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Monday, September 21, 2020

यूपी बोर्ड : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू

UP Board : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू।

उत्तर प्रदेश में नए अकादमिक सत्र शुरू होने के पांच महीने बाद ही यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अपने 11वीं कक्षा के कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए शुरू कर दिया है।


यूपी बोर्ड के इस फैसले क मतलब है कि अगले शैक्षिक सत्र में राज्यभर में बोर्ड से जुड़े करीब 28000 स्कूलों में कॉर्मस स्ट्रीम 12वीं कक्षा में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा।


परिणाम स्वरूप, यूपी बोर्ड 12वीं कक्षा की परीक्षा 2022 में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित होगी। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) आधारित पाठक्रम आर्ट्स और साइंस के लिए लागू किया जा चुका है।


यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि विशेश सचिव (माध्यमिक शिक्षा) आर्यका अखौरी ने 18 सितंबर को एक आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और यूपी बोर्ड को भेजा गया है। इस आदेश में पाठ्यक्रम में बदलाव की स्वीकृति और विवरण के बारे में बताया गया है।


उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2020 को प्रस्ताव पर यूपी बोर्ड से स्वीकृति मिल गई थी।

पुराने पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय हिन्दी या सामान्य हिन्दी रखा गया था। साथ ही कई सब्जेक्ट विकल्प के तौर पर थे। लेकिन अब नए पाठ्यक्रम में छात्रों को सामान्य हिन्दी, बिजनेस स्टडीज और अकाउंटैंसी को एक अनिवार्य विषय के रूप में चुनना होगा। वहीं दो विकल्पीय विषय जैसे इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, मैथमैटिक्स और कम्प्यूटर होगा।

यूपी बोर्ड ने 1 अप्रैल 2018 को बोर्ड से जुड़े स्कूलो में 18 विषयों का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने की बात कही थी।

कॉमर्स स्ट्रीम में कक्षा 9 में 41612 और 11वीं में 71,834 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।

Saturday, September 19, 2020

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के इंटरमीडिएट वाणिज्य में भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू हो गया है। नए शैक्षिक सत्र की कक्षा 11 में नए पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरू होगी। बता दें कि कुछ माह पहले ही अंग्रेजी विषय में भी एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाया गया था और कक्षा नौ से पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई अगले सत्र से होगी। शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है।


यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर हो रही है। कई विषयों में पहले ही यह पाठ्यक्रम लागू है तो अन्य विषयों में बोर्ड प्रशासन बदलाव करा रहा है। इस वर्ष हाईस्कूल में अंग्रेजी, व इंटर में अंग्रेजी व वाणिज्य विषय का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी की तर्ज पर किया गया है। इसका प्रस्ताव काफी समय पहले भेजा गया था, कक्षा 9 व 11 के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बदलाव हो चुका है।

अब शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है। असल में, वाणिज्य वर्ग में रेगुलेशन में संशोधन होना था इसलिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कार्य पूरा हो रहा है और पढ़ाई चल रही है इसलिए वाणिज्य वर्ग का नया पाठ्यक्रम नए सत्र से लागू होगा।


पहले का वाणिज्य पाठ्यक्रम

एक अनिवार्य विषय : हिंदी या सामान्य हिंदी
बहीखाता व लेखाशास्त्र
व्यापारिक संगठन व पत्र व्यवहार

निम्न में से कोई दो विषय
अर्थशास्त्र तथा वाणिज्य भूगोल
अधिकोषण तत्व
औद्योगिक संगठन
गणित तथा प्रारंभिक सांख्यिकी
कंप्यूटर
बीमा सिद्धांत एवं व्यवहार
मानविकी वर्ग के विषयों में से कोई एक विषय
क्रम एक अर्थशास्त्र व वाणिज्य भूगोल लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से अर्थशास्त्र विषय नहीं ले सकेंगे।
क्रम पांच कंप्यूटर विषय लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से कंप्यूटर विषय नहीं ले सकेगा।


अब ये पाठ्यक्रम
अनिवार्य विषय
1. सामान्य हिंदी
2. व्यवसाय अध्ययन
3. लेखाशास्त्र

ऐच्छिक विषय निम्न में से कोई दो लेने होंगे
1. अर्थशास्त्र
2. अंग्रेजी
3. गणित
4. कंप्यूटर

IGNOU ने शुरू किया Mobile App डेवलपमेंट कोर्स, छह महीने के कोर्स में 12वीं के बाद ही एडमिशन ले सकेंगे

IGNOU ने शुरू किया Mobile App डेवलपमेंट कोर्स, छह महीने के कोर्स में 12वीं के बाद ही एडमिशन ले सकेंगे 


इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) ने मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपमेंट में एक सर्टिफिकेट कोर्स की शुरूआत की है। इग्नू के स्कूल ऑफ कम्प्यूटर एंड इंफोर्मेशन साइंस द्वारा पेश यह सर्टिफिकेट कोर्स छह महीने का होगा। इस बारे में इग्नू की ऑफिशियल वेबसाइट ignou.ac.in पर एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। मोबाइल टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।


12वीं पास स्टूडेंट्स ले सकते हैं एडमिशन

इस प्रोग्राम में थ्योरी और प्रैक्टिकल बेस्ड कुल 5 पाठ्यक्रम हैं। हर पाठ्यक्रम में दो कॉम्पोनेन्ट, असाइनमेंट और टर्म-एंड परीक्षा होगी। प्रोग्राम में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को प्रिंटेड पाठ्य साम्रगी नहीं दी जाएगी। उन्हें egyankosh.ac.in से सिलेबस डाउनलोड करना होगा। वहीं, प्रैक्टिकल काउंसलिंग सेशन के समय दो स्टूडेंट्स को एक कंम्प्यूटर दिया जाएगा। इग्नू के इस कोर्स में 12वीं पास स्टूडेंट्स दाखिला ले सकेंगे। यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स के लिए योग्यता 12वीं पास रखी है। इसके अलावा, 10वीं (मैट्रिक) के बाद 2 या 3 वर्ष का डिप्लोमा करने वाले स्टूडेंट्स भी प्रोग्राम में हिस्सा ले सकते हैं।

एंड्रॉइड ऐप डेवेलप की मिलेगी जानकारी

इस कोर्स के तहत स्टूडेंट्स एंड्रॉइड ऐप डेवेलप करना भी सीखेंगे। जारी नोटिफिकेशन में इग्नू ने बताया कि यह पाठ्यक्रम डिजाइन, कार्यान्वयन और उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के लिए एक डेटाबेस का संचालन करेगा, पायथन का उपयोग करके कार्यक्रमों का विकास करेगा और एंड्राइड जैसे IDEs का उपयोग भी करेगा।

