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Sunday, June 28, 2026

शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश

शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन अब होगा निशुल्क, निर्देश जारी, UGC ने विश्वविद्यालयों को दिए सख्त निर्देश


नई दिल्ली। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों को निर्देश जारी कर शैक्षणिक योग्यताओं का सत्यापन निशुल्क करने को कहा है। अब कोई भी कॉलेज या विश्वविद्यालय सरकारी नौकरियों के लिए छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन से मना नहीं कर सकेगा।


यूजीसी ने पत्र में स्पष्ट किया है कि सरकारी सेवाओं में नियुक्तियों के लिए शैक्षणिक प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता की जांच एक अनिवार्य शर्त है। पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों के बावजूद छात्रों को सत्यापन के लिए लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।

इसी को देखते हुए अब सभी केंद्रीय, राज्य, मानित (डीम्ड) और निजी विश्वविद्यालयों को निर्देशित किया गया है कि वे किसी भी भर्ती एजेंसी द्वारा मांगे जाने पर शैक्षणिक दस्तावेजों की प्रामाणिकता की पुष्टि बिना किसी शुल्क के करें। आयोग का मानना है कि उम्मीदवारों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करना सरकारी हितों के लिए आवश्यक है, इसलिए संस्थान इस प्रक्रिया में पूरा सहयोग प्रदान करें।

Sunday, May 31, 2026

सत्यापन में UPTET के 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध, नियमानुसार होगी कार्रवाई, सत्यापन की प्रक्रिया जारी, जिलों को भेजी जा रही रिपोर्ट

सत्यापन में UPTET के 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध, नियमानुसार होगी कार्रवाई, सत्यापन की प्रक्रिया जारी, जिलों को भेजी जा रही रिपोर्ट

नाम अथवा अन्य विवरणों में नियमानुसार होगा संशोधन

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षक - पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के -प्रमाण पत्रों के सत्यापन में 200 प्रमाणपत्र फर्जी व संदिग्ध पाए गए हैं। यह प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा वर्ष 2011 से 2021 के बीच जारी किए गए थे। इनकी जांच जून 2025 से मई 2026 के बीच की गई है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार शिकायतों के आधार पर गाजियाबाद, गोंडा, देवरिया, अमेठी, शामली, संभल, बलरामपुर, मैनपुरी, फिरोजाबाद, सीतापुर, मथुरा, गाजीपुर, भदोही, बलिया और लखीमपुर खीरी समेत कई जिलों से भेजे गए मामलों की जांच की गई। जांच में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां सामने आई हैं।

पीएनपी के रजिस्ट्रार विजेंद्र सिंह का कहना है कि नाम अथवा अन्य विवरणों में संशोधन नियमानुसार ही किया जा सकता है। नियुक्ति प्राप्त करने के बाद किए जाने वाले संशोधन संबंधी मामलों की अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर जांच की जाती है।

हाल ही में सीतापुर जनपद से सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए पीएनपी भेजे गए थे। जांच में सभी प्रमाणपत्र असत्य पाए गए। पीएनपी के अनुसार पांच शिक्षकों द्वारा प्रस्तुत किए गए अनुक्रमांक विभागीय अभिलेखों में आवंटित ही नहीं थे जबकि दो अन्य मामलों में प्रस्तुत अनुक्रमांक अन्य अभ्यर्थियों के नाम पर दर्ज पाए गए।

इस संबंध में जांच रिपोर्ट 26 फरवरी 2026 तथा 12 मई 2026 को संबंधित जिले को भेजी गई। इसी प्रकार गोंडा जनपद से भेजे गए पांच शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों में भी विसंगति सामने आई है। हालांकि संबंधित रिपोर्ट अभी जिले को प्रेषित किए जाने की प्रक्रिया में है।

वर्ष 2011 की यूपीटीईटी परीक्षा का आयोजन माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कराया था जबकि वर्ष 2013 से 2021 तक परीक्षा का संचालन उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) द्वारा किया गया। बाद में इस व्यवस्था का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा आयोग को सौंप दिया गया। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि जिलों से प्राप्त सत्यापन अनुरोधों के आधार पर प्रमाणपत्रों की जांच की जाती है।

केस एक
देवरिया जिले के निवासी एक युवक की हाल ही में बिहार में  पर नौकरी लग अध्यापक पद गई। उसने अपने नाम में संशोधन कराने के लिए पीएनपी में संपर्क किया। जहां मना कर दिया गया तो उसने सीबीएसई बोर्ड में अपने नाम में संशोधन करा लिया। पीएनपी ने स्पष्ट तौर पर मना कर दिया कि वह संशोधन नहीं कर सकते। क्योंकि नियुक्ति होने के पहले इन्होंने कोई संशोधन नहीं कराया।


केस दो
आजमगढ़ का एक युवक हाल ही पीएनपी कार्यालय में आवेदन दिया लड़की के नाम कि उसका नाम पर सर्टिफिकेट में दर्ज हो गया है। जिस युवती का उसने नाम बताया वह उसकी बहन ही थी। अधिकारियों को आशंका हुई कि वह अपनी बहन के सर्टिफिकेट में संशोधन कराकर नौकरी हासिल करने की जुगत में है। सीतापुर में एक मामले में ऐसे ही भाई- बहन फर्जी सर्टिफिकेट पर नौकरी हासिल कर चुके थे।




TET प्रमाणपत्रों का सत्यापन किए बिना दे दी गई नियुक्ति, PNP ने ऑनलाइन अपलोड कराए हैं UPTET के परीक्षाफल

जब अनुक्रमांक आवंटित नहीं जिलों में सत्यापन पर प्रश्न

प्रयागराजः उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) के कई प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) कार्यालय द्वारा किए गए सत्यापन में फर्जी मिलने से जिलों में किए गए अभिलेख सत्यापन पर प्रश्न उठे हैं। 


पीएनपी ने टीईटी का परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध कराने के साथ व्यवस्था दी है कि प्रमाणपत्रों का आनलाइन सत्यापन किया जा सकता है। इसके बावजूद बेसिक शिक्षा परिषद की शिक्षक भर्तियों में कई जिलों में कुछ अभ्यर्थियों के टीईटी के प्रमाणपत्र पीएनपी के सत्यापन में तब फर्जी कूटरचित मिले, जब उन्हें नौकरी और वेतन पाते हुए महीनों/वर्ष बीत गए हैं। ऐसे में माना जा रहा है नियुक्ति देने से पहले कराई गई काउंसलिंग में संबंधित के प्रमाणपत्रों का सत्यापन जिलों में नहीं किया गया।


यह प्रश्न देवरिया, आगरा, आजमगढ़, बलरामपुर, मुजफ्फरनगर, कौशांबी के बाद सीतापुर के सात शिक्षकों के टीईटी प्रमाणपत्रों का पीएनपी कार्यालय में सत्यापन किए जाने के बाद उठा है। सीतापुर के मामले में पांच अभ्यर्थियों के टीईटी प्रमाणपत्र पर जो अनुक्रमांक अंकित है, वह पीएनपी ने आवंटित ही नहीं किए थे। इसी तरह दो अन्य ने जिस अनुक्रमांक का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी पाई, वह पीएनपी ने उन्हें नहीं, बल्कि दो अन्य अभ्यर्थियों को आवंटित किए थे। ऐसे में यदि काउंसलिंग में सही ढंग से सत्यापन कराया गया होता तो उसी समय फर्जीवाड़ा सामने आ जाता। 


