DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label फतेहपुर. Show all posts
Showing posts with label फतेहपुर. Show all posts

Wednesday, September 23, 2020

फतेहपुर : अब अभिभावक स्कूल जाकर लेंगे होमवर्क, मिशन प्रेरणा ई-पाठशाला का द्वितीय चरण 21 सितम्बर से शुरू

फतेहपुर : अब अभिभावक स्कूल जाकर लेंगे होमवर्क, मिशन प्रेरणा ई- पाठशाला का द्वितीय चरण 21 सितम्बर से शुरू।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को कोरोना संकटकाल में शिक्षा देने के लिए एक और नई कवायद शुरू हो गई है। अब विद्यालयों में ई-पाठशाला के तहत अभिभावकों के साथ गोष्ठी की जाएगी।कोविड-19 की गाइड लाइनों का पालन करते हुए गोष्ठी की जा रही है। 10 से अधिक अभिभावकों को एक बार में नहीं बुलाया जाएगा। 


जिसमें परिषदीय विद्यालयों में अब बच्चों की जगह अभिभावक स्कूल जाएंगे। अभिभावक स्कूल में शिक्षकों होमवर्क भी लेंगे और अपने बच्चों को होमवर्क कराने में मदद करेंगे। संसाधनों के अभाव में जो बच्चे शिक्षा से दूर हैं, ऐसे बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा रहा है। कोरोना संकट के कारण स्कूली छात्र- छात्राओं की नियमित पढ़ाई बुरी तरह से प्रभावित है।


इसके लिए विद्यालयों में पठन पाठन की जो ऑनलाइन व्यवस्था की गई है वह परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के लिए काफी मुश्किल साबित हो रही है। कारण है कि तमाम अभिभावकों के पासएंड्रायड फोन नहीं हैं। जिसके पास फोन हैं भी वह सही से ऑनलाइन वर्क को समझ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर विपरीत असर पड़ रहा है। 


परिषदीय स्कूलों में मिशन प्रेरणा की पाठशाला का दूसरा चरण 21 सितंबर से शुरू किया गया है। जिसमें उन अभिभावकों को स्कूल बुलाने की तैयारी की जा रही है जो व्हाट्सएप ग्रुप से नहीं जुड़े हैं। संसाधन के अभाव में मोबाइल आदि की व्यवस्था न कर पाने वाले बच्चों के अभिभावकों में किसी पढ़े लिखे सदस्य माता, पिता, भाई, बहन, चाचा, चाची को सप्ताह में एक दिन स्कूल बुलाकर पूरे सप्ताह का होमवर्क दिया जाएगा। जिससे कि यह होमवर्क बच्चों को कराया जा सके।

इस दौरान डीसी अशोक त्रिपाठी ने बताया कि विद्यालय में एक दिन शिक्षक एक एक घंटे बांटकर अभिभावकों को स्कूल आने की अपील कर रहे हैं। कोविड-19 की गाइडलाइन्स का पालन करते हुए गोष्ठी की जा रही है। 10 से अधिक अभिभावकों को एक बार में नहीं बुलाया जाएगा।

Tuesday, September 22, 2020

फतेहपुर : अंतर जनपदीय स्थानांतरण में 1038 शिक्षक जाएंगे जनपद से बाहर

फतेहपुर : अंतर जनपदीय स्थानांतरण में 1038 शिक्षक जाएंगे जनपद से बाहर।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा में अंतर जनपदीय स्थानांतरण प्रक्रिया को हरी झंडी मिलने से आवेदक शिक्षक-शिक्षिकाओं के चेहरे खिल गए हैं। इस आदेश से जिले के 1038 शिक्षक शिक्षिकाओं को लाभ मिलेगा। यह अलग बात है कि जिले को शिक्षक संख्या का नुकसान होगा। 

प्राथमिक शिक्षक भर्ती में कानपुर महानगर सहित आसपास के जिलों के युवक युवतियां बेरोजगारी दूर करने के लिए नौकरी तो ज्वाइन कर लेते हैं। इसके स्थानांतरण की जुगत भिड़ाते रहते हैं। स्थानांतरण नीति आते ही वह तबादले पर अपने जिलों को चले जाते हैं। बीते सालों में गौर करें तो जिले से 456 शिक्षक तबादले पर गए थे और आने वालों की संख्या 39 रही है। 


जानकार कहते हैं कि 1038 शिक्षकों की भरपाई आने वालों से नहीं होगी। इसलिए तबादला नीति से जिले को नुकसान होना तय है।