कोर्स के लिए ऐसे करें आवेदन

1 सबसे पहले https://ignouadmission.samarth.edu.in/ पर जाएं।

2 यहां न्यू रजिस्ट्रेशन के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

3 अब रजिस्ट्रेशन फॉर्म का पेज ओपन होने पर मांगी गई डिटेल्स भरें।

4 इसके बाद वापस पेज पर आएं और रजिस्टर्ड यूजर नेम और पासवर्ड के जरिये लॉगइन कर आवेदन के प्रक्रिया पूरी करें।

Friday, September 18, 2020

संस्कृत के कोर्स में विज्ञान- कम्प्यूटर, पढ़ाने को टीचर नहीं

संस्कृत के कोर्स में विज्ञान- कम्प्यूटर, पढ़ाने को टीचर नहीं

प्रयागराज : संस्कृत के कोर्स में आधुनिक विषय तो शामिल कर लिए गए लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने पिछले साल 2019-20 सत्र से कक्षा छह से 12 तक नया सिलेबस लागू किया था। संस्कृत पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से आधुनिक विषयों का समावेश किया गया है। इसके तहत भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, वाणिज्य, कम्प्यूटर विज्ञान, गणित, चित्रकला व गृह विज्ञान आदि विषय यूपी बोर्ड की तरह संयोजित किए गए हैं।


वर्ष 2000 में परिषद का गठन होने के बाद से अब तक संस्कृत बोर्ड का अपना सिलेबस नहीं था। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के सिलेबस के आधार पर यहां पढ़ाई हो रही थी। तकरीबन दो साल की मेहनत के बाद नया सिलेबस तैयार हुआ और पिछले साल पूर्व मध्यमा (9वीं) और उत्तर मध्यमा प्रथम (11वीं) के लिए इसे अनिवार्य किया गया था। इस साल से मध्यमा व उत्तर मध्यमा में इसे लागू कर दिया गया है। 9वीं व 10वीं में 70 नंबर की थ्योरी और 30 अंक प्रैक्टिक्ल के लिए तय किए गए हैं।

लेकिन संस्कृत विद्यालयों में व्याकरण, वेद-वेदांत, मीमांसा, ज्योतिष और साहित्य जैसे परंपरागत विषय पढ़ाने के लिए ही अध्यापक नहीं हैं तो आधुनिक विषय के अध्यापकों की बात कौन पूछे। मजे की बात है कि बिना शिक्षकों के आधुनिक विषयों की पढ़ाई एक साल हो गई और इन स्कूलों में पढ़ने वाले तकरबीन 92 हजार बच्चे अगली कक्षा में प्रोन्नत भी हो गए।


इनका कहना है

संस्कृत विद्यालयों में जब तक आचार्यों की नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक कम से कम दो परंपरागत और दो आधुनिक विषयों के शिक्षकों को मानदेय/संविदा पर रखने का अनुरोध सरकार से किया गया है। ताकि पठन-पाठन में बाधा न आए। उम्मीद है कि जल्द व्यवस्था हो जाएगी।
-- डॉ. शालिग्राम त्रिपाठी, सदस्य, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद

Tuesday, August 25, 2020

New Education Policy 2020 : यूपी के माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव, बनी 11 सदस्यीय कमेटी

New Education Policy 2020 : यूपी के माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव, बनी 11 सदस्यीय कमेटी।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम व मूल्यांकन पद्धति में बड़ा बदलाव करेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव करने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। अपर शिक्षा निदेशक व्यावसायिक शिक्षा मंजू शर्मा की अध्यक्षता में बनी कमेटी बुधवार तक माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय को कार्य योजना प्रस्तुत करेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस कार्य योजना के अनुसार अपना लक्ष्य तय करेगा और आगे के वर्षों में इसी के अनुरूप बदलाव करेगा।






नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव करने के लिए बनी कमेटी में संयुक्त शिक्षा निदेशक (शिविर) शिविर कार्यालय लखनऊ भगवती सिंह, माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा मंडल मुकेश अग्रवाल, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक झांसी मंडल प्रदीप कुमार, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ सुरेंद्र तिवारी, अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकांत पांडेय, उप शिक्षा निदेशक (शिविर) शिविर कार्यालय लखनऊ विवेक नौटियाल, उप शिक्षा निदेशक व्यावसायिक शिक्षा पीसी यादव, डीआइओएस लखनऊ मुकेश कुमार सिंह व डीआइओएस इटावा राजू राणा शामिल हैं।




फिलहाल यहा कमेटी सबसे पहले पाठ्यक्रम व मूल्यांकन पद्धति में बदलाव पर रोडमैप तैयार करेगी। विभागीय संगठनात्मक ढांचे में बदलाव सहित नव प्रयोग को किस तरह बढ़ावा दिया जाए इस पर विस्तृत रिपोर्ट देगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस कार्य योजना के अनुसार अपना लक्ष्य तय करेगा और आगे के वर्षों में इसी के अनुरूप बदलाव करेगा।

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Sunday, August 23, 2020

यूपी बोर्ड : कक्षा 10 व 12 के बच्चे पहली बार देंगे प्री बोर्ड एग्जाम, पाठ्यक्रम भी 30% घटा

यूपी बोर्ड : कक्षा 10 व 12 के बच्चे पहली बार देंगे प्री बोर्ड एग्जाम, पाठ्यक्रम भी 30% घटा।




UP Board: 2021 की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने की तैयारी कर रहे 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को अनिवार्य रूप से प्री बोर्ड एग्जाम भी देना होगा। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे बच्चों की तैयारियों परखने के उद्देश्य से सचिव ने शैक्षणिक पंचांग में फरवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में प्री बोर्ड परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं।




सचिव दिव्यकान्त शुक्ल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि विभिन्न कक्षाओं में आनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य 31 जनवरी 2021 तक पूर्ण किया जाएगा। उसके बाद प्री बोर्ड परीक्षा (यह कान्सेप्ट प्रथम बार प्रयोग किया जा रहा है) आयोजन फरवरी 2021 के तृतीय एवं चतुर्थ सप्ताह में किया जाएगा। इससे पहले प्री बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। कुछ स्कूल अपने स्तर पर बोर्ड परीक्षा से पहले बच्चों की तैयारी परखने के लिए परीक्षा कराते थे और उसके आधार पर आवश्यकता पड़ने पर एक्स्ट्रा क्लासेस चलाकर बच्चों की मुकम्मल तैयारी करवाते थे। लेकिन इस बार शैक्षणिक पंचांग में शामिल होने के बाद सभी स्कूलों को प्री बोर्ड परीक्षा कराना पड़ेगा। ये परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन ये तो कोरोना महामारी से पैदा होने वाले हालात पर निर्भर करेगा।




कब क्या हुआ?

