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Wednesday, November 25, 2020

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

राजधानी लखनऊ में बड़े बच्चों को थमाया जा रहा छोटे साइज का स्वेटर, वितरण में जमकर धांधली


लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो विभाग को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर स्वेटर बच्चों को थमाए जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा छह के बच्चों को कक्षा दो के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूर्ति की जा रही है।


शिक्षा विभाग के मुताबिक परिषदीय स्कूल करीब 1200 व पूर्व माध्यमिक स्कूल 640 हैं। कुल बच्चों की संख्या एक लाख 96 हजार है। विभाग का दावा है कि करीब 80 हजार स्वेटर किए जा वितरित किए जा चुके हैं। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमश: 26, 28 30 और 32 नंबर तक स्वेटर आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32, 34, 36 और 38 नंबर साइज आता है। गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। एक बच्चे के पिता ने बताया कि उनको 32 नंबर का स्वेटर दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं?


स्वेटर जिस एजेंसी से बंटवाए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चों की नाप से बहुत छोटे स्वेटरों की सप्लाई की जा रही है, जोकि उचित नहीं है। -विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


यह देखा जाएगा कि बीएसए ने आखिर किस साइज के स्वेटर ऑर्डर किए थे। अगर बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिए जा रहे हैं तो यह गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। - पीएन सिंह, एडी बेसिक


अगर ऐसा हुआ है तो इसके लिए खंड शिक्षाधिकारी जिम्मेदार हैं। बच्चों को किस साइज के स्वेटर लगेंगे, इसका ब्योरा खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराया गया है। खंड शिक्षाधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। - दिनेश कुमार, बीएसए



लखनऊ । बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो बच्चों को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर तैयार किए गए स्वेटर बच्चों को थमाये जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा 6 के बच्चों को कक्षा 2 के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूरी की जा रही है। स्पष्ट है कि इस बार भी स्वेटर वितरण में जमकर धांधली हुई है।


प्राथमिक विद्यालय विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमशः 26, 28 30 और 32 नंबर तक के स्वेटर साइज में आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32 (कॉमन), 34, 36, और 38 नंबर का स्वेटर साइज में आता है। मगर बेहद गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर मोहनलालगंज के एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा कक्षा सात में पड़ता है और उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज 32 नंबर है। इसी तरह कक्षा पांच में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता ने बताया कि उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज भी 32 नंबर ही है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे से आए साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं? क्या बड़े बच्चों के साइज के स्वेटर तैयार नहीं किए गए? या इसमें भी कोई बड़ी धांधली है।


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह के मुताबिक, स्वेटर खरीद कर बाटने की जिम्मेदारी जब शिक्षकों को दी जाती है तो सारे नियम सामने आ जाते थे, अब वही स्वेटर जिस भी एजेंसी से बटवाये जा रहे है उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चो की नाप से बहुत छोटे स्वेटर की सप्लाई की जा रही है, जो उचित नही है।


पैक लिफाफे में थमाया जा रहा है स्वेटर
बच्चों अभिभावकों की मानें तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वितरित किए जा रहा है स्वेटर पैक लिफाफे में स्वेटर थमा दिया जा रहा है। जबकि बच्चों के नाम का स्वेटर है य नहीं इसके लिए उन्हें पहना कर भी देखा जा सकता है। मगर जिम्मेदार सिर्फ स्वेटर के नाम पर औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे हैं।


क्‍या कहते हैं एडी बेसिक ? 
एडी बेसिक पीएन सिंह के मुताबिक, यह दिखवाया जाएगा। आखिर किस साइज के स्वेटर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आर्डर किए थे। अगर, बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिया जा रहा है तो यह बेहद गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।

Tuesday, November 17, 2020

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

Sunday, November 15, 2020

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था 


कोरोना संक्रमण से उपजे हालात से निपटने के लिए हर किसी ने एहतियात भरे कदम उठाए हैं। इन्हीं में से एक माध्यमिक शिक्षा विभाग भी है। तकनीकी और संसाधनों के लिए हमेशा से उपेक्षित कहा जाने वाला माध्यमिक शिक्षा विभाग अब हाईटेक बनकर उभरा है। यही कारण है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं ही नहीं अब ऑनलाइन परीक्षा कराए जाने का भी निर्णय ले डाला है। 


जिला विद्यालय निरीक्षक, डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, 20 नवंबर से शुरू हो रहे छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था की गई है। जो छात्र स्कूल आकर परीक्षा देना चाहते हैं वह स्कूल आकर परीक्षा देंगे। और वे जिनके अभिभावक कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों को स्कूल भेजने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, अबे घर से ही ऑनलाइन परीक्षाएं दे सकते हैं।


जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार बच्चों को गूगल मीट, जूम आदि के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराए जाएंगे बच्चों को उनके उत्तर लिखकर ई-मेल के जरिए भेजना होगा। यदि किसी बच्चे के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या आ रही है तो उसे व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराया जाएगा। बच्चे परीक्षा ईमानदारी के साथ दें इसकी जिम्मेदारी खुद अभिभावकों को सौंपी जा रही है।


अभिभावकों की भी मिल रही सराहना
यूपी बोर्ड के तहत संचालित स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की व्यवस्था को अभिभावकों की भी सराहना मिल रही है। छमाही परीक्षा को भी ऑनलाइन माध्यम से कराए जाने के प्रयास को भी अभिभावक खूब समर्थन दे रहे हैं।

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच


कोरोना संक्रमण के चलते शैक्षिक सत्र 2020-21 प्रभावित जरूर हुआ है। नियमित कक्षाएं न चालू रहकर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं अन्य सुविधाओं के लिए भी विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मगर इन सब के बावजूद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपना सारा शेड्यूल पटरी पर होने का दावा किया है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी विभाग का दावा है  की परीक्षाएं अपने निर्धारित कैलेंडर के अनुसार ही कराई जाएंगी। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि प्रायोगिक परीक्षाओं को विभाग कैसे कराएगा।


अभी तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही थी, मगर अब 25% से अधिक विद्यार्थी कॉलेज आने लगे हैं। दीपावली बाद बच्चों की संख्या में इजाफा होगा। प्रैक्टिकल संबंधित सारे उपकरण कॉलेज में उपलब्ध हैं।


क्या कहते हैं के राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल
राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल धीरेंद्र मिश्रा के मुताबिक, प्रैक्टिकल कराए जाने के संबंध में शिक्षकों के साथ बैठक भी की गई है। एक साथ विद्यार्थियों की भीड़ न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए, उन्हें शिफ्टवार बुलाया जाएगा। बोर्ड से निर्देश के बाद प्रयास किया जाएगा कि अगले एक से डेढ़ महीने के दौरान सिलेबस से जुड़ी प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी करा ली जाए।


क्या कहते हैं जिला विद्यालय निरीक्षक
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, स्कूलों में उपस्थिति प्रतिशत बढ़ी है। दो दिन पहले हुई वर्चुअल बैठक में स्कूलों की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्कूलों में शत-प्रतिशत भी बच्चों की हाजिरी पाई गई। प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कॉलेजों को तैयार रहने के लिए भी कह दिया गया है। परिषद से प्रायोगिक परीक्षाओं के संबंध में जैसे दिशा निर्देश मिलते हैं, वैसा किया जाएगा।

राजधानी लखनऊ में RTE अंतर्गत हज़ार से अधिक बच्चों की पढ़ाई दांव पर, नहीं म‍िल सका प्रवेश, निजी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाई हेतु हिम्मत नहीं जुटा पा रहा विभाग।

राजधानी लखनऊ में RTE अंतर्गत हज़ार से अधिक बच्चों की पढ़ाई दांव पर, नहीं म‍िल सका प्रवेश, निजी स्कूलों के खिलाफ कार्यवाई हेतु हिम्मत नहीं जुटा पा रहा विभाग।


 कई साल से शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करने वाले निजी स्कूलों पर बेसिक शिक्षा विभाग इस बार भी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा सका। हर बार की तरह इस बार भी दाखिले की समय सीमा समाप्त हो गई और करीब एक हज़ार से अधिक बच्चे दाखिले से वंचित रह गए। मगर जिम्मेदारों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा। जिम्मेदार हर बार की तरह इस बार भी नोटिस जारी करने तक सीमित रह गए। ऐसे में सवाल इस बात का है की दाखिला न पाने वाले एक हज़ार बच्चों का भविष्य क्या होगा? स्वाभाविक है कि उन्हें इस बार क्या बिना दाखिले व पढ़ाई के ही रहना होगा।


