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Saturday, April 25, 2026

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक

नौवीं कक्षा की पुस्तक मधुरिमा में दृश्य कला, संगीत, नृत्य और रंगमंच की होगी पढ़ाई, NCERT ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए नए पाठ्यक्रम के तहत तैयार की पुस्तक


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और राज्यों के प्रदेश शिक्षा बोर्ड की नौंवी कक्षा के विद्यार्थी पहली बार इस शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कला विषय की पढ़ाई करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने इस कला पुस्तक को मधुरिमा नाम दिया है।


कला पुस्तक के माध्यम से छात्रों को चार कला विधाओं-दृश्य कला, संगीत, नृत्य व रंगमंच को सीखने का मौका मिलेगा। पुस्तक से छात्रों को भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा। इसमें भीमबेटका गुफा की चित्रकारी, सांची का स्तूप, नाट्यशास्त्र, कैलाश व उन्नाकोटीश्वर मंदिर, अजंता गुफाओं के भित्ति चित्र, चोल काल की कांस्य व होयसला काल की मूर्तिवां भी शामिल हैं।

एनसीईआरटी ने सीबीएसई समेत सभी राज्यों को यह पुस्तक भेज दी है। पुस्तक बाजार के अलावा ऑनलाइन भी उपलब्ध करा दी गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत पहली बार कक्षा तीसरी से 10वीं तक के छात्रों को कला विधाओं से रूबरू कराने के लिए इस पुस्तक को विभिन्न नामों से शामिल किया गया है। इसमें छात्रों को भक्ति काल और कला के इतिहास के महत्व के बारे में विस्तार से जानने का मौका मिलेगा। इसके अलावा पुस्तक के जरिये कई ऐसी परंपराओं को भी जानेंगे, जिन्हें किसी एक श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। जैसे-वारली, कालीघाट चित्रकला, यक्षगान आदि। कवर पेज से ही भारतीय कला विधाओं की विविधता को दर्शाया गया है, जिसमें छात्र किसी



संगीत से संबंधित विज्ञान और गणित की अवधारणाओं को समझाया जाएगा। उदाहरण के तौर पर छात्र यह अनुभव कर सकेंगे कि वाद्य यंत्र बनाना हमें ध्वनि के मूल सिद्धांतों को समझने में कैसे मदद करता है। यह भी कि संगीत वाद्य यंत्र बनाने में भौतिकी की गहरी समझ भी शामिल होती है। गणित और ताल के बीच संबंध को एक रोचक गतिविधि के माध्यम से उजागर किया गया है।

कला विधा का अभ्यास और प्रदर्शन करते हुए दिखाई देंगे, जो अपनी कलाकृतियों के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करते हैं। इसमें शामिल कलाकृतियों से छात्र भारतीय सांस्कृतिक विरासत को जानेंगे। 


नटराज मूर्ति पर शोध के लिए किया जाएगा प्रेरित : छात्र-छात्राएं जानेंगे कि कांस्य मूर्तिकला का लंबा इतिहास रहा है। उन्हें भारत मंडपम स्थित नटराज की मूर्ति पर शोध करने को प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसे लॉस्ट-वैक्स प्रक्रिया का उपयोग करके बनाया गया था। इसी तकनीक का उपयोग सिंधु-सरस्वती सभ्यता में प्रसिद्ध नर्तकी की मूर्ति बनाने के लिए किया गया था। विद्यार्थियों को अपने प्रदेश और देश की कला शैलियों की विस्तृत श्रृंखला का अन्वेषण करने का मौका भी मिलेगा। हिंदुस्तानी और कर्नाटक संगीत में राग, ताल और रचनाओं के अलावा वे क्षेत्रीय / लोक संगीत और नृत्य शैलियां भी सीखेंगे। वाद्य यंत्र और भौतिकी में गहरा नाता

Friday, April 3, 2026

परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

परिषदीय स्कूलों के बच्चे 'बांसुरी' में देखेंगे कला के विविध रंग, बेसिक शिक्षा में कक्षा तीन व चार के लिए पहली बार कला की पुस्तक

कला शिक्षण के लिए सुनिश्चित है न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र

प्रयागराज । परिषदीय स्कूलों में अध्ययनरत कक्षा तीन और चार के विद्यार्थियों को पहली बार कला की पुस्तक 'बांसुरी' पढ़ने को मिलेगी। अब तक शिक्षक बिना पुस्तक कला/संगीत पढ़ाते थे और परीक्षा लेते थे। नए सत्र से बच्चों को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान (एनसीईआरटी) की पुस्तक बांसुरी पढ़ने के लिए मिलेगी। एनसीएफएसई (स्कूली शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा संबंधी मार्गदर्शिका) की अनुशंसा के अनुसार कला शिक्षण के लिए न्यूनतम 100 घंटे का शिक्षण सत्र सुनिश्चित किया गया है। इसमें कला के चारों घटक दृश्य कला, संगीत, नृत्य और अंग संचालन संबंधी जानकारी है।


कक्षा तीन की पुस्तक में 20 पाठ हैं। प्रत्येक अध्याय में क्यूआर कोड है, उसे स्कैन करके अतिरिक्त विषय सामग्री तक पहुंच सकते हैं। वर्तमान सत्र में बच्चों को कलात्मकता से परिचित कराने के लिए विशेषज्ञ भी आमंत्रित किए जाएंगे। शिक्षण के दौरान बच्चों से कलाकृतियां बनवाई जाएंगी। उनका प्रदर्शन स्कूल परिसर या अन्य स्थानों पर किया जाएगा।

राज्य शिक्षा संस्थान उत्तर प्रदेश के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप ने बताया कि बांसुरी में सुझाई गई गतिविधियों को कराने से अभिव्यक्ति कौशल, सामुदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय विरासत के संरक्षण के लिए सचेत रहने की चेतना जागृत होगी। इससे छात्र छात्राओं में व्यक्तिगत स्तर तथा समूह में कार्य करने, आलोचनात्मक दृष्टिकोण का विकास, पढ़ने के साथ लिखने का अभ्यास में मदद मिलेगी।


दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच से होगा जुड़ाव

पुस्तक के दृश्य कला भाग में रेखांकन, चित्रकला, काटना, चिपकाना जैसी गतिविधि शामिल है। मिट्टी, रंग, प्रकृति की समझ बच्चों में आएगी। संगीत की ओर छात्रों का ध्यान खींचते हुए विभिन्न भाषाओं के गीत, वाद्ययंत्रों व थिरकने, धुनों और गीतों पर शारीरिक गतिविधां कराने के साथ नाटक पाठ्यक्रम का हिस्सा है। विदूषक बच्चों को अभिनय, मंच, सहायक सामग्री आदि से परिचित कराएंगे। राज्य अध्यापक पुरस्कार प्राप्त शिक्षक डा. रीना मिश्रा कहती है कि यह पुस्तक सुगम और रोचक है। पुस्तक बताती है कि मिट्टी के घड़े का प्रयोग वाद्ययंत्र की तरह होता है, इसे घटम कहते हैं। कंदील, दीपक, मुखौटा, कागजों से आभूषण बनाना सीखने के साथ संगीत में ताली, चुटकी, लयबद्ध पैरों की धाप आदि को समझाने का प्रयास है।


20 घंटे दृश्यकला तो 20 घंटे संगीत की होगी पढ़ाई

पुस्तक में निहित दृश्यकला, संगीत, नृत्य और रंगमंच के लिए कुल 20-20 घंटे की पढ़ाई निर्धारित है। 20 घंटे अनुभवात्मक कार्य कराए जाएंगे। कला शिक्षक को सप्ताह में चार कक्षाएं और शनिवार को एक कक्षा आवंटित करने प्रविधान है। बच्चों के दक्षता स्तर को मापने के लिए चार श्रेणी ए, बी, सी, डी, ई का सुझाव है। इनका अर्थ क्रमशः उत्कृष्ट, कुशल, होनहार, विकासशील और आरंभिक है।


Thursday, March 26, 2026

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई

एनसीईआरटी की नई किताबों का फिर इंतजार, 9वीं के छात्र बदले सिलेबस का कर रहे इंतजार लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई


 लखनऊ : नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही एक बार फिर एनसीईआरटी की किताबों की कमी ने सीबीएसई स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कक्षा 9वीं के छात्र नई शिक्षा नीति के तहत बदले सिलेबस का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन एनसीईआरटी की नई किताबें बाजार में नहीं पहुंच पाई हैं। पिछले वर्ष कक्षा आठ के छात्रों को सितंबर तक किताबों के लिए इंतजार करना पड़ा था और अब वही स्थिति दोहराने की आशंका गहराने लगी है। इससे छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच असमंजस का माहौल बन गया है।