20 जुलाई को 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम को लगभग 30 प्रतिशत संक्षिप्त करते हुए बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
13 अगस्त को शैक्षिक पंचाग एवं शैक्षणिक क्रियाकलाप का माहवार एकेडमिक कैलेन्डर जारी किया गया।
18 अगस्त से विभिन्न कक्षाओं में ऑनलाइन/वर्चुअल स्कूल के माध्यम से शिक्षण कार्य प्रारम्भ।


ऑनलाइन शिक्षण की समय सारिणी
कक्षा---------------------प्रसारण-----------------प्रसारण समय-------------------पुनः प्रसारण (रिपीट)

9 व 11----------स्वयं प्रभा चैनल-22--------सुबह 11 से 1 बजे तक--------दोपहर बाद 4.30 से 6.30 बजे तक

10 व 12--------दूरदर्शन --------1 से 2 बजे तक,-----------------2.30 से 3, 3.30 से 5, 5.30 से 6.30 बजे तक





हर सप्ताह ऑनलाइन पढ़ाई की समीक्षा करेंगे सचिव दिव्यकांत शुक्ल : सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल हर सप्ताह ऑनलाइन पढ़ाई की समीक्षा करेंगे। वर्चुअल स्कूल एवं ई-ज्ञान गंगा के माध्यम से जनपदों में छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन की साप्ताहिक रिपोर्ट समस्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्राप्त करना एवं उसके पर्यवेक्षण आदि का दायित्व भी शिक्षा सचिव को दिया गया है। छात्रों के मूल्यांकन के लिए प्रश्न बैंक तैयार करना, छात्रों का मूल्यांकन करना तथा उनके लिए पाठ्य-पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी सचिव को दी गई है।



10-12 विद्यालयों पर एक नोडल अफसर करेंगे निगरानी : ऑनलाइन पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए डीआईओएस आरएन विश्वकर्मा ने 10 से 12 स्कूलों पर एक नोडल अफसर की तैनाती की है। जिले के कुल 1057 राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन स्कूलों पर कुल 84 प्रधानाचार्य नोडल अफसर की जिम्मेदारी निभाएंगे। ये प्रधानाचार्य पठन-पाठन की साप्ताहिक समीक्षात्मक रिपोर्ट डीआईओएस को देंगे।


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Friday, August 14, 2020

नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न

नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न।

नई दिल्ली : नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा में कई ऐसे बुनियादी बदलाव किए गए हैं जो आने वाले समय में देश की शिक्षा में बड़े बदलाव आ सकते हैं। नई नीति लागू होने के बाद स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम और उसका तौर-तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा।

छात्र-छात्राओं को भावी जरूरतों के अनुरूप विषय पढ़ाए जाएंगे। कक्षा छह से कृत्रिम बुद्धिमता की पढ़ाई भी इसी रणनीति का हिस्सा है। मकसद उनमें अभिरुचि पैदा करना है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक कहते हैं कि कक्षा छह से दो बड़े बदलाव हुए हैं। एक वोकेशनल शिक्षा आरंभ करना तथा दूसरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अध्ययन। इसका मकसद छात्रों को रोजगारोन्मुख बनाना और इनोवेशन में उनकी दिलचस्पी पैदा करना है। बच्चों को कक्षा छह से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में कुछ पाठ पढ़ाए जाएंगे।




नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का पूरा पैटर्न बदल जाएगा। पहले तीन साल की प्री-स्कूलिंग बच्चे आंगनबाड़ियों में करेंगे तथा बाद के दो साल तक स्कूलों में पढ़ेंगे। इस प्रकार पहले पांच साल नर्सरी से कक्षा दो तक बच्चों को बुनियादी तौर पर मजबूत बनाया जाएगा। इसके बाद अगले तीन साल के दौरान वे प्राइमरी शिक्षा ग्रहण करेंगे।मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि नीति को पूरे देश ने स्वीकार किया है। सूबों में अलग-अलग दलों की सरकार के बावजूद सबने इसे प्रगतिशील बताया है।

काफी विचार विमर्श किया गया : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इसे लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को खत्म करने वाला बताया है। इसलिए इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में कोई अड़चन नहीं आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भी कहा था कि जितना विचार-विमर्श इस नीति को तैयार करने में हुआ है, उतना दुनिया की किसी नीति पर नहीं हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती राज्यों को एक मंच पर लाने की थी जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक सफल रहे। शिक्षा नीति पर बनी समिति के चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने भी इस बात के लिए सराहना की है।


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Thursday, August 13, 2020

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स।


यूजीसी ने नई शिक्षा नीति आने के बाद सक्रियता दिखाई है जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थान अब सिर्फ वैश्विक और राष्ट्रीय जरूरतों के लिहाज से ही मैनपावर तैयार नहीं करेंगे, बल्कि वह स्थानीय व देश के छोटे-छोटे कामधंधों को लेकर भी प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने का काम करेंगे। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों में साफ्ट स्किल सहित विभिन्न कौशल से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे। यूजीसी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है। वह जल्द ही संस्थानों को ऐसे कोर्स शुरू करने की अनुमति देने की तैयारी में है। 




नई शिक्षा नीति के बाद यूजीसी ने दिखाई रुचि
यूजीसी ने यह सक्रियता नई शिक्षा नीति आने के बाद दिखाई है, जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को आगे आने को कहा गया है। इसे लेकर सीमित अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उन क्षेत्रों की पहचान खुद ही करना होगा और इसे आगे भी बढ़ाना होगा। नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि देश में अभी भी ढेरों ऐसे कारोबार और कामकाज पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं, जिन्हें तकनीकी लिहाज से मजबूती देने की जरूरत है। प्रशिक्षित मैनपावर की उपलब्धता न होने से इस दिशा में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। 

नैक में बेहतर रैंकिंग रखने वाले संस्थान शुरू कर सकेंगे
सूत्रों के मुताबिक यूजीसी की अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। इसको लेकर उनको पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। वैसे भी पीएम मोदी ने स्थानीय चीजों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फार लोकल का नारा दिया है। इस पूरी मुहिम को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालयों को अब तक कोई भी नया कोर्स शुरू करने के लिए यूजीसी से अनुमति लेनी होती है, हालांकि नैक की रैकिंग में बेहतर स्थान रखने वाले स्वायत्त संस्थानों के लिए ऐसी अनुमति की जरूरत नहीं है। साफ्ट स्किल से जुड़े कोर्सो को शुरू करने के विवि को भी अनुमति की कोई जरूरत नहीं पडे़गी। खासबात यह है कि नई शिक्षा नीति और सरकार का जिस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोगों को हुनरमंद बनाने पर जोर है, उसे देखते हुए ये कोर्स उसके लक्ष्य को आसान बना सकते हैं। नीति में वर्ष 2025 तक पचास फीसद लोगों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा जाना है। 
ये हो सकते हैं साफ्ट स्किल कोर्स 
बता दें कि सरकार स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देना चाहती है। उसके लिए प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। बढ़ई, काष्ठकला, बुनकर यानी कपड़े की बुनाई से जुड़े कोर्स, राजमिस्त्री, मिट्टी, कांच से जुड़ी कारीगरी के कोर्स के अतिरिक्त अलग-अलग राज्यों में स्थानीय छोटे-छोटे कामधंधों के कौशल से जुड़े अनेक कोर्स शुरू किए जा सकते हैं।

