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Monday, August 27, 2018

गोरखपुर : प्रधानाध्यापक के 81 फीसद पद समाप्त, नामांकन कम, शिक्षकों की पदोन्नति की राह कठिन

फैसला मुश्किल150 से कम संख्या वाले प्राथमिक व 100 से कम संख्या वाले उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नहीं होंगे प्रधानाध्यापकशिक्षकों ने शुरू किया विरोध नए पदसृजन के बाद बचे पद

जागरण संवाददाता, गोरखपुर : परिषदीय विद्यालयों में छात्रों की घटती संख्या का नुकसान अब शिक्षकों को भी उठाना पड़ेगा क्योंकि जनपद के 81 फीसद विद्यालयों में हेड मास्टर यानी प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त कर दिए गए हैं। यहां भविष्य में कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के भरोसे ही विद्यालयों का संचालन करना होगा। बड़े पैमाने पर पद समाप्त होने से सैकड़ों सहायक अध्यापकों के लिए पदोन्नति अंतहीन इंतजार जैसी हो जाएगी।

यूं बाधित होगी पदोन्नति: शिक्षकों की नियुक्ति प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के रूप में होती है। प्राथमिक के शिक्षक पदोन्नति पाकर प्रधानाध्यापक या जूनियर विद्यालय में सहायक अध्यापक बनते हैं जबकि जूनियर के सहायक अध्यापक यहीं प्रधानाध्यापक के रूप में पदोन्नत होते हैं। पद समाप्त हो जाने के बाद यह अवसर अत्यंत क्षीण हो जाएगा।

ऐसे हुआ पदों का सृजन: छात्र संख्या के आधार पर नए सिरे से शिक्षकों के पदों का सृजन किया गया है। इसके तहत जिन उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 100 से कम तथा जिन प्राथमिक विद्यालयों में 150 से कम छात्र संख्या थी, वहां प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर दिए गए। इस दायरे में दोनों मिलाकर करीब 81 फीसद विद्यालय आ गए।

नहीं हटेंगे पहले से तैनात प्रधानाध्यापक: जिन विद्यालयों से प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त किए गए हैं, उनमें यदि पहले से कोई प्रधानाध्यापक कार्यरत है, तो वह पद उसकी सेवानिवृत्ति तक कायम रहेगा। नया शिक्षक वहां प्रधानाध्यापक नहीं बन सकेगा।प्रधानाध्यापकों के पद समाप्त करने के फैसले का शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के मंडल अध्यक्ष एवं प्रदेश मंत्री भारतेंदु यादव के नेतृत्व में शुक्रवार को शिक्षकों ने मंडलायुक्त से मिलकर मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपकर पदों को बहाल करने की मांग की। भारतेंदु यादव व मंडल उपाध्यक्ष अमरेंद्र शाही ने कहा कि पद समाप्त हो जाने से शिक्षकों की पदोन्नति के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि समाप्त किए गए पदों को बहाल नहीं किया गया तो संगठन प्रदर्शन करने को बाध्य होगा। ज्ञापन सौंपने वालों में नीरज शाही, आशुतोष नायक, भानू प्रताप सिंह, रंजीत, प्रमोद आजाद, अरविंद यादव, चंद्रभान मिश्र, शंभू यादव, प्रीति सिंह, दिनेश उपाध्याय, संतोष चौधरी, अवनीश शुक्ला, शैलेंद्र मोहन, ममता कुरील, संजय यादव, पंकज, उमाशंकर यादव, राजकुमार राय, रानू वर्मा, दिनेश यादव, रमेश निषाद, संतोष सिंह आदि शामिल रहे।नए पद सृजन के बाद बड़ी संख्या में विद्यालयों से प्रधानाध्यापक के पद समाप्त कर दिए गए हैं। जहां प्रधानाध्यापक के पद नहीं होंगे, वहां शिक्षकों को प्रभारी बनाया जाएगा

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