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Wednesday, August 10, 2022

सीबीएसई 2022-23 परीक्षा : दसवीं और 12वीं सिलेबस में कटौती नहीं, वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी हुए कम

सीबीएसई 2022-23 परीक्षा : दसवीं और 12वीं सिलेबस में कटौती नहीं, वस्तुनिष्ठ प्रश्न भी हुए कम


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से दसवीं और 12वीं बोर्ड के सत्र 2022-23 की परीक्षा में 20 फीसदी ही वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। 2023 की परीक्षा के सिलेबस में कोई कटौती नहीं की गई है।


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की ओर से दसवीं और 12वीं बोर्ड के सत्र 2022-23 की परीक्षा में 20 फीसदी ही वस्तुनिष्ठ प्रश्न पूछे जाएंगे। 2023 की परीक्षा के सिलेबस में कोई कटौती नहीं की गई है। न ही किसी चैप्टर को हटाया गया है। सभी चैप्टर से प्रश्न पूछे जाएंगे। यह जानकारी बोर्ड द्वारा सभी स्कूलों को भेज दी गई है।

बोर्ड की मानें तो कोरोना संक्रमण के कारण वस्तुनिष्ठ प्रश्नों की संख्या 50 फीसदी की गई थी लेकिन 2023 की दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में 20 फीसदी ही वस्तुनिष्ठ प्रश्नों को रखा गया है। वस्तुनिष्ठ प्रश्न में मल्टीपल च्वॉइस वाले प्रश्न रहेंगे। इसके अलावा क्षमता आधारिक प्रश्नों की संख्या बढ़ाई गयी है। ये ऐसे प्रश्न होते हैं जिसका उत्तर समझ के साथ देनी होगी। ऐसे प्रश्नों की संख्या दसवीं और 12वीं दोनों में 20 फीसदी से अधिक होगी। जबकि पहले दस फीसदी ही ऐसे प्रश्न पूछे जाते थे। इतना ही नहीं, अब क्षमता आधारित प्रश्न, मल्टीपल च्वॉइस, केस स्टडी, लघु उत्तरीय प्रश्न आदि भी रहेंगे। ज्ञात हो कि 15 फरवरी 2023 से दसवीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा शुरू होगी। इससे पहले 15 जनवरी 2023 को प्रायोगिक परीक्षा शुरू होगी।

कॉरिकुलम से मिलेगी सारी जानकारी
बोर्ड ने वेबसाइट पर नए कॉरिकुलम को डाल दिया है। इससे छात्र सिलेबस की जानकारी के साथ अंक पैटर्न भी जान पाएंगे। बोर्ड ने आंतरिक मूल्यांकन के 20 फीसदी अंकों में कोई बदलाव नहीं किया है। आंतरिक मूल्यांकन 20 फीसदी ही रहेगा।

सिलेबस में किया गया बदलाव

-चैप्टर से ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जिसके उत्तर के लिए बच्चे सोचें।
-वास्तविक जीवन से जुड़े प्रश्नों की संख्या विषयवार अधिक होगी।

-दिनचर्या से जुड़े प्रश्न होंगे।
-विषयवार आए दिन होने वाली घटनाओं से जुड़े प्रश्न होंगे।

सीबीएसई सिटी कोऑडिनेटर राजीव रंजन ने बताया कि सिलेबस की जानकारी छात्रों को दे दी गई है। क्योंकि दो साल सिलेबस में कटौती की गई थी। लेकिन अगले साल की परीक्षा में हर चैप्टर से प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके साथ ही परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव किया गया है।

छात्र - छात्राओं की ई-मेल आइडी गड़बड़, सत्यापन के निर्देश, यूपी बोर्ड ने मुख्यमंत्री की 100 दिन कार्ययोजना में कराई थी तैयार

छात्र - छात्राओं की ई-मेल आइडी गड़बड़, सत्यापन के निर्देश, यूपी बोर्ड ने मुख्यमंत्री की 100 दिन कार्ययोजना में कराई थी तैयार

प्रयागराज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल में शुरुआती 100 दिन की कार्ययोजना के तहत उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के छात्र-छात्राओं की आनन फानन बनवाई गई ई-मेल आइडी में गड़बड़ियां सामने आई हैं। कुछ जिलों से एक ही विद्यार्थी के नाम पर पूरे विद्यालय के छात्रों की ई-मेल आइडी बना दी गई है। इसके अलावा भी त्रुटियां हैं। यह स्थिति सामने आने पर यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी पांच क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों को ई-मेल आइडी अविलंब सत्यापित कराकर ठीक कराने के निर्देश दिए हैं।


बोर्ड की परीक्षा संपन्न होने के बाद सभी विद्यार्थियों की ई-मेल आइडी तैयार कराने के निर्देश उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को दिए गए थे। जिस समय यह कार्य शुरू किया गया, उस समय विद्यालयों में परीक्षा के बाद अवकाश हो चुका था, जिससे विद्यार्थियों की उपस्थिति विद्यालयों में नहीं थी। इस कार्य की शासन निगरानी कर रहा था, ऐसे में प्रधानाचार्यों पर ई-मेल आइडी तेजी से बनाने का दबाव था । दबाव में प्रधानाचार्यों ने रिकार्ड बनाते हुए विद्यार्थियों की ई-मेल आइडी तैयार करा दी, लेकिन अब उसमें गड़बड़ी सामने आई हैं। जिन विद्यालयों से एक या दो चार विद्यार्थियों के नाम पर सभी की ई-मेल आइडी बना दी गई है, वहां सभी विद्यार्थियों की ई-मेल बनाए जाने की मंशा ही पूरी नहीं हुई। अब इस गड़बड़ी को अविलंब दुरुस्त कराने के निर्देश बोर्ड सचिव ने दिए हैं। इसके अलावा हाईस्कूल पास हुए तमाम विद्यार्थी प्रदेश के बाहर दूसरे बोर्ड के विद्यालयों में चले गए हैं। इसके अलावा कक्षा 11 में तमाम विद्यार्थी दूसरे प्रदेशों के बोर्डों से भी आए हैं। क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों ने जिला विद्यालय निरीक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए सत्यापन कराते हुए ई-मेल आइडी शत-प्रतिशत दुरुस्त कराने के निर्देश दिए हैं।

औरैया के BEO पर फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का आरोप, महानिदेशक ने दिए जांच के आदेश

औरैया के BEO पर फर्जी विकलांगता प्रमाणपत्र से नौकरी पाने का आरोप, महानिदेशक ने दिए जांच के आदेश 


औरैया। खंड शिक्षा अधिकारी अछल्दा अवनीश यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। कभी छात्रों के अभिभावकों से आधार कार्ड बनवाने की एवज में वसूली करने तो कभी विभागीय कार्यो में लापरवाही करने के कारण विवादों में रहे खंड शिक्षा अधिकारी पर अब फर्जी दिव्यांग पत्र लगाकर नौकरी पाने के आरोप लगे हैं। इस मामले की हुई शिकायत के बाद महानिदेशक विजय किरण आनंद ने जांच कराने के आदेश दिए हैं।


अछल्दा के माखनपुर अघासी निवासी भाजपा नेत्री मनु ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद से शिकायत की थी कि जिले में कार्यरत खंड शिक्षा अधिकारी अवनीश यादव ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी इटावा के कार्यालय में सांठगांठ कर 75 प्रतिशत दिव्यांग होने का प्रमाणपत्र बनवा लिया है और इस प्रमाणपत्र का प्रयोग कर लोक सेवा आयोग व बेसिक शिक्षा विभाग के साथ धोखाधड़ी कर बतौर बीईओ नौकरी पा ली है। उन्होंने अपने शिकायती पत्र में यह भी दावा किया है कि अवनीश यादव बमुश्किल 20 प्रतिशत दिव्यांग है।


शिकायती पत्र में कु. मनु ने मेडिकल बोर्ड गठित कर अवनीश यादव की विकलांगता की भौतिक जांच कराकर सेवा से बर्खास्त कर सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। 


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनन्द ने शिकायती पत्र का संज्ञान लेते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को 15 दिन में जांच कर आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। बीएसए विपिन कुमार तिवारी ने बताया कि शासन से जांच के संबंध में पत्र मिला है। मामले की जांच की जा रही है, मेडिकल बोर्ड के माध्यम से रिपोर्ट ली जाएगी, जो तथ्य सामने आएंगे उसकी रिपोर्ट कार्रवाई के लिए भेजी जाएगी।



शिक्षा विभाग के बाबुओं के 130 गड़बड़ तबादले संशोधित, दोषियों पर गिरेगी गाज, नए आदेश जारी, प्रस्तावित धरना स्थगित

शिक्षा विभाग के बाबुओं के 130 गड़बड़ तबादले संशोधित, दोषी बाबुओं पर गिरेगी गाज, नए आदेश जारी, प्रस्तावित धरना स्थगित 


बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के समूह ग के 130 गड़बड़ तबादलों को संशोधित कर दिया गया है। अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने इनके संशोधित आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही तबादलों में गड़बड़ी की गाज कार्रवाई से जुड़े बाबुओं पर गिराई गई है। निदेशालय स्तर के तीन बाबुओं के अलावा विभिन्न जिलों से गलत सूचना भेजने वाले बाबुओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। साथ ही चार्जशीट तैयार होते ही इन बाबुओं का निलंबन करने की भी तैयारी है।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश पर अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। वहीं खबर का संज्ञान लेते हुए 27 जुलाई को शासन ने दोषियों पर कार्रवाई कर तबादलों की सूची उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में जांच के बाद शिक्षा विभाग ने भी 124 मामलों में गड़बड़ी पकड़ी थी और अब कुछ और मामलों के परीक्षण के बाद गड़बड़ियों को दुरुस्त करके नए आदेश जारी किए गए हैं।


अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) अनिल भूषण चतुर्वेदी के अनुसार सभी आपत्तियों का परीक्षण करने के बाद 130 तबादलों में संशोधन किया गया है। इनमें जिन कर्मियों का तबादला बिना रिक्त वाले स्थान पर हो गया था, उनका नजदीकी विभाग में रिक्त पद पर स्थानांतरण कर दिया गया है। वहीं विकलांग व सेवानिवृत्त की तारीख नजदीक होने वाले कर्मियों के तबादले में भी उनकी दिक्कत देखते हुए संशोधन किया गया है। जिले से बाहर किए गए कर्मचारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तबादला जिले में रिक्त पद पर किया गया है।


कई अन्य मामले भी दुरुस्त किए गए हैं। वहीं गड़बड़ी के दोषी जिन बाबुओं पर कार्रवाई की जा रही है, उनमें जिले वाले वह बाबू हैं, जिन्होंने तैनाती या फिर गलत सूचना दी। इनके नाम एक-दो दिन में चिह्नित हो जाएंगे। वहीं निदेशालय स्तर पर तीन बाबू चिह्नित किए गए हैं। फिलहाल चिह्नित बाबुओं के नाम उजागर नहीं किए गए हैं। इनके खिलाफ आरोप पत्र तैयार करके अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।


कर्मचारियों का आज प्रस्तावित धरना स्थगिततबादलों में गड़बड़ी सुधारने की सूचना मंगलवार को अपर शिक्षा निदेशक बेसिक द्वारा दिए जाने के बाद यूपी एजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन ने 10 अगस्त को लखनऊ में बेसिक शिक्षा निदेशालय पर प्रस्तावित धरना स्थगित कर दिया है। एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विवेक यादव व महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव के अनुसार संगठन का धरना 22 अगस्त तक स्थगित करने का निर्णय किया गया है।


अपर शिक्षा निदेशक बेसिक ने कहा है कि संगठन की अन्य मांगों पर भी जल्द कार्रवाई होगी। महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक संशोधित तबादला आदेशों के अतिरिक्त जो तबादले और गड़बड़ निकलेंगे, उन्हें भी दुरुस्त करने का आश्वासन मिला है। इसी क्रम में धरना स्थगित किया गया है।

यूपी बोर्ड : 9 से 12 तक के पंजीकरण में आधार किया अनिवार्य

यूपी बोर्ड : 9 से 12 तक के पंजीकरण में आधार किया अनिवार्य


प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन पंजीकरण में अचानक से आधार नंबर को अनिवार्य कर दिया है। शासन के निर्देश पर चार दिन पहले बोर्ड ने चुपके से वेबसाइट अपडेट कर दी है जिसके चलते उन बच्चों के रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहे जिनके पास आधार नहीं है। पिछले साल तक बोर्ड का फॉर्म भरते समय आधार नंबर तो मांग गया था, लेकिन अनिवार्य नहीं था।


चार दिन पहले हुए इस बदलाव के कारण सबसे अधिक समस्या कक्षा नौ और 11 में प्रवेश लेने वाले उन बच्चों को हो रही है जिनके पास आधार नहीं है। कक्षा 10 और 12 में भी सीधे प्रवेश लेने वाले बगैर आधार नंबर वाले बच्चे परेशान हैं। हालांकि इस बदलाव पर बोर्ड का कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है।

वित्तविहीन स्कूल खोलना है तो रखे योग शिक्षक, मान्यता की शर्तों में भी होगा परिवर्तन

