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Friday, May 29, 2026

परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन

परिषदीय विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर SCERT की टीम करेगी मूल्यांकन


लखनऊ। शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार के लिए परिषदीय विद्यालयों का मूल्यांकन राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) करेगी। विद्यालयों को छोटे-छोटे क्षेत्रों में बांटकर एससीईआरटी की टीम मूल्यांकन करेगी।

परिषदीय विद्यालयों की निपुण आकलन में स्थित काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह की स्थिति ठीक रही। इसको और बेहतर करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग ने एससीईआरटी से मूल्यांकन कराने की कार्य योजना तैयारी की है।

निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई के सुधार के लिए प्रयास किया जाएगा। एससीईआरटी की टीम छोटे-छोटे क्षेत्रों में बंटे विद्यालयों का मूल्यांकन कर कमियों की जानकारी करेगी। सुधार के लिए आवश्यक दिशा निर्देश भी देगी।

मूल्यांकन के समय कक्षावार रिपोर्ट को वरीयता दी जाएगी ताकि इसी के आधार पर रेमेडियल कक्षाओं को संचालित कर पठन-पाठन में सुधार किया जा सके। बीएसए भूपेंद्र सिंह ने बताया कि परख और निपुण मूल्यांकन में विद्यालयों की स्थिति बेहतर थी। अब एससीईआरटी के मूल्यांकन में विद्यालयों की गुणवत्ता को परखा जाएगा। 




गुणवत्ता सुधार के लिए परिषदीय स्कूलों का होगा क्षेत्रवार मूल्यांकन

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता और बेहतर बनाकर प्रदेश को राष्ट्रीय रैंकिंग में भी और बेहतर स्थान दिलाया जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) इसके लिए विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट (क्षेत्र) में बांटकर वहां का मूल्यांकन कराएगा।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों की निपुण मूल्यांकन में तो स्थिति काफी बेहतर है। वहीं, इस बार राष्ट्रीय स्तर पर हुए परख मूल्यांकन में भी कक्षा तीन और छह में स्थिति ठीक रही है। किंतु कुछ क्षेत्रों में अभी भी सुधार की काफी गुंजाइश है। इसे देखते हुए बेसिक शिक्षा विभाग और एससीईआरटी नई रणनीति पर काम करेंगे। 



कक्षावार मूल्यांकन को मिलेगी तरजीह

विभाग का प्रयास है कि निपुण मूल्यांकन की तर्ज पर विद्यालयों की व्यवस्था और पढ़ाई में सुधार किया जाए। इसके लिए एससीईआरटी की ओर से विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटकर वहां की पढ़ाई की गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। इसमें ओवरऑल के साथ-साथ कक्षावार मूल्यांकन को वरीयता दी जाएगी। ताकि इसी के अनुरूप रेमेडियल क्लास या अतिरिक्त सुधार किया जा सके।


विद्यालयों को छोटे-छोटे पॉकेट में बांटने से काफी बारीक स्तर की जानकारी मिल सकेगी। अभी जिला स्तर पर ही सुधार की कवायद चलती है। जबकि जिलों में भी स्कूलों के बीच में पढ़ाई के स्तर में काफी अंतर होता है। नई कवायद से न सिर्फ सुधार की प्रक्रिया आसान होगी। बल्कि परख जैसे राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन की तैयारी भी बेहतर हो सकेगी। - डॉ. पवन सचान, संयुक्त निदेशक, एससीईआरटी

Saturday, January 24, 2026

यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई

यूपी प्रमाण पोर्टल पर कॉलेजों का रिपोर्ट कार्ड, हर महीने 44 मानकों की कसौटी पर कसेंगे, लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ होगी कार्रवाई


लखनऊ। डिग्री कॉलेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा व उच्च स्तरीय शोध सुनिश्चित करने के लिए यूपी प्रमाण पोर्टल तैयार किया गया है। अब इस पोर्टल के माध्यम से डिग्री कॉलेजों की निगरानी होगी, उनका मूल्यांकन और रैंकिंग की जाएगी। 44 मानकों की कसौटी पर कॉलेजों को कसा जाएगा और फिर रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा। लापरवाह कॉलेजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहली बार ऐसी व्यवस्था की जा रही है।


राज्य स्तरीय क्वालिटी एश्योरेंस सेल (एसएलक्यूएसी) के माध्यम से इस पोर्टल पर नजर रखी जाएगी। सभी सरकारी व एडेड डिग्री कॉलेजों को इस पर अनिवार्य रूप से पंजीकरण कराना होगा। सभी डिग्री कॉलेज प्रमाण पोर्टल https://updcs.crispindia.net पर अपना पंजीकरण कराएंगे। जिस पर कॉलेज की पूरी प्रोफाइल के साथ साथ उनकी रैंकिंग भी प्रदर्शित होगी। 

हर महीने कॉलेजों को 44 मानकों पर अपने प्रदर्शन की रिपोर्ट खुद भरनी होगी। छात्रों व शिक्षकों की बॉयोमीट्रिक उपस्थिति, इंस्टीट्यूट इनोवेशन काउंसिल में पंजीकरण, एनआईआरएफ रैंकिंग, रिसर्च, रिसर्च प्रोजेक्ट, आईएसओ सर्टीफिकेशन, एल्युमिनाई एसोसिएशन, कितने छात्र अप्रेंटिशसिप कर रहे हैं, एकेडमिक कैलेंडर का पालन व वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन और स्वयं पोर्टल के माध्यम से छात्रों को कराए जा रहे ऑनलाइन पाठ्यक्रम से संबंधित जानकारी देनी होगी। 100 अंकों में कॉलेजों का मूल्यांकन किया जाएगा। हर तीन-तीन महीने पर इसका रिपोर्ट कार्ड जारी होगा। लापरवाह कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।


अब ग्रीन कैंपस भी बनाना होगाः डिग्री कॉलेजों ने अपने यहां हरियाली बढ़ाने और ग्रीन कैंपस बनाने के लिए क्या पहल की इसके अंक भी शामिल किए गए हैं यानी कॉलेजों में पेड़-पौधे लगाने और हरा-भरा परिसर बनाने को भी इसके माध्यम से बढ़ावा दिया जाएगा। सभी कॉलेजों को इसके लिए तैयारी करनी होगी वरना वह रैंकिंग में फिसल जाएंगे। उन्हें अधिक से अधिक पौधे लगाने को प्रेरित किया जाएगा।


साहित्यिक चोरी रोकने के लिए करेंगे उपाय
शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में साहित्यिक चोरी रोकने के लिए सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं या नहीं यह भी बताना होगा। अगर वह साहित्यिक चोरी रोकने के लिए उपाय नहीं कर रहे तो आगे उन्हें इसका प्रयोग करना ही होगा। जिससे कॉलेजों के शोध कार्यों व प्रोजेक्ट वर्क में मौलिकता बढ़ेगी। अभी कॉलेजों में इस तरह के उपाय नहीं किए जा रहे। आगे करना होगा।

Sunday, May 4, 2025

ARP का जिम्मा शिक्षा का स्तर सुधारने का और करना पड़ रहा BRC में बाबूगिरी

ARP का जिम्मा शिक्षा का स्तर सुधारने का और करना पड़ रहा BRC में बाबूगिरी 


लखनऊ। प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा का स्तर सुधारने और निपुण बनाने वाले एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी), आरटीई के चयनित बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिले दिला रहे हैं। बच्चों व अभिभावकों के आधार का सत्यापन, अपार आईडी, यू डायस, डीबीटी, किताबों के वितरण समेत दूसरे काम काम कर रहे हैं। बीआरसी पर बाबूगिरि के साथ ही विभाग की ओर से मांगी जाने वाली सूचनाएं स्कूलों से लेकर भेज रहे हैं। इन्हीं कामों की वजह से एआरपी में खासी नाराजगी है। शिक्षक एआरपी की जिम्मेदारी संभालने से दूर भाग रहे हैं।


लखनऊ में 1618 प्राइमरी स्कूलों में करीब पौने दो लाख बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। शासन ने प्राइमरी स्कूलों का शैक्षिक स्तर सुधारने और निपुण बनाने के लिये एआरपी के पद सृजित किये हैं। नगर और ग्रामीण क्षेत्र में विज्ञान, हिन्दी, गणित, अंग्रेजी और सामाजिक अध्ययन के 10-10 एआरपी के पद हैं। विषय विशेषज्ञ शिक्षक ही एआरपी बनाए जाते हैं। सरोजनीनगर के एक आरपी का कहना है कि जिस काम के लिये लिया गया है, वो काम नहीं कराया जा रहा। डीबीटी समेत अन्य कार्य कर रहे हैं।


