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Thursday, July 16, 2020

यूपी बोर्ड में 30% पाठ्यक्रम कम, 70 फीसदी पाठ्यक्रम को तीन भागों में किया जाएगा पूरा

यूपी बोर्ड में 30% पाठ्यक्रम कम, 70 फीसदी पाठ्यक्रम को तीन भागों में किया जाएगा पूरा।

लखनऊ। शासन ने यूपी बोर्ड के 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम 30 फीसदी कम कर दिए हैं। पहले के मुकाबले बचा हुआ 70 फीसदी पाठ्यक्रम तीन भाग में पढ़ाया जाएगा। नियमित कक्षाएं न शुरू हो पाने की समस्या को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शासन के पास पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पर शासन ने अपनी मुहर लगा दी है। कोरोना महामारी की वजह से शैक्षिक सत्र 2020-21 में अभी तक स्कूलों में कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं हो पाया है। शासन ने 15 जुलाई से ऑनलाइन कक्षाएं संचालित करने का आदेश दे रखा हैं। लेकिन कॉलेज के साथ काफी विद्यार्थी ऐसे हैं जो संसाधनों अभाव में ऑनलाइन पढ़ाई की हालत में नहीं है। इसको देखते हुए पाठ्यक्रम कम करने पर मंथन किया जा रहा था। उप मुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा ने बताया कि शेष 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम को तीन भागों में बांटकर पूरा कराया जाएगा। पहले भाग में पाठ्यक्रम का वह भाग लिया जाएगा जिसे कक्षावार, विषयवार और अध्यायवार वीडियो बनाकर ऑनलाइन पढ़ाया गया है। उनको स्वयंप्रभा चैनल व डीडी यूपी से भी प्रसारित किया गया है। दूसरे भाग में वह पाठ्यक्रम शामिल किया जाएगा जिसे विद्यार्थी स्वयं पढ़कर पूरा कर सकते हैं। तीसरे भाग में पाठ्यक्रम का वह हिस्सा होगा जिसे प्रोजेक्ट के जरिये पूरा कराया जा सकता है। पाठ्यक्रम कम होने से 1 करोड़ 10 लाख से अधिक विद्यार्थियों को राहत मिलेगी।




ऑनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधनों की कमी से जूझने वालों को राहत।

एकेडमिक कैलेंडर बनेगा : : उप मुख्यमंत्री ने बताया कि विषय विशेषज्ञों द्वारा शैक्षिक पंचांग के अनुसार माहवार वार्षिक एकेडमिक कैलेंडर बनाया जाएगा। इसके अनुसार पढ़ाई व मूल्यांकन की विद्यालय, जिला, मंडल और राज्यवार मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर भी तैयार किया जाएगा। विषय विशेषज्ञों से कक्षावार, अध्यायवार और विषयवार प्रश्न बैंक तैयार कराकर माध्यमिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। उसका मासिक, त्रैमासिक वार्षिक मूल्यांकन किया जाएगा।

सीबीएसई-सीआईएससीई ने भी कम किया है पाठ्यक्रम : : इससे पहले सीबीएसई व सीआईएससीई ने भी 30 फीसदी तक अपना सिलेबस कम किया है। दोनों बोर्ड ने अपना नया सिलेबस भी जारी कर दिया है।


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Monday, July 13, 2020

सीबीएसई के कोर्स से हटाए गए कई प्रैक्टिकल, 30 फीसदी तक की कटौती

सीबीएसई के कोर्स से हटाए गए कई प्रैक्टिकल, 30 फीसदी तक की कटौती

 
लखनऊ : बढ़ते संक्रमण को देखते हुए थ्योरी के अलावा सीबीएसई ने प्रैक्टिकल में 30 फीसद कमी की है। ऐसे में कक्षा नौ से 12 तक में विज्ञान विषय में कई प्रैक्टिकल हटाए गए हैं। 


कक्षा 12 में जीव विज्ञान में हटाए गए प्रयोग की सूची

’ दो अलग-अलग साइडों पर हवा में निलंबित कण पदार्थ की उपस्थिति का अध्ययन। 
’ क्वाड्रेट विधि द्वारा पौधे की जनसंख्या घनत्व का अध्ययन करना। 
’ क्वाड्रेट विधि द्वारा पौधे की जनसंख्या आवृत्ति का अध्ययन।

कक्षा 11 में जीव विज्ञान में हटाए गए प्रयोग की सूची

’ तने के टीएस का अध्ययन।
’ पोटैटो ओस्मोमीटर द्वारा ओसमोसिस का अध्ययन।
’ एपिडर्मल पील (लिली के पत्ते या प्याज के बल्ब के स्केल लीफ ) में प्लास्मोलिसिस का अध्ययन।
’ पत्तियों की ऊपरी और निचली सतह में वाष्पोत्सर्जन की दरों का तुलनात्मक अध्ययन।
’ उपयुक्त पौधे और एनिमल में सुगर, स्टार्च, प्रोटीन और वसा की उपस्थिति के लिए परीक्षण करना।
’ यूरिन अर्थात मूत्र में यूरिया की उपस्थिति के लिए परीक्षण करना।
’ पौधों की कोशिकाओं के आकार ऊतक और विविधता का अस्थाई और स्थाई स्लाइड के द्वारा अध्ययन करना।
’ रूट स्टेम एवं रूट में विभिन्न मॉडिफिकेशन का अध्ययन करना ।
’ विभिन्न प्रकार के पुष्पक्रम (सिमोस और रेसमोसे)।
’ मानव कंकाल और विभिन्न प्रकार के जोड़ों को केवल आभासी छवियों व मॉडल की मदद से अध्ययन करना।