वित्तविहीन स्कूल खोलना है तो रखे योग शिक्षक, मान्यता की शर्तों में भी होगा परिवर्तन


राजकीय और सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में योग प्रशिक्षक रखने की तैयारियों के बीच माध्यमिक शिक्षा विभाग नए वित्तविहीन स्कूलों की मान्यता की शर्तों में भी परिवर्तन करने जा रहा है। सरकार के योग शिक्षा को बढ़ावा देने के वादे को पूरा करने के मकसद से अब उन्हीं वित्तविहीन स्कूलों को मान्यता दी जाएगी, जहां योग शिक्षक तैनात होंगे।


मान्यता के लिए ऑनलाइन आवेदन करने वाली संस्थाओं को योग शिक्षक का ब्योरा भी देना होगा। शैक्षिक योग्यता आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन के अनुसार होनी चाहिए। इस संबंध में यूपी बोर्ड की मान्यता शर्तों में बदलाव किया जा रहा है जो कि अगले वर्ष से प्रभावी होगा। क्योंकि इस साल मान्यता के आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई को समाप्त हो चुकी है। शासन में एक अगस्त को हुई बैठक में अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव को यह प्रस्ताव देने के निर्देश दिए गए हैं कि वर्तमान में संचालित वित्तविहीन स्कूलों में योग शिक्षक किस प्रकार रखा जाए।


दो साल से जारी नहीं हुई हाईस्कूल की मान्यता

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी शर्तें पूरी करने एवं आवश्यक संसाधन होने के बावजूद दो साल से मान्यता आदेश जारी नहीं किया है। 2020 में आवेदन करने वाले 100 से अधिक नए हाईस्कूलों को मान्यता जारी नहीं की गई। 2021 में आवेदन करने वाले स्कूलों को मान्यता भी नहीं दी गई है। सूत्रों के अनुसार यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 में संशोधन के बाद नए हाईस्कूलों को मान्यता जारी होगी।

Tuesday, August 9, 2022

सिर पर आ गई तिमाही परीक्षा, अब तक नहीं मिलीं परिषदीय बच्चों को पूरी किताबें

सिर पर आ गई तिमाही परीक्षा, अब तक नहीं मिलीं परिषदीय बच्चों को पूरी किताबें



कांवेंट की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों में होने वाली तिमाही परीक्षा सिर पर है। 30 फीसद पाठ्यक्रम पूरा करने के निर्देश जिम्मेदारों को मिल चुके हैं। इससे इतर सच्चाई यह है कि अब तक अत्यंत थोड़ी किताबों की ही आपूर्ति प्रकाशकों द्वारा विद्यालयों में की जा सकी। इस कारण बिना पढ़े ही नौनिहालों को पहली तिमाही की परीक्षा में बैठने को विवश होना पड़ेगा। 


मोह हो रहा भंग, कटवा रहे नाम

लचर व्यवस्था और जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते परिषदीय विद्यालयों से अभिभावकों का मोह भंग हो रहा है। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक को आदेश पालन का अंतिम अवसर, एक माह में आदेश का पालन न होने पर तय किया जाएगा अवमानना का आरोप

माध्यमिक शिक्षा निदेशक को आदेश पालन का अंतिम अवसर, एक माह में आदेश का पालन न होने पर तय किया जाएगा अवमानना का आरोप


प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अवमानना के एक मामले में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सरिता तिवारी को अंतरिम आदेश का पालन करने का अंतिम अवसर दिया है। कोर्ट ने आदेश का अनुपालन न होने को गंभीरता से लेते हुए कहा कि एक माह में आदेश का पालन न होने की स्थिति में अधिकारी को तलब कर अवमानना का आरोप तय किए जाएगा।


यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने अलीगढ़ के बिसारा इंटर कॉलेज के बर्खास्त शिक्षक सुधीर कुमार शर्मा की अवमानना याचिका पर दिया है। याची को 2005 में प्रबंधन समिति ने मौलिक रिक्ति के सापेक्ष नियुक्त किया था।


 नियुक्ति के समय शिक्षक ने राष्ट्रीय पत्राचार संस्थान कानपुर से शिक्षा अलंकार डिग्री प्रस्तुत की थी। विभाग द्वारा वेतन जारी न होने पर दाखिल याचिका को निस्तारित करते हुए हाईकोर्ट ने डीआईओएस को गुणदोष के आधार पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। जिसके बाद विभाग ने 2014 में वित्तीय सहमति प्रदान कर दी थी, लेकिन 2021 में अलीगढ़ के अरुण कुमार ने विनोद कुमार उपाध्याय केस के निर्देश के आधार पर याची की नियुक्ति को चुनौती दी। जिसके बाद विभाग ने प्रशिक्षण उपाधि को अवैध पाते हुए याची को बर्खास्त कर दिया था। सेवा समाप्ति के विरुद्ध दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने बर्खास्तगी आदेश को स्थगित कर दिया था, लेकिन विभाग ने पिछले चार महीनों में स्थगनादेश का अनुपालन नहीं किया।

Monday, August 8, 2022

पढ़ाई में शामिल होंगे खो-खो और गिल्ली डंडा

पढ़ाई में शामिल होंगे खो-खो और गिल्ली डंडा

शिक्षा मंत्रालय की राय, देसी खेलों में ज्ञान को प्रेरणा व समर्पण की क्षमता

बोर्ड गेम सांप-सीढ़ी से सरल कर समझाया जाएगा जटिल कराधान


नई दिल्ली  : नई शिक्षा नीति के तहत स्कूलों से उच्च शिक्षा के स्तर तक परंपरागत और आधुनिक शिक्षा प्रणाली के बीच उपयुक्त तालमेल की अद्भुत संगति देखने को मिलेगी। क्षेत्रीय भाषाओं को पहले ही प्राथमिकता पर लिया गया है। अब इससे एक कदम आगे बढ़कर केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने 'खोखो', 'गिल्ली डंडा', 'लंगड़ी', 'पतंग उड़ान', 'संथल कट्टी' जैसे देसी खेलों को स्कूली खेल पाठ्यक्रम का अहम हिस्सा बनाया जाएगा। भारत के हर घर और गली की पहचान इन खेलों के जरिये बच्चों को आयकर जैसे कठिन और जटिल विषयों तक को समझाया जाएगा।


शिक्षा मंत्रालय ने देश के ऐसे ही 75 देसी खेलों को बढ़ावा देने का फैसला किया है। इन भारतीय खेलों में नई पीढ़ी के बचपन  को पिरोने के साथ ही खेल खेल में पढ़ाई की मंशा को भी पूरा किया जाएगा। इन खेलों में और 'विष-अमृत' जैसे खेल भी शामिल होंगे। मंत्रालय का मानना है कि परंपरागत भारतीय कलाओं में ज्ञान के लिए प्रेरित करने और समर्पण की अद्भुत क्षमता है। यह हमारे चेतन मन को सुरक्षित करते हुए मानवीय भावनाओं को जागृत करती है। 


अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई) के उपाध्यक्ष प्रोफेसर एमपी पूनिया ने बताया कि स्कूल के स्तर पर 'अटाया-पटाया', 'खो खो', 'लंगड़ी', 'इक्कल-दुक्कल' भारतीय खेलों को शामिल करने का उदेश्य शारीरिक शिक्षा को बढ़ावा देना है। भारतीय खेलों के जरिये छात्रों को उनकी जड़ों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने में सहायता मिलेगी। इस अनूठी पहल के तहत ही छात्रों में कर साक्षरता बढ़ाने के लिए सरल भारतीय खेलों की मदद ली जाएगी।


 विभिन्न बोर्ड गेमों, पहेलियों और कामिक्स के जरिये स्कूली बच्चे जटिल कराधान को सरल व रोचक तरीके से समझेंगे। कराधान को सांप सीढ़ी के जरिये समझाया जाएगा। बच्चों में सीढ़ी के जरिये अच्छी आदतें को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि सांप से गलत आदतों से विमुख किया जाएगा। इसके साथ ही बच्चों को भारतीय कलाओं की विभिन्न विधाओं से परिचित कराना होगा ताकि वह देश की समृद्ध  सांस्कृतिक विरासत को पहचान सकें। भारतीय ज्ञान प्रणाली से शिक्षा को जोड़ने के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में वैदिक बोर्ड को मान्यता देने की तैयारी चल रही है।


 नई शिक्षा प्रणाली के तहत केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे। पैरामेडिकल, वास्तुशास्त्र और आयुर्वेद आधारित दवाओं के विषय के नए पाठ्यक्रम जल्द ही दिल्ली के केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू किए जाएंगे। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत नए व्यावसायिक विषयों को भी शुरू होगा। संस्कृत के साथ योग, संगीत, आयुष और अन्य विषय भी पढ़ाए जाएंगे। जुलाई से नैचुरोपैथी का पीजी डिप्लोमा कोर्स शुरू किया गया है। 

खेल के मैदान में प्रतिभा दिखाएंगे परिषदीय शिक्षक, खेल दिवस पर होगा आयोजन

खेल के मैदान में प्रतिभा दिखाएंगे परिषदीय शिक्षक,  खेल दिवस पर होगा आयोजन



प्राथमिक विद्यालयों में नौनिहालों को ककहरा रटाने वाले गुरुजी अब खेल के मैदान में हॉकी व फुटबॉल जैसे खेल खेलते नजर आएंगे। खेल दिवस के अवसर पर 29 अगस्त को बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से विभिन्न क्रीड़ा प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इन प्रतियोगिताओं में विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं नहीं बल्कि शिक्षकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करनी होगी।


प्रतिवर्ष 29 अगस्त को मेजर ध्यानचंद का जन्मदिवस खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न क्रीड़ा प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं। शिक्षा निदेशक (बेसिक) के आदेशानुसार इस बार 29 अगस्त को खेल दिवस के अवसर पर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए भी प्रतियोगिताएं आयोजित करनी हैं।


29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के अवसर पर खेल विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन कराया जाएगा हालांकि, इसमें वहीं शिक्षक प्रतिभाग करेंगे जो स्वेच्छा से प्रतियोगिता में शामिल होना चाहेंगे।

CUET : अब 24 अगस्त से, नए प्रवेश पत्र होंगे जारी

CUET : अब 24 अगस्त से, नए प्रवेश पत्र होंगे जारी

नई दिल्ली : तकनीकी खामी के कारण पिछले हफ्ते रद्द हुई केंद्रीय विश्वविद्यालय साझा प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-यूजी) 24 से 28 अगस्त तक आयोजित की जाएगी। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने कहा कि इन अभ्यर्थियों को नए प्रवेश पत्र जारी किए जाएंगे। एनटीए ने बताया कि तीसरे चरण की परीक्षा पूर्व निर्धारित तारीख 17, 18 और 20 अगस्त को ही कराई जाएगी।


एनटीए की वरिष्ठ निदेशक साधना पाराशर ने कहा, दूसरे चरण में 4 से 6 अगस्त को होने वाली परीक्षा प्रशासनिक और तकनीकी वजहों से कुछ केद्रों पर स्थगित कर दी गई थी। इससे पहले, हमने घोषणा की थी कि परीक्षा 12 से 14 अगस्त तक होगी। एनटीए ने प्रभावित अभ्यर्थियों को इन तारीखों के अलावा अन्य तारीखें चुनने का विकल्प भी दिया था। 15,811 अभ्यर्थियों ने अलग तारीखें रखने का अनुरोध किया।

शिक्षा विभाग की जांच में बाबुओं के 124 तबादले गड़बड़, कर्मचारियों ने 291 बताए, शासन की नीति का उल्लंघन करने का आरोप

शिक्षा विभाग की जांच में बाबुओं के  124 तबादले गड़बड़, कर्मचारियों ने 291 बताए, शासन की नीति का उल्लंघन करने का आरोप



बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के समूह ग के कर्मियों के संयुक्त रूप से हुए तबादलों में गड़बड़ियों का मामला सुलझ नहीं पा रहा है। तमाम विरोध के बाद शिक्षा विभाग की जांच में 124 तबादलों में गड़बड़ी उजागर तो हुई है, लेकिन कर्मचारी संगठन इसे अधूरी जांच बता रहे हैं। यूपी एजूकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफीसर्स एसोसिएशन का दावा है कि 291 तबादलों में गड़बड़ी है। संगठन ने अपने स्तर पर जांच कर ऐसे गड़बड़ तबादलों की सूची भी जारी की है। साथ ही महानिदेशक स्कूल शिक्षा के साथ ही अपर मुख्य सचिव (कार्मिक) से मामले में जांच कराकर अनियमितताओं को दूर कराने की मांग की है।



शिक्षा विभाग ने गड़बड़ियां को तीन सदस्यीय समिति की जांच के बाद पकड़ा है। कुल 900 से अधिक तबादलों में गड़बड़ मिले 124 तबादलों में तरह-तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं। विभाग ने जांच समिति द्वारा पकड़े गए गड़बड़ तबादलों का ब्योरा महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजा है। साथ ही तबादलों को दुरुस्त कर गड़बड़ी के दोषियों पर कार्रवाई करने की बात कही है। विभाग को जो गड़बड़ियां मिली हैं, उनमें सबसे ज्यादा 38 ऐसे कर्मचारी हैं, जिनका जिस कार्यालय में तबादला हुआ है, वहां पद ही खाली नहीं। या फिर एक पद पर एक से अधिक कर्मचारियों का तबादला किया गया है।


