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Tuesday, February 23, 2021

स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला

स्कूल खुलने के बाद भी चलती रहेगी मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला


प्रयागराज : कक्षा एक से आठ तक के स्कूल खोलने के निर्देश शासन की ओर से जारी किए जा चुके हैं। बावजूद इसके मिशन प्रेरणा की ई-पाठशाला चलती रहेगी। अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार ने निर्देश दिया है कि कक्षा एवं विषयवार शैक्षिक सामग्री सप्ताह के प्रत्येक सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा कर बच्चों को अभ्यास करने व प्रश्नों का उत्तर देने के लिए प्रेरित किया जाए। दूरदर्शन के जरिए भी प्रसारण जारी रहेगा। विद्यार्थियों को जुड़े रहने के लिए भी कहा जाए।




बेसिक शिक्षाधिकारी संजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि शासन की मंशा है कि बच्चों की पढ़ाई में कोई अवरोध न आए। हम सब भी इसके लिए प्रयासरत हैं। राज्य स्तर से प्रेषित शैक्षिक सामग्री के अतिरिक्त शिक्षक भी मासिक पंचांग के अनुसार शैक्षणिक सामग्री बच्चों को उपलब्ध कराएंगे। उसके अध्ययन के बाद बच्चों को उस अध्ययन सामग्री में पूछे गए प्रश्नों का भी उत्तर देना होगा। इसके लिए शिक्षक अपने स्तर से भी सवाल पूछ सकेंगे।

क्यूआर कोड स्कैन कर दीक्षा एप की पाठ्य सामग्री देख सकेंगे

दीक्षा एप डाउनलोड कर बच्चों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। एप पर उपलब्ध करीब 4000 आडियो विजुअल शिक्षण सामग्री को पाठ्य पुस्तक में दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर पढ़ सकेंगे।

सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को वाट्सएप ग्रुप से साझा की जाएगी कक्षा एक से आठ तक की शैक्षिक सामग्री

बच्चों को दी गई निश्शुल्क पुस्तक

पठन पाठन व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए निश्शुल्क पुस्तक व अभ्यास पुस्तिका बच्चों को बांटी जा चुकी है। उसके आधार पर ही दूरदर्शन से वीडियो प्रसारित हो रहे हैं। अभिभावकों से कहा है कि बच्चों को अनिवार्य रूप से शैक्षणिक कार्यक्रम दिखाएं। शैक्षणिक सामग्री और वीडियो वाट्सएप ग्रुप पर पहले की तरह भेजते रहेंगे। शिक्षकों और अभिभावकों के बीच संवाद भी जारी रखना है। बच्चों की प्रगति के बारे में भी समय समय पर रिपोर्ट देने की प्रक्रिया भी चलती रहेगी।

Thursday, February 18, 2021

सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण देने का निर्देश, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान फिर शुरू करेगा डिप्लोमा कोर्स

सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण देने का निर्देश, आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान फिर शुरू करेगा डिप्लोमा कोर्स


अब सरकारी प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के सभी शिक्षकों को अंग्रेजी में पढ़ाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये प्रशिक्षण आंग्लभाषा शिक्षण संस्थान प्रयागराज देगा । वहीं संस्थान का अंग्रेजी डिप्लोमा कोर्स भी फिर से शुरू होगा।ये निर्देश बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार ) डा सतीश द्विवेदी ने बुधवार को आयोजित बैठक में दिए।


उन्होंने कहा कि अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में जो प्रशिक्षण शिक्षकों को दिया जाता है उसे सभी शिक्षकों को दिया जाए । बुधवार को हिन्दी संस्थान की बैठक में उन्होंने सभी संस्थाओं के कामों का प्रस्तुतिकरण देखा । डा द्विवेदी निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी बीआरसी व एआरपी को अपने कामों से परिचित करवाएं और यू ट्यूब से कार्यक्रम करें उन्होंने कहा कि पाठ्यपुस्तकों से पुरानी व आप्रांसगिक जानकारी को हटाया जाए और नई पाठ्य सामग्री जोड़ी जाए।

Saturday, February 13, 2021

मुख्यमंत्री योगी ने परिषदीय स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और निरीक्षण के दिए निर्देश

मुख्यमंत्री योगी ने परिषदीय स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और निरीक्षण के दिए निर्देश


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत शिक्षण व्यवस्था में सुधार और एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने पाठ्यक्रमों में भारतीय परिवेश और संस्कृति, प्रदेश की जानकारी तथा प्रेरक कहानियों और महापुरुषों के जीवन प्रसंगों को भी शामिल करने के लिए कहा है। अपने आवास पर शुक्रवार शाम आयोजित बेसिक शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि बेसिक शिक्षा का स्तर उत्कृष्ट होने से माध्यमिक व उच्च शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक सुधार होंगे।



मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार तथा बच्चों में आधारभूत लर्निंग कौशल पर केंद्रित  कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्कूलों का संचालन कोविड-19 प्रोटोकॉल व एसओपी के अनुसार किया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाग के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी समय समय पर बेसिक शिक्षा कार्यालयों का निरीक्षण करें। कार्यालयों में स्वच्छता सहित कार्य संस्कृति को बेहतर किए जाने के उपाय करें। उन्होंने बेसिक शिक्षा के विद्यालयों में निःशुल्क पाठ्यपुस्तकों, स्कूल बैग, यूनिफार्म, स्वेटर, जूते-मोजे का वितरण गुणवत्ता के साथ समयबद्ध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं में वृद्धि के साथ फर्नीचर की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए।

