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Monday, July 28, 2025

आधार के फेर में उलझे दाखिले, कैसे बढ़े छात्र संख्या? स्कूलों पर बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव, शिक्षक-अभिभावक परेशान

आधार के फेर में उलझे दाखिले, कैसे बढ़े छात्र संख्या?  स्कूलों पर बच्चों की संख्या बढ़ाने का दबाव, शिक्षक-अभिभावक परेशान


लखनऊ : बेसिक स्कूलों में ज्यादा से ज्यादा बच्चों के दाखिले करने का दबाव है। शिक्षकों की दिक्कत ये है कि बच्चे के पास आधार नहीं है तो पहले उसका आधार बनवाएं। आधार में और पुराने स्कूल में दर्ज उसके ब्योरे में कुछ अंतर है तो आधार अपडेट करवाएं। आधार के लिए जन्म प्रमाण पत्र जरूरी है। वह भी आसानी से नहीं बन रहा। ऐसे शिक्षकों की मुश्किल है कि स्कूल में बच्चों की संख्या कैसे बढ़ाएं?


क्या दिक्कतें आ रही? 
स्कूल चलो अभियान के तहत बेसिक स्कूलों में छूटे हुए छात्रों को बढ़ाने के निर्देश दिए गए है। जुलाई और अगस्त में विशेष अभियान चलाया जा रहा है। बच्चों को स्कूल लाने के लिए सालभर कभी भी दाखिले किए जा सकते है लेकिन दाखिलों में काफी मुश्किलें आ रही है। शिक्षक इन मुश्किलों को लेकर काफी परेशान है।


 प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष वीरेंद्र सिंह बताते है कि पहली कक्षा में भी जो बच्चा दाखिला लेना चाहता है तो हम बिना आधार के उसका दाखिला तो ले सकते हैं लेकिन कई दिक्कतें आएंगी। उसे स्कूल यूनिफॉर्म सहित अन्य मदों में डीबीटी के जरिए धनराशि नहीं मिलेगी। उसका APAAR-ID भी नहीं बन पाएगा।


कैंप लगवाकर समस्या का समाधान किया जाएगा। कैंप का शेड्यूल तैयार हो गया है। 4 अगस्त से कैंप लगवाए जाएंगे। –कंचन वर्मा, डीजी, स्कूल शिक्षा


ऐसे में आधार बनवाने के लिए फिर शिक्षक को ही मशक्कत करनी पड़ेगी। शिक्षक जब आधार बनवाते है तो उसका जन्म प्रमाण पत्र भी जरूरी होगा। जन्म प्रमाण पत्र नहीं है तो उसको बनवाने की प्रक्रिया भी जटिल है। एक साल से अधिक आयु वाले बच्चे का आधार बनवाने के एफिडेविट सहित कई दस्तावेज और भौतिक जांच की प्रक्रिया होती है। उसमें वक्त लगता है।


शिविर लगवाने की मांग
प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते है कि कक्षा एक के अलावा अन्य किसी कक्षा में दाखिला लेना है तो बच्चे के पुराने रेकॉर्ड और आधार में अंतर होने पर उसमें सुधार करवाना भी मुश्किल है। आधार अपडेट करवाने के लिए भी प्रक्रिया लंबी है। आधार और जन्म प्रमाण पत्र में भी ब्योरे में कुछ अंतर है तो भी अपडेट करवाने की प्रक्रिया लंबी है।

 इस बारे में प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह कहते है कि आधार और जन्म प्रमाण पत्र के लिए कैंप लगवा दिए जाएं तो काम आसान हो सकता है। शिक्षको और अभिभावकों को भटकना नहीं पड़ेगा और दाखिलों की राह आसान हो जाएगी।

Saturday, May 31, 2025

बीएड की प्रवेश परीक्षा कल, दो पालियों में होगी परीक्षा, परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश

बीएड की प्रवेश परीक्षा कल, दो पालियों में होगी परीक्षा, परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही मिलेगा प्रवेश 

31 मई 2025
झांसी। बीएड की प्रवेश परीक्षा एक जून को दो पालियों में होगी।  तैयारियों का अंतिम चरण पूरा हो चुका है। परीक्षा सकुशल संपन्न कराने के लिए अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इस बार बीएड की प्रवेश परीक्षा आयोजन बुंदेलखंड का विश्वविद्यालय झांसी द्वारा किया जा रहा है। 

परीक्षा के लिए हर केंद्र पर एक आर्जवर व स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। परीक्षा कड़ी सुरक्षा व्यवस्था व सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होगी। कैलकुलेटर, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, ब्लूटुथ आदि ले जाने पर प्रतिबंध रहेगा। केंद्र से 200 मीटर की परिधि में फोटोकॉपी की दुकानें, साइबर कैफे आदि बंद रहेंगे।

परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद ही प्रवेश मिलेगा। लिहाजा किसी भी असुविधा से बचने के लिए परीक्षार्थियों को कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पर पहुंच जाना चाहिए। परीक्षा को सकुशल संपन्न कराने के लिए सचल दल भी बनाए गए हैं, जो परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण करेंगे। 

दो पालियों में आयोजित होने वाली परीक्षा के तहत पहली पाली का आयोजन सुबह नौ बजे से 12 बजे तक व दूसरी पाली दोपहर दो बजे से पांच बजे तक आयोजित होगी। परीक्षा के लिए हर केंद्र पर एक-एक स्टेटिक मजिस्ट्रेट की तैनाती की गई है। इसके अलावा दो-दो पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं। 



बीएड प्रवेश परीक्षा में बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद मिलेगा केंद्र पर प्रवेश, सीसीटीवी कैमरों की रहेगी निगरानी

29 मई 2025
झांसी। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का समय नजदीक आ गया है। एक जून को होने वाली परीक्षा के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। बिना बायोमेट्रिक जांच के परीक्षार्थी को केंद्र में प्रवेश नहीं दिया जाएगा।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा इस बार बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा का आयोजन कराया जा रहा है। परीक्षा दो पालियों में होगी।  परीक्षा के दौरान कड़े सुरक्षा बंदोबस्त किए जाएंगे। केंद्र पर प्रवेश करने से पहले परीक्षार्थी को बायोमेट्रिक प्रक्रिया से गुजरना होगा। एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भी किया जाएगा। परीक्षा पर सीसीटीवी कैमरों की नजर रहेगी। इसके लिए बुंदेलखंड विवि द्वारा सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों का अपना सेटअप लगवाया गया है। जिससे सर्विलांस के जरिये नजर रखी जा सकेगी।

प्रशासन की ओर से भी परीक्षा केंद्र पर पर सख्त नजर रहेगी। हर केंद्र पर स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगाए हैं। साथ ही केंद्र प्रतिनिधि के रूप में प्रशासनिक अधिकारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है। परीक्षा के दौरान दो सचल दल भी तैनात रहेंगे। 



यूपी बीएड : छह जिलों में नहीं बनेंगे प्रवेश परीक्षा केंद्र, 3.42 लाख छात्र छात्राओं ने किया बीएड में आवेदन

06 मई 2025
झांसी। एक जून को प्रस्तावित बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा के लिए 3.42 लाख छात्र-छात्राओं ने सोमवार रात तक फार्म भर दिए। दोपहर में बीयू कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय की अध्यक्षता में हुई बैठक में ललितपुर समेत छह जिलों को छोड़ प्रदेश के सभी 69 जिलों में परीक्षा कराने का फैसला किया गया। 

बीयू प्रदेश में लगातार तीसरी बार बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराएगा। इसके फार्म भरने की अंतिम तिथि सोमवार को खत्म हो गई और 3.42 लाख ने फार्म भरे जबकि गत वर्ष 2.23 लाख ने ही फार्म भले थे। 

कुलसचिव विनय कुमार सिंह ने बताया कि इस बार सबसे ज्यादा फार्म पूर्वांचल के जिलों के छात्र-छात्राओं ने भरे हैं। इसलिए पूर्वांचल के प्रत्येक जिले में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे, जिनकी संख्या 715 के करीब होगी। ललितपुर, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, कासगंज व श्रावस्ती जिले में परीक्षा केंद्र नहीं बनाए जाएंगे। 



70 जिलों के 715 केंद्रों पर होगी बीएड की प्रवेश परीक्षा, एक जून को होगा इम्तिहान

बीयू लगातार तीसरी बार करा रहा परीक्षा

04 मई 2025
झांसी। बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा को लेकर बीयू कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने शुक्रवार को 19 विश्वविद्यालयों के कुलसचिव, जिला कॉर्डीनेटर, डिप्टी नोडल अधिकारियों के साथ बैठक की। स्पष्ट किया कि परीक्षा 70 जिलों के करीब 715 केंद्रों पर कराई जाएगी। 28 मई तक बीयू के दो-दो प्रतिनिधि परीक्षा सामग्री लेकर पहुंच जाएंगे और परीक्षा केंद्रों का जायजा लेंगे।


बीयू लगातार तीसरी बार प्रदेश में बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा करा रहा है। पांच मई तक विलंब शुल्क के साथ फार्म भरे जाएंगे। शुक्रवार शाम तक प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए 3.33 लाख छात्र-छात्राओं ने फार्म भर दिए। पांच मई तक यह आंकड़ा 3.35 लाख तक पहुंच सकता है।