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Friday, August 7, 2020

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थीवे भी 11वीं में गणित विषय ले सकते हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थी , वे भी अब 11वीं में गणित विषय का विकल्प चुन सकते हैं। सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल इस साल के लिए जा रही है। वहीं इस संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूल प्रमुखों को यह निर्देश दिए गए हैं कि, वह इस बात की जांच करें कि 11वीं में मैथ्स सब्जेक्ट का विकल्प चुनने वाले छात्र-छात्राओं के भीतर उसे आगे बढ़ाने की योग्यता हो और क्षमता हो। इस बात को कॉलेजों को सुनिश्चित करना होगा। बता दें कि यह फैसला कोविड-19 संक्रमण के दौरान पड़ रहे प्रभाव की वजह से लिया गया है।




सीबीएसई बोर्ड के नियमानुसार जिन छात्र-छात्राओं को 11वीं और 12वीं में मैथ्स विषय लेना होता है, उन्हें 10वीं में स्टैंटर्ड गणित को पढ़ना होता है। वहीं जो परीक्षार्थी हॉयर स्टडीज में गणित नहीं पढ़ना चाहते हैं, वे बेसिक मैथ्स पढ़ते हैं। यह नियम साल 2019 में जारी किया गया था, जिससे जो छात्र-छात्राएं गणित का विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन पर ज्यादा बोझ न पड़े।


वहीं सीबीएसई के नियम के अुनसार 10वीं के बाद अगर उसका मूड बदलता है और वह 11वीं में मैथ्स विषय को चुनना चाहता है तो वह 10वीं में कंपार्टमेंट परीक्षा देकर 11वीं में गणित का विषय चुन सकता था। लेकिन इस बार कोविड-19 संक्रमण की वजह से पहले ही परीक्षाओं पर संकट गहराया हुआ है। एक तरफ जहां सीबीएसई बोर्ड ने अधूरी परीक्षाएं कराए बिना ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट की घोषणा कर दी थी। वहीं अभी तक कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को नए सत्र में पढ़ाई में संकट न हो इसके लिए यह आदेश दिए हैं। हालांकि कुछ वक्त पहले ही यह साफ किया है सीबीएसई बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षाएं कराएगा, क्योंकि ऐसा नहीं कराने पर हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाएगा। लेकिन यह परीक्षाएं कब हो पाएंगी यह साफ नहीं हुआ है। इसलिए शायद बोर्ड ने स्टूडेंट्स को सहूलियत दी है।


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Sunday, August 2, 2020

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम


बरेली : यूपी बोर्ड और सीबीएसई की तर्ज पर अब माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड के छात्र-छात्रओं को भी कम सिलेबस से पढ़ाई करनी होगी।


बोर्ड ने कोविड-19 की वजह से प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक सिलेबस में 30 फीसद कटौती कर दी है। इसके लिए बीते दिनों परिषद की बैठक हुई थी, जिसमें समिति के सदस्यों से सुझाव मांगे गए थे। अब बोर्ड ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

Wednesday, July 22, 2020

यूपी बोर्ड 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट का नया पाठ्यक्रम जारी, यहां क्लिक करके कक्षा- 9,10,11 एवं 12 के विषयों के पाठ्यक्रम करें डाउनलोड

यूपी बोर्ड सिलेबस 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट  का नया सिलेबस जारी, यहाँ खबर के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सभी विषयों के पाठ्यक्रम डाउनलोड।










नई दिल्ली :  UP Board Reduced Syllabus 2020-21: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) यानि यूपी बोर्ड से नये शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए हाई स्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम को 30 फीसदी तक संक्षिप्त किये जाने की घोषणा राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने 17 जुलाई 2020 को की थी।



इसके बाद से ही यूपी बोर्ड रिड्यूस्ड सिलेबस 2020-21 को लेकर छात्रों, शिक्षकों एवं विद्यालयों के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। इस पर विराम लगाते हुए यूपी बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2020-21 (परीक्षा वर्ष 2021) के लिए हाई स्कूल यानि कक्षा 9-10 और इंटरमीडिएट यानि कक्षा 11-12 के लिए संक्षिप्त पाठ्यक्रम को जारी कर दिया है। यूपी बोर्ड न्यू सिलेबस 2021 को सोमवार, 20 जुलाई 2020 को परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट, upmsp.edu.in पर जारी किया गया, जहां छात्र अपनी सम्बन्धित कक्षा के लिए पाठ्यक्रम डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही, छात्र यूपी बोर्ड हाई स्कूल सिलेबस 2021 या यूपी बोर्ड या इंटरमीडिएट सिलेबस 2021 को नीचे दिये गये डायरेक्ट लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं।


🔹 कक्षा- 9 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 10 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड


🔹 कक्षा- 11 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 12 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड



यूपी बोर्ड : धारा 370 हटाने का फैसला भी पढ़ेंगे बच्चे, 2020-21 के संशोधित पाठ्यक्रम में इसे किया गया है शामिल।

प्रयागराज :: यूपी बोर्ड के छात्र जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 2020-21 सत्र से अपने कोर्स में इसे शामिल किया है। यूपी बोर्ड की कक्षा 12 के लिए राजनीति विज्ञान की किताब स्वतंत्र भारत में राजनीति के क्षेत्रीय आकांक्षाएं पाठ के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति से जुड़ा पैराग्राफ हटाकर उसके स्थान पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का चैप्टर जोड़ा है।


किताब में लिखा है-'2014 में जम्मू-कश्मीर में हुए चुनाव में पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक मतदान होना रिकॉर्ड किया गया। बीजेपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में बीजेपी के साथ एक मिली-जुली सरकार सत्ता में आई। मुफ्ती मो. सईद के निधन के बाद,बेटी महबूबा मुफ्ती अप्रैल, 2016 में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। महबूबा मुफ्ती के कार्यकाल में बाहरी और भीतरी तनाव बढ़ाने वाली बड़ी आतंकवादी घटनाएं हुईं। जून, 2018 में बीजेपी ने मुफ्ती सरकार को दिया गया समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

पूरी होंगी राजनीतिक व विकास की आकांक्षाएं :  5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 द्वारा अनुच्छेद 370 समाप्त कर दिया गया और राज्य को पुनर्गठित कर दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख बना दिए गए। जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख भारत में बहुलवादी समाज के जीते-जागते उदाहरण हैं। वहां न केवल धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई, जातीय और जनजातीय विविधताएं हैं बल्कि विविध प्रकार की राजनीतिक और विकास की आकांक्षाएं हैं, जिन्हें नवीनतम अधिनियम द्वारा प्राप्त करने की इच्छा की गई है।


