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Friday, May 1, 2026

आईसीएसई व आईएससी के रिजल्ट जारी, छात्राएं अव्वल, 10वीं में 99.18% व 12वीं में 99.13% परीक्षार्थी पास

आईसीएसई व आईएससी के रिजल्ट जारी, छात्राएं अव्वल, 10वीं में 99.18% व 12वीं में 99.13% परीक्षार्थी पास


नई दिल्ली। भारतीय स्कूल प्रमाण पत्र परीक्षा परिषद (सीआईएससीई) ने बृहस्पतिवार को 10वीं व 12वीं कक्षा के परिणाम घोषित कर दिए। 10वीं कक्षा में 99.18 प्रतिशत जबकि 12वीं में 99.13 प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए। एक बार फिर परीक्षा परिणामों में छात्राओं ने बाजी मारी।


 कुल 2,58,721 परीक्षार्थियों ने 10वीं (आईसीएसई) जबकि 1,03,316 ने 12वीं (आईएससी) की परीक्षा में हिस्सा
 लिया। आईसीएसई में रिकॉर्ड 99.46 प्रतिशत छात्राएं, जबकि 98.93 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। वहीं, आईएससी में 99.48% छात्राएं, जबकि 98.81% छात्र उत्तीर्ण हुए। आईसीएसई में 2,56,590 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए, जबकि 2,131 असफल रहे। आईएससी में 1,02,414 उत्तीर्ण व 902 असफल रहे। परिणाम सीआईएससीई की वेबसाइट पर हैं। 


बोर्ड के चीफ एग्जीक्यूटिव व सेक्रेटरी डा. जोसफ इमैनुएल ने बताया कि इस बार दसवीं की परीक्षा में एक लाख 37 हजार 503 छात्रों और एक लाख 21 हजार 218 छात्राओं ने परीक्षा दी थी। इनमें एक लाख 36 हजार 32 छात्र व एक लाख 20 हजार 558 छात्राएं उत्तीर्ण हुईं। वहीं, 12वीं में 54 हजार 118 छात्र व 49 हजार 198 छात्राएं परीक्षा में सम्मिलित हुईं। इसमें 53 हजार 472 छात्र व 48 हजार 942 छात्राओं ने परीक्षा पास की। वहीं, जो छात्र अपने अकों से संतुष्ट नहीं हैं, वह रीचेक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके साथ ही सीआइएससीई की ओर से इम्प्रूवमेंट एग्जाम की सुविधा भी दी जाएगी। वैसे परिषद ने 2024 से कंपार्टमेंट परीक्षा समाप्त कर दी है। अब छात्र अधिकतम दो विषयों में सुधार के लिए परीक्षा दे सकते हैं।

अब यूपी बोर्ड के छात्र भी दे सकेंगे इम्प्रूवमेंट परीक्षा, बोर्ड ने शासन को भेजा प्रस्ताव, जल्द मिल सकती है मंजूरी

अब यूपी बोर्ड के छात्र भी दे सकेंगे इम्प्रूवमेंट परीक्षा, बोर्ड ने शासन को भेजा प्रस्ताव, जल्द मिल सकती है मंजूरी


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 में कम नंबर पाए विद्यार्थियों के लिए राहत भरी खबर है। वह इम्प्रूवमेंट परीक्षा देकर अपने नंबर बढ़ा सकेंगे। बोर्ड ने शासन को इम्प्रूवमेंट परीक्षा कराने का प्रस्ताव भेजा है। उम्मीद है कि जल्द ही मंजूरी मिल जाएगी।


