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Sunday, November 1, 2020

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम

तैयारी : मदरसों में भी हो सकती हैं ऑनलाइन परीक्षाएं, गृह परीक्षाओं को लेकर शुरू हो गई कवायद, कम होगा पाठ्यक्रम।

 
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद मदरसों में ऑनलाइन परीक्षाएं करा सकता है। इसकी शुरुआत गृह परीक्षाओं से होगी। यह परीक्षाएं नवंबर व दिसंबर में आयोजित की जाएंगी। मदरसा बोर्ड वर्तमान शैक्षिक सत्र में सिलेबस भी कम करने जा रहा है। इसके लिए जल्द ही मदरसा शिक्षा परिषद की बैठक होने जा रही है। इसमें मदरसों के ऑनलाइन फॉर्म भरने की तिथि से लेकर परीक्षा कार्यक्रम, सिलेबस व परीक्षाओं के स्वरूप को अंतिम रूप दिया जाएगा।




कोरोना संक्रमण के कारण प्रदेश के मदरसे भी पिछले छह महीने से बंद चल रहे थे। वर्तमान में मदरसे भले ही खुल गए हों, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इनमें छात्र-छात्रओं की उपस्थिति बहुत कम है। अभिभावक अपने बच्चों को मदरसों में नहीं भेज रहे हैं। मदरसा बोर्ड के सामने सबसे पहले गृह परीक्षाएं आयोजित कराना बड़ी चुनौती है। गृह परीक्षा मदरसा प्रबंधक कराते हैं, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में परीक्षा का मॉडल बोर्ड को तय करना है।


इसलिए बोर्ड ऑनलाइन परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। हालांकि बोर्ड के सामने चुनौती मदरसों में इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की भी है। साथ ही मदरसों में निम्न वर्ग के बच्चे आते हैं। इनकी ऑनलाइन परीक्षा किस तरह से कराई जाए, इस पर भी मंथन चल रहा है। यह भी देखा जा रहा है कि कितने बच्चों के घरों में मोबाइल फोन की उपलब्धता है। मदरसा बोर्ड छोटे बच्चों की टेलीफोनिक परीक्षा कराने पर भी विचार कर रहा है। इसमें टेलीफोन के जरिए बच्चों से कुछ प्रश्न पूछे जाएंगे। इसी आधार पर बच्चों को परीक्षा में अंक दिए जाएंगे। हालांकि इस पर अंतिम निर्णय मदरसा बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा। यह बैठक नवंबर के पहले पखवाड़े में प्रस्तावित है।

Friday, October 30, 2020

सभी बोर्डों ने परीक्षा की तैयारी के लिए दिया अतिरिक्त समय, पाठ्यक्रम भी किया गया कम।

सभी बोर्डों ने परीक्षा की तैयारी के लिए दिया अतिरिक्त समय, पाठ्यक्रम भी किया गया कम।

इस बार सभी बोर्डों के छात्रों को हाईस्कूल और इंटर की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए कम से कम एक महीना अतिरिक्त समय मिलेगा। यूपी बोर्ड ने तो बहुत पहले ही फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा कराने का निर्णय ले लिया था। वहीं, सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड की परीक्षा भी इस बार फरवरी के बजाय मार्च में होने की संभावना है।


सीबीएसई ने इसके लिए सभी स्कूलों से सुझाव भी मांगे हैं। कोरोना के चलते स्कूली शिक्षा बुरी तरह से प्रभावित है। अब सरकार कक्षा 10 व 12 के छात्रों की स्कूली शिक्षा को पटरी पर लाने की कवायद कर रही है। पाठ्यक्रम भी 30 प्रतिशत तक कम किया गया है। सीबीएसई ने बोर्ड परीक्षा के पेपर पैटर्न में भी बदलाव किया है।

अब बोर्ड परीक्षा में बैठने वाले छात्रों को तैयारी के लिए कम से कम एक माह का अतिरिक्त समय देने का प्रयास किया जा रहा है। यूपी बोर्ड के बाद सीबीएसई ने भी फरवरी के बजाय मार्च में बोर्ड परीक्षा के लिए स्कूलों के प्रतिनिधियों से सुझाव मांगे हैं। स्कूलों के प्रतिनिधियों की वर्चुअल बैठक में बोर्ड के सिलेबस, परीक्षा की तैयारी को लेकर चर्चा की गई थी। 

गृह परीक्षाएं भी खिसकेंगी 

सीबीएसई स्कूलों के संगठन की सदस्य व वरदान इंटरनेशनल एकेडमी की प्रधानाचार्य ऋचा खन्ना ने बताया कि स्कूलों के प्रतिनिधियों की बैठक में सभी ने बोर्ड परीक्षा को लेकर सुझाव दिए। सभी स्कूलों ने कम से कम एक महीना अतिरिक्त समय मांगा है। ऑनलाइन कक्षाओं से अधिकतर सिलेबस तो पूरा कर लिया गया है, लेकिन प्रैक्टिकल बाकी हैं।

ऐसे में सुझाव दिया गया है कि वे प्रैक्टिकल की परीक्षा एक महीने बाद लें। आमतौर पर प्रैक्टिकल परीक्षा 15 दिसंबर से 15 जनवरी के बीच होती है, लेकिन इस बार स्कूलों ने इसे एक महीना टालने की मांग की है। ताकि छात्रों को छोटे-छोटे समूह में बुलाकर प्रैक्टिकल कराया जा सके। ऐसे में जनवरी में होने वाली प्री बोर्ड परीक्षा भी एक महीना बाद होगी। ऐसी स्थिति में संभावना है कि बोर्ड परीक्षा फरवरी के बजाय मार्च में होगी। 

स्कूलों के मुताबिक इस बार गृह परीक्षाएं भी एक महीने तक खिसक जाएंगी। आमतौर पर स्कूलों को मार्च तक गृह परीक्षाएं संपन्न कराकर परीक्षा परिणाम जारी करने का आदेश होता है, ताकि एक अप्रैल से नया शैक्षिक सत्र चालू कर सकें। लेकिन इस बार स्कूलों को गृह परीक्षा कराने की छूट दी जाएगी। सेंट जोसेफ कॉलेज के एमडी अनिल अग्रवाल ने बताया कि इस बार गृह परीक्षाएं निर्धारित समय से एक महीने बाद कराई जा सकती हैं। बोर्ड से इसकी अनुमति मिल जाएगी। उन्होंने बताया कि ऐसी तैयारी है कि बोर्ड परीक्षा इस बार फरवरी के बजाय मार्च में होगी। वहीं गृह परीक्षाएं भी बाद में कराई जाएंगी ताकि स्कूलों पर बोर्ड परीक्षा के दौरान ही गृह परीक्षा कराने का बोझ ना हो। 

महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा महिला सशक्तीकरण

महिला सम्मान की दिशा में बड़ा कदम, बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा महिला सशक्तीकरण

 
मिशन शक्ति अभियान के तहत महिलाओं को स्वावलंबी बनाने के लिए प्रदेश सरकार कई नए कदम उठाने जा रही है। इसी क्रम में अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में महिला सशकक्‍्तीकरण को विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। मुख्य सचिव ने इसके लिए विचार करने के निर्देश दिए हैं। 


महिलाओं को प्रशिक्षित कर रोजगार मुहैया कराने की जिम्मेदारी कौशल विकास विभाग को दी है। मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने गुरुवार को मिशन शक्ति अभियान की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान तथा स्वावलम्बन के लिए विशेष अभियान 'मिशन शक्ति” का प्रथम चरण 25 अक्तूबर को सम्पन्न हो चुका है। द्वितीय चरण का माइक्रो प्लान तैयार कर विभाग अपनी कार्ययोजना 30 अक्तूबर तक गृह विभाग को सौंपदें। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं तथा अध्यापिकाओं को आत्मरक्षा प्रशिक्षण और शारीरिक / मानसिक यौन शोषण के विषय में विधिक के प्रति भी जागरूक किया जाए।



30 लाख अभिभावकों को जागरूक किया 
समग्र शिक्षा अभियान के तहत 34 लाख छात्राओं ने मिशन शक्ति में सहभागिता दर्ज कराई। डेढ़ लाख हाट्सएप ग्रुप के जरिए 30 लाख अभिभावकों को जोड़ा गया। सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के साथ 6 लाख से ज्यादा बच्चों को cal कर जागरूक किया गया। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सतीश चन्द्र इस दौरान 5.50 लाख बेसिक शिक्षकों के जरिए इस कार्यक्रम की शुरुआत की थी ! मिशन शक्ति का पहला चरण 17 से 25 अक्टूबर तक चलाया गया। इन कार्यक्रमों में रिकार्ड संख्या में छात्राओं व महिलाओं ने सहभागिता दर्ज की ।

Thursday, October 29, 2020

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों में लागू होगा समान पाठ्यक्रम, कमेटी गठित

 
प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में शैक्षिक सत्र 2021-22 से समान पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों के लिए न्यूनतम समान पाठ्यक्रम लागू करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव मोनिका एस.गर्ग की अध्यक्षता में कमेटी गठित की गई है। 


प्रदेश के 16 राज्य विश्वविद्यालयों में अभी अलग-अलग पाठ्यक्रम संचालित है। न्यूनतम समान पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए गठित समिति में लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आलोक राय, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के कुलपति प्रो. एनके. तनेजा और सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे को सदस्य बनाया है। प्रत्येक संकाय के लिए पांच सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी भी गठित की गई है। 

Wednesday, October 28, 2020

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

तैयारी: नई शिक्षा नीति के तहत पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग में कमेटियां गठित।

लखनऊ : नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के विश्वविद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम करने के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति व यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक किया जाएगा। इसकी अध्यक्ष विभागीय अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग होंगी। वहीं हर संकाय के लिए भी सुपरवाइजरी कमेटी का गठन किया गया है।


यह कमेटी प्रो. सुरेन्द्र दुबे द्वारा संस्तुत किए गए विषयों के पाठ्यक्रमों को नवम्बर 2020 तक पुर्नसंयोजित करेगी। अन्य विषयों के पाठ्यक्रम 15 जनवरी 2021 तक तैयार किए जाने हैं।


राज्य स्तरीय समिति में लखनऊ विवि की भौतिक विज्ञान की विभागाध्याक्ष प्रो. पूनम टण्डन, चौधरी चरण सिंह विवि मेरठ के सांख्यिकी विभाग के प्रो हरेकृष्ण, मायावती राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बादलपुर के एसो. प्रोफेसर दिनेश चन्द्र शर्मा सदस्य होंगे। ये कमेटी पाठ्यक्रम समयबद्ध रूप से तैयार हो, इसके लिए प्रभावी मॉनिटरिंग करेगी। इसके अलावा विभिन्न विषयों के लिए भी कमेटियों का गठन किया गया है। ये कमेटयां हर विषय का पाठ्यक्रम तैयार करने के लिए तीन सदस्यीय विषय विशेषज्ञों की कमेटी का गठन करेगी और उसकी मॉनिटरिंग करते हुए समयसीमा तक पाठ्यक्रम तैयार करवाएगी।

Saturday, October 24, 2020

उच्च शिक्षा : अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त

अगले शैक्षिक सत्र से एमफिल पाठ्यक्रम समाप्त।

राज्य मुख्यालय : प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया गया है। नई शिक्षा नीति 2020 में यह इस पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने की संस्तुति की गई है। ‌यह जानकारी विशेष सचिव उच्च शिक्षा मनोज कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि यह पाठ्यक्रम एक वर्ष की अवधि का है, जबकि पीएचडी पाठ्यक्रम तीन वर्ष की अवधि का है। 

एमफिल के लिए एपीआई स्कोर 5 से 7 प्वाइंट का है, जबकि पीएचडी का एपीआई स्कोर 25-30 प्वाइंट का है। नई शिक्षा नीति के तहत की गई संस्तुति के संबंध में शासन ने एमफिल पाठ्यक्रम को समाप्त किए जाने के बारे में प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों से अभिमत मांगा था। लखनऊ विश्वविद्यालय, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी एवं महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली की संस्तुतियों को देखते हुए उच्च शिक्षा विभाग ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2021-22 से एमफिल पाठ्यक्रम का संचालन समाप्त किए जाने का फैसला किया।

Wednesday, October 21, 2020

CBSE 10th & 12th Board Exams 2021 : सीबीएसई ने 10वीं और12वीं में 50 फीसदी पाठ्यक्रम में नहीं की कटौती

CBSE 10th & 12th Board Exams 2021: सीबीएसई ने 10वीं और12वीं में 50 फीसदी सिलेबस में नहीं की कटौती, पढ़ें डिटेल।


CBSE 10th & 12th Board Exams 2021: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए 10वीं और 12वीं की कक्षाओं में सिलेबस को पचास फीसदी तक कम नहीं किया है। इसके साथ ही इस संबंध में अभी तक कोई निर्णय भी नहीं लिया गया है। यह जानकारी सीबीएसई के मीडिया प्रभारी रमा शर्मा ने दी है। मीडिया प्रभारी ने बताया कि हालांकि सीबीएसई कोर्स कम करने के संबंध में अपने सभी संबद्ध स्कूलों से राय मांग रहा है। लेकिन फिलहाल कोई फैसला नहीं लिया गया है। वहीं बता दें कि देश भर में फैली महामारी कोरोना वायरस की वजह से पहले ही सिलेबस में पहले ही 30% की कमी की जा चुकी है।