Sunday, September 20, 2020

फतेहपुर : स्कूलों में होगी डिजिटल अवस्थापना

फतेहपुर : स्कूलों में डिजिटल अवस्थापना होगी।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में अब कंप्यूटर, प्रोजेक्ट में स्मार्ट टीवी उपलब्ध कराने के लिए सामुदायिक सहभागिता का सहारा लिया जाएगा। इसके अलावा विद्यालयों को गोद लेने के लिए कहा गया है। अपर मुख्य सचिव के निर्देश पर डीएम संजीव सिंह ने पत्र जारी कर विभिन्न वर्गों से सहयोग की अपील की है। 

 अपर मुख्य सचिवद्वारा दिशा निर्देशों के तहत डीएम ने पत्र जारी कर बताया कि बेसिक शिक्षा परिषद के संचालितप्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विकास के लिए उसे गोद लिए जाने तथा बेसिक शिक्षा क्षेत्र में योगदान के लिए इच्छुक संगठन एवं संस्थाओं के लिए सिद्धांत निर्धारित किए गए हैं। कहा कि अधिकांश परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अवस्थापना, कम्प्यूटर प्रोजेक्टर व स्मार्ट टीवी आदि न होने के कारण छात्र छात्राएं डिजिटल लर्निंग के तहत शिक्षा से वंचित हैं। विद्यालयों के शैक्षणिक परिवेश में गुणात्मक वृद्धि के लिए ग्राम पंचायत की निधियों से सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से व्यवस्था किया जाना है।

Friday, September 18, 2020

फतेहपुर : निकायक्षेत्र में नहीं रखी गई ऑपरेशन कायाकल्प की ईंट, बदहाली के आंसू बहा रहे स्कूल

फतेहपुर : निकायक्षेत्र में नहीं रखी गई ऑपरेशन कायाकल्प की ईंट, बदहाली के आंसू बहा रहे स्कूल।


जनपद के परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए दिए गए निर्देश, बदहाली के आंसू बहा रहे निकाय क्षेत्र के स्कूल


फतेहपुर : बेसिक के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को चकाचक करने के लिए शासन ने ऑपरेशन कायाकल्प योजना संचालित की है। योजना की खास बात यह है कि इसमें बेसिक शिक्षा के स्कूलों को संवारने में नगर निकाय धन खर्च करेगा। एक साल से चल रही ऑपरेशन कायाकल्प योजना में अभी तक निकाय क्षेत्र में एक ईंट तक नहीं रखी गई है। जिससे परिषदीय स्कूल बदहाली के आंसू बहा रहे हैं।

बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने गांवों में ग्रामसभा और शहरों में निकाय क्षेत्रों से परिषदीय स्कूलों को सुविधापरक बनाने के लिए काम कराने का आदेश जारी किया है। बेसिक शिक्षा में यूं तो संविलियन के बाद 2129 परिषद विद्यालय बचे हैं। गांवों के विद्यालयों में ग्रामसभाओं ने काम भी करवाया है। वहीं नगर क्षेत्र के 165 विद्यालय संवारे जाने की बांट जोह रहे हैं। 


यह है निकाय क्षेत्र: जिले में मुख्यालय और बिंदकी में नगर पालिकाएं हैं जबकि बहुआ, खागा, किशुनपुर, हथगाम, जहानाबाद में नगर पंचायत संचालित हो रहे हैं। निकाय क्षेत्र के अंदर खुले विद्यालयों का ऑपरेशन कायाकल्प के तहत संवारने की जिम्मेदारी निकायों पर है।

निगरानी के अभाव में अभियान को नहीं मिली गति : बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने आदेश तो जारी कर दिया लेकिन निकाय क्षेत्रों में इनके क्रियान्वयन पर निगरानी का अभाव रहा। गठित बोर्ड की बैठक तक नहीं की गई और न ही इस काम को निकाय की कार्ययोजना में शामिल कराया गया है। निकाय मुंह मोड़ा तो बेसिक शिक्षा विभाग के कानों में जूं नहीं रेंगी। जिससे योजना कागजों तक में ही सीमित हो होकर रह गई है।


ऑपरेशन कायाकल्प के तहत बेसिक शिक्षा के विद्यालयों को संवारने के आदेश दिए गए हैं।शहरों में निकाय और गांवों में ग्राम पंचायतों को जिम्मेदारी दी गई है। ऑपरेशन कायाकल्प में 14 बिंदु हैं जिसमें टाइल्स, बाउंड्रीवाल, इज्जतघर, पेयजल, साफ सफाई, गेट, सड़क आदि हैं। डीएम को जानकारी देकर योजना को क्रियान्वित कराया जाएगा। शिवेंद्र प्रताप सिंह, बीएसए

