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Saturday, July 11, 2026

यू-डायस रिपोर्टः 313 स्कूलों में छात्र नहीं, 7874 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

यू-डायस रिपोर्टः  313 स्कूलों में छात्र नहीं,  7874 स्कूल एक शिक्षक के भरोसे

 कहीं-कहीं एक शिक्षक संभाल रहे सैकड़ों की पढ़ाई

10 जुलाई 2026
लखनऊ : प्रदेश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था की दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं। एक ओर 313 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी छात्र नामांकित नहीं है, लेकिन इनमें 177 शिक्षक तैनात हैं। दूसरी ओर 7,874 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें पूरे विद्यालय की पढ़ाई सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रही है। इन स्कूलों में कुल 4,85,071 छात्र पढ़ रहे हैं। केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से जारी यू-डायस प्लस 2025-26 के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में चुनौती सिर्फ स्कूल या शिक्षक बढ़ाने की नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों के संतुलित और प्रभावी उपयोग की भी है।

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में कुल 2,65,278 स्कूल, 4,27,03,359 छात्र और 16,42,764 शिक्षक हैं। प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) 26 है, यानी औसतन एक शिक्षक पर 26 छात्र हैं। हर स्कूल में औसतन छह शिक्षक और 161 छात्र हैं। हालांकि औसत तस्वीर संतोषजनक दिखती है, लेकिन जमीनी स्तर पर असमानता साफ नजर आती है। एक तरफ ऐसे स्कूल हैं जहां बच्चे ही नहीं हैं, वहीं दूसरी तरफ हजारों स्कूलों में एक शिक्षक को सभी कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि उत्तर प्रदेश उन 12 राज्यों में शामिल है, जहां विद्यार्थियों की संख्या के सापेक्ष स्कूलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है। यानी स्कूलों का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

 उत्तर प्रदेश के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, असम, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और मेघालय भी इसी श्रेणी में हैं। इसके विपरीत महाराष्ट्र, बिहार, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और केरल जैसे राज्यों में छात्रों की तुलना में स्कूल कम हैं। वहां प्रति स्कूल छात्रों का दबाव अधिक है।

 विशेषज्ञों का मानना है कि यू-डायस के ये आंकड़े बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए स्पष्ट संकेत हैं। जहां छात्र नहीं हैं, वहां स्कूलों और शिक्षकों के बेहतर उपयोग की योजना बनानी होगी। वहीं एकल शिक्षक वाले स्कूलों में जल्द अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती करनी होगी, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। केवल स्कूलों और शिक्षकों की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनका संतुलित वितरण ही शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की कुंजी है।




उत्तर प्रदेश प्राथमिक में ड्राप आउट दर 0.3 और उच्च प्राथमिक में 6.7%,  मंत्रालय ने हाल ही में जारी की है यूडायस प्लस रिपोर्ट

शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में प्राथमिक स्तर पर प्रदर्शन बेहतर

8 जुलाई 2026
लखनऊ। प्रदेश में प्राथमिक स्कूलों में बीच में पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। प्राथमिक स्तर पर कक्षा एक से कक्षा पांच तक में ड्राप आउट दर 0.3 प्रतिशत है। वहीं उच्च प्राथमिक में यह अभी भी 6.7 प्रतिशत है जो राष्ट्रीय औसत 3.6 प्रतिशत के मुकाबले दोगुनी है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से यू-डायस प्लस की हाल ही में जारी रिपोर्ट में यूपी का प्रदर्शन उच्च प्राथमिक के साथ-साथ माध्यमिक स्तर पर भी बेहतर नहीं है। माध्यमिक स्तर पर 8.4 प्रतिशत ड्राप आउट दर है जो कि राष्ट्रीय औसत 9.5 प्रतिशत से कम है। उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा छह से कक्षा आठ तक के ज्यादा छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ रहे हैं। कक्षा पांच के बाद की कक्षाओं में स्कूलों में छात्रों को रोकने के लिए मजबूत रणनीति तैयार करनी होगी।

वहीं छात्र-शिक्षक अनुपात (पीटीआर) में भी उच्च प्राथमिक स्तर पर सुधार की जरूरत है। प्राथमिक स्तर पर एक शिक्षक पर करीब 19 छात्र हैं जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है। वहीं उच्च प्राथमिक स्तर पर पीटीआर एक शिक्षक पर 21 छात्र है और राष्ट्रीय स्तर पर यह अनुपात 17 है। माध्यमिक स्तर पर यूपी में एक शिक्षक पर 23 विद्यार्थी हैं और राष्ट्रीय स्तर पर यह औसत 15 ही है।

Friday, October 24, 2025

ड्रापबाक्स में अटका 5.74 लाख बच्चों का डाटा, 31 अक्टूबर तक यूडायस पोर्टल पर ड्रापबाक्स खाली करने का परिषदीय स्कूलों पर पड़ रहा दबाव

ड्रापबाक्स में अटका 5.74 लाख बच्चों का डाटा, 31 अक्टूबर तक यूडायस पोर्टल पर ड्रापबाक्स खाली करने का परिषदीय स्कूलों पर पड़ रहा दबाव

बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के समय परमानेंट एजुकेशन नंबर नहीं होने से हो सकती परेशानी