30 फीसदी कोर्स कम करने का फैसला सीबीएसई बोर्ड ने हाल ही में लिया था। दरअसल मार्च से स्कूल-कॉलेज बंद चल रहे हैं। इसकी वजह से पढ़ाई का बेहद नुकसान हुआ है। हालांकि इसकी भरपाई के लिए बोर्ड ने ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की हैं। लेकिन इंटरनेट की उपलब्धता, पर्याप्त नेटवर्क सहित कई बुनियादी समस्याओं को समझते हुए बोर्ड ने कोर्स में कटौती करने का फैसला किया था। बोर्ड ने इसके साथ ही यह स्पष्ट किया था कि सिलेबस में कमी का यह फैसला केवल इस साल यानी कि कोरोना काल के लिए ही लागू होता है। वहीं दूसरी तरफ स्टूडेंट्स सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं की डेटशीट को लेकर भी कयास लगाए जा रहे हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि सीबीएसई बोर्ड परीक्षा 2021 फरवरी से शुरू हो सकती है।

Monday, October 5, 2020

सीबीएसई अब पढ़ाएगा अहिंसा का पाठ, पंजीकरण हुआ शुरू

सीबीएसई अब पढ़ाएगा अहिंसा का पाठ, पंजीकरण हुआ शुरू


मेरठ। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के मूल्यों पर आधारित अहिंसा को वार्तालाप का सबसे मजबूत और प्रभावी दृष्टिकोण माना जाता है। इसी को आधार बनाकर सीबीएसई स्कूली बच्चों, अभिभावकों, शिक्षकों व प्रधानाचार्यों को नान वायलेंट कम्युनिकेशन नामक कोर्स कराने जा रहा है। संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत स्वायत्त संस्था गांधी स्मृति और दर्शन स्मृति के सहयोग से सीबीएसई ने इस कोर्स का पंजीकरण शुरू कर दिया है। सीबीएसई ने इसकी नोटिफिकेशन जारी की है। हर वर्ग के कोर्स में रजिस्ट्रेशन 10 अक्टूबर तक चलेंगे।


कोई शुल्‍क नहीं लिया जाएगा

सीबीएसई ने इस कोर्स के लिए कोई पंजीकरण शुल्क या कोर्स शुल्क नहीं रखा है। जिससे अधिक से अधिक लोग इसमें हिस्सा ले सकें और अपनी बात कहने या अपना संदेश पहुंचाने के लिए अहिंसात्‍मक रवैये के बारे में विस्तार से जान व पढ़ सकें। इसका प्रमुख उद्देश्य बच्चों व अभिभावकों और बच्चों व शिक्षकों के बीच के संवाद को मधुर व अहिंसात्‍मक बनाए रखना है। इस बाबत सीबीएसई ने कोर्स में रजिस्ट्रेशन कराने के लिए प्रिंसिपल व शिक्षकों और अभिभावक व छात्रों के लिए अलग-अलग लिंक जारी किए हैं। पंजीकृत लोगों को कोर्स मैटेरियल मुहैया कराने के अलावा कुछ वेबिनार भी आयोजित किए जाएंगे। कोर्स पूरा होने पर सभी को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।

घटेगी दूरी, बढ़ेगा सम्मान

इस कोर्स का एक प्रमुख उद्देश्य बच्चों व अभिभावकों और शिक्षकों व स्कूल के बीच मानसिक दूरी को कम कर एक-दूसरे के प्रति आदर-सम्मान के भाव को बढ़ाना है। पिछले कुछ सालों में गुरु-शिष्य का सम्मान कुछ विशेष दिवस के दिन ही दिखता है। इस दूरी को हरी कम करने और बच्चों को मूल्यों की सीख देने के लिए यह कोर्स बच्चों से लेकर प्रिंसिपल तक के लिए कराया जा रहा है।

Tuesday, September 29, 2020

NDLI : नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ने सीबीएसई 10वीं, 12वीं के छात्रों के लिए ऑनलाइन कंटेंट बनाया

NDLI : नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ने सीबीएसई 10वीं, 12वीं के छात्रों के लिए ऑनलाइन कंटेंट बनाया

 
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 10वीं और 12वीं 2021 के बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए नेशनल डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया (एनडीएलआई) ने ऑनलाइन कंटेंट तैयार किया है। एनडीएलआई ने यह कंटेंट कोरोना काल में घर बैठे छात्र-छाात्राओं को ऑनलाइन पढ़ाई में मदद करने के लिए तैयार किया है। कोरोना के चलते स्कूल बंद हैं, ऐसे में घर बैठे छात्रों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी में इस कंटेंट से मदद मिलेगी।


सीबीएसई स्कूलों के प्रधानाचार्यो का कहना है कि इसमें उन सारे बिंदुओं पर फोकस किया गया है जो परीक्षा की तैयारी में शिक्षक तैयार करवाते हैं। बोर्ड परीक्षा के पैटर्न पर इसमें सवाल और उसका जवाब चैप्टरवार बनाया गया है। एनडीएलआई की ओर से तैयार पूरी शैक्षिक सामग्री को वेबसाइट ndl.iitkgp.ac.in पर रखा गया है।


एनडीएलआई की ओर से तैयार शैक्षिक सामग्री को सभी स्कूलों को भेजा गया है। स्कूल अपने तरीके से बच्चों को ऑनलाइन कंटेंट उपलब्ध करवाएंगे। ऑनलाइन एग्जाम प्रिपरेशन कंटेंट में प्रश्न और उसके उत्तर के अलावा अलग-अलग शैक्षिक संस्थानों के विशेषज्ञ शिक्षकों के वीडियो लेक्चर भी अपलोड किया गया है। इसे तैयार करने में दीक्षा पोर्टल के शिक्षकों की मदद भी ली गई है।
छात्र एनडीएलआई की ओर से तैयार ऑनलाइन कंटेंट से पढ़ाई कर रहे हैं। एग्जाम प्रिपरेशन कंटेंट से बोर्ड परीक्षार्थियों को मदद मिलेगी। छात्रों को होने वाले लाभ - ऑनलाइन कंटेंट के जरिए छात्रों की पढ़ाई नियमित होगी - विशेषज्ञों की ओर से से तैयार कंटेंट छात्रों की शंका का समाधान करेगा।