दरअसल, राजधानी में शिक्षा के अधिकार के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए इस बार तीसरे चरण में 17 जुलाई से 10 अगस्त तक आवेदन करना था। 11 से 12 अगस्त के बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र का सत्यापन कर उन्हें लॉक करना था। विभाग की ओर से 14 अगस्त को लॉटरी निकाली गई और 30 अगस्त तक पात्र बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित कराया जाना था। मगर हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदार तमाम बच्चों को दाखिला दिलाने में नाकाम साबित हुए। इससे भी अधिक गंभीर बात यह रहेगी जिम्मेदारों ने इन निरंकुश निजी स्कूलों पर कोई ठोस कार्रवाई करने की इस बार भी हिम्मत नहीं दिखाई। शायद यही कारण है कि निजी स्कूल शिक्षा के अधिकार के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों को दाखिला देने में दिलचस्पी नहीं दिखाते।


राजधानी में ऑनलाइन माध्यम से 11729 और ऑफलाइन माध्यम से करीब 900 पात्र बच्चों को शिक्षा के अधिकार के तहत दाखिला दिलाया जाना था। मगर दाखिले को लेकर विभाग द्वारा निर्धारित तारीख बीतने के बाद भी महज करीब 10000 बच्चों को ही निजी स्कूलों में दाखिला मिल सका। जबकि करीब एक हजार से अधिक बच्चे इस बार अभी दाखिले से वंचित रह गए हैं। आरटीई को लेकर बच्चों को निशुल्क शिक्षा मुहैया कराने को लेकर अधिकारियों की ओर से बड़े-बड़े दावे भी किए जाते हैं, मगर  राजधानी के हाल को देखकर  प्रदेश के अन्य जिलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।


'इस सत्र अभी तक करीब 10000 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया गया है। व्यवहारिक रूप से अभी भी दाखिले हो रहे हैं। जिन स्कूलों ने बच्चों को दाखिला नहीं दिया हैं, उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।'  -दिनेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ

ठंड की आमद और स्वेटर का पता नहीं, बेसिक शिक्षा विभाग में लेटलतीफी वाला रवैया

ठंड की आमद और स्वेटर का पता नहीं, बेसिक शिक्षा विभाग में लेटलतीफी वाला रवैया 


लखनऊ: ठंड ने अपनी आमद दर्ज करा दी है यही कारण है कि लोग ने स्वेटर और मफलर के साथ घर से बाहर निकलना शुरू कर दिया है। मगर दूसरी ओर बेसिक शिक्षा विभाग के तहत संचालित परिषदीय स्कूल के बच्चों को अभी स्वेटर नसीब नहीं हुआ है। खुद अभिभावक भी स्वेटर के लिए स्कूलों से संपर्क कर रहे हैं।जबकि विभाग की ओर से बीते कई दिनों से दावा किया जा रहा है  कि जल्द ही स्वेटर वितरित हो जाएंगे।


मौजूदा समय में कोरोना संक्रमण के चलते स्कूल बंद हैं। इसकारण बच्चे स्कूल नहीं आ रहे हैं। मगर सरकारी निर्देशों के तहत उन्हें ठंड से पहले स्वेटर वितरित हो जाना है। जिला स्तर पर अधिकारियों ने खाना पूरी करने के लिए एक दो स्कूलों में कुछ बच्चों को स्वेटर वितरित कराए। मगर शारीरिक दूरी के मानक का पालन नहीं किया गया। इसे लेकर तमाम सवाल खड़े हुए। जिसके बाद से विभाग ने किनारा ही काट लिया।


इसे बेसिक शिक्षा विभाग का दुर्बल रवैया ही कहा जाएगा कि  नवंबर का आधा महीना भी चुका है मगर विभाग द्वारा परिषदीय विद्यालय के बच्चों को स्वेटर नहीं मुहैया कराया जा सके। अगर ऐसा ही रवैया विभाग का रहा तो इस जाड़े को बच्चों को बिना स्वेटर ही काटना होगा।


बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि स्वेटर आ चुके हैं। उनके वितरण का काम युद्ध स्तर पर कराया जाएगा। प्रयास यही है कि नवंबर अंत तक जिले के सभी परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के सभी बच्चों को स्वेटर मिल जाएं।

Friday, October 23, 2020

स्कूलों में कम पहुंच रहे थे छात्र तो जल्द हो गई दशहरा की छुट्टी

स्कूलों में कम पहुंच रहे थे छात्र तो जल्द हो गई दशहरा की छुट्टी

 
लखनऊ : सात महीने बाद राजधानी में खुले स्कूल तीन दिन बाद बंद होने लगे हैं। विद्यार्थियों की कम संख्या के चलते अभी से दशहरा की छुट्टी होने लगी है।


कुछ स्कूल दशहरा के बाद खुलेंगे तो कई ने दो नवंबर से खोलने का निर्णय लिया है। 19 अक्तूबर से हाईस्कूल व इंटर के लगभग सभी सरकारी स्कूल खुल गए।

वहीं, कई निजी स्कूल अभिभावकों की सहमति के बाद खुले। हालांकि, इसके तीन दिन बाद से स्कूल बंद होने भी शुरू हो गए। स्कूल प्रशासन की मानें तो त्यौहार की वजह से छात्रों की संख्या कम रही।


अब जब स्कूल खुलेंगे तो छात्रों की संख्या में इजाफा होगा। 19 से खोले गए स्कूलों में से अधिकतर केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों के मुख्य विषय और प्रैक्टिकल के लिए खोले गए थे। त्यौहार बाद ये स्कूल बाकी कक्षाओं के लिए भी खोले जाएंगे।


दो नवंबर से खुलेंगे केवी स्कूल
केंद्रीय विद्यालयों में 21 अक्तूबर से ही दशहरा का अवकाश घोषित हो गया, वहीं अब स्कूल दो नवंबर से खुलेंगे। खास बात है कि सबसे बड़ी छात्र संख्या वाले केवी गोमतीनगर और अलीगंज में महज तीन से चार प्रतिशत अभिभावकों ने ही बच्चों को स्कूल भेजने की सहमति दी थी। ऐसे में एक कक्षा में दो से चार छात्र ही बैठे। केवी प्रशासन के अनुसार दशहरे की छुट्टियों बाद ज्यादा संख्या में छात्र आएंगे। 


बाल विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य आरके पांडेय ने बताया कि उनके यहां कक्षा 9 से 12 में जितने अभिभावकों ने सहमति दी थी, उसके सापेक्ष भी छात्र नहीं पहुंचे। चार से दस छात्र ही स्कूल आए। कक्षा में एक या दो छात्र ही बैठे थे। उन्होंने बताया कि त्यौहार की वजह से छात्रों ने घर पर रहना सही समझा। गुरुवार से यहां दशहरा का अवकाश घोषित हो गया है। अब स्कूल दो नवंबर से खुलेगा। जयपुरिया स्कूल, गोमतीनगर में भी सात छात्र ही पहुंचे। ऐसे में यहां भी अवकाश घोषित कर दिया गया। सेंट जोसेफ स्कूल की सभी शाखाओं में शुक्रवार से छुट्टी हो गई है। एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि दशहरा बाद कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों को बुलाया गया है।


सीएमएस में भी आज से अवकाश
सिटी मोंटेसरी स्कूल ने भी शुक्रवार से दशहरा अवकाश की घोषणा कर दी है। यहां केवल कक्षा 10 और 12 के छात्रों को बुलाया गया था। लखनऊ पब्लिक स्कूल में 10वीं, 12वीं के छात्रों को ही बुलाया गया, आरएलबी की सभी आठ शाखाओं में कक्षा 12 के छात्रों को ही प्रैक्टिकल के लिए बुलाया गया। सेंट फ्रांसिस और कैथेड्रल में भी केवल बोर्ड परीक्षा के मद्देनजर छात्रों को बुलाया। इससे बहुत कम उपस्थिति रही। किसी कक्षा में तीन तो किसी में चार से पांच छात्र ही उपस्थित रहे। इन स्कूलों में दशहरा अवकाश घोषित कर दिया गया है। दशहरा और ईद-ए-मिलाद के अवकाश के चलते अधिकतर स्कूलों ने नए सिरे से दो नवंबर से विद्यालय खोलने का निर्णय लिया था। अवध कॉलेजिएट, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी, जीडी गोयनका, पायनियर मोंटेसरी, स्प्रिंग डेल समेत कई स्कूलों ने पहले से दो नवंबर से खोलने का निर्णय लिया था।

