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Friday, May 31, 2024

मदरसों में एक जून से सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक लगेंगी कक्षाएं

मदरसों में एक जून से सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक लगेंगी कक्षाएं


लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त और अनुदानित मदरसों में एक जून से सुबह 6.30 बजे से 10.30 बजे तक कक्षाएं संचालित की जाएंगी। मदरसा बोर्ड ने लगातार बढ़ रही भीषण गर्मी को देखते हुये कक्षाओं के समय में बदलाव किया है। 


मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार डॉ. प्रियंका अवस्थी ने बताया कि गर्मी को देखते हुये बीती एक अप्रैल से मदरसों में सुबह 7 बजे से दोपहर 12.30 बजे तक कक्षाएं संचालित की जा रही थीं। अब इसमें बदलाव किया गया है। वहीं मदरसे के शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारी सुबह 11.30 बजे तक मदरसे में उपस्थित रहेंगे। 

मदरसा बोर्ड में लड़कियां फिर अव्वल, 90.3 फीसदी लड़कियां और 86.7 फीसदी लड़के हुए उत्तीर्ण, मुंशी-मौलवी, आलिम, कामिल व फाजिल का रिजल्ट घोषित

मदरसा बोर्ड में लड़कियां फिर अव्वल, 90.3 फीसदी लड़कियां और 86.7 फीसदी लड़के हुए उत्तीर्ण, मुंशी-मौलवी, आलिम, कामिल व फाजिल का रिजल्ट घोषित



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लखनऊ। मदरसा बोर्ड की सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकेंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं में इस बार भी लड़कियों ने बाजी मार ली है। 86.7 फीसदी लड़के और 90.3 फीसदी लड़कियां उत्तीर्ण हुई हैं। बृहस्पतिवार को मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार डॉ. प्रियंका अवस्थी ने रिजल्ट की घोषणा की। आचार संहिता की वजह से कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया गया। बोर्ड के चेयरमैन इफ्तिखार अहमद जावेद ने परीक्षार्थियों को मुबारकबाद दी है। वहीं, बोर्ड के सदस्य कमर अली ने विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।



परीक्षाओं में कुल 1,41,115 परीक्षार्थियों ने आवेदन किया था। इनमें से 1,14,723 परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षाओं में 1,01,602 परीक्षार्थी पास हुए जबकि 13,121 परीक्षार्थी फेल हो गए। बोर्ड की परीक्षाओं में 52,348 बालिकाओं ने सफलता हासिल कर बाजी मार ली। उनका प्रतिशत 90.3 रहा, जबकि परीक्षाओं में 49,254 बालक सफल हुये, उनका प्रतिशत 86.7 रहा।


इन्होंने किया प्रदेश में टॉप

मुंशी मौलवी (सेकेंडरी) की परीक्षा में शामिल 60,915 में 51,515 परीक्षार्थी पास हुए ,हैं। इनमें 26,550 छात्राएं शामिल हैं। परीक्षा मुंशी-मौलवी असद खान 552 अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान हासिल किया। दूसरे नंबर पर देवरिया की अफीफा परवीन रहीं। वहीं, देवरिया की ही लाडली खातून तीसरे नंबर पर रहीं। इसी तरह आलिम (सीनियर सेकेंडरी) परीक्षा में 20,508 में से 17,375 परीक्षार्थी पास हुए। इनमें 9,312 छात्राएं उत्तीर्ण हुई। परीक्षा में कन्नौज के मोहम्मदद रेहान रजा 473 अंक हासिल कर प्रदेश में पहले स्थान पर रहे। दूसरे नंबर पर सीतापुर की गुलिस्तान परवीन और वहीं की यासमीन तीसरे स्थान पर रहीं। कामिल की परीक्षा में जालौन के मोहम्मद अरयान सिद्दीकी ने 343 नंबर हासिल कर पहले स्थान प्राप्त किया। बहराइच की जीनत फातिमा शेख ने प्रदेश में दूसरा स्थान हासिल किया। शाहजहांपुर की राबिया बी तीसरे स्थान पर रहीं। फाजिल की परीक्षा में सीतापुर की गुलफशां ने 344 अंक लाकर पहला स्थान हासिल किया। गाजीपुर के अबु ओसामा दूसरे स्थान पर रहे। बलरामपुर के महताब हुसैन ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।


लखनऊ के टॉपर

मुंशी-मौलवी की परीक्षा में सानिया खातून ने 505 अंक हासिल कर राजधानी में पहला स्थान हासिल किया। राशिदा परवीन दूसरे और अलकमा बानो तीसरे स्थान पर रहीं। इसी तरह आलिम में नरगिस खातून पहले स्थान पर रहीं। उन्हें 427 अंक मिले। सोहेल दूसरे और सफिया नजीब तीसरे स्थान पर रहीं। कामिल की परीक्षा में अब्बास मेंहदी 319 अंक लाकर पहला स्थान पर रहे। मोहम्मद आरिफ जमील दूसरे और सलमान अब्बास तीसरे नंबर पर रहे। फाजिल की परीक्षा में अबू बकर पहले स्थान पर रहे, उन्होंने 299 अंक हासिल किए जबकि अरमान दूसरे और मोहम्मद फिरदौस तीसरे स्थान पर रहे।

9 जून की बीएड प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डॉउनलोड

9 जून की बीएड प्रवेश परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी, ऐसे करें डॉउनलोड 


झांसी। बृहस्पतिवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने बीएड प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र जारी कर दिए। इसके साथ ही अभ्यर्थियों द्वारा प्रवेश पत्र ऑनलाइन डाउनलोड किए जाने लगे हैं। वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन तेजी से परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से नौ जून को प्रदेश में बीएड प्रवेश परीक्षा का आयोजन किया जा रहा है। परीक्षा 51 जनपदों में बनाए गए 470 केंद्रों पर होगी। जिसमें 2.23 लाख अभ्यर्थी शामिल होंगे। बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय ने सभी अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र अपनी वेबसाइट www.bujhansi.ac.in पर अपलोड कर दिए।



 डाउनलोड करें बीएड प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र

झांसी। बुंदेलखंड विवि द्वारा कराई जाने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के प्रवेश पत्र बृहस्पतिवार से विश्वविद्यालय की वेबसाइट से डाउनलोड किए जा सकेंगे। परीक्षा नौ जून को प्रदेश के 51 जिलों में होगी। विवि प्रशासन परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटा है।

विश्वविद्यालय द्वारा सभी आवेदकों के प्रवेश पत्र तैयार कर लिए गए हैं, जिन्हें अभ्यर्थी www.bujhansi.ac.in से बृहस्पतिवार से डाउनलोड कर सकेंगे। 



9 जून को होगी बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा

मेरठ। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा को लेकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय ने तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। नौ जून को प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। मेरठ समेत आस पास के जिलों में अभ्यर्थियों की संख्या के हिसाब से केंद्र निर्धारण कर लिया गया है। वहीं हापुड़ व बागपत में अभ्यर्थियों की संख्या कम होने के कारण माना जा रहा है कि हापुड़ के अभ्यर्थी गाजियाबाद व बागपत के अभ्यर्थी मेरठ में परीक्षा देंगे।


बीएड : वाराणसी में सबसे ज्यादा 52 और प्रयागराज में 33 केन्द्रों पर होगी 9 जून  को बीएड प्रवेश परीक्षा 

नौ जून को 468 केंद्रों पर होनी है परीक्षा, 2.21 लाख अभ्यर्थी होंगे शामिल


झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से नौ जून को होने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए पूरे प्रदेश में 468 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रदेश में वाराणसी में सबसे ज्यादा 52 परीक्षा केंद्र बने हैं। जबकि, सीतापुर समेत पांच जिलों में सबसे कम यानी दो-दो ही परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

बीएड प्रवेश परीक्षा में इस बार 2.21 लाख छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। बीयू कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा परीक्षार्थी होने के कारण सर्वाधिक 52 केंद्र वाराणसी में बनाए गए हैं। जबकि प्रयागराज में 33 और गोरखपुर में 30 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। 

वहीं, बलिया में 20, जौनपुर में 19, गाजियाबाद में 18, अंबेडकर नगर में 17, लखनऊ, आगरा, कुशीनगर में 15-15, आजमगढ़, कानपुर नगर, गाजीपुर, देवरिया में 14-14, मेरठ में 11, गौतमबुद्ध नगर, अलीगढ़, चंदौली में 10-10 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इन जिलों में बने 10 से कम केंद्र प्रवेश परीक्षा के लिए अयोध्या में नौ, सुल्तानपुर, मुरादाबाद में आठ आठ, प्रतापगढ़ में सात, बरेली, बस्ती, मऊ में छह-छह और बिजनौर, इटावा में पांच-पांच केंद्रों पर परीक्षा होगी। बाराबंकी, बुलंदशहर, एटा, जालौन, झांसी, लखीमपुर खीरी, मथुरा, मिर्जापुर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर में चार- चार केंद्र बने हैं। वहीं अमरोहा, बांदा, भदोही, बदायूं, गोंडा, हरदोई, रायबरेली, शाहजहांपुर, महाराजगंज में तीन- तीन परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।

इसके अलावा बहराइच, पीलीभीत, सिद्धार्थ नगर, सीतापुर, सोनभद्र में कम परीक्षार्थी होने के कारण दो-दो ही परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।


51 जिलों में सवा दो लाख अभ्यर्थी 9 जून को देंगे बीएड प्रवेश परीक्षा 

झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को लगातार दूसरी बार बीएड प्रवेश परीक्षा करने की जिम्मेदारी दी गई है। परीक्षा उत्तर प्रदेश के 51 जिलों में होगी जिसमें करीब दो लाख 21 हजार छात्र-छात्राएं हिस्सा लेंगे। रजिस्ट्रार विनय कुमार सिंह ने बत्ताया कि यूपी के 468 केंद्रों पर बीएड प्रवेश परीक्षा नौ जून को कराई जाएगी।



यूपी बीएड : 9 जून को 51 जिलों के 468 केंद्रों पर प्रवेश परीक्षा

बीयू ने सभी जिलों को भेजी केंद्रों की संख्या की सूची, छह-सात जून को रवाना होंगी टीमें

झांसी। नौ जून को प्रदेश के 468 केंद्रों में बीएड प्रवेश परीक्षा होगी। बुंदेलखंड विवि ने सभी जिलों को परीक्षा केंद्रों की संख्या की सूची भेज दी है। छह और सात जून को बीयू की सभी टीमें केंद्रों के लिए रवाना होंगी। परीक्षा को लेकर बृहस्पतिवार को हुई कुलपतियों की ऑनलाइन बैठक में बीयू अफसरों की तरफ से कई अहम जानकारियां दी गईं।


बीयू की तरफ से कराई जाने वाली बीएड प्रवेश परीक्षा के लिए इस बार 2,21,492 छात्र-छात्राओं ने फॉर्म भरा है। नौ जून को प्रदेश के 51 जिलों में प्रवेश परीक्षा होनी है। इसको लेकर बीयू ने 468 परीक्षा केंद्र बनाए हैं। कुलपतियों की ऑनलाइन बैठक के बाद कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि सभी जिलों को केंद्रों की संख्या की सूची भेज दी गई है कि कहां कितने केंद्र होंगे।