Thursday, September 17, 2020

फतेहपुर : अवशेष एआरपी चयन हेतु तीसरे चरण की प्रक्रिया आरंभ, विज्ञप्ति जारी

फतेहपुर :  अवशेष एआरपी चयन हेतु तीसरे चरण की प्रक्रिया आरंभ, विज्ञप्ति जारी। 



फतेहपुर : जल संचयन का मॉडल बनेंगे परिषदीय विद्यालय

फतेहपुर : जल संचयन का मॉडल बनेंगे परिषदीय विद्यालय।

फतेहपुर : दिनों दिन गिरते जा रहे पृथ्वी के जलस्तर को रोकने के लिए जल संचयन पर चिंतन और मंथन हो रहा है। जल संचयन के लिए नदी, तालाब खोदवाए जा रहे हैं तो सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा के स्कूल सालों साल पुराने हैं। तब रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी कोई बात ही नहीं थी। बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने परिषदीय स्कूलों में इस सिस्टम को मजबूत बनाने का काम लघु डाल सिंचाई को दिया है।





सर्वे करके सिस्टम की बिंदुवार रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं। गिरते भू-गर्भ जल स्तर को बचाने के लिए अब बेसिक शिक्षा के स्कूलों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। भवन की छतों का पानी से प्यासी धरती की कोख को भरा जाएगा। इसके लिए व्यापक स्तर पर कार्ययोजना बनाई गई है। शासन ने इसकी जिम्मेदारी लघुडाल सिंचाई को दी है। विभाग सर्वे 1. करने में जुट गया है। सर्वे में कितने विद्यालयों में सिस्टम है, कितने में नहीं है, कितने है तो निष्प्रयोज्य हो चुके हैं जैसे बिंदु जुटाए जा रहे हैं।




कवायद

▪️लघुडाल सिंचाई विभाग को सर्वे का दिया गया काम 
▪️रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को मजबूत करने की कवायद

परिषदीय विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके लिए शासन ने लघु डाल सिंचाई को जिम्मेदारी दी है। विभाग के द्वारा सर्वे कराया जा रहा है। रिपोर्ट के आधार पर शासन से लघु डाल को धन मुहैया होगा और सिस्टम बनाया जाएगा। शिवेंद्र प्रताप सिंह, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी।

प्राथमिक स्कूल - 1384

उच्च प्राथमिक स्कूल - 263

कंपोजिट स्कूल - 482

कुल परिषदीय स्कूल - 2129


जिले में यूं तो अभी तक 2650 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे थे। संविलियन के बाद स्कूलों की संख्या महज 2129 बची है। में यह सिस्टम लगा हुआ है।धरातल पर जिसकी दशा बेहद खराब है।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : आंगनबाड़ी में ई0सी0सी0ई0 (प्री प्राइमरी) संचालन हेतु जनपद स्तर पर डीएलटी एवं ब्लॉक स्तर पर बीएलटी के गठन हेतु नामित सदस्यों की सूची जारी

फतेहपुर : आंगनबाड़ी में ई0सी0सी0ई0 (प्री प्राइमरी) संचालन हेतु जनपद स्तर पर डीएलटी एवं ब्लॉक स्तर पर बीएलटी के गठन हेतु नामित सदस्यों की सूची जारी।






Wednesday, September 16, 2020

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची

फतेहपुर : चयन वेतनमान स्वीकृत आदेश जारी, देखें सूची।







 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : वर्ष 2020-21 में इन्स्पायर अवार्ड योजनांतर्गत छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन नामांकन के सम्बन्ध में

फतेहपुर : वर्ष 2020-21 में इन्स्पायर अवार्ड योजनांतर्गत छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन नामांकन के सम्बन्ध में।


फतेहपुर : इन्स्पायर अवार्ड योजना में निखरेगी प्रतिभा, 30 सितम्बर तक रजिस्ट्रेशन, नए स्वरूप में होंगे प्रोजेक्ट।

फतेहपुर : विज्ञान के क्षेत्र में छात्र-छात्राओं की प्रतिभा निखारी जाएगी। इसके लिए इंस्पायर अवार्ड योजना चलाई जा रही है। इसमें छात्र-छात्राओं के रजिस्ट्रेशन पर जोर दिया जा रहा है। इसमें बच्चे अपना वैज्ञानिक प्रोजेक्ट भी तैयार करेंगे।

भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इंस्पायर अवार्ड मानक योजना को प्रारंभ किया है। जिसका उद्देश्य कक्षा 6 से लेकर 10 तक के विद्यार्थियों को प्रोत्साहित कर विज्ञान की तरफ आकर्षित करना है। स्कूली बच्चों में नवाचार औररचनात्मक सोच की संस्कृति को बढावा देने के साथ साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के माध्यम से सामाजिक जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक पहल है। इस कार्यक्रम में देश भर के सभी निजी और सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों के मौलिक विचारों विज्ञान आधारित सामाजिक जरूरतों को पूरा करने वाले विचारों को 30 सितंबर तक भेजना है। विज्ञान में गहन रुचि तथा नवाचार पर कार्य करने वाले विद्यार्थियों को जिला स्तरीय प्रदर्शनी के लिए चयनित होने पर केंद्र सरकार दस हजार रुपये का पुरस्कार देती है।