Sunday, October 18, 2020

माध्यमिक : सात महीने बाद आज से खुलेंगे 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल, प्राइवेट स्कूलों ने लिया ये फैसला

बच्चों के लिए आज से खुलेंगे माध्यमिक स्तर स्कूल, बिना मास्क नहीं मिलेगा प्रवेश, ज्यादातर अभिभावकों ने नहीं दी अब तक सहमति

माध्यमिक : सात महीने बाद आज से खुलेंगे 9वीं से 12वीं कक्षा तक के स्कूल, प्राइवेट स्कूलों ने लिया ये फैसला।।


कोरोना संक्रमण काल में सात माह बाद प्रदेश में आज से कक्षा 9 से 12वीं तक के स्कूल खोले जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने राजकीय विद्यालयों में संक्रमण रोकने के पुख्ता इंतजाम का दावा किया है। वहीं सहायता प्राप्त और वित्तविहीन विद्यालयों को बच्चों को कोरोना से बचाने की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।


हालांकि, अधिकतर बड़े निजी स्कूल कोरोना को देखते हुए पहले 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों को ही बुलाएंगे। 9वीं, 11वीं के छात्रों को दशहरे के बाद बुलाया जाएगा। वहीं, यूपी बोर्ड व सीबीएसई के सरकारी स्कूलों ने सोमवार से 9 से 12 तक के उन सभी छात्रों को बुलाने का निर्णय लिया है, जिनके अभिभावकों की सहमति मिल गई है।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय ने बताया कि सोमवार से कक्षा 9 से 12 तक के स्कूलों का संचालन दो पालियों में किया जाएगा। कक्षा 9 एवं 10 के लिए पहली पाली सुबह 8.50 से 11. 50 बजे और 11 एवं 12 के लिए दूसरी पाली दोपहर 12.20 से 3.20 बजे तक संचालित होगी।


उन्होंने बताया कि जिला विद्यालय निरीक्षकों व स्कूल प्रबंधन को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी संचालन प्रक्रिया के मानकों (एसओपी) के अनुसार ही स्कूलों का संचालन के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों को कोरोना से बचाने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा। मास्क, साबुन व सैनिटाइजर की भी व्यवस्था करनी होगी। 


नहीं मिल रही अभिभावकों की सहमति 
विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि सभी जिलों में अभिभावकों से लिखित सहमति नहीं मिल रही है। इसके बिना विद्यार्थी को पठन-पाठन की अनुमति नहीं दी जा सकती है। विभाग को उम्मीद है कि एक बार स्कूल खुलने के बाद अभिभावक रुझान देखकर अनुमति देने लगेंगे।


आज से नहीं खुल रहे कई स्कूल
जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि उनका स्कूल दो नवंबर से खुलेगा। इससे पहले अभिभावकों के साथ वर्चुअल बैठक भी होगी। अवध कॉलेजिएट, पायनियर मोंटेसरी, वरदान इंटरनेशनल एकेडमी, लामार्ट गर्ल्स, लामार्ट बॉयज समेत कई स्कूल अगले महीने खोलने का विचार कर रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल ने भी बताया कि उनके संगठन के बैनर तले भी काफी स्कूल अगले महीने से खुलेंगे।

 
प्रयागराज : 19 अक्टूबर से सभी शैक्षिक बोर्ड के विद्यालय खुल रहे हैं। स्कूलों में बिना मास्क प्रवेश नहीं दिया जाएगा। विद्यालयों में बच्चों के पास यदि मास्क नहीं होगा तो उन्हें मास्क देने की भी तैयारी है। कक्षा नौ से 12वीं तक के ही विद्यार्थी स्कूलों आएंगे। सभी की ऑनलाइन कक्षाएं पूर्व की तरह चलती रहेंगी।


रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडेय ने बताया गया कि दो पालियों में 50 फीसद विद्यार्थी ही बुलाएं जाएंगे। सर्वार्य इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मुरारजी त्रिपाठी ने बताया कि अभिभावकों से सहमति ली जा रही है। सीएवी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. टीपी पाठक ने बताया कि कक्षाएं शुरू करने और कोरोना से बचने के लिए सभी उपाय किए हैं।


नहीं दिए सहमतिपत्र
डीपी पब्लिक स्कूल की प्रधानाध्यापक जया सिंह ने बताया कि अभिभावकों अनुमति नहीं दी। शिवचरण दास कन्हैयालाल इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य लालचंद्र पाठक ने बताया कि स्कूल खोलने की तैयारी है लेकिन अभी सहमतिपत्र नहीं भेजे हैं।


तैयारियों का लिया जायजा
तैयारियों का जायजा लेने के लिए डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा राजकीय बालिका इंटर कॉलेज पहुंचे। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन कक्षाएं पहले की तरह चलती रहेंगी। विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों की भी कक्षाएं नियमित रूप से चलें। इसी क्रम में जीजीआइसी कटरा का निरीक्षण डीआइओएस प्रथम राम नारायण विश्वकर्मा व डीआइओएस द्वितीय देवी सहाय तिवारी ने किया।


सम और विषम अनुक्रमांक के अनुसार बुलाएं जाएंगे विद्यार्थी
केंद्रीय विद्यालय ओल्ड कैंट में 11वीं और 12वीं की कक्षाएं सुबह आठ बजे से 11 बजे तक चलेंगी। कक्षा नौ और 10 की कक्षाएं 11 बजे से दो बजे तक चलेंगी। सम अनुक्रमांक वाले विद्यार्थी सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को बुलाए जाएंगे जब कि विषम अनुक्रमांक वाले विद्यार्थी मंगलवार, गुरुवार और शनिवार को बुलाए जाएंगे

Thursday, October 8, 2020

निजी स्कूल जवाबदेही से रहे बच, बच्चों में कोरोना संक्रमण होने पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं

निजी स्कूल जवाबदेही से रहे बच, बच्चों में कोरोना संक्रमण होने पर जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं

 
कोरोना काल में स्कूल खोलने के मुद्दे पर अभिभावकों में भी एक राय नहीं बन सकी है। निजी स्कूलों के छात्रों के 40 प्रतिशत अभिभावकों में इसकी सहमति बनती दिख रही है।


वहीं, सरकारी स्कूलों के छात्रों के महज 15 फीसदी अभिभावक ही सहमति देते दिख रहे हैं। उधर, अब कई स्कूल 15 अक्तूबर के बजाय दो नवंबर से खोले जाने को लेकर तैयारी कर रहे हैं।

 
राजधानी में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर शुरुआती रुझान मिलने लगे हैं। स्कूलों ने व्हाट्सएप मैसेज, गूगल फॉर्म, एप आदि से अभिभावकों से स्कूल खोले जाने को लेकर सहमति मांगी है।

अब धीरे-धीरे अभिभावकों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। फिलहाल निजी स्कूल खोले जाने को लेकर अभिभावकों में ज्यादा सहमति दिख रही है, वहीं सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों के अभिभावक अभी सोच विचार कर रहे हैं।


अनुमान के मुताबिक निजी स्कूल खोलने को लेकर 40 फीसदी अभिभावक तैयार दिख रहे हैं। सरकारी स्कूलों को लेकर यह आंकड़ा 15 प्रतिशत तक ही है।


निजी स्कूलों को लेकर स्थिति
सेंट जोसेफ स्कूल के निदेशक अनिल अग्रवाल ने बताया कि उनकी चार ब्रांच में स्कूल खोलने की सहमति को लेकर अभिभावकों का आंकड़ा 50 प्रतिशत पार कर गया है। 13 अक्तूबर तक सहमति पत्र मंगवाया है। उस दिन सहमति की गणना होगी। अवध कॉलेजिएट के प्रबंधक सर्वजीत सिंह ने बताया कि स्कूल खोले जाने को लेकर अभिभावक काफी सकारात्मक दिख रहे हैं। 30 प्रतिशत से ज्यादा राजी हैं। यह आंकड़ा 50 प्रतिशत को भी पार कर जाएगा। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्य रिचा खन्ना ने बताया कि स्कूल खोले जाने को लेकर 35 प्रतिशत अभिभावकों ने सहमति दे दी है। रोजाना अभिभावकों के सहमति पत्र आ रहे हैं। साथ ही यह प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है।