मामले में पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने बताया कि टीईटी के परीक्षाफल आनलाइन उपलब्ध हैं। सत्यापन के संबंध में पूर्व में आदेश निर्गत है कि आनलाइन माध्यम से सत्यापन किया जा सकता है। यदि किसी मामले में संदिग्ध स्थिति मिलती है तो उसे पीएनपी कार्यालय भेजकर सत्यापन कराया जा सकता है। वर्ष 2011 से टीईटी का आयोजन शुरू हुआ। पहली टीईटी यूपी बोर्ड ने कराई थी। 2012 में टीईटी का आयोजन नहीं हुआ। वर्ष 2013 से यह आयोजन पीएनपी करा रहा था। अब इसके आयोजन का दायित्व उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को दिया गया है।

Monday, January 12, 2026

फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

फर्जी नियुक्तियों पर रोक लगाने के लिए आउटसोर्सिंग की भर्तियों में सत्यापन अनिवार्य, वर्तमान में कार्यरत कर्मियों के दस्तावेजों की जांच भी तीन महीने के अंदर पूरी करने के निर्देश

 राज्यमंत्री असीम अरुण ने दिए निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अंतर्गत कुछ कोर्स कोऑर्डिनेटरों द्वारा फर्जी अभिलेखों के आधार पर नियुक्ति प्राप्त किए जाने के प्रकरण पर समाज कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने भविष्य में ऐसी किसी भी अनियमितता को रोकने के लिए विभाग में आउटसोर्सिंग से जुड़े मामलों में स्पष्ट शासनादेश जारी करने के निर्देश दिए हैं।


शासनादेश के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आउटसोर्सिंग के जरिये की जाने वाली सभी नियुक्तियां पूरी तरह निर्धारित नियमों, मानकों और प्रक्रिया के अनुरूप हों। साथ ही आउटसोर्सिंग के माध्यम से नियुक्त सभी कर्मियों के शैक्षिक और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच और पुलिस सत्यापन भी कराया जाएगा। उन्होंने वर्तमान में विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों के दस्तावेजों की भी अगले तीन महीने के अंदर जांच पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की संभावना न रहे। उन्होंने कहा कि विभाग में किसी भी तरह की गड़बड़ी स्वीकार नहीं की जाएगी। सभी नियुक्तियां पारदर्शी और नियमों के अनुसार होंगी। ब्यूरो

Thursday, October 2, 2025

माध्यमिक के नवनियुक्त 543 शिक्षकों को जल्द वेतन देने की तैयारी, अभिलेख सत्यापन न होने से चार महीने से नहीं मिला वेतन, विभाग ने इनका तुरंत वेतन स्वीकृत करने का दिया निर्देश

माध्यमिक के नवनियुक्त 543 शिक्षकों को जल्द वेतन देने की तैयारी, अभिलेख सत्यापन न होने से चार महीने से नहीं मिला वेतन, विभाग ने इनका तुरंत वेतन स्वीकृत करने का दिया निर्देश



लखनऊ : राजकीय माध्यामिक विद्यालय युक्त प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को जल्द वेतन दिलाने की कवायद शुरू हो गई है। विभाग ने इसके लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश दिया है कि इन शिक्षकों का तत्काल वेतन स्वीकृत करके, प्रयागराज निदेशालय को सूचित करें।

अपर शिक्षा निदेशक राजकीय अजय कुमार द्विवेदी की ओर से सभी डीआईओएस को जारी पत्र में कहा गया है कि जिन शिक्षकों ने विद्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया और कार्यरत हैं। कार्यभार संभालने की तिथि से अभी तक वेतन नहीं जारी हुआ है। इन शिक्षकों का तत्काल वेतन स्वीकृत किया जाए। 

इससे दिवाली से पहले शिक्षकों को वेतन मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। बता इन शिक्षकों पिछले दिनों निदेशालय को भेजे पत्र में कहा था कि कई त्योहार आने वाले हैं लेकिन वेतन न मिलने की वजह से हम अपनी नियुक्ति की खुशी तो मना ही नहीं सके। विभाग की लापरवाही से हमारा त्योहार भी खराब होने जा रहा है।

Saturday, May 31, 2025

बीएड की प्रवेश परीक्षा कल, दो पालियों में होगी परीक्षा, परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश

बीएड की प्रवेश परीक्षा कल, दो पालियों में होगी परीक्षा, परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश 

31 मई 2025
झांसी। बीएड की प्रवेश परीक्षा एक जून को दो पालियों में होगी।  तैयारियों का अंतिम चरण पूरा हो चुका है। परीक्षा सकुशल संपन्न कराने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस बार बीएड की प्रवेश परीक्षा आयोजन बुंदेलखंड का विश्वविद्यालय झांसी द्वारा किया जा रहा है। 

परीक्षा के लिए हर केंद्र पर एक आर्जवर व स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था व सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी। कैलकुलेटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, ब्लूटुथ आदि ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। केंद्र से 200 मीटर की परिधि में फोटोकॉपी की दुकानें, साइबर कैफे आदि बंद रहेंगे।

परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही प्रवेश मिलेगा। लिहाजा किसी भी असुविधा से बचने के लिए परीक्षार्थियों को कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंच जाना चाहिए। परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए सचल दल भी बनाए गए हैं, जो परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। 

दो पालियों में आयोजित होने वाली परीक्षा के तहत पहली पाली का आयोजन सुबह नौ बजे से 12 बजे तक व दूसरी पाली दोपहर दो बजे से पांच बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के लिए हर केंद्र पर एक-एक स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। इसके अलावा दो-दो पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। 



बीएड प्रवेश परीक्षा में बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद मिलेगा केंद्र पर प्रवेश, सीसीटीवी कैमरों की रहेगी निगरानी

29 मई 2025
झांसी। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का समय नजदीक आ गया है। एक जून को होने वाली परीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। बिना बायोमेट्रिक जांच के परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा इस बार बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराया जा रहा है। परीक्षा दो पालियों में होगी।  परीक्षा के दौरान कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएंगे। केंद्र पर प्रवेश करने से पहले परीक्षार्थी को बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जाएगा। परीक्षा पर सीसीटीवी कैमरों की नजर रहेगी। इसके लिए बुंदेलखंड विवि द्वारा सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों का अपना सेटअप लगवाया गया है। जिससे सर्विलांस के जरिये नजर रखी जा सकेगी।

प्रशासन की ओर से भी परीक्षा केंद्र पर पर सख्त नजर रहेगी। हर केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगाए हैं। साथ ही केंद्र प्रतिनिधि के रूप में प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। परीक्षा के दौरान दो सचल दल भी तैनात रहेंगे। 



यूपी बीएड : छह जिलों में नहीं बनेंगे प्रवेश परीक्षा केंद्र, 3.42 लाख छात्र छात्राओं ने किया बीएड में आवेदन

06 मई 2025
झांसी। एक जून को प्रस्तावित बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए 3.42 लाख छात्र-छात्राओं ने सोमवार रात तक फार्म भर दिए। दोपहर में बीयू कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में ललितपुर समेत छह जिलों को छोड़ प्रदेश के सभी 69 जिलों में परीक्षा कराने का फैसला किया गया। 

बीयू प्रदेश में लगातार तीसरी बार बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराएगा। इसके फार्म भरने की अंतिम तिथि सोमवार को खत्म हो गई और 3.42 लाख ने फार्म भरे जबकि गत वर्ष 2.23 लाख ने ही फार्म भले थे। 

कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा फार्म पूर्वांचल के जिलों के छात्र-छात्राओं ने भरे हैं। इसलिए पूर्वांचल के प्रत्येक जिले में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, जिनकी संख्या 715 के करीब होगी। ललितपुर, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, कासगंज व श्रावस्ती जिले में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। 



70 जिलों के 715 केंद्रों पर होगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, एक जून को होगा इम्तिहान

