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Thursday, July 18, 2024

लीज की जमीन पर खुल सकेंगे संस्कृत स्कूल, मान्यता के नियम हुए शिथिल

लीज की जमीन पर खुल सकेंगे संस्कृत स्कूल, मान्यता के नियम हुए शिथिल 

• फरवरी के तीसरे हफ्ते में होंगी संस्कृत बोर्ड परीक्षाएं


लखनऊः प्रदेश में अब लीज की भूमि पर भी संस्कृत विद्यालय खोले जा सकेंगे। कम से कम 15 वर्ष की लीज होने पर विद्यालय खोलने की अनुमति दी जाएगी। यह निर्णय मंगलवार को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया। तय किया गया कि बोर्ड परीक्षाएं अगले वर्ष फरवरी के तीसरे हफ्ते में आयोजित की जाएंगी। 


अभी तक संस्कृत विद्यालय खोलने के लिए जमीन का फ्री होल्ड होना जरूरी था। देववाणी संस्कृत को प्रोत्साहित करने के लिए अब मान्यता के नियमों को शिथिल किया जा रहा है।

पूर्व मध्यमा प्रथम (कक्षा नौंवी) और उत्तर मध्यमा प्रथम (कक्षा ग्यारहवीं) में भी बोर्ड परीक्षाएं कराए जाने पर बैठक चर्चा हुई, लेकिन आम सहमति नहीं बन सकी।

माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद के परीक्षा कार्यक्रम को मंजूरी दे दी गई है। अभ्यर्थी रजिस्ट्रेशन शुल्क छह अगस्त से 15 अगस्त तक जमा किया जा सकेगा। परीक्षा शुल्क 16 अगस्त से 27 अगस्त तक जमा होगा। आवेदन फार्म भरने की तारीख एक सितंबर से 15 सितंबर तक निर्धारित की गई है।

प्रायोगिक परीक्षाएं 10 जनवरी से 14 फरवरी तक होंगी। फरवरी के तीसरे हफ्ते में बोर्ड परीक्षा शुरू हो जाएंगी। 13 संस्कृत विद्यालयों को मान्यता दी गई है। इनमें से तीन विद्यालयों में डिप्लोमा पाठ्यक्रम भी चलाए जाएंगे।




संस्कृत विद्यालयों की बोर्ड परीक्षा फरवरी के तीसरे सप्ताह में

माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की कार्यकारणी व मान्यता समिति की बैठक

लखनऊ। प्रदेश के संस्कृत विद्यालयों की बोर्ड परीक्षाएं फरवरी के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएंगी। जबकि परीक्षा फार्म छह अगस्त से भरे जाएंगे। उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की कार्यकारिणी समिति ने मंगलवार को परीक्षा से जुड़े कार्यक्रम को हरी झंडी दी। साथ ही संबद्धता समिति ने 12 नए कॉलेजों की संबद्धता पर भी मुहर लगाई।


परीक्षा कार्यक्रम के अनुसार विद्यार्थी छह से 15 अगस्त तक पंजीकरण शुल्क जमा करेंगे। परीक्षा शुल्क 16 से 27 अगस्त तक जमा किया जाएगा और विलंब शुल्क के साथ 31 अगस्त तक शुल्क जमा होगा। आवेदन पत्रों में सुधार 16 से 26 सितंबर तक और परीक्षा आवेदन पत्र डीआईओएस कार्यालय में 30 सितंबर तक जमा किए जाएंगे।


 परीक्षा केंद्र का निर्धारण जिला स्तर पर 15 अक्तूबर, मंडल स्तर पर 21 अक्तूबर तक तय किए जाएंगे। प्रयोगात्मक परीक्षाएं 10 से 25 जनवरी तक और बोर्ड परीक्षा फरवरी के तीसरे सप्ताह में आयोजित की जाएगी।


परिषद सचिव शिवलाल ने बताया कि इसके साथ ही मान्यता के लिए भू-स्वामित्व 15 वर्ष की लीज पर मान्य की गई। वहीं विद्यालय प्रशासन योजना को संशोधित कर विद्यालय संचालन योजना कर दिया गया। अब विद्यालय अपनी कार्ययोजना बनाकर इसको लागू कर सकेंगे। उन्होंने बताया कि संबद्धता समिति ने 12 विद्यालयों को मान्यता पर भी सहमति दी और तीन कॉलेजों के डिप्लोमा पाठ्यक्रम शुरू करने के आवेदन भी स्वीकृत किए गए।

बैठक में अध्यक्ष संस्कृत भारती न्यास जितेन्द्र प्रताप सिंह, एमएलसी श्रीशचंद्र शर्मा आदि उपस्थित थे।

पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन 20 जुलाई से

पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन 20 जुलाई से

 
लखनऊ : पूर्व दशम व दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए ओबीसी श्रेणी के विद्यार्थी 20 जुलाई से 20 अक्टूबर तक आवेदन कर सकेंगे। शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन की अंतिम तारीख 20 नवंबर है। पूर्व दशम छात्रवृत्ति 19 दिसंबर को और दशमोत्तर छात्रवृत्ति 20 जनवरी तक विद्यार्थियों के खाते में आनलाइन माध्यम से भेजी जाएगी।

पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप के मुताबिक ओबीसी श्रेणी के विद्यार्थियों क को छात्रवृत्ति व शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए कोई कठिनाई न हो इसके लिए व विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। वर्ष 2024-25 की छात्रवृत्ति के लिए समय सारिणी जारी कर दी गई है। पूर्व दशम छात्रवृत्ति कक्षा नौ व कक्षा 10 के छात्रों और दशमोत्तर छात्रवृत्ति कक्षा 11 व कक्षा 12 के विद्यार्थियों को दी जाती है।



छात्रवृत्ति के लिए 20 जुलाई से आवेदन कर सकेंगे ओबीसी छात्र

लखनऊ। सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति योजना की समय-सारिणी जारी कर दी है। कक्षा-9 से 12 तक छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन 20 जुलाई से 20 अक्तूबर तक किए जा सकेंगे। 19 दिसंबर तक ऑनलाइन भुगतान किया जाएगा।


 कक्षा-11 व 12 को छोड़कर दशमोत्तर कक्षाओं के लिए छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए आवेदन 20 जुलाई से 20 नवंबर तक हो सकेंगे। इन कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए 20 जनवरी तक ऑनलाइन भुगतान होगा। पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेंद्र कश्यप ने बताया कि विद्यार्थियों को वेबसाइट scholarship.up.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। ब्यूरो

DGSE और शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक संघर्ष मोर्चे की बैठक सकारात्मक लेकिन रही बेनतीजा, बैठक का परिणाम 29 जुलाई के पहले नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा निदेशालय में करेगा धरना प्रदर्शन

DGSE और शिक्षक, शिक्षामित्र और अनुदेशक संघर्ष मोर्चे की बैठक सकारात्मक लेकिन रही बेनतीजा

बैठक का परिणाम 29 जुलाई के पहले नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा निदेशालय में करेगा धरना प्रदर्शन


लखनऊ । अवकाश के बावजूद बुधवार को डीजी स्कूल शिक्षा की पहल पर शिक्षक संगठनों के साथ हुई बातचीत सकारात्मक रही। हालांकि बैठक में तत्काल कोई निर्णय नहीं लिया जा सका। अलबत्ता शिक्षक नेताओं को बेहतर निर्णय का आश्वासन जरूर मिला। हालांकि बैठक के दौरान मोर्चे की ओर से स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि बैठक सकारात्मक रही, मगर इस बैठक का परिणाम यदि 29 जुलाई के पहले सकारात्मक नहीं आया तो संयुक्त मोर्चा के पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार 29 जुलाई को प्रदेश भर शिक्षक़ लखनऊ पहुंच कर धरना-प्रदर्शन करेंगे।


मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर (डीजी) कंचन वर्मा ने शिक्षक, शिक्षामित्र एवं अनुदेशकों के संयुक्त मंच 'संयुक्त संघर्ष मोर्चा' को अवकाश के दिन बुधवार को बातचीत के बुलाया था। स्कूल शिक्षा महानिदेशक कार्यालय में मोर्चे के सभी घटकों के साथ हुई इस बातचीत में संयुक्त मोर्चा के मांगपत्र पर महानिदेशक के साथ बिंदुवार विधिवत चर्चा हुई। 


महानिदेशक ने बिंदुवार चर्चा कर मोर्चा प्रतिनिधियों को आस्वस्त किया कि जो प्रकरण उनके स्तर का है, उसे वे अपने स्तर से जल्द निस्तारित कर देंगे। वहीं जो प्रकरण नीतिगत है और शासन स्तर से जिसका समाधान होना है। मसलन शिक्षा मित्र एवं अनुदेशकों के मानेदेय से जुड़े मामले को वे प्रस्ताव के रूप में शासन और सरकार को भेज देंगी।


कई मांगें रखी गईं

बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने डीजी के सामने संगठन की मांग रखी कि हाफ डे सीएल, 31 ईएल, कैशलेश चिकित्सा, शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को समान कार्य के समान वेतन अथवा मानदेय दिए जाएं। इस मुद्दे पर डीजी की ओर से शीघ्र ही विचार कर समाधान निकालने का आश्वासन दिया गया।


कार्यवृत्त जारी किया जाए

मोर्चे के सदस्यों ने बैठक में दिए गए आश्वासनों व सहमति को लेकर कार्यवृत्त जारी करने की मांग की, जिस पर डीजी ने कल तक निर्देश जारी करने का आश्वासन दिया। इसके बाद मोर्चे के सदस्यों ने कहा कि आज की वार्ता में जो सहमति बनी है। उस पर अगर 28 जुलाई तक आवश्यक कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ तो 29 को घेराव होगा।


स्कूल शिक्षा महानिदेशक के साथ वार्ता में ये रहे मौजूद

डीजी के साथ वार्ता में संयुक्त मोर्चा के संयोजक मंडल के प्रदेश अध्यक्ष जूनियर संघ योगेश त्यागी, प्राथमिक शिक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष सुशील पांडेय, बिशिष्ट बीटीसी प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव, प्रदेश सचिव संयुक्त मोर्चा दिलीप चौहान, टीएससीटी अध्यक्ष विवेकानंद, शिक्षामित्र संघ के महामंत्री सुशील यादव, हरिनाम सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगेश यादव, अटेवा के विक्रमादित्य मौर्या, विश्वनाथ मौर्या, सुधेश पांडेय मौजूद थे।



लिखित आश्वासन न मिलने पर 29 को निदेशालय घेरेंगे शिक्षक

लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों की डिजिटल अटेंडेंस का निर्णय अगले आदेश तक स्थगित होने के बाद बुधवार को शिक्षक संगठनों की महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा के साथ बैठक हुई। इसमें शिक्षकों ने ईएल, सीएल, हाफ डे, कैशलेश चिकित्सा सुविधा, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों को समान कार्य समान वेतन देने आदि मुद्दों पर बात की।

बैठक में अधिकारियों ने इस मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया, तो शिक्षक संगठनों ने कहा कि मांगों से संबंधित लिखित आश्वासन न मिलने पर वह 29 जुलाई को निदेशालय का घेराव करेंगे। मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के निर्देश पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा की शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के सभी घटक संगठनों की बैठक निदेशालय में हुई।

विशिष्ट बीटीसी वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी ने बताया कि महानिदेशक ने कहा कि हाफ डे व ईएल-सीएल को लेकर शासन से वार्ता की जाएगी। मेडिकल सुविधा को लेकर वार्ता की जा रही है। शिक्षामित्रों व अनुदेशकों को समान कार्य के लिए समान वेतन मामले में एक कोर्ट केस है। इसे ध्यान में रखते हुए शासन को आवश्यक प्रस्ताव भेजा जाएगा। शिक्षकों की अन्य मांगों पर भी वार्ता के बाद उन्होंने सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया।

जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संघ योगेश त्यागी ने कहा कि शिक्षकों ने कहा कि हमारी अवकाश तालिका में जयंती, राष्ट्रीय पर्व व रविवार का अवकाश भी शामिल हैं। उन्हें भी हटाया जाए। 

CBSE: बारहवीं में साल में दो बार होंगी परीक्षाएं, वर्ष 2026 से लागू करने की तैयारी

CBSE: बारहवीं में साल में दो बार होंगी परीक्षाएं, वर्ष 2026 से लागू करने की तैयारी

बोर्ड परीक्षा का तनाव कम करने को सीबीएसई कर रहा मंथन

योजना को अमली जामा पहनाने में लगेगा समय

फरवरी-मार्च व दूसरी बार जून में होगी आयोजित


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाओं को साल में दो बार आयोजित करने की योजना के तहत बारहवीं कक्षा के लिए दूसरी बार परीक्षा जून में आयोजित की जा सकती है। अभी तक एक बार फरवरी-मार्च में बोर्ड परीक्षा का आयोजन किया जाता है।


दरअसल अभी साल में दो बार परीक्षा आयोजन की योजना पर बोर्ड काम कर रहा है। इसे अमली जामा पहनाने में समय लगेगा। यह व्यवस्था वर्ष 2026 में ही लागू होगी। परीक्षाओं का आयोजन कैसे कराया जाएगा अभी यह तय नहीं है।


नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन की सिफारिशों के आधार पर बच्चों के तनाव को कम करने के लिए साल में दो बार बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की योजना बनाई गई है।


अभी वर्ष 2026 में बारहवीं कक्षा की परीक्षा दूसरी बार जून में आयोजित करने पर विचार किया जा रहा है। अभी तक बारहवीं की परीक्षाएं फरवरी-मार्च में होती है जिसके रिजल्ट मई तक घोषित कर दिए जाते हैं। इस रिजल्ट के आधार पर जुलाई में पूरक परीक्षा (कंपार्टमेंट) की परीक्षाएं होती हैं। यदि जून में परीक्षा दुबारा आयोजित की जाती है तो पहले परीक्षा दे चुके छात्र दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।


दो बार परीक्षा की योजना के तहत छात्रों के पास जून की परीक्षा में अपनी पसंद के किसी एक विषय या सभी विषयों में परीक्षा देने का अवसर होगा। इसके बाद इसका रिजल्ट अगस्त तक घोषित कर दिया जाएगा। इस संबंध में अभी स्कूल प्राचार्यों को भी कुछ स्पष्ट नहीं है। उन्हें बोर्ड की गाइडलाइंस का इंतजार है।

Wednesday, July 17, 2024

आखिर क्यों सरकार को स्थगित करना पड़ा डिजिटल हाज़िरी का फैसला?

आखिर क्यों सरकार को स्थगित करना पड़ा डिजिटल हाज़िरी का फैसला?

बड़ा सवाल यह है कि डिजिटल हाजिरी इतना बड़ा मुद्दा कैसे बन गया?

सरकार ने इतनी जल्दी क्यों समझी आंदोलन की अहमियत? 

क्यों हुई इतनी राजनीति? क्यों फैला इतना आक्रोश? 


