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Thursday, June 30, 2022

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीडिंग और आधार वेरिफिकेशन में जूझ रहे बेसिक शिक्षक

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, फीडिंग और आधार वेरिफिकेशन में जूझ रहे बेसिक शिक्षक 


परिषदीय विद्यालयों में बच्चों का शत-प्रतिशत रजिस्ट्रेशन और आधार वैरिफिकेशन शिक्षकों के लिए चुनौती बन गया है। 30 जून तक कार्य पूरा करने के दबाव के बीच नेटवर्क और सर्वर डाउन होने की समस्या से शिक्षक परेशान हैं।


आधार कार्ड बनाने के लिए विभाग की ओर से विद्यालयों में समुचित व्यवस्था नहीं होने के चलते बगैर आधार कार्ड के प्रवेश पाए बच्चों का डीबीटी रजिस्ट्रेशन नहीं हो पा रहा है।


 विभाग ने निर्देश दिए हैं कि प्रेरणा पोर्टल और यू-डीआईएस पर हर छात्र का रजिस्ट्रेशन होना चाहिए। इसके साथ ही बच्चों का आधार वेरिफिकेशन किया जाए और अगर किसी भी बच्चे के पास आधार नहीं है तो उसे तुरंत बनवाकर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। 


प्रयासों के बाद भी पोर्टल पर नामांकन अपलोड करने का काम गति नहीं पकड़ पा रहा था। अंतिम तिथि घोषित होने, बार-बार बीआरसी से संख्या पूछे जाने और कार्य पूर्ण करने की सख्ती के बीच रजिस्ट्रेशन और आधार वेरिफिकेशन में जूझते नजर आ रहे हैं। इसके अलावा कई अन्य कार्यों की आनलाइन फीडिंग का भी शिक्षकों पर दबाव है।

बेसिक शिक्षा का हाल : तिमाही परीक्षा आई पर किताबें नहीं मिल पाईं

कैसे होगी पढ़ाई? तीन माह बाद भी नहीं आ पाईं पुस्तकें 🤔

बेसिक शिक्षा का हाल : तिमाही परीक्षा आई पर किताबें नहीं मिल पाईं



परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र शुरू होने के तीन महीने बाद भी बच्चों को किताबें नहीं मिल पाईं हैं। नई शिक्षा नीति के तहत प्राइमरी व जूनियर स्कूलों में पहली बार तिमाही परीक्षाएं होंगी। जो कि जुलाई के अंत में हो सकती है। शिक्षा विभाग परीक्षाओं की तैयारी कर रहा है।


ऐसे में बिना किताब बच्चे परीक्षाओं की तैयारी कैसे करेंगे। इससे पहले राज्य सरकार ने मिशन प्रेरणा के तहत साल में दो बार स्टूडेंट असेसमेंट टेस्ट लेने का निर्णय किया था, लेकिन कोरोना के कारण यह संभव नहीं हो पाया। इस बार राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बेसिक शिक्षा विभाग साल में चार बार परीक्षाएं लेगा। हर तीन महीने में अलग लक्ष्य तय किए जाएंगे।


परिषदीय विद्यालय में बीते अप्रैल माह से ही नया शैक्षणिक सत्र शुरू है, लेकिन अभी तक छात्रों को पढ़ने के लिए निशुल्क पाठ्य पुस्तकें नहीं आ पाई हैं। अधिकांश छात्र पुरानी किताबों से पढ़ाई कर रहे हैं। कुछ छात्र ऐसे भी हैं जिनके पास किताब ही नहीं है। 


विभाग का कहना है कि पाठ्य पुस्तकें शासन स्तर से आती हैं। उसके लिए टेंडर जारी हो चुका है। सितंबर माह से शासन से जिलों में किताबें आनी शुरू हो जाएंगी। सत्यापन के बाद उसका वितरण छात्रों में करा दिया जाएगा। सवाल उठ रहा है कि नए सत्र के आरम्भ में ही छात्रों को विभाग नई पाठ्य पुस्तकें क्यों नहीं उपलब्ध करा पा रहा है।


बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के शैक्षणिक परिवेश को कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बेहतर बनाने की सरकारी कोशिश जारी है। मिशन कायाकल्प से अवस्थापना सुविधा बेहतर बनाने के लिए भारी भरकम धनराशि खर्च की जा रही है। 


कम्पोजिट ग्रांट से विद्यालय व्यवस्था प्रबंधन के लिए छात्र संख्या के आधार पर एसएमसी के खाते में पहले की तुलना में अधिक धनराशि शासन से आ रही है। पढ़ाई के लिए बेहद जरूरी किताब भी छात्रों को समय से नहीं मिल पा रही हैं। 


प्रदेश में सरकार किसी भी दल का हो, लेकिन पाठ्य पुस्तकों के वितरण में देरी की समस्या पिछले डेढ़ दशक से है। जुलाई अगस्त से पहले पाठ्य पुस्तकें नहीं आ पाती हैं। जिले से लेकर ब्लाक व स्कूलों में किताबों के पहुंचने में अक्सर सितंबर-अक्तूबर माह गुजर जाता है। देर से किताब पहुंचने के बाद शिक्षक उसका वितरण छात्रों में करते हैं।


विभाग का कहना है कि नई पाठ्य पुस्तक के अभाव में पढ़ाई प्रभावित नहीं है। क्योंकि पिछले सत्र समाप्ति के समय शिक्षक छात्रों से पुरानी किताबें एकत्र करा लिए थे।

विकल्प न भरना ग्रेच्युटी न देने का आधार नहीं, हाईकोर्ट ने फिर लगाई गई आदेश की मुहर, देखें हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आर्डर

विकल्प न भरना ग्रेच्युटी न देने का आधार नहीं, हाईकोर्ट ने फिर लगाई गई आदेश की मुहर, देखें हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण आर्डर 



प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि सहायक अध्यापक की 60 साल से पहले मृत्यु होने पर इस आधार पर भी ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं रोका जा सकता है कि उसने 60 साल में सेवानिवृत्त होने का विकल्प नहीं दिया था। कोर्ट ने मामले में सभी याचियों को 6 सप्ताह के भीतर आठ फीसदी की दर से ग्रेच्युटी भुगतान का आदेश दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने शिखा शर्मा, मंजू कुमारी सहित 28 याचिकाओं की एकसाथ सुनवाई करते हुए दिया।


" याची की ओर से तर्क दिया गया कि उनके पति की मृत्यु सेवानिवृत्ति होने से पहले ही हो गई है। उन्होंने सेवा के दौरान विकल्प का चुनाव नहीं किया था। इस आधार पर डीआईओएस ने ग्रेच्युटी के भुगतान करने से मना कर दिया। याचियों ने उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।


समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू

प्रयागराज : समाज कल्याण विभाग की विभिन्न छात्रवृत्तियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। नौंवी और दसवीं के नव प्रवेशी विद्यार्थियों का डाटाबेस तैयार करने की प्रक्रिया दो जुलाई से शुरू होगी। वहीं पुराने विद्यार्थियों के डाटा फीडिंग की प्रक्रिया 20 जुलाई से शुरू होगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी त्रिनेत्र कुमार सिंह का कहना है कि विश्वविद्यालय एवं कालेज प्रबंधकों को कार्यक्रम से अवगत कराया गया है। उन्हें पत्र भी लिखा गया है।

Board Results : सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा के नतीजे 15 जुलाई तक हो सकते हैं घोषित

Board Results : सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड परीक्षा के नतीजे 15 जुलाई तक हो सकते हैं घोषित

सीबीएसई और सीआईएससीई दसवीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे 15 जुलाई तक घोषित कर सकते हैं। सूत्रों ने बुधवार को बताया कि इस संबंध में मूल्यांकन प्रक्रिया चल रही है।