एक जून को होने वाली प्रवेश परीक्षा को लेकर बीयू प्रशासन ने तैयारी तेज कर दी है। कुलपति ने ऑनलाइन बैठक करते हुए बताया कि पांच मई की रात को बीएड संयुक्त प्रवेश परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों का डाटा स्पष्ट हो जाएगा।

इसके आधार पर कुछ परीक्षा केंद्र बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि परीक्षा केंद्र उन्हीं कॉलेज व विद्यालय को बनाया जाए, जिनकी छवि अच्छी हो। रास्ता सुगम हो। केंद्र शहर में ही बनाया जाए, जिससे अभ्यर्थियों को आने-जाने में दिक्कत न हो। प्रदेश कॉर्डीनेटर प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि परीक्षा सामग्री जिला प्रशासन की सुरक्षा में रखी जाएगी, जो परीक्षा शुरू होने से पहले कड़ी सुरक्षा में केंद्र तक पहुंचेगी।

Sunday, May 18, 2025

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा


लखनऊ । प्राइमरी स्कूल में सत्र शुरू हुए 47 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक यूनीफार्म के पैसे अभिभावकों के खाते नहीं पहुंचे हैं। कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों की यूनीफार्म, स्वेटर, जूते, मोजे व स्टेशनरी के प्रति छात्र 1200 रुपये अभिभावकों के खाते में आने हैं।


 प्रेरणा पोर्टल पर एक लाख से अधिक छात्रों (70 फीसदी) और अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर, आधार नंबर, आईएफएससी कोड की फीडिंग पूरी हो चुकी है। अभिभावक स्कूल आकर शिक्षकों से यूनीफार्म के पैसे भेजने का दबाव बना रहे हैं।


प्रधानाध्यापकों का कहना है कि स्कूल के पास आउट, प्रोन्नत और नव प्रवेशित करीब 70 फीसदी छात्र-छात्राओं का विवरण प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। जो बचे हैं उनका ब्योरा अपलोड किया जा रहा है। 


एडी बेसिक श्याम किशोर तिवारी बताते हैं कि किसी भी दिन अभिभावकों के खाते में यूनीफार्म के पैसे भेजे जा सकते हैं। विभाग की ओर से तैयारियां पूरी हैं। कक्षा वार ब्योरा अपलोड हो गया है

Saturday, August 10, 2024

गलती अभिभावकों ने की पर सजा मिल रही अध्यापकों को, DBT पेंडेंसी को लेकर कार्यवाहियों को लेकर शिक्षक हुए आक्रोशित

गलती अभिभावकों ने की पर सजा मिल रही अध्यापकों को, DBT पेंडेंसी को लेकर कार्यवाहियों को लेकर शिक्षक हुए आक्रोशित


बेसिक शिक्षा विभाग ने पूरे यूपी में परिषदीय विद्यालयों पर डीबीटी पेंडेंसी खत्म करने का दबाव बनाया हुआ है। कई  ज़िलों  में आंख मूंदकर हेडमास्टरों का वेतन बाधित किया जा रहा है,  अब प्रतिदिन समीक्षा कर हेडमास्टरों को लंबित डीबीटी कार्य समाप्त करने की ताकीद दी जाती है। उधर शिक्षकों का तर्क है कि अभिभावकों की गलतियों के लिए उन्हें बलि का बकरा क्यों बनाया जा रहा है।


विभाग ने वेतन अवरूद्ध किया
हेडमास्टरों पर इतना दबाव बनाया कि उनका कई रविवासरीय अवकाश भी डीबीटी के नाम चला गया। छुट्टियों  में भी शिक्षक डीबीटी की पेंडेंसी खत्म करने के लिए हाथ पैर मारते रहे लेकिन उन केसों को खत्म नहीं किया जा सका जिनमें मामला पूरी तरह अभिभावकों के हाथ हैं। कुछ अभिभावकों के आधार ही नहीं बने जबकि कई बच्चों के आधार प्रक्रियाधीन हैं। इस स्थिति में प्रतीक्षा ही एकमात्र विकल्प बन गया। शिक्षकों का  99 फीसदी तक 90 कार्य पूरा हो चुका है


अभिभावक बच्चों का आधार नहीं बनवा रहे
शिक्षकों का कहना है कि जब अभिभावक ही अपने बच्चे का आधार नहीं बनवा रहे और अपने बैंक खाते की आधार सीडिंग नहीं करा रहे हैं तो हमारा क्या दोष है। इसके बावजूद शिक्षकों ने रविवार को डीबीटी की पेंडेंसी खत्म करने के लिए पूरा जोर लगाया।