बीयू लगातार तीसरी बार करा रहा परीक्षा

04 मई 2025
झांसी। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा को लेकर बीयू कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने शुक्रवार को 19 विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, जिला कॉर्डीनेटर, डिप्टी नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की। स्पष्ट किया कि परीक्षा 70 जिलों के करीब 715 केंद्रों पर कराई जाएगी। 28 मई तक बीयू के दो-दो प्रतिनिधि परीक्षा सामग्री लेकर पहुंच जाएंगे और परीक्षा केंद्रों का जायजा लेंगे।


बीयू लगातार तीसरी बार प्रदेश में बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा करा रहा है। पांच मई तक विलंब शुल्क के साथ फार्म भरे जाएंगे। शुक्रवार शाम तक प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए 3.33 लाख छात्र-छात्राओं ने फार्म भर दिए। पांच मई तक यह आंकड़ा 3.35 लाख तक पहुंच सकता है।

एक जून को होने वाली प्रवेश परीक्षा को लेकर बीयू प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कुलपति ने ऑनलाइन बैठक करते हुए बताया कि पांच मई की रात को बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों का डाटा स्पष्ट हो जाएगा।

इसके आधार पर कुछ परीक्षा केंद्र बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र उन्हीं कॉलेज व विद्यालय को बनाया जाए, जिनकी छवि अच्छी हो। रास्ता सुगम हो। केंद्र शहर में ही बनाया जाए, जिससे अभ्यर्थियों को आने-जाने में दिक्कत न हो। प्रदेश कॉर्डीनेटर प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि परीक्षा सामग्री जिला प्रशासन की सुरक्षा में रखी जाएगी, जो परीक्षा शुरू होने से पहले कड़ी सुरक्षा में केंद्र तक पहुंचेगी।

Sunday, May 18, 2025

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा


लखनऊ । प्राइमरी स्कूल में सत्र शुरू हुए 47 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक यूनीफार्म के पैसे अभिभावकों के खाते नहीं पहुंचे हैं। कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों की यूनीफार्म, स्वेटर, जूते, मोजे व स्टेशनरी के प्रति छात्र 1200 रुपये अभिभावकों के खाते में आने हैं।


 प्रेरणा पोर्टल पर एक लाख से अधिक छात्रों (70 फीसदी) और अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर, आधार नंबर, आईएफएससी कोड की फीडिंग पूरी हो चुकी है। अभिभावक स्कूल आकर शिक्षकों से यूनीफार्म के पैसे भेजने का दबाव बना रहे हैं।


प्रधानाध्यापकों का कहना है कि स्कूल के पास आउट, प्रोन्नत और नव प्रवेशित करीब 70 फीसदी छात्र-छात्राओं का विवरण प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। जो बचे हैं उनका ब्योरा अपलोड किया जा रहा है। 


एडी बेसिक श्याम किशोर तिवारी बताते हैं कि किसी भी दिन अभिभावकों के खाते में यूनीफार्म के पैसे भेजे जा सकते हैं। विभाग की ओर से तैयारियां पूरी हैं। कक्षा वार ब्योरा अपलोड हो गया है

Wednesday, October 30, 2024

बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही मिलेगी छात्रवृत्ति

बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही मिलेगी छात्रवृत्ति

प्रधानाचार्य को भी ऑनलाइन कराना होगा प्रमाणीकरण


लखनऊ । बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के बाद ही विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति मिल सकेगी। शासन के आदेश के बाद समाज कल्याण विभाग ने नियम का अनुपालन कराना शुरू कर दिया। कॉलेज लॉगिन चालू कर विद्यालय में विद्यार्थियों का बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण किया जा रहा है।

शासन की ओर से छात्रवृत्ति के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 दिसंबर निश्चित की गई है। एक जुलाई से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। 31 दिसंबर तक पंजीकरण करा चुके विद्यार्थियों को पांच जनवरी तक आवेदन की हार्डकापी विद्यालय में जमा करनी होगी। आवेदन में सुधार के लिए 29 जनवरी से पांच फरवरी तक मौका दिया जाएगा।


मार्च माह से छात्रवृत्ति की धनराशि जारी होना शुरू हो जाएगी। हालांकि इस बार उन्हीं विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति का लाभ मिल सकेगा, जिनका बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण होगा।

बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण को अनिवार्य कर दिया गया है। फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने के लिए शासन की ओर से नया नियम जारी किया गया है। प्रमाणीकरण न होने पर विद्यार्थी छात्रवृत्ति से वंचित हो जाएंगे।

बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण न होने पर आवेदन निरस्त कर दिया जाएगा। समाज कल्याण विभाग कार्यालय में कॉलेज के प्रधानाचार्य को भी बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण कराना होगा।

उसके बाद कॉलेज संचालक विद्यालय की लॉगिन के माध्यम से विद्यार्थियों का बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण करेंगे। बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण के लिए केवाईसी अनिवार्य किया गया है। नए नियम के लागू होने से फर्जीवाड़े पर लगाम लग सकेगा।

Monday, November 27, 2023

नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण हजारों मेधावियों की छात्रवृत्ति फंसी, राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति का मामला

नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण हजारों मेधावियों की छात्रवृत्ति फंसी 

● राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति का मामला

● नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर आवेदन नहीं कर पा रहे मेधावी


प्रयागराज : नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल पर सत्यापन नहीं होने के कारण हजारों मेधावियों की छात्रवृत्ति फंसी हुई है। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन से वंचित राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा 2022 में सफल 14090 छात्र-छात्राएं परेशान हैं।


शिक्षा मंत्रालय ने इस साल से बायो आंथेटिकेशन का निर्णय लिया है। जिला स्तर पर डिस्ट्रिक्ट नोडल ऑफिसर (जिला विद्यालय निरीक्षक) और स्कूल स्तर पर इंस्टीट्यूट नोडल ऑफिसर (प्रिंसिपल) का बायो आंथेटिकेशन होना है। इसके लिए डीआईओएस और प्रिंसिपल का आधार नंबर अपलोड करने के साथ ही उनके फिंगरप्रिंट की मैचिंग कराई जानी है। इससे पहले सिर्फ आधार नंबर और ओटीपी से सत्यापन हो जाता था। अब चूंकि आवेदन की अंतिम तिथि 30 नवंबर में सप्ताहभर का समय भी नहीं बचा है, पोर्टल पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू न होने से परीक्षा में सफल मेधावी छात्र-छात्राएं परेशान हैं।


 छात्रवृत्ति परीक्षा के आयोजन की जिम्मेदारी उठाने वाले मनोविज्ञानशाला में प्रतिदिन दर्जनों छात्र-छात्राएं फोन पर और व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर पूछताछ कर रहे हैं। लेकिन पोर्टल पर सत्यापन शुरू न होने और शिक्षा मंत्रालय से कोई गाइडलाइन न मिलने के कारण मनोविज्ञानशाला के जिम्मेदार लोग भी कुछ बताने की स्थिति में नहीं हैं। इस समस्या को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने 24 नवंबर को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर पोर्टल पर केवाईसी कराने और छात्रों के ऑनलाइन फॉर्म भरवाने में सहायता कराने के निर्देश दिए हैं।


19 अप्रैल को परिणाम, अब तक परेशान

2022 की राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति परीक्षा का परिणाम 19 अप्रैल को घोषित हुआ था। परीक्षा में सम्मिलित 1,45,702 छात्र-छात्राओं में से 14090 का चयन हुआ था। सालाना 3.5 लाख से कम आय वाले परिवारों के इन बच्चों को कक्षा नौ से 12 तक प्रतिमाह एक हजार या प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये छात्रवृत्ति मिलनी है।