जिला प्रशासन से चर्चा करके जिला समन्वयक शिक्षण संस्थानों को केंद्र बनाएंगे। छह-सात जून को बीयू से टीमें रवाना हो जाएंगी। आठ जून को नोडल समन्वयक, जिला समन्वयक, ऑब्जर्वर और जिला प्रशासन के प्रतिनिधि के साथ बैठक होगी। बताया गया कि दो पालियों में परीक्षा होगी। सात जून तक सभी जिलों के कोषागार में प्रश्नपत्र पहुंच जाएंगे। सिटी इंचार्ज, बीयू के प्रतिनिधि, जिला समन्वयक, डिप्टी नोडल अधिकारी, कोषाधिकारी इन पेपरों को सुरक्षित रखवाएंगे।

नौ जून की सुबह पांच बजे पहली पाली की परीक्षा के लिए कोषागार से केंद्रों को प्रश्नपत्र भिजवाए जाएंगे। दूसरी पाली के लिए सुबह नौ बजे कोषागार से पेपर केंद्रों को पेपर भिजवाए जाएंगे। उत्तर पुस्तिका की तीन प्रतियां होंगीं। एक प्रति परीक्षार्थी ले जा सकेंगे। एक प्रति कोषागार में जमा होगी। जबकि, मूल प्रति बीयू की टीम लेकर आएगी।

परिषदीय स्कूलों में समर कैंप का विरोध जारी, बेसिक शिक्षा मंत्री, महानिदेशक को पत्र भेजकर स्थगित करने की मांग

परिषदीय स्कूलों में समर कैंप का विरोध जारी, बेसिक शिक्षा मंत्री, महानिदेशक को पत्र भेजकर स्थगित करने की मांग


लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से गर्मी की छुट्टियों में विश्व पर्यावरण दिवस पर समर कैंप के आयोजन का विरोध जारी है। विभाग की ओर से पांच से 11 जून तक समर कैंप आयोजित करने के आदेश को निरस्त करने के लिए शैक्षिक संगठनों ने बेसिक शिक्षा मंत्री व महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजा है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने महानिदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि 20 मई से 15 जून तक पूर्व से गर्मी की छुट्टियां घोषित हैं। प्रदेश में भीषण गर्मी का प्रकोप जारी है। तापमान 50 डिग्री के पास पहुंच गया है। मौसम विभाग ने रेड अलर्ट जारी किया है। ऐसे में समर कैंप आयोजित करना अनुकूल नहीं है। इसे स्थगित किया जाए।

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह ने बेसिक शिक्षा मंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि बेसिक विद्यालयों में गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप के आयोजन का निर्णय अव्यवहारिक, असामयिक व नियम विरुद्ध है।

प्रदेश भर में भीषण गर्मी पड़ रही है, मौसम विभाग ने भीषण गर्मी की चेतावनी दी है। ऐसे में इस अव्यवहारिक आदेश को स्थगित करें। गर्मी की छुट्टी में काफी शिक्षक अपने परिवार के साथ बाहर भी चले गए हैं। ऐसे में इस तिथि पर उनका लौटना संभव नहीं है। वहीं टाइम एंड मोशन स्टडी के आधार पर शैक्षणिक कार्य के लिए समयावधि व कार्य निर्धारण के साथ ही छुट्टियां निर्धारित हैं। ऐसे में गर्मी में समर कैंप का आयोजन करना व्यावहारिक नहीं है।



ग्रीष्मावकाश में समर कैंप पर शिक्षक संघ और बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग आमने-सामने

शिक्षक संगठनों ने की आदेश वापसी की अपील,  भीषण गर्मी में समर कैंप को बताया खतरनाक

लखनऊ । उत्तर प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में भीषण गर्मी और ग्रीष्मावकाश में समर कैम्प के आदेश से विभाग और शिक्षक संगठनों में टकराव की स्थिति बन गई है। 


माध्यमिक शिक्षा परिषद और बेसिक शिक्षा विभाग दोनों ने ही पांच से 11 जून तक विद्यालयों में समर कैम्प के आदेश जारी किए हैं। जबकि शिक्षक संगठनों का कहना है कि ग्रीष्मावकाश चल रहा है और प्रदेश में पारा 43 से 48 डिग्री है। ऐसे समय में समर कैम्प जोखिम भरा हो सकता है।


महानिदेशक शिक्षा के समर कैम्प कराने के आदेश के साथ ही शिक्षक संगठनों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ, प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन उत्तर प्रदेश, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट समेत अन्य शिक्षक संगठन समर कैम्प के विरोध में उतरे हैं। 

Thursday, May 30, 2024

भीषण गर्मी व ग्रीष्मावकाश में आयोजित समर कैंप को स्थगित करने के संबंध में RSMUP का बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन

प्रदेश में भीषण गर्मी व ग्रीष्म अवकाश के दौरान दिनांक 5 जून से 11 जून 2024 तक समर कैंप आयोजित किए जाने के अव्यवहारिक आदेश को स्थगित करने के संबंध में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश का बेसिक शिक्षा मंत्री को ज्ञापन



यूपी बोर्ड में स्क्रूटनी के लिए आए 29,555 आवेदन, 14 मई तक लिए गए थे ऑनलाइन आवेदन

यूपी बोर्ड में स्क्रूटनी के लिए आए 29,555 आवेदन, 14 मई तक लिए गए थे ऑनलाइन आवेदन


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) में स्क्रूटनी के लिए 29,555 आवेदन आए हैं। आवेदन आने के बाद यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों में स्क्रूटनी की प्रक्रिया चल रही है। जून में इसे पूरी करने की तैयारी है। उसके बाद परिणाम जारी कर दिया जाएगा और फिर संशोधित अंक पत्र वितरित किया जाएगा।


यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटर का परिणाम 20 अप्रैल को जारी कर दिया था। इस बार बोर्ड ने परिणाम जारी करने में रिकॉर्ड बनाया था। बोर्ड ने 12-12 दिनों में परीक्षा और मूल्यांकन का काम कराया था। उसके बाद 19 दिन तक लगातार काम करते हुए परिणाम जारी कर दिया था।


परिणाम जारी करने के साथ ही स्क्रूटनी के लिए ऑनलाइन आवेदन वेबसाइट पर दिए लिंक के जरिये लिए गए। यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 55,25,342 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था। इसमें से हाईस्कूल की परीक्षा में 27,49,364 और इंटर में 24,52,830 विद्यार्थी शामिल हुए थे।


परिणाम आने के बाद कई विद्यार्थियों ने परीक्षा में शामिल होने के बावजूद अनुपस्थित करने, विषय बदलने, कम अंक मिलने आदि की शिकायतें कीं। इसके आवेदन 14 मई तक लिए गए थे। अब उन्हीं आवेदनों के आधार पर स्क्रूटनी चल रही है।


सबसे अधिक आवेदन क्षेत्रीय कार्यालय में

प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय में कुल 12,206 आवेदन आए हैं। इसमें हाईस्कूल के 2065 और इंटरमीडिएट के 10,141 हैं। इसके बाद वाराणसी में कुल 5,939 आवेदन आए हैं। इसमें से हाईस्कूल के 927 और इंटर के 5012 आवेदन हैं।

मेरठ में कुल 5363 आवेदनों में से हाईस्कूल के 828 और इंटर के 4535 आवेदन हैं। गोरखपुर में आए 3451 आवेदनों में से हाईस्कूल के 468 और इंटर के 2983 आवेदन हैं। सबसे कम बरेली क्षेत्रीय कार्यालय में 2596 आवेदन आए हैं। उसमें से हाईस्कूल के 460 और इंटर के 2136 आवेदन हैं। संवाद

सेवा विस्तार वाले राज्य पुरस्कृत शिक्षकों को सत्रांत का लाभ नहीं – हाईकोर्ट

सेवा विस्तार वाले राज्य पुरस्कृत शिक्षकों को सत्रांत का लाभ नहीं – हाईकोर्ट 

हाईकोर्ट ने बीकेटी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य की सेवानिवृत्त करने के खिलाफ दायर याचिका खारिज की


लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को एक अहम फैसले में कहा कि 65 साल तक का सेवा विस्तार पाने वाले वाले राज्य पुरस्कृत शिक्षकों को प्रावधान न होने से सत्रांत का लाभ नहीं दिया जा सकता है। इस नजीर के साथ न्यायमूर्ति श्रीप्रकाश सिंह की एकल पीठ ने लखनऊ के बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज के तदर्थ प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत रहे कृष्ण कुमार शुक्ल की याचिका खारिज कर दी।


बता दें याची ने विभाग से बीती 10 जनवरी को भेजी गई रिटायरमेंट नोटिस को चुनौती दी थी। इसमें उसकी सेवानिवृत्ति की तिथि 30 अप्रैल 2024 कही गई थी। याची का कहना था कि वर्ष 2020 में उसे राज्य शिक्षक पुरस्कार मिला। इसके तहत 65 वर्ष तक का सेवा विस्तार भी मिला। ऐसे में उसे सत्रांत का लाभ देकर 31 मार्च 2025 तक सेवारत रखा जाना चाहिए था। लिहाजा उन्होंने अवैधानिक तरीके से 30 अप्रैल 2024 को सेवानिवृत्त करने संबंधी आदेश को रद्द कर दिया जाए। उधर, मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने 10 जनवरी के आदेश को उचित कहकर याचिका का विरोध किया।


कोर्ट ने फैसले में कहा कि 29 मार्च 2022 के सरकारी आदेश के तहत ऐसे राज्य पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों को सत्रांत का लाभ देने के लिए नहीं कहा गया है, जिन्हें 65 साल तक का सेवा विस्तार मिला हो। ऐसे में उन्हें सत्रांत का लाभ देने का प्रावधान न होने की वजह से याची को भी यह लाभ मंजूर नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस टिप्पणी के साथ याचिका को मेरिट विहीन करार देकर खारिज कर दिया।

अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में कार्यमुक्त करने के लिए शिक्षकों ने लगाई गुहार

अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में कार्यमुक्त करने के लिए शिक्षकों ने लगाई गुहार


प्रयागराज । अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में जल्द कार्यमुक्त करने की मांग को लेकर परिषदीय शिक्षकों ने बुधवार को शिक्षा निदेशालय में बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी को ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों का कहना है कि अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण नीति पर कोर्ट के आदेश की अनदेखी की जा रही है। सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया संपन्न होने के बावजूद पारस्परिक (म्यूचुअल) स्थानांतरण में पेयरिंग कर चुके शिक्षकों को अब तक कार्यमुक्त नहीं किया जा सका है। आवेदन के एक साल होने जा रहे हैं लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया पूर्ण नहीं हो पाई है।


कार्यमुक्त करने की मांग को लेकर विभिन्न जिलों से पहुंचे के प्रतिनिधिमंडल से वार्ता में सचिव सुरेंद्र तिवारी ने कहा कि अभी आचार संहिता लगी हुई है। चार जून को आचार संहिता समाप्त होने के बाद इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने आश्वस्त किया कि इसी ग्रीष्मावकाश में यह प्रक्रिया 18 जून से पहले ही पूर्ण हो जाएगी। ज्ञापन देने वालों में सुल्तानपुर के निर्भय सिंह, विद्योत्तमा, आरती केसरी, सुमन मिश्रा, श्रुति सागर, दिलीप वर्मा, विनोद वर्मा, भीमसेन, अनुराग तिवारी, आशुतोष तिवारी व पीयूष सिंह आदि शामिल रहे।

विश्वविद्यालय और कॉलेज जातीय भेदभाव से निपटने को रहें सतर्क, UGC ने दिया शिक्षण संस्थानों को निर्देश