बेसिक शिक्षा विभाग के डीसी जितेन्द्र सिंह ने बताया कि इस योजना में परंपरागत पाठ्यक्रम थर्माकोल तथा कार्ड बोर्ड से बने अचालित माडल नहीं चलेंगे। पंजीकरण के समय विद्यार्थी संभावित प्रोजेक्ट का सारांश 300 शब्दों में समस्या निदान तथा सामाजिक उपयोगिता का उल्लेख करते हुए स्कूल की सहायता से अपलोड कर सकते हैं। बदलते भारत की तस्वीर में नन्हें वैज्ञानिक भी अपने नवाचारों से रंग भरने का प्रयास कर रहे हैं।









 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Tuesday, September 15, 2020

फतेहपुर : नीति आयोग की पूंजी से संवरेंगे "कस्तूरबा स्कूल", छह विद्यालय चयनित, प्रत्येक में 50 लाख होंगे खर्च

फतेहपुर : नीति आयोग की पूंजी से संवरेंगे "कस्तूरबा स्कूल", छह विद्यालय चयनित, प्रत्येक में 50 लाख होंगे खर्च।

पहल

▪️ पुरस्कार राशि की तीन करोड़ रुपये हावनिंग हालवने में होगी खर्च।
▪️ प्रशासन के प्रस्ताव को नीति आयोग ने दी हरी झंडी, अफसर खुश।


▪️ 2019 में तेजी से सुधार के लिए अपना जिला देश में पहुंचा दूसरे स्थान पर।
▪️ 50 लाख होंगे खर्च प्रत्येक विद्यालय पर।


फतेहपुर : यूं तो देश के 115 जिलों को भारत सरकार ने आकांक्षात्मक जनपद घोषित किया था, लेकिन तेजी से सुधार के लिए वर्ष 2019 में अपना जिला देश में दूसरे स्थान पर पहुंचा था। इसके लिए भारत सरकार ने पांच करोड़ की वित्तीय सहायता देने की घोषणा की थी। अब नीति आयोग इस पूंजी को दो चरणों में देगा। पहले चरण में तीन करोड़ जल्द ही जिले को मिलेगी। भारत सरकार ने प्रशासन के खर्च प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है।



भारत सरकार से मिलने वाली पुरस्कार राशि से शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम होने हैं। जिला प्रशासन ने पहले चरण की राशि शिक्षा के क्षेत्र में खर्च करने के प्रस्ताव बनाए हैं। प्रस्ताव में कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को प्रशासन ने डायनिंग हाल कम सांस्कृतिक कक्ष की सुविधा देने का सुझाव दिया था। आशय यह था कि ऐसे हाल का निर्माण कर न सिर्फ कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में सौ छात्राओं को एक साथ बैठककर भोजन खिलाने की सुविधा मिलेगी। इस प्रस्ताव को नीति आयोग ने हरी झंडी दे दी है।

छह विद्यालय चयनित, हर में 50 लाख होंगे खर्च

नीति आयोग की पूंजी से जिन कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों को संवारने की पहल हुई है। उनमें कस्तूरबा गांधी तेलंगाना, असोथर, विजयपुर, भिटौरा, हसवा और मलवां हैं। प्रत्येक विद्यालय में पचास लाख रुपये ख्व्च किए जाएंगे। तय माडल के अनुसार डायनिंग हाल सुविधाओं से लैस रहेगा, इसका उपयोग आडिटोरियम के रूप में भी किया जा सके इसे ध्यान में रखकर निर्माण होगा।

बालिका शिक्षा को लगेंगे पंख : सीडीओ

सीडीओ सत्य प्रकाश ने बताया कि नीति आयोग से पांच करोड़ के प्रस्ताव मांगे गये थे। हमने स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के कामों के लिए प्रस्ताव दिए थे। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों में डायनिंग डाल के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गयी है।इसमे करीब तीन करोड़ की पूंजी खर्च होगी।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : ग्राम सभा करेंगी स्कूलों के बिजली बिलों का भुगतान

फतेहपुर : ग्राम सभा करेंगी स्कूलों के बिजली बिलों का भुगतान।

फतेहपुर : परिषदीय स्कूलों को ग्राम पंचायतों की संपत्ति मानकर उनके बिजली के बिलों का भुगतान करना होगा। शासन ने पंचायतराज विभाग की ओर से इसके क्रियान्यवन के निर्देश दिए हैं। नए नियम से जहां बेसिक शिक्षा विभाग को राहत मिलेगी वहीं ग्राम पंचायतों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा।



