार के आधार पर लोकोमोटर डिसएबिलिटी (चलन दिव्यांगता), मस्तिष्क पक्षाघात, बौनापन, एसिड हमला पीड़ित, नेत्र समस्या, लघु दृष्टिदोष, सुनने से जुड़ी अक्षमता, बोलने संबंधी अक्षमता, सीखने से जुड़ी विशिष्ट अक्षमता ऑटिज्म, बहुआयामी अक्षमता जैसे वर्गो में श्रेणीबद्ध किया जायेगा।


मसौदे में कहा गया है कि इसके आधार पर 'स्कूल का समग्र डाटा' तैयार किया जायेगा। मसौदे में 2019 के एक सर्वे का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि 52.9 प्रतिशत राज्यों को कुछ श्रेणियों की दिव्यांगता के लक्षणों को पहचानने एवं वर्गीकरण में समस्याओं का सामना करना पड़ा है। आठ राज्यों - सिक्किम, तमिलनाडु, केरल, असम, छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, दिल्ली और उत्तर प्रदेश ने ही अभी तक विशेष जरूरत वाले छात्रों की पहचान के लिये अपनी पहचान सूची तैयार की है।

सीएम योगी के शिक्षा सलाहकार बनाए गए UGC के पूर्व चेयरमैन प्रो धीरेन्द्र पाल सिंह

सीएम योगी के शिक्षा सलाहकार बनाए गए UGC के पूर्व चेयरमैन प्रो धीरेन्द्र पाल सिंह


उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिये प्रदेश सरकार ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासन की ओर से प्रख्यात शिक्षाविद प्रो धीरेन्द्र पाल सिंह को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शिक्षा सलाहकार नामित किया गया है। 



नियोजन विभाग के सचिव आलोक कुमार की ओर से इस संबंध में पत्र जारी कर दिया गया है। प्रो. सिंह 2018 से 2021 तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन रह चुके हैं। उन्होंने लगभग चार दशकों के अपने करियर में भारतीय उच्च शिक्षा में कई अकादमिक संस्थाओं का नेतृत्व किया है।


कुलपति के रूप में प्रोफेसर सिंह ने तीन विश्वविद्यालयों का नेतृत्व किया है, जिसमें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू), वाराणसी, डॉ एच एस गौर विश्वविद्यालय, सागर और देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर के अलावा निदेशक के रूप में राष्ट्रीय मूल्यांकन और प्रत्यायन परिषद (नैक) का नेतृत्व किया है।


प्रो. सिंह ने केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड (CABE), भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR), यूनेस्को के साथ सहयोग के लिए भारतीय राष्ट्रीय आयोग, RUSA, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की कार्यान्वयन समिति आदि के पदेन सदस्य के रूप में योगदान दिया है। इसके अलावा अध्यक्ष के रूप में, यूजीसी के शासी परिषदों के अध्यक्ष के रूप में 8 अंतर-विश्वविद्यालय केंद्रों का मार्गदर्शन भी किया।


प्रो. सिंह को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों और परियोजनाओं का भी गहरा अनुभव है। उन्हें पर्यावरण नेतृत्व पुरस्कार, दशक के पर्यावरणविद् (पूर्वांचल) पुरस्कार, भारत ज्योति पुरस्कार, यूपी रत्न पुरस्कार, आगरा विश्वविद्यालय गौरव श्री पुरस्कार, राजा बलवंत सिंह शिक्षा सम्मान, राष्ट्र निर्माता पुरस्कार जैसे कई सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

CBSE compartment exam: 23 अगस्त से होगी कंपार्टमेंट परीक्षा, ऐसे छात्रों को मिलेगा एडमिट कार्ड

CBSE compartment exam: 23 अगस्त से होगी कंपार्टमेंट परीक्षा, ऐसे छात्रों को मिलेगा एडमिट कार्ड







CBSE compartment exam 2022: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 23 अगस्त से कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित करेगा। परीक्षा देने वाले उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in से एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं।

कक्षा 10 की कंपार्टमेंट परीक्षा 23 अगस्त से 29 अगस्त, 2022 तक होगी और कक्षा 12 की कंपार्टमेंट परीक्षा 23 अगस्त, 2022 को होगी। परीक्षा सुबह 10.30 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक होगी। परीक्षा का समय दो घंटे है। छात्रों को प्रश्न पत्र पढ़ने के लिए 15 मिनट का समय मिलेगा।

CBSE Compartment exam admit card 2022: ऐसे डाउनलोड करें आंसर की

स्टेप 1-  सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट  cbse.gov.in पर जाएं।

स्टेप 2-  “Pariksha Sangam Portal” लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3- “Schools” लिंक पर क्लिक कर,  ‘Pre-Exam Activities’ लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 4-  ‘Admit Card, Centre Material for Comptt Exam 2022’ लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 5- मांगी गई जानकारी भरें।

स्टेप 6- एडमिट कार्ड आपके सामने होगा।

स्टेप 7- इसे डाउनलोड कर लें।

स्टेप 8-  भविष्य के लिए प्रिंटआउट लेना न भूलें।

छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे अपना एडमिट कार्ड प्राप्त करने के लिए अपने संबंधित स्कूलों से संपर्क करें। स्कूलों के प्रधानाचार्यों या प्रधानाध्यापकों द्वारा हस्ताक्षर और मुहर लगाने के बाद छात्रों को उनके प्रवेश पत्र स्कूलों से प्राप्त होंगे।