विश्वविद्यालय और कॉलेज जातीय भेदभाव से निपटने को रहें सतर्क, UGC ने दिया शिक्षण संस्थानों को निर्देश 

यूजीसी ने कहा-संस्थान बनाएं कमेटी, ब्योरा भी मांगा

कमेटी में एससी, एसटी, ओबीसी प्रतिनिधियों को करें शामिल


नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले देश के सभी विश्वविद्यालयों और उससे जुड़े कालेजों को जातीय भेदभाव से निपटने को लेकर सतर्क किया है। इसके लिए सभी उच्च शिक्षण संस्थानों से अपने यहां एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया है, जिसमें एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के प्रतिनिधियों को अनिवार्य रूप से शामिल करने का सुझाव दिया है। 


आयोग ने सभी संस्थानों से अपनी वेबसाइट पर इससे जुड़ी शिकायतों के लिए एक पेज भी तैयार करने को कहा है। आयोग ने यह कदम तब उठाया है, जब उच्च शिक्षण संस्थानों में नए शैक्षणिक सत्र शुरू होने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। ऐसे में आयोग ने जातीय भेदभाव की घटनाओं से निपटने के लिए पुख्ता बंदोबस्त रखने को कहा है। 


आयोग ने विश्वविद्यालय के अधिकारियों और प्राध्यापकों से भी विशेष सतर्कता रखने के निर्देश दिए हैं। यह सुनिश्चित करने को भी कहा था कि प्राध्यापक ऐसी घटनाओं से खुद को दूर रखें। यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों व कालेजों से कहा है कि वह शैक्षणिक सत्र 2023-24 के दौरान हुई ऐसी घटनाओं का ब्योरा मुहैया कराने को भी कहा है।


पांच साल से आधार बन रहा, नौ लाख बच्चे वंचित, DBT के जरिए खाते में 1200 रुपये मिलने में होगी दिक्कत

परिषदीय स्कूलों में पंजीकृत हैं 1.26 करोड़ छात्र-छात्राएं

पांच साल से आधार बन रहा, नौ लाख बच्चे वंचित, DBT के जरिए खाते में 1200 रुपये मिलने में होगी दिक्कत


प्रयागराज । प्रदेश के 133035 परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कम्पोजिट विद्यालयों में पंजीकृत 12677039 छात्र-छात्राओं में से 901106 बच्चों का आधार नंबर उपलब्ध नहीं है। बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से भले ही पांच साल से बच्चों के आधार बनाने का काम हो रहा है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चों का आधार नहीं बन सका है। इसके चलते बच्चों को यूनिफार्म, बैग, जूते-मोजे और स्टेशनरी वगैरह के लिए हर साल मिलने वाली 1200 रुपये की सहायता राशि खाते में ट्रांसफर होने में देरी होगी।


यह राशि बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों के अभिभावकों के खाते में सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के जरिए भेजी जाती है। लेकिन पहले उन्हीं बच्चों के अभिभावकों को यह राशि मिलती है जिनका आधार नंबर उपलब्ध होता है।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने 27 मई की रिपोर्ट भेजते हुए सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आधार वेरीफिकेशन जल्द से जल्द पूरा कराएं, ताकि बच्चों को समय से सहायता राशि उपलब्ध कराई जा सके।



लखीमपुर खीरी में सर्वाधिक 44477 छात्र-छात्राओं के पास आधार नहीं है। बहराइच में 35081, आजमगढ़ 34573, हरदोई 28130, जौनपुर 27161 और बदायूं में 25297 बच्चे ऐसे हैं जिनका आधार नहीं बना है। प्रदेश के 75 जिलों में सबसे अच्छी स्थिति हापुड़ की है जहां मात्र 1159 बच्चे आधारविहीन हैं। नोएडा या गौतमबुद्धनगर में 2029, पीलीभीत 2374, महोबा 2808 और शामली में 3071 बच्चों का आधार नहीं है। प्रयागराज में 16938, प्रतापगढ़ 10198, कौशाम्बी में 7746 बच्चों का आधार नहीं है।

ग्रीष्मावकाश में समर कैम्प को स्थगित करने की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा DGSE को पत्र

ग्रीष्मावकाश में समर कैम्प को स्थगित करने की मांग को लेकर प्राथमिक शिक्षक संघ ने लिखा DGSE को पत्र


यूपी में SC–ST विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए दोगुनी होगी आयसीमा, समाज कल्याण विभाग पांच लाख रुपये सालाना आयसीमा का प्रस्ताव कर रहा तैयार

यूपी में SC–ST विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए दोगुनी होगी आयसीमा, समाज कल्याण विभाग पांच लाख रुपये सालाना आयसीमा का प्रस्ताव कर रहा तैयार


लखनऊ। छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों के लिए आयसीमा बढ़ाकर पांच लाख रुपये सालाना की जाएगी। अभी यह ढाई लाख रुपये है। समाज कल्याण विभाग इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जुलाई तक प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।

प्रदेश में हर साल अनुसूचित जाति व जनजाति के करीब 13.5 लाख विद्यार्थी छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना का लाभ पाते हैं। केंद्र सरकार योजना का लाभ पाने वालों के लिए सालाना आयसीमा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसलिए यूपी के समाज कल्याण विभाग ने भी आयसीमा बढ़ाने का प्रस्ताव तैयार किया है। 

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आयसीमा पांच लाख रुपये करने से डेढ़ से दो लाख और विद्यार्थी लाभान्वित होंगे। वहीं सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए भी आयसीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये किए जाने पर विचार किया जा रहा है।




छात्रवृत्ति के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी जरूरी, वर्ष 2025-26 से बदलेगी व्यवस्था

लखनऊ। प्रदेश में छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना का लाभ पाने के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य की जाएगी। नई व्यवस्था वर्ष 2025-26 से लागू होगी। इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों को निर्देश दे दिए गए हैं।


प्रदेश में अनुसूचित जाति व जनजाति के विद्यार्थियों को ढाई लाख रुपये तक और अन्य वर्गों के लिए दो लाख रुपये तक सालाना आमदनी होने पर इस योजना का लाभ मिलता है। 


विगत वर्षों में योजना में काफी गड़बड़ियां सामने आई थीं। मथुरा में तो एक ही छात्र को कई शिक्षण संस्थाओं में दिखाकर छात्रवृत्ति की रकम हड़पी गई। मामले पकड़ में आने पर विभागीय अधिकारी व कर्मचारी सस्पेंड किए गए। 


शिक्षण संस्थानों को भी काली सूची में डाला गया। इस योजना में घपलों की गुंजाइश खत्म करने के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य करने का निर्णय लिया गया है।


50 लाख से ज्यादा को लाभ

बायोमीट्रिक हाजिरी लाभार्थी के चेहरे या अंगूठे पर आधारित होगी। कोई भी छात्र कक्षा में न्यूनतम 75 फीसदी हाजिरी होने पर ही योजना का लाभ पाने का हकदार होता है। हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र छात्रवृत्ति से लाभांवित होते हैं।

Wednesday, May 29, 2024

अब भिखारियों की तलाश करेंगे ग्वालियर के सरकारी टीचर, शिक्षा विभाग ने लगाई ड्यूटी, मध्य प्रदेश से आई इस खबर की चर्चा हो रही पूरे देश में

अब भिखारियों की तलाश करेंगे ग्वालियर के सरकारी टीचर, शिक्षा विभाग ने लगाई ड्यूटी

मध्य प्रदेश से आई इस खबर की चर्चा हो रही पूरे देश में


MP Teacher News: ग्वालियर के जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश का शिक्षकों ने विरोध किया है। उस आदेश में शिक्षकों को भिखारियों को ढूंढकर मुख्यधारा से जोड़ने का काम दिया गया है।हालांकि हाईकोर्ट का आदेश है कि शिक्षकों को गैर शिक्षण कार्यों में नहीं लगाना है।


ग्वालियर: अजब गजब वजहों की वजह से मध्य प्रदेश की चर्चा हमेशा होती है। कुछ समय पहले मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में शिक्षकों शराब के ठेकों की गिनती का काम दिया गया था। अब ग्वालियर में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने अपने आदेश में शिक्षकों को गजब काम दिया है। शिक्षकों को शहर में भिक्षावृत्ति करने वाले भिखारियों को मुख्य धारा में लाना है। साथ ही जो बच्चे भिक्षावृत्ति में लगे हैं कि उनकी संख्या पता कर स्कूलों तक पहुंचाना है। इस फैसले का शिक्षक संगठन विरोध कर रहे हैं।


ये है आदेश
दरअसल, ग्वालियर में जिला शिक्षा पदाधिकारी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अभियान का जिक्र करते हुए आदेश जारी किया है। इसके तहत हायर सेकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल और कर्मचारियों को शामिल किया गया है। उनसे कहा गया है कि सड़क पर भिक्षावृत्ति की रोकथाम करें। साथ ही इससे जुड़े लोगों को मुख्यधारा में वापस लाएं।


शिक्षक कर रहे विरोध
वहीं, जिला शिक्षा पदाधिकारी के आदेश का शिक्षक संगठन ग्वालियर में विरोध कर रहे हैं। साथ ही हाई कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया है, जिसमें यह कहा गया है कि शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाए। इसके बावजूद शिक्षकों को इन कामों में लगाया जा रहा है। उनसे तमाम तरह के कार्य कराए जा रहे हैं।


गौरतलब है कि कुछ दिन पहले महिला एवं बाल विकास विभाग की एक ऑनलाइन मीटिंग हुई थी। इसी मीटिंग में यह चर्चा हुई थी कि भिक्षावृत्ति करने वाले बच्चों को स्कूल तक पहुंचाएं। साथ ही उन्हें मुख्यधारा से जोड़ें।


स्वयं एप पर घर बैठे पढ़ाई करेंगे माध्यमिक के विद्यार्थी

स्वयं एप पर घर बैठे पढ़ाई करेंगे माध्यमिक के विद्यार्थी


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा परिषद अब विद्यार्थियों को घर बैठे पसंदीदा विषय पढ़ने की सुविधा दे रहा है। इसके लिए विभाग की तरफ से लांच किए गए स्वयं एप पर बच्चों का पंजीकरण कराना होगा। जिसके बाद वे मनचाहे विषय की पढ़ाई घर बैठे कर सकेंगे।


सूबे में संचालित हजारों राजकीय, वित्तपोषित और सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय के बच्चे यह लाभ उठा सकते हैं।  कोरोना काल के दौरान स्कूलों में ऑनलाइन शिक्षा की व्यवस्था को लागू किया गया था। इसके अलावा छात्र-छात्राएं कोचिंग के माध्यम से भी शिक्षा ग्रहण करते हैं। आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चे ट्यूशन पढ़ने से वंचित रह जाते हैं। 


इसी को देखते हुए विभाग की ओर से स्वयं एप को लांच किया गया है। जिस पर विद्यार्थियों को अपना पंजीकरण कराना होगा। इसके जरिए कक्षा 11 व 12 के छात्र हिंदी, गणित, भूगोल, संस्कृत, विज्ञान, इतिहास, अर्थशास्त्र, सामाजिक विज्ञान सहित अन्य विषयों की पढ़ाई ऑनलाइन कर सकेंगे।


