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Wednesday, August 19, 2026

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की किताबें उपलब्ध कराने में रहा फेल, टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से हवाहवाई रहा दावा 

अपर सचिव ने कहा, MOU न होने से अब अगले सत्र में ही किताबें उपलब्ध होने की उम्मीद


प्रयागराज। यूपी बोर्ड के अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले छात्रों को इस वर्ष अपनी निर्धारित पाठ्य पुस्तकें नहीं मिल पाएंगी। उन्हें वर्ष 2027-2028 शैक्षिक सत्र में ही ये किताबें उपलब्ध हो सकेंगी। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम की अलग किताबें प्रकाशित करने का दावा किया था लेकिन टेंडर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।


उम्मीद हैं कि आगामी शैक्षिक सत्र 2027-28 से हिंदी और अंग्रेजी दोनों माध्यमों में एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के अनुबंध किए जाएंगे। वर्तमान में कक्षा नौ से 12 तक के अंग्रेजी माध्यम के छात्र एनसीईआरटी की महंगी किताबों पर निर्भर हैं। बोर्ड ने छात्रों और अभिभावकों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को कम करने के लिए अपनी सस्ती पाठ्य पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बनाई थी।

इस योजना को शासन से अनुमति भी मिल गई थी। करीब एक लाख अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को सस्ती किताबें मिलने की उम्मीद थी। हालांकि, प्रकाशन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने से यह संभावना कमजोर पड़ गई है। अपर सचिव स्कन्द शुक्ला ने बताया कि अभी एमओयू नहीं हो सका है। उन्होंने आगामी सत्र 2027 से अंग्रेजी माध्यम की किताबें मुहैया कराने की उम्मीद जताई।

शासनादेश और प्रक्रिया : एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों के मुद्रण और वितरण के लिए जून 2026 में एक शासनादेश जारी हुआ था। शासन के विशेष सचिव कृष्ण कुमार गुप्ता ने यह शासनादेश जारी किया था। इसमें एनसीईआरटी नई दिल्ली से कॉपीराइट अनुबंध करने की बात कही गई थी। निविदा की कार्रवाई सात अप्रैल 2022 को गठित निविदा समिति के माध्यम से होनी थी।

Friday, June 26, 2026

परिषदीय इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हो रही हिन्दी में पढ़ाई, पढ़ाई के लिए तैनात शिक्षकों के हुए तबादलों से बढ़ी कठिनाई

परिषदीय इंग्लिश मीडियम स्कूलों में हो रही हिन्दी में पढ़ाई, पढ़ाई के लिए तैनात शिक्षकों के हुए तबादलों से बढ़ी कठिनाई 


लखनऊ। अंग्रेजी माध्यम के 16 हजार परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों में हिंदी में पढ़ाई कराई जा रही है। अंग्रेजी माध्यम की पूरी किताबें मिलती नहीं और स्कूलों को अंग्रेजी में पढ़ने वाले छात्र भी कम मिलते हैं। पढ़ाने को तैनात किए गए शिक्षकों के भी दूसरी जगह तबादले हो गए। ऐसे में पढ़ाई कराना कठिन हो रहा है।


सभी जिलों के प्रत्येक ब्लॉक में 17-17 अंग्रेजी माध्यम स्कूल हैं और इसके अलावा नगर क्षेत्र में भी यह विद्यालय चल रहे हैं। सबसे बड़ी कठिनाई यह है कि अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों को कभी भी पूरी किताबें अंग्रेजी में छपी नहीं मिलती। दूसरी समस्या यह है कि कक्षा पांच तक जैसे-तैसे अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई छात्रों को कराई जाती है लेकिन अंग्रेजी के उच्च प्राथमिक स्कूल बहुत कम हैं।

