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Friday, May 14, 2021

यूपी बोर्ड में हाईस्कूल व इंटर के विद्यार्थी ले सकेंगे NCC, शासन ने हाईस्कूल में छह विषयों को वैकल्पिक रूप में किया मान्य

यूपी बोर्ड में हाईस्कूल व इंटर के विद्यार्थी ले सकेंगे NCC

शासन ने हाईस्कूल में छह विषयों को वैकल्पिक रूप में किया मान्य



प्रयागराज : प्रदेश में यूपी बोर्ड से संबंद्ध 27 हजार माध्यमिक कालेजों में पढ़न वाले छात्र-छात्रओं के लिए खुशखबरी है। अब वे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में एनसीसी (राष्ट्रीय कैडेट कोर) की भी पढ़ाई कर सकेंगे। एनसीसी को वैकल्पिक विषय में शासन ने मान्य कर दिया गया है। ये विद्यार्थियों पर निर्भर है कि वे चाहें तो इस विषय की भी पढ़ाई कर सकते हैं। बोर्ड प्रशासन इसकी लिखित परीक्षा वर्ष 2023 से निरंतर कराएगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) में एनसीसी नया विषय नहीं है, बल्कि अभी तक इसकी पढ़ाई अतिरिक्त विषय के रूप में कराई जाती रही है। बोर्ड प्रशासन ने नौ फरवरी 2021 को एनसीसी को वैकल्पिक विषय के रूप में मान्य करने का प्रस्ताव भेजा था। शासन ने इस पर मंथन करने के बाद सात अप्रैल को आदेश कर दिया है। 


ऐसे में छात्र-छात्रएं इसी वर्ष से एनसीसी की हाईस्कूल व इंटर में वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ाई कर सकते हैं। असल में, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई में एनसीसी की पढ़ाई होती है, उसी तर्ज पर यूपी बोर्ड में पहले कोर्स तैयार किया गया और अब उसे वैकल्पिक विषय के रूप में मान्य किया गया है। इसकी लिखित परीक्षा 2023 से कराई जाएगी। वहीं, प्रायोगिक परीक्षा संबंधित बटालियन स्तर पर होगी।


हाईस्कूल में छह विषय वैकल्पिक : शासन ने हाईस्कूल में सिर्फ एनसीसी ही नहीं छह विषयों को वैकल्पिक रूप में मान्य किया है। इनमें प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, आपदा प्रबंधन, सोलर सिस्टम रिपेयर, मोबाइल रिपेयर व एनसीसी शामिल हैं। यानी अब इस कक्षा के छात्र-छात्रएं हंिदूी, अंग्रेजी, विज्ञान, गणित व सामाजिक विज्ञान के साथ छह विषयों में एक कोई भी विषय चुन सकते हैं। यह कदम छात्र-छात्रओं की एनसीसी के प्रति ललक जगाने के लिए उठाया गया है।

इंटर में मानविकी वर्ग वालों को मौका

इंटरमीडिएट में पढ़ने वाले विज्ञान व कामर्स वर्ग के छात्र-छात्रओं को एनसीसी पढ़ने का मौका नहीं मिलेगा। सिर्फ मानविकी यानी कला वर्ग के विद्यार्थी ही एनसीसी को वैकल्पिक विषय के रूप में चुन सकते हैं। इसके अलावा 17 अन्य विषय भी वैकल्पिक विषयों में शामिल हैं।

Saturday, May 8, 2021

हरियाणा में बड़ा फैसला : निजी स्कूलों में चलेंगी NCERT की किताबें।

हरियाणा :  NCERT से बाहर की किताबें नहीं पढ़ा सकेंगे निजी स्कूल, अभिभावकों को मिली बड़ी राहत

हरियाणा के निजी स्कूलों में चलेंगी एनसीईआरटी की किताबें। 


हरियाणा में सभी स्कूलों में पहली से बारहवीं कक्षा तक शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लगाने का निर्देश दिया गया है। राज्य के निजी स्कूल अब कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे।


चंडीगढ़। हरियाणा में निजी स्कूल संचालक अब राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) से बाहर की पुस्तकें नहीं पढ़ा सकेंगे। शिक्षा विभाग ने सभी निजी स्कूलों में अनिवार्य रूप से पहली से बारहवीं कक्षा तक एनसीईआरटी की किताबें लगाने के आदेश दिए हैं।


स्कूल निदेशक ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों और मौलिक शिक्षा अधिकारियों को लिखित आदेश जारी किए हैं। इससे निजी स्कूल मनमर्जी से निजी प्रकाशकों की पुस्तकों को बच्चों पर नहीं थोप पाएंगे। अभी तक अधिकतर निजी स्कूलों में कमीशनखोरी के चक्कर में निजी प्रकाशकों की पुस्तकें लगाई जा रहीं थी।


वर्ष 2016 से यह मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन चल रहा है। स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेश अध्यक्ष बृजपाल सिंह परमार ने बताया कि शिक्षा नियमावली 2003 में शिक्षा निदेशक को अधिकार नहीं था कि वह पाठ्यक्रम में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करें। प्रदेश सरकार ने विगत एक मार्च को नियमावली में संशोधन कर अब यह अधिकार शिक्षा निदेशक को दे दिया है।


हरियाणा में किसी भी बोर्ड से संबंद्धता रखने वाले सभी निजी स्कूलों में अब एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करनी होंगी। एनसीईआरटी की कक्षा पहली से बारहवीं तक की किताबें अमूमन 500 से 800 रुपये तक मिल जाती हैं, जबकि निजी स्कूलों में निजी प्रकाशकों की किताबें लगाकर बच्चों से छह हजार से आठ हजार रुपये तक वसूले जाते हैं। कई निजी प्रकाशकों द्वारा निजी स्कूल संचालकों को किताबों पर 70 फीसद तक कमीशन दिया जाता है, जिसकी मार अभिभावकों की जेब पर पड़ती है।