कोरोना महामारी के चलते वर्ष 2021-2022 के लिए शैक्षणिक सत्र को विभाजित करना और दसवीं व 12वीं कक्षा के लिए पाठ्यक्रम को युक्तिसंगत बनाना सीबीएसई द्वारा घोषित बोर्ड परीक्षाओं के लिए विशेष मूल्यांकन योजना का हिस्सा था। सीआईएससीई ने भी इसका पालन किया था। सीबीएसई की दसवीं कक्षा की परीक्षा 24 मई को संपन्न हुई, जबकि 12वीं कक्षा की परीक्षाएं 15 जून को समाप्त हुई थी। सीआईएससीई की दसवीं कक्षा की परीक्षा 20 मई को और 12वीं कक्षा की परीक्षा 13 जून को संपन्न हुईं थी। अधिकांश राज्य बोर्डों ने परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। सीबीएसई और सीआईएससीई ने परीक्षाएं महामारी के मद्देनजर देर से कराई थी।

गौरतलब है कि सीबीएसई ने कोरोना के चलते इस अकादमिक वर्ष को दो टर्म में बांटा था। टर्म-1 की परीक्षा नवंबर-दिसंबर 2021 में आयोजित हुई थी। टर्म-1 में स्टूडेंट्स से ऑब्जेक्टिव टाइप वाले प्रश्न पूछे गए थे। टर्म-1 परीक्षा के तीन माह बाद रिजल्ट जारी किया गया था।

डिग्री कॉलेज शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु के फैसले पर रोक

डिग्री कॉलेज शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु के फैसले पर रोक

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों से संबद्ध डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 से बढ़ाकर 65 वर्ष करने के एकल पीठ के फैसले पर रोक लगा दी है।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल एवं न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील पर सुनवाई करते हुए दिया है। एकल पीठ ने राज्य सरकार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के रेग्युलेशन के अनुसार तीन माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया था, जिसकी वैधता को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। खंडपीठ ने याचिका करने वाले चंद्र मोहन ओझा व 21 अन्य शिक्षकों से अपील पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है और राज्य सरकार को उसके बाद चार सप्ताह में प्रत्युत्तर शपथपत्र दाखिल करने को कहा है।


अपील में कहा गया है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने 2010 में रेग्युलेशन संशोधित किया और अध्यापकों की सेवानिवृत्ति आयुसीमा 65 वर्ष कर दी, जिसे राज्य सरकार ने 31 दिसंबर 2010 को आंशिक रूप से अपनाया है। लेकिन जब तक विश्वविद्यालय अपनी परिनियमावली संशोधित नहीं कर लेते, इसका लाभ उच्च शिक्षण संस्थाओं के शिक्षकों को नहीं मिल सकता। कहा गया कि एकल पीठ ने सरकार से जवाब मांगे बगैर निर्देश दिया है इसलिए उसे रद्द किया जाए।

यूपी बोर्ड : इंटर के अंकपत्र भेजे गए क्षेत्रीय कार्यालय, जानें कॉलेजों में कब से होगा वितरण

यूपी बोर्ड : इंटर के अंकपत्र भेजे गए क्षेत्रीय कार्यालय, जानें कॉलेजों में कब से होगा वितरण

यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) 24 मार्च से 13 अप्रैल के बीच संपन्न हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल से 4 मई के बीच प्रयोगात्मक परीक्षा संपन्न हुई। 27 अप्रैल से सात मई के बीच मूल्यांकन कार्य संपन्न हुआ।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को इंटरमीडिएट के अंकपत्र भेजे जा रहे हैं। मंगलवार तक क्षेत्रीय कार्यालयों से अंकपत्र कॉलेजों तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद विद्यार्थियों को अंकपत्र वितरण शुरू हो जाएगा। परिषद ने अभी इंटर के ही अंकपत्र भेजे हैं। दरअसल इन कक्षाओं के सभी विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे संस्थानों में दाखिले के लिए अंकपत्र होना जरूरी है। ऐसे में परिषद ने पहले इंटर के अंकपत्र भेजे हैं। हालांकि यूपी बोर्ड अफसरों का कहना है कि जल्द ही हाईस्कूल के भी अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों को भेज दिए जाएंगे।

यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 (हाईस्कूल और इंटरमीडिएट) 24 मार्च से 13 अप्रैल के बीच संपन्न हुई थी। इसके बाद 24 अप्रैल से 4 मई के बीच प्रयोगात्मक परीक्षा संपन्न हुई। 27 अप्रैल से सात मई के बीच मूल्यांकन कार्य संपन्न हुआ। लगभग सवा महीने बाद 18 जून को परिषद ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट का परिणाम जारी किया। इसमें इंटरमीडिएट में कुल 24 लाख से अधिक विद्यार्थी पंजीकृत रहे। 85.33 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए।

परिणाम जारी करने के बाद ही बोर्ड विद्यार्थियों के अंकपत्र भेजने की तैयारी में जुट गया था। बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक इंटरमीडिएट के अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे जा रहे हैं। मंगलवार तक सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में अंकपत्र पहुंच जाएंगे। इसके बाद कॉलेज से प्रधानाचार्य विद्यार्थियों को वितरित करेंगे। इसके बाद जल्द ही हाईस्कूल के अंकपत्र भी क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजे जाएंगे।

यूपी बोर्ड : इंटर के विद्यार्थियों को अगले हफ्ते मिलेंगे अंकपत्र

यूपी बोर्ड की इंटर परीक्षा में शामिल छात्र-छात्राओं को पहले अंकपत्र सह प्रमाणपत्र मिलेंगे। 18 जून को घोषित बोर्ड परीक्षा के परिणाम के अंकपत्र प्रयागराज समेत पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों को दो दिन पहले ही मिले हैं। क्षेत्रीय कार्यालयों में टेबुलेशन रिकॉर्ड से मिलान, जिला और विद्यालयवार व्यवस्थित करने आदि में चार-छह दिन लगेगा।

अधिकारियों के अनुसार अगले सप्ताह अंकपत्र जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेज दिए जाएंगे, जहां से विद्यार्थियों को बांटने के लिए स्कूलों को दिए जाएंगे। जल्द हाईस्कूल के अंकपत्र भी भेजे जाएंगे। यूपी बोर्ड के प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय के अपर सचिव विनय कुमार गिल ने बताया कि 12वीं के अंकपत्र मिल गए हैं। जरूरी औपचारिकता के बाद जिलों को भेज दिए जाएंगे।

सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एक जुलाई से शुरू होंगे कक्षा नौ व 11 में छात्रों के पंजीकरण

सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में एक जुलाई से शुरू होंगे कक्षा नौ व 11 में छात्रों के पंजीकरण

लखनऊ : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) स्कूलों के कक्षा नौ व 11 के छात्रों का पंजीकरण एक जुलाई से शुरू हो जाएगा। परीक्षा नियंत्रक डॉ. संयम भारद्वाज ने बोर्ड की वेबसाइट पर सभी स्कूलों को अपने संस्थागत छात्रों की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण प्रक्रिया के दौरान संस्थागत छात्रों के प्रमाण पत्रों में गड़बड़ी मिली तो संबंधित स्कूल के खिलाफ मान्यता खत्म करने की कार्रवाई की जाएगी।


बोर्ड ने सभी स्कूलों को इसकी सूचना भेज दी है। जो छात्र सभी विषयों में उत्तीर्ण हों उनका स्कूलों को पंजीकरण कराना होगा। जो छात्र दूसरे स्कूल से आ रहे हैं तो उन्हें वैध प्रमाणपत्र दर्शाने होंगे। स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे सुनिश्चित कर लें कि छात्र गैर मान्यता प्राप्त विद्यालय का तो नहीं है। यदि गौर मान्यता प्राप्त विद्यालय के छात्रों का पंजीकरण किया तो स्कूल की मान्यता भी जा सकती है। वहीं, सभी स्कूलों को कक्षा नौ से 12 तक में अध्ययनरत छात्रों की सूची भी बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करनी होगी। बोर्ड ने साफ किया है कि एक बार छात्र की पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने के बाद विषय में बदलाव को लेकर आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। स्थानांतरण वाले मामले में विचार-विर्मश किया जाएगा।

विलंब शुल्क 2000 रुपये
बोर्ड ने कक्षा नौ और 11 के छात्रों की पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। प्रति छात्र पंजीकरण शुल्क 300 रुपये निर्धारित है। इसके बाद विलंब शुल्क के साथ 15 अक्तूबर तक पंजीकरण होंगे। इस दौरान प्रति छात्र पंजीकरण शुल्क 2300 रुपये निर्धारित किया गया है।