कक्षा 12 में बायोटेक्नोलॉजी में हटाए गए प्रयोगों की सूची

’ जीनोमिक डीएनए का सीटैब विधि से अलगाव। ’ 
किसी भी प्लास्मिड का उपयोग करके जीवाणु परिवर्तन। ’ 
प्लास्मिड डीएनए का और जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस द्वारा इसका विश्लेषण

इनका होगा अध्ययन

’ परमानेंट स्लाइड या स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोग्राफ के माध्यम से स्टिग्मा पर पराग कण अर्थात का अंकुरण।
’ किसी भी पौधे के विभिन्न रंगों व आकारों के बीजों का उपयोग करके वंशानुक्रम का अध्ययन

कक्षा 11 में बायोटेक्नोलॉजी में हटाए गए प्रयोगों की सूची

प्रयोगशाला में व्यावहारिक परिणाम और सुरक्षा नियमों की रिकॉर्डिग’ 
बैक्टीरियल ग्रोथ कर्वे का निर्धारण ’ 
दूध प्रोटीन का अलगाव ’ 
माइटोसिस के विभिन्न चरणों का अध्ययन और माइटोटिक इंडेक्स की गणना ’ 
कायरेटाइप की तैयारी

Sunday, July 12, 2020

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

यूपी बोर्ड के पाठ्यक्रम में बदलाव सिर्फ इसी साल के लिए

 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड की ओर से संचालित माध्यमिक कालेजों में पाठ्यक्रम घटाया जाना है। बोर्ड प्रशासन पाठ्यक्रम सिर्फ इसी वर्ष के लिए कम करेगा, अगले वर्षो में तय पाठ की पढ़ाई होगी। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी सीबीएसई यह एलान कर चुका है, जबकि बोर्ड के प्रस्ताव पर शासन से अनुमोदन का इंतजार किया जा रहा है। विभाग कोरोना संक्रमण का प्रभाव पठन-पाठन पर कब तक पड़ेगा इसका अनुमान लगा रहा है इसीलिए आदेश देने में विलंब हो रहा है।


शैक्षिक सत्र अप्रैल से ही शुरू है। प्राथमिक की तर्ज पर माध्यमिक कालेजों के लिए हर वर्ष का शैक्षिक पंचांग जारी होता है, इसमें किस माह में कितनी पढ़ाई होती है इसका जिक्र रहता है। जुलाई आधा बीत रहा है और अब तक कालेजों को संचालित करने के हालात नहीं है। हालांकि बोर्ड प्रशासन हाईस्कूल व इंटर के अभ्यर्थियों से परीक्षा फार्म भरा रहा है और कक्षा नौ व 11 में पंजीकरण करा शुरू करा चुका है। इससे भी पढ़ाई नहीं हो रही है, यह जरूर है कि ऑनलाइन माध्यम से छात्र-छात्रओं को पढ़ाने का दावा किया जा रहा है ऐसे छात्रों की संख्या बहुत कम है। यूपी बोर्ड ने पहले 2020 का परिणाम जारी किया और फिर पाठ्यक्रम घटाने का प्रस्ताव तैयार किया। इसमें शासन को अलग-अलग सुझाव दिया गया है। 



आसार हैं कि सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड भी करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम कम करने का एलान करेगा और यह कटौती सिर्फ इसी वर्ष के लिए होगी। शासन प्रस्ताव का अनुमोदन करके पाठ्यक्रम घटाने का एलान कभी भी कर सकता है। यह भी संकेत है कि कंपार्टमेंट परीक्षा और पाठ्यक्रम की घोषणा एक साथ कर दी जाए। ज्ञात हो कि हाईस्कूल व इंटर की कंपार्टमेंट परीक्षा की तारीख अभी घोषित नहीं है। बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि उन्हें शासन के आदेश का इंतजार है।

Friday, July 10, 2020

सीबीएसई की तर्ज पर करीब 30 फीसदी घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, 27,342 कॉलेजों के पठन-पाठन पर पड़ेगा असर, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार

महीने के हिसाब से कोर्स कम करेगा यूपी बोर्ड।

प्रयागराज :: सीबीएसई के बाद यूपी बोर्ड भी 2020-21 सत्र के लिए कोर्स कम करने जा रहा है। कोरोना के कारण मार्च से ही स्कूलों में पढ़ाई-लिखाई बाधित है। इसे देखते हुए यूपी बोर्ड के विषय विशेषज्ञों से कोर्स कम करने का प्रस्ताव तैयार कराया है। शासन को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार जुलाई महीने में यदि नियमित कक्षाएं नहीं चलतीं तो कक्षा 9 से 12 तक के पूरे पाठ्यक्रम का 10 प्रतिशत गुस्सा कम किया जाएगा। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे। इसी प्रकार अगस्त में पढ़ाई बाधित होने पर 20 फीसदी और सितंबर तक कक्षाएं चालू नहीं होने पर 30 प्रतिशत कोर्स कम किया जाएगा। बोर्ड ने इसी फॉर्मूले के आधार पर विषय विशेषज्ञों की कमेटी से हिन्दी, अंग्रेजी, संस्कृत, गणित, विज्ञान, सामाजिक, विज्ञान, भूगोल, जीव विज्ञान, कला, गृह विज्ञान समेत पूरे कोर्स में कटौती करवाते हुए शासन को मंजूरी के लिए प्रस्ताव भेजा है। संस्कृत शिक्षा बोर्ड भी कम करने जा रहा कोर्स प्रदेश के 1151 संस्कृत विद्यालयों में संचालित प्रथमा (कक्षा 6 से 8 तक), पूर्व मध्यमा (कक्षा 9 व 10) और उत्तर मध्यमा (कक्षा 11 व 12) के कोर्स कटौती भी होने जा रही है। 13 से 15 जुलाई तक संस्कृत शिक्षा बोर्ड लखनऊ में बैठक बुलाई गई है। संस्कृत के कोर्स में भी 30 प्रतिशत कोर्स कम किए जाएंगे।