Thursday, February 4, 2021

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल होगा चौरी चौरा कांड


यूपी के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र अब चौरी-चौरा जनआक्रोश के शहीदों की वीरगाथाएं किताबों में पढ़ सकेंगे। मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग चौरी चौरा की घटना को यूपी बोर्ड के पाठयक्रम में शामिल करने जा रहा है।  मुख्‍यमंत्री ने चौरी चौरा जनआक्रोश को शताब्‍दी समारोह के रूप में मनाए जाने के निर्देश दिए हैं।


इसी क्रम में पहले चरण में गोरखपुर मंडल के 400 से अधिक राजकीय व एडेड माध्‍यमिक विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इससे छात्र वहां के शहीदों की गाथाओं से रूबरू हो सकेंगे। 

गोरखपुर के चौरी चौरा में 4 फरवरी 1922 में आजादी के वीर जवानों ने अंग्रेजी हुकूमत से भिड़ंत के बाद पुलिस चौकी में आग लगा दी थी। इसमें 23 पुलिस कर्मियों की मौत हो गई थी। इस घटना को चौरी चौरा जनआक्रोश के रूप में जाना जाता है। शहीदों के इसी शौर्य की कहानी को अब पाठयक्रम का हिस्‍सा बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के माध्‍यमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लाखों छात्र चौरी चौरा जनक्रांति में शहीद अपने वीरों के इतिहास से रूबरू हो सकेंगे।

गोरखपुर मंडल के छात्र करेंगे चौरी चौरा का भ्रमण

मुख्‍यमंत्री के निर्देश पर माध्‍यमिक शिक्षा विभाग छात्रों को न सिर्फ वीरों के इतिहास को पाठयक्रम के रूप में पढ़ाएगा बल्कि छात्रों को शहीदों के स्‍थल चौरी चौरा का भ्रमण भी कराएगा। 

पहले चरण में गोरखपुर मंडल के देवरिया, महाराजगंज, कुशीनगर व गोरखपुर के 87 राजकीय विद्यालयों, 333 अशासकीय सहायता प्राप्‍त विद्यालय के छात्रों को चौरी चौरा शहीद स्‍थल का भ्रमण कराया जाएगा। इसमें मंडल के निजी स्‍कूलों को भी शामिल किया जाएगा। 

छात्रों के बीच होंगी प्रतियोगिताएं

चौरी चौरा शताब्‍दी समारोह के दौरान प्रदेश के सभी माध्‍यमिक विद्यालयों में चार फरवरी 2021 से आगामी एक साल तक छात्र-छात्राओं के बीच निबंध, चित्रकला व पोस्टर, क्विज, स्लोगन, कविता लेखन व भाषण प्रतियोगिताएं भी कराई जाएंगी। इसके लिए पहले विद्यालय स्तर से शुरुआत होगी। फिर यह क्रम राज्य स्तर तक जारी रहेगा। तीन फरवरी 2022 को गोरखपुर में मंडल स्तरीय प्रतियोगिता कराई जाएगी।

Sunday, January 31, 2021

व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


व्यावसायिक रूप से दक्ष बनेंगे माध्यमिक के छात्र, पाठ्यक्रम होगा लागू, कक्षा नौ से शुरुआत


राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों के बच्चों को व्यवसाय और स्वरोजगार में दक्ष बनाने के लिए व्यावसायिक शिक्षा कार्यक्रम लागू किया जाएगा। शैक्षिक सत्र 2022-23 से कक्षा 9 से इसकी शुरुआत कर चरणबद्ध तरीके से कक्षा 12 तक लागू किया जाएगा। वर्ष 2024-25 तक माध्यमिक के 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस करते हुए बच्चों को प्रशिक्षण के लिए आईटीआई, पॉलीटेकिभनक सहित अन्य संस्थानों के प्रशिक्षक तैनात किए जाएंगे। वहीं, बच्चों के लिए इंटर्नशिप और साल में दो से तीन बार कॅरिअर काउंसिलिंग की भी व्यवस्था की जाएगी। पहले चरण में राजकीय विद्यालयों के साथ उन माध्यमिक विद्यालयों को शामिल किया जाएगा, जहां पहले से व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और संसाधन उपलब्ध हैं।


जिला स्तर पर विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ने के लिए सत्र 2021-22 से सर्वे किया जाएगा। स्थानीय मांग और आवश्यकता के अनुसार विद्यालयों में ट्रेड्स का निर्धारण किया जाएगा। ट्रेड्स का चयन सर्वे, रोजगार कार्यालय और स्थानीय इंडस्ट्री से प्राप्त सूचना का विश्लेषण करने के बाद किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा को व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों में सामान्य शिक्षा और सामान्य शैक्षिक संस्थानों में व्यावसायिक प्रशिक्षण का विकल्प उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि बच्चों में रोजगार के लिए आवश्यक न्यूनतम दक्षता विकसित हो।