 उदाहरण के तौर पर बीकेटी ब्लॉक में 17 अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में से सिर्फ दो महिगवां व बसहा उच्च प्राथमिक स्कूल अंग्रेजी माध्यम के हैं। ऐसे में अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कर छात्र आगे कक्षा छह से आठ तक की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम में नहीं कर पाते। वर्ष 2017 से चरणबद्ध ढंग से 16 हजार विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में तो तब्दील कर दिया गया लेकिन यह मकसद पूरा नहीं कर पा रहे।

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन, के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते हैं कि न किताबें मिलती हैं, न शिक्षक हैं और न ही अंग्रेजी में पढ़ने वाले ज्यादा छात्र।


पहले चयन फिर तबादला माध्यम

पढ़ाई कराने के लिए शिक्षकों की परीक्षा ली गई। उनसे विकल्प लिया गया और उसके बाद उनकी तैनाती हुई। समायोजन की प्रक्रिया में अंग्रेजी पढ़ाने वाले शिक्षकों को हिंदी माध्यम के स्कूलों में तैनात कर दिया गया।


कंपोजिट बेहतर विकल्प

अगर बेसिक शिक्षा परिषद यह प्रयोग कंपोजिट स्कूलों यानी जहां प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल एक ही परिसर में हैं वहां करते तो कठिनाई न होती। छात्र कक्षा एक से कक्षा आठ तक आसानी से अंग्रेजी माध्यम की पढ़ाई कर लेता।

Thursday, October 27, 2022

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशें विवादों में फंसी रह गईं। इसका नतीजा है कि लाखों बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के मानकों के अनुरूप शिक्षा नहीं मिल पा रही। कहीं अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किए गए परिषदीय स्कूलों में अंग्रेजी भाषा के योग्य शिक्षक नहीं मिले तो कहीं शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हो पा रही।



बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी माध्यम से संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों को तीन साल बाद भी योग्य शिक्षक नहीं मिल सके हैं। प्रदेशभर के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में योग्य शिक्षकों की तैनाती के लिए मार्च 2019 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन प्रयागराज, लखनऊ, मथुरा, फतेहपुर व बदायूं आदि 13 जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हुई और उसके बाद मध्य सत्र में तैनाती पर रोक लगा दी गई। उसके बाद कोरोना के कारण सबकुछ ठप रहा। इस मसले पर कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी की जो लंबित हैं।


प्रयागराज के अंग्रेजी माध्यम परिषदीय विद्यालयों में 500 से अधिक शिक्षकों के चयन के लिए 25 मार्च 2019 तक आवेदन लिए गए थे। 16 मई को लिखित परीक्षा हुई। 26 जून से एक जुलाई तक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ। 31 अगस्त और एक सितंबर 2019 को विद्यालय के विकल्प भरवाए गए। लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।



कई साल से प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति नहीं

परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पिछले चार सालों से फंसी है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में हर साल प्रदेश सरकार प्रधानाध्यापकों की तैनाती का प्रस्ताव रखती है लेकिन उस पर अमल नहीं हो पा रहा। 


इन स्कूलों में पदोन्नति के आधार पर प्रधानाध्यापकों की तैनाती की जाती है लेकिन पांच साल पहले कुछ शिक्षकों ने प्रमोशन में टीईटी अनिवार्य करने को लेकर याचिका कर दी थी। उस विवाद को लेकर जारी आदेश पर आज तक निबटारा नहीं हो सका है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 44378 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 75 प्रतिशत या 30 हजार से अधिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापक नहीं है। प्रमोशन न होने से प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, शिक्षकों की नई भर्ती में भी अड़चन आ रही है।


कस्तूरबा विद्यालयों में संगत-असंगत विषय का विवाद

प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भी शिक्षकों की नियुक्ति फंसी हुई है। संगत-असंगत विषय को आधार बनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने 14 जुलाई 2020 को सैकड़ों संविदा शिक्षकों को बाहर करने का आदेश जारी किया था। अफसरों का तर्क था कि कस्तूरबा विद्यालयों में एक विषय की एक से अधिक शिक्षिकाएं होने के साथ ही जो विषय नहीं है उसके टीचर नियुक्त कर लिए गए थे।


