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Thursday, August 6, 2026

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं

पीएम श्री स्कूलों में बजट तो बढ़ा लेकिन छात्रों का रूझान नहीं


प्रयागराजः पीएम श्री योजना के तहत देशभर के 14500 से अधिक सरकारी स्कूलों को माडल स्कूलों के रूप में अपग्रेड किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाने के लिए प्रति स्कूल दो करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जा रही है। प्रयागराज में इस योजना के तहत 43 स्कूल चयनित हैं, लेकिन सुविधाओं के बावजूद इन स्कूलों में छात्र संख्या में कमी देखी जा रही है।


सत्र 2025-26 में कुल 11773 पंजीयन हुए थे, जबकि सत्र 2026-27 में यह आंकड़ा घटकर 10417 रह गया है। पीएम श्री स्कूलों में स्मार्ट कक्षा, आईसीटी लैब, डिजिटल लाइब्रेरी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा, पर्यावरण अनुकूल उपायों के तहत सोलर पैनल, एलईडी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग और पोषण वाटिका भी विकसित की जा रही हैं। हालांकि, इन सभी प्रयासों के बावजूद छात्र संख्या में वृद्धि नहीं हो रही है। पीएम श्री पीएस पट्टीनाथ राय में पिछले सत्र में 202 छात्रों का पंजीयन हुआ था, जबकि इस बार केवल 127 नामांकन हुए। पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उपरदहा में 425 विद्यार्थियों के सापेक्ष सिर्फ 233 पंजीयन हुए हैं। धनुपुर विकासखंड के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल यासीनपुर में 398 के सापेक्ष 317 और जारौन में 271 के सापेक्ष 220 विद्यार्थी पंजीकृत हैं।

चाका के पीएम श्री कंपोजिट स्कूल उबारी में 400 के सापेक्ष 378 और बहरिया के पीएम श्री प्राथमिक विद्यालय महपुरा में 154 के सापेक्ष 128 नए नामांकन हुए हैं। बहादुरपुर विकासखंड के प्राथमिक विद्यालय पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रितैया में पिछले सत्र में 365 छात्रों का पंजीकरण था, जो इस बार 336 पर सीमित रह गया। पीएमश्री पीएस रामपुर में भी पंजीयन का आंकड़ा पिछले सत्र को पार नहीं कर पाया है। सिर्फ 133 नए नामांकन हुए हैं। यही हाल पीएमश्री कंपोजिट स्कूल सराय लहुरी का है, यहां 207 पंजीयन हुआ। जो पिछले सत्र की तुलना में 50 कम है। 

पीएमश्री कंपोजिट स्कूल भगवतपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल जनका, पीएमश्री प्राथमिक विद्यालय बालिका सिरसा, पीएमश्री पीएस छतवा जैसे अन्य स्कूलों में भी छात्र संख्या पिछले सत्र के आंकड़े को नहीं पार कर सकी है। बीएसए अनिल कुमार का कहना है कि सितंबर तक विद्यार्थियों का पंजीयन जारी रहेगा। छात्र संख्या बढ़ाने के लिए शिक्षक स्थानीय स्तर पर सक्रिय हैं। कुछ स्कूलों ने पिछले सत्र के आंकड़े को पार कर लिया है, जिनमें पीएम श्री पीएस सोरांव प्रथम, पीएम श्री कंपोजिट स्कूल रमईपुर, और पीएम श्री कंपोजिट स्कूल निकदलपुर, पीएमश्री कंपोजिट स्कूल तातारगंज जैसे विद्यालय शामिल हैं।

Friday, April 3, 2026

शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना

शिक्षक और कक्षा की उपलब्धता के आधार पर नामांकन की तैयारी में यूपी बोर्ड, प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे अंतिम रूप दिए जाने की संभावना


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के स्कूलों में अब शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के आधार पर ही छात्रों के नामांकन की तैयारी चल रही है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन हाल ही में प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ हुए मंथन के बाद इसे जल्द ही अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है।


प्रदेश में लगभग 30 हजार मान्यता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे स्कूलों की है जहां न तो पर्याप्त भवन हैं और न ही पर्याप्त शिक्षक उपलब्ध हैं, फिर भी हर साल बड़ी संख्या में छात्रों का नामांकन लिया जा रहा है। पढ़ाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।

नियम के अनुसार, एक कक्षा में अधिकतम 60 विद्यार्थियों के बैठने का प्रावधान है, लेकिन शिक्षकों की कमी के चलते कई स्कूलों में 100 से 110 छात्रों को एक ही कक्षा में बैठा दिया जाता है। इससे छात्रों को समुचित शिक्षा नहीं मिल पा रही है और उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

लंबे समय से मान्यता प्राप्त स्कूलों में शिक्षकों की कमी बनी हुई है। यही वजह है कि छात्र संख्या वित्तविहीन विद्यालयों की ओर बढ़ रही है, जबकि मान्यता प्राप्त स्कूलों में नामांकन घटता जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के अपर सचिव सत्येंद्र कुमार ने बताया कि शिक्षकों और कक्षाओं की उपलब्धता के अनुसार ही नामांकन और बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की योजना बनाई जा रही है।

इस पर अंतिम निर्णय प्रधानाचार्यों और शिक्षक संगठनों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि प्रति कक्षा 60 छात्रों का मानक निर्धारित है और इसी के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल्द ही इस मुद्दे पर विस्तृत बैठक कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

Sunday, March 29, 2026

उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

उच्च शिक्षा में भी दाखिले के लिए विशेष अभियान, मंडल स्तर पर अप्रैल से सभी राज्य विवि आयोजित करेंगे प्रवेश उत्सव, उच्च शिक्षा में भी नामांकन बढ़ाने की कोशिश

50 प्रतिशत नामांकन का लक्ष्य 2035 तक पाने की कवायद


प्रयागराज। कक्षा छह से 12 साल के बच्चों के लिए स्कूल चलो अभियान की तर्ज पर अब उच्च शिक्षण संस्थानों में भी दाखिले को विशेष अभियान चलाया जाएगा। प्रदेश के सभी 24 राज्य विश्वविद्यालयों, 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ाने के उद्देश्य से पहली बार विशेष प्रवेश अभियान शुरू करने का निर्णय लिया गया है।


सीबीएसई, सीआईएससीई समेत सभी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद अप्रैल से यह अभियान शुरू होगा। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा के अनुसार इसकी शुरुआत आगरा से होगी। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन लगभग 27 प्रतिशत है। 2035 तक सकल नामांकन 50 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। 

मंडल मुख्यालय वाले जिलों में राज्य विश्वविद्यालयों की ओर से दाखिला उत्सव आयोजित किया जाएगा, जहां सभी महाविद्यालय अपने स्टाल लगाकर बच्चों को अपने यहां पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों, छात्रवृत्ति एवं अन्य सुविधाओं की जानकारी देंगे।


छात्रसंख्या घटने से चिंतित

यूपी के महाविद्यालयों में 2025-26 सत्र में छात्रसंख्या घट गई है। प्रदेश के 216 राजकीय, 330 अशासकीय सहायता प्राप्त और 8072 वित्तविहीन महाविद्यालयों में 4895468 विद्यार्थियों ने परंपरागत पाठ्यक्रमों (बीए, बीएससी, बीकॉम आदि) में दाखिला लिया है। जबकि पिछले साल दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या 53,28,969 थी। 

Saturday, July 19, 2025

शून्य नामांकन वाले 335 स्कूल होंगे बंद, यूपी बोर्ड ने तैयार की डिफाल्टर स्कूलों की सूची, मान्यता होगी समाप्त

शून्य नामांकन वाले 335 स्कूल होंगे बंद, यूपी बोर्ड ने तैयार की डिफाल्टर स्कूलों की सूची, मान्यता होगी समाप्त

प्रयागराज । यूपी बोर्ड से संबद्ध 335 स्कूलों की मान्यता छिनेगी। बोर्ड की ओर से ऐसे स्कूलों की सूची तैयार की गई है जहां लगातार तीन साल से नामांकन शून्य है। इन स्कूलों ने मान्यता तो ली, लेकिन न तो विद्यार्थियों का प्रवेश हो रहा है और न ही इनके बच्चे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा में शामिल हो रहे हैं।