लखनऊ : सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा एक से सातवीं तक के 5,74,132  बच्चों का डाटा यू-डायस पोर्टल के ड्रापबाक्स में फंसा हुआ है। पोर्टल पर छात्रों का पूरा रिकार्ड नाम, जन्मतिथि, आधार नंबर और कक्षा की जानकारी दर्ज की जाती है। किसी बच्चे का रिकार्ड तब तक ड्रापबाक्स में रहता है, जब तक उसका डाटा अगले स्कूल में इंपोर्ट (स्थानांतरण) नहीं हो जाता। ऐसे बच्चे जब नौवीं कक्षा में जाएंगे तो बोर्ड परीक्षा के रजिस्ट्रेशन के समय परमानेंट एजुकेशन नंबर नहीं होने से परेशानी हो सकती है।

फिलहाल बड़ी संख्या में बच्चों का डाटा इंपोर्ट नहीं हो पाया है। कई बच्चे पांचवीं या आठवीं पास करने के बाद अपने परिवार के साथ राज्य से बाहर चले गए हैं, जिससे उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा। कुछ बच्चों ने गैर-मान्यता प्राप्त स्कूलों में दाखिला ले लिया है, जिनका डाटा सिस्टम में ट्रांसफर नहीं हो सकता।

परिषदीय स्कूल के प्रधानाध्यापकों - का कहना है कि ड्रापबाक्स खाली कराने का दबाव बेसिक शिक्षा अधिकारियों की ओर से डाला जा रहा है, जबकि कई मामलों में छात्रों की जन्मतिथि, आधार कार्ड और ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) में अंतर है। कुछ के नाम आधार और यू-डायस पोर्टल पर अलग अलग दर्ज हैं, जिससे सिस्टम डाटा स्वीकार नहीं कर रहा। जिन बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र या आधार कार्ड नहीं है, उन्हें कुछ स्कूलों ने अस्थायी रूप से '9999' डालकर पंजीकृत किया है।

ग्रामीण इलाकों में स्थिति और गंभीर है। कुछ स्कूल आरटीई (शिक्षा के अधिकार) 2009 के नियमों का उल्लंघन करते हुए कक्षा पांच या आठ पास बच्चों को फिर से निचली कक्षा में दाखिला दे रहे हैं, जिससे भी डाटा ट्रांसफर नहीं हो पा रहा। 

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ड्रापबाक्स में डाटा फंसे होने का मतलब यह नहीं है कि बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं, बल्कि सिर्फ उनका परमानेंट एजुकेशन नंबर (पेन) नए स्कूल में ट्रांसफर नहीं हो पाया है। एक स्कूल से दूसरे स्कूल में जाने वाले बच्चों का डाटा स्थानांतरित करने की जिम्मेदारी प्रधानाध्यापक की है। अगर किसी बच्चे ने पांचवीं पास करने के बाद निचली कक्षा में प्रवेश ले लिया है, तो संबंधित स्कूल के प्रधानाध्यापक फार्म भरकर इसे ठीक कर सकते हैं। सभी जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को 31 अक्टूबर तक समीक्षा कर गलत प्रविष्टियों को सुधारने के निर्देश दिए गए हैं





जानिए! ड्रॉप बॉक्स में बच्चों की संख्या में वृद्धि के कारण, यू-डायस पर प्रदर्शित ड्राप आउट वाले बच्चों की संख्या से जिम्मेदारों की चिंता बढ़ी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश में तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी 5,74,132 लाख बच्चे स्कूलों से दूर हैं। यू-डायस पर प्रदर्शित ड्राप आउट वाले इन बच्चों की संख्या जिम्मेदारों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। ड्राप बॉक्स में बच्चों की संख्या में इजाफा का सबसे बड़ा कारण जटिल नियम मने जा रहे हैं। कहीं आधार व यू डायस पर बच्चों के नाम मैच नहीं हैं, तो कहीं जन्मतिथि समेत अन्य गड़बड़ियों से मामला फंसा हुआ है। हजारों ऐसे बच्चें हैं जिन्होंने

कक्षा पांच पास करने के बाद गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों या मदरसों में अपना नाम लिखा लिया, यह भी एक कारण बताया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि हजारों बच्चे कक्षा 5 या 8 पास करने के बाद स्कूलों से टीसी लेकर राज्य से बाहर चले गए और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इन बच्चों को इम्पोर्ट करवाया जाना संभव नहीं है और इनके नाम भी ड्रॉप बॉक्स में पड़े हैं। इसी प्रकार ड्रॉप बॉक्स में कुछ ऐसे भी बच्चे हैं, जिनके यू-डायस पोर्टल पर जन्म तिथि आधार के अनुसार है और टीसी में अलग है।


ड्रॉप बॉक्स में बच्चों की संख्या में वृद्धि के कारण

बेसिक स्कूलों अभी भी लाखों बच्चों के पास आधार न होना

विद्यालय व विभाग के पास आधार बनाने का विशेष अधिकार न होना

माध्यमिक स्कूलों द्वारा अपने यहां नामांकित बच्चों का इंपोर्ट न करना

गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर शिकंजा न कसा जाना

गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों में अपना नामांकन कराना



परिषदीय विद्यालयों के 'लापता' बच्चे ड्रॉपबॉक्स में, बच्चों की तलाश में गुरु जी हलाकान, ड्राप बाक्स में सब से अधिक आठ पास विद्यार्थी


परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति को लेकर बड़ी समस्या सामने आई है। विभागीय जांच में पाया गया कि विभिन्न स्कूलों के ड्राप बाक्स में लाखों बच्चे हैं। ड्राप बाक्स का अर्थ है कि आनलाइन सिस्टम के जरिए छात्र रिकार्ड प्रबंधन। विशेष रूप से विद्यालय छोड़ने वाले बच्चों को ट्रैक करने के लिए यू डावस प्लस पोर्टल जैसे सिस्टम में इसका उपयोग होता है। लापता  बच्चों का कोई विवरण यू डायस पोर्टल पर अभी तक नहीं है। बेसिक शिक्षकों पर इन बच्चों की तलाश का दबाव है और इस दबाव के चक्कर में स्कूलों की पढ़ाई चौपट है।


विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, लापता बच्चों की संख्या बढ़ने के कई कारण हैं, पहला पारिवारिक स्थिति ठीक न होने की वजह से बहुत से बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी है। दूसरा कुछ बच्चे दूसरे स्कूलों में चले गए लेकिन उनके दूसरे विद्यालय में जाने संबंधी विवरण नहीं दर्ज किया गया। तीसरी वजह निजी स्कूलों में प्रवेश के बाद भी बच्चों का नाम सरकारी अभिलेखों से नहीं हटाया गया। इसके अतिरिक्त निर्देशों के बावजूद स्कूलों द्वारा बच्चों के नाम अपडेट या हटाने का कार्य समय से नहीं किया गया। 


ड्राप बाक्स में कक्षावार बच्चों की संख्या देखें तो सबसे अधिक आठवीं कक्षा में विद्यार्थी है। खास यह कि काफी विद्यार्थी अब भी पुरानी कक्षा में है। उनको यू डायस पर कक्षोन्नति नहीं किया गया है।


Monday, October 13, 2025

देश में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार लेकिन एक लाख स्कूल में केवल एक शिक्षक

देश में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार लेकिन एक लाख स्कूल में केवल एक शिक्षक, पढ़ रहे 33.76 लाख छात्र


नई दिल्ली। देश में एक लाख से ज्यादा स्कूल ऐसे हैं, जहां पूरा स्कूल सिर्फ एक ही शिक्षक चला रहा है। केंद्र सरकार के ताजा आंकड़ों के अनुसार, इन स्कूलों में करीब 33.76 लाख छात्र नामांकित हैं। यानी हर स्कूल में औसतन 34 बच्चे एक ही शिक्षक से पढ़ रहे हैं। दिल्ली में ऐसे केवल नौ स्कूल हैं, जबकि उत्तर प्रदेश दूसरे स्थान पर है।

शिक्षा मंत्रालय की 2024-25 की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में कुल 1,04,125 एक शिक्षक वाले स्कूल हैं। इनमें सबसे ज्यादा स्कूल आंध्र प्रदेश में हैं, जबकि इन स्कूलों में सबसे अधिक छात्र उत्तर प्रदेश में पढ़ते हैं। आंध्र प्रदेश में 12,912, उत्तर प्रदेश में 9,508, झारखंड में 9,172, महाराष्ट्र में 8,152, कर्नाटक में 7,349, और मध्य प्रदेश व लक्षद्वीप में 7,217-7,217 एक शिक्षक वाले स्कूल हैं। पश्चिम बंगाल में 6,482, राजस्थान में 6,117, छत्तीसगढ़ में 5,973 और तेलंगाना में 5,001 स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ एक शिक्षक हैं। केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी, लद्दाख, दादरा और नगर हवेली, दमन-दीव और चंडीगढ़ में कोई भी एक शिक्षक वाला स्कूल नहीं है। पिछले दो वर्षों में इन स्कूलों की संख्या में लगभग छह फीसदी की कमी आई है। वर्ष 2022-23 में देश में 1,18,190 ऐसे स्कूल थे, जो 2023-24 में घटकर 1,10,971 रह गए। एजेंसी

स्कूलों के विलय का चल रहा अभियान
शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, सरकार अब स्कूलों को जोड़ने और संसाधनों का सही इस्तेमाल करने के लिए अभियान चला रही है। इसके तहत जिन स्कूलों में कोई छात्र नहीं है, वहां के शिक्षकों को एक-शिक्षक वाले स्कूलों में भेजा जा रहा है। आरटीई कानून 2009 के मुताबिक, प्राथमिक स्कूलों में 30 छात्र पर एक शिक्षक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 35 छात्र पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन कई जगह अभी भी यह नियम पूरा नहीं हो रहा है।

दाखिले के लिहाज से यूपी अव्वल
छात्र दाखिले के लिहाज से उत्तर प्रदेश सबसे आगे है, जहां 6.24 लाख छात्र ऐसे स्कूलों में पढ़ रहे हैं। झारखंड में 4.36 लाख, पश्चिम बंगाल में 2.35 लाख, मध्य प्रदेश में 2.29 लाख, कर्नाटक में 2.23 लाख, आंध्र प्रदेश में 1.97 लाख और राजस्थान में 1.72 लाख बच्चे इन स्कूलों में पढ़ रहे हैं।




 UDISE रिपोर्ट के अनुसार ड्रॉपआउट में हुई कमी, स्कूल में रुकने की दर भी सुधरी 

नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई 2024-25 रिपोर्ट के अनुसार, सभी स्तरों पर रिटेंशन दर यानि बच्चों के स्कूल में रुकने की दर में सुधार हुआ है।