Monday, April 19, 2021

NCC को इलेक्टिव कोर्स के तौर पर जोड़ने के लिए UGC ने दिया विश्वविद्यालयो को निर्देश

NCC को इलेक्टिव कोर्स के तौर पर जोड़ने के लिए UGC ने दिया विश्वविद्यालयो को निर्देश


एनसीसी चुनने वाले छात्रों को ट्रेनिंग करने पर क्रमश: एनसीसी ‘बी’ और फिर एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा।
UGC Guidelines 2021 आयोग द्वारा वीरवार 15 अप्रैल 2021 को जारी नोटिस के अनुसार यूजीसी ने एनसीसी महानिदेशालय से प्राप्त अनुशंसा के आधार पर एनसीसी के जारी किये गये सिलेबस को 24 क्रेडिट के माध्यम से कुल 6 सेमेस्टर में छात्रों को कोर्स चुनने के दौरान उपलब्ध कराया जाएगा।


नई दिल्ली । UGC Guidelines 2021: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सभी भारतीय विश्वविद्यालयों को नेशनल कैडेट कॉर्प्स (एनसीसी) को जनरल इलेक्टिव क्रेडिट कोर्स (जीईसीसी) के तौर पर शामिल करने के निर्देश जारी किये हैं। आयोग द्वारा वीरवार, 15 अप्रैल 2021 को जारी नोटिस के अनुसार यूजीसी ने एनसीसी महानिदेशालय से प्राप्त अनुशंसा के आधार पर एनसीसी के जारी किये गये सिलेबस को 24 क्रेडिट के माध्यम से कुल 6 सेमेस्टर में छात्रों को कोर्स चुनने के दौरान उपलब्ध कराया जाएगा। 


इस कोर्स को चुनने वाले छात्रों को सफलता पूर्वक ट्रेनिंग करने पर क्रमश: एनसीसी ‘बी’ और फिर एनसीसी ‘सी’ सर्टिफिकेट जारी किया जाएगा। बता दें कि एनसीसी कर चुके उम्मीदवारों को उच्च शिक्षण संस्थानों में दाखिले के साथ-साथ रोजगार प्रोत्साहन के साथ-साथ केंद्र की और विभिन्न राज्यों की सरकारी नौकरियों में लाभ दिये जाते हैं। इन लाभ की राज्यवार सूची देखने के लिए नीचे दिये गये आधिकारिक नोटिस के लिंक पर जाएं।

Tuesday, April 13, 2021

कोरोना की न थमी रफ्तार तो स्कूली पाठ्यक्रम में फिर से की जा सकती है कटौती

कोरोना की न थमी रफ्तार तो स्कूली पाठ्यक्रम में फिर से की जा सकती है कटौती


नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण की रफ्तार यदि इस महीने के अंत तक नहीं थमी, तो स्कूलों के नौवीं से बारहवीं तक के पाठ्यक्रम में पिछले साल जैसी कटौती फिर हो सकती है। हालांकि अभी तक पूरा पाठ्यक्रम पढ़ाने की योजना है। बावजूद इसके कोरोना की रफ्तार पिछले हफ्ते से जिस तरह तेज हुई और स्कूल बंद होने का सिलसिला शुरू हुआ है, उसे देखते हुए इस मुद्दे पर गंभीरता से मंथन शुरू हो गया है।


शिक्षा मंत्रलय से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए छात्रों को आनलाइन पढ़ाने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। छात्रों को आनलाइन कितना पाठ्यक्रम पढ़ाया जा सकता है, इस पर भी मंथन हो रहा है। संक्रमण की स्थिति को देखते कोई भी फैसला इस महीने के अंत तक ही लिया जाएगा। इसके साथ ही सीबीएसई की बोर्ड परीक्षाएं इस बार तय समय पर ही कराने की योजना बनाई जा रही है। ताकि अगले साल इन परीक्षाओं को फरवरी और मार्च में कराया जा सके। फिलहाल इसे लेकर कोई भी फैसला आने वाले स्थिति के अनुसार लिया जाएगा।


इस बीच शिक्षा मंत्रलय के अधिकारियों ने एनसीईआरटी और सीबीएसई के साथ ही शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र से जुड़ी चुनौतियों लेकर चर्चा भी की है। साथ ही इन्हें पैनी नजर रखने को कहा है।

Sunday, April 11, 2021

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी की किताबों का संकट, नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं

यूपी बोर्ड : एनसीईआरटी की किताबों का संकट, नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं 


’>> ऑनलाइन भी नहीं कर सकेंगे अंग्रेजी की पढ़ाई

’>> कॉमर्स में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम, किताबों का संकट


प्रयागराज : कोरोना संक्रमण की वजह से भले ही अभी कालेज बंद हैं, लेकिन 9वीं व 11वीं से हाईस्कूल व इंटर में पहुंचे छात्र-छात्रएं अंग्रेजी की पढ़ाई फिलहाल ऑनलाइन भी नहीं कर पाएंगे। यही हाल कॉमर्स विषय का भी है, क्योंकि इस वर्ष नई किताबों के लिए प्रकाशकों को टेंडर नहीं दिया गया है और इन विषयों का पाठ्यक्रम बदल चुका है। बोर्ड प्रशासन का दावा है कि वह एनसीईआरटी से संपर्क करके किताबों का प्रबंध करने में जुटा है।



