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Thursday, October 27, 2022

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी

बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशों पर विवाद का ग्रहण, परिषदीय शिक्षकों को पदोन्नति अटकी, अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक, कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति भी फंसी


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा में सुधार की कोशिशें विवादों में फंसी रह गईं। इसका नतीजा है कि लाखों बच्चों को निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) 2009 के मानकों के अनुरूप शिक्षा नहीं मिल पा रही। कहीं अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किए गए परिषदीय स्कूलों में अंग्रेजी भाषा के योग्य शिक्षक नहीं मिले तो कहीं शिक्षकों की भर्ती ही नहीं हो पा रही।



बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी माध्यम से संचालित प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों को तीन साल बाद भी योग्य शिक्षक नहीं मिल सके हैं। प्रदेशभर के अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में योग्य शिक्षकों की तैनाती के लिए मार्च 2019 में प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन प्रयागराज, लखनऊ, मथुरा, फतेहपुर व बदायूं आदि 13 जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया में देरी हुई और उसके बाद मध्य सत्र में तैनाती पर रोक लगा दी गई। उसके बाद कोरोना के कारण सबकुछ ठप रहा। इस मसले पर कुछ शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं भी की जो लंबित हैं।


प्रयागराज के अंग्रेजी माध्यम परिषदीय विद्यालयों में 500 से अधिक शिक्षकों के चयन के लिए 25 मार्च 2019 तक आवेदन लिए गए थे। 16 मई को लिखित परीक्षा हुई। 26 जून से एक जुलाई तक उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ। 31 अगस्त और एक सितंबर 2019 को विद्यालय के विकल्प भरवाए गए। लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया।



कई साल से प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति नहीं

परिषदीय उच्च प्राथमिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति पिछले चार सालों से फंसी है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से आयोजित होने वाली प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पीएबी) की बैठक में हर साल प्रदेश सरकार प्रधानाध्यापकों की तैनाती का प्रस्ताव रखती है लेकिन उस पर अमल नहीं हो पा रहा। 


इन स्कूलों में पदोन्नति के आधार पर प्रधानाध्यापकों की तैनाती की जाती है लेकिन पांच साल पहले कुछ शिक्षकों ने प्रमोशन में टीईटी अनिवार्य करने को लेकर याचिका कर दी थी। उस विवाद को लेकर जारी आदेश पर आज तक निबटारा नहीं हो सका है। प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के 44378 उच्च प्राथमिक स्कूल हैं। इनमें से 75 प्रतिशत या 30 हजार से अधिक स्कूलों में नियमित प्रधानाध्यापक नहीं है। प्रमोशन न होने से प्रभारी प्रधानाध्यापकों को आर्थिक नुकसान तो हो ही रहा है, शिक्षकों की नई भर्ती में भी अड़चन आ रही है।


कस्तूरबा विद्यालयों में संगत-असंगत विषय का विवाद

प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में भी शिक्षकों की नियुक्ति फंसी हुई है। संगत-असंगत विषय को आधार बनाते हुए बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने 14 जुलाई 2020 को सैकड़ों संविदा शिक्षकों को बाहर करने का आदेश जारी किया था। अफसरों का तर्क था कि कस्तूरबा विद्यालयों में एक विषय की एक से अधिक शिक्षिकाएं होने के साथ ही जो विषय नहीं है उसके टीचर नियुक्त कर लिए गए थे।


 इस आदेश के खिलाफ प्रभावित शिक्षकों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं कर दी। सुनवाई के बाद कोर्ट ने 21 दिसंबर 2021 को 14 जुलाई 2020 के आदेश को निरस्त कर दिया था। इसके खिलाफ अफसरों ने स्पेशल अपील की जो 18 अप्रैल को खारिज हो गई। अब इसके खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका की है। इसके चलते अकेले प्रयागराज में 56 शिक्षिकाओं की नियुक्ति सवा साल से नहीं हो पा रही।

Friday, September 23, 2022

विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं, अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ

विडम्बना : सत्र शुरू और अब किताबें छापी जा रहीं,  अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ 


अंग्रेजी माध्यम के प्राइमरी और जूनियर स्कूलों में अभी तक किताबें नहीं पहुंची है। शैक्षिक सत्र शुरू हुए छह महीने होने को हैं लेकिन अभी तक कक्षा एक से आठ तक की किताबें नहीं छपी हैं। अब छपाई शुरू हुई है। किताबें न होने से बच्चों की पढ़ाई पिछड़ रही है। स्कूलों में त्रैमासिक परीक्षा अगले माह होनी है। ऐसे में बिना किताबों के ही बच्चे परीक्षा देंगे। लखनऊ, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली, उन्नाव समेत पूरे प्रदेश में अभी तक अंग्रेजी माध्यम की किताबों का वितरण नहीं हुआ है।