भेजा प्रस्ताव : कोरोना के कारण जुलाई महीने की पढ़ाई बाधित होने पर 10 प्रतिशत करेंगे कटौती

अगस्त के लिए 20 प्रतिशत, सितंबर तक नुकसान पर 30 प्रतिशत कमी का प्रस्ताव बोर्ड की ओर से शासन को भेजा गया है प्रस्ताव, विषय विशेषज्ञों से ली रिपोर्ट।

इस तरह होगी कटौती प्रयागराज उदाहरण के तौर पर जुलाई का नुकसान होने पर कक्षा 10 संस्कृत से तीन पाठ (10 प्रतिशत),अगस्तकी पढ़ाई प्रभावित होने की दशा में छह पाठ (20 प्रतिशत) और सितंबर तक पढ़ाई-लिखाई पटरी पर आने की स्थिति में नौ पाठ (30 प्रतिशत) कम किया जाएगा। 2020-21 सत्र की शुरुआत तो एक अप्रैल से ही हो चुकी है लेकिन यूपी बोर्ड जुलाई से सितंबर तक को आधार बनाकर कटौती करने के पक्ष में है।


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सीबीएसई की तर्ज पर घटेगा यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम, शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार।

प्रयागराज : सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में पाठ्यक्रम घटने जा रहा है। इसका असर प्रदेशभर के 27,373 कालेजों की पढ़ाई पर पड़ेगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कक्षा नौ से 12वीं तक का पाठ्यक्रम 30 प्रतिशत कम किया है। यूपी बोर्ड जून माह में ही पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा चुका है, संकेत है कि शासन करीब 30 प्रतिशत पाठ्यक्रम घटने का एलान कभी भी कर सकता है। गौरतलब है कि दैनिक जागरण ने 30 जून को 'यूपी बोर्ड से संबद्ध कालेजों में घटेगा पाठ्यक्रम !' खबर प्रकाशित की थी। कोरोना संक्रमण के कारण अब तक स्कूल-कालेज नहीं खुलने से पढ़ाई बाधित है। जबकि शैक्षिक सत्र पहली अप्रैल से ही शुरू हो चुका है।





हालांकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो इसके लिए ऑनलाइन माध्यम को अपनाया गया है। लेकिन, फिर भी उस गति से पढ़ाई नहीं हो सकी है। इसीलिए पाठ्यक्रम को कम करने की कवायद है। यूपी बोर्ड में कई विषयों में सीबीएसई का ही पाठ्यक्रम लागू हो चुका है। बोर्ड ने शासन के निर्देश पर जून में ही शिक्षा निदेशक माध्यमिक विनय कुमार पांडेय की देखरेख में पाठ्यक्रम घटाने के लिए बैठक की थी। पाठ्यचर्या समिति (पाठ्यक्रम बनाने वाले) के सदस्यों व विशेषज्ञों से चर्चा करने के बाद पाठ्यक्रम कम करने का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के अहम विषयों में पाठ्यक्रम कम करने पर सहमति बनी थी। इसके अलावा कक्षा नौ व ग्यारह का सिलेबस घटाने का प्रस्ताव है, जिसका करीब 20 व 30 फीसद कम करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। अब कभी भी शासन यूपी बोर्ड का पाठ्यक्रम सीबीएसई की तर्ज पर 30 प्रतिशत कम कर सकता है। उधर, यूपी बोर्ड सचिव दिव्यकांत शुक्ल का कहना है कि पाठ्यक्रम घटाने पर शासन ही अंतिम निर्णय करेगा, जो आदेश होगा उसका अनुपालन कराया जाएगा।


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Thursday, July 9, 2020

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ

सीबीएसई 12वीं के छात्र पढ़ेंगे सरदार पटेल के नजरिए से राष्ट्रवाद का पाठ


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) 12वीं के छात्र अब सरदार वल्लभ भाई पटेल का राष्ट्रवाद और दीन दयाल उपाध्याय के भारतीय धर्म निरपेक्षता का पाठ पढ़ेंगे। दरअसल, पहली बार 12वीं के कोर्स करिकुलम में सरदार पटेल का नाम आया है। यह पहले कोर्स में नहीं था। सीबीएसई ने अपना 30 फीसद पाठ्यक्रम घटाया है लेकिन 11वीं के पाठ्यक्रम से राष्ट्रवाद, संघवाद, धर्म निरपेक्षता तथा नागरिकता को हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। 