लखनऊ: बेसिक शिक्षा विभाग ने आठ जुलाई से शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी का आदेश दिया। शिक्षकों ने इसका विरोध शुरू किया। विभाग ने शुरुआत में कुछ सख्ती की, लेकिन शिक्षक हाजिरी लगाने को तैयार नहीं हुए। शिक्षकों के इस विरोध में राजनीतिक दल भी कूद गए। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी के बाद मायावती भी शिक्षकों के पक्ष में बड़ी हो गई। यहां तक कि सत्ता पक्ष के अंदर से भी डिजिटल हाजिरी के खिलाफ आवाजे उठीं। 


ऐसे में खुद सीएम योगी आदित्यनाथ ने हस्तक्षेप किया और आखिरकार डिजिटल हाजिरी का फैसला सरकार ने स्थगित कर दिया है। अब सवाल यह है कि यह इतना बड़ा मुद्दा कैसे बन गया? इसको लेकर इतनी राजनीति क्यों हुई और क्यों सरकार को फैसला स्थगित करना पड़ा?


क्यों हुई इतनी राजनीति? क्यों फैला इतना आक्रोश?

इस मुद्दे पर राजनीति की मुख्य वजह है बेसिक शिक्षकों की तादाद। प्रदेश में कुल 1.33 लाख प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालय है। इनमें शिक्षको, शिक्षामित्रो, अनुदेशकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों की कुल संख्या लगभग 6.50 लाख है। ऐसे में शिक्षक एक बड़ा वोट बैंक है। इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या लगभग 1.68 करोड़ है। 

शिक्षको का बच्चों के साथ उनके परिवारों से भी संपर्क होता है। विभिन्न योजनाओं में ग्राम प्रधान से लेकर प्रमुख लोगों के संपर्क में रहते है। सभी तरह के सरकारी अभियानों में इनकी ड्यूटी लगती है। ऐसे में ये शिक्षक वोटरो के एक बड़े वर्ग को प्रभावित कर सकते है। यही वजह है कि सभी दल शिक्षकों के साथ हमदर्दी दिखाकर उनको अपने साथ करना चाहते है।


क्या है डिजिटल हाजिरी?

बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षकों की हाजिरी, बच्चों की हाजिरी और मध्याह्न भोजन का ब्योरा सहित 12 रजिस्टर डिजिटल करने के आदेश दिए थे। इसके लिए हर स्कूल में शिक्षकों को दो-दो टैबलेट दिए गए हैं। इनमें तीन काम ऐसे हैं, जो रोजाना तय समय में पूरे करने हैं। सबसे पहले 7:45 से 8:30 बजे और फिर छुट्टी से पहले 2:15 से 2:30 बजे तक शिक्षकों को फेस रिकग्निकशन के जरिए अपनी हाजिरी दर्ज करनी है। सुबह 8 से 9 बजे के बीच सभी बच्चों की डिजिटल हाजिरी दर्ज करनी है। MDM का ब्योरा भी दोपहर 12 बजे तक दर्ज करना है।


क्या है विरोध की बड़ी वजह?

शिक्षकों का कहना है कि बेसिक स्कूल दूर-दराज के इलाकों में होते हैं। शिक्षक 40-50 किलोमीटर दूर अपने साधनों से पहुंचते हैं। ऐसे में रास्ता जाम या किसी और वजह से देर हो सकती है। कई स्कूल तो ऐसे हैं जहां बारिश में पानी भर जाया है या रास्ते लबालब होते हैं। नेटवर्क की भी दिक्कत है। ऐसे में तय समय में हाजिरी लगा पाना आसान नहीं है। छुट्टी से पहले भी हाजिरी दर्ज करनी है।

 शिक्षकों को आकस्मिक स्थिति में कहीं जाना पड़ा तो भी दिक्कत होगी। बच्चों की हाजिरी और MDM का ब्योरा भी दर्ज करना है। इससे पढ़ाई का काफी समय इन कामों में खप जाएगा। बेसिक शिक्षकों को साल भर में 14 कैजुअल लीव (CL) मिलती हैं। अर्जित अवकाश (EL) की सुविधा नहीं है। पूरी नौकरी में एक साल की मेडिकल लीव की व्यवस्था है। 

अगर शिक्षक लेट पहुंचते हैं तो हाफ लीव या तीन दिन लेट होने पर एक CL काटी जा सकती है। विभाग ने जो व्यवस्था लागू की है, उसके अनुसार लेट पहुंचने पर सीधे वेतन काट लिया जाएगा। शिक्षकों का कहना है कि विभाग ने इन दिक्कतों को समझे बिना नई व्यवस्था लागू कर दी।


क्या तर्क दे रहा विभाग?

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल हाजिरी से पारदर्शिता आएगी। शिक्षकों की उपस्थिति की सही जांच होगी। शिक्षक समय पर आते हैं तो इसका छात्रों की पढ़ाई पर सकारात्मक असर होगा। शिक्षकों को भी हर काम के लिए अलग-अलग रजिस्टर नहीं बनाने पड़ेंगे। सही ब्योरा मिलने से योजनाएं बनाने में लाभ मिलेगा। शिक्षकों, कर्मचारियों का उत्पीड़न बंद होगा।


ऐसे शुरू हुई राजनीति

आठ जुलाई को जैसे ही डिजिटल हाजिरी का आदेश लागू हुआ तो शिक्षकों ने विरोध शुरू कर दिया। हालांकि, वे स्कूल जाते रहे, मैनुअल हाजिरी लगाई और पढ़ाते भी रहे। दो दिन हाजिरी न लगने पर कुछ जिलों में BSA ने वेतन काटने के आदेश भी दिए लेकिन शिक्षक हाजिरी को तैयार नहीं हुए। इसी बीच राजनीतिक दलों की ओर से शिक्षकों के पक्ष में प्रतिक्रिया आने लगी। 

नौ जुलाई को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान आया। उन्होंने शिक्षकों की व्यावहारिक समस्याओं को लेकर X पर पोस्ट किया। सपा सांसद आनंद भदौरिया सहित कुछ विधायकों ने भी विरोध जताया। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि शिक्षकों की समस्याएं समझनी चाहिए। 

अब बसपा प्रमुख मायावती ने बयान दिया है कि जरूरी बुनियादी सुविधाओं का स्कूलों में घोर अभाव है। इसके लिए समुचित बजट का प्रावधान कर समस्याओं को हल करने की बजाय सरकार ध्यान बंटाने के लिए दिखावटी काम कर रही है। इस बीच सत्ता पक्ष से MLC देवेंद्र प्रताप सिंह ने CM को पत्र लिखकर कहा कि अधिकारी सरकार की छवि खराब कर रहे हैं। ऐसे निर्णयों से सरकार की शिक्षक कर्मचारी विरोधी छवि बन रही है।


सरकार ने इतनी जल्दी क्यों समझी आंदोलन की अहमियत? 