किसी स्कूल को नहीं मिलीं किताबें


लखनऊ में अंग्रेजी माध्यम के 165 प्राइमरी और जूनियर स्कूल हैं। इनमें करीब 20 हजार बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इन बच्चों को अभी तक एक भी किताब नहीं मिली है। शिक्षक लगातार बीएसए कार्यालय से किताबों की मांग कर रहे हैं। अधिकारी उपलब्ध नहीं कर पा रहे हैं। किताबें न मिलने से बच्चों के साथ अभिभावक भी परेशान हैं। वहीं शिक्षा विभाग जिले के बीएसए को भेजकर किताबों का सत्यापन करा रहा है। कुछ किताबों के नमूने भेजे हैं।


समस्या

● प्रदेश के किसी भी इंग्लिश मीडियम स्कूल में नहीं पहुंचीं किताबें

● लखनऊ के प्राइमरी, जूनियर 165 स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई

● सभी स्कूलों में पुरानी किताबों से शिक्षक बच्चों को पढ़ा रहे


अंग्रेजी माध्यम की जो किताबें मिली हैं, उन्हें वितरित करने के लिए खण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालयों को भेजा है। सभी को निर्देशित किया गया है कि किताबों का जल्द वितरण कराएं। अरुण कुमार, बीएसए, लखनऊ

Monday, January 3, 2022

अब अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे बेसिक शिक्षक

अब अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे बेसिक शिक्षक


बेसिक शिक्षा परिषद के लगभग 1.60 लाख स्कूलों के छह लाख शिक्षक अंग्रेजी व्याकरण की बारीकियां जानेंगे। आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) के विशेषज्ञ उनके लिए अंग्रेजी व्याकरण और अपठित गद्यांश पर एक हैंडबुक तैयार कर रहे हैं। जो हर समय शिक्षकों के पास रहेगी ताकि अंग्रेजी अध्यापन में मुश्किल न हो।


यह पुस्तिका अंग्रेजी और हिन्दी में होगी। इसे सरल भाषा में तैयार किया जा रहा है। अधिकांश उदाहरण परिषदीय स्कूलों की अंग्रेजी की किताबों से लिए गए हैं ताकि शिक्षक आसानी से समझ कर बच्चों को अच्छे से समझा सकें। हैंडबुक में अंग्रेजी व्याकरण की आधारभूत जानकारी रहेगी। जो शिक्षक अधिक अंग्रेजी समझना चाहते हैं उनके लिए उन्नत सामग्री के साथ शिक्षकों के स्व-मूल्यांकन के लिए भी सामग्री रहेगी। पुस्तिका में अंग्रेजी व्याकरण के नियमों की तर्कों के साथ व्याख्या दी जाएगी। इससे न सिर्फ शिक्षकों की अंग्रेजी व्याकरण की समझ बढ़ेगी बल्कि वे बच्चों को अच्छे से पढ़ा सकेंगे।


ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल के अनुसार हैंडबुक में कार्यात्मक आधार पर अंग्रेजी शिक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा जो अध्यापन का सही तरीका है।

Wednesday, August 25, 2021

बेसिक शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान - बेसिक शिक्षकों का नगरीय -ग्रामीण कैडर होगा खत्‍म, इंग्‍लिश मीडियम स्‍कूल का मॉडल भी अब होगा बन्द, परिषदीय स्कूलों को मिलेगा टैबलेट, लगेगी बच्चों को शिक्षकों की हाजिरी

बेसिक शिक्षा मंत्री का बड़ा ऐलान - बेसिक शिक्षकों का नगरीय -ग्रामीण कैडर होगा खत्‍म, इंग्‍लिश मीडियम स्‍कूल का मॉडल भी अब होगा बन्द

परिषदीय स्कूलों को मिलेगा टैबलेट, लगेगी बच्चों को शिक्षकों की हाजिरी


उत्‍तर प्रदेश में प्राइमरी विद्यालयों और जूनियर हाई स्‍कूल के प्रधानाध्‍यापकों को टैबलेट मिलेगा। राज्‍य सरकार ने आईआईटी कानपुर से इस बारे में राय मांगी है। बुधवार को कानपुर पहुंचे बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कहा कि जल्‍द ही यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

राज्‍य सरकार की योजना के मुताबिक इस टैबलेट प्राइमरी और जूनियर स्‍कूलों के प्रधानाध्‍यापकों को दिए जाने वाले इस टैबलेट में स्कूलों की निगरानी से संबंधित सारे एप होंगे। टैबलेट की खरीद के लिए सर्व शिक्षा अभियान ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इस पूरी योजना पर सरकार 150 करोड़ रुपये खर्च करेगी। बुधवार को कानपुर के बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में आयोजित गुरु वंदना कार्यक्रम में भाग लेने आए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान बताया कि प्रधानाध्‍यापकों को टैबलेट दिए जाने हैं। इसके लिए एक समिति आईआईटी कानपुर की राय लेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इस टैबलेट के जरिये प्रधानाचार्य सभी योजनाओं के बारे में शासन तक अपडेट करेंगे। हालांकि इससे पहले भी सरकारी स्कूलों के प्राचार्यों को टैबलेट देने की बात उठ चुकी है लेकिन बजट के अभाव में इसे रोक दिया गया। अब इस शैक्षिक सत्र में इसे लागू किया जाएगा।