बेसिक शिक्षा विभाग में संविलियन के बाद 2129 परिषदीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इनका भुगतान अभी तक बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा किया जाता रहा है। विभाग पर करीब चार करोड़ का बिजली का बिल बकाया चल रहा है। इसको अदा करने के लिए अब शासन ने नया तरीका निकाला है। शिक्षा महानिदेशक ने इस अदायगी को ग्राम पंचायतों से कराए जाने के निर्देश दिए हैं। बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बिजली के बिल की अदायगी के लिए शासन से पंचायतीराज विभाग को पत्र भेजा गया है। विभाग में इस मद में अब धन नहीं मिलेगा।

संविलियन के बाद विद्यालय कम, कनेक्शन ज्यादा

पहले जिले में 2650 विद्यालय संचालित थे। संविलियन के बाद इनकी संख्या 2129 रह गई है। ऐसी स्थिति में एक कैंपस में दो-दो बिजली के कनेक्शन कागजों पर चल रहे हैं। विभाग के लिए यह चिता का विषय बना हैं। असल में तमाम विद्यालय ऐसे हैं जिनमें कनेक्शन ही नहीं हैं, लेकिन बिजली का बिल आ रहा है। उनकी देनदारी बढ़ती जा रही है।


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : प्राइमरी में बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी

फतेहपुर : प्राइमरी में बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी।


फतेहपुर : विद्यालय खुलने से पूर्व परिषदीय स्कूलों में शैक्षिक गुणवत्ता को लेकर नई नई व्यवस्थाएं लागू हो रही हैं। इसी क्रम में बेसिक शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना निर्धारित किया है। अब कक्षा पांच तक के बच्चों के मूल्यांकन का आधार भाषा और गणित होगी। शिक्षकों का मूल्यांकन भी बच्चों की योग्यता के आधार पर होगा। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से भी इस पर सवाल-जवाब हो सकता है।



तय मानकों की बात करें तो भाषा विषय में कक्षा एक के बच्चे को निर्धारित सूची में पांच शब्दों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। कक्षा दो के छात्र को भाषा की किताब में 20 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा तीन के छात्र में 30 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा चार के बच्चे में किताब का छोटा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों का सही जवाब देने की क्षमता तथा कक्षा पांच के छात्र में बड़ा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत सवालों के सही जवाब देने की क्षमता का मानक बना है। कोरोना संक्रमण काल के बाद हालात सामान्य होने पर विद्यालय खुलने के पूर्व विभागीय मानक चौक चौबंद किए जा रहे हैं। बीएसए ने बताया कि प्रेरणा लक्ष्य की प्रतिलिपि सभी खंड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से स्कूलों में भेज दी गई है।




गणित के लिए यह होंगे मानक

गणित विषय में कक्षा एक के छात्र को निर्धारित सूची में पांच संख्याएं सही पढ़ने की क्षमता, कक्षा दो के छात्र को एक अंक का जोड़ना और घटाना आना चाहिए। कक्षा तीन के छात्र को हासिल वाले जोड़ और घटाने के सवाल 75 प्रतिशत हल करने की क्षमता का मानक है। कक्षा चार के छात्र को गुणा के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय हैं। कक्षा पांच के छात्र के लिए भाग के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय किया गया है।

शिक्षक समेत जवाबदेह भी रखें याद


सर्व शिक्षा विभाग से जारी किए गए दिशा निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यह मानक बच्चों के साथ शिक्षक और विभागीय अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को याद होना चाहिए। अगर कोई अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करता है, तो उसे इसी मानक के आधार पर बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का आंकलन करना होगा। कक्षा एक से पांच तक के बच्चों में गणित एवं भाषा का ज्ञान बेहतर करने के लिए कवायद की जा रही है।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Monday, September 14, 2020

फतेहपुर : कक्षा- 8 उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के प्रवेश कक्षा-9 में कराने एवं निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : कक्षा- 8 उत्तीर्ण छात्र-छात्राओं के प्रवेश कक्षा-9 में कराने एवं निर्धारित प्रारूप पर सूचना उपलब्ध कराने के सम्बन्ध में।

फतेहपुर : बेसिक शिक्षा विभाग के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों से बीते शिक्षा सत्र में कक्षा आठ उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को कक्षा में नौ में शत प्रतिशत पंजीकरण कराने को लेकर इस बार शासन गम्भीर नजर आ रहा है। इसके लिए बेसिक शिक्षा विभाग के साथ माध्यमिक शिक्षा विभाग को भी पंजीकृत छात्रों को सूचीबद्ध करने निर्देश जारी किए हैं।