सरकारी स्कूलों को लेकर रुझान
अमीनाबाद इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य साहेब लाल मिश्रा ने बताया कि अभिभावकों की सहमति महज 15 से 20 प्रतिशत के बीच है। इससे ज्यादा रुझान देखने को नहीं मिले। जीजीआईसी सरोसा भरोसा की प्रवक्ता डॉ वंदना तिवारी ने बताया कि सरकारी स्कूलों के छात्रों के अभिभावकों को कोरोना व अन्य मुद्दों को लेकर जागरूकता की कमी है। बहुत कम अभिभावक स्कूल खोले जाने को लेकर राजी हैं। धीरे-धीरे स्कूल खुले और व्यवस्थाएं अच्छी होगी तो अभिभावकों के विचार में बदलाव आएगा। राजकीय जुबली इंटर कॉलेज, राजकीय हुसैनाबाद इंटर कॉलेज, राजकीय इंटर कॉलेज निशातगंज में भी अभिभावकों की सहमति 10 प्रतिशत से ज्यादा नहीं है। स्कूलों ने कहा कि इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है कि सहमति पत्र पर अभिभावक जवाब दे रहे हैं या छात्र।


कई स्कूल दशहरा बाद खुलने की तैयारी में
कई स्कूल दशहरा के बाद खुलने की तैयारी में हैं। इस महीने अभिभावकों को तैयार करने के बाद दो नवंबर से स्कूल खोलेंगे। पायनियर मांटेसरी इंटर कॉलेज की प्रधानाचार्य शर्मिला सिंह ने बताया कि उनके यहां पर परीक्षाएं होनी हैं। इसके बाद दशहरा अवकाश हो जाएगा। ऐसे में दशहरा की छुट्टियों के बाद ही स्कूल खोलने का मन बनाया गया है। वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्या रिचा खन्ना ने बताया कि उनका स्कूल भी दशहरा अवकाश के बाद दो नवंबर से खोला जाएगा। एसोसिएशन ऑफ प्राइवेट स्कूल ने भी दो नवंबर से स्कूल खोले जाने का फैसला लिया है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल के चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि अभिभावकों के साथ बैठक करने के बाद दो नवंबर से स्कूल खोला जाएगा।


राजधानी लखनऊ में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है। जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से जवाब-तलब जरूर किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उधर, बजट की कमी सरकारी स्कूलों को खोले जाने में बाधा बन रही है।


जारी शासनादेश के अनुसार, स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। उनकी सहमति पर ही छात्रों को बुलाया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने एक कॉमन सहमति पत्र तैयार किया है। इस पर यह शर्त लिखी है कि यदि बच्चा संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी।


स्कूलों ने अपने सहमति पत्र पर यही शर्त रखी है और अभिभावकों को हस्ताक्षर करने के लिए भेज रहे हैं। इस पर शिक्षा विभाग ने ऐतराज जताया है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है। पढ़ाई के दौरान यदि कोई छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल से जवाब-तलब किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते।

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लखनऊ : अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खुलेंगे, शर्तो के साथ 11 व 12 वीं क्लास को मिली अनुमति।


● शिक्षा विभाग और स्कूल प्रबंधकों के साथ बैठक में फैसला

● प्रोटोकॉल के पालन व अभिभावकों की अनुमति से ही स्कूल में प्रवेश

● अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खुलेंगे


लखनऊ : स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में कोरोना संक्रमण पर फंसा पेंच

 
स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में कोरोना संक्रमण पर फंसा पेंच
राजधानी में 15 अक्तूबर से स्कूल खोले जाने को लेकर बच्चों में संक्रमण मिलने पर जिम्मेदारी तय होने का पेंच फंस गया है।


जहां निजी स्कूल सहमति पत्र पर अभिभावकों से इस शर्त के साथ हस्ताक्षर करा रहे हैं कि यदि छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी।


वहीं, जिला विद्यालय निरीक्षक ने साफ किया है कि ऐसी स्थिति में स्कूल से जवाब-तलब जरूर किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उधर, बजट की कमी सरकारी स्कूलों को खोले जाने में बाधा बन रही है।


जारी शासनादेश के अनुसार, स्कूल खोलने के लिए अभिभावकों की सहमति जरूरी है। उनकी सहमति पर ही छात्रों को बुलाया जाएगा। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन ने एक कॉमन सहमति पत्र तैयार किया है।


इस पर यह शर्त लिखी है कि यदि बच्चा संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं होगी। स्कूलों ने अपने सहमति पत्र पर यही शर्त रखी है और अभिभावकों को हस्ताक्षर करने के लिए भेज रहे हैं।
इस पर शिक्षा विभाग ने ऐतराज है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि कैंपस में बच्चों के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी स्कूल प्रशासन की है।


पढ़ाई के दौरान यदि कोई छात्र संक्रमित पाया जाता है तो स्कूल से जवाब-तलब किया जाएगा। वे जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते। यह पता लगाया जाएगा कि कहीं स्कूल में तो संक्रमण नहीं फैला है।
साथ ही स्कूल में वायरस की रोकथाम के लिए की गई व्यवस्था जांची जाएगी। स्कूलों की जिम्मेदारी होगी कि वे छात्रों को कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते हुए सुरक्षित रखें। इसमें कोताही पर स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।


स्कूल संगठन अभी भी शर्त पर अड़ा
शिक्षा विभाग के द्वारा रुख साफ किए जाने के बावजूद निजी स्कूल संगठन शर्त पर अड़ा है। अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि जिलाधिकारी की बैठक में सारे नियम साफ कर दिए गए हैं। क्या करना है क्या नहीं करना है, इसके दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि कोई स्कूल कोविड प्रोटोकॉल का पालन करते करने में लापरवाही बरतता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। लेकिन पालन के बावजूद कार्रवाई की जाएगी तो गलत होगा। बताया कि स्कूलों ने एसओपी में साफ निर्देश दिया है कि अभिभावक अपने बच्चों के स्वास्थ्य का ध्यान रखें। उनकी जरा सी भी तबीयत खराब हो तो दवाई देकर स्कूल न भेजें। जब पूरी तरह से स्वस्थ और संतुष्ट हो जाएं तभी स्कूल भेजें। छात्र यदि पॉजिटिव होता है तो किस आधार पर शिक्षा विभाग यह आरोप लगा सकता है कि संक्रमण स्कूल ने ही फैलाया होगा। इस तरह का आरोप निराधार होगा। अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने संगठन द्वारा बनाई गई एसओपी और सहमति पत्र शासन और जिलाधिकारी के सामने रखा है। इस पर कोई विवाद नहीं है।


सरकारी स्कूलों में बजट ने लगाया अड़ंगा
स्कूल खोले जाने को लेकर सरकारी स्कूलों में अलग समस्या हो गई है। वे कोविड प्रोटोकॉल का पालन में आ रहे खर्चे को लेकर परेशान हैं। स्कूल यह खर्चा उठाने को तैयार नहीं है। वे सरकार से इसके लिए ग्रांट की मांग कर रहे हैं। जिले में 51 राजकीय और 101 सहायता प्राप्त विद्यालय हैं। समय-समय पर कक्षाओं व परिसर का सैनिटाइजेशन, छात्रों व स्टाफ के लिए हर वक्त सैनिटाइजर उपलब्ध रखना, अतिरिक्त थर्मल स्कैनर व ऑक्सीमीटर खरीदना और मास्क उपलब्ध कराना आदि का खर्च स्कूल प्रशासन वहन करने को तैयार नहीं। जबकि जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि स्कूल में व्यवस्थाएं उपलब्ध कराने का जिम्मा स्कूल प्रबंधन का होगा। इसे आधार बनाकर जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेशीय मंत्री डॉ. आरपी मिश्रा ने बताया कि अभी परिस्थितियां अच्छी नहीं है। स्कूल नहीं खोला जाना चाहिए। छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर खतरा है। कोविड प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए प्रत्येक स्कूल में रोजाना 800 से 1000 रुपये का होने वाला खर्चा कहां से आएगा। उन्होंने बताया कि संगठन सरकार से इसके लिए अतिरिक्त ग्रांट की मांग करती है।