एप से जुड़ने के बाद संबंधित विषयों के शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई में मदद करेंगे। 21 सितंबर तक इस एप के माध्यम से ऑनलाइन पढ़ाई की जा सकेगी। इस एप से पढ़ाई करने से ग्रीष्मावकाश के दौरान विद्यार्थियों की पढ़ाई में मदद मिलेगी। इसके लिए विभाग की तरफ से सभी माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्य और प्रबंधकों को पत्र जारी कर एप के बारे में विद्यार्थियों को जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा विभाग की यह पहल विद्यार्थियों के लिए काफी मददगार साबित होगी। एप में पाठ्यक्रम का तथ्यात्मक विवरण है।

समर कैंप के आयोजन के आदेश को निरस्त करने के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ ने शासन को पत्र लिखा

समर कैंप के आयोजन के आदेश को निरस्त करने के लिए प्राथमिक शिक्षक संघ ने शासन को पत्र लिखा
  


30 मई को जारी होगा मदरसा बोर्ड का परीक्षा परिणाम

30 मई को जारी होगा मदरसा बोर्ड का परीक्षा परिणाम


लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद की सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकेंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं का परिणाम बृहस्पतिवार को जारी किया जाएगा। एनआईसी में परीक्षार्थियों नंबरों की फीडिंग का काम अंतिम चरण में चल रहा है।

मदरसा शिक्षा परिषद की इन परीक्षाओं में प्रदेश भर से 1,41115 परीक्षार्थियों ने पंजीकरण कराया था। पर, परीक्षाओं में सख्ती के कारण 1,13100 परीक्षार्थी शामिल हुए। बोर्ड की रजिस्ट्रार डॉ. प्रियंका अवस्थी ने बताया कि परीक्षार्थियों के अंक की फीडिंग का काम अंतिम चरण में चल रहा है। अगर कोई तकनीकी अड़चन नहीं आई तो 30 मई को परीक्षा का परिणाम घोषित किया जाएगा। 



मदरसा बोर्ड : 30 मई को जारी होगा परीक्षा परिणाम 

लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद की सेकेंडरी (मुंशी-मौलवी), सीनियर सेकेंडरी (आलिम), कामिल और फाजिल की परीक्षाओं का परिणाम 30 मई को जारी किया जाएगा। कॉपियों के मूल्यांकन होने के बाद अंकों की फीडिंग का काम भी अंतिम चरण में चल रहा है। 


बोर्ड ने प्रदेश भर के 1,13100 परीक्षार्थियों का रिजल्ट जारी करने की कवायद तेज कर दी है। इस बार परीक्षा में प्रदेश भर 113100 विद्यार्थी शामिल हुए हैं। दरअसल, हाईकोर्ट ने बीते मार्च में यूपी मदरसा शिक्षा परिषद एक्ट को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। इस फैसले के बाद मदरसा बोर्ड परीक्षा परिणाम जारी करने को लेकर असमंजस में था। 

Tuesday, May 28, 2024

मांग : गर्मी छुट्टी में चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश दे सरकार

मांग : गर्मी छुट्टी में चुनाव ड्यूटी करने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश दे सरकार

माध्यमिक शिक्षक संघ ने मुख्य चुनाव आयुक्त को भेजा पत्र


लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ प्रदेश के मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर छुट्टी में लोकसभा चुनाव में ड्यूटी पर तैनात शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को काम के बदले उपार्जित अवकाश देने की मांग की है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष चेत नारायण सिंह व प्रदेश मंत्री संजय द्विवेदी ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा विभाग में 21 मई से 30 जून -तक ग्रीष्मावकाश है। इस दौरान सामान्य - लोकसभा चुनाव में प्रदेश के हजारों शिक्षक शिक्षणेत्तर कर्मचारी निर्वाचन प्रक्रिया सम्पन्न करा रहे हैं। 


शासनादेश के अनुसार अवकाश अवधि में ड्यूटी करने वाले शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को उपार्जित अवकाश देने की व्यवस्था पूर्व में विहित है। किंतु माध्यमिक शिक्षा विभाग में कार्यरत कर्मचारियों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसलिए लोकसभा चुनाव में छुट्टी में काम करने वाले शिक्षक-शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को काम के बदले उपार्जित अवकाश दिए जाने के लिए संबंधित विभाग को निर्देश दें।

सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रयोग के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा

सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रयोग के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा



सूबे के माध्यमिक विद्यालयों में मोटे अनाज (मिलेट्स) के प्रयोग के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इंटरनेशनल इयर ऑफ मिलेट्स के तहत विद्यालयों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें दैनिक जीवन में मोटे अनाज के प्रयोग से होने वाले लाभ के बारे में विद्यार्थियों को जागरूक किया जाएगा।


नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों को बाजरा, ज्वार समेत अन्य मोटे अनाजों के रोजाना प्रयोग की जानकारी दी जाएगी। इन अनाजों से प्रयोग से होने वाले लाभ के बारे में भी छात्र-छात्राओं को जागरूक किया जाएगा। माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से बारहवीं तक विद्यार्थियों के लिए प्रत्येक माह में विशेषज्ञों की एक कक्षा चलेगी। 


विशेषज्ञ मोटे अनाज में मिलने वाले प्रोटीन, कार्बोहाइडेट, लौह तत्व और कैरोटीन की जानकारी देंगे। विद्यार्थियों को बाजरे के प्रयोग से आंखों की सुरक्षा और इसमें मिलने वाले पाइटिक अम्ल, पॉलीफेनॉल और एमाइलेज जैसे पोषण निरोधी अवरोधक के बारे में जानेंगे।


इसी प्रकार ज्वार से बनने वाले उत्पाद के बारे में भी विद्यार्थियों को बताया जाएगा।  विद्यार्थियों को मोटे अनाज के प्रयोग को लेकर जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही हम मोटे अनाज बाजरा व ज्वार के पोषण का विश्लेषण करें तो पाएंगे कि इनमें कैल्शियम प्रचुर मात्रा में होती है। 

जून के पहले सप्ताह में मिलेंगे यूपी बोर्ड के अंक पत्र

जून के पहले सप्ताह में मिलेंगे यूपी बोर्ड के अंक पत्र


प्रयागराज। यूपी बोर्ड के अंक पत्र जून के पहले सप्ताह में विद्यार्थियों को मिल सकते हैं। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। अंक पत्रों का बंडल क्षेत्रीय सचिवों के कार्यालय में पहुंचा दिए गए हैं। वहां से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय और फिर से विद्यालयों को भेजे जाएंगे।


 यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम 20 अप्रैल को जारी कर दिया था। परिणाम जारी करने के बाद अंक पत्र पहुंचाने की प्रक्रिया शुरू हो गई। अंक पत्रों का वितरण मई के आखिरी सप्ताह में होना था, लेकिन छपाई में देरी हुई। इसलिए अब तक अंक पत्र का वितरण नहीं हो सका है। फिलहाल, इंटरमीडिएट के अंक पत्र क्षेत्रीय सचिवों के कार्यालय में पहुंचा दिए गए हैं। अगले कुछ दिनों इसके लिए चल रही है प्रक्रिया में हाईस्कूल के भी अंक पत्र आ जाएंगे। उसके बाद इसे डीआईओएस कार्यालय भेजा जाएगा। वहां से विद्यालयों तक इसे पहुंचाया जाएगा।



आसार है कि जून के पहले हफ्ते में वितरण शुरू हो जाएगा। हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए 55,25,342 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था। इसमें से हाईस्कूल की परीक्षा में 27,49,364 और इंटरमीडिएट में 24,52,830 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परिणाम आया तो हाईस्कूल में 24,62,026 और इंटरमीडिएट में 20,26,067 परीक्षार्थी सफल हुए।

वित्तपोषित विद्यालय से सेवानिवृत्त अध्यापक संपूर्ण सेवाकाल के लिए पेंशन के लाभ का है हकदार – हाईकोर्ट

वित्तपोषित विद्यालय से सेवानिवृत्त अध्यापक संपूर्ण सेवाकाल के लिए पेंशन के लाभ का है हकदार – हाईकोर्ट 


प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा है कि स्ववित्त पोषित से वित्त पोषित हो चुके विद्यालय से सेवानिवृत अध्यापक पूरे सेवाकाल के सेवानिवृत्ति का लाभ पाने का हकदार है। कोर्ट ने याची को पुनरीक्षित पेंशन प्रदान करने का आदेश दिया है। यह शर्त भी लगाई है कि याची अध्यापक को इस दौरान प्रबंधन कोटे का जीपीएफ अंशदान ब्याज सहित जमा करना होगा। यह आदेश न्यायमूर्ति  जेजे मुनीर ने फर्रुखाबाद के याची अध्यापक रामपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।


अधिवक्ता विनय शर्मा ने बताया कि याची टैगोर विद्यालय फर्रुखाबाद में वर्ष 1977 में नियुक्त हुआ। बीएसए ने 1979 में उसकी नियुक्ति को अनुमोदित कर दिया। यह गैर वित्त पोषित प्राइवेट विद्यालय था। 1983 में विद्यालय को उच्चीकृत करके हाईस्कूल कर दिया गया और उसे मान्यता प्राप्त हो गई। इसके बाद याची सीटी ग्रेड में प्रोन्नत हो गया। फरवरी 1996 से विद्यालय ग्रांट इन एड पर आ गया। कर्मचारी व अध्यापकों को राज्य सरकार से वेतन मिलने लगा। 2002 में उसका स्थानांतरण आगरा के नेशनल मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल में कर दिया गया, जहां से वह 2015 में रिटायर हुए। 


डिप्टी डायरेक्टर माध्यमिक शिक्षा आगरा में उसकी पेंशन योग्य सेवा वर्ष 2022 से 2015 अर्थात मॉडल हायर सेकेंडरी स्कूल में स्थानांतरित होने से रिटायर होने की तिथि तक ही पेंशन के लिए जोड़ी गई। याची ने इस संबंध में अधिकारियों को प्रत्यावेदन दिया था। लेकिन, उसको यह कहते हुए लाभ नहीं दिया गया कि शासनादेश में जीपीएफ अंशदान जमा करने की कट ऑफ डेट 24 अप्रैल 2001 दी गई है। याची का अंशदान जमा नहीं हुआ। 


याची की ओर से कहा गया कि वह मैनेजमेंट का अंशदान ब्याज सहित देने को तैयार है। कोर्ट ने याचिका निस्तारित करते हुए कहा कि याची की सेवाएं 1964 की सेवा नियमावली से संचालित होगी न कि 1961 की नियमावली से। 2001 के शासनादेश जैसा एक अन्य शासनादेश हाईकोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। 




शिक्षक की पूरी सेवा पेंशन लाभ में जोड़ने का निर्देश


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर वित्त पोषित विद्यालय में नियुक्त अध्यापक को उसके पेंशन लाभ में पूरी सेवा जोड़े जाने का हकदार माना है क्योंकि विद्यालय बाद में वित्त पोषित हो गया और अध्यापक वित्त पोषित विद्यालय से रिटायर हुआ। कोर्ट ने अध्यापक की नियुक्ति अनुमोदित होने की तिथि से उसके रिटायर होने की तिथि तक की पूरी सेवा को जोड़ते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग को पेंशन पुनरीक्षित करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट में यह शर्त लगाई है कि अध्यापक मैनेजमेंट कोटे का जीपीएफ अंशदान ब्याज सहित जमा करेगा। 


