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Thursday, December 31, 2020

CBSE Board Exam: चार मई से शुरू होंगी सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं

CBSE Board Exams 2021 Dates Released
CBSE Board Exam: चार मई से शुरू होंगी सीबीएसई बोर्ड परीक्षाएं

🔔 परीक्षाओं के परिणाम 15 जुलाई को घोषित कर दिए जाएंगे




केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने साल 2021 में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों का एलान कर दिया है। इसके अनुसार 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं चार मई से शुरू होंगी और 10 जून को समाप्त होंगी। एक मार्च से प्रैक्टिकल (प्रयोगात्मक) परीक्षाएं होंगी। सीबीएसई ने बताया कि इन परीक्षाओं के परिणाम 15 जुलाई कर घोषित कर दिए जाएंगे।


CBSE Exam Date 2021: सीबीएसई 10वीं 12वीं परीक्षा 2021 की तारीखों ( cbse date sheet 2021 ) का ऐलान हो गया है. केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने गुरुवार को कहा कि 4 मई से 10 जून तक सीबीएसई बोर्ड की परीक्षा होगी. उन्होंने आगे कहा कि एक मार्च से स्कूलों में प्रैक्टिकल शुरू होंगे. 15 जुलाई को 10वीं-12वीं की परीक्षा के नतीजे आएंगे.

शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि 1.1 करोड़ अध्यापक 1,000 से अधिक विश्वविद्यालय और लाखों स्कूल में पढ़ाने वाले शिक्षक अमेरिका की कुल जनसंख्या से अधिक छात्र-छात्राओं को पढ़ाने वाले हैं. मैं उनका धन्यवाद करता हूं कि जब विश्व के कई देश पाठ्यक्रम में 1 साल पीछे चले गए. हमने विपरीत परिस्थितियों में भी ऑनलाइन एजुकेशन के जरिए बच्चों को पढ़ाया.



केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के CBSE बोर्ड के कक्षा 10वीं और 12वीं की एग्जाम डेट शीट की घोषणा करते ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने डेटसीट को लेकर नोटिफिकेशन जारी की है। 


नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के CBSE बोर्ड के कक्षा 10वीं और 12वीं की एग्जाम डेट शीट की घोषणा करते ही केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने डेटसीट को लेकर जारी दी है। CBSE बोर्ड की कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा को लेकर परीक्षा नियंत्रक डॉ. संजय भारद्वाज ने अधिसूचना जारी की है। 


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने अपनी अधिसूचना में कहा है कि कक्षा दस और बारह की बोर्ड परीक्षाएं 4 मई 2021 (मंगलवार) से शुरू होंगी। स्कूलों को कक्षा बारह की प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट/आंतरिक मूल्यांकन की अनुमति 1 मार्च, 2021 (सोमवार) से इसी कक्षा की लिखित परीक्षा की अंतिम तिथि तक दी जाएगी। इसी प्रकार स्कूलों को कक्षा दस की प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट/आंतरिक मूल्यांकन की अनुमति 1 मार्च, 2021 (सोमवार) से इसी कक्षा की लिखित परीक्षा की अंतिम तिथि तक दी जाएगी। 


सीबीएसई ने अपनी अधिसूचना में आगे कहा है कि जल्द ही दोनों कक्षा 10वीं और 12वीं की परीक्षा समय सारिणी जारी की जाएगी। सीबीएसई समय-समय पर परीक्षा से संबंधित जानकारी के बारे में सभी हितधारकों को सूचित करेगी। जानकारी सीबीएसई की वेबसाइट (https://cbse.nic.in/) पर उपलब्ध कराई जाएगी। सोशल मीडिया सहित किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध जानकारी को तब तक सही नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि यह जानकारी बोर्ड की वेबसाइट पर उपल्बध न हो। 


अधिसूचना में ये भी कहा गया है कि छात्रों/शिक्षकों और स्कूलों द्वारा कोविड-19 महामारी के कारण अभूतपूर्व स्थिति का सामना किया जा रहा है इसलिए सीबीएसई ने छात्रों के लिए परीक्षा के दौरान अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करने और विभिन्न हितधारकों के साथ परामर्श व उनके विचार जानने के बाद लिए गए निर्णय आपको सूचित किए जा रहे हैं।


4 मई से 10 जून के बीच होगी सीबीएसई 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं

बता दें कि, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने गुरूवार को अपने ऑफिशियल ट्विटर और फेसबुक हैंडल पर सीबीएसई बोर्ड एग्जाम की डेटशीट की घोषणा की। CBSE क्लास 10th और 12th के बोर्ड एग्जाम 4 मई 2021 से शुरू होंगे जो कि 10 जून तक चलेंगे। 1 मार्च से सीबीएसई के प्रैक्टिकल एग्जाम शुरू होंगे। रिजल्ट 15 जुलाई को घोषित किए जा सकते हैं। 

ऑफलाइन ही कराई जाएंगी परीक्षाएं

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई दोनों ही यह स्पष्ट कर चुके हैं की बोर्ड परीक्षाएं, परीक्षा केंद्रों में जाकर देनी होंगी। बोर्ड परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन परीक्षा का कोई विकल्प नहीं दिया गया है। यह परीक्षाएं प्रत्येक वर्ष की भांति इस बार भी पेन पेपर के माध्यम से ली जाएंगी। CBSE की ओर से जारी नोटिफिकेशन के अनुसार बोर्ड की परीक्षाएं पैन पेपर की मदद से ऑफलाइन ही कराई जाएंगी। कोरोना वायरस को ध्यान में रखते हुए एग्जाम हॉल में भी सोशल डिस्टेंसिंग के नियम का पालन करना होगा। एग्जाम सेंटर पर भीड़ ना हो इसके लिए केंद्र सरकार ने CBSE को सख्त निर्देश दिए हैं। CBSE ने पहले ही बताया था कि कोरोना के चलते एग्जाम सेंटर्स बढ़ा दिए गए हैं। 

नए शैक्षिक सत्र में अनिवार्य रूप से शतप्रतिशत परिषदीय स्कूलों में प्रेरणा एप होगा प्रभावी, नए साल में टेबलेट देने की तैयारी

नए शैक्षिक सत्र में अनिवार्य रूप से शतप्रतिशत परिषदीय स्कूलों में प्रेरणा एप होगा प्रभावी, नए साल में टेबलेट देने की तैयारी


फतेहपुर : शिक्षकों को विद्यालय में खड़े होकर दो बार सेल्फी के साथ अपनी हाजिरी इस एप पर लगानी होगी। एप व्यवस्था लागू करने के लिए विभाग ने बाधा भी दूर कर ली है। जल्द ही सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को टेबलेट देने के लिए शासन ने मंजूरी दे दी है। बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले सत्र में प्रेरणा एप लागू किया था। लेकिन  शिक्षक संघ ने अपने मोबाइल में एप अपलोड करने से साफ मना कर दिया था।


इस एप के माध्यम से सभी शिक्षकों को स्कूल पहुंचने और बंद करते समय स्कूल भवन और बच्चों के साथ अपनी फोटो भेजना था। इसके साथ ही एमडीएम पकाते और खाते समय का फोटो भी भेजना है। प्रेरणा एप व्यवस्था लागू होने से शिक्षकों को समय से स्कूल पहुंच कर पूरे समय स्कूल में उपस्थिति अनिवार्य थी। 


शिक्षकों ने विभाग से मोबाइल उपलब्ध कराने पर एप के माध्यम से काम करने को कहा था। ऐसे में विभाग ने सभी स्कूलों के प्रधानाध्यापकों को मोबाइल के बजाय टेबलेट उपलब्ध कराने को हरी झंडी दे दी है। 


इसके लिए शासन पहले चरण में फतेहपुर समेत 18 बीएसए को पत्र भेजा है। जिसमें जल्द ही प्रशिक्षण कराने को भी कहा गया है।  एप लागू होने के पहले जिले को 2123 टेबलेट उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें 480 कंपोजिट विद्यालय, 266 उच्च प्राथमिक स्कूल और 1384 प्राथमिक स्कूलों के प्रधानाध्यापक शामिल हैं। 


बीएसए शिवेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि नए शैक्षिक सत्र में शत प्रतिशत स्कूलों को टेबलेट उपलब्ध करा दिए जाएंगे।
इसके बाद दिन मेें दो बार शिक्षकों को उपस्थिति दर्ज कराना अनिवार्य होगा। हाजिरी न दे पाने वाले शिक्षकों को अनुपस्थित मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।

CBSE : 10वीं-12वीं की परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं, तिथि का एलान आज

CBSE : 10वीं-12वीं की परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं, तिथि का एलान आज, मार्च-अप्रैल में हो सकती हैं लिखित परीक्षाएं



नई दिल्ली : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की दसवीं और बारहवीं परीक्षा की तारीखों को लेकर फिलहाल इंतजार अब खत्म होने वाला है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक गुरुवार को शाम छह बजे परीक्षा कार्यक्रमों का एलान करेंगे। फिलहाल ऐसी जानकारी मिल रही है कि परीक्षाएं 15 से 20 मार्च के बाद शुरू हो सकती हैं। इस बीच केंद्रीय मंत्री निशंक ने एक बार फिर साफ किया है कि सीबीएसई की बोर्ड की परीक्षाएं ऑनलाइन बिल्कुल नहीं होंगी। इन्हें पहले की तरह ही कराया जाएगा।


सूत्रों के मुताबिक सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाओं के मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है। जो 15 से 20 मार्च के बाद शुरू हो सकती है। इससे पहले सीबीएसई के सामने दसवीं और बारहवीं की प्रैक्टिकल परीक्षाओं की भी एक बड़ी चुनौती है। जो अमूमन हर साल एक से पंद्रह जनवरी के बीच हो जाती थी, लेकिन इस बार स्कूलों के बंद होने से अभी तक प्रैक्टिकल कराए ही नहीं गए हैं। फिलहाल, ऐसी जानकारी मिल रही है कि 15 जनवरी के बाद छात्रों को छोटे-छोटे ग्रुपों में प्रैक्टिकल के लिए स्कूल बुलाया जा सकता है। माना जा रहा है कि प्रैक्टिकल के बाद तुरंत परीक्षाएं भी ले ली जाएंगी। जो एक से पंद्रह मार्च के बीच हो सकती है।