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एनसीईआरटी कोर्स में प्रदेश के नए नक्शे के साथ धारा 370 हटाने का घटनाक्रम गया जोड़ा

एनसीईआरटी कोर्स में प्रदेश के नए नक्शे के साथ धारा 370 हटाने का घटनाक्रम गया जोड़ा

 

एनसीईआरटी ने 12वीं कक्षा में राजनीति विज्ञान की पाठ्य पुस्तक के एक अध्याय में बदलाव किया है। पिछले साल जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने का ब्योरा इस केंद्र शासित प्रदेश के नए नक्शे के साथ दिया है। साथ ही इसी अध्याय में अलगाववाद संबंधी एक पैराग्राफ हटा दिया गया है।


राष्ट्रीय शैक्षिक और अनुसंधान परिषद (एनसीईआरटी) के अधिकारियों ने बताया कि कक्षा 12 की राजनीति विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में केवल जम्मू और कश्मीर के पुराने नक्शे की जगह नए नक्शे को जगह दी गई है। वर्ष 2020-21 शैक्षणिक सत्र के लिए जारी इस अध्याय का शीर्षक ‘स्वतंत्रता से अब तक भारत में राजनीति’ है। क्षेत्रीय प्रेरणा विषय से ‘अलगाववाद और उससे आगे’ शीर्षक वाले पैराग्राफ को भी हटा दिया गया है।


 इस किताब के इस अध्याय में भाजपा के महबूबा मुफ्ती सरकार से समर्थन वापस लेने पर सरकार गिरने के बाद जम्मू और कश्मीर में जून 2018 में राष्ट्रपति शासन लगाने का उल्लेख है। और अंत में संविधान में संशोधन करके जम्मू और कश्मीर को स्वायत्तता देने वाले अनुच्छेद 370 हटाने का पूरा विवरण दिया गया है।

Tuesday, July 21, 2020

कोराना प्रभाव : यूपी बोर्ड में 12वीं के छात्र परसाई के व्यंग और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे, 30% तक कोर्स गया घटाया

 कोराना प्रभाव : यूपी बोर्ड में 12वीं के छात्र परसाई के व्यंग और मर्चेंट ऑफ वेनिस नहीं पढ़ेंगे, 30% तक कोर्स गया घटाया


कोरोना के कारण स्कूलों में समय से पढ़ाई-लिखाई शुरू नहीं हो पाने की स्थिति में यूपी बोर्ड ने कक्षा 9 से 12 तक का कोर्स इस साल के लिए 30 प्रतिशत तक कम कर दिया है। बोर्ड ने संशोधित पाठ्यक्रम को अपनी वेबसाइट पर सोमवार रात अपलोड कर दिया। बदले पाठ्यक्रम के मुताबिक इस साल कक्षा 12 कला वर्ग के छात्र-छात्राओं के हिन्दी विषय से गद्य में हरिशंकर परसाई की निंदा रस और अंग्रेजी से मर्चेंट ऑफ वेनिस प्ले को बाहर कर दिया गया है।


हिन्दी के प्रमुख लेखकों सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला, सुमित्रानंदन पंत, मैथिलीशरण गुप्त और रामधारी सिंह दिनकर आदि की कुछ रचनाओं को बाहर किया है लेकिन कुछ रचनाएं शामिल है। केपी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. योगेन्द्र सिंह ने बताया कि कक्षा 10 हिंदी गद्य में कुल 7 पाठ में से 3 पाठ ईर्ष्या तू न गई मेरे मन से-रामधारी सिंह दिनकर, क्या लिखूं-पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और पानी में चंदा और चांद पर आदमी-जयप्रकाश भारती पाठ्यक्रम से बाहर किए गए हैं। 


पद्य के 13 पाठ में से सुमित्रानंदन पंत, महादेवी वर्मा व माखनलाल चतुर्वेदी की कुछ की रचनाओं का कुछ हिस्सा हटा दिया गया है जबकि मैथिलीशरण गुप्त की भारतमाता का मंदिर है यह, केदारनाथ सिंह की नदी और अशोक बाजपेयी की युवा जंगल पूरा पाठ हटाया गया है। सीबीएसई से सीख लेते हुए यूपी बोर्ड ने पाठ्यक्रम किसी ऐसे हिस्से को बाहर नहीं किया जिससे किसी प्रकार की विवाद की स्थिति पैदा हो। साथ ही यह गुंजाइश भी रखी है कि यदि कोई तर्कपूर्ण आपत्ति करता है तो उसपर विषय विशेषज्ञों से सलाह करके आवश्यक संशोधन किया जा सके।


10वीं-12वीं के कई विषयों में महत्वपूर्ण बदलाव
10वीं के अंग्रेजी प्रोस से टॉर्च बियरर व ऑवर इंडियन म्यूजिक, पोएट्री से द नेशन बिल्डर्स, सप्लीमेंटरी रीडर से माई ग्रेटेस्ट ओलम्पिक प्राइज को बाहर किया गया है। विज्ञान से धतु एवं अधतु, तत्वों का आवर्त वर्गीकरण, प्राकृतिक संसाधन, विद्युत का प्रभाव्र विद्युत धारा का चुम्बकीय प्रभाव को इस साल के लिए बाहर रखा गया है। गणित से त्रिकोणमितीय सर्वसमिकाएं, प्रायिकता व श्रेणी आदि, सामाजिक विज्ञान से औद्योगीकरण का युग, राजनीतिक दल, मुद्रा तथा साख को बाहर किया गया है। 12वीं के इतिहास से उपनिवेशवाद, विभाजन को समझना जबकि नागरिक शास्त्र से समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व, समकालीन विश्व में सुरक्षा, स्वतंत्र भारत में राजनीति आदि, समाजशास्त्र में भूमंडीकरण और सामाजिक परिवर्तन समेत कुछ पाठ हटाए गए हैं। 

Saturday, July 18, 2020

यूपी बोर्ड में पाठ्यक्रम घटने के अनुमोदन का इंतजार, 30% कौन पाठ शामिल कौन नहीं, स्पष्ट नहीं

यूपी बोर्ड में पाठ्यक्रम घटने के अनुमोदन का इंतजार, 30% कौन पाठ शामिल कौन नहीं, स्पष्ट नहीं