अब इन स्कूलों को नोटिस जारी करके शून्य नामांकन का कारण पूछा जाएगा और ठोस कारण न होने पर मान्यता समिति में विचार के कारण मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई की जाएगी। 2026 की बोर्ड परीक्षा से पहले मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई पूरी होने की उम्मीद है। 


बोर्ड सचिव भगवती सिंह का कहना है कि लगातार शून्य नामांकन वाले स्कूलों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इससे पहले दिसंबर 2022 में पूर्व सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने 178 ऐसे स्कूलों की सूची तैयार की थी। स्कूलों को नोटिस जारी करने के बाद मान्यता वापस ली गई थी।


नकल में फंसे स्कूलों पर भी हो सकती है कार्रवाई

उन स्कूलों की मान्यता प्रत्याहरण की कार्रवाई भी हो सकती है जहां 10वीं 12वीं की बोर्ड परीक्षा के दौरान सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम 2024 के तहत सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। यह अधिनियम लागू होने के बाद 2025 में पहली बोर्ड परीक्षा हुई है।

Saturday, July 12, 2025

माध्यमिक के भी 400 से ज्यादा विद्यालयों में 50 से कम छात्र, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जताई नाराजगी, नामांकन बढ़ाने के निर्देश

माध्यमिक के भी 400 से ज्यादा विद्यालयों में 50 से कम छात्र, महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने जताई नाराजगी,  नामांकन बढ़ाने के निर्देश
 

उत्तर प्रदेश के बेसिक ही नहीं राजकीय माध्यमिक विद्यालयों (हाईस्कूल व इंटर) में भी छात्रों का संकट खड़ा हो रहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से की जा रही तमाम कवायद व सुविधाओं के बाद भी इस तरफ विद्यार्थियों को आकर्षित करने में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है।

इसे लेकर शुक्रवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने सभी डीआईओएस व संयुक्त निदेशक आदि की ऑनलाइन बैठक में नामांकन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। विभाग की ओर से हाल में जारी आंकड़ों के अनुसार यू-डायस डाटा 2023-24 के अनुसार प्रदेश के 436 राजकीय हाईस्कूलों में 50 से कम छात्रों के नामांकन हैं। वहीं 189 राजकीय इंटर कॉलेज ऐसे हैं, जहां 100 से कम छात्रों के नामांकन हैं।


हर सप्ताह बैठक कर नामांकन बढ़ाने के निर्देश

महानिदेशक ने निर्देश दिए कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में नामांकन बढ़ाने के लिए मंडल स्तर के अधिकारी, सभी डीआईओएस अपने यहां प्रधानाचार्यों व प्रधानाध्यापकों की बैठक कर इसके लिए रणनीति तैयार करें। कक्षा आठ व दस के सभी विद्यार्थियों का नामांकन सुनिश्चित कराएं। इसके लिए हर सप्ताह बैठक करें।


Sunday, April 20, 2025

नामांकन में वृद्धि हेतु जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा विभाग को भेजे सुझाव

नामांकन में वृद्धि हेतु जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा विभाग को भेजे सुझाव


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा निधारित अपेक्षित नामांकन लक्ष्य प्राप्त करने के सम्बंध में उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल संघ  ने शिक्षा निदेशक बेसिक को पत्र भेजकर अवगत कराया कि परिषदीय विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नोति 2020 के अन्तर्गत स्कूली शिक्षा के लिए निर्धारित डिजाइन के तहत फाउंडेशनल स्टेज में आंगनबाड़ी एवं प्री स्कूल, बाल वाटिका हेतु 5 से 6 वर्ष के आयु वर्ग के बच्चों का नामांकन किया जाता है, ताकि कथा 1 में प्रवेश हेतु परिषदीय विद्यालयों को बच्चे उपलब्ध हो सकें। जबकि अधिकतर परिषदीय विद्यालयों में बाल वाटिका संचालित नहीं है। परिणाम स्वरूप शासन द्वारा निर्धारित नामांकन लक्ष्य प्राप्त करने में बाधा उत्पन्न हो रही है। 


जबकि वर्तमान सत्र में नामांकन के लिये शिक्षा निदेशक बेसिक द्वारा निर्देश दिये गए है कि कक्षा 1 में ऐसे बच्चों का ही नामांकन किया जाये जिनकी आयु 31 जुलाई 2025 को 6 वर्ष पूर्ण हो रही हो। जबकि निजी विद्यालयों द्वारा 5 प्लस आयुवर्ग के बच्चों का नामांकन भी कर लिया जा रहा है। जिसके कारण प्रायः विद्यालयों के सेवित क्षेत्र में कक्षा 1 में प्रवेश हेतु 6 वर्ष आयु के बच्चे उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। 


जिसके परिप्रेक्ष्य में उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ परिषदीय विद्यालयों के नामांकन में वृद्धि करने एवं निर्धारित नामांकन लक्ष्य प्राप्ति हेतु मांग करता है कि प्रदेश के समस्त परिषदीय विद्यालयों में बालवाटिका को अनिवार्य रूप से संचालित किया जाये। तत्पक्षात कक्षा 1 में प्रवेश की न्यूनतम आयु 6 वर्ष निर्धारित की जाये ताकि निजी विद्यालयों की तरफ बच्चों का पलायन रोका जा सके। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा 1 में प्रवेश हेतु निर्धारित आयु में शिथिलता प्रदान कर निजी विद्यालयों में भी उक्त आदेश का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए साथ ही परिषदीय विद्यालय के सापेक्ष मानक के विरुद्ध निजी विद्यालयों को यू डायस के मानकों के परिप्रेक्ष्य में इनका स्थलीय निरीक्षण किया जाये तो निजी विद्यालयों की सच्चाई उजागर हो जायेगी। क्योंकि इनके द्वारा यू डायस कार्य समय से पूर्ण नहीं किया जाता है ताकि बच्चों के दोहरे नामांकन को छिपाया जा सके। आधार कार्ड उपलब्ध न होना तथा इसके सत्यापन न हो पाने से बच्यों के नामांकन एवं डीबीटी सहित अन्य विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में गंभीर समस्या उत्पन हो रही है। 


विद्यालयों के कुशल प्रबंधन एवं संचालन के लिए प्रत्येक विद्यालय में प्रवअष का पद अनिवार्य रूप से सृजित किया जाये। शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाये तथा प्रति कक्षा न्यूनतम एक शिक्षक नियुरु की जाये उत्पक्षात नामांकन के सापेक्ष शिथकों की नियुक्ति की जाये। ताकि शिक्षकों को कमी से बच्चों का पलायन निजी विद्यालयों की तरफन हो। परिषदीय विद्यालयों के सेवित क्षेत्र के पांच किलोमीटर के दायरे में किसी निजी विद्यालय को मान्यता प्रदान न की जाये तथा पूर्व से संचालित निजी विद्यालयों की समीक्षा कर मानकों के विपरीत चल रहे विद्यालयों को मान्यता समाप्त की जाये।



शासन / विभाग द्वारा निर्धारित / अपेक्षित नामांकन लक्ष्य प्राप्त किये जाने के सम्बंध में जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने रखी मांग


Sunday, March 16, 2025

यूपी में बढ़े डिग्री कॉलेज पर घटी छात्रों की संख्या

यूपी में बढ़े डिग्री कॉलेज पर घटी छात्रों की संख्या 


उच्च शिक्षा में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) बढ़ाने के लक्ष्य के विपरीत शैक्षणिक सत्र 2024-25 में परंपरागत पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की संख्या कम हो गई। आश्चर्य की बात है कि प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की संख्या बढ़ने के बावजूद तकरीबन डेढ़ लाख विद्यार्थियों की कमी दर्ज की गई है।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से विधानसभा में प्रस्तुत आय-व्ययक रिपोर्ट के अनुसार 2024-25 में परंपरागत पाठ्यक्रमों में 53,28,969 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत थे जबकि 2023-24 सत्र में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या 54,76,441 थी। स्पष्ट है कि छात्रसंख्या में पिछले सत्र की तुलना में 1,47,472 की कमी आई है।