यूपी बोर्ड से संबद्ध 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में अंग्रेजी का पाठ्यक्रम बदल गया है। 9वीं व 11वीं की अंग्रेजी की किताबें बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन 10वीं व 12वीं की बदले पाठ्यक्रम की किताबें इस वर्ष प्रकाशित होनी थीं, लेकिन रायल्टी आदि के विवाद में प्रकाशन नहीं हो सका है। इसी तरह कॉमर्स (वाणिज्य) विषय में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम 11वीं कक्षा से लागू हुआ है। इस विषय की भी किताबों का टेंडर नहीं किया जा सका है। ऐसे में अभी ऑनलाइन पढ़ाई भी इन विषयों की नहीं हो पाएगी। बोर्ड प्रशासन का कहना है कि अंग्रेजी व कॉमर्स की किताबों का टेंडर नहीं हो सका है। किताबों का इंतजाम करने के लिए पत्रचार किया गया है।

Friday, April 9, 2021

इस वर्ष भी नहीं लागू होगा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, अगले आदेश तक रोका गया प्रशिक्षण कार्यक्रम

इस वर्ष भी नहीं लागू होगा एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, अगले आदेश तक रोका गया प्रशिक्षण कार्यक्रम


आजमगढ़। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में इस वर्ष भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) पाठ्यक्रम लागू नहीं हो सकेगा।


कोरोना संक्रमण व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के कारण विभागीय स्तर पर तैयारी नहीं हो पाई है। विभाग की माने तो अब इसे शैक्षिक सत्र 2022-23 से लागू किया जा सकता है। इससे पहले सत्र 2021- 22 से कक्षा एक में पाठ्यक्रम लागू करने की घोषणा की गई थी।


प्रदेश सरकार ने 2018 में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू करने को कहा था। इसके बाद 2019 और 2020 में भी इसे लागू नहीं किया जा सका । गत वर्ष शासन ने कहा था कि शैक्षिक सत्र 2021 22 से 2025 26 तक कक्षा एक से आठवीं तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

इधर बीच कोरोना संक्रमण भी तेजी से फैल रहा है । जिसके कारण प्रशिक्षण कार्यक्रम अगले आदेश तक स्थगित हो गया है। विभाग की माने तो इस वर्ष कक्षा एक में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू नहीं हो पाएगा। कारण कि अभी प्रशिक्षण शुरू हुआ था । ऐसे में उम्मीद कम है।


एनसीईआरटी का प्रशिक्षण अभी शुरू हुआ था। बढ़ते
कोरोना संक्रमण व त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के कारण अगले आदेश तक प्रशिक्षण स्थगित कर दिया गया है। जब तक प्रशिक्षण पूरा नहीं होगा तब तक एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू हो पाना संभवन नहीं है। ऐसे में अग्रिम आदेश का इंतजार किया जा रहा है। - अम्बरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

Sunday, April 4, 2021

CBSE Syllabus 2021-2022 : इस वर्ष 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए सिलेबस कम नहीं करेगा सीबीएसई

CBSE Syllabus 2021-2022 : इस वर्ष 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षा के लिए सिलेबस कम नहीं करेगा सीबीएसई



केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नए पाठ्यक्रम के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2021-22 के लिए नौवीं से 12वीं कक्षा तक के छात्रों के लिए सिलेबस में कमी नहीं करने का फैसला किया है। सीबीएसई ने पिछले साल कोविड-19 संकट के बीच छात्रों के सिलेबस के बोझ को कम करने के लिए शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए नौवीं से 12वीं कक्षा तक के कोर्स में 30 प्रतिशत तक की कमी की थी।


जिन छात्रों ने कम किए गए सिलेबस का अध्ययन किया, वे मई-जून में परीक्षा में शामिल होंगे।


सीबीएसई द्वारा जारी किए गए नए सिलेबस के अनुसार, पिछले शैक्षणिक वर्ष में जो अध्याय हटा दिए गए थे, उन्हें आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 के लिए आधिकारिक पाठ्यक्रम में वापस ला दिया गया है।

एक सीबीएसई अधिकारी ने कहा, 'बोर्ड ने यह पहले ही कह दिया था कि सिलेबस में कटौती केवल एक बार के लिए की जा रही है। उस वक्त ऑनलाइन पढ़ाई का तरीका पढ़ने और पढ़ाने दोनों तरह से नया था।'

पिछले वर्ष CISCE ने भी अपना सिलेबस 10वीं 12वीं के लिए 25 फीसदी घटाया था। अभी CISCE को सत्र 2021-2022 के लिए अपना सिलेबस जारी करना है।

Friday, April 2, 2021

यूपी : संस्कृत विद्यालयों में लागू होगा NCERT का पाठ्यक्रम, अंग्रेजी के साथ कम्प्यूटर शिक्षा भी होगी लागू

यूपी : संस्कृत विद्यालयों में लागू होगा NCERT का पाठ्यक्रम, अंग्रेजी के साथ कम्प्यूटर शिक्षा भी होगी लागू


प्रदेश में शैक्षिक सत्र 2021-22 से संस्कृत विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक में भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। वर्तमान में कक्षा 9 से 12 तक में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है। संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों को अंग्रेजी के साथ कम्प्यूटर की शिक्षा भी दी जाएगी।



प्रदेश सरकार के प्रवक्ता के अनुसार प्रदेश में अभी 1164 संस्कृत विद्यालय हैं। इनमें 97,500 से अधिक विद्यार्थी हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश पर बेसिक शिक्षा की तर्ज पर संस्कृत विद्यालयों में कक्षा 6 से 8 तक एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 72 जिलों के संस्कृत विद्यालयों में कम्प्यूटर लगाए जा चुके हैं। 