Monday, October 30, 2023

विजिलेंस जांच में पकड़ में आ सकते हैं कई और फर्जी, बलरामपुर, संभल के अलावा कुछ और जिलों में फर्जी चयनित

विजिलेंस जांच में पकड़ में आ सकते हैं कई और फर्जी, बलरामपुर, संभल के अलावा कुछ और जिलों में फर्जी चयनित

मुजफ्फरनगर में भी फर्जी चयन प्रमाणित कर चुका है चयन बोर्ड

हाई कोर्ट के आदेश पर शासन ने शुरू कराई थी जांच


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती 2013 में फर्जी तरीके से चयनित / समायोजित की संख्या कहीं ज्यादा हो सकती है। बलरामपुर, संभल के अलावा मुजफ्फरनगर में भी जालसाजों ने फर्जी ढंग से एडेड माध्यमिक विद्यालयों में तीन आरोपितों को कार्यभार ग्रहण कराए। फर्जी चयन का प्रकरण सामने आने के बाद आरोपित विद्यालयों से फरार हो चुके हैं। 


फर्जी ढंग से नियुक्ति के मामले में चयन बोर्ड हाई कोर्ट में पक्ष रख चुका है। हाई कोर्ट के आदेश पर शासन से विजिलेंस जांच शुरू कराने पर फर्जी चयनितों की संख्या ज्यादा सामने आ सकती है। चयन बोर्ड के सत्यापन में संभल और बलरामपुर में छह छह तथा मुजफ्फर नगर में तीन का समायोजन फर्जी निकल चुका है। इसके अलावा कुछ और जिलों में फर्जी तरीके से कार्यभार ग्रहण कराया गया है। 


बलरामपुर में ही 17 फर्जी चयनित विद्यालय से फरार हैं। एक आरोपित की बीएड की डिग्री फर्जी निकली थी। इस तरह 18 प्रकरण बलरामपुर में ही सामने आए। बलरामपुर के छह, संभल के एक और मुजफ्फरनगर के तीन के मामले हाई कोर्ट में पहुंचे हैं। इन्हें वेतन निर्गत करने में कई की संलिप्तता मानते हुए विजिलेंस जांच शुरू होने वाली है।


 जांच होने पर आरोपितों से आरोपितों के तार जोड़े जाने पर इस फर्जीवाड़े के मास्टरमाइंड और उसमें संलिप्त शिक्षा विभाग के अधिकारियों के कारनामे भी सामने आएंगे, क्योंकि कई के समायोजन का संबंधित जिला विद्यालय निरीक्षक न तो चयन बोर्ड की वेबसाइट से आनलाइन सत्यापन किया और न ही चयन बोर्ड से कराया। ऐसे में जांच शुरू होने पर कई की गर्दन फंस सकती है।



फर्जी चयनितों के खिलाफ मुकदमा लिखाने को डीआइओएस, प्रबंधक व प्रधानाचार्यों में खींचतान

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) भर्ती 2013 में फर्जी चयनितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को लेकर डीआइओएस, स्कूल के प्रबंधकों और प्रधानाचार्यों में खींचतान मची है। फर्जीवाड़ा खुलने पर मुकदमा दर्ज कराने से सब पीछे हट रहे हैं। 


अभी तक सामने आए 12 फर्जी मामलों में तीन के खिलाफ केस को मुकदमा दर्ज होने पर गिरफ्तार किया गया है, लेकिन अन्य मामले में प्रधानाचार्य मुकदमा नहीं दर्ज करा रहे हैं। इधर, हाई कोर्ट के आदेश पर शासन से भी विजिलेंस जांच शुरू करने के निर्देश दे दिए जाने के बाद डीआइओएस, प्रबंधक और प्रधानाचार्य मुकदमा दर्ज कराने को लेकर उलझे हुए हैं।

प्रधानाचार्यों ने फर्जी चयनितों को कार्यभार तो बिना चयन बोर्ड के सत्यापन कराए ग्रहण करा दिया गया, लेकिन उनका कहना है कि समायोजन सूची का सत्यापन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) ने नहीं कराया और फर्जी चयनित को नियुक्ति पत्र विद्यालय प्रबंधक ने जारी किया है तो मुकदमा प्रधानाचार्य क्यों दर्ज कराएं।

समायोजन पत्र का बिना सत्यापन कराए बलरामपुर और संभल में 12 लोगों को कार्यभार ग्रहण कराने के मामले में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड ने दोनों जिला विद्यालय निरीक्षकों को आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए थे।

 बलरामपुर में दबाव पड़ने पर प्रधानाचार्यों ने तीन आरोपितों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार किया है। अन्य के विरुद्ध संबंधित प्रधानाचार्यों पर जिला विद्यालय निरीक्षक और प्रबंधक दबाव बना रहे हैं कि वह मुकदमा दर्ज कराएं।

Sunday, September 3, 2023

अब 40 वर्ष से ऊपर वालों को छात्रवृत्ति नहीं देगी सरकार, छात्रवृत्ति योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी

🔵 अब 40 वर्ष से ऊपर वालों को छात्रवृत्ति नहीं देगी सरकार

🔵 छात्रवृत्ति योजना में कई महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी

🔵 दूसरे राज्य बोर्ड से पास छात्र- छात्राओं को भी छात्रवृत्ति नहीं

🔵 छात्रों को डिजिलाकर में कराना होगा पंजीकरण, शैक्षिक डाटा की होगी जांच

🔴 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को दशमोत्तर छात्रवृत्ति, शुल्क प्रतिपूर्ति एवं पूर्व दशम छात्रवृत्ति देती है सरकार

🔴 15 लाख तक छात्र-छात्राएं हैं. अनुसूचित जाति की पांच सौ रुपये प्रतिवर्ष और मिलेंगे छात्रवृति में

🔴 75 वर्ष तक के लोग भी ले रहे थे छात्रवृत्ति, जांच में हुआ था राजफाश



प्रदेश सरकार अब 40 वर्ष से ऊपर वालों को छात्रवृत्ति नहीं देगी। अभी तक छात्रवृत्ति के लिए अधिकतम उम्र की कोई सीमा नहीं है। दूसरे राज्य बोर्ड से हाईस्कूल पास छात्र- छात्राओं को भी छात्रवृत्ति अब सरकार नहीं देगी। केंद्रीय बोर्ड सीबीएसई व आइसीएसई बोर्ड के छात्रों को यूपी बोर्ड की तर्ज पर छात्रवृत्ति मिलती रहेगी। छात्रवृत्ति पाने के लिए छात्रों को डिजिलाकर में पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। उनके शैक्षिक डाटा की आनलाइन जांच आसानी से हो सकेगी। 


प्रदेश सरकार हर वर्ष करीब 50 लाख से अधिक गरीब परिवारों के छात्र-छात्राओं को दशमोत्तर छात्रवृत्ति शुल्क प्रतिपूर्ति एवं पूर्व दशम छात्रवृत्ति प्रदान करती है। इसमें से 14-15 लाख अनुसूचित जाति की छात्र-छात्राएं शामिल होते हैं। सरकार समाज कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति नियमावली में कई अहम बदलाव करने जा रही है। नियमावली में बदलाव को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी सहमति दे दी है। शीघ्र ही संशोधित नियमावली जारी होने की उम्मीद है।