छात्रों को इससे पता चलेगा कि परीक्षा में कैसे प्रश्न पूछे जाएंगे

विद्यार्थी बोर्ड परीक्षा की तैयारी छात्र स्वयं कर पाएंगे केंद्रीय विद्यालय, सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों कंटेंट तैयार करने में दी मदद - कोरोना संकट के समय घर बैठे छात्रों के लिए ऑनलाइन कंटेंट तैयार करने में एनसीईआरटी, कें द्रीय विद्यालयों, सीबीएसई स्कूलों के शिक्षकों ने तैयार किया है। इसको तैयार करने में बंगलुरू, देहरादून, गांधीग्राम, जपपुर, लखनऊ के केंद्रीय विद्यालयों के शिक्षकों ने मदद की है। कंटेंट तैयार करने में 10 वीं, 12 वीं 2019 एवं 2020 के टॉपर्स के सुझाव भी रखे गए हैं।

Monday, September 21, 2020

यूपी बोर्ड : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू

UP Board : कक्षा 11वीं कॉमर्स में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू।

उत्तर प्रदेश में नए अकादमिक सत्र शुरू होने के पांच महीने बाद ही यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम अपने 11वीं कक्षा के कॉमर्स स्ट्रीम के छात्रों के लिए शुरू कर दिया है।


यूपी बोर्ड के इस फैसले क मतलब है कि अगले शैक्षिक सत्र में राज्यभर में बोर्ड से जुड़े करीब 28000 स्कूलों में कॉर्मस स्ट्रीम 12वीं कक्षा में एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू हो जाएगा।


परिणाम स्वरूप, यूपी बोर्ड 12वीं कक्षा की परीक्षा 2022 में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर आधारित होगी। बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि इससे पहले नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) आधारित पाठक्रम आर्ट्स और साइंस के लिए लागू किया जा चुका है।


यूपी बोर्ड के सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि विशेश सचिव (माध्यमिक शिक्षा) आर्यका अखौरी ने 18 सितंबर को एक आदेश माध्यमिक शिक्षा निदेशालय और यूपी बोर्ड को भेजा गया है। इस आदेश में पाठ्यक्रम में बदलाव की स्वीकृति और विवरण के बारे में बताया गया है।


उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2020 को प्रस्ताव पर यूपी बोर्ड से स्वीकृति मिल गई थी।

पुराने पाठ्यक्रम में एक अनिवार्य विषय हिन्दी या सामान्य हिन्दी रखा गया था। साथ ही कई सब्जेक्ट विकल्प के तौर पर थे। लेकिन अब नए पाठ्यक्रम में छात्रों को सामान्य हिन्दी, बिजनेस स्टडीज और अकाउंटैंसी को एक अनिवार्य विषय के रूप में चुनना होगा। वहीं दो विकल्पीय विषय जैसे इकोनॉमिक्स, इंग्लिश, मैथमैटिक्स और कम्प्यूटर होगा।

यूपी बोर्ड ने 1 अप्रैल 2018 को बोर्ड से जुड़े स्कूलो में 18 विषयों का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी आधारित पाठ्यक्रम लागू करने की बात कही थी।

कॉमर्स स्ट्रीम में कक्षा 9 में 41612 और 11वीं में 71,834 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था।

Saturday, September 19, 2020

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव

यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट वाणिज्य में अब एनसीईआरटी पाठ्यक्रम, नए सत्र से लागू होगा बदलाव



उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) के इंटरमीडिएट वाणिज्य में भी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम लागू हो गया है। नए शैक्षिक सत्र की कक्षा 11 में नए पाठ्यक्रम से पढ़ाई शुरू होगी। बता दें कि कुछ माह पहले ही अंग्रेजी विषय में भी एनसीईआरटी पाठ्यक्रम अपनाया गया था और कक्षा नौ से पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि वाणिज्य वर्ग की पढ़ाई अगले सत्र से होगी। शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है।


यूपी बोर्ड में कक्षा 9 से 12वीं तक की पढ़ाई एनसीईआरटी पाठ्यक्रम पर हो रही है। कई विषयों में पहले ही यह पाठ्यक्रम लागू है तो अन्य विषयों में बोर्ड प्रशासन बदलाव करा रहा है। इस वर्ष हाईस्कूल में अंग्रेजी, व इंटर में अंग्रेजी व वाणिज्य विषय का पाठ्यक्रम एनसीईआरटी की तर्ज पर किया गया है। इसका प्रस्ताव काफी समय पहले भेजा गया था, कक्षा 9 व 11 के अंग्रेजी पाठ्यक्रम में बदलाव हो चुका है।

अब शासन ने वाणिज्य वर्ग में पाठ्यक्रम बदलने पर मुहर लगा दी है। असल में, वाणिज्य वर्ग में रेगुलेशन में संशोधन होना था इसलिए शासन के निर्देश का इंतजार किया जा रहा था। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने बताया कि इस वर्ष पंजीकरण कार्य पूरा हो रहा है और पढ़ाई चल रही है इसलिए वाणिज्य वर्ग का नया पाठ्यक्रम नए सत्र से लागू होगा।


पहले का वाणिज्य पाठ्यक्रम

एक अनिवार्य विषय : हिंदी या सामान्य हिंदी
बहीखाता व लेखाशास्त्र
व्यापारिक संगठन व पत्र व्यवहार

निम्न में से कोई दो विषय
अर्थशास्त्र तथा वाणिज्य भूगोल
अधिकोषण तत्व
औद्योगिक संगठन
गणित तथा प्रारंभिक सांख्यिकी
कंप्यूटर
बीमा सिद्धांत एवं व्यवहार
मानविकी वर्ग के विषयों में से कोई एक विषय
क्रम एक अर्थशास्त्र व वाणिज्य भूगोल लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से अर्थशास्त्र विषय नहीं ले सकेंगे।
क्रम पांच कंप्यूटर विषय लेने वाले छात्र मानविकी वर्ग से कंप्यूटर विषय नहीं ले सकेगा।


अब ये पाठ्यक्रम
अनिवार्य विषय
1. सामान्य हिंदी
2. व्यवसाय अध्ययन
3. लेखाशास्त्र

ऐच्छिक विषय निम्न में से कोई दो लेने होंगे
1. अर्थशास्त्र
2. अंग्रेजी
3. गणित
4. कंप्यूटर

IGNOU ने शुरू किया Mobile App डेवलपमेंट कोर्स, छह महीने के कोर्स में 12वीं के बाद ही एडमिशन ले सकेंगे

IGNOU ने शुरू किया Mobile App डेवलपमेंट कोर्स, छह महीने के कोर्स में 12वीं के बाद ही एडमिशन ले सकेंगे 


इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी (IGNOU) ने मोबाइल एप्लीकेशन डेवलपमेंट में एक सर्टिफिकेट कोर्स की शुरूआत की है। इग्नू के स्कूल ऑफ कम्प्यूटर एंड इंफोर्मेशन साइंस द्वारा पेश यह सर्टिफिकेट कोर्स छह महीने का होगा। इस बारे में इग्नू की ऑफिशियल वेबसाइट ignou.ac.in पर एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है। मोबाइल टेक्नोलॉजी में इंटरेस्ट रखने वाले स्टूडेंट्स इस कोर्स में दाखिला ले सकेंगे।