2023-24 में निजी महाविद्यालयों की संख्या 7924 थी जो 2024-25 में बढ़कर 7984 हो गई। 2023-24 में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या 38 थी जो 2024-25 में बढ़कर 47 हो गई थी। यानि इस दौरान 60 निजी महाविद्यालय और नौ निजी विश्वविद्यालय भी खोले गए लेकिन विद्यार्थियों की संख्या में वृद्धि नहीं हो सकी।

2024 में खुले निजी विश्वविद्यालय यूपी में वर्ष 2024 में सरोज इंटरनेशनल विश्वविद्यालय लखनऊ, शारदा विश्वविद्यालय आगरा, जेएसएस विश्वविद्यालय नोएडा, एचआरआईटी विश्वविद्यालय गाजियाबाद, जीएस विश्वविद्यालय हापुड़, फ्यूचर विश्वविद्यालय बरेली, विद्या विश्वविद्यालय मेरठ, चंडीगढ़ विश्वविद्यालय उन्नाव, विवेक विश्वविद्यालय बिजनौर खुले हैं।


इनका कहना है

उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की कमी को लेकर शासन भी गंभीर है। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि आने वाले सत्र में पंजीकरण में वृद्धि हो।- डॉ. अमित भारद्वाज, उच्च शिक्षा निदेशक


Saturday, January 4, 2025

PM Shri School's Enrollment: पीएम श्री से जुड़े स्कूलों में 75% से अधिक बढ़ा नामांकन

PM Shri School's Enrollment: पीएम श्री से जुड़े स्कूलों में 75% से अधिक बढ़ा नामांकन



नई दिल्ली : देश में भले ही ऐसे स्कूलों की बड़ी संख्या है जो कम नामांकन या फिर जीरो नामांकन जैसी स्थिति से जूझ रहे है, लेकिन यदि स्कूलों को बेहतर बना दिया जाए तो उन्हें कम नामांकन जैसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा।


 इसका अंदाजा पीएम-श्री (पीएम स्कूल फार राइजिंग इंडिया) के तहत चयनित स्कूलों से लगाया जा सकता है, जहां पीएम-श्री में चयनित होने और व्यवस्थाओं में सुधार होते ही इन स्कूलों के नामांकन में 75 प्रतिशत से अधिक की उछाल मिली है।


 पीएम- श्री में शामिल होने के बाद स्कूलों में आए बदलाव को लेकर पांच राज्यों के 40 स्कूलों में कराए अध्ययन में यह जानकारी सामने आयी है। मंत्रालय के बताया कि पीएम-श्री में चयनित होने से पहले वर्ष 2020-21 में इन स्कूलों में नामांकन करीब 14 हजार था, जो पीएम-श्री बनने के बाद वर्ष 2023- 24 में बढ़कर 25 हजार से अधिक हो गया है। 2021-22 में पहली खेप में देशभर के करीब आठ हजार स्कूलों का चयन किया गया था।

नामांकन में 37 लाख की कमी की खबर पर शिक्षा मंत्रालय ने की स्थिति स्पष्ट

नामांकन में 37 लाख की कमी की खबर पर शिक्षा मंत्रालय ने की स्थिति स्पष्ट

03 जनवरी 2024
शिक्षा मंत्रालय ने यूडीआइएसई (यूनीफाइड डिस्ट्रिक्स इन्फार्मेशन सिस्टम फार एजुकेशन प्लस) 2023-24 की रिपोर्ट में स्कूली नामांकन में आई 37 लाख की गिरावट पर स्थिति स्पष्ट की। कहा कि पहले के मुकाबले स्कूली शिक्षा के यह आंकड़े अब और ज्यादा सटीक है।

मंत्रालय के मुताबिक यूडीआइएसई प्लस के जो आंकड़े हैं वह राज्यों की ओर से मुहैया कराए जाते हैं। मंत्रालय सिर्फ इन्हें जांचता है। अब तक राज्य इन आंकड़ों को लगभग में दिया करते थे, लेकिन नई व्यवस्था के तहत इस बार आंकड़े छात्रों की संख्या के साथ ही उनके नाम और पिता के नाम के साथ मांगी गई थी।




स्कूली शिक्षा के नामांकन में 37 लाख से अधिक की गिरावट दर्ज, शिक्षा मंत्रालय की UDISE+ की वर्ष 2022-23 और 2023- 24 की रिपोर्ट में खुलासा

31 दिसम्बर 2024
नई दिल्ली। देशभर मेंस्कूली शिक्षा के नामांकन में 37 लाख से अधिक की गिरावट आई है। यह गिरावट एससी, एसटी, ओबीसी और लड़कियों के वर्ग में सबसे अधिक है। वर्ष 2022-23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में स्कूली शिक्षा की विभिन्न श्रेणियों में यह गिरावट है। माध्यमिक के तहत कक्षा नौंवी से 12वीं में यह गिरावट 17 लाख से अधिक है। हालांकि प्री-प्राइमरी के नामांकन में मामूली तो कुल स्कूलों में 5782 की बढ़ोतरी है।



शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई प्लस (यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इंफॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है। इसके मुताबिक, प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में छात्र नामांकन में 37.45 लाख की गिरावट है। 


वर्ष 2023-24 में सकल नामांकन 24.80 करोड़ था। इससे पहले वर्ष 2022-23 में 25.17 करोड़ तो वर्ष 2021-22 में 26.52 करोड़ से कम था। इस प्रकार वर्ष 2022- 23 की तुलना में वर्ष 2023-24 में यह आंकड़ा 37 लाख से अधिक पार कर गया है। हालांकि, प्रतिशत में यह आंकड़ा सिर्फ 1.5 फीसदी है। 


वर्ष 2023-24 में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के कुल नामांकन में 25 लाख की गिरावट आई है। अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी में 2022-23 की तुलना में स्कूलों में 12 लाख कम छात्र नामांकित हैं।

Friday, August 2, 2024

30 जून के नामांकन पर समायोजन की प्रक्रिया पर संभावित सरप्लस शिक्षकों में उपजा आक्रोश, विरोध की तैयारी

30 जून के नामांकन पर समायोजन की प्रक्रिया पर संभावित सरप्लस शिक्षकों में उपजा आक्रोश, विरोध की तैयारी


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद सचिव सुरेन्द्र कमार तिवारी ने 30 जून तक के छात्र नामांकन के आधार पर परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन का कार्यक्रम जारी किया है, लेकिन शिक्षक इसका विरोध कर रहे हैं। 


शिक्षकों ने बताया है कि उत्तर प्रदेश निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली के आधार पर शैक्षिक सत्र प्रारंभ के तीन माह नामांकन होने की व्यवस्था है। 


पहले जुलाई में सत्र शुरू होता था। अब अप्रैल में सत्र शुरू होने के साथ नामांकन प्रक्रिया शुरू होती है, लेकिन अगले महीने 18 मई से 30 जून तक ग्रीष्म अवकाश के कारण नामांकन नहीं हुए। इस कारण जुलाई के नामांकन के आधार पर समायोजन किया जाए।


Monday, May 27, 2024

कम नामांकन के लिए विभागीय नीतियां भी जिम्मेदार, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने महानिदेशक से मिलकर दर्ज कराई आपत्ति और सौंपा ज्ञापन

कम नामांकन के लिए विभागीय नीतियां भी जिम्मेदार,  जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने महानिदेशक से मिलकर दर्ज कराई आपत्ति और सौंपा ज्ञापन



बेसिक शिक्षा विभाग प्रत्येक  शैक्षिक सत्र में नए आदेश जारी करके शिक्षकों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर देता हैं। शिक्षक यदि अपने आला अधिकारियों के फरमान का पालन न करें तो वेतन कटौती अथवा निलंबन जैसी कार्यवाही का दंश झेलने को तैयार रहे।

पिछले कई शैक्षिक सत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की नामांकन की उम्र 5 प्लस वर्ष तय की थी, लेकिन वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 6 वर्ष की आयु कर दी गई है। जिसको लेकर गांवों में नामांकन के लिए गुरु जी को बच्चे ढूढ़े नही मिला रहे है। 

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि मंडल ने प्रांतीय अध्यक्ष सत्य प्रकाश मिश्र के नेतृत्व में महानिदेशक स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश, शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश एवं सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से भेंटकर उन्हें शिक्षक समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। 