 इस आदेश के खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 21 दिसंबर 2021 को 14 जुलाई 2020 के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ अफसरों ने स्पेशल अपील की जो 18 अप्रैल को खारिज हो गई। अब इसके खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। इसके चलते अकेले प्रयागराज में 56 शिक्षिकाओं की नियुक्ति सवा साल से नहीं हो पा रही।

Friday, September 23, 2022

विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं, अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ

विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं,  अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ 


अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची है। शैक्षिक सत्र शुरू हुए छह महीने होने को हैं लेकिन अभी तक कक्षा एक से आठ तक की किताबें नहीं छपी हैं। अब छपाई शुरू हुई है। किताबें न होने से बच्चों की पढ़ाई पिछड़ रही है। स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षा अगले माह होनी है। ऐसे में बिना किताबों के ही बच्चे परीक्षा देंगे। लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव समेत पूरे प्रदेश में अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ है।


किसी स्कूल को नहीं मिलीं किताबें


लखनऊ में अंग्रेजी माध्यम के 165 प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं। इनमें करीब 20 हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों को अभी तक एक भी किताब नहीं मिली है। शिक्षक लगातार बीएसए कार्यालय से किताबों की मांग कर रहे हैं। अधिकारी उपलब्ध नहीं कर पा रहे हैं। किताबें न मिलने से बच्चों के साथ अभिभावक भी परेशान हैं। वहीं शिक्षा विभाग जिले के बीएसए को भेजकर किताबों का सत्यापन करा रहा है। कुछ किताबों के नमूने भेजे हैं।


समस्या

● प्रदेश के किसी भी इंग्लिश मीडियम स्कूल में नहीं पहुंचीं किताबें

● लखनऊ के प्राइमरी, जूनियर 165 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई

● सभी स्कूलों में पुरानी किताबों से शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे


अंग्रेजी माध्यम की जो किताबें मिली हैं, उन्हें वितरित करने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को भेजा है। सभी को निर्देशित किया गया है कि किताबों का जल्द वितरण कराएं। अरुण कुमार, बीएसए, लखनऊ

Monday, January 3, 2022

अब अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे बेसिक शिक्षक

अब अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे बेसिक शिक्षक


बेसिक शिक्षा परिषद के लगभग 1.60 लाख स्कूलों के छह लाख शिक्षक अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे। आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) के विशेषज्ञ उनके लिए अंग्रेजी व्याकरण और अपठित गद्यांश पर एक हैंडबुक तैयार कर रहे हैं। जो हर समय शिक्षकों के पास रहेगी ताकि अंग्रेजी अध्यापन में मुश्किल न हो।


यह पुस्तिका अंग्रेजी और हिन्दी में होगी। इसे सरल भाषा में तैयार किया जा रहा है। अधिकांश उदाहरण परिषदीय स्कूलों की अंग्रेजी की किताबों से लिए गए हैं ताकि शिक्षक आसानी से समझ कर बच्चों को अच्छे से समझा सकें। हैंडबुक में अंग्रेजी व्याकरण की आधारभूत जानकारी रहेगी। जो शिक्षक अधिक अंग्रेजी समझना चाहते हैं उनके लिए उन्नत सामग्री के साथ शिक्षकों के स्व-मूल्यांकन के लिए भी सामग्री रहेगी। पुस्तिका में अंग्रेजी व्याकरण के नियमों की तर्कों के साथ व्याख्या दी जाएगी। इससे न सिर्फ शिक्षकों की अंग्रेजी व्याकरण की समझ बढ़ेगी बल्कि वे बच्चों को अच्छे से पढ़ा सकेंगे।


ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल के अनुसार हैंडबुक में कार्यात्मक आधार पर अंग्रेजी शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा जो अध्यापन का सही तरीका है।

Wednesday, August 25, 2021

बेसिक शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान - बेसिक शिक्षकों का नगरीय -ग्रामीण कैडर होगा खत्‍म, इंग्‍लिश मीडियम स्‍कूल का मॉडल भी अब होगा बन्द, परिषदीय स्कूलों को मिलेगा टैबलेट, लगेगी बच्चों को शिक्षकों की हाजिरी