इसके अलावा 27 में नाम पद नाम, कार्यालय के नाम में गड़बड़ी है। दस ऐसे कर्मचारियों का तबादला हुआ है जिनका शासनादेश के अनुसार पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था। वहीं नौ दिव्यांगों का और 15 ऐसे कर्मियों का तबादला हुआ है, जिनकी सेवानिवृत्ति अवधि में दो वर्ष से कम समय रह गया है। जिले में पति, पत्नी के कार्यरत होने संबंधी विसंगतियां आठ मिली हैं, जबकि चार ऐसे कर्मियों के तबादले हुए हैं जिनकी सेवानिवृत्ति 30 जून 2022 या इससे पूर्व थी।


वहीं पांच निलंबित कर्मियों के तबादले कर दिए गए हैं। कर्मचारी संघ के सात कर्मियों का तबादला जिले से बाहर किया गया है। बाकी अन्य गड़बड़ियां हैं। यूपी एजूकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफीसर्स एसोसिएशन ऐसी गड़बड़ियों की संख्या 291 बता रहा है।


शासन की नीति का उल्लंघन करने का आरोप
यूपी एजूकेशनल मिनिस्ट्रीयल ऑफीसर्स एसोसिएशन ने अपर मुख्य सचिव कार्मिक को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि शासन की नीति के विपरीत शिक्षा विभाग में 20 प्रतिशत से अधिक तबादले किए गए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक यादव व महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव का आरोप है कि वरिष्ठ व प्रधान सहायकों व आशुलिपिकों के 50-50 प्रतिशत और उर्दू अनुवादकों के 97 प्रतिशत तबादले हुए हैं। एसोसिएशन ने अपने स्तर पर कराई गई जांच में 291 तबादलों में गड़बड़ी पाई हैं और बाकायदा नाम सहित सूची शासन को भेजकर संशोधन कराने की मांग की है।

उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों को संवारने और पुनर्निर्माण की तैयारी, स्मार्ट क्लास के लिए बीएसए को प्रस्ताव भेजने के निर्देश

उत्तर प्रदेश में परिषदीय स्कूलों को संवारने और पुनर्निर्माण की तैयारी, स्मार्ट क्लास के लिए बीएसए को प्रस्ताव भेजने के निर्देश


लखनऊ : परिषदीय विद्यालयों का कायाकल्प प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) से भी होगा। इस योजना में सिर्फ चयनित विद्यालयों का पुनर्निर्माण कराया जा सकेगा साथ ही वहां स्मार्ट क्लास संचालित हो सकेंगे। बेसिक शिक्षा अधिकारियों से इस संबंध में 12 अगस्त तक प्रस्ताव मांगा गया है। अल्पसंख्यक बाहुल्य पिछले क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल व कौशल विकास से संबंधित कार्यों को कराने के लिए जिलों के चिन्हित विकास क्षेत्रों, नगरीय क्षेत्र व जिला मुख्यालयों में पीएमजेवीके योजना संचालित है। जहां भी अल्पसंख्यक आबादी कुल आबादी का 25 प्रतिशत से अधिक है वहां इस योजना के तहत कार्य कराया जाएगा।


निर्देश है कि ऐसे क्षेत्रों में स्थित बेसिक शिक्षा के अधीन संचालित जर्जर प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के पुनर्निर्माण, प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की स्थापना के लिए प्रस्ताव राज्य परियोजना कार्यालय को भेजा जाए। ज्ञात हो कि विद्यालयों का कायाकल्प अभी तक शिक्षा के अलावा ग्राम पंचायतों को मिलने वाले धन से कराया जा रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उन विद्यालयों के दोबारा निर्माण का प्रस्ताव भेजा जाए, जहां कार्य बेहद आवश्यक हैं। साथ ही ये भी देखा जाए कि पूर्व में उक्त विद्यालय किसी योजना में प्रस्तावित या स्वीकृत न हों।


साथ ही जहां विद्यालय निर्माण के लिए निर्विवाद निश्शुल्क भूमि उपलब्ध हो का प्रस्ताव भेज सकते हैं। साथ ही महानिदेशक ने जिलाधिकारियों व मुख्य विकास अधिकारियों से विद्यालय परिसर में जलभराव की समस्या दूर कराने का निर्देश दिया है। इसके लिए खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से ऐसे विद्यालयों की सूची तैयार की जाएगी जहां पर वर्षा के दौरान जलभराव हो जाता है। खंड शिक्षा अधिकारी वहां के बीडीओ से संपर्क करके समस्या की जानकारी देंगे। कार्य का तकनीकी अधिकारियों से मनरेगा के तहत प्रस्ताव बनाकर संबंधित ग्राम पंचायत के माध्यम से कार्य कराया जाए।

Sunday, August 7, 2022

BSA चंदौली अवमानना में तलब, मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति में आदेश की अवहेलना का आरोप

BSA चंदौली अवमानना में तलब, मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति में आदेश की अवहेलना का आरोप


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षाधिकारी चंदौली सत्येन्द्र कुमार सिंह को आदेश का पालन न करने के मामले में 31 अगस्त को तलब किया है और कहा है कि यदि आदेश का पालन कर देते हैं तो अनुपालन हलफनामा दाखिल करें। अन्यथा, कोर्ट अवमानना आरोप निर्मित कर दंडित करने की कार्यवाही करेगी।



यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने प्रतिभा सिंह की अवमानना याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता घनश्याम मौर्य ने बहस की। याची के पिता श्री कृष्ण लघु माध्यमिक विद्यालय परशुरामपुर चंदौली में लिपिक थे। सेवाकाल में मौत हो गई। याची ने आश्रित कोटे में नियुक्ति की मांग की। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार निर्णय लेने का निर्देश दिया। याची शादीशुदा है। स्पष्ट आदेश के बावजूद नियुक्ति न करने पर याचिका दायर की गई है।

यूपी बोर्ड के विद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों की सितंबर से पोर्टल पर लगेगी ऑनलाइन अटेंडेंस

यूपी बोर्ड के विद्यालयों में छात्रों और शिक्षकों की सितंबर से पोर्टल पर लगेगी ऑनलाइन अटेंडेंस 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) तकनीक के पथ पर तेजी से दौड़ने की तैयारी में है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू करने के बाद पहली बार बोर्ड परीक्षा में ओएमआर शीट के प्रयोग की भी तैयारी की गई है। छात्र - छात्राओं की ईमेल आइडी बनाने का काम पहले ही पूरा कराया जा चुका है।


 इन्हीं बदलावों के बीच कक्षा नौ से कक्षा 12 तक के करीब 1.10 करोड़ छात्र-छात्राओं और डेढ़ लाख से अधिक शिक्षकों की उपस्थिति पोर्टल पर लिए जाने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। सितंबर से यह व्यवस्था सभी शासकीय, अशासकीय एवं वित्त विहीन विद्यालयों में लागू करने की तैयारी है।


कोरोना महामारी के दौर में माध्यमिक शिक्षा परिषद ने तकनीकी दक्षता की ओर तेजी से कदम बढ़ाया। कक्षाओं में आनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था कर शिक्षण कार्य कराया गया। लिखित व प्रायोगिक परीक्षा में शिक्षकों की आनलाइन ड्यूटी लगाई गई। परीक्षाओं की निगरानी सीसीटीवी से की गई। इसके अलावा वर्ष 2024 से हाईस्कूल और 2026 से इंटर की परीक्षा नए पैटर्न से कराने का लक्ष्य विभाग ने तय किया, लेकिन मुख्यमंत्री ने इस समय सीमा को कम कर दिया है, जिससे हाईस्कूल की परीक्षा अब वर्ष 2023 में नए पैटर्न पर होगी। 


इंटर में नई व्यवस्था 2025 से लागू होगी। इधर, परिषद ने मुख्यमंत्री के छह महीने की कार्ययोजना में शामिल यूपी बोर्ड के विद्यालयों में आनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था को सितंबर से लागू करने की तैयारी तेज कर दी है। शासन ने भी इस व्यवस्था को जल्द लागू करने के लिए निगरानी बढ़ा दी है। इस व्यवस्था के लागू होने से छात्र-छात्राओं व शिक्षकों की उपस्थिति की आनलाइन मानीटरिंग हो सकेगी। 

Saturday, August 6, 2022

निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों पर मेंटर्स एवं शिक्षक संकुल को प्रेरित करने तथा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में 10 अगस्त को यूटयूब सेशन

निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों पर मेंटर्स एवं शिक्षक संकुल को प्रेरित करने तथा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में 10 अगस्त को यूटयूब सेशन


दिनांक 10 अगस्त, 2022 को सुबह 10.00 बजे से ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन के संबंध में। देखें यूट्यूब लिंक समस्त डायट प्राचार्य, BSA, DC Training, BEO, Mentors, एवं शिक्षक संकुल कृपया ध्यान दें 


👉 यूटयूब सेशन का लिंक : https://bit.ly/sankulmentorlive


निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों पर मेंटर्स एवं शिक्षक संकुल को प्रेरित करने तथा सहयोगात्मक पर्यवेक्षण व शिक्षक संकुल की बैठकों को सुदृढ़ करने के संबंध में राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा दिनांक 10 अगस्त, 2022 को सुबह 10.00 बजे से ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।





उक्त ऑनलाइन गोष्ठी में जनपद के समस्त ARP / SRG / DIET Mentor एवं शिक्षक संकुल की समय से प्रतिभागिता अनिवार्य है। 

नए आदेश से उठे सवाल! बिना बजट सात दिन हलवा, लड्डू और खीर खिलाएंगे तो बाकी दिन MDM कैसे बनवाएंगे?

नए आदेश से उठे सवाल!  बिना बजट सात दिन हलवा - खीर खिलाएंगे तो बाकी दिन MDM कैसे बनवाएंगे? 




परिषदीय स्कूलों के MDM खाते खाली, लड्डु, हलवा व खीर परोसे जाने का आदेश बना मुसीबत


दाल-रोटी खिलाने के लाले, छात्रों को कैसे खिलाएं हलवा-खीर और लड्डू 


देवरिया। आजादी के अमृत महोत्सव पर हर घर तिरंगा कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को दोपहर में एक सप्ताह तक विशेष भोजन कराया जाना है।

छात्रों को भोजन के साथ लड्डू, हलवा, खीर खिलाई जानी है। अब प्रधानाध्यापकों की समझ में नहीं आ रहा है कि 4.97 और 7.45 रुपये में कैसे व्यवस्था करें। इसके लिए अतिरिक्त बजट नहीं है।

दूसरी तरफ, रसोइया ये पकवान बनाने में असमर्थ हैं। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को लड्डू, हलवा, खीर खिलाने और फल वितरण के आदेश दिए गए हैं। शासन के आदेश पर परिषदीय स्कूलों में तैयारी भी की जा रही है।



बहराइच : बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित परिषदीय विद्यालयों में बनने वाले मिड-डे मील वितरण में करीब पांच माह से बजट न आने के कारण दिक्कत आ रही है। अब स्वतंत्रता सप्ताह के तहत स्कूलों में बच्चों को लड्डु, हलवा व खीर परोसे जाने का आदेश आ गया है। यह शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिले में 2,803 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है।


बहराइच :  बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से संचालित परिषदीय विद्यालयों में बनने वाले मिड-डे मील वितरण में करीब पांच माह से बजट न आने के कारण दिक्कत आ रही है। अब स्वतंत्रता सप्ताह के तहत स्कूलों में बच्चों को लड्डु, हलवा व खीर परोसे जाने का आदेश आ गया है। यह शिक्षकों के लिए मुसीबत बन गया है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से जिले में 2,803 परिषदीय स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। इसमें करीब 5.95 लाख छात्र छात्राएं पंजीकृत हैं। अभी तक यहां मीनू के हिसाब से खाना दिया जा रहा है। अभी तक यहां की कन्वर्जन कास्ट में पैसा नहीं भेजा जा सका हैं।



सीतापुर : आजादी के अमृत महोत्सव के तहत परिषदीय विद्यालय के नौनिहालों को हलवा, खीर व लड्डू खिलाने के आदेश तो कर दिए गए हैं लेकिन विभाग के पास मौजूद 15 करोड़ का बजट महज छह दिन मैं ही खर्च हो जाएगा उसके बाद विद्यालय में हलवा, खीर तो दूर एमडीएम बनना भी मुश्किल होगा।


आजादी के अमृत महोत्सव के तहत 11 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा कार्यक्रम मनाया जाएगा। इस सप्ताह परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले नौनिहालों को निर्धारित मेन्यू के अलावा अन्य स्वादिष्ट भोजन खिलाया जाएगा। प्रत्येक विद्यालय में नौनिहालों को हलवा, खीर, लड्डू, बूंदी व फल खिलाया जाएगा। शासन स्तर से निर्देश जारी होते ही बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है लेकिन इसमें सबसे बड़ी दिक्कत बजट को लेकर आएगी।