फाउंडेशन स्तर पर रिटेंशन दर बढ़कर 98.9%, प्रारंभिक स्तर पर 92.4%, मध्य स्तर पर 82.8% और माध्यमिक स्तर पर 47.2% हो गई है। साथ ही, स्कूल छोड़ने वाले छात्रों की दर में कमी आई है। प्रारंभिक स्तर पर 2.3%, मध्य स्तर पर 3.5% और माध्यमिक स्तर पर 8.2% ड्रॉपआउट दर घटी है। विभिन्न चरणों के बीच ट्रांजिशन दर भी मजबूत हुई है, जो विद्यार्थियों के लिए सुचारू प्रगति का संकेत है।

शिक्षकों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़कर 54.2% हो गया है। इसके अलावा स्कूलों में लड़कियों का नामांकन बढ़कर 48.3% हो गया है। 54.9% स्कूलों में रैंप और रेलिंग जैसी सुविधाएं लगाई गई हैं। यह दिखाता है कि सरकार समावेशी शिक्षा पर ध्यान दे रही है, ताकि विकलांग छात्रों को भी स्कूल आने में कोई परेशानी न हो। यूडीआईएसई रिपोर्ट के अनुसार, देश में शिक्षकों की कुल संख्या पहली बार एक करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है। वर्ष 2022-23 में शिक्षकों की संख्या 94,83,294 थी, 2024-25 में यह बढ़कर 1,01,22,420 हो गई है।



देश में पहली बार शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ के पार लेकिन 1 लाख स्कूलों में पढ़ाने के लिए केवल एक शिक्षक ही उपलब्ध, यूडाइस के शैक्षणिक सत्र 2024-25 की रिपोर्ट से हुआ खुलासा


यूडाइस रिपोर्ट 2024-25 पिछले सत्र में 14.71 लाख स्कूलों में कुल 24.69 करोड़ स्टूडेंट्स पढ़े, फिर भी 7993 स्कूलों में एक भी स्टूडेंट नहीं था

एक साल में करीब डेढ़ लाख शिक्षक बढ़ गए; 10 साल में महिला शिक्षक 8% बढ़ गईं, जबकि पुरुष महज 1% ही बढ़े


नई दिल्ली | देश में 1,04,125 स्कूल ऐसे हैं जिनमें केवल एक ही शिक्षक है जबकि 7993 स्कूलों में एक भी नामांकन नहीं है यानी वहां कोई नहीं पढ़ता। यह आंकड़े यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (यूडाइस) के शैक्षणिक सत्र 2024-25 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। हालांकि पिछले सत्र की तुलना में इन दोनों आंकड़ों में कमी आई है। यूडाइस केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय का डेटा बेस है, जिसका उद्देश्य सभी स्कूलों से शिक्षा से जुड़ी जानकारी एकत्रित करना है।


 ताजा रिपोर्ट बताती है कि देश में पहली बार किसी शैक्षणिक सत्र में शिक्षकों की संख्या 1 करोड़ से ज्यादा हुई है। 2023-24 के सत्र में कुल शिक्षक 98.83 लाख थे, जो अब 1,01,22,420 हो गए हैं। इनमें से 51% (51.47 लाख) शिक्षक सरकारी स्कूलों में हैं। एक दशक में महिला शिक्षकों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। 2014-15 में पुरुष शिक्षक 45.46 लाख तो महिला 40.16 लाख थीं, जो 2024-25 में बढ़कर क्रमशः 46.41 लाख और 54.81 लाख हो गई हैं। बीते दशक में महिला शिक्षकों की संख्या करीब 8% बढ़ने की बड़ी वजह इनकी भर्तियां हैं। 2014 से अब तक 51.36 लाख भर्तियों में से 61% महिला शिक्षकों की हुई हैं।


पीपुल-टीचर रेश्योः अब 21 छात्रों पर एक शिक्षक, पहले 31 पर थे

मिडिल स्तर पर 10 साल पहले एक शिक्षक के पास 26 छात्र थे, जो घटकर 17 रह गए हैं। सेकंडरी स्तर पर यह 31 से घटकर 21 रह गया है। यानी छात्र व शिक्षकों के बीच संवाद बेहतर हो रहा है। शिक्षकों के पास जितने कम छात्र होंगे, वे उन्हें ज्यादा समय दे पाएंगे।

ड्रॉपआउट रेट घटा है। सेकंडरी पर 2023-24 में यह 10.9% था, जो 2024-25 में 8.2% बचा है। मिडिल स्तर पर यह 5.2% की तुलना में 3.5% और प्राथमिक पर 3.7% से घटकर 2.3% रह गई है।

प्राथमिक पर रिटेंशन रेट 2023-24 में 85.4% से बढ़कर अब 92.4% हो गया है। मिडिल पर 78% से बढ़कर 82.8% तो सेकंडरी पर यह 45.6% से बढ़कर 47.2% हो गया है। सेकंडरी स्तर पर नामांकन दर बढ़कर 68.5% हो गई है।



असमानताः झारखंड में एक टीचर के पास औसत 47 बच्चे, सिक्किम में 7

सबसे ज्यादा प्राइमरी स्कूल बंगाल में (80%) और सबसे कम चंडीगढ़ में (3%) हैं। चंडीगढ़ में प्रति स्कूल 1222 छात्र हैं। लद्दाख में यह 59 हैं।