प्रदेश में 11 हजार से अधिक सीबीएसई स्कूल और 122 केंद्रीय विद्यालय संचालित हैं, जहां एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होती है। ऐसे में इस देरी का असर बड़ी संख्या में छात्रों पर पड़ना तय माना जा रहा है। इस बीच एनसीईआरटी ने एडवाइजरी जारी कर स्पष्ट किया है कि नई शिक्षा नीति के तहत किताबें और सिलेबस चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे। कक्षा एक से आठवीं तक की किताबें तैयार कर ली गई हैं और प्रिंट व डिजिटल दोनों रूपों में उपलब्ध हैं, जबकि कक्षा नौवीं की किताबें तैयार की जा रही हैं और इन्हें सत्र 2026-27 में लागू किया जाएगा। इसके लिए ड्राफ्ट सिलेबस जारी कर सुझाव भी मांगे गए हैं। 


एनसीईआरटी ने शिक्षकों को सलाह दी है कि नए सिलेबस से पहले छात्रों की बुनियादी समझ मजबूत की जाए, ताकि उन्हें बदलाव को समझने में आसानी हो। वहीं कक्षा 10 और 11 में फिलहाल पुराने सिलेबस से ही पढ़ाई जारी रहेगी और नई किताबें 2027-28 से लागू होंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ साल शिक्षा व्यवस्था के लिए संक्रमण काल साबित होंगे, जहां पुरानी और नई व्यवस्था साथ-साथ चलेगी। इस दौरान किताबों की देरी से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होने और भ्रम की स्थिति बनने की आशंका बनी रहेगी। ऐसे में स्कूलों और शिक्षकों की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि वे बच्चों की पढ़ाई को बिना रुकावट आगे बढ़ाएं।

Monday, March 16, 2026

यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

अगले वर्ष लागू होगा नया पाठ्यक्रम, भाषा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ेंगे विद्यार्थी


लखनऊ: उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) कक्षा नौ से 12 तक की हिंदी पढ़ाई का स्वरूप बदलने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार वर्ष 2027 से हिंदी का नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसनें रचनात्मक लेखन, अभिव्यक्ति और भाषा के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर रहेगा। खास बात यह है कि जहां अन्य विषयों में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाया गया है, वहीं हिंदी के लिए प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है। अब हिंदी के मौजूदा पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किए जाने की तैयारी है।


हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा वाला यह प्रदेश रहा भारतेंद हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अज्ञेय जैसे कालजयी साहित्यकारों की विरासत वहां की पहचान रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश का हिंदी पाठ्‌यक्रम भी ततन ही समृद्ध और उच्च स्तर का होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी हिंदी को रटने के बजाय उसकी गहराई को समझते हुए अप्नी सृजनात्मक क्षमता को विकसित कर सकें। परिषद के अनुसार हिंदी भाषी प्रदेश में विद्यार्थियों की भाषाई जरूरतें भी विशिष्ट हैं।

एनसीईआरटी की मैजूदा हिंदी पुस्तकों में कई बार प्रदेश के सामाजिक जीवन, लोक संस्कृति और स्थानीय संदर्भों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। इसी वजह से यूपी बोर्ड अपने स्तर पर हिंदी का ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करता है, जो विद्यार्थियों को भाषा के साथ साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ सके। अगे हिंदी को केवल व्याकरण और पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रखा जाएगा प्रस्तावित पाठ्यक्रम में कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध, संवाद लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक महत्व देने की योजना है। इससे छात्र केवल परीक्ष पास करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी सोच, अनुभव और भावनाओं को प्रभात्री ढंग से व्यक्त करना भी सीखेंगे।

परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी गई है। पाठ्यक्रम तैयर करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही हिंदी शिक्षण में नवाचार और व्यावहारिक उपयोगिता को भी प्रमुखता दी जाएगी। इससे प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी लेखन और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में मजबूत पहचान बना सकेंगे।

Sunday, March 1, 2026

अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे

अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे


नई दिल्ली । अप्रैल से शुरू हो रहे अगले शैक्षणिक सत्र में तीसरी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकता है। स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में तीसरी कक्षा से कंपटीशनल थिंकिंग और एआई का पाठ्यक्रम शुरू कराने का प्रयास है।


जैसे छात्रों को भाषाई ज्ञान और अंक ज्ञान शुरू से दिया जाता है, उसमें एआई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जोड़ना है। तीसरी से आठवीं कक्षा तक एआई की शुरुआती पढ़ाई के बाद नौवीं से बारहवीं तक इसे इलेक्टिव कोर्स के तौर पर छात्र पढ़ सकते हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने तीसरी से आठवीं कक्षा तक तुरंत यह पाठ्यक्रम शुरू करने की मंशा जताने के साथ उच्चस्तर पर एआई पाठ्यक्रम को अद्यतन करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

Friday, February 27, 2026

यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई, माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण यूपी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र –हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने निस्तारित की राजीव प्रकाशन की याचिका

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में यह टिप्पणी की है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद (बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन) प्रयागराज की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में आता है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मैसर्स राजीव प्रकाशन की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।

याची ने सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका को इसी मुद्दे पर 2014 में दिए गए एक पुराने फैसले के आधार पर निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उक्त निर्णय में कहा गया था कि विवादित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अध्ययन के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना संबंधित प्राधिकारी की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में है। यदि याची यूपी अधिनियम संख्या 7, 1979 या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो राज्य के अधिकारी उसमें परिकल्पित कार्रवाई का सहारा लेने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं।

याची अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तो उन्हें ऐसी किताबें प्रकाशित करने या खुले बाजार में बेचने से नहीं रोका जा सकता जो परिषद की निर्धारित पाठ्यपुस्तकें नहीं हैं। भले ही ऐसी पुस्तकें परिषद की पाठ्यपुस्तकों के स्तर की न हों या उनकी कीमत बहुत अधिक हो, याची को अपने विपणन प्रयासों के परिणाम स्वयं भुगतने होंगे।

कोर्ट ने आगे कहा कि हमने 15 अप्रैल 2014 के निर्णय का अवलोकन किया है और हमारा मानना है कि याचिका में उठाया गया मुद्दा पूरी तरह से उसी निर्णय के अंतर्गत आता है। तदनुसार इस याचिका को उन्हीं शर्तों के साथ निस्तारित किया जाता है।




यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई

माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

किताबें छापकर खुले बाजार में बेचने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने इसी मामले में मेसर्स मित्तल बुक डिपो केस के फैसले को लागू करते हुए याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका में परिषद के सचिव की आठ जनवरी 2026 की विज्ञप्ति व 31 जनवरी 2026 के संशोधन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के लोगो-नाम का उपयोग वर्जित
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी यूपी बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के नाम व लोगो के उपयोग का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सिर्फ इतना भर कहा है कि बोर्ड किसी को किताब छापने से नहीं रोक सकता (यदि यह कानून न तोड़े), लेकिन स्कूल में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना बोर्ड का काम है। किसी भी अनधिकृत प्रकाशक को एनसीईआरटी या यूपी बोर्ड के नाम/लोगो का उपयोग कर पुस्तकें छापने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना कापीराइट अधिनियम और यूपी एक्ट संख्या सात (1979) का उल्लंघन है।

 सचिव के अनुसार, यह तथ्य भ्रामक है कि निर्धारित पुस्तकों तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए केवल तीन मुद्रकों मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, मेसर्स पीतम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड बिजौली झांसी और मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को ही अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी भी निजी प्रकाशक की पुस्तक 'पाठ्यपुस्तक' के रूप में अधिकृत नहीं है।



हाईकोर्ट में याचिकाएं खारिज, विद्यालयों में पढ़ाई जाएंगी यूपी बोर्ड की NCERT पाठ्यक्रम आधारित पाठ्यपुस्तकें

प्रयागराज : यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों के माध्यम से मुद्रित कराई गईं कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्‌यपुस्तकों से नए शैक्षिक सत्र अप्रैल से पढाई कराए जाने में अब कोई अड़चन नहीं है। तीन अधिकृत प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई किताबें/गाइड बुक न पढ़ाए जाने की यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह की विज्ञप्ति के विरुद्ध दाखिल याचिकाएं हाई कोर्ट से खारिज हो गईं। यूपी बोर्ड ने अपनी 12 तथा एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें मुद्रित करने वाले प्रकाशकों की सूची जारी की है।