फर्रुखाबाद के रामपाल सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने याची की अधिवक्ता विनय शर्मा को सुनकर दिया। याचिका में कहा गया कि याची टैगोर विद्यालय फर्रुखाबाद में वर्ष 1977 में नियुक्त हुआ तथा बीएसए ने 1979 में उसकी नियुक्ति को अनुमोदित कर दिया। यह गैर वित्त पोषित प्राइवेट विद्यालय था। 1983 में विद्यालय को उच्चीकृत कर हाईस्कूल कर दिया गया तथा उसे मान्यता प्राप्त हो गई। याची सीटी ग्रेड में प्रोन्नत हो गया।

गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप कराने के आदेश के विरोध में PSPSA ने लिखा सीएम योगी को पत्र

गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप कराने के आदेश के विरोध में PSPSA ने लिखा सीएम योगी को पत्र 


महानिदेशक शिक्षा के समर कैम्प कराने के आदेश के साथ ही शिक्षक संगठनों ने विरोध दर्ज कराना शुरू कर दिया है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने भी इस कड़ी में मुख्यमंत्री को पत्र लिख विरोध जताया।


बीएड की पढ़ाई से हुआ मोहभंग, सीटों से भी कम आवेदन आए, सरकारी नौकरी की उम्मीद कम होने का दिख रहा असर

बीएड की पढ़ाई से हुआ मोहभंग, सीटों से भी कम आवेदन आए, सरकारी नौकरी की उम्मीद कम होने का दिख रहा असर 

पहले सीटों के मुकाबले होते थे दोगुने और तीन गुने आवेदन

2500 से ज्यादा कॉलेजों में 2.45 लाख सीटें, 2.23 लाख आवेदन आए हैं इस साल


लखनऊ: सरकारी नौकरी की उम्मीद कम हुई तो वीएड की पढ़ाई से युवाओं का मोहभंग साफ नजर आ रहा है। वीएड में दाखिले के लिए इस साल महज 2.23 लाख आवेदन आए हैं। ये कुल सीटों की संख्या से भी कम हैं। पिछले साल सीटों कुल सीटों के मुकावले दो गुना आवेदन आए थे। उससे पहले तीन गुना तक आवेदन आते थे।


ऐसे कम हुए आवेदन : वीएड की पढ़ाई का क्रेज काफी तेजी से बढ़ा और नए- नए कॉलेज भी खुले। इस समय भी यूपी में बीएड के 2500 से ज्यादा कॉलेज हैं और 2.45 लाख से ज्यादा सीटें हैं। इतनी सीटें होते हुए भी दाखिलों के लिए मारामारी होती थी। सीटों के मुकाबले तीन गुना तक आवेदन आते थे। 


वीएड में 2021 में 2.51 लाख सीटों के मुकाबले 5.91 लाख आवेदन आए थे। वहीं 2022 में 2.25 सीटों के मुकावले 6.67 लाख आवेदन आए। उसके बाद पिछले साल से संख्या में कुछ गिरावट आई और 2.45 सीटों के मुकाबले 4.74 लाख ही आवेदन आए। इस साल अचानक वड़ी गिरावट देखने को मिली है। आवेदन की अंतिम तिथि वीत चुकी है। कुल 2.45 सीटों के मुकाबले महज 2.23 लाख ही आवेदन आए हैं। 


15-20 फीसदी सीटें भरने की भी उम्मीद नहीं : दो साल पहले तक जव तीन गुना आवेदन आते थे, तव भी काउंसलिंग के जरिए कुल सीटों के मुकावले आधी ही भर पाती थीं। 2021 में 2.51 लाख में से 1.19 लाख और 2022 में 2.25 लाख में से 1.36 लाख सीटें भरी थीं। पिछले साल 61 हजार सीटें ही भर पाई थीं। यह कुल सीटों 25 फीसदी से भी कम थीं। इस वार तो सीटों के वरावर आवेदन भी नहीं आए हैं। 


ऐसे में वीएड कॉलेज प्रबंधक परेशान हैं। उनको आशंका सता रही है कि 15-20 प्रतिशत सीटें भी भर पाएंगी कि नहीं। इस वारे में उत्तर प्रदेश स्ववित्तपोषित महाविद्यालय असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय त्रिवेदी कहते हैं कि स्थिति वहुत खराब है। नौकरी की उम्मीद न होना वड़ी वजह है। स्थिति तभी सुधर सकती है जव हाईस्कूल और इंटर कॉलेजों में समय पर भर्तियां हों।


क्यों हुआ मोहभंग?

पिछले साल बीएड और बीटीसी में दाखिलों की प्रक्रिया चल रही थी तभी सुप्रीम कोर्ट ने एक आदेश जारी किया कि पांचवीं तक पढ़ाने के लिए बीएड वाले अर्ह नहीं होंगे। वहीं इंटर कॉलेजों और हाईस्कूलों का हाल ये है कि माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड 2011 के बाद से भर्तियां ही नहीं कर सका है। निजी स्कूलों में शिक्षक भर्ती के लिए बीएड की अर्हता को सख्ती से लागू नहीं किया जाता। ऐसे में हर तरफ से नौकरी की उम्मीद कम हो गई तो बीएड की पढाई से मोहभंग हो गया।


Monday, May 27, 2024

माध्यमिक शिक्षा: विद्यालयों में गठित Eco clubs (इको क्लब) के अन्तर्गत Summer Camps (समर कैम्प) आयोजित किये जाने के संबंध में आदेश जारी

गर्मियों में समर कैंप स्थगित करने की मांग, शिक्षक संगठनों का विरोध जारी


लखनऊ। माध्यमिक के विद्यालयों में समर कैंप आयोजित करने को लेकर शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है। वहीं एमएलसी व प्रश्न एवं संदर्भ समिति के सभापति राजबहादुर सिंह चंदेल ने माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव को पत्र भेजकर स्थगित करने की मांग की है। 


उन्होंने कहा है कि विभाग ने पांच से 11 जून तक समर कैंप अन्य कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में भीषण गर्मी में बच्चों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इसलिए मौसम और गर्मी की छुट्टियों को देखते हुए इसे स्थगित किया जाए। 


गर्मी की छुट्टियों में माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप पर शिक्षक नेताओं की आपत्ति

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी और महामंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा ने समग्र शिक्षा के राज्य परियोजना निदेशक को पत्र लिखकर पांच से 11 जून के मध्य आयोजित होने वाले समर कैंप पर आपत्ति दर्ज कराई है। 

उन्होंने कहा कि सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा शर्तों में अर्जित अवकाश न देकर उसके बदले में 40 दिन का ग्रीष्मावकाश मिलता है। ग्रीष्म अवकाश में अगर शिक्षकों से सेवा ली जाती है तो उसका उपार्जित अवकाश दिया जाना चाहिए।


छुट्टियों के दौरान माध्यमिक विद्यालयों में लगेंगे समर कैंप, छुट्टियों में विद्यालय खोले जाने को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

छुट्टी में भी आयोजन को लेकर शिक्षकों में नाराजगी

लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में भी मंगलवार से गर्मी की छुट्टियां हो जाएंगी। हालांकि विभाग ने जून के पहले सप्ताह में पर्यावरण दिवस पर छुट्टियों के दौरान स्कूलों में समर कैंप आयोजित कराने के निर्देश दिए हैं। एक सप्ताह के इस कैंप में विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से जागरूक किया जाएगा। वहीं शिक्षकों में छुट्टियों में विद्यालय खोले जाने को लेकर नाराजगी है।

विभाग के अनुसार विद्यालयों में गठित ईको क्लब के माध्यम से एनईपी के तहत पर्यावरण जागरूकता, जल संरक्षण, सफाई व स्वास्थ्य आदि कौशल विकास के लिए समर कैंप आयोजित किए जाएं। इसमें पांच जून को विद्यार्थियों को प्राकृतिक व पर्यटन स्थलों का भ्रमण, पौधरोपण कर जागरूक करना होगा। छह जून को विद्यालय के किचन गार्डेन में विद्यार्थियों को शामिल करने, पुरानी बाल्टी, बोतल में पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

कहा गया है सात जून को ई- कचरा इकट्ठा करने का अभियान और विद्यालय पर बूथ स्थापित कर विद्यार्थियों को इसके लिए जागरूक करें। आठ जून को स्वच्छता अभियान चलाएं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि इसी तरह नौ जून को ऊर्जा बचाने, दस जून को पानी बचाने, 11 जून को सिंगल यूज प्लास्टिक के प्रयोग न करने के लिए जागरूक करना है। 

उन्होंने सभी डीआईओएस को इसके अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने को कहा है। वहीं उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ पांडेय गुट ने 21 मई से 30 जून को गर्मी की छुट्टियों में कार्यक्रम निर्धारित करने पर नाराजगी जताई है। ओपी त्रिपाठी ने कहा कि इस भीषण गर्मी में छात्रों को टूर या गतिविधियां कराना संभव नहीं है। वहीं शिक्षक बाहर जाने के लिए आरक्षण तक करा चुके हैं। विभाग को अपने इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।


माध्यमिक शिक्षा: विद्यालयों में गठित Eco clubs (इको क्लब) के अन्तर्गत Summer Camps (समर कैम्प) आयोजित किये जाने के संबंध में आदेश जारी 

यूपी बोर्ड : माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाया जाएगा नैतिकता और संस्कार का पाठ

माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाया जाएगा नैतिकता और संस्कार का पाठ 

नया सवेरा के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाया जाएगा नैतिकता का पाठ

पुरातन छात्र और सफल व्यक्तियों को बुलाकर कराया जाएगा संवाद



यूपी बोर्ड के विद्यालयों में नवीन शैक्षिक सत्र में अब नया सवेरा होगा। इस नया सवेरा के तहत विद्यार्थियों को संस्कार, नैतिक शिक्षा एवं मूल्यों का पाठ पढ़ाया जाएगा। यह शिक्षा विद्यार्थियों को प्रार्थना के समय दी जाएगी। बोर्ड द्वारा जारी किए गए शैक्षिक कैलेंडर में इसकी व्यवस्था की गई है।


नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए यूपी बोर्ड हर संभव प्रयास कर रहा है। इसके तहत अब माध्यमिक स्कूलों में बच्चे नैतिक शिक्षा का ज्ञान भी सिखाया जाएगा।


नए सत्र में नया सवेरा कार्यक्रम के तहत सुबह के समय होने वाली प्रार्थना सभा में शिक्षाधिकारी सप्ताह में दो दिन पहुंचेंगे। वह बच्चों से कॅरिअर, नियमित दिनचर्या, अनुशासन, जीवन मूल्यों से संबंधित प्रेरक प्रसंग आदि पर संवाद करेंगे। कार्यक्रम में पुरातन छात्रों एवं सफल व्यक्तियों को भी आमंत्रित किया जा सकेगा। जिसमें छात्र छात्राओं को शिक्षण के साथ- साथ संस्कारित एवं अनुशासित बनने की शिक्षा भी दी जाएगी।


15 मिनट की होगी प्रार्थना सभा

यूपी बोर्ड द्वारा जारी किए शैक्षिक कैलेंडर के अनुसार प्रातः कालीन प्रार्थना सभा के लिए 15 मिनट का समय निर्धारित किया गया है। जिसमें आज का सुविचार भी प्रस्तुत किया जाएगा। प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों के द्वारा प्रत्येक दिन जीवन मूल्यों का महत्व, राष्ट्र भक्ति, समाज सेवा, महापुरुषों का जीवन चरित्र, पर्यावरण एवं जल संरक्षण, यातायात एवं सड़क सुरक्षा के संबंध में विचार रखे जाएंगे।