अभिभावक के बजाय बच्चे भेज रहे सहमति पत्र
कई निजी स्कूल अभिभावकों से सहमति गूगल फॉर्म पर मांग रही हैं। गूगल फॉर्म पर अभिभावकों को हां और न में जवाब देना है। यहां तक कि जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय से जो सर्वे कराया जा रहा है वह भी गूगल फॉर्म पर ही है। विद्यालय खुलने पर अभिभावकों को लिखित में सहमति पत्र छात्र के हाथ भिजवाना पड़ेगा। इसमें कई स्कूलों में गड़बड़ी की शिकायत मिली है। कई स्कूल प्रशासन ने बताया कि छात्र खुद ही गूगल फॉर्म पर स्कूल आने के लिए न का विकल्प भर कर भेज दे रहे हैं। अभिभावकों से बातचीत पर गड़बड़ी की पोल खुलने लगी है। स्कूल प्रशासन अब अभिभावकों के साथ मीटिंग कर सहमति लेंगे।


राजधानी में बच्चों के अभिभावकों की सहमति बिना स्कूल नहीं खोले जाएंगे। यह फैसला जिला प्रशासन ने बुधवार को स्कूल प्रबंधकों व अभिभावक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद लिया है। जिलाधिकारी अभिषेक प्रकाश ने साफ किया कि इस दौरान ऑनलाइन कक्षाएं जारी रहेंगी। उन्होंने इसे प्राथमिकता देने को कहा।


 डीएम ने बताया कि प्रथम चरण में कक्षा 10 व 12, द्वितीय चरण में कक्षा 9 व 11 और तृतीय चरण में फीड बैक आने के बाद छोटे बच्चों के स्कूल खोलने पर निर्णय लिया जायेगा। डीएम ने कहा कि हर स्कूल में एक मेडिकल रूम बनाया जाए। इसमें दो बेड हो। चिकित्सीय सुविधा के साथ जानकारी रखने वाला व्यक्ति उपस्थित रहे।


 LUCKNOW: प्रशासन की हरी झंडी मिलने के साथ ही 15 अक्टूबर से राजधानी में स्कूल खोलने को लेकर बना असमंजस समाप्त हो गया। बुधवार को स्कूल प्रबंधकों और शिक्षा विभाग की बैठक के बाद प्रशासन ने शर्तो के साथ अनुमति प्रदान कर दी। फिलहाल नौ से बारह तक की कक्षाओं को ही कड़ी शतरें के साथ ही चलाने की अनुमति दी गई है। पहले चरण में कक्षा 11 और 12 तथा द्वितीय चरण में कक्षा नौ और 10 के विद्यार्थियों को बुलाया जाएगा। इसके साथ ही स्कूलों को चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी।


कोरोना के चलते बीते कई महीनों से स्कूल बंद हैं और बच्चे ऑनलाइन क्लास के सहारे पढ़ाई कर रहे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा स्कूल खोलने की घोषणा के बाद भी राजधानी में कई स्कूल असमंजस में थे। बच्चों की सुरक्षा को फिक्रमंद स्कूल प्रबंधक स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहे थे। बुधवार को डीएम के साथ विद्यालय प्रबंधकों एवं अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों की बैठक में शतरे के साथ स्कूल खुलने पर सहमति बनी। स्कूलों के सुरक्षा इंतजामों से संतुष्ट होकर डीएम ने हरी झंडी दिखा दी।


बच्चों की सुरक्षा अहम

डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि विद्यालय खोलकर बच्चों को बुलाए जाने के लिए कोरोना प्रोटोकॉल से संबंधित जो गाइडलाइन शासन द्वारा जारी की गई है उसका पूरी तरह से पालन कराया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा हमारे लिए सबसे अहम है। सभी राजकीय, एडेड और निजी माध्यमिक विद्यालयों को शासन की गाइडलाइन जारी कर दी गई है। विद्यालयों के कक्ष, जहां बच्चे बैठेंगे वहां उसका रोजाना सैनिटाइज करना होगा। बिना मास्क के किसी भी बच्चे को विद्यालय के अंदर प्रवेश नहीं दिया जाएगा।


बच्चों को स्कूल भेजने की पक्ष में नहीं हैं अभिभावक
कई अभिभावक संगठनों की ओर से अभी स्कूल न शुरू किए जाने पर जोर दिया जा रहा है। इन संगठनों की मांग है कि जब तक वैक्सीन न आ जाए, बच्चों के जीवन को खतरे में न डाला जाए।

अभी स्थितियां अच्छी नहीं है। बच्चों की जान को जोखिम में डालना ठीक नहीं होगा। फिलहाल, स्कूल न खोले जाएं।
राकेश सिंह, अध्यक्ष, लखनऊ अभिभावक विचार परिषद

निजी स्कूल प्रबंधन सिर्फ अपना लाभ देख रहे हैं। उन्हें बच्चों की चिंता नहीं है। अभिभावकों पर सहमति देने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा है।               
प्रदीप कुमार श्रीवास्तव, अध्यक्ष, अभिभावक कल्याण संघ

इन प्रबंधनों ने स्कूल खोलने से किया इनकार  
एलपीएस : निदेशिका रश्मि पाठक ने बताया कि उन्होंने अभिभावकों से सहमति मांगी थी। बहुमत में अभिभावकों ने असहमति जताई है। इस वजह से ही फिलहाल स्कूल न शुरू करने का फैसला लिया है।

जीडी गोयनका : चेयरमैन सर्वेश गोयल ने बताया कि मौजूदा संक्रमण के मामलों को देखते हुए अभी स्कूल नहीं शुरू करने का निर्णय लिया है। 

स्कूल शुरू करने के पक्ष में प्रबंधनों का तर्क
15 अक्तूबर से स्कूल शुरू करने पर निजी स्कूलों के संगठनों का कहना है कि परीक्षा शुरू होने जा रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पर शासन के निर्देशों के हिसाब से ही स्कूल शुरू किए जाएंगे।

सैनिटाइजेशन से लेकर थर्मल स्कैनिंग तक की व्यवस्था है। शासन के निर्देश का पालन करते हुए ही स्कूल शुरू किए जाएंगे। लेकिन, प्रबंधन जिम्मेदारी नहीं लेगा।
अनिल अग्रवाल, अध्यक्ष, अनएडेड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन

बच्चों की सुरक्षा के लिये सभी सावधानियां बरती जा रही हैं। ऐसे में स्कूल शुरू करने की अनुमति मिलनी चाहिए।
आनंद द्विवेदी, अध्यक्ष, स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक एसोसिएशन

Monday, October 5, 2020

शिक्षकों बिन स्कूल में कैसे हो पढ़ाई? राजधानी के नगर क्षेत्र के 22 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नहीं, 69 में सिर्फ एक शिक्षक

शिक्षकों बिन स्कूल में कैसे हो पढ़ाई? राजधानी के नगर क्षेत्र के 22 परिषदीय विद्यालयों में शिक्षक नहीं, 69 में सिर्फ एक शिक्षक

 
सरकार ने 15 अक्टूबर से माध्यमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों को बुलाकर पढ़ाई कराने की तैयारी शुरू की है। इन विद्यालयों में संसाधन भी हैं और शिक्षक भी, लेकिन ऐसी सूरत परिषदीय विद्यालयों की नहीं। लखनऊ के नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों का टोटा है। आलम यह है कि कुल 254 में से 22 में तो कोई शिक्षक ही नहीं हैं। 69 में सिर्फ एक गुरुजी के भरोसे पूरा विद्यालय है। परिषदीय विद्यालयों में सीनियर कक्षा के बच्चों को बुलाकर पढ़ाई कराने का निर्णय हुआ है।


अपना स्कूल खाली, दूसरे विद्यालय में करेंगे पढ़ाई

नगर क्षेत्र के जोन एक-दो, तीन और चार में करीब 254 विद्यालय हैं। इनमें कई ऐसे विद्यालय हैं जहां शिक्षक नहीं हैं। वहां दूसरे विद्यालय के शिक्षामित्र भेजे जाते हैं। शिक्षकों की कमी के कारण प्राथमिक विद्यालय पिपराघाट के बच्चे कैबिनेटगंज प्राथमिक विद्यालय भेजे जाने की व्यवस्था की गई है। दुबग्गा समेत कई इलाकों में ऐसे विद्यालय हैं जिनके बच्चे दूसरे विद्यालय जाएंगे।