बोर्ड रिजल्ट आया नहीं 11 में हो गए दाखिले
सीबीएसई बोर्ड कक्षा 10 का परीक्षा परिणाम आना अभी बाकी है। इससे पहले ही अधिकतर स्कूलों ने अपने यहां पर कक्षा 11 के दाखिले पूर्ण कर लिए हैं। स्कूलों ने प्री बोर्ड परीक्षा और प्रथम टर्म परीक्षा के आधार पर दाखिले लिए हैं। इनमें कई ऐसे छात्र भी हैं जो पढ़ाई बायो व मैथ्स विषय से करना चाहते हैं, लेकिन स्कूलों ने उनको मानविकी वर्ग में रखा है। सीबीएसई के सिटी समन्वयक डॉ. जावेद आलम खान ने बताया कि स्कूल टर्म प्रथम और प्री बोर्ड परीक्षा के आधार पर दाखिला लेकर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कितने अंक तक विज्ञान वर्ग देना है, इसकी अर्हता स्कूल तय कर सकते हैं।

Wednesday, June 29, 2022

बेसिक परिषदीय अध्यापकों की पदोन्नति विषयक उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा सचिव परिषद के समक्ष तर्कपूर्ण मांगपत्र प्रेषित

बेसिक परिषदीय अध्यापकों की पदोन्नति विषयक उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ द्वारा सचिव परिषद के समक्ष तर्कपूर्ण मांगपत्र प्रेषित



प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद सृजन के संबंध में उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को दिया ज्ञापन

प्रत्येक परिषदीय विद्यालय में प्रधानाध्यापक के पद सृजन के संबंध में उoप्रo जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने सचिव परिषद को दिया ज्ञापन



CBSE : मान्यताविहीन स्कूलों के छात्रों का लिया प्रवेश तो कार्रवाई तय

CBSE : मान्यताविहीन स्कूलों के छात्रों का लिया प्रवेश तो कार्रवाई तय



 सीबीएसई बोर्ड के स्कूल उन स्कूलों के बच्चों का 9वीं और 12वीं में प्रवेश नहीं ले सकेंगे, जिसको मान्यता नहीं मिली है। यदि कोई स्कूल ऐसा करता पाया जाता है और जांच में यह सिद्ध हो जाता है तो उसकी मान्यता रद्द की जा सकती है। शर्त के मुताबिक स्कूलों को एक जुलाई से स्कूल में पंजीकरण और शिक्षकों का डाटा बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। आखिरी तिथि 30 सितंबर निर्धारित है।


प्रवेश को लेकर सख्ती की वजह यह है कि बहुत से ऐसे स्कूल हैं, जिनके विद्यार्थी पढ़ाई तो बिना मान्यता वाले स्कूलों में ही करते हैं लेकिन उनका औपचारिक पंजीकरण बोर्ड के स्कूलों में रहता है। प्रवेश के लिए बोर्ड ने यह शर्तें रखी हैं।


 • केवल अपने स्कूल के नियमित विद्यार्थियों का ही प्रवेश लेना होगा।

 • अगर दूसरे स्कूल के बच्चे का प्रवेश लें तो उसकी भी मान्यता होनी चाहिए।

 •11वीं में उसी विद्यार्थी का प्रवेश लिया जाए, जिसका हाईस्कूल रिजल्ट बोर्ड ने जारी किया हो एक कक्षा में 40 से ज्यादा बच्चे नहीं बैठाने होंगे।

 •हर स्कूल में 30 बच्चे पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है बोर्ड से अनुमति लेने के बाद ही सेक्शन की संख्या बढ़ाई जा सकती है।

 •दिव्यांग बच्चों को सहूलियत देने की अनिवार्यता होगी स्कूलों को जिस विषय की मान्यता मिली है, उसी में प्रवेश लेना होगा।

 •बिना मान्यता वाले विषय में प्रवेश लेने पर स्कूल मान्यता रद कर दी जाएगी।


 सीबीएसई ने 9वीं और 11वीं कक्षा में प्रवेश के लिए नियम और शर्तें जारी की हैं। इनसे सभी स्कूलों को बोर्ड की ओर से अवगत भी करा दिया गया है।

यूपी के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे विद्यार्थी, स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां जाएंगी सुनाई

यूपी के स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में जानेंगे विद्यार्थी, स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां जाएंगी सुनाई

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत पूरे एक साल तक यह कार्यक्रम चलाया जाएगा



लखनऊ । स्कूलों में स्वतंत्रता संग्राम की अनसुनी कहानियां सुनाई जाएंगी। ऐसी 100 स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की कहानियों को जुटाया जाएगा और फिर इसे दिलचस्प तरीके से बच्चों को सुनाया जाएगा। ये स्वतंत्रता संग्राम सेनानी यूपी के अलग-अलग हिस्सों के होंगे।


केंद्रीय कौशल विकास मंत्री धमेंद्र प्रधान ने यूपी के बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे जल्द से जल्द ऐसे सेनानियों के नाम और उनके जीवन वृत्त को इकट्ठा करें ताकि इनसे विद्यार्थियों को परिचित कराया जा सके।


आमतौर पर स्वतंत्रता संग्राम का जिक्र छिड़ते ही लोगों को रानी लक्ष्मी बाई, मंगल पाण्डे, झलकारी बाई, बेगम हजरतमहल, अशफाकउल्ला खान जैसे नाम ही याद आते हैं लेकिन कई ऐसे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हैं, जिन्होंने काकोरी काण्ड, चौरा चौरी काण्ड समेत अन्य आजादी की लड़ाइयों में हिस्सा लिया और शहीद हुए लेकिन उनका नाम केवल उनके क्षेत्र तक ही सीमित है। 

हर जिले से ऐसे सेनानियों के नाम, फोटो और अन्य सूचनाओं को इकट्ठा किया जाएगा और फिर इस पर दिलचस्प तरीके से कहानियां लिखी जाएंगी। हर सेनानी का लोगो तैयार किया जाएगा।

बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु प्री ‘बुकिंग’ को ऑनलाइन इश्तिहार!

बेसिक शिक्षकों के स्थानांतरण हेतु  प्री ‘बुकिंग’ को ऑनलाइन इश्तिहार!



यूपी सरकार ने अब तक बेसिक शिक्षकों के अन्तर्जनपदीय या जनपद के भीतर तबादले के लिए कोई आदेश जारी नहीं किया है लेकिन जिले में अभी से ही परस्पर स्थानान्तरण के लिए साथियों की तलाश जारी है।


सोशल मीडिया पर इश्तिहार देकर अपने साथियों की खोज कर प्री बुकिंग की जा रही है। सूत्र बताते हैं कि तबादले के लिए शिक्षक एक दूसरे को कई तरह के लालच भी दे रहे हैं।


कई साल से जिले के भीतर स्थानान्तरण न होने एवं बीते साल शिक्षकों का अपेक्षित संख्या में तबादले न होने से बेसिक शिक्षकों को उम्मीद है कि इस वर्ष उनके तबादले जिले के बाहर न सही लेकिन जिले के भीतर तो हो ही सकते हैं।


कयास लगाया जा रहा है कि तबादला प्रक्रिया में एकल स्थानान्तरण के साथ परस्पर स्थानान्तरण भी किए जाएंगे। म्युचुअल ट्रांसफर को शिक्षक अधिक सुरक्षित मान रहे हैं।


सूत्र बताते हैं कि इस स्थानान्तरण में दूसरे साथी की तलाश के लिए सोशल मीडिया पर शिक्षकों का ब्यौरा व मोबाइल नंबर दिए जा रहे हैं ताकि इच्छुक शिक्षक एक दूसरे से सम्पर्क कर सकें। बताते हैं कि परस्पर स्थानान्तरण के लिए अनेक शिक्षकों ने एक दूसरे से समझौता कर हामी भर ली है। आदेश जारी होते ही आवेदन कर दिए जाएंगे।


पेश किए जा रहे हैं कई आफर

मजे की बात है कि साथी की तलाश में सोशल मीडिया में कई तरह के आफर दिए जा रहे हैं। इनमें पैसों से लेकर गाड़ी व नाश्ते की व्यवस्था तक शामिल है। कुछ में आकर्षक गिफ्ट की भी पेशकश की गई है।