नौनिहालों को एक सप्ताह तक लगातार हलवा, खीर, लड्डू व फल का वितरण किया जाना है। एक अनुमान के मुताबिक एक बच्चे पर करीब 40 रुपये का रोजाना खर्च आएगा इस हिसाब से जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ रहे छह लाख नौनिहालों के लिए करीब 16.80 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया जा रहा है। छह लाख बच्चों के लिए रोजाना करीब 35 लाख रुपये का खर्च आता है। आप यह पोस्ट प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं। अगर हलवा, खीर व लड्डू का बजट जोड़ लिया जाए तो करीब 2.75 करोड़ का खर्च एक दिन में आएगा। यानि यह बजट महज छह दिन में ही खर्च हो जाएगा। उसके बाद विद्यालय में इसका वितरण तो दूर एमडीएम बनना भी मुश्किल हो जाएगा।



वितरण पर असमंजस की स्थिति

एक नौनिहाल पर कितने रुपये का बजट खर्च किया जाएगा, यह बजट किस मद से खर्च होगा, कन्वर्जन कास्ट से बजट लिया जाएगा या कोई बजट अलग से दिया जाएगा, इसकी स्थिति भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। ऐसे में हलवा, खीर, लड्डू, बूंदी व फल के वितरण को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शिक्षक से लेकर अफसर तक शासन के स्पष्ट आदेश का इंतजार कर रहे हैं।


40 रुपये प्रति बच्चा खर्च

स्कूल में रोजाना एमडीएम बनवा रहे एक शिक्षक ने बताया कि एक अनुमान के मुताबिक 50 ग्राम हलवा 10 रुपये का मिलेगा। बूंदी व लड्डू सात-सात रुपये में मिलेंगे। छह रुपये का एक केला मिलेगा। खीर पर करीब 10 रुपये का खर्च आएगा। इस लिहाज से एक नौनिहाल पर करीब 40 रुपये खर्च होंगे।


यह है रेट

परिषदीय विद्यालय के नौनिहालों के लिए कन्वर्जन कास्ट का रेट निर्धारित है। प्राथमिक विद्यालय के एक नौनिहाल के लिए 4.97 रुपये मिलते हैं। इसी तरह उच्च प्राथमिक विद्यालय के एक बच्चे के लिए 7.45 रुपये मिलते हैं। इस तरह एक दिन में छह लाख बच्चों के लिए करीब 35 लाख का खर्च आता है।



हो रहा है बजट के आदेश का इंतजार

"अमृत महोत्सव के तहत नौनिहालों को हलवा, खीर व लड्डू का वितरण किया जाएगा। इसकी मात्रा व बजट के बावत शासन के आदेश का इंतजार किया जा रहा है। जिले में कन्वर्जन कास्ट का पर्याप्त बजट है। बृजमोहन सिंह, डीसी, एमडीएम

दोषियों को भी पढ़ाई का अधिकार : हाईकोर्ट

दोषियों को भी पढ़ाई का अधिकार : हाईकोर्ट


एएमयू से निष्कासित छात्र के कोर्स पूरा करने के लिए विवि से मांगी जानकारी


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय कानूनी प्रणाली के तहत एक दोषी व्यक्ति को भी अपने अध्ययन को आगे बढ़ाने और जेल से परीक्षा में शामिल होने का अधिकार है, ताकि वह सामाजिक जीवन की मुख्यधारा में प्रवेश कर सके।


हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के निष्कासित विधि छात्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।

 
छात्र को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा बीएए एलएलबी पाठ्यक्त्रस्म पूरा करने की अनुमति नहीं दी गई थी ।अनुशासनहीनता के आरोप में उसे विवि से बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने मामले में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी प्रशासन से जानकारी मांगी है। पूछा कि अनुशासन बनाए रखने के साथ छात्र पढ़ाई कैसे पूरी कर सकता है।

गणित और विज्ञान को लेकर तनाव दूर करने हेतु CBSE शुरू करेगा एकलव्य सीरीज

गणित और विज्ञान को लेकर तनाव दूर करने हेतु CBSE शुरू करेगा एकलव्य सीरीज



👉 सीबीएसई तथा आईआईटी गांधीनगर द्वारा 3030 एकलव्य कार्यक्रम के 4 से 5 बजे के मध्य लाइव प्रसारण किया जा रहा हैl 

👉 इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में रचनात्मकता और सैद्धांतिक समझ विकसित करना है

 👉 कार्यक्रम में विज्ञान गणित की अनेकों गतिविधियां रोचक प्रश्न एवं गृह कार्य होंगे।


 👉 कार्यक्रम का प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए स्वयं को  पंजीकृत करें। पंजीकरण का लिंक है 👇




■ गणित और विज्ञान को लेकर तनाव कम करेंगे आईआईटीएन

■ सीबीएसई और आईआईटी गांधी नगर के बीच करार


लखनऊ  । गणित और विज्ञान को लेकर छात्र छात्राओं में अन्य विषयों से ज्यादा तनाव होता है। इस तनाव को खत्म करने और रोचक अंदाज में गणित और विज्ञान को समझने और सवालों को हल करने के नए-नए आइडिया अब छात्र छात्राओं को ऑनलाइन बताए जाएंगे। सीबीएसई, आईआईटी गांधी नगर के साथ करार कर एकलव्य 3030 सीरीज 14 अगस्त से शुरू करने जा रह है। जहां हर बच्चा विशेषज्ञ शिक्षकों से गणित और विज्ञान विषय को आसानी से समझने के तरीके जान सकेंगे।


एकलव्य सीरीज के लिए दूसरा कदमः एकलव्य सीरीज 3030 को कोरोना काल में शुरू करने का प्रयास किया गया था लेकिन ऑनलाइन सिर्फ पांच एपिसोड ही तैयार किए जा सके थे। पांच सितम्बर 2021 को शुरू हुआ सफर कोरोना बढ़ने की वजह से पांच एपिसोड बाद ही बंद कर दिया गया था। जिसके बाद अब बोर्ड ने दोबारा आईआईटी गांधी से वार्ता कर इस सीरीज को शुरू करने मन बनाया है।


स्कूल को भेजा गया लिंक: एकलव्य सीरीज से बच्चों को जोड़ने के लिए बोर्ड ने वेबसाइट पर लिंक अपलोड करने के साथ ही स्कूलों को सीधे लिंक भेज दिया है।


कक्षा 6 से 12 तक के बच्चे होंगे शामिल

एकलव्य सीरीज में कक्षा छह से 12 तक के छात्र-छात्राएं शामिल हो सकेंगे। लखनऊ में सीबीएसई के 126 स्कूलों के साथ ही यूपी बोर्ड और सीआईएससीई बोर्ड द्वारा संचालित होने वाले स्कूल भी शामिल हो सकते हैं।

हर सप्ताह में एक एपिसोड आएगा

एकलव्य सीरीज 14 अगस्त रविवार से शुरू हो रही है। जिसके बाद सप्ताह में एक दिन आईआईटी गांधी नगर के शिक्षकों की गणित और विज्ञान की क्लास बच्चों के लिए लगेगी। जिसमें बच्चों को इन विषयों में नई चुनौतियों और उनसे निपटने के आइडिया बताए जाएंगे।

परिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते : हाईकोर्ट

परिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते : हाईकोर्ट


नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता । उच्च न्यायालय ने कहा है कि पारिवारिक परिस्थितियों के कारण बच्चे को शिक्षा से वंचित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि शिक्षित बच्चा राष्ट्र के लिए एक संपत्ति बन जाता है। न्यायालय ने कहा कि माता-पिता के जेल में होने की वजह से किसी भी नाबालिग को शिक्षा के मोर्चे पर नुकसान नहीं होना चाहिए।


जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने एक महिला की हत्या के मामले में आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। उन्होंने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान नाबालिग के स्कूल में दाखिले के मसले पर स्वतः संज्ञान लिया है, क्योंकि उसके माता-पिता न्यायिक हिरासत के तहत जेल में है।


उच्च न्यायालय ने संबंधित थाना प्रभारी को नाबालिग लड़की को उस स्कूल में दाखिला कराने का आदेश दिया है जिसमें उसका बड़ा भाई-बहन पढ़ रहा है।

Friday, August 5, 2022

UP B.Ed 2022 : रिजल्ट जारी होने से पहले देखें अपेक्षित कट ऑफ, आज जारी होगा प्रवेश परीक्षा का परिणाम

UP B.Ed 2022: रिजल्ट जारी होने से पहले देखें अपेक्षित कट ऑफ, आज जारी होगा प्रवेश परीक्षा का परिणाम


UP B.Ed JEE Result 2022: उत्तर प्रदेश B.Ed ज्वाइंट एंट्रेंस परीक्षा  2022 का परिणाम 5 अगस्त को घोषित किया जाएगा। जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए हैं वह आधिकारिक वेबसाइट upbed2022.in पर जाकर परिणाम चेक कर सकते हैं। वहीं रिजल्ट जारी होने से पहले उम्मीदवार अपेक्षित कट ऑफ पर एक नजर डाल लें।


परीक्षा में शामिल हुए थे इतने उम्मीदवार

महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा 6 जुलाई को प्रदेश के 75 जिलों के 1541 केंद्रों पर उत्तर प्रदेश B.Ed ज्वाइंट एंट्रेंस परीक्षा का आयोजन किया गया था। इस साल UP B.Ed के लिए करीब  6,67,463  उम्मीदवारों ने आवेदन किया था। वहीं परीक्षा 92.26 फीसदी उम्मीदवार शामिल हुए थे और  कुल 51,676 उम्मीदवार अनुपस्थित रहे। परीक्षा दो शिफ्ट म में सुबह 9 से 12 बजे और दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक आयोजित की गई थी।

प्रत्येक भाग 200 अंकों का होता है जो कुल 400 अंकों का पेपर बनाता है। प्रत्येक प्रश्न 2 अंक का होता है और  वहीं हर गलत उत्तर देने पर एक तिहाई अंक काटे जाएंगे।


कैटगरी        कुल  अंक         अपेक्षित बीएड कट ऑफ
जनरल           400                  341-351
ओबीसी          400                  331-340
एससी            400                  201-215
एसटी             400                  200-212


परिणाम के साथ, कंडक्टिंग बॉडी यूपी बीएड जेईई काउंसलिंग की तारीख 2022 भी जारी करेगी और उम्मीदवारों को आवंटित कॉलेज में निर्धारित तिथि पर उपस्थित होना होगा। यूपी के 19 शिक्षण संस्थान इस एंट्रेंस परीक्षा के माध्यम से दाखिला देते हैं।


UP BEd entrance exam result 2022: इन स्टेप्स को फॉलो करते हुए चेक करें रिजल्ट

स्टेप 1- सबसे पहले आधिकारिक वेबसाइट upbed2022.in पर  जाएं।

स्टेप 2- 'Result' लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 3- 'UP BEd entrance exam result 2022' लिंक पर क्लिक करें।

स्टेप 4-  मांगी गई जानकारी भरें।

स्टेप 5- रिजल्ट आपके सामने होगा।

स्टेप 6- इसे डाउनलोड कर लीजिए।

यूपी बोर्ड की किताबों के लिए मारामारी, सभी जिलों में कक्षा 9 से 12 तक की किताबें उपलब्ध नहीं, पुस्तक विक्रेता भी नहीं ले रहे दिलचस्पी

यूपी बोर्ड की किताबों के लिए मारामारी,  सभी जिलों में कक्षा 9 से 12 तक की किताबें उपलब्ध नहीं, पुस्तक विक्रेता भी नहीं ले रहे दिलचस्पी




लखनऊ। यूपी बोर्ड के कक्षा 9 से 12 तक की किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। यह स्थिति तब है जबकि किताबों की आपूर्ति के लिए तीन-तीन प्रकाशक उपलब्ध हैं। इसका मुख्य कारण यह बताया जा रहा है कि, किताबों में मार्जिन कम होने के नाते पुस्तक विक्रेता बेचने से परहेज कर रहे हैं। यह स्थिति पूरे प्रदेश में बनी हुई हैं। 


माध्यमिक शिक्षा परिषद के संचालित उच्चतर माध्यमिक तथा इंटर कॉलेजों में एनसीईआरटीई की किताबों से पढ़ाई होती है। इन किताबों की छपाई की जिम्मेदारी कैला जी बुक्स आगरा, पीताम्बरा बुक्स झांसी और डायनामिक टेक्स्ट बुक्स झांसी को सौंपी गई है। इन्हीं तीनों को किताबें बाजारों में आपूर्ति करनी थी। कुल 34 विषयों की 67 किताबों के लिए मची मारामारी के कारणों की पड़ताल में पता चला कि सबसे ज्यादा संकट इंटरमीडिएट भौतिक विज्ञान, रसायन, विज्ञान तथा जीव विज्ञान (बॉयोलॉजी) की किताबों का है। यह किताबें बाजार में नहीं है। 


पुस्तक विक्रेताओं का कहना है कि प्रकाशक ही किताबें मुहैया नहीं करा रहे हैं। हाईस्कूल की अंग्रेजी, गणित, हिन्दी और विज्ञान की भी किताबें कम पड़ गई हैं। किताबों की कमी को देखते हुए डीआईओएस ने लखनऊ के जुबिली इंटर कॉलेज में प्रकाशकों के 5 दिन स्टॉल लगवाए। वहां भी एक दिन तो सभी किताबें मिली लेकिन बाद में किताबें कम पड़ गईं।


पुस्तक विक्रेता बोले

प्रकाशक किताबें उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। एनसीआरटी की किताबों के दाम कम होने से बचत न के बराबर है। प्रदीप कुमार अग्रवाल, व्यापार सदन

इन किताबों पर एक फीसदी की बचत है। किताबों को लाने व दूसरे जिलों में भेजने में कोई बचत नहीं होती है। नुकसान हो रहा है। जितिन्द्र सिंह चौहान, अध्यक्ष, उप्र. स्टेशनरी विक्रेता एवं निर्माता एसो.