🔴 एआरपी के मूल काम

● बच्चों को अंग्रेजी, हिन्दी गणित, विज्ञान और सामाजिक अध्ययन में दक्ष बनाना।
● विभागीय आदेश, ऐप, पढ़ाई से लेकर अन्य गतिविधियों का क्रियान्वयन कराना।
● शिक्षकों को प्रशिक्षण देना और स्कूलों की प्रगति को परखना
● बच्चों का मूल्यांकन का काम।


🔴 ये काम किये जा रहे 

● आरटीई तहत निजी स्कूलों में दाखिला लेने वाले या दाखिले से वंचित बच्चों का सत्यापन
● बच्चों की यूनीफार्म के रुपये भेजने के लिये डीबीटी में सूचनाएं अपलोड करना
● बच्चों व अभिभावकों के आधार सत्यापन,यूडाइस व अपार आईडी पर बच्चों का ब्योरा अपलोड कराना
● ड्रॉप बॉक्स में पड़े हुए बच्चों की सूचना, अगली कक्षा में नामांकन की सूचना देना
● इलाके के बिना मान्यता वाले स्कूलों का चिन्हीकरण


एआरपी का काम सिर्फ प्राइमरी स्कूलों की शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने का है। इसी मकसद से इनकी नियुक्ति की गई है। एआरपी से दूसरे काम लिये जाने की जानकारी नहीं है। बीएसए से बात करके पता करेंगे। -श्याम किशोर तिवारी, एडी बेसिक



एआरपी नहीं बनना चाहते

बाबूगीरी के काम लिये जाने से शिक्षकों में एआरपी बनने की रुचि कम हो गई। शिक्षक एआरपी नहीं बनना चाहते हैं। लखनऊ में एआरपी के 50 पद हैं। एआरपी चयन के लिये आवेदन में सिर्फ 66 शिक्षकों ने आवेदन किया था। लखनऊ में पांच हजार से अधिक शिक्षक हैं। 25 एआरपी का चयन हुआ है। 

Sunday, March 23, 2025

अप्रैल और जुलाई में चलाएं स्कूल चलो अभियान, शिक्षकविहीन न रहें विद्यालय, योगी बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, क्वालिटी ऑफ एजुकेशन पर अब होगा पूरा फोकस

अप्रैल और जुलाई में चलाएं स्कूल चलो अभियान, बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी ने दिए निर्देश, क्वालिटी ऑफ एजुकेशन पर अब होगा पूरा फोकस

गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए धन की कोई कमी नहीं

मुख्यमंत्री ने कहा, कोई स्कूल शिक्षक विहीन न हो


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक अप्रैल से 15 अप्रैल तक और जुलाई में 15 दिनों का स्कूल चलो अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहाकि इस दौरान शिक्षकों, ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत के सदस्यों द्वारा मिलकर इस प्रकार व्यवस्था की जाए कि यह स्कूल चानो अभियान बच्चों को एक उत्सव की भांति लगे। इस दौरान बच्चों को नया अनुभव प्रतीत हो। शिक्षक और प्रिंसिपल गांव का भ्रमण करें और घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। अब क्वालिटी ऑफ एजुकेशन पर पूरा फोकस करना होगा।


मुख्यमंत्री शनिवार को कालीदास मार्ग स्थित अपने सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में यह बातें कहीं। उन्होंने कहा है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है। कोई विद्यालय शिक्षक विहीन न हो।

सभी आकांक्षात्मक जिलों एवं विकास खंडों में शिक्षक छात्र का अनुपात बेहतर रहे। मुख्यमंत्री कंपोजिट विद्यालयों के साथ ही पीएमश्री विद्यालयों को इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में विकसित किया जाए। मुभावपूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास धन की कोई कमी नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रथम चरण में 13 हाट्स को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे डायट को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर पाएंगे। आवश्याकता हो तो इसके लिए आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती की जाए। आईआईएम लखनऊ और बेंगलुरू जैसे संस्थानों को भी यहां ट्रेनिंग मॉड्यूल से जोड़ा जाए।


प्रदेश में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई

मुख्यमंत्री ने कहा कि एसीईआर की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के मुजाबिक उत्तर प्रदेश अब टॉ परफॉर्मिग स्टेट की श्रेणी में सम्मिलित हो गया है। 2018 से 2024 के बीच उत्तर प्रदेश में शिक्षा के स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष 2010 में 57 प्रतिशत थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 71.4 प्रतिशत हो गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की समर कैंप संचालित करने के लिए भी निर्देशित किया। यह समर कैंप एक से डेढ़ घंटे के होने चाहिए।




शिक्षकविहीन न रहें विद्यालय, गुणवत्ता पर करें फोकस : योगी

सीएम ने बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिए निर्देश- कहा- एक अप्रैल से चलाएं स्कूल चलो अभियान

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए सरकार के पास पैसे की कोई कमी नहीं है। प्रदेश का कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरा फोकस गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर करें। वे शनिवार को अपने सरकारी आवास पर बेसिक शिक्षा विभाग के कामकाज की समीक्षा कर रहे थे।

उन्होंने अधिकारियों को सीएम मॉडल कंपोजिट और मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों में खेल के मैदान, ट्रेनिंग सेंटर और न्यू एज कोर्स की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। कहा, सरकार ने वित्तीय वर्ष 2023-24 में 925 तथा वर्ष 2024-25 में 785 शासकीय विद्यालयों को पीएमश्री योजना के तहत उच्चीकरण कराया है। इन विद्यालयों को इंटीग्रेटेड कैंपस के रूप में विकसित किया जाए। 

सीएम ने कहा कि एक से 15 अप्रैल तक और जुलाई में 15 दिन का स्कूल चलो अभियान चलाएं। शिक्षकों, ग्राम प्रधानों व ग्राम पंचायत सदस्यों के साथ मिलकर स्कूल चलो अभियान को एक उत्सव का रूप दिया जाए ताकि बच्चों को नया अनुभव मिले। उन्होंने कहा कि शिक्षक और प्रधानाचार्य गांवों में घर-घर जाकर बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करें। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की व्यवस्थाओं को भी बेहतर बनाएं। कहा, शिक्षकों को अच्छे प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़ना होगा, ताकि लर्निंग आउटकम को और बेहतर किया जा सके।

उन्होंने कहा कि सामूहिक प्रयासों से आरटीई के तहत 2016-17 में 10784 बच्चे लाभान्वित हुए थे, वहीं 2024-25 में यह संख्या बढ़कर 4.58 लाख से अधिक हो गई है। बैठक में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री संदीप सिंह, अपर मुख्य सचिव बेसिक, माध्यमिक व वित्त दीपक कुमार, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा भी शामिल हुई।


आकांक्षात्मक जिलों में शिक्षक-छात्र अनुपात सुधारें

सीएम ने कहा कि सभी आकांक्षात्मक जिलों व ब्लॉकों में शिक्षक छात्र का अनुपात बेहतर करें। सभी परिषदीय विद्यालयों में बालक-बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इन विद्यालयों में पेयजल, अच्छे क्लास रूम, बिजली की सुविधा, बाउंड्रीवाल व अच्छे फर्नीचर उपलब्ध कराया गया है।


समर कैंप चलाएं, बच्चों को सिखाएं नई चीजें

योगी ने कहा कि पहले चरण में 13 डायट की सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। डायट को एक संसाधन केंद्र के रूप में विकसित कर समावेशी शिक्षा को आगे बढ़ाया जाएगा। इसलिए आईआईएम लखनऊ और बंगलुरू जैसे संस्थानों के ट्रेनिंग मॉड्यूल से इसे जोड़ा जाए। उन्होंने अधिकारियों को समर कैंप चलाने के लिए भी निर्देश दिया। बच्चों को खेल-खेल में नई चीजों को सिखाने पर जोर देते हुए उन्होंने कैंप सुबह ही चलाने के निर्देश दिए।


छात्रों की उपस्थिति बढ़ी

सीएम ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हुए प्रयासों के परिणाम आज असर रिपोर्ट में साफ दिख रहा है। वर्ष 2024 की रिपोर्ट में प्रदेश की शिक्षा गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इससे यूपी अब टॉप परफॉर्मिंग प्रदेश बन गया है। प्राथमिक विद्यालयों में विद्यार्थियों की उपस्थिति वर्ष 2010 में 57 फीसदी थी जो वर्ष 2024 में बढ़कर 71.4 प्रतिशत हो गई है। लड़कों की तुलना में बालिकाओं का नामांकन भी बढ़ा है।