12वीं पास स्टूडेंट्स ले सकते हैं एडमिशन

इस प्रोग्राम में थ्योरी और प्रैक्टिकल बेस्ड कुल 5 पाठ्यक्रम हैं। हर पाठ्यक्रम में दो कॉम्पोनेन्ट, असाइनमेंट और टर्म-एंड परीक्षा होगी। प्रोग्राम में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स को प्रिंटेड पाठ्य साम्रगी नहीं दी जाएगी। उन्हें egyankosh.ac.in से सिलेबस डाउनलोड करना होगा। वहीं, प्रैक्टिकल काउंसलिंग सेशन के समय दो स्टूडेंट्स को एक कंम्प्यूटर दिया जाएगा। इग्नू के इस कोर्स में 12वीं पास स्टूडेंट्स दाखिला ले सकेंगे। यूनिवर्सिटी ने इस कोर्स के लिए योग्यता 12वीं पास रखी है। इसके अलावा, 10वीं (मैट्रिक) के बाद 2 या 3 वर्ष का डिप्लोमा करने वाले स्टूडेंट्स भी प्रोग्राम में हिस्सा ले सकते हैं।

एंड्रॉइड ऐप डेवेलप की मिलेगी जानकारी

इस कोर्स के तहत स्टूडेंट्स एंड्रॉइड ऐप डेवेलप करना भी सीखेंगे। जारी नोटिफिकेशन में इग्नू ने बताया कि यह पाठ्यक्रम डिजाइन, कार्यान्वयन और उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के लिए एक डेटाबेस का संचालन करेगा, पायथन का उपयोग करके कार्यक्रमों का विकास करेगा और एंड्राइड जैसे IDEs का उपयोग भी करेगा।

कोर्स के लिए ऐसे करें आवेदन

1 सबसे पहले https://ignouadmission.samarth.edu.in/ पर जाएं।

2 यहां न्यू रजिस्ट्रेशन के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

3 अब रजिस्ट्रेशन फॉर्म का पेज ओपन होने पर मांगी गई डिटेल्स भरें।

4 इसके बाद वापस पेज पर आएं और रजिस्टर्ड यूजर नेम और पासवर्ड के जरिये लॉगइन कर आवेदन के प्रक्रिया पूरी करें।

Friday, September 18, 2020

संस्कृत के कोर्स में विज्ञान- कम्प्यूटर, पढ़ाने को टीचर नहीं

संस्कृत के कोर्स में विज्ञान- कम्प्यूटर, पढ़ाने को टीचर नहीं

प्रयागराज : संस्कृत के कोर्स में आधुनिक विषय तो शामिल कर लिए गए लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षकों की व्यवस्था नहीं हो पाई है। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद ने पिछले साल 2019-20 सत्र से कक्षा छह से 12 तक नया सिलेबस लागू किया था। संस्कृत पाठ्यक्रम को रोजगारपरक बनाने के उद्देश्य से आधुनिक विषयों का समावेश किया गया है। इसके तहत भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, वाणिज्य, कम्प्यूटर विज्ञान, गणित, चित्रकला व गृह विज्ञान आदि विषय यूपी बोर्ड की तरह संयोजित किए गए हैं।


वर्ष 2000 में परिषद का गठन होने के बाद से अब तक संस्कृत बोर्ड का अपना सिलेबस नहीं था। सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी के सिलेबस के आधार पर यहां पढ़ाई हो रही थी। तकरीबन दो साल की मेहनत के बाद नया सिलेबस तैयार हुआ और पिछले साल पूर्व मध्यमा (9वीं) और उत्तर मध्यमा प्रथम (11वीं) के लिए इसे अनिवार्य किया गया था। इस साल से मध्यमा व उत्तर मध्यमा में इसे लागू कर दिया गया है। 9वीं व 10वीं में 70 नंबर की थ्योरी और 30 अंक प्रैक्टिक्ल के लिए तय किए गए हैं।

लेकिन संस्कृत विद्यालयों में व्याकरण, वेद-वेदांत, मीमांसा, ज्योतिष और साहित्य जैसे परंपरागत विषय पढ़ाने के लिए ही अध्यापक नहीं हैं तो आधुनिक विषय के अध्यापकों की बात कौन पूछे। मजे की बात है कि बिना शिक्षकों के आधुनिक विषयों की पढ़ाई एक साल हो गई और इन स्कूलों में पढ़ने वाले तकरबीन 92 हजार बच्चे अगली कक्षा में प्रोन्नत भी हो गए।


इनका कहना है

संस्कृत विद्यालयों में जब तक आचार्यों की नियमित नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक कम से कम दो परंपरागत और दो आधुनिक विषयों के शिक्षकों को मानदेय/संविदा पर रखने का अनुरोध सरकार से किया गया है। ताकि पठन-पाठन में बाधा न आए। उम्मीद है कि जल्द व्यवस्था हो जाएगी।
-- डॉ. शालिग्राम त्रिपाठी, सदस्य, उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद

Tuesday, August 25, 2020

New Education Policy 2020 : यूपी के माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव, बनी 11 सदस्यीय कमेटी

New Education Policy 2020 : यूपी के माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव, बनी 11 सदस्यीय कमेटी।

लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा विभाग पाठ्यक्रम व मूल्यांकन पद्धति में बड़ा बदलाव करेगा। नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव करने के लिए 11 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। अपर शिक्षा निदेशक व्यावसायिक शिक्षा मंजू शर्मा की अध्यक्षता में बनी कमेटी बुधवार तक माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनय कुमार पांडेय को कार्य योजना प्रस्तुत करेगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस कार्य योजना के अनुसार अपना लक्ष्य तय करेगा और आगे के वर्षों में इसी के अनुरूप बदलाव करेगा।






नई शिक्षा नीति के अनुरूप बदलाव करने के लिए बनी कमेटी में संयुक्त शिक्षा निदेशक (शिविर) शिविर कार्यालय लखनऊ भगवती सिंह, माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिव्यकांत शुक्ला, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक आगरा मंडल मुकेश अग्रवाल, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक झांसी मंडल प्रदीप कुमार, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक लखनऊ सुरेंद्र तिवारी, अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकांत पांडेय, उप शिक्षा निदेशक (शिविर) शिविर कार्यालय लखनऊ विवेक नौटियाल, उप शिक्षा निदेशक व्यावसायिक शिक्षा पीसी यादव, डीआइओएस लखनऊ मुकेश कुमार सिंह व डीआइओएस इटावा राजू राणा शामिल हैं।