बेसिक शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान - बेसिक शिक्षकों का नगरीय -ग्रामीण कैडर होगा खत्‍म, इंग्‍लिश मीडियम स्‍कूल का मॉडल भी अब होगा बन्द

परिषदीय स्कूलों को मिलेगा टैबलेट, लगेगी बच्चों को शिक्षकों की हाजिरी


उत्‍तर प्रदेश में प्राइमरी विद्यालयों और जूनियर हाई स्‍कूल के प्रधानाध्‍यापकों को टैबलेट मिलेगा। राज्‍य सरकार ने आईआईटी कानपुर से इस बारे में राय मांगी है। बुधवार को कानपुर पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि जल्‍द ही यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

राज्‍य सरकार की योजना के मुताबिक इस टैबलेट प्राइमरी और जूनियर स्‍कूलों के प्रधानाध्‍यापकों को दिए जाने वाले इस टैबलेट में स्कूलों की निगरानी से संबंधित सारे एप होंगे। टैबलेट की खरीद के लिए सर्व शिक्षा अभियान ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस पूरी योजना पर सरकार 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बुधवार को कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में आयोजित गुरु वंदना कार्यक्रम में भाग लेने आए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रधानाध्‍यापकों को टैबलेट दिए जाने हैं। इसके लिए एक समिति आईआईटी कानपुर की राय लेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस टैबलेट के जरिये प्रधानाचार्य सभी योजनाओं के बारे में शासन तक अपडेट करेंगे। हालांकि इससे पहले भी सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को टैबलेट देने की बात उठ चुकी है लेकिन बजट के अभाव में इसे रोक दिया गया। अब इस शैक्षिक सत्र में इसे लागू किया जाएगा।

इसी से लगेगी बच्‍चों और शिक्षकों की हाजिरी

प्रदेश में अब इसके जरिये स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की हाजिरी भी लिये जाने की तैयारी है। इससे सुबह प्रार्थना सभा का फोटो भी मंगवाया जाएगा और एक सॉफ्टवेयर के जरिये हेड काउंट भी किया जाएगा ताकि ये निश्चित हो सके कि कितने बच्चे स्कूल आए हैं। चूंकि प्रदेश के हर स्कूल की जियो टैगिंग है, यानी उस स्कूल का अक्षांश और देशांतर भी फोटो के साथ दर्ज हो जाएगा। इससे कोई भी फर्जी फोटो नहीं भेजी जा सकेगी। वहीं किसी दूसरी जगह से यह हाजिरी नहीं लगाई जा सकेगी।


उत्तर प्रदेश में प्राइमरी शिक्षकों का ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में तबादला अब आसान हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने शहरी और ग्रामीण काडर खत्म करने का निर्णय लिया है।इसके साथ नई शिक्षा नीति के तहत अंग्रेजी माध्यम के परिषदीय स्कूलों को भी बंद करने का निर्णय लिया गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कानपुर में ये ऐलान किए।


बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में बुधवार को आयोजित गुरु वंदना कार्यक्रम में भाग लेने आए बेसिक शिक्षा मंत्री पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि परिषदीय शिक्षा में शिक्षकों के नगरीय और ग्रामीण काडर को समाप्त कर दिया जाएगा। इससे शिक्षकों के ग्रामीण क्षेत्र से नगरों में स्थानांतरण आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक सरप्लस हैं और नगरीय क्षेत्र में शिक्षकों की कमी है। काडर समाप्त होने से शिक्षकों की नगर क्षेत्र में कमी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी माध्यम के परिषदीय स्कूल खोले गए थे लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे समाप्त कर दिया जाएगा।


सभी स्कूलों में मातृभाषा में पढ़ाई होगी। इसकी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जाने हैं। इसके लिए एक समिति आईआईटी कानपुर की राय लेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।