Thursday, March 13, 2025

QS Subject Ranking: तीन IIT और दो IIM समेत नौ भारतीय शैक्षिक संस्थान दुनिया के शीर्ष 50 में शामिल

QS Subject Ranking: तीन IIT और दो IIM समेत नौ भारतीय शैक्षिक संस्थान दुनिया के शीर्ष 50 में शामिल  

क्यूएस विषय विशिष्ट रैंकिंग : आईएसएम धनबाद 20वीं रैंक के साथ भारतीय संस्थानों में सबसे ऊपर



नई दिल्ली। देश के तीन आईआईटी, दो आईआईएम समेत नौ विश्वविद्यालयों व शिक्षण संस्थानों ने 15वीं क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी सबजेक्ट रैंकिंग में शीर्ष 50 में जगह बनाई है। इस सूची में बीसवें पायदान पर आईएसएम धनबाद भारतीय संस्थानों में सबसे ऊपर है। इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली 26वें पायदान पर है। इनके अलावा, आईआईटी मद्रास, बॉम्बे, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) अहमदाबाद व बंगलूरू और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) भी टॉप 50 की सूची में हैं।


लंदन स्थित क्वाक्वेरेली साइमंड्स (क्यूएस) की रैंकिंग में भारतीय खनन विद्यालय (आईएसएम), धनबाद, इंजीनियरिंग खनिज और खनन के लिए विश्व में 20वें स्थान पर है। यह देश का सर्वोच्च प्रदर्शन करने वाला विषय क्षेत्र रहा। आईआईटी बॉम्बे व खड़गपुर को इंजीनियरिंग-खनिज और खनन के लिए 28वें और 45वें स्थान पर रखा गया है। हालांकि, दोनों संस्थानों की रैंकिंग में गिरावट आई है। पहले इंजीनियरिंग व प्रौद्योगिकी के लिए संयुक्त रूप से 45वें स्थान पर रहने वाले आईआईटी दिल्ली और बॉम्बे ने अपनी स्थिति में सुधार करते हुए क्रमशः 26वां और 28वां स्थान हासिल किया। दोनों संस्थानों ने इंजीनियरिंग इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक के लिए भी रैंक में सुधार करते हुए शीर्ष 50 की सूची में जगह बनाई। आईआईएम अहमदाबाद व बंगलूरू विजनेस और मैनेजमेंट स्टडीज के लिए शीर्ष 50 में बने हुए हैं। 


हालांकि बीते साल की तुलना में उनकी रैंकिंग में गिरावट आई है। आईआईएम अहमदाबाद की रैंकिंग 22 से 27 हो गई, जबकि आईआईएम बंगलूरू की रैंकिंग 32 से गिरकर 40 हो गई। आईआईटी मद्रास (पेट्रोलियम इंजीनियरिंग) व जेएनयू (विकास अध्ययन) शीर्ष 50 में बरकरार रहे, पर उनकी रैंकिंग में भी कुछ स्थानों की गिरावट आई।


 क्यूएस की सीईओ जेसिका टर्नर ने कहा, हालांकि भारत ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), हरित व डिजिटल कौशल क्षेत्रों में असाधारण ताकत दिखाई है, पर स्थिरता व उद्यमशीलता क्षमताओं में अहम अंतर बना हुआ है। उच्च शिक्षा सुधार व कौशल सरेखण से यह अंतर पाटना जरूरी है, ताकि सुनिश्चित हो सके कि भारत के स्नातक वैश्विक आर्थिकी में प्रतिस्पर्धी बने रहें और उद्योगों का नेतृत्व करने में सक्षम हों।


सात भारतीय संस्थान एआई, डाटा साइंस में काम करने वालों में शामिल

डाटा साइंस, एआई में आईआईटी दिल्ली, बॉम्बे व कानपुर शीर्ष 100 संस्थानों की सूची में हैं। सात भारतीय संस्थान एआई और डाटा साइंस क्षेत्र में उल्लेखनीय काम करने वालों की सूची में शामिल हैं, जबकि 42 संस्थानों ने कंप्यूटर साइंस एवं आईटी और 15 संस्थानों ने पर्यावरण विज्ञान में बेहतरीन काम किया है।


बेहतरीन प्रदर्शन : डीयू में 24% सुधार

आईआईटी बॉम्बे व खड़गपुर और दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में से हर संस्थान ने 2025 की रैंकिंग में 29 एंट्री भेजी थीं। इनमें आईआईटी बॉम्बे का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा, जिसमें 12 विषयों में सुधार हुआ। वहीं, डीयू ने 24 फीसदी का सुधार किया, जिसमें नौ विषयों में वृद्धि हुई, जबकि दो में गिरावट आई है।

Tuesday, November 26, 2024

One Nation One Subscription: वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन योजन को मंजूरी, डेढ़ करोड़ छात्रों को मिलेगा लाभ; विस्तार से जानिए क्या है ये योजना

वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन योजन को मंजूरी, डेढ़ करोड़ छात्रों को मिलेगा लाभ; विस्तार से जानिए क्या है ये योजना


केंद्र सरकार ने देशभर के छात्रों को बड़ी सौगात दी है। सोमवार को केंद्रीय कैबिनेट ने वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन स्कीम को हरी झंडी दे दी है। मोदी सरकार आने वाले तीन सालों में छह हजार करोड़ रुपये इस योजना पर खर्च करेगी। अटल इनोवेशन मिशन के नए चरण को भी मंजूरी दी गई है। वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन स्कीम से शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा।


🔴  इनोवेशन की राह से हटेंगी भाषाई दिक्कतें।
🔴  अटल इनोवेशन मिशन का नया चरण शुरू।
🔴  देश में 30 नए इनोवेशन सेंटर होंगे स्थापित।


नई दिल्ली। सरकार ने शोध और इनोवेशन को रफ्तार देने के लिए दो और नई घोषणाएं की हैं। इनमें पहला छात्रों-शिक्षकों तक दुनियाभर के शोध पत्रों और जर्नल की पहुंच को आसान बनाने के लिए वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन स्कीम है। इसके चलते छात्रों को अब दुनियाभर के शोध पत्रों और जर्नल की तलाश के लिए भटकना नहीं होगा, बल्कि उन्हें यह सारा कुछ एक जगह पर ही मिल जाएगा। इस स्कीम पर अगले तीन सालों में छह हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे।


अटल इनोवेशन मिशन का नया चरण शुरू
दूसरा बड़ा एलान अटल इनोवेशन मिशन के नए चरण को शुरू करने को लेकर है। इसके तहत 30 ऐसे नए इनोवेशन सेंटर स्थापित होंगे, जिसमें भाषा का कोई बंधन नहीं होगा। यानी कोई भी छात्र यहां स्थानीय भाषा में भी काम कर सकेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुआई में सोमवार को हुई कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना और प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इन दोनों पहलों से छात्रों और युवाओं को शोध व इनोवेशन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।


शिक्षण संस्थानों को जोड़ा जाएगा
उन्होंने बताया कि वन नेशन-वन सब्सक्रिप्शन स्कीम से देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों और शोध संस्थानों को जोड़ा जाएगा। इस स्कीम के तहत उन्हें दुनियाभर के सभी शोध पत्र व जर्नल मुहैया कराए जाएंगे। इसमें कुल 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय पत्रिका प्रकाशकों को शामिल किया गया है। इन प्रकाशकों द्वारा प्रकाशित लगभग 13,000 ई-पत्रिकाएं अब 6,300 से अधिक सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों व केंद्र सरकार के अनुसंधान एवं विकास संस्थानों के लिए सुलभ होंगी।


अटल इनोवेशन मिशन पर खर्च होंगे 2,750 करोड़
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि कैबिनेट ने इसके साथ ही अटल इनोवेशन मिशन के नए चरण को भी शुरू करने की मंजूरी दी है। इसके तहत देश में 30 नए ऐसे इनोवेशन सेंटर खोले जाएंगे, जहां किसी भी स्थानीय भाषा के छात्र आकर इनोवेशन से जुड़ा काम कर सकते हैं। इस मिशन पर सरकार 2,750 करोड़ रुपये खर्च करेगी। इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर व पूर्वोत्तर के राज्यों में भी करीब एक हजार नए इनोवेशन लैब स्थापित किए जाएंगे। इस मिशन के तहत इनोवेशन की ब्रांडिंग भी की जाएगी।