सरकार की तरफ लगी हैं निगाहें

शिक्षकों की निगाहें फिलवक्त सरकार व विभाग की तरफ हैं। उन्हें उम्मीद है कि विभाग जल्द ही तबादले के लिए आदेश जारी कर सकता है। समायोजन के साथ शिक्षकों के तबादले की संभावना के मद्देनजर यह कवायद की जा रही है। बीते दिनों शिक्षकों से सम्बन्धित आंकड़े भी विभाग द्वारा मांगे जाने से इस संभावना को बल मिला है।

उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका,सत्र 2021-22 में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी

उच्च शिक्षा में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी, राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्र घटने से चिंता

 
● 2020-21 में 50,21,277 तो 2021-22 में 45.40 लाख थे छात्र

● उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका


प्रयागराज : उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं के नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका लगा है। शैक्षणिक सत्र 2021-22 में उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या में तकरीबन पांच लाख की गिरावट देखने को मिली है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तैयार प्रदेश के 51 राज्य विश्वविद्यालयों और 7875 महाविद्यालयों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

2020-21 सत्र में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 5021277 (1860220 छात्र व 3161057 छात्राएं) विद्यार्थी पंजीकृत थे। जबकि 2021-22 में यह संख्या सिमटकर 4540605 (2177467 छात्र व 2363138 छात्राएं) हो गई। 2019-2020 में उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 41,83,992 (1969206 छात्र व 2214786 छात्राएं) थी।

बालिका शिक्षा पर पड़ा सर्वाधिक असर : प्रयागराज। कोरोना काल में उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का सर्वाधिक असर बालिका शिक्षा पर पड़ा है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 में जहां 22,14,786 और 2020-21 में 31,61,057 छात्राओं ने उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया था, वहीं 2021-22 में बालिकाओं के नामांकन की संख्या कम होकर 23,63,138 रह गई। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के प्रयासों को कोरोना काल में झटका लगा है। इस सत्र में नामांकन संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

चार सालों में संस्थानों के नामांकन पर एक नजर

वर्ष छात्र छात्राएं योग

2021-22 2177467 2363138 4540605

2020-21 1860220 3161057 5021277

2019-20 1969206 2214786 41,83,992

2018-19 2074205 2308322 43,82,527

कोरोना काल में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के नामांकन में कमी दर्ज की गई है। 2022-23 सत्र में इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. अमित भारद्वाज, उच्च शिक्षा निदेशक


Tuesday, June 28, 2022

मदरसा बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे 15 जुलाई तक घोषित होने की उम्मीद

मदरसा बोर्ड परीक्षाओं के नतीजे 15 जुलाई तक घोषित होने की उम्मीद

लखनऊ : मदरसा बोर्ड की मुंशी मौलवी, आलिम, कामिल और फाजिल की परीक्षाओं का रिजल्ट 10 से 15 जुलाई के बीच जारी होने की उम्मीद है। कॉपियों के मूल्यांकन का काम पूरा हो चुका है अब नंबरों की फीडिंग की जा रही है। परीक्षा में करीब 1.20 लाख परीक्षार्थी शामिल हुए हैं। रजिस्ट्रार जगमोहन सिंह ने बताया कि 10 से 15 जुलाई के बीच मदरसा बोर्ड परीक्षाओं का रिजल्ट जारी कर दिया जाएगा।


यूपी बोर्ड ने त्रुटि वाले अंकपत्रों का वितरण करने से रोका, इस सप्ताह विद्यालयों में पहुंचाए जाएंगे हाईस्कूल व इंटर के अंकपत्र

यूपी बोर्ड ने त्रुटि वाले अंकपत्रों का वितरण करने से रोका

यूपी बोर्ड : अंकपत्र में गड़बड़ी दूर कराएंगे प्रधानाचार्य, छात्रों को नहीं होना होगा परेशान, बोर्ड से संशोधन के बाद ही मिलेंगे अंकपत्र, खबर नीचे



◆ इस सप्ताह विद्यालयों में पहुंचाए जाएंगे हाईस्कूल व इंटर के अंकपत्र 

◆ बोर्ड नहीं चाहता कि संशोधन के लिए चक्कर लगाएं परीक्षार्थी


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा- 2022 का परिणाम घोषित करने के बाद अंकपत्र वितरण की तैयारी में जुट गया है। इस दौरान परीक्षाफल में अंक संबंधी त्रुटि होने पर परीक्षार्थियों से बोर्ड प्रत्यावेदन ले रहा है, ताकि उसे ठीक किया जा सके। त्रुटि सुधारे जाने की प्रक्रिया के बीच बोर्ड ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि परीक्षार्थियों को अंकपत्र देने से पहले अभिलेखों से उसका मिलान अनिवार्य रूप से किया जाना है। अंकपत्र में किसी तरह की त्रुटि होने पर उसे वितरित न करें, बल्कि यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों को उसे वापस भेज दें, ताकि उसे दुरुस्त कर पुनः भेजा जा सके।


बोर्ड की ओर से अपर निदेशक क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज विनय कुमार गिल ने सभी राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को इस आशय के निर्देश दिए हैं। कहा है कि अंकपत्र में त्रुटि होने पर उसे सुधरवाने के लिए परीक्षार्थियों को अनावश्यक रूप से बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अंकपत्र में संशोधन की निर्धारित प्रक्रिया का उन्हें पालन करना पड़ता है, जिसमें चालान शुल्क जमा करने के साथ कई और औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। ऐसे में परीक्षार्थियों की इन परेशानियों को बोर्ड उत्पन्न नहीं होने देने चाहता। इसके लिए परीक्षार्थियों और उनके अभिभावकों को भी सचेत किया गया है कि वह अंकपत्र लेकर विद्यालय में ही उसका परीक्षण कर लें। त्रुटि होने पर उसे इंगित करते हुए विद्यालय को वापस कर दें, जिससे कि उसे सुधारकर पुनः भेजा जा सके। यह त्रुटियां परीक्षा फार्म भरे जाते समय विद्यालयों की ओर से गंभीरता से अभिलेखों से मिलान न करने के कारण होती हैं। विशेष रूप से वित्तविहीन विद्यालयों से यह समस्या अधिक आती है। इस तरह की त्रुटि पर अंकुश लगाया जाना जरूरी है।


यूपी बोर्ड : अंकपत्र में गड़बड़ी दूर कराएंगे प्रधानाचार्य, छात्रों को नहीं होना होगा परेशान, बोर्ड से संशोधन के बाद ही मिलेंगे अंकपत्र

प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने इस बार नई व्यवस्था की है। इससे अंकपत्र मिलने के बाद विद्यार्थियों को उसमें होने वाली नाम, पिता के नाम, जन्मतिथि आदि की त्रुटियां दूर कराने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। बोर्ड से क्षेत्रीय कार्यालय और फिर यहां से कॉलेजों में अंकपत्र पहुंचने के बाद प्रधानाचार्य अंकपत्र की जांच करेंगे। अगर किसी विद्यार्थी के अंकपत्र में संशोधन की जरूरत है तो उसे छात्र को नहीं देंगे। प्रधानाचार्य उसे संधोधन के लिए यूपी बोर्ड को भेज देंगे। ताकि बोर्ड से विद्यार्थियों को संशोधित अंकपत्र मिल सके।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद की यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 हाईस्कूल और इंटर का परिणाम 18 जून को घोषित किया गया है।

बोर्ड परीक्षार्थियों के अंकपत्र क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से कॉलेजों को भेजने की तैयारी में जुटा है। उम्मीद है इस सप्ताह के अंत अंकपत्र कॉलेजों में पहुंच जाएंगे। लेकिन इस बार विद्यार्थियों को अंकपत्र मिलने के बाद नाम, पिता के नाम, जन्मतिथि आदि की त्रुटि को दूर करने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।

इस बाबत बोर्ड की ओर से प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है कि अंकपत्र मिलने के बाद विद्यार्थियों को वितरित करने से पहले मिलान कर लें। यदि नाम, पिता के नाम, जन्मतिथि आदि में संशोधन की जरूरत है तो प्रधानाचार्य संशोधन के यूपी बोर्ड को भेजेंगे। ताकि विद्यार्थियों को परेशान न होना पड़े। क्षेत्रीय कार्यालय प्रयागराज के अपर सचिव विनय कुमार गिर ने बताया कि प्रधानाचार्य के पास बच्चों का पूरा रिकॉर्ड रहता है।