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पुरुष वर्ग पर महिलाओं की तैनाती होने से पद भरे और बालिका विद्यालयों में शिक्षिकाओं की कमी

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में  पुरुष वर्ग पर महिलाओं की तैनाती होने से पद भरे और बालिका विद्यालयों में शिक्षिकाओं की कमी 


● सिफारिश के जोर पर शिक्षिकाओं का हुआ तबादला


● जीआईसी में पुरुष वर्ग पर महिलाओं की तैनाती होने से पद भरा

प्रयागराज। कई जिलों के राजकीय बालक विद्यालयों में शिक्षकों से अधिक शिक्षिकाओं की संख्या हो गई है। शहर में जिला मुख्यालय वाले बालक विद्यालयों में शिक्षिकाएं सिफारिश की बदौलत तैनात हो जा रही हैं। जबकि ग्रामीण क्षेत्र के बालिका विद्यालयों में शिक्षिकाओं के पद खाली होने के बावजूद शहर से अधिक दूरी होने के कारण कोई जाना नहीं चाहता।


लखनऊ के राजकीय जुबली इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के 34 स्वीकृत पदों में से पांच पुरुष और नौ महिलाएं कार्यरत हैं। गाजियाबाद जीआईसी में चार पुरुष और 10 महिला प्रवक्ता, जबकि जीआईसी नोएडा में चार पुरुष और 14 महिला प्रवक्ता हैं। राजकीय इंटर कॉलेज झांसी में 13 सहायक अध्यापक पुरुष और 16 महिला हैं। जीआईसी प्रयागराज में 32 पुरुष व 29 महिला सहायक अध्यापक हैं। इसका नुकसान यह हो रहा है कि पुरुष वर्ग के पद कम होते जा रहे हैं। राजकीय इंटर कॉलेज में पुरुष वर्ग पर महिलाओं की तैनाती होने से पद भरा रहता है और यही सूचना विभाग को भेज दी जाती है। जबकि बालिका विद्यालयों में पद रिक्त बने रहते हैं। इससे पुरुष-महिला शिक्षकों का अनुपात बिगड़ रहा है।


स्कूलों में पद सृजन के बाद से तैनाती नहीं

एक ओर जिला मुख्यालय के बालक विद्यालयों में शिक्षिकाओं की धड़ल्ले से तैनाती की जा रही है, जबकि दूसरी ओर ग्रामीण क्षेत्र के बालिका विद्यालयों में शिक्षिकाओं की कमी बनी हुई है। प्रयागराज के ही 11 बालिका विद्यालयों में शिक्षिकाओं के 25 पद खाली हैं। इनमें से जीजीआईसी धनुपुर में विज्ञान, गणित व खेल और नारीबारी में गणित व कला के पद जब से सृजित हुए तब से शिक्षिकाओं की तैनाती नहीं हो सकी है। जीजीआईसी फूलपुर में 18 में से छह, शंकरगढ़ में 12 में से छह व हंडिया में दस में से पांच पद खाली हैं।


फिर बालक-बालिका का कैडर अलग क्यों

माध्यमिक शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रदेश के सभी शिक्षा संस्थानों में 2009 में सह शिक्षा का प्रावधान लागू किया गया था। इसलिए बालक विद्यालयों में शिक्षिकाओं की तैनाती हो रही है। वहीं शिक्षक संगठनों का तर्क है कि राजकीय विद्यालयों में बालक और बालिका का कैडर अलग-अलग है। इनकी नियुक्ति से लेकर वरिष्ठता निर्धारण और प्रमोशन तक सब अलग होता है। महिला और पुरुष के सेवा संबंधी सभी कार्यों का विभाजन भी शिक्षा निदेशालय में अलग-अलग है। बालक विद्यालयों में शिक्षिकाओं और बालिका में शिक्षकों का तबादला करने का प्रावधान नहीं है। लेकिन प्रदेशभर में शहर के मध्य बालक विद्यालयों में खाली पदों पर सोर्स-सिफारिश वाली शिक्षिकाओं का तबादला धड़ल्ले से हो रहा है।


ग्रामीणांचल के सभी बालिका विद्यालयों में प्रवक्ताओं और सहायक अध्यापिकाओं के रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्ति की जाए, जिससे वहां पढ़ने वाली बालिकाओं को सभी विषयों की शिक्षा प्राप्त हो सके। साथ ही राजकीय विद्यालयों में शिक्षिकाओं को उनके संवर्गीय बालिका विद्यालयों में रिक्त पदों पर समायोजित/स्थानांतरित किया जाए। -रामेश्वर पांडेय, प्रदेश महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ पांडेय गुट

Thursday, August 4, 2022

आंगनबाड़ी : बिना पहचान पत्र के अब नहीं मिलेगा पोषाहार

आंगनबाड़ी : बिना पहचान पत्र के अब नहीं मिलेगा पोषाहार


लखनऊ। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने अब सिर्फ पंजीकरण के आधार पर पोषाहार वितरण पर रोक लगा दिया है। इससे लाभार्थियों की अधिक संख्या दिखाकर अधिक पोषाहार आवंटन कराने के खेल खत्म हो जाएगा। 


नई व्यवस्था के तहत पोषाहार पाने वाले लाभार्थियों के पंजीकरण में आधार व अन्य पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। यानी पोषाहार पाने वाले सभी लाभार्थियों को अनुपूरक पोषाहार लेने के लिए आधार या कोई न कोई पहचान पत्र अवश्य दिखाना होगा। 


इस संबंध में विभाग द्वारा तैयार की गई गाइडलाइन के मुताबिक पंजीकरण में पहचान पत्र अनिवार्य किए जाने से अब लाभार्थियों की संख्या में फर्जीवाड़ा पर अंकुश लगेगा। पोषाहार प्राप्त करने के हकदार सभी लाभार्थियों के पास आधार या अन्य प्रकार का कोई भी पहचान पत्र होना चाहिए। हालांकि आधार न होने की स्थिति में आधार के लिए पंजीकरण का होना अनिवार्य है। 


इसी तरह सात महीने से पांच साल तक के बच्चे के नामांकन में भी अब पहचान पत्र देना जरूरी होगा। हालांकि इस उम्र के बच्चों का आधार बनने में अड़चन को देखते हुए उनके लिए किसी अन्य पहचान पत्र को मान्यता दी जाएगी। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार के निर्देश के मुताबिक लाभार्थियों के लिए आधार का सत्यापन अनिवार्य होगा।



ये पहचान पत्र होंगे मान्य

आधार नामांकन की पर्ची, जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल के प्रधानाचार्य द्वारा जारी पहचान पत्र, बच्चे के विधिक संरक्षक का राशन कार्ड, सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बने कार्ड, अभिभावक का पेंशन कार्ड व आर्मी कैंटीन का कार्ड।

इंटर प्राइवेट परीक्षा का फॉर्म हुआ खत्म, भटक रहे छात्र

इंटर प्राइवेट परीक्षा का फॉर्म हुआ खत्म, भटक रहे छात्र

प्रयागराज : इंटरमीडिएट परीक्षा 2023 का प्राइवेट फॉर्म भरने के लिए विद्यार्थी राजकीय इंटर कॉलेजों के चक्कर लगा रहे हैं लेकिन किसी स्कूल में फॉर्म नहीं बचा है। दरअसल प्रतियोगी छात्रों का केंद्र होने के कारण प्रयागराज में बड़ी संख्या में ये छात्र इंटर प्राविधिक कला में एक विषय से आवेदन कर देते हैं।


सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में सहायक अध्यापक कला विषय की भर्ती में प्राविधिक कला मान्य होने के कारण ऐसा होता है। यही कारण है कि जिले के जिन 15 राजकीय स्कूलों को इंटर के 400-400 प्राइवेट छात्रों के फॉर्म अग्रसारित करने के लिए केंद्र बनाया गया था, उनमें सारे आवेदन पूरे हो चुके हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में छात्र इंटर का फॉर्म नहीं भर सके हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज फाफामऊ में तो सीटें भरने की नोटिस चस्पा की गई है।

UGC: कोरोना काल के दौरान ली गई हॉस्टल, मेस फीस वापस करें, यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों को दिया निर्देश

UGC: कोरोना काल के दौरान ली गई हॉस्टल, मेस फीस वापस करें, यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों को दिया निर्देश


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कोरोना काल के दौरान हॉस्टल और मेस फीस वापस नहीं करने को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। यूजीसी ने देश के सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया कि कोरोना के दौरान ली गई हॉस्टल और मेस फीस को जल्द से जल्द वापस करें या फिर मौजूदा फीस में उसे समायोजित करें।


यूजीसी ने कहा कि यदि कोई संस्थान निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी। यूजीसी के सचिव प्रो. रजनीश जैन ने मंगलवार को सभी विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और राज्यों को पत्र लिखा। इसमें उल्लेख किया कि 27 मई, 2020 और 17 दिसंबर, 2020 को इस संबंध में पहले आयोग ने विश्वविद्यालयों और संस्थानों को पत्र लिखा था।



शिक्षण संस्थानों से 31 दिसंबर तक फीस वापस ले सकेंगे छात्र, फीस वापसी को लेकर यूजीसी ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए जारी किए दिशा-निर्देश, एआइसीटीई पर भी बढ़ा दबाव 

नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले की तैयारी में जुटे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने बड़ी राहत दी है। इसके तहत किसी पसंद के विश्वविद्यालय या कालेज में दाखिला मिलने पर विद्यार्थी पूर्व में किसी संस्थान में लिए गए अपने दाखिले को कैंसिल कर सकेगा। साथ ही संस्थान में जमा कराई गई फीस भी वापस ले सकेगा। हालांकि इसके लिए उसे आवेदन करना होगा। यदि यह आवेदन 31 अक्टूबर 2022 तक किया जाता है तो उसे पूरी फीस वापस मिल जाएगी। हालांकि विद्यार्थी 31 दिसंबर 2022 तक आवेदन कर सकेंगे, लेकिन ऐसी सूरत में उनकी फीस में से एक हजार रुपये प्रोसेसिंग चार्ज काटा जाएगा।



यूजीसी ने शैक्षणिक सत्र 2022 - 23 में फीस वापसी को लेकर नई गाइडलाइन जारी है। साथ ही विश्वविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थानों को इस पर सख्ती से अमल के निर्देश दिए हैं। माना जा रहा है कि जल्द ही अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद भी इस संबंध में इंजीनियरिंग कालेजों के लिए निर्देश जारी करेगी। यूजीसी का इस दौरान सबसे ज्यादा फोकस निजी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर है। ये अक्सर विद्यार्थियों को जमा कराई गई फीस वापस करने में आनाकानी करते हैं या उन्हें परेशान करते हैं। यूजीसी का कहना है कि कोरोना संकट के चलते अभिभावक पहले से ही आर्थिक रूप से परेशान हैं। ऐसे में उन पर किसी तरह बोझ डालना ठीक नहीं है। खास बात यह है कि कोरोना संकटकाल में भी यूजीसी ने फीस वापसी को लेकर ऐसी ही गाइडलाइन जारी की थी।

यूजीसी ने शिकायतों के बाद सभी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिया है कि पिछले साल कोरोना काल में छात्रों से वसूली गई छात्रावास और मेस फीस वापस की जाए या उसे अगले सत्र में समायोजित किया जाए। विद्यार्थियों की शिकायत थी कि कोरोना काल में जब छात्रावास बंद थे तो फिर वह फीस वापस की जाए। विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रवेश पाने की आपाधापी में छात्रों को पहले जिस भी संस्थान में दाखिला मिलता है, वह उनमें अपनी सीट आरक्षित कर लेते हैं।

राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए मांगे गए आवेदन

राज्य और मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए मांगे गए आवेदन

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्य अध्यापक पुरस्कार 2022 और मुख्यमंत्री अध्यापक - पुरस्कार के लिए 4 से 13 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन मांगे 



लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राज्य अध्यापक पुरस्कार 2022 और मुख्यमंत्री अध्यापक - पुरस्कार के लिए 4 से 13 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। 