गर्मी की छुट्टियों में प्रस्तावित समर कैंप के बहिष्कार का एलान, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा मंत्री को पत्र लिख मांगा समाधान

गर्मी की छुट्टियों में प्रस्तावित समर कैंप के बहिष्कार का एलान, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने बेसिक शिक्षा मंत्री को पत्र लिख मांगा समाधान 


बीत गया शिक्षासत्र, लाखों बच्चों को नहीं मिल सका DBT के जरिए यूनिफॉर्म का धन

हर साल ऐसे ही होती है तैयारी, ध्वस्त हो जाती है व्यवस्था

पुराने को भूल गए अफसर, नए बच्चों का मांगा गया डाटा,

बीत गया शिक्षासत्र,  लाखों बच्चों को नहीं मिल सका DBT के जरिए यूनिफॉर्म का धन



लखनऊ : सूबे के परिषदीय प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को शिक्षासत्र बीतने के बाद भी यूनीफॉर्म, जूता-मोजा और स्कूल बैग के लिए रुपये नहीं मिले हैं। विभागीय अधिकारी पिछले वर्ष के बच्चों को भूल गए हैं। अब नए शिक्षासत्र में प्रवेश लेने वाले बच्चों के खाते में धनराशि भेजने के लिए डाटा मांगा है।


वर्ष 2023-24 में सूबे के प्राइमरी, मिडिल, मदरसा, सहायता प्राप्त और राजकीय स्कूलों में कक्षा एक से आठ तक में पढ़ने वाले बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के तहत यूनिफॉर्म, स्वेटर, स्कूल बैग और जूता-मोजा स्कूलों में वितरित किया जाता था। पूरे प्रदेश में में नामांकित बच्चों का डाटा भेजकर 1200-1200 सौ रुपये भेजने की मांग की गई।


इसमें कई बच्चों के अभिभावकों के खाता नंबर और आधार नंबर में अंतर आने के कारण भुगतान नहीं किया जा रहा है। इधर, बेसिक शिक्षा विभाग के शीर्ष अफसरों ने विभाग को पत्र जारी कर नए सत्र में दाखिला लेने वाले बच्चों का डाटा 20 मई तक मुहैया कराने को कहा है।

पिछले सत्र में पूरे प्रदेश में लाखों बच्चों के खाते में अभी तक धनराशि नहीं आई है। आश्चर्य की बात यह है कि विभागीय अफसरों द्वारा एक अप्रैल से नई कक्षाओं में दाखिला लेने वाले बच्चों का डाटा मांगा जा रहा है।


हर साल ऐसे ही होती है तैयारी, ध्वस्त हो जाती है व्यवस्था

बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर हर साल कुछ ऐसा ही करते हैं। तैयारी तो वह मई से ही करना प्रारंभ कर देते हैं, मगर ठंडी प्रारंभ होने पर भी बच्चों को धनराशि मुहैया कराने में फेल हो जाते हैं। कुछ ऐसा ही इस वर्ष भी देखने को मिल रहा है, फिलहाल अब देखना है कि इन बच्चों के खाते में धनराशि कब आती है।

परिषदीय स्कूलों में पांच जून से प्रस्तावित समर कैंप का विरोध शुरू

विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध करते हुए ग्रीष्मावकाश बाद समर कैंप का आयोजन किए जाने की रखी मांग

परिषदीय स्कूलों में पांच जून से प्रस्तावित समर कैंप का विरोध शुरू


लखनऊ : परिषदीय स्कूलों में 15 जून तक ग्रीष्मकालीन अवकाश चल रहा है। अब इन छुट्टियों के बीच पांच जून से 11 जून तक विद्यालय खोलकर समर कैंप लगाया जाएगा। 

इसका विरोध करते हुए विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन ने DGSE को पत्र लिखा है। पत्र में विभाग के शिक्षकों को परेशान करने वाले रवैए का जिक्र करते हुए ग्रीष्मावकाश बाद समर कैंप का आयोजन किए जाने का आग्रह किया गया है।




उधर उप्र बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि अभी शिक्षकों की ड्यूटी चुनाव में लगाई गई है। वह मतगणना कराने के बाद दूसरे ही दिन स्कूल खोल देंगे तो फिर छुट्टी का क्या लाभ हुआ। आखिर उन्हें भी परिवार के साथ छुट्टियां बिताने का अवसर मिलना चाहिए। अगर यह आदेश वापस न लिया गया तो शिक्षक बहिष्कार करेंगे। वहीं, माध्यमिक स्कूलों में समर कैंप का पहले से ही विरोध किया जा रहा है।

कम नामांकन के लिए विभागीय नीतियां भी जिम्मेदार, जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने महानिदेशक से मिलकर दर्ज कराई आपत्ति और सौंपा ज्ञापन

कम नामांकन के लिए विभागीय नीतियां भी जिम्मेदार,  जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने महानिदेशक से मिलकर दर्ज कराई आपत्ति और सौंपा ज्ञापन



बेसिक शिक्षा विभाग प्रत्येक  शैक्षिक सत्र में नए आदेश जारी करके शिक्षकों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर देता हैं। शिक्षक यदि अपने आला अधिकारियों के फरमान का पालन न करें तो वेतन कटौती अथवा निलंबन जैसी कार्यवाही का दंश झेलने को तैयार रहे।

पिछले कई शैक्षिक सत्रों में बेसिक शिक्षा विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की नामांकन की उम्र 5 प्लस वर्ष तय की थी, लेकिन वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 6 वर्ष की आयु कर दी गई है। जिसको लेकर गांवों में नामांकन के लिए गुरु जी को बच्चे ढूढ़े नही मिला रहे है। 

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधि मंडल ने प्रांतीय अध्यक्ष सत्य प्रकाश मिश्र के नेतृत्व में महानिदेशक स्कूल शिक्षा उत्तर प्रदेश, शिक्षा निदेशक (बेसिक) उत्तर प्रदेश एवं सचिव बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश से भेंटकर उन्हें शिक्षक समस्याओं से संबंधित ज्ञापन सौंपा। 

प्रतिनिधि मंडल ने महानिदेशक को अवगत कराया, कि कक्षा 1 में नामांकन हेतु बच्चों की निर्धारित आयु 6 वर्ष कर दी गई है। जबकि पिछले वर्ष नामांकन की आयु 5 वर्ष प्लस थी। अतः वर्तमान सत्र में 6 वर्ष की आयु के बच्चे मिल पाना प्रायः संभव नही हो पा रहा है।

अधिकारियों द्वारा कम नामांकन पर शिक्षकों के विरुद्ध कार्यवाही भी की जा रही है, जो की घोर आपत्ति जनक है। संगठन ने कहा कि कम नामांकन के लिए मात्र शिक्षकों को दोषी माना जाना कतई उचित नही है। इसके लिए विभाग की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। 

संगठन ने अपेक्षित नामांकन लक्ष्य प्राप्त करने हेतु प्रत्येक विद्यालय में अनिवार्य रूप से बालवाटिका संचालित करने, वर्तमान निर्धारित आयु में शिथिलता प्रदान करने, कक्षावार शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है।


आदेश की अवहेलना में क्यों न राज्य व केंद्र के अधिकारियों को दंडित किया जाए, प्रदेश की 3.72 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के ग्रेच्युटी भुगतान का मामला

आदेश की अवहेलना में क्यों न राज्य व केंद्र के अधिकारियों को दंडित किया जाए : हाईकोर्ट

कारण बताने में नाकाम रहने पर अफसरों को तलब कर तय किए जा सकते हैं आरोप

प्रदेश की 3.72 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के ग्रेच्युटी भुगतान का मामला


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अवमानना के मामले में प्रदेश की 3.72 लाख आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का भुगतान न किए जाने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने मामले में पक्षकार बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग की सचिव बी चंद्रकला समेत अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर कारण पूछा है कि आखिर रिट कोर्ट की जानबूझकर अवज्ञा के लिए उन्हें क्यों न दंडित किया जाए? कोर्ट ने चेतावनी दी कि कारण बताने में नाकाम रहने पर इन अफसरों को तलब कर इनपर अवमानना के आरोप तय किए जा सकते हैं।


न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश उत्तर प्रदेश महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर दिया। याची संघ की अधिवक्ता अभिलाषा पांडेय का कहना था कि पहले अन्य याचिका पर रिटकोर्ट ने 15 दिसंबर 2023 को राज्य और केंद्र सरकार के अफसरों को सभी अर्ह आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का भुगतान 4 माह के भीतर किए किए जाने का निर्देश दिया था।


 संघ की ओर से बार-बार अनुरोध के बावजूद, सरकार ने आदेश के 5 माह बीत जाने के बाद भी इस आदेश का पालन नहीं किया। इसके खिलाफ संघ ने यह अवमानना याचिका दाखिल की। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख् अपनाते हुए केंद्र में महिला बाल विकास विभाग मंत्रालय के सचिव और राज्य सरकार के सचिव और अन्य अफसरों को नोटिस जारी कर पूछा है कि उन्हें आदेश की अवज्ञा के लिए दंडित क्यों न किया जाय। साथ ही चेताया कि कारण बताने में नाकाम रहने पर केंद्र और राज्य के अधिकारियों को तलब कर उनके खिलाफ आरोप तय किए जा सकते हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 26 जुलाई को नियत की है। 

Sunday, May 26, 2024

अधिकारियों को DBT और यूनिफॉर्म की याद आई, वह भी गर्मियों की छुट्टियों में ! स्कूल में छात्रों की संख्या और आधार सीडिंग की पूरी डिटेल भेजने के निर्देश

बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों से कहा-DBT की तैयारी कर ली जाए

अधिकारियों को DBT और यूनिफॉर्म की याद आई, वह भी गर्मियों की छुट्टियों में !

स्कूल में छात्रों की संख्या और आधार सीडिंग की पूरी डिटेल भेजने के निर्देश


लखनऊ : एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हुआ। डेढ़ महीना बीत गया। बेसिक शिक्षा विभाग को अब बच्चों की यूनिफॉर्म और बैग के लिए तैयारी की याद आई है। वह भी गर्मियों की छुट्टियों में। अब शिक्षकों को कहा जा रहा है कि वे बच्चों का ब्योरा, आधार सीडिंग सहित डीबीटी की सभी तैयारियों पूरी कर लें। अब सवाल ये उठता है कि स्कूल बंद हैं। शिक्षक और बच्चों की छुट्टियां हैं तो ये तैयारी कैसे होगी ?




30 मई तक ब्योरा अपडेट करने के आदेश

प्रदेश के बेसिक स्कूलों में बच्चों को यूनिफॉर्म, बैग, जूते-मोजे के लिए सरकार अब डीबीटी के माध्यम से अभिभावक के खाते में 1200 रुपये एकमुश्त भेजती है। अप्रैल से सत्र शुरू हो जाता है। लेकिन हर साल ही लेटलतीफी और तकनीकी दिक्कतों के कारण सभी बच्चों के खाते में सत्र के अंत तक यह धनराशि नहीं पहुंच पाती। 


इस बार भी एक अप्रैल से अभी तक इसकी प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी है। अब बेसिक शिक्षा निदेशक ने आदेश दिया है कि 30 मई तक इसके लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। कहा गया है कि जो छात्र स्कूल छोड़ गए हैं, उनके नाम हटाए जाएं और जो नए दाखिल हुए हैं, उनके नाम जोड़े जाएं। उसके बाद पूरा ब्योरा भेजा जाए। इसमें आधार सीडिंग का ब्योरा भी अपलोड किया जाए।


छुट्टियों में कैसे ब्योरा अपडेट हो ?

