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Friday, July 28, 2017

लखनऊ : आरटीई से दाखिला पाने वाले बच्चों को अलग बैठाने पर नोटिस, समान स्टेटस न होने के कारण किया जा रहा था भेदभाव

एग्जॉन मॉन्टेसरी स्कूल, जयपुरिया स्कूल और रामानुजम पब्लिक स्कूल शहर के कई स्कूल अब भी आरटीई के दाखिला नहीं दे रहे। कई स्कूल तो स्पेलिंग की मामूली गलती पर भी बच्चों के अभिभावकों को लौटा दे रहे हैं। ऐसी शिकायतें मिलने पर विभाग जल्द ही स्कूलों की बैठक बुलाने की तैयारी में है।
एनबीटी ने 26 जुलाई के अंक में उठाया था बच्चों के साथ भेदभाव का मुद्दा।• एनबीटी, लखनऊ : शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत दाखिला पाने वाले बच्चों को अलग कमरे में बैठाने वाले स्कूलों को बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवीण मणि त्रिपाठी ने गुरुवार को नोटिस कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है। बीएसए ने तीनों स्कूलों के प्रबंधन को बच्चों को तत्काल एक साथ बैठाने के निर्देश भी दिए हैं।

इंदिरानगर स्थित गुरुकुल अकेडमी व लखनऊ मॉडल पब्लिक स्कूल और हंसखेड़ा स्थित सिटी कॉन्वेंट स्कूल में आरटीई के तहत दाखिला पाने वाले बच्चों को अलग कमरों में बैठाकर पढ़ाया जा रहा था। एनबीटी ने इस बारे में बुधवार को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था। इसे संज्ञान में लेते हुए बीएसए ने स्कूलों को नोटिस भेजा है और उनके कृत्य को नियम के विपरीत बताया है।

बीएसए प्रवीण मणि त्रिपाठी ने बताया कि स्कूलों को नोटिस देने के साथ ही एक समिति भी बनाई गई है। यह समिति अन्य स्कूलों की जांच-पड़ताल करेगी कि वहां बच्चों के साथ कैसा बर्ताव किया जा रहा है। अगर कोई स्कूल गलत पाया जाता है तो उसे भी नोटिस जारी कर कार्रवाई की जाएगी।
बीएसए ने लगाई फटकार, स्कूलों की जांच के लिए बनाई समिति

RTE: बच्चों का अलग कमरा
'हमारे बच्चों जैसा स्टेटस नहीं, इसलिए अलग कमरे में बैठाते हैं'
पारा के सिटी कॉन्वेंट स्कूल में आरटीई के तहत दाखिला पाने वाले बच्चों को अलग शिफ्ट और अलग क्लास में पढ़ाया जा रहा है।
आरटीई के तहत एडमिशन पाने वाले बच्चों के लिए अलग टीचर और अलग शिक्षकों की व्यवस्था की गई है
इस संबंध में स्कूल के प्रशासनिक अधिकारी मनोज मिश्रा का कहना है कि ये बच्चे हमारे बच्चों की तरह न तो अंग्रेजी बोल सकते हैं। हमारे बच्चे प्रवेश परीक्षा के माध्यम से चयनित होते हैं ऐसे में इनकी शिक्षा का स्तर बेहतर है। इसीलिए आरटीई के बच्चों को अलग पढ़ाया जाता है। जब इनका स्तर हमारे बच्चों के बराबर हो जाएगा तो ही इन्
प्रिंसिपल प्रभास पांडेय का कहना है कि हमारे पास बच्चों को बैठाने की जगह कम है इसलिए हम आरटीई के बच्चों को दूसरी पाली में बुलाते हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों से हमारी वार्ता भी हुई थी तो उन्होंने कहा था कि एडमिशन ले लीजिए बाकी आप अपनी सुविधानुसार पढ़ा सकते हैं। साथ बैठाने का कोई नियम नहीं बताया गया।
स्कूल का अपना तर्क
मोहान रोड हंस खेड़ा स्थित सिटी कॉन्वेंट स्कूल ने आरटीई के बच्चों की शिफ्ट ही अलग कर दी है। जो बच्चे फीस देते हैं उन्हें सुबह आठ बजे बुलाया जाता है। जिनका आरटीई के तहत दाखिला हुआ है उन्हें दोपहर 12 बजे से 2:30 बजे के बीच मात्र ढाई घंटे ही पढ़ाया जाता है। अभिभावकों का कहना है कि इतना कम समय बच्चों को दिया जाता है, जबकि सुबह की पाली में बच्चों को ज्यादा पढ़ाया जाता है।
अलग शिफ्ट में हो रही पढ़ाई
प्रिंसिपल एपी कनौजिया का कहना है कि स्कूल में बैठने की जगह नहीं है। हमने एडमिशन कर लिए हैं। जो अलग बिल्डिंग बन रही है उसी में व्यवस्था की जाएगी। इस बीच बच्चों को न आने के लिए कहा गया। 15 अगस्त के बाद उन्हें पढ़ाया ज
इंदिरा नगर सेक्टर 11 स्थित लखनऊ मॉडल पब्लिक इंटर कॉलेज ने तो जगह न होने के कारण बच्चों को एक महीने बाद आने के लिए कहा। अभिभावकों ने बताया कि स्कूल प्रशासन का कहना है कि हमारी वर्तमान बिल्डिंग में जगह नहीं है इसलिए स्कूल में सामने वाली बिल्डिंग जो अभी बन रही है उसमें आरटीई के बच्चों के लिए बरामदे में पढ़ने की व्यवस्था की जाएगी। जब बरामदा बनकर तैयार हो जाएगा तो बच्चों को पढ़ने भेजें।
इन स्कूलों की कोई शिकायत अभी नहीं पहुंची है। अभिभावक शिकायत करें तो स्कूलों पर कार्रवाई जरूर की जाएगी। ये नियम के विपरीत है।