सेवाए निर्माण और कृषि सेक्टर पर होगा फोकस
विद्यालयों में ट्रेड्स के निर्धारण में सेवा, निर्माण और कृषि सेक्टर पर फोकस किया जाएगा। जिन ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग नहीं हैं, वहां कृषि से संबंधित ट्रेड्स को प्रमुखता से लागू किया जाएगा। व्यावसायिक शिक्षा के लिए स्थानीय पॉलीटेकिभनक, आईटीआई, इंजीनियरिंग कॉलेज, किसान सेवा केंद्र, खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग, स्किल इंडिया मिशन, यूपी स्किल डेवलपमेंट मिशन के साथ चिकित्सा, पशुपालन, कृषि और फलोत्पादन विभाग का भी सहयोग लिया जाएगा।


व्यावसायिक शिक्षा को नए रूप में लागू करने के लिए विद्यार्थियों को भाषा की दक्षता, उद्यमिता का ज्ञान और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता की जानकारी भी दी जाएगी। विद्यार्थियों को हिंदी और अंग्रेजी भाषा के प्रयोग में दक्ष बनाया जाएगा। कक्षा 6 से 8 तक में व्यावसायिक शिक्षा में समाजोपयोगी उत्पादन कार्य, कार्यानुभव के प्रशिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों को हस्तकौशल और कार्यानुभव के प्रति जागरूक किया जाएगा।

Sunday, January 17, 2021

यूपी नए पाठ्यक्रमों पर उच्च शिक्षा परिषद ने सुझाव मांगे, स्नातक स्तर पर 70% समान पाठ्यक्रम की मंशा

यूपी नए पाठ्यक्रमों पर उच्च शिक्षा परिषद ने  सुझाव मांगे, स्नातक स्तर पर 70% समान पाट्यक्रम की मंशा


उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार तैयार पाठ्यक्रमों पर विशेषज्ञों से सुझाव मांगे हैं। अब तक 14 विषयों के पाठ्यक्रमों को परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जा चुका है। आनलाइन फीडबैक देने का प्रावधान भी है।


प्रदेश सरकार ने नया पाठ्यक्रम तैयार कराकर उसे लागू कराने की जिम्मेदारी उच्च शिक्षा परिषद को ही दी है। फिलहाल स्नातक कक्षाओं के पाठ्यक्रम तैयार कराए जा रहे हैं। इससे पहले प्रदेश के सभी राज्य विवि में  स्नातक स्तर पर 70 प्रतिशत समान पाठ्यक्रम लागू करने की पूरी तैयारी थी।  सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेन्द्र दुबे की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने अलग- अलग विषयों का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी  अलग-अलग विश्वविद्यालयों को सौंपी थी। पाठ्यक्रम भी तैयार करा लिया था। इस बीच नई शिक्षा नीति लागू हो जाने के कारण पाठ्यक्रम को उसके अनुसार संशोधित करने का फैसला किया गया। इस पर लोगों के सुझावलेकर उसे अंतिम रूप दिया जाएगा।


स्नातक स्तर पर 70% समान पाट्यक्रम की मंशा

शासन की मंशा है कि राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर 70 प्रतिशत समान पाठ्यक्रम हो। राज्य विश्वविद्यालयों को छूट दी जाएगी कि वह चाहें तो शत-प्रतिशत पाठ्यक्रम अपना लें या अपने हिसाब से 30 प्रतिशत बदलाव कर लें। शासन की पहल पर ज्यादातर विश्वविद्यालय शत-प्रतिशत समान पाठ्यक्रम लागू करने पर सहमत थे। विश्वविद्यालयों को उनकी विशेषज्ञता एवं बेहतर फैकल्टी के आधार पर विषयों का पाठ्यक्रम तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

Friday, January 15, 2021

हाईस्कूल पास भी कर सकेंगे प्राथमिक चिकित्सा में पढ़ाई

हाईस्कूल पास भी कर सकेंगे प्राथमिक चिकित्सा में पढ़ाई


लखनऊ : अब हाईस्कूल पास छात्र-छात्राएं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय लखनऊ से प्राथमिक चिकित्सा में सर्टिफिकेट कोर्स की पढ़ाई कर सकेंगे। इसमें थ्योरी के साथ-साथ एसजीपीजीआइ में प्रैक्टिकल भी कराया जाएगा। इसमें एससी-एसटी वर्ग के अभ्यर्थियों को फ्री प्रवेश मिलेगा।


यह जानकारी गुरुवार को के इग्नू सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ. कीर्ति विक्रम सिंह ने दी। वह इग्नू की ओर से सड़क सुरक्षा एवं जागरूकता कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। 'रोड सेफ्टी : अट टुडे, अलाईव टुमारो' विषय पर हुई कार्यशाला में बतौर मुख्य अतिथि होमगार्ड विभाग के डिप्टी कमांडेंट रंजीत सिंह मौजूद रहे। 


इग्नू की निदेशक डॉ. मनोरमा सिंह ने बताया कि प्राथमिक चिकित्सा के नए कोर्स के माध्यम से विद्यार्थी सड़क दुघर्टना में प्राथमिक उपचार देने के तरीके सीख सकेंगे। एडीशनल डीसीपी पुर्नेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को यातायात के नियमों का पालन करने की सलाह दी। शिक्षाविद् आनंद शेखर, उप्र आदर्श व्यापार मंडल के अध्यक्ष संजय गुप्ता मौजूद रहे।