निशंक ने सीबीएसई बोर्ड परीक्षा की तारीखों के एलान से जुड़ी यह जानकारी पिछले दिनों ट्विटर के जरिए दी थी। साथ ही बताया था कि तारीखों के एलान से परीक्षाओं को लेकर आशंकाएं खत्म होंगी। साथ ही छात्र भी अपनी परीक्षा तैयारियों को अंतिम रूप दे सकेंगे। इससे पहले केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बोर्ड परीक्षाओं सहित आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के साथ चर्चा की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि अभी जो परिस्थितियां हैं, परीक्षाएं फरवरी तक संभव नहीं हैं। इस बाबत वह जल्द ही एलान करेंगे।

अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों का ब्योरा तलब

अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों का ब्योरा तलब


 प्रदेश के अशासकीय सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों में कार्यरत तदर्थ शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। अपर शिक्षा निदेशक माध्यमिक डा.महेंद्र देव ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों व जिला विद्यालय निरीक्षकों से 30 दिसंबर, 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों का ब्योरा मांगा है। 


कोर्ट के अंतिम व अंतरिम आदेश पर मौलिक रिक्ति व अल्पकालिक रिक्ति के प्रति प्रबंधतंत्र की ओर से नियुक्त व वेतन पाने वालों की सूचना मांगी है। सूचना हर हाल में एक जनवरी तक भेजने का निर्देश दिया है।

जनवरी में भरे जाएंगे अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों के वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म

जनवरी में भरे जाएंगे अनुदानित व मान्यता प्राप्त मदरसों के वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म


लखनऊ : प्रदेश के अनुदानित एवं मान्यता प्राप्त मदरसों की वार्षिक परीक्षाओं के फॉर्म जनवरी में भरे जाएंगे। हालांकि, उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने ऑनलाइन फार्म भरने की तिथि अभी घोषित नहीं की है। साथ ही मदरसा बोर्ड की परीक्षाएं कब आयोजित होंगी, इस पर भी अभी कोई निर्णय नहीं हो सका है।




मदरसा बोर्ड को यूपी बोर्ड व सीबीएसई के फैसले इंतजार है। इनके अनुरूप ही मदरसों में भी वार्षिक परीक्षाएं कराई जाएंगी।

सरकारी परिषदीय विद्यालयों में कोरोना काल में बढ़ गए विद्यार्थी

प्रयागराज : सरकारी परिषदीय विद्यालयों में कोरोना काल में बढ़ गए विद्यार्थी


प्रयागराज। कोरोना संक्रमण के दौर में स्कूल बंद होने, घर बैठे ऑनलाइन क्लास चलाने के प्रयास के बीच सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। अभिभावकों ने नौकरी चली जाने से निजी स्कूलों से बच्चों का नाम कटवाकर अपने बच्चों को परिषदीय विद्यालयों में नाम लिखवा दिया। जिले में कोरोना संक्रमण के दौर में चालू शैक्षिक सत्र में 14 हजार से अधिक बच्चे बढ़ गए। सबसे खास बात यह है कि इसमें पहली कक्षा नहीं बल्कि बीच की कक्षा में बच्चों की संख्या में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।


बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले के प्राथमिक विद्यालयों में 2019 में कुल 4,16007 बच्चे पंजीकृत थे, 2020 में बच्चों की संख्या 4,30191 पहुंच गई। बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय कुशवाहा का कहना है कि कोविड-19 के दौर में अभिभावकों का सरकारी स्कूलों के प्रति रुझान बढ़ा है। बड़ी संख्या में अभिभावकों ने निजी स्कूलों से नाम कटवाकर सरकारी स्कूलों में बच्चों का नाम लिखवाया। नए प्रवेश लेने वालों में नौकरी छूटने के बाद बाहर से आने वाले प्रवासियों के बच्चे हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के बाद इस बात का विवरण नहीं कि कितने प्रवासियों के बच्चों ने प्रवेश लिया।


परिषदीय स्कूल में बच्चों के आंकड़े
बेसिक शिक्षा विभाग के आंकड़ों को देखें तो पहली से पांचवीं तक कुल 164864 छात्राएं। उच्च प्राथमिक स्तर पर कुल 51566 छात्राओं ने प्रवेश लिया। प्राथमिक में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के 67717 और जूनियर में 22133 बालक अभी पढ़ रहे हैं। अंग्रेजी माध्यम में प्राथमिक विद्यालयों में कुल 43268 बच्चे पढ़ रहे हैं। इसमें छात्राओं की संख्या 21437 है। उच्च प्राथमिक कक्षाओं में कुल 4367 बच्चे पंजीकृत हैं। इसमें 2239 छात्राएं हैं।

शिक्षकों की भर्ती में दोहरा मापदंड, 20 साल की सेवा के बाद देंगे परीक्षा दूसरी तरफ तीन साल में कर रहे स्थायी

शिक्षकों की भर्ती में दोहरा मापदंड,  20 साल की सेवा के बाद देंगे परीक्षा दूसरी तरफ तीन साल में कर रहे स्थायी


तदर्थ शिक्षकों के विनियमितीकरण के दोहरे मानकों से इन शिक्षकों में नाराजगी है। एक तरफ अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में 20 साल से पढ़ारहे तदर्थ शिक्षकों को नियमित होने के लिए परीक्षा और साक्षात्कार देना पड़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ राजकीय स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में महज तीन साल की सेवा देने वाले प्रवक्ताओं को स्थायी करने के लिए प्रस्ताव मांगा जा रहा है।


सहायक निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. बीएल शर्मा ने 21 दिसंबर को सभी राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों को पत्र लिखकर अगस्त 2020 तक स्थायीकरण के लिए कितने प्रवक्ता बचे हैं इसकी सूचना मांगी है। यह भी पूछा है कि 2016 के पूर्व से कार्यरत कितनेप्रवक्ता स्थायी होना शेष हैं। इस बीच सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड तदर्थ शिक्षकों के लिए टीजीटी-पीजीटी 2020 भर्ती में लिखित परीक्षा और साक्षात्कार का प्रावधान कर रहा है।

30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों की मांगी सूचनाः अपर निदेशक माध्यमिक डॉ. महेन्द्र देव ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों से 30 दिसंबर 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों की सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

त्रुटि सुधार की मांग को लेकर साल के आखिरी दिन भी डटे रहे 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी


त्रुटि सुधार की मांग को लेकर साल के आखिरी दिन भी डटे रहे 69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के 69000 शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से बंचित अभ्यर्थी मांगों को लेकर बृहस्पतिवार को भी एससीईआरटी कार्यालय पर डटे रहे। पिछले तीन दिन से वार्ता की आस लगाए अभ्यर्थियों को साल के अंतिम दिन निराशा ही हाथ लगी। अभ्यर्थियों ने बताया कि तीन दिन पहले प्रदर्शन के दौरान अधिकारियों से वार्ता हुई थी। तब




उन्होंने तीन दिन में मांगों को पूरा कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन कोई अधिकारी वार्ता के लिए नहीं आय। वे अधिकारियों से मिलने का प्रयास करते रहे, लेकिन पुलिस बल की वजह से नहीं मिल फाए। अभ्यर्थियों ने कहा कि जब तक उनको लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक वे यहां से नहीं हटेंगे।


69000 शिक्षक भर्ती में त्रुटि सुधार का मौका देने को लेकर अभ्यर्थी कर रहे प्रदर्शन, तबीयत बिगड़ने पर भी धरना प्रदर्शन जारी

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के 69 हजार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से वंचित रहने वाले अभ्यर्थियों की प्रदर्शन के दौरान तबीयत बिगड़ने लगी है। बुधवार को शमा शुक्ला और सौरभ राय की तबीयत खराब होने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। 


गौरतलब है कि ये अध्यर्थी त्रृटियों में सुधार का अबसर देने और नियुक्त पत्र जारी करने की मांग को लेकर सात दिसंबर से शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण राज्य परिषद ( एससीईआरटी ) पर प्रदर्शन कर रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक शासन लिखित में आश्वासन नहीं देगा, तब तक प्रदर्शन खत्म नहीं करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में ज्यादा प्राप्तांक भरने वाले, लिंग लिखने में त्रुटि वाले अभ्यर्थी शामिल हैं।

69000 भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में किया अर्धनग्न प्रदर्शन

69000 भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में  किया अर्धनग्न प्रदर्शन


परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में 69000 सहायक अध्यापक भर्ती को लेकर दिव्यांग अभ्यर्थियों का प्रदर्शन बुधवार को 17वें दिन बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय के बाहर जारी रहा। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए ये दिव्यांग अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों के समर्थन में अर्धनग्न प्रदर्शन किया। 


अभ्यर्थियों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने दिव्यांगजनों के लिए 4 प्रतिशत आरक्षण की अधिसूचना 2018 में जारी की थी लेकिन इस भर्ती में केवल 3 फीसदी आरक्षण दिया गया है। उच्च गुणांक वाले दिव्यांग अभ्यर्थी जिन्होंने सामान्य श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों के समतुल्य या उनसे अधिक गुणांक अर्जित किया है उन्हें भी दिव्यांग श्रेणी में ही चयनित माना गया है, जो गलत है। 


दृष्टिबाधित एवं श्रवणबाधित दिव्यांगजनों की बची हुई सीटों को चलन क्रिया बाधित अभ्यर्थियों से भरने की भी मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन करने वालों में बृजेश कुमार मौर्य, महावीर सिंह, अमरजीत सिंह, मनोज भारद्वाज, मुद्रिका यादव, उपेन्द्र मिश्रा आदि रहे। गुरुवार को कैंडल मार्च निकालेंगे।

Wednesday, December 30, 2020

कानपुर नगर : अवांछित जन का विद्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित करने हेतु परिषदीय विद्यालयों में आगंतुक पंजिका बनाये जाने का आदेश

कानपुर नगर : अवांछित जन का विद्यालय में प्रवेश प्रतिबंधित करने हेतु परिषदीय विद्यालयों में आगंतुक पंजिका बनाये जाने का आदेश।