सबसे बड़ा बदलाव उम्र को लेकर किया जा रहा है। यह बदलाव इसलिए किया जा रहा है क्योंकि पिछले वर्षों में मथुरा व गाजियाबाद आइटीआइ संस्थानों में हुए छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में यह तथ्य सामने आया था कि इस योजना में 45 से 75 वर्ष के लोगों को छात्र बनाकर छात्रवृत्ति की रकम हजम कर ली गई। इनमें से कई बुजुर्ग तो पेंशन पाते थे किंतु उन्हें भी छात्र दिखाकर छात्रवृत्ति की रकम हड़पी गई छात्रवृत्ति पाने के लिए डिजिलाकर को समाज कल्याण विभाग एपीआइ पोर्टल से जोड़ने जा रहा है। इससे आनलाइन शैक्षिक डाटा जांचने में आसानी होगी।


सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है कि छात्रवृत्ति का आनलाइन आवेदन करने के दौरान आधार नंबर डालते ही प्रमाणीकरण हो जाएगा। इससे आधार में दर्ज नाम, पता, उम्र व पिता का नाम सहित अन्य जानकारी तत्काल आपके छात्रवृत्ति के फार्म में अपने आप आ जाएगी। यदि किसी छात्र को किसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति मिल रही है और बीच में ही उसका प्रतिष्ठित संस्थान में उच्च स्तर के किसी पाठ्यक्रम में दाखिला हो जाता है, तो भी उसे नए पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। अभी यदि किसी पाठ्यक्रम में छात्रवृत्ति मिल रही है और उसे बीच में छोड़ने पर दूसरे पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर छात्रवृत्ति प्रदान नहीं की जाती थी। इसके अलावा अब दूसरे प्रदेशों के विश्वविद्यालयों के यूपी में खुले कैंपस के छात्रों को भी छात्रवृत्ति नहीं मिलेगी।


सरकार एससी के छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति 500 रुपये बढ़ाने की तैयारी कर रही है। अभी इन छात्रों को तीन हजार रुपये प्रति वर्ष मिलता है। इसे साढ़े तीन हजार रुपये प्रति वर्ष किया जाएगा। सरकार छात्रवृत्ति नियमावली में जो बदलाव कर रही है उसके अनुसार अब एक साथ दो पाठ्यक्रम करने पर भी छात्रवृत्ति मिल सकेगी। एक व्यावसायिक व एक सामान्य पाठ्यक्रम होना चाहिए। अभी तक एक पाठ्यक्रम के लिए ही छात्रवृत्ति मिलती थी। समाज कल्याण विभाग में आठ स्तरों के एक हजार पाठ्यक्रम हैं जिनमें छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।


मैला ढोने वालों के बच्चों के लिए आय की सीमा नहीं

मैला ढोने व कच्चे चमड़े का कार्य करने वाले परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति योजना का लाभ देने के लिए आय की सीमा के बंधन को हटा दिया गया है। नियमावली संशोधन के बाद कक्षा नौ व 10 के बच्चों को 3500 रुपये प्रति वर्ष छात्रवृत्ति दी जाएगी। अभी ढाई लाख रुपये सालाना तक की आय वाले अनुसूचित जाति के परिवारों के बच्चों को ही छात्रवृत्ति का लाभ मिलता है।



एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा ली स्कॉलरशिप तो शिक्षण संस्थानों का होगा सत्यापन



लखनऊ। अगर किसी शिक्षण संस्थान ने एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के छात्रवृत्ति आवेदन अग्रसारित किए हैं, तो उसके रिकॉर्ड का अनिवार्य रूप से सत्यापन कराया जाएगा। भ्रष्टाचार रोकने के लिए चालू वित्त वर्ष से इस नियम का सख्ती से पालन करने का निर्णय लिया गया है।


इतना ही नहीं अगर किसी संस्थान में 40 फीसदी से ज्यादा अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्र हैं, तो वहां के भी संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाएगा। उसके बाद ही छात्रों के खातों में राशि भेजी जाएगी। प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को ढाई लाख रुपये तक और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक परिवार की सालाना आय होने होने पर छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की सुविधा दी जाती है।

नियमावली में यह व्यवस्था है कि अगर किसी संस्थान से एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के आवेदन अग्रसारित किए गए हैं तो

घपलों पर सख्ती : 40 फीसदी से ज्यादा एससी छात्र होने पर भी रहेगी निगाह

विद्यार्थियों के रिकॉर्ड का सत्यापन कराया जाएगा, ताकि किसी तरह के भ्रष्टाचार की गुंजाइश न रहे। लेकिन, देखने में आया है कि जिला स्तर पर इस नियम का कढ़ाई से पालन नहीं हो रहा है। वर्तमान में इंटर से ऊपर के करीब 9 हजार शिक्षण संस्थान हैं। इनमें से करीब 15 फीसदी यानी 1300-1400 संस्थानों में एक करोड़ रुपये से ऊपर के आवेदन अग्रसारित किए जाते हैं। इनमें बीटेक, बीफार्मा, बीएड और डिप्लोमा इंजीनियरिंग के संस्थान प्रमुख हैं।

शासन ने इन संस्थानों के विद्यार्थियों का सत्यापन कराने के निर्देश जिला स्तरीय समिति को दिए हैं। इसमें मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि विद्यार्थियों ने किसी अन्य पाठ्यक्रम में तो दाखिला नहीं लिया है या किसी तरह का कोई फर्जीवाड़ा तो नहीं है। भुगतान से पहले सत्यापन की प्रक्रिया अनिवार्य रूप से पूरी की जाएगी।

Saturday, August 26, 2023

आंगनबाड़ी : लाभार्थी के हिस्से का पोषाहार कोई दूसरा नहीं ले सकेगा, पुष्टाहार योजना के तहत पोषाहार वितरण को पारदर्शी बना रही सरकार

आंगनबाड़ी : लाभार्थी के हिस्से का पोषाहार कोई दूसरा नहीं ले सकेगा, पुष्टाहार योजना के तहत पोषाहार वितरण को पारदर्शी बना रही सरकार


26 अगस्त 2023
योगी सरकार ने प्रदेश की बाल विकास परियोजनाओं के तहत संचालित आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनुपूरक पुष्टाहार योजना के तहत पोषाहार वितरण को और सुदृढ़ तथा पारदर्शी बनाने के लिए बायोमैट्रिक्स प्रणाली लागू किए का फैसला किया है। इसके तहत ई-पॉस मशीनों की स्थापना एवं संचालन के लिए उत्तर प्रदेश डेवलपमेंट सिस्टम कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीडेस्को) को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है।


मुख्यमंत्री ने यह निर्देश शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में दिए। उन्होंने कहा है कि ई-पॉस मशीनों की स्थापना के लिए टेंडर के साथ ही ई-टेंडरिंग के माध्यम से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (आरएफपी) तैयार करने की जिम्मेदारी यूपीडेस्को की होगी। हाल ही में योगी कैबिनेट ने ई-पॉस मशीनों के माध्यम से अनुपूरक पुष्टाहार योजना के तहत पोषाहार वितरण की व्यवस्था को मंजूरी दी है। 


इसके माध्यम से लाभार्थी के हिस्से का पोषाहार कोई दूसरा नहीं ले सकेगा। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा प्रदेश की बाल विकास परियोजनाओं के तहत संचालित आंगनबाड़ी व मिनी आंगनबाड़ी केंद्रों पर अनुपूरक पुष्टाहार योजना के तहत 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों (अति कुपोषित सहित), गर्भवती एवं धात्री महिलाओं तथा 14 से 18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं (केवल आकांक्षात्मक जनपदों में) को पोषाहार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसे उत्तर प्रदेश शासन के ई- प्रोक्योरमेन्ट पोर्टल https://etender.up.nic.in के माध्यम से किए जाने के प्रबंध किए गए हैं।



23 अगस्त 2023
पोषाहार वितरण में घालमेल पर लगाम, मैनुअल व्यवस्था के बजाए अब हर आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ई- पॉस मशीन से होगा सत्यापन, कैबिनेट का फैसला