इसके अलावा छात्रों को स्क्रूटनी (पुनर्मूल्यांकन) और कंपार्टमेंट परीक्षा के जरिये भी अपनी स्थिति सुधारने का अवसर मिलेगा। इन प्रक्रियाओं की शुरुआत एक मई से होने जा रही है, जबकि कंपार्टमेंट परीक्षा जुलाई में प्रस्तावित है। वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में कुल 53,37,778 परीक्षार्थी पंजीकृत थे। हाईस्कूल में 26,01,381 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जिनमें से 23,52,181 पास हुए और 2,49,200 फेल हो गए। वहीं इंटरमीडिएट में 24,86,072 परीक्षार्थियों में से 19,98,317 उत्तीर्ण हुए, जबकि 4,87,755 असफल रहे। हालांकि, बोर्ड ने स्क्रूटनी का विकल्प दिया है, लेकिन प्रति विषय 500 रुपये शुल्क होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के सामने चुनौती बनी हुई है।

ऐसे में कंपार्टमेंट और प्रस्तावित इम्प्रूवमेंट परीक्षा उनके लिए अधिक व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकते हैं। इन कदमों से छात्रों को न केवल मानसिक राहत मिलेगी, बल्कि उन्हें अपने शैक्षणिक भविष्य को दोबारा संवारने का मौका भी मिलेगा। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया कि किसी भी छात्र का भविष्य खराब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और कंपार्टमेंट परीक्षा की प्रक्रिया भी एक-दो दिन में शुरू कर दी जाएगी। साथ ही, इम्प्रूवमेंट परीक्षा के प्रस्ताव को मंजूरी मिलते ही छात्रों को एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।

सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

सूबे के राजकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों का टोटा, 216 में सिर्फ 16 ही नियमित

पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों की संख्या पर पड़ रहा सीधा असर


प्रयागराज। प्रदेश के राजकीय महाविद्यालयों में लंबे समय से नियमित प्राचार्यों की कमी अब शिक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ने लगी है। 216 सरकारी कॉलेजों में मात्र 16 में ही पूर्णकालिक प्राचार्य तैनात हैं जबकि बाकी संस्थान कार्यवाहक व्यवस्था के सहारे चल रहे हैं। इसका असर न सिर्फ पठन-पाठन की गुणवत्ता पर पड़ रहा है बल्कि छात्रों की संख्या में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।


प्रयागराज मंडल के 13 महाविद्यालयों समेत प्रदेश भर के अधिकांश कॉलेजों में स्थायी प्राचार्य का अभाव है। प्राचार्य पद पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया वर्षों से लंबित है। यूजी कॉलेजों में 2017 और पीजी कॉलेजों में 2019 के बाद से प्रमोशन नहीं हो सका है। दूसरी ओर कॉलेजों की संख्या भी बढ़ी है। पहले जहां प्रदेश में 171 राजकीय महाविद्यालय थे, वहीं वर्ष 2025 के दौरान करीब 71 नए कॉलेज खोले गए, जिनमें से 46 राजकीय कालेज को पठन-पाठन की जिम्मेदारी दी गई। नए संस्थानों के लिए भी नियमित प्राचार्य की व्यवस्था नहीं हो पाई।

नियमों के तहत वरिष्ठ प्रोफेसर को प्राचार्य का चार्ज दिया जाना चाहिए लेकिन कई जगहों पर नियमों को दरकिनार कर अन्य को भी प्रभार सौंपा जा रहा है। यहां तक कि निदेशक स्तर पर भी कार्यवाहक व्यवस्था लागू है जिससे प्रशासनिक अस्थिरता साफ नजर आती है। शिक्षकों का मानना है कि कार्यवाहक प्राचार्य प्रभावी निर्णय लेने से बचते हैं। उन्हें यह आशंका रहती है कि स्थायी प्राचार्य की नियुक्ति के बाद उन्हें फिर से अपने ही सहकर्मियों के बीच सामान्य भूमिका में लौटना पड़ेगा। यही वजह है कि अनुशासन और शैक्षणिक गुणवत्ता पर अपेक्षित सख्ती नहीं हो पाती। वर्ष 2022 के बाद से राजकीय महाविद्यालयों में कोई नई भर्ती भी नहीं हुई है, जबकि हर माह दो से तीन प्राचार्य सेवानिवृत्त हो रहे हैं।