विशेष परिस्थिति में शिक्षामित्र/अनुदेशकों को एक साथ 4 आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किये जाने सम्बन्धी बीएसए हाथरस का आदेश जारी, देखें

विशेष परिस्थिति में शिक्षामित्र/अनुदेशकों को एक साथ 4 आकस्मिक अवकाश स्वीकृत किये जाने सम्बन्धी बीएसए हाथरस का आदेश जारी, देखें






हाथरस : दिनाँक 01 जनवरी 2021 को बीएसए द्वारा आयोजित ऑनलाइन बैठक के सम्बन्ध में

हाथरस : दिनाँक 01 जनवरी 2021 को बीएसए द्वारा आयोजित ऑनलाइन बैठक के सम्बन्ध में




हाथरस : संविलियन विद्यालयों के अतिरिक्त खाते बन्द कराये जाने के सम्बन्ध में

हाथरस : संविलियन विद्यालयों के अतिरिक्त खाते बन्द कराये जाने के सम्बन्ध में



डीएलएड 2020 का सत्र शून्य होने के कगार पर, मामले को लेकर सांसद से लेकर विधायक तक ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी

डीएलएड 2020 का सत्र शून्य होने के कगार पर, मामले को लेकर सांसद से लेकर विधायक तक ने सीएम योगी आदित्यनाथ को लिखी चिट्ठी


प्रदेश में बीएड 2020 के दाखिले कराए गए। प्रवेश परीक्षा हुई। काउंसलिंग करा दी गई। अब दाखिले की प्रक्रिया पूरी होने जा रही है। लेकिन डीएलएड (पहले बीटीसी) सत्र 2020-21 इस बार शून्य होने के कगार पर है। असल में यहां दाखिले की प्रक्रिया शुरू ही नहीं की गई। जबकि डीएलएड में सिर्फ मेरिट के आधार पर प्रवेश लिए जाते हैं। इस मामले को लेकर सांसद से लेकर विधायक तक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। इन जनप्रतिनिधियों का कहना है कि सत्र शून्य होने की स्थिति में इन संस्थानों में पढ़ाने वाले हजारों शिक्षकों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।


राजधानी समेत प्रदेश भर में डीएलएड कॉलेजों की संख्या करीब 2500 है। इनमें करीब सवा दो लाख सीटें हैं। उत्तर प्रदेश प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के महासचिव अभिषेक यादव ने बताया कि डीएलएड में प्रशिक्षुओं का प्रवेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी प्रयागराज के द्वारा ऑनलाइन आवेदन पत्र लेकर मेरिट के आधार पर किया जाता है। पूरी प्रक्रिया डिजिटल होती है। बीएड तक में प्रवेश परीक्षा कराकर दाखिले हो गए हैं लेकिन डीएलएड में आवेदन भी नहीं मांगे गए हैं।

पहले भी किया गया है सत्र शून्य
एसोसिएशन के अध्यक्ष सशक्त सिंह ने बताया कि वर्ष 2015-16 में डीएलएड का सत्र शून्य घोषित किया गया था ताकि 2016-17 से सत्र को ससमय चलाया जा सके। लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण प्रवेश प्रक्रिया प्रत्येक वर्ष सितम्बर अक्तूबर तक पूरी होती है। जबकि सत्र जुलाई से प्रारंभ हो जाना चाहिए।


एक साल बर्बाद, हजारों की रोटी पर संकट
विधायक रामानन्द बौद्ध की ओर से मुख्यमंत्री को लिखे गए में सत्र शून्य होने छात्रों का एक वर्ष बर्बाद होने के साथ ही हजारों शिक्षकों और कर्मचारियों की नौकरी की समस्या का जिक्र किया गया है। उन्होंने लिखा है कि दाखिले न होने से संस्थान बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। राज्य सभा सांसद जय प्रकाश निषाद ने जल्द से जल्द प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के लिए लिखा है।

UP : छात्रवृत्ति व फीस भरपाई पाने को आधार लिंक बायोमेट्रिक हाजिरी जरूरी

UP : छात्रवृत्ति व फीस भरपाई पाने को आधार लिंक बायोमेट्रिक हाजिरी जरूरी


अगले शैक्षिक सत्र से उत्तर प्रदेश में उन्हीं छात्र-छात्राओं को सरकारी छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ मिलेगा। अपने शिक्षण संस्थान में आधारलिंक बायोमेट्रिक हाजिरी लगाएंगे। यही नहीं छात्रवृत्ति और फीस भरपाई का लाभ लेने के लिए आधार लिंक बैंक खाता भी अनिवार्य होगा। समाज कल्याण विभाग की नई गाइडलाइन में यह प्रावधान किए गए हैं। 


अब अनुसूचित जाति के  ऐसे छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सुविधा प्राथमिकता पर दी जाएगी जिनके माता-पिता दोनों या उनमें से एक अशिक्षित होंगे। ऐसे छात्र-छात्राएं भी प्राथमिकता पर यह सुविधा पाएंगे जो राज्य सरकार के परीक्षा बोर्ड से हाईस्कूल की परीक्षा पास करेंगे या नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत जैसे स्थानीय निकायों द्वारा संचालित विद्यालयों में पढ़े होंगे।

इसके अलावा अब कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं के लिए अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं  को दी जाने वाली छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की योजना में व्यय होने वाले कुल बजट का 60 प्रतिशत हिस्सा केन्द्र सरकार देगी और 40 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार देगी। अभी तक करीब 90 प्रतिशत राज्य सरकार दे रही थी। चालू वित्तीय वर्ष के लिए कक्षा दस से ऊपर की कक्षाओं के अनुसूचित जाति के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति व फीस भरपाई देने के लिए कुल 1977.25 करोड़ रूपये खर्च होंगे जिनमें से 60 प्रतिशत यानि 1186.35 करोड़ रूपये केन्द्र सरकार और 40 प्रतिशत हिस्सा यानि 790.90 करोड़ रूपये राज्य सरकार देगी।

 छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की सुविधा पाने के लिए अब सिर्फ सामान्य  बैंक खाते से ही काम नहीं चलेगा बल्कि उस बैंक खाते को आधार लिंक भी होना चाहिए। केन्द्र सरकार अपने हिस्से के बजट से छात्रवृत्ति और फीस भरपाई की राशि सीधे इसी आधार लिंक बैंक खाते में भेजेगी। यह जानकारी समाज कल्याण विभाग के सहायक निदेशक सिद्धार्थ मिश्र ने दी है। उन्होंने बताया कि अब इस पूरी योजना का सोशल आडिट यानि थर्ड पार्टी मूल्यांकन किया जाएगा। शिक्षण संस्थाओं को हर छह महीने में स्वत: मूल्यांकन की रिपोर्ट देनी होगी।

69000 शिक्षक भर्ती मामले में महीने भर में दूर नहीं हो सकी अभ्यर्थियों की परेशानी, धरना जारी-भूख हड़ताल की तैयारी

69000 शिक्षक भर्ती मामले में महीने भर में दूर नहीं हो सकी अभ्यर्थियों की परेशानी, धरना जारी-भूख हड़ताल की तैयारी।


 लखनऊ : 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आंदोलित करीब 350 अभ्यर्थियों की परेशानी दूर नहीं हो रही है। अंकों की त्रुटिपूर्ण गणना को विभाग अब तक ठीक नहीं कर सका है। ऐसे में अभ्यर्थी और उनके परिवार के लोग एक माह से राजधानी में डटे हुए हैं। 


अभ्यर्थियों ने मंगलवार को भी प्रदर्शन किया। सात दिसंबर से अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना दे रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तक शासनादेश पारित नहीं हो जाता तब तक धरना जारी रखेंगे। अभी तक यह धरना शांतिपूर्ण चल रहा था, लेकिन अब हम भूख हड़ताल करेंगे।

यूपी बोर्ड परीक्षा मार्च-अप्रैल में, तिथियों की घोषणा होगी जल्द

यूपी बोर्ड परीक्षा मार्च-अप्रैल में, तिथियों की घोषणा जल्द


उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा है कि यूपी बोर्ड परीक्षाएं मार्च-अप्रैल में आयोजित की जाएंगी। पंचायत चुनाव को देखते हुए परीक्षा की तारीखें जल्द तय करेंगे।


 कोरोना महामारी की चुनौतियों का जिक्र करते हुए डॉ. शर्मा ने कहा कि विद्यार्थियों की पढ़ाई पूरी कराने के लिए हाईस्कूल से इंटर तक की ऑनलाइन क्लास चलाई गई।

विद्यार्थियों को वीडियो लेक्चर दिया है। टेक्नोलॉजी का बेहतर प्रयोग किया है। कोरोना के कार्यकाल में चुनौती को स्वीकार किया और इस पर काम कर पठन-पाठन बाधित नहीं होने दिया।

साल के आखिरी दिन कैंडल मार्च की तैयारी, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर धरना जारी

साल के आखिरी दिन कैंडल मार्च की तैयारी, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की गड़बड़ी को लेकर धरना जारी


69000 सहायक अध्यापक भर्ती में दिव्यांग अभ्यर्थियों को मानक के अनुरूप आरक्षण नहीं दिए जाने के खिलाफ बेसिक शिक्षा परिषद पर दिव्यांगों का धरना लगातार 16 वें दिन भी जारी रहा। दिव्यांग अभ्यर्थियों की मांग है कि 2016 के आरपीडब्ल्यूडी ऐक्ट के अनुसार उन्हें शिक्षक भर्ती में चार फीसदी आरक्षण दिया जाए।


दिव्यांग अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर साल के अंतिम दिन 31 दिसंबर को पत्थर गिरजाघर से सुभाष चौराहा सिविल लाइंस तक कैंडल मार्च निकालेंगे।


 अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को भी ज्ञापन दे चुके हैं। उन्होंने दिव्यांग अभ्यर्थियों को उनकी मांग पूरी करने का आश्वासन दिया है। दिव्यांग अभ्यर्थियों को समर्थन करने बालों में राष्ट्रीय दिव्यांग मोर्चा के लवलेश सिंह, सामाजिक एकता परिषद के ओम प्रकाश शुक्ल एवं श्रीनारायण यादव शामिल रहे।