वहीं,  इस साल भी उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से प्रदेश के शेष विद्यालयों को कम्प्यूटर सुविधा उपलब्ध कराई गई है। कम्प्यूटर के साथ पुस्तकें, अलमारी और टेबल भी दिए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने 200 से अधिक गुरुकुल पद्धति के संस्कृत विद्यालयों के 4 हजार से अधिक छात्रों को निशुल्क भोजन व छात्रावास की सुविधा देने की भी घोषणा की है।

Thursday, April 1, 2021

सीबीएसई ने नौवीं से बारहवीं तक का पाठ्यक्रम किया जारी, सत्र 2021-22 में इस पाठ्यक्रम के अनुसार ही होगी पढ़ाई

सीबीएसई ने नौवीं से बारहवीं तक का पाठ्यक्रम किया जारी,  सत्र 2021-22 में इस पाठ्यक्रम के अनुसार ही होगी पढ़ाई


सीबीएसई ने सत्र 2021-22 के लिए 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं का पाठ्यक्रम किया जारी,  Direct Link से करें डाउनलोड



CBSE Syllabus 2021-2022 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ( सीबीएसई ) ने अकादमिक सत्र 2021-2022 के लिए 9वीं, 10वीं, 11वीं और 12वीं कक्षाओं का सिलेबस जारी कर दिया है। विद्यार्थी cbseacademic.nic.in पर जाकर सब्जेक्ट वाइज सिलेबस देख सकते हैं। सीबीएसई बोर्ड पहले ही स्कूलों को अप्रैल 2021 से नया सत्र शुरू करने के निर्देश दे चुका है। वर्ष 2022 की सीबीएसई परीक्षाओं में बैठने विद्यार्थी अब इस सिलेबस के हिसाब से तैयारी कर सकते हैं। सिलेबस के साथ-साथ मूल्यांकन दिशानिर्देश भी जारी किए गए हैं। 

सीबीएसई ने स्कूलों से कहा है कि वे 9वीं, 10वीं कक्षा के लिए कंपीटेंसी बेस्ड क्वेश्चन लागू करने के लिए एनसीईआरटी के नियमों को लागू करें। बोर्ड से कुछ ऐसे संसाधन भी उपलब्ध कराए हैं जिसके जरिए शिक्षक अध्यापन कार्य और बेहतर ढंग से कर पाएंगे। बोर्ड ने कहा है कि सिलेबस बच्चों को पढ़ाने से पहले शिक्षक खुद इसकी अच्छे से स्टडी कर लें। 





बोर्ड ने कहा है कि स्कूल के प्रमुख सिलेबस की शुरुआत में दिए गए महत्वपूर्ण टॉपिकों को लेकर शिक्षकों से चर्चा कर सकते हैं। स्कूल सभी शिक्षकों और बच्चों के साथ सिलेबस शेयर करें। सीबीएसई समय पर अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सैंपल क्वेश्चन पेपर जारी करेगा।


नई दिल्ली। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने स्कूलों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही नौवीं से बारहवीं (सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी) तक की कक्षाओं का पाठ्यक्रम जारी कर दिया है। शैक्षणिक सत्र 2021-22 में स्कूलों को इसी पाठ्यक्रम अनुसार पढ़ाना है। मूल्यांकन भी इसी पाठ्यक्रम के आधार पर होगा। नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क 2005 के अनुसार तैयार पाठ्यक्रम से विद्यार्थियों का शारीरिक, बौद्धिक व सामाजिक विकास संभव हो सकेगा।


सीबीएसई की ओर से प्रत्येक वर्ष सत्र की शुरुआत होने पर स्कूलों को पाठ्यक्रम जारी किया जाता है। जिससे सत्र के आरंभ से ही छात्रों को यह पता चल सके कि उन्हें पूरे वर्ष किस विषय में क्या पढ़ना है। बोर्ड ने स्कूलों को सलाह दी है कि वह एनसीईआरटी द्वारा निर्धारित किए गए लर्निंग आउटकम को अपनाएं जिससे नौवीं-दसवीं में योग्यता आधारित प्रश्नों को शामिल किया जाए।


नौवीं व दसवीं के पाठ्यक्रम में दो भाषा (एक भाषा अनिवार्य), सोशल साइंस, गणित, साइंस व अन्य कोई इलेक्टिव विषय (वैकल्पिक) जैसे हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, आर्ट एजुकेशन के आधार पर उनका मूल्यांकन होगा। स्कूल कंप्यूटर ऐप्लिकेशन, इंर्फोमेशन टेक्नोलॉजी, व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में से किसी एक विषय को ऑफर कर सकता है। इन विषयों के काम्बिनेशन की मंजूरी नहीं है।


ग्यारहवीं-बारहवीं के इस पाठ्यक्रम में नौ क्षेत्र ह्यूमेनिटीज एंड सोशल साइंस, लैंग्वेज, मैथमेटिक्स, बिजनेस एंड कॉमर्स आधारित इलेक्टिव, विजुअल एंड परफोर्मिंग एंड क्रिऐटिव आर्ट, स्किल इलेक्टिव, हेल्थ एंड फिजिकल एजुकेशन, सामान्य शिक्षा शामिल हैं। स्कूल व विद्यार्थी छात्र इस पाठ्यक्रम को सीबीएसई की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं।