प्रतिनिधि मंडल ने महानिदेशक को अवगत कराया, कि कक्षा 1 में नामांकन हेतु बच्चों की निर्धारित आयु 6 वर्ष कर दी गई है। जबकि पिछले वर्ष नामांकन की आयु 5 वर्ष प्लस थी। अतः वर्तमान सत्र में 6 वर्ष की आयु के बच्चे मिल पाना प्रायः संभव नही हो पा रहा है।

अधिकारियों द्वारा कम नामांकन पर शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही भी की जा रही है, जो की घोर आपत्ति जनक है। संगठन ने कहा कि कम नामांकन के लिए मात्र शिक्षकों को दोषी माना जाना कतई उचित नही है। इसके लिए विभाग की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। 

संगठन ने अपेक्षित नामांकन लक्ष्य प्राप्त करने हेतु प्रत्येक विद्यालय में अनिवार्य रूप से बालवाटिका संचालित करने, वर्तमान निर्धारित आयु में शिथिलता प्रदान करने, कक्षावार शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है।


Saturday, April 20, 2024

प्राइमरी स्कूलों में दाखिले की उम्र बढ़ाने से घटे बच्चे, एक अप्रैल को 6 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले बच्चों का ही कक्षा एक में प्रवेश


 


प्राइमरी स्कूलों में दाखिले की उम्र बढ़ाने से घटे बच्चे, एक अप्रैल को 6 वर्ष की उम्र पूरी करने वाले बच्चों का ही कक्षा एक में प्रवेश

बेसिक शिक्षा में नए आदेश से बढ़ीं मुश्किलें, प्राइमरी स्कूलों में घटे बच्चे


लखनऊ । प्राइमरी स्कूलों में दाखिले की उम्र बढ़ाने से छात्र-छात्राओं की संख्या कम हो गई। एक अप्रैल को छह वर्ष की उम्र पूरी करने वाले बच्चों का ही कक्षा- एक में दाखिले के आदेश से बीते साल के मुकाबले 50 फीसदी बच्चे घटे हैं। बच्चों की संख्या लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में घट गई है। कुछ स्कूलों ने छह साल के भीतर वाले बच्चों के दाखिले ले लिये हैं। अब उनके दाखिले फंस गए हैं।


 बेसिक शिक्षक विभाग के स्कूल चलो अभियान के तहत बच्चों के नामांकन बढ़ाने के सारे जतन असफल साबित हो रहे हैं। शिक्षक घर-घर बच्चे खोज रहे हैं, छह साल वाले बच्चे नहीं मिल रहे हैं। अभिभावकों ने दाखिले निजी स्कूलों में करा दिये हैं। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने नौ अप्रैल को आदेश में निर्देश दिये कि कक्षा-एक में दाखिले के लिए उम्र एक अप्रैल को छह वर्ष होनी चाहिए।


राजधानी में साल भर में स्कूलों में घट गए 25 हजार बच्चे

लखनऊ में 1619 प्राइमरी स्कूलों में बीते वर्ष बच्चों की संख्या दो लाख के ऊपर थी। इस साल घटकर दो लाख के भीतर आ गई है। 16 अप्रैल तक नामांकित बच्चों की संख्या औसतन एक लाख 75 हजार है। बीते साल की तुलना में 25 हजार कम हो गई है। सबसे ज्यादा बच्चे कक्षा एक में घटे हैं।


निजी स्कूलों में मां बाप ने कराए बच्चों के दाखिले

प्राइमरी स्कूलों में बच्चों के दाखिले न होने पर अभिभावकों ने निजी स्कूलों में दाखिला करा दिया है। कोई भी अभिभावक बच्चे को घर में नहीं बैठाना चाहता है। कई निजी स्कूल दो बच्चों के दाखिले पर एक बच्चे की फीस माफ कर दी है। ऐसे में शिक्षकों के सामने नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है।


बीते साल छह साल की उम्र लागू की थी
बीते साल 25 अप्रैल 2023 को तत्कालीन अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने न्यूनतम छह साल की उम्र वाले बच्चों का प्राइमरी स्कूलों की कक्षा-एक में दाखिले का निर्देश जारी किया था। साथ ही आदेश में कहा था कि एक अप्रैल से 31 जुलाई के बीच छह वर्ष की आयु पूरी करने के कारण दाखिले से वंचित बच्चों को दाखिले लेने का छूट दी थी। जिसके चलते शिक्षकों ने जुलाई में छह साल की उम्र पूरी करने वाले बच्चों के दाखिले ले तीन माह पहले अप्रैल में ही ले लिये थे।


शिक्षा निदेशक के आदेश से नामांकन घटे
बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल ने नौ अप्रैल को जारी आदेश में सख्त निर्देश दिये कि कक्षा-एक में दाखिले के लिए छात्र-छात्राओं की उम्र एक अप्रैल को छह वर्ष पूरी होनी चाहिए। इससे कम आयु के बच्चों का नामांकन किसी भी दशा में न किया जाय। छह वर्ष से कम आयु के बच्चों का नामांकन बालवाटिका में कराएं।


शिक्षक नेता का बयान
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन के प्रान्तीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने बताया कि एक अप्रैल को 6 वर्ष पूर्व होने पर प्राइमरी स्कूलों में प्रवेश लेने का नियम बहुत घातक सिद्ध होगा। विभाग छात्र संख्या बढ़ाने की बात करता है। ऐसे में यह संख्या और कम हो जाएगी। निजी स्कूलों में चार वर्ष में ही केजी और नर्सरी में प्रवेश दिया जा रहा है। विभाग को इस नियम पर विचार करना चाहिए

Sunday, January 28, 2024

पीएचडी नामांकन में 81.2 फीसदी की बढ़ोतरी, अल्पसंख्यक वर्ग में बेटियां उच्च शिक्षा में अभी भी पीछे

अल्पसंख्यक वर्ग में बेटियां उच्च शिक्षा में अभी भी पीछे

अल्पसंख्यक वर्ग के तहत उच्च शिक्षा में 30.1 लाख छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि, वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 21 लाख (38 फीसदी की बढ़ोत्तरी) ही था। वहीं, इस वर्ग की बेटियां अभी भी लड़कों के मुकाबले पीछे हैं। बेटियों को संख्या 15.2 फीसदी तक पहुंच गयी है। वर्ष 2014 की तुलना करें तो यहां 42.3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। क्योंकि उस समय सिर्फ 10 लाख बेटियां ही दाखिला ले पाई थी।



पीएचडी नामांकन में 81.2 फीसदी की बढ़ोतरी

पीएचडी नामांकन में 2014-15 की तुलना में फीसदी बढ़ोतरी हुई 81.2 है। इसमें 2.12 लाख छात्र पंजीकृत हैं। वहीं, इस वर्ग में महिला शोधार्थियों की संख्या 2014-15 से 0.48 लाख से दोगुनी होकर 0.99 लाख हो गई है। यानी 10.4 फीसदी महिला शोधार्थी हैं


उच्च शिक्षा के प्रति बेटों से ज्यादा बेटियां उत्साहित,  नामांकन 4.33 करोड़, इनमें 2.07 करोड़ छात्राएं

उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-2022 की रिपोर्ट जारी, छात्राओं के नामांकन में नौ सालों में 32% का इजाफा


नई दिल्ली। देशभर में बेटों से अधिक बेटियां उच्च शिक्षा की पढ़ाई के प्रति उत्साहित हैं। यह खुलासा उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) 2021- 2022 की रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 4.33 करोड़ नामांकन में 2.07 करोड़ छात्राएं हैं।

महिला नामांकन में पिछले नौ सालों (2014-15 से) में 32 फीसदी तक का इजाफा हुआ है। वहीं, सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 28.4 फीसदी तक पहुंच गया है। लड़कों के मुकाबले लड़कियों का अनुपात लगातार पांचवें वर्ष आगे रहा। खास बात यह है कि एससी छात्रों के नामांकन में 44 फीसदी तक वृद्धि हुई है। 2020-21 में उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 4.14 करोड़ था। इस हिसाब से नामांकन में कुल 19 लाख की वृद्धि हुई है। ओबीसी वर्ग में भी छात्रों का नामांकन 1.63 करोड़ तक पहुंच गया है। 2014- 15 की तुलना में इसमें 45 फीसदी की वृद्धि हुई है।



