DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़
Showing posts with label नियमावली. Show all posts
Showing posts with label नियमावली. Show all posts

Saturday, February 28, 2026

वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय की तैयारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग बना रहा इनके लिए नियमावली

वित्तविहीन शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय की तैयारी, माध्यमिक शिक्षा विभाग बना रहा इनके लिए नियमावली

यूपी सरकार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की दशा सुधारने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है

23 हजार के करीब वित्त विहीन माध्यमिक स्कूल हैं यूपी में

नियमों के मुताबिक स्कूल प्रबंधन को काम करना होगा

04 लाख के करीब इनमें अंशकालिक शिक्षक काम करते हैं


लखनऊ। राज्य सरकार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। माध्यमिक शिक्षा विभाग इसके लिए नियमावली तैयार कर इसमें इनकी सेवा शर्तों के साथ मानदेय तय करने जा रहा है। स्कूल प्रबंधन को इसके आधार पर शिक्षकों को रखते हुए मानदेय देना होगा। प्रदेश में इस समय करीब 23 हजार वित्तविहीन माध्यमिक स्कूल हैं और इनमें चार लाख से अधिक अंशकालिक शिक्षक हैं।

नियमावली बनाने के लिए सचिव माध्यमिक शिक्षा की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। कमेटी एक माह में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें सभी बिंदुओं की गहन समीक्षा करते हुए जरूरी प्रावधान किए जाएंगे। नियमावली जारी होने के बाद स्कूल प्रबंधकों की मनमर्जी समाप्त हो जाएगी।


माध्यमिक शिक्षा में 80% इन शिक्षकों की भागीदारी

माध्यमिक शिक्षा में वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों की भागीदारी 70 से 80 प्रतिशत बताई जाती है। विधानमंडल में इनके मानदेय का मामला उठा था, इस पर सरकार ने कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद कार्यवाही का आश्वासन दिया था।


नियमावली जल्द जारी होः माध्यमिक शिक्षक संघ

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के महामंत्री राजीव यादव कहते हैं कि वित्त विहीन शिक्षकों के लिए मजबूत सेवा नियमावली बने और सम्मानजनक मानदेय मिले। नियमावली बनाते हुए इसे जल्द जारी किया जाए।


न्यूनतम मजदूरी के बराबर मानदेय नहीं

वित्त विहीन माध्यमिक स्कूलों में अंशकालिक शिक्षकों की सेवाशर्तें 10 अगस्त 2001 को जारी शासनादेश के अनुसार निर्धारित हैं। इसके मुताबिक स्कूल प्रबंधन को अपने संसाधनों के आधार पर शिक्षकों को भुगतान करना है। यह भुगतान संपूर्ण शिक्षण सत्र के लिए नियमित रूप से किया जाएगा। इसका लेखा-जोखा भी रखा जाएगा। इसके मुताबिक शिक्षकों को मजदूरी अधिनियम में कुशल श्रमिक के लिए तय न्यूनतम मजदूरी से कम मानदेय नहीं दिया जाएगा। साथ ही भविष्य निधि एवं जीवन बीमा की सुविधाएं भी दी जाएंगी। इसके बाद भी अधिकतर स्कूलों में शासनादेश का पूरी तरह से पालन नहीं हो रहा है। कुछ स्कूलों में तो 5000 से 6000 रुपये प्रतिमाह ही मानदेय दिया जा रहा है।



वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों के लिए बनेगी सेवा नियमावली, उच्चस्तरीय समिति गठित, देखें आदेश 

लखनऊः प्रदेश के 22 हजार वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की अरसे लंबित सेवा नियमावली अब तय होने वाली है। शासन ने सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के लिए सेवा नियमावली का मसौदा तैयार करेगी। 


समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव को सौंपनी होगी। इसके साथ ही यह समिति वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता से संबंधित नियमावली में भी संशोधन के लिए प्रस्ताव देगी। इस संबंध में सोमवार को आदेश जारी कर दिया गया।

सचिव माध्यमिक शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में गठित समिति में माध्यमिक शिक्षा के विशेष सचिव, शिक्षा निदेशक, मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (लखनऊ मंडल), शिक्षा निदेशक द्वारा नामित वित्तविहीन संस्था का प्रतिनिधि और कंसल्टेंट मेसर्स डेलाइट का प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल किए गए हैं। 

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे। यह समिति वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, कार्यकाल, दायित्व और अन्य आवश्यक पहलुओं को लेकर विस्तृत नियमावली पर विचार कर रिपोर्ट देगी। इसी के साथ माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा वित्तविहीन विद्यालयों को मान्यता दिए जाने से जुड़े मानकों और शर्तों का भी पुनरीक्षण करेगी।