कोरोना संक्रमण काल को लेकर नए शिक्षासत्र में शिक्षण कार्य बुरी तरह से प्रभावित है। जिसको लेकर इस बार कक्षा नौ में पंजीकरण कर स्थिति कमजोर दिख रही है। शासन से आए निर्देश के तहत बेसिक शिक्षा अधिकारी शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने सभी खंड शिक्षाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वह उच्च प्राथमिक विद्यालय एवं मान्यता प्राप्त विद्यालयों से कक्षा आठ उत्तीर्ण हुए छात्र-छात्राओं को अगली कक्षा यानि नौ में प्रवेश कराने के लिए सूची तैयार करने को कहा है। बताया कि जिन छात्र-छात्राओं द्वारा कक्षा नौ में पंजीकरण नहीं हुआ है, उनका पंजीकरण कराया जाना अनिवार्य है। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा विभाग के संचालित विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को भी जिम्मेदारी दी गई है कि वह कक्षा नौ में प्रवेश को लेकर गम्भीरता के साथ सूची तैयार करेंगे। हर हाल में सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े जाने के लिए कवायद की जा रही है। इसके लिए सभी सम्बंधित स्कूलों के प्रधानाध्यापक, बीईओ, बीएसए एवं डीआईओएस को निर्देश मिले हैं कि वह आपस में तालमेल बनाते हुए बच्चों के शत प्रतिशत पंजीकरण कराए जाएं।





व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Sunday, September 13, 2020

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान

फतेहपुर : यूनीफार्म का 40 फीसदी ही हो पाया वितरण, परिषदीय स्कूलों में बच्चों को समय से स्वेटर दिए जाने का फरमान।

फतेहपुट : संकट काल में भले ही परिषदीय स्कूलों के बच्चों के लिए विद्यालय बंद चल रहे हों लेकिन इनको निशुल्क उपलब्ध कराई जाने वाली अभी जिले में 40 प्रतिशत ही शुरू हो गई है। इस बार भी प्रशासन सामग्री समय से देने के लिए शासन प्रशासन स्तर पर तैयारियां तेजी पर हैं।

यूनिफार्म का वितरण हो पाया है कि अब स्वेटर वितरण की कवायद भी स्तर से जेम पोर्टल के माध्यम से स्वेटर की खरीद की जाएगी।

बच्चों को इस साल समय से निदेशालय और समग्र शिक्षा अभियान शैक्षिक सत्र में सभी बच्चों को 31 अक्टूबर तक स्वेटर बांटने का निर्देश दिया है। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को हर साल निःशुल्क एक स्वेटर देने का प्रावधान है। पिछले सत्रों में स्कूलों में स्वेटर देने के लिए बीएसए को स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण की कार्यवाही रिपोर्ट रोजाना बेसिक शिक्षा के राज्य परियोजना कार्यालय को भेजने के निर्देश है। शासन ने चालू विद्यार्थियों को दिसंबर के अंत तक मुश्किल स्वेटर मिल पाए थे। इस पर विभाग की खूब किरकिरी हुई थी। इस प्रशासन ने समय से बच्चों को स्वेटर मुहैया कराने को नियत समय में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।




ई-टेंडरिंग के साथ जैम पोर्टल से होगी खरीद :  इस साल भी प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के दो लाख से अधिक बच्चों को स्वेटर दिए जाने हैं। जिसकी खरीद और आपूर्ति जिला स्तर पर जेम पोर्टल के माध्यम से की जाएगी। स्वेटर की खरीद, आपूर्ति और वितरण के लिए शासन ने समय सारणी भी तय की है। बेसिक शिक्षा निदेशालय से जारी निर्देशो में सभी बीएसए को स्वेटर खरीद के सिलसिले में जिला स्तरीय समिति की बैठक की तिथि, जेम पोर्टल पर स्वेटर खरीदने के लिए ई टेंडर के प्रकाशन और बिड अपलोड करने और खोलने की तारीख की जानकारी देनी होगी।




समूह की महिलाओं ने दिखाई तेजी : परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब 2 लाख 32 हजार 909 छात्र-छात्राओं को यूनीफार्म दिया जाना है। जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को रोजगार देने के लिए इस बार करीब 65 हजार यूनीफार्म सिलने का काम सौंपा गया है।  जिन्होंने अब तक करीब 25 प्रतिशत कार्य पूरा कर लिया है। जिसका भुगतान एसएमसी द्वारा यूनीफार्म वितरण के बाद किया जाता है। हो रही लेट लतीफी को लेकर विभागीय हस्ताक्षेप के बाद समूह की महिलाओं ने यूनीफार्म तैयार करने में अब तेजी दिखाई है, जिसके चलते समय से ड्रेस वितरण कार्य पूरा हो सके।

बोले जिम्मेदार : परिषदीय विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र छात्राओं को यूनीफार्म वितरण कार्य तेजी | पर है। करीब 40 फीसदी बच्चों को वितरण किया जा चुका है। प्रशासनिक कमेटी |द्वारा जेम पोर्टल से स्वेटर खरीद की जाएगी। इसके पूर्व ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया कराई जा रही है।