इस बारे में सीबीएसई द्वारा बनाई गई कोर्स कमिटी ने निर्णय लिया था। इस कोर्स कमेटी के एक सदस्य का कहना है कोविड-19 से उपजी स्थिति को देखते हुए बस सत्र 2020-21 के लिए 30 फीसद तक कोर्स में कमी करनी थी। 11वीं के राजनीतिक सिद्धांत पुस्तक में से धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को इसलिए हटाया गया है क्योंकि इसे 10वीं में छात्रों ने समाज विज्ञान विषय में पढ़ा है। धर्म निरपेक्षता व राष्ट्रवाद एक पश्चिमी संकल्पना है।
 

12वीं के पाठ्यक्रम में कमेटी ने धर्मनिरपेक्षता और राष्ट्रवाद को भारतीय संदर्भ में पढ़ाने का पाठ्यक्रम बनाया है। वह भारतीय महापुरुषों और भारतीय समाज व परिप्रेक्ष्य के नजरिए से होगा। उन्होंने बताया कि 12वीं में राष्ट्रवाद सरदार वल्लभ भाई पटेल की दृष्टि से पढ़ाया जाएगा। भारतीय धर्म निरपेक्षता को दीन दयाल उपाध्याय के मानवतावाद तथा राम मनोहर लोहिया व जय प्रकाश नारायण के समाजवाद के संदर्भ में पढ़ाया जाएगा। कोर्स कमेटी ने इसमें जो भी संशोधन किए हैं उसे सम सामयिकता व भारतीय परिप्रेक्ष्य को ध्यान मे रखकर किया है। 


भारत को विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा
कोर्स कमेटी के सदस्य ने बताया कि पहले पाठ्यक्रम में चीन को पढ़ाया जाता था लेकिन अब छात्र ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देश को पढ़ेंगे। भारत को उभरती हुई विश्व की नई शक्ति के रूप में पढ़ाया जाएगा। इसमें वैश्विक परिप्रेक्ष्य में भारत की महत्ता भी दर्शाई जाएगी। नई उभरती शक्तियों में खासकर भारत इजरायल के संबंध भी 12वीं के छात्रों के पाठ्यक्रम का हिस्सा होंगे।


किस कक्षा से क्या पाठ्यक्रम हटा

● दसवीं : लोकतंत्र एवं विविधता, लिंग, जाति एवं धर्म, लोकप्रिय संघर्ष एवं आंदोलन और लोकतंत्र के लिए चुनौतियां जैसे विषय हटाए गए हैं।

● 11वीं : संघवाद, नागरिकता, राष्ट्रवाद, धर्मनिरपेक्षता और भारत में स्थानीय सरकारों के विकास से संबंधित पाठ शामिल हैं। 

● 12वीं : छात्रों को भारत के अपने पड़ोसियों- पाकिस्तान, म्यामां, बांग्लादेश, श्रीलंका और नेपाल के साथ संबंध, भारत के आर्थिक विकास की बदलती प्रकृति, भारत में सामाजिक आंदोलन और नोटबंदी सहित अन्य विषय पर पाठों को नहीं पढ़ना होगा।


इसलिए घटाया गया पाठ्यक्रम
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक पाठ्यक्रम को विद्यार्थियों का बोझ कम करने के लिए घटाया गया है, लेकिन मुख्य अवधारणाओं को जस का तस रखा गया है। सीबीएसई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, परीक्षा के लिए पाठ्यक्रम भार में अनुपातिक कमी के लिए शिक्षण संबंधी समय के नुकसान का आकलन किया गया। इसके अनुसार, बोर्ड की पाठ्यक्रम समिति ने सिलेबस घटाने पर काम शुरू किया। विभिन्न पक्षधारकों से सुझाव मांगे गए थे।

Wednesday, July 8, 2020

सीबीएसई ने 9वीं से 12वीं का कोर्स 30% घटाया, कोरोना के उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय

सीबीएसई ने 9वीं से 12वीं का कोर्स 30% घटाया, कोरोना के उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय।

नई दिल्ली : कोरोना संकट के कारण केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने नौवीं से लेकर 12वीं तक के पाठ्यक्रम में 30 फीसदी तक की कमी कर दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने ट्वीट कर मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस बाबत अभिभावकों, शिक्षकों से मशविरा लेने के बाद सीबीएसई को कोर्स कम करने का सुझाव दिया था। मंत्रालय की तरफ से बयान जारी कर कहा गया है कि कोरोना के कारण स्कूल नहीं खुल पाने से बच्चों की पढ़ाई पर प्रभाव पड़ा है। इसमे मद्देनजर सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2020-21 के लिए कक्षा नौ से 12 तक के पाठ्यक्रम को संशोधित किया है। इसके तहत मूल अवधारणा को बनाए रखते हुए कोर्स में 30 फीसदी तक कमी की गई है। घटाया गया पाठ्यक्रम बोर्ड परीक्षा या साल के अंत में होने वाले आंतरिक मूल्यांकन के लिए निर्धारित विषयों का हिस्सा नहीं होगा। जो पाठ्यक्रम कम किया गया है, उसकी जानकारी शिक्षक छात्रों को प्रदान करेंगे।




निर्णय : कोरोना से उपजे संकट के कारण सरकार ने लिया निर्णय, स्कूल नहीं खुल पाने के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित


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Sunday, July 5, 2020

सीआइसीएसई CISCE बोर्ड ने की पाठ्यक्रम में कटौती Syllabus

सीआइसीएसई CISCE बोर्ड ने की पाठ्यक्रम में कटौती


CISCE 10 से 15% सिलेबस कम हुआ,  कोरोना संक्रमण के मद्देनजर काउंसिल ने दी राहत 

आईएससी-आईसीएसई बोर्ड के सिलेबस में विषयवार किए गए हैं बदलाव



 ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर बच्चों की पढ़ाई जारी रखने वाले सीआइसीएसई (काउंसिल फॉर इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन) बोर्ड ने बच्चों की सुविधा के लिए पाठ्यक्रम कम करने का निर्णय लिया है। नौ से बारहवीं तक के पाठ्यक्रम को कम करते हुए कहा है कि बच्चों को पढ़ाने के लिए जितना पर्याप्त समय चाहिए, वह नहीं मिल रहा है। 


विशेषज्ञों से बातचीत के आधार में पाठ्यक्रम कम किया जा रहा है। सीआइसीएसई बोर्ड ने पाठ्यक्रम में जो कम किया है, उसमें हाईस्कूल में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायो, मैथ, इतिहास व भूगोल में चैप्टर तो पूरे हैं लेकिन, उपयोगिता के हिसाब से करीब 25 फीसद कम किया गया है।

Friday, July 3, 2020

NCERT : पांचवीं कक्षा तक जारी हुआ दूसरा एकेडमिक कैलेंडर

NCERT : पांचवीं कक्षा तक जारी हुआ दूसरा एकेडमिक कैलेंडर


नई दिल्ली। मानव संसाधन विकास मंत्री ने बृहस्पतिवार को पहली से पांचवीं कक्षा तक के छात्रों के लिए दूसरा वैकल्पिक एकेडमिक कैलेंडर जारी किया। आठ हफ्ते के कैलेंडर में पाठ्यक्रम को साप्ताहिक आधार पर बांटा गया। वैकल्पिक कैलेंडर संस्कृत, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में तैयार किया गया है। निशंक ने कहा कि कोरोना के कारण शिक्षण संस्थान बंद होने से मंत्रालय छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों को लगातार जारी रखने को प्रतिबद्ध है। 


आठ हफ्ते के कैलेंडर को इस प्रकार तैयार किया है, ताकि छात्रों को कंप्यूटर और मोबाइल के सामने कम से कम बैठना पड़े। जिन छात्रों के पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वह भी इसके जरिये पढ़ाई कर सकेंगे। इसमें ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है।

Monday, June 29, 2020

एक प्रश्नपत्र लागू करने से हुआ नुकसान, NCERT पैटर्न के कारण यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणाम में आई गिरावट

एक प्रश्नपत्र लागू करने से हुआ नुकसान, NCERT पैटर्न के कारण यूपी बोर्ड परीक्षा के परिणाम में आई गिरावट।

प्रयागराज : एनसीईआरटी पैटर्न अपनाए जाने के बाद से यूपी बोर्ड की लगातार तीन परीक्षाओं में इंटरमीडिएट के परिणाम में कमी देखी जा रही है। भले ही 2019 की परीक्षा की अपेक्षा अबकी बार परिणाम में चार फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है, लेकिन पूर्व में 2015 में 88.83 फीसदी परिणाम की अपेक्षा यह बहुत कम है।






इंटरमीडिएट में दो और तीन प्रश्नपत्रों के स्थान पर एकल प्रश्न पत्र की व्यवस्था लागू करने के बाद परीक्षा फल में गिरावट दर्ज की जा रही है। बोर्ड के अधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि बदलाव परीक्षाफल पर भारी पड़ा। यूपी बोर्ड की ओर से जारी आंकड़ों पर यदि नजर डालें तो 2015 में इंटरमीडिएट का परिणाम 88.83 फीसदी, 2016 में 87.99 फीसदी, 2017 में 82.62 फीसदी था। 2018 की परीक्षा से यूपी बोर्ड की ओर से एनसीईआरटी पैटर्न अपनाया जाने लगा था, 2019 की परीक्षा में इसे पूरी तरह लागू कर दिया गया। 2018 में रिजल्ट 72.43 फीसदी तो 2019 में यह गिरकर 70.06 फीसदी पहुंच गया। 2020 में रिजल्ट 74.63 फीसदी पहुंच गया। इस प्रकार बोर्ड की ओर से इंटरमीडिएट में भौतिकी, रसायन, गणित सहित मानविकी के विषयों नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र विषय में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाए जाने के बाद परिणाम में गिरावट दर्ज की गई। हाई स्कूल में पहले से ही कल प्रश्न पत्र की व्यवस्था लागू होने से परीक्षार्थियों ने यहां बदलाव को स्वीकार कर लिया। परिणाम पिछले वर्ष 80.07 फीसदी रहा।



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Friday, June 26, 2020

प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम स्थगित

प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में समान पाठ्यक्रम स्थगित


उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में प्रस्तावित स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम शासन ने स्थगित कर दिया। इसके लिए विश्वविद्यालयों को प्रक्रिया तत्काल प्रभाव से रोकने का निर्देश जारी किया है। ऐसे में नए शैक्षणिक सत्र 2020-21 में वर्तमान में जारी पाठ्यक्रम ही शामिल रहेगा।


