जिले के 1000 परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे मील चूल्हे पर बनाया जा रहा है। खाना बनाने के दौरान लकड़ी और कंडे के धुएं से कई बार बच्चों की आंखें छलछला जाती हैं तो विद्यालय में साफ-सफाई पर भी खराब असर पड़ता है। अच्छी खबर यह है कि इन विद्यालयों में रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए कवायद शुरू हो गई है। जनपद में 1855 परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में मध्याह्न भोजन बनता है। गत वर्ष 325 विद्यालयों में किचन उपकरण व गैस कनेक्शन के लिए 5 हजार रुपए दिए गए थे। पिछले वर्षों को मिलाकर 800 विद्यालयों में ही गैस कनेक्शन हैं। अन्य स्कूलों में खाना ईंट व मिट्टी से बने चूल्हे पर बनाया जाता है। लकड़ी व कंडे से खाना पकाने के समय विद्यालयों में काफी देर तक धुआं छाया रहता है। पूर्व में जिन विद्यालयों में गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए थे, उनमें से कुछ स्कूलों में सिलेंडर गायब हो गए हैं, कुछ पूर्व प्रधानों के घर पर भी सिलेंडर पहुंच गए। इन स्कूलों में गैस कनेक्शन होने पर भी खाना परंपरागत चूल्हे पर ही बनता है। विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों ने भी विद्यालय में सिलेंडर उपलब्ध न होने का मामला उठाया है। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी संदीप चौधरी ने बताया कि खंड शिक्षा अधिकारियों से रसोई गैस कनेक्शन न होने वाले विद्यालयों की सूची मांगी गई है। शैक्षिक गुणवत्ता अच्छी होने वाले व लोहिया ग्रामों के स्कूलों में प्राथमिकता से व्यवस्था कराई जाएगी। अन्य विद्यालयों में भी कनेक्शन उपलब्ध कराने की कार्ययोजना बनेगी।
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