शिक्षकों की अहमियत सरकार अच्छी तरह समझती है। यही वजह है कि सीएम खुद इस मसले पर नजर बनाए रहे। उन्होंने दो बार इस मामले का संज्ञान लेकर हस्तक्षेप किया। शिक्षकों से बातचीत कर मसले का हल निकालने की नसीहत दी। आखिरकार उन्होंने इस मसले पर मुख्य सचिव (CS) को आगे किया। पहले CS मनोज कुमार सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद दोबारा अधिकारियों के साथ शिक्षकों के प्रतिनिधियों को भी बुलाया। डिजिटल हाजिरी का फैसला स्थगित किया। कमिटी गठित कर दी और कहा कि सभी पक्षों से बातचीत करके ही आगे निर्णय लिया जाएगा।



 प्रदेश सरकार का शिक्षकों पर जल्दबाजी का निर्णय : मायावती

लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती भी मंगलवार को शिक्षकों के समर्थन में उतरी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों की बदहाली की शिकायत आम है। इस पर समुचित बजट प्रावधान कर समस्याओं का उचित हल निकालने की जगह सरकार दिखावटी कार्य कर रही है। शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी भी सरकार का ऐसा ही कदम है जो जल्दबाजी में थोपा गया है। इससे ज्यादा जरूरी शिक्षकों की सही व समुचित संख्या में भर्ती के साथ ही बुनियादी सुविधाओं का विकास किया जाए। ब्यूरो


उपचुनाव में हार के डर से स्थगित किया फरमान: अखिलेश

लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने आने वाले उपचुनाव में हार के डर से शिक्षकों की 'डिजिटल अटेंडेंस' का फरमान स्थगित किया है। इसे पूरी तरह से निरस्त होना चाहिए। उन्होंने एक्स के माध्यम से कहा कि भाजपा का असली चेहरा शिक्षकों व आम जनता के सामने आ गया है। शिक्षक व आम जनता भाजपा को उपचुनाव ही नहीं, अगला हर चुनाव हराएगी। जनता ने भाजपा सरकार की मनमानी के बुलडोजर के ऊपर जनशक्ति का बुलडोजर चला दिया है।

स्थगित नहीं, निरस्त हो डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक संयुक्त संघर्ष मोर्चा शासन के निर्णय से संतुष्ट नही, मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान

स्थगित नहीं, निरस्त हो डिजिटल अटेंडेंस, शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक संयुक्त संघर्ष मोर्चा शासन के निर्णय से संतुष्ट नही

मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का एलान

29 जुलाई को बेसिक शिक्षा निदेशालय का होगा घेराव 

डिजिटल अटेंडेंस को स्थगित करना हमारी समस्याओं का स्थायी हल नहीं है, यह क्षणिक जीत 

संयुक्त मोर्चा की बैठक में बनी रणनीति, शिक्षामित्रों को समान कार्य का मिले समान वेतन


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में डिजिटल अटेंडेंस भले ही अगले आदेश तक स्थगित हो गई हो, लेकिन शिक्षक संगठन इससे संतुष्ट नहीं है। शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने डिजिटल अटेंडेंस का आदेश निरस्त करने, शिक्षामित्रों को समान कार्य का समान वेतन देने जैसी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का निर्णय लिया है। 


मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह के साथ हुई बैठक के निर्णय की जानकारी होने पर लखनऊ में संयुक्त संघर्ष मोर्चा की मंगलवार को बैठक हुई। इसमें मोर्चे के सभी घटक संगठन शामिल हुए। मोर्चा संयोजक उप्र. जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी ने कहा कि डिजिटल अटेंडेंस को स्थगित करना हमारी समस्याओं का स्थायी हल नहीं है,  यह क्षणिक जीत है।


प्रदेश अध्यक्ष सुशील पांडेय ने कहा कि शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशकों की समस्याओं के समाधान होने तक मोर्चा के पूर्व घोषित कार्यक्रम यथावत रहेंगे। शिक्षामित्र संघ के प्रदेश महामंत्री सुशील यादव ने भी शिक्षामित्रों की समस्याओं के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। 


इस क्रम में 25 जुलाई को जिलों में प्रदर्शन, 29 जुलाई को बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव और 5 सितंबर को लखनऊ में डेरा डाला जाएगा। उप्र. बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने भी आंदोलन जारी रखने की घोषणा की है। बैठक में अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय बंधु, विशिष्ट बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संतोष तिवारी, सुशील पांडेय, रमेश मिश्रा, संतोष तिवारी, विक्रम सिंह, मो. अशरफ आदि शामिल हुए।


29 को निदेशालय घेरेगा मोर्चा

सरकार ने आनलाइन उपस्थिति का आदेश भले ही स्थगित कर दिया है लेकिन शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक संयुक्त संघर्ष मोर्चा अपने आंदोलन पर अडिग है। मंगलवार को मोर्चा की बैठक में इस फैसले को निरस्त करने की मांग उठाई गई। संयुक्त संघर्ष मोर्चा के संरक्षक व उम्र बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा कि 29 जुलाई को बेसिक शिक्षा निदेशालय का घेराव कर विरोध जताएगा। बैठक में संयुक्त मोर्चा के संयोजक संतोष तिवारी, उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष योगेश त्यागी, अटेवा के विजय बंधु ने कहा कि आंदोलन जारी रहेगा।

यूपी बोर्ड के नए सत्र की नामित NCERT की किताबें बाजार में न आने से अभिभावकों की जेब पर पड़ा बड़ा बोझ, यूपी बोर्ड की किताबें बाजार से गायब निजी पांच गुना तक महंगी बिक रहीं

यूपी बोर्ड के नए सत्र की नामित NCERT की किताबें बाजार में न आने से अभिभावकों की जेब पर पड़ा बड़ा बोझ

यूपी बोर्ड की किताबें बाजार से गायब निजी पांच गुना तक महंगी बिक रहीं


लखनऊ। यूपी बोर्ड के नए सत्र की नामित एनसीईआरटी की किताबें बाजार में अब तक नहीं आई हैं और पुरानी किताबें बाजार से नदारद हैं। ऐसे में कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्र- छात्राएं निजी प्रकाशकों की पांच गुना से अधिक महंगी किताबें खरीदकर पढ़ाई कर रहे हैं। बीते साल कक्षा नौ से 12वीं की किताबों का जो सेट 200- 300 रुपये में मिलता है, वही सेट निजी प्रकाशकों का 1500 से 2000 रुपये में मिल रहा है। विज्ञान, भौतिक, रसायन, जीव विज्ञान, गणित की किताबें सबसे महंगी हैं। गणित, रसायन विज्ञान, सामाजिक विज्ञान, भूगोल, इतिहास, अंग्रेजी की किताबों की कीमत में भारी अंतर है। उप्र. माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से लखनऊ में यूपी बोर्ड के सरकारी व निजी करीब 750 स्कूल संचालित हो रहे हैं। इनमें कक्षा नौ से 12 वीं तक औसतन दो लाख बच्चे पंजीकृत हैं



रॉयल्टी-जीएसटी के विवाद में नहीं छपी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी आधारित किताबें


प्रयागराज। रॉयल्टी और जीएसटी के विवाद में यूपी बोर्ड की किताबें नहीं छप सकी हैं। इसके चलते सत्र शुरू होने के साढ़े तीन महीने बाद भी यूपी बोर्ड से संबद्ध प्रदेश के 27 हजार से अधिक माध्यमिक स्कूलों के कक्षा नौ से 12 तक के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को सस्ती किताबें नहीं मिल सकी हैं। हर साल आमतौर पर जुलाई के पहले सप्ताह तक राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) आधारित किताबें मिल जाती थीं। इस साल जुलाई का दूसरा सप्ताह बीतने के बावजूद किताबों का अता-पता नहीं है।

एनसीईआरटी का 2021 की रॉयल्टी और जीएसटी का दो करोड़ से अधिक नहीं मिला है। प्रकाशकों ने हाईकोर्ट में याचिका कर दी है कि कोरोना काल में किताबें नहीं बिकने से उनका नुकसान हो गया, इसलिए रॉयल्टी और जीएसटी देने में असमर्थ हैं। यह मामला अब तक हाईकोर्ट में लंबित है। उधर, एनसीईआरटी ने साल 2021 की रॉयल्टी और जीएसटी नहीं मिलने पर इस साल किताबों के प्रकाशन का अधिकार ही नहीं दिया। 