हायर सेकंडरी स्तर पर झारखंड के स्कूलों में एक शिक्षकों को औसतन 47 को पढ़ाना होता है। सिक्किम में यह आंकड़ा औसतन 7 ही है।

ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो (जीईआर) में बिहार अपर प्राइमरी (69%), सेकंडरी (51%) व हायर सेकंडरी (38%) सभी स्तरों पर सबसे नीचे है। यह रेश्यो बताता है कि वहां किसी स्तर पर उसके योग्य उम्र वाले कितने बच्चे स्कूल में पढ़ रहे हैं।

चंडीगढ़ में यह रेश्यो सबसे अधिक है जहां अपर प्राइमरी का जीईआर 120%, मिडिल का 110% और हायर सेकंडरी का 107% है।



Saturday, January 4, 2025

नामांकन में 37 लाख की कमी की खबर पर शिक्षा मंत्रालय ने की स्थिति स्पष्ट

नामांकन में 37 लाख की कमी की खबर पर शिक्षा मंत्रालय ने की स्थिति स्पष्ट

03 जनवरी 2024
शिक्षा मंत्रालय ने यूडीआइएसई (यूनीफाइड डिस्ट्रिक्स इन्फार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन प्लस) 2023-24 की रिपोर्ट में स्कूली नामांकन में आई 37 लाख की गिरावट पर स्थिति स्पष्ट की। कहा कि पहले के मुकाबले स्कूली शिक्षा के यह आंकड़े अब और ज्यादा सटीक है।

मंत्रालय के मुताबिक यूडीआइएसई प्लस के जो आंकड़े हैं वह राज्यों की ओर से मुहैया कराए जाते हैं। मंत्रालय सिर्फ इन्हें जांचता है। अब तक राज्य इन आंकड़ों को लगभग में दिया करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इस बार आंकड़े छात्रों की संख्या के साथ ही उनके नाम और पिता के नाम के साथ मांगी गई थी।




स्कूली शिक्षा के नामांकन में 37 लाख से अधिक की गिरावट दर्ज, शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ की वर्ष 2022-23 और 2023- 24 की रिपोर्ट में खुलासा

31 दिसम्बर 2024
नई दिल्ली। देशभर मेंस्कूली शिक्षा के नामांकन में 37 लाख से अधिक की गिरावट आई है। यह गिरावट एससी, एसटी, ओबीसी और लड़कियों के वर्ग में सबसे अधिक है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में स्कूली शिक्षा की विभिन्न श्रेणियों में यह गिरावट है। माध्यमिक के तहत कक्षा नौंवी से 12वीं में यह गिरावट 17 लाख से अधिक है। हालांकि प्री-प्राइमरी के नामांकन में मामूली तो कुल स्कूलों में 5782 की बढ़ोतरी है।



शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट है। 


वर्ष 2023-24 में सकल नामांकन 24.80 करोड़ था। इससे पहले वर्ष 2022-23 में 25.17 करोड़ तो वर्ष 2021-22 में 26.52 करोड़ से कम था। इस प्रकार वर्ष 2022- 23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 37 लाख से अधिक पार कर गया है। हालांकि, प्रतिशत में यह आंकड़ा सिर्फ 1.5 फीसदी है। 


वर्ष 2023-24 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के कुल नामांकन में 25 लाख की गिरावट आई है। अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी में 2022-23 की तुलना में स्कूलों में 12 लाख कम छात्र नामांकित हैं।

Saturday, May 11, 2024

पहले जानें विद्यालय का यू-डायस नंबर, तब दिलाएं बच्चे को प्रवेश, गैर मान्यता वाले विद्यालयों पर अंकुश लगाने के लिए जारी किया है यू-डायस नंबर

पहले जानें विद्यालय का यू-डायस नंबर, तब दिलाएं बच्चे को प्रवेश, गैर मान्यता वाले विद्यालयों पर अंकुश लगाने के लिए जारी किया है यू-डायस नंबर


लखनऊ। सूबे  में सैकड़ों विद्यालय बिना मान्यता के संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे विद्यालयों पर नकेल कसने के लिए शासन की ओर से यू-डायस पोर्टल बनाया गया है। सभी विद्यालयों का अपना यू-डायस नंबर जारी किया गया है। पोर्टल में सभी विद्यालयों व बच्चों की जानकारी को अपलोड करना अनिवार्य किया गया है।


ऐसे में अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश किसी विद्यालय में कराने जा रहे हैं तो पहले उस विद्यालय का यू-डायस नंबर जरूर पता कर लें। इसके साथ ही यह भी पता करें कि विद्यालय की मान्यता किस कक्षा तक है। प्रदेश के सभी परिषदीय विद्यालयों का यू-डायस कोड शासन ने जारी किया है जो विद्यालय भवन पर दर्ज कराना अनिवार्य है।


यू-डायस पोर्टल पर कक्षा एक से 12वीं तक के सभी विद्यालयों का ब्यौरा दर्ज किया गया है। इस पोर्टल पर पंजीकृत होने वाले विद्यालयों का यू-डायस नंबर उनकी पहचान है। सभी विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों का विवरण भी पोर्टल पर अपलोड होना अनिवार्य है। इसके बाद बच्चों का पसर्नल एजुकेशन नंबर (पेन) जारी होता है।


