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Monday, February 15, 2021

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी

स्कूल तो गए खुल, शिक्षक अब भी कर रहे कोरोना ड्यूटी


राजधानी के सभी ब्लाकों और नगर क्षेत्र के बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित पूर्व माध्यमिक विद्यालय खुलने शुरू हो चुके हैं। लेकिन इन विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की वापसी कोरोना ड्यूटी से अभी तक नहीं हो सकी । इस स्थिति में विद्यालयों में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सभी ब्लाकों के बीईओ का कहना है शिक्षकों की ड्यूटी कोरोना पीरीयड में लगायी गयी थी, लेकिन अभी तक शिक्षकों की वापसी नहीं हो पायी है। इस स्थिति में शिक्षकों की कमी है। इस संबंध में अधिकारियों का कहना है शासन की ओर से जो निर्णय होगा उसका पालन किया जायेगा। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीद है कि शिक्षकों की वापसी 1 मार्च तक स्कूलों में हो जायेगी।



हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी पर विभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों हर ब्लाक ब्लाक से 18 से 20 शिक्षक ड्यूटी परःविभाग की ओर से दी गयी जानकारी के मुताबिक राजधानी के सभी ब्लाकों समेत सभी नगर क्षेत्र से 18 से 20 शिक्षक कोरोना ड्यू टी पर लगाये 
गये थे। लेकिन अभी तक इनकी वापसी नहीं हो पायी है। जबकि स्कूल खुलते बच्चे आने भी शुरू हो गये हैं और मध्यान्ह भोजन भी बनना शुरू हो गया है।


डीएम के आदेश पर लगी है ड्यूटी : कोरोना काल में हर ब्लाक से शिक्षकों की ड्यूटी जिलाधिकारी के आदेश पर लगायी गयी थी, लेकिन अभी इनकी वापसी कबतक होगी इस पर भी निर्णय जिला प्रशासन को ही लेना है। ऐसे में अब उम्मीद की जा रही है एक मार्च से शिक्षकों की वापसी हो सकती है।

Friday, February 5, 2021

किराए में चलने वाले और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज

किराए में चलने वाले  और 30 बच्चों से कम संख्या वाले नगर क्षेत्र के स्कूल होंगे पास के स्कूलों में मर्ज 


लखनऊ : किराए के एक कमरे, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या वाले परिषदीय स्कूलों की सूरत बदलने जा रही है। इन स्कूलों को अधिक कमरों व जगह वाले स्कूलों में मर्ज किया जाएगा, जहां बच्चों को डिजिटल क्लास सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा इस संबंध में अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।

राजधानी में करीब 1200 से अधिक परिषदीय विद्यालय संचालित हैं, जिसमें करीब दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें महज आधा दर्जन स्कूल, एक कमरे वाले, किराए के भवन, बरामदे या 30 बच्चों से कम संख्या की स्थिति में जैसे-तैसे चल रहे हैं। सुविधाओं के नाम पर यहां कुछ नहीं है। ऐसे हालात को देखते हुए निर्णय लिया गया है कि जिन स्कूलों के पास अधिक स्थान है, वहां एक कमरे वाले स्कूलों को मर्ज किया जाएगा। 


बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि महानिदेशक स्कूल शिक्षा के निर्देश मिले हैं। ज्यादा स्थान वाले स्कूलों में मर्ज करने का प्रस्ताव परिषद को भेजा जाएगा।

Monday, February 1, 2021

लखनऊ : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण कार्यमुक्ति/कार्यभार ग्रहण हेतु पत्रावली तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी

लखनऊ  : अंतर्जनपदीय स्थानांतरण कार्यमुक्ति/कार्यभार ग्रहण हेतु पत्रावली तैयार करने के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश जारी



Saturday, January 30, 2021

पहल पड़ी भारी : बिना आदेश चलायी जा रही मोहल्ला क्लास, छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने साधी चुप्पी

पहल पड़ी भारी :  बिना आदेश चलायी जा रही मोहल्ला क्लास, छेड़छाड़ की घटनाओं के बाद अधिकारियों ने साधी चुप्पी


बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित प्राथमिक और जूनियर विद्यालयों में इन दिनों बच्चों को नहीं बुलाया जा रहा है, ऐसे में बच्चे शिक्षा से वंचित न हो इसके लिए काफी संख्या में शिक्षकों ने बिना किसी आदेश के मोहल्ला - क्लास की शुरूआत की है। लेकिन ये पहल उनके लिए भारी पड़ रही है।


राजधानी समेत प्रदेश के अधिकांश जिलों में शुरू हुई इस पहल से बच्चों को तो लाभ मिल रहा है, लेकिन जब शिक्षक स्कूल से निकलकर गांव की ओर जाते हैं - उनके साथ छेड़छाड़ जैसी घटनाएं सामने आ रही हैं। जिसमें गुरूवार - को सीतापुर की घटना सबसे बड़ा उदाहरण बन गयी। 


जहां संधना थाना क्षेत्र में एक शिक्षिका जो मोहल्ला क्लास चलाकर बच्चों का भविष्य सवारने निकली थी, लेकिन दो लोगों न उससे छेड़छाड़ किया। इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज की गयी है । इसी तरह से गोंडा में एक प्रकरण सामने आया इस संबंध में शिक्षिका ने बीएसए से मदद भी मांगी जिसकी कोई मदद नहीं की गयी, वहीं लखीमपुर, बांदा बलिया, देवारिया, हाथरस व हमीरपुर से महिला शिक्षकों से अभ्रदता की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, लेकिन विभाग अधिकारी इस पर चुप्पी साधे रहते हैं।

शिक्षकों ने खोला मोर्चा

आये दिन हो रही महिला शिक्षकों की घटनाओं को देखते हुए शिक्षकों ने जिम्मेदार हुक्मरानें के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष महेश मिश्रा ने एसपी आरपी सिंह से फोन पर बातचीत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिक्षकों की मांग है सीतापुर जैसी घटनाएं न हो इस पर पुलिस प्रशासन को भी आगे आना होगा और विभाग के अधिकारियों को भी ध्यान देना होगा।