इन प्रकाशकों की किताबें फरवरी के प्रारंभ में जनपदों में निर्धारित पुस्तक विक्रेताओं के यहां उपलब्ध करा दी गई हैं। बोर्ड सचिव ने आठ जनवरी को जारी विज्ञप्ति में कहा था कि प्रदेश के सभी राजकीय, एडेड व स्ववित्तपोषित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट (कक्षा नौ से 12 तक) विद्यालयों में यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई पाठ्यपुस्तक प्रचलित नहीं की जाएगी। 

विद्यार्थियों को अधिक मूल्य/अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक आदि खरीदने पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। बोर्ड सचिव के अनुसार इस संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य याचिका को इस आशय से निस्तारित कर दिया गया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की आठ जनवरी की विज्ञप्ति में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं पाया गया। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अनधिकृत प्रकाशक किसी संबंधित कानून का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यावाही सुनिश्चित की जाएगी।

Friday, January 30, 2026

UPTET परीक्षा की संरचना और पाठ्यक्रम जारी, 150 अंक की होगा पेपर, सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा का पाठ्‌यक्रम भी जारी, करें डाउनलोड

UPTET परीक्षा की संरचना और पाठ्यक्रम जारी, 150 अंक की होगा पेपर, सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा का पाठ्‌यक्रम भी जारी


🛑 UPESSC : उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा परीक्षा संरचना और पाठ्यक्रम करें डाउनलोड 





 प्रयागराज । उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2026 के आयोजन की तिथि दो, तीन व चार जुलाई निर्धारित करने के बाद अब परीक्षा आयोजन के लिए उसकी संरचना और पाठ्यक्रम भी निर्धारित कर दिया है। इसे आयोग की वेबसाइट पर https://www.upessc.up.gov.in जारी कर दिया गया है। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी आयोजन की अवधि ढाई-ढाई घंटे होगी। दोनों में बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे जाएंगे। कुल 150 प्रश्न होंगे, जो एक-एक अंक के रहेंगे। इस तरह 150-150 अंक की परीक्षा होगी। मूल्यांकन में निगेटिव मार्किंग नहीं की जाएगी।

प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से पांच तक के लिए) की टीईटी के लिए पांच खंड यानी बाल विकास एवं शिक्षण विधि, भाषा प्रथम (हिंदी), भाषा द्वितीय (अंग्रेजी/उर्दू /संस्कृत), गणित तथा पर्यावरणीय विषय से प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रत्येक खंड से 30-30 प्रश्न होंगे और सभी अनिवार्य होंगे। इस तरह कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। इसके अलावा उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा छह से आठ तक के लिए) की टीईटी में चार खंड से प्रश्न पूछे जाएंगे। इसमें भी प्राथमिक स्तर की तरह बाल विकास एवं शिक्षण विधि के साथ-साथ भाषा से जुड़े 30-30 प्रश्न होंगे, जो एक-एक अंक के रहेंगे। चौथे खंड में (क) गणित एवं विज्ञान शिक्षक के लिए गणित/विज्ञान, (ख) सामाजिक अध्ययन या सामाजिक विज्ञान शिक्षक के लिए सामाजिक अध्ययन तथा अन्य किसी शिक्षक के लिए (क अथवा ख खंड से) 60 प्रश्न होंगे।


सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा का पाठ्‌यक्रम भी जारी: शिक्षा सेवा चयन आयोग ने सुपर टेट (सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा) की संरचना व विषयवस्तु भी वेबसाइट पर जारी किया है। प्राथमिक स्तर के लिए भर्ती परीक्षा ढाई घंटे को होगी, जिसमें 150 प्रश्न पूछे जाएंगे। सभी प्रश्न एक सही उत्तर के साथ चार विकल्प वाले होंगे। प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। प्रश्नपत्र अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषा में होंगे। आयोग के उप सचिव/जनसंपर्क अधिकारी संजय कुमार सिंह ने बताया कि उच्च प्राथमिक की भर्ती के पाठ्यक्रम का अनुमोदन अभी आयोग से नहीं हुआ है।

Saturday, January 17, 2026

यूपी बोर्ड सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य

सत्र 2026-27 से 9वीं और 11वीं में व्यावसायिक शिक्षा होगी अनिवार्य, यूपी बोर्ड में कौशल आधारित शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम, रोजगारपरक होगी पढ़ाई



प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) ने विद्यालयी शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है। परिषद द्वारा शैक्षिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 एवं कक्षा 11 में व्यवसायिक शिक्षा को अनिवार्य किए जाने का निर्णय लिया है। इस क्रम में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स, एपेरल तथा ब्यूटी एंड वेलनेस विषयों के व्यवसायिक पाठ्यक्रमों को विषय समितियों द्वारा अनुमोदित कर यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह को सौंप दिया है।


इन सभी ट्रेड्स के अंतर्गत जॉब रोल आधारित पाठ्यक्रम विकसित करने के लिए विषय विशेषज्ञों द्वारा कई चरणों में बैठकें आयोजित की गईं। यह कार्य अपर सचिव सत्येंद्र कुमार सिंह, स्कंद शुक्ल के निर्देशन तथा उप-सचिव डॉ. आनंद कुमार त्रिपाठी के संयोजन में संपन्न हुआ। सफलतापूर्वक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार किए गए इन पाठ्यक्रमों में वर्तमान तकनीकी आवश्यकताओं, उद्योग जगत की अपेक्षाओं और विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता को केंद्र में रखा गया है।

परिषद के अनुसार यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों के अनुरूप है, जो विद्यार्थियों में कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और व्यावसायिक क्षमता को बढ़ावा देगी। यह कदम विद्यालयी शिक्षा को सीधे रोजगार से जोड़ने और छात्रों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास माना जा रहा है।

यूपी बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगे अन्य व्यवसायिक ट्रेड्स के पाठ्यक्रम विकसित करने का कार्य प्रगति पर है, ताकि अधिक से अधिक छात्रों को कौशल आधारित शिक्षा का लाभमिल सके।

इन पाठ्यक्रमों के निर्माण में केंद्रीय व्यवसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल के सहयोग के साथ-साथ विभिन्न विषय विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। इनमें संजीव कुमार आर्य (वरिष्ठ प्रशिक्षण अधिकारी, राष्ट्रीय एवं प्रादेशिक संस्थान, नैनी), वीरेंद्र नाथ शुक्ला, डॉ. अदिति गोस्वामी, डॉ. दिलीप सिंह और डॉ. अविनाश पांडेय सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल रहे।

Saturday, January 3, 2026

यूपी बोर्ड: वर्ष 2028 से 10वीं में सात विषयों और वर्ष 2030 में इंटरमीडिएट में छह विषयों की होगी बोर्ड परीक्षा

हर परीक्षार्थी के लिए अनिवार्य विषय होगा 'जाब रोल'

व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए अंकपत्र में अंकित होगा व्यावसायिक विषय का अंक, इंटरमीडिएट मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य वर्ग में छह और कृषि वर्ग में सात विषय की होगी परीक्षा

प्रयागराज । यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के छात्र-छात्राओं में व्यावसायिक कौशल विकसित करने के लिए बड़ी पहल की गई है। इसके लिए हर वर्ग यानी मानविकी, विज्ञान, वाणिज्य व कृषि वर्ग के छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक धाराओं (ट्रेड्स) के 24 क्षेत्रों में से किसी एक जब रोल को चुनना अनिवार्य होगा। इंटरमीडिएट के अंकपत्र व प्रमाणपत्र में इसके अंक अंकित किए जाएंगे, जबकि हाईस्कूल में ग्रेड दिए जाएंगे। इस तरह परीक्षा वर्ष 2028 में हाईस्कूल में सात और इंटरमीडिएट में कृषि वर्ग में सात व अन्य वर्गों में छह विषयों में छात्र छात्राओं को परीक्षा देनी होगी। अभी हाईस्कूल में छह व इंटरमीडिएट में पांच विषयों की परीक्षा देनी होती है।

इंटरमीडिएट परीक्षा के मनविकी वर्ग, विज्ञान वर्ग, वाणिज्य वर्ग व कृषि वर्ग के छात्र-छात्राओं को अंतिम अनिवार्य विषय के रूप में जीवन कौशल (नैतिक, योग, खेल व शारीरिक शिक्षा) विषय अथवा व्यावसायिक कौशल विकास के लिए व्यावसायिक शिक्षा के किसी एक सेक्टर से एक जाब रोल में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकेगा। परीक्षार्थियों का 50 अंकों का केवल एक प्रश्नपत्र होगा। इसके अतिरिक्त 50 अंकों की प्रयोगात्मक परीक्षा अन्य विषयों के प्रयेगात्मक परीक्षाओं की भांति कराई जाएगी। कक्षा नौ व 11 की परीक्षा विद्यालय स्तर पर व कक्षा 10 व 12 की सार्वजनिक परीक्षा होगी। 