यूपी बोर्ड के कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा गंगा संरक्षण का पाठ, नमामि गंगे विभाग की पहल पर हाईस्कूल व इंटर स्तर पर होगा विषय, बोर्ड ने पाठ्यक्रम समिति को भेजा प्रस्ताव, नए शैक्षिक सत्र से होगा लागू

यूपी बोर्ड के कॉलेजों में पढ़ाया जाएगा गंगा संरक्षण का पाठ,  नमामि गंगे विभाग की पहल पर हाईस्कूल व इंटर स्तर पर होगा विषय, बोर्ड ने पाठ्यक्रम समिति को भेजा प्रस्ताव, नए शैक्षिक सत्र से होगा लागू

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) छात्र-छात्राओं को गंगा संरक्षण का पाठ भी पढ़ाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट नमामि गंगे विभाग की पहल पर इसे हाईस्कूल व इंटरमीडिएट स्तर पर विषय में रूप में शामिल करने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। ऐसा करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य होगा। इस पाठ्यक्रम को नए शैक्षिक सत्र में शामिल किया जाएगा।


असल में, गंगा संरक्षण व जल प्रदूषण की रोकथाम के लिए जन सहभागिता जरूरी है। इसके लिए यूपी बोर्ड सबसे है। प्रदेश भर में उपयुक्त 27 हजार से अधिक संबद्ध माध्यमिक कालेजों में हर साल पचास लाख से अधिक छात्र-छात्राएं दाखिला लेते हैं। विद्यार्थियों के इस विषय की पढ़ाई और जुड़ाव का असर उनके अभिभावकों पर भी पड़ेगा। सरकार के प्रवक्ता का कहना है कि गंगा संरक्षण और जल प्रदूषण की रोकथाम को पाठ्यक्रम में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। यूपी बोर्ड ने इसे विचार के लिए विशेषज्ञों की पाठ्यक्रम समिति के पास भेजा है। समिति की मंजूरी मिलते ही इस विषय को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। छात्र-छात्राएं सीखेंगे और करेंगे सैर : छात्र छात्राएं गंगा के पवित्र जल को प्रदूषित होने से बचाने के तरीके सीखेंगे और हिमालय से बंगाल की खाड़ी तक गंगा की यात्रा भी कर सकेंगे। साथ ही गंगा स्वच्छता अभियान को युवाओं से जोड़ने और बच्चों के बीच निर्मल और अविरल गंगा की अवधारणा को फैलाने में मदद मिलेगी। इस पहल से न केवल बच्चों का ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि गंगा स्वच्छता को भी नई गति मिलेगी।

राज्य सरकार का ग्रामीण जलापूर्ति विभाग भी तत्पर नमामि गंगे और राज्य सरकार के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग ने माध्यमिक शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि स्कूलों में गंगा प्रदूषण से संबंधित नए पाठ्यक्रम और गतिविधियां लागू की जाएं और छात्रों के लिए गंगा स्वच्छता कार्यक्रम में हिस्सा लेना अनिवार्य भी बनाया जाए।

नए सत्र से लागू होगा पाठ्यक्रम

यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि नमामि गंगे विभाग से निर्देश मिला है और उसे पाठ्यक्रम समिति के पास भेजा गया है। इस वर्ष कोरोना संक्रमण की वजह से 30 फीसद पाठ्यक्रम घटा है, इसलिए अभी इसे जोड़ना संभव नहीं है । नए शैक्षिक सत्र में इस विषय की पढ़ाई सभी कालेजों में कराई जाएगी।

Saturday, January 9, 2021

बेसिक शिक्षा विभाग में पहली कक्षा के बच्चों को सबसे योग्य व अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे, मिलेगा प्रशिक्षण।


बेसिक शिक्षा विभाग में पहली कक्षा के बच्चों को सबसे योग्य व अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे, मिलेगा प्रशिक्षण।


लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में कक्षा 1 के बच्चों को स्कूल के सबसे योग्य एवं अनुभवी शिक्षक पढ़ाएंगे। स्कूल शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने सभी डायट प्राचार्य को शिक्षकों को प्रशिक्षण दिलाने के निर्देश दिए हैं। परिषदीय स्कूलों में  अगले शैक्षिक सत्र से कक्षा 1 में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। 


परिषदीय स्कूलों के सबसे योग्य एवं अनुभवी शिक्षक को एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। ब्लॉक संदर्भदाताओं को 10 जनवरी तक ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया जाएगा। उसके बाद विकास खंड स्तर पर 25-25 शिक्षकों के बैच बनाकर 18 जनवरी से 31 मार्च तक प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच को छह-छह दिन का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

Wednesday, January 6, 2021

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटन New Syllabus in Anganwadi Centers 2021

उत्तर प्रदेश में आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नया पाठ्यक्रम शुरू, राज्यपाल ने किया उद्घाटन
New Syllabus in Anganwadi Centers 2021