आंगनबाड़ी केन्द्रों के जरिए लाभार्थियों को दिए जाने वाले पोषाहार के वितरण में अब घालमेल नहीं चलेगा। सरकार ने पोषाहार वितरण की मैनुअल व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब ई-पॉस मशीन के माध्यम से सत्यापन कराने का फैसला किया है।

बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों के जरिए लाभार्थियों को दिए जाने वाले पोषाहार के वितरण में अब घालमेल नहीं चलेगा। सरकार ने पोषाहार वितरण की मैनुअल व्यवस्था को समाप्त करते हुए अब ई-पॉस मशीन के माध्यम से सत्यापन कराने का फैसला किया है। इसके लिए सभी परियोजनाओं व आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ई-पॉस मशीन स्थापित किए जाएंगे । उप्र डेवलपमेंट सिस्टम कॉरपोरेशन (यूपीडेस्को) को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। इससे संबंधित प्रस्ताव को कैबिनेट ने मंगलवार को मंजूरी दे दी है।



बता दें कि अभी तक लाभार्थियों को वितरित किए गए पोषाहार के सत्यापन के लिए मैनुअल व्यवस्था लागू है। तमाम जिलों में लाभार्थियों की अधिक संख्या दिखाकर पोषाहार वितरण में बड़े पैमाने पर धांधली किए जाने के कई मामले सामने भी आते रहते हैं। ऐसी ही शिकायतों के आधार पर पिछले दिनों कई जिलों के अधिकारियों व आंगनबाड़ी स्तर के कर्मियों पर कार्रवाई भी की गई है । इस तरह की बढ़ती शिकायतों के देखते हुए ही सरकार ने इस पोषाहार वितरण के सत्यापन के लिए तनकीन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है।


सरकार के इस फैसले से जहां वास्तविक लाभार्थियों को तय मात्रा के मुताबिक पोषाहार उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी, वहीं किसी भी स्तर पर होने वाले धांधली को भी रोका जा सकेगा। प्रस्ताव के मुताबिक ई-पॉस मशीनों की स्थापना पर आने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। ई-पॉस मशीनों की स्थापना और संचालन की जिम्मेदारी यूपीडेस्को को दी गई है।

Tuesday, August 8, 2023

बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही जारी होगी छात्रवृत्ति

बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही जारी होगी छात्रवृत्ति,  अल्पसंख्यक कल्याण व वक्फ मंत्री का निर्देश, 

सत्यापन के लिए लगेंगे शिविर संबंधित संस्था में शिविर लगाया

चार लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिलना है फायदा


लखनऊ। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण व वक्फ मंत्री धर्मपाल सिंह ने केंद्रीय छात्रवृत्ति योजनाओं में आवेदन करने वाले करीब चार लाख विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति बायोमीट्रिक सत्यापन के बाद ही जारी करने के निर्देश दिए हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट कम मीन्स छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत छात्रवृत्ति देता है। अब इसे स्टेट नोडल अधिकारी, डिस्ट्रिक नोडल अधिकारी, इंस्टीट्यूट नोडल अधिकारी, संस्थाध्यक्ष और आवेदक छात्र - छात्राओं के सत्यापन के बाद ही दिया जाएगा। 


अल्पसंख्यक बायोमीट्रिक सत्यापन के लिए सभी जिलों में डीएम की अध्यक्षता में बैठकें आयोजित की जा रही हैं। जिला स्तर पर शिविर लगाकर बायोमीट्रिक द्वारा इन्स्टीट्यूट नोडल अधिकारी और संस्थाध्यक्ष का सत्यापन होना है। सभी संस्थानों की मैपिंग कराकर जाएगा। 


इन शिविरों के माध्यम से 4,01,876 छात्र - छात्राओं का बायोमीट्रिक सत्यापन होगा। यह पूरी कार्यवाही 25 अगस्त तक पूरा करने को कहा गया है। इसके लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के सभी मंडलीय उप निदेशकों और जिला कल्याण अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। 


सभी संस्थाओं के संस्थाध्यक्षों से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने अपील की है कि निर्धारित तारीखों पर बायो- सत्यापन शिविर में अपना और छात्र-छात्राओं का सत्यापन जरूर करा लें।


Saturday, May 28, 2022

पदों के सत्यापन को अब 30 तक खुलेगा पोर्टल

पदों के सत्यापन को अब 30 तक खुलेगा पोर्टल
 

प्रयागराज :  प्रदेश के 4500 से अधिक सहायता प्राप्त माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षित स्नातक (टीजीटी), प्रवक्ता (पीजीटी) और प्रधानाचार्यों के रिक्त पदों का सत्यापन निर्धारित समयसीमा 25 मई तक पूरा नहीं हो सका।


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के सचिव नवल किशोर ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिखकर निर्देशित किया है कि टास्क फोर्स के माध्यम से ऑनलाइन अधियाचित पदों का सत्यापन कराते हुए हर हाल में 30 मई तक सत्यापन करा दिया जाए। उसके बाद पोर्टल नहीं खुलेगा।


 19 मई को शासन स्तर पर हुई बैठक में रिक्त पदों का दोबारा सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए 23 से 25 मई तक अधियाचन पोर्टल खोला गया, लेकिन समयसीमा में सत्यापन न होने पर कुछ डीआईओएस ने और समय देने का अनुरोध किया था। स्कूलों में छात्रसंख्या, विषयवार स्वीकृत पदों और आरक्षण श्रेणी के मद्देनजर दोबारा रिक्त पदों की स्थिति देखी जानी है, ताकि चयन के बाद अभ्यर्थियों को भटकना न पड़े। 


जिलों से सहायक अध्यापक के 4500, प्रवक्ता के 850 और प्रधानाचार्यों के 1918 रिक्त पदों की सूचना मिली थी। इन पदों के सत्यापन के लिए 16 से 25 अप्रैल तक पहली बार अधियाचन पोर्टल खोला गया था।


अधियाचित पदों के सत्यापन को चयन बोर्ड ने बढ़ाई तिथि

बोर्ड ने आधी रात तक कार्य कर पूरा किया भर्तियों का बैकलाग

कल खत्म हो जाएगा बोर्ड के सभी पांच सदस्यों का कार्यकाल


प्रयागराज : एडेड माध्यमिक विद्यालयों में स्वीकृत एवं रिक्त पदों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को भेजे आनलाइन अधियाचन का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए चयन बोर्ड ने 23 से 25 मई के लिए अधियाचन पोर्टल खोला, लेकिन सत्यापन न होने पर तिथि बढ़ाकर 30 मई कर दी जाएगा। शासन के निर्देश के अनुसार आनलाइन अधियाचन का सत्यापन इस अवधि में करने के निर्देश चयन बोर्ड सचिव नवल किशोर ने प्रदेश भर के सभी डीआइओएस को दिए हैं।


चयन बोर्ड सचिव के मुताबिक पांच अप्रैल 2022 तक 2022- 2023 के लिए आनलाइन प्राप्त अधियाचन के सत्यापन के लिए 16 से 25 अप्रैल 2022 तक अधियाचन पोर्टल खोला गया था। चयन बोर्ड अध्यक्ष वीरेश कुमार ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में विषयवार स्वीकृत पढ़ें, आरक्षण श्रेणी तथा छात्र संख्या के दृष्टिगत औचित्य का परीक्षण के बाद सत्यापन करने का निर्देश दिया था ताकि वेतन भुगतान या नियुक्ति को लेकर कोई विवाद न हो। अब शासन ने जनपद स्तर पर गठित टास्क फोर्स के माध्यम से छात्र संख्या के आधार पर सत्यापन कार्य किए जाने का निर्देश दिया है। इसके लिए टास्क फोर्स के माध्यम से तीन दिन में सत्यापन के लिए अधियाचन पोर्टल खोला गया। इस अवधि में सत्यापन नहीं किए जाने पर सत्यापन की तिथि बढ़ाकर 30 मई कर दी गई है। इस अवधि में सत्यापन कार्य पूरा किया जाना है।