स्कूल छोड़ अभिभावकों को ढो रहे शिक्षक
हालात यह हैं कि कई हेडमास्टर व शिक्षकों ने स्कूल छोड़कर अभिभावकों को बैंक तक लाना शुरू कर दिया है ताकि उनके आधार को बैंक खाते से सीड कराया जा सके। जबकि स्कूल समय पर स्कूल छोड़ने पर पाबंदी है। सूत्र बताते हैं कि विभाग ही शिक्षकों पर ऐसा करने का दबाव बना रहा है। हालांकि शिक्षकों की इसमें कोई गलती नहीं है।


एक की पेंडेंसी पर भी वेतन रोका
शिक्षकों में की जा रही कार्रवाई को लेकर खासा रोष है। नाम न छापने की शर्त पर शिक्षकों ने कहा कि जब 90 से 99 फीसदी काम पूरा कर लिया तो एकाध छात्रों का डीबीटी कार्य भला हम क्यों छोड़ेंगे। विभाग को समझना चाहिए कि कोई न कोई व्यवहारिक दिक्कत रही होगी। इन दिक्कतों को दूर करना सिर्फ हमारे हाथ में नहीं है। अभिभावकों व जिम्मेदारों का साथ भी चाहिए।


तकनीकी दिक्कतों का क्या करें शिक्षक
सूत्र बताते हैं कि कई बार तो छात्र व उसके अभिभावक के आधार को प्रेरणा पोर्टल पर वेरीफाई करने के बावजूद डीबीटी ऐप में उनके आधार को सत्यापित नहीं होना दिखता है। जिसके चलते शिक्षकों को प्रेरणा पोर्टल में पंजीकरण के बाद डीबीटी ऐप पर भी आधार सत्यापन करना पड़ता है। जिसके चलते न केवल उनके कीमती समय की बर्बादी होती है बल्कि छात्रों की पढ़ाई भी बाधित होती है।

Tuesday, January 2, 2024

ओबीसी के सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी, गड़बड़ी रोकने के लिए आधार आधारित पेमेंट किया गया अनिवार्य

ओबीसी के सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी, गड़बड़ी रोकने के लिए आधार आधारित पेमेंट किया गया अनिवार्य


लखनऊ। प्रदेश सरकार इस सत्र में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सभी पात्र विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने की तैयारी कर रही है। इसके लिए 922 करोड़ रुपये ज्यादा बजट की व्यवस्था है। अधिकारियों का कहना है कि गड़बड़ियों पर अंकुश लगाने के लिए आधार आधारित पेमेंट अनिवार्य किया गया है। इससे 'जेनुइन' छात्र ही लाभ पा सकेंगे।


सरकार दो लाख रुपये सालाना आमदनी वाले ओबीसी परिवारों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क भरपाई की सुविधा देती है। बशर्ते, पिछली कक्षा में उनके न्यूनतम अंक 50 प्रतिशत रहे हों। 2022-23 में 24 लाख ओबीसी विद्यार्थियों को लाभ मिला था, जबकि बजट की कमी के चलते 5 लाख छात्र वंचित रह गए थे। पिछले वित्त वर्ष में 1514.86 करोड़ रुपये की व्यवस्था थी।


 इस बार अनुपूरक बजट में 330 करोड़ देने से मद में 2437 करोड़ रुपये की व्यवस्था हो गई है। इससे करीब 30 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की संभावना है। पिछड़ा वर्ग कल्याण के प्रमुख सचिव ने बताया कि पर्याप्त बजट है। उम्मीद है कि इस बार सभी पात्र छात्रों को लाभांवित किया जा सकेगा। 

Sunday, October 29, 2023

अल्पसंख्यक छात्रवृत्तिः बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य करने से घटे पात्र

अल्पसंख्यक छात्रवृत्तिः बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य करने से घटे पात्र


प्रयागराज । अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य किए जाने के बाद बड़ी संख्या में विद्यार्थी पीछे हट गए हैं। उन्होंने सत्यापन ही नहीं कराया। इससे गड़बड़ी की आशंका बन गई है। ऐसे में सत्यापन के लिए नहीं आने वाले विद्यार्थियों का विवरण एकत्रित करने के साथ कारणों की छानबीन की जा रही है। 


पिछले वर्ष छात्रवृत्ति का वितरण नहीं किया गया। गड़बड़ी की शिकायतों को देखते हुए सभी का बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन कराने के लिए कहा गया। अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के लिए अब बायोमीट्रिक सत्यापन अनिवार्य भी कर दिया गया है। इसके तहत छात्र छात्रा के साथ प्रधानाचार्य या संस्था प्रमुख का भी बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन होना चाहिए।


