लखनऊ : परिषदीय स्कूलों के 16 हजार शिक्षक स्कूलों में पढ़ाने की बजाए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) कार्यालय में ड्यूटी बजा रहे हैं। बीते 30 जून को इनका स्थानांतरण एक जिले से दूसरे जिले में किया गया था। दो से तीन जुलाई तक स्थानांतरित शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय में जाकर अपनी ज्वाइनिंग दे दी थी। फिर भी अभी वरिष्ठता सहित अन्य प्रकरणों के कारण स्कूल आवंटन नहीं हो पा रहा है। 


स्कूलों में शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई पर असर पड़ रहा है। परिषदीय स्कूलों के एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित किए गए तमाम शिक्षकों की वरिष्ठता काफी प्रभावित हो रही है। 


नियमानुसार प्राथमिक स्कूल में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्त किए गए शिक्षकों को तीन वर्ष बाद प्राथमिक स्कूल का हेड मास्टर या फिर उच्च प्राथमिक स्कूल का सहायक अध्यापक बनाया जाता है। पांच वर्ष बाद वह उच्च प्राथमिक स्कूल के हेड मास्टर पद पर प्रोन्नति पाते हैं। अगर पदोन्नति तय समय पर नहीं हो पा रही है तो प्रथम नियुक्ति तिथि से 10 साल पर चयन वेतनमान और फिर 12 साल तक अगर दोबारा प्रोन्नति नहीं हुई है तो प्रोन्नत वेतनमान दिया जाता है।


अब कुछ जिलों में तो शिक्षकों की पदोन्नति तय समय पर हो गई और वह दो-दो प्रमोशन पा गए। मगर कई जिलों में 15-15 साल से नहीं हुई। किसी दूसरे जिले में स्थानांतरण होने पर शिक्षक को वहां सबसे कनिष्ठ पद पर कार्यभार ग्रहण कराया जाता है। ऐसे में अब कई जिलों में शिक्षकों की एक-एक नहीं बल्कि दो-दो पदोन्नतियों का नुकसान हो रहा है। ऐसे में वह पदभार ग्रहण करने को राजी नहीं हैं। 


वहीं 69 हजार शिक्षक भर्ती में तमाम जिलों में मेरिट के अनुसार शिक्षकों की तैनाती न होने का भी प्रकरण निस्तारित नहीं हो पाया है।


महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद कहते हैं कि शिक्षकों से जुड़े इन सभी प्रकरणों पर नीतिगत निर्णय होने हैं और इसके बाद ही उन्हें स्कूल आवंटित होगा, ताकि आगे कोई अड़चन न हो।