UP के 50% माध्यमिक स्कूलों में शुरू होंगे व्यावसायिक कोर्स

UP के 50% माध्यमिक स्कूलों में शुरू होंगे व्यावसायिक कोर्स



उत्तर प्रदेश के 50 प्रतिशत माध्यमिक स्कूलों में अगले चार साल के अंदर व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू होंगे। शिक्षा मंत्रालय ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत यूपी को यह लक्ष्य दिया है। वर्तमान में यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा के कुल 41 ट्रेड विषय संचालित करता है। लेकिन चुनिंदा स्कूलों में ही इन्हें पढ़ाया जाता है। इनमें से तमाम कोर्स ऐसे हैं जिनमें 50 छात्र भी पंजीकरण नहीं कराते।


युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के मकसद से व्यावसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2022-23 शैक्षिक सत्र के लिए वार्षिक कार्ययोजना और बजट को लेकर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए आयोजित प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड की बैठक के 22 जून को जारी मिनट्स में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।


माध्यमिक स्कूलों में होंगी स्मार्ट क्लास

सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों समेत माध्यमिक स्कूलों में इन्फार्मेशन कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) और स्मार्ट क्लास की सुविधा दी जाएगी। छात्र-छात्राओं को इंटरनेट की नि:शुल्क सुविधा भी मिलेगी। राज्य सरकार को स्कूलों में बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है।


कक्षा नौ में प्रवेश के लिए बच्चों को करेंगे तैयार

आठवीं पास करने वाले बच्चों का कक्षा नौ में पंजीकरण बढ़ाने के मकसद से बच्चों को मानसिक रूप से तैयार किया जाएगा। पीएबी रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को माध्यमिक शिक्षा के लिए तैयार करने के मकसद से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के जरिए दो-तीन महीने का स्कूल रेडिनेस कोर्स बनवाया जाएगा।

राजर्षि टंडन मुक्त विवि के 118 कोर्स में दाखिला आज से होगा

राजर्षि टंडन मुक्त विवि के 118 कोर्स में दाखिला आज से होगा



उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में नए शैक्षिक सत्र 2022-23 में दाखिले का आगाज मंगलवार से होगा। स्नातक, परास्नातक, डिप्लोमा, सर्टिफिकेट व जागरूकता के 118 कार्यक्रमों में प्रवेश होगा। प्रवेश प्रक्रिया ऑनलाइन मोड में संचालित की जाएगी।




प्रवेश प्रभारी डॉ. ज्ञान प्रकाश यादव ने बताया कि नए सत्र में जिन पाठ्यक्रमों में सीधे प्रवेश दिए जाएंगे, उनमें दाखिला प्रक्रिया मंगलवार से शुरू होगी। इसके लिए तैयारी पूरी कर ली गई है। अभ्यर्थी ऑनलाइन एडमिशन लेने के बाद शुल्क रसीद समेत अन्य दस्तावेज प्रिंट कराके उसके साथ शैक्षिक कागजात लगाकर संबंधित अध्ययन केंद्र पर जमा करें।


नए सत्र में एमबीए, एमसीए, पीएचडी, बीएड में दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिए होगा। इन पाठ्यक्रमों के लिए ऑनलाइन आवेदन शुरू हैं। 

आधार सत्यापन में उलझ रहे शिक्षक, आधार व स्कूल रिकार्ड में जन्मतिथि की भिन्नता बनी सबसे बड़ी समस्या

आधार सत्यापन में उलझ रहे शिक्षक,  आधार व स्कूल रिकार्ड में जन्मतिथि की भिन्नता बनी सबसे बड़ी समस्या



फतेहपुर : डीबीटी ऐप पर परिषदीय शिक्षक इन दिनों कई कार्य कर रहे हैं। इनमें नए छात्रों का पंजीकरण, पुराने छात्रों की यूनीफार्म पहना कर फोटो अपलोड करने व छात्रों के आधार सत्यापन जैसे कार्य शामिल हैं। सबसे बड़ी समस्या आधार व स्कूल रिकार्ड में जन्मतिथि की भिन्नता है। जिसके चलते छात्रों के आधार सत्यापन में मुश्किलें पेश आ रही हैं।



शिक्षक बताते हैं कि जब ग्रामीण क्षेत्र के भोले भाले व जागरूकहीन अभिभावकों ने कई साल पहले अपने बच्चों के आधार कार्ड बनवाए थे तो उन्होंने आधार में जन्मतिथि अंकित कराने को लेकर समुचित गंभीरता नहीं बरती थी। इस कारण आधार सेण्टर के फीडिंग कर्मी ने अपनी मर्जी से बच्चों की गलत जन्मतिथि आधार में अंकित कर दी थी। जब बच्चे स्कूलों में प्रवेश के लिए पहुंचे तो वहां अभिभावकों ने दूसरी जन्मतिथि अंकित कराई। जन्मतिथि का यह अंतर तमाम स्कूलों में सामने आ रहा है। आधार सत्यापन के दौरान समूचा ब्यौरा आधार कार्ड के अनुसार ही होना चाहिए तभी आधार का सत्यापन हो सकेगा। भिन्न जन्मतिथियों के कारण ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है।


बच्चों को भविष्य में होगा नुकसान

जानकार बताते हैं कि यदि बच्चों की वास्तविक जन्मतिथि की बजाए उन्हें उम्र में अधिक दिखाया गया है तो भविष्य में उनका नुकसान हो सकता है। वह आयु वर्ग के अनुसार कक्षाओं को पास नहीं कर पाएंगे।


अभिभावकों ने संशोधन में भी नहीं ली रुचि

शिक्षक बताते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावकों ने समय रहते प्रवेश पंजिका के अनुसार आधार कार्ड में संशोधन नहीं कराया। यदि अब संशोधन किया जाएगा तो समय रहते डीबीटी का कार्य नहीं पूरा हो सकेगा।

Monday, June 27, 2022

2024 तक देश के हर ब्लाक में पीएम श्री स्कूल, इसी साल अपग्रेड होंगे करीव सौ स्कूल

2024 तक देश के हर ब्लाक में पीएम श्री स्कूल, इसी साल अपग्रेड होंगे करीव सौ स्कूल


शिक्षा मंत्रालय ने बनाई योजना
राज्यों से मांगे गए प्रस्ताव कौशल विकास पर होगा जोर


नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर उठते सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने आदर्श स्कूलों की कल्पना 'पीएम श्री स्कूल' के रूप में की गई है, जो जल्द ही साकार होने जा रही है। योजना लगभग तैयार हो गई है। वर्ष 2024 तक देश के हर ब्लाक में कम से कम एक 'पीएम श्री' स्कूल खोलने का लक्ष्य है।


इसकी शुरुआत इसी साल से होगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अमल को लेकर हाल ही में गुजरात में सभी राज्यों के शिक्षा मंत्रियों की बैठक बुलाई गई थी। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वहीं 'पीएम श्री' स्कूलों के खोलने की तैयारी की बात कही थी।


शिक्षा मंत्रालय ने सभी राज्यों से इसे लेकर प्रस्ताव मांगे हैं। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इसके तहत कोई नए स्कूल नहीं खोले जाएंगे, बल्कि पहले से चल रहे स्कूलों को चयनित कर उसे इस योजना के तहत अपग्रेड किया जाएगा। छात्रों को स्कूली शिक्षा के साथ ही कौशल विकास की भी शिक्षा दी जाएगी। इसके लिए इन खास स्कूलों में सारी सुविधाएं जुटाई जाएंगी। अधिकारियों के अनुसार, देशभर के करीब साढ़े पंद्रह हजार स्कूलों को इसके तहत तैयार किया जाएगा।


राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के लिए आवेदन प्रक्रिया 28 जून से

राजकीय महाविद्यालयों में तबादले के लिए आवेदन प्रक्रिया 28 जून से 


प्रयागराज : राजकीय महाविद्यालयों में आनलाइन तबादले की प्रक्रिया 28 जून से शुरू होगी। तीन दिन में ही तबादले की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। तबादले के इच्छुक प्राचार्य और प्रवक्ता को एक आनलाइन आवेदन करने का मौका एक दिन के लिए ही मिलेगा। इसके लिए वेबसाइट पर डाटा अपलोड करने का काम चल रहा है।


सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की स्थानांतरण नीति कुछ दिनों पहले घोषित हो चुकी है। उसी क्रम में राजकीय महाविद्यालयों में प्रचार्य, प्रवक्ता और समूह ग कर्मियों के तबादले होंगे। राजकीय महाविद्यालयों में तीन वर्ष या इससे अधिक समय से तैनात 20 प्रतिशत प्राचार्यों और प्रवक्ताओं का तबादला किया जाएगा। ऐसे ही तीन वर्ष या इससे अधिक समय से तैनात समूह ग के 10 प्रतिशत कर्मचारियों को तबादला किया जाएगा।


 आनलाइन तबादले को लेकर 23 जून को विशेष सचिव श्रवण कुमार ने निर्देश दिया था। लेकिन उच्च शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर अब तक महाविद्यालयों में खाली पदों से जुड़ा विवरण अपलोड नहीं हो सका है।

सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व प्रवक्ता को नियमित करने का हाईकोर्ट का आदेश, डाऊनलोड करें कोर्ट आर्डर

सेवानिवृत्ति के बाद पूर्व प्रवक्ता को नियमित करने का हाईकोर्ट का आदेश, डाऊनलोड करें कोर्ट आर्डर 

शैक्षणिक योग्यता में कमी के कारण नियमितीकरण रोक दिया गया था




प्रयागराज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सरकारी डिग्री कॉलेज की पूर्व प्रवक्ता डॉ. सुशीला जोशी को उनकी सेवानिवृत्ति के तीन साल बाद सेवा में बहाल मानते हुए नियमित करने का आदेश दिया है। डॉ. जोशी का नियमितीकरण उच्च शिक्षा विभाग द्वारा शैक्षणिक योग्यता की कमी के कारण रोक दिया गया था।


उच्च न्यायालय ने प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एवं निदेशक उच्च शिक्षा के आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को न केवल सेवा में नियमित करने का निर्देश दिया, बल्कि उनके वेतन एवं अन्य भत्तों आदि के सभी बकायों के भुगतान करने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो देरी करने वाले अधिकारियों से ब्याज की राशि वसूल सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डॉ. सुशीला जोशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।


याची के अधिवक्ता अरविंद सिंह ने तर्क दिया कि याची को 1987 में उत्तरकाशी के सरकारी डिग्री कॉलेज में अंशकालिक व्याख्याता के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें वर्ष 2000 में सरकारी डिग्री कॉलेज हमीरपुर में स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने नियमितीकरण के लिए आवेदन किया, लेकिन उच्च शिक्षा निदेशक ने यह दावा करते हुए इनकार कर दिया कि याचिकाकर्ता के पास व्याख्याता के लिए आवश्यक योग्यता नहीं है। याची के अधिवक्ता का कहना था कि इंटरमीडिएट और स्नातक में व्याख्याता के पद के लिए औसत 55 प्रतिशत या अधिक अंक होने चाहिए। सरकार ने 30 मार्च 1987 को जारी किए गए आदेश में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता में ढील दी है।



अहम फैसला :  रिटायरमेंट के बाद डिग्री कालेज प्रवक्ता को नियमित करें


प्रयागराज  । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राजकीय डिग्री कॉलेज में प्रवक्ता रहीं डॉ सुशीला जोशी को उनके रिटायरमेंट के तीन साल बाद सेवा में नियमित करने का आदेश दिया है। डॉ. जोशी का नियमितीकरण उच्च शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक अर्हता पूरी न करने के आधार पर रोक दिया था।



हाईकोर्ट ने इसे सही नहीं माना और प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा व उच्च शिक्षा निदेशक के आदेश को रद्द करते हुए याची को न सिर्फ सेवा में नियमित करने का निर्देश दिया बल्कि उनका सभी बकाया वेतन व अन्य भत्ते आदि का भुगतान करने का भी  निर्देश दिया है। कोर्ट ने याची को पेंशन में भी नियमितीकरण के सभी लाभ देने को है। कोर्ट ने कहा कि आदेश का पालन 12 सप्ताह में कर लिया जाए। उसके बाद आदेश का पालन करने पर याची को 12 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज का भी भुगतान करना होगा।




सरकार चाहे तो ब्याज की रकम की वसूली विलंब के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से कर सकती है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने डॉ. सुशीला जोशी की याचिका पर सुनवाई के बाद दिया । याची के अधिवक्ता अरविंद कुमार सिंह के अनुसार याची का चयन 1987 में उत्तरकाशी गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज में पार्ट टाइम लेक्चरर के रूप में हुआ था।

यूपी : उच्च शिक्षा में घट गए 4.80 लाख छात्र, नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका

यूपी : उच्च शिक्षा में घट गए 4.80 लाख छात्र, नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका 



प्रयागराज। उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं के नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका लगा है। शैक्षणिक सत्र 2021-22 में उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या में तकरीबन पांच लाख की गिरावट देखने को मिली है। 



उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तैयार प्रदेश के 51 राज्य विश्वविद्यालयों और 7875 महाविद्यालयों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। 2020-21 सत्र में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 5021277 विद्यार्थी पंजीकृत थे। जबकि 2021-22 में यह संख्या सिमटकर 4540605 हो गई। 2019-2020 में उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की कुल संख्या 41,83,992 थी।



Sunday, June 26, 2022

बीएड प्रवेश परीक्षा : परीक्षार्थियों को फोटोयुक्त पहचानपत्र भी लाना होगा, परीक्षा से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचना होगा

बीएड प्रवेश परीक्षा : परीक्षार्थियों को फोटोयुक्त पहचानपत्र भी लाना होगा

परीक्षा से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचना होगा

पहली पाली की परीक्षा सुबह नौ बजे से होगी



बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के प्रवेशपत्र जारी कर दिए हैं। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट या मतदाता पहचानपत्र में से कोई एक फोटोयुक्त पहचानपत्र साथ लाना होगा। परीक्षा से एक घंटे पहले केंद्र पर पहुंचना होगा।


बीएड प्रवेश प्रवेश परीक्षा दो पालियों में होगी। पहली पाली की परीक्षा सुबह नौ बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर दो बजे से शाम पांच बजे तक होगी। अभ्यर्थियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे परीक्षा शुरू होने से एक घंटा पहले केंद्र से पर पहुंचे। 


प्रवेशपत्र जारी करने के बाद रुहेलखंड विश्वविद्यालय अब छह जुलाई को होने वाली प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुट गया है। नोडल अधिकारी से लेकर अन्य टीमें केंद्रों पर भेजी जाएंगी। प्रश्नपत्रों की सुरक्षा से लेकर ओएमआर सीट आदि के बारे में के भी मंथन चल रहा है।

लखीमपुर खीरी : रिक्त पदों के सापेक्ष एआरपी चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

लखीमपुर खीरी : रिक्त पदों के सापेक्ष एआरपी चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।

8912 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए फर्नीचर खरीद को मंजूरी

8912 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए फर्नीचर खरीद को मंजूरी

लखनऊ : प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में संचालित 8, 912 आंगनबाड़ी केंद्रों में पढ़ रहे 3 से 6 आयु वर्ग के बच्चों के लिए फर्नीचर खरीद को शासन ने मंजूरी दे दी है। इसके तहत प्रति केंद्र 15,500 रुपये की दर से 13 करोड़ 81 लाख 36 हजार रुपये का अनुमोदन किया गया है । 



यह खरीद जेम पोर्टल से होगी। महानिदेशक स्कूल शिक्षा द्वारा अपर परियोजना निदेशक की अध्यक्षता में गठित समिति ने परीक्षण के बाद पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए शिशु डेस्क की खरीद के साथ ही अवशेष राशि का उपयोग बच्चों के बैठने के लिए इंटरलॉकिंग फोम मेट के खरीद की संस्तुति की है। इस खरीद के लिए हर जिले में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित होगी।

मान्यता से पहले नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों को अब देनी होगी परीक्षा, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से जांच कराने की हो रही तैयारी

