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Saturday, July 22, 2017

गोरखपुर : प्रोजेक्टर के माध्यम से विज्ञान के विषयों की दी जाती है शिक्षा, शिक्षिकाओं द्वारा छात्राओं को संगीत और नृत्य का भी दिया जाता है ज्ञान, कान्वेंट को टक्कर दे रहा जंगल छत्रधारी का पूर्व माध्यमिक विद्यालय


10 गरीब बच्चों का खर्चा उठाती है शिक्षिका
विद्यालय की यह है गुणवत्ता

यह ऐसा सरकारी स्कूल है जहां अंग्रेजी और हिन्दी दोनों माध्यम से पढ़ाई होती है। एक-एक कक्षा में तीन से चार सेक्शन हैं और सभी फुल हैं। कान्वेंट स्कूलों की तर्ज पर बच्चे ग्रीन, यलो, रेड व ब्लू आदि ग्रुपों में बंटे हुए हैं। पढ़ाई, खेलकूद, सिलाई-कढ़ाई व नृत्य-संगीत सभी में इन बच्चों में गजब का कम्पटीशन है। हम बात कर रहे हैं चरगांवा स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय जंगल छत्रधारी की। यहां के शिक्षकों ने छह से सात महीने में ऐसी मेहनत की है कि यह परिषदीय स्कूल कान्वेंट स्कूलों को टक्कर दे रहा है। इस साल करीब दर्जन भर कान्वेंट स्कूलों से नाम कटवाकर 124 बच्चों ने इस स्कूल में नामांकन कराया है। विद्यालय में औसत आकार का कमरा है जिसमें बच्चे भरे हुए हैं। एक बेंच पर दो की जगह तीन-तीन बच्चे बैठते हैं। उत्साहित बच्चे किसी भी सवाल का जवाब तत्काल देने को आतुर रहते हैं। कक्षा 6 में छात्रों की संख्या ज्यादा होने के कारण इसे तीन सेक्शन में बांट दिया गया है। सेक्शन ए और बी में सामान्य और सेक्शन सी में कमजोर बच्चों को रखा गया है जिन्हें अलग से शिक्षा दी जाती है। पूर्व माध्यमिक विद्यालय जंगल छत्रधारी में नए सत्र में कक्षा 6 में 113, कक्षा 7 में 10 व कक्षा 8 में एक बच्चे ने नामांकन कराया है। सरकारी विद्यालयों की छवि के विपरीत यहां पर हर दिन बच्चों की उपस्थिति 100 प्रतिशत रहती है। इस स्कूल में नियमित तौर पर सामान्य ज्ञान, कला व खेल की प्रतियोगिताएं आयोजित होती रहती हैं। इसके अलावा हर दिन पीटी अभ्यास और योगा कराया जाता है। शिक्षकों की सजगता से बच्चों में नृत्य व गायन की कला भी विकसित हो रही है। खेल के लिए अलग ड्रेस : विद्यालय में खेल के लिए चार टीमें बनाई गई हैं। रेड हाउस, ग्रीन हाउस, ब्लू हाउस व यलो हाउस। इनमें सभी कक्षाओं के प्रतिनिधि शामिल हैं। सभी टीमों के पास अपनी ड्रेस है। हर शिक्षक पांच-पांच छात्रों की ड्रेस का खर्चा उठाते हैं। शिक्षकों ने आपस में चन्दा एकत्रित कर खेलों के उपकरण लूडो, शतरंज, फुटबॉल, बैडमिंटन खरीदे हैं।
पूर्व माध्यमिक विद्यालय जंगल छत्रधारी में प्रोजेक्टर से पढ़ाई करते बच्चे। ’ हिन्दुस्तान
8 माह पहले इस विद्यालय में स्थानान्तरित होकर आई शिक्षिका अनिता श्रीवास्तव 10 गरीब बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठा रही हैं। इन बच्चों के ड्रेस, कापी-किताब, पेन, पेन्सिल सहित पढ़ाई में आने वाले अन्य सभी खर्च वह वहन करती हैं।
’ छात्रों के लिए है खेल की सामग्री ’ विद्यालय में लाइब्रेरी की है व्यवस्था ’ विद्यालय में प्रयोगशाला की व्यवस्था ’ ग्रामीण और प्रधान का सहयोग मिलना ’ खेल के लिए छात्रों के पास है अलग ड्रेस ’ कमजोर बच्चों को अलग से दी जाती है शिक्षा ’ छात्रओं को दी जाती है कढ़ाई-बुनाई की शिक्षा ’ माह में दो बार शिक्षक और अभिभावक की बैठक ’ छात्रों को शिक्षिकाओं द्वारा क्राफ्ट की दी जाती है शिक्षा ’ प्रोजेक्टर के माध्यम से विज्ञान के विषयों की दी जाती है शिक्षा ’ शिक्षिकाओं द्वारा छात्रओं को संगीत और नृत्य भी सिखाया जाता है

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