किताबों के प्रकाशन का अधिकार देने के लिए यूपी बोर्ड से लेकर शासन के अधिकारियों ने कई बार केंद्र सरकार से पत्राचार किया, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जानकारों की मानें तो आज की तारीख में भी प्रकाशन का अधिकार मिल जाए तो भी किताबें छपकर बाजार तक पहुंचने में कम से कम दो महीने का समय लग जाएगा। पहले किताबों के प्रकाशन के लिए टेंडर निकाला जाएगा और उसके बाद प्रकाशन और बाजार में उपलब्धता के लिए न्यूनतम दो महीने का समय देना होगा।


वेबसाइट पर किताबें

2024-25 सत्र में किताबों का प्रकाशन नहीं होने से बच्चे परेशान हैं। वैसे यूपी बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर किताबें उपलब्ध हैं और छात्र-छात्राएं चाहें तो नि:शुल्क डाउनलोड कर सकते हैं।


मनमानी कर रहे प्रकाशक

एनसीईआरटी की किताबें बाजार में नहीं आने पर निजी प्रकाशक मनमानी कर रहे हैं। कक्षा 12 की रसायन विज्ञान की दो किताबों की कीमत वैसे तो 38 रुपये है। लेकिन दोनों किताबों को एकसाथ छापकर निजी प्रकाशक बाजार में 1175 रुपये में बेच रहे हैं। इसी प्रकार 52 रुपये में मिलने वाली भौतिक विज्ञान की दो किताबें निजी प्रकाशक 1060 रुपये में बेच रहे हैं।



बगैर किताबों के 4 माह से चल रहे माध्यमिक स्कूल, यूपी बोर्ड के स्कूलों की किताबें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं, प्रभावित हो रही पढ़ाई

■ 12 अप्रैल को परिषद ने शैक्षिक कैलेंडर जारी किया


लखनऊ। यूपी बोर्ड के माध्यमिक स्कूलों के बच्चे बिना किताबों के पढ़ाई करने को मजबूर हैं। शैक्षिक सत्र शुरू हुए 115 दिन बीत जाने के बाद भी किताबें बाजार में उपलब्ध नहीं हो सकी हैं। शिक्षक बोल रहे हैं कि एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई की जानी है मगर माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अभी तक किताबों के लिए प्रकाशकों के नाम तक तय नहीं किए हैं। कक्षा 9 से 12 कक्षा तक के 36 विषयों की 70 किताबें एनसीईआरटी और हिन्दी, संस्कृत और उर्दू की 12 किताबें निजी प्रकाशकों की इस्तेमाल होंगी।


राजकीय, एडेड स्कूलों के प्रधानाचार्यों का कहना है कि परिषद ने 12 अप्रैल को शैक्षिक कैलेण्डर जारी किया था। जनवरी 2025 के पहले सप्ताह तक बच्चों का पाठ्यक्रम पूरा कराना है। अफसर स्कूलों का निरीक्षण कर रहे हैं और प्रधानाचार्यों, शिक्षकों को छात्रों को टाइम टेबल के हिसाब से पढ़ाने का दबाव बना रहे हैं।


अफसर बोले
माध्यमिक स्कूलों में नियमित कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। अभी तक माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से किताबों को लेकर कोई दिशानिर्देश नहीं मिले हैं। जैसे ही कोई आदेश मिलेगा, उसका पालन कराया जाएगा।- डॉ. प्रदीप कुमार सिंह, जेडी (माध्यमिक)


निजी प्रकाशकों की किताबों पर पाबंदी
कक्षा नौ से 12 के छात्र-छात्राओं की किताबें अभी तक बाजार में उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। बच्चों के सामने असमंजस है कि वे कौन सी किताबों से पढ़ाई करें? प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के सामने सवाल है कि वे कौन सी किताबें खरीदने का सुझाव दें? बीते साल निजी प्रकाशकों की किताबें बच्चों को खरीदने के लिए मना किया गया था। फिलहाल पुरानी किताबों से पढ़ा रहे हैं।


शिक्षक नेता बोले
नियमतः : एक अप्रैल को सत्र शुरू होने से पहले ही अधिकारियों को एनसीईआरटी की किताबें बाजार में उपलब्ध करानी चाहिए। किताबें देरी से मिलने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।–सोहनलाल वर्मा, प्रदेश अध्यक्ष, उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट)

शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए सीएम योगी के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने अगले आदेशों तक टाला डिजिटल हाजिरी का निर्णय, कमेटी का किया गठन

शिक्षकों के आक्रोश को देखते हुए सीएम योगी के हस्तक्षेप के बाद सरकार ने अगले आदेशों तक टाला डिजिटल हाजिरी का निर्णय, कमेटी का किया गठन


मुख्यमंत्री ने किया हस्तक्षेप, अधिकारियों को दिए निर्देश

शिक्षा विभाग ने आठ जुलाई को शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी का आदेश जारी किया था। उसके बाद से ही शिक्षक इस फैसले का विरोध कर रहे थे। वे स्कूल जा रहे थे और काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज करा रहे थे। स्कूल समय के बाद धरना-प्रदर्शन भी कर रहे थे। दूसरी तरफ कई विपक्षी दलों के साथ-साथ सत्ता पक्ष के भी कुछ विधायक व मंत्री भी इस मुद्दे पर शिक्षकों के साथ आ गए थे। उन्होंने भी सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की थी। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी दो बार इस मामले में हस्तक्षेप किया और बातचीत से हल निकालने के आदेश अधिकारियों को दिए थे।

छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छी शिक्षा दिए बगैर प्रधानमंत्री के 2047 में विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त नहीं किया जा सकता। - योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री


मुख्य सचिव ने की शिक्षक संगठनों से मुलाकात

यूपी में शिक्षकों के लगातार प्रदर्शन के बाद माहौल को शांत करने के लिए राज्य सरकार की ओर से पहल हुई। पूरे मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने खुद संभाली। उन्होंने शिक्षक संगठनों के नेताओं के साथ मुलाकात की। मुख्य सचिव ने शिक्षक संघ को आश्वासन दिया कि उनकी स्थिति को जानने के बाद ही डिजिटल अटेंडेंस के आदेश को प्रभावी बनाया जाएगा।



लखनऊ । राज्य सरकार ने शिक्षकों के लिए डिजिटल हाजिरी की अनिवार्यता को अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दिया है। साथ ही उनकी समस्याओं व सुझावों को सुनने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने का निर्णय किया है। यह कमेटी शिक्षा के सभी आयामों पर विचार कर सुधार के लिए सुझाव देगी।

मंगलवार को मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग एवं शिक्षक संगठनों की बैठक हुई जिसमें डिजिटल हाजिरी को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखने का निर्णय किया गया। बताया जाता है कि यह आदेश आगामी दो माह तक प्रभावी रह सकता है। 

इस दौरान बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा जगत में बड़े पैमाने पर बदलाव की जरूरत है। छात्रों  गुणवत्तापरक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिए बगैर वर्ष 2047 में प्रधानमंत्री के विकसित भारत के लक्ष्य को नहीं प्राप्त किया जा सकता। बैठक में शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया।


शिक्षकों की दिक्कतों पर विशेषज्ञ कमेटी देगी रिपोर्ट

लखनऊ । राज्य सरकार ने डिजिटल हाजिरी से जुड़ी शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनने के लिए एक विशेषज्ञ कमेटी गठित करने का निर्णय किया है। यह कमेटी शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस कमेटी में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक संघ के सदस्य व शिक्षाविद् आदि शामिल होंगे। समिति शिक्षा के सभी आयामों पर विचार कर सुधार के लिए अपने सुझाव देगी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जायेगा।

