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Saturday, July 8, 2017

सिद्धार्थनगर : एक विद्यालय ऐसा भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से छोड़ रहे अलग छाप, शिक्षा के साथ बच्चों को संस्कारवान बनाना मकसद

  जुनून एक ऐसा हथियार है, जिसकी बदौलत जिंदगी की बड़ी से बड़ी जंग आसानी से जीती जा सकती है। यह कार दिखाया है एक प्राथमिक शिक्षक ने। उन्होंने अपने ों से न केवल स्कूल की तस्वीर बदल दी, वरन वहां के अभिभावकों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। उनका यह जज्बा न केवल नौनिहालों का भविष्य सवांर रहा है, वरन वहां स्थित कांवेंट स्कूलों को मजबूत चुनौती भी पेश कर रहा है।

परिषदीय विद्यालय का नाम आते ही आमतौर पर खानापूरी करने वाली शिक्षा की तस्वीर मन मस्तिष्क पर आ जाती है। परंतु उस्का बाजार विकास क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चुरिहारी के प्रधानाध्यापक राकेश सिंह समय पालन व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के कारण क्षेत्र के बच्चों व अभिभावकों में अलग छाप छोड़ रहे हैं। तीन वर्ष पूर्व जबसे वह इस विद्यालय में आए, तबसे विद्यालय की तस्वीर ही बदल गई है।

योग व विज्ञान पर देते हैं ध्यान: पढ़ाई के दौरान योग व विज्ञान पर उनका पूरा फोकस रहता है। सुबह प्रार्थना सभा में ही वह बच्चों को योग की शिक्षा देते हैं। इससे होने वाले लाभ भी बताते हैं। शाम को छुट्टी होने से कुछ देर पूर्व एक बार फिर वह बच्चों को योग एवं व्यायाम कराते हैं। विज्ञान के प्रति बच्चों में रुचि पैदा करने के लिए वह प्रयोगों का भी सहारा लेते हैं। इसके लिए उन्होंने उपकरणों की भी व्यवस्था कर रखी है।

ऐसे दे रहे शिक्षा: राकेश सिंह की तैनाती के समय बहुत ही कम बच्चे पढ़ने के लिए आते थे। तब उन्होंने अभिभावकों से संपर्क कर बेहतर पढ़ाई का भरोसा दिलाया। उन्होंने सर्व प्रथम बच्चों को नियमित और समय पर स्कूल आने की व्यवस्था कराई।

उसके बाद सभी बच्चे ड्रेस में आने लगे। बच्चों की पढ़ाई के बारे में वह अभिभावकों से साप्ताहिक संपर्क करते हैं। कमजोर बच्चों पर ज्यादा ध्यान देकर उसे अन्य बच्चों के समक्ष तैयार करते हैं। इसी का परिणाम है कि यहां से कक्षा 8 उत्तीर्ण मानवी दूबे एक प्रतिष्ठित निजी विद्यालय के प्रवेश परीक्षा में प्रथम पांच स्थानों में सम्मिलित रही।

वर्तमान में प्रतिदिन 100 से अधिक बच्चे उपस्थित रहते हैं। यहां पढ़ने के लिए चुरिहारी के अलावा यहां आसपास के मरवटियामाफी, छितरापार, विशुनपुर जैसे कई गांवों के बच्चे आ रहे हैं। प्रधानाचार्य राकेश सिंह कहते है कि बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के साथ ही संस्कारवान बनाना ही उनका मूल मकसद रहा है। उन्हें प्रसन्नता है कि इस दिशा में वह सफलता की ओर अग्रसर हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अर¨वद कुमार पाठक कहते हैं कि ऐसे शिक्षक निश्चय ही अन्य अध्यापकों के लिए प्रेरणास्नोत बन सकते हैं। सभी को इस दिशा में सकारात्मक व ठोस करने की आवश्यकता है।
बच्चों को सूक्ष्मदर्शी की खूबियों से परिचित कराते राकेश सिंह ’ जागरण

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