मान्यता से पहले नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों को अब देनी होगी परीक्षा, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया से जांच कराने की हो रही तैयारी
 
नए और पुराने सभी कॉलेजों के दस्तावेज करने होंगे ऑनलाइन

लखनऊ :  प्रदेश के नर्सिंग और पैरामेडिकल कॉलेजों को मान्यता से पहले क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (क्यूसीआई) की परीक्षा से गुजरना होगा। क्यूसीआई की मुहर लगने के बाद ही कॉलेज को संबंधित कोर्स की मान्यता दी जाएगी।


दरअसल प्रदेश में इन कॉलेजों की शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। हाल ही नर्सिंग की भर्ती के दौरान योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने की वजह से करीब 1200 सीटें खाली रह गईं। विभागीय जांच में तमाम नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों में संसाधनों का अभाव मिला। वर्ष 2021-22 में मान्यता के लिए आए आवेदनों में 577 खारिज कर दिए गए। इन कॉलेजों में लैब, स्टॉफ, कक्ष सहित कई खामियां थीं। ऐसे में उत्तर प्रदेश मेडिकल फैकल्ट्री ने नर्सिंग, एएनएम जीएनएम व अन्य पैरामेडिकल कॉलेज की क्यूसीआई से जांच कराने का प्रस्ताव तैयार किया है। जहां राष्ट्रीय स्तर पर तैयार गाइडलाइन के अनुसार सुविधाएं मिलेंगी, उस पर क्यूसीआई मुहर लगाएगा।

क्यूसीआई की मुहर लगने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग संबंधित कॉलेजों को मान्यता देगा। खास बात यह है कि नए कॉलेजों के साथ ही पुराने कॉलेजों की भी क्यूसीआई से जांच कराने की तैयारी है। इतना ही नहीं सभी कॉलेजों के दस्तावेज ऑनलाइन करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों और शिक्षकों की उपस्थिति भी ऑनलाइन की जा रही है। शिक्षकों का आधार भी संबंधित कॉलेज से लिंक किया जा रहा है। ऐसे में एक शिक्षक किसी दूसरे कॉलेज में गया तो वह तत्काल पकड़ में आ जाएगा। ऐसा होने पर शिक्षक और कॉलेज दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

राजकीय माध्यमिक विद्यालय : स्थानांतरण में मांगी नियुक्ति अवधि की सीमा एक साल, वेबसाइट न चलने से नहीं हुए आवेदन, तिथि दो दिन बढ़ाने की मांग

स्थानांतरण में मांगी नियुक्ति अवधि की सीमा एक साल

◆ राजकीय शिक्षक संघ ने अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा को भेजा पत्र

◆ वेबसाइट न चलने से नहीं हुए आवेदन, तिथि दो दिन बढ़ाने की मांग

प्रयागराज : राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के आनलाइन स्थानांतरण के शासनादेश का राजकीय शिक्षक संघ ने स्वागत तो किया है, लेकिन कई शर्तें लगाए जाने पर विरोध के स्वर भी उठे हैं। कहा है कि स्थानांतरण के लिए नियुक्ति अवधि की सीमा तीन साल निर्धारित किया जाना नए शिक्षकों के हित में नहीं है। इसे घटाकर एक साल किया जाना चाहिए। कई और प्रतिबंधों को भी शिथिल किए जाने की मांग करते हुए राजकीय शिक्षक संघ भड़ाना गुट ने अपर मुख्य सचिव (एसीएस) माध्यमिक शिक्षा को पत्र भेजा है। दूसरे दिन भी वेबसाइट नहीं चलने से आवेदन नहीं किए जा सके। ऐसे में मांग की गई है कि तिथि दो दिन बढ़ाई जाए।


राजकीय शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुनील भड़ाना एवं प्रांतीय महामंत्री डा. रवि भूषण ने संयुक्त रूप से पत्र में लिखा है कि स्थानांतरण के संबंध में जारी शासनादेश के कई बिंदुओं से शिक्षक सहमत नहीं हैं। तीन वर्ष से कम की सेवा वाले | शिक्षकों के आवेदन करने पर रोक | के नियम को शिथिल कर एक साल किया जाना चाहिए। इसके अलावा विद्यालय में कार्यरत स्टाफ की संख्या के आधार पर इच्छुक शिक्षक व शिक्षिकाओं को आवेदन करने से वंचित न किए जाने की भी मांग की गई है। साथ ही पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि मेरठ, आगरा, वाराणसी, कानपुर, प्रयागराज में दूरी की वैधता को समाप्त किया जाए। प्रांतीय महामंत्री ने बताया कि 24, 25 और 26 जून को आवेदन लिए जाने थे, लेकिन वेबसाइट नहीं चलने से शिक्षक परेशान हैं। ऐसे में आवेदन तिथि दो दिन बढ़ाई जाए।

6800 शिक्षक नियुक्ति को उप मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी के कारण हो गए थे बाहर

6800 शिक्षक नियुक्ति को उप मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन

◆ 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी के कारण हो गए थे बाहर

◆ बेसिक शिक्षा परिषद ने पांच जनवरी को अलग से जारी की चयन सूची


प्रयागराज: बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए आई 69000 शिक्षक भर्ती में बाद में चयनित 6800 शिक्षक नियुक्ति न मिलने से आर्थिक और मानसिक रूप से परेशान हैं। नियुक्ति दिलाए जाने के लिए आरक्षित वर्ग में चयनित अभ्यर्थी शनिवार को प्रयागराज आए उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मिले। अपनी मांग से संबंधित ज्ञापन उन्हें सौंपा। अभ्यर्थियों को उन्होंने न्याय दिलाने का आश्वासन दिया है।

ज्ञापन लेकर पहुंचे लक्ष्मीकांत यादव, प्रतिमा पटेल, अनु पटेल ने उप मुख्यमंत्री को बताया कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी के कारण 6800 अभ्यर्थी चयन से बाहर हो गए थे। इस मामले की जानकारी अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को दी थी । उनके आदेश के बाद परीक्षण में आरक्षण की गड़बड़ी को ठीक करते हुए आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों की अलग से चयन सूची बेसिक शिक्षा परिषद ने पांच जनवरी को जारी की। इसके बाद उम्मीद बंधी थी कि जल्द नियुक्ति मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। राधा मौर्या, नितिन, संजय सिंह आदि ने कहा कि चयनित होने के बावजूद नियुक्ति नहीं मिलना उनके साथ अन्याय है। नियुक्ति के लिए वह भाजपा नेताओं और अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही है। उप मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सभी को न्याय दिलाया जाएगा।

शिक्षक भर्ती के मूल्यांकन में 20 नंबर तक हेरफेर, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में भर्ती की लिखित परीक्षा का मामला

शिक्षक भर्ती के मूल्यांकन में 20 नंबर तक हेरफेर, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में भर्ती की लिखित परीक्षा का मामला

अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापकों के 1504 और प्रधानाध्यापकों के 390 पदों पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में 20 नंबर तक की हेरफेर की गई थी। ओएमआर शीट पर परीक्षा लेने के बाद कम्प्यूटर और स्कैनिंग मशीन की सहायता से कॉपियों का मूल्यांकन कराया गया था। इसके बावजूद इतने नंबर की हेरफेर ने पूरी परीक्षा पर सवाल खड़े किए हैं। कम अंक मिलने पर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका की थी।


हाईकोर्ट के आदेश पर शासन ने 12 अप्रैल को एक समिति का गठन करते हुए आपत्तियों की जांच कराई। 571 शिकायतों के मैनुअल मिलान में 132 सही पाई गई। शासन ने आठ जून को संपूर्ण परिणाम का मूल्यांकन कराते हुए संशोधित परीक्षाफल घोषित करने के आदेश दिए हैं। परीक्षाफल की फिर से जांच हो रही है। जुलाई के पहले सप्ताह में परिणाम घोषित होने की उम्मीद जताई जा रही है। किसी प्रकार की चूक न हो, इसलिए मूल्यांकन के बाद एक बार फिर से परिणाम की जांच की जा रही है। यही कारण है कि भर्ती फंसी हुई है।