बैठक में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा डॉ शनमुगा सुंदरम, महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा समेत उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।


प्रेस विज्ञप्ति  👇
पत्र सूचना शाखा (मुख्य सचिव मीडिया कैम्प)
सूचना एवं जन सम्पर्क विभाग, उ०प्र०

डिजिटल अटेंडेंस को अग्रिम आदेशों तक रखा जायेगा स्थगित


🔵 मुख्य सचिव की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग एवं शिक्षक संगठनों के साथ बैठक आयोजित की गई

🔵 बैठक में शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनने के लिये एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन करने का लिया गया निर्णय

🔵 समिति शिक्षा के सभी आयामों पर विचार कर सुधार हेतु देगी अपने सुझाव


दिनांकः 16 जुलाई, 2024 लखनऊः मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार सिंह की अध्यक्षता में शिक्षा विभाग एवं शिक्षक संगठनों के साथ बैठक आयोजित की गई। अपने संबोधन में मुख्य सचिव ने कहा कि मा० मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में बच्चों को गुणवत्तापरक शिक्षा उपलब्ध कराना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शिक्षा जगत में ट्रांसफार्मेशनल चेंज की जरूरत है। छात्रों को गुणवत्तापरक शिक्षा देने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। बच्चों को अच्छी शिक्षा दिये बगैर वर्ष 2047 में मा. प्रधानमंत्री जी के विकसित भारत के लक्ष्य को नहीं प्राप्त किया जा सकता।

बैठक में शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनने के लिये एक एक्सपर्ट कमेटी को गठित करने का निर्णय लिया गया। यह कमेटी शिक्षकों की समस्याओं व सुझावों को सुनकर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। इस कमेटी में शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक संघ के सदस्य व शिक्षाविद् आदि शामिल होंगे। समिति शिक्षा के सभी आयामों पर विचार कर सुधार हेतु अपने सुझाव देगी। डिजिटल अटेंडेंस को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा जायेगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर फैसला लिया जायेगा।

 बैठक में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा श्री दीपक कुमार, प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा डॉ० शंमुगा सुंदरम, महानिदेशक स्कूल शिक्षा सुश्री कंचन वर्मा, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण आदि उपस्थित थे।



बेसिक शिक्षकों की डिजिटल हाजिरी पर रोक, चौतरफा विरोध के बाद बैकफुट पर यूपी सरकार, अब कमेटी करेगी अन्तिम निर्णय 

उत्तर प्रदेश में सरकारी टीचरों की डिजिटल हाजिरी का सिस्टम लागू किए जाने के बाद से भारी विरोध शुरू हो गया था. शिक्षकों ने सामूहिक इस्तीफा देना शुरू कर दिया था. इसके बाद सरकार अब बैकफुट पर आ गई है.


Jul 16, 2024
लखनऊ: सरकारी टीचरों के डिजिटल हाजिरी का विरोध करने के बाद अब सरकार बैकफुट पर आ गई है. शासन की ओर से उत्तर प्रदेश में डिजिटल अटेंडेंस को होल्ड कर दिया गया है. यानी अब सरकारी टीचरों की डिजिटल हाजिरी पर रोक लग गई है. अब यह सिस्टम लागू नहीं होगा. बेसिक शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा ने बताया कि मामले को लेकर एक कमेटी का गठन किया गया है, जो इस पूरे प्रकरण का निस्तारण करेगी.



यूपी के लगभग हर जिले से बेसिक शिक्षकों के संकुल प्रभारी पद से इस्तीफे दिए जाने की लगी झड़ी

यूपी के लगभग हर जिले से बेसिक शिक्षकों के संकुल प्रभारी पद से इस्तीफे दिए जाने की लगी झड़ी  

शिक्षण कार्य के बजाए पोस्टमैन की तरह काम लिए जाने का आरोप 

शिक्षकों का आरोप, बिना सहमति चार साल से हो रहा नवीनीकरण


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के हर जिले से बेसिक शिक्षकों ने  संकुल प्रभारी पद से सामूहिक इस्तीफा दे दिया है, और यह प्रक्रिया  रोज का रोज जोर पकड़ रही है। शिक्षकों का आरोप है कि निपुण लक्ष्य और शिक्षण कार्य के बजाए उनसे पोस्टमैन की तरह काम लिया जा रहा है। इतना ही नहीं, एक साल के लिए नियुक्ति होने के बावजूद पिछले चार साल से उनका नवीनीकरण हो रहा है।


 वर्ष 2018 से शिक्षण संकुल पद बने थे। शिक्षकों को एक वर्ष की अवधि के लिए संकुल पद पर तैनाती दी गई थी। उस समय एक न्याय पंचायत में एक शिक्षक को इस काम के लिए लगाया गया था। यह संख्या अब पांच हो चुकी है। इनके ऊपर एसआरजी (स्टेट रिसोर्स ग्रुप) और एआरपी (अकादमिक रिसोर्स पर्सन) के पद हैं।


तैनाती के समय हर साल नवीनीकरण की व्यवस्था थी। पिछले चार साल से बिना सहमति के इनका नवीनीकरण  किया जा रहा है। इसके विरोध में संकुल प्रभारियों ने सामूहिक रूप से जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अपना इस्तीफा भेज दिया है।


इसके बाद अधिकारियों ने शिक्षकों को मनाने का भी प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। इन शिक्षकों को यूडायस का डाटा कलेक्शन, चिट्ठी पहुंचाने जैसे काम करने पड़ रहे हैं। इसके साथ ही शिक्षकों को ऑनलाइन उपस्थिति के लिए विद्यालय बंद होने के दो घंटे बाद तक ऑनलाइन रहना पड़ता है।

Tuesday, July 16, 2024

हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन हुई समायोजन प्रक्रिया, अगली सुनवाई 29 जुलाई को

सरप्लस समायोजन पर कोर्ट ऑर्डर हुआ अपलोड

समायोजन पर अभी नहीं लगी उच्च न्यायालय से रोक


हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के अधीन हुई समायोजन प्रक्रिया, अगली सुनवाई 29 जुलाई को



🔴 देखें कोर्ट ऑर्डर 👇 



परिषदीय स्कूलों की समायोजन प्रक्रिया पर रोक की खबर निकली गलत

■ कनिष्ठ अध्यापक को समायोजित करने के आदेश को चुनौती दी 
■ कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा, समायोजन प्रक्रिया न्यायालय के अन्तिम निर्णय के हुई अधीन


प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में होने वाली समायोजन प्रक्रिया अब न्यायालय के अन्तिम फैसले के अधीन रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने याचिकाकर्ता पुष्कर सिंह चंदेल और अन्य कि याचिका पर अधिवक्ता दिलीप कुमार मिश्रा और अमित मिश्रा की दलीलों को सुनने के बाद दिया।


याचिका में विभाग के उस आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें विद्यालय के कनिष्ठ अध्यापक को पहले समायोजित करने का आदेश दिया गया था। न्यायालय ने अधिवक्ताओं की दलीलों से सहमत होते हुए प्रक्रिया को फाइनल आउटकम ऑफ़ जजमेंट करते हुए सरकार से जवाब मांगा है और मामले को 29 जुलाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

13 सूत्री मांगपत्र DGSE को सौंपकर डिजिटाइजेशन से पूर्व शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की RSM की मांग

13 सूत्री मांगपत्र DGSE को सौंपकर डिजिटाइजेशन से पूर्व शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की RSM की मांग

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्रा०सं०) के प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक स्कूल शिक्षक के साथ की भेंटवार्ता

▪️धरातल पर डिजिटाइजेशन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से कराया अवगत