मोहल्ला क्लास चलाने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं

सरकारी स्कूलों के तहत गांव-गांव में मोहल्ला क्लास चलाये जाने का स्पष्ट आदेश नहीं है, लेकिन फिर भी शिक्षक अपने प्रयास से ये जोखिम उठा रहे हैं, हैरानी की बात ये ग्रामीण क्षेत्रों में महिला सुरक्षा के नाम पर पुलिस की भी लापरवाही सामने निकल कर आती है।

"मोहल्ला क्लासें जहां-जहां भी चल रही है, उसमें ग्रामीणों को भी सहयोग करना चाहिए, बाकी शिक्षकों को कोई जबरदस्ती नहीं है।"  -बुद्ध प्रिय सिंह, बीएसए, लखीमपुर

बच्चे स्कूलो में बलाये जाने चाहिए,

"मोहल्ला क्लास से कुछ नहीं होने वाला है, भले ही कोरोना की सख्त गाइडलाइन का पाल करना पड़े।' -महेश मिश्रा, मंडलीय व जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ

"मोहल्ला क्लास के लिए कोई ऊपर से आदेश नहीं है, लेकिन शिक्षकों ने पहल शुरू की है तो ये" अच्छी बात है, गांव वालों को सहयोग करना चाहिए। -दिनेश कुमार, बीएसए लखनऊ

"शिक्षक अपने प्रयास से मोहल्ला क्लास चला रहे हैं, ऊपर से आदेश कोई भी नहीं है, लेकिन ये पहल सराहनीय है, इसका सम्मान होना चाहिए।" -हेमंत राव, बीएसए हरदोई

साभार - अमृत विचार

Wednesday, January 20, 2021

अच्छी खबर: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा देशभर में इंटर्नशिप का मौका

अच्छी खबर: लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों को मिलेगा देशभर में इंटर्नशिप का मौका


लखनऊ विश्वविद्यालय के पर्यटन विभाग के छात्रों को अब राजधानी समेत देशभर में इंटर्नशिप करने का मौका मिलेगा। इसको लेकर आज लखनऊ विश्वविद्यालय और इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स ने इंस्टिट्यूट ऑफ़ टूरिज़्म स्टडीज़ लखनऊ विश्वविद्यालय में एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। एमओयू पर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो आलोक कुमार राय ने भी हस्ताक्षर किए। इंडियन एसोसिएशन टूर ऑपरेटर्स  की ओर से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड चैप्टर के अध्यक्ष प्रतीक हीरा ने एमओयू पर हस्ताक्षर किए।


लखनऊ विश्वविद्यालय के नए परिसर में इंस्टीट्यूट ऑफ टूरिज्म स्टडीज संचालित है। यहां स्नातक में बीबीए टूरिज्म और पीजी में मास्टर ऑफ टूरिज्म एंड ट्रवल मैनेजमेंट का कोर्स पढ़ाया जाता है। इनमें करीब 300 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इंस्टीट्यूट की कोआर्डिनेटर अनुपमा श्रीवास्तव ने बताया कि अभी तक बीबीए टूरिज्म में चौथे सेमेस्टर के बाद दो महीने की ट्रेनिंग होती है। वहीं पीजी में मास्टर ऑफ टूरिज्म एवं ट्रैवल्स मैनेजमेंट में एक साल के बाद ट्रेनिंग का प्राविधान है। छात्र-छात्राओं को लखनऊ और दिल्ली में ही यह ट्रेनिंग कराई जाती है। एमओयू होने के बाद इसका दायर बढ़ जाएगा।

Sunday, January 10, 2021

नई पहल : कर्मयोगी स्कीम के तहत पढ़ाई के साथ कमाई भी करेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स

नई पहल :  कर्मयोगी स्कीम के तहत पढ़ाई के साथ कमाई भी करेंगे लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स


एक स्टूडेंट को एक दिन में 2 घंटे काम करने की होगी अनुमति


लखनऊ यूनिवर्सिटी ने स्टूडेंट्स के लिए कर्मयोगी स्कीम की शुरुआत की है। इस स्कीम के तहत स्टूडेंट्स को पढ़ाई जारी रखने के साथ ही पार्ट टाइम जॉब करने का अवसर मिलेगा। यानी अब यूनिवर्सिटी के सहयोग से स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ-साथ कमाई भी कर सकेंगे। इस बारे में यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने बताया कि स्कीम के तहत एक स्टूडेंट को एक दिन में अधिकतम 2 घंटे काम करने की अनुमति मिलेगी।


एक एकेडमिक ईयर में 50 दिन कर सकेंगे काम

कर्मयोगी स्कीम के तहत एक एकेडमिक ईयर में एक स्टूडेंट अधिकतम 50 दिन काम कर सकता है। उन्हें उनकी इच्छा और क्षमता के मुताबिक यूनिवर्सिटी का तरफ से ही काम दिए जाएंगे। स्टूडेंट्स क्लास करने के बाद यह काम कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें पैसे भी दिए जाएंगे। एक स्टूडेंट को प्रति घंटे 150 रुपए के हिसाब से वेतन दिया जाएगा। यानी कि एक स्टूडेंट साल में 15 हजार रुपए तक कमा सकेगा।


यूनिवर्सिटी कैंपस में पढ़ रहे स्टूडेंट्स को मिलेगी सुविधा

कुलपति के मुताबिक फिलहाल यह स्कीम सिर्फ लखनऊ यूनिवर्सिटी के कैंपस में पढ़ रहे स्टूडेंट्स के लिए शुरू की गई है। हालांकि, कुलपति चाहते हैं कि संबद्ध कॉलेज भी अपने स्तर पर इस तरह की पहल शुरू करें। ऐसी योजनाओं से स्टूडेंट्स काम का आदर करना सीखेंगे और स्टूडेंट्स का टैलेंट यूनिवर्सिटी के काम आएगा। साथ ही स्टूडेंट्स का अपनी यूनिवर्सिटी के साथ उनका जुड़ाव गहरा होगा और उन्हें आर्थिक मदद भी मिलेगी।

Tuesday, January 5, 2021

लखनऊ : RTE के तहत दाखिला न देने वाले स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित रह गया विभाग