फिलहाल यहा कमेटी सबसे पहले पाठ्यक्रम व मूल्यांकन पद्धति में बदलाव पर रोडमैप तैयार करेगी। विभागीय संगठनात्मक ढांचे में बदलाव सहित नव प्रयोग को किस तरह बढ़ावा दिया जाए इस पर विस्तृत रिपोर्ट देगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस कार्य योजना के अनुसार अपना लक्ष्य तय करेगा और आगे के वर्षों में इसी के अनुरूप बदलाव करेगा।

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Sunday, August 23, 2020

यूपी बोर्ड : कक्षा 10 व 12 के बच्चे पहली बार देंगे प्री बोर्ड एग्जाम, पाठ्यक्रम भी 30% घटा

यूपी बोर्ड : कक्षा 10 व 12 के बच्चे पहली बार देंगे प्री बोर्ड एग्जाम, पाठ्यक्रम भी 30% घटा।




UP Board: 2021 की बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने की तैयारी कर रहे 50 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को अनिवार्य रूप से प्री बोर्ड एग्जाम भी देना होगा। कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई कर रहे बच्चों की तैयारियों परखने के उद्देश्य से सचिव ने शैक्षणिक पंचांग में फरवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में प्री बोर्ड परीक्षा कराने के निर्देश दिए हैं।




सचिव दिव्यकान्त शुक्ल ने शनिवार को मीडिया को बताया कि विभिन्न कक्षाओं में आनलाइन या ऑफलाइन माध्यम से शिक्षण कार्य 31 जनवरी 2021 तक पूर्ण किया जाएगा। उसके बाद प्री बोर्ड परीक्षा (यह कान्सेप्ट प्रथम बार प्रयोग किया जा रहा है) आयोजन फरवरी 2021 के तृतीय एवं चतुर्थ सप्ताह में किया जाएगा। इससे पहले प्री बोर्ड परीक्षा की अनिवार्यता नहीं थी। कुछ स्कूल अपने स्तर पर बोर्ड परीक्षा से पहले बच्चों की तैयारी परखने के लिए परीक्षा कराते थे और उसके आधार पर आवश्यकता पड़ने पर एक्स्ट्रा क्लासेस चलाकर बच्चों की मुकम्मल तैयारी करवाते थे। लेकिन इस बार शैक्षणिक पंचांग में शामिल होने के बाद सभी स्कूलों को प्री बोर्ड परीक्षा कराना पड़ेगा। ये परीक्षा ऑनलाइन होगी या ऑफलाइन ये तो कोरोना महामारी से पैदा होने वाले हालात पर निर्भर करेगा।




कब क्या हुआ?

20 जुलाई को 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम को लगभग 30 प्रतिशत संक्षिप्त करते हुए बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड किया गया।
13 अगस्त को शैक्षिक पंचाग एवं शैक्षणिक क्रियाकलाप का माहवार एकेडमिक कैलेन्डर जारी किया गया।
18 अगस्त से विभिन्न कक्षाओं में ऑनलाइन/वर्चुअल स्कूल के माध्यम से शिक्षण कार्य प्रारम्भ।


ऑनलाइन शिक्षण की समय सारिणी
कक्षा---------------------प्रसारण-----------------प्रसारण समय-------------------पुनः प्रसारण (रिपीट)

9 व 11----------स्वयं प्रभा चैनल-22--------सुबह 11 से 1 बजे तक--------दोपहर बाद 4.30 से 6.30 बजे तक

10 व 12--------दूरदर्शन --------1 से 2 बजे तक,-----------------2.30 से 3, 3.30 से 5, 5.30 से 6.30 बजे तक





हर सप्ताह ऑनलाइन पढ़ाई की समीक्षा करेंगे सचिव दिव्यकांत शुक्ल : सचिव यूपी बोर्ड दिव्यकांत शुक्ल हर सप्ताह ऑनलाइन पढ़ाई की समीक्षा करेंगे। वर्चुअल स्कूल एवं ई-ज्ञान गंगा के माध्यम से जनपदों में छात्र-छात्राओं के पठन-पाठन की साप्ताहिक रिपोर्ट समस्त मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक से प्राप्त करना एवं उसके पर्यवेक्षण आदि का दायित्व भी शिक्षा सचिव को दिया गया है। छात्रों के मूल्यांकन के लिए प्रश्न बैंक तैयार करना, छात्रों का मूल्यांकन करना तथा उनके लिए पाठ्य-पुस्तकों की उपलब्धता सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी भी सचिव को दी गई है।



10-12 विद्यालयों पर एक नोडल अफसर करेंगे निगरानी : ऑनलाइन पढ़ाई सुनिश्चित करने के लिए डीआईओएस आरएन विश्वकर्मा ने 10 से 12 स्कूलों पर एक नोडल अफसर की तैनाती की है। जिले के कुल 1057 राजकीय, सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन स्कूलों पर कुल 84 प्रधानाचार्य नोडल अफसर की जिम्मेदारी निभाएंगे। ये प्रधानाचार्य पठन-पाठन की साप्ताहिक समीक्षात्मक रिपोर्ट डीआईओएस को देंगे।


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Friday, August 14, 2020

नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न

नई शिक्षा नीति : बच्चे कृत्रिम बुद्धिमत्ता का कक्षा छह से ही पढ़ेंगे पाठ, नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का बदल जाएगा पूरा पैटर्न।

नई दिल्ली : नई शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा में कई ऐसे बुनियादी बदलाव किए गए हैं जो आने वाले समय में देश की शिक्षा में बड़े बदलाव आ सकते हैं। नई नीति लागू होने के बाद स्कूली शिक्षा का पाठ्यक्रम और उसका तौर-तरीका पूरी तरह से बदल जाएगा।

छात्र-छात्राओं को भावी जरूरतों के अनुरूप विषय पढ़ाए जाएंगे। कक्षा छह से कृत्रिम बुद्धिमता की पढ़ाई भी इसी रणनीति का हिस्सा है। मकसद उनमें अभिरुचि पैदा करना है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक कहते हैं कि कक्षा छह से दो बड़े बदलाव हुए हैं। एक वोकेशनल शिक्षा आरंभ करना तथा दूसरा कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अध्ययन। इसका मकसद छात्रों को रोजगारोन्मुख बनाना और इनोवेशन में उनकी दिलचस्पी पैदा करना है। बच्चों को कक्षा छह से ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में कुछ पाठ पढ़ाए जाएंगे।