- प्रवीण मणि त्रिपाठी, बीएसए• जीशान हुसैन राईनी, लखनऊ: हर वर्ग को समान शिक्षा मुहैया कराने के उद्देश्य से राइट टु 

एजुकेशन कानून देश में लागू किया गया। लेकिन शहर के कुछ स्कूल गरीब बच्चों के साथ अछूतों जैसा व्यवहार कर रहे हैं। किसी स्कूल ने आरटीई के बच्चों के लिए अलग कमरा और अलग शिक्षक नियुक्त कर दिया। तो एक स्कूल ने आरटीई के बच्चों की शिफ्ट ही अलग कर दी।
इंदिरानगर स्थित गुरुकुल अकेडमी में स्कूल के पिछले गेट पर स्थित एक कमरे में आरटीई के सभी बच्चों को पढ़ाया जाता है। इनको पढ़ाने के लिए स्कूल ने दो अलग शिक्षकों की भी नियुक्ति की है। अभिभावकों के मुताबिक वो शिक्षक स्कूल के अन्य शिक्षकों की तरह प्रशिक्षित भी नहीं है। अभिभावकों की शिकायत के बाद भी इन बच्चों को स्कूल अलग ही पढ़ा रहा है। इस संबंध में अभिभावकों की ओर से शिक्षा विभाग में भी शिकायत की गई है।
आरटीई एक्ट के तहत निजी स्कूलों को अपनी 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब बच्चों को मुफ्त दाखिला देना है। इनकी फीस शिक्षा विभाग 450 रुपये प्रतिमाह के हिसाब से स्कूल को देता है। नियम के मुताबिक स्कूलों को प्री प्राइमरी और कक्षा एक के 40 बच्चों के एक सेक्शन में 30 ही एडमिशन लेने हैं। शेष 10 एडमिशन आरटीई से लेने हैं। आरटीई एक्टिविस्ट समीना बानो ने बताया कि यूपी आरटीई रूल के सेक्शन 7(1) में है कि स्कूल आरटीई से प्रवेश पाने वाले बच्चों को स्कूल के अन्य बालकों से अलग कक्षा में या अलग समय पर नहीं बुला सकेंगे। सेक्शन 7(2) में लिखा गया है कि अन्य बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल व अन्य जो सुविधाएं दी जा रहीं है वो ही सुविधाएं आरटीई से प्रवेश पाने वाले बच्चों को भी दी जाएं।


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