शिक्षा मंत्रालय रिपोर्ट: बेटियों में दिखी पढ़ने की चाहत, उच्च शिक्षा में 32 फीसद बढ़ा नामांकन; पीएचडी में दोगुनी हुई संख्या

उच्च शिक्षा को लेकर बेटियों के बढ़े रुझान से उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात में भी बड़ा बदलाव दिखा।


27 जनवरी 2024
देश की बेटियां आगे बढ़ना चाहती हैं। वह पढ़ना चाहती हैं। उनकी यह ललक गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ की परेड हो या फिर शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्च शिक्षा को लेकर जारी अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-22 की रिपोर्ट हर जगह साफ दिखने को मिली। उच्च शिक्षा में उनके बढ़े नामांकन ने सभी को चौंकाया है जो वर्ष 2014 -15 के मुकाबले 32 फीसद से ज्यादा है।


नई दिल्ली। देश की बेटियां आगे बढ़ना चाहती हैं। वह पढ़ना चाहती हैं। उनकी यह ललक गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ की परेड हो या फिर शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्च शिक्षा को लेकर जारी अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-22 की रिपोर्ट हर जगह साफ दिखने को मिली।

उच्च शिक्षा में उनके बढ़े नामांकन ने सभी को चौंकाया है, जो वर्ष 2014 -15 के मुकाबले 32 फीसद से ज्यादा है, यानी मोदी सरकार के आठ सालों में उच्च शिक्षा में बेटियों के पढ़ने की संख्या बढ़ी है। 2021- 22 में उच्च शिक्षा के लिए 2.07 करोड़ बेटियों ने दाखिला लिया था, जबकि 2014-15 में यह संख्या 1.57 करोड़ ही थी।

उच्च शिक्षा को लेकर बेटियों के इस बढ़े रुझान से उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में भी बड़ा बदलाव दिखा है। सर्वेक्षण में वर्ष 2021-22 का जीईआर जहां 28.4 फीसद हो गया है, जबकि यह 2014-15 में 23.7 फीसद था। वहीं, 2021-22 में उच्च शिक्षा में बेटियां की जीईआर बढ़कर 28.5 हो गया है, जो राष्ट्रीय जीईआर से भी अधिक हो गया है। हालांकि, बेटियां का यह जीईआर वर्ष 2014-15 में 22.9 फीसद ही था।

जो राष्ट्रीय जीईआर से कम था। इतना ही नहीं, बेटियों ने पीएचड़ी जैसे कोर्सों में दाखिला लेने को लेकर भी जबरदस्त उत्साह दिखाया है। जो 2014-15 के मुकाबले दोगुना हो गया है। वर्ष 2014-15 में पीएचड़ी के लिए जहां 47 हजार बेटियों ने नामांकन कराया था, वहीं 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 99 लाख हो गई है। गौरतलब है कि शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा को लेकर अखिल भारतीय सर्वेक्षण 2021-22 गुरुवार को देर रात जारी किया है। 


राज्यों में उत्तर प्रदेश और शहरों में बेंगलुरु में सबसे अधिक कॉलेज
अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण 2021-22 के मुताबिक, देश में सबसे अधिक कॉलेज उत्तर प्रदेश में है। इनकी संख्या 8375 है, जबकि कॉलेज की संख्या में दूसरे नंबर पर महाराष्ट्र (4692 कालेज), तीसरे नंबर पर राजस्थान (83934 कॉलेज), चौथे पर तमिलनाडु (2829 कॉलेज), पांचवें पर मध्य प्रदेश (2742) है।

वहीं, देश के ऐसे शहर जहां सबसे अधिक कॉलेज है, उनमें बेंगलुरु शहरी में सबसे अधिक 1106 कॉलेज है, जबकि जयपुर शहर में 703 कॉलेज, हैदराबाद में 491 कॉलेज, पुणे में 475 कॉलेज और प्रयागराज में 398 कॉलेज है।



पिछले सत्र के मुकाबले 2021-22 में उच्च शिक्षा नामांकन में 19 लाख की वृद्धि हुई: सरकारी सर्वेक्षण

नयी दिल्ली, 25 जनवरी
उच्च शिक्षा में 2021-22 के सत्र में नामांकन बढ़कर लगभग 4.33 करोड़ हो गया जो इससे पिछले सत्र में 4.14 करोड़ था। विज्ञान संकाय में महिला अभ्यर्थियों के नामांकन की संख्या पुरुषों की संख्या से अधिक है। उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) में यह जानकारी सामने आई है।


शिक्षा मंत्रालय की ओर से बृहस्पतिवार की रात जारी सर्वेक्षण के अनुसार कुल मिलाकर महिला नामांकन 2020-21 में 2.01 करोड़ से बढ़कर 2021-22 सत्र में 2.07 करोड़ हो गया है।


एआईएसएचई की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘उच्च शिक्षा में कुल नामांकन 2020-21 में 4.14 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में लगभग 4.33 करोड़ हो गया है। वर्ष 2014-15 में नामांकन के आंकड़े 3.42 करोड़ में लगभग 91 लाख की वृद्धि हुई है।’’


इसमें कहा गया है, ‘‘महिला नामांकन 2020-21 में 2.01 करोड़ से बढ़कर 2021-22 में 2.07 करोड़ हो गया है। वर्ष 2014-15 में महिला नामांकन में 1.57 करोड़ के मुकाबले लगभग (32 प्रतिशत) 50 लाख की वृद्धि हुई है।’’


रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पीएचडी में महिला नामांकन 2014-15 सत्र के 0.48 लाख से दोगुना होकर 2021-22 में 0.99 लाख हो गया है।


रिपोर्ट के अनुसार 2014-15 से 2021-22 की अवधि के लिए महिला पीएचडी नामांकन में वार्षिक वृद्धि 10.4 प्रतिशत है।


इसमें कहा गया है कि 2021-22 में स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएच.डी. और एम.फिल स्तर पर 57.2 लाख छात्र विज्ञान संकाय में नामांकित हैं जिसमें छात्राओं की संख्या 29.8 लाख के मुकाबले छात्रों की संख्या (27.4 लाख) से अधिक है।


रिपोर्ट के अनुसार एसटी छात्रों का नामांकन 2014-15 में 16.41 लाख से बढ़कर 2021-22 में 27.1 लाख हो गया जिसमें 65.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।


शिक्षा मंत्रालय 2011 से उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण आयोजित कर रहा है, जिसमें देश में उच्च शिक्षा प्रदान करने वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को शामिल किया गया है।


सर्वेक्षण के तहत विभिन्न मापदंडों जैसे छात्र नामांकन, शिक्षकों का आंकड़ा, ढांचागत एवं वित्तीय सूचनाओं आदि पर विस्तृत जानकारी एकत्र की जाती है।



उच्च शिक्षा को लेकर बढ़ा रुझान, आठ वर्षों में 26 प्रतिशत बढ़ा नामांकन, मंत्रालय ने जारी की सर्वेक्षण रिपोर्ट

नई दिल्ली। उच्च शिक्षा को नई ऊंचाई देने और 2035 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) को 50 प्रतिशत तक पहुंचाने की मोदी सरकार की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं। देश में उच्च शिक्षा को लेकर रुझान बढ़ा है। उच्च शिक्षा के नामांकन में पिछले आठ वर्षों में 26 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।छात्राओं के नामांकन में यह बढ़ोतरी करीब 32 प्रतिशत है।


शिक्षा मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

गुरुवार को शिक्षा मंत्रालय की ओर से उच्च शिक्षा को लेकर जारी अखिल भारतीय सर्वेक्षण-2021-22 की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। इसके साथ ही देश में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात अब बढ़कर 28.4 प्रतिशत हो गया है, जो 2014-15 में 23.7 प्रतिशत था।


उच्च शिक्षा में नामांकन में बढ़ोतरी

सर्वेक्षण में बताया गया है कि देश में 2014-15 के दौरान उच्च शिक्षा के लिए 3.42 करोड़ छात्रों ने नामांकन कराया था, जबकि वर्ष 2021-22 में यह संख्या बढ़कर 4.33 करोड़ हो गई। इससे पहले 2020-21 में उच्च शिक्षा के लिए नामांकन कराने वाले छात्रों की संख्या 4.14 करोड़ थी।