नई शिक्षा नीति के लागू होने के बाद पढ़ाई का पूरा पैटर्न बदल जाएगा। पहले तीन साल की प्री-स्कूलिंग बच्चे आंगनबाड़ियों में करेंगे तथा बाद के दो साल तक स्कूलों में पढ़ेंगे। इस प्रकार पहले पांच साल नर्सरी से कक्षा दो तक बच्चों को बुनियादी तौर पर मजबूत बनाया जाएगा। इसके बाद अगले तीन साल के दौरान वे प्राइमरी शिक्षा ग्रहण करेंगे।मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि नीति को पूरे देश ने स्वीकार किया है। सूबों में अलग-अलग दलों की सरकार के बावजूद सबने इसे प्रगतिशील बताया है।

काफी विचार विमर्श किया गया : राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इसे लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति को खत्म करने वाला बताया है। इसलिए इसके जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन में कोई अड़चन नहीं आएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं भी कहा था कि जितना विचार-विमर्श इस नीति को तैयार करने में हुआ है, उतना दुनिया की किसी नीति पर नहीं हुआ है। सबसे बड़ी चुनौती राज्यों को एक मंच पर लाने की थी जिसमें मानव संसाधन विकास मंत्री निशंक सफल रहे। शिक्षा नीति पर बनी समिति के चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने भी इस बात के लिए सराहना की है।


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Thursday, August 13, 2020

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स

यूजीसी जल्द दे सकता है नए कोर्सों को शुरू करने की इजाजत, विश्वविद्यालयों में शुरू होंगे साफ्ट स्किल कोर्स।


यूजीसी ने नई शिक्षा नीति आने के बाद सक्रियता दिखाई है जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है।

नई दिल्ली : उच्च शिक्षण संस्थान अब सिर्फ वैश्विक और राष्ट्रीय जरूरतों के लिहाज से ही मैनपावर तैयार नहीं करेंगे, बल्कि वह स्थानीय व देश के छोटे-छोटे कामधंधों को लेकर भी प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने का काम करेंगे। इसके तहत सभी विश्वविद्यालयों में साफ्ट स्किल सहित विभिन्न कौशल से जुड़े कोर्स शुरू किए जाएंगे। यूजीसी ने इसको लेकर काम शुरू कर दिया है। वह जल्द ही संस्थानों को ऐसे कोर्स शुरू करने की अनुमति देने की तैयारी में है। 




नई शिक्षा नीति के बाद यूजीसी ने दिखाई रुचि
यूजीसी ने यह सक्रियता नई शिक्षा नीति आने के बाद दिखाई है, जिसमें स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देने और उसके लिहाज से प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। साथ ही विश्वविद्यालयों को आगे आने को कहा गया है। इसे लेकर सीमित अवधि के सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव किया गया है। हालांकि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को उन क्षेत्रों की पहचान खुद ही करना होगा और इसे आगे भी बढ़ाना होगा। नई शिक्षा नीति में कहा गया है कि देश में अभी भी ढेरों ऐसे कारोबार और कामकाज पुराने ढर्रे पर ही चल रहे हैं, जिन्हें तकनीकी लिहाज से मजबूती देने की जरूरत है। प्रशिक्षित मैनपावर की उपलब्धता न होने से इस दिशा में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। 

नैक में बेहतर रैंकिंग रखने वाले संस्थान शुरू कर सकेंगे
सूत्रों के मुताबिक यूजीसी की अनुमति मिलने के बाद विश्वविद्यालय इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकेंगे। इसको लेकर उनको पूरी स्वतंत्रता दी जाएगी। वैसे भी पीएम मोदी ने स्थानीय चीजों को बढ़ावा देने के लिए वोकल फार लोकल का नारा दिया है। इस पूरी मुहिम को उससे भी जोड़कर देखा जा रहा है। विश्वविद्यालयों को अब तक कोई भी नया कोर्स शुरू करने के लिए यूजीसी से अनुमति लेनी होती है, हालांकि नैक की रैकिंग में बेहतर स्थान रखने वाले स्वायत्त संस्थानों के लिए ऐसी अनुमति की जरूरत नहीं है। साफ्ट स्किल से जुड़े कोर्सो को शुरू करने के विवि को भी अनुमति की कोई जरूरत नहीं पडे़गी। खासबात यह है कि नई शिक्षा नीति और सरकार का जिस तरह से ज्यादा से ज्यादा लोगों को हुनरमंद बनाने पर जोर है, उसे देखते हुए ये कोर्स उसके लक्ष्य को आसान बना सकते हैं। नीति में वर्ष 2025 तक पचास फीसद लोगों को व्यावसायिक शिक्षा से जोड़ा जाना है। 
ये हो सकते हैं साफ्ट स्किल कोर्स 
बता दें कि सरकार स्थानीय रोजगार व कामकाज को बढ़ावा देना चाहती है। उसके लिए प्रशिक्षित मैनपावर तैयार करने पर जोर दिया गया है। बढ़ई, काष्ठकला, बुनकर यानी कपड़े की बुनाई से जुड़े कोर्स, राजमिस्त्री, मिट्टी, कांच से जुड़ी कारीगरी के कोर्स के अतिरिक्त अलग-अलग राज्यों में स्थानीय छोटे-छोटे कामधंधों के कौशल से जुड़े अनेक कोर्स शुरू किए जा सकते हैं।

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Friday, August 7, 2020

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय

CBSE ने लिया बड़ा फैसला, 10वीं में स्टैंडर्ड मैथ्स नहीं होने पर भी 11वीं में ले सकते हैं विषय।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थीवे भी 11वीं में गणित विषय ले सकते हैं।

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने महत्वपूर्ण घोषणा की है। इसके अनुसार जिन छात्र-छात्राओं के पास 10वीं में स्टैंटर्ड मैथ्स नहीं थी , वे भी अब 11वीं में गणित विषय का विकल्प चुन सकते हैं। सीबीएसई ने यह स्पष्ट किया है कि यह छूट केवल इस साल के लिए जा रही है। वहीं इस संबंध में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने स्कूल प्रमुखों को यह निर्देश दिए गए हैं कि, वह इस बात की जांच करें कि 11वीं में मैथ्स सब्जेक्ट का विकल्प चुनने वाले छात्र-छात्राओं के भीतर उसे आगे बढ़ाने की योग्यता हो और क्षमता हो। इस बात को कॉलेजों को सुनिश्चित करना होगा। बता दें कि यह फैसला कोविड-19 संक्रमण के दौरान पड़ रहे प्रभाव की वजह से लिया गया है।




सीबीएसई बोर्ड के नियमानुसार जिन छात्र-छात्राओं को 11वीं और 12वीं में मैथ्स विषय लेना होता है, उन्हें 10वीं में स्टैंटर्ड गणित को पढ़ना होता है। वहीं जो परीक्षार्थी हॉयर स्टडीज में गणित नहीं पढ़ना चाहते हैं, वे बेसिक मैथ्स पढ़ते हैं। यह नियम साल 2019 में जारी किया गया था, जिससे जो छात्र-छात्राएं गणित का विषय नहीं पढ़ना चाहते हैं, उन पर ज्यादा बोझ न पड़े।