लखनऊ : RTE के तहत दाखिला न देने वाले स्कूलों को नोटिस देने तक सीमित रह गया विभाग


■ निजी स्कूलों की मनमानी के वजह से सैकड़ों बच्चे पढ़ाई से वंचित

■ कार्रवाई के नाम पर होती है खानापूर्ति बच्चों के भविष्य से खिलवाड़


लखनऊ : सब पढ़ें सब बढ़ें। कोई पीछे न रहे। सभी को समान अवसर मिले। इसी उद्देश्य से शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों को दुर्बल आय वर्ग के बच्चों का भी दाखिला लेना अनिवार्य किया गया, लेकिन उनकी मनमानी जारी है। स्कूल में प्रवेश न देने वाले ऐसे चार स्कूलों के खिलाफ नोटिस जारी की गई है। बड़ा सवाल यह है कि दाखिला न पाने वाले बच्चों का भविष्य का क्या होगा? क्या इन बच्चों को यह सत्र बिना पढ़ाई के ही समाप्त हो जाएगा। अब देखना यह कि शिक्षा विभाग हर बार की तरह मनमानी करने वाले स्कूलों के खिलाफ सिर्फ नोटिस जारी कर खानापूर्ति तक ही सीमित रहेगा या कार्रवाई भी करेगा।


30 अगस्त तक होना था बच्चों का प्रवेश : राजधानी समेत प्रदेश भर में आरटीई के तहत निजी स्कूलों में दाखिले के लिए इस बार तीसरे चरण में 17 जुलाई से 10 अगस्त 2020 तक आवेदन करना था। 11 से 12 अगस्त के बीच जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा आवेदन पत्र का सत्यापन कर उन्हें लॉक किया गया। विभाग की ओर से 14 अगस्त 2020 को लॉटरी निकाली गई और 30 अगस्त 2020 तक पात्र बच्चों का निजी स्कूलों में दाखिला सुनिश्चित कराया जाना था। मगर हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदार तमाम बच्चों को दाखिला दिलाने में नाकाम साबित हुए।


★ इन स्कूलों को जारी किया गया है नोटिस
●एलपीएस राजाजीपुरम
● सेंट जोसेफ राजाजीपुरम
● सीएमएस, स्टेशन रोड
● बाल विद्या मंदिर, चारबाग


शीतकालीन अवकाश के बाद सोमवार को स्कूल खुले हैं। आरटीइ के तहत जो बच्चा पात्र पाया जाएगा, उसका दाखिला लिया जाएगा। - ऋषि खन्ना, प्रवक्ता, सीएमएस

बच्चे का घर उस वार्ड में नहीं होगा, जिस वार्ड में स्कूल है। अगर विभाग ने नियमों में कोई बदलाव किया हो तो, उसे सार्वजनिक रूप से अवगत कराएं। हम पात्र बच्चे को दाखिला देने के लिए तैयार हैं। - अनिल अग्रवाल, प्रबंधक, सेंट जोसफ

अभी तक स्कूल बंद थे। जो भी पात्र बच्चे हैं, उनका दाखिला लिया जाएगा। - एसपी सिंह, प्रबंधक, एलपीएस


इस सत्र में अभी तक 8500 बच्चों को आरटीई के तहत दाखिला दिलाया गया है। जिन स्कूलों ने प्रवेश नहीं लिया है, उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। सभी स्कूलों से नियमों का पालन कराया जाएगा। -दिनेश कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखनऊ

Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

Sunday, December 27, 2020

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी।

उपस्थिति पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू, चुनिन्दा विद्यालयों में 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण शुरू।


 नए साल में परिषदीय विद्यालयों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग द्वारा विद्यालयों को टेबलेट देने की घोषणा अब मूर्त रूप लेने जा रही है। प्रायोगिक तौर पर राजधानी लखनऊ के चुनिन्दा विद्यालयों में 31 दिसम्बर से 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहा तो नए साल पर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी टेबलेट वितरित किया जाएगा।


परिषदीय विद्यालयों के कार्यो को डिजिटल करने एवं शिक्षकों पर ऩजर रखने के लिए विभाग ने पहले स्मार्ट फोन को हथियार बनाने की रणनीति तैयार की थी। प्रेरणा पोर्टल पर सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने एवं सेल्फि के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की सुगबुगाहट हुई तो शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। शिक्षकों के मुखर विरोध से बेसिक शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया। शिक्षकों का तर्क था कि सभी शिक्षकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है और न ही वे इण्टरनेट का उपयोग करते है। इसके बाद विभाग ने समस्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को टेबलेट देने की महत्वाकांक्षी योजना पर अमल शुरू किया। 


कोरोना काल में टेबलेट के लिए टेण्डर आमन्त्रित किए गए थे, किन्तु कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति में अधिकांश कम्पनि ने टेण्डर ही नहीं डाले। इसके बाद दोबारा टेण्डर निकाले गए। इस बार कई कंपनियों ने टेबलेट की आपूर्ति करने में रुचि दिखाई। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) विजय किरण आनन्द द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 3 कंपनियों द्वारा लखनऊ के 15 परिषदीय विद्यालयों में 31 दिसम्बर से टेबलेट का डेमो/परीक्षण प्रारम्भ किया जा रहा है। 


यह परीक्षण 16 जनवरी 2021 तक होगा। गौरतलब है कि परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के बारे में सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वे समय से विद्यालयों में उपस्थित नहीं होते है। अधिकारियों के निरीक्षण में भी कई बार शिक्षक बिना किसी सूचना के विद्यालय से गायब मिलते है। सूत्रों का कहना है कि टेबलेट आने से शिक्षक विद्यालयों में समय से एवं नियमित उपस्थित रहेगे। विभाग द्वारा ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे परिषदीय विद्यालयों की सूरत निखर रही है।





Tuesday, December 22, 2020

लेटलतीफी : कड़ाके की सर्दी में भी परिषदीय बच्चों को नहीं मिल पाए जूते-मोजे

लेटलतीफी : कड़ाके की सर्दी में भी परिषदीय बच्चों को नहीं मिल पाए जूते-मोजे


राजधानी में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, लेकिन अभी तक परिषदीय विद्यालयों के करीब 1.96 लाख बच्चों को शासन की तरफ से निशुल्क जूते और मोजे नहीं मिले हैं। सर्दियां शुरू होने से पहले बच्चों के पैरों में जूते मोजे होने चाहिए थे, लेकिन अब तक कोई खेप नहीं आई है। 