Tuesday, December 29, 2020

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लख़नऊ : स्वेटर बांट दिए, पर नहीं कराई गुणवत्ता की जांच, लैब टेस्टिंग के लिए स्वेटर का एक सैम्पल तक नहीं भेजा गया

लखनऊ। जिले के परिषदीय विद्यालयों के छात्रों को स्वेटर तो बांट दिए गए हैं, लेकिन विभाग ने उनकी लैब टेस्टिंग कराने की जहमत नहीं उठाई। अभी तक किसी भी ब्लॉक से एक भी स्वेटर का सैंपल लैब टेस्टिंग के लिए नहीं भेजा गया है।


जिले में परिषद विद्यालयों के प्राइमरी और जूनियर में करीब 1.96 लाख छात्र पंजीकृत हैं। करीब 98 प्रतिशत छात्रों को स्वेटर बांट दिए गए हैं, लेकिन अधिकारियों ने स्वेटर की लैब टेस्टिंग नहीं कराई है। उल्टा सत्यापन कराया जा रहा है, जबकि लैब टेस्टिंग प्रक्रिया का अनिवार्य हिस्सा लैब टेस्ट से स्वेटर की गुणवत्ता का पता चलता है स्वेटर में कितने प्रतिशत ऊन है, इसकी जानकारी लैब टेस्टिंग से ही होती है। अक्सर देखा गया है स्वेटर पहनने के कुछ दिनों बाद उनकी सिलाई खुलने लगती है। कई जगहों से वे फटने लगते हैं लैब टेस्टिंग में इसकी गड़बड़ी पकड़ में आ जाती है।


जिन्होंने बंटवाए स्वेटर, वही कर रहे सत्यापन

स्वेटरों का विभागीय अधिकारियों की ओर से सत्यापन कराए जाने पर सवाल उठने लगे हैं। जिन खंड शिक्षा अधिकारियों ने स्वेटर वितरित कराए उन्हीं से उनका सत्यापन भी कराया जा रहा है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि जिन्होंने गड़बड़ी को अंजाम दिया उनको ही जांच अधिकारी बनाया गया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे ! होगी। कोई भी अधिकारी अपने क्षेत्र के 10 अच्छे की ओर से सत्यापन करवाना खानापूर्ति करना है।

हर अधिकारी 10-10 स्वेटर का करेगा सत्यापन

बेसिक शिक्षा अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि अभी लैब टेस्टिंग के लिए कोई स्वेटर नहीं भेजा गया है। फिलहाल गुणवत्ता को लेकर गड़बड़ी की शिकायत भी नहीं आई है। केवल स्वेटर की साइज को लेकर शिकायत है इसलिए रैंडम सत्यापन कराया जा रहा है। प्रत्येक खंड शिक्षा अधिकारी अपने क्षेत्र के 10-10 स्वेटरों का सत्यापन करके रिपोर्ट देगे। वहीं 117 न्याय पंचायतों में भी सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद पता चल जाएगा कि छात्रों को सही साइज के स्वेटर मिले हैं या नहीं।

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान

वाराणसी : प्राइमरी शिक्षकों के एनपीएस खाते में नहीं जमा हो रहा सरकारी अंशदान, हो रहा नुकसान


पुरानी पेंशन के स्थान पर शुरू हुई न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की परेशानी और चिंता का सबब बन गई है। वेतन से उनका अंशदान तो कट रहा है। मगर सरकार का अंशदान नहीं जमा हो रहा है। पिछले 13 महीने से यह स्थिति बनी हुई। इसका कारण बजट की कमी बताया जा रहा है। सरकार के रवैये से शिक्षकों में नाराजगी है।


जिले के परिषदीय विद्यालयों में करीब सात हजार शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें से चार हजार पहली अप्रैल 2005 के बाद नौकरी में आए हैं। उस समय नई पेशन व्यवस्था (न्यू पेंशन स्कीम) लागू हो गई थी। इसके तहत हर महीने शिक्षकों के वेतन का दस प्रतिशत अंशदान काट लिया जाता है। इसी के सापेक्ष सरकार अपनी ओर से 14 फीसदी अंशदान देती है। 


शिक्षकों का कहना है कि उनके वेतन से हर महीने दस प्रतिशत काटा जा रहा है, लेकिन सरकार अपना 14 फीसदी अंशदान नहीं जमा कर रही है। शिक्षकों के मुताबिक हर शिक्षक का सरकार पर एक-एक लाख रुपये बकाया है। उनके अनुसार अकेले बनारस में चार अरब रुपए का अंशदान चाहिए। एनपीएस के नियम के मुताबिक जबतक सरकारी अंशदान नहीं जमा होगा, तब तक उनके वेतन से की गई कटौती भी ब्लॉक रहेगी।

भविष्य में होगा नुकसान

एनपीएस के अनुसार उनकी कटौती में सरकारी अंशदान न मिलाए जाने से मार्केट में निवेश नहीं किया जा रहा है। इसका नुकसान शिक्षकों को रिटायरमेंट के समय उठाना पड़ेगा। रिटायरमेंट के समय बाजार आधारित एनपीएस का कोई लाभ नहीं मिलेगा।

हर महीने चाहिए 25 करोड़

एक अनुमान के मुताबिक वाराणसी में जितने शिक्षक एनपीएस से आच्छादित हैं, उनकी कटौती के अनुसार सरकारी अंशदान जमा करने के लिए प्रति महीने 25 करोड़ रुपए चाहिए। जब तक बजट में इतनी धनराशि की व्यवस्था नहीं होगी। सरकारी अंशदान नहीं जमा हो पाएगा।

माध्यमिक विद्यालयों में भी यही समस्या

प्राथमिक के साथ माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। वहां सोलह महीने से अंशदान न जमा होने की शिकायत है। पिछले दिनों माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष चेतनारायण सिंह ने इस मुद्दे पर बात की थी। डीआईओएस ने भी बजट न होने की समस्या बताई थी।


'इस वित्तीय वर्ष में एनपीएस में अंशदान जमा करने के लिए बजट नहीं आया। इस बारे में शासन और शिक्षकों को वस्तुस्थिति से अवगत कराया गया है। जैसे ही बजट उपलब्ध होगा। एनपीएस में सरकारी अंशदान जमा जाएगा।' - अनूप मिश्र, वित्त एवं लेखाधिकारी (बेसिक शिक्षा)


'सरकार शिक्षकों का बकाया एनपीएस नहीं देगी तो शिक्षक आंदोलन कर सकते हैं। एनपीएस की अपनी कटौती रोकवाने के लिए न्यायालय की शरण में जा सकते हैं। नई पेंशन योजना शिक्षकों को नुकसान पहुंचा रही है।' - शशांक कुमार पांडेय, जिला संयोजक, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ प्राथमिक संवर्ग

अयोध्या : परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा स्थगित, शासनादेश के विरुद्ध बताते हुए शिक्षक संघ द्वारा परीक्षा के औचित्य पर उठाया गया था सवाल

अयोध्या : परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा स्थगित, शासनादेश के विरुद्ध बताते हुए शिक्षक संघ द्वारा परीक्षा के औचित्य पर उठाया गया था सवाल


● जिलाधिकारी के निर्णय के बाद परीक्षा स्थगित

● परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा के औचित्य पर उठाया सवाल

● प्राथमिक शिक्षक संघ ने जिलाधिकारी से की मुलाकात

● शासनादेश का अनुपालन कराए जाने की डीएम से मांग


उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष व प्रांतीय ऑडिटर नीलमणि त्रिपाठी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने जिला अधिकारी से मिलकर 30 दिसंबर को आयोजित की जाने वाली परिषदीय शिक्षकों की परीक्षा के औचित्य पर सवाल उठाया है। फिलहाल जिलाधिकारी ने प्रकरण को गंभीरता से लेकर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया है। संघ ने इस सम्बंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को भी ज्ञापन सौंपा है।


जिलाध्यक्ष श्री त्रिपाठी ने बताया कि आधारशिला ध्यानाकर्षण एवं शिक्षण संग्रह मॉड्यूल पर क्विज प्रतियोगिता आयोजित किए जाने का मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिया है। प्रतियोगिता ऐच्छिक होती है बाध्यकारी नहीं। बावजूद इसके जनपद में परिषदीय शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों की परीक्षा आयोजित की जा रही है। जो कि शासनादेश के सर्वथा विपरीत है। 


उन्होंने बताया कि शासनादेश में यह स्पष्ट है कि जिला प्रशासन, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी व खंड शिक्षा अधिकारी अपने स्तर पर किसी तरह की परीक्षा का आयोजन नहीं करा सकते। श्री त्रिपाठी ने कहा कि चयनित होकर आए योग्य शिक्षकों की परीक्षा कराया जाना समाज में शिक्षकों की छवि धूमिल करने वाला निर्णय है। जिसे निरस्त किया जाना चाहिए। जिला मंत्री अजीत सिंह ने कहा कि परिषदीय शिक्षकों का सेंटर प्राइवेट कॉलेजों में भेजकर परीक्षा कराया जाना अपमानजनक व निंदनीय है। प्रतिनिधिमंडल में जिला कोषाध्यक्ष वीरेंद्र भारती मौजूद रहे।

हाथरस : पंचायत चुनाव तैयारी के चलते CCL / मेडिकल अवकाश सामान्यतः देय न होने के सम्बन्ध में आदेश, देखें

हाथरस : पंचायत चुनाव तैयारी के चलते CCL / मेडिकल अवकाश सामान्यतः देय न होने के सम्बन्ध में आदेश, देखें



जालौन / जौनपुर : सपोर्टिव सुपरविजन के दौरान ARP से अभद्रतापूर्ण व्यवहार करने पर कार्यवाही के सम्बन्ध में

जालौन / जौनपुर : सपोर्टिव सुपरविजन के दौरान ARP से अभद्रतापूर्ण व्यवहार करने पर कार्यवाही के सम्बन्ध में




गोरखपुर : अंतर्जनपदीय ट्रांसफर हेतु रिक्ति प्रदर्शित करने परन्तु पदोन्नति हेतु रिक्ति शून्य बताने पर प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर मार्गदर्शन हेतु बीएसए ने सचिव परिषद को लिखा पत्र, देखें