शिक्षकों का कहना है कि गर्मियों की छुट्टियों में यह आदेश किया गया है। शिक्षक हर समय अपने पास पूरा ब्योरा नहीं रखते। स्कूल में दस्तावेज होते हैं। उसे देखकर भरना होता है। वहीं छुट्टियों में शिक्षक घूमने और अन्य काम से बाहर भी जाते हैं। बाहर के कुछ अपने घर या मूल निवास पर चले जाते हैं। 

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि जब स्कूल खुले थे, तभी यह काम करा लेना चाहिए था। इससे तो अब बच्चों की यूनिफॉर्म का काम और लेट होगा। बेसिक शिक्षा निदेशक प्रताप सिंह बघेल कहते हैं कि ज्यादातर ब्योरा ऑनलाइन होता है। अभी से तैयारी के लिए इसलिए कहा जा रहा है, ताकि आचार संहिता खत्म होते ही धनराशि अभिभावकों के खाते में भेजी जा सके।

Saturday, May 25, 2024

उच्च शिक्षा में विज्ञान पढ़ने पर मिलेगी इंस्पायर स्कॉलरशिप

उच्च शिक्षा में विज्ञान पढ़ने पर मिलेगी इंस्पायर स्कॉलरशिप


उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने बाले विद्यार्थीयों के लिए इंस्पायर स्कॉलरशिप योजना शुरू की गई है। इंटर उत्तीर्ण कर मेधावी विद्यार्थी विज्ञान क्षेत्र की शिक्षा में जाते हैं तो योजना के तहत हर साल 60 हजार रुपये तक लाभान्वित सकते हैं। योजना का लाभ इंजीनियरिंग, मेडिकल के साथ परास्नातक, रिसर्च और अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में पढ़ाई करने वाले क्यार्थियों को मिलेगा।


 सभी बोर्ड के मेधावी छात्र-छात्रओं के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग आने की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति देता है। योजना का मकसद अर्तित कर देश के विज्ञान और तकनीकी रिसर्च को बेहतर बनाना है। बताया कि विज्ञान से स्नातक और परास्नताक की पढ़ाई करने वाले छात्र-छासओं को पांच हजार रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस तरह साल भर में विद्यार्थियों को 60 हजार रुपये मिलेंगे। इंस्पायर स्कॉलरशिप छात्रों को पांच वर्ष कोर्स पूरा होने तक दी जाती है।


आवेदक का भारतीय स्टेट बैंक शाखा में बचत खाता होना जरूरी है। आवेदकों को अपने संस्थान के अध्यक्ष को हस्ताक्षरित वार्षिक प्रदर्शन रिपोर्ट भी देनी होगी स्वलरशिप जारी करने के लिए बीएससी, एमएससी की मार्कशीट भी जमा करनी होगी। पहले साल की प्रदर्शन रिपोर्ट स्वीकृत होने के बाद ही स्कॉलरशिप जारी की जाएगी। यदि विद्यार्थीका शैक्षणिक स्कोर दूसरे वर्ष भी अच्छा रहता है तो दूसरे साल को स्कॉलरशिप बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दी जाएगी।


इस वर्ष के इंस्पायर स्कॉलरशिप के लिए ऑनलाइन आवेदन की तिथि की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। तिथि व आवेदन संबंधी जानकारी के लिए वेबसाइट https://online-inspire.gov.in को देखते रहे।


इन दस्तावेजों की होगी जरूरत

आवेदन करने के लिए कक्षा 10 और 12 की मार्कीट और प्रमाण पत्र के साथ जाति प्रमाण पत्र, कॉलेज के प्रधानाचार्य का हस्तवधरित समर्थनएसई की पासबुकली स्वतक और परास्नातक में दाखिले के समय भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान केमिस्ट्री पिक सहित अन्य विज्ञान के विषयों का चयन करने पर योजना का लाभ मिलेगा।

अब सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी के, पुस्तकालय का उपयोग बढ़ाने को DGSE का फरमान

अब सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी केपुस्तकालय का उपयोग बढ़ाने को DGSE का फरमान

■ बच्चों को लाइब्रेरी से पुस्तक ले जानी की देंगे सुविधा

■ छात्रों में पुस्तकालय के प्रति रुझान बढ़ाने की कोशिश


प्रयागराज । समग्र शिक्षा अभियान (माध्यमिक) के तहत प्रदेश के 2306 राजकीय विद्यालयों में पुस्तकालयों का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि छात्र-छात्राओं को सप्ताह में दो पीरिएड लाइब्रेरी में अध्ययन करना अनिवार्य होगा। इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने नौ मई को सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी किया है। शैक्षिक पंचाग में माहवार उल्लिखित विभिन्न दिवसों पर पुस्कालय में गतिविधियां कराई जाएंगी।

रीडिंग क्लब, प्रश्नोत्तरी क्लब, साहित्यिक क्लब, वाद-विवाद क्लब आदि के माध्यम से पुस्तकालय की गतिविधियों को सक्रियता बढ़ाएंगे। विद्यार्थियों और शिक्षकों को पुस्तकालय में बैठकर पढ़ने के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। कुछ निश्चित अवधि (अधिकतम 15 दिन) के लिए विद्यार्थियों को पुस्तक घर ले जाने की सुविधा भी प्रदान करने की व्यवस्था होगी। पुस्तकालय का दायित्व देखने वाले शिक्षक पुस्तकों की प्रदर्शनी, समारोह, प्रतियोगिताएं, पुस्तक मेले आदि का आयोजन भी करेंगे।


प्रत्येक स्कूल में गठित होगी छात्र पुस्तकालय समिति

छात्र-छात्राओं में पठन-पाठन के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से प्रत्येक राजकीय स्कूल में छात्र पुस्तकालय समिति भी गठित होगी। इसके अध्यक्ष प्रधानाचार्य होंगे और पुस्तकालयाध्यक्ष या इंचार्ज पुस्तक सहायक सदस्य सचिव बनाए जाएंगे। स्कूल में पढ़ाए जाने वाले तीन मुख्य शिक्षक के एक-एक शिक्षक और विभिन्न कक्षाओं से पुस्तकालय कप्तान चयनित पांच छात्र समिति के सदस्य होंगे। स्कूल मैनेजमेंट कमेटी के एक सदस्य समिति के आमंत्रित सदस्य होंगे। महीने में कम से कम एक बार समिति की बैठक होगी।



माध्यमिक विद्यालयों की लाइब्रेरी में बनेंगे रीडिंग कॉर्नर

लखनऊ। सूबे के माध्यमिक विद्यालयों के पुस्तकालयों में छात्रों को पढ़ने के लिए रीडिंग कॉर्नर बनाए जाएंगे। छात्र-छात्राओं में पढ़ने की प्रवृत्ति विकसित करने के उद्देश्य से ऐसी व्यवस्था की जाएगी। पुस्तकालयों के सुचारू संचालन के लिए विद्यालयों में स्टूडेंट लाइब्रेरी काउंसिल का गठन किया जाएगा। यह काउंसिल पुस्तकालयों का संचालन करेगी। 


इस संबंध में राज्य परियोजना निदेशक कंचन वर्मा का निर्देश पत्र सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजा गया है। इसमें कहा गया है कि पुस्तकालय विद्यालय का महत्वपूर्ण अंग हैं। इसमें उपलब्ध सुविधाएं छात्रों के पढ़ने और समझने में सहयोग प्रदान करेंगी। साथ ही विद्यार्थियों की मौखिक एवं लिखित भाषा सुदृढ़ होगी। समग्र शिक्षा की वार्षिक कार्ययोजना और बजट में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में पुस्तकालय के सुदृढ़ीकरण के लिए यह व्यवस्था की गई है।

समय से जारी करें परीक्षा परिणाम ताकि वजीफे से वंचित न हों छात्र

समय से जारी करें परीक्षा परिणाम ताकि वजीफे से वंचित न हों छात्र

विवि की लेटलतीफी से तमाम छात्रों को नहीं हो पाता भुगतान, शासन तैयार कर रहा कार्ययोजना, ऑनलाइन फॉर्म भरना भी होगा आसान



लखनऊ। विश्वविद्यालयों को परीक्षा परिणाम जारी करने में छात्रवृत्ति के शेड्यूल (नियमावली) का भी ध्यान रखना होगा। रिजल्ट समय से जारी न होने के कारण तमाम छात्र योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं, इसलिए शासन इस समस्या से निपटने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। इतना ही नहीं विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन फॉर्म भरने की प्रक्रिया भी आसान की जाएगी।



बीटीसी और नर्सिंग समेत तमाम पाठ्यक्रमों का रिजल्ट समय से नहीं आता है। जब तक इन छात्रों का रिजल्ट आता है, तब तक समाज कल्याण विभाग भुगतान के लिए डाटा लॉक कर चुका होता है। साथ ही पोर्टल पर रिजल्ट अपलोड न करने वाले छात्रों को अपात्र घोषित कर दिया जाता है। यह लेटलतीफी तो विश्वविद्यालय स्तर से होती है, लेकिन इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ता है। 


इस समस्या से निपटने के लिए शासन ने तय किया है कि सभी विश्वविद्यालयों के साथ बैठकर कार्ययोजना तैयार होगी कि वे छात्रवृत्ति सूची अपलोड करने की अंत्तिम तिथि से पहले अपना रिजल्ट जारी करें। इसी तरह से सभी विश्वविद्यालयों को अपनी फीस निर्धारित करनी होगी। फीस निधर्धारित न होने से भी तमाम छात्र योजना का लाभ नहीं पा पाते हैं। 


जिन शिक्षण संस्थानों में एक निश्चित संख्या से ज्यादा विद्यार्थी होंगे, उन्हें एक से ज्यादा लॉगइन, पासवर्ड और डिजिटल साइन दिए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों का डाटा अपलोड करने में उन्हें  अभी तक एक शिक्षण संस्थान को एक ही डिजिटल साइन दिया जाता है। इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए ऑनलाइन फॉर्म भी छोटा किया जाएगा। इसके अलावा जो जानकारियां आधार कार्ड, विवि के रिकॉर्ड और डीजी लॉकर से ऑटो फेम (स्वतः ग्रहण) की जा सकेंगी, उसे छात्रों से नहीं भरवाया जाएगा।


शासन उच्च स्तर पर इन समस्याओं के निराकरण के लिए विचार कर रहा है। इसके लिए शीघ्र ही सभी विश्वविद्यालयों के साथ बैठक भी होगी। उनकी दिक्कतें व सुझाव सुनने के बाद नियमावली पर जरूरी बदलाव किए जाएंगे।


बढ़ सकती है आय की सीमा

प्रदेश में सामान्य, पिछड़े व अल्पसंख्यक छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए सालाना आय की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर दाई लाख रुपये करने पर भी विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर कैबिनेट से ही लगेगी।

Friday, May 24, 2024

प्रदेश की खेलकूद प्रतियोगिताओं से CBSE और CISCE बाहर, नए सत्र में स्पोर्ट्स फॉर स्कूल का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित

प्रदेश की खेलकूद प्रतियोगिताओं से CBSE और CISCE बाहर, नए सत्र में स्पोर्ट्स फॉर स्कूल का विस्तृत कार्यक्रम निर्धारित