प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में स्नातक स्तर पर समान पाठ्यक्रम लागू करने की कवायद तीन वर्षो से चल रही थी। 2017 में तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक की अध्यक्षता में कुलपति सम्मेलन में फैसला लिया था। पाठ्यक्रम तैयार करने का जिम्मा गोरखपुर व लखनऊ विश्वविद्यालय को दिया। दोनों विवि ने 16 विषयों का पाठ्यक्रम तैयार किया। 


शासन ने इसे लागू कराने के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रोफेसर सुरेंद्र दुबे की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर विवि आगरा के कुलपति प्रो. अर¨वद दीक्षित, गोरखपुर विवि के कुलपति प्रो. वीके सिंह, रुहेलखंड विवि के कुलपति प्रो. अनिल शुक्ल, लखनऊ विवि के तत्कालीन प्रति कुलपति प्रो. यूएन द्विवेदी बतौर सदस्य शामिल थे। पाठ्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर विश्वविद्यालयों को भेज दी। 


शासन से निर्देश था कि सभी विश्वविद्यालय इसे विद्वत परिषद और कार्य परिषद के एजेंडे में शामिल कर मंजूरी देंगे। प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विवि समेत प्रदेश के तमाम विश्वविद्यालयों में कवायद शुरू हो गई थी।


●  यूपी में स्नातक स्तर पर प्रस्तावित समान पाठ्यक्रम पर शासन ने लगा दी रोक

●   बुंदेलखंड विवि के कुलपति की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने की थी सिफारिश


प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों में नए सत्र 2020-21 से समान पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी थी। फिलहाल इस प्रक्रिया पर शासन स्तर से रोक लगा दी गई है। - शेषनाथ पांडेय, कुलसचिव, प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विवि।

Thursday, June 25, 2020

CBSE : 10वीं के गणित विज्ञान का कम हो गया कोर्स, देखें हटाए गए टॉपिक

CBSE : 10वीं के गणित विज्ञान का कम हो गया कोर्स, देखें हटाए गए टॉपिक।


प्रयागराज : कोरोना संक्रमण की वजह से लागू किए गए लॉकडाउन के दौरान छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। छात्रों की पिछड़ी पढ़ाई को पटरी पर लाने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने कोर्स कम करने का फैसला किया है।





सीबीएसई के सुझाव पर एनसीईआरटी (नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च ऐंड ट्रेनिंग) ने दसवीं के कोर्स से कुछ टॉपिक हटाने का फैसला किया। हटाए गए सिलेबस में दसवीं से हर विषय के कुछ टॉपिक और कांसेप्ट को लिया गया है। एनसीईआरटी ने कहा है कि इन चैप्टर से परीक्षा में कोई सवाल नहीं पूछे जाएंगे। स्कूलों में भी इन चैप्टर की पढ़ाई भी नहीं होगी। हटाए गए टॉपिक से बच्चों का आंतरिक मूल्यांकन होगा।


ये टॉपिक हटाए गए

सीबीएसई की ओर से दसवीं में गणित से त्रिभुज का क्षेत्रफल, शंकु के वक्र पृष्ठ को हटा दिया गया है, जबकि विज्ञान में मेटल, नॉन मेटल की फिजिकल प्रॉपर्टी, लाइट में टिंडल एफेक्ट को कोर्स से हटाया गया है। टिंडल एफेक्ट बच्चे आठवीं में पढ़ चुके हैं, इस कारण से इसे हटाया जा रहा है। इसके अलावा ऊर्जा के स्रोत एवं प्राकृतिक संसाधनों का स्थायी प्रबंधन को कोर्स से हटाया गया है। सामाजिक विज्ञान में औद्योगिकीकरण युग, प्रिंट संस्कृति और आधुनिक दुनिया का सुझाव, बोलीविया के जल युद्घ, नेपाल में लोकतंत्र के लिए आंदोलन को भी हटाया गया है। कोर्स से इन चैप्टर को हटाने के साथ एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया है कि अब जो टॉपिक स्कूल में पढ़ाया जाएगा, उन्हीं से सवाल पूछे जाएंगे। उन्हीं के आधार पर छात्रों का मूल्यांकन होगा। हटाए गए टॉपिक छात्रों को स्वयं पढ़ने होंगे, इन टॉपिक से 20 अंक का इंटर्नल असेसमेंट होगा। इसमें छात्रों को प्रोजेक्ट और असाइनमेंट बनाने होंगे।


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Tuesday, June 9, 2020

छोटा किया जा सकता है स्कूलों का सिलेबस

छोटा किया जा सकता है स्कूलों का सिलेबस


छोटा किया जा सकता है स्कूलों का सिलेबस

 नई दिल्लीः स्कूलों के समय में कटौती के साथ सिलेबस भी छोटा हो सकता है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार इस दिशा में विचार कर रही है। मानव संंसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मंगलवार को कहा कि स्टूडेंट्स और पैरंट्स से इस बारे में काफी सुझाव मिले हैं। इस बीच डीओपीटी ने अपने कर्मचारियों के लिए निर्देश जारी किया है कि अब एक दिन में 20 कर्मचारी ही ऑफिस जा सकेंगे।