बोर्ड की ओर से स्कूलों को कहा गया है कि वह इस पाठ्यक्रम के संबंध में शिक्षकों को सूचित करें। जिससे वह इसी के आधार पर अपना प्लान तैयार कर सकें। जल्द ही बोर्ड सैंपल पेपर व विस्तृत प्रश्न पेपर भी जारी करेगा। जिससे विद्यार्थियों को मूल्यांकन के संबंध में पूरी जानकारी मिल सके।


Tuesday, March 23, 2021

नए शैक्षिक सत्र में भी 70 फीसदी पाठ्यक्रम की पढ़ाई के आसार

नए शैक्षिक सत्र में भी 70 फीसदी पाठ्यक्रम की पढ़ाई के आसार


■ प्रदेश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए मंथन शुरू

■ बोर्ड परीक्षा के कारण अप्रैल व मई में कक्षाएं शुरू हो पाना मुश्किल


प्रयागराज : यूपी बोर्ड से संबद्ध माध्यमिक कालेजों में नए शैक्षिक सत्र में भी 70 फीसद पाठ्यक्रम की ही पढ़ाई के आसार हैं। चालू शैक्षिक सत्र में कक्षा नौ से 12 तक जो पाठ्यक्रम लागू है, उसे यथावत रखने पर मंथन चल रहा है। बोर्ड से शासन तक इस मुद्दे पर एकमत हुआ तो पाठ्यक्रम में कोई बदलाव नहीं होगा। इस संबंध में इसी माह निर्णय होने के आसार हैं। इस कदम से बोर्ड के लाखों छात्र-छात्रओं को भी सहूलियत मिल सकेगी।



माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के 27 हजार से अधिक माध्यमिक कालेजों में इस बार कुल पाठ्यक्रम का 70 फीसद ही ऑनलाइन व कक्षाओं में पढ़ाया गया। पाठ्यक्रम में 30 फीसद की कटौती कोरोना संक्रमण को देखते हुए की गई, क्योंकि लंबे समय तक कालेज खोले नहीं जा सके थे। अब एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र शुरू होना है, इसके पहले ही कोरोना संक्रमितों की संख्या में धीरे-धीरे उछाल आ रहा है। बोर्ड से लेकर शासन तक की इस पर नजर है। ऐसे हालात देखते हुए पाठ्यक्रम को यथावत रखा जा सकता है। पाठ्यक्रम कम रखने के लिए एक तर्क यह भी दिया जा रहा है कि भले ही सभी स्कूल एक अप्रैल से खुल जाएं, लेकिन यूपी बोर्ड की 2021 की परीक्षाएं अप्रैल व मई माह में प्रस्तावित हैं। परीक्षा के दौरान पढ़ाई प्रभावित होगी। इसके बाद शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में व्यस्त रहेंगे।

Saturday, March 6, 2021

12वीं कक्षा के इतिहास की किताब में मुगलों के महिमामंडन पर NCERT को लीगल नोटिस जारी

12वीं कक्षा के इतिहास की किताब में मुगलों के महिमामंडन  पर NCERT को लीगल नोटिस जारी


NCERT की 12वीं कक्षा की इतिहास की किताबों (Book) में मुगलों की तारीफ को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं. एक समाजसेवी ने लीगल नोटिस(Legal notice) भेजकर इन कथित तथ्यहीन बातों को हटाने की मांग की है.


एनसीआरटीई की 12वीं की इतिहास के किताब में औरंगजेब का महिमा मंडन करने पर बवाल हो रहा है.


जयपुर. एनसीईआरटी (NCERT) की 12वीं कक्षा की इतिहास की किताब में मुगल शासकों का महिमामंडन करने पर बवाल शुरू हो गया है. राजस्थान के एक समाजसेवी दपिंदर सिंह ने एनसीईआरटी (NCERT) को लीगल नोटिस भेजा है. इस नोटिस में मुगलों की तारीफ में लिखी गईं भ्रामक बातों को हटाने की मांग की गई है. दपिंदर ने इस संबंध में NCERT को एक RTI भी भेजी थी जिस पर संस्था की तरफ से संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दिया गया.


दपिंदर के मुताबिक NCERT की 12वीं की इतिहास की पुस्तक 'थीम्स इन इंडियन हिस्ट्री पार्टी- 2' के पेज नंबर 234 में पर लिखा है मुगल बादशाहों ने युद्ध के दौरान हिंदू मंदिरों को ढहा दिया था. इसमें आगे लिखा है कि युद्ध खत्म होने के बाद मुगल बादशाहों, शाहजहां और औरंगजेब ने मंदिरों को फिर से बनाने के लिए ग्रांट जारी की थी. दपिंदर ने इन तथ्यों को वेरीफाई करने के लिए एक RTI डालकर NCERT से जवाब मांगा था. हालांकि इस RTI के जवाब में हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रो. गौरी श्रीवास्तव और पब्लिक इन्फोर्मेंशन डिपार्टमेंट ने फाइलों में इससे संबंधित कोई भी सूचना न होने का जवाब भेज दिया है.


एनसीईआरटी को भेजा लीगल नोटिस
इसके बाद समाजसेवी दपिंदर सिंह और उनके साथी संजीव विकल ने दिल्ली हाईकोर्ट के वकील कनक चौधरी के जरिए NCERT को लीगल नोटिस भेजकर किताब से ये भ्रामक तथ्य हटाने की मांग की है. दपिंदर सिंह का कहना है कि ऐसा लग रहा है कि बिना किसी आधार पर मुगल शासकों शाहजहां और औरंगजेब के महिमा मंडन के लिए पैरा जोड़ा गया है. इतिहास में वही बाते लिखी जाती है, जिसके तथ्य आपके पास रिकॉर्ड में हो, जबकि यह अविश्वसनीय रूप से घातक साक्ष्य प्रतीत हो रहे हैं.