जिस विद्यालय के पास यू-डायस व बच्चों का एजुकेशन नंबर नहीं है, उस विद्यालय के बच्चे का दाखिला दूसरे विद्यालय में नहीं हो पाएगा। कुछ विद्यालयों की मान्यता कक्षा पांच तक है और वह आठवीं तक के बच्चों को प्रवेश दिए हैं। जबकि कुछ विद्यालय हाईस्कूल की मान्यता पर इंटरमीडिएट तक कक्षाएं संचालित हैं। जिले में कुछ विद्यालय बिना मान्यता के चल रहे हैं, जो दूसरे विद्यालयों से सांठगांठ करके उनके विद्यालय में परीक्षा दिलाते हैं। ऐसे विद्यालयों की पहचान के लिए शासन ने यह निर्देश दिए हैं।


विना यू-डायस कोड के बच्चे को प्रवेश दिलाने पर उनके भविष्य संकट में पड़ सकता है।  सभी विद्यालयों का यू- डायस नंबर शासन द्वारा जारी किया गया है। जब बच्चा विद्यालय में पढ़ाई पूरी कर लेता है तो उसकी टीसी पर विद्यालय का यू-डायस नंवर व एजुकेशन नंबर अंकिन किया जाता है।

Saturday, May 4, 2024

एडमिशन से पहले विद्यालय का यू-डायस कोड अवश्य पूछें, स्कूल के फर्जी होने पर बच्चे का भविष्य हो सकता है प्रभावित

स्कूल में दाखिला कराने से पहले जानें यू डायस नंबर, नहीं तो पछताएंगे, 

एडमिशन से पहले विद्यालय का यू-डायस कोड अवश्य पूछें, स्कूल के फर्जी होने पर बच्चे का भविष्य हो सकता है प्रभावित


आप अपने बच्चे का प्रवेश कराने जा रहे हैं तो स्कूल के यू डायस नंबर की जानकारी करने के बाद ही किसी भी विद्यालय में प्रवेश कराएं। अन्यथा बाद में पछताना पड़ सकता है। सूबे में बिना मान्यता के भी तमाम स्कूल चल रहे हैं। इन स्कूलों में दाखिला होने पर बच्चे का भविष्य प्रभावित हो सकता है।


बिना मान्यता वाले स्कूलों पर अंकुश लगाने के लिए शासन की ओर से यू-डायस पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर कक्षा एक से 12 तक के सभी स्कूलों का ब्योरा अंकित किया गया है। इस पोर्टल पर पंजीकृत होने वाले स्कूलों को यू-डायस नंबर भी जारी किया गया है। यह नंबर स्कूल की पहचान होता है। 


स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों का विवरण भी इसी पोर्टल पर अपलोड होता है। जिस बच्चे का विवरण पोर्टल पर अपलोड हो जाएगा, उसका पर्सनल एजुकेशन नंबर (पेन) जारी होता है। जिस स्कूल के पास यू-डायस नंबर होगा, वह बच्चों को पेन जारी कर सकेंगे। यह नंबर बच्चे की पहचान होती है। यू- डायस नंबर न होने पर आपके बच्चे का दाखिला बाद में किसी दूसरे स्कूलों में नहीं हो सकेगा।


एडमिशन से पहले विद्यालय का यू-डायस कोड अवश्य पूछें

 जब बच्चा स्कूल की पढ़ाई पूरी कर लेता है, तो उसकी टीसी पर स्कूल यू-डायस नंबर तथा बच्चे का पेन नंबर अंकित किया जाता है। इसी के आधार पर बच्चे का दूसरे स्कूल में प्रवेश होगा। वर्ना कोई स्कूल बिना पेन नंबर के बच्चे का प्रवेश नहीं लेगा। इसलिए बच्चे का विद्यालय में प्रवेश कराते समय विद्यालय का यू-डायस कोड अवश्य पूछें।

Saturday, June 17, 2023

यूपी : सात वर्षों में छात्र घटे पर छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर

यूपी : सात वर्षों में छात्र घटे पर छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर



यूपी में प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंड्री तक के छात्रों को लेकर बड़ा चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है। वर्ष 2015-16 के शैक्षणिक सत्र में प्रदेश में इन कक्षाओं के पंजीकृत कुल छात्रों की संख्या 4 करोड़ 84 लाख 82 हजार 681 थी। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 4 करोड़ 71 लाख 81 हजार 438 था यानि बच्चों की संख्या 13 लाख से अधिक घट गई। हालांकि कई साल गिरावट के बाद अब यह आंकड़ा ऊपर चढ़ रहा है। वहीं प्रदेश का छात्र-शिक्षक अनुपात लगातार बेहतर हो रहा है।


यूडाइस प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफारमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन) के डैशबोर्ड पर अंकित आंकड़े इसकी गवाही देते हैं। स्कूली शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए होने वाले बेतहाशा खर्च को भी आंकड़े मुंह चिढ़ाते हैं। 2015-16 के बाद लगातार तीन सालों तक प्रदेश की कुल छात्र संख्या में गिरावट दर्ज होती रही। 