-शिवेंद्र प्रताप सिंह




 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Friday, September 11, 2020

फतेहपुर : 07- 30 सितम्बर 2020 तक तृतीय राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित होने के फलस्वरूप विद्यालयों में गतिविधियां कराए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें

फतेहपुर : 07- 30 सितम्बर 2020 तक तृतीय राष्ट्रीय पोषण माह आयोजित होने के फलस्वरूप विद्यालयों में गतिविधियां कराए जाने के सम्बन्ध में निर्देश जारी, देखें।




 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Tuesday, September 8, 2020

फतेहपुर : Fit India Freedom Run के अंतर्गत खेल गतिविधि आयोजित कराए जाने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : Fit India Freedom Run के अंतर्गत खेल गतिविधि आयोजित कराए जाने के सम्बन्ध में।






▪️👉🏻 यहां क्लिक करके देखें मुख्य आदेश एवं विस्तृत निर्देश ▪️👈🏻







 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

फतेहपुर : अब एंड्राएड फोन चलाना सीख रहे मास्साब, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण

फतेहपुर : अब एंड्राएड फोन चलाना सीख रहे मास्साब, शिक्षकों के गले की फांस बना ऑनलाइन प्रशिक्षण।

फतेहपुर : कोरोना संक्रमण काल में भले ही बच्चों के लिए विद्यालय बंद चल रहे हों लेकिन शिक्षकों के लिए काम बढ़ता ही जा रहा है। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय विद्यालयों में इनदिनों सबकुछ आनलाइन कार्य सम्पादित करने में जोर दिया जा रहा है। जिससे खासकर बुजुर्ग शिक्षकों की परेशानी बढ़ रही है। इस उम्र में शिक्षक स्मार्ट एंड्रायड मोबाइल फोन चलाना सीखरहे हैं।

परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए दीक्षा एप और मानव सम्पदा पोर्टल को लिंक करने के निर्देश दिए गए हैं। कुछ शिक्षक शिक्षकों ऐसे हैं जो एंड्रायड मोबाइल चलाने में सक्षम नहीं हैं। उन्हें प्रशिक्षण लेने में दिक्कत आ रही है। परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को आनलाइन प्रशिक्षित करने का शासन का फरमान उनके गले की फांस बन गया है। पहले तो चुनिंदा शिक्षकों को शासन के बताए ऐप डाउनलोड कराने के निर्देश थे। जैसे तैसे उनको डाउनलोड कर ही पाए थे कि शासन ने दीक्षा ऐप और मानव सम्पदा को लिंक करने के निर्देश जारी हो गए। लिंक करने के आदेश आते ही मोबाइल चलाने में अक्षम शिक्षक शिक्षकों का सिर दर्द बढ़ गया है।

कोरोना के चलते एक जगह पर भीड़ इकट्ठा करने पर मनाही है। इसके चलते आनलाइन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद में लगभग 25 से 30 फीसद शिक्षकों की उम्र पचास से पचपन वर्ष के आसपास है। यह शिक्षक न तो तकनीकी रूप से दक्ष हैं और न ही मोबाइल पर प्रशिक्षण में सक्षम हैं। खासकर अधिकतर महिला शिक्षक ऐसी हैं जिनके लिए प्रशिक्षण में शामिल होना चुनौती है। कुछ दिनों पहले ही शासन ने शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षित करने के लिए दीक्षा ऐप को मानव संपदा पोर्टल से लिंक का आदेश जारी कर दिया है। शिक्षकों को अब प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।



मोबाइल खरीदना आसान चलाना मुश्किल : बुजुर्ग शिक्षक

स्मार्ट फोन खरीदने में तो सक्षम हैं लेकिन उसे चलाने में उन्हें तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 50 से 55 वर्ष पेन कागज के तहत काम निपटाने वाले बुजुर्ग शिक्षकों के लिए ऑनलाइन व्यवस्थाएं सिर दर्द बन रही हैं। ऐसे में ये मास्साब घर के बच्चों या फिर विद्यालय के युवा शिक्षकों से मदद ले रहे हैं।



शिक्षक संकुलों का गठन : न्याय पंचायत स्तर पर शिक्षक संकुलों का गठन किया गया है। ऑनलाइन प्रशिक्षण के लिए शिक्षकों को दीक्षा ऐप से मानव संपदा से लिंक करने समेत मोबाइल चलाने में आ रही दिक्कतों का निदान कर रहे हैं।विद्यालयों में जाकर शिक्षकों को बता रहे है।-राकेश सचान, बीईओ मुख्यालय