राज्य अध्यापक पुरस्कार के लिए प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं संस्कृत विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और अध्यापक आवेदन कर सकेंगे जबकि मुख्यमंत्री अध्यापक पुरस्कार के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद प्रयागराज से मान्यता प्राप्त स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक और अध्यापक आवेदन कर सकते हैं। विभाग ने पुरस्कार से संबंधित जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 9369470010 जारी किया है। 

Wednesday, August 3, 2022

रिजल्ट बताएगा स्कूल में विद्यार्थी का व्यवहार, माध्यमिक विद्यालयों में बनेगा बहुआयामी रिपोर्ट कार्ड

यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत हर विद्यार्थी का बनेगा बहुआयामी रिपोर्ट कार्ड 

रिजल्ट बताएगा स्कूल में विद्यार्थी का व्यवहार, माध्यमिक विद्यालयों में बनेगा बहुआयामी रिपोर्ट कार्ड


 राजकीय और अर्द्ध शासकीय स्कूलों में इस साल से नए तरह के प्रगति पत्र या अंक पत्र जारी किए जाएंगे। इस रिपोर्ट कार्ड में विषयवार अंकों के अलावा पाठ्य सहगामी और व्यक्तिगत मूल्यांकन के ग्रेड भी होंगे। माध्यमिक स्कूलों का रिपोर्ट कार्ड पहली बार स्कूल में बच्चों के व्यवहार, नैतिक शिक्षा, खेलकूद और उनकी प्रतिभा के बारे में भी बताएगा। इसमें 10 बिंदुओं पर विद्यार्थियों का मूल्यांकन होगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद, प्रयागराज के निर्देश पर जिले के सभी राजकीय और अर्द्ध शासकीय स्कूलों में इसका प्रारूप भेजा गया है। इसके तहत अब क्लास टीचर को बच्चों की अन्य गतिविधियों पर ग्रेड देने होंगे। प्रगति पत्र में परिवर्तन का मूल उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर देने के साथ ही अभिभावकों से भी बेहतर सामन्जस्य बनाना है। 


अब तक देखा गया है कि विषयों में बेहतर अंक लाने वाले छात्र ही अच्छे माने जाते हैं जबकि अनुशासन, उपस्थिति, सांस्कृतिक आयोजन, शिक्षणेत्तर प्रतिभा, नेतृत्व गुण, स्वच्छता और सौम्य व्यवहार करने वाले बच्चों को भले ही स्कूल में शाबासी मिले मगर अंकपत्र पर इनका कोई प्रभाव नहीं होता। प्रगति पत्र में यह बदलाव खास इसलिए भी है क्योंकि निजी स्कूलों में व्यक्तिगत मूल्यांकन का एक कॉलम रखा जाता है।


 नए प्रारूप के अनुसार इस सत्र से आंतरिक परीक्षा, अर्द्ध वार्षिक और वार्षिक परीक्षा में विषयवार अंकों के साथ व्यक्तिगत मूल्यांकन का ग्रेड भी देने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इस ग्रेड के जरिए शिक्षक और अभिभावक बच्चों पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे।




अब यूपी बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत हर विद्यार्थी का बहुआयामी रिपोर्ट कार्ड बनेगा। अभिभावकों को घर बैठे ही छात्र की शैक्षिक गतिविधियों को जानकारी मिलेगी। सभी विद्यालयों में प्रगति कार्ड का प्रारूप समान होगा नई शिक्षा नीति 2020 लागू होने के बाद पढ़ाई-लिखाई, खेलकूद आदि शैक्षिक गतिविधियों में बदलाव हो रहे हैं।


निजी स्कूलों की तर्ज पर माध्यमिक स्कूलों में अध्ययनरत बच्चों को गुणवत्तायुक्त शिक्षा मुहैया कराने की दिशा में सरकार की ओर से पहल तेज कर दी गई है। उसी क्रम में छात्रों का रिपोर्ट कार्ड बनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूपी बोर्ड छात्र-छात्राओं के रिपोर्ट कार्ड और स्कूल डायरी में बड़ा बदलाव हो रहा है। अब रिपोर्ट कार्ड में बच्चों का 360 डिग्री मूल्यांकन दिखाई पड़ेगा। सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी करते हुए नए अंकपत्र (रिपोर्ट कार्ड) और छात्र दैनंदिनी (स्कूल डायरी) के प्रारूप से प्रधानाचार्यों को अवगत कराने को कहा है।


इस शैक्षिक सत्र 2022-23 से कक्षा नौ में नया रिपोर्ट कार्ड और स्कूल डायरी लागू होगी। आगामी कक्षाओं में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। सचिव के अनुसार सभी विद्यार्थियों के स्कूल आधारित आंकलन के आधार पर तैयार होने वाले और अभिभावकों को दिए जाने वाले प्रगति कार्ड को पूरी तरह से नया स्वरूप दिया जाएगा। बहुआयामी कार्ड में प्रत्येक विद्यार्थी के संज्ञानात्मक, भावनात्मक विकासका बारीकी से किए गए विश्लेषण का विवरण विद्यार्थी की विशिष्टताओं समेत दिया जाएगा। 


इसमें प्रोजेक्ट कार्य, विवज, रोल प्ले, समूह कार्य आदि शिक्षक मूल्यांकन सहित शामिल होगा। अभिभावकों को घर बैठे बच्चों के शैक्षिक गतिविधियों की जानकारी होगी।बच्चों का समग्र प्रगति कार्ड घर और स्कूल के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनेगा। यह माता-पिता- शिक्षक बैठकों के साथ अपने बच्चों की समग्र शिक्षा और विकास में माता पिता को सक्रिय रूप से शामिल करने के लिए होगा। इस प्रगति कार्ड के द्वारा शिक्षकों और माता-पिता को बच्चे के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी भी मिलेगी।

एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती : संशोधित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन

एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती : संशोधित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन 


प्रयागराज। जूनियर हाईस्कूल सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर मंगलवार को अभ्यर्थियों ने सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन किया। बारिश के दौरान भी अभ्यर्थी डटे रहे। सचिव ने कार्यालय से बाहर आकर बात की। उन्होंने आश्वासन दिया कि शासन को प्रस्ताव भेजा गया है । इसके बाद भी अभ्यर्थी डटे रहे। प्रदर्शनकारी छात्रों की पुलिस से नोकझोंक भी हुई। शाम को अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन खत्म किया।


सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) की ओर से जूनियर हाईस्कूलों के लिए सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा अक्तूबर 2021 में कराई गई थी। नवंबर में परिणाम जारी हुआ लेकिन इसके बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया।


अभ्यर्थियों ने परिणाम में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसके बाद कोर्ट चले गए। कोर्ट के आदेश पर पीएनपी ने पुनर्मूल्यांकन कराया। लेकिन अभी परिणाम घोषित नहीं हुआ है। मंगलवार को बड़ी संख्या में पीएनपी कार्यालय पहुंचे अभ्यर्थी संशोधित परिणाम की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। पुलिस ने जैसे-तैसे मामला शांत कराया। प्रदर्शन में ज्ञानवेंद्र सिंह, राहुल, राजेश कुमार आदि अभ्यर्थी शामिल रहे। 

व्यवस्था : फर्जी डिग्रियों, प्रमाणपत्रों से नहीं पा सकेंगे नौकरी, यूनीक आईडी से ट्रैक होगी पढ़ाई, हर विद्यार्थी के पास होगा लर्नर पासपोर्ट, डिजिटल तिजोरी में अंकपत्र-प्रमाणपत्र होंगे अपलोड

व्यवस्था : फर्जी डिग्रियों, प्रमाणपत्रों से नहीं पा सकेंगे नौकरी, यूनीक आईडी से ट्रैक होगी पढ़ाई, हर विद्यार्थी के पास होगा लर्नर पासपोर्ट, डिजिटल तिजोरी में अंकपत्र-प्रमाणपत्र होंगे अपलोड


● इसे शुरू करने वाला यूपी पहला राज्य होगा

● आउट ऑफ स्कूल बच्चों को लाया जा सकेगा मुख्य धारा में


अब फर्जी डिग्रियों या अंकपत्र के बहाने नौकरी पाने वालों की खैर नहीं। विद्यार्थियों की पढ़ाई-लिखाई का ब्योरा रखने के लिए राज्य सरकार यूनिवर्सल लर्नर पासपोर्ट की व्यवस्था करने जा रही है। इस पासपोर्ट में न सिर्फ उसके सीखने का पूरा सफर दर्ज किया जाएगा बल्कि इसकी ‘डिजिटल तिजोरी’ में सभी प्रमाणपत्र व अंकपत्र संस्थान स्तर से अपलोड होंगे। इससे नौकरी के आवेदन के समय युवा फर्जी अंकपत्र या प्रमाणपत्र नहीं लगा सकेंगे क्योंकि उनका सत्यापन इसी तिजोरी से होगा।


राज्य सरकार इसके लिए प्रस्ताव मांगने जा रही है। यूपी इसे शुरू करने वाला पहला राज्य होगा। प्रदेश में इस योजना को चरणबद्ध ढंग से लागू किया जाएगा। इसकी शुरुआत कक्षा एक से आठ तक होगी लेकिन भविष्य में इसे प्ले ग्रुप से लेकर परास्नातक और प्रोफेशनल पढ़ाई में भी लागू किया जाएगा। इसका कांसेप्ट नोट, नियम व शर्ते समेत अन्य आधारभूत तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। तकनीकी साझेदारी के लिए जल्द ही प्रस्ताव मांगा जाएगा। इस पासपोर्ट से एक बच्चे की पढ़ाई से लेकर नौकरी तक ट्रैक की जा सकेगी और आउट ऑफ स्कूल बच्चों को पढ़ाई की मुख्यधारा में लाने में मदद मिलेगी।

इस व्यवस्था से कई तरह के फायदे होंगे

इससे फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने वालों पर भी लगाम लगेगी क्योंकि यह लागू होने के बाद प्रमाणपत्रों का सत्यापन डिजिटल तिजोरी से ही होगा। सत्यापन के लिए अंकपत्र या प्रमाणपत्र विभिन्न बोर्डों या फिर विश्वविद्यालयों को नहीं भेजे जाएंगे। अभी सबसे ज्यादा खेल सत्यापन में होता है और बाबुओं की सांठगांठ से सत्यापन का मामला अटकाए रखा जाता है। लर्नर पासपोर्ट से एक बच्चे का नामांकन दो जगह नहीं हो सकेगा। एक ही वक्त में दो डिग्रियां हासिल करने पर भी लगाम लगेगी। स्कॉलरशिप आदि के लिए फजीवाड़ा नहीं हो सकेगा क्योंकि फर्जी अंकपत्र, जाति या आय प्रमाणपत्र नहीं लगाया जा सकेगा।


किस तरह से काम करेगा लर्नर पासपोर्ट

कक्षा एक में प्रवेश लेने पर एक आधार सीडिंग के बाद उसे एक यूनीक आईडी मिलेगी और डिजिटल तिजोरी (वॉल्ट) खोली जाएगी। इसमें उसके सभी कक्षाओं के अंकपत्र, प्रमाणपत्र और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमाणपत्र भी संस्थान स्तर पर डाले जाएंगे। जब वह अपनी पढ़ाई पूरी करेगा उसके पासपोर्ट पर इसकी पूरी जानकारी होगी। किसी भी स्तर पर सत्यापन के लिए इसी डिजिटल पासपोर्ट के वॉल्ट से जानकारियां ली जाएंगी। इसमें सरकारी, निजी, व्यावसायिक सेक्टर सब आएंगे।

19 डीएलएड कालेज लौटाएंगे मान्यता, भेजा प्रस्ताव

19 डीएलएड कालेज लौटाएंगे मान्यता, भेजा प्रस्ताव


• 19 डीएलएड कालेज लौटाएंगे मान्यता, भेजा प्रस्ताव

•  पीएनपी ने 12 की फाइल राज्य स्तरीय समिति को भेजी

•  बाद में मिली सात कालेजों की फाइलों को भी भेजा जाएगा



प्रयागराज  :  प्राथमिक शिक्षा में करीब तीन साल से भर्ती नहीं आने से डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजूकेशन (डीएलएड) के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान घटने लगा है। इससे प्रबंधतंत्र के सामने डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों के संचालन में मुश्किलें आ रही हैं। इसके चलते प्रदेश के 19 संस्थानों ने नया प्रवेश नहीं लेने की इच्छा जताते हुए मान्यता लौटाने का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) सचिव को भेज दिया है। पहले आए 12 संस्थानों के प्रस्ताव को राज्य स्तरीय समिति को भेज दिया गया है। इसके अलावा बाद में आए सात और संस्थानों के मान्यता लौटाने के प्रस्ताव को राज्य स्तरीय समिति को भेज दिया जाएगा।


प्रदेश में 66 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट), एक सीटीईटी कालेज वाराणसी के अलावा करीब 3100 निजी प्रशिक्षण संस्थान संचालित हैं। डायट कालेजों व कुछ निजी प्रशिक्षण संस्थानों में डीएलएड प्रशिक्षण में प्रवेश की स्थिति ठीक है, लेकिन कई कालेजों को सीट के अनुरूप छात्र-छात्राएं नहीं मिल रहे हैं। प्रदेश के सभी प्रशिक्षण संस्थानों को मिलाकर 2,42,200 सीटें हैं। 


इनमें प्रवेश की स्थिति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2022 के लिए करीब 1,68,000 आवेदन पीएनपी को प्राप्त हुए हैं। प्रवेश मेरिट के आधार पर दिया जाएगा। इस तरह कई कालेजों को प्रवेश के लिए छात्र-छात्राओं का मिलना मुश्किल है। इसके पहले के वर्षों में भी कई कालेजों को छात्र-छात्राएं नहीं मिले या बहुत कम मिले। 


ऐसे में गाजीपुर, अमरोहा, कानपुर, मऊ एवं गाजियाबाद के एक-एक, गौतमबुद्धनगर एवं मथुरा के दो-दो, मुरादाबाद व एटा के तीन-तीन और आगरा के चार कालेजों ने नया प्रवेश नहीं लिए जाने की इच्छा जताते हुए मान्यता वापस करने का प्रस्ताव पीएनपी को भेज दिया है। पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि 12 प्रशिक्षण संस्थानों की फाइल पहले प्राप्त हुई थी, जिसे राज्य स्तरीय समिति को भेज दिया गया है।

केंद्र सरकार डिजिटल स्कूल बनाने की राह पर, जानिए कैसा होगा डिजिटल स्कूल?