प्रयागराज : सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड ने भी संबद्ध कालेजों का पाठ्यक्रम घटाने का ऐलान किया है। अब तक यह तय नहीं है कि छात्र छात्रओं को किस विषय का कौन पाठ नहीं पढ़ना है। सभी उसका इंतजार कर रहे हैं। पाठ्यक्रम घटने का असर प्रदेश भर के 27,373 कालेजों की पढ़ाई पर पड़ेगा। बोर्ड ने जून माह में पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा था, उस पर शासन में मंथन चला उपमुख्यमंत्री ने गुरुवार को 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम घटाने का ऐलान कर दिया है। अब माध्यमिक शिक्षा निदेशक के अनुमोदन के बाद विषयवार पाठ्यक्रम बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड करने की तैयारी है।

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के कारण अब तक स्कूल-कालेज नहीं खुल सके हैं जिससे पढ़ाई बाधित है, शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से ही शुरू हो चुका है। शासन, बोर्ड प्रशासन ने छात्र-छात्रओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम को अपनाया है। लेकिन, फिर भी उस गति से पढ़ाई नहीं हो सकी है। इसीलिए पाठ्यक्रम को 30 प्रतिशत कम किया गया है। यूपी बोर्ड में कई विषयों में एनसीईआरटी का ही पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। बोर्ड ने शासन के निर्देश पर जून में ही शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की देखरेख में पाठ्यक्रम घटाने के लिए बैठकें की थीं। पाठ्यचर्या समिति (पाठ्यक्रम बनाने वाले) के सदस्यों व विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा। इसमें हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अहम विषयों में पाठ्यक्रम कम करने पर सहमति बनी थी।


 इसके अलावा कक्षा नौ व ग्यारह का सिलेबस घटाने का प्रस्ताव है। यह पत्रवली अनुमोदन के लिए शिक्षा निदेशक माध्यमिक के यहां लंबित है। आदेश निर्गत होने के बाद बोर्ड प्रशासन विषयवार घटाए गए पाठ्यक्रम को वेबसाइट पर अपलोड करेगा, ताकि छात्र-छात्रएं, शिक्षक व अभिभावक उससे अवगत हो सकें। उधर, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पाठ्यक्रम घटाने का का निर्णय हो गया है, उसका अनुपालन कराया जाएगा। पाठ्यक्रम में कमी सिर्फ इसी सत्र के लिए है, अगले शैक्षिक सत्र से घोषित पूरा पाठ्यक्रम ही पढ़कर परीक्षा की तैयारी करनी होगी।

Thursday, July 16, 2020

यूपी बोर्ड में 30% पाठ्यक्रम कम, 70 फीसदी पाठ्यक्रम को तीन भागों में किया जाएगा पूरा

यूपी बोर्ड में 30% पाठ्यक्रम कम, 70 फीसदी पाठ्यक्रम को तीन भागों में किया जाएगा पूरा।

लखनऊ। शासन ने यूपी बोर्ड के 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम 30 फीसदी कम कर दिए हैं। पहले के मुकाबले बचा हुआ 70 फीसदी पाठ्यक्रम तीन भाग में पढ़ाया जाएगा। नियमित कक्षाएं न शुरू हो पाने की समस्या को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शासन के पास पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पर शासन ने अपनी मुहर लगा दी है। कोरोना महामारी की वजह से शैक्षिक सत्र 2020-21 में अभी तक स्कूलों में कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। शासन ने 15 जुलाई से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का आदेश दे रखा हैं। लेकिन कॉलेज के साथ काफी विद्यार्थी ऐसे हैं जो संसाधनों अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई की हालत में नहीं है। इसको देखते हुए पाठ्यक्रम कम करने पर मंथन किया जा रहा था। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शेष 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम को तीन भागों में बांटकर पूरा कराया जाएगा। पहले भाग में पाठ्यक्रम का वह भाग लिया जाएगा जिसे कक्षावार, विषयवार और अध्यायवार वीडियो बनाकर ऑनलाइन पढ़ाया गया है। उनको स्वयंप्रभा चैनल व डीडी यूपी से भी प्रसारित किया गया है। दूसरे भाग में वह पाठ्यक्रम शामिल किया जाएगा जिसे विद्यार्थी स्वयं पढ़कर पूरा कर सकते हैं। तीसरे भाग में पाठ्यक्रम का वह हिस्सा होगा जिसे प्रोजेक्ट के जरिये पूरा कराया जा सकता है। पाठ्यक्रम कम होने से 1 करोड़ 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।




ऑनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधनों की कमी से जूझने वालों को राहत।

एकेडमिक कैलेंडर बनेगा : : उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विषय विशेषज्ञों द्वारा शैक्षिक पंचांग के अनुसार माहवार वार्षिक एकेडमिक कैलेंडर बनाया जाएगा। इसके अनुसार पढ़ाई व मूल्यांकन की विद्यालय, जिला, मंडल और राज्यवार मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तैयार किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों से कक्षावार, अध्यायवार और विषयवार प्रश्न बैंक तैयार कराकर माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। उसका मासिक, त्रैमासिक वार्षिक मूल्यांकन किया जाएगा।

सीबीएसई-सीआईएससीई ने भी कम किया है पाठ्यक्रम : : इससे पहले सीबीएसई व सीआईएससीई ने भी 30 फीसदी तक अपना सिलेबस कम किया है। दोनों बोर्ड ने अपना नया सिलेबस भी जारी कर दिया है।


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Monday, July 13, 2020

सीबीएसई के कोर्स से हटाए गए कई प्रैक्टिकल, 30 फीसदी तक की कटौती

सीबीएसई के कोर्स से हटाए गए कई प्रैक्टिकल, 30 फीसदी तक की कटौती

 
लखनऊ : बढ़ते संक्रमण को देखते हुए थ्योरी के अलावा सीबीएसई ने प्रैक्टिकल में 30 फीसद कमी की है। ऐसे में कक्षा नौ से 12 तक में विज्ञान विषय में कई प्रैक्टिकल हटाए गए हैं। 


कक्षा 12 में जीव विज्ञान में हटाए गए प्रयोग की सूची

’ दो अलग-अलग साइडों पर हवा में निलंबित कण पदार्थ की उपस्थिति का अध्ययन। 
’ क्वाड्रेट विधि द्वारा पौधे की जनसंख्या घनत्व का अध्ययन करना। 
’ क्वाड्रेट विधि द्वारा पौधे की जनसंख्या आवृत्ति का अध्ययन।

कक्षा 11 में जीव विज्ञान में हटाए गए प्रयोग की सूची

’ तने के टीएस का अध्ययन।
’ पोटैटो ओस्मोमीटर द्वारा ओसमोसिस का अध्ययन।
’ एपिडर्मल पील (लिली के पत्ते या प्याज के बल्ब के स्केल लीफ ) में प्लास्मोलिसिस का अध्ययन।
’ पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह में वाष्पोत्सर्जन की दरों का तुलनात्मक अध्ययन।
’ उपयुक्त पौधे और एनिमल में सुगर, स्टार्च, प्रोटीन और वसा की उपस्थिति के लिए परीक्षण करना।
’ यूरिन अर्थात मूत्र में यूरिया की उपस्थिति के लिए परीक्षण करना।
’ पौधों की कोशिकाओं के आकार ऊतक और विविधता का अस्थाई और स्थाई स्लाइड के द्वारा अध्ययन करना।
’ रूट स्टेम एवं रूट में विभिन्न मॉडिफिकेशन का अध्ययन करना ।
’ विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रम (सिमोस और रेसमोसे)।
’ मानव कंकाल और विभिन्न प्रकार के जोड़ों को केवल आभासी छवियों व मॉडल की मदद से अध्ययन करना।