Friday, July 26, 2024

कोर्स अधूरा तो चलेगी परिषदीय स्कूलों में एक्स्ट्रा क्लास, हर दिन 30 मिनट का रेमेडियल (उपचारात्मक) क्लास चलाने का भी निर्देश

कोर्स अधूरा तो चलेगी परिषदीय स्कूलों में एक्स्ट्रा क्लास, हर दिन 30 मिनट का रेमेडियल (उपचारात्मक) क्लास चलाने का भी निर्देश




परिषदीय स्कूलों में बच्चों को शैक्षणिक रूप से प्रतिस्पर्धा में सक्षम बनाने के लिए इस साल कोर्स को समय से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हर स्कूल में इसके लिए ‘एक्स्ट्रा क्लासेज’ की व्यवस्था दी गई है। साथ ही स्कूल के दौरान ही हर दिन 30 मिनट का रेमेडियल (उपचारात्मक) क्लास चलाने का भी निर्देश है। खेलकूद और अन्य गतिविधियों के साथ ही पढ़ाई का रुटीन तय किया गया है।


बेसिक स्कूलों के सत्र 2024-25 के लिए जारी शैक्षणिक कैलेंडर में हर दिन प्रार्थना सभा और ध्यान सत्र के बाद कक्षाएं शुरू करने के निर्देश हैं। एक पीरिएड यानी कालांश 40 मिनट का रखा जाएगा। भोजनावकाश के पहले और बाद में इन कालांश को बराबर रखा जाएगा। शैक्षणिक कैलेंडर में हर महीने के पाठ्यक्रम को तय करने के साथ ही तय समय में इनके पूरा न होने पर एक्स्ट्रा क्लास चलाने के निर्देश दिए गए हैं। पढ़ाई के दौरान और छुट्टी के दिनों में भी अतिरिक्त कक्षाएं चलाकर छूटा हुआ कोर्स पूरा कराया जाएगा। हर दिन 30 मिनट की एक रेमेडियल कक्षा चलाने के निर्देश दिया है।

Monday, June 3, 2024

केंद्रीय विद्यालयों में अब यूथ पार्लियामेंट और ई-क्लासरूम पर रहेगा जोर, पढ़ाई में तकनीक और नवाचार का और अधिक होगा उपयोग

केंद्रीय विद्यालयों  में अब यूथ पार्लियामेंट और ई-क्लासरूम पर रहेगा जोर, पढ़ाई में तकनीक और नवाचार का और अधिक होगा उपयोग


लखनऊ। केंद्रीय विद्यालय संगठन के विद्यालय आने वाले समय में पढ़ाई में तकनीक और नवाचार का और अधिक उपयोग करेंगे। निरालानगर स्थित होटल में चल रहे केंद्रीय विद्यालय संगठन लखनऊ संभाग के तीन दिवसीय वार्षिक प्राचार्य सम्मेलन के दौरान सहायक आयुक्त विजय कुमार ने यह जानकारी दी।


विजय कुमार ने सभी केंद्रीय विद्यालयों को अपनी वेबसाइट अपडेट करने के साथ ही तकनीक आधारित शिक्षा के तहत ई क्लासरूम को बढ़ावा देने पर जोर दिया। इसके साथ ही यूथ पार्लियामेंट, ग्रीन स्कूल, विद्यांजलि, तरुण-उत्सव तथा प्रेरणा जैसे कार्यक्रमों को भी नियमित रूप से आयोजित करने के लिए कहा। 


नई दिल्ली के सहायक आयुक्त मनोज कुमार पांडेय ने पीएमश्री योजना और उसके प्रयोग के विषय में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लखनऊ संभाग के 32 केंद्रीय विद्यालयों को पीएमश्री योजना में सम्मिलित किया गया है। पीएमश्री विद्यालय सभी विद्यालयों के लिए एक आदर्श स्कूल के रूप में स्थापित किए जाने हैं। यहां पर बच्चों के लिए अच्छे संसाधन के साथ ही प्रशिक्षित अध्यापक होंगे। लखनऊ संभाग की सहायक आयुक्त महोदय अर्चना जायसवाल ने विषय-वार एवं विद्यालय-वार परीक्षा परिणाम पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। 

Sunday, May 19, 2024

कमजोर विद्यार्थियों के लिए चलेंगी विशेष कक्षाएं, माध्यमिक विद्यालयों में तैयार होंगे अलग पाठ्यक्रम, शिक्षण कार्यों की होगी मॉनिटरिंग

कमजोर विद्यार्थियों के लिए चलेंगी विशेष कक्षाएं, माध्यमिक विद्यालयों में तैयार होंगे अलग पाठ्यक्रम, शिक्षण कार्यों की होगी मॉनिटरिंग


लखनऊ । सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। इन विद्यार्थियों के लिए अलग पाठ्यक्रम तैयार कर शिक्षक विशेष कक्षाएं संचालित करेंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा कमजोर विद्यार्थियों के शिक्षण कार्यों की हर महीने मॉनिटरिंग होगी। शिक्षक इन विद्यार्थियों के शिक्षण कार्यों की रिपोर्ट तैयार करेंगे, ताकि इन बच्चों में हो रहे सुधार का पता चल सके।


 माध्यमिक विद्यालयों में जुलाई से विशेष प्रतिभाशाली व सामान्य से कमजोर विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी। चयन के बाद कमजोर विद्यार्थियों के लिए विद्यालय स्तर पर विशेष कक्षाएं संचालित होंगी। इन विशेष कक्षाओं के लिए शिक्षक अलग से पाठ्यकम तैयार करेंगे।


 इसके साथ ही इन विद्यार्थियों को बेहतर बनाने के लिए विद्यालय प्रधानाचार्य द्वारा विशेष संबोधन दिया जाएगा। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि जुलाई महीने में विद्यालय स्तर पर विद्यार्थियों की पहचान होने के बाद उनको विशेष तौर पर आगे बढ़ाया जाएगा।

Friday, May 3, 2024

आगामी यूपी बोर्ड परीक्षा-2025 के परीक्षाफल में सुधार के सम्बन्ध में

अच्छा रिजल्ट लाने वाले माध्यमिक कॉलेज कमजोर के बनेंगे मार्गदर्शक

लखनऊ। इस साल का बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी होने के बाद नए सत्र 2024-25 को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। विभाग ने 50 फीसदी से कम परिणाम लाने वाले कॉलेजों में सुधार का जिम्मा अच्छा रिजल्ट लाने वाले विद्यालयों को दिया है। यह विद्यालय आपस में संवाद करेंगे। अपनी बेस्ट प्रैक्टिस साझा करेंगे और शिक्षकों का भ्रमण भी होगा। 

विभाग ने यह योजना तैयार की है कि परीक्षाफल में सुधार के लिए हर जिले से एक राजकीय, एक सहायता प्राप्त व एक वित्तविहीन विद्यालयों, जिनका परीक्षाफल सर्वश्रेष्ठ रहा है, उनका चयन किया जाएगा। चयनित विद्यालयों के प्रधानाचार्य का कम परीक्षाफल वाले राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों से संवाद कराया जाएगा। साथ ही अगले साल के परीक्षाफल को बेहतर करने की एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा है कि कम परीक्षाफल लाने वाले विद्यालयों के प्रधानाचार्य व शिक्षकों को इन चयनित विद्यालयों का भ्रमण कराएं। इसी के साथ पठन-पाठन से जुड़ी प्रक्रिया, उनकी बेस्ट प्रैक्टिस, शैक्षिक कैलेंडर भी साझा करेंगे। उन्होंने सभी डीआईओएस से कहा है कि इसके लिए मंडलीय उप शिक्षा निदेशक को नोडल अधिकारी नामित किया गया है। उनके समन्वय से 20 मई तक विस्तृत कार्यक्रम बनाकर इसका अनुपालन सुनिश्चित कराएं। 



आगामी यूपी बोर्ड परीक्षा-2025 के परीक्षाफल में सुधार के सम्बन्ध में 



राजकीय और अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए अब हर सप्ताह समीक्षा


लखनऊ। राजकीय और अनुदानित माध्यमिक विद्यालयों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के लिए अब हर सप्ताह समीक्षा होगी। समग्र शिक्षा के तहत जिला विद्यालय की ओर से इसके लिए सभी प्रधानाचार्यों को निर्देशित किया गया है।