Saturday, May 7, 2022

नियमित सेवा से पहले दस्तावेज का सत्यापन क्यों नहीं? : हाई कोर्ट, अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट

नियमित सेवा से पहले दस्तावेज का सत्यापन क्यों नहीं : हाई कोर्ट, अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट
 
फर्जी डिग्री से नियुक्ति पाने का मामला : हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से अफसरों की जवाबदेही तय कर मांगी रिपोर्ट



प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा एलटी अध्यापक को बर्खास्त करने के आदेश पर रोक लगा दी। अध्यापक को फर्जी बीएड अंकपत्र व डिग्री के आधार पर नियुक्ति पाने का दोषी करार देते हुए बर्खास्त कर दिया गया था। कोर्ट ने राज्य सरकार को 1993 में तदर्थ नियुक्त अध्यापक को 2008 में नियमित करने व 2015 में चयन वेतनमान देने वाले शिक्षा विभाग कुशीनगर के सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है।


 अधिकारियों की जवाबदेही तय कर तीन माह में रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा कि दस्तावेज का सत्यापन नियमित सेवा में लेने के समय ही किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं किया गया? फर्जी अंक पत्र वाला व्यक्ति सरकारी धन से कैसे नियुक्त किया गया? कोर्ट ने निदेशक के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि याची के अध्यापन कार्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न किया जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनता इंटर कालेज रामकोला, कुशीनगर कृषि अध्यापक अशोक कुमार सिंह की याचिका पर दिया है। मामले के अनुसार याची एलटी ग्रेड कृषि अध्यापक पद पर तदर्थ रूप में छह मार्च 1993 को नियुक्त किया गया। क्षेत्रीय समिति ने 15 सितंबर 2008 को सेवा नियमित कर दी।


इलाहाबाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा निदेशक के एलटी अध्यापक की बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी है। अध्यापक को फर्जी बीएड अंकपत्र के आधार पर नियुक्ति पाने का दोषी करार देते हुए उसे बर्खास्त कर दिया गया था।


कोर्ट ने राज्य सरकार को 1993 में तदर्थ नियुक्त अध्यापक को 2008 में नियमित करने और 2015 में चयन वेतनमान देने वाले शिक्षा विभाग कुशीनगर के सभी अधिकारियों के खिलाफ जांच करने का निर्देश दिया है। साथ ही अधिकारियों की जवाबदेही तय कर तीन माह में रिपोर्ट मांगी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ ने जनता इंटर कॉलेज रामकोला कुशीनगर के अध्यापक अशोक कुमार सिंह की याचिका पर दिया है।


कोर्ट ने कहा है कि फर्जी अंकपत्र वाला व्यक्ति सरकारी धन से कैसे नियुक्त किया गया। दस्तावेज का सत्यापन नियमित सेवा में लेने के समय ही किया जाना चाहिए था। ऐसा क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने निदेशक के आदेश पर रोक लगाते हुए कहा है कि याची के अध्यापन कार्य में किसी प्रकार का अवरोध उत्पन्न न किया जाए।लोकसेवक से ऐसी लापरवाही की उम्मीद नहीं की जा सकतीकोर्ट ने कहा कि एक लोक सेवक से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि दस्तावेज का सत्यापन किए बगैर सेवा नियमित कर देगा। डीआईओएस सहित शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी की भी जवाबदेही है। चयन वेतनमान देने वाले अधिकारियों की भी जवाबदेही है। विभागीय जांच की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा सेवा नियमित करने से लेकर चयन वेतनमान देने तक की जांच होनी चाहिए।


याची ने कोर्ट के आदेश का अनुपालन न होने पर याचिका दायर की थी। नोटिस जारी होने केबाद माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने धारा 16 ई (10) के अंतर्गत कार्यवाही शुरू की। याची ने जवाब दिया कि उसकी नियुक्ति बीएससी कृषि डिग्री के आधार पर की गई थी। फर्जी डिग्री के आरोपों से इनकार किया। सुनवाई केदिन याची की पत्नी बीमारी के कारण अस्पताल में भर्ती थी। उसने निदेशक को इसकी सूचना दी। इसके बाद दोबारा बुलाए बगैर याची की सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया गया, जिसे चुनौती दी गई है।

Sunday, June 27, 2021

एडेड स्कूलों में फर्जी व संदिग्ध शिक्षकों पर सख्ती, सभी बीएसए से मांगी गयी रिपोर्ट

एडेड स्कूलों में फर्जी व संदिग्ध शिक्षकों पर सख्ती, सभी बीएसए से मांगी गयी रिपोर्ट


प्रयागराज : प्रदेश के 3049 अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में फर्जी और संदिग्ध शिक्षकों को लेकर शासन सख्त है। महानिदेशक स्कूली शिक्षा विजय किरन आनंद ने 24 जून को सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों से ऐसे शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अभिलेखों की जांच के निर्देश दिए हैं।


महानिदेशक ने एक जून को पत्र भेजकर अभिलेखों की जांच के संबंध में अब तक की कार्रवाई की सूचना 15 जून तक मांगी थी। लेकिन अधिकांश जिलों के बीएसए ने सूचना नहीं भेजी। इसके बाद 24 जून को पत्र लिखकर तीन दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं। देरी पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रबंधकों की सांठगांठ से हुई थी मनमानी भर्तीः अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों के प्रबंधक पहले बेसिक शिक्षा अधिकारियों से सांठगांठ कर शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्ति कर लेते थे। इसमें लाखों का खेल होता था। 2011 से 2016 तक सैकड़ों नियुक्तियां की गई। प्रयागराज में ही एक स्कूल की अनुमन्यता न होने के बावजूद 4 शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई थी।

शासन के निर्देश पर जिले के 106 एडेड जूनियर हाईस्कूलों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अभिलेख उपलब्ध कराने के निर्देश खंड शिक्षाधिकारियों को दिए हैं ताकि सत्यापन कराया जा सके। ये सूचनाएं मानव संपदा पोर्टल पर अपलोड की
जाएगी। - संजय कुशवाहा, बेसिक शिक्षा अधिकारी

Saturday, May 29, 2021

बेसिक शिक्षा विभाग के नवनियुक्त 69000 शिक्षकों को जल्द से जल्द वेतन देने के निर्देश, लेटलतीफी पर होगी कार्रवाई : CM योगी आदित्यनाथ

बेसिक शिक्षा विभाग के नवनियुक्त 69000 शिक्षकों को जल्द से जल्द वेतन देने के निर्देश, लेटलतीफी पर होगी कार्रवाई : CM योगी आदित्यनाथ


उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नवनियुक्त शिक्षकों का वेतन भुगतान समय से किए जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा कि नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन कार्य जल्दी पूरा किए जाए। सत्यापन में देरी होने पर सम्बंधित अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने के निर्देश भी दिए हैं।


प्रदेश में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए योगी सरकार ने पिछले साल बेसिक शिक्षा विभाग में 69 हजार शिक्षकों की भर्ती की गई थी। इनको प्रदेश के 1.5 लाख से अधिक परिषदीय विद्यालयों में तैनाती दी गई है। दस्तावेजों के सत्यापन की वजह से शिक्षकों का वेतन निकलने में दिक्कत हो रही है। हालांकि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से करीब 60 प्रतिशत नवनियुक्त शिक्षकों के दस्तावेजनों का सत्यपान कार्य पूरा कर उनको वेतन दिया जा रहा है। शेष शिक्षकों को वेतन दिए जाने की मांग शिक्षक संगठनों ने मुख्यमंत्री से की थी।