संजीव विकल ने कहा कि कल्पना के आधार पर छात्रों को इतिहास पढ़ाया जा रहा है, एनसीईआरटी की पुस्तकों को विद्यालयी शिक्षा के लिए बेंचमार्क माना जाता है, सिविल सेवा जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी इन पुस्तकों से तैयारी करने की सलाह एक्पर्ट्स द्वारा दी जाती रही है. हमारी भविष्य की पीढ़ी को गलत दिशा में धकेलने की कोशिश की जा रही है जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं।

Tuesday, February 23, 2021

स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला

स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला


प्रयागराज : कक्षा एक से आठ तक के स्कूल खोलने के निर्देश शासन की ओर से जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला चलती रहेगी। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देश दिया है कि कक्षा एवं विषयवार शैक्षिक सामग्री सप्ताह के प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा कर बच्चों को अभ्यास करने व प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रेरित किया जाए। दूरदर्शन के जरिए भी प्रसारण जारी रहेगा। विद्यार्थियों को जुड़े रहने के लिए भी कहा जाए।




बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि शासन की मंशा है कि बच्चों की पढ़ाई में कोई अवरोध न आए। हम सब भी इसके लिए प्रयासरत हैं। राज्य स्तर से प्रेषित शैक्षिक सामग्री के अतिरिक्त शिक्षक भी मासिक पंचांग के अनुसार शैक्षणिक सामग्री बच्चों को उपलब्ध कराएंगे। उसके अध्ययन के बाद बच्चों को उस अध्ययन सामग्री में पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर देना होगा। इसके लिए शिक्षक अपने स्तर से भी सवाल पूछ सकेंगे।

क्यूआर कोड स्कैन कर दीक्षा एप की पाठ्य सामग्री देख सकेंगे

दीक्षा एप डाउनलोड कर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एप पर उपलब्ध करीब 4000 आडियो विजुअल शिक्षण सामग्री को पाठ्य पुस्तक में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर पढ़ सकेंगे।

सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा की जाएगी कक्षा एक से आठ तक की शैक्षिक सामग्री

बच्चों को दी गई निश्शुल्क पुस्तक

पठन पाठन व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए निश्शुल्क पुस्तक व अभ्यास पुस्तिका बच्चों को बांटी जा चुकी है। उसके आधार पर ही दूरदर्शन से वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। अभिभावकों से कहा है कि बच्चों को अनिवार्य रूप से शैक्षणिक कार्यक्रम दिखाएं। शैक्षणिक सामग्री और वीडियो वाट्सएप ग्रुप पर पहले की तरह भेजते रहेंगे। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद भी जारी रखना है। बच्चों की प्रगति के बारे में भी समय समय पर रिपोर्ट देने की प्रक्रिया भी चलती रहेगी।

Thursday, February 18, 2021

सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण देने का निर्देश, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान फिर शुरू करेगा डिप्लोमा कोर्स

सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण देने का निर्देश, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान फिर शुरू करेगा डिप्लोमा कोर्स


अब सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षण आंग्लभाषा शिक्षण संस्थान प्रयागराज देगा । वहीं संस्थान का अंग्रेजी डिप्लोमा कोर्स भी फिर से शुरू होगा।ये निर्देश बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) डा सतीश द्विवेदी ने बुधवार को आयोजित बैठक में दिए।


उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में जो प्रशिक्षण शिक्षकों को दिया जाता है उसे सभी शिक्षकों को दिया जाए । बुधवार को हिन्दी संस्थान की बैठक में उन्होंने सभी संस्थाओं के कामों का प्रस्तुतिकरण देखा । डा द्विवेदी निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी बीआरसी व एआरपी को अपने कामों से परिचित करवाएं और यू ट्यूब से कार्यक्रम करें उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों से पुरानी व आप्रांसगिक जानकारी को हटाया जाए और नई पाठ्य सामग्री जोड़ी जाए।

Saturday, February 13, 2021

मुख्यमंत्री योगी ने परिषदीय स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और निरीक्षण के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी ने परिषदीय स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और निरीक्षण के दिए निर्देश


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने पाठ्यक्रमों में भारतीय परिवेश और संस्कृति, प्रदेश की जानकारी तथा प्रेरक कहानियों और महापुरुषों के जीवन प्रसंगों को भी शामिल करने के लिए कहा है। अपने आवास पर शुक्रवार शाम आयोजित बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा का स्तर उत्कृष्ट होने से माध्यमिक व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार होंगे।



मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा बच्चों में आधारभूत लर्निंग कौशल पर केंद्रित  कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों का संचालन कोविड-19 प्रोटोकॉल व एसओपी के अनुसार किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी समय समय पर बेसिक शिक्षा कार्यालयों का निरीक्षण करें। कार्यालयों में स्वच्छता सहित कार्य संस्कृति को बेहतर किए जाने के उपाय करें। उन्होंने बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों, स्कूल बैग, यूनिफार्म, स्वेटर, जूते-मोजे का वितरण गुणवत्ता के साथ समयबद्ध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं में वृद्धि के साथ फर्नीचर की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

Thursday, February 4, 2021

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड


यूपी के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अब चौरी-चौरा जनआक्रोश के शहीदों की वीरगाथाएं किताबों में पढ़ सकेंगे। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग चौरी चौरा की घटना को यूपी बोर्ड के पाठयक्रम में शामिल करने जा रहा है।  मुख्‍यमंत्री ने चौरी चौरा जनआक्रोश को शताब्‍दी समारोह के रूप में मनाए जाने के निर्देश दिए हैं।