प्रत्येक परीक्षार्थों को नैतिक, योग, खेल व शारीरिक शिक्षा विषय अथवा व्यावसानिक शिक्षा के किसी एक सेक्टर के एक जाब रोल की परीक्षा में न्यूनतम उत्तीर्णांक 33 प्रतिशत पाना अनिवार्य होगा। इंटरमीडिएट स्तर पर कक्षा 11 व 12 का पाठ्यक्रम अलग-अलग निधर्धारित है। इसके अंतर्गत ट्रेड (सेक्टर/जाब रोल्स) का निर्धारण संस्था स्तर पर किया जाएगा। संस्था द्वारा चयनित सेक्टर स्वतः मान्य मने जाएंगे। शैक्षिक सत्र 2026-2027 से कक्षा नौ व 11 में प्रवेश लिए जाएंगे

इंटरमीडिएट में यह हैं व्यवसायिक क्षेत्र एयरोस्पेस एंड एविएशन, (कृषि) एग्रीकल्चर, परिधान (अपेरल्स), आटोमोटिव, बैंकिंग फाइनेंस सर्विस एंड इंश्योरेंश (बोएफएसआइ), ब्यूटी एंड वेलनेस, कैपिटल गुइस, कांस्ट्रक्सन, डोमेस्टिक वर्कसं. इलेक्ट्रानिक्स, फूड प्रोसेसिंग, हेल्थकेयर, आइटी, लाजिस्टिक्स, मीडिया एंड इंटरटेनमेंट, फिजिकल एजुकेशन, प्लंबिंग, पावर, प्राइवेट सिक्योरिटी, श्री डी प्रिंटिंग आपरेटर (रबर), स्किल काउंसिल फार ग्रीन जाब्स, स्पोर्ट्स, टेलीकाम, टूरिज्म एंड हास्पिटैलिटो।

हाईस्कूल में इंटरमीडिएट के यह क्षेत्र नहीं होंगे एयरोस्पेस एंड एविएशन, बैंकिंग फाइनेंस सर्विस एंड इंश्योरेंश (बीएफएसआइ), कैपिटल गुड्स, कांस्ट्रक्सन, डोमेस्टिक वर्कर्स, फूड प्रोसेसिंग, रबर एवं स्पोर्ट्स। शेष क्षेत्र में पढ़ाई हो सकेगी।




यूपी बोर्ड: वर्ष 2028 से 10वीं में सात विषयों और वर्ष
 2030 में इंटरमीडिएट में छह विषयों की होगी बोर्ड परीक्षा 

2026-27 सत्र से व्यावसायिक पाठ्यक्रम होगा अनिवार्य

प्रत्येक छात्र-छात्रा को एक व्यवसायिक विषय लेना होगा


प्रयागराज। एक अप्रैल 2026 से शुरू होने जा रहे 2026-27 शैक्षणिक सत्र से यूपी बोर्ड अपने पाठ्यक्रम में बहुत बड़ा बदलाव करने जा रहा है। इस सत्र से कक्षा नौ से व्यावसायिक शिक्षा को अनिवार्य किया जा रहा है। मतलब नए सत्र में जो भी विद्यार्थी यूपी बोर्ड के स्कूल में कक्षा नौ में प्रवेश लेगा उसे व्यावसायिक शिक्षा के तहत एक विषय अनिवार्य रूप से लेना होगा। इस प्रकार 2028 में हाईस्कूल के छह की बजाय सात विषयों की बोर्ड परीक्षा होगी।


परीक्षा कराई जाएगी। कक्षा नौ में एक विषय हिंदी अथवा प्रारंभिक हिंदी, दूसरे विषय के रूप में एक आधुनिक भारतीय भाषा या अंग्रेजी या शास्त्रीय भाषा संस्कृत, पाली, अरबी या फारसी और तीसरे विषय के रूप में गणित या गृह विज्ञान (केवल बालिकाओं के लिए), चौथे विषय के रूप में विज्ञान, पांचवें विषय के रूप में सामाजिक विज्ञान लेना होगा।

 छठवें विषय के रूप में एक भाषा जो पहले न ली हो या संगीत गायन/वादन, वाणिज्य, चित्रकला, कृषि, सिलाई, रंजन कला, कंप्यूटर, मानव विज्ञान, हेल्थ केयर, रिटेल ट्रेडिंग, ऑटोमोबाइल, आईटी/आईटीईएस, प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, सोलर सिस्टम रिपेयर या मोबाइल रिपेयर आदि पहले से संचालित व्यावसायिक पाठ्यक्रम में से कोई एक लेना होगा। 

सातवें विषय के रूप में जीवन कौशल (नैतिक, योग, खेल एवं शारीरिक शिक्षा, समाजोपयोगी, उत्पादक एवं समाज सेवा कार्य) या व्यावसायिक कौशल विकास के लिए व्यावसायिक शिक्षा के 16 में से किसी एक सेक्टर से एक जॉब रोल में प्रशिक्षण प्राप्त किया जा सकता है।

Friday, January 2, 2026

कीमत बढ़ी पर एनसीईआरटी से सस्ती यूपी बोर्ड की किताबें, जनवरी अंत तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अधिकृत पुस्तकें

कीमत बढ़ी पर एनसीईआरटी से सस्ती यूपी बोर्ड की किताबें, जनवरी अंत तक बाजार में उपलब्ध हो जाएंगी अधिकृत पुस्तकें

नौ साल में पहली बार सत्र के दो महीने पहले आ जाएंगी किताबें


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की ओर से 2026-27 सत्र के लिए छपवाई जा रही किताबों के दाम बढ़ने के बावजूद एनसीईआरटी किताबों से कम हैं। बोर्ड ने किताबों के प्रकाशन का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है और इस महीने के अंत तक सभी 75 जिलों में किताबें पहुंच जाएंगी। इसका सबसे अधिक फायदा यूपी बोर्ड से जुड़े 29 हजार से अधिक स्कूलों के कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को होने जा रहा है।


पिछले नौ साल में पहली बार यूपी बोर्ड के स्कूलों में पढ़ने वाले मध्यम और निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को सस्ती और अधिकृत किताबें समय से उपलब्ध हो सकेंगी। इससे पहले हर साल जुलाई में किताबें बाजार पहुंचती थी जबकि शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल शुरू होने के 16 दिन में ही शिक्षकों के दबाव में बच्चे कई गुना महंगी और अनाधिकृत किताबें खरीद लेते थे। इसी बात का ध्यान रखते हुए बोर्ड ने इस साल पहले ही प्रकाशन की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। इस साल यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी किताबें बेचने पर फुटकर विक्रेताओं को 20 प्रतिशत कमिशन भी मिलेगा। इसका फायदा यह होगा कि फुटकर विक्रेता किताबें बेचने में रुचि लेंगे।


 पिछले सालों में प्रकाशक किताबें तो छापते थे लेकिन मार्जिन बहुत कम होने के कारण जिलों तक किताब नहीं पहुंचाते थे। जिलों के फुटकर दुकानदार दूसरे जिलों के प्रकाशकों से किताबें नहीं लेने जाते थे, इसलिए इस साल प्रकाशकों को ही सभी 75 जिलों में किताबें उपलब्ध कराना होगा। यूपी बोर्ड ने एनसीईआरटी की 36 विषयों की 70 किताबों और हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 पाठ्यपुस्तकों का वर्कऑर्डर जारी किया है।


किताबों की विषयवस्तु एनसीईआरटी की

यूपी बोर्ड भले ही एनसीईआरटी की विषयवस्तु प्रकाशित करवाता है लेकिन उसकी किताबें सस्ती हैं। जैसे एनसीईआरटी की कक्षा 12 भौतिक विज्ञान की किताब 310 रुपये में मिलती है लेकिन यूपी बोर्ड यही किताब 110 रुपये में उपलब्ध करवा रहा है। कक्षा 11 की एनसीईआरटी की गणित 180 रुपये में है जबकि यूपी बोर्ड 87 रुपये में उपलब्ध करा रहा है। कक्षा 12 जीव विज्ञान की एनसीईआरटी किताब 170 और गणित की दो किताबें 245 रुपये में मिलती है वहीं यूपी बोर्ड जीव विज्ञान 73 रुपये और गणित की दोनों किताबें 100 रुपये में उपलब्ध कराने जा रहा है।