गोरखपुर : अंतर्जनपदीय ट्रांसफर हेतु रिक्ति प्रदर्शित करने परन्तु पदोन्नति हेतु रिक्ति शून्य बताने पर प्रा0शि0संघ के ज्ञापन पर मार्गदर्शन हेतु बीएसए ने सचिव परिषद को लिखा पत्र, देखें



70 फीसद पाठ्यक्रम पर ही होगी हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा, जनवरी में घोषित हो सकता है परीक्षा का कार्यक्रम।

70 फीसद पाठ्यक्रम पर ही होगी हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा, जनवरी में घोषित हो सकता है परीक्षा का कार्यक्रम।


प्रयागराज: यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 का कार्यक्रम भले ही जारी नहीं हुआ है, लेकिन यह तय है कि परीक्षा केवल 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम पर ही होगी। बोर्ड की ओर से कई माह पहले ही पाठ्यक्रम कम करके वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, उसके बाद चर्चा तेज थी कि पाठ्यक्रम में और कटौती हो सकती है।


बोर्ड सचिव ने उसे सिरे से खारिज किया है। संकेत है कि जनवरी के पहले पखवाड़े में परीक्षा की तारीखें घोषित हो सकती हैं। बोर्ड की ओर से कोरोना को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा-9, 10, 11 व 12 के सभी विषयों के पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कटौती की गई थी। 


बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि पाठ्यक्रम संबंधी विवरण समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा चुके हैं। संक्षिप्त पाठ्यक्रम परिषद की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। 2021 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 70 फीसद पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। वेबसाइट पर मॉडल पेपर अपलोड नहीं किए गए हैं। क्योंकि कम पाठ्यक्रम से वही प्रश्न परीक्षा में पूछे जाने का खतरा है। यूपी बोर्ड ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए कम किया है पाठ्यक्रम, 

सड़क की ओर खिड़की खुली तो विद्यालय नहीं बनेगा यूपी बोर्ड का परीक्षा केंद्र, राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को नियम में छूट

सड़क की ओर खिड़की खुली तो विद्यालय नहीं बनेगा यूपी बोर्ड का परीक्षा केंद्र, राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को नियम में छूट 


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की परीक्षा के लिए इस बार वह विद्यालय केंद्र नहीं बनाए जाएंगे जिनकी खिड़की सार्वजनिक सड़क या फिर संकरी गली में खुलती होगी। इन स्कूलों को असुरक्षित पर्यवेक्षण की सूची में रखा गया है, हालांकि राजकीय एवं अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों को इस नियम में छूट दी गई है।


 इसी क्रम में जिन वित्तविहीन विद्यालयों के प्रबंधन व प्रधानाचार्य के बीच विवाद होगा उन्हें भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों में भी प्रबंधकीय विवाद होने तथा प्राधिकृत नियंत्रक न होने पर भी स्कूलों का केंद्र नहीं बनाया जाएगा।जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि स्कूलों के भौतिक सत्यापन करने के दौरान यह भी देखा गया है कि सभी स्कूलों के मुख्य प्रवेश द्वार व शिक्षण कक्ष, प्रशासनिक कक्ष के बीच कोई हाईटेंशन तार तो नहीं गुजरा है? अब शासन स्तर पर तय होगा कि किन को केंद्र बनाया जाए। सभी केंद्रों की सूची 11 जनवरी को जारी की जाएगी। उसके अनुसार ही बोर्ड परीक्षा की तैयारियां होंगी।

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर

स्कूलों के लिए भी बन सकता है राष्ट्रीय आयोग, शिक्षाविदों के सुझाव पर सरकार भी गंभीर


विश्वविद्यालयों और कालेजों की तरह देश भर के सभी स्कूलों की पढ़ाई का स्तर और उनकी गुणवत्ता भी एक जैसी हो, तो कैसा होगा। फिलहाल यह सवाल अभी तो दूर की कौड़ी लाने जैसा है, लेकिन नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति को तेजी से लागू करने की मुहिम से जुड़े शिक्षाविदों और अब सरकार का जो रुख है, उनमें यह राह आसान होते दिखाई दे रही है। हालांकि इसके लिए नीति में अलग-अलग कई कदमों को उठाए जाने का प्रस्ताव है, लेकिन इसके अमल के दौरान एक ऐसा सुझाव भी आया है, जो नीति में नहीं है, लेकिन सभी को पसंद आ रहा है। इसमें यूजीसी तर्ज पर देश भर के स्कूलों की गुणवत्ता और स्टैंडर्ड को एक जैसा बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक आयोग बनाने का सुझाव है।


खास बात यह है कि नीति के अमल की शुरुआती चर्चा में इस सुझाव को गंभीरता से नहीं लिया गया, लेकिन जैसे-जैसे शिक्षाविद इसे लेकर एकजुट हो रहे हैं, उसमें अब सरकार के स्तर पर भी इसे लेकर विमर्श शुरू हो गया है। सूत्रों की मानें तो इसे लेकर राज्यों की भी राय ली जा रही है। साथ ही इसे लेकर जल्द कोई फैसला ले सकती है। हालांकि इस पूरी मुहिम के साथ खड़े शिक्षाविदों के मुताबिक इसके अमल में कोई दिक्कत नहीं है। वैसे भी इस आयोग के गठन का उद्देश्य राज्य के विषयों और अधिकारों में कोई हस्तक्षेप करने का भी नहीं है। यह सिर्फ स्कूलों की गुणवत्ता और उसका देश भर के समान स्टैंडर्ड बना रहे, इसे लेकर काम करेगा। स्कूलों के संचालन का पूरा अधिकार पहले की तरह राज्यों के पास ही होगा।

यह ठीक यूजीसी की तरह ही काम करेगा। इसका संचालन राज्यों की ओर से किया जाता है, लेकिन उसके स्टैंडर्ड यानी शिक्षकों की योग्यता, इंफ्रास्ट्रक्चर, प्रशासन कैसा होगा इसके नियम यूजीसी तय करता है। इसी तरह से पढ़ाई का स्तर भी वह निर्धारित करता है।

69000 भर्ती में 04 फीसदी आरक्षण के लिए दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री और महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन

69000 भर्ती में 04 फीसदी आरक्षण के लिए दिव्यांग अभ्यर्थियों ने उपमुख्यमंत्री  और महानिदेशक को सौंपा ज्ञापन


69000 सहायक अध्यापक भर्ती में दिव्यांगों को चार फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने सोमवार को प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को ज्ञापन सौंपा।


दिव्यांग अभ्यर्थियों ने सर्किट हाउस में उप मुख्यमंत्री से मिलकर अपनी समस्या बताई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की बात सुनने के बाद उप मुख्यमंत्री ने इस बारे में अधिकारियों से बात करके समस्या के हल का आश्वासन दिया। दिव्यांग अभ्यर्थियों ने लखनऊ में महानिदेशक स्कूल शिक्षा को भी अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।


69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी 14 दिसंबर से लगातार अपनी मांगों को लेकर सचिव बेसिक शिक्षा परिषद कार्यालय पर धरने पर बैठे हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि आरपीडब्ल्यूडी ऐक्ट 2016 में दिव्यांगों को चार फीसदी आरक्षण देने का नियम है। आरक्षण के लिए ऐक्ट होने के बाद भी बेसिक शिक्षा परिषद ने दिव्यांग अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ नहीं दिया।

धरने पर बैठे अभ्यर्थियों में अधिकांश प्रदेश के दूसरे जिलों के अभ्यर्थी होने के कारण उनके खाने, नाश्ते का प्रबंध स्थानीय स्तर पर सामाजिक एकता परिषद के ओम प्रकाश शुक्ल, श्रीनारायण यादव एवं राष्ट्रीय दिव्यांग मोर्चा के लवलेश सिंह कर रहे हैं। धरने पर बैठने वालों में उपेन्द्र मिश्रा, धनराज यादव, राघवेन्द्र सिंह, अमरजीत, मनोज, आशीष पांडेय, महावीर, सरद, विनोद, अखिलेश झा, लवकुश सिंह, विवेक, शशि आदि भारी संख्या में दिव्यांग मौजूद थे।

69000 शिक्षक भर्ती : पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों की चयन समितियों से मांगा गया जवाब

69000 शिक्षक भर्ती : पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रदेश के सभी जिलों की चयन समितियों से मांगा गया जवाब


शाहजहांपुर : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण मानकों को लेकर राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग ने बीएसए समेत चयन समिति को तलब किया है। सदस्य सचिव के रूप में बीएसए ने आयोग के दिल्ली मुख्यालय पहुंचकर जवाब दाखिल किया है। शाहजहांपुर के अलावा बरेली, मुरादाबाद, आगरा तथा अलीगढ़ मंडल के सभी जिलाधिकारियों को भी चयन समिति समेत आयोग ने जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस भेजा है।


इससे पूर्व सितंबर में 69 हजार शिक्षक भर्ती में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव, विशेष सचिव तथा परीक्षा नियामक प्राधिकरण सचिव को तलब किया था। 


अब प्रदेश के सभी जिलों से क्रमवार चयन समितियों से जवाब मांगा गया है। शाहजहांपुर मे 69 हजार शिक्षक भर्ती की चयन कमेटी में डायट प्राचार्य अध्यक्ष अचल कुमार मिश्र अध्यक्ष, बीएसए राकेश कुमार सदस्य सचिव समेत जिला विद्यालय निरीक्षक शौकीन सिंह यादव तथा जीजीआइसी प्रधानाचार्य विमला वर्मा सदस्य है। पिछड़ा वर्ग आयोग ने डीएम को संबोधित पत्र में चयन कमेटी को निर्धारित तिथि को आयोग पहुंचने का आदेश दिया था। जिलाधिकारी इंद्र विक्रम सिंह ने कमेटी के सदस्य सचिव के रूप में बीएसए को प्रकरण में जवाब के लिए नामित कर भेजा है।


राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने प्रदेश को तीन हिस्सों में बांटकर सबंधित डीएम को पत्र भेजकर जवाब के लिए बुलाया था। शाहजहांपुर से चयन समिति के सदस्य सचिव बीएसए राकेश कुमार को जवाब दाखिल करने के लिए भेज दिया गया है। जनपद की कमेटी ने शासन से मिली सूची का सिर्फ सत्यापन किया। आयोग को इससे अवगत करा दिया गया है। - इंद्र विक्रम सिंह, जिलाधिकारी