सबसे ज्यादा 18 लाख छात्र की गिरावट वर्ष 2016-17 के शैक्षणिक सत्र में दर्ज की गई। वर्ष 2019-20 से फिर छात्र संख्या में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई लेकिन अभी तक प्रदेश में प्री-प्राइमरी से हायर सेकेंड्री के बच्चों का आंकड़ा 2015-16 के बराबर नहीं पहुंच सका है। वर्ष 2015-16 के शैक्षणिक सत्र की बात करें तो 10 लाख 84 हजार 249 शिक्षक थे। वहीं 2021-22 में 15 लाख 7 हजार 828 शिक्षक थे यानी पहले यूपी में 44.7 बच्चों पर एक शिक्षक था। वर्ष 2021-22 में यह आंकड़ा 31.3 बच्चों पर एक शिक्षक का हो गया।


डाटा से बजट आवंटन
केंद्र सरकार से पैसा भी इसी डाटा के आधार पर मिलता है। पूरे प्रदेश के जिलों में यू-डाइस का डाटा अपडेट करने का काम बीएसए के पास है। बेसिक के साथ ही माध्यमिक का डाटा भी बीएसए दफ्तर ही अपडेट करता है। जो हो नहीं पा रहा है।


सरकारी में बढ़ी संख्या
प्रदेश में सरकारी स्कूलों के स्तर और शिक्षा में बीते सालों में बदलाव आया है। वर्ष 2015-16 में कुल स्कूलों में से 63.5 फीसदी सरकारी थे। इनमें 35.3 फीसदी बच्चे पढ़ रहे थे। वहीं 2021-22 में सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों का आंकड़ा 40.4 फीसदी हो गया।


Saturday, December 24, 2022

संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को यू-डायस कोड आवंटित करने के सम्बन्ध में

संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को यू-डायस कोड आवंटित करने के सम्बन्ध में

Thursday, December 15, 2022

विद्यार्थियों की तैयार होगी डिजिटल कुंडली, पहली बार यू-डाइस पर छात्रों का अपलोड हो रहा डाटा, एक क्लिक पर मिलेगा ब्योरा

विद्यार्थियों की तैयार होगी डिजिटल कुंडली, पहली बार यू-डाइस पर छात्रों का अपलोड हो रहा डाटा, एक क्लिक पर मिलेगा ब्योरा



बेसिक विभाग व माध्यमिक कॉलेजों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की डिजिटल कुंडली तैयार की जा रही है। पहली बार एकीकृत जिला सूचना प्रणाली ( यू-डायस) पर विद्यार्थियों का डाटा अपलोड किया जा रहा है। अब एक क्लिक करने से विद्यालय व विद्यार्थी के बारे में पूरी जानकारी मिलेगी। इसके लिए विद्यालयवार जानकारी भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।


चार चरणों में पूरी होगी यू-डायस की प्रक्रिया

यू-डायस को इस बार चार चरणों में भरा जाएगा। पहले चरण में स्कूलों से संबंधित विवरण अपलोड होगा। दूसरे चरण में भौतिक सुविधाओं के आंकड़े भरे जाएंगे। तीसरे चरण में शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों की विस्तृत डिटेल भरी जाएगी। चौथे चरण में छात्र छात्राओं का विधिवत विवरण भरा जाएगा।


 सभी विद्यार्थियों का डेटा इस बार यू-डायस पर अपलोड कराया जा रहा है। इसमें विद्यार्थी के नाम, कक्षा से लेकर उसका पता, माता-पिता का नाम, आधारकार्ड संख्या, मोबाइल नंबर आदि सभी जानकारियां अपलोड की जाएंगी। हर विद्यार्थी का आनलाइन विवरण भरा जाना अनिवार्य भी किया गया है। शिक्षा विभाग के इस कदम से बच्चों की संख्या को लेकर विभाग व स्कूल प्रबंधन में आए दिन पैदा हो रही असहज की स्थिति दूर होगी। साथ ही विद्यार्थियों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन में भी पारदर्शिता रहेगी।


वर्ष 1995 के बाद पहली बार यू- डायस की व्यवस्था: वर्ष 1995 के बाद पहली बार यू-डायस को पूरा खाली कर दिया गया है। इसको नए सिरे से भरने की तैयारी की गई है। सही व सटीक जानकारी सत्यापित करने के बाद ही यू डायस पर अपलोड होगी। प्रधानाचार्यो को यू-डायस पूरा भरने के बाद इसका प्रमाण भी अधिकारियों को उपलब्ध कराना होगा, ताकि सही डाटा भरा जा सके।

Monday, November 28, 2022

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को UDISE कोड आवंटित कराने के सम्बंध में।

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को UDISE कोड आवंटित कराने के सम्बंध में।


Thursday, October 20, 2022

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को यू डायस कोड आवंटित कराने के सम्बंध में

प्रदेश में संचालित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को यू डायस कोड आवंटित कराने के सम्बंध में।


Monday, May 17, 2021

महराजगंज : यू-डायस+ के अन्तर्गत डाटा फीडिंग कराये जाने हेतु जनपद, विकास खण्ड एवं विद्यालय स्तर पर की जाने वाली कार्यवाही विषयक बीएसए का दिशानिर्देश जारी

महराजगंज : शैक्षिक सत्र 2020-21 हेतु यू-डायस+ के अन्तर्गत डेटा एकत्रीकरण, अंकन एवं ऑनलाइन डाटा फीडिंग का कार्य समयान्तर्गत पूर्ण किये जाने के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किया दिशानिर्देश।




