DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कैसरगंज कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महाराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फर नगर मुजफ्फरनगर मुज़फ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी मैनपूरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Friday, July 21, 2017

कानपुर देहात : नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके गांव परौंख के सरकारी विद्यालय को लेकर की चर्चा, कहा : शैक्षिक व्यवस्था रहे बेहतर, ‘विद्यालय का ध्यान रखिएगा’

गंगा तीरे बचपन जमुना तीरे ‘आसन’
बचपन की यादें

जिंदगी की ऋतु भी क्या बदली है। एक वो सावन था और एक ये सावन। बचपन में शांत मन से गंगा किनारे अधिकतर वक्त बिताने वाले रामनाथ कोविंद अब यमुना किनारे बसी दिल्ली में देश के सबसे ऊंचे आसन पर बैठने जा रहे हैं। गंगा से रहे उनके लगाव ने गंगा के उद्धार की उम्मीदों को और हिलोरें दे दी हैं।

प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव कानपुर देहात के डेरापुर स्थित परौंख में हासिल करने वाले रामनाथ कोविंद आगे की पढ़ाई के लिए कानपुर नगर आ गए थे। यहां बीएनएसडी इंटर कॉलेज में कक्षा नौ में दाखिला लेने वाले कोविंद अपनी बड़ी बहन पार्वती देवी के घर मैकरॉबर्टगंज की लाल इमली कॉलोनी नंबर 42 में रहते थे। उनके साथ रहे भांजे काकादेव निवासी रामशंकर कोविंद ने उनकी साझा कीं। अपने मामा के राष्ट्रपति निर्वाचित होने से उत्साहित रामशंकर ने बताया कि मामा अक्सर गंगा किनारे जाकर बैठते थे। उनका आध्यात्म के प्रति बचपन से ही झुकाव रहा। सावन के महीने में तो उनकी दिनचर्या ही बदल जाती थी। एक बार सुबह गंगा किनारे जाते थे, उसके बाद शाम को परमट स्थित गंगा छवि घाट जाकर पथिक जी के सत्संग में शामिल होते थे। अब वही रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति के रूप में यमुना किनारे बसी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में रहेंगे। ऐसे में कानपुर के बाशिंदों को पूरी उम्मीद है कि गंगा के प्रति इतना लगाव रखने वाले कोविंद की नजर गंगा की बदहाली पर भी होगी और सरकार को इशारा इसके उद्धार के कार्य में तेजी लाने का भी मिलेगा।

पढ़ाई के दौरान गंगा के घाट पर काफी वक्त बिताते थे रामनाथ कोविंद

सावन भर हर शाम परमट घाट पर सत्संग में होते थे शामिलतब दिल्ली में नहीं था रहने का ठिकाना1ये वही रामनाथ कोविंद हैं, जिनके पास कभी दिल्ली में रहने तक का ठिकाना नहीं था। उनके भांजे रामशंकर कोविंद ने बताया कि डीएवी कॉलेज से बीकॉम एलएलबी करने के बाद मामा वर्ष 1968 में दिल्ली चले गए। वह हमेशा कहते थे कि आइएएस बनना है। यहां से सिविल सर्विसेज की तैयारी की बात कहकर ही गए थे। मगर, वहां जाकर उन्होंने एसएन दासगुप्ता कॉलेज में एमकॉम एलएलबी में दाखिला ले लिया। परिजनों के पूछने पर उन्होंने बताया था कि तैयारी तो आइएएस की ही करनी है, लेकिन रहने की कोई जगह नहीं, इसलिए हॉस्टल के लालच में कॉलेज में एडमिशन ले लिया। वही कोविंद अब देश के सबसे बड़े सरकारी बंगले में रहेंगे।

बात कुछ दिन पहले की है, देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उनके गांव परौंख के सरकारी विद्यालय को लेकर चर्चा की। बोले, उस विद्यालय की शैक्षिक व्यवस्था बेहतर रहे, इसका ध्यान रखिएगा। पुराने संस्मरण याद करते हुए बीएनएसडी शिक्षा निकेतन प्रधानाचार्य डॉ. अंगद सिंह बताते हैं कि रामनाथ कोविंद का उनके विद्यालय से हमेशा आत्मीय जुड़ाव रहा। उन्होंने बताया कि बिहार के राज्यपाल रहते हुए उन्होंने विद्यालय के कई कार्यक्रमों में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। यहां के शिक्षकों, छात्रों में हर्ष का माहौल है।नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के गांव परौंख का सरकारी विद्यालय ’

No comments:
Write comments