Tuesday, December 9, 2025

दाम्पत्य शिक्षक स्थानांतरण नीति के सम्बन्ध में

पहले से लागू नियमावली में नहीं होगा कोई बदलाव, परिषदीय शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर आया बेसिक शिक्षा परिषद का स्पष्टीकरण 


प्रयागराज । परिषदीय शिक्षकों के स्थानांतरण को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति अब पूरी तरह साफ हो गई है। आनंद कुमार सिंह उप सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षकों का स्थानांतरण केवल पहले से निर्धारित नियमों के तहत ही किया जाएगा। इसके लिए किसी नए नियम या व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

मुख्यमंत्री कार्यालय से आए एक प्रकरण के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह तथ्य सामने आया कि स्थानांतरण कोई शिक्षक का अधिकार नहीं, बल्कि प्रशासनिक जरूरत के आधार पर लिया जाने वाला निर्णय होता है। पत्र में यह भी साफ किया गया है कि शिक्षक का स्थानांतरण उसी जिले या क्षेत्र में होगा, जैसा कि पहले से लागू स्थानांतरण नियमावली में तय है। स्पष्ट हो गया है कि मनमाने तरीके या नियमों के बाहर स्थानांतरण नहीं किया जाएगा। नियमों के अनुसार ही अपने स्थानांतरण को लेकर भरोसा रखना होगा।


दाम्पत्य शिक्षक स्थानांतरण नीति के सम्बन्ध में




Tuesday, October 28, 2025

कामिल और फाजिल डिग्री धारक नहीं बन सकेंगे मदरसा शिक्षक, स्नातक, परास्नातक व बीएड के साथ टीईटी होगा अनिवार्य

कामिल और फाजिल डिग्री धारक नहीं बन सकेंगे मदरसा शिक्षक,  स्नातक, परास्नातक व बीएड के साथ टीईटी होगा अनिवार्य

मदरसा बोर्ड की संशोधित नियमावली तैयार, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद नए सिरे से योग्यता तय


लखनऊ। मदरसा शिक्षा परिषद से कामिल (स्नातक) और फाजिल (परास्नातक) डिग्री धारक अब मदरसों में शिक्षक नहीं बन सकेंगे। अब स्नातक/परास्नातक व बीएड के साथ टीईटी होना अनिवार्य होगा। मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए शासन स्तर से गठित कमेटी ने शिक्षकों की नए सिरे से योग्यता तय कर दी है। संशोधित मदरसा विनियमावली 2016 अंतिम बैठक के बाद शासन को भेजी जाएगी।


दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मदरसा बोर्ड की कामिल और फाजिल की डिग्री यूजीसी से मान्य न होने पर इन्हें असांविधानिक घोषित कर दिया था। इसके बाद मदरसा शिक्षकों की योग्यता का पुनर्निर्धारण और पाठ्यक्रम में सुधार, दंड प्रक्रिया, स्थानांतरण आदि के लिए अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में कमेटी बनाई थी।


 सूत्रों के मुताबिक कमेटी ने संशोधित नियमावली तैयार कर ली है। कमेटी की अंतिम बैठक मंगलवार को होने की उम्मीद है। बैठक में संशोधन पर मुहर लगने के बाद रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक मान्यता प्राप्त विवि से स्नातक, परास्नातक और प्रशिक्षित स्नातक ही शिक्षक नियुक्त हो सकेंगे। 

Wednesday, July 23, 2025

बेसिक शिक्षा नियमावली में दंड की प्रकृति पर निर्भर है अपील या प्रत्यावेदन –हाईकोर्ट, जानिए! पूरा मामला

बेसिक शिक्षा नियमावली में दंड की प्रकृति पर निर्भर है अपील या प्रत्यावेदन –हाईकोर्ट,  जानिए! पूरा मामला  


प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी आदेश के खिलाफ अपील होगी या प्रत्यावेदन यह दंड की प्रकृति के आधार पर तय किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा कर्मचारी नियमावली में अधिरोपित दंड की प्रकृति के अनुसार अपील या शिकायत किस प्राधिकारी को संबोधित की जाए, स्पष्ट है। न्यायमूर्ति डॉ योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने भदोही की शिक्षिका अर्चना साहू की याचिका की सुनवाई करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश को रद्द कर दिया है। साथ ही निर्देश दिया कि याची के अभ्यावेदन पर एक माह में नए सिरे से निर्णय लिया जाए।