1.25 लाख आंगनबाड़ी केंद्रों में इस सत्र से शुरू होंगी प्री प्राइमरी कक्षाएं


आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए नए पाठ्यक्रम 'प्रारंभिक बाल्यावस्था, देखभाल और शिक्षा' का शुभारंभ सोमवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बीएचयू के विज्ञान संकाय सभागार में किया। तीन साल से छह साल तक के बच्चों के लिए तीन खंडों में बने इस पाठ्यक्रम को पॉयलट प्रोजेक्ट के तहत सेवापुरी ब्लाक के आंगनबाड़ी केंद्रों में शुरू किया जाएगा। यहां तीन से छह माह का शिक्षण देने के बाद इसे राज्य में लागू करने का प्रस्ताव राज्रू सरकार को दिया जाएगा। इसके बाद यह पाठ्यक्रम प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर संचालित होगा।


चार दिवसीय दौरे के पहले दिन राज्यपाल ने बीएचयू में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के तीन दिन के प्रशिक्षण कार्यक्रम में नए पाठ्यक्रम की पुस्तिका का भी विमोचन किया। यह विद्याभारती की ओर से तैयार किया गया है। इसमें बच्चों के लिए कविताएं, खेल के साथ मोरल साइंस समेत अन्य मनोरंजन विषयों को समावेश किया गया है। ताकि बच्चों को पढ़ने के प्रति लगाव हो सके। अभी तक आंगनबाड़ी केंद्र पर केवल पहल नाम की एक पुस्तिका से पढ़ाया जाता था।


बच्चों में शुरुआती शिक्षा सांस्कारित होनी चाहिए
राज्यपाल ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों से कहा कि नई शिक्षा नीति में बहुत बल है। इसमें चार वर्ष, चार से पांच व 5 से 6 वर्ष की शिक्षा आंगनबाड़ी केंद्र का भाग है। भारत का भविष्य बनाने के लिए नन्हे-मुन्नों को संस्कारित शिक्षा दी जानी चाहिए। बच्चे को 8 वर्ष तक जो सिखाया व पढ़ाया जाता है, उसका 80 फीसदी उनकी आदत में ढल जाती है। इसलिए प्रारंभिक शिक्षा अतिमहत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि आंगनवाड़ी में आने से पहले बच्चे अपने घर में देखी, सुनी हुई चीजों व व्यवहार को लेकर आंगनबाड़ी में आते हैं। इसलिए आंगनबाड़ी को बच्चे के अंदर की कमियों को दूर कर उसी के अनुरूप बात, व्यवहार, पढ़ाई, खेल आदि क्रियाकलाप करें।

Monday, January 4, 2021

सहूलियत : बोर्ड परीक्षाओं से पहले मदरसा परिषद कम करेगा 30 फीसद कोर्स

सहूलियत : बोर्ड परीक्षाओं से पहले मदरसा परिषद कम करेगा 30 फीसद कोर्स

उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड की ओर से संचालित मदरसों में कोरोना महामारी की वजह से कोर्स घटाने का निर्णय लिया गया है। मदरसा बोर्ड से पहले यूपी बोर्ड, सीबीएससी और आईसीएसई बोर्ड भी कोविड-19 की वजह से शैक्षिक सत्र 2020-21 के पाठ्यक्रम से 30 फीसद तक घटा चुके हैं। मदरसा बोर्ड की शैक्षिक सत्र 2020-21 की परीक्षाएं यूपी बोर्ड की परीक्षाओं के साथ ही होंगी। इसलिए मदरसा बोर्ड ने हायर सेकेण्ड्री, सीनियर सेकेण्ड्री के साथ ही कामिल और फाजिल के पाठ्यक्रम को 30 फीसद कम करने का निर्णय लिया है। कुछ महीनों बाद ही परीक्षाएं संभावित हैं। कोरोना के दौर में अन्य बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड में भी ऑनलाइन कक्षाएं संचालित की गई थीं। जिसके माध्यम से 60 से 70 फीसद तक पाठ्यक्रम पढ़ाया जा चुका है। अब मदरसा बोर्ड की तरफ से कोर्स कम करने की घोषणा कर दी गई है। जो मदरसा छात्र-छात्राओं के लिए राहत वाली खबर है। अब परीक्षाओं की तैयारी छात्र-छात्राओं को कम पाठ्यक्रम के साथ करनी होगी। परीक्षाओं के लिए प्रश्न पत्र भी कम कोर्स के साथ ही बनाए जाएंगे।


कौन से पाठ हटेंगे कौन से रहेंगे
यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई की ओर से काफी पहले ही न सिर्फ 30 प्रतिशत कोर्स कम करने की घोषणा कर दी गई थी। बल्कि कौन-कौन से पाठ हटाए जाएंगे ये भी साफ कर दिया गया। अब मदरसा बोर्ड ने वर्तमान शैक्षिक सत्र के लिए कोर्स कम करने की घोषणा की है लेकिन किस पाठ्यक्रम से कौन-कौन से पाठ हटाए जाएंगे ये निर्णय होना बाकी है। यह फैसला विषय विशेषज्ञों की स्क्रीनिंग कमेटी करेगी। कमेटी के निर्णय पर ही तय किया जाएगा कि मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम से किस-किस पाठ को हटाया जा सकता है।

कोरोना की वजह से लिया फैसला
मदरसा बोर्ड के रजिस्ट्रार आरपी सिंह ने कहा कि अन्य बोर्ड की तरह मदरसा बोर्ड ने भी 30 प्रतिशत कोर्स घटाने का निर्णय शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए लिया है। घटाए गए कोर्स के आधार पर ही परीक्षाएं होगी। कोरोना महामारी की वजह से ही यह निर्णय लिया है।