विद्यालयों में बुलाए गए बच्चे तो कैसे चलेंगी कक्षाएं


इन विद्यालयों में नहीं शिक्षक

जोन एक : अमीनाबाद, आजादनगर, बाजार झाऊलाल, बेहसा-एक, बेहसा-दो, मुक्ति खेड़ा।

जोन दो : चक्कर पुरवा, धनेहर खेड़ा, गौरी खेड़ा-एक, गौरी दो, गोदौंदा, हैवतमऊ मवैया, हसनपुरिया।

जोन तीन : कुंडरी रकाबगंज, मार्टिन पुरवा, लोकमान गंज, मारवाड़ी गली, मटियारी, नया गदौरा, रानीगंज।

जोन चार : शंकर पुरवा, उदयगंज।

एकल शिक्षक व्यवस्था

’ जोन एक के 20 विद्यालयों में।

’ जोन दो के 19 विद्यालयों में।

’ जोन तीन के 20 विद्यालयों में।

’ जोन चार के 10 विद्यालयों में।

नगर क्षेत्र में शिक्षकों की कमी है। यहां सीधे पो¨स्टग का कोई प्रावधान नहीं है। यह शासन की व्यवस्था है। जहां, शिक्षक नहीं हैं वहां पर अन्य विद्यालयों को शिक्षकों को भेजकर विद्यालय खोले जा रहे हैं। - दिनेश कुमार, बीएसए

45 फीसद विद्यालय ऐसे हैं जहां या तो शिक्षक नहीं हैं या एकल शिक्षक की व्यवस्था है। शासन को नगर क्षेत्र की सेवा नियमावली में संशोधन करते हुए बिना ज्येष्ठता खोए ग्रामीण क्षेत्रों के शिक्षकों को नगर क्षेत्र में समायोजित करना चाहिए। - विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक, प्रशिक्षित स्नातक एसो.

Wednesday, September 23, 2020

डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व डीएलएड 2019 द्वितीय सेमेस्टर के डायट एवं निजी संस्थानों के प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप संचालित किये जाने के सम्बन्ध में

लखनऊ : डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व डीएलएड 2019 द्वितीय सेमेस्टर के डायट एवं निजी संस्थानों के प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप संचालित किये जाने के सम्बन्ध में

डीएलएड प्रशिक्षुओं की ऑनलाइन इंटर्नशिप

 
प्रयागराज : कोरोना संक्रमण के दौर में डीएलएड के प्रशिक्षुओं की इंटर्नशिप भी ऑनलाइन कराने के आदेश हुए हैं। प्रदेश के डीएलएड 2018 चतुर्थ सेमेस्टर व 2019 के द्वितीय सेमेस्टर के वे प्रशिक्षु जो डायट व निजी कालेजों में प्रशिक्षण ले रहे हैं प्रतिभाग करेंगे। यह इंटर्नशिप प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के सहयोग से कराई जाएगी। सभी संस्थानों को प्रशिक्षुओं की सूचनाएं तैयार कराने के निर्देश भी दिए जा चुके हैं। 


उप शिक्षा निदेशक डा. पवन कुमार की ओर से जारी आदेश में कहा है कि इंटर्नशिप की अवधि पांच सप्ताह रहेगी और सभी प्रशिक्षुओं को प्रतिभाग करना अनिवार्य है। इसे प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के सहयोग से डायट की ओर से संचालित किया जाएगा। हर प्रशिक्षु का नाम, दूरभाष नंबर व संख्या की सूचना विद्यालय के प्रधानाध्यापक को उपलब्ध कराई जाएगी। प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का आवंटन बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से होगा। इसके लिए वे खंड शिक्षा अधिकारियों से प्रस्ताव लें। 


इंटर्नशिप ऑनलाइन कक्षा शिक्षण से जुड़े कक्षा एक, दो, छह, सात व आठ के छात्र-छात्राओं से संबंधित होगा। प्रशिक्षुओं के लिए यह प्रशिक्षण करके सीखना के नाम से संचालित होगा। इसमें उन्हें भौतिक रूप से संस्थान या फिर विद्यालय में उपस्थित नहीं होना है। उप शिक्षा निदेशक ने सभी विवरण व अगली कार्यवाही के लिए रिपोर्ट 25 सितंबर तक मांगी है।

Saturday, September 19, 2020

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी

Right to Education : तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल नहीं रहे सुधर, स्कूलों को नोटिस जारी, बीएसए ने दी चेतावनी



Right to Education दाखिला न देने पर बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी की सूची। बीएसए बोले नोटिस के बाद भी दाखिला न लेने वाले स्कूलों पर होगी कड़ी कार्रवाई। ...


लखनऊ । तमाम जतन बाद भी निजी स्कूल सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। बीते वर्षो की तरह इस बार भी तमाम निजी स्कूलों ने शिक्षा का अधिकार (आरटीई) के तहत दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का दाखिला लेने में आनाकानी शुरू कर दी है। अभी तक दाखिला न लेने वाले करीब 21 स्कूलों को चिन्हित कर बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय नोटिस जारी की गई है। बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉक्टर दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसे स्कूलों को चिन्हित कर लिया गया है अगर वह दाखिला नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ सख्ती से पेश आया जाएगा।बहरहाल अब यह देखना है कि विभाग इन स्कूलों में बच्चों को दाखिला दिला पाता है या नहीं?


 इन स्कूलों को जारी हुई नोटिस
एग्जान मोंटेसरी स्कूल कैंपवेल रोड,एविज कान्वेंट स्कूल गढ़ी पीर खां, बीएसडी एकेडमी बरौरा, सेंट्रल अकैडमी सेक्टर 4 विकास नगर, टाउन हॉल पब्लिक स्कूल ठाकुरगंज, लखनऊ पब्लिक स्कूल राजाजीपुरम, सिटी इंटरनेशनल स्कूल ठाकुरगंज, न्यू पब्लिक स्कूल देवपुर पारा, राजकुमार एकेडमी मेहंदीगंज, ग्रीनलैंड स्कूल गोमती नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल जानकीपुरम विस्तार, संस्कार पब्लिक स्कूल इंदिरा नगर, टिनी टॉय स्कूल अलीगंज, टाउन हॉल स्कूल सेक्टर के अलीगंज, कैरियर कान्वेंट स्कूल सेक्टर 5 विकास नगर।

Tuesday, September 15, 2020

लखनऊ : बर्खास्त सात शिक्षकों से जल्द होगी वेतन की रिकवरी

लखनऊ : बर्खास्त सात शिक्षकों से जल्द होगी वेतन की रिकवरी

 
लखनऊ : राजधानी में भी बीएड और टीईटी के फर्जी अंकपत्र लगाकर नौकरी पाने वाले शिक्षकों ने नियुक्ति के वक्‍त हुए वेरीफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बीते कुछ माह में प्राथमिक विद्यालयों के सात ऐसे शिक्षक पकड़े गए, जिनकी बीएड व टीईटी की अंक तालिका फर्जी निकली। ऐसे शिक्षकों को बर्खास्त कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। अब इन दोषी शिक्षकों से वेतन की रिकवरी भी जल्द की जाएगी। बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी



तैयारी पूरी कर ली है। हालांकि, शिक्षा विभाग अभी तक फर्जी वेरीफिकेशन में संलिप्त शिक्षकों के मददगारों को चिह्वित नहीं कर पाया है। सात शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। इन शिक्षकों में मलिहाबाद प्राथमिक विद्यालय के सुशील तिवारी, हर्षनाग, रीमा पाल, मोहनलालगंज से नूर अमरीद, गोसाईगंज से आकाश श्रीवास्तव, बीकेटी से बबिता और ज्योति रावत हैं। इनके खिलाफ केस दर्ज कराई गई है। इसकी जांच चल रही है। चिनहट से नीलम यादव और गोसाईगंज से कमला वर्मा के भी शैक्षिक दस्तावेज फर्जी पाए गए थे। इनकी जांच एसआइटी कर रही है। बीएसए दिनेश कुमार ने बताया कि जो फर्जी शिक्षक नौकरी कर रहे थे, उनके वेतन को रिकवरी जल्द की जाएगी।