यूपी बोर्ड के परिणाम में निजी शिक्षण संस्थानों के सापेक्ष में सरकारी और अनुदानित यूपी बोर्ड परीक्षा में सरकारी व विद्यालयों का प्रदर्शन इस बार काफी निराशाजनक रहा। इसे देखते हुए नए अनुदानित विद्यालयों के खराब प्रदर्शन के बाद कवायद सिरे से यहां न केवल शिक्षा व्यवस्था की समीक्षा होगी बल्कि शिक्षकों के पढ़ाने के ढंग को भी परखा जाएगा। शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग के अनुसार, आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर कक्ष व साइंस लैब की व्यवस्था को बेहतर बनाया जाएगा।


कम उपस्थिति वाले छात्रों के अभिभावकों से करेंगे संपर्क : विभाग के अनुसार, लगातार तीन दिन तक अनुपस्थित रहने वाले छात्रों के अभिभावकों से संपर्क किया जाएगा। विद्यालयों में यूथ व इको क्लब, साइंस मैथ्स क्लब गठित होंगे। समय-सारिणी में स्मार्ट कक्षा कक्ष, प्रयोगशालाओं व संसाधनों को बेहतर बनाने पर कार्य होगा। कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएं चलेंगी। प्रत्येक शनिवार प्रयोगात्मक कार्यक्रम होंगे। मानव संपदा पोर्टल से ही शिक्षकों के अवकाश स्वीकृत होंगे, अन्यथा विभागीय कार्रवाई होगी। शिक्षकों की ओर से पंख पोर्टल के जरिये विद्यार्थियों के लिए कॅरिअर काउंसिलिंग पर कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। 

Thursday, March 14, 2024

बेसिक शिक्षा : सिर पर परीक्षाएं और विभाग प्रशिक्षण में ही है व्यस्त

बेसिक शिक्षा : सिर पर परीक्षाएं और विभाग प्रशिक्षण में ही है व्यस्त


परिषदीय स्कूलों की वार्षिक परीक्षाएं सिर पर हैं लेकिन विभाग परीक्षाओं की तैयारी के बजाए लंबित सेवारत प्रशिक्षण कार्यक्रमों को ही पूरा करने में जुटा है। प्रशिक्षण में शिक्षकों के व्यस्त रहने के कारण स्कूली बच्चों की परीक्षा पूर्व तैयारी भी प्रभावित हुई हैं।


परिषदीय स्कूलों में 16 मार्च से 21 मार्च के मध्य वार्षिक परीक्षाएं आयोजित होंगी। इस बार वार्षिक परीक्षाओं की अवधि ढाई घंटे होगी। प्रश्नपत्रों में अति लघु उत्तरीय, बहुविकल्पीय, लघु उत्तरीय एवं दीर्घ उत्तरीय प्रश्न सम्मिलित होंगे। कक्षा एक की परीक्षा मौखिक एवं कक्षा दो से पांच तक की परीक्षाएं मौखिक एवं लिखित होंगी। जबकि कक्षा छह से आठ में लिखित परीक्षाएं आयोजित होंगी। वार्षिक परीक्षा 50 अंकों की होगी।


दो पालियों में होने वाली गृह परीक्षाओं की प्रथम पाली सुबह 9.15 से 11.45 एवं द्वितीय पाली दोपहर 12.15 से 2.45 तक आयोजित होगी। कक्षा एक से चार एवं कक्षा छह व सात की उत्तरपुस्तिकाएं विद्यालय स्तर पर, कक्षा पांच की संकुल केन्द्र में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा तथा कक्षा 8 की उत्तपुस्तिकाएं बीआरसी में जांची जाएंगी। किसी भी छात्र की कक्षोन्नति नहीं रोकी जाएगी।


सूत्रों के अनुसार, बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले वर्ष से शिक्षकों के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए थे। इनमें से कई कार्यक्रम अभी भी अधूरे हैं। परीक्षाएं नजदीक आने के बावजूद विभाग ने शिक्षकों को इन कार्यक्रमों को पूरा करने का निर्देश दिया है।

इस वजह से शिक्षकों को स्कूल में बच्चों को पढ़ाने के बजाय प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए जाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर छात्रों की परीक्षा पूर्व तैयारी पर पड़ रहा है।


छात्रों की चिंता:
छात्रों का कहना है कि परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, लेकिन शिक्षकों ने अभी तक उन्हें पूरी तरह से तैयार नहीं किया है। वे परीक्षा को लेकर चिंतित हैं।


शिक्षकों की मजबूरी:
शिक्षकों का कहना है कि वे भी चाहते हैं कि वे बच्चों को पढ़ाएं और उनकी परीक्षा पूर्व तैयारी करवाएं। लेकिन विभाग के निर्देशों का पालन करना उनकी मजबूरी है।


विभाग का पक्ष:
बेसिक शिक्षा विभाग का कहना है कि शिक्षकों का प्रशिक्षण भी महत्वपूर्ण है। विभाग का प्रयास है कि परीक्षाएं भी समय से हों और शिक्षकों का प्रशिक्षण भी पूरा हो जाए।


क्या है समाधान:
विभाग को इस मामले पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और शिक्षकों को परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। विभाग शिक्षकों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बाद के लिए भी रख सकता है।

Thursday, September 21, 2023

राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन, शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए प्रदेश स्तर पर बनाई जाएगी नीति

शिक्षा में गुणवत्ता सुधार के लिए प्रदेश स्तर पर बनाई जाएगी नीति

शासन ने राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का किया गठन

राज्य एवं नैक के बीच नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा प्रकोष्ठ


प्रयागराज । प्रदेश के विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रदेश स्तर पर नीति का निर्धारण किया जाएगा। इसके लिए शासन ने राज्य स्तरीय गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन किया है, जो राज्य और राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) के बीच नोडल एजेंसी के रूप में भी कार्य करेगा।


प्रकोष्ठ में 18 सदस्य नियुक्त किए गए हैं, जिनमें उच्च शिक्षा मंत्री पदेन अध्यक्ष और अपर मुख्य सचिव / प्रमुख सचिव/सचिव उत्तर शिक्षा विभाग पदेन उपाध्यक्ष होंगे। प्रकोष्ठ के सदस्य के रूप में उच्च शिक्षा निदेशक, उच्च शिक्षा परिषद के अध्यक्ष सहित नैक सीजीपीए प्राप्त संस्थानों के कुलपतियों, कॉलेज प्रबंधक, प्राचार्यों आदि को शामिल किया गया है। इनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा।


आगामी तीन वर्षों में प्रदेश के समस्त अर्ह उच्च शिक्षण संस्थानों का नैक मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए उत्तरदायित्व आधारित नीति निर्धारित करने, नैक मूल्यांकन के लिए मापदंडों को उच्च शिक्षण संस्थानों में कियन्वित कराने, प्रदेश के विश्वविद्यालयों / महाविद्यालयों की नैक मूल्यांकन में सहायता के लिए मेंटर की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी इसी प्रकोष्ठ की होगी।



राज्य स्तरीय प्रकोष्ठ क्षेत्रीय गुणवत्ता

आश्वासन प्रकोष्ठ का गठन, निगरानी एवं मूल्यांकन करेगा। क्षेत्रीय प्रकोष्ठ के पदेन अध्यक्ष संबंधित क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी, पदेन उपाध्यक्ष संबंधित राज्य विश्वविद्यालय के कुलसचिव और पदेन संयोजक विश्वविद्यासलय के आईक्यूएसी कोऑर्डिनेटर होंगे। इसके अलावा चार अन्य सदस्य होंगे।


राज्य पुरस्कार योजना, सेमिनार अनुदान, रिसर्च एंड डेवपलमेंट अनुदान के प्रस्ताव की स्क्रीनिंग कर उनको उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद को उपलब्ध कराने और विश्वविद्यालयों/महाविद्यालयों में सभी प्रकार की प्रोन्नति के लिए राज्य सरकार एवं यूजीसी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नीति तैयार कर शासन को उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ की होगी। कॅरियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रोन्नति का डिजिटिलाईजेशन भी किया जाएगा।

Sunday, March 26, 2023

2023-24 सत्र से CBSE स्कूलों में लागू होगा SQAA कार्यक्रम

CBSE ने स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एंश्योरेंस फ्रेमवर्क जारी किया, 

2023-24 सत्र से CBSE स्कूलों में लागू होगा SQAA कार्यक्रम



नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूल संबद्धता, अपग्रेडेशन के लिए स्कूल क्वालिटी असेसमेंट एंड एंश्योरेंस (एसक्यूएए) फ्रेमवर्क जारी किया है। आगामी शैक्षणिक सत्र 2023-24 से बोर्ड ने इसे अपने सभी संबद्ध स्कूलों के लिए लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत स्कूलों को हर साल अपना स्व-मूल्यांकन - करना होगा। इसे स्कूलों के लिए - अनिवार्य बनाया गया है। यदि कोई स्कूल नई संबद्धता भी चाहता है तो उसके लिए यह जरूरी होगा।


Central Board of Secondary Education (CBSE) on Friday released School Quality Assessment and Assurance (SQAA) Framework to catalyse transformational change in its affiliated schools. The Board has decided to implement SQAA for all its affiliated schools from the Session 2023- 2024 while applying for fresh affiliation/switch over/upgradation/extension of schools. 


