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Thursday, November 2, 2017

बुलंदशहर : स्कूलों की अनदेखी की तो होगी कड़ी कार्रवाई , परिषदीय स्कूलों को लेकर शासन गंभीर, प्रधान जी को स्कूलों पर भी करना होगा खर्च

गांवों के विकास के लिए आने वाली धनराशि को गांव प्रधान नाली व खड़ंजा समेत अन्य कार्यों में खर्च कर देते हैं। इनका ध्यान सरकारी धरोहर परिषदीय स्कूलों की जर्जर हालत की ओर नहीं जाता है। शासन ने प्रधानों की इस लापरवाही का संज्ञान लेते हुए अहम निर्णय किया है। अब गांव प्रधानों को विकास कार्यों के लिए आने वाली धनराशि का महत्वपूर्ण अंश सरकारी स्कूलों की देखरेख पर भी खर्च करना होगा।

पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम पंचायतों में राज्य वित्त आयोग की संक्रमित धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा गांवों की सृजित परिसंपत्तियों के रख-रखाव पर और शेष 50 प्रतिशत धनराशि अन्य कामों में खर्च की जाएगी। अमूमन देखा जाता है कि गांव प्रधान पूरी राशि को ही अपनी मर्जी से खर्च करता है। इसमें वह सृजित परिसंपत्ति की ओर से निगाह फेर लेता है।

यही कारण है कि गांवों में परिषदीय स्कूलों की जर्जर हालत रहती है। जबकि परिषदीय स्कूल सृजित परिसंपत्तियों में से एक है। जब कभी स्कूलों में मरम्मत या निर्माण आदि की बारी आती है तो गांव प्रधान धनराशि न होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं। इसके बाद बेसिक शिक्षा विभाग को ही स्कूलों का रख-रखाव करना पड़ता है। अब ऐसा नहीं होगा। शासन ने मामले में संज्ञान लेते हुए गांव प्रधानों को सख्त निर्देश दिए हैं।

इस तरह कराएंगे स्कूलों में निर्माण कार्य प्रधान अब 14वें वित्त आयोग की संक्रमित धनराशि से सर्वप्रथम आवश्यकता अनुसार परिषदीय स्कूलों में मरम्मत व निर्माण कार्य कराएंगे। मरम्मत या निर्माण कार्य पूरा होने के बाद ही अन्य काम करा सकेंगे। यह कार्य दो भागों में कराया जाएगा। प्रथम नंबर पर बाउंड्रीवाल, शौचालय, फर्श, दीवार व छत पर प्लास्टर, खिड़कियां व रसोईघर में बर्तन व फर्नीचर आदि। दूसरे नंबर पर दीवारों पर पेंट फर्श टाइल, मिड-डे मील शैड, विद्यार्थियों के हाथ धोने की टंकियां व सबमर्सिबल आदि।यह समिति रखेगी निगरानी स्कूलों पर गांव प्रधान धनराशि खर्च कर रहे हैं या नहीं, इसकी देखरेख के लिए विकास खंड अधिकारी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया जाएगा। इसमें खंड शिक्षा अधिकारी व एडीओ पंचायत को नामित सदस्य शामिल किया जाएगा। यह समिति प्रत्येक सप्ताह स्कूल में हुए कार्यों का निरीक्षण कर रिपोर्ट देगी। अगर कार्य का मौके पर जाकर निरीक्षण नहीं किया तो उक्त दोनों अधिकारी इसके लिए जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा, संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारी व गांव प्रधान के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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