कक्षा 12 में बायोटेक्नोलॉजी में हटाए गए प्रयोगों की सूची

’ जीनोमिक डीएनए का सीटैब विधि से अलगाव। ’ 
किसी भी प्लास्मिड का उपयोग करके जीवाणु परिवर्तन। ’ 
प्लास्मिड डीएनए का और जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा इसका विश्लेषण

इनका होगा अध्ययन

’ परमानेंट स्लाइड या स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ के माध्यम से स्टिग्मा पर पराग कण अर्थात का अंकुरण।
’ किसी भी पौधे के विभिन्न रंगों व आकारों के बीजों का उपयोग करके वंशानुक्रम का अध्ययन

कक्षा 11 में बायोटेक्नोलॉजी में हटाए गए प्रयोगों की सूची

प्रयोगशाला में व्यावहारिक परिणाम और सुरक्षा नियमों की रिकॉर्डिग’ 
बैक्टीरियल ग्रोथ कर्वे का निर्धारण ’ 
दूध प्रोटीन का अलगाव ’ 
माइटोसिस के विभिन्न चरणों का अध्ययन और माइटोटिक इंडेक्स की गणना ’ 
कायरेटाइप की तैयारी

Sunday, July 12, 2020

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक कालेजों में पाठ्यक्रम घटाया जाना है। बोर्ड प्रशासन पाठ्यक्रम सिर्फ इसी वर्ष के लिए कम करेगा, अगले वर्षो में तय पाठ की पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई यह एलान कर चुका है, जबकि बोर्ड के प्रस्ताव पर शासन से अनुमोदन का इंतजार किया जा रहा है। विभाग कोरोना संक्रमण का प्रभाव पठन-पाठन पर कब तक पड़ेगा इसका अनुमान लगा रहा है इसीलिए आदेश देने में विलंब हो रहा है।


शैक्षिक सत्र अप्रैल से ही शुरू है। प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक कालेजों के लिए हर वर्ष का शैक्षिक पंचांग जारी होता है, इसमें किस माह में कितनी पढ़ाई होती है इसका जिक्र रहता है। जुलाई आधा बीत रहा है और अब तक कालेजों को संचालित करने के हालात नहीं है। हालांकि बोर्ड प्रशासन हाईस्कूल व इंटर के अभ्यर्थियों से परीक्षा फार्म भरा रहा है और कक्षा नौ व 11 में पंजीकरण करा शुरू करा चुका है। इससे भी पढ़ाई नहीं हो रही है, यह जरूर है कि ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्रओं को पढ़ाने का दावा किया जा रहा है ऐसे छात्रों की संख्या बहुत कम है। यूपी बोर्ड ने पहले 2020 का परिणाम जारी किया और फिर पाठ्यक्रम घटाने का प्रस्ताव तैयार किया। इसमें शासन को अलग-अलग सुझाव दिया गया है। 



आसार हैं कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम करने का एलान करेगा और यह कटौती सिर्फ इसी वर्ष के लिए होगी। शासन प्रस्ताव का अनुमोदन करके पाठ्यक्रम घटाने का एलान कभी भी कर सकता है। यह भी संकेत है कि कंपार्टमेंट परीक्षा और पाठ्यक्रम की घोषणा एक साथ कर दी जाए। ज्ञात हो कि हाईस्कूल व इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि उन्हें शासन के आदेश का इंतजार है।

Friday, July 10, 2020

सीबीएसई की तर्ज पर करीब 30 फीसदी घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, 27,342 कॉलेजों के पठन-पाठन पर पड़ेगा असर, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार

महीने के हिसाब से कोर्स कम करेगा यूपी बोर्ड।

प्रयागराज :: सीबीएसई के बाद यूपी बोर्ड भी 2020-21 सत्र के लिए कोर्स कम करने जा रहा है। कोरोना के कारण मार्च से ही स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बाधित है। इसे देखते हुए यूपी बोर्ड के विषय विशेषज्ञों से कोर्स कम करने का प्रस्ताव तैयार कराया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जुलाई महीने में यदि नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं तो कक्षा 9 से 12 तक के पूरे पाठ्यक्रम का 10 प्रतिशत गुस्सा कम किया जाएगा। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे। इसी प्रकार अगस्त में पढ़ाई बाधित होने पर 20 फीसदी और सितंबर तक कक्षाएं चालू नहीं होने पर 30 प्रतिशत कोर्स कम किया जाएगा। बोर्ड ने इसी फॉर्मूले के आधार पर विषय विशेषज्ञों की कमेटी से हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक, विज्ञान, भूगोल, जीव विज्ञान, कला, गृह विज्ञान समेत पूरे कोर्स में कटौती करवाते हुए शासन को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है। संस्कृत शिक्षा बोर्ड भी कम करने जा रहा कोर्स प्रदेश के 1151 संस्कृत विद्यालयों में संचालित प्रथमा (कक्षा 6 से 8 तक), पूर्व मध्यमा (कक्षा 9 व 10) और उत्तर मध्यमा (कक्षा 11 व 12) के कोर्स कटौती भी होने जा रही है। 13 से 15 जुलाई तक संस्कृत शिक्षा बोर्ड लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे।


भेजा प्रस्ताव : कोरोना के कारण जुलाई महीने की पढ़ाई बाधित होने पर 10 प्रतिशत करेंगे कटौती

अगस्त के लिए 20 प्रतिशत, सितंबर तक नुकसान पर 30 प्रतिशत कमी का प्रस्ताव बोर्ड की ओर से शासन को भेजा गया है प्रस्ताव, विषय विशेषज्ञों से ली रिपोर्ट।

इस तरह होगी कटौती प्रयागराज उदाहरण के तौर पर जुलाई का नुकसान होने पर कक्षा 10 संस्कृत से तीन पाठ (10 प्रतिशत),अगस्तकी पढ़ाई प्रभावित होने की दशा में छह पाठ (20 प्रतिशत) और सितंबर तक पढ़ाई-लिखाई पटरी पर आने की स्थिति में नौ पाठ (30 प्रतिशत) कम किया जाएगा। 2020-21 सत्र की शुरुआत तो एक अप्रैल से ही हो चुकी है लेकिन यूपी बोर्ड जुलाई से सितंबर तक को आधार बनाकर कटौती करने के पक्ष में है।