439 रुपये में कक्षा नौ की किताबों का पूरा सेट

इस साल किताबों का जो रेट तय हुआ है उसके मुताबिक कक्षा नौ की 12 किताबों का पूरा सेट 485 रुपये में मिलेगा। इसमें अंग्रेजी की तीन, सामाजिक विज्ञान की चार, गणित, विज्ञान, हिंदी व संस्कृत/उर्दू की किताबें शामिल है। इसी प्रकार कक्षा दस की 11 किताबों का सेट 474 रुपये में मिलेगा। उर्दू लेने वालों को 482 रुपये में सेट मिलेगा। कक्षा 11 में विज्ञान वर्ग लेने वालों को 458 रुपये में पूरी किताबें मिल जाएंगी। इसी प्रकार कक्षा 12 में गणित विषय के साथ विज्ञान वर्ग के विद्यार्थियों को 439 रुपये में पूरा सेट मिलेगा।

राज्य शिक्षा संस्थान ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेजा

राज्य शिक्षा संस्थान ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेजा

कक्षा चार के उर्दू विषय में जुड़ा नया पाठ 'बेगम हजरत महल

प्रयागराज । प्रदेश के बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों में चरणबद्ध ढंग से लागू किए जाने के क्रम में अब कक्षा चार में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। इसके लिए राज्य शिक्षा संस्थान ने एनसीईआरटी आधारित कक्षा चार के पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विषयवार कस्टमाइज किया है। इसमें भाषा, गणित, पर्यावरण अध्ययन, संस्कृत, कला, उर्दू एवं अंग्रेजी विषय की पाठ्य पुस्तकें शामिल हैं।


उर्दू विषय की पाठ्यपुस्तक 'सितार' में 'नज्म शाम' के स्थान पर 'सोने वाले जागो नज्म' और 'बहादुर रूपा' की जगह 'बेगम हजरत महल' पाठ जोड़ा गया है। इसमें उनका संक्षिप्त इतिहास पढ़ाया जाएगा।

राज्य सरकार कक्षा तीन तक में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू कर चुकी है। वर्ष 2026 से कक्षा चार में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम लागू किए जाने की तैयारी है। राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेन्द्र प्रताप ने प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज की गई पुस्तकों को राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेज दिया है। उर्दू विषय चार के विद्यार्थी जंग-ए-आजादी में बेगम हजरत महल के योगदान को पढ़ेंगे। 

इसी तरह गणित की पाठ्यपुस्तक 'गणित मेला' में कनर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह राम मंदिर (अयोध्या) का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न शामिल किया गया है। डेजी और लाऊ मेघालय के शिलांग को नाम परिवर्तित करके वैभव और बबली प्रदेश के प्रयागराज, पुसाव (व्यंजन) की जगह केक वकांडा गांव के सामुदायिक पुस्तकालय का नाम बदलकर प्रयागराज जनपद के राजकीय पुस्तकालय नाम कर प्रदेश के स्थानीय परिवेश व विशेषताओं के आधार पर कस्टमाइज किया गया है। 

इसके अलावा कला विषय की बांसुरी पाठ्यपुस्तक में बनारस घराना में पं. छन्नूलाल मिश्र एवं उप शास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र) के साथ प्रदेश की विशेषता को ध्यान में रखकर कुछ और बदलाव के साथ एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम में कस्टमाइज किया गया है।



2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू होगी कक्षा चार की नई किताबें, यूपी के संदर्भ में एनसीईआरटी की पुस्तक में किया बदलाव

कक्षा चार की किताब में जोड़ी अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तस्वीर

कला विषय में छात्र-छात्राएं पढ़ेंगे कजरी, लोरी और गंगा गीत

हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, कला, पर्यावरण की किताब में संशोधन


प्रयागराज। यूपी के के एक एक लाख से अधिक परिषदीय स्कूलों के कक्षा चार में 2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू हो रही एनसीईआरटी की गणित, हिन्दी, पर्यावरण और कला की किताबों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव गणित मेला पाठ्यपुस्तक के 'हमारे आसपास हजारों की संख्या' शीर्षक चौथे पाठ में हुआ है जिसमें कर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह अयोध्या के प्रभु श्रीराम मंदिर का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न जोड़ा गया है। 

राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने दक्षिण भारतीय व्यक्तियों के नाम जैसे गुड़प्पा के स्थान पर गणेश, वृक्षों में नारियल के स्थान पर आंवला, मुनिअम्मा के स्थान पर मीना कर दिया गया है। कक्षा चार हिंदी की पाठ्यपुस्तक वीणा में आसामान गिरा पाठ के स्थान पर बेसिक शिक्षा परिषद की पाठ्यपुस्तक फुलवारी से हौसला, एक पृष्ठीय गोलगप्पा के स्थान पर डेजी की डायरी, एक पृष्ठीय हवा और धूल के स्थान पर सत्य की जीत (सत्यवादी हरिशचन्द्र) जोड़ा गया है।

छन्नू लाल मिश्र एवं गिरिजा देवी का चित्र जोड़ाः कला की पाठ्यपुस्तक बांसुरी में दक्षिण भारतीय कोलम की जानकारी देने के साथ-साथ हमारे प्रदेश में शुभ अवसरों पर चौक पूरना क्यों और कैसे बनाया जाता है? तथा चित्रकूट, वाराणसी, मिर्जापुर और सहारनपुर लकड़ी के खिलौने क्यों प्रसिद्ध है, के बारे में बताया गया है।

 एनसीईआरटी की पुस्तक में दक्षिण भारत के स्थान चन्नापाटना (कर्नाटक) का उल्लेख है। वरिसाई के स्थान पर उत्तर भारतीय संगीत में उपयोग में आने वाले अलंकार अथवा पलटा शब्द जोड़ा गया है। बनारस घराना में पं. छन्नू लाल मिश्र एवं उपशास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कन्नड़ गीत आदोना बन्नी के स्थान पर कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र), तमिल भाषा में लिखी लोरी को परिवर्तित करके हिन्दी अवधी भोजपुरी मिश्रित पारंपरिक लोरी शामिल की गई है। इसके अतिरिक्त कुमाऊंनी गीत (उत्तराखंड) के स्थान पर प्रदेश के प्रचलित बारहमासा गीत, मिजोरम लोकगीत के स्थान पर गंगा गीत और संबंधित चित्र दर्शाया गया है।

मट्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी को किया शामिल

पर्यावरण की पाठ्यपुस्तक 'हमारा अद्भुत संसार' में उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प, प्रचलित भोजन (मठ्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी), श्री अन्न जैसे कोदो, रागी (मडुआ) के नाम, अनाज उगाने में सूर्य के प्रकाश का महत्व, प्रबोधनी एकादशी (पर्व), कागज निर्माण के प्रसिद्ध केन्द्र एवं अनुसंधान जालौन एवं सहारनपुर आदि विषयवस्तु भी जोड़ी गई है।

कक्षा चार की की पाठ्यपुस्तकों के परीक्षण एवं कस्टमाइजेशन का काम उत्तर प्रदेश की शैक्षिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं परिवेश के परिप्रेक्ष्य किया गया है। निश्चित रूप से इसका लाभ बच्चों को होगा। – राजेन्द्र प्रताप, प्राचार्य, राज्य शिक्षा संस्थान




उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित की गई एनसीईआरटी की कक्षा 4 की किताबों को मिली मंजूरी, अगले सत्र से होंगी लागू 

कक्षा चार की अंग्रेजी किताब में अब रानी लक्ष्मीबाई भी

एनसीईआरटी की किताब में ईएलटीआई ने किया बदलाव, संगीतकार रवींद्र जैन भी शामिल


प्रयागराज । कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में बच्चों को अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाली रानी लक्ष्मीबाई और मशहूर गायक, गीतकार और संगीतकार पद्मश्री रवीन्द्र जैन के बारे में भी संक्षेप में पढ़ाया जाएगा। 2026-27 सत्र से प्रदेश के एक लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा चार में एनसीईआरटी की किताबें लागू होने जा रही हैं। अंग्रेजी की किताब संतूर को आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) एलनगंज के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित किया है।


महारानी अहिल्याबाई होल्कर के राज्य महेश्वर पर आधारित पाठ में रानी लक्ष्मीबाई के बारे में भी बताया गया है। लिखा है कि उन्होंने 1957 में झांसी किले की रक्षा के लिए अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ाई की थी। अलीगढ़ में जन्मे और टीवी धारावाहिक रामायण के जरिए घर-घर में मशहूर हुए दिवंगत रवीन्द्र जैन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। यूपी के लिए खासतौर से किताब में कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर नागालैंड के पारंपरिक खेल हेक्को पर आधारित पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि हेक्को और कबड्डी लगभग एक ही जैसे खेल हैं। जैसे लगौरी/सतोलिया को बताया गया कि वह खेल पिट्ठ है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में उपयोग में आने वाले शब्द चिन्ना को भी समझाया गया है। जैसे तमिल में चिन्ना का अर्थ छोटा जबकि कन्नड़ में चिन्ना का मतलब सोना होता है।

ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल ने बताया कि अंग्रेजी की किताब में हिंदी में शब्दार्थ दिए गए हैं जिससे कि किताबें बच्चों और शिक्षकों को भी पढ़ने-पढ़ाने में ज्यादा समस्या न आए। इसके अतिरिक्त छोटी-छोटी चीजें जोड़ी गई हैं। किसी अन्य प्रदेश के संदर्भ में दी गई विषयवस्तु में प्रयुक्त अपरिचित शब्दों के हिंदी अर्थ भी दिए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप बच्चों में अन्य भारतीय भाषाओं में भी रुचि पैदा हो सके।


अंग्रेजी की किताब में जोड़ा हिंदी का शब्दकोष

ईएलटीआई के विशेषज्ञों ने कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में कठिन शब्दों का हिंदी में अर्थ भी दिया है। साथ ही उन शब्दों का उच्चारण करना भी बताया गया है। ग्रामीण परिवेश के जिन बच्चों को अंग्रेजी समझने में कठिनाई होती है, उन्हें कठिन शब्द समझने में आसानी होगी।

Thursday, December 11, 2025

माध्यमिक स्कूलों में डिजिटल तरीके से भी होगी पढ़ाई, होगी मॉनिटरिंग

माध्यमिक स्कूलों में डिजिटल तरीके से भी होगी पढ़ाई, होगी मॉनिटरिंग 


लखनऊ : प्रदेश सरकार ने माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई और शिक्षकों के प्रशिक्षण को और बेहतर बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब सभी स्कूलों में पोर्टल और मोबाइल एप का नियमित और प्रभावी उपयोग अनिवार्य होगा। अपर मुख्य सचिव, बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को विस्तृत निर्देश भेजे हैं, ताकि हर शिक्षक और विद्यार्थी डिजिटल तकनीक से जुड़कर सीख सके।


माध्यमिक शिक्षा विभाग की विभिन्न योजनाओं व कार्यक्रमों जैसे अध्यापन, शिक्षकों का प्रशिक्षण, गतिविधि-आधारित शिक्षण और आनलाइन सामग्री सबके लिए कई डिजिटल पोर्टल उपलब्ध हैं, लेकिन कई जिलों में शिक्षक और प्रधानाचार्य इनका उपयोग नहीं कर रहे थे।

इससे पढ़ाई की गुणवत्ता प्रभावित हो रही थी। इसी वजह से अब सभी स्कूलों में इन पोर्टलों का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। इसके लिए trackshiksha.in वेबसाइट पर एक डैशबोर्ड बनाया गया है। इसके उपयोगी एप, शिक्षक के लिए पोर्टल और विद्यार्थी के विकल्प से सभी पोर्टलों के लिंक आसानी से डाउनलोड किए जा सकते हैं। इसमें दीक्षा, ई-पाठशाला, स्वयं, एनडीएलआई, एनआरओईआर, जिज्ञासा, एनसीईआरटी बुक्स, स्टेम एकेडमी, लोटस लर्निंग जैसे उपयोगी एप शामिल किए गए हैं। 


सभी जिला विद्यालय निरीक्षक से कहा गया है कि डैशबोर्ड का लिंक सभी राजकीय, सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को वाट्सएप और ईमेल के माध्यम से भेजें।

Friday, October 31, 2025

कक्षा तीसरी और चौथी के छात्र पढ़ेंगे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस

कक्षा तीसरी और चौथी के छात्र पढ़ेंगे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस


नई दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा तीसरी और चौथी के छात्र भी आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) के बारे में पढ़ेंगे। केंद्र सरकार भविष्य में रोजगार में बदलाव और वैश्विक मांग को देखते हुए युवाओं को (एनईपी) 2020 के तहत इसी शैक्षणिक सत्र 2025-26 में पहली बार कक्षा पांचवीं की हिंदी की पाठ्यपुस्तक 'वीणा' में एआई को शामिल किया गया है, जबकि छठीं से 12वीं कक्षा में पहले से ही छात्र एआई की पढ़ाई कर रहे हैं।


स्कूली शिक्षा से ही एक्सपर्ट बनाएगी सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति

भारत सरकार के स्कूल शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा, भविष्य की मांग के आधार पर युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए तैयार करना होगा। इसमें एआई सबसे महत्वपूर्ण है, क्योंकि एआई के कारण रोजगार में बदलाव आएगा। हमें तेजी से काम करने की जरूरत है। इसके लिए छात्रों और शिक्षकों को तकनीक से जोड़ना होगा। सबसे बड़ी चुनौती देशभर के एक करोड़ से अधिक शिक्षकों तक पहुंचने और उन्हें एआई आधारित शिक्षा देने के लिए प्रशिक्षित करने की होगी। क्योंकि दूरदराज व ग्रामीण इलाकों के शिक्षकों को भी एआई मुहिम से जोड़ना जरूरी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई बोर्ड) चरणबद्ध तरीके से स्कूली शिक्षा के सभी छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से जोड़ रहा है। फिलहाल, बोर्ड के मान्यता प्राप्त स्कूलों में कक्षा पांचवीं से 12वीं तक के छात्र पहले से ही एआई की पढ़ाई कर रहे हैं।


स्कूलों से एआई इकोसिस्टम विकसित करना होगा : नीति आयोग

दरअसल, नीति आयोग ने पिछले दिनों 'एआई और रोजगार' रिपोर्ट जारी की थी। इसमें बताया गया है कि आने वाले सालों एआई और नौकरियों में बदलाव के कारण करीब 20 लाख पारंपरिक नौकरियां समाप्त हो सकती हैं। लेकिन, सही इकोसिस्टम विकसित करने पर नए जमाने की 80 लाख नई नौकरियां तैयार भी होंगी। इसलिए केंद्र सरकार एआई को स्कूल से लेकर उच्च शिक्षा तक सभी छात्रों तक पहुंचाने की योजना बनाई है। 

Friday, September 26, 2025

NCERT की गणित में वैदिक गणित की अवधारणा भी पढ़ेंगे विद्यार्थी, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में एनसीईआरटी की गणित व विज्ञान पुस्तक का कस्टमाइजेशन शुरू

NCERT की गणित में वैदिक गणित की अवधारणा भी पढ़ेंगे विद्यार्थी, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में एनसीईआरटी की गणित व विज्ञान पुस्तक का कस्टमाइजेशन शुरू


प्रयागराजः राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के परिपेक्ष्य में विकसित कक्षा छह, सात एवं आठ की विज्ञान व गणित की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज किया जाना है। कक्षा सात के गणित विषय के लिए राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में कार्य शुरू किया गया है। इसमें पुस्तकों की समीक्षा प्रदेश की आवश्यकता, पृष्ठभूमि एवं शैक्षिक परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए की जा रही है। 


गणित की पाठ्य-पुस्तक में वैदिक गणित की अवधारणाओं एवं अभ्यास प्रश्नों का समावेश किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कठिन भाषा को सरलीकृत करके पुस्तक को उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए रोचक बनाया जा रहा है। अभी वैदिक गणित राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पाठ्यक्रम में तो है, लेकिन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में नहीं होने के कारण जोड़ा जा रहा है।


राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी के निर्देशन में 26 सितंबर तक चलने वाले कस्टमाइजेशन में संस्थान के प्रवक्ता के साथ अन्य विद्यालयों के भी विषय विशेषज्ञ सम्मिलित हैं। संस्थान के गणित के प्रवक्ता अरविंद कुमार गौतम के अनुसार वैदिक गणित का आधार प्राचीन भारतीय ग्रंथ है।


 इस प्रणाली में गणनाओं को तेज और सरल बनाने के लिए सूत्र एवं उप-सूत्र शामिल किए गए हैं। यह अंकगणित, बीजगणित और ज्यामिति के संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए सरल नियम प्रदान करता है। यह विधि मानसिक गणना पर जोर देती है, जिससे मस्तिष्क की क्षमता और गणना करने की गति बढ़ती है। 


वैदिक गणित का अभ्यास छात्रों की स्मृति और एकाग्रता को बढ़ाता है। इसे एनसीईआरटी से अनुमति लेकर उनकी पुस्तक में सम्मिलित किया जाएगा। इसी तरह विज्ञान विषय के प्रवक्ता एवं विशेषज्ञ एनईपी के परिपेक्ष्य में विकसित पुस्तक को उत्तर प्रदेश के अनुकूल बना रहे हैं यानी कस्टमाइज कर रहे हैं।