मदरसा बोर्ड से जुड़ी अहम बातें एक नजर में-
प्रदेश में अनुदानित मदरसों की संख्या- 558
प्रदेश में मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या-16500
वर्ष 2020 बोर्ड परीक्षा में शामिल परीक्षार्थियों की संख्या- 1,82,259
वर्ष-2020 में उत्तीर्ण छात्राओं की संख्या-55,457
वर्ष-2020 में उत्तीर्ण छात्रों की संख्या- 60,175

Tuesday, December 29, 2020

70 फीसद पाठ्यक्रम पर ही होगी हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा, जनवरी में घोषित हो सकता है परीक्षा का कार्यक्रम।

70 फीसद पाठ्यक्रम पर ही होगी हाईस्कूल व इंटर की परीक्षा, जनवरी में घोषित हो सकता है परीक्षा का कार्यक्रम।


प्रयागराज: यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा 2021 का कार्यक्रम भले ही जारी नहीं हुआ है, लेकिन यह तय है कि परीक्षा केवल 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम पर ही होगी। बोर्ड की ओर से कई माह पहले ही पाठ्यक्रम कम करके वेबसाइट पर अपलोड किया गया था, उसके बाद चर्चा तेज थी कि पाठ्यक्रम में और कटौती हो सकती है।


बोर्ड सचिव ने उसे सिरे से खारिज किया है। संकेत है कि जनवरी के पहले पखवाड़े में परीक्षा की तारीखें घोषित हो सकती हैं। बोर्ड की ओर से कोरोना को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा-9, 10, 11 व 12 के सभी विषयों के पाठ्यक्रम में 30 प्रतिशत की कटौती की गई थी। 


बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि पाठ्यक्रम संबंधी विवरण समस्त विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को जिला विद्यालय निरीक्षकों के माध्यम से उपलब्ध कराए जा चुके हैं। संक्षिप्त पाठ्यक्रम परिषद की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है। 2021 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की परीक्षा 70 फीसद पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। वेबसाइट पर मॉडल पेपर अपलोड नहीं किए गए हैं। क्योंकि कम पाठ्यक्रम से वही प्रश्न परीक्षा में पूछे जाने का खतरा है। यूपी बोर्ड ने कोरोना संक्रमण को देखते हुए कम किया है पाठ्यक्रम, 

Thursday, December 3, 2020

यूपी बोर्ड परीक्षा-2021 के पाठ्यक्रम में फिर होगी कटौती, 10 से 15 प्रतिशत कम करने पर चल रहा विचार।

यूपी बोर्ड परीक्षा-2021 के पाठ्यक्रम में फिर होगी कटौती, 10 से 15 प्रतिशत कम करने पर चल रहा विचार।


10 से 15 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम करने पर चल रहा विचार

कोरोना के चलते जुलाई में भी 30 प्रतिशत की हुई थी कटौती

मार्च से अप्रैल के बीच परीक्षा

डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि बोर्ड परीक्षा-2021 मार्च से अप्रैल के बीच कराई जाएगी। परीक्षा काकार्यक्रम इसी महीने घोषित किया जाएगा।

लखनऊ : माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा-2021 का पाठ्यक्रम एक बार फिर 10 से 15 प्रतिशत तक कम किया जाएगा। इसको लेकर शासन स्तर पर मंथन चल रहा है बोर्ड परीक्षा में 45 लाख से अधिक विद्यार्थी बैठेंगे।


कोरोना संक्रमण के कारण राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों में करीब सात महीने पठन-पाठन बंद रहा। 19 अक्तूबर से शिक्षण कार्य शुरू होने के बाद भी कक्षाएं पूर्व की भांति नहीं चल रही हैं। हालांकि विभाग ने जुलाई में परीक्षा का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत कम किया था, लेकिन ऑनलाइन क्लास तक हर बच्चे की पहुंच नहीं होने से एक बार फिर पाठ्यक्रम कम किया जाएगा सूत्रों के मुताबिक परीक्षा की तारीख व पाठ्यक्रम पर विभाग की नजर सीबीएसई के निर्णय पर है। इसके बाद ही यूपी की परिस्थितियों के अनुरूप अंतिम निर्णय किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा का कहना है कि पाठ्यक्रम कम करने पर जल्द निर्णय लिया जाएगा।

Sunday, November 1, 2020

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम।

 
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद मदरसों में ऑनलाइन परीक्षाएं करा सकता है। इसकी शुरुआत गृह परीक्षाओं से होगी। यह परीक्षाएं नवंबर व दिसंबर में आयोजित की जाएंगी। मदरसा बोर्ड वर्तमान शैक्षिक सत्र में सिलेबस भी कम करने जा रहा है। इसके लिए जल्द ही मदरसा शिक्षा परिषद की बैठक होने जा रही है। इसमें मदरसों के ऑनलाइन फॉर्म भरने की तिथि से लेकर परीक्षा कार्यक्रम, सिलेबस व परीक्षाओं के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।




कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश के मदरसे भी पिछले छह महीने से बंद चल रहे थे। वर्तमान में मदरसे भले ही खुल गए हों, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इनमें छात्र-छात्रओं की उपस्थिति बहुत कम है। अभिभावक अपने बच्चों को मदरसों में नहीं भेज रहे हैं। मदरसा बोर्ड के सामने सबसे पहले गृह परीक्षाएं आयोजित कराना बड़ी चुनौती है। गृह परीक्षा मदरसा प्रबंधक कराते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में परीक्षा का मॉडल बोर्ड को तय करना है।


इसलिए बोर्ड ऑनलाइन परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि बोर्ड के सामने चुनौती मदरसों में इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की भी है। साथ ही मदरसों में निम्न वर्ग के बच्चे आते हैं। इनकी ऑनलाइन परीक्षा किस तरह से कराई जाए, इस पर भी मंथन चल रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि कितने बच्चों के घरों में मोबाइल फोन की उपलब्धता है। मदरसा बोर्ड छोटे बच्चों की टेलीफोनिक परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। इसमें टेलीफोन के जरिए बच्चों से कुछ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसी आधार पर बच्चों को परीक्षा में अंक दिए जाएंगे। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मदरसा बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। यह बैठक नवंबर के पहले पखवाड़े में प्रस्तावित है।

Friday, October 30, 2020

सभी बोर्डों ने परीक्षा की तैयारी के लिए दिया अतिरिक्त समय, पाठ्यक्रम भी किया गया कम।

सभी बोर्डों ने परीक्षा की तैयारी के लिए दिया अतिरिक्त समय, पाठ्यक्रम भी किया गया कम।

इस बार सभी बोर्डों के छात्रों को हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम एक महीना अतिरिक्त समय मिलेगा। यूपी बोर्ड ने तो बहुत पहले ही फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा कराने का निर्णय ले लिया था। वहीं, सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की परीक्षा भी इस बार फरवरी के बजाय मार्च में होने की संभावना है।


सीबीएसई ने इसके लिए सभी स्कूलों से सुझाव भी मांगे हैं। कोरोना के चलते स्कूली शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित है। अब सरकार कक्षा 10 व 12 के छात्रों की स्कूली शिक्षा को पटरी पर लाने की कवायद कर रही है। पाठ्यक्रम भी 30 प्रतिशत तक कम किया गया है। सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के पेपर पैटर्न में भी बदलाव किया है।

अब बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को तैयारी के लिए कम से कम एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रयास किया जा रहा है। यूपी बोर्ड के बाद सीबीएसई ने भी फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूलों के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं। स्कूलों के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक में बोर्ड के सिलेबस, परीक्षा की तैयारी को लेकर चर्चा की गई थी। 

गृह परीक्षाएं भी खिसकेंगी 

सीबीएसई स्कूलों के संगठन की सदस्य व वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्य ऋचा खन्ना ने बताया कि स्कूलों के प्रतिनिधियों की बैठक में सभी ने बोर्ड परीक्षा को लेकर सुझाव दिए। सभी स्कूलों ने कम से कम एक महीना अतिरिक्त समय मांगा है। ऑनलाइन कक्षाओं से अधिकतर सिलेबस तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन प्रैक्टिकल बाकी हैं।

ऐसे में सुझाव दिया गया है कि वे प्रैक्टिकल की परीक्षा एक महीने बाद लें। आमतौर पर प्रैक्टिकल परीक्षा 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच होती है, लेकिन इस बार स्कूलों ने इसे एक महीना टालने की मांग की है। ताकि छात्रों को छोटे-छोटे समूह में बुलाकर प्रैक्टिकल कराया जा सके। ऐसे में जनवरी में होने वाली प्री बोर्ड परीक्षा भी एक महीना बाद होगी। ऐसी स्थिति में संभावना है कि बोर्ड परीक्षा फरवरी के बजाय मार्च में होगी। 

स्कूलों के मुताबिक इस बार गृह परीक्षाएं भी एक महीने तक खिसक जाएंगी। आमतौर पर स्कूलों को मार्च तक गृह परीक्षाएं संपन्न कराकर परीक्षा परिणाम जारी करने का आदेश होता है, ताकि एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र चालू कर सकें। लेकिन इस बार स्कूलों को गृह परीक्षा कराने की छूट दी जाएगी। सेंट जोसेफ कॉलेज के एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि इस बार गृह परीक्षाएं निर्धारित समय से एक महीने बाद कराई जा सकती हैं। बोर्ड से इसकी अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसी तैयारी है कि बोर्ड परीक्षा इस बार फरवरी के बजाय मार्च में होगी। वहीं गृह परीक्षाएं भी बाद में कराई जाएंगी ताकि स्कूलों पर बोर्ड परीक्षा के दौरान ही गृह परीक्षा कराने का बोझ ना हो। 

महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा महिला सशक्तीकरण

महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा महिला सशक्तीकरण

 
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रदेश सरकार कई नए कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में महिला सशकक्‍्तीकरण को विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसके लिए विचार करने के निर्देश दिए हैं। 


महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार मुहैया कराने की जिम्मेदारी कौशल विकास विभाग को दी है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने गुरुवार को मिशन शक्ति अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलम्बन के लिए विशेष अभियान 'मिशन शक्ति” का प्रथम चरण 25 अक्तूबर को सम्पन्न हो चुका है। द्वितीय चरण का माइक्रो प्लान तैयार कर विभाग अपनी कार्ययोजना 30 अक्तूबर तक गृह विभाग को सौंपदें। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं तथा अध्यापिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण और शारीरिक / मानसिक यौन शोषण के विषय में विधिक के प्रति भी जागरूक किया जाए।



30 लाख अभिभावकों को जागरूक किया 
समग्र शिक्षा अभियान के तहत 34 लाख छात्राओं ने मिशन शक्ति में सहभागिता दर्ज कराई। डेढ़ लाख हाट्सएप ग्रुप के जरिए 30 लाख अभिभावकों को जोड़ा गया। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ 6 लाख से ज्यादा बच्चों को cal कर जागरूक किया गया। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चन्द्र इस दौरान 5.50 लाख बेसिक शिक्षकों के जरिए इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी ! मिशन शक्ति का पहला चरण 17 से 25 अक्टूबर तक चलाया गया। इन कार्यक्रमों में रिकार्ड संख्या में छात्राओं व महिलाओं ने सहभागिता दर्ज की ।

Thursday, October 29, 2020

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लिए न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। 


प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित है। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित समिति में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके. तनेजा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को सदस्य बनाया है। प्रत्येक संकाय के लिए पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी भी गठित की गई है। 

Wednesday, October 28, 2020

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

लखनऊ : नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम करने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति व यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक किया जाएगा। इसकी अध्यक्ष विभागीय अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग होंगी। वहीं हर संकाय के लिए भी सुपरवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है।


यह कमेटी प्रो. सुरेन्द्र दुबे द्वारा संस्तुत किए गए विषयों के पाठ्यक्रमों को नवम्बर 2020 तक पुर्नसंयोजित करेगी। अन्य विषयों के पाठ्यक्रम 15 जनवरी 2021 तक तैयार किए जाने हैं।


राज्य स्तरीय समिति में लखनऊ विवि की भौतिक विज्ञान की विभागाध्याक्ष प्रो. पूनम टण्डन, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के सांख्यिकी विभाग के प्रो हरेकृष्ण, मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बादलपुर के एसो. प्रोफेसर दिनेश चन्द्र शर्मा सदस्य होंगे। ये कमेटी पाठ्यक्रम समयबद्ध रूप से तैयार हो, इसके लिए प्रभावी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए भी कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटयां हर विषय का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन करेगी और उसकी मॉनिटरिंग करते हुए समयसीमा तक पाठ्यक्रम तैयार करवाएगी।

Saturday, October 24, 2020

उच्च शिक्षा : अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त

अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त।

राज्य मुख्यालय : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 में यह इस पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। ‌यह जानकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम एक वर्ष की अवधि का है, जबकि पीएचडी पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवधि का है। 

एमफिल के लिए एपीआई स्कोर 5 से 7 प्वाइंट का है, जबकि पीएचडी का एपीआई स्कोर 25-30 प्वाइंट का है। नई शिक्षा नीति के तहत की गई संस्तुति के संबंध में शासन ने एमफिल पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने के बारे में प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों से अभिमत मांगा था। लखनऊ विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी एवं महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की संस्तुतियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया।

Wednesday, October 21, 2020

CBSE 10th & 12th Board Exams 2021 : सीबीएसई ने 10वीं और12वीं में 50 फीसदी पाठ्यक्रम में नहीं की कटौती

CBSE 10th & 12th Board Exams 2021: सीबीएसई ने 10वीं और12वीं में 50 फीसदी सिलेबस में नहीं की कटौती, पढ़ें डिटेल।


CBSE 10th & 12th Board Exams 2021: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए 10वीं और 12वीं की कक्षाओं में सिलेबस को पचास फीसदी तक कम नहीं किया है। इसके साथ ही इस संबंध में अभी तक कोई निर्णय भी नहीं लिया गया है। यह जानकारी सीबीएसई के मीडिया प्रभारी रमा शर्मा ने दी है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि हालांकि सीबीएसई कोर्स कम करने के संबंध में अपने सभी संबद्ध स्कूलों से राय मांग रहा है। लेकिन फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं बता दें कि देश भर में फैली महामारी कोरोना वायरस की वजह से पहले ही सिलेबस में पहले ही 30% की कमी की जा चुकी है।


30 फीसदी कोर्स कम करने का फैसला सीबीएसई बोर्ड ने हाल ही में लिया था। दरअसल मार्च से स्कूल-कॉलेज बंद चल रहे हैं। इसकी वजह से पढ़ाई का बेहद नुकसान हुआ है। हालांकि इसकी भरपाई के लिए बोर्ड ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं। लेकिन इंटरनेट की उपलब्धता, पर्याप्त नेटवर्क सहित कई बुनियादी समस्याओं को समझते हुए बोर्ड ने कोर्स में कटौती करने का फैसला किया था। बोर्ड ने इसके साथ ही यह स्पष्ट किया था कि सिलेबस में कमी का यह फैसला केवल इस साल यानी कि कोरोना काल के लिए ही लागू होता है। वहीं दूसरी तरफ स्टूडेंट्स सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2021 फरवरी से शुरू हो सकती है।