- नवयुग कॉलेज की प्राचार्य ने इस सत्र में बीएड की पढ़ाई करवाने से किया इन्कार
- दूसरे कॉलेजों की भी यही हालत
- नए नियम के तहत शिक्षकों की नहीं हो पा रही नियुक्ति
लखनऊ। सूबे में सरकारी सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेज इस
सत्र से बीएड की पढ़ाई से तौबा कर रहे हैं। राजधानी में नवयुग कन्या पीजी
कॉलेज की प्राचार्य नीरजा गुप्ता ने लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति व प्रमुख
सचिव उच्च शिक्षा को पत्र लिखकर इस सत्र से बीएड की पढ़ाई करवाने में
असमर्थता जता दी है। उन्होंने अपने कॉलेज में बीएड की 80 सीटों पर सत्र
2016 में पढ़ाई न करवाने का निर्णय लिया है। इसके पीछे राष्ट्रीय अध्यापक
शिक्षा परिषद (एनसीटीई) द्वारा दो वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम में शिक्षकों की
संख्या दोगुनी करना है।
एडेड कॉलेजों में शासन के निर्देश पर ही पद स्वीकृत हो सकते हैं जो अभी तक नहीं हुए। यही हालत दूसरे एडेड कॉलेजों की भी है। अगर यहां पर बीएड की पढ़ाई न हुई तो फिर बीएड प्रवेश परीक्षा पास अभ्यर्थियों को मोटी फीस भरकर प्राइवेट कॉलेजों में पढ़ाई करनी होगी। जय नारायण पीजी कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एसडी शर्मा कहते हैं कि एनसीटीई के नए नियम के अनुसार हम लैब बनवा सकते हैं, मगर शिक्षक तो तब तक भर्ती नहीं कर सकते जब तक शासन के निर्देश न हों। प्राइवेट कॉलेज तो अपने मानक पूरे कर लेंगे क्योंकि उन्हें विश्वविद्यालय स्तर पर ही अनुमोदन लेना होता है, ऐसे में वह शिक्षक भर लेंगे। मगर हम ऐसा नहीं कर सकते। इधर बीएड पाठ्यक्रम में एडेड कॉलेजों में जहां एक वर्ष की फीस न्यूनतम 1466 रुपये से लेकर अधिकतम पांच हजार रुपये है। वहीं प्राइवेट कॉलेजों में पहले वर्ष 51250 रुपये व दूसरे वर्ष 30 हजार रुपये फीस लेने का प्रावधान है। ऐसे में अगर एडेड कॉलेज में पढ़ाई न हो पाई तो विद्यार्थियों को मोटी फीस भरकर पढ़ाई करनी होगी। यही नहीं टॉप मेरिट के विद्यार्थियों को भी मजबूरन निजी कॉलेज में पढ़ना होगा। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा हो चुकी है और आगे रिजल्ट भी 22 मई से 25 मई तक घोषित होना है। मगर काउंसिलिंग की तैयारी सीटों का ब्योरा न मिलने के कारण नहीं हो पा रही है। बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा के स्टेट कोआर्डिनेटर प्रो. वाई के शर्मा ने बताया कि एडेड कॉलेजों में शिक्षकों की भर्ती शासन के अनुमोदन पर होगी। नियमानुसार मानक पूरा करना जरूरी है।
एडेड कॉलेजों में करीब दस हजार सीटें : सूबे में बीएड की करीब 1.62 लाख सीटें 1775 डिग्री कॉलेजों में हैं। इसमें से 90 कॉलेज एडेड व सात राजकीय डिग्री कॉलेज हैं। इनमें करीब दस हजार बीएड की सीटें हैं। यह सीटें टॉप मेरिट के छात्रों को मिलती हैं। इनमें फीस भी मामूली होती है। ऐसे में छात्रों को निश्चित तौर पर झटका लगेगा।
काउंसिलिंग की बुकलेट नहीं छप पा रही: एडेड कॉलेजों में बीएड की पढ़ाई के लिए मानकों को पूरा करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में राज्य विश्वविद्यालय अपने संबंधित कॉलेजों की बीएड की सीटों का ब्योरा नहीं दे रहे हैं। बीएड के स्टेट कोआर्डिनेटर प्रो. वाईके शर्मा कहते हैं कि तीन बार सीटों का ब्योरा मांगा गया मगर किसी ने नहीं दिया। ऐसे में काउंसिलिंग की बुकलेट नहीं छप पा रही है।

No comments:
Write comments