संजय उपाध्याय ने कराई थी यह भर्ती परीक्षा: यूपी-टीईटी 2021 के पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी संजय उपाध्याय ने ही एडेड जूनियर हाईस्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए 17 अक्तूबर 2021 को परीक्षा कराई थी।

गड़बड़ी की पुष्टि के बावजूद कार्रवाई नहीं

132 अभ्यर्थियों के अंक में गड़बड़ी की पुष्टि के बावजूद किसी पर कार्रवाई न होना आश्चर्य में डालने वाला है। ये वे अभ्यर्थी हैं जिन्होंने अपने परिणाम में अनियमितता की शिकायत की थी। नंबरों में हेरफेर के मामले और अधिक हो सकते हैं। इससे पहले 68500 शिक्षक भर्ती परीक्षा के परिणाम में गड़बड़ी की पुष्टि होने पर तत्कालीन सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी डॉ. सुत्ता सिंह को निलंबित कर दिया गया था।

लिखित परीक्षा परिणाम में होगा व्यापक बदलाव

पुनर्मूल्यांकन के बाद एडेड जूनियर हाईस्कूल भर्ती परीक्षा के परिणाम में व्यापक बदलाव होगा। सहायक अध्यापक पद के लिए परीक्षा में सम्मिलित 2,71,066 अभ्यर्थियों में से 45,257 (16.69) और प्रधानाध्यापक के लिए सम्मिलित 14,928 अभ्यर्थियों में से 1,722 (11.53) अभ्यर्थी सफल घोषित हुए थे। पुनर्मूल्यांकन के बाद सारे आंकड़े बदल जाएंगे।

Saturday, June 25, 2022

पॉलीटेक्निक के शिक्षकों का वेतन 80 फीसदी तक बढ़ेगा, उच्च वेतनमान का रास्ता साफ, शासन ने कहा- कैबिनेट के अनुमोदन के बाद वित्त विभाग की सहमति जरूरी नहीं

पॉलीटेक्निक के शिक्षकों का वेतन 80 फीसदी तक बढ़ेगा, उच्च वेतनमान का रास्ता साफ, शासन ने कहा- कैबिनेट के अनुमोदन के बाद वित्त विभाग की सहमति जरूरी नहीं


2000 से अधिक शिक्षक और शैक्षणिक स्टाफ को फायदा

लखनऊ : पॉलीटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक स्टाफ को उच्च वेतनमान देने का रास्ता साफ हो गया है। शासन ने स्पष्ट किया है कि एआईसीटीई विनियम 2019 के तहत संस्तुत वेतनमान को कैबिनेट का अनुमोदन मिल चुका है। इसलिए वित्त विभाग की सहमति लिए जाने का कोई औचित्य नहीं है। इससे प्रधानाचार्यों व शिक्षकों के वेतन में करीब 80 प्रतिशत तक की वृद्धि होगी।

दरअसल, कुछ समय पहले कोषागार निदेशक ने सभी कोषाधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था कि सुनिश्चित कर लें कि संशोधित उच्चीकृत वेतनमान और एरियर के भुगतान के लिए वित्त विभाग से औपचारिक मंजूरी ले ली  गई हो। वहीं, प्राविधिक शिक्षा निदेशक का कहना था कि इस पत्र से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। कोषागार निदेशालय इसका निराकरण कराते हुए वेतन आहरण सुनिश्चित कराएं। 

यह प्रकरण शासन में पहुंचा तो विशेष सचिव प्राविधिक शिक्षा ने शासनादेश जारी कर कहा कि पूर्व में जारी आदेश अनुभाग की पत्रावली पर वित्त विभाग का परामर्श और सहमति लेकर ही जारी किए गए हैं।



निदेशक से ज्यादा हो जाएगा प्रधानाचार्यों का वेतनमान

संशोधित वेतनमान दिए जाने पर पॉलीटेक्निक संस्थानों के प्रधानाचार्यों का वेतन उनसे उच्च पद पर तैनात प्राविधिक शिक्षा निदेशक और अपर निदेशक से ज्यादा हो जाएगा। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के विनियम-2019 के तहत प्रधानाचार्यों को 10 हजार ग्रेड-पे के आधार पर वेतन दिया जाना निर्धारित है। जबकि संयुक्त निदेशक का ग्रेड-पे 7600, अपर निदेशक का 8700 और निदेशक का ग्रेड-पे 8900 रुपये है।

यूपी बोर्ड : अंकपत्र मिलने के बाद नाम व जन्मतिथि से जुड़ीं त्रुटियों के लिए जाएंगे आवेदन

यूपी बोर्ड :  अंकपत्र मिलने के बाद नाम व जन्मतिथि से जुड़ीं त्रुटियों के लिए जाएंगे आवेदन


ग्रीवांस सेल में शुक्रवार को पहुंचे अभ्यर्थियों को वहां तैनात कर्मचारी जानकारी दे रहे हैं कि अभी सिर्फ परीक्षा परिणाम से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवेदन लिया जा रहा है। नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि आदि से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने  के लिए आवेदन मूल अंकपत्र मिलने के बाद लिए जाएंगे।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने यूपी बोर्ड 2022 हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा का परिणाम जारी होने के बाद ग्रीवांस सेल में परीक्षाफल जुड़ी खामियों को दूर करने के लिए आवेदन लिए जा रहे हैं। वहीं ऐसे तमाम अभ्यर्थी ग्रीवांस सेल पहुंच रहे हैं, जिनके अंकपत्र की इंटरनेट कॉपी में नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि आदि में त्रुटि है। बोर्ड अफसरों ने से संबंधित आवेदन के लिए पहुंच रहे हैं। लेकिन उन्हें निराश होकर लौटना पड़ा रहा है। 

ग्रीवांस सेल में शुक्रवार को पहुंचे अभ्यर्थियों को वहां तैनात कर्मचारी जानकारी दे रहे हैं कि अभी सिर्फ परीक्षा परिणाम से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवेदन लिया जा रहा है। नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि आदि से जुड़ी त्रुटियों को दूर करने  के लिए आवेदन मूल अंकपत्र मिलने के बाद लिए जाएंगे। यूपी बोर्ड जल्द ही अंक पत्र कॉलेजों को क्षेत्रीय कार्यालय के माध्यम से भेज देगा। उम्मीद है कि अगले सप्ताह से विद्यार्थियों के अंकपत्र कॉलेज से मिलने लगेंगे। 

ग्रीवांस सेल में तीसरे दिन आईं 83 शिकायतें
यूपी बोर्ड के ग्रीवांस सेल में शुक्रवार को तीसरे दिन हाईस्कूल की 20 और इंटर 63 यानी कुल 83 शिकायतें आई हैं। यह सभी शिकायतें परीक्षा परिणाम से जुड़ी हैं। इससे कहीं ज्यादा अभ्यर्थी अंकपत्र की इंटरनेट कॉपी लेकर नाम, जन्मतिथि आदि त्रुटियों में सुधार के लिए आवेदन करने आए थे, लेकिन उन्हें मायूस होना पड़ा।

यूपी बोर्ड : प्रमाण पत्र मिलने के बाद होगा संशोधन

प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटर परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद त्रुटि सुधार के लिए के लिए आवेदन क्षेत्रीय कार्यालय स्थित ग्रीवांस सेल में लिया जा रहा है। ग्रीवांस सेल में अंक पत्र में नाम की स्पेलिंग और दोषपूर्ण फोटो में सुधार के लिए आवेदन लेकर विद्यार्थी पहुंच रहे हैं, लेकिन ग्रीवांस सेल की ओर से यह जानकारी दी जा रही है कि प्रमाण पत्र आने के बाद त्रुटि सुधारने के लिए आवेदन लिए जाएंगे। क्यूंकि एक साथ दो प्रमाण पत्र जारी करने का प्रावधान नहीं है।

ग्रीवांस सेल में सबसे अधिक प्रार्थना पत्र स्कूल के आंतरिक मूल्यांकन में अनुपस्थित दिखाए जाने की गड़गड़ी सुधारने के लिए आवेदन पहुंच रहे हैं। दूसरे नंबर पर विषय परिवर्तन के लिए प्रार्थना पत्र जमा हो रहे हैं। शुक्रवार को ग्रीवांस सेल में 35 विद्यार्थी आवेदन लेकर पहुंचे।