▪️समस्याओं का निराकरण होने तक जारी रहेगा आन लाइन उपस्थिति/ डिजिटाइजेशन का बहिष्कार


लखनऊ।  महानिदेशक स्कूल शिक्षा के विशेष आमंत्रण पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्रा०सं०) के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मा० महेंद्र कुमार जी के नेतृत्व में महानिदेशक स्कूल शिक्षा के साथ बैठक की व 13 सूत्री ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की वर्तमान ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराया। 

डिजिटाइजेशन/ऑनलाइन उपस्थिति पर लंबी वार्ता हुई। जिसमें संगठन द्वारा इस व्यवस्था को धरातल पर लागू करने में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों को बारीकी से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। परंतु जब तक समाधान संबंधी कोई आदेश निर्गत नहीं होता है तब तक महासंघ का बहिष्कार एवं संघर्ष जारी रहेगा।संघर्ष की कार्ययोजना शीघ्र प्रदेश नेतृत्व द्वारा घोषित की जायेगी।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह, प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री शिवशंकर सिंह, प्रदेशीय संयुक्त मंत्री प्रदीप तिवारी व रविंद्र पंवार मौजूद रहे।


ज्ञापन में निम्नांकित मांगों को रखा गया

👉1- अन्य विभागों की भांति आकस्मिक अवकाश की श्रेणी में बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को भी न्यूनतम 15 ‘हाफ डे लीव अवकाश’ का विकल्प प्रदान किया जाये। जिससे आकस्मिकता की स्थिति में शिक्षक हाफ डे लीव अवकाश का उपभोग कर सकें।

👉2- बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति 30 ईo एलo प्रदान किया जाये यदि ईo एलo प्रदान करने में कोई विशेष विधिक समस्या है तो महाविद्यालयों के शिक्षकों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग में भी प्रिविलेज अवकाश (P.L.) प्रदान किया जाये।

👉3- अन्य विभागों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग में भी अवकाश के दिनों में कार्य करने पर देय ‘प्रतिकर अवकाश’ का विकल्प मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रदान किया जाये।

 👉4- किसी आकस्मिक घटना अथवा आपदा की स्थिति में यदि शिक्षक/शिक्षामित्र/अनुदेशक/शिक्षणेत्तर कर्मचारी आगमन हेतु निर्धारित समय के पश्चात 01 घण्टे की अवधि तक माह में पाँच कार्य दिवस विलम्ब से पहुंचने पर अर्थात माह में अधिकतम 05 घन्टे तक विलम्ब से उपस्थित होने पर सम्बन्धित को अनुपस्थित न माना जाए। (दिनांक 07-07-2024 को महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा V IMP/ व्यक्तिगत ध्यान अपेक्षित के रूप में प्रसारित संदेश में उल्लेखित 30 मिनट की शिथिलता समाहित)

👉5- बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के शिक्षक/शिक्षामित्र/अनुदेशक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति निःशुल्क कैशलेश चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाये।

👉6- प्राकृतिक आपदा/स्थानीय स्तर पर मौसम की प्रतिकूलता तथा जनपद स्तरीय विभागीय कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की स्थिति में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ऑनलाइन उपस्थिति से शिथिलता प्रदान करने का अधिकार प्रदान किया जाये।

👉7- ऑनलाइन उपस्थिति सहित पंजिकाओ का डिजिटाइजेशन सर्वर की उपलब्धता व टैबलेट के सुचारू संचालन के अधीन है। इसलिए एक समय मे अधिक लोड से सर्वर क्रैश होने अथवा टैबलेट के खराब होने पर वैकल्पिक व्यवस्था का स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जाए।

👉8- डिजिटाइजेशन की वर्तमान ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था भेदभाव पूर्णं,असुरक्षा की भावना व शोषणकारी होने से शिक्षक की सृजनात्मक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा। इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग में ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था महानिदेशक कार्यालय से लेकर विद्यालय स्तर तक कार्य करने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के समस्त घटक कार्यालयों पर समान रूप से लागू किया जाए।

👉9- शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से मुक्त किया जाए तथा शिक्षकों/शिक्षिकाओं से लिए जाने वाले कार्यों की सूची जारी की जाए।

👉10- प्रमोशन/सामान्य स्थानान्तरण/पारस्परिक-जनपदीय/अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन शीघ्र ससमय कराए जाएं।

👉11- 17140/18150 लंबित प्रोन्नत वेतन विसंगति की समस्या शीघ्र निस्तारित की जाए।

👉12- शिक्षामित्र/अनुदेशकों को सम्मानजनक मानदेय दिया जाए तथा शिक्षकों की भाँति पारस्परिक व सामान्य स्थानान्तरण सहित अन्य समस्याओं का निस्तारण किया जाए।

👉13- रसोइयों से 11 माह का कार्य लिया जाता है परंतु 10 माह का ही मानदेय दिया जाता है। इसलिए रसोइयों को 11 माह का मानदेय दिया जाए।

13 सूत्री मांगपत्र DGSE को सौंपकर डिजिटाइजेशन से पूर्व शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की RSM की मांग

13 सूत्री मांगपत्र DGSE को सौंपकर डिजिटाइजेशन से पूर्व शिक्षकों की विभिन्न ज्वलंत समस्याओं के निराकरण की RSM की मांग

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्रा०सं०) के प्रतिनिधिमंडल ने महानिदेशक स्कूल शिक्षक के साथ की भेंटवार्ता

▪️धरातल पर डिजिटाइजेशन में आने वाली व्यवहारिक समस्याओं से कराया अवगत

▪️समस्याओं का निराकरण होने तक जारी रहेगा आन लाइन उपस्थिति/ डिजिटाइजेशन का बहिष्कार


लखनऊ।  महानिदेशक स्कूल शिक्षा के विशेष आमंत्रण पर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ उत्तर प्रदेश (प्रा०सं०) के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मा० महेंद्र कुमार जी के नेतृत्व में महानिदेशक स्कूल शिक्षा के साथ बैठक की व 13 सूत्री ज्ञापन सौंपकर शिक्षकों की वर्तमान ज्वलंत समस्याओं से अवगत कराया। 

डिजिटाइजेशन/ऑनलाइन उपस्थिति पर लंबी वार्ता हुई। जिसमें संगठन द्वारा इस व्यवस्था को धरातल पर लागू करने में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों को बारीकी से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। वार्ता सौहार्दपूर्ण वातावरण में हुई। परंतु जब तक समाधान संबंधी कोई आदेश निर्गत नहीं होता है तब तक महासंघ का बहिष्कार एवं संघर्ष जारी रहेगा।संघर्ष की कार्ययोजना शीघ्र प्रदेश नेतृत्व द्वारा घोषित की जायेगी।

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह, प्रदेश महामंत्री भगवती सिंह, प्रदेश संगठन मंत्री शिवशंकर सिंह, प्रदेशीय संयुक्त मंत्री प्रदीप तिवारी व रविंद्र पंवार मौजूद रहे।


ज्ञापन में निम्नांकित मांगों को रखा गया

👉1- अन्य विभागों की भांति आकस्मिक अवकाश की श्रेणी में बेसिक शिक्षा के शिक्षकों को भी न्यूनतम 15 ‘हाफ डे लीव अवकाश’ का विकल्प प्रदान किया जाये। जिससे आकस्मिकता की स्थिति में शिक्षक हाफ डे लीव अवकाश का उपभोग कर सकें।

👉2- बेसिक शिक्षा परिषद के शिक्षकों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति 30 ईo एलo प्रदान किया जाये यदि ईo एलo प्रदान करने में कोई विशेष विधिक समस्या है तो महाविद्यालयों के शिक्षकों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग में भी प्रिविलेज अवकाश (P.L.) प्रदान किया जाये।