Monday, December 28, 2020

UGC ने शुरू किए 124 ओपन ऑनलाइन कोर्सेस, ऐसे कर सकेंगे कोर्स

UGC ने शुरू किए 124 ओपन ऑनलाइन कोर्सेस, ऐसे कर सकेंगे कोर्स


UGC online courses: यूजीसी आपको यूजी व पीजी लेवल के 100 से ज्यादा ओपन ऑनलाइन कोर्सेस ऑफर कर रहा है। इसकी डीटेल व पूरी लिस्ट देखें।
    
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) घर बैठे आपको अपनी स्किल्स बेहतर करने और करियर को बूस्ट देने का बेहतरीन मौका दे रहा है। यूजीसी ने कुल 124 ऐसे ओपन ऑनलाइन कोर्स शुरू किए हैं, जो आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

खास बात ये है, कि कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर, टीचर्स व प्रोफेशनल्स, होम मेकर्स, सीनियर सिटिजन तक अपनी पसंद व योग्यता के अनुसार इनमें से कोई भी कोर्स कर सकते हैं। यूनिवर्सिटी या कॉलेज में नामांकित स्टूडेंट्स को इनमें से कोई भी कोर्स करने पर क्रेडिट ट्रांसफर का लाभ भी मिलेगा।


अंडरग्रेजुएट लेवल के कुल 78 ऑनलाइन कोर्सेस (UG level online courses) और पीजी लेवल के 46 ओपन ऑनलाइन कोर्सेस (PG Level online courses) शुरू किए गए हैं। यूजीसी के इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर (CEC) ने स्वयं पोर्टल (SWAYAM portal) पर इनकी शुरुआत की है। इन कोर्सेस की पूरी लिस्ट आगे दी जा रही है।


कब से शुरू होगी क्लास
इन सभी 124 ऑनलाइन कोर्सेस के लिए ऑनलाइन क्लासेस जनवरी 2021 से शुरू की जाएंगी। देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों के एक्सपर्ट प्रोफेसर्स द्वारा ये क्लासेस स्वयं पोर्टल के जरिए ही ली जाएंगी। कोर्स पूरा होने के बाद ऑनलाइन एग्जाम्स होंगे। जिसमें सफल होने के बाद आपको यूजीसी द्वारा सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

आगे दी गई लिस्ट में हर कोर्स के लिए जरूरी योग्यता, क्लास शुरू व खत्म होने की तारीख, परीक्षा की तारीख, प्रोफेसर का नाम समेत पूरी जानकारी दी गई है। संबंधित लिंक पर क्लिक करके आप यूजीसी के ओपन ऑनलाइन कोर्सेस की पूरी डीटेल देख सकते हैं।


■ क्लिक करके देखें : 



स्कूलों में भी मनेगा 'साहिबजादा दिवस’, पाठ्यक्रम में शामिल होगा सिख गुरुओं का इतिहास

स्कूलों में भी मनेगा 'साहिबजादा दिवस’, पाठ्यक्रम में शामिल होगा सिख गुरुओं का इतिहास


लखनऊ: सिख समाज को भक्ति, शक्ति, पुरुषार्थ और परिश्रम में अग्रणी बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री आवास पर साहिबजादा दिवस मनाने की पहल की है। गुरु गो¨बद सिंह जी के चार साहिबजादों और माता गुजरी जी को नमन करते हुए योगी ने घोषणा की है कि अब प्रदेश के हर स्कूल में प्रतिवर्ष साहिबजादा दिवस मनाया जाएगा। साथ ही, सिख गुरुओं का इतिहास पाठ्यक्रम में भी शामिल किया जाएगा।


मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर रविवार को साहिबजादा दिवस पर आयोजित गुरुबाणी कीर्तन में योगी समेत सरकार के अन्य मंत्री शामिल हुए। योगी ने कहा कि साहिबजादा दिवस सिख समाज और प्रदेशवासियों के लिए गौरव का दिन है। आज एक नया इतिहास बन रहा है। गुरु गो¨बद सिंह जी के चारों सुपुत्रों- साहिबजादा अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह को सामूहिक रूप से साहिबजादा के तौर पर संबोधित किया जाता है। गुरु गो¨बद सिंह जी ने देश और धर्म की रक्षा के लिए अपने पुत्रों को समर्पित करते हुए दुखी न होकर पूरे उत्साह के साथ कहा था कि चार नहीं तो क्या हुआ, जीवित कई हजार। सिख गुरुओं ने हंिदूू धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दिया, जिसे देश सदैव याद रखेगा।


मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरुबाणी कीर्तन हम सबको देश और धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों के निर्वहन की प्रेरणा देता है। इतिहास को विस्मृत करके कोई भी समाज आगे नहीं बढ़ सकता है। सिख इतिहास पढ़ने पर पता चलता है कि विदेशी आक्रांताओं ने जब भारत के धर्म और संस्कृति को नष्ट करने, भारत के वैभव को पूरी तरह समाप्त करने को एकमात्र लक्ष्य बना लिया था, तब गुरु नानक जी ने भक्ति के माध्यम से अभियान शुरू किया और कीर्तन उसका आधार बना।


 योगी ने घोषणा की कि प्रत्येक वर्ष 27 दिसंबर को सभी स्कूलों में साहिबजादा दिवस मनाया जाएगा। इस दिन स्कूलों में वाद विवाद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने सिख गुरुओं के इतिहास को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की भी घोषणा की। उन्होंने मंत्रियों और सिख समाज के प्रमुख संतों के साथ बैठकर लंगर में प्रसाद भी ग्रहण किया। 


उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सिख समाज ने धर्म और राष्ट्र की रक्षा की जो लड़ाई लड़ी, वह अविस्मरणीय है। उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने कहा कि सिख समाज का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। जल शक्ति राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख ने भी विचार रखे। औद्योगिक विकास मंत्री सतीश महाना, विधि मंत्री बृजेश पाठक, जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह, महिला कल्याण राज्यमंत्री स्वाती सिंह, लखनऊ की महापौर संयुक्ता भाटिया सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। सरोजनीनगर के अवध कॉलेजिएट के प्रबंधक सर्वजीत सिंह ने कॉलेज में शिक्षा ग्रहण कर रहे सिख समुदाय के छात्रों के साथ मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

Sunday, December 27, 2020

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी

परिषदीय विद्यालयों में टेबलेट वितरण हेतु कार्यवाही तेज़, निर्धारित विद्यालयों में डेमो/परीक्षण हेतु महानिदेशक स्कूल शिक्षा का आदेश जारी।

उपस्थिति पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू, चुनिन्दा विद्यालयों में 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण शुरू।


 नए साल में परिषदीय विद्यालयों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। विभाग द्वारा विद्यालयों को टेबलेट देने की घोषणा अब मूर्त रूप लेने जा रही है। प्रायोगिक तौर पर राजधानी लखनऊ के चुनिन्दा विद्यालयों में 31 दिसम्बर से 15 दिनों तक टेबलेट का परीक्षण किया जाएगा। परीक्षण सफल रहा तो नए साल पर प्रदेश के अन्य जनपदों में भी टेबलेट वितरित किया जाएगा।


परिषदीय विद्यालयों के कार्यो को डिजिटल करने एवं शिक्षकों पर ऩजर रखने के लिए विभाग ने पहले स्मार्ट फोन को हथियार बनाने की रणनीति तैयार की थी। प्रेरणा पोर्टल पर सभी सूचनाएं उपलब्ध कराने एवं सेल्फि के माध्यम से शिक्षकों की उपस्थिति की सुगबुगाहट हुई तो शिक्षकों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया। शिक्षकों के मुखर विरोध से बेसिक शिक्षा विभाग बैकफुट पर आ गया। शिक्षकों का तर्क था कि सभी शिक्षकों के पास स्मार्ट फोन नहीं है और न ही वे इण्टरनेट का उपयोग करते है। इसके बाद विभाग ने समस्त विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को टेबलेट देने की महत्वाकांक्षी योजना पर अमल शुरू किया। 


कोरोना काल में टेबलेट के लिए टेण्डर आमन्त्रित किए गए थे, किन्तु कोरोना वायरस के कारण उत्पन्न स्थिति में अधिकांश कम्पनि ने टेण्डर ही नहीं डाले। इसके बाद दोबारा टेण्डर निकाले गए। इस बार कई कंपनियों ने टेबलेट की आपूर्ति करने में रुचि दिखाई। महानिदेशक (स्कूल शिक्षा) विजय किरण आनन्द द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि 3 कंपनियों द्वारा लखनऊ के 15 परिषदीय विद्यालयों में 31 दिसम्बर से टेबलेट का डेमो/परीक्षण प्रारम्भ किया जा रहा है। 


यह परीक्षण 16 जनवरी 2021 तक होगा। गौरतलब है कि परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के बारे में सबसे बड़ी शिकायत यही है कि वे समय से विद्यालयों में उपस्थित नहीं होते है। अधिकारियों के निरीक्षण में भी कई बार शिक्षक बिना किसी सूचना के विद्यालय से गायब मिलते है। सूत्रों का कहना है कि टेबलेट आने से शिक्षक विद्यालयों में समय से एवं नियमित उपस्थित रहेगे। विभाग द्वारा ऑपरेशन कायाकल्प के माध्यम से परिषदीय विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए भी अभियान चलाया जा रहा है, जिससे परिषदीय विद्यालयों की सूरत निखर रही है।





DD UP, e vidya-9 एवं e vidya-11 पर शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से 28.12.2020 से 01.01.2021 तक ई-लर्निंग प्रसारण का उन्नीसवां चरण

कक्षा-10 एवं 12 के विद्यार्थियों के लिए DD UP चैनल और कक्षा-9 एवं 11 के विद्यार्थियों के लिए चैनल e vidya-9 एवं e vidya-11 पर शैक्षणिक वीडियो के माध्यम से 28.12.2020 से 01.01.2021 तक ई-लर्निंग प्रसारण का उन्नीसवां चरण