Sunday, September 13, 2020

लखनऊ : बड़े स्कूल नहीं ले रहे हैं गरीब बच्चों के दाखिले, अधिकारी बेबस

लखनऊ : बड़े स्कूल नहीं ले रहे हैं गरीब बच्चों के दाखिले, अधिकारी बेबस।

लखनऊ : प्रमुख संवाददाताबड़े स्कूलों में गरीब बच्चों के दाखिले कराने में बेसिक शिक्षा के जिले के अधिकारी बेबस नजर आ रहे हैं। वह स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करने की बजाय अभिभावकों को अदालत जाने की सलाह दे रहे हैं। इसकी वजह से अभिभावक अपने बच्चों को दाखिले के लिए भटक रहे हैं। राजधानी के तमाम बड़े स्कूलों ने आरटीई के तहत गरीब बच्चों को एडमिशन देने से मना कर दिया है।




बीएसए कार्यालय ने इस वर्ष आरटीई के तहत करीब 10,947 बच्चों को विभिन्न स्कूलों में दाखिले के लिए चयनित किया है। इसमें छोटे बड़े सभी कॉलेजों को शामिल हैं। सूची जारी होने के बाद अब बच्चों के अभिभावक जब दाखिले के लिए स्कूलों में जा रहे हैं तो वहां उन्हें ठेंगा दिखाया जा रहा। स्कूल संचालक दाखिले से साफ मना कर दे रहे हैं। वह कह रहे हैं कि एडमिशन नहीं लेंगे जिससे शिकायत करना हो करो।

------------------------इन स्कूलों में नहीं ले रहे हैं दाखिलेशहर के कई बड़े स्कूल ऐसे हैं जो एक भी गरीब बच्चे का एडमिशन नहीं ले रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक सिटी इंटरनेशनल स्कूल, सेंट्रल एकैडमी, पायनियर मांटेसरी स्कूल तथा सिटी मांटेसरी स्कूल जैसे कई अन्य कॉलेज भी हैं जिन्होंने एडमिशन नहीं लिया है।-------------------सीएमएस ने 48 बच्चों की खुद जांच करा कर बताया अयोग्य सिटी मांटेसरी स्कूल ने 48 बच्चों को यह कहकर वापस कर दिया है कि यह बच्चे दूसरी जगह पढ़ रहे थे। इसलिए एडमिशन के लिए अर्ह नहीं हैं। अब सवाल यह उठता है कि बीएसए कार्यालय की रिपोर्ट सही मानी जाय या सीएमएस की। अगर बीएसए कार्यालय ने परीक्षण के बाद इन्हें स्कूल आवंटित किया तो सीएमएस यह कैसे लिख रहा है कि यह बच्चे दूसरी जगह पढ़ रहे हैं। ----------------------मेरे दोनों बेटे चैतन्य व लक्ष्यदीप का नाम सेंट्रल एकेडमी के लिए आया।

मैं वहां गया तो स्कूल ने एडमिशन से मना कर दिया। कहा जिससे शिकायत करना हो करो एडमिशन नहीं लेंगे। अधिकारी अदालत जाने की सलाह दे रहे हैं।महेंद्र यादव, अभिभावक, विकास नगर----------मेरी बच्ची विदुषी दीक्षित को आर्मी पब्लिक स्कूल एलाट किया गया। वहां एडमिशन कराने पहुंचा तो बता दिया कि वहां नर्सरी की क्लास नहीं चलती। अब कहां जाएं।जितेश दीक्षित, नरही-----


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Monday, September 7, 2020

प्राइवेट में फीस देना भारी, बच्चे चले स्कूल सरकारी

प्राइवेट में फीस देना भारी, बच्चे चले स्कूल सरकारी

Saturday, September 5, 2020

लखनऊ में सर्वाधिक शिक्षकों ने कोरोना काल में बनाए शैक्षणिक वीडियो, हुआ सम्मान

लखनऊ में सर्वाधिक शिक्षकों ने कोरोना काल में बनाए शैक्षणिक वीडियो, हुआ सम्मान।

लखनऊ : कोरोना काल मे जब विद्यालय और कोचिंग सेंटर बंद हैं। बच्चे घरों में बैठकर संसाधनों के अभाव में पढाई कर रहे हैं। ऐसे में शासन के आदेश पर ई-ज्ञान गंगा एवं स्वयंप्रभा और डीडी यूपी पर माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों की कक्षाएं संचालित करने का आदेश हुआ तो सूबे में सवार्धिक शिक्षक लखनऊ से आगे आएं। उन्होंने बच्चों के लिए पाठ्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक वीडियो बनाएं।






जिन्हें दूरदर्शन पर प्रसारित किया गया। ऐसे सभी 40 शिक्षकों का शिक्षक दिवस के मौके राजकीय बालिका इंटर कॉलेज गोमतीनगर में प्रशस्तिपत्र देकर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर संयुक्त शिक्षा निदेशक सुरेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम में उक्त शिक्षक/ शिक्षिकाओं की महती भूमिका है। राज्य स्तर पर सर्वाधिक वीडियो तैयार करने का कार्य जनपद लखनऊ के शिक्षक/शिक्षिकाओं द्वारा किया गया। इस दैरान डीआइओएस (द्वितीय) नंदकुमार एवं डीआइओएस डॉ. मुकेश कुमार सिंह मौजूद रहें। कार्यक्रम के दौरान कोविड-19 के प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए सभी शिक्षक शिक्षिकाओं को सम्मानित कर प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया। वहीं, शिक्षक, शिक्षिकाओं द्वारा ने वीडियो निर्माण में अपने अनुभव को साझा करते हुए उक्त कार्यक्रम को आगे बढ़ाने हेतु संकल्प लिया गया साथ ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को कैसे जनपद स्तर पर लागू किया जाए इस पर भी विचार विमर्श हुआ।

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Tuesday, September 1, 2020

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

निलंबित शिक्षकों की जांच दबाए बैठे हैं खंड शिक्षा अधिकारी

 

लखनऊ : विभिन्न कारणों से निलंबित किए गए परिषदीय शिक्षकों के खिलाफ जारी जांच को खंड शिक्षा अधिकारी दबाए बैठे हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मामले हैं, जिनमें जांच रिपोर्ट लंबित है।


इससे जहां जांच की कार्यवाही के निस्तारण में विलंब हो रहा है, वहीं बेसिक शिक्षा विभाग भी अनावश्यक रूप से शिक्षकों की सेवाओं से वंचित हो रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा की ओर से हाल ही में की गई समीक्षा में 68 जिलों से प्राप्त सूचना में पाया गया कि प्रदेश में परिषदीय विद्यालयों के कुल 478 शिक्षक वर्तमान में निलंबित हैं।

समीक्षा से यह भी मालूम हुआ कि 269 शिक्षकों की जांच खंड शिक्षा अधिकारी दबाए हुए हैं।

Saturday, August 29, 2020

परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी दीक्षा एप के जरिये चलचित्र के माध्यम से करेंगे पढ़ाई

परिषदीय स्कूलों के बच्चे भी दीक्षा एप के जरिये चलचित्र के माध्यम से करेंगे पढ़ाई, 



निजी विद्यालयों की तरह ही अब परिषदीय विद्यालयों के बच्चे भी स्मार्ट क्लास में अत्याधुनिक विधा से पढ़ाई करेंगे। कोरोनाकाल के बाद विद्यालय खुलते ही बच्चे चलचित्र के माध्यम से पढ़ाई करेंगे। शिक्षक अपने मोबाइल, लैपटॉप और विद्यालयों में मुहैया कराए जा रहे प्रोजेक्टर पर वीडियो और काटरून के माध्यम से पढ़ाएंगे। इसके लिए सभी शिक्षकों की ट्रेनिंग भी पूरी हो गई है।


अब शिक्षकों के मोबाइल पर दीक्षा एप डाउनलोड कराया जा रहा है। दीक्षा एप पर बच्चों के पाठ्य के काटरून वीडियो दिए गए हैं। पहले फेज में जिन बच्चों के परिवारीजनों के पास एंड्रॉयड मोबाइल हैं, उन्हें वाट्सएप ग्रुप पर जोड़कर शिक्षक वीडियो पोस्ट करने लगे हैं। बीकेटी ब्लाक के एआरपी (एकेडमिक) रिसोर्स पर्सन अनुराग सिंह राठौर ने यह कार्य अपने क्षेत्र के विद्यालयों में यह कार्य शुरू कर दिया है। इसके लिए सभी ब्लाकों में शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक की ट्रेनिंग भी पूरी हो गई है। अब शिक्षकों के मोबाइल पर दीक्षा एप डाउनलोड कराने और उसे मानव संपदा से जोड़ने का कार्य शनिवार से शुरू होगा।