Friday, September 19, 2025

गणित के पाठ्यक्रम मसौदे में गंभीर कमियां, 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने की यूजीसी से मांग

गणित के पाठ्यक्रम मसौदे में गंभीर कमियां, 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने की यूजीसी से मांग

900 से ज्यादा गणितज्ञों ने यूजीसी अध्यक्ष को दिए प्रतिवेदन में कहा, इससे छात्रों पर बुरा असर पड़ेगा

पिछले महीने यूजीसी ने गणित समेत नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का मसौदा जारी कर मांगा था सुझाव


नई दिल्ली । 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने यूजीसी से गणित के स्नातक पाठ्यक्रम के मसौदे को वापस लेने की अपील की है। उनका कहना है कि इसमें कई गंभीर कमियां हैं और अगर इसे लागू किया गया तो कई पीढ़ियों के छात्रों पर बुरा असर पड़ेगा। पिछले महीने यूजीसी ने गणित सहित नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का मसौदा जारी किया था और इस पर सुझाव मांगा था। 


यूजीसी अध्यक्ष को भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि इसमें बीजगणित, वास्तविक विश्लेषण और व्यावहारिक गणित जैसे विषयों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। बताते चलें, इस मसौदे में चार साल के स्नातक कार्यक्रम की परिकल्पना की गई है, जो छात्रों को दाखिला लेने और पढ़ाई छोड़ने का विभिन्न विकल्प प्रदान करता है। मसौदा पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत लर्निंग आउटकम आधारित फ्रेमवर्क के अनुसार तैयार किया गया है।


भारतीय ज्ञान परंपरा पर यूजीसी का जोरः यूजीसी द्वारा जारी स्नातक गणित पाठ्यक्रम में काल गणना (पारंपरिक भारतीय समय गणना), भारतीय बीजगणित, भारतीय परंपरा में पुराणों का महत्व और नारद पुराण में पाए जाने वाले बुनियादी अंकगणित और ज्यामिति से संबंधित गणितीय अवधारणाओं और तकनीकों पर ध्यान दिया गया है। यूजीसी ने भारतीय बीजगणित के इतिहास और विकास तथा परावर्त्य योजयेत सूत्र (एक पारंपरिक वैदिक गणित तकनीक) का उपयोग करके बहुपदों का विभाजन सिखाने की सिफारिश की है।


पंचांग और शुभ मुहूर्त को भी शामिल किया गया है: स्नातक गणित पाठ्यक्रम में पंचांग (भारतीय कैलेंडर) जैसी अवधारणाओं को सिखाने का प्रस्ताव है। यह भी बताया गया है कि यह रीति-रिवाजों और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले शुभ समय (मुहूर्त) का निर्धारण कैसे करता है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और संस्कृति का मिश्रण है, जो भारत के समृद्ध समय-विज्ञान को जीवंत बनाता है।


गणितज्ञों की ये हैं आपत्तियां

गणितज्ञों ने प्रतिवेदन में कहा है-व्यावहारिक गणित और बीजगणित को उचित महत्व नहीं दिया गया है। स्नातक पाठ्यक्रम में बीजगणित के कम से कम तीन कोर्स होने चाहिए। देश में गणित और सभी वैज्ञानिक गतिविधियों का भविष्य खतरे में है।

प्रोग्रामिंग, संख्यात्मक विधियों व सांख्यिकी जैसे व्यावहारिक विषयों का मुख्य पाठ्यक्रम में अभाव है या उन्हें बिना व्यावहारिक प्रशिक्षण के सतही तौर पर प्रस्तुत किया गया है।

सांख्यिकी को एक ही पाठ्यक्रम में जबरदस्ती ठूंस दिया गया है। सांख्यिकी, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक और अनुप्रयोग-आधारित घटक होना स्वाभाविक और सामान्य बात है। इस अवसर को बर्बाद कर दिया गया है।

Tuesday, August 26, 2025

जूनियर हाई स्कूलों में ग्रह, उपग्रह के साथ चंद्रयान मिशन की होगी पढ़ाई

जूनियर हाई स्कूलों में ग्रह, उपग्रह के साथ चंद्रयान मिशन की होगी पढ़ाई


लखनऊ। प्रदेश के जूनियर हाई स्कूलों के स्मार्ट क्लासों में अगले सत्र से ग्रह, उपग्रह और ब्रह्मांड के साथ-साथ गगनयान व चंद्रयान मिशन की भी पढ़ाई होगी। इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) जल्द ही अंतरिक्ष से जुड़े तथ्यों पर आधारित कोर्स तैयार करेगा।

इस कोर्स में भारतीय अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा और शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा से जुड़े प्रसंग को भी शामिल किया जाएगा। राज्य सरकार जूनियर हाईस्कूलों के विद्यार्थियों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से एनसीईआरटी के तर्ज पर यह कोर्स तैयार करने की जिम्मेदारी एससीईआरटी को सौंपने जा रही है। 


बताया जाता है कि शुभांशु शुक्ला के अंतरिक्ष यात्रा के बाद से अंतरिक्ष विज्ञान को समझने पर रहेगा फोकस सूत्र बताते हैं कि प्रस्तावित कोर्स में अंतरिक्ष विज्ञान को आसानी से समझने पर फोकस किया जाएगा। साथ ही किशोर विद्यार्थियों के लिए यह उबाऊ न बन जाए इसके लिए ऑडियो-वीडियो के रूप में भी कोर्स का कुछ हिस्सा रखे जाने पर सहमति बनी है। सूत्रों का कहना है कि सरकार चाहती है कि स्कूली छात्र-छात्राएं किताबी ज्ञान अर्जित करते हुए विज्ञान और तकनीक को भी व्यावहारिक रूप से समझें ताकि स्कूली बच्चों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति गहरी रुचि पैदा हो।


बच्चों को विज्ञान से जोड़ने के लिए चल रही कवायद

जानकारों की मानें तो शिक्षा विभाग पहले ही स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, ड्रोन और रोबोटिक्स लैब जैसी पहलों से बच्चों को नई तकनीकों से जोड़ने में लगा है। नए कोर्स से उन्हें अंतरिक्ष विज्ञान की नई उड़ान समझने का अवसर प्रदान किया जाएगा, जिससे स्कूली छात्र-छात्राओं में शोध व नवाचार की नया मार्ग प्रशस्त करेगा।

किशोरों एव युवाओं में अंतरिक्ष और उससे जुड़ी प्रौद्योगिकियों के प्रति बढ़ती जिज्ञासाओं को देखते हुए सरकार ने जूनियर हाईस्कूल स्तर से ही इसकी पढ़ाई शुरू कराने का निर्णय किया है ताकि अधिक से अधिक युवा इस क्षेत्र का रुख कर सकें।

इसी को ध्यान में रखकर सरकार ने एससीईआरटी को इसका सरल कोर्स तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपने का फैसला किया है। नए कोर्स में चंद्रयान, आदित्य-एल-1 और गगनयान जैसे मिशनों की पूरी जानकारी छात्र-छात्राओं के साथ साझा करने को कहा गया है। तय किया गया है कि कुछ हिस्सा ऑडियो-वीडियो रूप में तैयार किया जाए जिससे युवाओं में रूचि बरकरार रहे।

Saturday, August 2, 2025

माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा सत्र 2025-26 में विषय चयन सम्बन्धी आवश्यक निर्देश जारी

माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश, प्रयागराज द्वारा सत्र 2025-26 में विषय चयन सम्बन्धी आवश्यक निर्देश जारी 


Thursday, July 10, 2025

अब 8वीं में छात्र पढ़ेंगे म्यूजिक, डांस मूवमेंट, विजुअल आर्ट व थियेटर

अब 8वीं में छात्र पढ़ेंगे म्यूजिक, डांस मूवमेंट, विजुअल आर्ट व थियेटर


नई दिल्ली। शैक्षणिक सत्र 2025-26 से आठवीं कक्षा के छात्र अनिवार्य विषय में आर्ट एजुकेशन की पढ़ाई भी करेंगे। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ) 2023 के आधार पर आठवीं कक्षा की आर्ट एजुकेशन की पाठयपुस्तक कृति तैयार कर ली है।