शिक्षकों ने बताया कि बच्चों की सारी संख्या विभाग को बहुत पहले उपलब्ध करा दी गई है। कोरोना काल में भी एक जुलाई से स्कूल खोले गए। मिड-डे मील का राशन, कुकिंग की लागत देने का कार्य किया गया। किताबें बंटवाई और अब स्वेटर भी बांट रहे हैं। समय पर जूते-मोजे आ गए होते तो इसी दौरान अभिभावकों को दे दिया गया होता। बार-बार अभिभावकों को स्कूल न बुलाना पड़ता।


टेंडर में हुई देरी
विभागीय जानकारी के अनुसार, शासन की तरफ से जूतों के लिए टेंडर जारी करने में देरी हुई है। विभाग पर जूतों की लागत कम करने का दबाव था। बताया जा रहा है कि इस बार पिछले वर्षों के मुकाबले कम कीमत में में जूते मंगाए जा रहे हैं। वहीं, जूते-मोजे वितरण का कार्यक्रम तय न होने की वजह से भी यह अटका हुआ है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री द्वारा जूते वितरण का कार्यक्रम गोरखपुर में कराए कराए जाने की बात चल रही है। कार्यक्रम फाइनल न होने पर वितरण प्रक्रिया अभी ठप पड़ी है।


बच्चों को बस्ते भी नहीं मिले
इस बार बच्चों को विभाग की तरफ से बस्ते भी नहीं मिले हैं। इस संबंध में शासन से अभी कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं हुआ है। बस्ता वितरित करने की प्रक्रिया की तैयारी को लेकर बेसिक शिक्षा कार्यालय में कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई है।


वितरण के लिए खेप नहीं आई
बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि शासन से सभी बच्चों को जूते-मोजे उपलब्ध कराने का आदेश तो आ गया है, लेकिन अभी तक वितरण के लिए खेप नहीं आई है।

Monday, December 21, 2020

शासन का स्पष्ट आदेश, इस साल शिक्षकों को नहीं मिलेगा शीतकालीन अवकाश

शासन का स्पष्ट आदेश, इस साल शिक्षकों को नहीं मिलेगा शीतकालीन अवकाश




परिषदीय स्कूलों में इस वर्ष नहीं होगा शीतकालीन अवकाश, विभाग ने शिक्षकों में फैले भ्रम को लेकर दी सफाई


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक सत्र 2020-21 में शीतकालीन अवकाश नहीं होगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने 2021-22 के शीतकालीन एवं ग्रीष्मकालीन अवकाश को लेकर जारी आदेश को लेकर फैले भ्रम के बाद विभाग ने अपनी सफाई दी है। विभाग की अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने 14 अगस्त को टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि कार्य निर्धारण का आदेश जारी किया था। इसमें पांचवें बिंदु पर शैक्षिक सत्र 2021-22 में 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक शीतकालीन अवकाश और 20 मई से 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित किया गया है। 

इस पर शिक्षकों और विद्यार्थियों में चर्चा थी कि इस साल 31 दिसंबर से 14 जनवरी 2021 तक शीतकालीन अवकाश रहेगा। लखनऊ के बीएसए दिनेश कुमार ने बताया कि जारी आदेश 2021-22 के लिए है। लिहाजा इस सत्र में अबकाश नहीं होगा। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरन आनंद ने बताया कि इस साल कोरोना संक्रमण के कारण स्कूलों का संचालन नहीं हो रहा है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों से शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े दूसरे कराए जाने हैं।

प्रदेश के प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों को इस सत्र से शीतकालीन अवकाश नहीं मिलेगा। शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को शीतकालीन अवकाश सत्र 2021- 22 से दिया जाएगा। इस संबंध में 14 अगस्त 2020 को अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने एक आदेश भी जारी कर रखा है। इसमें उन्होंने टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्यों के लिए समय अवधि एवं कार्य निर्धारण की बात लिखी थी। इसमें बिंदु संख्या 5 पर ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन अवकाश के बारे में स्पष्ट बताया गया है।


आदेश में 2021-22 से ग्रीष्मकालीन व शीतकालीन अवकाश की बात कही गई है। शीतकालीन अवकाश 31 दिसंबर से 14 जनवरी तक रहेगा। जबकि ग्रीष्मकालीन अवकाश 20 मई से 15 जून तक रहेगा। ग्रीष्म काल के पश्चात 16 जून से नया सत्र शुरू होगा। बीएसए लखनऊ दिनेश कुमार ने बताया कि कुछ जगह इसी सत्र से शीत कालीन अवकाश होने की भ्रामक सूचना वायरल हो रही है। यह सही नहीं है। इस सत्र में स्कूलों में शीत कालीन अवकाश नहीं होगा। 



छुट्टी मामले में अफसरों की फटकार के बाद बैकफुट पर प्रतापगढ़ बीएसए


प्रतापगढ़। परिषदीय स्कूलों में 25 दिसंबर से दस जनवरी तक अबकाश बताने वाले बीएसए के सुर अफसरों कौ फटकार मिलते ही बदल गए। उन्होंने कहा कि यह अवकाश अगले वर्ष के लिए है। इधर, बीएसए सोशल मीडिया पर भी स्कूलों के खुले रहने की जानकारी देते रहे। शनिवार को अमर उजाला में जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में 25 दिसंबर से दस जनवरी तक अवकाश रहने की खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षक सोशल मीडिया पर खुशी का इजहार करने लगे। 


विभागीय अफसरों के अधिकृत ग्रुपों में खबर चलने के बाद लखनऊ में बैठे अफसरों ने बीएसए को फोनकर फटकार लगाई और बताया कि वर्ष 2021-22 के शैक्षिक सत्र के लिए यह अवकाश निश्चित किया गया है। इधर बीएसए अशोक कुमार सिंह ने बताया कि मैंने उस समय ध्यान नहीं दिया था।

Saturday, December 19, 2020

लखनऊ : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें

लखनऊ : ARP के अवशेष पदों पर चयन हेतु विज्ञप्ति जारी, देखें।


लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : बच्चों के स्वेटर की गुणवत्ता की दोहरी जांच शुरू, बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

लखनऊ : प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को वितरित स्वेटर की गुणवत्ता और इनके अंडरसाइज होने की जांच शुरू हो गई है । इसकी दोहरी जांच कराई जा रही है। जिला स्तर पर टास्क फोर्स जांच कर रही है, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग के स्तर पर भी इसकी जांच के निर्देश दिए गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद के आदेश के बाद शुक्रवार को बीएसए दिनेश कुमार ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी जांच के काम में लगा दिया है।


