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Thursday, October 26, 2017

आरटीई कानून लागू होने के बाद प्राथमिक शिक्षा पर हावी हुआ निजी क्षेत्र, सरकारी में घटे पर निजी स्कूलों में बच्चों की संख्या बढ़ी

साढ़े चार गुना तेजी से बढ़े निजी स्कूल

खुलासा

71 हजार निजी स्कूल बढ़े

बच्चों की फीस

2010-11

100

निजी स्कूलों में बच्चे ज्यादा

2014-15

500

202

1000

छात्रों का अनुपात

2500

देश में प्राथमिक शिक्षा में बड़े बदलाव नजर आ रहे हैं। सरकारी स्कूलों की संख्या जिस धीमी गति से बढ़ रही है, उससे तकरीबन साढ़े चार गुना तेजी से निजी स्कूल बढ़ रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है, जबकि निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। स्कूल शिक्षा पर हुए शोध में यह खुलासा हुआ है। ‘आईजेडए-इंस्टीट्यूट ऑफ लाबोर इकोनोमिक्स’ में भारत में निजी स्कूलों के परिदृश्य को लेकर प्रकाशित शोधपत्र में 2010-11 से 2014-15 के आंकड़ों को शामिल किया गया है। यह वही अवधि है जब ‘शिक्षा के अधिकार कानून’ का क्रियान्वयन हो रहा था और सरकार हर 14 साल तक के हर बच्चे को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करने का अधिकार दे रही थी। लेकिन इस अवधि में स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव दिखे हैं।

यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ लंदन से संबद्ध शिक्षाविद गीता गांधी किंगडोन के शोध पत्र में कहा गया है कि चार सालों में देश के 20 बड़े राज्यों में कुल 16,376 सरकारी प्राथमिक स्कूल खुले। जबकि इसी अवधि में 71,360 निजी स्कूल खुले। लेकिन इन चार सालों में सरकारी स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में 1.11 करोड़ की कमी आई। जबकि निजी स्कूलों में 1.60 करोड़ बच्चे बढ़ गए। राज्य उत्तर प्रदेश में चार सालों के दौरान 31,196 निजी स्कूल खुले जिनमें 70 लाख बच्चे बढ़े। जबकि सरकारी स्कूलों में 26 लाख बच्चे घटे।

से कम फीस चुकाते हैं 11 फीसदी निजी स्कूलों के बच्चे

में सरकारी स्कूलों में प्रति स्कूल 122 बच्चे थे

में 10 फीसदी घटकर 109 रह गए

से कम फीस चुकाते हैं 57} बच्चे

बच्चे इसी दरम्यान निजी स्कूलों में, जो बढ़कर 207 हो गए

तक की फीस आठ फीसदी बच्चे चुकाते हैं

’ 49} शहरी बच्चे और 21 फीसदी ग्रामीण बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। ’ 40.7 तथा 17.5 फीसदी क्रमश: है अपर प्राइमरी में यह आंकड़ा।’ 36 फीसदी सेकेंडरी के बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। फीस मुद्दा नहींशोध पत्र में एनएसएसओ रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा गया है कि निजी स्कूलों की ज्यादा फीस बड़ा मुद्दा नहीं है। क्योंकि महंगी फीस लेने वाले स्कूल सीमित हैं।

से ज्यादा फीस चुकाते हैं 36 फीसदी बच्चे

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