केंद्र सरकार डिजिटल स्कूल बनाने की राह पर, जानिए कैसा होगा डिजिटल स्कूल? 


Digital School केंद्र सरकार देशभर में डिजिटल स्कूल खोलने की दिशा में काम कर रही है जहां इनोवेटिक तरीके से बच्चों को लर्निंग की सुविधा मिलेगी। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे डिजिटल स्कूल काम करेंगे जहां टीचर की जरूरत नहीं होगी।


नई दिल्ली, Digital E-Learning School: मोदी सरकार डिजिटल इंडिया (Digital India) को लगातार बढ़ावा देती रही है। इसी कड़ी में अब केंद्र सरकार डिजिटल स्कूल (Digital School) का कॉन्सेप्ट लेकर आ रही है, जहां बिना टीचर (Teacher Without School) बच्चे पढ़ाई कर पाएंगे। डिजिटल स्कूल सीएससी (CSC) यानी कॉमन सर्विस सेंटर की मदद से खोले जाएंगे। सीएससी ई-गवर्नेंस सर्विसेज इंडिया लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. दिनेश त्यागी ने बताया कि भारत सरकार की कोशिश है कि हर गांव में डिजिटल स्कूल खोले जाएं, जहां स्कूल विदआउट टीचर होंगे।


कैसा होगा डिजिटल स्कूल

डॉ. दिनेश त्यागी के मुताबिक जल्द देश में डिजिटल स्कूल खोले जाएंगे। इस स्कूल में ई-लर्निंग कोर्स की सुविधा मिलेगी। इन स्कूल के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AR) और ऑग्मेंटेड रियलिटी (VR) की मदद से ई-लर्निंग कोर्स तैयार किए जाएंगे, जहां डिजिटल डिवाइस कनेक्टिविटी से बच्चे ऑनलाइन सवाल पूछे सकेंगे, जिनका बच्चों को रियल-टाइम जवाब मिलेगा। 


ई-लर्निंग कोर्स में बच्चे अगर L फॉर लॉयन बोलेंगे, तो स्क्रीन पर शेर आ जाएगा। इसी तरह एप्पल बोलने पर सामने सेब आ जाएगा। त्यागी की मानें, तो इससे बच्चों में पढ़ाई के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। त्यागी ने बताया कि कुछ बच्चे इंट्रोवर्ट होते हैं, साथ ही कुछ टीचर के डर की वजह से सवाल नहीं पूछते हैं, ऐसे बच्चों के लिए डिजिटल स्कूल काफी मददगार साबित हो सकते हैं।

6 लाख गांवों में खोले जाएंगे डिजिटल स्कूल

त्यागी की मानें, तो डिजिटल स्कूल एक नई तरह की शुरुआत है, जिसे हर सीएससी सेंटर पर खोलने की योजना है। त्यागी बताते हैं कि उनकी कोशिश है कि तेजी से डिजिटल स्कूल के कॉन्सेप्ट को रफ्तार मिले। सरकार आने वाले दिनों में डिजिटल स्कूल का दायरा बढ़ाकर 6 लाख सीएससी सेंटर तक करेगी।


घर बैठे मुफ्त में मिलेगी ई-लर्निंग की सुविधा

डॉ. दिनेश त्यागी ने बताया कि उनकी इच्छा है कि पहले डिजिटल स्कूल को हरिद्वार में खोला जाए। त्यागी ने बताया कि 5G की लॉन्चिंग के बाद डिजिटल स्कूल खोलने की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी होगी। वहीं, टेक स्टार्टअप SugarBox सरकार की डिजिटल स्कूल खोलने में मदद कर सकता है। बता दें कि SugarBox ग्रामीण इलाकों में मुफ्त इंटरनेट कनेक्टिविटी ऑफर कर रहा है, जिससे बिना इंटरनेट कनेक्टिविटी वाले इलाकों में ई-लर्निंग की सुविधा मिलेगी, जो पीएम मोदी की डिजिटल इंडिया की राह में मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही बच्चों के स्कूल ड्रॉप होने की संख्या में कमी आएगी।

एडेड कालेजों में ऑनलाइन तबादलों का नियम होने के बाद भी हुए ऑफलाइन तबादलों की जांच की मांग

एडेड कालेजों में ऑनलाइन तबादलों का नियम होने के बाद भी हुए ऑफलाइन तबादलों की जांच की मांग


सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में केवल ऑनलाइन तबादलों का नियम होने के बावजूद दर्जनों शिक्षकों के ऑफलाइन स्थानान्तरण को लेकर विरोध रुकने का नाम नहीं ले रहा है। माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रदेश महामंत्री लालमणि द्विवेदी ने मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव को 30 जुलाई को पत्र लिखकर इस प्रकरण की जांच कराने की मांग की है।


उनका कहना है कि 14 जून 2019 को विनियमों में किए गए संशोधन के अनुसार ऑनलाइन स्थानांतरण की व्यवस्था के तहत पिछले तीन वर्ष में एक भी आम या सामान्य शिक्षक का स्थानांतरण नहीं किया गया जबकि 12 मई 2020 से लेकर आज तक नियमों के विरुद्ध केवल विभाग में विशेष पहुंच रखने वाले सैकड़ों शिक्षकों के गोपनीय ढंग से ऑफलाइन स्थानांतरण किए गए हैं। 


उन्होंने इस प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा सभी दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सभी शिक्षकों को एक समान व्यवस्था के अंतर्गत स्थानांतरण का अवसर प्रदान करने का अनुरोध किया है।

मदरसा बोर्ड की 124 आईटीआई की होगी जांच, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने दिए निर्देश

मदरसा बोर्ड की 124 आईटीआई की होगी जांच

छात्रों की ट्रेनिंग का स्तर और शिक्षकों के दस्तावेजों को भी परखा जाएगा

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने दिए निर्देश



लखनऊ : उप्र मदरसा शिक्षा परिषद द्वारा प्रदेश में चलाई जा रही 124 आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) की जांच होगी। इनमें से किसी भी आईटीआई को स्टेट या नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग की मान्यता नहीं है। जांच में इनमें पढ़ने वाले छात्र क्या कर रहे हैं और शिक्षक उन्हें किस स्तर की ट्रेनिंग दे रहे हैं यह सब परखा जाएगा। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस बाबत निर्देश जारी किए हैं।

2003 में सपा सरकार के समय मदरसा बोर्ड ने आईटीआई खोलने की कवायद शुरू की थी। यूपी मदरसा वोकेशनल ट्रेनिंग स्कीम के तहत 140 आईटीआई को स्वीकृति दी गई थी, लेकिन 124 का ही संचालन इस समय हो रहा है। प्रत्येक आईटीआई में तीन ट्रेड हैं और एक ट्रेड में लगभग 12 छात्र हैं। यानी एक संस्थान में 36 छात्र अध्ययनरत रहते हैं। सभी में कुल साढ़े चार हजार बच्चे अध्ययन करते हैं। इनको करीब 350 अनुदेशक छात्रों को पढ़ाते हैं।

अहम बात यह है कि इन संस्थानों को केवल मदरसा बोर्ड से कहा गया है। मान्यता है। इन्हें स्टेट या नेशनल काउंसिल फॉर वोकेशनल ट्रेनिंग की मान्यता नहीं है। ऐसे में यहां के छात्रों को केवल मदरसा बोर्ड का प्रमाणपत्र मिलता है। इन्हें अन्य कोई डिप्लोमा सर्टिफिकेट नहीं मिल पाता है। ऐसे में इनके कॅरिअर की राह बेहद मुश्किल है।

अब इन सभी की जांच होगी। अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि जांच टीम बना दी गई है। टीम देखेगी कि इन बच्चों का स्तर क्या है और ये यहां पढ़ने के बाद क्या कार्य कर रहे हैं। यहां कार्य ठीक से हो रहा है या नहीं। शिक्षकों के भी दस्तावेजों की जांच होगी। उन्होंने कहा कि टीम को जल्द ही जांच रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है।

Tuesday, August 2, 2022

प्रदेश के मदरसों में 11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता सप्ताह मनाने के निर्देश

प्रदेश के मदरसों में 11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता सप्ताह मनाने के निर्देश



लखनऊ। अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री दानिश आजाद अंसारी ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को पत्र लिखकर प्रदेश के मदरसों में 11 से 17 अगस्त तक स्वतंत्रता सप्ताह मनाने के निर्देश दिये हैं। 


उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को भेजे गये पत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश का हवाला देकर कहा कि मदरसों में भी स्वतंत्रता सप्ताह का आयोजन कर झंडारोहण, देशभक्ति गीत, प्रदर्शनियों, पेंटिंग, निबंध प्रतियोगिता, पौधरोपण, नुक्कड़ नाटक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाए। इसके अलावा हर घर तिरंगा के विशेष आयोजन के लिये लोगों को जागरूक किया जाए। 

प्रतिदिन टास्क; शिक्षक झेल रहे मानसिक तनाव, शासनादेश व विभागीय आदेशों में उलझे शिक्षक, पढाई प्रभावित

प्रतिदिन टास्क; शिक्षक झेल रहे मानसिक तनाव, शासनादेश व विभागीय आदेशों में उलझे शिक्षक, पढाई प्रभावित



परिषदीय शिक्षक इन दिनों शक्तिमान की भूमिका में है, एक पल में लिपिकीय कार्य तो दूसरे पल में बच्चों को दक्ष बना रहे है। विभाग शिक्षकों को अल्लादीन का चिराग समझ बैठा है और समझे भी क्यों नहीं शिक्षक जब प्रतिदिन विभागीय आदेशों का टास्क पल भर में निपटा रहा हो और चार माह से बिना हथियार के जंग लड़ नौनिहालों का भविष्य सवार रहे है तो ऐसे में शिक्षक से बड़ा योद्धा कौन हो सकता है। शिक्षक बदलते परिवेश में भी अपने फर्ज को निभा रहे है भले ही - मानसिक तनाव से जूझ रहे हो। 


 उल्लेखनीय है कि इन दिनों परिषदीय स्कूल जांच और दर्शायी जा रही खामियों से सुर्खियों में है। शिक्षक अपने पद की गरिमा को बचाने के लिए न चाहकर भी वो सब कर रहे है जो शिक्षक के कार्यक्षेत्र के बाहर भी है। अचानक शिक्षकों के ऊपर उठे सवालों से शिक्षक विवश होकर मानसिक युद्ध लड़ रहा है।


 प्रदेश के तमाम विभाग जहां अपने अधिनस्थ विभागों की कमियों को उजागर करने से हिचकते है वहीं शिक्षा विभाग का जांच के नाम पर प्रतिदिन उपहास उड़ाया जा रहा है।


 बताते चले कि परिषदीय शिक्षक नये शैक्षिक सत्र से ही डीबीटी, निपुण भारत प्रशिक्षण, निर्वाचन ड्यूटी, मध्याहन भोजन, यू ट्यूब सेशन, नवीन नामांकन, संचारी रोग नियंत्रण, नवीन छात्रों डीबीटी अपलोड, निपुण भारत क्वीज, शारदा कार्यक्रम, हाउस सर्वे व ड्राप आउट नामांकन, आधार नामांकन/ अपडेशन शिविर, आडिट, पेरोल लाक, अधिगम क्षति माड्यूल शिक्षण, निःशुल्क पाठय पुस्तक विवरण, एमडीएम उपभोग, प्रबंधन समिति बैठक, अभिभावक बैठक, विद्युत व शौचालय का विवरण, हर घर तिरंगा कार्यक्रम, डीबीटी यू ट्यूब सेशन में अभिभावकों का प्रतिभाग, कोरोना कंट्रोल ड्यूटी, मतदाता जागरुकता अभियान जैसे सैकड़ो विभागीय और गैर विभागीय कार्य को निपटा रहे हैं और बिना किताब के ही बच्चो में शैक्षणिक दक्षता भी अर्जित करा रहे है। 