सीबीएसई के अनुसार सभी संबद्ध स्कूलों को हर साल एक अप्रैल से 31 दिसंबर के बीच एसक्यूएए पोर्टल पर स्व-मूल्यांकन करना होगा। स्कूल द्वारा एसक्यूएए पोर्टल पर प्रस्तुत स्व- मूल्यांकन एक वर्ष की अवधि के लिए मान्य होगा। 


बोर्ड का सरस पोर्टल पर सत्र 2024-25 के लिए संबद्धता, स्विच ओवर, अपग्रेडेशन - विस्तार के लिए स्कूलों के आवेदन स्वीकार करेगा। स्कूलों को एसक्यूएए पोर्टल पर स्व-मूल्यांकन पूरा करना होगा और फिर समय सीमा समाप्त होने से पहले इसे सरल पोर्टल पर आवेदन जमा करना होगा। 

Saturday, October 29, 2022

प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (UPCRAM) केंद्र की स्थापना

प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (UPCRAM) केंद्र की स्थापना


लखनऊ : प्रदेश के विश्वविद्यालय व डिग्री कालेजों में गुणवत्तापरक शिक्षा, राष्ट्रीय व वैश्विक स्तर पर रेंकिंग हासिल करने और विश्व स्तरीय उच्च शिक्षण संस्थान बनाने के लिए उत्तर प्रदेश सेंटर फार रैंकिंग एंड एक्रीडिटेशन मेंटरशिप (उपक्रम) केंद्र की स्थापना की गई है।


 लखनऊ विश्वविद्यालय(लवि) में स्थापित किए गए इस प्रदेश स्तरीय केंद्र उपक्रम का महानिदेशक प्रो. प्नम टंडन को बनाया गया है। प्रो. टंडन लवि की ड्रीन स्टूडेंट वेलफेयर भी हैं। प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा डा. सुधीर एम. बोबड़े की ओर से उपक्रम केंद्र की 10 सदस्यीय कमेटी के गठन के आदेश जारी किए गए हैं।


 प्रो. टंडन के अलावा पीजीआइ लखनऊ के प्रो. आर हर्ष वर्धन को एक्रीडिटेशन का प्रमुख, लवि के प्रो. सत्येंद्र पाल सिंह को एसोसिएट डायरेक्टर (इंटरनेशनल) केजीएमयू के प्रो. आरके गर्ग को एसोसिएट डाक्टर (रिसर्च एंड इनोवेशन), लवि की प्रो. संगीता साहू को एसोसिएट डायरेक्टर (परसेप्शन), दीन दयाल उपाध्याय डा. अंकिता राज राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (रूसा) के प्रतिनिधि के रूप में और अभिज्ञान मिश्रा को सेक्टोरियल असिस्टेंट बनाया गया है।

पिछले हफ्ते ही इस केंद्र की स्थापना का राज्यपाल महोदया द्वारा उद्घाटन किया गया था।

Thursday, May 19, 2022

Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

Quality of School Education: स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता परखने के लिए इसी साल से छिड़ेगी मुहिम, NCERT शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगा रिपोर्ट

शिक्षा की गुणवत्ता परखने को इसी साल से मुहिम, स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार
 

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता (quality of school education) को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। अब शैक्षणिक बदलावों की सालाना परख होगी। इस पूरी व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर गठित एक स्वतंत्र इकाई देखेगी।


नई दिल्ली : स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने की कोशिशों के बीच उसमें आने वाले बदलावों की अब सालाना परख भी होगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक स्वतंत्र इकाई गठित होगी, जो इस पूरी व्यवस्था को देखेगी। फिलहाल इस प्रस्तावित एजेंसी को 'परख' नाम दिया गया है। वहीं इस पूरी मुहिम को इसी साल से शुरू करने की तैयारी भी है। इसमें स्कूलों के साथ छात्रों का रिपोर्ट कार्ड तैयार होगा।




एनसीईआरटी को सौंपी जिम्‍मेदारी

इसके आधार पर ही उन्हें जरूरी सुविधाएं और मदद मुहैया कराई जाएगी। शिक्षा मंत्रालय ने फिलहाल इसके लिए रोडमैप तैयार करने का जिम्मा राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को सौंपा गया है। जो जल्द ही इस रिपोर्ट को शिक्षा मंत्रालय को सौंपेगी।


जिम्मा एनसीईआरटी के पास

वैसे अभी भी स्कूली शिक्षा को गुणवत्ता को परखने का जिम्मा एनसीईआरटी के पास ही है। जो फिलहाल नेशनल अचीवमेंट सर्वे (एनएएस) के जरिए इसे जांचने का काम करती है। इस बीच एनएएस- 2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट जल्द ही जारी होने के संकेत दिए गए है। सूत्रों की मानें तो स्कूलों की गुणवत्ता को परखने के लिए एनएएस-2021 के सर्वेक्षण की रिपोर्ट ही आधार बनेगी।


बदलावों को परखा जाएगा

इसके आधार पर बदलावों को परखा जाएगा। मंत्रालय की प्रस्तावित योजना के मुताबिक परख देश भर के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की गुणवत्ता को जांचने का काम करेगी। यह एक स्वतंत्र एजेंसी रहेगी। इसके साथ ही इसमें ऐसे प्रोफेशनल्स को शामिल किया जाएगा, जिनकी इस तरह के आकलन में विशेषज्ञता है। यह पूरा आकलन आनलाइन होगा।


प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी

इसके जरिए जहां स्कूलों की गुणवत्ता का पता चलेगा, वहीं प्रत्येक छात्र की संपूर्ण प्रगति भी सामने आएगी। गौरतलब है कि नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को जांचने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर इस पहल के साथ राज्यों से भी अपने स्तर पर गुणवत्ता को आंकने की व्यवस्था बनाने का सुझाव दिया है।


इनोवेशन पर भी होगा फोकस

स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को परखने में अब इनोवेशन पर भी फोकस होगा। जिसमें प्रत्येक स्कूलों में इस दिशा में उठाए गए कदमों और ऐसी प्रतिभाओं को पहचाना जाएगा। साथ ही स्कूलों की रुचि को पहचान करके उन्हें आगे बढ़ने में मदद दी जाएगी। वैसे भी स्कूली छात्रों को इनोवेशन से जोड़ने के लिए मौजूदा समय में स्कूलों में अटल टिंकरिंग लैब (Atal Tinkering Labs, ATL) स्थापित किए जा रहे है। जहां बच्चे अपनी इनोवेशन से जुड़ी प्रतिभा को निखार सकते है।

Friday, March 25, 2022

TET की तर्ज पर अब यूपी में MTET, मदरसा टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (एमटीईटी) का होगा आयोजन

TET की तर्ज पर अब यूपी में MTET,  मदरसा टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (एमटीईटी) का होगा आयोजन

 
लखनऊ :  उत्तर प्रदेश में अब सरकारी शिक्षक भर्ती के लिए आयोजित होने वाले टीचर्स एजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा टीचर्स एलिजिबिलिटी टेस्ट (एमटीईटी) आयोजित होगा। प्रदेश सरकारी मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों में अब मदरसा प्रबंधक सीधे अपने स्तर पर रिक्त पदों पर शिक्षकों की भर्ती नहीं कर पाएंगे। हिन्दुस्तान से बातचीत में मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद ने यह जानकारी दी।

इन खाली पदों के लिए पहले उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड आवेदन आमंत्रित करेगा। उसके बाद चयनित अभ्यर्थियों की लिखित परीक्षा आयोजित करवाएगा। इस लिखित परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों का साक्षात्कार आदि की प्रक्रिया मदरसा प्रबंधन पूरी करके नियुक्त करेगा।

इसी के साथ अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों में अब मोबाइल एप से भी पढ़ाई होगी। उ.प्र.मदरसा बोर्ड ने एक मोबाइल एप तैयार करवाया है। रमजान के बाद इसकी लांचिंग की जाएगी। बोर्ड के रजिस्ट्रार एस.एन.पाण्डेय ने बताया कि मोबाइल एप में एनसीईआरटी के सभी पाठ्यक्रमों के साथ धार्मिक शिक्षा के कोर्स का मैटीरियल भी उपलब्ध होगा। यह स्टडी मैटीरियल शिक्षकों के लिए काफी उपयोगी रहेगा।