वहीं सीबीएसई के नियम के अुनसार 10वीं के बाद अगर उसका मूड बदलता है और वह 11वीं में मैथ्स विषय को चुनना चाहता है तो वह 10वीं में कंपार्टमेंट परीक्षा देकर 11वीं में गणित का विषय चुन सकता था। लेकिन इस बार कोविड-19 संक्रमण की वजह से पहले ही परीक्षाओं पर संकट गहराया हुआ है। एक तरफ जहां सीबीएसई बोर्ड ने अधूरी परीक्षाएं कराए बिना ही आंतरिक मूल्यांकन के आधार पर रिजल्ट की घोषणा कर दी थी। वहीं अभी तक कंपार्टमेंट परीक्षा का शेड्यूल भी जारी नहीं हुआ है। ऐसे में छात्र-छात्राओं को नए सत्र में पढ़ाई में संकट न हो इसके लिए यह आदेश दिए हैं। हालांकि कुछ वक्त पहले ही यह साफ किया है सीबीएसई बोर्ड कंपार्टमेंट परीक्षाएं कराएगा, क्योंकि ऐसा नहीं कराने पर हजारों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाएगा। लेकिन यह परीक्षाएं कब हो पाएंगी यह साफ नहीं हुआ है। इसलिए शायद बोर्ड ने स्टूडेंट्स को सहूलियत दी है।


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Sunday, August 2, 2020

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम

संस्कृत शिक्षा बोर्ड में भी कम हुआ 30 फीसदी पाठ्यक्रम


बरेली : यूपी बोर्ड और सीबीएसई की तर्ज पर अब माध्यमिक संस्कृत शिक्षा बोर्ड के छात्र-छात्रओं को भी कम सिलेबस से पढ़ाई करनी होगी।


बोर्ड ने कोविड-19 की वजह से प्रथमा से उत्तर मध्यमा तक सिलेबस में 30 फीसद कटौती कर दी है। इसके लिए बीते दिनों परिषद की बैठक हुई थी, जिसमें समिति के सदस्यों से सुझाव मांगे गए थे। अब बोर्ड ने इस पर अंतिम मुहर लगा दी है।

Wednesday, July 22, 2020

यूपी बोर्ड 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट का नया पाठ्यक्रम जारी, यहां क्लिक करके कक्षा- 9,10,11 एवं 12 के विषयों के पाठ्यक्रम करें डाउनलोड

यूपी बोर्ड सिलेबस 2020-21: हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट  का नया सिलेबस जारी, यहाँ खबर के नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सभी विषयों के पाठ्यक्रम डाउनलोड।










नई दिल्ली :  UP Board Reduced Syllabus 2020-21: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपीएमएसपी) यानि यूपी बोर्ड से नये शैक्षिक सत्र 2020-21 के लिए हाई स्कूल और इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए पाठ्यक्रम को 30 फीसदी तक संक्षिप्त किये जाने की घोषणा राज्य के उपमुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा ने 17 जुलाई 2020 को की थी।



इसके बाद से ही यूपी बोर्ड रिड्यूस्ड सिलेबस 2020-21 को लेकर छात्रों, शिक्षकों एवं विद्यालयों के बीच उहापोह की स्थिति बनी हुई थी। इस पर विराम लगाते हुए यूपी बोर्ड ने शैक्षिक सत्र 2020-21 (परीक्षा वर्ष 2021) के लिए हाई स्कूल यानि कक्षा 9-10 और इंटरमीडिएट यानि कक्षा 11-12 के लिए संक्षिप्त पाठ्यक्रम को जारी कर दिया है। यूपी बोर्ड न्यू सिलेबस 2021 को सोमवार, 20 जुलाई 2020 को परिषद की ऑफिशियल वेबसाइट, upmsp.edu.in पर जारी किया गया, जहां छात्र अपनी सम्बन्धित कक्षा के लिए पाठ्यक्रम डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही, छात्र यूपी बोर्ड हाई स्कूल सिलेबस 2021 या यूपी बोर्ड या इंटरमीडिएट सिलेबस 2021 को नीचे दिये गये डायरेक्ट लिंक से भी डाउनलोड कर सकते हैं।


🔹 कक्षा- 9 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 10 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड


🔹 कक्षा- 11 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड

🔹 कक्षा- 12 का सिलेबस (2020-21) यहां क्लिक करके करें डाउनलोड



यूपी बोर्ड : धारा 370 हटाने का फैसला भी पढ़ेंगे बच्चे, 2020-21 के संशोधित पाठ्यक्रम में इसे किया गया है शामिल।

प्रयागराज :: यूपी बोर्ड के छात्र जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने का फैसला पढ़ेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने 2020-21 सत्र से अपने कोर्स में इसे शामिल किया है। यूपी बोर्ड की कक्षा 12 के लिए राजनीति विज्ञान की किताब स्वतंत्र भारत में राजनीति के क्षेत्रीय आकांक्षाएं पाठ के अंतर्गत जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद की राजनीति से जुड़ा पैराग्राफ हटाकर उसके स्थान पर जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाए जाने का चैप्टर जोड़ा है।


किताब में लिखा है-'2014 में जम्मू-कश्मीर में हुए चुनाव में पिछले 25 वर्षों में सबसे अधिक मतदान होना रिकॉर्ड किया गया। बीजेपी के मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में बीजेपी के साथ एक मिली-जुली सरकार सत्ता में आई। मुफ्ती मो. सईद के निधन के बाद,बेटी महबूबा मुफ्ती अप्रैल, 2016 में राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। महबूबा मुफ्ती के कार्यकाल में बाहरी और भीतरी तनाव बढ़ाने वाली बड़ी आतंकवादी घटनाएं हुईं। जून, 2018 में बीजेपी ने मुफ्ती सरकार को दिया गया समर्थन वापस लेने के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया।

पूरी होंगी राजनीतिक व विकास की आकांक्षाएं :  5 अगस्त, 2019 को जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम-2019 द्वारा अनुच्छेद 370 समाप्त कर दिया गया और राज्य को पुनर्गठित कर दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख बना दिए गए। जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख भारत में बहुलवादी समाज के जीते-जागते उदाहरण हैं। वहां न केवल धार्मिक, सांस्कृतिक, भाषाई, जातीय और जनजातीय विविधताएं हैं बल्कि विविध प्रकार की राजनीतिक और विकास की आकांक्षाएं हैं, जिन्हें नवीनतम अधिनियम द्वारा प्राप्त करने की इच्छा की गई है।


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