नई शिक्षा नीति 2020: विश्वविद्यालयों को नए कोर्स लागू करने की अनुमति देने को सीएम योगी का निर्देश


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर प्रचलित नए पाठ्यक्रमों को अपने यहां लागू करने की अनुमति दी जाए। वह शनिवार को अपने सरकारी आवास पर उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय महाविद्यालयों में नवनिर्मित संकायों में पद सृजन, नवनिर्मित राजकीय महाविद्यालयों के संचालन तथा राज्य विश्वविद्यालयों में नए पाठ्यक्रमों के संचालन के संबंध में प्रस्तुतीकरण देख रहे थे।

संस्थानों को स्वायत्तता के प्रावधान लागू कराएंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत शिक्षण संस्थाओं को स्वायत्तता देने के संबंध में जो प्राविधान किए गए हैं, उन्हें लागू किया जाए। उन्होंने विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को भी सुदृढ़ करने पर बल दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए प्रतिबद्ध है। अच्छे और कुशल मानव संसाधन सृजन में उच्च शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में उपलब्ध कराई जा रही शिक्षा गुणवत्तापरक होनी चाहिए।


कृषि विभाग को सौंपा जाएगा हरदोई का राजकीय महाविद्यालय
प्रस्तुतीकरण के दौरान अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग ने प्रदेश में पूर्व से संचालित राजकीय महाविद्यालयों में निर्मित अतिरिक्त संकायों के लिए पदों के सृजन के औचित्य के विषय में अवगत कराया। नवनिर्मित तीन राजकीय महाविद्यालयों के विषय में मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए उन्होंने कहा कि हरदोई जिले में राजकीय कृषि महाविद्यालय का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कृषि महाविद्यालय का कार्य विशिष्ट श्रेणी का होने के कारण उन्होंने इसे कृषि विभाग को हस्तांतरित करने की संस्तुति की, जिस पर मुख्यमंत्री ने अपनी सहमति प्रदान की। उन्होंने नवनिर्मित राजकीय महाविद्यालयों के संचालन पर भी विचार करने का अनुरोध किया।

प्रस्तुतीकरण के दौरान मुख्यमंत्री को राज्य विश्वविद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने एवं नैक एक्रीडिएशन के लिए प्रयास करने के लिए इन विश्वविद्यालयों द्वारा अपने संसाधनों से नए पाठ्यक्रम संचालित करने के संबंध में भी अवगत कराया गया। उन्होंने अनुरोध किया कि यदि कोई विश्वविद्यालय अपने स्वयं के वित्तीय स्रोतों से विश्वविद्यालय में पद सृजित करना चाहता है तो उसके लिए वित्त विभाग द्वारा सहमति प्रदान की जाए। उन्होंने नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी आफ इंडिया द्वारा उत्तर प्रदेश की डिजिटल लाइब्रेरी के साथ पार्टनरशिप के अनुरोध के संबंध में भी मुख्यमंत्री को अवगत कराया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव वित्त संजीव मित्तल व अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री एसपी गोयल सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

पीलीभीत : बेसिक स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत कार्यों की समीक्षा बैठक में हंगामा, धरने पर बैठे सचिव


पीलीभीत। प्रेक्षागृ़ह में आयोजित ऑपरेशन कायाकल्प की समीक्षा बैठक में हंगामा हो गया। काम के बाद भी शिक्षा विभाग की गलत रिपोर्ट से गुस्साएं सचिव धरने बैठ गए। अतरिक्त एसडीएम और डीपीआरओ ने सचिवों को मनाया और फिर उनकी समस्साएं सुनी। सचिव कुछ देर ही धरने पर बैठे।

सचिवों ने बताया कि वह काफी मेहनत करते है। पूरे-पूरे दिन सिर्फ काम ही काम करते रहते है। कहीं सामुदायिक शौचालय, तो कहीं पंचायत भवन तो कहीं कायाकल्प के कार्यो में लगे है। आरोप है कि इतना कुछ करने के बाद भी उन पर गलत तरह से कार्रवाई की जाती है। मिशन कायाकल्प में शिक्षा विभाग की गलत रिपोर्ट से हम लोगों पर कार्रवाई कर दी जाती है। काम के बाद भी गलत तरीके से कार्रवाई होना हम सचिवों पर मानसिक रूप से परेशान करना है। इसी को लेकर सचिव धरने पर बैठ गए और विरोध करने लगे। सचिव के धरने पर बैठते ही अफसर उन्हें मनाने दौड़े।


व्यस्त रहे डीएम और सीडीओ

मिशन कायाकल्प की बैठक शाम पांच बजे डीएम की अध्यता में प्रस्तावित थी, पर डीएम के व्यस्त होने पर सीडीओ की अध्यक्षता में बैठक होना तय किया गया, पर सीडीओ भी व्यस्त रहे। इसके बाद डीपीआरओ ने सचिवों के साथ बैठक की और उनकी समस्साएं सुनी।

डीडीआरओ प्रमोद कुमार यादव ने कहा सचिव थोड़ा नाराज हो गए थे, पर धरने पर नहीं बैठे। सचिवों के साथ बैठक कर उनकी समस्साएं सुन ली गई है। सचिवों का कहना है कि वह लोग काम करते है, पर शिक्षा विभाग उनके कार्यो की लगत रिपोर्ट भेज देता है, जिसके चलते उन पर कार्रवाई हो जाती है। सचिवों की समस्या सुन ली गई है। डीपीआरओ ने बताया कि मिशन कायाकल्प का करीब 80 से 90 फीसदी काम पूरा हो गया है। शेष काम नए वर्ष के पहले हफ्ते तक पूरा करा लिया जाएगा।

अब स्कूलों में मनमानी फीस पर लगेगा अंकुश, शिक्षा मंत्रालय ने मजबूत तंत्र बनाने की तेज की पहल, संस्थानों की गुणवत्ता के आधार पर फीस का मानक होगा तय


नई दिल्ली : बच्चों को स्कूल बैग के बोझ से मुक्ति दिलाने के बाद केंद्र सरकार का ध्यान अब शैक्षणिक संस्थानों द्वारा वसूली जा रही मनमानी फीस से अभिभावकों को राहत दिलाने पर है। इसको लेकर सरकार तेजी से काम कर रही है। माना जा रहा है कि नए शैक्षणिक सत्र तक स्कूल से लेकर उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए वह एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर देगी, जिससे मनमानी फीस पर पूरी तरह से अंकुश लग जाएगी। मनमानी फीस पर नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भी एक मजबूत और पारदर्शी तंत्र बनाने का सुझाव दिया गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षा मंत्रलय एक ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनाने में जुटा है, जिससे फीस का विवाद सदैव के लिए खत्म हो जाए। साथ ही निजी क्षेत्र के बेहतर शैक्षणिक संस्थानों को इससे कोई नुकसान भी न हो। यही वजह है कि इस पूरी व्यवस्था को संस्थानों की ग्रेडिग से जोड़ा जाएगा। यानी जो शैक्षणिक संस्थान गुणवत्ता के आधार पर जिस ग्रेड का होगा, वह एक निर्धारित दायरे तक ही अपनी फीस रख सकेगा। साथ ही बढ़ोत्तरी की भी उसकी एक सीमा होगी। इसके साथ ही जो भी फीस वह लेगा, उसकी उसे हर साल आनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही तरीकों से अपने नोटिस बोर्ड पर जानकारी साझा करनी होगी। मौजूदा समय में निजी संस्थानों में फीस को लेकर कोई अंकुश नहीं है। खासबात यह है कि इस पूरी व्यवस्था में किस ग्रेड का संस्थान अधिकतम कितनी फीस ले सकेगा, यह निर्धारित रहेगा। ग्रेड निर्धारण सरकार के स्तर पर तरीके से किया जाएगा।

कड़ाके की ठण्ड के बाद भी 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की मांग पर अड़े दिव्यांग अभ्यर्थी, शासन ने साधी चुप्पी

69000 भर्ती के दिव्यांग अभ्यर्थियों का धरना जारी

प्रयागराज। 69 हजार शिक्षक भर्ती के तहत आरक्षण के मसले पर दिव्यांग अभ्यर्थियों का बेसिक शिक्षा परिषद में धरना रविवार को भी जारी रहा। अभ्यर्थियों ने कहा कि 69 हजार सीटों के सापेक्ष चार फीसदी आरक्षण के तहत दिव्यांग अभ्यर्थियों की 2760 सीटें होनी चाहिए, जबकि 1673 सीटें ही दिव्यांग अभ्यर्थियों को दी गईं। सरकार ने दिव्यांगों को उनके अधिकार से वंचित किया। धरने में उपेंद्र मिश्र, धनराज यादव, राघवेंद्र सिंह, नाज खान, मनोज, अजय, महेंद्र, मोती, विनोद, अखिलेश झा, सुशी मौर्य, दीपक, श्याम पाल आदि मौजुद रहे।


प्रयागराज। 69000 सहायक अध्यापक भर्ती में आरक्षण के मानकों का पालन नहीं किए जाने के विरोध में दिव्यांग अभ्यर्थियों का धरना 13वें दिन भी शनिवार को जारी रहा। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार शिक्षक भर्ती में चार फीसदी आरक्षण लागू करने के साथ पूर्व की भर्तो में बैकलाग के जरिये खाली पदों को भरे। दिव्यांग अभ्यर्थियों का कहना है कि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से दिव्यांग आरक्षण ( आरपीडब्लूडी ऐक्ट ) 2016 का पालन नहीं किया गया है। 


दिव्यांग अभ्यर्थी 69000 शिक्षक भर्ती में पिछली भर्तियों की बैकलाग सीटों को जोड़ने की मांग कर रहे हैं। इन अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती में दिव्यांगों को चार फीसदी आरक्षण दिया जाए। अपनी मांगों को लेकर दिव्यांग अभ्यर्थी कड़ाके की ठंड में 14 दिसंबर से लगातार धरना दे रहे हैं। अभी तक उनसे वार्ता करने कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। धरना देने वालों में उपेन्द्र कुमार मिश्रा, धनराज यादव, राघवेन्द्र सिंह, दीपेन्द्र कुमार वर्मा, अंकित सिंह, दिनेश आदि मौजूद रहे।