 यह व्यवस्था लागू होने के बाद सत्र 2022-23 में आवेदन करने वाले कुछ विद्यार्थी बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन के लिए नहीं आए। ऐसे में कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि, यह भी कहा जा रहा है कि ये पिछले सत्र के विद्यार्थी हैं और वेरिफिकेशन अब कराया जा रहा है। ऐसे में कई विद्यार्थी पासआउट हो चुके होंगे। ऐसे में बायोमीट्रिक वेरिफिकेशन न कराने वालों का विवरण खंगाला जा रहा है। 



अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के 14 हजार आवेदक निकले फर्जी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में केंद्रीय अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के 14 हजार आवेदक फर्जी निकले हैं। जिन संस्थानों ने इन छात्रों का डाटा अग्रसारित किया, अब उन्होंने ही इन्हें अपना छात्र मानने से इन्कार कर दिया है। राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग शीघ्र ही पूरी रिपोर्ट केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय को भेजेगा। इसके बाद संबंधित शिक्षण संस्थानों के खिलाफ भी कार्रवाई तय मानी जा रही है।


केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने वर्ष 2022-23 में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले छात्रों का बॉयोमीट्रिक सत्यापन कराने के निर्देश सभी राज्यों को दिए थे। शुरुआती जांच में गड़बड़ियां मिलने पर यह निर्णय लिया गया था। उत्तर प्रदेश में वित्त वर्ष 2022-23 में 359659 छात्रों ने आवेदन किया था।


राज्य अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक, बॉयोमीट्रिक सत्यापन के दौरान 17473 छात्रों का नाम आधार में दिए गए नाम से अलग मिला। 11377 छात्रों का आधार सत्यापन फेल हो गया। 93 आवेदकों की मृत्यु हो गई। 



बॉयोमीट्रिक सत्यापन हुआ तो 27 फीसदी छात्र गायब,  केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने कराई थी आधार की जांच

मुरादाबाद, कुशीनगर, सीतापुर, बिजनौर, बस्ती व संतकबीरनगर समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में छात्रों ने नहीं कराया सत्यापन



लखनऊ। बॉयोमीट्रिक सत्यापन में 27 फीसदी अल्पसंख्यक छात्र गायब मिले हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की उनके आधार के जरिये जांच कराई थी। इसमें मुरादाबाद, कुशीनगर, सीतापुर, बिजनौर, बस्ती और संतकबीरनगर समेत कई जिलों में बड़ी संख्या में छात्र गायब मिले हैं। बड़े फर्जीवाड़े की आशंका को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इसके असली कारणों की पड़ताल की तैयारी शुरू कर दी है।


अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय ने 2022-23 में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति के लिए आवेदन करने वाले छात्रों के बॉयोमीट्रिक सत्यापन कराने के निर्देश सभी राज्यों को दिए थे। शुरुआती जांच में गड़बड़ियां मिलने पर यह निर्णय लिया गया था। यह भी तय किया गया कि सत्यापन के बाद ही छात्रों को भुगतान किया जाएगा।


इस योजना में यूपी में उस वित्त वर्ष में 3,59,659 छात्रों ने आवेदन किया था। इनमें से 97,463 छात्रों ने दी गई अंतिम तिथि तक बॉयोमीट्रिक सत्यापन नहीं कराया। मुरादाबाद में 46,211 छात्रों में से सबसे ज्यादा 12, 161 ने सत्यापन नहीं कराया। इसी तरह कुशीनगर में 5630, सीतापुर में 4073, बिजनौर में 6738, वस्ती में 3726, फर्रुखाबाद में 4228, गोंडा में 4416 और संतकबीरनगर में 3339 छात्र आगे नहीं आए। इस मामले में औरेया, अंबेडकरनगर, सहारनपुर, उन्नाव, मेरठ, अमरोहा, रामपुर, संभल और अलीगढ़ जिलों में भी स्थिति काफी खराब मिली।


27 तक डाटा आगे बढ़ा सकते हैं संस्थान

बॉयोमीट्रिक सत्यापन के लिए संस्थान स्तर पर 4483 आवेदन और जिला नोडल अधिकारी के स्तर पर 231 आवेदन लंबित हैं। संस्थान स्तर पर आवेदन अग्रसारित करने की अंतिम तिथि 27 अक्तूबर और जिला व राज्य नोडल अधिकारी के स्तर पर सत्यापन की अंतिम तिथि 28 अक्तूबर कर दी गई है।