इसे चार भारों में थियेटर, म्यूजिक, डांस-मूवमेंट और विजुअल आर्ट को 19 अध्यायों में बांटा गया है। इसमें सभी राज्यों के प्राचीन गाने और नृत्य भी शामिल हैं। एनसीईआरटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पाठ्यपुस्तक में 10वीं शताब्दी में कश्मीर के दार्शनिक व विद्धान अभिनव गुप्त का भरत मुनि के प्रसिद्ध ग्रंथ नाट्यशास्त्र पर अभिनवभारती नामक टीका और नाट्यशास्त्र के नवम रस यानी शांति रस का भी वर्णन है।

इसके अलावा ताल, कोन्नाकोल सोलकट्टू और स्वर, हिंदोस्तानी संगीत, सरस्वती प्रणाम, पारंपरिक व आधुनिक वाद्ययंत्र, पांडुलिपि, नाटक-नृत्य, गाने के प्रकार (अकेले और ग्रुप प्रस्तुति) आदि के बारे में बताया गया है।


भक्ति, सूफी और प्रदेशों के गीत-संगीत : पुस्तक में छठीं शताब्दी में लोगों को धर्म, समाज और शिक्षा से जागरूक करने वाले भक्ति मूवमेंट से जोड़ने वाले भजनों को शामिल किया गया है। इसमें उत्तर भारत से मीराबाई, तुलसीदास के अलावा शास्त्रीय संगीतकार व सखी संप्रदाय के संस्थापक हरिदास पुरानादारा, या स्वामी हरिदास के अलावा दक्षिण भारत के संतधारा संत कनकदास हैं। जबकि मध्यकालीन भारत के सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, बाबा फरीद शामिल हैं, इसमें पंजाब, पश्चिमी भारत के सूफी गाने व नृत्य शामिल हैं।

सभी बोर्ड के पाठ्यक्रम को एक समान करने के लिए परख ने की पहल, एक से दूसरे बोर्ड में जाने पर नहीं बदलेगा पाठ्यक्रम

सभी बोर्ड के पाठ्यक्रम को एक समान करने के लिए परख ने की पहल, एक से दूसरे बोर्ड में जाने पर नहीं बदलेगा पाठ्यक्रम

रटने की प्रवृत्ति कम करने के लिए प्रश्न पत्र के प्रारूप में भी होगा बदलाव


प्रयागराज। एक परीक्षा संस्था (बोर्ड) से दूसरी परीक्षा संस्था में पंजीकृत होने पर छात्रों के सीखने के स्तर में विविधता देखने को मिलती है और उन्हें कठिनाई का सामना करना पड़ता है। छात्रों को इस समस्या ने निजात दिलाने के लिए परख ने पहल की है।

माध्यमिक शिक्षा परिषद व एनएसी परख के संयुक्त तत्वावधान में जीबी पंत संस्थान में आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला के तीसरे दिन परख की सीईओ इंद्राणी भादुड़ी ने क्वेश्चन पेपर टेंपलेट (क्यूपीटी) का विश्लेषण किया।


उन्होंने बताया कि मॉडल पेपर व ब्लू प्रिंट की आवश्यकता इसलिए महसूस की गई क्योंकि वर्तमान में देश में लगभग 60 परीक्षा संस्थाएं काम कर रहीं हैं। इनके प्रश्नों के प्रकार, उद्देश्य और कठिनाई के स्तर में विविधता पाई जाती है।

एनएसी परख का मुख्य उद्देश्य सभी बोर्ड की विविधता का सम्मान करते हुए उसे सुसंगत बनाने की कोशिश करने के साथ एक मानकीकृत प्रश्नपत्र ढांचा स्थापित करना है। परीक्षा केंद्रित मानसिकता को कम करना, विभिन्न राज्यों के बोर्ड में मूल्यांकन में छात्रों की रटने की प्रवृत्ति को कम करते हुए उच्चतर चिंतन कौशल, पारदर्शिता, सीखने आदि बिंदुओं पर समझ विकसित करना है।

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों द्वारा समूहवार अपने-अपने विषय के प्रश्नपत्रों की समीक्षा कराई गई ताकि कमियों को दूर किया जा सके। इससे पूर्व परख के रिसोर्स पर्सन ने होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड (एचपीसी) के संबंध में प्रतिभागियों से प्रश्न पूछकर यह जानकारी ली कि उन्होंने कार्यशाला में क्या सीखा। अपर सचिव (शोध) ने बताया कि स्व मूल्यांकन और सहपाठी आकलन में एचपीसी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण साबित होगी।

Sunday, July 6, 2025

अब कक्षा 6 से 12वीं तक छात्र पढ़ेंगे सहकारिता का पाठ, NCERT ने 9वीं व 12वीं कक्षा के लिए भारत में सहकारिता नाम से विशेष मॉड्यूल बनाया

अब कक्षा 6 से 12वीं तक छात्र पढ़ेंगे सहकारिता का पाठ, NCERT ने 9वीं व 12वीं कक्षा के लिए भारत में सहकारिता नाम से विशेष मॉड्यूल बनाया

वैकल्पिक विषय के रूप में होगी  पढ़ाई


नई दिल्ली। पहली बार छठी से 12वीं कक्षा तक के छात्र सहकारिता का पाठ भी पढ़ेंगे। पहले चरण में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की छठी कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में सहकारिता विषय पर एक अध्याय' अमूल' नामक पाठ जोड़ दिया है। जबकि सेकंडरी स्टेज यानी 9वीं और 12वीं कक्षा के लिए' भारत में सहकारिता (कोऑपरेटिव इन इंडिया) नाम से विशेष मॉडयूल तैयार हो गया है। 


केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने पांच जुलाई को गुजरात के आनंद में पहली त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी के भूमि पूजन मौके पर इस मॉड्यूल को जारी करते हुए कई घोषणाएं भी की। खास बात यह है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2025 को अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष घोषित किया है।


वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, भारत को तीसरी अर्थव्यवस्था बनाने के लिए प्रति व्यक्ति रोजगार के मौके उपलब्ध करवाने होंगे। इसमें सहकारिता क्षेत्र में सबसे अधिक संभावनाएं हैं। क्योंकि सहकारिता एक विचार नहीं, बल्कि आंदोलन है। देश का विकास सहकारिता के विकास पर निर्भर है और इसी आंदोलन की सफलता के लिए सरकार द्वारा गुजरात के आनंद में त्रिभुवन सहकारी यूनिवर्सिटी (टीएसयू) की स्थापना की जा रही है।


 मार्च-अप्रैल 2025 में टीएसयू बिल पास हुआ था। देश का पहला सहकारी विश्वविद्यालय भारत में श्वेत क्रांति और सहकारी दुग्ध आंदोलन के जनक, अमूल के संस्थापक त्रिभुवनदास किशिभाई पटेल को समर्पित होगा।


11वीं से सहकारिता वैकल्पिक विषय रख सकेंगे: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय, केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से एनसीईआरटी ने कक्षा 6 में सहकारिता विषय पर सामाजिक विज्ञान पुस्तक में एक अध्याय जोड़ दिया है। सरकार की योजना छठी कक्षा से ऊपर सभी कक्षाओं में सहकारिता से संबंधित अध्याय जोड़ने की है, ताकि वे प्राचीन काल से अब तक की सहकारी क्रांति, योजनाओं, उपलब्धियों से लेकर रोजगार के विकल्पों में बारे में जान सकें। इसके बाद, सीबीएसई बोर्ड समेत विभिन्न प्रदेश शिक्षा बोर्ड के स्कूलों में 9वीं और 12वीं कक्षा में सहकारिता एक वैकल्पिक विषय बनाया जाएगा। उसी के तहत, उक्त कक्षाओं के लिए भारत में सहकारिता नाम से विशेष मॉडयूल तैयार किया गया है।


राव बहादुर श्रीपाद एस तल्मकी से लेकर सरदार पटेल शामिल

इस सहकार से समृद्धि थीम पर आधारित मॉड्यूल में कुल छह चैप्टर हैं। इसमें छात्रों को 19वीं सदी में भारत में सहकारी आंदोलन के शुरुआती जनक राव बहादुर श्र श्रीपाद सुब्रमण्यम तल्मकी के बारे में जानने का मौका मिलेगा। उन्हें भारत के सहकारी आंदोलन के जनक के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा छात्र सरदार वल्लभभाई पटेल, महात्मा गांधी, वी लालूभाई मेहता, त्रिभुवनदास के पटेल, कमलादेवी चट्टोपाद्धाय आदि की कहानियों से रूबरू होंगे। इसके अलावा आजादी से पहले से लेकर वर्ष 2024 तक सहकारिता क्षेत्र में होने वाले रिफॉर्म की जानकारी मिलेगी। इसमें 6 जुलाई, 2021 को केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के गठन को भी शामिल किया है।