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सीबीएसई की तर्ज पर घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार।

प्रयागराज : सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में पाठ्यक्रम घटने जा रहा है। इसका असर प्रदेशभर के 27,373 कालेजों की पढ़ाई पर पड़ेगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा नौ से 12वीं तक का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत कम किया है। यूपी बोर्ड जून माह में ही पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा चुका है, संकेत है कि शासन करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम घटने का एलान कभी भी कर सकता है। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने 30 जून को 'यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में घटेगा पाठ्यक्रम !' खबर प्रकाशित की थी। कोरोना संक्रमण के कारण अब तक स्कूल-कालेज नहीं खुलने से पढ़ाई बाधित है। जबकि शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से ही शुरू हो चुका है।





हालांकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम को अपनाया गया है। लेकिन, फिर भी उस गति से पढ़ाई नहीं हो सकी है। इसीलिए पाठ्यक्रम को कम करने की कवायद है। यूपी बोर्ड में कई विषयों में सीबीएसई का ही पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। बोर्ड ने शासन के निर्देश पर जून में ही शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की देखरेख में पाठ्यक्रम घटाने के लिए बैठक की थी। पाठ्यचर्या समिति (पाठ्यक्रम बनाने वाले) के सदस्यों व विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अहम विषयों में पाठ्यक्रम कम करने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा कक्षा नौ व ग्यारह का सिलेबस घटाने का प्रस्ताव है, जिसका करीब 20 व 30 फीसद कम करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब कभी भी शासन यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम सीबीएसई की तर्ज पर 30 प्रतिशत कम कर सकता है। उधर, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पाठ्यक्रम घटाने पर शासन ही अंतिम निर्णय करेगा, जो आदेश होगा उसका अनुपालन कराया जाएगा।


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Thursday, July 9, 2020

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12वीं के छात्र अब सरदार वल्लभ भाई पटेल का राष्ट्रवाद और दीन दयाल उपाध्याय के भारतीय धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ेंगे। दरअसल, पहली बार 12वीं के कोर्स करिकुलम में सरदार पटेल का नाम आया है। यह पहले कोर्स में नहीं था। सीबीएसई ने अपना 30 फीसद पाठ्यक्रम घटाया है लेकिन 11वीं के पाठ्यक्रम से राष्ट्रवाद, संघवाद, धर्म निरपेक्षता तथा नागरिकता को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 


इस बारे में सीबीएसई द्वारा बनाई गई कोर्स कमिटी ने निर्णय लिया था। इस कोर्स कमेटी के एक सदस्य का कहना है कोविड-19 से उपजी स्थिति को देखते हुए बस सत्र 2020-21 के लिए 30 फीसद तक कोर्स में कमी करनी थी। 11वीं के राजनीतिक सिद्धांत पुस्तक में से धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को इसलिए हटाया गया है क्योंकि इसे 10वीं में छात्रों ने समाज विज्ञान विषय में पढ़ा है। धर्म निरपेक्षता व राष्ट्रवाद एक पश्चिमी संकल्पना है।
 

12वीं के पाठ्यक्रम में कमेटी ने धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को भारतीय संदर्भ में पढ़ाने का पाठ्यक्रम बनाया है। वह भारतीय महापुरुषों और भारतीय समाज व परिप्रेक्ष्य के नजरिए से होगा। उन्होंने बताया कि 12वीं में राष्ट्रवाद सरदार वल्लभ भाई पटेल की दृष्टि से पढ़ाया जाएगा। भारतीय धर्म निरपेक्षता को दीन दयाल उपाध्याय के मानवतावाद तथा राम मनोहर लोहिया व जय प्रकाश नारायण के समाजवाद के संदर्भ में पढ़ाया जाएगा। कोर्स कमेटी ने इसमें जो भी संशोधन किए हैं उसे सम सामयिकता व भारतीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान मे रखकर किया है। 


भारत को विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा
कोर्स कमेटी के सदस्य ने बताया कि पहले पाठ्यक्रम में चीन को पढ़ाया जाता था लेकिन अब छात्र ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देश को पढ़ेंगे। भारत को उभरती हुई विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की महत्ता भी दर्शाई जाएगी। नई उभरती शक्तियों में खासकर भारत इजरायल के संबंध भी 12वीं के छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।


किस कक्षा से क्या पाठ्यक्रम हटा

● दसवीं : लोकतंत्र एवं विविधता, लिंग, जाति एवं धर्म, लोकप्रिय संघर्ष एवं आंदोलन और लोकतंत्र के लिए चुनौतियां जैसे विषय हटाए गए हैं।

● 11वीं : संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और भारत में स्थानीय सरकारों के विकास से संबंधित पाठ शामिल हैं। 

● 12वीं : छात्रों को भारत के अपने पड़ोसियों- पाकिस्तान, म्यामां, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ संबंध, भारत के आर्थिक विकास की बदलती प्रकृति, भारत में सामाजिक आंदोलन और नोटबंदी सहित अन्य विषय पर पाठों को नहीं पढ़ना होगा।


इसलिए घटाया गया पाठ्यक्रम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों का बोझ कम करने के लिए घटाया गया है, लेकिन मुख्य अवधारणाओं को जस का तस रखा गया है। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम भार में अनुपातिक कमी के लिए शिक्षण संबंधी समय के नुकसान का आकलन किया गया। इसके अनुसार, बोर्ड की पाठ्यक्रम समिति ने सिलेबस घटाने पर काम शुरू किया। विभिन्न पक्षधारकों से सुझाव मांगे गए थे।

Wednesday, July 8, 2020

सीबीएसई ने 9वीं से 12वीं का कोर्स 30% घटाया, कोरोना के उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय

सीबीएसई ने 9वीं से 12वीं का कोर्स 30% घटाया, कोरोना के उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय।

नई दिल्ली : कोरोना संकट के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं से लेकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कमी कर दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बाबत अभिभावकों, शिक्षकों से मशविरा लेने के बाद सीबीएसई को कोर्स कम करने का सुझाव दिया था। मंत्रालय की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि कोरोना के कारण स्कूल नहीं खुल पाने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ा है। इसमे मद्देनजर सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा नौ से 12 तक के पाठ्यक्रम को संशोधित किया है। इसके तहत मूल अवधारणा को बनाए रखते हुए कोर्स में 30 फीसदी तक कमी की गई है। घटाया गया पाठ्यक्रम बोर्ड परीक्षा या साल के अंत में होने वाले आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित विषयों का हिस्सा नहीं होगा। जो पाठ्यक्रम कम किया गया है, उसकी जानकारी शिक्षक छात्रों को प्रदान करेंगे।




निर्णय : कोरोना से उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय, स्कूल नहीं खुल पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित


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