इन सब के बाद भी निरीक्षणकर्ता स्कूलों पर पहुंच खामियां गिना रहे है जो शिक्षकों को मानसिक अवसाद में डूबो रहा है। संसाधनों के अभाव में कान्वेंट को मात दे रहे परिषदीय शिक्षकों का उत्साहवर्धन के बजाय हतोत्सित करना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मनसूबों पर पानी फेर सकता है।

हाईकोर्ट ने दिया अनौपचारिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान योजना के तहत कार्यरत रहे अनुदेशकों के समायोजन पर विचार करने का निर्देश

हाईकोर्ट ने दिया अनौपचारिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान योजना के तहत कार्यरत रहे अनुदेशकों के समायोजन पर विचार करने का निर्देश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार की अनौपचारिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान योजना के तहत कार्यरत अनुदेशकों को अन्य विभागों में समायोजित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि न्यायालय के आदेश के अनुसार राज्य सरकार ने समायोजन की कोई योजना अब तक तैयार नहीं की है इसलिए योजना तैयार कर अनुदेशकों के समायोजन पर विचार किया जाए।


यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक वर्मा ने कौशाम्बी के अंबिका प्रसाद उपाध्याय व 15 अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याची के अधिवक्ता राघवेंद्र प्रसाद मिश्र का कहना है केंद्र व राज्य की अनौपचारिक शिक्षा योजना के तहत नियुक्त याचियों से वर्ष 1989 से 2001 तक कार्य लिया गया। एक अप्रैल 2001 से उक्त योजना समाप्त कर सर्व शिक्षा अभियान योजना में समाहित कर ली गई। योजना बंद होने से समायोजन को लेकर पूरे देश में याचिकाएं की गईं। 


पटना हाईकोर्ट ने 11 अगस्त 2015 को अनुदेशकों को भी समायोजित करने पर विचार करने का निर्देश दिया। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने एसएलपी खारिज कर दी। उसके बाद बिहार में योजना बनाकर अनुदेशकों को समायोजित कर लिया गया। प्रदेश के अनुदेशकों ने भी समानता के आधार पर समायोजन की मांग की। 


हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को योजना तैयार करने का निर्देश दिया लेकिन अब तक कोई योजना नहीं बनाई गई है। सुपरवाइजर व अन्य पदों पर नियुक्त लोगों को समायोजित कर लिया गया है और अनुदेशकों के समायोजन की योजना नहीं बनाई गई है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को योजना बनने पर याचियों को समायोजित करने पर विचार करने का निर्देश दिया है।


124 लिपिकों के तबादले में हुई गड़बड़ी, अपर शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच रिपोर्ट सोमवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को सौंपी

124 लिपिकों के तबादले में हुई गड़बड़ी, अपर शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच रिपोर्ट सोमवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को सौंपी 


लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग में 124 लिपिकों के तबादलों में विसंगतियां पाई गई है। विभाग के अपर शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच रिपोर्ट सोमवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को सौंप दी है। रिपेार्ट में विसंगति के लिए दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई करने की अनुशंसा की गई है।


स्थानांतरित किए गए 1043 लिपिकों में से अभी तक 775 लिपिकों ने कार्यभार ग्रहण कर लिया है। जिन तबादलों में विसंगति पाई गई है उनमें 70 फीसदी ऐसे हैं जहां एक ही पद पर दो लोगों को तैनाती दे दी गई है या फिर जहां से लिपिक का तबादला हुआ है, वहां पर वह तैनात है ही नहीं। अधिकारियों का मानना है कि लिपिकों के सही पटल की जानकारी अपडेट न होने के कारण यह विसंगतियां हुई है।


विभाग ने जून में 1043 लिपिकों का तबादला किया था जिनमें 45 फीसदी ऐसे थे जो 10 सालों से एक ही जगह पर जमे थे। लिपिकों के तबादलों को लेकर यूपी एजुकेशन मिनिस्ट्रियल ऑफिसर्स एसोसिएशन ने लगभग 300 लिपिकों की सूची विभाग को सौंपी थी जिनमें गड़बड़ियां थीं।

छात्रवृत्ति आवेदन में भी अब मिलेगी यूनीक आइडी, हर वर्ष छात्रवृत्ति के आवेदन में नहीं लगाने पड़ेंगे प्रमाण पत्र, समाज कल्याण दशमोत्तर छात्रवृत्ति में शुरू करने जा रहा है सुविधा

छात्रवृत्ति आवेदन में भी अब मिलेगी यूनीक आइडी


◆ हर वर्ष छात्रवृत्ति के आवेदन में नहीं लगाने पड़ेंगे प्रमाण पत्र

◆ समाज कल्याण दशमोत्तर छात्रवृत्ति में शुरू करने जा रहा है सुविधा



लखनऊ : छात्रवृत्ति के आवेदन में अब छात्रों को हर वर्ष अपने प्रमाण पत्र लगाने की जरूरत नहीं रह जाएगी। प्रदेश सरकार दशमोत्तर छात्रवृत्ति में प्रत्येक छात्र को यूनीक आइडी प्रदान करने जा रही है। इसके तहत छात्रों को केवल प्रथम वर्ष में ही आवेदन के समय अपने सभी प्रमाण पत्र लगाने होंगे। इसके बाद के वर्षों में छात्रों को आवेदन के समय केवल अपना यूनीक आइडी नंबर भरना होगा । पड़ेगा

दरअसल, समाज कल्याण विभाग में अभी छात्रवृत्ति आवेदन के समय प्रत्येक वर्ष छात्र छात्राओं को अपने सभी प्रमाण पत्र आनलाइन अपलोड करने पड़ते हैं। सरकार इस समस्या को देखते हुए अब प्रत्येक छात्र को आवेदन के पहले वर्ष में ही यूनीक आइडी आवंटित कर देगी। यानी इस योजना के तहत 11वीं कक्षा में छात्रवृत्ति के आवेदन के समय छात्रों को अपने सभी प्रमाण पत्र लगाने होंगे। इसमें उन्हें यूनीक आइडी नंबर आवंटित हो जाएगा।

इसके बाद छात्र हर वर्ष केवल यूनीक आइडी नंबर से छात्रवृत्ति का रिन्यूअल करा सकेंगे। इस नियम के लागू होने के बाद छात्रों को जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, शैक्षिक प्रमाण पत्र, आधार से लिंक बैंक खाता आदि हर वर्ष नहीं लगाना

छात्रवृत्ति के आवेदन के समय छात्रों को जो प्रमाण पत्र लगाने होते हैं उनमें केवल आय प्रमाण पत्र ही ऐसा है जिसकी वैधता तीन वर्ष के लिए मान्य होती है। समाज कल्याण विभाग में नियम यह है कि यदि किसी पाठ्यक्रम के प्रथम वर्ष में आवेदन के समय आय प्रमाण पत्र वैध है तो वह संपूर्ण पाठ्यक्रम अवधि में मान्य होता है । यानी किसी छात्र ने बीटेक प्रथम वर्ष में छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है तो उसका आय प्रमाण पत्र पूरे चार वर्ष मान्य रहेगा।

Monday, August 1, 2022

डायट कर्मियों ने राजकीय शिक्षकों की भांति मांगा वेतन

डायट कर्मियों ने राजकीय शिक्षकों की भांति मांगा वेतन


लखनऊ। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में कार्यरत शिक्षकों, कर्मचारियों ने राजकीय शिक्षकों की भांति वेतन नियमित करने की मांग की है। 


यूपी एजुकेशनल मिनिस्टीरियल ऑफीसर्स एसोसिएशन के प्रांतीय महामंत्री राजेश चंद्र श्रीवास्तव कहते हैं कि डायट में कार्यरत शिक्षक, कर्मचारी नियमित सेवा के होते हैं। वे तबादला होने पर वहां जाते हैं। इसलिए उनके वेतन की व्यवस्था भी नियमित होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 75 डायट हैं। इनमें प्रत्येक में लगभग एक-एक प्राचार्य, उप प्राचार्य के अलावा छह वरिष्ठ प्रवक्ता, 17 प्रवक्ता, दो सहायक अध्यापक के अलावा दस से 15 शिक्षणेतर कर्मचारी तैनात हैं। इन्हें केंद्रांश व राज्यांश के आधार पर वेतन मिलता है, जो अक्सर विलंब से मिलता है। 


इन शिक्षकों, कर्मचारियों को हमेशा समय से वेतन न मिलने की शिकायत रहती है। अभी कुछ दिन पहले ही तीन महीने का बकाया वेतन इन्हें मिला है, लेकिन जुलाई का वेतन मिलने की संभावना दूर दूर तक नहीं दिख रही। 

मदरसों में शिक्षक भर्ती के लिए अब टीईटी होगी अनिवार्य, उर्दू, अरबी, फारसी या दीनियात के शिक्षकों को मिलेगी छूट

मदरसों में शिक्षक भर्ती के लिए अब टीईटी होगी अनिवार्य,  उर्दू, अरबी, फारसी या दीनियात के शिक्षकों को मिलेगी छूट


उन्होंने कहा कि राज्य के मदरसों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किया गया है। राज्य में करीब 16,461 मदरसे यूपी मदरसा बोर्ड से संबद्ध हैं। इनमें से 560 मदरसों को सरकार द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।

सिर्फ इन शिक्षकों को मिलेगी

अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि चूंकि यह वैज्ञानिक रूप से तैयार किया गया पाठ्यक्रम है, इसलिए इसे बेहतर ढंग से पढ़ाने के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों का होना अनिवार्य है। इसे देखते हुए सरकार मदरसों में शिक्षकों की भर्ती के लिए टीईटी को अनिवार्य करने जा रही है। अंसारी ने हालांकि स्पष्ट किया कि टीईटी की आवश्यकता उर्दू, अरबी, फारसी या दीनियात के शिक्षकों पर लागू नहीं होगी। यह केवल एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पढ़ाने वाले शिक्षकों की भर्ती के लिए लागू होगा।


2017 में शुरू करवाई थी एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई

यह पूछे जाने पर कि क्या मदरसों में शिक्षकों की भर्ती करने का अधिकार प्रबंधन समितियों के पास है और क्या सरकार टीईटी को अनिवार्य करने के लिए कानून में कोई बदलाव करेगी?

अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा, नहीं, ऐसा कुछ नहीं होगा। हम बस इतना करने जा रहे हैं कि मदरसों में आधुनिक शिक्षा के शिक्षकों की भर्ती में टीईटी अनिवार्य करने के लिए 2017 में, उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘तथानिया’ (कक्षा एक से पांचवीं), ‘फौकानिया’ (कक्षा पांचवीं से आठवीं) और आलिया या उच्चतर आलिया स्तर (हाई स्कूल और ऊपर) के मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई कराने को मंजूरी दी थी।


मदारिस अरबिया ने कहा- एक वर्ग के साथ भेदभाव होगा। वहीं, शिक्षक संघ मदारिस अरबिया के संयुक्त महासचिव हकीम अब्दुल हक ने कहा कि इस कदम से मदरसा शिक्षकों के एक वर्ग के साथ भेदभाव होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रदान करने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने से एक ही मदरसे में पढ़ाने वाले शिक्षकों के बीच योग्यता का व्यावहारिक अंतर होगा, क्योंकि टीईटी पास करने के बाद भर्ती होने वाले शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता दीनियात, उर्दू, अरबी और फारसी पढ़ाने वालों की तुलना में अधिक है।


सभी मदरसा शिक्षकों के लिए टीईटी शुरू करें

हकीम अब्दुल हक ने कहा कि नई प्रणाली के बाद एक प्रशिक्षित शिक्षक होगा जो भर्ती परीक्षा (टीईटी) पास करेगा। क्या सरकार दोनों शिक्षकों को एक ही श्रेणी में रखेगी? इससे प्राथमिक विद्यालयों में स्थायी शिक्षकों और ‘शिक्षा मित्र’ (एडहॉक टेकर्स) के बीच भेदभाव का खतरा बढ़ जाएगा। हक ने मांग की कि दीनियात, उर्दू, अरबी और फारसी पढ़ाने वाले मदरसा शिक्षकों के लिए भी विशेष टीईटी पाठ्यक्रम शुरू किया जाए।


मदरसों में शिक्षकों की भर्ती वर्तमान प्रक्रिया

मदरसों में शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्तमान में लागू प्रक्रिया के अनुसार कक्षा एक से पांचवीं तक पढ़ाने वाले शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता उर्दू या किसी समकक्ष प्रमाण पत्र के साथ इंटरमीडिएट होनी चाहिए। इसके अलावा कक्षा पांचवीं से आठवीं तक में पढ़ाने के लिए शिक्षक के लिए न्यूनतम योग्यता कामिल डिग्री या अरबी फारसी या दीनियात और फाजिल के साथ विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री या आलिया (हाई स्कूल और ऊपर) के लिए अरबी या फारसी निर्धारित है।