पुराने बर्तन पर बन गए नए बिल बाबेसिक शिक्षा विभाग के लगभग 400 विद्यालयों में अभी तक नए बर्तन खरीदे नहीं गए हैं। कई विद्यालयों में पुराने बर्तनों पर ही नया बिल बना कर रकम डकारनी शुरू कर दी है। बेसिक शिक्षा विभाग के 2400 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन ने बर्तन खरीदने के लिए पांच-पांच हजार रुपए की धनराशि भेजी थी। विभाग ने प्रत्येक विद्यालय के खाते में बर्तन खरीदने के लिए धनराशि को स्थानांतरित कर दिया था। लगभग 2000 प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बर्तन खरीदे जा चुके हैं। इन विद्यालयों में से कुछ खंड शिक्षा अधिकारियों ने एक-एक हजार रुपए का कमीशन ले लिया। दैनिक जागरण के शुक्रवार के अंक में खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारी और शिक्षकों में हड़कंप मच गया। शनिवार को इस मामले में विभाग के एक कर्मचारी ने नाम न छापने पर नया खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि जिन विद्यालयों में नए बर्तन आए हैं, उनमें से तो कई खंड शिक्षा अधिकारियों ने कमीशन ले लिया और जिन विद्यालयों में बर्तन नहीं खरीदे गए हैं, उनमें से कई विद्यालयों में पुराने बर्तनों पर ही नया बिल बनवाया जा रहा है। विभागीय सूत्र ने बताया कि बर्तन के लिए आए सारे पैसे को डकारने की तैयारी की जा रही है। यदि बेसिक शिक्षा अधिकारी ने इसमें हस्तक्षेप नहीं किया तो इन विद्यालयों में पुराने बर्तनों में ही मध्याहन भोजन खिलाया जाएगा और उनके पैसे से कुछ खंड शिक्षा अधिकारी और कुछ प्रधानाध्यापक, एनपीआरसी और एबीआरसी मचे करेंगे। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र यादव ने भी बीएसए से इस संबंध में शिकायत की है। बीएसए के दबाव के बाद कुछ स्थानों पर तो पैसा वापस हो गया है। कुछ एबीआरसी और एनपीआरसी अपनी जेब गर्म करने के लिए पैसा वापस नहीं कर रहे हैं। क्योंकि जांच होगी तो उसमें अधिकारी ही फंसेंगे।
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