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Thursday, May 11, 2017

हाथरस : कान्वेंट की तर्ज़ पर मिल रही सरकारी स्कूल में शिक्षा, प्र0अ0 ने खुद के संसाधनों और प्रयासों से संवारा स्कूल परिसर

सिकंदराराऊ 1सरकारी स्कूलों की दशा पर नाक-भौं सिकोड़ने वाले एक बार विकास खण्ड हसायन के जिरौली खुर्द जरूर जाएं। एटा बॉर्डर पर स्थित गांव के सरकारी प्राथमिक स्कूल के प्रधानाध्यापक हेमंत कटारा के प्रयासों से यह विद्यालय कान्वेंट स्कूलों को मुंह चिढ़ा रहा है। इस विद्यालय के बच्चे कान्वेंट स्कूलों की तरह ह्वाइट बोर्ड पर पढ़ते हैं और अंग्रेजी में भी अव्वल हैं। यहां लाइब्रेरी भी है, जिसमें बच्चों को महंगी किताबें बिना पैसे खर्च किए मिलती हैं। 1संक्षिप्त परिचय : सिकंदराराऊ नगर के मोहल्ला अनल कालोनी निवासी हेमंत कटारा ने शुरुआती शिक्षा गौरीशंकर हिन्दू इंटर कालेज से प्राप्त की। वर्ष 2008 में डॉ. बीआर अम्बेडकर विश्वविद्यालय आगरा से स्नातक, फिर अंग्रेजी व दर्शनशास्त्र में एमए किया। बीटीसी करके 23 जून 2011 को हाथरस ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय नगला अलगर्जी में पहली नियुक्ति सहायक अध्यापक के रूप में मिली। फिर पदोन्नत होकर 13 मार्च 2015 को प्राथमिक विद्यालय जिरौली खुर्द में प्रधानाध्यापक का पद संभाला। 1पिता से मिली प्रेरणा : हेमंत कटारा के पिता कृष्णगोपाल कटारा भी शिक्षक थे। उनका निधन 2004 में हो गया था। उस समय हेमंत 11वीं कक्षा में थे और उनको परिवार में अकेला होने के कारण परिवार की जिम्मेदारी के साथ-साथ अपनी और अपनी बहनों की शिक्षा पर ध्यान देना था। उनके मन में शुरू से ही पिता की तरह शिक्षक बनने की ललक थी और जब पुन: प्रधानाध्यापक के रूप में जिरौली खुर्द के सरकारी स्कूल में काम का अवसर मिला तो वहां की बदहाली देख मन में कुछ अलग करने का विचार आया। फिर जुट गए मिशन में। 1अतीत की यादें : विकास खण्ड हसायन का गांव जिरौली खुर्द हाथरस व एटा जिले की सीमा पर है। दो वर्ष पहले यहां के प्राथमिक विद्यालय में न तो बॉउण्ड्रीवॉल थी और न ही शिक्षा का कोई स्तर। 13 मार्च 2015 को स्थानांतरित हो कर यहां पहुंचे प्रधानाध्यापक हेमंत कटारा ने दो वर्ष के अंदर ही विद्यालय में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर दी हैं। 1मेहनत रंग लाई : शिक्षा के प्रति समर्पित भाव और अपनी कर्तव्य निष्ठा के बल पर शिक्षक हेमंत कटारा ने सरकारी धन के साथ-साथ अपने पास से पैसे खर्च करके महज दो साल में रौनक बिखेर दी। स्कूल की दीवारों पर पोस्टर व पेंटिंग किसी कान्वेंट स्कूल का अहसास कराती हैं। पढ़ाई ऐसी कि बच्चों की काबिलियत देख लोग हैरान रह जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे लम्बी संख्याओं के सवाल पलक झपकते हल कर देते हैं। अंग्रेजी के मीनिंग भी उन्हे कंठस्थ हैं। स्कूल में एक दिव्यांग छात्र उनकी प्रेरणा से बाएं हाथ से सुन्दर लेख लिखती है। 1जहां चाह वहां राह : प्रधानाध्यापक हेमंत कटारा ने खण्ड शिक्षा अधिकारी के माध्यम से बॉउण्ड्रीवॉल, गेट के लिए डिमाण्ड भिजवाई, जिसकी स्वीकृति मिलते ही निर्माण कराया। अपने पैसे से टॉयलेट में टाइल्स लगवाई। निजी धन से ह्वाइट बोर्ड, टीएलएम आदि की व्यवस्था की, ताकि बच्चे खुद को स्मार्ट क्लास का विद्यार्थी महसूस करें। 1उपस्थिति शानदार : विद्यालय में पंजीकृत 142 विद्यार्थियों में अधिकांश उपस्थित रहते हैं। यह सब पढ़ाई का बेहतर माहौल देने का नतीजा है। कई बच्चे तीस तक पहाड़ा व अंग्रेजी में कठिन शब्दों की मीनिंग आदि रट चुके हैं। कक्षा दो के छोटे-छोटे बच्चे 20 से 25 संख्या वाले लम्बे जोड़ व गुणा-भाग, घटाना आदि आसानी से कर लेते हैं। पढ़ाई का नायाब तरीका निकाला है। पूर्व में पढ़ाए गए टॉपिक पर किसी विद्यार्थी को ही पढ़ाने के लिए खड़ा कर देते हैं, जिससे बच्चों में प्रतिस्पर्धा की भावना बढ़ रही है। 1लाइब्रेरी भी : विद्यालय की लाइब्रेरी में 250 किताबें हैं, जिनमें से 150 किताबें उन्होंने अपने वेतन में से रुपये खर्च करके जुटाई है। स्टेशनरी की भी व्यवस्था उन्होंने की है, जिससे गरीब बच्चों के समक्ष पढ़ने-लिखने की कोई समस्या न रहे। जो बच्चे अपनी कक्षा में पढ़ाई में कमजोर होते हैं उन्हें नि:शुल्क एक्स्ट्रा क्लास में पढ़ाते हैं। 1परिणाम सामने है : तीसरी कक्षा की प्रियंका का दायां हाथ टूट गया था। वह हेमंत कटारा की प्रेरणा से अब बाएं हाथ से दाएं की अपेक्षा और अधिक सुंदर लिखने लगी है। प्रियंका भी हेमंत सर की प्रेरणा की कायल है। दूसरी कक्षा की तनु 20-25 संख्याओं के सवाल फटाफट हल कर देती है।जिरौली खुर्द के प्राथमिक स्कूल की कक्षा में बच्चों को पढ़ाते हेमंत कटारा ’जागरण’>>अंग्रेजी व गणित में दक्ष बच्चे बड़े सवाल आसानी से हल कर लेते हैं 1’>>हेड मास्टर ने खुद के संसाधनों और प्रयासों से संवारा है स्कूल परिसर1विद्यालय का वर्तमान स्वरूप 2015 में प्रधानाध्यापक के पद पर तैनात हुए हेमंत कटारा के अथक प्रयासों की देन है। उनके आने के बाद स्कूल का माहौल इतना बढ़िया हो गया है कि अब गांव के बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने के लिए जाने की आवश्यकता ही नहीं है। 1रामसिंह, ग्राम प्रधान, जिरौली खुर्द, यदि सरकारी स्कूलों में अध्यापक इसी प्रकार रुचि लेकर पढ़ाने लगें तो गरीब परिवारों के बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे और शिक्षा का स्तर भी सुधरेगा। 1राजेश कुमार, जिरौली खुर्द

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