इस पर कड़ा रूख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त शेष शिक्षकों के दस्तावेजों का सत्यापन जल्द पूरा किए जाने के निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। उन्होने कहा कि शिक्षकों का समय पर उनके वेतन का भुगतान किया जाए। उन्होंने उच्च अधिकारियों को निर्देश दिए है कि वह जिलेवार शिक्षकों के सत्यापन कार्य की समीक्षा करें। जिन जिलों में सत्यापन कार्य धीरा चल रहा है। वहां संबंधित अधिकारी को समय पर सत्यापन पूरा करने के निर्देश दें। इसके बाद भी लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई करें। मुख्यमंत्री ने कोरोना काल में परिषदीय विद्यालयों में पठन पाठन कार्य सुचारू रूप से संचालित किए जाने के निर्देश भी दिए।

Sunday, May 23, 2021

वेतन जारी करने के लिए शिक्षकों से मांगा शपथ पत्र

वेतन जारी करने के लिए शिक्षकों से मांगा शपथ पत्र

2003 के पहले के प्रमाण पत्रों का सत्यापन ऑनलाइन नहीं होने से होगी परेशानी


प्रयागराज प्रदेश सरकार की ओर से 69 हजार सहायक अध्यापक भर्ती में नौकरी पाए शिक्षकों को कोरोना काल में शपथ पत्र लेकर वेतन जारी करने के आदेश के बाद बीएसए की ओर से जिले के शिक्षकों से शैक्षिक प्रमाण पत्रों के संबंध में शपथ पत्र मांगा गया है। बीएसए संजय कुमार कुशवाहा की ओर से जारी मांगे जाने के बाद शिक्षक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में शपथ पत्र जमा कर रहे हैं। बीएसए की ओर से सोमवार तक वेतन जारी करने की संभावना है।


2003  के पहले डिग्री पूरी करने वाले अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्र ऑनलाइन नहीं होने के चलते इनका सत्यापन संभव नहीं होगा। ऐसे में 2003 के पहले शैक्षिक अर्हता हासिल करने वालों को शपथ पत्र लेकर वेतन जारी करना संभव नहीं होगा।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बेसिक शिक्षा अधिकारी एवं प्रदेश सरकार से सभी अभ्यर्थियों से शपथ पत्र लेकर वेतन जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों की जांच के बाद ही जिला समिति ने नौकरी के लिए चुना है, ऐसे में शपथ पत्र लेने के बाद उन्हें वेतन जारी कर दिया जाए। उनका कहना है कि कोरोना संक्रमण के दौर में शिक्षक बिना वेतन के काम कर रहे हैं।

Saturday, May 22, 2021

69000 भर्ती के अंतर्गत शपथ पत्र के आधार पर वेतन भुगतान के संबंध में शिक्षक संघ का अनुरोध

69000 भर्ती के अंतर्गत शपथ पत्र के आधार पर वेतन भुगतान के संबंध में शिक्षक संघ का अनुरोध




Wednesday, May 19, 2021

अंततः UP में 69000 नवनियुक्त शिक्षकों के सैलरी मिलने का रास्ता साफ, CM योगी ने दिया आदेश

अंततः UP में 69 हजार नव चयनित शिक्षकों के सैलरी मिलने का रास्ता साफ,  CM योगी ने दिया आदेश


उत्तर प्रदेश में 69000 शिक्षक भर्ती के नव चयनित शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर CM योगी ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग नव चयनित शिक्षकों के ऑफलाइन वेरीफिकेशन के पेंच को हटाते हुए नया आदेश जारी करने जा रहा है.


लखनऊ. उत्तर प्रदेश में पिछले साल चयनित किये गये 69000 शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर CM योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं, जिसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने 69000 शिक्षक भर्ती में नव चयनित शिक्षकों के ऑफलाइन वेरीफिकेशन के पेंच को हटाते हुए आदेश जारी करने जा रहा है. कोरोना काल में बेसिक शिक्षकों को आर्थिक तंगी से ना जूझना पड़े, इसलिए विभाग ने यह बड़ा फैसला किया है. अब ऑफलाइन वेरिफिकेशन की जगह नव नियुक्त शिक्षकों को बीएसए कार्यालय में शपथ पत्र देना होगा.


बता दें कि 69000 शिक्षक भर्ती की पहली कॉउंसलिंग 12 अक्टूबर 2020 को हुई थी, जिसमें नियुक्ति पत्र 17 अक्टूबर को मिला था. वहीं दूसरी कॉउंसलिंग 2 से 4 दिसंबर 2020 को हुई थी. जिसमें 5 दिसंबर को नव चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिला था. ऐसे में वेरिफिकेशन में वर्ष 2003 के बाद का हाईस्कूल व इंटरमीडिएट का  डेटा तो ऑनलाइन है, लेकिन पहले के वर्षों के लिए ऑफलाइन वेरिफिकेशन की व्यवस्था है. बीएड व स्नातक (Graduation) की डिग्री का डाटा आज भी ऑनलाइन मौजूद नही है, जिस कारण कोरोना काल मे विश्वविद्यालय से ऑफलाइन वेरिफिकेशन में तमाम दिक्कत आ रही थी.


बेसिक शिक्षा विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शपथ पत्र के बाद यदि कोई त्रुटि वेरिफिकेशन में आती है तो विभाग FIR कराने के साथ शिक्षकों से  वसूली भी करायेगा. बेसिक शिक्षा विभाग के इस आदेश के बाद प्रदेश के करीब 70 हज़ार शिक्षकों ने राहत की सांस ली है.v बता दें कि प्रदेश में नव चयनित शिक्षकों की भर्ती के बाद से उन्हें सैलरी नहीं मिल पा रही थी, इसकी तमाम वजहों के साथ प्रमुख वजह वेरीफिकेशन को बताया गया था. लेकिन अब योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद नव चयनित शिक्षकों को सैलरी मिलने का रास्ता साफ हो गया है.

भेदभाव : प्रदेश में नवनियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान में दो तरह के नियम

भेदभाव : प्रदेश में नवनियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान में दो तरह के नियम


प्रयागराज : प्रदेश में नवनियुक्त शिक्षकों के वेतन भुगतान में दो तरह के नियम चल रहे हैं। राजकीय माध्यमिक कालेजों में तैनात शिक्षकों को शपथपत्र लेकर वेतन देने के निर्देश दिए गए हैं, वहीं प्राथमिक स्कूलों में तैनात शिक्षकों को अभिलेख सत्यापन पूरा न होने से वेतन नहीं मिल रहा है। हालांकि इस संबंध में बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सख्त आदेश दिए गए हैं लेकिन, शिक्षक संघ ने कहा है कि माध्यमिक की तरह बेसिक में भी शपथपत्र पर भुगतान क्यों नहीं हो सकता?


बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक स्कूलों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती के तहत करीब 64 हजार शिक्षक सात माह से वेतन मिलने की राह देख रहे हैं। उनके शैक्षिक व प्रशिक्षण अभिलेखों का सत्यापन कराकर भुगतान कराने के लिए कई पत्र भेजे जा चुके हैं लेकिन, जिलों में बीएसए व अन्य अधिकारी ऑनलाइन सत्यापन में रुचि नहीं ले रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर से उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग से चयनित प्रवक्ता व एलटी ग्रेड शिक्षकों को राजकीय माध्यमिक कालेजों में नियुक्ति मिली है। इन शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन होना है।