शिक्षक नहीं दे पाएंगे गलत जानकारी : दीक्षा एप को अब मानव संपदा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है। इसके माध्यम से शिक्षक जितनी देर दीक्षा एप के माध्यम से बच्चों को पढ़ाएंगे, उसकी टाइमिंग उनकी आइडी पर सेव हो जाएगी। इससे यह पता चलेगा कि किस शिक्षक ने कितनी देर बच्चों कोवीडियो और काटरून विधा से पढ़ाई कराई।


परिषदीय विद्यालय खुलते ही लागू होगी यह व्यवस्था, बच्चों के पाठ्य को प्रोजेक्टर पर कार्टून वीडियो से दिखाएंगे शिक्षक


ऐसा होगा पाठ्यक्रम

जैसे बच्चों को समुद्र के बारे में जानकारी दी जानी है तो दीक्षा एप पर समुद्र का वीडियो होगा, जिसे बच्चे देखेंगे कैसे आवाज करती हुई लहरें समुद्र में उठती हैं या फिर किसी चिड़िया की आवाज बच्चों को बतानी है तो वीडियो के माध्यम से उस चिड़िया का वीडियो दिखाकर बच्चों को आवाज सुनाई जाएगी। इसी तरह गणित के जोड़-घटाने से सम्बंधित भी काटरून वीडियो के माध्यम से ही बच्चों को पढ़ाया जाएगा।


दीक्षा एप से बच्चों को वीडियो के माध्यम से कैसे पढ़ाया जाए, बच्चों को अक्षरों की पहचान समेत अन्य जानकारियां वीडियो के माध्यम से दी जाएंगी। इसके लिए सभी शिक्षकों की ट्रेनिंग भी कराई गई है। विद्यालय खुलने के बाद यह व्यवस्था शुरू की जाएगी। - दिनेश कुमार, बीएसए

Friday, August 28, 2020

कपड़ा दिखाया न नाप ली, तैयार कर दी ड्रेस, कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं


लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को दी जाने वाली निशुल्क यूनिफार्म वितरण में स्वयं सेवी संस्थाओं ने फिर खेल शुरू कर दिया है। मोहनलालगंज, माल व अन्य ग्रामीण ब्लाकों में स्वयं सेवी संस्थाओं ने विद्यालय में बच्चों की न नाप ली और नहीं विद्यालय प्रबंध समिति को कपड़े प्रबंध समिति का गठन की गुणवत्ता दिखाई पर यूनिफार्म तैयार करवा दी। खंड विकास अधिकारी की ओर से पत्र जारी करा कर स्वयं सेवी संस्था विद्यालय पर आपूर्ति का दबाव बना रही है। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को निशुल्क यूनिफार्म का वितरण किया जाता है। इसके लिए विद्यालय स्तर पर प्रबंध समिति का गठन किया जाता है। इसमें शिक्षकों के साथ अभिभावक भी रहते हैं। जो कपड़े की गुणवत्ताजांच के बादयूनिफार्म सिलाई का आर्डरस्थानीय दर्जी, स्वयं सेवी संस्था या फिर ग्रामीण इलाकों के महिला समूह को दे सकते हैं। हालांकि हर ब्लाक में कुछ काम स्वयं सेवी संस्थाओं के जरिए कराने के निर्देश हैं। इसमें मोहनलालगंज में करीब 15 हजार यूनिफॉर्म सिलने की जिम्मेदारी स्वयं सेवी संस्थाओं को दी गई है।
शासनादेश के मुताबिक संस्थाओं से सिर्फ यूनिफॉर्म सिलाई का काम लिया जाएगा लेकिन संस्थाएं विद्यालय प्रबंध समिति को बिना कपड़े की जांच कराए और बच्चों की नाप लिए बिना ही यूनिफॉर्म तैयार कर रहे हैं। 



कागजों पर चल रहीं स्वयं सेवी संस्थाएं : यूनिफार्म तैयार करने वाली बहुत सी संस्थाएं सिर्फ कागजों पर ही चल रही हैं। जानकारों के अनुसार ये संस्थाएं खुद ड्रेस सिलने के बजाए उन्नाव मौरावां रोड स्थित एक दुकान से सस्ती ड्रेस खरीदकर विद्यालय में सप्लाई का दबाव प्रबंध समिति पर बना रहीं हैं। बीएसए दिनेश कुमार के मुताबिक उनको भी कई स्वयं सेवी संस्थाओं के बारे में पता किया गया कि मौके पर जाकर वहां जांच की जाए लेकिन उनके पते की जानकारी नहीं हो पा रही है।

शासन के उच्च शिक्षा अधिकारियों ने अपने आदेश में कहा है कि विद्यालय प्रबंध समिति प्रत्येक बच्चे का नाप करवाकर निःशुल्क यूनिफार्म स्वयं सहायता समूह/महिला समूह/स्थानीय दर्जी से सिलाई के लिए सेवा ले सकती है,परंतु 
ब्लाकों में ये समूह बिना नाप लिए यूनिफार्म स्कूलों में देने के लिए दबाव बना रहे,जो उचित नहीं है।
 - विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, 
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन

सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे कपड़े की गुणवत्ता की जांच और बच्चों की नाप कराए बिना यूनिफार्म न लें। 
- दिनेश कुमार, बीएसए

Monday, August 24, 2020

सभी विद्यालयों में रखे जाएंगे ड्रॉप बॉक्स, विद्यार्थियों के प्रश्नों को ड्रॉप बॉक्स में डाल सकेंगे अभिभावक

सभी विद्यालयों में रखे जाएंगे ड्रॉप बॉक्स,  विद्यार्थियों के प्रश्नों को ड्रॉप बॉक्स में डाल सकेंगे अभिभावक

 
प्रयागराज : छात्र दूरदर्शन और स्वयंप्रभा चैनल के जरिए भी प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों से पठन पाठन को आगे बढ़ा रहे हैं। प्रत्येक शनिवार को विद्याíथयों से प्रश्न भी पूछे जाएंगे। उनका जवाब लिख कर छात्र-छात्रएं विद्यालय के वाट्सएप ग्रुप पर भेजेंगे। जिनका उत्तर नहीं आएगा उस संबंध में अध्यापक से विमर्श कर सकेंगे। बहुत से ऐसे छात्र हैं जिनके पास एंड्रॉयड मोबाइल नहीं है, उनके लिए शासन के निर्देश पर विद्यालयों में ड्रॉप बॉक्स रखे जाएंगे।


कक्षा नौ से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अगल-अलग बाक्स रहेंगे। अभिभावक स्कूलों में जाकर बच्चों के प्रश्न उसमे रख देंगे। प्रधानाचार्य की जिम्मेदारी होगी कि उसे संबंधित शिक्षक तक पहुंचाएं। अध्यापक उनके जवाब बना कर नोट्स के रूप में फिर उसी ड्राप बॉक्स में डाल देंगे। अभिभावक उसे आकर ले जाएंगे। आवश्यकता के अनुसार शिक्षक विद्यार्थी से फोन पर भी बात कर विषयवस्तु को समझाने की कोशिश करेंगे। डीआइओएस आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि प्रधानाचार्य यह सुनिश्चित करेंगे कि जिन विद्यार्थियों के पास टेलीविजन और ऑनलाइन शिक्षा के लिए व्यवस्था नहीं है उनके लिए दूरस्थ शिक्षा से संबंधित पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए। प्रधानाचार्यो को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि दूरदर्शन पर प्रसारित वीडियो में जो भी प्रश्न पूछे गए हैं उनके उत्तर शिक्षक वाट्सएप पर जरूर दें।

एंड्रॉयड मोबाइल न रखने वाले बच्चों के लिए उठाया गया कदम, विद्यार्थियों के प्रश्नों को ड्रॉप बॉक्स में डाल सकेंगे अभिभावक

शनिवार को देंगे प्रश्नों का जवाब

सोमवार से शुक्रवार तक हुई ऑनलाइन पढ़ाई के संदर्भ में विद्यार्थी शनिवार को प्रश्न पूछ सकते हैं। वाट्सएप से जुड़े शिक्षक उनके प्रश्नों का जवाब लिखकर या फोन पर देंगे। इसके अतिरिक्त विद्यार्थी माध्यमिक शिक्षा विभाग के यू ट्यूब चैनल पर भी पाठ्य सामग्री हासिल कर सकते हैं।