यूपी : कक्षाएं शुरू होने से पहले अब मदरसों में गाना होगा राष्ट्रगान, शिक्षा परिषद की बैठक में हुआ तय

मदरसा शिक्षा परिषद की बैठक में लिए गए कई अहम फैसले,  TET की तर्ज पर MTET के जरिए शिक्षकों की होगी नियुक्ति। 

यूपी के सभी मदरसों में अब राष्ट्रगान अनिवार्य, दीनियात के प्रश्नपत्रों को कम कर जोड़े गए आधुनिक विषय

मदरसा शिक्षकों के बच्चे कहां पढ़ते हैं, होगा सर्वे, मदरसा बोर्ड की बैठक में फैसला



योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा मदरसों में सुधार के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें कई अहम निर्णय लिए गए।


लखनऊ । उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने राज्य के सभी मदरसों में राष्ट्रगान अनिवार्य कर दिया है। 11 मई से शुरू होने वाले नए शिक्षण सत्र में कक्षाएं प्रारंभ होने से पहले अन्य दुआओं के साथ ही राष्ट्रगान का गायन अनिवार्य होगा।
इसके अलावा अब मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम को प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए दीनियात (धर्म संबंधी) के प्रश्नपत्रों को कम कर आधुनिक विषयों को जोड़ दिया है। अब दीनियात के चार के बजाय केवल एक प्रश्नपत्र होगा। सेकेंड्री (मुंशी/मौलवी) में अरबी व फारसी के साथ-साथ दीनियात को शामिल करते हुए केवल एक पेपर होगा। इसके अलावा हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र अलग-अलग होंगे।

योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा मदरसों में सुधार के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद के अध्यक्ष डा. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में गुरुवार को महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें कई अहम निर्णय लिए गए। मदरसा बोर्ड में अब छह प्रश्नपत्रों की परीक्षा होगी। बेसिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर कक्षा एक से आठ तक के पाठ्यक्रम में दीनियात के विषय के अतिरिक्त हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान एवं सामाजिक विज्ञान के प्रश्नपत्र होंगे।

मदरसों में घटती छात्र संख्या पर भी बैठक में चिंता जताई गई। साथ ही तय किया गया कि जिन मदरसों में छात्र कम हैं और शिक्षक अधिक हैं वहां के शिक्षकों को दूसरे मदरसों में समायोजित किया जाएगा। बैठक में सदस्यों ने कहा कि बहुत से मदरसा शिक्षक ऐसे हैं जो अपने बेटे-बेटियों को कान्वेंट स्कूल में पढ़ाते हैं जबकि अन्य को मदरसा शिक्षा ग्रहण करने के लिए प्रेरित करते हैं। मान्यता प्राप्त मदरसों के शिक्षकों व कर्मचारियों के पुत्र-पुत्रियां कहां पढ़ रहे इस बारे में मदरसा बोर्ड सर्वे कराएगा।

बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत संचालित मदरसों की शैक्षिक गुणवत्ता का मूल्यांकन कराया जाएगा। स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए जो प्रस्ताव आए हैं वह विनियमावली 2016 के अनुरूप हो तो उन्हें स्वीकृत किया जाए अन्यथा वापस भेज दिया जाए। भूमि व भवन के ट्रांसफर संबंधी प्रस्ताव बोर्ड के रजिस्ट्रार निस्तारित करेंगे।

आगामी सत्र से मदरसों में छात्रों के पंजीकरण आनलाइन कराए जाने की व्यवस्था कराने व आधार आधारित उपस्थिति प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की समय से उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मदरसे में बायोमैट्रिक उपस्थिति सिस्टम की स्थापना की जाएगी। बैठक में सदस्य कमर अली, तनवीर रिजवी, डा. इमरान अहमद, असद हुसैन के अलावा वित्त एवं लेखाधिकारी आशीष आनन्द व रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय मुख्य रूप से उपस्थित थे।

14 मई से शुरू होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं : बोर्ड बैठक में तय हुआ कि मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 14 मई से शुरू होकर 27 मई तक चलेंगी। रजिस्ट्रार शेषनाथ पाण्डेय परीक्षा समिति से विचार कर विस्तृत कार्यक्रम जारी करेंगे। बोर्ड की वार्षिक परीक्षाएं राज्य के अनुदानित मदरसों व आलिया स्तर के स्थायी मान्यता प्राप्त मदरसों में सीसीटीवी कैमरे की निगरानी में होंगी।


टीईटी की तर्ज पर मदरसा शिक्षकों के लिए एमटीईटी : मदरसा बोर्ड ने मदरसा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से योग्य शिक्षकों के चयन के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की तर्ज पर मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) लागू करने का निर्णय लिया गया। बोर्ड ने रजिस्ट्रार को इसका प्रस्ताव बनाकर शीघ्र शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। यानी अब मदरसों में रिक्त पदों पर भर्तियां उन्हीं अभ्यर्थियों से की जाएंगी जो एमटीईटी परीक्षा पास होंगे। वर्तमान में करीब 550 मदरसा शिक्षकों के पद रिक्त हैं। एमटीईटी के लागू होने से भर्तियों में भाई-भतीजावाद के आरोप भी नहीं लगेंगे।


प्रदेश के मान्यता प्राप्त, अनुदानित व गैर अनुदानित मदरसों में नए शिक्षण सत्र से कक्षाएं शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को राष्ट्रगान गाना होगा। इसे अन्य दुआओं के साथ अनिवार्य कर दिया गया है। इतना ही नहीं, मदरसों की शैक्षिक गुणवत्ता बढ़ाने के लिए टीईटी की तर्ज पर शिक्षकों की भर्ती के लिए मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा (एमटीईटी) भी शुरू किया जाएगा। ये निर्णय बृहस्पतिवार को मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डॉ. इफ्तिखार अहमद जावेद की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए। 

डॉ. जावेद ने बताया कि बोर्ड के रजिस्ट्रार जल्द ही शासन को एमटीईटी के बाबत प्रस्ताव भेजेंगे। उन्होंने बताया कि मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों के बच्चे किन संस्थानों से शिक्षा हासिल कर रहे हैं, इसका सर्वे कराने पर भी सहमति बनी है। बैठक में बोर्ड के सदस्य कमर अली, तनवीर रिजवी, डॉ. इमरान अहमद, असद हुसैन, अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय में लेखाधिकारी आशीष आनंद और बोर्ड के रजिस्ट्रार एसएन पांडेय मौजूद रहे।


मदरसों में शिक्षक और विद्यार्थी अनुपात की होगी जांच
डॉ. जावेद ने बताया कि मदरसों में विद्यार्थियों की घटती संख्या को देखते हुए अनुदानित मदरसों में शिक्षक और विद्यार्थी अनुपात की जांच कराने का निर्णय लिया गया है। छात्रों के अनुपात से ज्यादा शिक्षक होने पर शिक्षकों को समायोजित किया जाएगा। इसके अलावा मदरसों बायोमीट्रिक हाजिरी सिस्टम लागू करने का भी निर्णय लिया गया है।


14 से 27 मई के बीच होंगी मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं
परिषद के चेयरमैन ने बताया कि मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं 14 से 27 मई के बीच कराई जाएंगी। बेसिक शिक्षा परिषद की तर्ज पर कक्षा एक से आठ तक के पाठ्यक्रम दीनियात के विषयों के अलावा हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान विषय के प्रश्न पत्र परीक्षा में शामिल होंगे।


मदरसा बोर्ड: अरबी फारसी के साथ दीनियात भी शामिल

लखनऊ : मदरसा बोर्ड की सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी) में अरबी-फारसी साहित्य के साथ दीनियात शामिल करते हुए एक विषय रखा जाएगा। बाकी हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के प्रश्न पत्र अलग होंगे।

बैठक में तय किया गया कि मदरसों में घटती छात्र संख्या के चलते जिन अनुदानित मदरसों में छात्रों की संख्या से शिक्षक के पद अधिक सृजित हैं वहां के शिक्षक जिन मदरसों में शिक्षक कम हैं वहां समायोजित के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा। बैठक में मदरसा शिक्षकों के पुत्र-पुत्रियों के अंग्रेजी शिक्षा ग्रहण करने की जानकारी प्राप्त करने के लिए सर्वे कराने का निर्णय लिया गया।