याचिका के अनुसार बीएसए भदोही ने गत नौ अप्रैल के आदेश से याची की एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोक दी। साथ ही प्राथमिक विद्यालय, भावपुर ब्लॉक डीघ से स्थानांतरित कर दिया है, जहां उसकी नियुक्ति हुई थी। याची ने उक्त आदेश के विरुद्ध अभ्यावेदन दिया था लेकिन कोई सकारात्मक निर्णय नहीं होने की दशा में यह याचिका की। 

याचिका में बीएसए को उसके अभ्यावेदन पर निर्णय लेनेका निर्देश देने की मांग की गई। कोर्ट ने पाया कियाची की सेवाएं उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा कर्मचारी नियमावली 1973 से शासित हैं। इसमें कहा गया है कि नियुक्ति प्राधिकारी उचित और पर्याप्त कारणों से कर्मचारी की निंदा करने के साथ वेतन वृद्धि रोक सकता है। 

पदावनति, लापरवाही या अन्य आदेशों के उल्लंघन के कारण बोर्ड को हुई किसी भी आर्थिक हानि की पूरी या आंशिक राशि वेतन से वसूल करना, सेवा से हटाना जो उसे भविष्य में रोजगार के लिए अयोग्य नहीं ठहराता या सेवा से बर्खास्तगी जो उसे सामान्यतः भविष्य में रोजगार के लिए अयोग्य ठहराती है। 

कोर्ट ने नियमों से संलग्न अनुसूची के स्तंभ एक में उल्लिखित पदों के संबंध में नियुक्ति प्राधिकारी के आदेश के विरुद्ध अपील के लिए तय व्यवस्था पर विचार किया। कहा कि नियम पांच के उप-नियम एक के तहत उक्त दंड के अधिरोपण के विरुद्ध कोई अपील नहीं की जा सकेगी लेकिन उप-नियम (2) के अनुसार याची को अभ्यावेदन करने का अधिकार है।

Sunday, January 21, 2024

डाउनलोड करें GUIDELINES FOR REGULATION OF COACHING CENTER Primary_Ka_Master कोचिंग सेंटर के लिए रेगुलेशन गाइडलाइन डाऊनलोड करें।

डाउनलोड करें GUIDELINES FOR REGULATION OF COACHING CENTER Primary_Ka_Master

कोचिंग सेंटर के लिए रेगुलेशन गाइडलाइन डाऊनलोड करें।


Friday, September 15, 2023

मदरसा मान्यता नियमावली में संशोधन करेगी यूपी सरकार

मदरसा मान्यता नियमावली में संशोधन करेगी यूपी सरकार


यूपी की योगी सरकार मदरसा मान्यता नियमावली में संशोधन करने जा रही है। अल्पसंख्यक कल्याण मुस्लिम वक्फ एवं हज मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा है कि मदरसा छात्र-छात्राओं को दीनी तालीम के साथ ही आधुनिक व विज्ञान की शिक्षा देकर मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। 



इसके लिए उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी-फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली-2016 में संशोधन किया जाएगा। मंत्री ने गुरुवार को विधानभवन स्थित कार्यालय में प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम के कामों की भौतिक व वित्तीय प्रगति और मदरसा शिक्षा की समीक्षा बैठक की।


कहा कि मदरसों में व्यावसायिक शिक्षा व कम्प्यूटर की शिक्षा को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम में रोजाना एक परियोजना को पूरा कराया जाए, ताकि अल्पसंख्यक बाहुल्य क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल व कौशल विकास से जुड़ी सुविधाएं मिल सके। निर्माणाधीन 851 परियोजनाओं को तय समय में पूरा किया जाए।


उन्होंने कहा कि मिनी आईटीआई को एससीवीटी से जोड़ने का प्रयास किया जाए, जिससे इसमें गुणात्मक परिवर्तन आ सके और परम्परागत शिक्षा के साथ छात्र-छात्राओं को उनकी रूचि के अनुरूप प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए और अधिक प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं को नवाचार, रोजगार और उद्यमशीलता से जोड़ा जाए।


उन्होंने कहा कि सरकार अल्पसंख्यक समाज के हितों के लिए बेहतर काम कर रही है। इसीलिए वक्फ संपतियों का सदुपयोग अल्पसंख्यकों के विकास के लिए होना चाहिए। वक्फ की सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए प्रत्येक स्तर पर जरूरी कार्यवाही की जाए। अपर मुख्य सचिव मोनिका एस गर्ग ने बताया कि प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम में वर्ष 2023-24 माह अप्रैल से अगस्त तक कुल 163 परियोजनाएं पूरी कराई गई हैं।