इसी क्रम में पहले चरण में गोरखपुर मंडल के 400 से अधिक राजकीय व एडेड माध्‍यमिक विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इससे छात्र वहां के शहीदों की गाथाओं से रूबरू हो सकेंगे। 

गोरखपुर के चौरी चौरा में 4 फरवरी 1922 में आजादी के वीर जवानों ने अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ंत के बाद पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। इसमें 23 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। इस घटना को चौरी चौरा जनआक्रोश के रूप में जाना जाता है। शहीदों के इसी शौर्य की कहानी को अब पाठयक्रम का हिस्‍सा बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्र चौरी चौरा जनक्रांति में शहीद अपने वीरों के इतिहास से रूबरू हो सकेंगे।

गोरखपुर मंडल के छात्र करेंगे चौरी चौरा का भ्रमण

मुख्‍यमंत्री के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग छात्रों को न सिर्फ वीरों के इतिहास को पाठयक्रम के रूप में पढ़ाएगा बल्कि छात्रों को शहीदों के स्‍थल चौरी चौरा का भ्रमण भी कराएगा। 

पहले चरण में गोरखपुर मंडल के देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर व गोरखपुर के 87 राजकीय विद्यालयों, 333 अशासकीय सहायता प्राप्‍त विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा शहीद स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इसमें मंडल के निजी स्‍कूलों को भी शामिल किया जाएगा। 

छात्रों के बीच होंगी प्रतियोगिताएं

चौरी चौरा शताब्‍दी समारोह के दौरान प्रदेश के सभी माध्‍यमिक विद्यालयों में चार फरवरी 2021 से आगामी एक साल तक छात्र-छात्राओं के बीच निबंध, चित्रकला व पोस्टर, क्विज, स्लोगन, कविता लेखन व भाषण प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। इसके लिए पहले विद्यालय स्तर से शुरुआत होगी। फिर यह क्रम राज्य स्तर तक जारी रहेगा। तीन फरवरी 2022 को गोरखपुर में मंडल स्तरीय प्रतियोगिता कराई जाएगी।

Sunday, January 31, 2021

व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को व्यवसाय और स्वरोजगार में दक्ष बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम लागू किया जाएगा। शैक्षिक सत्र 2022-23 से कक्षा 9 से इसकी शुरुआत कर चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक लागू किया जाएगा। वर्ष 2024-25 तक माध्यमिक के 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस करते हुए बच्चों को प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पॉलीटेकिभनक सहित अन्य संस्थानों के प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। वहीं, बच्चों के लिए इंटर्नशिप और साल में दो से तीन बार कॅरिअर काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में राजकीय विद्यालयों के साथ उन माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले से व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और संसाधन उपलब्ध हैं।


जिला स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सत्र 2021-22 से सर्वे किया जाएगा। स्थानीय मांग और आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों में ट्रेड्स का निर्धारण किया जाएगा। ट्रेड्स का चयन सर्वे, रोजगार कार्यालय और स्थानीय इंडस्ट्री से प्राप्त सूचना का विश्लेषण करने के बाद किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सामान्य शिक्षा और सामान्य शैक्षिक संस्थानों में व्यावसायिक प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बच्चों में रोजगार के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता विकसित हो।


सेवाए निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकस
विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेकिभनक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक में व्यावसायिक शिक्षा में समाजोपयोगी उत्पादन कार्य, कार्यानुभव के प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को हस्तकौशल और कार्यानुभव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

Sunday, January 17, 2021

यूपी नए पाठ्यक्रमों पर उच्च शिक्षा परिषद ने सुझाव मांगे, स्नातक स्तर पर 70% समान पाठ्यक्रम की मंशा

यूपी नए पाठ्यक्रमों पर उच्च शिक्षा परिषद ने  सुझाव मांगे, स्नातक स्तर पर 70% समान पाट्यक्रम की मंशा


उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार तैयार पाठ्यक्रमों पर विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। अब तक 14 विषयों के पाठ्यक्रमों को परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। आनलाइन फीडबैक देने का प्रावधान भी है।


प्रदेश सरकार ने नया पाठ्यक्रम तैयार कराकर उसे लागू कराने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा परिषद को ही दी है। फिलहाल स्नातक कक्षाओं के पाठ्यक्रम तैयार कराए जा रहे हैं। इससे पहले प्रदेश के सभी राज्य विवि में  स्नातक स्तर पर 70 प्रतिशत समान पाठ्यक्रम लागू करने की पूरी तैयारी थी।  सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने अलग- अलग विषयों का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी  अलग-अलग विश्वविद्यालयों को सौंपी थी। पाठ्यक्रम भी तैयार करा लिया था। इस बीच नई शिक्षा नीति लागू हो जाने के कारण पाठ्यक्रम को उसके अनुसार संशोधित करने का फैसला किया गया। इस पर लोगों के सुझावलेकर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा।


स्नातक स्तर पर 70% समान पाट्यक्रम की मंशा

शासन की मंशा है कि राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर 70 प्रतिशत समान पाठ्यक्रम हो। राज्य विश्वविद्यालयों को छूट दी जाएगी कि वह चाहें तो शत-प्रतिशत पाठ्यक्रम अपना लें या अपने हिसाब से 30 प्रतिशत बदलाव कर लें। शासन की पहल पर ज्यादातर विश्वविद्यालय शत-प्रतिशत समान पाठ्यक्रम लागू करने पर सहमत थे। विश्वविद्यालयों को उनकी विशेषज्ञता एवं बेहतर फैकल्टी के आधार पर विषयों का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