प्राइमरी स्कूलों के बच्चों को घटिया स्वेटर वितरित करने का मामला संज्ञान में आया था। शासन ने इसे गंभीरता से लिया है। इस मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं। महानिदेशक ने जिलेवार टास्क फोर्स बनाई थी। जो जांच कर रही है । अब उन्होंने 17 दिसंबर को आदेश जारी कर बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों से भी इसकी जांच कराने का निर्देश दिया है। स्वेटर की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला समन्वयक स्वयं करेंगे। इन अधिकारियों को प्रत्येक ब्लाक के 10 विद्यालयों में जाकर जांच करनी होगी। एक विद्यालय के न्यूनतम 5 छात्र तथा 5 छात्राओं के अभिभावकों से संपर्क करना होगा। रिपोर्ट में उन्हें विकासखंड का नाम, विद्यालय का नाम, नामांकित छात्र का नाम व कक्षा, अभिभावक का नाम व मोबाइल नंबर तथा अभिभावक का फीडबैक देना ह होगा। अभिभावक से पूछना होगा कि बच्चों को स्वेटर मिला है अथवा नहीं। स्वेटर की साइज ठीक है या नहीं। गुणवत्ता संतोषजनक है अथवा नहीं। यह सारी रिपोर्ट 24 दिसंबर 2020 तक हर हाल में महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भेजनी होगी।


बीएसए ने निरीक्षण के लिए जारी किया रूट चार्ट

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने स्कूलों में स्वेटर की जांच के लिए रूट चार्ट जारी कर दिया है। सभी ब्लॉकों के साथ नगर क्षेत्र के 10- 10 स्कूलों की जांच के लिए रूट चार्ट बनाया गया है। किन-किन स्कूलों में जांच करनी है। इसकी सूची भी उन्होंने जारी कर दी है।

Tuesday, December 8, 2020

नियमों की अनदेखी : नए शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दे दी सीधी तैनाती

नियमों की अनदेखी : नए शिक्षकों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में दे दी सीधी तैनाती


नियमों की अनदेखी : हिंदी व अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनाती के हैं अलग नियम


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में 31000 शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया के बाद अब उनकी तैनाती को लेकर खेल शुरू हो गया है जिले के कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में नए शिक्षकों को सीधे तैनाती दी जा रही है जबकि शासन के मानक व नियम के अनुसार अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में सीधे तैनाती करने का कोई प्रावधान नहीं है। शिक्षकों के अनुसार गड़बड़ी जानबूझकर की गई है ताकि बाद में समायोजन की प्रक्रिया में इन शिक्षकों को शामिल किया जा सके।


जिले के परिषदीय विद्यालयों शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत नए शिक्षकों की तैनाती को लेकर एक और खेल सामने आया है। ब्लॉकों के कई अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में सीधे नए शिक्षकों की तैनाती कर दी गई है जबकि अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में नए शिक्षकों की तैनाती करने का नियम नहीं है।आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।  उनमें पुराने अनुभवी शिक्षकों की तैनाती की जाती है। वह भी खास प्रक्रिया से गुजरने के बाद। 


सरोजिनी नगर ब्लॉक के बेसिक विद्यालय सदरौना के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय परसादी खेड़ा में दो नए शिक्षकों की तैनाती की गई है। यह विद्यालय अग्रेजी माध्यम है। इसी ब्लॉक में बेसिक विद्यालय बिजनौर के अंतर्गत बिजनौर प्रथम में बेसिक विद्यालय बिजनौर के अंतर्गत बिजनौर प्रथम विद्यालय में दो नए शिक्षकों की तैनाती की गई है। यह विद्यालय भी अंग्रेजी माध्यम का है। इसी प्रकार माल ब्लॉक में अंग्रेजी माध्यम के प्राथमिक विद्यालय बसंतपुर में एक नए शिक्षक की तैनाती की गई है। इसी प्रकार अन्य अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में भी नए शिक्षकों को तैनाती दी गई है। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों की माने तो बेसिक शिक्षा कार्यालय से जान बुझकर गड़बड़ी की गई है ताकि बाद में शिक्षकों के समायोजन के नाम पर उनका शोषण किया जा सके।


यह है तैनाती का नियम

सत्र 2017-18 में परिषदीय विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई की योजना शुरू हुई थी। प्रोजेक्ट के तौर पर पहले साल जिले के 2 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम किया गया था। वर्तमान में 145 विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में बदला गया है। इन विद्यालयों में शिक्षकों की नई तैनाती नहीं की गई है। जिले में जो पहले से पढ़ा रहे हैं उन्हीं अनुभवी शिक्षकों की ही तैनाती की गई है। इसके लिए पहले आवेदन आमंत्रित किया गया । इन शिक्षकों का टेस्ट और साक्षात्कार के बाद चयन किया गया। फिर इनको प्रशिक्षण देकर अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनाती दी गई है। अब एक नए आदेश के तहत इन शिक्षकों को स्पोकन इंग्लिश का कोर्स भी करना होगा यह मानक और नियम होने के बावजूद शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत नए शिक्षकों को सीधे इन अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनाती दे दी गई है, जो नियम विरुद्ध है।


'शिक्षकों की तैनाती के लिए सारी प्रक्रिया बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा अपनाई गई। यह प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन होती है, जो ऑनलाइन सूचनाएं फीड की जाती है. उसी के तैनाती की जाती है। किस अनुसार प्रकार उन्होंने यह प्रक्रिया अपनाई इसकी जानकारी नहीं है।" पीएन सिंह, एडी बेसिक, लखनऊ मंडल


"अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के लिए कई शिक्षक चयनित हो चुके है। लिखित परीक्षा के पश्चात कार्यरत शिक्षकों का समायोजन किया गया था। मेरिट में आने के वावजूद एकल विद्यालय होने के कारण ऐसे शिक्षको का अभी तक अंग्रेजी विद्यालय में समायोजन बाधित है। जबकि इसमें नव नियुक्त शिक्षकों का पदस्थापन किया गया है जो शासनादेशों के विरुद्ध है।" -विनय कुमार सिंह, प्रान्तीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