उच्च शिक्षा को लेकर छात्राओं में सबसे अधिक रुचि देखी गई है। 2014-15 में देश में उच्च शिक्षा में नामांकन कराने वाली छात्राओं की संख्या जहां 1.57 करोड़ थी, वह 2021-22 में 2.07 करोड़ हो गई। एससी-एसटी छात्र-छात्राओं के नामांकन में भी काफी बढ़ोतरी दर्ज हुई है।


एसटी की छात्राओं की संख्या में 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी

अकेले अनुसूचित जनजाति (एसटी) की छात्राओं की संख्या में 80 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2014-15 में देश में उच्च शिक्षा हासिल करने वाली एसटी छात्राओं की संख्या 7.47 लाख थी, जो 2021-22 में 13.46 लाख हो गई।उच्च शिक्षा को लेकर यह बदलाव पीएचडी के नामांकन में भी साफ दिख रहा है।

वर्ष 2014-15 के मुकाबले 2021-22 में पीएचडी में 81 प्रतिशत से अधिक नामांकन हुआ है। वर्ष 2014-15 में पीएचडी में दाखिला लेने वालों की संख्या जहां 1.17 लाख थी, वह 2021-21 में 2.13 लाख हो गई। इनमें छात्राओं की संख्या दोगुनी हुई है। 2021-22 में पीएचडी में कुल 99 लाख छात्राओं में दाखिला लिया, जबकि 2014-15 में सिर्फ 48 हजार छात्राओं में पीएचडी में नामांकन कराया था।

Friday, January 19, 2024

गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'Annual Status Of Education Report (असर–रूरल) 2023- Beyond Basics' जारी

गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'Annual Status Of Education Report (असर–रूरल) 2023- Beyond Basics' जारी


गैरलाभकारी संस्था प्रथम फाउंडेशन द्वारा 26 राज्यों में 28 जिलों के 34,745 किशोरों से बातचीत पर आधारित 'एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (रूरल), 2023- बियोंड बेसिक्स', दरअसल ग्रामीण भारत में 14-18 के किशोरों के शैक्षिक स्तर की पड़ताल है, जो परेशान करती है, तो कुछ मामलों में आश्वस्त भी करती है। 

सर्वेक्षण के लिए इसमें देश भर के प्रत्येक राज्य के एक- एक ग्रामीण जिले को, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो-दो ग्रामीण जिलों को चुना गया था। पता चलता है कि 25 फीसदी किशोर अपनी क्षेत्रीय भाषा में दूसरी कक्षा का पाठ नहीं पढ़ पाते, जबकि 56.7 फीसदी को गणित में भाग करने में परेशानी आई ! ऐसे ही, करीब 57.3 फीसदी किशोर अंग्रेजी में वाक्य पढ़ सकते हैं, और इनमें से तीन चौथाई (73.4 फीसदी) इसका अर्थ बता सकते हैं। जाहिर है, यह हताश करने वाली स्थिति है। 

सर्वे में शामिल 43.7 फीसदी किशोरों व 19.8 प्रतिशत किशोरियों के पास खुद का स्मार्टफोन है, लेकिन 9.9 फीसदी किशोरों और 8.3 प्रतिशत किशोरियों के पास ही कंप्यूटर लैपटॉप है। यह भी कोई अच्छी तस्वीर पेश नहीं करता। हालांकि कुछ तथ्य स्थिति बेहतर होने की बात कहते हैं। जैसे, उम्र के साथ नामांकन प्रतिशत बढ़ा है और 86.8 फीसदी से अधिक किशोर शैक्षणिक संस्थानों में पंजीकृत हैं। 

नामांकन में लैंगिक खाई भी घट रही है। वर्ष 2017 में 11.9 फीसदी लड़कों के मुकाबले 16 फीसदी लड़कियां स्कूल कॉलेज में नहीं थीं, यानी अंतर करीब चार फीसदी का था। लेकिन 2023 में यह अंतर घटकर महज 0.2 फीसदी रह गया। ग्रामीण किशोरियों की स्थिति अलबत्ता तुलनात्मक रूप से हताशाजनक है। मसलन, वे इंजीनियर और डॉक्टर बनना तो चाहती हैं, लेकिन मानविकी पढ़ने के लिए विवश हैं। डिजिटल कौशल में भी वे अपने समवयस्क किशोरों से पीछे हैं। 

सर्वे के अनुसार, मात्र 5.6 फीसदी किशोर व्यावसायिक प्रशिक्षण ले रहे हैं, जबकि सरकार व्यावसायिक प्रशिक्षण को गांवों तक ले जाने की कई योजनाओं पर काम कर रही है। 


ASER रिपोर्ट का दावा, 25 फीसदी छात्र कक्षा दो की क्षेत्रीय भाषा की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ

नई दिल्ली। देश के 25% 14 से 18 आयु वर्ग के छात्र कक्षा दो की क्षेत्रीय भाषा की पुस्तक पढ़ने में असमर्थ हैं। आधे से अधिक युवा भाग के सामान्य सवाल हल करने में पीछे हैं। यह खुलासा वार्षिक शिक्षा स्थिति रिपोर्ट (असर) 2023 में हुआ है। 


दिल्ली में बुधवार को भारत में सरकारी स्कूलों में शिक्षा के स्तर को दर्शाती असर रिपोर्ट 2023 जारी की गई है। असर रिपोर्ट के लिए 26 राज्यों के 28 जिलों में 14 से 18 आयु वर्ग के 34,745 बच्चों पर सर्वेक्षण किया है। देशभर के प्रत्येक राज्य के एक ग्रामीण जिले को चुना गया है, जबकि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के दो-दो ग्रामीण जिलों को सर्वे के लिए चुना गया था। 


असर रिपोर्ट 2023 रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर के 86.8% छात्र किसी न किसी शैक्षणिक संस्थान में नामांकित हैं लेकिन आयु के अनुसार नामांकन में कुछ अंतर है। इसके मुताबिक 14 वर्ष के 3.9% और 18 वर्ष के 32.6% युवा कहीं भी पढ़ाई नहीं कर रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, 14 साल के 96.1% छात्रों ने शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश लिया था, लेकिन जब 18 साल के बच्चों की बात आती है तो यह प्रतिशत तेजी से गिरकर 67.4% हो गया।



STEM एरिया यानी साइंस, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी व मैथ्स में अब लड़कों का रुझान बढ़ रहा, असर रिपोर्ट में खुलासा 


अभी तक इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, साइंस, मैथ्स यानी स्टेम में लड़कियों का दबदबा होता था। लेकिन अब एक बड़ा बदलाव असर 2023 रिपोर्ट में दिखा है। इसके स्टेम एरिया यानी साइंस, मुताबिक, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी व मैथ्स में अब लड़कों का रुझान बढ़ रहा है। 

देश में 36.3% लड़के इन विषयों में पढ़ाई कर रहे हैं। जबकि लड़कियां का यहां आंकड़ा महज 28.1% है। हालांकि, उच्च शिक्षा तक आते-आते बेटियां आगे निकल जाती हैं। वहीं, 70.9% लड़के कक्षा दो की पढ़ाई क्षेत्रीय भाषा में कर पाते हैं तो लड़कियों का यह आंकड़ा 76% है। हालांकि, लड़के अंग्रेजी और गणित में बेहतर प्रदर्शन करते हैं।



यूपी : स्कूली बच्चों के नामांकन में वाराणसी टॉप पर, ASER 2023 की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

लखनऊ। प्रदेश में पठन-पाठन व स्कूली बच्चों (14 से 18 साल) की शिक्षा में अपेक्षाकृत सुधार हो रहा है। देश में जहां इस आयु वर्ग के 86.8 फीसदी बच्चों का नामांकन विभिन्न विद्यालयों में हैं, वहीं वाराणसी में कुल 91.2 फीसदी बच्चों का नामांकन हुआ है। हाथरस में बच्चों का कुल नामांकन 81.07 फीसदी ही है। 