लखनऊ : देश में शैक्षणिक सत्र 2020-21 में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के पाठ्यक्रम कम किए जा सकते हैं। सोमवार को इस बाबत केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में स्कूलों को खोलने के बाबत चर्चा की गई। इस दौरान मंत्रालय के सचिव ने सभी स्कूल राज्यों के शिक्षा अधिकारियों से पाठ्यक्रम को लेकर बातचीत की। इसमें यह सामने आया कि सत्र 2020-21 में अप्रैल-मई में स्कूल नहीं खुला और अब जुलाई में भी तारीख तय नहीं होने से पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो सकेगा इस दौरान पाठ्यक्रम में कटौती करने का सुझाव दिया।


 यूपी में माध्यमिक शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव आराधना शुक्ला ने कहा कि यूपी बोर्ड में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू है। अगर केंद्र सरकार पाठ्यक्रम कम करेगी तो यूपी में उसी के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। वहीं, बेसिक शिक्षा महानिदेशक विजय किरण आनंद ने कहा कि बेसिक शिक्षा परिषद की स्कूलों में रोजाना एक घंटे अधिक कक्षाएं संचालित कर पाठ्यक्रम को पूरा कराने का प्रयास किया जाएगा। वीसी में माध्यमिक शिक्षा निदेशक वीके पांडेय भी मौजूद थे।


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Thursday, May 7, 2020

कवायद : विवि से लेकर स्कूल तक के सभी कोर्स में होगी कटौती, यूजीसी व एनसीईआरटी का काम शुरू, 30 से 40% तक हो सकती कमी

कवायद : विवि से लेकर स्कूल तक के सभी कोर्स में होगी कटौती, यूजीसी व एनसीईआरटी का काम शुरू, 30 से 40% तक हो सकती कमी।



विवि से लेकर स्कूल तक के सभी कोर्स में होगी कटौती

यूजीसी व एनसीईआरटी का काम शुरू, 30 से 40% तक हो सकती कमी

10वीं और 12वीं की सबसे पहले शुरू हो सकती है पढ़ाई

चार से पांच महीने में प्रस्तावित कोर्स को पूरा करने का लक्ष्य बना रहे।


कोरोना संकट से जल्द निजात न मिलने की आशंका को देखते हुए अब बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य पर पड़ने वाले प्रभावों से निपटने को लेकर तेजी से काम शुरू हो गया है। इसके तहत विश्वविद्यालय से लेकर स्कूल स्तर के सभी कोसों में कटौती कर उन्हें छोटा करने की तैयारी हो रही है। मौजूदा स्थिति में सभी कक्षाओं के कोर्स में 30 से 40 फीसद तक कोर्स घटाने का प्रस्ताव है। हालांकि इस पर कोई भी अंतिम निर्णय तात्कालिक परिस्थितियों को देखते हुए लिया जाएगा। फिलहाल इसका जिम्मा यूजीसी और एनसीईआरटी को सौंपा गया है। जिन्होंने अपने स्तर पर काम भी शुरू कर दिया है। प्रस्तावित कोर्स को इस तरह से तैयार किया जा रहा है, जो चार से पांच महीने में पूरा हो जाए। बता दें कि देश भर में स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र एक अप्रैल से ही शुरू हो जाता है। जबकि कोरोना संकट के चलते 18 मार्च के बाद से स्कूल बंद पड़े है। यहां तक बोर्ड की परीक्षाएं भी रुकी पड़ी है। केंद्रीय विद्यालय संगठन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए स्कूलों में सितंबर से पहले पढ़ाई शुरू होने में मुश्किल ही है। यह इसलिए भी है, क्योंकि जब तक सुरक्षा के कोई पुख्ता बंदोबस्त या फिर इसके संक्रमण का खतरा खत्म नहीं हो जाता तब तक किसी भी स्कूल के लिए बच्चों को बचाना खतरे से खाली नहीं होगा। हालांकि इस बीच दसवीं और बारहवीं के छात्रों को सुरक्षा के सख्त बंदोबस्त के बीच पढ़ाने की एक योजना पर जरूर काम किया जा रहा है, लेकिन कोई भी कदम सरकार के निर्णय के बाद ही लिया जाएगा। छात्रों की बोर्ड परीक्षाओं को देखते हुए इस दिशा में विचार चल रहा है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कोरोना संकट के चलते नए शैक्षणिक सत्र में 12वीं का जो कोर्स तय होगा, उसी के आधार पर जेईई और नीट की 2020-21 की परीक्षाएं भी होंगी। इसे लेकर भी छात्रों के नुकसान को कम करने में जुटी मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी ने मंथन किया है। गौरतलब है कि जेईई और नीट की परीक्षाएं पूरी तरह से 12वीं की पाठ्यक्रम पर ही आधारित होती हैं। ऐसे में बच्चों को जो पढ़ाया ही नहीं जाएगा, उसकी परीक्षाएं कैसे ली जाएंगी।





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विश्वविद्यालयों में स्नातक में होगा अब कॉमन पाठ्यक्रम, शासन के निर्देश पर शुरू हो गई तैयारियां

विश्वविद्यालयों में स्नातक में होगा अब कॉमन पाठ्यक्रम, शासन के निर्देश पर शुरू हो गई तैयारियां।