इनका चयन, पर नहीं दी तैनाती

वहीं, दूसरी तरफ कुछ पुराने शिक्षक ऐसे हैं जिनका चयन अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों के लिए हुआ था, लेकिन उनको अभी तक तैनाती नहीं दी गई। मोहनलालगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय काशीपुर के शिक्षक का चयन अंग्रेजी माध्यम के प्राथमिक विद्यालय मऊ में हुआ, लेकिन उनको तैनाती इसलिए नहीं दी गई क्योंकि उनका मूल विद्यालय एकल विद्यालय था और वहां पर वही एकमात्र शिक्षक तैनात थे। इसी प्रकार मलिहाबाद के प्राथमिक विद्यालय गोसवा तेरवा के शिक्षक का चयन होने के बाद भी चिनहट स्थित प्राथमिक विद्यालय रोशनाबाद में तैनाती नहीं दी गई। उनका विद्यालय भी एकल विद्यालय है। इस तरह से कई अन्य शिक्षक भी हैं जो चयन होने के बाद भी हिंदी माध्यमिक विद्यालय में पढ़ा रहे हैं क्योंकि उनके यहां शिक्षकों की कमी है। ऐसे में नए शिक्षकों को एकल विद्यालयों में तैनाती ना देकर सीधे अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में तैनाती देकर गंभीर गड़बड़ियां की गई हैं।

Thursday, December 3, 2020

स्कूलों में नए शिक्षकों की तैनाती में खेल, यूं की गईं गड़बड़ियां

Irregularities In Appointment Of New Teachers In Schools Of Basic Siksha Parishad

स्कूलों में नए शिक्षकों की तैनाती में खेल, यूं की गईं गड़बड़ियां


शिक्षक भर्ती प्रक्रिया के तहत जिले के बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में नए टीचरों की तैनाती में खेल किया गया है। शासन ने जो मानक व नियम तय किए थे, उसके अनुसार शिक्षक नहीं तैनात किए गए हैं। जिन विद्यालयों में आवश्यकता नहीं थी, वहां पर भी शिक्षकों की तैनाती दे दी गई है, जबकि ऐसे स्कूल जहां शिक्षकों की ज्यादा जरूरत थी, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया है।


काफी समय बाद जिले के परिषदीय विद्यालयों को 141 शिक्षक मिले थे। इनमें से 137 को विद्यालयों में तैनाती दे दी गई। बचे चार शिक्षकों के प्रमाणपत्र जमा किए गए मूल प्रमाणपत्र से मेल नहीं खा रहे थे। आप यह खबर प्राइमरी का मास्टर डॉट इन पर पढ़ रहे हैं।  शासन की ओर से जारी नियम, मानक अनुसार छात्रों और शिक्षकों की संख्या के आधार पर तैनाती के लिए स्कूलों की सूची बनाई जाती है।


इसमें पहले उन विद्यालय को रखा जाता है जहां एक भी शिक्षक नहीं है। इनमें तैनात शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की गिनती नहीं की जाती है। इसके बाद सूची में एकल विद्यालयों को रखा जाता है, जहां एक शिक्षक के भरोसे स्कूल चल रहे हों।


फिर दो, तीन और इससे ज्यादा शिक्षकों वाले विद्यालयों की बारी आती है। विद्यालयों के शिक्षकों के अनुसार तैनाती में इसलिए गड़बड़ी की जाती है, ताकि बाद में शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया में वसूली की जा सके। जहां पहले से ज्यादा शिक्षक हैं, उनमें गए नए शिक्षकों को बाद में समायोजन की प्रक्रिया में डाल दिया जाता है।


दो दर्जन विद्यालयों में एक भी शिक्षक नहीं
गोसाईगंज में 35 एकल विद्यालय हैं। यहां 13 स्कूलों में ही शिक्षकों को तैनाती दी गई। माल के 60 एकल विद्यालयों में से 20 में ही तैनाती दी गई। वहीं, 13 शिक्षकों को यहां के दूसरे विद्यालयों में तैनाती दे दी गई। मोहनलालगंज के 23 एकल विद्यालयों में से 11 में तैनाती दी गई और 10 शिक्षकों को यहां के दूसरे स्कूलों में भेज दिया गया।


सरोजनीनगर के 25 एकल विद्यालयों में से नौ में ही शिक्षकों की तैनाती दी गई और छह को दूसरे स्कूल भेज दिया गया। बीकेटी में आठ एकल स्कूल हैं। यहां एकल विद्यालयों में तैनाती के साथ छह शिक्षकों को भी अन्य स्कूलों में तैनाती दी गई। नगर क्षेत्र में करीब दो दर्जन ऐसे विद्यालय हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है।


बेसिक शिक्षा अधिकारी के स्तर से जो सूचनाएं होती हैं वह यू डायस पर उपलब्ध कराई जाती हैं। इसके अनुसार ही तैनाती की जाती है। यह उनकी जिम्मेदारी है कि सही व सटीक सूचनाएं उपलब्ध कराएं। - पीएन सिंह, एडी बेसिक, लखनऊ मंडल


नवनियुक्त शिक्षकों को सबसे पहले बंद और एकल विद्यालयों में भेजा जाना था। आज भी बहुत से एकल विद्यालयों में नए शिक्षकों की तैनाती नहीं की गई। वहीं, कई जगह जहां शिक्षकों की जरूरत नहीं थी, ऐसे स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती कर दी गई, जो ठीक नहीं है। - विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश 

Saturday, November 28, 2020

शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्तियां अवैध होने के बाद भी दो साल से वेतन बांट रहा विभाग

शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्तियां अवैध होने के बाद भी दो साल से वेतन बांट रहा विभाग


लख़नऊ : कभी स्पष्टीकरण... कभी रिपोर्ट... कभी कोई आदेश लेकिन नतीजा सिफर। चूना 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का लेकिन कार्वाई के नाम पर सिर्फ हीलाहवाली...। 


मामला माध्यमिक शिक्षा के सहायता प्राप्त स्कूलों में नियम विरुद्ध तैनात शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति का है। अवैध नियुक्तिहोने के बाद भी विभाग दो साल से इन्हें वेतन बांट रहा है। वर्ष 2016 में मनमाने तरीके से हुई इन भर्तियों में सरकार ने तत्कालीन डीआईओएस-2 को वर्ष 2017 में निलम्बित भी किया लेकिन इन 103 शिक्षकों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई अभी तक नहीं हो पाई है। लखनऊ के डीआईओएस डॉ मुकेश सिंह ने निदेशक विनय पांडेय को पत्र लिख कर कहा है कि रिकवरी का प्रस्ताव भेजे हुए करीब चार महीने बीत चुके हैं लेकिन नियम विरुद्ध भर्ती शिक्षकों की सेवा समाप्ति से जुड़ा कोई आदेश अभी तक नहीं मिला है।