यह आंकड़े प्रथम संस्था की ओर से हाल ही में जारी असर-2023 की रिपोर्ट में सामने आए हैं। संस्था की ओर से देश के 26 राज्यों व 28 जिलों में 14 से 18 साल के बच्चों की शैक्षिक स्थिति का सैंपल सर्वे किया गया था। इसमें के वाराणसी व हाथरस ग्रामीण में भी सर्वे किया गया। 


रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी में 30.6% बच्चे सरकारी स्कूलों में व बाकी प्राइवेट व अन्य शैक्षिक संस्थानों में नामांकित हैं। 16.8% लड़के व 18.8% लड़कियां किसी भी शैक्षिक संस्थान में नामांकित नहीं हैं। वाराणसी में 82% बच्चे दूसरे स्तर तक की किताब पढ़ लेते हैं। 91.5% युवाओं के घर में स्मार्टफोन है, 93.7% युवा स्मार्टफोन चलाने में सक्षम हैं। 70.5% युवा सप्ताह में कम से कम एक शैक्षिक गतिविधि के लिए स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं और 90.5% सोशल मीडिया के लिए करते हैं।


दूसरी ओर, हाथरस में कुल नामांकित 81.7% बच्चों में 27.7% सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में नामांकित हैं, जबकि 18.3% कहीं नामांकित नहीं हैं। 73% बच्चे दूसरे स्तर तक की किताब पढ़ लेते हैं। हाथरस में 89.2% युवाओं के घर में स्मार्टफोन है। 93.1% युवा स्मार्टफोन का प्रयोग करने में सक्षम हैं। इसमें 54.1 फीसदी युवा सप्ताह में कम से कम एक शैक्षिक गतिविधि के लिए स्मार्टफोन का प्रयोग करते हैं। 

Saturday, November 4, 2023

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा

यूपी बोर्ड : हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा


प्रयागराज। यूपी के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों की लड़कियां भी पढ़ाई-लिखाई में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। यूपी बोर्ड के आंकड़ों पर गौर करें तो बालिका शिक्षा की उत्साहवर्धक तस्वीर दिखाई पड़ती है। 


हाईस्कूल में बेटियों का पंजीकरण पिछले चार साल से लगातार बढ़ रहा है। 2024 की हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 29,47,324 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं। 13,75,638 (46.67%) छात्राएं जबकि 15,71,686 ( 53.32% ) छात्र हैं। 2021 में छात्राओं की संख्या 44.02 प्रतिशत थी।



Sunday, July 2, 2023

माध्यमिक के विद्यालयों में भी चलेगा विशेष नामांकन अभियान

माध्यमिक के विद्यालयों में भी चलेगा विशेष नामांकन अभियान

लखनऊ : बेसिक के विद्यालयों की ही तरह माध्यमिक के विद्यालयों में भी विद्यार्थियों के नामांकन बढ़ाने के लिए नए सत्र में विशेष अभियान चलाया जाएगा। विशेष नामांकन अभियान के तहत कक्षा आठ के उत्तीर्ण हर विद्यार्थियों का नजदीक के ही राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त, स्ववित्त पोषित व अन्य बोर्ड के माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ में नामांकन कराया जायेगा। 


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने इसके लिए 31 जुलाई तक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने जिलों में जिलाधिकारी के नेतृत्व में विशेष नामांकन अभियान चलाने के लिए कहा है। कहा है कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक संयुक्त टीम बनाकर नामांकन के लिए घर-घर संपर्क करेंगे।

Tuesday, April 4, 2023

डेढ़ दर्जन राज्यों में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से कम, शिक्षा मंत्री ने लोकसभा में आंकड़े प्रस्तुत किए

डेढ़ दर्जन राज्यों में उच्च शिक्षा में महिला नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से कम, शिक्षा मंत्री ने लोकसभा में आंकड़े प्रस्तुत किए


देश के डेढ़ दर्जन राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में उच्च शिक्षा में महिलाओं की नामांकन दर, सकल राष्ट्रीय महिला नामांकन दर से कम है। लोकसभा में सोमवार को सरकार द्वारा पेश आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। 


लोकसभा में सुमलता अम्बरीश के प्रश्न के लिखित उत्तर में शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने ये आंकड़े प्रस्तुत किए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उच्च शिक्षा में राष्ट्रीय स्तर पर सकल महिला नामांकन दर 27.9 प्रतिशत है। वहीं, लक्षद्वीप, लद्दाख, बिहार, दादरा नगर हवेली एवं दमन दीव, झारखंड,त्रिपुरा, नगालैंड, असम, गुजरात, ओडिशा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मिजोरम, मध्य प्रदेश, जम्मू कश्मीर और अंडमान निकोबार द्वीपसमूह में महिला नामांकन दर राष्ट्रीय औसत से कम है। 


प्रधान ने बताया कि 2021-22 में स्कूली शिक्षा के प्राथमिक से उच्च माध्यमिक स्तर तक बालिकाओं का कुल नामांकन 12.28 करोड़ रहा। उच्चतर माध्यमिक स्तर पर बालिकाओं का नामांकन 2018-19 से बढ़कर 2021-22 में 1.4 करोड़ हो गया।


 मंत्री ने बताया कि उच्च शिक्षा में महिला नामांकन 2014-15 के 1.57 करोड़ से बढ़कर 2020-21 में 2.01 करोड़ हो गया। उन्होंने बताया कि उच्चतर शिक्षा में सकल महिला नामांकन दर 2017-18 से पुरूष सकल नामांकन दर से अधिक हो गयी।

Wednesday, March 8, 2023

उच्च शिक्षा : प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गिर रही संख्या, नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य

उच्च शिक्षा : प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में गिर रही संख्या, नामांकन बढ़ाने का लक्ष्य 


प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के अधिक से अधिक युवाओं तक उच्च शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सरकार ने भले ही 2030 तक सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) 40 प्रतिशत रखा हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। यूपी के राज्य, मुक्त, डीम्ड व निजी विश्वविद्यालयों के साथ ही राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और निजी महाविद्यालयों में पिछले दो शैक्षिक सत्रों में छात्र- छात्राओं की संख्या घटती जा रही है।


शिक्षा निदेशालय स्थित उच्च शिक्षा विभाग की ओर से वर्तमान सत्र के लिए तैयार बुकलेट के अनुसार इन शिक्षण संस्थाओं में वर्तमान शैक्षिक सत्र 2022-23 में 44,18,809 विद्यार्थी पंजीकृत हैं 45,40,605 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। कोरोना काल के दौरान 2020-21 शैक्षिक सत्र में पंजीकृत छात्र-छात्राओं की संख्या 50,21,277 थी। उससे पहले के वर्षों में छात्रसंख्या में वृद्धि हो रही थी। पिछले दो सालों में पंजीकरण कम होने से उच्च शिक्षा को लेकर सरकारी प्रयासों को धक्का लगा है।


सकल नामांकन अनुपात

सकल नामांकन अनुपात का तात्पर्य स्कूलों से 12वीं पास करने वाले छात्र- छात्राओं के उच्च शिक्षण संस्थानों में | दाखिला लेने से है। यूपी में वर्तमान में 12वीं पास 25-26 छात्र-छात्राएं ही विश्वविद्यालय या कॉलेज की ओर रुख करते है। इसे ही 2030 तक बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है।


आंकड़ों पर एक नजर

■  51 राज्य, मुक्त, डीम्ड व निजी विवि हैं यूपी में
■  172 राजकीय महाविद्यालय
■  331 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालय 
■  7372 निजी महाविद्यालय


शैक्षिक सत्रवार पंजीकृत विद्यार्थियों की संख्या

2022-23           44,18,809

2021-22           45,40,605

2020-21           50,21,277

2019-20           41,83,992

2018-19           43,82,527

Monday, January 30, 2023

शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (AISHE) 2020-2021 जारी किया

शिक्षा मंत्रालय ने उच्च शिक्षा पर अखिल भारतीय सर्वेक्षण (एआईएसएचई) 2020-2021 जारी किया


उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़कर 4.14 करोड़ हुआ, पहली बार चार करोड़ के आंकड़े के पार; 2019-20 से 7.5 प्रतिशत और 2014-15 से 21 प्रतिशत की बढ़त