Friday, August 28, 2020

फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2019-20 यू-डायस को पूर्ण कराए जाने के सम्बन्ध में

फतेहपुर : शैक्षिक सत्र 2019-20 यू-डायस को पूर्ण कराए जाने के सम्बन्ध में।








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Tuesday, August 11, 2020

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता, बीएसए ने अंतिम अवसर देते हुए जारी की चेतावनी

फतेहपुर : यू-डायस प्रपत्र न भरने वाले मान्यता प्राप्त विद्यालयों की जाएगी मान्यता।

मान्यता प्राप्त जिन विद्यालयों ने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी। इन विद्यालयों को अब अंतिम अवसर देते हुए शीघ्र ही प्रपत्र अपलोड करने की बेसिक शिक्षा विभाग ने चेतावनी दे दी है। अन्यथा उन पर मान्यता प्रत्याहरण कार्रवाई की जाएगी। जिले में ऐसे करीब आधा सैकड़ा विद्यालय हैं जिन्होंने यू-डायस पर प्रपत्र अपलोड नहीं किए हैं।



बीएसए शिवेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीएसए, डीआईओएस, समाज कल्याण विभाग व अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधीन संचालित परिषदीय शासकीय सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों को कई बार डाटा कैप्चर फार्मेट भरने के लिए निर्देशित किया जा चुका है। इसके बाद भी इस कार्य में लापरवाही बरती जा रही है। अभी भी जिले 50 विद्यालय ऐसे हैं जिन्होंने यह विवरण अपलोड नहीं किया है। अंतिम चेतावनी जारी करते हुए इन विद्यालयों से कहा गया है कि शीघ्र ही डीसीएफ भर दें। अन्यथा की स्थिति में उनकी मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी।





इसके लिए विद्यालयों से बीआरसी से संपर्क करके यह प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के लिए कहा गया है। बीएसए ने साफ कहा है कि कई बार कहने के बाद भी यह कार्य नहीं किया गया है। इसमें लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी और कार्रवाई की जाएगी।


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Wednesday, July 29, 2020

जालौन : शिक्षकों पर अनुचित दबाव बनाकर नियमविरुद्ध यू-डायस (DCF) ऑनलाइन भराने के सम्बन्ध में RSM द्वारा की गई शिकायत पर जांच का आदेश

जालौन : शिक्षकों पर अनुचित दबाव बनाकर नियमविरुद्ध यू-डायस (DCF) ऑनलाइन भराने के सम्बन्ध में RSM द्वारा की गई शिकायत पर जांच का आदेश





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Tuesday, June 23, 2020

महराजगंज : 63 परिषदीय विद्यालयों के यू-डायस प्लस वर्ष 2019-20 का डाटा अद्यतन अपलोड नहीं करने वाले प्रधानाध्यापकों/ प्रभारी प्रधानाध्यापकों का वेतन तत्काल प्रभाव से अवरुद्ध

महराजगंज : 63 परिषदीय विद्यालयों के यू-डायस प्लस वर्ष 2019-20 का डाटा अद्यतन अपलोड नहीं करने वाले प्रधानाध्यापकों/ प्रभारी प्रधानाध्यापकों का वेतन तत्काल प्रभाव से अवरुद्ध, आदेश देखें।



Saturday, June 13, 2020

महराजगंज : यू डायस+ वर्ष 2019-20 के अन्तर्गत ऑनलाइन डाटा अपलोडिंग कार्य 15 जून तक पूर्ण कराने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश

महराजगंज : यू डायस+ वर्ष 2019-20 के अन्तर्गत ऑनलाइन डाटा अपलोडिंग कार्य 15 जून तक पूर्ण कराने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश, आदेश देखें-

Sunday, March 15, 2020

महराजगंज : यू-डायस+ के अन्तर्गत ऑनलाइन डाटा इंट्री का कार्य एक सप्ताह के अन्दर पूर्ण कराए जाने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश

महराजगंज : शैक्षिक सत्र 2019-20 में यू-डायस+ के अन्तर्गत ऑनलाइन डाटा इंट्री का कार्य एक सप्ताह के अन्दर पूर्ण कराए जाने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश।

Thursday, February 20, 2020

फतेहपुर : प्र0अ0/इं0प्र0अ0 हेतु ब्लॉकस्तरीय एक दिवसीय यू-डायस प्रशिक्षण हेतु विकासखंडवार कार्यक्रम व महत्वपूर्ण बिन्दु/निर्देश जारी, देखें

फतेहपुर : प्र0अ0/इं0प्र0अ0 हेतु ब्लॉकस्तरीय एक दिवसीय यू-डायस प्रशिक्षण हेतु विकासखंडवार कार्यक्रम व महत्वपूर्ण बिन्दु/निर्देश जारी, देखें।








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Saturday, July 13, 2019

महराजगंज : हाउस होल्ड सर्वे डाटा के 3426 दिव्यांग बच्चों के सापेक्ष यू-डायस प्लस में अवशेष 2690 बच्चों का डाटा फीड करने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश

महराजगंज : हाउस होल्ड सर्वे डाटा के 3426 दिव्यांग बच्चों के सापेक्ष यू-डायस प्लस में अवशेष 2690 बच्चों का डाटा फीड करने के सम्बन्ध में बीएसए ने दिया निर्देश, आदेश देखें-