इससे पहले डीआईओएस ने जुलाई में एक पत्र भेज कर शासन को अवगत कराया था कि अब तक इन शिक्षकों को लगभग 16 करोड़ रुपये वेतन के रूप में दिया जा चुका है। छह महीने बीते चुके हैं लिहाजा यह रकम भी बढ़ चुकी है। ऐसे में सरकार इन शिक्षकों को फर्जी पाए जाने पर वेतन की रिकवरी कैसे कर पाएगी ? इन नियुक्तियों में ज्यादातर तत्कालीन डीआईओएस और प्रबंधकों के रिश्तेदार शामिल थे। ये पद मृत थे यानी अस्तित्वमें ही नहीं थे।


अपर मुख्य सचिव से इस मामले का पूरा विवरण मांग रहे हैं | दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। हमारी सरकार में भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस | -डॉ. दिनेश शर्मा, उप मुख्यमंत्री

Wednesday, November 25, 2020

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

बच्चों को दिए जा रहे छोटे स्वेटर, सरकारी स्कूलों में स्वेटर वितरण के नाम पर मनमानी

राजधानी लखनऊ में बड़े बच्चों को थमाया जा रहा छोटे साइज का स्वेटर, वितरण में जमकर धांधली


लखनऊ : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो विभाग को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर स्वेटर बच्चों को थमाए जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा छह के बच्चों को कक्षा दो के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूर्ति की जा रही है।


शिक्षा विभाग के मुताबिक परिषदीय स्कूल करीब 1200 व पूर्व माध्यमिक स्कूल 640 हैं। कुल बच्चों की संख्या एक लाख 96 हजार है। विभाग का दावा है कि करीब 80 हजार स्वेटर किए जा वितरित किए जा चुके हैं। प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमश: 26, 28 30 और 32 नंबर तक स्वेटर आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32, 34, 36 और 38 नंबर साइज आता है। गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। एक बच्चे के पिता ने बताया कि उनको 32 नंबर का स्वेटर दिया गया है। ऐसे में सवाल यह है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं?


स्वेटर जिस एजेंसी से बंटवाए जा रहे हैं, उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चों की नाप से बहुत छोटे स्वेटरों की सप्लाई की जा रही है, जोकि उचित नहीं है। -विनय कुमार सिंह, प्रांतीय अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन


यह देखा जाएगा कि बीएसए ने आखिर किस साइज के स्वेटर ऑर्डर किए थे। अगर बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिए जा रहे हैं तो यह गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी। - पीएन सिंह, एडी बेसिक


अगर ऐसा हुआ है तो इसके लिए खंड शिक्षाधिकारी जिम्मेदार हैं। बच्चों को किस साइज के स्वेटर लगेंगे, इसका ब्योरा खंड शिक्षाधिकारियों द्वारा उपलब्ध कराया गया है। खंड शिक्षाधिकारियों से जवाब तलब किया जाएगा। - दिनेश कुमार, बीएसए



लखनऊ । बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा परिषदीय और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को मुफ्त स्वेटर वितरण की व्यवस्था में इस बार भी सेंध लगी है। हर बार की तरह इस बार भी जब ठंड शुरू हुई तो बच्चों को स्वेटर वितरण की याद आई। उस पर भी मानकों को दरकिनार कर तैयार किए गए स्वेटर बच्चों को थमाये जा रहे हैं। आलम यह है कि कक्षा 6 के बच्चों को कक्षा 2 के बच्चे के साइज का स्वेटर देकर खानापूरी की जा रही है। स्पष्ट है कि इस बार भी स्वेटर वितरण में जमकर धांधली हुई है।


प्राथमिक विद्यालय विद्यालयों के शिक्षकों के मुताबिक कक्षा एक से पांच तक के बच्चों को क्रमशः 26, 28 30 और 32 नंबर तक के स्वेटर साइज में आते हैं। इसी तरह कक्षा पांच से कक्षा आठ तक के बच्चों को 32 (कॉमन), 34, 36, और 38 नंबर का स्वेटर साइज में आता है। मगर बेहद गंभीर बात यह है कि अधिकांश बच्चों को 32 नंबर यानि छोटे साइज के ही स्वेटर वितरित किए जा रहे हैं। नाम न उजागर करने की शर्त पर मोहनलालगंज के एक अभिभावक ने बताया कि उनका बच्चा कक्षा सात में पड़ता है और उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज 32 नंबर है। इसी तरह कक्षा पांच में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता ने बताया कि उन्हें दिए गए स्वेटर का साइज भी 32 नंबर ही है। ऐसे में सवाल इस बात का है कि बड़े बच्चों को आखिर छोटे से आए साइज के स्वेटर क्यों दिए जा रहे हैं? क्या बड़े बच्चों के साइज के स्वेटर तैयार नहीं किए गए? या इसमें भी कोई बड़ी धांधली है।


प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह के मुताबिक, स्वेटर खरीद कर बाटने की जिम्मेदारी जब शिक्षकों को दी जाती है तो सारे नियम सामने आ जाते थे, अब वही स्वेटर जिस भी एजेंसी से बटवाये जा रहे है उनकी गुणवत्ता और साइज तक नहीं देखा जा रहा है। जूनियर विद्यालयों में बच्चो की नाप से बहुत छोटे स्वेटर की सप्लाई की जा रही है, जो उचित नही है।


पैक लिफाफे में थमाया जा रहा है स्वेटर
बच्चों अभिभावकों की मानें तो बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा वितरित किए जा रहा है स्वेटर पैक लिफाफे में स्वेटर थमा दिया जा रहा है। जबकि बच्चों के नाम का स्वेटर है य नहीं इसके लिए उन्हें पहना कर भी देखा जा सकता है। मगर जिम्मेदार सिर्फ स्वेटर के नाम पर औपचारिकता पूरी करते नजर आ रहे हैं।