इसी से लगेगी बच्‍चों और शिक्षकों की हाजिरी

प्रदेश में अब इसके जरिये स्कूलों में बच्चों और शिक्षकों की हाजिरी भी लिये जाने की तैयारी है। इससे सुबह प्रार्थना सभा का फोटो भी मंगवाया जाएगा और एक सॉफ्टवेयर के जरिये हेड काउंट भी किया जाएगा ताकि ये निश्चित हो सके कि कितने बच्चे स्कूल आए हैं। चूंकि प्रदेश के हर स्कूल की जियो टैगिंग है, यानी उस स्कूल का अक्षांश और देशांतर भी फोटो के साथ दर्ज हो जाएगा। इससे कोई भी फर्जी फोटो नहीं भेजी जा सकेगी। वहीं किसी दूसरी जगह से यह हाजिरी नहीं लगाई जा सकेगी।


उत्तर प्रदेश में प्राइमरी शिक्षकों का ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों में तबादला अब आसान हो जाएगा। प्रदेश सरकार ने शहरी और ग्रामीण काडर खत्म करने का निर्णय लिया है।इसके साथ नई शिक्षा नीति के तहत अंग्रेजी माध्यम के परिषदीय स्कूलों को भी बंद करने का निर्णय लिया गया है। बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कानपुर में ये ऐलान किए।


बीएनएसडी शिक्षा निकेतन में बुधवार को आयोजित गुरु वंदना कार्यक्रम में भाग लेने आए बेसिक शिक्षा मंत्री पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि परिषदीय शिक्षा में शिक्षकों के नगरीय और ग्रामीण काडर को समाप्त कर दिया जाएगा। इससे शिक्षकों के ग्रामीण क्षेत्र से नगरों में स्थानांतरण आसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षक सरप्लस हैं और नगरीय क्षेत्र में शिक्षकों की कमी है। काडर समाप्त होने से शिक्षकों की नगर क्षेत्र में कमी खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अंग्रेज़ी माध्यम के परिषदीय स्कूल खोले गए थे लेकिन अब नई शिक्षा नीति में इसे समाप्त कर दिया जाएगा।


सभी स्कूलों में मातृभाषा में पढ़ाई होगी। इसकी तैयारी कर ली गई है। उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापकों को टैबलेट दिए जाने हैं। इसके लिए एक समिति आईआईटी कानपुर की राय लेगी। इसके बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

Wednesday, June 16, 2021

नए सत्र में भी अंग्रेजी स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक

नए सत्र में भी अंग्रेजी स्कूलों को नहीं मिले शिक्षक


प्रयागराज: बेसिक शिक्षा परिषद के अंग्रेजी माध्यम के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों को नया सत्र 2021-22 शुरू होने के दो महीने बाद भी योग्य शिक्षक नहीं मिल सके हैं। जिले के अंग्रेजी माध्यम परिषदीय विद्यालयों में शिक्षकों के चयन के लिए 25 मार्च 2019 तक आवेदन लिए गए थे। 16 मई को लिखित परीक्षा हुई।


26 जून से 1 जुलाई तक अभ्यर्थियों का साक्षात्कार हुआ। 31 अगस्त और 1 सितंबर 2019 को विद्यालय के विकल्प भरवाए गए। लेकिन उसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। चयनित शिक्षक सचिव बेसिक शिक्षा परिषद से लेकर बीएसए संजय कुशवाहा तक से गुहार लगा रहे हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ।


अकेले प्रयागराज में ही लगभग 500 शिक्षकों की तैनाती फंसी है। इसके अलावा लखनऊ, मथुरा, फतेहपुर व बदायूं आदि एक दर्जन से अधिक जिलों में भी तैनाती नहीं हो सकी है। चयनित शिक्षकों ने इसे लेकर ट्विटर पर भी अभियान चलाया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

Friday, March 26, 2021

महराजगंज : अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के आज आयोजित आनलाइन मीटिंग में प्रतिभाग करने तथा Sampark Baithak App डाउनलोड करने के सम्बन्ध में

महराजगंज : अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को 26 मार्च के आनलाइन मीटिंग में प्रतिभाग करने एवं Sampark Baithak App डाउनलोड करने के सम्बन्ध में बीएसए ने जारी किया निर्देश।