विश्वविद्यालयों में स्नातक में होगा अब कॉमन सिलेबस


स्नातक स्तर पर अब छात्रों को कॉमन सिलेबस पढ़ाने की तैयारी की जा रही है। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलसचिव डॉ. एसएल मौर्य ने बताया कि कॉमन सिलेबस के लिए सुझाव मांगा गया है। इसके अलावा विभागों से बोर्ड ऑफ स्टडीज से अनुमोदिन पाठ्यक्रम मांगा गया है, ताकि इसे विद्या परिषद व कार्य परिषद से अनुमोदित कराने के बाद लागू कराया जा सके। एक समान पाठ्यक्रम के लिए गठित समिति की सिफारिशों की लागू करने के लिए उच्च शिक्षा के विशेष सचिव मनोज कुमार ने सभी राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों को पत्र भेजा है। इसमें सभी पर शुरू विश्वविद्यालयों ने अनिवार्य रूप से 70 फीसदी पाठ्यक्रम लागू करने का निर्देश दिया गया है वहीं 30 फीसदी पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय अपने स्तर पर संशोधित कर सकती है। विद्यापीठ के कुलसचिव ने बताया कि सभी औपचारिकता पूरी करने के बाद सत्र 2020-21 से ही इसे लागू कराया जाएगा।





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पॉलीटेक्निक के 26 विषयों के बदले जाएंगे पाठ्यक्रम, लॉकडाउन के दौरान शोध विकास संस्थान ने किया फैसला

पॉलीटेक्निक के 26 विषयों के बदले जाएंगे पाठ्यक्रम, लॉकडाउन के दौरान शोध विकास संस्थान ने किया फैसला।



लॉकडाउन के दौरान शोध विकास संस्थान ने किया फैसला

पॉलीटेक्निक के 26 विषयों के पाठ्यक्रम बदला जाएगा

रोजगार की जरूरत को देखते हुए बदलाव नए सेमेस्टर से लागू होंगे।

एक से तीन साल तक के कोर्स में बदलाव किया गया


पॉलीटेक्निक के 26 विषयों का कोर्स बदला जाएगा। इसकी स्वीकृति भी मिल गई है। 2020-21 के नए सेमेस्टर से यह लागू होगा। लॉकडाउन के दौरान शोध विकास संस्थान ने सभी कोर्स बदल दिए हैं। ऐसा रोजगार व इंडस्ट्री की जरूरतों को देखते हुए किया गया है। साथ ही इसमें देशभर के विशेषज्ञों की मदद ली गई है। निदेशक मनोज कुमार ने बताया कि एक से तीन साल तक के कोर्स में बदलाव किया है। इससे छात्र नई जानकारियां हासिल कर सकेंगे। इन कोर्स में बदलावः डिप्लोमा इन एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन मोल्ड टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन केमिकल टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन केमिकल इंजीनियरिंग, डिप्लोमा इन पेंट टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन आर्किटेक्चर, डिप्लोमा इन इंटीरियर डिजाइन, पीजी डिप्लोमा इन कंप्यूटर एप्लीकेशन, पीजी डिप्लोमा इन टूरिज्म एंड ट्रैवल, पीजी डिप्लोमा इन इंडस्ट्रियल सेफ्टी, पीजी डिप्लोमा इन ब्यूटी एंड हेल्थ, पीजी डिप्लोमा इन टेक्सटाइल डिजाइन, पीजी डिप्लोमा इन पब्लिक रिलेशन, पीजी डिप्लोमा इन मार्केटिंग एंड सेल्स, पीजी डिप्लोमा इन वेब डिजाइन, पीजी डिप्लोमा इन कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग, पीजी डिप्लोमा इन कस्टमर सर्विस, पीजी डिप्लोमा इन फैशन डिजाइनिंग आदि।




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Thursday, April 30, 2020

उच्च शिक्षा में नए सत्र से समान पाठ्यक्रम लागू करने का प्रदेश सरकार ने लिया फैसला

उच्च शिक्षा में नए सत्र से समान पाठ्यक्रम लागू करने का प्रदेश सरकार ने लिया फैसला।











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Wednesday, April 29, 2020

CBSE : स्कूलों में कम होगा प्रमुख विषयों का कोर्स

CBSE : स्कूलों में कम होगा प्रमुख विषयों का कोर्स।








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प्रदेश के 18 जनपदों में केंद्रीय स्कूल के लिए उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से किया अनुरोध, लॉकडाउन के बाद स्थितियां सामान्य रहीं तो 04 मई से जांची जा सकती हैं यूपी बोर्ड की कॉपियां

प्रदेश के 18 जनपदों में केंद्रीय स्कूल के लिए उपमुख्यमंत्री ने केंद्र से किया अनुरोध, लॉकडाउन के बाद स्थितियां सामान्य रहीं तो 04 मई से जांची जा सकती हैं यूपी बोर्ड की कॉपियां।















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Saturday, April 25, 2020

अब छोटे किए जाएंगे स्कूलों के 12वीं तक के पाठ्यक्रम, NCERT को सौंपा गया जिम्मा

अब छोटे किए जाएंगे स्कूलों के 12वीं तक के पाठ्यक्रम, NCERT को सौंपा गया जिम्मा।





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Wednesday, April 22, 2020

उच्च शिक्षा : ऑनलाइन पढ़ाई ढर्रे पर आने का अपर मुख्य सचिव ने किया दावा, 75% तक कोर्स कराया जा चुका है पूरा

उच्च शिक्षा : ऑनलाइन पढ़ाई ढर्रे पर आने का अपर मुख्य सचिव ने किया दावा, 75% तक कोर्स कराया जा चुका है पूरा।






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