क्‍या कहते हैं एडी बेसिक ? 
एडी बेसिक पीएन सिंह के मुताबिक, यह दिखवाया जाएगा। आखिर किस साइज के स्वेटर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने आर्डर किए थे। अगर, बड़े बच्चों को भी छोटे साइज के स्वेटर दिया जा रहा है तो यह बेहद गलत है। इसकी पूरी जांच कराई जाएगी।

Tuesday, November 17, 2020

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू

यूपी बोर्ड ने हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंकपत्र को बताया अमान्य, जाँच के बाद कार्रवाई शुरू


लखनऊ: शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बीच माध्यमिक शिक्षा परिषद ने हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट को अमान्य करार दिया है। परिषद की सचिव ने स्पष्ट कहा है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन की परीक्षाएं न तो पूर्व में यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के समकक्ष थीं और न वर्तमान में हैं।


दरअसल, राजधानी समेत प्रदेशभर में हिंदी साहित्य सम्मेलन के अंक पत्रों के आधार पर तमाम शिक्षकों की नियुक्ति हुई है। शासन के निर्देश पर शिक्षकों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन शुरू हुआ तो ऐसे मामले सामने आए। बीते दिनों शासन के आदेश पर प्रदेशभर के राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के दस्तावेजों की जांच शुरू की गई थी।


 इसमें राजधानी में लखनऊ मांटेसरी इंटर कालेज, रामाधीन सिंह इंटर कालेज, मुमताज इंटर कालेज समेत कई अन्य सहायता प्राप्त विद्यालयों में हिंदी साहित्य सम्मेलन की मार्कशीट पर कई शिक्षक नौकरी करते मिले। इसके बाद जिला विद्यालय निरीक्षक डा. मुकेश कुमार ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

Sunday, November 15, 2020

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था

यूपी बोर्ड : नहीं करना कोरोना के खत्म होने का इंतजार, छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था 


कोरोना संक्रमण से उपजे हालात से निपटने के लिए हर किसी ने एहतियात भरे कदम उठाए हैं। इन्हीं में से एक माध्यमिक शिक्षा विभाग भी है। तकनीकी और संसाधनों के लिए हमेशा से उपेक्षित कहा जाने वाला माध्यमिक शिक्षा विभाग अब हाईटेक बनकर उभरा है। यही कारण है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग ने ऑनलाइन कक्षाएं ही नहीं अब ऑनलाइन परीक्षा कराए जाने का भी निर्णय ले डाला है। 


जिला विद्यालय निरीक्षक, डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, 20 नवंबर से शुरू हो रहे छमाही परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों की व्यवस्था की गई है। जो छात्र स्कूल आकर परीक्षा देना चाहते हैं वह स्कूल आकर परीक्षा देंगे। और वे जिनके अभिभावक कोरोना संक्रमण के कारण बच्चों को स्कूल भेजने का साहस नहीं जुटा पा रहे हैं, अबे घर से ही ऑनलाइन परीक्षाएं दे सकते हैं।


जिला विद्यालय निरीक्षक के अनुसार बच्चों को गूगल मीट, जूम आदि के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराए जाएंगे बच्चों को उनके उत्तर लिखकर ई-मेल के जरिए भेजना होगा। यदि किसी बच्चे के साथ इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या आ रही है तो उसे व्हाट्सएप के माध्यम से प्रश्न पत्र मुहैया कराया जाएगा। बच्चे परीक्षा ईमानदारी के साथ दें इसकी जिम्मेदारी खुद अभिभावकों को सौंपी जा रही है।


अभिभावकों की भी मिल रही सराहना
यूपी बोर्ड के तहत संचालित स्कूलों में ऑनलाइन और ऑफलाइन पढ़ाई की व्यवस्था को अभिभावकों की भी सराहना मिल रही है। छमाही परीक्षा को भी ऑनलाइन माध्यम से कराए जाने के प्रयास को भी अभिभावक खूब समर्थन दे रहे हैं।

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच

यूपी बोर्ड की प्रायोगिक परीक्षाओं में फंस सकता है पेंच


कोरोना संक्रमण के चलते शैक्षिक सत्र 2020-21 प्रभावित जरूर हुआ है। नियमित कक्षाएं न चालू रहकर ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। इतना ही नहीं अन्य सुविधाओं के लिए भी विभाग को काफी मशक्कत करनी पड़ी। मगर इन सब के बावजूद माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अपना सारा शेड्यूल पटरी पर होने का दावा किया है। यूपी बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी विभाग का दावा है  की परीक्षाएं अपने निर्धारित कैलेंडर के अनुसार ही कराई जाएंगी। ऐसे में सबसे अहम सवाल यह है कि प्रायोगिक परीक्षाओं को विभाग कैसे कराएगा।


अभी तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की जा रही थी, मगर अब 25% से अधिक विद्यार्थी कॉलेज आने लगे हैं। दीपावली बाद बच्चों की संख्या में इजाफा होगा। प्रैक्टिकल संबंधित सारे उपकरण कॉलेज में उपलब्ध हैं।


क्या कहते हैं के राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल
राजकीय जुबली इंटर कॉलेज प्रिंसिपल धीरेंद्र मिश्रा के मुताबिक, प्रैक्टिकल कराए जाने के संबंध में शिक्षकों के साथ बैठक भी की गई है। एक साथ विद्यार्थियों की भीड़ न हो इस बात को ध्यान में रखते हुए, उन्हें शिफ्टवार बुलाया जाएगा। बोर्ड से निर्देश के बाद प्रयास किया जाएगा कि अगले एक से डेढ़ महीने के दौरान सिलेबस से जुड़ी प्रायोगिक परीक्षाएं पूरी करा ली जाए।


क्या कहते हैं जिला विद्यालय निरीक्षक
जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ मुकेश कुमार सिंह के मुताबिक, स्कूलों में उपस्थिति प्रतिशत बढ़ी है। दो दिन पहले हुई वर्चुअल बैठक में स्कूलों की ओर से दी गई रिपोर्ट के अनुसार कुछ स्कूलों में शत-प्रतिशत भी बच्चों की हाजिरी पाई गई। प्रायोगिक परीक्षाओं को लेकर कॉलेजों को तैयार रहने के लिए भी कह दिया गया है। परिषद से प्रायोगिक परीक्षाओं के संबंध में जैसे दिशा निर्देश मिलते हैं, वैसा किया जाएगा।