Friday, January 15, 2021

हाईस्कूल पास भी कर सकेंगे प्राथमिक चिकित्सा में पढ़ाई

हाईस्कूल पास भी कर सकेंगे प्राथमिक चिकित्सा में पढ़ाई


लखनऊ : अब हाईस्कूल पास छात्र-छात्राएं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय लखनऊ से प्राथमिक चिकित्सा में सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई कर सकेंगे। इसमें थ्योरी के साथ-साथ एसजीपीजीआइ में प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा। इसमें एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को फ्री प्रवेश मिलेगा।


यह जानकारी गुरुवार को के इग्नू सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह ने दी। वह इग्नू की ओर से सड़क सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 'रोड सेफ्टी : अट टुडे, अलाईव टुमारो' विषय पर हुई कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि होमगार्ड विभाग के डिप्टी कमांडेंट रंजीत सिंह मौजूद रहे। 


इग्नू की निदेशक डॉ. मनोरमा सिंह ने बताया कि प्राथमिक चिकित्सा के नए कोर्स के माध्यम से विद्यार्थी सड़क दुघर्टना में प्राथमिक उपचार देने के तरीके सीख सकेंगे। एडीशनल डीसीपी पुर्नेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को यातायात के नियमों का पालन करने की सलाह दी। शिक्षाविद् आनंद शेखर, उप्र आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता मौजूद रहे।

यूपी बोर्ड के कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा गंगा संरक्षण का पाठ, नमामि गंगे विभाग की पहल पर हाईस्कूल व इंटर स्तर पर होगा विषय, बोर्ड ने पाठ्यक्रम समिति को भेजा प्रस्ताव, नए शैक्षिक सत्र से होगा लागू

यूपी बोर्ड के कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा गंगा संरक्षण का पाठ,  नमामि गंगे विभाग की पहल पर हाईस्कूल व इंटर स्तर पर होगा विषय, बोर्ड ने पाठ्यक्रम समिति को भेजा प्रस्ताव, नए शैक्षिक सत्र से होगा लागू

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) छात्र-छात्राओं को गंगा संरक्षण का पाठ भी पढ़ाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे विभाग की पहल पर इसे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर पर विषय में रूप में शामिल करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। इस पाठ्यक्रम को नए शैक्षिक सत्र में शामिल किया जाएगा।


असल में, गंगा संरक्षण व जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए जन सहभागिता जरूरी है। इसके लिए यूपी बोर्ड सबसे है। प्रदेश भर में उपयुक्त 27 हजार से अधिक संबद्ध माध्यमिक कालेजों में हर साल पचास लाख से अधिक छात्र-छात्राएं दाखिला लेते हैं। विद्यार्थियों के इस विषय की पढ़ाई और जुड़ाव का असर उनके अभिभावकों पर भी पड़ेगा। सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि गंगा संरक्षण और जल प्रदूषण की रोकथाम को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। यूपी बोर्ड ने इसे विचार के लिए विशेषज्ञों की पाठ्यक्रम समिति के पास भेजा है। समिति की मंजूरी मिलते ही इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। छात्र-छात्राएं सीखेंगे और करेंगे सैर : छात्र छात्राएं गंगा के पवित्र जल को प्रदूषित होने से बचाने के तरीके सीखेंगे और हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक गंगा की यात्रा भी कर सकेंगे। साथ ही गंगा स्वच्छता अभियान को युवाओं से जोड़ने और बच्चों के बीच निर्मल और अविरल गंगा की अवधारणा को फैलाने में मदद मिलेगी। इस पहल से न केवल बच्चों का ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि गंगा स्वच्छता को भी नई गति मिलेगी।

राज्य सरकार का ग्रामीण जलापूर्ति विभाग भी तत्पर नमामि गंगे और राज्य सरकार के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि स्कूलों में गंगा प्रदूषण से संबंधित नए पाठ्यक्रम और गतिविधियां लागू की जाएं और छात्रों के लिए गंगा स्वच्छता कार्यक्रम में हिस्सा लेना अनिवार्य भी बनाया जाए।

नए सत्र से लागू होगा पाठ्यक्रम

यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि नमामि गंगे विभाग से निर्देश मिला है और उसे पाठ्यक्रम समिति के पास भेजा गया है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से 30 फीसद पाठ्यक्रम घटा है, इसलिए अभी इसे जोड़ना संभव नहीं है । नए शैक्षिक सत्र में इस विषय की पढ़ाई सभी कालेजों में कराई जाएगी।

Saturday, January 9, 2021

बेसिक शिक्षा विभाग में पहली कक्षा के बच्चों को सबसे योग्य व अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे, मिलेगा प्रशिक्षण।


बेसिक शिक्षा विभाग में पहली कक्षा के बच्चों को सबसे योग्य व अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे, मिलेगा प्रशिक्षण।


लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कक्षा 1 के बच्चों को स्कूल के सबसे योग्य एवं अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने सभी डायट प्राचार्य को शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए हैं। परिषदीय स्कूलों में  अगले शैक्षिक सत्र से कक्षा 1 में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। 


परिषदीय स्कूलों के सबसे योग्य एवं अनुभवी शिक्षक को एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ब्लॉक संदर्भदाताओं को 10 जनवरी तक ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके बाद विकास खंड स्तर पर 25-25 शिक्षकों के बैच बनाकर 18 जनवरी से 31 मार्च तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच को छह-छह दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।