छात्र-छात्रओं के बर्तन में कमीशन खाने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों ने कई ब्लाक में पैसा वापस लौटाना शुरू कर दिया है। एनपीआरसी और एबीआरसी ने शिक्षकों को पैसे वापस कर दिए हैं। यह पैसे जागरण में खबर प्रकाशित होने के बाद वापस किए गए हैं। जांच के डर से अधिकारियों ने एबीआरसी और एनपीआरसी को पैसे वापस करने के निर्देश देने की चर्चा है। शासन ने बेसिक शिक्षा विभाग के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों के मध्याह्न भोजन खाने के लिए नए बर्तन खरीदने के लिए 1.20 करोड़ रुपए का बजट भेजा था। प्रत्येक विद्यालय के खाते में पांच-पांच हजार रुपए भेजे गए। कई खंड शिक्षा अधिकारियों ने बर्तन के लिए आए रुपयों में से एक-एक हजार रुपए कमीशन ले लिया। दैनिक जागरण ने शुक्रवार के अंक में मिड-डे मील: गरीब छात्रों के बर्तन पर कमीशन का खेल, खबर प्रमुखता से प्रकाशित किया। खबर प्रकाशित होने के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों में हडकंप मच गया। सुबह-सुबह ही कई खंड शिक्षा अधिकारियों ने एबीआरसी और एनपीआरसी की बैठक बुलाकर शिक्षकों से लिए पैसे वापस करने के निर्देश दिए। कई शिक्षकों ने नाम न छापने पर बताया कि शुक्रवार दोपहर में कमीशन के लिए एक हजार रुपए वापस कर दिए हैं। पूरे दिन अधिकारी इसी जोड़तोड़ में लगे रहे कि मामला शांत हो जाए। क्योंकि बेसिक शिक्षा अधिकारी वेदराम ने जांच कराकर कार्रवाई के आदेश दिए थे। कार्रवाई के डर से अधिकारियों ने पैसे वापस कराना शुरू कर दिया है, जिससे आगे को कोई गर्दन न फंसे। यदि जांच हो जाती है तो अधिकारियों के काले खेल का सच सामने आ जाएगा। गरीब बच्चों के बर्तन में कमीशन खाने वाले लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा। पैसे वापस हो या न हों। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। जिससे आगे को गरीब बच्चों के हक पर कोई डाका न डाल सके।
No comments:
Write comments