निजी उम्मीदवारों के लिए एडमिट कार्ड जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। छात्र सीबीएसई के लेटेस्ट अपडेट के लिए यहां जांच कर सकते हैं। सीबीएसई 23 अगस्त, 2022 से कक्षा 10 और 12 के छात्रों के लिए कंपार्टमेंट परीक्षा आयोजित करेगा।

Sunday, August 21, 2022

अवकाश लेने पर धर्म के आधार पर आपत्ति जताने वाले BEO के नवाचार पर लगा ब्रेक, BSA ने बीइओ की आपत्ति की दरकिनार, MLC ने मामले पर शासन को दिलाया ध्यान

अवकाश लेने पर धर्म के आधार पर आपत्ति जताने वाले BEO के नवाचार पर लगा ब्रेक, BSA ने बीइओ की आपत्ति की दरकिनार, MLC ने मामले पर शासन को दिलाया ध्यान।





फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में जेल भेजे गए पांच शिक्षक, डीआईओएस ऑफिस से निदेशालय तक के बाबू भी शक के दायरे में

फर्जी नियुक्ति पत्र मामले में जेल भेजे गए पांच शिक्षक



लखनऊ, फर्जी नियुक्ति पत्र के सहारे झांसी जिले के राजकीय विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण करने वाले सभी पांच अध्यापकों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया। पांचों फर्जी अध्यापकों के विरुद्ध शुक्रवार को एफआईआर दर्ज कराई गई थी।


यह जानकारी अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता ने दी। उन्होंने बताया कि कार्यभार ग्रहण करने की आख्या निदेशालय को प्राप्त हुई तो नियुक्ति पत्र जांच में पूर्णत फर्जी पाया गया। इस पर शिक्षा निदेशालय ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) झांसी को फर्जी सहायक अध्यापक के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। डीआईओएस झांसी ने जब प्रधानाध्यापिका को तलब किया तो जानकारी मिली कि उनके विद्यालय में पंचदेव के अलावा दो अन्य सहायक अध्यापकों रणविजय विश्वकर्मा पुत्र लालचन्द्र विश्वकर्मा और नरेन्द्र कुमार मौर्य पुत्र राम आधार मौर्य ने भी उसी तिथि में कार्यभार ग्रहण किया है।

साथ ही यह जानकारी भी मिली कि जिले के राजकीय हाईस्कूल वीरा और राजकीय हाईस्कूल बम्हौरी सुहागी झांसी में भी एक-एक अध्यापिकाएं जुलाई में नियुक्त हुई हैं।



लखनऊ। झांसी जिले के राजकीय विद्यालयों में पांच फर्जी शिक्षकों के नौकरी करने के मामले में प्रधानाध्यापिकाओं की लापरवाही के साथ शिक्षा विभाग के बाबू भी शक के दायरे में हैं। फर्जी शिक्षकों के कार्यभार ग्रहण करने के मामले में शिक्षा विभाग के बाबू भी जांच के घेरे में हैं। डीआईओएस झांसी के कार्यालय के साथ ही निदेशालय के कुछ कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। 

पुलिस द्वारा आरोपियों से पूछताछ में मामला खुलने की उम्मीद जताई जा रही है। यही नहीं शिक्षा विभाग के अधिकारी भी अपने स्तर पर जांच कर रहे हैं। अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता के अनुसार मामले में अन्य दोषियों की तलाश की जा रही है। पकड़े जाने पर उनके विरुद्ध भी कार्यवाही की जाएगी।


ऐसे हुआ खुलासा
झांसी के राजकीय हाईस्कूल, खडौरा में पढ़ा रहे आजमगढ़ जिले के लालमऊ, पोस्ट मेहनाजपुर, तहसील लालगंज निवासी पंचदेव पुत्र रामचरन मौर्य का फर्जी नियुक्ति पत्र अपर शिक्षा निदेशक (राजकीय) केके गुप्ता को मिला तो उन्होंने उसकी जांच कराई। जांच में नियुक्ति पत्र फर्जी पाए जाने पर संयुक्त शिक्षा निदेशक व डीआईओएस झांसी को कार्यवाही के निर्देश दिए गए। 


इसके बाद डीआईओएस ने प्रधानाध्यापिका राजकीय हाईस्कूल, खडौरा को कागजात के साथ तलब किया तो पता चला कि उनके विद्यालय में पंचदेव के अलावा दो अन्य सहायक अध्यापक रणविजय विश्वकर्मा पुत्र लालचंद्र विश्वकर्मा और नरेंद्र कुमार मौर्य पुत्र राम आधार मौर्य ने भी उसी तिथि में कार्यभार ग्रहण किया है


अन्य विद्यालयों में नया कार्यभार ग्रहण करने वालों की पड़ताल में पता चला कि जिले के दो अन्य विद्यालयों राजकीय हाईस्कूल वीरा व राजकीय हाईस्कूल बम्हौरी सुहागी में भी एक-एक अध्यापिकाएं जुलाई 2022 में नियुक्त हुई हैं। सभी के नियुक्ति पत्र एक जैसे व पंचदेव की तरह फर्जी लगने व निदेशालय से पत्र निर्गत न होने की बात सामने आने पर डीआईओएस झांसी ने झांसी के मऊरानीपुर व गरौठा में एफआईआर कराने के लिए प्रधानाध्यापिकाओं को निर्देशित किया।