प्रयागराज : साल भर में नहीं पूरा हो सका एआरपी का चयन

प्रयागराज : साल भर में नहीं पूरा हो सका एआरपी का चयन


प्रयागराज। जिले में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाई का स्तर बढ़ाने और स्कूलों की निगरानी के लिए सोमवार को हुई अकादमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) चयन परीक्षा में मात्र छह अभ्यर्थियों ने भागीदारी की।

एआरपी चयन के लिए तीन चरण की परीक्षा के बाद 105 एआरपी के सापेक्ष मात्र 93 शिक्षकों का चयन किया जा सका। डायट में चौथे चरण के लिए सोमवार को हुई परीक्षा में मात्र छह शिक्षक ही एआरपी की परीक्षा में शामिल हुए। जिला समन्वयक प्रशिक्षण डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि चौथे चरण में नौ आवेदन आए थे, इसमें छह ही परीक्षा देने पहुंचे। कॉपियों का मूल्यांकन करने के बाद जो अभ्यर्थी 60 फीसदी अंक पाएंगे, उनकी माइक्रो टीचिंग कराई जाएगी।


कुल 105 एआरपी चुनकर एकेडमिक रिसोर्स ग्रुप का होना था गठन, अब तक सिर्फ 93 एआरपी का हो सका है गठन

प्रयागराज : परिषदीय स्कूलों में पढ़ाई का स्तर बढ़ाने (लर्निंग आउटकम) व स्कूलों की निगरानी की कमान एआरपी (एकेडमिक रिसोर्स पर्सन) को देने का निर्णय एक साल पहले लिया जा चुका है। योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में पांच एआरपी तैनात होने हैं। जनपद में कुल 105 एआरपी चुनकर एकेडमिक रिसोर्स ग्रुप का गठन किया जाना था। अब तक यह संख्या पूरी नहीं हो सकी है। खास बात यह कि तीन चरण की चयन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। चौथे चरण में भी मात्र नौ आवेदन आए है।

जिला समन्वयक प्रशिक्षण डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि 105 एआरपी के सापेक्ष मात्र 93 का चयन हो सका है। ऐसा शिक्षकों की उदासीनता के कारण हो रहा है। स्कूलों के शिक्षक एआरपी के चयन के लिए रुचि नहीं ले रहे हैं। वर्तमान में चौथे चरण की चयन प्रक्रिया चल रही है। इसके लिए 16 दिसंबर तक आवेदन का अवसर था। अब 28 दिसंबर को सभी शिक्षकों की लिखित परीक्षा कराई जाएगी। माइक्रो टीचिंग व, साक्षात्कार भी होगा। जो शिक्षक उपयुक्त होंगे उन्हीं का चयन किया जाएगा फिलहाल अभी सिर्फ नौ आवेदन आए हैं और 12 पद रिक्त हैं। इससे साफ है कि चौथे चरण के बाद भी जिले में एआरपी की संख्या पूरी नहीं होगी।


प्रत्येक स्तर पर चाहिए 60 फीसद अंक

डॉ. विनोद मिश्र ने बताया कि एआरपी के लिए जिन शिक्षकों ने आवेदन किया है उन्हें लिखित परीक्षा देनी होगी। प्रत्येक अभ्यर्थी को 60 फीसद अंक हासिल करना होगा।माइक्रो टीचिंग व साक्षात्कार होगा। दोनों स्तरों पर भी अभ्यर्थी को 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करना होगा। ऐसा न होने पर अभ्यर्थियों का चयन नहीं हो सकेगा।

सीबीएसई : दसवीं और 12वीं की परीक्षाओं की घोषणा 31 को, केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर दी जानकारी



नई दिल्ली, प्रेट्र: दसवीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की घोषणा 31 दिसंबर को होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शनिवार को यह जानकारी दी।


एक ट्वीट में रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया कि वे 31 दिसंबर की शाम बोर्ड परीक्षाओं की तारीखों का एलान करेंगे। हालांकि शिक्षा मंत्री ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि कोरोना के चलते फरवरी के अंत तक बोर्ड परीक्षाएं नहीं होंगी। तब उम्मीद की जा रही थी कि परीक्षाएं मार्च से शुरू होकर अप्रैल में समाप्त होंगी। उल्लेखनीय है सामान्य तौर पर प्रैक्टिकल परीक्षाएं जनवरी में और लिखित परीक्षाएं फखरी में शुरू होकर मार्च में संपन्न हो जाती हैं । सेंट्रल बोर्ड आफ सेकेंड्री एजूकेशन (सीबीएसई) ने इस माह ते शुरू में स्पष्ट किया था कि 2021 की बोर्ड परीक्षाएं ऑनलाइन नहीं, लिखित रूप से आयोजित की जाएंगी।

कॉलेजों को 2022-23 से दो चक्रों में संबद्धता, 28 फरवरी तय की गई है विवि द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने की अंतिम तिथि


लखनऊ। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शैक्षिक सत्र 2022-23 एवं आगामी सत्रों के लिए संबंद्धता की प्रक्रिया दो चक्रों में विश्वविद्यालयों के माध्यम से पूरी की जाएगी। प्रथम चक्र में नए पाठ्यक्रमों के लिए प्रस्ताव जमा करने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर तथा विश्वविद्यालय द्वारा सम्बद्धता प्रदान करने की अंतिम तिथि 28 फरवरी तय की गई है । द्वितीय चक्र के लिए ये तिथियां 31 दिसंबर व 15 अप्रैल होंगी।

डॉ. शर्मा ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग में नए महाविद्यालयों एवं पूर्व से संचालित महाविद्यालयों में नए पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय से एनओसी एवं संबद्धता प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह आनलाइन कर दिया गया है। शैक्षिक सत्र 2021 22 से संबद्धता आनलाइन ही प्रदान की जाएगी। भूमि के संबंध में अभिलेखों के सत्यापन की रिपोर्ट एवं निरीक्षण रिपोर्ट भी पोर्टल पर आनलाइन ही प्रेषित की जाएगी। अल्पसंख्यक शिक्षण संस्था की स्थापना के लिए एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया को भी आनलाइन कर दिया गया है।

जीआईसी प्रवक्ता : 10 माह बाद भी नहीं हुई नियुक्ति, देरी का खामियाजा भुगतेंगे अभ्य्धी, वरिष्ठता का नहीं मिलेगा लाभ


प्रयागराज। राजकीय इंटर कॉलेज में प्रवक्ता के लिए 2014-15 में घोषित पदों पर पांच वर्ष बाद इस साल फरवरी-मार्च में रिजल्ट तो जारी हो गया लेकिन चयन के बाद भी अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिल सकी है। उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर नियुक्ति के लिए प्रक्रिया तो शुरू हुई परंतु बीच वह भी अधर में फंस गई है। जबकि 22 दिसंबर को ही नियुक्ति पत्र मिल जाना चाहिए था । इस साल के खत्म होने में सिर्फ पांच दिन ही शेष बचे हैं। बाकी बचे चार दिनों में भी अगर नियुक्ति नहीं होती है तो पांच वर्ष से भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को एक वर्ष की वरिष्ठता का नुकसान उठाना होगा। राजकीय इंटर कॉलेजों में प्रवक्ता पदों पर चयनित 298 अभ्यर्थियों ने आठ से 15 दिसंबर के बीच नियुक्ति के लिए खुले पोर्टल पर ऑनलाइन कॉलेज लॉक किया। अभ्यर्थियों का कहना है कि माध्यमिक सचिव की ओर से 22 दिसंबर को नियुक्ति पत्र देने की बात कही गई थी।



Saturday, December 26, 2020

महराजगंज : जनपद स्तर पर 28 दिसम्बर को समस्त शिक्षक संकुल के बैठक/उन्मुखीकरण के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण तथा निर्देश जारी

महराजगंज : जनपद स्तर पर 28 दिसम्बर को समस्त शिक्षक संकुल के बैठक/उन्मुखीकरण के सम्बन्ध में विस्तृत विवरण तथा निर्देश जारी, आदेश देखें-



सिद्धार्थनगर: बेसिक शिक्षा विभाग में अब एक नाम से जाने जाएंगे उच्च प्राथमिक विद्यालय


सिद्धार्थनगर: बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित कक्षा छह से आठ तक के विद्यालयों के नाम आने वाले दिनों में बदल दिए जाएंगे। अब विद्यालय के नामों में एकरूपता रहेगी। अभी तक जूनियर विद्यालयों के लिए अलग-अलग नाम लिखे जाते थे। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। विभाग के महानिदेशक ने इसके गंभीरता से लेते हुए नामों में एकरूपता लाने का निर्णय लिया गया है। सभी जूनियर विद्यालयों के नाम अब उच्च प्राथमिक विद्यालय लिखा जाएगा। महानिदेशक का पत्र मिलते ही विभाग ने आगे की कार्रवाई भी शुरू कर दी है।




अभी तक बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित जूनियर विद्यालयों के लिए पूर्व माध्यमिक विद्यालय, जूनियर हाई स्कूल, बेसिक विद्यालय जैसे कई नामों का प्रयोग किया जाता था पर अब एक विभाग-एक नाम को अपनाते हुए एक ही नाम उच्च प्राथमिक विद्यालय के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए स्कूल शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनंद ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर सुधार कराने का निर्देश दिया है। दरअसल बेसिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 6 से 8 तक संचालित विद्यालयों पर लिखे नामों में एकरूपता नहीं दिखाई पड़ती है कहीं शिक्षक पूर्व माध्यमिक विद्यालय लिखते हैं तो कहीं जूनियर हाई स्कूल लिखा जाता था। यही भिन्नता विद्यालयों के यू डायस के साथ अंकित नामों में भी है। विभाग ने इस विसंगति को गंभीरता से लेते हुए एकरूपता के लिए निर्देश जारी किया है। यदि किसी प्राथमिक व जूनियर विद्यालय ़का संविलयन किया गया है तो उसके नाम भी उच्च प्राथमिक रहेगा। अब शीघ्र ही विद्यालयों की दीवालों पर लिखे नाम बदले हुए नजर आएंगे। बीएसए राजेंद्र सिंह ने बताया कि विभागीय निर्देश का अनुपालन कराने के लिए समस्त खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित कर दिया गया है।