मदरसा शिक्षक पात्रता परीक्षा एमटीईटी लागू होगी:

बैठक में यह भी तय किया गया कि मदरसों में छात्र पंजीकरण ऑनलाइन कराया जाएगा और आधार बेस्ड उपस्थिति प्रणाली विकसित करते हुए अगले सत्र से लागू की जाएगी। मदरसा शिक्षकों की ससमय उपस्थिति के लिए मदरसों में बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू की जाएगी।

Tuesday, January 18, 2022

कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले

कोरोना काल में स्कूल बंद होने से छोटी कक्षाओं के छात्र अक्षर ज्ञान भी भूले


कोरोना काल में स्कूलों के बंद होने से छात्रों की सीखने और पढ़ने की क्षमता प्रभावित हो रही है। इस कारण छोटी कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र अक्षर भी भूलने लगे हैं। ऐसे छात्रों की शिक्षा को फिर से पटरी पर लाने की तैयारी है। तस्वीरों, कहानियों और दूसरी गतिविधियों के जरिए छात्रों को अक्षर पढ़ने, लिखने और बोलने को लेकर सक्षम बनाया जाएगा।


एससीईआरटी का परिपत्र जारी: राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एससीईआरटी) दिल्ली की ओर से हाल ही में परिपत्र जारी किया गया है। जिसे लेकर दिल्ली के सरकारी स्कूल से लेकर निगम स्कूलों में 14 हफ्तों के लिए नर्सरी से आठवीं के छात्रों के लिए विशेष अभियान चलेगा। 


इस अभियान को सभी स्कूलों में लागू करने को लेकर दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। साथ ही दिल्ली के अलग-अलग जिलों को लेकर नौ नोडल अधिकारियों की एक समिति भी गठित की गई है।


छात्रों को कार्य पुस्तिका मिलेगी: छात्रों को सप्ताह में छह कार्य पुस्तिका उपलब्ध कराई जाएंगी। अंग्रेजी, हिंदी और अंक गणित की दो-दो लघु कथाएं, गीत, कविताएं और संख्यात्मक गतिविधियां दी जाएंगी। इसके अलावा चित्र देखकर समझने और कहानी बनाने से जुड़ी गतिविधियां भी अभियान का हिस्सा होंगी।


कई माध्यमों का प्रयोग: एससीईआरटी के अनुसार इन कार्य पुस्तिका के माध्यम से छात्रों को बोलने, सुनने, पढ़ने, लिखने और संख्यात्मक गतिविधियों को करने के लिए उन्मुख बनाना जाएगा, ताकि स्कूल बंद होने के वर्तमान चरण के दौरान उनकी मूलभूत सीखने की क्षमता में सीखने की हानि कम से कम हो।

रिपोर्ट में क्या

वर्ष 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, कोविड के चलते सभी कक्षा के छात्रों में सीखने की क्षमता कम हुई है। दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पिछले वर्ष अक्तूबर में रिपोर्ट के हवाले से भी यह जानकारी दी थी। वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-2021 में 17 फीसदी से अधिक छात्र अक्षर नहीं पढ़ सके। यह केवल प्राथमिक कक्षा के छात्रों की बात नहीं है, बल्कि बड़ी कक्षा में भी ऐसा देखने को मिला है। 14-18 वर्ष की उम्र वाले 80 छात्रों का सीखने का स्तर कम हुआ है।


सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ा

लैसेंट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार स्कूलों के बंद होने का छात्रों पर सामाजिक, शारीरिक और मानसिक प्रभाव भी पड़ता है। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में भी एक तिहाई अभिभावकों ने बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक स्वास्थ्य प्रभावित होने के बारे में सूचना दी है।

Friday, November 20, 2020

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी

उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की बनेगी नई विश्वस्तरीय व्यवस्था, जेएनयू में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम की तैयारी


उच्च शिक्षण संस्थानों की गुणवत्ता को परखने के लिए आने वाले दिनों में अब क्यूएस (क्वाकरेल्ली सायमोंड्स) और टाइम्स जैसी रैकिंग का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। देश में इसी तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों के विश्वस्तरीय रैकिंग की एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था बनेगी। इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। हालांकि, इसके आकलन का फामरूला भारतीय शिक्षा पद्धति के मापदंडों के अनुरूप होगा। वैसे भी नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के आने के बाद देश में शिक्षा के क्षेत्र में बड़े बदलावों की तैयारी शुरू हो गई है। फिलहाल उच्च शिक्षण संस्थानों की वैश्विक रैकिंग के लिए क्यूएस और टाइम्स जैसी दो ही एजेंसियां हैं। दोनों ही बिटिश मूल की हैं।


क्यूएस और टाइम्स जैसी रैकिंग करने वाली एजेंसियों पर ‘धारणा’ के आधार पर भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों का आकलन करने का आरोप लगाया गया था। ये आरोप कोई और नहीं, बल्कि शिक्षा मंत्रलय और उच्च शिक्षण संस्थानों की ओर से लगाए गए थे। यही वजह थी कि 2020 की टाइम्स रैकिंग में आइआइटी बांबे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर और खड़गपुर जैसे देश के सात प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों ने विरोध स्वरूप इस रैकिंग में शामिल होने से इन्कार कर दिया।



जेएनयू में चार वर्ष का होगा स्नातक पाठ्यक्रम!

नई दिल्ली : जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय स्नातक पाठयक्रम की समयावधि चार वर्ष करने पर बढ़ रहा है। गुरुवार को विवि की अकादमिक परिषद की बैठक में चर्चा हुई। नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए कमेटी गठित करने व स्नातकोत्तर की पढ़ाई ऑनलाइन माध्यम से कराने पर मंथन हुआ।

Friday, August 14, 2020

फतेहपुर : बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी, शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना तय, प्रेरणा लक्ष्य के मानक से बच्चों की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन

फतेहपुर : बच्चों के लिए भाषा और गणित का ज्ञान जरूरी, शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना तय, प्रेरणा लक्ष्य के मानक से बच्चों की पढ़ाई का होगा मूल्यांकन।


फतेहपुर :: बेसिक शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से पांच तक के बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का नया पैमाना निर्धारित किया है। अब कक्षा पांच तक के बच्चों के मूल्यांकन का आधार भाषा और गणित होगी। शिक्षकों का मूल्यांकन भी बच्चों की योग्यता के आधार पर होगा। निरीक्षण के दौरान शिक्षकों से भी इस पर सवाल-जवाब हो सकता है।

तय मानकों की बात करें तो भाषा विषय में कक्षा एक के बच्चे को निर्धारित सूची में पांच शब्दों को पहचानने की क्षमता होनी चाहिए। कक्षा दो के छात्र को भाषा की किताब में 20 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा तीन के छात्र में 30 शब्द प्रति मिनट पढ़ने की क्षमता, कक्षा चार के बच्चे में किताब का छोटा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत प्रश्नों का सही जवाब देने की क्षमता तथा कक्षा पांच के छात्र में बड़ा पैरा पढ़कर 75 प्रतिशत सवालों के सही जवाब देने की क्षमता का मानक बना है।



इसी प्रकार गणित विषय में कक्षा एक के छात्र को निर्धारित सूची में पांच संख्याएं सही पढ़ने की क्षमता, कक्षा दो को छात्र में एक अंक का जोड़ना और घटाना आना चाहिए। कक्षा तीन के छात्र में हासिल वाले जोड़ और घटाने के सवाल 75 प्रतिशत हल करने की क्षमता का मानक है कक्षा चार के छात्र को गुणा के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय हैं। कक्षा पांच के छात्र में भाग के 75 प्रतिशत सवाल हल करने का मानक तय किया गया है।

सर्व शिक्षा से जारी पत्र में स्पष्ट लिखा गया है कि यह मानक बच्चों के साथ शिक्षक और विभागीय अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों को कंठस्थ होना चाहिए। अगर कोई अधिकारी स्कूल का निरीक्षण करता है, तो उसे इसी मानक के आधार पर बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता का आकलन करना होगा। बीएसए देवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि प्रेरणा लक्ष्य की प्रतिलिपि सभी बीईओ के माध्यम से स्कूलों में भेज दी गई है।


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Thursday, January 23, 2020

मैनपुरी : सी और डी ग्रेड के स्कूलों का स्तर सुधारेंगे एआरपी, खंड शिक्षाधिकारी करेंगे निगरानी

मैनपुरी : सी और डी ग्रेड के स्कूलों का स्तर सुधारेंगे एआरपी, खंड शिक्षाधिकारी करेंगे निगरानी।





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