 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Monday, September 7, 2020

फतेहपुर : कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई

फतेहपुर : कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई।

कस्तूरबा विद्यालय के एक चौथाई बालिकाएं ही कर पा रहीं पढ़ाई।

फतेहपुर : कोरोना संक्रमण काल में बच्चों की शिक्षा अनवरत जारी रखने के लिए तमाम तरह की कवायदे तो की जा रही हैं लेकिन इनकी जमीनी हकीकत कुछ और बयां कर रही है। खासकर बेसिक विभाग द्वारा संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों की छात्राओं से आनलाइन पढ़ाई पहुंच से दूर दिख रही है। इसका कारण है कि गरीब छात्राओं के अभिभावकों के पास न ही स्मार्ट मोबाइल हैं और न ही उन्हें रीचार्ज कराने की व्यवस्था। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि बीते मार्च माह से पढ़ाई पूरी तरह से बाधित है।




कोरोना काल में स्कूलों की बंदी के बाद सरकार की ओर से ऑनलाइन क्लॉसेज को बढ़ावा देने की मुहिम में कस्तूरबा विद्यालय की छात्राएं पिछड़ गईं हैं। सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय खोलकर गांवों की गरीब बच्चियों को शिक्षित कर रही है। लेकिन बीते मार्च से कोरोना संक्रमण शुरू हो जाने के बाद से इन विद्यालयों के बच्चे घर भेज दिए गए। अब इन विद्यालयों पर स्टाफ तो है, बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कराई जा रही है। लेकिन आनलाइन कक्षाएं छात्राओं तक बिना संसाधन के नहीं पहुंच पा रही हैं। कहने को तो स्टाफ इन बच्चियों को भी शिक्षित करने की सरकारी मुहिम में जुटा हुआ है। लेकिन अभिभावकों के पास एंड्रायड मोबाइल न होने से करीब एक चौथाई छात्राएं पढ़ाई से दूर हैं। डीसी विवेक कुमार बताते हैं कि जिले के सभी 10 बॉ विद्यालयों में छात्राओं के पढ़ाई के लिए आनलाइन व्यवस्था की गई है। इसके लिए स्टाफ विद्यालय पहुंच कर स्टडी मैटेरियल उपलब्ध करा रहे हैं।

 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।

Saturday, September 5, 2020

फतेहपुर : ड्रेस वितरण में फंसा सिलाई व कपड़े का पेंच

फतेहपुर : ड्रेस वितरण में फंसा सिलाई व कपड़े का पेंच


धाता : परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण में स्वयं सहायता समूह को विद्यालय नामित कर दें।


धाता: परिषदीय विद्यालयों में ड्रेस वितरण में स्वयं सहायता समूह को विद्यालय नामित कर देने के बाद वितरण के नियम स्पष्ट न होने से शिक्षक और विभागीय अधिकारी असमंजस में हैं। वितरण का मानक प्रत्येक जिले में अलग-अलग है। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं विद्यालय के अध्यापकों से सिलाई की रकम को लेकर पूछताछ कर वापस लौट रही हैं। ड्रेस के एक सेट की कीमत 300 रुपये तय की गई है।




समूह की महिलाएं तय कीमत में 140 रुपये सिलाई बताती हैं। जबकि हाथरस के बीएसए ने अपने जनपद में जारी एक आदेश में स्पष्ट किया है कि 80 रूपये प्रति सेट सिलाई का निकालने के बाद 220 रुपये का कपड़ा खरीदा जाएगा। बताते चलें कि इससे पहले शिक्षकों द्वारा ड्रेस का वितरण किया जाता था। इसमे प्रबंध समिति की बैठक बुलाकर तीन दुकानों से कपड़े का कोटेशन लिया जाता था। उचित मूल्य व उचित गुणवत्ता के कपड़े को स्थानीय टेलर से सिलाई करा कर ड्रेस का वितरण होता था। इस वर्ष ब्लाक क्षेत्र के 110 परिषदीय विद्यालयों में महिला समूह द्वारा अनिवार्य रूप से ड्रेस वितरण का आदेश दिया गया है। समूह से जुड़ी महिलाएं स्कूल पहुंचकर बच्चों की संख्या का एक प्रपत्र भरवाती हैं। जिसमें लिखा हुआ है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सिर्फ कपड़े सिलने का कार्य दिया गया है। जबकि महिलाएं साथ में एक कपड़ा लगा हुआ ऐरायां ब्लॉक के नाम की रसीद प्रस्तुत करती हैं। उक्त रसीद में 160 रुपये कपड़े की कीमत दी गई है, 140 रुपये एक सेट की सिलाई निकाली गई है। 22 जून से पहले महिला समूहों को ड्रेस सिलाई आर्डर की रकम को लेकर भी असमंजस की स्थिति बनी है। अध्यापकों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में बीईओ, धाता सुनील कुमार सिंह का कहना था सभी विद्यालयों में महिला समूह द्वारा ही ड्रेस का वितरण किया जाएगा। एक सेट ड्रेस की सिलाई कितनी निर्धारित की गई है, इसके बारे में जानकारी नहीं है।



 व्हाट्सप के जरिये जुड़ने के लिए क्लिक करें।