छात्राओं का नामांकन दो करोड़ तक पहुंचा, 2019-20 से 13 लाख की वृद्धि

वर्ष 2014-15 की तुलना में 2020-21 में अनुसूचित जाति के छात्रों के नामांकन में 28 प्रतिशत और अनुसूचित जाति की छात्राओं के नामांकन में 38 प्रतिशत की महत्वपूर्ण वृद्धि

वर्ष 2014-15 की तुलना में 2020-21 में अनुसूचित जनजाति के छात्रों के नामांकन में 47 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की छात्राओं के नामांकन में 63.4 प्रतिशत की वृद्धि

2014-15 से अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के नामांकन में 32 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के नामांकन में 39 प्रतिशत की महत्वपूर्ण बढ़ोतरी

2014-15 से पूर्वोत्तर क्षेत्र में 2020-21 में छात्रों के नामांकन में 29 प्रतिशत और छात्राओं के नामांकन में 34 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि

सभी सामाजिक समूहों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में सुधार

2019-20 से 2020-21 में दूरस्थ शिक्षा में नामांकन सात प्रतिशत बढ़ा

2019-20 के क्रमागत रूप से 2020-21 में 70 विश्वविद्यालय और 1,453 कॉलेज बढ़े

2017 में लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) 01 था, जो 2020-21 में 1.05 हो गया

2019-20 की तुलना में फैकल्टी/शिक्षकों की कुल संख्या में 47,914 की बढ़ोतरी



उच्च शिक्षा में पहली बार चार करोड़ से अधिक छात्रों ने दाखिला लिया, लड़कियों के प्रवेश का प्रतिशत भी बढ़ा

अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण की रिपोर्ट से हुआ खुलासा 


देश में पहली बार उच्च शिक्षा में चार करोड़ से अधिक छात्रों ने दाखिला लिया। अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण की रविवार को जारी रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2020-21 में 4.14 करोड़ छात्रों ने उच्च शिक्षा में प्रवेश लिया। यह वर्ष 2019-20 से 7.5 और 2014-15 से 21 की वृद्धि है। लड़कियों में दाखिले का प्रतिशत 34 फीसदी बढ़ा है।


महिला नामांकन बढ़ा
उच्च शिक्षा में महिला नामांकन दो करोड़ तक पहुंच गया। इसमें वर्ष 2019-20 से 13 लाख की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 की तुलना में 2020-21 में अनुसूचित जाति के छात्रों के नामांकन में 28 और अनुसूचित जाति की महिला छात्रों के नामांकन में 38 की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जबकि 2014-15 की तुलना में 2020-21 में एसटी छात्रों के नामांकन में 47 और महिला एसटी छात्रों के नामांकन में 63.4 की वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 से ओबीसी छात्र नामांकन में 32 और महिला ओबीसी छात्रों में 39 की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 से 2020-21 में पूर्वोत्तर क्षेत्र में छात्र नामांकन में 29 और महिला छात्र नामांकन में 34 की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सभी सामाजिक समूहों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) में सुधार हुआ है


दूरस्थ शिक्षा में भी बढ़ोत्तरी, विश्वविद्यालय की संख्या भी बढ़ी 
वर्ष 2019-20 से 2020-21 में दूरस्थ शिक्षा में नामांकन 7% बढ़ा है। वर्ष 2019-20 की तुलना में 2020-21 में विश्वविद्यालयों की संख्या में 70, कॉलेजों की संख्या में 1,453 की वृद्धि हुई है।


फैकल्टी की संख्या बढ़ी लैंगिक समानता सूचकांक (जीपीआई) 2017-18 में 1 से बढ़कर 2020-21 में 1.05 हो गया है। वर्ष 2019-20 से संकाय/शिक्षकों की कुल संख्या में 47,914 की वृद्धि हुई है।


● नामांकित छात्रों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और राजस्थान शीर्ष 6 राज्य हैं।


● दूरस्थ शिक्षा में नामांकन 45.71 लाख (20.9 लाख महिला के साथ) है, 2019-20 से लगभग 7 और 2014-15 से 20 की वृद्धि हुई है।


● एआईएसएचई 2020-21 में प्रतिक्रिया के अनुसार, कुल छात्रों में से लगभग 79.06 स्नातक स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं और 11.5 स्नातकोत्तर स्तर के पाठ्यक्रमों में नामांकित हैं।


● स्नातक स्तर पर विषयों में नामांकन कला (33.5) में सबसे अधिक है, इसके बाद विज्ञान (15.5), वाणिज्य (13.9) और इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी (11.9) का स्थान है।


● स्नातकोत्तर स्तर पर धाराओं में, अधिकतम छात्र सामाजिक विज्ञान (20.56) में नामांकित हैं, विज्ञान (14.83) का स्थान है।


● कुल नामांकन में से, 55.5 लाख छात्र साइंस स्ट्रीम में नामांकित हैं, जिसमें महिला छात्रों (29.5 लाख) की संख्या पुरुष छात्रों (26 लाख) से अधिक है।


● सरकारी विश्वविद्यालयों (कुल का 59) का नामांकन में 73.1 योगदान है। सरकारी कॉलेज (कुल का 21.4) नामांकन के 34.5 में योगदान करते हैं।


● 2014-15 से 2020-21 के दौरान राष्ट्रीय महत्व के संस्थान में नामांकन में 61 की वृद्धि हुई है।


लड़कियों के प्रवेश का प्रतिशत भी बढ़ा

● वर्ष 2020-21 में 4.14 करोड़ ने उच्च शिक्षा में प्रवेश लिया


● 2019-20 से 7.5 और 2014-15 से 21 की वृद्धि


● लड़कियों का प्रतिशत 34 फीसदी बढ़ा


● महिला नामांकन दो करोड़ तक पहुंचा, 2019-20 से 13 लाख की वृद्धि

Wednesday, June 29, 2022

उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका,सत्र 2021-22 में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी

उच्च शिक्षा में घट गए 4.80 लाख विद्यार्थी, राज्य विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में छात्र घटने से चिंता

 
● 2020-21 में 50,21,277 तो 2021-22 में 45.40 लाख थे छात्र

● उच्च शिक्षा में पंजीकरण बढ़ाने की कवायदों के बीच लगा झटका


प्रयागराज : उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं के नामांकन बढ़ाने की कवायद को कोरोना काल में झटका लगा है। शैक्षणिक सत्र 2021-22 में उच्च शिक्षा में छात्र-छात्राओं की संख्या में तकरीबन पांच लाख की गिरावट देखने को मिली है। उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से तैयार प्रदेश के 51 राज्य विश्वविद्यालयों और 7875 महाविद्यालयों की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है।

2020-21 सत्र में प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कुल 5021277 (1860220 छात्र व 3161057 छात्राएं) विद्यार्थी पंजीकृत थे। जबकि 2021-22 में यह संख्या सिमटकर 4540605 (2177467 छात्र व 2363138 छात्राएं) हो गई। 2019-2020 में उच्च शिक्षा में विद्यार्थियों की संख्या 41,83,992 (1969206 छात्र व 2214786 छात्राएं) थी।

बालिका शिक्षा पर पड़ा सर्वाधिक असर : प्रयागराज। कोरोना काल में उच्च शिक्षा संस्थानों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने का सर्वाधिक असर बालिका शिक्षा पर पड़ा है। शैक्षणिक सत्र 2019-20 में जहां 22,14,786 और 2020-21 में 31,61,057 छात्राओं ने उच्च शिक्षा के लिए दाखिला लिया था, वहीं 2021-22 में बालिकाओं के नामांकन की संख्या कम होकर 23,63,138 रह गई। शिक्षा मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के उच्च शिक्षा में नामांकन बढ़ाने के प्रयासों को कोरोना काल में झटका लगा है। इस सत्र में नामांकन संख्या बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

चार सालों में संस्थानों के नामांकन पर एक नजर

वर्ष छात्र छात्राएं योग

2021-22 2177467 2363138 4540605

2020-21 1860220 3161057 5021277

2019-20 1969206 2214786 41,83,992

2018-19 2074205 2308322 43,82,527

कोरोना काल में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्र-छात्राओं के नामांकन में कमी दर्ज की गई है। 2022-23 सत्र में इसमें सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

डॉ. अमित भारद्वाज, उच्च शिक्षा निदेशक