👉3- अन्य विभागों की भांति बेसिक शिक्षा विभाग में भी अवकाश के दिनों में कार्य करने पर देय ‘प्रतिकर अवकाश’ का विकल्प मानव सम्पदा पोर्टल पर प्रदान किया जाये।

 👉4- किसी आकस्मिक घटना अथवा आपदा की स्थिति में यदि शिक्षक/शिक्षामित्र/अनुदेशक/शिक्षणेत्तर कर्मचारी आगमन हेतु निर्धारित समय के पश्चात 01 घण्टे की अवधि तक माह में पाँच कार्य दिवस विलम्ब से पहुंचने पर अर्थात माह में अधिकतम 05 घन्टे तक विलम्ब से उपस्थित होने पर सम्बन्धित को अनुपस्थित न माना जाए। (दिनांक 07-07-2024 को महानिदेशक, स्कूल शिक्षा द्वारा V IMP/ व्यक्तिगत ध्यान अपेक्षित के रूप में प्रसारित संदेश में उल्लेखित 30 मिनट की शिथिलता समाहित)

👉5- बेसिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश के शिक्षक/शिक्षामित्र/अनुदेशक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी राज्य कर्मचारियों की भांति निःशुल्क कैशलेश चिकित्सा सुविधा प्रदान की जाये।

👉6- प्राकृतिक आपदा/स्थानीय स्तर पर मौसम की प्रतिकूलता तथा जनपद स्तरीय विभागीय कार्यक्रमों में प्रतिभागिता की स्थिति में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को ऑनलाइन उपस्थिति से शिथिलता प्रदान करने का अधिकार प्रदान किया जाये।

👉7- ऑनलाइन उपस्थिति सहित पंजिकाओ का डिजिटाइजेशन सर्वर की उपलब्धता व टैबलेट के सुचारू संचालन के अधीन है। इसलिए एक समय मे अधिक लोड से सर्वर क्रैश होने अथवा टैबलेट के खराब होने पर वैकल्पिक व्यवस्था का स्पष्ट दिशा निर्देश जारी किया जाए।

👉8- डिजिटाइजेशन की वर्तमान ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था भेदभाव पूर्णं,असुरक्षा की भावना व शोषणकारी होने से शिक्षक की सृजनात्मक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे शिक्षण कार्य भी प्रभावित होगा। इसलिए बेसिक शिक्षा विभाग में ऑनलाइन उपस्थिति की व्यवस्था महानिदेशक कार्यालय से लेकर विद्यालय स्तर तक कार्य करने वाले बेसिक शिक्षा विभाग के समस्त घटक कार्यालयों पर समान रूप से लागू किया जाए।

👉9- शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्यो से मुक्त किया जाए तथा शिक्षकों/शिक्षिकाओं से लिए जाने वाले कार्यों की सूची जारी की जाए।

👉10- प्रमोशन/सामान्य स्थानान्तरण/पारस्परिक-जनपदीय/अंतर्जनपदीय स्थानान्तरण/समायोजन शीघ्र ससमय कराए जाएं।

👉11- 17140/18150 लंबित प्रोन्नत वेतन विसंगति की समस्या शीघ्र निस्तारित की जाए।

👉12- शिक्षामित्र/अनुदेशकों को सम्मानजनक मानदेय दिया जाए तथा शिक्षकों की भाँति पारस्परिक व सामान्य स्थानान्तरण सहित अन्य समस्याओं का निस्तारण किया जाए।

👉13- रसोइयों से 11 माह का कार्य लिया जाता है परंतु 10 माह का ही मानदेय दिया जाता है। इसलिए रसोइयों को 11 माह का मानदेय दिया जाए।


कल पूरे प्रदेश में सिर्फ़ 407 शिक्षकों ने लगाई ऑनलाइन हाज़िरी, बढ़ते आन्दोलन के चलते डिजिटाइजेशन का विभागीय प्लान हुआ धड़ाम


कल पूरे प्रदेश में सिर्फ़ 407 शिक्षकों ने लगाई ऑनलाइन हाज़िरी, बढ़ते आन्दोलन के चलते डिजिटाइजेशन का विभागीय प्लान हुआ धड़ाम

16 जुलाई 2024


आन्दोलन के चलते परिषदीय स्कूलों में ऑनलाइन हाजिरी बढ़ने के के बजाय लगातार घट रही, मात्र 2120 शिक्षकों की ही हाजिरी दर्ज हुई


14 जुलाई 2024
स्कूल शिक्षा महानिदेशालय की ओर से पूरी मशीनरी को झोंके जाने के बाद भी शुक्रवार की अपेक्षा शनिवार को ऑनलाइन हाजिरी कम हो गई। शुक्रवार को 0.61 फीसदी और छु‌ट्टी के समय 0.33 फीसदी ने ऑनलाइन हाजिरी लगाई। वहीं शनिवार को कुल 6,09,564 शिक्षकों में से मात्र 2120 शिक्षकों यानि 0.39 प्रतिशत ने ही ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की। छुट्टी के समय 0.31 फीसदी हाजिरी लगी।




ऑनलाइन हाजिरी पर गतिरोध के चलते एक फीसदी भी उपस्थिति नहीं हो पा रही दर्ज, 
जनप्रतिनिधियों से आंदोलन को मिल रहा लगातार समर्थन

ऑनलाइन ऐप के संचालन में तकनीकी दिक्कतों के चलते किसी भी समय डिजिटाइज़ रजिस्टर ऐप का हो सकेगा प्रयोग

13 जुलाई 2024
लखनऊ । तमाम सरकारी प्रयासों के बावजूद शिक्षक ऑनलाइन हाजिरी भरने को तैयार नहीं हैं। शुक्रवार को जिलों में अधिकारियों के सक्रिय होने के बावजूद एक फीसदी हाजिरी भी ऑनलाइन नहीं लग सकी।

वहीं स्कूल शिक्षा महानिदेशालय बैकफुट पर आता दिख रहा है। महानिदेशालय ने बयान जारी कर कहा है कि जिन स्कूलों में ऑनलाइन ऐप के संचालन में तकनीकी दिक्कतें आ रहीं हैं। वहां स्कूल अवधि में किसी भी समय डिजिटाइज़ रजिस्टर ऐप का प्रयोग किया जा सकेगा। 


इस बीच शिक्षकों के विरोध ने शुक्रवार को नया मोड़ ले लिया है। कई जिलों में शिक्षकों ने शिक्षण कार्य के अलावा अपने अन्य अतिरिक्त प्रभारों से इस्तीफा देना शुरू कर दिया है। एटा, बरेली तथा मैनपुरी आदि जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों ने संकुल के प्रभार से इस्तीफा दे दिया है। 


बेसिक शिक्षा विभाग ने आज प्रदेश भर में जिले स्तर के अपने अधिकारियों को शिक्षकों को ऑनलाइन ऐप के प्रयोग के लिए लगाया लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। प्रदेश के कुल 6,09,530 प्राइमरी शिक्षकों में से मात्र 0.61 फीसदी शिक्षकों ने सुबह के समय ऑनलाइन हाजिरी लगाई जबकि केवल 0.33 प्रतिशत शिक्षकों ने ऐप पर उपस्थिति दर्ज की। यह डिजिटल ऐप्स के लागू होने के पहले दिन से भी कम रहा। आठ जुलाई को 2.6 फीसदी शिक्षकों ने ऑनलाइन हाजिरी दर्ज की थी।

जनप्रतिनिधियों से आंदोलन को मिल रहा लगातार समर्थन