जिला, मंडल व राज्य स्तर पर आयोजित होंगी प्रतियोगिताएं


लखनऊ। प्रदेश में नए सत्र 2024-25 को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने पढ़ाई के साथ-साथ प्रदेशीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिताओं का भी कैलेंडर जारी किया है। इसमें जहां विभिन्न स्तर पर आयोजन की तिथि तय की गई है वहीं नए सत्र से सीबीएसई व सीआईएससीई के छात्र प्रदेशीय विद्यालयी खेलों में प्रतिभाग नहीं करेंगे।


माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से छात्रों के सर्वांगीण विकास के लिए विद्यालय, जिला, मंडल व प्रदेश स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया जाएगा। इसमें माध्यमिक के साथ-साथ बेसिक के कक्षा छह से आठ तक के अंडर 14 आयु वर्ग के छात्र शामिल किए जाएंगे। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राओं को प्रतियोगिताओं में सीधे एक यूनिट के रूप में शामिल किया जाएगा। 


जबकि इस सत्र से सीबीएसई व सीआईएससीई से संबद्ध प्रदेश के विद्यालयों के छात्र प्रदेशीय विद्यालयी खेलों में प्रतिभाग नहीं करेंगे। विभाग ने इसका स्पष्ट कारण तो नहीं बताया है लेकिन माना जा रहा है कि ऐसा यूपी बोर्ड के छात्रों को ज्यादा अवसर उपलब्ध कराने के लिए किया गया है। इस बार से ट्रायल के तौर पर थांगता मार्शल आर्ट, कलारीपयट्ट, मलखम्भ, शतरंज, योगासन आदि को भी प्रतियोगिताओं में शामिल करने का निर्णय लिया है। इनका ट्रायल तीन साल के लिए होगा।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने कहा है कि हर जिले में राजकीय इंटर कॉलेज, सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय, स्ववित्तपोषित विद्यालय, कस्तूरबा बालिका व उच्च प्राथमिक विद्यालयों के बच्चे अनिवार्य रूप से स्पोर्ट्स फॉर स्कूल कार्यक्रम के तहत कम से कम दो खेलों में ब्लॉक व जिला स्तर पर प्रतियोगिता में शामिल होंगे। खेलकूद के आयोजन के लिए जिला स्तर पर डीआईओएस व मंडल स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में समिति काम करेंगी।


खेलकूद प्रतियोगिताएं 19 वर्ष से कम

(सीनियर), 17 वर्ष से कम (जूनियर) और 14 साल से कम (सब जूनियर) आयु वर्ग में आयोजित की जाएंगी। इसके लिए 21 अगस्त से अक्तूबर दूसरे सप्ताह तक का प्रदेश स्तर पर कार्यक्रम निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा है कि विद्यालय स्तर पर खेलकूद प्रतियोगिता के लिए आयोजन का व्यय क्रीडा शुल्क व रमसा में आवंटित धनराशि से किया जाएगा। जबकि जिला, मंडल व राज्य स्तर पर प्रतियोगिता के लिए अलग से बजट आवंटित किया जाएगा।

नए खेलों की जानकारी नहीं, खेल शिक्षक कैसे करा सकेंगे प्रशिक्षण, माध्यमिक शिक्षा विभाग ने थांगता, गतका, कलारीपयट्टू को खेल सूची में जोड़ा

नए खेलों की जानकारी नहीं, खेल शिक्षक कैसे करा सकेंगे प्रशिक्षण

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने थांगता, गतका, कलारीपयट्टू को खेल सूची में जोड़ा



लखनऊ । माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शैक्षिक सत्र 2024-25 में खेल प्रशिक्षण को बढ़ावा देने के लिए स्पोर्ट्स फॉर स्कूल कार्यक्रम शुरू किया और नौ नए खेलों को शामिल किया गया। कुछ खेल तो ऐसे हैं जिनका नाम विद्यार्थियों और खेल शिक्षकों ने कभी सुना नहीं। ऐसे में इन खेलों का हिस्सा विद्यार्थी कैसे बन पाएंगे यह बड़ा सवाल है।


सूबे में  कुछ कॉलेजों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांश में व्यायाम शिक्षक कार्यरत हैं। एक अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र 2024-25 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों में खेल को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। इस बार खेल सूची में नौ नए खेलों को शामिल किया गया है। शतरंज के साथ ही गतका, कलारीपयट्टू, थांगता जैसे खेलों को शामिल किया गया है।


विद्यालयों में तैनात अधिकांश व्यायाम शिक्षकों को गतका, कलारीपयट्टू, थांगता खेल के बारे में जानकारी ही नहीं है। शिक्षक एक दूसरे साथी से नए खेल के बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। सप्ताह में एक बार आयोजित होने वाली खेलकूद प्रतियोगिता में इन खेलों के आयोजन को लेकर शिक्षक परेशान है। ऑनलाइन खेल को सर्च करने की कोशिश की जा रही है। मगर, इन खेलों का प्रशिक्षण न होने के कारण व्यायाम शिक्षक इन नए खेलों को संचालित नहीं कर पाएंगे।  खेल को बढ़ावा देने के लिए नौ नए खेल जोड़े गए हैं। सप्ताह में एक बार खेल गतिविधियां विद्यालय में आयोजित करने का आदेश दिया गया है। 


इन खेलों को किया गया शामिल

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने शतरंज, थांग ता, गतका, कलारीपयट्टू, जिम्नास्टिक, लॉन टेनिस, तीरंदाजी, जूडो व सॉफ्ट बॉल खेल को शामिल किया है। सभी खेलों का प्रशिक्षण जुलाई माह से सप्ताह में एक बार दिए जाने का निर्देश दिया गया है।


महत्वपूर्ण हैं जोड़े गए खेल

थांगता: यह मणिपुर राज्य का मार्शल आर्ट खेल है। तलवार और भाले के साथ खेला जाने वाला यह खेल आत्मरक्षा और युद्ध कला की पारंपरिक गतिविधि है। इसमें खिलाड़ी तलवार, ढाल और भाले के साथ खेलते हैं।

कलारीपयटूः- यह केरल के मार्शल आर्ट का नाम है। यह लाठी और चाकू चलाने में महारत हासिल करने वाला खेल है। यह व्यक्तिगत युद्ध परीक्षण की एक प्रणाली है। 

गतकाः इसे गुरुमुखी और शाहमुखी से नाम से भी जाना जाता है। यह लाठी लड़ाई की एक मार्शल आर्ट शैली है। पंजाब में इसका प्रशिक्षण दिया जाता है।

Thursday, May 23, 2024

पॉलीटेक्निक में कई चक्र में प्रवेश और टुकड़ों में परिणाम आने से छात्र हो रहे आक्रोशित

प्रदेश भर के पॉलीटेक्निक संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र टुकड़ों में रिजल्ट आने से परेशान

पॉलीटेक्निक में कई चक्र में प्रवेश और टुकड़ों में परिणाम आने से छात्र हो रहे आक्रोशित 

सोशल साइट पर छात्रों ने जताया आक्रोश

पुनर्मूल्यांकन परिणाम का एक हिस्सा ही जारी किया

जिन छात्रों का परिणाम नहीं आया वे अब दुविधा में हैं

17 मई को पुनर्मूल्यांकन के परिणाम का एक हिस्सा जारी किया था

22 अगस्त 2023 को काउंसलिंग शुरू हुई 29 दिसंबर तक चली


लखनऊ । प्रदेश भर के पॉलीटेक्निक में पढ़ाई कर रहे छात्र प्रावधिक शिक्षा परिषद के तरीकों से परेशान हो गए हैं। पहले पॉलीटेक्निक में प्रवेश टुकड़ों में लिए गए और अब पुनर्मूल्यांकन परिणाम भी लगातार टुकड़ों में जारी किए जा रहे हैं।

जिन छात्रों का परिणाम जारी हुआ है वो लगाातर सोशल साइट पर सही रिजल्ट जारी नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं और जिनका परिणाम जारी नहीं हुआ वो दुविधा में हैं कि आगामी सम सेमेस्टर के परीक्षा फार्म बिना रिजल्ट के कैसे भरें।


प्राविधिक शिक्षा परिषद की वेबसाइट देखते-देखते और कार्यालय पर चक्कर लगा लगा कर पॉलीटेक्निक विषम सेमेस्टर की परीक्षा दे चुके छात्र परेशान हो चुके हैं। क्योंकि छात्रों ने कम अंक आने पर पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया था। अभी तक बोर्ड सिर्फ 20 प्रतिशत पुनर्मूल्यांकन के आवेदन का परिणाम ही जारी कर पाया है और बाकी 80 फीसदी परिणाम अभी भी अधर में है। जानकारी के अनुसार इससे पूर्व की परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन परिणाम भी टुकड़ों में ही जारी किए थे। 


विभागीय सूत्रों की मानें तो स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन की कापियां एक अलग समिति से तीन-तीन बार जांच करायी जा रही हैं। पिछले सत्र की वार्षिक परीक्षा बाद भी स्क्रूटनी और पुनर्मूल्यांकन के परिणाम में इसी के चलते देरी हुई थी। स्क्रूटनी के परिणाम दीपावली पर जारी हुए थे लेकिन पुनर्मूल्यांकन के परिणाम में तीन महीने लगे। बता दें कि शासन ने कापी की तीन बार जांच कराई। इसमें नंबर बढ़ने व घटने पर पहले कापी जांचने वाले 400 शिक्षकों को डिबार कर दिया था।



प्रवेश काउंसलिंग भी टुकड़ों में पूरी की गई

सत्र 2023-24 की प्रवेश काउंसलिंग भी टुकड़ों में हुई थी। 22 अगस्त 2023 को काउंसलिंग शुरू हुई और पांच सितंबर से कक्षाएं लगाने के निर्देश मिल गए लेकिन 29 दिसंबर तक काउंसलिंग चली। अक्टूबर में दो अन्य चरण में काउंसलिंग के बाद भी सीटें नहीं भरी। 17 दिसंबर में फिर दो अन्य चरणों में काउंसलिंग करायी थी। जिन छात्रों का प्रवेश अगस्त माह में हुआ और जिनका दिसम्बर में दोनों की पढ़ाई एक सेमेस्टर में हुई।


सोशल साइट पर छात्रों ने जताया आक्रोश

छात्रों का आरोप है कि पुनर्मूल्यांकन परिणाम ऐसे ही जारी करना है तो बोर्ड को पुनर्मूल्यांकन आवेदन बंद कर देना चाहिए। प्रत्येक विषय के लिए पांच सौ रुपए शुल्क देना होता है। जिस प्रकार परीक्षा की कापियां जांची जाती हैं छात्रों को एक से लेकर तीन विषय में आवेदन करना होता है। जिससे समय और पैसा बर्बाद होता है। छात्र-छात्राओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी समस्याएं प्रमुखता से उठाई। 

बता दें कि बोर्ड ने विषम सेमेस्टर परीक्षा के पुनर्मूल्यांकन के परिणाम का एक हिस्सा 17 मई को जारी कर दिया था। रिजल्ट जारी होने के बाद सोशल साइट पर बड़ी संख्या में छात्रों ने नाराजगी जतायी। छात्रों का आरोप था कि कापियां बिना जांचे परिणाम जारी कर दिया गया है क्योंकि अधिकांश छात्रों के परिणाम में कोई बदलाव नहीं देखने को मिला। इससे साफ होता है कि परिणाम बिना जांचे जारी हुआ।